सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी - Page 13 - SexBaba
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सुप्रिया: एक जवान बीवी की कहानी

अपडेट 93

सुप्रिया और इक़बाल बस में बैठे अपने घर की और वापिस जा रहे थे. सुप्रिया खिड़की की तरफ बैठी थी, और उसके बराबर में इक़बाल, उससे बिलकुल सत्ता हुआ. सुप्रिया का कन्धा और पेअर इक़बाल के शरीर से बिलकुल चिपके हुए से थे, और आज तोह सुप्रिया इक़बाल को अपने से दूर करने के बारे में सोच भी नहीं रही थी.

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सुप्रिया के चेहरे पर एक हलकी सी शर्मीली सी मुस्कान थी, जाने क्या चल रहा था उसके मैं में, शायद बीजी की कही बात. वहां से निकलते हुए उन्होंने उसे बोलै था की अगली बार जब वह उससे मिलेंगी तब उन्हें यकीं था की सुप्रिया की गॉड में एक बच्चा होगा, इक़बाल और उसका बच्चा. ये सुनकर उसके गाल शर्म से बुरी तरह लाल हो गए थे, और अब फिर से उसके बारे में सोचते hi सुप्रिया ने अपने दोनों हाथों से कास के आगे की सीट का हैंडल जकड लिया.

कल खेत में भी उसने कितनी हिम्मत दिखा दी थी, इक़बाल के गालों को चूम कर. पता नहीं इक़बाल जी उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे. उन्होंने तोह अपनी तरफ से अब तक उसकी और कोई भी कदम नहीं बढ़ाया था. पता नहीं उनके मैं में क्या चल रहा था. पता नहीं ये सब क्या होता जा रहा था, और वह इस सब के बारे में क्यों सोच रही थी. बहार से आती हुई ठंडी हवा उसे पागल सी कर रही थी.

वह अपने खयालो में खोयी hi हुई थी की तभी उसे महसूस हुआ की इक़बाल उठ कर खड़ा हो गया. शायद उनका गाँव आने hi वाला था. सुप्रिया भी उसके पीछे पीछे कड़ी हो गयी और जल्द hi वह दोनों बस से नीचे उतर गए. इक़बाल ने सामान उठाया और वह दोनों एक रिक्शा में बैठ कर घर की और चल दिए.

ये वही गालियां थी जहाँ से सुप्रिया कुछ दिन पहले रुक्सत हुई थी, पर अब सब कुछ अलग अलग सा लग रहा था. जैसे ये उसका गाँव हो, एक जानी पहचानी जगह जहाँ वह अपने घर जा रही थी. अपने घर… उसका घर…

सुप्रिया ने रिक्शा पर बैठे बैठे अपने दुपट्टे से अपना सर अचे से ढाका. हवा में सर्दी और बाद गयी थी और सुप्रिया ने अपने आप को अचे से ढकने की कोशिश की. वह लोगो को अपना चेहरा नहीं देखने देना चाहती थी, मैं hi मैं वह शायद अब किसी की अमानत जो बन गयी थी.

जैसे जैसे घर पास आ रहा था उसकी बेचैनी बाद सी रही थी. अगर घर जाकर सब कुछ पहले जैसा hi हो गया तोह? नहीं नहीं... पहले जैसे क्यों होगा? जाने रुबीना भाभी उससे क्या क्या पूछेंगी...

पर उसे ज्यादा सोचने का वक़्त hi नहीं मिला और जल्द hi रिक्शा घर के बहार आ कर रुक गया था. इक़बाल जल्दी से नीचे उतरा और सामान उतार कर दरवाज़ा खटखाने लगे. सुप्रिया भी रिक्शा से नीचे उतर कर कड़ी हो गयी थी.

कुछ hi पल बाद रुबीना ने दरवाज़ा खोला और उन दोनों को देख कर उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गयी. वह जल्दी से सुप्रिया की और बड़ी और उसे गले लगा लिया.

रुबीना - आ गयी वापिस... तुम्हारे बिना ये घर इतना खाली खाली सा लग रहा था...

सुप्रिया के चेहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी, जैसे वह अपनी बड़ी बेहेन से इतने दिनों बाद मिल रही हो - जी... मुझे भी आपकी और हिना की काफी याद आ रही थी...

रुबीना उसे अपने साथ अंदर ले गयी, और उसे हलके से अपने कंधे से मारते हुए बोली - याद तोह क्या hi आ रही होगी... सब पता है मुझे...

सुप्रिया उनका इशारा समझ गयी और उसने शरमाते हुए अपनी आँखें झुका ली.

रुबीना - अब तोह इतना मत शरमायो... इसीलिए तोह तुम्हे भेजा था वहां... मुझे यकीं था की बीजी सब ठीक hi करा देंगी...

सुप्रिया ने हलके से अपनी आँखें ऊपर उठायी और धीरे से बोली - ाचा... तोह आपकी साज़िश थी ये सब... मुझे पहले hi समझ जाना चाहिए था...

रुबीना हस्ते हुए - साज़िश समझो या जो चाहे... पर मुझे दिख रहा है तुम्हारी आँखों में.... कैसे उदास सी, मुरझाई हुई सी गयी थी तुम यहाँ से... और वापिस आयी हो तोह तुम्हारे चेहरे पर एक अलग सी hi चमक है...

सुप्रिया ब्लश कर गयी - नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं... बस वह तोह ऐसे hi...

रुबीना - चलो, ऐसे या वैसे... तुम्हारे चेहरे का नूर तोह वापिस सा आ गया... ाचा जायो ज़रा अम्मी जी से भी मिल लो. वह कहेंगी तोह नहीं, पर वह भी बेसब्री से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी.

सुप्रिया - जी...

इतने सुप्रिया अम्मी जी के कमरे में उनसे मिलने गयी, इक़बाल सामन ऊपर के कमरे में रख कर घर से निकल भी गया था. सुप्रिया को लगा था की उसे शायद कुछ पल मिल जाये इक़बाल के साथ, पर शायद उसे आज रात तक का इंतज़ार hi करना पड़े.

दिन का वक़्त हो रहा था, तोह हिना अभी भी कॉलेज में थी. सुप्रिया रुबीना के साथ बैठी वहां की बातें करने लगी. जितना हो सके हो वह रुबीना को वहां के बारे में सब बता रही थी, सिवाए उसके और इक़बाल के बीच जो भी हुआ. पर रुबीना ने भी उसे कुछ ज्यादा कुरेदने की कोशिश नहीं की.

फिर थोड़ी देर बाद हिना घर वापिस आ गयी और वह घर आते hi सबसे पहले अपनी चची से जाकर लिपट गयी.

हिना एक्ससिटेड होते हुए बोली - चेचीईई... आप आ गयी!!!

सुप्रिया - जी... आ गयी... तुम बताया, कैसा चल रहा है कॉलेज...

हिना सुप्रिया के गले लगी हुई थी - सब बढ़िया... बस आपको बोहोत मिस कर रही थी मैं.... अब आपको कहीं नहीं जाने दूंगी मैं...

सुप्रिया - ाचा... और अगर मुझे जाना पड़ा तोह?

हिना - तोह फिर मैं भी आपके साथ जयुंगी...

सुप्रिया - हाहाहा... ाचा ठीक है बाबा... अगली बार तुम मेरे साथ चलना....

हिना - अगली बार हम सब लोग कहीं घूमने चलेंगे...

सुप्रिया - बिलकुल... क्यों नहीं...

हिना काफी देर तक उसे कॉलेज की बातें बताती रही. अपने टीचर्स के बारे में, आपने साथ पद रही लड़कियों के बारे में, नाज़ के बारे में, और पता नहीं क्या क्या.

सुप्रिया के दिमाग में एकदम से वह लड़का आया जो उस दिन एडमिशन के टाइम उससे बहस कर रहा था - और वह... उसने तोह परेशान नहीं किया न?

हिना - कौन? किसने?

सुप्रिया - हम्म्म... क्या नाम था उसका... जो एडमिशन के टाइम हमे परेशान कर रहा था...

हिना - प्रणव!?

सुप्रिया ने मुँह बनाते हुए कहा - हाँ... शायद वही था उसका नाम...

हिना - नहीं नहीं, उन्होंने तोह मुझे परेशान नहीं किया. ज्यादा तोह नहीं, एक दो बार मिले थे मुझे. उसे याद थे हम लोग, आपके बारे में भी पूछ रहे थे...

सुप्रिया ने हाथ नाचते हुए कहा - ाचा... आज तोह बड़ी इज़्ज़त से बात कर रही हो उसके बारे में...

हिना - हाँ तोह.... मुझसे तोह उम्र में बड़े hi है न वह...

सुप्रिया - क्या पूछ रहा था मेरे बारे में?

हिना - हम्म्म... कुछ ख़ास नहीं... एहि की आप आती हो क्या मुझे यहाँ छोड़ने... और हम लोग कहाँ रहते है...

सुप्रिया ने एकदम से कहा - उसे ज्यादा मुँह मत लगाना... और बताना तोह कुछ भी नहीं.... हम लोग कहाँ रहते है, उससे उसे क्या मतलब...

हिना - हम्म.... काफी हेल्पफुल है वह वैसे...

सुप्रिया - ाचा चलो उसकी पैरवी करना बंद करो....

हिना - ाचा आप बताइये... आप क्या लायी मेरे लिए वहां से...

हिना ने शाम तक सुप्रिया को घेरे hi रखा. शाम होते होते सुप्रिया के मैं में एक अजीब सा एहसास जागने लगा था. उसके शरीर के सारे बाल जैसे खड़े से हो गए थे, और जाने क्यों उसकी चूचियां भी एक डैम सख्त सी हो गयी थी. शायद हवा में हो रही ठण्ड का असर था. पर वह दरवाज़े पर एक नज़र रखे, इक़बाल के घर आने का इंतज़ार कर रही थी.

और शाम को थोड़ी देर में इक़बाल और अब्बास घर वापस आ hi गए. इक़बाल के चेहरे पर काफी थकान सी लग रही थी, आखिर उसे घर वापस आ कर ज़रा भी आराम करने का मौका नहीं मिला था. ऐसा लग रहा था जैसे चार दिन का काम आज उसने एक hi दिन में कर दिया हो. सुप्रिया ने चुप चाप उन दोनों को पानी का गिलास पकड़ाया.

सुप्रिया रसोई के पास कड़ी इक़बाल की और hi देख रही थी की तभी रुबीना भाभी ने सुप्रिया को हिना के कमरे से आवाज़ लगायी - सुप्रिया... सुनो... इधर आयो...

सुप्रिया - आयी भाभी...

सुप्रिया अंदर पहुंची तोह रुबीना ने एक मोती सी रजाई निकाल राखी थी - ये लो... अपने कमरे में ले जायो... ठण्ड बाद गयी है... और रात को तोह काफी ठण्ड हो जाती है...

सुप्रिया - जी भाभी

सुप्रिया ने उस मोती रजाई को उठाने की कोशिश करि. चाहे उसमे रुई hi भरी पड़ी हो, पर वह काफी भारी सी थी. सुप्रिया ने किसी तरह से रजाई को उठा लिया और अपने आप को बैलेंस करते हुए वह कमरे से बहार निकली. सुप्रिया लड़खड़ाते हुए रजाई को उठाये चल रही थी.

इक़बाल ने जैसे hi सुप्रिया को इस हाल में देखा, वह जल्दी से उसकी और लपका - लायो... मैं उठा लेता हूँ...

सुप्रिया को सामने सही से दिख भी नहीं रहा था, पर इक़बाल की लम्बाई की वजह से उसे उसका सर दिखाई दे रहा था - नहीं नहीं... मैं उठा लुंगी... आप बैठो...

इक़बाल - ारी काफी भरी लग रही है... आप कैसे ऊपर तक पहुचायोगी इसे...

सुप्रिया ने थोड़ा नाराज़ होते हुए कहा - इतनी भी कमज़ोर नहीं हु मैं... अब तोह पंहुचा के hi रहूंगी...

सुप्रिया ने लड़खड़ाते हुए दो तीन और कदम लिए, पर उसके ठीक सामने इक़बाल था. इक़बाल ने जैसे hi मदद के लिए हाथ बढ़ाया - आप पीछे हैट जायो, मैं कर लुंगी.

इक़बाल - ारी पर...

सुप्रिया - पर वॉर कुछ नहीं... हटिये...

इक़बाल सुप्रिया का जिद्दीपन शायद समझने लगा था, और उसने एक दो कदम साइड किये, पर उसे दिख रहा था की सुप्रिया को कितनी मुश्किल हो रही थी.

सीढ़ियों तक पहुंचते पहुंचते तोह सुप्रिया की सांस hi फूलने लगी थी. शायद उसे इक़बाल की मदद ले hi लेनी चाहिए थी. अचानक से सुप्रिया को महसूस हुआ की उसका भार थोड़ा काम हो गया. पीछे से रजाई को इक़बाल ने पकड़ लिया था.

इक़बाल - चलिए... साथ मिल कर ले जाते है ऊपर...

सुप्रिया के चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट आ गयी, और वह आगे आगे और इक़बाल पीछे पीछे मिल कर रजाई को ऊपर के कमरे तक ले आये. बिस्तर पर रजाई डालते hi सुप्रिया को महसूस हुआ की उसकी तोह जान सी hi निकल गयी थी. पर वह इक़बाल के सामने अपने आप को कमज़ोर नहीं दिखाना चाहती थी.

सुप्रिया हाँफते हुए - देखा... कर लिया न...

इक़बाल को उसकी बात सुन कर हसी सी आ गयी - जी.. बिलकुल...

सुप्रिया - वैसे मुझे पता है... आप तोह रजाई और मुझे दोनों को उठा कर ऊपर ले आते... पर चलो इस बहाने मुझे भी कुछ काम तोह करने को मिला...

इक़बाल - आप मुझे उठाने देती अपने आप को?

सुप्रिया की आवाज़ एक डैम से सॉफ्ट हो गयी - हाँ... तोह उसमे क्या है... अगली बार उठा लेना न आप...

इक़बाल - जी... बिलकुल...

सुप्रिया बुरी तरह झेप रही थी - चलिए... मैं नीचे चलती हूँ... खाना लगाना है न...

सुप्रिया जल्दी से नीचे की और गयी और इक़बाल थोड़ी देर बाद उसके पीछे पीछे आ गया. हमेशा की तरह रुबीना खाना बनती गयी और सुप्रिया चुप चाप परोसती गयी, और उन लोगो का खाना हो जाने के बाद सुप्रिया, रुबीना और हिना ने भी खाना खा लिया.

सुप्रिया को आज उन दोनों के साथ खाना खाते हुए ऐसा hi लग रहा था जैसे वह अपने परिवार के साथ खाना खा रही हो. तीनो के बीच थोड़ी नोक झोक, थोड़ा हसी मजाक होता रहा.

खाना खाने के बाद सुप्रिया रसोई समेटने लगी hi थी, की रुबीना पीछे से आयी - सुप्रिया... या क्या कर रही... तुम जायो न ऊपर... इक़बाल इंतज़ार कर रहा होगा...

सुप्रिया अनजान बनते हुए बोली - किस चीज़ का इंतज़ार...

रुबीना हस्ते हुए - एक बार शेर के मुँह में खून लग जाता है न... तोह उसे रोज़ प्यास लगती है... अब ये नहीं पता की तुम दोनों में शेर कौन है...

सुप्रिया चिड्डे हुए बोली - भाभी... आप भी न....

रुबीना - जायो जायो... मैं देख लुंगी...

सुप्रिया के मैं में एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट और घबराहट होनी शुरू हो गयी थी. 4-5 दिन पहले जब वह यहाँ से गयी थी तोह उसके मैं में एक उदासी थी, जो छत सी गयी थी, और उसकी जगह इस नए एहसास ने ले ली थी.

सुप्रिया ऊपर कमरे में पहुंची, हवा की ठंडक उसके कपड़ो को चीरते हुए उसके सीने तक चुभ रही थी. उसने अंदर आकर देखा की इक़बाल अभी कमरे में नहीं था.

सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से फड़क रहा था, उसने रजाई को पूरे बिस्तर पर अचे से फैलाया, ये रजाई दो लोगो के सोने के लिए बानी थी. आज वह दोनों शायद इस एक hi रजाई में सोने वाले थे. सुप्रिया निर्वसली बिस्तर पर बैठ गयी और दरवाज़े की और देखने लगी, सोचते हुए की जाने कब इक़बाल कमरे में आएंगे.

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उसका कुछ पल का इंतज़ार कुछ मिनट बन गया था और हर एक पल उसके दिल में एक अजीब सी सनसनाहट पैदा कर रहा था. सुप्रिया थक कर बिस्तर पर पीछे लेती hi थी की एकदम से दरवाज़ा खुला और इक़बाल अंदर आया.

उसे अंदर आते देख सुप्रिया जल्दी से उठ कर बैठ गयी और उसके मुँह से निकला - आप कहीं गए थे? नीचे भी नहीं थी और ऊपर भी नहीं...

इक़बाल - हाँ वह किसी काम से बहार गया था... आप सोई नहीं अभी...

सुप्रिया ने धीरे से कहा - नहीं बस आपका hi इंतज़ार कर रही थी...

इक़बाल - हाँ... मैं बत्ती बंद कर देता हूँ... आप सो जाइये...

सुप्रिया ने सोचा, पता नहीं इक़बाल की रीलीज़ किया या नहीं, पर आज वह दोनों एक hi रजाई के अंदर सोने वाले थे. सुप्रिया जल्दी से रजाई में घुस गयी, ठण्ड से उसका पूरा शरीर काँप सा रहा था.

इक़बाल बत्ती बंद करके हमेशा की तरह बिस्तर के दुसरे कोने की तरफ से ऊपर चड्ढा और वह भी उसी रजाई में घुस गया. अंदर घुसते hi शायद उसे भी महसूस हो गया था की आज कुछ अलग था.

इक़बाल - ओह्ह... मैडमजी... ये तोह एक hi रजाई है... हम दोनों के लिए...

सुप्रिया की तोह आवाज़ hi नहीं निकल रही थी अभी - जी....

इक़बाल ने रजाई को सुप्रिया की और धकेलना शुरू किया - आप ये ले लीजिये.... मैं चद्दर ोड कर सो जायूँगा...

सुप्रिया जल्दी से रजाई को वापिस उसकी और करने लगी - नहीं नहीं... इतनी ठण्ड हो रही है... आप सो जाइये इसमें... नहीं तोह आप बीमार पद जाओगे...

इक़बाल - पर मैडमजी एक hi...

सुप्रिया ने उसे बीच में चुप करा दिया - तोह क्या हुआ? एक रजाई में नहीं सो सकते क्या? आप चुप चाप इसे ोडिये, नहीं तोह मैं नीचे ज़मीन पर सोने चली जयुंगी...

इक़बाल - ारी नहीं मैडमजी... आप भी न...

इक़बाल ने वापिस रजाई अपनी और खींची और अपने पेअर उसमे अंदर किया. रजाई, चद्दर, तकिया सब कुछ इतना ठंडा ठंडा था अभी, और बिलकुल सॉफ्ट भी. सब कुछ सुप्रिया को और भी उत्तेजित सा कर रहा था. जाने क्यों उसे लगा था की इक़बाल आज रात उसके साथ कुछ कर hi न बैठे, जिससे उसे डर और एक्ससिटेमेंट दोनों hi लग रहा था. जाने वह उसका बड़ा सा लुंड कैसे झेल पायेगी. उफ्फ्फ वह चुदाई के बारे में सोच भी कैसे सकती थी...

इक़बाल कुछ पल बाद सुप्रिया से पीठ फेर कर लेट गया. सुप्रिया को थोड़ा सा गुस्सा आने लगा. अभी कल hi तोह इस आदमी ने कहा था की वह उसका हाथ नहीं छोड़ेगा, और आज वह उसकी तरह एक कदम भी नहीं बड़ा रहा था.

