महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड) - Page 5 - SexBaba
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महीन ........ मोहय रंग दी पिया (कम्प्लेटेड)

ऑफिस टाइम ऑफ होआ तो वह विनोद की बता क्र नीतू की साथ शॉपिंग मॉल मैं चली गए ........

नीतू ...... हाँ तो बताओ फिर क्या गिफ्ट लो गई तुम अपनी विनोद जी की लय ..... उनको सरप्राइज करनी की लय .......

महीन ब्लश करती होइ ....... मुझी नहीं पता .......... तुम hi बताओ ....

नीतू ....... ी थिंक एक पंत शर्ट और एक घरी ठीक रही गई ......

महीन .......... हम्म ठीक है ...... लकिन घरी किस लय

नीतू महीन को तंग करती होइ बोली ....... वह इस लय की जब भी विनोद तुम्हारी दी होइ घरी पहनी गए तो उसी तुम्हारी याद आय गई ........... हाहाहाहा

महीन शर्मा गए और ाग्य बढ़ गए स्टोर मैं .......

नीतू न्य एक शर्ट निकाली जो ब्राइट कलर की थी ............ महीन यह चेक करो .......... ी थिंक विनोद इस मई डैशिंग लगे गए ........

महीन नर्वस होती होय ............ पता नहीं ...... और अगर यह लय लाइन तो महीन न्य नीतू को अपनी पसंद की एक शर्ट दिखाई ........... क्रीम कलर मैं ..........

नीतू मुस्कराई ........ ठीक है ....... व्हाई नॉट ....... तुमको अपनी पसंद की hi शर्ट गिफ्ट करनी चाहिए ............ जब उसनी पहन नई भी तुम्हारी सामन्य hi है ............

महीन भी वीर्य सी मुस्करा दी ........ और फिर विनोद की लय उस शर्ट की साथ एक ब्लैक कलर की पंत भी लय ली .........

महीन ाहसिता सी बोली ............ नीतू ........ वह ....... विनोद जी को कल मंदिर भी जाना है पूजा की लय ........... तो मैं सोच रही थी की उनकी लय एक पजामा और कुरता भी लय लोन ............. ाचा लगी गए न जब वह नया पजामा कुरता पहन क्र मंदिर जाईं गए ..........

नीतू महीन को देखती होइ शरारत सी मुस्करा रही थी ........... वह ........ अभी थोड़ी देर पहली तो तुमको यह सुब अजीब लग रहा था ...... और अब देखो कितनी फ़िक्र हो रही है विनोद की ............. जैसी विनोद न्य तुम्हारी साथ पहली डेट पी जाना है ........

महीन बस मुस्करा दी ............ और फिर हैंग की होय कुर्ती देखनी लगी ........ महीन न्य एक मैरून कलर का कुरता और उसकी साथ सुफैद पजामा सेलेक्ट क्या .......

महीन ....... यह कैसा लगी गए ........

नीतू ........... योर चॉइस इस ऑलवेज गुड ............. टेक आईटी महीन ......

महीन खुश हो गए .......... और फिर नीतू कि आठ उसनी एक खूबसूरत सी वाच भी खरीद ली .............

महीन .......... थैंक्स नीतू ........... चलो अब घर चलें ........

नीतू ........ क्या मतलब घर चलें .......

महीन हैरानी सी ...... हाँ तो विनोद की लय गिफ्ट्स लय तो लये हैं तो अब घर hi चलना है न ...........

नीतू ........... no वे महीन .......... मैं न्य बोलै था न की तुम उसकी साथ बहार जाओ गई ........ तुमको विनोद की लय स्पेशल तैयार होना है ........ कुछ ऐसा पहन न है जो तुम्हारी और उसकी लय स्पेशल हो ............

महीन नीतू की बातें सुन रही थी ........... तुम कहना क्या चाहती हो ......

नीतू ....... मैं यह कहना चाहती हों की तुमको भी अपनी लय कोई नै स्पेशल ड्रेस लेनी चाहिए ........ जो तुम विनोद की जनम दिन पी पहनो जब तुम उसकी साथ बाहिर जाओ तो तुमको भी नै ड्रेस मैं होना चाहिए ...........

महीन ........ हम्म्म ........... कुछ सोचती होइ ........... तो फिर व्हाट दो यू सुग्गेस्ट फॉर में ......... ??

नीतू चाहतकी होइ बोली ........... साड़ी ....... महीन साड़ी मैं तुम गोरजोस लगो गई सुच मैं ........

महीन शॉकेड .......... घबरा की बोली ....... साड़ी ........ ??? नहीं नहीं नीतू ...... मैं न्य कभी साड़ी नहीं पहनी ..... मैं नहीं यह पहन सकती ..............

नीतू .............. एहि तो ख़ास सरप्राइज हो गए ......... और एहि तुम्हारी लय स्पेशल हो गए जो तुम विनोद की ख़ुशी की लय करो गई ...... की तुम अपनी ज़िन्दगी मैं पहली बार विनोद की जनम दिन पर उसकी लय साड़ी पहनो गई ........... उसी भी फील हो गए की तुम उसकी लय ख़ास तोर पी तैयार होइ हो .....

महीन ब्लश करनी लगी ........... उसकी गाल गुलाबी होनी लगी ......

नीतू उसी तैसे करती होइ ............ महीन यू अरे बलुशिंग मेरी जान ...... मेरी कहनी पी तरय तो करो यार .............

महीन शर्माती होइ मुस्करानी लगी

नीतू महीन को लय क्र इंडियन ड्रेसेस की कार्नर मई लय गए ............ वहां कुछ देर देखनी की बाद नीतू न्य महीन की लय एक मैरून कलर की ट्रांसपेरेंट साड़ी सेलेक्ट की ...........

महीन ........ नीतू ...... यह तो ट्रांसपेरेंट है ......... मैं यह कैसी पहन सकती हों यार ......

नीतू .... क्यों क्या होआ तुम क्यों नहीं पहन सकती .......... कितनी बार कह रही हों तुमको की भूल जाओ इंडिया को ........... तुम यहाँ ुक मैं हो ....... और इस वक़्त को एन्जॉय क्र लो ............

महीन आहिस्ता सी बोली ........ और ब्लाउज ........

नीतू मुस्करा की .......... ब्लाउज भी स्पेशल होना चाहिए विनोद की जनम दिन की लय ..........

महीन .......... जी नहीं ........

नीतू न्य हंसती होइ महीन को ब्लौसेस दिखानी लगी ....... जो वह पी सटटूएस पी पहनाय होय थय ............... महीन कुछ सिंपल ब्लाउज देखनी लगी ........... मगर नीतू उसका हाथ पाकर की ाग्य लय आई ........... जहाँ पी कुछ सेक्सी ब्लाउज डिस्प्ले की होय थय ..........

नीतू ....... उन मैं सी नहीं ........ इन मैं सी सेलेक्ट करनी हैं ........

महीन उनको देखनी लगी .......... उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं ........ वह बुहत hi सेक्सी कटाई की थय ........ स्लीवलेस और बैकलेस ........ गले भी उनकी काफी डीप थय ..........

महीन ........ नीतू तुम पागल हो गए हो क्या .......... मैं कैसी यह ब्लाउज पहन सकती हों विनोद की सामन्य ..........

नीतू उसको तैसे करती होइ बोली .......... क्यों ...... क्यों नहीं पहन सकती ........ विनोद सी अपनी लेग का मस्सगे करवा सकती हो तो उसकी सामन्य यह ब्लाउज क्यों नहीं पहन सकती .............

महीन ........ पर नीतू .......

नीतू ....... सुच बताओ क्या तुम्हारी जिसम का कुछ भी हिस्सा उसकी सामन्य थोड़ा भी एक्सपोज़ नहीं होआ कभी ............

महीन न्य सर झुका लय शर्म सी ........... नीतू न्य महीन को एक ब्लाउज दया और उसी तरय करनी को बोलै ............ महीन झिझक रही थी ....... नीतू न्य उसी ट्रायल रूम मैं पुश क्या और बोली पहन की दिखाओ ..........

महीन की हालत अजीब हो रही थी ............ वह उस ब्लाउज को देखनी लगी ........... ....... कुछ देर सोचनी की बाद उसनी अपनी शर्ट उतारी ........ और फिर अपनी ब्रा भी उतार की हैंग क्र दी ............. महीन न्य वह ब्लाउज पहना .............. तो उसकी आंखें खुद hi शर्म सी झुक गईं ................. बुहत hi छोटा ब्लाउज था ........ महीन की बूब्स सी नीची बस थोड़ा हिस्सा hi था ब्लाउज का ........ मगर उसकी गूरी गूरी पेट का ज़्यादा हिस्सा नंगा हो रहा था ........ स्लीवलेस था ........... और शोल्डर पी सिर्फ तीन इंच की चोरी स्ट्रैप्स थीं ............ बैक पी भी सिर्फ उतनी hi साइज की पट्टी थी ..... उसकी इलावा उसकी साड़ी कमर नंगी हो रही थी .......... ब्लाउज का गाला काफी खुला होआ था जिस सी महीन का सीना नंगा हो रहा था ........ और उसकी बूब्स का ऊपरी हिस्सा भी ब्लाउज सी थोड़ा थोड़ा दिख रहा था .............

महीन शॉक की हालत मैं खुद को आंय मैं देख रही थी ............. मैं कैसी यह ब्लाउज पहन सकती हों विनोद की सामन्य ........... उसकी तो होश hi उड़द जैन गए ............ पर क्या सोची गए न वह मेरी बारी मैं ............. लकिन क्या उसकी जनम दिन पी यह पहन क्र उसी सुर्पीसे देना उसकी लय बुहत बारे गिफ्ट नहीं हो गए ............... मुझी इस साड़ी मैं देख क्र तो वह प्रिय को भूल hi जाय गए ............... ............ महीन शर्माती होइ मुस्कराई .............. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी बहार जांय की ........... इतनी मैं दूर नॉक होआ .............. और नीतू की आवाज़ आई उसको बहार अन्य को बोली ............

महीन न्य झिझकती होय दरवाज़ा खोला मगर बहार नहीं निकली ........... नीतू न्य महीन को देखा तो उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं ........... फिर वह अपनी दिल पी हाथ रख की बिहोश होनी की एक्टिंग करनी लगी .............. उसकी इस हरकत पी महीन भी शर्माती होइ हंसनी लगी ............

नीतू ............. महीन ................ तुम तो जान लय लो गई विनोद की इस साड़ी मैं ..............

महीन .......... नीतू की बची .......... मैं कैसी यह साड़ी पहन सकती हों ........... देखो तो कितना जिसम एक्सपोज़ हो रहा है ............

नीतू मुस्कराई .......... एहि तो स्पेशल हो गए न विनोद की लय ............ जो विनोद को प्रिय की याद नहीं अन्य दी गए .................

महीन ......... लकिन नीतू ..... यह देखो सामन्य सी मेरा सुब कुछ दिख रहा है ..........

नीतू महीन को तैसे करती होइ बोली ........... तुम तो ऐसी बोल रही हो जैसी विनोद न्य कभी बी चांस भी इनको नहीं देखा हो गए घर मैं .......... हहहए

महीन शर्मा गयी ...... बुहत hi बद्तमीज़ हो तुम ............

महीन शर्मा गए ............. और दरवाज़ा बंद क्र लय ............. थोड़ी देर मैं महीन चेंज क्र की बहार निकली ............ नीतू न्य ज़बरदस्ती hi उसकी लय वही मैरून कलर की एम्ब्रॉइडेड ट्रांसपेरेंट साड़ी और वही सेक्सी लुक वाला ब्लाउज लय लय .......

नीतू बोली .... देखना तुम दोनों मैचिंग कलर की ड्रेस मैं जब बहार जाओ गए तो कितनी ाच्य लगो गए ......... बिलकुल एक कपल की तरह ........

महीन शर्मा रही थी ........ रेसिस्ट भी क्र रही थी ....... मगर दिल hi दिल मैं सोच रही थी की कैसा लगी गए विनोद को मुझी इस साड़ी मैं देख की ............... फिर दोनों मॉल सी बहार आ गईं और नीतू न्य महीन को उसकी घर चोर दया ..............
 
नेक्स्ट डे भी महीन और नीतू ऑफिस मैं विनोद की बर्थडे को लय क्र बातें कृत्य रही ........... नीतू उसी कन्विंस करती रही की और उसी बताती रही की उसी क्या करना है ............. और उसकी दिल मैं बार बार पैदा होनी वाली गिल्ट की अहसास को ख़तम करनी की कोशिश करती रही ..............

महीन ............ नीतू ....... अगर कुछ हो गया तो ........

नीतू उसी तैसे करती होइ .......... क्या हो गए .........

महीन शर्माती होइ ............... प्लीज मुझी तंग नहीं करो ........... तुम जानती हो मैं क्या बोल रही हों ..............

नीतू ........... तो जो हो उसी होनी देना ........ रोकना नहीं ... ना खुद को और ना hi विनोद को .............. कुछ मत सोचो ....... जस्ट एन्जॉय थे मोमेंट्स ................

महीन ............ लकिन नीतू मैं मैरिड हों ............ और फिर मुझी लगता है की यह सुब करना आसिफ की साथ चीटिंग हो गई ..........

नीतू ........ महीन बेवक़ूफ़ नहीं बनो ............ विनोद की साथ वक़त गुज़ारनी का मतलब यह नहीं है की तुम्हारी दिल मई आसिफ की लय मोहब्बत काम हो रही है ............. यह सुब एक ऐसी सिचुएशन की वजह सी हो रहा है जिस का तुमको सामना करना पर रहा है .......... आखिर तुम भी एक इंसान हो .......... क्या तुम झुटला सकती हो की जब सी तुम यहाँ आई हो तो तुम्हे जिसम को एक मर्द की ज़रूरत महसूस नहीं होइ .............

महीन न्य सर झुका लय ........... उसकी दिल की धरकन तेज़ हो रही थी ........ आज की रात hi थी जब सुब कुछ उसी करना था .............

ऑफिस सी अन्य की बाद महीन और विनोद न्य खाना खाया .......... खाना खाती होय भी विनोद महीन को काफी बुझा बुझा सा लग रहा था ............. महीन उस सी बातें करनी की कोशिश क्र रही थी .......... उसका दिल बहलानी की ........

महीन खाना खाती होय ............. विनोद चाँद घंटी रह गए हैं तुम्हारा जनम दिन शुरू होनी मैं बस ............

विनोद न्य हलकी सी मुस्कराहट दी ..............

महीन ............ विनोद हम ाच्य सी सेलिब्रेट करें गए तुम्हारी जनम दिन को ................ और तुम न्य वह सुब करना है जो प्रिय न्य बोलै है तुमको .............

विनोद फिर मुस्करा दया बस ..........

महीन चहकती होइ .............. पता है ी विल बे थे फर्स्ट ओने तो विश यू ों योर बर्थडे ................. महीन एक्ससिटेड होती होइ बोली ...........

विनोद बोलै ........... हाँ हाँ ठीक है ........... पर तुम मुझी फाॅर्स नहीं करो गई कल कुछ भी करनी को .......... और ना hi प्रिय को बताओ गई कुछ ............ हाहाहा .......... विनोद हंसा .........

महीन ..... वह तो कल देखें गए न क्या करना है और क्या नहीं ........... महीन मुस्कराई ........

लंच की बाद दोनों अपनी अपनी रूम मैं चली गए ........ और महीन लेट क्र फिर सी विनोद की और उसकी बर्थडे सेलिब्रेशन की बारी मैं सोचनी लगी ............ की क्या वह ठीक क्र रही है ........... फिर खुद hi को जवाब देंय लगी की हाँ जो भी वह करनी जा रही है विनोद की लय वह डेसेर्वे करता है ........ और फिर क्या करनी वाली है ....... बस उसकी साथ उसकी जनम दिन को सेलिब्रेट क्र रही है न .......... उसकी लय साड़ी पहन लय गई ताकि उसी ख़ुशी मिले की कोई यहाँ भी है जिसकी लय उसकी ख़ुशी की ाहमयत है ........ जिसकी लय उसकी ाहमयत है ............ अगर मैं थोड़ा बुहत उसकी खातिर क्र भी लोन गई तो कोनसा हर्ज है ........... सिर्फ साड़ी hi है न ...... क्या होआ जो थोड़ी एक्सपोसिंग है .......... और यहाँ तो सुब चलता है न ........ यहाँ कोनसा मेरी अब्बू या आसिफ देखनी वाली हैं .......... थोड़ी देर को hi तो पहन नई है .......... और फिर पहली भी तो मैं उसकी सामन्य शॉर्ट्स मैं रहती हों न ....... हर रोज़ मेरी टांगों को तइस तक देखता है ........... और जब मेरी पाऊँ मैं मोच आई थी तो मेरी पेअर और लेग का मस्सगे भी तो करता रहा है न ............ एहि सोचती सोचती महीन की आँख लग गए ........

रात को कहानी की बाद दोनों अपनी अपनी रूम मैं ाग्य .......... मगर महीन सोइ नहीं थी अभी भी जाग रही थी ......... और उसकी नज़र मोबाइल पी hi थी ........... वह बार बार टाइम देख रही थी ........... वह चाहती थी की सुब सी पहली वह hi विनोद को बर्थडे विश क्रय ........ प्रिय सी भी पहली ............. जैसी hi 2 मिनट बाक़ी थय 12 बजनी मैं तो महीन अपनी कमरे सी निकली और लाउन्ज मैं आगये ........... लाउन्ज मैं अँधेरा था .......... सिर्फ एक नाईट बल्ब जल रहा था ....... जिसकी हलकी हलकी रौशनी लाउन्ज मैं फैली होइ थी ........ महीन न्य नाईट शर्ट और पजामा शॉर्ट्स पहनी होइ थी ...... महीन की टांगें उसकी हाफ तइस तक नंगी हो रही थीं ........ उसकी नाईट शर्ट भी उसकी शार्ट पजामी की स्टार्ट तक hi थी ........

उसकी दोनों बाज़ू भी नंगी हो रही थय .......... जैसी hi घरी पी 12 बाजी तो महीन न्य विनोद की दरवाज़ी को नॉक क्र दया .............

विनोद न्य दरवाज़ा खोला और महीन को देख क्र हैरान हो गया ........ विनोद न्य सिर्फ एक शॉर्ट्स पहनी होय थय ........ उसका बाक़ी जिसम नंगा था ........ उसका बलून सी भरा होआ चौरा सीना ....... और मज़बूत तइस ....... नंगी थीं ............

विनोद ....... खैरयत तो है महीन ...........

महीन न्य मुस्कराती होय कहा ......... हैप्पी बर्थडे तो यू विनोद ......

विनोद खुश हो गया और हंसनी लगा ............ थैंक यू महीन ..... थैंक्स अलॉट ...........

महीन ख़ुशी सी चहकती होइ बोली .......... विनोद ी ऍम हैप्पी की मैं न्य सुब सी पहली तुमको विश क्या है ............ प्रिय सी भी पहली ......

विनोद मुस्कराया ........ हाँ .......... लकिन प्रिय की तरह तो नहीं न ....

महीन थोड़ा हैरानी सी बोली....... क्या मतलब ......

विनोद .......... प्रिय तो मुझी हुग क्र की विश करती है न .......

महीन का चेहरा शर्म सी सुराख़ हो गया ........ उसनी विनोद की नंगी सीने पी एक नज़र डाली और फिर नीची देखनी लगी .......... उसकी नज़र विनोद की शॉर्ट्स मैं बनी होय उभार पी रुक गईं और वह वीर्य सी बोली .............. मैं प्रिय की तरह कैसी क्र सकती हों ..........

विनोद ........ क्र सकती हो तुम भी महीन ...........

यह बोल क्र विनोद न्य महीन का नाज़ुक सा हाथ पकड़ा और वीर्य सी उसी अपनी तरफ खींचा तो महीन एक झटकी सी विनोद की नंगी सीने सी जा लगी ........... विनोद न्य फौरन hi अपनी बहून को उसकी कमर की गिर्द कस्ती होय उसी अपनी बहून मैं भर लय ............ महीन की एक सिसकी सी निकल गए .............. विनोद की मज़बूत बाज़ूओं मैं ...... और उसकी चोरी मज़बूत छाती की साथ उसका नाज़ुक सा जिसम चिपका होआ था ......... महीन को विनोद की जिसम की मज़बूती का ाच्य सी अहसास हो रहा था .......... विनोद की सख्त मज़बूत हाथ महीन की कमर को सहला रही थय ....... महीन न्य नीची सी ब्रा नहीं पहनी होइ थी ........ उसकी बूब्स विनोद की नंगी सैन्य की साथ प्रेस हो रही थय ........ महीन को अपनी पूरी जिसम मैं जैसी करंट सा दौड़ता होआ महसूस हो रहा था ...... महीन हलकी सी मज़ाहिमत करनी लगी .......... खुद को चुरवानी की ......

