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माया, राधे को घर कर देखती है और मन hi मन में (कमीना एक तो नसे में है और खवाब पूरा करने के लिए मुझसे पूछ रहा है माय उसे क्या दे सकती हूँ), इधर मैं, माया को घूरते पा के, एक रात के लिए माय तेरा पति और तू मेरी बीवी नहीं बन सकती क्या?, माया, इतना सुनते hi गुस्से से भरते हुए, नहीं.. नहीं.. ुर बार बार बीवी बोलना बंद कर दो वर्ण?, मैं, वर्ण क्या, मेरी जान.. ये कहते हुए अब माय आगे आता हु और बिस्तर पर हाँथ रखते हुए उसकी तरफ बढ़ने लगता हु, जिसे देख कर माया, बिस्तर के पीछे धीरे धीरे जाते हुए Ru...Ruko.. मेरी तरफ नहीं आना और अपनी औकात देखो साथ hi अपनी शकल भी देखो? ुर जो ख्वाब सजाये हो वो कभी पूरा नहीं होने वाला, ुर आप एक दम पागल हो क्या? या फिर ज्यादा शराब पि लिए हो जो
ऐसी बहकी बहकी बाते कर रहे है और अपने कैसे सोच लिया की मैं आपकी बीवी सीबी बन सकती हु?, मैं, अब जैसी भी शकल है, वो तेरे एक रात का होने वाला पति की है, इतना बोलते हुए माय अब माया के दोनों पैरो को पकड़ लेता हु और उसको अपनी तरफ खींचता हु, माया, ाःह.. कमीने कहिके मुझसे दूर रहो?, मैं, अरे मेरी जान.. तेरे इस पति देव को अपने नज़दीक भी नहीं आने देगी क्या?, माया, न नहीं बिलकुल नहीं दूर हटो मुझसे नहीं तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा समझे आप? ये कह के वो अपने पैरो को इधर उधर झटकने लगी, मैं, उसकी बात को झुट्लाते हुए माया के दोनों पैरो को खींच देता हु जिसकी वजह से माया अपना बैलेंस खोते हुए पीठ के बल बिस्तर पर गिर जाती है और मैं जल्दी से उसके ऊपर आ जाता हु. अब माया मेरे
निचे दबी हुई थी वो अपनी ताकत लगा के मुझे अपने ऊपर से देखने लगती है, लेकिन वो मुझे तस से मास नहीं कर पाती है, कहा माय 70 कग का, कहा वह 50 कग की, अब माया के चेहरे पर डर और गुस्सा फ़्रस्ट्रेटेड होता हुआ साफ़ दिख रहा था. साथ hi साथ मेरे मुँह से दारू की गन्दी बदबू माया को परेशां कर रही थी, जिसकी वजह से वो मुझे घर भी रही थी. की तभी मैं, अपने होंठ एक बार माया के होंठो पर लगा कर हटा देता हु और मुस्कुरा कर उसको देकता हु. मेरी की इस हरकत से माया की आँखे बड़ी हो जाती है लेकिन मेरी इस हरकत का कोई जवाब उसके पास नहीं था वही उसके दिल की धड़कन एक दम से बढ़ जाती है, पर वो मुझे अभी भी अपनी ऐटिटूड दिखाना चाहती थी. और उसी ऐटिटूड में माया, तू तड़क पर उतर आती है और गुस्से से घूरते हुए.. बेशर्म कही के
तुझे तो माय छोडूंगी नहीं और तुमममम.. वह उतना बोली hi थी के मैने फिर से माया के लाल होंठो पर अपने काळा सूखे होंठ रख देता हु और बड़े hi धीरे से उसके होंठो को चूसने लगता हु उसके होंठ पर जैसे hi मेरे होंठ छूटे है वैसे hi मुझे फील कुछ होता और खुद से बात करते हुए (वह ूमम कितने कोमल होंठ है खास ऐसे hi जिंदगी भर इस पारी के होंठो का राश माय पिता राहु), अब हम दोनों के किश से ुंहःहः.. पुछठ.. उम्म्म.. पुछठ.. हहममम.. की आवाज़ वह गूंज उठती है, मेरी इस हरकत पर अब माया मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरी ताकत के सामने वह कुछ भी नहीं कर प् रही थी. इधर मैं, उसकी दोनों सॉफ्ट और कोमल कलियों को पकड़ कर बिस्तर पर सत्ता कर उसके कभी ऊपर वाले होंठो को तो कभी नीच वाले
होंठो को जबरदस्ती चूमे जा रहा था, वही माया, को राधे के मुँह से आ रही शराब की गन्दी बदबू स उसका सर चक्र रहा था साथ hi उसके दिल की धड़कन जोरो से धड़क रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसका दिल सीना फाड़ कर बहार hi आ जायगा. माया, को ये बात और जायदा परेशां कर रही थी की एक मामूली सेक्स उसको जबरदस्त टी से चुम रहा है जिसमे उसकी कोई राजम अण्डी नहीं है. यह बात उसको घिन के साथ एक अनजान सी फीलिंग दे रही थी, जो वो बयां नहीं कर सकती थी, इधर जवान लड़की के होंठो को चूसना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी वैसे तो कई जवान लड़की का मैने अपना बनाया था लेकिन माया के होंठो में एक अलग सी कसक थी, जितना उसके कोमल होंठो को पिता इतना hi मेरे बदन में बिजली फ़ैल रही थी आज इतने जूस होंठ चूस कर मन तृप्त हो गया था.
