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जैसी hi महीन का हाथ विनोद की लुंड को छूआ तो उसकी जिसम मैं करंट सा दौड़ गया ........... उसने अपना हाथ विनोद की लुंड सी हटा लय ......... यह पहला मौका था की उसका हाथ विनोद की लुंड सी टच होआ था ........ हलकी वह तीन बार विनोद सी चुद चुकी होइ थी ......... तीन बार इसी लुंड को अपनी नाज़ुक सी छूट मैं लय चुकी थी ........ इसी लुंड की माज़ी लय चुकी थी ....... इस लुंड की ज़ुलम भी सेह चुकी थी ............ मगर अभी तक उसकी लुंड को देखना तो क्या छूआ भी नहीं था .............. मगर अब जैसी hi उसका हाथ टच होआ था तो उसकी जिसम मैं करंट सा दौड़ गया था .......... विनोद की लुंड की लम्स सी ......... और उसनी अपना हाथ हटा लय था ...........
विनोद न्य फिर सी उसका हाथ पकड़ा और अपनी लुंड पी रख की महीन की कान मैं बोलै ................ महीन इसी पाकर लो pleaseeeeeeeeeeeeeeeee ..........
महीन उसकी रिक्वेस्ट पी कुछ नहीं बोली ....... मगर अब की बार उसनी अपना हाथ विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया ........... विनोद न्य महीन की हाथ की मुठी अपनी लुंड पी बना दी ......... अब विनोद का मोटा लुंड महीन की नाज़ुक सी हाथ की मुठी मैं था ......... उसकी कॉटन शॉर्ट्स की ऊपर सी ........... और महीन का शर्म की मारी बुरा हाल हो रहा था ....... दूसरी तरफ विनोद का हाथ महीन की छूट को सहला रहा था उसकी कॉटन पजामी की ऊपर सी .......... महीन का जिसम और दिल पूरी तरह सी अब विनोद का साथ दी रहा था ............ उसनी भी अपनी हाथ की ग्रिफ्ट विनोद की लुंड पी टाइट क्र दी थी ......... विनोद का हाथ अपनी हाथ की ऊपर सी हटनी की बाद भी अपना हाथ उसकी लुंड सी नहीं हटाया .............
विनोद थोड़ा सा बीएड सी उठती होय महीन की नंगी सीने पर झुक गया .......... और अपनी होंठ महीन की निप्पल पी रख डाई .......... हल्का सा उसी किश क्र दया ...... और जैसी hi विनोद न्य अपनी जुबां की नौक की साथ महीन की निप्पल को टच क्या तो महीन की होंठों सी सिसकारी सी निकल गए ............. और साथ hi विनोद की लुंड पी उसकी हाथ की गृप और भी सख्त हो गए ...... विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी जुबां की नौक सी महीन की गुलाबी निप्पल को सहलाना शुरू क्र दया ....... महीन की आंखें बंद हो रही थीं ....... और वह विनोद की लुंड को अपनी हाथ सी आहिस्ता आहिस्ता महसूस करनी लगी ......... जैसी जैसी उसका हाथ विनोद की लुंड को फील क्र रहा था ...... वैसी वैसी उसी अंदजा हो रहा था की विनोद का लुंड आसिफ की लुंड सी ज़्यादा मोटा और लम्बा है ........ इस बात का अहसास तो उसी उस वक़्त hi हो गया था जब विनोद न्य अपना लुंड पहली बार उसकी छूट की अंदर डाला था .......... मगर अब वह अपनी हाथ की साथ भी उसी कन्फर्म क्र रही थी ........... uuuuuufffffffffffffff ............ कितना मोटा और लम्बा है यह विनोद का ............ मुझी तो यक़ीन hi नहीं हो रहा की मैं इसी तीन बार अपनी अंदर लय भी चुकी हों ......... तीन बार अपनी अंदर लय चुकी हों और अभी तक इस लुंड को देखा भी नहीं है ............ हाहाहा ............. महीन खुद hi सोच रही थी .......... ऊऊफफफफफफफ ........... इम्पॉसिबल ........... इतना बारे कैसी मेरी अंदर जा सकता है ....... लकिन चला तो गया न ........ और फिर दर्द भी तो इतना ज़्यादा होआ था न ........... मगर इस वक़्त तो फिर सी मेरी छूट गीली हो रही है ....... पानी चोर रही है .......... जैसी वह फिर सी इसी लुंड को अपनी अंदर मांग रही है ...... इस मोटे लुंड की आदत तो अब बनानी hi पारी गई ....... अब तो कभी भी मुझी विनोद चोरनी वाला नहीं है जब तक हम दोनों यहाँ हैं .......... ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ ....... क्या करों मैं ............ मुझ सी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है ............. यह सुब आसिफ सी दूर रहंय की वजह सी होआ है .......... आखिर मेरी भी तो जिसम की ....... मेरी छूट की प्यास है न ........ तो कैसी मैं 16 मंथ तक बिना अपनी जिसम की आवाज़ को सुने रह सकती हों ............ aaaaaaahhhhhhhhhhhhh ............. sssssssssssssssssssss ............ महीन की होंठों सी एक सिसकारी निकल गए ............ और उसका पूरा जिसम कैंम्प सा गया ............... क्यों की विनोद न्य अपनी हाथ को महीन की पाजामे की अंदर डालती होय अपनी ऊँगली महीन की छूट की अंदर दाल दी थी ............... गीली छूट की अंदर .............. जिस सी महीन का पूरा जिसम झटकी लय रहा था .............
महीन की बर्दाश्त और कण्ट्रोल अब ख़तम हो रहा था .......... वह खुद भी छह रही थी की विनोद एक बार फिर सी अपनी इसी मोटे लुंड को उसकी छूट मैं दाल दी ........... और उसी छोड़ की उसकी छूट की प्यास बुझा दी ................. महीन उसकी लुंड को खुद सी hi अपनी थिगह पी रगड़ रही थी ........... और विनोद महीन की छूट की अंदर अपनी ऊँगली अंदर बहार कृत्य होय महीन की होंठों को किश क्र रहा था .............
