Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya - Page 16 - SexBaba
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Usski Gali Mein Jaana Chorr Diya

एक्साक्ट्ली , बिल्कुल सही कहा भाई

100% सही भाई

बिल्कुल सही कहा भाई

यह एक ड्रीम था उसस्के लिए उतना सारा पैसा पाना हकीकत में होता नहीं के किसी को उतना पैसा कभी मिले एक बिज़नेस स्टार्ट करने के लिए

ऐसा hi रिलेशन था अभी का नैना से बहोत क्लोज थे दोनों

नहीं रहीम ने कोई गड़बड़ नहीं की सब कुछ रूही की माँ ने किया अगले अपडेट में आप को पता चल जाएगा भाई

बहोत बहोत शुक्रिया विक्रम भाई आप की वैल्युएबल रिव्यु के लिए दोस्त
 
थैंक्स वैरी वैरी मच विक्रम भाई

भाई रूही हमेशा पढ़ती है हाँ ....

और वैसे hi पढ़ रही थी जैसे उसुअल्ल्य पढ़ती है अपने कमरे में जाकर

मगर उस्सकी माँ को शक हो गयी, उस ने देखा होगा के रहीम के यहाँ से लेकर आयी थी तब पढ़ रही है, रो समझ गयी होगी के अभी का भेजा हुआ चीज़ है इसी लिए रूही से चीन कर मनोज को दिया पढ़ने के लिए के देखो इस में अभी ने किआ कहा है उस्सको कहीं प्लान तो नहीं बना रहा इस्को आकर उठाने की.... कुछ ऐसा हुआ होगा तब नाह मनोज ने पूरा पढ़ा उस डायरीज को

थैंक्स लोड्स विक्रम भाई
 
बही दिल की गहराई से आप का धयवाद इतने अचे डिटेल्ड रिव्यु के लिए जो मेरे लिए अनमोल है..

ज़्यादा कुछ नहीं कहूंगा भाई बुसस थैंक्स थैंक्स एंड थैंक्स फ्रॉम थे बॉटम ऑफ़ माय हार्ट विक्रम भाई
 
अपडेट 48 अभी ट्राइंग तो गेट थे लैंड मोर्टगेजेड

जब अभी ने अपने पिता से ज़मीन को मॉर्गेज करने वाली बात किया तो उसस्के पिता ने साफ़ इंकार किया, उस्सने कहा,

“मेरा ज़मीन सिर्फ मेरा नहीं है बीटा, यह तुम सब भाई बहनों के हैं इस में सब का हिस्स्सा है तेरा भी हिस्सा है मैं ने अगर इस्को गिरवीं रख दिया और तू उधार चूका नहीं पाया तो तेरे भाई बहनों का किआ होगा? बैंक वाले ज़मीन हड़प लेंगे और किसी को कुछ नहीं मिलेगा. मैं तेरे लिए अपने दूसरे बच्चों का हक़ तो नहीं मार सकता नाह?”

अभी ने बेहेज़ नहीं किया क्यूंकि उस्सको सही में लगा के कहीं कुछ उल्टा हो गया तो वो अपने छोटे भाई और दो बहनों को किआ दे पायेगा…. तो उस्सने बाप की जम्में वाले आईडिया को ड्राप किया मगर फिर भी बैंक गया कुछ पेपर्स को डायरेक्टर से लेकर उस गेराज को रोपें करवाने के सिलसिले में….

बैंक के मैनेजर से घंटों भर बात किया, सारे अपने बस बनाये हुए पिक्स दिखाया…. मैनेजर इम्प्रेस हुआ मगर सुरती के तौर पर ज़मीन या किसी भी प्रॉपर्टी का होना ज़रूरी था उस्सने कहा अभी से.

अभी ने मैनेजर से कहा के गेराज को hi मॉर्गेज कर लिया जाए, उसस्के तमान मचिनेरिएस, उस्सकी ज़मीन, और बिल्डिंग sab….magar मैनेजर ने कहा वो तो आलरेडी मोर्टगेजेड है नाह उसी को चुररवाने के लिए दूसरी मॉर्गेज की ज़रुरत है. वार्ना अभी को लोन नहीं दिया जा सकता…. अभी ने मैनेजर से पूछा कितना ज़मीन चाहिए उस वैल्यू की मोर्टगे के लिए… तो मैनेजर ने कहा कम से कम आधा एकर तो होना चाहिए.

अभी उदास लौटा बैंक से और उसस्के समझ में नहीं ारः था के किआ करें कैसे करें….. आखिर में सोचा के आईडिया को ड्राप करें और अपने घर के सामने अपने खुद का छोटा सा गेराज खोले और कोच बिल्डिंग शुरू करे अपने खुद का…. मगर उसस्के लिए भी पैसे चाहिए थे, और सारे मचिनेस खरीदने के लिए भी तो पैसे चाहिए, और सोचा के पुराने गेराज के मचिनेरिएस खरीद पायेगा शायद क्यूंकि वो सब लिक्विडेशन पर तो थे hi….. अभी रात भर उस के बारे में सोचता रहा…

और नवीन को खत लिखते वक़्त इन् सब के बारे में बताया के वो परेशान है क्यूंकि उस्सको नहीं समझ में ारः के कैसे उस्सको बैंक से लोन मिल सकता है अब….

अभी नवीन से कुछ भी नहीं छुपता था, जो भी अपने डायरी में लिखता सब कुछ नवीन को बता देता था….