महीन सिसकी .......... प्लीज विनोद चोर दो मुझी .......... प्लीज नहीं ............

विनोद न्य उसकी बात पूरी होनी सी पहली hi अपनी होंठ महीन की होंठों पी टिका डाई और उसकी होंठों को बंद क्र की उसी किश करनी लगा ........... और साथ hi और भी ज़ोर सी उसी अपनी बहून मैं दबा लय .......... महीन सिसक सी पारी ..... और उसकी सिसकी विनोद की होंठों मैं hi डाब गए

महीन सिसकी .............. प्लीसीईईई विनोद ........ नहीं करो ............ यह ठीक नहीं है ...................... pleaseeeeeeeeeeee noooooooooo

विनोद ........... कुछ ग़लत नहीं है महीन ..... प्लीसीईई मुझी करनी दू .............

महीन ............. mmmmmmmmmmmm ................

विनोद की होंठ महीन की होंठों पी अपना जादू चला रही थय ......... इतनी ारस्य सी आसिफ सी दूर रहंय की बाद आज जब वह एक मर्द की नंगी सीने सी लगी तो उसका जिसम उसकी दिमाग़ की कण्ट्रोल सी बहार हो रहा था ........... उसका जिसम भी जैसी विनोद का साथ दी रहा था ........... उसकी बाज़ू भी जो पहली उसकी सीने को पुश क्र रही थय अब वीर्य सी विनोद की गर्दन पी चली गए ............ और महीन न्य अपनी नंगी बहिन विनोद की गर्दन मैं दाल दिन और खुद भी किश करनी मैं विनोद का साथ देंय लगी ........ विनोद की हाथ महीन की पूरी कमर को सहला रही थय ............. विनोद की सीने की साथ लगी होनी की वजह सी अब महीन को विनोद की लुंड का उभार भी अपनी छूट पी महसूस हो रहा था ........ विनोद खुद भी अपनी लुंड को महीन की छूट पी दबा रहा था ........... महीन की सिस्क्यान निकल रही थीं ......और उसको अपनी छूट गीली होती हो महसूस हो रही थी .............. जैसी जैसी विनोद का लुंड महीन की छूट सी रगड़ खा रहा था ....... वैसी वैसी महीन भी विनोद की जिसम की साथ चिपकती जा रही थी ............ विनोद की हाथ अब वीर्य वीर्य महीन की गांड पी पोहंच रही थय ....... और उसनी अपनी दोनों हाथों की साथ महीन की गांड को आहिस्ता आहिस्ता दबाना शुरू क्र दया ........... महीन की मुंह सी सिसकार्यं निकल रही थीं ..........और उसकी आंखें बंद थीं ............ विनोद न्य महीन को पिच्य लय जाती होय बीएड पी धक्का दया तो महीन की मुंह सी चीख निकल गए ...........

बीएड पी गिरनी की साथ hi महीन की आंखें खुल गए ............ उसनी देखा तो वह अपनी बीएड पी लेती होइ थी .............. वह हरबरा की इधर उधर देखनी लगी ........... वह अपनी कमरे मैं अकेली थी .......... महीन न्य मोबाइल पी टाइम देखा तो शाम की 7 बज रही थय .............. महीन न्य अपना सर वापिस सरहंय पी रखा और अपनी आंखें बंद क्र लीन ................ थोड़ी देर पहली की खवाब का मंज़र महीन की आँखों की सामन्य घूमनी लगा .............. और उसकी होंठों पी मुस्करहट फैल गए ............... अचानक hi उसी कुछ याद आया तो बंद आँखों की साथ hi वह अपना हाथ अपनी शार्ट पजामी की अंदर लय लय गए ........... और अपनी छूट को छूआ ............ और चौंक की उसनी अपनी आंखें एक बार फिर खोल दिन ........... उसकी छूट गीली हो रही थी ........... जैसी पानी चोर चुकी होइ हो सोते मैं ............ पहली उसी थोड़ी हैरानी होइ .......... और फिर वह मुस्करानी लगी ................ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ्फ़ .......... विनोद की वजह सी मेरी यह हालत हो गए .............. यह कैसी हो गया ............ महीन खुद पी हैरान हो रही थी ..... क्या सुच मई hi विनोद की वजह सी मेरी यह हालत होइ है ...... जैसी उसका वह मेरी छूट पी रगड़ रहा था ........... uuuuuuuufffffffffff .......... यह मैं क्या सोच रही हों ........... महीन इसी कश्मकश मैं थी की उसका दरवाज़ा नॉक होआ ......... और फिर आहिस्ता सी दरवाज़ा खुला और विनोद अपनी हाथ मई चाय की 2 कप लये होय उसकी बैडरूम मैं दाखिल हो गया ...........

महीन जल्दी सी संभल की उठ की तकए सी कमर लगा क्र बेथ गए ........ उसकी नज़र विनोद पी पारी ........ तो उसकी चेहरी पी शर्म की मारी हलकी सी लाली दौड़ गए ............ उसकी नज़र खुद सी hi विनोद की शॉर्ट्स की उभार पी चली गए ............ मगर महीन न्य फौरन hi खुद को संभला और विनोद सी चाय का कप लय लय ............. विनोद भी अपना कप लय क्र सोफे पर बेथ गया ........... और दोनों बातें कृत्य होय चाय पीने लगी ........

चाय पीती होय भी महीन को एहि ख्याल आ रहा था की उसकी शॉर्ट्स की अंदर उसकी छूट गीली है ........ उसकी छूट न्य विनोद की बारी मैं खवाब देखती होय पानी छोरा है ....... उसी विनोद की बारी मैं जो अभी उसकी सामन्य बैठा होआ है .......... इसी सोच की साथ उसी अपनी जिसम मैं फिर सी थोड़ी गर्मी सी फैलती होइ महसूस हो रही थी ............ और वह खुद पी कण्ट्रोल करनी की कोशिश क्र रही थी ........ चाय पीने की बाद दोनों रूम सी बहार ाग्य ........... और फिर महीन रात की कहानी की तैयारी करनी लगी ..........

रात को डिनर की बाद महीन और विनोद दोनों hi लाउन्ज मैं बैठी होय थय ............ और टीवी देख रही थय ........... महीन की नज़रें बार बार क्लॉक की तरफ जा रही थीं ............ वह एक्ससिटेड भी हो रही थी और नर्वस भी ............ महीन को पता था की प्रिय कभी भी विनोद को बर्थडे विश करनी मैं दिएर नहीं क्रय गई .............. लकिन वह चाहती थी की वह सुब सी पहली विनोद को विश क्रय ............. विनोद भी महीन को देख रहा था ........ और उसी महीन की बैचैनी महसूस हो रही थी .......... जो उसी अछि भी लग रही थी .............

जैसी hi वाल क्लॉक पी 12 बाजी तो महीन की नज़रें विनोद की तरफ गईं ........... दोनों की नज़रें मिलीं ............. महीन मुस्करा दी ...... और इस सी पहली की वह कुछ बोलती ........... विनोद का फ़ोन बजनी लगा .......... महीन की चेहरी सी मुस्कराहट ग़ायब हो गए .......... और डिसअप्पोइन्त्मेन्त उसकी चेहरी सी साफ़ दिख रही थी ..........

विनोद बोलै ............ प्रिय की कॉल है ..........

महीन अपनी होंठों को दांतो सी काट टी होइ मायूसी सी बोली ........... it's okay ....... कॉल अटेंड क्र लो आप प्रिय की .......

विनोद न्य मोबाइल और फिर महीन की चेहरी की तरफ देखा और बोलै ............ No ............ ी थिंक प्रिय थोड़ा वेट क्र सकती है ............ लेट थे फ़ोन रिंग .............. वह मुस्कराया ........

महीन न्य हैरत भरी नज़रों सी विनोद की तरफ देखा .......... और उसकी चेहरी पर एक मुस्कराहट फैल गए ............

विनोद फिर बोलै ....... यू शुड बे थे फर्स्ट तो विश में .......

विनोद की इस जेस्चर पी ....... और उसकी अपनी लय इतनी केयर ....... और खुद को प्रिय पी प्रेफरेंस डाई जांय पी महीन खुश हो गए ............. और उठ की विनोद की पास आई ........ और बिना सोची समझी विनोद को हुग क्र लय जा की उसकी गले मैं बहिन डालती होय ........ और उसी हैप्पी बिरथ डे बोल दया ............ महीन को कुछ समझ नहीं आई थी की उसनी क्या क्या ........ उसनी यह सुब कुछ बिना सोची समझी क्या था ........... ज़ोर सी विनोद को हुग क्या .......... और फिर उस सी अलग हो गए ........ विनोद भी हैरत की साथ महीन को देखनी लगा ..............

विनोद ...... थैंक्स महीन ..........

महीन शर्मा गए ................... और सोफे की पिच्य रखा होआ एक बैग उठा की विनोद को देती होय बोली .......... विनोद यह तुम्हारा बर्थडे गिफ्ट ...........

विनोद एक बार फिर सी हैरान हो गया ....... और खुश भी ....... फिर शोखी सी बोलै ........... मैं तो समझा था की बर्थडे गिफ्ट तुम दी चुकी हो मुझी .......

महीन विनोद की बात समझ क्र मुस्करा दी ........ और बोली ...... ज़्यादा बातें नहीं बनाओ और पकरो इसी ...............

विनोद न्य उस शॉपिंग बैग सी शर्ट और पंत निकाली और उनकी कलर्स को देख की खुश हो गया ........... बुहत अछि चॉइस है तुम्हारी महीन .......... थैंक्स वन्स अगेन ............... इस गिफ्ट की लय भी ...........

महीन न्य शर्माती होय उसकी बाज़ू पी एक हल्का सा मुक्का मारा ........ और अपनी रूम मैं जाती होइ बोली ........... प्रिय को कॉल क्र लो ........ वेट क्र रही हो गई तुम्हारी कॉल का .................. महीन मुस्कराई और अपनी रूम मैं चली गए सोने ................ सुबह सैटरडे था ........ लकिन उसी जल्दी उठना था न ............
 
अपडेट NO: 19

थे बर्थडे मॉर्निंग

महीन सुबह 8 बाजी उठी ............ जल्दी सी बहार आई तो देखा की टीवी लाउन्ज खाली था ............. विनोद की रूम का दरवाज़ा बंद था ....... आहिस्ता सी जा की महीन न्य विनोद की रूम का दरवाज़ा खोला .......... और अंदर झाँक की देखा .............. विनोद अभी तक सो रहा था ........... वीकेंड था न तो जल्दी उतनी की ज़रूरत hi नहीं थी .......... महीन उसी सोता होआ देख की मुस्कराई ........ और फिर सी दरवाज़ा बंद क्र दया ............ महीन अपनी रूम मैं गए और वहाँ ला की राखी होइ चीज़ें लय क्र बाथरूम मई आगये ........... महीन न्य जल्दी जल्दी वाशरूम को अछि तरह सी साफ़ क्या ........... बाथ टब मैं पानी भर की उस मई खुसबू मिला दी ...... जिस सी वह नहानी का पानी और सारा बाथरूम महाकन्य लगा ........... फिर महीन न्य टब की इर्दगिर्द काफी सारी दिए रख की जला डाई ........... और पानी की ऊपर गुलाब और गैंदी की फूलों की पता दाल दिन ........... महीन न्य बाथरूम की लाइट ऑफ की और अब जो मंज़र देखा तो उसी बुहत hi रोमांटिक लगा ......... बाथरूम मैं बहार की रौशनी बुहत काम hi आती थी ....... तो लाइट ऑफ होनी की वजह सी बाथरूम मैं दीयों की रौशनी फैली होइ थी ............ जिस सी बाथरूम और टब का मंज़र बुहत hi सुहाना और रोमांटिक लग रहा था ................ फिर महीन न्य खुसबू दार सोप और शैम्पू भी वहां टब की पास रख दया ........... हेंगर पी साफ़ सुथरे धुले होय टॉवल लटका डाई ...... बाथरूम की अर्रंगेमेन्ट्स पी आखरी नज़र दाल की महीन मुस्कराई और फिर बाथरूम सी बहार आगये ..........

महीन न्य जल्दी सी चाय बनाई ............ और ट्रे मैं 2 कप रख की विनोद की रूम मैं चली गए ............ अब तो उसी विनोद की कमरे मैं जांय मैं कोई झिझक नहीं होती थी ............. ना hi कभी विनोद न्य उस रोका था ........... विनोद की बीएड की क़रीब खरी हो क्र महीन न्य विनोद को आवाज़ दी ..........

महीन ............ उठ जाओ अब बर्थडे बॉय .......... बुहत सुबह हो गए है ........

विनोद आंखें माल्टा होआ उठा और महीन को चाय की ट्रे लये होय खरा देख क्र मुस्कराया .......... और अपनी बाज़ू उठा क्र अंगराई लेनी लगा ............ विनोद का ऊपरी जिसम नंगा था ............ जैसी वह हमेशा सोता था ........... बाज़ू ऊपर की तो उसी विनोद की बह्लूं मैं बाल नज़र आय ........... और उसकी हेयरी चेस्ट को नंगा देखनी की तो अब वह आदि हो चुकी होइ थी ............. हमेशा की तरह आज भी उसकी होंठों सी हलकी सी सिसकारी निकली ...... जैसी सिर्फ वह खुद hi सुन सकीय ....... विनोद उठ क्र बैठा और महीन न्य उसी चाय का कप दया और दोनों बेथ क्र चाय पीने लगी .............

महीन मुस्करा की उसी तंग करती होइ बोली .......... लगता है बुहत लम्बी बात होती रही है प्रिय की साथ रात को ............

विनोद हंसा .......... नहीं जल्दी hi ख़त्म हो गए थी कॉल .........

महीन ...... तो फिर क्या कहा प्रिय न्य ...........

विनोद ...... कहना क्या है वही जो बातें पहली सी क्र रही है ............. हहहह

महीन ....... तो फिर क्या िरादय हैं आज की ...... ??? प्रिय की बातून पी कुछ अमल भी करना है या नहीं .......

विनोद .... बिलकुल भी नहीं ....... आज तो मैं खूब सौं गए ..... और दोपहर को hi ब्रंच करों गए ............ तुम भी जा की रेस्ट करो बस ........

महीन ........ जी नहीं .... बिलकुल भी नहीं .... कोई सोना वोना नहीं है ...... ........बस उठ जाओ जल्दी सी अब विनोद ........ बुहत सो लय है साड़ी रात ...........

विनोद दोबारा सी बीएड पी लेत की एक चादर अपनी मुंह पी लेती होय बोलै .......... ना ना प्लीज महीन अभी थोड़ा और सोनी दो .......

महीन न्य विनोद की अपनी ऊपर ली होइ चादर खींची और बोली ............ उठ जाए महा राज ....... और जल्दी सी मेरी साथ बहार आये ........

विनोद भी बारी नखरय की सात बोलै ......... क्या है न तुमको भी महीन ......... सोने भी नहीं देती ............ आज तो मेरा बर्थडे तो आज तो सोनी दो न मुझी सुकून सी ........

महीन ..... तुम्हारा बर्थडे है इस लय तो जल्दी उठना ज़रूरी है न आज ....... और जो कुछ भी प्रिय न्य बताया था वह सुब करना है ............

महीन न्य उसका हाथ पाकर की खींचा और विनोद बीएड सी उतर आया ..............

महीन विनोद का हाथ पकड़े होय उसी उसकी रूम सी बहार लाइ ....... और उसी बाथरूम की दूर पी लय गए ............. और बोली .......... चलो शाबाश नहा लो जल्दी सी .........

विनोद फिर सी नखरा दिखती होय ....... क्या मुसीबत है न महीन ....... बुहत ज़िद्द करनी लगी हो तुम भी प्रिय की तरह .............

महीन मुस्कराई और बाथरूम का दरवाज़ा खोल की विनोद को हाथ य ईशारी सी थोड़ा सर को झुकाती होइ बोली ........... आशनां की लय पधारये महा राज ............

दरवाज़ा खुलनी पर विनोद को जब अंदर का मंज़र नज़र आया तो वह चौंक पारा ........ और जल्दी सी अंदर दाखिल होआ ............. एई ...... एहहह .......... महीन एहहहह क्या है .......... यह किस न्य क्या है सुब ....

महीन खुश होइ दिल hi दिल मैं .......... लकिन थोड़ी नाराज़ होनी की एक्टिंग करती होइ बोली ............ वह प्रिय आई थी वही क्र की गए है यह सुब आप की लय तैयार ...........

विनोद हंस पारा ........... ओह सॉरी सॉरी ............... मुझी यक़ीन नहीं हो रहा की तुम न्य इतना कुछ क्या है मेरी लये ............... आईटी इस सो रोमांटिक .......... बल्कि इतना ाचा तो कभी प्रिय न्य भी अर्रंगे नहीं क्या ........... थैंक यू वैरी मच महीन .........

महीन मुस्करा दी .............

विनोद उसी आँख मारती होय बोलै .......... यह माहोल इतना रोमांटिक बना दया है तुम न्य की अब यहाँ अकेले नहानी को दिल नहीं क्र रहा .............. किसी को साथ होना चाहिए ............

महीन उसकी बात ो समझ गए ........... थोड़ा शरमाई और थोड़ा हंसी ........ और बोली .......... ज़्यादा बातें नहीं बनाओ और जल्दी सी नहा की निकलो ........ और फिर तुम न्य पूजा भी करनी है ............

विनोद हंसती होय ............ ाचा बाबा ............ ठीक है .......

महीन बाथरूम सी जांय की लय दूर की तरफ गए तो विनोद बोलै ....... महीन जी ....... रुको ....... अब इतना कुछ क्या है तो फिर रिचुअल तो ठीक सी पूरा क्र दो न .............

महीन हैरानी सी उसी देखनी लगी ............

विनोद बोलै ........ महीन मेरी जिसम पर सोप तुमको hi लगाना पारी गए प्रिय की तरह ............ वर्ण इस सुब का कुछ फ़ायदा नहीं हो गए ......

महीन घबरा गए .......... मममममींणन्न .......... लेकिंन ंन्न ..... मैंन कैसीय ........... विनोद .....

विनोद मुस्कराया .......... आर्य यार इस मैं क्या है ....... बस सोप hi तो लगाना है मेरी जिसम पी ........... बाक़ी मैं खुद hi नहा लोन गए ......

महीन बयबूसी सी विनोद को देखनी लगी ............ अब वह उसी इंकार भी नहीं क्र सकती थी ........... वह रुक की वापिस विनोद की तरफ आगये ........... विनोद मुस्कराया ........ और जल्दी सी अपनी जिसम पी पहना होआ शॉर्ट्स नीची को सिरकानी की लय हाथ बढ़ा दया .............. और एक झटकी सी उसी नीची खींचा ...........

महीन न्य चिक्थ्य होय जल्दी सी अपनी आँखों पी हाथ रख लये और दूसरी तरफ मुद गए ........... oooooooooyyyyyyyyyyyyyy गंदी इंसान .......... एहहहहहहह क्या क्र रही हो .............. महीन दूसरी तरफ मुंह की की हंसी ................

विनोद भी पिच्य सी हंसा और बोलै ........... आर्य मैं न्य क्या क्र दया है ........... इधर तो मुंह क्र की देखो ज़रा ..........

महीन ........ नहीं ऐसी नहीं ....... पहली कुछ पहनो तुम ..........

विओड़ ...... यार अभी कुछ उतरा hi नहीं है तो पहनों क्या .......... देखो इधर ............. यह कह क्र विनोद महीन की सामन्य आज्ञा ...... और महीन की नज़र विनोद की जिसम की निचली हिस्से पर गए ............... जहाँ उसनी अंडरवियर पहना होआ था ............ और बाक़ी का पूरा जिसम नंगा था ...............

महीन हंसी ....... uuuuuuufffffffffff ...... विनोद ....... तुम न्य तो मुझी द्वारा hi दया था ..............

विनोद हंसा ............... आर्य यार तुम भी मैरिड हो ............. तुम्हें दारण्य की क्या ज़रूरत है ...........

महीन न्य शर्मीली हंसी की साथ विनोद की सीने पर एक थप्पड़ मारा और बोली ............ बुहत ज़्यादा नॉटी नहीं होनी लगी तुम ........... चलो जल्दी सी सोप लगवा लो मुझी और भी बुहत सी काम करनी हैं ..............

