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- Dec 5, 2013
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रस्ते में पंडित जी चलते हुए रूद्र के आने कारन पूछ ने लगे
पीजे- ऐसी क्या बात हो गयी रूद्र बाबू जो आप को मुझे ढूंढ़ते हुए ठाकुर की हवेली तक आना पड़ा और आपको पता कैसे चला की में यहाँ हु
र- वो क्या है न पंडित जी माँ चाहती है की अब एक नए घर का निर्माण किया जाये जो की गाओं की सीमा वाली ज़मीन पैर बनेगा उसी की भूमि पूजन के लिए आपको बुलाने आप के घर गया तो वह एक लड़की थी नाम तो पता नहीं पैर उसी ने बताया की आप ठाकुर के यहाँ हो
पीजे- ाचा ाचा अरे वो मेरी भांजी है बेचारी के माँ बाप तो पहले hi गुज़र गए थे अब पति ने भी छोड़ दिया इसलिए में उसे यहाँ ले आया बड़ी अछि बच्ची है मेरी सुकन्या
र- ाचा किया पंडित जी आपकी भी खाना बनाने की संशय दूर हो गयी उसके आने से
पीजे- ये तो सच बात कही रूद्र बाबू वैसे मुझे लगता है अबकी बार कुछ बड़ा hi बनाने की सोच रहे हो
र- बस पंडित जी आप के आशीर्वाद से छोटी से कोठी बन जाये वो hi बहुत है
पीजे- कोठी नहीं रूद्र बाबू हवेली बोलो हाहाहा लो पता भी नहीं चला और हम पहुंच भी गए ( रूद्र के परिवार वालो को देखते हुए बोले)
सुरभि- परनाम पंडित जी
पीजे- खुश रहो बेटी भगवान् धन धन्य से भरपूर रखे
सबसे राम राम के बाद पंडित जी अपने करए में लग गए कॉन्ट्रैक्टर भी मजदूर के साथ पहुंच चूका था और वो भी वही बैठ कर अपने मजदूरों के साथ पूजा में शामिल हो गया
पंडित जी हर काम बड़े hi ध्यान पूर्ण कर रहे थे
वही ठाकुर की हवेली में
रूद्र के जाते hi वाणी तेज़ कदमो से चलती अपने कमरे में पहुंची और गेट लॉक करके तेज़ तेज़ सानें लेने लगी और रूद्र को सोचते हुए बड़बड़ा ने लगी
वाणी- उउउउउफफ्फ्फ्फ़ क्या लड़का है इतनी काम उम्र भी पूरा तूफ़ान है और कितनी तेज़ नाक है उसकी जो मेरे बहते काम रास की गंध तक को पहचान गया हाय कैसा होगा उसका लुंड देखने में तो बहुत मजबूत लग रहा था ऊऊफफफफफ कैसा लगेगा जब वो सांप मेरे अंदर जायेगा आआह्ह्ह्ह छी कह रहा था लुंड के नाम से भी डरूंगी क्या सच में ऐसा हो जायेगा नहीं नहीं वो तो अभी बहुत छोटा है और मासूम भी शायद जवानी के जोश में बोल गया होगा आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पैर इस निगोड़ी का क्या करू जो आज उसकी बातो से hi क्यों इतना रोने लगी है aaahhhhhhhhhhmmmmooohhhhhhhhhhhaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ये क्याआ हो रहा है मुझे आआह्ह्ह्हम्म्म में तो सच में झाड़ रही हु ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआ ऐसा तो कभी नहीं हुआ मेरे साथ हहमममाःह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
