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जहा मेरी सासकविता, आग के सामने बैठी हुई थी और मैं भी उनके पास बैठ में गया तभी कुछ देर में राधा रानी दोनों नास्ता ले ै और नास्ता करने लगा तभी सासकविता, बीटा अब तो बर्फ बरी रुक गई है जल्दी से निकल जाओ नहीं तो फिर से सुरु हो गई तो कही रोड जाम hi न हो जाये इसका कोई भरोसा नहीं है मैं, है माँ जी इस मौसम में रोड जाम होना आम बात है वही मैं थोड़ी देर में नास्ता ख़तम कर के चेयर पे बैठ गया और तभी मेरी नज़र रति में पड़ी एक बहुत hi प्यारी सूट सलवार पहनी हुई सीधी से उतरी आज पहली बार उसे सूट में देखा था उसकी मोती मोती जंघे सूट के साइड से मुझे दिखी और उसकी बड़े बड़े चुके सूट के बहार आने को बेताब नज़र आ थे मुझे ऐसा घूरते हुए प् के रति शर्मा सी गई,
और मैं सब की नज़र को बचा के एक आंख मर दिया जिसे देख के रति थोड़ा गुस्सा दिखाई और मुँह फेर के मेरी सास से माँ जी अब जाऊ माय, सासकविता, है बच्ची जा और ठीक से पहुंचने के बाद कॉल कर देना नहीं तो मेरी जान अटकी रहेगी की मेरे बच्चे लोग पहुंचे की नहीं?, वही रति, है माँ जी मैं कॉल कर दूंगी तभी इन दोनों को बात को काटते हुए अरे बस सूट सलवार पहन के जाना है क्या इतनी ठण्ड है बहार कही जम hi न जाओ फासिओं दिखने के चक्कर में ये सुन के रति शरमाते हुए जीजू शॉल रख ली हु और स्वेटर भी ली हु?, मैं, तो पहन लो क्युकी अभी बाइक में जाने पैर बहुत ठण्ड लगेगी पिछली बार रामु के साथ कैसे गई थी?, रति, वो तो हम बस से गए थे तो इतनी ठण्ड नहीं लगी थी?, मैं, लेकिन अभी..
हम बाइक से जायँगे तो ठण्ड ज्यादा लगेगी वैसे कोई लाठर की जैकेट नहीं है?, रति, न में सर हिलाई तो मैं, ाचा जो है उसे पहन लो बाकि मार्किट से ले लेंगे?, रति फिर दूसरे रूम में गई और अपना उन् वाला स्वेटर पहन के शॉल ओढ़ ली और हम दोनों बहार ए वही राधा रानी भी हम दोनों को बहार तक छोड़ने ै और मैं बाइक को स्टार्ट किया और रति मेरे कंधे को पकड़ के पीछे बैठ गई सीट छोटी होने के कारन वो बिलकुल मेरे से सात गई और उसे बड़े बड़े चुके मेरी पीठ से जा टकराया हाला की वो स्वेटर के साथ शॉल भी ोधी थी फिर भी उसके बड़े चुके पीठ पे लगने से मेरा लुंड में जान सी आ गई, वही मैं सब से विदा लेके चल दिया और रति मेरे कंधे पे अपनी हाँथ को राखी थी और थोड़ा दूर..
होक बैठी थी वो अपने चुके मेरी पीठ पे न लगे वो पूरी कोशिश कर रही थी, मैं, रति बहु कंधे पे नहीं मेरे जैकेट के अंदर हाँथ डाला के पेट पे हाँथ रख लो वर्ण हाँथ तुम्हारे ठन्डे हो जायँगे इस बर्फ बरी में रति शरमाते हुए पीछे से अपनी हांथो को मेरे जैकेट में डाली और पेट पे रख के पकड़ ली जिसकी वजह से रति मेरे से एक दम सात गई और अपने सर को मेरे पीठ पे रख के सरे घाटी का नज़ारा लेने लगी.. इधर रति आज पहली बार बाइक में बैठी थी जिसकी वजह से वो अंदर hi अंदर बहुत खुस थी और वो मेरे पेट से अपने हांथो को धीरे धीरे कभी ऊपर साइन तक लती तो कभी पेट तक ये सब बाइक के चलने से हो रहा था उसे संत बैठा देख के..
और मैं सब की नज़र को बचा के एक आंख मर दिया जिसे देख के रति थोड़ा गुस्सा दिखाई और मुँह फेर के मेरी सास से माँ जी अब जाऊ माय, सासकविता, है बच्ची जा और ठीक से पहुंचने के बाद कॉल कर देना नहीं तो मेरी जान अटकी रहेगी की मेरे बच्चे लोग पहुंचे की नहीं?, वही रति, है माँ जी मैं कॉल कर दूंगी तभी इन दोनों को बात को काटते हुए अरे बस सूट सलवार पहन के जाना है क्या इतनी ठण्ड है बहार कही जम hi न जाओ फासिओं दिखने के चक्कर में ये सुन के रति शरमाते हुए जीजू शॉल रख ली हु और स्वेटर भी ली हु?, मैं, तो पहन लो क्युकी अभी बाइक में जाने पैर बहुत ठण्ड लगेगी पिछली बार रामु के साथ कैसे गई थी?, रति, वो तो हम बस से गए थे तो इतनी ठण्ड नहीं लगी थी?, मैं, लेकिन अभी..
हम बाइक से जायँगे तो ठण्ड ज्यादा लगेगी वैसे कोई लाठर की जैकेट नहीं है?, रति, न में सर हिलाई तो मैं, ाचा जो है उसे पहन लो बाकि मार्किट से ले लेंगे?, रति फिर दूसरे रूम में गई और अपना उन् वाला स्वेटर पहन के शॉल ओढ़ ली और हम दोनों बहार ए वही राधा रानी भी हम दोनों को बहार तक छोड़ने ै और मैं बाइक को स्टार्ट किया और रति मेरे कंधे को पकड़ के पीछे बैठ गई सीट छोटी होने के कारन वो बिलकुल मेरे से सात गई और उसे बड़े बड़े चुके मेरी पीठ से जा टकराया हाला की वो स्वेटर के साथ शॉल भी ोधी थी फिर भी उसके बड़े चुके पीठ पे लगने से मेरा लुंड में जान सी आ गई, वही मैं सब से विदा लेके चल दिया और रति मेरे कंधे पे अपनी हाँथ को राखी थी और थोड़ा दूर..
होक बैठी थी वो अपने चुके मेरी पीठ पे न लगे वो पूरी कोशिश कर रही थी, मैं, रति बहु कंधे पे नहीं मेरे जैकेट के अंदर हाँथ डाला के पेट पे हाँथ रख लो वर्ण हाँथ तुम्हारे ठन्डे हो जायँगे इस बर्फ बरी में रति शरमाते हुए पीछे से अपनी हांथो को मेरे जैकेट में डाली और पेट पे रख के पकड़ ली जिसकी वजह से रति मेरे से एक दम सात गई और अपने सर को मेरे पीठ पे रख के सरे घाटी का नज़ारा लेने लगी.. इधर रति आज पहली बार बाइक में बैठी थी जिसकी वजह से वो अंदर hi अंदर बहुत खुस थी और वो मेरे पेट से अपने हांथो को धीरे धीरे कभी ऊपर साइन तक लती तो कभी पेट तक ये सब बाइक के चलने से हो रहा था उसे संत बैठा देख के..