महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 7 - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

जैसी hi महीन का हाथ विनोद की लुंड को छूआ तो उसकी जिसम मैं करंट सा दौड़ गया ........... उसने अपना हाथ विनोद की लुंड सी हटा लय ......... यह पहला मौका था की उसका हाथ विनोद की लुंड सी टच होआ था ........ हलकी वह तीन बार विनोद सी चुद चुकी होइ थी ......... तीन बार इसी लुंड को अपनी नाज़ुक सी छूट मैं लय चुकी थी ........ इसी लुंड की माज़ी लय चुकी थी ....... इस लुंड की ज़ुलम भी सेह चुकी थी ............ मगर अभी तक उसकी लुंड को देखना तो क्या छूआ भी नहीं था .............. मगर अब जैसी hi उसका हाथ टच होआ था तो उसकी जिसम मैं करंट सा दौड़ गया था .......... विनोद की लुंड की लम्स सी ......... और उसनी अपना हाथ हटा लय था ...........

विनोद न्य फिर सी उसका हाथ पकड़ा और अपनी लुंड पी रख की महीन की कान मैं बोलै ................ महीन इसी पाकर लो pleaseeeeeeeeeeeeeeeee ..........

महीन उसकी रिक्वेस्ट पी कुछ नहीं बोली ....... मगर अब की बार उसनी अपना हाथ विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया ........... विनोद न्य महीन की हाथ की मुठी अपनी लुंड पी बना दी ......... अब विनोद का मोटा लुंड महीन की नाज़ुक सी हाथ की मुठी मैं था ......... उसकी कॉटन शॉर्ट्स की ऊपर सी ........... और महीन का शर्म की मारी बुरा हाल हो रहा था ....... दूसरी तरफ विनोद का हाथ महीन की छूट को सहला रहा था उसकी कॉटन पजामी की ऊपर सी .......... महीन का जिसम और दिल पूरी तरह सी अब विनोद का साथ दी रहा था ............ उसनी भी अपनी हाथ की ग्रिफ्ट विनोद की लुंड पी टाइट क्र दी थी ......... विनोद का हाथ अपनी हाथ की ऊपर सी हटनी की बाद भी अपना हाथ उसकी लुंड सी नहीं हटाया .............

विनोद थोड़ा सा बीएड सी उठती होय महीन की नंगी सीने पर झुक गया .......... और अपनी होंठ महीन की निप्पल पी रख डाई .......... हल्का सा उसी किश क्र दया ...... और जैसी hi विनोद न्य अपनी जुबां की नौक की साथ महीन की निप्पल को टच क्या तो महीन की होंठों सी सिसकारी सी निकल गए ............. और साथ hi विनोद की लुंड पी उसकी हाथ की गृप और भी सख्त हो गए ...... विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता अपनी जुबां की नौक सी महीन की गुलाबी निप्पल को सहलाना शुरू क्र दया ....... महीन की आंखें बंद हो रही थीं ....... और वह विनोद की लुंड को अपनी हाथ सी आहिस्ता आहिस्ता महसूस करनी लगी ......... जैसी जैसी उसका हाथ विनोद की लुंड को फील क्र रहा था ...... वैसी वैसी उसी अंदजा हो रहा था की विनोद का लुंड आसिफ की लुंड सी ज़्यादा मोटा और लम्बा है ........ इस बात का अहसास तो उसी उस वक़्त hi हो गया था जब विनोद न्य अपना लुंड पहली बार उसकी छूट की अंदर डाला था .......... मगर अब वह अपनी हाथ की साथ भी उसी कन्फर्म क्र रही थी ........... uuuuuufffffffffffffff ............ कितना मोटा और लम्बा है यह विनोद का ............ मुझी तो यक़ीन hi नहीं हो रहा की मैं इसी तीन बार अपनी अंदर लय भी चुकी हों ......... तीन बार अपनी अंदर लय चुकी हों और अभी तक इस लुंड को देखा भी नहीं है ............ हाहाहा ............. महीन खुद hi सोच रही थी .......... ऊऊफफफफफफफ ........... इम्पॉसिबल ........... इतना बारे कैसी मेरी अंदर जा सकता है ....... लकिन चला तो गया न ........ और फिर दर्द भी तो इतना ज़्यादा होआ था न ........... मगर इस वक़्त तो फिर सी मेरी छूट गीली हो रही है ....... पानी चोर रही है .......... जैसी वह फिर सी इसी लुंड को अपनी अंदर मांग रही है ...... इस मोटे लुंड की आदत तो अब बनानी hi पारी गई ....... अब तो कभी भी मुझी विनोद चोरनी वाला नहीं है जब तक हम दोनों यहाँ हैं .......... ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ ....... क्या करों मैं ............ मुझ सी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है ............. यह सुब आसिफ सी दूर रहंय की वजह सी होआ है .......... आखिर मेरी भी तो जिसम की ....... मेरी छूट की प्यास है न ........ तो कैसी मैं 16 मंथ तक बिना अपनी जिसम की आवाज़ को सुने रह सकती हों ............ aaaaaaahhhhhhhhhhhhh ............. sssssssssssssssssssss ............ महीन की होंठों सी एक सिसकारी निकल गए ............ और उसका पूरा जिसम कैंम्प सा गया ............... क्यों की विनोद न्य अपनी हाथ को महीन की पाजामे की अंदर डालती होय अपनी ऊँगली महीन की छूट की अंदर दाल दी थी ............... गीली छूट की अंदर .............. जिस सी महीन का पूरा जिसम झटकी लय रहा था .............

महीन की बर्दाश्त और कण्ट्रोल अब ख़तम हो रहा था .......... वह खुद भी छह रही थी की विनोद एक बार फिर सी अपनी इसी मोटे लुंड को उसकी छूट मैं दाल दी ........... और उसी छोड़ की उसकी छूट की प्यास बुझा दी ................. महीन उसकी लुंड को खुद सी hi अपनी थिगह पी रगड़ रही थी ........... और विनोद महीन की छूट की अंदर अपनी ऊँगली अंदर बहार कृत्य होय महीन की होंठों को किश क्र रहा था .............

महीन टर्पी ............. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ............... sssssssssssssssssss............ ooooooooooooooo ................ Vinoooooooooooddddddddddddd .................... plzzzzzzzzzzzzzzzzz नहीं kroooooooooooooooooooo ............. aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh

मगर विनोद कहाँ सुन रहा था ........ वह तो महीन की छूट की अंदर अपनी ऊँगली अंदर बहार क्र रहा था ........ और अपनी अंगोट्य सी उसकी छूट की दांय को रगड़ रहा था ............... जिस सी महीन की हालत और भी ख़राब होती जा रही थी ............. हल्की सी बल्ब की रौशनी मई महीन का जिसम विनोद की बीएड पी थय .......... विनोद का हाथ महीन की पजामी मैं .............. और उसकी होंठ महीन की होंठों पी थय ........... और महीन का ऊपरी जिसम बिलकुल नंगा था ............... उसकी खूबसूरत तनय होय मम्मी और भी तन की खरी होय थय ............ और महीन का पूरा जिसम hi हिल रहा था ......... तरप रहा था ........... मचल रहा था ....................... उसकी हाथ मैं विनोद का लुंड था जैसी वह अपनी मुठी मैं दबा रही थी ........ जैसी जैसी उसकी छूट की अंदर हलचल बढ़ती जा रही थी वैसी वैसी उसकी ग्रिफ्ट और सख्त होती जा रही थी विनोद की लुंड पी ...........

विनोद न्य महीन की पाजामे को नीची को सिरकाना शुरू क्र दया ........ महीन न्य भी अपनी गांड को ऊपर उठा क्र उसी अपना पजामा उतारनी दया ............. पजामा महीन की घुटनो तक आया तो उस सी ाग्य महीन न्य खुद अपनी टांगों और पैरों को हरकत देती होय अपनी पैरों सी निकाल दया ............ और पैरों की हरकत सी उसका पजामा कहाँ गया इसका न महीन को पता था और ना hi इस बात की कोई फ़िक्र थी ............ अब महीन का पूरा जिसम ........ बिलकुल नंगा .......... हलकी हलकी रौशनी मई विनोद की बीएड पी पारा होआ चमक रहा था .............. महीन का हाथ अभी बह विनोद की लुंड पी था ........ उसकी पाजामे की ऊपर सी hi ........... जैसी वह अब ज़ोर ज़ोर सी दबा रही थी ............ विनोद अब महीन की हालत को समझ रहा था ............. उसकी तरप को समझ रहा था ....... उसकी जिसम की ....... उसकी छूट की ज़रूरत को समझ रहा था ............ उसी महीन की हालत का अंदाज़ा उसकी छूट सी रिसती होय पानी को देख की हो रहा था ...........

विनोद न्य आहिस्ता सी करवट ली और महीन की ऊपर आज्ञा ............. अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखा और उसी किश करनी लगा ........ साथ hi नीची सी अपनी लुंड को अपनी पाजामे की अंदर सी hi महीन की छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया .......... विनोद का सख्त लुंड और कॉटन शॉर्ट्स की महीन की छूट पी रगड़ उसकी हालत को और भी ख़राब क्र रही थय ............... लुंड का टोपा महीन की छूट की दांय को रगड़ रहा था .......... और महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं .......... वह तरप रही थी ........... अपनी टांगों को विनोद की जिसम की गिर्द दाल रही थी ........ और अपनी बाँहों को उसकी गर्दन मैं दाल चुकी होइ थी ............ और विनोद की किश करनी मैं उसका भरपूर साथ दी रही थी ............ वह भूल चुकी होइ थी की थोड़ी देर पहली वह खुद विनोद को मन क्र रही थी की उसी आज उस सी नहीं छोड़ना ........ मगर विनोद की हाथों की जादू और उसकी लुंड की शून्य सी महीन अपना इरादा तोड़ चुकी होइ थी ........ और वह जानती थी की अब उसी विनोद का लुंड अपनी अंदर लय बिना सुकून नहीं अन्य वाला ...........

विनोद का लुंड महीन की छूट को रगड़ रहा था ....... और उसकी छूट सी निकालनी वाला पानी उसकी पाजामे को भिगो रहा था .......... गीला क्र रहा था .............. महीन की होंठों सी निकालनी वाली सिसकार्यं विनोद की कानून मैं जलतरंग की तरह गूँज रही थीं ............ और उसी अपनी नीची तड़पता होआ देख क्र विनोद को ाचा लग रहा था ....... उसी ाचा लग रहा था की महीन जैसी फैथ्फुल ........ और पर्दा दार लड़की को वह अपनी नीची लितानी ............ अपनी लुंड की आदि बनानी ........ और उसी छोड़नी मैं कामयाब हो गया है ............. जब सी वह महीन की ब्रांच मई आया था तब सी उसकी नज़र थी महीन पी .......... लकिन उसी कभी इस बात का यक़ीन नहीं था की वह कभी महीन को छोड़ पाय गए ........... लकिन अब सुब कुछ हो चूका होआ था ......

विनोद न्य हाथ नीची लय जा की अपना पजामा अपनी जिसम सी नीची सिरकाया ........ और उसी उतारनी लगा ....... जैसी hi पजामा उसकी गांड सी नीची गया तो विनोद का लुंड नंगा हो की महीन की छूट सी तक्राण्य लगा ............. गरम गरम लुंड अपनी गरम गरम प्यासी छूट सी टच होती hi महीन की जिसम मैं करंट सा दौड़ गया ........... और उसनी अपनी निचली जिसम को फौरन hi ऊपर उठा दया ........ अपनी छूट को विनोद की लुंड की तरफ बढ़ाती होय ........ विनोद की मोटे लुंड को अपनी छूट की अंदर लेनी की कोशिश कृत्य होय ....................

विनोद न्य अपनी नंगी लुंड को महीन की छूट की ऊपर रखा और रगड़नी लगा ........... साथ hi महीन की निप्पल को अपनी मुंह मैं लय और उसी चूसना शुरू क्र दया .......... महीन इस दो तरफ़ा तैसिंग को बर्दाश्त नहीं क्र पा रही थी ............ अपनी बहून को विनोद की गर्दन की गिर्द टाइट करती होइ siskiiiiiiiiii .............. Vinodddddddddddddd ........................ pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ........... ना tarpaaooooooooooooooooooooooooo .................. naheeeeeeeeeeeeee kroooooooooooooooooooooooooo plzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz ............

विनोद महीन की होंठों पी किश कृत्य होय बोलै .............. मैं तो कुछ भी नहीं क्र रहा महीन ................

महीन आंखें बंद की होय टर्पी ................ करूऊऊऊ नाआआआ plzzzzzzzzzzzzzzz ...............

विनोद महीन की चेहरी पी मौजूद बी चैनी और बी करारी को देख की मुस्कराया ............. क्या करों महीन .............. और साथ hi नीची सी फिर सी अपनी लुंड को महीन की छूट की दांय पी रगड़ दया .............

महीन टर्पी ............ और अपनी छूट को ऊपर की तरफ उठाया ....... जैसी विनोद का लुंड अपनी छूट की अंदर लेना चाहती हो ............. मगर विनोद तो अपना लुंड उसकी छूट मैं दाल hi नहीं रहा था ........... महीन मुंह सी नहीं बोल रही थी मगर अपनी जिसम की हरकत सी विनोद को इशारा दी रही थी की वह अपना लुंड उसकी छूट की अंदर दाल दी .............

अपनी जिसम की आग ........ और छूट की तरप सी मजबूर हो क्र महीन न्य अपना हाथ नीची बढ़ाया और विनोद का लुंड ........ नंगा लुंड पहली बार अपनी हाथ मैं पाकर लय ........ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ........ कितना गरम हो रहा था वह लुंड ....... जैसी आग की भट्टी सी लोहे की रोड को गरम क्र की निकला हो ........ कपड़ों सी बहार आ की और भी मोटा लग रहा था ......... और भी लम्बा ...... मगर इस वक़त महीन को उसकी लम्बाई और मोटाई सी ज़रा भी दर नहीं लग रहा था ...... उसनी विनोद की लुंड को अपनी हाथ सी पाकर की खेंचा और उसी अपनी छूट पी रगड़नी लगी ......... आंखें बंद होती जा रही थीं उसकी .... और वह उस मूसल को अपनी छूट पी रगड़ रही थी ...... घिस रही थी ...... उसकी मोटे बल्ब को अपनी छूट की सूराख मैं डालनी की कोशिश क्र रही थी .......... मगर विनोद तो कुछ भी नहीं क्र रहा था न ...... बस महीन की हालत की मज़े लय रहा था .......

महीन सिसकी ............. Vinoooooooooooooodddddddddddddddd ......... plzzzzzzzzzzzzzzzzz

विनोद फिर बोलै ............. बताओ न महीन क्या करना है मुझी ........

महीन अपनी आंखें बंद रखी होय आखिर सिसक hi पारी ........... विनोद ............... अंदर क्र दो .................

विनोद मुस्कराया ............. क्या अंदर क्र डॉन ........... कहाँ अंदर क्र डॉन ...........

महीन उसकी कमर को नोचती होइ बोली .......... मत तडपाओ pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ....................... ऐसा नहीं krooooooooooo .............

विनोद उसकी कान मैं अपनी जुबां की नौक फैरता होआ बोलै ............ पर तुम न्य तो कहा था की आज रात को नहीं करना है .............

महीन का शर्म सी बुरा हाल हो रहा था ........... और अपनी छूट की आग सी भी ................ अब करना है ............ वह वीर्य सी बोल पाई ..........

विनोद अपनी लौड़ी की टोपे को महीन की छूट की सूराख पी रखती होय उसकी कान मैं बोलै ............. फिर सी दर्द हो गए वहां ...............

महीन .............. mmmmmmmmmmmmmmm होनी doooooooooo

विनोद अपनी लुंड को थोड़ा सा महीन की छूट की अंदर पुश कृत्य होय बोलै ................... बर्दाश्त क्र लो गई ..............

महीन विनोद की लुंड को अपनी टाइट छूट की अंदर आता होआ महसूस क्र की जैसी एक लज़्ज़त की लहर मैं डूबनी लगी ........... haannnnnnnnnnn .......... क्र लोन geeeeeeeeee ...................

विनोद न्य अपनी लुंड को थोड़ा सा और ाग्य क्या महीन की छूट मैं .............. पूरा या आधा ............

महीन टर्पी ........ अपनी छूट को ऊपर को उछालती होइ बोली ........... pooooooraaaaaaaaaaaaaaaaaaaa .................

विनोद अपनी लुंड को और भी ाग्य कृत्य होय बोलै ........... बुहत बारे है ............ लय लो गई न ..............

महीन न्य अपनी दोनों पेअर विनोद की कमर की गिर्द लापित्य और उसी अपनी जिसम की तरफ खींचती होइ टर्पी ........... hhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaannnnnnnnnnnnnnnnnnnnn ............ krrrrrooooooooooooooooooo

विनोद न्य अब उसी और तडपाना मुनासिब नहीं समझा ............ और अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करनी लगा ....... हल्की हॉकी धक्कों की साथ महीन की छूट को छोड़नी लगा ........... थोड़ी hi देर मैं उसका पूरा लुंड महीन की छूट की अंदर बहार हो रहा था ...... पूरा लुंड जड़ तक महीन की छूट मैं उतर जाता ............ अंदर जा की महीन की बचा दानी की मुंह सी टकराता और फिर उसी विनोद बहार को खींच लेता ............ पिच्य को सिरका लेता ............. लज़्ज़त सी महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं ........... और वह तरप रही थी .......... विनोद का गरम मोटा लुंड उसकी छूट को पूरा खोलता होआ अंदर तक जा रहा था .............. उसकी मोटे लुंड की रगड़ सी महीन की छूट और भी पानी चूर्ण शुरू हो गए थी .............. जैसी hi विनोद न्य महीन की छूट की अंदर 3-4 ढक्की लगाय तो महीन की छूट न्य एक बार पानी चोर दया ............... उस रात का पहला ओर्गास्म हो गया महीन को ............... उसका जिसम झटकी लय रहा था ............. और वह निढाल होती जा रही थी ................. विनोद की नीची ................ विनोद भी रुक गया होआ था अपना लुंड उसकी छूट की अंदर डाले होय .............. महीन को अपनी ओर्गास्म को ाच्य सी एन्जॉय करनी का टाइम दी रहा था .............

जैसी hi महीन का ओर्गास्म ख़तम होआ तो विनोद न्य दोबारा सी महीन की चुदाई शुरू क्र दी .......... अब उसकी धक्कों की रफ़्तार तेज़ हो गए थी .......... और वह ज़ोर ज़ोर सी अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर बहार क्र रहा था ............ कभी उसकी होंठों को चूमनी लगता तो कभी उसकी मम्मों को चूसनी लगता ................ महीन जैसी हसीं लड़की की जिसम का भरपूर मज़ा लय रहा था ................ अपनी मोटे लम्बे लुंड सी ........ उसकी छूट की अंदर डाले होय ........... उसी छोड़ती होय .............

आधा घंटा तक विनोद महीन को छोड़ता रहा ............... और इस दौरान महीन एक बार और जहर गए ............... और आखिर जब विनोद की लुंड न्य अपनी पानी महीन की छूट मैं गिराना शुरू क्या तो महीन एक बार फिर सी झाड़ गए ........ और विनोद की जिसम सी लिपट गए ........... आंखें बंद क्र की ............ लम्बी लम्बी सांसें लेती होइ ............. अपनी छूट की मसल्स सी विनोद की लुंड को निचोड़ती होइ ................. उसकी लुंड की पानी का आखरी क़तरा तक अपनी छूट सी चूसती होइ .............. विनोद भी निढाल हो की उसकी ऊपर था अब ................ और जब पूरा पानी महीन की छूट मैं गिरा दया तो महीन की जिसम सी नीची लुरख गया ........... अपनी लुंड को महीन की छूट सी निकालती होय .......... और उसकी बिलकुल साथ लेट की लम्बे लम्बे सांस लेनी लगा ............... ऐसी hi लेते लेते दोनों की आँख लग गए ................

सुबह महीन की आँख पहली खुली ............. उसनी इधर उधर देखा और खुद को विनोद की बैडरूम मैं ........ उसकी बीएड पर ........ उसकी साथ नंगी लेते होय पाया ............... वह विनोद की तरफ देख क्र वीर्य सी मुस्करा दी ........... और आहिस्ता सी बीएड सी उठ गए .............. बीएड पी देखा तो वह पी टिश्यू पेपर्स रखी होय थय ........... उसकी छूट सी बाह क्र निकालनी वाला विनोद की लुंड का पानी उन टिश्यू पेपर्स पी गिर की उन मैं जज़ब हो चूका होआ था ........ महीन की नज़र बीएड सी नीची फेंकी होय टिश्यू पेपर्स पी भी पारी ......... महीन समझ गए की रात को उसकी आँख लगनी की बाद विनोद न्य टिश्यू पेपर्स सी hi उसकी छूट साफ़ क्र दी थी ......... और फिर टिश्यू पेपर्स hi उसकी छूट की नीची रख डाई थय ............ महीन विनोद की ऐसी उसकी केयर करनी पर मुस्करा दी ....... और प्यार सी विनोद की तरफ देखनी लगी ..... विनोद सो रहा था .... उसकी चेहरी सी होती होइ महीन की नज़र विनोद की लुंड की तरफ गए ........... मगर उसी मायूसी होइ ........ विनोद का लुंड नहीं देख सकीय ........ क्यों की विनोद रात को किसी वक़्त शॉर्ट्स पहन चूका होआ था .......... खुद तो शॉर्ट्स पहन लीन ...... मुझी भी पहना देता ........ मुझी ऐसी hi सुलाय रखा साड़ी रात अपनी पास ...... महीन शर्मा गए ........... और अपना नाईट ड्रेस उठा की खामोशी सी विनोद की बैडरूम सी निकल गए ............... नहानी की लय ...........