महीन टर्पी ............. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ............... sssssssssssssssssss............ ooooooooooooooo ................ Vinoooooooooooddddddddddddd .................... plzzzzzzzzzzzzzzzzz नहीं kroooooooooooooooooooo ............. aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh
मगर विनोद कहाँ सुन रहा था ........ वह तो महीन की छूट की अंदर अपनी ऊँगली अंदर बहार क्र रहा था ........ और अपनी अंगोट्य सी उसकी छूट की दांय को रगड़ रहा था ............... जिस सी महीन की हालत और भी ख़राब होती जा रही थी ............. हल्की सी बल्ब की रौशनी मई महीन का जिसम विनोद की बीएड पी थय .......... विनोद का हाथ महीन की पजामी मैं .............. और उसकी होंठ महीन की होंठों पी थय ........... और महीन का ऊपरी जिसम बिलकुल नंगा था ............... उसकी खूबसूरत तनय होय मम्मी और भी तन की खरी होय थय ............ और महीन का पूरा जिसम hi हिल रहा था ......... तरप रहा था ........... मचल रहा था ....................... उसकी हाथ मैं विनोद का लुंड था जैसी वह अपनी मुठी मैं दबा रही थी ........ जैसी जैसी उसकी छूट की अंदर हलचल बढ़ती जा रही थी वैसी वैसी उसकी ग्रिफ्ट और सख्त होती जा रही थी विनोद की लुंड पी ...........
विनोद न्य महीन की पाजामे को नीची को सिरकाना शुरू क्र दया ........ महीन न्य भी अपनी गांड को ऊपर उठा क्र उसी अपना पजामा उतारनी दया ............. पजामा महीन की घुटनो तक आया तो उस सी ाग्य महीन न्य खुद अपनी टांगों और पैरों को हरकत देती होय अपनी पैरों सी निकाल दया ............ और पैरों की हरकत सी उसका पजामा कहाँ गया इसका न महीन को पता था और ना hi इस बात की कोई फ़िक्र थी ............ अब महीन का पूरा जिसम ........ बिलकुल नंगा .......... हलकी हलकी रौशनी मई विनोद की बीएड पी पारा होआ चमक रहा था .............. महीन का हाथ अभी बह विनोद की लुंड पी था ........ उसकी पाजामे की ऊपर सी hi ........... जैसी वह अब ज़ोर ज़ोर सी दबा रही थी ............ विनोद अब महीन की हालत को समझ रहा था ............. उसकी तरप को समझ रहा था ....... उसकी जिसम की ....... उसकी छूट की ज़रूरत को समझ रहा था ............ उसी महीन की हालत का अंदाज़ा उसकी छूट सी रिसती होय पानी को देख की हो रहा था ...........
विनोद न्य आहिस्ता सी करवट ली और महीन की ऊपर आज्ञा ............. अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखा और उसी किश करनी लगा ........ साथ hi नीची सी अपनी लुंड को अपनी पाजामे की अंदर सी hi महीन की छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया .......... विनोद का सख्त लुंड और कॉटन शॉर्ट्स की महीन की छूट पी रगड़ उसकी हालत को और भी ख़राब क्र रही थय ............... लुंड का टोपा महीन की छूट की दांय को रगड़ रहा था .......... और महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं .......... वह तरप रही थी ........... अपनी टांगों को विनोद की जिसम की गिर्द दाल रही थी ........ और अपनी बाँहों को उसकी गर्दन मैं दाल चुकी होइ थी ............ और विनोद की किश करनी मैं उसका भरपूर साथ दी रही थी ............ वह भूल चुकी होइ थी की थोड़ी देर पहली वह खुद विनोद को मन क्र रही थी की उसी आज उस सी नहीं छोड़ना ........ मगर विनोद की हाथों की जादू और उसकी लुंड की शून्य सी महीन अपना इरादा तोड़ चुकी होइ थी ........ और वह जानती थी की अब उसी विनोद का लुंड अपनी अंदर लय बिना सुकून नहीं अन्य वाला ...........
विनोद का लुंड महीन की छूट को रगड़ रहा था ....... और उसकी छूट सी निकालनी वाला पानी उसकी पाजामे को भिगो रहा था .......... गीला क्र रहा था .............. महीन की होंठों सी निकालनी वाली सिसकार्यं विनोद की कानून मैं जलतरंग की तरह गूँज रही थीं ............ और उसी अपनी नीची तड़पता होआ देख क्र विनोद को ाचा लग रहा था ....... उसी ाचा लग रहा था की महीन जैसी फैथ्फुल ........ और पर्दा दार लड़की को वह अपनी नीची लितानी ............ अपनी लुंड की आदि बनानी ........ और उसी छोड़नी मैं कामयाब हो गया है ............. जब सी वह महीन की ब्रांच मई आया था तब सी उसकी नज़र थी महीन पी .......... लकिन उसी कभी इस बात का यक़ीन नहीं था की वह कभी महीन को छोड़ पाय गए ........... लकिन अब सुब कुछ हो चूका होआ था ......
विनोद न्य हाथ नीची लय जा की अपना पजामा अपनी जिसम सी नीची सिरकाया ........ और उसी उतारनी लगा ....... जैसी hi पजामा उसकी गांड सी नीची गया तो विनोद का लुंड नंगा हो की महीन की छूट सी तक्राण्य लगा ............. गरम गरम लुंड अपनी गरम गरम प्यासी छूट सी टच होती hi महीन की जिसम मैं करंट सा दौड़ गया ........... और उसनी अपनी निचली जिसम को फौरन hi ऊपर उठा दया ........ अपनी छूट को विनोद की लुंड की तरफ बढ़ाती होय ........ विनोद की मोटे लुंड को अपनी छूट की अंदर लेनी की कोशिश कृत्य होय ....................
