महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 3 - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

महीन किचन मैं स्टोव देखनी लगी ....... उसी पहनी होइ विनोद की शर्ट सी विनोद की परफ्यूम की खुसबू आ रही थी ......... महीन की नंगी जिसम पी सिर्फ विनोद की शर्ट थी ....... अपनी नंगी बदन पी विनोद की शर्ट का टच उसी फील हो रहा था ......... जैसी hi वह इस बारी मैं सोचती तो उसी अजीब सा अहसास होता ........ की एहि शर्ट पहली विनोद की जिसम पी थी ...... और अब उसकी नाज़ुक मुलायम जिसम को टच क्र रही है ............. वह अपनी ख्याल पी खुद hi मुस्करा दी और ोमलते बनानी लगी ............

थोड़ी देर मैं विनोद किचन मैं आज्ञा .......... उसनी फ्लोर पर सारा मेस देखा तो खुद सी hi एक सफाई वाला कपड़ा लय क्र फ्लोर साफ़ करनी लगा ........

विनोद की अन्य की बाद महीन को अब थोड़ा अजीब लग रहा था ....... वह उनकंफर्टबले महसूस क्र रही थी ........... विनोद की लाइट ब्लू कलर की शर्ट की नीची उसकी निप्पल सख्त होनी लगी थय ...... आकर रही थय .......... जितना वह कौन्सियस होती जा रही थी ....... उतना hi उसकी निप्पल्स और भी हार्ड हो रही थय .......... विनोद न्य फ्लोर साफ़ किआ और फिर इधर उधर की बातें कृत्य होय महीन का हाथ बतानी लगा ब्रेकफास्ट बनानी मैं ........ आहिस्ता आहिस्ता महीन का विनोद की मौजूदगी को महसूस करना काम हो गया ....... और वह रिलैक्स होनी लगी .......... और विनोद की बातों पी हंसती होय ब्रेकफास्ट त्यार करनी लगी .........

महीन को अभी भी विनोद की पहनी होइ शर्ट सी उसकी परफ्यूम की खुसबू आ रही थी .............

महीन मुस्करा की बोली ......... विनोद वैसी एक बात है ....... तुम्हारी परफ्यूम की चॉइस बुहत अछि है .......

विनोद मुस्कराया ........ थैंक्स महीन .......

महीन भी मुस्करा दी ..........

ब्रेकफास्ट बनानी की बाद दोनों न्य टेबल पी लगाया ..... और मिल क्र नाश्ता करनी लगी .......... महीन विनोद की बिलकुल सामन्य बैठी होइ थी ........ विनोद की नज़रें भी बार बार महीन की सीने पी जा रही थीं ........ उसी अपनी शर्ट की ऊपर सी महीन की निप्पल्स की निशाँ साफ़ महसूस हो रही थय ....... और वह महीन सी नज़र बचा की उनको बार बार देख रहा था ....... उसी ाचा लग रहा था ............

नाश्ता करनी की बाद महीन बोली ....

महीन ....... विनोद िफ़ यू डोंट मंद तो मैं चेंज करनी सी पहली तुम्हारी शर्ट पहनी होय hi घर की डस्टिंग क्र लोन .......... फिर एक hi बार नहा की चेंज करों गई ड्रेस ........

विनोद मुस्कराया ........ आर्य इस मैं पूछनी की क्या बात है ...... जैसी मर्ज़ी .... जब तक मर्ज़ी पहनो ...... no इशू ........

महीन मुस्कराई ........ और तुम उतनी देर मैं डिशेस वाश क्र की चाय बना लो .........

विनोद मुस्कराया ....... okay बॉस ..........

महीन बनवाती गुस्से सी बोली ....... वह जी बॉस बॉस कहती रहती हो और बनाया होआ घर की माइड है मुझी ........

दोनों इस बात पी हंस पारी ........

महीन न्य डस्टिंग का कपड़ा उठाया और डस्टिंग करनी लगी ........ डस्टिंग कृत्य होय महीन कार्नर मैं बानी होइ छोटी सी शेल्फ पर राखी होइ गणेश जी की मूर्ती की पास पोहंची ......... वह शेल्फ क़रीब 4 फुट ऊंची थी .. .. शेल्फ पर गणेश जी की मूर्ती राखी होइ थी ........... महीन न्य पहली तो सोचा की वह इसी ऐसी hi रहंय दी ........ उसी अपनी फेथ और अपनी घर की माहोल न्य हमेशा इन सुब सी दूर रहना सिखाया था ........... मगर उस मूर्ती की खूबसूरती को देखती होय महीन न्य उसी भी साफ़ करनी का इरादा क्र लय .......... महीन उसी कपड़े की साथ साफ़ करनी लगी ...... मगर फिर उसी ख्याल आया की नहीं ...... यह तो कपड़ा साफ़ नहीं है ......... उसनी एक साफ़ कपड़ा उठाया और उसकी साथ गणेश जी की मूर्ती को साफ़ करनी लगी ......... बुहत hi प्यार सी .......... उसी भी अहसास था की ....... उसकी रेलगिओं का ना सही मगर विनोद की लय तो वह सुब मुकदस है न .......... इसलय उसी लगा की विनोद का दिल रखनी की लय वह यह क्र सकती है बिना कुछ भी और सोची ........ मगर इस सुब की करनी का महीन पी कुछ न कुछ असर ज़रूर हो रहा था .......... उसी बुरा फील नहीं हो रहा था ....... उसी अहसास हो रहा था की दूसरों की रेलगिओं और मुकदस चीज़ों की रेस्पेक्ट ज़रूर करनी चाहिए ...... और यह तो उसकी अपनी रेलगिओं न्य भी उसी सिखाया था ......

महीन गणेश जी की मूर्ती को साफ़ क्र रही थी की विनोद चाय बना की लय आया ........ उसनी महीन को वह सुब कृत्य होय देखा तो मुस्करा की बोलै .......

विनोद ........ क्या बातें हो रही हैं गणेश जी की साथ ....

महीन चूँकि ..... और वह सी हैट की विनोद की तरफ आती होइ बोली ...... कुछ नहीं ...... बस साफ़ क्र रही थी मैं .............. महीन मुस्करा की बोली ........ सॉरी अगर आप को बुरा लगा तो ........

विनोद मुस्कराया .......... आर्य नहीं नहीं ....... ऐसी कोई बात नहीं है ........ आप जो चाहो क्र सकती हो ............

महीन मुस्कराई ........ और फिर दोनों बेथ क्र चाय पीने लगी .........

चाय पीनी की बाद महीन उठ क्र अपनी कमरे मैं चली गए और विनोद कप लय क्र किचन मैं ............ महीन न्य अपनी रूम सी अपनी कपड़े लय और बाथरूम की तरफ जांय लगी ........ विनोद भी किचन सी निकला और महीन को बाथरूम की तरफ जाती होय देखा ...... दोनों की नज़रें मिलीं ....... और महीन थोड़ा सा शर्मा गए ........ और फिर बाथरूम मैं चली गए ............
 
महीन न्य विनोद की पहनी होइ शर्ट उतारी और उसी लौंडरी बकेट की ऊपर रख दया .......... फिर महीन न्य अपना ट्रॉउज़र भी उतरा और उसी वहीँ पर विनोद की शर्ट की ऊपर रख दया .......... और आंय की सामन्य नंगी खरी हो कर अपनी बाल खोलनी लगी ....... आंय मैं उसकी नज़र अपनी पिच्य बकेट की ऊपर रखी होय कपड़ों पी पारी ....... विनोद की शर्ट और उसका ट्रॉउज़र एक साथ hi पारी होय थय .......... उसी देख क्र खुद सी hi महीन की होंठों पी मुस्कान सी फैल गए ...... उसनी अपनी ख्यालों को झटका और फिर अपनी कपड़े वाशिंग मशीन मैं डालनी की लय चली गए ............

महीन न्य पानी की बकेट मैं भिगोय होय अपनी कपड़े निकाली और उसी मशीन मैं दाल दया ........ और अपना ट्रॉउज़र भी ....... फिर उसी ख्याल आया की उसनी विनोद की शर्ट इस्तमाल की है तो क्यों न वह उसी भी धो दी ........... उसनी विनोद की शर्ट भी अपनी कपड़ों की साथ hi मशीन मैं दाल दी .....और वापिस पलटी नहानी की लय ........... अचानक उसनी कुछ सोचा ...... उसी विनोद की बकेट मैं पारी होय उसकी बाक़ी कपड़ों का ख्याल आया ........ उसी ाचा नहीं लगा की वह विनोद की शर्ट तो धू रही है लकिन उसकी बाक़ी कपड़ों को नहीं ..........

महीन न्य एहि सोच क्र बकेट खोली और उस मैं पारी होइ विनोद की पंत उठा ली ...... पंत उठाई तो नीची विनोद का अंडरवियर भी पारा होआ था ...... महीन अब समझ नहीं पा रही थी की क्या क्रय ......... महीन न्य विनोद की पंत वाशिंग मशीन मैं डाली और फिर विनोद का पहना होआ अंडरवियर उठा लय .......... उसी थोड़ा सा फैला की देखा ........... वह आसिफ की कपड़े और अंडरवियर भी धोती रही थी .......... इस लय उसी लगा की कुछ ऐसी ग़लत बात नहीं है ........ महीन को विनोद की अंडर वियर सी कुछ स्मेल सी आई ........... महीन को पता नहीं क्या होआ की उसनी ाहसिता सी विनोद की अंडर वियर को सूंघ लय ........... विनोद की जिसम की मरदाना महक महीन की जिसम मैं दाखिल हो गए ............ एक लम्बी सांस की साथ ............ महीन की आंखें थोड़ी देर की लय बंद होइन ......... और फिर उसनी जल्दी सी विनोद का अंडरवियर भी वाशिंग की लय दाल दया .............. अब महीन की कपड़े, उसकी ब्रा, पंतय और विनोद की पंत शर्ट और अंडरवियर एक साथ hi धूल रही थय ...........

महीन मशीन को चला क्र वापिस आंय की तरफ आगये ............ वहीँ साथ hi बानी होइ वाशरूम कैबिनेट खोली ....... उस मैं एक शेल्फ पर विनोद का शेविंग किट रखा होआ था ........ जो वह अपनी छोटी छोटी सी दाढ़ी को ट्रिम करनी की लय इस्तमाल करता था ....... साथ hi उसका शैम्पू रखा था ...... और उस सी नीची की शेल्फ मैं महीन की हेयर रेम्योविंग क्रीम, शैम्पू और बॉडी लोशन वग़ैरा पारी थय .......... महीन की नज़र अपनी हेयर रेम्योविंग क्रीम पी पारी तो वह मुस्करा दी ........... इस ख्याल सी की विनोद भी इसी देखता हो गए की मैं यह क्रीम उसे करती हों अपनी बालों की सफाई की लय .......... ........... फिर महीन नहानी लगी ........... बाल शैम्पू क्र की और ाच्य सी नहा क्र महीन न्य अपना जिसम साफ़ क्या और अपनी धूलि होइ साथ लाइ होइ वाइट ब्रा पहनी फिर पिंक कलर की शर्ट और ब्लैक ट्रॉउज़र पहन लय और बाथरूम सी बहार आगये ..........

बाथरूम सी निकल क्र लाउन्ज मैं आई तो विनोद बैठा होआ टीवी देख रहा था ....... महीन की बाथरूम सी निकलती hi उसकी नज़र महीन पी पारी ........ जो गीले बलून की साथ वाशरूम सी निकली थी ....... नही होइ ....... धूलि होइ ..... निखरी होइ ............... इसतरह नहानी की बाद गीले बलून की साथ विनोद की सामन्य अन्य का महीन का यह पहली मौका था ........... उसकी चेहरी पर एक शर्मीली सी मुस्कराहट फैल गए ........... और वह अपनी बैडरूम की तरफ बढ़ गए ..........

कुछ देर की बाद महीन अपनी बाल ब्रश क्र की और हल्का सा मेक उप क्र की रूम सी बहार आगये ........ कमरे सी बहार आती hi महीन को बुहत hi अछि सी खुसबू पूरी घर मैं फैली होइ महसूस होइ ........ वह हैरान थी की यह कहाँ सी खुसबू आ रही है ....... फिर उसकी नज़र विनोद पी पारी ............ विनोद गणेश जी की मूर्ती की पास hi खरा है ......... महीन उसकी क़रीब गए तो देखा की विनोद न्य एक छोटा सा कपड़ा बिहसा की उसकी ऊपर मूर्ती रख दी थी ...... और उसी की पास hi एक पीतल की छोटी सी घंटी, एक चांदी की कटोरी, एक चांदी की पार्षद वाली थाली, एक पीतल का दिया और एक अगर बाटी स्टैंड रखा होआ था ........ पास hi अगर बाटी का बॉक्स रखा था ........ वह दिया जल रहा था ........... और साथ hi 3 अगर बता स्टैंड मैं जल रही थीं जिनकी खुसबू पूरी घर मैं फैली होइ थी ...... परशाद की थाली मैं 2 लाडू और कुछ गैंदी की फूल और वह जलता होआ दिया राख्या होआ था ........ चाँद फूल गणेश जी की मूर्ती की पास भी पारी होय थय .......... और विनोद आंखें बंद कए ....... हाथ जोरी होय अपनी पूजा मैं मसरूफ था ........

