TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 3 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

अरे कहा जा रहे हो भाई!!

इतनी जल्दी नहीं छोडूंगा आपका साथ, आपकी कमेंट से लगता है अप्प उदास hi होक बेथ गए, और उसका कारन में था सॉरी दोस्त, आगे से अपडेट ात्ते रहेंगे, मुझे बस थोड़ा सा वक़्त चाहिए था, लकिन अब कोई टेंशन नहीं..

और अपने तोह सिग्नेचर पर भी मेरी स्टोरी भर राखी है..

शुक्रिया...
 
अपडेट-13

इक लड़का- भाई साहबब क्या मरे है सब क सब..

लड़का.2- भाई वो बिच वाले को दर्दनाक मौत मिली है..

लड़की- कोण कहता है की बिच में बैठना सेफ होता है..

लड़का.3- भाई में तोह अग्गे से दिग्गी में बेथ जायूँगा लकिन बिच में नहीं बेठुंगा..

(शिवं भी वह से जल्दी से रफू चाकर होक वापिस बिल्डिंग की तरफ जाने लगा....

|अब अग्गे|

(इधर तुषार, सवाना और सफल ने करीब सरे गुंडे मार दिए थे अब वह 3 गुंडे थे जो अपनी जिंदगी की भेक मांगते हुए गिरगिद्र रहे थे.)

गुंडा.1- (घुटनो पर बेथ हाथ जोड़ता हुआ) भाई मुझे छोर दे, में आपका वफादार कुत्ता बन क रहूँगा..

गुंडा.2- (हाथ जोड़ तुषार क पास जाता हुआ) हाँ भाई हमें छोड़ दो, हम येह सरे बुरे काम छोड़ देंगे..

तान्या- (गुस्से से गुंडे.2 की तरफ देखती हुई) भाई इससे मत छोड़ना इसने मेरे होंटो पे जबरदस्ती किश किया था, येह बचना नहीं चाहिए..

(तान्या इतना बोल, वो पल याद करने लगी जब येह गुंडा ने इसका मुँह पकड़ अपने काळा गंदे होंठ उसके नरम गुलाबी होठो पर रखे थे, उसकी आखो ने भी ासु बहाने शुरू कर दिया.. तुषार की तोह जैसे गुस्से ने नसे पहात गयी, लकिन उसने गुस्से पे कण्ट्रोल रखते हुए बोलै..)

तुषार- (उसके पास जेक कलर पकड़ता हुआ) ओह्ह तोह तू था वो, लकिन तू अभी तक बचा हुआ था, मुझे लगा इन् kede-makodo में तू भी कहा कुचला गया होगा, लकिन चलो ाचा हुआ तू बच गया, (सफल क तरफ देख) सफल इससे जरा साइड रख, (गुस्से से) इसको इतनी सीधी मौत में नहीं दूंगा, (उसकी गाल पे इक थप्पड़ मर क) बहनचोड़ड़ तूने मेरी बहिन को चूहा (इक और थप्पड़ मार क) मदारचोड़ अगली वीडियो येह दुनिआ तेरी देखेगी...

(गुंडे.2 की तोह पहात के चार हो गई, सफल उसके पास गया और उससे कास क इक खम्बे से बांध दिया..)

गुंडा.1- भाई हामी…

(वो अग्गे कुछ बोलता तुषार ने दोनों के सर पे गोली चला दी, सवाना ने जेक चेयर से बंधी तान्या की रसिया खोल दी, अब तक तुषार को लगी हुई गोली क कारन उसका काफी खून बह चूका था, लेफ्ट कन्धा काफी ज़ख़्मी हालत में था, वाइट शर्ट लेफ्ट साइड से बहते खून क कारन लाल हो गयी थी, तान्या ने चेयर से उठ के तुषार की तरफ देखा जो अभी दिवार क साथ पीठ टिकाये खड़ा था..)

तुषार- (सवाना की तरफ देख अपना मास्क निकलता हुआ) सवाना कुछ कर न यार येह दर्द अब सेहन नहीं होता..

(इतनी देर में शिवं भी सीढियाँ छड्ड ऊपर ा गया..)

सवाना- शिवं ाचा हुआ तू जल्दी ा गया, चल बॉस को जल्दी हॉस्पिटल लेके चलते है, पहले hi बहुत खून बह चूका है कही बेहोश न हो जाये..

(सवाना ने अभी इतना hi बोलै था की तुषार दिवार के साथ इक तरफ ढ़ाआरररममम से गिर गया, तान्या जो कब से तुषार की तरफ देख रही थी इक डैम से तुषार के गिरने से गभरा गयी, वो जल्दी से तुषार के पास गयी और उसका सर अपनी गॉड में लेके रोने..)

तान्या- भाई, भाई क्या हुआ तुजे, (एजेंट्स से, अपनी बेगहि हुई आखो से बोली)

इससे क्या हुआ है, अचानक गिर क्यों गया?..

शिवं- वो बेहोश हो गए है, अप्प चिंता मत कीजिये, हम अभी इन्हे हॉस्पिटल लेके चलते है..

तान्या- तोह मेरा मुँह क्या देख रहे हो, जल्दी लेके चलो कही इससे कुछ हो न जाये…

(शिवं तुषार को अपनी मजबूत बहो में पकड़ के उठा लेता है..)

शिवं- तुम दोनों उस गुंडों को पकड़ के (अपनी जेब से इक पर्ची निकलता हुआ) इस एड्रेस पे ले जाओ..

सवाना- (पर्ची लेती हुई) येह किसका एड्रेस है? और वह लेजके क्या करेंगे?

शिवं- येह वही जगह का एड्रेस है जैसे जगह को ढूंढ़ने क लिए बॉस ने बोलै था..

सवाना- क्या!! तुमने ढूंढ भी ली..

शिवं- हाँ जल्दी इससे ले जाओ, कही यहाँ पुलिस न ा जाये, और हमारा सिग्नेचर छोड़ते जाना..

सवाना- हम्म ठीक है...

(शिवं तुषार को अपनी गॉड में उठाये बहार कार की तरफ चल पड़ता है, उसके पीछे पीछे तान्या भी धीरे धीरे सुबकती हुई चली ा रही थी, शिवं कार क पास आके रुक गया तोह तान्या ने पिछली सीट का दरवाजा खोल दिया, जैसे hi दरवाजा खुला अंदर बैठी अन्निका ने जब शिवं के हाथो अपने प्यारे भैया की खून से lath-path बेहोश पड़ी बॉडी देखि तोह उसकी इक डैम से चीख निकल गयी..)

अन्निका- आअहाहहहह्ही भाईयियाआ, भैया, क्या हुआ.. क्या हुआ भैया को..

(शिवं कुछ नहीं बोलै और तुषार को पिछली सीट पर लेता दरवाजा बंद कर दिया और खुद ड्राइविंग सीट पर ा गया, तान्या भी उसके साथ अग्गे वाली सीट पर आकर बेथ गयी..)

अन्निका- (तुषार का सर अपनी गोदी में रख रोटी हुई) अप्प कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो, कितना खून बह रहा है भैया का..

शिवं- (कार स्टार्ट करता हुआ) जी वो आपके भैया को गोली लगी है..

अन्निका- (गभ्राश्य हुई) क्या!! भैया को गोली लगी है?,, अप्प लोगो ने वडा किया था की अप्प भैया को कुछ नहीं होने देंगे, अप्प झूठे लोग हो, अपने भैया को बछिया नहीं..

तान्या- (पीछे अन्निका की तरफ देखती हुई) अनुऊ, शांत हो जा, कुछ नहीं होगा भाई को..

अन्निका- दीदी अप्प तोह चुप hi रहिये, भैया आपकी वजह से वह उन् गुंडों से जेक लड़े और गोली भी खाई लकिन आपको तोह कोई फरक नहीं पड़ता न, भैया जिए या मरे, हैना..

(तान्या कुछ नहीं बोली, लकिन उसकी आखो से ासु झरने की तरह बह निकले थे, शिवं बार बार तान्या की तरफ देख मुस्कुराई जा रहा था लकिन उसकी आखे भी गेली थी, फिर कोई कुछ नहीं बोलै लकिन तीनो रू रहे थे, सबकी अपनी अपनी इक अलग वझे थी रोने की, अन्निका तोह बस तुषार के फेस को देखती हुई रू रही थी, उसके ासु गिर के तुषार के फेस पर पढ़ते तोह वो उससे अपने हाथ से बार बार साफ करती, और बड़े प्यार से उसके चेहरे को, उसके बल्लो को अपने हाथ से सहलाती, उसके माथे पे छोटे छोटे किश करती, जैसे तुषार उसका गुड्डा है और वो उसकी गुड़िया, येह कहना गलत भी नहीं होगा क्युकी येह बात सच hi थी. तान्या सामने लगे मिरर से अन्निका की येह हरकते देख हल्का सा मुस्करा दी.)

(कुछ देर में शिवं ने कार हॉस्पिटल के सामने कड़ी करदी और जल्दी से उतर कर तुषार को लेके हॉस्पिटल के अंदर चला गया..)

(करीब 2घंटे बाद.. तुषार के खंधे से गोली निकल ली गई थी, उससे होश ा चूका था और डॉक्टर ने सबको उससे मिलने की इजाजत भी दे दी थी, अभी सब लोग तुषार के रूम में बैठे थे..)

अन्निका- भैया में बहुत दर गयी थी, जब येह भैया आपको गोदी में उठा के मेरे पास लाये थे..

तुषार- डरने की क्या बात है भला, वो तोह गोली लगी थी और ज्यादा खून बहने क कारन में बेहोश हो गया था, बस..

अन्निका- भैया बस? येह कोई छोटी बात है, अगर आपका ज्यादा कुन बह जाता तोह आपको खून कोण देता? उस दिन तोह शिव भैया ने अपना खून दे दिया था, (तान्या की तरफ देख) अगर अज्ज भी आपको खून की जरुरत पड़ती तोह कोण देता आपको खून यहाँ तोह कोई अपना भी नहीं है जो आपको खून देदे..

(दूर बैठी तान्या अन्निका की बात सुन ख़ामोशी से ासु बहाने लगी, उसकी बात सुन उसके दिल में इक तेज दर्द उठा था..)

तुषार- (उसकी बात का मतलब समझता हुआ) गुड़िया!! ऐसा नहीं बोलते, तू अज्ज कल बरी चुलबुली हो गयी है, जो तू ख़ामोशी से किसी को तीर मार रही है न मुझे सब पता चल रहा है..

(इतना बोल तुषार अन्निका को थोड़ा पास खींच उसकी कमर पे गुदगुदी करने लगा..)

अन्निका- हीहीहीइ आह्हः ः भैया आ मत करो न हाहाहा ईई भैया प्लीज आह्हः..

(कुछ देर उससे ऐसे hi सताने के बाद तुषार उससे छोड़ देता है, शिवं भी मुस्कुरा रहा था, तान्या भी है रही थी..)

अन्निका- उफ्फ्फ भैया क्या करते हो!! अप्प न बचे रहोगे हमेशा, (मासूमियत से) ाचा भैया मुझे कास क गले लगाओ न, बहुत मन कर रहा है आपके गले लगने का..