नाहा धू क्र महीन अपना टॉवल अपनी नंगी जिसम पी लपेटी होय बहार आई .............. और विनोद की रूम मई जा की उसी जगानी लगी ...........

महीन ........ विनोद ............ विनोद ....... उठ जाओ देर हो रही है ऑफिस की लय ............. महीन अपनी गीले बलून को हल्का हल्का झटकी होय उन का पानी विनोद की चेहरी और उसकी नंगे जिसम पी गिराती होइ बोली

विनोद न्य आंखें खोल की महीन को देखा ............. महीन न्य उसी मुस्करा की गुड मॉर्निंग बोलै ..............

विनोद भी मुस्कराया ............ और महीन की नंगी जिसम को सिर्फ उस छोटी सी टॉवल सी दांम्पय होय देख की उसी महीन का ऐसी जगाना ाचा लगा .............. महीन की गीले बलून सी पानी अभी भी विनोद की ऊपर टपक रहा था .....

विनोद ............ बुहत प्यारी लग रही हो महीन इस तरह ............

महीन मुस्कराई ........... ज़्यादा बातें नहीं करो और उठ की तैयार हो जाओ जल्दी सी ........ वर्ण ऑफिस सी लेट हो जाईं गए .......... जल्दी आओ मैं नाश्ता बना रही हों जा की ............

लेट हो रहा था ऑफिस का टाइम तो महीन न्य अपनी कपड़े पहन न्य टाइम लगानी की बजाय उसी टॉवल मैं लिपटे होय किचन मई जा की नाश्ता बनाना शुरू क्र दया ............. और विनोद की नहा की निकालनी तक वह टेबल पी ब्रेकफास्ट लगा चुकी होइ थी .................... थोड़ी hi देर मैं विनोद भी अपनी निचली जिसम पी टॉवल बाँधी होय टेबल पी आज्ञा .......... दोनों एक दूसरी को इस हालत मैं देख की मुस्कराय .............. और बिना कुछ और बोले नाश्ता करनी लगी ................. नाश्त्य की बाद दोनों न्य तैयारी की और अपनी ऑफिस की लय निकल गए .......................
 
अपडेट NO: 25

ऑफिस मैं टिया ब्रेक तक सुब को महीन और विनोद की बीच होय ने सम्बन्ध का पता चल चूका होआ था ........ टिया ब्रेक मैं निक भी अपनी कॉफ़ी लेंय की लय आया तो उस सी भी महीन की मुलाक़ात होइ ............ निक न्य महीन को देखा ..... तो वीर्य सी मुस्करानी लगा ...... माइनि खैज़ नज़रों सी उसी देखती होय .............. उसकी नज़रों को देखती होय महीन समझ गए की उसी भी उसकी और विनोद की दरम्यान जो होआ उसका पता चल चूका है ................ यह बात सोच क्र निक की नज़रों का मतलब समझती होइ महीन शर्मा गए .............. निक उसकी क़रीब आया .....

निक ........ Hi महीन ...... हाउ अरे यू

महीन ... ी ऍम okay सर ...

निक ..... that's गुड ...... टुडे यू अरे लुकिंग फ्रेश एंड ग्लोइंग ........ अन्य स्पेशल रीज़न ........ निक महीन को तैसे कृत्य होय बोलै ........

महीन उसकी बात को सुन की शर्मा गए ....... वह निक का मतलब समझ रही थी ......... मगर अब उसी क्या जवाब देती ....... no ... नथिंग स्पेशल सर .....

निक मुस्कराया ..... okay .......... एन्जॉय योरसेल्फ ........ यह कहती होय निक अपनी ऑफिस की तरफ चला गया और महीन न्य सुख का लम्बा सांस लय .....

चाय पी कारन भी आया लकिन ज़्यादा बात नहीं की और खामोशी सी अपना चाय का कप लय क्र अपनी टेबल पी चला गया ........ बजाय टिया रूम मैं बेथ की चाय पीने की ............ उसकी जांय की बाद........... . नीतू और जेनी दोनों मिल की महीन को तैसे क्र रही थीं ............ विनोद को तो किसी न्य कुछ न कहा ........ मगर महीन की षर्मान्य और लजानी की वजह सी उसी ज़्यादा तंग करती रहीं ...........

नीतू .......... हे जेनी ........ महीन और विनोद एक हनीमून ट्रिप प्लान क्र रही हैं ........ थिस वीकेंड पी ........

जेनी ....... ववव ........... यह तो बुहत अछि बात है ...... इन लोगो को जाना भी चाहिए .......... एक दूसरी को समझनी का और एन्जॉय करनी का टाइम मिली गए ............

महीन शर्मा रही थी ............... मुझी यह सुब ठीक नहीं लग रहा ......

जेनी ........... महीन एक्चुअली यह तुम्हारा पहला मौका है न अपनी हस्बैंड की इलावा किसी भी दूसरी मर्द की साथ रिलेशनशिप मैं अन्य का इस लय तुम को थोड़ा उन कम्फरर्टेबले लग रहा है ......... लकिन यह सिर्फ चाँद दिंनोन की बात है फिर तुम दोनों एक दूसरी की साथ बिलकुल कफोटाब्ले हो जाओ गए .......... और यह हनीमून ट्रिप भी इस सुब मैं काफी हेल्पफुल हो गए ............

नीतू मुस्कराई ......... और महीन को तैसे करती होइ बोली ........... जेनी ..... महीन तो अब तक भी काफी कम्फर्टेबले हो चुकी होइ है विनोद की साथ .......... मैं न्य कल देखि थी इन दोनों की केमिस्ट्री ............

जेनी हंसी ........ बी थे वे यू तवो अप्पेअर तो बे ा वैरी ब्यूटीफुल एंड कम्पेटिबल कपल ............ बिलकुल मैच ..........

महीन जेनी की बात सी शरमाई .......... लकिन दिल hi दिल मैं खुश भी होइ ............... और एक नज़र विनोद की तरफ देखा ....... जो उन सी दूर डेन की साथ बैठा होआ था ...........

जेनी फौरन hi बोली ........ लुक लुक ..... हाउ इस शी लुकिंग ात हेर लवर ...... हहहहह ............ नीतू भी हंसनी लगी ........ और महीन भी शर्माती होइ उनकी साथ मुस्करानी लगी ............

जेनी ........ बी थे वे महीन यू अरे वैरी लकी .......... की तुमको विनोद जैसा हैंडसम बॉयफ्रेंड मिला है ............ ी होप यू अरे एंजोयिंग हिज कंपनी ............. ऍम ी राइट ...... ?

महीन न्य शर्माती होय आहिस्ता सी हाँ मैं सर हिला दया ..........

जेनी ....... महीन तेल्ल में हाउ वास् योर फर्स्ट नाईट विथ विनोद ....... ???

महीन मुस्कराई ........ और शर्माती होइ बोली ....... ना मैं कोई वर्जिन हों और ना hi मेरी विनोद सी शादी होइ है ........... जो मेरी उसकी साथ पहली नाईट स्पेशल होती ...........

जेनी हंसी ........ no no ........ no वे ....... तुम ऐसी बातें क्र की बच नहीं सकती ............ ठीक सी बताओ की कैसा होआ सुब कुछ ........ वर्ण तुमको पता है न की मैं जा की विनोद सी पूछ लोन गई ........

महीन घबरा गए ........ और फिर हंस पारी ........ तहत वास् गुड ..........

जेनी ...... बेटर थान विथ योर फर्स्ट नाईट विथ योर हस्बैंड .... ???

महीन शर्माती होइ ...... यस .... मच बेटर ....... विनोद इस मच केयरिंग ........ एंड मच लोविंग ........

जेनी ........ इस हे बिग्गेर थान योर हस्बैंड ...... ???

महीन ..... शरमाती होइ ..... हम्म्म .......... बिग्गेर ..

जेनी ........ फिर तो दर्द भी होआ हो गए ...........

महीन ....... हाँ ........ बुहत ........

जेनी ........ ओनली नाउ यू कैन क्नोव तहत थे बिग्गेर इस ऑलवेज बेटर ........

महीन न्य भी मुस्करा की हाँ मैं सर हिला दया ........

जेनी महीन की कान की पास अपनी होंठ ला की व्हिस्पर करती होइ बोली ............ महीन ........... विनोद मिगहत बे बिग ..... बूत हे कैन नेवर बे बिग्गेर थान Nick's बिग गन ................... हहहहए

महीन का चेहरा उसकी बात सुन की लाल हो गया ........ नीतू और जेनी उसकी हालत देख की हंसनी लगीं .......

महीन ........... जेनी ...... हैवे यू टोल्ड निक आल्सो ........... ??

जेनी महीन को आँख मारती होइ बोली .......... यस ....... एंड बिलीव में हे वास् सो मच हैप्पी एंड एक्ससिटेड ............. और फिर उसकी कान की पास मुंह लय जा की आहिस्ता सी बोली ......... एंड हे इस वेटिंग फॉर हिज टर्न ........... हहहहए ........

महीन को उसकी बात पी और भी शर्मिंदगी होनी लगी ..... और उसी निक की नज़रें याद अन्य लगीं .............

नीतू बोली ..... हे जेनी ... don't सकारे हेर ..... it's जस्ट बेगिनिंग फॉर हेर ........ अभी देर लगी गई इसी निक की लय रेडी होनी मैं ........

महीन शरमाई और उनको जवाब देती होइ बोली ..... no वे ....... ी don't वांनै दिए इन सम ॉवर्ड वे ........ हहहह

तीनों हंसने लगीं ........ और फिर महीन और विनोद की हनीमून ट्रिप की लय मुनासिब जगा डिसकस करनी लगीं ......... जेनी न्य उनको लंदन सी ऑउटस्कर्ट्स मैं एक लेक एरिया का बताया ........... महीन यू विल एन्जॉय थे प्लेस ........... आईटी इस सो गुड एंड फुल ऑफ़ नेचर ........... वैरी गुड एनवायरनमेंट एंड गुड शॉपिंग माल्स ........... अद्दिश्नालय तेरे इस ा ब्यूटीफुल लेक ............ यू वोउल्ड फेल इन लव विथ थे प्लेस ...............

महीन को भी दिलचस्पी होनी लगी ........... जेनी न्य विनोद को भी बुला लय और उनको उस जगा का बताया .......... फिर जेनी न्य hi कॉल क्र की महीन और विनोद की लय वहां की एक रिसोर्ट मैं एक रूम बुक करवा दया .......... उनको थर्सडे की शाम को चेक इन करना था ........... संडे तक की लय .................. महीन भी अब काफी कम्फर्टेबले और खुश थी .......... उसी आसिफ की साथ कहीं पर भी हनीमून की लय जांय का मौका नहीं मिला था अपनी घर की कन्सेर्वटिवे माहोल की वजह सी ....... मगर उसकी दिल मैं यह खवाहिश और यह कम्मी ज़रूर रह गए थी की वह हनीमून को एन्जॉय नहीं क्र सकीय ............ और अब उसी लाइफ मैं एक और मौका मिल रहा था अपनी लाइफ मैं रह जांय वाली कम्मी को पूरा करनी का ............ और वह भी विनोद जैसी हैंडसम, खूबसूरत, पावरफुल और केयरिंग मर्द की साथ .............. पहली हनीमून की लय जांय की झिझक उसकी ख़तम हो चुकी थी ............. और उसकी जगा एक्ससिटेमेंट न्य लय ली थी ...............

जेनी ........... विनोद ी होप यू तवो विल फुल्ली एन्जॉय थे सीनरी ऑफ़ नेचर ............... don't कीप स्टेइंग इन बीएड विथ महीन आल थे टाइम ............ हाहाहा ............... नीतू भी हंसनी लगी और महीन शर्मा गए ........

जेनी ........ और हाँ वहां महीन को शॉपिंग भी करवाना ....... ी थिंक महीन को अब अपनी कन्सेर्वटिवे अत्तिरे सी बहार आना चाहिए और यहाँ की माहोल मैं ढल जाना चाहिए .......... महीन तरय तो बे लिखे तहत .............

महीन न्य होले सी अपनी सर को हिला दया ............... और फिर अपनी टेबल पी काम करनी लगी ............. वह महसूस क्र रही थी की कारन कुछ खींचा खींचा सा है ........ कुछ साद साद ............... एक बार वह कोई फाइल लय की उसकी केबिन मैं गए ............. तो उस सी पूछी बिना ना रह सकीय .......

महीन ........ कारन ..... तुम ठीक तो हो न ........ क्या होआ है आज तुमको ....

कारन न्य महीन की आँखों मैं देखा और उदास लेहजी मैं बोलै ........ कुछ नहीं ............ लकिन तुम तो खुश हो न ...........

महीन थोड़ा झीणम्प गए ........... हाँ मैं खुश हों ............ लकिन तुम अपना बताओ न .......... कोई प्रॉब्लम है क्या ....

कारन .......... तुम मेरी प्रोब्लेम्स को चोरो ...... और विनोद की साथ अपना हनी मून एन्जॉय करो ........... हे इस ा लकी गाए ............

महीन थोड़ा शरमाई और अपनी टेबल पी आगये ................. और थोड़ा कारन की बातों को सोचनी लगी समझनी की कोशिश करनी लगी ....... उसकी बेहेवियर को ........... की जैसी ........ की जैसी उसी उसका विनोद की साथ मिलना और उसकी साथ हनीमून की लय जाना पसंद ना आया हो ............. महीन को कारन की ाचा या बुरा लगनी सी कोई फरक परण्य वाला नहीं था ........... क्यों की वह तो विनोद को प्यार करनी लगी थी .......... दिल सी चाहंय लगी थी ............... लकिन उसी इस बात की हैरत हो रही थी की कारन को क्यों ाचा नहीं लग रहा ............. कहीं वह भी तो उसी पसंद नहीं करनी लगा ............. यह बात सोच की महीन मुस्करा दी ............. अब हर कोई तो मुझी पसंद करता है तो मैं अब किसी को रोक तो नहीं सकती न ............. महीन दोबारा सी अपनी काम मैं लग गए ............. लकिन एक ायरत होनी की हैस्यत सी वह कारन की नज़रों और उस की उदासी को समझ रही थी ......... उसी याद आ रहा था की कैसी कारन हमेशा उसकी हेल्प करनी की लय उसकी इर्दगिर्द मदलाता रहता था ........... मगर वह तो सिर्फ विनोद की ख्यालों मैं थी तो उसी कैसी किसी और की तरफ देखनी की फुर्सत मिलती ...... मगर आज उस पी थोड़ा असर होआ था कारन की उदासी का .......

ऑफिस सी घर अन्य की बाद विनोद बोलै ....

विनोद ...... तो फिर कैसा रहा आज का तुम्हारा दिन ......

महीन हंसी ...... उउउउउउफफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ......... जेनी और नीतू न्य तो मेरा सर hi खा लय आज ...... मुझी तैसे क्र क्र की .......

विनोद हंसनी लगा .........

महीन ....... हाँ तो और क्या ...... वह तो ऐसी मुझी तैसे क्र रही थीं जैसी की मैं न्य तुम सी शादी hi क्र ली है ..... और अब सुच मैं hi हम पति पत्नी हैं .........

विनोद उसी अपनी बहून मैं भर्ती होय बोलै ...... तो क्या ख्याल है लय hi न लाइन हम फेरे मंडप मैं जा की ...........

महीन उसकी बहून मैं कसमसाई ....... और उसकी नाक को अपनी उंगलयों मैं लय की पिंच करती होइ बोली ....... वह ..... बरी जल्दी है मुझी अपनी पत्नी बनानी की ........

विनोद महीन की होंठों को किश कृत्य होय बोलै ....... हाँ बिलकुल है ..........

महीन उसकी होंठों पी किश बैक करती होइ बोली ........ अभी भी कुछ ज़रूरत बाक़ी है क्या फैरी लेंय की .......... बना तो लय है मुझी तुम न्य अपनी पत्नी ...... बिना फेरों की hi ......

और दोनों एक दूसरी की बहून मैं कुछ देर किश कृत्य रही ..... और फिर चेंज क्र की खाना कहानी लगी ........

वीक की बाक़ी दिन लॉन्ग वीकेंड और शार्ट हनीमून ट्रिप की तैयारी मैं hi लग गए ............ ऑफिस और घर मैं बस इसी बात पी डिस्कशन होती ........... महीन भी अब काफी एक्ससिटेड थी ........... मगर जो मुश्किल विनोद को पेश आ रही थी वह यह थी की महीन न्य अब विनोद को हनीमून ट्रिप तक अपनी क़रीब अन्य सी रोक दया था ........ वह रात को अपनी बैडरूम मैं अलग सोती थी ..... आज नाईट पी भी वही बहस हो रही थी ..........

विनोद ....... प्लीज महीन ........... आज तो क्र लेनी दो न ........ इतनी दिन हो गए हैं न ............

महीन ............. तो क्या होआ .......... पहली भी तो इतनी दिन बिना कए रुकी hi थय न ........... और अब एक दिन सबर नहीं होता क्या ............. कल शाम को तो हम न्य वहां जाना hi है .......... फिर वह जा की तुम कोनसा मुझी चोरनी वाली हो .............. महीन मुस्कराई ..........

विनोद ........ ठीक है ........ वहां जा की देखना मैं पूरा बदला लून गए तुम सी ...........

महीन मुस्कराई ........... हाँ लय लेना बदला .......... जैसी दिल क्रय .............

एहि तो महीन चाहती थी की इतनी दिन विनोद उसकी लय तड़पता रही ....... और वह खुद भी ........... ताकि हनीमून पी वह लोग खुल की एन्जॉय क्र सकें ............ महीन न्य महसूस क्या था की जब सी उसका विनोद की साथ रिलेशनशिप शुरू होआ था ......... अब वह पहली की निस्बत ज़्यादा खुश और फ्रेश रहंय लगी थी ................ खिली खिली सी .......... क्यों की अब उसी आसिफ की कमी फील नहीं होती थी ............... हाँ दूसरी तीसरी दिन आसिफ सी बात हो जाती थी उसकी ............... खुद सी hi उसकी तरफ सी भी कॉल्स मैं वक़्फ़ा बढ़ता जा रहा था ............... लकिन ऐसा नहीं था की वह आसिफ को भूल रही थी .......... या उसकी मोहब्बत काम हो रही थी ........... लकिन एक नए मर्द का साथ उसकी जीवन मैं नए रंग भर रहा था ............
 
अस पैर माय प्रॉमिस एक अपडेट हाज़िर इ खिदमत है

उम्मीद है दोस्तों को पसंद आय गए

और तशनगी ख़तम हो जाय गई अब नेक्स्ट अपडेट की लय

और उम्मीद है की मुझी कुछ वक़्त दी दया जायी गए दोस्तों की तरफ सी ............

पिंकबाबी
 
अपडेट NO: 26

थर्सडे को ऑफिस टाइम ख़तम होनी की बाद सुब न्य महीन और विनोद को उनकी ट्रिप की लय विश क्या ........... और फिर अपनी अपार्टमेंट जा की खाना कहानी की बाद दोनों अपनी बैग्स लय की ........... ट्रैन सी जाती होय महीन और विनोद नेचर की ब्यूटी को एन्जॉय क्र रही थय ........ बुहत hi खूबसूरत मनाज़िर थय वहां की ........ ग्रीनरी hi ग्रीनरी और खूबसूरती ............. 2 घंटी की जर्नी की बाद वह अपनी रिसोर्ट पी पोहंची ........

बुहत खूबसूरत और ाचा रिसोर्ट था ........... बुहत ज़्यादा बारे नहीं था मगर इर्दगिर्द काफी ग्रीन हिल्स थीं .......... अंदर hi एक स्विमिंग पूल भी था ........... चेक इन करनी की बाद महीन और विनोद अपनी रूम मैं पोहंची ........... सामान रखती hi विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं भर लय .......... और उसकी होंठों को किश करनी लगा ........... वहां की एनवायरनमेंट और सिचुएशन का असर था की महीन भी विनोद का साथ देंय लगी ........ उसकी होंठों को किश करनी लगी ........... विनोद महीन की होंठों को चूसती होय उसको किश क्र रहा था .......... और महीन उसकी सर की बलून मैं हाथ फैरती होय उसका साथ दी रही थी ........... उसकी बूब्स विनोद की सीने की साथ दबी होय थय ........... महीन को विनोद की सीने की साथ लग्न बुहत ाचा लग रहा था ....... वह अपनी बूब्स को और भी विनोद की सीने पी दबा रही थी ...........

