TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 2 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

अपडेट-9

आरुषि- चलो येह nayi-nayi दोस्ती पे इक इक कप कॉफी हो जाये..

तुषार- हाँ सूरे..

हर्षिका- (मुस्कुरा क उठती हुई) ok में बना क लती हु..

आरुषि- चल में भी चलती हु..

(दोनों चली जाती है और तुषार किसी को कॉल लगा लेता है...)

|अब अग्गे|

(दोनों के जाने क बाद तुषार अपने एजेंट्स को कॉल लगता है. उधर तीनो एजेंट्स इक साथ थे फ़ोन स्पीकर पर था..)



तुषार- hello..

सफल- hello बॉस! कैसे हो अप्प अब..

तुषार- में बिलकुल ठीक हु. ाचा बताओ तुम लोग को कुछ बताने की जरुरत है?..

सवाना- नहीं बॉस हमें सब पता है. और वेट है तोह बस आपके इक आर्डर का..

तुषार- (मुस्कुरा के) हम्म..

सफल- तोह बताओ बॉस क्या हुकम है..

तुषार- अभी नहीं. अभी इक और मुसीबत मेरा इंतज़ार कर रही है..

सवाना- (हैरानी से) कैसी मुसीबत?..

तुषार- वीडियो वाले 3 मर्डर मैंने किया है वो मैंने स्कूल में सबके सामने काबुल किया था..

सवाना- वो तोह हमें पता है. और में भी वही बात करने वाली थी की अपने ऐसा क्यों किया. क्या येह कोई आपका बनाया हुआ प्लान है.. या कुछ और?..

(तुषार कुछ बोलता उससे पहले hi जो कब से चुप बैठा शिवं था बोल पड़ा..)

शिवं- हाँ येह इनका hi बनाया हुआ प्लान है..

सफल- (हैरानी से) क्या?.. लकिन तुम कैसे पता चला..

शिवं- अरे भाई एजेंट हु. येह तोह मुझे साफ़ पता चल रहा था की येह इनका कोई प्लान है और क्या प्लान है येह भी में जनता हु..

सवाना- ोोूहो तोह तुम hi हो एजेंट हाँ?.. हम तोह डेड बॉडी ले जाने वाले लगते है.. हैं न?... और क्या प्लान है जरा बताना..

सफल- अरे शांत! शांत. उसने ऐसा कब कहा की हम एजेंट्स नहीं है या लगते नहीं. वो बस इतना कह रहा है की उसके दिमाग में येह बात आयी आखिर एजेंट है वो भी. हमने इतना दिन नहीं दिया इस बात पे लकिन शयद वो इस बात को लेकर थोड़ा ज्यादा सीरियस हो गया होगा. और फिर उसके दिमाग की घंटी बजी और उससे सारा खेल समाज ा गया.. क्यों शिवं?...

शिवं- (मुस्कुरा के) थैंक्स मेरे दोस्त. हाँ सही कहा तुमने यही बात है इस बात पर में काफी देर से सोच रहा था इस लिए मुझे पता चल गया की माजरा क्या है..

सवाना- ाचा ठीक है तोह बताओ क्या प्लान है बॉस का..

शिवं- हाँ बताता हु. तोह बॉस क्या अप्प बताना चाहोगे या में hi सब क्लियर करू..

तुषार- नहीं भाई अब तूने इतना दिमाग लगाया है तोह येह हक़ तुजे मिलना hi चाहिए..

शिवं- (है के) ठीक है.. तोह सुनो.

सवाना- हाँ बताओ..

शिवं- देखो बात कुछ ज्यादा बड़ी नहीं है.. सिंपल सा प्लान है. पहले तोह येह बात की हम लोग येह मिशन छोड़ने वाले नहीं है येह मिशन बहुत लम्बा जायेगा. इस लिए तुषार जी को अग्गे चल के कोई खतरा न हो या इनका भेद न खुल जाये इस लिए उन्होंने पहले hi इक प्लान सोच लिया..

सफल- हम्म और क्या है वो प्लान?..

शिवं- वो प्लान है येह..

(शिवं उन्हें तुषार का सारा प्लान बता देता है और उन्हें क्या करने है येह तुषार उन्हें समजा देता है.. थोड़ा देर बाद तुषार फ़ोन रखता है और देखता है सामने सोफे पर आरुषि और हर्षिका बैठी हुई है जो उससे बड़े धयान से सुन और देख रही थी..)

तुषार- क्या हुआ अप्प लोग को?. ऐसे क्यों देख रही हो मुझे..

आरुषि- नहीं कुछ खास नहीं बस देख रही हु तू कही एजेंट तोह नहीं..

तुषार- (हैरानी से) क्या! में और एजेंट. और आपको ऐसा क्यों लगा भला..

आरुषि- तू इक 19साल का 12तह क्लास में पड़ने वाला आम सा लड़का है जो इंडिया के बेस्ट एजेंट्स को अपना बनाया हुआ प्लान समजा रहा है.. वाओ न…

तुषार- हम्म! तोह अस्सी बात है. अपने मेरी साडी बाते और प्लान सुना है..

हर्षिका- हाँ!. और मैंने भी..

तुषार- Ok. तोह कोई क़ुएस्तिओन्स? क्यों कर रहा हु, कैसे कर रहा हु, सेफ है नई है, कामयाब होगा नई होगा और समथिंग ेल्स?

आरुषि- नहीं. मैंने तुमसे पहली भी कहा था की तुजे जो करना है कर. में तुजे रोकूंगी नहीं बल्कि तेरा साथ दूंगी.. बस इतना कहूँगी के संभल के करना जो भी करना.. क्युकी अगर तुजे कुछ हुआ तोह पहले उससे मर दूंगी जिसने तुजे हाथ लगाया फिर खुद भी तेरे पास ा जाउंगी.. तेरे साथ…

(आरुषि का बस येह सोच के hi दिल कम्प गया और आखो में अस्सू ा गए.. तुषार उठ के उसके पास बेथ गया और उसका सर अपने कंडे पे रख लिया और ासु साफ़ कर दिए..)

तुषार- दीदी! क्यों करती हो ऐसा.. मुझे कुछ नहीं होगा.. (स्माइल के साथ उसकी तरफ देख के) और आपको तोह पता hi है न अभी मेरी उम्र hi क्या है.. अभी क्या क्या करना है मुझे सब बताया तोह था आपको मैंने. और वैसे क्या सोचा अपने क्या अप्प करोगी मेरी मदद मेरा वो काम करने में. हँ?.. देखो मुझे 2hi चाहिए बस. ः..

(और उठ के बाघ गया आरुषि भी उसके पीछे बग्ने लगी. पुरे हॉल में इनके धोरणे की dhagad-dhagad आवाज ा रही थी..)

आरुषि- रुक तू.. अभी देती hi 2तुजे. 2क्यों 6 लेले. हाँ.. दीदी से अस्सी बात करता है कोई..

तुषार- में नहीं रुकूंगा दीदी. अप्प मेरा कचुम्बर बना डौगी.. बघू…

आरुषि- वो तोह में बनाउंगी hi. बस इक बार हाथ अजजा मेरे फिर देख...

तुषार- (थोड़ा सा रुक) दीदी अप्प भी बस इक बार दिख दो फिर देखो में kya-kya बनाऊगा..( और फिर भागने लगा.)

(हर्षिका को इनकी बाते समाज तोह नहीं आ रही थी लकिन वो फुल एन्जॉय कर रही थी.. उससे अज्ज पता चल रहा था की उसका घर कितना सुना सुना रहता था.. वो सोच रही थी की येह मस्ती, येह nok-jok, hasna-hasana, किसी अपने से प्यार लेना प्यार देना कितने किस्मत वालो को मिलता है.. उसकी माँ की डिलीवरी के वक़्त डॉक्टर्स ने उन्हें 2रस्ते दिया पेहलिअ की वो खुद को बचा के. अपनी औलाद को जहा से वो आयी है वही उससे दुबारा बेज दे जा फिर खुद उसकी जगह जेक अपनी बची को ज़िंदगी दिखा सके. उसकी माँ ने उससे ज़िंदगी और अपने आपको मौत के हवाले कर दिया.. उसके पापा लास्ट टाइम कब हिस्से थे या कभी वो हस्ते भी हैं नहीं देखा. कैसे उसके पापा ने अपने दिल पे पत्थर रख के अपनी बीवी को हस्ते हस्ते तोह नहीं कहूंगा रट रट अपनी आखो के सामने अपनी ज़िंदगी को ज़िंदगी से जाते हुए देखा hoga..khushiyo बहरा दिन कब दुखो में बदल जाये कोई नहीं कह सकता…)

(हर्षिका येह सब sochte-sochte रू रही थी. अपनी और अपने फॅमिली की किस्मत हो लेकर बागवान को तरह तरह के क्वेश्चन पूछ रही थी.. कुछ देर बाद अपने आपको संभल के वो चुप हो जाती है..)

आरुषि- ाचा ठीक है बाबा में कुछ नहीं बोलूगी. मेरी बात तोह सुन ले इक बार..

तुषार- नहीं दीदी अप्प मरोगी..

आरुषि- अरे नहीं मरूंगी. ा इधर बेथ कुछ बात करनी है..

(दोनों आकर वापिस सोफे पे बेथ जाते है..)

तुषार- हाँ बोलो दीदी क्या बात है..

आरुषि- थोड़ी देर पहले जब तू फ़ोन पे बात कर रहा था तब पापा का कॉल आया था. वो कह रहे थे की तुषार को लेके घर ा जल्दी कुछ जरुरी बात है..

तुषार- हम्म ाचा तोह येह बात है..

आरुषि- हाँ. तुजे पता है पापा ने क्यों बुलाया होगा?..

तुषार- हाँ पता है. लकिन में अभी आपको नहीं बताऊंगा. चलो पहले घर चलते है..

हर्षिका- (उदास हो के) क्या इतनी जल्दी. मुझे लगा अप्प लोग थोड़े दिन रुकोगे पर अप्प तोह अज्ज hi जा रहे हो..

तुषार- हर्षिका ग थोड़े दिन नहीं पुरे इक महीने के लिए यहाँ ए है.. अभी बस जरुरी जाना पढ़ रहा है. हम कल सुभे hi आपके घर ा जायेंगे. और हमारे कपडे और सामान भी तोह घर पे hi है वो भी ले आएंगे.. ठीक है?..

हर्षिका- (खुश होक) सच्ची अप्प इक मंथ के लिए मेरे घर रुकने वाले हो..

तुषार- ग

हर्षिका- तोह फिर ठीक है..

(कुछ देर बाद आरुषि और तुषार हर्षिका के घर से निकल पड़ते है अपने घर के और जहा इक मुसीबत बैठी थी हाथ में डंडा लिए..)

(करीब आधे घंटे बाद तुषार और आरुषि अपने घर के मैं दूर के बहार काढ़े थे. तुषार बेल्ल बजता है तोह सामने अन्निका दूर खोलती है अपना साद सा फेस लिए..)

अन्निका- (साद फेस किये) भैया अप्प ा गए..

तुषार- हाँ गुड़िया..

(तीनो अंदर जाते है तोह सामने सोफे पे पापा और उनके साथ पुलिस बैठी हुई थी..)

पापा- (तुषार को देख) अरे बीटा ा गया तू..