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) इसके लिए तुजे परमिशन लेने की कब से जरुरत पड़ने लगी, तू तोह झपट्टा मरने में माहिर थी न, ः..

अन्निका- (मुँह बना क) भैया!

(और तुषार के बीएड पर hi उसके साथ कास के चिपक गयी, शिवं भी थोड़ी देर पहली hi उठ कर बहार चला गया था..)

(तान्या दोनों के प्यार को देख मुस्कुरा रही थी और रू भी रही थी, क्युकी उसने अपने इतने प्यारे भाई को खुद से दूर रखा उससे नफरत की, वो खुद तुषार के गले लग्न चाहती थी उससे बाते करनी चाहती थी लकिन अभी वो मजबूर थी, मजबूर थी अपनी कही हुई कड़वी बत्तो से जो वो वापिस नहीं ले सकती थी, मजबूर थी तुषार से की हुई नफरत से जो उससे बार बार याद दिला रही थी की तू वो हक्क खो चुकी है, अब अस्सू बनाने का कोई फयदा नहीं, लकिन उससे क्या पता की उसके भाई ने तोह उससे कबि नफरत की hi नहीं, कबि उसकी बात का बुरा मन hi नहीं, वो तोह खुद तड़फ रहा था उससे ढेर साडी बाते करने को, उससे अपने भाई होने का प्यार जताने को, अपने गले लगाने को..)

(तुषार अन्निका के गले लगे सामने बैठी तान्या को देख रहा था जो अभी कुछ सोचती हुई आखो में ासु लिए जमीं को घर रही थी, तुषार को शायद उसकी हालत का अंदाजा हो चूका था लकिन वो कुछ बोल नहीं रहा था बस चुप चाप मुस्कुराता हुआ सोच रहा था की…

~मात रहो दूर हमसे इतना की अपने फैसला पर अफ़सोस हो जाये,

कल को शायद अस्सी मुलाकात हो हमारी की अप्प हमसे लिपटकर रोये और हम खामोश हो जाये.~

(तुषार येह सोच हुआ अन्निका को और भी कास क अपने गले लगा लेता है..)

अन्निका- भैया इतना कास क गले मत लगाओ आपको दर्द होगा..

तुषार- मुझे. मुझे क्या दर्द होगा भला, दर्द तोह तुजे होगा मोती..

अन्निका- (बुरा सा मुँह बना क) में मोती नहीं हु भैया, में इक डैम फिट हु, और मुझे क्यों दर्द होगा में तोह अपने प्यारे भैया के गले लगी हुई हु, वो जितना भी कास के गले लगाए मुझे दर्द नहीं होगा.

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) मेरी प्यारी गुड़िया, तुहि है मेरी साडी दुनिया..

अन्निका- भैया अप्प भी मेरे लिए सारा यूनिवर्स हो..

तुषार- (हस्ता हुआ) क्या कहा सारा यूनिवर्स, ूउम्मंहा, तू भी न पता नहीं क्या क्या बोलती है..

(अन्निका कुछ बोलती तुषार का फ़ोन बज उठा, येह कॉल आरुषि ने किया था जो घर पे परेशां बैठी थी, तुषार की भी पहात रही थी नंबर देख, की वो इतनी देर से कहा है इसका आरुषि को क्या जवाब देगा..)

तुषार- hello दीदी..

आरुषि- (गुस्से से) hello क बचे कहा है तू सुभे से?, अभी तक घर क्यों नहीं आया..

तुषार- वो. वो.. दीदी क्या हुआ न की…

आरुषि- हाँ क्या हुआ बोल न वो वो क्या कर रहा है, और तू हर्षिका का घर खुला छोड़ आया था, कोई अकाल वकाल है तुजे, कोई chor-vor घुस जाता तोह, सरे कमरे खुले पड़े थे, वो तोह शुक्र है हम दोनों जल्दी घर ा गयी, कहा गया था तू इतनी जल्दी में की तुजे घर लॉक करना भी याद नहीं रहा…

तुषार- वो दीदी बात दरअसल येह हुई की न…

(तुषार उससे अज्ज हुई साडी बाते बता देता है लकिन उससे गोली लगी थी येह नहीं बताता, तुषार की बात पूरी होने क बाद आरुषि फुल ों गुस्से में ा जाती है..)

आरुषि- (गुस्से से) तुशाअरररररर, इतना कुछ हो गया और तूने मुझे इक फ़ोन करना तक जरुरी नहीं समाज, क्या यही था तेरा प्यार अपनी बहिन क लिए..

(अन्निका जो पास लेती साडी बाते सुन रही थी, उससे अपने भाई को दन्त पड़ती सुनी न गयी तोह वो झट से बोल पड़ी..)

अन्निका- वो दीदी क्युकी भैया को गोली लगी थी, और भैया बेहोश हो गए थे, हम अभी भी हॉस्पिटल में hi है..

आरुषि- (और गुस्सा में) क्या तुषाररर तुजे गोली लगी है, और तूने येह बात भी मुझसे चुप क राखी और भी कुछ बात है तोह बोल दे न, (रोटी हुई) ठीक है अब तू? अन्नू भी वही है..

तुषार- हाँ दीदी में बिलकुल ठीक हु..

अन्निका- हाँ, और दीदी में भी यही हु, अप्प फ़िक्र मत करो भैया ठीक है, और में भैया का पूरा ख्याल रख रही हु..

आरुषि- ख्याल की बची, मुझे सब पता है अभी अपने भैया से लिपट क बैठी होगी..

अन्निका- (हैरानी से) दीदी! वाओ आपको कैसे पता..

आरुषि- मुझे सब पता है तेरा, ाचा वो सब छोड़ घर से फ़ोन आया था की तुम दोनों कहा हो, अब जल्दी से घर की और निकालो, mamma-papa परेशां हो जायेंगे, और अज्ज जो कुछ भी हुआ घर में बताना मत. Ok?..

अन्निका- (साद होक) ठीक है दीदी, लकिन फिर भैया के साथ कोण रहेगा?..

आरुषि- अरे पागल लड़की में ा रही हु न वह..

अन्निका- ओह्ह ठीक है दीदी, में और तान्या दीदी घर चले जाते है..

आरुषि- हम्म गुड गर्ल, चल bye..

अन्निका- bye दीदी..

《2133 -वर्ड्स》
 
हाँ मौत तोह भयानक होगी hi उस गुंडे की काम hi ऐसा जो किया है..

नफरत जितनी भी हो प्यार क आगे ज्यादा देर नहीं टिक सकती..

सही कहा भाई हीरो खामोस हो जाये तोह स्टोरी ख़तम हो जाएगी, पर वो तोह अग्गे मालूम पड़ेगा क्या पता कहानी में कोनसा मोड़ ा जाये..

थैंक्स फॉर योर वैल्युएबल कमेंट...
 
अपडेट-14

आरुषि- मुझे सब पता है तेरा, ाचा वो सब छोड़ घर से फ़ोन आया था की तुम दोनों कहा हो, अब जल्दी से घर की और निकालो, mamma-papa परेशां हो जायेंगे, और अज्ज जो कुछ भी हुआ घर में बताना मत. Ok?..

अन्निका- (साद होक) ठीक है दीदी, लकिन फिर भैया के साथ कोण रहेगा?..

आरुषि- अरे पागल लड़की में ा रही हु न वह..

अन्निका- ओह्ह ठीक है दीदी, में और तान्या दीदी घर चले जाते है..

आरुषि- हम्म गुड गर्ल, चल bye..

अन्निका- bye दीदी..


|अब अग्गे|

अन्निका- (तान्या की तरफ देख) चलो तान्या दीदी घर चलते है..

(तान्या का तोह जैसे मन hi उदास हो गया येह बात सुन क, वो तो कब से तुषार के चेहरे को देख मुस्कुरा रही थी लकिन अब उससे दूर जाने की बात से उसके चेहरे पर उदासी से भाव ा गए थे..)

तान्या- (साद होक) लकिन क्यों?..

अन्निका- वो आरुषि दीदी कह रही थी की घर पे मुम्मा, पापा टेंशन में है की हम दोनों कहा है, तोह हमें जाने चाहिए..

तान्या- तोह तू चली जा न, और घर पे कह देना की में अपनी किसी फ्रेंड क घर रुकी हु..

(तान्या के इस जवाब ने अन्निका के दिमाग में कई सरे सवाल छोड़ दिए, लकिन नादाँ dil-dimag क्या hi समाज लेता, लकिन तुषार सब समाज चूका था और मुस्कुरा रहा था..)

अन्निका- पर क्यों दीदी?, अप्प क्या करोगी यहाँ पे, मुझे तोह लगा था अप्प बोलोगी- है है जल्दी चल में पाक गयी हु इस गधे का चेहरा देख क..

तान्या- क्या बोल रही है तू, में ऐसा क्यों बोलूंगी, हाँ मेरा मतलब में बोलती अगर येह गधा ठीक होता तोह और अगर हमारे जाने क बा...

अन्निका- (बिच में) दीदी पहली बात तोह में हेरैं हु की आपको भैया की फ़िक्र हो रही है, हो सकता है भैया ने आपको बछिया तोह आपके अंदर की इंसानियत जाग गयी, अगर यही बात है तोह ाचा है, और दूसरी बात आरुषि दीदी यहाँ ा रही है वो भैया का धाइयाँ रख लेगी, अभी हमारा घर जाना जरुरी है नहीं तोह Mamma-Papa फ़िक्र करेंगे चलो जल्दी...

तुषार- (उससे गले लगता हुआ) अरे वह गुड़िया तू तोह बड़ी समझदार हो गयी है..

अन्निका- हाँ भैया जब बड़े hi नासमज हो जाये तोह छोटो को समझदार होना hi पड़ता है.. (उठती हुई) चले दीदी..

(तान्या अपना मुरझाया हुआ चेहरा लेके रूम से बहार चली जाती है, अन्निका भी उसके piche-piche चल देती है, उसके जाने क बाद तुषार अपने मन में सोचता है और है देता है की-

~ अफसोस तो है तुम्हारे बदल जाने का,

क्युकी तुम्हारी कुछ बातों ने मुझे जीना सीखा दिया.. ~


(थोड़ी hi देर में आरुषि और हर्षिका हॉस्पिटल पौंछती है और जल्दी से तुषार के रूम पता कर उसके रूम क पास पांच जाती है, आरुषि ने दूर खोला तो सामने अपने भाई को बीएड पर इक साइड फेस कर कुछ सोचते पाया, आरुषि आखो में ासु लिए धीरे धीरे तुषार के पास जाती है और उसके फेस पर प्यार से हाथ फेरती है..)

तुषार- ओह दीदी अप्प..

आरुषि- हाँ भाई, ठीक है अब तू?..

तुषार- (उसकी आखो से अस्सू साफ़ करके) बिलकुल ठीक हु में, अप्प रोया मत करो दीदी, अछि नहीं लगती अप्प ऐसे..

आरुषि- हम्म..

