Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 56 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

लौंडिया पटवारी की -बड़ी नमकीन

ललिया

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फिर अचानक वो चुप हो गयीं एकदम उदास,... और मैं समझ गयी उनका दर्द, बच्चा एक खिलौने के लिए जिद्द कर रहा हो, वो उसे मिल भी जाये, लेकिन उससे खेल न पाए,... फिर थोड़ा सा गुस्सा और उन्होंने सब कुछ उगल दिया,...

" वही पटवारी की बिटिया, ललिया,... मुँहझौंसी, कुल बोरन कुल आग लगाई,... रेनुआ के साथ पढ़ती थी, समौरिया,... पक्की सहेली,,... जोबन उसके भी गदरा रहे थे, चूत में आग लगी रहती थी,... और आती भी तब जब रेनुआ नहीं होती, और कमल होता,... मैं समझती नहीं थी का, की असल में रेनू से दोस्ती ही उसने कमलवा के चक्कर में की है,... लेकिन मुझे क्या,... जानबूझ के जब वो आती थी तो मैं कभी बाहर,... तो कभी अपनी जेठानी के पास,... और चीख पुकार मचती तो हम दोनों मुस्कराते की बेटवा हम लोगों का सच में सांड़ है, बछिया कुल खुद ही,...

पर कुछ ज्यादा ही चीखती थी. एक दिन कमल नहीं था लेकिन आने वाला था, तो ललिया से बात बात में मैंने पूछ लिया, पहली बार तो लड़कियों के दर्द होता है, लेकिन तुम रोज इतना,... कोई परेशानी है का,... तेल वेल लगा लिया करो,

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तो वो ललिया हंसने लगी, हंसती तो गाल में गड्ढे पड़ते, ... बोली,

" अरे चाची,... पहली बार,... अरे एकरे पहले चार खूंटा घोंट चुकी हूँ,... जहाँ बाबू जी क पहले पोस्टिंग थी, तीन तो वहां, एक हमरे स्कूल के मास्टर थे सुधीर माट्साब, बेचारे उनकी मेहरारू छोड़ के चली गयी थी की उनका मनई का नहीं गदहा घोडा क है, उन्ही पे दया आ गयी तो झिल्ली उन्ही से फड़वा लिए. फिर एक हमारे फुफेरे भाई आये थे उनसे,... और ननिहाल गयी गरमी की छुट्टी में तो वहां तो महीने भर बिना नागा अपने मामा के लड़के के साथ,... और यहाँ अहिरौटी क, जो हमरे घर गाय दुहने आता है, वो हमको भी दुह दिया,... यहाँ आने के दूसरे ही दिन। अब हम रेनुआ की तरह थोड़े हैं की मारे डर के हरदम जांघ चिपका के रहे,... "

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मुझे तो ललिया की बात अच्छी लगी, मैंने रेनू की चाची को बोला भी

" ये तो अच्छी बात है न ऐसी लड़की रेनुआ की सहेली थी तो कुछ तो आपन गुन ढंग सिखाई होगी। "

" यही तो हम भी सोच रहे थे " रेनू की चाची मुस्करा के बोलीं फिर ललिया की बात आगे बढ़ाई।

"ललिया से हम बोले की तू चार चार मर्दों से चुदवाने के बाद भी इतना काहें चोकरती हो,... हाथ गोड़ पटकती हो, इतना नखड़ा तो गौने की रात दुल्हिन भी नहीं करती।

" अरे चाची, आपके बेटवा, अपने भैया के लिए. जो पिया मन भावे। "

ललिया हँसते खिलखिलाते बोली, फिर बड़ी देर तक हम दोनों खिलखिलाते रहे। मान गयी साली कच्ची उमर में ही पक्की चुदककड़ बन गयी थी, मरद की एक एक पेंच मालूम थी। ललिया ने फिर असल बात बताई। सब बात समझायी बोली,

" चाची, बेटवा तोहार पक्का सांड़ है,... अइसन मोटा मूसल,... चार चार से चुदवाने के अलावा और कितनों का पकड़ मसल मुठिया चुकी हूँ. फिर गाँव के भौजाइ, सहेली सब बताती है , लेकिन वइसन न देखा न सुना, ... लेकिन ओह से भी खतरनाक है उसका सुपाड़ा, जाता है तो लगता है कउनो बुर में मुट्ठी पेल रहा है। इतना मोटा और इतनी ताकत है उसके कमर में, कुतिया बनाय के जब पेलता है न तो जान निकल जाती है , लेकिन मैं उस समय नहीं चीखती,... बाद में। "

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रेनू की चाची ने लीलवा की जो ये बात बतायी, मेरी समझ में नहीं आयी। मैंने पूछ लिया,

" सुपाड़ा घुसने में तो चीख पुकार समझ में आती है, और अगर हमरे देवर क मोट है, तो रोई रोहट, लेकिन ससुरी जब सुपाड़ा घोंट लेती थी तब काहें चिल्लाती थी,... "

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रेनू की चाची जोर से हंसी, बोलीं

"अभी तुम छह महीने पहले आयी हो न , ये सब यह गाँव की लड़कियों क छिनरपन है, गाँव क पानी क असर,... चाहे तोहार ननद होयँ चाहे हमार,... ललिया तो जबरदस्त छिनार, वो खुदे बोली,... "

और फिर रेनू की चाची ने ललिया और कमल की चुदाई के किस्से का हाल खुलासा किया।

और क्या मस्त हाल बताया उन्होने बताया सुन के मेरी गीली हो गयी,

"कमल दरवाजा भी ठीक से नहीं बंद करता था, और ललिया खुद ही कपडे उतार के निहुर जाती थी, कभी पलंग पकड़ के, कभी मेज, कभी दीवाल के सहारे तो कभी बिस्तर पर ही,... टाँगे अपनी फैला लेती थी,...

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चूँचियाँ गदरा रही थी, लेकिन थीं अभी अमिया ही,... अभी जैसी छुटकी की हैं,... और कमलवा, बिना थूक लगाए सूखे ही पेलता था,... लेकिन ललिया की तो हरदम पनियाई रहती थी,... और वो खुद चूत चियार के, कमर में कमल की जबरदस्त की ताकत थी, और कमर को पकड़ जब पेलता था, बिना छेद के छेद हो जाये।

चुदी चूत में भी दो चार धक्के के बाद ही पूरा सुपाड़ा घुस पाता था। जैसे सांड़ अगले दो पैरों से बछिया को दबोच के रखता है, उसी तरह कमल भी अपने दोनों हाथों ललिया को पकड़ के दबोच लेता था, एक बार सुपाड़ा घुस जाए फिर लाख चूतड़ पटके , सूत भर भी लंड बाहर नहीं सरक सकता था और तभी ललिया क छिनरपन शुरू होता था.

मैं रेनू की चाची की बात मुंह बंद कर के सुन रही थी, सोच सोच के गीली हो रही थी की रेनू की चाची जो सिर्फ ललिया का कहा नहीं , जरूर अपनी बेटवा क चुदाई खुद देखती होंगी,...

लेकिन ये पूछने से नहीं रुक पायी क्या छिनरपन करती थी,...

" अरे उसकी मामी ने सिखाया था, महीने भर अपनी ननिहाल थी रोज उसका ममेरा भाई चोदता था ललिया को दिन रात। वहीँ उसकी मामी ने सिखाया, प्रैक्टिस कराई चूत को सिकोड़ने की, लंड को निचोड़ने की। थोड़ा सा लंड घुस जाए उसके बाद चूत को टाइट कर लेती थी वो, फिर कमलवा को पूरी ताकत से पेलना पड़ता था, चूत में घुसाने के बाद भी. बहुत ताकत है तोहरे देवर में,... तो वो केतनो चूत सिकोड़े, तोहार देवर, दोनों छोट छोट चूँची पकड़ के पूरी ताकत से ठेलता था, फिर दरेरते,... छीलते रगड़ते घसीटते लंड अंदर घुसता था ललिया की बुर में,... अभिन जो उम्र कम्मो, पायल की है वही उम्र रेनू की, उसकी सहेली ललिया की थी. और वो चिल्लाती थी, चीखती थी। लेकिन फिर भी ढीली नहीं करती थी"

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" क्यों लेकिन ये तो उसके हाथ में था की बुर आपन ढीली कर देती तो दर्द नहीं होता न " मैने रेनू की चाची से पूछा,...

" एकदम यही सवाल मैंने ललिया से भी पूछा " चाची बोलीं। फिर उन्होंने ललिया के शब्दों में ही जवाब दिया,...

ललिया बोली,...

" अरे चाची, तोहरे बेटवा को चीख पुकार सुनने में मजा आता है , उसका जोश दूना हो जाता है, फिर एकदम पागल होके चोदता है, गाली देता है , दांत काटता है, गाल पे चूँची पे कंधे पे नाख़ून से नोचता है,... और ऐसे रगड़ते हुए अंदर जाता है की लगता की बुर की चमड़ी छिल गयी। अब आप पूछेंगी की तुझे दर्द इतना होता है तो,... तो असली मज़ा तो इसी दर्द में है और दर्द देने वाले मर्द मिलते कहाँ है,... बुर जितना छिलती है उतनी ही मलाई से ठंडी होती है. "

तो ललिया बहुत मजा ले रही थी चीख चीख के हमरे देवर के साथ,... हँसते हुए मैंने कहा,... लेकिन चाची अब सीरियस थी, उन्होंने उसका दूसरा पहलू समझाया,
 
चालाकी ललिया की

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तो ललिया बहुत मजा ले रही थी चीख चीख के हमरे देवर के साथ,... हँसते हुए मैंने कहा,... लेकिन चाची अब सीरियस थी, उन्होंने उसका दूसरा पहलू समझाया,

" उसको तो मजा आ रहा था लेकिन बेचारी मेरी रेनू का इसी बहाने वो पत्ता काट रही थी , ये मुझे बाद में समझ आया। कई बार खुली खिड़की से रेनू को आते देखती तो और जोर जोर से चिल्लाने लगती थी, ...

" भैया, छोड़ दो, बहुत दर्द कर रहा है, मारो मत, काटो मत, लगता है,... ओह्ह एक मिनट रुक जाओ,... मन भर चोदना लेकिन ज़रा आराम आराम से,... ओह्ह मना नहीं कर रही हूँ पर, उफ़ जान निकल गयी,... '

और रेनू खिड़की से ये सब आवाजें सुनती थीं तो हदस जाती थी. वापस चली जाती थी।

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उधर तोहार देवर सोचता था की स्साली ललिया रोज की तरह नौटंकी कर रही वो और जोर से उसके चूतड़ पे चांटे मारता,... गाल कस के काट लेता, नाख़ून निपल में नोच लेता और करीब पूरा लंड निकाल के वो धक्का मारता की सीधे बच्चेदानी पे धक्का लगता और ललिया और चिल्लाती,...

