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- Dec 5, 2013
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अपडेट-36
अननोन.1- (फ्रीज़ज़ीर के पास जाकर) अब्बे इतना खून कहे लगा है.. अंदर क्या lashe-washe रख राखी है क्या.. आअह्ह्ह्ह...
(यह एक चीख उस आदमी की तभ गूंजी जब उस आदमी ने फ्रीजर का उप्पेर ड्रावर खोला तोह एक लम्बा नोकीला टूल आकर उस आदमी की गर्दन में घुस गया.. आदमी की सांसी वही जैम गयी और वो एक साइड को गिर गया.. दूसरे आदमी ने अपने पास रखा एक बटन प्रेस किया तोह वो टूल वापिस अंदर चला गया और ड्रावर बंद हो गया.. उसने उस आदमी की लाश को मन मरते हुए एक काळा बड़े से बैग में डाला और एक कोने में रख दिया...)
अननोन.2- (हस्ता हुआ) हे हे ः है हाहाहाहा.. (अपने एक हाथ को gol-gol घूमता हुआ) डॉ. लॉकेट नाम है मेरा इस दुनिआ को अपनी जंजीर में बांधना सपना है मेरा.. हे हे हे है है है है...
|अब अग्गे|
|बैक तो सिटी नातिर|
(लाला के आदमी पूरी सिटी में एक के पीछे एक करीब 30-35 गाड़ियां लगाए, हथियारों से लैस पुलिस स्टेशन को उड़ने निकलते जा रहे थे.. उनका मकसद यह था की सिटी में जो 15 पुलिस स्टेशन है उसमे घुस कर जितने अंदर पुलिस वाले सबको मर गिरना है और सरे कैदियों को जेल से फरार करने के बाद थाने को जला देना है...)
|बैक तो तुषार|
(शाम का वक़्त था, हरलीन अपने घर को चली गयी थी.. तुषार भी कुछ काम बोल कर घर से निकल गया और हवेली पहुँच गया.. Safal-Savana, प्रियल और सिया को लेकर हवेली पहुँच गए थे.. दोनों माँ बेटी को तोह कुछ ख्याल hi नहीं था की उन्हें कोण किधर ले जा रहा है.. खीर हवेली पहुँच कर सवाना ने प्रियल को जो भी हॉस्पिटल में हुआ सब बता दिया और वो और सफल कोण है..? तुषार के लिए काम करते है, यह हवेली भी उसकी है यह सब बता दिया.. करीब 1 घंटे बाद तुषार हवेली आया उसने अपने घर के सेक्रेटरी को कुछ समजा के 7-8 लोग हवेली में पहुंचा दिया थे, तककि वो सब सिया के पापा का antim-sanskar कर सके.. सिया को सवाना के पास हवेली में छोड़ 2- 2:30 घंटे बाद अंतिम विदाई की तयारी हुई सब निकल पड़े ram-ram सत्य करते हुए.. तुषार ने सिया के पापा की चिटा को आग दी और उनकी अंतिम विदाई की.. प्रियल काफी हद तक संभल चुकी थी.. वो बस कड़ी सामने जल रही अपने पति की लाश को देख आंसू बहा रही थी.. शाम निकल गयी और आसमान में टारे निकल ए, करीब रात के 9 बजे गए थे, लकिन अभी तक कोई वह से गया नहीं था...)
|अमेरिका, सिटी शिकागो|
( रूद्र अपनी बिल्डिंग के किसी फ्लोर पर था.. वो एक ब्लैक T-shirt, पंत में खड़ा था..
हेलमेट जैसा पुरे सर को कवर कर देने वाला एक मास्क उसने पहना था.. रुद्रे ने एक टेबल का ड्रावर खोल उसमे से एक कुल्हाड़ी निकल ली.. और एक बैग जो दिवार से लटका हुआ था उससे उठा कर अपनी पीठ पर पहन लिया.. यह कही जा रहा था, और इसने पूरी तयारी कर ली थी, वो क्या तयारी की थी पता नहीं...)
रूद्र- (लिफ्ट में, ऊपर के फ्लोर से निचे आता हुआ) यह साला बहुत हुआ, आज पहले इसका ख़तम करके आता हु...
(और रूद्र लिफ्ट से बहार निकल अपनी कार पार्किंग की तरफ जाने लगा तोह पीछे से चाचा ने आवाज लगाई...)
चाचा- अरे कहा जा रहा है...
रूद्र- किसी भोसड़ीवाली का भोसड़ा बनाने...
