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- Dec 5, 2013
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#36
इस बातचीत ने मेरे मन में हलचल मचा दी, चाची की बातो से लग रहा था की वो वैसी नहीं है जैसा दिखती है, और उसकी क्या कहानी है अब मुझे ये मालूम करना था . दूसरी बात मुझे ये पता चली थी चाचा कर नहीं पा रहा है उसके साथ , शायद इसी बात से वो दबता था चाची से. जी भर कर पानी पीने के बाद मैं घर से निकला ही था की रीना की मामी मिल गयी.
“अरे मनीष, वो तेरा काम हुआ के नहीं ” उसने कहा
मैं- जल्दी ही हो जायेगा काकी.
काकी- अच्छा ही है
मैं- रीना कहा है
काकी- घर पर ही है .
मैं रीना के घर गया तो वो चबूतरे पर बैठी कपडे धो रही थी . मैं उसके पास ही बैठ गया .
रीना- आजकल कुछ जायदा ही मुलाकाते हो रही है ऐसा लोग कहने लगे है अब
मैं- कुछ तो लोग कहेंगे
रीना- कल मैं क्या पहनू
मैं- नीला सूट
रीना- तुझे मैं नीले में अच्छी लगती हूँ क्या
मैं- मेरी नजर से देख कभी खुद को समझ जायेगी.
रीना- इसी लिए तो नहीं देखती .और बता
मैं- अभी तो कुछ नहीं है बताने को
रीना- तेरी बाते सर के ऊपर से जाती है .
मैं - आजकल बस ऐसा ही चल रहा है .
रीना- ये सुहानी हवा, ये ढलती शाम कितने दिन हुए पनघट किनारे हम बैठे नहीं
मैं- बस कुछ दिनों की बात है , फिर पनघट भी मेरी और तू भी मेरी.
रीना ने आँखे मटकाई और आसपास देखते हुए बड़ी शोखियो से अपनी जुल्फे संवारी और बोली- कुछ भी बोलता है .
मैं- तू कहे तो न बोलू
रीना- एक नइ कसेट लायी हु गानों की ले जा , तुझे पसंद आएगी.
मैं - ताई के पास रख जाना , चल मिलता हूँ फिर.
आँखों में रंग थे,सपने थे कल मैं रीना के साथ मेले में जाने वाला था . मैं उस से वो सब कहना चाहता था जिसे सुनने को वो बेताब थी. मैं उसका हाथ पकड़ना चाहता था. उसके साथ घूमना चाहता था . उसकी जुल्फों के साये तले जीना चाहता था . ढलती शाम में मैं ताई के साथ बावड़ी पर बैठा था . वो मुझे देख रहा था मैं उसे .
ताई- क्या देखता है इस तरह से
मैं- तू जानती है मेरी नजर को फिर क्यों पूछती है
ताई- बस यूँ ही . आजकल तू कुछ खोया खोया सा रहता है , मुझे देवरानी ने बताया की कल रात तू खेत में किसी लड़की के साथ था , मैं तुझसे ये नहीं पूछूंगी की वो कौन थी पर इतना जरुर कहूँगी जिसका भी तू हाथ थामे , थाम कर रखना
मैं- वैसे तो चाची तुम्हे फूटी आँख नहीं सुहाती और वैसे बड़ी निजी जानकारिया बांटी जा रही है .
ताई- हैं तो मेरी देवरानी ही और फिर छोटी मोटी बाते किस घर में नहीं होती.
मैं- मुझे तो समझ नहीं आता
ताई- उसकी जरुरत भी नहीं .
मैं- ये हवा, ये मौसम कुछ कहता है
ताई- क्या कहता है
मैं- तुमसे प्यार करने को
ताई- मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हूँ क्या , या तेरा प्यार बस उस चीज़ तक ही है
मैं- तुझे क्या लगता है, मुझे उस चीज की हसरत होती तो मेरे पास मौका था न , पर मैंने तुम्हे तब पाया जब तुम्हारे दिल ने कहा , वर्ना मेरी क्या औकात थी जो तुमसे जबरदस्ती कर सकता. क्या मैंने कभी तुमसे पूछा की कितने लोगो के साथ ..........
