part -10

शुभम अब निश्चिंत हो कर सो रहा था , अब जय और उर्वशी के बिच के मिलन पर उसने प्रतिबन्ध लगा दिया था, जय ने शुभम को प्रॉमिस क़र के वादा दे दिया था के आज से वो शुभम के mom की चुदाई नहीं करेगा. इस सब मे चलाक अदनान का बड़ा हाथ था, उसीकी ही प्लानिंग काम क़र गई, उसी ने बड़े अच्छे तरीके से जय को होश मे ला क़र धीरज बँधाया था जिस धीरज के कारण जय शुभम को मना सका....

दूसरी तरफ आर्यन था, अब वो उर्वशी को ले कर अलग ही ख़याली दुनिया मे ख़ोने लगा था, शुभम से तीन साल बड़ा उसका क्लास मेट आर्यन बहोत ही हरामी किस्म का लड़का था, उसे शुभम से कोई लगाव था ही नहीं, पर क्लास मे हमेशा अव्वल रहने वाले शुभम के साथ रह कर वो किसी प्रकार से अपनी आधी अधूरी पढ़ाई पूर्ण करना चाहता था, इसी स्वार्थ को साधने वो शुभम के साथ यारी बनाये रहता था, BASKETBALL खिलाडी आर्यन पढ़ाई हमेशा dump ही करता रहा था, इस वजह से वो दो बार fail भी हो चूका था, और तो और स्कूल मे एक lady teacher और लड़कीओ से बतसलूकी के वजह से उसे फिर एक बार fail कर के पुराने school से निकाल दिया गया था. उसके बड़े मामा का बड़ा political दबदबा था. political वजन रखने वाले उसके मामा ने उसे बड़ी मुश्किल से पिछले वर्ष ही शुभम के स्कूल मे दाखिल दिलवाया था. School मे lady teacher और लड़कियों से बदसुलुकी करने का अंजाम भुगत चूका आर्यन अब अपने से बड़ी उमर की milf आंटीओ मे रूचि लेने लगा था, शुभम के ही कॉलोनी मे कही पास मे ही family के साथ रहता था. शुभम के साथ वो अक्सर शुभम के घर आया जाया करता था. ज़ब भी वो आता उर्वशी के गदराये बदन पर आँखे सेके बिना नहीं रहता था, उर्वशी भी उसकी नजरों से भली भाती परिचित थी...!







आज रविवार था, जय और अदनान आज उनके flat मे ही थे....
जय : भाई शुभम को तो प्रॉमिस कर के मना लिया...! अब उर्वशी का क्या करू....! शुभम अब रात मे नजर रखेगा, उर्वशी बुलाएगी तब कैसे उसे टालू....!
अदनान : अरे भाई, बहाना कर ले और टाल दे....!
जय : क्या बहाना करू...! वही तो सूझ नहीं रहा है...!
अदनान : देख अब शुभम की exams आ रही है...! बोल दे के रात मे वो पढ़ाई करते रगेगा, इसलिए अब तुम दोनों का मिलन उसकी exams ख़त्म होने तक़ बंद कर देते है...! इस बात से वो भी खुश हो जाएगी...!
जय : वाह..! वाह..! भाई तेरे दिमाग़ का जवाब नहीं...!
अदनान : और हा, इन दिनों शुभम से नजदीकीया बढ़ा दे...! प्यार दे उसे...! बाप के साये से दूर है बेचारा, उसे तेरा साथ अच्छा लगेगा... और हा तू अगर उसका दिल जीत सका तो आगे तेरे लिए आसानी होंगी...!
जय : मतलब समझा नहीं...!
अदनान : मतलब तू उर्वशी को चाहता है और वो तुझे... तुम्हारा मिलन होता रहे इसमें काटा तो शुभम ही है ना...? बोलो...!
जय : हा.... बिलकुल...!
अदनान : तो तू बस उसका दिल जीत ले... बाकि मै हु ना...! मै सब जुगाड़ बनवा दूंगा...! देख लियो...!
जय : ठीक है...! आज से शुभम का दिल जितने की तैयारी सुरु...! पर अब तू ही ये बता कैसे....!
अदनान : किसी का दिल जितना बड़ी बात नहीं है....! बस उसे अपना मान ले...! उस के साथ वक़्त बिता...! उसकी बाते सुना कर...! बस हो गया...!
जय : hum... Hum.... ठीक है उसे घुमाने भी ले जाया करूंगा...!