ooooohhhhhhhhhhhh सच hi कहा था उसने की हाथ लगाने से hi झाड़ जाउंगी आआअह्हह्ह्ह्हम्म्म्म बात हैईईई रईईए ोररररर इनका क्याआआआ कक्कारररू
उफ्फ्फ इन चूचियों को कैसे घर जाने वाली नज़र से देख रहा था हाय राम ये क्या हो रहा है मुझे क्यों में अपनी hi उम्र से आधे लड़के के लिए पागल हो रही हु क्या जादू कर दिया उसकी उन नशीली आँखों ने माआहहह उछाल लो निगोदियो जब वो मसालेगा न तब पता चलेगा आअह्हह्ह्ह्हहोूःहहहह ाआज तो इनका वजन भी जायदा लग रहा है उउउउम्महहहहहह ( चूचियों को हिलाते हुए बोली)
वाणी अपने में गम थी की तभी गेट पैर थक्क थक्क हुई तो अंदर से hi बोली
वाणी- कोण है
ये थी मालिनी ठाकुर
मत- अरे हम है नन्द रानी गेट खोलो
मालिनी की आवाज़ सुनकर वाणी ने गेट खोला और वो अंदर आयी
मत- क्या बात है इतने पसीने क्यों आ रहे है तुम्हे कही ऊँगली तो नहीं कर रही थी
वाणी- अरे नहीं भाभी आज तो बिना ऊँगली के hi इतना झड़ी हु में जितना आज तक चुद के भी नहीं झड़ी
मत- ाचा तो मुझे भी बता ऐसी कोण सी गोली खा ली तूने जो इतनी मस्त हो गयी
वाणी- कोई गोली नहीं भाभी बस आज एक सांड के दर्शन कर लिए उसी से ये हाल हुआ है मेरा और सोचो जब उस से छोडूंगी तो क्या हाल होगा आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में तो सोच कर hi हवा में उड़ रही हु aaaahhhhhhhhhh
मत- ऐसा कोण सा सांड है जो इतना जोश दिखा रही है कही कोई फिरंगी तो नहीं फसा लिया तूने
वाणी- न न भाभी अपने hi गाओं का है सच कहु जब पहली बार उसे देखा था न गीलापन तो उसी वक़्त आज्ञा था मेरी छूट में ओह्ह्ह्ह और आज उसके करीब गयी तो उसकी गर्मी से hi मेरा ये हाल हो गया
मत- हाय कामिनी अपने गाओं में कोण है ऐसा जो मेरी नज़रो में नहीं आया अभी तक
वाणी- रूद्र नाम है उसका भाभी वो सुरभि है न उस लड़का कसम से अब तो कल hi उसका लुंड अपनी छूट में लुंगी
मत- ोुह्ह्ह्हह्ह वाणी मुझे मत भूल जाना तुझे तो तेरे भाई का पता hi है आअह्ह्ह देख तेरी बातो से hi मेरा क्या हाल हो रहा है
वाणी- ोुह्ह्ह्ह भाभी देखा उसके बारे में सुनके hi आपका भी हाल बुरा हो गया देखो आपकी चूचिया कैसे तन गयी ाःह देखो मेरा तो सारा जिस्म hi रोये छोड़ रहा है ( कहते hi अपने कपडे उतार दिए)
मत- ओह्ह्ह्ह वाणी तू नंगी क्यों हो गयी तुझे पता है न तेरा जिस्म मेरी कमजोरी ऊऊफफफफफ तेरे ये होठ उउउउम्म्माःह्ह्ह्ह
और दोनों एक दूसरे को चूसने लगी जैसे जन्मो की प्यासी हो कमरे में गर्मी बढ़ चुकी थी और ें दोनों के जिस्म में भी जिसे दोनों एक दूसरे से मिटा न चाहती थी
मत- आआह्ह्ह्ह वाणीइ तूने आग लगा दी मेरे जिस्म में ऊऊह्ह्ह्ह मा में तड़प रही हु कुछ कर मेरा ऊऊऊह्ह्हज्ज
ऊह्ह्हह्ह कुछ करना मेरी चूचियों को देख कैसे तन्न गयी है ऊऊफफफफफ ले चूस इन्हे आआह्ह्हह्हूःहहहहहह