महीन की नज़र विनोद की अंडरवियर पी गए ........ जो हस्ब इ मामूल फूला होआ था ...... और लुंड वाले हिस्से सी काफी भारी लग रहा था ........ विनोद न्य शावर की नीची खरी हो क्र शावर ों क्या ....... और अपना जिसम गीला क्र लय ........ फिर महीन उसकी क़रीब आई ....... लिक्विड बाथिंग सोप उठाया ....... और उसी अपनी पाम पी गिराया ..... और विनोद की पिच्य खरी हो गए .................... महीन नंगी खरी होय विनोद की बिलकुल पास खरी थी ........ उसका सॉलिड जिसम महीन की आँखों की सामन्य था ....... और उसकी हाथों सी सिर्फ एक फुट की फ़ासली पी .............. पानी की बूंदें उसकी जिसम पर थीं ............ विनोद की जिसम को उस न्य इस हालत मैं नंगा पहली भी कई बार देखा था ....... मगर कभी छूआ नहीं था ........... महीन की दिल की धरकन तेज़ हो रही थी .......... उसकी सांस भी तेज़ होनी लगी थी ........... महीन न्य ाहसिता सी अपना हाथ बढ़ाया ...... और अपनी कांम्पत्य होय हाथ को विनोद की सॉलिड कमर पी रख दया ........... और अपनी हाथ पी लय होआ लिक्विड सोप आहिस्ता आहिस्ता विनोद की जिसम पर लगानी लगी .......... महीन की हाथ ...... पहली बार ...... विनोद की नंगी जिसम को फील क्र रही थय इस तरह ....... और उसकी जिसम पर फिसलती होय उसकी जिसम की मज़बूती को जांच रही थय .......... उसी अपनी नरम नरम हाथों की नीची विनोद की मज़बूत जिसम की गर्मी और सख्त मसल्स महसूस हो रही थय ........ वह वीर्य वीर्य विनोद की बैक पर सोप लगा रही थी .......... तेज़ होती होइ साँसों की साथ ........ महीन को ाचा भी लग रहा था ............. और पता नहीं क्यों खुद पी उसको कण्ट्रोल करना भी मुश्किल हो रहा था .............

बैक पी सोप लग गया तो अचानक सी विनोद घूम गया महीन की तरफ ........ और उसका चेहरा और छाती महीन की नज़रों की सामन्य थी ....... जैसी hi महीन की नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं तो महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ............ विनोद न्य लिक्विड सोप उठाया और बोलै ..... अब सामन्य भी लगा दो ........ महीन न्य अपना हाथ उसकी ाग्य खोल दया ............ और विनोद न्य सोप उसकी हाथ पी गिरा दया ........

महीन न्य कांम्पत्य हाथों को विनोद की सीने पी रखा और आहिस्ता आहिस्ता उसकी सीने पी हाथ फेरती होइ सोप उसकी सीने पी लगानी लगी ............ विनोद की गरम सांसें महीन की चेहरी पी पर रही थीं ........ और उसकी नज़रें महीन की चेहरी पर hi थीं ..... जिस सी महीन को और भी बैचैनी हो रही थी ........... घबराहट हो रही थी ....... विनोद की नज़रों सी वह कंफ्यूज हो रही थी ............ उसकी हाथ विनोद की निप्पल्स को सहलानी लगी ..... सॉलिड निप्पल थय ..... हार्ड और काले ............. सोप लगाती होय महीन न्य अपनी ऊँगली सी उनको फील क्या ...... खुद सी hi .... बिला इरादा उसकी फिंगर्स विनोद की निप्पल्स को सहलानी लगीं ...... विनोद को भी ाचा लग रहा था .......... उसकी होंठों सी हलकी सी सिसकारी निकल गए ......... जैसी महीन न्य भी सुन लय ....... उसनी चौंक की विनोद की तरफ देखा और फिर शर्माती होय ...... उसका हाथ नीची विनोद की पेट पी जांय लगा ........... वीर्य वीर्य ........ बिलकुल स्पॉट पेट था ........ बिलकुल भी निकला होआ नहीं था .............. विनोद की पेट पी सोप लगाती होय उसकी नज़रें विनोद की अंडरवियर पी जम गईं ........... जो पहली सी भी ज़्यादा फूला होआ था .......... महीन की नरम नरम हाथों की जादू न्य विनोद की लुंड को खरा क्र दया था ........... और खुद उस सी भी कण्ट्रोल करना मुशिकल हो रहा था ............. उसका भी दिल क्र रहा था की वह महीन को अपनी बहून मैं भर लय ...... और अपनी सीने की साथ भींच लय .......... मगर उसी हिम्मत नहीं हो रही तह ....... ना hi वह ऐसी वैसी कोई हरकत करना चाहता था जिस सी महीन हर्ट हो ........

महीन की अपनी हालत भी ख़राब हो रही थी ........ इतनी दिंनो सी आसिफ सी दूर थी ........ एक मर्द की क़ुरबत सी दूर थी ........ उसका जिसम भी अब कुछ मांग रहा था ........... उसी अपनी छूट भी गीली होती होइ महसूस हो रही थी .............. यह तो मुझी आसिफ सी भी ज़्यादा बारे लग रहा है ........ महीन की दिमाग़ मैं यह ख्याल लपका ........ और उसकी पूरी जिसम न्य जैसी एक झटका सा लय ............ और अपनी ख्याल को झटक दया .......... और फिर वह विनोद सी दूर हटी ....... और वषबसों की तरफ जाती होइ बोली ........ चलो बाक़ी अब खुद नहा लो तुम ........

महीन न्य हाथ धोय और वाशरूम सी बहार चली गए ........ लाउन्ज मैं आ कर महीन न्य लेद पर भजन चला डाई ...... पूरी घर मैं उनकी मधुर आवाज़ गूंजनी लगी ......... एक अलग hi पुर सुकून सा माहोल बन रहा था ......... किचन मैं आगये ............. उस न्य दूध हल्का गरम क्या ...... उस मैं 2 चमच शहद और 2 चमच देसी घी की मिलाय ......... और फिर उसी एक बाउल मैं दाल की गणेश जी की मूर्ती की सामन्य रख दया .......... फिर महीन न्य वहीँ स्टैंड पी अगर बता जला दिन ........ और दिया भी ............. विनोद की लये पूजा की थाली भी तैयार क्र की रख दी .......... विनोद की लय यह सुब काम कृत्य होय उसी अजीब सी ख़ुशी हो रही थी ........ फिर महीन सोफे पर बेथ गए ........ संगीत की मधुर आवाज़ उसकी कानों मैं रूस घुल रही थी .......... और पता नहीं क्यों वह खुद भी ाहसिता आहिस्ता उसी लय की साथ हिलनी लगी होइ थी ...............

थोड़ी देर की बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला .............. महीन न्य उसकी तरफ देखा तो वह एक टॉवल अपनी जिसम की निचली हिस्से पी बाँधी होय खरा था .............

महीन न्य उसकी तरफ देखा ........ और फिर बोली ...... अब क्या चाहिए है ...

विनोद ....... महीन वह मुझी रूम सी अंडरवियर तो ला दो प्लीज .....

महीन सोफे सी उठी और विनोद की रूम मैं चली गए ........ उसी भी पता था अब की विनोद की कांस्य कपड़े कहाँ रखी होती हैं .... बल्कि अब तो अक्सर वह खुद hi उसकी कपड़े उसकी कप्बोर्ड मैं रखती थी ........ महीन न्य एक ड्रा मैं सी विनोद का अंडरवियर निकला ......... डार्क मैरून कलर का .......... और उसी एक नज़र देखा .......... वीर्य सी मुस्कराई ........ और उसी लय क्र विनोद की पास आगये ...... वह अभी भी वाशरूम की दूर मैं hi खरा था .......... उसकी क़रीब जाती होय उसकी नज़र विनोद की जिसम पी बंधी होय टॉवल पी पारी ......... जिस मैं उसी विनोद का लुंड खरा होआ साफ़ दिख रहा था ......... बिलकुल सीधा नहीं खरा था ....... मगर लग रहा था की उसका लुंड एकरा होआ है ....... और काफी बारे है ......

महीन न्य लाल होती होय चेहरी की साथ विनोद को उसका अंडरवियर दया और वापिस आगये ........... और विनोद बाथरूम की अंदर चला गया लकिन दूर लॉक नहीं क्या ...........

विनोद अंडरवियर पहन की बहार निकला तो ............. उसी देखती hi महीन का दिल उछाल की हलक़ मैं आज्ञा ........... विनोद बाथरूम सी सिर्फ और सिर्फ एक अंडरवियर पहनी होय बहार आया था ............. उसका पूरा जिसम नंगा था ........ सिवाय उसकी अंडरवियर की ............. और वह भी उसकी लुंड वाले हिस्से पी इसकदर फूला होआ था की उसी देख क्र तो जैसी महीन की आंखें hi हलकूँ सी भर आ रही थीं ............. विनोद वीर्य वीर्य चलता होआ महीन की सामन्य उस सी कुछ फ़ासली पी खरा हो गया ............ महीन तो बट बानी होइ उसकी जिसम को देख रही थी ........... विनोद भी उसकी इस हालत को एन्जॉय क्र रहा था ........... कुछ देर बाद आहिस्ता सा बोलै ........

विनोद ............. अब क्या हुकम है महारानी जी ........

महीन चौंक की अपनी ख्यालों सी बहार आई ............ और थोड़ा झीणम्प क्र ........ और शर्मा की उठी और बोली पूजा करो चल की ............
 
विनोद जैसी hi उस छोटी सी मंदिर की पास गया तो हैरान हो गया साड़ी अरेंजमेंट देख क्र ........... उसी ख़ुशी भी होइ ............ की महीन उसकी लये यह सुब क्र रही है ............... उसनी मुस्करा की महीन की तरफ देखा जो अभी भी सोफे पी बैठी होइ थी ............

विनोद ........ थैंक्स महीन तुम न्य इतना कुछ अर्रंगे क्र दया मेरी लय ........... अब प्लीज थोड़ा मेरी पास आ की भी हेल्प क्र दो ............

महीन मुस्कराई .......... और थोड़ा झिझकती होइ उठी और विनोद की क़रीब आगये ............... अब महीन उसकी नंगी जिसम की पास खरी थी ........ उसकी जिसम सी बुहत hi प्यारी खुसबू आ रही थी ............. जो महीन को मदहोश क्र रही थी ..............

विनोद न्य कुछ परहत्य होय वह दूध वाला बाउल उठाया ....... और उस मैं सी दूध को गणेश जी की मूर्ती की ऊपर सी गिरानी बहानी लगा .......... थोड़ा थोड़ा ........... ाहसिता आहिस्ता ............ और वह दूध मूर्ती पर सी बेहटा होआ नीची आती होय ........ मूर्ती की पैरों सी होता होआ नीची रखी होय एक पीतल की प्याली मैं जमा होनी लगा ............ फिर विनोद न्य दूध वाला बाउल महीन को दया और बोलै इसी ऐसी hi आहिस्ता ाहसिता मूर्ती पी डालती रहो जब तक पूरा ख़तम न हो जाय ......

महीन .......... ककककककक ककययययययय maainnnnnnnnnnn ...... महीन झिझकी ............ उसकी लय यह करना अजीब लग रहा था .......

विनोद ............ हाँ ....... प्लीज ........

महीन न्य वह बाउल उसकी हाथ सी लय और विनोद आंखें बंद क्र की हाथ बाँधी थोड़ा झूमती होय कुछ परहंय लगा .......... महीन न्य आहिस्ता आहिस्ता वह दूध विनोद की तरह hi मूर्ती पी बहाना शुरू क्र दया ............... उसी यह सुब बुहत अजीब लग रहा था .......... की वह विनोद की पूजा मैं इस क़दर शामिल हो गए है ........ मगर वह विनोद का सोच की खामोश रही ................ और उसका साथ देती रही .......

दूध सारा बहा क्र महीन न्य विनोद की तरफ देखा उसनी ज़रा सी देर की लय आंखें खोलीं और उसी अपनी बंधी होय हाथों की तरफ इशारा क्या आँखों सी hi और फिर सी अपनी ाँहें बंद क्र लीन ............. महीन उसका मतलब तो समझ गए थी ........... ना चाहती होय भी उसनी अपनी दोनों हाथ बाँध लये मूर्ती की सामन्य ........... उसकी नज़रें तो अपनी सामन्य खरी उस यूनानी देवता पी जमी होइ थीं ........... जो उसकी सामन्य सिर्फ एक अंडरवियर पहनी खरा था ........ जिसका पूरा जिसम नंगा था .......... जब महीन सी कण्ट्रोल नहीं होआ तो उसनी एक नज़र मूर्ती की तरफ देखा और फिर अपनी आंखें बंद क्र लीन ........ और खुद सी hi विनोद की सेहत और तरक़ी की लय दुआ करनी लगी ............ गणेश जी सी ........... अपनी फेथ की खिलाफ जाती होय ..............

थोड़ी देर मैं विनोद न्य पूजा ख़तम की ........ और फिर मूर्ती की पैरों की पास पारा होआ बाउल उठा लय जिस मैं सारा दूध जमा हो चूका था .............. विनोद न्य उसी अपनी होंठों सी लगाया और एक घूँट पी लय ........ फिर उसनी वही प्याला महीन की होंठों की तरफ बाढ्य .......... महीन पहली तो झिझकी ......... और फिर जैसी hi उसकी नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं तो उसनी अपनी होंठ उस प्याले सी लगा डाई ........ और उस मैं सी दूध का एक घूँट लय लय ............... दूध का ज़ाइक़ा तो बुहत ाचा हो रहा था .......... मगर उस दूध को पीना उसकी लय बुहत बरी बात थी ............... मगर फिर भी उसनी उस प्याले की दूध को ख़तम करनी मैं विनोद का साथ दया ............. दोनों न्य बारी बारी घूँट घूँट लय क्र वह प्याला ख़तम क्र दया ........... महीन को बुहत अजीब सा लग रहा था ........ इस तरह का दूध पीना .......

पूजा सी फेरघ हो क्र विनोद अपनी बैडरूम मैं चला गया कपड़े पहन न्य ............ महीन उसी जाता होआ देख रही थी ........ उसकी मज़बूत पीठ और ताक़तवर जिसम महीन को बुहत ाचा लग रहा था .......... उसकी अंडरवियर मैं फँसी होइ उसकी गांड की टाइट मसल्स ....... बुहत hi सेक्सी लग रही थय .............. महीन किठें मैं आगये नाश्ता बनानी की लय ........... थोड़ी देर मैं दोनों बैठी नाश्ता क्र रही थय ........... मुस्कराती होय ........ बातें कृत्य होय ...........

नष्त्य की बाद महीन बोली ...... विनोद तुम चाय बना लो ..... मैं नहा की आती हों ............

विनोद ...... okay

महीन ........... और हाँ उसकी बाद तुमको मंदिर भी जाना है ........ याद है न ........ महीन मुस्कराई .........

विनोद न्य मुंह बनाया ........ और महीन हंसती होइ अपनी रूम मैं चली गए ............ और अपनी कपड़े लय क्र आई और बाथरूम मैं चली गए नहंय ...............

महीन न्य वाशरूम मैं जा की अपनी कपड़े उतारी और बिलकुल नंगी हो गए ........... आंय की सामन्य खरी हो की महीन खुद को देखनी लगी ......... और सोचनी लगी ....... की सुबह सी उसनी क्या कुछ क्या था ....... और ाग्य क्या करनी वाली थी विनोद की लय ...... महीन को कुछ ख्याल आया तो उसनी अपनी दोनों बाज़ू ऊपर उठाय और अपनी बह्लूं को देखनी लगी ......... बुहत हल्की हल्की बाल थय वह पी .............. लकिन अगर उसनी नीतू की दी होइ स्लीवलेस ब्लाउज पहन नई थी तो फिर उसी उनको बिलकुल साफ़ करना था ............ महीन मुस्कराई और साइड कैबिनेट सी हेयर रेम्योविंग क्रीम निकाली और उसी अपनी अंडर एआरएम बलून और छूट पी ाच्य सी लगा लय .......... दोनों जगह सी बाल ाच्य सी साफ़ क्र की खुद को देखा तो उसकी बग़लें बिलकुल सुफैद हो चुकी थीं ..... बिलकुल चिकनी और साफ़ ........... और ऐसी hi उसकी छूट थी ..... एक भी बाल नहीं था ........ बिलकुल साफ़ और चिकनी ........... महीन न्य अपनी छूट पी हाथ फैरा और फिर सी मुस्करा दी ........

महीन शावर की नीची नहानी की लय गए ....... तो उसकी नज़र बाथ टब पी पारी ........ उस मैं अभी भी पानी मौजूद था ..... वैसी hi ....... मगर जैसी उसनी छोरा था वैसी नहीं था ....... फूलों की पता पानी मैं बेथ चुकी होइ थीं .......... साफ़ लग रहा था की टब का पानी उसे होआ है ........... लकिन गन्दा नहीं था ............ महीन यही सोचनी लगी ............ अभी कुछ देर पहली विनोद इसी पानी मई बैठा हो गए न ........ उसका जिसम ........ नंगा जिसम इसी पानी मैं हो गए न .......... महीन टब की पानी मैं हाथ पहिरण्य लगी ...... और फिर उसी पता नहीं क्या होआ की वह उस टब मैं दाखिल हो गए ......... और वीर्य वीर्य अपनी जिसम को विनोद की नहाय होय पानी मैं भिगोन्य लगी ............ टब की दीवार की साथ अपनी कमर लगा की महीन बेथ गए ......... और उस पानी की गर्मी को अपनी जिसम पी महसूस करनी लगी .......... उसकी आंखें बंद हो गए ....... और आँखों की सामन्य फिर सी विनोद का जिसम अन्य लगा ....... और उसकी लुंड का उभार ............ महीन का हाथ अपनी छूट की तरफ बरहनी लगा ............ और वीर्य वीर्य उसनी अपनी छूट को सहलाना शुरू क्र दया .............. छूट की दांय को सहलात होय उसी अपनी छूट की अंदर चिकना पूण महसूस हो रहा था ........ महीन की एक ऊँगली वीर्य सी अपनी छूट की अंदर दाखिल हो गए ............ और उसकी अपनी मुंह सी एक सिसकारी सी निकल गए ................ बुहत दिंनो की बाद उसकी इस छूट मैं कुछ गया था ............ और वह भी सिर्फ एक अपनी ऊँगली .......... महीन वीर्य वीर्य अपनी ऊँगली को अपनी छूट मैं अंदर बहार करनी लगी ............ उसकी सीने की नंगी उभार ...... पानी मैं ऊपर नीची हो रहे थय ........... और हाथ अपनी छूट पी चल रहा था ............

आहिस्ता आहिस्ता वह अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ रही थी .............. उसनी कभी भी ऐसी खुद को शांत नहीं क्या था .......... मगर आज उसी पता नहीं क्या होआ था ....... की वह विनोद की लुंड को याद करती होइ अपनी छूट का पानी निकालना छह रही थी .............. उसका पानी निकालनी hi वाला था की बाथरूम का दरवाज़ा नॉक होआ .............. और विनोद की आवाज़ आई ............

विनोद ........... महीन चाय तैयार है .......... जल्दी सी ाजाओ .......

महीन हरबरा की टब सी बहार आई .......... और विनोद को आवाज़ दी ....... बस आई अभी ...........

महीन का जिसम कैंम्प रहा था .......... और छूट शांत ना होनी की वजह सी थोड़ी फ़्रस्ट्रेशन भी हो रही थी ................ महीन न्य जल्दी सी शावर लय और फिर अपना जिसम टॉवल सी साफ़ क्र की अपना लाउन्ज वियर पहन लय ............... एक शार्ट शर्ट और शॉर्ट्स ............. जिस मैं सी उसकी मुलायम तइस और टांगें नंगी हो रही थीं .................

महीन बाथरूम सी निकली और अपनी गीले बलून की साथ hi मुस्कराती होइ विनोद की पास आगये .......... और सोफे पी बेथ क्र चाय पीने लगी ............. उसी अब विनोद की सामन्य गीले बलून की साथ अन्य मैं भी कोई झिझक नहीं होती थी ........... हलकी अपनी घर मैं उनकी अयर्तों को नहा क्र गीले बलून की साथ मर्दों की सामन्य अन्य की इजाज़त नहीं थी ............. और आज ....... आज वह नहानी की बाद ...... गीले बलून की साथ ...... इतनी शार्ट कपड़े पहनी होय एक ग़ैर मर्द की सामन्य बैठी होइ थी ........ जिस मई उसका जिसम बुहत ज़्यादा नंगा दिख रहा था ............. अगर उसकी अब्बू को या उसकी भाई या उसकी हस्बैंड को पता चल जाता तो वह तो उसी मार hi डालती ............ महीन यह सोच क्र मुस्करा दी ........... विनोद भी चाय पीते होय विनोद की नंगी टांगों और तइस को देख रहा था ................ और उसकी नज़रों का अंदाज़ा महीन को भी हो रहा था ............