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अदनान और जय बस बात कर ही रहे थे के कमर लचकाती हुईं उर्वशी वहा आ गई, गोलाकार चिकने मटके जैसे नितंब, मोटे रसीले झूमते हुए स्तन, पतली कमर से सराबोर यौवन पर लाल साड़ी और लाल ब्लाउज पहनी हुईं उर्वशी बड़ी नजाकत से एक एक कदम बढ़ा रही थी. कच्चे दूध सा साफ बदन का रंग और उस पर पडती सूरज की किरनो से वो कुंदन सी चमक रही थी. बालो के जुड़े पर सफ़ेद तौलिया लपेटे हुईं उर्वशी ऊँगलीओ से छोटी छोटी लटाओ को बड़ी प्यार से कानो के पीछे दबा देती. उसके बदन की खुशबु और काले नागिन से घने बाल बता रही थी के वो कयामत की बला अभी अभी नहा के बाहर आई हो इसलिए गजब की नमकीन लग रही थी. बड़ी नजाकत से कपडे सुखाती, इधर उधर कावरीबावरी घूमती हुईं उसकी नजरें जय के मर्दाना बदन को देखना चाहती थी, खुद के कुंदन से बदन पर लिपटी लाल साड़ी दिखाना चाहती थी, कई बार जय के हाथो उर्वशी नंगी हो चुकी थी, जय ने भी उसके गोरे गोरे बदन को एड़ी से चोटी तक़ कई बार नंगा देखा था, जय के गोद मे बच्ची बन कर कई बार उर्वशी बैठ चुकी थी.

जैसे कोई नई नवली दुल्हिन उसके पति को लुभा कर उसका पवित्र स्पर्श पाने आतुर रहती वैसे ही उर्वशी रोज जय को लुभाने ऊपर आजाती. हर रोज नहा कर अपनी अदाए दिखाती हुईं उर्वशी कपड़े सुखाने के बहाने अपने प्रेमी से मिलने जरूर आती. लटक मटक कर देह प्रदर्शन यु करती मानो वो जय को बताना चाहती हो के उसके अंदर आज भी एक कुवारी कन्या है जो उसके प्रेमी से शरीर सुख पाने के लिए उतावली हो रही है....

