- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 94,178
विनोद और महीन दोनों अपनी बिल्डिंग मैं पोहंची ...... क़रीब 8 बज रही थय अब .............. इसलय अपनी फ्लैट पी जांय की बजाय दोनों ऊपर की फ्लोर पी ाग्य ........... विनोद न्य ब्रोकर की दी होइ कीस की साथ अपार्टमेंट का दरवाज़ा खोला और फिर दोनों अंदर ाग्य ............ अंदर दाखिल होती hi उनको बुहत ाचा अहसास होआ ........ ऑलमोस्ट शामे hi डिज़ाइन था उस अपार्टमेंट का भी ........... बस यह डिफरेंस था की इस मैं रूम एक था ........ और वाशरूम भी रूम की अंदर hi आत्ताच था ........... बाक़ी किचन भी सेपरेट था मगर एक काउंटर ओपन था लाउन्ज की तरफ .......... लाउन्ज थोड़ा छोटा था पहली अपार्टमेंट सी ............. फुल्ली फुरणसीहेड था .............
विनोद और महीन दोनों बैडरूम मैं दाखिल होय .......... बुहत hi ाचा सा ........ बारे डबल बीएड था .......... साफ़ सुथरी बेडशीट बिछी होइ थी ............ एक तरफ एक दूर था जो की यक़ीनन वाशरूम का था ...... बुहत बरी सी फुल वाल कपबओर्ड थी ........ ड्रेसिंग टेबल और सूफी बैडरूम की अंदर भी थय ........... एक विन्डौन भी बहार की तरफ खुल रही थी .............. बुहत hi प्यारा बैडरूम था ........... दोनों को hi बुहत पसंद आया ..........
विनोद अपनी बाज़ू फैला की घूमता होआ बोलै .............. महीन जी ........... यह है हमारा बैडरूम ................ इतना प्यारा ........ और कम्फर्टेबले ............
महीन भी मुस्करा दी ...... हाँ ....... हमारे बैडरूम ......... महीन को यह लफ़ज़ बोलना और महसूस करना ाचा लग रहा था ........ ....... विनोद न्य उसी खींच की अपनी बहून मैं भरा और उसकी गालों और गर्दन पी किश करनी लगा ............ uuuuuuunnnnnnnnhhhhhhhhhhhhhh ........... oohhhhhhhhhh कृत्य होय महीन विनोद को रोकनी की कोशिश करनी लगी ........ मगर विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी किश करनी लगा .......... महीन न्य भी अपनी मज़ाहिमत तर्क कृत्य होय उसका साथ देना शुरू क्या ....... मगर फ्री भी वह उसी रोक रही थी ........... विनोद की हाथ महीन की हिप्स को सहलानी लगी ........ उसनी अपनी जुबां महीन की होंठों की अंदर डालनी शुरू क्र दी ........ और महीन भी उसी चूसनी लगी ........
विनोद न्य महीन की स्कर्ट को ऊपर को उठाना शुरू क्र दया ........ महीन न्य अपनी किश तोड़ी और बोली ........... विनोद क्या क्र रही हो ....... हम अपनी अपार्टमेंट मैं नहीं हैं ........
विनोद उसी फीस सी अपनी सीने की साथ लगाता होआ बोलै ........... आज सी यह हमारा hi है ...........
महीन मुस्कराई .......... चलो ठीक है ........ लकिन जब यहाँ शिफ्ट हों गए तो फिर जो दिल चाही कृत्य रहना .......... पर प्लीज अभी नहीं ........
विनोद ........ नहीं न ........ प्लीज एक बार आज hi यहाँ करनी को दिल क्र रहा है न .............. देखो न कितना थ्रिलिंग है यह सुब की हम यह अपार्टमेंट देखनी आय हैं और यहाँ सी सेक्स क्र की जाईं ............
महीन हंसी .......... No वे ........... तुम और तुम्हारी एडवेंचर्स ..... दोनों hi पागल हैं .............
विनोद न्य महीन को पाकर की बीएड पी बिठा दया ..... उसकी क़रीब बेथ की उसी बीएड पी लिटा दया और उसी अपनी तरफ खींच की उसकी होंठों को किश करनी लगा ........ महीन उसी रोक रही थी .......
महीन ........ विनोद .... क्यों पागल बन रही हो ..... प्लीज अपनी घर चलो वहां जा की जो दिल चाही क्र लेना ..... नहीं रोकों गई तुमको .....
विन्डोद ......... प्लीज महीन समझा करो न ....... थोड़ा थ्रिल करनी दो न पलेआसे .......
महीन ...... नहीं न ..... मुझी शर्म आती है न ....
विनोद ....... एक तो तुम शर्माती बुहत हो .......... देखा नहीं था अभी उस सेल्स गर्ल को ....... कैसी बी शर्मी सी खरी थी और कैसी सुब डील क्र रही थी.........
महीन को याद आज्ञा ....... और तुम उसकी बूब्स को घूर रही थय ......
विनोद हंसा ....... उउउउउउफ .... जब वह दिखा रही थी तो देखना तो था hi न ....... पर तुम्हारी तो उस सी भी बुहत hi प्यारी हैं ............. विनोद महीन की बूब्स को दबाती होय बोलै .......... महीन हंसने लगी ........
फिर विनोद बीएड सी उठा और अपनी पंत की ज़िप खोलनी लगा ....... महीन भी उठ की बेथ गए बीएड पी hi ... और उसकी तरफ देखनी लगी ....... वह अपना लुंड अपनी खुली ज़िप सी निकाल की उसकी सामन्य खरा हो गया .......
विनोद ...... देखो तो कैसी खरा होआ है तुम्हारी लये ....
महीन हंसी और उसकी लुंड को हल्का सा स्लैप करती होइ बोली ..... यह तो हर वक़त hi ऐसी hi रहता है ......... वैसी यह मेरी वजह सी खरा है या उस सेल्स गर्ल की लय ......... महीन न्य उसी तैसे क्या ........
विनोद ...... हाहाहाहा ............ तुम्हारी लय ............ क्यों की जब भी तुमको अपनी पास देखता है तो खरा हो जाता है न बस यह .....
महीन हंसी और फिर उस न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय लय ... और उसी ाहसिता ाहसिता सहलानी लगी ........... फिर उसकी टोपे को किश करती होइ बोली .........
महीन ..... ाचा सूचि सूचि बताओ जब हमारी बीच यह सुब शुरू नहीं होआ था तो तब भी क्या यह ऐसी hi खरा होता था .....
विनोद महीन की सर की बलून को सहलाती होय बोलै .... हाँ होता था ........