महीन कुछ देर तक उसी देखती रही ........ उसकी पास खरी होइ ........... उसी यह सुब कुछ लग तो अजीब रहा था ....... क्यों की यह सुब उसनी कभी इतना क़रीब सी नहीं देखा था ....... और अपनी घर की ...... और अपनी अब्बू की स्ट्रिक्ट मज़हबी होनी की वजह सी वह इन सुब बातों सी दूर hi रहती थी ................ इसलय यह सुब उसी अपनी घर मैं मौजूद होना थोड़ा हज़म नहीं हो रहा था अभी ....... मगर वह जानती थी की विनोद भी उसी घर मैं रहता है तो वह भी अपनी मर्ज़ी का सुब कुछ करनी का हक़ रखता है .......... इसलय महीन चुप रही ............ और विनोद को देखनी लगी जो की होंठों मैं hi कुछ पढ़ रहा था ............

थोड़ी देर की बाद विनोद न्य आंखें खोलीं ...... वह आरती की थाली उठाई और उसी गणेश जी की मूर्ती की सामन्य घुमाया ..........कुछ परहत्य होय ........... और फिर पूजा पूरी क्र की ......... महीन को अपनी पास खरी होय देखा ............. तो मुस्करानी लगा ..............

विनोद ........ महीन ी होप यू विल नॉट मंद थिस आल .....

महीन मुस्कराई ........... नहीं नहीं ....... आप जैसी चाहो क्र सकती हो अपनी धरम की मुताबिक़ .......... वैसी यह सुब कुछ कब लाय ........... महीन न्य वहां पारी होइ पूजा की चीज़ों की तरफ इशारा कृत्य होय पुछा .....

विनोद मुस्कराया .......... आर्य यार यह सुब कुछ भी प्रिय न्य साथ hi भेजा है पैक क्र की ........... और यह सुब करनी को बोलै था ........

महीन मुस्कराई ...... अछि हैं सुब चीज़ें .......... जस्ट फस्किनटिंग ......... और अब यह सुब प्रिय को दिखा देना वह खुश हो जाय गई ........

विनोद बोलै ....... हाँ हाँ क्यों नहीं ........

फिर विनोद न्य पार्षद की थाली उठाई और महीन की तरफ बढ़ाई ........ महीन झिझक रही थी .......... उसी इनका परशाद खाना ठीक नहीं लग रहा था ..........

विनोद महीन की झिझक देख की बोलै ...... आर्य यार यह थोड़ा सा लाडू hi है न ........ और कुछ भी नहीं ........

महीन मुस्कराई ........ और विनोद का दिल रखनी की लय वह लाडू उठा लय ...... और बी दिली की साथ उसका एक छोटा सा बाईट लय ........... मीठा लाडू उसकी मुंह मैं घुला तो उस उसका टास्ते बुहत ाचा लगा .......

विनोद ........ कैसा है टास्ते लाडू का ....

महीन मुस्कराई ....... बुहत ाचा है ........... और दूसरा बाईट लय लय

और फिर वह वीर्य वीर्य पूरा खा गए ........... और विनोद को थैंक्स बोलै ....... विनोद भी मुस्कराया और दोनों वहां सी हैट क्र सोफे पी ाग्य .............. महीन को लग रहा था की उसनी एक लाइन क्रॉस की है ....... लकिन उसी कोई बुरा नहीं लग रहा था ...........

महीन बोली ........ अगर बाटी की खुसबू भी बुहत अछि है .........

विनोद ........ थैंक्स तुम को अछि लगी .......... वर्ण मैं तो दर रहा था की तुम बुरा hi न मान जाओ .......

महीन मुस्करा दी और बोली ......... अब कहानी का क्या करना है ........
 
विनोद ....... मेरा ख्याल है की आज कुछ बहार सी मंगवा लेती हैं .......... और क्रिकेट मैच भी लगनी वाला है इंडिया का तो वह देखती हैं बेथ क्र बजाय किचन मैं लगनी की ........... महीन को भी उसका आईडिया ठीक लगा ......... उसनी okay बोल दया ......... विनोद उठ क्र अपनी रूम मैं चला गया .......... अपना मोबाइल लय क्र कहानी का आर्डर करनी की लय ............ और महीन बाथरूम की तरफ चली गए मशीन सी कपड़े निकालनी की लय ..............

महीन न्य वाशिंग मशीन सी अपनी और विनोद की कपड़े निकाली और उनको लय क्र बाहर बालकनी मैं आगये ........... महीन न्य अपनी शर्ट, ट्रॉउज़र लटका डाई ........... फिर उसनी विनोद की पंत, शर्ट भी लटका दी तार पी ........ अपनी ब्रा, पंतय और विनोद का अंडरवियर उसनी एक छोटी हेंगर पी हैंग क्या और उसी भी वहीँ लटका दया .......... महीन वापिस जांय लगी तो उसकी नज़र लटकाय होय कपड़ों पी पारी ........... तो अपनी कपड़ों की साथ विनोद की लटके होय कपड़ों को देख क्र मुस्करानी लगी ......... अलग सा कॉम्बिनेशन लग रहा था उसी ............ जैसी कभी घर मैं उसकी कपड़ों की साथ आसिफ की कपड़े लटकी होती थय ............ महीन मुस्कराती होइ अंदर आगये ............ विनोद भी आ चूका होआ था ....... दोनों बेथ क्र मैच देखनी लगी ........

आद्य घंटी की बाद बेल्ल होइ तो विनोद न्य कहानी का पार्सल रिसीव क्या और ला की महीन को दया ........... महीन न्य कटिचें मैं जा की प्लेट्स मैं खाना निकला और टीवी लाउन्ज मैं लय आई ............ दिंनिंग टेबल पी कहानी की बजाय वह दोनों टीवी की सामन्य hi बेथ गए ....... एक hi सोफे पर .... थोड़ा फसली पर ....... और सामन्य टेबल पी खाना रख की कहानी लगी ..........

दोनों की नज़रें टीवी पर चल रही होय क्रिकेट मैच पर थीं ........ कोहली बैटिंग क्र रहा था ........ और बुहत ाचा खेल रहा था ........ दोनों खूब एन्जॉय क्र रही थय उसकी बैटिंग को .......... महीन भी पूरा साथ दी रही थी .......

विनोद ........ महीन मुझी नहीं पता था की तुमको भी क्रिकेट सी दिलचस्पी है ........

महीन मुस्कराई ........ आर्य कोण हो गए इंडिया मैं जैसी नहीं हो गई ........... महीन न्य राइस का एक चमच मुंह मैं डालती होय कहा .......... इतनी मैं कोहली न्य एक ज़ोर दार ऊंची शॉट लगाई और विनोद उछाल पारा शोर मचाती होय ..................... Chakkkaaaaaaaaaaaa ............

शॉट देख क्र महीन भी ज़ोर सी चीखी विनोद की साथ hi ............. चकककककककक ................. मगर उसकी मुंह का अलफ़ाज़ पूरा होनी सी पहली hi उसी खांसी का बोहत ज़ोर का दूर पर गया ............ खाना खाती होय ऐसी उचलण्य और ज़ोर सी नारा लगानी की वजह सी राइस का कोई दाना महीन की सांस की नाली मैं चला गया था ..............

महीन का तो सांस hi उलट गया ............ वह दोहरी होनी लगी .......... उसका चेहरी का रंग बदलनी लगा ................ विनोद जल्दी सी ाग्य बढ़ा .......... उसी कुछ और नहीं सूझा तो उसनी फौरन hi नीची को झुकी होइ महीन की बालों की छोटी सी पुनि को हटा की उसकी गर्दन मैं ाग्य की तरफ क्या और महीन की कमर को क्लियर क्र की कमर की ऊपर अपनी हाथ सी ज़ोर ज़ोर सी थप्पड़ मारना शुरू क्र दया ....... उसकी कमर को थपथपाती होय ....... 4, 5 बार उसनी महीन की कमर पी अपना डायन हाथ मारा ......... और बाईं हाथ सी उसनी महीन की कंधी को पकड़ा होआ था ......... महीन को या विनोद को कुछ अहसास नहीं था की क्या हो रहा है ..........

विनोद की ऐसी ज़ोर ज़ोर सी मारण्य सी महीन का सांस कुछ बेहतर होआ तो विंडो न्य सामन्य पारा होआ पानी का गिलास उठाया और महीन की कमर पी एक हाथ रखी होय दूसरी हाथ सी गिलास महीन की होंठों सी लगा दया .......... महीन न्य भी अपना हाथ गिलास पकड़े होय विनोद की हाथ पी रख दया और पानी पीनी लगी ........ ना महीन न्य गिलास अपनी हाथ मैं पकारण्य की कोशिश की और ना hi विनोद न्य गिलास छोरा ....... महीन की हालत की वजह सी ........

महीन न्य 2 घूँट पानी की लये और लम्बी लम्बी सांस लेंय लगी ........... विनोद का हाथ अभी भी महीन की कमर पी था ........... अब वह ाहसिता आहिस्ता महीन की कमर को सहला रहा था ......... उसी अपनी हाथ की नीची महीन की ब्रा का हुक फील होआ ....... और उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स ........ विनोद अपनी नज़रों को महीन की कमर पी लय जाय बिना नहीं रह सका .......... महीन की पिंक कलर की पलाइन शर्ट की नीची सी उसकी ब्रा की हुक्स और स्ट्रैप्स की मुकमल आउटलाइन दिख रही थी .......... विनोद दोबारा सी महीन की ब्रा की बेल्ट, हुक और स्ट्रैप्स को ....... उसकी कमर को सहलानी की बहानी हाथ फैरी बिना नहीं रह सका ........ महीन की जिसम पी हाथ फैरना उसी ाचा लग रहा था ......... पहला मौका था की उसनी महीन की जिसम को छूआ था ............ बुहत दिनों की बाद वह ऐसी किसी औरत की जिसम को छु रहा था ....... वह भी महीन जैसी खूबसूरत लड़की को ......... अपनी हाथ की नीची उसी महीन की जिसम की नरमी और चिकना पैन महसूस हो रहा था ............

थोड़ी सांस बेहतर होनी सी तबियत सम्भली तो महीन को भी अपनी जिसम पर विनोद की हाथों का लम्स महसूस होआ ........ उसकी जिसम मैं करंट सा दौड़नी लगा ........ अलग सा अहसास होनी लगा ......... विनोद की सख्त और भारी हाथ उसकी कमर को सहला रही थय ........... महीन न्य नज़रें उठा क्र विनोद की तरफ देखा ............ दोनों की नज़रें मिलीं ........

महीन वीर्य सी बोली ...... बस करें ....... अब ठीक हों मैं ......

विनोद न्य एक झटकी सी अपना हाथ महीन की कमर सी हटाया ....... ओह ी ऍम सॉरी ........

महीन शरमाई ............. इतस okay ........... थैंक्स फॉर योर कंसर्न एंड हेल्प ............ आप न हेल्प कृत्य तो शायद मैं मर hi जाती ..........

विनोद भी अब थोड़ा रिलैक्स करनी की लय मुस्कराया ....... ऐसी बातें नहीं बोलो आप .... थैंक्स गॉड तुम ठीक हो गए हो ...............

महीन भी मुस्कराई ........... और दोनों फिर सी खाना कहानी लगी ........ महीन का ध्यान अब मैच पी नहीं था ........ उसी अभी तक अपनी जिसम पर ......... अपनी कमर पर विनोद का हाथ रेंगता होआ महसूस हो रहा था ........... जिस सी उसकी जिसम मैं करंट की लहरें दौड़ रही थीं ...... आहिस्ता ाहसिता वह अपनी हालत को कण्ट्रोल करनी लगी .......... उसकी दिल मैं विनोद की लय कुछ नहीं था ........... मगर ज़िन्दगी मैं पहली बार आसिफ की इलावा किसी और मर्द न्य उसकी जिसम को ऐसी छूआ था तो ऐसी हालत होनी तो नेचुरल hi था न ............ और वह भी इतनी दिन तक आसिफ सी दूर रहंय की बाद .... खाना खा की महीन न्य बर्तन समेत्य और अपनी कमरे मैं चली गए ............. उसी हिम्मत नहीं हो रही थी विनोद की पास बेथनी की ................. वह अंदर आ की लेट गए ........... इसी सुब को सोचतंय लगी ......... उसी ाचा लगा था विनोद का उसकी इतनी फ़िक्र करना ................. और उसकी लय वह सुब कुछ करना उसकी हालत ठीक करनी की लय ............. एहि सोचती होय उसकी आँख लग गए ............