जय भी उसके देह प्रदर्शन का खूब लुफ्त उठता, देह प्रदर्शन का उत्तर देह प्रदर्शन करता हुवा जय उसके 6 फिट के gym मे कसे हुए भारी भरकम शरीर का वो भी मर्दाना प्रदर्शन किया करता, सफ़ेद बनियान से घिरी हुईं मांसल चौड़ी छाती, और short pant से आधे ढके हुए मांसल जांघे निहार कर उर्वशी का दिन बन जाता था....
उर्वशी के ऊपर आते ही जय उसके अंग प्रदर्शन कार्यक्रम को देखने बाहर जरूर निकलता, अपनी प्रेमिका अपने लिए ही सज कर आती है इसका उसे बड़ा अभिमान होता...! इस बार भी वो उर्वशी की राह ताक ही रहा था के उर्वशी आ भी गई...
जय : hum भाबी...! लाल साड़ी...! वाह भाबी...! जच रही हो...!
उर्वशी : क्या बात है जय...! आज आज sad लग रहे हो...! उर्वशी ने जय का चेहरा निहारते हुए कहा...!
जय : sad तो हु...! एक वज़ह है भाबी...!
उर्वशी : हा बताओ... क्या वजह है..!
जय : भाबी अगले हप्ते शुभम की exams start हो रही है...! अब वो रात रात जाग कर पढ़ेगा...! ऐसे मे अब exams होने तक हमारा मिलना ठीक नहीं होगा...! कुछ देख लिया, या कोई उसे शक हो गया तो खामखा disturbed हो जायेगा....! उसके पढ़ाई पर बुरा असर पड़ेगा...!
उर्वशी : आयहाय...! बड़े पिता बन रहे हो मेरे बेटे के...! वैसे शुभम की चिंता मुझे भी है ...!अब उसकी exams होने तक आप को याद भी करुँगी ये बात तो भूल ही जाओ...!
जय : हा भाबी...! पर मेरा क्या होगा वो क्यों नहीं सोचा आप ने...
उर्वशी : तुम्हारे बारेमे क्या सोचना है...! दो दो बेटे नहीं पाल सकती मै...!
जय : बेटा...! भाबी...! मै बेटा कब से बन गया...!
उर्वशी : ज़ब से दूध पिया है तब से...!(श्लीलता भरी हसीं के साथ उर्वशी बोली)
जय : तब भाबी...! इस बेटे के भूक की भी कुछ इंतजामात करिये... हो सके तो बिच बिच मे दूध पिलाने ऊपर ही आजाया करिये ...!
तभी अदनान वहां आता है....
अदनान : क्या बाते हो रही है दीदी..!
जय : दूध का...! मेरा मतलब है दूध मे केला डालकर दूध पिने से तबियत चुस्त रहती है.... क्यों भाबी...!

(उर्वशी के दूध नीहार कर जय ने लंड तौलिया के अंदर adjust करते हुए कहा)
उर्वशी : मुझे केला पसंद नहीं है...

! (नकछड़े नखरेल अंदाज से जय को देखते हुए उर्वशी बोलते हुए उर्वशी कमर मटकाते हुए जाने लगी)
शुभम : मम्मी...! आज और कल के दिन आर्यन और वासु जल्दी आएंगे...! कल से school ने भी exam के priperition करने के लिए छूट्टीया दी है मम्मी...! परसो से हम group study बंद कर देंगे...! और self study पर ज्यादा focus करेंगे...!
उर्वशी : ठीक है बेटा...! Lunch redy है पहले lunch कर लो आप...!
शुभम : ठीक है मम्मी...!
(शुभम lunch कर रहा था, उर्वशी बेडरूम मे जा कर आयने के सामने सवरने लगी, लाल साड़ी, लाल ब्लाउज, लाल लिपस्टिक, कमल की पंखुडियो सी बड़ी बड़ी आँखो मे काजल, लाल चुड़ी, घुंगरू वाली पायल, और उसके नाजुक कमर से निचे लटकती हुईं काले नागिन सी लटकती हुईं चोटी बांध कर सज धज कर तैयार हो रही थी तभी आर्यन और वासु वहा आजाते है.)
वासु : hello... शुभम...!
शुभम : hii.. आर्यन...! Hii... वासु...!
आर्यन : आंटी जी कही दिखाई नहीं दे रही है...!
शुभम : है घर मे ही है...! मम्मी...! मम्मी...!
उर्वशी : आ गए हो...! अच्छा...!
वासु : नमस्ते आंटी...!
(उर्वशी को देखते ही आर्यन उसका बदन ऊपर से निचे तक scan करने लगता है, मन ही मन उर्वशी को नजरों से नंगी करने लगता है. बड़ी उमर की औरतों मे रूचि रखने वाला आर्यन उर्वशी को केवल एक मादा समझता था,