चाचा- कोण..?
रूद्र- अरे वही वो जो baar-baar हिटमैन बेज रही है...
चाचा- अरे उससे क्या डरता है.. वो तोह.....
रूद्र- (बिच में, उसके पास आता हुआ) क्यों न दारू.. सोच तेरे ऊपर हर वक़्त कोई गन तने खड़ा है, तू जहा जा रहा है तेरे पे स्नाइपर का लाज़र है तोह कैसा लगेगा तुझे.. लगेगा दर.. लगेगा न...
चाचा- ाचा चल जा मुझे क्या है मैं तोह बस इतना कह रहा था की इतनी बड़ी फ़ौज रख कर खुद क्यों जाता है लड़ने...
रूद्र- (हस्ता हुआ) तोह अपनी दरिंदगी कैसे कायम रखूँगा चाचा.. चल अभी जान दे मुझे.. आज तोह लुंड मुँह में डालूंगा उसके.. उसकी गांड खोल कर लाल मिर्ची से न भरी तोह कहना...
चाचा- अरे ek-do को तोह लेता जा.. जरुरत पद सकती है...
रूद्र- (पीछे मुद देखता हुआ, मुस्कुरा के) हूहहह.. जरुरत..? यह सब झंटू तेरे लिए इकठ्ठा किये है... (इतना बोलकर वो कार में बैठा और कार को बिल्डिंग से बहार निकल लिया...)
चाचा- एक नंबर का हरामी है.. (मुस्कुराता हुआ) अरे बच ले किआरा अहति.! बच ले.. तेरी मौत रस्ते में है.. जल्द hi तेरे पास होगी.. गांड में दकन लगा ले यह सच्चे आज तेरी गांड मिर्ची से भरेगा हहहह...
(रूद्र की कार 240 कम्फ की रफ़्तार से दौड़ी हुई करीब 30 मिनट बाद एक खली शांत जगह पर पहुंची.. यह एक विलेज था.. chote-chote घरो की बस्ती में एक बहुत बड़ा बांग्ला उससे नाराज ा रहा था... रूद्र ने कार को विलेज के बहार hi रोक लिया और कार से बहार निकल गया.. वही एक बैग जो रूद्र साथ लाया था उससे बहार निकल लेता है और chupke-chupke चल पड़ता है उस बंगले की और.. काळा suit-boot में मुँह पर एक हेलमेट टाइप मास्क पहने वो विलेज के सरे घरो के पीछे से छुपकर निकले जा रहा था.. बांग्ला विलेज के bicho-bich था.. अभी सुभे थी और विलेज में chehal-pehal भी काम hi थी.. बांग्ला काफी बड़ा था हर जगह गार्ड्स गन्स लेकर खड़े थे.. रूद्र उस बंगले के पीछे की बड़ी सी दिवार करीब 3 मंजिला इमारत जितनी उच्ची दिवार के सामने आकर रुक गया...)
(बंगले के पीछे 1, 2 hi घर थे, और न hi वह कोई jeev-parinda घूम रहा था, वह काफी शांति थी.. रूद्र ने अपना बड़ा सा बैग उतर कर जमीन पर रखा और उसमे से कुछ सामान निकल लिया.. पहले उसने एक प्लास्टिक का बॉक्स निकला, उसमे लगी 3, 4 बटन को रूद्र ने दबा दिया तोह वो बॉक्स के एक ड्रोन जैसे फंस बहार निकल ए.. उसमे लगी स्क्रीन पर रूद्र ने कुछ किया और वो बॉक्स वह में उड़ता हुआ ऊपर और ऊपर और ऊपर जाता हुआ बंगले की दिवार ऊपरी किनारे तक पहुँच गया.. वो ड्रोन अंदर जितना जहा तक दिख सके साडी डिटेल्स निकल आकर रूद्र की वाच पर सेंड करदी और बंगले की दिवार को पर कर वो बॉक्स दिवार के पर गिर गया.. फिर उस बॉक्स में कुछ आवाज हुई और वो बॉक्स dhire-dhire फटने लगा.. यह था इसके अंदर एक प्लास्टिक का एयर मटलेस जो dhire-dhire अपने अंदर हवा भर रहा था.. और फूलता जा रहा था...)