तुषार- हाँ पापा बोलिये क्या काम था की अपने मुझे इतना अर्जेंट बुलाया..

इंस्पेक्टर- अर्जेंट तोह बुलाया था पर तुम कोनसे जल्दी ा गए हो.. खेर छोड़ो पहले येह बताओ की तुमने जगाला के तीन आदमियों को मारा है अपनी तरफ से कोई सफाई देना चाहोगे?..

तुषार- (चौंके का नाटक करता हुआ) क्या!!.. माँ.. mai..mainee?...

इंस्पेक्टर- (उसका कलर पकड़ता हुआ) हाँ तुमने..

पापा- देखो इंस्पेक्टर पहले मेरे बेटे का कलर छोड़ो..

अन्निका- (मुँह बना के) हाँ अंकल छोड़ दो भैया को..

(इंस्पेक्टर छोड़ देता है.)

पापा- में आपसे पहले भी कह चूका हु की आपके पास क्या साबुत है की मेरा बीटा हु उन् तीन आदमियों का कातिल है..

इंस्पेक्टर- मर विजय हमारे पास कोई साबुत तोह नहीं लकिन 10हज़ार से भी ज्यादा गवाह है.. इसने खुद अपने स्कूल में काबुल किया था की इसने hi उन् तीन आदमियों को मारा है. तोह अप्प hi बताओ की इक इंसान झूट बोल सकता है 10 बोल सकते है 10हज़ार तोह नहीं न.

पापा- (तुषार की तरफ देख) बीटा ये..

तुषार- (बिच में) में बताता हु पापा.. (इंस्पेक्टर की तरफ देख) देखो सर येह बात इतनी सीधी भी नहीं है जितनी अप्प सोच रहे हो..

इंस्पेक्टर- क्या मतलब है तुम्हारा..

तुषार- मेरा मतलब येह की में येह बात मंटा हु की मैंने येह बात बोली थी की मैंने hi उन् तीन आदमियों को मारा है लकिन..

इंस्पेक्टर- लकिन क्या..

तुषार- लकिन येह की अप्प hi सोचो की अगर मुझे उन्हें मार के वीडियो बनानी होती तोह में उस वीडियो में अपना फेस hi क्यों बलौर करवाता..

इंस्पेक्टर- देख बचे. तूने उस वीडियो में अपना फेस बलौर तोह करवा लिया था लकिन हमने उससे वापिस क्लियर करवाया तोह उसमे भी तेरी hi चेहरा निकला. अब बता..

तुषार- सर अप्प मेरी बात अब भी नहीं समजे..

इंस्पेक्टर- हाँ तोह समजा न फिर क्या कहना चाहता है तू..

तुषार- देखो सर मुझे भी पता है की बलौर फेस को वापिस किसी अचे एडिटर से साफ़ करवाया जा सकता है..

इंस्पेक्टर- हाँ तोह..

तुषार- तोह सर में वही तोह कह रहा हु की मुझे पता है बलौर फेस साफ़ हो सकता है तोह मैं क्यों फेस बलौर करवाता और वीडियो hi क्यों बनता पहली बात तोह..

इंस्पेक्टर- ाचा!. चलो मान लेते है तूने उन् तीनो को नहीं मारा. लकिन कल काबुल क्यों किया फिर उसकी क्या वझे थी येह बता..

तुषार- सर मैंने उधर सबको डरने के लिए बोलै था..

इंस्पेक्टर- और डरने की क्या वझे थी..

तुषार- सर उधर स्कूल का इक बिगड़ा हुआ लड़का मेरी बहिन को शेड रहा था बतमीज़ी कर रहा था. और उसने मुझे भी काफी चोट पहुंचे. इस लिए मैंने बस उससे डरने क लिए झूट बोलै था..

इंस्पेक्टर- ाचा तोह अब येह बता की में येह तेरी बात कैसे मान लू. तेरे पास है कोई साबुत..

शिवं- (अंदर अट्टा हुआ) साबुत है इंस्पेक्टर दीपक शर्मा..

(सब शिवं की तरफ देखने लगे तीनो एजेंट्स एक्के उनके पास खड़े हो गए..)

इंस्पेक्टर- आपकी तारीफ..

शिवं- हम इनके दोस्त है..

इंस्पेक्टर- हम्म तोह बताओ क्या साबुत है..

शिवं- अप्प कूद hi देख लो..

(फिर शिवं उन्हें अपने साथ लाये लैपटॉप में इक वीडियो प्ले कर दिखता है. वो वीडियो थी तुषार की देण्य की साथ हुई फाइट की. पूरी वीडियो देखने क बाद इंस्पेक्टर बोलै..)

इंस्पेक्टर- ठीक है चलो तुम सही हो लकिन क्या तुम लोग येह कहना चाहते हो की उन् तीन आदमियों को मरने वाला कोई तुम्हारा हमशकल है?..

शिवं- हाँ हो सकता है. क्यों नहीं हो सकता. येह कोई इम्पॉसिबल जैसी बात थोड़ी है या अप्प पहली बार सुन रहे हो की किसी इक hi शकल के 2 आदमी है..

सवाना- सही कहा अप्प बेवजा तुषार पर इलज़ाम लगा रहे है जब की आपके पास कोई साबुत भी नहीं.. वो इसका हमशक्ल hi है जिसने खून किया है..

सफल- अब अप्प जा सकते है इंस्पेक्टर. आपके पास कोई साबुत नहीं है की तुषार hi गुनेगार है. कातिल तोह इसका हमशकल है. अप्प जेक उससे पकड़े कही वो और न किसी को टपका दे..

इंस्पेक्टर- ठीक है तोह Mr.Tushar. अभी हम जा रहे है. लकिन आपको दुबारा परेशां करने जरूर आएंगे. अगर वो आपका हमशकल होगा तोह वो भी जल्दी hi पदक जायेगा..

(फिर वो इंस्पेक्टर और उसके साथी निकल पड़ते है अपने रस्ते और इधर शुरू हो जाता है तुषार के साथ क्वेश्चन आंसर का खेल…)

《2106 -वर्ड्स

 
थैंक्स भाई..

कोई न भाई स और स ने मेरी काफी मदद की है. कई जगह से मिस्टेक हो रही थी जो अब नहीं होगी.. मेरी लैंग्वेज हिंदी नहीं है. हिंदी न तोह में बोलता हु न टाइपिंग, चैटिंग वगेरा करता हु पहली बार इसमें कुछ लिख रहा हु.. और भी कुछ गलती हो तोह बताना जरूर..

कीप रीडिंग ंद सपोर्टिंग...
 
अपडेट-10



सफल- अब अप्प जा सकते है इंस्पेक्टर. आपके पास कोई साबुत नहीं है की तुषार hi गुनेगार है. कातिल तोह इसका हमशकल है. अप्प जेक उससे पकड़े कही वो और न किसी को टपका दे..

इंस्पेक्टर- ठीक है तोह Mr.Tushar. अभी हम जा रहे है. लकिन आपको दुबारा परेशां करने जरूर आएंगे. अगर वो आपका हमशकल होगा तोह वो भी जल्दी hi पदक जायेगा..

(फिर वो इंस्पेक्टर और उसके साथी निकल पड़ते है अपने रस्ते और इधर शुरू हो जाता है तुषार के साथ क्वेश्चन आंसर का खेल…)



|अब अग्गे|



(पुलिस के जाते hi पापा ने तुषार को खींच के इक थप्पड़ उसकी गाल पे मारा.. थप्पड़ पड़ते hi अन्निका जल्दी से तुषार के पास आयी और उसका गाल पकड़ सहलाने लगी और दूसरा हाथ भी उसकी दूसरे गाल पे रख दिया ताकि पापा कही वापिस न मार दे..)



अन्निका- पापा क्या कर रहे हो अप्प.. भैया ने क्या किया है.. उससे कुछ बोलने तोह दीजिये..

माँ- अप्प शांति से पहले उसकी बात तोह सुन लीजिये की आखिर बात क्या हुई है. अपने तोह पहली hi थप्पड़ मर दिया मेरे बेटे को..

पापा- (गुस्से से) सुन्ना क्या है सब समाज ा रहा है. इसने हमें येह बात क्यों नहीं बताई की कल येह सब हो गया.. कितनी बुरी तरीके से मार रहे थे इससे वो स्कूल के आवारा लड़के. उसने मेरी बेटी के साथ इतनी बदसलूकी की सबके सामने बेइज़्ज़त किया, मेरी बेटी को छुआ (फुल गुस्से में) अब देखो इसकी उससे क्या सजा मिलती है.. (तुषार के पास जाते हुए) तूने येह बात मुझसे छुपाई भी कैसे.. तेरी बहिन है वो. भले hi तू उसके लिए वह लड़ा लकिन तेरा फराज बनता था की हमें बताये एक्के... लकिन कोई नहीं अब में देख लूंगा उससे.. (तान्या की तरफ देख) तान्या बीटा तूने भी नहीं बताया हमें..



(तान्या कब से अपने कल वाले डरावने पल याद कर रू रही थी. पापा की आवाज सुन होश में अत्ति है. तान्या भाग के पापा के गले लग जाती है.)



तान्या- (रोटी हुई) सॉरी पापा. वो में दर गई थी तोह इस लिए नहीं बता पायी..

माँ- (उसको खींच के अपने गले से लगाती हुई) अरे बीटा हम है तेरे साथ तोह डरने की क्या जरुरत भला. हाँ!.. कोई नहीं तू रू मत हम उस कमीने लड़के को सजा दिलवा के रहेंगे...



(तान्या किसी तरह चुप हो जाती है..)



पापा- (तुषार को) में इतना तोह समाज गया हु की तूने कुछ न कुछ करने की सोची है.. नहीं तोह तू हमें सब बता देता क्यों?

तुषार- हाँ पापा..

माँ- नहीं अब तू कुछ नहीं करेगा. जो करेंगे तेरे पापा करेंगे..

पापा- सही कहा.. तोह बता की येह एजेंट्स? इनका काम तोह ख़तम हो गया था न. तोह येह वापिस कैसे और क्यों?..

तुषार- वो बात अस्सी है पापा की मैंने इन एजेंट्स को खरीद लिया है..



(पापा एजेंट्स की तरफ और एजेंट्स इक दूसरे की तरफ देखने लगे..)



पापा- क्या?.. तूने इन्हे उस लड़के को मरने के लिए ख़रीदा है क्या..

तुषार- प्रोटेक्शन के लिए पापा.. देखो पापा बात अस्सी है की मेरी दो बहनो को शेड गया है दिन दहाड़े. इस लिए मैंने इन्हे हम सब की प्रोटेक्शन के लिए रख लिया है. हम लोग स्कूल में सेफ नहीं है. बहार घूमने जाये वह सेफ नहीं है.. तोह इस लिए अब से येह हम सबके साथ रहेंगे..

माँ- हाँ फिर तोह येह तूने ाचा किया बीटा. इससे बेहतर और क्या हो सकता है भला. क्यों ग क्या कहते हो..

पापा- वो बात तोह ठीक है..

माँ- तुषार बीटा तूने आरुषि के साथ हुई बतमीज़ी का बदला लिया था तोह क्या तू..

तुषार- आपको क्या लगता है माँ?..