कुछ देर किश करनी की बाद महीन विनोद सी अलग होइ ....... और सोफे पर बेथ क्र कमरे का जायज़ा लेनी लगी ............ काफी बारे और कुशादा और साफ़ सुथरा रूम था ........ विंडो बहार हिल्स की तरफ खुलती थी ........ वाशरूम ........ ड्रेसिंग टेबल ......... सिटींग सोफे .......... सुब कुछ था .............. महीन वहीँ टेबल पी रखा होआ रिसोर्ट का ब्रॉउचर उठा की देखनी लगी ............. जिस मैं दिंनिंग हॉल, बार, स्विमिंग पूल, स्पा, गयम एरिया, मिनी सिनेमा थेटर्स और पता नहीं क्या क्या मेंशन था ...........

महीन ........ काफी ाचा रिसोर्ट है यह ........ काफी फैसिलिटीज दी रही हैं यह ......... और सुब की सुब कम्पलेंनेट्री हैं .....

विनोद ........ हाँ ....... ाचा है ...... हम हर फैसिलिटी को ावैल करें गए ..........

महीन और विनोद फ्रेश होय ....... महीन न्य एक फिटिंग ट्रॉउज़र और शार्ट कमीज पहन ली ....... जो की उसकी हिप्स को कवर क्र रही थी और हाफ तइस तक जा रही थी ........... विनोद न्य एक टी शर्ट और जीन्स पहनी ......... और फिर दोनों डिनर की लय दिंनिंग हॉल मैं चली गए .............. दिंनिंग हॉल का भी बुहत ाचा माहोल था ........ बुहत hi रोमांटिक ............. हलकी हलकी लाइट और बुहत hi ाचा सा म्यूजिक ........... चाँद एक कपल्स और भी वह पी मौजूद थय .......... और सुब लवर्स hi लग रही थय ............. उन दोनों की तरह ...........

खाना खाती होय विनोद बोलै ........... महीन देखो तो लग रहा है की यह सुब लोग भी यहाँ हनीमून मनानी hi आय होय हैं ............

महीन भी उनकी तरफ देख की मुस्करा दी ............ खाना कहानी की बाद दोनों रिसोर्ट मैं घूमनी लगी ............. स्विमिंग पूल की गिर्द वाक करनी लगी ........... बुहत ाचा माहोल लग रहा था .......... एक दो कपल्स वहीँ पर स्विमिंग पूल की किनारी चेयर्स पी बैठी होय थय ........ और बातें क्र रही थय या किसिंग क्र रही थय .............. महीन न्य उनको देखा तो चलती होय विनोद की थोड़ा क़रीब हो क्र आहिस्ता सी उसकी बाज़ू की नीची सी हाथ दाल की उसकी बाज़ू को पाकर लय ........... जैसी वाइफ अपनी हस्बैंड की बाज़ू मैं बाज़ू दाल की चलती है .......... ...... विनोद न्य महीन की तरफ देखा और मुस्कराया ............ महीन भी उसकी तरफ देख क्र मुस्करा दी ............ और विनोद न्य उसका हाथ होले सी दबा दया .................... थैंक्स महीन ............. वह बोलै .............

महीन चलती होइ अपना सर विनोद की कंधी पी रखती होइ बोली ........ वह किस लय ...........

विनोद ........ मुझी कंपनी देंय की लय ...........

महीन न्य हौली सी विनोद की शोल्डर को उसकी शर्ट की ऊपर सी hi चूमा और बोली .............. थैंक्स तो तुम्हारा बनता है मेरी ज़िन्दगी मैं यह नया चेंज लानी और नए रंग भरनी की लय .............. दोनों मुस्करानी लगी ............. विनोद न्य महीन का चेहरा अपनी हाथों मैं लय और उसकी आँखों मैं देखती होय अपनी होंठ उसकी होंठों पी रख डाई ............... और उसी किश करनी लगा ............. महीन भी विनोद की मोहब्बत मैं डूबी होइ थी ............ वह भी उसका साथ देंय लगी .......... बिना यह सोची की वह इस वक़्त कहाँ पर है ............ माहोल की खूबसूरती और रमने का इफ़ेक्ट उस पी हो रहा था ......... विनोद महीन की कमर को सहलाती होय उसी किश क्र रहा था ....... उसकी हाथ महीन की ब्रस्सिएर की बेल्ट्स और स्ट्रैप्स को फील क्र रही थय ......... और विनोद की हाथ हमेशा की तरह महीन की जिसम पी अपना जादू चला रही थय ....... चाँद लम्हों तक वह किश करती रही फिर अचानक सी वह विनोद सी अलग हो गए .........

विनोद .......... क्या होआ ........

महीन .......... ओह्ह्ह माय गोवूड ........ यह तुम यहीं शुरू हो गए ओपन मैं hi .............

विनोद मुस्कराया ........... तो क्या होआ ........ यहाँ तो सुब लोग hi यही कुछ क्र रही हैं .......... कोई किसी की तरफ नहीं देखता ...........

महीन मुस्करा दी और उसका हाथ थामी ाग्य चलनी लगी .......... इस तरह ओपन मैं .......... पब्लिक मैं महीन का यह पहला किश था ........... और उसी यह ाचा भी लगा था ................ थ्रिलिंग और एनर्जेटिक ..........

दोनों फिर सी ाग्य चलनी लगी ......... थोड़ा दरख्तों की पास आ की विनोद न्य एक बार फिर सी महीन को किश करना शुरू क्र दया ........ महीन न्य ऐतराज़ नहीं क्या .......... उसी भी ाचा लग रहा था यौन चुप चुप की किसिंग करना ............ उसी लग रहा था की जैसी वह कोई मैरिड लड़की नहीं बल्कि कॉलेज स्टूडेंट हो जो अपनी बॉयफ्रेंड की साथ चुप चुप की यह सुब क्र रही हो .............. उसी अपनी कॉलेज की फ्रेंड्स की बातें याद आ रही थीं ........ वह इन बातों का ज़िकर करती रहती थीं ........ मगर महीन को कभी भी इन सुब की करनी की हिम्मत नहीं होइ थी ........... अपनी कन्सेर्वटिवे माहोल की वजह सी ............ और वैसी भी उसी घर सी यही सिखाया गया होआ था की यह सुब ग़लत है ......... मगर अब जब वह खुद यह सुब क्र रही थी इस सुब का मज़ा चख रही थी तो उसी अंदाज़ा हो रहा था इस सुब मई किस क़दर मज़ा है ......... और वह क्या ख़ास चीज़ अपनी लाइफ मई मिस करती रही है ............ इन्ही सुब का मज़ा लेती होय महीन विनोद को किश क्र रही थी ओपन मैं .......... और विनोद की हाथ भी महीन की जिसम पी फिसल रही थय ....... उसी सहला रही थय .......... महीन की जज़्बात भी मचलना शुरू हो गए थय ....... उसका जिसम भी गरम होनी लगा था ........... आखिर वह भी तो इन दिंनोन की इन्तिज़ार मैं खुद को इतनी दिन सी विनोद सी दूर रख रही थी ...............

थोड़ी देर की बाद विनोद खुद hi महीन सी अलग होआ ....... और महीन न्य शर्माती होय उसको देखा और फिर ाग्य को चल पारी ....... वापिस रिसोर्ट की अंदर आ की मुख्तलिफ एरियाज को देखनी लगी .......... महीन न्य अंदर आ की विनोद का बाज़ू चूर्ण चाहा मगर विनोद न्य उसी ऐसी hi रखनी को बोलै ......... महीन को ऐसी सुब की सामन्य विनोद का बाज़ू पाकर की चलती होय शर्म आ रही थी ........ मगर फिर वह खामोशी सी उसकी साथ चलनी लगी ....... उनको दिंनिंग एरिया की इलावा वह पी गयम एंड स्पा का बोर्ड लगा हो नज़र आया ....... उस एरिया मैं इस वक़त कोई नहीं था ....... स्पा मैं शायद अंदर कोई मौजूद हो .......... फिर उनको एक आरा मैं मिनी सिनिमा थिएटर का बोर्ड दिखा ........... उन्हों न्य सोच लय की अगली दिंनो मैं वह स्टे की दौरान वह एक साथ मूवी भी ेंजो करें गए ........... फिर उनको बार एरिया नज़र आया .........

महीन बार सी ाग्य जांय लगी ......... क्यों की उसी एक्सपेक्टेड नहीं था की वह लोग वहां अंदर जैन गए ........... मगर विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और उसी बार की अंदर लय जांय लगा ......

महीन ...... आर्य यहाँ कहाँ जा रही हो .......

विनोद ........ आर्य अंदर देखें तो सही कैसा माहोल है ......

महीन उसकी साथ अंदर दाखिल हो गए .......... बुहत hi रोमांटिक और इरोटिक माहोल था ........ रंग बृंगी लाइट्स धीमी धीमी जल रही थीं ............ हल्का हल्का म्यूजिक ों था ......... लकिन कोई दज वाघ्यारा नहीं था ......... मुख्तलिफ टेबल्स लगी होइ थीं ...... जिन पी कपल्स बैठी होय ड्रिंक क्र रही थय ....... कुछ लोग बार काउंटर की साथ ऊंची बार चेयर्स पी बैठी ड्रिंक क्र रही थय ........... एक तरफ थोड़ा दूर कार्नर मैं डांस फ्लोर था ....... जिस पी और भी हलकी रौशनी थी .......... और कुछ कपल्स वहां पी बुहत hi होले होले डांस कृत्य होय झूम रही थय ......... यह महीन का पहला मौका था किसी बार ..... या शराब कहानी मैं अन्य का ............ लकिन पता नहीं क्यों उसी वहां का माहोल कुछ ज़्यादा बुरा भी नहीं लगा था ............. बल्कि वहां का रोमांटिक माहोल उसी ाचा लग रहा था ............ विनोद न्य उकसा हाथ पकड़ा और उसी एक कार्नर मैं खाली टेबल की तरफ लय जांय लगा .........

महीन न्य थोड़ी सी रेजिस्टेंस की ........ क्यों .. यहाँ किस लय .... चलो यहाँ सी ........

विनोद ..... आर्य क्या हो गया है .... कुछ नहीं होता ..... जस्ट एन्जॉय करो यहाँ की एनवायरनमेंट को .........

महीन उसकी साथ खींचती होइ चलती होइ बोली ....... लकिन यहाँ तो सुब लोग शराब पी रही हैं .......

विनोद बोलै ..... तो क्या होआ पीनी दो उनको ...... कोई हमको ज़बरदस्ती तो पिलानी सी रहा .........

महीन खामोशी सी उसकी साथ जा की टेबल पी बेथ गए ...... फिर विनोद उठ की बार काउंटर पी गया ...... और दोनों की लय सॉफ्ट ड्रिंक्स लय आया ........... महीन और विनोद बातें कृत्य होय और बार मैं इधर उधर देखती होय सॉफ्ट ड्रिंक एन्जॉय करनी लगी ........

महीन ...... विनोद तुम भी ड्रिंक कृत्य हो क्या ........

विनोद महीन की आँखों मैं देखती होय बोलै ........हाँ बस कभी कभी .......

महीन न्य नज़रें नीची झुका लीन और नीची देखनी लगी ...... तो इतनी दिन सी यहां आ की क्यों नहीं ड्रिंक की ......

विनोद महीन सी नज़रें चुराती होय ...... बस वैसी hi ....

महीन समझ गए की वह उसकी वजह सी यहाँ आ की ड्रिंक नहीं क्र रहा था ......... वह मुस्कराई ....... वैसी hi या मेरी वजह सी .....

विनोद आहिस्ता सी मुस्कराया ......... हम्म्म्म ..... तुम को ाचा नहीं लगता......... और तुम उनकंफर्टबले हो जाती न ..... इसलय .......

महीन को विनोद का यह जेस्चर भी ाचा लगा ....... की उसकी खातिर उसनी ड्रिंक्स भी नहीं ली थी इतनी दिन सी ...........

महीन ......... विनोद आज अगर आप चाहो तो लय सकती हो थोड़ी ड्रिंक्स .....

विनोद महीन की तरफ देखनी लगा ....... अरे यू सूरे महीन ... ??

महीन मुस्कराई ....... और हाँ मैं सर हिलाया ........ लकिन ज़्यादा नहीं ......... की आउट ऑफ़ कण्ट्रोल hi हो जाओ ........ और हाँ मुझी स्मेल नहीं आणि चाहिए इसकी ........

विनोद मुस्कराया ......... नहीं नहीं इतनी नहीं लून गए ..... और जो यहाँ मिलती है उसकी स्मेल बुरी नहीं होती ........

वह मुस्कराती होय उठा और बार सी जा की अपनी लये एक बियर लय आया ....... उसनी महीन को कोई ऑफर नहीं की ना उसी पीनी को बोलै ........ विनोद का यह अंदाज़ भी महीन को ाचा लगा ......... की वह उसकी साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं क्र रहा है ........... बियर पीती होय विनोद बोलै ..........

विनोद ....... महीन ....... बेबी .... डांस फ्लोर पी चलें ......

महीन नहीं उसी बेबी बोलनी पी मुस्कराती होय उसकी तरफ देखनी लगी .......... मुझी डांस करना नहीं आता .......

विनोद न्य बियर का आखरी घूँट लय और उठ क्र महीन का हाथ पकड़ा और उसी उसकी सीट सी खरा क्र की फ्लोर की तरफ लय जाती होय बोलै ....... तो क्या होआ ...... वहां कोनसा कोई मैं तुमको डांस कम्पटीशन मैं लय जा रहा हों ........... महीन खिलखिला की हंसती होइ उसकी साथ डांस फ्लोर पी आगये ......

2 कपल्स और भी वहां हल्की हल्की म्यूजिक पी डांस क्र रही थय .... डांस क्या था बस हल्का हल्का ठरक रहे थय म्यूजिक पी .... एक दूसरी की साथ चिपकी होय ....... विनोद न्य महीन की कमर मैं हाथ डाला और उसका एक हाथ अपनी कंधी पी रख की उसकी साथ आहिस्ता आहिस्ता लेहकनी लगा ....... महीन भी म्यूजिक की ले की साथ आहिस्ता आहिस्ता हिल रही थी ......... विनोद का क़ुरब उसी ाचा लग रहा था ........ वह विनोद की आँखों मैं hi देख रही थी ......... जहाँ उसी किसी लवर की तरह अपनी लय प्यार दिख रहा था ........ विनोद न्य महीन की आँखों मैं देखती होय झुक क्र आहिस्ता सी अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई ......... महीन इर्दगिर्द की माहोल को अब इग्नोर क्र रही थी ....... उसनी विनोद को किश करनी दया ....... और खुद भी किश मैं उसका साथ देंय लगी ....... विनोद आहिस्ता आहिस्ता महीन की होंठ चूस रहा था ...... उनको सूचक क्र रहा था ..... विनोद की हाथ महीन की कमर को सहला रही थय ....... उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स और बेल्ट्स को फील क्र रही थय ........... फिर उसका हाथ महीन की कमर सी फिसलता होआ उसकी हिप्स की उभार पी चला गया होआ था ..... जिनको वह आहिस्ता आहिस्ता दबा रहा था और सहला रहा था ...... उसकी हिप्स को दब्बत होआ अपनी तरफ खींच रहा था ....... विनोद की तोउसेर मैं एकरा होआ उसका लुंड महीन की छूट सी टकरा रहा था ..... उसी प्रेस क्र रहा था .......... sssssssssssssss ..... aaaaahhhhhhhhhhhh........ महीन की मुंह सी हलकी सी सिसकारी निकल गए ......... महीन को भी ाचा लग रहा था विनोद का उसकी जिसम की साथ ऐसी खेलना ... ..... इर्दगिर्द दूसरी लोग होनी की वजह सी उसी थोड़ी शर्म आ रही थी ...... मगर वह सुब लोग भी उसी हालत मई hi थय ......... किसिंग कृत्य होय और एक दूसरी की साथ चिपकती होय ...........

कुछ देर डांस करनी की बाद दोनों वापिस अपनी टेबल पी ाग्य ....... महीन बुहत खुश थी ........ विनोद न्य एक और बियर ली और फिर ड्रिंक कृत्य होय दोनों अपनी रूम की तरफ जांय लगी .........
 
रूम का दरवाज़ा बंद कृत्य साथ hi विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं भर लय और उसी किश करनी लगा ......... महीन भी बुहत ाच्य मूड मैं थी ........... वह उसका साथ देंय लगी ........ विनोद महीन को लय होय सोफे पी जांय लगा ...........

महीन ......... बेबी थोड़ा सबर तो क्र लो

विनोद ...... नहीं होता सबर मेरी जान ......

विनोद महीन को अपनी तइस पी बिठा की उसकी होंठों को किश करनी लगा .......... महीन को विनोद की मुंह सी बियर की स्मेल आ रही थी ........ पहली तो महीन को अजीब सी लगी ...... मगर बुरी नहीं ...... अछि स्मेल थी ........ इसलय महीन न्य उसी पिच्य हटनी को नहीं बोलै ........

महीन बोली ......... मुंह खोलना ज़रा .......

विनोद न्य हैरानी सी महीन की तरफ देखा ....... और फिर अपना मुंह खोल दया ......... महीन न्य अपना मुंह उसकी खुली होय मुंह की क़रीब ला की अपनी नाक सी एक लम्बा सांस खींचा ......... विनोद की मुंह सी बियर की स्मेल उसकी अंदर जांय लगी ......... बुरी नहीं थी ....

महीन बोली ..... नॉट बाद ......... और मुस्करा दी .....

विनोद खुश होआ की महीन को उसका बियर पीना बुरा नहीं लगा ...... उसनी अपनी होंठ महीन की होंठों पी रख डाई और उसी किश करनी लगा .......... महीन भी किश करनी मैं उसका साथ देंय लगी .......... उसकी होंठों को चूसती होय ........ विनोद न्य अपनी जुबां महीन की मुंह की अंदर डाली ......... जैसी महीन न्य चूसना शुरू क्र दया अपनी होंठों मैं लय की ...... तभी महीन को अपनी मुंह मैं अजीब सा टास्ते घुलता होआ महसूस होनी लगा ........... विनोद की मुंह सी उसकी पी होइ शराब का ज़ाइक़ा महीन की मुंह मई जा रहा था ....... महीन थोड़ा हिचकिचा रही थी ........ उस सी पिच्य हटना चाहती थी ...... मगर विनोद का जोश और उसकी दीवानगी देखती होय उसी ाचा नहीं लगा की वह विनोद को पिच्य हटा दी .........

महीन को अजीब सा ज़ाइक़ा फील हो रहा था ....... मगर इतना बुरा भी नहीं था ...... आहिस्ता आहिस्ता ाचा लगनी लगा ........ पता नहीं क्यों ........ उसी अहसास हो रहा था की यह शराब का टास्ते है जो विनोद की मुंह सी उसकी अंदर आ रहा है .......... मगर महीन अब खुद सी hi आहिस्ता आहिस्ता विनोद की जुबां को चूसनी लगी ....... जैसी वह शराब उसकी जुबां सी hi निकल रही हो ......... आंखें बंद क्र की विनोद की जुबां को चूसती होय महीन न्य अब अपनी जुबां विनोद की मुंह की अंदर दाल दी ...... और उसकी जुबां की ऊपर ....... और मुंह मैं इधर उधर घुमान्य लगी ........ उसकी मुंह मैं उसकी पी होइ शराब का टास्ते ढ़ूंढ़नी की लय ..........

विनोद की हाथ महीन को किश कृत्य होय उसकी कमर पी सिरक रही थय ........ सहला रही थय ............ फिर उसनी महीन की शर्ट को पकड़ा और उसी ऊपर उठानी लगा ....... उसकी जिसम सी अलग करनी की लय ..........

महीन न्य हलकी सी मज़ाहिमत की ......... विनोद लाइट्स ऑफ क्र दो प्लीज .........

विनोद ..... नहीं आज मैं फुल लाइट मई तुम को देखना चाहता हों ......... जो आज तक नहीं देखा ........