वाणी- ऊऊह्ह्हह्ह भाभी तुम्हारी छूट तो देखो मेरी चारो ऊँगली खा रही हैई उउउउम्माह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह उम्माह ( मालिनी को किसी गुड़िया की तरह गॉड में लेकर )
मत- आआह्ह्ह्हह पूरा हाथ घुसा दे वाणी आआह्ह्ह्हह फायआडडडडड डीईईओओओओओ इस निगोड़ी को aaaaaahhhhhhhhhhhmmmaaaaaaaaaaaahaaaa जज्जाआंआआआआआआआआआह्ह्ह्हह्हआआआआ
वाणी पोरे जोश के साथ मालिनी की छूट चाट में लगी हुई थी ताकि जल्द से जल्द उसकी भी छूट को आराम मिले
मत- आआह्ह्ह्हह्हह्हआआ एआईसीई हठीीी कहहाआआ इसे काट दाल ooooooohhhhhhhhhhmaaaaaaaaaavaaaaaniiiiii aaaaaiiiiisssseeeeeeeeeeeeeehhhhhhiiiiiiiiiiiii ऊह्ह्हह्ह मीरररीी छाती मी खुजली सी हो रहीए हाइइइइ uuuuuffffffffff( वाणी के चेहरे पैर बैठी खुद hi अपनी चूचियों को मसल ने में लगी हुई थी)
वाणी- ओह्ह्ह्हह भाभी तो इन्हे प्यार से क्यों मसल रही इन्हे तो ऐसे मसलो ताकि इनकी साडी अकड़न निकल जाए उफ्फ्फ्फ़ कितनी ढोस है ये ( दोनों हाथो से मसल ने लगी)
मत- ओह्ह्ह्ह वाणी तू मेरी हर कमजोरी को जानती है जैसे मेरी ननद नहीं बहिन हो आआह्ह्हह्ह्ह्ह अअअअअ जरा मुझे भी तो अपनी छूट का रास चखा बहुत दिन हो गए और में तो बस्स्स आने hi वाली हु मेरी जायंननननननन ोुह्ह्ह्हम्मम्मम्म
वाणी- ूउम्मम्मम्हभाआआअभियई आआह्ह्हह्ह्ह्हह्हूऊऊऊआआह्ह्ह्हगाजजायबबबबबब कार्ररत्तीी होओओओओओओ ttuuuuummmmmmmmmaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
मत- आआअह्ह्ह्ह मेरी रानी तुझे ठंडा करू मइईईईन्न्नन टूओ गईइइइइइइआआह्ह्ह्हह्ह ब्ब्ब्बूउससससससससस
( वाणी की छूट को कुत्ते की तरह चाट ने लगी अपनी छूट को रगड़ते हुए )
वाणी- ोुह्ह्हह्ह भाभीयाआईसीई हीईई आआह्ह्ह्हहम्म्मआआआअखावू ऐसे ही खाउऊ और मीटीं तुम्हे खाउंगी बारी बारी आअह्हह्ह्ह्हह
मत- सच कहा रररीीी तूने आआह्ह्हह्ह्ह्ह पहले की तरह कभी तू कभी मेऐईंण्णन आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ooohhhhhmaaaaaaaaaaaaaahhhh एआईसी हीई मेऐईंण gaaayyyiiiiiiiivvvaaaaaaaaaaannnnniiiiiiiiooohhhhhhhhhhhhhhhh और (खुद hi अपनी छूट वाणी के मुँह पैर मरते हुए झड़ने लगीई)
aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh और यही चिल्लाते कर झड़ते हुए वाणी के ऊपर hi अकड़ गयी
अपनी भाभी को यु झाड़ता देख वाणी खुद मालिनी के ऊपर सवार हो गयी जिसका स्वागत मालिनी की लैप लपाती छूट ने किया और जोर जोर से चाट ने लगी
वाणी- आआआआह्ह्ह्हह्ह भहाभी में मर जाउंगी ऊऊह्ह्हह्हआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हहतुम्हरी जीब में जायडूउउ हाआईईईई ohhhhhhhhhhhhhhbmaaaaaaaabhabhi मीटी गायीइइइइइइइइ मुझे sambhalloooooooooooaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaahhhhhaaaahhhhhaaahhhh..