नवीन का जवाब आया दूसरे दिन तो अभी दांग रह गया उसस्के खत पढ़ कर!!! उसस्के आँख भर आये और वो रो पड़ा नवीन के खत पढ़ कर…. कई महीनों बाद आज अभी रोया था…. आज के आंसू रूही के लिए नहीं था, एक दोस्त के लिए था, एक ऐसा दोस्त जो अजनबी थी, कोई रिश्ता नहीं था उसस्के साथ मगर अभी के मदद के लिए तैयार कड़ी थी किसी भी हाल में.

नवीन ने लिखा था,

“माय फादर है आलरेडी गिवेन में माय शेयर ऑफ़ लैंड एंड आईटी इस ों माय नाम, ी हैवे ा लिटिल बिट मोरे थान हाफ ान एकर ऑफ़ लैंड, िफ़ यू वांट ी कैन के तो थे बैंक विथ यू तो गेट आईटी मोर्टगेजेड सो तहत यू गेट थे रिक्वायर्ड अमाउंट तो रीस्टार्ट तहत गेराज यू वन्स वोरकेड ात!”

ऐसा कौन करता है? अपने भी नहीं करते, और वो अजनबी थी, सिर्फ खतों के ज़रिए पहचान थी उस से. उस्सने अपने ज़मीन को गिरवीं रखने के लिए कहा अभी से!

अभी ने इंकार किया, खत के जवाब देते हुए.

नवीन ने रिप्लाई में इंसिस्ट किया के अभी को एक्सेप्ट करना चाहिए उस्सकी हेल्प, और नवीन ने अभी से फिर मिलने के लिए कहा ुरगेंटली.

दोनों फिर मिले उसी जगह, बात किये, डिसकस किये, नवीन अपने लैंड के कागज़ात लेकर आयी थी और अभी को दिखाया के सब लीगल हैं और उसस्के नाम पर है. अभी उसस्के एहसानों के टेल डब्बा रहना नहीं पसंद कर रहा था तब नैना को कहना पड़ा के वो अभी से प्यार करती है शुरू से hi और उस प्यार के लिए वो कुछ भी कर सकती है….. अभी को नवीन से प्यार नहीं था. मगर अभी को पता था प्यार के बदले प्यार नहीं पाने से किआ बीतता है क्यूंकि वो गुज़र चूका था उस गली से…. तो उस्सने नवीन को कुछ नहीं कहा फिर भी नवीन ने खुद कहा,

“मैं आप से कुछ नहीं मांग रही हूँ अपने प्यार के बदले… मैं आप से नहीं कह रही हूँ के आप भी मुझसे प्यार करो अभी… मुझे पता है आप रूही से प्यार करते हो, मैं सिर्फ अपनी बात कर रही हूँ के मुझको आप से प्यार हो गया तो किआ करूँ? जान बुझ कर तो नहीं किया बुसस हो गया… आप के एक खत के बिना नहीं रह सकती, आप एक दिन मुझे नहीं पोस्ट करो तो मैं बीमार होने लगती हूँ, आप की खबर नहीं मिले तो बेचैन रहती हूँ, मेरे दिल ो दिमाग़ में सिर्फ आप बसे रहते हो, रात दिन आप को और आप के बारे में सोचती हूँ…. यह प्यार नहीं तो किआ है?!”

अभी को शक था, मगर यकीन नहीं था के नवीन उस से प्यार करने लगी है…. यह तभी हो गया था जब नवीन ने अभी की डायरीज को पढ़ा था….. जिस तरह से नवीन अभी को खत लिखती है उन् खतों से अभी को शक और डर भी था और आज नवीन ने कह भी दिया…. और अभी नहीं चाहता था के नवीन को वो तकलीफ मिले जो अभी को मिला था रूही से….. तो अभी ने नवीन के प्यार को एक्सेप्ट किया और दोनों के जल्द मांगनी हो गए….. 1987 में hi….

मांगनी के बाद भी दोनों एक दूसरे को लिखते रहे, फिर फ़ोन लग गए घर में और एक दूसरे से रात रात भर फ़ोन पर बात करते दोनों…..

दो साल तक सॉर्टिंग चला दोनों का और 1989 में 10तह दिसंबर को दोनों ने शादी किये…..

मगर शादी से बहोत पहले, मांगनी के बाद hi बैंक से लोन मिल गया अभी को, नवीन ने अपने लैंड मॉर्गेज करवा दिए, और गेराज रोपें कर दिया अभी ने और काम चालु हो गया था गेराज में 75% पुराने वर्कर्स वापस आगये थे और बस ओनर्स अपने बसों को लाने लगे थे गेराज में रिपेयर या नया बनाने के लिए… काम मस्त चलने लगा था और इन दो सालों में अभी ने रूही को बिल्कुल hi भुला दिया था….. भुला दिया था इस तरह के काम और नवीन के बीच अभी का पूरा टाइम निकल जाता था…. हर वीकेंड में नवीन के घर गुज़ारता… सैटरडे शाम जो जाता रात भर रहता और संडे शाम को घर वापस अत, फिर मंडे को गेराज चला जाता दिन भर काम करता शाम को घर अत नाहा धो कर नवीन को लिखता, या फ़ोन पर बात करता….. एक मिनट टाइम नहीं था उसस्के पास किसी और चीज़ के बारे में सोचने के लिए….

किसी दिन तो नवीन गेराज चली आती अभी से मिलने जब वो काम कर रहा होता था शाम को. कॉलेज तो 3 बजे एन्ड होती तो नवीन घर नहीं जाती अभी के पास चली आती…..

वीकेंड्स में कभी दोनों बाहर मिलते, दूर घूमने जाते इश्क फरमाते, जंगलों, नेचुरल प्लेसेस में जाते जहाँ कोई कभी नहीं जाते वैसे जगहों में इश्क फरमाते दोनों….. पुरे दो दाल तक ऐसा चला दोनों के बिच….

