महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 9 - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

विनोद और महीन दोनों अपनी बिल्डिंग मैं पोहंची ...... क़रीब 8 बज रही थय अब .............. इसलय अपनी फ्लैट पी जांय की बजाय दोनों ऊपर की फ्लोर पी ाग्य ........... विनोद न्य ब्रोकर की दी होइ कीस की साथ अपार्टमेंट का दरवाज़ा खोला और फिर दोनों अंदर ाग्य ............ अंदर दाखिल होती hi उनको बुहत ाचा अहसास होआ ........ ऑलमोस्ट शामे hi डिज़ाइन था उस अपार्टमेंट का भी ........... बस यह डिफरेंस था की इस मैं रूम एक था ........ और वाशरूम भी रूम की अंदर hi आत्ताच था ........... बाक़ी किचन भी सेपरेट था मगर एक काउंटर ओपन था लाउन्ज की तरफ .......... लाउन्ज थोड़ा छोटा था पहली अपार्टमेंट सी ............. फुल्ली फुरणसीहेड था .............

विनोद और महीन दोनों बैडरूम मैं दाखिल होय .......... बुहत hi ाचा सा ........ बारे डबल बीएड था .......... साफ़ सुथरी बेडशीट बिछी होइ थी ............ एक तरफ एक दूर था जो की यक़ीनन वाशरूम का था ...... बुहत बरी सी फुल वाल कपबओर्ड थी ........ ड्रेसिंग टेबल और सूफी बैडरूम की अंदर भी थय ........... एक विन्डौन भी बहार की तरफ खुल रही थी .............. बुहत hi प्यारा बैडरूम था ........... दोनों को hi बुहत पसंद आया ..........

विनोद अपनी बाज़ू फैला की घूमता होआ बोलै .............. महीन जी ........... यह है हमारा बैडरूम ................ इतना प्यारा ........ और कम्फर्टेबले ............

महीन भी मुस्करा दी ...... हाँ ....... हमारे बैडरूम ......... महीन को यह लफ़ज़ बोलना और महसूस करना ाचा लग रहा था ........ ....... विनोद न्य उसी खींच की अपनी बहून मैं भरा और उसकी गालों और गर्दन पी किश करनी लगा ............ uuuuuuunnnnnnnnhhhhhhhhhhhhhh ........... oohhhhhhhhhh कृत्य होय महीन विनोद को रोकनी की कोशिश करनी लगी ........ मगर विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उसी किश करनी लगा .......... महीन न्य भी अपनी मज़ाहिमत तर्क कृत्य होय उसका साथ देना शुरू क्या ....... मगर फ्री भी वह उसी रोक रही थी ........... विनोद की हाथ महीन की हिप्स को सहलानी लगी ........ उसनी अपनी जुबां महीन की होंठों की अंदर डालनी शुरू क्र दी ........ और महीन भी उसी चूसनी लगी ........

विनोद न्य महीन की स्कर्ट को ऊपर को उठाना शुरू क्र दया ........ महीन न्य अपनी किश तोड़ी और बोली ........... विनोद क्या क्र रही हो ....... हम अपनी अपार्टमेंट मैं नहीं हैं ........

विनोद उसी फीस सी अपनी सीने की साथ लगाता होआ बोलै ........... आज सी यह हमारा hi है ...........

महीन मुस्कराई .......... चलो ठीक है ........ लकिन जब यहाँ शिफ्ट हों गए तो फिर जो दिल चाही कृत्य रहना .......... पर प्लीज अभी नहीं ........

विनोद ........ नहीं न ........ प्लीज एक बार आज hi यहाँ करनी को दिल क्र रहा है न .............. देखो न कितना थ्रिलिंग है यह सुब की हम यह अपार्टमेंट देखनी आय हैं और यहाँ सी सेक्स क्र की जाईं ............

महीन हंसी .......... No वे ........... तुम और तुम्हारी एडवेंचर्स ..... दोनों hi पागल हैं .............

विनोद न्य महीन को पाकर की बीएड पी बिठा दया ..... उसकी क़रीब बेथ की उसी बीएड पी लिटा दया और उसी अपनी तरफ खींच की उसकी होंठों को किश करनी लगा ........ महीन उसी रोक रही थी .......

महीन ........ विनोद .... क्यों पागल बन रही हो ..... प्लीज अपनी घर चलो वहां जा की जो दिल चाही क्र लेना ..... नहीं रोकों गई तुमको .....

विन्डोद ......... प्लीज महीन समझा करो न ....... थोड़ा थ्रिल करनी दो न पलेआसे .......

महीन ...... नहीं न ..... मुझी शर्म आती है न ....

विनोद ....... एक तो तुम शर्माती बुहत हो .......... देखा नहीं था अभी उस सेल्स गर्ल को ....... कैसी बी शर्मी सी खरी थी और कैसी सुब डील क्र रही थी.........

महीन को याद आज्ञा ....... और तुम उसकी बूब्स को घूर रही थय ......

विनोद हंसा ....... उउउउउउफ .... जब वह दिखा रही थी तो देखना तो था hi न ....... पर तुम्हारी तो उस सी भी बुहत hi प्यारी हैं ............. विनोद महीन की बूब्स को दबाती होय बोलै .......... महीन हंसने लगी ........

फिर विनोद बीएड सी उठा और अपनी पंत की ज़िप खोलनी लगा ....... महीन भी उठ की बेथ गए बीएड पी hi ... और उसकी तरफ देखनी लगी ....... वह अपना लुंड अपनी खुली ज़िप सी निकाल की उसकी सामन्य खरा हो गया .......

विनोद ...... देखो तो कैसी खरा होआ है तुम्हारी लये ....

महीन हंसी और उसकी लुंड को हल्का सा स्लैप करती होइ बोली ..... यह तो हर वक़त hi ऐसी hi रहता है ......... वैसी यह मेरी वजह सी खरा है या उस सेल्स गर्ल की लय ......... महीन न्य उसी तैसे क्या ........

विनोद ...... हाहाहाहा ............ तुम्हारी लय ............ क्यों की जब भी तुमको अपनी पास देखता है तो खरा हो जाता है न बस यह .....

महीन हंसी और फिर उस न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय लय ... और उसी ाहसिता ाहसिता सहलानी लगी ........... फिर उसकी टोपे को किश करती होइ बोली .........

महीन ..... ाचा सूचि सूचि बताओ जब हमारी बीच यह सुब शुरू नहीं होआ था तो तब भी क्या यह ऐसी hi खरा होता था .....

विनोद महीन की सर की बलून को सहलाती होय बोलै .... हाँ होता था ........

महीन मुस्कराई ....... उसी ाचा लगा ........ तो फिर क्या कृत्य थय .....

विनोद ..... क्या करना है बस सबर करता था ...... खुद को कण्ट्रोल करता था और ...........

महीन ...... और क्या ...... ???

विनोद हंसा ...... वाशिंग बिन सी तुम्हारी पंतय और ब्रा उठा की उन सी मुठ मारता था ....... अपना पानी निकालता था .... और फिर उनको धू की दाल देता था .......

महीन शॉकेड हो गए ....... hhhhhhhoooooooooooo ........... gandayyyyyyyyyyyy ........... यह सुब कृत्य थय तुम मेरी पंतय और ब्रा की साथ .......... महीन को बुरा नहीं लगा था .......... बल्कि ाचा hi लगा था ........

विनोद ...... हाँ तो कुछ तो करना hi था न जब तुम मेरी पास नहीं थी तब ..... इतना क़रीब हो की भी जब इतना दूर थी ......

महीन मुस्करा दी ........ सबर नहीं क्र सकती थय क्या .......

विनोद ..... सबर तो तब करता न जब तुम्हारी मिलनी की उम्मीद होती .......

महीन मुस्कराई ..... पर मिल तो गए न तुमको ..... और फिर ाग्य को झुक की उसकी लुंड को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसनी लगी ..... आहिस्ता आहिस्ता उसकी ऊपर जुबां पहिरण्य लगी ...... चैतन्य लगी ..... और कभी फिर सी मुंह मैं लय की सूचक करनी लगती ......... उसका हाथ विनोद की लुंड की नीची की बॉल्स को सहला रहा था ........ आहिस्ता आहिस्ता ..... उसकी लुंड को चूसती होय ....... विनोद को भी ाचा लग रहा था ........... उसकी बलून को सहला रहा था ...... जो ख़राब होती जा रही थय ....... महीन को भी मज़ा अन्य लगा था ....... वह भी पूरा पूरा साथ दी रही थी ......

कुछ देर तक ऐसी hi लुंड चूसनी की बाद विनोद न्य महीन को बीएड सी खरा क्या और उसी बीएड पी अपनी दोनों हाथ रख की झुकनी को बोलै ......

महीन फिर सी उसी रोकनी की लय बोली ........ बस करो न .... अब इतना तो क्र दया है ....... अब बाक़ी अपनी घर जा की क्र लेती हैं ......

विनोद ..... नहीं प्लीज ..... जल्दी सी झुक जाओ न ......

महीन को उसकी बात मान नई hi पारी ... वह बीएड पी हाथ रख की झुक गए ...... और पिच्य मुद की विनोद की तरफ देखनी लगी .... विनोद न्य महीन की स्कर्ट को ऊपर को उठाया ..... और उसकी पंतय पहनी होइ गांड को नंगा क्र दया .... फिर महीन की पंतय को उसकी टांगों सी नीची को सिरकाती होय उसकी पैरों तक लय आया ...... महीन न्य बारी बारी अपनी पाऊँ उठाय और अपनी पंतय उतार दी .... जो अब उसकी पैरों की पास hi पारी होइ थी ...... महीन की हिप्स को खोलती होय विनोद न्य अपनी लुंड की टोपे पी थूक लगा की महीन की छूट की सूराख पी रखा और आहिस्ता ाहसिता उसी अंदर डालनी लगा ......... महीन की कमर को पाकर की ........

aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ........... ssssssssssss ............ महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकालनी लगीं ........ उसकी छूट भी गीली हो रही थी .......... उसकी आंखें बंद होनी लगीं और वह भी आहिस्ता ाहसिता ाग्य पिच्य को होती होइ विनोद सी छुडवानी लगी ........ विनोद की धक्कों मैं तेज़ी आती जा रही थी ..... महीन को भी ाचा लग रहा था यौन ऐसी किसी अजनबी जगा पी चुदाई करना ....... विनोद न्य पूरी कपड़े पहनी होय थय ..... सिर्फ अपना लुंड अपनी पंत की ज़िप सी निकाल की महीन को छोड़ रहा था ...... जिसका निचला जिसम पूरा hi नंगा हो रहा था ...........

विनोद न्य महीन की शर्ट की अंदर हाथ डाली और उसकी कमर को सहलानी लगा ...... उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स और हुक्स सी खेलनी लगा ....... फिर विनोद न्य पिच्य सी लुंड डाली होय hi महीन की दोनों कन्धों को पकड़ा और ढक्की लगानी शुरू क्र डाई ....... उसका लुंड तेज़ी की साथ महीन की छूट मैं अंदर बहार हो रहा था ........ महीन भी अपनी मंज़िल को पोहंच रही थी ...... और फिर थोड़ी देर मैं उसकी छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया ...... और वह अपनी ओर्गास्म को पोहंच गए ...........

विनोद भी फ़ारिग़ होनी वाला था ...... उसनी महीन की कमर की गिर्द अपनी बाज़ू कस्सी और फिर उसकी लुंड न्य भी अपना पानी महीन की छूट मैं उगल दया ........ विन्डोद का लुंड महीन की छूट मैं झटकी मारती होय अपना माल गिरा रहा था ........ महीन भी उन लम्हों की पूरी पूरी लज़्ज़त मैं थी ......... उसका पूरा जिसम भी कैंम्प रहा था ......... विनोद का लुंड अपना गाढ़ा गाढ़ा पानी महीन की छूट मैं चोर रहा था ......... दोनों hi निढाल हो रही थय ......

अचानक hi अपार्टमेंट की मैं दूर मैं चाबी घूमनी की आवाज़ सुनाई दी ...... दोनों अचानक सी पैनिक हो गए ........ विनोद न्य अपना पानी चोरता होआ लुंड महीन की छूट सी निकाला और सीधा खरा हो गया .......... उसकी लुंड सी पानी निकल की नीची फर्श पी गिरनी लगा ........ महीन भी जल्दी सी सीढ़ी होइ और अपना स्कर्ट ठीक करनी लगी ....... दोनों इतनी तेज़ी मैं थय ...... महीन की पास पंतय पहन न्य का भी टाइम नहीं था .......

महीन हलकी सी आवाज़ मैं चीखी ... यह कौन आज्ञा है ..

विनोद .... पता नहीं कौन है .. तुम जल्दी सी कपड़े ठीक करो .... मैं बहार जा की देखता हों ..... विनोद अपनी लुंड को अपनी अंडरवियर की अंदर क्र की ज़िप लगा की बहार की तरफ जाती होय बोलै ......

विंडो की बहार जांय सी महीन और भी घबरा गए ..... उसनी जल्दी सी अपनी पंतय उठाई नीची सी और उसी पहन न्य लगी ..... मगर घबराहट और जल्दी की वजह सी उस सी पहनी नहीं जा रही थी .. उसकी पाऊँ लरखरा रही थय .... और एक बार तो वह गिरती गिरती बची ........ बहार उसी विनोद की किसी की साथ बातें करनी की आवाज़ सुनाई दी ........... जैसी कोई अंदर बैडरूम मैं आ रहा हो ....... महीन न्य घबरा की जल्दी सी अपनी पंतय अपनी पैरों सी निकाली और उसी अपनी स्कर्ट की पॉकेट मैं दाल लय .... और अपना स्कर्ट ठीक करती होइ बहार की तरफ बरही .........

दरवाज़ा खोल की बहार लाउन्ज मैं आई तो देखा की विनोद ब्रोकर की साथ खरा था ..... ब्रोकर महीन की हालत को देखनी लगा ..... उसकी बाल बिखरी होय थय ..... शर्ट आधी स्कर्ट की अंदर थी और आधी बहार थी .... मेकअप भी बिखरा होआ था ....... साफ़ लग रहा था की वह अंदर बैडरूम मैं क्या क्र की आ रही है .......

ब्रोकर न्य ऊपर सी नीची तक महीन को देखा और फिर मुस्करा पारा ........ महीन इधर उधर देखनी लगी .......

ब्रोकर .... मम कैसा लगा आप को यह अपार्टमेंट ..... उम्मीद है की आप को कम्फर्टेबले लगा हो गए .....

महीन ..... जी ाचा है .....

विनोद ...... आप यहाँ कैसी आय .....

ब्रोकर मुस्कराया ..... ओह हाँ मैं फ्री हो गया तो सोचा की आप सी कीस लेता जाऊँ और आप की ओपिनियन भी पूछ लोन ..... ताकि इसी प्रोसीड क्या जा सकी ....... मैं न्य आप की अपार्टमेंट मैं जा की काफी देर बेल्ल दी मगर दरवाज़ा नहीं खुला ...... ी थॉट की आप लोग बाहिर है अभी ....... फिर मैं न्य सोचा की मैं इस अपार्टमेंट का एक चक्कर लगाता जाऊँ ....... इसलय इधर आज्ञा .......... लकिन ी फील ी हैवे इन्ट्रप्टेड यू पीपल ........ ी ऍम एक्सट्रेमेली सॉरी फॉर तहत ...... वह आहिस्ता सी माइनि खैज़ मुस्कराहट की साथ दोनों को देखती होय बोलै ........

महीन न्य शर्मिंदाह हो की अपना सर झुका लय .......

विनोद फौरन बोलै ...... नहीं नहीं .... it's no प्रॉब्लम ....... हम जस्ट बैडरूम देख रही थय .........

ब्रोकर न्य दोबारा सी उनको किचन, बालकनी और लाउन्ज दिखाया और फिर उनकी साथ लय की बैडरूम मैं जांय लगा ....... दोनों उसकी पिच्य पिच्य थय ........ महीन का दिल तेज़ी सी धारक रहा था ........ उसनी विनोद का हाथ खींचनी की कोशिश की ....... मगर वह भी थोड़ा परेशां लग रहा था .......... तीनों अंदर दाखिल होय ........

तीनों की नज़र बीएड पी पारी ...... जिसकी बेडशीट खराब हो रही थी ...... जैसी अभी अभी इसी बीएड को उसे क्या गया हो चुदाई की लय ....... फिर ब्रोकर की नज़र नीची फर्श पी पारी ..... जहाँ विनोद की लुंड सी निकली होइ मणि गिरी होइ थी ........... महीन का मुंह खुश्क होनी लगा ........ उधर नीची सी उसकी छूट मैं मौजूद विनोद की लुंड की माननी अजीब सा अहसास पैदा क्र रही थी ....... बुहत अजीब फीलिंग हो रही थी ...... और कुछ पानी बेहटा होआ उसकी छूट सी बहार भी आ रहा था .............. महीन का शर्म की मारी बुरा हाल हो रहा था .............. उसनी भी नीची फर्श पी गिरी होइ विनोद की लुंड की माननी को देख लय था ........ उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ........... उसी बुहत शर्म आ रही थी यह सोच सोच क्र की वह ब्रोकर पता नहीं क्या सोचता हो गए उन की बारी मैं ........

ब्रोकर ....... ी थिंक यू विल एग्री अबाउट थे कम्फर्ट ऑफ़ थिस बैडरूम ............ िफ़ ी ऍम राइट ....

विंडो आहिस्ता सी बोलै .... यह आईटी इस फाइन .........

ब्रोकर न्य वाशरूम भी खोल की दिखाया ......... की यह आत्ताच बाथ है ...... फिर उसनी अपनी हाथ मैं पकरि होइ डायरी ड्रेसिंग टेबल पी राखी और कपबोर्ड्स खोल की दिखानी लगा .........

ब्रोकर ....... ी होप की आप लोगो को यह अपार्टमेंट पसंद आया हो गए ...... मेरी आप को एडवाइस हो गई की इसी मिस ना करें ......

विनोद ... जी जी हमें यह पसंद है ...... आईं हमारी अपार्टमेंट मैं जा की डील फाइनल कृत्य हैं ......... वह खुद भी उसी वहां सी लय की जाना चाहता था .......

ब्रोकर ..... यस यस सूरे .......

विनोद की ाग्य ाग्य ब्रोकर निकला और विनोद पिच्य था ..... महीन न्य उसको पिच्य सी उसकी शर्ट पाकर की खींचा ........ विनोद महीन की तरफ देखनी लगा ....... तो महीन न्य फर्श पी गिरी होइ उसकी माननी की तरफ इशारा क्या ......... जैसी कह रही हो की उसका क्या करना है .........

विनोद वीर्य सी बोलै ..... उसी जल्दी सी साफ़ क्र दो ..... और यह कह की वह बहार निकल गया .........

महीन को पता था की उसी hi यह साफ़ करनी है ...... वह इधर उधर देखनी लगी ......... मगर उसी कोई भी कपड़ा या टिश्यू पेपर का बॉक्स नहीं मिला .......... उसी एक और ख्याल आया ...... उसनी अपनी पॉकेट मई राखी होइ अपनी पंतय निकाली ....... और नीची गिरी होइ माननी की स्पॉट की पास बेथ की उसी अपनी पंतय सी साफ़ करनी लगी ......... माननी ज़्यादा नहीं थी .... मगर काफी सारी ड्रॉप्स बिखरी होय थय ............ महीन उसी ाच्य सी दो तीन बार साफ़ क्र रही थी .........

अचानक सी बैडरूम का दरवाज़ा खुला और ब्रोकर अंदर दाखिल होआ ..... उसनी महीन को वहां नीची माननी की स्पॉट की पास बैठी होय देख लय ......... और उसकी हाथ मैं पकरि होइ उसकी पैंटी को भी ......... महीन उसी देख की घबरा गए ...... और हिल भी ना सकीय अपनी जगा सी ....... उसी समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय ......... वह तो जैसी शर्म सी मरी जा रही थी ........ उस ब्रोकर न्य एक ग़ैर मर्द न्य ........ उसी अपनी पंतय की साथ .... एक दूसरी मर्द की माननी को फर्श पर सी साफ़ कृत्य होय देख लय था ...........

ब्रोकर न्य वीर्य सी मुस्करा की महीन की तरफ देखा ....... और ड्रेसिंग टेबल सी अपनी डायरी उठाती होय बोलै ....... मैं अपनी डायरी भूल गया था यहाँ पी ....... फिर वह दरवाज़ी की तरफ बढ़ा ....... एंड मम यू प्लीज लीव आईटी ....... आईटी विल बे क्लीनेड लेटर .......... यह बोल की वह मुस्कराता होआ रूम सी निकल गया .......

महीन भी होश मैं आई और जल्दी सी खरी हो की विनोद की माननी को साफ़ की होइ अपनी पंतय को फिर सी अपनी स्कर्ट की पॉकेट मैं डाला और जल्दी सी बैडरूम की दरवाज़ी सी बहार निकल गए ......... विनोद न्य उसी देखा ......... महीन का चेहरा लाल हो रहा था .......... वह बिना कोई बात कए अपना बैग और हैंड बैग उठा की अपार्टमेंट सी निकलती होय बोली .......... विनोद मैं अपनी अपार्टमेंट मैं जा रही हों ......

महीन की निकलती hi ब्रोकर वहीँ सोफे पी बेथ गया ...... और फिर दोनों न्य वहीँ बेथ की डील फाइनल की ........ और विनोद न्य पेपर्स सिग्न क्र डाई .......... ब्रोकर न्य कीस विनोद की पास hi रहंय दिन ....... और विनोद न्य उसी बोलै की वह वीकेंड तक यहाँ शिफ्ट हो जाईं गए ....... फिर उस अपरमेन्ट को लॉक क्र की दोनों नीची आगये ...... विनोद न्य ब्रोकर को सी ऑफ क्या और फिर अपनी अपार्टमेंट मई आज्ञा ...........

दरवाज़ा नॉक करनी पर महीन न्य दरवाज़ा खोला ....... उसी देखती hi उसकी पिच्य देखनी लगी की कोई और तो नहीं है न ....... उसी सुकून मिला जब उसनी देखा की वह अकेला है ...... महीन न्य विंडो को उसकी टाई सी पाकर की अंदर खींचा, दरवाज़ा ज़ोर सी बंद क्या और उसी दरवाज़ी की साथ लगा की उसकी सीने पी मुक्के मारती होइ बोली ........

महीन ..... पागल इंसान ...... रोका भी था मैं न्य तुमको की वहां नहीं करो ......... मगर तुम तो मानती hi नहीं हो न जब तुम पी सेक्स का भूत सवार हो जाता है एक बार ......

विनोद हंसती होय खुद को चुरवानी की हलकी सी कोशिश कृत्य होय बोलै ..... अब क्या हो गया .......

महीन गुस्सा दिखाती होइ बोली ....... उस ब्रोकर न्य मुझी वहां नीची साफ़ कृत्य होय देख लय है जब वह दोबारा अंदर आया तो .......

विनोद हंसा ...... ओह माय गॉड ........ किस सी साफ़ क्र रही थी .....

महीन गुस्से सी बोली ........ अपनी पंतय सी .....

विनोद फिर हंसनी लगा ...... ओह सॉरी सॉरी ....... यह तो सुच मई hi बुहत ग़लत हो गया ......... यार ी ऍम रियली सॉरी ...... आज तो ब्लंडर पी ब्लंडर हो रही हैं ........... सॉरी सॉरी सॉरी ...... विनोद अपनी दोनों कान पाकर की माफ़ी मांगती होय बोलै .........

महीन उसी चोरटी की किचन की तरफ जाती होय बोली .... अब आज तुम कहना सही मुझी अपनी पास अन्य को .......

विनोद न्य जल्दी सी महीन को पिच्य सी hi अपनी बहून मई लय लय और उसकी गर्दन को किश करनी लगा ........... मेरी जान .... क्यों परेशान होती हो इन छोटी छोटी बातून सी ........ यह सुब इन लोगो की लय कॉमन है ......

महीन गुस्सा दिखाती होइ ....... इन की लय कॉमन है न हमारी लय तो नहीं न .......

विनोद महीन की गाल को चूमती होय बोलै ...... हमें भी इस सुब को अब कॉमन लेना चाही ........ एक आम सी बात ....... फिर hi हम यहाँ सर्वाइव क्र सकती हैं न ...........

महीन न्य खुद को विनोद सी छुडवाया ...... बातें चोरो और जाओ चेंज करो जा की ............

विनोद ..... okay बॉस ..... कहती होय अपनी बैडरूम की तरफ चला गया ........ और महीन मुस्कराती होइ वाशरूम की तरफ चली गए ....... अपनी आप को वाश करनी की लय .....

थोड़ी देर मई दोनों फ्रेश होनी की बाद महीन न्य चाय बनाई और दोनों कप लय क्र विनोद की बैडरूम मई आगये ....... वह वाशरूम मैं था ....... महीन उसकी बीएड पी लेट की उसका िनित्ज़ार करनी लगी ........ थोड़ी देर मैं विनोद भी आज्ञा तो दोनों बेथ की चाय पीनी लगी .......

महीन ...... विनोद आज तो बुहत hi बुरा होआ .......... और सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह सी ...........

विनोद ..... कुछ नहीं होआ तुम ऐसी hi परेशान हो रही हो .....

महीन उसी टेढ़ी आँख सी देखती होइ बोली ....... कैसी कुछ क्यों नहीं होआ ............. साफ़ तो दिख गया था उसी की हम उस घर की बैडरूम मैं hi शुरू हो गए होय थय जैसी हम रहंय की लय देखने गए थय ........ मुझी तो अभी भी शर्मिंदगी हो रही है ............

विनोद ........ कोई बात नहीं है षर्मान्य की ........ अगर उसी पता लग भी गया है तो ...............

महीन ..... वैसी पता नहीं क्या क्या सोचता हो गए हमारी बारी मैं ..... की पहली तो यह एक साथ रहना नहीं चाहती थय और अब देखो हर जगा शुरू हैं ........... महीन हंसी ......

विनोद ....... हाहाहाहा ....... वह बस यही समझी गए न की हम भी यहीं की रंग मैं रंग गए हैं ........... दोनों हंसनी लगी ........

चाय पीनी की बाद दोनों आराम करनी की लय लेट गए ........ उसी तरह एक hi बीएड पी ..... एक साथ चिपक की ...... एक दूसरी की बहून मैं ........
 
अपडेट NO: 32

रात का खाना कहानी की बाद दोनों न्य मिल क्र किचन समेटा .... और फिर विनोद अपनी बैडरूम मैं चला गया ......... थोड़ी देर की बाद महीन दूध गरम क्र की 2 ग्लासेज मैं दाल की रूम मैं आगये ..... बिलकुल एक संस्कारी पत्नी की तरह ........ और ग्लासेज ला की बेडसाइड टेबल पी रख डाई ...... फिर ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो की अपनी बाल ब्रश कए ...... और अपनी चेहरी और हाथों पी लोशन लगानी लगी ...... वह ड्रेसिंग टेबल की आंय मैं विनोद को देख रही थी जो की बीएड पी बैठा होआ अपना मोबाइल देख रहा था ..... उसी देखती होय महीन मुस्करानी लगी ........ की कितना कासुअल लग रहा है न ....... और कितनी आम सी बात लग रही है न ... ऐसी बी तक्लुफी की साथ एक ग़ैर मर्द की सामन्य उसकी बैडरूम मैं बैठना ....... फिर वह खुद सी hi बोली की अब वह ग़ैर कहाँ रहा है ....... अब तो सुब कुछ इतनी बार उनकी बीच हो चूका है ..... वह मुस्कराती होइ उठी और बीएड पी आगये ...... और वही टिपिकल अलफ़ाज़ बोली पत्नयों वाली .....

महीन दूध का गिलास विनोद की तरफ बढ़ाती होय बोली ...... कब तक मोबाइल पी लगी रहना है .... सोना नहीं है क्या

अभी रात की 10 बजी थय ...... विनोद न्य मोबाइल साइड पी रखा और दूध का गिलास महीन सी लय क्र सिप लेनी लगा ........ महीन भी अपना गिलास पीनी लगी ....... दोनों क़रीब क़रीब hi बैठी होय थय बीएड की बैक सी टेक लगाय होय ...... महीन न्य एक कॉटन की नाईट ड्रेस पहनी होइ थी ..... जो की बुहत hi छोटी सी शॉर्ट्स और एक शार्ट लेंथ शर्ट थी ...... शॉर्ट्स तो उसकी हाफ तइस तक थीं ......... पूरी टांगें नंगी थीं ..... और तइस भी ........ वह अपनी टांगें फैला की बैठी होइ थी ..... और विनोद उसकी मुलायम तइस पी हाथ फेर रहा था .... उनको सहला रहा था ...... महीन को ाचा लग रहा था ..... अपनी गोरी गोरी तइस पी उसकी सांवली हाथों का कंट्रास्ट ....... दूध पीनी की महीन न्य गिलास साइड टेबल पी रखा और विनोद सी भी गिलास लय क्र रख दया ...... और उसकी तरफ देखा तो विनोद न्य मुस्कराती होय उसी अपनी बहून मैं खींच लय ...... महीन मुस्कराती होइ उसकी सीने सी लग गए ....... उसी भी ाचा लगता था विनोद की सीने मैं अपना मुंह छुपाना .... अपना सर उसकी कांधों पी रखना ..... उसकी जिसम की लम्स को महसूस करना ......... महीन न्य अपना सर विनोद की सीने पी रखती होय उसकी सीने पी किश क्र लय ....... विनोद भी उसकी बलून को सहलानी लगा ....... महीन की रेशमी बलून मैं हाथ फैरना उसी बुहत ाचा लगता था ......

महीन उसकी मूड को समझनी लगी थी अब ...... इसी लय वह बोली ...... चलो अब सत्य हैं .......

विओड़ महीन की बूब्स को सहलाती होय बोलै ..... नहीं अभी नहीं .....

कुछ देर मैं सोएं गए ...... ओह हाँ याद आया ..... वह हैंड बैग कहाँ ही जो आज शॉपिंग क्र की आय थय ........

महीन न्य उसी घूर की देखा ............ उसका क्या करना है अभी ..

विनोद .... लाओ तो सही ...... देखें तो सही न की कैसी चीज़ें हैं वह .......

महीन बीएड सी उठी और कपबओर्ड खोल की उस मैं सी वही हैंडबैग उठा की वापिस बीएड पी आती होय बोली ..... आखिर इस सुब की ज़रूरत क्या थी तुमको लेनी की ........

विनोद ..... सूचि बताऊँ ... हमेशा मूवीज मैं देखा था अंग्रीज़ लक्यों को यह सुब उसे कृत्य होय ..... तो बस दिल क्या की क्यों न लाइव देखा जाय .......

महीन उसी घूरती होइ ...... और तुम्हारी डेमोंस्ट्रेशन की लय मैं hi मिली हों क्या तुमको ...........