और बाहर आवाज सुन के रेनुआ और घबड़ाती, की कहि तोहार देवर उस पे चढ़ गया तो उसकी तो जान ही निकल जायेगी। "

मैं ध्यान से सुन रही थी और समझ भी रही थी। लेकिन मैंने चाची से पूछा लेकिन रेनू ने उस छिनार से ये नहीं कहा की जब तोहें इतना दर्द हो रहा है तो काहें रोज टांग फैला के हमरे भैया से चुदवाने आ जाती हो.

" पूछा था, रेनुआ ने "

चाची बोलीं लेकिन ललिया का जवाब सुनके मेरी भी हिल गयी। ललिया ने उसे समझाया

" देख रेनुआ यह गाँव में तू ही हमार सहेली हो। हमार तो चलो फट गयी है , सबसे पहले सुधीर सर ने ही फाड़ दिया था मैथ में नंबर बढ़ाने के लिए,... फिर तीन चार और,... फिर भैया भी महीने दो महीने से,... लेकिन तेरी तो अभी कोरी है, तुझे तो अस्पताल ही जाना होगा, फिर अस्पताल में क्या कहोगी, मेरे भैया ने फाड़ दिया ? मैं रोज इसी लिए चुदवाती हूँ की वो तेरे पीछे न पड़े, मेरी सहेली के साथ कुछ हादसा न हो। मैं मना नहीं कर रही हूँ खाली बता रही हूँ, हमारे क्लास की आधी से ज्यादा लड़कियां चुदवाती हैं लेकिन मेरे गाल पे, जोबन पे जो दांत के निशान रहते हैं, दो दिन टांग छितरा के चलती हूँ, और किसी की हालत होती है ऐसी क्या ? देखो तुम्हारा भाई है, मैं बुराई नहीं करती,... लेकिन झिल्ली कहीं और फड़वा ले मेरी तरह, दो चार चुदवा ले उसके बाद ही तू उसके लायक हो पाएगी। "

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मैं अब सब समझ गयी थी मैंने रेनू की चाची की को बताया

" समझ गयी, हमार ननद कोरी कुँवार, चाँद अँजोरिया अस,... ललिया जानती थी , एक बार देवर जी को उसका स्वाद मिल गया, फिर घर में , जब चाहे तब,... वो ललिया को पूछेगा भी नहीं, इसलिए रेनुवा को भड़काए रहती थी। और रेनुआ के साथ बाकी उसकी उम्र की लड़कियों को भी हदसा के रख दिया,... की कउनो कुँवारी लड़की हमरे देवर के आगे नाड़ा न खोले,... लेकिन वो पिछवाड़े वाली का बात।'

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मुझे जो नैना ने बताया था उसके आधार पे मैंने एक सवाल और रेनू की चाची से पूछ लिया और उन्होंने उलटे मुझसे सवाल पूछ लिया।

और उसका मेरे पास कोई जवाब नहीं था सिवाय हाँ बोलने के लिए।

रेनू की चाची ने पूछा,

" ये बताओ नयको, कउनो कच्ची अमिया वाली हो, लौंडा छाप छोट छोट टाइट टाइट चूतड़, खूब मटका के चलती हो,... कच्ची कोरी गाँड़,.... तो गाँड़ उसकी मारी जायेगी की नहीं, कउनो तोहार देवर हो तो ऐसे माल की गाँड़ मारेगा की नहीं।"

अब इस बात का क्या जवाब होता सिवाय सर हिला के हामी भरने के, वो मैंने किया फिर साफ़ साफ़ बोल दिया।
 
पिछवाड़ा ललिया का

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मुझे जो नैना ने बताया था उसके आधार पे मैंने एक सवाल और रेनू की चाची से पूछ लिया और उन्होंने उलटे मुझसे सवाल पूछ लिया।

और उसका मेरे पास कोई जवाब नहीं था सिवाय हाँ बोलने के लिए।

रेनू की चाची ने पूछा, " ये बताओ नयको, कउनो कच्ची अमिया वाली हो, लौंडा छाप छोट छोट टाइट टाइट चूतड़, खूब मटका के चलती हो,... कच्ची कोरी गाँड़,.... तो गाँड़ उसकी मारी जायेगी की नहीं, कउनो तोहार देवर हो तो ऐसे माल की गाँड़ मारेगा की नहीं।

अब इस बात का क्या जवाब होता सिवाय सर हिला के हामी भरने के, वो मैंने किया फिर साफ़ साफ़ बोल दिया।

" वैसी लौंडिया की गाँड़ न मारना पाप है, ... और अगर मेरे किसी देवर ने मेरी किसी ननद की कच्ची कोरी गाँड़ छोड़ी न तो मैं उसकी गाँड़ खुद मार लूंगी। स्साला गांडू, अरे बिना जबरदस्ती के कहीं गाँड़ मारी जाती है। "

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" एकदम तोहार देवर ललिया के साथ वही किया, वो भी महीना दो महीना बुर चोदने के बाद,... वो स्साली खुदे चूतड़ मटका मटका के ललचाती कभी ठीक से मना भी नहीं करती, बस कहती, भैया आज नहीं , बस आज नहीं , अगली बार मना करुँगी तो भी ले लेना। एकदम मना नहीं करुँगी आज स्साली चूत में आग लगी है पहले बुर चोद दो भैया , ऐसे ललिया बोलती बस खाली ललचाती और ऐन मौके पे टांग सिकोड़ लेती।

ऊपर से कलवती, वही जो हमारे यहाँ काम करती थी, सबसे , तोहरे देवर से तो बचपन से बहुत खुली और चढ़ाती थी। तो वही बोली,

" हे सुन, वो स्साली पता नहीं तोहसे पहले कैसे कैसे चुदवा के, तोहसे चोदवा रही है, अरे मजा तो सील खोलने में है, चलो अगवाड़ा नहीं तो पिछवाड़ा ही सही,... अबकी चाहे जो हो जाए उसकी गाँड़ की सील जरूर फाड़ना। स्साली छिनरपन करती है. और कउनो आराम आराम से करने की जरूरत नहीं है, पठानटोला और भरौटी तक आवाज जाए उसकी,... फट जायेगी तो मैं खुदे ले जाके मोची से सिलवा दूंगी, छोटी छोटी सिलाई करेगा, पता भी नहीं चलेगा। देवर तोहरे आगे तो छिनरपन करती है बहरे गाँव भर में गाती होगी, रेनुआ क भाई में गाँड़ मारने का जांगर ही नहीं है। छोड़ना मत स्साली को. "

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मैंने बीच में रेनू की चाची को टोका,...

" कलावती ने एकदम सही कहा. कोई भी भौजी देवर को यही सलाह देती , मैं तो अपने देवर का पकड़ के उसके पिछवाड़े सटाय देती , किसके लिए बचा के रखी हो,... बिना जबरदस्ती के न किसी लौंडिया की गाँड़ मारी जाती है न किसी लौंडे की, देवर ने अगर जबरदस्ती की तो एकदम सही किया, मेरा असली देवर है वो। "

रेनू की चाची जोर से मुस्करायीं,... बोलीं

"यह गाँव के देवरन क किस्मत की तोहार अस भौजी आयी और हम सास लोगन की किस्मत की तोहरे अस बहू आयी। बात एकदम सही कह रही हो, अरे जैसे कुल लौंडे गपागप शुरू करते हैं, पाहिले पहल तो तोहार देवर भी पहले लौंडन के साथ,... कुछ दिन बाद तो सब खुदे नेकर सरका के निहुर जाते है, .... तो उसको वही आदत थी,..."

मैं कुछ बोलना चाह कर भी नहीं बोल पायी। मेरे देवर ही क्यों मेरे साजन और ननदोई भी तो, और साजन की ये आदत पूरे घर को मालूम है, उनकी बहनों तक को,

मेरा छोटा भाई चुन्नू मुझे होली में लेने आया था, तो मेरी छोटी ननद ने इशारा कर दिया, भौजी तोहरी ससुरारी में लोग चुन्नू और चुन्नी में फ़रक नहीं करते हैं , वो छुटकी से थोड़ा ही बड़ा, हाईस्कूल में, खूब गोरा रेख अभी आ ही रही थी,... चिकना,... और मैंने देखा की ये, मेरे साजन, अपने जीजा के साथ, ... ये अपने साले को गोदी में बैठा के मजे ले रहे थे छेड़ रहे थे ,... मैं खाने के लिए दोनों लोगों को बुलाने गयी थी तो देखा की अपने गोद में बिठाये ये उसे चुम्मा ले रहे हैं और मुझसे ननदोई जी बोले, इतना अच्छा भोजन तो है हमारे पास,... अगले दिन, मेरे भाई की चीख सुन के मैं गयी, बाहर से झाँका तो ये और नन्दोई जी दोनों लगे हुए थे,... ननदोई ने मेरे भाई के मुंह में अपना मूसल ठोंक रखा था और वो चूस रहा था,... निहुरा हुआ, पीछे से ये मेरे भाई की गाँड़, हचाहच,... मैं एकदम सिहर गयी, जितना इनको मजा आ रहा होगा, उससे ज्यादा मुझे देखने में आ रहा था, मन कर रहा था और कस के पेलें, पूरी ताकत से , एकदम जड़ तक,...

और थोड़ी देर में ननदों ने मुझे देसी पिला के टुन्न कर दिया, एक लड़का पूरा रंगा पुता, मुझे बोला की तेरा देवर हे, बस आगे कुछ कहने की देर नहीं थी मैंने कपडे फाड़े और उसे पटक के चोदना शुरू कर दिया,... थोड़ी देर में वो ऊपर था, ... और तबतक नन्दोई जी आये और उसके पिछवाड़े वो भी चढ़ गए, वो सैंडविच की तरह बीच में,... मैंने भी सोचा की मेरा देवर तो नन्दोई जी का स्साला हुआ तो होली में चलता है। वो तो जब मैं और वो लड़का झड़ने लगे, और नंदों ने चार बाल्टी पानी हम सबके ऊपर डाला, रंग और नशा दोनों उतरा तो पता चला की वो तो मेरा भाई चुन्नू है, जिससे मैं चुदवा रही थी और ननदोई जी जिसकी गाँड़ मार रहे थे, रात में ट्रेन में भी, अब तक तो मुझे पता ही चल गया था इनकी पंसद,... तो चुन्नू के साथ जबरदस्ती मैं 69 कर रही थी उसके ऊपर चढ़ के,.. और अपने हाथ से पकड़ के उसके पिछवाड़े,....

