TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》 - Page 9 - SexBaba
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TUSHAR EK YODHA 《Incest, Thrill, Magical》

अपडेट-36

अननोन.1- (फ्रीज़ज़ीर के पास जाकर) अब्बे इतना खून कहे लगा है.. अंदर क्या lashe-washe रख राखी है क्या.. आअह्ह्ह्ह...

(यह एक चीख उस आदमी की तभ गूंजी जब उस आदमी ने फ्रीजर का उप्पेर ड्रावर खोला तोह एक लम्बा नोकीला टूल आकर उस आदमी की गर्दन में घुस गया.. आदमी की सांसी वही जैम गयी और वो एक साइड को गिर गया.. दूसरे आदमी ने अपने पास रखा एक बटन प्रेस किया तोह वो टूल वापिस अंदर चला गया और ड्रावर बंद हो गया.. उसने उस आदमी की लाश को मन मरते हुए एक काळा बड़े से बैग में डाला और एक कोने में रख दिया...)


अननोन.2- (हस्ता हुआ) हे हे ः है हाहाहाहा.. (अपने एक हाथ को gol-gol घूमता हुआ) डॉ. लॉकेट नाम है मेरा इस दुनिआ को अपनी जंजीर में बांधना सपना है मेरा.. हे हे हे है है है है...



|अब अग्गे|


|बैक तो सिटी नातिर|

(लाला के आदमी पूरी सिटी में एक के पीछे एक करीब 30-35 गाड़ियां लगाए, हथियारों से लैस पुलिस स्टेशन को उड़ने निकलते जा रहे थे.. उनका मकसद यह था की सिटी में जो 15 पुलिस स्टेशन है उसमे घुस कर जितने अंदर पुलिस वाले सबको मर गिरना है और सरे कैदियों को जेल से फरार करने के बाद थाने को जला देना है...)

|बैक तो तुषार|

(शाम का वक़्त था, हरलीन अपने घर को चली गयी थी.. तुषार भी कुछ काम बोल कर घर से निकल गया और हवेली पहुँच गया.. Safal-Savana, प्रियल और सिया को लेकर हवेली पहुँच गए थे.. दोनों माँ बेटी को तोह कुछ ख्याल hi नहीं था की उन्हें कोण किधर ले जा रहा है.. खीर हवेली पहुँच कर सवाना ने प्रियल को जो भी हॉस्पिटल में हुआ सब बता दिया और वो और सफल कोण है..? तुषार के लिए काम करते है, यह हवेली भी उसकी है यह सब बता दिया.. करीब 1 घंटे बाद तुषार हवेली आया उसने अपने घर के सेक्रेटरी को कुछ समजा के 7-8 लोग हवेली में पहुंचा दिया थे, तककि वो सब सिया के पापा का antim-sanskar कर सके.. सिया को सवाना के पास हवेली में छोड़ 2- 2:30 घंटे बाद अंतिम विदाई की तयारी हुई सब निकल पड़े ram-ram सत्य करते हुए.. तुषार ने सिया के पापा की चिटा को आग दी और उनकी अंतिम विदाई की.. प्रियल काफी हद तक संभल चुकी थी.. वो बस कड़ी सामने जल रही अपने पति की लाश को देख आंसू बहा रही थी.. शाम निकल गयी और आसमान में टारे निकल ए, करीब रात के 9 बजे गए थे, लकिन अभी तक कोई वह से गया नहीं था...)

|अमेरिका, सिटी शिकागो|

( रूद्र अपनी बिल्डिंग के किसी फ्लोर पर था.. वो एक ब्लैक T-shirt, पंत में खड़ा था..


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हेलमेट जैसा पुरे सर को कवर कर देने वाला एक मास्क उसने पहना था.. रुद्रे ने एक टेबल का ड्रावर खोल उसमे से एक कुल्हाड़ी निकल ली.. और एक बैग जो दिवार से लटका हुआ था उससे उठा कर अपनी पीठ पर पहन लिया.. यह कही जा रहा था, और इसने पूरी तयारी कर ली थी, वो क्या तयारी की थी पता नहीं...)

रूद्र- (लिफ्ट में, ऊपर के फ्लोर से निचे आता हुआ) यह साला बहुत हुआ, आज पहले इसका ख़तम करके आता हु...

(और रूद्र लिफ्ट से बहार निकल अपनी कार पार्किंग की तरफ जाने लगा तोह पीछे से चाचा ने आवाज लगाई...)

चाचा- अरे कहा जा रहा है...

रूद्र- किसी भोसड़ीवाली का भोसड़ा बनाने...

चाचा- कोण..?

रूद्र- अरे वही वो जो baar-baar हिटमैन बेज रही है...

चाचा- अरे उससे क्या डरता है.. वो तोह.....

रूद्र- (बिच में, उसके पास आता हुआ) क्यों न दारू.. सोच तेरे ऊपर हर वक़्त कोई गन तने खड़ा है, तू जहा जा रहा है तेरे पे स्नाइपर का लाज़र है तोह कैसा लगेगा तुझे.. लगेगा दर.. लगेगा न...

चाचा- ाचा चल जा मुझे क्या है मैं तोह बस इतना कह रहा था की इतनी बड़ी फ़ौज रख कर खुद क्यों जाता है लड़ने...

रूद्र- (हस्ता हुआ) तोह अपनी दरिंदगी कैसे कायम रखूँगा चाचा.. चल अभी जान दे मुझे.. आज तोह लुंड मुँह में डालूंगा उसके.. उसकी गांड खोल कर लाल मिर्ची से न भरी तोह कहना...

चाचा- अरे ek-do को तोह लेता जा.. जरुरत पद सकती है...

रूद्र- (पीछे मुद देखता हुआ, मुस्कुरा के) हूहहह.. जरुरत..? यह सब झंटू तेरे लिए इकठ्ठा किये है... (इतना बोलकर वो कार में बैठा और कार को बिल्डिंग से बहार निकल लिया...)

चाचा- एक नंबर का हरामी है.. (मुस्कुराता हुआ) अरे बच ले किआरा अहति.! बच ले.. तेरी मौत रस्ते में है.. जल्द hi तेरे पास होगी.. गांड में दकन लगा ले यह सच्चे आज तेरी गांड मिर्ची से भरेगा हहहह...

(रूद्र की कार 240 कम्फ की रफ़्तार से दौड़ी हुई करीब 30 मिनट बाद एक खली शांत जगह पर पहुंची.. यह एक विलेज था.. chote-chote घरो की बस्ती में एक बहुत बड़ा बांग्ला उससे नाराज ा रहा था... रूद्र ने कार को विलेज के बहार hi रोक लिया और कार से बहार निकल गया.. वही एक बैग जो रूद्र साथ लाया था उससे बहार निकल लेता है और chupke-chupke चल पड़ता है उस बंगले की और.. काळा suit-boot में मुँह पर एक हेलमेट टाइप मास्क पहने वो विलेज के सरे घरो के पीछे से छुपकर निकले जा रहा था.. बांग्ला विलेज के bicho-bich था.. अभी सुभे थी और विलेज में chehal-pehal भी काम hi थी.. बांग्ला काफी बड़ा था हर जगह गार्ड्स गन्स लेकर खड़े थे.. रूद्र उस बंगले के पीछे की बड़ी सी दिवार करीब 3 मंजिला इमारत जितनी उच्ची दिवार के सामने आकर रुक गया...)

(बंगले के पीछे 1, 2 hi घर थे, और न hi वह कोई jeev-parinda घूम रहा था, वह काफी शांति थी.. रूद्र ने अपना बड़ा सा बैग उतर कर जमीन पर रखा और उसमे से कुछ सामान निकल लिया.. पहले उसने एक प्लास्टिक का बॉक्स निकला, उसमे लगी 3, 4 बटन को रूद्र ने दबा दिया तोह वो बॉक्स के एक ड्रोन जैसे फंस बहार निकल ए.. उसमे लगी स्क्रीन पर रूद्र ने कुछ किया और वो बॉक्स वह में उड़ता हुआ ऊपर और ऊपर और ऊपर जाता हुआ बंगले की दिवार ऊपरी किनारे तक पहुँच गया.. वो ड्रोन अंदर जितना जहा तक दिख सके साडी डिटेल्स निकल आकर रूद्र की वाच पर सेंड करदी और बंगले की दिवार को पर कर वो बॉक्स दिवार के पर गिर गया.. फिर उस बॉक्स में कुछ आवाज हुई और वो बॉक्स dhire-dhire फटने लगा.. यह था इसके अंदर एक प्लास्टिक का एयर मटलेस जो dhire-dhire अपने अंदर हवा भर रहा था.. और फूलता जा रहा था...)

(रूद्र ने तब तक कुछ और तैयार कर लिया था.. यह भी एक वैसा भी एयर मैट्रेस्स टाइप था, पर थोड़ा अलग.. रूद्र के वाच पर एक मैसेज आया, यह मैसेज था की उधर काम हो गया अब तेरी बरी, ृर्दा उस हवा से बहरे गद्दे पर अपना बेग लेकर पीठ के बल लेट गया और वाच पर एक बटन दबा दिया.. एक जोरदार झटका दिया उस गद्दे से मिला और रूद्र हवा में, गुलाटी मरता हुआ वो दिवार पर कर गया और दिवार के दुरसी तरफ दूसरे गद्दे पर जा गिरा...)

|बैक तो सिटी नातिर|

(अब तक 3 पुलिस स्टेशन की हालत ख़राब कर चुके थे लाला के आदमी.. इस वक़्त दर, खोफ्फ़, घबराहट सिटी के लोगो में दौड़ रही थी.. यह खबर dhire-dhire फैलती जा रही की कुछ गुंडे पुलिस स्टेशन जला रहे है, पुलिस वालो को मार रहे है, जेल में कैद कैदियों को आजाद कर रहे है.. अब तक तीनो पुलिस स्टेशन से करीब 80 पुलिस वालो की मौत हो चुकी थी.. बिच में ा रहे हर पुलिस वाला मौत के घात उतर दिया जा रहा था.. अब रात हो चुकी थी और लाला के गुंडे चौथे पुलिस स्टेशन की और जा रहे थे सड़के सुनसान थी हर कोई यह खबर सुन कर अपने घर से बहार नहीं निकल रहा था.. हथियारों से लैस 35 गाड़ियां भर के करीब 300 गुंडे अपने अगले टारगेट की और जा रहे थे.. उन्होंने एक पेट्रोल पंप पर किया और थोड़ी दूर जाकर सब गाड़ियां एक के बाद एक पीछे रूकती गयी.. उसकी वझे थी की सामने एक बोलेरो कार लिए गुंडों की आंखों में अपनी कार की सीधी लाइट मरता हुआ सड़क के बीचो दया खड़ा था...)