पापा- (गुस्से से) हमें क्या पता. मेरी बात धयान से सुन जो बोलना है साफ़ साफ़ बोल ज्यादा होशियार बने की जरुरत नहीं है समजा. और अभी तू इतना बड़ी नहीं हुआ की कोई भी बड़े से बड़ा फैसला खुद ले सके..



(पापा की दन्त सुन के तुषार थोड़ा सा सहम जाता है. लकिन फिर सब बताने लगता है..)



तुषार- पापा में बस यही कह रहा था की मुझे उस देण्य को सजा देनी है..

माँ- मुझे लग hi रहा था.. सुनले तू! अब अगर तूने दुबारा कुछ ऐसा वैसा किया न तोह अपना हल सोच लेना..

पापा- बिलकुल ठीक कहा विषैली. और ख़बरदार अगर ज्यादा होशियार बने की कोशिश की तोह. तू इस बारे में अब कोई बात नहीं करेगा. उससे में खुद देख लूंगा..

तुषार- लकिन अप्प लोग मेरी बात तोह सुन लो. में कोनसा कह रहा हु की में उससे सबक सीखने जायूँगा..

पापा- तोह फिर..

सफल- अंकल हम जायेंगे न..

सवाना- हाँ अंकल हम अब इसके लिए काम करने लगे है तोह येह क्यों तकलीफ लेंगे. हम उस देण्य को आराम से निपटा देंगे..

पापा- अगर ऐसा है तोह मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.. लकिन अगर तू गलती से भी इनके साथ गया न फिर देख तेरा क्या करूँगा में..

तुषार- ठीक है पापा में नहीं जायूँगा इनके साथ..

सफल- चलो अंकल हम लोग चलते है अब. उस देण्य के बारे में कुछ प्लान सोचते है..

पापा- ठीक है..

(तन्नो एजेंट्स निकल जाते है घर से..)



तुषार- माँ बहुत भूख लगी है. मैंने और दीदी ने सुभे से कुछ नहीं खाया जल्दी से कुछ बना के खिलाडो न..

माँ- ख़ैया तोह तेरी गुड़िया ने भी नहीं है सुभे से.. और तान्या ने कहा कुछ खाया है..


तान्या- (हडबडी हुई) अरे नहीं नहीं माँ मुझे भूक नहीं थी. इस्सलिये नहीं कहा मैंने. ाचा में जाती हु अपने रूम में..

(तान्या वह से अपने रूम में चली जाती है. और माँ किचन में पापा भी ऑफिस के लिए चले जाते है..)



(आरुषि dhire-dhire कुछ सोचती हुई मुस्कुरा रही थी..)



तुषार- क्या हुआ गुड़िया तूने कहना क्यों नहीं कहा..

अन्निका- वो भैया अप्प हॉस्पिटल में थे तोह मुझे भूक कैसे लग सकती है.. और दीदी अपने मुझे बताया क्यों नहीं की भैया ठीक हो गए है.

आरुषि- सॉरी अन्नू मुझे बताना चाहिए था सॉरी गलती हो गई. माफ़ करदे..

अन्निका- दीदी इस गलती की कोई माफी नहीं है.. में आपसे बात नहीं करुँगी. में आपसे गुस्सा हु.

आरुषि- अरे ऐसा न कर मेरी जान. मेरा दिल में बहुत दर्द होता है तेरी अस्सी बत्तो से..

अन्निका- नहीं!!.. में नहीं करुँगी आपसे बात. अप्प चाहे कुछ भी कह लो..

आरुषि- अरे तुषार तू मन न अपनी गुड़िया को की मुझसे बात करे..

तुषार- में क्यों मनौ इससे. अपने गलती की है अप्प hi मनाओ..

आरुषि- (मुस्कुरा के) ाचा में तोह और भी गलतिया करना चाहती हुई लकिन तेरे साथ.

तुषार- (मुस्कुरा के) ओह्हो ाचा!.. देख लो येह गलतिया भरी पढ़ सकती है आपको..

आरुषि- कोई न तू इक बार मुझे भरी कर दे. इक बार में सेह लुंगी..

तुषार- दीदी बस इक बार hi सहना पड़ता है. उसके बाद तोह जब चाहो सवर्ग के सैर करलो..

आरुषि- ठीक है अगर तू इतनी कह hi रहा है तोह तुजे में इक बार सैर करवा hi दूंगी..

(तुषार खुश हो जाता है और पास बैठी अन्निका कंफ्यूज पे कंफ्यूज..)



अन्निका- भैया, दीदी येह अप्प लोग कबसे क्या बाटे कर रहे हो.. और सवर्ग की सैर कैसे करोगे अप्प. मुझे भी करनी है..



(आरुषि और तुषार अपनी hi बातो में लगे हुए थे. अन्निका की बात सुन उनका धियान हटा. और तुषार अन्निका की बात सुन हड़बड़ा गया तोह उधर आरुषि की हसी निकल गई..)



आरुषि- (सोफे पर पेट पकड़ हस्ती हुई) हाँ हाँ क्यों नहीं तू भी ा जाना. क्यों तुषार है डैम इतना की दोनों को सैर करवा सके..

तुषार- (उदास मन लेके) दीदी येह क्या बोल रही हो.. येह मेरी छोटी सी गुड़िया है.. में बस आपको hi सैर करवाओगे..

आरुषि- क्यों भाई. येह तेरी छोटी सी गुड़िया है तोह जो मेरी छोटी सी गुड़िया है उसका क्या?...



(आरुषि ने येह बात बोल तोह दी लकिन फिर उससे बहुत शर्म आयी.. वो अपना फेस साइड कर चुप बेथ गई..)



तुषार- (मुस्कुराता हुआ) दीदी आपकी गुड़िया को तोह में आराम से सैर करवाऊंगा. और इक दिन आपकी गुड़िया को बढ़ी कर दूंगा..

आरुषि- तुषार!!!! चुप बेथ..



(और अपनी आखो से अन्निका की तरफ इशारा करती है जो बड़े धयान से बाटे समझने की कोशिश कर रही थी लकिन उसका नादाँ दिल, दिमाग कुछ समाज नहीं प् रहा था..)



(तुषार भी चुप होक बेथ जाता है..)



अन्निका- (ऊपर देख अपने बाल साइड कर बागवान से) होई बागवान मुझे भी थोड़ा दिमाग दे ताकि में भी इनकी कोड वर्ड वाली बाटे समाज सकू और बोल सकू.. हूफ्फ नाजने में कब बड़ी हूँगी..



(आरुषि और तुषार को उसकी नादानी भरी बत्तो पे बहुत प्यार अट्टा है तोह दोनों उठ कर उसके agal-bagal बेथ जाते है और दोनों साइड से उससे कास के गले लगा लेते है और इक इक किश उसकी गाल पर कर देते है..)

तुषार- ऊह्ह्म्म तेरी येह नादानी भरी बाते hi तोह मुझे अछि लगती है.. मेरी प्यारी गुड़िया बागवान करे तू मेरे लिए हमेसा अस्सी hi रहे..

आरुषि- हाँ और मेरे लिए bhi..uuhmma...

माँ- (आवाज देती हुई) चलो बचो ाजाओ खाना लग गया है.

(फिर तीनो भाई बहिन बेथ खाना खुद काम कहते है इक दूसरे को ज्यादा खिलते है..)



(पूरा दिन ऐसे hi निकल गया. रात को तुषार के रूम में अन्निका और तुषार बीएड पे लेते बाते कर रहे थे..)



अन्निका- तोह भैया क्या अप्प खुद नहीं जा रहे न उस देण्य से लड़ने?..

तुषार- में भी उसी के बारे में सोच रहा था गुड़िया की अब्ब में क्या करू.

अन्निका- हाँ मुम्मा पापा ने तोह साफ़ मन कर दिया है की अप्प नहीं जा सकते. नहीं तोह आपका वो बुरा हल कर देंगे..

तुषार- येह तू मुझे डरा रही है क्या..

अन्निका- (हस्स के) अरे नहीं भैया में तोह में आपको सच से अवेयर करवा रही थी..

(ऐसे hi इनकी थोड़ी देर बाते चली फिर दोनों सू.)



(सुभे अन्निका पहले जग्गी. उसने उठ के तुषार की तरफ देखा और इक किश उसके गाल पर किया और फिर हलके सा टच उसके होठो पे अपने होठो से करा दिया और तेजी से उठ के अपने रूम में भाग गई...)



(करीब शाम के 6 बजे रहे थे. इक बड़े से घर के इक कमरे में इक लड़का चेयर से कास के बंधा हुआ था. उसके मुँह पर टेप चिपके हुई थी जिसे की वो kheek-chilla न सके. और उसका पूरा चेहरा इक काळा कपडे से देखा हुआ था.)



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(कुछ देर बाद इक लड़का मास्क पहने कमरे में अट्टा है. मास्क थोड़ा डरावना था उसमे से बस उस लड़के की नीले आखे hi दिख रही थी.)

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(उसके हाथ में इक टूल बॉक्स था. वो एक्के उस बंधी बने लड़के के पास खड़ा हो जाता है..)



लड़का- कपडा हटाओ इसके चेहरे से..



(उसके पास खड़ा इक लड़का बंदी बने लड़के के चेहरे से कपडा हटा देता है.. जैसे hi कपडा hat.ta है बंदी बना लड़का अपने सामने खड़े इक मास्क वाले चेहरे को देख दर जाता है.. और फिर हाहहममम हहम्म्म्म करके बोलने की कोशिश करता है.. मास्क वाला लड़का उसके मुँह पर से टेप भी निकल देता है. टेप निकलते hi बंदी बना लड़का बोलै..)



बी लड़का- आहहह बहनचोड़ो! सालो तुम्हारे हिम्मत कैसे हुई मुझे बंधी बना रखने की..

मास्क वाला लड़का- (इक थप्पड़ कास के उसके गाल पे मरता हुआ) सेल जुबान को लगाम दे अपनी. तुजसे कुछ जरुरी काम था इस लाये है तुजे यहाँ..

बी लड़का- कैसे काम है तुम्हे?. हो कोण तुम लोग. मेरी बात याद रखना अगर मेरे बाप को पता लग गया न की तुम लोग मुझे उठा लाये हो तोह तुम लोग को वो ज़िंदा नहीं छोड़ेगा. टुकड़े टुकड़े करवा बैठो गए तुम लोग..

लड़की- (उसकी दूसरी गाल पर थप्पड़ मरती हुई) कितना बोलता है येह. इसके मुँह पे तोह टेप hi अछि लगती है..

बी लड़का- क्यों मार रहे हो मुझे. तुम लोग चाहते क्या हो मुझसे..

म लड़का- (अपना पेअर उसके घुटनो पे रखता हुआ) बदला!!.. देण्य बदला चाहिए मुझे. बता लेलु क्या में..

देण्य - (दर क) ky.kyaa बदला कसिए बदला.. और तुम्हारी आवाज तोह.. क्या तुम तुषार हो?..

म लड़का- (हस्ता हुआ अपना मास्क निकल क) नहीं में कैसर हु..

देण्य- (शॉक से) तुषार तू.. देख ोये मुझे छोड़ दे तेरे लिए ाचा होगा. नहीं तोह..

तुषार- नहीं तोह क्या हाँ. क्या..

देण्य- नहीं तोह तेरी तीनो बहनो को इक साथ नंगा करके छोड़ूगा..

सवाना- लो ग हो गया कलयाण..

