TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 5 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

थैंक्स भाई फॉर रीडिंग..

हम सही कहा भाई तुषार को बहुत खतरनक लोगो से लड़ना है तोह ट्रेनिंग भी खरतनक लेनी होगी.. तान्या की नफरत तुषार क लिए ख़त्म हो गयी है तोह उसका बेहेवियर भाई बिलकुल वैसे hi हो गया है जैसे वो पहले थी.. हर्षिका ने किसी को इतना प्यार करते पहले नहीं देकता था और जब देखता तोह उससे खुद hi उससे प्यार हो गया.. येह जरुरी था आरुषि क लिए जानना की क्या सचमे वो तुषार से प्यार करती है या नहीं.. अब येह तोह 7दिन बाद hi पता चलेगा क्या होता है...

शुक्रिया भाई फॉर थिस वंडरफुल रिव्यु..

कीप सपोर्टिंग...
 
थैंक्स भाई फॉर रीडिंग..

येह तोह वक़्त जाने भाई की वो कैसा फाइटर बनता है.. बदला लेना है एक मस्सों लड़की क रपे का उसकी मौत का.. उसकी दी हुई जुबान क हिसाब से की 7दिनों में वो उस गुंडों को मरेगा इसलिए जोरदार ट्रेनिंग ले रहा है. वक़्त काम है लकिन सीखना बहुत कुछ है..

कीप सपोर्टिंग...
 
थैंक्स एंड वेलकम तो माय थ्रेड भाई..

और हाँ भाई स्टोरी के स्टार्टिंग में. में कुछ गलतिया कर चूका हु.. और भी रीडर्स ने बोलै था.. बस उन्हें अग्गे सुधरने की कोशिश कर रहा हु.. और भाई बुरा क्यों मानुगा.. बल्कि थैंक्स कहता हु आपका की अपने गलतिया निकलती स्टोरी से. इससे उन्हें में ठीक कर सकता हु. वर्ण में तोह वही लिखता रहता जो मेरे मन में आया... सपोर्ट करते रहे भाई ऐसे और कुछ आगे भी गलत लिखू तोह बताना.. शुक्रिया...
 
अपडेट-24

आरुषि- (उससे साइड से गले लगा क) सॉरी मेरी जान.. लकिन तूने मेरी जान मेरे भाई को इतना सुना दिया.. मैंने तोह बस चेक hi किया था की क्या सचमे तेरी बाते सच है या नहीं.. और क्या बोली तू मुझे कुट्टी..? अपनी ननद से ऐसे बात करता कोई…

हर्षिका- (शर्माती हुई) हट पागल.. शादी तोह होने दे पहले.. और उससे पहले हमे अपनी पढाई भी तोह पूरी करनी है…

आरुषि- हम्म वो तोह है..

|अब अग्गे|

आरुषि- ाचा सुन्न…

हर्षिका- हम्म..?

आरुषि- पर्पस कब कर रही है तुषार को..?

हर्षिका- (हैरानी से) क्या.. में.. में क्यों पर्पस करू

आरुषि- तोह कोण करेगा…

हर्षिका- वो.. वो करेगा न…

आरुषि- क्यों.. लड़को ने थक्का ले रखा है. की वही पहले पर्पस करेंगे और फिर लड़किया नखरे दिखती हुई हाँ करोगी.. हम्म..?

हर्षिका- (उंगलिया आपस में रगड़ती हुई) वो यार लकिन मुझे शर्म अत्ति है.. और वो भी तोह कर सकता है न पर्पस. वो प्यार नहीं करता क्या मुझसे…

आरुषि- (अपना माथा pet.ti हुई) हद हो गयी.. क्यों तू प्यार नहीं करती उससे…

हर्षिका- (झट से) करती हु न…

आरुषि- तोह फिर.. अब तोह तू hi करेगी उससे प्रोपोज़.. कितना शर्माती है.. (अपने गुथने पे हाथ पे हाथ रखती हुई) देख अगर तूने प्रोपोज़ न किया न तोह मेरी तरफ से तोह इस रिश्ते के लिए साफ़ मन है, नहह है,.. अग्गे तू बोल…

हर्षिका- (खुले मुँह से) में क्या बोलू.. येह क्या बात हुई यार.. (सोचती हुई) ठीक है में करुँगी पर्पस तुषार को…

आरुषि- (मुस्कुरा क) येह हुई न मर्दो वाली बात…

हर्षिका- क्या.. में मर्द हु क्या…

आरुषि- लकिन वो.. वो बात तोह मर्दो वाली है न.. अभी यही डायलॉग फिट बेथ रहा था तोह बोल दिया.. वो सब छोड़ अब बता कब करेगी पर्पस तुषार को..?

हर्षिका- (मुस्कुरा क) मुझे नहीं पता.. और अभी इतनी हिम्मत नहीं है मुझमे.. अभी तोह हमने अचे से बाते भी नहीं की…

आरुषि- तोह फिर किया करो न.. बाते करोगे तोह प्यार बढ़ेगा न…

हर्षिका- (शर्माती हुई) आरुषि अस्सी बाते मत कर न प्लीज.. मुझे….

आरुषि- शर्म आती है.. हैना.. यार कोई इतना भी कैसे शर्मा सकता है.. और मेरे से क्या शर्मा रही है.. तुषार क सामने पता नहीं कर करेगी…

हर्षिका- वो में कर लुंगी.. तू वो छोड़ तुषार अभी तक आया नहीं है कॉल कर उससे…

आरुषि- रुक करती हु...