महीन शर्मा गए ..... और आहिस्ता सी अपनी बाज़ू ऊपर उठा डाई ........ और दोनों की होंठ एक दूसरी सी अलग होय ....... और अगली hi लम्हे विनोद न्य महीन की शर्ट उतार की सोफे पी फेंक दी .......... अब महीन रेड कलर की ब्रस्सिएर और ट्रॉउज़र मई थी ....... उसका गोरा गोरा जिसम विनोद की बहून मैं कमरे की फुल लाइट मैं चमक रहा था ......... और बुहत hi सेक्सी लग रहा था ............ विनोद की नज़रें महीन की सीने पर थीं ...... उसकी बूब्स रेड कलर की ब्रा मैं तनय हो थय ....... बुहत खूबसूरत क्लीवेज बना रही थय .......... चिकना सुफैद जिसम बुहत सेक्सी लग रहा था ............ विनोद महीन की जिसम को देखता रहा ..... और फिर एक हाथ सी उसकी नंगी जिसम को सहलानी लगा ...... दूसरी हाथ सी उसनी अपनी क़रीब राखी होइ बियर की चैने उठाई और महीन की आँखों मैं देखती होय एक बारे सा घूँट भर लय ....... और महीन को hi देखती होय उसी अपनी हलक़ सी उतार लय ........... महीन यह सुब देख रही थी ......... विनोद की होंठों पर भी बियर लगी होइ नज़र आ रही थी ....... उसकी होंठ हलकी सी शराब सी चमक रही थय .......

विनोद न्य महीन की गर्दन पी हाथ रखा ....... और उसकी चेहरी को फिर सी अपनी तरफ खींचनी लय ......... आहिस्ता सी ........ और अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखनी लगा ........ विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य हलकी सी रेजिस्टेंस दिखाई ............ उसकी होंठों और मुंह मैं बियर की वजह सी ........ मगर फिर आहिस्ता सी अपनी होंठ विनोद की होंठों की क़रीब लय आई ........... विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों सी टच कए ... मगर उसी किश नहीं ... बल्कि आहिस्ता आहिस्ता अपनी गीले होंठों को महीन की होंठों पी पहिरण्य लगा ........ अपनी होंठों सी महीन की नरम नरम होंठों को सहलानी लगा ......... महीन की पूरी जिसम मैं मस्ती की लहराईं दौड़ रही थीं विनोद की इस अंदाज़ मैं उसकी होंठों को टच करनी सी ........ विनोद की गीले होंठों सी हलकी हलकी शराब महीन की होंठों पी लग रही थी ....... फिर महीन को पता नहीं क्या होआ की ......... विनोद की आँखों मैं देखती होय महीन न्य अपनी जुबां थोड़ी सी बहार निकाली और उसी विनोद की होंठों पी पहिरण्य लगी .......... जैसी वह उसकी होंठों पी लगी होइ उस बियर को चाट रही हो ......... उसका ज़ाइक़ा लेना छह रही हो ......... विनोद को भी ाचा लग रहा था ..... वह अपनी होंठों को महीन की सामन्य कए होय बीटा था ...... महीन अपनी जुबां को उसकी होंठों पी फेर रही थी ..... लिपस्टिक की तरह .........

फिर विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों सी लगा डाई ..... और उसको किश करनी लगा ......... . विनोद उसी किश क्र रहा था ........ अपनी होंठों पर लगी होइ बियर महीन की होंठों पी लगा रहा था ......... ग़ैर महसूस अंदाज़ मैं ............. और फिर अपनी होंठों को महीन की होंठों की दरम्यान दी दया ............ उसकी चूसनी की लय ........ सूचक करनी की लय ................... विनोद की मुंह सी बियर की स्मेल महीन को आ रही थी .......... मगर वह अपनी मुंह को पिच्य नहीं हटा रही थी ........

महीन न्य एक फिर सी विनोद की आँखों मैं देखा ....... और आहिस्ता आहिस्ता उसकी होंठों को सूचक करनी लगी ...... चूसनी लगी ........... उसकी होंठों पी लगी होइ बियर अब महीन की मुंह की अंदर जा रही थी ....... महीन को पता नहीं क्यों उसका ज़ाइक़ा बुरा नहीं लग रहा था ............ महीन न्य अपनी जुबां को फिर सी थोड़ा सा बाहिर निकाला और विनोद की होंठों पी पहिरण्य लगी ............... विनोद को भी यह सुब ाचा लग रहा था ........... कुछ hi देर की बाद विनोद न्य अपनी जुबां को अपनी होंठों सी बहार निकाल दया ..... महीन की ाग्य ....... महीन न्य उसकी तरफ देखती होय अपनी जुबां बहार निकाल और दोनों की जीब एक दूसरी सी तक्राण्य लगीं ...... बहार hi सहलानी लगीं ....... फिर विनोद न्य अपनी जुबां को महीन की होंठों की अंदर दाल दया .......... और महीन उसकी जुबां को अपनी होंठों की साथ चूसनी लगी ........ विनोद की जुबां पी मौजूद बियर को सूचक करनी लगी ............ यह जानती होय भी की यह शराब है ........ जो उसकी फेथ मैं हराम है ........... ग़लत है .............. मगर फिर भी वह उसी सूचक क्र रही थी ........ यही सोच क्र की वह तो सिर्फ विनोद की होंठों को किश क्र रही है ........... डायरेक्ट तो शराब नहीं पी रही न ........ वह तो विनोद की ख़ुशी की लय सुब क्र रही थी ...... उसकी प्यार मैं ....... विनोद महीन की नंगी कमर को सहलाती होय कभी खुद महीन की जुबां को चूसनी लगता ........... और कभी अपनी जुबां उस सी चूस्वांय लगता ..............

कुछ देर की किसिंग की बाद महीन न्य अपनी होंठ विनोद की होंठों सी हटाय ............... और दोनों एक दूसरी की आँखों मैं देखनी लगी .......... महीन अपनी जुबां अपनी होंठों पी फेर रही थी ........

विनोद महीन को देख रहा था ....... अपनी तइस पी बैठी होइ ........ विनोद न्य महीन की ब्रा की ऊपर सी उसकी बूब्स पी हाथ फैरना शुरू क्या और बोलै ............... महीन .......... मुझी अभी तक यक़ीन नहीं हो रहा की तुम्हारा यह संग इ मर्मर जैसा हसीं बदन मेरी बहून मैं है ...........

महीन अपनी जिसम की तारीफ सुन क्र शरमाई और मुस्कराई ........... विनोद की नाक को अपनी ऊँगली और अंघूटी की बीच मैं पिंच करती होइ बोली ............. तो फिर जनाब को कैसी यक़ीन आय गए .............

विनोद न्य महीन की कमर को सहलाती होय अपनी हाथ सी बारी hi एक्सपर्ट तरीक़ी सी महीन की ब्रस्सिएर की हुक को खोल दया और ाग्य सी उसकी ब्रस्सिएर को महीन की बूब्स पर सी हटाती होय बोलै ............ ऐसी ........

महीन भी खिलखिला की हंसनी लगी .......... और जल्दी सी अपनी हाथ अपनी दोनों नंगी हो रही बूब्स पी रख दी ............ और अपनी रेड कलर की ब्रस्सिएर को अपनी बूब्स पर सी हटनी सी रूक लय ............. प्लीज विनोद ....... लाइट्स ऑफ क्र दो न .............. मुझी शर्म आती है ..........

विनोद महीन की दोनों कलयाओं को पकृत्य होय बोलै ........... बेबी हमारी बीच की एहि शर्म तो ख़तम होनी चाहिए अब हमारी इस हनीमून पी ............

यह कहती होय विनोद न्य महीन की हाथ उसकी माम्मूण सी हटा डाई ........ और उसकी बूब्स को नंगा क्र दया .............. महीन न्य अपनी बूब्स पर सी अपनी हाथ हटा की अपनी आँखों पी रख लये ............. शर्माती हो .............. अब पहली बार फुल लाइट्स मैं महीन की खूबसूरत बूब्स विनोद की आँखों की सामन्य थय ........... इतनी बार विनोद सी चुद जांय की बावजूद आज पहली बार महीन का ऊपरी जिसम फुल लाइट्स मैं विनोद की नज़रों की सामन्य आया था .............. और वह फुल लाइट मैं ........... कमरे मैं फैली होइ सुफैद रौशनी मैं ............. महीन की बी दाग़ गूरी सुफैद जिसम को देख रहा था ................ जिस पी उसी एक भी निशाँ नहीं दिख रहा था .............. महीन की सीने की उभार और उनकी ऊपर गुलाबी निप्पल दोनों hi तनय होय थय .............

विनोद न्य महीन को सोफे पर बिठाया ...... और खुद उसकी ऊपर झुक की अपनी होंठ उसकी निप्पल पी रखी और उनको किश करनी लगा .............. फिर विनोद न्य महीन की निप्पल्स को अपनी उंगलयों मैं लय और मसल दया ............ महीन न्य सिसक क्र अपनी आँखों सी हाथ हटाया .......... और विनोद की तरफ देखनी लगी .......... आहिस्ता तो करो न ........... वह बोली .............

विनोद मुस्करा दया ......... और फिर महीन की बूब्स और निप्पल्स पी जुबां पहिरण्य लगा ........... उसकी बूब्स की दरम्यानी लकीर को किश करनी लगा ........ चैतन्य लगा ............ फिर उसी कुछ ख्याल आया तो उसनी बियर चैने उठाया ........ और उस मैं सी थोड़ी सी बियर महीन की बूब्स की दरम्यान गिरा दी ........... ठंडी बियर की टच होती hi महीन का जिसम कैंम्प उठा ........ aahaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ............ मममममममम ....... साथ hi विनोद न्य अपनी जुबां उस जगा राखी और बियर को चैतन्य लगा ........ महीन की जिसम की ऊपर सी ...............

महीन ........ विनोद यह क्या क्र रही हो ............. गन्दा क्र रही हो मेरी जिसम को शराब की साथ .............

विनोद .......... डार्लिंग कुछ गन्दा नहीं हो रहा ............ मैं साफ़ तो क्र रहा हों न ............ इस शराब का नशा और भी बढ़ रहा है तुम्हारी जिसम पी गिरानी सी

महीन उसकी बात पी हंस पारी ............. विनोद न्य फिर थोड़ी सी बियर महीन की निप्पल्स पी भी गिराई .......... और उसी चाट लय ............. और निप्पल्स को चूसनी लगा .............. महीन को इस सुब मैं अलग hi मज़ा आ रहा था ............... ाचा लग रहा था ............ विनोद का ठंडी ठंडी बियर का उसकी जिसम पी गिराना ............. और फिर अपनी अपनी गरम गरम जीब सी उसी चाट लेना ................ महीन की छूट तक सनसनाहट सी हो रही थी ............

महीन थोड़ा लेट सी गए होइ थी सोफे पर ........ विनोद महीन की बूब्स सी नीची उसकी पते को चूमती होय नीची अन्य लगा ........... विनोद न्य महीन की ट्रॉउज़र को पकड़ा और उसी नीची उतारनी लगा ........... महीन न्य आहिस्ता सी अपनी हिप्स को ऊपर उठा दया ........ और विनोद न्य महीन की ट्रॉउज़र को उसकी जिसम सी अलग क्र दया .......... अब नीची महीन की रेड कलर की पंतय थी ........... विनोद न्य झुक क्र महीन की पंतय की ऊपर सी hi उसकी छूट पी अपनी होंठ रखी और उसी किश क्र दया .......... महीन का जिसम कांम्पा और वह फिर सी मुस्करा दी ............
 
विनोद महीन की तइस की अंदर की साइड को चूम रहा था ........ किश क्र रहा था .......... वेट किश ........ और छूट को उसकी पंतय की ऊपर सी चूम रहा था ............. विनोद न्य फिर सी बियर का चैने उठाया और अब की बार बियर महीन की छूट की ऊपर गिरानी लगा .......... उसकी पंतय की ऊपर सी hi ........... बियर महीन की पंतय को गीली करती होइ महीन की गरम छूट पी ठंडा अहसास देंय लगी .............. बियर महीन की पंतय मैं जज़ब हो रही थी ............... विनोद न्य मुस्कराती होय अपनी होंठ फिर सी महीन की पंतय पी रखी ............ और उसकी पंतय को सूचक करनी लगा ............ उस मैं जज़ब हो रही होइ शराब को चूसनी लगा ......... पीनी लगा .............. और अपनी जुबां सी पंतय की ऊपर सी hi महीन की छूट को चैतन्य लगा .......... उसकी जुबां महीन की गीली पंतय मैं सी नज़र आ रही होइ उसकी छूट की लकीर को चैतन्य लगी ............ महीन तरप रही थी ............. लज़्ज़त सी ........... माज़ी सी ........... और छूट की गर्मी सी ............

विनोद न्य अब महीन की पंतय को उतरना शुरू क्र दया ............ आहिस्ता आहिस्ता उसकी पंतय को भी उसकी जिसम सी अलग क्र दया ............. अब महीन पूरी तरह सी नंगी थी ........... उस कमर्य मैं ........ उसकी लाइट्स मैं .............. उसका गोरा जिसम चमक रहा था ............. विनोद कुछ देर तक तो महीन की नंगी जिसम को देखता रहा ............. फिर महीन की तइस पी हाथ फैरती होय अपनी हाथ को महीन की छूट पी लय जांय लगा ............. और उसकी छूट को छु लय ............. महीन की छूट गीली पंतय की बियर की वजह सी गीली हो रही थी ................ विनोद न्य महीन की छूट की लबूं पर ऊँगली पहिजरती होय आहिस्ता सी अपनी ऊँगली महीन की छूट की अंदर दाल दी ............. sssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ................ की आवाज़ महीन की मुंह सी निकली ................ विनोद को महीन की छूट की अंदर गीला पैन महसूस होआ ............ चिकना चिकना पानी ............ महीन की छूट का गाढ़ा पानी ................

उसनी महीन की चेहरी की तरफ देखा ........... दोनों की नज़रें मिलीं ........ तो महीन न्य शर्मा की मुस्कराती होय अपनी नज़र होता ली ........ हटाती भी क्यों न .......... सोफे पर वह बिलकुल नंगी ........ अपनी दोनों तइस को खोली होय ........... विनोद की सामन्य लेती होइ थी ............. और वह सोफे सी नीची कारपेट पी बैठा होआ उसकी छूट की अंदर अपनी ऊँगली को आहिस्ता ाहसिता अंदर बहार क्र रहा था ............. कुछ देर की बाद विनोद न्य झुक क्र अपनी होंठ महीन की छूट पी रखी और उसी चूमनी लगा ............ और अपनी जुबां को छूट की बीच की लकीर पी पहिरण्य लगा ................ महीन की छूट सी निकालनी वाला गाढ़ा पानी विनोद की जुबां पी लग रहा था .......... जैसी वह चाट रहा था ........ और कभी अपनी जुबां की नौक सी महीन की छूट की दांय को सहला देता ............. फिर विनोद न्य अपनी जुबां की नौक महीन की छूट की अंदर दाल दी ........... और अपनी एक ऊँगली सी महीन की छूट की दांय को रगड़नी लगा ............... महीन की हालत ख़राब होनी लगी ......... वह जो इतनी देर सी विनोद की हरकतों को बर्दाश्त क्र रही थी ............ अपनी जिसम की साथ खेल को सह रही थी ............... अब उसकी छूट और कण्ट्रोल नहीं क्र सकीय .......... और झटकी लय क्र पानी चोरनी लगी .............. हनीमून पी महीन का पहला ओर्गास्म था यह ............ और वह आंखें बंद कए लम्बी लम्बे सांस लेती होइ इस को एन्जॉय क्र रही थी ................. और विनोद बस महीन की चेहरी को देख रहा था .................

अपनी ओर्गास्म सी रिलैक्स हो रही होइ महीन की नंगे जिसम को विनोद न्य अपनी हाथों मैं उठे लय .......... महीन न्य सुस्ती की साथ आंखें खोल दिन .... और विनोद को देखनी लगी ........ और साथ hi गिरनी सी बचनी की लय अपनी बाज़ू विनोद की गर्दन मैं दाल डाई सहारी की लय ......... विनोद न्य महीन को लय जा की बीएड पी लिटा दया ..... और खुद उसकी सामन्य बीएड सी नीची खरा हो गया .......... महीन उस रिसोर्ट की रूम मैं बीएड पी लेती होइ विनोद को hi देख रही थी .............

महीन सी नज़रें मिलाय होय विनोद न्य अपनी शर्ट उतार की फेंक दी ....... विनोद की सॉलिड और मस्कुलर सांवले जिसम को नंगा होता होआ देख क्र महीन की होंठों पर मुस्कान फैल गए ........... फिर विनोद अपनी जीन्स की बेल्ट खोलनी लगा ....... और उसी भी उतार दया ......... अब विनोद महीन की सामन्य सिर्फ एक बॉक्सर शॉर्ट्स मई था .... जिस मई उसका मोटा लम्बा लुंड फूला होआ नज़र आ रहा था ........ उसी देखती hi महीन शर्मा गए ......... विनोद अपनी बॉक्सर शॉर्ट्स की ऊपर सी hi अपनी लुंड को सहलानी लगा ....... महीन जानती थी उसकी अंदर कितना तगड़ा लुंड है ....... जो 3 बार उसकी छूट की अंदर जा चूका होआ है ........ और उसी जन्नत की सैर करवा चूका होआ है ........ और वह इसी छु भी चुकी होइ है ...... मगर इसकी साथ hi यह भी हकीकत थी की महीन न्य विनोद की लुंड सी 3 बार छुड़नी की बावजूद भी अभी तक उसी देखा नहीं था ....... 3 बार उसी अपनी छूट मैं लय क्र जहर चुकी होइ थी ..... बुरी तरह सी चुद चुकी होइ थी मगर उसकी लुंड को देख नहीं पाई थी अभी तक ............. और उसी यक़ीन था की अब वह उस लुंड को ज़रूर देख पाय गए ........... उसी यह भी पता था की यह लुंड ...... विनोद का लुंड उसकी छूट की लय कितनी दिन सी भूका है ........ यह सोच की महीन की होंठों पी मुस्कान फैल गए ........

विनोद बीएड की ऊपर आज्ञा .... और महीन की साथ लेत गया ...... महीन का नंगा जिसम विनोद की नंगे जिसम सी छु रहा था .......

महीन न्य उसकी तरफ करवट ली और शरारत सी बोली ..... क्या होआ .... थक गए क्या ........

विनोद हंसा ...... नहीं ..... अब तुम्हारी बारी है ....

महीन मुस्कराती होइ ....... किस बात की ........

विनोद अपनी लुंड की तरफ इशारा कृत्य होय बोलै ....... इसी बहार निकालनी की ..........

महीन शरमाई ....... मैं नहीं निकाल रही ......... खुद hi करो ......

विनोद न्य महीन का हाथ अपनी हाथ मैं लय और उसी अपनी बॉक्सर मैं फूली होय लुंड पी रख दया ....... और उसकी हाथ सी अपनी लुंड को सहलानी लगा .......... देखो तो कैसी तरप रहा है ...... आज़ादी की लय .......

महीन उसकी लुंड को उसकी बॉक्सर की ऊपर सी hi अपनी मुठी मैं दबाती होइ बोली ........ और बहार आ क्र िसंय जो आतंक मचाना है वह .......

विनोद मुस्कराया ........ तुम्हारा hi क़ुसूर है इस मई भी ......

महीन ....... मेरा कैसी ......

विनोद ...... एक तो तुम इतनी खूबसूरत हो ........ और ऊपर सी इसकी मुंह को अपनी छूट का पानी लगानी की बाद ... तुम न्य इस को इतनी दिन सी भूका रखा होआ है .........

महीन हंसी पारी ...... और अपनी कोहनी की बल ऊपर उठ गए ....... और अपना नाज़ुक सा गोरा हाथ विनोद की सीने पी रख की आहिस्ता आहिस्ता उसकी सीने को सहलानी लगी ..... उसकी सीने की बलून मैं अपना हाथ पहिरण्य लगी .......... उसकी काले सख्त हो रही होय निप्पल्स को अपनी उंगलयों सी सहलानी लगी ........ और फिर झुक की पहली उसकी सीने को चूमा और फिर अपनी होंठ विनोद की निप्पल्स पी रख डाई ......... और अपनी पतली पतली लिप्स सी उसकी निप्पल को चूमनी लगी ......... फिर अपनी मोती जैसी दांतों की साथ उसकी निप्पल को हल्का सा काटा तो विनोद सिसक पारा ........ महीन का हाथ विनोद की पेट पी फिसल रा था ..... उसी सहला रहा था ....... और फिर नीची को जाती होय उसकी लुंड की उभार पी पोहंच गया .......... जैसी वह अपनी मुठी मैं लय की आहिस्ता आहिस्ता दबानी लगी ...... सहलानी लगी ........

विनोद फिर सी बोलै ........ महीन ....... इसी आज़ाद क्र दो .........