( 2 लीणो में गुंडों की गाड़ियां सड़क में रुक गयी.. अगली वाली दोनों गाड़ियों से aage-piche, daen-baen दोनों गाड़ियों से 15-20 आदमी बहार निकले.. दया ने भी ज्यादा देर न करते हुए वही से एक आदमी के गोली मर दी.. यह एक आदमी के गोली मरना एक सिग्नल था.. यह सिग्नल जैसे hi बक्की के जो सभी पुलिस वाले सड़क के daen-baen बने दूर घरो की विंडो से शूट करना शुरू कर दिए.. उन्होंने बन्दुक पर लाइट स्कोप लगायी और फायरिंग पे फायरिंग करनी शुरू कर की.. दूर से आती बन्दुक की गोली जब कार की आयल टैंक को लगी तोह हर जगह आग ने तबाही मचा दी.. सड़क पर पहले hi दया ने पेट्रोल की बारिश करवादी गयी थी तोह बाकी गाड़ियां और गुंडों का बच पाना नामुमकिन था.. कुछ hi सेकण्ड्स में 35 की 35 गाड़ियां आग में शामिल हो गयी.. रात का वक़्त था लकिन अब dur-dur तक उजाला हो गया था...)

|बैक तो तुषार|

(तुषार और बक्की सब अभी हवेली वापिस ा गए थे.. सिया तबसे roti-roti सू गयी थी.. सवाना सबके लिए खाना बना रही थी लकिन खाने का किसी का मन नहीं था.. सब दिंनिंग टेबल पर gum-shum से बैठे थे.. सफल उठा और सवाना के पास चला गया उसकी मदद करने.. कुछ देर बाद खाना बन गया और दोनों ने टेबल पर लगा दिया.. मुश्किल से सवाना से प्रियल को थोड़ा सा खाना खिलाया और बक्की सब ने भी थोड़ा कहा लिया.. कुछ देर सभी वही बैठे रहे लकिन कोई कुछ बोलै नहीं.. सवाना ने प्रियल को साथ लेकर उससे सिया के रूम में सुला दिया और बाकि सब भी सोने चले गए apne-apne रूम्स में...)

|अगली सुबह|

सिया- (अपनी मुम्मा को अपने पास सोता देख, उसके फेस पर प्यार से हाथ फेरती हुई) मुम्मा...!


प्रियल- (जो शायद सू hi नहीं रही थी, अपनी बेटी का हाथ महसूस कर जल्दी से उठती हुई) क्या हुआ मेरा बचा..?.......

《1667 -वर्ड्स》
 
थैंक्स प्रदीप भाई.. बिलकुल सही कहा भाई यह सरे काम करने अभी बक्की है.. हम्म यह तोह बात है स्टोरी जिस दिन अचे से स्टार्ट हुई उस दिन मैं खुद कहुगा की बिदुलोग लो यह है असली स्टोरी.. अभी तोह यु समाज लो की चरकतर की इंट्रोडस हो रहे है... लेट नहीं दिया हु भाई आज hi अपडेट दे दिया हु.. मैं खुद सटिस्फीएड नहीं था कल के अपडेट से इसलिए आज hi आ गया.. शुक्रिया कीप सुप्प्रोटींग...
 
थैंक्स आकाश बीआरओ.. हम्म बात तोह सही है पुलिस स्टेशन और इतने सरे पुलिस वालो को मर देना छोटी बात नहीं पर लाला खुद इसने कही गुणा ऊपर उठा हुआ है.. आप इस दर्द से गुजरे तोह मतलब..!! सचमे.? खुद हुआ भाई सुन कर बहुत.. हाँ रूद्र कॉंफिडेंट से भरा हुआ है पता नहीं क्या करेगा और क्या होगा... शुक्रिया भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
अपडेट-37

|अगली सुबह|

सिया- (अपनी मुम्मा को अपने पास सोता देख, उसके फेस पर प्यार से हाथ फेरती हुई) मुम्मा...!

प्रियल- (जो शायद सू hi नहीं रही थी, अपनी बेटी का हाथ महसूस कर जल्दी से उठती हुई) क्या हुआ मेरा बचा..?.......




|अब अग्गे|

(सिया कुछ बोली नहीं बस प्रियल के गले गयी और अपनी moti-moti आँखों से chote-chote आंसू बहाने लगी.. प्रियल ने सिया के मत्थे पर धीरे से चूमा और उसके बल सहलाती हुई उससे अपने साइन में डब्बा लिया…)

प्रियल- क्या बात है बचा.. रू रही हो आप..? मैं हु न आपके पास…

सिया- (प्रियल के आँखों में देखती हुई) मुम्मा आप हमेशा मेरे पास रहोगे न…

प्रियल- हाँ सिया.. मैं कही नहीं जायूँगा आपको छोड़ के.. ठीक है चिंता मत करो…

सिया- मुम्मा पापा क्यों चले गए छोड़ कर.. क्या वो कभी वापिस नहीं आएंगे..?

(प्रियल के पास सिया की मासूम भरी बातो का कोई जवाब नहीं था.. इधर तुषार हवेली के बहार गार्डन में लगे बेंच पर gum-sum बैठा था…)

सफल- (उसके पास आता हुआ) बॉस..!!

तुषार- (पीछे घूम कर उससे देख) हम्म..?

सफल- (उसके साथ बैठता हुआ) एक बुरी खबर है बॉस..!! अपनी सिटी में एक नए पुलिस वाले का ट्रांसफर हुआ है.. उसने आते hi जग्गू को उसकी हवेली से उठा लिया, अभी जग्गू जेल में था की लाला ने गुस्से में 3 पुलिस स्टेशन को जला दिया और 70-80 के करीब पुलिस वाले भी मर डेल, और कड़ियों को भी आजाद कर दिया.. यह कल रात की बात थी, लकिन वो जो नया पुलिस वाला है……

तुषार- (बिच में बोलता हुआ) नाम नहीं है क्या उसका..?

सफल- दया..! इंस्पेक्टर दया…

(उसके बाद सफल तुषार को कल रात वाली दया की सड़क के बिच गाड़ियों को उदय देने वाली बात बता देता है.. सब सुनने के बाद तुषार सोच रहा था की अब वो क्या करे, उसने जो वचन लिया है की वो उस लड़की का बदला खुद लेगा क्या अब वो उससे पूरा करे या जो दया कर रहा है उससे वो करने दे.. देखा जाये तोह जो हो रहा सही hi हो रहा है.. अभी कानून से लड़ कर जग्गू को सजा देनी भी गलत होगा…)

सवाना- (हवेली से बहार गार्डन में आती हुई) बॉस..!!

तुषार- अब आप भी कोई बुरी खबर लायी हो क्या देवी..?

सवाना- हाँ बॉस.. स्कूल, कॉलेजेस में कुछ लोग स्टूडेंट्स को ड्रग्स सप्लाई करते है अब उन्होंने वो ड्रग्स देने बंद कर दिए है.. स्टूडेंट्स तड़फ रहे है ड्रग्स लेने को.. हर स्कूल, कॉलेजेस से करीब 20% स्टूडेंट्स थे जो ड्रग्स लेते थे.. उनकी हालत बहुत ख़राब है बॉस.. कुछ स्टूडेंट्स के सुसडे केस भी ा चुके है...

तुषार- क्या.. यह सब उस लाला का काम है.. जग्गू जेल में है वो कोई न कोई तूफान खड़ा करता रहेगा.. यह तोह बहुत बड़ी प्रॉब्लम है.. साडी सिटी को कबड़ा बना के रखा है इस लाला ने.. इस जड़ को जड़ली उखाड़ना होगी.. ऐसा करो एक न्यूज़ चप्पो फॅमिली वालो के लिए की जिसके भी बचे कुछ अलग तरीके का बेहवे करते या ड्रग्स मांगते हुए नजर आये उन्हें (सोच कर) उन्हें जल्द से जल्द …………… हॉस्पिटल लेकर ए.. उनकी जान का खतरा बढ़ सकता है.. फ्री है कोई पैसा नहीं लगेगा.. उन्हें बचाना चाहते हो तोह जल्द करो.. मैं पापा से बात कर लूंगा की हॉस्पिटल वालो से बात करले.. अभी जाओ…!!

सवाना- Okay बॉस..!! चल सफल…

|बैक तो रूद्र|

रूद्र- इसकी माँ की छूट. मज़ा ा गया.. चल अभी देखता हु कहा होगी यह माँ की लौड़ी…

(रूद्र ने देखा की बंगले के पीछे वाले दूर पर भी 3 गार्ड्स खड़े है, तोह उसने एक बड़ी hi नयी और कामयाब तरकीब का इस्तमाल किया.. रूद्र ने एक पास पड़ा छोटा सा पाथेर उठाया और कास कर विंडो के कांच पर मारा...)

गुरदस.1- (चौंकता हुआ) आबे.. कोण था यह...

गुरदस.2- कोई उधर से कांच टूटने की आवाज आयी है.. चल ा देखते है...

(2 गार्ड्स जैसे hi उस तरफ गए रूद्र तेजी से एक बचे हुए गार्ड के सामने ा गया...)

गार्ड.3- (हैरानी से) ोये कोंण......

(बस इतनी hi बोलै था की रूद्र ने उसके सर पे लोहे की उलटी कुल्हाड़ी मर दी.. गार्ड का सर बिच में से फैट गया.. जल्दी से रूद्र गार्ड को पीछे एक खोने में खींच के ले गया.. वह काफी जगह थी की गार्ड को चुप्या जा सके.. रूद्र ने उसकी t-shirt उतर के पहन ली और वापिस उस गार्ड की जगह खड़ा हो गया.. 1 मिंट बाद अछि तरह janch-partal करने के बाद जो गार्ड्स गए थे वापिस ा गए...)

रूद्र- (उन्हें आता हुआ देख) हाँ कोण था.. मिला कुछ..?

गार्ड.2- यह क्या पहन लिया मुँह पे तूने...

गार्ड.1- हाँ यह मास्क क्यों पहन रखा है तूने..?

रूद्र- अरे पता नहीं है क्या वायरस चल रहा है एक.. उसी के दर से पहना है.. बताओ क्या हुआ था उधर.. कांच किसने तोडा था...

गार्ड.2- (उसके पास आकर उसका मास्क उतरता हुआ) यह उतर पहले... (और रूद्र का मास्क उतर दिया...)

गार्ड.2- (उससे देख दर कर कंपता हुआ) लू.. लूउउउउक्कक्सीी.....

रूद्र- (बिच में) अबे लूसिफ़ेर यार.. (उसके कंधे पर हाथ रख) इतना कंपता क्या है.. आराम से आराम से.. (दूसरे गार्ड को देख) तेरेको क्या हुआ, तेरे क्यों पसीने छूट गए...

गार्ड.1- (हाथ जोड़ता हुआ) हमे छोड़ दो.. हमे मरना मत...