और सबसे मजा आया तो इनकी सास, मेरी माँ के सामने ,

जब इन्होने कबूला की सबसे पहले इन्होने किसी लड़की के साथ नहीं, इन्ही के स्कूल में इन्ही के क्लास में पढ़ने वाला कोई चिकना था, नया नया आया था किसी अफसर का लौंडा, ... दोनों टाइम चपरासी आता था साईकिल पे छोड़ने ले जाने , ... पूरे स्कूल में उसने आग लगा रखी थी,... लेकिन कोई हाथ नहीं मार पा रहा था,... एक दिन पानी बरस रहा था, स्कूल से वापस ले आने के लिए उसका चपरासी नहीं आया,... बस ये अपनी साइकिल पे आगे डंडे पे बैठा के ले आये,... और रस्ते में अपनी बाग़ में,... फिर उसको इनके डंडे की ऐसी आदत लगी की उसने खुद घर पे बोल दिया की लौटते हुए इन्ही के साथ आ जाएगा,... और हफ्ते भर में वो इनके लौंडे के नाम से मशहूर हो गया।

तो मेरे देवर कमल ने ऐसा कौन सा नया काम किया था, ... जिसके लिए,...

रेनू की चाची चुप हो गयी थी, पर मुझे ललिया की गाँड़ मरवाई पूरी सुननी थी और कैसे रेनू हदस गयी।

और रेनू की चाची ने हाल खुलासा सुनाया की कसिए उनके बेटे ने पटवारी की लौंडिया की गाँड़ मारी,...

रेनू की चाची जिस तरह ललिया की गाँड़ मराई का आँखों देखा हाल बता रही थीं, लहक लहक कर, कैसे उनके एकलौते बेटवा, रेनू के भाई कमल ने ललिया का गुदा भेदन किया, .... लग रहा था मैं अपनी आँख के सामने देख रही हूँ।

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ललिया का गुदा भेदन

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रेनू की चाची जिस तरह ललिया की गाँड़ मराई का आँखों देखा हाल बता रही थीं, लहक लहक कर, कैसे उनके एकलौते बेटवा, रेनू के भाई कमल ने ललिया का गुदा भेदन किया, .... लग रहा था मैं अपनी आँख के सामने देख रही हूँ।

ललचता होगा, की कभी इधर भी,... कितने लौंडों को निहुरा निहुरा के उसने घोंपा था,... तो उसके लिए वो गैल कोई नयी तो थी नहीं,... तो उस बंद दरवाजे की कमल ने कितनी बार सांकल भी खटखटायी होगी, ललिया मना भी नहीं करती थी और देती भी नहीं थी,... वो अपनी चुनमुनिया के मजे के लिए पागल थी,... पिछवाड़े की गली में कोई चला भी नहीं थी,...

उस दिन भी ललिया निहुर के,... दिन दहाड़े रेनू के घर में,... पांच दिन की माहवारी वाली छुट्टी के बाद आयी थी, चूत में आग लगी थी, आज कुछ भी हो जाये, उसे रेनू के भाई से चुदवाना ही था,... वो मारता था, काटता था, गरियाता था, लेकिन वैसा चुदवैया बीस गाँव में नहीं था, जब दरेररता, रगड़ता पेलता था तो जान निकल जाती लेकिन मजा भी जबरदस्त मिलता था और उस मजे के लिए कोई भी लड़की कुछ भी करेगी, ...

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और ललिया उस दिन कुछ ज्यादा ही गरमायी थी ( माहवारी ख़तम होने के बाद सब लड़कियों , औरतों की यही हालत होती है, बस लम्बा मोटा चाहिए ) तो रेनू के भाई, कमल को उकसा रही थी, ललचा रही, चिढ़ा रही, सुपाड़ा घुसने के बाद ही लंड को कस कस के चूत में भींच रही थी,... खुद रेनू के भाई कमल का हाथ कमर पर से खींच के अपने कच्चे टिकोरों पे, जो कमल के के नाख़ून और दांतों के निशानों से भरा पड़ा था, जो ललिया के लिए मेडल की तरह था, गाँव के सांड़ के संग मस्ती का निशान।

और कमल भी कई दिनों से भूखा था, कसी चूत के लिए,... वो भी हचक हचक के चोद रहा था,...

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लेकिन बीच बीच में उसकी निगाह ललिया के गोल दरवाजे पर पड़ती थी, खूब कसा चिपका भूरा भूरा छेद, ... छेद क्या बस एकदम दरार सी वो भी इस लिए की जब ललिया निहुरी थी, खूब कस के टांगो को पूरी तरह फैला के, जाँघे एकदम खुली,... तो भरे भरे चूतड़ों के बीच वो दरार हल्की सी खुली,...

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और सुबह सुबह कलवतिया ने उसे खूब चढ़ाया था, ...

" अरे आज पांच दिन वाली छुट्टी ख़तम हो रही होगी, आज एकदम गर्मायी होगी तोहार दुलहिनिया, पटवारी की लौंडिया,... खुले छेद का मजा बहुत ले लिए हो,... बंद छेद में घात लगाओ आज,... चार दिन गाँव में लंगड़ा लंगड़ा के चले तो पता चलेगा गाँव भर को की पटवारी की लौंडिया रेनू के भाई से गाँड़ मरवा के आयी हैं,... और ये मत कहना की उससे पूछते हो वो मना कर देती है,...अरे लौंडिया तो मना करेगी ही, पूछते काहें हो, ऊपर से मना करेगी, नौटंकी पेलेगी स्साली और मन में सोचेगी, स्साला कितना बुरबक है, ... अरे खुद चल के आती है, जानती है मारी जायेगी, तो चाहे आगे, चाहे पीछे। कस के दबा के चाप दो, और आधा तिहा में मन न भरेगा उसका जबतक गाँड़ में पूरा मूसल न घोंटेंगी। छोड़ना मत, एकबार मार लोगे, चूतड़ मटकाना भूल जायेगी। "

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रेनू की चाची और माँ भी आँगन में बैठी थी और वो भी मुस्करा के कलावती को और बढ़ावा दे रही थीं, फिर रेनू की माँ भी कलावती की भाषा बोलने लगीं,

अपनी देवरानी से,

" अरे हम बचपन से तेल लगा लगा के इसको नूनी से एतना जबरदस्त बांस किये हैं, खोल के तेल चुआते थे की डबल साइज का सुपाड़ा हो,... पहली बियाई काली गाय क घी रोज मुट्ठी भर सुपाड़ा पर, जिससे एकदम डबल हो जाए, पहाड़ी आलू झूठ,... इतना बुकवा मालिश के बाद,... अगर तुम पूछोगे तो तोहरे से ज्यादा हमार बेज्जती,... महीने भर से ऊपर खुदे आती है दिन दहाड़े निहुर जाती,.... है और गाँड़ मरवाने के नाम पर,...अरे छेद देखो, सटाओ, धँसाओ, फाड़ दो स्साली की "

रेनू की चाची भी हंसने लगी और अपनी जेठानी से बोलीं, ...दीदी अब तोहार बात तो ये आज तक नहीं टाले है,...

रेनू के भाई को वो सब बातें बार बार याद आ रही थीं,... दोनों चूँची पकड़ के चोद रहा था, उसकी माँ बहन गरिया रहा था, और ललिया भी उसी भाषा में जवाब दे रही थी, चुदवाती हुयी कभी वो चूत भींचती कभी खुद पीछे धक्के मारती,...

रेनू के भाई कमल से अब नहीं रहा जा रहा था, उसने एक ऊँगली बस पिछवाड़े की दरार पर लगाई और उसका लंड एकदम पागल हो गया उसको रेनू की माँ की की बात याद आ गयी, उसने तय कर लिया आज कुछ हो जाए, ललिया गाँड़ मरवा के जायेगी,...

और ऊँगली लगते ही ललिया गिनगीना गयी,... वो भी कभी कभी सोचती बेचारा उसकी सहेली का भाई है रोज रोज मांगता है दे दे न,... पर कमल को चिढ़ाया उसने,...

" हे बहुत मन कर रहा है स्साले तेरा,... दे दूंगी यार,... अबे स्साले, लेकिन तेरे घर में मस्त माल है, तेरी बहन रेनू एकदम कच्ची कोरी, मेरी समौरिया, मेरी पक्की सहेली, ... दोनों छेद अबतक सील बंद,... स्साले जिस दिन तू गाँड़ मार लेगा न,... मेरी सहेली की.... मैं खुद अपने दोनों चूतड़ फैला के, गाँड़ का छेद खोल के तेरे इस मूसल पे बैठ जाउंगी,... मार लेना मन भर के, पहले अपनी बहिनिया की गाँड़ मार ले,... तेरी महतारी का भोंसड़ा नहीं है मेरी गाँड़, जो आसानी से चला जाएगा, बड़ी मेहनत लगती है,... "

अब इससे ज्यादा कोई उकसाता,...

कमल ने दोनों अंगूठों से पूरी ताकत उसकी गाँड़ फैलाई।

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ललिया को उस दिन दुबारा चोद रहा था वो, उसकी मलाई सब ललिया की बुर में, कुछ उस मलाई से कुछ ललिया की बुर की चाशनी से लंड भी चिकना हो गया था,... और बिना कुछ बोले अपना मोटा सुपाड़ा ललिया की हल्की सी खुली गाँड़ में सटा दिया,... दोनों अंगूठे से जोर से फ़ैलाने पर छेद थोड़ा सा खुल गया था,... सुपाड़े का टच होते ही गाँड़ में ललिया और गिनगीना गयी , अभी भी उसे लग रहा था की कमल उसकी गाँड़ नहीं मारेगा,...

उसने फिर रेनू का नाम लेके चिढ़ाया,...

" अबे स्साले,... तेरी बहन की फुद्दी मारुं,... अबे बस एक बार मेरे सामने रेनुआ की गांड मार ले इसी आंगन में, ... उसके बाद चाहे जित्ती बार मेरी मारना, चाहे जहाँ मारना,.. रेनुआ तोहार बहिनिया, तोहरे किस किस जीजा के लिए बचा के रखी है "

बस, कमल ने पूरी ताकत से पेल दिया,... एक धक्का दो धक्का, चौथे धक्के में पूरा का पूरा सुपाड़ा ललिया की गाँड़ में गप्प,...

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मारे दर्द के ललिया की चीख भी निकल नहीं पायी, वो जैसे एकदम बेहोश सी,... कस के दोनों हाथों से उसने पलंग का सिरहाना पकड़ के रखा था, चेहरा एकदम सफ़ेद,... मिनट भर तक वो हिल भी नहीं पायी ऐसा करारा धक्का था,...

फिर उसकी कर्ण भेदी चीख गुंजी,... बहुत तेज कोई आवाज नहीं सिर्फ चीख जैसे किसी हिरणी को भाले ने बेंध दिया हो,.... दीवालों को भेद दे ऐसी चीख, और देर तक गूंजती रही,...

आधे गाँव में तो पहुंची ही होगी,...

रेनू की माँ, पास में ही रसोई में थीं, दाल चढ़ा रखी थी, खूब जोर से मुस्करायीं, दिल गदगद,...