ऐसी बहकी बहकी बाते कर रहे है और अपने कैसे सोच लिया की मैं आपकी बीवी सीबी बन सकती हु?, मैं, अब जैसी भी शकल है, वो तेरे एक रात का होने वाला पति की है, इतना बोलते हुए माय अब माया के दोनों पैरो को पकड़ लेता हु और उसको अपनी तरफ खींचता हु, माया, ाःह.. कमीने कहिके मुझसे दूर रहो?, मैं, अरे मेरी जान.. तेरे इस पति देव को अपने नज़दीक भी नहीं आने देगी क्या?, माया, न नहीं बिलकुल नहीं दूर हटो मुझसे नहीं तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा समझे आप? ये कह के वो अपने पैरो को इधर उधर झटकने लगी, मैं, उसकी बात को झुट्लाते हुए माया के दोनों पैरो को खींच देता हु जिसकी वजह से माया अपना बैलेंस खोते हुए पीठ के बल बिस्तर पर गिर जाती है और मैं जल्दी से उसके ऊपर आ जाता हु. अब माया मेरे
निचे दबी हुई थी वो अपनी ताकत लगा के मुझे अपने ऊपर से देखने लगती है, लेकिन वो मुझे तस से मास नहीं कर पाती है, कहा माय 70 कग का, कहा वह 50 कग की, अब माया के चेहरे पर डर और गुस्सा फ़्रस्ट्रेटेड होता हुआ साफ़ दिख रहा था. साथ hi साथ मेरे मुँह से दारू की गन्दी बदबू माया को परेशां कर रही थी, जिसकी वजह से वो मुझे घर भी रही थी. की तभी मैं, अपने होंठ एक बार माया के होंठो पर लगा कर हटा देता हु और मुस्कुरा कर उसको देकता हु. मेरी की इस हरकत से माया की आँखे बड़ी हो जाती है लेकिन मेरी इस हरकत का कोई जवाब उसके पास नहीं था वही उसके दिल की धड़कन एक दम से बढ़ जाती है, पर वो मुझे अभी भी अपनी ऐटिटूड दिखाना चाहती थी. और उसी ऐटिटूड में माया, तू तड़क पर उतर आती है और गुस्से से घूरते हुए.. बेशर्म कही के
तुझे तो माय छोडूंगी नहीं और तुमममम.. वह उतना बोली hi थी के मैने फिर से माया के लाल होंठो पर अपने काळा सूखे होंठ रख देता हु और बड़े hi धीरे से उसके होंठो को चूसने लगता हु उसके होंठ पर जैसे hi मेरे होंठ छूटे है वैसे hi मुझे फील कुछ होता और खुद से बात करते हुए (वह ूमम कितने कोमल होंठ है खास ऐसे hi जिंदगी भर इस पारी के होंठो का राश माय पिता राहु), अब हम दोनों के किश से ुंहःहः.. पुछठ.. उम्म्म.. पुछठ.. हहममम.. की आवाज़ वह गूंज उठती है, मेरी इस हरकत पर अब माया मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरी ताकत के सामने वह कुछ भी नहीं कर प् रही थी. इधर मैं, उसकी दोनों सॉफ्ट और कोमल कलियों को पकड़ कर बिस्तर पर सत्ता कर उसके कभी ऊपर वाले होंठो को तो कभी नीच वाले
होंठो को जबरदस्ती चूमे जा रहा था, वही माया, को राधे के मुँह से आ रही शराब की गन्दी बदबू स उसका सर चक्र रहा था साथ hi उसके दिल की धड़कन जोरो से धड़क रही थी ऐसा लग रहा था जैसे उसका दिल सीना फाड़ कर बहार hi आ जायगा. माया, को ये बात और जायदा परेशां कर रही थी की एक मामूली सेक्स उसको जबरदस्त टी से चुम रहा है जिसमे उसकी कोई राजम अण्डी नहीं है. यह बात उसको घिन के साथ एक अनजान सी फीलिंग दे रही थी, जो वो बयां नहीं कर सकती थी, इधर जवान लड़की के होंठो को चूसना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी वैसे तो कई जवान लड़की का मैने अपना बनाया था लेकिन माया के होंठो में एक अलग सी कसक थी, जितना उसके कोमल होंठो को पिता इतना hi मेरे बदन में बिजली फ़ैल रही थी आज इतने जूस होंठ चूस कर मन तृप्त हो गया था.