The Story of a Bodyguard (by Naree) - Page 96 - SexBaba
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The Story of a Bodyguard (by Naree)

वही महिमा, के ब्रा जो मैने किश करते वक़्त खोल दी थी वो अपने ब्रा को पकड़ लेती है ताकि उसकी चुके बे पर्दा न हो, वही महिमा अपने पति के साइड के वाले दीवार से सटे हुए बड़ी सासे लेने लगती है ुर वो राधे को देखती है जो शैतानी हसी के साथ अपने होंठ चाट रहा था, माहि अपनी इज्जत को सँभालने में लगी हुई थी और उसकी कोशिश देख राधे को मजा आ रहा था, इधर मैं, अपनी साँसों पर काबू करते हुए एक बार उसके पति की और देखता हु तो वो इस वक़्त अपनी नज़र माहि के बड़े बड़े चुके पर hi था ये देख के मैं, माहि से, मेरी जहां मज़ा आया मेरे गन्दी जुबान ुर होंठो को चूसकर?, महिमा, अब मेरी तरफ गुस्से से देखती है और अपने होंठो पर से थूक साफ़ करते हुए तुम.. तुम एक दम पागल और सनकी हो.. कही मुझे मरने का तो तुम्हारा कोई प्लान तो नहीं था है? कितने

वाइल्ड तरीके से मेरे होंठो को चूस और काट रहे थे देखो मेरे होंठ तुमने कैसे काटे है जिसकी वजह से मेरे होंठो से खून भी निकलने लगे है वह अपनी ऊँगली मेरी तरफ दीखते हुए बोली, मैं नसे में थोड़ा झूम रहा था मेरे पेअर सही ढंग से खड़े भी नहीं हुए जा रहे थे लेकिन ये नासा मेरे रोज का काम था इस लिए माय जितना भी शराब पि लू लेकिन मेरी ताकत पहले जितना hi रहता है, वही मैं, माहि की बातो को कोई तबज्जु न देते हुए अब आगे बढ़ने लगा तभी महिमा, मेरे से दूर रहो देखो न राघव इसे तुम कुछ कहते क्यों नहीं प्लीज इस हैवन्स मुझे बचा लो प्लीज राघव तुम प्रॉपर्टी पर सिग्नेचर करते क्यों नहीं, इधर मैं, हस्ते हुए हेहेहे.. साला ये नामर्द मेरे से आज नहीं बचा सकता तेरे नामर्द पति को ऑप्शन दिया था लेकिन वह उस वक़्त भी नहीं मन तो अब क्या मानेगा ये कहते हुए माहि के करीब आ

कर उसकी नग्गी और गोरी कमर में हाथ डालता हु और उसको अपने पास खींचते हुए तू दर मत मेरी जान मैं भले hi हैवान नज़र आता हु लेकिन मेरी एक बात तू गांठ बांध के रख ले तुझे पर मेरे अलावा कोई खरोच भी नहीं लगा सकता.. तो चुने की बात hi छोड़ दे बस एक बार मेरा साथ दे फिर तेरे नामर्द पति के सामने हर रोज तेरी बुर और गांड मार के तेरी ये मादक बदन की प्यास बुझाता रहूँगा.. वैसे मेरी उम्र पे तू मत जा जिसमे तेरे पति से 4 गुना दम बाकी है, मेरी बात सुन कर माहि का दिल जोरो से धड़कने लगता है, वही उसको कुछ समझ नहीं आता की वह राधे की बात पर कैसे रियेक्ट करे, असल में राधे की बात सुनकर माहि को अच्छा लगता है पर वह अपने चेहरे पर कोई भो नहीं लाती क्यों की उसका पति सामने hi बैठा था.
 
इधर माय, अब फिर से उसके गले को चूमने लगता हु. वही महिमा, अपने ब्रा को सँभालते हुए मुझे अपने से दूर करने की कोशिश लगातार करने लगती है. ऐसा करने पर मैं अब एक तरकीब आज़माता हु और माहि के ब्रा को उसके कंडे से उतरने लगता हु. मेरी हरकत से माहि मुझे अपने आप से दूर करने के बजाय अपने ब्रा को कास के पकड़ लेती है इधर मैं माहि की पंतय उतरने की कोशिश करने लगता हु माहि को कुछ भी समझ नहीं आता और वो अपने ब्रा और पंतय दोनों को एक एक हाँथ से पकड़ लेती है, इधर मैं, इसका फायदा उठाकर उसके गले और उसके गोर बहो को चूमने लगता हु और माहि बिना किसी विरोध किये मुझे अपने जिस्म से खेल ने देती है मगर अपने पति के सामने वह ऐसे चुप रहना नहीं चाहती थी, क्युकी अगर वो संत रही तो उसका पति तो यही सोचेगा की माहि को राधे का प्यार करना पसंद आ रहा है इस लिए माहि न

चाहते हुए भी मेरा विरोध करती है, ये.. ये.. क्या बदतमीज़ी है तुम्हारी है अब बहुत हुआ राधे अब छोडो मुझे?, मैं, क्या करूँ मेरी फुलझड़ी? तुझे नंगा देखने के लिए आखे तरस रही है. देख मेरा लौड़ा कैसे सख्त हुआ पड़ा है तेरी ये जवानी देख कर, माहि, एक पल के लिए मेरे पंत में दिख रहे बड़े तम्बू को देखती है और दूसरे hi पल वह शर्मा कर दूसरी तरफ देकने लगती है.. उसे शर्माता हुआ देख कर मैं, अरे शर्मा क्यों रही है मेरी बुलबुल.. आज ये लौड़ा hi तेरी साड़ी प्यास बुझायेगा जो अब तक तेरा न मर्द पति कभी नहीं बुझा पाया होगा, राघव मेरी बात पर एक बार अपने पत्नी यानि महिमा को घूरता है, इधर माहि, मम.. माय शर्मा नहीं रही हु समझे और अब्ब ऐसी बाते करना बंद करो.. आह वो कुछ और बोलती उससे पहले माय उसके गोर गर्दन पर हलके से काटता हु और जिससे उसकी सिसकारी निकल जाती है.

