अपडेट 49 थे प्रोग्रेस
अभी ने गेराज ओपन होने के एक महीने बाद एक कार ले लिया था. इम्पोर्टेड जापानीज टोयोटा था. उसी में जाता नवीन के घर, रहता और दोनों घर पर नहीं मिलते तो बाहर उसी कार में घूमने जाते, अक्सर सीसाइड पर पाए जाते दोनों वीकेंड्स में.
अब अजीब बात यह थी के अभी की डेस्टिनी शायद देश के पूरब वाले हिस्से से जुड़ा हुआ था, रूही hi उधर से hi थी, नवीन भी उधर की hi थी, मगर दो डिफरेंट इलाके से थे दोनों. ईस्ट जाते हुए एक छोटा सा शहर था और वहां से एक दो रहा था, स्ट्रैट जाओ तो रूही के घर के सामने से गुज़ारना होता, और राइट मुङो तो नवीन के इलाके को जाता रास्ता… मगर अपने घर से अभी निकलता तो उस ईस्ट के छोटे शहर तक जाने के लिए वही रास्ता लेना पड़ता जो वो लेता था रूही के घर के तरफ जाने के लिए….
अब एक मशहूर से साइड ईस्ट में था और वहां जाने के लिए रूही के मैं रोड से जाना होता था और एक वीकेंड को अभी और नवीन ने उस सीसाइड जाने को डीडे किया…. नवीन को पता था के रूही के इलाके से गुज़ारना होगा वहां जाने के लिए, मगर उस्सने एक बात भी नहीं किया अभी से उस बारे में… और जब अभी ड्राइव करते हुए वहां से गुज़रा, तो रूही की आँगन में देखा तक नहीं सिद्ध अपना रास्ता देखता गया…. नवीन को पता hi नहीं चला के किधर रूही रहती थी….
जब समुन्दर किनारे दोनों कार से उतरे तब नवीन ने पूछा,
“हम रूही के मोहल्ले से गुज़रे थे नाह अभी, आप ने मुझे क्यों नहीं बताया वो किधर रहती है? उस्का घर तो बता सकते थे मुझे ात लीस्ट.”
अभी ने समुन्दर के दूर होराइजन को देखते हुए कहा,
“मुझे खुद नहीं पता चला के मैं कब वहां से गुज़र गया!”
अभी ने झूट कहा था, अस्सल में अभी चाहता था के मनोज या रूही की माँ उस्सको देखे ड्राइव करते हुए उस मैं रोड पर, मगर कोई नज़र नहीं आया था…. और अभी ने सच में ज़्यादा ध्यान दिया hi नहीं वहां से गुज़रते वक़्त.
अभी और नवीन ने एक दूसरे को मांगनी के बाद से शादी के 3 दिन पहले तक खत लिखते रहे बिना किसी दिन मिस किये…. और टोटल 3,700 खत थे एक दूसरे के पास. तमाम वह खत आज भी तीन कार्टन के बॉक्सेस में मौजूद हैं.
अभी जब बैंक के लोन को रपय करने जाता तो कभी मैनेजर से मिलता, कुछ बातें होते के काम कैसे चल रहा है ेट्स…. तब एक दिन अभी ने मैनेजर के डेस्क पर एक छोटा सा टीवी सेट जैसा देखा और पूछा के वो किआ है. मैनेजर ने कहा के वो एक कंप्यूटर है. कटड़े रे वाले कम्प्यूटर्स थे उन् दिनों, फ्लैट स्क्रीन था hi नहीं कंप्यूटर hi सही तरह से कमर्सिअलिज़्ड नहीं हुआ था सिर्फ किसी बड़े बड़े कंपनी वाले इस्तेमाल करते थे और बैंक वाले… ज़्यादा तर ीबम और एप्पल वाले कमर्सिअलिज़्ड थे, माइक्रोसॉफ्ट तब उतना पॉपुलर नहीं हुए थे… 1985 में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 1.0 कमर्सिअलिज़्ड किया था… अभी को तब कंप्यूटर का नाम भी नहीं पता था.