कुछ hi देर में इक़बाल के खर्राटों की आवाज़ सुनाई देने लग गयी थी. इक़बाल तोह बोहोत hi जल्दी सो गया था. सुप्रिया ने अपने आप को समझाया, शायद एहि ठीक था. वह भी पता नहीं क्या क्या सोचने लगी थी. इक़बाल और उसके बीच कुछ कैसे हो सकता था. सुबह से उसके अंदर पनप रही रही एक छह को उसने जैसे एक झटके में अपने मैं से निकाला और आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी.

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अगले कुछ दिन सर्दी बढ़ती गयी, और इक़बाल और सुप्रिया को एक hi रजाई में सोने की आदत सी पद गयी. एक hi रजाई में सोने की झिझक तोह धीरे धीरे ख़तम सी हो गयी थी, पर शायद सुप्रिया के अंदर दबी हुई आग नहीं. वह अक्सर रात को सुलग सी जाती, खासकर इन कांपती हुई रातों में.

उस दौरान वह चोरी छुपे अपने कुर्ती में अपना हाथ घुसा कर अपने गरम जिस्म पर लगा लेती. उसे ऐसा लगता जैसे उसका गरम जिस्म एक भट्टी बना हुआ है, और उसी आग के सहारे वह अपने रात काटने की कोशिश करती. कभी कभी तोह वह थोड़ा और सरक कर इक़बाल की और होने की कोशिश भी करती, पर वह उसकी और अपनी पीठ किये बेखबर सोये रहता.

ऐसे hi एक दिन सुप्रिया अकेली अपने कमरे में बैठी हुई अपनी अलमारी को जच्चा रही थी. और कुछ ख़ास करने को भी तोह नहीं था. आज उसने अलमारी में सब कुछ hi तोह निकाल लिया था, अपने कपडे, इक़बाल के कपडे, इक़बाल की लायी हुई साड़ियां, और कुछ ऐसे पुराण सामान वैगेरा.

तभी सब कपडे निकालते निकालते एक कपडे के अंदर से पुराणी सी फोटो बहार आ कर गिरी. एक पल तोह सुप्रिया का ध्यान उस पर गया hi नहीं, पर दूर से उसकी नज़र उस पर गयी तोह कोई लड़की थी उसमे एक लाल सी साड़ी पहने हुए और उसके साथ एक पतला सा आदमी खड़ा हुआ.

सुप्रिया ने फोटो को उठाया और पास से देखने लगी. फोटो काफी पुराणी सी लग रही थी, उसका रंग काफी उड़द चूका था, पर ये पतला सा आदमी ज़रूर इक़बाल hi था. उसकी दादी मूछे नहीं थी. उसके साथ एक छरहरी सी लड़की कड़ी थी. उस लड़की की शकल बड़ी जानी पहचानी सी लग रही थी. शायद वह उसे खुद की hi याद दिला रही थी? नहीं... पता नहीं...

सुप्रिया पलंग पर बैठ कर काफी देर तक फोटो को देखती रही. वह लड़की कितनी प्यारी और मासूम सी लग रही थी. जरूर एहि इक़बाल की पहली बीवी रही होगी. फोटो में दोनों बिलकुल साथ खड़े थे, लड़की बोहोत hi काम उम्र की रही होगी... शायद 18-19, और इक़बाल भी बोहोत ज्यादा बड़ा नहीं... शायद 20-22... समय की साथ फोटो का रंग तोह उतर गया था पर दोनों के चेहरे की मुस्कान नहीं...

पर उसने ये लाल साड़ी क्यों पहनी हुई थी? क्या वह भी सुप्रिया की तरह...? पहले hi दिन अम्मी जी की कही कुछ बातें उसके कानो में गूंजने लगी... शायद इसी लिए कोई उसके बारे में बात नहीं करता था? कितने सारे ख्याल चलने लगे सुप्रिया के मैं में.

इससे पहले कोई और कमरे में आता, सुप्रिया ने उसे फोटो को संभल के अपने पास रख लिया और सामान समेत कर वापिस अलमारी में रख दिया. आखिर में वह साड़ी के थैले को रख रही थी. क्या इसीलिए इक़बाल उसके लिए साड़ी लेकर आया था... वह उसे साड़ी पहने देखना चाहता था?

सुप्रिया कुछ देर बाद नीचे रुबीना के पास पहुंच गयी. वह रुबीना को उस फोटो के बारे में नहीं बताना चाहती थी. फिलहाल तोह वह बस उसका hi राज़ था.

काम करते करते सुप्रिया ने कहा - भाभी... एक बात पूछनी थी...

रुबीना - तुझे कब से इज़ाज़त मांगने की ज़रुरत पद गयी... पूछ न...

सुप्रिया - उम्म्म... काफी दिनों पहले इक़बाल जी मेरे लिए साड़ी लाये थे... मैं सोच रही थी की वह पेहेन कर देख लू... कोई बुरा तोह नहीं मानेगा न?

रुबीना थोड़ा सा चौंकी - साड़ी!? हम्म्म... ाचा... पेहेन ले... कोई दिक्कत की बात थोड़ी न है... और भी औरते पहनती है यहाँ सरियाँ...

सुप्रिया एकदम खुश सी हो गयी - सच.... अभी पेहेन लू?

रुबीना उसकी ख़ुशी देख कर मुस्कुरायी - पगली... जा पेहेन ले... पर थोड़ा धक् के रहियो... ठण्ड हो रही है...

सुप्रिया - जी भाभी....

सुप्रिया जल्दी से ऊपर अपने कमरे में वापिस आयी और उसने अलमारी में से एक साड़ी निकाल कर उसे पेहेनना शुरू किया. उसको डर था की पता नहीं ब्लाउज उसे फिट आने वाला था या नहीं, पर ब्लाउज उसे अचे से फिट आ गया, बस हल्का सा ढीला था. जैसे साड़ियां सुप्रिया पहले पहना करती थी ये उससे काफी हलकी थी पर फिर भी आज कितना ाचा सा लग रहा था एक साड़ी पेहेनना.

साड़ी पेहेन कर सुप्रिया बहार छत पर आ गयी. और तभी शायद इक़बाल किसी काम से दिन में घर आया था और सीढ़ियों से ऊपर चला आ रहा था. इक़बाल को देख कर सुप्रिया के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी, और साथ hi शर्म भी.

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इक़बाल ने सुप्रिया को इस तरह साड़ी में खड़े देखा तोह वह बस उसे देखता hi रह गया.

उसे अपनी और यूँ घूरते देख सुप्रिया के गाल लाल हो चुके थे पर वह हिम्मत करके बोली - कैसी लग रही हु मैं इस साड़ी में?

इक़बाल हकलाते हुए बोलै - आऍप... बोहोत hi अचे लग रहे हो आप...

सुप्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा - थैंक यू...

इक़बाल - शायद आपके लिए थोड़ी हलकी साड़ी है... अगली बार और अछि लेकर ायूँगा...

सुप्रिया - नहीं नहीं ठीक है... अछि है... बोहोत अछि है...

दोनों एकदम छुप हो गए और उनके बीच एक अजीब सा सन्नाटा छा गया. दोनों नीचे की और देख रहे थे.

सुप्रिया ने छुप को तोड़ते हुए पुछा - आप किसी काम से आये थे?

इक़बाल - हाँ... वह... भाई जान ने कुछ मंगवाया था... मैं लेकर जाता हूँ...

सुप्रिया - ठीक है... शाम को मिलते है...

इक़बाल - जी...

इक़बाल जल्दी से छत पर और ऊपर छड़ गया और थोड़ी देर बाद एक औज़ार सा लेते हुए नीचे आया.

वह नीचे की और जा hi रहा था की सुप्रिया ने धीरे से कहा - मैं आपका इंतज़ार कर रही हूँगी...

इक़बाल ने पलट कर सुप्रिया की और देखा और फिर वहां से चला गया. सुप्रिया का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, ठण्ड के मौसम में भी उसके पसीने से छूट रहे थे. पता नहीं क्यों वह इक़बाल की और ऐसे खींची सी जा रही थी. क्यों वह उसके सामने उसकी आवाज़ इतनी कमज़ोर सी पद जाती थी. शायद वह मैं hi मैं तय कर चुकी थी की आज रात उसे hi आगे कदम बढ़ाना पड़ेगा.

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रात को सुप्रिया जब कमरे में आयी तोह इक़बाल वहीँ था. सुप्रिया ने साड़ी के ऊपर एक स्वेटर पहना हुआ था जिससे उसे ठण्ड न लगे और ताकि उसकी नंगी कमर भी न दिखे. पर कमरे में आते hi सुप्रिया ने स्वेटर को उतारते हुए साइड रखा. ठण्ड या टेंशन के मारे उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके मम्मी और भी भारी हो गए हो और ब्लाउज में कास के फास गए हो.

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इक़बाल शायद उसे स्वेटर उतारते देख रहा था - मैडमजी... आपको कपडे बदलने हो तोह मैं बहार चला जाता हूँ...

सुप्रिया - नहीं... मैं ऐसे hi साड़ी में सो जयुंगी...

इक़बाल - पर साड़ी में दिक्कत नहीं होगी?

सुप्रिया - कोई ख़ास दिक्कत नहीं... मैं साड़ी में सोती hi थी पहले तोह...

इक़बाल - ाचा...

सुप्रिया - मैं बत्ती बुझा दू?

इक़बाल - जी...

सुप्रिया कमरे की बत्ती बुझा कर बिस्तर पर आ गयी और रजाई के अंदर घुस गयी. आज रात तोह उसे और भी ठण्ड लग रही थी. पर इक़बाल हमेशा की तरह दूसरी और मुँह करके सोने लगा था.

सुप्रिया उसे सोने नहीं देना चाहती थी - इक़बाल जी... आज कुछ ज्यादा hi ठण्ड नहीं है...

इक़बाल ने वापिस सुप्रिया की और करवट ली - जी मैडमजी... आप कहे तोह मैं नीचे से एक और रजाई ले आता हूँ... या तसले में थोड़ी सी आग जला देता हूँ...

सुप्रिया - नहीं नहीं... तसले से कमरे में धुंआ हो जायेगा... और दूसरी रजाई काफी भारी हो जायेगी...

इक़बाल - हाँ... ये तोह है... आपने साड़ी भी पहनी हुई है न... शायद उसमे कुछ ज्यादा ठण्ड लग रही होगी...

सुप्रिया - हाँ... शायद...

फिर से सन्नाटा. इक़बाल किसी भी पल वापिस मुड़ने वाला था. सुप्रिया का दिल उसे बेशरम होने के लिए मज़बूर सा कर रहा था - मैं सोच रही थी....

सुप्रिया बीच में रुक गयी, और इक़बाल ने पूछा - जी... बताइये... मैं स्वेटर दे दू आपको....

सुप्रिया - नहीं... मुझे स्वेटर में नींद नहीं आती... मैं सोच रही थी की मैं... आपके थोड़ा नज़दीक आ कर लेट जायु? दो लोगो साथ लेते हो तोह इतनी सर्दी नहीं लगती न...

इक़बाल एक डैम चौंकते हुए बोलै - साथ में मैडमजी!!

सुप्रिया - क्यों? कोई दिक्कत है क्या? मैं तोह बस... सोच hi रही थी...

इक़बाल - नहीं... दिक्कत कैसी...

सुप्रिया - तोह मैं आ जायु?

इक़बाल ने धीरे से कहा - हाँ....

सुप्रिया जल्दी से पलंग पर सरकती हुई इक़बाल की और हो गयी. इतनी तेज़ी से की अँधेरे में उसके मम्मी इक़बाल के सख्त शरीर से जाकर टकराये.

सुप्रिया के मुँह से एकदम से निकला - अह्ह्ह....

इक़बाल - क्या हुआ मैडमजी... आपके लगी तोह नहीं...

सुप्रिया अपने मम्मी हलके से मसलने लगी, उसकी चूचियां पहले से काफी सख्त हो राखी थी जिससे उसको दर्द थोड़ा ज्यादा हुआ था - नहीं... सब ठीक...

सुप्रिया ने अपने सर इक़बाल के कंधे के पास रखा, और उससे बिलकुल सात कर लेट गयी - अब थोड़ा बेहतर लग रहा है... है न...

इक़बाल तोह कुछ बोलने की हालत में नहीं था - जी.....

सुप्रिया के पेअर नीचे तक इक़बाल की पैरो से सटे हुए थे, दोनों साथ साथ लेते एक साइड से एकदम चिपके हुए से थे. पर शायद इतना काफी नहीं था.

सुप्रिया ने अँधेरे में इक़बाल का हाथ ढूंढ़ने की कोशिश करि - आप अपना हाथ मुझ पर रख सकते है...

इक़बाल - नहीं मैडमजी... ऐसे hi ठीक है...

सुप्रिया - ाचा ठीक है... फिर मैं रख लेती हु...

सुप्रिया ने अपना शरीर इक़बाल की और किया और अपने मम्मी उसके जिस्म से सत्ता दिए और फिर उसकी छाती पर अपना हाथ रख दिया. उसने अपना सर हलके से उठाया और इक़बाल के कंधे पर अपना सर रख दिया. अब तोह वह उससे बिलकुल hi चिपक गयी थी. उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. उसने प्यार भरी निगाहों से इक़बाल की और देखा.

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इक़बाल सुप्रिया से नज़रे नहीं मिला पा रहा था - मैडमजी... आप थोड़ा सा अलग हो कर लेट जाइये न...

सुप्रिया - क्यों? आपको ाचा नहीं लग रहा... या मेरे हाथ रखने से कोई परेशानी है... आप भी अपना हाथ मुझ पर रख सकते है...

सुप्रिया ने इक़बाल का हाथ अपनी और खींचा और अपनी नंगी कमर पर रख दिया. जैसे hi इक़बाल का हाथ उसकी कमर पर लगा उसके शरीर में जैसे 440 वाल्ट की बिल्जी दौड़ गयी, और वह कसमसाते हुए हिल पड़ी. वह हिलते हुए इक़बाल के ऊपर hi आ लेती थी. उसका हाथ इक़बाल के पायजामा पर जैसे hi पड़ा उसे उसका उभरा हुआ लुंड महसूस हुआ. ये उसने जानबूज कर नहीं किया था.

इक़बाल का लुंड पयजामे में हलके हलके थिरक सा रहा था और उसकी सांसें थोड़ी तेज़ से हो गयी थी. सुप्रिया का मैं छह रहा था की इक़बाल उसे अभी अपने नीचे खींच कर उसके होंठों को चूम ले. पर इक़बाल कोशिश कर रहा था की वह सुप्रिया से नज़रे न मिलाये.

इतनी तोह खूबसूरत थी वह... और अपने आपको इक़बाल को सौंप रही थी. इक़बाल क्यों उससे दूर खींच रहा था. क्या उसे अपनी पहली बीवी की याद आ रही थी, क्या इतना प्यार था उसे उससे? ये सोचते hi सुप्रिया और भी रोमांचित सी हो गयी. और जाने अनजाने... उसकी ऊँगली पयजामे के ऊपर से इक़बाल के लुंड पर चलने लगी. इससे इक़बाल का लुंड और भी थिरक उठा, और वह एक डैम से झटपटाते हुए खड़ा हो गया.

बिस्तर से खड़े होते hi सुप्रिया देख पा रही थी की उसका लुंड पूरी तरह खड़ा था और बहार निकलने के लिए झटपटा सा रहा था.

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पर इक़बाल की शकल से उसकी हालत देखने लायक थी और सुप्रिया को उसकी और देख कर हसी और गुस्सा दोनों आ रहा था.

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सुप्रिया - इक़बाल जी... क्या हुआ... वापिस आ जाइये बिस्तर में... ठण्ड लग जाएगी...

इक़बाल - नहीं मैडमजी... बस कुछ अजीब सा लगा...

सुप्रिया - क्या अजीब लगा... आपकी बीवी hi हूँ मैं...

सुप्रिया के मुँह से ये सुन कर इक़बाल हैरान सा हो गया था. सुप्रिया उसे अपना शौहर मानने लगी थी क्या. उसके लिए तोह वह बस विक्रम साब की अमानत थी, जिसे वह देख तोह सकता था पर छह कर भी छू नहीं सकता था.

सुप्रिया ने हस्ते हुए कहा - क्या हुआ? आपकी बीवी नहीं हु क्या? आपने निकाह किया था मुझसे... किया था न?

इक़बाल - जी.. पर वह...

सुप्रिया मासूमियत से बोली - तोह आपके लिए वह निकाह कुछ मायने नहीं रखता? खुदा का बनाया हुआ एक रिश्ता...

इक़बाल अपना सर ज़ोर ज़ोर से हिलाते हुए बोलै - नहीं नहीं... मैडमजी ऐसा कुछ नहीं... बस वह...

सुप्रिया - बस वह क्या? या फिर मैं आपको पसंद नहीं? आपके मैं में कोई और है...

इक़बाल - नहीं मैडमजी... आप इतनी खूबसूरत है... आप किसको पसंद नहीं होंगी...

सुप्रिया को उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर ाचा सा लगा - आपको पसंद हु या नहीं? आप क्यों मुझसे दूर दूर रहते है... आइये न... इतनी सर्दी हो रही है... आपको ठण्ड लग जाएगी... और मुझे भी

इक़बाल - पर मैडमजी...

सुप्रिया के अंदर की गर्मी बुरी तरह भड़क चुकी थी. सुप्रिया ने अपनी सॉफ्ट सी आवाज़ में कहा - पर वॉर नहीं... आइये न इधर...

सुप्रिया ने बिस्तर से खड़े होते हुए अपना मुलायम सा हाथ इक़बाल की और बढ़ाया. इक़बाल ने भी अपना हाथ उसकी और किया. न जाने सुप्रिया में एकदम से इतनी ताकत कैसे आ गयी की उसने इक़बाल ज़ोर से अपनी और खींच किया, या फिर वह hi उसकी और खींचा सा चला गया.

एक तेज़ के झटके से वह और सुप्रिया दोनों पलंग पर गिरते हुए लेट गए. इक़बाल सुप्रिया के ऊपर और सुप्रिया उसके ठीक नीचे. इक़बाल का मुँह सुप्रिया की छाती से होता हुआ उसकी गर्दन पर आकर रुका. एक सुराहीदार कोमल अस गर्दन. सुप्रिया के हाथ भी उसके बालों में घूम कर उसे और उत्तेजित कर रहे थे.

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वह अपने आप को अब बस और नहीं रोक सकता था. इतने दिनों से उसकी प्यारी मैडमजी उसके सामने हो कर भी उसकी पहुंच से दूर थी. पर आज उसे पहली बार ये महसूस हो रहा था की शायद वह सच में उसकी बीवी hi थी. और वह उसके साथ जो चाहे कर सकता था.
 
सॉरी थोड़ा सा एडिट किया एन्ड का part. आईटी वेंट ा बिट फुरदर थान ी वांटेड तो व्रिठे. ी ऑलवेज तरय तो रीड आफ्टर पोस्टिंग एंड एडिट िफ़ ी डोंट लिखे आईटी. मय्बे ी शुड तरय रीडिंग बिफोर पोस्टिंग.
 
अपडेट 94

इक़बाल का चेहरा जैसे hi सुप्रिया के चेहरे के पास पंहुचा, उसकी हलकी सी सिसकी निकल गयी. इक़बाल का सख्त शरीर का भार उसके नाज़ुक से बदन को दबा जो रहा था.

इक़बाल की नाक ठीक उसके होंठों के पास आकर रुकी.