वही माहि गर्दन पर काटने के बाद मैं, कब तक रोकेगी खुद को मेरी जान? एक बार भूल जा अपने ना मर्द पति जो थोड़े से प्रॉपर्टी के लिए तुझे मेरे साथ खेलने पर मजबूर कर दिया है इस लिए तू भी बस खुद के बारे में सोच, आज मौका है, एक बार अपने दिल की सुन और मेरा साथ दे और बना ले मुझे अपने दिल का शेह्ज़ादा सिर्फ और सिर्फ आज के लिए okay?, मेरी बातो में माहि इतनी मदहोश हो जाती है की उसको पता hi नहीं चलता की मैं उसके जिस्म को देख पंत के ऊपर से hi अपने लौड़े को मसल रहा हूँ? लेकिन मैं उसको कुछ पल hi देख पाया था, की तभी माहि एक दम से इस बात का पता चलता है और वो अपने जिस्म को धक् देती है दोनों हाथो से साथ hi सोफे के बाजू में पड़ी वो अपनी निघ्त्य उठाने hi वाली थी की तभी मैं, एक दम से उसके निघ्त्य को ले कर रूम क दूसरी और बहार फेंक देता हूँ.

महिमा, आईईए.. ये क्या किया कमीने, मैं, अब उस कपडे की क्या जरुरत है तुझे महिमा, अपने पति को एक बार देखि और अगले पल मेरी और देख के Tu..Tum.. देखो हद्द से ज़्यादा आगे जा रहे हो राधे?, (वह अपने पति के सामने खुद को बजट होता नहीं देख पाती है इसलिए यह कही), मैं, अभी हद्द पार की कहाँ है मेरी जान. अगर तेरा पति प्रॉपर्टी के पेपर पर सिग्नेचर नहीं किया तो यह हद्द और भी आगे जायगी ुर अभी बहुत कुछ बाकी है, ये कह कर मैं अब माहि के पास जा कर एक दम से उसके ब्रा के ऊपर अपने हाँथ रख कर उनको सहलाने लगता हु और माहि जी जान से अपने ब्रा को पकड़ कर मेरे हांथो को वह से दूर करने लगती है.. मैं, बोल मेरी रानी आज कही तू मुझ से प्यार तो करने नहीं लगी है, मैं एक बार उसके पति की और देख के ये बात बोली क्युकी मैं उसके पति राघव को जलना छठा था.

माहि, यह बात सुनकर एक दम से शॉक हो जाती है क्युकी उसको ये उम्मीद नहीं थी की एक बॉडीगार्ड जो दिखने में एक दम हैवान टाइप का था उससे प्यार करने का दवा कर रहा था ये बात माहि को झक झोर देती है लेकिन वह कही न कही राधे के इस बे बाग़ सवाल को सुन के ये तो समझ जाती है की राधे मेरे पति के सामने के लिए ऐसा कह रहा है, वही मैं, साली बहन छोड़ कुछ पूछ रहा हु तुझसे.. इतना बोलकर मैं अब उसके उसके ब्रा को जोर से खींच कर उसके जिस्म से निकल कर हाथ में पकड़ लेता हु, उधर माहि मेरे गुस्से से डर जाती है वही अब महिमा के बड़े बड़े चुके मेरे सामने थे जिसे देख कर आठ.. क्या मस्त बड़े2 रसीले आम है तेरे मेरी जान?, तेरे चुके देख कर लग hi नहीं रहे है की तेरी एक बच्ची है? साली अपने दूध अपनी बेटी को नहीं पिलाती थी क्या जो तेरे निप्पल
 
अभी भी गुलाबी है और देख तो तेरे चुके कितने गोल गोल है लग hi नहीं रहा है की तू एक बची की माँ के साथ शादी सुदा है ये कहते हुए मैं उसके पति की और देख के क्या सेल अपने बीवी की चुके तूने कभी दबाये और पिए नहीं है क्या तभी मैं कहता हु सेल तू न मर्द है, देख अगर तूने अपने बीवी की चुके पिया होता तो इतने गुलाबी निप्पल नहीं होते??, इधर महिमा, झट से अपने दोनों चुके को ढकती है अपने दोनों हांथो से और मुझे गुस्से में गालिया देते हुए सेल कमीने कुत्ते.. तेरी हिम्मत.. कैसे हुई मेरी ब्रा खींचने की वापिस दे मेरी ब्रा.. इस वक़्त महिमा अपने पति के सामने किसी गैर मर्द के आगे दीवाल से चिपकी हुई कड़ी? अपनी इज्जत छिपा रही थी.. इधर मैं, उसके ब्रा को सूंघते हुए उसे साइड वाले टेबल पर रख देता हु साथ hi मैं अपने पंत भी खोल देता हु और माहि, की

नज़र अब मेरे अंडरवियर पर जाती है जहा बहुत hi बड़ा तम्बू बना हुआ था जिसे देख कर वह मन में खुद से बाते करते हुए (हे भगवन.. ye..ye क्या चीज है इसका सा.. सच म बहुत बड़ा ह क्या?), उधर राघव, सोफे पर बैठा हुआ था उसकी नज़र भी मेरे अंडरवियर पर जाती है और एक बड़ा सा तम्बू देख कर हैरान हो जाता है की इस गंदे से दिखने वाले हैवान का लौड़ा इतना बड़ा कैसे हो सकता है, इस वक़्त दोनों पति पत्नी राधे के अंडरवियर में कैद लौड़े को घर के देख रहे थे और मन hi मन खुद से बाते कर रहे थे, वही मैं, माहि को अपने अंडरवियर की तरफ घूरता हुआ देख कर उसकी ब्रा को अपने एक हाँथ में ले कर सूंघते हु वही अपने दूसरे हाँथ को अपने काळा लुंड को अंडरवियर की ऊपर से मसलता हूँ यह देख कर माहि, अपनी नज़र दूसरी तरफ करते हुए प्लीज मेरी

कपडे ला कर दो नहीं तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा माहि राधे को डरने के लिए कहती है? लेकिन उसे भी ये बात पता था की?? राधे आज उसे किसी भी किस्मत पर छोड़ने वाला नहीं जब तक उसका पति उस पेपर पर सिग्नेचर नहीं कर देता है.. इधर मैं, चल ठीक है मैं तेरे कपडे ला कर दे दूंगा लेकिन? माहि, एक पल के लिए खुस तो हुई लेकिन अगले hi पल राधे की लेकिन?? सुन कर उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगता है और मन hi मन में उसे चिंता होने लगती है की अब राधे की क्या डिमांड होने वाली है, इधर मैं, माहि को घूरते हुए है तो तेरे कपडे दे दूंगा लेकिन मेरी एक शर्ट है, माहि, मेरे मुँह से शर्ट का नाम सुन के समझ गई की पक्का राधे उससे कुछ उल्टा सीधा मांग करने वाला है, वही मैं, माहि की तरफ देख के क्यों तू है तैयार या नहीं,

