TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 4 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

अपडेट-18

अन्निका- हाँ दीदी.. मैंने आरुषि डीडू को बोल दिया है की भैया ए तोह उन्हें मुझसे मिलवाने बेज देना...

तान्या- ओह्ह्ह मतलब राजकुमार खुद आएंगे अपनी राजकुमारी से मिलने..?

अन्निका- और नहीं तोह क्या.. अगर वो नहीं ए तोह हम क्रोधित हो जायेंगे.. और aas-pass क सभी इलाके जला क भस्म कर देंगे... हहै…

तान्या- हाहाहा.. चल अब चले घर…

अन्निका- हाँ चलो दीदी…

|अब अग्गे|

|बैक तो तुषार|

कैसर- शिवं स्टार्ट कर जल्दी..

(शिवं अपने हाथ में पकडे इक रिमोट को ों कर देता है.. और चेयर में लगी मशीन अपना काम करना स्टार्ट कर देती है.. वो लोहे की चेयर dhire-dhire अब गरम होने लगी थी.. करीब और 2मिंट बाद चेयर काफी गरम हो चुकी थी, अब गुंडे के चूतड़ गरम होने लगे थे. उससे एहसास हो चूका था की उसके साथ क्या होने वाला है..)

गुंडा- (डरता हुआ) bha.i.. येह कुर्सी बहुत गरम होती जा रही है.. अह्ह्ह्हह्ह भाई.. भाई में जल जायूँगा…

कैसर- न न इतनी जल्दी नहीं जलेगा तू.. अभी तोह गेम शुरू भी न हुआ.. बस थोड़ी देर और थाहार…

(चेयर में लगी मशीन ने अपना कमाल दिखते हुए चेयर को और गरम करना शुरू कर दिया.. गुंडे की पूरी बॉडी निचे से धीरे धीरे जलने लगी.. और उसके कपडे इस वक़्त उसकी बॉडी से चिपक चुके थे और उन् में से धुआँ निकलने लगा था.. गुंडा अब बर्दाश्त करने की हद में न था और चिलए जा रहा था…)

गुंडा- (रोटा हुआ) आआह्ह्ह्ब्भई आअह्ह्ह नाहीइ भाई मुजी छोड़ दी भाई माफ़ करदी... जानी दे कुट्टी.. मर जायूँगा.. रख बन जायूँगा मेंनननन…

(गुंडा तड़फ रहा था.. उठने की नाकाम कोशिश कर रहा था लकिन हिल तक नहीं प् रहा था...)

कैसर- शिवं!.. रोक दो…

(शिवं रिमोट का स्विच ऑफ कर देता है.. अब चेयर dhire-dhire ठंडी होनी चालू हो गयी थी.. लकिन गुंडे की तोह पहले hi फैट चुकी थी.. उसकी पीठ, चूतड़, टैंगो और बाजु के चेयर से दबे हुए हिस्से के कपडे जल क उसकी बॉडी से चिपक चुके थे…)

गुंडा- (दर्द से तड़फते हुए) भाई.. भाई मुझे पुलिस क हवाले करदे.. चाहे मुझे उम्र कैद की सजा दिलवादे. पर यह अत्याचार मुझ पर मात कर भाई.. तुम इक निहथे पे वॉर कर रहे हो..

कैसर- और जो तू कर रहा था क्या वो अत्याचार नहीं था.. 10 आदमियों को लेकर स्कूल में घुस गया मेरी मासूम बहिन को स्कूल के बीचो बिच चूमा.. उससे सबके सामने जलील किया.. उससे उठा क ले गया अपनी पावर क डैम पर. क्या वो सही था.. और तुजे तोह 60 आदमियों में से निकल क लाया हु में. ताकि तुजे tadpa-tadpa क मार सकू तभी मेरे मन को सकूं मिलेगा…

गुंडा- भाई ऐसा जुलम न कर.. बागवान कसम अग्गे से कुछ बुरा का…

(गुंडा अग्गे कुछ बोलता कैसर ने इक लम्बी नीदडले उसके होंठ पकड़ निचले होंठ से उपरवाले होंठ से निकल फसा दी.. उसके काळा होंठ लाल रंग में तब्दील होने लगे.. नीदडले उसके होंठो में hi अटकी थी तोह चिल्ला पाने का सवाल hi पैदा नहीं होता…)

कैसर- (इक थप्पड़ उससे मरता हुआ) बदनाम मात कर बागवान को अपनी गन्दी जुबान से… शिवं!! ों कर सेल को तड़पते देखना है मुझे…

(शिवं वापिस स्विच ों कर देता है लकिन इस बार रिमोट के 2 बटन ों करता है.. धीरे धीरे चेयर वापिस गरम होने लगी.. करीब 5मिंट बाद चेयर इतनी गरम हो चुकी थी की अब चेयर halke-halke लाल रंग में दिखने लगी थी.. गुंडे की हालत बताने लायक नहीं थी.. वो जोर जोर से नाक से सास से रहा था.. लकिन चीख नहीं प् रहा था.. अब चेयर ने अपना असली कमाल दिखना शुरू किया.. चेयर क होल्स में से lambi-lambi गरम नीडल्स बहार को एना शुरू हो गयी.. वो होल्स से बहार आयी और गुंडे के चूतड़, हाथो, पाँव और कमर में धीरे से हाफ इंच अंदर घुस क वापिस निकल गयी… गुंडा इतनी जोर से तड़प क चीखा की उसके होठो में फास्सी नीडल भी उसके होठो को फाड़ती हुई निकल क गिर गयी...)

(2मिंट तक चेयर ने अपने अप्प को शांत रखा लकिन ठंडी नहीं हुई वैसे hi गुंडे को गरम करती रही.. और करीब 2मिंट बाद, गरम होने क कारन चेयर अब गहरे लाल रंग में चमक रही थी.. इसी बिच न जाने गुंडा कितना चीखता चिलता रोटा रहा.. गुंडा की बैक साइड जल क खख हो गयी थी.. और जैसे अब वो सुन्न हो गयी थी.. की अचानक होल्स में से गरम नीडल्स वापिस निकली और गुंडे की बॉडी में 1 इंच अंदर डांस गयी.. ऐसे hi नीडल्स वापिस होल्स में चली गयी और फिर स्पीड से एक्के गुंडे को चुभ गयी.. येह प्रोसेस रिपीट होता gaya..jale पे नमक तो सुना था लकिन गुंडे को जले पे garam-garam सुई चुभ रही थी.. गुंडे की हालत देखने लायक नहीं बची थी.. क्युकी अब वो शांत हो चूका था.. अपनी जिंदगी क कुछ आखरी पल hi जी रहा था.. कपडे dhire-dhire जल रहे थे की अचानक उनमे भयानक अग्ग लग गयी.. और साथ में गुंडे की चीखे भी निकल गयी. जैसे अभी वो बेहोशी से जगह हो.. गुंडा जो पीछे से जल रहा था अब अग्गे से भी जलने लगा…

कैसर- बस बहुत हुआ.. शिवं जल्दी इससे यमराज से मिलवाओ…

शिवं- ok बॉस…

(शिवं रिमोट का इक लास्ट बटन दबा देता है.. बटन दबाते hi इक लम्बा गरम तीखा चाकू गुंडे की गर्दन क पीछे से निकल अग्गे को ा जाता है… गुंडा मार चूका था. वो बहार से उतना दिखा नहीं पाया जितना वो अंदर से तड़पा था. येह तोह बस वही जनता था. शयद अब शैतान भी उससे नरक में सजा न दे क्युकी इक भयानक सजा वो जीते जी भुगत चूका था.. कैसर और एजेंट्स कुछ देर उससे यही देखते रहे.. शिवं चेयर को ऑफ कर देता है.. सवाना जेक कैमरा बंद कर देती है…)

सफल- बॉस…

कैसर- (मास्क निकलता हुआ) हम्म..

सफल- अब क्या करना है..

तुषार- कुछ नहीं.. इसकी लाश को उठाओ और जंगल में जेक दफना दो…

(कुछ देर बाद तुषार वापिस हर्षिका क घर की और निकल जाता है.. घर पांच कर तुषार दुर्बल बजता है तोह सामने हर्षिका दूर खोलती है. और वो तुषार को देख इक स्माइल कर देती है.. तुषार क जो गुंडे को मार के चेहरे क haav-bhaav बदले हुए थे अब हर्षिका की प्यारी स्माइल देख तुषार का चेहरा खिल गया था.. वो भी मुस्कुराता हुआ अंदर ा जाता है.. और सोफे पर बेथ जाता है…)

हर्षिका- (उसके सामने वाले सोफे पे बैठती हुई) कहा गए थे आप सुभे से..?

तुषार- बस ऐसे hi थोड़ा काम था.. दीदी कहा है…

हर्षिका- वो शयद अपने रूम में hai..(par जैसे hi उससे याद अट्टा है की आरुषि उससे नाराज है तोह उसका फेस साद हो जाता है.. लकिन वो तुषार को इस बात का एहसास नहीं होने देती…)

तुषार- (उठता हुआ) ठीक है में जरा मिल क अट्टा हु दीदी से.. मुझे कुछ बात करनी है उनसे…

हर्षिका- Okay…

(तुषार जेक आरुषि के रूम के सामने खड़ा हो जाता है.. दरवाजा बंद था लकिन लॉक नहीं था.. तुषार दरवाजा को ढाका देके अंदर चला जाता है.. सामने आरुषि बीएड पे लेती फैन को घर रही थी…)

तुषार- hello दीदी..

आरुषि- (उठ क बैठती हुई) अरे तुषार तू ा गया.. कभी आया..?

तुषार- (बीएड पे बैठता हुआ) बस अभी अभी.. और आप क्या यहाँ अकेली बैठी छत को देख रही हो...

आरुषि- बस ऐसे hi.. वैसे गया कहा था तू सुभे से..?

तुषार- वो कुछ नहीं दीदी बस एजेंट्स क साथ hi था.. कुछ प्लान समजने गया था…

आरुषि- (ऊँगली दिखती हुई) पक्का न..? देख अगर तू खुद किसी से भिड़ने गया न तोह बहुत बुरा हाल करुँगी तेरा समजा…

तुषार- (उसकी ऊँगली पकड़ निचे करता हुआ) उफ्फो दीदी.. में नहीं जायूँगा किसी से भी bhidne-vhidne.. में तोह बस उन्हें अग्गे क्या करना है. सेहर में कैसे गुंडों का राज ख़तम करना है वो बताने गया था.. और एजेंट्स क साथ उनका इक बॉस भी तोह आया है. वो सब संभल लेगा अप्प मेरी फ़िक्र मत करो…

आरुषि- हम्म.. फिर ठीक है…

तुषार- वो सब छोडो दीदी. मुझे आपसे इक जरुरी बात करनी है…

आरुषि- हाँ बोल क्या बात करनी है…

तुषार- दीदी कल अपने मुझे हॉस्पिटल में किश किया था…

आरुषि- (मुस्कुरा क) हाँ किया था. तोह..?

तुषार- दीदी आप समाज नहीं रही हो.. मेरा कहना का मतलब है की आप मुझे किश कैसे कर सकती हो. ी मैं…

आरुषि- (बिच में. सीरियस होक) देख तुषार! मेरी बात सुन. जा पहले दरवाजा बंद करके आ..

(तुषार उठ क दरवाजा बंद कर देता है और वापिस आकर बीएड पर बेथ जाता है…)

आरुषि- (उसकी आखो में देखती हुई) तुषार देख! मैंने देख वही किया है जो मेरे दिल में था.. तोह मैंने तुम्हे किश कर लिया…

तुषार- (कंफ्यूज होक) दीदी आपकी कोई बात मुझे समाज नहीं आयी.. थोड़ा डिटेल में बताओ प्लीज…

आरुषि- तुषार में तुझसे प्यार करती हु. और तू भी मुझसे करता है. हैना..?