उर्वशी के लिए आर्यन जरूर कम उम्र है नया नर था मगर वह एक Basketball का खिलाड़ी था एक स्पोर्ट्स पर्सन था, उसकी शारीरिक क्षमता अपने समकालीन अन्य लड़को से ज्यादा थी और उसका कलाई जितना मोटा, असामान्य रूप से लंबा, योनि मे घाव बना देने वाला औजार उसे बहुसंख्यक लड़को आदमियों से अलग करता था. वह पत्थर सा सख्त, आगे से नुकिला बिच मे मोटा और ताकतवर था, निश्चित रूप से उर्वशी उसे देख कर मोहित हो गई और उसे विश्वास हो गया कि ये उसके खेत मे बीज जरूर बो देगा तभी तो उर्वशी ने आर्यन को अपना खेत सौपने का फैसला कर लिया था, दो दिन पहले ही अपने पदार्पण मैच में उर्वशी के पुरानी पिच पर आर्यन ऐसी पारी खेल चूका था कि पहली पारी(inning) में ही अनबीटन सेंचुरी मार कर उर्वशी की पिच(pitch) घायल कर दी थी. और वो मादा जो सिर्फ ये समझती थी कि उसके खेत मे कोई मजबूत और तजुर्बेकार किसान ही हल चला कर जोत सकता है गलत साबित हुई, आर्यन के दमदार performance से प्रभावित उर्वशी आर्यन से अब नजरें चुराने लगी थी, आर्यन एक सुरक्षित दुरी बना कर रखना चाहती थी, उसके ताकतवर लिंग के आगे फिर टांग खोलना नहीं चाहती थी. वही आर्यन अलग ही अकड़ मे था, उर्वशी के पिच पर एक बार विजय प्राप्त कर चूका था. "एक मादा जो मेरे आगे टांग खोल चुकी हो, जिसके योनि अंदर तक की गहराई मैंने नाप ली हो उसे मै क्यों पहले greet करू, उर्वशी खुद हो कर मुझे greet करें" ऐसी भावना पाले हुए बैठा था. उर्वशी को देख कर आर्यन ने उसे greet भी नहीं किया था, आर्यन का ये अंदाज उर्वशी को बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था, अब वो आर्यन को अपने नखरो से हैरान करने वाली थी,)
शुभम दोनों को उसके रूम मे ले आया और तीनो मिल कर group study करने लगें, लेकिन आर्यन का मन कही और ही था, कई बार पानी पिने के बहाने तो कभी सुसु करने के बहाने आर्यन उर्वशी को ताकने बाहर गया पर उर्वशी ने उसके bed room का दरवाजा ओढ़ कर रखा था, दोपहर के 4 बज रहे थे....
वासु : शुभम... Bro आंटी से कह कर कॉफी बनवा लो...!
आर्यन : हा भाई...! आंटी के हाथ की बनी कॉफी मिल जाती तो मजा आजाता...!
शुभम : ठीक है...! अभी बोल कर आता हु...!(शुभम उर्वशी को कॉफ़ी के लिए बोल कर आता है, उर्वशी कॉफी बनाने लगती है, कुछ snakes और कॉफ़ी redy कर के उर्वशी शुभम के रूम मे enter करती है....)
उर्वशी : बच्चो...! लो गरमा गरम कॉफी...!
(अब नखरे दिखाती हुईं उर्वशी ने आर्यन के और देखा तक नहीं, न ही कोई बात की, आर्यन जैसे लौंडों को ठीक करना वो बखूबी जानती थी. कॉफी पी कर आर्यन cup किचन मे रखने जाने लगा, सोचता के उर्वशी खुद उसके साथ बात करेगी, पर ऐसा हुवा नहीं. अब भी उर्वशी ने उसको दूध मे पड़ी मक्खी के जैसे नजर अंदाज कर दिया)
शाम के 4 बजने आये थे, study निपटा कर दिनों room से बाहर आने लगें, उर्वशी tv पर कुछ प्रोग्राम्स देखने मे busy थी.
वासु : अच्छा आंटी...! हम चलते है...!
उर्वशी : ठीक है बेटा...!
(तभी जय वहा आता है)
जय : नमस्ते भाबी...!