महीन मुस्कराई ....... उसी ाचा लगा ........ तो फिर क्या कृत्य थय .....
विनोद ..... क्या करना है बस सबर करता था ...... खुद को कण्ट्रोल करता था और ...........
महीन ...... और क्या ...... ???
विनोद हंसा ...... वाशिंग बिन सी तुम्हारी पंतय और ब्रा उठा की उन सी मुठ मारता था ....... अपना पानी निकालता था .... और फिर उनको धू की दाल देता था .......
महीन शॉकेड हो गए ....... hhhhhhhoooooooooooo ........... gandayyyyyyyyyyyy ........... यह सुब कृत्य थय तुम मेरी पंतय और ब्रा की साथ .......... महीन को बुरा नहीं लगा था .......... बल्कि ाचा hi लगा था ........
विनोद ...... हाँ तो कुछ तो करना hi था न जब तुम मेरी पास नहीं थी तब ..... इतना क़रीब हो की भी जब इतना दूर थी ......
महीन मुस्करा दी ........ सबर नहीं क्र सकती थय क्या .......
विनोद ..... सबर तो तब करता न जब तुम्हारी मिलनी की उम्मीद होती .......
महीन मुस्कराई ..... पर मिल तो गए न तुमको ..... और फिर ाग्य को झुक की उसकी लुंड को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसनी लगी ..... आहिस्ता आहिस्ता उसकी ऊपर जुबां पहिरण्य लगी ...... चैतन्य लगी ..... और कभी फिर सी मुंह मैं लय की सूचक करनी लगती ......... उसका हाथ विनोद की लुंड की नीची की बॉल्स को सहला रहा था ........ आहिस्ता आहिस्ता ..... उसकी लुंड को चूसती होय ....... विनोद को भी ाचा लग रहा था ........... उसकी बलून को सहला रहा था ...... जो ख़राब होती जा रही थय ....... महीन को भी मज़ा अन्य लगा था ....... वह भी पूरा पूरा साथ दी रही थी ......
कुछ देर तक ऐसी hi लुंड चूसनी की बाद विनोद न्य महीन को बीएड सी खरा क्या और उसी बीएड पी अपनी दोनों हाथ रख की झुकनी को बोलै ......
महीन फिर सी उसी रोकनी की लय बोली ........ बस करो न .... अब इतना तो क्र दया है ....... अब बाक़ी अपनी घर जा की क्र लेती हैं ......
विनोद ..... नहीं प्लीज ..... जल्दी सी झुक जाओ न ......
महीन को उसकी बात मान नई hi पारी ... वह बीएड पी हाथ रख की झुक गए ...... और पिच्य मुद की विनोद की तरफ देखनी लगी .... विनोद न्य महीन की स्कर्ट को ऊपर को उठाया ..... और उसकी पंतय पहनी होइ गांड को नंगा क्र दया .... फिर महीन की पंतय को उसकी टांगों सी नीची को सिरकाती होय उसकी पैरों तक लय आया ...... महीन न्य बारी बारी अपनी पाऊँ उठाय और अपनी पंतय उतार दी .... जो अब उसकी पैरों की पास hi पारी होइ थी ...... महीन की हिप्स को खोलती होय विनोद न्य अपनी लुंड की टोपे पी थूक लगा की महीन की छूट की सूराख पी रखा और आहिस्ता ाहसिता उसी अंदर डालनी लगा ......... महीन की कमर को पाकर की ........
aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ........... ssssssssssss ............ महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकालनी लगीं ........ उसकी छूट भी गीली हो रही थी .......... उसकी आंखें बंद होनी लगीं और वह भी आहिस्ता ाहसिता ाग्य पिच्य को होती होइ विनोद सी छुडवानी लगी ........ विनोद की धक्कों मैं तेज़ी आती जा रही थी ..... महीन को भी ाचा लग रहा था यौन ऐसी किसी अजनबी जगा पी चुदाई करना ....... विनोद न्य पूरी कपड़े पहनी होय थय ..... सिर्फ अपना लुंड अपनी पंत की ज़िप सी निकाल की महीन को छोड़ रहा था ...... जिसका निचला जिसम पूरा hi नंगा हो रहा था ...........
विनोद न्य महीन की शर्ट की अंदर हाथ डाली और उसकी कमर को सहलानी लगा ...... उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स और हुक्स सी खेलनी लगा ....... फिर विनोद न्य पिच्य सी लुंड डाली होय hi महीन की दोनों कन्धों को पकड़ा और ढक्की लगानी शुरू क्र डाई ....... उसका लुंड तेज़ी की साथ महीन की छूट मैं अंदर बहार हो रहा था ........ महीन भी अपनी मंज़िल को पोहंच रही थी ...... और फिर थोड़ी देर मैं उसकी छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया ...... और वह अपनी ओर्गास्म को पोहंच गए ...........
विनोद भी फ़ारिग़ होनी वाला था ...... उसनी महीन की कमर की गिर्द अपनी बाज़ू कस्सी और फिर उसकी लुंड न्य भी अपना पानी महीन की छूट मैं उगल दया ........ विन्डोद का लुंड महीन की छूट मैं झटकी मारती होय अपना माल गिरा रहा था ........ महीन भी उन लम्हों की पूरी पूरी लज़्ज़त मैं थी ......... उसका पूरा जिसम भी कैंम्प रहा था ......... विनोद का लुंड अपना गाढ़ा गाढ़ा पानी महीन की छूट मैं चोर रहा था ......... दोनों hi निढाल हो रही थय ......
अचानक hi अपार्टमेंट की मैं दूर मैं चाबी घूमनी की आवाज़ सुनाई दी ...... दोनों अचानक सी पैनिक हो गए ........ विनोद न्य अपना पानी चोरता होआ लुंड महीन की छूट सी निकाला और सीधा खरा हो गया .......... उसकी लुंड सी पानी निकल की नीची फर्श पी गिरनी लगा ........ महीन भी जल्दी सी सीढ़ी होइ और अपना स्कर्ट ठीक करनी लगी ....... दोनों इतनी तेज़ी मैं थय ...... महीन की पास पंतय पहन न्य का भी टाइम नहीं था .......
महीन हलकी सी आवाज़ मैं चीखी ... यह कौन आज्ञा है ..
विनोद .... पता नहीं कौन है .. तुम जल्दी सी कपड़े ठीक करो .... मैं बहार जा की देखता हों ..... विनोद अपनी लुंड को अपनी अंडरवियर की अंदर क्र की ज़िप लगा की बहार की तरफ जाती होय बोलै ......