आगे की अव्वाज़्ज़ज़ मालिनी के होठो में hi डाब के रह गईइइइइइइइ और दोनों बड़े प्यार से एक दूसरे को चुम ने लगी
जब वाणी थोड़ी नार्मल हुई तो मालिनी एक आखिरी चुम्बन उसके होठो पैर किया और बड़े प्यार से बोली
मत- देखा संभल लिया न मैंने तुम्हे हर बार की तरह
वाणी- ओह्ह्ह भाभी तुमने hi तो संभाला है मुझे वर्ण कब की बिखर गयी होती में तुम सच में मेरी भाभी से कही बढ़कर हो लव यू सोऊ मच
मत- लव यू 2 मेरी जान तू भी मेरा कितना ख्याल रखती थी शादी के बाद जब में यहाँ नयी 2 आयी थी वर्ण में तो अकेली मर ह......( आगे कुछ न कह पायी)
वाणी- कितनी बार बोलै है गलत बात मत बोलै करो
मत- सॉरी मेरी जान वैसे एक बात बता क्या सच में वो बिलकुल वैसा है जैसा तू बोल रही थी
वाणी- हां भाभी बिलकुल और उस से ज्यादा hi होगा मुझे लगता है
मत- हम्म्म चल फिर तो ठीक वैसे कहा करेगी तू कहे तो में इंतज़ाम करू
वाणी- उसके खेत पैर वो बता कर गया है की वह अकेला hi होता है
मत- ाचा फिर तो ठीक पैर ध्यान रखना कोई देखे न तुझे और मुझे मत भूल जाना
वाणी- में तो कुछ नहीं भूलूंगी पैर आप क्यों ऊँगली करने लगी दोबारा से
मत- क्यों करू तूने उसके बारे में बता कर मुझे भी पागल कर दिया है चल हैट कपडे पहन ने दे मुझे और तू भी पहन ले इस पहले की श्री इधर आये
ऐसी hi मस्ती मैसक करते हुए दोनों ने कपडे बदले और बहार निकल गयी
दूसरी तरफ भूमि पूजन हो चूका था सब में प्रसाद बात ने के बाद पंडित जी को दक्षिणा देकर विदा किया और सभी घर को निकल गए रूद्र को छोड़ कर उसे सेहर जाना था और सामान का आर्डर करके आना था इसलिए वो वह से गाड़ी लेकर सेहर निकल गया
सब सामान का आर्डर देने में उसे शाम हो गयी थी और घर लौट ते वक़्त लगभग अँधेरा हो गया था इसलिए वो गाड़ी को आराम से चला रहा था की कही कोई जानवर न आ जाये
मस्त में चलता वो गाओं की सरहद में दाखिल hi हुआ था की एक जोर की चीख उस के कानो में पड़ी तो वो गाड़ी को रोक कर बहार निकला और जिस तरफ से चीखने की आवाज़ आयी थी उस तरफ चल दिया रात का सन्नाटा और घाना जुगल जिस में रूद्र बिना डरे घुसता जा रहा था इतना अंदर आनी के बाद भी जब उसे कुछ दिखाई नहीं दिया तो उसे लगा की शायद ये उसका वहां था इसलिए वो पलट कर वापस जाने hi लगा था की
एक बार फिर से आवाज़ आई
baaaaaccccchhhhhhaaaaaaaaaaaaooooooooooooooooo
रस्ते में पंडित जी चलते हुए रूद्र के आने कारन पूछ ने लगे
पीजे- ऐसी क्या बात हो गयी रूद्र बाबू जो आप को मुझे ढूंढ़ते हुए ठाकुर की हवेली तक आना पड़ा और आपको पता कैसे चला की में यहाँ हु
र- वो क्या है न पंडित जी माँ चाहती है की अब एक नए घर का निर्माण किया जाये जो की गाओं की सीमा वाली ज़मीन पैर बनेगा उसी की भूमि पूजन के लिए आपको बुलाने आप के घर गया तो वह एक लड़की थी नाम तो पता नहीं पैर उसी ने बताया की आप ठाकुर के यहाँ हो
पीजे- ाचा ाचा अरे वो मेरी भांजी है बेचारी के माँ बाप तो पहले hi गुज़र गए थे अब पति ने भी छोड़ दिया इसलिए में उसे यहाँ ले आया बड़ी अछि बच्ची है मेरी सुकन्या
र- ाचा किया पंडित जी आपकी भी खाना बनाने की संशय दूर हो गयी उसके आने से
पीजे- ये तो सच बात कही रूद्र बाबू वैसे मुझे लगता है अबकी बार कुछ बड़ा hi बनाने की सोच रहे हो
र- बस पंडित जी आप के आशीर्वाद से छोटी से कोठी बन जाये वो hi बहुत है
पीजे- कोठी नहीं रूद्र बाबू हवेली बोलो हाहाहा लो पता भी नहीं चला और हम पहुंच भी गए ( रूद्र के परिवार वालो को देखते हुए बोले)
सुरभि- परनाम पंडित जी
पीजे- खुश रहो बेटी भगवान् धन धन्य से भरपूर रखे