विनोद न्य अपनी नंगी लुंड को महीन की छूट की ऊपर रखा और रगड़नी लगा ........... साथ hi महीन की निप्पल को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसना शुरू क्र दया .......... महीन इस दो तरफ़ा तैसिंग को बर्दाश्त नहीं क्र पा रही थी ............ अपनी बहून को विनोद की गर्दन की गिर्द टाइट करती होइ siskiiiiiiiiii .............. Vinodddddddddddddd ........................ pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ........... ना tarpaaooooooooooooooooooooooooo .................. naheeeeeeeeeeeeee kroooooooooooooooooooooooooo plzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ............
विनोद महीन की होंठों पी किश कृत्य होय बोलै .............. मैं तो कुछ भी नहीं क्र रहा महीन ................
महीन आंखें बंद की होय टर्पी ................ करूऊऊऊ नाआआआ plzzzzzzzzzzzzzzz ...............
विनोद महीन की चेहरी पी मौजूद बी चैनी और बी करारी को देख की मुस्कराया ............. क्या करों महीन .............. और साथ hi नीची सी फिर सी अपनी लुंड को महीन की छूट की दांय पी रगड़ दया .............
महीन टर्पी ............ और अपनी छूट को ऊपर की तरफ उठाया ....... जैसी विनोद का लुंड अपनी छूट की अंदर लेना चाहती हो ............. मगर विनोद तो अपना लुंड उसकी छूट मैं दाल hi नहीं रहा था ........... महीन मुंह सी नहीं बोल रही थी मगर अपनी जिसम की हरकत सी विनोद को इशारा दी रही थी की वह अपना लुंड उसकी छूट की अंदर दाल दी .............
अपनी जिसम की आग ........ और छूट की तरप सी मजबूर हो क्र महीन न्य अपना हाथ नीची बढ़ाया और विनोद का लुंड ........ नंगा लुंड पहली बार अपनी हाथ मैं पाकर लय ........ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ........ कितना गरम हो रहा था वह लुंड ....... जैसी आग की भट्टी सी लोहे की रोड को गरम क्र की निकला हो ........ कपड़ों सी बहार आ की और भी मोटा लग रहा था ......... और भी लम्बा ...... मगर इस वक़त महीन को उसकी लम्बाई और मोटाई सी ज़रा भी दर नहीं लग रहा था ...... उसनी विनोद की लुंड को अपनी हाथ सी पाकर की खेंचा और उसी अपनी छूट पी रगड़नी लगी ......... आंखें बंद होती जा रही थीं उसकी .... और वह उस मूसल को अपनी छूट पी रगड़ रही थी ...... घिस रही थी ...... उसकी मोटे बल्ब को अपनी छूट की सूराख मैं डालनी की कोशिश क्र रही थी .......... मगर विनोद तो कुछ भी नहीं क्र रहा था न ...... बस महीन की हालत की मज़े लय रहा था .......
महीन सिसकी ............. Vinoooooooooooooodddddddddddddddd ......... plzzzzzzzzzzzzzzzzz
विनोद फिर बोलै ............. बताओ न महीन क्या करना है मुझी ........
महीन अपनी आंखें बंद रखी होय आखिर सिसक hi पारी ........... विनोद ............... अंदर क्र दो .................
विनोद मुस्कराया ............. क्या अंदर क्र डॉन ........... कहाँ अंदर क्र डॉन ...........
महीन उसकी कमर को नोचती होइ बोली .......... मत तडपाओ pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ....................... ऐसा नहीं krooooooooooo .............
विनोद उसकी कान मैं अपनी जुबां की नौक फैरता होआ बोलै ............ पर तुम न्य तो कहा था की आज रात को नहीं करना है .............
महीन का शर्म सी बुरा हाल हो रहा था ........... और अपनी छूट की आग सी भी ................ अब करना है ............ वह वीर्य सी बोल पाई ..........
विनोद अपनी लौड़ी की टोपे को महीन की छूट की सूराख पी रखती होय उसकी कान मैं बोलै ............. फिर सी दर्द हो गए वहां ...............
महीन .............. mmmmmmmmmmmmmmm होनी doooooooooo
विनोद अपनी लुंड को थोड़ा सा महीन की छूट की अंदर पुश कृत्य होय बोलै ................... बर्दाश्त क्र लो गई ..............
महीन विनोद की लुंड को अपनी टाइट छूट की अंदर आता होआ महसूस क्र की जैसी एक लज़्ज़त की लहर मैं डूबनी लगी ........... haannnnnnnnnnn .......... क्र लोन geeeeeeeeee ...................
विनोद न्य अपनी लुंड को थोड़ा सा और ाग्य क्या महीन की छूट मैं .............. पूरा या आधा ............
महीन टर्पी ........ अपनी छूट को ऊपर को उछालती होइ बोली ........... pooooooraaaaaaaaaaaaaaaaaaaa .................
विनोद अपनी लुंड को और भी ाग्य कृत्य होय बोलै ........... बुहत बारे है ............ लय लो गई न ..............
महीन न्य अपनी दोनों पेअर विनोद की कमर की गिर्द लापित्य और उसी अपनी जिसम की तरफ खींचती होइ टर्पी ........... hhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaannnnnnnnnnnnnnnnnnnnn ............ krrrrrooooooooooooooooooo
विनोद न्य अब उसी और तडपाना मुनासिब नहीं समझा ............ और अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करनी लगा ....... हल्की हॉकी धक्कों की साथ महीन की छूट को छोड़नी लगा ........... थोड़ी hi देर मैं उसका पूरा लुंड महीन की छूट की अंदर बहार हो रहा था ...... पूरा लुंड जड़ तक महीन की छूट मैं उतर जाता ............ अंदर जा की महीन की बचा दानी की मुंह सी टकराता और फिर उसी विनोद बहार को खींच लेता ............ पिच्य को सिरका लेता ............. लज़्ज़त सी महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं ........... और वह तरप रही थी .......... विनोद का गरम मोटा लुंड उसकी छूट को पूरा खोलता होआ अंदर तक जा रहा था .............. उसकी मोटे लुंड की रगड़ सी महीन की छूट और भी पानी चूर्ण शुरू हो गए थी .............. जैसी hi विनोद न्य महीन की छूट की अंदर 3-4 ढक्की लगाय तो महीन की छूट न्य एक बार पानी चोर दया ............... उस रात का पहला ओर्गास्म हो गया महीन को ............... उसका जिसम झटकी लय रहा था ............. और वह निढाल होती जा रही थी ................. विनोद की नीची ................ विनोद भी रुक गया होआ था अपना लुंड उसकी छूट की अंदर डाले होय .............. महीन को अपनी ओर्गास्म को ाच्य सी एन्जॉय करनी का टाइम दी रहा था .............