रूद्र- ( left-right से दोनों के गले में हाथ डालता हुआ) अरे दर क्यों रहे हो.. और किसने कहा की मैं तुम लोगो को मरने वाला हु...

गार्ड.2- हम जानते है.. जिसने भी आज तक लूसिफ़ेर को देखा है वो बच नहीं पाया है...

रूद्र- (दोनों की गर्दन को कसता हुआ) होसियार हो.. वैसे मैंने सोचा था की chup-chap गार्ड बनकर अंदर चला जायूँगा लकिन तुम्हे अपनी आत्मा नरक में पौंछणी थी.. खीर जैसी तुम लोग की मर्जी...

(इतना बोलै रूद्र ने कास की दोनों की मुंडी left-right को घुमा के पीछे की और करदी, और एक काटककककक की आवाज के साथ उनकी गर्दन टूट गयी.. यह था रूद्र की ताकत का कमल.. उनकी लाशो को उसने वही पड़े रहने दिया और दूर खोल कर अंदर चला गया...)

|बैक तो सिटी नातिर, Harshika’s होम|

(आरुषि अभी हर्षिका के रूम में बैठी थी.. उसके मन में कुछ चल रहा था...)

आरुषि- हरु..!!

हर्षिका- (चौंकती हुई उसको देख) क.. क्या.. हरु..?

आरुषि- (मुस्कुराती हुई) क्यों क्या हुआ.. क्या भी तक अपने मर. ने आपको यह नाम नहीं दिया...

हर्षिका- यह क्या बोल रही है.. हरु कोण.. और मर..?

आरुषि- ीह ज्यादा नाटक नहीं करना मेरे सामने.. हरु तू और मर. तेरा वो तुषार...

हर्षिका- लकिन तू हरु क्यों बुला रही है मुझे...

आरुषि- उसने गलती से एक दिन तुम्हरा नाम हरु लिया था मेरे सामने.. इसलिए मैं बस पूछ रही थी की क्या आपका नामकरण हो गया है आपके मर. के लिए..?

हर्षिका- (मुस्कुराती हुई) देखो मुझे नहीं पता यह सब...

आरुषि- ाचा ठीक है छोड़ मत बता.. चल यह बता की तू उससे पर्पस कब करने वाली है.. और कैसे करेगी.. (एक्सीटेंड होकर) बता न प्लीज...

हर्षिका- (शर्माती हुई) मुझे खुद नहीं पता.. यार आरुषि मुझे बड़ी शर्म आती है.. पता नहीं मैं कब और कैसे उससे बोल पयूंगी...

आरुषि- (अपना माथा पीट के) अरे शर्मीली भाभी.. कैसे चलेगा ऐसे.. बात तोह करनी पड़ेगी न.. देख मैंने उस दिन भी संजय था तुझे.. तुझे उससे शादी के लिए हाँ थोड़ी बुलवानी है, तू उससे प्यार करती है इतना उससे बताना है.. तूने इतना उससे कह दिया न बस फिर वो तुझे हमेशा के लिए अपनी गुड में उठा लेगा और कभी वो तेरा पाव भी जमीन नहीं पड़ने देगा...

हर्षिका- (अपने उस खाब को सोचो में बुनती हुई) हम्म.. तोह बता (शर्माती हुई) कब करू पर्पस..?

आरुषि- मेरी तरफ से तोह आज hi करदे...

हर्षिका- सचमे आज hi करदु..?

आरुषि- हाँ कॉल कर उससे और बुला यहाँ...

हर्षिका- (ख़ुशी से) Okay...

(हर्षिका अपने मोबाइल निकलती है और आरुषि उससे तुषार का नंबर लगा के देती है.. उधर तुषार अभी भी बहार वैसे hi बैठा था.. कुछ hi सेकण्ड्स में उससे हर्षिका का कॉल ा जाता है, आरुषि ने हर्षिका को तुषार का नंबर दिया था.. आज पहली बार कॉल करने के कारन तुषार की तरफ उससे एक अननोन नंबर से कॉल आया..)

तुषार- (कॉल पिक कर) Hello..!!




हर्षिका- Hello..!!

तुषार- (पहचान के, मज़े लेता हुआ) हांजी कोण..?

हर्षिका- जी मैं हर...

तुषार- ाचा हरिलाल हो.. सुनो मेरी बात टिंडे अचे देख कर लाना.. और हाँ पिछली बार तू बाजार गया था और तूने उधर बहुत तमाशा किया था.. अब तेरी अस्सी कोई शिकायत नहीं ांनी चाहिए समाज...

हर्षिका- (कन्फ्यूज्ड होकर) क्या..!!

आरुषि- (जो तब से स्पीकर पर हो रही बात सुन रही थी, गुस्से दबा कर बुद्धि की आवाज में) तेरे कान के निचे बजाऊंगी एक.. मैं हरिगढ़ से बोल रही हु.. तेरे परदादे की नन्नी हु मैं...

तुषार- (चूंक के सीधी तरह बैठता हुआ) कक.. कोण..? (रिश्तेदारी सोचता हुआ) परदादे की नन्नी...

आरुषि- चल अभी फ़ोन रख.. बदमाश छोरा... (और फ़ोन कट कर दिया)

तुषार- (सोचता हुआ) परदादे की नन्नी..? (हैरानी से) और वो जिन्दा है अभी.. पता नहीं कोण थी.. रॉंग नंबर लग गया होगा शायद...

|बैक तो हर्षिका' होम|

आरुषि- (हस्ती हुई) बड़ा स्मार्ट बन रहा था.. अब कैसा मज़ा छकाया हाहाहाहा...

हर्षिका- (साद होकर) लकिन बात तोह हुई नहीं...


आरुषि- बड़ी जल्दी हो राखी है तुझे अब.. कोई बात नहीं मैं भी सोच रही हु कुछ ाचा सा सरप्राइज देकर पर्पस करना.. ऐसे sukhe-sukhe कुछ करने में मज़ा नहीं आएगा.. (नॉटी स्माइल से) समाज रही है न..? इसपर अग्गे भी अमल करना की sukhe-sukhe मज़ा नहीं आता...

हर्षिका- (न समझती हुई) मतलब..?


आरुषि- (अपने सर पित्ती हुई) हहासश्च छोड़ तू.. तुझे भी क्या संजना...

《1570-वर्ड्स》
 
अपडेट-38

आरुषि- बड़ी जल्दी हो राखी है तुझे अब.. कोई बात नहीं मैं भी सोच रही हु कुछ ाचा सा सरप्राइज देकर पर्पस करना.. ऐसे sukhe-sukhe कुछ करने में मज़ा नहीं आएगा.. (नॉटी स्माइल से) समाज रही है न..? इसपर अग्गे भी अमल करना की sukhe-sukhe मज़ा नहीं आता...



हर्षिका- (न समझती हुई) मतलब..?



आरुषि- (अपने सर पित्ती हुई) हहासश्च छोड़ तू.. तुझे भी क्या संजना...



|अब अग्गे|

|बैक तो रूद्र|

(रूद्र बंगले का पीछे का दूर खोल अंदर चला गया.. एक हाथ में उसके साइलेंट पिस्तौल और दूसरे में उसने कुल्हाड़ी पड़की हुई थी.. सामने रास्ता क्लियर था लकिन थोड़ी आगे जाकर उसने देखा की हॉल में लगे सोफे पर एक लड़की बैठी हुई है और उसके aas-pass 10 गार्ड्स और 2 आदमी वाइट suit-boot में खड़े है…)

रूद्र- (अपनी कुल्हाड़ी अपने कंधे पर टंगे, उसकी और छठा हुआ) हम्म.. क्या चल रहा है, (लड़की को देख) मिस किआरा अहति..?

(सब गार्ड्स ने अपनी बंदूके रूद्र की तरफ कर दी, और उस लड़की के इशारे की वेट करने लगे की कब यह हमे शूट करने का बोले और हम इसकी खोपड़ी ुधा दे…)

गार्ड.1- कोण है.. अंदर कैसे ा गया...

(रूद्र लड़की के पास जाने लगता है तोह एक गार्ड बिच में आकर रूद्र की छाती पर हाथ रख उससे रोकने लगता है.. रूद्र ने एक स्माइल की उस लड़की की और, और अपनी कुल्हाड़ी घूम के उस गार्ड की गार्डन के पीछे दे मरी. वो गार्ड उधर hi शांति से लेट्ट गया और बाकि गार्ड्स कुछ बोले नहीं पीछे हैट गए, जब मालकिन hi चुप बैठी देख रही थी तोह उनकी क्या हिम्मत जो रूद्र को ऐनी से रोक सके...)

रूद्र- (लड़की के पास जाता हुआ) हाँ क्या बात है तेरेको मेरे लुंड की रानी.. (उसके करीब जाकर उसकी पतली सी वाइट टॉप के ऊपर से उसके दोनों बूब्स अपने हाथ में पकड़ता हुआ) बताया नहीं क्या इन्हे मैं कोण हु...

लड़की- (मुस्कुराती हुई अपने बूब्स दबवाती) तूने hi तोह कहा था की इन्हे बताना नहीं.. और यह ऐसे क्यों आया है तू, यह mask-wask..? sidha-sidha दरवाजे से आता…

रूद्र- (वैसे hi उसके दूध मसलता हुआ) क्या करू यार यह चाचा ने मुझे देख लिया जाते तोह बताना पड़ा कहा जा रहा हु अब बता दिया की कहा जा रहा हु तोह मेरे पीछे जरूर इसने कोई न कोई आदमी लगा दिया होगा, इसलिए ऐसे एना पड़ा.. चाचा कितना मादरचोद और हरामी है जानती hi है न तू.. किआरा..!!

किआरा- (रूद्र के हाथ अपने दूध से हटती हुई) हाँ जानती हु इसलिए तूने मुझे उसके सामने अपना दुश्मन बना रखा है, और वो भी खुद रिस्क न लेते हुए तुझे मेरे हाथो से मरता देखना चाहता है.. (रूद्र के गले में बहे दाल) और मैं तोह अपने रूद्र को कभी मरूंगी नहीं.. क्यों मेरी छूट के राजा…

रूद्र- (उसको अपने से और सत्ता कर पीछे उसकी गांड पर हाथ रख दबाता हुआ) हम्म सही कहा, वैसे बहार तेरे 3 आदमी को मरना पड़ा मुझे पता नहीं चाचा का आदमी कहा से दूरबीन लगाए मुझे देख रहा हो इसलिए सब प्लान के साथ आया हु डार्लिंग.. (जोर से उसकी गांड दबाता हुआ) चल ा अब थोड़ी uchal-kudd मचाये…

किआरा- (उससे दूर हटाकर) लकिन तेरा चाचा तोह मुझे भी मरना चाहता है न..? यह मास्क तोह उतर पहले…

(और किआरा रूद्र का मास्क उतर देती है.. मास्क उतारते hi सरे के सरे गार्ड्स Lucifer-Lucifer कहते हुए 4-4 कदम पीछे हैट जाते है…)

रूद्र- (गार्ड्स को देखता हुआ) यह सब नए है क्या..? खीर छोड़ हाँ तोह मैं कह रहा था की मुझे भी वही बात समाज नहीं ा रही की चाचा मुझे तेरे से भी मरवाना चाहता लकिन तुझे भी मरना चाहता है, हम्म ऐसा हो सकता है की मुझे मरने के बाद उससे लगे की कही तुम उससे भी न मर्दो…

किआरा- (रूद्र के कान में) कही वो जनता तोह नहीं की मैं किसकी बेटी हु…

रूद्र- हाहाहा अरे जनता तोह (गार्ड्स को देख) यह लड्डू लोग भी नहीं है.. (मुस्कुराता हुआ) यह बात बस तू और मैं या तेरा बाप hi जानते है.. (एकदम से रूद्र किआरा को अपनी बहो में उठा लेता है) चल अभी और देर न कर यार.. तेरा राजा मेरी रानी से मिलने के लिए तड़फ रहा है...