तुषार- हाँ दीदी. करता हु.. बहुत प्यार करता हु…

आरुषि- (उसके दोनों कंधो पे हाथ रखती हुई) मेरी बात सुन.. में तुजे प्यार करती हु. तू मुझे प्यार करता है..

तुषार- मैंने अभी वही बोलै दीदी…

आरुषि- (लम्बी सास अंदर लेती हुई) हष्ठ.. देख तुषार में तुजे प्यार करती हु.. बहुत प्यार करती हु.. अस ा लवर प्यार करती हु.. और तू जनता है वो किश जो मैंने तुजे किया था वो कोई बहिन अपने भाई को नहीं कर सकती.. मैंने तुजे हमेशा अपने लवर की तरह hi देखा है.. में तुझसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हु.. कब से करती हु मुझे नहीं पता.. येह फीलिंग्स कब मेरे अंदर जाग गयी येह मुझे भी नहीं पता. लकिन तेरे बिना अकेला रहना सोच क hi मेरे अंदर कुछ कुछ होने लगता है तू समाज रहा है न… (आखे गीली करती हुई) देख तुषार मुझे पता है तू भी मुझसे प्यार करता है. नहीं तोह कोई भाई इक बहिन से ऐसा छेड़खानी नहीं करता जो तू करता है. और तूने तोह खुद hi मन्ना था कल की तू मुझे प्यार करता है इक लवर की तरह.. और अब सब जानते हुए भी तू मुझे कल किये हुए किश के बारे में पूछ रहा है…

(आरुषि की बात सुन तुषार को कुछ झटके लगे थे. लकिन अब उसके भी दिल में दबे हुए अरमान जाग गए थे…)

तुषार- दीदी.. येह नहीं हो सकता.. हाँ में आपसे प्यार करता हु.. इक प्रेमी वाला प्यार करता हु.. लकिन..

आरुषि- लकिन क्या.. मजबूरी क्या है तेरी.. में हु न तेरे साथ…

तुषार- दीदी अप्प शायद प्यार में इतना भूल चुकी हो की आपको हमारा रिश्ता भी याद नहीं रहा.. हम इक भाई बहिन है.. और भाई बहिन कभी प्रेमी प्रेमिका नहीं बन सकते... दीदी में आपसे प्यार इशिता से भी पहले का करता था.. लकिन इस समाज के बंधनो के आगे में नहीं लड़ सकता. इस लिए मैंने अपने जज्बातो को कब का अपने दिल में दबा लिया था.. और इशिता को अपनी लाइफ में ले आया. (रट हुए) लकिन कुदरत का खेल तोह देखो वो भी चली गयी मुझे छोड़ क…

(तुषार अटना बोलै और अपने अस्सू पोंछते हुए उठा और दरवाजा खोल बहार चला गया.. रू तोह आरुषि भी रही थी तुषार क जाने क बाद वो और जोर से बीएड पे लेट तकिये में अपना सर दे रोने लगी...)



(इसी बात पे में यानि येह कैसर कुछ कहना चाहता है की-



~वक़्त ने हालातो ने कुछ बातों ने मजबूर कर रखा है,

मुझे तुझसे और तुजे मुझसे इक रिश्ते ने दूर कर रखा है..~

《1877 -वर्ड्स》
 
रीड प्लीज...

दोस्तों इक क्वेश्चन है मुझे आप सबसे. की क्या अप्प कैसर को पसंद करते हो ी मैं क्या उसकी दरिंदगी, उसका टार्चर करना पसंद है आपको..?

में टार्चर सीन को बहुत लम्बा खींच लेता हु.. शायद कुछ लोग येह भी कहे की इक गोली मार आदमी को ख़तम क्र न.. ऐसे सीन लिखने में मुझे मजा अत है. लकिन क्या आपको इसे पढ़ क मजा अत है.. मुझे येह जानना है.. अप्प सभी रीडर्स से और मेरे साइलेंट रीडर्स से भी इक रिक्वेस्ट है की आप बताये की क्या मैं ऐसे सीन्स को थोड़ा काम करदु? या फिर ख़तम hi करदु?...

अभी स्टोरी क 2 प्लाट निकल सकते है. तोह में इस लिए आपसे पूछ रहा हु.. में 1,2 रीडर्स से सहमत होक प्लाट चेंज नहीं करना छटा क्युकी इससे बाकि लोग नाराज हो सकते है.. इस नोट को पढ़ने वाले सभी रीडर्स से रिक्वेस्ट है की अपनी राय दे..

थैंक्स...
 
अपडेट-19



(तुषार अटना बोलै और अपने अस्सू पोंछते हुए उठा और दरवाजा खोल बहार चला गया.. रू तोह आरुषि भी रही थी तुषार क जाने क बाद वो और जोर से बीएड पे लेट तकिये में अपना सर दे रोने लगी...)

(इसी बात पे में यानि येह कैसर कुछ कहना चाहता है की-

~वक़्त ने हालातो ने कुछ बातों ने मजबूर कर रखा है,

मुझे तुझसे और तुजे मुझसे इक रिश्ते ने दूर कर रखा है..~



|अब अग्गे|



(हमेशा की तरह सवाना ने कैसर की दरिंदगी की वीडियो इंटरनेट पे अपलोड करदी थी.. वीडियो को यूट्यूब पर अपलोड किया जाता था.. जहा पहली hi वीडियो ने यूट्यूब हंगामा मचा दिया था और चैनल को 10मिलियन सुबस तक पौंछा दिया था.. अभी चैनल 50मिलों पर कर चूका था.. दुनिया के हर कोने से लोगो ने सब्सक्राइब कर रखा था और इंतजार में थे की कब अगली वीडियो अपलोड होगी.. खेर सवाना ने तीसरी वीडियो को एडिट किया.. और एडटिंग में वीडियो का बैकग्राउंड अछि तरह से बलौर कर दिया ताकि येह वीडियो कहा शूट हुई है पता न लगाया जा सके.. और jaha-jaha जरुरत नहीं थी वह से ऑडियो को भी म्यूट कर दिया.. वीडियो अपलोड होते hi दुबारा दुनिया में इक ha-ha कर मच गया.. हर न्यूज़ चैनल में कैसर का ज़िकर होने लगा.. क्यों, कहा, कैसे. खुद hi सवाल करने और खुद hi उनके जवाब भी देने.. येह न्यूज़ वाले अछि तरह से कर लेते है…)



(सात समुंदार पर करीब 500फ़ीट की एक ुचि बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर एक लड़का हाथ में एक एप्पल और दूसरे हाथ में मोबाइल लेके कोई वीडियो देख रहा था..

लड़का- फुल ब्लैक सूट बूट में, दासों उंगलियां में डायमंड रिंग्स डाली हुई, halki-halki बियर्ड, लाइट ब्लू कोलोउरेड हेयर, 6फ़ीट हाइट, आगे 23 साल, सिक्स पैक बॉडी पर ज्यादा जानवरो वाली नहीं...



लड़का- (एप्पल कहते हुए वीडियो देखता हुआ) हम्म.. अबे येह कोण सा जिव है.. (सामने सोफे पे बैठे एक आदमी से) कोण है चाचा येह दरिंदा.. (अग्गे वीडियो देख हेरैं होता हुआ) इसकी बहिन को घर से उठा ले जाऊ.. बहनचोद क्या मौत देता है साला जानवर कही का...

चाचा- (उठता हुआ) इसका नाम कैसर है.. इंडिया में रहता hai..pata नहीं क्या वझे है जो येह अस्सी दरिंदगी कर रहा है.. दुनिया वालो क दिल हिला रखे है इसने... कुछ hi दिनों में पूरी दुनिया में फेमस होने वाला पहला बाँदा है येह...

लड़का- (सोचते हुए) हम्म कैसर! मतलब यूनिवर्स का सबसे ब्राइटेस्ट ऑब्जेक्ट!!. जो अभी एअर्थ पर चमक रहा है... वझे कोई ठोस hi होगी नहीं तोह एक गोली से मर जाने वाले आदमी को कोई क्यों इतना तड़पता.. गोली से तोह बस आदमी दुनिया से जाता है.. dil-o-dimag से निकलने क लिए येह सब करना पड़ता है..

चाचा- (हस्ता हुआ) हाँ! और मुझसे बेहतर येह कोण जान सकता है...

लड़का- (मुस्कुराते हुए) बिलकुल सही चाचा.. चलो मिलते है इससे...

चाचा- (हैरानी से) मिलना है!! लकिन क्यों..? येह हमारे किस काम का..?

लड़का- जुंग शुरू होने वाली है चाचा!!.. ऐसे दरिंदा की बहुत जरुरत है हमें...

चाचा- पर उसमे अभी बहुत टाइम है.. और दरिंदे तुम नहीं हो क्या.. तेरे से बड़ा दरिंदा इस दुनिया में कोई नहीं है.. येह तोह अभी बचा hai..Rudra...

रूद्र- क्यों चाचा आप क्या 38 साल के नीलके थे सीधा छूट से..? बचा है तोह बड़ा कर देंगे.. अभी इसके बारे में पता लगाने की कोशिश करो.. कहा से है, क्या करता है, परिवार है नहीं है, और मकसद क्या इसका ऐसे करना का सब पता करो...

चाचा- हम्म.. चल ठीक है अगर तू कहता है तोह.. में पता लगता हु इसका..



(वही दूसरी और जगाला की हवेली में लाला और जग्गू अपने आदमी क मौत की वीडियो देख गुस्से से अग्ग बबूला हो रहे थे...)



लाला- (गुस्से में) येह साला कैसर.. कैसर.. कैसर!!! समझता क्या अपने आपको.. बहुत दिमाग है इसके पास.. हमारे लोगो के साथ दरिंदगी दिखायेगा तोह हमारे लोग दर क येह सब छोड़ देंगे.. (मुक्का टेबल पे मरता हुआ) इसकी माँ की छूट तोह में मार न पाया लकिन इस बहनचोद की गांड जरूर मरूंगा...

जग्गू- भाई क्या करना है फिर इसका.. जो प्लान बनाया है वो बदलना है क्या..?

लाला- (सोफे से उठता हुआ) नहीं!.. प्लान जैसे है सही है.. वो तोह उसके परिवार को बर्बाद कर देगा लकिन पहले मुझे इससे सबक सीखना है...

जग्गू- (उठ क उसके पास जाता हुआ) तोह भाई कैसा सबक सीखना है...


लाला- (सामने लगे T.V में कैसर की वीडियो देखता हुआ) बहुत शोक है न इससे वीडियो बनाने का.. अब हम बनायेगे वीडियो.. जग्गू!!...

जग्गू- हाँ भाई..? बोलो..

लाला- पकड़ किसी लड़की को और कैमरा लगा क रपे कर उसका.. और बिलकुल लड़की भी उसी तरह तड़पनी चाहिए जिस तरह येह मादरचोद हमारे आदमियों को तड़पता है.. सेल को लगते है वीडियो बना क येह लोगो में अपने लिए एक उम्मीद की किरण जगा रहा है.. तू जा और अस्सी जबरदस्त ठुकाई कर लड़की की.. की इस हवेली में उसकी चीखे गूँज उठे.. और वीडियो बना क दाल इंटरनेट पे जिसे देख येह सेहर हमारे दर से वापिस thar-thar कंम्प जाये...