कुछ देर सोने की बाद महीन अपनी रूम सी बहार आई तो देखा की विनोद लाउन्ज मैं नहीं था ............. और सोफे की बैक पर उसकी सूखी होय कपड़े पारी होय थय ......... जो विनोद बहार सी उतार की लाया था .... जिन मैं उसकी शर्ट, ट्रॉउज़र, ब्रा और पंतय वहां पारी होय थय .............. महीन का दिल उछाल की हलक़ मैं आज्ञा ............. जब उसी अहसास होआ की विनोद उसकी कपड़े उठा की लाया है बाहिर सी ........ उसकी ब्रा और पंतय भी ........... उसी शर्म सी महसूस होनी लगी ..........

इतनी मैं विनोद किचन सी निकला उसकी हाथ मैं चाय की दो कप थय .......... .........

विनोद ...... उठ गए तुम महीन ........... अब कैसी तबियत है ........

महीन ........ ठीक हों अब मैं ........

विनोद ..... आर्य महीन तुम न्य मेरी कपड़े भी धू डाली ....... इस तकलीफ की क्या ज़रूरत थी ........ मैं खुद hi धू लेता ........

महीन मुस्कराई ........ तो क्या हो गया ........ मैं न्य आप की शर्ट भी तो पहनी थी न ............ दोनों हंसनी लगी ....... महीन न्य अपनी कपड़े अपनी क़रीब hi रखी सोफे पर ........ ब्रा और पंतय को कपड़ों की नीची रख दया ....... और वहीँ बेथ क्र चाय पीने लगी ..........

चाय पीते होय विनोद का मोबाइल रिंग करनी लगा ........ विनोद न्य फ़ोन उठाया और महीन सी बोलै ......

विनोद ........ प्रिय की कॉल है .........

महीन मुस्कराई ....... okay ..... तुम करो बात मैं रूम मैं जाती हों........

विनोद .... नहीं तुम बेथ क्र चाय पीओ ....... इतस okay ......

विनोद न्य कॉल अटेंड की ...... वीडियो कॉल थी ...... विनोद प्रिय सी बातें करनी लगा ........

अचानक प्रिय की आवाज़ सुनाई दी ........ आर्य वह मुझी तुम्हारी पिच्य गणेश जी की मूर्ती नज़र आ रही है ...... सजा ली है न तुम न्य ......

महीन प्रिय की बात सुन क्र मुस्करा पारी .......

विनोद भी मुस्कराया .... और बोलै हाँ हाँ ..... आओ तुमको दिखता हों ......

विनोद उठा और जा की गणेश जी की मूर्ती की सामन्य खरा हो गया ...... और वह पी सजाई होइ सुब चीज़ें उसी दिखानी लगा ......

प्रिय ... बुहत ाचा क्या है तुम न्य ......... इस सी तुम को गणेश जी की आशीर्वाद रही गई .... और हर काम मैं तुम्हारी सहायता करें गए ...... रोज़ सुबह उठ की पूउजा क्र लय करना .......... दिया और अगर बाटी जलाती रहना ....... जो तुम हर दफा hi भूल जाती हो ..........

विनोद न्य महीन की तरफ देखा ........ वह भी प्रिय की बात सुन की मुस्करानी लगी .......... विनोद भी मुस्करानी लगा ......

विनोद ..... ाचा बाबा ...... जला दया करों गए रोज़ hi .......... तुम फ़िक्र नहीं करो ........

महीन उठी और कप किचन मैं रख की अपनी कपड़े उठाय और विनोद को इशारा क्या की वह अपनी रूम मैं जा रही है ......... विनोद न्य भी आहिस्ता सी okay मैं सर हिला दया ............ और महीन न्य अपनी कमरे मैं जा की आहिस्ता सी दरवाज़ा बंद क्र लय ...... बिना कोई आवाज़ पैदा कए ........

फिर थोड़ी देर तक इधर उधर की बातें करनी की बाद कॉल एन्ड हो गए ....... और विनोद भी अपनी रूम मैं चला गया ......
 
अपडेट NO: 11

नेक्स्ट डे संडे था ........ महीन देर सी सो क्र उठी ........ घरी देखि तो 10 बज रही थय ........... महीन न्य जल्दी सी अपना नाईट ड्रेस चेंज क्र की अपनी कमीज और पजामा पहन लय ......... पजामा थोड़ा टाइट था ....... नीची लेग्स सी भी ........ और कमीज की लंघत भी ज़्यादा थी ....... महीन रूम सी निकली .... देखा तो बिलकुल शान्ति थी .......... विनोद अभी तक सो रहा था अपनी रूम मैं ........ महीन वाशरूम मैं गए ...... और वह सी फ़ारिग़ हो की निकली और किचन की तरफ चली गए ......... चाय बनानी की लय .........

महीन गुनगुनाती होय चाय बनानी लगी ..... अपनी और विनोद की लय ....... 2 कप चाय की लय पानी महीन न्य स्टोव पी रखा ...... और पति और चीनी की डब्बी निकाली ...... पति का बॉक्स खली था ....... नई बॉक्स कैबिनेट की ऊपर वाली शेल्फ पी रखा होआ था ...... जहाँ महीन का हाथ नहीं जा पा रहा था ............ महीन न्य एक कार्नर मैं रखा होआ छोटा सा स्टूल उठाया और उसी कप्बोर्ड की पास रख की गण गुनगुनाती होय अपना पाऊँ स्टूल पी रखा ....... और ऊपर चढनी लगी ........ उसकी नज़र चूल्ही पी रखी होय पानी पी गए साथ hi वह ऊपर को चढ़ी ......... लकिन पता नहीं कैसी उसकी लम्बी शर्ट का निचला हिस्सा स्टूल की किसी कील मैं फँस गया ........ और वह ऊपर चढनी की बजाय ........ धाराम की साथ नीची फर्श पी गिर पारी ........ उसकी मुंह सी एक तेज़ चीख की आवाज़ निकली जो पूरी घर मैं गूँज गए ....... स्टूल भी उलट गया था ... और उसकी शर्ट अभी भी उसी की कील मैं फँसी होइ थी ......... महीन बरी मुश्किल सी उठ क्र फर्श पर hi बेथ गए ...... उस सी उठा नहीं गया ..... क्यों की उसकी पाऊँ मैं शदीद दर्द हो रहा था .............. वह अपना पाऊँ पाकर की बेथ गए ..........

महीन की चीख सुन क्र विनोद की आँख खुल गए और वह अपनी रूम सी निकल क्र भागता होआ किचन मैं आया .......... उसनी सिर्फ एक शॉर्ट्स पहना होआ था जो उसकी हाफ तइस तक था ........ ऊपर उसनी कुछ भी नहीं पहना होआ था ....... ऑपेरी जिसम बिलकुल नंगा था उसका .......... किचन मैं महीन को नीची गिरा होआ देखा तो वह एकदम सी परेशां हो गया ........ और जल्दी सी महीन की तरफ बढ़ा ....... और उसकी पास बेथ गया ....... उसकी कंधी पी हाथ रखा ...........

विनोद ........ क्या होआ महीन ....... कैसी गिर गए ......

महीन अपनी पाऊँ को दबाती होइ बोली ...... आआअह्ह्ह्हह ........ उउउउउउउफ्फ्फ्फ़ ....... स्टूल सी नीची गिर गए ...........

विनोद ... ओह्ह्ह ..... ज़्यादा चोट तो नहीं लगी ....

विनोद न्य महीन की शर्ट की निचली हिस्से को जो की कील मैं फंसा होआ था अभी तक ...... और शर्ट भी पहात चुकी थी ....... उसी निकला ...... और स्टूल को हटा दया ....... महीन न्य उतनी की कोशिश की ..... मगर वह अपनी पाऊँ पर वज़न नहीं दाल सकीय .......... और जैसी hi पाऊँ रखा ज़मीन पर तो उसकी एक और चीख निकल गए तकलीफ सी .....

विनोद न्य फौरन hi महीन को पकड़ा ....... मैं हेल्प करता हों आप की ......

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ....... उसकी नज़र विनोद की नंगी जिसम पर थी ....... एक लम्हे की लय उसका जिसम कैंम्प सा गया ........ विनोद की नंगी जिसम को देख क्र ........... मगर विनोद इस वक़त सुच मैं फिकरमंद हो रहा था महीन की लय ................ उसनी अपना हाथ महीन की कमर मैं डाला ...... महीन का हाथ अपनी कंधी पर रखा ........... और उसी सहारा दी क्र उठानी लगा ........... महीन न्य भी अपनी तकलीफ की वजह सी अपने बाज़ू सी विनोद की कांद्य का सहारा लय ....... और विनोद की सहारी वह फर्श सी उठ गए ........

विनोद उसी सहरा दी क्र उसकी बैडरूम की तरफ लय जांय लगा ........ महीन का जिसम विनोद की नंगी जिसम की साथ चिपका होआ था ....... और वह अपने एक पाऊँ पर लंगड़ाती होइ ाग्य बढ़ रही थी ........... महीन का हाथ विनोद की नंगी कंधी पर था ..... उसी विनोद की जिसम की मज़बूती का पता चल रहा था ............ उसकी हाथ की नीची विनोद की शोल्डर की मज़बूत मसल्स फील हो रही थय .......... और विनोद की जिसम की गर्मी महीन की पतली सी कमीज सी उसकी जिसम मैं उतरती होइ महसूस हो रही थी ............. विनोद की जिसम की इतना क़रीब होनी की वजह सी महीन की अपनी हालत भी ख़राब हो रही थी .......... इतनी ारस्य की बाद एक मर्द की नंगी जिसम की साथ टच होना ....... उस पी असर क्र रहा था ..... महीन की बूब्स विनोद की जिसम सी चिपक रही थय ........ वह चाहती होय भी अपनी बूब्स को उसकी चेस्ट की साइड सी हटा नहीं पा रही थी ......... महीन की सांसें तेज़ हो रही थीं ..... उसकी दिल की धरकन बढ़ रही थी ............ एक मर्द की .... एक ग़ैर मर्द की जिसम की गर्मी जैसी उसकी अपनी गूरी चिकनी जिसम को जला रही थी ........

विनोद की हालत भी ऐसी hi थी ........ महीन का गरम और नरम मुलायम जिसम उसकी बहून की हिसार मैं था ........ उसी महीन की बूब्स का उभार भी महसूस होरहा था .......... जिस खूबसूरत लड़की को आज तक उसनी नहीं छूआ था ...... आज उसकी बहून की हिसार मई थी ......... उसका जिसम उसकी साथ चिपका होआ था ........ उसी खुद पी कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था ........ मगर वह खुद को कण्ट्रोल कए होय था .............

बरी मुश्किल सी विनोद महीन को उसकी बीएड तक लय आया और उसी बीएड पर बिठा दया ........... उसी वक़त एक बार फिर महीन की तकलीफ सी भरी होइ सिसकी निकल गए ........... विनोद न्य महीन की पाऊँ को उठा की बीएड पी रखा और उसी सीढ़ी हो क्र लैतनय को बोलै ......... महीन आहिस्ता सी सीढ़ी हो गए अपनी दोनों टांगें बीएड पी रख की ............... महीन को शर्म आ रही थी ऐसी विनोद की सामन्य लैतनय मैं ........ विनोद उसकी पैरों की पास hi बीएड की पास खरा था .........

विनोद ...... लाओ मैं देखता हों कितनी चोट लगी है ....... विनोद न्य अपना हाथ उसकी पाऊँ की तरफ बढ़ाया ......

महीन .......... नहीं नहीं ........ ठीक है ..... आप रहंय दो ........ महीन न्य जैसी hi अपना पेअर पिच्य खींचा तो फिर सी उसकी पेअर मैं तेज़ दर्द होआ और वह अपनी तकलीफ को नहीं छुपा सकीय .......

विनोद थोड़ा सख्त लहजी मैं बोलै ........ देखनी दो मुझी प्लीज ........ विनोद की लेहजी मैं सख्ती थी मगर उसकी साथ hi महीन की लय काफी फिक्रमंदी और केयर भी साफ़ महसूस हो रही थी ....... महीन अपना पाऊँ पिच्य न हटा सकीय ...........