चाय पीने की बाद विनोद अपनी रूम मैं जांय लगा तैयार होनी की लय तो महीन बोली .......... रुको मैं अभी आती हों ...........

महीन जल्दी सी अपनी रूम मैं गए .......... और अपनी कप्बोर्ड खोल की प्रेस क्र की हैंग क्या होआ विनोद का नया पजामा कुरता निकाला और मुस्करा की उसी देखा और फिर उसी लय होय अपनी रूम सी बहार आगये ..............

महीन .......... लो विनोद ........ मंदिर जांय की लय तुम यह कुरता पजामा पहनो गए ............

विनोद न्य महीन की हाथ मैं पकड़ा होआ हेंगर देखा तो हैरान रह गया ............ और खुश होती होय बोलै ........... आर्य महीन यह क्या है अब .........

महीन मुस्कराई ........... अब पंत शर्ट मैं मंदिर जाती होय तो ाच्य नहीं लगती न तुम ............ तो इसलय तुम्हारी जनम दिन पी पहन न्य की लय यह कुरता पजामा भी लय आई थी मैं ............ क्यों पसंद नहीं आया क्या .........

विनोद हेंगर उस सी लेता होआ बोलै ........... महीन यह तो बुहत ज़बरदस्त कलर है .......... माय फेवरेट ........... थैंक्स महीन .......... मेरी लये इतना कुछ करनी की लय ............

महीन मुस्कराई और दिल hi दिल मैं बोली ............ अभी तो तुमको और भी सरप्राइज देना है विनोद ........... ताकि तुमको प्रिय की कम्मी बिलकुल भी फील नहीं हो ................

महीन ........ थैंक्स वैक्स को चोरो और जाओ जल्दी सी यह पहन क्र आओ फिर मंदिर जाना ............. मैं रूम मैं हों ........... ात लीस्ट मुझी यह कुरता पजामा पहनी होय दिखा की जाना ..........

विनोद ........ हाँ हाँ क्यों नहीं ............. बल्कि मैं तो कहता हों की तुम भी मेरी साथ hi चलो मंदिर ............

महीन ........... मैं .......... मैं कैसी जा सकती हों मंदिर .......... तुमको पता है न मेरा .............

विनोद ......... हाँ तो फिर क्या होआ .......... तुम न्य देखा hi है न गणेश जी न्य तुम्हारी कितनी मदद की थी .............. भगवन सुब की लय बराबर है और भगवन की लय सुब बराबर हैं ............ इसलय तुम कुछ भी नहीं सोचो .......... और चलो मेरी साथ ..............

महीन ............ नहीं नहीं ........... फिर कभी सही ......... अभी तो तुम खुद जाओ न त्यार हो की ..........

विनोद थोड़ा उदास होआ ........ और वह हैंग क्या होआ सूट लय क्र अपनी रूम मैं चला गया ........... मुंह लटकाय होय ............ महीन उसी जाता होआ देखती रही और फिर मुस्करा की अपनी रूम मैं चली गए ...........

महीन न्य जल्दी सी अपनी कपड़े उतारी और आंय की सामन्य नंगी हो क्र खरी हो गए ........... महीन न्य लोशन लय और अपनी पूरी जिसम पी लगानी लगी ........... उसकी बूब्स बिना ब्रा की भी तनय होय थय ........ अपनी बूब्स, नंगी पेट और तइस पी लोशन लगानी की बाद महीन न्य कप्बोर्ड सी नीतू की ली होइ साड़ी निकाली ............ और एक बार फिर सोचनी लगी य वह उसी पहनी या नहीं ............. फिर एक लम्बी सांस लेनी की बाद महीन न्य उस साड़ी का पति कोट उठाया और उसी पहन लय ........... और उसका नाडा बांड लय ............ उसकी ऊपर महीन न्य वही ट्रांसपेरेंट साड़ी बांधना शुरू क्र दी ............

साड़ी बांधनी की बाद महीन न्य उसकी साथ का ब्लाउज उठाया ....... और उसी एक बार फिर देखा ........ छोटा सा ब्लाउज था ............ महीन न्य धरकती होय दिल की साथ वह ब्लाउज पहना ....... बिना ब्रा की ... और पिच्य उसकी पट्टी का हुक लगा लय ........... ब्लाउज को ठीक करनी की बाद खुद को देखनी लगी ........... ब्लाउज मैं सी उसकी दोनों बाज़ू पूरी नंगी थीं ............. सीना बुहत ज़्यादा खुला होआ था ........... गोरा सफेद सीना .......... ब्लाउज का नैक भी थोड़ा डीप था ........ जिस सी महीन की बूब्स का ऊपरी उभरा होआ हिस्सा और उसकी क्लीवेज की लकीर का ऊपर का हिस्सा दिख रहा था .............. ब्लाउज उसकी पेट की थोड़ी सी हिस्से को कवर क्र रहा था उसकी बूब्स सी नीची .......... और उसकी खूबसूरत चिकना पेट और गहरी नाभि बिलकुल नंगी थी .......... ढक्की होइ नहीं थी .......... साड़ी भी नाभि सी काफी नीची hi बंधी होइ थी ................ महीन खुद की अक्स को देखनी लगी ............ उसनी ऐसा ड्रेस कभी नहीं पहना था ......... और इतनी दिन तक विनोद की साथ रहंय की बावजूद भी विनोद न्य उसी इस तरह की ड्रेस मैं कभी नहीं देखा था ........... उसका दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था ............. मगर उसी सिर्फ सिर्फ एहि ख्याल था की उसी विनोद की लय यह सुब कुछ करना है ........... ताकि उसी उसकी जनम दिन पी किसी भी तरह की कमी महसूस ना हो ..........

महीन न्य अब मेक उप करना शुरू क्र दया .......... अभी बस वह फिनिश करनी वाली थी की दरवाज़ा नॉक होआ .......... और विनोद की आवाज़ आई ......

विनोद ....... महीन ........ मैं रेडी हों ........ बस निकल रहा हों मंदिर की लय ...........

महीन न्य अपनी गाल पी ब्रश चलाती होय उसी आवाज़ दी ........ रुको बस मैं अभी आई ..............

महीन न्य जल्दी सी अपनी लिपस्टिक और ऑय शेड्स को आखरी टच दया और फिर साड़ी का पालू अपनी सीने पी दाल लय ........... ट्रांसपेरेंट पालू सीने पी डालनी की बावजूद भी उसका जिसम कवर नहीं हो रहा था ...... बल्कि ब्लाउज मैं सी नंगा हो रहा होआ उसका जिसम और भी सेक्सी लग रहा था .............. पता नहीं विनोद आज क्या सोची गए मेरी बारी मैं ........... महीन खुद सी बोली ................ फिर उसी अंदर सी hi एक दूसरी आवाज़ सुनाई दी ........... यह नहीं ...... यह सोचो की आज विनोद खुद को कैसी कण्ट्रोल क्र पाय गए तुम्हें देख क्र ................ महीन मुस्कराई और ड्रा मैं सी विनोद की लय ली होइ वाच उठाई और रूम का दरवाज़ा खोल क्र बहार निकल आई ..........

विनोद जो की सोफे पर बैठा होआ था ........ महीन को देख क्र जैसी उसी करंट का झटका लगा .......... और वह उछाल क्र सोफे सी खरा हो गया .......... और उसका मुंह खुली का खुला रह गया .............. विनोद की चेरि पी हैरानी और महीन की होंठों पी शर्मीली सी मुस्कराहट थी ........... दोनों एक दूसरी को देख रही थय ............ महीन विनोद की पहनी हो कुर्ती पाजामे को देख रही थी ............... जो उसकी जिसम पी बुहत जांच रहा था ........... और विनोद भी महीन की जिसम पी पहनी होइ साड़ी को देख रहा था ........... आज सी पहली उसनी महीन को इस लिबास मैं नहीं देखा था कभी ............ और कभी उसकी जिसम को इतना एक्सपोज़ नहीं देखा था ........... ऊपरी जिसम को ......... मगर आज उसकी पूरी बाज़ू, और सीना और पेट और बूब्स का कुछ हिस्सा और क्लीवेज विनोद की नज़रूँ की सामन्य साफ़ साफ़ दिख रही थय ......... और उसका मुंह खुला होआ था ............

महीन उसकी क़रीब आई .......... और अपनी ऊँगली सी उसकी खुली मुंह को बंद करती होइ बोली ............. क्या होआ कहाँ खो गए ..............

विनोद चौंक की होश मैं आया ............. Maheeennnnnnnnnnnn ......... Maheennnnnnnnnnn ............... यह तुम हो .......... hyyyyyyyyyyy भगवान् ................ कितनी खूबसूरत बनाया है तुम न्य इसी ............. महीन मुझी यक़ीन नहीं आ रहा की यह तुम हो ..........

महीन की हंसी की जलतरंग बजी ............ क्यों मैं अछि नहीं लग रही साड़ी मैं .............

विनोद ............ अछि ....... तुम तो क़यामत लग रही हो महीन क़यामत .......... बुहत बुहत अछि लग रही हो ........... बुहत hi प्यारी .............

महीन शरारत सी बोली ........ प्रिय सी भी ज़्यादा प्यारी ............

विनोद फोरि बोलै ........ हाँ प्रिय सी भी ज़्यादा ........ प्रिय तो कुछ भी नहीं है तुम्हारी सामन्य महीन ............. लकिन ...... लकिन ...... यह सुब .....

महीन मुस्कराई ............. सुब तुम्हारी लय ........... और तुम न्य hi तो बोलै था न तुम्हारी साथ मंदिर जांय को ............ तो बस इसी लय ....... साड़ी पहन ली ..............

विनोद ........ मगर पहली तो कभी तुमको साड़ी मैं नहीं देखा .......

महीन शरमाई ........ आज पहली बार पहनी है ज़िन्दगी मैं साड़ी ...... और वह भी देखो तो कैसी लय क्र दी है यह नीतू की बची न्य ...........

विनोद बोलै ........ क्या होआ ....... बिलकुल परफेक्ट है ........ बुहत hi हॉट ...... और बुहत hi खूबसूरत साड़ी है ..........

महीन शर्माती होय ............ लकिन ...... विनोद ...... यह ब्लाउज ....... कुछ ज़्यादा नहीं है .............

विनोद .......... नहीं नहीं बिलकुल ठीक है .......... मोडरें दसिग्नस ऐसी hi तो होती हैं ...........

महीन पिच्य को घूमी और बोली ........... पर यह बैकलेस है ........ कुछ भी नहीं छुपा रहा है पिच्य सी .............

विनोद न्य महीन की दूध की जैसी सुफैद और माखन की तरह मुलायम चिकनी कमर देखि तो उसकी आंखें फाइल गईं ............. उसनी कभी भी महीन की कमर को नंगी नहीं देखा था ........... पर आज उस बैकलेस साड़ी मैं महीन की कमर नंगी थी विनोद की सामन्य ........... विनोद का बुहत दिल चाहा की ाग्य बढ़ की वह अपनी होंठ महीन की नंगी कमर पी रख दी ........ मगर वह ऐसी हिम्मत नहीं क्र सका .............

विनोद .......... कुछ नहीं है ............ फैशन है आज कल का ............ कुछ बुराई नहीं है इस ब्लाउज मैं ............ तुम बिला वजह hi फील क्र रही हो ............

महीन वीर्य सी बोली ........ मुझी दर था की तुम गुस्सा हो गए मुझी ऐसी ब्लाउज मैं देख क्र ..............

विनोद ........ आर्य गुस्सा क्यों होना है ........... यह सुब तो आज कल का फैशन है ............. सुब चलता है .......... और तुम इंडिया मैं नहीं ुक मैं हो ........... इस लय कोई भी कुछ नहीं कही गए तुमको ............ बल्कि सुब घायल hi हो जाईं गए तुम्हारा हुसैन देख क्र ..........

महीन शर्माती होइ ......... थैंक्स विनोद .......... अब इतनी भी तारीफ नहीं करो ..........

विनोद हंसा चलो चलें फिर ............

महीन .......... एक मिनट ........ महीन न्य बॉक्स खोल की उस मैं सी वाच निकाली और विनोद की तरफ बरही ........

विनोद हैरानी सी .......... अब यह क्या .......

महीन मुस्कराई .......... वाच है तुम्हारी लय ........

विनोद न्य खुश हो क्र अपना हाथ ाग्य क्र दया ........ उफ्फ्फ्फ़ महीन कितनी गिफ्ट देंय हैं मुझी तुम न्य मेरी जनम दिन पी .......... तुम न्य बुहत कुछ क्र दया है मेरी लय यार .............

महीन मुस्कराई और विनोद की कलाई मैं वह घरी बाँध दी ....... और विनोद उस खूबसूरत घरी को देखनी लगा ........... और फिर महीन को अपनी साथ लगा क्र हुग करनी लगा ............. महीन का दिल ज़ोर सी धारक उठा ........... विनोद की बहून की गर्मी और सख्ती सी ............. फिर विनोद न्य महीन को छोरा और दोनों साथ साथ घर सी निकल पारी ...............
 
अपडेट NO: 20

महीन और विनोद अपनी अपार्टमेंट को लॉक क्र की बहार निकली ....... और बिल्डिंग मैं नीची जांय लगी ........... महीन को इस ड्रेसिंग मैं काफी शर्म महसूस हो रही थी ...... उसनी ऐसी ड्रेस कभी ख्वाब मैं भी नहीं पहनी थी ........... न कभी सोचा था ..........

लिफ्ट मैं नीची जाती होय महीन विनोद की थोड़ा क़रीब होती होइ बोली ........ विनोद ....... मुझी बुहत शर्म आ रही है इस साड़ी मैं ......

विनोद मुस्कराया ..... और उसकी हाथ को थाम की बोलै ...... टेंशन नहीं लो ......... तुम सुच मैं hi बुहत प्यारी लग रही हो इस साड़ी मई ........ जो भी देखी गए घायल हो जाय गए ............ और वैसी भी यहाँ पी किसी को कोई फ़िक्र नहीं होती की किसनी क्या पहना होआ है ..........

महीन चुप हो गए ........... और विनोद की साथ चलनी लगी ........ विनोद महीन को लय क्र एक टेम्पल मैं पोहंचा ........ महीन उसकी अंदर दाखिल होनी मैं झिझक रही थी ......... अपनी मज़हब की इलावा किसी और की इबादत गाह मैं दाखिल होनी का उसकी लय पहला मौका था ........ विनोद न्य उसी हौसला दया ........ और उम्मीद भरी नज़रों सी देखा ...... और उसका हाथ थाम क्र मंदिर की अंदर दाखिल हो गया .......... महीन का दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था .............. जैसी hi दोनों अंदर दाखिल होय तो महीन मंदिर की खूबसूरती को देख क्र हैरान रह गए ........... उसकी इंटीरियर न्य उसी सुच मैं दिल सी तारीफ करनी पी मजबूर क्र दया ...... मंदिर की अंदर अगरबतों की खुसबू फैली होइ थी ........... और बुहत hi मशहूर कुन माहोल था उस मंदिर की अंदर का ............. महीन न्य दिल hi दिल मैं सोचा की मैं न्य तो कभी मंदिर देखा भी नहीं हालाकि यह तो बुहत hi अछि जगा है ............

महीन की नर्वस्नेस अब वीर्य वीर्य दूर हो रही थी ........ जैसी जैसी उस माहोल ........ और वहां की खुसबू का असर उसकी नेर्वेस पी हो रहा था .............. उस माहोल का असर उस की ऊपर हो रहा था ....... वह विनोद का हाथ थामी होय वीर्य वीर्य मंदिर की अंदर चल रही थी ...... नंगी पाऊँ ....... अपनी इर्दगिर्द मुख्तलिफ खूबसूरत मूर्त्यों को देख क्र उसी अजीब सी फीलिंग हो रही थी ........ मगर उसी ाचा लग रहा था ............. वह सुब ............ और विनोद का साथ ........ उसकी लये उस जगा पी आना ........ विनोद महीन को मंदिर की अंदर एक छोटी सी हिस्से की तरफ लय गया ........... वहां पी एक पंडित जी बैठी होय थय ........ उधेड़ ुमार की ........ धूति और कुर्ती मैं ............. उसकी पास जा की विनोद बोलै ......

विनोद दोनों हाथ जोर की बोलै .......... नमस्त्य पंडित जी .....

विनोद की देखा देखि महीन न्य भी अपनी दोनों हाथ जोर डाई और हल्का सा अपना सर झुका दया ..............

पंडित .......... राम राम ....... की जय ..... कैसी आय हो बीटा .......

विनोद ...... पंडित जी वह आज मेरा जनम दिन है तो इसी लये हम पूजा और आप की आशीर्वाद की लय आय थय ..........

पंडित ...... ओह ...... ाचा ाचा ........ बुहत बुहत बधाई हो तुमको जनम दिन की बीटा ........ पंडित महीन की साड़ी मैं सी छलकती होय उसकी जिसम पर नज़र डालती होय बोलै ............

फिर पंडित जी उठी और बोली ............ आ जाओ दोनों मेरी पिच्य पिच्य .......

पंडित जी उन दोनों को एक मूर्ती की ाग्य लय गए ........... और बोली बेथ जाओ दोनों ...........

महीन न्य घबरा की विनोद की तरफ देखा ....... उसनी महीन को आँखों सी शांत रहंय का इशारा क्या और बेथनी को कहा ....... महीन खामोशी सी उसकी क़रीब hi बेथ गए .......... अजीब नज़रों सी विनोद को देखती होइ ...........

पंडित जी .......... बीटा यह ना सिर्फ तुम्हारी जन्मदिन की पूजा है ..... बल्कि दो रूहों की मिलान की क़ायम रहंय की भी पूजा है .......... भगवान् सदा तुम दोनों की जोड़ी क़ायम रखी ........... और अगली जनम मैं भी तुम दोनों को मिलाय ...........

महीन न्य चौंक की विनोद की तरफ देखा .......... वह भी वीर्य सी मुस्करा दया ....... महीन का चेहरा शर्म सी लाल हो गया ........ क्यों की पंडित उन दोनों को पति पत्नी समझ रहा था ......... महीन चुप हो गए और पंडित न्य अपनी रसूमात शुरू क्र दिन .. ........ विनोद और महीन दोनों हाथ जोड़ी होय उसकी सामन्य बैठी थय ........... सामन्य बैठी होय पंडित की आंखें बंद थीं .......... और वह कुछ मंतीर और अश्लोक पढ़ रहा था ............

थोड़ी देर की बाद पंडित न्य अपनी आंखें खोलीं और बोलै ........ बेटी अब तुम अपनी पति की जनम दिन पी उसकी लम्बी उम्र की दुआ मानगो ............ ऐसी hi बैठी होय ..........

महीन घबरा गए ............... और विनोद की तरफ देखा ....... महीन पंडित जी को कुछ बोलनी वाली थी ................ मगर विनोद उम्मीद भरी नज़रों सी महीन की तरफ देख रहा था .......... महीन को लगा की उसी मायूस करना उसकी लय ठीक नहीं है ........ और वह भी उसकी जनम दिन पी ................. उसनी एक लम्बी सांस ली ............... मंदिर मैं फैली होइ खुशबु उसकी सांस की साथ उसकी सैन्य मैं उतर गए ........ और जैसी उसकी अंदर शान्ति सी फैल गए ............ उसका दिमाग़ क्लियर हो गया ........... उसनी एक नज़र विनोद की तरफ देखा ....... वीर्य सी मुस्कराई ......... और फिर अपनी आंखें बंद क्र की विनोद की लम्बी उम्र की दुआ करनी लगी ........ उसकी खुशीओं की लय ............ उसकी तरक़ी की लय ....................

कुछ देर की बाद महीन न्य अपनी आंखें खोएं और विंड की तरफ देखा ............. उसकी आँखों मैं उसकी लय तशकूर था ........... महीन न्य शरमाती होय नज़रें झुका लीन ...........

पंडित जी बोली .......... अब तुम दोनों खरी होय जाओ ........... एक दूसरी की तरफ मुंह क्र की ...........

महीन और विनोद दोनों खरी हो गए .............

पंडित जी ........ बेटी अब तुम अपनी पति की पाऊँ छु और उसकी आशीर्वाद लो .......

महीन झिझकी ........... उसकी लय यह सुब कुछ करना मुश्किल फील हो रहा था .............. विनोद न्य नज़रों hi नज़रों सी उसी ेन्सॉरगे किआ .......... महीन भी सोचनी लगी की यह बस एक रसूम hi तो है .......... क्र भी लोन गई तो क्या है ....... यह सोच क्र महीन आहिस्ता सी विनोद की ाग्य झुक गए ....... और उसकी पैरों को छु लय ............ विनोद न्य उसको कन्धों सी पाकर की उठा दया और अपनी सीने सी लगा लय ........... महीन को जैसी रहत सी मिली विनोद की सीने सी लग की .......... मगर वह जल्दी सी उस सी अलग हो गए ............