महीन न्य मुस्करा की विनोद की तरफ देखा ..... और फिर उसकी आँखों मैं देखती होय अपनी हाथ को उसकी बॉक्सर की इलास्टिक की नीची सिरका दया ..... उसकी बॉक्सर की अंदर ........ उसी लुंड की ऊपर का हिस्सा बिलककुल साफ़ लगा ........ वह मुस्कराई ....... की विनोद भी खुद को ाच्य सी साफ़ क्र की आया होआ था हनीमून की लय ......... महीन न्य विनोद की बॉक्सर की अंदर अपनी हाथ को और भी ाग्य को बढ़ाती होय विनोद की लुंड को उसकी बेस सी अपनी हाथ मैं लय लय ..... उस पी अपनी उंगलयां पहिरण्य लगी ......... विनोद की आंखें लज़्ज़त की मारी बंद हो रही थीं ...... महीन की हाथ मैं विनोद का मोटा और गरम लुंड था ......... जैसी वह सहला रही थी ..... हाथ मैं लय होय वह उसकी मोटाई को महसूस करनी की कोशिश क्र रही थी ..... और उसी हाथ मैं थामी होय ....... वह इस ख्याल सी hi सहर उठती थी की यह मोटा लुंड उसकी अंदर जा चूका है ........ और उस लुंड की लज़्ज़त सी भी हु ाच्य सी वाक़िफ़ थी ..........

अपनी उंगलयों मैं थामी होय वह अपनी अंघूटी को विनोद की लुंड की टोपे पी फिरा रही थी .... गोल गोल घुमा रही थी ..... और उसी टोपे पी कुछ चिप छिपा सा महसूस हो रहा था ...... जैसी वह ाच्य सी जानती थी की क्या है ....... वह उसी उसकी ऊपर hi मल्टी जा रही थी ............

विनोद ........ महीन इसी निकाल दो न बहार ........

महीन अपना चेहरा विनोद की सीने पी रखती होय बोली ..... मुझ सी नहीं हो सकी गए प्लीसीएएएएए ......

विनोद .... क्यों ...

महीन ..... मुझी शर्म आती है बस ......

विनोद मुस्कराया और बीएड सी उठ की खरा हो गया ........ महीन उसी हैरानी सी देखनी लगी की वह कहा जा रहा है ....
 
बीएड सी उतर की विनोद खरा हो गया और फिर ....... महीन की तरफ देखती होय अपनी उंगलयां अपनी बॉक्सर शॉर्ट्स मैं फँसाई और महीन की आँखों मैं देखती होय इशारा क्या की जैसी वह अंडरवियर उतारनी लगा हो ............ महीन की चेहरी पी बैचैनी सी फैल गए .... और हलकी सी मुस्कराहट भी ..... उसकी दिल की धरकन तेज़ होनी लगी ....... उसी अभी भी अपनी छूट सी पानी बेहटा होआ महसूस हो रहा था ......... और वह भी अपनी नज़रें विनोद की अंडरवियर पी गाढ़ होय थी ............ आखिर कार विनोद न्य अपनी बॉक्सर शॉर्ट्स को नीची खींच दया ........ और उसका काला लुंड ....... बल्कि गहरा सांवला रंग का लुंड नंगा हो की लेहरानी लगा .......... उस पी नज़र पार्टी hi महीन का दिल उछाल की उसकी हलक़ मैं आज्ञा ......... वह सिर्फ आसिफ की लुंड को देखि थी आज तक ...... और यह दूसरा लुंड था जो उसकी नज़रों की सामन्य था ......... और तीसरा लुंड रॉक का था ..... जो होटल मैं उसनी उस वीडियो मैं देखा था .......... महीन अंदाज़ा करनी लगी की विनोद का लुंड आसिफ सी ज़्यादा मोटा और लम्बा था मगर रॉक की लुंड सी छोटा था ...... और ऐसी hi उसका रंग भी दोनों की दरम्यान था ...... न आसिफ की लुंड की तरह गोरा सुफैद .... और ना hi रॉक की लुंड की जैसी कला स्याह ........ बल्कि सांवला था ........ महीन को ख्याल अन्य लगा की एहि लुंड ..... यही मोटा लम्बा लुंड 3 बार उसकी छूट की अंदर जा चूका होआ है ........ उसी छोड़ चूका होआ है ....... वह इस लुंड को अपनी छूट मई सह चुकी होइ है ...... उस सी छुड़वा चुकी होइ है .......... उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं ..... उसी यक़ीन नहीं हो रहा था की इतना मोटा और लम्बा लुंड कभी उसकी छूट मैं जा सकता है ...... वह इसी लय सकती है ...... मगर वह जानती थी की एहि सुच है की वह इस लुंड को अपनी छूट मई लय चुकी होइ थी ........... और इस सी मिलनी वाली लज़्ज़त सी भी अछि तरह सी आगाह थी ....... इस सी मिलनी वाले दर्द को भी वह महसूस क्र चुकी थी ........ उसी वही दर्द याद अन्य लगा ....... फिर अचानक सी उसकी दिमाग़ मई रॉक का लुंड लहराया ....... अगर वह मेरी अंदर जाय तो कितना दर्द हो गए ....... क्या मैं उसी सेह भी सकूं गई की नहीं ........ और फिर उसकी आँखों की सामन्य रॉक की चेहरी की जगा निक की चेहरी न्य लय ली ........ मुस्कराता होआ चेहरा ......... और निक का सोचती hi महीन का जिसम बुरी तरह सी कैंम्प गया ........

महीन की नज़रों को अपनी लेहराती हो लुंड पी जमाय हो देख क्र विनोद बोलै ........... कैसा लगा महीन मेरा लुंड .........

महीन शर्मा गए ...... ीीेहःहःहः .. ययययययययी ...... इतना बरआ .......

विनोद मुस्कराया ........ तुम तो ऐसी बोल रही हो जैसी यह तुम्हारी अंदर गया नहीं है अभी तक ..........

महीन शर्मा गए ......... और विनोद बीएड पी आज्ञा ..... महीन की टांगों को चूमती होय ऊपर को अन्य लगा ........ और फिर उसकी तइस को खोल की बीच मैं आ की घुटनो की बल बेथ गया ........ उसका लुंड बिलकुल महीन की छूट की सामन्य था .......... विनोद न्य अपनी लुंड को अपनी एक हाथ मैं पकड़ा और अपनी काले लुंड को को महीन की गुलाबी छूट की लबूं पी टिक्का दया ......... sssssssssssssssssssssssss .................. ससससीईईई ........ महीन की सिसकारी निकली ...... और उसकी हिप्स न्य हल्का सा झटका लय .... जिस सी उसकी छूट और भी विनोद की लुंड सी जुड़ गए ............ विनोद न्य अपनी लुंड को आहिस्ता आहिस्ता महीन की छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया ........ अपनी लुंड की मूर्ति टोपी सी महीन की छूट को सहलानी लगा ...... उसकी छूट की दांय को रगड़नी लगा ........ महीन की छूट न्य फिर सी पानी चूर्ण शुरू क्र दया था ...... उसकी छूट की बहार की लिप्स मिले होय थय ......... और अंदर की नज़र नहीं आ रही थय ...........

विनोद बोलै ......... महीन .. तुम्हारी छूट बुहत खूबसूरत है ........ ऐसी लगता है की कभी उसे hi ना होइ हो ....... बिलकुल बंद है ........

महीन शर्मा गए ........... विनोद न्य अपनी हाथों की उंगलयों सी महीन की छूट की लिप्स को खोला ....... तो अंदर बुहत hi पतली पतली और छोटी छोटी लिप्स नज़र अन्य लगी ...... और उनकी बीच मैं महीन की छूट का छोटा सा सूराख ....... और उस सी ऊपर बुहत hi छोटा सा ....... एक और सूराख ......... जो की ना होनी की हद तक दिख रहा था ............ महीन की छूट की छोटी की गुलाबी मुंह पी हल्का हल्का पानी चमक रहा था ........ जो विनोद की लुंड की टोपे पी लग की उसी भी गीला क्र रहा था .......... अपनी सर को तकए पी रखी महीन नीची देख रही थी ........ उसकी आँखों की सामन्य विनोद का मोटा लुंड ...... काला .... लम्बा लुंड ... और उसकी गेहरी जामनी रंग की टोपी ........ महीन की गोरी गोरी छूट पी रगड़ रही थी ............ महीन की छूट की ऊपर की हिस्से और उसकी लिप्स पी एक भी बाल नहीं था ......... बिलकुल मुलायम चिकनी छूट थी ........... वह आज hi अपनी तमाम हेयर रिमूव क्र की आई थी ..... अपनी हनीमून की लय .......... विनोद का कला लुंड उसकी सुफैद और गुलाबी छूट पी अलग hi नज़र दी रहा था .... जैसी जैसी विनोद अपनी गरम लुंड को महीन की छूट पी रगड़ता तो महीन की मुंह सी सिसकार्यं निकालनी लगतीं ............ वह तरप रही थी ......... उसकी हालत बुरी हो रही थी ........... वह छह रही थी की अब विनोद अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर दाल दी ........... और उसी छोड़ डाली .............

महीन टर्पी ......... आआआआअह्ह्ह्हह ...........Viiiiiiiinnnnnnnnnnooooooooooodddddddd ............ नहीं tarpaaoooooooooooooooooo ......... pleaseeeeeeeeeeeeeeeee

विनोद मुस्कराया .......... तो क्या करों ..........

महीन की बुहत hi धीमी सी आवाज़ निकली .......... दाल दो .........

विनोद ............ क्या ...........

महीन शर्माती और तारापत्य होय .......... उसकूऊऊऊओ .......

विनोद .......... कहाँ दाल डॉन ...........

महीन ........... मेरी अंदर .......... वहां ...........

विनोद मुस्कराया .......... okay बेबी .......... और अपना लुंड महीन की छूट की सूराख पी रख की आहिस्ता ाहसिता उसी अंदर करनी लगा .........

महीन फिर सी टर्पी ............ विनोडडडडडडड ........... प्लीसीईई ahistaaaaaaaaaaaa .............

विनोद मुस्कारया ........ फ़िक्र न करो मेरी जान .......... और आहिस्ता आहिस्ता अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर डालनी लगा .......... विनोद का मोटा कला लुंड महीन की छूट को स्ट्रेच क्र की अंदर दाखिल होनी लगा ........... महीन को हलकी हलकी तकलीफ हो रही थी ......... मगर उतनी नहीं जितनी पहली बार होइ थी ...... उसकी छूट आहिस्ता आहिस्ता विनोद की लुंड को ैकमोदते क्र रही थी ...... उसी रास्ता दी रही थी ........... और विनोद महीन की आँखों मैं देखती होय अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर उतारता जा रहा था ........... महीन की छूट अपनी hi पानी सी चिकनी हो रही थी ........ और विनोद का लुंड आराम सी बिना किसी रुकावट की महीन की छूट मई जा रहा था ........... विनोद न्य अब आहिस्ता आहिस्ता अपनी लुंड को महीन की छूट मैं अंदर बहार करना शुरू क्र दया ......... महीन की आंखें बंद होनी लगीं ......... और उसकी छूट विनोद की लुंड को जकरण्य लगी ......... दबानी लगी ............ विनोद की लुंड की गर्मी और रगड़ को उसकी छूट ज़्यादा देर तक बर्दाश्त करनी की पोजीशन मई नहीं थी ........... उसी लग रहा था की वह जल्द hi एक बार फिर सी झाड़ जाय गई .......... वह आंखें बंद कए बस विंडो की लुंड का स्वाद लय रही थी ...... और सिसकती होय ....... अपनी छूट को आहिस्ता ाहसिता हिलाती होय विनोद का साथ दी रही थी चुदाई मैं ............ और फिर वही होआ ....... महीन ज़्यादा देर तक विनोद की लुंड की चुदाई बर्दाश्त नहीं क्र पाई ....... और विनोद की लुंड को अपनी छूट मैं अंदर बहार करवाती होय अचानक सी उसकी साथ चिपक गए ... और अपनी दोनों टांगें विनोद की कमर की गिर्द कस लीन और झरनी लगी .......... पानी चोरनी लगी ........ विनोद की लुंड पर hi .............. हनीमून की पहली रात का दूसरा ओर्गास्म था यह महीन का ............

विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर hi दबाय रखा .... और उसी ाच्य सी झरनी दया ........... अपना ओर्गास्म एन्जॉय करनी दया ....... महीन की आंखें बंद थीं ....... वह लम्बी लम्बी सांस लय रही थी ........ उसकी बूब्स ऊपर नीची हो रही थय ....... उसकी साँसों की साथ ...... और उसकी चेहरी पर बुहत hi सुकून और बुहत hi मासूमीयत थी ........ जैसी विनोद उसकी चेहरी पी देख रहा था .......... उसी महीन बुहत प्यारी लग रही थी ....... उस पी बुहत प्यार आ रहा था ............. और अपनी क़िस्मत पी रश्क भी .............. फिर महीन की होंठों को चूमनी की बाद विनोद न्य उसकी छूट सी अपना लुंड बहार निकाल लय ....... और सीधा हो गया ............ विनोद का लुंड अपनी छूट सी निकालनी की बाद महीन को अपनी छूट मैं खाली पैन महसूस होनी लगा .............. उसनी अपनी आंखें खोलीं तो उसकी नज़रें विनोद की चेहरी पी गईं ........ और फिर नीची आ की उसकी लुंड पी रुक गईं .......... जो अभी भी एकरा होआ था ...... फुल जोबन पी ........... और लहरा रहा था ............ महीन की होंठों पी मुस्कान फैल गए ............... उसी विनोद का लुंड ाचा लग रहा था .......... उस पी प्यार आरहा था ............. जिस तरह उसनी इसकी छूट की प्यास बुझाई थी ............ मगर जिस तरह सी वह अभी भी लहरा रहा था उस सी साफ़ दिख रहा था की उसका लुंड अभी भी प्यासा है .......... महीन की छूट का ...............

विनोद की आवाज़ आई ....... महीन उलटी हो जाओ ........

महीन उसकी बात को नहीं समझ सकीय की वह क्या चाहता है ..... लकिन फिर भी करवट लय क्र उलटी हो गए .......... अब महीन की खूबसूरत हिप्स विनोद की सामन्य थय ....... वह उन पी हाथ पहिरण्य सी खुद को नहीं रोक सका ........... और उसकी हिप्स पी हल्का सा थप्पड़ मारती होय बोलै ....... ठीक सी पोजीशन बनाओ न मेरी जान .........

महीन न्य अपनी गर्दन मोदी और अपनी कंधी की ऊपर सी विनोद की तरफ स्वल्य नज़रों सी देखनी लगी ......... उसी समझ नहीं आ रही थी की विनोद क्या चाहता है ..........

विनोद समझ गया की उसी कुछ पता नहीं है .......... विनोद न्य महीन की कमर को दोनों तरफ सी पकड़ा और उसी ऊपर को खींच दया ...... और उसी उसकी घुटनो की बल क्र दया .......... और ाग्य सी उसकी हाथ बीएड पी टिक्का डाई ............ ऐसी खरी हो जाओ ........... घुटनो और हाथों की बल ........ महीन इस पोजीशन मैं खुद को देख क्र शर्मसार हो रही थी ....... लकिन उसी नहीं पता था की विनोद अब उसी घोरी बना की छोड़ना चाहता है ............ विनोद अब महीन की गांड की पिच्य खरा था .......... विनोद न्य झुक क्र महीन की हिप्स को चूमा ........ और फिर उसकी हिप्स को फैला क्र उसकी छूट का नज़ारा करनी लगा ............ महीन की गांड का तंग और बिलकुल बंद सूराख भी विनोद की आँखों की सामन्य था ....... बिलकुल छोटा सा गुलाबी सूराख ............... विनोद उसको किश की बिना नहीं रह सका ...... झुक की अपनी होंठ महीन की गांड की सूराख पी रखी और उसी चूम लय ......... महीन तरप उठी ................... यह क्या क्र रही हो ......... वहां गन्दी जगा क्यों मुंह लगा रही हो ........ विनोद न्य उसकी बात का कोई जवाब नहीं दया और अपनी जुबां निकाल की महीन की गांड की सूराख को चैतन्य लगा ............. उस सुब को गन्दा महसूस करनी और अपनी लय यह बिलकुल नै चीज़ होनी की बावजूद भी महीन को ाचा लगा ........ और महीन की पूरी जिसम मैं करंट सा दौड़ गया ............. और उसकी हिप्स न्य भी एक ज़ोर का झटका खाया ............

विनोद कुछ देर तक महीन की गांड की सूराख को चाट ता रहा ....... फिर सीधी होय क्र अपना लुंड महीन की छूट की सूराख पी रखा और उसकी कमर को पाकर की आहिस्ता ाहसिता अपना लुंड महीन की छूट की अंदर दाखिल करनी लगा ........... इस पोजीशन मई महीन पहली बार लुंड अपनी छूट की अंदर लय रही थी ............ उसी थोड़ा दर्द भी हो रहा था ......... मगर वह बर्दाश्त क्र रही थी .........

महीन .......... विनोद यह कैसी क्र रही हो .......... मुझी लतनय दो फिर करना न .......... ऐसी कोण करता है भला ........

विनोद महीन की नंगी गोरी कमर को सहलाती होय बोलै ....... महीन सुच मई hi तुमको कुछ नहीं पता सेक्स की बारी मैं .......... पता नहीं आसिफ क्या करता रहा है तुम्हारी साथ ........ उसनी तुमको कुछ भी नहीं सिखाया ............

महीन हंसी ...... ाचा जी ....... उल्टी उल्टी काम खुद कृत्य हो और कहती हो आसिफ न्य नहीं सिखाया ..........

विनोद अपनी लुंड को महीन की छूट मई अंदर बहार कृत्य होय बोलै ..... कोई बात नहीं तुमको सुब कुछ सीखा डॉन गए ............ सेक्स की बारी मैं ...... क्यों की जब तक पूरी तरह और हर तरह सी सेक्स ना क्या जाय खुल की तो असल मज़ा नहीं आता सेक्स का ........

विनोद महीन की हिप्स को पाकर की ढक्की लगा रहा था ........ इस पोजीशन मैं विनोद का लुंड ज़्यादा गहराई तक महीन की छूट की अंदर जा रहा था ........ और महीन को ाचा भी लग रहा था ........ वह अपना सर नीची झुकाय विनोद की लुंड का मज़ा लय रही थी .......... विनोद भी अपनी लुंड को पूरा महीन की छूट की अंदर बहार क्र रहा था ........... उसका लुंड इस पोजीशन मैं उसकी बचा दानी की मुंह की अंदर तक जा रहा था ........... जिस सी महीन को और भी ाचा लग रहा था ....... उसकी छूट मई इतना अंदर तक आसिफ की लुंड न्य कभी नहीं चोअ था ............ थोड़ी देर तक ऐसी hi छोड़नी की बाद विनोद न्य अपनी लुंड की टोपे को महीन की छूट की अंदर उसकी बचा दानी की मुंह मैं फंसा दया ....... और फिर उसकी लुंड न्य अपनी माननी की पिचकारयण महीन की बचा दानी की अंदर चोरनी शुरू क्र दिन ...... बिना एक भी क़तरा बहार गिराय ............. और इसकी साथ hi महीन भी अपनी ओर्गास्म को पोहंच गए ............ हनीमून की पहली रात का तीसरा ओर्गास्म था महीन का .........

कुछ देर की बाद दोनों बीएड पी लेती होय थय .......... महीन का सर विनोद की बाज़ू पी था .......... दोनों की जिसम नंगी थय ............ विनोद महीन की बलून सी खेलती होय बोलै ........

विनोद ........ तुम आसिफ की साथ हनीमून पी कहाँ गए थी .......

महीन थोड़ा मुस्कराई ...... कहीं भी नहीं .........

विनोद ....... क्या मतलब ..........

महीन मुस्करा की ...... मतलब यह जनाब की हमारी हाँ इन सुब चोंचलों को अहका नहीं समझा जाता ........

विनोद महीन की तरफ हैरानी सी देखती होय ........ क्या सुच मई तुम कहीं नहीं गए थी शादी की बाद .......

महीन न्य ना मई सर हिला दया .......... मुस्कराती होय ........

विनोद महीन की माथै को चूमती होय बोलै ........ तो इसका मतलब यह होआ की यह तुम्हारा पहला हनीमून है ............

महीन न्य हाँ मैं सर हिला दया शर्माती होय ........ उसका हाथ विनोद की सैन्य को सहला रहा था ....... उसकी सीने की बलून को ........

विनोद ...... और मेरा ख्याल है की आसिफ न्य तुम्हारी साथ सेक्स भी ठीक सी नहीं क्या ...........

महीन उसकी सीने पी हल्का सा थप्पड़ मारती होइ बोली ...... ाच्य सी hi करता है ...... पर तुम्हारी तरह गंदी सी नहीं ........... हहहहए ......

विनोद .......... कुछ भी गन्दा नहीं होता ........ मैं तुमको सुब क्कुह दिखा भी दूँ गए और सीखा भी .......... इसी हनीमून मैं ....

महीन न्य अपना सर विनोद की सीने मई छुपा लय ....... दोनों बातें कृत्य रही ......... और फिर रात को एक बार और सेक्स करनी की बाद दोनों एक दूसरी की बहून मई सो गए ...............