जैसी hi महीन का ओर्गास्म ख़तम होआ तो विनोद न्य दोबारा सी महीन की चुदाई शुरू क्र दी .......... अब उसकी धक्कों की रफ़्तार तेज़ हो गए थी .......... और वह ज़ोर ज़ोर सी अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर बहार क्र रहा था ............ कभी उसकी होंठों को चूमनी लगता तो कभी उसकी मम्मों को चूसनी लगता ................ महीन जैसी हसीं लड़की की जिसम का भरपूर मज़ा लय रहा था ................ अपनी मोटे लम्बे लुंड सी ........ उसकी छूट की अंदर डाले होय ........... उसी छोड़ती होय .............
आधा घंटा तक विनोद महीन को छोड़ता रहा ............... और इस दौरान महीन एक बार और जहर गए ............... और आखिर जब विनोद की लुंड न्य अपनी पानी महीन की छूट मैं गिराना शुरू क्या तो महीन एक बार फिर सी झाड़ गए ........ और विनोद की जिसम सी लिपट गए ........... आंखें बंद क्र की ............ लम्बी लम्बी सांसें लेती होइ ............. अपनी छूट की मसल्स सी विनोद की लुंड को निचोड़ती होइ ................. उसकी लुंड की पानी का आखरी क़तरा तक अपनी छूट सी चूसती होइ .............. विनोद भी निढाल हो की उसकी ऊपर था अब ................ और जब पूरा पानी महीन की छूट मैं गिरा दया तो महीन की जिसम सी नीची लुरख गया ........... अपनी लुंड को महीन की छूट सी निकालती होय .......... और उसकी बिलकुल साथ लेट की लम्बे लम्बे सांस लेनी लगा ............... ऐसी hi लेते लेते दोनों की आँख लग गए ................
सुबह महीन की आँख पहली खुली ............. उसनी इधर उधर देखा और खुद को विनोद की बैडरूम मैं ........ उसकी बीएड पर ........ उसकी साथ नंगी लेते होय पाया ............... वह विनोद की तरफ देख क्र वीर्य सी मुस्करा दी ........... और आहिस्ता सी बीएड सी उठ गए .............. बीएड पी देखा तो वह पी टिश्यू पेपर्स रखी होय थय ........... उसकी छूट सी बाह क्र निकालनी वाला विनोद की लुंड का पानी उन टिश्यू पेपर्स पी गिर की उन मैं जज़ब हो चूका होआ था ........ महीन की नज़र बीएड सी नीची फेंकी होय टिश्यू पेपर्स पी भी पारी ......... महीन समझ गए की रात को उसकी आँख लगनी की बाद विनोद न्य टिश्यू पेपर्स सी hi उसकी छूट साफ़ क्र दी थी ......... और फिर टिश्यू पेपर्स hi उसकी छूट की नीची रख डाई थय ............ महीन विनोद की ऐसी उसकी केयर करनी पर मुस्करा दी ....... और प्यार सी विनोद की तरफ देखनी लगी ..... विनोद सो रहा था .... उसकी चेहरी सी होती होइ महीन की नज़र विनोद की लुंड की तरफ गए ........... मगर उसी मायूसी होइ ........ विनोद का लुंड नहीं देख सकीय ........ क्यों की विनोद रात को किसी वक़्त शॉर्ट्स पहन चूका होआ था .......... खुद तो शॉर्ट्स पहन लीन ...... मुझी भी पहना देता ........ मुझी ऐसी hi सुलाय रखा साड़ी रात अपनी पास ...... महीन शर्मा गए ........... और अपना नाईट ड्रेस उठा की खामोशी सी विनोद की बैडरूम सी निकल गए ............... नहानी की लय ...........
नाहा धू क्र महीन अपना टॉवल अपनी नंगी जिसम पी लपेटी होय बहार आई .............. और विनोद की रूम मई जा की उसी जगानी लगी ...........
महीन ........ विनोद ............ विनोद ....... उठ जाओ देर हो रही है ऑफिस की लय ............. महीन अपनी गीले बलून को हल्का हल्का झटकी होय उन का पानी विनोद की चेहरी और उसकी नंगे जिसम पी गिराती होइ बोली
विनोद न्य आंखें खोल की महीन को देखा ............. महीन न्य उसी मुस्करा की गुड मॉर्निंग बोलै ..............
विनोद भी मुस्कराया ............ और महीन की नंगी जिसम को सिर्फ उस छोटी सी टॉवल सी दांम्पय होय देख की उसी महीन का ऐसी जगाना ाचा लगा .............. महीन की गीले बलून सी पानी अभी भी विनोद की ऊपर टपक रहा था .....
विनोद ............ बुहत प्यारी लग रही हो महीन इस तरह ............
महीन मुस्कराई ........... ज़्यादा बातें नहीं करो और उठ की तैयार हो जाओ जल्दी सी ........ वर्ण ऑफिस सी लेट हो जाईं गए .......... जल्दी आओ मैं नाश्ता बना रही हों जा की ............
