अपडेट-13
इक लड़का- भाई साहबब क्या मरे है सब क सब..
लड़का.2- भाई वो बिच वाले को दर्दनाक मौत मिली है..
लड़की- कोण कहता है की बिच में बैठना सेफ होता है..
लड़का.3- भाई में तोह अग्गे से दिग्गी में बेथ जायूँगा लकिन बिच में नहीं बेठुंगा..
(शिवं भी वह से जल्दी से रफू चाकर होक वापिस बिल्डिंग की तरफ जाने लगा....
|अब अग्गे|
(इधर तुषार, सवाना और सफल ने करीब सरे गुंडे मार दिए थे अब वह 3 गुंडे थे जो अपनी जिंदगी की भेक मांगते हुए गिरगिद्र रहे थे.)
गुंडा.1- (घुटनो पर बेथ हाथ जोड़ता हुआ) भाई मुझे छोर दे, में आपका वफादार कुत्ता बन क रहूँगा..
गुंडा.2- (हाथ जोड़ तुषार क पास जाता हुआ) हाँ भाई हमें छोड़ दो, हम येह सरे बुरे काम छोड़ देंगे..
तान्या- (गुस्से से गुंडे.2 की तरफ देखती हुई) भाई इससे मत छोड़ना इसने मेरे होंटो पे जबरदस्ती किश किया था, येह बचना नहीं चाहिए..
(तान्या इतना बोल, वो पल याद करने लगी जब येह गुंडा ने इसका मुँह पकड़ अपने काळा गंदे होंठ उसके नरम गुलाबी होठो पर रखे थे, उसकी आखो ने भी ासु बहाने शुरू कर दिया.. तुषार की तोह जैसे गुस्से ने नसे पहात गयी, लकिन उसने गुस्से पे कण्ट्रोल रखते हुए बोलै..)
तुषार- (उसके पास जेक कलर पकड़ता हुआ) ओह्ह तोह तू था वो, लकिन तू अभी तक बचा हुआ था, मुझे लगा इन् kede-makodo में तू भी कहा कुचला गया होगा, लकिन चलो ाचा हुआ तू बच गया, (सफल क तरफ देख) सफल इससे जरा साइड रख, (गुस्से से) इसको इतनी सीधी मौत में नहीं दूंगा, (उसकी गाल पे इक थप्पड़ मर क) बहनचोड़ड़ तूने मेरी बहिन को चूहा (इक और थप्पड़ मार क) मदारचोड़ अगली वीडियो येह दुनिआ तेरी देखेगी...
(गुंडे.2 की तोह पहात के चार हो गई, सफल उसके पास गया और उससे कास क इक खम्बे से बांध दिया..)
गुंडा.1- भाई हामी…
(वो अग्गे कुछ बोलता तुषार ने दोनों के सर पे गोली चला दी, सवाना ने जेक चेयर से बंधी तान्या की रसिया खोल दी, अब तक तुषार को लगी हुई गोली क कारन उसका काफी खून बह चूका था, लेफ्ट कन्धा काफी ज़ख़्मी हालत में था, वाइट शर्ट लेफ्ट साइड से बहते खून क कारन लाल हो गयी थी, तान्या ने चेयर से उठ के तुषार की तरफ देखा जो अभी दिवार क साथ पीठ टिकाये खड़ा था..)
तुषार- (सवाना की तरफ देख अपना मास्क निकलता हुआ) सवाना कुछ कर न यार येह दर्द अब सेहन नहीं होता..
(इतनी देर में शिवं भी सीढियाँ छड्ड ऊपर ा गया..)
सवाना- शिवं ाचा हुआ तू जल्दी ा गया, चल बॉस को जल्दी हॉस्पिटल लेके चलते है, पहले hi बहुत खून बह चूका है कही बेहोश न हो जाये..
(सवाना ने अभी इतना hi बोलै था की तुषार दिवार के साथ इक तरफ ढ़ाआरररममम से गिर गया, तान्या जो कब से तुषार की तरफ देख रही थी इक डैम से तुषार के गिरने से गभरा गयी, वो जल्दी से तुषार के पास गयी और उसका सर अपनी गॉड में लेके रोने..)
तान्या- भाई, भाई क्या हुआ तुजे, (एजेंट्स से, अपनी बेगहि हुई आखो से बोली)
इससे क्या हुआ है, अचानक गिर क्यों गया?..