(रूद्र ने तब तक कुछ और तैयार कर लिया था.. यह भी एक वैसा भी एयर मैट्रेस्स टाइप था, पर थोड़ा अलग.. रूद्र के वाच पर एक मैसेज आया, यह मैसेज था की उधर काम हो गया अब तेरी बरी, ृर्दा उस हवा से बहरे गद्दे पर अपना बेग लेकर पीठ के बल लेट गया और वाच पर एक बटन दबा दिया.. एक जोरदार झटका दिया उस गद्दे से मिला और रूद्र हवा में, गुलाटी मरता हुआ वो दिवार पर कर गया और दिवार के दुरसी तरफ दूसरे गद्दे पर जा गिरा...)
|बैक तो सिटी नातिर|
(अब तक 3 पुलिस स्टेशन की हालत ख़राब कर चुके थे लाला के आदमी.. इस वक़्त दर, खोफ्फ़, घबराहट सिटी के लोगो में दौड़ रही थी.. यह खबर dhire-dhire फैलती जा रही की कुछ गुंडे पुलिस स्टेशन जला रहे है, पुलिस वालो को मार रहे है, जेल में कैद कैदियों को आजाद कर रहे है.. अब तक तीनो पुलिस स्टेशन से करीब 80 पुलिस वालो की मौत हो चुकी थी.. बिच में ा रहे हर पुलिस वाला मौत के घात उतर दिया जा रहा था.. अब रात हो चुकी थी और लाला के गुंडे चौथे पुलिस स्टेशन की और जा रहे थे सड़के सुनसान थी हर कोई यह खबर सुन कर अपने घर से बहार नहीं निकल रहा था.. हथियारों से लैस 35 गाड़ियां भर के करीब 300 गुंडे अपने अगले टारगेट की और जा रहे थे.. उन्होंने एक पेट्रोल पंप पर किया और थोड़ी दूर जाकर सब गाड़ियां एक के बाद एक पीछे रूकती गयी.. उसकी वझे थी की सामने एक बोलेरो कार लिए गुंडों की आंखों में अपनी कार की सीधी लाइट मरता हुआ सड़क के बीचो दया खड़ा था...)
( 2 लीणो में गुंडों की गाड़ियां सड़क में रुक गयी.. अगली वाली दोनों गाड़ियों से aage-piche, daen-baen दोनों गाड़ियों से 15-20 आदमी बहार निकले.. दया ने भी ज्यादा देर न करते हुए वही से एक आदमी के गोली मर दी.. यह एक आदमी के गोली मरना एक सिग्नल था.. यह सिग्नल जैसे hi बक्की के जो सभी पुलिस वाले सड़क के daen-baen बने दूर घरो की विंडो से शूट करना शुरू कर दिए.. उन्होंने बन्दुक पर लाइट स्कोप लगायी और फायरिंग पे फायरिंग करनी शुरू कर की.. दूर से आती बन्दुक की गोली जब कार की आयल टैंक को लगी तोह हर जगह आग ने तबाही मचा दी.. सड़क पर पहले hi दया ने पेट्रोल की बारिश करवादी गयी थी तोह बाकी गाड़ियां और गुंडों का बच पाना नामुमकिन था.. कुछ hi सेकण्ड्स में 35 की 35 गाड़ियां आग में शामिल हो गयी.. रात का वक़्त था लकिन अब dur-dur तक उजाला हो गया था...)
|बैक तो तुषार|
(तुषार और बक्की सब अभी हवेली वापिस ा गए थे.. सिया तबसे roti-roti सू गयी थी.. सवाना सबके लिए खाना बना रही थी लकिन खाने का किसी का मन नहीं था.. सब दिंनिंग टेबल पर gum-shum से बैठे थे.. सफल उठा और सवाना के पास चला गया उसकी मदद करने.. कुछ देर बाद खाना बन गया और दोनों ने टेबल पर लगा दिया.. मुश्किल से सवाना से प्रियल को थोड़ा सा खाना खिलाया और बक्की सब ने भी थोड़ा कहा लिया.. कुछ देर सभी वही बैठे रहे लकिन कोई कुछ बोलै नहीं.. सवाना ने प्रियल को साथ लेकर उससे सिया के रूम में सुला दिया और बाकि सब भी सोने चले गए apne-apne रूम्स में...)
|अगली सुबह|
सिया- (अपनी मुम्मा को अपने पास सोता देख, उसके फेस पर प्यार से हाथ फेरती हुई) मुम्मा...!
प्रियल- (जो शायद सू hi नहीं रही थी, अपनी बेटी का हाथ महसूस कर जल्दी से उठती हुई) क्या हुआ मेरा बचा..?.......