मैंने जान बुझ कर बात अधूरी छोड़ दी.
ताई- तुझे हक़ है जानने का ,
मैं- पर मुझे नहीं जानना
ताई- मेरी बात सुन, तेरी जो भी दोस्त है उसका ध्यान रखना, अब तूने इतने लोगो से दुश्मनी पाल ली है , तो ये बात हमेशा याद रखना की तेरी वजह से उसकी सुरक्षा से कोई समझोता न हो. अपनों को खोने का गम सहन करना आसन नहीं होता. दुश्मनी का पहला नियम यही होता है की लोग सबसे खास को ही नुक्सान पहुंचाते है .
मैं- , उसे मेरी जरुरत नहीं उस मामले में
ताई- वो तू जाने,
मैंने ताई की जांघ पर हाथ रखा और सहलाने लगा. उसके बदन की संदली खुशबु मुझे पागल कर रही थी . मैंने ताई के हाथ को धीरे से अपने लंड पर रख दिया. वो उसे सहलाने लगी. कुछ देर बात उसने हाथ अंदर पायजामे में डाल दिया और मैं क्या बताऊ मैं उस मजे के अहसास में डूबने लगा.
“ताऊ तुमसे नफरत क्यों करता है ” मैंने कहा
ताई- उसके पास पर्याप्त कारण है
मैं- उसने भी तुम्हे देख लिया था न किसी के साथ
ताई- उसकी नफरत जायज है , मैंने स्वीकार कर लिया है उसकी नफरत को
मैं- किसके साथ देखा था तुम्हे उसने
ताई- तुम्हे जरुरत नहीं जानने की .
मैंने ताई को खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके गालो को चुमते हुए बोला- मुझे हर वो बात जाननी है जो मुझसे छिपी है.
ताई-कुछ चीज़े छिपी रहे तो ही बेहतर होती है .
मैंने अपने हाथ ताई की चुचियो पर रखा और उन्हें दबाते हुए बोला- ठीक है नहीं पूछता पर ये राज़ फिर किसी भी तरह से मेरे सामने नहीं आना चाहिए
ताई- वो मेरी जिंदगी है , उसे कैसे जिया मैंने वो मेरी मर्जी थी , जरुरी नहीं की दुनिया की नजर से देखा जाए, दुनिया की नजरो में ये गलत हो सकता है पर अगर मैं टांगे खोल दू तो क्या सबसे पहले ये समाज ही नहीं चढ़ जायेगा मुझे पर. मैंने तुझे दी , पर इसका मतलब ये नहीं था की मेरी कोई मज़बूरी थी , उसमे मेरी मर्जी थी . बेशक वो गलत था , पर उस छोटे से लम्हे ने मुझे ख़ुशी दी.
मैं- मैं बस चाहता हूँ की तुम खुश रहो , तुम्हारे दामन में दुनिया भर की खुशिया रहे .
मैंने ताई के पैरो को फैलाया और अपने उपर चढ़ा लिया ताई ने मेरे लंड को अपनी चूत पर लगाया और उस पर बैठती चली गयी . ताई की चूत की गर्मी का क्या कहना . वो धीरे धीरे ऊपर निचे होने लगी. घुप्प अँधेरे में बस हमारी साँसे ही चल रही थी. न वो कुछ बोल रही थी न मैं पर हमारे जिस्म एक दुसरे से कह रहे थे वो बात जो बस उन्हें ही मालूम थी .
चुदाई के बाद वो मेरे ऊपर से उठी और पास में बैठ कर ही मूतने लगी. अँधेरी रात में उसकी चूत से टपकते मूत की आवाज सुनना भी एक अजब ही सुख था .
“घर चले अब ” ताई ने कहा
मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- क्या तुम मुझमे पिताजी को देखती हो .
ताई ने मेरी बाहं मरोड़ी और बोली- मेरा इम्तिहान मत ले तू , अर्जुन और मेरा रिश्ता जो था उसे समझने के काबिल नहीं है तू. बस इतना समझ ले मैं काशी का घाट हूँ , मेरे और अर्जुन के रिश्ते को समझने के लिए तुझे गंगा होना पड़ेगा. .......................