सुबह विनोद की आँख खुली तो उसनी देखा की बिलकुल नंगी उसकी क़रीब सोइ होइ थी दूसरी तरफ करवट लय की .......... विनोद न्य अपनी मॉर्निंग स्टिफनेस को महीन की गांड पी रगड़ना शुरू क्र दया ...... और फिर उसकी एक टांग को हल्का सा उठा की आहिस्ता आहिस्ता अपना लुंड महीन की छूट पी रखा ...... और उसी अंदर डालनी लगा ........ आधा लुंड महीन की छूट की अंदर डालनी की बाद उसी अंदर बहार करनी लगा ........ और उसकी हल्की हल्की धक्कों की साथ महीन की आँख खुल गए ........ उसनी पिच्य सर घुमा की विनोद की तरफ देखा और मुस्करा दी ......... उसी विंड का ऐसी जगाना ाचा लगा था ............ उसनी अपनी हिप्स को थोड़ा और पिच्य की तरफ पुश क्र दया ...... थोड़ा और बेंड होती होय ........ और विनोद की लय अपनी पोजीशन को और भी बेहतर कृत्य होय .......... विनोद महीन की कमर पी हाथ रखी उसी छोड़ रहा था ...........

सुबह सुबह आधा घंटा सेक्स करनी की बाद दोनों फ़ारिग़ हो गए ...... विनोद बीएड सी उठा और जा की विंडो सी कर्टेन हटा डाई ........ महीन न्य चीखती होय बेडशीट अपनी जिसम पी खींच ली ........ यह क्या क्र रही हो विनोद ........ कोई देख लय गए ........

विनोद हंसनी लगा ........ कोई नहीं देखी गए .......... बल्कि तुम यहाँ आ की देखो कितना ाचा नज़ारा है बहार का ............ महीन न्य देखा की विंडो तो हिल्स की तरफ खुल रही है ........ और हिल्स की ग्रीनरी बुहत hi ाचा नज़ारा दिखा रही थी .......... महीन भी बीएड सी उठी और बेडशीट को अपनी जिसम पी लपेटी होय विनोद की पास आ की खरी हो गए और दोनों बहार देखनी लगी .............. महीन को बुआहट ाचा लग रहा था .......... वह खुश थी की उसनी विनोद की लय ऐसी अछि जगा अन्य का फैसला क्या .......... थोड़ी देर की बाद विनोद बोलै आओ नहानी चलें ..........

महीन ...... पहली तुम नहा लो ......

विनोद ....... no वे ....... इतनी दिंनो सी हम अलग अलग नहा रही हैं पर आज हम ीखती नहीं गए .............

महीन उसकी बात पी हंस पारी .......... और उसकी साथ बाथरूम की तरफ जाती होय बोली .......... जब तुम्हारी साथ लंदन की लय आई थी तो मेरी खवाब ो ख्याल मैं भी नहीं था की तुम्हारी साथ यह सुब कुछ हो जाय गए ............

विनोद ....... तुमको ाचा नहीं लगा क्या ........... ???

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ....... और उसकी सीने पी हल्का सा थप्पड़ मारती होइ बोली ............. नहीं लगा ........... बस ....... अब खुश हो ........

विनोद भी उसकी बात पी हंस पारा ........ और फिर दोनों नहानी चली गए ............. एक साथ नहानी की बाद दोनों न्य कपड़े पहनी और दिंनिंग हॉल मई जा की नाश्ता क्या और फिर घूमनी की लय निकल पारी ...........
 
अपडेट NO: 27

फ्राइडे का दिन था ........... और उनकी वीकेंड का पहला दिन ........ महीन न्य एक जीन्स और थिगह लेंथ शर्ट पहनी और विनोद की साथ रिसोर्ट सी बहार निकल आई ........ वहां की सैर करनी की लय ............. बुहत hi ाचा नज़ारा था उस एरिया का .......... बुहत अछि हवा चल रही थी ....... लश ग्रीन हिल्स की स्तुन्निंग व्यूज और उनकी बीचों बीचय बल खाती होय जाती होय रास्ती दूर सी दिख रही थय ........ जो कमल मंज़र पेश क्र रही थय ......... बुहत अछि धुप चमक रही थी .......... हर तरफ फूल खिली होय थय ............ महीन उन सुब को देख की बुहत खुश हो रही थी ........... वह अपनी मोबाइल मैं पिक्टुरेस लेनी लगी ......... कभी वहां की फूलों की , हिल्स की , बर्ड्स की ....... और कभी विनोद की .......... विनोद भी महीन की पिक्टुरेस बना रहा था .......... दोनों काफी देर तक पैदल चलती रही .......... और भी कपल्स वहां घूम फिर रही थय ........... तभी उनको एक कैफ़े नज़र आया .......... वादी की बीच मैं ....... बुहत ाचा लग रहा था .......... उन्हों न्य वहां बेथ की कॉफ़ी पीनी का इरादा क्या .............. कैफ़े की आउटडोर सीटिंग पी बेथ क्र वह गरम गरम कॉफी एन्जॉय करनी लगी इर्दगिर्द की खूबसूरत हिल्स को देखती होय ............ महीन अपनी ज़िन्दगी मैं कभी भी किसी ऐसी खूबसूरत जगा पी नहीं गए थी .............

विनोद ....... महीन कैसा लगा तुमको यह हिल स्टेशन ......

महीन ....... ऊऊफफफफफ ....... विनोद मेरा तो दिल करता है की यहीं रह जाऊँ हमेशा की लय .............. वह विनोद का बाज़ू पकर्त्य होय बोली .......... विनोद भी मुस्करा दया ............. और फिर कॉफ़ी पीनी की बाद दोनों वह सी निकल पारी ..............

दोनों चलती होय काफी दूर आ चुकी होय थय ........... महीन कभी विनोद का हाथ थाम लेती और कभी उसका बाज़ू ....... और विनोद भी अपना बाज़ू महीन की कमर मैं डाली होय था ............. उसी बुहत ाचा लग रहा था विनोद की साथ चलना ........... उसी आसिफ का कोई ख्याल नहीं था ..... कोई गिल्ट नहीं थी ......... और ना hi इस बात की फ़िक्र की वह एक हिन्दूओ की साथ सेक्स क्र चुकी होइ है और अब उसकी बहून मैं बहिन डाली होय घूम रही है ............ महीन को विनोद का साथ बुहत ाचा लग रहा था ........

चलती चलती उनको एक शॉपिंग मॉल नज़र आया ....... विनोद महीन का हाथ पाकर की अंदर लय गया ........... महीन भी इधर उधर विंडो शॉपिंग करनी लगी .......... गिलास वाल्स सी दिख रही होय कपड़ों को देखनी लगी .......... काफी बोल्ड और रेवेलिंग ड्रेसेस थय ............

विनोद बोलै ........ महीन तुमको यह ड्रेस तरय करनी चाहीं .......

महीन न्य उन ड्रेसेस की तरफ देखा और फिर माथै पी हल्की सी बल डालती होइ बोली ....... विनोद ...... थी अरे तू मच रेवेलिंग फॉर में ... और तुम मुझी जानती हो मैं कैसी यह पहन सकती हों ...........

विनोद महीन की झिझक को महसूस क्र की उसका हाथ पाकर की उसी एक शॉप मैं लय क्र दाखिल हो गया .......... महीन की इंकार करनी की बावजूद भी ......... मुझी पता है की तुम कन्सेर्वटिवे मंद की हो ...... हमेशा कन्सेर्वटिवे ड्रेस hi पहनती हो ....... इसी लय मैं चाहता हों की तुम कुछ बोल्ड ड्रेसेस पहनो यहाँ की माहोल की मुताबिक़ ....... ी ेंसुरे यू मेरी जान की तुम बुहत hi खूबसूरत लगो गई ......

महीन अपनी निचली होंठ को काटनी लगी ....... लकिन मुझी नहीं लगता की मैं यह ड्रेस पहन की कम्फर्टेबले राहों गई .......

विनोद ..... क्यों नहीं रहो गई .......... कम्फर्टेबले रहंय की लय कॉन्फिडेंस चाहिए है ........ और फिर यहाँ कौन हमें जानता है ...... सुब लोग hi ऐसी hi ड्रेसेस पहनी होय हैं तो कोई तुमको देखी गए भी नहीं ....... जब हम रात को घूमनी निकलती हैं यहाँ पी या डिनर की लय तो तुम यह ड्रेसेस पहनो गई तो बुहत अछि लगो गई .......... और फिर तुम वापिस जा की भी तो पहन सकती हो न ...... pleaseeeeeeeeeeeeeeeeee ..... और फिर ......... मुझी भी तो ाचा लगी गए न ......... विनोद न्य आखरी तीर चलाया ...... महीन को इमोशनल करनी की लय ........... उसी पता था की उसकी लय वह कभी इंकार नहीं क्रय गई ..........

महीन विनोद की ज़िद की ाग्य मजबूर हो रही थी .......... okay okay ठीक है सिर्फ तुम्हारी खातिर मैं पहन की तरय क्र रही हों ....... अगर ाचा नहीं लगा तो मैं यह नहीं लून गई .........

विनोद खुश होती होय बोलै ........ okay पक्का ...........

एक खूबसूरत सी सेल्स गर्ल उनकी पास आई और बोली .......... सर क्या मैं आप की कोई हेल्प क्र सकती हों ????

विनोद ..... यस सूरे सूरे .......... शी इस माय गर्लफ्रेंड ........ प्लीज आप इनको कुछ कम्फर्टेबले ड्रेसेस सेलेक्ट करनी मैं हेल्प आउट करो जो हमारी इस खूबसूरत हनीमून ट्रिप को और भी ाचा और इंटरेस्टिंग बना डैन ........

विनोद की बात पी महीन शर्मा गए .......

सेल्स गर्ल ...... व्हाई नॉट सर ..... मैं समझ गए हों की मम को कैसी ड्रेस सेलेक्ट करनी चाहिए ........... सॉरी तो से जो मम न्य पहनी होय हैं वह आप की होनेमूद ट्रिप की लय बिलकुल भी सूट नहीं क्र रही .......

वह सेल्स गर्ल उनको लय क्र ाग्य शॉप मैं लय गए ....... और मुख्तलिफ ड्रेसेस दिखानी लगी .......... उसनी एक बुहत hi खूबसूरत सा मिनी फ्लोरल ड्रेस सेलेक्ट क्या ............ जो की बुहत hi प्यारी कलर का था ............ लाइट पिंक कलर ड्रेस जिस पी मुख्तलिफ रंगों की फूल बनी होय थय ............ उसकी लेंथ हाफ तइस तक थी ........ बुहत ज़्यादा लम्बा नहीं था ........... और स्लीव्स भी बुहत शार्ट थीं .......... जस्ट शोल्डर्स को कवर क्र रही थीं ....

सेल्स गर्ल ........ मम आईटी इस परफेक्ट ड्रेस फॉर कौसल आउटिंग्स एंड रोमांटिक दिन्नेर्स. आप पी यह बुहत खूबसूरत लगी गए ......... और आप इस मई इंडोर लॉन्गिंग और आउटडोर वैक्स की लय बुहत कम्फर्टेबले रहें गई ........... आप इसी तरय क्र की देखें ............

महीन ........ थोड़ा आहिस्ता सी विनोद सी बोली ...... यह तो बुहत शार्ट है ......

सेल्स गर्ल ........ मम आईटी इस परफेक्ट ............ आप एक बार पहन क्र तरय तो करें .......

महीन झिझक रही थी मगर विनोद न्य उसी वह ड्रेस हाथ मैं पकड़ाई और ट्रायल रूम की तरफ पुश क्या ...........

सेल्स गर्ल मुस्कराती होय बोली ....... सर यू कैन हेल्प योर गर्ल इन चेंजिंग थे ड्रेस इनसाइड थे ट्रायल रूम .............

महीन उसकी बात पी फिर सी शर्मा गए .......... विनोद उसी थैंक्स बोल की महीन का हाथ पाकर की ट्रायल रूम मैं दाखिल हो गया ........

महीन आहिस्ता सी रेसिस्ट करती होइ बोली ........... नहीं विनोद तुम बहार hi रहो ....... मैं खुद hi चेंज क्र लोन गई .......... वह लड़की पता नहीं क्या सोची गई हमारी बारी मैं ......

विनोद उसी अंदर को पुश कृत्य होय बोलै ....... बेबी जब वह सेल्स गर्ल हमें खुद मौका दी रही है तो फिर क्या हर्ज है .............

दोनों ट्रायल रूम मई ाग्य .......... यह ट्रायल रूम आम माल्स की ट्रायल रूम्स की निस्बत बारे था ...... जहाँ दो लोग आराम सी खरी हो सकती थय और इधर उधर मूव भी क्र सकती थय ....... शायद वहां की टूरिस्ट्स को अत्त्रक्ट करनी की लय hi बनाया गया था ............... एक वाल पी फुल वाल मिरर था ........ और हैंगिंग की लय खूँटयां भी लगी होइ थीं .............

महीन उस मिनी फ्लोरल ड्रेस को अपनी सामन्य लगा क्र आंय मैं देखनी लगी .............. यह बुहत छोटा लग रहा है विनोद ....... मैं नहीं पहन पाऊँ गई प्लीज ..........

विनोद ........ ाचा चलो नहीं लेना लकिन एक बार मुझी पहन की तो दिखा दो ..........

महीन न्य उसकी तरफ देखा और मुस्करा की अपनी शर्ट उतारनी लगी ...... शर्ट उतारती होय विनोद की तरफ आंय मैं देखा तो वह मुस्करा रहा था शरारती नज़रों की साथ ......... महीन उसकी मस्ती को समझती होइ बोली ........... कोई उलटी सीढ़ी हरकत नहीं करनी ........ आराम सी खरी रहो बस .......... और यह कह क्र महीन न्य अपनी शर्ट उतार दी ....... और उसी हैंग क्र दया ........ अब महीन उस ट्रायल रूम मैं सिर्फ ब्रा पहने होय खरी थी .......... विनोद न्य शरारत सी कहाँ बाज़ आना था .... जल्दी सी उस न्य महीन की ब्रा का स्ट्राप खींच की छोरा जो थक्क की आवाज़ सी महीन की नरम जिसम पी लगा और महीन की हलकी सी चीख निकल गए ........ ोोोोूछ्हःह ...... क्या कृत्य हो विनोद ......

महीन और फिर वह मिनी फ्लोरल ड्रेस पहन लय ............ उसी ख्याल आया की उस सेल्स गर्ल को पता है की मैं यहाँ विनोद की सामन्य hi ड्रेस चेंज क्र रही हों ........... पता नहीं क्या सोचती हो गई ............. उसी कुछ ख्याल आया ..... वह ड्रेस पहनती होइ विनोद सी बोली ......

महीन ............ विनोद उसको यह क्यों बोलै की मैं तुम्हारी गर्ल फ्रेंड हों ...........

विनोद .......... तो फिर क्या बता ता की तुम मेरी वाइफ हो ........ विनोद न्य महीन को तैसे क्या ..........

महीन मुस्करा दी ........... और अपनी पहनी होइ ड्रेस को आंय मैं देखतँय लगी ............. उसकी स्लीव्स बुहत छोटी थीं ........ सिर्फ उसकी शोल्डर्स को कवर क्र रही थीं .......... गाला काफी खुला था ....... और महीन की बूब्स की ऊपरी हिस्से और क्लीवेज को भी दिखा रहा था ........ लेंथ उसकी महीन की हाफ तइस तक थी ............

विनोद ........... महीन यह ट्रॉउज़र तो उतार दो ........... फिर hi ठीक सी पता चली गए न ...........

महीन न्य घूर की विनोद की तरफ देखा और फिर अपना ट्रॉउज़र भी उतार दया ........ और खुद को देखनी लगी ............. अब वह ड्रेस बुहत जांच रहा था महीन की जिसम पी ......... उस ड्रेस सी नीची महीन की गोरी गोरी टांगें नंगी हो रही थीं ........ तइस सी नीची तक ........... और ऊपर सी बाज़ू भी नंगी थय ..............

महीन विनोद को अपनी नंगी हो रही होइ तइस की तरफ इशारा कृत्य होय बोली ........... यह भला मैं कैसी पहन सकती हों बहार ओपन मई .........

इस सी पहली की विनोद कोई जवाब देता ट्रायल रूम का दूर नॉक होआ .......... और सेल्स गर्ल की आवाज़ आई ............ सर दो यू नीड अन्य हेल्प प्लीज ...........

विनोद न्य दरवाज़ा खोल दया और महीन का हाथ पाकर की बहार लय आया ............ महीन झिझक रही थी ...........

विनोद ....... व्हाट दो यू से अबाउट थिस ड्रेस मिस .......

वह सेल्स गर्ल महीन को देखनी लगी ........ सर आईटी इस पर्फेक्ट्ली फिट ों mam's बॉडी .......... नॉट तू लॉन्ग नॉट तू शार्ट ....... एंड फिटिंग इस आल्सो परफेक्ट ............

महीन आहिस्ता सी बोली .......... व्हाट इस तो वियर विथ थिस ड्रेस ........

सेल्स गर्ल मुस्कराई .............. ओनली ा ब्यूटीफुल स्टाइलिश पंतय ............ नथिंग ेल्स ......

महीन का चेहरा सुर्ख होनी लगा .......... महीन न्य इंकार करना चाहा मगर विनोद न्य फौरन hi बोल दया ...........

विनोद .......... okay मिस ........ सेलेक्ट थिस ओने एंड नाउ शो समथिंग ेल्स ............

महीन हैरान होइ वह कुछ कहना चाहती थी मगर चुप रही ........... वह सेल्स गर्ल अब उनको कुछ और ड्रेसेस दिखानी लगी ........... सेल्स गर्ल न्य एक बुहत hi खूबसूरत रेड कलर का बॉडीकॉन ड्रेस दिखाया ....... जो देखनी मैं छोटा लग रहा था ......... महीन न्य उस ड्रेस को देखा ....... वह स्ट्रेटचेब्ले क्लॉथ था ..........

सेल्स गर्ल ....... मम थिस इस देसिग्नेड तो बे क्लोज फिटिंग एंड इस मेड ऑफ़ स्ट्रेटची मटेरियल ........ आईटी विल डिस्प्ले थे शेप ऑफ़ योर बॉडी वैरी पर्फेक्ट्ली ............... एंड यू विल लुक वैरी अट्रैक्टिव .......... यू कैन वियर आईटी इन ों योर वर्क प्लेस आल्सो मम ........... एंड आईटी इस आइडियल फॉर ा नाईट आउट आल्सो ............ प्लीज तरय थिस आल्सो

महीन को समझ नहीं आ रही थी की वह क्या बोली ............ वह खामोशी सी ट्रायल रूम मैं चली गए .......... और इस बार विनोद बहार hi रुक गया .............. महीन न्य वह ड्रेस पहन क्र खुद को आंय मैं देखा तो बुहत hi सेक्सी लुक दी रहा था वह ड्रेस .......... बिलकुल उसकी जिसम की साथ चिपका होआ ..... गाला इसका बिलकुल ऊपर तक था और स्लीव्स भी शार्ट थीं मगर हाफ उप्पेर एआरएम तक ........ समझो की नैक सी लय क्र नीज की ऊपर तक उसकी पूरी बॉडी कवर हो रही थी ............ मगर जो ख़ास बात थी वह यह की वह ड्रेस महीन की जिसम की साथ बिलकुल चिपक सा गया होआ था ........ और उसकी जिसम की हर उतार चढ़ाओ को साफ़ साफ़ दिखा रहा था .......... महीन की खूबसूरत बूब्स उस ड्रेस मैं और भी प्रोमिनेन्ट हो रही थय ....... महीन न्य मुद की अपनी बैक साइड को देखा तो उसकी हिप्स भी उस ड्रेस मैं बुहत ज़्यादा उभरी होय नज़र आ रही थय .............. उसी समझ नहीं आ रही थी की वह बहार जा की उनको दिहाय या नहीं ............

विनोद न्य दरवाज़ा नॉक क्या तो महीन को बहार जाना पारा उनको दिखानी की लय ............ महीन को इतनी सेक्सी ड्रेस मैं देख क्र विंडो का तो मुंह hi खुली का खुला रह गया .......... जैसी देख क्र महीन भी हंस पारी ............

वह सेल्स गर्ल उनको तैसे करती होइ बोली .......... मम अगर आप की बॉयफ्रेंड का यह हाल है तो सोचो की बाक़ी लोगो की क्या हालत हो गई आप को इस ड्रेस मई देख क्र .............

विनोद न्य महीन की कोई भी राय पूछी बिना उस सेल्स गर्ल को इस ड्रेस की भी दोने बोल दया ............ महीन बोलती रही की नहीं नहीं ..... यह नहीं लेना ........... मगर विनोद न्य उसकी एक ना सुनी .............

महीन ........... विनोद ी थिंक आईटी इस एनफ फॉर टुडे ........

सेल्स गर्ल जल्दी सी बोली ....... सर वोल्डनत यू लिखे तो हैवे समथिंग स्पेशल फॉर थे मम तो वियर ात नाइट्स ........ ???