शिवं- वो बेहोश हो गए है, अप्प चिंता मत कीजिये, हम अभी इन्हे हॉस्पिटल लेके चलते है..
तान्या- तोह मेरा मुँह क्या देख रहे हो, जल्दी लेके चलो कही इससे कुछ हो न जाये…
(शिवं तुषार को अपनी मजबूत बहो में पकड़ के उठा लेता है..)
शिवं- तुम दोनों उस गुंडों को पकड़ के (अपनी जेब से इक पर्ची निकलता हुआ) इस एड्रेस पे ले जाओ..
सवाना- (पर्ची लेती हुई) येह किसका एड्रेस है? और वह लेजके क्या करेंगे?
शिवं- येह वही जगह का एड्रेस है जैसे जगह को ढूंढ़ने क लिए बॉस ने बोलै था..
सवाना- क्या!! तुमने ढूंढ भी ली..
शिवं- हाँ जल्दी इससे ले जाओ, कही यहाँ पुलिस न ा जाये, और हमारा सिग्नेचर छोड़ते जाना..
सवाना- हम्म ठीक है...
(शिवं तुषार को अपनी गॉड में उठाये बहार कार की तरफ चल पड़ता है, उसके पीछे पीछे तान्या भी धीरे धीरे सुबकती हुई चली ा रही थी, शिवं कार क पास आके रुक गया तोह तान्या ने पिछली सीट का दरवाजा खोल दिया, जैसे hi दरवाजा खुला अंदर बैठी अन्निका ने जब शिवं के हाथो अपने प्यारे भैया की खून से lath-path बेहोश पड़ी बॉडी देखि तोह उसकी इक डैम से चीख निकल गयी..)
अन्निका- आअहाहहहह्ही भाईयियाआ, भैया, क्या हुआ.. क्या हुआ भैया को..
(शिवं कुछ नहीं बोलै और तुषार को पिछली सीट पर लेता दरवाजा बंद कर दिया और खुद ड्राइविंग सीट पर ा गया, तान्या भी उसके साथ अग्गे वाली सीट पर आकर बेथ गयी..)
अन्निका- (तुषार का सर अपनी गोदी में रख रोटी हुई) अप्प कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो, कितना खून बह रहा है भैया का..
शिवं- (कार स्टार्ट करता हुआ) जी वो आपके भैया को गोली लगी है..
अन्निका- (गभ्राश्य हुई) क्या!! भैया को गोली लगी है?,, अप्प लोगो ने वडा किया था की अप्प भैया को कुछ नहीं होने देंगे, अप्प झूठे लोग हो, अपने भैया को बछिया नहीं..
तान्या- (पीछे अन्निका की तरफ देखती हुई) अनुऊ, शांत हो जा, कुछ नहीं होगा भाई को..
अन्निका- दीदी अप्प तोह चुप hi रहिये, भैया आपकी वजह से वह उन् गुंडों से जेक लड़े और गोली भी खाई लकिन आपको तोह कोई फरक नहीं पड़ता न, भैया जिए या मरे, हैना..
(तान्या कुछ नहीं बोली, लकिन उसकी आखो से ासु झरने की तरह बह निकले थे, शिवं बार बार तान्या की तरफ देख मुस्कुराई जा रहा था लकिन उसकी आखे भी गेली थी, फिर कोई कुछ नहीं बोलै लकिन तीनो रू रहे थे, सबकी अपनी अपनी इक अलग वझे थी रोने की, अन्निका तोह बस तुषार के फेस को देखती हुई रू रही थी, उसके ासु गिर के तुषार के फेस पर पढ़ते तोह वो उससे अपने हाथ से बार बार साफ करती, और बड़े प्यार से उसके चेहरे को, उसके बल्लो को अपने हाथ से सहलाती, उसके माथे पे छोटे छोटे किश करती, जैसे तुषार उसका गुड्डा है और वो उसकी गुड़िया, येह कहना गलत भी नहीं होगा क्युकी येह बात सच hi थी. तान्या सामने लगे मिरर से अन्निका की येह हरकते देख हल्का सा मुस्करा दी.)
(कुछ देर में शिवं ने कार हॉस्पिटल के सामने कड़ी करदी और जल्दी से उतर कर तुषार को लेके हॉस्पिटल के अंदर चला गया..)