जग्गू- (खुश होता हुआ) वाह भाई वाह! क्या दिमाग लगाया है अपने.. इससे वो पागल लड़के की अकाल भी ठिकाने ा जाएगी.. साला वीडियो बना क हमें डरता है मादरचोद...



|Harshika’s हाउस|



(आरुषि क रूम से जाने क बाद तुषार वापिस हॉल में ा जाता है.. यहाँ हर्षिका सोफे पर बैठी मोबाइल में कुछ वीडियोस देख रही थी.. तुषार अपनी आखे अछि तरह से साफ़ करता है और जेक हर्षिका क साथ ट्रिपल सीट सोफे पे बेथ जाता है... हर्षिका का अभी भी कोई धयान नहीं था.. वो बस मोबाइल में खोई हुई थी.. तुषार बेथ क बस उससे देखे जा रहा था.. उसके माथे पर लहरा रहे बालो को देख रहा था.. उसके प्यारे से फेस को देख रहा था जो की अजीब से भाव ला रहा था वीडियो dekhte-dekhte.. तुषार हल्का सा खिसक क उसके करीब जाता है और धीरे से अपने हाथ उसके फेस की तरफ बढ़ा देता है और baar-baar पढ़ रही उसके फेस पर ज़ुल्फ़ें को पकड़ उसके कण के पीछे कर देता है.. अपने हाथ पर उसके कोमल फेस को फील करते hi उसका rom-rom में खुश हो जाता है.. उधर हर्षिका को जब अपने फेस पर किसी का हाथ महसूस हुआ तोह वो एक डैम से सामने की और देखने लगी.. लकिन जब उसने देखा की सामने उसका प्यार उसकी मोहब्बत बड़े प्यार से उससे देख रही है.. जा शायद उससे देख खोई हुई है.. जब उससे एहसास हुआ की abhi-abhi तुषार ने उसके साथ क्या किया तोह वो थोड़ा शर्मा क अपनी पलकें निचे झुका लेती है.. उसका ऐसा शर्माना देख तुषार क फेस पर स्माइल ा जाती है.. इस वक़्त वो किसी होश में नहीं था.. वो बस डूबा हुआ था हर्षिका नाम क समंदर में.. कुछ देर तक हर्षिका की नजरें जमीन को देखती रही और तुषार की नजरें हर्षिका को.. फिर हर्षिका ने एक बार आँख उठा क देखा की तुषार तोह बस उससे देखे जा रहा है तोह वो बोली...)



हर्षिका- (धीरे से स्वीट आवाज में) क्या हुआ आपको..?

तुषार- एक खाई में गिर गया हु...

हर्षिका- कोनसी खाई में..?

तुषार- आपके दिल की...

हर्षिका- (शर्मा क निचे देखती हुई) ाचा.. इतनी गहरी है हमारे दिल की खाई..?

तुषार- जितनी भी गहरी हो.. अब में बहार नहीं एना चाहता...

हर्षिका- (उसकी आखो में देखती हुई) ाचा.. और अगर में आपको जबरदस्ती बहार निकल दू तोह..?

तुषार- अप्प निकल hi नहीं पयोगी...

हर्षिका- क्यों...

तुषार- क्युकी आपको में अपने दिल की खाई में फ़ेंक दूंगा...

हर्षिका- (स्माइल करती हुई) में क्यों जयुंगी आपके दिल की खाई में. अगर वह अपने पहले से किसी और को फ़ेंक रखा होगा तोह...

(अब तक तुषार होश संभल चूका था और हर्षिका से बाते करने का उसका मन हो रहा था.. वो हर्षिका के थोड़ा और करीब जेक उसका एक हाथ अपने हाथ में लेकर उसकी उंगलियों को अपनी उंगलियों में दाल लिया.. और बोलै...)



तुषार- तोह अप्प वह उससे लड़ कर हमारे दिल पर कब्ज़ा कर लेना...

हर्षिका- हमें नहीं अट्टा लड़ना...

तुषार- क्यों आपके पास हमारे प्यार की ताकत नहीं होगी क्या...

हर्षिका- (शर्मा क वापिस निचे देखि हुई. उसका हाथ अभी भी तुषार क हाथ में hi था...) बस कीजिये तुषार जी.. हमारे पास लफ़ज़ नहीं है कुछ बोलने को...

तुषार- (उसके चेहरे को हलके से निचे से पकड़ अपनी तरफ करते हुए..) पर हमारे पास तोह इतने लफ़ज़ है की आपको पूरी जिंदगी भी सुनाता राहु तोह भी काम न होंगे...

हर्षिका- इक दिन ऐसा अट्टा है जब किसी का किसे से मन भर hi जाता है...

तुषार- (अपना दूसरा हाथ भी उसके हाथ क ऊपर रखता हुआ) हाँ एक दिन ऐसा आएगा जब में आपसे थोड़ा. थोड़ा सा बस थोड़ा सा ज्यादा प्यार किसी और को करूँगा...

हर्षिका- (साद होक वापिस अपना हाथ खेंच क) बस देखा न.. और वैसे किस्से करोगे..?

तुषार- (स्माइल क साथ) हमारी प्यारी golu-molu बेटी से...

(हर्षिका पहले तोह एक डैम से मुस्कुराई और बाद में शर्म से pani-pani हो गयी...)



तुषार- क्या हुआ.. बोलो न कुछ...

हर्षिका- (उसकी तरफ देखि हुई) और अगर हम दोनों से आपका प्यार काम हो गया तोह...

तुषार- (उसकी आखो में देखता हुआ) तोह समाज जाना की में जिन्दा नहीं हु...

हर्षिका- (एक डैम से उसके मुँह पे हाथ रखती हुई) ष्ही.. बस ऐसा नै बोलते...

तुषार- (उसका हाथ अपने मुँह पर से हटाता हुआ अपने हाथ में पकड़ क) तोह अप्प हमें मज......



(तुषार अग्गे कुछ बोलता तुषार को आरुषि बहार अत्ति हुई दिखाई दी तोह उसने हर्षिका है हाथ छोड़ दिया और थोड़ा सीधा होक बेथ गया.. हर्षिका को पहले तोह तुषार का ऐसे अचानक से रियेक्ट करना समाज नहीं आया लकिन फिर जब उसकी भी नजर आरुषि जो अब उसके पास hi ा गयी उस पर गयी तोह वो भी थोड़ी साइड होक बेथ गयी...)



आरुषि- तुषार वो तेरे जाने क बाद अन्नू आयी थी यहाँ.. कहती तुजे सरप्राइज देना है मिल कर.. पर तू तोह था नहीं इस लिए मैंने कह दिया की तेरे भैया तेरे से एक्के मिल लेंगे...

तुषार- (साद होक) ओह्ह मेरी गुड़िया आयी थी... चलो में जेक उससे मिल लेता हु.. पता नहीं येह लड़की 2,3 दिन भी नहीं रह पति मेरे बिना तोह इतने दिन कैसे रहेगी... खेर दीदी में एक बार मिल क अट्टा हु उससे...

आरुषि- Ok...

《1689 -वर्ड्स》
 
थैंक्स भाई रिव्यु क लिए..

बिलकुल ठीक खा अपने भाई जगाला ने जो रिएक्शन दिखया है वीडियो पे वो तुषार को भरी पड़ने वला है.. और तुषार की गलती थी इसमें सही खा अपने..

अग्गे क्या होगा देखते है. तुषार पर क्या bet.ti है इस को लेकर...

शुक्रिया वन्स अगेन भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-20

आरुषि- तुषार वो तेरे जाने क बाद अन्नू आयी थी यहाँ.. कहती तुजे सरप्राइज देना है मिल कर.. पर तू तोह था नहीं इस लिए मैंने कह दिया की तेरे भैया तेरे से एक्के मिल लेंगे...

तुषार- (साद होक) ओह्ह मेरी गुड़िया आयी थी... चलो में जेक उससे मिल लेता हु.. पता नहीं येह लड़की 2,3 दिन भी नहीं रह पति मेरे बिना तोह इतने दिन कैसे रहेगी... खेर दीदी में एक बार मिल क अट्टा हु उससे...

आरुषि- Ok...

|अब अग्गे|

(तुषार हर्षिका के घर से निकल अपने घर की और चल पड़ता है… घर पांच कर तुषार दुर्बल बजता है और सामने तान्या दूर खोलती है.. तुषार एक बार उसकी तरफ देखता है और फिर तान्या की साइड से निकल जाता है.. तान्या घूम कर उसको पीछे से जाती हुई देखती रहती है.. पापा घर पर नहीं थे और माँ अपने रूम में थी.. तुषार अन्निका के रूम की और चल देता है.. दरवाजे को हल्का सा धक्का दे कर तुषार धीरे से अंदर चला जाता है.. सामने बीएड पर अन्निका पेट क बल लेती किसी किताब में खोयी हुई थी.. तुषार दबे पाव ठीक उसके सामने जेक खड़ा हो जाता है और…

तुषार- (अपनी दोनों बहे ऊपर की और फेहला क मोती आवाज में) हूहीहैहहहहहाआआ….

(एक दम से तुषार को अपने सामने देख और उसकी अस्सी भयानक आवाज से उसका नाजुक न दिल दर जाता है और किताब उसके हाथो हवा में उड़द जाती है और वो चिल्लाने लगती है …

अन्निका- aaahhaahhhhhhhhhhaahh कुओं

(हड़बड़ा के बीएड पे अपने घुटनो पर बेथ जाती है.. उसकी आखें बिग गयी थी.. वो हलके हलके आंसू बहता हुई तुषार के चेहरे को देखे जा रही थी.. जो मुस्कुराता हुआ उससे देख रहा था…)

अन्निका- (सुबकती हुई अपनी आखे साफ कर, धीमे से) भैया…

(तुषार ने अपनी गुड़िया की आखो में आंसू देखे तो उसके लगने लगा की येह मजाक कर उसने अपनी लाइफ की सबसे बड़ी गलती कर दी…)

तुषार- (उसके करीब जाकर बैठता हुआ) गुड़िया… (और उसके आंसू साफ़ कर उसके माथे पर किश कर देता है) तुम तोह बहुत दर गयी गुड़िया.. में तोह छोटा सा मजाक करके तुम्हे सरप्राइज देना चाहता था…

अन्निका- (मुस्कुरा उसके सीने से लगती हुई) भैया अप्प बहुत ख़राब हो.. मुझे लगा कोई बहुत ा गया और अब वो मुझे मरेगा…

तुषार- (उससे गले लगा क) कोई नहीं मरेगा तुम्हे.. में हु न…

अन्निका- अभी अपने hi तोह डराया मुझे…

तुषार- (उसके गाल खींचता हुआ) अरे मेरा गुड्डू बहुत दर गया था.. मैंने तोह सोचा में आपको सरप्राइज दूंगा…

अन्निका- बहुत डरावना सरप्राइज था.. अप्प ऐसे भी तोह कर सकते थे की.. (बहे फैलती हुई) गुड़िया सरप्राइज! देखो में ा गया तुमसे मिलने!!... पर नहीं आपको तोह डरना था न मुझे…

तुषार- ाचा सॉरी बाबू अग्गे से नहीं करूँगा.. ok..?

अन्निका- Okay..

तुषार- ाचा दीदी बोल रही थी की तुम हर्षिका जी के घर आयी थी मुझे सरप्राइज देने…

अन्निका- हाँ भैया में आयी थी स्कूल से सीधा हर्षिका दीदी के घर चली गयी थी आपसे मिलने पर अप्प तोह घर पर hi नहीं थे…

तुषार- स्कूल से सीधा आयी थी तुम.. किसके साथ..?

अन्निका- वो तान्या दीदी क साथ…

तुषार- तान्या!!!

अन्निका- हाँ भैया.. क्यों क्या हुआ..

तुषार- कुछ नहीं.. ाचा अब मिल लिया न मुझसे तोह क्या में जाऊ..?

अन्निका- (साद होक) क्या भैया इतनी जल्दी.. abhi-abhi तोह ए हो..

तुषार- रात होने वाली है गुड़िया.. मुझे जल्दी निकलना चाहिए…

अन्निका- (हाथ पकड़) नहीं!! अप्प नहीं जाओगे.. अप्प अज्ज रात यही रहोगे.. मेरे साथ…

तुषार- लकिन..