विनोद न्य महीन की पाऊँ को अपनी हाथों मैं लय और उसी देखनी लगा ........ उस पी हाथ पहिरण्य लगा ...... यह देखनी की लय दर्द कहाँ हो रहा है ........ महीन की नज़रें विनोद की हाथों सी होती होइ उसकी चेहरी और फिर उसकी नंगी जिसम पी ागीण ............. महीन न्य पहली बार ाच्य सी और सामन्य सी विनोद को देखा ........ उसका ऊपरी जिसम नंगा था .......... मस्कुलर बॉडी ........ सांवला रंग .......... चेस्ट और बाज़ू की मज़बूत मसल्स ............. चौरा सीना ....... बलून सी भरा होआ ......... विनोद की काली काली निप्पल्स भी उसकी सीने की बलून मई छुपे दिख रही थय .. ........ उसका पेट बिलकुल सपाट ............ और नीची शॉर्ट्स ........ जो उसकी सिर्फ हाल्फ तइस तक थीं .......... उस सी नीची उसकी तइस नंगी थीं ....... ........ सॉलिड और मज़बूत तइस और टांगें .......... बलून सी भरी होइ .......... काले काले घूंगर्यालय बाल ............ महीन न्य पहली बार विनोद को ऐसी हालत मैं देखा था ....... नंगे जिसम को ........ इतनी क़रीब सी ......... उसकी जिसम को देख क्र महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी .......... उसकी जिसम की मज़बूती उसी आसिफ की याद दिला रही थी ........ ऐसा hi जिसम था आसिफ का भी ....... चौरा और मज़बूत........... मगर विनोद की जिसम पी बाल hi बाल थय .......... यही डिफ़्फेरनेके था विनोद और आसिफ की जिसम का .......... और एहि फरक महीन को दिख भी रहा था ...... उसी विनोद की सीने और टांगों पी इतनी बाल ाच्य लग रही थय ....... पहली बार उसी अहसास हो रहा था की सीने पर इतनी बाल मर्द की वजाहत को और उसकी मर्दानगी को कितना बढ़ा देती हैं ......... महीन विनोद की जिसम को देखनी मैं खोई होइ थी की उसकी हलकी सी चीख निकल गए ........

महीन ...... ooucchhhhhhhhhhhhhhh ..............

विनोद न्य उसकी पाऊँ को एक जगा सी दबाया था ........

विनोद न्य महीन को अपनी नंगी जिसम की तरफ देखती होय देख लय था .......... वह बोलै ...... सॉरी महीन ... सोया होआ था मैं ...... तुम्हारी चीख सुन क्र ऐसी hi भागना पारा ........... विनोद न्य अपनी नंगी जिसम की तरफ इशारा क्या .......
 
महीन न्य शर्मिंदाह हो कर अपनी नज़रें झुका लीन ........ महीन न्य अपनी पाऊँ की तरफ देखा ........... विनोद महीन की टाइट पजामी की पैंची को थोड़ा ऊपर करनी की कोशिश क्र रहा था मगर वह फंसा होआ था ........... और उसकी पिंडली पी भी दर्द हो रही थी ........

विनोद ..... महीन तुम अपना ड्रेस चेंज क्र लो ...... थोड़ा लूसे ड्रेस पहनो मैं अभी मूव लय क्र आता हों अपनी रूम सी ........... पाऊँ पी लगा डॉन गए तो जल्दी ठीक हो जाय गई यह मोच .........

महीन ......... ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह ...... नाआअह्ह्ह्हह्हह ..... रहनिययययययय दू आप ....... हो जाय गई ठीकककक '

विनोद थोड़ा गुस्से सी ........ ऐसी कैसी हो जाय गई ....... चेंज करो मैं आता हों ...........

विनोद न्य इधर उधर नज़र दौड़ाई ....... सोफे की बाज़ू पी उसी महीन का सुबह को उतरा होआ सिल्की नाईट ड्रेस नज़र आया ....... पजामा और फ्रंट बटन शार्ट शर्ट ........... विनोद न्य जल्दी सी उसी उठा की महीन की पास रखा ........... एहि पहन लो ........ इस मैं तुम इजी रहो गई .......... और मूव भी लग जाय गई आसानी सी ...........

महीन ............. लकिन विनोद .........

विनोद न्य महीन की कपड़े उसकी पास रखी और उसका जवाब लये बिना रूम सी निकल गया और अपनी पिच्य रूम का दरवाज़ा बंद क्र दया ........... महीन को कुछ समझ नहीं आ रही थी की क्या क्रय ............ लकिन उसी विनोद की बात ठीक लगी ............ उसनी बीएड पी बैठी बैठी बरी मुश्किल सी अपना टाइट ट्रॉउज़र उतरना शुरू क्या ....... उफ्फ्फ्फ़ ...... कितना टाइट है न कितना मुश्किल है इसी उतरना ........ विनोद भी तो ठीक hi कह रहा है ...... इस ट्रॉउज़र की साथ कैसी मूव लग सकती है ..... ........ और नाईट ड्रेस का लूसे पजामा पहन लय ....... टाइट ट्रॉउज़र को उतारती होय और लूसे पजामा पेहनतय होय भी उसी अपना पाऊँ हिलानी मैं बुहत तकलीफ हो रही थी .......... और फिर महीन न्य अपनी लम्बी शर्ट भी उतार दी जो की निचली हिस्से सी फटी होइ थी ....... कितनी लम्बी शर्ट है ....... इसी की वजह सी गिरी हों मैं ....... पर अब ऐसी कपड़े ना पहनों तो और क्या करों ......... विनोद की होती होय ......... महीन न्य अपनी शर्ट को उतर बीएड पी अपनी पैरों की तरफ रख दया ....... अब वह अपनी बीएड पर सिर्फ नाईट पजामा और ब्लैक ब्रा पहनी होय बैठी होइ थी ................ इतनी मैं दरवाज़ा नॉक होआ .......

महीन घबरा गए और जल्दी सी अपनी सिल्की शर्ट उठाई ............ 2 मिनट रुको विनोद प्लीज ............. अभी शर्ट नहीं पहनी मैं न्य ......... घबराहट मैं महीन सुब कुछ hi बोल गए ........ जिस पी उसी खुद भी फौरन hi ग़लती का अहसास होआ .............

महीन न्य जल्दी सी शर्ट पहनी और फिर विनोद को अंदर अन्य की लय आवाज़ दी ........ विनोद एंटर होआ तो महीन अपनी शर्ट का सेकंड लास्ट बटन बंद क्र रही थी ....... विनोद हाथ मई मूव लये होय अंदर आया ........ उसनी अब एक संदू बुनयान पहन ली होइ थी ...... ब्लैक कलर की ........... जो उसकी मज़बूत जिसम पी फँसी होइ थी ........ विनोद की चौड़े शोल्डर्स और बाज़ू नंगी थय ........ नीची अभी भी उसनी शॉर्ट्स hi पहनी होय थय ........... महीन न्य विनोद की जिसम पी एक नज़र डाली और फिर अपनी नज़रें झुका लीन ..........

विनोद भी महीन को देखनी लगा ......... नाईट ड्रेस की टाइट शर्ट उसकी जिसम पर थी ....... जिस मैं उसकी सीने की उभार साफ़ दिख रही थय .......... और भी प्रॉमिनेंट हो की ........ शर्ट उसकी जस्ट हिप्स तक पोहंच रही थी ......... गाला थोड़ा ओपन था .......... जिस सी उसकी बूब्स का क्लीवेज तो नहीं मगर उस सी ऊपर का खुला होआ सुफैद सीना दिख रहा था ......... और नीची उसनी लूसे सा पजामा पहना होआ था .......... टाइट सिल्की शर्ट मैं महीन की बूब्स पहली सी भी ज़्यादा उठी होय लग रही थय.............

विनोद वापिस आया और बीएड सी महीन की उतारी होय कपड़े उठा की उनको सोफे पी रख दया ........ उसी यह सुब कृत्य देख क्र महीन को थोड़ी शर्म भी आई .............. मगर वह चुप रही ............. विनोद बीएड सी नीची ..... महीन की पाऊँ की तरफ बेथ गया ........... महीन को यह ाचा नहीं लगा ....... विनोद का नीची बैठना ........... विनोद जैसी एक जवान और मज़बूत जिसम की भरपूर मर्द का ऐसी उसकी पैरों मैं बैठना .......... वह फौरन बोली ...........

महीन .......... नहीं विनोद ....... प्लीज नीची नहीं बैठो ............ ऐसी ाचा नहीं लगता .....

विनोद न्य okay मैं सर हिलाया ........ और खरा हो गया ........... महीन न्य अपनी पैरों को थोड़ा सा सिरका क्र विनोद को बीएड पर बेथनी की जगा दी ........... विनोद भी बीएड पर बेथ गया .......... महीन की बिलकुल पैरों मैं ............. महीन की पाऊँ पी हाथ रखा ...... और फिर मूव निकाल क्र महीन की पाऊँ पर लगानी लगा ........ आहिस्ता आहिस्ता .......
 
अपनी पैरों पर महीन को विनोद की हाथों का लम्स बुहत ाचा फील हो रहा था .... उसकी जिसम मैं एक करंट सा दौड़ रहा था जैसी ......

विनोद ....... यह सुब कैसी होआ था ........ कैसी गिर गए स्टूल सी .....

महीन आहिस्ता सी बोली ...... वह शर्ट स्टूल की कील मैं फँस गए थी जिसकी वजह सी नीची गिर गए .............

विनोद ........... हम्म्म .......... महीन मंद न करना लकिन तुम कापरी भी तो ऐसी hi पहनती हो न घर मैं भी तो फिर गिरना hi है न ........... ात लीस्ट घर मैं तो थोड़ी कम्फर्टेबले कपड़े पहन न्य छाए ............. जैसी अब पहनी होय हैं ........

महीन नज़रें झुका क्र ....... हम्म्म.....

विनोद ....... तुम इंडिया मैं भी ऐसी hi कपड़े पहनती थी घर मैं ......

महीन थोड़ा शर्माती होइ ........ नहीं अपनी घर पी तो यही शर्ट और पजामा होता था ऑफिस सी आ की ........ लकिन तुमको तो पता hi है की यहाँ की सिचुएशन ...........

विनोद ....... यहाँ की सिचुएशन को क्या हो गया है .......... और इन कपड़ों को ऐसा क्या है जो तुम इनको घर मैं नहीं पहन सकती ............ तुम्हारी वजह सी hi मुझी भी रिज़र्व टाइप की ड्रेसेस hi पहन न्य पार्टी हैं घर पी ......

विनोद की बात पी महीन हंस पारी .....

महीन न्य अपनी नज़रें झुका लीन ...... और खामोशी सी विनोद की हाथों को देखनी लगी ........ विनोद की भारी चौराय हाथों मई महीन का गोरा गोरा सुफैद नाज़ुक पाऊँ था ........... उसी विनोद की हाथों की सख्ती महसूस हो रही थी ........... उसकी हाथों का खुर्दरा पैन उसी ाचा लग रहा था ............ विनोद की सांवले हाथों मैं उसी अपनी गूरी गूरी पेअर अलग hi नज़ारा दी रही थय .......... विनोद की रंगत आसिफ की निस्बत थोड़ी सांवली थी ...........

महीन की देखती होय hi विनोद न्य खुद सी hi महीन की पाजामे की खुले पैंची को थोड़ा ऊपर की तरफ सिरकाया ........... उसकी घुटनी की ऊपर खींचती होय ...... जिस सी महीन की पूरी गोरी गोरी चिकनी पिंडली और सुफैद घुटना नंगा हो गया ......... महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ..... ऐसा पहली बार था की उसकी जिसम का कोई हिस्सा इस तरह किसी ग़ैर मर्द की ाग्य खुला होआ था.... नंगा होआ था ........ विनोद न्य आहिस्ता सी महीन की मुलायम पिंडली पी अपना हाथ फैरा ....... उसी आहिस्ता ाहसिता सहलानी लगा ........... विनोद की हाथ महीन की चिकनी पिंडली पी फिसल रही थय ........... ............ फिर विनोद न्य थोड़ी मूव लय कर महीन की पिंडली पी लगाई ..... और उसकी पिंडली का मस्सगे करनी लगा ........... थोड़ी तकलीफ और थोड़ी मिलनी वाली रहत की साथ महीन की आंखें बंद होनी लगीं ................. उसकी मुंह सी हलकी सी सिसकारी निकल गए ........

महीन .......... ssssssssssssssss ................

विनोद बोलै ........... पैन है यहाँ भी ....... ??

महीन न्य ाहसिता सी सर हिला दया ........ मूव की वजह सी विनोद का हाथ अब और बी फिसल रहा था महीन की पिंडली पर ........ किसी ग़ैर मर्द का हाथ पहली बार उसकी जिसम पर लग रहा था ........ महीन की आंखें बंद थीं ...... और उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं ....... उसकी सीने की उभार उसकी तेज़ साँसों की साथ ऊपर नीची को हो रही थय ........ जिन पर विनोद की नज़र थी .............. उसी महीन की चेहरी की एक्सप्रेशंस साफ़ नज़र आ रही थय ...... मगर वह अपनी लिमिट को क्रॉस नहीं क्र रहा था ..........