(आरुषि तुषार को कॉल करती है तोह पास बैठी हर्षिका झट्ट से फ़ोन में स्पीकर बटन दबा देता है.. उधर तुषार हवेली में अपने रूम में बीएड पर पड़ा आराम कर रहा था..)

तुषार- (फ़ोन उठा के) hello दीदी…

आरुषि- Hello तुषार.. कहा है तू..?

तुषार- वो दीदी में तोह एजेंट्स के साथ हु.. हम कुछ प्लान सोच रहे है…

आरुषि- कैसा प्लान…

तुषार- आपको तोह पता hi है दीदी की में एजेंट्स के साथ क्यों घूम रहा हु.. सेहर को गुंडों से आजाद करवाने क लिए.. तोह वही प्लान सोचा रहे हम लोग…

आरुषि- हाँ वो तोह मुझे पता है.. लकिन मैंने प्लान के बारे में पूछा है.. वो बता क्या प्लान सोच रहे हो तुम लोग…

तुषार- अभी जग्गू को मरने की प्लानिंग कर रहे है हम लोग…

आरुषि- येह जग्गू कोण है.. (सोच के हेरैं होती हुई) ओह्ह माय गॉड तुषार मतलब इन् सभी गुंडों का लीडर जा बॉस जा जो भी है वो.. उससे मरने वाले हो.. इसमें तोह बहुत खतरा हो सकता है न.. कही तू भी तोह नहीं जा रहा इसके साथ.. देख अगर तू गया न...... और तुम 4 लोग हो उनके साथ गुंडों की फ़ौज हो सकती है.. जान को खतरा हो सकता है तुषार…

तुषार- दीदी.. दीदी.. दीदी.. शांत.. पहले बात तोह जो उस जग्गू ने किया है एक लड़की के साथ अगर अप्प वो सुनोगी की तोह शायद अप्प मुझे नहीं रोकेगी.. और दूसरी बात…..

आरुषि- (बिच में) क्या किया है उसने किसी लड़की के साथ..?

तुषार- दीदी.. उस हरामी जग्गू ने… एक लड़की का रपे किया है.. पता है दीदी क्यों.. क्युकी कैसर ने गुंडों को डरने क लिए अपनी दरिंदगी की वीडियोस डाली तोह उसका बदला लेने क लिए लोगो में खूफ, दर पैदा करने के लिए उसने एक लड़की का रपे वीडियो बनाया और फिर उस मस्सों लड़की को मार दिया… बताओ दीदी क्या वो आदमी जिन्दा रहने क काबिल है..? मुझे नहीं लगता.. इसलिए वो तोह मरेगा.. वो भी जल्द hi… और दूसरी बात येह थी की में यहाँ बस प्लान समझने और समजने आया हु.. कैसर और एजेंट्स सब देख लेंगे.. इनको मेरी जरुरत तोह नहीं है लकिन इसकी शुरुवात मैंने की है तोह मैं chup-chap घर कैसे बेथ सकता हु…

(तुषार की बाते सुनके आरुषि और हर्षिका दोनों की आखो में ासु ा गए थे.. पर एक गुस्सा भी दोनों के मन में भर चूका था जग्गू के खिलाफ.. एक लड़की होने के नाते उन्हें इस दर्द का आभास था की अगर कोई अनजान लड़का उन्हें छू भी ले तोह कितना बुरा लगता है.. किसी लड़की का रपे हो जाना जबरदस्ती उसकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करना पूरी जिंदगी कितनी दर्द देता है…)

आरुषि- (गुस्से से) तुषार.. वो जो कोई भी था.. वो ज्यादा दिन जिन्दी नहीं बचना चाहिए.. उससे इसी दुनिया में नरक दिखा दो… समजे!….

तुषार- बिलकुल दीदी.. वो नहीं बचे.. नहीं बचेगा वो… दीदी जब तक्क वो जिन्दा है में यहाँ एजेंट्स के साथ हु.. आपको कोई प्रॉब्लम तोह नहीं होगी न..?

आरुषि- तू हमारी फ़िक्र मत कर.. यहाँ 10 गार्ड्स है.. हमारी पूरी सेफ्टी है इधर तू अपना काम कर बस…

तुषार- हम्म.. ठीक है दीदी…

|अगले दिन|

(सुभे 4 बजे तुषार एंड एजेंट्स उठ कर bhag-dhoor कर रहे थे.. लकिन गुरूजी और शिवं कहा थे दोनों का कुछ पता नहीं था.. शिवं पहले भी जब एजेंट्स के साथ रहता था तोह उनके उठने से थोड़ी देर पहले कही चला जाता था और करीब 7बजे वापिस अट्टा था.. अज्ज भी वो कहा गया था कुछ पता नहीं और साथ hi गुरूजी कहा गए उसके साथ येह बात जब तुषार ने एजेंट्स से पूछी तोह उन्होंने भी यही जवाब दिया की शिवं और गुरूजी का पहले भी यही डेली रूटीन होता था.. दोनों कहा जाते है उन्हें भी नहीं पता लकिन 7बजे तक दोनों वापिस ा जायेंगे...)

(अभी तुषार एंड एजेंट्स ग्राउंड में लगे बेंच पर बैठे थे...)

सवाना- बॉस एक बात पूछनी थी आपसे..

तुषार- हाँ पूछो न..

सवाना- अपने कल hi ट्रेनिंग शुरू की और हम सबको हेरैं कर दिया...

तुषार- मतलब..?