अन्निका- लकिन वाकिन कुछ नहीं.. अप्प अब कल सुभे hi इस घर से निकल पयोगे.. अज्ज आपको परमिशन नहीं है बहार जाने की…

तुषार- ाचा ठीक है भाई.. में इधर hi हु अज्ज रात.. अपनी गुड़िया के पास.. Okay..

अन्निका- (खुसी से गले लग क) एस्सस!! थैंक्यू भैया.. अप्प बहुत प्यारे हो…

तुषार- (है क) अरे में कहा प्यारा हु भाई…

अन्निका- पर मेरे लिए तोह हो न अप्प.. (गाल खींचती हुई) मेरे प्यारे से भैया…

तुषार- हाँ वो तोह में हु.. ाचा में माँ से मिल लू कितने दिन हो गए उनसे मिले…

अन्निका- हाँ ठीक है चलो…

(दोनों उठ क बहार हाल में ात्ते है और तुषार माँ को आवाज लगता है…)

तुषार- माँ!! माँ कहा हो…

माँ- (रूम से बहार अत्ति हुई, स्माइल क साथ) अरे बीटा तुषार तुम.. कब ए.. (और एक्के उससे गले लगा लिया)

तुषार- बस माँ थोड़ी देर पहले…

माँ- ाचा और आरुषि कहा है…

तुषार- वो दीदी नहीं आयी माँ में अकेला hi आया हु.. (अन्निका की और देख) येह पागल लड़की का मेरे बिना मन नहीं लगता है.. तोह इससे मिलने ा गया…

अन्निका- (मुस्कुरा क) हाँ भैया मुझसे मिलने ए है…

माँ- (अन्निका क सर पे हाथ फेरती) इस पागल लड़की का hi नहीं तेरी इस पागल माँ का भी मन नहीं लगता है तेरे बिना.. वो तो मेरी मज़बूरी है की तुजे आरुषि क साथ बजाना पद रहा.. वो दोनों लड़किया अकेली है घर पर इस लिए...

तुषार- सही कहा माँ में तोह बस थोड़ी देर क लिए इससे मिलने आया था और येह है की मुझे अब जाने नहीं दे रही है.. दीदी और उनकी फ्रेंड उधर अकेली है...

माँ- नहीं! अब तू नहीं जायेगा कही.. आरुषि के पास हम 2 गार्ड बेज देंगे.. तुम इतने दिन बाद घर ए हो अब नहीं जाओगे…

तुषार- ठीक है माँ.. अप्प गार्ड्स को बोल दो.. और हर्षिका जी क घर भिजवा दो उनकी सेफ्टी क लिए…

माँ- ठीक है में 2 क्या 3 गार्ड्स को बेज देती हु.. और तूने बता खाना खाया या नहीं..

तुषार- नहीं माँ अभी नहीं खाया बहुत भूख लगी है…

माँ- ठीक है बेथ में लगाती हु खाना…

तुषार- Okay माँ…



《932 -वर्ड्स》
 
अपडेट-21

माँ- ठीक है में 2 क्या 3 गार्ड्स को बेज देती हु.. और तूने बता खाना खाया या नहीं..

तुषार- नहीं माँ अभी नहीं खाया बहुत भूख लगी है…

माँ- ठीक है बेथ में लगाती हु खाना…

तुषार- Okay माँ…




|अब अग्गे|



(रात को खाना खाने क बाद सभी apne-apne रूम में चले गए.. तुषार भी अभी अपने रूम में बैठा था.. कुछ देर बाद रूम का दूर खुलता है और तान्या अंदर ा जाती है.. वो दूर क पास hi कड़ी थी अपना सर निचे किये.. तुषार की उस पर नजर पड़ती है तोह वो मुस्कुरा देता है…



तुषार- तान्या!!..



(तान्या बस वही चुप चाप कड़ी रही…)



तुषार- तान्या…



(तान्या dhire-dhire अपना सर निचे किये और अपने दोनों हाथो की उंगलियों को आपस में मरोड़ती हुई तुषार क बीएड क पास जाकर कड़ी हो जाती है…)



तुषार- क्या हुआ तान्या…

तान्या- (अपना सर उठा उससे देखि हुई) बैठने को नहीं कहोगे…

तुषार- हाँ बैठो न…



(तुषार अभी पीछे बीएड से पीठ टिका क लेता था और तान्या ठीक उसके पास आकर बेथ जाती है…)



तुषार- तान्या.. सब ठीक है न..?

तान्या- (धीमे स्वर में) हम्म. सब ठीक है…

तुषार- तोह फिर तुम यहाँ.. मेरे रूम में.. तुम्हे पता है एक साल बाद तुम मेरे रूम में आयी हो…

(तान्या को वो पल याद ा रहे थे जब वो और अन्निका तुषार को कास क गले लगा क सोया करती थी.. इन दोनों में खूब लड़ाई हुआ करती थी की कोण अज्ज तुषार क साथ सोयेगा.. येह सब सोचते hi उसकी आखें बिग गयी..)



तान्या- (बेगहि आखों से मुस्कुरा क) तुषार वो भी क्या दिन थे न जब में अन्नू से लड़ क तेरे साथ सोया करती थी…

तुषार- (वो यादें याद कर मुस्कुराता हुआ) हम्म.. तुम तोह मेरे साथ सू जाया करती थी लकिन मेरी गुड़िया साडी रात दीदी से तुम्हारी शिकायत कर रोटी रहती थी…

तान्या- हाँ.. बहुत भोली है न अपनी अन्नू.. कोई इतना मासूम भी कैसे हो सकता है.. मुझे तोह kabhi-kabhi चिंता होती है उसकी की कही….

तुषार- (बिच में) की कही कोई हमारी अन्नू का गलत फयदा न उठा ले.. यही न..?

तान्या- हम्म्म…

तुषार- तुम्हे लगता है में ऐसा कुछ होने दूंगा.. अगर उससे एक खरोच भी आयी (थोड़ी भरी आवाज में) तोह पूरी दुनिया मिटटी में मिला दूंगा.. बागवान से लड़ जायूँगा में अपनी गुड़िया क लिए…

तान्या- मुझे पता है की तुम अपनी गुड़िया को कितना प्यार करते हो.. जब एक बहिन जो तुमसे ठीक से बात तक नहीं करती, हमेशा तुम्हारी इंसल्ट करती, तुमसे नफरत करती ा रही है उसके लिए अगर तुम लड़ सकते हो तोह येह अन्नू तोह तुम्हारे दिल टुकड़ा है…

(तान्या की पीठ तुषार की तरफ थी तुषार उसके कंडे को पकड़ के उससे थोड़ा अपनी और घुमा लेता है.. तोह तान्या अपनी नजरे निचे कर लेती है…)



तुषार- तान्या!!

तान्या- (वैसे hi निचे देखती हुई) हम्म..

तुषार- क्या हुआ!.. कुछ बात करनी है तुम्हे मुझसे..? इधर मेरी तरफ तोह देखो…

तान्या- ( उसकी आखों में देखती हुई) हाँ बात तोह करनी है.. पर समाज नहीं ा रहा कैसे करू.. (वापिस नजरे निचे कर) बड़ी हिम्मत से तुम्हारे पास आयी हु…

तुषार- अब आयी हो तोह बात भी कर लो.. और तुम ऐसे नज़ारे क्यों चुरा रही हो मेरे से.. ऐसा कोनसा गुन्हा कर दिया तुमने जो तुम मेरे से आखे मिलाने क काबिल भी नहीं हो…

तान्या- गुन्हा नहीं बहुत बड़ा गुन्हा किया है मैंने.. इतना प्यार करने वाले भाई से इतनी नफरत की.. तुमने 2 बार खुद छोट खा क मुझे बचाया.. और में इतनी खुदगर्ज की तुम्हारा हाल तक न पूछने आयी.. और तुम कह रहे हो की मैं तुमसे नज़ारे क्यों नहीं मिला रही.. किस हक़ से मिलौ में तुमसे नज़ारे..

तुषार- तोह अब तुम क्या चाहती हो.. पहले मेरी तरफ देखो ऐसे नहीं…

तान्या- (घूम क उसकी तरफ देखती हुई, उसकी ाकेँ halki-halki बेगहि हुई थी) में बस वैसे hi तुम्हे पहले जैसा प्यार करना चाहती हु.. अपने भाई क साथ मस्ती करना चाहती हु.. तुम्हारे साथ nok-jok करना चाहती हु.. और चाहती हु की तुम मुझपे अपनी बहिन होने का पूरा हक़ जाताओ…

तुषार- तोह मतलब सीधी भाषा में तुमने मुझे माफ़ किया.. हैना…

तान्या- हाँ!.. क्युकी जिस तुषार से में नफरत करती थी वो तुषार तोह अब रहा नहीं.. तोह उससे नफरत भी नहीं रही.. मुझे नहीं पता की तुमने उस वक़्त ऐसा क्यों किया.. शायद तुम कई बार बताने भी ए थे मुझे (रोटी हुई) लकिन मैंने तुम्हे देखे मार कर अपने रूम से बहार निकल दिया.. ी ऍम सॉरी… मुझे माफ़ कार्डो तुषार उन् सब बातो क लिए जिसे मैंने तुम्हारा दिल दुखाया हो...

तुषार- (उसकी पीठ सहलाता हुआ) सीससह तान्या.. तुम रू क्यों रही हो.. चुप हो जायो.. और तुम्हारा माफ़ी माँगा तोह बनता hi नहीं है.. माफ़ी तोह उससे मांगी जाती है जो कभी नाराज हो जो कभी तुमसे रूठा हो.. लकिन में तोह कभी तुमसे नाराज hi नहीं था क्युकी मुझे पता थी तुम्हारे येह सब करने की वझे..

तान्या- नहीं पहले तुम बोलो की तुमने मुझे माफ़ किया फिर hi मेरे दिल को शांति मिलेगी…

तुषार- ाचा ठीक है मैंने माफ़ किया तुम्हे.. अब खुश हो…

तान्या- (मुस्कुरा क उसकी तरफ देखती हुई) हम्म.. बहुत खुश हु में.. थैंक्यू.. लकिन में जानना चाहती हु की तुमने क्यों उस वक़्त म….

तुषार- (बिच में) बताऊंगा.. सब बताऊंगा लकिन बाद में.. अभी नहीं…

तान्या- Okay.. जैसा तुम चाहो.. क्या अभी मेरी एक बात मानोगे..?