ससुरी बहुत छनछनाती थी, अब पता चला, हमरे दुलरुआ क ताकत, आज बिना चीरे फाड़े नहीं छोड़ेगा, बहुत छिनरपन करती थी, स्साली, छिनार क जनी,

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मन ही मन बोलीं, पेल साली को पूरी ताकत से,... लौंडिया का काम चीखना है,... अरे पहले गौने की रात की रगड़ाई के बाद अगले दिन दुल्हिन अपने आप बिस्तर से उठ गयी तो माना जाता की गौने की रात ठीक से नहीं हुयी,... कम से कम दो तीन ननद आती थी,... पकड़ के बिस्तर से उठाने के लिए,.... और उन्ही के कंधे के सहारे,...सांझ तक टांग जमीन पर ठीक से नहीं पड़ती थी,... चार दिन बाद जब चौथी में मायके वाले आते थे तो उनके सामने भी दीवाल का सहारा लेकर धीरे धीरे, हर कदम पर चिल्ख होती,... और ननदें भाइयों को चिढ़ाती,... और आज कल की लौंडिया चुदवाती कम हैं चिल्लाती ज्यादा,... मर्द कौन जो जबरदस्ती न करे,...

और उस चीख का असर रेनू के भाई पर भी हुआ, लंड एकदम पत्थर का हो गया,...
 
भाग ७१ - किस्सा रेनू और कमल का

ललिया ने लील लिया पिछवाड़े

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ललिया निहुर के,... दिन दहाड़े रेनू के घर में,... पांच दिन की माहवारी वाली छुट्टी के बाद आयी थी, चूत में आग लगी थी, आज कुछ भी हो जाये, उसे रेनू के भाई से चुदवाना ही था,... वो मारता था, काटता था, गरियाता था, लेकिन वैसा चुदवैया बीस गाँव में नहीं था, जब दरेररता, रगड़ता पेलता था तो जान निकल जाती लेकिन मजा भी जबरदस्त मिलता था और उस मजे के लिए कोई भी लड़की कुछ भी करेगी, ... और ललिया उस दिन कुछ ज्यादा ही गरमायी थी ( माहवारी ख़तम होने के बाद सब लड़कियों , औरतों की यही हालत होती है, बस लम्बा मोटा चाहिए )

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तो रेनू के भाई, कमल को उकसा रही थी, ललचा रही, चिढ़ा रही, सुपाड़ा घुसने के बाद ही लंड को कस कस के चूत में भींच रही थी,... खुद रेनू के भाई कमल का हाथ कमर पर से खींच के अपने कच्चे टिकोरों पे, जो कमल के के नाख़ून और दांतों के निशानों से भरा पड़ा था, जो ललिया के लिए मेडल की तरह था, गाँव के सांड़ के संग मस्ती का निशान।

और कमल भी कई दिनों से भूखा था, कसी चूत के लिए,... वो भी हचक हचक के चोद रहा था,...

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लेकिन बीच बीच में उसकी निगाह ललिया के गोल दरवाजे पर पड़ती थी, खूब कसा चिपका भूरा भूरा छेद, ... छेद क्या बस एकदम दरार सी वो भी इस लिए की जब ललिया निहुरी थी, खूब कस के टांगो को पूरी तरह फैला के, जाँघे एकदम खुली,... तो भरे भरे चूतड़ों के बीच वो दरार हल्की सी खुली,...

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और सुबह सुबह कलवतिया ने उसे खूब चढ़ाया था, ...

" अरे आज पांच दिन वाली छुट्टी ख़तम हो रही होगी, आज एकदम गर्मायी होगी तोहार दुलहिनिया, पटवारी की लौंडिया,... ससुरी पता नहीं कौन कौन गाँव से चूत मरवा के आयी है यहाँ, लेकिन पिछवाड़ा तो अभी कोरा है न, बस खुले छेद का मजा बहुत ले लिए हो,... बंद छेद में घात लगाओ आज,... चार दिन गाँव में लंगड़ा लंगड़ा के चले तो पता चलेगा गाँव भर को की पटवारी की लौंडिया रेनू के भाई से गाँड़ मरवा के आयी हैं,... और ये मत कहना की उससे पूछते हो वो मना कर देती है,...बिना जबरदस्ती के गाँड़ कभी नहीं मारी जाती चाहे चिकना कल क लौंडा हो या कोई खेली खायी लौंडिया, पहली बार तो जबरदस्ती करनी ही पड़ती है, हाँ एक बार फाड् दोगे अच्छी तरह से तो खुदे चियार कर,... छोड़ना मत आज पिछवाड़ा, चिंचियाने देना स्साली को,... "

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रेनू की चाची और माँ भी आँगन में बैठी थी और वो भी मुस्करा के कलावती को और बढ़ावा दे रही थीं, फिर रेनू की माँ भी कलावती की भाषा बोलने लगीं,

अपनी देवरानी से,

" अरे हम बचपन से तेल लगा लगा के इसको नूनी से एतना जबरदस्त बांस किये हैं, खोल के तेल चुआते थे की डबल साइज का सुपाड़ा हो,... इतना बुकवा मालिश के बाद,... अगर तुम पूछोगे तो तोहरे से ज्यादा हमार बेज्जती,... महीने भर से ऊपर खुदे आती है दिन दहाड़े निहुर जाती,.... है और गाँड़ मरवाने के नाम पर,... स्साली नौटंकी, अरे हमको मालूम नहीं है का, केतना छिनरपन करती है केतना पिराता है,.... और दर्द होगा तो होगा, जितना चिल्लाएगी उतना हमार और तोहार महतारी क सीना डबल होगा, साइज बड़ी होने से अक्ल नहीं बढ़ती, वो तोहें चरा रही है, कलवतिया सही कह रही है, ... "

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रेनू की चाची भी हंसने लगी और अपनी जेठानी से बोलीं, ...दीदी अब तोहार बात तो ये आज तक नहीं टाले है,...

रेनू के भाई को वो सब बातें बार बार याद आ रही थीं,... दोनों चूँची पकड़ के चोद रहा था, उसकी माँ बहन गरिया रहा था, और ललिया भी उसी भाषा में जवाब दे रही थी, चुदवाती हुयी कभी वो चूत भींचती कभी खुद पीछे धक्के मारती,...

रेनू के भाई कमल से अब नहीं रहा जा रहा था, उसने एक ऊँगली बस पिछवाड़े की दरार पर लगाई और उसका लंड एकदम पागल हो गया उसको रेनू की माँ की बात याद आ गयी , उसने तय कर लिया आज कुछ हो जाए, ललिया गाँड़ मरवा के जायेगी,... और ऊँगली लगते ही ललिया गिनगीना गयी,... वो भी कभी कभी सोचती बेचारा उसकी सहेली का भाई है रोज रोज मांगता है दे दे न,... पर कमल को चिढ़ाया उसने,...

" हे बहुत मन कर रहा है स्साले तेरा,... दे दूंगी यार,... अबे स्साले, लेकिन तेरे घर में मस्त माल है, तेरी बहन रेनू एकदम कच्ची कोरी, मेरी समौरिया, मेरी पक्की सहेली, ... दोनों छेद अबतक सील बंद,... स्साले जिस दिन तू गाँड़ मार लेगा न,... मेरी सहेली की मैं खुद अपने दोनों चूतड़ फैला के, गाँड़ का छेद खोल के तेरे इस मूसल पे बैठ जाउंगी,... मार लेना मन भर के, पहले अपनी बहिनिया की गाँड़ मार ले,... तेरी महतारी का भोंसड़ा नहीं है मेरी गाँड़, जो आसानी से चला जाएगा, बड़ी मेहनत लगती है,... "

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अब इससे ज्यादा कोई उकसाता,... कमल ने दोनों अंगूठों से पूरी ताकत उसकी गाँड़ फैलाई।

ललिया को उस दिन दुबारा चोद रहा था वो, उसकी मलाई सब ललिया की बुर में, कुछ उस मलाई से कुछ ललिया की बुर की चाशनी से लंड भी चिकना हो गया था,... और बिना कुछ बोले अपना मोटा सुपाड़ा ललिया की हल्की सी खुली गाँड़ में सटा दिया,... दोनों अंगूठे से जोर से फ़ैलाने पर छेद थोड़ा सा खुल गया था,... सुपाड़े का टच होते ही गाँड़ में ललिया और गिनगीना गयी , अभी भी उसे लग रहा था की कमल उसकी गाँड़ नहीं मारेगा,... उसने फिर रेनू का नाम लेके चिढ़ाया,...

" अबे स्साले,... तेरी बहन की फुद्दी मारुं,... अबे बस एक बार मेरे सामने रेनुआ की गांड मार ले इसी आंगन में, ... उसके बाद चाहे जित्ती बार मेरी मारना, चाहे जहाँ मारना,.. रेनुआ की अपनी किसी जीजा के लिए बचा के रखी है "

बस, कमल ने पूरी ताकत से पेल दिया,... एक धक्का दो धक्का, चौथे धक्के में पूरा का पूरा सुपाड़ा ललिया की गाँड़ में गप्प,...

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मारे दर्द के ललिया की चीख भी निकल नहीं पायी, वो जैसे एकदम बेहोश सी,... कस के दोनों हाथों से उसने पलंग का सिरहाना पकड़ के रखा था, चेहरा एकदम सफ़ेद,... मिनट भर तक वो हिल भी नहीं पायी ऐसा करारा धक्का था,...

फिर उसकी कर्ण भेदी चीख गुंजी,... बहुत तेज कोई आवाज नहीं सिर्फ चीख जैसे किसी हिरणी को भाले ने बेंध दिया हो,.... दीवालों को भेद दे ऐसी चीख, और देर तक गूंजती रही,...

आधे गाँव में तो पहुंची ही होगी,...

रेनू की माँ, पास में ही रसोई में थीं, दाल चढ़ा रखी थी, खूब जोर से मुस्करायीं, दिल गदगद,... ससुरी बहुत छनछनाती थी, अब पता चला, मन ही मन बोलीं,

पेल साली को पूरी ताकत से,... लौंडिया का काम चीखना है,... अरे पहले गौने की रात की रगड़ाई के बाद अगले दिन दुल्हिन अपने आप बिस्तर से उठ गयी तो माना जाता की गौने की रात ठीक से नहीं हुयी,... कम से कम दो तीन ननद आती थी,... पकड़ के बिस्तर से उठाने के लिए,.... और उन्ही के कंधे के सहारे,...सांझ तक टांग जमीन पर ठीक से नहीं पड़ती थी,... चार दिन बाद जब चौथी में मायके वाले आते थे तो उनके सामने भी दीवाल का सहारा लेकर धीरे धीरे, हर कदम पर चिल्ख होती,... और ननदें भाइयों को चिढ़ाती,... और आज कल की लौंडिया चुदवाती कम हैं चिल्लाती ज्यादा,... मर्द कौन जो जबरदस्ती न करे,...