सफल- मतलब बॉस कोई पहले hi दिन इतनी बिना थकावट वाली ट्रेनिंग कैसे कर सकता है.. जैसे ट्रेनिंग अपने कल ली है वैसे तोह शायद में अज्ज तक नहीं कर पाया.. अप्प चीज़ क्या हो.. अग्गे तोह अप्प पता नहीं क्या बनने वाले हो...

तुषार- (सोचता हुआ) हम्म.. येह तोह मुझे भी नहीं पता की मेरे साथ हो क्या रहा है.. पहले मेरा छोट लगने पर जखम जल्दी से ठीक हो जाना. जैसे मुझे कुछ हुआ hi न हो.. अपने अंदर हर टाइम एक अलग सी ऊर्जा. एक शक्ति महसूस करना.. अगर कभी मुझे गुस्सा अट्टा है तोह लगता है सब कुछ cheer-faad कर रख सकता हु.. और जब भी में कैसर बनता हु तोह अपने आप hi वो दरिंदगी वाले रूप में बदल जाता हु.. किसी पे रेहम खाने का मन नहीं करता.. और ट्रेनिंग मुझे लगा था येह सब में गुस्से और जोश में कर गया.. पर शायद नहीं.. कुछ तोह चल रहा है मेरे साथ जो मुझे पता नहीं...

(जब तक येह बात कर रहे थे.. हवेली में दो ब्लैक कार्स एक्के रुकी.. कार्स तोह फुल पानी से नहीं हुई थी.. jagha-jagha से पानी टपक रहा था.. एक ब्लैक लेम्बोर्गिनी कार से गुरूजी...



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तोह दूसरी ब्लैक बुगाटी कार से शिवं बहार निकला..)


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तुषार- गुरूजी तोह छाए हुए है लकिन शिवं तेरे पास भी बड़ी मस्त कार है यार...

शिवं- शुक्रिया बॉस...

सवाना- येह तोह इसके पास बहुत पहले से है.. रोज सुभे गेराज से निकलता है और पता नहीं कहा जाता है.. और जब लौट कर अट्टा है तोह कार paseeno-paseeni हो राखी होती है.. शायद कार को भी एक्सरसाइज करवा कर लता है.. और गुरूजी और उनकी कार का भी यही हाल है.. हमे कुछ बताते नहीं है येह दोनों Guru-Shishya...

गुरूजी- बाते छोडो.. तुषार ट्रेनिंग के लिए तैयार हो..?

तुषार- बिलकुल गुरूजी.. बताये अज्ज क्या सीखा रहे हो मुझे..?

गुरूजी- (सफल और सवाना की और देखते हुए)

सफल, सवाना- (थोड़ा दर के) जी गुरूजी.. हमारे लिए क्या हुकम है..

गुरूजी- (एक कहली जगह की और इशारा करते हुए) तुम उधर.. तुम उधर.. 10-10फ़ीट गड्ढा खोदो...

सवाना- (हैरानी से) 20 गुरूजी..? लास्ट टाइम तोह 5 था न.. चलो 7फ़ीट कार्डो..

सफल- (धीरे से उसके कान में) ज्यादा मत बोल कही 10 से 15फ़ीट न हो जाये..

सवाना- (झट्ट से) नहीं नहीं.. ठीक है गुरूजी.. हम अभी लगते है काम पर. मतलब ट्रेनिंग पर...

(दोनों ने गद्दा खोदने वाला टूल लिया और लग गए खुदाई करने..)

सफल- (खोदता हुआ धीरे से सवाना से) मुझे एक बात समाज नहीं अत्ति है येह गुरूजी हमसे पता नहीं कोनसा बदला लेते रहते है लकिन बॉस को कुछ नहीं कहते.. कितनी नरमी से पेश आते है.. येह गधा खोदने से होगा क्या येह भी नहीं पता...

गुरूजी- (ोुचि आवाज में) कुछ कहा..?

सफल- (हड़बड़ के) सोच रहा हु 15फ़ीट तक खोद लू गुरूजी...

गुरूजी- जैसी तुम्हारी मर्जी...

सफल- (अपना माथा pet.ta हुआ)

सवाना- (हस्ती हुई) क्यों..? और बोल ले..

(तुषार को तोह समाज hi नहीं ा रहा था की हो क्या रहा है.. लकिन उसने कुछ पूछा नहीं..)

तुषार- गुरूजी अब मुझे बताये क्या करना है..

गुरूजी- शांति बीटा शांति.. दिराज रखो.. इतनी जल्दबाजी करोगे तोह तुम कुछ नहीं सिख पयोगे.. कुछ सिखने के लिए सिर्फ जोश और शारीरिक ताकत hi नहीं मन की शांति और उसपे पूरा कण्ट्रोल होना चाहिए...

तुषार- मतलब.. में कुछ समजा नहीं.. और खहे की शारीरिक ताकत गुरूजी मेरा बॉडी देख के लगता है मेरे में कोई ताकत कोई जोश है..?

गुरूजी- (मुस्कुरा के) तुम खुद अनजान हो तुषार.. वक़्त ऐनी पर तुम खुद उसका आभास हो जायेगा.. फ़िलहाल तुम्हे अपने मन को शांत करना होगा...

तुषार- पर मेरा मन तोह शांत hi है...

गुरूजी- नहीं.. नहीं शांत तुम्हार मन.. बहुत सी उलझने हमेशा अपने साथ लिए घूमते हो.. जा तोह इन् उलझनों को सुलझाओ.. जा फिर जब इनका वक़्त ए तब इनके बारे में सोचो.. जो गलतिया कर चुके हो उनके बारे में मत सोचो.. जिस रस्ते पर तुम चलने जा रहे हो उसपे हमेशा खतरा मंडराता रहेगा.. ऐसे में तुम्हारी शारीरिक नहीं तुम्हारी दिमागी शक्ति काम आएगी.. अपनी उलझनों को गुस्से और नफरत से नहीं दिमाग और प्यार से उन्हें सुलझाने की कोशिश करो...

