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मरद चढ़ा, ननद के ऊपर
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और अब मैं अपनी ननद के ऊपर, उसको दिखाते हुए अपने पिछवाड़े का छेद उसको दिखा के दोनों हाथों से खुद, खूब फैला के खोला पूरी ताकत से, चौड़ा किया, और खुला फैला पिछवाड़े का छेद ननद के खुले मुंह पर, और लगी गरियाने
" अभी तो चटनी चाटी थी अपने भैया के लंड से, अब ले लो असली स्वाद,... "

लेकिन असली खेल कहीं और हो रहा था,
ननद एकदम पलंग के किनारे पर थी. उनके भैया ने चूतड़ के नीचे एक बार फिर से सारे तकिये लगा के दो बित्ता चूतड़ अपनी बहिनिया का ऊपर किया और खुद पलंग के नीचे खड़े हो कर अपना लंड अपनी बहिनिया की बुर में पेल दिया, गप्पाक।
सुपाड़ा पूरा एक झटके में अंदर। पतली कटीली कमरिया पकड़ के उन्होंने अपनी बहिन की जबरदस्त चुदाई एक बार फिर शुरू कर दी।
कितना मस्त लग रहा था देखना,
बहिन की बुर में भाई का लंड,...
और वो बहिन अपनी ननद हो और भाई अपना मरद तो कहना ही क्या,
जैसे बार बार इंजन का पिस्टन अंदर बाहर हो रहा है, जैसे कोई तलवार म्यान में घुसती हो और फिर निकलती हो, ...

मैं,..
जैसे गाँव की नई जवान होती लड़की, बछिया पर चढ़ रहे सांड़ को देखती है की कैसे सांड़ का खूब मोटा लम्बा,... बछिया के अंदर जा कर गायब हो जाता है उसी तरह मैं भी देख रही थी की मेरी ननद किस तरह मेरे मर्द का बित्ते भर का मूसल घोंट रही है।
वो धीरे धीरे बाहर निकालते और एक धक्के में दोनों हाथों से मेरी ननद की कमर पकड़ के पूरी ताकत से ठेल देते, अपनी कमर के जोर से, उनकी कमर के जोर का मुझसे ज्यादा किसे अंदाजा होगा, ... और गप्पाक, मुंह बा के ननद की बिल अपने भैया का घोंट लेती।ननद खुद अपने हाथ से अपने भैया का, मेरे मरद का खूंटा पकड़ के अपनी बिल में घुसेड़वा रही थी।

और जिस तेजी से मेरा मरद मेरी ननद के बुर में अपना लंड पेल रहा था उसी जोर से, उनकी बहिनिया, मेरी ननद मेरे पिछवाड़े एकदम अंदर तक जीभ धकेल देती थी और गोल गोल अंदर, अंदर की दीवालों से रगड़ रगड़,..मैं ननद के ऊपर चढ़ी अपने बड़े बड़े चूतड़ फैलाये, अपना पिछवाड़ा ननद से चटवा रही थी। और खेल तमासा भैया बहिनी का देख रही थी , ननद की दोनों टाँगे उठी, जाँघे फैली और मेरा मरद अपना मोटा मूसल पूरी ताकत से पेल रहा था, खड़े खड़े।
देखने में भी मजा आ रहा था और चटवाने में भी,
लेकिन ननद की दोनों गेंदें, जबरदस्त जोबन था मेरी ननद का, खूब कड़े कड़े टाइट, निपल भी बड़े बड़े,...
मुझसे नहीं रहा गया और अब मैं भी खेल तमाशे में शामिल हो गयी. दोनों हाथों से ननद की गेंदों से खेलने लगी, कभी सहलाती, कभी दबा देती, कभी कस कस के रगड़ती, आखिर ये जवानी के खिलौने, खेलने के लिए ही तो हैं, और आज मेरे मरद की मलाई खा के जब इन दोनों में दूध भरेगा तो दुहूँगी भी मैं ऐसे ही कस कस के.

मेरे मरद का हर चौथा पांचवा धक्का सीधे बच्चेदानी पे लगता था और बहिनिया उनकी काँप जाती थी। अबकी जब बच्चेदानी पे धक्का पड़ा तो लगा कुछ ज्यादा ही ठीक से पड़ा बेचारी मेरी ननद एकदम काँप गयी जैसे भूकंप का झटका लगा हो,... लेकिन मैंने इशारे से अपने मरद को रोक दिया,...
जैसे बोतल में कस के डॉट लगी हो, अंदर तक घुसी एकदम टाइट, बोतल उलट दो तो भी एक बूँद बाहर न गिरे,... बस उसी तरह जड़ तक मेरे साजन का खूंटा मेरी ननद की बिल में जड़ तक घुसा, ...
मेरी निगाह उस जादू की बटन पर पड़ी थी, छोटा सा दाना सा, योनि द्वार के ऊपर बिंदी सा,.. लेकिन औरत को पागल करने के लिए काफी,...
बस झुक के मैंने उसे चूम लिया, नहीं नहीं चूमा नहीं सिर्फ जीभ की टिप से छू भर दिया,