किआरा- ाचा ठीक है चलो ऊपर रूम में या यही गार्ड्स के सामने मुझे नंगी करेगा…

रूद्र- मुझे तोह कोई इतराज नहीं है इन् गांडू लोग के से सामने तुझे नंगी करने में पर मेरी एक अनमोल चीज़ मैं सबको क्यों दिखाऊ…

किआरा- (उसके होठो पर किश कर) हाई इतना प्यार आज मेरे ऊपर…

रूद्र- हाँ तेरे ऊपर तोह मुझे पूरी रात तक लेटना है…

किआरा- ठीक है लेट जइयो.. पर पहले ऊपर रूम में चल...

(रूद्र वैसे hi किआरा को अपनी बहो में लिए 2ंद फ्लोर की सीढ़ियां छड़ कर एक बैडरूम में घुस जाता है.. निचे गार्ड्स के दिमाग हिले हुए थे की आखिर यह सब हो क्या रहा है.. रूम में पहुँच कर रूद्र खुद बीएड पर बेथ जाता है कैरा को अपनी गौड़ में बिठा लेता है…)

रूद्र- (एक हाथ उसके दूध पर रख मसलता हुआ) आज तीन महीने हो गए तुझे चोदे.. kabhi-kabhi तोह दिल में आया की किसी और लड़की को पकड़ के छोड़ लू पर….

किआरा- (उसका फेस पकड़ अपनी और करती हुई) ऐसा सोचा भी न तोह तेरा लुंड काट लुंगी…

रूद्र- (जोर से उसका एक बूब दबाता हुआ) हाइये.. मुँह से कटेगी क्या.. आना जल्दी से अपनी फवौरीते क्रीम निकल के खले…

किआरा- आअह्ह्ह्ह धीरे दबा जान hi निकल रहा है तू मेरी…

रूद्र- ाचा चल अपनी जुबान बहार निकल…

(किआरा मुँह खोल अपनी जुबान को जितना हो सके बहार निकल कर रूद्र को दिखती है और रूद्र फाटक से अपना मुँह उसके पास करके उसकी जुबान को अपने मुँह में ले लेता है.. raseli-meethi कैरा की जुबान रूद्र किसी टॉफ़ी की तरह चूसने लगता है…)

(किआरा एक 22 साल की लड़की है.. 5.6 फ़ीट हाइट, दूध जैसा गोरा रंग.. कर्ली बाल, जिसके अभी उसने पोनीटेल कर राखी थी.. आँखों में ब्लू लेंस, तीखे एएब्रोस, पहले हुए गाल, गुलाबी पतले होंठ और एक मस्त slim-trim फिगर…)

(रूद्र कैरा की जुबान का सेहद अपने मुँह में भर रहा था.. और साथ में उसके बूब्स को ऊपर से मसल भी रहा था.. जैसा hi रूद्र उसके बूब्स थोड़ा जोर से मसल देता तोह कैरा की एक घुटी सी सिसकी निकल जाती.. अभी रूद्र की जुबान और कैरा की जुबान दोनों के होंठो के बिच लड़ रही थी.. कैरा अपनी आँखे बंद करके पूरा मन लगा कर रूद्र के होंठ चूस रही थी, रूद्र ने अपने एक हाथ कैरा की गर्दन के पीछे लेजाकर पकड़ा हुआ था और दूरसे हाथ से उसके दूध मसल रहा था.. वो कभी उसके ऊपर वाले होंठ तोह कभी निचे होंठ प्यार से चूस रहा था, करिअ भी शामे वैसा hi कर रही थी.. कुछ देर और होंठ चूसै करके रूद्र एक गहरा स्मूच कैरा को देने के बाद उससे छोड़ देता है…)

रूद्र- वाह.. क्या लाजवाब है तेरे होंठो का रास डार्लिंग…

कैरा- (मुस्कुरा के) ाचा..!!

रूद्र- हम्म.. चल जल्दी नंगी होजा.. तेरा वो हुसैन देखने के लिए मैं बहुत बेकरार हु…

कैरा- तोह करले नंगी मुझे मैंने कहा तुझे रोका है…

(रूद्र ने अपनी गुड में बिठा राखी किआरा का वाइट टॉप को ऊपर उठा कर उसके गले से अलग कर दिया.. टॉप अलग होते hi उसकी आँखों के सामने कैरा की वाइट ब्रा ा जाती है.. रूद्र उससे भी जल्दी से अपना हाथ कैरा की पीठ पे लेकर ब्रा है हुक खोल देता है, और ब्रा भी उसकी बॉडी से अलग कर फ़ेंक देता है.. एक मध्यम साइज के बूब्स, जिसके निप्पल हलके गुलाबी रंग में थे.. रूद्र अपना हाथ आगे बढ़ता है और उसके एक बूब को अपने हाथ की हथेली में रख कर उससे बाउंस करने लगता है…)

रूद्र- (दूसरे हाथ से उसका दुरसा बूब को पकड़ धीरे से मसलता हुआ) आठ क्या बात है.. क्या नरम चीज़ बनाई है ऊपर वाले ने…

कैरा- आह्ह्ह्ह.. आराम से, आराम से करना ज्यादा जोर लगाया तोह पिट जायेगा…

रूद्र- हाँ नहीं करता जोर से, चल अभी लेट जा जरा मुझे इससे अपने मुँह में भरने दे…

(कैरा उसकी गौड़ से उतर कर बीएड पर सीधी होकर लेट जाती है.. रूद्र भी jaldi-jaldi अपनी पेण्ट और T-shirt उतर, अंडरवियर में उसके ऊपर लेट जाता है.. रूद्र एक किश उसके होंठो पर करता है और dhire-dhire निचे सरकने लगता है.. अपना सर उसके बूब्स पर लेकर उसके निप्पल को अपने अपने मुँह में भरकर एक लम्बा सूचक करता है.. ‘आआह्ह्हआआ’ इतनी जोर से सूचक करने से कैरा की जैसे जान hi निकल गयी थी…)

कैरा- (सिसकती हुई) आह्हः.. रूद्र!! ह्ह्हम्म्म आआह धीरे कर आअह्ह्ह…

(रूद्र अभी उसके एक बूब को हाथ से मसल रहा था और दूसरे को मुँह में लेकर चूस रहा था.. bich-bich में वो उसके बूब को दांतो में लेकर ऊपर को खींच देता तोह कभी उसके निप्पल को haule-haule काट भी देता जिससे कैरा रूद्र का सर पकड़ ऊपर उठने की कोशिश करती.. वैसा hi थोड़ी देर बाद रूद्र उसके दूसरे बूब को मुँह में लेकर चूसने, काटने लगा.. और 10 मिंट तक वही चला.. रूद्र ने अपने दांतो से उसके निप्पल लाल कर दिए थे और आधे बूब्स अपने थुकः से भर दिए थे…)

(रूद्र सीधा होता है और कैरा की पेण्ट का बटन खोल देता, और dhire-dhire उससे सरककर उतरने लगता है कैरा भी अपनी गांड उठा कर उतरने में मदद करती है.. पेण्ट उतरने के बाद निचे कैरा की वाइट पेंटी थी.. रूद्र देर न करते हुए उससे भी एक झटके में उतर देता है.. पेंटी निकलते hi रुद्रे के सामने कैरा की नाजुक सफ़ीद बिन बाल की छूट ा जाती है.. जो रूद्र का लुंड लेने के कारन थोड़ी सी खुली हुई नजर ा रही थी.. उसके अंदर का lal-lal मास्स थोड़ा बहार को निकला हुआ था…)

रूद्र- आखिर इतने महीनो बाद दर्शन हो hi गए.. चल उठा ले अपनी टंगे और मुझे जल्दी से इसका रास निकल कर दे…

किआरा- तू म्हणत तोह कर, रास खुद बा खुद निकल आएगा…

(यह बोल कैरा अपनी दोनों टंगे ऊपर उठा लेती है और उसकी छूट और खुल कर रूद्र के सामने ा जाती है.. रूद्र अपने दोनों हाथो से उसकी छूट को और खोल कर झुक जाता है और अपनी जीब निकल छूट के अंदर तक बेज देता है.. dhire-dhire रूद्र कैरा की छूट को चाटने लगता है.. अपनी जुबान को गहराई तक फेरता हुआ मज़े से कहते जा रहा था.. कैरा की छूट ने पानी बहाना शुरू कर दिया था जो रूद्र को एक अलग मज़े दे रहा था.. कैरा अपना सर patak-patak के मचल रही थी…)

कैरा- आअह्ह्ह रूद्र.. आआह्ह्ह्ह नहिई हां एसससस ह्ह्हआआ आआह्ह्हआ मम्मा हूऊआआहाआ.. हांण पलासी पलासी पलासी प्लीसीईए ाआहुयउ आह्हः….

रूद्र- सलुपपपप सलुप्प सलुपपप हां मेरी जान निकल दे जितना पानी है तेरे अंदर, आज मैं सारा पि जायूँगा…

कैरा- हहम्म्मम्म अस्सी hi.. ाः चुस्त जा मैं अभी तेरा मुँह भर्ती हु अपने पानी से.. और जोर से कर.. कर न….

रूद्र- कर रहा हु डार्लिंग.. सलुपपप सलुपपप.. हा स्लीपप सलुपपपप…

(रूद्र अपनी एक बिच वाली ऊँगली कैरा की छूट में दाल देता है और छूट chate-chate ऊँगली ander-bahar करने लगता है.. रूद्र अपनी जीब को नोकीली कर जड़ तक अंदर घुसा तेजी से चाटने लगती है और ऊँगली भी तेजी से ander-bahar करने लगता है.. बस यह उसने कुछ hi देर और किया था की कैरा रूद्र के बाल पकड़ कर उसका मुँह अपनी छूट में दबा लेती है और एक लम्बी चीख लेते हुए जड़ने लगती है..)