इस बातचीत ने मेरे मन में हलचल मचा दी, चाची की बातो से लग रहा था की वो वैसी नहीं है जैसा दिखती है, और उसकी क्या कहानी है अब मुझे ये मालूम करना था . दूसरी बात मुझे ये पता चली थी चाचा कर नहीं पा रहा है उसके साथ , शायद इसी बात से वो दबता था चाची से. जी भर कर पानी पीने के बाद मैं घर से निकला ही था की रीना की मामी मिल गयी.
“अरे मनीष, वो तेरा काम हुआ के नहीं ” उसने कहा
मैं- जल्दी ही हो जायेगा काकी.
काकी- अच्छा ही है
मैं- रीना कहा है
काकी- घर पर ही है .
मैं रीना के घर गया तो वो चबूतरे पर बैठी कपडे धो रही थी . मैं उसके पास ही बैठ गया .
रीना- आजकल कुछ जायदा ही मुलाकाते हो रही है ऐसा लोग कहने लगे है अब
मैं- कुछ तो लोग कहेंगे
रीना- कल मैं क्या पहनू
मैं- नीला सूट
रीना- तुझे मैं नीले में अच्छी लगती हूँ क्या
मैं- मेरी नजर से देख कभी खुद को समझ जायेगी.
रीना- इसी लिए तो नहीं देखती .और बता
मैं- अभी तो कुछ नहीं है बताने को
रीना- तेरी बाते सर के ऊपर से जाती है .
मैं - आजकल बस ऐसा ही चल रहा है .
रीना- ये सुहानी हवा, ये ढलती शाम कितने दिन हुए पनघट किनारे हम बैठे नहीं
मैं- बस कुछ दिनों की बात है , फिर पनघट भी मेरी और तू भी मेरी.
रीना ने आँखे मटकाई और आसपास देखते हुए बड़ी शोखियो से अपनी जुल्फे संवारी और बोली- कुछ भी बोलता है .
मैं- तू कहे तो न बोलू
रीना- एक नइ कसेट लायी हु गानों की ले जा , तुझे पसंद आएगी.
मैं - ताई के पास रख जाना , चल मिलता हूँ फिर.
आँखों में रंग थे,सपने थे कल मैं रीना के साथ मेले में जाने वाला था . मैं उस से वो सब कहना चाहता था जिसे सुनने को वो बेताब थी. मैं उसका हाथ पकड़ना चाहता था. उसके साथ घूमना चाहता था . उसकी जुल्फों के साये तले जीना चाहता था . ढलती शाम में मैं ताई के साथ बावड़ी पर बैठा था . वो मुझे देख रहा था मैं उसे .
ताई- क्या देखता है इस तरह से
मैं- तू जानती है मेरी नजर को फिर क्यों पूछती है
ताई- बस यूँ ही . आजकल तू कुछ खोया खोया सा रहता है , मुझे देवरानी ने बताया की कल रात तू खेत में किसी लड़की के साथ था , मैं तुझसे ये नहीं पूछूंगी की वो कौन थी पर इतना जरुर कहूँगी जिसका भी तू हाथ थामे , थाम कर रखना
मैं- वैसे तो चाची तुम्हे फूटी आँख नहीं सुहाती और वैसे बड़ी निजी जानकारिया बांटी जा रही है .
ताई- हैं तो मेरी देवरानी ही और फिर छोटी मोटी बाते किस घर में नहीं होती.
मैं- मुझे तो समझ नहीं आता
ताई- उसकी जरुरत भी नहीं .
मैं- ये हवा, ये मौसम कुछ कहता है
ताई- क्या कहता है
मैं- तुमसे प्यार करने को
ताई- मैं तुझे इतनी अच्छी लगती हूँ क्या , या तेरा प्यार बस उस चीज़ तक ही है
मैं- तुझे क्या लगता है, मुझे उस चीज की हसरत होती तो मेरे पास मौका था न , पर मैंने तुम्हे तब पाया जब तुम्हारे दिल ने कहा , वर्ना मेरी क्या औकात थी जो तुमसे जबरदस्ती कर सकता. क्या मैंने कभी तुमसे पूछा की कितने लोगो के साथ ..........