विनोद महीन की पिंडली पी मूव लगाता रहा ....... मगर उसका हाथ ठीक सी नहीं पर रहा था ....... उसनी महीन की पाऊँ को फैलाया और उसका पाऊँ अपनी थिगह पी रख दया ....... और अब महीन की पिंडली की मालिश करनी लगा हल्की हल्की दबाओ की साथ ............ महीन का गोरा गोरा पाऊँ अब विनोद की नंगी थिगह पी था ....... उसी विनोद की थिगह की बाल और मसल्स अपनी पाऊँ की नीची महसूस हो रही थय ............. विनोद की जिसम को अपनी इतना क़रीब पा कर ....... अपनी जिसम पी उसकी हाथों की मस्सगे और उसकी जिसम की लमस सी महीन की दिल की धरकन उसकी कण्ट्रोल सी बहार हो रही थी ............. उसी अहसास होआ की आसिफ की इलावा किसी ग़ैर मर्द की लय कुछ फील करना ठीक नहीं है .......... वह अपनी हालत को कण्ट्रोल करती होइ आहिस्ता सी बोली ........

महीन ...... विनोद बस करो ........... काफी है यह

विनोद न्य महीन की पाऊँ को वापिस बीएड पी रखा और बीएड सी खरा हो गया और उसी बोलै ....... महीन इसकी पैंची को ऐसी ऊपर hi रखना ..... वर्ण साड़ी ऑइंटमेंट कपड़ों को लग जाय गई और कोई फ़ायदा नहीं हो गए ........

महीन हाँ मैं सर हिलाया और वीर्य सी बोली ........ थैंक्स विनोद .......

विनोद मुस्कराया ...... तुम रेस्ट करो मैं तुम्हारी लये दूध गरम क्र की लाता हों .......

महीन जल्दी सी बोली ........ नहीं नहीं ......... विनोद प्लीज रहंय दो ..........

विनोद थोड़ा नक़ली गुस्सा दिखता होआ बोलै .......... जस्ट कीप किते वर्ण अब तुम मुझ सी ठीक ठाक दांत खाओ गई देख लेना .........

विनोद की बात पर महीन हंस पारी ........ okay okay बॉस ........

विनोद भी हँसता होआ महीन की बैडरूम सी बहार चला गया .......

थोड़ी देर मैं विनोद महीन की लय गरम दूध मैं हल्दी दाल की लाया ....... और अपनी लये चाय का कप .............

महीन को एक पैन किलर खिलाई ....... और उसी दूध का कप पकड़ा की खुद भी वहीँ उसकी पास hi सोफे पर बेथ की चाय पीनी लगा ........

हल्दी वाला दूध देख क्र महीने नाक मुंह चढ़ानी लगी ..... उफ्फ्फ्फ़ ोोू मैं यह नहीं पी सकती प्लीज विनोद ............. महीन विनोद को नखरा दिखा की बोली .....

विनोद ..... आर्य चुप क्र की पी लो ..... जल्दी ठीक हो जाय गई इस सी तबियत ........ वर्ण सुबह ऑफिस भी नहीं जा सको गई ........

महीन आहिस्ता ाहसिता दूध सिप करनी लगी ..... वह बीएड की बैक सी कमर लगा की बैठी होइ थी ......... और उसका पजामा अभी तक उसकी घुटनो तक ऊपर था ........... और विनोद भी अपनी चाय पीती होय उस सी बातें करता रहा ......... उसकी नज़रें भी बार बार महीन की नंगी गोरी पिंडलों पी जा रही थी ........ जो कुछ hi देर पहली उसकी हाथ मैं थीं ......... जिनका वह मस्सगे क्र रहा था ......... सहला रहा था ....... ..... कुछ देर की बाद विनोद न्य महीन को नाश्ता भी उसकी बीएड पर hi ला क्र दया ........ महीन विनोद की इतना ख्याल रखनी और इतनी केयर करनी सी बुहत इम्प्रेस हो रही थी ........ उसी थोड़ी शर्म भी आ रही थी ....... मगर ाचा भी लग रहा था की इस दूसरी देश मैं कोई तो है जो उसका ख्याल रख रहा है इतना .......... उसी विनोद की यह बात भी अछि लग रही थी की विनोद न्य अभी तक उसकी हालत का कोई ग़लत फ़ायदा उठानी की कोई कोशिश नहीं की थी ............ इस सी महीन की नज़रों मैं विनोद की इज़्ज़त और भी बढ़ गए थी ............ नाश्ता करनी की बाद विनोद न्य महीन को रूम मैं hi आराम करनी को बोलै और खुद उसकी रूम सी बहार जांय की लय दूर की तरफ बढ़ा ............ महीन उसी जाता होआ देखनी लगी .......... उसकी नज़रें विनोद की चौड़ी कमर मज़बूत जिसम .......... और नीची बलून सी भरी होइ टांगों पर थीं ....... जो अभी भी नंगी थीं ............ क्यों की विनोद न्य अभी भी सिर्फ शॉर्ट्स और संदू बुनयान पहनी होइ थी ....... महीन उसी जाता होआ देख क्र मुस्करा दी .......

विनोद दरवाज़ी की पास रुका और पिच्य मुद की महीन सी बोलै ....... बीएड सी उतरण्य की कोई ज़रूरत नहीं है ........... अभी पाऊँ पी बिलकुल भी वज़न नहीं डालना ....... कोई भी काम हो मुझी आवाज़ दी देना प्लीज ........... दरवाज़ा मैं थोड़ा सा खुला चोर की जा रहा हों .........

महीन न्य मुस्करा की हाँ मैं सर हिला दया ........ और उसी एक बार फिर थैंक्स बोलै ........... और विनोद मुस्कराता होआ रूम सी बहार चला गया ....... थोड़ी देर मैं महीन की भी आँख लग गए ..........
 
अपडेट NO: 12

2 पं की क़रीब महीन की आँख खुली ........ उसी अपनी पाऊँ की तकलीफ मैं कमी महसूस होइ ....... उसी बाथरूम मैं जांय की ज़रूरत लगी ........ महीन न्य आहिस्ता सी अपनी पाऊँ बीएड सी नीची उतारी और एक पाऊँ पर थोड़ा लंगड़ाती होइ दरवाज़ी की तरफ बरही ........ मगर उस सी थोड़ी दूर भी नहीं चल की जाया गया ........ और वह सोफे पर बेथ गए .......... oochhhhhhhhhhh ........... उउउउउउफफ्फ्फ अभी भी पैन है ......... अब क्या करों बुलाऊँ विनोद को ....... पर उस सी कहौं गई क्या मैं .......

इतनी मैं महीन की बैडरूम मैं होइ हलचल की आवाज़ सुन क्र विनोद जो की लाउन्ज मैं hi बैठा था जल्दी सी उठ क्र दरवाज़ी पर आया ........ और दरवाज़ा नॉक क्र खोला और अंदर आज्ञा ...... महीन को बीएड की बजाय सोफे पर बैठा होआ देख क्र थोड़ा गुस्सा कृत्य होय उस सी वहां अन्य की वजह पूछनी लगा ........

महीन थोड़ी शरमाई ...... झिझकी .......... woooooooooo ..... विनोदड़ड्ढ ..... वोओओओओओ .... मुज्झी ..... वाशरूम ......

विनोद तेज़ लेहजी मैं बोलै ....... हाँ तो फिर क्या है .... मुझी कह देती .... मैं चोर देता वह तक ............ जो कहता हों वह मानती नहीं हो तुम मेरी बात ............

महीन ाहसिता सी बोली .......... सॉरी विनोद ........

विनोद न्य ाग्य बढ़ क्र महीन की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ........ महीन न्य आहिस्ता सी अपना नाज़ुक सा हाथ विनोद की सख्त हाथ मैं दया ....... और विनोद न्य उसी खरा क्र दया ........... फिर महीन का हाथ पाकर की अपनी कंधी पर डाला .......... और अपना हाथ उसकी कमर मैं दाल लय ...... महीन एक बार फिर उसकी इतना क़रीब अन्य की वजह सी ब्लश करनी लगी .......... उसका जिसम फिर सी कंम्पनी लगा .......... दिल की धरकन तेज़ होनी लगी ............. वह एक बार फिर सी पहली की तरह विनोद की बहून मैं थी .......... मगर इस बार उसका जिसम नंगा नहीं था .......... बल्कि उसनी एक टी शर्ट पहनी होइ थी ............ मगर उसकी बावजूद भी महीन को विनोद की जिसम की गर्मी महसूस हो रही थी ............ विनोद आहिस्ता आहिस्ता महीन को सहारा देता होआ उसकी बैडरूम सी बहार आया ........ और उसी बाथरूम की दरवाज़ी तक लय आया ....... महीन उसकी जिसम की साथ चिपकी होइ थी ..........

बैठूं की दरवाज़ी पर पोहंच क्र विनोद न्य बाथरूम का दरवाज़ा खोला ...... और उसी लय कर अंदर दाखिल होनी लगा .......... महीन झिझकी और रुक गए ............. विनोद अब मैं चली जाऊँ गई ........

विनोद ....... नहीं मैं तुमको टॉयलेट तक चोर देता हों ........ और फिर फ़ारिग़ हो क्र तुम मुझी आवाज़ दी देना ........... और खबरदार जो एक क़दम भी बिना सहारे की उठाया तो ........

महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो रहा था ......... मगर वह विनोद की सहरी लरखरा की चलती होइ बाथरूम मैं दाखिल हो गए .......... और विनोद न्य उसी टॉयलेट सीट तक छोरा और दरवाज़ा बंद क्र की बहार आज्ञा ..........

बाथरूम का दरवाज़ा बंद था ....... मगर लॉक नहीं था ............ और यह बात दोनों को मालूम थी ............. महीन न्य दरवाज़ी की तरफ देखा ...... और झिझकत होय अपना पजामा नीची खिसकाया ....... और कमोड पी बेथ गए .......... वह बैठी विनोद की बारी मैं सोचनी लगी .... जो कुछ हो रहा था उस सुब की बारी मैं .............

थोड़ी देर की बाद फ़ारिग़ हो क्र महीन उठी ...... और अपना पजामा ऊपर क्या ........ टॉयलेट को फ्लश क्या ........... तो उसकी आवाज़ सुन क्र विनोद न्य दरवाज़ा नॉक क्र दया ...........

महीन न्य एक लम्बी सांस ली .......... और उसी आवाज़ दी ........ विनोद ........... वह उसी पूरा भी ना बोल सकीय .... बाथरूम मैं अंदर अन्य की लय .......

विनोद बाथरूम का दरवाज़ा खोल क्र अंदर आज्ञा ...... और महीन की तरफ बढ़ा ....... महीन उसको बाथरूम मई अपनी तरफ आता होआ देख फिर शर्मा गए .... और नज़रें नीची क्र लीन ......... विनोद न्य महीन को फिर सी सहारा दी क्र वाश बसों की क़रीब लय गया .......... महीन न्य मुंह हाथ धोया और फिर विनोद की सहारी बाथरूम सी बहार आगये ......... विनोद उसी बैडरूम मैं लय जांय लगा तो बोली ......

महीन ...... विनोद ..... नहीं अब अंदर नहीं ...... यहीं बैठूँ गई मैं .....

विनोद न्य okay बोल क्र उसी लय जा क्र सोफे पर बैठाया .......अपनी रूम सी एक सरहाना ला क्र सोफे की एआरएम की साथ लगा की रखा ....... और महीन को सहारा दी क्र उसकी साथ टेक लगवाई ....... और उसका पाऊँ सोफे की ऊपर क्र दया ....... ताकि वह कम्फर्टेबले रही .............

महीन उसी मुस्करा क्र देख रही थी ............ और फिर सी उसका थैंक्स बोलै ............

विनोद ..... अब क्या खाना है तुम न्य ....... वही मंगवा लेती हैं .....

महीन ...... कुछ भी मंगवा लो ........

विनोद न्य फ़ूड आर्डर की और फिर दोनों न्य वहीँ लाउन्ज मैं hi खाना खाया ........... और फिर बेथ क्र मूवी देखनी लगी ............ एक कॉमेडी मूवी ................. महीन काफी हद तक अब विनोद की साथ रिलैक्स फील क्र रही थी ........... उसी विनोद की साथ रहना ाचा लग रहा था .......... उसकी झिझक ख़तम हो रही थी ............ और विनोद पी उसकी कॉन्फिडेंस मैं इज़ाफ़ा हो रहा था ........ उसकी इज़्ज़त बरहनी की साथ ........