लेट हो रहा था ऑफिस का टाइम तो महीन न्य अपनी कपड़े पहन न्य टाइम लगानी की बजाय उसी टॉवल मैं लिपटे होय किचन मई जा की नाश्ता बनाना शुरू क्र दया ............. और विनोद की नहा की निकालनी तक वह टेबल पी ब्रेकफास्ट लगा चुकी होइ थी .................... थोड़ी hi देर मैं विनोद भी अपनी निचली जिसम पी टॉवल बाँधी होय टेबल पी आज्ञा .......... दोनों एक दूसरी को इस हालत मैं देख की मुस्कराय .............. और बिना कुछ और बोले नाश्ता करनी लगी ................. नाश्त्य की बाद दोनों न्य तैयारी की और अपनी ऑफिस की लय निकल गए .......................
विनोद न्य फिर सी उसका हाथ पकड़ा और अपनी लुंड पी रख की महीन की कान मैं बोलै ................ महीन इसी पाकर लो pleaseeeeeeeeeeeeeeeee ..........
महीन उसकी रिक्वेस्ट पी कुछ नहीं बोली ....... मगर अब की बार उसनी अपना हाथ विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया ........... विनोद न्य महीन की हाथ की मुठी अपनी लुंड पी बना दी ......... अब विनोद का मोटा लुंड महीन की नाज़ुक सी हाथ की मुठी मैं था ......... उसकी कॉटन शॉर्ट्स की ऊपर सी ........... और महीन का शर्म की मारी बुरा हाल हो रहा था ....... दूसरी तरफ विनोद का हाथ महीन की छूट को सहला रहा था उसकी कॉटन पजामी की ऊपर सी .......... महीन का जिसम और दिल पूरी तरह सी अब विनोद का साथ दी रहा था ............ उसनी भी अपनी हाथ की ग्रिफ्ट विनोद की लुंड पी टाइट क्र दी थी ......... विनोद का हाथ अपनी हाथ की ऊपर सी हटनी की बाद भी अपना हाथ उसकी लुंड सी नहीं हटाया .............
विनोद थोड़ा सा बीएड सी उठती होय महीन की नंगी सीने पर झुक गया .......... और अपनी होंठ महीन की निप्पल पी रख डाई .......... हल्का सा उसी किश क्र दया ...... और जैसी hi विनोद न्य अपनी जुबां की नौक की साथ महीन की निप्पल को टच क्या तो महीन की होंठों सी सिसकारी सी निकल गए ............. और साथ hi विनोद की लुंड पी उसकी हाथ की गृप और भी सख्त हो गए ...... विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी जुबां की नौक सी महीन की गुलाबी निप्पल को सहलाना शुरू क्र दया ....... महीन की आंखें बंद हो रही थीं ....... और वह विनोद की लुंड को अपनी हाथ सी आहिस्ता आहिस्ता महसूस करनी लगी ......... जैसी जैसी उसका हाथ विनोद की लुंड को फील क्र रहा था ...... वैसी वैसी उसी अंदजा हो रहा था की विनोद का लुंड आसिफ की लुंड सी ज़्यादा मोटा और लम्बा है ........ इस बात का अहसास तो उसी उस वक़्त hi हो गया था जब विनोद न्य अपना लुंड पहली बार उसकी छूट की अंदर डाला था .......... मगर अब वह अपनी हाथ की साथ भी उसी कन्फर्म क्र रही थी ........... uuuuuufffffffffffffff ............ कितना मोटा और लम्बा है यह विनोद का ............ मुझी तो यक़ीन hi नहीं हो रहा की मैं इसी तीन बार अपनी अंदर लय भी चुकी हों ......... तीन बार अपनी अंदर लय चुकी हों और अभी तक इस लुंड को देखा भी नहीं है ............ हाहाहा ............. महीन खुद hi सोच रही थी .......... ऊऊफफफफफफफ ........... इम्पॉसिबल ........... इतना बारे कैसी मेरी अंदर जा सकता है ....... लकिन चला तो गया न ........ और फिर दर्द भी तो इतना ज़्यादा होआ था न ........... मगर इस वक़्त तो फिर सी मेरी छूट गीली हो रही है ....... पानी चोर रही है .......... जैसी वह फिर सी इसी लुंड को अपनी अंदर मांग रही है ...... इस मोटे लुंड की आदत तो अब बनानी hi पारी गई ....... अब तो कभी भी मुझी विनोद चोरनी वाला नहीं है जब तक हम दोनों यहाँ हैं .......... ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ ....... क्या करों मैं ............ मुझ सी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है ............. यह सुब आसिफ सी दूर रहंय की वजह सी होआ है .......... आखिर मेरी भी तो जिसम की ....... मेरी छूट की प्यास है न ........ तो कैसी मैं 16 मंथ तक बिना अपनी जिसम की आवाज़ को सुने रह सकती हों ............ aaaaaaahhhhhhhhhhhhh ............. sssssssssssssssssssss ............ महीन की होंठों सी एक सिसकारी निकल गए ............ और उसका पूरा जिसम कैंम्प सा गया ............... क्यों की विनोद न्य अपनी हाथ को महीन की पाजामे की अंदर डालती होय अपनी ऊँगली महीन की छूट की अंदर दाल दी थी ............... गीली छूट की अंदर .............. जिस सी महीन का पूरा जिसम झटकी लय रहा था .............
महीन की बर्दाश्त और कण्ट्रोल अब ख़तम हो रहा था .......... वह खुद भी छह रही थी की विनोद एक बार फिर सी अपनी इसी मोटे लुंड को उसकी छूट मैं दाल दी ........... और उसी छोड़ की उसकी छूट की प्यास बुझा दी ................. महीन उसकी लुंड को खुद सी hi अपनी थिगह पी रगड़ रही थी ........... और विनोद महीन की छूट की अंदर अपनी ऊँगली अंदर बहार कृत्य होय महीन की होंठों को किश क्र रहा था .............