नवीन के प्यार में अभी गिरफ्तार हो गया था ात लास्ट और धीरे धीरे नवीन के साथ रहते हुए अभी को आखिरकार उस से प्यार हो hi गया….. किसी के साथ रहते हुए, प्यार हो hi जाता है, उस्सको रोकना नामुमकिन होता है ख़ास कर अगर इंसान बेस्ट हो तो…. नवीन एक नगीना थी, एक एंजेल थी जो आसमान ने दिया था अभी को गिफ्ट के तौर पर…. शायद आसमान को तरस आगया था अभी पर, उसस्के टूटे हुए दिल को जोड़ने के लिए आसमान ने नवीन को अभी के झोली में दाल दिया था.

दोनों खुश थे, ख़ुशी से जीवन बस्सर कर रहे थे. नवीन बहोत प्यार निछावर करती थी अभी पर….. नवीन ने part टाइम कोर्स भी किये शादी के बाद…. अभी चाहता था के वो और आगे बढे, तो 5 साल part टाइम कोर्स करने के बाद नवीन ने पगे की डिग्री हासिल किये और टीचर की नौकरी बरकरार रखा और part टाइम लेक्चरर भी बन गयी यूनिवर्सिटी में. नवीन शुरू से अभी से बहोत ज़्यादा ाकडेमिकल्ल्य क्वालिफाइड थी. और अभी चाहता था के नवीन और ज़्यादा क्वालिफाइड हो.

उतना हाइली क्वालिफाइड होने के बावजूद नवीन घर में अपने हाथ से पकती थी और सारे घर के काम खुद करती थी, उस्सको नौकरानी रखना पसंद नहीं था. एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ था के दोनों कभी बाहर किसी रेस्टोरेंट में खाने के लिए गए….. हमेशा घर के खाना खाते थे दोनों….

दिन भर नौकरी करती नवीन, घर पर बहोत सारे स्टूडेंट्स के कॉपी बुक्स लाती करेक्ट करने के लिए फिर भी घर के सारे काम करती थी. और अभी का ख्याल भी रखती. अभी को एक भी शिकायत का मौका नहीं मिला कभी नवीन से. परफेक्ट वाइफ थी वो. लाखों नहीं करोड़ों में एक. कैसे ऐसे इंसान से कोई प्यार नाह करता?

और रही बात अभी की तो, वो कोई बड़े बॉस की तरह नहीं रहता गेराज में…. वो खुद कपडे बदल कर गंदे कपड़ों में सुबह 7 से शाम 4 बजे तक तमान वर्कर्स के साथ खुद काम करता. कोई भी गेराज में अत और अभी को देखता मज़दूरों के बिच तो समझता के वो भी एक वर्कर है… जब पता चलता के वो मालिक है गेराज का तो सबको शॉक लगता….

350 लोग काम करते थे उस गेराज में, पैर डे 10 बसों में काम होते थे…. कभी कभी 12 से 15 बसों में भी काम होते थे… अगर अभी चाहता तो ऑफिस में सूट बूट पेहेन कर बैठा रहता, मज़दूरों के आगे पीछे रहता चेक करते हुए मगर नहीं उस्सको अपने गंदे कपड़ों में रहकर काम करना पसंद था, तीन काटना, लोहे में ड्रिल करना, वेल्डिंग करना, रिवेट लगाना , यह सब करने में उस्सको चैन और सुकून मिलता था, बिल्कुल अपने तमाम वर्कर्स की तरह काम करता था…. सारे वर्कर्स अभी के इज़त करते थे, बिग रेस्पेक्ट देते थे उस्सको, और क्यूंकि वो मालिक होकर खुद काम करता था तो किसी की मजाल थी जो वो काम नाह करे और किसी भी डिलीवरी में देरी हो? इस वजह से अभी की गेराज बड़ा तर्रकी करने लगा था और काम मल्टीप्लय होते जा रहा था….

गेराज का नाम अभी ने अब्रूहि रखा था

सामने बोर्ड पर लिखा हुआ था:

अब्रूहि कोच बिल्डिंग एंड अल्लुमिनियम वर्कशॉप

तमाम ऑफिस पेपर्स पर लोगो में अब्रूहि डिज़ाइन होता था. एक मैनेजर, एक सेक्रेटरी और एक टीम मैनेजर था ऑफिस में. फाइनेंस मैनेजर खुद अभी था, और वर्कर भी था, और खुद को वर्कर की और फाइनेंस मैनेजर का तनख्वा देता था अभी.

तो बे कॉन्टिनोएड….
 
थैंक्स वैरी मच फॉर थे अप्प्रेसिअशन यादव भाई

वे विल क्नोव अबाउट रूही थ्रू अभी ओनली अंटिल अभी डस नॉट क्नोव अबाउट रूही वे विल आल्सो रेमें इन थे ब्लैक

बुर रेस्ट असुरेद तहत शी विल के तो थे सरफेस अगेन

एंड अभी विल मीट हेर... अबाउट Abhi's करियर यू विल क्नोव इन नेस्ट उपदटेस
 
थैंक्स सो वैरी मच फॉर थे अप्प्रेसिअशन आकाश बीआरओ

ी अंडरस्टैंड तहत यू मई नॉट लिखे थे अपडेट बूत थिस इस हाउ आईटी हप्पेनेड थिस इस ा रियल स्टोरी आकाश

होवेवेर दो नॉट वोर्री अबाउट रूही शी विल बे बैक एंड रेमें इन थे स्टोरी टिल थे लास्ट अपडेट

जस्ट कीप फोल्लोविंग थे स्टोरी यू विल नॉट बे डिसपॉइण्टेड बीआरओ
 
अपडेट 49 थे प्रोग्रेस

अभी ने गेराज ओपन होने के एक महीने बाद एक कार ले लिया था. इम्पोर्टेड जापानीज टोयोटा था. उसी में जाता नवीन के घर, रहता और दोनों घर पर नहीं मिलते तो बाहर उसी कार में घूमने जाते, अक्सर सीसाइड पर पाए जाते दोनों वीकेंड्स में.