विनोद हंसा .... हाँ ....... क्यों की तुम तो मेरी जान हो न ...... महीन भी मुस्करा दी .......... और विनोद को तैसे करती होइ बोली .......

महीन ..... क्यों ...... वह है न तुम्हारी प्रिय ....... उसकी साथ क्यों नहीं क्या यह सुब कुछ ......

विनोद मुंह बनाती होय बोलै ........ उसका तो नाम hi ना लो न ........ वह तो बुहत कन्सेर्वटिवे है .......... तुम्हारी तरह ब्रॉड माइंडेड नहीं है ........

महीने मुस्कराई .... जे नहीं ...... मैं भी कोई ब्रॉड माइंडेड नहीं हों ...... यह तो तुम hi बना रही हो मुझी ऐसी ..........

विनोद न्य मुस्कराते होय महीन सी वह हैंड बैग लय और उस मैं सी वह वाइब्रेटर निकाला ..... पिंक कलर का स्मूथ ..... रबर मटेरियल का .... टपपेरिंग एन्ड .... जो छूट मैं एंटर होनी की लय परफेक्ट शेप थी .........

महीन भी उसकी साथ उस वाइब्रेटर को देख रही थी ..... भला इसकी साथ क्या करती हों गई लडक्यां भी न ......

विनोद ... एहि तो देखना है न .........

महीन शर्माती होइ ...... मुझी नहीं करना कुछ भी इनकी साथ .....

विनोद न्य थोड़ी सी महीन की तरफ करवट ली .... और उसकी गालों को किश करनी लगा ........ बस थोड़ा सा प्लीज........

विंडो न्य महीन की शर्ट की बटन खोली ...... और महीन की दोनों खूबसूरत बूब्स नंगी हो गए ........ उनकी निप्पल हल्की हॉकी तनय होय थय ........ विनोद न्य झुक की महीन की बूब्स और उनकी क्लीवेज को किश क्या ........ और अपनी जुबां सी उसकी गुलाबी निप्पल्स को शून्य लगा ....... चैदंय लगा ..... चैतन्य लगा ..... महीन को हमेशा की तरह ाचा लगनी लगा था ........ उसनी अपना हाथ विनोद की सर की बलून मैं रखा और उनको सहलानी लगी ........ विनोद न्य वाइब्रेटर को ों क्या ...... और उनकी खामोश कमरे मैं उस वाइब्रेटर की वाइब्रेशन की हलकी हलकी आवाज़ सुनाई देंय लगी ........ महीन विनोद की तरफ hi देख रही थी .... और उसकी हाथ मैं पकड़ी होय उस मूव कृत्य होय उस वाइब्रेटर को ............. विनोद न्य अपनी जुबां सी एक बार फिर सी महीन की निप्पल को छूआ ..... फिर उसी अपनी दांतों की बीच लय क्र आहिस्ता सा काटा ... और दांतों मैं दबा की उसी खींचनी लगा ........ ssssssssssssssssss .......... aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ........... महीन की होंठों सी सिसकारी सी निकली .......... विनोद न्य अब उस विबरते कृत्य होय वाइब्रेटर की टिप को महीन की निप्पल सी टच क्या .......... जैसी hi वाइब्रेटर महीन की तनय होय निप्पल को टच होआ था महीन की पूरी जिसम मैं जैसी करंट सा दौड़ गया ...... उसका पूरा जिसम कैंम्प सा गया ...... हिल सा गया ........ मगर वह फीलिंग बुहत अछि लगी महीन को .... उसनी विनोद को रोकनी की कोई कोशिश नहीं की ........

विनोद अब महीन की निप्पल को बार बार उस वाइब्रेटर की साथ टच करनी लगा ....... जिस सी महीन को करंट सा लगता ...... आखिर उसनी उसी निप्पल की साथ hi थोड़ी देर की लय लगा दया .... और महीन का तो जैसी पूरा जिसम hi विबरते करनी लगा ......... आंखें ऊपर को चढनी लगीं ............. aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhgggggggggghhhhhhhhhhhh ............ mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm महीन की होंठों सी बी रब्त सी आवाज़ें निकालनी लगीं ........ लज़्ज़त सी भरपूर ....... उसनी एक हाथ की साथ विनोद की बाज़ू को भींच लय ......... और उसकी जिसम सी लिपटनी लगी ............ उस वाइब्रेटर की वाइब्रेशन उसकी पूरी जिसम मैं रींग रही थी ...... और यहाँ तक की उसकी छूट की अंदर तक भी महसूस हो रही थी .......... जिस सी उसी अजीब सी फीलिंग हो रही थी ......... और छूट की अंदर बिना हाथ लगाय hi गीला पैन महसूस हो रहा था ....... आखिर जब महीन सी ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं हो सका तो उसनी अपनी हाथ की साथ उस वाइब्रेटर को हटा दया ...... और गेहरी गेहरी सांस लेनी लगी ...... उसकी चेहरी पी हॉकी सी मुस्कराहट थी ......... और अजीब सी कैफयत ....

विनोद न्य वाइब्रेटर को ऑफ क्या .... और उसकी होंठों का हल्का सा किश लेती होय बोलै ...... कैसा लगा महीन .......

महीन न्य अपनी बंद आंखें हौली सी खोलीं ..... और हलकी सी ... शर्मीली सी मुस्कराहट की साथ विनोद को देखती होय बोली ...... अमेजिंग ........... और अपनी बात पी शर्मा गए ......

विनोद अपना हाथ महीन की नंगी पेट पी सी सहलाती होय नीची उसकी छूट की तरफ लय गया ....... और उसकी छूट को उसकी शॉर्ट्स की ऊपर सी छूती होय बोलै ..... यहाँ पी इसका और भी मज़ा आय गए ....

महीन न्य शर्माती होय ना मैं सर हिलाया ........ नहीं विनोदद्ड ....... वहां नहीं प्लीज ....... बुहत अजीब सी फीलिंग होती है ......

विनोद न्य महीन की शॉर्ट्स को उसकी तइस पी नीची को सिरकाना शुरू क्र दया ....... और आहिस्ता आहिस्ता उसकी शॉर्ट्स को उसकी जिसम सी उतार दया ..... अब महीन का निचला जिसम नंगा था ..... उसकी गुलाबी छूट नेकेड हो चुकी थी ..... विनोद न्य खुद भी सिरकटी होय नीची को आया ....... और महीन की दोनों टांगों को खोल की बीच मैं लेट गया ........ महीन की सुफैद और गुलाबी लबूं वाली छूट विनोद की आँखों की सामन्य थी ....... वह उसी कुछ देर तक देखता रहा .....

विनोद ...... महीन .... तुम्हारी छूट सुच मैं बुहत hi प्यारी और खूबसूरत है ........ दिल करता है की बस इसी खाता hi राहों .....

महीन अपनी छूट की तारीफ सुन की मुस्करा दी ..... विनोद न्य आहिस्ता सी ाग्य हो क्र महीन की छूट को अपनी होंठों सी चूम लय ...... छूट की ऊपर की हिस्से पी महीन की छूट का छोटा सा गुलाबी दाना था ....... छोटी सी क्लीट ........ विनोद न्य अपनी जुबां की साथ उसी छूआ .... उसी तैसे क्या तो महीन का जिसम हिलनी लगा ..... विनोद न्य महीन की छूट की लबूं को खोलती होय अपनी एक ऊँगली छूट की अंदर डाली और उसी महीन की छूट मैं अंदर बहार कृत्य होय अपनी जुबां की टिप की साथ महीन की छूट की दांय को सहलानी लगा ....... महीन एक बार फिर सी लज़्ज़त मैं खूनी लगी ......

कुछ hi देर की बाद विनोद न्य अपनी क़रीब hi रखा होआ वह वाइब्रेटर ों क्या ...... और उसी महीन की छूट की दांय पी टच क्र की हटा लय .......... AAAAAAAAAAAHHHHHHHHHHHHHH ........... OOOOOOOOOOOO ........ महीन की मुंह सी अचानक सी एक तेज़ सिसकारी निकल गए ........ और उसका पूरा जिसम hi कैंम्प गया ........... विनोद मुस्कराया .... और अब बार बार उस विबरते कृत्य होय वाइब्रेटर की साथ महीन की छूट की दांय को शून्य लगा .. और हटानी लगा ........ महीन की हालत खराब होनी लगी ....... उसकी छूट सी पानी बेहनी लगा ..... उसनी अपनी दोनों हाथ फैला की बेडशीट को अपनी दोनों मुठयों मैं भींच लय ........ और आंखें बंद क्र सर को पिच्य को लय जांय लगी .......... विनोद न्य आहिस्ता सी उस वाइब्रेटर को ऑफ क्या और फिर उसी महीन की छूट की अंदर सिरका दया ... वाइब्रेटर ऑफ होनी सी महीन को कुछ सुकून मिला ........ मगर अब वह उसकी छूट की अंदर दाखिल हो चूका होआ था ........ जैसी वह उसकी छूट मैं ाहसिता आहिस्ता अंदर बहार क्र रहा था ........ महीन को भी ाचा लग रहा था ........... सांसें फूल रही थीं ........ लम्बी गहरी सांसें लय रही थी ............

अचानक सी विनोद न्य वाइब्रेटर ों क्र दया .... और उसनी तो महीन की छूट की अंदर जैसी तूफ़ान hi खरा क्र दया ....... महीन तो चीखँय लगी ..... उसका पूरा जिसम हिलनी लगा ..... ाकर्ण्य लगा ..... अपनी हिप्स को ऊपर उठाती होइ अपनी छूट को ऊपर को उछालनी लगी ....... गर्दन उसकी पिच्य को जा रही थी ....... आंखें बंद थीं ........ और छूट तो पानी चोरी जा रही थी ........ इसी विब्रेशन्स की दौरान hi महीन अपनी ओर्गास्म को पोहंच गए ........ हिलती होइ ....... कंम्पटी होइ ........... महीन का ओर्गास्म पूरा होनी की बाद विनोद न्य वाइब्रेटर महीन की छूट सी निकाला और उसी ऑफ क्र की साइड पी रख दी ........ और ऊपर को ाक्य महीन की कांम्पत्य होय जिसम को अपनी बहून मैं भर लय ......... उसकी तो हालत ख़राब हो रही थी ........ पूरा जिसम कैंम्प रहा था ..... विनोद उसी किश करनी लगा ........ महीन भी अपना आप विनोद की साथ चिपका की खुद को सुकून देंय की कोशिश करनी लगी .......... विनोद महीन की कांम्पत्य होय जिसम को आहिस्ता ाहसिता सहला रहा था ...... और उसकी सर की बलून और माथै और कांधों पी किश क्र रहा था .......

विनोद आहिस्ता सी बोलै ....... महीन ...... तुम ठीक तो हो न .......

थोड़ी देर की बाद महीन की हालत संभाली ........ उसनी आहिस्ता ाहसिता अपनी आंखें खोलीं ........ और वीर्य सी बोली ......... यह क्या था विनोद ...........

विनोद वीर्य सी मुस्कराया ........ ज़िन्दगी का मज़ा ...... कैसा लगा तुमको .........

महीन न्य हलकी सी मुस्कराहट सी अपना मुंह विनोद की सैन्य मैं छुपा लय ........ और विनोद को अपनी बात का जवाब मिल गया .....
 
आहिस्ता आहिस्ता महीन का जिसम नार्मल होनी लगा ....... विनोद न्य दोबारा सी वही वाइब्रेटर उठा लय था ...... और उसी देख रहा था ...... महीन की नज़रें भी उसी पी थीं ....... वह बुहत hi वीर्य सी बोली ......... बुहत hi अजीब चीज़ है यह ......

विनोद मुस्कराया ....... लकिन है तो कमल की न .....

महीन भी मुस्करा दी .....

विनोद ........ इसका कमल तो देख लय ...... चलो अब दूसरी को भी चेक कृत्य हैं .....

महीन विनोद की तरफ देखनी लगी ...... नहीं प्लीज ...... फिर कभी सही ...... अभी कुछ और नहीं ............ मेरी मैं बिलकुल भी हिम्मत नहीं है कुछ भी और करनी की .............

विनोद जो महीन की बिलकुल बराबर मैं लेता होआ था ......... तो फिर मेरी इसका क्या हो गए .......... इसकी हालत तो देखो ............ विनोद न्य अपनी नंगी लुंड की तरफ इशारा कृत्य होय कहा ........ जो बिलकुल एकरा होआ था ..... और हल्का लय रहा था .............

महीन विनोद की लुंड की तरफ देख क्र मुस्कराई ...... आहिस्ता सी अपना हाथ ाग्य बढ़ा की उसकी लुंड की क़रीब रखा ....... और अपनी ऊँगली सी उसकी खरी होय लुंड को सहलानी लगी ............ उसकी ऊपर की स्किन भी आहिस्ता ाहसिता मूव क्र रही थी ............ उसकी लुंड की ऊपर hi आहिस्ता ाहसिता स्लाइड क्र रही थी ............

महीन ....... तुम्हारी इसकी लय तो वह डॉल लय लेनी चाहिए ..... जब दिल क्रय उसकी साथ कृत्य रहना ........... हाहाहा

विनोद ..... जी नहीं ....... मेरी लय तुम्हारी छूट hi काफी है ......

महीन हंसी ...... तो फिर आज इसी सुला दो ...... आज इसी कुछ नहीं मिलनी वाला ....... भूका hi सोना पारी गए इसी आज .........................

विनोद उसकी तरफ देखती होय बोलै .............. प्लीज महीन ........... अपनी हाथों और अपनी होंठों सी hi क्र दो इसको रिलैक्स प्लीज .......

महीन मुस्करा की उसकी लुंड को अपनी हाथ मैं लेती होइ बोली ........ जैसी िसंय हाथों सी शांत हो hi जाना है न ...............

विनोद अपनी लुंड को थामी होय महीन की हाथ पी अपना हाथ रख की उस सी अपना लुंड सहलाती होय बोलै ....... कोशिश तो करो न प्लीज .......

महीन उसकी तरफ देख की बोली ........... क्र तो रही हों ..........

विनोद अपनी हाथ की ऊँगली महीन की होंठों पी फैरती होय बोलै ........ हाथों की साथ साथ इनका जादू भी तो चलाओ न .........

महीन अपनी कोहनी पी वज़न दाल की उठती होइ बोली .......... उल्टी उल्टी कामो पी लगाती जा रही हो तुम मुझी .........

विनोद न्य महीन की गर्दन की पिच्य हाथ दाल की अपनी ऊपर झुका लय ..... और दोनों की होंठ मिल गए .... विनोद न्य महीन की होंठों को चूमना शुरू क्र दया ............ महीन भी उसका साथ देंय लगी ........... विनोद की जुबां महीन की होंठों की बीच आ गए ..... जैसी महीन न्य अपनी होंठों की ग्रिफ्ट मैं लय क्र चूसना शुरू क्र दया .......... कुछ देर तक ऐसी hi किसिंग करनी की बाद महीन न्य अपनी होंठ विनोद की होंठों सी हटाय .......... और नीची को अन्य लगी ............. विनोद की सीने पी अपनी होंठों को रख की उसकी सीने को चूमनी लगी ............. फिर महीन विनोद की काली काली निप्पल्स को देखनी लगी ........... जो की सख्त हो रही थय ............. महीन न्य अपनी नरम नरम ऊँगली विनोद की निप्पल पी फैरनी शुरू क्र दी ........ और फिर विनोद की आँखों मैं देखती होय अपनी लम्बे नाख़ून सी उसकी निप्पल को कुरीदनी लगी ....... खुरचनी लगी ............. तैसे करनी लगी .............. ssssssssssssssssssssssssss aaaaaahhhhhhhhhh विनोद की होंठों सी हलकी सी सिसकारी निकल गए .............. हलकी सी तकलीफ की वजह सी ........

महीन न्य फौरन सी अपनी होंठ विनोद की निप्पल पी रख की उसी चूम लय ............ और फिर उसकी काली काली निप्पल को अपनी गुलाबी जुबां सी चैतन्य लगी .......... अपनी जुबां की नौक सी उसी सहलानी लगी ........ फिर विनोद की छोटी सी काली निप्पल को अपनी होंठों मैं लय की उसी ाहसिता ाहसिता चूसनी लगी ...... सूचक करनी लगी ....... साथ साथ अपनी जुबां उस पी फैरती होय ............. लज़्ज़त सी विनोद की आंखें एंड होनी लगीं .............. विनोद की निप्पल को चूसती होय महीन का दूसरा हाथ उसकी पेट सी नीची को सिरकनी लगा ........... उसकी नंगे लुंड की तरफ ........ और फिर नीची जा की उसनी विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं लय लय ...... और उसी सहलानी लगी ............ उसकी निप्पल को चूसती होय ........

थोड़ी देर की बाद महीन खुद भी नीची को सिरक गए ....... विनोद की लौड़े की पास ....... और अपनी हाथ मैं पकड़े होय उसकी लुंड को देखनी लगी ............ विनोद की लुंड की खाल उसकी लुंड पी ऊपर तक चढ़ी होइ थी ........ मगर उसका टोपा उस खाल की ओपनिंग मैं सी थोड़ा सा मुंह बहार को निकाली होय था ......... बुहत hi कमल का मंज़र पेश क्र रहा था .............. और विनोद की अनकट लुंड की यह हालत हमेशा सी hi महीन को फस्किनटे करती थी ........... उसी विनोद की लुंड का यह रूप बुहत hi प्यारा लगता था ........... और सेक्सी भी ........... महीन न्य झुक क्र वीर्य सी विनोद की लुंड की टोपे को किश क्र दया ............ और उसी फिर सी देखनी लगी .........

विनोद महीन की बलून मैं हाथ फैरती होय बोलै .......... महीन ऐसी क्या देख रही हो इसको

महीन मुस्कराई और विनोद की तरफ देखती होइ बोली ....... देख रही हों की ऐसी कितना क्यूट लगता है यह ........... पर जब अंदर जाता है तो क्या hi तूफ़ान मचाता है .................

विनोद ..... ाचा यह बताओ की तुमको मेरा लुंड ज़्यादा पसंद है या आसिफ का .......

महीन विनोद की चेहरी की तरफ देखी लगी ..... फिर उसकी टोपे को चूम की बोली ....... जैसी अपनी होंठों सी प्यार क्र रही हों वही ज़्यादा पसंद हो गए न .......... आसिफ का तो कभी भी मुंह मैं नहीं लय मैं न्य ..........

विनोद भी महीन की बात पी हंस पारा .............. महीन न्य अपनी दो उंगलयां विनोद की लुंड की बेस पी रखीं ......... और उसकी लुंड की लेंथ को नीची सी ऊपर तक किश करनी लगी ........... ऊपर उसकी लुंड की टोपे तक .............. और फिर नीची सी ऊपर तक अपनी जुबां उसकी लुंड पी पहिरण्य लगी ........... उसकी लुंड को चाट टी होइ ........... विनोद की लुंड की गिर्द काफी बाल हो रही थय ........... काफी दिन सी साफ़ नहीं कए थय न उसनी .............

महीन विनोद की लुंड की ऊपर की हिस्से की बलून मैं अपनी ऊँगली फेरती होइ बोली .............. मुझ सी यह सुब कुछ करवाना होता है तो इनको तो साफ़ क्र लय करो ...... मुंह और नाक पी रगड़ती हैं तुम्हारी यह बाल ............

विओड़ हंसा ........... ओह सॉरी जान इ मन .......... कल hi क्र लोन गए ....... don't यू वोर्री .............. तुम बस अब जल्दी सी इसी मुंह मैं लो न प्लीज .............

महीन भी मुस्करा दी ........... और विनोद की लुंड की टोपे को देखा जिस की छूती सी सूराख सी उसका हल्का हल्का पानी निकल रहा था ....... और उस पानी का एक क़तरा लुंड की सूराख पी चमक रहा था .......... महीन न्य विनोद की लुंड को अपनी हाथ मैं थामी होय ......... विनोद की आँखों मैं देखती होय ............ आहिस्ता सी अपनी जुबां की नौक की साथ उस पानी की क़तरे को चाट लय ............ उसका हल्का सा ज़ाइक़ा महीन की मुंह मैं घुल गया ...............

महीन को उसका स्वाद बुरा नहीं लगा .............. उसनी विनोद की लुंड की बेस पी अपनी उंगलयां रखीं और उसकी लुंड को नीची सी ऊपर की तरफ स्क्वीज़ करनी लगी ........ उसकी लुंड को नॅचुरती होय ........... जैसी उसकी अंदर सी कुछ निकालना चाहती हो ........... और फिर उस मैं सी कुछ निकल भी आया ............... विनोद की लुंड का थोड़ा और प्रेकम निकल की उसकी लुंड की टोपे की छोटे सी सूराख पी चमकनी लगा ............... और उसी भी महीन न्य अपनी जुबां सी चाट लय ...........

विनोद की आँखों मैं देखती होइ बोली .......... अब खुश हो न ....... ???

विनोद न्य मुस्कराती होय हाँ मैं सर हिला दया .............. महीन मुस्कराई और अपनी हाथों को थोड़ा सा हरकत देती होय विनोद की लुंड की टोपे को उसकी स्किन कवरिंग सी बहार निकाला और अपनी होंठों को उसकी लुंड की टोपे पी रख दया ........... उसकी लुंड की सूराख को कवर कृत्य होय ............ और फिर विनोद की आँखों मैं देखती होय उसकी लुंड को किसी स्ट्रॉ की तरह सूचक करनी लगी ............ जैसी उसकी अंदर सी कुछ निकाल की पीना छह रही हो ............ मगर एक क़तरे की इलावा और कुछ नहीं निकल सका .............. महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी जुबां को उसकी लुंड की टोपे पी फैरना शुरू क्र दया .......... और उसी चैतन्य लगी ........ उसकी जुबां की नौक विनोद की लुंड की टोपे की सूराख की अंदर भी घुसनी की कोशिश करनी लगी .......... मगर अंदर तो जा hi नहीं सकती थी न ........... थोड़ा सा बस चाट सकीय ...........

महीन न्य अब आहिस्ता आहिस्ता विनोद की लुंड को अपनी मुंह मैं लय क्र चूसना शुरू क्र दया ...... नीची सी ऊपर को अपना मुंह लय जाती होइ .......... उसी सूचक करती होइ ............... कभी मुंह सी निकाल की उस पी अपनी ज़ुबा पहिरण्य लगती .......... और अपनी हाथ सी भी उसकी मुठ मार रही थी ................. थोड़ी hi देर मैं विनोद की लुंड न्य अपनी मणि उगलनी शुरू क्र दी ........ जैसी महीन न्य सारी का सारा विनोद की पेट पी hi गिरवा दया उसकी लुंड को उसकी पेट की साथ लगाती होय ........... और उसकी पेट पर लुंड की पानी का पूल सा बन गया ............. महीन न्य ाच्य सी विनोद का लुंड निचोड़ दया ......... और उसी देख की मुस्करानी लगी .........

महीन ....... अब मिल गया सुकून इन महाराज को .......... ???

विनोद मुस्करा दया ............ महीन न्य अपनी हाथ की उंगलयों पी लगी होइ थोड़ी सी माननी को विनोद की आँखों मैं देखती होय अपनी जुबां सी चाट लय ............ साड़ी माननी विओड़ की पेट पी थी ........ एक पूल बानी होइ ........ महीन खुद सी hi उस मैं अपनी उंगलयां चलानी लगी ..... उसी ाचा लग रहा था ..... उस गाढ़ी गाढ़ी पानी को फील करना ....... महीन विनोद की आँखों मैं hi देख रही थी यह सुब कृत्य होय ....... विनोद न्य उसी आँखों hi आँखों मैं सर को थोड़ा सा हिला की उस पानी को चैतन्य का इशारा क्या ......... महीन कुछ देर तक तो विनोद की आँखों मैं देखती रही ....... फिर पता नहीं उसी क्या होआ की वह झुकी और अपनी जुबां को विनोद की माननी की उस पूल मैं दाल दया ...... और आहिस्ता सी थोड़ा सा स्कूप उठा लय अपनी जुबां सी ...... अपनी जुबां को पिच्य लाइ तो एक तार सी नीची तक बानी होइ थी उसकी जुबां की नौक सी लय क्र .......... महीन अपनी ज़ुबान को अपनी मुंह मैं लय गए और उसी निगल लय ........... विनोद मुस्करानी लगा ....... उसी देखती होय महीन न्य दोबारा सी अपनी जुबां नीची लय जा की उस पूल मैं डाली ...... और इस बार उसी मैं इधर उधर घुमान्य लगी ..... उस माननी को चाट तय होय ........... कुछ hi देर मैं महीन न्य टिश्यू पेपर लय और फिर टिश्यू पेपर लय क्र मुस्कराती होइ विनोद की पेट पर सी उसकी माननी को साफ़ करनी लगी ........... दोनों एक साथ hi उठी और बैडरूम सी बहार आ की वाशरूम मैं जा की फ्रेश होय और वापिस आ की एक दूसरी की बहून मैं सो गए ................

सुबह पहली विनोद की आँख खुली ....... महीन सिर्फ एक शार्ट सी नाईट शर्ट पहनी होय सो रही थी ........ नीची का उसका जिसम नंगा था ......... उसनी दूसरी तरफ करवट ली होइ थी ...... उसकी गांड विनोद की तरफ निकली होइ थी ...... विनोद बीएड सी उठा ... झुक की महीन की गोरी गोरी गांड को प्यार सी एक किश क्या और मुस्कराता होआ बैडरूम सी चला गया ...... विनोद वाशरूम मैं जा की फ्रेश होआ और फिर किचन मैं जा की चाय बना की वापिस बैडरूम मैं आज्ञा ....... महीन को जगण्य लगा ......... महीन न्य आंखें खोलीं ...... अपनी गोरी गोरी बहिन ऊपर उठा की एक लम्बी अंगराई ली ..... और विनोद को देख की मुस्कराई और उठ की बेथ गए .......

विनोद ...... गुड मॉर्निंग .....

महीन भी मुस्कराई ........ गुड मॉर्निंग .

विनोद न्य उसी चाय का कप दया और दोनों चाय पीनी लगी ...... थोड़ी गुप् शूप कृत्य होय ......... चाय पीनी की बाद महीन उठी और बैडरूम सी निकल क्र वाशरूम मई चली गए ....... जा की कमोड पी बेथ गए ....... सिर्फ एक शार्ट सी शर्ट पहनी होय ....... निचला जिसम तो उसका पहली hi नंगा था .......... अभी उसी बैठी एक आध मिनट hi होआ था की बतरह्रूम का दरवाज़ा खुला और विनोद अंदर दाखिल हो गया .......... बाथरूम का दरवाज़ा लॉक करनी का तो अब रिवाज hi नहीं रहा था न उनकी हाँ ........ ना आदत और ना hi ज़रूरत .......... दोनों बिना लॉक कए hi बाथरूम उसे कृत्य थय ....... विनोद को बाथरूम मैं आता होआ देख क्र महीन सिर्फ मुस्करा दी ........ विनोद बाथरूम की कप्बोर्ड की तरफ गया और वहां सी एक रेजर उठा की महीन की सामन्य आज्ञा ..... जो कमोड पी hi बैठी होइ थी ........ उसी को देख रही होइ .....

विनोद ..... यह लो रजो और क्र दो बाल साफ़ यहाँ की ....... विनोद न्य उसकी सामन्य खरी हो की अपना शॉर्ट्स उतारती होय कहा ......

महीन हंस पारी ....... ाचा जी तो अब यह काम भी मुझी hi करनी परैं गए क्या तुम्हारी ........

विनोद .... हाँ तो तुमको hi दिक्कत होती है न इन सी .....

महीन न्य रेजर लय लय और विनोद की लुंड और उसकी इर्दगिर्द की बलून पी अपना नाज़ुक सा हाथ पहिरण्य लगी ..... विनोद का लुंड बिलकुल एकरा होआ नहीं था ...... पूरी तरह सी सख्ती मैं नहीं था ...... महीन आहिस्ता ाहसिता लुंड की ऊपर की हिस्से पी रेजर चलनी लगी .....

महीन ...... अगर मुझ सी कट लग गया तो ......

विनोद ....... नहीं लगता तुम करो .........

महीन ...... ऐसी करो वहां कप्बोर्ड सी मेरी हेयर रेम्योविंग क्रीम लय क्र आओ ..........

विनोद को यह आईडिया ठीक लगा ..... और नया भी ..... वह कपबओर्ड की पास गया और वहां सी वह महीन की हेयर रेम्योविंग क्रीम उठा की वापिस महीन की क़रीब आ गया ....... महीन न्य उस क्रीम को विनोद की लुंड की इर्दगिर्द उसकी बलून पी लगाना शुरू क्र दया ...... बुहत ज़्यादा बढ़ी होय बाल नहीं थय ........ महीन न्य ाच्य सी उनको लगा दया ....... विनोद की बॉल्स पी भी .......

फिर महीन उठी ......... अब थोड़ा वेट क्र लो फिर नहाती होय इसी उतार देना ......

महीन न्य अपनी शर्ट उतार की हैंग की और नहानी की एरिया मैं चली गए शावर की नीची ......... और विनोद की सामन्य hi नंगी हो की नहानी लगी ........... थोड़ी hi देर की बाद विनोद न्य वहीँ आज्ञा ....... टाइम पूरा हो चूका था ........ महीन न्य hi उसकी क्रीम को साफ़ क्या और उसका लुंड और उसकी इर्दगिर्द सी बाल सारी साफ़ हो चुकी होय थय ........... महीन न्य ाच्य सी उसी धू की साफ़ क्र दया और फिर उसकी लुंड को चूम लय ..........

महीन .... अब देखो और भी ाचा लग रहा है न .......

विनोद मुस्कराया ........ तुम्हारी hi लये है जैसी ाचा लगता है वैसी रख लो इसी ........... हाहाहा

महीन मुस्करा दी और टॉवल सी अपना जिसम साफ़ क्र की बाथरूम सी निकलती होइ बोली ..... जल्दी सी ाजाओ नष्त्य की लये ....... देर हो रही है ऑफिस सी ..... कोई पोनी घंटी की बाद दोनों अपनी ऑफिस की लय जा रही थय.
 
अपडेट NO: 33

ऑफिस सी आ की दोनों न्य फ्रेश होनी की बाद खाना खाया ........ खाना कहानी की बाद दोनों न्य आसिफ और प्रिय सी फ़ोन पी बात की और फिर रेस्ट करनी की लय बैडरूम मैं ाग्य ........... थोड़ी देर आपस मैं बातें करनी और हल्का फुल्का प्यार करनी की बाद की बाद दोनों की आँख लग गए .............

शाम मैं उठ की दोनों न्य चाय पी ........ बैडरूम मैं hi ...... चाय पीनी की बाद विनोद न्य अपनी बेडसाइड ड्रा मैं रखी होय हैंड बैग को निकाला और मुस्करा की महीन को देखनी लगा ..........