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दोनों एक दुसरे के बेहद करीब आ गए थे और एक दुसरे की साँसों को अपने चेहरे पर महसूस कर पा रहे थे. सुप्रिया की सांसें भारी होती जा रही थी. सुप्रिया ने फिर से अपना हाथ इक़बाल के बालों में हलके से घुमाया, जिससे इक़बाल ने अपना चेहरा सुप्रिया के चेहरे से सत्ता लिया.

इक़बाल की एक टांग सुप्रिया के टांगों के बीच में थी, और दूसरी थोड़ी बहार. दोनों की टांग का ऊपर का हिस्सा आपस में रगड़ रहा था. साड़ी का पल्लू तोह पलंग पर गिरते hi नीचे हो चूका था.

इक़बाल ने अपने दोनों हाथ सुप्रिया की बाहों पर रखे और उसके कोमल मुलायम हाथों को अचे से महसूस करते हुए उसकी हथेलियों पर आ रुके. उसने उसकी हथेलियों को कास के थाम लिया और उसके हाथों को थोड़ा ऊपर की और कर दिया. सुप्रिया की छाती तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी. उसे डर लग रहा था, पर एक अजीब सा एहसास भी हो रहा था.

इक़बाल ने अपनी नाक सुप्रिया की गर्दन से रगड़ी और फिर उसकी गर्दन और उसके थोड़ा नीचे के हिस्से को चूमना शुरू कर दिया. इतना दिनों बाद उसे कोई आदमी ऐसे छू रहा था, सुप्रिया का मैं बुरी तरह मचलने लगा था और उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

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सुप्रिया हलके से आवाज़ निकालने लगी - मममम.... ममम... इक़बाल जी... उह्ह्ह....

इक़बाल उसकी मीठी मदहोश करने वाली आवाज़ सुनकर और भी उत्तेजित होता जा रहा था और वह उसकी गर्दन को चूसने लगा. सुप्रिया अपने होंठ दबा कर रह गयी, सब कुछ इतनी जल्दी जल्दी शुरू हो चला था. अभी कुछ पल पहले तोह इक़बाल उससे दूर खड़ा था, और अभी जैसे उसने एक सांड को अपने ऊपर चढ़ने का खुला निमंत्रण दे दिया हो.

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इक़बाल का मुँह सुप्रिया की गर्दन से नीचे जाते हुए उसके ब्लाउज के पास पहुंच गया, और फिर वापिस गर्दन पर. उसके हाथ सुप्रिया की पतली सी कमर को पकडे हुए थे और सुप्रिया के चिकने से शरीर पर वह बिना रोक टोक के फिसल रहे थे. उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की उसकी मैडमजी आखिर आज उसकी होने वाली थी.

उसने अपने दोनों हाथों से सुप्रिया की कमर को हलके से दबाया. उसके ऐसा करते hi सुप्रिया ने अपनी कमर थोड़ी सी ऊपर उठी ली और ज़ोर की सिसकी ली.

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सुप्रिया के प्यारे से चेहरे पर उसकी भावनाये साफ़ दिख रही थी. इक़बाल ने अपने एक हाथ सुप्रिया के कमर से हटते हुए सुप्रिया के चेहरा पर रखा और अपना मुँह उसकी गर्दन से लगते हुए उसके ब्लाउज के ऊपर रगड़ दिया. सुप्रिया के सेंसिटिव बूब्स पर जैसे hi इक़बाल का मुँह लगा वह बुरी तरह काँप उठी.

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सुप्रिया - Ahhh....mmmm.... इक़बाल जी....

इक़बाल की हिम्मत तोहाब बढ़ती जा रही थी. दोनों के ऊपर रजाई नहीं थी पर अब शायद ठण्ड भी महसूस नहीं हो रही थी. इक़बाल की दादी उसे चुभ सी रही थी, पर इस चुभन में एक अलग मज़ा आ रहा था.

इक़बाल अपना मुँह सुप्रिया के ऊपर रगड़ते हुए खो सा गया - मममम.... अह्ह्ह... ममम... अहह.... मैडमजी....

इक़बाल ने अपना मुँह सुप्रिया के ब्लाउज के ठीक नीचे सुप्रिया के पेट पर लगा दिया और वहां हलके हलके चूसने लगा. सुप्रिया का अंग अंग बुरी तरह काँप रहा था और उसने अपना हाथ इक़बाल के हाथ पर रख दिया, जैसे उसे रोकने की कोशिश कर रही हो, पर शायद न भी.

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सुप्रिया उत्तेजित होते हुए ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी - अह्ह्ह... उफ़... आठ... mmmm....mmmm.. अह्ह्ह....

इक़बाल ने अपने हाथ सुप्रिया ने नीचे घुसाए और उसे घूमते हुए अपने ऊपर ले आया. उसके हाथ सुप्रिया की कमर और पीठ पर घूम रहे थे. उसका दूधिया सफ़ेद जिस्म बोहोत hi नाज़ुक और सॉफ्ट था. उस पर चलते हुए उसके खुरदुरे हाथ उसके जिस्म पर हलके हलके निशाँ छोड़े जा रहे थे.

सुप्रिया ने इक़बाल के ऊपर आते हुए उसकी गर्दन को चूमा, शायद ये उसका मौका था अपना प्यार जताने का. वह दोनों hi ये करना चाहता थे.

इक़बाल ने पीछे से सुप्रिया की ब्लाउज की दूरी को खींचते हुए उसे थोड़ा सा ढीला किया.

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सुप्रिया कांपते हुए इक़बाल से बिलकुल चिपक सी गयी - ससससीई.. आह्हः... मममम...

इक़बाल ने अपने दोनों हाथ सुप्रिया की पीठ पर रखते हुए उसे कास के भींच लिया. जैसे hi इक़बाल ने उसे दबाया, सुप्रिया ने दर्द के मारे अपना मुँह और टाँगे ऊपर की उठा ली. वह किसी गुड़िया की तरह इक़बाल के ऊपर लेती उस में समायी हुई थी.

इक़बाल ने धीरे से कहा - मैडमजी... मैं आपका ब्लाउज खोल दू...

सुप्रिया ने इक़बाल के कानो के पास अपना मुँह लाते हुए हलके से कहा - हाँ... आप जो चाहे कर सकते है...

ये सुनते hi इक़बाल का लुंड तोह और भी टाइट हो गया और उसने जल्दी से अपनी मोती उंगलियां सुप्रिया की ब्लाउज के हुक की और बड़ाई. उसे शायद ब्लाउज खोलने का कोई ख़ास तज़ुर्बा नहीं था, और वह उन्हें खींच कर खोलने की कोशिश करने लगा. वैसे भी इस समय ब्लाउज सुप्रिया के जिस्म से बिलकुल चिपक सा गया था, शायद उनके बीच की गर्माहट से उसके मम्मी और भी फूल गए थे.

इस बीच सुप्रिया इक़बाल के ऊपर लेती हुई उसके कानो के पास चूम रही थी. उसकी छाती की गोलियां इक़बाल की छाती पर दबी हुई थी, और वह अपने आप को उस से सताते हुए उन्हें और भी दबा रही थी. उसकी सिसकियाँ अब कमरे में गूँज सी रही थी.

आखिर कार ब्लाउज का एक हुक खुला, जिससे वह टाइट सा ब्लाउज थोड़ा सा ढीला हुआ. इक़बाल ने बेसबर होते हुए उसके बाकी हुक्स को भी जल्दी से खोल दिया, और ब्लाउज खुलते hi दोनों साइड से नीचे हो गया. इक़बाल के हाथ अब सुप्रिया की नंगी पीठ पर थे. और क्या कमल की गोरी मुलायम पीठ थी वह.

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इक़बाल एक डैम पागलो की तरह सुप्रिया की पीठ को मसलने लगा - अह्ह्ह.... मममम.... अह्ह्ह... सीमा....

जैसे hi इक़बाल के मुँह से ये नाम निकला सुप्रिया की बंद आँखें एक डैम से खुल गयी और उसने इक़बाल पर से अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर दी. इक़बाल को भी शायद इसका एहसास हो गया और वह एकदम से उठ खड़ा बैठा और सुप्रिया से अलग हो गया.

सुप्रिया अपने खुले ब्लाउज को पहने बीएड पर पलटी और पीठ के बल लेट गयी - इक़बाल जी... क्या हुआ?

इक़बाल सुप्रिया से मुँह फेर कर बिस्तर से पेअर नीचे करके बैठ गया - माफ़ कीजियेगा मैडमजी... पता नहीं मुझे क्या हो गया था... मुझे अपने आप पर काबू रखना चाहिए था...

सुप्रिया की सांसें अभी भी तेज़ hi थी, पर उसने अपने आपको सँभालते हुए कहा - सीमा... वह आपकी... पहली बीवी थी न...

इक़बाल पलंग से फिर से खड़ा हो गया था - मैडमजी... बोहोत बड़ी गलती हो गयी मुझसे... मुझे आपके साथ ये सब नहीं करना चाहिए था... आप विक्रम साब की अमानत हो मेरे पास...

इक़बाल ये कह कर कमरे से बहार की और निकल गया.

सुप्रिया दरवाज़े की और देख रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था वह क्या सोचे या बोले. अभी तोह उनके बीच सब कुछ जैसे होने hi वाला था और अभी सब कुछ बीच में अधूरा सा रह गया था. शायद इक़बाल के मैं में कुछ और hi चल रहा था.

कुछ पल उसका इंतज़ार करने के बाद सुप्रिया अपने ब्लाउज के हुक लगाने लगी. कमरे की ठण्ड फिर से बाद गयी थी, और उसके अंदर जो अधूरा सा रह गया था उससे वह और भी कम्पन महसूस कर रही थी. सुप्रिया ने रजाई को अपने ऊपर खींचा और पेट के बल लेटते हुए अपने पैरो को अपनी छाती के पास दबा लिया.

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सुबह कमरे में हलकी सी आवाज़ ने सुप्रिया को जगाया. सुप्रिया हड़बड़ाते हुए उठ बैठी. उसका पूरा बदन पसीने में टर्र था. शायद वह कोई बुरा सपना देख रही थी.

सुप्रिया उठते hi बोली - इक़बाल जी....

इक़बाल - मैडमजी... मैंने आपको जगा दिया क्या... माफ़ कीजिये...

सुप्रिया - नहीं नहीं... कोई नहीं... आप कहाँ थे रात भर...

रात की बाद यात करते hi सुप्रिया को शर्म सी आने लगी थी. कैसे इक़बाल ने पहली बार उसके जिस्म को छुआ था. उसका मुँह और हाथ कैसे उसके शरीर के अलग अलग हिस्सों पर घूम रहे थे. उफ्फ्फ... वह और इक़बाल दोनों उन पालो में कैसे पागल से हो गए थे.

इक़बाल - मैं... बस... यही तोह था...

सुप्रिया - आप झूठ तोह न बोले... मैं काफी देर तक जगी हुई थी और आप कमरे में तोह वापस नहीं आये थे...

इक़बाल - मैडमजी...

सुप्रिया - बहार कितनी ठण्ड थी... आप बीमार पद सकते थे न...

इक़बाल - मुझे चलना चाहिए मैडमजी... भाई जान ने थोड़ा जल्दी जाने के लिए कहा है...

सुप्रिया बिस्तर से जल्दी से कड़ी हुई - बस 2 मिनट रुकिए...

सुप्रिया की नज़र इक़बाल के हाथ पर बंधा एक रुमाल पर पड़ी. रुमाल पर खून का एक हल्का सा धब्बा था. उसने इक़बाल के पास आते हुए उसका हाथ पकड़ लिया - ये क्या हुआ? कल रात तक तोह नहीं थी ये चोट...

इक़बाल - कुछ नहीं है मैडमजी... ऐसे hi बस... अंधेरे में थोड़ा...

सुप्रिया परेशान होते हुए बोली - आपको अँधेरे में कमरे में से जाना hi नहीं चाहिए था...

इक़बाल छुप खड़ा रहा.

सुप्रिया - सीमा... वह आपकी बीवी थी न... आप बोहोत प्यार करते थे न उससे...

इक़बाल ने सर झुका लिया.

सुप्रिया ने जल्दी से अलमारी खोलते हुए कल मिले फोटो को निकला और इक़बाल के सामने किया - एहि है न वह....

इक़बाल ने फोटो की और देखते हुए कहा - ये आपको कहाँ मिली?

सुप्रिया - अलमारी में.... कुछ कपड़ो के बीच में थी... बोहोत प्यारी लग रही सीमा इस फोटो में... आप दोनों hi अचे लग रहे हो...

इक़बाल गहरी सोच में डूबा हुआ था - हाँ... हमारी बस अभी शादी hi हुई थी... (वह एकदम अपनी सोच से बहार आया) माफ़ कीजिये कल रात मैंने आपको सीमा बुला दिया...

सुप्रिया - तोह क्या हुआ? मैं सीमा जैसे hi लग रही थी न कल... और उसकी तरह मैं भी आपकी बीवी hi हूँ न...

इक़बाल उसकी बात सुन कर परेशान हो गया - मैडमजी... कहाँ आप और कहाँ मैं... वह शादी तोह बस आपकी मजबूरी थी... मैं आपकी बराबरी कैसे कर सकता हूँ... आप इतनी पड़ी लिखी है... इतनी जवान है... मतलब उम्र में बोहोत छोटी है आप मुझसे... आप तोह बस यहाँ फास गयी हो मेरे साथ...

सुप्रिया - शुरू में मुझे भी ऐसा लगता था... पर अब नहीं... अब ये जगह जाने क्यों अपनी सी लगने लगी है... हीना, रुबीना भाभी, अम्मी... और आप....

इक़बाल ने छौंकते हुए कहा - मैं??

सुप्रिया - हाँ आप... आप इतने अचे इंसान हो... जब भी मैं कहीं फांसी हुई थी... आपने hi तोह मेरी मदद की थी... इतनी इज़्ज़त दी मुझे... मेरा ख्याल रखा... मुझे है मुसीबत से दूर रखा...

इक़बाल - वह तोह मेरा फ़र्ज़ था मैडमजी...

सुप्रिया - आपने जो कुछ मेरे लिए किया वह बस आपका फ़र्ज़ था? आपके मैं में मेरे लिए कुछ भी और नहीं है? क्या मैं उस लायक भी नहीं हु?

इक़बाल - मैडमजी... आप ये क्या कह रही है... आपको तोह दुनिया का कोई भी आदमी मिल सकता है... आप इतनी हसीं है... इतनी प्यारी...

सुप्रिया की आँख में पानी आ गया था - सबने तोह छोड़ दिया है मुझे... विक्रम यहाँ आने वाला नहीं है... आप भी जानते है ये बात... मैं बस उसके लिए एक खिलौना थी... अतुल को भी कोई और मिल गया है... मैं कहीं की नहीं रही हु... मैं वापिस नहीं जा सकती अब... पर शायद आपके लिए भी मैं एक बोझ hi हु... और हूँ भी क्यों न... सब कुछ तोह जानते है आप मेरे बारे में... आप सोचते होंगे कैसी बेशरम लड़की हु न मैं...

इक़बाल ने सुप्रिया के हाथ को हलके से पकड़ा - आप मेरे लिए बोझ कैसे हो सकती हैं... मुझे बस डर लगता है... डर लगता है की आप मुझे छोड़ कर चली गयी तोह? मैं आपके ज्यादा नज़दीक आ गया तोह आपसे दूर जाना बोहोत मुश्किल होगा...

सुप्रिया एकदम से इक़बाल के गले लग गयी - मुझे दुनिया का कोई भी आदमी नहीं, बस आप चाहिए... मैं अब आपके बिना नहीं रह पायूँगी... मैंने कह दिया बस जो मेरे मैं में था... अब भी आप नहीं समझे तोह...

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सुप्रिया अपने हाथ इक़बाल की पर लपेटे उससे पूरी तरह चिपक गयी थी. इक़बाल ने अपना हाथ धीरे से लाते हुए सुप्रिया की पीठ पर रखा. कितना हसीं पल था ये उसके लिए. वह तोह शायद सपने में भी नहीं सोच सकता था की सुप्रिया कभी उसकी हो सकती थी. आज उसकी जिंदगी के सारे ख्वाब पूरे हो गए थे.
 
Hello, तेरे वास् ा कंप्लेंट अगेंस्ट में अस बिलो एंड कोटिंग आईटी बिलो अस प्रोवाइडेड तो में बी थे एडमिन टीम. एडमिन अस्केद में तो पोस्ट तो क्लैरिफी माय इंटेंशन्स.

यू कैन आल्सो मैसेज में डायरेक्टली िफ़ यू हैवे अन्य कंसर्नस ों थे स्टोरी. ी थिंक ी हैवे आलरेडी ट्राइड तो एक्सप्लेन एवरीथिंग इन थे स्टोरी. स्टोरी इस टोल्ड फ्रॉम Supriya's पर्सपेक्टिव. ी आल्सो ट्राइड तो ऐड इतर पर्सपेक्टिव्स इन सम उपदटेस. No ओने इस पुरेली गुड और पुरेली बाद एंड तहत वास् नेवर माय इंटेंशन. बूत एनीवे, िफ़ यू फील ओफ्फेंन्डेड बी थे स्टोरी, ी अपोलॉगीज़े.

इतर: आल क्लोज चरक्टेर्स ऑफ़ सुप्रिया अरे पोर्टराइड बाद एंड इक़बाल एंड हिज फॅमिली अरे डिपिक्टेड अवेसमे, आल वेज़ क्लोज्ड फॉर सुप्रिया इवन शी can't स्टे विथ हेर पेरेंट्स और ससुराल, थे मैरिज ऑफ़ सुप्रिया एंड इक़बाल डेस्क्रिबेद इन सुच वे लिखे वृत्तेर क्नोव
 
यस, ी डोंट वांट एनीवन तो गेट अपसेट ओवर फीडबैक. ी ऍम हैप्पी तो लिसेन तो आईटी माइसेल्फ.

यस, थे स्टोरी मूव्ड अवे फ्रॉम अडुल्टेरी, बूत मय्बे आईटी विल गेट बैक तो आईटी. ी िंटेंड तो कनेक्ट आईटी तो सम इतर स्टोरीज व्हिच ी कैन व्रिठे वीथिन थिस स्टोरी और अस सेपरेट स्टोरीज. ी प्रॉबब्ली वोउल्ड हैवे गोत तो तहत पॉइंट िफ़ आईटी वसंत फॉर माय पर्सनल सरकमस्टान्सेस.

तेरे इस ा डुअलिटी तो हुमंस, थे कैन बे तवो डिफरेंट थिंग्स तो तवो डिफरेंट सेट ऑफ़ पीपल. सो ी रेस्पेक्टफुल्ली डिसागरी विथ सम ऑफ़ योर पॉइंट्स ों इक़बाल. आल्सो सुप्रिया वास् सेक्सुअली नैवे, एंड थेरेफोरे सोमेथिंग्स तहत हप्पेनेड.

िफ़ ी कुड रेवरिटे आईटी आल ओवर अगेन, ी वोउल्ड प्रॉबब्ली व्रिठे आईटी स्लिंगटली डिफरेंटली एंड कट आउट ा फ्यू थिंग्स बूत प्रॉबब्ली स्टिल वांट तो एन्ड उप हेरे ात थिस पॉइंट.

अस सम और मान्य ऑफ़ यू मई क्नोव इतस रियली हार्ड तो फंड टाइम तो व्रिठे ा स्टोरी. ी फील ी हैवे गिवेन मोस्ट ऑफ़ माय अवेलेबल टाइम ओवर थे लास्ट ईयर राइटिंग थिस. ात टाइम्स, ी फेल्ट ी डिडन्ट वांट तो जो ों, बूत थें डीडेड तो कंटिन्यू. हैविंग इनवेस्टेड सो मच ऑफ़ माय पर्सनल टाइम नाउ, ी फील लिखे िफ़ ी रश थिंग्स थान आईटी वोउल्ड नॉट गिव ा सटिस्फैक्टरी रिजल्ट. थैंक यू फॉर रीडिंग थे स्टोरी.
 