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और उस चीख का असर रेनू के भाई पर भी हुआ, लंड एकदम पत्थर का हो गया,... यही आवाज सुनने के लिए तो कान तरह रहे थे, बस जैसे पंचायत का सांड़ नयी नयी बछिया को छापता है, अपने दोनों आगे के पैरों से, बस उसी तरह, रेनू के भाई कमल ने ललिया को, रेनू की सहेली को दबोच लिया,... एक बार सुपाड़ा स्साली की गाँड़ में घुस गया बस आप लाख चूतड़ पटके,... बहुत नौटंकी पेलती थीं,... न अब उसने फिर पूरी कमर का जोर लगा के ठेलना शुरू किया,... बड़ी टाइट गाँड़ थी, स्साली की, इतनी गाँड़ उसने मारी थी, इस ललिया से कम उमर वालों की भी, लेकिन ऐसी मेहनत,... उसने फिर जोर लगाना शुरू किया,...

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" ओह्ह उह्ह्ह नहीं भैया,... हाथ जोड़ रही हूँ , निकाल लो, जान चली जाएगी,... नहीं जाएगा अंदर,... " ललिया रो रही थी सुबक रही थी,...

" स्साली छिनरपन" कमल जोर से बोला, और दो हाथ उसके चूतड़ पे जोर से लगाए, चूतड़ पर कमल के दो लाल फूल खिल गए, लेकिन न ये ललिया के लिए नयी बात थी न कमल के लिए,...

" स्साली निकाल तो लूंगा ही, तेरी गाँड़ में अपना लंड थोड़े ही छोड़ दूंगा,... और नहीं जाएगा अंदर जो बोल रही है तो पेलना किसको है मुझे की तुझे. स्साली गाँड़ ढीली कर ,... "

दो हाथ और चूतड़ पर, ... पहले से भी जबरदस्त,... एक हाथ कमर पर और दूसरा कस के चूँची को निचोड़ते हुए, नाखून धँसाते हुए,... उसने पूरी ताकत से लंड अंदर ठेला, बड़ी मुश्किल से किसी तरह दरेरते, रगड़ते, छीलते, जरा जरा सा उसका कलाई ऐसा मोटा लंड एकदम कसी टाइट गाँड़ में धंस रहा था.

ललिया, सुबक रही थी, उसके आंसू गालों को भिगो रहे थे,... सुबकते हुए कभी कभी उसके होंठों से चीख निकल ही जाती थी,

" ओह्ह उफ्फ्फ, उफ्फ्फ्फ़ नहीं, आह आह्ह्ह्हह, जान गयी, अब नहीं बचूंगी,... मेरे भैया रुक जाओ बस एक मिनट " और फिर रुलाई जोर से चालू,

रेनू की माँ बार बार कमरे की ओर देखतीं, मुस्करा रही थीं, दाल चूल्हे से उतारते सोच रही थीं, साली, बिना रोई रोहट के पता ही नहीं चलता की पहली बार गाँड़ मारी जा रही है,... बस दो चार बार गाँड़ मरवा लेगी, तो खुदे, ये कमलवा बहुत सोझ है, चलो कुछ तो सद्बुद्धि आयी,... और इतना पाल पोष के इसलिए थोड़ी बड़ा किये थे की, लौंडिया कुल चूतड़ मटकाये के ललचाये के चली जायँ,...
 
ललिया पर चढ़ाई

गोलकुंडा विजय

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रेनू की माँ बार बार कमरे की ओर देखतीं, मुस्करा रही थीं, दाल चूल्हे से उतारते सोच रही थीं, साली, बिना रोई रोहट के पता ही नहीं चलता की पहली बार गाँड़ मारी जा रही है,... बस दो चार बार गाँड़ मरवा लेगी, तो खुदे, ये कमलवा बहुत सोझ है, चलो कुछ तो सद्बुद्धि आयी,... और इतना पाल पोष के इसलिए थोड़ी बड़ा किये थे की, लौंडिया कुल चूतड़ मटकाये के ललचाये के चली जायँ,...

कमल रुक गया, थोड़ा सा पीछे भी खींचा, दर्जनों लौंडो की तो वो,... भले किसी लड़की की गाँड़ पहली बार,... लेकिन बनावट तो वही,...असली लड़ाई तो अब होगी, गाँड़ का छल्ला, एक बार गाँड़ का छल्ला पार हो जाये, फिर भले स्साली लाख नौटंकी करे,...

ललिया को भी एक पल आराम हो हो गया था,... धीरे धीरे गांड को सुपाड़े की आदत हो रही थी, मसल्स फ़ैल गयी थीं,... और अब कमल धक्के भी नहीं मार रहा था, लेकिन उस बेचारी को क्या मालूम था की असली लड़ाई अभी बाकी है,...

कमल ने दोनों हाथों से ललिया की पतली सी कमर पकड़ी और फिर पूरी ताकत से जो धक्का मारा,

पहली बार का दर्द तो कुछ भी नहीं था,... इसके आगे,... आँखों के आगे अँधेरा छा गया, जैसी बिजली गिरी हो उसके ऊपर,....

लेकिन लंड गाँड़ के छल्ले के पार था,...

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ओह्ह्ह उफ्फ्फ आ आह आआ आआ आ आ ,.... जैसे किसी मेमने की गर्दन भोंथरे चाकू से रेती जा रही हो, दर्द भरी आवाज,... ... एक तिहाई लंड अंदर घुस गया था,... और अब रेनू के भाई ने लंड ठेलना रोक दिया, बस कभी झुक के उसकी चूँची चूसता, गाल चूमता, पीठ सहलाता,...

दो चार मिनट के बाद दर्द दूर तो नहीं हुआ लेकिन ललिया को उस दर्द की आदत पड़ने लगी, ... और उसी समय मारे आदत के जैसे चढ़वाते समय वो मारे बदमाशी के अपनी चूत भींच लेती थी, अपने यार का लंड निचोड़ लेती थी,... और उसका यार मारे मस्ती के पागल होके तूफानी चुदाई करता था,... बस अपने आप उसकी चूत के साथ गाँड़ भी भिंच गयी,...

उसी समय कमल लंड बाहर खींच रहा था, अगला धक्का मारने के लिए और गाँड़ का छल्ला जो टाइट हुआ, मोटा सुपाड़ा उसी में फंस गया, फिर तो अंदर की चमड़ी, छिली, खिंची,... लेकिन कमल ने जोर से बाहर खींच के जो धक्का मारा,

ललिया ने अभी भी गांड ढीली नहीं की थी, पर कमल की कमर की ताकत,… और लंड तो गांड में ही था,... बस भचाक से छल्ला दुबारा पार और जो छिली जगह थी वो जब मोटे कड़े सुपाड़े से रगड़ी गयी, जैसे किसी कच्ची अमिया वाली की जहाँ झिल्ली फटी हो वहीँ से रगड़ रगड़ के बार बार मोटा मूसल जाए,... उससे भी सौ गुना ज्यादा दर्द,...

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जैसे छिली हुयी जगह पर किसी ने लाल मिर्च छिड़क दी हो. लेकिन अब कमल को फर्क नहीं पड़ रहा था, उसपर कसी गाँड़ मारने का भूत सवार हो गया था, बस पूरी ताकत से वो पेल रहा था, ठेल रहा था, पांच सात मिनट की मेहनत के बाद बांस पूरा अंदर था।

ललिया चीख रही चिल्ला रही थी बिसूर रही थी,...

रसोई में बैठीं रेनू की माँ सुन रही थीं, और खुश हो रही थी, जो इतना काली गाय का दूध पिलाया अपने हाथ से चमड़ा खोल के तेल लगाया, सब सुफल हो रहा था, बस किसी दिन रेनुआ के साथ भी,... अरे गौने की रात दुल्हिन कितना चिल्लाती है टांग पटकती है और अगले दिन खुद ही सांझ से जम्हुआई आने लगती है , उसी को जल्दी होती है,

कमल के लिए पहली बार यह नहीं था की ललिया चीख चिल्ला रही हो,... लेकिन अक्सर वो नाटक करती थी, कमल को उकसाने के लिए और आज भी वो वही सोच रहा था, दोनों हाथों से एक बार छोटी छोटी अमिया पकड़ के दबा रहा था मसल रहा था, निपल पकड़ के नोच रहा था और उसका बित्ते भर का लम्बा मोटा लंड, ललिया की गांड में जड़ तक धंसा था, धीरे धीरे उसने आधा लंड बाहर निकाला फिर पूरी ताकत से पेल दिया,

ललिया की चीख जो अब तक धीमी पड़ गयी थी, दुबारा तेज हो गयी,

अरे कोई बचाओ, जान गयी, नहीं बचूंगी, अरे मर गयी,... "

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जितना वो जोर से चीखती उसके दूनी जोर से रेनू का भाई उसकी गाँड़ मार रहा था , अब तक न जाने कितने लौंडों की उसने गाँड़ मारी थी, पर जो मजा आज आ रहा था वैसा कभी नहीं आया था, कलावती सही कहती थी,... धीरे धीरे थक कर ललिया की आवाज बैठ गयी,... और कमल ने अपनी दो ऊँगली एक साथ ललिया की बुर में अंदर पेल दिया , फिर तो गाँड़ से लंड बाहर होता,... दोनों ऊँगली अंदर, ... लंड गांड में ऊँगली अंदर, थोड़ी देर बाद लंड और ऊँगली दोनों एक साथ अंदर बाहर

अब ललिया सिसक रही थी, हां , करो न उफ़ उफ़ आह उह्ह्ह

और रेनू के भाई ने रफ़्तार दूनी कर दी गाँड़ मारने की भी बुर चोदने की भी, एक साथ दोनों छेदों की रगड़ाई हो रही थी, और वही हुआ जो होना था, ललिया बड़ी तेजी से झड़ने लगी, लेकिन उसकी सहेली का भाई रुका नहीं हाँ धीमा जरूर हो गया, ... और जब ललिया झड़ कर थेथर हो गयी, तो उसकी बुर से कमल ने दोनों ऊँगली निकाल कर ललिया के मुंह में, ललिया को उसकी बुर का रस चटा दिया, और वो छिनार शौक से चाट रही थी,...

गाँड़ मारने की रफ्तार दुबारा बढ़ी तो ललिया कभी चीखती, कभी सिसकती और अबकी बिना बुर छुए, ऊँगली से न लंड से , सिर्फ गाँड़ मार मार कर रेनू के भाई ने अपनी बहन की सहेली को झड़ने की कगार पर पहुंचा दिया,... बुर कभी सिकुड़ती कभी फैलती, कमल रुका नहीं बस पेलता रहा धकेलता रहा, ठेलता रहा,

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और ललिया झड़ने लगी, आज तक कभी ऐसी नहीं झड़ी थी, वो पागलों की तरह सिसक रही थी, चूतड़ मचका रही थी,... लेकिन थी तो वो पक्की छिनार, ... जब झड़ना रुका तो ललिया ने फिर रेनू के भाई को रेनू का नाम लेकर हलके से छेड़ा,...

"अब तो रेनुआ की गाँड़ मार ले स्साले, कहो तो मैं सिफारिश लगाऊं तेरी,..."