पंडित की आवाज़ आई .......... भगवान् तुम दोनों की जोड़ी को क़ायम रखी और ज़िंदगी भर की खुस्यान दी ........... महीन और विनोद दोनों एक दूसरी की तरफ देख क्र मुस्करा डाई ............. फिर विनोद न्य झुक क्र पंडित जी की पैरों को छूआ .......... और झिझकती होय महीन भी पंडित जी की सामन्य झुक गए ............ और उसकी बूब्स पंडी जी की नज़रों की सामन्य जैसी ब्लाउज सी निकल की बहार अन्य लगी .......... महीन जल्दी सी सीढ़ी हो की खरी हो गए ........... पंडित जी न्य दोनों को पार्षद दया और दोनों न्य उसी मुंह मैं दाल लय ........... फिर दोनों मंदिर सी बहार जांय लगी ...........

विनोद ........ महीन यह मेरी लये बुहत बरी बात है जो तुम न्य मेरी लय यह सुब कुछ क्या है ............ मेरी ख़ुशी की लय ........

महीन मुस्कराई ........ विनोद तुम्हारी ख़ुशी मुझी भी अज़ीज़ है ....... क्या होआ अगर प्रिय नहीं है यहाँ तो मैं तो हों न उसकी कमी को दूर करनी की लय ...........

विनोद महीन को मंदिर की सैर करवानी लगा ...... उसी इधर उधर राखी होइ मूर्त्यों की दरशन करवानी लगा ........ महीन भी बरी दिलचस्पी की साथ यह सुब देख रही थी .............

कुछ देर तक घूमनी की बाद महीन और विनोद मुस्कराती होय मंदिर सी भर निकली .......... महीन आज हम डिनर बहार करें गए ............ ठीक है न .......

महीन न्य मुस्करा की विनोद की तरफ देखा और हाँ मैं सर हिला दया ........... थोड़ी देर मई वह दोनों एक होटल मैं बैठी अपनी आर्डर का वेट क्र रही थय ............ विनोद उठ की थोड़ी देर की लय बहार निकला और कुछ 15 मिनट की बाद वापिस आज्ञा ........... और फिर दोनों डिनर करनी लगी ...........

विनोद .......... महीन आज का दिन तुम न्य मेरी लय यादगार बना दया है ........ यक़ीन करो इतना मज़ा तो मुझी अपनी पिछली जनम दिन पी भी नहीं आया था जितना तुम्हारी साथ आया है .......... महीन यू दीद तू मच फॉर में .............. महीन मुस्करा दी .......... विनोद की नज़रें महीन की नंगी हो रही होय जिसम पी दौड़ रही थीं ............ वह उसकी बूब्स और नंगी पेट को देख रहा था ...........

महीन शर्माती होय ....... क्या देख रही हो खाना खाओ ......

विनोद वीर्य सी बोलै .......... महीन तुम बुहत खूबसूरत हो ........ मुझी अंदाज़ा नहीं था आज सी पहली इस बात का ..............

महीन उसकी बात का मतलब समझ की मुस्करा दी ..............

महीन .......... पता भी है मुझी कितनी शर्म आ रही है इस साड़ी मैं ...... बुहत hi अजीब लग रहा है सुब की सामन्य ऐसी यह साड़ी पहनन न ..........

विनोद ...... क्यों क्या होआ ....... सुब की सामन्य क्या है....

महीन ........... विनोदद्ड .............. मैं न्य कभी ऐसी कपय नहीं पहनी ........... आसिफ की सामन्य भी नहीं ........... और आज तुम्हारी खातिर यौन सुब की सामन्य पहन की आना पारा है ..........

विनोद वीर्य सी बोलै ............ थैंक्स महीन .............. मेरी खातिर यह सुब कुछ करनी का ..............

महीन मुस्कराई ......... यह बार बार क्यों मेरा थैंक्स बोल रही हो ........ मेरा तुम न्य इतना ख्याल रखा मैं न्य तो इतनी बार तुमको थैंक्स नहीं बोलै न ............

विनोद हंसनी लगा ..............

खाना खाती होय विनोद महीन को देखी जा अहा था ........ और महीन उस सी शर्मा रही थी .............

डिनर करनी की बाद दोनों अपनी फ्लैट की तरफ रवाना हो गए ........... दोनों साथ साथ चल रही थय ........... बिलकुल क़रीब ....... रात की ठंडी हवा महीन की नंगी बाज़ू, उसकी नंगी पेट और उसकी नंगी कमर को छु रही थी .......... जिस सी महीन की जिसम मैं अलग hi अहसास जाग रहा था ............. विनोद की साथ ....... उसकी बिलकुल क़रीब चलती होय महीन को बुहत ाचा लग रहा था .............. कुछ देर तक चलनी की बाद ........ बुहत hi आहिस्ता सी विनोद न्य महीन का हाथ थाम लय .......... महीन न्य अपनी नज़र झुका की विनोद की हाथ मैं थामी होय अपनी हाथ को देखा .............. और फिर नज़रें उठा की विनोद की आँखों मैं देखा ............. महीन न्य विनोद की आँखों मैं देखती होय बुहत hi आहिस्ता सी ......... अपनी हाथ को विनोद की हाथ सी चुरवानी की बुहत hi हलकी सी कोशिश .............. बी नाम सी मज़ाहिमत ............. मगर विनोद न्य उसका हाथ नहीं छोरा ....... बल्कि थोड़ा सा और भी मज़बूती सी थाम लय ........... उसकी आँखों मैं इल्तिजा थी जैसी ........... जैसी वह महीन को कह रहा हो की अपना हाथ उसी हाथ मैं रहंय दो ............. महीन विनोद की नज़रों का पैग़ाम पढ़ती होइ ......... उसी समझती होइ .............. वीर्य सी मुस्करा पारी ............. और फिर शर्मा की अपनी नज़रों को झुकाया और आहिस्ता सी ाग्य को चलनी लगी ............. विनोद भी खुश हो गया ........... और महीन का हाथ अपनी मज़बूत हाथ मैं थामी होय उसकी साथ चलनी लगा ...........

महीन का हाथ अब विनोद की हाथ मैं था ....... और वह इस बात सी बिलकुल कम्फर्टेबले हो चुकी होइ थी ........... उसी कुछ ग़लत नहीं लग रहा था ............ विनोद का हाथ थामी होय उसकी क़दम सी क़दम मिला की ुकस्य साथ चलना ............. अलग hi रोमांटिक अहसास पैदा क्र रहा था उसकी अंदर ......... अलग सी फीलिंग उसकी बदन मैं फैल रही थी ............ दिल की धरकन भी तेज़ हो रही थी ............... एक दूसरी का हाथ थामी होय दोनों अपनी अपार्टमेंट की तरफ बढ़ रही थय ...............
 
विनोद और महीन दोनों अपार्टमेंट मैं दाखिल हो गए ............ विनोद बुहत खुश था ........... और उसी देख क्र महीन को भी बुहत ख़ुशी हो रही थी .............. महीन खुश थी की उसकी वजह सी विनोद का जनम दिन ाचा गुज़रा है ........... और उसी अपनी तनहा होनी का ....... और प्रिय सी दूर होनी का अहसास नहीं होआ है ............. विनोद घर आ की सोफे पी बेथ गया लाउन्ज मैं hi ........... और महीन किचन की तरफ चली गए ............. विनोद की नज़र महीन की नंगी कमर पी थी ....... जो उसकी बैकलेस साड़ी की वजह सी नज़र आ रही थी ........... गोरी ..... सुफैद ....... चिकनी कमर ........ और उस सी नीची साड़ी मैं लिपटी होइ महीन की सादूल टाइट गांड ..............

महीन किचन सी पानी लय क्र आई ........ और विनोद को पानी दी क्र खुद त्रि सीटर पर बेथ गए ........... विनोद न्य पानी प्या और फिर उठ क्र महीन की क़रीब उसी की त्रि सीटर सोफे पर आ की बेथ गया .......... उस सी 2 फुट की फ़ासली पर ............ महीन का हाथ अपनी हाथ अपनी हाथ मैं लय लय ......... महीन का दिल ज़ोर ज़ोर सी धरकनी लगा ............

विनोद महीन का हाथ पकड़े होय वीर्य सी बोलै ........... महीन ........ आज का दिन मेरी ज़िन्दगी का सुब सी ाचा दिन है ........... सुब सी खुशगवार .......... मैं आज की दिन को कभी भी भूल नहीं पाऊँ गए ........... ज़िन्दगी भर नहीं ........... और यह सुब कुछ सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह सी होआ है महीन ............... तुम्हारी कारन .............

महीन मुस्करा दी ........... अपनी हाथ को थामी होय विनोद की हाथ पी अपना हाथ रख की बोली ........... विनोद ....... तुम को बार बार शुक्रया अड्डा करनी की ज़रूरत नहीं है ............. ी ऍम नॉट फीलिंग कम्फर्टेबले विथ आईटी ........... ऐसी लगता है जैसी तुम मुझी अपना नहीं समझती ..............

विनोद मुस्कराया और बोलै ............ अपना hi समझता हों महीन ............ और इसी लये तो तुम्हारी लय यह लाया हों .............. विनोद न्य अपनी पॉकेट मैं सी इक छोटा सा बॉक्स निकला ........... और उसी महीन की हाथ पी रख दया .............

महीन हैरानी सी उस बॉक्स को देखती होइ बोली ........... विनोद यह क्या है .........

विनोद मुस्कराया ......... खोल की देख लो ........

महीन न्य उस बॉक्स को खोला तो उसकी अंदर गोल्ड का एक लॉकेट चमक रहा था ........... गोल्डन चैन मैं प्रोया होआ छोटा सा लॉकेट ............ बुहत hi खूबसूरत ...... और क़ीमती दिख रहा था ..........

महीन हैरानी सी बोली .............. विनोद यह किस लय ..........

विनोद .......... तुम्हारी लये .............

महीन फौरन hi घबरा की ........... नहीं नहीं मैं यह कैसी लय सकती हों ...........

विनोद ........... कैसी नहीं लय सकती ............ अभी तो तुम न्य बोलै है न की तुम मेरी अपनी हो ........... तो जैसी लास्ट ईयर मैं न्य प्रिय को गिफ्ट क्या था ........... उसी तरह इस जन्मदिन पी मेरी इस गिफ्ट पी तुम्हारा हक़ बनता है ........... प्लीज इंकार नहीं करना .................

महीन उस लॉकेट को हाथ मैं लय क्र देखती होइ बोली ............. विनोद ...... यह बुहत क़ीमती है ........... मैं कैसी यह ..........

विनोद ......... महीन यह उस सुब की सामन्य कुछ भी नहीं है जो कुछ तुम न्य आज मेरी लय किआ है .............

महीन चुप हो गए ........ और अपनी हाथ मैं पकड़ी होय उस लॉकेट को देखती रही ...........

महीन विनोद की बारी मैं hi सोच रही थी .......... उसका दिल ज़ोर ज़ोर सी धारक रहा था विनोद की लय ........... उसी विनोद का इस तरह सी अपनी चाहत का इज़हार ाचा लग रहा था .......... इस बात की भी ख़ुशी हो रही थी उसी की उसनी आज की दिन उसी प्रिय की जैसा मक़ाम दया है ........... अपनी ज़िन्दगी मैं .............. विनोद की लय इज़्ज़त उसकी दिल मैं और भी बढ़ गए होइ थी ............

विनोद बोलै ............. महीन ............ अगर तुमको बुरा ना लगी तो मैं इसी दाल डॉन तुम्हारी गली मैं ..............

महीन न्य विनोद की तरफ देखा ............. उसकी आँखों मैं ....... और फिर शर्माती होय आहिस्ता सी अपनी हाथ मैं पकड़ा होआ वह गोल्ड का लॉकेट विनोद की तरफ बढ़ा दया ............... विनोद का चेहरा जैसी खिल उठा .............

विनोद सोफे सी उठ क्र सोफे की पिच्य आज्ञा ........ महीन की बैक पी ......... आहिस्ता सी महीन की बलून को उसकी गर्दन सी हटाया ........... महीन की गोरी गोरी कमर एक बार फिर उसकी सामन्य थी ...... और वह भी इस क़दर उसकी नज़रों और उसकी हाथों की क़रीब ........... ..... विनोद न्य महीन की नंगी कमर को देखती होय ........... लॉकेट की गोल्डन चैन खोल क्र उसी आहिस्ता सी महीन की गले मैं लटकाया और फिर उसी महीन की गर्दन पी लॉक क्र दया ............ और जल्दी सी उसकी सामन्य आ की उसकी गले मैं लटक रही होय उस खूबसूरत लॉकेट को देखनी लगा ............ और खुश होता होआ बोलै .....

विनोद .......... महीन देखो तो कितना खूबसूरत लग रहा है यह तुम्हारी गले मैं ............

महीन अपना सर झुका की अपनी गले मैं लटक रही होय उस लॉकेट को देखनी लगी .............. विनोद न्य जल्दी सी महीन का हाथ थामा और थोड़ी सी ताक़त लगा क्र उसी सोफे सी खरा क्र दया ............ और उसी जैसी खींचता होआ अपनी रूम की तरफ लय जांय लगा ............ महीन जैसी उसकी पिच्य खींची चली आ रही थी ................. विनोद अपनी बैडरूम मैं दाखिल होआ ......... और एक हलकी लाइट वाला बल्ब ों क्र दया ........... बैडरूम मैं फैल गए ............... जिस सी बुहत ज़्यादा रौशनी नहीं हो रही थी ....... बल्कि बुहत hi रोमांटिक सा माहोल बन गया होआ था ........... महीन की दिल की हालत अजीब सी होनी लगी ............ विनोद न्य उसी लय जा की अपनी ड्रेसिंग टेबल की सामन्य खरा क्र दया ........... और खुद उसकी साथ खरा हो गया ...........

विनोद ........... महीन ........ अब देखो कैसा लग रहा है ...... कितना जांच रहा है यह तुम्हारी गले मैं ..............

महीन अपनी सामन्य आंय मैं अपनी अक्स को देखनी लगी ........ अपनी गले मैं लटक रही होय उस लॉकेट को ............ जो सुच मैं hi बुहत खूबसूरत लग रहा था ............ बैडरूम मैं फैली होइ हलकी हलकी रौशनी मैं चमक रहा था ............ लॉकेट को देखती होय महीन को कुछ और भी नज़र अन्य लगा ............... अपना अक्स ............ ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी होय अपना जिसम ........... जिस मैं सी उसकी बाज़ू और पेट और सीना नंगा हो रहा था .......... और उसकी साथ नेवी ब्लू कलर की कुर्ती और सुफैद पाजामे मैं विनोद खरा था .............. महीन का दिमाग़ कुछ और hi सोच रहा था ............ सामन्य आंय मैं ऐसी लग रहा है जैसी पति पत्नी खरी हों ........... महीन की दिल मैं ख्याल आया ........... और विनोद लग भी तो कितना हैंडसम रहा है न ............. बिलकुल किसी शहज़ादे की तरह .............

महीन आंय मैं खुद को और विनोद को देख रही थी ........... उसी अपनी नंगी गर्दन और गोरी कमर की ऊपरी हिस्से पी विनोद की गरम गरम सांसें फील हो रही थीं .......... जिस सी महीन की अंदर हलचल सी हो रही थी ............ उसी अपनी जज़्बात भी बी काबू होती होय महसूस हो रही थय ................... अचानक उसी अपनी नंगी कमर पी विनोद की भारी मज़बूत हाथों का लम्स महसूस होआ ............. जैसी hi विनोद न्य अपनी हाथ महीन की कमर पी रखी .......... उसकी कमर को अपनी दोनों हाथों की ग्रिफ्ट मैं लय तो महीन की आंखें बंद हो गए .................... उसकी मुंह सी आवाज़ निकली ......

महीन ............. sssssssssssssssss............ Vinooooodddddddddddddddddd ............. naheeeeeeeeeeeeeee pleaseeeeeeeeeeeeeeeee ........................ महीन की हलकी सी सरगोशी की आवाज़ थी ..............

विनोद अपनी होंठों को उसकी कानों की पास लाती होय वीर्य सी बोलै ........... SSSSSSSSHHHHHHHHHHHHHHHHhhhhh ...................... और वीर्य सी महीन की कान पी चूम लय ........... विनोद की होंठों सी महीन की पूरी जिसम मैं एक लज़्ज़त की लहार सी दौड़ गए ............ विनोद का हाथ आहिस्ता ाहसिता सिरकटा होआ महीन की नंगी पेट पी अन्य लगा ............. और उसकी नंगी पेट को सहलानी लगा ................ महीन की होंठों सी बुहत hi हलकी हलकी सिसकार्यं निकल रही थीं ............... उसकी आंखें बंद हो रही थीं .......... कभी वह अपनी आंखें खोल की विनोद को देखनी लगती ............

विनोद की अक्स को hi महीन देख रही थी की .......... विनोद न्य आंय मैं महीन की आँखों मैं देखती होय आहिस्ता सी उसकी साड़ी की ट्रांसपेरेंट पालू को उसकी कंधी सी सिरका दया ............ और अगली hi लम्हे उस साड़ी का ट्रांसपेरेंट पालू महीन की रेशमी बदन सी फिसल क्र नीची चला गया ............. महीन का जिसम अब आंय मैं सिर्फ ब्लाउज मैं दिख रहा था ........... और महीन का खूबसूरत सीना ....... उसकी सीने की उभार ........... और उसका क्लीवेज आंय मैं सी विनोद की नज़रों की सामन्य आज्ञा ........... विनोद का पहनाया होआ गोल्ड का लॉकेट उसकी गले मैं चमक रहा था .......... महीन की सीने की उभारों की बिलकुल ऊपर ........ उसकी क्लीवेज की स्टार्ट पी ...... .. खुद को इतनी ज़्यादा एक्सपोज्ड हालत मैं देख क्र महीन का चेहरा शर्म सी लाल होनी लगा ............ विनोद का जादू उस पी चल रहा था.. . महीन की दोनों बाज़ूओं पी अपनी हाथ रखी और उसकी नंगी बाज़ूओं को आहिस्ता आहिस्ता सेहलानी लगा ........ महीन की जिसम मैं सनसनाहट सी होनी लगी ................

विनोद न्य महीन की बलून मैं लगा होआ क्लिप खोल की ड्रेसिंग टेबल पी रख दया .......... और महीन की रेशमी बाल बिखर गए ............ विनोद न्य उसकी बलून को समेत क्र एक तरफ क्या ......... विनोद की गरम गरम सांसें फिर सी महीन को अपनी गर्दन पी महसूस होनी लगीं ......... और फिर विनोद न्य अपनी होंठों को आहिस्ता आहिस्ता महीन की गर्दन की क़रीब लानी लगा ........ ............... जिस सी महीन की अपनी सांसें भी तेज़ होनी लगीं ........... उसी अहसास हो रहा था की विनोद की होंठ किसी भी वक़्त उसकी गर्दन को को सकती हैं .......... और नाजन्य क्यों वह खुद भी विनोद की होंठों की मुन्तज़िर थी .......... उसका अपना जिसम भी गरम हो रहा था ................... दिल मैं अजीब गुदगुदी सी हो रही थी ............ सारा दिन विंडो की इतना क़रीब गुज़ारनी की बाद ............ उसकी हैंडसम और ताक़तवर जिसम को सारा दिन अपनी साथ देखनी की बाद .......... सारा दिन खुद को कण्ट्रोल करनी की बाद .......... सारा दिन खुद को विनोद की साथ प्रिय की जगा रखनी और महसूस करनी की बाद ................ आखिर अब उसका कण्ट्रोल ख़तम हो रहा था खुद पी ........

आखिर विनोद न्य अपनी गरम होंठ महीन की गर्दन पी रख डाई ............ बुहत hi आहिस्ता सी ........ गरम गरम ताप्ती होय होंठ ......... जलती होय होंठ ............. महीन को ऐसी लगा की जैसी किसी न्य अंगारी उसकी गर्दन पी रख दी हों ............... और उनकी गर्मी की साथ hi महीन का पूरा बदन जैसी जल उठा ........... उस की आंखें बंद हो गए ........... एक सिसकारी की साथ .............

विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता महीन की गर्दन पी छोटी छोटी किश लेनी शुरू क्र डाई ........... विनोद की वह छोटी छोटी किश .......... महीन को अंगारों की तरह महसूस हो रही थय ......... जैसी विनोद उसकी गर्दन को जगा जगा सी जला रहा हो .............. जिसम की गर्मी मैं ............ हवस की आग मैं ............. और उसको रोकनी की बजाय ........ महीन की होंठों सी बस सिसकार्यं सी निकल रही थीं ............. विनोद महीन की बाज़ूओं को सहलाती होय उसकी गर्दन को चूमी जा रहा था .............