सबसे राम राम के बाद पंडित जी अपने करए में लग गए कॉन्ट्रैक्टर भी मजदूर के साथ पहुंच चूका था और वो भी वही बैठ कर अपने मजदूरों के साथ पूजा में शामिल हो गया
पंडित जी हर काम बड़े hi ध्यान पूर्ण कर रहे थे
वही ठाकुर की हवेली में
रूद्र के जाते hi वाणी तेज़ कदमो से चलती अपने कमरे में पहुंची और गेट लॉक करके तेज़ तेज़ सानें लेने लगी और रूद्र को सोचते हुए बड़बड़ा ने लगी
वाणी- उउउउउफफ्फ्फ्फ़ क्या लड़का है इतनी काम उम्र भी पूरा तूफ़ान है और कितनी तेज़ नाक है उसकी जो मेरे बहते काम रास की गंध तक को पहचान गया हाय कैसा होगा उसका लुंड देखने में तो बहुत मजबूत लग रहा था ऊऊफफफफफ कैसा लगेगा जब वो सांप मेरे अंदर जायेगा आआह्ह्ह्ह छी कह रहा था लुंड के नाम से भी डरूंगी क्या सच में ऐसा हो जायेगा नहीं नहीं वो तो अभी बहुत छोटा है और मासूम भी शायद जवानी के जोश में बोल गया होगा आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पैर इस निगोड़ी का क्या करू जो आज उसकी बातो से hi क्यों इतना रोने लगी है aaahhhhhhhhhhmmmmooohhhhhhhhhhhaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ये क्याआ हो रहा है मुझे आआह्ह्ह्हम्म्म में तो सच में झाड़ रही हु ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्हह्हआआ ऐसा तो कभी नहीं हुआ मेरे साथ हहमममाःह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
ooooohhhhhhhhhhhh सच hi कहा था उसने की हाथ लगाने से hi झाड़ जाउंगी आआअह्हह्ह्ह्हम्म्म्म बात हैईईई रईईए ोररररर इनका क्याआआआ कक्कारररू
उफ्फ्फ इन चूचियों को कैसे घर जाने वाली नज़र से देख रहा था हाय राम ये क्या हो रहा है मुझे क्यों में अपनी hi उम्र से आधे लड़के के लिए पागल हो रही हु क्या जादू कर दिया उसकी उन नशीली आँखों ने माआहहह उछाल लो निगोदियो जब वो मसालेगा न तब पता चलेगा आअह्हह्ह्ह्हहोूःहहहह ाआज तो इनका वजन भी जायदा लग रहा है उउउउम्महहहहहह ( चूचियों को हिलाते हुए बोली)
वाणी अपने में गम थी की तभी गेट पैर थक्क थक्क हुई तो अंदर से hi बोली
वाणी- कोण है
ये थी मालिनी ठाकुर
मत- अरे हम है नन्द रानी गेट खोलो
मालिनी की आवाज़ सुनकर वाणी ने गेट खोला और वो अंदर आयी
मत- क्या बात है इतने पसीने क्यों आ रहे है तुम्हे कही ऊँगली तो नहीं कर रही थी
वाणी- अरे नहीं भाभी आज तो बिना ऊँगली के hi इतना झड़ी हु में जितना आज तक चुद के भी नहीं झड़ी
मत- ाचा तो मुझे भी बता ऐसी कोण सी गोली खा ली तूने जो इतनी मस्त हो गयी
वाणी- कोई गोली नहीं भाभी बस आज एक सांड के दर्शन कर लिए उसी से ये हाल हुआ है मेरा और सोचो जब उस से छोडूंगी तो क्या हाल होगा आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में तो सोच कर hi हवा में उड़ रही हु aaaahhhhhhhhhh
मत- ऐसा कोण सा सांड है जो इतना जोश दिखा रही है कही कोई फिरंगी तो नहीं फसा लिया तूने
वाणी- न न भाभी अपने hi गाओं का है सच कहु जब पहली बार उसे देखा था न गीलापन तो उसी वक़्त आज्ञा था मेरी छूट में ओह्ह्ह्ह और आज उसके करीब गयी तो उसकी गर्मी से hi मेरा ये हाल हो गया
मत- हाय कामिनी अपने गाओं में कोण है ऐसा जो मेरी नज़रो में नहीं आया अभी तक
वाणी- रूद्र नाम है उसका भाभी वो सुरभि है न उस लड़का कसम से अब तो कल hi उसका लुंड अपनी छूट में लुंगी
मत- ोुह्ह्ह्हह्ह वाणी मुझे मत भूल जाना तुझे तो तेरे भाई का पता hi है आअह्ह्ह देख तेरी बातो से hi मेरा क्या हाल हो रहा है