तुषार- पर में कहा गुस्सा करता हु गुरूजी...

गुरूजी- तुम अपने अंदर एक तूफान को दबाये रखे हो.. जब कोई किसी के साथ बुरा करता है तोह येह अपने आप बहार निकल आता है...

तुषार- लकिन किसी के साथ बुरा हो तो मुझे गुस्सा आएगा hi न.. और इसमें गलत क्या है..

गुरूजी- गुस्से से तुम्हे कोई फयदा नहीं मिलेगा.. इससे शायद तुम खुद को और बाकियो को भी तबाह कर बैठो.. कोई मुसीबत ए तोह शांति से उसके बारे में सोचो.. तुम्हारा गुस्सा हमेसा तुम्हे गलत कदम पर लेक छोड़ देगा जिससे तुम और मुसीबत में पढ़ जाओगे...

तुषार- आप कह तोह ठीक रहे हो गुरूजी...

शिवं- हाँ बॉस.. गुरूजी ने जो भी कहा बिलकुल ठीक कहा.. आप हमारे बॉस हो आप जो आर्डर डोज हम वैसा hi करेंगे.. लकिन आप हर वक़्त गुस्से से फैसला लेते हो.. जो की किसी के लिए भी खतरा बन सकता है.. ऐसे वक़्त में आपको ठन्डे दिमाग से सोचना चाहिए और मन को हमेसा शांत रखना चाहिए.. आप हमारे बॉस हो.. इंडिया के बेस्ट एजेंट्स के बॉस.. आपको हमसे भी कई गुणा आगे का सोचा चाहिए.. येह Jaggu-waggu को तोह हम चुटकियो में मसल दे.. अज्ज येह गुरूजी ए है तोह सिर्फ आपको सीखने, येह आपकी लड़ाई है.. हम तोह बस आपके साथ है.. जैसा आप बोलेगे हम वैसा कर देंगे.. लकिन इस लड़ाई में सबसे ज्यादा मजबूत आपको होना है.. मन से भी और तन से भी...

तुषार- (उसके कंधे पे हाथ रखता हुआ) शुक्रिया दोस्त, शुक्रिया.. में समाज गया.. गुरूजी अब बताये कैसे और क्या करना है मुझे...

गुरूजी- (मुस्कुरा के) बस यही निचे बेथ जाओ.. (तुषार निचे योग पोज़ में बेथ जाता है) ऑंखें बंद करो.. (तुषार ऑंखें बंद कर लेता है) अपने बचपन से लेकर अब तक क्या क्या हुआ है, शुरू से अब तक सब कुछ dhire-dhire सोचो.. एक बार वापिस अपनी बीती जिंदगी को देखो, कोशिश करो वो हर एक याद वापिस महसूस करने की.. (तुषार सोचने लगता है.. अपने बचना की जो dhundhli-dhundhli यादें थी उसमे खोता चला जाता है....)

《2061-वर्ड्स》
 
माफ़ करना दोस्तों! में पिछले 3दिन से हॉस्पिटल हु और शायद अपडेट ऐनी में देरी हो सकती है. में येह नहीं कह रहा की अपडेट नहीं आएगा. आएगा जर्रूर आएगा में 20,25 दिन हॉस्पिटल में तोह शायद वीक में 1 अपडेट ए. में कोशिश करुगा 2 देने की लकिन वीक में 1 अपडेट पक्का है....

छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था इसलिए हॉस्पिटल की हवा खा रहा हु......
 
अपडेट-25

गुरूजी- (मुस्कुरा के) बस यही निचे बेथ जाओ.. (तुषार निचे योग पोज़ में बेथ जाता है) ऑंखें बंद करो.. (तुषार ऑंखें बंद कर लेता है) अपने बचपन से लेकर अब तक क्या क्या हुआ है, शुरू से अब तक सब कुछ dhire-dhire सोचो.. एक बार वापिस अपनी बीती जिंदगी को देखो, कोशिश करो वो हर एक याद वापिस महसूस करने की.. (तुषार सोचने लगता है.. अपने बचना की जो dhundhli-dhundhli यादें थी उसमे खोता चला जाता है....)

|अब अग्गे|

(तुषार अपनी यादों में खोइया हुआ था.. अपने बचपन के कुछ ख़ुशी के पल.. जब वो पहली बार स्कूल गया था रोटा हुआ.. तान्या ने जब उससे मरना तोह आरुषि ने तान्या को पकड़के खींचना लकिन अन्निका ने उससे कास के गाला लगा ताकि कही उससे छोट न पांच जाये.. जब उसका स्कूल में एक बार एक लड़के से झगड़ा हुआ था तोह तीनो बहनो ने कैसे उसकी धुलाई की थी.. dhire-dhire बचपन से लेकर अब तक तुषार उन् सभी यादों को याद कर रहा था जो उससे याद थी.. लकिन इन् यादों को याद karte-karte उससे महसूस हुआ की जैसे उसकी यादों में कोई chhed-chhad हो रही है.. उससे कुछ और भी दिख रहा था.. जहा उसका चेहरा अपनी यादों को याद कर मुस्कुरा रहा था अब उस चेहरे के भाव कभी गंभीर, कभी हैरानी, गुस्सा, दर्द, ख़ुशी में बदल रहे थे.. बंद आखों से भी कुछ ासु बहार आकर निचे टपक रहे थे.. और यह सब हो रहा था जो वो देख रहा था.. अपनी यादों के sath-sath वो किसी और की भी यादें देख रहा था.. वो खुद तोह था उन् यादों में लकिन वो घटना कब कहा घाटी उस कुछ याद नहीं ा रहा था.. अपनी यादों के साथ वो bich-bich में इन् अनजान यादों को में देख रहा था.. जिसमे वो खुद था एक अस्सी जगह जो उसने पहले कभी नहीं देखि थी…)