कैरा- आआआहहहहहहहआ हहहा हम्म्म आहे रूद्र ले अभी पि ले जितना पीना हां आअह्ह्ह हहममम आआआ... (और अपना वीर्य रूद्र के मुँह में छोड़ने लगती है...)

(रूद्र भी अपना मुँह पूरा खोल कर बहार ा रहे उसकी छूट के पानी को पिने लगता है.. करीब 15-20 सेकंड तक कैरा झड़ती रही और रूद्र का मुँह अपने वीर्य से भर्ती रही.. रूद्र भी ek-ek बांड चाट जाने के बाद अपना फेस साफ़ करके साइड हो जाता है.. करिअ भी बेसुध होकर हांफ रही थी.. कुछ देर तक रूद्र ने उससे वैसे hi रहने दिया और फिर उठ कर अपना अंडरवियर भी उतर लिया...)

रूद्र- (हस्ता हुआ) बस थक गयी..?

कैरा- (उठती हुई) हाँ.. लकिन मज़ा ा गया (उसके होंठो पर किश करती हुई) क्या छूट छाती है तूने मेरी.. वाह्ह...

रूद्र- हहहह ाचा.. चल अभी मेरी बरी है.. (कहता हुआ रूद्र बीएड पर लेट गया) ले चूस मेरा लुंड, अब तुझे पिलाता हु मैं अपना जूस...

कैरा- (मुस्कुरा के, उसकी दोनों टंगे के बिच आती हुई) जो हुकम सर्कार.. अपने हमे जो सुख की प्राप्ति दी है हम भी बिलकुल आपको वैसे hi सुख देंगे...

(यह बोलकर कैरा ने रूद्र का 7इंच का फुल तना हुआ लोढ़ा अपने हाथ में ले लिया.. करिअ रूद्र के बिना बालो वाले, लाल टोपा और सफ़ीद लुंड को अपने एक हाथ से ऊपर से निचे तक मसल रही थी...)

रूद्र- हांण मेरी फानन तू तोह जाननं निकल देगी आज.. लेले इससे अपने मुँह में भी ले न...

(रूद्र की तड़फ को देखते हुए कैरा अपने मुँह धीरे से निचे करती है और रूद्र के लुंड का टोपा अपने मुँह में भर के सूचक करती है जिससे रूद्र तड़फ उठता है...)

रूद्र- हॉस्शह्ह्ह मर गया.. और कितना घायल करेगी.. पूरा मुँह में दाल ले मेरा लुंड...

कैरा- (लुंड मुँह से निकल कास से पकड़ती हुई) सलुप्प आह.. कर तोह रही हु.. और तू चुप रह मुझे पता है मुझे अपना काम कैसे करना है.. समजा.! तू ज्यादा समझा न मुझे...

रूद्र- ाःह लुंड को इतना जोर से क्यों मरोड़ रही है.. तोड़ेगी क्या.. ाचा ठीक है जैसे चूसना है चूस मेरी जान.. मैंने तुझे खुश किया अब तू भी मुझे कर न...

(कैरा लुंड की पकड़ ढीले कर लुंड को जड़ से पकड़ लेती है और वापिस लुंड का टोपा मुँह में भर लेती है.. dhire-dhire अपनी जुबान को वो लुंड के टोपे पर फेरनी चालू कर देती है.. कुछ देर टोपे का मज़े लेने के बाद कैरा लुंड को और गहराई तक अपने मुँह में डालने लगती है...)

रूद्र- (आँखे बंद कर इस आनंद को फील करता हुआ) आअह्ह्ह्ह ओह्ह्ह मय्यै.. ससससस ाःह हांण अस्सी hi औरर अंडरर तक लेले डार्लिंग...

(कैरा लुंड को 5इंच तक मुँह में ग़ुस्सा लेती है.. और वैसे hi उसके लुंड पर जीब फिरनी सुरु कर देती है.. एक हाथ से उसने निचे ांडो को मसलना शुरू कर दिया था.. करीब और 10मिंट तक ऐसे hi कैरा लगी रही लुंड चूसै में.. अब रूद्र का छूटने के करीब था, कैरा के मुँह की गर्मी अब रूद्र का लुंड बर्दाश नहीं कर प् रहा था.. रूद्र से और न रहा गया उसने कैरा के पीछे से बाल पकडे और अपना 7इंच का पूरा लुंड उसके मुँह में ग़ुस्सा दिया.. कैरा को थोड़ी तकलीफ तोह हुई लकिन रूद्र पहले भी उसके साथ ऐसे कर चूका था.. रूद्र ने अपने लुंड के झटके कैरा के मुँह में देने शुरू कर दिए.. कैरा भी पूरा साथ दे रही थी, अपना मुँह खोल कर हर एक धक्का अपने अंदर ले रही थी...)

रूद्र- आहहहहहा.. हहम्म्मम्म हहहहह हाहाहा बस होने वाला है डार्लिंग.. पूरा पानी पेले.. आह्हः ममममम.. ले पिले सारा रास निगल जा इससे.. aahhhhhhhhhhhhhmmmmhaaa...

(और यह रूद्र भी झाड़ गया, 10,12 lambi-lambi पिचकारी रूद्र ने कैरा के मुँह में छोड़ दी.. उनसे अपना लुंड करिअ की मुँह में जड़ तक घुस के डायरेक्ट hi अपना माल उसके गले से पेट में पहुंचा दिया.... और वो खुद बेसुध होकर लेट गया.. कैरा ने भी आखिर बांड तक रूद्र का लुंड नहीं छोड़ा और उससे चुस्ती रही जब तक की वो छोटा नहीं हो गया...)

कैरा- (अपना फेस साफ़ कर, मुस्कुराती हुई) हहममम हहासश्च.. मज़ा आया..?

रूद्र- (उसको अपनी और खींच साथ में लेटता हुआ) हाँ मेरी जान.. बहुत मज़ा आया.. तूने तोह खुश कर दिया आज.. लकिन असली खेल खेलना तोह बाकि है अभी.. (मुस्कुराता हुआ) क्यों..?

कैरा- हाँ.. (अपनी छूट दिखती हुई, और रूद्र का लुंड वापिस पकड़ के) अभी तेरे इस लुंड का मेरी छूट में घमासान युद्ध होने वाला है.. अभी तोह तूने मेरा मुँह hi भरा है, छूट को भरना तोह बक्की है मेरे राजा...

|बैक तो तुषार|

(तुषार अभी काफी टेंशन में था की अब वो करे तोह क्या करे.. एक तरफ तोह सिटी के बचो की हालत ख़राब थी उन्हें ड्रग्स की लत लगी हुई अब ड्रग्स न मिलने के कारन वो कुछ ulta-sidha न कर बैठे इसलिए और दूसरा सिया की प्रॉब्लम थी की उस मासूम बची के पीछे कोण लोग पड़ा है और अस्सी क्या खासियत है उसमे जो वो एक आम लड़की नहीं है कोई खास है.. तीसरी प्रॉब्लम थी लाला, की कही जग्गू जेल से न छूटने के गुस्से में लाला सिटी को न तबाह करदे.. एक आखरी प्रॉब्लम उसके दिमाग में जो थी वो थी की क्या अब वो जग्गू को खुद मरे या उससे कानून के हवाले करदे यह सब सोचता हुआ तुषार हवेली के अंदर चला गया..)

(हॉल में पहुँच कर वो देखता है की सोफे पर बैठी प्रियल सिया को खाना खिलने की कोशिश कर रही है मांगा सिया खा नहीं रही...)

प्रियल- खले बीटा.. नहीं तोह ऐसे बीमार हो जायेगी.. (स्पून उसकी और बढाती हुई) चलो fata-fat खालो...

सिया- (मुँह साइड को करती हुई) मुझे नहीं खाना है...

प्रियल- देखो बीटा जिद्द नहीं करते.. आप गुड गर्ल हो ना.. लो थोड़ा सा खालो...

सिया- मुम्मा प्लीज न मेरा मन नहीं है खाने के.. और अपने कोनसा खाया है.. आप तोह खाओ...

प्रियल- मेरी प्रिंसेस भूखी है तोह भला मैं कैसे खा सकती हु...

सिया- तोह आप खालो मुम्मा.. मैं बाद में कभी खेलूंगी.. Okay...

तुषार- (उनके पास जाकर, थोड़ा daant.ta हुआ) सिया क्या हो रहा है यह.. आप खाना नहीं खा रही हो.. आपकी पिटाई करू क्या मैं...

सिया- (दांत सुन अपना फेस निचे कर, मासूम सी आवाज में) मुझे भूख नहीं है भैया.. फिर भी मुम्मा मुझे जबरदस्ती खिला रही...

प्रियल- आप देखिये न यह खा hi नहीं रही है, मैं कब से इससे खिलने का तरय कर रही...

तुषार- हम्म.. (सिया को देख) तोह सिया मेरे हाथ से भी नहीं खयेगी...

(सिया chup-chap वैसे hi सर निचे किये बैठी रही.. जैसे उससे तुषार की छोटी सी दांत का बुरा लगा हो.. तुषार सिया के पास जाकर बेथ गया और सामने टेबल पर रखा प्लेट में खाना उठा लिए.. तुषार ने एक स्पून में खाना भरा और स्पून सिया की और किया...)

तुषार- सिया..!! इधर देखो.. नहीं कहोगी खाना...

सिया- (वैसे hi निचे देखती हुई नाह में सर हिलती हुई)

तुषार- (प्यार से बोलता हु) खले न बाबू.. मेरी प्यारी सिया.. ऐसे करेगी अभी.. अपने भैया के लिए खले.. पलासी बाबू.. बाद में मैं आपको चॉकलेट लेकर दूंगा.. पक्का प्रॉमिस...

(सिया एकदम से तुषार की और देखती है और उसकी आँखों में ghur-ghur कर देखने लगती है.. प्रियल भी तुषार को आश्चर्य भरी नजरो से देख रही थी.. यह हुआ इसलिए था की कभी सिया के पापा भी उससे ऐसे hi खाना खिलते थे.. सिया सीधा होकर बेथ जाती है और मुँह खोल आगे बढ़ा देती है.. तुषार भी प्यार से उससे खिला देता है और फिर एक के बाद एक चमच bhar-bhar के आधा खाना सिया को खिला देता है...)

सिया- (अपनी मुम्मा की और ऊँगली कर) भैया मुम्मा ने भी खाना नहीं खाया है.. उन्हें भी खिलाओ...

(तुषार प्रियल की और देखता है और प्रियल तुषार को देख रही थी...)

तुषार- आप.. अपने खाना नहीं खाया...

प्रियल- वो मुझे भूख नहीं थी.. मैं खेलूंगी बाद.. आप फ़िक्र मत करे...