उस दिन बैंक मैनेजर ने अभी से कहा के उसस्के कंपनी के लिए भी एक कंप्यूटर होना चाहिए जिस में वो तमान वर्कर्स के नाम ईद, एड्रेस, सैलरी, कंपनी की बजट ेट्स सब सेव कर सकता था और इस्तेमाल कर सकता था….
और कुछ महीनों बाद अभी के गेराज वाले ऑफिस में पहला कंप्यूटर लाया गया…. सेक्रेटरी को part टाइम कोर्स फॉलो करना पड़ा उस कंप्यूटर पर काम करने के लिए, और 3 महीने बाद कंपनी के सारे इम्पोर्टेन्ट फाइल्स सेव होने लगा कंप्यूटर पर. और 1988 से hi अभी ने कंप्यूटर चलना सीख लिया था और एक कंप्यूटर खुद अपने लिए भी ख़रीदा घर के लिए…
और धीरे धीरे जैसे जैसे कंप्यूटर की जनरेशन बढ़ता और बदलता गया वैसे वैसे अभी भी चेंज करता गया और ज़्यादा जानता गया कंप्यूटर के बारे में.
1990’स में इंटरनेट पर सब कुछ होना शुरू हो गया था और अभी तभी से इंटरनेट पर कनेक्टेड था और अपने कंपनी के सिलसिले में फॉरेन से कम्युनिकेट करता इमेल्स से. और लैपटॉप नया नया आया था तब और अभी ने तब एक लैपटॉप भी ले लिया जो हमेशा उस्सकी कार में रहता था , सिर्फ रात को लैपटॉप घर जाता जब अभी घर में दाखिल होता था…
1990 में hi अभी ने अपना पहला मोबाइल ख़रीदा… वो एक अनलोगे मोबाइल था मोटोरोला मेक की, वो यह था इस्को आज भी अभी ने संभल कर रखा है क्यूंकि यह उस्का पहला मोबाइल था 1990 में आया था नया नया देश में….
तो इन् दो सालों में अभी और नवीन एक दूसरे से खूब मिले, घूमें, मजा किये और लास्ट में दोनों की शादी फिक्स हुई और बड़े धूम धाम से शादी हुई दोनों की.
अब अभी की कंपनी काफी पॉपुलर हो गया था अब्रूहि. टेलीविज़न वालों ने उस्का इंटरव्यू लिया था जिस दिन उस्सने गेराज को रोपें किया था क्यूंकि सब से यंगेस्ट इंटरप्रेन्योर था जिस्सको बैंक ने करीब एक करोड़ लोन देकर गेराज को उसस्के हवाले किया था. प्रेस में भी उस्सकी इंटरव्यू और फोटोज आये थे….
उन् दिनों अभी सोच रहा था किआ रूही और उस्सक्कि माँ ने टीवी पर उस्सक्को देखा होगा? पेपर में उस्सकी फोटो और कंपनी का नाम देखा होगा? रूही को कैसा लगा होगा उस्का नाम अभी के नाम के सात जुड़कर, अब्रूहि बनते देख कर?? किआ रूही की माँ और खुद रूही को पछतावा नहीं हुआ होगा?
अभी को उस वक़्त पता भी नहीं था के रूही किधर है, उस्सको पता नहीं था के रूही उस अमित के साथ फ्रांस चली गयी या कहीं और किसी से शादी कर लिया और व्हाट!! अगर अभी चाहता तो सुनील को खत लिख कर रूही के बारे में पता लगा सकता था मगर उस्सने वैसा नहीं किया…. अभी यह चाहता था के अगर रूही को अभी से प्यार है तो रूही को अभी के तरफ आना चाहिए था. जितना अपने तरफ से करना था वो अभी ने कर लिया था, बहोत ज़्यादा hi किया और झेला था अभी ने रूही के लिए, तो रूही की बारी थी अभी ने सोचा इस लिए उस्सने कभी जान्ने की कोशिश नहीं किया पहले 5 सालों में.