|Tushar’s हाउस|

(तान्या अपने रूम में लेती कुछ सोच रही थी…

अन्निका- (रोटी हुई आयी) भैया.. भैया…

तुषार- क्या हुआ मेरी गुड़िया.. रू क्यों रही है तू.. हाँ..?

अन्निका- (अपनी ऑंखें मल्टी हुई) भैया तान्या दीदी ने मारा…

तुषार- अरे मेरी गुड़िया को मारा तान्या ने.. चल ा अभी खबर लेते है उसकी…

(तान्या अभी अपनी 1साल पुराणी यादों को याद कर रही थी...)

तुषार- (तान्या क रूम में घुसता हुआ) ए चुड़ैल.. क्यों मारा तूने मेरी गुड़िया को..?

तान्या- मैंने कहा मारा है इससे.. झूठ बोल रही है येह…

अन्निका- (तुषार को साइड से गले लगा के) नहीं भैया.. दीदी ने मारा…

तुषार- (अन्निका के गाल सहलाते हुए) देखा.. मेरी गुड़िया कभी झूठ नहीं बोलती…

तान्या- (बीएड से कड़ी होती हुई) हाँ मारा मैंने इससे एक कस के थप्पड़…

तुषार- (शॉक से) क्या.. तूने मेरी गुड़िया को थप्पड़ मारा.. तुम पागल हो क्या तान्या.. अज्ज तेरा बर्थडे है इसलिए छोड़ रहा हु तुझे.. वर्ण…..

तान्या- वर्ण.. वर्ण क्या..? तू भी बचा हुआ है क्युकी तेरा भी अज्ज hi बर्थडे है… और हल्का सा मारा था मैंने तेरी गुड़िया को येह तोह पता नहीं कैसे इतना रू पड़ी...

तुषार- मेरी गुड़िया बहुत नाजुक है.. हल्का सा भी उससे लग जाये तोह उससे क्या मुझे भी दर्द होता है.. (अन्निका को देख) हैना मेरी प्यारी सी जान…

अन्निका- (छलांग मार तुषार से lipat.ti हुई) हाँ प्यारे भैया…

आरुषि- (रूम में एंटर करती हुई) तुम तीनो इधर गप्पे लगा रहे हो.. चलो निचे सब मेहमान ा गए है केक काटने का टाइम हो गया है...

(चारो निचे पौंछते है तोह निचे बस aas-pados के लोग थे.. करीब 20-25 लोग hi होंगे जो ए थे वो भी तुषार की फॅमिली को ज्यादा अचे से नहीं जानते थे लकिन इन्विते करने पर ा गए थे… जैसा की स्टोरी की स्टार्टिंग में कहा था की तुषार की फॅमिली वालो को कोई नहीं जनता.. तुषार के पापा कितने बड़े बिजनेसमैन है, वो क्या बिज़नेस करते है किसी को नहीं पता.. इंडिया के टॉप5 बिजनेसमैन में से एक होने के कारन हमेशा उनपर और उनकी फॅमिली पर कोई न कोई खतरा मंडराने का दर था.. इसलिए उन्होंने अपनी फॅमिली को दुनिया वालो के सामने हाईड रखा.. यहाँ तक की जो लोग उनके लिए काम करते है उन्होंने भी अपने बॉस को और उनकी फॅमिली को नहीं देखा बस सेक्रेटरी को छोड़ कर...)

(तुषार और तान्या ने एक साथ दो bade-bade केक कटा और पहला टुकड़ा दोनों ने एक दूसरे को खिलाया और ek-ek किश दोनों ने ek-dusre के गाल पे kiya..fhir दोनों ने आरुषि, मम्मी, पापा को केक खिलाया और एक अलग केक बाकि मेहमानो में बाँट दिया… अन्निका अभी बची हुई थी.. कभी इधर तोह कभी उधर देख रही थी की कब उसकी बरी आएगी केक खाने की.. फिर जब थक हर के उससे लगा की उसका नंबर बिना बोले नहीं ऐनी वाला तोह बोली…)

अन्निका- मेको भी खिलाओ न केक…

आरुषि- येह भूकर अभी तक भूखी बैठी है…

अन्निका- (मासूमीयत से) मेको कोई केक नहीं खिला दीदी.. सबको केक खिलाया मुझे नहीं खिलाया…

तुषार- अरे अभी खिला देते है मेरी गुड़िया को…

(फिर तुषार और तान्या दोनों ने मिलकर ek-ek बड़ा वाला केक का तड़का अन्निका को खिलाया.. उसने भी बिना देर किया अपना छोटा सा मुँह पूरा खोल लिया और दोनों केक के टुकड़े उसके मुँह में दाल दिए.. टुकड़े इतने बड़े भी नहीं थे. अन्निका करीब 1मिंट तक टुकड़ो को मुँह में इधर उधर करती फाइनली निगल hi गयी..)