देण्य- तुम लोग मेरे बाप को नहीं जानते हो व्..

तुषार- (बिच में) चुप इक डैम चुप.. 5मिंट में..

देण्य- क्या 5मिंट में.

तुषार- (अपना मास्क वापिस पहनता हुआ) 5मिंट में तेरी चीखे इक पुरे रूम में गूंज रही होंगी और तेरे बाप को तब पता चलेंगे जब तेरी लाश उन्हें तेरे घर क सामने मिलेगी..

तुषार- (एजेंट्स से) अब तुम लोग बहार जाओ..

सवाना- क्यों?..

तुषार- अभी जो होने वाला है उससे तुम लोग देख नहीं पयोगे..

सफल- अरे देख लेंगे बॉस. हम भी तोह देखे की क्या करते हो अप्प..

सवाना- सही कहा..

तुषार- जैसे तुम लोग की मर्ज़ी बाद में मुझे मत कहना..

सवाना- (कैमरा सामने लगाती हुई) नहीं कहेंगे बॉस अप्प अपना काम शुरू करू..

देण्य- (घबराता हुआ) क्या शुरू करने वाले हो तुम लोग..

सफल- तेरी मौत का खेल शुरू होने वाला है..



(तुषार अपने टूलबॉक्स से इक टूल निकल लेता है)

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(और देण्य का हाथ जो चेयर से कास के बंधा हुआ था उसकी तरफ ले जाता है..)



तुषार- यही है न वो हाथ..

देण्य- (न समझता हुआ) कैसा हाथ. कोनसा हाथ. येह क्या हरने वाला है तू..



(तुषार उसका हाथ कास के पकड़ लेता है और दूसरे हाथ से वो टूल से उसकी बिच वाली ऊँगली के नाखून में फसा लेता है और पूरा जोर लगा के टूल को वापिस खिसक लेता है. और इक hi झटके में उसकी ऊँगली से नखों अलग कर देता है. ऊँगली में कौन का फवारा डोर पड़ता है.)



देण्य- (दर्द से) आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… hhaayyyee..e मायआ अह्ह्ह्हह्हह… मर्डर गगगया..


सफल- बाप रे..

सवाना- ओह्ह माय गॉड..

देण्य- (रोटा हुआ) भाई मत कर भाई. माफ़ करदे.. में तेरी बहनो की पूजा करूँगा भाई.. छोड़ दे मुझे..

(तुषार उसकी बत्तो पे धयान नहीं देता और उनका हाथ पकड़ पहली, फिर दूसरी, तीसरी, चौथी ऊँगली से भी इक इक करके उसके नाखून अलग कर देता है.. इसी बिच देण्य के गले से सुर इक सेक् के लिए भी बंद नहीं हुए.)



(तुषार ने टूल बॉक्स से कुछ और निकला जो इक लमि सी सुई जैसी थी.)

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(तुषार ने देण्य का फेस पकड़ा और उस सुई को देण्य के इक गाल से निकलता हुआ दूसरी गाल से बहार कर दिया. गाल के साथ उसकी जुबान भी थोड़ी काट गई थी. सुई उसके दोनों गालो के 2-2 इंच बहार थी और बाकि मुँह के अंदर.. मुँह से खून से फव्वारी बहार ा रहे थे.. और देण्य चीखता भी तोह उससे दर्द और ज्यादा होता..)



(2 मिंट तक तुषार उसकी येह हालत थोड़ा डोर हो देखता रहा. फिर उसने इक और हतियार निकल लिया.)

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(उससे देख देण्य की और फटने लगी वो अपनी लड़खड़ाती हुई जुबान के साथ दर्द में बोलै..)



देण्य- (तोतली आवाज में) अहइ मुले चोल दू. वापिस असा नई कयुगा..

सफल- बॉस अप्प तोह बहुत खूंखार हो..

तुषार- (हस्ता हुआ) ः इसको तड़फने में मुझे बहुत मजा ा रहा है. ऐसा करो इसका चेहरा पकड़ो कास के..

(सफल देण्य के पीछे जाता है और अपने दोनों हाथो से उसका चेहरा पकड़ लेता है.. तुषार उस नोकीले टूल को पकड़ देण्य के करीब जाता है. और उस टूल को उनकी आखो पर फेरने लगता है.. देण्य को लग रहा था की वो मरने से पहले hi नरक में अपने पप्पू का दंड भुगत रहा है..)

तुषार- हाँ तोह देण्य भौ इन् आखो से इस दुनिआ को आखरी भर देख ले..



(इतना बोल तुषार वो टूल का नोकीला हिस्सा उसकी आँख में दाल देता है. टूल उसकी आँख को फोड़ता हुआ 4इंच तक अंदर घुस जाता है. देण्य को लगा जैसे किसी ने उसकी आँख में बम फोड़ दिया हो. उसको अपनी आखो में दिवाली नजर आ रही थी जैसे उसकी आखो में पटाखे फूट रहे हो.. उसका सर दर्द से फैट गया और वो उसी वक़्त बेहोश हो गया..)



(तुषार के अंदर इक अजीब सा गुस्सा दौड़ रहा था. उसकी आखे हलकी हलकी लाल हो रही थी साथ में हल्का सा लाल रंग का धुआँ बहार ा रहा था उसके आखो से निकलता हुआ मास्क से. वो वही नहीं रुका उसने वो टूल को गोल गोल गुमा के देण्य की आँख का कचुम्बर बना दिया और टूल वापिस खींच लिया. फिर उसने दूसरी आँख में भी टूल घुसा दिया देण्य इक बार बेहोशी की हालत से बहार आके जोर से चीखा और वापिस बेहोश हो गया..)



(दूसरी आँख का भी बुरा हाल करने के बाद तुषार ने इक और टूल निकल लिया.)

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(और उस टूल से इक इक करके बरी बेरहमी से उसके दोनों हाथो से दसो ऊँगली अलग करदी..)



सवाना- (मुँह दूसरी और घूमती हुई) हे बागवान!! में और नहीं देख सकती..

सफल- बॉस कुछ और भी बचा है?..



(तुषार कुछ नहीं बोलता सिदा देण्य के मुँह से उसकी जुबान बहार निकल लेता और इक टूल से उससे भी काट फेकता है..)



सफल- भाई बस कर यार. वो बेहोश है उसको कोनसा दर्द हो रहा है जो तू उसपे इतनी बेरहमी दिखा रहा है.. और तू अपनी आखे देख कितनी लाल हो गई है. गुस्सा शांत कर अपना..

तुषार- (लम्बी सैस लेता हुआ. कैमरा की तरफ देख) हास्सःह बदला पूरा हुआ मेरा. बदला पूरा हुआ कैसर का.. इसने किसी की बहिन को गन्दी नजर से देखा इसकी आखे फोड़ दी मैंने, इसने किसी की बहिन के बारे में गन्दा बोलै इसकी जुबान काट दी मैंने, इसने किसी की बहिन को अपने गंदे हाथ लगाए इसकी उंगलिया काट दी मैंने.. येह कैसर उनके लिए आया है जो इसके जैसे बने घूम रहे है. याद रखना कुछ भी गलत करने से पहले. कही ऐसा न हो की तेरी मौत की वीडियो बाकि सब देख रहे हो… सवाना बंद कार्डो कैमरा..



(सवाना कैमरा ऑफ कर देता है. उस से देण्य की तरफ देखा तक नहीं जा रहा था. पूरी चेयर और फर्श देण्य के खून से रेंज हुए थे तुषार के कपड़ो पर भी jagha-jagha खून लगा हुआ था.. )



सवाना- बॉस अब इक गोली मर ख़तम करो इससे..

तुषार- नहीं इसको उठा के इसके घर के बहार फेक ायो..

सवाना- (हैरानी से) क्या.. लकिन वो क्यों. इससे जिन्दा क्यों छोड़ रहे हो.. इसको तोह मौत मिलने चाहिए..

(तभी शिवं पहली बार बोलै जो तब से बस सब कुछ देख और सुन रहा था..)

शिवं- मौत.. मौत इसके लिए बहुत छोटी सजा है. मौत का दर्द तोह बस पल भर के लिए hi होगा. इसने मेरी माँ को ch..(hadbada हुआ) ी मैं किसी के साथ बदसलूकी करने की सजा मेरी नजरो में इससे बड़ी कुछ नहीं होगी. येह जो दर्द लेके येह पूरा ज़िंदगी घूमेगा न येह मौत से भी बत्तर होगा. पूरी ज़िंदगी पछताता फिरेगा की क्यों इसने किसी को चड्डा, परेशां किया..

तुषार- (मुस्कुरा के) हाँ भाई तू कबि कबि बोलता है. लकिन जो भी बोलता है वही बोलता है जो में बोलना चाहता हु मेरे मन की बात कैसे जान लेता है तू..

सफल- तोह मतलब बॉस अप्प इससे जिन्दा छोड़ने वाले हो?..


तुषार- हाँ येह सजा इसके लिए मौत से भी अछि है. येह ज़िंदगी भर तड़पता रहेगा अपने किये कर्मो पे.. अब ऐसा करना इसकी पीठ पे किसी खंजर से कैसर लिख देना. ताकि मेरी असली पेचान छुपी रह सके और इक नयी पेचान न जनम हो sake.QUASAR... और वीडियो मेरी आवाज बदल देना सब जगह फैला देना...

सवाना- हाँ भाई वीडियो तोह फैलाने पड़ेगी दुनिया वालो को भी तोह पता चले की उन् जैसे दरिंदो को मरने के लिए इक नए कैसर नाम के दरिंदे ने जनम ले लिया है.. (कातिल स्माइल का साथ) येह वीडियो देख उनकी रूह कम्पनी वाली है. शयद कुछ लोग तोह वीडियो देख hi सुधर जाये..

तुषार- (मुस्कुरा के) सही कहा.. ाचा अब में चलता हु.. और इस देण्य को इसके घर के बहार फेक देना..

सफल- ok बॉस!..


(तुषार वह से चला जाता अपने घर की और. और एजेंट्स भी वैसा hi करते है देण्य की पीठ चिल उसपे कैसर लिख देते है और उसके घर के भर फेक देते है और जाते हुए इक गोली उनके घर के मैं दूर के कांच पर मर देते है ताकि उन्हें पता चल सके की उनका बीटा अपने पप्पू की सजा भुगत अपने घर लोट आया है.)



(इधर तुषार अपने घर लौट आया था. और अपने रूम में बैठा था अपनी गुड़िया के साथ. अभी रात के 8 बज रहे थे. आरुषि उसके रूम में आयी और बोली..)



आरुषि- (अन्निका से) अरे तू कबि तोह अपने भैया को अकेला छोड़ दिया कर..

अन्निका- (मुँह बना के) क्यों.. में भैया को कबि नहीं छोड़ूगा..

आरुषि- ाचा ठीक है.. और तुषार कहा था तू शाम से न तोह तू मेरा फ़ोन hi उठा रहा था. हर्षिका नाराज है तेरे से. बोल रही थी की तुम लोग सुभे ऐनी वाले थे लकिन अभी तक नहीं ए..

तुषार- हाँ दीदी मुझे याद है. उसको तोह में भूल hi नहीं सकता..

आरुषि- (मुस्कुरा के) ाचा ऐसा क्या इतनी अछि लगी वो की उससे तू भूल नहीं सकता है..