अपडेट 95

पूरा दिन भर सुप्रिया के शरीर में एक अजीब सी संसाहट सी दौड़ती रही. आखिर उसने इक़बाल से अपने दिल की बात कह hi दी थी. कितना अजीब और गलत लगा था वह सब कहना और पता नहीं इक़बाल जी उसके बारे में क्या सोच रहे होंगे. पर जो भी था, अब तोह कह दिया था.

उसे हिना के कॉलेज से आने का इंतज़ार था, क्यूंकि उस समय इक़बाल एक बार घर का चक्कर लगता था. क्या पता उस समय इक़बाल से दो मिनट और बात करने को मिल जाये. जाने क्यों इतनी बेसब्री सी हो रही थी उससे फिर से बात करने के लिए.

पर दिन में जब हिना अकेले hi घर में घुसी तोह सुप्रिया थोड़ी सी निराश सी हो गयी.

रुबीना ने जैसे उसका मैं पड़ते हुए पूछा - हिना.... तेरे चाचा नहीं आये?

हिना - उन्होंने तोह मुझे बाजार पर hi उतार दिया था... बोले कुछ ज़रूरी काम है...

रुबीना - ाचा.... क्या ज़रूरी काम था?

हिना - पता नहीं... पर आज कुछ तोह अजीब था... कॉलेज से आते हुए बीच रास्ते में कुछ लोग दिखे थे... चाचू बाइक रोक कर पता नहीं उनको क्यों देख रहे थे...

रुबीना - कौन लोग?

हिना - पता नहीं कौन थे....

ये सुन कर सुप्रिया के कान खड़े से हो गए और उसे गभरहट सी होने लगी. क्या ये लोग.... नहीं... अब तोह तीन महीने होने को आये थे... अब तक वह उसकी तलाश क्यों कर रहे होंगे...

बाकी पूरी शाम हिना उससे कुछ तोह बोल रही थी, पर हिना की बात उसके कानो में जैसे जा नहीं रही थी. उसे तोह बस इक़बाल के आने का इंतज़ार था. और रात होते भी अब्बास अकेला hi घर पंहुचा. जब अब्बास भाई जान ने ये बताया की इक़बाल दिन से कारखाने आया hi नहीं था तोह सुप्रिया की परेशानी और भी बाद गयी.

सुप्रिया अपने कमरे में पहुंच कर यहाँ से वहां चल रही थी. उसके मैं में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे. और आखिर कर उसे नीचे दरवाज़े पर एक दस्तक सुनाई दी. उसने जल्दी से बहार जाकर नीचे की और देखा तोह इक़बाल सच में वापिस आ गया था. उसके जान में जान वापिस आयी, पर अभी भी वह काँप सी रही थी.

नीचे सब लोग इक़बाल से पूछ रहे थे की वह गया कहाँ था, पर सुप्रिया ने नीचे जाने की हिम्मत नहीं की. उसका दिल अभी भी घबराया हुआ सा था. आज सुबह hi तोह उसने इक़बाल को अपने मैं में चल रही हलचल बयां की थी, और आज hi जाने क्या हो गया था.

थोड़ी देर बाद इक़बाल ऊपर कमरे में आ गया.

सुप्रिया ने उसके आते hi परेशान होते हुए पुछा - क्या हुआ था? आप कहाँ रह गए थे?

इक़बाल - कुछ नहीं मैडमजी... आप परेशान क्यों हो रही है... बस किसी काम से गया था...

सुप्रिया - पर बिना किसी को बताये? और हिना कह रही थी की रास्ते में कुछ लोग मिले थे... कौन थे वह लोग?

सुप्रिया एकदम इक़बाल के पास आकर कड़ी हो गयी थी.

इक़बाल ने सुप्रिया से नज़र नहीं मिलायी - कोई नहीं थे मैडमजी....

सुप्रिया ने उसका हाथ पकड़ते हुए अपने सर पर रखा - आप मेरी कसम खाइये... कोई नहीं थे...

इक़बाल ने जल्दी से हाथ हटा लिया - मैडमजी... कसम वसं कुछ नहीं होती...

सुप्रिया - क्या ये वही लोग थे? लखनऊ से...

इक़बाल ने एक गहरी सांस भरी - जी... पर आप फिक्र न करे... वह यहाँ आने की हिम्मत भी नहीं करेंगे... वैसे भी उनके हाथ कुछ लगा नहीं है... मैं पूरा दिन उनके पीछे पीछे hi घूम रहा था...

सुप्रिया का डर अब सच हो गया था - पर वह लोग मुझे अब तक क्यों ढून्ढ रहे है?!! इतने महीने हो गए... मैं तोह अब विक्रम को शायद भूल भी चुकी हूँ...

इक़बाल - वह तोह मुझे नहीं पता मैडमजी... पर हमें होशियार रहना चाहिए...

सुप्रिया ने भड़कते हुए कहा - एक तोह आप मुझे ये मैडमजी बुलाना बंद कीजिये... और दूसरा आप क्यों उनका पीछा कर रहे थे... अगर वह लोग आपको पकड़ लेते तोह?

इक़बाल - पकड़ लेते तोह क्या hi हो जाता मैडमजी...

सुप्रिया की आवाज़ भरी हुई सी हो गयी थी - आपने कुछ नहीं सुना न जो मैंने सुबह कहा था... आपको मेरी ज़रा भी फिक्र नहीं है न...

इक़बाल के चेहरे पर एक हलकी सी हसी आयी और फिर गायब सी हो गयी - सब सुना था मैडमजी...

सुप्रिया इस बार थोड़ा ज़ोर से बोली - सुप्रिया... सुप्रिया नाम है मेरा...

इक़बाल को उसके गुस्से पर भी हसी आ गयी - मैडमजी hi ठीक है न...

सुप्रिया ने छिड़ते हुए अपना सर झटका और मुद गयी - मैं hi पागल हूँ... शायद आप मुझे कभी उस तरह से देख hi नहीं कर सकते..

सुप्रिया एक पल के लिए मुड़ी hi थी की इक़बाल ने उसे अपनी और खींचते हुए उसकी कमर पर हाथ रख दिया. सुप्रिया के मम्मी जाकर इक़बाल की छाती से टकराये और उसने इक़बाल के कंधो पर अपने हाथ रख लिए. सुप्रिया भी उसकी हिम्मत देख कर एक डैम से दांग सी रह गयी थी.

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इक़बाल ने धीरे से कहा - ऐसा नहीं है की मैंने कभी आपको उस नज़र से नहीं देखा... पर आप जैसे कोई मेरे बारे में सोचे, मेरे लिए तोह शायद वह hi काफी है...

इक़बाल की मरदाना पकड़ से सुप्रिया की सांस जैसे अटक hi गयी थी - शायद आपको भी नहीं पता की आप कितने अचे इंसान है...

इक़बाल - मैं उतना भी ाचा नहीं हूँ जितना आप समझती... बोहोत गलत काम करे है मैंने...

सुप्रिया - मुझसे भी बोहोत गलतियां हुई है ज़िन्दगी में...

इक़बाल - मैडमजी... और मुझे आप मैडमजी बुलाने दे... मुझे ाचा लगता है... मेरे लिए तोह आप इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की है... जबसे मैंने आपको पहली बार देखा था, तबसे hi आप मुझे बोहोत अछि लगी थी...

सुप्रिया - इक़बाल जी...

इक़बाल - मुझे बोलने दीजिये अब... कल आपको उस साड़ी में देख कर मैं बहक सा गया था... जैसे मुझे फिर से मेरी सीमा मिल गयी हो... मैं तोह यकीन नहीं कर सकता की आप यहाँ मेरे घर में है... मेरी बीवी बन चुकी हैं...

सुप्रिया ने उसकी आँखों में आखें डालते हुए कपकपाती हुई आवाज़ में कहा - अगर मैं आपको बीवी हूँ... तोह आप मुझे पूरी तरह से अपनी बीवी बनाइये न...

दोनों एक दुसरे की आँखों में आँख दाल कर एक दुसरे को घूर रहे थे. एक डैम से इक़बाल ने अपने दोनों हाथ सुप्रिया के गाल पर रखे और तेज़ी से अपने होंठ उसके होंठों पर जड़ दिए.

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सुप्रिया उसके चुम्बन से स्तभ्द सी रह गयी थी. कुछ पल बाद जब उनके होंठ अलग हुए, उसने शर्म से अपनी आँखें झुका ली. पर इक़बाल ने फिर से एक बार अपना मुँह उसके होंठों पर लगते हुए उसे चूमना शुरू कर दिया, इस बार और ज़ोर से, उसके नीचे के होंठ को चूसते हुए. शायद सुप्रिया ने आखिर कार इक़बाल के अंदर के मर्द को जगा hi दिया था.

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कुछ पल इक़बाल सुप्रिया के होंठों को चूसता रहा, जैसे वह उनके लिए कब से प्यासा हो. सुप्रिया भी उसे वापिस चूम रही थी, उसने इक़बाल के ऊपर के होंठ को हलके से चूमा. इक़बाल के सख्त हाथ उसकी गर्दन को कास के पकडे हुए थे.

वह सुप्रिया को पकडे पकडे बिस्तर की और ले गया और उसे बिस्तर पर धकेलते हुए उसके ऊपर आ गया. इक़बाल से सुप्रिया की आँखों में देखा, जैसे कह रहा हो की आगे जो होने वाला था वह पूरी तरह से उसका जिम्मेवार नहीं था. सुप्रिया गहरी सांसें लेते हुए उसकी और देख रही थी, वह भी आज पीछे नहीं हटने वाली थी.

इक़बाल सुप्रिया के गालों और गर्दन पर बरस पड़ा. सुप्रिया ने अपने हाथ उसके गले में दाल दिए, उसके चेहरे पर आज एक बड़ी सी मुस्कान थी.

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इक़बाल ने अपना मुँह सुप्रिया के कान के पास लेट हुए कहा - मैडमजी... आज तोह मैं आपको पूरी तरह अपना बना के रहूँगा... अगर मैं थोड़ा ज्यादा बहक जायु तोह आप मुझ पर कोई इल्जाम मत लगाना...

सुप्रिया का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, और इक़बाल का जिस्म उसके जिस्म पर अपना पूरा भार दाल रहा था. सुप्रिया ने धीरे से जवाब दिया - कोई इल्जाम नहीं लगयूंगी... अह्ह्ह्ह... मैं बस अब आपकी हूँ...

इक़बाल को हरी झंडी मिल गयी थी और वह बुरी तरह सुप्रिया पर टूट पड़ा, उसके चेहरे के हर हिस्से को चूमते हुए, जैसे कबसे इस पल का इंतज़ार कर रहा हो. कल जो अधूरा रह गया था आज वह उसे पूरा करने वाला था.

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इक़बाल ने अपनी जीब सुप्रिया के गालों पर हलके से फेर दी - मममम.... कितने मुलायम गाल है आपके.... और आपके होंठ... मममम...

सुप्रिया की सिसकियाँ निकलने लगी थी - अह्ह्ह.. ममम.... मममम... अह्ह्ह...

जैसे hi सुप्रिया ने अपना मुँह एक साइड किया, इक़बाल ने उसके के चेहरे के पास हाथ रखते हुए उसे सीधा करते हुए अपनी और किया.

इक़बाल तेज़ सांसें लेता हुआ सुप्रिया को चूमे जा रहा था - अह्ह्ह.... आह्हः.... मममम.... कभी ख्वाबो में भी नहीं सोचा था एक दिन आप मेरी होंगी...

सुप्रिया - अह्ह्ह... ममम... उफ़.... इक़बाल जी...

इक़बाल का मुँह सुप्रिया के गले और उसके नीचे उसकी गोरी छाती पर लगा दिया और वहां चूसने लगा. इतनी सर्दी में भी सुप्रिया के पसीने निकलने शुरू हो गए थे. उसके शरीर में एक अलग hi गर्मी पैदा हो रही थी आज.

सुप्रिया ने कसमसाते हुए करवट ली और इक़बाल उसके ठीक पीच हो गया. उसने पीछे से सुप्रिया के पेट पर हाथ रखा और वहां हलके हलके मसलने लगा. उसका मुँह अभी भी सुप्रिया के कानो के पास लगा हुआ था.

इक़बाल ने सुप्रिया के पेट को पकड़ते हुए अपनी और ज़ोर से खींचा. सुप्रिया के मुँह से एक ज़ोर की आह्हः निकल गयी. वह अपने पिछवाड़े पर कपडे के ऊपर से hi इक़बाल का मोटा लुंड महसूस कर सकती थी. उसके मोठे लम्बे लुंड के बारे में सोचते hi वह काँप उठी. उसने जोश जोश में इक़बाल को भड़का तोह दिया था, पर वह उसे कैसे संभालेगी.

इक़बाल ने सुप्रिया का चेहरा फिर से अपनी और किया और उसके होंठों को चूमने लगा. उसके दुसरे हाथ ने सुप्रिया की कुर्ती को थोड़ा सा ऊपर करके उसके पेट को नंगा उघाड़ दिया था.

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उनके बीच इतना दिनों से चल रही आँख मिचोली आज ख़तम होने वाली थी. अब तोह शायद वह चाहती भी तोह इक़बाल को नहीं रोक सकती थी.

इक़बाल ने सुप्रिया के नंगे पेट पर अपना हाथ फेरा. सुप्रिया का पूरा शरीर सिहर उठा. ठण्ड और गभरहट से उसके हाथों के बाल रोमांचित होते हुए खड़े हुए थे.

इक़बाल ने पीछे से सुप्रिया की गांड में एक धक्का मारा. इक़बाल का लुंड सुप्रिया को ज़ोर के चुभा - ईई... आह्हः....

इक़बाल ने अपना हाथ सुप्रिया की कुर्ती में अंदर घुसा दिया और उसके मम्मी पर जाकर रखा.

सुप्रिया उछाल सी पड़ी - सीईई... आठ...

सुप्रिया की हर सिसकी इक़बाल के अंदर की आग को और भड़का रही थी, उसने अपना दूसरा हाथ भी सुप्रिया की टाइट कुर्ती में घुसा दिया और पीछे से उसके मम्मो को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.

सुप्रिया - अह्ह्ह.. ोुछ.... इक़बाल जी... कुर्ती फैट जाएगी....

इक़बाल - कोई नहीं मैडमजी... नयी दिला दूंगा... वैसे आप साड़ी में तोह और भी अछि लगती है... कल मेरे लिए साड़ी पेहेनना न आप...

सुप्रिया - जी... आह्हः... उफ्फ्फ.... ममम....

इक़बाल के अंगूठे सुप्रिया की चूचियां को ब्रा के ऊपर से दबा रहे थे, मसल रहे थे. और उसकी बाकी उंगलियां उसके मम्मो पर लिपटी हुई उन्हें दबा रही थी.

सुप्रिया के पेअर अपने आप hi हिल रहे थे, उसे अपने ऊपर काबू पाना मुश्किल हो रहा था. कुर्ती की हलकी सी फटने की आवाज़ आयी. और इक़बाल के एक झटके में को सुप्रिया के ऊपर से हटा दिया. सुप्रिया ने एक बार पहले देखा था कैसे इक़बाल सेक्स के दौरान जंगली हो जाता था, जब वह करुणा के साथ सेक्स कर रहा था. आज शायद उसकी बारी थी इस जंगलीपन को झेलने की.

इक़बाल ने सुप्रिया के घुटने को नीचे दबाया और उसके पैरो पर चढ़ कर बैठ गया. उसने अपने एक हाथ से सुप्रिया के पेट को नीचे दबाया और फिर अपना मुँह वहां लगा लिया.

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इक़बाल के हाथ ब्रा के ऊपर से उसके मम्मो को राउंड रहे थे और सुप्रिया सिसकियाँ लेती हुई अपनी पीठ ुचा रही थी.

सुप्रिया - उफ्फ्फ... आठ.... अह्ह्ह... मममम...

इक़बाल - सच में आपको बोहोत फुर्सत में बनाया गया है... मममम....

सुप्रिया इक़बाल के हाथों से अपने मम्मो को बचती हुई किसी तरह से बिस्तर पर मुद गयी - अह्ह्ह्ह.... ोुछः...

इक़बाल ने तुरंत hi उसकी पीठ पर अपने होंठों से चूमना शुरू कर दिया - मममम.... मदमजीइ... आह्हः... आप इतनी हसीं है... मैं अब आज अपने आप को रोक नहीं पायूँगा...

सुप्रिया - ममममममम.... इक़बाल जी...

इक़बाल ने सुप्रिया की पीठ चूमते चूमते उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और सुप्रिया के बड़े से मम्मी ब्रा की कैद से आज़ाद हो गए. सुप्रिया की दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी.

इक़बाल ने सुप्रिया का पेट पकड़ते हुए उसे बिस्तर से थोड़ा सा ऊपर उठाया और ब्रा अपने आप hi नीचे बिस्तर पर गिर गयी. इक़बाल ने तुरंत hi सुप्रिया के नंगे मम्मो पर झपट्टा मारते हुए उन्हें अपने हाथों में दबोच लिया. कबसे वह इस पल का इंतज़ार कर रहा था.

सुप्रिया ने ज़ोर से सिसकी ली - उईईई... अह्ह्ह्ह.....

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इक़बाल अपने उंगलियों से सुप्रिया की चूचियां मसल रहा था. उसकी हलकी गुलाबी भूरी चूचियां क्या मस्त थी. आज तक उसने ऐसी चूचियां नहीं देखि थी. और सुप्रिया के रुई दार गोले, एक डैम सख्त और सॉफ्ट दोनों थे. वह अपने बड़े बड़े हाथों से उन्हें हलके दबा रहा था.

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सुप्रिया के अंदर की गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही थी. उसे उस दिन का सपना याद आ रहा था जब इक़बाल उस पर जंगलियों की तरह टूट पड़ा था. पर अब तक तोह इक़बाल ने अपने आप को काफी कण्ट्रोल किया हुआ था.

इक़बाल - उफ्फ्फ.. क्या गोर मम्मी है आपके...

सुप्रिया ने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा - और ज़ोर से... और ज़ोर से दबाइये न...

इक़बाल का हाथ जैसे उसके आदेश का इंतज़ार कर रहा हो, उसने एक डैम से अपनी मुट्ठी में उसके मम्मो को कास के बंद कर लिया. सुप्रिया की ज़ोर की चीख निकल पड़ी.

इक़बाल - आपके मम्मी इतने मुलायम... उफ्फ्फ... ये पहले से hi इतने बड़े थे क्या...

सुप्रिया - अहह... ोुछ... हाँ शायद...

इक़बाल - मैं इन्हे चूसना चाहता हूँ...

इक़बाल ने सुप्रिया की हाँ का इंतज़ार नहीं किया. उसने उसे बिस्तर पर हलके से लिटाया और उसके ऊपर आते हुए उसके मम्मो पर अपना मुँह लगा लिया.

वह एक बचे की तरह सुप्रिया के मम्मो को चूसने लगा था. बिलकुल सुप्रिया की सपने की तरह.

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अपडेट 96

काफी देर तक इक़बाल सुप्रिया के ऊपर लेता हुआ उसके मम्मो को छत्ता रहा. कभी उसकी चूचियों को अपने होंठों में दबा लेता, कभी उन्हें हलके से अपने होंठों से खींच लेता, और कभी उन्हें चूस लेता. उसके मुँह में तोह आज ऐसे अंगूर लग गए थे जिनका उन्हें कबसे इंतज़ार था.