खाना कहानी की बाद विनोद दोबारा सी मूव लय आया ..... लाओ मैं अब दोबारा लगा देता हों ऑइंटमेंट ताकि जल्दी ठीक हो जाय ...... महीन न्य रेसिस्ट क्या मगर विनोद नहीं माना और आखिर मुस्कराती होय महीन को उसकी बात मान नई hi पारी .........

विनोद सोफे पर बेथ गया ...... महीन न्य शर्माती होय अपना पाऊँ उसकी ाग्य क्र दया ........

महीन ाहसिता सी बोली ...... विनोद यह ाचा नहीं लगता न .... की आप ऐसी यह सुब क्र रही हो .......

विनोद मुस्कराया ....... आर्य इस मैं बुरा लगनी वाली क्या बात है ....... जब मुझी चोट लगी गई तो तुम मेरी पाऊँ पी लगा देना बस ........

महीन हंस पारी ....... विनोद न्य उसका पाऊँ अपनी सामन्य क्या और उसकी पाजामे का पइंचा ऊपर को सिरकाया ........ साड़ी ऑइंटमेंट उसकी पजामी की कपड़े को लग चुकी होइ थी ..........

विनोद .... ओह no .... सुब बेकार गया है ..... साड़ी ऑइंटमेंट तो कपड़ों पर लग गए है ...... इसी लय कोई फ़ायदा नहीं होआ इसी लगानी का .... और इसी लये अभी तक पैन मौजूद है ......

महीन भी अपनी पैरों की तरफ देख रही थी ......... उसी भी विनोद की बात ठीक लग रही थी .....

महीन ....... तो फिर अब ........

विनोद ........ हम्म्म ....... महीन तुम्हारी पास शॉर्ट्स हों गए तुम वह पहन लो .....

महीन घबरा की बोली ..... नहीं विनोद मेरी पास तो कोई शॉर्ट्स नहीं हैं ...... ना मैं न्य कभी पहनी हैं .....

विनोद .... उफ्फ्फ होऊ ..... रुको ज़रा ........ यह कह क्र विनोद उठ की अपनी रूम मैं गया और थोड़ी देर मई अपना एक शॉर्ट्स उठा लाया ......

विनोद ..... लो इसी पहन लो तुम .....

महीन हैरानी सी ........ यह ..... मगर विनोद मैं कैसी ..... यह ... शॉर्ट्स .......

विनोद ..... आर्य यार इस मैं क्या इशू है ....... अभी भी तो आप की लेग्स ओपन hi हैं न जिस पी मूव लगानी है ....... और यह शॉर्ट्स भी तुम्हारी नीज की ऊपर तक कवर करें गई ......... इसलय don't थिंक एंड हेरे इस no इशू ........

महीन घबराती होइ ........ लकिन विनोदद ..........

विनोद उसकी पास अपना शॉर्ट्स रखती होय बोलै ..... बस तुम इसी पहनो ...... मैं अपनी रूम मई जा रहा हों ....... तुम यहीं पी चेंज क्र लो और फिर मुझी आवाज़ दी देना ......... okay ......

महीन न्य ब्लश कृत्य होय हाँ मई सर हिला दया ....... विनोद की ज़िद्द की ाग्य उसकी पास मान न्य की इलावा कोई ऑप्शन भी तो नहीं थी न .........

विनोद अपनी रूम मैं चला गया और दरवाज़ा बंद क्र लय ......... महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी ........... उसी अजीब लग रहा था यह सुब ....... लकिन फिर उसनी विनोद की बैडरूम की दूर को देखा ..... और सोफे पर बैठी बैठी hi अपनी नाईट सूट का पजामा नीची सिरका दया .......... और उसी उतार की वहीँ सोफे पर रख दया ....... महीन न्य नीची सी पंतय तो पहनी hi नहीं थी.... महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो रहा था ..... इस तरह सी घर की टीवी लाउन्ज मई उसकी अपना पजामा उतरण्य का पहला मौका था ...... मगर उस न्य जल्दी सी विनोद का लाया होआ उसका शॉर्ट्स पहन लय ...... वह काफी ढीला ढाला था ...... और महीन की नाज़ुक जिसम पर काफी खुला भी था ..... मगर उसकी नीज तक जा रहा था ....... नीज सी ऊपर उसकी तइस कवर्ड थीं ........ इस सी महीन को तसली होइ की नीज सी नीची तो विनोद पहली भी मस्सगे क्र चूका होआ है .......... महीन न्य विनोद का शॉर्ट्स पहन क्र अपनी शर्ट को फिर सी एडजस्ट क्या ...... जो की उसकी हिप्स तक आ रही थी ...... और फिर विनोद को आवाज़ दी दी ........
 
विनोद अपनी बैडरूम सी बहार आया ...... उस पर नज़र पार्टी hi महीन का चेहरा शर्म सी सुराख़ हो गया ....... मगर विनोद न्य बिलकुल hi कासुअल अंदाज़ मई महीन की पैरों की पास रखा होआ उसका पजामा उठा क्र दूसरी सोफे पर रख दया ...... और सोफे पर बेथ क्र महीन की पाऊँ पर मूव लगानी लगा ........

इतनी मैं टेबल पर रखा होआ महीन का मोबाइल बजनी लगा ........ महीन का हाथ दूर था तो विनोद को hi उठाना पारा ..... विनोद न्य मोबाइल उठाया तो देखा की आसिफ की वीडियो कॉल थी ........

विनोद न्य मोबाइल महीन की तरफ बढ़ाया और बोलै ........ तुम्हारी पति की कॉल है .........

महीन न्य ब्लश कृत्य होय विनोद सी फ़ोन लय विनोद की तरफ देखनी लगी ....... जैसी पूछ रही हो की वह अब क्या क्रय ........

विनोद बोलै ....... तुम कॉल अटेंड क्र लो .... मैं बस थोड़ा सा काम है यह ख़तम क्र की उठ जाऊँ गए .......

महीन न्य okay मैं सर हिलाया और आसिफ की कॉल अटेंड क्र ली ........ लाउन्ज मई आसिफ की आवाज़ गूंजनी लगी ......... और मोबाइल की सामन्य महीन अपनी हस्बैंड सी वीडियो पर बात करनी लगी ...... ..... और मोबाइल की पिच्य विनोद बैठा था जिसकी सामन्य महीन की टांगें नंगी थीं ....... और वह महीन की पेअर को अपनी हाथों मैं लये उसका मस्सगे क्र रहा था .................. महीन का चेहरा इस सुब सिनेरियो सी ब्लश क्र रहा था ........ जैसी आसिफ न्य भी देख लय ......

आसिफ ........ महीन क्या बात है तुम बुहत ब्लश क्र रही हो ..

महीन घबरा गए .... एक नज़र विनोद की तरफ देखा .... विनोद की नज़र सी उसकी नज़र मिली .... विनोद भी हल्का सा मुस्करा दया ....... महीन जल्दी सी बोली ...... नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है ........

महीन विनोद सी घर की बातें करनी लगी ........

महीन एक शार्ट नाईट शर्ट और विनोद का शॉर्ट्स पहनी होय सोफे पर थोड़ा ऊंची हो क्र लेती होइ थी ........ विनोद की सामन्य ..... और उसकी टांगें ...... दोनों इस बार ....... विनोद की सामन्य नंगी थीं ....... ऐसी लैतनय की वजह सी महीन की शर्ट की सामन्य का दो बटन्स की दरम्यान का हिस्सा थोड़ा खुल रहा था ........ जिस सी महीन की उस शर्ट की नीची पहनी होइ ब्लैक कलर की ब्रा विनोद को दिख रही थी ............. विनोद न्य महीन की पिंडलों पर अपना हाथ ठीक करनी की लय ........ आहिस्ता सी महीन की लेग को बेंड क्र की खरा क्या ........ उसकी पिंडलों पर मूव लगानी की लये ......... तो विनोद का शॉर्ट्स जो उसकी जिसम पी ढीला ढाला था .... पहली तो उसकी कनी को कवर क्र रहा था ........ मगर कनी को बेंड करनी सी शॉर्ट्स सिरक क्र उसकी तइस सी नीची उसकी पेट की तरफ ीखती होय गए ........... और अचानक सी hi महीन की गोरी गोरी चिकनी तइस विनोद की नज़रों की सामन्य नंगी हो गए .............

महीन इस अचानक होय मिषाप सी चौंक पारी ..... वह घबरा गए ....... की सामन्य आसिफ की वीडियो कॉल चल रही है और वह कैसी खुद को ठीक क्रय .......... उसनी फौरन सी अपना हाथ बढ़ा क्र अपनी शार्ट की पांचों को पकरणय की कोशिश की ........... ताकि वह फिर सी अपनी तइस को धानमप सकी ........ मगर विनोद न्य ऐसा कासुअल अंदाज़ अपनाया ... जैसी उसनी कुछ भी डिफरेंट नहीं देखा हो ........ उसनी महीन को हाथ सी खामोश और कम्फर्टेबले रहंय का इशारा क्या .......... उसकी हाथ मैं पकड़े होय मोबाइल की तरफ इशारा कृत्य होय उसी कुछ भी अचानक मूवमेंट करनी सी रोका ........ की उसकी ऐसा करनी सी आसिफ को शक हो सकता है .............

महीन विनोद की बात को समझ गए ....... मगर वह परेशान नज़रों सी विनोद की तरफ देख रही थी ............ उसनी फिर सी महीन को रिलैक्स रहंय का इशारा क्या ........ और महीन की नंगी तइस की तरफ ध्यान डाई बिना आहिस्ता ाहसिता महीन की पिंडली पी मस्सगे करनी लगा ........... महीन देख रही थी की विनोद उसकी तइस की तरफ नहीं देख रहा .......... उसनी भी अपनी हाथों की हरकत को रोक दया ........ और विनोद सी नज़रें चुरा क्र आसिफ को देखनी लगी ............. महीन की दिल की धरकन बढ़ रही थी ...... और घबराहट भी .............. विनोद चोरी सी महीन की नंगी चिकनी तइस को देख रहा था ............. बिलकुल साफ़ .... सुफैद और चिकनी तइस ...... एक भी बाल नहीं था उन पी हल्का सा भी ..... ......... और इस नज़ारे न्य विनोद की अपनी शॉर्ट्स की अंदर भी करंट सा दौड़ा दया था ........... उधर महीन की हालत भी कुछ मुख्तलकफ नै थी ........ विनोद की सामन्य अपनी तइस ऐसी ओपन होनी की बाद उसी फील हो रहा था की जैसी वह विनोद की ाग्य अचानक सी नंगी हो गए हो .......... ऊपर सी विनोद की हाथ महीन की टांगों पी अपना जादू चला रही थय ........ महीन की दिल की धरकन तेज़ थी ....... और उसी अपनी शॉर्ट्स की नीची गीला पैन महसूस हो रहा था ............. आसिफ सी वीडियो कॉल कृत्य होय खुद पर काबू रखना उसकी लय मुश्किल हो रहा था .......... उसी अजीब लग रहा था ........ जैसी वह आसिफ को धोका दी रही हो ........ उसी की तस्वीर की पिच्य वह विनोद को अपना जिसम शून्य दी रही थी .......... मगर मैं यह सुब कुछ किसी माज़ी की लय या किसी ग़लत िरादय सी तो नहीं क्र रही ........ यह सुब तो मेरी तकलीफ को दूर करनी की लय है न .......... महीन न्य खुद को समझाया .............

महीन आसिफ की बातून का हूँ हाँ मैं जवाब दी रही थी ....... ....... महीन की एक हाथ मैं मोबाइल था और दूसरी हाथ सी वह ग़ैर महसूस अंदाज़ मैं अपनी शॉर्ट्स की पैंची को ऊपर को करनी की कोशिश क्र रही थी अपनी नंगी गोरी तइस को छुपानी की लय .......... मगर वह इस मैं कामयाब नहीं हो पा रही थी ................... बातें कृत्य होय अचानक आसिफ बोलै ........ महीन तुम ऑफिस वैल पहन की जाती हो न .......

महीन फौरन hi विनोद की तरफ देखनी लगी ...... जैसी पूछ रही हो की वह अब क्या बोली ......... विनोद न्य हाँ मैं सर हिला दया ...... की उसी यस बोली

महीन न्य दोबारा आसिफ की तरफ देखती होय झूट बोल दया ..... हाँ हाँ वैल मैं hi जाती हों ..... उसकी बिना तो मुझी आदत hi नहीं है .........