रेनू का नाम सुनते ही रेनू का भाई, कमल एकदम पागल,... अभी तक अपने दोनों पैरों को ललिया के पैरों के बीच में डाल कर उसकी दोनों टांगों को उसने फैला दिया था जिससे गाँड़ खूब चौड़ी हो जाये और मोटा लंड आसानी से,... लेकिन अब दोनों पैर बाहर और कस के कमल ने ललिया के पैर कैंची की फाल की तरह अपने पैरों के बीच डालकर बांध दिया और कस के भींच लिया।

ललिया के दोनों पैर एकदम चिपक गए, गाँड़ का छेद भी सिमट गया,... संकरा हो गया, लेकिन बांस बराबर लंड तो अंदर था ही,... और अब एक बार फिर से जब दरेरते, रगड़ते छीलते लंड अंदर बाहर होना शुरू हुआ तो लगा कीलंड हर धक्के से चमड़ी अंदर की छिल रही है, लहर पर लहर दर्द की,...

कमल ने किसी तरह से अपने बांस को खींच के गाँड़ के छल्ले के बाहर,... ललिया ने एक पल के लिए सांस ली राहत की,... लेकिन असली हमला बाकी था,... कमल ने कस के दोनों जुबना पकड़ा और पूरी ताकत से भाला ढकेल दिया,

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ओह्ह उन्हह नहीं नहीं,... वो फिर सुबक रही थी, टांग फ़ैलाने की कोशिश कर रही थी लेकिन कमल ने कस के भींच रखा था, और पेले जा रहा था, गांड के एंड रकि चमड़ी छिले तो छिले उसको परवाह नहीं,... और लंड पूरा घुसा ही नहीं था की ललिया की गाँड़ और बुर दोनों दुबकने लगी, ... कभी फैलती कभी सिकुड़ती और जैसे ही लंड अंदर जड़ तक घुसा जोर की ठोकर उसने मारी, ललिया अपने कंट्रोल में नहीं थी, उसकी गांड जोर जोर से सिकुड़ रही थी, साथ में बुर भी.

पहली दो बार से भी तेज वो झड़ रही थी, और गाँड़ के सिकुड़ने फैलने का नतीजा हुआ की कमल भी एकदम जड़ तक गाँड़ में झड़ने लगा, और देर तक बार बार , रुक रुक कर, कटोरी भर से ज्यादा मलाई, ललिया की गाँड़ में,...

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रेनू की चाची ने जो ये आँखों देखा हाल सुनाया, वो बगल के कमरे में थीं और वहां से सब कुछ दिख रहा था,.
 
दीवाल -

भाई बहिन के बीच में

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रेनू की चाची ने जो ये आँखों देखा हाल सुनाया, वो बगल के कमरे में थीं और वहां से सब कुछ दिख रहा था,... तो मैंने पूछा

" लेकिन फिर तो ललिया को खुश होना चाहिए था न गाँड़ तो कभी न कभी फटती ही, लेकिन वो तीन बार झड़ी, तो किस बात का गुस्सा , उसे तो खुश होना चाहिए था? " मैं बोली

" स्साली नौटंकी, असल में तोहरे देवर ने ,... रेनू की चाची, ... कमल की माँ बोलते बोलते रुक गयीं और फिर हंसने लगी, मुश्किल से हंसी रुकी तो बोली,

"तोहरे देवर ने गंडिया से निकाल के आपन खूंटा स्साली के मुंह में बस वो मुंह बंद कर ली,...एकदम जोर से भींच ली,... "

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" काहें,... अरे माल मसाला तो ससुरी के गांड का तो साफ़ कौन करता हमरे देवर का मूसल ? मैं भी बोली।

" यही तो, रेनू की चाची बोलीं, फिर जोड़ा, जब कमलवा से नहीं रहा गया तो एक चांटा कस के उसके गाल पे,... "

" यही देवर हमारे गलती कर गए,... " मैं बड़ी सीरियस हो के बोली।

अब रेनू की चाची भी चुप, मेरी ओर देखने लगीं, मैं बोली,...

" देवर जी को कम से कम चार चांटे मारने चाहिए थे, वो भी पूरी ताकत से, दोनों गालों पर दो दो , हफ्ते भर गाल सूजा रहता, लाल लाल बंदर के पिछवाड़े की तरह तो अगली बार खूंटा पिछवाड़े से बाद में बाहर निकलता स्साली मुंह पहले खोलती, झोंटा पकड़ के चार लगाते,... "

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अब वो मुस्करायीं बोली, तू हो असली भौजी देवर की, लेकिन स्साली एक चांटे में ही मुंह खोल दी, लंड पूरा घोंटी भी, चाटी भी चूसी भी एकदम चिक्कन।

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लेकिन रेनू की चाची ने बताया ललिया की असली बदमाशी कैसे उसने रेनू को भड़काया मेरे देवर, कमल के खिलाफ। तीन चार बातें थीं।

रेनू की चाची का चेहरा एकदम राख हो गया था, रुंआसा, मुंह लटक आया,... मुश्किल से मुंह से उनके निकला,

स्साली, मुँहझौंसी, कलमुंही, हमरे बेटवा बिटिया दोनों क जिन्नगी, सात पुश्त ओकर,...

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फिर उन्होंने बताया की ललिया ने कैसे रेनू और रेनू के भाई के बीच अम्बुजा सीमेंट टाइप दीवाल खड़ी की, वो भी फेविकोल का जोड़ लगा के जिसे खली भी न तोड़ सके, ...

खेल तमाशा तो सब ही देख रहे थे, दिन का टाइम,...

रेनू की माँ रसोई में थी, दिखाई ज्यादा नहीं पड़ रहा था लेकिन सुनाई सब पड़ रहा था, और सुन के खुश हो रही थीं ललिया की चीख, कमल की गालियां और जो चांटे वो मार रहा था उसकी आवाजें,... और वो रेनू की माँ भी, कलावती के साथ वो भी तो पीछे पड़ी थी रेनू के भाई के की ललिया क पिछवाड़ा अब जरूर बेधना, बहुत छिनरापना कर रही है, और एक बार घुस जाएगा पिछवाड़े तो खुदे निहुर के हाथ से पकड़ के पीछे भी सटवायेगी,

रेनू की चाची, कमल की माँ, अपने कमरे में, लेकिन एक खुली खिड़की से सब कुछ देख रही थीं, एक एक चीज तभी तो उन्होंने सब कुछ इतना डिटेल में बताया,... हाँ वो दोनों के पिछवाड़े के साइड में थी, तो कमल और ललिया के उनके देखने का चांस नहीं था,.. और वो ललिया की कच्ची कोरी गाँड़ में घुसता रेनू के भाई का मोटा खूंटा देख देख के खुस हो रही थी, कैसी जबरदस्त मस्त गाँड़ मार रहा है रेनू का भाई,...

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लेकिन ये किसी को नहीं मालूम था की रेनू भी घर में है,... वो तब ही आयी थी जब कमल ने ललिया के पिछवाड़े अपना मोटा खूंटा ठोंकने की कोशिश की थी,...

ललिया की ह्रदय विदारक चीख, आधे गाँव ने सुना होगा,... तो रेनू क्यों नहीं सुनती,...

बस एक छेद, छेद क्या बिलुक्का था बड़ा सा,.. जो रेनू के भाई ने अपने कमरे से अपनी बहन के कमरे में तांक झाँक करने के लिए बनाया था, और रेनू को पता चल गया था. बस वो कपडे बदलती तो ठीक उसी छेद के सामने, उस ेभी अपने भैया को तड़पाने में ललचाने में मजा आता था,... उसी छेद के सामने खड़ी होकर हर टीनेज लड़की की तरह अपने जोबन मुट्ठी में दबा के देखती कित्ते बड़े हो रहे है ,... और वो भी तब जब उसे मालूम होता की कमल बगल के कमरे में है और तांक झाँक कर रहा है, ....

हाँ बाद में कमरा खोलने के पहले एक कलेण्डर टांग देती ठीक उसी छेद के ऊपर, जिससे माँ या चाची को उस छेद का भेद न पता चले।
 
हदस गयी रेनू

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किसी को नहीं मालूम था की रेनू भी घर में है,...

वो तब ही आयी थी जब कमल ने ललिया के पिछवाड़े अपना मोटा खूंटा घोंटने की कोशिश की थी,... ललिया की ह्रदय विदारक चीख, आधे गाँव ने सुना होगा,... तो रेनू क्यों नहीं सुनती,... बस एक छेद, छेद क्या बिलुक्का था बड़ा सा,.. जो रेनू के भाई ने अपने कमरे से अपनी बहन के कमरे में तांक झाँक करने के लिए बनाया था, और रेनू को पता चल गया था. बस वो कपडे बदलती तो ठीक उसी छेद के सामने, उसे भी अपने भैया को तड़पाने में ललचाने में मजा आता था,... उसी छेद के सामने खड़ी होकर हर टीनेज लड़की की तरह अपने जोबन मुट्ठी में दबा के देखती कित्ते बड़े हो रहे है ,...

और वो भी तब जब उसे मालूम होता की कमल बगल के कमरे में है और तांक झाँक कर रहा है, .... हाँ बाद में कमरा खोलने के पहले एक कलेण्डर टांग देती ठीक उसी छेद के ऊपर, जिससे माँ या चाची को उस छेद का भेद न पता चले।

तो सहेली की चीख सुनते ही उसने कैलेंडर उतार फेंका, और आँखे जो देख रही थीं, रेनू का चेहरा गुस्से से लाल,... उसकी सहेली उसके भाई के बारे में बहुत कुछ बोलती थी लेकिन वो इस हद तक होगा, सोच नहीं सकती थी।

बेचारी ललिया, आंसू की धार रुक नहीं रही थी, भैया ने उसका झोंटा पकड़ रखा था, अपने दोनों हाथों से कस के दबोच रखा था और अंदर,... सहेली उसकी चिल्ला रही थी मना कर रही थी, फिर भी वो,... अपने नाख़ून उन्होंने कस के रेनू की सहेली की चूँची में गड़ा दिए, .... ललिया की चीख रुक नहीं रही थी,... फिर चांटो की आवाज,... एक एक पल वो देख रही थी,... लेकिन सबसे ज्यादा उसे गुस्सा आया जब भैया ने अपना वो,... क्या क्या लगा था, ललिया के मुंह में, बस एक पल की देर हुयी और क्या तगड़ा चांटा भैया ने उसे मारा,... मुंह घूम गया बेचारी का ,

रेनू ने जो देखा था, शायद कुछ दिन में भूल जाती लेकिन ललिया थी न, और उसने छेद से झांकती रेनू की आँखें देख ली थी,

इसलिए और जोर से चोकर रही थी, टेसुए बहा रही थी और जब दर्द ख़तम भी हो गया था, मजे से धक्के ले रही थी , खुद ही चूत और गांड सिकोड़ रही थी, तब भी रेनू की आंखे देख कर जोर जोर से सुबकने लगती।

और ललिया, जान बुझ के बजाय घर जाने के, कमल की रगड़ाई के बाद जब बड़ी मुश्किल से सीधी हुयी तो नाटक करती, बड़ी मुश्किल से दीवार पकड़ के रेनू के कमरे में,... देखा रेनू की माँ ने भी था , उसे रेनू के कमरे में ,... लेकिन उनको, रेनू की चाची सबको अंदाजा यही था की रेनू घर में नहीं है। पर ललिया को तो मालूम ही था उसे ही तो दिखा दिखा के वो बिलख रही थी.