《1667 -वर्ड्स》
अननोन.1- (फ्रीज़ज़ीर के पास जाकर) अब्बे इतना खून कहे लगा है.. अंदर क्या lashe-washe रख राखी है क्या.. आअह्ह्ह्ह...
(यह एक चीख उस आदमी की तभ गूंजी जब उस आदमी ने फ्रीजर का उप्पेर ड्रावर खोला तोह एक लम्बा नोकीला टूल आकर उस आदमी की गर्दन में घुस गया.. आदमी की सांसी वही जैम गयी और वो एक साइड को गिर गया.. दूसरे आदमी ने अपने पास रखा एक बटन प्रेस किया तोह वो टूल वापिस अंदर चला गया और ड्रावर बंद हो गया.. उसने उस आदमी की लाश को मन मरते हुए एक काळा बड़े से बैग में डाला और एक कोने में रख दिया...)
अननोन.2- (हस्ता हुआ) हे हे ः है हाहाहाहा.. (अपने एक हाथ को gol-gol घूमता हुआ) डॉ. लॉकेट नाम है मेरा इस दुनिआ को अपनी जंजीर में बांधना सपना है मेरा.. हे हे हे है है है है...
|अब अग्गे|
|बैक तो सिटी नातिर|
(लाला के आदमी पूरी सिटी में एक के पीछे एक करीब 30-35 गाड़ियां लगाए, हथियारों से लैस पुलिस स्टेशन को उड़ने निकलते जा रहे थे.. उनका मकसद यह था की सिटी में जो 15 पुलिस स्टेशन है उसमे घुस कर जितने अंदर पुलिस वाले सबको मर गिरना है और सरे कैदियों को जेल से फरार करने के बाद थाने को जला देना है...)
|बैक तो तुषार|
(शाम का वक़्त था, हरलीन अपने घर को चली गयी थी.. तुषार भी कुछ काम बोल कर घर से निकल गया और हवेली पहुँच गया.. Safal-Savana, प्रियल और सिया को लेकर हवेली पहुँच गए थे.. दोनों माँ बेटी को तोह कुछ ख्याल hi नहीं था की उन्हें कोण किधर ले जा रहा है.. खीर हवेली पहुँच कर सवाना ने प्रियल को जो भी हॉस्पिटल में हुआ सब बता दिया और वो और सफल कोण है..? तुषार के लिए काम करते है, यह हवेली भी उसकी है यह सब बता दिया.. करीब 1 घंटे बाद तुषार हवेली आया उसने अपने घर के सेक्रेटरी को कुछ समजा के 7-8 लोग हवेली में पहुंचा दिया थे, तककि वो सब सिया के पापा का antim-sanskar कर सके.. सिया को सवाना के पास हवेली में छोड़ 2- 2:30 घंटे बाद अंतिम विदाई की तयारी हुई सब निकल पड़े ram-ram सत्य करते हुए.. तुषार ने सिया के पापा की चिटा को आग दी और उनकी अंतिम विदाई की.. प्रियल काफी हद तक संभल चुकी थी.. वो बस कड़ी सामने जल रही अपने पति की लाश को देख आंसू बहा रही थी.. शाम निकल गयी और आसमान में टारे निकल ए, करीब रात के 9 बजे गए थे, लकिन अभी तक कोई वह से गया नहीं था...)
|अमेरिका, सिटी शिकागो|
( रूद्र अपनी बिल्डिंग के किसी फ्लोर पर था.. वो एक ब्लैक T-shirt, पंत में खड़ा था..
हेलमेट जैसा पुरे सर को कवर कर देने वाला एक मास्क उसने पहना था.. रुद्रे ने एक टेबल का ड्रावर खोल उसमे से एक कुल्हाड़ी निकल ली.. और एक बैग जो दिवार से लटका हुआ था उससे उठा कर अपनी पीठ पर पहन लिया.. यह कही जा रहा था, और इसने पूरी तयारी कर ली थी, वो क्या तयारी की थी पता नहीं...)
रूद्र- (लिफ्ट में, ऊपर के फ्लोर से निचे आता हुआ) यह साला बहुत हुआ, आज पहले इसका ख़तम करके आता हु...
(और रूद्र लिफ्ट से बहार निकल अपनी कार पार्किंग की तरफ जाने लगा तोह पीछे से चाचा ने आवाज लगाई...)
चाचा- अरे कहा जा रहा है...
रूद्र- किसी भोसड़ीवाली का भोसड़ा बनाने...