उर्वशी : नमस्ते...! कहा की तैयारी है बुलेट राजा...!(बड़ी नजाकत से जय के साथ उर्वशी बात कर रही थी)
जय : भाबी जी...! आप की permission हो तो शुभम को साथ ले जाऊ...!
उर्वशी : हा... हा...! कभी हमें भी घुमाने ले चलिए...!
जय : जी जरूर...! कहिये कहा ले चलू...!
उर्वशी : बताएँगे...! शुभम की छुट्टीया लग जाये तब ले चलिए...!
जय : जी बिलकुल...! आप बस एक बार बता देना..!
उर्वशी : जी बिलकुल...!
जय : अरे शुभम, पार्क चलोगे...! घूम कर आते है...!
शुभम : ठीक है अंकल...!
जय : 6 बजे तैयार रहना,...!
शुभम : जी ठीक है...!

(ये पहली बार था ज़ब जय और आर्यन एक दूसरे को देख रहे थे, एक शिकार पर दावेदारी ठोकने वाले दो शिकारीओ की ये पहली मुलाक़ात थी. "एक तरफ उर्वशी को अपना मान चूका बब्बर शेर(lion) जय" तो "दूसरी तरफ उर्वशी पर झपट्टा मार अपने निचे लेने की फिराक मे घात लगाए हुए ताक मे बैठा शेर(tiger) आर्यन" एक दूसरे को यु निहार रहे थे जैसे के अपने area पर दबदबा बनाने के लिए लड़ाई से पहले दो शेर एक दूसरे की ताकद आजमा रहे हो.....
जय और उर्वशी जिस अंदाज नजरों मे नजरें डाल कर हस हस कर बाते कर रहे थे उस से आर्यन के अंदर जलन सी होने लगी, ज़ब के उर्वशी ने आर्यन की और देखा तक नहीं, न उस से कोई बात भी की, इस सब से उकड़ा हुवा चेहरा ले कर आर्यन वहा से जाने लगा.)
शाम के 6 बजे ही थे के जय तैयार हो कर वहा आ गया, उसकी बाइक बुलेट(royal Enfield) बाहर निकालते हुए शुभम को आवाज देने लगा....
जय : शुभम...! चलो निकलते है...!
शुभम : आया...! बस एक मिनिट...!
जय ने बाइक को किक मारी, एक ही किक मे धड... धड... धड... धड... की आवाज करती हुईं बाइक start कर दी, बाइक start होते ही शुभम बाइक पर सवार हो गया के दोनों बाते करते करते निकल पड़े,,, देखते ही देखते destination पर पोहोच गए...

जय : कैसे चल रही है पढ़ाई...!
शुभम : जी पढ़ाई तो पूरी कर चूका हु, अब तो बस revision कर रहा हु...!
जय : बहोत बढ़िया...! अब next week exams है, एक काम करो आज ही exams के जरुरी सामान खरीद लेते है...!
शुभम : पर अंकल मैंने पैसे नहीं लाये है...!
जय :पैसो की चिंता तुम मत करो...!याद है मैंने तुमसे वादा किया था के तुम्हारा मै खयाल रखूँगा... मै बस मेरा वादा निभाना चाहता हु...!
शुभम : पर मम्मी डाँटेगी...!
जय : मै उनको बोल दूंगा के मैंने खुद forces कर के shopping करवाई है..! ठीक है ना...!
शुभम : hum hum...!
जय : अच्छा शुभम, वो आज तुम्हारे घर दो लड़के कौन आये थे... फ्रेंड्स है क्या...?
शुभम : हा... दोनों classmates है... वो जो ऊंचा लड़का था उसका नाम आर्यन है, दूसरा वासु है...!
जय : पर शुभम...! आर्यन कुछ ठीक नहीं लगा मुझे...!
शुभम : जी वो ना थोड़ा aggressive है, BASKETBALL खेलता है, बस इसी का attitude है उसे...!(शुभम ने आर्यन की सारी history बता दी)
जय : hum...! लगा ही मुझे...! वो लड़का थोड़ा बिगड़ा हुवा है...!
वैसे तुम्हारे घर कब से आता जाता है...!
शुभम : बस इसी साल से आता है अंकल...!
जय : ऐसे लड़को को घर मे लाना ठीक नहीं होता है...! इनकी नजरो का कोई भरोसा नहीं होता है...!
शुभम : जी पर वो...
जय : ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी...! मुझे बस तुम्हारी फ़िक्र है...! अच्छा कोई परेशानि हुईं तो मुझे बताना... मै हु...! आने दो उसे...!
शुभम : जी अंकल...! अब आप है तो किसी से क्या डरना...!
( यु ही बातो बातो मे जय शुभम को exams का जरुरी सामान खरीद दिया, ice cream खिलाई and पार्क घुमा लाया, देखते ही देखते दोनों घर पोहोच गए.) दोनों ज़ब घर पोहोचे तब उर्वशी किचन मे खाना बना रही थी...!
जय : भाबी...! देखिये शुभम की exams के लिए जो जरुरी सामान खरीद लाये है वो मैंने उसे दिलवाया है...! इतना तो मेरा हक बनता है...!(यु कह कर जय ने शुभम के बालो मे उंगलियां फहराई और ऊपर उसके flat मे जाने लगा)
उर्वशी : हा बिलकुल...! अच्छा किया जय....!
शुभम : मम्मी.. मम्मी... जय अंकल कितने अच्छे है ना...! पापा भी होते तो मुझे ऐसे ही घुमाने ले जाते