थोड़ी देर की बाद विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी दोनों हाथ महीन की नंगी कमर पी रख डाई .......... जिसकी साथ hi महीन की होंठों सी तेज़ सिसकारी की आवाज़ निकल गए ................ ssssssssssssssssssssssss ........... aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ................ अपनी मज़बूत हाथों की ग्रिफ्ट मैं महीन की नंगी कमर को लये होय ........ विनोद न्य इस बार अपनी होंठ महीन की गर्दन पी रखी तो इस बार होंठों को उसकी गर्दन पी जमा hi दया .................... थोड़ा सा अपनी होंठों को खोलती होय ....... उसकी गर्दन की स्किन को अपनी होंठों मैं खींच लय ............

aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh ................. mmmmmmmmmmmmmmm ..................... महीन की मुंह सी शिकारी निकल गए ....................... naheeeeeeeeeeeeeee ................. Vinodddddddddddddddddddd ............................. pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee .................... महीन सिसकी ................... उसकी होंठों सी बी तरतीब अलफ़ाज़ निकल रही थय ............ वह विनोद को रोक रही थी ............. मगर उसका जिसम उसका साथ नहीं दी रहा था .................... इतनी दिनों सी आसिफ सी दूर रहंय ............ और अब विनोद जैसी खूबसूरत जवान मर्द की जिसम की क़ुरबत को पानी की वजह सी महीन का जिसम अब खुद की कण्ट्रोल सी आज़ाद हो रहा था ........... विनोद न्य ाहसिता ाहसिता महीन की गर्दन को जैसी चूसना शुरू क्र दया ............. उसकी गर्दन को चूमती होय ........... उसकी हाथ आहिस्ता ाहसिता महीन की नंगी पेट को सहलानी लगी ........... फिसलनी लगी .......... महीन की जिसम मैं आग लगानी लगी ............... महीन की आंखें बंद थीं ............. और उसकी होंठों सी सिसकायां निकल रही थीं ................ विनोद महीन की गर्दन पी लव मार्क्स बना रहा था ....... जैसी अपनी प्यार की मोहरें लगा रहा हो ............

विनोद की हाथ आहिस्ता ाहसिता ऊपर की तरफ सिरकनी लगी ........... महीन की बूब्स की तरफ ............... महीन का बुरा हाल हो रहा था .............. विनोद की नीम रोशन बैडरूम मैं ............. महीन विनोद की बहून मैं खरी थी .............. और वह उसकी जिसम को सहलाती होय उसकी गर्दन को चूम रहा था .......... चूस रहा था ................ जैसी hi विनोद न्य अपनी दोनों हाथ महीन की दोनों बूब्स पी रखी ........... और साथ hi महीन की गर्दन की जिल्द को अपनी होंठों मैं लय क्र सूचक क्या ......... तो महीन का जिसम तो जैसी झटकी कहानी लगा .............. महीन को अपनी जिसम मैं करंट की लहरें फैलती होइ महसूस होनी लगीं ............. अपनी तइस की दरम्यान ......... उसी गीला पैन महसूस होनी लगा ............. गीला पैन ......... जो उसकी छूट सी निकल रहा था ............. और उसकी साड़ी की नीची उसकी नाज़ुक सी छूट को गीला क्र रहा था .............
 
विनोद न्य अपनी हाथों मैं लये होय महीन की बूब्स को आहिस्ता सी दबती होय महीन की गर्दन पी अपनी दांतों सी हल्का सा काटा तो .............. महीन न्य एक तेज़ सिसकारी की आवाज़ की साथ अपनी एक हाथ को ऊपर उठा की विनोद की सर की बलून को अपनी मुठी मैं भींच लय ........... और दूसरा हाथ अपनी बूब्स पी रखी होय विनोद की हाथ पी रख दया ...................... और सिसकीइइइइइइ .............. Vinoddddddddddddd ................. pleaseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ................ naheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee ...................... और साथ hi अपनी जिसम को पिच्य विनोद की ऊपर जैसी गिरा सा दया ...............

विनोद न्य महीन की गर्दन और उसकी पीठ को चूमती होय ....... अपना एक हाथ महीन की बूब्स पर सी हटाया .......... और हाथ नीची लय जा क्र ........... महीन की साड़ी की फाल खोल दी ............. और अगली hi लम्हे महीन की जिसम पी लिपटी होइ उसकी साड़ी उसकी जिसम सी फिसल क्र नीची उसकी पैरों मैं गिर चुकी होइ थी................ मगर महीन को इस बात का अहसास भी नहीं होआ ......... और अगर कुछ अहसास होआ भी था तो शायद अब उसी इसकी फ़िक्र नहीं थी ....... और अब वह विनोद की बहून मई आंखें बंद की होय सिर्फ अपनी ब्लाउज और पैटी कोट मैं खरी थी ............ और विनोद उसकी गर्दन को चूम रहा था .......... हौली हौली काट रहा था .......... और अपनी जुबां सी चाट रहा था ................ और महीन की मुंह सी गरम सिसकार्यं निकल रही थीं ................

विनोद न्य आहिस्ता सी महीन को अपनी तरफ घुमा लय ......... अपनी दोनों हाथों को उसकी नंगी कमर पी रखी होय hi ............. महीन न्य अपनी आंखें खोल दिन ............. और उसकी नज़रें जैसी hi विनोद की नज़रों सी मिलीं तो शर्म सी जैसी उसकी आंखें झुक गए .............. विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी होंठों को महीन की माथै पी रखा और उसी चूम लय ............. महीन न्य फिर सी अपनी नज़रें उठा क्र विनोद की आँखों मैं देखना शुरू क्र दया .............. जहाँ उसी अपनी लय प्यार hi प्यार ............ और प्यास hi प्यास नज़र आ रही थी ................ विनोद की नज़रें महीन की गुलाबी होंठों पी थीं ............ जो हौली हौली थरथरा रही थय ................ विनोद अपनी चेहरी को आहिस्ता ाहसिता महीन की चेहरी की क़रीब लानी लगा ............... उसकी होंठ महीन की होंठों की क़रीब अन्य लगी ............ दोनों की नज़रें अभी बह मिली होइ थीं .............. जैसी किसी मैग्नेट की साथ जुडी हों ................ विनोद की होंठों को अपनी क़रीब आता होआ देख क्र ............... महीन की होंठ वीर्य सी थोड़ी सी खुल गए ............... खुद सी hi ............. जैसी वह विनोद की होंठों का स्वागत क्र रही हों ................

विनोद बुहत hi हलकी सी आवाज़ मैं बोलै ............. महीनंणंन्न .........

जैसी वह महीन सी उसकी होंठों को किश करनी की इजाज़त मांग रहा हो ............. महीन भी उसकी आँखों और उसकी होंठों पी मौजूद उसकी सवाल को समझ चुकी थी ............ उस न्य आहिस्ता सी हाँ मैं सर हिला दया .......... और अपनी होंठों को हल्का सा खोल दया ......... चेहरी को थोड़ा उसकी तरफ लय जाती होय ..............

विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी होंठों को महीन की होंठों सी बुहत हल्का सा टच क्या ......... आहिस्ता सी अपनी होंठों को महीन की पतली पतली ....... गुलाबी होंठों पी पहिरण्य लगा .......... उसकी होंठों को सहलानी लगा अपनी होंठों सी ............. बुहत hi हल्का सा टच था दोनों की होंठों का ........... फिर विनोद न्य बुहत hi हल्की सी किश क्र लय महीन की होंठों का ........... विनोद का महीन की होंठों का पहला किश ............. महीन का अपनी शौहर की इलावा किसी भी मर्द की साथ पहला किश ............. और वह भी विनोद जैसी मज़बूत जिसम की मर्द की साथ ............... एक बार महीन को चूमनी की बाद विनोद न्य फिर सी अपनी होंठों को महीन की होंठों पी टिक्कया ........... और आहिस्ता आहिस्ता उनको चूमनी लगा ............... उसकी इंटेंसिटी मैं इज़ाफ़ा होता जा रहा था ................. महीन की होंठ भी खुली होय थय .......... मगर अभी तक वह उसका साथ नहीं दी रही थी ............ बस उसी खुद की होंठों को किश करनी दी रही थी .................... जैसी वह छह रहा था वैसी ..............

विनोद न्य अपनी हाथों को सिरकाती होय महीन की नंगी कमर पी लय आया .............. और उसकी मुलायम कमर की नंगी स्किन को सहलाती होय महीन की निचली होंठ को अपनी होंठों मैं लय और उसको चूसनी लगा ....... आहिस्ता आहिस्ता ............ उस पी अपनी जुबां पहिरण्य लगा ........... विनोद महीन की जिसम को अपनी साथ चिपकाती होय उसकी होंठों को चूस रहा था ........ महीन का जिसम पूरी तरह सी गरम हो रहा था ........... उसकी जज़्बात उसकी काबू सी बहार हो रही थय ............... उसकी हाथ भी आहिस्ता सी उठी और विनोद की गले का हार बन गए ............. महीन न्य विनोद की गले मैं अपनी बहिन दाल क्र उसी हल्का सा अपनी तरफ खींच लय ............. विनोद अब और भी शिद्दत की साथ महीन की होंठों को चूमनी और चूसनी लगा .......... उसनी अपनी जुबां को महीन की होंठों की अंदर दाल दया .......... उसकी मुंह मैं ........... महीन न्य भी अब विनोद का साथ देना शुरू क्र दया था ............ वह आहिस्ता ाहसिता विनोद की जुबां को चूसनी लगी .......... कभी उसकी होंठों को चूमनी लगती ............

महीन इतनी दिंनो सी आसिफ सी दूर थी ....... उसके जिसम की प्यास इतनी दिंनोन सी डब्बी होइ थी .......... उसकी खवाहिश ....... मगर आज ....... विनोद की इतनी क़रीब अन्य की बाद .......... विनोद की बाँहों मैं अन्य की बाद उसकी प्यास जाग गए थी ............. वह सुब कुछ भूल चुकी होइ थी ............ वह भूल गए थी की वह आसिफ की साथ नहीं बल्कि विनोद की साथ है ....... एक ग़ैर मर्द .......... मगर उस ग़ैर मर्द की बहून की ताक़त और उसकी जिसम की गर्मी न्य उसकी जज़्बात को पिघला दया था ........ भरका दया था .......... बी काबू क्र दया था ........... और अब वह पूरी तरह सी विनोद का साथ दी रही थी ..........

महीन की कमर को सहलाती होय विनोद महीन की पति कोट की ऊपर सी महीन की गांड को सहलानी लगा .......... उसकी हाथ पति कोट की रेशमी कापरी पर फिसल रही थय ........ जिस सी महीन की गांड उसी और भी चिकनी महसूस हो रही थी ........... विनोद का हाथ पति कोट की डोरी पी आया तो उसनी उसी खोल दया ........... और महीन को अपनी पति कोट की अपनी जिसम सी अलग हो की नीची गिरनी का पता भी नहीं चला ............. वह तो बस आंखें बंद कए होय विनोद की होंठों को चूस रही थी ........... और उसकी मज़बूत कमर पी हाथ फेर रही थी ............ उसकी कमर पी हाथ फैरती होय उसी अहसास हो रहा था की विनोद का जिसम कितना मस्कुलर है .......... कितना स्ट्रांग .......... महीन अब सिर्फ ब्लाउज और पंतय मैं विनोद की बहून मैं थी ............. और विनोद की हाथ अब महीन की पंतय की ऊपर सी उसकी गांड को सहला रही थय ......... उसको अपनी हाथों मैं दबोच रहा था विनोद और महीन की मुंह सी सिसकार्यं निकल रही थीं ................

विनोद की जिसम की साथ चिपकी होय महीन को कुछ और भी महसूस हो रहा था ............ विनोद का लुंड ........ जो की विनोद की पाजामे मैं आकर क्र उसकी पेट सी टकरा रहा था ....... उन दोनों की जिस्मो की दरम्यान भींच रहा था ........ विनोद की लुंड की गर्मी महीन को अपनी जिसम पी महसूस हो रही थी ......... वह खुद को अलग करना छह रही थी .......... मगर उसका जिसम उसकी दिमाग़ का साथ नहीं दी रहा था ....... वह वीर्य वीर्य अपनी पेट को हरकत देती होय विनोद की लुंड को महसूस क्र रही थी ........ उस अहसास हो रहा था की विनोद का लुंड कितना बारे है .......... आसिफ की लुंड सी भी ज़्यादा बारे लग रहा था ............. महीन का जिसम जितना गरम हो रहा था उस सी ज़्यादा उसकी छूट गरम हो रही थी ........ उसी लग रहा था की जैसी उसकी छूट की अंदर लावा पाक रहा है ........... जो किसी भी वक़त उसकी छूट सी बह निकली गए .............

महीन की होंठों को चूमती होय विनोद महीन को अपनी बीएड की तरफ लय जांय लगा .......... बीएड की क़रीब ला की विनोद न्य महीन को बीएड पी लिटा दया और खुद भी उसकी ऊपर लेत गया ...... बिना उसको कुछ सोचनी का मौका डाई ........ विनोद अब महीन की टांगों को थोड़ा सा खोल की उनकी दरम्यान लेता होआ था ............ और उसका एकरा होआ लुंड महीन की छूट सी टकरा रहा था ........ विनोद न्य अपनी कुर्ती की पालू को हटाया और अपनी पजामी की अंदर एकराय होय अपनी लुंड को पजामी की ऊपर सी hi महीन की छूट की ऊपर रगड़नी लगा ......... उसकी पंतय की ऊपर सी hi ............ जैसी hi विनोद का लुंड महीन की छूट सी टच होआ तो महीन की मुंह सी तेज़ सिसकारी की आवाज़ निकल गए .......... और वह विनोद की साथ लिपट गए ............ विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की छूट पी रगड़ना शुरू क्र दया ............ और साथ hi महीन की होंठों को फिर सी अपनी होंठों मैं लय की चूसनी लगा .........

महीन की छूट पानी चोर रही थी ....... जो उसकी पंतय को भिगो रहा था ........ और साथ hi विनोद की पाजामे को भी ....... गीला क्र रहा था ............ विनोद का एक हाथ नीची को जांय लगा ....... महीन की छूट पी ....... जैसी उसकी पंतय की ऊपर सी विनोद न्य सहलाना शुरू क्र दया .......... महीन तो जैसी और भी तरपणय लगी ........... विनोद न्य महीन की छूट पर सी उसकी पंतय की स्ट्रिप को हटाया ...... और महीन की छूट की दांय को अपनी ऊँगली सी मसलनि लगा ............. महीन न्य अपनी टांगों को विनोद की कमर की गिर्द कस्ती होय अपनी जुबां को विनोद की मुंह की अंदर दाल दया ............ aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ........... oooooooooooohhhhhhhhhhh ................. Vinnnnnnnooooooooooodddddddddddddddd ..................

महीन की छूट को सहलाता होआ विनोद का हाथ महीन की छूट की पानी सी गीला हो रहा था ......... विनोद न्य अपनी एक ऊँगली महीन की छूट की अंदर डाली तो उसी अहसास होआ की महीन की छूट कितनी गरम है और कितना पानी चोर रही है ........ विनोद की ऊँगली अपनी छूट की अंदर जाती hi महीन का पूरा जिसम hi जैसी ऊपर को उतनी लगा ........ मगर वह विनोद की जिसम को ऊपर ना उठा सकीय और बस aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ....................... ssssssssssssssssssssssssssss क्र की रह गए ............... उसका जिसम आज तक आसिफ की साथ सेक्स कृत्य होय भी इतना गरम नहीं होआ था जितना विनोद की हाथों मैं हो रहा था ............ शायद इतनी दिंनो तक आसिफ की लुंड सी दूर रहंय की कारन .......... या फिर एक दूसरी मर्द की बहून मैं अन्य की असर सी .............. विनोद जैसी मज़बूत और हैंडसम मर्द की क़ुरबत की असर सी .........

विनोद न्य वक़त को जाया ना करनी का सोचती होय अपना हाथ महीन की छूट सी हटाया और अपनी पजामी की नारी को खोल की उसी नीची को सिरका दया ......... और अपनी टांगों को हरकत देती होय अपनी टांगों सी निकाल दया .............. महीन को विनोद की निचली जिसम की नंगी होनी का पता तब चला जब विनोद की नंगी टांगें महीन की नंगी टाँगूं सी रगड़नी लगीं ................. विनोद न्य अपनी गरम और एकराय होय लुंड को महीन की छूट पी रखा और उसकी साथ महीन की छूट को सहलानी लगा .............. उसकी छूट की ऊपर रगड़ती होय ............. महीन तो अब जैसी पागल हो रही थी ................. Vinooooooooooooddddddddddddddddd ............................. aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ................. uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffffff.............................. nahhhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeeeeee krrrrrrroooooooooooooooooooooooooooo plllllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz .....................

अब पता नहीं वह विनोद को अपना लुंड उसकी छूट पी रगड़नी सी रोक रही थी की खुद को तैसे ना करनी को बोल रही थी .............. मगर उसनी विनोद को अपनी जिसम सी दूर करनी की कोई कोशिश नहीं की .....................

विनोद न्य अपनी मोटे लम्बे लुंड की फूली होइ टोपी को .......... जो उसकी लुंड की स्किन सी बहार आ रही थी .............. उसी महीन की छूट की सूराख पी रखा और आहिस्ता ाहसिता अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर दाखिल करनी लगा ................ aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Vinooooooooooooooodddddddddddddddddddddd ................ mmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm .............. ssssssssssssssssssssss ....................... जैसी hi विनोद की लुंड का टोपा महीन की छूट की अंदर दाखिल होआ तो महीन की होंठों सी दर्द भरी सिसकारी निकली ................ और उसी ऐसी लगा जैसी की उसकी छूट मैं कोई मोटा सा लोही का गरम डंडा दाल रहा हो ...................... विनोद का लुंड उसी अपनी छूट को फैलाता होआ महसूस हो रहा था .............. आसिफ की लुंड सी मोटा लुंड था विनोद का .................... विनोद को भी अहसास हो रहा था की महीन की छूट कितनी टाइट है ............... ऐसा नहीं था की आसिफ महीन को छोड़ता नहीं था ......... या उसी सटिस्फी नहीं करता था ............. मगर वह हमेशा बुहत hi प्यार सी महीन को छोड़ता था ....... और उसको उसकी ओर्गास्म पी लय जाता था .............. इसी लय महीन की छूट अभी भी टाइट थी .............

विनोद को अपना लुंड महीन की छूट मैं डालनी मैं काफी ताक़त लग रही थी ............ महीन की छूट गीली थी छूट की पानी सी ........... जिस सी विनोद को कुछ आसानी हो रही थी ............ वह भी महीन को तकलीफ नहीं देना चाहता था पहली बार की चुदाई मैं ........... इसी लय आहिस्ता ाहसिता अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर दाल रहा था ......... जैसी hi उसकी लुंड का फूला होआ टोपा महीन की छूट मैं दाखिल होआ तो महीन को लगा की जैसी किसी न्य उसकी छूट को खुल की रख दया हो ............. और विनोद को लग रहा था की जैसी उसकी लुंड को किसी वैक्यूम पंप न्य अपनी ग्रिफ्ट मैं लय लय हो ............ आहिस्ता आहिस्ता विनोद न्य अपनी लुंड को महीन की छूट की अंदर डालना शुरू क्र दया ....... ाग्य पेची कृत्य होय ............. आहिस्ता ाहसिता विनोद का आधा लुंड महीन की छूट मैं उतर गया .............. और महीन की सिसकार्यं हलकी हलकी चीखों मैं बदलनी लगीं .............. उसकी छूट और भी तेज़ी सी पानी चोर रही थी ................. वह आंखें बंद क्र की विनोद की साथ लिपटी होइ थी ............ उसकी बाज़ू विनोद की गर्दन मैं थय और वह उसी अपनी साथ चिपका रही थी ........... अपनी तरफ खींच रही थी .............

विनोद न्य अपनी होंठों को महीन की होंठों पी रखा और अपनी गांड को उठा क्र ाग्य पिच्य कृत्य होय अपना लुंड महीन की छूट मैं अंदर बहार करनी लगा .......... वह अभी तक अपना पूरा लुंड महीन की छूट मैं नहीं दाल रहा था .......... और ना hi महीन की छूट की तिघटनेस की वजह सी दाल पा रहा था .......... मगर महीन की फिर भी चीखें निकल रही थीं ............ वह विनोद की गर्दन मैं बहाएं डाली होय अपनी मुंह को विनोद की कान की पास ला की सिसकीइइइइइ ............ aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ................... Viiiiiiinooooooooooooooddddddddddddd buuuuuuuuuussssssssss ................... ahsitaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa ............. uuuuuuuuuuuuuffffffff ......................... dardddddddddddddddd ................