अब अजीब बात यह थी के अभी की डेस्टिनी शायद देश के पूरब वाले हिस्से से जुड़ा हुआ था, रूही hi उधर से hi थी, नवीन भी उधर की hi थी, मगर दो डिफरेंट इलाके से थे दोनों. ईस्ट जाते हुए एक छोटा सा शहर था और वहां से एक दो रहा था, स्ट्रैट जाओ तो रूही के घर के सामने से गुज़ारना होता, और राइट मुङो तो नवीन के इलाके को जाता रास्ता… मगर अपने घर से अभी निकलता तो उस ईस्ट के छोटे शहर तक जाने के लिए वही रास्ता लेना पड़ता जो वो लेता था रूही के घर के तरफ जाने के लिए….

अब एक मशहूर से साइड ईस्ट में था और वहां जाने के लिए रूही के मैं रोड से जाना होता था और एक वीकेंड को अभी और नवीन ने उस सीसाइड जाने को डीडे किया…. नवीन को पता था के रूही के इलाके से गुज़ारना होगा वहां जाने के लिए, मगर उस्सने एक बात भी नहीं किया अभी से उस बारे में… और जब अभी ड्राइव करते हुए वहां से गुज़रा, तो रूही की आँगन में देखा तक नहीं सिद्ध अपना रास्ता देखता गया…. नवीन को पता hi नहीं चला के किधर रूही रहती थी….

जब समुन्दर किनारे दोनों कार से उतरे तब नवीन ने पूछा,

“हम रूही के मोहल्ले से गुज़रे थे नाह अभी, आप ने मुझे क्यों नहीं बताया वो किधर रहती है? उस्का घर तो बता सकते थे मुझे ात लीस्ट.”

अभी ने समुन्दर के दूर होराइजन को देखते हुए कहा,

“मुझे खुद नहीं पता चला के मैं कब वहां से गुज़र गया!”

अभी ने झूट कहा था, अस्सल में अभी चाहता था के मनोज या रूही की माँ उस्सको देखे ड्राइव करते हुए उस मैं रोड पर, मगर कोई नज़र नहीं आया था…. और अभी ने सच में ज़्यादा ध्यान दिया hi नहीं वहां से गुज़रते वक़्त.

अभी और नवीन ने एक दूसरे को मांगनी के बाद से शादी के 3 दिन पहले तक खत लिखते रहे बिना किसी दिन मिस किये…. और टोटल 3,700 खत थे एक दूसरे के पास. तमाम वह खत आज भी तीन कार्टन के बॉक्सेस में मौजूद हैं.

अभी जब बैंक के लोन को रपय करने जाता तो कभी मैनेजर से मिलता, कुछ बातें होते के काम कैसे चल रहा है ेट्स…. तब एक दिन अभी ने मैनेजर के डेस्क पर एक छोटा सा टीवी सेट जैसा देखा और पूछा के वो किआ है. मैनेजर ने कहा के वो एक कंप्यूटर है. कटड़े रे वाले कम्प्यूटर्स थे उन् दिनों, फ्लैट स्क्रीन था hi नहीं कंप्यूटर hi सही तरह से कमर्सिअलिज़्ड नहीं हुआ था सिर्फ किसी बड़े बड़े कंपनी वाले इस्तेमाल करते थे और बैंक वाले… ज़्यादा तर ीबम और एप्पल वाले कमर्सिअलिज़्ड थे, माइक्रोसॉफ्ट तब उतना पॉपुलर नहीं हुए थे… 1985 में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 1.0 कमर्सिअलिज़्ड किया था… अभी को तब कंप्यूटर का नाम भी नहीं पता था.

उस दिन बैंक मैनेजर ने अभी से कहा के उसस्के कंपनी के लिए भी एक कंप्यूटर होना चाहिए जिस में वो तमान वर्कर्स के नाम ईद, एड्रेस, सैलरी, कंपनी की बजट ेट्स सब सेव कर सकता था और इस्तेमाल कर सकता था….

और कुछ महीनों बाद अभी के गेराज वाले ऑफिस में पहला कंप्यूटर लाया गया…. सेक्रेटरी को part टाइम कोर्स फॉलो करना पड़ा उस कंप्यूटर पर काम करने के लिए, और 3 महीने बाद कंपनी के सारे इम्पोर्टेन्ट फाइल्स सेव होने लगा कंप्यूटर पर. और 1988 से hi अभी ने कंप्यूटर चलना सीख लिया था और एक कंप्यूटर खुद अपने लिए भी ख़रीदा घर के लिए…

और धीरे धीरे जैसे जैसे कंप्यूटर की जनरेशन बढ़ता और बदलता गया वैसे वैसे अभी भी चेंज करता गया और ज़्यादा जानता गया कंप्यूटर के बारे में.

1990’स में इंटरनेट पर सब कुछ होना शुरू हो गया था और अभी तभी से इंटरनेट पर कनेक्टेड था और अपने कंपनी के सिलसिले में फॉरेन से कम्युनिकेट करता इमेल्स से. और लैपटॉप नया नया आया था तब और अभी ने तब एक लैपटॉप भी ले लिया जो हमेशा उस्सकी कार में रहता था , सिर्फ रात को लैपटॉप घर जाता जब अभी घर में दाखिल होता था…

1990 में hi अभी ने अपना पहला मोबाइल ख़रीदा… वो एक अनलोगे मोबाइल था मोटोरोला मेक की, वो यह था इस्को आज भी अभी ने संभल कर रखा है क्यूंकि यह उस्का पहला मोबाइल था 1990 में आया था नया नया देश में….