महीन न्य उसकी हाथ मैं कल वाली शॉपिंग का हैंडबैग देखा तो उसकी िरादय समझ गए की अब वह क्या करना चाहता है ...........

महीन मुस्कराई ...... नहीं प्लीज विनोद ...........

विनोद ...... आर्य इसी देखें तो सही ..........

महीन वीर्य सी ........ ह्म्म्मम्म

विनोद न्य हैंडबैग मैं सी वह रीयलिस्टिक लुकिंग डिल्डो निकाल लय और महीन की और अपनी सामन्य क्र दया ....... दोनों की नज़रें उसी पी थीं ........ ....... उसी देखती होय आहिस्ता सी बोली ...

महीन .......... विनोद .......... यह कैसी ............

विनोद ...... जैसी कल रात वह वाइब्रेटर उसे क्या था न ........... उस सी भी तो मज़ा आया था न ...............

महीन हल्का सा मुस्करा दी .......... पता नहीं क्या क्या करवा रही हो तुम मुझ सी ........... मैं न्य यह सुब कभी खवाब मैं भी नहीं देखा था जो कुछ मैं अब क्र रही हों तुम्हारी साथ ......

विनोद न्य महीन की गाल पी किश क्या ........ थैंक यू महीन ...... मेरा इतना साथ देंय की लय ............

विनोद न्य वह रीयलिस्टिक डिल्डो महीन की हाथ मैं पकड़ा दया .... महीन उसी देखनी लगी ........ ऊपर नीची सी ......... विनोद की लुंड सी बारे डिल्डो था ....... मोटा और सुफैद ....... जैसी किसी गूरी आदमी का लुंड हो ........... उसका टोपा भी फूला होआ था .......... डिल्डो की ऊपर लुंड की वेइन्स भी साफ़ बानी होइ थीं ........ नीची बिलकुल मर्दून की बॉल्स की तरह hi जूत्यां बाई होइ थीं ........ बिलकुल एकरा होआ लुंड हो जैसी ............

महीन व्हिस्पेरेद ........ कैसी असली की जैसी लगता है न .....

विनोद न्य हाँ मैं सर हिलाया ....... और मज़ा भी असली की जैसा hi दी गए ...........

महीन शर्मा गए ........

विनोद बोलै ..... इसी वैसी hi मुंह मैं लो जैसी मेरा लेती हो ....

महीन न्य विनोद को घूरा ....... विनोद न्य उसकी हाथ सी वह डिल्डो लय क्र उसकी टोपे को महीन की होंठों पी फैरना शुर क्र दया ........ आहिस्ता ाहसिता ...... जैसी लिपस्टिक को महीन की होंठों पी फेर रहा हो .......... महीन विनोद की आँखों मैं देखती होइ उस डिल्डो को अपनी होंठों पी महसूस क्र रही थी ........... अहिंसा आहिस्ता महीन न्य अपनी होंठों को खोल दया ........ थोड़ा सा ....... और उसकी जुबां बहार को सिरक की आई ...... और आहिस्ता सी उस डिल्डो की फूली होय टोपे को चाट लय ............. उसी कुछ बुरा नहीं लगा ....... विनोद न्य उस डिल्डो को महीन की होंठों की सामन्य hi रखा ..... उसकी होंटो सी लगाय होय ........ महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता उस की ऊपर अपनी जुबां फैरनी शुरू क्र दी ........ उसी चैतन्य लगी ........ उसकी गोल गोल गोपय पी जुबां पहिरण्य लगी ............ सर्किल मैं घुमाती होय ........

विनोद न्य आहिस्ता सी उस डिल्डो को महीन की होंठों की अंदर पुश क्र दया ............ जैसी महीन न्य अपनी मुंह को थोड़ा और खोलती होय अंदर लय लय ........... विनोद अपनी हाथ सी उस डिल्डो को महीन की होंठों की बीच अंदर बहार करनी लगा ......... महीन भी उसी जैसी चूस रही थी ...........

विनोद ..... सही लग रहा है न ..........

महीन न्य उसकी तरफ देखती होय हाँ मैं सर हिला दया ............

विनोद एक हाथ सी उस डिल्डो को महीन की मुंह मैं अंदर बहार कृत्य होय दूसरा हाथ नीची लय जा की महीन की छूट को सहलाना शुरू क्र दया .......... उसकी शॉर्ट्स की ऊपर सी hi .......... महीन को ाचा लग रहा था ............ उसकी छूट गीली हो रही थी ......... विनोद न्य अपना हाथ उसकी शॉर्ट्स की अंदर डाला और उसकी नंगी छूट को सहलानी लगा .......... एक ऊँगली छूट की अंदर डाली तो वह गीली हो गए ............ विनोद न्य महीन की मुंह मैं सी वह डिल्डो निकला और झुक की उसकी होंठों को किश क्र लय .......... फिर नीची को आ की उसकी शॉर्ट्स को उतार दया ............ महीन का निचला जिसम नंगा हो गया ............

विनोद महीन की टांगों की दरम्यान आज्ञा .......... महीन की गुलाबी छूट विनोद की होंठों और आँखों की सामन्य थी .......... बुहत hi प्यारी लग रही थी ............. सुफैद छूट ........ गुलाबी अंदर की लिप्स ....... और छूट की ऊपर या इर्दगिर्द एक भी बाल नहीं था ............. विनोद को महीन की छूट ऐसी hi अछि लगती थी ............ बिलकुल क्लीन .......... विनोद न्य झुक की अपनी होंठ उसकी छूट की ऊपर की हिस्से पी रखी और उसी किश क्र लय ........... छूट की दोनों लिप्स ऊपर को जहाँ मिल रही थय वहां पी छोटा सा गुलाबी कलर का दाना था ........... विनोद न्य अपनी जुबां की नौक सी उसी छूआ तो महीन उछाल सी पारी .......... जैसी उसी कोई करंट लगा हो ............. लज़्ज़त की एक लहर सी दौड़ गए थी उसकी जिसम मैं उस करंट की साथ hi .............. विनोद मुस्कराया और आहिस्ता आहिस्ता महीन की छूट की दांय को अपनी जुबां की नौक सी सहलानी लगा ........... महीन की आंखें बंद होनी लगीं .......... वह किसी नग्न की तरह सी बीएड पी बल कहानी लगी ............ तरपणय लगी ........ उसकी छूट सी हल्का हल्का पानी बेहनी लगा ........... विनोद न्य महीन की छूट की दांय को छोरा और नीची को अपनी जुबां को लाती होय छूट की दोनों जुडी होय लिप्स की ऊपर अपनी जुबां की नौक पहिरण्य लगा .......... जुबां पी हल्का सा प्रेशर डाला तो जुबां की नौक महीन की छूट की जुड़े होय सुफैद लिप्स को खोलती होइ अंदर को सिरक गए ............ उसकी छूट की सूराख तक .............

विनोद आहिस्ता ाहसिता महीन की छूट की लकीर को अपनी जुबां सी सहला रहा था ........... और कभी उसकी छूट की दांय को रगड़नी लगता .......... विनोद न्य वह डिल्डो दोबारा सी लय और उसी महीन की छूट की लिप्स पी आहिस्ता आहिस्ता सहलानी लगा ........ ऊपर सी नीची को ........ जैसी अपनी लुंड की टोपे को उस पी रगड़ रहा हो ........ हल्का हल्का उसकी छूट की दांय पी मारता तो महीन तरपणय लगती ............. उस प्लास्टिक की लुंड का लम्स महीन को अपनी छूट पी बुहत hi ाचा लग रहा था ........ ऐसा hi लग रहा था की जैसी कोई असली लुंड उसी तैसे क्र रहा हो ........... वह उसी अपनी अंदर लेना चाहती थी ............ उसकी होंठों सी हलकी हलकी सिसकार्यं निकल रही थीं ..........

महीन न्य अपनी दोनों टांगों को और भी फैला दया ........ और अपनी छूट को बी शर्मी की साथ विनोद की सामन्य खोल दया ............ जैसी उसी खुद को छोड़नी की दावत दी रही हो .......... विनोद न्य अपनी उंगलयों सी महीन की छूट की लिप्स को खोला और उस लुंड की मोटे टोपे को उसकी छूट की सूराख पी रख दया ....... आहिस्ता आहिस्ता उसी सहलानी लगा ........ उस प्लास्टिक की लुंड का टोपा महीन की छूट की पानी सी गीला हो रहा था ............ विनोद न्य हल्का सा प्रेशर बढ़ाया और उस लुंड का टोपा महीन की छूट की अंदर सिरक गया ........ एक प्लॉप की आवाज़ की साथ ............ साथ hi महीन की सिसकारी निकल गए ......... aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ........... ooooooooooooooo ........ इतनी मोटे लुंड की उसकी छूट की अंदर दाखिल होनी सी ........... मगर विनोद न्य उस लुंड को महीन की छूट की अंदर hi रखा ....... सिर्फ उसकी टोपे को hi ........ और फिर थोड़ा थोड़ा उसी ाग्य पिच्य को करनी लगा ........... उस मोटे लुंड की टोपे की साथ महीन की छूट को छोड़ती होय .........

विनोद महीन की टांगों की बीच मैं लेता होआ था उसकी छूट की बिलकुल सामन्य ....... और अपनी हाथ मैं पकड़ी होय उस प्लास्टिक की लुंड को आहिस्ता आहिस्ता महीन की छूट मैं अंदर बहार क्र रहा था ........ महीन की आंखें बंद थीं ...... वह लज़्ज़त मैं डूबती जा रही थी ........ महीन न्य आज तक सिर्फ अपनी हस्बैंड आसिफ का लुंड अपनी छूट मैं लय था और या फिर विनोद का लुंड उसकी छूट मैं गया था ........ उसकी इलावा वह आज तक किसी और सी नहीं चूड़ी थी ....... ना hi किसी और की ाग्य इस तरह सी नंगी हो की लेती थी ........ अपनी टांगें और छूट खोली होय ......... मगर यह प्लास्टिक का लुंड विनोद और आसिफ की लुंड सी मोटा था और लम्बा भी ...... इस लय महीन को अपनी छूट स्ट्रेच होती होइ महसूस हो रही थी ......... उस प्लास्टिक की लुंड की वजह सी ......... मगर उस स्ट्रेचिंग की साथ भी उसकी छूट की अंदर की नेर्वेस टच हो रही थीं ...... जो कभी भी पहली टच नहीं होइ थीं ......... जिसकी वजह सी महीन को ाचा लग रहा था .......... विनोद उस लुंड को आहिस्ता आहिस्ता महीन की छूट मैं अंदर बहार क्र रहा था ........... और साथ hi उसकी छूट की दांय को भी सहला देता था अपनी जुबां सी ........ महीन भी अपनी छूट को ऊपर को उठा रही थी विनोद की तरफ ......... विनोद की हाथों की जादू और उस लुंड की चुदाई सी महीन की लय खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था ........ उसका ओर्गास्म उसकी आदर बिल्ट हो रहा था .......... उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं ......... विनोद भी आद्य सी ज़्यादा लुंड को उसकी छूट की अंदर बहार क्र रहा था ...... मगर पूरा नहीं गया था .......... कुछ hi देर मैं महीन की छूट न्य पानी चूर्ण शुरू क्र दया ....... उस प्लास्टिक की लुंड की गिर्द .......... उसका पूरा जिसम आकर रहा था ........ और उसकी जिसम सी उसका माल निकल रहा था ...........

कुछ देर तक ऐसी hi जिसम की ाकर्ण्य की बाद आहिस्ता आहिस्ता महीन रिलैक्स होनी लगी ........... मगर उसकी सांसें अभी भी तेज़ चल रही थीं ......... और आंखें बंद थीं ........ विनोद उसकी हालत को देख की मुस्करा रहा था .......... वह सिरकटा होआ ऊपर आया और महीन की बराबर आ की लेट गया ........... अपना हाथ उसकी जिसम पी रखा और झुक की उसकी गाल को चूम की बोलै .........

विनोद ....... कैसा लगा ....

महीन चुप रही ........ बस शर्मीली सी मुस्कान उसकी चेहरी पी फैल गए ...........

विनोद न्य थोड़ी देर की लय महीन को अपनी सांसें भाल करनी दिन ....... फिर अपनी कपड़े उतारी और उठ की महीन की जिसम की ऊपर आज्ञा ......... उसका लुंड तना होआ था ...... मगर अभी पूरी तरह सी नहीं ....... उसनी अपनी लौड़े को महीन की बूब्स की बीच मैं रखा और और वहां उसी सहलानी लगा .......... महीन न्य अपनी आंखें खोलीं और विनोद की आँखों मैं देखा ....... और फिर अपनी दोनों गोरी गोरी चूच्यों की बीच मैं रखी होय विनोद की काले लुंड को देखनी लगी ...... जिसका टोपा उसकी स्किन सी बहार को निकल रहा था ........ उसकी ऊपर और इर्दगिर्द अब कोई बाल नहीं था ..... बिलकुल साफ़ जगा थी ........ जैसी महीन न्य खुद hi तो सुबह साफ़ किआ था ........ अपनी लय ....... और विनोद की लय ........ वह मुस्करा दी .........

महीन को अपनी तरफ देखती होय विनोद न्य देखा तो थोड़ा ाग्य को सिरकटी होय अपनी लुंड को महीन की मुंह की पास लय गया ..... और उसकी टोपे को महीन की होंठों सी टच करनी लगा ......... महीन न्य अपनी होंठों को सकैडटी होय आहिस्ता सी विनोद की लुंड की टोपे को चूम लय ....... महीन न्य विनोद की तरफ देखती होय अपनी होनोटं को सुकैदी होय hi थोड़ा सा सूराख बना दया बीच मैं .......... जैसी वह कोई चुदाई की लय सूराख हो ......... (जैसी OOOOOOOOOOOO बोलती होय होंठ सुकड़ की सूराख बना देती हैं वह सूराख .... ज़रा ऊऊऊओ बोल की चेक करें फिर अंदाज़ा हो जाय गए आप को हहहहह) विनोद न्य महीन की पिंक होंठों की उस ो मैं अपनी लुंड की टोपे को फंसाया ... और आहिस्ता आहिस्ता उसी अंदर को पुश करनी लगा ..... महीन उसकी लुंड की टोपे को थोड़ी थोड़ी जगा देती जा रही थी अंदर दाखिल होनी को ....... विनोद थोड़ा थोड़ा अपना लौड़ा महीन की होंठों की अंदर डालता और फिर उसी पिच्य निकाल लेता ....... इसी तरह वह महीन की होंठों को छोड़ रहा था ........ विनोद की लुंड की अंदर आती hi महीन उसकी टोपे को अपनी जुबां की साथ वेलकम करती और उस पी अपनी जुबां फेरती .........

विनोद न्य अपनी लुंड का तीसरा हिस्सा महीन की मुंह की अंदर दाल की रोक लय ..... और महीन न्य उसी सूचक करना शुरू क्र दया ...... उसकी ऊपर नीची हर तरफ सी अपनी जुबां फैरती होय ...... उसकी लुंड को हर तरफ सी चाट रही थी ....... विनोद भी अपनी लुंड को उसकी मुंह मैं ाग्य पिच्य क्र रहा था ...... और उसकी मुंह को छोड़ रहा था ........ आहिस्ता आहिस्ता अपनी लुंड को पहली सी ज़्यादा उसकी मुंह की अंदर करता जा रहा था ... जिस सी विनोद का मोटा लुंड महीन की हलक़ सी तक्राण्य लगा ....... जिस पी महीन न्य उसी थोड़ा पिच्य निकालनी का इशारा क्या ...... विनोद न्य अपनी लुंड को पिच्य को खींच लय ........ और फिर सी लुंड महीन की मुंह मैं अंदर बहार करनी लगा ....... महीन विनोद की नंगी हिप्स को सहलाती होइ उसका लुंड चूस रही थी ........ जो अब उसकी मुंह की गर्मी और जुबां की हरकत सी फुल तैयार हो चूका होआ था ...........

विनोद न्य अपना एकरा होआ लुंड महीन की मुंह सी निकला ...... और उसी उल्टा होनी का इशारा क्या ......... महीन अपनी घुटनो और हाथों की बल झुक गए विनोद की सामन्य ....... विनोद महीन की गांड की सामन्य आज्ञा ...... उसकी टांगों को खोल की बीच मैं जगा बनाती होय ....... अब विनोद न्य पिच्य सी अपना लुंड महीन की छूट की सूराख पी रखा और लुंड को महीन की छूट की अंदर डालनी लगा ....... sssssssssssssssssssssss ......... aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ की साथ महीन भी अपनी गांड को पिच्य की तरफ पुश करनी लगी ..... विनोद का लुंड अपनी छूट की अंदर लेनी की लय ..........

विनोद को ाचा लगा ....... उसनी अपनी हरकत को रोक दया और महीन की गांड को उसकी पतली सी कमर सी पाकर की ाग्य पिच्य को करनी लगा .... अब महीन की छूट विनोद की लुंड पी ाग्य पिच्य हो रही थी ...... कुछ देर तक महीन की गांड को खुद सी मूव करनी की बाद विनोद न्य अपनी हाथ हटा डाई और महीन खुद सी hi ाग्य पिच्य को मूव करनी लगी ....... अपनी गांड को हिलाती होइ विनोद की लुंड को अपनी छूट मैं अंदर बहार लेती होइ खुद सी hi अपनी छूट विनोद की लुंड सी छुडवानी लगी ........ विनोद महीन की गोरी गोरी गांड पी अपनी हाथ फेर रहा था .... उनको दबोच रहा था ..... सहला रहा था ........ उसकी नरम नरम गोरी सुफैद चिकनी गांड विनोद की हाथों की ताक़त सी लाल होती जा रही थी .......

विनोद न्य महीन की दोनों हिप्स को खोला और उसकी गांड की गुलाबी सूराख को अपनी ऊँगली सी सहलानी लगा ....... महीन को भी पहली सी ज़्यादा मज़ा अन्य लगा ......... वह मुद की पिच्य विनोद को देखनी लगी ........ शायद उसका भी दिल छह रहा था की विनोद अपना लुंड उसकी गांड की सूराख की अंदर भी दाल दी ........ और उसकी गांड भी मारी .......... मगर विनोद महीन की छूट की अंदर hi अपना लुंड अंदर बहार क्र रहा था ...........

महीन को बीएड की सरहंय रखी होय हैंड बैग सी की जेली निकाल की देंय को बोलै तो महीन उसका मतलब समझ गए ...... उसनी बिना कुछ बोली hi उस हैंडबैग सी की जेली निकाल की विनोद की तरफ बढ़ा दी ......... विंडो न्य उसी खोला और उस मैं सी जेली महीन की गांड की सूराख पी लगानी लगा ....... उसी चिकना करनी की लय ...... और फिर उसकी गांड की अंदर भी अपनी ऊँगली डालती होय उसकी गांड की सूराख को अंदर सी भी चिकना क्र दया .......... विनोद का लुंड अभी भी महीन की छूट की अंदर hi था और उसकी ऊँगली महीन की गांड की सूराख मैं अंदर बहा रो रही थी .......... जिस सी महीन की लज़्ज़त मैं इज़ाफ़ा होता जा रहा था ........ उस न्य अपना सर नीची सरहंय मैं रख दया और अपनी आंखें बंद क्र लीन ...... अब वह विनोद की लुंड की अपनी गांड की सूराख मैं एंट्री का वेट क्र रही थी ... और खुद को उसकी लय तैयार क्र रही थी ...........

कुछ देर की बाद विनोद न्य अपना लुंड महीन की छूट सी निकला और उसी महीन की गांड की गुलाबी सूराख पी रख दया ........ और आहिस्ता आहिस्ता अंदर पुश करनी लगा ......... विनोद की लुंड का मोटा टोपा महीन की गांड की सूराख मैं दाखिल हो गया ........... महीन को हलकी सी तकलीफ का अहसास होआ ..... मगर वह उसी बर्दाश्त क्र गए ....... अब विनोद न्य अपना लुंड महीन की गांड मैं अंदर बहार कृत्य होय उसकी गांड मारनी शुरू क्र दी ......... महीन को भी ाचा लग रहा था ......... मज़ा आ रहा था ........ वह अपना सर नीची तकए मैं रखी होय अपनी गांड को ऊपर उठाय होय अपनी गांड मैं विनोद की लुंड का मज़ा लय रही थी ..........

महीन की गांड मारती मारती विनोद न्य अपनी क़रीब hi पारा होआ वही प्लास्टिक का लुंड उठाया और उसकी ऊपर भी की जेली लगानी लगा ..... मगर इस बात का महीन को पता नहीं था ......... विनोद न्य अपना लुंड महीन की गांड सी निकला और उस डिल्डो की मोटे टोपे को महीन की गांड की सूराख पी रख दया ......... महीन तो अपनी hi लज़्ज़त मैं खोई होइ थी ....... उसी कुछ ज़्यादा फरक का अहसास नहीं होआ .... विनोद न्य जैसी hi उस प्लास्टिक की लुंड पी थोड़ा ज़ोर लगाया और उसकी मोटे टोपे को महीन की गांड की अंदर डालना चाहा तो महीन को शदीद तकलीफ का अहसास होआ ....... उसी यह भी अहसास होआ की कुछ डिफरेंट है विनोद की लुंड सी .......

महीन न्य अपना सर उठाया और पिच्य मुद की विनोद की तरफ देखनी लगी ........... और साथ hi उसकी आंखें फैल सी गायन ........ विनोद उस मोटे डिल्डो को अपनी हाथ मैं लये होय उसी महीन की गांड की अंदर डालनी की कोशिश क्र रहा था ..........

महीन ........ aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh .......... ssssssssss .... यह क्या क्र रही हो विनोडडडडडडड ..........

विनोद ..... जैसी यह तुम्हारी छूट मैं गया था वैसी hi अब इसी यहाँ भी दाल रहा हों ...........

महीन ......... aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ......... नाआआअह्हह्ह्ह्हह्हैईईई .......... यह नहीं जाय गाआआआ ........ बुहत बारे haiiiiiiiiiiiii ............ aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ........ और मोटा भी .............. oooooooooiiiiiiiiii .........

महीन की एक तेज़ चीख निकली जब उस डिल्डो का अगला मोटा टोपा महीन की गांड की सूराख को खोलता होआ अंदर चला गया ............. महीन न्य जल्दी सी ाग्य को हो की उसी अपनी गांड की अंदर सी निकालनी की कोशिश की मगर विनोद न्य उसी उसकी कमर सी पाकर लय और ाग्य को होनी सी रोक दया ....... उस डिल्डो को महीन की गांड की सूराख की अंदर रखी होय hi बोलै ......

विनोद .... बस महीन थोड़ा सा बर्दाश्त करो .... अब तो अंदर चला गया है ...... कुछ नहीं हो गए ..........

महीन टर्पी ...... नाहीईईईई विनोडडडडडडड ........... बुहत दर्द हो रहा है ............ aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh .......... nikaalooooooooooooooooo plzzzzzzzzzzzzzzzzz ..............

मगर विनोद नहीं माना ...... आहिस्ता आहिस्ता उस डिल्डो को महीन की गांड की अंदर बहार करनी लगा ......... महीन की तकलीफ सी सिसकार्यं निकल रही थीं ........ मगर विनोद की कहनी पी वह उस तकलीफ को बर्दाश्त क्र रही थी ......... आधा डिल्डो महीन की गांड की अंदर जा चूका होआ था ..... जैसी विनोद अंदर बहार क्र रहा था .......... तकलीफ की बावजूद भी महीन को वह ाचा महसूस हो रहा था ......... अजीब सी कैफियत थी ....... तकलीफ भी और मज़ा भी ..........

उस डिल्डो को महीन की गांड की सूराख की अंदर रखी रखी hi विनोद न्य पिच्य सी अपना लुंड महीन की छूट की सूराख पी रख दया ....... महीन चौंक की उसकी तरफ देखनी लगी ....... उसकी छूट पानी चोर रही थी जिस सी विनोद का लुंड चिकना हो रहा था .........

महीन ......... ववववववववविनोदद्ड़ड्डड्डड्ड .......... यह क्या करनी लगी हो ............

विनोद मुस्कराया ...... डबल पेनेट्रेशन मेरी जान ........

महीन टर्पी ...... नहीं नहीं ... विनोद ....... पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ ऐसी नहीं ीीीीे ........... यह नहीं जा सकता ............ ऐसी कैसी दो दो ......... नहीं nahiiiiiiiiiiiiii .........

मगर विनोद न्य हल्का सा धक्का लगाया और उसका लुद्न महीन की छूट की अंदर फिसल की चला गया .......... और साथ hi कमरे मैं महीन की चीख गूँज गए .......... विनोद न्य डिल्डो की हरकत रोक दी होइ थी .. बस अब अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर दाल रहा था ... और अंदर बहार क्र रहा था .......... महीन को दोनों तरफ सी अनोखा hi अहसास मिल रहा था .......... ज़िन्दगी मैं कभी भी ऐसा कुछ उसकी साथ नहीं होआ था .......... मगर इस वक़त एक hi वक़त मैं उसकी छूट और गांड की दोनों सूराख फइलल थय ............

विनोद का लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार होती होय महीन को ाचा लग रहा था ............ कुछ देर मैं hi विनोद न्य अब महीन की गांड मैं डाली होय उस डिल्डो को भी ाग्य पिच्य को करना शुरू क्र दया ........ और साथ hi महीन की लज़्ज़त सी भरी होइ सिसकार्यं गूंजनी लगीं ........... दो तरफ सी चुदाई उसकी बर्दाश्त क्र बहार थी ............. थोड़ी hi देर मैं महीन की छूट न्य एक बार फिर सी पानी चोर दया ............. और वह अपना सर नीची सरहंय पी रख की निढाल हो गए ..........

महीन की गांड मैं डिल्डो होनी सी उसकी छूट और भी टाइट हो गए होइ थी ........ जो विनोद की लुंड को भींच रही थी ........ वह भी ज़्यादा देर तक नहीं रुक सका और उसनी भी अपना पानी महीन की छूट की अंदर निकाल दया ........... और दोनों hi निढाल हो की बीएड पी लेट गए ..........

महीन अभी बह ूंढ़ी लेती होइ थी ...... और वह डिल्डो उसकी गांड की अंदर अभी भी फंसा होआ था ....... महीन का फेस विनोद की तरफ hi था ....... जो महीन की नंगी चिकनी सुफैद कमर पी आहिस्ता आहिस्ता हाथ फेर रहा था ........ इतनी ज़बरदस्त किसम की दोनों तरफ सी चुदाई की बाद महीन निढाल हो चुकी होइ थी ...........

विनोद बोलै ....... महीन तुम ठीक तो हो न ........

महीन न्य अपनी आंखें खोलीं ....... विनोद की तरफ देखा ....... और वीर्य सी मुस्करा की बोली ........ अब तो उसी निकाल दो ........ महीन न्य पिच्य उस डिल्डो की तरफ इशारा क्या जो अभी भी उसकी गांड की सूराख मैं फंसा होआ था ..........

विनोद न्य चौंक क्र उसकी तरफ देखा ....... और फिर मुस्कराती होय उस डिल्डो को आराम आराम सी महीन की गांड सी निकाल दया .......... महीन न्य सुकून का सांस लय .............

विनोद ....... अब ठीक है न .......

महीन ....... ऐसी भी भला कोई करता है क्या ..................

विनोद ........... ऐसी कैसी ..........

महीन ........ जैसी तुम न्य क्या ........ दोनों तरफ सी .........

विनोद ........ वह तो हम पहली भी कृत्य hi हैं न ...........

महीन ........ पर ऐसी एक साथ तो नहीं न ...........

विनोद .......... हाँ हम न्य पहली ऐसी कभी नहीं क्या ...... लकिन लोग ऐसी कृत्य हैं ........ गर्ल्स एन्जॉय करती हैं इसी ...........

महीन ....... नहीं ऐसी कैसी कोई क्र सकता है ......

विनोद मुस्कराया .......... तुम न्य भी तो क्या है न ........

महीन ब्लश करनी लगी ............

विनोद ........ यह तो नक़ली था न ........... लड़का तो एक वक़्त मैं दो दो मर्दों की साथ भी करती हैं ............

महीन ......... पागल हो क्या तुम ........... ऐसी कैसी कोई 2 - 2 मर्दों की साथ क्र सकता है ...........

विनोद ...... दिखाऊँ गए तुम को वीडियोस फिर तुमको यक़ीन आय गए .......

महीन ........... हम्म्म ..............

कुछ देर ऐसी hi लेती होय महीन की आँख लग गए ........ थकावट की वजह सी .............. और लज़्ज़त की इंतेहा को शून्य की वजह सी .......
 
अपडेट NO: 34

अगली दिन दोनों अपनी रूटीन की मुताबिक़ तैयार होय आज महीन को बॉस कि साथ एक मीटिंग मैं जाना था ........ मीटिंग उसी बिल्डिंग मैं थी मगर दूसरी ऑफिस और फ्लोर पी थी ........ महीन न्य आज एक स्कर्ट और शर्ट पहनी थी .......... स्कर्ट उसकी हाफ लेग्स तक थी ....... घुटनो सी नीची ..... और शर्ट हाफ स्लीव थी ....... दोनों hi उसकी जिसम पी काफी जांच रही थय ....... बुहत ज़्यादा टाइट नहीं थय मगर फिटिंग मैं थय ........ महीन न्य एक बुहत प्यारी सी परफ्यूम भी लगाई होइ थी .............. विनोद महीन को रेडी होती होय hi देख रहा था ............ उसी देख की मुस्कराया

विनोद ....... आज तो लगता है की सुब को घायल करनी का इरादा है .....

महीन ब्लश करती होइ मुस्कराई ........ जी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है ...

विनोद हंसा .......... हाहाहा ....... ाचा है वैसी ............. बिलीव में ी don't मंद .........

महीन न्य विनोद की बाज़ू पी एक हल्का सा थप्पड़ मारा और हंसती होइ बोली ........... ज़्यादा फ़ुज़ूल बातें नहीं करो ायक चलो जल्दी ........ देर हो रही है ............

विनोद भी हँसता होआ उसकी साथ अपार्टमेंट सी निकला ......... वैसी आज काफी प्यारी लग रही हो तुम .......... अपार्टमेंट सी बहार आ की विनोद न्य महीन की गाल पी किश कृत्य होय बोलै ............ महीन मुस्करा दी और दोनों लिफ्ट की तरफ बढ़ी .......

विनोद ........ आज कोई स्पेशल असाइनमेंट तो नहीं है क्या ....

महीन थोड़ा झिजकतय होय ...... हाँ वह आज निक की साथ एक मीटिंग मैं जाना है

विनोद महीन को देख की मुस्करानी लगा और उसी तैसे कृत्य होय बोलै ........ oooooohhhhhhhhhh तो यह स्पेशल तैयारी निक की लय है .......

महीन शरमाई ...... जी नहीं ...... ऐसा कुछ नहीं है ......