विनोद महीन की होंठों को चूमती होय बोलै ............... दर्द नहीं करों गए मेरी जान ................. uuuuuuuuuuuuufffffffffffffff ................ बुहत टाइट हो तुम ...................

महीन की छूट अपनी ओर्गास्म को पोहनचंय वाली थी .......... उसकी छूट पानी चोरटी जा रही थी ............. और कुछ hi देर मई महीन ज़ोर सी विनोद की जिसम की साथ चिपक गए .............. और उसकी छूट न्य विनोद की लुंड को भींचना शुर क्र दया .............. दबनी लगी ............ और साथ hi महीन न्य पानी चोर दया .................. विनोद महीन की होंठों को चूमती होय खुद पी कण्ट्रोल रखनी की कोशिश क्र रहा था ............ की महीन की साथ hi वह भी न पिघल जाय ............... मगर उसकी साड़ी कोशिश बेकार गए ............... और महीन की छूट की गर्मी न्य उसकी लुंड को अपना पानी चोरनी पी मजबूर क्र दया .............. विनोद न्य अपनी होंठ महीन की होंठों पी रखी और उनको चूमती होय .......... उसका लुंड महीन की छूट की अंदर पिचकारयण चोरनी लगा ........ अपनी गारही सुफैद फर्टाइल पानी की ............... विनोद की लुंड की पानी की गर्मी सी महीन की जिसम मैं करंट की और लहरें दौड़नी लगीं ........... और वह विनोद की साथ चिपकती होय एक बार फिर सी झरनी लगी ............

विनोद का सिर्फ आधा लुंड लय क्र hi महीन की छूट न्य पानी चोर दया था और विनोद भी सिर्फ आधा लुंड hi महीन की छूट की अंदर दाल सका था ................ और उसी की साथ महीन को छोड़ती होय अपना पानी उस न्य महीन की छूट की अंदर hi गिरा दया था ............ और दोनों एक साथ hi अपनी ओर्गास्म को पोहंची थय ............

दोनों की आंखें बंद थीं ........ महीन की छूट अभी भी विनोद की लुंड की गिर्द सुकर रही थी और फैल रही थी .............. और विनोद का लुंड महीन की छूट मैं हल्की हल्की झटकी लय रहा था ............. सुफैद गाढ़ी माननी की आखरी कटरी तक महीन की छूट की अंदर गिरानी की लय ................. दोनों hi लेती होय लम्बी लम्बी सांसें लय रही थय ............... हिलनी की हिम्मत दोनों मैं सी hi किसी मैं भी नहीं थी .......................
 
अपडेट NO: 21

विनोद की बैडरूम मैं हलकी सी रौशनी मैं महीन विनोद की बीएड पर विनोद की बहून मैं लेती होइ थी .............. उसका ब्लाउज और उसकी पंतय अभी भी उसकी जिसम पी थी ........... गोरी सुफैद टांगें पूरी बिलकुल नंगी थीं ......... और विनोद का नेवी ब्लू कुरता उसकी जिसम पी था ................ दोनों बीएड पी साथ साथ लेती होय थय .............. जज़्बात का तूफ़ान गुज़र चूका था ............ मगर दोनों की जिस्मों की प्यास ठंडी तो होइ थी मगर अभी पूरी तरह सी बुझी नहीं थी ................ महीन की सांस तेज़ तेज़ चल रही थी ........... और उसकी ब्लाउज मैं तनय होय उसकी बूब्स उसकी साँसों की साथ ऊपर नीची को हो रही थय ................ महीन की छूट सी विनोद की लुंड का गाढ़ा पानी आहिस्ता आहिस्ता रिस्ता होआ बाहिर आ रहा था .......... .. वह हलकी हलकी फैली होइ रौशनी मैं विनोद की बैडरूम की छठ को देख रही थी ................ कुछ सोच रही थी ........... उसी की बारी मैं सोच रही थी जो अभी अभी उसनी क्या था ............... विनोद की साथ .............. अपनी जज़्बात और अपनी जिसम की गर्मी मैं बहक क्र ................ विनोद की साथ .......... एक ग़ैर मर्द की साथ ....... अपनी हस्बैंड की इलावा पहली बार किसी ग़ैर मर्द की साथ ............. और वह भी एक हिन्द्दू मर्द की साथ ............. अपनी शौहर की इलावा पहली बार उसकी छूट मैं किसी और मर्द का लुंड गया था ............. और वह भी विंडो जैसी सॉलिड हिन्दूओ मर्द का ............. मगर पता नहीं क्यों अभी भी उसी कुछ बुहत ज़्यादा गिल्ट का अहसास नहीं हो रहा था ...........

विनोद न्य महीन की तरफ करवट ली ....... और महीन की बलून को सहलाती होय बोलै ........... क्या सोच रही हो महीन .......

महीन आहिस्ता सी बोली ........... विनोद ........ क्या यह सुब ग़लत नहीं हो गया

विनोद उसकी बलून को सहलाती होय बोलै ................ नहीं महीन ........ कुछ भी ग़लत नहीं होआ ............. यह सुब कुछ नेचुरल है ........... जो भी होआ है .............. तुम इतनी दिंनो सी आसिफ सी दूर हो ............ और मैं प्रिय सी ................. और हम दोनों एक साथ रह रहे हैं ............... कब तक हम अपनी जिस्मों की प्यास को कण्ट्रोल क्र सकती हैं .............. कब तक हम एक दूसरी सी दूर रह सकती थय ................. यह सुब नार्मल है महीन ............... तुम कुछ भी नहीं सोचो ................ बस अपनी दिल की और अपनी जिसम की आवाज़ सुनो ............. इसकी प्यास और इसकी तालाब को पूरा करो .............

महीन ............ लकिन ........ विनोद ............ आसिफ .......

विनोद न्य महीन को अपनी बहून मैं खींचा .......... और अपनी जिसम की साथ चिपका लय ............. महीन .......... आसिफ कहीं नहीं जा रहा तुम्हारी लाइफ सी ............... उसकी जगा कोई नहीं लय सकता ............ मैं भी नहीं ........... और ना hi कोई और ............ तुम हमेशा आसिफ की hi रहो गई ............ लकिन तुम कब तक अपनी जिसम की प्यास को कण्ट्रोल करो गई .............. कब तक अपनी जज़्बात का गाला घूंटो गई ......... बस जब तक हम दोनों यहाँ हैं .......... मैं तुमको आसिफ की कम्मी महसूस नहीं होनी डॉन गए ............. तुम को तुम्हारी जिसम की आग मैं नहीं जलनी डॉन गए ............. तुम भी भूल जाओ सुब कुछ .............. और अपनी लाइफ को जीओ .......... इसी एन्जॉय करो ..... जब तक तुम यहाँ हो ..............

महीन न्य भी विनोद की तरफ करवट ली और मुस्करा क्र उसी देखनी लगी ........... विनोद न्य महीन की कमर को सहलाती होय अपनी होंठ महीन की होंठों की तरफ बढ़ाय....... और उसकी आँखों मैं देखती होय बोलै

विनोद ........ मई ी .... ???

महीन मुस्कराई .......... पहली इजाज़त ली थी क्या ???

विनोद न्य मुस्करा की अपनी होंठ महीन की होंटो पी रख डाई और एक बार फिर सी उसी चूमनी लगा .............. फिर अपनी होंठों को हटा की फिर सी महीन की आँखों मैं देखनी लगा .................

विनोद ............. महीन तुम बुहत प्यारी हो सुच मैं .......

महीन मुस्कराई ............ ाचा जी .......... यह आज दिखा है क्या आप को ..........

विनोद ........... नहीं ........ हमेशा सी hi पता था ........

महीन .......... पर पहली कभी बोलै तो नहीं ...........

विनोद ........... तब हिम्मत नहीं थी ............ और ना hi तुम मेरी बात सुनती ..........

महीन ........... तो आज कैसी हिम्मत आ गए यह बोलनी की ............ और यह सुब कुछ करनी की ................

विनोद मुस्करया ............. पता नहीं ........ बस हो गया सुब कुछ ............

महीन मुस्कराई और शरारत सी बोली ............. बस हो गया न ....... अब जौं मैं अपनी बैडरूम मैं ...........

विनोद उसी फौरन hi अपनी जिसम की साथ चिपकाती होय बोलै .......... अभी कहाँ होइ है बस .................... अभी तो शुरू होआ है ............ और ाग्य सी तुम इसी बैडरूम मैं hi रहो गई ............. मेरी पास ........ मेरी साथ ............

महीन उसी तैसे करती होइ बोली ............. क्यों मैं क्यों यहाँ राहों ...... मैं कोई तुम्हारी पत्नी हों ....

विनोद महीन की होंटो को किश कृत्य होय बोलै ........... तुम मेरी पत्नी सी भी बढ़ की हो मेरी लये .................

महीन ........... ाचा जी ............. वैसी मुझी नहीं पता था की तुम्हारी जनम दिन को मनाती मनाती इतना सुब कुछ हो जाय गए ............

विनोद ........ क्यों तुमको ाचा नहीं लगा क्या .....

महीन शरारत सी इंकार मैं सर हिलाती होइ बोली ...... नहीं ......

विनोद मुस्करया ........ और अपना हाथ महीन की जिसम पी नीची लय जाती होय बोलै ............ ाचा जी ...... पर यह तो कुछ और hi कह रही है .............. विनोद महीन की छूट को छूती होय बोलै .......

महीन शर्मीली मसूकान की साथ हंसनी लगी .......... विनोद न्य महीन की छूट को टच क्या तो उसी महीन की छूट सी अपनी माननी निकलती होइ महसूस होइ ...........

विनोद .......... ओह्ह ...... वेट ा मिनट ...........

विनोद न्य साइड टेबल पी रखा होआ टिश्यू बॉक्स उठाया ...... और उस मैं सी काफी सारी टिश्यू निकाल की महीन की छूट को साफ़ करनी लगा ......... उस मैं सी बेहतय होय अपनी लुंड की पानी को .............

महीन उसी रोकनी की लय हाथ बढ़ाती होइ बोली .......... प्लीज रहंय दो विनोद मैं साफ़ क्र लोन गई ............. तुम्हारी हाथ गंदी हो जैन गए ..........

विनोद ............ नहीं होती गंदी ................ विनोद न्य टिश्यू पेपर्स की साथ 2, 3 बार महीन की छूट को साफ़ क्या और फिर अपनी ऊँगली पी टिश्यू लय क्र महीन की छूट की अंदर भी अपनी ऊँगली दाल दी .......... अंदर सी साफ़ करनी की लय ................... महीन की सिसकारी निकल पारी ...........

विनोद मुस्कराया ............. यह तो बस अभी शुरुआत हैं मेरी जान .............. देखना कितना मज़्ज़ा डॉन गए मैं तुम को ाग्य ाग्य ....

महीन विनोद की आँखों मैं डेक्ठी होइ उसी तैसे करनी की लय बोली ............. मेरी जानननननननन ............. वाह इतनी जल्दी .............

विनोद महीन की होंठों को चूम की बोलै ............. हाँ ...... इतनी hi जल्दी ................

महीन मुस्करा की विनोद की बहून सी निकली ........ और बीएड सी उतरण्य लगी ............ विनोद उसका हाथ पकृत्य होय बोलै ........... कहाँ जा रही हो ...........

महीन उसकी तरफ देखती होइ बोली .............. वाशरूम ...........

विनोद बोलै ............. जल्दी आना वापिस ............ महीन मुस्कराई और विनोद की बीएड सी बेडशीट उठाई और अपनी सेमि नुदे जिसम पी लपेट की रूम सी निकल गए ........... विनोद मुस्कराते होय उसी जाता होआ देखता रहा ...........

महीन वाशरूम मैं गए ........ अपनी जिसम पी लिपटी होइ बेडशीट उतार की हैंग की .............. फिर अपनी पंतय उतार की लौंडरी बकेट मैं डाली ............ और जा की टॉयलेट पी बेथ गए ............ अपनी कोहनों को अपनी घुटनो पी रखा और अपनी चेहरी को अपनी हथेलिओं पी रख की बेथ गए .......... .......... और जो कुछ सुबह सी अब तक होआ था फिर सी उसकी बारी मैं सोचनी लगी ............... उसी याद अन्य लगा की कैसी सारा दिन विनोद की साथ गुज़ारती होय ........ उसकी साथ रहती होय ..... कैसी वह खुद को उसकी तरफ अत्त्रक्ट होता पा रही थी ........... कैसी उसकी क़रीब आती गए थी ............ फिर विनोद का उसको खूबसूरत लॉकेट गिफ्ट करना .............. और उसी अपनी बहून मैं भर लेना ............. पहला किश करना ............. और फिर विनोद की गरम गरम लुंड न्य उसकी छूट की अंदर जो आग लगाई थी .............. उसकी अंदर की प्यास को जगा दया था ............ उस सुब की बाद वह बी काबू हो की खुद को उसकी सुपुर्द क्र बैठी थी .......... और फिर कैसी विनोद न्य उसी छोड़ा था ............ और सुब सी बरी बात यह थी की उसका जिसम उसकी कण्ट्रोल सी बाहिर हो की विनोद का साथ देता रहा था ............ और कैसी दो बार उसी ओर्गास्म होआ था .......... कैसी वह झाड़ गए थी .......... कैसी उसकी छूट न्य पानी छोरा था ............. महीन को विनोद और नीतू की बातें याद आ रही थीं ............... उसी लग रहा था की वह सही कह रही हैं .............. आखिर कब तक वह अपनी जिसम की प्यास को दबा सकती थी ............. वह खुद सी इस बात का इक़रार क्र रही थी की सुच मैं hi उसका जिसम प्यासा था .............. आसिफ सी इतनी दिन दूर रहंय की बाद ........ सुच मैं hi उसका जिसम मर्द की बहून का हिसार मांग रहा था ............. वह हिसार चाही किसी भी मर्द की बहून का हो ............... और आज विनोद न्य उस मर्द की जगा फइलल क्र दी थी ............. उसकी जिसम की प्यास बुझानी की लय ...... पता नहीं सिर्फ आज की लय ........ या आइंदा की लय भी ........ जब तक वह आसिफ की पास वापिस ना चली जाती ................. यह तो वक़त hi बताय गए ............. लकिन यह बात तो कन्फर्म थी की यह जो कुछ होआ था .......... वह अब बदलनी वाला तो नहीं था ............... वापिस होनी वाला तो नहीं था ........ महीन मुस्कराई ........... और शावर सी अपनी छूट को धूनी लगी ....... अंदर तक पानी डालती होय छूट को वाश क्या ........ और फिर मुंह हाथ धो क्र लांड्री बकेट मैं सी अपना एक शार्ट पजामा निकला और उसी पहन की वाशरूम सी बहार आगये ............... लाउन्ज मैं आ कर वह रुक गए .......... यह फैसला करनी की लय की वह अपनी बैडरूम मई जाय या वापिस विनोद की पास चली जाय ........ पूरी रात की लय विनोद की पास ...... पूरी रात .. उसकी बैडरूम मैं ...... उसकी बहून मैं गुज़ारनी की लय .............. चाँद लम्हे सोचनी की बाद वह मुस्कराई ........ और उसकी क़दम खुद सी hi विनोद की बैडरूम की तरफ बढ़ गए .......................

विनोद अभी भी बीएड पी लेता होआ था ............... महीन को अपनी बैडरूम मैं आता होआ देख की मुस्कराया और अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दया ........ उसी अपनी तरफ खींचनी की लय .................

विनोद ......... आ जाओ मेरी जान ............. इतनी देर लगा दी ......

महीन उस सी दूर hi रूकती होइ बोली .......... मैं नहीं आ रही ....... उठ जाओ वाश क्र की आओ पहली ..............

विनोद .......... आर्य ाजाओ न ........ कुछ नहीं होता ..........

महीन ....... नहीं जी ............ मैं नहीं आ रही ऐसी ...........

विनोद हंसा और बीएड सी उतर आया और महीन की तरफ बढ़ा .......... जो उसकी सामन्य सिर्फ अपनी शार्ट सी सेक्सी ब्लाउज और एक शार्ट पाजामे मैं खरी थी .............. विनोद न्य महीन की रोकती रोकती भी उसी अपनी बहून मैं लय और उसकी होंटो को चूमनी लगा ........... महीन न्य हंसती होय उसी धक्का देती होय अपनी सी अलग क्या और उसी बैडरूम की दरवाज़ी की तरफ धकेलंय लगी ................ विनोद हँसता होआ बैडरूम सी निकल गया ...........

महीन मुस्कराती होइ विनोद की बीएड पी बेथ गए ............. उसकी बैक सी अपनी कमर लगा की ........... और विनोद की रूम को देखनी लगी ........... ऐसा नहीं था की वह पहली कभी इस रूम मैं नहीं आई थी ............ मगर जैसी वह आज यहाँ थी .......... उस सी महीन को अलग hi फीलिंग्स हो रही थीं .............. उसी आज विनोद का रूम भी अपना अपना लग रहा था ............ ऐसी फीलिंग्स थीं जैसी पहली रात को दुल्हन को अपनी हस्बैंड की रूम मैं जा की होती हैं ....... उसी वह जगा नै भी लग रही होती है और अपनी अपनी भी ........... वह खुद सी hi मुस्करानी लगी .....
 
थोड़ी hi देर मैं विनोद वापिस आज्ञा ....... उसकी हाथ मैं पानी की बोतल थी जो वह किचन सी लय की आया था ....... उसनी महीन को गिलास मैं पानी दाल की दया ......... महीन पानी पीनी पीती होय विनोद की जिसम को देखनी लगी .... उसनी अब सिर्फ एक अंडरवियर पहना होआ था .......... बाक़ी उसका पूरा जिसम नंगा था ................ महीन उसकी नंगी चौराय मज़बूत जिसम को देखनी लगी ................. विनोद महीन की पास hi बीएड पी लेत गया ............... उसकी बिलकुल क़रीब ....................

विनोद न्य अपना हाथ महीन की नंगी गोरी चिकनी पेट पी रखा और उसी ाहसिता आहिस्ता सहलानी लगा ........ महीन की जिसम मैं फिर सी करंट दौरनी लगा ....... उसी विनोद का हाथ अपनी जिसम पी बुहत ाचा लग रहा था ......... उसकी उंगलयां महीन की बूब्स की निचली हिस्से को छु रही थीं उसकी ब्लाउज की ऊपर सी hi ........

फिर विनोद न्य अपना हाथ महीन की ब्लाउज की ऊपर सी उसकी बूब्स पी रखा और उसी ाहसिता सी अपनी मुठी मैं लेती होय बोलै ............... uuuuuuuffffffffffff ............ महीनंणंन्न .......... तुम नहीं जानती कितना दिल चाहता होता था तुम्हारी इन बूब्स को देख की इनको अपनी हाथों मैं लेनी को ............. इनको पकारण्य को ............ इनको बिना कपड़ों की देखनी को ........................ विनोद न्य महीन की क्लीवेज को चूमती होय कहा ..........

महीन मुस्कराई और विनोद की सर की बलून को सहलाती होइ बोली ........... ाचा जेईईईई ............... पर इनको देखा तो अभी भी नहीं है तुम न्य ..................

विनोद न्य पिच्य सी महीन की ब्लाउज की हुक्स खुल डाई ...... और उसका ब्लाउज ाग्य सी क्र की उसकी बूब्स की ऊपर सी हटा दया ........... महीन न्य फौरन hi अपनी हाथों सी अपनी बूब्स को छुपा लय और शर्माती होय विनोद को देखनी लगी ..............

विनोद ........... अब तो देखनी दो न मेरी जान इनको ............ इतनी दिंनो सी तरस रहा हों इनकी दीदार की लय .......

महीन ........... शर्म आती है मुझी ..........

विनोद ........ अभी भी शर्म आ रही है क्या तुम को ............

यह कहती होय विनोद उठ की महीन की जिसम की ऊपर चढ़ गया ....... उसकी जिसम की दोनों तरफ अपनी घुटनी रखती होय............ और महीन की दोनों हाथों को पाकर की उसकी बूब्स सी हटा दया ............ अगली hi लम्हे महीन की खूबसूरत ........ तनय होय ........ सुफैद बूब्स विनोद की नज़रों की सामन्य थय .............. गुलाबी निप्पल ........ सख्त हो रही थय ........ बूब्स बिलकुल भी ढलकी होय नहीं थय ........... विनोद महीन की हाथों को पाकर क्र बीएड पी दबाय होय hi बस अपनी नज़रों को महीन की बूब्स पी जमाय होय था ............. वह तो जैसी अपनी नज़रों को हटाना hi भूल गया होआ था ............... महीन का पूरा जिसम hi अब तो नंगा था ........ सिवाय उसकी शॉर्ट्स की .................... महीन विनोद की हालत को देख की मुस्करा रही थी ....... मगर बोली कुछ नहीं .............