तुषार- हाँ बोलो…

तान्या- क्या में अज्ज रात तुम्हारे साथ सू जायु.. पलासी…

तुषार- मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.. इनफैक्ट अब हमारे बिच कोई नफरत की दिवार नहीं है तोह तुम पहले की तरह जबरदस्ती कर क भी मेरे साथ सू सकती हो.. बूत बात है गुड़िया की.. वो अभी अत्ति होगी सोने मेरे साथ. पता नहीं अभी तक आयी क्यों नहीं…

तान्या- क्युकी वो अपने रूम में आराम से सू रही है.. मैं hi उससे थोड़ी देर पहले उससे अपनी गोदी में सुला क आयी हु.. मुझे पता था वो मोती आएगी और मुझे तेरे साथ सोने क्या बात भी नहीं करने देगी तोह इसलिए मैंने येह आईडिया निकला.. तोह क्या अब में तुम्हारे साथ सू सकती हु…

तुषार- ठीक है भाई अब इतनी प्लानिंग कर क आयी हो तोह सू hi जाओ.. मुझे क्या प्रॉब्लम होगी भला…



(तुषार सीधा होक लेट जाता है और तान्या भी khushi-khushi उसके साथ लेट जाती है…)



तान्या- (उससे कास क चिपकी हुई) थैंक्स.. कितना सकूं है तुम्हारी बहो में…



(तुषार भी उससे अपने से चिपका लेता है.. और मुस्कुराता हुआ एक किश उसके माथे पर करके आखें बंद कर लेता है.. इस वक़्त दोनों bhai-behan न होकर एक miya-biwi की तरह चिपक क सू रहे थे लकिन दोनों के hi मन में कोई गलत भावना नहीं थी.. लम्बे समय से जो दोनों पास होकर भी ek-dusre से जुड़ा थे अब दोनों क मिल जाने से एक अलग एहसास एक अलग hi सकूं दोनों को मिल रहा था… मुस्कुराते हुए दोनों एक दूसरे की बहो में जल्द hi सू जाते है…)



(अगली सुभे तुषार उठा तोह वो अकेला hi रूम में था तान्या जा चुकी थी.. वो उठ क फ्रेश हुआ और निचे चला गया जहा सभी दिंनिंग टेबल पर बैठे हुए थे.. तुषार उन् सब क पास जाता है.. तोह अन्निका उससे देख…



अन्निका- गुड मॉर्निंग भैया…

तुषार- गुड मॉर्निंग गुड़िया.. गुड मॉर्निंग Mom-Dad.. गुड…

तान्या- (बिच में, मुस्कुरा क) गुड मॉर्निंग भाई…



(और येह फटा बम… सबके लिए येह बात किसी शॉक से काम नहीं थी.. पापा पानी pite-pite रुक गए.. माँ खाना uthati-uthati और अन्निका का तोह खाना hi गले में अटक गया जिससे वो खस्ने लगी.. तुषार ने उसकी पीठ thap-thapai और उससे पानी पिलाया…)



अन्निका- दीदी अपने abhi-abhi भैया को भाई बोलै और गुड मॉर्निंग भी..? या येह मेरे कण बज रहे है…

तान्या- तेरे कण तोह वैसे भी बझाते रहते है लकिन अज्ज तेरे कानो से सही सुना है.. (तुषार को देख) क्यों भाई…

तुषार- (मुस्कुरा क) हाँ…

माँ- तोह मतलब तुम दोनों में जो नफरत की दिवार थी वो टूट चुकी है..?

तान्या- माँ इसने तोह कभी नफरत की hi नहीं मुझसे.. वो तोह में hi पागल थी जो इतनी नफरत करती ा रही थी इतने प्यारे भाई से.. और कल रात को मैंने इससे माफ़ी भी मांग और इसने मुझे माफ़ भी कर दिया…

पापा- येह तोह गुड न्यूज़ है भाई.. चलो ाचा है अब तुम दोनों क लड़ाई झगड़े भी ख़तम हुए…

तान्या- नहीं पापा अब तोह झगड़े शुरू होंगे.. (तुषार को देख) लकिन नफरत वाले नहीं प्यार वाले…

माँ- चलो प्यार वाले तोह ठीक है…

तुषार- (थोड़ा गभरा क) लकिन मुझे ठीक नहीं है न.. माँ येह मुझे लिटा क मेरे ऊपर चढ़ क मुझे मरती है.. और अब तोह वजन भी बहुत बढ़ा रखा है.. मुझे दबा क मर देगी येह.. मोती…

तान्या- ोये मोती किसको बोलै.. रोज इतनी एक्सरसाइज क्या में इस लिए करती हु की तू ए और मुझे मोती बोले.. मोती तोह येह है तेरी गुड़िया…

अन्निका- (साद होक) नही.. में मोती नहीं हु.. (चेयर से उठ दिखती हुई) देखो! में कहा मोती हु.. हैना पापा…

पापा- हाँ मेरा बचा कहा मोटा है.. वो तोह बहुत फिट है…

अन्निका- (खुश होक) थैंक्स पापा.. (तान्या को देख) देखा!!...

तान्या- हाँ dekha-dekha.. लकिन मेरे से फिट नहीं है तू.. सामजी...


माँ- हे बागवान! येह लड़की.. शांत थी तोह सिर्फ तुषार को तकलीफ देती थी लकिन अब हम सबको परेशां करेगी…

तान्या- हाँ थोड़ी बहुत परेशानी तोह अब सबको होगी hi.. क्युकी एक साल पुराणी वाली तान्या वापिस ा चुकी है… हाहाहाहा…

तुषार- हाँ! जो कभी डायन थी.. और अब वापिस अपना भयानक रूप ले चुकी है.. हाहाहा…

अन्निका- हहहह

तान्या- ए ज्यादा दांत मात फाड़ समजा (अन्निका को) और तू भी सामजी…

तुषार- okay सॉरी सॉरी…

तान्या- तोह अब बता अज्ज का क्या प्लान है तेरा…


तुषार- (सोचता हुआ) मममम…

तान्या- अरे शर्मा नहीं bata-bata…

तुषार- (एक डैम से उसकी तारक देख) अरे शर्मा नहीं रहा हु में.. सोच रहा हु.. और ऐसे कोण शर्मता है भला…

तान्या- (मुस्कुरा क) ाचा ठीक है बता फिर…

तुषार- कुछ खास नहीं वापिस दीदी क पास चला जायूँगा.. उनकी फ्रेंड क घर…

तान्या- हम्म ठीक है.. दीदी को जरुरत पद सकती है तुम्हारी...

माँ- पर बीटा तेरे स्कूल का क्या..?

तुषार- माँ अब लीव ले राखी है स्कूल से तोह अब रहने देता हु.. और वैसे भी में तोह बिना स्कूल जाये भी पास हो जायूँगा...

अन्निका- (मुस्कुरा क) हाँ मेरे भैया इंटेलीजेंट और स्मार्ट जो है..

तुषार- (उसके सर पे हाथ फेरता) और मेरी गुड़िया भी तोह स्मार्ट और ब्यूटीफुल है...

तान्या- ोये इंटेलीजेंट, ब्यूटीफुल.. ज्यादा नहीं हाँ!!..

अन्निका- पापा देखो न दीदी मेरे और भैया के प्यार में डंडा बन रही है...


तान्या- (हस्ती हुई) अरे बुद्धू.. वो डंडा नहीं दीवार होता है...

अन्निका- हाँ वही.. दीवार...



(सबको अन्निका की बातो पे हसी ा रही थी)



(फिर कुछ खास नहीं हुआ.. तान्या अन्निका को लेकर स्कूल चली गयी और तुषार भी कार से हर्षिका के घर की और जा रहा था की उससे किसी का कॉल आया उसने कार साइड रोक के कॉल पिक किया…)



तुषार- Hello! सवाना…

सवाना- Hello! बॉस...

तुषार- हाँ बोलो..

सवाना- वो बॉस.. एक बाद न्यूज़ है…

तुषार- (गभरा क) क्या हुआ. सब ठीक तोह है..? कैसी बाद न्यूज़...

सवाना- बॉस अप्प पहले हवेली ा जाओ.. फिर में बताती हु…

तुषार- ठीक है में अभी अट्टा हु…



(तुषार कॉल कट करता है और कार को तेजी से हवेली की और मोड़ देता है.. कुछ hi देर बाद कार हवेली के सामने थी.. तुषार कार से उतर कर हवेली के अंदर जाता है जहा सभी एजेंट्स हाल में बैठे हुए थे…)



सवाना- (तुषार को देख) बॉस ा गए…

तुषार- क्या हुआ??.. क्या बाद न्यूज़ है.. जल्दी बताओ…

सफल- बॉस वो अप्प खुद hi देख लो…



(इतना बोल सफल सामने लगे T.V में एक वीडियो को प्ले कर देता है.. वीडियो में 4 आदमी एक 20 साल की लड़की को ghaseta.te हुए एक रूम में लाये और सामने बीएड पर पटक के उसके hath-pao बांध दिए.. कुछ देर बाद एक आदमी अपने मुँह पे रुमाल बंद कर अंदर अट्टा है.. येह कोई और नहीं जग्गू था.. जो अज्ज फिर एक मस्सों लड़की का रपे करने वाला था.. और उसने ात्ते hi अपना खेल शुरू भी कर दिया.. उसने आकर बेरहमी से उस लड़की के कपडे पहाड़ दिए.. लड़की जोर जोर से चीला रही थी, अपना सर idher-udher पटक रही थी.. पर शयद अज्ज उसका जग्गू नाम के शैतान से बच कर निकल जाना. नसीब में नहीं लिखा था… वीडियो अग्गे बढाती गयी और इधर तुषार की आखो में अंगारे फहुत रही थी.. उसकी मुट्ठी तेजी से खुल और बंद हो रही थी.. उसका खून बहुत गरम हो चूका था.. बॉडी तोह जैसे तफ रही थी.. उधर जग्गू एक मस्सों कच्ची काली को फूल बना चूका था.. लड़की की चीखे तुषार से सुनी न जा रही थी. उसने रिमोट पकड़ा और वीडियो को स्किप किया.. और लास्ट में जेक रोक दी.. यहाँ अभी लड़की सफ़ेद चद्दर में ढकी बेहोश पड़ी थी.. और जग्गू कैमरा क सामने आकर बोलै…)




जग्गू- सुन ोये तू.. क्या नाम था तेरा.. कैसर.! तोह कैसी लगी येह वीडियो.. मजा आया देख क.?... सेल गांड में डैम है तोह सामने आकर लड़ न.. ऐसे हमारे chote-mote आदमियों को मार क क्या शेर बनता है.. और क्या!!.. बहुत डरा लिया तुम्हे हमारे आदमियों को.. बहुत दरिंदा बनता है सेल तू.. मेरे से बड़ा दरिंदा नहीं है कोई इस दुनिया में.. अब येह वीडियो देख कैसे thar-thar कंपते है लोग… (लड़की की तरफ देख) और ऐसे hi तेरी साडी बहनो को अपने बिस्तर पर नंगा करके छोड़ूगा में.. और उसके बाद..



(अपनी गन निकलता है और बेहोश पड़ी लड़की के पेट में एक क बाद एक 3गोलियां फायर कर देता है... सफ़ेद पड़ी चद्दर लाल रंग में ढल चुकी थी.. बस येह देखना था की जैसे तुषार में खड़े होने जितनी भी ताकत नहीं बची वो अपने घुटनो पर गिर गया.. एक 20 साल की मस्सों भोली लड़की.. जिसने नजाने कितने hi सपने देखे होंगे अपनी ऐनी वाली लाइफ क लिए.. अज्ज वो एक दरिंदा का शिकार हो गयी.. वो तोह शायद मरने क बाद भी ऊपर जाकर किसी को मुँह दिखने लायक नाह होगी.. की क्या बटेगी की कैसे मर कर आयी है वो…

~दरिंदगी की हद पर हो गयी,

आज महाकाल नगरी शर्मसार हो गयी,

मस्सों की हसी कही दफ़न हो गयी,

हैवानियत की अज्ज फिर इंसानियत पर जीत हो गयी,

छोटे कपड़ो से बलात्कार होते है कहने वाले समाज क ठेकेदारों की बोलती अज्ज बंद हो गयी,

मोमबत्ती, तख़्त, कागज को हाथ में लिए फिर इंसाफ की गुहार शुरू हो गयी,

दरिंदगी की हद पर हो गयी,

आज महाकाल नगरी शर्मसार हो गयी..~


येह सब सोचते हुए तुषार खड़ा होता है.. उसके फेस पे गुस्सा और ाकेँ लाल थी जो बेगहि हुई थी…)



तुषार- (गुस्से से ऊपर को देख चीखता हुआ) माद्द्दाररछोड़ड़ड़ तुज्जी में जिन्दा नहीं छोड़ूगा.. मेरी बहिन तेरा बदला में लेके रहूँगा.. इस कुत्ते को इसी जनम में नरक का सवाद चखा क रहूँगा.. मुझे मेरी औकात बताने का शुक्रिया तुझे तेरी औकात वक़्त बताएगा...



(कुछ देर तक कोई एजेंट उसके पास नहीं जाता.. तुषार काफी देर तक अस्सू बहता रहा.. जब तुषार थोड़ा शांत हुआ तोह शिवं उसके पास जेक बोलै...)