विनोद ..... वैसी वह काला भला तुम्हारी जैसी खूबसूरत लड़की की सामन्य कहाँ टिक सकता है ........

महीन हंसी ....... हहहह ..... अब ऐसी भी कोई बात नहीं है .... इनकी ाग्य पिच्य हर वक़त खूबसूरत गोरी लड़का रहती हैं ... उनको भला हम जैसी इंडियंस सी क्या दिलचस्पी .........

विनोद न्य अपनी बाज़ू महीन की कमर मई डाली और उसकी गाल को चूमती होय बोलै ............ महीन बिलीव में no ओने कैन इग्नोर ा ब्यूटी लिखे यू ...........

महीन शर्मा गए .......... और मुस्करा की बोली ...... थैंक्स विनोद ......... लकिन यह तुम्हारी नज़र और तुम्हारी मोहब्बत का कमाल है बस जो तुम ऐसी समझती हो .......

विनोद एक बुहत hi ओपन माइंडेड मर्द था ........ उसी अपनी फॅमिली की अंदर और कल्चर मैं मौजूद रेस्ट्रिक्शन्स और पाबंदों सी नफरत थी ........... ऊपर सी उसी प्रिय जैसी मज़हबी लड़की वाइफ की सूरत मैं मिली थी ........ जो उसकी अरमानो का ख्याल नहीं रखती थी .......... ना hi कभी फॅमिली और कल्चरल बोंदागेस को तोरणय मैं प्रिय न्य उसका साथ दया था ........ बल्कि वह तो खुद भी बुहत hi ज़्यादा कन्सेर्वटिवे मंद की थी .......... जबकि विनोद वह नौजवान था जो की ज़िन्दगी को खुल की एन्जॉय करना चाहता था ........ उसी हमेशा सी hi वेस्टर्न लाइफ ......... वेस्टर्न कल्चर .......... वेस्टर्न फ्रीडम ........ इम्प्रेस और अत्त्रक्ट करती थी ............ यही वजह थी की विनोद को जब ुक मैं ट्रांसफर की ऑफर होइ थी तो उसी दिल hi दिल मैं बुहत ख़ुशी होइ थी ............ जैसी उसका एक खवाब पूरा हो रहा हो .......... मगर उसनी प्रिय का दिल रखनी की लय उसी यही शो की था की वह उसको चोर की नहीं जाना चाहता ............. और उसकी उम्मीद की मुताबिक़ प्रिय न्य hi उसी इंसिस्ट क्या था की वह ुक जांय का चांस ज़रूर ावैल क्रय ......

जब वह यहाँ आया और जैसी जैसी उसी शुरू की कुछ दिन महीन की साथ रहंय का मौका मिला .......... तो महीन की लय उसकी अट्रैक्शन और भी बरहनी लगी ........ जो उसकी दिल मैं पहली दिन सी hi थी जब सी उसनी महीन का ऑफिस ज्वाइन क्या था इंडिया मैं .......... लकिन महीन की रिज़र्व रहंय की आदत ........ उसकी स्ट्रिक्ट ड्रेसिंग .......... उसकी फॅमिली बैकग्राउंड ............ और ख़ास क्र दूसरी रेलगिओं सी होनी की वजह सी विनोद न्य कभी उसकी तरफ कोई क़दम नहीं बढ़ाया था ........... बस दिल hi दिल मैं वह महीन की ब्यूटी को एन्जॉय करता रहता था .......... और उसकी हुसैन की पूजा करता था .............

विनोद को तब यक़ीन hi नहीं आया था की जब महीन उसकी साथ एक hi अपार्टमेंट मैं रहंय पी राज़ी हो गए थी ......... उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था ................ लकिन उसकी साथ रहती होय भी विनोद न्य खुद पी कण्ट्रोल रखा था .......... क्यों की वह महीन का ऐतमाद नहीं खून चाहता था ........ वह हमेशा सी उसी एक अछि दोस्त समझता था ............ जिसकी साथ वह हर हद पार करना चाहता था ...... उसी हासिल करना चाहता था ........ मगर उसकी मर्ज़ी और रज़ामंदी सी ........... एक बार की लय नहीं बल्कि हमेशा की लय ....... अपना एक पर्मनंट पार्टनर बना की ... इसलय उसकी साथ रहती होय भी विनोद न्य कभी उसको शून्य या कुछ भी ग़लत करनी की कोशिश नहीं की .............. मगर उसकी क़िस्मत उसका साथ दी रही थी की ऐसी ऐसी वाक़्यात होती रही जिस सी वह दोनों खुद सी hi एक दूसरी की क़रीब आती चली गए ............ और महीन न्य भी उसी दिल सी क़ुबूल क्र लय ...... अपनी पार्टनर की तोर पी ........... जैसी जैसी उसकी और महीन की बीच सम्बन्ध बढ़ी थय ......... जैसी जैसी वह एक दूसरी मैं समाती गए थय वैसी वैसी hi विनोद महीन को खोलना शुरू हो गया था ........ क्यों की उसकी हमेशा सी hi यही खवाहिश थी की वह वेस्टर्न लाइफ स्टाइल की साथ ज़िन्दगी को एन्जॉय क्रय ............ और उसकी ख़ुशक़िसमति थी की महीन जैसी कन्सेर्वटिवे और मज़हबी लड़की उसका साथ देंय पी राज़ी हो गए थी .............. इसी लय विनोद न्य अपनी हनीमून पी महीन को वह सुब कुछ करवाया था जो महीन न्य कभी सोचा भी नहीं था ........... और ना hi कभी विनोद न्य सोचा था की प्रिय उसकी कहनी पी ........ उसकी खातिर यह सुब क्र सकती है ............

ऐसा भी नहीं था की विनोद कोई ककोल्ड नेचर का मर्द था ........ जो अपनी पार्टनर को दूसरो को पेश क्रय ....... और खुद उनको देख क्र एन्जॉय क्रय ...... मगर यह ज़रूर था की वह अपनी पार्टनर को दूसरो को दिखा की फखर महसूस करता था ..... ट्रॉफी वाइफ की तरह सुब की सामन्य शो करनी मैं ...... ाचा फील होता था उसी ........... कोई जेएलओसी फील नहीं करता था ........ जैसी खुद की लय आज़ाद माहोल पसंद था उसी वैसी hi आज़ादी वह अपनी पार्टनर को भी देंय मैं कोई बुराई नहीं समझता था ............ बल्कि उसी ेन्सॉरगे करता था .............. यही कोशिश उसनी शादी की शुरू मैं प्रिय की साथ भी की थी .......... मगर उसनी बुहत hi सख्ती की साथ उसकी ऐसी तमाम बातों को रिजेक्ट क्र दया था ............ जिसकी बाद सी उसनी दोबारा प्रिय को ऐसा कुछ नहीं कहा था .............. ना कुछ ऐसा करनी को कहा था ......... मगर महीन डिफरेंट लड़की निकली थी ............ जो उसकी प्यार मैं ........ उसकी खातिर .......... उसकी कहनी पी सुब कुछ करती थी ............. दिल सी ............ यही बात उनकी बांड को और भी मज़बूत क्र रही थी .............

ऑफिस मैं अपनी सीट पी बैठी महीन काम क्र रही थी ............. निक न्य उसी एक प्रेजेंटेशन प्रेपर करनी की लय दी होइ थी जो उन्हों न्य अपनी साथ आज की मीटिंग मैं लय की जानी थी ........... महीन पूरी म्हणत और दिल की साथ वह प्रेपर क्र रही थी ...... उसी बॉस की साथ जांय मैं थोड़ी झिझक भी फील हो रही थी ....... और कुछ अजीब सी फीलिंग भी ..... वही फीलिंग जो हमेशा hi उसी निक की साथ फील होनी लगती थी ....... उसकी पर्सनालिटी की सामन्य ........ और अब तो उसी निक की साथ अकेली मैं जाना था ......... थोड़ी देर मैं प्रेजेंटेशन कम्पलीट करनी की बाद महीन निक की ऑफिस की तरफ जांय की लय उठी .............. उसका दिल फिर सी ज़ोर ज़ोर सी धरकनी लगा ......... महीन न्य अपनी मोबाइल मैं फ्रंट सीएएम ों क्या और खुद का हुल्य देखनी लगी .......... वह ठीक लग रही थी ...... लिपस्टिक थोड़ी फाडे हो रही थी ........ महीन न्य अपनी बैग सी अपनी लिपस्टिक निकाल की अपनी होंठों पी ठीक की .... ...... महीन अब अपना लैपटॉप उठा की धरकती होय दिल की साथ निक की ऑफिस की तरफ बरही .................. इतनी दिन हो चुकी होय थय उसी यहाँ पी जॉब कृत्य होय मगर अभी भी जब भी उसका सामना निक सी होता तो उसकी दिल की धरकन तेज़ हो जाती थी ...... और वह खुद को उसकी पर्सनालिटी सी मुतासिर होनी सी ना रोक पाती थी ........ उसकी लय हमेशा hi मुश्किल होता था निक की आँखों मैं देखना और उस सी नज़रें मिलाना ............ हालाकि अभी तक उसकी दिल मैं या दिमाग़ मई निक की लय कोई भी ग़लत फीलिंग्स नहीं थीं ........... मगर जब सी विनोद की साथ उसकी जिस्मानी सम्बन्ध बनी थय ..... और जैसी जैसी विनोद उसी सेक्स वीडियोस दिखा दिखा की सेक्स करता था ...... उस सुब सी उसकी नज़रें भी दूसरी मर्दून की लय तब्दील होनी लगी थीं .......... उनको देख की वह खुद मैं पैदा हो रही फीलिंग्स को रोक नहीं पाती थी ........... और कैसी रोकती .............. जब विनोद खुद उसी पोर्न दिखाता था तो उन पोर्न ैट्रोरस को देख देख क्र ....... जब भी वह किसी दूसरी मर्द को देखती तो उसकी नज़रें उसकी पंत की अगली हिस्से पी ज़रूर जाती थीं ......... चाही बाद मैं वह खुद सी शर्मिंदाह हो जाती थी ....... एक लम्हे की लय उसी यह ख्याल ज़रूर आता था की उसका लुंड कैसा हो गए ..... ऐसा नहीं था की किसी भी दूसरी मर्द को देख की उसकी साथ सेक्स की ख्वाहिश होती थी ............ ... मगर उसकी नेचर विनोद की साथ रहंय सी काफी बदल रही थी ........... इसलय ऐसा सोचना उसी ाचा ज़रूर लगता था ... और उसी गरम भी क्र देता था ............

महीन नॉक क्र की निक की ऑफिस मैं दाखिल होइ ........ वह अपनी चेयर पी hi बैठा होआ था ........... हमेशा की तरह hi स्मार्ट और हैंडसम दिख रहा था ............. महीन न्य धरकती होय दिल की साथ .......... अपनी होंठों पी एक मुस्कराहट सजाती होय उसी गुड मॉर्निंग बोलै ........... निक न्य अपनी लैपटॉप पी काम कृत्य होय उसी अपनी सामन्य बेथनी को बोलै ............. महीन निक की सामन्य उसी की टेबल पी अपना लैप टॉप ओपन क्र की बेथ गए ..............

निक ........ प्रेजेंटेशन तैयार हो गए क्या .....

महीन .......... jjjjjjjjjjj जजजजजीएएएएएएए. ....... सर

निक ........ सो अरे यू रेडी फॉर थे मीटिंग ...... ??

महीन ....... य्ययएसस ........ सर ........ आप एक बार प्रेजेंटेशन देख लेती

निक .......... हम्म्म .......... ी होप आईटी विल बे परफेक्ट ..........

महीन अपनी तारीफ पी खुश हो गए .......... और मुस्करानी लगी ..........

निक अपनी चेयर सी उठा और महीन की पिच्य आज्ञा ............ जैसी hi निक महीन की क़रीब आया तो महीन को घबराहट होनी लगी ............ निक महीन की बुहत क़रीब आज्ञा ....... और झुक की महीन की लैपटॉप पर देखनी लगा ........... वह महीन की इतना क़रीब था की महीन को उसकी परफ्यूम की मशहूर कुन खुसबू महसूस हो रही थी .......... जो उसकी साँसों मैं जाती होय उसका बुरा हाल क्र रही थी ............

निक की उसकी इतना क़रीब होनी की वजह सी महीन की हाथ कंम्पनी लगी थय ........ जो साफ़ नज़र आ रही थय ...............

निक न्य महीन की पिच्य खरी होय अपनी दोनों हाथ महीन की कन्धों पी रख डाई ........ और दोनों हाथों सी उसकी कन्धों को आहिस्ता सी दबाती होय बोलै ..........

निक ....... यू सिम्स तो बे नर्वस ......

महीन घबरा गए ........ उसकी दिल की धरकन और भी तेज़ होनी लगी ........ वह आहिस्ता सी बोली ............. Nnnnnnnnnn ऊऊऊओ नननननननननूवो सर ........

निक न्य अपनी दोनों हाथ महीन की शोल्डर्स सी नीची को सिरकाती होय उसकी हाफ स्लीव्स मैं सी नंगी होती होइ बाज़ूओं पी रख डाई ........ निक की काले स्याह सख्त हाथों का अपनी बाज़ू पी लम्स महसूस होती hi महीन का दिल ज़ोरों सी धरकनी लगा ....... उसी ऐसा लगा जैसी उसका दिल उछाल की उसकी हलक़ मैं आज्ञा हो ......... उसी अपनी नंगी सुफैद बाज़ूओं पी निक की हाथों का गरम गरम अहसास हो रहा था ....... उसकी हाथों की गर्मी महीन की पूरी जिसम मैं फैलती जा रही थी ........ और उसकी पूरी जिसम को जैसी झुलसाय दी रही थी ......... महीन बरी मुश्किल सी अपना थूक निगल पा रही थी ............

निक ........... मिस महीन ........ आप की हाथ तो कैंम्प रही हैं ...... अरे यू okay ............

महीन की घबराई होइ सी आवाज़ निकली .......... nnnnnooooooooooo ननूवो सर ........ ी ऍम फाइन ........

निक उसकी नंगी बाज़ूओं को आहिस्ता आहिस्ता सहलाती होय बोलै ....... अगर आप ऐसी hi घबराएं गई और नर्वस रहें गई तो आप आज की मीटिंग ठीक सी अटेंड नहीं क्र पाइन गई ............ लुक ात आईटी ............ योर हैंड्स अरे शाकिंग ..........

निक न्य अपना हाथ आहिस्ता सी महीन की गोरे हाथ पी रख दया जो की लैपटॉप की ऊपर था ......... निक की उसकी इतना क़रीब अन्य ........ उसकी नंगी बाज़ू को शून्य ....... उसकी हाथ पी अपना हाथ रखनी सी .......... महीन की घबराहट मैं इज़ाफ़ा होता जा रहा था ........ उसकी दिल की धरकन और भी तेज़ होती जा रही थी ........... उसी ऐसी लग रहा था की जैसी उसका दिल अभी की अभी उसकी हलक़ की रास्ती बहार अजय गए ........ और या फिर उसकी सीने को खोल क्र बहार निकल आय गए तेज़ धरकती होय ...............

महीन की नज़रें निक की काले मज़बूत बारी सी हाथ पी थीं .......... जो उसकी हाथ पी था ......... इतना बारे था निक का हाथ की उसकी नीची रखा होआ महीन का अपना हाथ तो नज़र hi नहीं आ रहा था ........... बिलकुल hi चुप गया होआ था .......... बुहत hi अजीब लग रहा था निक का काला स्याह हाथ ........ अपनी छोटे सी सुफैद मुलायम हाथ की ऊपर .......... बिलकुल hi कंट्रास्ट ...........

निक का चेहरा महीन की चेहरे की क़रीब था ........ बुहत hi क़रीब ..... और उसकी गरम गरम सांसें महीन को अपनी नैक पी महसूस हो रही थीं .......... जिस सी महीन की हालत और भी ख़राब होती जा रही थी ........... उसी तो जैसी हलकी हलकी मदहोशी सी होनी लगी थी ........... उसी अपनी तइस की बीच ...... अपनी छूट मैं हल्का हल्का गीला पैन महसूस होनी लगा था ......

बरी hi मुश्किल सी महीन की मुंह सी आवाज़ निकल पाई ........ Sssssssssiiiiirrrrrrrrrrrrrrr .............. ppppppllllllllzzzzzzzzzzzzzzz ............. महीन न्य निक की हाथ की नीची अपनी हाथ को आहिस्ता सी हरकत देती होय कहा ............. वह अपना हाथ निक की हाथ की नीची सी छुड़वाना चाह रही थी ............

निक न्य अपनी हाथ को आहिस्ता आहिस्ता उसकी हाथ की ऊपर सी पिच्य को उसकी कलाई और उसकी ऊपर की हिस्से पी फैरती होय ...... अपना हाथ उसकी जिसम सी हटाया और बोलै ................ ी ऍम सॉरी मिस महीन ......... परहैप्स ी गोत कर्रिएद अवे ................ मैं माफ़ी चाहता हों अगर तुमको बुरा लगा है तो .................

महीन घबरा की बोली ........ nnnnoooooooooo nnnnnnnnnnnnoooooooooo सर ....... प्लीज ............... no नीड तो अपोलोग्य ..............

निक अब महीन की पिच्य सी हैट की अब उसकी बिलकुल सामन्य ..... बिलकुल hi क़रीब अपनी hi टेबल सी अपनी हिप्स टिका की खरा हो गया ......... वह ऐसी की अब निक की लुंड का उभार बिलकुल महीन की चेहरी की सामन्य ....... उसकी आँखों और होंठों की लेवल पी था ......... महीन की नज़रें सीढ़ी निक की पंत की सामन्य की हिस्से पी गईं ...... और वह एक बार फिर सी कैंम्प की रह गए ....... उसकी उभार को देखती होय ...... और फिर अपनी नज़रें चुरानी लगी .......

निक महीन की नज़रों को फील कृत्य होय बोलै .......... अरे यू फीलिंग okay नाउ .......... यह लाइन पानी पी लाइन .....

निक न्य अपनी टेबल पी रखा होआ ....... अपना पानी का गिलास उठा की महीन की तरफ बढ़ा दया ........ जो की आधा भरा होआ था ........... शायद निक न्य उस मैं सी आधा पानी प्या होआ था ....... और अपनी प्यीय होय गिलास का पानी hi महीन को दी रहा था पीनी की लय ...............

महीन को भी इस बात का अंदाजा हो रहा था ........ उसनी अपनी फैली होइ आँखों की साथ निक की चेहरी की तरफ देखा ..... उसकी चेहरी सी महीन की नज़रें नीची को आईं ...... उसकी चौराय सीने को देखती होइ नीची उसकी पंत की उभार पी ......... और फिर उसकी बढ़े होय हाथ मैं पकड़े होय गिलास पी ........... और फिर पता नहीं क्यों अपना हाथ बढ़ा की निक सी गिलास पाकर लय .............. कुछ देर की लय वह अपनी हाथ मैं पकड़े होय गिलास को देखती रही ............. और फिर एक नज़र निक की तरफ देखा ........ और धरकती होय दिल की साथ गिलास अपनी होंठों सी लगाया ....... और निक का झूठा पानी पीनी लगी ............ इसी ख्याल की साथ hi महीन को अजीब सा अहसास हो रहा था की वह निक का झूठा पानी पी रही है ........ एक ग़ैर मर्द का ........... वह भी इतनी काले ........ नेगगरो का ............ अजीब सा लग रहा था महीन को ..... मगर एक बुहत hi इरोटिक फीलिंग हो रही थी ...... महीन को ऐसा लग रहा था की जैसी वह सिंपल पानी नहीं बल्के शराब पी रही हो उस गिलास सी .......... 2 घूँट लय क्र महीन न्य गिलास टेबल पी रख दया ............. और साथ hi फिर सी महीन की नज़रें निक की पंत मैं बन रही उसकी लुंड की उभार पी ागीण ...........

निक न्य महीन की नज़रों को अपनी लुंड पी देखा तो मुस्करा की बोलै ......... मिस महीन ........ दो यू नीड एनीथिंग ेल्स ....... ???

निक की इस सवाल पी महीन घबरा गए ....... और जल्दी सी अपनी नज़रें उसकी लुंड की उभार पी सी हटा की उसकी चेहरी की तरफ देखा और फिर उस सी नज़रें चुराती होय बोली ........... ननननननननॉऊऊऊओ noooooooooooo sirrrrrrrrrrrr .................. sssssssoooorrrrrryyyyyyyyyy sirrrrrrrrrr ...........

महीन को खुद समझ नहीं आई की उसनी निक को सॉरी किस बात की लय बोलै है ........ शायद उसकी लुंड की तरफ देखनी की लय ....... उसी खुद सी भी शर्मिंदगी होनी लगी ..........

निक मुस्कराती होय बोलै ......... okay ... थें Let's मूव फॉर थे मीटिंग ....

महीन न्य भी जल्दी सी अपना लैपटॉप बंद क्या और उठ की खरी हो गए ............ निक न्य अपना कोट उठा की पहना ....... और दरवाज़ी की तरफ बढ़ा .......... महीन भी उसकी पिच्य पिच्य आई .......... निक न्य दरवाज़ा खोला और महीन को ाग्य बरहनी का इशारा किआ ............. अपनी बॉस की तरफ सी उसकी लय दरवाज़ा खोलनी पर महीन का चेहरा लाल हो गया ....... उसी निक का यह जेस्चर ाचा लगा ....... वह ाग्य बरही और निक की क़रीब सी निकलती होय उसी थैंक्स बोलै ...........

महीन निक की साथ ऑफिस सी जांय की लय बरही ......... जेनी न्य उनको देखा ............. जेनी की नज़रें महीन सी मिलीं ......... तो उसनी मुस्करा की महीन को देखा और विंक क्या ............. महीन न्य शर्माती होय अपनी आंखें झुका लीन ...... और निक की पिच्य बरही ........

जेनी उसी आहिस्ता सी बोली ............ बेस्ट ऑफ़ लक महीन ........

महीन खामोशी सी निक की पिच्य पिच्य ऑफिस सी निकल गए ....... मीटिंग मैं भी महीन निक की क़रीब hi बैठी थी ........ और कई बार निक का जिसम उस सी टच होआ ........... साड़ी मीटिंग मैं वह निक की अपनी क़रीब होनी की वजह सी उनकंफर्टबले फील करती रही ........... मगर दूसरी तरफ उसी ाचा भी लग रहा था निक की साथ बैठना ......... वह उसकी पर्सनालिटी और वेल बिल्ट बॉडी सी बुहत इम्प्रेस थी .......... जब भी उसका बाज़ू महीन की बाज़ू को टच होता तो महीन को फील होता की उसका जिसम कितना मस्कुलर है ....... कितना मज़बूत है ........ कितना सॉलिड है ...............

मीटिंग की दौरान कुछ देर की लय ब्रेक होइ ....... निक उठ क्र टिया कार्नर की तरफ गया ........ और अपनी और महीन की लय चाय बना की लय आया ........... महीन को बुहत अजीब सा लगा की उसका बॉस उसकी लय चाय बना की लाया है ............ वह फौरन बोली ..........

महीन ....... सर आप न्य क्यों तकलीफ की ....... मैं लय लेती .........

निक ....... it's नॉट ान इशू मिस महीन ........

महीन ...... थैंक्स सर

दोनों चाय पीने लगी .......... दूसरी पार्टिसिपेंट भी इधर उधर खरी होय चाय पी रही थय ............... निक भी इधर उधर की बातें करनी लगा ..........

निक ...... सो हाउ योर स्टे इस गोइंग ों हेरे इन ुक महीन ??

महीन मुस्कराई ........... it's ा वंडरफुल एक्सपीरियंस सर ....... बुहत ाचा लग रहा है यहाँ रहना .......... आप सुब की साथ यहाँ काम करना ...... बुहत कुछ सीखनी को मिल रहा है ........

निक मुस्कराया ........... गुड ........ that's वैरी गुड ........ हाउ दो यू फील ............ हाउ इस थे लाइफ ओवर हेरे ....... ???

महीन ....... it's एक्चुअली वैरी गुड सर ......... वे अरे रियली एंजोयिंग ओवर हेरे इन ुक ........ हेरे इस सो मच फ्रीडम अस कपरेड़ तो आवर कंट्री

निक मुस्कराया ......... सो यू अरे एंजोयिंग योर फ्रीडम हेरे .....

महीन खामोश हो गए ....... और अपनी नज़रें चुरानी लगी .....

निक मुस्कराया ............ गुड ........... अन्य प्रोब्लेम्स ओवर थे वर्क ... ???

महीन मुस्कराई .......... no सर ........ नॉट ात आल ........... यू आल अरे सो मच हेल्पिंग एंड सपोर्टिंग ..........

निक मुस्कराया ...... दोनों न्य अपनी चाय खतम की ......... और फिर सी मीटिंग शुरू हो गए ............. मीटिंग सी वापसी तक महीन अब निक की साथ काफी कम्फर्टेबले हो चुकी होइ थी .......... उसकी जो झिझक थी वह काफी काम हो गए थी ........... मगर दूसरी तरफ इतना लम्बा टाइम निक की साथ गुज़ारनी की बाद ....... वह उस सी और भी इम्प्रेस हो चुकी होइ थी ........... और उसकी लय अट्रैक्शन और भी ज़्यादा फील क्र रही थी ..............

शाम मैं महीन और विनोद दोनों वापिस अपनी अपार्टमेंट मैं ाग्य ............... वीकेंड था तो दोनों काफी रिलैक्स थय ........... खाना खाती होय विनोद बोलै .....

विनोद ....... महीन मेरा ख्याल है की कुछ सामान आज शिफ्ट क्र लेती हैं और बाक़ी कल क्र लाइन गए ..........

महीन ाहसिता सी बोली ......... जी ........ जैसी बेहतर लगी .......

कहानी की बाद महीन और विनोद न्य अपनी पैकिंग शुरू की ........ वहां सी कुछ ऐसा वैसा भारी सामान तो लय जाना नहीं था ....... बस अपनी कपड़ों की बैग्स और बर्तन वग़ैरा hi थय ............ थोड़ी hi देर मैं दोनों बैग समेत की दूसरी फ्लैट मैं ाग्य ........... और वहां अलमारी मैं अपना सामान रखनी लगी ........ यहाँ पी एक hi रूम था तो उसी मैं कपबओर्ड थी बरी ........... महीन उसी मैं दोनों की कपड़े रखनी लगी ............. विनोद और महीन की कपड़े एक hi कप्बोर्ड मैं ........... और विनोद उसकी हेल्प क्र रहा था ................ फिर कुछ सामान और भी ला की दोनों न्य वहां पी सेट क्या ............. अब बुहत थोड़ा hi सामान बचा था ........... जो बस जल्दी सी hi शिफ्ट हो सकती थय ............... रात की कहानी का टाइम हो रहा था तो विनोद बोलै की अब बाक़ी कल करें गए ............ और दोनों फ्रेश हो की डिनर बनानी लगी ..........

डिनर की बाद दोनों लाउन्ज मैं टीवी देख रही थय ............. विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं खींच लय .............

महीन उसकी पास आ तो गए मगर थोड़ा नखरा करती होइ बोली ........... नहीं प्लीज विनोद आज नहीं न ............. आज थक गए होइ हों न मैं ...........

विनोद महीन की होंठों को किश कृत्य होय बोलै .......... थक तो मैं भी गया होआ हों मगर यार इस अपार्टमेंट मैं आज हमारी लास्ट नाईट है तो क्या लास्ट नाईट को एन्जॉय नहीं करना चाहिए हमें .............

महीन हंसी ............ हाहाहाहा ............. इतनी दिन सी एन्जॉय hi क्र रही हो न ...........

विनोद ....... लकिन तुम तो कुछ दिनों सी hi मिली हो न मुझी .......... उस सी पहली तो दूर दूर hi रहती थी न ..........

महीन विनोद की सीने को सहलाती होइ बोली ........ हाँ रहना तो दूर दूर hi था ...... पर बस पता नहीं कैसी तुम्हारी इतना क़रीब आगये हों ........

विनोद उसकी आँखों मैं देखती होय बोलै ........... कितना क़रीब ......

महीन भी उसकी आँखों मैं देखती होइ बोली .......... इतना क़रीब की अपना तुन मन सुब कुछ तुमको सोंम्प दया है .................

विनोद ........ सुच मैं .......... ??

महीन उसी घूरती होइ बोली ......... क्यों तुमको नहीं पता क्या ........ ??? मेरी जिसम की उस उस अंग को भी तुम न्य छूआ है ........ भोगा है ....... जैसी कभी आसिफ न्य हाथ भी नहीं लगाया था ............... तुम्हारी साथ मैं न्य वह सुब कुछ किआ है जिसका कभी आसिफ की साथ सोचा भी नहीं था ........... और ना hi कभी आइंदा भी उसकी साथ यह सुब मुमकिन है .......

विनोद महीन की होनोटों को चूम की बोलै ........... तो क्या तुमको ाचा नहीं लगा यह सुब .........

महीन मुस्कराई .......... अगर ाचा नहीं लगता तो क्या इस वक़त मैं यौन बैठी होती तुम्हारी साथ .............

विनोद ....... हाँ हो तो मेरी पास लकिन कुछ क्र तो नहीं रही न ........ और ना hi करनी दी रही हो ............

महीन मुस्कराई ........... अपना हाथ नीची लय जा की उसनी विनोद की शॉर्ट्स की अंदर अपना हाथ डाला और उसकी लुंड को पाकर की सहलानी लगी ........ अपनी मुठी मैं ऊपर नीची करनी लगी ........... और बोली ............ बस अब खुश ...........

विनोद ...... इसी आज़ाद तो करो न पहली ........

महीन मुस्कराई और विनोद की शॉर्ट्स को नीची को सिरका दया ........ महीन सोफे पी लेती होइ थी ........ उसका सर विनोद की बेल्ली पी था और चेहरा बिलकुल उसकी लुंड की सामन्य ............ जैसी अब वह अपनी हाथ मैं लय की सहला रही थी ............ उसकी नज़रें विनोद की मोटे काली लुंड पी थीं .......... जिसकी खाल उसकी टोपे पी चढ़ी होइ थी ............ उसकी लुंड को अपनी हाथ मैं लय की आहिस्ता आहिस्ता सहलानी लगी ........ थोड़ा सा प्रेशर बढ़ा की उसी नीची सी ऊपर को क्या तो विनोद की लुंड सी उसका प्रेकम का एक क़तरा निकल आया ............. महीन न्य विनोद की लुंड को चूमा और फिर अपनी जुबां की नौक की साथ उस प्रेकम की क़तरे को चाट लय ............... महीन न्य विनोद की लुंड की टोपे को अपनी मुंह मैं लय और आहिस्ता ाहसिता उसी मुंह मैं अंदर बहार करती होइ चूसनी लगी ....... कभी मुंह सी निकाल की उस पी जुबां पहिरण्य लगती ............. उसकी टोपे की गिर्द अपनी जुबां घुमाती ........... चाट टी ........... और उसका हाथ नीची विनोद की भारी बॉल्स सी खेल रहा था ........... उनको सहला रहा था ............ महीन बुहत प्यार सी विनोद की लुंड को चूस रही थी .......