विंडो की बहार जांय सी महीन और भी घबरा गए ..... उसनी जल्दी सी अपनी पंतय उठाई नीची सी और उसी पहन न्य लगी ..... मगर घबराहट और जल्दी की वजह सी उस सी पहनी नहीं जा रही थी .. उसकी पाऊँ लरखरा रही थय .... और एक बार तो वह गिरती गिरती बची ........ बहार उसी विनोद की किसी की साथ बातें करनी की आवाज़ सुनाई दी ........... जैसी कोई अंदर बैडरूम मैं आ रहा हो ....... महीन न्य घबरा की जल्दी सी अपनी पंतय अपनी पैरों सी निकाली और उसी अपनी स्कर्ट की पॉकेट मैं दाल लय .... और अपना स्कर्ट ठीक करती होइ बहार की तरफ बरही .........
दरवाज़ा खोल की बहार लाउन्ज मैं आई तो देखा की विनोद ब्रोकर की साथ खरा था ..... ब्रोकर महीन की हालत को देखनी लगा ..... उसकी बाल बिखरी होय थय ..... शर्ट आधी स्कर्ट की अंदर थी और आधी बहार थी .... मेकअप भी बिखरा होआ था ....... साफ़ लग रहा था की वह अंदर बैडरूम मैं क्या क्र की आ रही है .......
ब्रोकर न्य ऊपर सी नीची तक महीन को देखा और फिर मुस्करा पारा ........ महीन इधर उधर देखनी लगी .......
ब्रोकर .... मम कैसा लगा आप को यह अपार्टमेंट ..... उम्मीद है की आप को कम्फर्टेबले लगा हो गए .....
महीन ..... जी ाचा है .....
विनोद ...... आप यहाँ कैसी आय .....
ब्रोकर मुस्कराया ..... ओह हाँ मैं फ्री हो गया तो सोचा की आप सी कीस लेता जाऊँ और आप की ओपिनियन भी पूछ लोन ..... ताकि इसी प्रोसीड क्या जा सकी ....... मैं न्य आप की अपार्टमेंट मैं जा की काफी देर बेल्ल दी मगर दरवाज़ा नहीं खुला ...... ी थॉट की आप लोग बाहिर है अभी ....... फिर मैं न्य सोचा की मैं इस अपार्टमेंट का एक चक्कर लगाता जाऊँ ....... इसलय इधर आज्ञा .......... लकिन ी फील ी हैवे इन्ट्रप्टेड यू पीपल ........ ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी फॉर तहत ...... वह आहिस्ता सी माइनि खैज़ मुस्कराहट की साथ दोनों को देखती होय बोलै ........
महीन न्य शर्मिंदाह हो की अपना सर झुका लय .......
विनोद फौरन बोलै ...... नहीं नहीं .... it's no प्रॉब्लम ....... हम जस्ट बैडरूम देख रही थय .........
ब्रोकर न्य दोबारा सी उनको किचन, बालकनी और लाउन्ज दिखाया और फिर उनकी साथ लय की बैडरूम मैं जांय लगा ....... दोनों उसकी पिच्य पिच्य थय ........ महीन का दिल तेज़ी सी धारक रहा था ........ उसनी विनोद का हाथ खींचनी की कोशिश की ....... मगर वह भी थोड़ा परेशां लग रहा था .......... तीनों अंदर दाखिल होय ........
तीनों की नज़र बीएड पी पारी ...... जिसकी बेडशीट खराब हो रही थी ...... जैसी अभी अभी इसी बीएड को उसे क्या गया हो चुदाई की लय ....... फिर ब्रोकर की नज़र नीची फर्श पी पारी ..... जहाँ विनोद की लुंड सी निकली होइ मणि गिरी होइ थी ........... महीन का मुंह खुश्क होनी लगा ........ उधर नीची सी उसकी छूट मैं मौजूद विनोद की लुंड की माननी अजीब सा अहसास पैदा क्र रही थी ....... बुहत अजीब फीलिंग हो रही थी ...... और कुछ पानी बेहटा होआ उसकी छूट सी बहार भी आ रहा था .............. महीन का शर्म की मारी बुरा हाल हो रहा था .............. उसनी भी नीची फर्श पी गिरी होइ विनोद की लुंड की माननी को देख लय था ........ उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ........... उसी बुहत शर्म आ रही थी यह सोच सोच क्र की वह ब्रोकर पता नहीं क्या सोचता हो गए उन की बारी मैं ........
ब्रोकर ....... ी थिंक यू विल एग्री अबाउट थे कम्फर्ट ऑफ़ थिस बैडरूम ............ िफ़ ी ऍम राइट ....
विंडो आहिस्ता सी बोलै .... यह आईटी इस फाइन .........
ब्रोकर न्य वाशरूम भी खोल की दिखाया ......... की यह आत्ताच बाथ है ...... फिर उसनी अपनी हाथ मैं पकरि होइ डायरी ड्रेसिंग टेबल पी राखी और कपबोर्ड्स खोल की दिखानी लगा .........
ब्रोकर ....... ी होप की आप लोगो को यह अपार्टमेंट पसंद आया हो गए ...... मेरी आप को एडवाइस हो गई की इसी मिस ना करें ......
विनोद ... जी जी हमें यह पसंद है ...... आईं हमारी अपार्टमेंट मैं जा की डील फाइनल कृत्य हैं ......... वह खुद भी उसी वहां सी लय की जाना चाहता था .......
ब्रोकर ..... यस यस सूरे .......
विनोद की ाग्य ाग्य ब्रोकर निकला और विनोद पिच्य था ..... महीन न्य उसको पिच्य सी उसकी शर्ट पाकर की खींचा ........ विनोद महीन की तरफ देखनी लगा ....... तो महीन न्य फर्श पी गिरी होइ उसकी माननी की तरफ इशारा क्या ......... जैसी कह रही हो की उसका क्या करना है .........
विनोद वीर्य सी बोलै ..... उसी जल्दी सी साफ़ क्र दो ..... और यह कह की वह बहार निकल गया .........
महीन को पता था की उसी hi यह साफ़ करनी है ...... वह इधर उधर देखनी लगी ......... मगर उसी कोई भी कपड़ा या टिश्यू पेपर का बॉक्स नहीं मिला .......... उसी एक और ख्याल आया ...... उसनी अपनी पॉकेट मई राखी होइ अपनी पंतय निकाली ....... और नीची गिरी होइ माननी की स्पॉट की पास बेथ की उसी अपनी पंतय सी साफ़ करनी लगी ......... माननी ज़्यादा नहीं थी .... मगर काफी सारी ड्रॉप्स बिखरी होय थय ............ महीन उसी ाच्य सी दो तीन बार साफ़ क्र रही थी .........