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तो इन् दो सालों में अभी और नवीन एक दूसरे से खूब मिले, घूमें, मजा किये और लास्ट में दोनों की शादी फिक्स हुई और बड़े धूम धाम से शादी हुई दोनों की.

अब अभी की कंपनी काफी पॉपुलर हो गया था अब्रूहि. टेलीविज़न वालों ने उस्का इंटरव्यू लिया था जिस दिन उस्सने गेराज को रोपें किया था क्यूंकि सब से यंगेस्ट इंटरप्रेन्योर था जिस्सको बैंक ने करीब एक करोड़ लोन देकर गेराज को उसस्के हवाले किया था. प्रेस में भी उस्सकी इंटरव्यू और फोटोज आये थे….

उन् दिनों अभी सोच रहा था किआ रूही और उस्सक्कि माँ ने टीवी पर उस्सक्को देखा होगा? पेपर में उस्सकी फोटो और कंपनी का नाम देखा होगा? रूही को कैसा लगा होगा उस्का नाम अभी के नाम के सात जुड़कर, अब्रूहि बनते देख कर?? किआ रूही की माँ और खुद रूही को पछतावा नहीं हुआ होगा?

अभी को उस वक़्त पता भी नहीं था के रूही किधर है, उस्सको पता नहीं था के रूही उस अमित के साथ फ्रांस चली गयी या कहीं और किसी से शादी कर लिया और व्हाट!! अगर अभी चाहता तो सुनील को खत लिख कर रूही के बारे में पता लगा सकता था मगर उस्सने वैसा नहीं किया…. अभी यह चाहता था के अगर रूही को अभी से प्यार है तो रूही को अभी के तरफ आना चाहिए था. जितना अपने तरफ से करना था वो अभी ने कर लिया था, बहोत ज़्यादा hi किया और झेला था अभी ने रूही के लिए, तो रूही की बारी थी अभी ने सोचा इस लिए उस्सने कभी जान्ने की कोशिश नहीं किया पहले 5 सालों में.

अभी और नवीन की मैरिड लाइफ बहोत मस्त चल रहा था, अभी का काम मस्त से भी मस्त चल रहा था. अभी ने अपने गेराज की अद्वेर्तिसेमेन्ट के साथ एक एक चिठ्ठी टाइप करवा कर खुद ड्राइव करते हुए हर एक बस ओनर के घर चौररने गया था…. नार्थ से साउथ तक, ईस्ट से वेस्ट तक हर बस ओनर को एक एक चिठ्ठी बनता अभी ने अपने गेराज को अद्वेर्तीसे करते हुए… सिर्फ एक बस ओनर को चिठ्ठी नहीं दिया अभी ने, वो था मेहबूब.

अब बस की कोच बिल्डिंग के इलावा एल्युमीनियम के काम भी होते थे, उस्का एक अलग टीम था गेराज में, वह लोग ज़्यादा तर आउटडोर काम करते थे, बड़े बड़े बिल्डिंग्स में एल्युमीनियम फ्रेम्स लगा कर विंडो पैन्स लगाना ेट्स… बड़े ऊंचे 20 से 50 माले के बिल्डिंग्स में वह काम किया जाता था करनेस से…. उसस्के लिए टेंडर भाड़े जाते थे अगर गवर्नमेंट्स के बिल्डिंग्स होते थे… और अक्सर दाम कम होते थे इस लिए अभी को टेंडर मिलता रहता था… अभी स्माल प्रॉफिट में काम करता था इस लिए उस्सको बहोत ज़्यादा काम मिलता रहता था गेराज में.

और वही काम छोटे घरों में भी किया जाता और कोई ग़रीब के लिए कॉस्ट ज़्यादा होता तो अभी फ्री में वैसे लोगों के घर में एल्युमीनियम वर्क्स कर दिया करता था, फ्री ऑफ़ कॉस्ट!

1994. शादी के 5 साल बाद अभी को एक दिन एक पुलिस स्टेशन में अल्लुमिनियन के खिड़की चेंज करके नए लगवाने थे. उसस्के आदमी वहां काम कर रहे थे तो अभी चेक करने को गया था के काम कहाँ तक हुआ है वहां…. और अभी को कौन मिला वहां? महेश, रूही का छोटा भाई, अब वो पुलिस अफसर था….. अभी ने उस्सको देखा, मुस्कुराया और महेश खुद आया अभी से मिलने….

महेश ने अभी से शेक हैंड किया, और कहा,

“Hi, अभी आप तो बहोत बड़े आदमी बन गए हो अब, हम्म्म अब्रूहि हहहहए आप को टीवी पर कई बार देखा हूँ, काफी आगे बढ़ गए हो अब लाइफ में, वैरी गुड वैरी गुड मुझे ख़ुशी हुई अभी.”

अभी ने महेश का हाथ अपने हाथ में पकड़े रखा महेश से बात करते हुए, और पूछा के वो कब पुलिस में भर्ती हुआ यह सब…. अभी को उस से रूही के बारे में पूछने का मैं किया मगर नहीं पूछा क्यूंकि महेश ने रूही की बात नहीं किया, बस एक दोस्त की तरह मिला उस से और कासुअल बात किया तो अभी ने भी नार्मल बात किया महेश से…. रूही की बात hi नहीं हुई…. उस दिन के बाद अभी महेश से कई बार मिला वहां और कभी उस शहर में जहाँ उस्सकी चची की सुपरमार्केट था…. हर बार दोनों दोस्तों की तरह मिलते और कुछ देर बात करते और अलग हो जाते….