मैंने जान बुझ कर बात अधूरी छोड़ दी.
ताई- तुझे हक़ है जानने का ,
मैं- पर मुझे नहीं जानना
ताई- मेरी बात सुन, तेरी जो भी दोस्त है उसका ध्यान रखना, अब तूने इतने लोगो से दुश्मनी पाल ली है , तो ये बात हमेशा याद रखना की तेरी वजह से उसकी सुरक्षा से कोई समझोता न हो. अपनों को खोने का गम सहन करना आसन नहीं होता. दुश्मनी का पहला नियम यही होता है की लोग सबसे खास को ही नुक्सान पहुंचाते है .
मैं- , उसे मेरी जरुरत नहीं उस मामले में
ताई- वो तू जाने,
मैंने ताई की जांघ पर हाथ रखा और सहलाने लगा. उसके बदन की संदली खुशबु मुझे पागल कर रही थी . मैंने ताई के हाथ को धीरे से अपने लंड पर रख दिया. वो उसे सहलाने लगी. कुछ देर बात उसने हाथ अंदर पायजामे में डाल दिया और मैं क्या बताऊ मैं उस मजे के अहसास में डूबने लगा.
“ताऊ तुमसे नफरत क्यों करता है ” मैंने कहा
ताई- उसके पास पर्याप्त कारण है
मैं- उसने भी तुम्हे देख लिया था न किसी के साथ
ताई- उसकी नफरत जायज है , मैंने स्वीकार कर लिया है उसकी नफरत को
मैं- किसके साथ देखा था तुम्हे उसने
ताई- तुम्हे जरुरत नहीं जानने की .
मैंने ताई को खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके गालो को चुमते हुए बोला- मुझे हर वो बात जाननी है जो मुझसे छिपी है.
ताई-कुछ चीज़े छिपी रहे तो ही बेहतर होती है .
मैंने अपने हाथ ताई की चुचियो पर रखा और उन्हें दबाते हुए बोला- ठीक है नहीं पूछता पर ये राज़ फिर किसी भी तरह से मेरे सामने नहीं आना चाहिए
ताई- वो मेरी जिंदगी है , उसे कैसे जिया मैंने वो मेरी मर्जी थी , जरुरी नहीं की दुनिया की नजर से देखा जाए, दुनिया की नजरो में ये गलत हो सकता है पर अगर मैं टांगे खोल दू तो क्या सबसे पहले ये समाज ही नहीं चढ़ जायेगा मुझे पर. मैंने तुझे दी , पर इसका मतलब ये नहीं था की मेरी कोई मज़बूरी थी , उसमे मेरी मर्जी थी . बेशक वो गलत था , पर उस छोटे से लम्हे ने मुझे ख़ुशी दी.
मैं- मैं बस चाहता हूँ की तुम खुश रहो , तुम्हारे दामन में दुनिया भर की खुशिया रहे .
मैंने ताई के पैरो को फैलाया और अपने उपर चढ़ा लिया ताई ने मेरे लंड को अपनी चूत पर लगाया और उस पर बैठती चली गयी . ताई की चूत की गर्मी का क्या कहना . वो धीरे धीरे ऊपर निचे होने लगी. घुप्प अँधेरे में बस हमारी साँसे ही चल रही थी. न वो कुछ बोल रही थी न मैं पर हमारे जिस्म एक दुसरे से कह रहे थे वो बात जो बस उन्हें ही मालूम थी .
चुदाई के बाद वो मेरे ऊपर से उठी और पास में बैठ कर ही मूतने लगी. अँधेरी रात में उसकी चूत से टपकते मूत की आवाज सुनना भी एक अजब ही सुख था .
“घर चले अब ” ताई ने कहा
मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- क्या तुम मुझमे पिताजी को देखती हो .
ताई ने मेरी बाहं मरोड़ी और बोली- मेरा इम्तिहान मत ले तू , अर्जुन और मेरा रिश्ता जो था उसे समझने के काबिल नहीं है तू. बस इतना समझ ले मैं काशी का घाट हूँ , मेरे और अर्जुन के रिश्ते को समझने के लिए तुझे गंगा होना पड़ेगा. .......................