महीन टर्पी ............. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ............... sssssssssssssssssss............ ooooooooooooooo ................ Vinoooooooooooddddddddddddd .................... plzzzzzzzzzzzzzzzzz नहीं kroooooooooooooooooooo ............. aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh
मगर विनोद कहाँ सुन रहा था ........ वह तो महीन की छूट की अंदर अपनी ऊँगली अंदर बहार क्र रहा था ........ और अपनी अंगोट्य सी उसकी छूट की दांय को रगड़ रहा था ............... जिस सी महीन की हालत और भी ख़राब होती जा रही थी ............. हल्की सी बल्ब की रौशनी मई महीन का जिसम विनोद की बीएड पी थय .......... विनोद का हाथ महीन की पजामी मैं .............. और उसकी होंठ महीन की होंठों पी थय ........... और महीन का ऊपरी जिसम बिलकुल नंगा था ............... उसकी खूबसूरत तनय होय मम्मी और भी तन की खरी होय थय ............ और महीन का पूरा जिसम hi हिल रहा था ......... तरप रहा था ........... मचल रहा था ....................... उसकी हाथ मैं विनोद का लुंड था जैसी वह अपनी मुठी मैं दबा रही थी ........ जैसी जैसी उसकी छूट की अंदर हलचल बढ़ती जा रही थी वैसी वैसी उसकी ग्रिफ्ट और सख्त होती जा रही थी विनोद की लुंड पी ...........
विनोद न्य महीन की पाजामे को नीची को सिरकाना शुरू क्र दया ........ महीन न्य भी अपनी गांड को ऊपर उठा क्र उसी अपना पजामा उतारनी दया ............. पजामा महीन की घुटनो तक आया तो उस सी ाग्य महीन न्य खुद अपनी टांगों और पैरों को हरकत देती होय अपनी पैरों सी निकाल दया ............ और पैरों की हरकत सी उसका पजामा कहाँ गया इसका न महीन को पता था और ना hi इस बात की कोई फ़िक्र थी ............ अब महीन का पूरा जिसम ........ बिलकुल नंगा .......... हलकी हलकी रौशनी मई विनोद की बीएड पी पारा होआ चमक रहा था .............. महीन का हाथ अभी बह विनोद की लुंड पी था ........ उसकी पाजामे की ऊपर सी hi ........... जैसी वह अब ज़ोर ज़ोर सी दबा रही थी ............ विनोद अब महीन की हालत को समझ रहा था ............. उसकी तरप को समझ रहा था ....... उसकी जिसम की ....... उसकी छूट की ज़रूरत को समझ रहा था ............ उसी महीन की हालत का अंदाज़ा उसकी छूट सी रिसती होय पानी को देख की हो रहा था ...........
विनोद न्य आहिस्ता सी करवट ली और महीन की ऊपर आज्ञा ............. अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखा और उसी किश करनी लगा ........ साथ hi नीची सी अपनी लुंड को अपनी पाजामे की अंदर सी hi महीन की छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया .......... विनोद का सख्त लुंड और कॉटन शॉर्ट्स की महीन की छूट पी रगड़ उसकी हालत को और भी ख़राब क्र रही थय ............... लुंड का टोपा महीन की छूट की दांय को रगड़ रहा था .......... और महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं .......... वह तरप रही थी ........... अपनी टांगों को विनोद की जिसम की गिर्द दाल रही थी ........ और अपनी बाँहों को उसकी गर्दन मैं दाल चुकी होइ थी ............ और विनोद की किश करनी मैं उसका भरपूर साथ दी रही थी ............ वह भूल चुकी होइ थी की थोड़ी देर पहली वह खुद विनोद को मन क्र रही थी की उसी आज उस सी नहीं छोड़ना ........ मगर विनोद की हाथों की जादू और उसकी लुंड की शून्य सी महीन अपना इरादा तोड़ चुकी होइ थी ........ और वह जानती थी की अब उसी विनोद का लुंड अपनी अंदर लय बिना सुकून नहीं अन्य वाला ...........
विनोद का लुंड महीन की छूट को रगड़ रहा था ....... और उसकी छूट सी निकालनी वाला पानी उसकी पाजामे को भिगो रहा था .......... गीला क्र रहा था .............. महीन की होंठों सी निकालनी वाली सिसकार्यं विनोद की कानून मैं जलतरंग की तरह गूँज रही थीं ............ और उसी अपनी नीची तड़पता होआ देख क्र विनोद को ाचा लग रहा था ....... उसी ाचा लग रहा था की महीन जैसी फैथ्फुल ........ और पर्दा दार लड़की को वह अपनी नीची लितानी ............ अपनी लुंड की आदि बनानी ........ और उसी छोड़नी मैं कामयाब हो गया है ............. जब सी वह महीन की ब्रांच मई आया था तब सी उसकी नज़र थी महीन पी .......... लकिन उसी कभी इस बात का यक़ीन नहीं था की वह कभी महीन को छोड़ पाय गए ........... लकिन अब सुब कुछ हो चूका होआ था ......
विनोद न्य हाथ नीची लय जा की अपना पजामा अपनी जिसम सी नीची सिरकाया ........ और उसी उतारनी लगा ....... जैसी hi पजामा उसकी गांड सी नीची गया तो विनोद का लुंड नंगा हो की महीन की छूट सी तक्राण्य लगा ............. गरम गरम लुंड अपनी गरम गरम प्यासी छूट सी टच होती hi महीन की जिसम मैं करंट सा दौड़ गया ........... और उसनी अपनी निचली जिसम को फौरन hi ऊपर उठा दया ........ अपनी छूट को विनोद की लुंड की तरफ बढ़ाती होय ........ विनोद की मोटे लुंड को अपनी छूट की अंदर लेनी की कोशिश कृत्य होय ....................
विनोद न्य अपनी नंगी लुंड को महीन की छूट की ऊपर रखा और रगड़नी लगा ........... साथ hi महीन की निप्पल को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसना शुरू क्र दया .......... महीन इस दो तरफ़ा तैसिंग को बर्दाश्त नहीं क्र पा रही थी ............ अपनी बहून को विनोद की गर्दन की गिर्द टाइट करती होइ siskiiiiiiiiii .............. Vinodddddddddddddd ........................ pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ........... ना tarpaaooooooooooooooooooooooooo .................. naheeeeeeeeeeeeee kroooooooooooooooooooooooooo plzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ............