अभी को अब पता चल गया था के रूही ने भी उस्सको टीवी पर देखा होगा, उसस्के घर में अगर महेश ने अभी को देखा तो मतलब सब ने उस्सको देखा होगा और अब्रूहि कंपनी से सब वाकिफ होंगे, रूही की माँ को भी सब पता चला होगा के अभी एक क्रोरेपति बन गया है और उस्सकी रूही के लिए अभी सही लड़का था, और पचता रही होगी…. इस से अभी को बहोत ख़ुशी मिलता था जब सोचता था के रूही की माँ पर किआ बीत रही होगी जब जब अभी को और उस्सकी कंपनी को टीवी पर दिखाया गया होगा….

और एक दिन अभी को ईस्ट में जाना था एक बिल्डिंग के लिए कोटशन बनाने. अभी जब रूही की मैं रोड से गुज़रा तो जान बुझ कर उस फिलिंग स्टेशन पर रुका फ्यूल लेने के बहाने. फिलिंग स्टेशन से रूही की किचन की स्टैर्स साफ़ दिखाई देता था…. अभी कार से निकला और रूही के किचन के तरफ देखने लगा…

ये अभी वो वाला अभी नहीं था जो उन् दिनों उस आँगन में गंदे कपड़ों में काम करता था और रूही से प्यार की भीक माँगा करता था…. पिछले 5 सालों में अभी ने इतना तर्रकी कर लिया था के अब उसस्के पास एक बंव, एक मेरकॉड्स बेंट्ज़, और एक ऑडी था, कार्स का शौक था अभी को, रदेऊ जैसा द्रिविंग्स करता था…. उस्का घर पता नहीं कितने करोड़ का था; उसस्के पहनाव से दीखता था एक राइज़ आदमी है…. और जब अभी को कोई नहीं दिखा स्तैर पर तो पंप पर काम करने वाले आदमी ने अभी से पूछा,

“कुछ चाहिए किआ सर, फ्यूल तो फुल है आप की बंव में तो आप क्यों रुके यहाँ सर?

अभी ख्यालों में खोया हुआ उस पंप वाले से पूछा,

“उस घर में वहां लास्ट वाला जो है, मनोज, महेश, वह दोनों यहीं रहते हैं नाह?”

आदमी ने कहा,

“हाँ सर जी, दोनों भाई वहीँ रहते हैं, आप जानते हो उन्हें सर?”

अभी ने वैसे hi ख्यालों में खोया हुआ उधर hi देखते हुए कहा,

“रूही?! रूही को जानते हो तुम?! वो यहीं है किआ?!”

आदमी ने पूछा,

“मगर सर आप क्यों सवाल कर रहे हो? अगर उनको जानते हो तो वहां चले क्यों नहीं जाते आप?”

अभी ने जैसे एक सपना देखते हुए कहा,

“रूही फ्रांस जाने वाली थी गयी के नहीं बता मुझे, तब से अभी 8 साल हो गए; गयी के नहीं बता मुझे!!”

अभी का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा था, वही पहले की तरह जब रूही का नाम लेता था, तब एहि हाल होता था, उसस्के जैसे सांस फुल्ने लगे थे उस आदमी से सवाल करते हुए… अभी के नज़र उस्सकी किचन से हट नहीं रहा था और उस आदमी से जवाब का वेट कर रहा था तो आदमी ने कहा,

“सुना था जाने वाली थी सर, मगर गयी नहीं है अभी तक यहीं है!!”

अभी तब तक ऐसे हांफने लगा था जैसे 100 मेट्रेस भाग कर आया था, उस आदमी का जवाब सुन कर अभी ने उसस्के चेहहरे में देखते हुए एक अजीब सी मुस्कराहट में कहा,

“आठ साल, 8 साल हाहाहाहा देखता हूँ कब जाती है!”

और अभी कार के ड्राइविंग वाले सीट पर बैठा, तो आदमी ने झुक कर कहा,

“सर कोई मैसेज हो तो बतादूँ रूही जी को?!”

अभी ने उस्सको एक 100 का नोट देते हुए कहा,

बस इतना कहना के अमिताभ बच्चन जितना लम्बा आदमी पूछ रहा था उसस्के बारे में वो समझ जाएगी.

तो बे कॉन्टिनोएड….
 
दिल की गहराई से आप का शुक्रिया यादव भाई. मुझे ख़ुशी है के आप को अपडेट पसंद आया.

हाँ महेश से हमेशा बनता था अभी का, महेश उन् दिनों एक स्टूडेंट था, और छोटा था... 17 से 18 साल का था और उस्का और अभी का जमता था वो सच में अभी को रूही के लिए पसंद करता था..... तो जब इतने साल बाद मिले तो महेश खुद मिला अभी से...
 
अपडेट 50 अबाउट रूही

“सर कोई मैसेज हो तो बतादूँ रूही जी को?!”

अभी ने उस्सको एक 100 का नोट देते हुए कहा,

बस इतना कहना के अमिताभ बच्चन जितना लम्बा आदमी पूछ रहा था उसस्के बारे में वो समझ जाएगी.

अब आगे….

अभी ने क्यों उस दिन वहां रुक कर रूही के बारे में सवाल किया था इतने सालों बाद वो खुद नहीं समझ सका. और उस्सको रूही के बारे में बात करते वक़्त किआ हो रहा था यह भी वो नहीं समझ सका. जिस दौरान वो रूही की स्टैर्स पर देख रहा था, और उस आदमी से बात कर रहा था अभी की आवाज़ बदल गयी थी, उसस्के सांसें तेज़ चल रहे थे, वो जैसे सपने में था उस वक़्त, जैसे ख्यालों में जी रहा था उस पल को….