और कमरे में घुसते ही कटे पेड़ ऐसी वो गिर पड़ी, बड़ी मुश्किल से रेनू उसकी सहेली ने उठाया, और फिर ललिया जोर जोर से सुबकने लगी, दर्द तो कब का ख़तम हो गया था लेकिन नाटक सिर्फ नाटक,...

लेकिन उसके बाद साली ने जो नाटक फैलाया, हमार बिटिया जिंदगी भर के लिए हदस गयी, रेनू की चाची बस रोयीं नहीं,

मैं भी चुप रही, फिर हिम्मत कर बोली, क्या हुआ,...

' सलवार, ललिया क सलवार,... " मुश्किल से रेनू की चाची बोलीं,... और फिर फफक कर,..

मैंने कुछ नहीं कहा, कुछ देर रुक के रेनू की चाची ही बोलीं,...

' ललिया की सलवार में खून था,... जैसे रेनुआ उसको खड़ा की, सलवार ललिया की सरक के नीचे आ गयी,... "

" अरे पहली बार गाँड़ मरवाई थी, तो थोड़ बहुत गांड कहीं छिली होगी, दो चार बूँद खून निकलना,... " मैंने रेनू की चाची को समझाने की कोशिश की पर वो नहीं मानी बोलीं,

" नहीं ज्यादा था, गांड से निकल कर,... शलवार में नीचे तक बहा था, और यह देख के हमारा बिटिया, रेनुआ डर के सफ़ेद हो गयी, उसके मुंह से बोली नहीं निकली। दो दिन खाना नहीं खाया, मैंने, मेरी जेठानी उसकी माँ, कलावती ने बहुत समझाया,... ये खून वाली बात तो हफ्ते भर बाद पता चली। दो ढाई हफ्ते रेनू अपने भाई से बोली नहीं,... "

रेनू की चाची धीरे धीरे बोल रही थीं, पहली बार ये अपने दिल की बात किसी से बाँट रही थीं। मैं सोच रही थी, फिर समझ गयी, मुस्कारते हुए मैंने समझाया,

" गलती स्साली ललिया की थी, गाँड़ मरवाते समय गाँड़ ढीली करनी चाहिए थी,... फिर जब देवर मेरा बाहर खींच रहा था, गाँड़ क छल्ला में ही तो असली मजा असली दर्द है,... उसी टाइम वो भींच ली होगी,... तो बेचारा मेरा देवर का करता, लंड अपना काट के उस स्साली की गाँड़ में छोड़ देता, चमड़ी छिल गयी होगी। गाँड़ मारते समय कौन मर्द स्साला दरद का छिलने का ध्यान रखता है, ये सब सोचे न तो न कउनो लौंडिया की गाँड़ मारी जाए न लौंडे की। देवर के हमरे कउनो गलती नहीं। फिर दो चार बूँद भी होगी खून की तो खड़ी होने पे नीचे ही गिरेगी, सलवार में लग के कपडे के सहारे, थोड़ी देर में चोट अपने आप ठीक हो जाती है, जब ललिया रेनू के पास गयी तो ललिया स्साली की गाँड़ में खून बह थोड़े ही रह होगा, हाँ एकाध थक्का लगा होगा स्साली की गाँड़ में, मतलब चोट सूख गयी होगी। उसका तो एक ही इलाज था दुबारा पहली बार से भी कस के गांड मारी जाती, हाँ एकाध दिन दिसा मैदान में थोड़ी दिक्कत होती, जब जोर लगाती तो हमरे देवर की याद आती। "

रेनू की चाची खुल के हंसी, मुझे एक बार फिर से अँकवार में भर के बोलीं, बहुरिया हो तो तोहरे जस और भौजाई हो तोहरे जस,... देवर क साथ हरदम देने वाली।

फिर उन्होंने खून का राज खोला,

नहीं वो गाँड़ से नहीं निकला था, गांड से तो दो चार बूँद खून वो शलवार में चिपक जाता और इतनी देर में तो सूख जाता,... बहुते चालाक थी, पता नहीं कउनो चूड़ी तोड़ के या किसी चीज से रेनुआ के कोठरी में घुसने के पहले, शलवार सरकाय के पिछवाड़े चूतड़ में या जांघ में जहाँ दिखे नहीं, फाड़ ली थी, और जानबूझ के शलवार रेनुवा के सामने खोल के गिरायी जिससे ताजा खून और भरभरा के बहता देखेगी तो जिन्नगी भर के लिए हदस जायेगी।

फिर उन्होंने ललिया की और चाल बतायी,...

ललिया ने रेनू को समझा दिया था की रेनू का भाई तो असल में रेनू की गाँड़ मारने के चक्कर में था, बोल रहा था आपन बुर बचा के रखी हैं न स्साली तो आज उस की गाँड़ फाड़ के चीथड़े चीथड़े कर दूंगा, पूरे गाँव में मशहूर हो जाएगी, स्साली,... लेकिन ललिया बोली की नहीं भैया रेनू तो फूल अस कोमल है, तू हमार मार ला, हमरे सहेली को छोड़ दा।
 
ललिया की चाल

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रेनू की चाची खुल के हंसी, मुझे एक बार फिर से अँकवार में भर के बोलीं, बहुरिया हो तो तोहरे जस और भौजाई हो तोहरे जस,... देवर क साथ हरदम देने वाली।

फिर उन्होंने ललिया की और चाल बतायी,...

ललिया ने रेनू को समझा दिया था की रेनू का भाई तो असल में रेनू की गाँड़ मारने के चक्कर में था, बोल रहा था आपन बुर बचा के रखी हैं न स्साली तो आज उस की गाँड़ फाड़ के चीथड़े चीथड़े कर दूंगा, पूरे गाँव में मशहूर हो जाएगी, स्साली,... लेकिन ललिया बोली की नहीं भैया रेनू तो फूल अस कोमल है, तू हमार मार ला, हमरे सहेली को छोड़ दा।

और रेनू ने दो दिन तक मारे गुस्से के खाना नहीं खाया, ... महीनों अपने भाई से बोली नहीं,...

रेनू की चाची थोड़ी देर चुप रहीं, फिर आगे का हाल उन्होंने सुनाया, लेकिन ललिया ने खाली रेनू के दिल में आग नहीं लगाई, पूरे गाँव की लड़कियों ख़ास तौर से नयी नयी जवान होती लड़कियों को उसने ऐसा भड़काया, सबसे बोलती

" अरे रेनुआ के भाई के चक्कर में मत पड़ना,... वो स्साला नोचता ज्यादा है चोदता कम है। देख मेरे गाल पे, पूरी देह पे कैसा काट के,... अरे वो तो मेरी सहेली का भाई है इसलिए में कभी कभी,... अगर मैं न दूँ तो वो मेरी सहेली की पिटाई करेगा,..."

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किसी से कहती,

"अरे यार सोच न घर में उसके माल है मस्त, इत्ती बुरी भी नहीं है अभी कुँवारी है, तब भी वो उसे नहीं चोदता, क्यों ? अरे स्साले का या तो खड़ा नहीं होता होगा या कुछ बात होगी की घर में माल रहते हुए, ... वो भी कोरी कुँवारी,..."

और सब लड़कियां औरते तेरे देवर को चिढ़ाती,

"अरे कोरी कुँवारी चाहिए तो पहले रेनुआ की सील तोड़ के आओ, फिर हम सब अपने हाथ से नाड़ा खोल देंगे,... "

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और तोहार देवर रेनुआ के पीछे पड़ गया,.... घर का माल घर में

रेनू की चाची की बात बीच में काट के मैं बोली,...

सही तो कहता है मेरा देवर, ... न उसका छोट न पतला, ऐसा तगड़ा औजार और घर का माल बाहर किसी से,... हाँ इ बार फड़वा ले, गाँड़ मरवा ले,... उसके बाद,..

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अब बात काटने की जिम्मेदारी रेनू की चाची पर थी, ... वो बोलीं

तोहार सोच और तोहरे देवर की और हम देवरान जेठान की,... लेकिन रेनुआ के मन में वो ललिया अस बिष बेल बो के गयी है,... हमरे बिटिया और बेटवा दोनों क जिन्नगी, यही खेलने खाने की उम्र और इसी में,... गाँव क कुल लड़कियां लड़के मजे लेते हैं और ये दोनों,... जब रेनुआ नहीं मानी की सबसे पहले तोहार देवर तो वो बोल दिया की ठीक है जउन कूंवा से हम पानी नहीं पी सकते वहां पे और किसी को झाँकने भी नहीं देंगे और रेनुआ क माई क पाला पोसा, देह का तगड़ा है, कउनो क हिम्मत नहीं पड़ती है,

" देवर हमार एकदम ठीक कहते हैं और ओह कूंवा क पानी पिएंगे वो मन भर कर,... सबसे पहले उहे "

मैंने अपना फैसला सुना दिया लेकिन एक बात और मुझे पूछनी थी, जो नैना ने बताया था की चार चार बच्चों की माँ, भोंसड़ी वाली भी चिल्लाती हैं रेनू के भाई के नीचे आने के बाद, दो दिन तक टांग फैला के चलती है "

और रेनू की चाची थोड़ी हंसी, मुस्करायीं। कौन माँ अपने बेटे की बड़ाई सुन के नहीं खुश होगी। बोलीं,

" बात तो सही है काफी हद तक। तोहार देवर है तो जब्बर, और हमसे ज्यादा हमरी जेठानी, रेनू क माई क हाथ है कउनो खास बुकवा, मालिश, ... थोड़ा बड़ा हो गया था, टनटनाने लगा था तब भी,... बड़ा भी है तगड़ा भी लेकिन तू खुद सोचो, कउनो क लौंड़ा हो , का बच्चे से बड़ा होगा या मोटा होगा? नहीं न। तो जौनो भोंसडे से बच्चे निकल चुके हों, ... वो अगर चिल्लाय,... तो साली नौटंकी है न। हाँ दर्द होगा बात सही है, लेकिन वही दर्द में तो मजा है। पर वो सब कुछ ज्यादा इसलिए चिल्लाती हैं, जिससे तोहार देवर और गाँव क बाकी लौंडे समझे की चार बच्चे निकालने के बाद भी उनकी टाइट है,... और कोई बात नहीं लेकिन नुक्सान ये होता की नयी उमर वाली वो सब जो न जाने कितनी बार गन्ने के खेत में नाड़ा खोल चुकी हैं, स्कर्ट फैला चुकी हैं, और लीलवा पहले जहर बो गयी है की कमल मारता है पीटता है वो हदस जाती है,..."