तुषार- दीदी वो भी कोई भूलने की चीज़ है..

अन्निका- इक मिंट!!. कोण है येह हर्षिका.. मुझे उसकी साडी डिटेल्स चाहिए अभी क अभी..

तुषार- अरे कुछ नहीं गुड़िया वो जो दीदी की फ्रेंड थी न वही है हर्षिका..

आरुषि- हाँ और अब तू जल्दी से अपना सामान पैक कर. हमें अभी जाना होगा वो बेचारी अकेली है घर पे. मैंने माँ को बोल दिया है अब जल्दी चल वैसे भी रात हो गई है..

तुषार- ठीक है दीदी चलो.

(कुछ देर बाद दोनों घर से निकल जाते है हर्षिका के घर के और…)

《3549 -वर्ड्स》
 
अपडेट-11



तुषार- अरे कुछ नहीं गुड़िया वो जो दीदी की फ्रेंड थी न वही है हर्षिका..

आरुषि- हाँ और अब तू जल्दी से अपना सामान पैक कर. हमें अभी जाना होगा वो बेचारी अकेली है घर पे. मैंने माँ को बोल दिया है अब जल्दी चल वैसे भी रात हो गई है..

तुषार- ठीक है दीदी चलो.

(कुछ देर बाद दोनों घर से निकल जाते है हर्षिका के घर के और…)

|अब अग्गे|

(कुछ देर में दोनों हर्षिका के घर हॉल में बैठे हुए थे..)

हर्षिका- तोह!. क्या हुआ था कल घर पे? आपके पापा ने आपको इतनी ुरगेंटली क्यों बुलाया था?..

तुषार- वो हर्षिका जी..

हर्षिका- हर्षिका! ओनली हर्षिका!, येह जी वि मत कहो अब हम दोस्त है न..

तुषार- Ok हर्षिका.. तोह में कह रहा था.. (फिर तुषार उससे कल घर में जो हुआ सब बता देता है. लकिन अज्ज शाम जो हुआ वो नहीं बताता एक्चुअली येह बात अभी उसके और एजेंट्स के बिच hi थी..)

हर्षिका- (टेंशन में) क्या! येह सब हो गया. वो आपको पकड़ के ले जाते तोह. कही आपको मारा तोह नहीं उन्होंने ने?.. मुझे समाज नहीं ा रहा सेहर में इतने बुरे लोग खुले आम घूम रहे है उन्हें तोह येह पुलिस वाले पकड़ते नहीं, लकिन अपने कुछ बुरे लोगो को सजा दी तोह येह आपको झट से पकड़ने ा गए..

तुषार- (गंभीर होक) हम्म. वही में सोच रहा हु. येह पुलिस अपने अप्प तोह नहीं ा सकती जरूर इन्हे किसी ने बेजा होगा.

आरुषि- (सोचती हुई) हाँ जा तोह इन्हे देण्य के बाप ने बेजा होगा जा फिर..

तुषार- उन् गुंडों के डॉन ने..

हर्षिका- हाँ वो भी हो सकता है. तुम्हे याद है वो इंस्पेक्टर ने कहा था की तूने जगाला के आदमियों को मारा है.

तुषार- (चौंकता हुआ) ओह्ह सहित.. येह में कैसे भूल गया.. हाँ उसने कहा था मैंने कोई जगाला नाम के आदमियों को मारा है. येह सेहर के सभी गुंडों मावलीओ का डॉन होगा जो इन्हे चला रहा है.. लकिन इससे स्कूल में हुई घटना के बारे में कैसे पता चला..

(येह लोग बात कर hi रहे थे की तुषार को अन्निका का कॉल ा गया)

अन्निका- hello भैया..

तुषार- हाँ गुड़िया बोलो क्या बात है..

अन्निका- भैया अप्प जल्दी से T.V ों करके न्यूज़ चैनल देखो..

तुषार- (सब समझता हुआ) क्यों क्या हुआ..

अन्निका- भैया अप्प पहले देखो न. बाद में मुझे कॉल करना..

तुषार- ठीक है..

तुषार- हर्षिका जरा T.V ों करना मुझे न्यूज़ चैनल देखना है..

हर्षिका- अभी करती हु..

आरुषि- क्या हुआ तुषार?..

तुषार- वो दीदी अन्नू बोल रही है की न्यूज़ देखो जड़ली पता नहीं क्या हुआ..

(इतने में हर्षिका न्यूज़ लगा देती है.. तीनो बड़े धयान से देखने लगते है की आखिर चल क्या रहा है.. न्यूज़ रिपोर्टर- बड़ी hi बेरहमी से मारा है इसने मला के लड़के को जैसे इससे किसी का दर hi नहीं. कोण था, कहा से था, किसके लिए आया येह, किसका बदला लिया इसने, और अग्गे किस किस का बदला लेगा, कोई नहीं जनता.. अभी लोग उन् तीन गुंडों की दिल दहला देनी वाली मौत देख अपने अप्प को संभाले hi थे की इक इसने इक और वीडियो पोस्ट करदी, और इसमें तोह मला के लड़के को ज़िंदा लाश बना क रख दिया.. कोई इतना भी ज़ालिम हो सकता है इसने बता दिया.. येह dekhiye..(T.V में देण्य की चीखो की और थोड़े भोत खून की फोटोज दिखाई जाती है. देण्य का फेस दिखने लायक नहीं था उससे बलौर कर दिया गया था..) हम आपको इससे ज्यादा नहीं दिखा सकते.. अगर आपका दिल कमजोर नहीं है तोह अप्प इस वीडियो को पूरा देख सकते है इंटरनेट पर हर जगह येह वीडियो फेहली हुई है, इसके कुछ hi घंटो में मिलियंस ऑफ़ व्यूज पांच चुके है..)

(कोण है येह?.. चेहरे पे इक मास्क लगा रखा है.. अपने आपको कैसर बता रहा है.. क्या येह सेहर को गुंडों की चपेट से बहार निकलने के लिए आया है.. या इसका कोई और मकसद है.. पुलिस जोरो शोरो से इससे पकड़ने की कोशिश कर रही है पर अभी तक इसका कोई पता ठीकहाना नहीं चला है.. इसके साथ इसके तीन साथी भी है. 2लड़के और 1लड़की कोण है yeah?.Quasar बस यही इक नाम छोड़ गया है अपने पीछे.. हम इसके बारे में हर खबर अप्प तक पौंछते रहेंगे, जुड़े रहे हमारे साथ टीवी चैनल ........ में)

(हर्षिका T.V बंद कर देती है. और मुँह फाडे कभी आरुषि तोह कभी तुषार को देखती है.. आरुषि का भी यही रिएक्शन था.)

तुषार- मेरे को ऐसे मत देखो मैंने नहीं किया येह.. येह एजेंट्स का नई मेंबर है..

आरुषि- तुषार मैंने कब कहा की तूने किया है येह सब.. (स्माइल क साथ) मेरा भाई इतना भी दरिंदा नहीं हो सकता. क्यों?..

तुषार- (मुस्कुरा के) हाँ दीदी.. एजेंट्स ने बताया था मुझे इसका नाम कैसर है. बहुत खतरनाक है, किसी पर रेहम नहीं खता. किसी को इतनी जड़ली मौत नहीं देता. लकिन जैसे देता है वो भी आधी, ताकि न वो जीने लायक बचे न मरने लायक.. ः...

हर्षिका- लकिन कोई इतना बेरहम भी हो सकता hai..(muh बना क) िस्स्सिस्स.. कैसे मारा है उसने उस लड़के को..

तुषार- (हस्स क) आपको असली वीडियो दिखाऊ काया, की कैसे मारा है उसने..

हर्षिका- नाहीइ!.. मुझे नहीं देखनी, मेरा इतना मजबूत दिल नहीं है..

(तुषार कुछ बोलै उसका फ़ोन दुबारा बज गया..)

तुषार- hello गुड़िया..

अन्निका- भैया अपने न्यूज़ देखि..

तुषार- हाँ मैंने देखि..

अन्निका- भैया उसने देण्य की बहुत बुरी हालत करदी. कोण था वो..

तुषार- अरे गुड़िया वो अपना hi आदमी है..

अन्निका- क्या?..

तुषार- हाँ वो एजेंट्स के साथ आया है, उनका बॉस है, अब उनके साथ hi रहेगा. मेरी प्यारी गुड़िया की रक्षा करेगा..

अन्निका- मुझे नहीं करवानी कोई रक्षा वक्ष उससे. मेरी रक्षा तोह अप्प hi करोगे बस.. वो भी पूरी ज़िंदगी..

तुषार- येह कोई बताने वाली बात है, मेरी गुड़िया को कोई हाट भी नहीं लगा सकता..

अन्निका- वो तोह में जानती हु, भैया आपके बिना दिल नहीं लग रहा है, में भी ा जाऊ क्या वह?..

तुषार- नहीं गुड़िया! तुजे पता है न में यहाँ कोई खास काम के लिए आया हु..

अन्निका- जानती हु भैया, लकिन अपने इस दिल को क्या संजो में,, पागल मंटा hi नहीं, बोलता है आपके साथ hi रहेगा. हम्म?..

तुषार- (हस्स के) क्या बोल रही है तू?, ाचा अपने दिल को बोल की बस 28दिन और वेट करले, फिर में उसके पास ा जायूँगा..

अन्निका- (ख़ुशी से) लव ु भैया..

तुषार- लव ु तू मेरी गुड़िया..

(अन्निका फ़ोन रख देती है और वापिस आके माँ पापा और तान्या के साथ बेथ जाती है..)

माँ- क्या हुआ क्या बोलै तुषार ने?..

अन्निका- अरे माँ डरने की बात नहीं है, भैया बोले के येह कैसर नाम का लड़का एजेंट्स के साथ है, बॉस है उनका..

माँ- फिर तोह ठीक है, मुझे लगा कही येह अपना पागल तुषार तोह नहीं..

पापा- (हस्स के) आखिर मेरी दन्त रंग ले..

माँ- चुप कीजिये अप्प, अप्प उससे प्यार से समजते तब भी वो नहीं जाता..

(तान्या कुछ दिनों से थोड़ी बदल सी गई थी, पहले वो ज्यादा किसी से बात करना पसंद नहीं करती थी सारा दिन अपने रूम में पड़ी रहती, लकिन अब वो सबके साथ थोड़ा थोड़ा अचे से बात करने लगी थी, पहले बस अपने मतलब के लिए बात करती थी, लकिन पता नहीं जब तुषार उसके पास होता तोह वो जल्दी से रूम में चली जाती, उसका येह बिहेवियर अभी किसी ने नोट नहीं किया था..)

(उधर तुषार ने जैसे फ़ोन रखा हर्षिका उससे घर के देख रही थी)

हर्षिका- येह कोण थी तुषार..

तुषार- अरे वो मेरी छोटी सी गुड़िया..

हर्षिका- मतलब आपकी छोटी सिस्टर..

तुषार- (मुस्कुरा के) हाँ..

हर्षिका- ओह्ह्ह बहुत प्यार करती है वो आपसे?..