घर वापस जाने पर अभी ने ड्रावर से उन् डायरीज को निकला जिस्सको उस्सने उस दिन ड्रावर में बंद किया था जिस दिन नवीन ने पढ़कर वापस किया था, मतलब 7 साल बाद उन् डायरीज को अभी फिर पढ़ने लगा…. और उसस्के सूखे हुए आंसू फिर बाहर आये….. रूही के साथ गुज़ारे एक एक लम्हात को पढ़ते हुए अभी एक छोटे बचे की तरह रोने लगा… उसस्के आँखों के सामने फिर वो सारे दृष्ट ताज़ा होने लगे, रूही की मुस्कान, उस्सक्कि आवाज़, उस्सकी आदयें सब अभी को घिरणे लगे और वो वापस 1986 में चला गया…..

उस्सको लगा के एक टाइम मशीन ने उस्सको उठाकर वापस रूही के आँगन में पटक दिया.

नवीन की यूनिवर्सिटी में लेक्चर देने वाला दिन था, वो रात को 9 बजे वापस आने वाली थी, मतलब 9 बजे अभी को उस्सको लेने जाना था क्यूंकि नवीन ड्राइव नहीं करती थी, सीखना भी नहीं चाहती थी, दरर्ति थी ड्राइव करने से.

तो अभी घर में अकेले डायरीज पढ़ते हुए खूब रोया… आधा पढ़ा तब तक नवीन को लेने जाने का टाइम हो गया….

नवीन से उस्सने कुछ नहीं कहा के दरिएस पढ़कर वो रोया था, फिर भी नवीन अभी को इतना पहचानती थी के उसस्के आवाज़ से नवीन को पता चल गया के वो रोया था और पूछा क्यों तो अभी ने झूट कहा के एक मूवी की इमोशनल सन ने उससे रुलाया.

घर वापस आने पर नवीन ने अभी के चेहरे में ग़ौर से देखा और उसस्के गालों को चूमते हुए पूछा,

“आज आप ने रूही की डायरीज पढ़े थे किआ?”

अभी नवीन को बाँहों में भरके रोने लगा…. उस्सकी चोरी पकरि गयी थी…. नवीन उस वक़्त उस्सको एक दोस्त की तरह कम्फर्ट कर रही थी, एक माँ की तरह एक रट हुए बच्चे को आराम पहुंचा रही थी, अभी के पीठ को थपथपाते हुए नवीन ने पूछा,

“आज आप को रूही दिखी थी किआ कहीं? हम्म्म? आप ने देखा उस्सको कहीं पर किआ?!”

अभी ने रट हुए कहा,

“तुम इतनी अच्छी क्यों हो? तुम कैसे बर्दाश्त कर लेती हो के तुम्हारा पति किसी और लड़की के बारे में सोच कर रो रहा है?!”

नवीन ने आराम से मुस्कुराते हुए कहा,

“वो आप का पहला प्यार है, मैं तो सेकेंडरी हूँ नाह, तो समझती हूँ के अगर वो आप को कभी कहीं मिल गयी, तो किआ होगा मेरा? अक्सर सोचती हूँ के अगर रूही आप की ज़िन्दगी में वापस आगयी तो आप किआ करोगे? कैसे सामना करोगे? और हमारे हालत को कैसे मैनेज करोगे आप? मैं तो आप को उस से मिलने या उसस्के साथ रहने को कभी मन नहीं करुँगी, मगर मैं इस घर को चोरर कर कहीं नहीं जाउंगी इतना जान लीजिये आप…. अगर वो मिली तो आप उसस्के लिए अलग घर लेना मेरे घर में मत लाना उससे हाँ!!”

अभी ने नवीन को किश करते हुए कहा,

“तुम फरिश्ता मत बाणों नवीन, तुम अपने हक़ के लिए लड़ो मुझसे से, लड़ाई करो मुझसे अगर मैं उस से मिली तो, मुझको इतना छूट मत दो के मैं भटक जॉन!”

नवीन ने अभी के छाती को चूमते हुए कहा,

“नाह, उस्का भी हक़ है आप पर, इस लिए मैं उस्का हक़ नहीं छीनूँगी, उसी के बदौलत तो मैं आप से मिली, उसी की डायरीज को पढ़ कर तो मुझे आप से प्यार हुआ, उसी के बदौलत मैं ने आप को जाना, पहचाना, यह जाना के आप के अंदर कितना प्यार भरा हुआ है…. अगर वो नहीं होती तो मैं आज आप की भी नहीं होती. इस लिए उस्का भी हक़ बनता है आप पर, इस लिए मुझे आप को उस से मिलने पर रोक टोक करने का कोई हक़ नहीं.”

अभी ने नवीन के गालों को चूमते हुए कहा,

“किश मिटटी के बने हो तुम पता नहीं!”

तो नवीन ने पूछा,

“तो अब बताओ कहाँ मिली वो आज आप को?!”

अभी: “कहीं नहीं मिली वो. आज तक उस्सको देखा नहीं है मैं ने 24तह दिसंबर के बाद. जिस दिन से वो मुझे चोरर कर गयी आज तक नहीं देखा उस्सको मैं ने एक्सेप्ट एक दो दिन बस के अंदर से उस्सको उस्सकी आँगन में देखा था गुज़रते हुए… वार्ना पर्सनली आज तक नहीं मिला उस से मैं उस दिन के बाद”

नवीन: “तो फिर क्यों रोये उस्सकी याद में आज?!”