अचानक सी बैडरूम का दरवाज़ा खुला और ब्रोकर अंदर दाखिल होआ ..... उसनी महीन को वहां नीची माननी की स्पॉट की पास बैठी होय देख लय ......... और उसकी हाथ मैं पकरि होइ उसकी पैंटी को भी ......... महीन उसी देख की घबरा गए ...... और हिल भी ना सकीय अपनी जगा सी ....... उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ......... वह तो जैसी शर्म सी मरी जा रही थी ........ उस ब्रोकर न्य एक ग़ैर मर्द न्य ........ उसी अपनी पंतय की साथ .... एक दूसरी मर्द की माननी को फर्श पर सी साफ़ कृत्य होय देख लय था ...........
ब्रोकर न्य वीर्य सी मुस्करा की महीन की तरफ देखा ....... और ड्रेसिंग टेबल सी अपनी डायरी उठाती होय बोलै ....... मैं अपनी डायरी भूल गया था यहाँ पी ....... फिर वह दरवाज़ी की तरफ बढ़ा ....... एंड मम यू प्लीज लीव आईटी ....... आईटी विल बे क्लीनेड लेटर .......... यह बोल की वह मुस्कराता होआ रूम सी निकल गया .......
महीन भी होश मैं आई और जल्दी सी खरी हो की विनोद की माननी को साफ़ की होइ अपनी पंतय को फिर सी अपनी स्कर्ट की पॉकेट मैं डाला और जल्दी सी बैडरूम की दरवाज़ी सी बहार निकल गए ......... विनोद न्य उसी देखा ......... महीन का चेहरा लाल हो रहा था .......... वह बिना कोई बात कए अपना बैग और हैंड बैग उठा की अपार्टमेंट सी निकलती होय बोली .......... विनोद मैं अपनी अपार्टमेंट मैं जा रही हों ......
महीन की निकलती hi ब्रोकर वहीँ सोफे पी बेथ गया ...... और फिर दोनों न्य वहीँ बेथ की डील फाइनल की ........ और विनोद न्य पेपर्स सिग्न क्र डाई .......... ब्रोकर न्य कीस विनोद की पास hi रहंय दिन ....... और विनोद न्य उसी बोलै की वह वीकेंड तक यहाँ शिफ्ट हो जाईं गए ....... फिर उस अपरमेन्ट को लॉक क्र की दोनों नीची आगये ...... विनोद न्य ब्रोकर को सी ऑफ क्या और फिर अपनी अपार्टमेंट मई आज्ञा ...........
दरवाज़ा नॉक करनी पर महीन न्य दरवाज़ा खोला ....... उसी देखती hi उसकी पिच्य देखनी लगी की कोई और तो नहीं है न ....... उसी सुकून मिला जब उसनी देखा की वह अकेला है ...... महीन न्य विंडो को उसकी टाई सी पाकर की अंदर खींचा, दरवाज़ा ज़ोर सी बंद क्या और उसी दरवाज़ी की साथ लगा की उसकी सीने पी मुक्के मारती होइ बोली ........
महीन ..... पागल इंसान ...... रोका भी था मैं न्य तुमको की वहां नहीं करो ......... मगर तुम तो मानती hi नहीं हो न जब तुम पी सेक्स का भूत सवार हो जाता है एक बार ......
विनोद हंसती होय खुद को चुरवानी की हलकी सी कोशिश कृत्य होय बोलै ..... अब क्या हो गया .......
महीन गुस्सा दिखाती होइ बोली ....... उस ब्रोकर न्य मुझी वहां नीची साफ़ कृत्य होय देख लय है जब वह दोबारा अंदर आया तो .......
विनोद हंसा ...... ओह माय गॉड ........ किस सी साफ़ क्र रही थी .....
महीन गुस्से सी बोली ........ अपनी पंतय सी .....
विनोद फिर हंसनी लगा ...... ओह सॉरी सॉरी ....... यह तो सुच मई hi बुहत ग़लत हो गया ......... यार ी ऍम रियली सॉरी ...... आज तो ब्लंडर पी ब्लंडर हो रही हैं ........... सॉरी सॉरी सॉरी ...... विनोद अपनी दोनों कान पाकर की माफ़ी मांगती होय बोलै .........
महीन उसी चोरटी की किचन की तरफ जाती होय बोली .... अब आज तुम कहना सही मुझी अपनी पास अन्य को .......
विनोद न्य जल्दी सी महीन को पिच्य सी hi अपनी बहून मई लय लय और उसकी गर्दन को किश करनी लगा ........... मेरी जान .... क्यों परेशान होती हो इन छोटी छोटी बातून सी ........ यह सुब इन लोगो की लय कॉमन है ......
महीन गुस्सा दिखाती होइ ....... इन की लय कॉमन है न हमारी लय तो नहीं न .......
विनोद महीन की गाल को चूमती होय बोलै ...... हमें भी इस सुब को अब कॉमन लेना चाही ........ एक आम सी बात ....... फिर hi हम यहाँ सर्वाइव क्र सकती हैं न ...........
महीन न्य खुद को विनोद सी छुडवाया ...... बातें चोरो और जाओ चेंज करो जा की ............
विनोद ..... okay बॉस ..... कहती होय अपनी बैडरूम की तरफ चला गया ........ और महीन मुस्कराती होइ वाशरूम की तरफ चली गए ....... अपनी आप को वाश करनी की लय .....
थोड़ी देर मई दोनों फ्रेश होनी की बाद महीन न्य चाय बनाई और दोनों कप लय क्र विनोद की बैडरूम मई आगये ....... वह वाशरूम मैं था ....... महीन उसकी बीएड पी लेट की उसका िनित्ज़ार करनी लगी ........ थोड़ी देर मैं विनोद भी आज्ञा तो दोनों बेथ की चाय पीनी लगी .......
महीन ...... विनोद आज तो बुहत hi बुरा होआ .......... और सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह सी ...........
विनोद ..... कुछ नहीं होआ तुम ऐसी hi परेशान हो रही हो .....
महीन उसी टेढ़ी आँख सी देखती होइ बोली ....... कैसी कुछ क्यों नहीं होआ ............. साफ़ तो दिख गया था उसी की हम उस घर की बैडरूम मैं hi शुरू हो गए होय थय जैसी हम रहंय की लय देखने गए थय ........ मुझी तो अभी भी शर्मिंदगी हो रही है ............
विनोद ........ कोई बात नहीं है षर्मान्य की ........ अगर उसी पता लग भी गया है तो ...............