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सुप्रिया की सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थी. सुप्रिया थोड़ी घबराइए हुई थी पर इक़बाल अभी तक उसके टाक पूरी तरह जंगली नहीं हुआ था.

सुप्रिया उत्तेजित होते अपने बालों में अपने हाथ फेर रही थी, वह बीच बीचे में मचलती हुई अपनी पीठ उचका लेती - मममम... ुह्ह्ह्ह.. मममम... उफ्फ्फ....

इक़बाल - मैडमजी... ममम.... कबसे आपके मम्मी चूसने का मैं था मेरा...

सुप्रिया जाने क्यों उसकी बातें सुन कर और भी गरम होने लगी थी. जाने कबसे इक़बाल उसके साथ ये सब करना चाहता था? क्या तब से जब वह लखनऊ में रहती थी, किसी और की पत्नी थी? उफ्फ्फ.... उस समय क्या वह एक वॉचमन से चुद जाती... तब भी तोह उसे जाने क्यों इक़बाल को रिझाने में एक अजीब सा मज़ा आता था. क्या इक़बाल मैडमजी बोलते हुए उसे किसी और की बीवी की तरह सोच रहा था? पता नहीं क्यों ये सोचते hi उसके निप्पल और भी सख्त हो गए, और इतनी ठण्ड में भी उसके पसीने निकल रहे थे.

इक़बाल उसके मम्मो और पेट पर उभरती पसीने की हर बूँद को चूस रहा था. वह अपनी मैडमजी के पानी के एक कतरे को भी जाया नहीं करना चाहता था.

इक़बाल - मैडमजी... कभी किसी ने आपके मम्मी इतनी देर तक... इतने आराम से चूसे है? ममममम... बोहोत संभालना पद रहा है मुझे अपने आप को...

सुप्रिया - उफ्फ्फ... अह्ह्ह.. इक़बाल जी... प्लीज मुझे मैडमजी कहना बंद कीजिये... बोहोत अजीब सा लग रहा है...

इक़बाल उसके मम्मो को आम की तरह चूसे जा रहा था - मममम... बताइये न... मुझे ये सब करते हुए.... गन्दी बातें करना ाचा लगता है... और आप तोह बिलकुल चुप चाप लेती है... मज़ा नहीं आएगा ऐसे...

सुप्रिया - उफ्फ्फ... अह्ह्ह.... आप के इलावा मैं किसी और के बारे में सोचना भी नहीं चाहती...

इक़बाल - फिक्र मत कीजिये... आज के बाद आप किसी और के बारे में कभी सोच भी नहीं पाएंगी... मममम....

इक़बाल ने फिर से सुप्रिया के मम्मो को ज़ोर से चूस लिया.

सुप्रिया - ममममम..... उउउउउउ.....

इक़बाल - मैंने अपनी ज़िन्दगी में बोहोत औरतो को छोड़ा है... पर आज मैं दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान हूँ आपको पाकर... ममममम...

सुप्रिया को तोह बस करुणा और सीमा के बारे में पता था, पता नहीं इक़बाल और किस किस के साथ सेक्स कर चूका था. काश उसने इक़बाल से ये पहले पूछ लिया होता. वह भी तोह आज तक तीन मर्दो के साथ सेक्स कर चुकी थी, और शायद 2 और मर्दो के लुंड उसने चूसे थे. वह भी कोई दूध की धूलि नहीं थी. उफ्फ्फ.... जाने क्यों वह सारे लुंड इस समय उसकी आँखों के आगे तैर रहे थे. वह तोह भूल भी गयी थी की इक़बाल का लुंड दीखता कैसा था.

सुप्रिया - अह्ह्ह.... कौन थी... वह औरते... ममम....

इक़बाल - अकेली औरते.... जिन्ही जिंदगी में नामर्द पति मिले हुए थे... कुछ तोह आपकी hi बिल्डिंग में रहती थी... पर सच मानिये... आह्हः... उनके साथ मुझे कभी ऐसा एहसास... आह्हः... नहीं हुआ... जो आपके साथ... आज... मैडमजी....

सुप्रिया - अह्ह्ह... प्लीज... मुझे सुप्रिया बुलाइये न... और उनसे मेरी तुलना क्यों कर रहे है... अह्ह्ह... मैं तोह आपकी... बीवी हूँ न...

इक़बाल - हाँ... माफ़ कीजिये... जाहिल हु न... आपकी बराबरी तोह कोई नहीं कर सकता... मैं अक्सर भूल जाता हूँ की... अह्ह्ह... आप मेरी बीवी है... सुप्रिया...

इक़बाल के मुँह से अपना नाम सुनकर सुप्रिया की छूट एकदम हरकत में आ गयी, और उसके गाल शर्म से लाल हो गए. उसने धीरे से कहा - आप नहीं... तुम कहो न... मममम..... आपसे उम्र में छोटी भी हूँ...

इक़बाल - मैडमजी... सुप्रिया..... ठीक है... ममम.... जैसा आप... जैसा तुम कहो... तैयार हो न... अब बस और नहीं रुका जा रहा... मेरा लोढ़ा दर्द करने लगा है...

सुप्रिया ने घबराते हुए सर हिलाया. शायद वह पल आने hi वाला था जिसका उसे डर था. इक़बाल सुप्रिया के ऊपर से खड़ा हुआ और उसने अपना पजामा और अंडरवियर जल्दी से नीचे सरकाया. अंदर से उसका तना तन खड़ा लुंड देख कर सुप्रिया के तोह होश hi उड़द गए.

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उसे याद था की इक़बाल का लुंड बड़ा था, पर इतना बड़ा... और इतना मोटा भायक सा दीखता हुआ... लुंड की नसे बुरी तरह तानी हुई थी. इक़बाल ने अपना लुंड सहलाया, और वह ज़ोर से फड़कने लगा.

सुप्रिया ने डर के अपनी आँखें बंद कर ली - ुउउइइइइ... ये तोह बोहोत बड़ा है... नहीं.....

इक़बाल के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान आ गयी - बड़ा है... तभी तोह आपको पूरा एहसास देगा... पर डरिये नहीं... सब हो जायेगा... बस एक बार थोड़ा सा दर्द होगा... उसके बाद मज़ा hi मज़ा...

सुप्रिया बुरी तरह घबरा गयी थी, उसने आँखें मीचते हुए लुंड की और फिर से देखा - नहीं नहीं... आप इसे अंदर hi कर लीजिये न... किसी और दिन करते है बाकी सब...

इक़बाल ने सुप्रिया के पास बैठते हुए उसके गाल पर आराम से हाथ फेरा - डरो मत... मैंने कहा न... मुझे बोहोत तज़ुर्बा है... बोहोत आराम से करूँगा सब... इतनी आगे आ चुके हम... अब इसे अंदर जाने के लिए न बोलो...

सुप्रिया का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, इक़बाल पूरा नंगा उसके पास अपने घुटनो पर बैठा था. उसका बड़ा सा लुंड हवा में उसके ठीक ऊपर झूल रहा था. सुप्रिया ने डर के मारे न में सर हिलाया, वह उसके लुंड को नहीं झेल पायेगी.

इक़बाल ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसे प्यार से पुचकारा - तुम भी तोह एहि चाहती थी न... हमारे बीच आज सब हो जाये... अब डरो नहीं...

सुप्रिया की आँखों में डर काम नहीं हुआ था, पर उसने किसी तरह से हाँ में सर हिलाया. वह भी तोह एहि चाहती थी की आज वह पूरी तरह से एक दुसरे के हो जाये.

इक़बाल ने फिर से सुप्रिया के मुलायम गालों पर हलके से हाथ फेरा. और फिर वह अपने दोनों घुटने सुप्रिया के पैरो के दोनों और छोड़े करते हुए उसके पैरो पर बैठ गया. सुप्रिया ऊपर से तोह पूरी नंगी थी और उसने अपने हाथ अपनी पजामी पर रखे हुए थे जैसे वह इक़बाल को रोकना चाहती हो उन्हें उतारने से.

इक़बाल ने उसके हाथों को हलके से पकड़ा और उसकी पजामी और पंतय को एक hi झटके में पूरा नीचे सरका दिया. सुप्रिया एक डैम से हक्की बक्की रह गयी, उसे तोह रियेक्ट करने का भी टाइम नहीं मिला.

सुप्रिया का अंदर का मामला देख कर तोह इक़बाल का लुंड और भी कड़क हो गया और उसकी आँखें फटी रह गयी है. जन्नत से उत्तरी हुई हूर मिल गयी थी उसे.

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सुप्रिया के नीचे का गोरा हिस्सा और झात के बाल इक़बाल को साफ़ दिखने लगे थे. सुप्रिया के नीचे के बाल हलके हलके भूरे, उसकी बाकी की त्वचा की तरह एक डैम मखमली से लग रहे थे. उस पर उसका गोरा बदन और गोरी जंघे, उसका नीचे के हिस्से को और भी सुन्दर बना रहे थे. कोई निशाँ कोई कालिख नहीं थी वहां.

सुप्रिया ने अपने पैरो को पास लाते हुए अपनी गुप्त गुफा के द्वार को बंद करने की कोशिश की. जो चाबी इक़बाल के पास थी, वह तोह उसके द्वार को तहस नहस hi करने वाली थी. उसने अपनी छूट को उसकी नज़र से ढकने के लिए अपना हाथ नीचे लगाया.

पर इक़बाल ने जल्दी से सुप्रिया की झाटों में अपनी उंगलियां घुसते हुए उन्हें हलके से मसलना शुरू कर दिया. सुप्रिया बुरी तरह काँप गयी और उसने इक़बाल की उंगलियां पकड़ने की कोशिश करि.

इक़बाल के लिए ये पहली बार नहीं था की कोई लड़की उसका लुंड देख कर इतनी बुरी तरह घबराई हुई हो. और उसकी मैडमजी... वह इतनी प्यारी, इतनी भोली थी. वह अपने अंदर के जानवर को किस तरह रोके हुए था, वह hi जानता था. पर अब इतनी आगे पहुंच कर न तोह वह अब रुक सकता था और न रुकना चाहता था. सुप्रिया उसकी बीवी थी और आज वह उससे अपना हक़ लेकर hi रहेगा.

इक़बाल ने अपने दांत भींचे और सुप्रिया की झांटों के नीचे के हिस्से को मसलते हुए उसके बालों को हलके से खींचा - कितने मुलायम है आपके नीचे के बाल भी...

सुप्रिया दर्द से करहाई - अह्ह्ह्हह.... नहीं नहीं... आराम से... इन्हे खींचे नहीं... उफ्फ्फ...

इक़बाल ने सुप्रिया की आँखों में देखते हुए कहा - सच में... कभी सोचा भी नहीं था की किसी औरत के नीचे के बाल ऐसे बाल भी हो सकते है...

इक़बाल अपनी उँगलियों से उसके नीचे के बाल मसल रहा था, पर वह उलझे हुए बाल उसकी उँगलियों से लगते हुए थोड़े थोड़े खींच रहे थे.

सुप्रिया इक़बाल से आँखें मिलाने के लायक नहीं थी - सीईई... ईई... मैं बस इन्हे हटा नहीं पायी...

इक़बाल - नहीं नहीं... इन्हे हटाना क्यों... बोहोत hi कमल के है ये तोह...

इक़बाल अपना मुँह नीचे लाया और सुप्रिया के बालों पर चूम लिया.

सुप्रिया ने ज़ोर की सिसकी ली और अपनी गांड थोड़ी सी ऊपर उठा ली - अह्ह्ह... वहां मत छुइए न... अजीब सा लगता है...

इक़बाल ने अपना पूरा हाथ उसके बालों में घुसा दिया और एक साइड मसलते हुए उन्हें खींचता चला गया. दर्द के मारे सुप्रिया की चीख निकल गयी. पर ये दर्द भी जाने क्यों मीठा सा लग रहा था.

इक़बाल - मैं बस आपका नीचे का हिस्सा थोड़ा खोल रहा हु ताकि आप मेरा लोढ़ा अचे से ले पाए...

इक़बाल आगे होता हुए सुप्रिया और अपना हाथ उसकी कमर के नीचे लगते हुए उसे तोह थोड़ा ऊपर उठा लिया. उसकी पत्नी सी नाज़ुक कमर उसके बड़े से हाथ में बड़ी आराम से सम्भली हुई थी. सुप्रिया का मुँह इक़बाल के मुँह के ठीक सामने था. उसने उसके होंठों को फिर से ज़ोर के चूमा और फिर उसकी गर्दन से होते हुए उसके मम्मो और पेट को चूसने लगा. अब वह अपने आप को और कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था.

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इक़बाल ने सुप्रिया के पेट पर मुँह लगते हुए उसकी नाभि को चूसना शुरू कर दिया. उसका कुंड नीचे सुप्रिया की छूट के ठीक सामने लहरा रहा था और बहार के हिस्से से धीरे धीरे टकरा रहा था. सुप्रिया बुरी तरह तड़प रही थी और जाने अनजाने अपने शरीर को खुद hi ऊपर नीचे करने लगी थी ताकि इक़बाल का लुंड उसकी छूट में चला जाये.

ये देखते hi इक़्बा की आँखों में चमक आ गयी, उसकी मैडमजी उसका लुंड लेने के लिए पूरी तरह तैयार थी अब, उसने उन्हें बुरी तरह गरम कर दिया था. इक़बाल ने अपने हाथ धीरे से सुप्रिया की जाँघों पर रखे और उसके पैरो को हलके से अलग करते हुए खोला. उसे आखिर कार सुप्रिया की छूट का नज़ारा हो hi गया था. नीचे उसका हिस्सा पूरा गोरा और गुलाबी पड़ा था, जैसे आज तक उसे किसी ने छुआ भी न हो. जाने कैसे नामर्दो से पाला पड़ा था मैडमजी का जो उसे सही से छोड़ भी नहीं पाए, इक़बाल के मैं में ख्याल आया.

सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी, और हाथ थार था रहे थे - इक़बाल जी... सुनिए ज़रा...

इक़बाल - हाँ... कहिये न... ममम... आपको देख कर ऐसा लग रहा है... जैसे मुझे एक कुंवारी... दुल्हन मिल गयी हो... कभी किसी से सही से छोड़ा भी न हो...

सुप्रिया हाँफते हुए बोली - नहीं... नहीं... अह्ह्ह... आपको पता है न... जब हमारी शादी हुई थी तोह यहाँ की औरतो ने नीचे एक लेप लगाया था जिससे.... वह शायद नीचे थोड़ी बंद हो गयी है...

इक़बाल - हाँ... वह... यहाँ का रिवाज़ है... कासी हुई छूट छोड़ने में बोहोत मज़ा आता है...

सुप्रिया हिचकिचाते हुए बोली - पर आपका... लुंड... इसे बुरी तरह खोल देगा...

सुप्रिया के मुँह से ये सुनते hi इक़बाल को और भी मज़ा सा आ गया, आखिर सुप्रिया भी बोलने लगी थी - कोई नहीं, खुल भी गयी न तोह भाभी से बोल कर फिर से लेप मंगवा दूंगा तुम्हारे लिए... अब तैयार हो जायो...

सुप्रिया ने हाथ आगे बड़ा कर इक़बाल का हाथ पकड़ने की कोशिश करि. उफ्फ्फ वह पागल थी क्या जो इक़बाल को उसने इतना उकसा दिया था. अब तोह उसे उसका मोटा लुंड झेलना hi पड़ेगा. उफ्फ्फ..... वह तोह मर्डर hi जाएगी.

इक़बाल ने सुप्रिया के पतली पतली टांगो को अपने हाथों से पकड़ा और हवा में ऊपर की और कर दिया - घबरायो नहीं... सब हो जायेगा... आराम से... ज्यादा झटपटायोगी तोह चोट लग सकती है नीचे...

सुप्रिया की नंगी छाती ऊपर नीचे हो रही थी, उसने अपने दांत कास के आपस में जोड़ लिए. वह अपना सर डर के मारे न में हिला रही थी.

इक़बाल ने उसके पैरो को पकड़ते हुए अपनी और खींचा और अपना मोटा लुंड उसके पेट पर रख दिया.

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लुंड इतना मोटा और लम्बा था की लगभग सुप्रिया के मम्मो तक पहुंच रहा था. उसकी मोती से टोपी सुप्रिया की आँखों के ठीक सामने. सुप्रिया ने डर के मारे अपना मुँह फेर लिया और दूसरी और मुँह कर लिया.

इक़बाल ने सुप्रिया की टांगो को खोलते हुए अपने पैरो से और भी छौड़ा कर दिया. उसे पता था की इस तरह से उसे सुप्रिया के काफी अंदर तक लुंड डालने का मौका मिलेगा. सुप्रिया के कापते हुए चेहरे और होंठों को देख कर उसका मैं कर रहा था की वह अभी सुप्रिया के मुँह में अपना लुंड दाल दे, पर नहीं, आज उसे पहले मैडमजी को अपना बनाना था.

सुप्रिया ने अपने हाथ इक़बाल की छाती पर रखा - इक़बाल जी... आपका ये बोहोत बड़ा है... आप... कुछ लगा लीजिये इस पर... तेल... वेसिलीन...

इक़बाल ने अपने हाथों पर थूका और अपने लुंड को अपने थूक से मलने लगा - ये लीजिये... होगया चिकना... अब चला जायेगा ये... आप बस घबराइयेगा नहीं..

लुंड का आकर देख कर कोई कैसे न घबराता. सुप्रिया की हालत ख़राब होती जा रही थी, अब बस जो होना था वह उसके बस में नहीं था. उसे hi तोह जूनून सवार हुआ था इक़बाल को अपना बनाने का. जाने क्यों इस वक़्त उसकी छूट भी उसका साथ छोड़ रही थी, और वह अपने नीचे हल्का सा गीलापन महसूस कर पा रही थी. उफ्फ्फ....

इक़बाल ने अपना लुंड सुप्रिया के पेट और नाभि पर घिसना शुरू किया, सुप्रिया महसूस कर पा रही थी वह कितना सख्त था इस वक़्त. सुप्रिया की घबराई हुई आँखें इक़बाल की और देख रही थी. इक़बाल ने हलके से मुस्कुरा कर उसका हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रख दिया और उसके हाथ को पकडे रखा.

उसके लुंड पर हाथ रखते hi सुप्रिया के बदन में बिजली सी दौड़ गयी. इतनी मोटा, इतना कड़क लुंड, और लुंड के अंदर थरथराहट सी हो रही थी. सुप्रिया ने अपना दूसरा काँपता हुआ हाथ इक़बाल की जांघ पर रखा, वह कुछ भी... इस समय कुछ भी ज़ोर के पकड़ना चाहती थी.

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इक़बाल ने उसकी बेचैनी को समझते हुए कहा - आपको और इंतज़ार करवाना सही नहीं होगा...

इक़बाल थोड़ा सा नीचे सरका और अपने लुंड को सुप्रिया की छूट के द्वार के पास टिका दिया, और वहां बहार हलके से अपने लुंड को हिलने लगा.

सुप्रिया ने आने वाले दर्द को पहले से hi महसूस करते हुए अपनी आँखें मीच ली - उउउउउउउउ..... मममम......

इक़बाल को हसी सी आ गयी - अभी तोह अंदर भी नहीं गया...

सुप्रिया ने आँखें बंद कर ली, वह इस लुंड को अपनी छूट के अंदर जाता नहीं देख सकती थी. उसने डर के मारे अपनी दोनों जाँघों को कास के पकड़ कर अपनी और ऊपर की खींच लिया.

उसके ऐसा करते hi सुप्रिया की गोरी गांड इक़बाल को दिखने लगी. उसने उन पर अपने काले हाथ फेरे - आपकी गांड तोह बोहोत hi गोरी है... मममम.... और मुलायम भी...