चाचा- कोण..?
रूद्र- अरे वही वो जो baar-baar हिटमैन बेज रही है...
चाचा- अरे उससे क्या डरता है.. वो तोह.....
रूद्र- (बिच में, उसके पास आता हुआ) क्यों न दारू.. सोच तेरे ऊपर हर वक़्त कोई गन तने खड़ा है, तू जहा जा रहा है तेरे पे स्नाइपर का लाज़र है तोह कैसा लगेगा तुझे.. लगेगा दर.. लगेगा न...
चाचा- ाचा चल जा मुझे क्या है मैं तोह बस इतना कह रहा था की इतनी बड़ी फ़ौज रख कर खुद क्यों जाता है लड़ने...
रूद्र- (हस्ता हुआ) तोह अपनी दरिंदगी कैसे कायम रखूँगा चाचा.. चल अभी जान दे मुझे.. आज तोह लुंड मुँह में डालूंगा उसके.. उसकी गांड खोल कर लाल मिर्ची से न भरी तोह कहना...
चाचा- अरे ek-do को तोह लेता जा.. जरुरत पद सकती है...
रूद्र- (पीछे मुद देखता हुआ, मुस्कुरा के) हूहहह.. जरुरत..? यह सब झंटू तेरे लिए इकठ्ठा किये है... (इतना बोलकर वो कार में बैठा और कार को बिल्डिंग से बहार निकल लिया...)
चाचा- एक नंबर का हरामी है.. (मुस्कुराता हुआ) अरे बच ले किआरा अहति.! बच ले.. तेरी मौत रस्ते में है.. जल्द hi तेरे पास होगी.. गांड में दकन लगा ले यह सच्चे आज तेरी गांड मिर्ची से भरेगा हहहह...
(रूद्र की कार 240 कम्फ की रफ़्तार से दौड़ी हुई करीब 30 मिनट बाद एक खली शांत जगह पर पहुंची.. यह एक विलेज था.. chote-chote घरो की बस्ती में एक बहुत बड़ा बांग्ला उससे नाराज ा रहा था... रूद्र ने कार को विलेज के बहार hi रोक लिया और कार से बहार निकल गया.. वही एक बैग जो रूद्र साथ लाया था उससे बहार निकल लेता है और chupke-chupke चल पड़ता है उस बंगले की और.. काळा suit-boot में मुँह पर एक हेलमेट टाइप मास्क पहने वो विलेज के सरे घरो के पीछे से छुपकर निकले जा रहा था.. बांग्ला विलेज के bicho-bich था.. अभी सुभे थी और विलेज में chehal-pehal भी काम hi थी.. बांग्ला काफी बड़ा था हर जगह गार्ड्स गन्स लेकर खड़े थे.. रूद्र उस बंगले के पीछे की बड़ी सी दिवार करीब 3 मंजिला इमारत जितनी उच्ची दिवार के सामने आकर रुक गया...)
(बंगले के पीछे 1, 2 hi घर थे, और न hi वह कोई jeev-parinda घूम रहा था, वह काफी शांति थी.. रूद्र ने अपना बड़ा सा बैग उतर कर जमीन पर रखा और उसमे से कुछ सामान निकल लिया.. पहले उसने एक प्लास्टिक का बॉक्स निकला, उसमे लगी 3, 4 बटन को रूद्र ने दबा दिया तोह वो बॉक्स के एक ड्रोन जैसे फंस बहार निकल ए.. उसमे लगी स्क्रीन पर रूद्र ने कुछ किया और वो बॉक्स वह में उड़ता हुआ ऊपर और ऊपर और ऊपर जाता हुआ बंगले की दिवार ऊपरी किनारे तक पहुँच गया.. वो ड्रोन अंदर जितना जहा तक दिख सके साडी डिटेल्स निकल आकर रूद्र की वाच पर सेंड करदी और बंगले की दिवार को पर कर वो बॉक्स दिवार के पर गिर गया.. फिर उस बॉक्स में कुछ आवाज हुई और वो बॉक्स dhire-dhire फटने लगा.. यह था इसके अंदर एक प्लास्टिक का एयर मटलेस जो dhire-dhire अपने अंदर हवा भर रहा था.. और फूलता जा रहा था...)