फिर जीभ की टिप से उस योनि शिखर की परिक्रमा कर उस जादू की बटन, ननद की क्लिट को अपने दोनों होंठों के हवाले, और कस कस लगी चूसने,
जल बिन मछली की तरह मेरी ननद तड़प रही थी,
कभी उछल जाती, कभी दोनों हाथों से कस के बिस्तर की चादर पकड़ लेती, मस्ती से आँखे उलट रही थी. न बोल सकती थी न सिसक सकती थी , मेरे भारी चूतड़ ने कस के ननद के मुंह को सील कर रखा था। बहन की यह हालत देख के मेरे मरद को बहुत मजा आ रहा था, कभी वो मोटे लंड के बेस से अपनी बहन की चूत को रगड़ देते, बिना लंड को निकाले, तो कभी बस कमर के जोर से रगड़ते।
ननद झड़ने के करीब आ रही थी मचल रही थी। और मैंने चूसना छोड़ दिया, .... बस मेरे साजन के लिए ये इशारा काफी था, उन्होंने अपनी बहन की बुर से लंड करीब पूरा बाहर निकाला, फिर,... क्या ताकत थी जैसे कोई भाला फेंक में पूरी ताकत से भाला फेंके, उन्होंने कमर के जोर से एक धक्के में ही पूरा भाला धंसा दिया,... सुपाड़े का धक्का बच्चेदानी पर लगा और ननद झड़ने लगी.

झड़ती रही, झड़ती रही, ... इस तरह कांप रही थी जैसे उसके ऊपर चढ़ी मुझे और अंदर घुसे अपने भैया को बाहर फेंक देगी,
उसके भैया के धक्के बंद हो गए थे और भौजी का बुर चूसना।
लेकिन झड़ना अभी अच्छी तरह रुका भी नहीं था की मैंने एक बार फिर से अपनी ननद की क्लिट चूसना शुरू कर दिया। एक बार फिर से वो गरमा गयी थी।
और अब मेरे मरद ने कस के अपनी बहन के दोनों चूतड़ पकड़ के उसे चोदना भी शुरू कर दिया, चुसाई और चुदाई एक साथ।]
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और अब मैं अपनी ननद के ऊपर, उसको दिखाते हुए अपने पिछवाड़े का छेद उसको दिखा के दोनों हाथों से खुद, खूब फैला के खोला पूरी ताकत से, चौड़ा किया, और खुला फैला पिछवाड़े का छेद ननद के खुले मुंह पर, और लगी गरियाने
" अभी तो चटनी चाटी थी अपने भैया के लंड से, अब ले लो असली स्वाद,... "

लेकिन असली खेल कहीं और हो रहा था,
ननद एकदम पलंग के किनारे पर थी. उनके भैया ने चूतड़ के नीचे एक बार फिर से सारे तकिये लगा के दो बित्ता चूतड़ अपनी बहिनिया का ऊपर किया और खुद पलंग के नीचे खड़े हो कर अपना लंड अपनी बहिनिया की बुर में पेल दिया, गप्पाक।
सुपाड़ा पूरा एक झटके में अंदर। पतली कटीली कमरिया पकड़ के उन्होंने अपनी बहिन की जबरदस्त चुदाई एक बार फिर शुरू कर दी।
कितना मस्त लग रहा था देखना,
बहिन की बुर में भाई का लंड,...
और वो बहिन अपनी ननद हो और भाई अपना मरद तो कहना ही क्या,
जैसे बार बार इंजन का पिस्टन अंदर बाहर हो रहा है, जैसे कोई तलवार म्यान में घुसती हो और फिर निकलती हो, ...

मैं,..
जैसे गाँव की नई जवान होती लड़की, बछिया पर चढ़ रहे सांड़ को देखती है की कैसे सांड़ का खूब मोटा लम्बा,... बछिया के अंदर जा कर गायब हो जाता है उसी तरह मैं भी देख रही थी की मेरी ननद किस तरह मेरे मर्द का बित्ते भर का मूसल घोंट रही है।
वो धीरे धीरे बाहर निकालते और एक धक्के में दोनों हाथों से मेरी ननद की कमर पकड़ के पूरी ताकत से ठेल देते, अपनी कमर के जोर से, उनकी कमर के जोर का मुझसे ज्यादा किसे अंदाजा होगा, ... और गप्पाक, मुंह बा के ननद की बिल अपने भैया का घोंट लेती।ननद खुद अपने हाथ से अपने भैया का, मेरे मरद का खूंटा पकड़ के अपनी बिल में घुसेड़वा रही थी।