विनोद न्य महीन की शर्ट को पकड़ा और उसी उतारनी लगा ............ इसी तो निकाल दो ............ महीन मुस्कराई और सोफे पी सीढ़ी हो क्र बैठी और अपनी लाउन्ज वियर की शर्ट की बटन खोल की उसी अपनी जिसम सी अलग क्र दया ............. महीन का ऊपरी जिसम नंगा था अब ........ उसकी खूबसरत मम्मी बिना ब्रा की भी तनय होय थय .............. विनोद न्य हाथ बढ़ा की उसकी बूब्स को छूआ और उनको ाहसिता ाहसिता दबानी लगा ........ फिर सी उसको अपनी लुंड की तरफ खींचा ............ महीन न्य दोबारा सी उसका लुंड अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसनी लगी .............

कुछ देर की बाद विनोद न्य महीन को सोफे पी hi झुका की घोरी बना दया और खुद उसकी पिच्य आ की उसकी छूट की सूराख पी अपना लुंड रख की उसी महीन की छूट मैं उतार दया ............. और आहिस्ता ाहसिता ढक्की लगाती होय उसी छोड़नी लगा ................ महीन भी सोफे की बाज़ू पी अपना सर रखी होय अपनी गांड को हवा मैं ऊपर उठाय होय विनोद सी चुद रही थी ...........

महीन की छूट छोड़ती होय महीन की गांड का तंग सूराख विनोद की सामन्य था ............ विनोद न्य झुक की अपनी मुंह सी थूक महीन की गांड की सूराख पी गिराया .......... और फिर अपनी ऊँगली सी उसी सूराख पी मालंय लगा .............. महीन को पता था की विनोद उसकी गांड मारी बिना नहीं रही गए ............. उसी खुद भी अब यह सुब कुछ ाचा लगता था .............. वह गांड मैं विनोद की लुंड की मुन्तज़िर थी अब ........... विनोद न्य महीन की छूट सी अपना लुंड निकाला और उसी महीन की गांड की सूराख पी रख दया .......... और आहिस्ता आहिस्ता अंदर को पुश करनी लगा ............ अब तो बिना किसी ख़ास रुकावट की विनोद का लुंड महीन की गांड मैं भी उतर जाता था .............. थोड़ी सी तकलीफ होती थी बस ............... विनोद न्य महीन की कमर को अपनी दोनों हाथों मैं पकड़ा और उसकी गांड मैं अपना लुंड अंदर बहार करनी लगा .................. महीन भी आंखें बंद कए होय अपनी चुदाई का लुत्फ़ लय रही थी .............. विनोद का मोटा लुंड गांड मैं जांय सी महीन को बुहत ाचा लगता था ......... उसी अपनी गांड का सूराख और अंदर सी स्ट्रेच होता होआ महसूस होता था .................

थोड़ी देर तक महीन की गांड मारण्य की बाद विनोद अपना लुंड निकाला और सोफे पी सीहड़ा हो की बेथ गया ............... और महीन को ऊपर अन्य का इशारा क्या ........... महीन उठ की विनोद की ऊपर आगये ............. उसकी लुंड को अपनी हाथ मैं पकड़ा और उसी अपनी छूट की सूराख सी टिका दया............. और आहिस्ता आहिस्ता नीची को बेथनी लगी .......... विनोद की लुंड को अपनी छूट की अंदर लेती होइ ............. महीन न्य अपनी दोनों हाथ विनोद की कन्धों पी रख डाई थय ............ विनोद न्य उसी अपनी तरफ खींचा और अपनी होंठ उसकी होंठों पी रख की उसी चूमनी लगा .............. महीन उसका साथ देंय लगी ............ पिच्य सी महीन विनोद का लुंड अपनी अंदर उतारती जा रही थी ............. अब महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता विनोद की लुंड पी ऊपर नीची होना शुरू क्र दया ........... और खुद सी hi विनोद सी छुडवानी लगी ........... विनोद की गौड़ मैं बेथ की ऊपर नीची को होती होय उसका लुंड अपनी छूट मैं लेनी सी ........... विनोद का लुंड पूरा अंदर तक उसकी छूट मैं उतर रहा था ........... और जब वह सीधा जा की महीन की बचा दानी की मुंह सी टकराता था तो उसी बुहत hi मीठा सा दर्द भी होता था ................

कुछ देर ऐसी hi छुडवानी और विनोद की होटों को चूमती होय ........ और उसकी जिसम सी लिपटे होय महीन अपनी मंज़िल को पोहंच गए .......... रात को दोनों न्य अपनी बैडरूम मैं एक बार फिर सी चुदाई की और फिर सो गए .............. सुबह नाश्त्य की बाद दोनों न्य बाक़ी का सामान भी अपनी नए अपार्टमेंट मैं शिफ्ट क्या और पहली अपार्टमेंट को खाली क्र दया .........

अपनी नए अपार्टमेंट मैं शिफ्ट होनी की बाद महीन और विनोद दोनों न्य मिल की सामान की सेटिंग की और सफाई क्र की फ़ारिग़ होनी की बाद दोनों मिल की बाथरूम मैं नहाने चली गए .........

विनोद न्य अपनी कपड़े उतार की वहीँ फर्श पी फेंकी और नंगा हो गया ........ और कमोड पी खरा हो की पेशाब की धार मारण्य लगा ........ महीन उसी देखती होइ अपनी कपड़े उतारनी लगी .......

महीन ..... कितनी बार बोलै है की गंदी कपड़े वाशिंग बिन मैं डाला करो ....

विनोद अपनी लुंड को हिलाती होय बोलै ...... sorryyyyyyyyyy डार्लिंग

महीन उसकी बात पी हंस पारी ........ महीन न्य अपनी कपड़े वाशिंग बिन मैं डाली और फिर फर्श सी विनोद की कपड़े उटाह क्र भी उस मैं दाल डाई .......... विनोद कमोड सी हैट गए था ........ अब महीन उसकी सामन्य hi कमोड पी बेथ गए ........ विनोद उसकी सामन्य hi खरा था ......

महीन उसकी तरफ देखती होइ बोली ....... अब जाओ नहाना शुरू करो मैं भी आ रही हों .......

विनोद बोलै........... नहीं तुमको पेशाब कृत्य होय देखना है ......

महीन हंसी ...... बुहत hi बी शर्म हो तुम तो .........

विनोद हंसा ......... हहहहह ...... हाँ वह तो मैं हों न ...चलो जल्दी सी शुरू करो ......

महीन हसनी ..... तुम तो ऐसी क्र रही हो जैसी पहली कभी नहीं देखा .........

विनोद उसकी और भी क़रीब होआ और अब बिलकुल नीची बेथ गया उसकी सामन्य और बोलै ......... और तुम ऐसी क्र रही जैसी पहली कभी मेरी सामन्य नहीं क्या ............

महीन उसको देख की हंसनी लगी ......... उसी पता था की विनोद अपनी बात मनवा की hi रहता है .......... और वैसी भी उसी विनोद की बातें अछि लगती थीं ......... थ्रिलिंग और एक्ससिटिंग ...... उसनी खामोशी सी पेशाब करना शुरू क्र दया ...........विनोद की सामन्य hi ....... और विनोद उसकी छूट को hi देख रहा था जिस मैं सी पेशाब निकल रहा था ......... महीन उसी देख की मुस्करा रही थी ......

........ यह सुब अब उन दोनों की दरम्यान नार्मल hi था ...... और यह सुब भी विनोद न्य hi नार्मल क्या था ....... वर्ण महीन न्य तो कभी भी आसिफ की सामन्य इस तरह बेथ की पेशाब नहीं क्या था ..... और ना hi आसिफ कभी ऐसी करता था .........

विनोद अपनी जगा सी उठा और अपना लुंड अपनी सामन्य कमोड पी बैठी होइ महीन की होंठों की सामन्य क्र दया ...... महीन न्य उसकी आँखों मैं देखा और फिर अपना हाथ बढ़ा की उसकी लुंड को पाकर लय ....... विनोद का लुंड अभी पूरी तरह सी एकरा होआ नहीं था ......... महीन न्य उसको सहलाती होय ...... उसकी टोपे को अपनी होंठों मैं लय लय .... और उसकी टोपे पी अपनी जुबां फैरी .......... और उसी चूसनी लगी .......... महीन को अपनी मुंह मैं विनोद की पेशाब का हल्का सा ज़ाइक़ा महसूस होआ ...... मगर उसनी इसी इग्नोर क्र दया ....... और उसकी लुंड को चूसनी लगी ......... विनोद की साथ रहती होय महीन को भी अब हर वक़त और हर जगा सेक्स करनी की आदत हो गए होइ थी .......... वह विनोद की बॉल्स को सहलाती होइ उसकी लुंड को चूस रही थी ......... कुछ देर तक उसकी लुंड को चूसनी की बाद महीन न्य उसी अपनी मुंह सी निकला और कमोड सी खरी हो गए ........ और बोली चलो अब नहीं चल की ......... और यह कह की वह शावर की गिलास केबिन मैं दाखिल हो गए ........ विनोद भी उसकी पिच्य पिच्य आज्ञा ..... महीन न्य शावर खोला और पानी की नीची आगये ........... विनोद उसकी पिच्य आया ...... और अपना एकरा होआ लुंड महीन की गांड मैं घुसाती होय उसी अपनी बहून मैं भर लय ........ और पिच्य सी उसकी गर्दन को चूमनी लगा ....... और उसकी जिसम पी बेहतय होय पानी को चैतन्य लगा ..........

महीन उसकी होंठों और हाथों और उसकी लुंड को एन्जॉय करती होइ बोली ....... विनोद ........ बस भी क्या करो ..... तुम्हारा यह तो हर वक़त खरा रहता है .......... महीन न्य अपना हाथ पिच्य लय जा की विनोद का लूँ डपकर लय ...... और उसी अपनी मुठी मैं लय की सहलानी लगी ............ विनोद न्य शावर बंद क्र दया ......... महीन की एक टांग को थोड़ा ऊपर उठाया और पिच्य सी अपना लुंड महीन की छूट पी रख की एक hi ढक्की मैं उसी अंदर दाल दया ............. aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ........ mmmmmmmmmmmmmmmmm महीन की होंठों सी लज़्ज़त भरी सिसकारी निकल गए .......... वह भी थोड़ा झुक गए .......... विनोद की मदद करनी की लय ........... विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करना शुरू क्र दया ........ और ढक्की लगाती होय महीन को छोड़नी लगा ........... थोड़ी hi देर मैं महीन की छूट न्य पानी चोर दया ........... विनोद का लुंड भी पानी चोरनी वाला होआ तो विनोद न्य अपना लुंड महीन की छूट सी निकाला और महीन को नीची बेथनी को बोलै .......... महीन नीची बेथ गए और विनोद न्य अपना लुंड दोबारा सी महीन की मुंह मैं दाल दया ...........

महीन को अजीब सा ज़ाइक़ा लगा अपनी hi छूट की पानी का ......... मगर वह उसकी लुंड को चूसती रही ........ थोड़ी देर की बाद विनोद न्य अपना लुंड महीन की होंठों सी निकाला और उसी अपनी मुठी मैं लय की मसलनि लगा .......... विनोद की लुंड सी उसकी मणि निकाल की महीन की बूब्स पी गिरनी लगी ....... महीन न्य उसी नहीं रोका ...... जब उसकी लुंड सी सारा पानी निकल की महीन जिसम पी गिर गया तो विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की होंठों की तरफ बढ़ाया ........ जिस मैं सी अभी भी एक क़तरा निकल की लटक रहा था ............ महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखा ...... और फिर अपनी जुबां बहार निकाल की उसकी लुंड सी टपक रही होय उसकी माननी की क़तरे को अपनी जुबां सी चाट लय .......... फिर उसकी लुंड को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसनी लगी .............. उसकी लुंड सी माननी की आखरी क़तरे निकल की महीन की मुंह मैं आ रही थय ...... जैसी वह निगलती जा रही थी ...........

विनोद की लुंड को ाच्य सी चूसनी की बाद महीन खरी होइ और उसकी मुरझाय होय लुंड को अपनी मुठी मैं लय की उसी दबाती होइ बोली ...... बस ... अब खुश हो ....... मिल गया तुम्हारी इसको सुकून ....... यह कहती होय महीन न्य शावर ों क्या और दोनों नहानी लगी ..........

कुछ देर बाद महीन किचन मैं थी ...... और विनोद लाउन्ज मैं टीवी देख रहा था की दूर बेल्ल बजी ......... विनोद उठ की मैं दूर की तरफ बढ़ा .......
 
अपडेट NO: 35

विनोद न्य जा की दरवाज़ा खोला .......सामन्य एक बरी उम्र का अंग्रेज़ मर्द खरा था ......... जो क़रीब क़रीब भी 70 साल का हो गए ....... ओवर वेट भारी जिसम था उसका ...... क्लीन शवेद फेस ..... गोरा रंग ..... गांजा सर ...... चेहरी और नैक पी झुरा .......... नैक की स्किन भी थोड़ी लटकी होइ थी ............ भारी पेट भी लटका होआ .......... और आँखों पी ग्लासेज लगाय होय ......... उसकी एक हाथ मैं एक छोटा सा बॉक्स था ....... और दूसरी हाथ मैं एक स्टिक थी ....... जो बूढ़ी लोग चलनी की लय सहारे की तोर पी इस्तेमाल कृत्य हैं ........... विनोद उसकी तरफ स्वल्य नज़रों सी देख रहा था की वह खुद hi बोलै .

ओल्ड मन ....... hi ...... ी ऍम मिलर ..... मैं आप का नेक्स्ट दूर निगहबॉर हों ...... एहि साथ वाला दरवाज़ा है मेरा ...... मुझी पता चला की इस अपार्टमेंट मैं नए लोग शिफ्ट हो रही हैं तो सोचा आप को वेलकम क्र ाओं ......

विनोद खुस होआ ....... उसी रास्ता देती होय बोलै ..... जी जी आईं मर. मिलर ...... अंदर तशरीफ़ लाइन ......

मिलर वह बॉक्स लये होय अपार्टमेंट की अंदर आज्ञा ......... और विनोद दरवाज़ा बंद क्र की उसी लय क्र लाउन्ज मैं आज्ञा ....... उसी सोफे पी बेथनी को बोलै और महीन को आवाज़ दी ........ महीन बहार आई और अपनी अपार्टमेंट मैं किसी गेस्ट को देख की हैरान हो गए ........ महीन उसकी सामन्य एक शॉर्ट्स और हाफ स्लीव टाइट फिटिंग टी शर्ट पहनी होय खरी थी ......... महीन की शॉर्ट्स उसकी हाफ तइस तक थीं ....... और उसकी हाफ तइस और गोरी गोरी टांगें नंगी हो रही थीं ........... महीन तो थोड़ा अजीब सा फील होआ ....... मगर बुहत ज़्यादा भी नहीं .......... और वह किसी हद तक इस ड्रेस की आदि हो चुकी होइ थी ...........

विनोद ....... महीन यह मर. मिलर हैं ....... हमारी साथ वाली अपार्टमेंट मैं रहती हैं .......... हमारी नेक्स्ट दूर निगहबॉर ....... और यह महीन है मर. मिलर ...........

विनोद न्य दोनों का इंट्रोडक्शन करवाया ...........

मिलर ...... ओह ....... गुड ... गुड ........ यह आप की वाइफ हैं ..... ???

मिलर की इस सवाल पी महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ........ विनोद और महीन न्य एक दूसरी की तरफ देखा ........ और फिर विनोद थोड़ा मुस्करा की बोलै .......... No No ........... शी इस नॉट माय वाइफ ....... वे अरे कलगुएस .... एंड लिविंग टुगेदर हेरे ............

मिलर न्य दोनों की तरफ देखा बारी बारी ....... और उसकी चेहरी पी मुस्कान फैल गए ............. okay okay ......... सॉरी ...... िफ़ माय क्वेश्चन बोथेरेद यू तवो .............

विनोद .......... no no .......... it's okay मर. मिलर .......

मिलर फिर बोलै ........... ओह मैं भूल hi गया ........ यह मैं आप लोगो की लय केक लाया था ........ आप को वेलकम करनी की लय .......

विनोद और महीन दोनों hi उसकी इस जेस्चर सी खुश होय .......... महीन जल्दी सी बोली ........... ओह थैंक यू मर. मिलर ............ अल्थौघ तेरे वास् no नीड ऑफ़ तहत बूत येत आईटी इस वैरी मच फॉर उस ओवर हेरे ........

मिलर मुस्कराया ............ it's नथिंग डिअर ........ बी थे वे यू कैन कॉल में अंकल .......

महीन मुस्कराई ....... और फिर बोली .......... okay अंकल मिलर मैं चाय बना की लाती हों फिर आप का लाया होआ केक खाएं गए चाय की साथ .........

मिलर न्य उठ की जाना चाहा मगर दोनों न्य उसी इसरार क्र की रोक लय .......... विनोद मिलर की साथ गुप् शूप करनी लगा और महीन चाय बनानी चली गए किचन मैं ........... थोड़ी देर मैं महीन चाय बना की लय आई और विनोद की पास hi सोफे पी बेथ गए ........ उसकी बिलकुल क़रीब hi ........... जैसी वह उसका पति हो ............ तीनो न्य केक काटा और फिर चाय पीनी लगी ............... मिलर अपनी अपार्टमेंट मैं अकेला रहता था ........... काफी पैसी वाला था ........... कोई ज़्यादा फ़िक्र नहीं थी कामान्य की अब उसी ............ बीवी की डेथ हो चुकी होइ थी कोई 10 साल पहली .......... 2 बेटे और एक बेटी थय जो सुब अपनी अपनी घर मैं रहती थय अपनी फॅमिली की साथ .............. और मिलर खुद यहाँ पी अकेला रहता था ........... विनोद न्य भी मिलर सी आसिफ और प्रिय की बारी मैं शेयर क्या .......... जैसी बताती होय महीन का चेहरा शर्मिंदाह हो रहा था ............

मिलर न्य इस बात को गेस क्र लय था ....... वह बोलै ......... महीन यू don't नीड तो बे वरीड अबाउट स्टेइंग विथ विनोद ........ एंड आल्सो no नीड तो बे ाषामेड ऑफ़ योर रिलेशनशिप विथ विनोद ......... थिस आल इस नेचुरल .......... ा नार्मल थिंग ऑफ़ थिस सोसाइटी .......... यू कैन नेवर कंसन्ट्रेट ों योर वर्क एंड जॉब अंतिल यू अरे मेंटली एंड फिशलय सटिस्फीएड ........... एंड योर बौडिल्य नीड्स अरे फुलफिलड......

महीन न्य सर झुका लय ........... कोई एक घंटा बेथनी की बाद मिलर उठ की जांय लगा ....... दोनों न्य उसी डिनर की लय रुकनी को कहा मगर वह नहीं माना ..... और उनको भी अपनी अपार्टमेंट अन्य का इनविटेशन दया ........... दोनों न्य अपनी अपार्टमेंट सी निकल क्र मिलर को उसकी अपार्टमेंट की दरवाज़ी तक छोरा और फिर वापिस ाग्य ...........

विनोद ...... चलो यहाँ पी कोई ाचा निगहबॉर तो मिला ......

महीन मुस्कराई ..... हाँ ाच्य हैं अंकल ........ लकिन कितनी तनहा लाइफ है न उनकी ...........

विनोद ..... हाँ यह तो है ..... लकिन यहाँ की सोसाइटी मैं ओल्ड आगे मैं अक्सर लोगो की साथ ऐसा hi होता है ........ बहरहाल वह काफी ाच्य मिज़ाज की हैं ...... और जैसी उन्हों न्य हमारा ख्याल क्या है वैसी hi हमें भी उनका ख्याल रखना चाहिए ........

महीन ..... हाँ हाँ क्यों नहीं ...... हंसाय hi तो हमसायों की काम आती हैं न ......

फिर महीन न्य डिनर तैयार किआ और फिर दोनों बेथ की डिनर करनी लगी ............. डिनर की बाद विनोद न्य महीन सी थोड़ा ड्रिंक करनी की इजाज़त मांगी ............

विनोद ........... महीन जी ........... अगर इजाज़त हो तो थोड़ी पी सकता हों क्या मैं आज की रात ............

महीन मुस्कराई ....... उसी विनोद की आदत और शौक़ का ाच्य सी पता था अब ........... अक्सर वीकेंड पी उसका दिल करता था पीनी को ........ और महीन उसी इजाज़त भी दी देती थी ............. विनोद पीटा भी था ....... मगर हमेशा hi महीन की इजाज़त सी ............ और उसको भी अपनी साथ शामिल क्र की ........ महीन उसका साथ देती थी मगर बुहत hi काम पीती थी .......... बस उसका दिल रखनी को ............ उसकी सवाल करनी पी वह बोली .........

महीन ........ मुझी पता था क्या बोलो गए तुम ........... अभी लाती हों जनाब की लय .............

महीन किचन मैं गए और जा की विनोद की लय एक बियर की बोतल लय आई और उसी दी क्र जांय लगी तो विनोद न्य उसका हाथ पाकर की अपनी गौड़ मैं बिठा लय .............. बियर की बोतल खोल की उसी महीन की तरफ बढ़ाया ............. महीन मुस्कराई ........ और उस मैं सी एक छोटा सा सिप लय लय ............. महीन की लय ....... एक मुस्लिम लड़की होती होय भी ...... शराब पीना अब कोई बरी बात नहीं रही थी ........... ना hi वह इसी अब कुछ ग़लत समझती थी ........... ना hi गुन्नाह का ख्याल उसकी दिल मैं आता था ............ बस यह उसी अहसास हो चूका था की शराब कोई इतनी बुरी चीज़ भी नहीं है ............. जिस तरह सी यह दिमाग़ और जिसम को सुकून देती है ......... इसलय अब महीन शराब पीने को जस्ट नार्मल चीज़ hi समझनी लगी थी ... अपनी मज़हब और फॅमिली उपब्रिंगिंग की खिलाफ जाती होय .... विनोद न्य अब उस बोतल सी सिप लेनी शुरू क्र डाई ........... फिर महीन को सोफे सी नीची सिरकानी लगा .............. महीन उसका मतलब समझ गए .............

महीन सोफे सी उतर की नीची कारपेट पी बेथ गए ........... विनोद की दोनों टांगों की बीच मई ............ और एक बार फिर विनोद की शॉर्ट्स को खींच की उतरा और उसको नंगा क्र दया ........ उसकी लुंड को अपनी हाथ मैं लय और अपनी मुठी मैं सहलानी लगी .......... फिर झुक की उसी चूम लय ............. लुंड को मुंह मैं लय और उसी चूसनी लगी ............ उसकी लुंड को छोस्ती होय ........ उस पी जुबां पहिरण्य लगी ....... उसी प्यार करनी लगी .............

विनोद ............ महीन ........ तुमको मेरा लौड़ा कैसा लगता है .... ???

महीन न्य मुस्करा की विनोद की तरफ देखा ............ फिर उसकी लुंड की टोपे को किश करती होइ बोली ............ बुहत ाचा .......

विनोद उसकी सर की बलून को सहलाती होय बोलै ........... आसिफ की लुंड सी भी ज़्यादा ............ ??

महीन न्य मुस्करा की विनोद की आँखों मैं देखा और हाँ मैं सर हिला दया ............

विनोद .......... क्या फरक लगता है तुमको आसिफ की लुंड सी ......

महीन मुस्कराई ............. आपका यह आसिफ सी बारे है ........

विनोद ...... और ..........

महीन ........... मोटा भी है ...........

विनोद ........ और .......

महीन .......... इसका कलर डार्क है ........ जबकि आसिफ का व्हिटिष है ......

विनोद ......... और .......

महीन ....... आपकी यह ब्लैक कलर की बॉल्स भी उस सी भारी हैं ........ महीन न्य उसकी बॉल्स को अपनी हाथों मैं तोलती होय कहा ........

विनोद ........ हम्म्म ....... और तुमको इस मैं सुब सी ज़्यादा ाचा क्या लगता है ........

महीन मुस्कराई ....... उसकी लुंड पी अपनी मुठी को ऊपर की तरफ सिरकाती होय उसकी टोपे को स्किन की अंदर क्र की उस स्किन को अपनी उंगलयों मैं लेती होइ बोली ........... आपकी यह स्किन ........... आसिफ की यह स्किन नहीं है न ........... यह बुहत अछि लगती है मुझी ...........

विनोद ...... मतलब की तुमको मेरी लुंड का अनकट होना ाचा लगता है .........

महीन न्य हाँ मैं सर हिला दया ...........

विनोद ...... ाचा महीन सूचि बताना पहली कभी कोई अनकट लौड़ा देखा था तुम न्य ............

महीन न्य ना मैं सर हिलाया .......... नहीं ....... कभी भी नहीं ........... बस सुना था की हिंन्दू मर्दों की खतंय नहीं होय होती ......... लेकीन देखा नहीं था ........... सिर्फ एहि है जैसी देखा मैं न्य ...........

फिर विनोद की आँखों मैं देखती होइ बोली ............. विनोद ....... आसिफ की बाद सिर्फ एहि है जैसी मैं न्य देखा है ........... और जो मेरी अंदर गया है ..............

विनोद मुस्कराया ............ आईटी मीन्स ी ऍम लकी ........

महीन मुस्कराई ........... यस ....... यू अरे लकी ........

विनोद ........ तो किसी और की भी लकी होनी का इमकान है या की नहीं ............

महीन जल्दी सी ............. हरगिज़ नहीं ............ कभी भी नहीं .......... मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती कभी ..........

विनोद मुस्कराया ........ सोचा तो हम न्य कभी मेरी बारी मैं भी नहीं हो गए की एक दिन तुम मेरा लुंड लो गई .......... मगर हो गया न हमारी बीच हो गया ............ और अब तक हो रहा है .......

महीन ........ हाँ ....... वह तो हो गया बस पता नहीं कैसी ......

विनोद ........ महीन वह होना hi था .......... हमारी जिसम आखिर कब तक प्यासी रहती ........... कब तक हम अपनी जिस्मों की ज़रूरत को दबाय रखती .............. इतना क़रीब रहती होय कैसी हमारा मिलान न होता ........

महीन मुस्करा दी ....... और उसकी लौड़े सी अपनी गाल को सहलाती होइ बोली ........ यह मिलान ना होता तो यह कैसी मुझी मिलता ...........

विनोद मुस्कराया .......... यह सुब इस परदेस की कारण है ....... और यहाँ पी हमें अपनी ज़िन्दगी एन्जॉय करनी है ............. यहीं की सोसाइटी की नॉर्म्स की मुताबिक़ ............... बिलकुल आज़ादी की साथ ............ बिना खुद को रोके ....... बिना अपनी ज़ररयात को दबाय ............

महीन मुस्करा दी .......... तुम मुझी पता नहीं क्या बना की रहो गए यहाँ पी ............

विनोद ..... एक ओपन माइंडेड खूबसूरत लड़की ........ जो लाइफ को अपनी मर्ज़ी की मुताबिक़ एन्जॉय क्र सकी .......... जैसी वह चाही ....... जिसकी साथ वह चाहे ..........

महीन ...... किसी और की साथ नहीं सिर्फ तुम्हारी साथ .......

विनोद मुस्कराया ....... जैसी हमारी बीच जो होआ उसकी होना का पता hi नहीं चला ...... ऐसी hi जब किसी और की साथ हो गए तो भी अचानक hi हो जाय गए ..........

महीन मुस्करा दी ...... और फिर सी विनोद की लुंड की टोपे को मुंह मैं लय की चूसनी लगी .........

थोड़ी देर मैं दोनों अपनी नए बैडरूम मैं थय और विनोद महीन को बीएड पी लिटा की उसकी ऊपर था ........... उसका लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार हो रहा था .......... नए अपार्टमेंट मैं पहली रात को वह कैसी बिना चुदाई की रह सकती थय ...............
 
नेक्स्ट डे संडे था तो दोनों देर सी hi नींद सी जाएगी ........... पहली महीन की आँख खुली ............. वह वाशरूम सी फ्रेश होनी की बाद चाय बना की लाइ ........ और विनोद को जगाया ........... दोनों न्य बीएड पी साथ साथ बेथ की चाय पी ........... इधर उधर की बातें कृत्य होय ........... चाय पीनी की बाद कुछ देर तक दोनों फिर सी एक दूसरी की बाँहों मैं लेती रही ........... जस्ट उन लम्हात को एन्जॉय करनी की लय ......... एक दूसरी की क़ुरबत का मज़ा लेनी की लय .............

विनोद .......... महीन ........

महीन विनोद की सीने पी सर रखी होय बोली ........ हम्म्म

विनोद ........ महीन ..... जब हम लोग वापिस जाईं गए तो क्या हो गए ....... क्या हम तब भी मिल सकें गए ऐसी ........

महीन भी थोड़ी उदास हो गए .......... पता नहीं विनोद ..... मैं भी जब यह सोचती हों तो उदास हो जाती हों ..... पता नहीं क्या हो गए जब हम वापिस जाईं गए तो ....... मिल भी सकें गए या नहीं ....

विनोद ...... हम्म ..... पता नहीं भगवन न्य क्या लिखा है ाग्य ......

महीन ..... पता नहीं ........ लकिन जब तक हम यहाँ साथ हैं तब तक तो एक दूसरी की लय हैं न .....

विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख दी ........

फिर महीन न्य नाश्ता बनाया और क़रीब 11 बजी दोनों न्य नाश्ता किआ ............. नाश्ता क्र की फ़ारिग़ होय तो नीतू की कॉल आई की वह उन सी मिलनी और उनका नया अपार्टमेंट देखनी की लय राजीव की साथ आ रही है ........... विनोद न्य उसी okay बोल दया ..........

विनोद न्य महीन को बताया ........ दोनों जल्दी सी नहानी की लय बाथरूम मैं चली गए ........... एक साथ hi दोनों नहाय ....... और फिर अपना जिसम खुश्क क्र की बाथरूम सी निकली ............ महीन नहानी की बाद अपनी नंगी जिसम पी सिर्फ एक सुफैद रंग का टॉवल लपेटी होय ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरी हो की अपनी बाल ब्रश करनी लगी ......... टॉवल उसकी ुंडेरर्मः की नीची सी उसकी हिप्स तक जा रहा था ............ विनोद भी एक टॉवल लपेटी होय बीएड पी लेता मोबाइल देख रहा था ........ उसकी नज़रें महीन पी भी थीं ........ जिसका नंगा जिसम सिर्फ टॉवल मैं होनी की वजह सी बुहत hi सेक्सी लग रहा था ........ महीन को इतनी बार नंगा देखनी ........... और उसी हर पोजीशन मैं छोड़नी की बावजूद भी उसी महीन का जिसम सिर्फ टॉवल मैं बुहत ाचा लग रहा था ....... उसी महीन पी बुहत प्यार आ रहा था ............