वाणी- ोुह्ह्ह्ह भाभी देखा उसके बारे में सुनके hi आपका भी हाल बुरा हो गया देखो आपकी चूचिया कैसे तन गयी ाःह देखो मेरा तो सारा जिस्म hi रोये छोड़ रहा है ( कहते hi अपने कपडे उतार दिए)
मत- ओह्ह्ह्ह वाणी तू नंगी क्यों हो गयी तुझे पता है न तेरा जिस्म मेरी कमजोरी ऊऊफफफफफ तेरे ये होठ उउउउम्म्माःह्ह्ह्ह
और दोनों एक दूसरे को चूसने लगी जैसे जन्मो की प्यासी हो कमरे में गर्मी बढ़ चुकी थी और ें दोनों के जिस्म में भी जिसे दोनों एक दूसरे से मिटा न चाहती थी
मत- आआह्ह्ह्ह वाणीइ तूने आग लगा दी मेरे जिस्म में ऊऊह्ह्ह्ह मा में तड़प रही हु कुछ कर मेरा ऊऊऊह्ह्हज्ज
ऊह्ह्हह्ह कुछ करना मेरी चूचियों को देख कैसे तन्न गयी है ऊऊफफफफफ ले चूस इन्हे आआह्ह्हह्हूःहहहहहह
वाणी- ऊऊह्ह्हह्ह भाभी तुम्हारी छूट तो देखो मेरी चारो ऊँगली खा रही हैई उउउउम्माह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह उम्माह ( मालिनी को किसी गुड़िया की तरह गॉड में लेकर )
मत- आआह्ह्ह्हह पूरा हाथ घुसा दे वाणी आआह्ह्ह्हह फायआडडडडड डीईईओओओओओ इस निगोड़ी को aaaaaahhhhhhhhhhhmmmaaaaaaaaaaaahaaaa जज्जाआंआआआआआआआआआह्ह्ह्हह्हआआआआ
वाणी पोरे जोश के साथ मालिनी की छूट चाट में लगी हुई थी ताकि जल्द से जल्द उसकी भी छूट को आराम मिले
मत- आआह्ह्ह्हह्हह्हआआ एआईसीई हठीीी कहहाआआ इसे काट दाल ooooooohhhhhhhhhhmaaaaaaaaaavaaaaaniiiiii aaaaaiiiiisssseeeeeeeeeeeeeehhhhhhiiiiiiiiiiiii ऊह्ह्हह्ह मीरररीी छाती मी खुजली सी हो रहीए हाइइइइ uuuuuffffffffff( वाणी के चेहरे पैर बैठी खुद hi अपनी चूचियों को मसल ने में लगी हुई थी)
वाणी- ओह्ह्ह्हह भाभी तो इन्हे प्यार से क्यों मसल रही इन्हे तो ऐसे मसलो ताकि इनकी साडी अकड़न निकल जाए उफ्फ्फ्फ़ कितनी ढोस है ये ( दोनों हाथो से मसल ने लगी)
मत- ओह्ह्ह्ह वाणी तू मेरी हर कमजोरी को जानती है जैसे मेरी ननद नहीं बहिन हो आआह्ह्हह्ह्ह्ह अअअअअ जरा मुझे भी तो अपनी छूट का रास चखा बहुत दिन हो गए और में तो बस्स्स आने hi वाली हु मेरी जायंननननननन ोुह्ह्ह्हम्मम्मम्म
वाणी- ूउम्मम्मम्हभाआआअभियई आआह्ह्हह्ह्ह्हह्हूऊऊऊआआह्ह्ह्हगाजजायबबबबबब कार्ररत्तीी होओओओओओओ ttuuuuummmmmmmmmaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
मत- आआअह्ह्ह्ह मेरी रानी तुझे ठंडा करू मइईईईन्न्नन टूओ गईइइइइइइआआह्ह्ह्हह्ह ब्ब्ब्बूउससससससससस
( वाणी की छूट को कुत्ते की तरह चाट ने लगी अपनी छूट को रगड़ते हुए )
वाणी- ोुह्ह्हह्ह भाभीयाआईसीई हीईई आआह्ह्ह्हहम्म्मआआआअखावू ऐसे ही खाउऊ और मीटीं तुम्हे खाउंगी बारी बारी आअह्हह्ह्ह्हह
मत- सच कहा रररीीी तूने आआह्ह्हह्ह्ह्ह पहले की तरह कभी तू कभी मेऐईंण्णन आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ooohhhhhmaaaaaaaaaaaaaahhhh एआईसी हीई मेऐईंण gaaayyyiiiiiiiivvvaaaaaaaaaaannnnniiiiiiiiooohhhhhhhhhhhhhhhh और (खुद hi अपनी छूट वाणी के मुँह पैर मरते हुए झड़ने लगीई)
aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh और यही चिल्लाते कर झड़ते हुए वाणी के ऊपर hi अकड़ गयी
अपनी भाभी को यु झाड़ता देख वाणी खुद मालिनी के ऊपर सवार हो गयी जिसका स्वागत मालिनी की लैप लपाती छूट ने किया और जोर जोर से चाट ने लगी
वाणी- आआआआह्ह्ह्हह्ह भहाभी में मर जाउंगी ऊऊह्ह्हह्हआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हहतुम्हरी जीब में जायडूउउ हाआईईईई ohhhhhhhhhhhhhhbmaaaaaaaabhabhi मीटी गायीइइइइइइइइ मुझे sambhalloooooooooooaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaahhhhhaaaahhhhhaaahhhh..