अपनी हस्बैंड सी झूट बोलती होय उसका चेहरा लाल हो रहा था शर्म सी .... मगर वह बोल दी ......... उसी अजीब लग रहा था ...... बुहत hi अजीब की वह अपनी हस्बैंड सी फ़ोन पर बात क्र रही है और उसकी सामन्य hi विनोद उसकी नंगी तइस को देख रहा है और उसकी नंगी पिंडली का मस्सगे क्र रहा है ...... कुछ hi देर मैं बातें कृत्य होय महीन को ख्याल नहीं रहा और उसनी दूसरा हाथ भी अपनी शॉर्ट्स सी हटा लय ...... और महीन की शॉर्ट्स उसकी बेल्ली की पास ीखता हो की गिर पारा ........ और महीन की दोनों तइस एक बार फिर नंगी हो गए ....... गोरी चिकनी सुफैद तइस ......... विनोद की आंखें चुंध्या रही थीं ....... वह बरी मुश्किल सी अपनी हाथों को कण्ट्रोल क्र रहा था उसकी तइस को शून्य सी ........ और ओपनली उसकी नंगी तइस को देख भी नहीं रहा था की कहीं महीन को बुरा न लगी ............. महीन को भी यह बात फील हो रही थी की विनोद उसकी तइस को नहीं देख रहा .......... उसी यह ाचा लग रहा था की विनोद उसकी कंडीशन का कोई भी ग़लत फ़ायदा उठानी की कोशिश नहीं क्र रहा है .......... विनोद न्य उसकी पिंडली का मस्सगे ख़तम क्या और सोफे सी उठ गया ....... महीन की नंगी तइस और टांगों पर एक नज़र डाली और महीन को थम्ब्स उप का सिग्नल दया .......... महीन उस सी नज़रें मिला क्र शर्मा गए ............. और विनोद ख़ामोशी सी अपनी कमरे मैं चला गया ....... तो महीन न्य रहत की सांस ली .............

15 मिनट्स की बाद विनोद न्य अपनी रूम का दरवाज़ा खोल की बाहिर झाँका ....... और महीन को ईशारी सी आसिफ की कॉल का पुछा ....... महीन विनोद को ऐसी झांकती होय देख क्र मुस्कराई और बोली ...

महीन . हाँ ाजाओ ... कॉल बंद हो गए है ....

विनोद बहार आया और आकर सोफे सी महीन का पजामा उठा क्र बाथरूम की तरफ बढ़ गया ........ महीन यह देख क्र शर्मा गए ........ विनोद महीन का पजामा अंदर बकेट मैं दाल आया ........ और महीन की तरफ आती होय बोलै .....

विनोद ..... आज तो बाल बाल बची ........

महीन भी मुस्करा दी .......

विनोद ..... ाचा चाय पीओ गई तुम ......

महीन मुस्करा की ......... यह व्हाई नॉट ...

और विनोद किचन मई चला गया चाय बनानी .......... कुछ देर बाद दोनों लाउन्ज मैं बैठी होय चाय पी रही थय ...... विनोद महीन की सामन्य वाले सोफे पर बैठा था ..... और महीन थोड़ा ऊंचा हो क्र अपनी लेग्स को पिच्य की तरफ फोल्ड क्र की बैठी होइ चाय पी रही थी ..... ऐसा बेथनी की वजह सी उसकी तइस फिर सी थोड़ी नंगी हो रही थीं ............ मगर शायद महीन अब इस को एक्सेप्ट क्र चुकी थी ........ बुहत ज़्यादा अपनी तइस को अपनी टांगों को छुपानी की कोशिश नहीं क्र रही थी ........... और विनोद भी महीन की जिसम की झलक को एन्जॉय क्र रहा था .......... मगर ऐसी की महीन को अहसास न हो ..... और वह उनकंफर्टबले फील न क्रय .....

रात तक महीन भी विनोद की मौजूदगी मैं उसकी सामन्य इस शॉर्ट्स और स्माल नाईट शर्ट मैं रहंय की आदि हो गए थी ........ अब उसी बुहत hi काम अपनी जिसम की एक्सपोज़ होनी का अहसास था ........ उसी नहीं लग रहा था की ऐसा कुछ बुरा है अगर उसकी गोरी टांगें एक्सपोज़ हो रही हैं ....... क्यों की वह तो अभी भी यह सुब सिर्फ अपनी पाऊँ की पैन की वजह सी हो रहा महसूस क्र रही थी ..... रात की कहानी की बाद विनोद न्य एक बार फिर महीन की पाऊँ का मस्सगे क्या ...... उसी शॉर्ट्स मैं ....... और फिर महीन को एक बार फिर सहारा दी क्र उसकी बैडरूम मैं छोरा ......... और दोनों अपनी अपनी रूम मैं सो गए ........

सुबह महीन उठी तो उसका पाऊँ काफी बेहतर था ........... और दर्द भी अब ख़तम हो चूका था ........ विनोद उसकी लये चाय लय क्र आया और दूर नॉक क्या ........ अंदर आ की महीन को गुड मॉर्निंग बोलै ........ और महीन को चाय दी .......... महीन उठ क्र बैठी और मुस्करा की विनोद सी चाय का कप लय और पीने लगी ...............

विनोद ....... अब कैसा है दर्द ......

महीन मुस्कराई ....... इतनी तो केयर की है तुम न्य तो ठीक कैसी न होता .......

विनोद भी मुस्कराया ........ तो ऑफिस जांय का क्या प्रोग्राम है ......

महीन ...... जाऊँ गई मैं ........ अब ठीक हों बिलकुल .......

विनोद ..... okay ठीक है ..... कुछ काम हो तो बता दो ........

महीन ..... नहीं शुक्रया कोई काम नहीं है अभी तो ...........

फिर महीन बाथरूम मैं गए ...... अपनी कल की कपड़े भी ला की लौंडरी बकेट मैं डाली ....... और नाईट पजामा और शर्ट, पंतय ब्रा भी उतार की लांड्री बकेट मैं दाल दी ........ और नहा क्र दूसरी कपड़े पहन क्र बाथरूम सी बहार आगये ....... अपनी रूम मैं .......

कुछ देर की बाद महीन तैयार हो क्र बहार आई तो टीवी लाउन्ज मैं आज भी अगर बाटी की खुसबू फैली होइ थी ....... किचन की तरफ जाती होय ... वहीँ उसकी क़रीब hi देवर की पास शेल्फ थी ....... जिस पर विनोद न्य अपना छोटा सा मंदिर बनाया होआ था ...... वहीँ पर गणेश जी की सामन्य रखा होआ दिया भी जल रहा था ........... वह शेल्फ किचन को जाती होय वहीँ किचन की देवर की पास hi थी....... महीन मुस्कराई और किचन की तरफ बरही ...........

विनोद किचन मैं hi था ..... नाश्ता बना रहा .......... उस न्य महीन को देखा तो बोलै .......... महीन तुम टेबल पी चलो मैं नाश्ता ला रहा हों .............

महीन बोली मैं कुछ हेल्प क्र डॉन ........

विनोद ..... बिलकुल भी नहीं ....... बस तुम जा क्र टेबल पी बैठो मैं ला रहा हों .......

महीन मुस्करा की विनोद को देखती होइ दिंनिंग टेबल पी आ की बेथ गए ........ वहां टेबल पर आरती वाली थाली मैं एक लाडू और फूल पारी होय थय ........ महीन उसी hi देख रही थी की विनोद की आवाज़ आई ..........

विनोद ......... महीन ...... तुम्हारी लय मैं न्य पार्षद रखा है टेबल पी ....... वह लय लो ....... उतनी देर मई मैं नाश्ता ला रहा हों ...........

महीन का आज फिर सी अपनी फेथ की खिलाफ वह कहानी का कोई इरादा नहीं था ....... मगर फिर उसी ख्याल आया की विनोद कल सी कैसी उसकी लये फ़िक्र मंद है ..... और कैसी उसकी लय सुब कुछ क्र रहा है ....... और अगर अब वह उसकी कहनी पी इतना सा भी नहीं क्रय गई तो विनोद का दिल टूट जाय गए और उसी बुरा लगी गए .......और फिर एक थोड़ी सी मिठाई hi तो है ..... इस मैं क्या हर्ज है... एहि सोच क्र महीन न्य वह लाडू उठाया ...... ................. और आहिस्ता सी अपनी मुंह मैं लय जा क्र एक बाईट लय ली ........... उसकी दिल की कैफियत अजीब सी हो रही थी ........ जैसी वह अंदर hi अंदर खुद सी लार रही हो ......... वह अंदर hi अंदर गिल्ट भी महसूस क्र रही थी .....

महीन लाडू खा रही थी ...... और आधा उसकी हाथ मैं hi था की विनोद किचन सी नाश्ता लय क्र आज्ञा ............ और महीन को पार्षद खता होआ देख क्र मुस्कराया और टेबल पी ब्रेकफास्ट रख की उसकी साथ बेथ गया ....... और दोनों नाश्ता करनी लगी ........... थोड़ी देर की बाद दोनों ऑफिस की लय निकल गए .............
 
अपडेट NO: 13

महीन अभी भी थोड़ा लंगड़ा क्र चल रही थी ...... ऑफिस मैं उसी लंगड़ा क्र चलती होय देखा तो नीतू उसी पूछनी लगी .... दोनों टिया रूम मैं थय .... और कोई भी पास नहीं था .........

नीतू...... महीन क्या होआ तुमको .... यह ऐसी क्यों चल रही हो ......

महीन ..... कुछ नहीं यार बस वह किचन मैं गिर गए थी स्टूल सी तो पाऊँ मैं मोच आगये .....

नीतू ... ओह ... तो आज छुट्टी क्र की रेस्ट क्र लेती तुम ....

महीन ..... नहीं अब ठीक हों मैं .....

नीतू ...... सही है ..... कोई पैन किलर लय .... कुछ लगाया मोच पी ....

महीन .... हाँ विनोद न्य पैन किलर भी दी दी थी और पाऊँ पी मूव का मस्सगे भी क्र दया था .........

नीतू .... है .... है .... वेट ा मिनट ..... क्या बोली तुम ...... विनोद न्य मस्सगे क्र दया था .........

महीन बलुशेड ....... और थोड़ी सी शर्मीली स्माइल की साथ ...... हाँ विनोद न्य ... मैं तो उसी मन क्या था मगर वह माना hi नहीं मेरी बात ......

नीतू महीन को तैसे करती होइ बोली ... ओह रियली .... क्या सुच मैं विनोद न्य मस्सगे क्या ....... और क्या सिर्फ पाऊँ का hi मस्सगे hi क्या उसनी ......... नीतू उसी विंक करती होइ बोली .......

महीन का चेहरा रेड होनी लगा .......... नीतू प्लीज ..... वैसा कुछ नहीं है जैसा तुम सोच रही हो ....... मेरा पाऊँ सुच मैं स्ट्रेच हो गया था तो विनोद न्य हेल्प क्र दी ......

नीतू तैसे करती होइ ......... hhmmmmmmmmmm ...... हेल्प ......... मुझी यक़ीन नहीं आ रहा की यह सिर्फ एक सिंपल सी हेल्प की हो गई उस हैंडसम न्य ........

महीन नीतू सी नज़रें चुराती होइ बोली ..... नहीं नीतू ... कुछ भी ऐसा नहीं होआ ....... विनोद न्य सिर्फ मस्सगे hi क्या था ...... और कुछ भी नहीं .......

नीतू ....... तुम जो भी बोलो ..... लकिन महीन जैसी तुम्हारा चेहरा अभी ब्लश क्र रहा है न ......... तो ी कैन तेल्ल तहत यू वेरे फीलिंग समथिंग स्पेशल ात तहत टाइम ........ सुच सुच बताओ न कैसी फीलिंग थी तुम्हारी जब विनोद जैसा हैंडसम और जवान और स्ट्रांग मर्द तुम्हारी जिसम को ी मैं तो से ...... तुम्हारी पैरों को छु रहा था .........

नीतू की बात सुन क्र माही न्य अपना सर झुका लय और अपनी हाथ मैं पकड़े होय कॉफ़ी की कप को देखनी लगी ..... उसकी दिमाग़ मैं कल की मंज़र दौड़नी लगी .... जब विनोद की हाथ उसकी जिसम को छु रही थय ..... उसकी पाऊँ का मस्सगे क्र रही थय ....... और यह सोच की उसकी दिल की धरकन तेज़ होनी लगी .... उसकी चेहरी का गुलाबी रंग और भी गहरा होता जा रहा था .......... और उसकी चेहरी पी हो रही यह तब्दीली नीतू की आँखों सी बच नहीं पा रही थी ......

नीतू महीन को चोरनी वाली नहीं थी ...... उसनी महीन की क़रीब होती होय बोलै ..... बताओ न महीन ........ क्यों छुपा रही हो ....