माहि, देखो राधे मेरे साथ ये घटिया चल तुम्हारी नहीं चलने वाली इस लिए अपनी बातो में लेने की कोशिश भी मत करो?, मैं, शर्ट बस यह है की एक बार अपने चुचो पर से हाँथ हटा दे माय सच में सरे कपडे तेरे वापिस कर दूंगा?, माहि, बेशर्म कमीने.. माय कुछ नहीं दिखने वाली समझे, माय जानती हु पक्का तुम उल्टा सीधा मेरे साथ हरकत करोगे, अब मेरी गन्दी हरकत हो या तू कुछ भी समझ ले लेकिन हाथ हटा अपने चुचो पर से?, माहि, नहीं.. नहीं.. बिलकुल नहीं.. मैं, ठीक है.. तोह फिर ऐसे hi कड़ी रह अपने पति और एक गैर मर्द के सामने?, महिमा, प्लीज.. क्यों मेरे साथ ये सब गंदे हरकत कर रहे हो?, तुम्हे मेरे पति से मतलब है तो तुम उससे बात करो न, लेकिन मेरे पीछे पड़े हुए हो.. क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद करने पर तुले हुए हो? देखो न राघव तुम कुछ..

करते क्यों नहीं? और इसे जो चाहिए दे क्यों नहीं देते? तुम्हे ाचा लग रहा है मैं किसी और के सामने नग्गी हो जाऊ? तुम्हे मेरे से थोड़ा भी प्यार नहीं है क्या? मैने तुम्हारे लिए क्या क्या नहीं किया, जो तुमने कहा वह सब मैने आंख बंद कर के की, लेकिन अब जब मेरे ऊपर यह सब बिट रही है तो तुम चुप बैठे हो, उसकी बात पर राघव कुछ रियेक्ट नहीं करता है और दूसरी तरफ देखने लगता है, मैं उसके पति को कुछ रियेक्ट करता हुआ न देख के मैं, थोड़ा चांस मरते हुए कैसी बात करती हो मेरी जान माय कभी भी तेरी जिंदगी बर्बाद करना चाहूंगा.. क्या? माय तो बस तुझे प्यार करना चाहता हूँ अगर तेरा पति मेरे कहे मुताबिक काम करता है तो उसी वक़्त मैं तुझे हाँथ भी नहीं लगाने वाला यह मेरा वडा है? अगर मेरे पर यकीं नहीं है तो तू एक बार अपने पति से कह की जो माय

उससे करवाना चाहता हु वो कर दे फिर देख मैं तुझे कैसे छोड़ता हु ये कह के मैं एक सैतानी स्माइल करता हु? वही माहि, मेरी चुपड़ी चुपड़ी बातो में फिर एक बार आते हुए होश खोने लगती है, लेकिन तभी वह एक दम से होश में आते हुए, बस बहुत हुई तुम्हारी मीठी2 बाते अब वापस दो मुझे मेरे कपडे अब माय यहाँ एक पल भी नहीं रुकने वाली, मैं, तुझे वापस चाहिए यह कपडे तो खुद आ कर मेरे पास से ले ले आ जल्दी, महिमा, सोच में पद जाती है की कही राधे फिर से उसके साथ कुछ गलत सलत हरकत न करने लगे लेकिन अपने पति के सामने वो इस तरह बिना ब्रा और कपडे के रह भी नहीं सकती थी इस लिए महिमा मेरे हाथो से ब्रा लेने के लिए आगे बढ़ती है, वही उसका एक हाथ अपने दोनों चुके को छुपा के रखा हुआ था वही दूसरे हाँथ से वह ब्रा लेने के लिए बढाती है.
 
Episode 32ा,

इधर मैं, उसको इतनी सेक्सी हाल में देख कर अपने आप को रोक नहीं पाटा और मैं माहि को फिर से आगे से पकड़ लेता हु.. माहि का हाथ अभी भी अपने चुचों को छुपाये हुए थे वही वो सिर्फ पंतय में थी और मैं सिर्फ एक अंडरवियर में था, वही हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे और आँखों में देखने लगते है.. वही हम दोनों के बीच में बस माहि के हाथ थे, जो मेरी बालो से भरी काळा सफ़ेद बालो वाली छाती और माहि के गोर चुचो का मिलान होने से रोक रहे थे. माहि, के पीछे जो दीवार थी वही पीछे धकेलते हुए मैं उसे सत्ता देता हूँ, माहि ने अपने हाथ अभी भी नहीं हटाए थे और वही वो मेरी आँखों में देखते हुए गुस्से से घूरती रहती है इधर मैं, अब माहि की आँखों में देखते हुए उसके दोनों हाँथ पकड़ कर हटाने लगता हु ुर माहि, रोकने की कोशिश करती है के तभी..

मैं, उसके कानो में फुसफुसाता हुए, अब बस कर बहुत हुआ मेरी जान.. अब ये सब नौटंकी छोड़ कर हटा दे अपने हाथों को? वैसे भी तेरा पति चुप चाप बैठा हुआ है उसे तेरे से प्यार होता तो मेरे चुने से पहले hi वह जो माय कहता हो कर चूका होता समझी, अब मैं महिमा के दिमाग में उसके पति के प्रति गुस्सा भरने लगा साथ hi जो बचा खुचा प्यार महिमा को अपने पति से था वो अब मेरी बात सुन कर ख़तम हो जाता है, यही मेरा सबसे पहला प्लान था की माहि अपना पति प्रेम मोह को जल्दी से तयाग दे जिससे वो खुल कर मेरा साथ दे जो मैं कर रहा था उसके साथ क्युकी औरत जब तक तैयार नहीं होती तब तक उससे चुदाई करना सही नहीं होता है, इधर मेरी बातो का महिमा पर असर हुआ और उस का जो विरोध था वो भी अब ख़त्म हो जाता है जिसकी वजह से अपने आप चुचो पर से

हाथ जैसे हटने से लगते है. वैसे hi कामिनी स्माइल चेहरे पर लाते हुए उसके हाँथ पकड़ कर आसानी से हटा देता हु.. वही उसके हांथो को हट्टे hi बड़े बड़े और बेदाग़ चुके अब मेरी आँखों के सामने थे जिसे देख के मैं, ये हुई न बात अब खुल कर मज़ा ले मेरे साथ और जो तू डर रही है की तेरा पति तुझे क्या कहेगा तो उसकी फ़िक्र छोड़ दे क्युकी तूने देख hi लिया की तेरा पति तेरे से ज्यादा अपनी प्रॉपर्टी से प्यार करता है, ये कह के अब मैं अपनी छाती उसके बड़े चुचो में दबाकर उसके गले पर चूमने लगता हु, वही माहि, का मन में उथल पथल चल रही थी एक मन ये कह रहा था (की ये सब जो हो रहा है वो गलत है तू कोई रण्डी नहीं की किसी के बहो में आ कर खुद को उसके हवाले कर दे?), वही दूसरा मन ये कह रहा था की (जब तेरा पति सामने होते हुए भी तुझे बचने के लिए कुछ नहीं