अन्निका- भैया.. दीदी.. मैं मर जाती तोहह.. इतना बड़ा टुकड़ा खिलाया मुझे.. मेरे पे रेहम नहीं करते आप लोग.. मैं छोटी हु सब मुझे परेशां करते...

तान्या- अरे अभी कहा परेशां किया है.. चल तुषार...

(तुषार भी थोड़ा सा मुस्कुराया और अपने केक को पूरा का पूरा निचे से पकड़ लिया और चल दिया अन्निका की तरफ.. उधर तान्या ने भी शामे hi किया हाथ में केक लिए अन्निका की तरफ बढ़ने लगी.. अन्निका बेचारी दरी दरी सी पीछे हटने लगी..)

अन्निका- भैया येह क्या करने वाले हो आप लोग.. मुझे केक से मरोगे.. मुम्मा.. येह देखो न येह भैया और दीदी का बर्थडे और येह लोग मुझे केक लगा रहे है.. अपने बर्थडे पे तोह मैं वैसे hi केक से नहाती hi हु और इनके बर्थडे पे भी मुझे hi केक लगाया जा रहा है.. मेको गन्दा नहीं होना.. पापा प्लीज हेल्प...

पापा- (मुस्कुराते हुए) सॉरी बीटा.. आज इनका बर्थडे है तोह दन्त भी नहीं सकता...

अन्निका- पापा आप बुरे हो... (रेहम भरी नजरो से) दीदी आप हेल्प करोगी…

आरुषि- अरे कैमरा कहा है में वीडियो निकलती हु…

अन्निका- आप भी बुरे दीदी.. मैं किसी से बात नहीं करुँगी…

तान्या- (एक दम उसके नजदीक जाती हुई) कितना बोलती है येह लड़की.. एक बार वापिस तेरा मुँह केक से बंद करुँगी... चल तुषार रंग दे इससे केक से...

(तुषार भी उसके साथ अग्गे बढ़ा अन्निका अभी पीछे जाती जाती दिवार के साथ लगी हुई थी.. वो कार्नर वाली दिवार थी तोह दोनों तरफ से घिरी हुई थी और सामने एक तरफ तुषार तोह दूसरी और तान्या.. तुषार थोड़ा और नजदीक गया और जैसे hi तान्या अन्निका पे केक डालने वाले थी तुषार तेजी से अन्निका के आगे खड़ा हो गया.. तान्या को कुछ समाज ए उससे पहले hi तुषार ने अपना वाला केक तान्या के मुँह पे दे मारा.... मौका देख अन्निका पीछे से आयी और तान्या के हाथो केक पकड़ उससे तुषार के मुँह पे दे मारा.... दोनों अभी मुँह लटकाये खड़े थे और मम्मी, पापा, और आरुषि और बक्की पार्टी में ए लोगो का has-has के पेट दर्द करने लगा था.. पापा और आरुषि ने alag-alag एंगल्स से वीडियो भी बना ली थी...)

अन्निका- (khil-khila क हस्ती हुई) हहहहहह.... अरे भैया बस.. अब और नहीं देखा जायेगा आपका इतना फनी फेस... और दीदी.. ओह सॉरी सॉरी जोकर दीदी.. मजा आया आपको.. भैया हमेशा मेरे साथ hi है.. (नाचती हुई) मुझे पता था भैया पलट जायेंगे... हेहेहे

तान्या- (गुस्से से फेस बनके) मिल गयी न सजा पलटने की..

तुषार- (अपना लटका हुआ मुँह लिए केक साफ़ करता हुआ) वाह गुड़िया वाह.. ाचा सिला दिया तूने मेरे प्यार का, यार ने hi ख़राब किया चेहरा यार का...

अन्निका- (हस्ती हुई) हहह.. सॉरी भैया.. आज आप दोनों का hi बर्थडे था इसलिए आप दोनों को hi केक से रंगना जरुरी था...

आरुषि- सही कहा अन्नू.. और बिलकुल ठीक किया तूने.. तेरे साथ भी तोह यही हुआ है.. (सदा सा मुँह बना के) और मेरे साथ क्या नहीं हुआ है.. बहुत ाचा किया तूने.. (अंगूठा दिखती हुई) ग्रेट जॉब...

अन्निका- थैंक्स दीदी...

(तान्या जो कब से गरम हो रही थी गुस्से से फाटक से बोली..)

तान्या- (तुषार का कलर पकड़) बुद्धू कही के. साडी रात सोच के प्लान बनाया और जब अंजाम देने का वक़्त आया तोह गद्दारी कर्ली तूने.. मिल गयी न गद्दारी की सजा.. लकिन अब असली सजा तुझे में दूंगी देख तू...

तुषार- (हाथ जोड़ ऊपर देखता हुआ) हे ऊपर वाले.. शायद आज तेरे से मुलाकात करने ा रहा हु.. कुछ मंगवा के रखना.. में बस अभी आया.. (एक तरफ इशारा करता हुआ) वो देख तान्या. कितना मोटा मेंढक है..

तान्या, अन्निका- (दर के एक साथ उछाल के उस तरफ देखती हुई) आह मुम्मा मेंढक...