(करीब 2घंटे बाद.. तुषार के खंधे से गोली निकल ली गई थी, उससे होश ा चूका था और डॉक्टर ने सबको उससे मिलने की इजाजत भी दे दी थी, अभी सब लोग तुषार के रूम में बैठे थे..)
अन्निका- भैया में बहुत दर गयी थी, जब येह भैया आपको गोदी में उठा के मेरे पास लाये थे..
तुषार- डरने की क्या बात है भला, वो तोह गोली लगी थी और ज्यादा खून बहने क कारन में बेहोश हो गया था, बस..
अन्निका- भैया बस? येह कोई छोटी बात है, अगर आपका ज्यादा कुन बह जाता तोह आपको खून कोण देता? उस दिन तोह शिव भैया ने अपना खून दे दिया था, (तान्या की तरफ देख) अगर अज्ज भी आपको खून की जरुरत पड़ती तोह कोण देता आपको खून यहाँ तोह कोई अपना भी नहीं है जो आपको खून देदे..
(दूर बैठी तान्या अन्निका की बात सुन ख़ामोशी से ासु बहाने लगी, उसकी बात सुन उसके दिल में इक तेज दर्द उठा था..)
तुषार- (उसकी बात का मतलब समझता हुआ) गुड़िया!! ऐसा नहीं बोलते, तू अज्ज कल बरी चुलबुली हो गयी है, जो तू ख़ामोशी से किसी को तीर मार रही है न मुझे सब पता चल रहा है..
(इतना बोल तुषार अन्निका को थोड़ा पास खींच उसकी कमर पे गुदगुदी करने लगा..)
अन्निका- हीहीहीइ आह्हः ः भैया आ मत करो न हाहाहा ईई भैया प्लीज आह्हः..
(कुछ देर उससे ऐसे hi सताने के बाद तुषार उससे छोड़ देता है, शिवं भी मुस्कुरा रहा था, तान्या भी है रही थी..)
अन्निका- उफ्फ्फ भैया क्या करते हो!! अप्प न बचे रहोगे हमेशा, (मासूमियत से) ाचा भैया मुझे कास क गले लगाओ न, बहुत मन कर रहा है आपके गले लगने का..
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) इसके लिए तुजे परमिशन लेने की कब से जरुरत पड़ने लगी, तू तोह झपट्टा मरने में माहिर थी न, ः..
अन्निका- (मुँह बना क) भैया!
(और तुषार के बीएड पर hi उसके साथ कास के चिपक गयी, शिवं भी थोड़ी देर पहली hi उठ कर बहार चला गया था..)
(तान्या दोनों के प्यार को देख मुस्कुरा रही थी और रू भी रही थी, क्युकी उसने अपने इतने प्यारे भाई को खुद से दूर रखा उससे नफरत की, वो खुद तुषार के गले लग्न चाहती थी उससे बाते करनी चाहती थी लकिन अभी वो मजबूर थी, मजबूर थी अपनी कही हुई कड़वी बत्तो से जो वो वापिस नहीं ले सकती थी, मजबूर थी तुषार से की हुई नफरत से जो उससे बार बार याद दिला रही थी की तू वो हक्क खो चुकी है, अब अस्सू बनाने का कोई फयदा नहीं, लकिन उससे क्या पता की उसके भाई ने तोह उससे कबि नफरत की hi नहीं, कबि उसकी बात का बुरा मन hi नहीं, वो तोह खुद तड़फ रहा था उससे ढेर साडी बाते करने को, उससे अपने भाई होने का प्यार जताने को, अपने गले लगाने को..)
(तुषार अन्निका के गले लगे सामने बैठी तान्या को देख रहा था जो अभी कुछ सोचती हुई आखो में ासु लिए जमीं को घर रही थी, तुषार को शायद उसकी हालत का अंदाजा हो चूका था लकिन वो कुछ बोल नहीं रहा था बस चुप चाप मुस्कुराता हुआ सोच रहा था की…
~मात रहो दूर हमसे इतना की अपने फैसला पर अफ़सोस हो जाये,
कल को शायद अस्सी मुलाकात हो हमारी की अप्प हमसे लिपटकर रोये और हम खामोश हो जाये.~
(तुषार येह सोच हुआ अन्निका को और भी कास क अपने गले लगा लेता है..)