अभी और नवीन की मैरिड लाइफ बहोत मस्त चल रहा था, अभी का काम मस्त से भी मस्त चल रहा था. अभी ने अपने गेराज की अद्वेर्तिसेमेन्ट के साथ एक एक चिठ्ठी टाइप करवा कर खुद ड्राइव करते हुए हर एक बस ओनर के घर चौररने गया था…. नार्थ से साउथ तक, ईस्ट से वेस्ट तक हर बस ओनर को एक एक चिठ्ठी बनता अभी ने अपने गेराज को अद्वेर्तीसे करते हुए… सिर्फ एक बस ओनर को चिठ्ठी नहीं दिया अभी ने, वो था मेहबूब.
अब बस की कोच बिल्डिंग के इलावा एल्युमीनियम के काम भी होते थे, उस्का एक अलग टीम था गेराज में, वह लोग ज़्यादा तर आउटडोर काम करते थे, बड़े बड़े बिल्डिंग्स में एल्युमीनियम फ्रेम्स लगा कर विंडो पैन्स लगाना ेट्स… बड़े ऊंचे 20 से 50 माले के बिल्डिंग्स में वह काम किया जाता था करनेस से…. उसस्के लिए टेंडर भाड़े जाते थे अगर गवर्नमेंट्स के बिल्डिंग्स होते थे… और अक्सर दाम कम होते थे इस लिए अभी को टेंडर मिलता रहता था… अभी स्माल प्रॉफिट में काम करता था इस लिए उस्सको बहोत ज़्यादा काम मिलता रहता था गेराज में.
और वही काम छोटे घरों में भी किया जाता और कोई ग़रीब के लिए कॉस्ट ज़्यादा होता तो अभी फ्री में वैसे लोगों के घर में एल्युमीनियम वर्क्स कर दिया करता था, फ्री ऑफ़ कॉस्ट!
1994. शादी के 5 साल बाद अभी को एक दिन एक पुलिस स्टेशन में अल्लुमिनियन के खिड़की चेंज करके नए लगवाने थे. उसस्के आदमी वहां काम कर रहे थे तो अभी चेक करने को गया था के काम कहाँ तक हुआ है वहां…. और अभी को कौन मिला वहां? महेश, रूही का छोटा भाई, अब वो पुलिस अफसर था….. अभी ने उस्सको देखा, मुस्कुराया और महेश खुद आया अभी से मिलने….
महेश ने अभी से शेक हैंड किया, और कहा,
“Hi, अभी आप तो बहोत बड़े आदमी बन गए हो अब, हम्म्म अब्रूहि हहहहए आप को टीवी पर कई बार देखा हूँ, काफी आगे बढ़ गए हो अब लाइफ में, वैरी गुड वैरी गुड मुझे ख़ुशी हुई अभी.”
अभी ने महेश का हाथ अपने हाथ में पकड़े रखा महेश से बात करते हुए, और पूछा के वो कब पुलिस में भर्ती हुआ यह सब…. अभी को उस से रूही के बारे में पूछने का मैं किया मगर नहीं पूछा क्यूंकि महेश ने रूही की बात नहीं किया, बस एक दोस्त की तरह मिला उस से और कासुअल बात किया तो अभी ने भी नार्मल बात किया महेश से…. रूही की बात hi नहीं हुई…. उस दिन के बाद अभी महेश से कई बार मिला वहां और कभी उस शहर में जहाँ उस्सकी चची की सुपरमार्केट था…. हर बार दोनों दोस्तों की तरह मिलते और कुछ देर बात करते और अलग हो जाते….