महीन विनोद को अपनी तरफ देखता होआ देख की बोली .......... क्या देख रही हो ...........

विनोद मुस्कराया .......... बुहत मस्त लग रही हो टॉवल मैं .......

महीन मुस्कराई ....... तुम न्य तो इसकी बिना भी देखा होआ है न इतनी बार तो फिर .......

विनोद ...... फिर भी बुहत प्यारी लग रही हो ........

महीन .......... ाचा जी .........

विनोद ...... हाँ सुच मैं .........

महीन .......... ाचा बातें बनाना छोरा ........ यह बताओ क्या पहनों मैं ......

विनोद ........ शॉर्ट्स और टी शर्ट पहन लो .......

महीन ....... शॉर्ट्स नहीं ........ वह राजीव भी तो साथ आ रहा है न नीतू की ...........

विनोद .... तो क्या होआ यार ......

महीन .......... बस मुझी ाचा फील नहीं हो गए न .......

विनोद ..... क्या ाचा फील नहीं हो गए ......

महीन ब्लश करती होइ बोली ...... राजीव की सामन्य मेरा जिसम एक्सपोज़ हो गए वह ....... और तुमको भी तो ाचा नहीं लगी गए न ......

विनोद ...... ओह के ों यार .......... तुम अपना कन्सेर्वटिवे मंद कब तब्दील करो गई यार ........

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ....... और ब्रश ड्रेसिंग टेबल पी रख की बीएड की तरफ गए विनोद की पास .......... विनोद अपनी टांगें लम्बी क्र की बैठा होआ था बीएड की बैक सी कमर टिकाय होय ........... महीन अपना घुटनी बीएड पी रख की ऊपर चढ़ी ....... और एक घुटनी को विनोद की टांगों की ऊपर सी क्रॉस कृत्य होय उसकी तइस पी बेथ गए ....... और अपनी दोनों हाथ विनोद की कंधो पी रख की उसकी आँखों मैं देखती होइ बोली ............

महीन ........ इतना तो तब्दील क्र चुकी होय आज बता hi दो की और कितना तब्दील करना चाहती होय मुझी ......... ..........

विनोद मुस्कराया और अपनी दोनों हाथ महीन की नंगी हो रही होइ तइस पी रख की सहलाती होय बोलै .......... बिलकुल इन गुरयों की तरह करना चाहता हों .......

महीन ....... सुब कुछ तो पहनती हों अब उनकी तरह hi ..........

विनोद महीन की टॉवल को खोलती होय बोलै .......... लकिन शर्माती भी तो बुहत हो न ...........

महीन मुस्कराई .... अब बिलकुल उनकी तरह बिहाराम तो नहीं हो सकती न ...... वह तो पता नहीं क्या क्या करती हैं ...........

विनोद हंसा और महीन की निप्पल्स को अपनी उंगलयों मैं सहलाती होय बोलै ....... तो तुम भी करो ..... किस न्य रोका है तुमको ........ यहाँ की माहोल और कल्चर की फ्रीडम को एन्जॉय करो ........

महीन ....... लकिन उनकी तरह अपना जिसम दूसरों को दिखाना ...... ??? यह ठीक है क्या ....... ???

विनोद महीन की बूब्स पी हाथ फैरती होय बोलै .......... महीन डार्लिंग ........ भगवन न्य तुमको यह खूबसूरत जिसम छुपानी की लय नहीं दया ........... ये खूबसूरती तुम्हारी लये फखर की बात है ........ दूसरों को दिखानी सी तुमको शर्मिंदाह नहीं होना चाहिए ..........

महीन मुस्कराती होइ उसकी बातें सुन रही थी .......... महीन की जिसम सी उसका टॉवल उतर चूका होआ था ........ और वह बिलकुल नंगी अब विनोद की तइस की ऊपर बैठी होइ थी .............. उसी अपनी तइस की क़रीब विनोद का एकरा होआ लुंड फील हो रहा था ........... महीन न्य अपना हाथ उसकी टॉवल की ऊपर सी hi उसकी लुंड पी रख दया और उसी सहलाती होय बोली .............

महीन .......... यह फिर सी खरा हो गया है ..........

विनोद मुस्कराया .... ..... खुद hi देख लो खोल की ...........

विनोद न्य महीन की कमर मैं बाज़ू डाली और उसी अपनी तरफ खींचती होय अपनी होंठ उसकी गुलाबी होंठों पी रख दी ............ और उसी किश करनी लगा ........... महीन का हाथ टॉवल की ऊपर सी hi विनोद की लुंड पी था जिसे वह सहला रही थी ....... और फिर खुद सी hi उसनी विनोद का टॉवल खोल दया और उसकी लौड़े को नंगा क्र की अपनी हाथ मैं लय लय .......... विनोद का मोटा लुंड उसकी नरम नरम मुलायम हाथों मैं और भी फूलनी लगा ........... महीन विनोद की होंठों को चूस रही थी ........ और विनोद उसकी नंगी जिसम को सहला रहा था ............. नीची सी महीन की दोनों हाथ विनोद की लुंड को पकड़े होय थय और उसी ऊपर नीची कृत्य होय उसकी मुठ लगा रही थय ............ महीन की छूट भी विनोद की लुंड की बिलकुल क़रीब थी ........

कुछ देर तक किसिंग करनी की बाद महीन उस सी अलग होइ और उसकी ऊपर सी उतनी लगी ........

विनोद उसका हाथ पकारण्य की कोशिश कृत्य होय बोलै .......... रुको तो सही ...... कहाँ जा रही हो ....... ........

महीन बोली ....... बस अब इस सी ज़्यादा कुछ नहीं करना अभी ........ नीतू अन्य वाली है फिर देर हो जाय गई .............

विनोद ....... पर इसका तो कुछ करो ...... इसी तो शांत क्र दो अब ......

महीन ........ बी फिक्कर रहो ........ इसको ाच्य सी शांत क्र डॉन गई मैं हमेशा की तरह ......... मगर ...... .. नीतू लोग की जांय की बाद ......

विनोद बचूं की तरह मुंह बनानी लगा और उसी देख क्र महीन भी हंस पारी ............ फिर महीन न्य विनोद की कहनी पर एक जीन्स और टी शर्ट पहन ली .......... जीन्स उसकी जिसम पी टाइट थी ........ उसकी जिसम की उतार चढ़ाओ साफ़ साफ़ दिख रही थय और बुहत hi सेक्सी लग रही थय ............ महीन की खूबसूरत सेक्सी गांड उस जीन्स मैं और भी सेक्सी लग रही थी ........ बहार को निकली होइ ........... फूली होइ ............ ऊपर सी उसकी टी शर्ट भी उसकी जिसम सी चिपकी होइ थी .......... और महीन न्य अपनी बलून को पोनी टेल मैं बाँधा और फिर नीतू लोगो की लय स्नैक्स त्यार करनी लगी ...........

थोड़ी देर मई नीतू और राजीव भी ाग्य ........ आज महीन न्य नीतू की साथ साथ राजीव सी भी हाथ मिलाया ....... और मुस्कराती होय उसी वेलकम क्या ............ राजीव आज भी महीन की जिसम को देख रहा था ........... महीन को आज उसकी नज़रें कुछ बुरी नहीं लग रही थीं ........ बल्कि वह उसकी नज़रों को एन्जॉय क्र रही थी ...........

चाय पीती होय नीतू बोली ........ ात लास्ट तुम लोगो न्य हमारी बात मान hi ली न ......... सिंगल रूम अपार्टमेंट लेनी की ...... हाँ तो जब सोना hi तुम दोनों न्य एक बैडरूम मैं एक hi बीएड पी है तो फिर अलग अलग रूम्स और अलग अलग बेड्स की अपार्टमेंट का रेंट पाय करनी का क्या फ़ायदा ............

महीन उसकी बात पी शर्मा गए ............

विनोद बोलै ...... हाँ ठीक कह रही हो ........

राजीव भी बोलै ............ ी होप की आप दोनों अपनी इस नए लाइफ को खूब एन्जॉय क्र रही हो गए .............

महीन और विनोद दोनों बस मुस्करा डाई ........... कोई एक घंटा तक उनकी साथ रहंय की बाद दोनों चली गए ........... इस दौरान राजीव भी महीन की जिसम को तारता रहा ....... उसकी टाइट जीन्स सी दिखती होइ उसकी गांड ...... और टी शर्ट सी छलकती होय उसकी बूब्स को ......... महीन को भी उसकी नज़रें अपनी जिसम पी महसूस हो रही थीं ........ मगर पता नहीं क्यों उसी भी अब बुरा नहीं लग रहा था ...... बल्कि मज़ा hi आ रहा था ......... ाचा hi लग रहा था .........

उन दोनों की जाती साथ hi विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं भर लय ............

विनोद ...... उफ्फफ्फ्फ़ ........ देखा था कैसी भूकी नज़रों सी तुमको देख रहा था राजीव ........

महीन हंसी ......... हाहाहा ...... हाँ ..... उसकी नज़रें तो हैट hi नहीं रही थीं मेरी ऊपर सी .........

विनोद ........ यार उसकी हालत देख देख की मेरा लुंड खरा हो रहा था ...........

महीन हंसी ...... अभी इसकी खातिर क्र देती हों जनाब ........

महीन न्य अपनी प्रॉमिस की मुताबिक़ विनोद को ाच्य सी शांत क्या .......... और खुद को भी ........... फिर दोनों बीएड पी साथ साथ लेती होय थय एक दूसरी की बहून मैं ........

महीन ...... तो फिर कल सुबह तुमको बॉस की साथ जाना है न ..

विनोद ..... हाँ बिलकुल .......... और पता नहीं कितना टाइम लगी गए ....... अगर ऑफिस टाइम मैं वापसी ना हो सकीय तो तुम घर आजाना और खाना खा लेना ........

महीन ...... आप इन टच रहना न मेरी साथ ........ अगर देर हो तो बता देना मुझी ..........

विनोद ........ हाँ ठीक है .............. विनोद न्य महीन की नंगे जिसम को अपनी बहून मैं भरा और दोनों सोनी लगी ............

नेक्स्ट डे विनोद और महीन ऑफिस पोहंची ........ और प्रोग्राम की मुताबिक़ एक नई प्रोजेक्ट पी काम स्टार्ट करनी की लय निक विनोद को अपनी साथ लय क्र 10 बजाय ऑफिस सी चला गया ............ शाम को ऑफिस टाइम की ख़तम होनी की क़रीब महीन को विनोद की कॉल आई की अभी वह लोग फ्री नहीं होय और वह घर चली जाय ............

महीन ऑफिस सी फ्री होनी की बाद 5:30 पी अपनी अपार्टमेंट पी आगये .......... खाना कहानी की बाद महीन न्य थोड़ी देर आराम क्या और फिर 7 बाजी उठी ............. विनोद अभी तक नहीं आया था ........ ना hi कोई कॉल आई थी ........... महीन न्य विनोद को कॉल मिलाई तो उसका फ़ोन ऑफ जा रहा था ......... महीन को थोड़ी परेशानी तो होइ मगर वह उसी इग्नोर क्र की फ्रेश होइ और डिनर बनानी लगी ............. महीन न्य नहानी की बाद एक जीन्स की शॉर्ट्स पहनी होइ थी ............ जो उसकी हाफ तइस सी भी ऊपर तक थी सिर्फ ......... बाक़ी उसकी पूरी तइस और पूरी टांगें बिलकुल नंगी थीं ........... ऊपर उसनी एक पिंक कलर का टैंक टॉप पहना होआ था .......... ....... टैंक टॉप का गाला भी काफी खुला था ....... उसकी बूब्स की दरम्यानी लकीर का ऊपरी हिस्सा हिस्सा दिख रहा था ............ गोरा गोरा सीना भी काफी ओपन था ........ सुफैद चिकनी शोल्डर भी नंगी थय ....... जिन पी टॉप की स्ट्रैप्स की साथ hi उसकी रेड ब्रस्सिएर की स्ट्रैप्स भी दिख रही थय. ..... बुहत hi प्यारी लग रही थी ........ और सेक्सी भी ...... उसकी बॉल अभी भी गीले थय ......... जो उसी और भी हसीं और सेक्सी बना रही थय ... .. यह सुब तो अब उसका घर का नार्मल ड्रेस था ......... जो वह विनोद की कहनी पी पहन न्य लगी थी ........... उसी महीन को इस ड्रेस मैं देख की ख़ुशी होती थी .............

महीन किचन मैं थी की बेल्ल बजी ......... विनोद आज्ञा ........ महीन न्य सोचा और स्टोव ऑफ क्या और दरवाज़ा खोलनी की लय चली गए ............ इतनी मैं फिर सी बेल्ल हो गए ..............

महीन दरवाज़ी की तरफ जाती होइ बोली .......... आ रही हों विनोद .......

महीन न्य जा की दरवाज़ा खोला ........ तो शॉकेड रह गए ............ सामन्य विनोद खरा था .......... मगर उसकी साथ ............ लम्बा तरंगा ........ विनोद सी भी हाइट मैं लम्बा ....... भरी मज़बूत जिसम और काली सेयह चमकती होइ रंगत वाला ............... उनका बॉस ........ निक ........ विनोद की साथ खरा मुस्करा रहा था ............ उसी देख क्र तो जैसी महीन का खून hi खुश्क हो गया ..... वह अचानक सी निक को अपनी सामन्य देख की घबरा गए ......... उसका ऊपर का सांस ऊपर और नीची का नीची रह गया ............. वह तो जैसी स्टेचू hi बानी रह गए ............ उसनी कभी भी यह एक्सपेक्ट नहीं क्या था की निक किसी दिन अचानक सी इस तरह उसकी सामन्य आ खरा हो गए ........... या यौन की वह ऐसी हालत मैं कभी अचानक सी विनोद की सामन्य आजाय गए ........

विनोद थोड़ा ाग्य बढ़ा और बोलै ............ महीन ...... मर. निक मुझी घर चोरनी आय हैं तो मैं न्य सोचा की उनको कॉफ़ी की लय ऊपर ना बुलाना मुनासिब नहीं है ........... फर्स्ट टाइम तो आय हैं यह हमारी घर ...........

महीन चौंक की अपनी हालत सी बहार आई ...... और जल्दी सी उन दोनों को रास्ता देती होइ बोली ............ jjjjjjjjjjj jjjjjjjjjjjjeeeeeeeee जजजजज्जजीईए आईं सर अंदर आईं ............

निक ऊपर सी नीची तक महीन की जिसम का जायज़ा लय रहा था ........... उसकी नज़रें महीन की नंगी शोल्डर्स ........ नंगी बाज़ुओ ....... नंगे सीने .......... और शार्ट सी टैंक टॉप सी निकलती होय थोड़ी सी पेट की हिस्से को देखती होइ ........... नीची उसकी नंगी चिकनी टांगों का जायज़ा लय रही थीं ................ निक खुद भी महीन को इस हालत मैं देख क्र हैरान रह गया था ........ महीन की तरह उसी भी यह अंदाज़ा नहीं था की किसी दिन यौन अचानक सी महीन ऐसी ड्रेस मैं उसकी सामन्य अजय गई ...... और वह उसका जिसम ऐसी नंगा देख सकी गए ..........

विनोद अंदर को गया तो निक भी मुस्कराता होआ विनोद की पिच्य पिच्य ाग्य बढ़ा ....... और मुस्कराती होय महीन की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ............ महीन न्य घबराती होय अपना नाज़ुक सा हाथ बढ़ा क्र निक की मज़बूत भारी और चौड़े काले हाथ मैं दी दया .......... निक न्य महीन का हाथ थामा और उसी अपनी हाथ मैं लय क्र दबती होय वीर्य सी बोलै .............. यू अरे लुकिंग गॉर्जियस महीन .... ............ निक की मुंह सी अपनी जिसम की तारीफ सुन कर महीन की आंखें फैल सी गईं ............ उसनी निक की तरफ देखा .......... और वह मुस्करा रहा था ............. महीन न्य हलकी सी कोशिश की अपना हाथ चुरवानी की ............ तो निक न्य उसका हाथ चोर दया और उनकी अपार्टमेंट मैं दाखिल हो गया ......... महीन भी उनकी पिच्य दरवाज़ा बंद क्र की उनकी पिच्य पिच्य चलती होइ लाउन्ज मैं आगये .............

विनोद न्य निक को सोफे पी बेथनी को कहा और खुद भी उसकी साथ hi सोफे पी बेथ गया ............ महीन को कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था की वह क्या क्रय .......... वह उनकी सामन्य खरी थी ............. निक न्य महीन को ऊपर सी नीची तक देखा ......... उसकी भरपूर जिसम को ........ गीले बलून को ..... वह तो पहली बार महीन को ऐसी ड्रेस मैं देख रहा था ........... महीन को तो लग रहा था की जैसी वह शर्म की मारी वहीँ मर जाय गई ............ पहली बार उसका जिसम इस क़दर निक की सामन्य एक्सपोज़ होआ था .......... छोटी सी जीन्स शॉर्ट्स मैं उसकी गोरी गोरी तइस और टांगें नंगी थीं ......... उसकी टैंक टॉप मैं उसकी शोल्डर और गोरी बाज़ू नंगी हो रही थय .......... उसकी बूब्स भी उस टॉप मैं काफी तनय होय थय ............. बस नीम बढ़ाना हालत मैं महीन विनोद और निक की सामन्य थी ........... विनोद की सामन्य होनी की तो उसी फ़िक्र नहीं थी मगर निक की वहां होनी सी उसकी हालत अजीब सी हो रही थी ...............

महीन को ख्याल आया की जा की चेंज क्र लय ...... मगर फिर उसनी सोचा की यह बात मुनासिब नहीं है ............ निक को बुरा लगी गए ......... वह खामोशी वहीँ खरी थी की निक बोलै ............

निक ......... मिस महीन आप भी बैठें न प्लीज .......

महीन जैसी किसी सोच सी बहार आई हो ............ जी जी ....... सर .......... यह कहती होइ महीन उनकी सामन्य hi सोफे पी बेथ गए ........ इस तरह बेथनी सी भी उसकी तइस और टांगें बिलकुल नंगी निक की सामन्य थीं ........... और वह भी अपनी नज़रें महीन की नंगे हो रही होय जिसम पर सी हटा नहीं पा रहा था ............ उसकी नज़रें महीन की चिकने जिसम पी फिसलती जा रही थीं ................

निक ......... मिस महीन ी होप की मैं न्य आप को डिस्टर्ब नहीं किआ ........

महीन जल्दी सी ....... no no सर ........... ऐसी कोई बात नहीं है डिस्टर्ब होनी की .......... मैं बस अभी नहा की निकली थी और अब डिनर hi बना रही थी ....... ............

महीन तो उसकी सामन्य बी सुध बैठी थी ...... उसी कुछ समझ नहीं आ रही थी की वह क्या क्रय क्या बोली .... या क्या बोल रही है ........ उसी तो इतना भी ख्याल नहीं आया की वह निक की सेवा की लय कुछ सर्वे क्रय ............ आखिर विनोद hi बोलै ....

विनोद ....... महीन निक की लय कुछ लाओ प्लीज ......

महीन अपनी ख्यालों सी चौंक की बहार आई और जल्दी सी उठी ..... ओह्ह्ह सॉरी ..... सॉरी ....... मैं अभी लाती हों ......

महीन यह बोल की जल्दी सी उठ की किचन मैं चली गए .......... और कैबिनेट की साथ टेक लगा की लम्बी लम्बे सांस लेनी लगी आंखें बंद क्र की ........... वह इस सुब का सोच रही थी जो अभी अभी हो रहा था .......... उसका अपना जिसम ऐसी निक की सामन्य एक्सपोज़ होना .......... चाही वह उसकी टांगें और बाज़ू hi क्यों न हों ......... वह परेशान थी की वह क्या सोचता हो गए की ऑफिस मई यह कैसी मॉडेस्ट बन की रहती है और यहाँ घर पी कैसी ड्रेस पहनती है ............ आखिर महीन न्य फ्रिज सी कोल्ड ड्रिंक्स निकालीं और फिर 2 ग्लासेज मैं दाल की ट्रे मैं लय क्र बहार आगये ............ उसनी सुब सी पहली निक को सर्वे की ...... सर्वे करनी की लय जैसी hi वह झुकी तो उसका क्लीवेज और भी नज़र अन्य लगा ........ और निक की नज़रें भी सीढ़ी महीन की टॉप की खुली होय गले मैं चली गईं ........... और उसी महीन की बूब्स की ऊपरी हिस्सों का दर्शन हो गया ....... महीन को निक की नज़रों का अंदाज़ा होआ की वह कहाँ हैं तो वह जल्दी सी उसी गिलास दी की सीढ़ी होइ और वापिस पलट गए .......... फिर विनोद को गिलास देंय लगी ....... विनोद को गिलास देती होय उसकी नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं तो महीन न्य उसी गुस्से सी देखा ....... और ाग्य सी वह मुस्करा दया .......... महीन वापिस अपनी जगा पी बेथ गए ....

निक सिप लेती होय बोलै .......... तो यह है आप दोनों का अपार्टमेंट .... बुहत ाचा है ........

विनोद मुस्कराया ....... जी जी सर हम दोनों यहीं रहती हैं ........ और अभी 2 दिन hi होय हैं यहाँ शिफ्ट होय ..........

निक ........ क्यों शिफ्ट करनी की क्या वजह थी ..........

महीन उसकी सवाल पी घबरा गए ........

विनोद ....... सर एक्चुअली वह पहली वाली अपार्टमेंट मैं 2 बेडरूम्स थय ....... और थोड़ा एक्सपेंसिव था .......... तो अब यह सिंगल बैडरूम वाला अपार्टमेंट लय है जो इकोनोमिकल है ........

निक न्य उनकी इकलौती बैडरूम की तरफ देखा और फिर महीन को देखनी लगा ............ महीन न्य अपनी नज़रें झुका लीन .......

निक ....... ाचा है ....... सही डेसिओं है ............. जब आप एक बैडरूम मैं रह सकती हैं दोनों तो फिर डबल बेडरूम्स अपार्टमेंट लेना तो नुकसान hi है न ...........

उसकी बात सुन क्र महीन का चेहरा लाल हो गया ........ उसनी अपना सर झुका लय ......... वह बात बदलनी की लय बोली .....

महीन ....... सर अब आप डिनर क्र की जाए गए ........ डिनर रेडी है ....

विनोद ..... जी बिलकुल सर ......

निक ..... नहीं नहीं मिस महीन ....... फिर कभी डिनर करें गए जब आप इन्विते करें गए ........... अभी नहीं ....... अब मुझी निकलना हो गए सुबह सी घर सी निकला होआ हों ..............

विनोद ........ जी जी ज़रूर हम जल्द hi इन्विते करें गए आप को डिनर की लय ........

महीन भी ...... जी बिलकुल सर ............

थोड़ी देर तक और बेथनी की बाद निक उन सी इजाज़त लय की चला गया ...... उसकी जाती hi महीन विनोद सी लड़ाई करनी लगी .....

महीन .......... विनोद ... पागल हो गए हो क्या तुम ........... मुझी कॉल नहीं क्र सकती थय की की बॉस तुम्हारी साथ आ रही हैं .......... मेरी हालत देखि है तुम न्य ........ पता भी है तुमको की घर पी कैसी ड्रेसिंग होती है मेरी ..........

विनोद उसी शांत कृत्य होय बोलै .......... शांत ....... शांत ........ शांत हो जाओ महीन ........... मैं कैसी कॉल करता मेरी बेटरी डेड हो गए थी मोबाइल की ............. इसलय नहीं बता सका तुमको ............

महीन थोड़ा ठंडी होइ .......... लकिन देखो न मेरा ड्रेस .......... क्या सोचती हों गए बॉस ...

विनोद मुस्कराया ....... क्या होआ है ड्रेसिंग को ..... इतनी तो अछि लग रही हो .......

महीन ........ अछि लगनी की बची ...... कभी ऐसी ड्रेस मैं मुझी किसी और न्य नहीं देखा तुम्हारी सिवा ........ और आज वह निक न्य भी देख लय है ...........

विनोद हंसा ........ वैसी बॉस की नज़रें रुक नहीं रही थीं तुम्हारी जिसम पी फिसलती hi जा रही थीं ........... हाहाहाहा ............

महीन विनोद को मारण्य की लय दौड़ी और विनोद हँसता होआ बैडरूम मैं भाग गया ............ और महीन भी मुस्कराती होइ किचन मैं चली गए खाना लगानी की लय .......
 
नेक्स्ट डे ऑफिस मई निक न्य महीन को अपनी ऑफिस मैं बुलाया कुछ काम की लय ............. महीन धरकती होय दिल की साथ उसकी ऑफिस मैं दाखिल होइ ................ उसी समझ नहीं आ रही थी की कल की बाद वह कैसी सामना क्रय निक का ............. आखिर वह जा की उसकी सामन्य बेथ गए और अपना फाइल वर्क कम्पलीट करनी लगी .............. अचानक निक बोलै .......

निक .......... मिस महीन ी ऍम सॉरी कल मैं आप की प्राइवेसी मैं ऐसी अचानक सी आज्ञा ......

महीन जल्दी सी ....... नहीं नहीं सर ........ ऐसा कुछ नहीं था ........

निक ...... लकिन फिर भी ......... आप रिलैक्स हो रही हो गई न ............ ी मैं घर की ड्रेस मैं ..........

महीन का चेहरा सहारा सी लाल हो गया ........... वववववूऊ सर ....... घर मैं तो थोड़ा कासुअल पहन न hi परता है न ............. और मुझी नहीं पता था की विनोद की साथ आप भी हों गए .......... ना hi विनोद न्य बताया ........

निक मुस्कराया ........ यह तो ाचा हो गया की विनोद न्य आप को इन्फॉर्म नहीं किआ ........ वर्ण मैं आप को कैसी देख पाटा ............

निक की बात सी महीन श्रामान्य लगी ..........

निक .......... ी थिंक आप न्य वह ड्रेस विनोद की लय पहनी थी ........ उसकी कहनी पी .............

महीन निक की बात पी फिर सी शर्मा गए ........ उसनी कोई जवाब नहीं दया .......... और यही उसका हाँ मैं जवाब था ...........

निक .......... ओह ी गोत योर आंसर ............ मुझी लगता है की विनोद लाइक्स तो सी यू इन सुच ड्रेसेस ............

महीन न्य शर्म सी सर झुकाय होय आहिस्ता सी कहा ............ मैं बस घर पी hi पहनती हों वह ड्रेस ..........

निक .... आप को बहार भी पहन नई चाहिए ऐसी ड्रेस जो सुब को अछि लगी .......... यू हैवे ा गॉर्जियस बॉडी ......... आईटी इस नॉट तो हाईड ..........

महीन शर्मा गए .......... थैंक यू सर .......... और फिर अपनी टेबल पी वापिस आगये ...........

आफ्टर ा फ्यू डेज ...........

सैटरडे की शाम विनोद और महीन आउटिंग की लय निकल गए ....... काफी वक़त इधर उधर घूमती रही ....... महीन न्य अपना बाज़ू विनोद की बाज़ू मैं डाला होआ था ........ और कभी विनोद अपना बाज़ू महीन की कमर मैं दाल लेता ...... दोनों न्य थोड़ी बुहत शॉपिंग की ...... फिर डिनर भी दोनों न्य बहार hi एक रेस्टुरेंट मैं क्या ............ और रात को वापिस आय ............ वीकेंड था तो महीन न्य विनोद को ड्रिंक करनी की इजाज़त भी दी दी ........ और थोड़ा उसका साथ भी दया ........ मगर ज़्यादा नहीं ........... रात को दोनों न्य हमेशा की तरह सेक्स क्या और फिर दोनों सो गए ............. एक दूसरी की बहून मैं ...........

सुबह महीन की आँख खुली ....... उसी अपनी तबियत मैं थोड़ी बैचैनी और बूझल पैन सा महसूस होआ ........... बल्कि उसकी आँख भी उसी डिस्कम्फर्ट की वजह सी खुली थी ............... वह बीएड पी उठ की बेथ गए .......... बीएड की बैक सी अपनी कमर टिक्का क्र ........ महीन न्य विनोद की तरफ देखा .......... वह दूसरी तरफ करवट लय की सो रहा था ............. महीन को थोड़ी मतली सी महसूस हो रही थी ............ नौसी सा ........ जैसी उसी उलटी आ रही हो ............ महीन बीएड सी उठी और अपनी नाईट शर्ट पहन क्र बाथरूम मैं आगये .......... वाशरूम मई जा की वह फ़ारिग़ होइ ......... मुंह हाथ धोया ताकि तबियत बेहतर हो ......... मगर फिर भी उसकी कैफयत बेहतर नहीं हो रही थी ............

महीन रूम सी निकली ........ किचन सी पानी प्या और फिर बालकनी मैं आगये ........ खुली फ़िज़ा मैं सांस लेंय की लय ........ ताकि उसकी तबियत बेहतर हो ........ मगर उसकी नौसी की कैफियत बेहतर नहीं हो रही थी ............ पेट मैं जैसी प्रेशर सा बन रहा था ........ जो ऊपर की तरफ आ रहा था ............. ज़रूर रात रेस्टुरेंट का खाना ठीक नहीं था ......... उसी सी तबियत ख़राब हो रही है ........... महीन न्य सोचा ....... वह बालकनी की रीलिंग पी बाज़ू रखी खरी थी .......... लम्बी लम्बे सांस लय रही थी .............. अचानक सी उस पी वोमिटिंग का प्रेशर इतना बढ़ा की वह किचन की तरफ भागी .......... जल्दी सी जा की सिंक पी हाथ रख की झुक गए और उसकी हलक़ सी ज़ोर दार वोमिटिंग होइ ............ पूरी प्रेशर की साथ ........... मगर कुछ भी नहीं निकला .......... सिवाय गाढ़ी गाढ़ी थूक और पानी की ............

महीन सिंक पी झुकी होइ लम्बे लम्बे सांस लय रही थी ........ एक बार फिर सी वोमिटिंग की वेव आई और फिर सी उसनी वोमिट क्र दया ........ मगर इस बार भी गाढ़ा पानी सा hi निकला .......... महीन को 15 मिनट तक वैसी hi झुकी रही ........ बार बार उसको वोमिट होती मगर कुछ नहीं निकलता ........ आखिर कुछ उसकी तबियत सम्भली और फिर वह कुल्ली क्र की ....... मुंह हाथ धो की टॉवल सी साफ़ क्र की किचन सी बहार आई और आ की सोफे पी बेथ गए ............ वह वोमिटिंग की कैफयत और वोमिटिंग सी निढाल हो चुकी होइ थी ......... वह सोफे पी hi बेथ की लम्बे लम्बे सांस लय रही थी ........ और खुद की हालत को संभालनी की कोशिश क्र रही थी .......