कर रहा है तो फिर तू इतना क्यों राधे का विरोध कर रही है? वैसे भी तेरी प्यास न तो तेरा पति कभी बुझा पाया और न hi कोई और तो तू राधे को एक मौका दे कर देख सायद वह तेरी मन मुताबिक तेरे बदन के सालो की जलन एक पल म निकला दे), माहि अपने खयालो से बहार आती है जब उससे अपने चुचो पर मेरे हार्ड होंठ महसूस होते है, वही उसके चुके पर कुछ गिला महसूस होता है तो अपनी नज़र थोड़ा निचे करती है तो क्या देखती है की उसके चुके क गुलाबी निप्पल राधे अपने काळा मुँह में भर कर चूसे जा रहा था. ये देखते hi अचानक माहि, होश में आते हुए राधे को अपने चुके से दूर करते हुए आह्ह्ह्ह.. बस्सस.. राधे इसके आगे बिलकुल नहीं बढ़ना है मुझे समझे इधर मेरे दिमाग में अब हवस भर चुकी थी इस लिए मैं उसके बोलने पर भी खुद को रोक नहीं पाटा हु और फिर से आगे आ कर?
 
उसके दोनों नग्गे चुके पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगता हु जिससे.. माहि, आह्ह्ह्ह.. नाहीई.. छोडो.. कमीने बुड्ढे.. कहिके.. आह्हः.. सशह्ह्ह.. बहुत हुआ आह्हः तुम्हारा ये सब गंदे काम, मैं, साली मैं तुझे बुद्धा दीखता हु लेकिन कोई नहीं मेरी जान ने बुद्धा कहा है तो मैं मान लेता हु, मेरी बात सुनकर माहि के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान छ जाती है, वो तो राधे को गुस्सा करने के लिए उसे बुद्धा बोली थी लेकिन राधे गुस्सा न हो कर वह माहि की बात को मज़ाक बना के उदा देता है ुर माहि को यही बात राधे की अछि लगती है, मैं, तू डर मत मेरी जान.. मेरे जाने के बाद कभी तेरे पति ने डाटा या तुझपर हाँथ उठाने की कोशिश भी की तो मुझे बताना फिर देखना मैं इसकी कैसे माँ छोड़ता हु ये बात मैं राघव जो सोफे पर बैठा हुआ था उसकी तरफ देखते

हुए बोलै तो माहि, मेरी बात पर मुस्कुरा देती है और उसको मुस्कुराता देख अब्ब मैं उसके नंगे और गोर चुचो पर हाँथ रख कर सलौली सलौली मसलने लगता हु और माहि इस बार मेरा कोई भी विरोध नहीं करती उल्टा वो खुद hi मेरे हाथो पर अपने कोमल हाथ रख देती है, माहि अपने पति की और देखती है तो पाती है उसका पति आंखे गदा कर राधे को चुके मसलते हुए देखे जा रहा था, उसे ऐसा देखते हुए महिमा का बदन और ज्यादा गरम होने लगता है साथ hi साथ राधे की बात पर गुस्सा करने के बजाय हल्का स्माइल पास करती है, क्युकी महिमा के साथ आज तक उसके साथ राघव भी कभी ऐसी बाते नहीं की थी, भले hi इन दोनों की लव मैरिज हुई थी, वही राधे के मुँह से ऐसी केयरिंग बाते सुनकर उसको बहुत अच्छा लग रहा था और वो अब बिना पति से डरे रिलैक्स होकर

राधे के हाथो पर से अपने हाथ को हटा देती है, इधर मैं माहि से कैरिंग बाते करते हुए, तू अब अकेली नहीं है मेरी जान.. मैं हु न तेरे साथ तुझे कोई भी प्रॉब्लम हो मुझे कह देना मैं उसका तुरंत सलुटेशन्स निकल दूंगा, माहि, को राधे की मीठी मीठी बाते अब अच्छी लगने लगती थी लेकिन उसे नहीं पता था की राधे के चाल में वो फस्ती जा रही थी.. इधर मैं, भी अब उसके निप्पल्स पर से अपनी ऊँगली फेरते हुए थोड़ा निचे झुक कर उसके एक चुके की गुलाबी निप्पल को अपने मुँह से चूसते हुए, उम्म्म... तेरे पति ने कभी ऐसे चूसा है तेरे मम्मी?, माय राघव को तरफ देखते हुए उसके छोटी निप्पल को चुम ुर चाटने लगता हु, माहि कुछ नहीं बोलती इस बात पर साथ hi शर्म से वो दूसरी तरफ देखने लगती है, मैं, अब उसके दूसरे चुके के छोटी निप्पल को अपने मुँह में भर के चूसने

लगता है और माहि सिसकारने लगती है.. आह्हः.. उम्म्म.. राधे.. उफ्फ्फ्फ़.. सष्ठ.. मैं, बता न मेरी जान.. मुझे नहीं लगता तेरे पति ने मेरे जैसे कभी तुझे ये मजा दिया होगा क्यों है न मैं उसके छोटी निप्पल को हलके काटते हुए बोलता हु, जिसकी वजह से माहि अब अपने आप को रोक नहीं पाती और वो अपने हाँथ को मेरी बालो में से फेरते हुए उम्म्ह.. न.. नहीं.. मैं, उसकी बात सुनकर खुश हो जाता हु वही उसका पति जो सोफे पर बैठा है था वो माहि की बात सुन कर हैरान होता है लेकिन उसको भी ये बात पता थी की उसने कभी भी अपने बीवी के गोर चुके जैसे राधे बड़े hi पैशनेट तरीके से चूस रहा है वैसे आज तक नहीं चूसा है, इधर मैं, थोड़ी देर चूसने के बाद उसके निप्पल को अपनी ऊँगली में पकड़ कर दबाता हु जिसकी वजह से माहि, ाहहीईई.. नाहीई.. सशह्ह्ह.. उफ्फ्फ्फ़.. आठ.. करती है.