हर्षिका- ही तुषार..

तुषार- (हर्षिका की तरफ देखता हुआ) ओह्ह अप्प भी आयी हो..

हर्षिका- (मुस्कुराती हुई) जी, अपने दोस्त का हाल चाल देखने आयी हु, लकिन अप्प मुझे बतायेगे की आखिर बात क्या हुई है और आपको गोली लगी कैसे?...

तुषार- जी मेरी बहिन तान्या को कुछ गुंडे उठा क ले गए थे, उसी को बचते- बचते इक गोली मेरे लग गयी..

हर्षिका- क्या!! आपकी बहिन क साथ कितना गलत हो रहा है न 2बार उसके साथ छेड़खानी की गयी है..

तुषार- (उदास हो क) हाँ सही कहा अज्ज अगर में वक़्त पे न पोंछता तोह.. आह्ह्ह्हह (गुस्से से) नही वो सेल ने तान्या के होठ चूसे थे, में छोडूंगा नहीं उस हरामज़ादे को, ख़तम कर दूंगा उससे..

आरुषि- (उसके गले लगती हुई) शांत, शांत होजा तुषार..

तुषार- (अपने अप्पा संभालता हुआ) चलो दीदी चलते है अब्ब यहाँ से..

आरुषि- नहीं तुषार अभी नहीं, अभी तुम्हे रेस्ट की जरुरत है..

तुषार- (आरुषि की आखो में देखता हुआ) दीदी आपको तोह पता है न मेरा राज़..

आरुषि- हाँ लकिन अभी तू पुरे तरीके से ठीक नहीं हुआ है..

तुषार- दीदी में ठीक हो चूका हु, प्लीज...

आरुषि- नहीं तुषार, अभी में तुजे कही जाने नहीं दे सकती..

तुषार- लकिन दीदी..

आरुषि- (डंडी हुई) कुछ लकिन वाकिन नहीं, अब चुप चाप लेट जा आराम और आराम कर, में कल तुजे यहाँ से डिस्चार्ज करवा दूंगी, फिर तुजे जो करना है कर..

तुषार- ok दीदी..

(तुषार फिर शांत होक बेथ जाता है, वो बिच बिच में नजरे चुरा क हर्षिका को देख रहा था, हर्षिका की हर हरकत वो बड़े प्यार से अपने दिल में उतर रहा था, उसके दिल में घंटिया jorro-shoro से बज रही थी..)

(उधर जब सवाना और सफल उस गुंडे को लेके शिवं की बताई हुई जगह पहुंचे, तोह सामने का नजारा देख खुश हो जाते है,, सामने इक बहुत बड़ी और ख़ूबसूरत हवेली थी, जो चारो और से इक बहुत बड़े ग्राउंड में घिरी हुई थी, हवेली के सामने इक स्विमिंग पूल भी था..

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सवाना- (एक्ससिटेड होक) ववव! क्या हवेली है यार..

सफल- सही कहा बहुत सुन्दर है..

(सफल कार को हवेली के अंदर ले जाता है और इक गार्ड बहार hi उन्हें हवेली की कीस दे देता है, शिवं के पहले hi गार्ड को उनके चेहरे दिखा दिए थे, इस लिए उसने कोई sawal-jawab नहीं किया, हवेली पांच सबसे पहले सफल कार की दिग्गी में से बेहोश पड़ी गुंडे की बॉडी को उठा के अंदर ले जाता है, और अंदर लेजके इक लकड़ी की चेयर से बांध देता है..)

(हवेली सही में काफी बड़ी थी, इक बड़ी सा हॉल, करीब 25 रूम्स की येह हवेली हर जरुरत के सामान से भरी हुई थी, जिसमे कई सरे ख़ुफ़िया कमरे भी थे, अब हवेली हो उसमे सीक्रेट रूम्स न हो तोह वो हवेली hi क्या हुई, काफी देर तक हवेली को ऊपर से निचे और पूरी जगह को अछि तरह से देखने क बाद...)

सफल- हवेली तोह बड़ी मस्त है यार..

सवाना- हाँ! सही में अस्सी हवेली तोह पहली बार देख रही हु में, चल इक बार बॉस का हाल चल पूछ लेते है, अब तक तोह उन्हें होश ा hi गया होगा..

सफल- हम और उन्हें येह भी बताना की उनकी बताई हुई जगह भी ढूंढ ली है..

(सवाना तुषार को कॉल लगाती है, कुछ देर में तुषार फ़ोन पिक करता है..)

तुषार- hello! हाँ सवाना बोलो..

सवाना- बॉस कैसे हो अप्प..

तुषार- में ठीक हु यार मुझे क्या होगा, तुम लोग बताओ कहा हो और उस गुंडे क्या किया..

सवाना- बॉस अपने जो हवेली ढूंढे को बोलै था हम दोनों उससे में खड़े है..

तुषार- (हैरानी से) ओह्ह तुम लोग ने ढूंढ भी ली हवेली, बड़े फ़ास्ट हो यार, हर काम यू निपटा देते हो..

सवाना- अरे नहीं बॉस येह हवेली हमने नहीं धुंडी, शिवं ने धुंडी है..

तुषार- क्या लकिन वो तोह मेरे साथ है हॉस्पिटल में..

सवाना- उसने शयद पहली से hi ढूंढ ली होगी, और उस गुंडे को हम यहाँ हवेली ले ए है, अप्प जो करना चाहो कर लेना..

तुषार- येह तोह बहुत बढ़िया किया तुम लोग ने, ाचा क्या शिवं ने इन सबके बॉस को मार दिया था क्या, वो गया था न उसके पीछे..

सवाना- हाँ बॉस इन् गुंडों का बॉस मर चूका है, लकिन शिवं ने कैसे मारा येह सब मुझे नहीं पता..

तुषार- हम्म ठीक है, में कल हवेली ायूँगा, उस गुंडे की खबर लेने, और अब से तुम लोग हवेली hi रहा करोगे..

सवाना- ठीक है बॉस, लकिन मुझे अब भी इक बात समाज नहीं आयी की आपको यानि कैसर को इक अलग जगह लेने की क्या जरुरत पढ़ गयी?..

तुषार- (मुस्कुरा क) तुम्हारा येह सवाल तुम वक़्त बता देगा, चलो bye..

सवाना- bye बॉस..

(सवाना से बात करने क बाद तुषार फ़ोन में कुछ वीडियोस देखने लगता है, इकटक उसकी नजर इक वीडियो पर गयी जिसके 5घंटो में 100मिलियन व्यूज थे और लगातार बढ़ते hi जा रहे थे, तुषार ने उस वीडियो पर क्लिक किया तोह उसकी आखे बहार को ा गयी, उसके देखा की सकद क bicho-bich शिवं खड़ा है तलवार लेके, जैसे जैसे वो वीडियो देख रहा था हर पल वो और हेरैं होता जा रहा था, पूरी वीडियो देखने क बाद तोह उसका रंग hi ुधा हुआ था..)

तुषार- (मन में) येह शिवं है क्या चीज़?.., मेरे तोह पसीने निकल गए येह वीडियो देख, इसने कार को तोह पियाज़ की तह काट दिया, हर वक़्त मास्क पहने घूमता है, इसका कोई तोह राज़ है जो मुझे जल्द hi पता लगाना पड़ेगा..

आरुषि- (गभारती हुई) क्या हुआ तुषार?.. (उसके माथे पे हाथ रख) तू ठीक तो है, दर्द बढ़ रहा है क्या?, में डॉक्टर को बुलाऊँ..

तुषार- अरे नहीं नहीं दीदी, वो तोह बस ऐसे hi..

हर्षिका- ऐसे कैसे देखो आपको कितना पसीना ा रहा, कुछ तोह प्रॉब्लम हुई होगी न में बुलाती हु डॉक्टर को...

तुषार- उसकी कोई जरुरत नहीं है हर्षिका जी में ठीक हु, विश्वास कीजिये..

हर्षिका- (मुस्कुराती हुई) वो तोह में करती hi हु अप्प पर..

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) ाचा जी, इतनी जल्दी नहीं करना चाहिए किसी पे विश्वास..

हर्षिका- नहीं! मैंने तोह कर लिया, अब अप्प पर है की अप्प मेरा विश्वास तोड़ते है जा इससे बनाये रखते है..

तुषार- (उसकी आखो में देखता हुआ) तोह फिर ठीक है, क्युकी हम न तोह कभी किसी का दिल तोड़ते है और न hi विश्वास..

(आरुषि जो कभी तुषार को तोह कभी हर्षिका को देख उनकी बाते सुन रही थी, और वो दोनों तोह जैसे अपने में hi खोये हुए थे, आरुषि को बड़ी खुजली हो रही थी की वो उनके बत्तो में काँटा बने तोह वो बोल hi पड़ी..)

आरुषि- (खास्ती हुई) ाहहु ाहू, ओह्ह तोह तेरा दिल इतनी जल्दी जुड़ भी गया हाँ, जो तू तोड़ेगा नहीं, हम्म?

तुषार- (हडबडा हुआ) अरे नहीं दीदी वो तोह में उससे अपने विश्वास की परिभाषा समजा रहा था..

आरुषि- (मुस्कुराती हुई हर्षिका को देख) विश्वास की परिभाषा या प्यार की परिभाषा?..

तुषार- वो वो, दीदी क्या बोल रही हो अप्प, में समजा नहीं..

आरुषि- लकिन में सब समाज रही हु जो तुम लोग तब से लगे हुए हो, अब मुझे सच सच बता दो की आखिर तुम दोनों में चल क्या रहा है..

तुषार- कुछ नहीं चल रहा है यार दीदी, अप्प ऐसे hi बात लम्बी कर रही हो..

आरुषि- ठीक है भाई, अगर तुम लोग मुझे नहीं बताना चाहते तोह तुम्हारी मर्जी..

हर्षिका- (गुस्से से) ेहः आरुषि!.. क्या बाके जा रही है तू कब से, चुप रह तू सामजी..

आरुषि- अरे भाबीजी को तोह देखो, कैसे गरम हो गयी है, उनके पति को जरा सा कुछ कह दिया तोह..

(हर्षिका आरुषि के मुँह से अपने लिए भाबी वर्ड सुन शर्म से pani-pani हो गयी, उसने इक बार तुषार को आँख उठा क देखा जो उसकी तरफ देख मुस्कुरा रहा, वो जल्दी से उठी रूम से बहार ढूढ़ गयी..)

आरुषि- (हस्ती हुई) अरे रुको तोह भाबीजी, कहा जा रही हो..

तुषार- दीदी क्या अप्प भी कुछ भी बोलती हो, चली गयी न मेरी हरु..

आरुषि- कहा में कुछ बह... (अचानक से) क्या कहा तूने मेरी हरु?..

तुषार- (पछताता हुआ) वो,.. वो दीदी.. मेरा मतलब था..

आरुषि- हाँ हाँ बोल क्या मतलब था तेरा, तूने उसका निक नाम भी रख लिया, वह छोटे, बड़ा तेज है तू तोह, (उठती हुई) अभी उससे बता क अत्ति हुई की तेरे पति ने तेरा निक नाम हरु रखा है.. ः.