सुप्रिया - ममममम… अह्ह्ह… इक़बाल जी...

इक़बाल - पहले छूट को hi छोड़ लू... फिर गांड को देखते है...

इक़बाल ने लुंड को छूट के द्वार पर थोड़ा सा घिसा और सुप्रिया के पुसी लिप्स बहार की और थोड़े से खुल गए. इक़बाल वहां का गीलापन महसूस पा रहा था.

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वक़्त आ गया था इस लुंड को सुप्रिया को अंदर डालने का. इक़बाल ने अपने आप को सहारा देने के लिए सुप्रिया के पैरो को पकड़ लिया और अंदर की और धक्का मारा. छूट बेहद टाइट थी और लुंड अंदर जाने का नाम hi नहीं ले रहा था. इक़बाल ने अपने हाथ से पकड़ते हुए अपनी लुंड की टोपी को किसी तरह छूट में घुसाया.

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सुप्रिया दर्द के मारे चीख उठी और उसकी आँखें पूरी खुल कर बड़ी हो गयी - उईईईईई माआ….. फ्फ्फ्फफ्फ्फ़…. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…

लुंड तोह अभी ज़रा सा अंदर गया था, बस उसका ऊपर का टोपा और सुप्रिया से झेला नहीं जा रहा था. वह बुरी तरह झटपटाने लगी.

इक़बाल भी सुप्रिया की टाइट छूट को महसूस कर पा रहा था. शायद उसे और ज़ोर से धक्का मारना पड़ेगा लुंड को अंदर घुसाने के लिए. उसका लुंड खुद hi छूट से बहार निकल गया.

इक़बाल को अपनी नयमकाबी पर गुस्सा सा आने लगा था - अह्ह्ह्हह…… बोल रहा हूँ न... ज्यादा हिलो नहीं… थोड़ा और तेज़ से करना पड़ेगा...

इक़बाल ने सुप्रिया के पैरो को कास के पकड़ा और लुंड को इस बार थोड़ा और तेज़ी से अंदर डालने की कोशिश करि. लुंड थोड़ा और अंदर गया पर बोहोत ज्यादा नहीं.

सुप्रिया ज़ोर के चीखी पड़ी - अग्घहहह… अह्हह्ह्ह्ह…. इक़बाल जी इसे बहार निकालूओ….. ये नहीं जा पायेगा अंदर….. उफ्फ्फफ्फ्फ़…

इक़बाल - जायेगा… आप झटपटायो नहीं… जायेगा ये… पूरा जायेगा अंदर...

सुप्रिया दर्द के मारे अपना मुँह बना रही थी और उसने अपने बात अपने मम्मो पर रखते हुए उन्हें पकड़ लिया.

इक़बाल के मैं में गुस्से में ख्याल आया, साली के मुँह से गीला करवा लेना चाहिए था पहले अचे से. नहीं... नहीं... ये उसकी मैडमजी थी, उसे अपने जानवर पर काबू रखना था.

सुप्रिया ने दर्द में अपनी आँखें बंद कर ली और अपने दांतों में अपने होंठ दबा लिए. उफ्फ्फ.... उसके नीचे आग लगी हुई थी, ये लुंड अंदर नहीं जाने वाला था...

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इक़बाल ने एक बार फिर लुंड बहार निकाला और फिर से डालने की कोशिश करि पर लुंड फिर से अटक गया. सुप्रिया दर्द में चिल्लाई, उसके नीचे का मामला फाटे जा रहा था, वह इस लुंड को नहीं झेल सकती थी.

इक़बाल आगे आते हुए सुप्रिया के ऊपर झुक गया और अपना भार सुप्रिया पर दाल दिया. उसने अपने दोनों हाथ बिस्तर पर रखे और डैम लगते हुए सुप्रिया के अंदर अपना लुंड धकेला.

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लुंड थोड़ा और अंदर गया और सुप्रिया की चीख उसके गले में hi अटक गयी. वह बुरी तरह काँप रही थी. उसके नीचे का छेड़ पता नहीं कितना बड़ा कर दिया इक़बाल ने अभी अभी में. उसने कांपते हुए इक़बाल की बाहों को कास के पकड़ लिया और अपने आप को ऊपर खींचते हुए उससे गले लगने की कोशिश करि.

पर इक़बाल अपना लुंड निकलता हुआ थोड़ा सा पीछे हुए और फिर दुबारा ज़ोर से लुंड को अंदर घुसा दिया. इस बार लुंड पहले से थोड़ा सा जल्दी अंदर चला गया.

सुप्रिया की अटकी हुई चीख ज़ोर से निकली - ैय्यियीईइ... उउउउउउ.... ाःह अहहहहह हहहा.

इक़बाल के चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान आ गयी, उसकी मैडमजी की छूट आखिर उसकी हो hi गयी थी, पर अभी तोह उसे उन्हें अचे से छोड़ना था.
 
अपडेट 97

इक़बाल ने एक बार फिर से अपने लुंड को बहार निकाला और तेज़ी से सुप्रिया की छूट में वापस घुसा दिया, हर बार लुंड थोड़ा और अंदर जाने लगा.

सुप्रिया की हर चीख के साथ उसके नाख़ून इक़बाल के हाथों पर गड रहे थे, वह बुरी तरह काँप रही थी - उह्ह्ह हूहः... ममम... हहह... मममम... अह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ....

इक़बाल - मैडमजी.... सुप्रिया.... मममम.... क्या मस्त छूट है आपकी... हहहह... कभी इतनी कासी हुई छूट नहीं छोड़ी... अह्ह्ह...

सुप्रिया - इक़बाल... इक़बाल जी.... नहीं... निकाल लीजिये इसे बहार... मैं नहीं झेल पा रही... अहह....

इक़बाल - मैं तेज़ी से अंदर बहार करता हु... खुल जाएगी छूट... मज़ा आएगा आपको...

सुप्रिया - मुझे बोहोत डर लग रहा है.... अह्ह्ह...

इक़बाल सुप्रिया की और आगे झुका और उसने सुप्रिया के हाथों को अपने हाथों से जकड लिया. वह अपने लुंड को धीरे धीरे उसकी छूट में अंदर बहार धकेलने लगा.

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सुप्रिया - अह्ह्ह्ह.... ैय्यियी... नहहीइ... ऊऊह्ह्ह

इक़बाल - मैं थोड़ी तेज़ करता हूँ... और मज़ा आएगा... ुह्ह्ह्ह....

इक़बाल ने एकदम से अपनी स्पीड तेज़ कर दी और ज़ोर ज़ोर से सुप्रिया के अंदर झटके मारने लगा. इक़बाल ने झुक कर उसके कंधो को कास के पकड़ लिया था ताकि वह हिले न. सुप्रिया बुरी तरह काँप रही थी और उसकी चीखें निकल रही थी. उसने अपने हाथों से बिस्तर को ज़ोर से थपथपाया, आज तक कभी वह ऐसे नहीं चूड़ी थी. इक़बाल तोह एक hi मिनट में 0 से 50 तक पहुंच गया था.

सुप्रिया की आँखें ऊपर को चढ़ आयी.

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सुप्रिया - इक़्ब.... इक़्बाललललल.. जजी... अह्ह्ह्ह... ऊऊह्ह्हह्ह....

इक़बाल का सब्र का बांड भी टूट गया था - सुरपिया...... मेरी जान... अह्ह्ह... अह्ह्ह.... छूवूँत तेरी.... अह्ह्ह्हह.....

सुप्रिया झटपटा कर इक़बाल को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी, पर इक़बाल तोह अब पूरी स्पीड से उसे छोड़ने लगा था. इक़बाल का लुंड सुप्रिया को अंदर तक उसे महसूस हो रहा था, उनके छोड़ने से कमरे में सुप्रिया की सिसकियों के साथ थप थप थपाथप की आवाज़ आने लगी थी.

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सुप्रिया ने अपने पेअर इक़बाल के पीठ पर लपेट लिए थे और इक़बाल ने अपना लुंड उसकी छूट में फसा के उसकी पीठ को ऊपर उठा लिया. बोहोत ताकत चाहिए थी ऐसा करने के लिए.

हर धक्के से सुप्रिया की छूट और भी खुल रही थी और अब तोह उसे भी एक अजीब सा मज़ा आने लगा था. धीरे धीरे उसकी दर्द भरी चीख एक ऑर्गैस्मिक आनंदमय आवाज़ में तब्दील हो रही थी - अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.... अह्ह्ह्ह.... अह्ह्ह....

सुप्रिया की आवाज़ में बदलाव सुनते hi इक़बाल का लुंड और भी खूंखार तरीके से अंदर बहार होने लगा था, उसकी मैडमजी अब अपनी मर्ज़ी से ले रही थी उसका लुंड.

दोनों के शरीर पसीने से टर्र हो चुके थे, और इक़बाल को आज तक कभी किसी ने इतनी म्हणत नहीं करवाई थी अपनी छूट खुलवाने में. आज तोह वह इसका हिसाब पूरा करके hi रहेगा. उसकी गति थोड़ी सी काम हुई और वह थोड़ा सा ऊपर उठा.

इक़बाल - मैडमजी... सुप्रिया... अह्ह्ह ... अह्ह्ह... थोड़ा सहारे के लिए बाल पकड़ने पड़ेंगे...

सुप्रिया - अह्ह्ह... जो मर्ज़ी... जो मर्ज़ी कर लो आप... ऊऊह्ह्ह्ह...

इक़बाल ने हाथ आगे बड़ा कर सुप्रिया के बालो का एक गुच्छा अपनी मुठी में भरा और अपना लुंड फिर से उसकी छूट में घुसा दिया. सुप्रिया ने अपने पैरो के नीचे अपनी गांड पर हाथ लगते हुए अपने पेअर हवा में कर लिए ताकि इक़बाल उसे अचे से छोड़ पाए. उफ्फ्फ... उसकी ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई थी.

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इक़बाल थकने का नाम नहीं ले रहा था और सुप्रिया को ज़ोर ज़ोर से चोदे जा रहा था. कभी वह सुप्रिया की शकल देख कर अपनी गति थोड़ी धीरे कर लेता और कभी तेज़.

इक़बाल - अह्ह्ह्ह.... ुह्ह्ह्ह.... बहनचोद.... अह्ह्ह्ह... छूवूँत मारूऊ... आह्हः...

सुप्रिया - ममममम... आह्ह्ह्ह... उउउउउ... नही....

अब तोह सुप्रिया का छेड़ इक़बाल के लुंड को अचे से लेने लगा था, शायद बस उसे ऐसे hi लुंड का तोह इंतज़ार था अपनी जिंदगी में.

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हर धक्के से अभी भी सुप्रिया की आँखें ऊपर को चढ़ के आ रही थी, और जैसे hi एक बार इक़बाल का लुंड उसकी छूट से निकला वह उलटी हो कर लेट गयी, वह और नहीं झेल सकती थी इस लुंड को.

पर इक़बाल उसे कहाँ छोड़ने वाला था, वह ठीक उसके ऊपर आ कर लेट गया और अपने हाथ उसकी छाती के नीचे दबाते हुए उसके मम्मो को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. उसका बड़ा सा लुंड सुप्रिया की गांड से टकरा रहा था.

इक़बाल - अह्ह्ह्ह.... उह्ह्ह... मज़ा आ रहा है न... कभी ऐसा मज़ाआ आया है तुम्हे पहले.... आठ...

सुप्रिया हांफ रही थी - उफ्फ्फ.. उफ्फ्फ.. हेतु.. अह्ह्ह.. आह्हः... इक़्बाआल... अह्ह्ह...

इक़बाल के अंदर का जानवर पागल हो चूका था - इक़बाल जी से इक़बाल पर आ गयी... बहनचोद...

उसने सुप्रिया की कमर पर हाथ रखते हुए उसकी गांड को थोड़ा ऊपर उठाया, और पीछे से उसकी छूट में फिर से अपना लुंड दाल दिया. पीछे से सुप्रिया की गांड और भी फैली हुई दिख रही थी, जो उसे और भी मस्त लग रही थी. ये गांड भी तोह आखिर उसकी hi थी अब.

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इस तरह से तोह लुंड उसके और अंदर तक जाने लगा था और सुप्रिया लुंड को अंदर से अपने पेट तक टकराता महसूस कर सकती थी - ऊऊह्ह्ह्ह... उह्ह्ह.. मम्मी.... आआह्ह्ह... धीरे थोड़ा...

इक़बाल ने सुप्रिया का मुँह अपनी और मोड़ा - धीरे में क्या मज़ा आएगा... अह्ह्ह... ममममम....

इक़बाल फिर से ज़ोर से सुप्रिया के ऊपर छडा हुआ उसे छोड़ने लगा. सुप्रिया की आँखें ऊपर को छड़ी और वह अपने अंदर जल से फव्वारे को बहार निकलता महसूस करने लगी. इतना महीनो से जो उसने अंदर दबा कर रखा हुआ था वह सब बहार आने लगा था. उसका सारा पानी इक़बाल के लुंड पर लगता हुआ उसके पैरो और गांड पर बहने लगा.

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सुप्रिया बुरी तरह थक चुकी थी, पर इक़बाल तोह अभी भी रुकने का नाम hi नहीं ले रहा था. उसने अभी भी उसके बाल पकडे हुए थे. सुप्रिया थक के बीएड पर चूर हो कर गिर पड़ी, पर इक़बाल ने पीछे से उसके पेअर छोड़े किये और अपना लुंड फिर से उसके अंदर दाल दिया.

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सुप्रिया - उफ्फ्फ... क्या खाया है आपने आज... अह्ह्ह... उउउउउउ..... बस... अहह...

इक़बाल - इतने में थक गयी... मैं तोह घंटो छोड़ सकता हूँ... पर सच में तुमने भी काफी थका दिया है मुझे आज... आह्हः....

सुप्रिया - ऊऊह्ह्ह.... इक़बाल जे..... अह्ह्ह...

इक़बाल - सुप्रिया... मेरी जान... कबसे इंतज़ार था मेरे लुंड को तेरा.... अह्ह्ह्ह... अभी तोह छूट hi छोड़ी है... और भी जगह देना है इसे....

सुप्रिया - ऊऊह्ह्ह... नहीं नहीं.... आज नहीं... उह्ह्ह मैं मर्डर जयुंगी... उह्ह्ह... मम्मी...

इक़बाल - मरने नहीं दूंगा... अभी तोह बोहोत चुदाई बाकी है... ुह्ह्ह्ह.... बहनचोद....

सुप्रिया - उफ्फफ्फ्फ़.. फुकककक... आह्हः...

इक़बाल अपना आप खो चूका था - और सुना मुझे अंग्रेजी गालिया .... ाचा लगेगा मुझे....

सुप्रिया दर्द में चीख उठी - फुककककक... अह्ह्ह.... बास्टर्ड....

इक़बाल - ुह्ह्ह्ह.... तेरे उस नामर्द पहले पति से तोह लाख गुना ाचा हूँ न मैं... और तेरे उस भोस्डिके आशिक़ से? उससे बता... उससे भी ाचा छोड़ता हूँ न....

जाने क्यों इक़बाल की ये गन्दी बातें सुप्रिया को मज़ा क्यों दे रही थी, उसे छोड़ते हुए और भी मज़ा आ रहा था.

सुप्रिया - ऊऊह्ह्ह्ह.... आप से बेहतर कोई नहीं हो सकता.... ोुर्र... ऑर्डर ज़ोर से छोड़ो न... अह्ह्ह... अह्ह्ह....

अपनी तारीफ सुनते hi इक़बाल को और जोश आ गया और उसने सुप्रिया के पैरो को नीचे से पकड़ा और उन्हें हवा में थोड़ा ऊपर करते हुए उसकी गांड को हवा में कर दिया. सुप्रिया ने अपने हाथों से अपने आप को बिस्तर पर सहारा दिया और इक़बाल के लुंड को फिर से सहने लगी.

इक़बाल - सुप्रिया.... सुप्रिया.... मेरे टट्टे महसूस हो रहे है न गांड पर...

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह.... हैं... ुह्ह्ह्ह...

इक़बाल बेरहमी से सुप्रिया को चोदे जा रहा था. सुप्रिया तोह अब तक शायद दो बार झाड़ चुकी थी. पर इक़बाल ने झड़ने का नाम नहीं लिया था.

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थकान के मारे सुप्रिया की आँख लगने को आयी थी, इक़बाल ने उसके पेअर छोड़े और वह एक पल के लिए बिस्तर पर नीचे गिर गयी पर दुसरे hi पल इक़बाल ने उसे पेट के सहारे ऊपर उठाया, और खुद भी बिस्तर पर आधा खड़ा हो गया. वह पीछे से किसी कुटिया की तरह उसे छोड़ना चाहता था.

सुप्रिया के बहार और अंदर का मामला पूरा लाल हो चूका था - इक़बाल जी.. बास... और नहीं कर पयूंगी...

इक़बाल - बस अब थोड़ा सा और... अह्ह्ह्ह.... अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ है...

इक़बाल ने सुप्रिया को पेट से पकड़ते हुए उसके शरीर को बीएड पर थोड़ा ऊपर उठाया. सुप्रिया को अपने हाथों से अपने शरीर को सहारा देना पड़ा. इक़बाल ने हलके हाथों से सुप्रिया की गर्दन को पकड़ा और अपने लुंड को उसकी छूट के ठीक पीछे, किसी कुत्ते की तरह, लगा कर, उसे ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लगा.

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इक़बाल - अह्ह्ह्ह ..... अह्ह्ह्ह... अहह.... बोहोत इंतज़ार करवाया तूने....

सुप्रिया - अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह... अह्ह्ह... अह्ह्ह..... उह्ह्ह...

शायद ये थी असली चुदाई तोह, सुप्रिया चुड़ते हुए सोच रही थी. उफ्फ्फ... आज समझ आया उसे की करुणा क्यों कहती थी की इक़बाल बिलकुल किसी राक्षस की तरह छोड़ता था.

इस एक पल में जाने क्यों उसके बीते दिन उसकी आँखों के सामने घूम गए. और जाने एक नाम उसके जेहन में आया, उसके मैं में एक नफरत की आग फिर से जल उठी, एक ऐसी इंसान जिसकी वजह से तोह आखिर वह आज यहाँ तक पहुंची थी.... कृति.... आज कितनो बाद उसके बारे में उसने सोचा था, और सोचती कैसी नहीं, वही तोह थी उसकी इस चुदाई की असली उत्तरदायी.

पर उसे क्या पता था की जिस नफरत से वह कृति के बारे में सोच रही थी, उसी नफरत से कोई सात समुन्दर पार उसके बारे में सोच रहा था.
 
अपडेट 98

शाम के 9 बजे थे और कृति बस अभी एक निघटकलब में दाखिल हुई थी. बहार काफी सर्दी थी पर कृति ने घुटनो के ऊपर ख़तम होती हुई एक छोटी सी चमकती हुई ड्रेस पहनी हुई थी.

वह अंदर आते हुए एक कोने में अपनी रेगुलर जगह पर बैठ गयी. उसने बारटेंडर को एक ड्रिंक का आर्डर किया और कुछ hi पल बाद बारटेंडर ने उसके सामने वह ड्रिंक रख दिया. कृति ने ड्रिंक को उठाते हुए जल्दी से ख़तम कर दिया, और बारटेंडर को दुसरे गिलास का इशारा किया.

फुकककक.... वह उसके दिमाग से जाने का नाम क्यों नहीं लेती थी... कृति के अंदर की आवाज़ ज़ोर से चिल्लाई.

Do-teen-chaar गिलास वह कब जातक गयी उसे होश hi नहीं था. पर वह एक नाम, वह एक शकल उसके दिमाग से हटने का नाम नहीं लेती थी. कृति अपने हाथ में गिलास लेते हुए कड़ी हुई और डांस फ्लोर की तरफ बड़ी.