महीन ..... वैसी पता नहीं क्या क्या सोचता हो गए हमारी बारी मैं ..... की पहली तो यह एक साथ रहना नहीं चाहती थय और अब देखो हर जगा शुरू हैं ........... महीन हंसी ......
विनोद ....... हाहाहाहा ....... वह बस यही समझी गए न की हम भी यहीं की रंग मैं रंग गए हैं ........... दोनों हंसनी लगी ........
चाय पीनी की बाद दोनों आराम करनी की लय लेट गए ........ उसी तरह एक hi बीएड पी ..... एक साथ चिपक की ...... एक दूसरी की बहून मैं ........
विनोद और महीन दोनों बैडरूम मैं दाखिल होय .......... बुहत hi ाचा सा ........ बारे डबल बीएड था .......... साफ़ सुथरी बेडशीट बिछी होइ थी ............ एक तरफ एक दूर था जो की यक़ीनन वाशरूम का था ...... बुहत बरी सी फुल वाल कपबओर्ड थी ........ ड्रेसिंग टेबल और सूफी बैडरूम की अंदर भी थय ........... एक विन्डौन भी बहार की तरफ खुल रही थी .............. बुहत hi प्यारा बैडरूम था ........... दोनों को hi बुहत पसंद आया ..........
विनोद अपनी बाज़ू फैला की घूमता होआ बोलै .............. महीन जी ........... यह है हमारा बैडरूम ................ इतना प्यारा ........ और कम्फर्टेबले ............
महीन भी मुस्करा दी ...... हाँ ....... हमारे बैडरूम ......... महीन को यह लफ़ज़ बोलना और महसूस करना ाचा लग रहा था ........ ....... विनोद न्य उसी खींच की अपनी बहून मैं भरा और उसकी गालों और गर्दन पी किश करनी लगा ............ uuuuuuunnnnnnnnhhhhhhhhhhhhhh ........... oohhhhhhhhhh कृत्य होय महीन विनोद को रोकनी की कोशिश करनी लगी ........ मगर विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी किश करनी लगा .......... महीन न्य भी अपनी मज़ाहिमत तर्क कृत्य होय उसका साथ देना शुरू क्या ....... मगर फ्री भी वह उसी रोक रही थी ........... विनोद की हाथ महीन की हिप्स को सहलानी लगी ........ उसनी अपनी जुबां महीन की होंठों की अंदर डालनी शुरू क्र दी ........ और महीन भी उसी चूसनी लगी ........
विनोद न्य महीन की स्कर्ट को ऊपर को उठाना शुरू क्र दया ........ महीन न्य अपनी किश तोड़ी और बोली ........... विनोद क्या क्र रही हो ....... हम अपनी अपार्टमेंट मैं नहीं हैं ........
विनोद उसी फीस सी अपनी सीने की साथ लगाता होआ बोलै ........... आज सी यह हमारा hi है ...........
महीन मुस्कराई .......... चलो ठीक है ........ लकिन जब यहाँ शिफ्ट हों गए तो फिर जो दिल चाही कृत्य रहना .......... पर प्लीज अभी नहीं ........
विनोद ........ नहीं न ........ प्लीज एक बार आज hi यहाँ करनी को दिल क्र रहा है न .............. देखो न कितना थ्रिलिंग है यह सुब की हम यह अपार्टमेंट देखनी आय हैं और यहाँ सी सेक्स क्र की जाईं ............
महीन हंसी .......... No वे ........... तुम और तुम्हारी एडवेंचर्स ..... दोनों hi पागल हैं .............
विनोद न्य महीन को पाकर की बीएड पी बिठा दया ..... उसकी क़रीब बेथ की उसी बीएड पी लिटा दया और उसी अपनी तरफ खींच की उसकी होंठों को किश करनी लगा ........ महीन उसी रोक रही थी .......
महीन ........ विनोद .... क्यों पागल बन रही हो ..... प्लीज अपनी घर चलो वहां जा की जो दिल चाही क्र लेना ..... नहीं रोकों गई तुमको .....
विन्डोद ......... प्लीज महीन समझा करो न ....... थोड़ा थ्रिल करनी दो न पलेआसे .......
महीन ...... नहीं न ..... मुझी शर्म आती है न ....
विनोद ....... एक तो तुम शर्माती बुहत हो .......... देखा नहीं था अभी उस सेल्स गर्ल को ....... कैसी बी शर्मी सी खरी थी और कैसी सुब डील क्र रही थी.........
महीन को याद आज्ञा ....... और तुम उसकी बूब्स को घूर रही थय ......
विनोद हंसा ....... उउउउउउफ .... जब वह दिखा रही थी तो देखना तो था hi न ....... पर तुम्हारी तो उस सी भी बुहत hi प्यारी हैं ............. विनोद महीन की बूब्स को दबाती होय बोलै .......... महीन हंसने लगी ........
फिर विनोद बीएड सी उठा और अपनी पंत की ज़िप खोलनी लगा ....... महीन भी उठ की बेथ गए बीएड पी hi ... और उसकी तरफ देखनी लगी ....... वह अपना लुंड अपनी खुली ज़िप सी निकाल की उसकी सामन्य खरा हो गया .......
विनोद ...... देखो तो कैसी खरा होआ है तुम्हारी लये ....
महीन हंसी और उसकी लुंड को हल्का सा स्लैप करती होइ बोली ..... यह तो हर वक़त hi ऐसी hi रहता है ......... वैसी यह मेरी वजह सी खरा है या उस सेल्स गर्ल की लय ......... महीन न्य उसी तैसे क्या ........
विनोद ...... हाहाहाहा ............ तुम्हारी लय ............ क्यों की जब भी तुमको अपनी पास देखता है तो खरा हो जाता है न बस यह .....
महीन हंसी और फिर उस न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय लय ... और उसी ाहसिता ाहसिता सहलानी लगी ........... फिर उसकी टोपे को किश करती होइ बोली .........
महीन ..... ाचा सूचि सूचि बताओ जब हमारी बीच यह सुब शुरू नहीं होआ था तो तब भी क्या यह ऐसी hi खरा होता था .....
विनोद महीन की सर की बलून को सहलाती होय बोलै .... हाँ होता था ........
महीन मुस्कराई ....... उसी ाचा लगा ........ तो फिर क्या कृत्य थय .....
विनोद ..... क्या करना है बस सबर करता था ...... खुद को कण्ट्रोल करता था और ...........
महीन ...... और क्या ...... ???
विनोद हंसा ...... वाशिंग बिन सी तुम्हारी पंतय और ब्रा उठा की उन सी मुठ मारता था ....... अपना पानी निकालता था .... और फिर उनको धू की दाल देता था .......