तुषार- (उसकी बाजु पकड़ बिठाता हुआ) रुक्जाओ दीदी क्या कर रही हो, वो तोह मैंने ऐसे hi रख दिया प्यार से..

आरुषि- (उसकी आखो में देखि हुई) ाचा बहुत प्यार करता है उससे?..

तुषार- (हर्षिका की यादो में खोता हुआ) बहुत!.. ा आ मेरा मतलब अस ा फ्रेंड..

आरुषि- बूत ी थिंक यू लव हेर अस ा लवर..

तुषार- ाचा दीदी छोडो न इन् बत्तो को, में तोह आपसे प्यार करता हु, बस..

आरुषि- वो तोह में भी तेरे से बहुत प्यार करती हु..

तुषार- हाँ लकिन में आपसे वैसे hi प्यार करता हु जैसे..

आरुषि- (स्माइल के साथ उसकी आखो में देखती हुई) जैसे?...

तुषार- अरे कुछ नहीं, छोड़ो दीदी वो सब..

आरुषि- (उसका हाथ पकड़ती हुई) बता न प्लीज, कैसा प्यार करता है तू मेरे से..

तुषार- नहीं दीदी वो में नहीं बता सकता, अप्प गुस्सा करोगी..

आरुषि- (अपना चेहरा उसके करीब करती हुई) बता मेरा बाबू, कैसे प्यार करता है तू अपनी दीदी से..

तुषार- (उसके गिल्ले गुलाबी होठो में खोता हुआ) शामे वैसा hi जैसा हरु से करता हु..

आरुषि- (इक डैम उसके होठो के करीब अपने होठ करती हुई) यू मैं अस ा लवर?...

तुषार- (अपने होठ उसके होंठ से जरा सा टच करवाता हुआ) हाँ दीदी, ी लव यू अस ा लवर..

(आरुषि उसकी बात सुन इतना खुश होती है की एकदम से उसके होठो पे इक किश कर देती है, करीब 5सेक् तक किश किया और जब आरुषि को होश आया की उसने अभी क्या किया है तोह शर्माती हुई रूम से बहार भाग गयी, तुषार तोह जैसे सदमे में था की उसने येह क्या बोल दिया और उसकी दीदी ने येह क्या कर दिया..)

《2168 -वर्ड्स》
 
नाह भाई आपको रेस्पेक्ट तोह दिल से देता हु, आखिर क्यों अप्प स्टोरी रीड करो और निकलो अपने काम को लकिन नहीं अप्प हर अछि बुरी बात को समजते हो और राइटर क साथ कॉर्पोरेट करते हो येह बात मुझे आपकी बहुत पसंद है.. पूरी बात को रीड कर उसपे अपनी राइ देना वह भाई.. और मुझे कहा बड़ा राइटर बना रहे हो भाई... शुक्रिया भाई..
 
अपडेट-15

तुषार- (अपने होठ उसके होंठ से जरा सा टच करवाता हुआ) हाँ दीदी, ी लव यू अस ा लवर..

(आरुषि उसकी बात सुन इतना खुश होती है की एकदम से उसके होठो पे इक किश कर देती है, करीब 5सेक् तक किश किया और जब आरुषि को होश आया की उसने अभी क्या किया है तोह शर्माती हुई रूम से बहार भाग गयी, तुषार तोह जैसे सदमे में था की उसने येह क्या बोल दिया और उसकी दीदी ने येह क्या कर दिया..)

|अब अग्गे|

(अब चलते है जगाला की हवेली की तरफ, दोनों डॉन सोफे पे बैठे हुए थे, और इंटरनेट पर शया हुआ शिवं का एक्शन सीन सामने लगी लेद पर न्यूज़ में देख रहे थे.. रिपोर्टर- लगता है कोई योद्धा धरती पर उतर आया है, क्या येह कोई देवता है या कोई दानव?.. क्या खासियत है इसकी तलवार में की इक पूरी कार को दो हिस्सों में काट क बिखर दिया.. लोग इससे सोर्ड मन का नाम भी दे रहे है, बताया जा रहा है की जो लोग कार में मरे गए वो सेहर के डॉन जगाला के आदमी थे, क्या येह लड़का सेहर क लिए खतरा बन सकता है? जाँच पड़ताल जारी है लकिन अभी तक इसका कोई और सुराख़ नहीं मिला, दूसरी बड़ी खबर है कैसर! जी हाँ इसका नाम सुनते hi इक बार को दिल कम्प जाता है, सेहर के दूसरी तरफ इक बिल्डिंग में कैसर की कुछ गुंडों के साथ मार धार हुई है, कुछ गुंडे कहना गलत होगा क्युकी वह करीब 55-60 आदमियों की लाशें मिली है, क्या येह काम अकेला कैसर का है, इस बार कोई वीडियो नहीं, कोई दरिंदगी नहीं, रिपोर्ट क अनुसार कैसर ने गुंडों को मारा और दिवार पर अपना सिग्नेचर छोड़ फर्रर हो गया, बताया जा रहा है की कैसर की गुंडों से फाइट और सोर्ड मन का कार सीन करीब इक hi टाइम पर hi घटा है, तोह काया येह सोर्ड मन कैसर का hi साथी है?. अभी येह क्लियर नहीं हुआ है, लोगो का

कहना है की कैसर उन्हें सेहर में सफो की तरह फैले गुंडों से आजादी दिलाने आया है.. लकिन क्या जगाला खामोश रहेगा?.. क्या वो…)

जग्गू- (खड़ा होक गुस्से से लेद पर इक क बाद इक 3गोलियां चलता हुआ) नहीं रहेगा जगाला खामोश... नही..

लाला- (धीमे स्वर में) जग्गू!.. शांत, शांत होजा..

जग्गू- कैसे शांत हो जाऊ भाई, येह साला मादरजात मरता क्यों नहीं है, अपने 60 आदमियों को टपका गया..

राजू- सर मैंने इस लड़के के बारे में सब पता किया है, इसका नाम तुषार है इंडिया के टॉप 10 बिज़नेस में से इक विजय महरा का बीटा है येह..

लाला- (चौंकता हुआ) क्या!! कही.. कही इसकी माँ का नाम विषैली तोह नहीं?...

राजू- हाँ सर, लकिन आपको कई…

लाला- (बिच में, उठता हुआ) बस फिर छोड़ दो इससे जो हो गया सो गया..

जग्गू- लकिन जो अग्गे होगा उसका क्या भाई, और आपको अचानक क्या हुआ, हम इससे कैसे छोड़ दे, में आपकी बात से सहमत नहीं हु भाई..

लाला- पर जग्गू मेरी बात... (फिर कुछ सोच क) ाचा ठीक है फिर, हर इंसान की इक कमजोरी होती है पता लगाओ इसकी कमजोरी क्या है..

राजू- सर मैंने पहले hi इसके बारे में सब पता कर लिया है, इसकी कमजोरी इसका परिवार है इसकी बहाने है..

जग्गू- बस फिर उठा लो इसकी बहनो को, येह खुद गिड़गिड़ाता हुआ यहाँ आएगा, तब में इससे बत्तर से बत्तर मौत दूंगा..

राजू- जी सर..

लाला- रुको!.. इसकी बहाने इसकी कमजोरी hi नहीं इसकी ताकत भी है, उन्हें कुछ हुआ तोह न जाने येह और क्या करेगा.. दुश्मन को कमजोर समझने वाले सबसे बड़े बेवकूफ होते है, और में वो बेवकूफी नहीं करूँगा..

जग्गू- तोह भाई क्या करना है फिर..

(फिर लाला उन्हें इक प्लान समजने लगता है, जिसे सुन जग्गू भी है देता है..)

जग्गू- क्या बात है भाई, अब येह परिंदा जल्द hi निचे आएगा. हाहाहाहा..

लाला- परिंदा जितना भी ऊँचा उड़द ले कभी तोह निचे आएगा hi, और जब येह निचे आएगा तब हम इसके पारर काट देंगे..

जग्गू- सही बोलै भाई..

लाला- (मुस्कुराता हुआ, मन में) मर. विजय!! मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है की तू जिन्दा है.. तू जिंदा हैई,,, अब देख तेरी और तेरे परिवार की किसी हालत करूँगा में..

(लाला सोच hi रहा था की उससे किसी का फ़ोन ा गया..)

लाला- (फ़ोन पे) हाँ बोल भाई मला..

मला- (गुस्से से) तुम लोग को मैंने इक काम दिया था, वो भी तुम से नहीं हो पाया, इक बचे को नहीं मार प् रहे, पहले वो पुलिस से भी बच गया और अब तुम लोग क गुंडों को भी उसने निपटा दिया, और तुम खुद को सेहर का डॉन कहते हो, शर्म ांनी चाहिए तुम लोग को…

लाला- हो गया तेरा.. देख ोये! मला होगा तू सेहर का, हमसे ोुचि आवाज में बात करने का नतीजा जनता है तू?,, कल hi तेरे सरे काळा धंधे लोगो क सामने रख तुजे बर्बाद कर दूंगा..

मला- (डरता हुआ) माफी लाला! लकिन तुम hi बताओ की में क्या करू.. उसने मेरे बेटे को अदमरा कर छोड़ दिया है, और अभी तक में उससे सजा नहीं दे पाया..

लाला- मैंने कहा न तुमसे की वो नहीं बचेगा, लाला अपना कोई काम अधूरा नहीं छोड़ता, अब येह लड़ाई तेरी नहीं मेरी है, चल अब फ़ोन रख और अपना काम कर और मुझे भी करने दे..

राजू- (जग्गू से) सर इक बात करनी थी आपसे..

जग्गू- हाँ बोल..

राजू- सर वो नया माल ा चूका है अगर आपका मूड है टास्ते करने का तोह बता दो नहीं तोह हम अग्गे पार्टी को बेज देते है..

जग्गू- (खुश होता हुआ) पहले मुझे चखने तोह दे, फिर जिधर भेजना है बेज देना, पहले मुझे दिखा तोह konsi-konsi आइटम आयी है, इक काम कर 5मस्त वाली गोरी गोरी शोरिया अंदर बेज..

राजू- जी सर..

(राजू किसी को कॉल करता है और 2मिंट बाद 10 आदमी 5लड़कियों को लेके अंदर आते है जिनके हाथ रस्सियों से बंधे हुए थे और मुँह और आखो पर पट्टी बंधी हुई थी..)

जग्गू- (लड़कियों के करीब जाता हुआ) खोल दो इन्हे..

(इक लड़का सबको रस्सियों से आज़ाद कर देता है.. लड़कियों का रू रू क बुरा हाल हो रखा था, बाल बिखरे थे, मुँह जगह जगह से चिल्ला हुआ था..)

लड़की.1- (रोटी हुई) हमें यहाँ क्यों लाये हो, कोण हो तुम लोग, प्लीज जाने दो हमें..

जग्गू- (इक लड़की की तरफ देख लार टपकता हुआ) वाह मुझे तू चाहिए, चल.. अजजा मेरे साथ..