तुषार- हाँ, बहुत प्यार करती है. मेरे शिव उससे कुछ नहीं दीखता, मुझे खरोच भी ा जाये तोह खाना नहीं कहती, मेरे लिए नजाने कितनी बार बुखी रही है, मेरे बिना सोना उससे पसंद नहीं, मेरे बिना घूमना उससे पसंद नहीं, अपनी कोई फ़िक्र नहीं करती, करती है तोह बस मेरी, अज्ज तक उसने मेरी कोई बात नहीं ताली, चाहे वो गलत हो या सही उसने मेरा हर जगह साथ दिया है, पागल लड़की उससे मेरे गलत कदम भी सही लगते है. में सोच भी नहीं सकता इतना प्यार करती है वो मुझसे..

(हर्षिका तुषार के मुँह से किसी के लिए इतना प्यार सुनके उसके दिल में इक दर्द सा उठ गया, उसकी आखे भीग गई थी, उससे पूरी ज़िंदगी सब कुछ मिला, सिवाए इक प्यार के..)

हर्षिका- वाओ, में मिलना चाहती हु उस प्यार की मूरत से, जो अपने भाई से इतना प्यार करती है.. मुझे नहीं पता प्यार का मतलब क्या होता, मुझे न कबि मुम्मा का प्यार मिला न hi पापा का, मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी बस अकेलापन में hi निकल दी, किसी ने मुझे अज्ज तक प्यार नहीं किया, किसी ने मुझे अपनापन दिखते हुए कास के गले नहीं लगया, में सरे दर्दो में अकेली रोइ हु, किसी ने मेरे ासु साफ नहीं किये, में बहुत बार गिरी हु चोट खाई हु, लकिन कोई मुझे उठा के मुझे दवा लगाने वाला नहीं था.. अप्प बहुत लकी हो आपको इतना प्यार करने वाले आपके मुम्मा पापा मिले, इतना प्यार करने वाली तीन बहने मिली. और इक में हु की अपना दुःख तक किसी के साथ नहीं बाँट सकती..

(हर्षिका इतना बोल जोर जोर से रोने लगी, उसकी आवाज में जो दर्द था वो साफ देखा जा सकता था, आरुषि से येह देखा न गया वो खुद रू रही थी उसकी बाते सुन, वो उठ के उसके पास गई, लकिन अपना हीरो ठहरा इमोशनल बाँदा वो उसके साथ hi बैठा था उसने उससे उठा के कास के अपने गले से लगा लिए, आरुषि वही रुक गई और अपने ासु साफ़ कर स्माइल करने लगी, हर्षिका को जब कोई कन्धा मिला तोह वो और जोर जोर से रोने लगी, तुषार भी उसके बालो में हाथ दाल सहलाता हुआ उससे रोना दिया, शायद hi किसी ने उससे कबि ऐसे गले लग रोने दिया हो.. करीब 5मिंट बाद जब हर्षिका ने रू रू कर तुषार का कन्धा गिला कर दिया तब वो शांत हुई, उससे जब एहसास हुआ की वो किसके इतना चिपक के गले लगी हुई है तोह वो इक झटके में तुषार से अलग हो गई, उसने पहले तुषार को थोड़ी देर घर के देखा और फिर वो शर्मा गई, और सोफे पर बेथ गई..)

आरुषि- (हस्ती हुई) अरे मेरी बुलबुल ऐसे शर्मा क्यों रही है, कैसा लगा मेरे भाई के गले लग के?..

हर्षिका- (और शर्माती हुई) अरुशी!,, क्या कुछ भी बोलती है..

आरुषि- हाय मेरी जान कितना प्यारी शर्माती है तू. तुषार देख तोह जरा..

(तुषार क्या देखे वो तोह खुद शर्मा रहा था, आरुषि को जब पता चला की तुषार तोह शर्म के मरे हर्षिका से नजरे तक नहीं मिला प् रहा तोह वो जोर जोर से हसने लगी..)

आरुषि- लो जी करलो बात तुषार तू तोह हर्षिका से भी ज्यादा शर्मा रहा है, अरे भाई गले hi मिले हो किश नहीं किया तुम लोग ने..

(आरुषि की बात सुन हर्षिका शर्म से पिगलति जा रही, उससे उम्मीद नहीं थी की आरुषि कबि अस्सी बात भी बोल सकती है.. उससे और न सुना गया वो उठ कर अपने रूम में बाघ गई और जाती जाती गुड नाईट बोल गई..)

तुषार- दीदी क्यों परेशां करती हो बेचारी को.

आरुषि- अरे में तोह बस मज़ाक कर रही थी, उसके चेहरे पर बड़े टाइम बाद मैंने स्माइल देखि है, वो तोह बस ऐसे gum-sum सी रहती थी..

तुषार- (उदास हो क) हम्म..

आरुषि- चल अब तू ज्यादा साद मत हो, खुश रहा कर, तेरा ऐसे उदास रहना मुझे ाचा नहीं लगता..

(तुषार आरुषि के पास जेक उससे गले में बहे दाल देता है.)

तुषार- (गाल पे किश करता हुआ) ाचा दीदी अप्प बस इक बार हाँ बोल दो, (आँख मार क) फिर कबि उदास नहीं होने दूंगा..

(तुषार इतना बोल वह से अपने रूम में बाघ जाता है और आरुषि भी अपने रूम मुस्कुराती हुई चल देता है.)

आरुषि- (मन में) बदमाश कही का, तुजे हाँ सुने की जरुरत hi नहीं बच्चू क्युकी येह हाँ मुझे नहीं तुजे केहनी है. तब देखूँगी तू क्या बोलता है, अभी तोह बहुत मज़े ले रहा था न मेरे तू तब दिखाउंगी..

(फिर आरुषि थोड़ी देर कुछ और सोच सू जाती है..)

(अगले दिन करीब 12 बजे तुषार एजेंट्स के साथ उनके घर में बैठा हुआ था)

सफल- तोह बॉस अग्गे क्या करना है..

शिवं- अग्गे इन्हे अपने अप्प पर काम करना है..

सवाना- अपने अप्प पर काम करना है मतलब?..

शिवं- देखो इन्हे अभी बहुत बड़ी जुंग लड़नी है, उसके लिए येह अभी तैयार नहीं है..

सवाना- (हस्ती हुई) सही कहा, बॉस तोह येह हमारे है hi लकिन बचे लगते है. ओले ओले, हहह..

सफल- हहहह

शिवं- (गुस्से से) चुप्प!., चुप रहो तुम दोनों, वो वो है जो तुम लोग सोच भी नहीं सकते..

(दोनों उसके गुस्से और चीख से सेहम गए. तुषार भी शिवं की बात से कंफ्यूज हो गया की शिवं ने ऐसा क्यों कहा की वो वो है जो कोई सोच भी नहीं सकता..)

तुषार- भाई शिवं!, क्या बोलै तुमने में क्या हु?..

शिवं- वो वो अप्प.. मेरा कहने का मतलब था की हम आपको वो बना देंगे की कोई सोच भी न सके.. हाँ में यही कह रहा था..

तुषार- ाचा तुमने बात तोह सही कही है, मुझे अपने अप्प को लड़ने के लिए तैयार करना होगा, तोह क्या करना होगा मुझे?..

शिवं- आपको त्रिनेड होना होगा, येह लड़ाई कोई छोटी मोती लड़ाई नहीं है, अगर आपको इस रस्ते पर चलना है तोह आपको हर तरह से त्रिनेड होगा चाहहए वो कोई भी स्किल हो, हर स्किल में परफेक्ट, जैसे हम है..

तुषार- ओह्ह्ह,, तोह मुझे ट्रैन कोण करेगा?..

शिवं- (मुस्कुरा के) आपके गुरूजी..

तुषार- मेरे गुरूजी?..

शिवं- हाँ पहले उन्होंने मुझे सिखिया था, और अब आपकी बारी है..

तुषार- ठीक है तोह मुझे कहा मिलना होगा उनसे, जा वो खुद hi ा जायेंगे..

शिवं- हाँ वो खुद hi ा जायेंगे.. मैंने उन्हें बुला लिया है.. वो कल यहाँ ा जायेंगे..

तुषार- फिर तोह येह तुमने ाचा किया.. ाचा इक काम करो तुम लोग, मुझे इक हवेली टाइप जगह चाहिए, जो पास में हो, और उसके पास ज्यादा घर न हो थोड़ी सुनसान जगह, जो बहुत बड़े एरिया में घिरी हुई हो.. मुझे बहुत बड़ी जगह चाहिए..

सावन- (हेरैं होती हुई) लकिन आपको अस्सी जगह क्यों चाहिए?..

तुषार- मुझे नहीं चाहिए..

सफल- तोह फिर किसे चाहिए?..

तुषार- (मुस्कान के साथ) कैसर को चाहिए.. वही होगा कैसर का घर.. इक दरिंदा का घर...

शिवं- ठीक है उसका इंतज़ाम में कर दूंगा..

तुषार- गुड, ाचा अब में चलता हु..

(फिर तुषार एजेंट्स के घर से सीधा चला जाता है हर्षिका के घर..)



《2394-वर्ड्स》
 
अरे थैंक्स भाई..

में भी शामे सिचुएशन में हु भाई, बहुत बिजी हु आपके उपदटेस नहीं रीड कर प् रहा, लकिन जल्द hi टाइम निकल रीड करता हु और रिव्यु देता हु.. में इक बहुत अछि स्टोरी रीड नहीं कर प् रहा, और अप्प तूफान की तरह अग्गे बढ़ रहे हो, ऐसे hi बढ़ते रहो, वे अरे ऑलवेज विथ यू..
 
दोस्तों शायद में अभी अपडेट देदू, थोड़ी देर में बताता हु..

और इक बात दोस्तों कहना चाहूंगा की अप्प लोग शिवं करैक्टर को शिवम् न बोले.. शिवं में न है न की म, लिखे जैसे शिवानी होता है वैसे hi शिवानी से ी निकल तोह शिवं .. अप्प लोग समाज गए?.. कोई मेरी बात का बुरा मात मन्ना, मैंने सरे चरक्टेर्स के नाम बहुत टाइम लगा के सोचे है, अगर अप्प चाहते हो तोह में शिवं को शिवम् में बदल सकता हु जैसे अप्प कहहु में वैसा hi कर दूंगा अपनी राइ मुझे बता दे...
 
अपडेट-12



सावन- (हेरैं होती हुई) लकिन आपको अस्सी जगह क्यों चाहिए?..

तुषार- मुझे नहीं चाहिए..

सफल- तोह फिर किसे चाहिए?..

तुषार- (मुस्कान के साथ) कैसर को चाहिए.. वही होगा कैसर का घर.. इक दरिंदा का घर...

शिवं- ठीक है उसका इंतज़ाम में कर दूंगा..

तुषार- गुड, ाचा अब में चलता हु..

(फिर तुषार एजेंट्स के घर से सीधा चला जाता है हर्षिका के घर..)



|अब अग्गे|



(तुषार ने अभी स्कूल से छोटी ली हुई थी, उसने घर में भी येह बोल दिया था की डॉक्टर ने उससे कुछ दिनों के लिए रेस्ट के लिए बोलै है, अभी अन्निका तान्या के साथ स्कूल गयी थी, हर्षिका और आरुषि भी दोनों कॉलेज गयी हुई थी, और हर्षिका घर की इक चाबी तुषार को देकर गायति थी..)