महीन शॉकेड हो गए ....... hhhhhhhoooooooooooo ........... gandayyyyyyyyyyyy ........... यह सुब कृत्य थय तुम मेरी पंतय और ब्रा की साथ .......... महीन को बुरा नहीं लगा था .......... बल्कि ाचा hi लगा था ........
विनोद ...... हाँ तो कुछ तो करना hi था न जब तुम मेरी पास नहीं थी तब ..... इतना क़रीब हो की भी जब इतना दूर थी ......
महीन मुस्करा दी ........ सबर नहीं क्र सकती थय क्या .......
विनोद ..... सबर तो तब करता न जब तुम्हारी मिलनी की उम्मीद होती .......
महीन मुस्कराई ..... पर मिल तो गए न तुमको ..... और फिर ाग्य को झुक की उसकी लुंड को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसनी लगी ..... आहिस्ता आहिस्ता उसकी ऊपर जुबां पहिरण्य लगी ...... चैतन्य लगी ..... और कभी फिर सी मुंह मैं लय की सूचक करनी लगती ......... उसका हाथ विनोद की लुंड की नीची की बॉल्स को सहला रहा था ........ आहिस्ता आहिस्ता ..... उसकी लुंड को चूसती होय ....... विनोद को भी ाचा लग रहा था ........... उसकी बलून को सहला रहा था ...... जो ख़राब होती जा रही थय ....... महीन को भी मज़ा अन्य लगा था ....... वह भी पूरा पूरा साथ दी रही थी ......
कुछ देर तक ऐसी hi लुंड चूसनी की बाद विनोद न्य महीन को बीएड सी खरा क्या और उसी बीएड पी अपनी दोनों हाथ रख की झुकनी को बोलै ......
महीन फिर सी उसी रोकनी की लय बोली ........ बस करो न .... अब इतना तो क्र दया है ....... अब बाक़ी अपनी घर जा की क्र लेती हैं ......
विनोद ..... नहीं प्लीज ..... जल्दी सी झुक जाओ न ......
महीन को उसकी बात मान नई hi पारी ... वह बीएड पी हाथ रख की झुक गए ...... और पिच्य मुद की विनोद की तरफ देखनी लगी .... विनोद न्य महीन की स्कर्ट को ऊपर को उठाया ..... और उसकी पंतय पहनी होइ गांड को नंगा क्र दया .... फिर महीन की पंतय को उसकी टांगों सी नीची को सिरकाती होय उसकी पैरों तक लय आया ...... महीन न्य बारी बारी अपनी पाऊँ उठाय और अपनी पंतय उतार दी .... जो अब उसकी पैरों की पास hi पारी होइ थी ...... महीन की हिप्स को खोलती होय विनोद न्य अपनी लुंड की टोपे पी थूक लगा की महीन की छूट की सूराख पी रखा और आहिस्ता ाहसिता उसी अंदर डालनी लगा ......... महीन की कमर को पाकर की ........
aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ........... ssssssssssss ............ महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकालनी लगीं ........ उसकी छूट भी गीली हो रही थी .......... उसकी आंखें बंद होनी लगीं और वह भी आहिस्ता ाहसिता ाग्य पिच्य को होती होइ विनोद सी छुडवानी लगी ........ विनोद की धक्कों मैं तेज़ी आती जा रही थी ..... महीन को भी ाचा लग रहा था यौन ऐसी किसी अजनबी जगा पी चुदाई करना ....... विनोद न्य पूरी कपड़े पहनी होय थय ..... सिर्फ अपना लुंड अपनी पंत की ज़िप सी निकाल की महीन को छोड़ रहा था ...... जिसका निचला जिसम पूरा hi नंगा हो रहा था ...........
विनोद न्य महीन की शर्ट की अंदर हाथ डाली और उसकी कमर को सहलानी लगा ...... उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स और हुक्स सी खेलनी लगा ....... फिर विनोद न्य पिच्य सी लुंड डाली होय hi महीन की दोनों कन्धों को पकड़ा और ढक्की लगानी शुरू क्र डाई ....... उसका लुंड तेज़ी की साथ महीन की छूट मैं अंदर बहार हो रहा था ........ महीन भी अपनी मंज़िल को पोहंच रही थी ...... और फिर थोड़ी देर मैं उसकी छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया ...... और वह अपनी ओर्गास्म को पोहंच गए ...........
विनोद भी फ़ारिग़ होनी वाला था ...... उसनी महीन की कमर की गिर्द अपनी बाज़ू कस्सी और फिर उसकी लुंड न्य भी अपना पानी महीन की छूट मैं उगल दया ........ विन्डोद का लुंड महीन की छूट मैं झटकी मारती होय अपना माल गिरा रहा था ........ महीन भी उन लम्हों की पूरी पूरी लज़्ज़त मैं थी ......... उसका पूरा जिसम भी कैंम्प रहा था ......... विनोद का लुंड अपना गाढ़ा गाढ़ा पानी महीन की छूट मैं चोर रहा था ......... दोनों hi निढाल हो रही थय ......
अचानक hi अपार्टमेंट की मैं दूर मैं चाबी घूमनी की आवाज़ सुनाई दी ...... दोनों अचानक सी पैनिक हो गए ........ विनोद न्य अपना पानी चोरता होआ लुंड महीन की छूट सी निकाला और सीधा खरा हो गया .......... उसकी लुंड सी पानी निकल की नीची फर्श पी गिरनी लगा ........ महीन भी जल्दी सी सीढ़ी होइ और अपना स्कर्ट ठीक करनी लगी ....... दोनों इतनी तेज़ी मैं थय ...... महीन की पास पंतय पहन न्य का भी टाइम नहीं था .......
महीन हलकी सी आवाज़ मैं चीखी ... यह कौन आज्ञा है ..
विनोद .... पता नहीं कौन है .. तुम जल्दी सी कपड़े ठीक करो .... मैं बहार जा की देखता हों ..... विनोद अपनी लुंड को अपनी अंडरवियर की अंदर क्र की ज़िप लगा की बहार की तरफ जाती होय बोलै ......
विंडो की बहार जांय सी महीन और भी घबरा गए ..... उसनी जल्दी सी अपनी पंतय उठाई नीची सी और उसी पहन न्य लगी ..... मगर घबराहट और जल्दी की वजह सी उस सी पहनी नहीं जा रही थी .. उसकी पाऊँ लरखरा रही थय .... और एक बार तो वह गिरती गिरती बची ........ बहार उसी विनोद की किसी की साथ बातें करनी की आवाज़ सुनाई दी ........... जैसी कोई अंदर बैडरूम मैं आ रहा हो ....... महीन न्य घबरा की जल्दी सी अपनी पंतय अपनी पैरों सी निकाली और उसी अपनी स्कर्ट की पॉकेट मैं दाल लय .... और अपना स्कर्ट ठीक करती होइ बहार की तरफ बरही .........