लड़की.3- (दर्द भरी आखो से) क्यों! क्या करोगे तुम मेरे साथ..

जग्गू- (हस्ता हुआ) तुम्हारे साथ!, रपे करूँगा तेरा में.. हहहह.. अब देख रपे तोह तेरा होक रहेगा, क्युकी मजे तोह तू मुझे देके रहेगी अब फैसला तेरे हाथो में है, जा तोह तू चुप चाप मेरा साथ दे नहीं तोह जबरदस्ती तोह में कर hi लूंगा..

लड़की.3- (रोटी हुई) बागवान मैंने तुज से कबि कुछ नहीं माँगा तोह क्या उसका येह सिला दिया तूने?.. (जग्गू के पैरों में गिरती हुई) प्लीज मुझे छोड़ दो में किसी को मुँह दिखने लायक नहीं बचूंगी, बागवान के वास्ते मुज पर रेहम करो..

जग्गू- (अपने आदमियों से) पकड़ो ोये इससे, येह साली ऐसे नहीं मानेगी.. इससे लेजके कमरे में मेरे बीएड पर बंद दो, में अट्टा हु फिर इसकी खातिरदारी करने…

(3,4 लड़के उस लड़की को घसीटते हुए जग्गू के कमरे में लेजाने लगते है, लड़की रोटी रही, गिड़गिड़ाती रही लकिन यहाँ उसकी चीखे सुनने वाले न उसके maa-baap थे न भाई था न hi कोई और अपना..)

|बैक तो तुषार|

(रात हो चुकी थी, शिवं पहले hi सबको bye बोल निकल चूका था, हर्षिका अपने घर जाना चाहती थी, नजाने क्यों वो तुषार से शर्माती शर्माती सी फिर रही थी, लकिन आरुषि ने उससे जाने नहीं दिया, इस वक़्त हर्षिका तुषार के hi रूम में इक दूसरे सिंगल बीएड पर करवट लेके लेती हुई थी, तुषार से नजरे मिला पाना उसके बस की बात नहीं थी, लकिन आरुषि अब थोड़ी खुल चुकी थी, अभी वो तुषार के पास बैठी उससे अपने हाथ से खाना खिला रही थी..)

आरुषि- (उससे खिलाती हुई, धीरे से) तोह तुषार तुम्हारी बीवी तोह बहुत शर्माती है यार, देख न तब से बस शर्माए जा रही है जैसे अभी इसकी सुहागरात है.. हहह

तुषार- (घम्बिर होता हुआ) दीदी वो सब छोडो और मुझे येह बताओ की अज्ज अपने येह क्या किया था..

आरुषि- (कंफ्यूज होक) क्या किया था?..

तुषार- अरे वही,..

आरुषि- येह वही क्या होता है..?

तुषार- यार दीदी कैसे बताओ,..

आरुषि- (है क) मुँह से..

तुषार- कमल करती हो दीदी, मेरे कहने का मतलब था की अपने अज्ज मुझे ki..ki स.. किश किया था..

आरुषि- (मुस्कुरा क) ओह्ह! ाचा वो, हाँ किया था, तेरे होठो पे किया था, भूल गया क्या, (उसके करीब अत्ति हुई) याद दिलायु क्या..?

तुषार- (उसका मुँह पीछे कर) दीदी! आपको पता है न येह सब ठीक नहीं है हमारे बिच..?

आरुषि- (सीरियस होक) देख तुषार अभी मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी है..

तुषार- लकिन मुझे करनी है दीदी..

आरुषि- मैंने कोनसा कहा है मात कर, लकिन घर चल के, अभी नहीं, अभी तू सू जा, कल बात करेंगे इस बारे में..

तुषार- ठीक है दीदी..

(नेक्स्ट डे तुषार को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवा तीनो हर्षिका के घर की और चल देते है, लकिन अभी तक तुषार और हर्षिका के बिच कोई बात नहीं हुई थी, हर्षिका के घर तुषार अपने रूम में लेता हुआ था की उसका फ़ोन रिंग हुआ..)

तुषार- (फ़ोन उठा क) hello! सफल..

सफल- बॉस अप्प कोनसे हॉस्पिटल में हो? हमने सोचा आपसे मिल लेते है और आपका हाल चल पूछ लेंगे..

तुषार- नहीं में घर ा चूका हु, अपनी फ्रेंड का घर हु अभी..

सफल- क्या! बॉस अप्प इतनी जल्दी ठीक हो गए.. कैसे..?

तुषार- वो सब में तुम्हे मिल क बता दूंगा, मुझे हवेली का एड्रेस सेंड कर, अभी तुम लोग हवेली hi हो क्या, और मेरा शिकार भी वही है न..

सफल- ठीक है बॉस, हाँ हम तीनो यही है.. और आपका शिकार भी यही है..

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) बस फिर उससे बोल दो की शिकारी ा रहा है.. Bye!.

सफल- हाहाहा ठीक है बॉस.. Bye!..

(तुषार आरुषि को कोई काम बोल टेक्सी लेके हवेली की ऑर्डर निकल जाता है, हवेली पांच तुषार अंदर जाने लगता है तोह इक हत्ता कट्टा गार्ड उससे रोक लेते है..)

गार्ड- (उसकी चट्टी पर हाथ रख उससे रोकता हुआ) हांजी भाई साहब, किधर..?

तुषार- (हवेली की और इशारा कर) इधर और किधर..

गार्ड- क्यों भाई, सामने क्या तेरे जीजाजी की हवेली है जो तू चलता फिरता आएगा और अंदर घुस जायेगा..

शिवं- (बहार अट्टा हुआ) जीजाजी की नहीं इनकी hi हवेली है, यही है इसके मालिक..

गार्ड- (तुषार को सलूट मरता हुआ) सॉरी सर मुझे पता नहीं था की अप्प hi हवेली के मालिक हो..

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) अरे नहीं नहीं, कोई बात नहीं, वैसे मुझे ाचा लगा अप्प तो मालिक को hi बरी मुश्किल से अंदर घुसने दे रहे हो तोह किसी गैर को कैसे अंदर जाने डोज. ः..

गार्ड- (शर्मिंदा होता हुआ) माफी चाहूंगा मालिक, अग्गे से ऐसा नहीं होगा..

तुषार- अरे में मज़ाक कर रहा था, अप्प भी कहा सीरियस हो रहे हो..

गार्ड- जी..

(फिर शिवं तुषार को अंदर लेके जाता है और हवेली देख तोह तुषार क भी होश ुढे हुए थे..)

तुषार- (हवेली को ऊपर से निचे तक देखता हुआ) क्या हवेली ढूंढी है है भाई तूने, बिलकुल वैसे जैसे मैंने सोची थी. कमाल की है..

शिवं- शुक्रिया बॉस, अंदर तोह चलिए..

तुषार- हम्म..

(तुषार अंदर जेक भी हवेली को देखता है तोह काफी खुश हो जाता है..)

सवाना- और बॉस कैसे हो, हवेली कैसे लगी..

तुषार- में तोह मस्त हु और हवेली भी मस्त है.. और कहा है वो..?

सवाना- (इक रूम की तरफ इशारा कर) वो उस रूम में चेयर से बंधा है, कब कर रहे हो उससे मुक्त..?

तुषार- (मुस्कुरा क) जल्द hi..

सवाना- (मुस्कुराती हुई) मतलब में कैमरा तैयार राखु न..?

तुषार- (हस्ता हुआ) हाहाहा हाँ हाँ, क्यों नहीं.. आखिर गेम तोह रिकॉर्ड करनी hi पड़ेगी न..

सवाना- सही कहा बॉस…

《1957 -वर्ड्स》
 
अपडेट-16

सवाना- (इक रूम की तरफ इशारा कर) वो उस रूम में चेयर से बंधा है, कब कर रहे हो उससे मुक्त..?

तुषार- (मुस्कुरा क) जल्द hi..

सवाना- (मुस्कुराती हुई) मतलब में कैमरा तैयार राखु न..?

तुषार- (हस्ता हुआ) हाहाहा हाँ हाँ, क्यों नहीं.. आखिर गेम तोह रिकॉर्ड करनी hi पड़ेगी न..

सवाना- सही कहा बॉस…

|अब अग्गे|

तुषार- (शिवं की तरफ देख) शिवं मुझे कुछ बात करनी थी तुमसे..

शिवं- यही न की येह सोर्ड मन वाला क्या सीन है मेरा.? तोह सुनिए..

तुषार- (बिच में) हाँ भाई, और कभी तोह मुझे कुछ खुद से पुश लेने दिया करो, मेरे सवाल से पहले hi तुम्हारा जवाब तैयार होता है, खैर बताओ क्या था वो सब और आखिर कोण हो तुम..

सवाना- बताना क्या है बॉस, बस इतना जान लो की वर्ल्ड के बेस्ट टॉप5 सोर्ड फिघ्टर्स में से इक इसका नाम अट्टा है..

तुषार- (हैरानी से) व्हाट!!..

सफल- हाँ बॉस, येह बहुत पौंची हुई चीज़ है, ऐसे hi थोड़ी मास्क लगाए घूमता है, इक बार मास्क हटा दे तोह लाखो लोग इससे घेर क खड़े हो जाये.. पता है येह पहला मिशन है जिसमे येह बात करता है, वर्ण तोह येह बोलता hi नहीं था, चेहरे पे मास्क, मुँह पे ख़ामोशी, आखो में गुस्सा, चुटकियो में मिशन को यू ख़तम कर देने वाला बाँदा, येह बदले में अपने लिए बस इक चीज मांगता है..

तुषार- क्या..?

सफल- विश्वास! अप्प इससे दुनिया का कोई भी काम सौंप दो, आपके दिए हुए टाइम से पहले येह उससे पूरा कर देगा..

तुषार- ठीक है, वक़्त ऐनी पर इससे भी आज़मा लेंगे, और तुम्हारे गुरूजी ा गए क्या.?

सवाना- (सफल क कान में) येह बॉस गुरूजी को बहुत याद कर रहे है..

सफल- (धीरे से) जब आएंगे तब पता चलेगा इन्हे, लकिन बॉस क साथ साथ हमारी भी खैर नहीं..

सवाना- सही कहा.. हमारी भी अछि खासी बंद बजने वाली है..

शिवं- जब चाहे आज़मा लेना बॉस, और बॉस मेरे गुरूजी ा गए है आपको ट्रेनिंग देने, बताओ कब उन्हें लेके आयु यहाँ..?

तुषार- कल, कल सुभे उन्हें बुला लेना, कल से शुरू करते है.. अज्ज मुझे कुछ काम निपटा लेने दो, पहले मुझे इस हवेली को उस ढंग क लिए सेट करने दो जिस काम क लिए मैंने इससे ख़रीदा है, वैसे कितने की मिली तुम्हे येह हवेली..?

शिवं- 15करोड़..

तुषार- हम्म! लगा hi था.. तोह कहा है इसका असली मालिक, मेरे नाम कब होगी हवेली..

शिवं- में उससे फ़ोन कर बुला लेता हु..