(मोके का फयदा देख तुषार बाघ लिया.. तान्या भी उसके piche-piche बघणे लगी.. तुषार अपने रूम में पौंछा तान्या ने बाघ की उसके ऊपर छलांग मार दी दोनों बीएड पे गिर गए.. अभी तुषार निचे पीठ के बल लेता हुआ था और उसके साइन पर तान्या बैठी हुई थी जो अब jor-jor से मुक्के उसके साइन पर जड़ रही थी.. कुछ देर मार खाने और मार खिलने के बाद दोनों थक के बीएड पर हफ्ते हुए लेट जाते है…)

तुषार- (हलके दर्द में) बहुत मारा है तूने.. बर्थडे बॉय हु में.. मेरे पास पावर है आज मुझे कोई हाथ नहीं लगा सकता.. तूने तोह मुक्के पेले है जो.. आअह्ह्ह..

तान्या- (हस्ती हुई) बर्थडे गर्ल तोह में भी हु तोह पावर तोह मेरे पास भी हुई न…

तुषार- हाँ मुझे मरने की…

(तान्या आगे कुछ बोलती तुषार का फ़ोन रिंग होने लगा..)

तुषार- (सीधा होक फ़ोन उठता हुआ) Hello..

दूसरी तरफ- ……….

तुषार- (बीएड से उठ परेशां होता हुआ) क्या… नहीं.. ऐसा नहीं करना.. में अभी उससे लेके ा रहा हु.. प्लीज इशिता के साथ कुछ मत करना..

दूसरी तरफ- ………..

तुषार- पर तुम्हे उससे क्या काम है…

दूसरी तरफ- ………...

तुषार- (आखों में ासु लिए) नहीं नहीं.. ऐसा कुछ मत करना.. में अभी आता हु…

(तुषार डरा, घबरा अपनी आखें साफ़ कर तान्या की तरफ देखता है जो बड़ी परेशां हुई उससे देख रही थी..)

तान्या- (चिंता में) क्या हुआ तुषार.. इतना परेशां क्यों है.. रू क्यों रहा है.. किसका फ़ोन था…

तुषार- वो वो.. तान्या…

तान्या- (उसके पास जेक अस्सू साफ़ करती हुई) क्या ह्या तुषार.. बता न प्लीज.. मुझे बहुत चिंता रही है.. क्या बात हुई है..?

तुषार- वो तान्या.. येह बात किसी और को पता नहीं लगनी चाहिए.. (उसका हाथ पकड़ता हुआ) तू चल मेरे साथ…

तान्या- (उसके piche-piche चलती हुई) पर कहा…

तुषार- सब पता चल जायेगा पहले चल मेरे साथ…

(निचे पांच के तुषार ने कोई बहाना बना लिया और तान्या को साथ लिए घर से बहार चला गया और कार में तान्या को साथ लिए कहे जाने लगा… करीब एक घंटे बाद तुषार कार को एक सुनसान से रस्ते पर मूड देता है.. थोड़ी hi आगे जेक सामने एक छोटा सा घर दिखाई देता है.. तुषार कार को घर के सामने रोकता है और जल्दी से कार का दरवाजा खोल घर की और चल देता है.. तान्या भी भगति हुई तुषार के पिछले चल देती है…)

तान्या- (उसकी बाजु पकड़ती हुई) तुषार!! इधर क्यों लेके आया है मुझे.. कोनसी जगह है यह…

(तुषार कुछ नहीं बोलता और आगे चलने लगा जहा सामने 4 गार्ड्स ब्लैक कपड़ो में खड़े थे.. घर के 2 मैं दूर थे.. 2 गार्ड्स लेफ्ट और 2 गार्ड्स राइट वाले दूर के सामने खड़े थे.. तुषार उनके सामने जेक खड़ा हो गया लेफ्ट तरफ वाले गार्ड्स ने तुषार को अपनी ऑर्डर इशारा किया तोह तुषार उसकी तरफ चला गया.. तान्या तुषार के थोड़ा पीछे परेशां कड़ी थी…)

गार्ड.1- कुछ बताया तोह नहीं इससे..?

तुषार- नहीं मैंने कुछ नहीं बताया.. पर इससे तुम्हे क्या मतलब है.. और इशिता कहा है..? प्लीज मुझे जल्दी बताओ…

(गार्ड्स उससे लेफ्ट वाला दूर ओपन करके दिखते है जिससे देख तुषार के ासु jhar-jhar बहने लगते है.. वो वो जोर से चीखता हुआ अंदर एंटर कर जाता है.. तान्या को अभी नहीं दिखा था की तुषार ने क्या देखा वो भी उसके पीछे जाने लगी तोह गार्ड्स ने दूर बंद कर दिया..)

तान्या- (परेशां होक) क्या हुआ.. मुझे जाने दो अंदर.. क्या है अंदर जिससे देख मेरा भाई jor-jor से रोने लगा और अंदर बाघ गया..?

गार्ड.1- (दूसरे दूर की तरफ इशारा करते हुए) आप वह से जाइये…

(तान्या ने भी ज्यादा नहीं सोचा.. उससे फ़िक्र हो रही थी तुषार की वो जल्दी से उस तरफ गयी तोह गार्ड्स ने दूर खोल दिया तान्या अंदर चली तोह दूर बंद हो गया.. तान्या ने अंदर जाकर देखा तोह चारो तरफ अँधेरा चाय हुआ था.. और फिर ek-dam से रूम में रौशनी फेल गयी.. अभी रूम में एक बीएड लगा हुआ था और बीएड के पास 4 hate-kate आदमी खड़े थे.. चारो आदमी dhire-dhire तान्या की तरफ बढ़ने लगे.. तान्या को दर लगने लगा एक अनजान जगह पर एक बंद कमरे में 4 आदमियों से साथ वो अकेली थी.. वो dhire-dhire पीछे कदम बढ़ने लगी…)

तान्या- कोण हो तुम लोग.. क्या चाहते हो मुझसे..?