शिवं- तोह बॉस कितने दिन जिन्दा है येह कुत्ता…

तुषार- (आखें साफ़ कर, खुद को संभालता हुआ, बेहनायक आवाज में) 7 दिन.. उसकी जिंदगी क आखरी 7 दिन बचे हैं इस दुनिया में.. पता लगाओ कोण था येह बोस्डिका.. नमक स्वाद अनुसार और अकड़ औकात अनुसार hi अछि होती है.. बहुत अकड़ है न इसमें.. अब इसके गंदे खून को नाली में बहाना है मुझे…

सफल- Okay बॉस.. अभी पता लग जायेगा कोण था येह…

तुषार- शिवं! जो सामान कल मंगवाया था उससे किसी रूम में सेट करो…


शिवं- (जाता हुआ) Okay बॉस…

सवाना- पर बॉस उसमे है क्या..?

तुषार- उसमे कंप्यूटर सिस्टम है, कामर्स है.. जिससे हम हवेली में bethe-bethe पुरे सेहर पर नजर रख सकते है.. तुम्हे लोग को हैकिंग तोह अत्ति hi होगी.. हैना…

सवाना- बहुत अचे से बॉस…

तुषार- वैरी गुड.. सेहर में jaha-jaha जितने भी कामर्स लगे है सब हैक करलो.. बिना किसीको खबर लगे…

सवाना- Okay बॉस...

सफल- मेरे लिए और कोई काम बॉस…

तुषार- (मुस्कुरा क) हम्म.. हतियार!! हतियारो का इंतज़ाम करो.. बिना पैसे की परवाह किये दुनिया के सबसे हितेश हतियार मंगवाओ…

सफल- बाएं हाथ का खेल है बॉस.. पर किस तरह के हतियार चाहिए..?

तुषार- वो सब मुझे नहीं पता.. वो तुमलोग देखो की कोनसे वेपन्स चलने में तुमलोग एक्सपर्ट हो.. हम 4 है उधर 1000 भी हो सकते है.. में जरा सी भी चूक नहीं होने देना चाहता.. (क्रेडिट कार्ड देते हुए) समाज गए...

सफल- (कार्ड लेता हुआ) बिलकुल बॉस.. में सब समाज गया…

तुषार- (टहलता हुआ)

~जिनके डैम पे तूने यह हरकत की है,

मेरे हाथो वो मिटटी हो जायेगा,

ऐसा वॉर करूँगा तेरे साइन पर की तू खामोश हो जायेगा,

और और और.. अस्सी मौत होगी वो की यमराज लेजाता हु कम्प जायेगा..~

《2782 -वर्ड्स》
 
थैंक्स भैया जी फॉर रीडिंग...

सही कहा भाई R**E वाला सीन बहुत इमोशनल है.. में खुद थोड़ा डरा हुआ था की कही रीडर्स नाराज न हो जाये.. जैसा की मैंने पहले की कहा मैंने ज्यादा स्टोरीज रीड नहीं की है तोह मुझे कई जगह गलतिया भी हो सकती है.. लकिन इतना स्टोरी में चलता है येह में जनता हु.. हैं येह एक हद होती है जहा तक मैंने येह सीन लिखा.. पर येह स्टोरी को अग्गे बढ़ने क लिए जरुरी था... शुक्रिया फॉर रीडिंग.. कीप सपोर्टिंग....
 
अपडेट-22

सफल- मेरे लिए और कोई काम बॉस…

तुषार- (मुस्कुरा क) हम्म.. हतियार!! हतियारो का इंतज़ाम करो.. बिना पैसे की परवाह किये दुनिया के सबसे हितेश हतियार मंगवाओ…

सफल- बाएं हाथ का खेल है बॉस.. पर किस तरह के हतियार चाहिए..?

तुषार- वो सब मुझे नहीं पता.. वो तुमलोग देखो की कोनसे वेपन्स चलने में तुमलोग एक्सपर्ट हो.. हम 4 है उधर 1000 भी हो सकते है.. में जरा सी भी चूक नहीं होने देना चाहता.. (क्रेडिट कार्ड देते हुए) समाज गए...

सफल- (कार्ड लेता हुआ) बिलकुल बॉस.. में सब समाज गया…

तुषार- (टहलता हुआ)

~जिनके डैम पे तूने यह हरकत की है,

मेरे हाथो वो मिटटी हो जायेगा,

ऐसा वॉर करूँगा तेरे साइन पर की तू खामोश हो जायेगा,

और और और.. अस्सी मौत होगी वो की यमराज लेजाता हु कम्प जायेगा..~

|अब अग्गे|

(करीब एक घंटे तक तुषार yaha-waha टहलता हुआ कुछ सोचता रहा.. शिवं ने कंप्यूटर सिस्टम सेट कर दिया था और तुषार उससे देखने गया तोह रूम में एक साइड सिर्फ सर्वर्स hi लगे हुए थे...

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और एक तरफ दिवार और टेबल पर करीब 20 मॉनीटर्स थे...

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रूम काफी chamak-dhamak रहा था.. कुछ मॉनिटर में badal-badal क सेहर की कई जगहों की फुटेज दिखाई जा रही थी.. शायद सवाना ने कई जगहों के कामर्स हैक कर लिए थे जो हर हो रही hal-chal की तस्वीरें मॉनीटर्स में दिखा रहे थे…)

तुषार- बहुत बढ़िया शिवं.. बहुत बढ़िया सवाना.. सुपर फ़ास्ट हो तुम लोग…

Shivan,Savana- शुक्रिया बॉस…

तुषार- शिवं अपने गुरु जी को बुला लो.. अब ट्रेनिंग लेने क वक़्त ा गया है…

शिवं- ठीक है बॉस.. में अभी उन्हें बुला लेता हु.. वो कुछ hi देर में ा जायेंगे…

तुषार- हम्म…

(वही दूर किसी जगह रूद्र अपनी बिल्डिंग की लिफ्ट से निचे ग्राउंड फ्लोर पर आ रहा था.. आखों पर चश्मा, हाथ में पिस्तौल.. साथ में चाचा खड़े थे…)

रूद्र- (लिफ्ट से बहार निकलता हुआ) येह सालो ने जीना हराम कर रखा है…

चाचा- अब क्या कर सकते है.. पैसा चीज़ hi अस्सी है.. जिधर ज्यादा मिले इंसान उधर hi जाता…

(ग्राउंड फ्लोर पर पांच कर दोनों गेराज में पांच गए.. जहा करीब 20 आदमी 5 आदमियों को गुठो पर बैठा उन्हें घेरे खड़े थे…)

रूद्र- लकिन अब गांड में दाल लें उन् पैसो को.. लोदु कही क…

चाचा- हाहाहा.. अब ज्यादा खेल मत खेलना एक गोली में टपका देना सबको…

रूद्र- हाँ चाचा.. मेरे पास भी कहा इतना टाइम है…

रूद्र- (उनके पास पोंछता हुआ) क्यों बे बहनचोड़ो.. अक्कल क साथ अपनी गांड को घास खिलने बेज दिया था क्या.. (उनके साथ निचे बैठा हुआ) पहले तोह मुझे यह बताओ की तुम लोग गांड में इतना डैम आया कहा से की तुम लोग मुझे धोका देने चले थे.. सामने नंगी लड़की कड़ी हो तोह किसी के लोडे खड़े न होते मुझे देख.. और तुम लोग सालो अपना लोढ़ा खड़ा कर मेरी hi मरने वाले थे…

(सरे आदमी rone-dhone लगे गिड़गिड़ाने लगे.. हाथ पेअर जोड़ने लगे रूद्र क सामने)

रूद्र- (उठा हुआ सबको गन दिखा क) ेहः येह बकचोदी नहीं… सालो मेरा पैसा भी कहते हो और दुश्मनो का भी लकिन माँ की आँख.. काम किसी के न ए तुम लोग…

आदमी.1- (हाथ जोड़ता हुआ) भाई बस एक बार हमें अपनी वफादारी दिखने का मौका दो…

आदमी.2- हाँ भाई बस एक……

रूद्र- (मुँह पे ऊँगली रख, आंखे दीखता हुआ) सस्शह्ह्हह्ह.. जुबान बंद...

(पांचो आदमी खामोश होक निचे देखने लगे…)

रूद्र- अब मेरी बात ध्यान से सुनो.. तुम लोगो में से सिर्फ एक बच सकता है…

(रूद्र अपने आदमियों को इशारा करता है और उसके आदमी उन् पांचो आदमियों को ek-ek पिस्तौल दे देते है…)

रूद्र- (पीछे पड़ी चेयर पर बेथ मुस्कुराता हुआ) तुम पांचो में से किसी एक को मौका मिलेगा जिन्दा रहना का.. mar.do ek-durse को.. जो आखरी बचा वो मेरे से भी बचा…

(पांचो आदमी ek-durse की तरफ देखने लगे.. पांचो क दिमाग में एक hi बात चल रही थी.. उन्होंने हाथ में पकड़ी गन को देखा और फिर पांचो मुस्कुरए और त्तठ्ठ्हा… त्तठ्ठ्हा… त्तठ्ठ्हा… त्तठ्ठ्हा… त्तठ्ठ्हा… करके पांचो ने रूद्र पर गोली चला दी…)

रूद्र- (उठ क हस्ता हुआ) अबे अक्कल क अंधों वो खली पिस्तौल है.. दिखा दी अपनी औकात.. तुम पांचो को गन पकड़ा क तुम लोगो क सामने बेथ जाता क्या में.. मादरजात कही क.. तुम लोगो क इरादे तोह में जनता था.. बस देखना चाहता था किसी में हिम्मत है की वो मुझे मार सके.. जिगरा तोह बहुत है तुम लोगो में.. (बिच वाले की गर्दन पकड़, गुस्से से) दर न लगा, हाथ न कम्पे तुम लोग के मुझे शूट करते हुए…

(और रूद्र ने गुस्से में उस आदमी के मुँह में अपने लेफ्ट हैंड की चार ऊँगली ऊपर वाले दांतो को पकड़ घुसाई और राइट हैंड की चार उंगलिया निचे वाले दांतो में घुसा क पकड़ लिया और लेफ्ट हैंड को ऊपर की ऑर्डर. और राइट हैंड को निचे की और कास क एक जोर का झटका दिया.. और उस आदमी की चीखो क साथ मुँह सिदो से पहात गया.. मुँह क अंदर की और से खून निकलने लगा.. एक पतली खून की धार नाक से होती हुई निचे टपकने लगी.. आदमी की आंके लाल होकर भर हो ऐनी को हो चुकी थी.. वो अपना मुँह पकड़ निचे गिर गया.. बाकि चारो आदमी तोह रूद्र की पावर और अस्सी कभी न देखि. हरकत देख कम्प सा गए…)

रूद्र- (वापिस मुड़ता हुआ, अपने आदमियों से) टपका दो सब लोदो को.. एक एक गोली लुंड पे भी मरना सबके…

(थोड़ी देर फायरिंग की आवाज आयी इसी आवाज क साथ थोड़ी देर चीखो की आवाज भी आयी और फिर मामला शांत हो गया…)

|बैक तो तुषार|

(करीब एक घंटे बाद हवेली में एक ब्लैक लेम्बोर्गिनी आके रूकती है...

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उसमे से 38 साल का एक आदमी. ब्लू ट्रैकसूट, ब्लैक चश्मा लगाए बहार utar.ta है…)

शिवं- वह गुरूजी अज्ज कार में..? इनके पास तोह कला घोडा हुआ करता था न…

तुषार- (हैरानी से) शिवं!! क्या येह तुम्हारे गुरूजी है..?

शिवं- (मुस्कुरा क) यस बॉस.. यही है गुरूजी…

तुषार- (उनकी तरफ बढ़ता हुआ) बड़े मॉडर्न गुरूजी है यार..

सफल- वाह गुरूजी घोडा बेच क लेम्बोर्गिनी.. मस्त है...

