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- Dec 5, 2013
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करीब 15 मं बाद
"किया हुआ रैंड.. घर नहीं चलना अब तोह बारिश भी बंद हो गयी है
वर्ण बोल तोह फिर से एक बार और...."
सत्यम मुस्कुराते हुए जैसे hi ये बोलता है मैं टपक से अपनी आँखों को खोल क देखती हुई तोह बारिश अब लगभग रुक चुकी थी और उसे अपने ऊपर से हटते हुए
"कमीना आज दुरबा तोह सोचना भी नहीं.. एक hi दिन में 3 बार चुदाई करि है मेरी, कमीने अपनी चची को रैंड बना डाला"
मैं ये बोलती हुई तोह खुद hi है पड़ती हु, जिसपे सत्यम भी हस्ते हुए उठ क अपने कपडे पहनना सुरु कर देता है
पर जब मैं अपनी पेंटी पहनने क लिए ढूंढती हुई तोह देखती हु की वो बिस्तर क दूसरी तरफ खेत की खीचड़ भरी मिटटी मैं पड़ी हुई थी
सत्यम मेरी पेंटी की हालत देख क है पड़ता है
"पहले ब्रा और अब पेंटी... वाह्ह्ह
मैं तोह कहता हु आप नंगी hi घर चलो"
मालती- (मुस्कुराते हुए अपनी बड़ी बड़ी आँखें दिखते हुए) चुप कर कमीने
अब मेरे पास और कोई रास्ता तोह था नहीं, इसलिए मुझे बिना पेंटी क hi पेटीकोट और ब्लाउज पेहेन क उसपे साड़ी पहनी पड़ती है और फिर जल्दी hi हम दोनों एक दूसरे को देख क कभी मुस्कुराते तोह कभी मैं शर्मा क दूसरी तरफ देखते हुए अपने घर की चल पड़ते है
वैसे मैं ये भी बता दू की इस सफर क दौरान मुझे बीच में कई बार अजीब से गन्दी उबकाई भी आयी मानो जैसे उलटी हो जाएगी.. सायद इसकी वजह मेरी वो टट्टी थी जिसे सत्यम ने अपनी ऊँगली पे लगा क मुझे hi खिला दी थी
सत्यम ने आज सही मायने में मुझे एक रैंड बना दिया था.. और ये रैंड आज बहुत खुस थी, और अलग बात है की इस समय मेरे सरीर का एक एक हिस्सा टूट रहा है
दोनों जैसे hi घर पहुंचते है मुझे सभी लोग छप्पर क नीचे hi बैठे नज़र आ जाते है
मैं बुरी तरह दर जाती हु की कही किसी को कुछ सक न हो जाये.. इसलिए जल्दी से एक बड़ा सा घूँघट कर लेती हु और अपने पल्लू का बाकि कपडा अपनी बड़ी बड़ी चूचियों क ऊपर ले आती हु ताकि किसी को मेरी बिना ब्रा वाली चूचियों का पता न चले, और पेंटी का पता चलने का तोह सवाल hi नहीं था ककी उसके लिए किसी को मेरी साड़ी उठानी होगी
मैं इतनी जल्दी से घर क अंदर जाती हु मानो दर हो की कही कोई रोक क मुझसे सवाल जवाब न करने लगे
मैं घर क अंदर आते hi जल्दी से अपना घूँघट हटती हु और अपना पल्लू सही करती हुई चैन की सांस लेती हु, पर मुझे कुछ पल और रुकना चाहिए था.. ककी जैसे hi मैं रहत की सांस लेती हु मुझे मेरे कानो में आवाज़ सुनाई पड़ती है
"कहा रह गए थे दोनों इतनी दिएर.. हम लोग परेशां हो रहे थे ?"