(कोई आदमी कुछ नहीं बोलै और चारो ने आकर तान्या को पकड़ लिया.. उन्होंने तान्या को पकड़ा और लेकर बीएड पर पटक दिया…)

तान्या- (रोटी हुई) तुषाररर… कहा गया तू… छोडो मुझे तुम लोग….

(एक आदमी ने रस्सी ली और तान्या के hath-pau कास कर बीएड से बांध दिए.. तान्या तोह बस रोये चीखे जा रही थी.. खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश किये जा रही थी.. तान्या के सामने वाली जो दिवार थी वो ek-dam से एक मिरर में बदल गयी.. उसने देखा मिरर के उस पर तुषार ek-dam शांत खड़ा उससे देख रहा है…)

तान्या- तुषारर.. देख क्या रहा है… यहाँ क्यों लेके आया मुझे..? यह लोग क्या कर रहे मेरे साथ.. बोल न.. बोलता क्यों नहीं तू.. खड़ा क्या है.. (रोटी हुई) तुषार.. यह लोग मेरा रपे कर रहे है क्या..? तू अपनी बहिन का रपे करवाने इधर लाया है…

(तुषार भट्ट बना बस देख रहा था.. एक आदमी ने तान्या की स्कर्ट को पकड़ा और थोड़ा सा ऊपर कर दिया जिससे उसकी गोरी जाँघे दिखने लगी.. फिर उस आदमी ने तान्या की टॉप को भी थोड़ा खिसका के ऊपर कर दिया जिससे उसकी ब्लैक ब्रा thori-thori दिखने लगी और उसका गोरा सॉफ्ट पेट सामने ा गया.. तान्या रू रही थी उन् आदमियों के सामने गिड़गिड़ा रही थी.. तुषार को cheekh-cheekh के पुकार रही थी जो बस उससे मिरर से शांत खड़ा देख रहा था.. उसके चेहरे पर कोई भौ नहीं थे.. न दुःख के न ख़ुशी के जैसे किसी सदमे में हो जा शायद वो तुषार था hi नहीं.. इधर एक आदमी ने पास में रखे एक टेबल पर से एक बोतल उठाई जिसमे कुछ लिक्विड था.. उसने बोतल का ढक्कन खोला तोह उसमे से वाइट स्मोक निकलने लगी.. आदमी ने वो लिक्विड. शायद वो कोई केमिकल था.. उससे लेकर वो तान्या के करीब ऐनी लगा………

《2481-वर्ड्स》
 
शुक्रिया Mr.X भाई.. भाई मैंने दिखया है की तुषार और तान्या के बिच जो नफरत बानी थी उससे तान्या बैठी याद क्र रही है.. तुषार की मज़बूरी हो सकती है जा कुछ और भी जिसकी वझे से उसने तान्या को बिन बताये ले गया गुस्सा जरुरी है भाई. पर आधा अधूरा पढ़ क जज नहीं करना चाहिए.. नफरत के कारन बड़े hi होते है. और यह तान्या को नफरत तोह इतना थी की तुषार मर जाता तोह उससे फरक न पड़ता.. अपनी बात रखने क लिए शुक्रिया भाई.. कीप सपोर्टिंग..
 
थैंक्स मोहद शाहबाज़ भाई.. सही कहा भाई सेक्स सन क्या अभी स्टोरी में एक किश सन तक न दिखया गया.. बहुत सरे रीडर्स भी इंतजार क्र रहे है. लकिन जल्द hi आपकी इच्छा पूरी होगी.. स्टोरी बहुत अग्गे लेके जाना है सब काम dhire-dhire होंगे.. हीरो की बात करे तोह उससे शुरुवात में hi बहुत कमजोर दिखया है. नाजने कितनी गलतिया वो क्र चूका और आगे करेगा. पर इन् सब गलतियों से sikhta-sikhata hi वो बनेगा एक परफेक्ट.................. शुक्रिया भाई कीप सपोर्टिंग....
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. अपने बिलकुल सही बोली है ध्यान एक अभ्यास है जहा एक व्यक्ति एक तकनीक का उपयोग करता है.. अन्निका तोह सबकी फव है हो राखी है.. यह लड़की सबकी फव hi रहे इसलिए इस्पे बहुत म्हणत करता हु.. आप लोगो ने इससे स्पेशल गर्ल बना दिया जबकि यह थी नहीं. लकिन फिर मैंने इस थोड़ा और सुधरा है ताकि आपको पसंद aye..Tania और तुषार के नफरत के राज़ dhire-dhire खुलेंगे... थैंक्स बीआरओ फॉर थिस ब्यूटीफुल रिव्यु. एंड हैप्पी होली.. कीप सपोर्टिंग...
 
शुक्रिया आपका विक्रम भाई.. हाँ भाई तुषार अपने बेटी जिंदगी को याद कर रहा है लकिन भाई आप शायद यहाँ थोड़ा गलत हो की जो तान्या और तुषार वाला सीन दिखया जा रहा वो तुषार अपनी यादों में देख रहा गलत.. वो घर पे तान्या अपनी सोचो में घुम्म उससे याद कर रही है.. मैंने कोशिश तोह की थी काफी. तुषार रूम में गया तोह क्या हुआ वो तान्या को नहीं पता उससे बस पता है की उसके साथ क्या क्या हुआ.. बाकि शयद मैं इससे ठीक से लिख नहीं पाया. आगे से मैं थोड़ा और ज्यादा ध्यान दूंगा... शुक्रिया आपके कमैंट्स का भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
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