अन्निका- भैया इतना कास क गले मत लगाओ आपको दर्द होगा..
तुषार- मुझे. मुझे क्या दर्द होगा भला, दर्द तोह तुजे होगा मोती..
अन्निका- (बुरा सा मुँह बना क) में मोती नहीं हु भैया, में इक डैम फिट हु, और मुझे क्यों दर्द होगा में तोह अपने प्यारे भैया के गले लगी हुई हु, वो जितना भी कास के गले लगाए मुझे दर्द नहीं होगा.
तुषार- (मुस्कुराता हुआ) मेरी प्यारी गुड़िया, तुहि है मेरी साडी दुनिया..
अन्निका- भैया अप्प भी मेरे लिए सारा यूनिवर्स हो..
तुषार- (हस्ता हुआ) क्या कहा सारा यूनिवर्स, ूउम्मंहा, तू भी न पता नहीं क्या क्या बोलती है..
(अन्निका कुछ बोलती तुषार का फ़ोन बज उठा, येह कॉल आरुषि ने किया था जो घर पे परेशां बैठी थी, तुषार की भी पहात रही थी नंबर देख, की वो इतनी देर से कहा है इसका आरुषि को क्या जवाब देगा..)
तुषार- hello दीदी..
आरुषि- (गुस्से से) hello क बचे कहा है तू सुभे से?, अभी तक घर क्यों नहीं आया..
तुषार- वो. वो.. दीदी क्या हुआ न की…
आरुषि- हाँ क्या हुआ बोल न वो वो क्या कर रहा है, और तू हर्षिका का घर खुला छोड़ आया था, कोई अकाल वकाल है तुजे, कोई chor-vor घुस जाता तोह, सरे कमरे खुले पड़े थे, वो तोह शुक्र है हम दोनों जल्दी घर ा गयी, कहा गया था तू इतनी जल्दी में की तुजे घर लॉक करना भी याद नहीं रहा…
तुषार- वो दीदी बात दरअसल येह हुई की न…
(तुषार उससे अज्ज हुई साडी बाते बता देता है लकिन उससे गोली लगी थी येह नहीं बताता, तुषार की बात पूरी होने क बाद आरुषि फुल ों गुस्से में ा जाती है..)
आरुषि- (गुस्से से) तुशाअरररररर, इतना कुछ हो गया और तूने मुझे इक फ़ोन करना तक जरुरी नहीं समाज, क्या यही था तेरा प्यार अपनी बहिन क लिए..
(अन्निका जो पास लेती साडी बाते सुन रही थी, उससे अपने भाई को दन्त पड़ती सुनी न गयी तोह वो झट से बोल पड़ी..)
अन्निका- वो दीदी क्युकी भैया को गोली लगी थी, और भैया बेहोश हो गए थे, हम अभी भी हॉस्पिटल में hi है..
आरुषि- (और गुस्सा में) क्या तुषाररर तुजे गोली लगी है, और तूने येह बात भी मुझसे चुप क राखी और भी कुछ बात है तोह बोल दे न, (रोटी हुई) ठीक है अब तू? अन्नू भी वही है..
तुषार- हाँ दीदी में बिलकुल ठीक हु..
अन्निका- हाँ, और दीदी में भी यही हु, अप्प फ़िक्र मत करो भैया ठीक है, और में भैया का पूरा ख्याल रख रही हु..
आरुषि- ख्याल की बची, मुझे सब पता है अभी अपने भैया से लिपट क बैठी होगी..
अन्निका- (हैरानी से) दीदी! वाओ आपको कैसे पता..
आरुषि- मुझे सब पता है तेरा, ाचा वो सब छोड़ घर से फ़ोन आया था की तुम दोनों कहा हो, अब जल्दी से घर की और निकालो, mamma-papa परेशां हो जायेंगे, और अज्ज जो कुछ भी हुआ घर में बताना मत. Ok?..
अन्निका- (साद होक) ठीक है दीदी, लकिन फिर भैया के साथ कोण रहेगा?..
आरुषि- अरे पागल लड़की में ा रही हु न वह..
अन्निका- ओह्ह ठीक है दीदी, में और तान्या दीदी घर चले जाते है..
आरुषि- हम्म गुड गर्ल, चल bye..
अन्निका- bye दीदी..
《2133 -वर्ड्स》