विनोद न्य महीन की हाथों को छोरा और अपनी दोनों हाथों को महीन की नंगी बूब्स पी रख की आहिस्ता आहिस्ता सहलानी लगा .......... उनको अपनी हाथ मैं लय क्र महसूस करनी लगा ........... उनकी सख्ती को ........... उनकी तनाव को .......... उसकी निप्पल्स को .......... विनोद न्य महीन की गुलाबी निप्पल्स को अपनी उंगलयों मैं लय की मसला तो महीन सिसक सी पारी ................... aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ............... ahsitaaaaaaaaaaaaaa ................

विनोद ............ महीन ............ बुहत खूबसूरत हैं तुम्हारी बूब्स ...............

महीन शरमाई ................ और मुस्करा की बोली .............. प्रिय सी भी ज़्यादा .............

विनोद बोलै .............. हाँ ........... बुहत ज़्यादा ............

महीन वीर्य सी बोली .............. थैंक्स विनोद .......

विनोद सिर्फ एक अंडरवियर पहनी होय महीन की ऊपर बैठा होआ था ...... उसकी तइस पी ............. बिलकुल नंगी जिसम की साथ ............. उसकी हाथ महीन की बूब्स पी थय ............. और उसकी अंडरवियर मैं फूला होआ उसका ुण्ड ........ महीन की छूट की बिलकुल ऊपर था ........ उसकी शॉर्ट्स की ऊपर सी ....... विनोद की हिलनी सी उसकी लुंड का उभार महीन की छूट पी रगड़ खा रहा था ............ और महीन की नज़रें भी विनोद की अंडरवियर पी hi थीं ............. उसकी लुंड की उभार पी ............. ऊऊफफफफफफ ........... कितना मोटा है न ............. एहि अंदर गया था न मेरी ............... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ...... कितना दर्द हो रहा था न जब अंदर गया था ......... इसी देखा भी नहीं अभी तक और अपनी अंदर भी लय लय है ......... कितनी अजीब बात है न .......... महीन की होंठों पी हलकी सी मुस्कान फैल गए ............ ............

विनोद अब नीची झुका और अपनी होंठों को महीन की बूब्स की दरम्यान उसकी नंगी सीने पी रख दया ........... और उसी चूमनी लगा ........... आहिस्ता ाहसिता उसकी होंठ महीन की बूब्स की तरफ जांय लगी ........... विनोद अपनी जुबां को उसकी बूब्स पी फैरती होय उनको हर जगा सी चूम रहा था ........ वह इस तरह सी किश क्र रहा था की महीन की बूब्स की नाज़ुक सी जिल्द पी उसकी होंठों की निशाँ प्रिंट हो रही थय .......... लव मार्क्स बन रही थय ..... जैसी hi उसकी होंठ महीन की निप्पल्स की क़रीब आय तो विनोद न्य एक निप्पल पी अपनी होंठों रख की हल्का सा उसी चूम लय ........ ........ महीन सिसक पारी ............ aaaaaaaaaaaaaaaaa ...........ssssssssssssss ............. mmmmmmmmmmmmmmm

विनोद न्य अपनी होंठों सी गर्म सांसें महीन की निप्पल्स चोरनी शुरू क्र दिन .............. और आहिस्ता सी अपनी जुबां निकाली ........ और जुबां की नौक सी महीन की गुलाबी निप्पल को टच करनी लगा .......... छेड़नी लगा ............. महीन सिसक रही थी .......... आंखें बंद कए होय .......... उसका जिसम विनोद की भारी मज़बूत जिसम की नीची तरप रहा था ............... और उसकी निप्पल विनोद की जुबां सी गीले होती जा रही थय ................... फिर विनोद न्य अपनी होंठों को बंद कृत्य होय महीन की एक निप्पल को अपनी होंठों की बीच मैं लय लय ............

विनोद न्य महीन की निप्पल को चूसना शुरू क्र दया ............... सिर्फ अपनी होंठों मैं लय होय ........... ज़्यादा अंदर भी नहीं लय ........ सिर्फ होंठों मैं रखी होय उनको सूचक करनी लगा ............. महीन का जिसम तरप रहा था ............ उसका हाथ विनोद की सर पी था ........ और उसकी बलून को सहलाती होइ उसकी सर को अपनी सीने की तरफ ........ अपनी निप्पल की तरफ खींच रही थी .............. अपनी बूब्स की तरफ ............. विनोद अब महीन की निप्पल को अपनी मुंह मैं भर्ती होय चूस रहा था ........... ज़ोर ज़ोर सी .......... नीची उसका हाथ महीन की छूट पी पोहंच चूका था ........... जैसी वह उसकी शॉर्ट्स की ऊपर सी hi सहलानी लगा था ...................

महीन का नंगा जिसम .......... सिर्फ एक छोटी सी शॉर्ट्स मैं .......... विनोद की नंगे जिसम की नीची था .............. महीन को विनोद की नंगे जिसम की गर्मी और उसकी सख्ती महसूस हो रही थी ........... उसकी हाथ विनोद की कमर पी पोहंच गए .......... और वह उसकी मसल्स को फील करनी लगी .......... उसकी बैक की सख्त मसल्स को ............. कई बार वह विनोद की जिसम को ऐसी नंगा देह चुकी थी ........ मगर आज पहली बार था की उसकी नंगे जिसम को फील क्र रही थी ............ अपनी हाथों सी सहला रही थी ............. और उसका अपना जिसम नंगी हालत मैं उसकी जिसम सी चिपका होआ था ........... नीची सी महीन अपनी छूट को ऊपर को उठानी की कोशिश क्र रही थी ....... विनोद की लुंड की साथ रगड़नी की लय ............... मगर विनोद की भारी भरकम जिसम को वह कहाँ उठा सकती थी ....... उल्टा जैसी hi महीन अपनी छूट को ऊपर की तरह पुश करती तो विनोद अपनी लुंड की उभार सी उसकी छूट को और भी दबा देता ...... और भी रगड़ देता ............ महीन का लज़्ज़त की मारी बुरा हाल हो रहा था .......... आसिफ भी उसकी बूब्स को चूसता था ...... ुणस्य खेलता था ....... मगर जो मज़ा उसी विनोद की होंठों और हाथों सी आ रहा था वह आसिफ की साथ नहीं आया था कभी ...........

काफी देर तक महीन की बूब्स को चूमनी और उनको चूसनी की बाद ......... उनको अपनी थूक सी गीला करनी की बाद .......... विनोद अब महीन की जिसम पर नीची को सिरकनी लगा ............ महीन की नंगे पेट को चूमनी लगा ........... हल्की हल्की किश की साथ ........... नीची महीन की नाभि पी पोहंचा तो अपनी होंठों को महीन की जिसम सी हटा की उसकी नाभि को देखनी लगा ........... जो ज़्यादा गहरी नहीं थी ........... महीन की स्मार्ट जिसम की वजह सी ............. विनोद न्य अपनी होंठों को महीन की नाभि पी रखा और उसी चूम लय ............... फिर उसनी अपनी जुबां की नौक को महीन की नाभि की अंदर दाल दया ........... इसकी साथ hi महीन की होंठों सी एक सिसकारी निकल गए ............... और उसकी आंखें बंद हो गईं .............. विनोद न्य अपनी जुबां की नौक को महीन की नाभि मैं घुमाना शुरू क्र दया ........ उसी अंदर सी चैतन्य लगा ....... दूसरी हाथ सी महीन की छूट को सहलाती होय .............

uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffff........... Vinoddddddddddd ........... क्या क्र rahhyyyyyyyyyyy हो tummmmmmmmmmmmmmmmmm ........... aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ........... महीन सिसकी ............

विनोद न्य थोड़ी देर की बाद अपना मुंह महीन की नाभि सी हटाया और अब और भी नीची सिरक गया .............. महीन की शॉर्ट्स को पाकर की महीन की आँखों मैं देखनी लगा .............. उतार डॉन इसी ............... विनोद न्य महीन की आँखों मैं देखती होय पुछा ...........

महीन चुप रही .............. बस शर्मा क्र दूसरी तरफ देखनी लगी .............
 
विनोद न्य आहिस्ता आहिस्ता महीन की शॉर्ट्स को नीची सिरकना शुरू क्र दया .......... थोड़ा सा नीची को उतारा तो महीन की छूट का ऊपरी हिस्सा नज़र अन्य लगा ............ बिलकुल मुलायम ........... बलून सी पाक ...... साफ़ शफाफ ..... फिर महीन की छूट नंगी हूँय लगी ............... विनोद न्य महीन की शॉर्ट्स को उतारती होय उसकी टांगों सी निकल दया ................ महीन की खूबसूरत ............ सुफैद और गुलाबी छूट विनोद की नज़रों की सामन्य नंगी हो गए ............ पहली बार वह महीन की छूट को देख रहा था ....... हलकी वह अभी थोड़ी देर पहली इस छूट को अपनी लुंड की साथ छोड़ चूका था ............ मगर उसकी प्यास अभी तक नहीं बुझी थी ........ अभी तो उसी अपना पूरा लुंड इस नाज़ुक सी छूट की अंदर डालना था ........... विनोद की नज़रें महीन की नाज़ुक सी छूट पी जमी होइ थीं ........ वह उसकी खूबसूरती को देख रहा था ........... एक भी बाल नहीं था उस पी ............. छूट की बहार की सुफैद पतली पतली लिप्स ........... वह भी बलून सी पाक ........... दोनों लिप्स आपस मैं जुडी होय थय ...... ऐसी जैसी की कोई कंवरी लड़की की छूट हो ...... अंदर की लिप्स या सूराख का कुछ भी हिस्सा नज़र नहीं आ रहा था ..... छूट की ऊपर की गुड्डी भी बालू सी पाक थी ....... बुहत hi प्यारी लग रही थी ..... डबल रोटी..... बहार की सुफैद लिप्स उसकी छूट की अंदर को लिप्स को छुपाय होय .......... उसकी छूट की सूराख को दांम्पय होय .......... बस एक पतली सी लकीर दिख रही थी दोनों लिप्स की दरम्यान ........... सुफैद लिप्स की दरम्यान ............. इतनी पतली सी लकीर थी की जैसी इन लिप्स को कभी किसी न्य अलग क्या hi न हो ...... जैसी इन दोनों लिप्स की बीच मैं कभी कुछ गया hi ना हो .........

विनोद महीन की छूट को देखी जा रहा था ........... और महीन विनोद की चेहरी को ............ उसी साफ़ दिख रहा था की विनोद को उसकी छूट कैसी लग रही है ............. हलकी सी मुस्कान उसकी होंठों पर फैल रही थी विनोद की खुली होइ आँखों को देखती होय ....... विनोद न्य अपनी ऊँगली को महीन की छूट की ऊपर की हिस्से पी रखा और उसी सहलानी लगा ....... इतनी मुलायम जिल्द थी की ज़रा सा भी बालों का कुछ फील नहीं हो रहा था ........ ऐसा लग hi नहीं रहा था की वहां सी बाल साफ़ कए गए हों ....... बल्कि ऐसी महसूस हो रहा था की जैसी वहां पी कभी कोई बाल आया hi ना हो .......... विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी ऊँगली नीची को सिरकाया और ........ महीन की छूट की लिप्स की दरम्यानी लकीर पी रखा और बिलकुल hi आहिस्ता सी उस लकीर पी पहिरण्य लगा .......... बिना कोई ज़ोर लगाय .......... बिना अपनी ऊँगली को उन लिप्स की दरम्यान डालनी की कोशिश कए ........... बस उन लिप्स की दरम्यानी लकीर को महसूस कृत्य होय ......... sssssssssssssssssssss ............. aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh .......... महीन की होंठों सी सिसकारी सी निकल गए ............. और साथ hi उसकी छूट सी हल्का सा पानी बह निकला ............ और बहार की लिप्स पी आ की चमकनी लगा .............. विनोद की नज़र उस मोती पी पारी तो उसनी महीन की छूट की पानी की कटरी को अपनी ऊँगली पी लय लय ........ और महीन की आँखों मैं देखनी लगा ............... महीन की नज़रें विनोद की नज़रों सी मिलीं तो वह शर्मा गए .........

विनोद न्य महीन की आँखों मैं देखती होय अपनी ऊँगली को अपनी होंठों मैं लय ............. और महीन की छूट की पानी को चाट लय ......... यह देख क्र अब महीन की आंखें हैरानी सी फैल गईं ........... की यह विनोद न्य क्या किआ है .............

विनोद उसकी हैरानी को देखती होय मुस्करा की बोलै ........... it's देलेसियस ...............

विनोद ............ महीन ............ बुहत hi खूबसूरत है यह तुम्हारी ............ जैसा मैं न्य सोचा था उस सी भी ज़्यादा खूबसूरत ..........

महीन शर्मा गए ............ तो क्या तुम इस हद तक सोचती होती थय मेरी बारी मैं ........... कितनी गंदी होती हो न तुम मर्द लोग .... ज़रा भी शर्म नहीं होती तुम लोगो को .......

विनोद हंसा ............. तुम जैस खूबसूरत लड़की को पास देख क्र ऐसी ख़याल तो आ hi जाती हैं न .......... की बहार सी इतनी हसीं है तो इसकी छूट कितनी खूबसूरत हो गई .......... हेठे

महीन भी हंस पारी ............... और वीर्य वीर्य विनोद की होंठ महीन की छूट की क़रीब अन्य लगी ............. और उसी अपनी छूट पर विनोद की गरम गरम सानें महसूस होनी लगीं ........... जिस सी महीन की छूट और भी गरम होनी लगी ............... और भी पानी चोरनी लगी ............... विनोद न्य आहिस्ता सी अपनी होंठों को महीन की छूट की ऊपर की हिस्से पी रख दया ............. महीन की सिसकारी सी निकल गए ............ विनोद न्य उसकी छूट की ऊपर की हिस्से को चूम लय ............ एक बार .......... दूसरी बार ........ तीसरी बार ............ उसकी छूट की ऊपर की हिस्से को हर जगा सी चूमनी लगा ..............

फिर विनोद अपनी लिप्स को नीची को लाया ...... महीन की छूट की वर्टिकल लिप्स की ऊपर विनोद न्य अपनी होंठों को रखा ...... विनोद न्य जैसी hi महीन की छूट की लिप्स पी अपनी होंठ रखी और उसी हल्का चूम लय ........ महीन का जिसम कैंम्प सा गया ............ और उसनी हाथ बढ़ा की विनोद की सर को अपनी छूट की लिप्स सी हटा दया ............... और बोली .......... क्या क्र रही हो विनोद ............... यहाँ कहाँ अपनी होंटो को लगा रही हो ............ गन्दी जगा पी .........

विनोद हैरानी सी महीन की तरफ देखती होय बोलै ........... क्या बोल रही हो महीन ............... क्या तुमको बिलकुल भी नहीं पता इसका ........

महीन भी हैरानी सी विनोद को देखती होइ बोली ........... किस बात का .......

विनोद अपनी अंघूटी सी महीन की छूट की लिप्स सो सहलाती होय बोलै ....... यहाँ पी प्यार करनी का ........

महीन विनोद की सर पी हल्का सा थप्पड़ मारती होइ बोली ............ यहाँ कौन प्यार करता है भला मुंह सी अपनी ........... पागल .......

विनोद ....... मतलब की आसिफ न्य कभी तुमको यहाँ प्यार नहीं क्या ..........

महीन न्य ना मैं सर हिलाया ............ ना ....... हमारी हाँ ऐसी गन्दी जगा पी प्यार नहीं कृत्य ..........

विनोद ... तो तुम्हारी हाँ क्या इसी सिर्फ छोड़ती hi हैं ....

महीन उसकी बाज़ू पी एक थप्पड़ मारती होइ शर्मा गए .....

विनोद ........ इसका मतलब है की तुमको सेक्स करनी का कुछ भी नहीं पता ............ चलो आज मैं तुमको दिखाता हों की कैसी प्यार कृत्य हैं यहाँ ..............

महीन मुस्कराई ....... दिखा तो दया है ........... सुब कुछ क्र की ...

विनोद ..... नहीं ....... अभी तो असल प्यार करना बाक़ी है मेरी जान ..........

यह कहती होय विनोद न्य अपनी होंठों को महीन की छूट की लिप्स पी रखती होय उसी एक बार चूम लय .............. aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ........ ssssssssss.......... महीन की मुंह सी आवाज़ निकली ............ और उसका पूरा जिसम कैंम्प सा गया ........... विनोद महीन की छूट की लिप्स पी अपनी उंगलयां पहिरण्य लगा ........ आहिस्ता आहिस्ता उसी सहलानी लगा ........... फिर विनोद न्य अपनी जुबां निकाली और उसकी नौक को महीन की छूट की सुफैद लिप्स की दरम्यान बन रही होइ लकीर पी पहिरण्य लगा ...... ऊपर सी नीची की तरफ .....................

विनोद की जुबां की नौक महीन की छूट की लकीर पी रींगणी लगी तो महीन की जिसम मैं तो जैसी करंट सा दौड़नी लगा .............. oooooooooooohhhhhhhhhhhh ................. Viiiiiiiiiinnnnnnnooooooooodddddddddddddddd ..................... nahhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeee kroooooooooooooooooo pllllllllllllzzzzzzzzzzzzzzzz ............... महीन सिसक रही थी ............. और विनोद अपनी जुबां सी महीन की छूट की लकीर को सहला रहा था ............

कुछ देर तक ऐसी hi महीन की छूट की बहार की लिप्स पी अपनी जुबां पहिरण्य की बाद विनोद न्य अपनी होंठों को हटाया ......... और फिर सी महीन की छूट को देखनी लगा .............. महीन की छूट की लिप्स विनोद की जुबां सी गीले हो की चमक रही थय ............... विनोद न्य महीन की चेहरी की तरफ देखा तो वह विनोद को hi देख रही थी .......... मगर जैसी hi विनोद की नज़रों सी उसकी नज़र मिली तो महीन न्य फौरन hi अपनी आंखें बंद क्र लीन ............. शर्मा क्र ...........

विनोद न्य दोबारा सी झुक की अपनी जुबां की नौक को महीन की छूट की लकीर पी फैरना शुरू क्र दया ..... इस बार उसनी हल्का सा प्रेशर बढ़ा की अपनी जुबां की नौक को लिप्स की दरम्यान दाल दया ..... मगर इतना अंदर नहीं की वह महीन की छूट की सूराख मैं चली जाय जा उसकी छूट की अंदर की पतली लबूं को छु सकी ....... बस ऐसी समझें की बहार की लिप्स की अंदर की साइड को सहला रहा था अपनी जुबां सी .... महीन की होंठों सी सिसकार्यं निकल रही थीं .... उसका पूरा जिसम हिल रहा था ....... मचल रहा था ....... तरप रहा था .........

फिर विनोद न्य महीन की छूट की लिप्स पी अपनी दोनों हाथों की अनघोटूं को रखा और उनको खोल दया ....... फैला दया ............ जैसी hi दोनों बहार की लिप्स खुली तो अंदर सी महीन की छूट की पतली पतली गुलाबी लिप्स नज़र अन्य लगी ............. पतली और छोटी छोटी ........ जिनकी ऊपर की हिस्से पी छोटा सा छूट का दाना था ...... चमक रहा था ....... किसी नगींय की तरह सी .......... महीन की छूट की पानी सी ............ उस सी नीची बुहत hi छोटा सा ........ पेशाब का सूराख था महीन का .......... और निचली हिस्से मैं एक और छोटा सा सूराख था ........ महीन की छूट का ............. वह भी इतना छोटा था की ऐसी लग रहा था की जैसी महीन अभी भी कंवरी हो ........... और अभी तक उसकी छूट मैं कभी भी लुंड ना गया हो .............. गुलाबी सूराख ........ छोटा सा ........... विनोद की नज़रों की सामन्य था .......... वह महीन की छूट की उस छोटी सी सूराख को देखी जा रहा था ...... उसी यक़ीन नहीं आ रहा था की इस छोटी सी सूराख मैं उसका अपना इतना मोटा लुंड जा चूका होआ है ........ अगर विनोद न्य महीन को ना छोड़ा होता तो वह आज उसकी छूट को देख की सिर्फ एहि कहता की महीन की छूट आज भी कंवरी है ...... उन टच ..........

विनोद न्य अपनी होंठों को नीची लाती होय हौली सी उस सूराख को किश क्या ....... और महीन की तरफ देखती होय बोलै .............. महीन ...........

महीन न्य अपनी आंखें खोल की विनोद की तरफ देखा और ाहसिता सी बोली ............ ह्म्मम्म्म्म ..
 
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