(फिर करीब 1 घंटे बाद इक 30 साल का आदमी सूट बूट में इक सूटकेस क साथ हवेली में एंटर करता है..)

शिवं- बॉस यही है हवेली क मालिक, मर. राजेश..

तुषार- (हाथ मिलता हुआ) hello सर..

Mr.Rajesh- hello बीटा, तो अप्प खरीदना चाहते हो इस हवेली को..

तुषार- जी सर, आपकी हवेली बहुत खूबसूरत है, बहुत शानदार है जैसे मुझे चाहिए थी बिलकुल वैसे hi है..

Mr.Rajesh- शुक्रिया बीटा, लकिन अप्प करते क्या हो..

तुषार- जी में अभी स्टूडेंट हु..

Mr.Rajesh- क्या! लकिन आपको पता है न इसकी कीमत कितनी है..

तुषार- जी सर लकिन अप्प फ़िक्र मत कीजिये, पैसे आपको मेरे पापा से मिल जायेंगे..

Mr.Rajesh- (बैग से पेपर्स निकलता हुआ) ओह्ह तोह फिर ठीक है, कल शिवं जी ने 1लाख रुपए मेरे अकाउंट में ट्रांसफर किये और बोलै की उनके दोस्तों को हवेली ुरगेंटली चाहिए तोह मैंने गार्ड को बोल इन्हे हवेली की कीस दे दी..

तुषार- ओह्ह शुक्रिया शिवं, तुम्हे तुम्हारे पैसे मिल जायेंगे..

शिवं- कोई बात नहीं बॉस, जब चाहे आराम से देना..

Mr.Rajesh- तोह बीटा कॅश, चेक, कार्ड कैसे पेमेंट करोगे.?

तुषार- फ़िलहाल तोह मेरे पास इनमेसे कुछ भी नहीं है, अप्प अपना अकाउंट नंबर मुझे सेंड कर दीजिये, में पापा से बोल पैसे ट्रांसफर करवा देता हु..

(फिर Mr.Rajesh उससे अपना अकाउंट नंबर सेंड करता है तोह तुषार उससे अग्गे अपने पापा को फॉरवर्ड कर देता है और कॉल लगता है, 2 रिंग क बाद hi पापा कॉल उठा लेते है वो अभी ऑफिस में थे..)

तुषार- hello पापा..

पापा- हाँ बोलो बीटा..

तुषार- पापा आपसे इक काम था, मुझे 15करोड़ रुपए चाहिए..

पापा- हम्म, और वो क्यों चाहिए..

तुषार- पापा इक अकाउंट नंबर मैंने आपको सेंड किया है अप्प उसमे पैसे ट्रांसफर कार्डो प्लीज बिना कोई सवाल किये, आपको मुझे पर विश्वास है न..

पापा- पूरा विश्वास है बीटा, ठीक है में करता हु.. और मुझे अपना लोकेशन सेंड कर 3,4 कार्ड भी बेज देता हु, खूब मस्ती कर, एन्जॉय कर, जितना पैसा उधना है ुधा.. आखिर शुखार है तुजे मेरी बात समाज तोह आयी, नहीं तोह मुझे लगा इतना पैसा कमाने का क्या फायदा अगर मेरे बचे hi उससे खुल क न उढ़ाये..

तुषार- ठीक है पापा आपकी येह ीचा भी पूरी कर देता हु.. थैंक्यू.. लव यू. पापा..

(कुछ देर बाद पापा अकाउंट में पैसे बेज देते है, और Mr.Rajesh के मोबाइल पर भी मैसेज ा जाता है..)

Mr.Rajesh- (मैसेज पढता हुआ) ठीक है बीटा, पैसे तोह ा गए, (पेपर उसकी तरफ करता हुआ) अब इन् पेपर्स पर सिग्न कर इस शानदार हवेली की मालिक बन जायो…

(तुषार सभी पेपर्स पर सिग्नेचर कर देता है, कुछ देर baat-vaat करने क बाद Mr.Rajesh भी निकल जाता है, कुछ देर बाद इक लड़का हवेली अट्टा है और इक पैकेज गार्ड को सौंप देता है, इसमें क्रेडिट कार्ड्स थे जो पापा ने तुषार क लिए बजे थे…)

सवाना- कोंग्रटुलतिओन्स बॉस, क़ानूनी तौर पर येह हवेली अब आपकी हुई.. और अब अग्गे क्या करना है..

तुषार- (कातिल मुस्किन क साथ) तुम जेक कैमरा रेडी करो..

सवाना- (मुस्कुरा क) जी बॉस..

तुषार- सफल तुम गुंडे को बहार गार्डन में लेके जाओ.. और गार्ड को चुटी दे दो...

सफल- ok बॉस..

तुषार- शिवं तुम्हे कुछ सामान लेने जाना पड़ेगा मार्किट..

सफल- हाँ बॉस. बोलो क्या लाना है..

(फिर तुषार कुछ सामान लिख क इक लिस्ट उससे दे देता है और इक क्रेडिट कार्ड भी निकल क पकड़ा देता है, और खुद बहार गार्डन में चला जाता है, यहाँ सवाना कैमरा फिट कर रही थी और सफल गुंडे के पास खड़ा था जो फ़िलहाल कल से bhukha-pyasa होने क कारन कोई hosh-o-awaj में नहीं था..)

तुषार- पाने मारो इसके मुँह पे..

(शिवं इक गिलास पानी उसके मुँह पे मरता है..)

गुंडा- (हड़बड़ा क होश में अट्टा हुआ) ाहहु अह्ह्म्म हहह्म्म भाई!! भाई! कुछ खाने को देदो भाई.. में मर जायूँगा नहीं तो..

तुषार- और जिन्दा रह क तू कोनसे सोने क अंडे देगा.. सवाना हवेली में जो phal-fruits पड़े है लेक इससे दो, सेल को भूखे पेट मार कही हमें पाप न लग जाये..

(सवाना उससे कुछ फ्रूट्स लेक देती है, सफल उसकी रस्सिया खोल देता है और गुंडा पागलो की तरह खाने लगता है..)

|Harshika’s हाउस|

(तुषार को गए 2 घंटे हो चुके थे.. हर्षिका और आरुषि दोनों हाल में बैठी थी, इन्हे भी अभी थोड़ी देर पहले hi पता चला था सोर्ड मन और कैसर वाला कान्त..)

हर्षिका- यार आखिर येह दोनों है कोण..

आरुषि- (मज़ाक से) क्यों तेरेको क्या राशनकार्ड बनवाना है इनका..

हर्षिका- आरुषि!! यार में कोई सीरियस बात कर रही हु इधर..

आरुषि- अरे तोह मेरे से क्या पूछ रही है.. मेरे कोनसे मौसी के लड़के है येह दोनों..

हर्षिका- (मुँह बना क) छोड़ तेरे से बात करना बेकार है..

आरुषि- (उसके पास जेक बैठती हुई) अरे मेरी जान गुस्सा हो गयी, (कान पकड़ क) सारल्य.. (उसकी कमर पे गुदगुदी करती हुई..)

हर्षिका- (उछाल क हस्ती हुई) आहहहह ाहः आरुषी ाःहाहीही हिहि मात कररर ाहः ाःहाहा ारूऊ… (आरुषि उससे छोड़ देती है) छोड़ मुझे, पागल कही की..

आरुषि- हहह क्यों अब तोह नहीं नाराज न.. है तोह बता दे.. इक अस्सी जगह गुदगुदी करुँगी की फिर कभी तू मेरे से नाराज नहीं होगी..

हर्षिका- (न समझती हुई) मतलब.? क्या कहना चाहती है तू, कोनसी जगह गुदगुदी करेगी..?

आरुषि- (अपना हाथ उसकी स्कर्ट के ऊपर छूट पर रख बताती हुई) यहाँ पर..

हर्षिका- (उसकी पूरी बात का मतलब समाज) हट बेशरम.. गन्दी कही की.. मुझे नहीं करवानी gudgudi-vudgudi तेरे से..

आरुषि- (स्माइल क साथ) क्यों किसी और से करवाएगी..? (झूठे गुस्से से) सुन ले मेरी बात इसपर सिर्फ मेरे तुषार का हक़ है, समाजी..

हर्षिका- (उससे मुँह फाड़े देखती हुई) आरुषि!..

(हर्षिका बस इतना hi बोल पायी और अपना सर निचे कर लिया.. उससे बहुत शर्म ा रही थी.. वो उठ क जाने लगी तोह आरुषि ने उससे पकड़ क वापिस बिठा लिया..)

आरुषि- कहा जा रही हो मैडम.. अप्प तोह बहुत शर्माती हो.. देखो शादी क बाद ऐसा नहीं चलेगा.. भाबीजी…

हर्षिका- हम्म!!! दूर हट.. में क्यों बानगी तुम्हारी भाबी.. हाँ. ऐसा क्या खास है तुम्हारे भाई में, की में उससे शादी करू.. मुझे नहीं पसंद तेरा भाई.. हाँ वो इक ाचा लड़का है.. इक ाचा दोस्त है.. लकिन तुम्हे किसने कहा की में ुसस्स पसंद करती हु.. शकल देखि है उसकी.. में नहीं करती उससे pyar-wyar, तोह तू क्यों मुझे उसकी वाइफ बनाने पे तुली हुई है.. चल छोड़ मुझे जाने दे..

(हर्षिका ने येह बोल तोह दिया लकिन इक बार भी आरुषि की आखो में बहती नदिया नहीं देखि जो अब समंदर में भी तब्दील हो चुकी थी.. हर्षिका इतना बोल उठी और अपने रूम में चली गयी..)

आरुषि- (रोटी हुई मन में) क्या हर्षिका सच में तुषार को प्यार नहीं करती.. शायद में hi गलत थी जो समाज न पायी.. और क्या कहा तूने हर्षिका शकल देखि उसकी..? मेरे भाई जितनी प्यारा और हैंडसम लड़का तुजे कभी कही नहीं मिलेगा.. अगर में तेरी जगह होती न तोह पूरी दुनिया को इक साइड रख सिर्फ मेरे तुषार को चुनती.. गलती कर रही है तू.. उसकी आखो में मैंने तेरे लिए जो मोहब्बत, जो प्यार देखा है वो तुजे शायद hi कोई और दे…)

(इसी बात पे में कुछ कहना चाहूंगा की-

~ तुजे मिला है प्यार, मौका, और सच्चा जीवनसाथी लकिन तू कर रही है उससे इंकार! क्या येह तेरी कोई मज़बूरी है या तेरे असूल है जो किसी चीज़ से बंधे हुए है.?

क्युकी जो करनी चाहती है उससे प्यार, उसके हाथ तोह इक रिश्ते की जंजीरो से बंधे हुए है.. ~

|बैक तो तुषार|

(गुंडे ने पेट भर क खाना खा लिया था, अभी वो अपनी जिंदगी की लास्ट रेस्ट ले रहा था.. कुछ देर में शिवं भी ा गया इक मिनी ट्रक में तुषार का मंगवाया हुआ सामान लेके..)

सवाना- (ट्रक को देख क) येह सब क्या है बॉस..?