और जिस तेजी से मेरा मरद मेरी ननद के बुर में अपना लंड पेल रहा था उसी जोर से, उनकी बहिनिया, मेरी ननद मेरे पिछवाड़े एकदम अंदर तक जीभ धकेल देती थी और गोल गोल अंदर, अंदर की दीवालों से रगड़ रगड़,..मैं ननद के ऊपर चढ़ी अपने बड़े बड़े चूतड़ फैलाये, अपना पिछवाड़ा ननद से चटवा रही थी। और खेल तमासा भैया बहिनी का देख रही थी , ननद की दोनों टाँगे उठी, जाँघे फैली और मेरा मरद अपना मोटा मूसल पूरी ताकत से पेल रहा था, खड़े खड़े।
देखने में भी मजा आ रहा था और चटवाने में भी,
लेकिन ननद की दोनों गेंदें, जबरदस्त जोबन था मेरी ननद का, खूब कड़े कड़े टाइट, निपल भी बड़े बड़े,...
मुझसे नहीं रहा गया और अब मैं भी खेल तमाशे में शामिल हो गयी. दोनों हाथों से ननद की गेंदों से खेलने लगी, कभी सहलाती, कभी दबा देती, कभी कस कस के रगड़ती, आखिर ये जवानी के खिलौने, खेलने के लिए ही तो हैं, और आज मेरे मरद की मलाई खा के जब इन दोनों में दूध भरेगा तो दुहूँगी भी मैं ऐसे ही कस कस के.

मेरे मरद का हर चौथा पांचवा धक्का सीधे बच्चेदानी पे लगता था और बहिनिया उनकी काँप जाती थी। अबकी जब बच्चेदानी पे धक्का पड़ा तो लगा कुछ ज्यादा ही ठीक से पड़ा बेचारी मेरी ननद एकदम काँप गयी जैसे भूकंप का झटका लगा हो,... लेकिन मैंने इशारे से अपने मरद को रोक दिया,...
जैसे बोतल में कस के डॉट लगी हो, अंदर तक घुसी एकदम टाइट, बोतल उलट दो तो भी एक बूँद बाहर न गिरे,... बस उसी तरह जड़ तक मेरे साजन का खूंटा मेरी ननद की बिल में जड़ तक घुसा, ...
मेरी निगाह उस जादू की बटन पर पड़ी थी, छोटा सा दाना सा, योनि द्वार के ऊपर बिंदी सा,.. लेकिन औरत को पागल करने के लिए काफी,...
बस झुक के मैंने उसे चूम लिया, नहीं नहीं चूमा नहीं सिर्फ जीभ की टिप से छू भर दिया,

फिर जीभ की टिप से उस योनि शिखर की परिक्रमा कर उस जादू की बटन, ननद की क्लिट को अपने दोनों होंठों के हवाले, और कस कस लगी चूसने,
जल बिन मछली की तरह मेरी ननद तड़प रही थी,
कभी उछल जाती, कभी दोनों हाथों से कस के बिस्तर की चादर पकड़ लेती, मस्ती से आँखे उलट रही थी. न बोल सकती थी न सिसक सकती थी , मेरे भारी चूतड़ ने कस के ननद के मुंह को सील कर रखा था। बहन की यह हालत देख के मेरे मरद को बहुत मजा आ रहा था, कभी वो मोटे लंड के बेस से अपनी बहन की चूत को रगड़ देते, बिना लंड को निकाले, तो कभी बस कमर के जोर से रगड़ते।
ननद झड़ने के करीब आ रही थी मचल रही थी। और मैंने चूसना छोड़ दिया, .... बस मेरे साजन के लिए ये इशारा काफी था, उन्होंने अपनी बहन की बुर से लंड करीब पूरा बाहर निकाला, फिर,... क्या ताकत थी जैसे कोई भाला फेंक में पूरी ताकत से भाला फेंके, उन्होंने कमर के जोर से एक धक्के में ही पूरा भाला धंसा दिया,... सुपाड़े का धक्का बच्चेदानी पर लगा और ननद झड़ने लगी.

झड़ती रही, झड़ती रही, ... इस तरह कांप रही थी जैसे उसके ऊपर चढ़ी मुझे और अंदर घुसे अपने भैया को बाहर फेंक देगी,
उसके भैया के धक्के बंद हो गए थे और भौजी का बुर चूसना।
लेकिन झड़ना अभी अच्छी तरह रुका भी नहीं था की मैंने एक बार फिर से अपनी ननद की क्लिट चूसना शुरू कर दिया। एक बार फिर से वो गरमा गयी थी।
और अब मेरे मरद ने कस के अपनी बहन के दोनों चूतड़ पकड़ के उसे चोदना भी शुरू कर दिया, चुसाई और चुदाई एक साथ।]

