दरवाज़ा खोल की बहार लाउन्ज मैं आई तो देखा की विनोद ब्रोकर की साथ खरा था ..... ब्रोकर महीन की हालत को देखनी लगा ..... उसकी बाल बिखरी होय थय ..... शर्ट आधी स्कर्ट की अंदर थी और आधी बहार थी .... मेकअप भी बिखरा होआ था ....... साफ़ लग रहा था की वह अंदर बैडरूम मैं क्या क्र की आ रही है .......
ब्रोकर न्य ऊपर सी नीची तक महीन को देखा और फिर मुस्करा पारा ........ महीन इधर उधर देखनी लगी .......
ब्रोकर .... मम कैसा लगा आप को यह अपार्टमेंट ..... उम्मीद है की आप को कम्फर्टेबले लगा हो गए .....
महीन ..... जी ाचा है .....
विनोद ...... आप यहाँ कैसी आय .....
ब्रोकर मुस्कराया ..... ओह हाँ मैं फ्री हो गया तो सोचा की आप सी कीस लेता जाऊँ और आप की ओपिनियन भी पूछ लोन ..... ताकि इसी प्रोसीड क्या जा सकी ....... मैं न्य आप की अपार्टमेंट मैं जा की काफी देर बेल्ल दी मगर दरवाज़ा नहीं खुला ...... ी थॉट की आप लोग बाहिर है अभी ....... फिर मैं न्य सोचा की मैं इस अपार्टमेंट का एक चक्कर लगाता जाऊँ ....... इसलय इधर आज्ञा .......... लकिन ी फील ी हैवे इन्ट्रप्टेड यू पीपल ........ ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी फॉर तहत ...... वह आहिस्ता सी माइनि खैज़ मुस्कराहट की साथ दोनों को देखती होय बोलै ........
महीन न्य शर्मिंदाह हो की अपना सर झुका लय .......
विनोद फौरन बोलै ...... नहीं नहीं .... it's no प्रॉब्लम ....... हम जस्ट बैडरूम देख रही थय .........
ब्रोकर न्य दोबारा सी उनको किचन, बालकनी और लाउन्ज दिखाया और फिर उनकी साथ लय की बैडरूम मैं जांय लगा ....... दोनों उसकी पिच्य पिच्य थय ........ महीन का दिल तेज़ी सी धारक रहा था ........ उसनी विनोद का हाथ खींचनी की कोशिश की ....... मगर वह भी थोड़ा परेशां लग रहा था .......... तीनों अंदर दाखिल होय ........
तीनों की नज़र बीएड पी पारी ...... जिसकी बेडशीट खराब हो रही थी ...... जैसी अभी अभी इसी बीएड को उसे क्या गया हो चुदाई की लय ....... फिर ब्रोकर की नज़र नीची फर्श पी पारी ..... जहाँ विनोद की लुंड सी निकली होइ मणि गिरी होइ थी ........... महीन का मुंह खुश्क होनी लगा ........ उधर नीची सी उसकी छूट मैं मौजूद विनोद की लुंड की माननी अजीब सा अहसास पैदा क्र रही थी ....... बुहत अजीब फीलिंग हो रही थी ...... और कुछ पानी बेहटा होआ उसकी छूट सी बहार भी आ रहा था .............. महीन का शर्म की मारी बुरा हाल हो रहा था .............. उसनी भी नीची फर्श पी गिरी होइ विनोद की लुंड की माननी को देख लय था ........ उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ........... उसी बुहत शर्म आ रही थी यह सोच सोच क्र की वह ब्रोकर पता नहीं क्या सोचता हो गए उन की बारी मैं ........
ब्रोकर ....... ी थिंक यू विल एग्री अबाउट थे कम्फर्ट ऑफ़ थिस बैडरूम ............ िफ़ ी ऍम राइट ....
विंडो आहिस्ता सी बोलै .... यह आईटी इस फाइन .........
ब्रोकर न्य वाशरूम भी खोल की दिखाया ......... की यह आत्ताच बाथ है ...... फिर उसनी अपनी हाथ मैं पकरि होइ डायरी ड्रेसिंग टेबल पी राखी और कपबोर्ड्स खोल की दिखानी लगा .........
ब्रोकर ....... ी होप की आप लोगो को यह अपार्टमेंट पसंद आया हो गए ...... मेरी आप को एडवाइस हो गई की इसी मिस ना करें ......
विनोद ... जी जी हमें यह पसंद है ...... आईं हमारी अपार्टमेंट मैं जा की डील फाइनल कृत्य हैं ......... वह खुद भी उसी वहां सी लय की जाना चाहता था .......
ब्रोकर ..... यस यस सूरे .......
विनोद की ाग्य ाग्य ब्रोकर निकला और विनोद पिच्य था ..... महीन न्य उसको पिच्य सी उसकी शर्ट पाकर की खींचा ........ विनोद महीन की तरफ देखनी लगा ....... तो महीन न्य फर्श पी गिरी होइ उसकी माननी की तरफ इशारा क्या ......... जैसी कह रही हो की उसका क्या करना है .........
विनोद वीर्य सी बोलै ..... उसी जल्दी सी साफ़ क्र दो ..... और यह कह की वह बहार निकल गया .........
महीन को पता था की उसी hi यह साफ़ करनी है ...... वह इधर उधर देखनी लगी ......... मगर उसी कोई भी कपड़ा या टिश्यू पेपर का बॉक्स नहीं मिला .......... उसी एक और ख्याल आया ...... उसनी अपनी पॉकेट मई राखी होइ अपनी पंतय निकाली ....... और नीची गिरी होइ माननी की स्पॉट की पास बेथ की उसी अपनी पंतय सी साफ़ करनी लगी ......... माननी ज़्यादा नहीं थी .... मगर काफी सारी ड्रॉप्स बिखरी होय थय ............ महीन उसी ाच्य सी दो तीन बार साफ़ क्र रही थी .........
अचानक सी बैडरूम का दरवाज़ा खुला और ब्रोकर अंदर दाखिल होआ ..... उसनी महीन को वहां नीची माननी की स्पॉट की पास बैठी होय देख लय ......... और उसकी हाथ मैं पकरि होइ उसकी पैंटी को भी ......... महीन उसी देख की घबरा गए ...... और हिल भी ना सकीय अपनी जगा सी ....... उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ......... वह तो जैसी शर्म सी मरी जा रही थी ........ उस ब्रोकर न्य एक ग़ैर मर्द न्य ........ उसी अपनी पंतय की साथ .... एक दूसरी मर्द की माननी को फर्श पर सी साफ़ कृत्य होय देख लय था ...........