(गुरूजी कुछ न बोले.. शिवं भी बस मुस्कुरा देता है और तुषार गुरूजी क पास जेक उनसे हाथ मिलाने लगता है तोह गुरूजी आगे बढ़ क तुषार को कास क गले लगा लेते है… सफल और सवाना तोह येह देख हेरैं hi हो गए…)

सवाना- (खुले मुँह से) उन्होंने बॉस को गले लगा लिया…

सफल- हाँ!! हमसे तोह कभी हाथ भी न मिलाया…

(गुरूजी अभी भी गले लगे हुए थे.. शिवं मुस्कुरा रहा था.. और फिर वो आखों से कुछ इशारा करता है जिससे गुरूजी तुषार को छोर देते है…)

गुरूजी- तुषार!!...

तुषार- जी गुरूजी.. में तुषार हु.. अब आपको जैम क मुझे ट्रेनिंग देनी होगी.. हमारे पास वक़्त बहुत काम है…

गुरूजी- (मुस्कुराते हुए) जैम क ट्रेनिंग की बात भी करते हो और वक़्त की कमी भी बताते हो.. ऐसे नहीं चलेगा बीटा… (सवाना और सफल को देख) और तुम दोनों…

सवाना, सफल- (हड़बड़ा क) जी गुरूजी…

गुरूजी- कैसे हो तुम दोनों..?

सवाना, सफल- जी अभी तक बिलकुल ठीक थे गुरूजी…

गुरूजी- (मुस्कुरा क) हम्म.. तोह मतलब तुमलोग को पता है तुम्हे क्या करना है…

सफल- (सवाना को धीरे से) वाट लगनी है अपनी और क्या करना है…

सवाना- जी गुरूजी हमें पता है क्या करना है… अप्प बस थोड़ा सा इशारा कार्डो…

गुरूजी- (साइड में पड़ी ईंटों की और इशारा करते हुए) एक के ऊपर एक और एक पेअर पे 30मिंट तक…

सवाना- समाज गए गुरूजी…

सफल- (jaldi-jaldi चलता हुआ सवाना से) जल्दी चल कही पीछे से हंटर न पड़ जाये…

(दोनों ने जल्दी से 2-2 ईंटों को उठाया और एक क ऊपर एक रख. अपनी राइट तंग से उस पर खड़े हो गए.. तुषार हैरान खड़ा उन्हें देख रहा था बस…)

गुरूजी- तोह बीटा तुषार…

तुषार- जी गुरूजी बताये कब, कहा और कैसे शुरू होगी मेरी ट्रेनिंग..?

गुरूजी- अज्ज, अभी और यही शुरू होगी तुम्हारी ट्रेनिंग…

तुषार- ठीक है गुरूजी.. तोह बताये मुझे पहले क्या सिखाओगे अप्प.?

(फिर गुरूजी तुषार को सबसे पहले पंच मरने के alag-alag तरीके सिखाते है.. ज्यादातर जो बॉक्सिंग में काम ात्ते है जैसे अपरकट, जब, हुक और क्रॉस… काफी देर पंचेस की प्रैक्टिस करने क बाद गुरूजी उससे किक्स मरने की प्रैक्टिस करने लगते है.. जैसे साइड किक, टर्निंग किक, फ्रंट किक, ऐसे किक, फ्लाइंग किक और हुक किक… तुषार बड़े धयान से गुरूजी जो कर रहे थे उससे देख पुरे मन से तरय कर रहा था और जल्द hi उससे करने में कामयाब भी हो रहा था.. इसी बिच सवाना और सफल भी ईंटों से 2,3 बार गिर चुके थे.. गुरूजी ने उनकी राइट तंग बदल लेफ्ट तंग ईंटों पर रखवा दी.. गुरूजी शिवं को कुछ नहीं बोल रहे थे.. शिवं खुद भी तुषार की मदद कर रहा था.. जैसे वो गुरूजी से भी अचे से जनता हो सब कुछ…)

|Arushi’s कॉलेज|

(कॉलेज की छुट्टी हो चुकी थी.. आरुषि, हर्षिका और हरलीन तीनो एक साथ बहार आ रहे थी हाथ में ek-ek किताब लिए.. कुछ थोड़ी hi दुरी पर खड़े 4 लड़के इन्हे ताड़ रहे थे…)

लड़का.1- क्या मस्त लड़किया है यार…

लड़का.2- कॉलेज की सबसे हॉट माल है में से है तीनो…

लड़का.1- हाँ वो तोह दिख रहा है…

लड़का.3- (अपना लुंड मसलता हुआ) तोह क्या बोलते हो.. किसी दिन दबोचे इन्हे..?

लड़का.1- हाँ यार मुझे इनकी बुर से चुस्किया लेनी है… आअह्ह्हा क्या टास्ते होगा न…

(न जाने येह लड़के और kya-kya बकवास करते गए तीनो को देख क…)

हर्षिका- कब से देख रही हु येह चारो बस हमें hi घूरे जा रहे है.. मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा...

हरलीन- (लड़को की तरफ देख) छोड़ न यार.. हमें इससे क्या.. तू ज्यादा टेंशन न ले…

हर्षिका- में कहा ले रही हु टेंशन.. टेंशन तोह मुझे लगता है तू ले रही है.. इतना घबराना नहीं चाहिए इन् लफंगो को देख.. में तोह सोच रही हु इन्हे मजा चखा क आयु…

(आरुषि भी उन्हें देख कुछ सोचती है..)

हरलीन- (उसको खींच बहार लेजाती हुई) अरे यार छोड़ न तू.. वो हमे कुछ नहीं कह रहे.. बिना वजे मत पन्गा ले किसी से.. और तू तोह इतनी इनोसेंट हुआ करती थी येह pange-wange कब से शुरू कर दिए लेने..?

हर्षिका- (मुस्कुरा क) हाँ में बस थोड़ी सी बदल गयी हु…

हरलीन- और तुम्हे येह थोड़ी सी बदल देने वाला कोण है..?

हर्षिका- वो तोह तुस….

हरलीन- तुस क्या…

(आरुषि जो कब से चुप कहदी थी एक डैम से बोली)

आरुषि- (हैरानी से) तुषार!!..?

(आरुषि थोड़ा जोर से बोली थी तोह दोनों उससे अजीब से देखने लगी…)

हरलीन- (हर्षिका की तरफ देख) तुषार..? क्या हर्षिका तुषार..? आरुषि का भाई!!…

(हर्षिका तोह हड़बड़ा गयी थी.. उससे समाज नहीं ा रहा था अब बोले क्या.. जल्दबाजी में उसने गलती करदी थी…)

हर्षिका- तुषार.. क्या तुषार..?

हरलीन- अरे यही की क्या तू तुषार से प्यार करती है...

हर्षिका- मैंने ऐसा कब बोलै.. (आगे चलती हुई) मैंने तोह ऐसा न बोलै…

हरलीन- (हस्ती हुई) ाचा ठीक है नहीं बोलै.. लकिन आगे कहा चली जा रही.. आगे रोड है.. निचे एक्के मरना है क्या किसी चीज़ से…

हर्षिका- (अपनी सोचो से बहार ा, रोड क किनारे आके रूकती हुई) वो… वो में बस को रोक रही थी…

आरुषि- पर हम तोह कार से ए थे न…

हर्षिका- हांण…. तोह कहा है कार.. जाओ लेके ायो कार… जल्दी…

हरलीन- (आरुषि से) येह सटक गयी है क्या…

आरुषि- (मुस्कुरा क) हम्म लगता है प्यार में…

हरलीन- हेहेहे...

《1860 -वर्ड्स》
 
थैंक्स सर जी मेरे थ्रेड्स में ऐनी क लिए...

और येह

हर्षिका- तुस क्या…

येह भाई मिस्टेक हो गयी थी येह लाइन हर्षिका ने नहीं हरलीन ने कही थी..

हर्षिका- वो तोह तुस….

हरलीन- तुस क्या…

आरुषि- (हैरानी से) तुषार!!..?

हरलीन- (हर्षिका की तरफ देख) तुषार..? क्या हर्षिका तुषार..? आरुषि का भाई!!…

हर्षिका- तुषार.. क्या तुषार..?

सॉरी मैंने भी अभी देखि थी येह गलती.. ठीक कर चूका हु में...
 
अपडेट-23

आरुषि- पर हम तोह कार से ए थे न…

हर्षिका- हांण…. तोह कहा है कार.. जाओ लेके ायो कार… जल्दी…

हरलीन- (आरुषि से) येह सटक गयी है क्या…

आरुषि- (मुस्कुरा क) हम्म लगता है प्यार में…

हरलीन- हेहेहे...

|अब अग्गे|

|बैक तो तुषार|

(तुषार पिछले 7 घंटो से ट्रेनिंग कर रहा था.. 7 घंटो से वो हवेली क 200 चाकर लगा चूका था, 1000 पुशअप्स, मार्टिकल आर्ट्स क कई सरे स्टाइल्स वो अपने अंदर दाल चूका था.. कड़ी म्हणत कर रहा था पर अब वो बहुत थक्क गया था. लकिन एक बात थी की जैसे hi उससे लड़की क रपे वाली बात याद अत्ति उसमे वापिस जोशो जूनून जगह उठता.. अभी वो थका हुआ था लकिन फिर भी फुल स्पीड से हवा में ग़ुस्से मार रहा था.. फ्लाइंग किक्स मार रहा था.. सवाना और सफल उससे देख hakke-bakke हो रहे थे की जहा वो त्रिनेड रोज प्रैक्टिस करने वाले एजेंट्स 5घंटे में hi थक्क क बेथ गए वही येह लड़का पहली बार प्रैक्टिस कर रहा वो भी पिछले 7घंटो से और अभी तक्क न थक्का…)

गुरूजी- बस करो तुषार.. अज्ज क लिए इतना काफी है…

तुषार- (हवा में सुपरमैन पंच मरता हुआ) ाआहहुआआआ… नहीं!!... (हफ्ता हुआ) हहाआअहाश नहीं गुरूजी.. अभी मुझे बहुत प्रैक्टिस करनी है…

गुरूजी- (हाथ का इशारा कर उससे रोकते हुए) बस.. मैंने कह दिया अज्ज क लिए बहुत है… अभी तुम्हारी शुरुवात है इस लिए में तुम्हे रोक रहा हु.. अभी तुम्हारी बॉडी इतनी जोरदार ट्रेनिंग लेने क काबिल नहीं बानी है…

तुषार- (निचे घास पर बेथ let.ta हुआ) ठीक है गुरूजी जैसा आप कहे.. लकिन शायद आपको नहीं पता की एक मस्सों लड़की क साथ कितना बुरा हुआ है.. शायद उसके साथ hi नहीं और नजाने कितनी hi लड़की होंगी जो उस हवसी दरिंदा का सिखर हो कर इस दुनिया को अलविदा कह गयी होंगी.. मुझे उन् सभी का बदला लेना है.. और में उससे अपने दम पे मरुँगा वो भी ठीक अज्ज से 7दिन बाद.. कैसर बनकर नहीं तुषार बनकर….

गुरूजी- मुझे सब पता है.. शिवं ने मुझे सब बताया था जो भी उस लड़की क साथ हुआ.. लकिन तुम फ़िक्र मत करो में तुम्हे तुम्हारे दिए वक़्त के अंदर तुम्हे अस्सी ट्रेनिंग दूंगा की तुम्हारे सामने कोई बड़ा से बड़ा भी ज्यादा देर तक टिक्क नहीं पायेगा…

तुषार- बहुत बहुत शुक्रिया गुरूजी…

|Tushar’s हाउस|

(तान्या और अन्निका दोनों अभी अन्निका के रूम में बीएड पर बैठी बाते कर रही थी…)

तान्या- अन्नू तेरा दिल लग रहा है क्या तुषार के बिना..?