सिया- (गुस्से में) नहहीइ.. भैया आप इन्हे भी मेरे जैसे जबरदस्ती खिलाओ.. यह बाद में नहीं खाएंगी...

(तुषार एक स्पून भर के प्रियल की और बढ़ता है मगर प्रियल एकदम से वह से उठ कर अंदर रूम में चली जाती hai..Tushar और सिया बस एक दूसरे को देखते रह जाते है...)

सिया- मुम्मा को क्या हुआ भैया..?

तुषार- पता नहीं...



《3250 -वर्ड्स》
 
अपडेट-39





(तुषार एक स्पून भर के प्रियल की और बढ़ता है मगर प्रियल एकदम से वह से उठ कर अंदर रूम में चली जाती hai..Tushar और सिया बस एक दूसरे को देखते रह जाते है...)



सिया- मुम्मा को क्या हुआ भैया..?



तुषार- पता नहीं...



|अब अग्गे|

(सिया और तुषार प्रियल को जाते हुए देख रहे थे की पता नहीं सिया को क्या हुआ उसने अपने पास बैठे तुषार को एकदम से कास के गले लगा लिया…)

तुषार- (सिया की पीठ सहलाता हुआ) अरे.. क्या हुआ सिया…

सिया- (वैसे hi कास के गले लगी हुई) कुछ नहीं भैया.. मुझे आपको हुग करने दो…

तुषार- (मुस्कुराता हुआ) ाचा ठीक है.. (उसके सर पर किश कर) मैं आपके पास hi हु ठीक है.. फ़िक्र नहीं करना मेरा बचा…

सिया- भैया आपसे एक बात करू…

तुषार- हम्म.. बोलो..?

सिया- भैया मुझे न कुछ लोग लेना चाहते है.. क्या वो वापिस आएंगे मुझे लेने..?

तुषार- (उसको अपने से अलग कर) मैंने कहा न मैं अपनी सिया के हमेशा साथ हु.. आपको कोई कही नहीं लेजा सकता.. मैं आपका और आपकी मुम्मा का पूरा ख्याल रखूँगा…

(इतना बोल कर तुषार ने सिया की गाल पर एक किश कर लिया जिससे सिया के फेस पर एक लम्बी सी मुस्कान गयी…)

|सिटी नातिर, पुलिस स्टेशन|

(दया अभी अपनी कुर्सी पर बैठा कोई फाइल देख रहा था.. फाइल padhte-padhte उसके चेहरे के haav-bhaav बदल रहे थे…)

इंस्पेक्टर दया- (गुस्से से, वह बैठे सभी पुलिसवालो से) वाह वाह.. किसी बचे का किडनैप हो गया लकिन उसकी सिर्फ रिपोर्ट लिखी गयी किसी ने उसपे कोई एक्शन नहीं लिया, किसी का मर्डर हो गया लकिन उसकी भी सिर्फ रिपोर्ट लिखी गयी कोई एक्शन नहीं, किसी की धोखे से प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा कर लिया, लड़कियों को cheed-chhad करने की कंप्लेंट, रपे की कंप्लेंट, chori-dekhati की कॉम्पलिमेंट को सिर्फ लिखा जा रहा है.. (सामने 4,5 पोलिसवाले जो निचे बैठे पत्ते खेल रहे थे उन्हें घुर्र के) लकिन ठान्ने में बैठे तुम छै पे छै पि रहे हो, पत्ते खेल रहे हो.. (टल्ली बजता हुआ) वाह रे तुम लोगो की बदौलत यह शहर दलदल में धस्ता जा रहा है, धस्ता जा रहा है, धस्ता जा रहा है.. एक दिन ऐसा आएगा जब तुम्हारी maa-behan, तुमलोग के chote-chote बचे भी उसी दलदल में होंगे, लकिन समझ लो तब तुम उन्हें वह से निकल नहीं पयोगे.. (सबको ऊँगली दिखता हुआ) मेरी बात धयान में रखना तुमलोग…

(एक तकला पोलिसवाले थोड़ी सी दूर टेबल पर एक के ऊपर एक टंगे रखके चेयर पर बैठा था.. वो आराम से अपने मोबाइल में लगा हुआ था.. जैसे उससे कोई मतलब नहीं दया की बातो से.. दया की बातो पर शर्म खाने के बजाये वो हसने लगा और चाय की चुस्कियां लेने लगा…)

इंस्पेक्टर दया- (उसको घर कर देखता हुआ, हवलदार से) पाटिल…

पाटिल- (यह अभी किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था, कॉल एन्ड कर अंदर आता हुआ) जी सर…

इंस्पेक्टर दया- शहर में जितने ठाणे है उनमे जितनी भी रिपोर्ट फाइल है सब मंगवाओ…

पाटिल- Okay सर.. सर मुझे abhi-abhi खबर मिली है एक और आफत शहर पर मंडरा रही है…

इंस्पेक्टर दया- क्या..!!

पाटिल- सर school-colleges के स्टूडेंट्स और बचो को ड्रग्स दिए जा रहे थे यह काम उनके टीचर्स का hi था.. अभी बचे ड्रग्स एडिक्टेड हो चुके थे और टीचर्स ने उन्हें ड्रग्स देना बंद कर दिए जिसके कारन अब वो खुद को नुकसान पहुंचा रहे है अपने परिवार वालो को नुकसान पहुंचा रहे है, कुछ तोह इतने ज्यादा ड्रग एडिक्टेड हो चुके थे की उन्हें ड्रग्स न मिलने के चलते सुसडे कर लिया.. लकिन एक बात और सर 2 एजेंट्स है जो इस काम में मदद कर रहे है.. वो dhund-dhund कर बचो को हॉस्पिटल पहुंचा रहे है, और उनका ट्रीटमेंट करवा रहे है.. कोण है, क्यों ए कुछ पता नहीं इनके बारे में…

इंस्पेक्टर दया- (चौंका हुआ, चेयर से उठ के) व्हाट..!! हो क्या रहा है इस शहर में.. यह एजेंट्स कोण है मुझे पता है, उनको अपना काम करने दो.. और तू ऐसा कर उन् टीचर्स को पकड़ कर इधर ला जो बचो को ड्रग्स दे रहे थे.. इन्हे तोह एक अछि शिक्षा मैं देता हु.. (जोर से बोलता हुआ, बक्की पुलिसवालो से) और अगर तुम लोग के घर में भी बचे है तोह मुझे कुछ कहने की जरुरत नहीं है की क्या करना है तुम लोग को…

(पोलिसवाले तोह पहले से दया की बातो से शर्मिंदा होकर सुधर चुके थे, वो तोह बस इंतजार में थे की कब उन्हें भी कोई आर्डर मिले कुछ करने को.. 4,5 पुलिसवालो को छोड़ कर बक्की सब ने apni-apni कार की छबि, डंडा, पिस्तौल उठाई, और कुछ hi मिंटो में शहर की और रवाना हो गए उन् ड्रग्स देने वाले टीचर और ड्रग्स लेने वाले स्टूडेंट्स को ढूंढ़ने में…)

|बैक तो रूद्र|

रूद्र- चल डार्लिंग अभी ज्यादा देर न कर मुँह में ले और खड़ा कर…

कैरा- (उसका लुंड पकड़ के) aye-haye मेरे बस चले तोह तेरे लुंड को पूरा दिन अपने मुँह में लेकर चुस्ती राहु…

रूद्र- वो दिन भी जल्द hi आएगा जब तेरा पेट पूरा दिन भरा रहेगा सिर्फ मेरे लुंड का पानी पीकर…

(इतना बोलकर रूद्र ने कैरा का मुँह अपने लुंड की और बढ़ा दिया, कैरा भी रूद्र का सुकड़ चूका लुंड अपने मुँह में लेती है और अंदर मुँह में उसपर अपनी जीब फिरने लगती है.. jaise-jaise वो उससे chus-chat रही थी waise-waise रूद्र का लुंड सख्त और मोटा होता जा रहा था…)

रूद्र- (मज़े से) ीीिस्स्सस्स.. हम्म्म्म.. हांण.. डार्लिंग कर इससे वापिस बड़ा करो तककि तेरी छूट को यह घायल कर सके.. उफ्फ्फ.. मर डालेगी रे तेरी तोह यह जीब hi मुझे.. हहम्म्म्म.. हहह्माहः.. हहममहाअ…

कैरा- सल्ल्लूप्पप्प.. सलाऊपपप.. आठ.. सलुपपपपप.. हममऊमहः…

(कैरा ने लुंड का अक्कर बदल दिया था.. एक बन्दुक की गोली को एक टॉप का गोला बना दिया था.. लुंड वापिस 7.5 इंच का कैरा के मुँह में अंदर बहार होने लगा.. कुछ 1,2 मिनट की और चूसै के बाद…)

रूद्र- (उसका मुँह अपने लुंड से हटाता हुआ) अरे बस डार्लिंग हो गया लम्बा, अब और इससे क्या राकेट बनाएगी.. चल मुझे तेरी छूट का चीड़ दिखा इस लुंड को इसकी असली मंजिल तक पहुंचू…

कैरा- (बीएड पर टंगे पहला कर बैठती हुई) ले मेरे राजा खुल गया दरवाजा अब आजा और मुझमे समाज…

रूद्र- (उसकी छूट से सामने अपने मुँह लगा के एक लम्बी किश लेता हुआ) म्मूउऊउउउउआआआह.. अब देख मेरी रानी कैसे निकलता हु मैं तेरे फवारे से पानी…

(रूद्र कैरा की टंगे के बिच आकर बैठा गया और उसकी टैंगो को थोड़ा सा और पहला दिया.. अपने लुंड को कैरा की छूट से सामने रख…)

कैरा- आराम से डालना.. बहुत महीनो से चूड़ी नहीं हु तेरे से…

(रूद्र हाँ में सर हिलता हुआ dhire-dhire अपने लुंड को कैरा की छूट में डालने लगता है.. लुंड छूट में 1इंच गया..)