...!
उर्वशी : हा बेटा...!
(दूसरी तरफ आर्यन का कुछ अलग ही चल रहा था, दो दिन पहले उर्वशी की चुदाई कर के उसने ये मान लिया था के उर्वशी पर अब सिर्फ और सिर्फ उसी का हक है पर आज उर्वशी ने उसे दूध मे गिरी मक्खी के तरह नजर अंदाज कर दिया और तो और जय के साथ उर्वशी जिस अंदाज मे गुलुगुलु कर रही थी उस सब के वज़ह से आर्यन आगबबूला होने लगा था, इसे वो खुद का अपमान मान बैठा. धूर्तता, चालाकियाँ और बदमोसी से भरा हुवा आर्यन अब उर्वशी को अच्छे से फ़साने की प्लानिंग करने लगा...
मन ही मन बुदबूदाता हुवा आर्यन सोचने लगा "एक साल से मै उर्वशी पर लाइन मार रहा हु, उसके बदन को पाने के लिए मैंने बहोत मेहनत की है अब कोई दूसरा आ कर मेरा हक छीन जाये ये मै बर्दास्त नहीं करूंगा, उर्वशी मेरे से set हो चुकी थी पर ऐसा क्या हुवा जो उसने मुझे नजरअंदाज कर दिया, कोई बात नहीं मै उसे प्यार मे फसाउँगा, उसे मेरी दीवानी कर दूंगा फिर उसे अच्छे से रगडूंगा, उसकी चुत और गांड का छेद एक कर दूंगा...और चोद चोद कर मन भर जाये तब मै उसे मै छोड़ दूंगा. उर्वशी तुझे तेरे बदन का बड़ा गुरुर है मै उस बदन को तहस नहस कर दूंगा, तेरे पाव भारी कर दूंगा, तेरे बच्चो का नाजायज बाप मै ही बनूंगा, कल group study का आखरी दिन है मुझे कल ही कुछ करना पड़ेगा'"....आर्यन अब उर्वशी को प्यार से मनाने, अपने प्रेम जाल मे फ़साने की की प्लानिंग करने लगा....!







कोई कितना भी पढ़ाकू क्यों न हो, क्लास मे अव्वल भी आता रहा हो पर पिता का साथ न हो तो दुनियदारी के exams मे वो fail ही हो जाता है. अब तक अपने काम से काम रखने वाला शुभम अजीब अज्ञातवास मे जीवन बिता रहा था. पर अगले दिन जो आर्यन कांड करने वाला था उस से शुभम के जीवन मे एक महत्पूर्ण बदलाव आने वाला था....!