मैं, जी भर के चीख मेरी जान.. जो मजे तेरे पति ने नहीं दिए वो आज मैं दूंगा तुझे ये बोल कर मैं, अब उसके दोनों चुचो को अलाट पलट कर चूसने लगता हु और माहि मेरे सर के बालो में से हाथ फेरते हुए अपनी आँखे बंद किये हुए लाल लाल होंठ काट रही थी, मैं, अब अपने हाँथ उसकी पतली कमर से निचे ले जाते हुए उसकी सेक्सी पंतय में घुसता हु.. जैसे hi माहि को मेरे हाँथ अपनी छूट की उभरी हुई सतह पर महसूस होता है, वो मेरी बाहो से छूट कर रूम के दूसरी तरफ भाग जाती है. वो जानती थी की अब माय आगे क्या करने की सोच रहा हु. मैं, अब अपने अंडरवियर में हाथ डालकर अपना लुंड हिलाते हुए माहि जो थोड़ी दुरी पर कड़ी थी मैं उसके तरफ बढ़ता हु, वही माहि, की नज़र मेरे अंडरवियर पर hi थी जो वो बड़े गौर से देख रही थी.. उसे अपने अंडरवियर पर देखते हुए पा कर,
 
मैं, क्या देख रही है मेरी जान.. तेरे पति से बड़ा है न?, ये बात मैं राघव की और देख के बोलता हु वही राघव की भी नज़र मेरे बोलने पर जाती है और एक बड़ा सा तम्बू देख के मन hi मन में बाते करता हुए (भला किसी का इतना बड़ा लौड़ा कैसे हो सकता है जब की अभी भी उसका अंडरवियर में है और जब ये सामने आएगा तब कितना बड़े होगा?), इधर माहि कुछ नहीं बोलती और वो झट से अपना मुँह घूम कर दीवार के तरफ कर के देखने लगती है, वही मेरी तरफ अब महिमा की नंगी पीठ और बहुत hi बड़ी उभरी हुई गांड थी जो सिर्फ पंतय में कैद थी जिसे देख कर मेरा लौड़ा एक दो झटके मरता है क्युकी मेरी सबसे बड़ी कमजोरी औरतों की बड़ी गांड है और माहि की 36 साइज की गांड देख देख के अपने लाऊड को अंडरवियर के ऊपर से मसलते हुए मैं अब जल्दी से माहि के पीछे खड़ा हो जाता..

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हु और उसके सेक्सी बदन से चिपक जाता हु, माहि मेरे चिपकने की वजह से उसके मुँह से एक आह्ह्ह्ह.. सिसकारियां निकल जाती है, उसको अब अपनी गांड पर मेरा गर्म लोहे जैसे औज़ार भी महसूस होने लगता है वो कोई कुमारी लड़की नहीं थी की जो उसके गांड की दरारों के महसूस हो रहा है वह आखिर क्या है, वो भली भाटी जानती थी की वो राधे का लौड़ा है लेकिन उसकी टिटनेस फील करते हुए वह इतना तो समझ गई थी की राधे का लौड़ा बहुत hi दुमदार है.. इधर मैं, उसके पीछे से उसके दोनों चुके पकड़ कर मसलने लगता हु.. माहि, राधे पलासी ऐसा मत कारु अब बस्स्स बहुत हुआ मुझे छोड़ दो?, मैं, तू फालतू में टेंशन ले रही है वैसे भी हम कुछ गलत नहीं कर रहे है मेरी जान?? मैंने तो तेरे पति के सामने सब कुछ रख दिया है अगर वो नहीं चाहता तेरी इज्जत बचाना तो तू क्यों

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परेशां हो रही है ये कह के अपना लुंड उसके पीछे से पंतय पर रगड़ने लगता hai..Jisase महिमा, आह्हः.. पर.. आठ.. मैं, कुछ पर बार नहीं तू भूल जा की तेरा पति यहाँ सामने बैठा हुआ है ये सोच की यहाँ कोई भी नहीं है मेरे सिवा? माय हु न.. सब कुछ संभल लूंगा.. माय तेरी इज्जत पर कोई भी ाच नहीं आने दूंगा मेरी बाते माहि को रिलैक्स कर रही थी और वो अब आगे कुछ नहीं बोल पा रही थी, मैं उसके गले पर हलके से किश करते हुए तेरा पति.. तुझे उससे डर है क्या?, ये बात उसके पति की और देख के पूछा, माहि, कुछ नहीं बोलती, बस 'हां' में सर हिलती है. मैं, उसके मम्मी दबाते हुए, तू डर मत.. माय अकेला hi काफी हु तेरे पति को सँभालने में.. तू डर मत उससे.. बिनधास्त होकर मजे कर बस ये बात फिर से उसके पति की और देख के बोलै और उससे भी पूछा क्यों हरामजादे मेरी

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जान को कुछ बोलेगा मेरे जाने के बाद क्या?, राघव, न में सर हिलता है ये देख के मैं एक कामिनी हंसी हस्ते हुए देख लिया मेरी जान तेरा पति भी अब तुझे कुछ नहीं कहेगा ये कहते हुए मैं अब माहि की कमर में हाँथ दाल देता हु और धीरे से अपने हाथ उसकी पंतय की तरफ बढ़ने लगता हु. माहि की धड़कन और सांसे दोनों बढ़ चुके थे वही मेरे हाथ कहा जा रहे है वो जानती थी, और वो अब हाँथ को रोकना भी नहीं चाहती थी, क्यों की माहि को अपने पति से परमिशन मिलने के बाद जो थोड़ा डर था वो अब निकला गया था, लेकिन उसके संस्कार और पति प्रेम का कोई भरोसा नहीं था की कब उसके ये दोनों जाग जाये इस लिए मैं अपने गन्दी बातो से माहि को गरम करते हुए, लगता है आज हमारी सुहाग रात है क्यों?, मेरे मुँह से सुहागरात की बात सुन कर माहि शर्म से पानी पानी हो जाती है.
 
मैं, अब देर न करते हुए अपना एक हाँथ उसकी पंतय के अंदर घुसता देता हु और जैसे hi मेरा हाँथ अंदर जाते है वैसे hi मुझे उसकी छूट की गर्माहट पाटा चली साथ hi उसकी छूट कुछ ज्यादा उभरी हुई थी वही छूट एक दम चिकनी थी झांट के नमो नीसाण नहीं थे ये फील करते हुए अब मैं उसकी छूट पर अपने बड़े हांथो में ले कर उसे बुरी तरह से मसलता हु जिसकी वजह से माहि, के मुँह से एक जोर दर आह निकलती है, और वो अपने पंतय के ऊपर से अपने नजीओक हांथो को रख के थोड़ा मेरे हांथो को दबती है जैसे इसारे से कह रही हो प्लीज ऐसे मेरी बुर को न दबाओ लेकिन उसके मुँह से बस ाहो के अलावा कुछ नहीं निकला पता है सायद वो अब शर्मा रहे थी, इधर मेरे बड़े बड़े काले हाँथ उसके फूली हुई छूट पर फेरने लगता hu..meri ऊँगली अपनी छूट पर महसूस करते hi माहि सिसकारने लगती है.. ऊम्मम.. आह्ह्ह्ह.. सष्ठ.. उफ्फ्फ्फ़ की.