ब्रोकर न्य वीर्य सी मुस्करा की महीन की तरफ देखा ....... और ड्रेसिंग टेबल सी अपनी डायरी उठाती होय बोलै ....... मैं अपनी डायरी भूल गया था यहाँ पी ....... फिर वह दरवाज़ी की तरफ बढ़ा ....... एंड मम यू प्लीज लीव आईटी ....... आईटी विल बे क्लीनेड लेटर .......... यह बोल की वह मुस्कराता होआ रूम सी निकल गया .......
महीन भी होश मैं आई और जल्दी सी खरी हो की विनोद की माननी को साफ़ की होइ अपनी पंतय को फिर सी अपनी स्कर्ट की पॉकेट मैं डाला और जल्दी सी बैडरूम की दरवाज़ी सी बहार निकल गए ......... विनोद न्य उसी देखा ......... महीन का चेहरा लाल हो रहा था .......... वह बिना कोई बात कए अपना बैग और हैंड बैग उठा की अपार्टमेंट सी निकलती होय बोली .......... विनोद मैं अपनी अपार्टमेंट मैं जा रही हों ......
महीन की निकलती hi ब्रोकर वहीँ सोफे पी बेथ गया ...... और फिर दोनों न्य वहीँ बेथ की डील फाइनल की ........ और विनोद न्य पेपर्स सिग्न क्र डाई .......... ब्रोकर न्य कीस विनोद की पास hi रहंय दिन ....... और विनोद न्य उसी बोलै की वह वीकेंड तक यहाँ शिफ्ट हो जाईं गए ....... फिर उस अपरमेन्ट को लॉक क्र की दोनों नीची आगये ...... विनोद न्य ब्रोकर को सी ऑफ क्या और फिर अपनी अपार्टमेंट मई आज्ञा ...........
दरवाज़ा नॉक करनी पर महीन न्य दरवाज़ा खोला ....... उसी देखती hi उसकी पिच्य देखनी लगी की कोई और तो नहीं है न ....... उसी सुकून मिला जब उसनी देखा की वह अकेला है ...... महीन न्य विंडो को उसकी टाई सी पाकर की अंदर खींचा, दरवाज़ा ज़ोर सी बंद क्या और उसी दरवाज़ी की साथ लगा की उसकी सीने पी मुक्के मारती होइ बोली ........
महीन ..... पागल इंसान ...... रोका भी था मैं न्य तुमको की वहां नहीं करो ......... मगर तुम तो मानती hi नहीं हो न जब तुम पी सेक्स का भूत सवार हो जाता है एक बार ......
विनोद हंसती होय खुद को चुरवानी की हलकी सी कोशिश कृत्य होय बोलै ..... अब क्या हो गया .......
महीन गुस्सा दिखाती होइ बोली ....... उस ब्रोकर न्य मुझी वहां नीची साफ़ कृत्य होय देख लय है जब वह दोबारा अंदर आया तो .......
विनोद हंसा ...... ओह माय गॉड ........ किस सी साफ़ क्र रही थी .....
महीन गुस्से सी बोली ........ अपनी पंतय सी .....
विनोद फिर हंसनी लगा ...... ओह सॉरी सॉरी ....... यह तो सुच मई hi बुहत ग़लत हो गया ......... यार ी ऍम रियली सॉरी ...... आज तो ब्लंडर पी ब्लंडर हो रही हैं ........... सॉरी सॉरी सॉरी ...... विनोद अपनी दोनों कान पाकर की माफ़ी मांगती होय बोलै .........
महीन उसी चोरटी की किचन की तरफ जाती होय बोली .... अब आज तुम कहना सही मुझी अपनी पास अन्य को .......
विनोद न्य जल्दी सी महीन को पिच्य सी hi अपनी बहून मई लय लय और उसकी गर्दन को किश करनी लगा ........... मेरी जान .... क्यों परेशान होती हो इन छोटी छोटी बातून सी ........ यह सुब इन लोगो की लय कॉमन है ......
महीन गुस्सा दिखाती होइ ....... इन की लय कॉमन है न हमारी लय तो नहीं न .......
विनोद महीन की गाल को चूमती होय बोलै ...... हमें भी इस सुब को अब कॉमन लेना चाही ........ एक आम सी बात ....... फिर hi हम यहाँ सर्वाइव क्र सकती हैं न ...........
महीन न्य खुद को विनोद सी छुडवाया ...... बातें चोरो और जाओ चेंज करो जा की ............
विनोद ..... okay बॉस ..... कहती होय अपनी बैडरूम की तरफ चला गया ........ और महीन मुस्कराती होइ वाशरूम की तरफ चली गए ....... अपनी आप को वाश करनी की लय .....
थोड़ी देर मई दोनों फ्रेश होनी की बाद महीन न्य चाय बनाई और दोनों कप लय क्र विनोद की बैडरूम मई आगये ....... वह वाशरूम मैं था ....... महीन उसकी बीएड पी लेट की उसका िनित्ज़ार करनी लगी ........ थोड़ी देर मैं विनोद भी आज्ञा तो दोनों बेथ की चाय पीनी लगी .......
महीन ...... विनोद आज तो बुहत hi बुरा होआ .......... और सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह सी ...........
विनोद ..... कुछ नहीं होआ तुम ऐसी hi परेशान हो रही हो .....
महीन उसी टेढ़ी आँख सी देखती होइ बोली ....... कैसी कुछ क्यों नहीं होआ ............. साफ़ तो दिख गया था उसी की हम उस घर की बैडरूम मैं hi शुरू हो गए होय थय जैसी हम रहंय की लय देखने गए थय ........ मुझी तो अभी भी शर्मिंदगी हो रही है ............
विनोद ........ कोई बात नहीं है षर्मान्य की ........ अगर उसी पता लग भी गया है तो ...............
महीन ..... वैसी पता नहीं क्या क्या सोचता हो गए हमारी बारी मैं ..... की पहली तो यह एक साथ रहना नहीं चाहती थय और अब देखो हर जगा शुरू हैं ........... महीन हंसी ......
विनोद ....... हाहाहाहा ....... वह बस यही समझी गए न की हम भी यहीं की रंग मैं रंग गए हैं ........... दोनों हंसनी लगी ........
चाय पीनी की बाद दोनों आराम करनी की लय लेट गए ........ उसी तरह एक hi बीएड पी ..... एक साथ चिपक की ...... एक दूसरी की बहून मैं ........