तुषार- येह मेरे, नहीं हम सब क लिए कुछ जरुरी सामान है.. इसकी हमें अग्गे जरुरत पड़ेगी..

《1691 -वर्ड्स》
 
अपडेट-17

(गुंडे ने पेट भर क खाना खा लिया था, अभी वो अपनी जिंदगी की लास्ट रेस्ट ले रहा था.. कुछ देर में शिवं भी ा गया इक मिनी ट्रक में तुषार का मंगवाया हुआ सामान लेके..)

सवाना- (ट्रक को देख क) येह सब क्या है बॉस..?

तुषार- येह मेरे, नहीं हम सब क लिए कुछ जरुरी सामान है.. इसकी हमें अग्गे जरुरत पड़ेगी..

|अब अग्गे|

सफल- पर बॉस इसमें है क्या..

तुषार- बाद में बताउगा, शिवं येह सरे बॉक्सेस अंदर रखवाडो..

(शिवं सारा सामान ट्रक क साथ ए हुए आदमियों को लेके हवेली में उतर देता है.. सामान रखवाने क बाद ट्रक वाला भी निकल जाता है..)

गुंडा- (तरस भरी नजरो से) भाई!! ए भाई.. छोड़ दे न मुझे.. जाने दे भाई.. में अग्गे से ऐसा कुछ बुरा काम नहीं करूँगा..

तुषार- (उससे इक थप्पड़ मरता हुआ) चल सेल!.. छोड़ दू तुजे.. मेरी बहिन क होंठ चुस्त है.. (इक और थप्पड़ मर क) तेरे येह काळा होंठ को तोह कोई सूअर भी न मुँह लगाए.. (अपना कैसर मास्क पहनता हुआ) सवाना कैमरा फिट करो.. इस सेल को जल्दी मुक्त करे.. हमें और भी काम है..

(सवाना कैमरा का एंजेल कैसर और गुंडे की तरफ कर कैमरा ों कर देती है..)

सफल- (खुश होता हुआ) अब आएगा मजा.. बॉस अस्सी दरिंदगी दिखाना क वीडियो देख सेहर क सरे गुंडे कांप जाये.. किसी को लड़की को छूने भी जाये तोह उन्हें येह वीडियो याद ा जाये..

कैसर- (गुंडे क पास जेक उसकी आखो में आखे मिलता हुआ) अज्ज हम खेलेंगे अग्ग में चुरियो का खेल.. शिवं!!

शिवं- यस बॉस..

कैसर- खेल का आयोजन किया जाये..

शिवं- जी महाराज..

(शिवं हवेली जाता है और लाये हुए सामान में से इक बड़ा सा बॉक्स और कुछ छोटे बॉक्सेस इक इक करके बहार ले अट्टा है.. और फिर सरे बॉक्सेस खोल सामान इक जगह रख देता है.. सफल और सवाना तोह बस हेरैं खड़े थे..)

सवाना- बॉस येह सब हो क्या रहा है..

गुंडा- हाँ भाई.. क्या हो रहा है मुझे भी दिखाओ..

सफल- ीह सेल तू चुप बेथ.. येह साडी म्हणत तेरे hi लिए की जा रही है…

(शिवं जो सारा सामान लाया था उससे फिट करने में लगा हुआ था, सामान कुछ ऐसा था की इक लोहे की चेयर जो करीब इक सोफे की जितनी moti-chodi थी.. पूरी चेयर कुछ छोटे कुछ मोठे चीड़ो से भरी हुई थी.. कुछ चाकू, छुरी, इक छोटी ऊँगली से लेकर करीब इक पुरे हाथ जितनी teekhi-teekhi पिंस.. इन् सब को शिवं चेयर में फिट कर रहा था.. येह एक एडवांस चेयर थी.. कुछ देर म्हणत करने क बाद शिवं साडी पिंस, सुई, chaku-churi सब चेयर में फिट कर देता है..)

(गुंडे अभी दूसरी चेयर से बाँदा हुआ था.. शिवं ने अभी क्या किया है उससे नहीं पता था क्युकी वो सारा सामान उठा उसके पीछे ले गया था..)

कैसर- सफल खोल दो इससे जाने दो.. जा भाई तू आजाद है…

(सफल उसके हाथ पाओ को रसियो से आजाद कर देता है.. गुंडा आजाद होक काफी खुश लग रहा था.. लकिन अभी तोह उससे अपने ऐनी वाली मौत का डरावना नजारा देखना था..)

गुंडा- (ख़ुशी से) भाई अज्ज के बाद सरे बुरे धंदे बंद.. चलो चलता हु भाई...

कैसर- अरे सर रुकियो तोह.. सवाना जेक इक गिलास ठंडा जूस लेके ायो.. सर बैठिये 2मिंट जूस पेक जाना.. शिवं तुम भी जायो...

(सवाना और शिवं चले गए हवेली क अंदर.. गुंडा भी वापिस उसी चेयर पर बैठने लगा तोह कैसर ने उससे रोक लिया..)

कैसर- अरे अरे सर वह नहीं.. (दूसरी चेयर की और इशारा कर) यहाँ बैठिये.. खास आपके लिए मंगवाई है..

गुंडा- (दूसरी चेयर पर बैठता हुआ) अरे इतनी बड़ी चेयर.. इसकी क्या जरूरत थी..

(थोड़ी देर में सवाना भी ा गयी जूस लेके.. और जूस का गिलास गुंडे को पकड़ा दिया..)

कैसर- pijiye-pijiye सर.. येह भी खास आपके लिए बनाया है.. (धीरे से) बेहोश जो करना था…

(गुंडे जूस का पूरा गिलास जातक जाता है और कुछ hi देर में बेहोश भी हो जाता है.. करीब 15मिंट बाद उससे होश आया तोह वो हिल तक नहीं प् रहा था.. येह काम था चेयर का.. जो अभी उसकी पूरी बॉडी को जकड़ी हुई थी.. हाथ, पेअर, कमर, गर्दन...)

गुंडा- (गभ्राता हुआ) yea.h.. येह सब क्या है भाई..? भाई मुझे छोड़ दो.. गलती हो गयी…

कैसर- (कास क इक थप्पड़ उसके मुँह पे मरता हुआ) सेल!..

बिना मौत तुजे छोड़ दू, अपने असलो को में ऐसे hi तोड़ दू..

सफल- अब देख गैंडे की गांड, कैसे निकलते है बॉस तेरी जान..

सवाना- बीटा अब तू मान ले हार, कैसे तुजे मरेंगे येह तेरी समाज क है पार..

कैसर- शिवं स्टार्ट कर जड़ली..

(शिवं अपने हाथ में पड़के इक रिमोट को ों कर देता है..)

|Harshika’s हाउस|

(हर्षिका अभी अपने रूम में बैठी कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी..)

हर्षिका- (मन में) कितना प्यारा है वो.. मेरा तोह पहली नजर में hi दिल ले गया.. पहले दिन जब आया कैसे मुझे देखे जा रहा था.. क्या आखे थी उसकी.. हैंडसम भी तोह कितना है.. खुद में चाहे जान न हो लकिन अपनी बहनो की जान क लिए अपनी जान पे खेल gaya.wahh..

लकिन क्या मैंने अभी सही किया आरुषि क साथ.? हाँ छोटा सा मजाक hi तोह किया है.. वो भी तोह मुझे कितना सताती है.. अब से मुझे परेशां नहीं करेगी.. और अगर वो नाराज हो गयी होगी तोह.? खैर उससे बाद में मन्ना लेंगे.. तोह कहा थी में..

है.. में उससे कैसे बताऊ की में उसे कितना प्यार करती हु..? आखिर में क्यों बताऊ उसे वो भी तोह करता है प्यार मुझसे, वो खुद बोलेगा. मेरे पास इतनी हिम्मत नहीं है… लकिन क्या वो सचमे मुझसे प्यार करता है..? पता नहीं.. लकिन जैसे वो मुझे प्यार से देखता है. मुझे तोह येह उसका प्यार hi लगता है.. कब करोगे अपने प्यार का इज़हार मेरे तुषार.. में तुम्हारी बहो में लिपटना चाहती हु.. तुम्हे चूमना चाहती हु.. तुम्हे अपनी आखो के सामने रखना चाहती हु… वो क्या बोल रही थी आरुषि की (अपनी छूट की तरफ देख) इस्पे सिर्फ तुषार का हक़ है. पागल.. बिलकुल शर्म नहीं है उससे (शर्माती हुई) हिहि.. ऐसे भी कोई बोलता है भला.. अब येह दिल hi उससे दे दिया तोह येह जिस्म क्यों किसी और को दूंगी.. इस्पे सिर्फ मेरे प्यारे तुषार का हक़ है…

(हर्षिका अपने ख्यालो में खोयी नजाने क्या क्या सपने देख रही थी... दूसरी तरफ स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी और तान्या और अन्निका इक साथ पार्किंग की तरफ जा रहे थे…)

अन्निका- दीदी मुझे भी कार चलना सिखाओ न..

तान्या- नहीं अन्नू तू अभी छोटी है…

अन्निका- (मुँह बना क) कहा छोटी हु दीदी.. अब में 18साल की हो गयी हु.. और आपसे बस 1 साल hi छोटी हु…

तान्या- (हस्स क) में उम्र की नहीं तेरे दिमाग क बात कर रही हु.. वो तोह छोटा सा hi है न…

अन्निका- (बुरा सा फेस करके) हुह्ह्ह!!.. दीदी जाओ अप्प.. में नहीं ायूँगी आपके साथ…

तान्या- तोह किसके साथ आएगी.. अपने राजकुमार क साथ.. हाँ.?

अन्निका- (सोचती हुई) लकिन भैया तोह यहाँ नहीं है न..

तान्या- (हैरानी से) क्या! तेरे भैया तेरे राजकुमार है..?

अन्निका- (खुश होक) हाँ.. और में उनकी राजकुमारी.. हिहि

तान्या- (अपने माथे पे हाथ रख) येह तेरी बाते मेरी समाज तोह न अत्ति भाई.. (कार की और इशारा कर) चल बेथ अब्ब..

(दोनों कार में बेथ जाती है लकिन तान्या के दिमाग में कुछ चल रहा था…)

तान्या- (कार सड़क की और दौड़ती हुई) अन्नू!..

अन्निका- हाँ दीदी..

तान्या- तुजे तेरे राजकुमार से मिलना है..?

अन्निका- (खुश होक) भैया से.. हाँ मिलना है न.. चलो न दीदी भैया से मिल क ात्ते है.. मेरा बहुत मन कर रहा है.. देखहो न मेरा दिल येह सुन क कितना खुश हो गया.. अप्प चाहो तोह उनसे न मिलना.. कार में hi रहना लकिन प्लीज मुझे उनसे मिलवा दो…

(तान्या अन्निका के बात से पहले तोह बहुत खुश थी लकिन जैसे उसने कहा की अप्प उनसे न मिलना तोह येह सुन उसका चेहरा मुरझा गया... कुछ देर बाद तान्या कार को हर्षिका क घर क सामने कड़ी कर देती है.. अन्निका जल्दी से कार से उतरती है और बाघ क घर की दुर्बल बजा चली जाती है.. तान्या तोह बस खामोश कार में देखती रह गयी.. लकिन वो बहार भी नहीं ा सकती थी.. किस हक़ से वो तुषार से मिलती… अन्निका दुर्बल बजती है तोह थोड़ी hi देर में आरुषि आके दूर खोलती है…)

अन्निका- (स्माइल क साथ) हाय डीडू.. कैसे हो..?