विनोद न्य महीन की तरफ देखा और फिर सेल्स गर्ल सी बोलै .. सूरे प्लीज शो समथिंग स्पेशल ......... उस सेल्स गर्ल न्य जल्दी सी विनोद को एक मैरून कलर की नाईट ड्रेस दिखाई ....... जो की नूडल स्ट्रैप्स की साथ थी ........ और उसका गाला काफी ज़्यादा खुला होआ था ....... और हाफ तइस को भी मुश्किल सी कवर क्र रही थी ......... उसका मटेरियल भी नेट का था और काफी ट्रांसपेरेंट था ............... उसकी साथ एक छोटा सा उसी कलर का गाउन था ........... विनोद न्य वह ड्रेस भी लय ली ............ महीन अभी तक उसी बॉडीकॉन ड्रेस मैं खरी थी ............. महीन चेंज करनी की लय गए तो विनोद बोलै ............ महीन प्लीज आप एहि ड्रेस पहनी रखो ........ ाचा लग रहा है ............

महीन परेशां हो गए ........... उसी लगा था की वह यह ड्रेस सिर्फ घर मई hi पहनी गई ............. मगर विनोद न्य ज़िद्द की तो महीन वह उस सेक्सी दिखनी वाले बॉडीकॉन ड्रेस को hi पहने रखी ......... महीन इसकी लय कम्फर्टेबले नहीं थी मगर विनोद की ख़ुशी की खात्रीर उसी उसकी बात मान नई पारी .......... की आखिर वह इतना एक्ससिटेड है उनकी हनीमून को लय क्र ........ और उसी खुद को भी वह सुब ाचा लग रहा है ...... तो फिर एहि ड्रेस पहनी रखनी मैं कोई हर्ज नहीं है .... .............. महीन चेंजिंग रूम मैं गए और अपना पहली सी पहना होआ ड्रेस जो वहां हैंग क्या होआ था उसी फोल्ड क्र की सेल्स गर्ल को दया जैसी उस न्य अलग हैंड बैग मैं दाल दया ........... सेल्स गर्ल न्य बारी शॉपिंग बैग्स की साथ एक छोटा साइज का हैंड बैग भी महीन को पकरया ......

महीन बोली ........ इस मैं क्या है ........

सेल्स गर्ल मुस्करा की महीन को आँख मारती होय बोली ........ जब आप चेंज क्र रही थीं तब सर न्य आप की लय कुछ लिंगेरी भी पसंद की है ी होप आप को अछि लगी गई .................

महीन का चेहरा शर्म सी सुराख़ हो गया .......... उसनी थोड़ा मस्नूई गुस्से सी विनोद को देखा जो मुस्करा रहा था .......... फिर विनोद सेल्स गर्ल को थैंक्स बोल की महीन का हाथ पकड़े होय बहार की तरफ निकल पारा .............

बहार निकलती hi महीन बोली ........ विनोद इतना कुछ खरीदनी की क्या ज़रूरत थी .......... यह ड्रेस पहन न्य कहाँ हैं ..........

विनोद ........... जैसी अभी पहनी होय ऐसी hi पहनो गई ...........

महीन ........... विनोद मुझी बुहत अजीब सा लग रहा है ........ ऐसी इस ड्रेस मैं घूमना ........... देखो तो तइस बिलकुल भी कवर नहीं हो रही हैं ............ मुझी तो बुहत शर्म आ रही है विनोद ......

विनोद ........... आर्य यार तुम इस सुब की बारी मैं सोचो hi ना ......... बस चलती रहो .......... कोई भी तुम्हारी ड्रेस की तरफ तवज्जह नहीं दी रहा है ........ तो फिर कॉन्फिडेंस सी चलती रहो बस ...........

महीन चुप हो गए ............ महीन को अपनी टाँगूं और तइस पी रूइन खरी होती होय महसूस हो रही थय ............. थ्रिल की वजह सी ............. उसकी झिझक आहिस्ता आहिस्ता काम होती जा रही थी ............... वह दोनों बहार आकर रोड पी चल रही थय ........... ठंडी ठंडी हवा महीन को अपनी नंगी टांगों, तइस और छूट तक जाती होइ महसूस हो रही थी .......... उसनी कभी सोचा भी नहीं था की वह कभी ऐसा ड्रेस पहन की बहार फिरय गई ............. मगर ाहसिता ाहसिता उसी ाचा लगनी लगा था ........ वह विनोद का हाथ थामी आहिस्ता आहिस्ता चल रही थी .......... लम्बी गोरी गोरी टांगें नंगी हो रही थीं .............

महीन ........ विनोद मैं न्य कभी सोचा भी नहीं था की मैं ऐसी फिर सकती हों कहीं ...... ऐसी ड्रेस मैं ..........

विनोद मुस्कराया .......... महीन को खुद सी चिपकाती होय उसकी गाल को चूम की बोलै ........... लकिन ाचा तो लग रहा है न ..........

महीन न्य मुस्करा की हाँ मैं सर हिला दया ...........
 
रोड्स पी यहाँ वहां घूमती, सिघ्त सीइंग कृत्य, डिफरेंट शॉप्स को विजिट कृत्य और मुख्तलिफ एरियाज को देखती होय उनको शाम होनी लगी .......... विनोद बोलै ........... महीन क्यों न आज का डिनर भी बहार hi कृत्य हैं ...........

महीन ....... विनोद ...... एक्सपेंसेस ज़्यादा हो जैन गए .......... रिसोर्ट मई भी डिनर मिल सकता है न ............

विनोद न्य वहीँ रोड पी खरी होय hi महीन की होंठों पी अपनी होंठ रखी और उसी किश कृत्य होय बोलै ........... तो क्या होआ डार्लिंग ....... यह हमारा हनीमून है .......... खर्चा तो हो गए hi न .............

महीन न्य उसी पिच्य धकेला ........ क्या क्र रही हो यहाँ रोड पी किसिंग ........

विनोद ........ तो क्या होआ यार ........ एक तो तुम शर्माती बुहत हो .......... सिर्फ हम hi तो नहीं हैं न यह करनी वाली यहाँ ........

महीन शरमाई .......... फिर भी .......... हमारी कल्चर तो डिफरेंट हैं न इन लोगो सी .........

विनोद .......... वह कहती हैं न की दो इन रोम अस Roman's दो

महीन भी हंसनी लगी .......... फिर दोनों एक खूबसूरत सी रेस्टुरेंट मैं दाखिल हो गए ........... बुहत hi ाचा सा खवाबनाक सा माहोल था रेस्टुरेंट का ........ डिम लाइट्स मैं ............. मुख्तलिफ कपल्स टेबल्स पी बैठी होय थय ........... तमाम hi टेबल्स सिर्फ कपल्स की लय hi थीं ........... विनोद और महीन भी एक कार्नर मैं टेबल पी बेथ गए ........... वहीँ टेबल पर hi मेनुए कार्ड भी रखा होआ था ........ विनोद और महीन उसी देखनी लगी ............... डिफरेंट ड्रिंक्स भी मेंशन थय उस मैं ........ जिस मैं मॉस्किटो, पीना कड़ा, बियर, शैम्पेन और पता नहीं क्या क्या थय .......... इतनी मैं वैट्रेस्स उनकी टेबल पी आई .......

वेट्रेस ...... गुड इवनिंग सर ........ गुड इवनिंग मम

महीन और विनोद न्य मुस्करा क्र उसको रिप्लाई क्या ........

वेट्रेस ........ सर व्हाट कैन वे सर्वे फॉर योर लवली इवनिंग

विनोद न्य कुछ कहानी का आर्डर क्या ............. लकिन कोई वाइन वग़ैरा नहीं आर्डर की

वेट्रेस .......... सर wouldn't यू लिखे तो हैवे सम ड्रिंक्स ...... थी अरे कॉम्प्लिमेंटरी ......

विनोद मुस्कराया .......... ी don't थिंक सो ........ बिकॉज़ शी doesn't ड्रिंक

वेट्रेस मुस्कराई .......... okay सर ....... गिव में ा मिनट प्लीज ........... यह बोल क्र वह वहां सी चली गए और कुछ hi देर की बाद वह एक ट्रे मैं दो वाइन गिलास रखी होय वापिस आई ....... जिन मैं रेड कलर की कोई मश्रूब थय ............

महीन उसी हैरानी सी देखनी लगी .........

विनोद महीन की बैचैनी को महसूस कृत्य होय बोलै .......... मिस मैं न्य आप को बताया था न ...........

वेट्रेस मुस्कराई .......... it's no प्रॉब्लम सर ........ बूत ी शॉल सुग्गेस्ट तहत मम शुड तरय आवर स्पेशल मॉस्किटो, व्हिच इस स्वीट एंड फ्रुइटी वाइन एंड हैविंग वैरी लिटिल अल्कोहल ......... ओनली 5% .......... शी विल सुरेली अप्प्रेसियते इतस एरोमा एंड टास्ते ........

महीन ............. बूत ........... ी don't लिखे आईटी .............

वेट्रेस ........ मम प्लीज ............ तरय थिस टुनाइट .......... मैं यक़ीन दिलाती हों की यह आप की शाम को और भी हसीं बना दी गई ......... और ज़रा सा भी नशा नहीं होता इस सी ...........

यह बोल की वह वहां सी चली गए ........

महीन अपनी सामन्य पारी होय गिलास को देखनी लगी .............

महीन .......... विनोद ...... तुमको पता है न की मैं यह नहीं पी सकती ..........

विनोद न्य अपना गिलास उठाया और उसी स्मेल करनी लगा ............ बुहत hi अछि खुसबू थी उस ड्रिंक की ............ वह बोलै ........ महीन स्मेल तो क्र की देखो कितनी अछि खुशबू है ..........

महीन न्य गिलास नहीं उठाया ............ मगर विनोद न्य अपना गिलास उसकी चेहरी की क़रीब क्या .............. और महीन को एक सांस लेनी पारी ........ सुच मई hi बुहत प्यारी स्मेल थी उस ड्रिंक की ......... जैसी महीन न्य कभी पहली नहीं स्मेल की थी ......... जैसी फ्रूट जूस मैं रोज वाटर मिलाया हो ............. महीन की दिल मई ख्याल आया की जो बियर विनोद पी रहा था पिछली रात उसकी स्मेल भी बुरी नहीं थी ......... मगर इस ड्रिंक की उस सी भी बेहतर है ........ उसी याद आया की उसनी खुद भी तो बियर टास्ते की थी न ........... विनोद की होंठों सी ....... उसकी जुबां सी ........ उसी चूस चूस की ......... क्यों की उसी बियर का टास्ते ाचा लगा था ............ महीन खुद सी hi शर्मिंदाह हो गए ...........

महीन ........ हाँ अछि स्मेल है ....... लकिन विनोद तुम जानती हो न की की मैं मुस्लिम हों ........ ारो हमारी रेलगिओं की मुताबिक़ तो यह ...............

विनोद न्य अपना हाथ बढ़ा की महीन की हाथ पी रखा ........... महीन यह टिपिकल शराब नहीं है बल्कि जस्ट फ्रूट जूस है और सिर्फ थोड़ी सी hi अल्कोहल है .......... इस सी नशा भी नहीं होता .............

विनोद न्य अपनी गिलास सी एक सिप लय और वही गिलास महीन की तरफ बढ़ा दया ............. महीन झिझक रही थी ........ ज़िन्दगी मैं पहली बार शराब पीनी का ख्याल उसी अंदर सी हिला रहा था ............ कांम्पत्य होय हाथों की साथ महीन न्य विनोद की हाथ सी गिलास पकड़ा ..... और आहिस्ता ाहसिता अपनी होंठों की तरफ लय जांय लगी ............. ड्रिंक की बुहत hi प्यारी सी खुशबू महीन की सांसूं मैं उतर गए .............. विनोद की तरफ देखती होय उसनी वाइन गिलास को अपनी होंठों सी लगाया .......... और एक हल्का सा सिप लय ..........

पहली सिप लेती hi महीन को झटका सा लगा ........... यह तो सिर्फ फ्रूट जूस है ........... और वह भी बुहत hi टेस्टी वाला ............. ऐसा फ्रूट जूस तो उसनी अपनी लाइफ मैं कभी नहीं प्या था ............. पहला सिप hi उसी ाचा लगा था ............ बुहत hi रिफ्रेशिंग ........ और स्वीट ..............

विनोद महीन की तरफ देख रहा था ............. महीन उसकी आँखों मैं देखती होइ शर्मीली सी मुस्कान की साथ मुस्करा दी .............

विनोद ...... हाउ इस आईटी .......

महीन ...... यह तो फ्रूट जूस है ........

विनोद ..... हाँ एहि तो मैं कह रहा था ........ इस मैं जो अल्कोहल है उस का टास्ते बिलकुल भी फील नहीं हो रहा ..........

महीन न्य अब आहिस्ता आहिस्ता उस ड्रिंक की सिप लेनी शुरू क्र डाई .......... उसी वह जूस ाचा लग रहा था ............ उसका टास्ते ....... उसकी फ्रग्रेंस और उसका इफ़ेक्ट ...... थोड़ी देर मैं वही वेट्रेस डिनर सर्वे करनी आई तो महीन को ड्रिंक कृत्य होय देख की मुस्कराई .........

वेट्रेस ....... हाउ इस आईटी मम

महीन उसकी तरफ देख क्र मुस्कराई और गुड का इशारा कृत्य होय सर हिला दया ............. वेट्रेस न्य खाना सर्वे क्या और फिर दोबारा आ क्र दोनों की गिलास रिफिल क्र डाई ............ अब महीन और विनोद खाना कहानी लगी ............ खाना भी बुहत टेस्टी था ............. दोनों न्य ाच्य सी खाना खाया और 3 गिलास उस फ्रुइटी ड्रिंक की लये ..............

डिनर की बाद दोनों रेस्टुरेंट सी निकल आय और अपनी रिसोर्ट की तरफ चल पारी ........ एक दूसरी का हाथ थामी होय ............... खुशगवार ठंडी हवा चल रही थी ............ महीन न्य जो ड्रिंक ली थी उसका इफ़ेक्ट भी हो रहा था ........... मगर कोई नशा नहीं था .......... बस महीन की दिमाग़ को हल्का महसूस हो रहा था .......... पूरा जिसम लाइट फील हो रहा था ........ वह बुहत हंस रही थी .......... मुस्करा रही थी ............. और विनोद की साथ चिपक की चल रही थी ........... जैसी होश मैं रहती होय उसकी इन्हिबिशंस ख़तम हो रही हों ............. अब उसी यह भी अहसास नहीं था की वह कितना एक्सपोसिंग ड्रेस पहनी फिर रही है ............. मगर थी वह पूरी होश हवास मैं .......... उसकी जुबां ज़रा भी नहीं लरखरा रही थी .............. ड्रिंक hi कुछ ऐसा था ..............

दोनों रिसोर्ट मैं जाती होय फिर सी थिएटर की ाग्य सी गुज़रे तो विनोद बोलै ............. मूवी देखें आज ..........

महीन ........ हाँ ठीक है लकिन यह हैंड बैग्स तो रख आईं ....... और फ्रेश हो की आजाती हैं ........

विनोद ...... okay ठीक है ..........

दोनों अपनी रूम मैं गए ........... अपना खरीदा होआ सामान रखा ........ और महीन वाशरूम मई चली गए ..........

फ्रेश हो की वापिस आई तो विनोद सी बोली ........ विनोद मैं चेंज क्र लोन ... ???

विनोद ...... नहीं यार एहि ड्रेस रहंय दो ........ अछि तो लग रही हो इस मैं ..........

महीन मुस्कराती होय ........... बुहत ज़िद्दी हो तुम न ........ अपनी हर बात मनवाती हो .............. देखो आज तुम्हारी कहनी पर मुझी शराब भी पीनी पारी ........... कितना ख़राब कृत्य जा रही हो मुझी तुम .....

विनोद हंसा .......... हाहाहाहा ........... लकिन सूचि बताओ अछि लगी या नहीं तुमको ...........

महीन ........ अछि थी ...... बुहत अछि थी .......... वैसी बिलकुल नहीं जैसी मुझी आज तक सिखाया और बताया गया होआ था ........... की इतनी बुरी चीज़ होती है यह ............ लकिन बात तो यह है न की अगर मेरी बाप को पता चल जाय की उसकी बेटी यहाँ लंदन मैं आ की शराब भी पीनी लगी है तो वह तो बेचारा हार्ट अटैक सी hi मर जाय ............ हेहहीह

विनोद और महीन दोनों hi हंसनी लगी ........... और फिर अपनी रूम सी निकल की थिएटर की तरफ चल पारी ........
 
मिनी थिएटर पी पोहंची तो विनोद न्य एक साइड पी बनी होय काउंटर सी पता क्या तो उन्हों न्य बताया की 10 मिनट तक मूवीज स्टार्ट हों गई ....... आप जो भी मूवी देखना चाहीं उसी हॉल मैं चली जैन ............ महीन और विनोद .... अंदर गए तो एक बारे हॉल था और उस मैं 4 डोर्स थय ....... उन डोर्स की ऊपर उन मैं चलनी वाली मूवीज की बारी मैं लिखा होआ था ........ जैसी ....... रमने, थ्रिलर, हॉरर .. और 4तह दूर की ऊपर एडल्ट लिखा होआ था ................ विनोद समझ गया की वहां पी कैसी मूवी चलनी हो गई ............ विनोद न्य महीन का हाथ पकड़ा और उसी थिएटर की तरफ लय जांय लगा ..........

महीन ......... विनोद रोमांटिक मूवी तो उस थिएटर मई यह तुम कहाँ लय जा रही हो ........

विनोद हंसा ....... हमें रोमांटिक नहीं एजुकेशनल मूवी देखनी है ......

महीन ........ व्हाट ............. व्हाट एजुकेशनल ......

विनोद हंसा ....... तुम्हारी एजुकेशन और ट्रेनिंग .........

महीन ...... क्या मतलब ........ ???

विनोद ...... आओ तो सही अभी समझ आ जाय गई तुमको ......

महीन हंसी ........ मुझी लग रहा है की फिर सी तुम्हारे शैतानी दिमाग़ मैं कुछ चल रहा है .............

दोनों हंसती होय उस थिएटर मई दाखिल हो गए ........... बुहत बारे टिपिकल सिनेमा हॉल की तरह नहीं था ........ बल्कि एक बारे सा कमरा था जिस मैं 15 की क़रीब बारी बारी सोफे लगी होय थय .......... सोफे कह लाइन या कोचेस ........... जिनकी बैक और छोटी छोटी एआरएम रेस्ट थीं ........ और लेंथ इतनी थी की बाँदा आराम सी लेट सकी ुसपय ......... कोचेस की साइड पी छोटी छोटी टेबल्स थीं .......... एक सोफे काउच 2 पर्सन्स यानी एक कपल की लय था ........... हर सोफे काउच का दूसरी सी काफी फासला था ............ और स्क्रीन भी कोई बुहत दूर नहीं तह ...... बस 20 एक फुट दूर हो गई कोचेस सी और बुहत बरी टीवी स्क्रीन थी बजाय की टिपिकल पर्दा की ............ महीन उस सिनेमा हॉल को देख क्र हैरान होइ .......

महीन ......... विनोद ऐसा हॉल तो मैं न्य कभी भी नहीं देखा ........ वाक़्या hi स्पेशल रिसोर्ट है यह ......... हर चीज़ hi स्पेशल है यहाँ पी ......

विनोद खुश होआ की उसी यह हॉल पसंद आया है ........... विनोद महीन को लय क्र एक साइड वाली काउच पी आज्ञा ................ 3 कपल और भी थय ुणस्य थोड़ी दूर लेती होय कोचेस पी .......

महीन ........... हैरानी सी ....... यहाँ बैठना है की लेटना है ..........

विनोद हंसा ........ हहहह ............. इसी लय तो उन्हों न्य यह कोचेस बनाय हैं की जैसी चाहो देखो मूवी .......... चाहो तो बेथ क्र और चाहो तो लेट क्र ...........

महीन और विनोद एक दूसरी सी जुड़ क्र काउच पर बेथ गए ........ विनोद न्य महीन का हाथ अपनी हाथ मई लय लय ........... अभी मूवी स्टार्ट नहीं होइ थी तो दोनों बातें करनी लगी .............

महीन अपना सर विनोद की कांद्य पी रखती होइ बोली .......... विनोद मैं न्य कभी सोचा भी नहीं था की मेरी लाइफ इतनी चेंज हो जाय गई ..........

विनोद मुस्कराया .......... महीन की माथै पी किश कृत्य होय बोलै ........ तो क्या यह चेंज तुमको अछि नहीं लगी ...........

महीन विनोद की साथ चिपकती होइ ...... बुहत अछि लग रही है ......... मगर दर भी लगता है की कुछ ग़लत ना हो जाय ........... अगर किसी को पता चल गया तो ..........