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डांस फ्लोर पर आलरेडी काफी भीड़ थी और वह इसी भीड़ में कहीं अपने आप को खोना चाहती थी. भीड़ में नाचते हुए उसे एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे अभी अभी बहार से सुप्रिया अंदर दाखिल हुई हो और उसकी और देख कर कुटिल तरीके से मुस्कुरा रही हो. फुकककककक..

कृति म्यूजिक की धुन पर तेज़ी से थिरकने लगी और अपनी आँखें बंद कर ली. आँखें बंद होते हुए भी वह महसूस कर पा रही थी की मर्दो की नज़र उस पर hi थी. उसने सडक्टिवेली अपने बालों में अपने दोनों हाथ फेरे और मर्दो को अनदेखा करते हुए नाचती रही.

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बंद आँखों में भी एक डैम से सुप्रिया का चेहरा उसकी आँखों के आगे फ़्लैश हुआ और उसने ज़ोर की सांस लेते हुए अपनी आँख खोल ली. कुछ मर्द उसके ठीक पास आकर नाचने लगे थे.

वह नाचते नाचते कृति के और भी पास पहुंच गए और दो लड़को ने एक सैंडविच बनाते हुए कृति को घेर लिया. पर कृति इससे बिलकुल भी दरी नहीं, उसे तोह अब ये मर्दो को रिझाने वाला खेल अछि तरह आता था. वह अपने हाथ उचका कर जोश में नाचने लगी.

इससे उन लड़को को और भी बढ़ावा मिल रहा था और एक ने कृति की कमर पीछे से पकड़ते हुए अपनी पंत उसकी गांड पर लगा दी. कृति के दोनों हाथ अभी भी हवा में थे और उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्का थी. ऐसे मस्ती भरे पल उसके दिमाग से साड़ी यादें, साड़ी फिक्र भुला देते थे.

उन में से एक लड़के ने कृति की कमर पर हाथ रखते हुए उसे कास के पकड़ा और उसके होंठों पर एक किश दे दी. और दूसरा पीछे से पास आते हुए कृति की गांड पर ग्राइंड करने लगा. कृति के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी.

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तभी do-teen बड़े से काले आदमी उस के पास पहुंचे और उन में से एक ने गोर लड़के को धकेलते हुए कृति से दूर किया. बाकी दोनों भी कृति के पास आ गए थे.

कृति अभी भी मस्त हो कर नाच रही थी और उसने शरारत में उन में से सबसे बड़े आदमी के सीने पर अपनी उंगलियां चलनी शुरू कर दी.

आदमी कृति के कान के पास अपना मुँह ला कर फुसफुसाया - िफ़ यू अरे दोने प्लेइंग विथ बॉयज, वांट तो के प्ले विथ रियल में?

कृति ने उसे मुस्कुरा के देखा - येह... सूरे... बूत लेट में जस्ट डांस ा बिट मोरे... that's माय फवौरीते सांग...

आदमी को शायद थोड़ी जल्दी थी - के... के विथ में... वे गोत आल थे बेस्ट सांग्स...

कृति - Ok... येह... लेटस जो... वोओओओ....

आदमी कृति का हाथ पकडे हुए उसे अपने साथ बैक की एग्जिट से बहार ले गया, जहाँ पहले hi एक गाडी कड़ी थी.

वहां एक और कला आदमी खड़ा था, जो सबसे छोटा लग रहा था - She's हॉट... who's शी?

पहला आदमी - आवर राइड फॉर टुनाइट... लेटस गेट गोइंग...

कृति तोह उस आदमी पर झूलते हुए उसका सहारा लेकर कड़ी थी. जल्दी hi उन में से एक आदमी गाडी लेकर बैक एंट्रेंस पर आ गया. पहले आदमी ने कृति का हाथ पकड़ते हुए उसे पीछे की सीट पर बिठाया और बीच में सरकते हुए उसके साथ बैठ गया.

एक और आदमी दूसरी साइड से पीछे बैठ गया और यंग लड़का आगे बैठते हुए पीछे मुद कर कृति को ललचायी नज़रो से देख रहा था. कृति उसको देख कर हसने लगी, पता नहीं क्यों उसकी हसी hi नहीं रुक रही थी.

उसके साथ बैठे दोनों आदमी भी उसके साथ हसने लगे और दोनों ने अपने हाथ उसकी नंगी जांघ पर रख दिए.

पहला आदमी जो कृति को अपने साथ लाया था, उसकी जांघ मसलते हुए बोलै - ी ऍम शॉन... what's योर नाम... वेयर यू फ्रॉम...

कृति ने हस्ते हुए उसको देखा, वह बुरी तरह बहकी हुई थी, वह बोहोत hi सलोत्तय तरीके से बोल रही थी - शवणनं... नीस तो मीट यू... ी ऍम कृति... ी ऍम फ्रॉम इंडिया...

शॉन - ओह्ह्ह वाओ इंडिया... ी लिखे इंडियन गर्ल्स...

कृति ने उसकी और मुँह करके देखा, वह गाडी में बैठा हुआ भी कृति से काफी लम्बा लग रहा था - ओह रियली.... एंड ी लिखे ब्लैक में... थी योर फ्रेंड्स...

शॉन ने उसकी जांघ मसलते मसलते अपना हाथ उसकी जाँघों के ठीक बीच फसा दिया था जहाँ वह पसीने से थोड़ा गीलापन था - येह... थी अरे माय फ्रेंड्स... यू अरे माय फ्रेंड तू... वे अरे आल फ्रेंड्स टुनाइट... एंड वे अरे गोंना हैवे ा फन टाइम...

कृति - ी लिखे फन टाइम्स... ी ऍम बाद ात नेम्स... कैन ी नाम माय फ्रेंड्स फॉर टुनाइट...

शॉन ने उसका गाल हलके से सहलाया और चेहरे से बाल हटाए - सूरे... व्हाटएवर यू लिखे...

कृति ने कार में बाकी तीनो की और देखा, साथ बैठे वाले का हाथ तोह पहले hi उसकी जांघ पर घूम रहा था - यू... बिग गाए... यू लुक लिखे बिग मैक... ी विल कॉल यू मैक... एंड मर. ड्राइवर... कैन ी कॉल यू लेविस... फॉर लेविस हैमिलटन, थे फ1 ड्राइवर... एंड यू लिटिल बॉय... (कृति को फिर से हसी आ गयी)... यू लुक लिखे ा लिटिल बेबी कंगारू... सो ी विल कॉल यू जाए... ोोू... यू अरे सो क्यूट...

जाए को शायद अपना नाम ाचा नहीं लगा था पर बाकी सब लोग है रहे थे. नाम चाहे जो भी आज रात काम तोह उनका hi होने वाला था.

शॉन हस्ते हुए बोलै - नीस नेम्स... यू अरे रियली गुड ात थिस...

कृति - ी तरय... हेहेहे...

शॉन - हे... यू गोत समथिंग ों योर लिप्स... कैन ी टेक आईटी ऑफ...

कृति - सूरे...

कृति ने खुद hi अपने होंठ शॉन की तरफ बड़ा दिए, और शॉन उसके होंठों को धीरे से चूमने लगा. दूसरी तरफ से मैक भी कृति के बालों में अपना मुँह घुसा के उसकी गर्दन को सूंघ रहा था. आज उनके हाथ एक अलग hi माल लगा था.

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आगे वाला लोगो से भी रहा नहीं गया और लेविस ने अपना एक हाथ स्टीयरिंग से छोड़ते हुए पीछे हाथ डालते हुए कृति का पेअर पकड़ लिया. जाए ने भी ठीक ऐसा करते हुए उसकी दूसरी टांग पकड़ ली. दोनों ने एक दुसरे की और देखा और एक hi झटके में उसकी टांग उठाते हुए आगे की सीट्स के बीच के बॉक्स के ऊपर रख दी.

कृति पीछे सीट पर सरकती हुई थोड़ी नीचे हो गयी और फिर से उसकी ज़ोर की हसी छूट गयी - आईटी टिकल्स.... अह्हह्हह्ह... ममम....

शॉन ने कृति के सर पर हाथ फेरा - ी कैन टिकल यू इन आल थे राइट प्लेसेस… बेटर थान ठोस वाइट बॉयज …

कृति ने अपना हाथ शॉन की छाती पर रखा - ओह रियली…

शॉन - एवर बीन विथ ा ब्लैक मन बिफोर?

कृति ने उसकी आँखों में आँखें दाल कर उसे तैसे करते हुए कहा - Can't से ी हैवे… इस तेरे ा डिफरेंस… वाइट.. ब्लैक… आल थे शामे..

शॉन - व्हाई don’t यू फंड आउट फॉर योरसेल्फ…

शॉन ने अपनी पंत खोलते हुए उसे थोड़ा नीचे सरकाया और साथ hi अपने अंडरवियर को भी, जिससे उसका बड़ा सा लुंड बहार आज़ाद हो गया. कृति का मुँह उसके लुंड के काफी पास hi था और वह उसके लुंड को घूरने लगी.

शॉन उसको अपने लुंड को घूरते हुए देख कर बोलै - नोटिस अन्य डिफरेंस...

कृति - मय्बे.. ा बिट…

शॉन को उसके ये शरारत भरे जवाब और भी भड़का रहे थे - व्हाई don’t यू हैवे ा क्लोज़र लुक तो फंड आउट…

शॉन ने कृति को हलके से गर्दन से पकड़ा और उसका सर अपने लुंड की और धकेल दिया और कृति के होंठ उसके मोठे काळा लुंड पर जाकर लगे. पर उसे कृति को ज्यादा पुश करने की जरूरत नहीं पड़ी, वह तोह तुरंत hi उसके लुंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

कृति उसके लुंड को सपद सपद अपने मुँह में ले रही थी - मममम.... it's सोऊ हूजे.... मममम... ी लिखे आईटी सो मच...

शॉन ने उसकी गर्दन छोड़ते हुए प्यार से उसके बालों को सहलाया - यू विल गेट मोरे ऑफ़ थिस टुनाइट...

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दूसरी और आगे बैठा जाए कृति की गोरी टांगो को चूम रहा था, उन्हें चाट रहा था. शायद उसे कोई फुट फेटिश था, और उसे कृति की पतली टाँगे बेहद आकर्षक लग रही थी.

कृति की गांड मैक की और मुद गयी थी और उसने पीछे से उसकी ड्रेस को थोड़ा सा ऊपर उठाया और उसकी काली पंतय में कैद उसकी गोरी गांड को देखने लगा. आज तोह उन लोगो को बोहोत hi मज़ा आने वाला था. उसने जल्दी से अपना मुँह कृति की गांड के पास लगा लिया और वहां सूंघने लगा. शायद उसे हर चीज़ सूंघने का शौक था.

लेविस बार बार मुद कर कृति की और देख रहा था की कैसे वह शॉन के मोठे लुंड को आहिस्ता आहिस्ता अपने मुँह से गीला करती हुई अचे से चूस रही थी. ये देखते hi उसका लुंड पंत में पूरी तरह खड़ा हो गया था और उसने गाडी को और तेज़ी से दौड़ते हुए अपनी मंज़िल की और ले गया.

दूसरी और जाए अभी भी कृति की टांगो को चूसता हुआ उन्हें हलके हलके काटने लगा. कृति ने दर्द में अपना पेअर हिलाया और उसकी संदल जाकर जाए के मुँह पर लगी.

जाए दर्द में चिल्लाया और पीछे कृति की और झपटा - बितछःह!!! You're गोंना गेट आईटी फ्रॉम में...

पर मैक ने उसे कृति तक पहुंचने से रोक लिया - हे... हे... कलम डाउन...

कृति उसकी और कटाक्ष भरा मुँह बनाते हुए बोली - ावववव... ी ऍम सॉरी... ी थॉट वे वेरे आल फ्रेंड्स...

शॉन ने उसका मुँह अपनी और करते हुए उसके होंठों को चूसा - वे अरे... don't मंद हिम... हे जाए... कलम डाउन... यू बिट थे लेडी फर्स्ट...

जाए गुस्से में आगे मुँह करके बैठ गया, पर वह बस इंतज़ार कर रहा था की कब वह कृति को सबक सीखा पायेगा. इस बीच मैक ने भी अपनी पंत खोल ली और उसमे से एक और बड़ा सा लुंड कूद कर बहार निकला.

कृति ने दोनों लुंड को देखते हुए - ों मययययय.... लुक ात थी तवो बिग्गिएस.... हेहेहे

कृति ने दोनों के लुंड को अपने दोनों हाथ में पकड़ा और उन्हें हिलने लगी. वह दोनों hi उसकी छोटी सी मुट्ठी में पूरे आ भी नहीं रहे थे, पर दोनों के लुंड को कृति के कोमल से गोर हाथों की छुअन से बोहोत hi मज़ा आ रहा था. कभी शॉन उसे चूम लेता और कभी मैक. एक उसके होंठों पर किश करता तोह दूसरा उसके कंधो और पीठ को चूमना शुरू कर देता.

मैक - ओह्ह्ह माय गॉड.... she's सो क्यूट एंड होतट... ी वांनै फ़क हेर हेरे इन थे कार...

आगे से लेविस की आवाज़ आयी - No मन! यू गाइस अरे आलरेडी हैविंग आल थे फन... let's नॉट फ़क हेर टिल वे गेट तेरे... ोथेरविसे ी ऍम सतोप्पिंग थे कार राइट हेरे...

मैक - हे… रिलैक्स मन… यू विल गेट योर चांस…

जाए भी बीच में बोल पड़ा - No… लेटस स्टॉप थे कार हेरे… एंड लेटस फ़क थिस बीच राइट हेरे इन थे ओपन…

शॉन ों आखिर उन लोगो को शांत करना hi पड़ा - हे हे… लेटस नॉट फाइट… we’re ऑलमोस्ट तेरे एंड वे विल स्टार्ट व्हेन वे गेट तेरे…

कृति आराम से अपना शॉन की लैप में रखे लेती थी और शॉन का बड़ा सा लुंड थिरकते हुए उसके पूरे चेहरे को छू रहा था और अपना हल्का हल्का प्रे छुम उस पर छोड़ रहा था.

गाडी में अचानक से हुई चुप्पी फिर से उसके मैं को पुराणी यादों में ले गए. और उसके मैं में एक आक्रोश सा आ गया. क्या सुप्रिया भी इसी तरह बीच बनकर लोगो से छोड़ना पसंद करती थी.

पल जल्द hi गाडी एक घर के आगे रुकी और आगे वाले लोग बहार उतर गए. शॉन ने कृति को सहारा देते हुए गाडी से बहार निकाला और वह उसे अपने साथ घर के अंदर ले आया.

कृति - वोऊ... आईटी वास् रियली कोल्ड आउटसाइड...

शॉन ने उसे मुस्कुरा के देखा - वे अरे गोंना हीट उप थिंग्स...

बाकी तीनो भी शॉन के पीछे घर में घुस गए थे और कृति की और हवस भरी नज़रो से देख रहे थे. कृति खुद hi अंदर की और चल पड़ी और लिविंग रूम में रखे एक काउच पर घुटनो के बल बैठ गयी. क्या कमल की लग रही थी कृति इस समय, उसके फूलो जैसे होंठ, सेडक्टिव आँखें, गोरा बदन, सॉफ्ट बाल देख कर उन मर्दो की आँखें फटी हुई थी और वह खड़े के खड़े रह गए थे.

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कृति ने अपने हाथ से उन लोगो को अपनी और आने का इशारा किया - Don't कीप में वेटिंग...

ये इनविटेशन सुनते hi चारो मर्द अपनी पंत और जीन्स को खोलते हुए उसकी और बाद चले. एक एक करके चारो का मोटा काला लुंड बहार आ गए. कृति ने उन्हें आते देख अपने बाल ऊपर बाँड्ने शुरू करे. वह अपने बाल बाँध भी नहीं पायी थी की शॉन ने वहां पहुंच कर कृति को बालो से पकड़ कर काउच से ज़मीन पर बिठा दिया. और साथ hi लेविस ने उसकी ड्रेस के ऊपर के हिस्सा को उसके कंधो से सरकते हुए उसे टॉपलेस कर दिया.

कृति काउच से तक लगा कर बैठ गयी और चारो लुंड उसके ऊपर मंडराने लगे. उनमे से लेविस ने अपना लुंड आगे करते हुए कृति के होंठों पर लगा दिया और बाकी तीनो ने बेसब्री से अपने लुंड उसके चेहरे पर लगाने शुरू कर दिए. जाए अभी भी थोड़ा पीछे था और वह अपना लुंड कृति के पास नहीं पंहुचा पाया था.

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कृति अपने होंठों से सक्शन बनाते हुए उसके लुंड की टोपी को चूसने लगी - ममममम.... ममम...

लेविस - ऊऊह्ह्ह्ह.... फुकककक... व्हिप लिप्स.... ुह्ह्ह्ह... थिस इस थे फन यू गाइस वेरे हैविंग इन थे बैक.... अह्ह्ह....

कृति अपना मुँह ऊपर करके लेविस की तरफ देख रही थी, और उसका भोला मासूम सा चेहरा उनके लुंड के साथ बेहद आकर्षक लग रहा था.

मैक ने अपना लुंड कृति की आँखों के पास घिसना शुरू कर दिया और शॉन कृति के गालो पर अपने लुंड से हलके हलके मार रहा था. उनके लुंड का थोड़ा बोहित रास निकल कर कृति के गालों को गीला कर चूका था.

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शॉन ने कृति का हाथ पकड़ते हुए अपने लुंड पर रखा - होल्ड आवर डिस्कस व्हिले यू सूचक हिम...

लेविस हस्ते हुए बोलै - बीच डोएसेंट सीम लिखे ा प्रो...

मैक ने उसे हाई फाइव किया और हँसा - Don't वोर्री... बी थे टाइम वे अरे थ्रू विथ हेर... शी वोउल्ड हैवे लर्न्ट ा ट्रिक और तवो...

कृति ने खुद hi मैक का लुंड भी पकड़ लिया और शॉन एंड मैक के लुंड को हिलने लगी.

मैक - सी... she's ा क्विक लर्नर....

जाए भी किसी तरह से उनके बीच जगह बनाते हुए कृति के पीछे आ गया और अपना बड़ा सा लुंड उसके सर पर रख दिया. कृति देख नहीं पा रह थी पर जाए का लुंड तोह उन सब में सबसे बड़ा था.

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लेविस अब तेज़ी से कृति के मुँह को छोड़ रहा था, और कृति बाकी दोनों लुंड पकडे उन्हें हिला रही थी. उसके मुँह में दर्द होना शुरू हो गया था, पर अभी तोह तीन और लुंड थे चूसने के लिए.

मैक खड़ा खड़ा बोर हो गया था और उसने एकदम से कृति के बाल पकड़ते हुए उसके मुँह को अपनी और खींचा. लेविस का लुंड तेज़ी से कृति के मुँह से निकला और कृति के गाल पर ज़ोर से लगा. पर इससे पहले की वह दर्द में कोई आवाज़ निकाल पाती मैक ने उसके बाल पकड़ते हुए अपना लुंड उसके गले में अंदर तक दाल दिया था.

मैक पीछे से कृति को अपनी और धकेल रहा था ताकि उसका लुंड थोड़ी देर उसके मुँह में रहे. कृति ने अपने आप को सहारा देने के लिए मैक की टाँगे पकड़ ली. उफ्फ्फ.... ये तोह उसके गले में अंदर तक टकरा रहा था. उसने उसका पेअर थपथपाया ताकि वह उसे छोड़ दे.