महीन ......... नीतू ... प्लीज ...... कुछ भी नहीं थी फीलिंग्स ... बस अजीब सा लग रहा था ऐसी मेरी हस्बैंड की इलावा किसी और का मेरी जिसम को चूना .....

नीतू ....... अजीब ......??? क्या सिर्फ अजीब लग रहा था ..... बताओ न ...... मैं किसी को नहीं बताऊँ गए ..... जो भी तुम न्य फील क्या बताओ .... देखो महीन जब भी कोई दूसरा मर्द हमारी जिसम को चूय तो हमारी अंदर कुछ अलग सी फीलिंग्स पैदा होना कुछ बरी बात नहीं है ..... कुछ भी ग़लत नहीं है ...... यह सुब इंसानी नेचर है महीन ........

महीन अपनी हाथों को मसलती होइ वीर्य सी बोली .... हम्म्म ..... नीतू तुम ठीक कह रही हो ........ लकिन मुझी यह सुब अजीब लग रहा है और ग़लत भी ..... मुझी लगता है की जैसी मैं आसिफ की साथ ढूका क्र रही हों .... उसी चीट क्र रही हों ......... महीन न्य नज़रें झुकाय होय कहा .......

नीतू ....... आर्य यार ऐसी कोई बात नहीं है .... आईटी इस आल नेचुरल ह्यूमन बॉडी इंस्टिंक्ट ..... ज़्यादा नहीं सोचो .... और आसिफ की साथ कुछ भी चीटिंग नहीं है यह ......... क्यों की तुम न्य कोनसा कोई लाइन क्रॉस की है विनोद की साथ ..... सो जस्ट रिलैक्स एंड तरय तो एन्जॉय योर स्टे हेरे इन ुक.

यह कह क्र नीतू मुस्कराती होइ उठ क्र अपनी वर्क स्टेशन पी चली गए .... और महीन उसकी बातों को सोचनी लगी ......

ऑफिस की बाद दोनों अपनी अपार्टमेंट मैं वापिस ाग्य ............ घर आती hi दोनों अपनी अपनी कमरों मैं चली गए चेंज करनी की लय .......... महीन अभी अपना बैग रख की अपना दोपट्टा वघैर उतार hi रही थी की उसका दरवाज़ा नॉक होआ ............ महीन न्य दरवाज़ा खोला तो सामन्य विनोद खरा था ........... हाथ मैं अपना शॉर्ट्स लये होय ........

विनोद ........ यह लो महीन ....... यह धुली होय शॉर्ट्स हैं मेरी ........ इनको पहन लो .............. अपनी नाईट शर्ट की साथ ..........

महीन थोड़ी झिझक रही थी ........... मगर विनोद .............. अब किस लय ........

विनोद ......... अभी आज का दिन भी मूव लगानी पारी गई फिर आराम आय गए ........ इस लय चुप क्र जैसी कहा है वैसी करो और जल्दी सी बहार ाजाओ ........... जो खाना लाय हैं वह ठंडा हो जाय गए वर्ण .............

महीन मुस्कराई और रूम का दरवाज़ा बंद क्र की अपनी ड्रेस चेंज करनी लगी ............. महीन न्य दवाज़ा बंद क्या था मगर लॉक नहीं क्या था .......... पता नहीं क्यों मगर उसी अब विनोद पर काफी ऐतबार हो चूका होआ था की वह कितना कंट्रोल्ड है ............ कैसी अपनी लिमिट्स मैं रहता है ............ और कभी भी उसकी साथ कोई भी लाइन क्रॉस करनी की कोशिश नहीं करता .......

महीन न्य अपनी शर्ट और ट्रॉउज़र उतार दया ....... अब वह आंय की सामन्य ब्रा और पंतय मैं खरी थी ........ फिर महीन न्य अपना हाथ पिच्य लय जा क्र अपनी ब्रा खोल की उतार दी ........ महीन की बूब्स उसकी नज़रों की सामन्य नंगे हो गए थय .................. फिर महीन न्य पंतय भी अपनी जिसम सी अलग क्र दी ................ और आंय की सामन्य बिलकुल नंगी खरी अपनी जिसम को देखनी लगी .............. अपनी खूबसूरत जिसम , अपनी उभरी होय बूब्स और स्पॉट पेट को देख क्र महीन खुद पी रश्क करनी लगी ........ फिर महीन न्य दूसरी ब्रा और पंतय पहनी ....... उसकी ऊपर अपनी कॉटन की नाईट शर्ट पहन ली .............. और नीची विनोद की दी होइ उसकी शॉर्ट्स ............. यह शॉर्ट्स थोड़ी टाइट थीं ...... और उसकी तइस को कवर क्र रही थीं उसकी नीज तक .............. महीन को तस्सली होइ की उसका जिसम धणंपा होआ है विनोद की नज़रों सी ........ माही न्य अपनी ऑफिस सी आ क्र उतारी होय कपड़े लये और वाशरूम मैं जा क्र उनको लौंडरी बकेट मैं दाल दया .......... फिर वाशरूम सी फ़ारिग़ हो क्र वापिस आई ...... और खाना गरम क्र की विनोद का इन्तिज़ार करनी लगी ..........
 
विनोद आया तो उसनी भी शॉर्ट्स और एक टी शर्ट पहनी होइ थी ........... महीन की नज़रें विनोद की बलून सी भरी होइ सॉलिड लेग्स को घोरणी लगीं ............. और टी शर्ट भी उसकी जिसम पर टाइट हो रही थी ............ विनोद की चेस्ट की मसल्स और निप्पल्स भी प्रॉमिनेंट हो रही थय .......... महीन न्य अपनी नज़रें उसकी जिसम सी चुरा लीन ............ फिर दोनों खाना कहानी लगी .......... महीन को आज फिर सी विनोद की सामन्य उसकी शार्ट मैं रहना अजीब लग रहा था ..... मगर वह चुप रही .......... उसकी झिझक थोड़ी हद तक तो काम होइ थी मगर अभी भी उसकी लय यह सुब थोड़ा ावक्वार्ड था ....... महीन को फील होआ की उसकी शॉर्ट्स पहन न्य की वजह सी अब विनोद भी थोड़ा ओपन हो रहा है ...... और खुद भी शॉर्ट्स पहन न्य शुरू क्र डाई हैं घर मैं ...... मगर महीन को उसी रोकना ाचा नहीं लगा ....... इस लय उसनी कोई भी बात नहीं की ... खाना कहानी की बाद महीन अपनी रूम मैं चली गए आराम करनी की लय ........... बीएड पर लेट क्र मोबाइल देखनी लगी ............

कोई 15 मिनट बाद उसका दरवाज़ा नॉक होआ ....... महीन न्य अंदर अन्य को बोलै ........ तो विनोद चाय का एक कप पकड़े होय उसकी रूम मैं आज्ञा ........ उसकी दूसरी हाथ मैं मूव थी .......

महीन उसी देख क्र किसी छोटी बची की तरह मुंह बनाती होइ बोली ....... ओह्ह्ह ... नाहीईईईईई अब फिर सी नाहीये pleaseeeeeeeeee विनोद ......

विनोद हंसा .......... कोई दारमा नहीं ........... आज का दिन तो यह लगवानी hi पारी गई ....... कल सी तुम ठीक हो जाओ गई लाज़मी ............

महीन हंस पारी और बनवाती सा मुंह बनाती होय विनोद को अपनी बीएड पर अपनी पैरों की क़रीब जगा दी दी ........ विनोद उसकी बीएड पी बैठा और उसकी पाऊँ पर मूव लगानी लगा .......... एक बार फिर सी महीन की जिसम मैं सनसनाहट सी दौड़नी लगी ...... उसी नीतू की बातें याद अन्य लगीं ........ की यह बॉडी का रिस्पांस नेचुरल है ....... इस सी लारण्य की कोई ज़रूरत नहीं है ......... महीन भी खुद को समझानी लगी ........ ठीक hi तो कह रही है ...... मैं कोनसा उसकी विनोद की साथ कुछ क्र रही हों ....... जस्ट मस्सगे hi तो है ...... वह भी मजबूरी मैं ........... उधर विनोद की हाथ महीन की मुलायम टांग को सहला रही थय ........ और फिर सी महीन की दिल की धरकन उथल पथल हो रही थी ......... कुछ hi देर मैं विनोद उठ क्र चला गया ............. उसी आराम करनी का बोल क्र ........... महीन न्य उसी थैंक्स बोलै और वह मुस्कराता होआ रूम सी बहार निकल गया ..........

शाम को भी विनोद की दरवाज़ी पर नॉक की साथ hi महीन की आँख खुली ....... उसनी विनोद को अंदर अन्य को बोलै ...... विनोद अंदर आया तो महीन बीएड पर उठ क्र बेथ गए और अपनी हाथ ऊपर लय जा क्र अंगराई लेनी लगी ............ पता नहीं क्यों उसी विनोद की अपनी बैडरूम मैं होनी सी कोई फरक नहीं पर रहा था ........ उस सी अब कोई अजनबियत महसूस नहीं हो रही थी ............... इसी लय तो वह उसकी सामन्य hi अंगराई लय रही थी ..... ....... विनोद की नज़रें महीन की नाईट शर्ट मैं टाइट हो रही होय उसकी बूब्स पर जैम गईं .......... वह उन सी नज़रें नहीं हटा पा रहा था ....... मगर फिर फौरन hi बोलै ...........

विनोद ..... महीन चाय तुम रूम मैं लो गई या लाउन्ज मैं ....

महीन मुस्कराई ..... विनोद प्लीज बस करो .... और कितनी काम करो गए तुम

विनोद मुस्कराया ........ कुछ नहीं क्या मैं न्य ..........

महीन मुस्कराई ...... मैं लाउन्ज मैं hi आ रही हों ........

थोड़ी देर मैं दोनों टीवी देखती होय चाय पी रही थय लाउन्ज मैं ......... महीन पाऊँ सोफे की ऊपर रख क्र भी बैठी होइ थी ......... फिर विनोद उठ क्र बहार बालकनी मैं गया ........ और चाँद मिनट की बाद बाहर सी सूखी होय कपड़े लय क्र आया ...... महीन न्य देखा की उसकी हाथ मैं काफी सारी कपड़े थय ........... और उन मैं महीन की कपड़े भी थी .......... महीन का दिल उछाल की हलक़ मैं आज्ञा ..........

महीन ........... विनोद यह क्या किआ है तुम न्य ....... अब इसकी क्या ज़रूरत थी .... मैं खुद hi वाश क्र लेती मेरी कपड़े .........

विनोद हंसा ........... मैं न्य नहीं धोय मशीन न्य धोय हैं ....... मैं न्य तो सिर्फ मशीन मई डाली थय ....... अपनी कापरी वाश करनी लगा तो सोचा की तुम्हारी भी दाल डॉन मशीन मई .........

महीन को शर्म आ रही थी ........ उसकी ब्रा और पैंतीस भी उन्ही कपड़ों मैं थीं ......... जो विनोद न्य धोय थय फिर सूखनी डाली थय ..... और फिर उनको लय क्र आया था .......... विनोद न्य अपनी पंत, शर्ट और अंडरवियर सोफे पर रखा और महीन की कपड़े लय क्र उसकी बैडरूम की तरफ बढ़ा ...... मैं इनको तुम्हारी बैडरूम मैं रख की आता हों ..........

महीन जल्दी सी ........ विनोद प्लीसीएएएएए ........

मगर विनोद उसकी बात सुने बिना hi चला गया ........... विनोद को उसकी बैडरूम मैं गए होय 5 मिनट्स हो गए थय और वह अभी तक वापिस नहीं आया था ....... महीन को बैचैनी हो रही थी की विनोद उसकी रूम मैं क्या क्र रहा है .......... अभी वह उठ की अंदर जांय का सोच hi रही थी की विनोद बहार आज्ञा .......... और फिर अपनी कपड़े उठा क्र अपनी रूम मैं चला गया ............ महीन उठा क्र अपनी रूम मैं गए तो उसकी चेहरे पर शरमीली सी मुस्कराहट फैल गए .......... विनोद न्य उसकी तमाम कपड़े अछि तरह सी फोल्ड क्र की बीएड पर रखी होय थय .......... और उसकी ब्रा और पैंतीस को भी फोल्ड क्र की अलग सी रख दया होआ था ............. महीन को बुहत शर्मिंदगी होइ ...... हद है यार वैसी ......... यह मेरी ब्रा और पंतय विनोद की सामन्य आना तो मामूल hi बनता जा रहा है ........... महीन यह सोच क्र हंस पारी ......... अब इस तरह एक साथ रहती होय इस सुब को रोकना तो मुमकिन नहीं है न ........... .......... फिर महीन न्य अपनी कपड़े अपनी कपबओर्ड मैं रखी और वापिस लाउन्ज मैं आगये ............
 
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