अभी को अब पता चल गया था के रूही ने भी उस्सको टीवी पर देखा होगा, उसस्के घर में अगर महेश ने अभी को देखा तो मतलब सब ने उस्सको देखा होगा और अब्रूहि कंपनी से सब वाकिफ होंगे, रूही की माँ को भी सब पता चला होगा के अभी एक क्रोरेपति बन गया है और उस्सकी रूही के लिए अभी सही लड़का था, और पचता रही होगी…. इस से अभी को बहोत ख़ुशी मिलता था जब सोचता था के रूही की माँ पर किआ बीत रही होगी जब जब अभी को और उस्सकी कंपनी को टीवी पर दिखाया गया होगा….
और एक दिन अभी को ईस्ट में जाना था एक बिल्डिंग के लिए कोटशन बनाने. अभी जब रूही की मैं रोड से गुज़रा तो जान बुझ कर उस फिलिंग स्टेशन पर रुका फ्यूल लेने के बहाने. फिलिंग स्टेशन से रूही की किचन की स्टैर्स साफ़ दिखाई देता था…. अभी कार से निकला और रूही के किचन के तरफ देखने लगा…
ये अभी वो वाला अभी नहीं था जो उन् दिनों उस आँगन में गंदे कपड़ों में काम करता था और रूही से प्यार की भीक माँगा करता था…. पिछले 5 सालों में अभी ने इतना तर्रकी कर लिया था के अब उसस्के पास एक बंव, एक मेरकॉड्स बेंट्ज़, और एक ऑडी था, कार्स का शौक था अभी को, रदेऊ जैसा द्रिविंग्स करता था…. उस्का घर पता नहीं कितने करोड़ का था; उसस्के पहनाव से दीखता था एक राइज़ आदमी है…. और जब अभी को कोई नहीं दिखा स्तैर पर तो पंप पर काम करने वाले आदमी ने अभी से पूछा,
“कुछ चाहिए किआ सर, फ्यूल तो फुल है आप की बंव में तो आप क्यों रुके यहाँ सर?
अभी ख्यालों में खोया हुआ उस पंप वाले से पूछा,
“उस घर में वहां लास्ट वाला जो है, मनोज, महेश, वह दोनों यहीं रहते हैं नाह?”
आदमी ने कहा,
“हाँ सर जी, दोनों भाई वहीँ रहते हैं, आप जानते हो उन्हें सर?”
अभी ने वैसे hi ख्यालों में खोया हुआ उधर hi देखते हुए कहा,
“रूही?! रूही को जानते हो तुम?! वो यहीं है किआ?!”
आदमी ने पूछा,
“मगर सर आप क्यों सवाल कर रहे हो? अगर उनको जानते हो तो वहां चले क्यों नहीं जाते आप?”
अभी ने जैसे एक सपना देखते हुए कहा,
“रूही फ्रांस जाने वाली थी गयी के नहीं बता मुझे, तब से अभी 8 साल हो गए; गयी के नहीं बता मुझे!!”
अभी का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा था, वही पहले की तरह जब रूही का नाम लेता था, तब एहि हाल होता था, उसस्के जैसे सांस फुल्ने लगे थे उस आदमी से सवाल करते हुए… अभी के नज़र उस्सकी किचन से हट नहीं रहा था और उस आदमी से जवाब का वेट कर रहा था तो आदमी ने कहा,
“सुना था जाने वाली थी सर, मगर गयी नहीं है अभी तक यहीं है!!”
अभी तब तक ऐसे हांफने लगा था जैसे 100 मेट्रेस भाग कर आया था, उस आदमी का जवाब सुन कर अभी ने उसस्के चेहहरे में देखते हुए एक अजीब सी मुस्कराहट में कहा,
“आठ साल, 8 साल हाहाहाहा देखता हूँ कब जाती है!”
और अभी कार के ड्राइविंग वाले सीट पर बैठा, तो आदमी ने झुक कर कहा,
“सर कोई मैसेज हो तो बतादूँ रूही जी को?!”
अभी ने उस्सको एक 100 का नोट देते हुए कहा,
बस इतना कहना के अमिताभ बच्चन जितना लम्बा आदमी पूछ रहा था उसस्के बारे में वो समझ जाएगी.
तो बे कॉन्टिनोएड….