(रूद्र ने तब तक कुछ और तैयार कर लिया था.. यह भी एक वैसा भी एयर मैट्रेस्स टाइप था, पर थोड़ा अलग.. रूद्र के वाच पर एक मैसेज आया, यह मैसेज था की उधर काम हो गया अब तेरी बरी, ृर्दा उस हवा से बहरे गद्दे पर अपना बेग लेकर पीठ के बल लेट गया और वाच पर एक बटन दबा दिया.. एक जोरदार झटका दिया उस गद्दे से मिला और रूद्र हवा में, गुलाटी मरता हुआ वो दिवार पर कर गया और दिवार के दुरसी तरफ दूसरे गद्दे पर जा गिरा...)
|बैक तो सिटी नातिर|
(अब तक 3 पुलिस स्टेशन की हालत ख़राब कर चुके थे लाला के आदमी.. इस वक़्त दर, खोफ्फ़, घबराहट सिटी के लोगो में दौड़ रही थी.. यह खबर dhire-dhire फैलती जा रही की कुछ गुंडे पुलिस स्टेशन जला रहे है, पुलिस वालो को मार रहे है, जेल में कैद कैदियों को आजाद कर रहे है.. अब तक तीनो पुलिस स्टेशन से करीब 80 पुलिस वालो की मौत हो चुकी थी.. बिच में ा रहे हर पुलिस वाला मौत के घात उतर दिया जा रहा था.. अब रात हो चुकी थी और लाला के गुंडे चौथे पुलिस स्टेशन की और जा रहे थे सड़के सुनसान थी हर कोई यह खबर सुन कर अपने घर से बहार नहीं निकल रहा था.. हथियारों से लैस 35 गाड़ियां भर के करीब 300 गुंडे अपने अगले टारगेट की और जा रहे थे.. उन्होंने एक पेट्रोल पंप पर किया और थोड़ी दूर जाकर सब गाड़ियां एक के बाद एक पीछे रूकती गयी.. उसकी वझे थी की सामने एक बोलेरो कार लिए गुंडों की आंखों में अपनी कार की सीधी लाइट मरता हुआ सड़क के बीचो दया खड़ा था...)
( 2 लीणो में गुंडों की गाड़ियां सड़क में रुक गयी.. अगली वाली दोनों गाड़ियों से aage-piche, daen-baen दोनों गाड़ियों से 15-20 आदमी बहार निकले.. दया ने भी ज्यादा देर न करते हुए वही से एक आदमी के गोली मर दी.. यह एक आदमी के गोली मरना एक सिग्नल था.. यह सिग्नल जैसे hi बक्की के जो सभी पुलिस वाले सड़क के daen-baen बने दूर घरो की विंडो से शूट करना शुरू कर दिए.. उन्होंने बन्दुक पर लाइट स्कोप लगायी और फायरिंग पे फायरिंग करनी शुरू कर की.. दूर से आती बन्दुक की गोली जब कार की आयल टैंक को लगी तोह हर जगह आग ने तबाही मचा दी.. सड़क पर पहले hi दया ने पेट्रोल की बारिश करवादी गयी थी तोह बाकी गाड़ियां और गुंडों का बच पाना नामुमकिन था.. कुछ hi सेकण्ड्स में 35 की 35 गाड़ियां आग में शामिल हो गयी.. रात का वक़्त था लकिन अब dur-dur तक उजाला हो गया था...)
|बैक तो तुषार|
(तुषार और बक्की सब अभी हवेली वापिस ा गए थे.. सिया तबसे roti-roti सू गयी थी.. सवाना सबके लिए खाना बना रही थी लकिन खाने का किसी का मन नहीं था.. सब दिंनिंग टेबल पर gum-shum से बैठे थे.. सफल उठा और सवाना के पास चला गया उसकी मदद करने.. कुछ देर बाद खाना बन गया और दोनों ने टेबल पर लगा दिया.. मुश्किल से सवाना से प्रियल को थोड़ा सा खाना खिलाया और बक्की सब ने भी थोड़ा कहा लिया.. कुछ देर सभी वही बैठे रहे लकिन कोई कुछ बोलै नहीं.. सवाना ने प्रियल को साथ लेकर उससे सिया के रूम में सुला दिया और बाकि सब भी सोने चले गए apne-apne रूम्स में...)
|अगली सुबह|
सिया- (अपनी मुम्मा को अपने पास सोता देख, उसके फेस पर प्यार से हाथ फेरती हुई) मुम्मा...!
प्रियल- (जो शायद सू hi नहीं रही थी, अपनी बेटी का हाथ महसूस कर जल्दी से उठती हुई) क्या हुआ मेरा बचा..?.......
《1667 -वर्ड्स》