कैरा- सेआठ…

(रूद्र ने एक हल्का सा झटका और दिया और लुंड 2इंच और अंदर चला गया…)

कैरा- हहममम आअह्ह्ह.. हाँ…

(अभी यह रूद्र था इसने एक आखरी धक्का मारा और लुंड छूट को चीरता हुआ कैरा की जोरदार चीखो के साथ उसकी छूट में जड़ तक पूरा समां गया…)

कैरा- (दर्द से) आआआअह्ह्हह्हआआह्ह बहचुड़.. कहा था न धीरे दाल.. आअह्ह्ह्ह (सर idher-udher पटकती हुई) आआह्ह्ह मम्मा मर्डर गयी.. आआह्ह्म्म्म…

रूद्र- (मुस्कुराता हुआ उसके ऊपर लेट) क्या हुआ डार्लिंग..? बहार निकलू क्या.. आठ मज़ा ा रहा है अपना लुंड तेरी गरम छूट में रखने से…

कैरा- (उसके सर के पीछे अपना हाथ फेरती हुई) ह्ह्हहम्म्मह मेरे राजा मेरी तोह जान निकल रही है न.. प्लीज अभी हिलना मत.. थोड़ी देर ऐसे hi पड़ा रह…

रूद्र- (एक किश उसके होंठो पर लेता हुआ) हाँ डार्लिंग…

(कुछ 1 मिनट तक रूद्र अपना लुंड कैरा की छूट में hi पड़े रहने दिया, और फिर एक hi झटके में बहार निकल कर वापिस पूरा अंदर दाल दिया.. जिससे कैरा की चीखे वापिस बंगले में गूंजने लगी…)

कैरा- आअह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह हहाआनं.. उफ्फ्फ्फ़.. नाहीई. हम्म्म नही सुधरेगगआए नाआ चू काभीई.. आठ आह्हः.. हम्म थोड़ा धीरे कर प्लीज.. ाःह हहम…

रूद्र- (kas-kas के अपने लुंड के ढके उसकी छूट में पेलता हुआ) आठ.. आठ हां डार्लिंग.. तेरी यह चीखे सुने बिना तोह तुझे छोड़ने में मज़ा hi नहीं आता.. हाहहा क्या रास बहती छूट है तेरी.. बहादे.. बहादे जितना पानी तेरे अंदर है आज सारा बहादे.. ाःह आठ ममममम.. ओह्ह्ह…

कैरा- (अभी मज़े लेती हुई) ऊऊह्ह्ह्ह ोूहः हैं.. आअह्ह्ह मर और जोर से मर मेरी छूट.. कस के.. आह्हः ठांण ओह्ह फुकक में.. आठ रूद्र.. मेरे रूद्र मेरी छूट का सारा पानी निकल दे.. आह्ह्ह्ह हहममम…

रूद्र- (ruk-ruk के लकिन kas-kas के धक्के मरता हुआ) आआह्ह्ह.. आअह्ह्ह.. ले. यह ली.. और ली.. हहममम.. ा रहा है मेरी रानी को मज़ा..?

कैरा- ोुह्ह्ह ममममम बहुत मज़ा ा रहा है.. तेरी रानी अभी हवा में ुद्ध रही है.. आआह्ह्ह सससस… मेरे राजा को अपनी रानी की छूट मरने में कैसा लग रहा है.. हम्म्म…

रूद्र- (उसके ऊपर गिर, उसके पुरे मुँह को अपनी जीब से chat,ta हुआ) व्व्वाहहह.. आनंद से भरी है मेरी रानी की छूट…

(रूद्र का लुंड लगातार कैरा की छूट में अंदर बहार हो रहा था.. कैरा की छूट का पानी रूद्र के लुंड को पूरा गिला कर चूका था जिससे अब लुंड छूट में आराम से phisal-phisal कर जा रहा था.. कुछ 15 मिनट तक लगातार लुंड छूट में अंदर बहार होता रहा…)

कैरा- (रूद्र के दोनों कंदो पर हाथ रख कस्ती हुई) आअह्ह्ह आअह्ह्ह.. बास.. हहममम बास रूद्र.. आठ और नहीं सही जाती तेरे लुंड की मार.. आह्हः आ.. मैं झड़ने वाली हु…

रूद्र- ाःह ठांण तेरी छूट की गर्मी भी मुझसे नहीं सही जाती.. आआह.. मैं भी झड़ने वाला हु.. आए...

कैरा- (रूद्र को कास के पकड़ती हुई) आआह्ह्ह रूद्र फुकक मई.. आअह्ह्ह आठ आह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह माय आआआह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआ hhhhm.mm… ooohhhhhhhhhhhhhhhh… (और यह कैरा चीखती हुई झाड़ गयी)

रूद्र- (कैरा के गरम पानी को अपने लुंड पर महसूस कर, उसको कास के जकड़ता हुआ) आआआह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्ह डार्लिंगगगगग लल्लीए.. छ्हम्म मैं भी छूट गया.. आआह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह हहू.. हहू.. हूऊह्ह्ह्हहोअह...

(रूद्र भी अपने लुंड से निकले वीर्य की 8,9 पिचकारियां कैरा की छूट में लुंड को जड़ तक डालकर छोड़ने लगा.. जब रूद्र की वीर्य कैरा की छूट में दाखिल हुआ तोह इसका दोनों को ऐसा मज़ा मिला की दोनों बयां नहीं कर सकते.. pasino-pasini हो चुके थे दोनों.. कुछ देर तक रूद्र कैरा के ऊपर hi लेता रहा.. उसका लुंड मुरझा के कैरा की छूट से बहार निकल आया था.. लुंड बहार आते hi दोनों का वीर्य छूट से बहकर बहार आने लगा.. कैरा इतनी जबरदस्त चुदाई से थक के सू hi चुकी थी.. रूद्र उठा और उनसे पास में पड़े टॉवल से कैरा की छूट को अचे से साफ़ किया और एक पतली सी चद्दर उसके ऊपर दाल दिया...)

रूद्र- (खिड़की के पास जाकर, शैतानी मुस्कान के साथ) हाहाहाहा…


《1756 -वर्ड्स》
 
थैंक्स आशिक़क़ भाई.. हम्म जितना उससे समाज ए उतना उससे लग रहा है की वो खतरे में है..

नहीं भाई यह बात पहले के उपदटेस में ा चुकी है की दया को रूद्र ने बेझा है तुषार की shan-ben करने..

हाहाहा हाँ भाई यह रूद्र का कुछ करना पड़ेगा, अब एब क्यों हँसा यह तोह वही जाने, हमने तोह बस उससे हस्ते देखा hai..:D

शुक्रिया भाई..

कीप सपोर्टिंग...
 
नहीं भाई यह शायद आपको इसलिए लगा होगा क्युकी उसने गले में टाला लटका रखा है और दूसरा उसने जब कहा की यह दुनिआ को जंजीर में बांधना सपना है.. तोह हाँ लॉक नाम पहले था लकिन यह कुछ जमा नहीं तोह लॉक के साथ lock'et लगा दिया और आगे डॉ. तोह मस्त बन गया...

हाँ भाई यह सही कहा अपने यह मैं बस तरय किया था की सन चेंज कर कर के अपडेट देता हु लकिन इससे मेरा खुद का इंट्रेस्ट ख़त्म हो जाता है.. आगे से ऐसा काम hi देखने को मिलेगा...

हम्म मेरे ख्याल से स्टोरी स्लो नहीं है बस मैं चाहता हु की पुरे दिन का कोई सन मिस न हो.. उसने लिखने के चाकर में अपडेट काम देखने को मिल रहे है.. अभी मैं तोह फुल डिटेल के साथ hi लिखूंगा, हाँ बिच बिच में स्टोरी फ़ास्ट हो जाएगी लकिन अभी बहुत साडी प्रॉब्लम चल रही थी स्टोरी में जिससे निकलने में हालत खरब हो गयी, अभी भी है कुछ जो जल्द hi सोल्वे हो जाएगी.. उसके बाद स्टोरी रफ़्तार पर ा जाएगी...

शुक्रिया विक्रम भाई.. कीप सपोर्टिंग...
 
हम्म भाई बात तोह आपकी करेक्ट है.. लकिन हाँ ऐसा है की एक दिन बस चुटी लेता हु और एक पूरा दिन निकल जाता है सिर्फ कुछ 1800 वर्ड्स का अपडेट में.. लकिन में कोशिश कर रहा हु की अभी एकदिन छोड़ कर अपडेट दू.. और इंट्रेस्ट ख़त्म नहीं होने दूंगा.. इसलिए हर अपडेट डिटेल में होता ताकि आप न चाहो की यह सन जल्दी से स्किप हो.. इसमें काफी म्हणत लगती है.. कुछ सन थे जो मुझे एक साथ क्रिएट करने थे लकिन वक़्त नहीं था तोह यह पीछे 3-4 उपदटेस मेरी नजर से अचे नहीं थे.. पर आज के अपडेट से मैं खुद खुश हु.. शुक्रिया भाई. आगे से बड़े अपडेट आएंगे...
 
अपडेट-40





रूद्र उठा और उसके पास में पड़े टॉवल से कैरा की छूट को अचे से साफ़ किया और एक पतली सी चद्दर उसके ऊपर दाल दिया...)

रूद्र- (खिड़की के पास जाकर, शैतानी मुस्कान के साथ) हाहाहाहा…




|अब अग्गे|

|बैक तो तुषार|

(तुषार अभी सिया के पास hi बैठा था की शिवं बहार से आता है उनके पास..)

शिवं- बॉस.. गुरूजी ए है.. चलिए…

तुषार- (प्यार से सिया का गाल सहलाता हुआ) सिया बीटा जाओ मुम्मा के पास…

सिया- Okay भैया.. पर यह गुरूजी कोण...

तुषार- वो मैं आपको बाद में बाटूंगा...

सिया- Okay भैया...

(तुषार शिवं के साथ बहार गार्डन में चला जाता है जहा एक लम्बी टेबल लगी हुई थी, और गुरूजी उस टेबल पर हथियार और औजार सेट करके रख रहे थे…)

तुषार- (सब समझता हुआ, उनके पास जाकर) हम्म तोह लगता है गुरूजी वक़्त ा गया है आपके शिष्य का औजारों के साथ खेलने का…

गुरूजी- (पीछे मुद, मुस्कुराते हुए उससे देख) बिलकुल.. (वह पड़ी बहुत साडी तलवारो की और इशारा कर) यह रही तलवारे.. जो पसंद हो उथले…

(तुषार साडी तलवारो को धयान से देख रहा था.. वह निंजा, ास्सास्सिन, मॉडर्न, Alag-Alag कंट्री से लायी गयी Alag-Alag प्रकार की और भी काफी साडी तलवारे थी.. तुषार आगे बढ़ा और उन् तलवारो एक बिच में पड़ी एक जुंग लगी तलवार को उठा लिया.. यह देख शिवं और गुरूजी दोनों मुस्कुरा दिए…)

तुषार- (तलवार को धयान से देखता हुआ) यह तलवार कैसी…..