अपना सर सोफे की बैक सी टिक्के होय ........ आंखें बंद की होय ............ महीन खुद सी hi बोल रही थी ............ मुझी लगता है की कुछ मेडिसिन लेनी hi हो गई ..... रात की कहानी सी पेट ख़राब हो रहा है ..... इस सी पहली की तबियत ख़राब हो कुछ मेडिसिन लय लेनी चाहिए ............ पता नहीं कोई मेडिसिन पारी भी होइ है की नहीं ......... विनोद को जगाती हों उसी कहती हों की नीची स्टोर सी लय आय अगर नहीं है तो .......... लकिन वह तो अभी सो रहा है ........... थक्का होआ भी तो बुहत है न .......... हाँ तो खुद hi थकता है न ........ वह कोनसा बाज़ आता है हर रात को करनी सी ........... उसी तो बस हर रात को मेरी चाहिए है ........... जैसी मेरी लये बिना तो उसी नींद hi नहीं आणि न ............ महीन आंखें बंद कए होय मुस्करा रही थी विनोद की बारी मैं सोचती होइ ............ लकी है विनोद जो उसी मेरी जैसी खूबसूरत लड़की मिल गए है अपनी बिस्तर पी ............ वह फिर सी मुस्कराई ........... इतनी खूबसूरत हों इसी लय तो इतनी दिन बाद भी उसका दिल नहीं भर रहा .............. दिन मैं रात मैं जब मौका मिलता है मुझी लिटा लेता है बस ............. वह खुद सी hi मुस्कराती जा रही थी ............ और प्रिय को तो बिलकुल hi भूल चूका होआ है ...........हहहहह

आंखें बंद क्र की सोचती सोचती उसकी माथै पी बल परण्य लगी ....... जैसी वह कोई हिसाब किताब लगा रही हो ......... कुछ अंदाज़ा लगानी की कोशिश क्र रही हो ...........

विनोद की साथ जिस्मानी तालुक शुरू होय कितनी दिन हो गए हैं भला ......... महीन न्य खुद सी hi पुछा .......

कोई एक महीना और पंद्रह दिन तो हो hi चुके हैं ........... खुद सी hi जवाब दया ............

और इसकी बावजूद भी उसका दिल नहीं भर रहा ....... उसकी प्यार मैं कोई कमी नहीं आ रही ............. जब देखो मेरी साथ hi चिपका रहता है ........... महीन मुस्कराती होय सोच रही थी ........... फिर अचानक सी उसकी होंठों सी हंसी जैसी ख़तम हो गए ........... उसनी आंखें खोलीं ............. लकिन ............. लकिन ................ यह मुझी पीरियड्स क्यों नहीं होय इस मंथ ............... aryyyyyyyyyy ....... मेरी देय डेट तो गुज़रे होय भी 15 दिन सी ज़्यादा हो चुकी होय हैं .............. महीन को ख्याल आया ............... kkkkkkkkyyyyyyyyyyaaaaaaaaaaa .............. कककककययय्यआआअ मैं इतनी पागल कैसी हो सकती हों की मुझी अपनी डेट का भी याद नहीं ............ विनोद की साथ जिस्मानी माज़ी लेनी मैं मुझी यह सुब भी याद नहीं .................

LLLLLLLLLLLLLLLLLLakinnnnnnnnnnnnnn ................ पीरियड्स ना अन्य का मतलबबबबबबबब ...................... ...... kahinnnnnnnnnnnnnnnn ........... mainnnnnnnnnnn ................. ॉरररर ........ वूऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ....... wwwooooooooooooo सुबह की मेरी जो तबियत हो रही है ...... और वह नौसी ........... और वह वोमिटिंग ................. kkkkkkkkkkkkkkkyyyyyyyyyyyaaaaaaaaaaaaaaa ............................ nnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnooooooooooooooooooo .............. nnnnnnnnnoooooooooooooooooooooooo ............. यययययहहह नहीं हो सकता ................ ohhhhhhhhhh माय Goooooooddddddddddddddddddddddddddd ............................

महीन अचानक सी परेशान हो गए .............. बात थी भी परेशानी की ........... उसी कुछ समझ नहीं आ रही थी की क्या क्रय .......... एक बार फिर सी अपनी पीरियड्स की डेट्स को कैलकुलेट क्या ........... फिर वही जवाब था ............ 15 दिन ऊपर हो चुकी होय थय ................... महीन को बस एक hi काम सूझा ........... वह जल्दी सी उठी ........ बैडरूम मैं गए .......... विनोद अभी भी सो रहा था ............ पहली तो महीन न्य विनोद को जगानी का सोचा .......... मगर फिर इरादा बदल दया ............... और ड्रेस चेंज क्र की रूम सी बहार आगये ............. फिर अपार्टमेंट की कीस उठाएं और अपार्टमेंट सी बहार निकल आई ........... नीची स्टोर सी जा की बुहत hi ज़्यादा झिझकती होय उसनी प्रेगनेंसी किट खरीदी और वापिस अपनी फ्लैट मैं आगये ....... उसका दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था ....... बैडरूम मैं आई तो विनोद अभी भी सो रहा था ...... वाशरूम मैं जा की ..... कमोड पी बेथ की ............ तेज़ होती होइ धरकन की साथ किट खोल की उसी अपनी छूट की ाग्य क्या .......... और उसी पी अपनी यूरिन की ड्रॉप्स गिरानी लगी ............. और फिर उसी हाथ मैं पाकर की उसकी रिजल्ट का इन्तिज़ार करनी लगी ............. उसका दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था ...... और उसकी हाथ कैंम्प रही थय ........ और साथ hi उसकी हाथ मैं पकरि होइ वह प्रेगनेंसी स्टिक भी कैंम्प रही थी ............. जिस पी उसकी क़िस्मत का फैसला होनी वाला था ..............

जैसी जैसी उस प्रेगनेंसी स्टिक पी लकीरों का कलर गहरा होता जा रहा था ....... वैसी वैसी hi महीन की दिल की धरकन बढ़ती जा रही थी .......... और जैसी hi लकीरों का कलर वाज़ेह होआ तो महीन की हाथ सी वह डिवाइस चौथ की नीची गिर पारी .......... और उसी लगा की जैसी उसका दिल उछाल की हलक़ सी बहार अजय गए ........ नीची वाशरूम की फर्श पी उसकी बिलकुल सामन्य पारी होइ वह प्रेगनकंसी किट चीख चीख की ऐलान क्र रही थी ..... कह रही थी ..............

............................. महीन यू अरे प्रेग्नेंट ..............
 
अपडेट NO: 36

महीन न्य वह प्रेगनेंसी स्टिक उठाई और हाथ धो की उसी लय होय बहार आगये .......... विनोद अभी भी गहरी नींद मैं था .......महीन बैडरूम सी निकल की लाउन्ज मैं आगये और वह प्रेगनेंसी स्टिक अपनी क़रीब रख की खुद सोफे पी बेथ गए ......... अपना सर पाकर की ........... उसी कुछ समझ नहीं आ रही थी ........... अगर कुछ समझ आ रही थी तो सिर्फ एक बात की शी गोत प्रेग्नेंट बी विनोद ......... यह बचा विनोद का है ......... आसिफ का नहीं ....... वह ...... महीन .... एक मुस्लिम लड़की होती होय एक हिन्दूओ मर्द की बची की मान बन न्य वाली थी ........ एक हिन्दूओ मर्द की बीज न्य एक मुस्लिम लड़की को प्रेग्नेंट क्र दया था ......... यह सोच सोच क्र महीन का दिल घबरा रहा था ......... कुछ समझ नहीं आ रही थी की वह आसिफ का कैसी सामना क्रय गई अगर उसी पता चला तो ............. उसकी भी ग़लती थी की जब सी विनोद की साथ तालुक शुरू होआ था उसनी कभी प्रोटेक्शन इस्तिमाल नहीं की थी ....... क्यों की उसी तो इस की आदत hi नहीं थी ......... आसिफ की साथ कभी भी उन्हों न्य प्रोटेक्शन उसे नहीं की थी क्यों की वह प्रेगनकनी चाहती थय ......... बचा चाहती थय ....... मगर इतनी बार बिना प्रोटेक्शन की सेक्स करनी की बावजूद भी वह आसिफ सी प्रेग्नेंट नहीं हो सकीय थी .......... इसी लय वह बिना सोचे समझी .... बिना इस बात पी घोओर की वह विनोद की साथ भी बिना प्रोटेक्शन की सेक्स करती रही थी ......... और उस न्य ....... उस भरपूर ...... करदयाल हिन्दूओ मर्द न्य उसी पहली महीनी मैं hi अपन ताक़तवर पोटेंट बीज उसकी कूख मैं दाल की उसी प्रेग्नेंट क्र दया था .........

एक तरफ महीन को सुब की सामन्य यह बात एक्सपोज़ होनी का खौफ हो रहा था तो दूसरी तरफ उसी अपनी इस पहली प्रेगनेंसी की ख़ुशी भी हो रही थी .......... वह फैसला नहीं क्र पा रही थी की वह इस बात पी खुश हो या परेशान ......... एक तरफ मान बन न्य की ख़ुशी थी तो दूसरी तरफ बदनामी का दर .......... वह दुराही पी खरी थी ..........

इतनी मैं बैडरूम का दरवाज़ा खुला और विनोद लाउन्ज मैं आया .... और महीन को सोफे पी बैठा होआ देख की उसकी तरफ आज्ञा .........

विनोद ....... डार्लिंग खैरयत तो है ....... बहार क्यों बैठी हो ......... आसिफ की कॉल आई थी क्या ........

महीन खाली नज़रों सी विनोद को देख रही थी ....... बिना किसी एक्सप्रेशन की ......... उसकी चेहरी सी परेशानी नज़र आ रही थी ....... विनोद उसकी क़रीब बेथ गया ....... और उसका हाथ अपनी हाथों मैं लय की बोलै ......... महीन बताओ क्या होआ है ...... सुब ठीक तो है न वहां इंडिया मैं .........

महीन आहिस्ता सी बोली ....... इंडिया का तो पता नहीं मगर यहाँ खैरयत नहीं है ......

विनोद भी परेशान होती होय ....... क्यों क्या होआ है .... तुम्हारी तबियत तो ठीक है न .........

महीन विनोद की आँखों मैं देखती होइ वीर्य सी बोली ....... विनोद ी ऍम प्रेग्नेंट ..............

विनोद भी उछाल पारा ....... kkkkkkyyyyyyyyyyyaaaaaaaaaaaa ....... क्या बोल रही हो महीन ...............

महीन न्य अपनी साइड पी राखी होइ वह किट उठा की विनोद की सामन्य क्र दी ......... विनोद जालिंदाई सी उसी हाथ मैं लय की देखनी लगा .......

विनोद ...... महीन ......... yyyyeeeehhhhhhhhhh ........ पपपरररररर .... ययययीएहहह कैसिययययय ..........

महीन न्य सर झुका लय .......... सुब तुम्हारी वजह सी होआ है विनोद ........ ना तुम यह सुब शुरू कृत्य और ना यह होता ...........

विनोद सर झुकाय कुछ सोच रहा था बिना कुछ बोली ...... .........

महीन विनोद का हाथ पकृति होइ बोली ...... अब क्या हो गए विनोद ..... मुझी बुहत फिक्कर हो रही है ...........

विनोद ....... महीन फ़िक्र नहीं करो ........ मैं हों न तुम्हारी साथ ....... सुब ठीक हो जाय गए ........

महीन परेशानी सी विनोद की तरफ देखती होइ बोली ....... कैसी ठीक हो जाय गए .......... क्या ठीक हो जाय गए ........

विनोद ...... देखो महीन ........... तुम जानती हो की ....... वे can't अफ़्फोर्ड आईटी तो हैपन ात थिस टाइम ......

महीन थोड़ी परेशानी सी ........ ी क्नोव विनोद .......... लकिन यह हमारी प्यार की निशानी है ........... हमारा बचा ......... तुम्हारा और मेरा बचा ........

विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं खींचा ........ हाँ महीन तुम ठीक कह रही हो ........ ..... हमारी प्यार की निशानी है ....... मैं खुद चाहता हों की तुम मेरी बची की मान बनो ....... लकिन अभी इस का सही वक़्त नहीं आया ............ अभी हम न्य यह नहीं सोचा था न .......... इस सी बुहत कॉम्प्लीकेशन्स हो जाईं गई हमारी लय ..........

महीन न्य आहिस्ता सी अपना सर विनोद की सीने सी लगा दया ........ वह इस सुब को समझ रही थी ........ विनोद ठीक कह रहा था ...... उनकी पास इस प्रेगनेंसी को इसी स्टेज पी ख़तम करनी की इलावा कोई और रास्ता नहीं था ............

महीन ....... फिर अब क्या करना है ....... ???

विनोद कुछ सोचती होय बोलै ......... ी थिंक हमें नीतू की हेल्प लेना हो गई .......... मैं उसी कॉल करता हों ........

महीन ........ हम्म्म ........ लकिन उसी यहाँ बुला लो ....... फ़ोन पी नहीं ..........

विनोद ..... हाँ ठीक है ......... लकिन पहली नाश्ता क्र लेती हैं .... वह भी अभी सो रही हों गए ........

महीन ......... मेरा दिल नहीं छह रहा कुछ कहानी को .......... महीन न्य विनोद को अपनी वोमिटिंग और तबियत ख़राब होनी की बारी मैं बताया ............... विनोद न्य उसी वहीँ लाउन्ज की सोफे पी hi पाऊँ ऊपर रख की बिठा दया ......... और महीन की लय जूस का गिलास लय आया ...... और उसकी पास बेथ की उसी पिलानी लगा ..... महीन विनोद को अपनी केयर करता होआ देख की दिल hi दिल मैं खुश हो रही थी और उसी ाचा भी लग रहा था की विनोद उसकी इस हालत मैं इतनी केयर क्र रहा है ...........

महीन मुस्कराई ...... तुम तो अभी सी मेरी इतनी केयर करनी लगी हो .....

विनोद मुस्कराया और अपना हाथ महीन की पेट पी रख की उसी आहिस्ता आहिस्ता सहलाती होय बोलै ....... क्यों ना करों तुम्हारी केयर ..... आखिर को तुम्हारी यहाँ मेरा बचा जो है .... और तुम न्य मुझी इतनी बरी ख़ुशी जो दी है .......

महीन मुस्कराई ....... और उसी तैसे करती होइ बोली ........ लकिन तुम तो इसी ना रखनी का सोच रही हो न ...........

विनोद ..... हाँ ........ लकिन तुम तो हो hi न मेरी पास ........... फिर सी हो जाय गए ............. don't वोर्री डार्लिंग .............. एक न एक दिन तुम्हें मैं अपनी बचे की मान ज़रूर बनाऊँ गए ....... यह मेरा तुम सी वादा है ......... एक हिन्दूओ मर्द का पक्का वडा ..........

महीन भी मुस्करा दी ............ मुझी भी उस दिन का इन्तिज़ार है जब मैं तुम्हारी बचे की मान बनोँ गई ........

दोपहर की बाद नीतू आई ............ विनोद और महीन उसको लय क्र लाउन्ज मैं बेथ गए .......... विनोद उनकी लय चाय बना की लाया ...........

नीतू ...... अब तुम लोग मुझी कुछ बताओ गए भी की क्या बात है ...... क्यों इतनी जालिंदाई मई मुझी बुलाया है ....... कोई प्रॉब्लम है क्या ..........

महीन सर झुकाय बेथ थी .........

विनोद बोलै ............ नीतू तुम सी एक बात करनी थी ......

नीतू ... हाँ हाँ बोलो भी क्या बात करनी है ....... इसी लय तो मैं आई हों ...........

विनोद ........... नीतू .......... महीन इस प्रेग्नेंट .......

नीतू उछाल hi पारी .......... WHATTTTTTTTTTTTTT ...........

विनोद न्य शर्मिंदगी सी सर झुका लय ............ हाँ नीतू ........ महीन की पते मैं मेरा बचा है ......

नीतू थोड़ा तै आवाज़ मैं बोलनी लगी .......... पागल हो क्या तुम लोग ........ महीन तुम इतनी केयरलेस कैसी हो सकती हो ................

विनोद और महीन दोनों hi सर झुकाय बैठी होय थय ........

नीतू ....... तुम लोग कोई प्रोटेक्शन उसे नहीं कृत्य रही क्या ......

महीन न्य सर झुका लय शर्मिंदगी सी ...........

नीतू ....... महीन तो मासूम है ....... इनोसेंट है ........ उसकी लय यह रिलेशनशिप बिलकुल नै बात है ....... मगर तुमको तो ख्याल करना चाहिए था न विनोद ...........

विनोद ...... वह बस ख्याल hi नहीं रहा ........

नीतू मुस्कराई ....... तुम मर्दों को क्यों ख्याल रहना है ........ तुम को तो मज़ा लेना hi बिना कंडोम की होता है न ..........

महीन उसकी बात पी शर्माती होइ मुस्करानी लगी .........

विनोद .......... नीतू प्लीज बस क्र दो टॉन्ट करना .......... हम न्य तुमको हमारी हेल्प की लय बुलाया है ............. जो होना था सो हो गया .......... अब तुम कुछ हेल्प करो न ............

नीतू ...... क्या हेल्प करों ....... यह तो तुम दोनों को डीडे करना है न की तुम इस बची को जनम देना चाहती हो की नहीं ..........

महीन ......... नीतू ....... तुम तो जानती हो न मेरी पोजीशन .......... आसिफ ..... और मेरी फॅमिली .......... मेरा मतलब समझ रही हो न तुम ........

विनोद ....... ठीक कह रही है महीन ........ नीतू मुझी नहीं लगता की हम इस प्रेगनेंसी को कंटिन्यू क्र सकें गए ............. तुम ाच्य सी जानती हो की हम अभी यह अफ़्फोर्ड नहीं क्र सकती ..........

नीतू ...... हम्म्म्म ..... तो फिर ....

विनोद .......... नीतू इसी लय तुमको बुलाया है की तुम कल महीन को हॉस्पिटल या क्लिनिक लय जाओ फॉर इतस टर्मिनेशन ............

नीतू .......... हम्म्म ........ मुझी भी लगता है की एहि ठीक रही गए ...........

विनोद ..... हम्म्म

नीतू ........ ठीक है कल हम जाईं गए एक मैटरनिटी क्लिनिक ..... यह हो जाय गए ........ क्यों की यह लीगल है यहाँ पी ....... कोई मसला नहीं हो गए .......... .. विनोद तुम को भी साथ जाना हो गए ........

विनोद ...... हाँ मैं ज़रूर जाता लकिन कल मुझी बॉस की साथ दोबारा जाना है उसी असाइनमेंट की सिलसिली मैं ...........

महीन ..... हाँ विनोद आप अटेंड करो ..... मैं और नीतू मैनेज क्र लाइन गए ............. नीतू ......... ठीक है ........

फिर तीनो चाय पीने लगी ........ महीन न्य नीतू को साड़ी बात बताई की क्यों और कैसी वह लोग प्रोटेक्शन वग़ैरा उसे नहीं कृत्य रही .......... नीतू महीन को तैसे भी करती रही इस बात को लय क्र की वह विनोद की बचे की मान बन न्य जा रही है ........... और महीन उसकी बातून पी शर्मीली सी मुस्कराहट की साथ शर्माती रही ...........

नीतू उसी तैसे करती होइ बोली ............ महीन ........ मुझी अब यह न्यूज़ जेनी को भी देनी है .......

महीन शरमाई ....... नहीं नीतू प्लीज ........ ऐसी नहीं करना ........ वह बुहत तंग क्रय गई मुझी ....... और पता नहीं क्या सोची गई मेरी बारी मैं ............

नीतू ...... कुछ नहीं सोचे गई ........ तुम न्य कोई गुन्नाह नहीं क्या ...... आईटी इस जस्ट नेचुरल थिंग ............

महीन खामोश हो गए ............ थोड़ी देर मैं नीतू न्य घर जांय की इजाज़त ली ........ महीन उसी दूर तक चोरनी की लय आई ..........

नीतू की जांय की बाद महीन बैडरूम मैं आगये .......... विनोद नीतू की जांय का वेट क्र रहा था ...........

विनोद ..... चली गए नीतू .....

महीन बीएड पी बेथ टी होइ बोली ....... हम्म ..... चली गए ......

विनोद ... चलो अब तुम थोड़ा आराम क्र लो .......... इस हालत मैं आराम बुहत ज़रूरी होता है .......

महीन ........ हम्म्म ...... ठीक है .... मगर वह खाना भी तो बनाना है न .......

विनोद ....... नहीं कोई ज़रूरत नहीं है ...... आर्डर क्र डैन गए बस ........

महीन मुस्करा की बीएड पी लेट गए और मोबाइल देखनी लगी .......... अचानक व्हाट्सप्प पी नीतू का एक मैसेज आया .............. यह मैसेज एक ग्रुप मैं था ........ जो नीतू न्य उसी और जेनी को शामिल क्र की बनाया होआ था ......... जस्ट थ्री गर्ल्स ........... आपस मैं चित चाट करनी की लय .......... मैसेज परहत्य hi महीन घबरा गए ...... और उसका चेहरा भी शर्म सी लाल सुराख़ हो गया ...........

नीतू का मैसेज था ........ गर्ल्स ........ हेरे इस ा ब्रेकिंग न्यूज़

महीन न्य जल्दी सी मैसेज क्र दया ........ नीतू प्लीज don't ..........

मैसेज करनी की बाद उसी अपनी ग़लती का अहसास होआ की उसी मैसेज नहीं करना चाहे था ............. वही होआ .......... अभी महीन अपना रिप्लाई डिलीट करनी वाली थी की जेनी का मैसेज आज्ञा ग्रुप मैं ......

जेनी ....... वववव .......... तेल्ल में ........... what's तहत न्यूज़ ..........

महीन ........ no जेनी ..... it's नथिंग स्पेशल ........ शी इस जस्ट किडिंग ......

जेनी ..... ही महीन ...... व्हाई यू वांट तो कीप में आउट ऑफ़ थिस न्यूज़ ........... what's थिस न्यूज़ ...... प्लीज तेल्ल में .......... ी ऍम गेटिंग क्यूरियस ........ ही नीतू तेल्ल में नाउ .......

नीतू ........... okay okay ी ऍम टेलिंग ......... जेनी ............ थे न्यूज़ इस तहत ............. आवर इनोसेंट महीन इस प्रेग्नेंट ........

जेनी ...... ओह्ह्ह्हह ...... वववव .......... that's ा बिग न्यूज़ ............ कोंग्रटुलतिओन्स महीन ............... पार्टी कब दी रही हो तुम ........... या फिर हमें विनोद सी पार्टी लेना हो गई ...........

महीन को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वह क्या जवाब दी ........

नीतू .......... हाहाहाहाहा ............. हाँ पार्टी तो बनती है .......

जेनी ........... बूत हाउ आईटी हप्पेनेड ............. आईटी मीन्स थे लव बर्ड्स वेरे दोंग आईटी विथाउट कंडोम ों थेइर हनीमून ....... हहहह

नीतू ...... हाँ ऐसा hi है कुछ ........

जेनी ........... ी ऍम फीलिंग थ्रिल्लेद तो इमेजिन मूविंग इन थे ऑफिस विथ तहत ब्यूटीफुल बेबी बुम्प ........... हहहह ............ एवरीवन विल बे लुकिंग ात हेर अहहहहहह ...........

नीतू ............ हाहाहाहा ........

महीन ...... प्लीज जेनी ............

जेनी ........ ओह महीन बिलीव में ..... यू विल लुक सो क्यूट विथ ा बिग बेबी बुम्प ............

महीन उसकी बातून को एन्जॉय भी क्र रही थी और शर्मा भी रही थी ........

नीतू .......... बूत हेरे इस ओने इशू ..........

जेनी ............ वह क्या ........

नीतू ....... जस्ट इमेजिन व्हाट विल हैपन व्हेन Maheen's मुस्लिम हस्बैंड आसिफ विल के तो क्नोव तहत हिज इनोसेंट ब्यूटीफुल वाइफ इस प्रेग्नेंट बी हेर हिन्दूओ colleague's कॉक ............. हहहह ..........

जेनी ........... हहहहह .............. तहत इस रियली हिलेरियस ...........

महीन की भी दिल की धरकन तेज़ हो गए ........ no .no ........ हे शोलिंडा नेवर क्नोव आईटी ........... वह तो मर hi जाय गए यह न्यूज़ सुन की ...... हहहह

नीतू ........ हहहह ...... जस्ट इमेजिन की इंडिया मैं यह न्यूज़ फैली हो की ................ एक मुस्लिम लड़की न्य एक हिन्दूओ दोस्त और लवर की ना जैज़ बची को जनम दी दया ...........

महीन की दिल को धचका सा लगा ........... नीतू .......... प्लीज ........ इसी ना जैज़ ना बोलो ............. it's माय बेबी ............ आवर बेबी ...... हमारी प्यार का फल .............

जेनी ...... वववव ........ महीन .... यू अरे आलरेडी इन लव विथ योर बेबी .......... that's लिखे ा रियल मां ..........

नीतू ....... यस जेनी ........ शी वांट्स थे बेबी ........ बूत शी इस तो टर्मिनेट थिस प्रेगनेंसी .............. यू क्नोव शी can't अफ़्फोर्ड आईटी ात थिस स्टेज ऑफ़ हेर करियर ........

जेनी ....... हम्म ........... that's ा वाइज डेसिओं ........... ी ऍम विथ यू महीन िफ़ यू नीड अन्य हेल्प यू मई आस्क में अन्य टाइम ........

महीन को जेनी का यह सपोर्टिंग अंदाज़ ाचा लगा ....... उसनी जेनी और नीतू को थैंक्स बोलै ......... थोड़ी देर की लय इधर उधर की बातें होइन और फिर तीनों अपनी अपनी काम मैं लग गईं चाट चोर की ..........

रात को भी विनोद महीन की बुहत ज़्यादा केयर करता रहा ........... और महीन भी विनोद की सीने पी सर रख की लेती होइ थी बीएड पी ......... अपनी नंगी पते को सहलाती होय उसकी आँखों मैं आंसू आ रही थय ..............

विनोद उसकी आंसूं को साफ़ कृत्य होय बोलै .......... परेशान न हो महीन ........... एक न एक दिन हमारा यह खवाब ज़रूर पूरा हो गए ........... मैं साथ हों न तुम्हारी ...........

महीन विनोद की साथ लिपट गए ............. विनोद ..... ी लव यू जान ..........

विनोद .......... ी लव यू तू माय बेबी ..........
 
नेक्स्ट डे

तीनो ऑफिस पोहंची ..... विनोद निक की साथ चला गया तो महीन और नीतू भी ऑफिस सी छुट्टी लय क्र क्लिनिक की लय निकल गए ............ नीतू महीन को लय क्र एक लेडी डॉक्टर की क्लिनिक पी आई और दोनों वेटिंग एरिया मैं बेथ क्र अपनी बारी का इन्तिज़ार करनी लगी .......... नीतू न्य बताया की वह पहली भी यहाँ आ चुकी है ........ महें न्य ज़्यादा कुछ पूछना मुनासिब नहीं समझा ................. अपनी बारी अन्य पी नीतू और महीन दोनों डॉक्टर की चैम्बर मैं गईं ...........

नीतू न्य लेडी डॉक्टर को गुड मॉर्निंग बोलै ....... डॉक्टर न्य भी मुस्करा की नीतू को वेलकम क्या .............. महीन को अंदाज़ा हो गया की वह डॉक्टर नीतू को जानती है .............. महीन न्य देखा उसकी वाइट गाउन पी उसका नाम डॉ. लिंडा लिखा होआ था .........

लेडी डॉक्टर (लिंडा) ........... हाउ अरे यू .......

नीतू ........ ी ऍम फाइन डॉ. लिंडा ...........

लिंडा मुस्कराती होइ नज़रों सी नीतू को देखती होइ बोली ....... कैसी आना होआ आप का ............

नीतू मुस्कराई और फिर उसनी महीन का प्रॉब्लम बताया ........

नीतू ........ डॉक्टर शी है मिस्ड हेर पीरियड्स थिस मंथ .....

लिंडा ........ okay ....... लेट में हैवे ा हिस्ट्री एंड थें ी शॉल हैवे हेर एग्जामिनेशन ........... और फिर उस न्य महीन सी हिस्ट्री लेनी शुरू की ..........

L.D ........ नाम ...... ???

महीन .......... महीन ...

लिंडा........ आगे ???

महीन ...... 25 यर

लिंडा ........ मैरिड ..... ???

महीन न्य नीतू की तरफ देखा और फिर बोली ............ No ...

लिंडा ............ बॉयफ्रेंड ....... ???

महीन न्य फिर सी नीतू की तरफ देखा और आहिस्ता सी बोली ..... यस

लिंडा ....... दो यू हैवे फिजिकल रिलेशनशिप विथ योर बॉयफ्रेंड?

महीन वीर्य सी ........ यस ........

लिंडा ........ ोक्सासिओनल और फ्रेक्वेंटली ........ ???

महीन न्य शर्माती होइ एक नज़र नीतू पी डाली और बोली ........ फ्रेक्वेंटली डॉक्टर .........

लिंडा ......... कितना अरसा हो गया आप की रिलेशनशिप को

महीन ........... ओने एंड ा हाफ मंथ ......

लिंडा ....... इस आईटी योर फर्स्ट टाइम तहत यू मिस्ड योर पीरियड्स ......

महीन ...... यस ........

लिंडा ...... हैवे यू एवर गोत प्रेग्नेंट एअरलिएर ......

महीन ....... No ..........

महीन को डॉक्टर की सवालों पी बुहत ज़्यादा शर्मिंदगी महसूस हो रही थी ...... उसी समझ नहीं आ रही थी की वह कैसी जवाब दी ....... मगर फिर भी वह जवाब दी रह िथि ......... और नीतू भी उसकी हालत की माज़ी लय रही थी .........

लिंडा ....... okay ....... व्हाट प्रोटेक्शन दो यू उसे ...... कंडोम और पिल्स ...

महीन न्य आहिस्ता सी बोलै .......... नथिंग ....

लिंडा ........ यू टोल्ड तहत यू अरे इन रिलेशनशिप विथ योर बॉयफ्रेंड फॉर लास्ट ओने एंड ा हाफ मंथ .........

महीन का चेहरा लाल होनी लगा था ........ यस ........ ऑलमोस्ट 2 मोनथस ........

लिंडा ...... हम्म्म ...... एंड यू पीपल वेरे हैविंग इंटरकोर्स विथाउट ुसिंग एंड प्रोटेक्शन्स और कॉन्ट्रासेप्टिव्स .....

महीन आहिस्ता सी ....... यस ........

लिंडा ....... यू शुड उसे समथिंग फॉर थिस ............ स्पेशलय कंडोम्स तो अवॉयड स्टड्स ........... यू क्नोव व्हाट ी मैं तो से .......