विनोद महीन की होंठों पी किश कृत्य होय बोलै .............. मैं तो कुछ भी नहीं क्र रहा महीन ................
महीन आंखें बंद की होय टर्पी ................ करूऊऊऊ नाआआआ plzzzzzzzzzzzzzzz ...............
विनोद महीन की चेहरी पी मौजूद बी चैनी और बी करारी को देख की मुस्कराया ............. क्या करों महीन .............. और साथ hi नीची सी फिर सी अपनी लुंड को महीन की छूट की दांय पी रगड़ दया .............
महीन टर्पी ............ और अपनी छूट को ऊपर की तरफ उठाया ....... जैसी विनोद का लुंड अपनी छूट की अंदर लेना चाहती हो ............. मगर विनोद तो अपना लुंड उसकी छूट मैं दाल hi नहीं रहा था ........... महीन मुंह सी नहीं बोल रही थी मगर अपनी जिसम की हरकत सी विनोद को इशारा दी रही थी की वह अपना लुंड उसकी छूट की अंदर दाल दी .............
अपनी जिसम की आग ........ और छूट की तरप सी मजबूर हो क्र महीन न्य अपना हाथ नीची बढ़ाया और विनोद का लुंड ........ नंगा लुंड पहली बार अपनी हाथ मैं पाकर लय ........ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ........ कितना गरम हो रहा था वह लुंड ....... जैसी आग की भट्टी सी लोहे की रोड को गरम क्र की निकला हो ........ कपड़ों सी बहार आ की और भी मोटा लग रहा था ......... और भी लम्बा ...... मगर इस वक़त महीन को उसकी लम्बाई और मोटाई सी ज़रा भी दर नहीं लग रहा था ...... उसनी विनोद की लुंड को अपनी हाथ सी पाकर की खेंचा और उसी अपनी छूट पी रगड़नी लगी ......... आंखें बंद होती जा रही थीं उसकी .... और वह उस मूसल को अपनी छूट पी रगड़ रही थी ...... घिस रही थी ...... उसकी मोटे बल्ब को अपनी छूट की सूराख मैं डालनी की कोशिश क्र रही थी .......... मगर विनोद तो कुछ भी नहीं क्र रहा था न ...... बस महीन की हालत की मज़े लय रहा था .......
महीन सिसकी ............. Vinoooooooooooooodddddddddddddddd ......... plzzzzzzzzzzzzzzzzz
विनोद फिर बोलै ............. बताओ न महीन क्या करना है मुझी ........
महीन अपनी आंखें बंद रखी होय आखिर सिसक hi पारी ........... विनोद ............... अंदर क्र दो .................
विनोद मुस्कराया ............. क्या अंदर क्र डॉन ........... कहाँ अंदर क्र डॉन ...........
महीन उसकी कमर को नोचती होइ बोली .......... मत तडपाओ pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ....................... ऐसा नहीं krooooooooooo .............
विनोद उसकी कान मैं अपनी जुबां की नौक फैरता होआ बोलै ............ पर तुम न्य तो कहा था की आज रात को नहीं करना है .............
महीन का शर्म सी बुरा हाल हो रहा था ........... और अपनी छूट की आग सी भी ................ अब करना है ............ वह वीर्य सी बोल पाई ..........
विनोद अपनी लौड़ी की टोपे को महीन की छूट की सूराख पी रखती होय उसकी कान मैं बोलै ............. फिर सी दर्द हो गए वहां ...............
महीन .............. mmmmmmmmmmmmmmm होनी doooooooooo
विनोद अपनी लुंड को थोड़ा सा महीन की छूट की अंदर पुश कृत्य होय बोलै ................... बर्दाश्त क्र लो गई ..............
महीन विनोद की लुंड को अपनी टाइट छूट की अंदर आता होआ महसूस क्र की जैसी एक लज़्ज़त की लहर मैं डूबनी लगी ........... haannnnnnnnnnn .......... क्र लोन geeeeeeeeee ...................
विनोद न्य अपनी लुंड को थोड़ा सा और ाग्य क्या महीन की छूट मैं .............. पूरा या आधा ............
महीन टर्पी ........ अपनी छूट को ऊपर को उछालती होइ बोली ........... pooooooraaaaaaaaaaaaaaaaaaaa .................
विनोद अपनी लुंड को और भी ाग्य कृत्य होय बोलै ........... बुहत बारे है ............ लय लो गई न ..............
महीन न्य अपनी दोनों पेअर विनोद की कमर की गिर्द लापित्य और उसी अपनी जिसम की तरफ खींचती होइ टर्पी ........... hhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaannnnnnnnnnnnnnnnnnnnn ............ krrrrrooooooooooooooooooo
विनोद न्य अब उसी और तडपाना मुनासिब नहीं समझा ............ और अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करनी लगा ....... हल्की हॉकी धक्कों की साथ महीन की छूट को छोड़नी लगा ........... थोड़ी hi देर मैं उसका पूरा लुंड महीन की छूट की अंदर बहार हो रहा था ...... पूरा लुंड जड़ तक महीन की छूट मैं उतर जाता ............ अंदर जा की महीन की बचा दानी की मुंह सी टकराता और फिर उसी विनोद बहार को खींच लेता ............ पिच्य को सिरका लेता ............. लज़्ज़त सी महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं ........... और वह तरप रही थी .......... विनोद का गरम मोटा लुंड उसकी छूट को पूरा खोलता होआ अंदर तक जा रहा था .............. उसकी मोटे लुंड की रगड़ सी महीन की छूट और भी पानी चूर्ण शुरू हो गए थी .............. जैसी hi विनोद न्य महीन की छूट की अंदर 3-4 ढक्की लगाय तो महीन की छूट न्य एक बार पानी चोर दया ............... उस रात का पहला ओर्गास्म हो गया महीन को ............... उसका जिसम झटकी लय रहा था ............. और वह निढाल होती जा रही थी ................. विनोद की नीची ................ विनोद भी रुक गया होआ था अपना लुंड उसकी छूट की अंदर डाले होय .............. महीन को अपनी ओर्गास्म को ाच्य सी एन्जॉय करनी का टाइम दी रहा था .............