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वही मेरा एक हाँथ उसके एक चुके को दबा रहा था, वही अपने दूसरे हाथ से उसकी छूट पर से ऊँगली फेर रहा था और साथ hi साथ उसके पीछे से अपना कला लौड़ा जो इस वक़्त अंडरवियर में कैद था उससे मैं उसकी गांड पर लगातार रगड़े जा रहा था. मेरे इतने सारे वॉर माहि सेह नहीं पा रही थी. वही मैं, माहि के गले पर हलके से काटते हुए उसके निप्पल्स दबाता हु माहि थोड़ा तड़प कर, आह्हः.. नाहीइ.. राधी.. उम्मन.. सष्ठ.. मैं, बोल मेरी जान.. क्या है?, माहि कुछ नहीं बोलती ुर बस दीवार को देखती रहती है, मैं, शैतानी हसी के साथ फिर से उस के निप्पल्स को ऊँगली में पकड़ कर खींचता हु.. माहि, आठ.. नही.. ूमम.. करती है मैं, दर्द हो रहा है?, माहि, हम्म्म... मैं, फिर से उसके निप्पल को पकड़ खींचता हूँ और फिर से माहि सिसकारती है. मुझे मजा आ रहा था ऐसे उसके निप्पल्स के

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साथ खेलते हुए.. वही माहि, को अपने अपने पीछे टांगो के बीच अब मेरा कला लुंड अचे से महसूस होने लगा था जो अंडरवियर में टैंकर लोहे जैसा सख्त हो चूका था उधर माहि दीवार पर अपने दोनों नाजुक हाथ रख देती है और अपनी बड़ी गांड को हलके हलके से पीछे करने लगती है, मेरे लिए ये अनएक्सपेक्टेड था, वही उसका पति यह देख के वह भी हैरान था की महिमा कैसे किसी गैर मर्द के साथ ऐसा पेस आ सकती है लेकिन उसकी hi गलती है अगर उसने वक़्त रहते हुए राधे की बात मान गया होता तो उसे यह सब नहीं देखना पड़ता लेकिन अभी भी राघव राधे के लाये हुए प्रॉपर्टी के ऊपर सिग्नेचर नहीं करना चाहता था, इधर माहि की इस हरकत मेरे लिए अब कण्ट्रोल कर पाना नामुमकिन हो जाता है और माय माहि की कमर पकड़ कर पीछे से जोर जोर से झटका मरता हु.

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जिस्सके कारन माहि, के मुँह से आह्ह्ह्ह.. की आहे उठने लगती है, वही मैं उसके पति की और देखता हु तो वो बड़े गौर से हमें घर रहा था और मैं भी उसे दिखते हुए माहि के पीछे से दे दाना दान झटके देने लगता हु जैसे मैं छोड़ hi रहा हु वैसा hi उसके पति को दिख रहा था लेकिन यहाँ हम दोनों के बिच अंडरवियर का एक बंधन था नहीं तो अब तक मेरा लौड़ा उसके पत्नी की गांड के अंदर होता, इधर मैं, लगातार 10 से 15 तगड़े झटके जोर जोर से मरता हु और माहि दीवार पर दोनों हाथों को रख के चिल्लाने लगती है. उसको मेरा कला लुंड अपनी गांड पर अचे से चुभने लगता है, वही मैं, क्या हो गया मेरी जान चिल्ला क्यों रही है, मैं, भोला बनाने का नाटक करते हुए पूछता हु मेरी बात सुन कर माहि अपनी गर्दन थोड़ा घुमा के मुझे गुस्से से घूरती है लेकिन वह कुछ नहीं बोलती है.

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इधर मैं, उसका इशारा समाज जाता हु की वह क्यों ऐसे मुझे गुस्से से घर रही लेकिन उसका मुझे गुस्से से घूरना मेरे लिए बहुत hi सेक्सी था और ये सेक्सी रूप को देख के मैं खुद को रोक नहीं पता और मैं उसके होंठो पर अपने होंठ रख देता हु. माहि एक पल के लिए शॉक हो जाती है पर अगले hi पल उसकी आँखे बंद हो जाती है, अब वह अपना एक हाँथ थोड़ा टर्न करके मेरे काळा गले में दाल कर मेरे किश का जवाब अपने सेक्सी किश से देने लगती है उधर माहि, के ऊपर अब्ब हवस भरी हो चुकी थी जिसकी वजह से उसका दिमाग काम करना बंद कर चूका था और वो अब बेशर्म होकर एक मामूली से बॉडीगार्ड को चूमे जा रही थी जब की उसका पति उसके hi बैडरूम के सोफे पर बैठा हुआ था, इधर मैं थोड़ी देर उसके होंठो का राश पान करने के बाद?
 
मैं, अब माहि के दोनों चुके को बरी बरी से अपने मुँह में भर कर अच्छे से थूक लगा लगा कर चूसने लगता हु.. माहि मुझे अपने चुके चूसते हुए घूरे जा रही थी.. उस बैडरूम में अब माहौल काफी गर्म हो चूका था वही उसका पति हम दोनों को बस घूरे जा रहा था.. लगभग 10 मिनट्स तक मैं उसके गोर चुके को अपने गन्दी और महकदार थूक से भर देता हु वही हम दोनों एक दूसरे को हवस भरी नज़रो से देखने लगे थे इधर मैं, अब बिना देरी किये माहि की पंतय निचे करने लगता हु उधर माहि एक बार मेरे हाथ को रोकने की कोशिश करती है पर मैं उसका हाथ को हटा कर उसकी पंतय निचे सरका देता हु, अब माहि, एक मामूली से बॉडीगार्ड के सामने पूरी तरह से नंगी कड़ी थी.. वही माहि को मेरी ऐसी हरकत एकदम से चुका देती है और वो अपने चुके और छूट एक एक हाथो से छुपाने लगती है.