महीन न्य हाँ मैं सर हिलाया ........ बूत हे इस नॉट लिखे तहत .......

लिंडा मुस्कराई ......... और फ्री उसी चेकउप की लय अंदर की रूम मैं चलनी को कहा ...... दोनों अंदर ागीण ............ लेडी डॉक्टर न्य महीन का मोइन क्या ..... उसका अल्ट्रासाउंड क्या ......... और महीन की प्रेगनेंसी को कन्फर्म क्र दया .........

लेडी डॉक्टर .......... यस यू अरे प्रेग्नेंट मिस महीन ......... और आप को पहली आना चाहिए था ........ लकिन अभी भी आप बिलकुल ठीक वक़्त पी आई हैं ........ अगर आज hi आप डंक करवा लाइन गई तो सिंपल प्रोसीजर हो गए ....... अगर थोड़ा लेट होइन तो फिर कॉम्प्लीकेशन्स हो सकती हैं .............

नीतू ........ सूरे डॉक्टर ....... आप करें प्लीज ...... वे अरे रेडी ...

लिंडा ....... okay ...... that's गुड ........ वेयर इस हेर बॉयफ्रेंड ....... थे फादर ऑफ़ थे बेबी ........

महीन और नीतू न्य एक दूसरी की तरफ देखा ..........फिर महीन बोली ..... हे इस ों जॉब .......... हम दोनों मैनेज क्र लाइन गई .......

लिंडा मुस्कराई ......... यस यू कैन ...... बूत वे नीड हिज सिग्नेचर्स तू ों पेपर्स फॉर थिस प्रोसेस ......... आईटी इस थे लीगल रेक्विरेमेंट फॉर थे प्रोसीजर ...............

महीन ........ लकिन वह अभी नहीं आ सकती ............ क्या हम कल या परसों मैं आजाएं .......

लिंडा ....... तहत इस ुप्तो यू ........ बूत ी can't गारंटी फॉर tomorrow's कंडीशन .......... माय ओपिनियन इस स्टिल थे शामे तहत आईटी शोलिंडा बे दोने इम्मेडिएटली .........

नीतू ...... okay डॉ. लिंडा हम कॉल कृत्य हैं इसकी बॉयफ्रेंड को ........

लिंडा ...... okay यू प्लीज टेक योर टाइम एंड थें तेल्ल में ....... टिल थें ी मई अटेंड इतर पेशेंट्स ........

नीतू ........ सूरे डॉ. थैंक्स ........

नीतू और महीन दोनों डॉक्टर की रूम सी बहार ागीण ...........

महीन परेशान होती होइ ......... अब क्या करें ........ विनोद तो आ नहीं सकता ..........

नीतू ..... हम्म्म्म .......... फिर हम ऐसा कृत्य हैं की कल आजाती हैं ...

महीन ........ लकिन डॉक्टर न्य तो आज का hi कहा है ........... मुझी दर लग रहा है मैं कल का रिस्क नहीं लय सकती नीतू ........

नीतू कुछ सोचती होइ बोली .......... हम्म्म ........ फिर ऐसा कृत्य हैं की राजीव को बुला लेती हैं .......... सिर्फ सिग्न hi करनी हैं न किसी को क्या पता की तुम्हारा बॉयफ्रेंड विनोद है की राजीव ........

महीन घबराहट और हैरानी सी बोली .......... राजीव ...... ??? क्या मतलब ........

नीतू ...... मेरा मतलब है की हम राजीव को बुला लेती हैं एंड हे विल प्रिटेंड तो बे योर बॉयफ्रेंड फॉर सम टाइम ...

महीन शॉक हो गए .......... उसकी आंखें फैल गईं ...... No वे नीतू ....... That's तू मच यार .......

नीतू मुस्कराई ....... के ों यार ...... यहाँ किस को पता चलना है की राजीव तुम्हारा बॉयफ्रेंड है या नहीं .......... और यह भी की तुम्हारी पेट मैं यह बचा विनोद का है या राजीव का ........... नीतू न्य उसी आँख मारी ..........

महीन उसकी बात पी शर्मा गए ........... बुहत मुश्किल मैं फंसा रही हो तुम मुझी नीतू ....... मुझी समझ नहीं आ रही की मैं राजीव को कैसी फेस करों गई .........

नीतू .... don't वोर्री यार ........ कुछ नहीं हो गए ..... टेक आईटी जस्ट अस ा फन ........

महीन अपनी होंठों को अपनी दांतों सी दबाती होय बोली ..... राजीव आजाएं गए क्या ......

नीतू ...... हाँ कोशिश करती हों शायद फ्री हो ........

नीतू न्य राजीव को कॉल की और उसी हॉस्पिटल पोहनचंय को कहा .......... वह बोलै की वह 15 मिनट तक पोहंच जाता है ........... और फिर कॉल बंद हो गए .............. नीतू महीन को लय की कैफेटेरिया मैं आगये ........ और दोनों चाय पीनी लगीं ............

महीन ....... कितना ग़लत काम क्र लय न मैं न्य ........ ठीक hi कहती हैं न की ग़लत काम का ग़लत अंजाम hi होता है .....

नीतू ..... क्या हो गया है तुमको ......... कोनसा ग़लत काम क्र लय है तुम न्य जो खुद को दोष दी रही हो ..........

महीन सर झुकाय होय ........ ग़लत hi है न जो मेरी और विनोद की बीच चल रहा है .........

नीतू महीन की हाथ पी हाथ रखती होइ बोली ....... कुछ भी ग़लत नहीं है .......... सुब कुछ नार्मल है .......... और यह जो होआ है न यह भी नार्मल hi है ....... बस तुमको थोड़ी अहतयात करनी चाही थी बस और कुछ नहीं ..........

महीन ....... हाँ बस ख्याल hi नहीं रहा न ..........

नीतू ..... आइंदा ख्याल रखना ...........

महीन उसकी बात पी मुस्करा दी .......... नीतू ........ क्या मैं विनोद को बता डॉन राजीव की बारी मैं .........

नीतू ........ नहीं अभी बतानी की क्या ज़रूरत है ........ जब घर जाईं गए तब बता डैन गए .......... ऐसी hi वह परेशान हो जाय गए तुम्हारी लय ..... अपर वैसी भी उसी बतानी की कोई ज़रूरत है तो नहीं ....... लकिन फिर भी अगर उसी पता चला भी तो ी होप वह मंद नहीं क्रय गए ...........

महीन मुस्कराई ....... हम्म्म ठीक है ........

इतनी मैं राजीव की कॉल आई नीतू की मोबाइल पी ..........

राजीव ...... नीतू मैं पोहंच गया हों ..... कहाँ हो तुम ....

नीतू न्य उसी कैफेटेरिया मैं अन्य को बोलै .......... राजीव वहां आया तो नीतू की साथ महीन को देख की हैरान होआ .......... फिर उनकी साथ बेथ गया टेबल पी .............. नीतू न्य उसकी लय भी चाय मंगवाई .........

राजीव ........ अब बताओ क्यों बुलाया है ........ तुम्हारी तबियत तो ठीक है न ..........

नीतू .......... हाँ मैं तो ठीक हों मगर यह मोहतरमा प्रेग्नेंट हो गए हैं .........

राजीव ...... वाओ....... यह तो ख़ुशी की बात है ....... कोंग्रटुलतिओन्स महीन ........

महीन न्य शर्मा की अपना चेहरा झुका लय .......

नीतू उसकी हाथ पी थप्पड़ मारती होइ बोली ....... राजीव पूरी बात तो सुन लो ........

राजीव ........ okay okay ....... बोलो

नीतू .......... महीन यहाँ पी अबो्र्ट करवानी आई है .......

राजीव ...... ohhhhhhhhhh ........ ी सीईई ............. मैं भी यही सोच रहा था की यह इन दोनों न्य क्या किआ है ............ अभी तो इनकी एन्जॉय करनी का टाइम है ...........

महीन का शर्म की मारी बुरा हाल था ....... वह सर झुकाय बैठी होइ थी किसी मुजरिम की तरह ..............

नीतू ....... राजीव ....... तंग मत करो महीन को ........ कोनसा कुछ ग़लत होआ है उस सी ............ अपना नहीं पता तुमको ........ तुम खुद भी मुझी 2 बार प्रेग्नेंट क्र चुके हो ............

राजीव हँसता होआ अपना सर खुजाती होय .......... हहहहहए ...........

महीन चौंक क्र दोनों को देखनी लगी ..... और फिर नीतू सी बोली ........ ककककककया बोलै नीतू ........ तुम भी ...........

नीतू मुस्कराई ........ हाँ ............ इसी न्य hi बिना कंडोम की मज़े लेंय की चक्कर मैं 2 बार क्र दया मुझी प्रेग्नेंट .............. और मुझी 2 बार अबो्र्ट करवाना पारा ........... और यहीं सी होआ था .......... इसी डॉक्टर न्य क्या था ........ बुहत अछि डॉक्टर है तुमको घबरानी की ज़रूरत नहीं है ..........

महीन की लय यह शॉकिंग न्यूज़ तो थी मगर फिर उसकी साथ साथ उसकी लय हौसला अफ़ज़ा भी थी की नीतू भी इस हालत सी गुज़र चुकी है ...........

नीतू .......... महीन इस मैं तुम्हारा कोई क़ुसूर नहीं है ...... यह मर्द लोग होती hi ऐसी हैं ........ बिना किसी रुकावट की मज़े लेंय होती हैं न इनको ........ वह क्या कहती हैं न ...... हाँ ..... स्किन तो स्किन ............. हहहह ........

राजीव की वजह सी ............ महीन नीतू की बातें सुन की शर्मा रही थी ...........

राजीव ....... यह सारा मामला तो मुझी पता चल गया है ........ लकिन मुझी क्यों बुलाया है यहाँ पी ............

नीतू ....... वह महीन का अबो्र्ट करवाना है .....

राजीव ...... हाँ तो ठीक है ....... इस मई मैं क्या क्र सकता हों ....... मई कोई गयनेकोलॉजिस्ट हों क्या ........ जो मैं न्य करना है महीन का अबो्र्ट .... हाहाः .............

महीन राजीव की बात सुन की शर्मिंदाह हो गए ........... नीतू न्य राजीव की बाज़ू पी एक थप्पड़ मारा और बोली .......... मज़ाक़ चोरो और कभी सीरियस भी हो जाय करो ............... वह डॉक्टर न्य नीतू की बॉयफ्रेंड को बुलानी को बोलै है ........

राजीव ........ हाँ वह तो बुलाएं गए hi ............ यह उनकी लीगल रेक्विरेमेंट जो है ....... तो विनोद कब तक आ रहा है ............

नीतू .......... वह नहीं आ रहा ...........

राजीव ....... क्यों ........ विनोद क्यों नहीं आ रहा है ......

नीतू ....... यार वह आज बॉस की साथ एक कंपनी मैं विजिट पी गया होआ है और शाम सी पहली नहीं आय गए ........ और डॉक्टर न्य कहा है की देर नहीं क्र सकती मज़ीद .............

राजीव ...... तो फिर अब क्या करना है ....... उसकी आय बिना तो डॉक्टर प्रोसीजर नहीं क्रय गई .............. तुमको तो पता है है ..........

नीतू ....... हाँ इसी लय तो तुमको बुलाया है न ..........

राजीव ....... क्या मतलब ........ मैं क्या करों गए ............ साफ़ साफ़ बताओ न प्लीज ........

नीतू ........... राजीव तुम महीन की बॉयफ्रेंड बन जाओ थोड़ी देर की लय ........ और तुम hi सिग्न करो गए पेपर्स पी ........

राजीव चहक क्र महीन को तैसे कृत्य होय बोलै ....... वाओ .... इसका मतलब है की आज सी महीन मेरी गर्लफ्रेंड है ....... हाउ लकी ी ऍम ......

महीन शर्मा गए .........

नीतू बोली .... बे सीरियस राजीव ..... महीन मुश्किल मैं है यार ..... और तुम को मस्ती सूझ रही है ..........

राजीव सीरियस होती होय बोलै ...... okay okay ...... ... लकिन मैं कैसी क्र सकता हों ....... तुमको पता है न की वह डॉक्टर हमें ाच्य सी जानती है .......... उसी पता है की मैं तुम्हारा बॉय फ्रेंड हों .......... तो फिर मैं महीन की साथ कैसी ...........

महीन भी नीतू की बात पी शर्मिंदाह हो रही थी ........

नीतू बोली ....... तुम इस बात को चोरो ........ वह सुब मैं खुद संभाल लोन गई ............. चलो अब .........

विनोद रेलुक्टेंटली नीतू की साथ चलनी लगा .......... और महीन सर झुकाय होय उनकी पिच्य पिच्य ................

नीतू न्य मुद की महीन की तरफ देखा ........ आर्य तुम पिच्य पिच्य क्यों चल रही हो ........ ाग्य साथ आ की राजीव का बाज़ू पकरो ........

महीन शॉकेड हो की मुंह खोली नीतू की तरफ देखनी लगी .......

नीतू ... आर्य यार तुम दोनों को बॉयफ्रेंड और गर्ल फ्रैंड वाली थोड़ी एक्टिंग तो करनी hi पारी गई न ..... चलो जल्दी सी आओ ाग्य ......

महीन झिझकती होइ ...... शर्माती होइ ाग्य आई और आहिस्ता सी राजीव की बाज़ू मैं अपना हाथ दाल की उसकी बाज़ू को पाकर लय .......... राजीव की जिसम को छूती hi महीन की जिसम को करंट सा लगा ......... उसका पूरा जिसम hi हिल सा गया .......... महीन न्य दोनों की तरफ मुस्कराती होइ नज़र डाली ......... राजीव तो खूब एन्जॉय क्र रहा था मगर नीतू घबराई होइ तिह ........

नीतू ......... महीन जस्ट रिलैक्स .........

महीन शर्मीली सी मुस्कराहट अपनी होंठों पी लाइ और फिर राजीव की साथ साथ चलनी लगी ....... उसकी काइब होनी की वजह सी महीन की ब्रैस्ट राजीव की मज़बूत बाज़ू सी टच हो रही थी .......... और महीन की जिसम मैं भी अजीब सी कैफियत पैदा हो रही थी ........... उसी भी थोड़ा ाचा hi लग रहा था ऐसी राजीव की जिसम को चूना ...........

राजीव, नीतू और महीन दोबारा सी डॉक्टर की रूम मैं दाखिल होय .......

लिंडा ....... आ गए इनकी बॉयफ्रेंड क्या ........... ???

नीतू ..... यस डॉक्टर .......... यह है इनका बॉयफ्रेंड ........

डॉक्टर न्य राजीव की तरफ देखा और फिर नीतू की तरफ देखनी लगी ........ जहाँ तक मुझी याद परता है ............ हे वास् योर बॉयफ्रेंड ........ ऍम ी राइट ........ ????

नीतू मुस्कराई ............ हे इस स्टिल माय बॉयफ्रेंड ....... राथेर हे इस आवर बॉयफ्रेंड ........

लिंडा ........... ओह्ह्ह ....... यू मैं तो से तहत बोथ ऑफ़ यू अरे इन रिलेशनशिप विथ हिम ............. ???

नीतू ....... यस एक्साक्ट्ली ............ थे थ्री ऑफ़ उस अरे लिविंग टुगेदर .......... एंड वे बोथ अरे Rajiv's गर्ल फ्रेंड्स ........... क्यों महीन .....

महीन नीतू की बातें सुन की शर्म की मारी जैसी ज़मीन मैं गति जा रही थी ........ उसकी हालत ख़राब हो रही थी मगर उसी वह सी निकलनी का या उस शर्मिंदगी सी बचनी का कोई रास्ता नहीं मिल रहा था ............. फिर भी वह वीर्य सी हाँ मैं सर हिला दया .............

लिंडा माइनि खैज़ अंदाज़ मैं महीन की तरफ देख क्र मुस्कराई ........ okay ...... okay ......... that's गुड एंड मर. राजीव इस ा लकी गाए ........

राजीव भी उसकी बात पी मुस्करानी लगा ........

लिंडा ............. मर. राजीव let's प्रोसीड तो कम्पलीट थे लीगल फॉर्मलिटीज बिफोर स्टार्टिंग थे प्रोसीजर ...........

तीनों लिंडा की सामन्य बेथ गए ..........

लिंडा ......... मिस महीन ....... सो राजीव इस योर बॉयफ्रेंड ......

महीन वीर्य सी .......... यस डॉक्टर .......

लिंडा .......... मर. राजीव ........ यू क्नोव योर गर्लफ्रेंड इस प्रेग्नेंट ....... एंड दो यू एक्सेप्ट तहत आईटी इस योर बेबी ..........

राजीव न्य महीन की तरफ देखा ....... महीन न्य भी राजीव की तरफ देखा शर्माती होय ........... और राजीव न्य महीन की आँखों मैं देखती होय मुस्करा की आँख मार दी ............ महीन शर्मा गए .......

राजीव ...... यस डॉ. लिंडा ......... महीन इस माय गर्लफ्रेंड ......... एंड शी इस हैविंग माय बेबी .........

लिंडा मुस्कराई ......... that's गुड .......... सो मिस महीन ....... मई ी व्रिठे मर. Rajiv's नाम अस थे फादर ऑफ़ थे बेबी इन योर वॉम्ब ......

महीन का शर्म सी बुरा हाल हो रहा था ......... उसनी नीतू की तरफ देखा ....... और फिर शर्माती होय बोली ............ यस डॉक्टर .........

नीतू भी मुस्करा दी .......

फिर लिंडा न्य कुछ पेपर्स फइलल क्र की टेबल पी सामन्य रख डाई ....... जिन पी महीन की पूरी हिस्ट्री वग़ैरा और इजाज़त नाम लिखा होआ था ............ राजीव न्य एक नज़र महीन की तरफ देखा ........... दोनों की नज़रें मिलीं ....... और महीन न्य शर्मा की अपनी नज़रें झुका लीन ........... राजीव न्य 3, 4 जगहों पी सिग्नेचर कए और लिंडा न्य पेपर्स संभाल की फाइल मैं लगा डाई ............ फिर अपनी सीट सी उठ टी होइ बोली .........

लिंडा ....... आईं मिस महीन प्रोसीजर रूम मैं .......

नीतू और महीन उठ की उसकी साथ चल परिन ........ राजीव भी उठ की खरा होआ ............. उसी देख की लिंडा मुस्कराई और बोली .....

लिंडा .... अभी आप यहीं बैठें .........

राजीव वहीँ बेथ गया ........ और वह तीनो अंदर रूम मैं चली गईं ............. अंदर रूम मैं एक प्रोसीजर टेबल थी ....... फ्लैट और उसकी पाऊँ वाली साइड पी दोनों तरफ टांगों को रखनी की स्टैंड लगे होय थय ............ डॉक्टर न्य महीन को अपना ट्रॉउज़र उतर की उस पी लेतंय को बोलै .......... महीन न्य झिझकती होय नीतू की तरफ देखा .... और फिर एक साइड पी जा की अपना ट्रॉउज़र उतरा ..... और पंतय भी उतार की वहां हैंग क्र की चलती होइ उस टेबल की पास आगये .......... एक थोड़ी लॉन्ग शर्ट मैं थी अब महीन सिर्फ ........ जो उसकी घुटनो तक कवर क्र रही थी ....... नीतू न्य महीन को उस प्रोसीजर टेबल पी लेतंय मैं मदद की .......... और महीन उसकी ऊपर लेट गए .......... अपनी दोनों टांगें दोनों साइड्स पी ऊपर रख की ............ महीन को इस पोजीशन मैं लेतंय मैं बुहत hi शर्म आ रही थी ..........

एक नर्स न्य एक मूविंग कर्टेन ला की इस तरह सी महीन की ऊपर क्र दया की उसकी छूट का हिस्सा नहीं दिख सकता था मगर उसकी ऊपर को उठी होइ नंगी टांगें साफ़ दिख रही थीं ............ उसी नर्स न्य महीन की सर वाली साइड की दोनों तरफ एक एक स्टूल रख डाई और एक स्टूल महीन की टांगों की बिलकुल सामन्य महीन की छूट की सामन्य रख दया ........ वह डॉक्टर मास्क लगा क्र महीन की छूट की सामन्य आ की उस स्टूल पी बेथ गए ............ महीन को बुहत शर्म आ रही थी .......... उसकी दोनों टांगें खुली होइ उस साइड सुप्पोर्टस पी राखी होइ थीं ..... और उसकी छूट बिलकुल नंगी थी .......... उस डॉक्टर की सामन्य ....... ऐसी लग रहा था उसी जैसी उसनी छुडवानी की लय यह पोजीशन बनाई होइ हो ..... .... लिंडा अपनी हाथों पी ग्लोवेर्स चढ़ाती होइ महीन को देख रही थी .............

डॉक्टर नर्स सी बोली ........ जो एंड कॉल हेर बॉयफ्रेंड ......

महीन घबरा गए ....... और जल्दी सी उठ की बेथनी लगी ......... वोऊ व्व्व्वू किस लये ........

नीतू न्य फौरन hi उसका हाथ पाकर की उसी संभाला ............ और उतनी सी रोका ..........

डॉक्टर ....... don't यू क्नोव आईटी इस रूल ओवर हेरे तहत हस्बैंड और बॉयफ्रेंड शोलिंडा रेमें अलोंग विथ थे फीमेल व्हेन ुन्देरगोइंग सुच प्रोसेदूरेस ...........

महीन ........ लकिन ............

डॉक्टर मुस्कराई ........ व्हाई अरे यू सो मच वरीड ....... अन्य प्रॉब्लम ............. राजीव की लय ऐसा कुछ नया तो नहीं है ........... हे है आलरेडी सीन आईटी सो मान्य टाइम्स ............ है न .........

महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ...........

महीन वीर्य सी बोली .......... लकिन उनकी सामन्य यह प्रोसीजर .......

डॉक्टर ....... आप फ़िक्र नहीं करें .... वह टेबल की इस तरफ नहीं हों गए ......

महीन चुप क्र गए ......... इतनी मैं उस नर्स की पिच्य पिच्य राजीव रूम मैं दाखिल होआ ........ नर्स न्य उसी महीन की राइट साइड पी स्टूल पी बिठा दया ........... महीन की नज़रें राजीव सी मिलीं तो वह शर्मा गए .......... राजीव न्य महीन की क़रीब बेथ क्र उसका हाथ अपनी हाथ मैं लय लय और उसी सहलानी लगा ........ उसकी बॉयफ्रेंड की एक्टिंग कृत्य होय .............

राजीव ...... फ़िक्र नहीं करो महीन ....... सिंपल सा प्रोसीजर है अभी ख़तम हो जाय गए .............

राजीव की नज़रें महीन की ऊपर को उठी होइ नंगी टांगों पी थीं ........... जो उस कर्टेन की दूसरी तरफ सी नज़र आ रही थीं .......... गोरी गोरी ....... ऊपर को उठी होइ ....... खुली होइ ...... चुदाई की लय परफेक्ट पोजीशन ............. राजीव की दिमाग़ मैं आया ......... और वह मुस्करानी लगा ............ उधर महीन शर्म सी मरी जा रही थी ....... यह सुब कुछ राजीव की सामन्य होता होआ देख क्र ............

डॉक्टर ....... मर. राजीव, महीन एंड नीतू ....... यू शुड उसे प्रोटेक्शन्स तो अवॉयड रेपेटेड प्रेग्नेन्सीज़ एंड ाबोर्ट्स ......... थिस मई कम्पलीकाते इन फ्यूचर ..........

नीतू ....... यस डॉक्टर ......

डॉक्टर ...... महीन ...... स्पेशलय यू शुड बे मोरे केयरफुल ........ व्हाट ी ऍम सीइंग ........ योर वागिना इस सो मच देलेकते एंड सॉफ्ट .......... आईटी नीड्स तो हांडलेड विथ ग्रेट केयर एंड सोफ़्त्ल्य ........ राजीव यू शुड नेवर बे रफ़ विथ हेर दूरिंग सेक्स ..........

महीन उसकी बात सुन की शर्मा गए ........

राजीव ..... ी ऍम आलरेडी दोंग आईटी वैरी सोफ़्त्ल्य विथ हेर डॉक्टर ...... राजीव महीन का हाथ सहलाती और उसी हल्का सा दबाती होय बोलै ........ महीन न्य राजीव की तरफ देखा और शर्म सी अपना सर झुका लय ....... उधर डॉक्टर उन लोगो सी बातें करती होइ अपना प्रोसीजर क्र रही थी ...... मुख्तलिफ औज़ार महीन की छूट की अंदर दाल रही थी ........

डॉक्टर बोली ........ महीन ........

महीन ...... जी डॉक्टर .......

डॉक्टर ........... महीन नेवर अल्लोव राजीव तो एंटर हेरे विथाउट कंडोम ोंवर्ड्स ....... ऑलवेज आस्क हिम तो वियर कंडोम बिफोर पुटिंग हिज कॉक इन योर पुसी ........... अंडरस्टैंड .......

महीन की घुट्टी घुट्टी सी आवाज़ निकली ........ okay डॉक्टर ........ महीन न्य थोड़ी गुस्से की एक्सप्रेशंस की साथ नीतू की तरफ देखा जो उसी देख की मुस्करानी लगी ..........

महीन की टांगें ऊपर थीं ....... और उसकी छूट की साथ साथ उसकी गांड का सूराख भी डॉक्टर की सामन्य था .......... महीन की छूट सी अपना इंस्ट्रूमेंट निकाल की डॉक्टर न्य आहिस्ता सी अपनी एक ऊँगली महीन की गांड की सूराख पी फैरी ........ महीन का जिसम हल्का सा लरज़ सा गया ........

डॉक्टर ......... राजीव ........ अरे यू फूकिंग हेर अस्स होल आल्सो ....... ???

राजीव इस सवाल पी घबरा गया की वह क्या बोली ........ क्यों की उसी इस बात का नहीं पता था की महीन अपनी गांड मरवाती है की नहीं ......... वह हकलाती होय बोलै ............ nnnnnnnnnnnnnooooooo नन्नूऊऊ मम .........

डॉक्टर मुस्कराई ......... don't तेल्ल ा लिए ........... ी ऍम ा डॉक्टर ..... और मैं इसकी अस्स होल को देख की बता सकती हों की आईटी है बीन फुकेद आल्सो ........ एंड इस बीइंग फुकेद रेगुलरली .......... ऍम ी राइट महीन ........ तहत राजीव इस फूकिंग योर अस्स आल्सो बी पुटिंग हिज कॉक इन योर थिस होल ........

महीन को पता था की डॉक्टर सी छुपानी का कोई फ़ायदा नहीं है ...... वह फिर सी नीतू की तरफ देखती बी बसी सी देखती होइ बुहत hi वीर्य सी बोली ........... यस डॉक्टर ........ हे इस लैंग .............. हे इस दोंग आईटी ........

लिंडा अपनी बात ठीक साबित होनी पी मुस्करा रही थी ..... और राजीव भी मुस्करा रहा था ..... मगर महीन की हालत ख़राब हो रही थी ....... इतनी मैं डॉक्टर न्य अपना काम मुकमल क्या और उठ खरी होइ .......... नर्स न्य महीन को अंडरवियर पहनाया ....... और फिर महीन की ऊपर सी उस कर्टेन को हटा की उसी उतनी मैं हेल्प करनी लगी ........ फिर वह राजीव सी बोली ..... प्लीज हेल्प में सर ....

राजीव फौरन ाग्य बढ़ा और महीन की कमर मैं अपना बाज़ू दाल की उसी पाकर लय ......... महीन का जिसम कैंम्प सा गया जैसी hi उसनी खुद को राजीव की भाव की हिसार मैं महसूस क्या ...... महीन का नरम नरम जिसम राजीव की गरम और सख्त जिसम की साथ लगा होआ था ..... वह उसकी जिसम की गर्मी को महसूस क्र पा रही थी ....... महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी ......... नर्स उसी राजीव की सुपुर्द क्र की उस सी अलग हो चुकी होइ थी ....... नीतू भी मुस्करा की उन दोनों को देख रही थी ..... उसी महीन की हालत देख की मज़ा आ रहा था ......... जैसी hi महीन की नज़रें नीतू की नज़रों सी मिलीं तो नीतू न्य उसी आँख मार दी .......... और महीन न्य शर्मा की अपना सर झुका लय .... उसी सुच मैं बुहत hi अजीब फील हो रहा था ऐसी राजीव की इतना क़रीब आना .........

थोड़ी देर मैं महीन , नीतू और राजीव डॉक्टर की सामन्य उसकी टेबल पी थय ......... डॉक्टर न्य महीन को कुछ पैन किलर और विटामिन्स लिख डाई ............ और फिर महीन इन्तेहाई शर्मिंदाह हालत मैं उनकी साथ हॉस्पिटल सी निकल आई ..................

नीतू और राजीव महीन को उसकी अपार्टमेंट मैं लय आय ..... और उसी लाउन्ज मैं काउच पी लिटा दया ......

नीतू हंसती होइ बोली ...... वेलकम बैक लव बर्ड्स ......

राजीव ....... लव बर्ड्स ...... ????

नीतू हंसी ...... हाँ तो तुम दोनों तो वहां लव बर्ड्स की तरह hi बेहवे क्र रही थय न ........ हहहह

महीन शर्मा गए ......

राजीव बोलै ..... हाँ तो क्यों न करों आखिर मैं अब महीन का ऑफिसियल बॉयफ्रेंड हों ..........

महीन भी उसकी बात पी षर्मान्य लगी ....

नीतू ... हाँ यह तो सही कहा .....

महीन हंसी ...... जी नहीं ..... वह सुब सिर्फ पेपर्स तक था .....

राजीव मायूसी का मुंह बना की एक्टिंग कृत्य होय बोलै ....... ओह no ...... मैं तो समझा था की अब सुच मच मई मेरा रिलेशनशिप शुरू हो रहा है महीन की साथ .....

महीन न्य शर्माती होय अपना चेहरा अपनी हाथों मैं छुपा लय .....

नीतू न्य सुब की लय चाय बनाई ...... और तीनो बेथ की चाय पीनी लगी ......

महीन ...... नीतू अब विनोद को क्या बताना है ......

नीतू ..... एहि की काम हो गया है ......

महीन ...... ी मैं तो से राजीव की बारी मैं .....

नीतू .... कुछ भी बतानी की ज़रूरत नहीं है उसी राजीव की बारी मैं ...........

महीन ......... क्यों ......

नीतू मुस्कराई और उसी तैसे करती होइ बोली ........ मैं चाहती हों की तुम्हारा और राजीव का रिलेशनशिप खुफया hi रही विनोद सी ...... हहहहह

महीन और राजीव भी उसकी बात पी हंसनी लगी ...... थोड़ी देर रुकनी की बाद राजीव चला गया ....... और नीतू महीन की कहनी पी उसकी पास रुक गए ........
 
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