(घर पांच कर तुषार ने घर का दूर खोला और अंदर अपने रूम के तरफ जाने लगा, तुषार अपने रूम की और बढ़ hi रहा था की उसने हर्षिका के रूम की तरफ देखा, रूम का फैन ों था हर्षिका शयद भूल गयी होगी ऑफ करना तुषार यही सोचता हुआ रूम में चला गया फैन ऑफ करने, तुषार ने रूम में जेक देखा तोह सामने टेबल पे इक डेरी पड़ी हुई थी जिसके फैन की हवा से पाने idher-udher ुद्ध रहे थे, तुषार ने इक बार रूम में चारो और नजर डोढ़ा देखा तोह रूम में चारो और हर्षिका की तस्वीर लगी हुई थी,



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(तुषार उसकी तस्वीरो को देख उनमे खो सा गया था, वो इक तक उसके चेहरे को, उसकी गहरी नीली आखो को, उसके ख़ूबसूरत होठो को देकता जा रहा था, उससे कुछ होश hi न रहा की कब उसके दिल के कुछ अलफ़ाज़ उसके होठो ने बयान कर दिए..)



~तेरे इतने हसीं चेहरे को देखकर चाँद भी शर्मा गया,

आया मेरे पास और धीरे से फार्मा गया,

की जा रहा हूँ मैं छिपाने अपनी ये ख़ूबसूरती,

क्योंकि मुझसे भी हसीं कोई आया और इस जहां पर छा गया..~



(तुषार badal-badal कर हर्षिका की साडी तस्वीरो को देखता रहा, उसका मन hi नहीं भर रहा था, भरे भी कैसे हर्षिका थी hi इतनी ख़ूबसूरत की किसी का मन उससे देख उलझ सकता है भर नहीं सकता..)



(तुषार तोह शायद पूरा दिन hi उससे ऐसे hi देखता रहता, लकिन इक फ़ोन की रिंगटोन उससे होश में लेके आयी, तुषार फ़ोन की रिंगटोन सुन हड़बड़ा गया जैसे उससे किसे ने उसके सपनो के महल से बहार फेक दिया हो, तुषार को फ़ोन करने वाले पर बहुत गुस्सा ा रहा था, लकिन जैसे hi उसने फ़ोन पर फ़ोन करने वाले का नाम देखा उसके फेस पर इक बड़ी स्माइल ा गई..)



तुषार- hello गुड़िया..

अन्निका- (रोटी हुई) है., हेल्लो भैया वो व्वो.,,

तुषार- (गभ्राता हुआ) hello गुड़िया, क्या हुआ?.. तू ठीक तोह है न?..

अन्निका- भैया वो अप्प जल्दी से स्कूल ा जाओ..

तुषार- क्यों क्या हुआ है गुड़िया बता न?..

अन्निका- अप्प पहले स्कूल ा जाओ भय, मुझे बहुत दर लग रहा है..

तुषार- हाँ हाँ तू गभरा मैट, में ा रहा हु..

अन्निका- प्लीज जल्दी एना..

तुषार- बस अभी आया मेरा बचा, तू डरना नै..



(तुषार तोह पूरा गभरा गया था, वो सोच रहा था की काश उसके पास कोई शक्ति होती तोह वो जल्दी से अपनी गुड़िया के पास चला जाता और अपनी गुड़िया को रोलने वाले की डाझिया ूढा देता. तुषार जल्दी से बहार के और बाघा और इक टेक्सी वाले को रोक अपने स्कूल की तरफ दौरान को बोलै..)



(कुछ देर में टैक्सी स्कूल के गेट के बहार कड़ी थी और अन्निका भी वही तुषार का वेट कर रही थी, तुषार टैक्सी से निकल अन्निका की तरफ बाघा, जैसे hi अन्निका की नजर तुषार पर पड़ी उसने बाघ के तुषार को गले लगा लिया..)



अन्निका- (रोटी हुई) भैया अप्प ा गए.. वो वो दीदी ko..(vo इतना बोल और जोर से रोने लगी और तुषार को कास के गले लगा लिया)

तुषार- (गभ्राता हुआ) क्या हुआ है तान्या को?, प्लीज बोल न अन्नू, मुझे गभरहट सी हो रही है..

अन्निका- (अपनी आखे साफ़ करती हुई) वो भैया, वो न थोड़ी देर पहले स्कूल में कुछ गुंडे ए थे, वो देण्य के पापा ने बजे थे, वो गुंडों ने दीदी को बहुत थप्पड़ मरे, उन्होंने इतने थप्पड़ मरे की उसके मुँह से खून निकल आया, और इक लड़का ने जबरदस्ती दीदी के होंठो को चूस लिए बहुत देर तक और बाद में दीदी को उठा के ले गए वो लोग..

तुषार- कयय्यआआ.. अरे हे बागवान येह मैंने क्या कर दिया.. मुझे संजना चाहिए थे की उसका बाप अब भी है, वो अपने बेटे का बदला ले सकता है.. येह मेरी hi गलती है... (गुस्से में) वो जितने भी थे, उनमे से इक भी नहीं बचेगा मेरे हाथो... ाचा अन्नू कहा लेके गए है वो तान्या को. कुछ बताया उन्होंने?..

अन्निका- हाँ भैया वो मुझे बोले की (रोटी हुई) अपनी बहिन की इज़्ज़त बचाना चाहती है तोह अपने भाई को लेकर 1घंटे के अंदर सेहर की ******* बिल्डिंग में अजजा. वर्ण तेरी दीदी की नंगी वीडियो पूरा देश देख रहा होगा... भैया अप्प दीदी को बचा लो प्लीज...

तुषार- (गुस्से से) अब नहीं बचेंगे वो, उन्होंने अपनी मौत को अपना एड्रेस दिया है, और वीडियो तान्या की नहीं उनकी बनेगी...



(तुषार कुछ और बोलता इक कार एक्के उसके पास रुक गयी, येह कोई और नहीं एजेंट्स थे..)



सवाना- बॉस जल्दी बैठो!..

तुषार- गुड़िया तुम टेक्सी लेकर घर चली जाओ..

अन्निका- नहीं भैया में भी जाउंगी आपके साथ, और अप्प मुझे रोकोगे नहीं प्लीज भैया..

तुषार- नहीं गुड़िया, वह खतरा हो सकता है, में तुम्हे नहीं लेजा सकता..

शिवं- बॉस अप्प जल्दी कीजिये, कही देर न हो जाये, और ऐनी दीजिये इन्हे, हमारे साथ सेफ hi रहेगी..



(तुषार ने भी शिवं की बात मानते हुए अन्निका को साथ ले लिया और कार में बेथ गया, शिवं ड्राइविंग सीट पर था, उसने जल्दी से कार स्टार्ट की और इक ड्रिफ्ट के साथ कार घुमा दी..)



(थोड़ी देर में सभी उस बिल्डिंग के सामने खड़े थे यहाँ तान्या को वो गुंडे लेके ए थे..)



तुषार- गुड़िया जब तक हम वापिस नहीं ात्ते तुम कार से बहार नहीं अयोगी, ठीक है?

अन्निका- ok भैया, पर अप्प संभल के जाना, (एजेंट्स से) प्लीज मेरे भैया का धियान रखना अप्प लोग..

सवाना- (स्माइल के साथ उसके सर पर हाथ फेरती हुई) आपके भैया को कुछ नहीं होगा, हम है न उनके साथ, प्यारी सी डॉल अप्प फ़िक्र मैट करो..

तुषार- हम्म तू फ़िक्र मत कर गुड़िया, सफल मुझे गन दो..



(सफल उससे इक गन दे देता है और 2 लोडेड मैगज़ीन भी, चारो कार से बहार ा जाते है, सफल कार की डिग्री से 2 पिस्तौल निकल सवाना को देता है,



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और अपने लिए इक ार निकल लेता है,

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शिवं भी अपनी तलवार निकल पीठ पर तंग लेता है,



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और इक पिस्तौल भी ले लेता है, तुषार उनकी तयारी देख और उनकी गन बंदूके देख थोड़ा सा हेरैं रह गया, शिवं जैसे समाज गया था की तुषार के मन में क्या चल रहा है, वो बोलै..)


शिवं- बॉस क्या पता अंदर कितने लोग हो..

तुषार- हम्म, सही कहा, चलो जल्दी..

सवाना- इक मिंट बॉस (अपने बैग से इक मास्क निकलती हुई) आपकी अमानत..



(तुषार अपना मास्क पकड़ पहन लेता है, फिर चारो बिल्डिंग की और बढ़ने लगते है, येह कोई सुनसान जगह नहीं थी अस्स पास काफी और बिल्डिंग्स भी थी, लोग इधर उधर तेहाल रहे थे, आखिर बिल्डिंग सेहर के बिच में थी, शायद येह बिल्डिंग गुंडों का अपना अड्डा होगा..)



(तुषार एंड टीम बिल्डिंग के अंदर जाने लगे, बहार करीब 10 गुंडों की गाड़िया कड़ी थी, इतनी गाड़िया देख सब समाज गए की अंदर काफी लोग हो सकते है, बिल्डिंग शायद अभी तैयार हो रही थी और उन् गुंडों ने इस्पे अपना कब्ज़ा कर लिया, तुषार ने जैसे hi अंदर जेक देखा तोह ग्राउंड फ्लोर पूरा खली था, सिवाए धुल मिटी के कुश नहीं थी..)



(तुषार अभी इधर उधर देख hi रहा था की किसी की चीक की आवाज सुनाई दी, येह चीक ऊपर वाले फ्लोर से ा रही थी, तुषार समाज गया की येह चीक तान्या की है, वो दूध के सीढ़ियों के पास गया उसके पीछे एजेंट्स ने भी दौड़ लगा दी, तुषार एंड एजेंट्स जल्दी जल्दी सीढिया चढ़ ऊपर पांच गए..)



(ऊपर जेक तुषार ने जैसे hi सामने नजर दौड़ाई उसकी आखे मास्क के अंदर से लाल हो गई और गुस्सा तोह इतना की पूछो मत, सामने इक लड़का अपना लुंड निकल तान्या के मुँह के अग्गे कर रहा था,)



गुंडा.1- येह मार इस साली को इक और, जब तक येह खुद नहीं बोलेगी की अपना लुंड मेरे मुँह में दाल तब तक ग़ुस्से मरता जा इससे..

गुंडा.2- यस बॉस..



(इतना बोल उसने इक ग़ुस्सा तान्या के पेट में जड़ दिया जो अभी चेयर के साथ बंदी हुई थी, नजाने उसने तब से कितना ग़ुस्से खाये थे की उसके मुँह में से खून सी पतली सी धार बहार ा रही थी..)

तान्या- अह्हह्हह्ह्ह्हह्हह भाआईई बचा ले मुझे..



(जैसे hi गुंडे ने मुक्का मारा उसके माथे से होती हुई गोली दिवार से जा लगी और गुंडे.2 वही जमीं पे गिर गया, येह गोली मरी थी तुषार ने..)



बॉस- यह कोण है मादरचोद..

तुषार- (गुस्से से) में हु सेल, अब तू नहीं बचेगा, तेरा में ऐसा हाल करूँगा की..

बॉस- ोये सेल चुप सेल चुप, (हाथ फैलता हुआ) दिख नहीं रहा हम काम से काम 60-70 लोग है, तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे मला के बेटे को हाथ लगाने की, अब तू नहीं बचेगा.. सेल मास्क पहन के अपने अप्प को जोकर समाज रहा है, दरिंदगी दिखाएगा हमारे सामने, तुजे अस्सी मौत दूंगी की येह ज़माना याद रहेगा..