अन्निका- (तुषार को याद कर साद होक) नहीं न दीदी.. भैया क बिना तोह एक पल भी चैन नहीं मिलता है…

तान्या- हम्म.. मेरा भी यही हाल है अन्नू.. मन तोह मेरा भी नहीं लग रहा उसके बिना…

अन्निका- (गोरर से उसकी तरफ देखती हुई)

तान्या- ऐसे क्या देख रही है..?

अन्निका- दीदी अप्प कितनी ज्यादा बदल गयी हो न.. एक वक़्त था जब अप्प भैया की शकल देखना तोह क्या उनकी जरा सी आवाज भी आपको तकलीफ देती थी.. और अज्ज देखो अप्प पहले जैसे हो गयी हूँ. बिलकुल मेरे जैसी जो एक…..

तान्या- (मुस्कुराती हुई) जो एक पल भी तुम्हारे भैया से दूर नहीं रह सकती.. हैना..?

अन्निका- हाँ दीदी…

तान्या- (उसको खींच के अपनी गोड़ में बिठाती हुई) अरे मेरी जान की नन्ही सी जान.. उस वक़्त आपके भैया ने काम hi कुछ ऐसा किया था की मुझे बहुत गुस्सा आया और मुझे उससे नफरत होने लगी...

अन्निका- (उसकी तरफ मुँह घुमा देखती हुई) लकिन ऐसा क्या किया था भैया ने..? बताओ न दीदी.. प्लस.. प्लस.. प्लस.. प्लस.. प्लसससससस…..

तान्या- मेरी डॉली.. अभी नहीं.. अभी न तोह इतना टाइम है और शायद न hi में पूरी बात जानती भी हु…

अन्निका- क्या मतलब दीदी..?

तान्या- वो सरे मतलब तुषार बटेगा.. क्युकी मुझे भी ज्यादा नहीं पता…

अन्निका- Okay दीदी.. लकिन मुझे बताना जरूर...

तान्या- (उसकी गाल पर किश कर) ूउम्म्माआहहह.. ठीक है मेरी डॉल...

|Harshika’s हाउस|

(आरुषि और हर्षिका अभी दोनों सोफे पर बैठी हुई थी.. वो जब से कॉलेज से आयी दोनों में कोई बात नहीं हुई थी.. आरुषि हर्षिका की तुषार के बारे में कही हुई बातो से गुस्सा थी तोह वही हर्षिका को लग रहा था की उसके छोटे से मजाक के कारन आरुषि उससे थोड़ा सा नाराज हो गयी है… लकिन शायद उससे नहीं पता था की उसका येह छोटा सा मजाक आरुषि के दिल को cheer-faad कर रख चूका था.. उसकी कही हुई ek-ek बातो ने उससे बहोत रुलाया था.. इसी लिए उसने तुषार से अपने प्यार का इजहार किया था की कही तुषार भी हर्षिका के मुँह से अपने बारे में येह सब बाते सुन टूट न जाये.. क्युकी वो जानती थी की वो पहली hi बड़ी मुश्किल से सम्भला है.. अगर वो फिरसे टूट गया तोह उससे वापिस जोड़ना बहुत मुश्किल होगा.. या येह कह लो की वो वापिस जुड़ hi नहीं पायेगा… आरुषि क दिमाग को एक सवाल ने बहुत उलझन में दाल रखा था. की अगर हर्षिका तुषार को पसंद नहीं करती तोह वो किसके खयालो में खोई रहती है.. उससे दर था की कही हर्षिका किसी और लड़के को पसंद तोह नहीं करती.. वो इस सवाल से परेशां हो चुकी थी.. लकिन वो हर्षिका से पूछने से दर रही थी क्युकी पहले hi हर्षिका ने उससे तुषार के बारे में अपनी फीलिंग्स बता दी थी की वो तुषार से प्यार नहीं करती वो बस उससे अपना एक ाचा दोस्त मानती है.. इसी लिए आरुषि थोड़ा जिझक रही थी उससे बात करने में.. लकिन उससे कन्फर्म तोह करना hi था की वो किसी और से प्यार करती है या नहीं.. तोह वो बोली…)

आरुषि- हर्षिका..

हर्षिका- (मोबाइल से ध्यान हटा उसकी तरफ देखि हुई) हाँ क्या हुआ…

आरुषि- वो.. (गाला साफ कर) हुहहममम वो.. क्या तू..

हर्षिका- (अजीब सी देखि हुई) क्या..? वो क्या…

आरुषि- वो क्या तू किसी को पसंद करती है क्या तू.. ी मैं दो यू लव समवन..?

हर्षिका- (मन में) इससे क्या हुआ अचानक.. शायद इससे शक हो गया है की में तुषार से प्यार करती हु.. होगा hi न भी में भी उस पागल क प्यार में बावली हुई बैठी हु.. ajib-ajib हरकते करती रहती हुई…

आरुषि- हर्षिका!!.. (थोड़ा जोर से पुकारती हुई) हर्षिका…

हर्षिका- (हड़बड़ाती हुई) हानंन्न.. हैं क्या.. क्या हुआ…

आरुषि- मैंने तुमसे कुछ पूछा था.. अभी अभी.. याद है..?

हर्षिका- हाँ याद है न…

आरुषि- तोह बताओ फिर…

हर्षिका- अरे नहीं यार.. मुझे कोई पसंद नहीं है.. और मुझे येह pyar-wyar क चकरो में नहीं पड़ना.. में सिंगल hi ठीक हु…

आरुषि- (कुछ सोच क) ाचा.. चलो फिर तोह ठीक है.. (सोफे पर बहे फैलती हुई) ाचा मेरे तुषार को एक लड़की पसंद ा गयी है…

हर्षिका- (झटका खाके, सोफे से कड़ी होती हुई) कययआआआ…..

आरुषि- तुझे क्या हुआ.. बैठजा तू…

हर्षिका- (हड़बड़ा के बैठती हुई) हाँ.. नाह कुछ नहीं मुझे क्या होगा भला…

आरुषि- हम्म.. तुजे झटका लगा होगा की तुषार को किसी ने पसंद कैसे कर लिया राइट..? उसकी तोह बेकार सी शकल है.. थोड़ा पतला सा है.. बोरिंग सा.. उससे किस लड़की ने पसंद कर लिया.. हैना..?

हर्षिका- हाँ.. उससे कोण पसंद करेगा भला.. (धीरे से) कोई करके देखे…

आरुषि- नहीं मैडम.. येह आपकी गलतफमी है.. मैंने बस आपसे कन्फर्म किया था की कही आप तुषार से प्यार तोह नहीं करती लकिन अपने तोह sida-sida मेरे भाई की बजती करदी.. तोह मैंने तुषार को आपकी जो उसके बारे में कही बाते थी पहले hi क्लियर करके बता दी तककि कही वो आपसे प्यार करे और अप्प उससे ठुकरा दो.. इसलिए मैंने उससे पहले hi सब समजा दिया की हर्षिका तेरे लायक.. ओह्ह sorry-sorry तू हर्षिका क लायक नहीं है…

(हर्षिका तोह जैसे येह सुन्न अपने hosho-awaj गवा बैठी.. वो सोफे से निचे होक गुठो पर बेथ गयी.. ऑर्डर futt-futt कर रोने लग गयी.. अब उसकी प्यारी दोस्त ऐसे रोइ और आरुषि कैसे येह देख सकती थी.. वो जानती थी की हर्षिका उससे सच बटेगी नहीं इस लिए उससे ऊँगली टेढ़ी कर घी निकलना पड़ा.. और कमल की बात घी निकल भी गया.. आरुषि उसके पास बेथ उसके ासु साफ़ करने लगी.. लकिन हर्षिका के ासु थमने का नाम hi नहीं ले रहे थे.. खेर थोड़ी देर तक्क हर्षिका ासु बहती रही.. आरुषि ने उससे पकड़ सोफे पे बिठाया.. लकिन अभी भी हर्षिका से कुछ बोलते नहीं बन रहा था.. लकिन वो वापिस subak-subak क रोने लगी…)

आरुषि- (उससे गले से लगा क) क्या हुआ हर्षिका.. इतना क्यों रू रही है.. क्या मैंने तेरे बारे में थोड़ा बुरा बोलै तोह तू इसलिए रू रही है..?

हर्षिका- (उसके गले से अलग होक ासु साफ़ करती हुई) बस!.. बस कर यार आरुषि.. क्या.. क्या सुना चाहती है तू अब.. तूने सब कुछ बर्बाद कर दिया.. हाँ में तेरे भाई से प्यार करती हु.. बहुत करती हु.. मैंने तोह अज्ज तक येह भी नहीं देखा की किसी को प्यार दिया जा किया कैसे जाता है.. मगर जब मैंने तेरे भाई को देखा की वो बिना मतलब उन् लड़कियों के लिए लड़ रहा है जिनको वो जनता भी नहीं है.. तोह उसके लिए मेरे दिल में बहुत इज्जत बढ़ गयी.. तूने बताया की तेरी छोटी बहिन उससे नफरत करती है लकिन वो पागल है की उसने इस बात को कभी सीरियसली hi नहीं लिया.. कितनी प्यार करता है वो तुम सबसे.. ऐसे लड़के बहुत काम देखने को मिलते है.. मुझे लगा था की येह लड़का मेरी जिंदगी में भी प्यार ले आएगा, मेरी भी उतनी की फ़िक्र करेगा जितनी वो तुम सबकी करता है, इतनी meethi-meethi बाते करते है की मेरी दिल जीत लिया है उसने.. शायद वो भी मुझसे प्यार करता था.. (रोटी हुई) लकिन.. लकिन तूने उससे मेरा मज़ाक सच बताकर मुझसे अलग कर दिया… आरुषि तूने ाचा नहीं किया.. में नहीं जी पयूंगी उसके बिना.. (और आरुषि क गले लग रोने लगी)

आरुषि- (मुस्कुराती हुई उसके बालो में हाथ फेरती) ाचा चुप चुप.. चुप होजा…. बहुत प्यार करती है मेरे भाई से..?

हर्षिका- (उसके अलग हो ासु साफ करती) हाँ बहुत प्यार करती हु तेरे भाई से…

आरुषि- तोह उससे शादी भी करेगी…

हर्षिका- (मुस्कुरा क) हाँ.. करुँगी न.. और क्या बिना शादी क उसके साथ रहूंगी.. लकिन तूने जो बोलै की वो किसी और को पसंद करने लगा है उसका क्या होगा फिर…

आरुषि- हम्म.. वो. वो तोह मैंने मजाक किया था.. जैसे तूने किया था मेरे साथ.. मेरा दिल दुख क.. और में जानना चाहती थी की क्या तू सचमे इतने लोविंग, इतने केयरिंग, इतने हैंडसम लड़के को पसंद नहीं करती.. और देखो मुझे मेरा जवाब मिल गया.. हहहह…

हर्षिका- (हैरानी से ाख्ने फढ़ देखती हुई) क्या.. आरुषि क्या तूने जो कहा वो सब जूथ था..? आरुषि तूने मेरा दिल दुखिया.. तुझे शर्म नहीं आयी एक भोली लड़की को रुलाते.. पता है में सोच क कितना घबरा गयी थी की में तुषार के बिना कैसे जी पयूंगी.. तू कितनी बड़ी कुट्टी है आरुषि.. तूने अपना बदला लेने के लिए एक मस्सों के दिल को दुख डाला…

आरुषि- (उससे साइड से गले लगा क) सॉरी मेरी जान.. लकिन तूने मेरी जान मेरे भाई को इतना सुना दिया.. मैंने तोह बस चेक hi किया था की क्या सचमे तेरी बाते सच है या नहीं.. और क्या बोली तू मुझे कुट्टी..? अपनी ननद से ऐसे बात करता कोई…

हर्षिका- (शर्माती हुई) हट पागल.. शादी तोह होने दे पहले.. और उससे पहले हमे अपनी पढाई भी तोह पूरी करनी है…

आरुषि- हम्म वो तोह है..

《1852 -वर्ड्स》
 
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