जैसी hi महीन का ओर्गास्म ख़तम होआ तो विनोद न्य दोबारा सी महीन की चुदाई शुरू क्र दी .......... अब उसकी धक्कों की रफ़्तार तेज़ हो गए थी .......... और वह ज़ोर ज़ोर सी अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर बहार क्र रहा था ............ कभी उसकी होंठों को चूमनी लगता तो कभी उसकी मम्मों को चूसनी लगता ................ महीन जैसी हसीं लड़की की जिसम का भरपूर मज़ा लय रहा था ................ अपनी मोटे लम्बे लुंड सी ........ उसकी छूट की अंदर डाले होय ........... उसी छोड़ती होय .............
आधा घंटा तक विनोद महीन को छोड़ता रहा ............... और इस दौरान महीन एक बार और जहर गए ............... और आखिर जब विनोद की लुंड न्य अपनी पानी महीन की छूट मैं गिराना शुरू क्या तो महीन एक बार फिर सी झाड़ गए ........ और विनोद की जिसम सी लिपट गए ........... आंखें बंद क्र की ............ लम्बी लम्बी सांसें लेती होइ ............. अपनी छूट की मसल्स सी विनोद की लुंड को निचोड़ती होइ ................. उसकी लुंड की पानी का आखरी क़तरा तक अपनी छूट सी चूसती होइ .............. विनोद भी निढाल हो की उसकी ऊपर था अब ................ और जब पूरा पानी महीन की छूट मैं गिरा दया तो महीन की जिसम सी नीची लुरख गया ........... अपनी लुंड को महीन की छूट सी निकालती होय .......... और उसकी बिलकुल साथ लेट की लम्बे लम्बे सांस लेनी लगा ............... ऐसी hi लेते लेते दोनों की आँख लग गए ................
सुबह महीन की आँख पहली खुली ............. उसनी इधर उधर देखा और खुद को विनोद की बैडरूम मैं ........ उसकी बीएड पर ........ उसकी साथ नंगी लेते होय पाया ............... वह विनोद की तरफ देख क्र वीर्य सी मुस्करा दी ........... और आहिस्ता सी बीएड सी उठ गए .............. बीएड पी देखा तो वह पी टिश्यू पेपर्स रखी होय थय ........... उसकी छूट सी बाह क्र निकालनी वाला विनोद की लुंड का पानी उन टिश्यू पेपर्स पी गिर की उन मैं जज़ब हो चूका होआ था ........ महीन की नज़र बीएड सी नीची फेंकी होय टिश्यू पेपर्स पी भी पारी ......... महीन समझ गए की रात को उसकी आँख लगनी की बाद विनोद न्य टिश्यू पेपर्स सी hi उसकी छूट साफ़ क्र दी थी ......... और फिर टिश्यू पेपर्स hi उसकी छूट की नीची रख डाई थय ............ महीन विनोद की ऐसी उसकी केयर करनी पर मुस्करा दी ....... और प्यार सी विनोद की तरफ देखनी लगी ..... विनोद सो रहा था .... उसकी चेहरी सी होती होइ महीन की नज़र विनोद की लुंड की तरफ गए ........... मगर उसी मायूसी होइ ........ विनोद का लुंड नहीं देख सकीय ........ क्यों की विनोद रात को किसी वक़्त शॉर्ट्स पहन चूका होआ था .......... खुद तो शॉर्ट्स पहन लीन ...... मुझी भी पहना देता ........ मुझी ऐसी hi सुलाय रखा साड़ी रात अपनी पास ...... महीन शर्मा गए ........... और अपना नाईट ड्रेस उठा की खामोशी सी विनोद की बैडरूम सी निकल गए ............... नहानी की लय ...........
नाहा धू क्र महीन अपना टॉवल अपनी नंगी जिसम पी लपेटी होय बहार आई .............. और विनोद की रूम मई जा की उसी जगानी लगी ...........
महीन ........ विनोद ............ विनोद ....... उठ जाओ देर हो रही है ऑफिस की लय ............. महीन अपनी गीले बलून को हल्का हल्का झटकी होय उन का पानी विनोद की चेहरी और उसकी नंगे जिसम पी गिराती होइ बोली
विनोद न्य आंखें खोल की महीन को देखा ............. महीन न्य उसी मुस्करा की गुड मॉर्निंग बोलै ..............
विनोद भी मुस्कराया ............ और महीन की नंगी जिसम को सिर्फ उस छोटी सी टॉवल सी दांम्पय होय देख की उसी महीन का ऐसी जगाना ाचा लगा .............. महीन की गीले बलून सी पानी अभी भी विनोद की ऊपर टपक रहा था .....
विनोद ............ बुहत प्यारी लग रही हो महीन इस तरह ............
महीन मुस्कराई ........... ज़्यादा बातें नहीं करो और उठ की तैयार हो जाओ जल्दी सी ........ वर्ण ऑफिस सी लेट हो जाईं गए .......... जल्दी आओ मैं नाश्ता बना रही हों जा की ............
लेट हो रहा था ऑफिस का टाइम तो महीन न्य अपनी कपड़े पहन न्य टाइम लगानी की बजाय उसी टॉवल मैं लिपटे होय किचन मई जा की नाश्ता बनाना शुरू क्र दया ............. और विनोद की नहा की निकालनी तक वह टेबल पी ब्रेकफास्ट लगा चुकी होइ थी .................... थोड़ी hi देर मैं विनोद भी अपनी निचली जिसम पी टॉवल बाँधी होय टेबल पी आज्ञा .......... दोनों एक दूसरी को इस हालत मैं देख की मुस्कराय .............. और बिना कुछ और बोले नाश्ता करनी लगी ................. नाश्त्य की बाद दोनों न्य तैयारी की और अपनी ऑफिस की लय निकल गए .......................