तुषार- वो तोह वख hi बताएगा की कोण किसे कैसे मौत देता है..



(इतना बोल तुषार ने 4गोलिया चली दी, जो सीधी उसके पास खड़े 4आदमियों के सर पे जा लगी..)



बॉस- सालो किसी और के मरने का इंतज़ार कर रहे हो क्या, मार डालो चारो को..

(बॉस के इतना बोलते hi सभी अपनी गन निकल अग्गे बढ़ने लगे.. उन्होंने पहला वॉर तुषार पे किया तोह वो संभल न पाया और इक गोली सीधी अपने कंधे पे खा ली,)

तान्या- भाईई...

(शिवं ने जल्दी से उसका बाजु पकड़ उससे अपने साथ इक छोटी दिवार के साथ बिठा लिया..)


तुषार- (चिलता हुआ) आअह्हह्हह्ह भाई बहुत दर्द हो रहा है..

शिवं- अप्प यही बैठे रहो हम देखते है उन्हें..

तुषार- नहीं में यहाँ बैठने नहीं आया..

(इतना बोल तुषार थोड़ा सा दिवार से झुक के फायर करने लगा उसके साथ शिवं भी फायर करने लगा दोनों ने 5 बन्दों को टपका दिया था, उधर सवाना भी इक खम्बे के पीछे चिप कभी अपनी दोनों पिस्तौल से कभी लेफ्ट तोह कभी राइट साइड से फायर करने लगी, सफल भी इक दिवार का सहारा लिए अपनी ार से करीब 20 लोगो को भून चूका था..)



(काफी देर तक दोनों तरफ से फायरिंग चालू रही, अगर गुंडे सामने ऐनी लगते तोह वही ढेर हो जाते फिर सबने वही से फिर करना सही समजा, लकिन अब सामने चाहे 60 गुंडे hi थे पर थे थो गली के गुंडे hi न कब तक टिक पते इंडिया के बेस्ट त्रिनेड एजेंट्स के सामने और ऊपर से उनकी गोलिया भी कहातम हो चुकी, लकिन एजेंट्स के पास तोह बैग भर के गोलियों की मैगजीन्स थी, वो दे धना धन धन मार रहे थे और गुंडे उछलते खुदे अपने मरे हुए साथियो की गन उठा फायर कर रहे थे..)



(अब करीब 25 लोग बचे थे गुंडों का बॉस काफी दर गया था, उससे अब लग रहा था की वो भी नहीं बचेगा, वो इक दिवार के पीछे चुप अपने साथियो को मरते देख रहा था, उनकी दिल दहला देनी वाली चीखे सुन वो कम्प रहा था..)



बॉस- ए बाघों ोये जिसे अपनी जान बचानी है, येह सेल तुम सबको मार देंगे में भी नहीं बचूगा बहनचोद में तोह जा रहा है हु, इतना बोल वो बॉस अपने साथ अपने 5 साथियो को लेके चुपके से पीछे के दरवाजे से निकल गया..)



सवाना- इनका बॉस भाग रहा है..

शिवं- में देखता हु इन्हे, तुम इन्हे सम्भालो..



(शिवं जल्दी से उठा और सीढ़ियों से छलांग मरता हुआ ग्राउंड फ्लोर पर ा पांच, वो बाघ के बहार को आया और उसने देखा बॉस अपने साथयो के साथ इक कार में चला गया..)



बॉस- जल्दी बाघों रे कही साला पीछे से न मार दे..



(गुंडे ने कार की स्पीड और तेज करदी, और कार बिल्डिंग से बहार निकल दी, थोड़ी देर बाद वो सेहर के बिच में ा गए थे, इक गुंडे ने देखा की करीब 50मीटर की दूरी पर इक लड़का सकद के बीचो बिच खड़ा है,)



बॉस- येह कोण है बे साला..

गुंडा- (हैरानी से) बॉस येह तोह वही है जो हमारा पीछा कर रहा था, पर येह इतनी जल्दी कैसे ा गया यहाँ..

बॉस- (choonk.ta हुआ) क्या!, येह साला यहाँ कैसे ा गया, इक काम कर कार मत रोकना ुद्धा दे सेल को..

गुंडा- ठीक है बॉस..



(अब सेहर के लोग भी देख रहे थे की सामने से गद्दी ा रही है और येह पागल लड़का सड़क के बीचो बिच खड़ा है, गद्दी अपनी रफ़्तार से शिवं की तरफ ा रही थी, उसकी नजर सीधी कार में पिछली सीट पर बैठे बॉस पर थी, गद्दी करीब अत्ति गई शिवं ने अपनी पीठ पर तंगी तलवार निकल ली तलवार निकलते hi वो गरम होने लगी, अब तलवार किसी अग्ग की बैठी की तरह गरम हो चुकी थी, वो इक डैम लाल हो गई थी, शिवं के फेस पे मास्क था जो उसने कबि नहीं उतरा था, मास्क के ऊपर उसकी नीली आखे सफ़ेद धुआँ चोर रही थी..)



(aas-paas काफी लोग येह मंजर देख रहे थे, कुछ वीडियो बनाने में लगे हुए थे, शिवं के हाथ इक लम्बी गरम तलवार देख किसी की हिमत नहीं हो रही थी कोई उससे जेक उस कार से टकराने से बचाये..)



(और अब कार बस शिवं से कुछ hi कदम की दुरी पर थी की शिवं ने इक डैम से अपनी तरफ अत्ति कार की और दूरह लगा दी..)



बॉस- ीह चूतिये को देखो, लगता है सत्या गया है, कुचल दे सेल को निचे..

Aas-Paas के लोग- येह लड़का क्या पागल हो गया है..

- येह खुली बैल के सामने दूरह लगा रहा है..

- इसने क्या कोई फिल्म और गेम समाज राखी है की इक बार मार गया तोह इसकी दूसरी लाइव बच जाएगी..

- क्या पता भाई जो भी हो लकिन मेरी येह वीडियो तो मिलियंस में जानेवाली है..



(कार और शिवं में थोड़ा सा फैसला बाकि था की शिवं ने ऊपर की और इक ऊंची जम्प मर तलवार को हवा में ऊपर की और फिर सिदा कर इक डैम से निचे की और कर दी और तलवार की तीखी नोक सीधी जा सड़क से टकराई और तलवार का थोड़ा सा हिस्सा सड़क में धस्स गया, और शिवं खुद को हवा में hi उड़द तलवार की मुठी पर अपनी इक के ऊपर इक हाथ की काल्हि रख अपनी टंगे सीधी आसमान की और कर तलवार की तरह सीधा लकिन उल्टा तलवार पर खड़ा हुआ था, अब तलवार की तीखी धार कार की तरफ थी और उसके ऊपर उल्टा कहड़ा था शिवं, उधर सेहर वालो के मुँह खुले पड़े थे..)



(इधर गुंडों को कुछ सोचने समजे का मौका तक न मिला और कार फुल स्पीड से जा तलवार से टकराई, छहारररर की आवाज के साथ गरम और लम्बी तलवार कार को ऊपर से निचे तक सेंटर से चीरती हुई पिछली सीट पर बैठे बॉस को और पूरी कार को 2 हिस्सों में करती सड़क से घसीटी हुई इक लेफ्ट इक राइट साइड जा गिरी..)



(बॉस के तोह दोनों टुकड़े कार के दोनों टुकड़ो के साथ hi चले गए, अब शरीर से क्या करेंगे जब आत्मा hi यमराज ले गया तोह, लोग तोह दर के मरे दूर बाघ गए, तभी बचे हुए गुंडे कार से बहार निकलने लगे तोह इक भूयओम की आवाज के साथ कार के दोनों टुकड़ो में विस्फोट हो गया, और सरे गुंडे भी वही जल के मार गए..)

इक लड़का- भाई साहबब क्या मरे है सब क सब..


लड़का.2- भाई वो बिच वाले को दर्दनाक मौत मिली है..

लड़की- कोण कहता है की बिच में बैठना सेफ होता है..

लड़का.3- भाई में तोह अग्गे से दिग्गी में बेथ जायूँगा लकिन बिच में नहीं बेठुंगा..

(शिवं भी वह से जल्दी से रफू चाकर होक वापिस बिल्डिंग की तरफ जाने लगा....

《2656 -वर्ड्स》
 
टाइम नहीं था भाई अज्ज इस लिए जितना हो सका लिखा हु..

हाँ भाई हसीना hi अस्सी है तोह नशा तोह चढ़ेगी hi..

मोत को लोग ु hi बदनाम करते है...

तकलीफ तो जिंदगी देती है


क्या मस्त बात बोली है भाई..

हाँ कल में part कम्पलीट कर दूंगा..

शुक्रिया भाई बने रहने क लिए..
 
ः अरे भाई अपने तोह दिल क टुकड़े टुकड़े कर दिए..

ाचा बताता हु देखो आपके अंदर नफरत लेके ांनी उन् गुंडों क लिए यही मेरा मकसद था, की अप्प उन्हें उतनी hi नफरत करे जितनी की हीरो कर रहा है, उसके बाद जब हीरो उससे लड़ कर या मर कर सकूँ लेगा वही सकूँ आपको मिलेगी. हर तरफ ख़ुशी ख़ुशी और खुसी देखि आदमी को स्टोरी बोरिंग लगने लगती है..

और रही बात स्टोरी की देखो भाई हीरो क पास कोई सुपर नेचुरल पावर नहीं है और वो तोह खुद मेजर है अभी कल hi उसमे जान आयी है, लकिन फिर भी जान पर खेल बहनो तक पांच hi जाता है, और भाई अभी तोह स्टोरी स्टार्ट हुई है और आपको नफरत भी हो गई.. सॉरी भाई आपका दिल दुखिया तोह माफ़ी चाहूंगा....
 
ठीक है दोस्तों!..

दोस्तों बात येह थी की अप्प लोग स्टोरी को पूरा फील करके पढ़ते हो इक्नोव सब वैसे hi पढ़ते है, अप्प उस हीरो को खुद में फील करते हो उसकी ख़ुशी, गमी, नफरत जो उससे होता वो आपको फील होता है, और वही तोह मेरा मकसद है, अब आपके अंदर नफरत पैदा कर रहा हु तोह सामने वाले क लिए लकिन वो नफरत तोह आप मेरे पे निकल दिए, हिहि, देखो अगर में कोई दुख बारे, दर्द भरा सीन क्रिएट नहीं करुगा तोह स्टोरी अग्गे कैसे बढूंगा?.. कल से मुझे काफी लोगो के मश्ग ा रहे है तू ऐसा है फलाना दिनका, तोह मुझे लगा शयद अप्प लोगो मेरी लिखावट पसंद नै है, और अप्प अग्गे कैसे पढ़ पाओगे. इस लिए आगे लिखा नै. लकिन भाई साहब, जितने मुझे हेट मश्ग ए थे उससे ट्रिपल तोह अचे मश्ग ए, मुझे पता नै मेरे इतने सरे साइलेंट रीडर्स है सबको थैंक्स... सॉरी मैंने अप्प सब को निराश किया अग्गे से ऐसा नै होगा.. और दोस्तों कल रात ठीक 9बजे अपडेट आएगा..
 
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