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इधर मैं, उसके नंगे जिस्म को देखते हुए अपने अंडरवियर में से लुंड हिलने लगता हु वही मैं, माहि से क्या जिस्म है तेरा मेरी जान उफ्फ्फ आज तक ऐसी गदराई हुई माल अपने पुरे लाइफ में नहीं देखि है (मैं ये बात हर औरत से कहता हु क्युकी मेरा मानना है की औरतो की जितनी तारीफ करो वो उतनी ज्यादा खुस होती है). उधर माहि को अपने सेक्सी बदन की तारीफ सुन कर ाचा लगता है क्युकी आज तक उसके पति ने कभी भी महिमा की तारीफ नहीं की थी भले hi उनकी लव मैरिज थी लेकिन माहि हमेशा से चाहती थी की राघव उसके बदन को देख के उसकी टैरिफ करे लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, लेकिन जब आज कोई गैर मर्द उसकी टैरिफ उसके पति के hi सामने करता है तो माहि के बदन में एक अलग hi एक्ससिटेमेंट जागने लगती है वही माहि की नज़र बार बार मेरे अंडरवियर पर जा रही थी और मैं उसको देखते हुए

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अब्ब अंडरवियर से हाथ निकल कर माहि के हाथ पर रखने hi वाला था की वो अपने चुचो पर से हाँथ हटा देती है क्युकी मेरा गन्दा हाँथ उसे अपने हांथो पर नहीं चाहिए था. लेकिन जैसे hi वो अपना हाँथ हटती है वैसे hi उसके गोर चुके मेरे सामने बे पर्दा हो जाते है और माय देर न करते हुए अब उसके चुके पर हाथ रख कर उसको दबाने लगता हु, माहि, ीववव.. हटाओ अपना गंदे हाँथ.. मैं, क्या गंदे हाथ? अपना लौड़ा हिला रहा था इस हाँथ से तो ये हाँथ गंदे हो गए?, माहि, ीववव.. छीटीए.. है तुमने सही कहा अब हटाओ अपने हाथ.. मैं, मेरी जान.. यही लुंड तेरी छूट में जायेगा थोड़ी देर बाद, तो क्या करेगी तू? माहि, मेरी बात से शर्म से लाल हो जाती है उधर उसका पति सोफे पर बैठा हम दोनों की राश्लीला और गरम बाते सुन कर मज़ा ले रहा था इधर उसकी पत्नी के अंदर अब एक बार फिर से हवस जगाने लगती है.
 
वही मैं, उसकी शर्माती नज़र देख अब उसकी छूट पर से हाथ हटाने लगता हु साथ hi अब उसको जहा उसका पति सोफे पर बैठा था वह खींचते हुए ले जा कर लिटाने लगता हु और महिमा, ये देख कर प्लीज.. राधे मुझे छोड़ दो, मैं, सशह्ह्ह्ह.. चुप.. अब कुछ बोल मत.. अब बस प्यार करने का वक़्त है.. माहि, नहीं.. प्लीज छोड़ दो... ये गलत हो रहा है?, माहि अपने पति की वजह से वो खुल कर एन्जॉय भी नहीं कर पा रही थी इस लिए मेरा इतना विरोध कर रही थी, भला कौन पत्नी होगी जो अपने पति के सामने किसी और मर्द के साथ ऐसे सेक्सी रोमांस कर सकेगी वही हाल अभी माहि का था, इधर मैं, क्या गलत मेरी जान? सब कुछ सही हो रहा है.. अगर तुझे मेरे साथ कुछ नहीं करना है तो तू अपने पति से बोल वो जल्दी पेपर पे सिग्नेचर कर दे

और माय तुझे अभी के अभी छोड़ दूंगा? लेकिन अगर वह सिग्न नहीं करता तो मैं अपनी प्यास को बुझा के रहूँगा तेरे साथ, मुझे कोई रोक भी नहीं सकता समझी मेरी बात सुन कर अब उसकी आखरी उम्मीद भी ख़तम सी हो जाती है क्युकी राधे उसे छोड़ने के मोड़ में नहीं था और दूसरी तरफ उसका पति प्रॉपर्टी के पेपर पर सिग्न करना नहीं चाहता था माहि अब बुरी तरह से फास चुकी थी वही राधे के छेद चढ़ से अब वह फिर से मदहोश होने लगती है, इधर मैं जिस सोफे पर उसका पति बैठा था ठीक उसके बगल के बड़ी वाली सोफे पर माहि को लिटा देता हु, वही माहि सोफे पर पीठ के बल लेटते hi फिर एक बार अपने एक एक हांथो से अपने चुके साथ hi अपनी नग्गी छूट को छुपा लेती है इधर मैं मन में (साली कितना शर्मा रही है लेकिन थोड़े वक़्त के लिए जितना शर्माना है शर्मा ले लेकिन उसके

बाद जब मेरा कला बड़ा और मोटा लौड़ा तेरी छूट में जायगा उसके बाद साडी शर्म तेरी दूर हो जायगी?), ये सोचते हुए मैं, उसके चुके और छूट पर से मैं उसके हाँथ हटा देता हु, वो मेरा थोड़ा बहुत विरोध करती है लेकिन पहले जैसे मेरा वह विरोध नहीं दिखा पाती है.. मैं अब उसके नंगे जिस्म को निहार रहा था और निहारते हुए मन में (आज तक मैने बहुत साड़ी शादीशुदा औरतो को छोड़ा था लेकिन माहि के जैसी खूबसूरत औरत मैने आज तक नहीं देखि थी). उधर माहि, भी अब शर्माना छोड़ चुकी थी, वो सोफे पर लेते हुए मुझे देखती है. इधर मैं, वह क्या बदन पाई है तू मेरी जान? ऊपर वाले ने बड़ी फुर्सत से तुझे बनाया है क्या बड़े बड़े चुके उफ्फ्फ्फ़ और उतनी hi गोर है, और तेरी फूली हुई छूट और तित फांके देख कर लग hi नहीं रहा है की तेरी इसी छेद से तेरी बेटी निकली

है, आज तो ये छूट छोड़ कर माय धन्य हो जाऊंगा?, छोड़ना शब्द सुन कर माहि, क्या बोल रहे हो? मैने तुम्हे कोई इजाजत नहीं दी है और तुम जबरदस्ती कर रहे हो मेरे साथ, उसकी बात पर मैं हस्ता हु और अचानक निचे झुक कर उसकी जांघ को चूमने लगता हु, वही मेरी जुबान अपनी जांघ पर लगते hi माहि जोर से सिसकारने लगती है आह्हः.. सष्ठ.. उफ्फ्फ.. मैं, सच में तेरे साथ जबरदस्ती कर रहा हु? ये कह के मैं फिर से अपनी जुबान उसकी गोरी जांघ पर फेरने लगा और माहि के जिस्म से अब तेज़ बिजली दौड़ने लगी साथ hi उसे मेरी खुरदरी जुबान से गुड़ गुड़ी सी होती है और माहि, आठ.. राधे.. गुदगुदी हो रही.. ाओऊ.. हहै.. आह्हः.. ूमम.. मैं, बोल न.. माय तेरे साथ जबरदस्ती कर रहा हु क्या? तू है रही है एक बॉडीगार्ड के साथ अय्याशी करते वक़्त?, मेरी बात का जवाब अब माहि के पास नहीं