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लेकिन मेरे दिमाग में कुछ और चल रहा था। मेरे सवाल का जवाब मिल चुका था।

वो ललिया गयी कहाँ ,...

और रेनू की चाची ने बोला की महीने दो महीने के अंदर परधानी का इलेक्शन हुआ, पुरनके परधान से मिलके पटवारी खूब चांदी काट रहा था, लेकिन नयके ने शिकायत लगा दी और रातोरात पटवारी का पास के गाँव में तबादला हो गया।

" अरे वो ललिया स्साली मिलती न कभी, तो अबकी ओकर गांड मैं मारती कोहनी तक हाथ डार के अबकी सच में खून खच्चर होता और ओहि से सच उगलवातीं अपने देवर के सामने " मैंने अपने मन की बात बोल दी।

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रेनू की चाची हंसने लगीं, बोलीं

का पता तोहरे मन की हो जाए, ओकरे बाप क केस वेस खतम हो गया है, वो परधान भी हट गया है , तहसीलदार भी ललिया की बिरादरी का , तो हो सकता है पटवारी क लौंडिया दो तीन महीने में,... आये जाए अगर ओकर किस्मत,...

लेकिन एक बार फिर वो उदास हो गयी थीं, बहुत धीमी आवाज में बोली

लेकिन तोहरे देवर की किस्मत तो बिगड़ी गयी न, अइसन सोना अस देह सांड़ अस ताकत,.. और महीना दो महीना में कउनो काम वाली, घास वाली , कभी वो भी नहीं, .... हरदम उदास रहता या गुस्से में,.... बहुत चिंता है।

और वो चुप हो गयीं।
 
रेनू -कमल --

किस्सा भाई बहन का

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लेकिन एक बार फिर वो उदास हो गयी थीं, बहुत धीमी आवाज में बोली

लेकिन तोहरे देवर की किस्मत तो बिगड़ी गयी न, अइसन सोना अस देह सांड़ अस ताकत,.. और महीना दो महीना में कउनो काम वाली, घास वाली , कभी वो भी नहीं, .... हरदम उदास रहता या गुस्से में,.... बहुत चिंता है।

और वो चुप हो गयीं।

मैंने रेनू की चाची से पूछा, " और ये सब किस्सा ललिया का पता कैसे चला और फिर ललिया दुबारा हमरे देवर से मिली, का "

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वो हलके से मुस्करायीं और चिढ़ाती हुयी बोली,

" यह गांव क खूंटा क मज़ा जो एक बार ले लिया वो कहाँ जाएगा, अरे कुछ तो आपन छोट बहिन भी ले आती हैं,... ललिया थी रंडी पक्की छिनार, तो जान बूझ के घर आना बंद कर दिया, रेनुआ के साथ एक दो बार आयी भी तो ऐसे चलती थी की गांड में अभी भी खपच्ची घूसी हो. लेकिन कमल के साथ एक दिन भी जो नागा किया हो, गाँव में लड़का लड़की के मिले के जगह क कौन कमी,... कभी गन्ने के खेत में, तो कभी बँसवाड़ी के पीछे, और गाँड़ खुद कह के मरवाती थी,... "

मैं ध्यान से सुन रही थी और रेनू की चाची कमल की बात बता रही थीं ललिया के साथ कैसे कैसे, उन्होंने आगे बात बढ़ाई,

" और ललिया जो चारो ओर सब लड़कियों में कमल के बारे में फैलाई थी तो कउनो लड़की उस से बात करे को न तैयार, चुदवावे को तो छोड़ दो,... और ललिया जब जहाँ कमल कहे वहां आने को तैयार, दिन दहाड़ें, आधी रात,... तो कमल को लगता की पूरी दुनिया में उसकी हितवा वही है, और चुदवाती भी खूब मजे से थी,... गाँड़ भी बिना नागा,... उधर रेनू भी लीलवा को पक्की सहेली और कमल को दुश्मन माने बैठी थी, दोनों लीलवा के खिलाफ एक बात सुनने को तैयार नहीं,...

तो पता कैसे चला, मेरी समझ में नहीं आया, मैंने पूछ ही लिया,...

" अरे बताया तो उसका बाप, पटवरिया गाँव से दुरदुरा के निकाला गया, परधान के बदलने पर,... तो ओहि दिन जिस दिन बाप बेटी गाँव छोड़े,... लीलवा को उसका ग्वाला भी, पहले गाय दूहता था फिर लीलवा को,.. तो लीलवा ने उसी ग्वाले के आगे सब उगल दिया, बाद में जब लगा की गड़बड़ हो गया तो उसे सब कसम धरायी, लेकिन हम सबको सक तो था ही, तो वही कलवतिया, ... बाप बेटी के जाने के दस पन्दरह दिन बाद उसी ग्वाले से,... और उसने सब किस्सा बताया तो उसकी चाल समझ में आयी लेकिन जो बिस बेल बो के गयी थी वो पनप ही गयी। "

रेनू की चाची ने बताया फिर एकदम चुप, चेहरा झांवा,... बस रो नहीं रही थीं।फिर बहुत धीरे धीरे बोलीं, रेनुआ वो अब एकदम चुप्प, कतो गाना रतजगा होता है तो वहां भी नहीं जाती, मैं सोचती हूँ सादी बियाह होगा गौना होगा तो वहां भी कैसे, ऐसी हदसी डरी घबड़ायी रहेगी तो कैसे और कमल की भी हालात, अइसन सोना अस देह, जांगर ताकत लेकिन हम लोगन तो तो पूरे घर पे जैसे गरहन ,

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लेकिन में बोली थोड़ा हड़का के और मुस्करा के

" देवर किसका है "

" तुम्हारा " वो बोली,

" देवर मेरा, भौजी मैं,... उसकी तो चिंता मैं करुँगी आप क्यों चिंता कर रही है " मैं हंस के बोली।

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और वो भी खिलखिला के बोलीं, " बात तेरी एकदम सही है तेरा देवर तेरे हवाले "

" तो मेरा एक काम कर दीजियेगा, मेरे देवर को बोल दीजियेगा,...कल ठीक साढ़े दस बजे आम वाली बगिया में पोखर के बगल में पहुँच जाए, न एक मिनट पहले न एक मिनट बाद, हाँ और आपकी बिटिया रेनू को इसकी कानो कान खबर न हो की मेरा देवर वहां आएगा। लेकिन ये बताइये,... की बाकी सास लोग तो गाँव छोड़ के छावनी गयी हैं मजे करने के लिए , आप ने कोई यार बुलाये हैं का,... जो आप नहीं गयी। "

मारे ख़ुशी के उन्होंने मुझे गले से लगा लिया और मेरी माँ को गरियाते बोलीं " एकदम पक्की छिनार क बेटी हो,... पैदायसी रंडी होगी तोहार महतारी अरे हम मायके जाएंगे , कल भिसारे के पहले ही,... फिर एक दो दिन बाद,... "

उनकी बात काट के मैं बोली, ...

" अरे तो हमरे देवर के मामा क पिचकारी अकेले अकेले काहें पकड़ियेगा, अपनी जेठानी को रेनुवा क माई को भी साथ ले जाइये,... और खबरदार जो हफ्ता भर से पहले लौंटी, ... और लौटिएगा, तो हमार देवर और तोहार बिटिया रेनुआ एक बिस्तर में मिलेंगे,... चिपका चिपकी करते, जो कातिक में कुत्ता कुतिया की हाल होती है न वो नंबर भी डंका देंगे दोनों,... बस हमार देवर कल पहुँच जाये। "

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एक बार फिर उन्होंने अँकवार भरा , असीसा की तोहरे मन की कुल बात पूरी हो, .. ननद देवर तोहरे मर्द सब पर तोहार हुकुम चले,...

और अभी तो पहले मेरी मन की ये इच्छा पूरी होनी थी मेरे साजन मेरी ननद के ऊपर,... लेकिन मैं कुछ और सोच रही थी,

रेनू और कमल के बारे में कैसे कहानी बदलती है,

सबसे पहले मैं सोच रही थी स्साली रेनुआ हाईस्कूल पास कर गयी साल भर पहले और अभी तक फटी नहीं, यहाँ तो लड़कियां हाईस्कूल के पहले ही सब पढाई पढ़ लेती हैं, गन्ने के खेत का सब पाठ लौंडे पढ़ा देते हैं, ...झांटे बाद में आती हैं लौंड़ा पहले ढूंढती है,... पता चला की उसका भाई कमल, एकदम कटखना कुत्ता, कोई उसकी बहन की ओर नजर उठा के भी देख ले तो उसकी आँख फोड़ने को तैयार, एक ने खाली छेड़ दिया था तो उसका हाथ तोड़ दिया,

मेरी समझ में नहीं आ रहा था की लंका में ये विभीषण कैसे , यहाँ तो सब भाई पहले घर के माल पे, ... और ये लट्ठ लेकर रखवाली कर रहा है,... बाल ब्रह्मचारी,

और नैना ने बात साफ़ की

कोई ब्रह्चारी नहीं है स्साला नंबरी चोदू है, गदहे ऐसा लंड है इसलिए रेनुआ भड़कती है, और उसने बोल रखा है की कुछ भी हो रेनुआ चढ़ेगी तो सबसे पहले उसके खूंटे पे। कितनी काम वाली घास वाली चोद चुका है, सब बताती है की चोदने में पूरा सांड़ है , खाली औजार ही नहीं बित्ते भर का ताकत भी कमर में जबरदस्त है,... लेकिन आराम आराम से नहीं, गाली दे दे के , रगड़ के पेलता है।

लेकिन पूरी कहानी रेनू के चाची ने साफ़ की

और बस कल सुबह रेनू और कमल की गाँठ जुड़वानी है , देवर को ननद पर चढाने से बड़ा पुण्य काम भौजाई के लिए क्या होगा।

और अब बात अगले दिन की, मेरी सारी गाँव भर की नंदों ने मनाया,

मेरा भाई मेरी जान,...

जिसके जिसके सगे भाई थे, छोटे बड़े, सब चढ़े अपनी बहनों पर कच्ची कलियाँ हो, बिन ब्याही चुदी ननदें हो या ब्याही और गौना न हुआ, साजन के पहले भाइयों ने नंबर लगाया, कुछ ने सीधे, कुछ ने धोखे से कुछ ने जबरदस्ती, लेकिन सबका पानी बच्चेदानी तक गया,... और जिसके सगे नहीं थी, तो चचेरे, नहीं तो उसी पट्टी के जिसको वो राखी बांधती थी, सबके सामने भैया भैया बोलती थीं, उन सब के संग जम के चुदेया हुयी और वो भी बीच गाँव में सब भौजाइयों के सामने,...

न कोई ननद बची न बिन ब्याहा देवर,

सब ने होली के संग राखी मनाई,
 
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