आगे की अव्वाज़्ज़ज़ मालिनी के होठो में hi डाब के रह गईइइइइइइइ और दोनों बड़े प्यार से एक दूसरे को चुम ने लगी
जब वाणी थोड़ी नार्मल हुई तो मालिनी एक आखिरी चुम्बन उसके होठो पैर किया और बड़े प्यार से बोली
मत- देखा संभल लिया न मैंने तुम्हे हर बार की तरह
वाणी- ओह्ह्ह भाभी तुमने hi तो संभाला है मुझे वर्ण कब की बिखर गयी होती में तुम सच में मेरी भाभी से कही बढ़कर हो लव यू सोऊ मच
मत- लव यू 2 मेरी जान तू भी मेरा कितना ख्याल रखती थी शादी के बाद जब में यहाँ नयी 2 आयी थी वर्ण में तो अकेली मर ह......( आगे कुछ न कह पायी)
वाणी- कितनी बार बोलै है गलत बात मत बोलै करो
मत- सॉरी मेरी जान वैसे एक बात बता क्या सच में वो बिलकुल वैसा है जैसा तू बोल रही थी
वाणी- हां भाभी बिलकुल और उस से ज्यादा hi होगा मुझे लगता है
मत- हम्म्म चल फिर तो ठीक वैसे कहा करेगी तू कहे तो में इंतज़ाम करू
वाणी- उसके खेत पैर वो बता कर गया है की वह अकेला hi होता है
मत- ाचा फिर तो ठीक पैर ध्यान रखना कोई देखे न तुझे और मुझे मत भूल जाना
वाणी- में तो कुछ नहीं भूलूंगी पैर आप क्यों ऊँगली करने लगी दोबारा से
मत- क्यों करू तूने उसके बारे में बता कर मुझे भी पागल कर दिया है चल हैट कपडे पहन ने दे मुझे और तू भी पहन ले इस पहले की श्री इधर आये
ऐसी hi मस्ती मैसक करते हुए दोनों ने कपडे बदले और बहार निकल गयी
दूसरी तरफ भूमि पूजन हो चूका था सब में प्रसाद बात ने के बाद पंडित जी को दक्षिणा देकर विदा किया और सभी घर को निकल गए रूद्र को छोड़ कर उसे सेहर जाना था और सामान का आर्डर करके आना था इसलिए वो वह से गाड़ी लेकर सेहर निकल गया
सब सामान का आर्डर देने में उसे शाम हो गयी थी और घर लौट ते वक़्त लगभग अँधेरा हो गया था इसलिए वो गाड़ी को आराम से चला रहा था की कही कोई जानवर न आ जाये
मस्त में चलता वो गाओं की सरहद में दाखिल hi हुआ था की एक जोर की चीख उस के कानो में पड़ी तो वो गाड़ी को रोक कर बहार निकला और जिस तरफ से चीखने की आवाज़ आयी थी उस तरफ चल दिया रात का सन्नाटा और घाना जुगल जिस में रूद्र बिना डरे घुसता जा रहा था इतना अंदर आनी के बाद भी जब उसे कुछ दिखाई नहीं दिया तो उसे लगा की शायद ये उसका वहां था इसलिए वो पलट कर वापस जाने hi लगा था की
एक बार फिर से आवाज़ आई
baaaaaccccchhhhhhaaaaaaaaaaaaooooooooooooooooo