अभी: “पागल हूँ मैं, पता नहीं क्यों आज मैं रुका उसस्के घर के सामने मैं रोड पर उस फिलिंग स्टेशन पर फ्यूल लेने के बहाने और उस पंप वाले से रूही के बारे में पूछ बैठा…. पता नहीं क्यों वैसा किया मैं ने!! ग़लती कर बैठा मुझको नहीं पूछना चाहिए था, ऊपर से उस पंप वाले से कह दिया के रूही से कहना के मैं आया था उससे ढूंढ़ते हुए!!!”

नवीन: “तो चाह हुआ नाह अब एक दो दिन बाद वापस जाना उस स्टेशन पर उस आदमी से पूछना किआ उस ने आप की मैसेज को दिया उस्सको या नहीं, तब सब पता चल जाएगा आप को! – अगर दिया होगा तो रूही ने किआ कहा उस्सको वो भी पता चलेगा आप को…. अगर उस्सकी रिस्पांस सही हुई होगी तो चले जाना उस से मिलने, किआ पता के वो आप की राह देख रही है अभी तक?! हु कनौस?!”

अभी: “क्यों भटका रही हो मुझे, मैं नहीं जाने वाला अब वहां…. ग़लती हुई मुझसे ी won’t जो तेरे एनीमोर!”

नैना: “ाचा एक बात बताइये, अगर उस दौरान रूही आप के सामने आजाती जिस वाट आप वहां खड़े थे तो? किआ करते आप? अगर वो भाग कर आप के तरफ बाहें फैलाये हुए आती तो आप उस्सको अपने बाहों में नहीं जकरते सब के सामने सबको गोली मार कर? बताइये नाह!”

अभी और नवीन दोनों खड़े थे एक दूसरे को बाहों में भाड़े, और अभी ने उस्सकी पेशानी को चूमते हुए कहा,

“अब बास करो मुझे और कुछ नहीं सुन्ना उसस्के बारे में, स्टॉप आईटी प्लीज!”

नैना ने कहा,

“रूही वास् ा ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़ इन योर लाइफ. वो आप की लाइफ में इसी लिए आयी के आप लाइफ में तरक्की करो. अगर वो नहीं आती आप की लाइफ में, उस्सकी माँ को आप का काम नापसंद नाह होती तो आप ने आज यह धन दौलत नहीं कमाए होते, मुर्दे गेराज को फिरसे ज़िंदा नहीं करते आप, इतना बड़ा लोन लेकर उस गेराज को नहीं चलाते आप…. यह सब आप ने रूही और उस्सकी माँ को दिखाने के लिए kiya….So रूही आप की लाइफ में एक मसीहा बन कर आयी, आप का इम्तेहान लिया और उस तरह से आप को नेग्लेक्ट करके आप को आगे बढ़ने का मौका दिया रूही ने…. तहत इस ा ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़! – बल्कि हम दोनों को भी मिलाया रूही ने hi, वो नहीं आती आप की लाइफ में तो आप उस्सकी नाम से डायरीज नहीं लिखते, और मैं नहीं पढ़ती तो मैं आप से इम्प्रेस नहीं होती तो प्यार नहीं hota….yeh सब कुछ तो रूही की वजह से hi हुआ नाह? आज हम दोनों एक साथ है तो रूही के ज़रिए से!.....

अगर वो कभी भी आप को मिली तो एक बार मुझसे ज़रूर मिलवाना मुझे उस्सको थैंक्स कहना है, थैंक्स इस लिए के उस्सने आप को मेरे लिए चोर्रा, इस लिए के उस्सने आप के प्यार को ठुकराया तो आप का प्यार मुझे मिला, थैंक्स इस लिए करना है उससे के उस ने आप को आज इस मुकाम पर पहुँचाया.”

अभी के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं था क्यूंकि जो भी नवीन ने कहा सब सही थे…..

फिर भी अभी ने पूछा,

“दो यू थिंक उन् लोगों को मेरे बारे में खबर मिलता होगा? दो यू थिंक के रूही को पता है मेरा अब्रूहि उसस्के और मेरे नाम से है? किआ उस्सको और उस्सकी माँ को पता होगा के मैं कहाँ से कहाँ पहुंच गया हूँ? किआ उस्सकी माँ को अब पछतावा होता होगा? किआ मनोज को पता होगा मैं कितना बड़ा हस्ती बन गया हूँ और वो अभी मेरे सामने कीड़े मकोड़े के जैसा है हम्म व्हाट दो यू थिंक? दो थे क्नोव?”

नवीन: “100% सब पता हैं सबको. रूही को तो पक्का सब पता होगा और उस्सकी माँ को भी…. आप इतने बार टीवी पर आये हो न्यूज़ में, और हर कोई न्यूज़ देखता है, और फिर पेपर्स में, और फिर उस डाक्यूमेंट्री में जो बार बार टीवी पर दिखाया गया था, और उस बिज़नेस मैगज़ीन वालों ने पिछले 5 सालों में आप के 3 इंटरव्यूज लिए और हर बार आप की कितने तसवीरें छापे गए उस मैगज़ीन में? माय हुब्बी इस ा सेलिब्रिटी माय डिअर, तो कैसे एक सेलिब्रिटी को नहीं जानेंगे वह लोग, पूरा देश आप को जानते हैं माय डिअर हुब्बी!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…..
 
बहोत शुक्रिया राहुल

तुम्हारा कहना कुछ हद तक सही है मगर , अगर रूही नहीं होती तो नवीन नहीं मिलता अभी को यह बी सच्च और सही बात है इसी को ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़ कहते हैं जो सब समझ गए यहाँ
 
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