विनोद महीन को अपनी बहून मैं समेत तय होय बोलै ....... कुछ नहीं हो गए तुम बस अपनी इस नई लाइफ को एन्जॉय करो ..........

महीन न्य देखा की एक लड़की हाथ मैं ट्रे लये होय हॉल मैं दाखिल होइ है और वह कपल्स की चौचेस की पास जा की उनको कुछ ड्रिंक्स सर्वे क्र रही है ............... महीन उसको देख क्र थोड़ा विनोद सी अलग हो क्र बेथ गए ............ विनोद मुस्करा दया ............. वह लड़की उनकी क़रीब आई और दो गिलास वाइन की उनकी क़रीब टेबल पी रख डाई ............ इनका आर्डर विनोद बहार नोट करवा की आया था ........... उसकी जांय की बाद महीन बोली ........ विनोद यह क्या है ........ यह फिर सी शराब रख गए है ........

विनोद ....... महीन यह मूवी देखती होय एन्जॉय करनी की लय है ........

महीन .......... लकिन मैं यह कैसी पी सकती हों ..... इतनी तो पहली पी है मैं न्य ............ महीन झिझक रही थी ...........

विनोद ........ कुछ नहीं है ........ एहि भी उसी की तरह की है जो पहली पी थी ........... बिलकुल hi लाइट है .......... सिर्फ जूस की तरह hi है ............. कोई नशा नहीं हो गए ..........

महीन चुप क्र गए ........... और विनोद उस गिलास सी सिप लेनी लगा ............. महीन न्य भी गिलास लय और उसी स्मेल क्या तो डिनर वाली सी डिफरेंट स्मेल थी .......... मगर अछि थी .............. उसी हल्का सा सिप लय तो टास्ते भी ाचा लगा ............. इतनी मैं हॉल की लाइट्स ऑफ हो गईं और लेद टीवी ों हो गया .......... और जैसी मूवी चलनी सी पहली नाम आती हैं वह अन्य लगी .............. सुब सी पहली आर्ट ऑफ़ सेक्स लिखा होआ आया ............. विनोद समझ गया की यह बुहत hi खूबसूरत कपल्स की मूवी हो गई .............

यह नाम पढ़ की महीन घबरा गए ................ उसी शक तो पहली hi था मगर अब उसी अहसास होनी लगा की यक़ीनन यह सेक्स मूवी hi है जो उसनी होटल मैं देखि थी .............. वह आहिस्ता सी विनोद सी बोली ......

महीन ........... विनोद ..... यह कैसी मूवी देखनी बेथ गए हो ......... मुझी नहीं देखनी ऐसी मूवी

विनोद मुस्कराया .......... महीन को अपनी साथ लगाती होय बोलै ........ पहली कभी तुम न्य सेक्स मूवीज नहीं देखि हैं क्या ........

महीन न्य विनोद सी झूट बोलती होय ना मई सर हिला दया ............ विनोद बोलै ..... तुम्हारी बातून सी मुझी पहली hi पता चल रहा था की तुमको सेक्स का कुछ भी नहीं पता और ना hi आसिफ न्य सिखाया है ........

महीन शर्मा गए ....... मुझी नहीं देखनी ........ चलो यहाँ सी ......

विनोद ....... आर्य क्या हो गया है ........ देखो तो सही क्या होता है ..........

इतनी मैं स्क्रीन पी एक बुहत hi खूबसूरत कपल सामन्य आया ........ फुल ड्रेस मई था .............. और उन्हों न्य थोड़ी देर बातें करनी की बाद किसिंग शुरू क्र दी .............. महीन थोड़ी उनकंफर्टबले हो रही थी ....... कुछ hi देर मैं उस लड़के न्य लड़की की कपड़े उतार डाई और उसी नंगी क्र दया ........... महीन विनोद सी नज़रें चुरानी लगी ............ फिर इधर उधर देखनी लगी .......... बाक़ी की तीन कपल भी एक दूसरी की साथ जुड़ की बैठी होय थय और किसिंग क्र रही थय ........... हलकी रौशनी मैं कोई अपनी साथी की बूब्स सी खेलता होआ भी दिख रहा था ...........

मूवी की लड़की बुहत hi खूबसूरत थी .......... बहुत गोरी ....... उस लड़के न्य लड़की की छूट को चाटना शुरू क्र दया ................

महीन बी चैन होनी लगी ........ उसी शर्म भी आ रही थी ......... यह सुब देखती होय...... वह आहिस्ता सी विनोद सी बोली .......... विनोद चलो यहाँ सी ....... मुझी शर्म आ रही है यार .............. ऐसी सुब की सामन्य ...... यह सुब देखनी सी

विनोद बोलै ....... शर्म कैसी ........ वह सुब भी तो एहि कृत्य हैं न ........ वह देखो जो आखिर मैं बैठी हैं .......... देखो तो क्या कृत्य हैं वह दोनों मूवी मैं ........

विनोद न्य महीन को अपनी साथ चिपकाया होआ था ...... उसका बाज़ू महीन की पिच्य सी जा की उसकी कांद्य पी था .......... और वह उसकी बाज़ू को आहिस्ता ाहसिता सहला रहा था ........

विनोद महीन की कान मैं बोलै .......... देखो तो उस लड़की को कितना मज़ा आ रहा है .......... उस लरकी की जुबां सी ........

महीन उस लड़की की चेहरी को देख रही थी ....... जो आहिस्ता ाहसिता सिसक रही थी ........ और उस लड़के की सर की बलून को सहलाती होइ उसकी मुंह को अपनी छूट की तरफ दबा रही थी ............. ह्म्म्मम्म ....... वह आहिस्ता सी बोली ...........

विनोद ....... तुमको भी ऐसी hi मज़ा आता है न वहां पी .......

महीन न्य शर्मा की उसकी थिगह पी हल्का सा थप्पड़ मारा ....... मुझी नहीं पता .................. मगर महीन को अभी सी मज़ा आ रहा था ..... यह सुब देखती होय ............. उसका जिसम गरम होनी लगा था ......... और उसकी छूट भी गीली होना शुरू हो रही थी ..............

विनोद बोलै ............ महीन ..........

महीन ाहसिता सी बोली ... ... हुन्न .......

विनोद ......... महीन तुम्हारी छूट भी इस लड़की की तरह hi गुलाबी और टाइट है ................

महीन शर्मा गए ............. चुप क्र जाओ बी शर्म ..........

विनोद महीन की गाल को चूम की हंसनी लगा ............. फिर उसनी महीन का अपनी थिगह की पास रखा होआ हाथ अपनी ट्रॉउज़र की ऊपर सी अपनी लुंड पी रख दया .......... महीन न्य फौरन hi अपना हाथ हटा लय .......... क्या कृत्य हो ........... कोई देख लय गए ...

विनोद आहिस्ता सी ........... इसी तो सहलाओ थोड़ा ........ देखो तो कैसी हालत हो रही है इसकी ...........

महीन ाहसिता सी बोली ........... तो ना देखो न ऐसी चीज़ें जिस सी इसकी हालत ऐसी हो रही है ............. हहहहए ............

महीन हंसी ....... लकिन उसनी अपना हाथ विनोद की लुंड की ऊपर सी नहीं हटाया ......... और आहिस्ता आहिस्ता उसी उसकी ट्रॉउज़र की ऊपर सी सहलानी लगी ....... उसी ाचा लग रहा था ........ विनोद की लुंड को ऐसी फील करना ....... उसकी लम्बाई और मोटाई को फील करना ............. मूवी मैं लड़की न्य अब उठ क्र उस लड़के की पंत उतारी ........ और उसका लुंड नंगा हो की लेहरानी लगा ..........

विनोद महीन की कान मैं बोलै ........ देखो तो कैसा है उस लड़के का लुंड ...........

महीन शरमाई ........ मुझी नहीं पता ........... मुझी नहीं देखना ..........

विनोद हंसा ........... देखो तो कैसी प्यार सी सहला रही है न वह लड़की उसकी लुंड को ..............

महीन विनोद की तरफ देखती होय ............ जैसी मैं नहीं क्र रही न ........

विनोद हंसनी लगा ............. उस लड़की न्य अब लड़के की लुंड को किश करना शुरू क्र दया ...... आहिस्ता ाहसिता ....... उसकी पूरी लुंड पी ........ महीन बारी घोर सी देख रही थी उसकी हरकतों को ....... अपनी हाथ मैं विनोद की लुंड को पकड़े होय ............. वह लड़की अब अपनी जुबां उस की लुंड पी पहिरण्य लगी ........... चैतन्य लगी .............. उस लड़के की आँखों मैं देखती होय .............. विनोद न्य जब देखा की महीन पूरी तरह सी उस सन मैं गम हो चुकी होइ है तो उसनी आहिस्ता सी अपना लुंड अपनी ट्रॉउज़र सी निकाल लय . और अपनी नंगी लुंड पी महीन का हाथ रख दया ........ महीन को अहसास भी नहीं होआ की क्या तब्दीली होइ है ......... उसनी फिर सी विनोद की लुंड को पाकर लय ............

विनोद महीन की कान मैं बोलै ........ उसका लुंड बारे है या आसिफ का .....

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ........... और आहिस्ता सी बोली ....... मुझी नहीं पता ............. और फिर उसकी नज़र विनोद की लुंड पी रखी होय अपनी हाथ पी गए तो वह चौंक परइ .......... और जल्दी सी विनोद की लुंड को उसकी पाजामे की अंदर करनी की कोशिश करनी लगी ........ घबरा की इधर उधर देखती होइ ...........

महीन ........ यह क्या क्र रही हो ....... अंदर करो इसी कोई देख लय गए ........

विनोद हंसा ...... देखता है तो देख लय .......... मुझी क्या है ......

महीन ........... तुम तो हो hi बी शर्म न ............. विनोद न्य दोबारा सी उसका हाथ अपनी लुंड पी रख दया होआ था ........ महीन को अपनी नरम नरम हाथ मैं विनोद का गरम गरम लुंड बुहत ाचा फील हो रहा था ............ उसनी फिर सी खामोशी सी विनोद की लुंड को सहलाना शुरू क्र दया ........ और फिर सी मूवी देखनी लगी ........... वह लड़की अब लड़के की लुंड को अपनी मुंह मई लय की चूस रही थी ........ अपनी मुंह की ाग्य पिच्य करती होइ ................

महीन न्य ऐसा सन पहली भी देखा था होटल मैं ......... जिस मैं एक गोरी लड़की काले कस्टमर का लुंड चूस रही थी ........ मोटा और बारे ........... आज दूसरी बार देख रही थी .............. उसकी दिल की धरकन तेज़ हो रही थी ............... छूट मैं गुदगुदी सी होनी लगी थी .....

महीन वीर्य सी बोली ........... विनोद ....... यह कैसी क्र सकती है ऐसी .... ऐसी भी भला कोई करता है ...........

विनोद .......... क्यों इस मई क्या है ............

महीन ........ यह तो गन्दा होता है न ............

विनोद ........... उस लड़की की चेहरी पी देखो ........ टमको लग रहा है क्या की उसी यह गन्दा फील हो रहा है ......... .. देखो तो कितनी मोहब्बत और प्यार नज़र आ रहा है उसकी चेहरी पी उस लड़के की लय ........... तो इसी प्यार मैं तो यह सुब कुछ कृत्य हैं ............ जितना प्यार ज़्यादा होता है उतना hi यह एक दूसरी को मज़ा देती हैं ...............

महीन ........ लकिन इस मैं क्या मज़ा जो यह क्र रही है ........

विनोद ........ जब मैं तुम्हें वह पी प्यार क्र रहा था तो तुमको ाचा लगा था न ..........

महीन न्य शर्माती होय हाँ मैं सर हिला दया ........

विनोद ..... तो इसी तरह मर्द को भी ाचा लगता है लड़की का वहां पी प्यार करना ........... उसी भी इस सुब सी मज़ा मिलता है .......... उसकी भी दिल की खवाहिश होती है की उसकी लवर उसकी लुंड को ऐसी hi प्यार क्रय ...........

महीन अपना चेहरा विनोद की तरफ क्र की उसी देखनी लगी .............. जैसी उसकी चेहरी को परहंय की कोशिश क्र रही हो ............. जैसी उसी पूछ रही हो की क्या सुच मैं उसका भी दिल चाहता है अपना लुंड चूस्वांय का ............ क्या उसकी भी खवाहिश है .............. और उसकी चेहरी पी दिख रही होइ प्यास को देख क्र उसी अपनी बात का जवाब भी मिल गया था ........... महीन न्य अपनी नज़र नीची लय जा की अपनी हाथ मैं पकड़े होय विनोद की लुंड पी डाली ......... वह मोटा लम्बा लुंड .......... महीन की छोटी सी हाथ की ग्रिफ्ट मैं था ............ उसी विनोद की लुंड की लम्बाई को नापना ाचा लग रहा था .............. महीन न्य दोबारा सी अपना चेहरा स्क्रीन की तरफ क्र लय ...................

महीन लड़की की चेहरी की एक्सप्रेशंस को देखनी लगी ............ वह सुच मैं hi बुहत शौक़ सी और बुहत hi प्यार सी उस लड़के का लुंड चूस रही थी ............... जैसी वह उसको खुश करना चाहती हो ............. उसको पूरा मज़ा देना चाहती हो .............. उसी यह सुब ाचा लग रहा हो ........... महीन को विनोद की बात ठीक लगनी लगी .......... जो उसनी बोली थी ............... मगर वह अभी भी डीडे नहीं क्र पा रही थी की वह भी विनोद को उसी लड़की की तरह सी मज़ा दी सकती है या नहीं ........... क्या उसी भी वह सुब करना चाहे या नहीं ............. क्या सुच मैं विनोद का भी दिल चाहता है की मैं .................... वह ाग्य नहीं सोच सकीय .......... बस अपनी हाथ मैं पकड़े होय विनोद की लुंड को आहिस्ता ाहसिता सहलाती रही ...............

महीन न्य ठीक सी पहली बार विनोद का लुंड आज अपनी हाथ मई पकड़ा था ............. वह अपनी हाथ सी टटोल टटोल की विनोद की लुंड को महसूस क्र रही थी ........... उसकी टोपे पर हाथ पहिरण्य लगती .......... ऊपर को हाथ लय क्र जाती तो उसकी लुंड का टोपा खाल की झिल्ली मैं चुप जाता ........... इस बात की महीन को समझ नहीं आ रही थी ....... मगर वह आहिस्ता ाहसिता विनोद की लुंड को सहला रही थी ......... वह अपनी दिमाग़ मैं विनोद की लुंड का मुवाज़ना आसिफ की लुंड सी करनी लगी ........ अपनी हाथ सी hi उसी साफ़ महसूस हो रहा था की विनोद का लुंड आसिफ की लुंड सी ज़यादा मोटा और लम्बा है ..............

विनोद की लुंड को सहलाती होय महीन की नज़र सामन्य स्क्रीन पी थी ........ जहाँ वह लड़की अभी उस लड़के की लुंड की ऊपर बेथ क्र खुद उसकी लुंड को अपनी छूट मई लय रही थी ............ महीन हैरानी सी उसी देख रही थी ........... की यह कैसी लय रही है ...............

विनोद न्य महीन की चेहरी को और उसकी हैरानी को परः लय .......... क्या होआ ........... तुम न्य कभी ऐसी नहीं क्या ...........

महीन न्य स्क्रीन की तरफ देखती होय इंकार मैं सर हिला दया ..........

विनोद न्य अपना हाथ महीन की थिगह लेंथ बॉडीकॉन ड्रेस सी नंगी हो रही होइ थिगह पी रख दया और आहिस्ता आहिस्ता उसकी चिकनी तइस को सहलानी लगा .............. स्क्रीन पी चल रही होय सन ........... हाथ मैं पकड़े होय विनोद की लुंड ............. और अपनी नंगी तइस पी चल रही होय विनोद की हाथों की असर सी महीन की छूट गीली हो रही थी ............... वह थोड़ा और सिमट की विनोद की पास हो गए ............ ssssssssssssssssssssss .......... aaaaaaaaaaaaa ........... की आवाज़ उसकी मुंह सी निकली ..................

इस सुब सी महीन का गाला सूख रहा था .......... और छूट गीली होनी लगी थी ............... महीन न्य साइड टेबल पी रखा होआ अपना वाइन का गिलास उठाया और उस मैं सी उस जूस का एक बारे सा घूँट लय लय .............. महीन की पूरी जिसम मैं ठंडक की लहर दौड़ गए .............. बुहत hi अछि फीलिंग होनी लगी ..............

महीन की तइस को सहलाती होय विनोद न्य महीन की तंग को अपनी तरफ को फैलाती होय थोड़ा खोल दया .......... और अपनी हाथ को महीन की ड्रेस की अंदर लय जांय लगा ..... उसकी तइस पी ऊपर लय जाती होय ....... उसकी छूट की तरफ ..........

महीन सिसकी .......... नहीं करो विनोद ........ प्लीसीईईई ........ यहाँ इतनी लोग हैं .........

विनोद अपनी हाथ को ऊपर की तरफ लय जाती होय बोलै ........ कोई नहीं देख रहा बेबी ............ जस्ट एन्जॉय करो तुम .............

महीन सी खुद बह कण्ट्रोल नहीं हो रहा था ............ उसनी अपना हाथ हटा लय ........... और विनोद न्य अपना हाथ महीन की पंतय की ऊपर सी उसकी छूट पी रख दया ............. और आहिस्ता ाहसिता उसी सहलानी लगा .......... सामन्य स्क्रीन पर वह लड़का उस लड़की को घोरी बना की छोड़ रहा था ................. विनोद न्य आहिस्ता सी महीन की पंतय को महीन की छूट पर सी हटाया और अपनी ऊँगली छूट की अंदर दाल दी ........... ssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh .............. VVVvvvvvvvinoooooooooooodddddddddddddddddddd ............. महीन सिसकी ............ और उसका पूरा जिसम कैंम्प गया ............... जैसी hi विनोद की ऊँगली महीन की छूट मैं दाखिल होइ ...............

महीन ............. नहीं करो pleaseeeeeeeeeeeeeee ............. Vinooooodddddddddddddd ................. मुझ सी कण्ट्रोल नहीं हो रहा है ...............

मगर विनोद नहीं रुका ............ आहिस्ता ाहसिता अपनी ऊँगली महीन की छूट की अंदर बहार करनी लगा ............... इतनी मैं मूवी वाला लड़का भी अब फ़ारिग़ होनी वाला था ............... उसनी अपना लुंड उस लड़की की छूट सी निकाल लय ............ और वह लड़की जल्दी सी उसकी लुंड की सामन्य बेथ गए .......... और फिर सी उसकी लुंड को चूसनी लगी ............... महीन हैरानी सी सन को देख रही थी ................. और अगली hi लम्हे उस लड़के की लुंड सी उसकी सुफैद गाढ़ी मणि निकल की उस लड़की की चेहरी पी गिरनी लगी ............. उसकी चेहरी को भिगोती होइ ........ और कुछ कटरी उस लड़की की खुली मुंह और जुबां पी भी गिरी .......... जिसे वह निगल गए ............. यह सन देखती hi महीन की छूट न्य भी पानी चोर दया ................. उसका जिसम झटकी लय रहा था ......... और महीन न्य अपनी हाथ मैं पकड़े होय विनोद की लुंड को ज़ोर सी अपनी मुठी मैं भींच लय ........... अपनी ओर्गास्म की वजह सी .............. कुछ देर मैं उसकी सांसें भाल होइ न तो ........... उसी अपनी आँखों पी यक़ीन नहीं हो रहा था की कोई ऐसा भी क्र सकता है ...........

महीन ............. VVVViiiinnoooooooooodddddddd ............ यययययय ..यययययययय eeeeeehhhhhhhhhh kyyyaaaaaaaaaaaaaaa किआआआ उसनी ........ cheeeeeeeeeee cheeeeeeeeeee cheeeeeeeeeeeee.......

विनोद उसकी छूट को सहलाती होय बोलै .......... उस लड़की की चेहरी सी तुमको लग रहा क्या की यह गन्दा काम क्या है उसनी ............

महीन को हैरानी होइ की सुच मैं विनोद ठीक कह रहा था ........... क्यों की उस लड़की की चेहरी सी तो ऐसा लग रहा था की उसी यह सुब ाचा लगा है ................... महीन की लय अब यह सुब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था .............. उसका जिसम बुरी तरह सी गरम हो रहा था .............

महीन ......... विनोद ........ बस करो .......... चलो रूम मैं चलती हैं ................

विनोद भी महीन की हालत को समझ रहा था ........ उसी पता था की अब महीन भी गरम हो रही है ............ उसनी अपनी गिलास का आखरी घोंट लय और अपना ट्रॉउज़र ठीक कृत्य होय काउच सी उठ गया महीन भी उसकी साथ hi उठ गए ........... और दोनों एक दूसरी का हाथ पकड़े होय थिएटर सी बहार निकल आय ................ और अपनी रूम की तरफ जांय की लय ............
 
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