गुरूजी- (बिच में बोलते हुए) सदियों पुराणी तलवार है यह.. कहते है किसी योद्धा की यह पहली तलवार थी, जो उसने खुद hi बनाई थी.. इस तलवार से लाखो गार्डन काटी थी उसने.. जुंग लगा हुआ है इसपर, पर आज भी इसका एक तेज धार वॉर अछि से अछि तलवार को 2 हिस्सों में काट के फेक देगा…

तुषार- हम्म.. फिर तोह यही हुई आज से मेरी तलवार.. चलो गुरूजी सिखाओ मुझे की इससे गले कैसे काटे जाते है…

गुरूजी- शिवं सिखाएगा तुम्हे…

तुषार- ठीक है गुरूजी.. (शिवं को देखता हुआ, पता नहीं कहा से पर अभी शिवं के हाथ में उसकी तलवार थी) चल भाई शिवं आजा, बहुत तलवारबाजी देखली तेरी अब मेरी बरी है…

(तुषार यह बोलता हुआ खली जगह की और जा रहा था, उसने अपनी जुंग लगी तलवार को लेफ्ट हैंड से रिघ हैंड की और अपने पीछे से घामते हुए पकड़ लिया.. उसने ऐसा किया है यह बात का एहसास उससे शायद हुआ hi नहीं…)

तुषार- (पिच मुद शिवं और गुरूजी को देखता हुआ) मुस्कुरा क्यों रहे हो गुरूजी..? शिवं चल ा, आज तेरी तलवार को काट के फेकूगा…

शिवं- (उसकी और बढ़ता हुआ, मुस्कुरा के धीरे से बोलै) एक hi लोहे से बानी है दोनों तलवारे, क्या काटोगे आप…

(अभी दोनों aamne-samne खड़े थे.. तुषार तलवार को दोनों हाथो में पकडे शिवं की आँखों में देख रहा था, शिवं की तलवार उसके राइट हैंड में लटकी जमीन को छू रही थी.. एकदम से तुषार ने अपनी तलवार को शिवं की गार्डन की और चला दिया लकिन एक झटके में शिवं की तलवार उठ गयी और तुषार की तलवार के सामने ा गयी.. तुषार ने अपनी तलवार वापिस ली और इसबार तेजी से उसने शिवं के लेफ्ट कंडे पर चलनी चाही लकिन यह कोशिश भी उसकी नाकाम रही…)

तुषार- वाह यार.. मन गया तेरी तलवारबाजी…

(फिर शिवं उससे तलवार चलनी सिखने लगता है.. उसकी धार को मरते वक़्त कब और कैसे सीधी राखी जाती है, हैंडल किस वक़्त ऊपर से और किस वक़्त नीचे से पकड़ना है, किस रफ़्तार से तलवार का वॉर करना है, और कैसे अपने आप को तलवार से डिफेंड करना है.. dhire-dhire तुषार सिक्ख रहा था एक्चुअली वो jaldi-jaldi हर चीज़ को सिक्ख रहा था.. एक अजीब बात जो हो रही थी वो थी की तलवार पर तलवार की लग रही रगड़ से तुषार की तलवार पर लगा जुंग अब कुछ हिस्सों से उतर चूका था, और अंदर से चमकती हुई तलवार बहार ा रही थी…)

(करीब 2 घंटे तलवारबाजी सिक्खणे के बाद गुरूजी ने उन्हें रोक दिया, और तुषार को कसरत करने को बोलै लिखे, पुशअप्स, रनिंग, वेट उठाना...)

(रात हो चुकी थी तुषार सुभे के 10 बजे से ट्रेनिंग ले रहा था, अभी तक उसने ब्रेकफास्ट, लंच तक कुछ भी नहीं खाया था.. न उससे भूख लग रही थी न उससे थकावट हो रही थी.. वो सब कुछ बुला के बस ट्रेनिंग कर रहा था.. गुरूजी जा चुके थे लकिन शिवं उसके साथ hi था.. तुषार के कपड़ो में एक भी ऐसा हिस्सा नहीं थी जहा वो पसीने से भीगा न हो, यहाँ तक के उसके बालो से पसीना ऐसे टपक रहा था जैसे अभी वो तालाब में डुबकी लगा के आया हो…)

(रात हो चुकी थी और हवेली में प्रियल सुभे से भुकी अपने रूम में बैठी roo-roo कर थक चुकी थी और टेंशन और भूखे पेट होने के कारन उससे थकावट हो रही थी तोह वो सू रही थी.. सिया सुभे से पक रूम में बैठी थी, वह लगे कम्प्यूटर्स में वो cheed-chaad कर रही थी, नजाने वो क्या देख रही थी तब से, लकिन उसने भी सुभे hi खाना खाया था तोह उससे भूख लगी थी और यह भूख उससे उसकी मुम्मा के पास ले गयी…)

सिया- (दूर खोल अंदर आती हुई) मुम्मा..!!

प्रियल-- (अपनी बेटी की आवाज सुन उठी हुई) हाँ.. क्या, क्या हुआ बीटा…

सिया- (बीएड पर बैठती हुई) मुम्मा भूख लगी…

प्रियल- भूख लगी है.. ाचा वो आपके भैया. क्या नाम था उनका…

सिया- तुषार भैया…

प्रियल- हाँ तुषार, उन्होंने भी नहीं खाना खाया होगा न शायद…

सिया- (अपने दोनों हाथ सर पे रख) हाँ मुम्मा, यह तोह मैं भूल hi गयी.. भैया ने मुझे खिलाया और खुद नहीं खाया…

प्रियल- ाचा जाओ तुम उन्हें बुला लाओ मैं खाने की तयारी करती हु…

सिया- Okay मुम्मा…

(दोनों उठी और प्रियल किचन में और सिया तुषार को dhundhti-dhundti बहार गार्डन में ा गयी…)

सिया- (तुषार के पास आती हुई) अरे ो प्यारे भैया.. क्या कर रहे हो…

तुषार- (सिया को देख मुस्कुराता हुआ) सिया.. कुछ नहीं बचा.. थोड़ी एक्सरसाइज कर रहे रहा हु…

सिया- (दोनों हाथ अपने कमर पे रख) भैया सुभे से कुछ नहीं खाया न अपने..?

तुषार- वो….

सिया- (बिच में) हाँ मुझे पता अपने नहीं खाया.. चलो यह सब बाद में करना पहले खाना खा लेते.. मुम्मा बना रही है.. (तुषार का हाथ पकड़ खींचती हुई) ायो चलाऊ…

तुषार- ठीक है- ठीक है चलो…

सिया- (पीछे मुद शिवं को देख) ारी.. आप नहीं आएंगे भैया.. खड़े क्या हो चलो…

(सिया दोनों को thora-thora दन्त कर ले गयी हवेली.. सिया जाकर दिंनिंग टेबल के ऊपर चढ़कर बेथ गयी और शिवं और तुषार फ्रेश होने चले गए.. करीब आधे घंटे बाद दोनों आकर सिया के पास बेथ गए…)

सिया- (टेबल पर बैठी दोनों को घूरती हुई) आप दोनों ने खाना नहीं खाया सुभे से…

तुषार- वो मैं.. मुझे पता नहीं चला कब रात हो गयी.. (और साइड को मुँह कर सेट्टी बजने लगा)

सिया- वाह्ह क्या बहाना है आपका.. (शिवं को देख) और आपको भी पता नहीं चला मास्क वाले भैया...

शिवं- नहीं सिया मैंने खा लिया था खाना...

(तुषार किचन की और देख रहा था यहाँ प्रियल मन लगा के खाना तैयार कर रही थी.. तुषार उठा और किचन की और जाने लगा...)

तुषार- (किचन में पहुँच कर) जी मैं.. मैं कुछ हेल्प करू आपकी…

प्रियल- (घूम कर उसकी और देखती हुई) अरे आप तुषार जी.. नहीं नहीं मैं आप रहने दो.. मैं कर लुंगी…

तुषार- आप जी क्यों बुला रही हो मुझे.. इतना छोटा हु मैं आपसे.. इतनी इज्जत न दे आप मुझे…

प्रियल- नहीं जी आप इज्जत के हक़दार है.. मैं नहीं जानती आप कोण हो, क्या हो, इनफैक्ट आप तोह मुझे भी ठीक से नहीं जानते लकिन अपने मुझे और मेरी बेटी को अपने घर रहने दिया, दुःख की घडी में अपने हमारा इतना ख्याल रखा.. उसके लिए जितना शुक्रिया करू मैं आपका काम है…

तुषार- देखिये आप ऐसा मत बोलिये , ाचा आपकी आगे क्या है…

प्रियल- जी मेरी आगे 27 है…

तुषार- हम्म.. तोह जो बहार बैठा है न शिवं उसकी 22 है.. तोह मतलब वो 5 साल छोटा है आपसे उस हिसाब से आप उसकी भाभी लगती हो और उसकी हुई तोह मेरी भी हुई फिर…

प्रियल- (तुषार की गाल खींचती हुई) ाचा ठीक है लकिन आप जानते नहीं की देवर को भी देवर जी बुला लेते है.. समजे जी…

तुषार- (अपना सर खुजा के) तोह आप नहीं मानेगी ठीक है.. तोह लाओ में आपकी मदद करता हु.. मेरे वो 2 साथी किसी जरुरी काम से बहार गए है.. वर्ण तोह वही दोनों खाना बनाते थे…

(फिर तुषार प्रियल की थोड़ी काम में हेल्प करता है और फिर खाना बनने के बाद तीनो बेथ के कहते है.. शिवं ने वह नहीं खाया था वो अपना मास्क नहीं उतर सकता तोह इसलिए वो अलग होकर खता है सबसे…)

(उधर शहर में जितने स्टूडेंट्स, बचे ड्रग्स एडिक्टेड थे उनमेसे ज्यादातर स्टूडेंट्स को सवाना, सफल और उनकी टीम, और पुलिस वालो ने उन्हें हॉस्पिटल पहुंचा दिया था.. जो टीचर्स ड्रग्स दे रहे थे बचो को उनमे से कुछ टीचर्स पकडे गए थे और थोड़ा डरा, दमकार और ek-do डंडे लगाने के बाद उन्होंने बक्की के कुछ टीचर्स का भी पता लगा लिया था…)

|Jagala’s हवेली|

(लाला परेशां हुआ सोफे पर बैठा था.. उससे जाकीं नहीं हो रहा था की उसके 300-350 आदमी एक झटके में ुधा दिए गए…)

लाला- यह सेल मूरख लोग थे क्या.. यहाँ से तोह बारे हल्ला मचाते हुए गए थे.. उधर जाकर कुछ hi मिनटों में हवा में धूल हो गए.. सेल गांड मरवाइए लोग न खाक के न झट के.. टट्टे बड़े हुए नहीं की चले गुंडे बनने…

खास आदमी- बॉस मैं क्या कहता हु अभी आपकी मीटिंग है कल, इंडिया के सबसे बड़े डॉन वैभव सेठिए के साथ.. आप उससे मिलने की तयारी कीजिये.. वो baar-baar इंडिया नहीं आएगा, और आएंगे तोह जरुरी नहीं की हमसे मिलेंगे hi.. अगर हमारी डील हो गयी तोह क्रोरो का माल हाथ आएगा…



लाला- हाँ बात तोह तेरी यह भी सही है.. तू तयारी कर मिलने की.. और माल फ्रेश रखना.. यह सेल दया का पत्ता साफ़ करने को भी बोलना होगा उससे.. कुछ ज्यादा hi फुदक रहा है आते hi वो…

《1660 -वर्ड्स》
 
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