आरुषि- अन्नू तू..?

अन्निका- हाँ में.. मैंने सोचा आपको और भैया को सरप्राइज देदू.. भैया कहा है.. (ुचि आवाज लगाती हुई) भैया!.. भैया!...

आरुषि- तू स्कूल ड्रेस में.. किसके साथ आयी है.. और स्कूल से सीधा इधर hi ा गयी.. बहुत मार पड़ेगी घर से…

अन्निका- ुफ्फू डीडू क्या अप्प भी दांत रही हो.. और तान्या दीदी क साथ आयी हु.. मुझे भैया से मिलना था इस लिए…

आरुषि- (दरवाजे क तरफ देखती हुई) तान्या.. तान्या क साथ आयी है.. कहा है वो…

अन्निका- वो बहार कार में hi है.. उन्होंने मुझे कहा की भैया से मिलना है तोह मैंने हाँ क्यों नहीं और फिर वो मुझे यहाँ ले आयी… अप्प कब से बाते क्या कर रही हो.. भैया को बुलाओ न.. वो आ hi नहीं रहे है…

(आरुषि साडी बात समाज गयी की अन्निका को तुषार से मिलाना तोह बस इक बहाना था.. वो तोह खुद तुषार से मिलना चाहती थी.. उसके अंदर की आग अब शांत हो चुकी है.. लकिन क्या वो तुषार से बात कर पायेगी.. इक लाइन उसके दिमाग में आयी जिससे सोच वो मुस्कुरा दी.. क

~ अब सजा दे hi चुकी हो तो उसका हाल न पूछना,

अगर वो बेगुनाह निकला तो तुम्हे अफसोस बहुत होगा.. ~

अन्निका- (उसकी बाजु से पकड़ हिलती हुई) डीडू!.. डीडू क्या हुआ.. कहा खोयी हुई हो.. अप्प भैया को क्यों नहीं बुला रही.. प्लीज जल्दी बुलाओ न मुझे उनको सरप्राइज देना है…

आरुषि- (उसकी गाल सहलाती हुई) अरे मेरी डॉल.. तेरे भैया घर पर नहीं है.. वो सुभे से कही गया हुआ है.. पता नहीं कहा गया है.. बोलै की काम है दीदी शाम तक ा जायूँगा…

अन्निका- (उदास होक) ओह्ह भैया घर पर नहीं है…

आरुषि- (उससे साइड से गले लगा क) अरे उदास क्यों हो गयी.. तुषार आएगा तोह में उससे बोल दूंगी की तेरी गुड़िया आयी थी तेरे से मिलने.. इक बार जेक उससे मिल क आ…

अन्निका- (स्माइल क साथ) ठीक है डीडू.. लकिन अप्प याद से बोलना प्लीज उन्हें..

आरुषि- देखो तोह कितना मिस कर रही है.. अभी कल hi तोह मिली है उससे.. ठीक है में बोल दूंगी.. अब तू घर जा.. मुम्मा परेशां न हो कही घर पर…

अन्निका- (उसकी गाल पे किश कर) ok डीडू में चलती हु.. Bye…

आरुषि- (उससे भी किश कर) Bye मेरा बचा…

(अन्निका घर से बहार आके कार में बेथ जाती है…)

तान्या- क्या हुआ.. मिल लिया अपने राजकुमार से..?

अन्निका- (साद फेस करके) अरे कहा दीदी.. भैया घर पर hi नहीं है.. वो कही बहार गए है.. मेरा सरप्राइज देना वाला प्लान hi फ़ैल हो गया.. उल्टा मुझे hi सरप्राइज मिल गया…

तान्या- (हस्स क) ाचा.. येह तोह बहुत बुरा हुआ राजकुमारी जी.. कोई न अप्प अगली बार मिल लेना…

अन्निका- हाँ दीदी.. मैंने आरुषि डीडू को बोल दिया है की भैया ए तोह उन्हें मुझसे मिलवाने बेज देना...

तान्या- ओह्ह्ह मतलब राजकुमार खुद आएंगे अपनी राजकुमारी से मिलने..?

अन्निका- और नहीं तोह क्या.. अगर वो नहीं ए तोह हम क्रोधित हो जायेंगे.. और aas-pass क सभी इलाके जला क भस्म कर देंगे... हहै…

तान्या- हाहाहा.. चल अब चले घर…

अन्निका- हाँ चलो दीदी…

《1888 -वर्ड्स》
 
बहुत बहुत थैंक्स भाई क अपने मेरी स्टोरी रीड की. और अपना रिव्यु दिया. इसी लिए मैंने आपको खा क स्टोरी में जितने छेद है अप्प स्टोरी रीड करके मुझे बताये.. अप्प दिनों से स्टोरी रीड ंद लिखे क्र रहे थे तोह लग hi गया था की इक धमकद्र रिव्यु ऐनी वला है..

हाँ भाई ऐसे hi स्टोरी पॉट्स तोह भरे पड़े है इस साइट पे, लकिन मैंने इसमें अपना टकड़ा लगाने की कोशिश की है. अग्गे भी शयद थोड़ी भोत सिचुएशन शामे अत्ति रहेगी, इक बात में कहुगा की मैंने बहुत काम स्टोरी रीड की है. और स्टोरी को लिखा का सही तरीका, संजना का सही तरीका मेरेको सही में नहीं पता था, अपनी स्टोरी को लिखने क लिए मैंने कही साडी स्टोरी रीड करनी शुरू करदी.....

हाँ भाई येह इक पैसे वाली फॅमिली है, भाई आपको बताना चाहूंगा की जिन दिन स्टोरी पोस्ट करने वाला था उसी दिन कुछ अग्गे का सोच का मुझे इन्हे अमर फॅमिली बनाना पड़ा, अब वो क्यों किया अग्गे खुद आप जन जयोगे, और अभी भी जो कुछ कम हीरो न किये वो शयद अमर hi लोंदा क्र सकता था.....

तोह अब बात करते जोकर मास्क वाली. भाई इसमें जोकर को दिखा hi नहीं रहा हु. तुषार जो हीरो है वो इक रियल लाइफ में भी दरिंदा है. बात येह नहीं की सिर्फ मास्क पीछे, मास्क सिर्फ उसकी असली आइडेंटिटी छुपने को और नई बनाने को पहनता है. वो दरिंदा नहीं था दरिंदा बना अपने पास्ट में घाटी कुछ सीटुएशन्स क कारन.. वो अछि काम क्यों क्र रहा है बुरे क्यों नहीं.? फ़िलहाल इसका जवाब में नहीं दे सकता......

Mom,dad का रोले.. माँ के लिए अभी कुछ खास रोले नहीं ा रहा है. तुषार ज्यादा घर रुकता जितना रुकता है में कोशिश करता हु देने की...

पापा के रोले में सही से नहीं क्र प् रहा था. येह सही खा अपने.. इसका रोले mein.mein सुधर करूंगा.......

अब बात करते तुषार की.. सच खु तोह तुषर अभी भी वैसे hi है. लकिन फिजिकली.. हाँ वो थोड़ा बहुत फिट हो चूका है गयम यम करके. एजेंट्स का साथ इस लिए दिया क्युकी वो अकेला गुंडों से नहीं लड़ सकता. हीरो तोह 100,100 को इक साथ ुधा देता है लकिन अपना हीरो शयद कोई 2 भी न मर पाए. और बार बार हॉस्पिटल जाना क भी यही कारण है. एजेंट्स ठहरे इंडिया क बेस्ट में से इक उनको तोह इक सुई न चुभे सके. अभी एजेंट्स साथ है तोह सिर्फ हॉस्पिटल पोंछता है अकेला जाये तोह शयद ऊपर hi पहुंचे.. हाँ यह सही खा शुरुत में उसे वेल माइंडेड दिखने की कोशिश की थी लकिन फिर वैसे hi क्र दिया इसका भी रीज़न था. वो भी अभी नहीं बता सकता.. येह में गलती क्र रहा था की इस एक्शन का अग्गे क्या रिएक्शन होगा इस्पे जयदा दिन नहीं दिया. शुक्रिया. इससे सबसे ऊपर नोट किया हु......

बात करते दरिंदगी की.. आदमी को बंद क मरना उससे टार्चर करना, येह इक सजा है उस गुंडे क लिए जिनसे अब तक पाप किये, ऑर्डर उससे खोल क लड़ना उससे इक मौका देना होगा.. जैसे की मैंने पहले खा की हीरो में कोई अभी खूबी नहीं है. किसी भी तरही की तोह वो लड़ने जयेगा तोह मर hi खायेगा. और गुंडा उसे मर फिर फरार हो जयेगा. गुंडे ने जुल्म बहुत क्र लिए. मेरे खिल से टार्चर उसके लिए अछि सजा है की वो सजा भुक्त भुक्त अपने किये पर पशतये.. हीरो है तोह अभी छुआ hi लकिन भाई जिन दिन येह शेर बन गया तब शुरू एन्ड क करीब ा चुकी होगी.. अप्प समज रहे मेरा मतलब?.....

स्टोरी बोरिंग न लगे मैंने पूरी कोशिश की है फ़िलहाल हीरो का काम एजेंट्स कर रहे है. खास क्र शिवं... टार्चर सीन लिखे में मुझे ज्यादा मजा अट्टा है अस कपड़े तो कोई एक्शन सीन.. यही कारण है की कैसर इक दरिंदा है... इसकी दरिंदगी क भी कुछ राज़ है हो मैंने सोचे अग्गे पता चलगा आपको........

और बाकि जितनी भी गलतिया थी अपने बता दी मुझे... इन्हे अप्प अग्गे अत्ति स्टोरी में सुधरते देख लोगे.... बहुत शुक्रिया की अप्प ए और इतना बेह्तरीनं रिव्यु दिया... आपके रिव्यु का साइज मेरा अपडेट क जितना hi लग रहा है. हहै.. अग्गे भी ऐसे hi मुझे सही करते रहे.. आपके कारन और भी कई रीडर्स क डॉब्टस दूर हो गए होंगे... इक बार वापिस थैंक्स भाई....
 
इक डैम 100तक सही बात की है भाई अपने, किसी राइटर से ज्यादा इक एक्सपीरियंस रीडर को स्टोरी की पहचान होती है.. मैंने ज्यादा स्टोरी रीड भी नहीं की. तोह मेरी स्टोरी से काफी साडी कमिया निकालनी तोह लाज़मी थी.. लकिन भाई ने अपना भाई समज क्र वो सब मुझे गलतिया मुझे बता दी. इसके लिए इनका शुक्रिया..
 
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