था, वो अब्ब किसी भी तरह का विरोध कर नहीं पा रही थी, वही उसका पति अपने पत्नी को विरोध न करते हुए वो फिर एक बार ास्चर से अपने पत्नी यानि माहि को देखता है लेकिन इस वक़्त माहि अपने हवस के आगे हार मान चुकी थी इस लिए उसकी आँखे बंद थी, इधर मैं, अब माहि की गोरी जांघो को चूमते हुए उस के ऊपर आ जाता हु, अब हम दोनों के जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए थे. अचानक राधे के अपने ऊपर आने से माहि उसके बदसूरत चेहरे को देखने लगती है. दोनों नंगे सोफे पर लेते हुए थे और मेरी नंगी जांघ माहि की जांघ पर घिस रही थी वही मेरी आँखों में शराब के साथ hi साथ सेक्स का नशा साफ़ तौर पर दिख रहा था, वही माहि, को अब अपनी टांगो के बिच में मेरा कला गर्म लुंड अच्छे से महसूस हो रहा था और वह तेज़ी सी सासे लेते हुए मुझे देख..

रही थी इधर मैं, अब माहि के निप्पल दबाते हुए उसकी छूट की तरफ जाता हु, माहि को ये फील होते hi की राधे अब कहा जाने वाला है वो उससे पहले hi अपने दोनों हाथो से अपनी छूट छुपा देती है, ये देख कर मैं, अब बस भी कर मेरी जान.. क्यों छुपा रही है? ये तो स्वर्ग का दरवाजा है, माहि, कुछ नहीं बोलती, मैं, अब उसके चुचो को मसलने लगता हु और माहि आहे भरते हुए मुझे देखने लगती है इधर मैं कुछ देर उसके गुलाबी निप्पल को दबाने के बाद मैं अब माहि के हाथो पर अपनी जुबान रख कर उसको चाटने लगता है, मेरी जुबान महसूस होते hi माहि अपने दोनों हाथ अपनी छूट पर से हटा देती है और अब मुझे उसकी गुलाबी छूट मेरे आँखों के सामने आ जाती है जिसे देखते hi मैं, वाह्ह्ह.. क्या.. क़यामत.. छूट है तेरी?.
 
माहि मुझे अपनी छूट के इतना पास पाकर फिर से अपनी छूट ढकने लगती है. जिसे देख कर मैं, मत छुपा अब इसको मेरी जान.. ये स्वर्ग का दरवाजा है.. स्वर्ग का.. माहि मेरी बात से शर्मा जाती है, मैं, अब्ब थोड़ा आगे झुक कर माहि की गुलाबी छूट को सूंघते हुए आह्ह्ह्ह.. वहहह.. क्या खुशबु है.. वाह्ह.. माहि, शर्म से पानी पानी हो जाती है, उसके छूट की कभी कोई बड़ाई नहीं की थी और जब राधे ने की तो शर्मा जाती है लेकिन दिल hi दिल में उसे राधे की बड़ाई भ जाती है, इधर मैने अपने एक हांथो से उसके दोनों कोमल हाँथ को पकडे हुए था और वह बस मुझे hi देख रही थी उसका धयान अब अपने पति से पूरी तरह से हैट चूका था, क्युकी इससे पहले सारा धयान अपने पति पर की थी लेकिन जब उसका पति प्रॉपर्टी के पेपर पर सिग्न नहीं किया तो माहि भी समझ गई की उसका पति उससे

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प्यार नहीं करता है अब वो भी अपने पति को बेवफाई करने पर उतारू हो चुकी थी, वही मैं, उसके छूट की स्मेल लेते हुए, तेरी छूट की खुशबु के सामने परफ्यूम भी कुछ nahi..Mahi मेरी बात सुन कर उसके गाल एक दम लाल हो जाती है, मैं, अब्ब देर न करते हुए अपनी जुबान बहार निकल कर माहि को देखने लगता हु माहि, भी मेरी और देख के समझ जाती है की राधे उसके साथ अब क्या करने वाला है, इधर मैं, अब अपनी जुबान को हलके से माहि की छूट पर रखता हु और माहि बड़ी सी सिसकारी भर्ती हुए ाहहीइए.. सष्ठ.. ऊम्मम.. आह्हः.. नाहीई.. राधे.. उफ्फ्फ.. प्लीज जो करना चाहते हो वो न कारु?, मैं माहि की बाते और सिसकारी सुन कर बस मुस्कुरा देता हु माय जानता था की अब माहि मेरे पुरे कण्ट्रोल में आ चुकी है अब्ब इस पोस्टिव में आ कर वापस नहीं जा सकती थी भले hi ऊपर ऊपर से वो मन कर रही है लेकिन अंदर से उसका मन कर

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रहा था की राधे जल्दी से उसकी जलती भट्टी की तरह छूट के अंदर अपनी जुबान दाल दे, वही उसका पति बगल में बैठा मुझे hi घर रहा था वह आंखे गदा कर मुझे अपने पत्नी की छूट में जुबान लगते हुए देख रहा था उसने अपने पत्नी के साथ ऐसा कभी कुछ नहीं किया था उसे ये सब करना बहुत hi गन्दा लगता था लेकिन कही न कही उसकी पत्नी ये करवाना चाहती थी, इधर मैं, फिर से माहि को देखते हुए अपनी जुबान उसकी गुलाबी छूट पर रख देता हूँ और फिर से हलके से उसकी छूट पर से माय फेरने लगता हु.. मेरी गर्म जुबान और गरमा गरम साँसे उसको मदहोश करने लगती है, अब्ब उसके दिल ो दिमाग पर कुछ ज्यादा hi हवस भरी पड़ने लगती है, इधर मैं, फिर से अपनी जुबान माहि की छूट पर रख कर चाटता हूँ और वह आहे भरते हुए अब अपनी आँखे बंद कर देती है, (वह अब्ब पूरी तरह से खुद को राधे के हवाले कर चुकी थी).
 
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