शॉन ने भी मैक को उसे छोड़ने का इशारा किया और मैक ने उसके सर पर से अपनी पकड़ ढीली कर. कृति का मुँह एक डैम से पीछे हो गया और मैक का बड़ा सा लुंड कृति के थूक से सना हुआ बहार आ गया.

अगर कृति उनकंफर्टबले थी भी तोह उसने उन लोगो को ये ज़ाहिर नहीं होने दिया और वह लुंड बहार निकलते हुए उसे अपने दोनों हाथों से मसलने लगी. वह तुरंत hi अपने चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान ले आयी थी.

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कुछ देर ऐसे hi कृति का मुँह एक लुंड से दुसरे लुंड पर जा रहा था. उसके मुँह के अंदर उन लोगो का थोड़ा बोहोत छुम निकल गया था और उसका मुँह नमकीन सा हो गया था. कुछ झाग तोह उसके होंठों से नीचे भी टपक रहा था. पर जाए अभी भी बस अपना लुंड पकडे उसे हिला रहा था. उससे बस अब और सब्र नहीं हुआ, और उसने शॉन की तरफ देख कर इशारा किया.

शॉन हस्ते हुए बोलै - माय बॉय ओवर हेरे इस ड्राई, लेटस गेट हिम सम अस वेल...
 
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जाए तोह कबसे बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था की उसका लुंड इस खूबसूरत लड़की के मुँह में जाए. उन लोगो को जो लडकियां मिला करती थी वह इसकी तरह इतनी अछि दिखनी वाली कहाँ होती थी. और कार में जो उसने उसे भड़काया था उससे तोह जाए उसको और भी तेज़ छोड़ना चाहता था.

शॉन ने कृति का मुँह जाए के लुंड की और मोड़ा और उसका सर पकड़ते हुए जाए का पूरा लुंड उसके गले तक में अंदर धकेल दिया. उसका लुंड लेते hi कृति का मुँह तोह फटने को hi आया था. जिसे वह छोटा समझ रही थी, वह तोह उनमे सबसे बड़ा निकला. अब तक तोह जैसे तैसे उसने अपने आप को संभाला हुआ था पर अब तोह उसका मुँह बेहद दर्द कर रहा था और उसकी हालत ख़राब हो चली थी.

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जाए ने कृति का सर पीछे से पकड़ते हुए उसके मुँह में अपना लुंड तेज़ी से अंदर बहार करना शुरू कर दिया. शॉन भी उसका सर हिलने में पूरी मदद कर रहा था. कृति समझ गयी थी की कार में वह सब मजाक hi कर रहे थे और उनके ग्रुप का असली चुड़क्कड़ तोह ये लड़का था.

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जाए के लुंड से घिसते घिसते कृति के होंठ काटने को हो रहे थे और उसकी जीब भी जलन मार रही थी.

कृति ने उसे रोकने की कोशिश करि पर वह रुका नहीं, बस कृति की दबी हुई आवाज़ hi बहार आयी - मममममम.... ममममम....

बाकी लोग जाए को उसका मुँह छोड़ते देख हसने लगे. बाकी सब लोग कृति के मम्मो और पीठ और छू और चूम रहे थे. कृति का जिस्म भी अब थिरकने सा लगा था जैसे वह हीट में जाने वाली हो.

मैक - She's स्टार्टिंग तो पर्क उप... लेट में चेक हेर डाउन तेरे...

मैक ने नीचे बैठते हुए कृति की ड्रेस को नीचे खींचते हुए उसके पैरो से निकल लिया और फिर उसकी पंतय को भी. कृति पूरी नंगी हो गयी थी और उसकी बाकी तीनो उसके गोर जिस्म को अपने हाथों से अचे से टटोलने लगे.

शॉन और लेविस ने अपने लुंड कृति के पीठ पर मसलने शुरू करे. कमल की स्किन थी इस लड़की की, गोरी लड़कियों को भी मात दे दे. अपने स्किनकेयर का काफी ख्याल रखती थी कृति. मैक ने नीचे बैठते हुए कृति की गांड सूघनी और दबनी शुरू कर दी. बोहोत मोती गांड तोह नहीं थी, पर ुतली एथलेटिक सी पतली फिगर में लुंड डालने में मज़ा आने वाला था.

मैक ने एकदम से कृति की गांड में अपनी मोती ऊँगली घुसा दी, और कृति एकदम हैरान होते हुए उछाल सी पड़ी. पर ऊपर शॉन और जाए ने उसके सर को अचे से पकड़ा हुआ था और नीचे से मैक उसके पैरो को जकड लिया. कृति की आँखें बड़ी हो गयी, जैसे अभी अभी में उसका सारा नशा उतरने लगा हो और वह बुरी तरह झटपटाने लगी.

मैक अपनी उंगलियां कृति की गांड की दरार पर दौड़ते हुए थोड़ा आगे उसकी छूट तक पंहुचा. उसकी ऊँगली छूट के बहार पहुंची तोह उसे छूट से रिस्ता हुआ पानी महसूस हुआ. वह समझ गया की कृति भी पूरी तरह गरम थी और उनका लुंड लेने के लिए तैयार.

मैक - She's रेडी... ी ऍम गोइंग इन फर्स्ट...

इससे पहले कोई और झपट्टा, मैक जल्दी से कृति के ठीक नीचे जमीन पर लेट गया और अपना लुंड हवा में सीधा करके कृति की छूट की तरफ निशाना साधने लगा. शॉन और लेविस ने कृति के कंधो पर दबाव डालते हुए उसे थोड़ा सा नीचे किया और जाए भी साथ में नीचे होता गया. आखिर वह अपना लुंड कृति के अमेजिंग मुँह से निकालना नहीं चाहता था.

कृति ने हलकी सी नज़र नीचे झांकी और उसे एक मिसाइल की तरह खड़ा हुआ मैक का लुंड दिखाई दिया. उसने जाए का लुंड चूसना बंद किया और लुंड को अपनी छूट में जाने के दर्द भरे एहसास के लिए अपने को तैयार करने लगी.

पर जाए से फिर से अपना लुंड उसके मुँह में ठूस दिया और शायद एहि बेहतर था नहीं तोह वह बुरी तरह चीख hi पड़ती. मैक का मोटा सा लुंड एक hi झटके में आधा अंदर चला गया था और कृति की आँखें दर्द के मारे बड़ी हो गयी. ये अब तक का सबसे बड़ा लुंड तोह नहीं था जो उसने लिया था, पर फिर भी इस पोजीशन ने उसके इम्पैक्ट को और बड़ा बना दिया था.

मैक - शीट्ट्ट्ट… हेर पुसी इस सो टाइट एंड अमेजिंग…

शॉन हस्ते हुए - Don’t लूसेन हेर उप तू मच…

मैक ने उसकी कमर को कास के पकड़ लिया और उसे अपने लुंड पर ऊपर नीचे करने लगा. कृति ने अपने आप को सहारा देने के लिए बाकी दोनों के लुंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

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मैक कृति को कमर से पकडे ऊपर नीचे उछाल रहा था, और कृति किसी तरह जाए का लुंड अपने मुँह में भरे बाकी दोनों लुंड को अपने हाथ से हिला रही थी.

बीच बीच में सामने वाला लुंड मुँह से निकल जाता तोह कृति की दर्द भरी ाँहें कमरे में गूँज उठती - उठ उह्ह्ह उह्ह्ह... ओह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... मममम... उह्ह्ह... उह्ह्ह ... उठ... फुककक...

मैक दमदार था और उसने अपने हाथों पर कृति का पूरा वजन संभाला हुआ था. उसे बोहोत मज़ा आ रहा था कृति को इस तरह छोड़ते हुए, पर आखिर सबको अपनी बारी की जल्दी थी.

लेविस - हे... लेट में जो नाउ... यू हद ा लोट ऑफ़ फन विथ हेर इन थे कार अस वेल..

कृति की छूट को दो पल का आराम मिला और लेविस ऊपर खड़ा हो गया और लेविस नीचे अपने घुटनो पर बैठ गया. उसमे मैक जितना डैम नहीं था की वह कृति को अपने हाथों से ऊपर नीचे कर ले तोह उसने अपने पैरो का सहारा लेते हुए ज़मीन पर पोजीशन बनायीं और फिर कृति के बालों को खींचते हुए उसकी गांड को हवा में थोड़ा पीछे खींचा.

कृति बाल खींचने से दर्द में चिल्ला उठी - ोुछः... ोोोू.... फुकक....

लेविस ने जल्दी hi अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया था. मैक के लुंड के आगे तोह लेविस का लुंड काफी पतला सा लग रहा था और कृति के चेहरे पर जाने अनजाने एक मुस्कान सी आ गयी. उसने अपने आप को सहारा देते हुए जाए की टाँगे पकड़ ली.

बाकी सबको कुछ न कुछ करते देख वह भी बेसब्र हो चला था, और उसने भी अपना लुंड कृति के चेहरे पर घिसना शुरू कर दिया. जाए का लुंड तोह पहले से उसके मुँह में था, उसने साथ hi अपना लुंड भी उसके मुँह में ठूस दिया. कृति का मुँह तोह और भी चौड़ा होता जा रहा था और उसने दर्द के मारे अपने आँखें बंद कर ली.

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पीछे से लेविस कृति पर छडा हुआ धक्के मार रहा था और आगे से शॉन और जाए अपना लुंड कभी बारी बारी और कभी साथ में उसके मुँह में दाल रहे थे. कृति कभी खुद hi अपनी जीब निकाल कर उनका लुंड चाट लेती, और शॉन खुश होता हुआ उसका सर पर प्यार से हाथ फेर देता.

मैक भी टॉयलेट से वापिस आ गया था और वह कृति के मम्मो को अपने हाथों से दबाने लगा, उन्हें खींचने लगा.

कृति दर्द में कराह रही थी - ऊऊह्ह्ह... उह्ह्ह.. आह्हः... गॉडडडड... उफ्फ्फ...

लेविस ने ज़ोर की आवाज़ निकाली और अपना सारा माल कृति की छूट में निकाल दिया और वह बहार टपकता हुआ ज़मीन पर गिरने लगा.

शॉन - मन... यू don't हैवे ा लोट ऑफ़ सेल्फ कण्ट्रोल... दो यू...

लेविस - सॉरी मन... बूत she's हॉट.... बेस्ट बीच ी एवर फुकेद...

शॉन ने जाए की तरफ देखा - दो यू वांनै जो नेक्स्ट?

जाए - नहहह... यू जो... इमम्म... कैन ी फ़क हेर अलोन आफ्टर ya'll अरे दोने?

शॉन ने उसे घूरा - अलोन????

जाए - के ों... यू गाइस मेड सो मच फन ऑफ़ में...

उनकी आपस की बातें सुनकर कृति के चूची और भी सख्त होते जा रहे थे और उसकी गर्मी बढ़ती जा रही थी. जाए उसे अकेले क्यों छोड़ना चाहता था.... क्या करना चाहता था वह उसके साथ.

पर फिलहाल तोह शॉन कृति के पीछे आ गया था और उसने कृति पर थोड़ी दया दिखते हुए उसके हाथों और बदन को सोफे का सहारा दे दिया.

जाए अब कृति के सामने से हट गया और कोई और उसके सामने आ गया था. अब तोह सबके चेहरे कृति को एक जैसे hi लग रहे थे. सब बारी बारी अपना लुंड उसके मुँह में जो दे रहे थे.

पर शॉन के मोठे लुंड के लिए शायद वह तैयार नहीं थी. शॉन उसके पैरो को छोड़ता करते हुए उसके ठीक पीछे पहुंच गया और उसने कृति के अंदर एक ज़ोर का धक्का मारा.

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कृति बुरी तरह आगे तक हिल गयी और आगे वाला लुंड उसके गले में अंदर तक पहुंच गया. उसकी आँखें जैसे बहार hi निकल गयी थी. शॉन अब तक सब में उससे काफी नरमी से पेश आया था, पर अब तोह उसकी छूट में अपना लुंड ज़ोर लगा कर ठोका था. कृति का पीछा का हिस्सा बुरी तरह दर्द करने लगा था. वह तोह एक झटके से hi बुरी तरह हिल गयी थी.

शॉन ने कृति की पतली कमर को कास के पकड़ा ताकि वह हिले न और झटके पर झटका मारने शुरू किये. शॉन के बड़े बड़े बॉल्स आकर कृति की गांड से टकरा रहे थे और उसकी गांड और पेट में बुरी तरह दर्द होना शुरू हो गया था. कृति की आँखों से पानी बहने लगा, तप तप करके एक दो बूँद काउच पर गिरी.

शॉन उसके टपकते हुए आंसू देख कर थोड़ा धीरे हुआ - यू ok प्रिंसेस...

जैसे hi लुंड बहार निकला कृति ने करारा जवाब आया - येह... ी ऍम फाइन... ी ऍम फाइन... फ़क में हर्डर... हर्डर... don't स्टॉप...

शॉन ने मैक को इशारा किया - वांनै दो आईटी टुगेदर? थ्री होल्स ात वन्स...

मैक - अब्सोलुतेल्य माय डॉग... यू क्नोव ी लव तहत...

शॉन ने हलके से कृति की पीठ थप थपाई - प्रिंसेस... यू गुड विथ तहत?

कृति ने हलके से हाँ में सर हिलाया, एंड मैक ने शॉन को एक बड़ा सा हाई फाइव किया.

शॉन - जाए... यू स्टे आउट ऑफ़ थिस ओने... यू गोंना एन्जॉय हेर अलोन एनीवे...

जाए हस्ते हुए थोड़ा अलग खड़ा हो गया. और मैक भी कृति के पीछे आ गया. शॉन कृति की गांड के ऊपर कुत्ते की तरह चढ़ गया और मैक पीछे उसकी पुसी की जगह पर आ गया. और आगे लेविस अपना पतला सा लुंड लिए उसके मुँह के पास.

कृति की आँखों में घबराहट साफ़ दिख रही थी, शायद वह अब तक इस हद्द तक नहीं गिरी थी. उसने पीछे पलट कर दोनों की और देखने की कोशिश करि पर लेविस ने उसका चेहरा पकड़ते हुए आगे की और कर दिया.

उन्होंने एक दुसरे को देखते हुए 1, 2, 3 का इशारा किया और कृति को चीखने का मौका hi नहीं मिला. एक साथ तीनो लुंड उसके तीनो छेड़ में घुस गए थे और वह बुरी तरह झटपटा रही थी. उसकी गांड शायद पहले hi कभी किसी से खुल चुकी थी तोह शॉन का लुंड लेने में उसे जान निकलने वाला दर्द नहीं हुआ.

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कृति अपने आपको अपने हाथ पर सहारा भी सही से दे नहीं पा रही थी. और शरीर का रोम रोम दर्द से करहा रहा था. पीछे से पड़ते हुए दोनों लुंड ज़ोर ज़ोर से थापा थप की आवाज़ कर रहे थे. आगे बेरहमी से लेविस ने उसके बाल पकडे हुए थे. जिस तरह कुत्ते की तरह शॉन उस पर चड्ढा हुए उसे छोड़ रहा था वह किसी कुटिया से काम नहीं रह गयी थी.

लुंड मुँह से निकलते hi कृति ज़ोर की चिल्लाई - उह्ह्ह. .ऊऊह्ह्ह .. आआआह्ह्ह्ह... फुकककककक... मममममम.....

शॉन ने उसकी पीठ को हलके से मसला.

कृति अपनी अंदर की हिम्मत को वापिस लाते हुए फिर से बोली - फुकककक.... फुककक में हर्डर.... अह्ह्ह्ह.....

तीनो की गति फिर से तेज़ हो गयी थी, और कृति अपना वजन अपने हाथों पर नहीं संभल पा रही थी. उसके हाथों ने उसका साथ छोड़ दिया और वह काउच पर गिर सी पड़ी.

शॉन ने लेविस को इशारा किया - यू के अंडर हेर... एंड मैक यू जो इन थे फ्रंट...

दोनों ने पोजीशन बदल ली और लेविस कृति के नीचे आ कर लेट गया. लेविस के नीचे होने से कृति के शरीर को थोड़ा सहारा मिल गया और तीनो फिर से जैम के कृति को छोड़ने लगे.

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काफी देर तक तीनो पोजीशन बदल बदल कर कृति को छोड़ते रहे. कृति भी अपना होश खो सा चुकी थी. उसने तीनो छेड़ बुरी तरह लाल कर रहे थे और दर्द भी कर रहे थे. अब तोह इतना दर्द की कुछ महसूस करने की क्षमता भी चली गयी थी.

मैक ने अपना सारा माल कृति के मुँह में निकाल दिया और शॉन ने उसकी गांड में. वह उनके सफ़ेद पानी से बुरी तरह रंग चुकी थी, और जगह जगह पर वह सफ़ेद चिप चिप पानी जैम का सख्त होने लगा था.

शॉन ने कृति की हालत देखते हुए सबको थोड़ा ब्रेक लेने के लिए कहा और कृति को थोड़ी देर काउच पर अकेले छोड़ दिया. कृति अपनी छूट और गांड को मसलने लगी, बोहोत बुरी तरह दर्द हो रहा था. उसके मुँह की तोह बंद hi बज गयी थी. और अभी तोह वह जाए बाकी था जो पता नहीं उसके साथ क्या करने वाला था.

शॉन ने एक पतला सा कम्बल लाते हुए कृति को धक् दिया - प्रिंसेस... यू ok...

कृति ने हलके से सर हिलाया - येह...

शॉन - यू वेरे अमेजिंग... यू क्नोव तहत... ी होप वे वेरेन्ट तू रफ़ ों यू...

कृति - No... इतस फाइन...

शॉन - व्हाई don't यू क्लीन उप एंड हेड ईंटो तहत रूम... जाए वांटेड सम अलोन टाइम विथ यू... यू ok विथ तहत?

कृति ने हाँ में सर हिलाया.

शॉन - िफ़ हे गेट्स तू रफ़, जस्ट गिव ा शॉट... ी तरय तो कीप थी बॉयज इन कण्ट्रोल... एंड यू अरे सुच ा डार्लिंग... ी don't वांट अन्य ट्रबल आफ्टर आल...

कृति हलके से मुस्कुरायी. उसने अपने आप को चद्दर से लपेटा. कड़ी में टाइम देखा तोह रात के 1 बज चुके थे. वह लोग उसे काम से काम पिछले दो घंटो से छोड़ रहे थे. कृति का पूरा शरीर थका हुआ था और उसकी आँखें भारी हो चली थी.

कृति कमरे में अंदर गयी और वहां एक बड़ा सा पलंग देखा. पलंग पर एक टॉवल रखा था. कृति साथ अटैच्ड बाथरूम में गयी और टॉवल को गरम पानी से गीला कर लिया. वह अपने जिस्म पर लगे सफ़ेद निशानों को साफ़ करने लगी और अपनी छूट और गांड को भी हलके से सेकने लगी. बुरी हालत हो गयी थी उसकी तोह आज.

कृति बीएड पर नंगी बैठी तौलिये को अपनी छूट और गांड के बीच में दबाये बैठी hi थी की अचानक से कमरे पर एक नॉक हुई. कृति ने जल्दी से अपने आप को उस पतले सी चद्दर से धक् लिया और "के इन" की आवाज़ लगायी.

जाए कमरे का दरवाज़ा खोलता हुआ अंदर दाखिल हुआ, वह अभी भी पूरा तरह नंगा था. उसने अंदर आते hi कृति की और देखा और कमरे की लाइट को डिम कर दिया.

जाए - यू रेडी...

जितना कृति चार लोगो के सामने नहीं दरी थी, इस समय जाने क्यों अकेले में जाए के साथ उसका दिल डर के मारे ज़ोर से धड़क रहा था. उसने हलके से हाँ में सर हिलाया.

जाए - यू एंड में... वे अरे गोंना हैवे ा लोट ऑफ़ फन टुनाइट...
 
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