मालती ये आवाज़ सुनते hi बुरी तरह काँप सी पड़ती है ककी सच वो बता नहीं सकती थी और झूठ वो सविता से बोलना नहीं च रही थी.. पर इस समय तोह झूट hi एकलौता विकल्प था
और आप सब भी अब जान hi चुके होंगे की ये आवाज़ सविता की थी जिसके बेटे ने आज मोनू की माँ को एक hi दिन में 3 बार छोड़ा था.. और पहलवान क खेत में हुई चुदाई क बाद तोह ज्यादा दिएर वह वो दोनों रुके भी नहीं थे
मालती हिम्मत करके अपनी इस्तिथि को सँभालते हुए जैसे hi सविता की तरफ मुद क कुछ बोलने को होती है.. उससे पहले hi सविता बोल पड़ती है
"अरे तेरी गर्दन पे ये निशान.... और तेरे निचले होंठ को किया हुआ, किसी चीज़ ने काट लिया था किया.. सूजन जैसी है"
पर फिर सविता भी आगे नहीं बोलती बस मुस्कुरा पड़ती है और मालती को ऊपर से नीचे तक देखने लगती है, मालती का हाल तोह ऐसा था की वो प्राथना करने लगती है की काश धरती पहात जाये और वो उसमे समां जाये.. ककी मारे शर्म क वो अपनी जेठानी से आँखें भी नहीं मिला प् रही थी
मालती- (नीचे अपने पैरों क अंगूठे को देखते हुए, धीरे से कांपते हुए) वो.. मैं वो... आते हुए रस्ते में गिर पद.. गिर पड़ी थी
इस पल तक सविता की परकी नज़रें मालती क पुरे सरीर का भूगोल नाप चुकी थी और उसकी नज़रें मालती क बिना ब्रा क नज़र आते मोठे मोठे निप्पल्स पे अटक चुकी थी
सविता- (मुस्कुराते हुए) सही कह रही है.. जरूर गिरी होगी, पर कहा
फिर धीरे से मालती क कान क पास आगे अपनी गरम गरम साँसें उसपे चोरते हुए
"लुंड पे...."
मालती को काटो तोह खून नहीं, उसे समझ hi नहीं आता की वो बोले तोह किया बोले
पर आगे बोलने का काम भी सविता hi करती है.. वो भी मुस्कराहट क साथ
"जा पहले अचे से नाहा ले.. ककी तेरी हालत बता रही है की आज तू 1 बार से ज्यादा बार गिरी है.. उम्मीद है ज्यादा दर्द नहीं होगा, क्यू नहीं है न"
मालती बस शर्म से लाल और बुरी तरह झेपते हुए बस 'है' में अपना सर हिला क रह जाती है
सविता- जा पहले नाहा ले.. तेरे कपडे भिजवाती हु, और है चलते हुए अपनी चाल पे थोड़ा धियान रखा.. तेरी चाल इस बात की चुगली कर रही है की तू कहा गिरी है
और ये कहते हुए धीरे से आँख मार देती है.. बेचारी मालती तोह पानी पानी हु चुकी थी वो जल्दी से वह से भाग जाना चाहती थी और मौका मिलते hi लगभग दौड़ती हुई वह से सीधा घर क पीछे वाले स्नानघर की तरफ चल पड़ती है
इधर उसकी हालत और उसकी लज़्ज़ा देख क सविता khil-khila क है पड़ती है, फिर खुद से कहती है
"लगता है अचे से रगड़ी गयी है बेचारी"
फिर अपनी साड़ी क ऊपर से hi अपने चूतड़ वाले हिस्से पे अपना हाथ फिरते हुए और अपने पिछले छेद में उठते उस मीठे मीठे दर्द का एहसास लेते हुए खुद से कहती है
"वैसे रगड़ा तोह उसने मुझे भी जैम क है.. उफ्फ्फ्फ़ कमीने ने छेद बड़ा कर दिया.. हैईईई"
सविता फिर हस्ते हुए कमरे में जाने लगती है ताकि मालती क कपडे निकल क उसे दे सके, पर तभी उसके चेहरे पे एक शरारत भरी मुस्कान खिल पड़ती है और वो कमरे से जेक सिर्फ एक टॉवल उठती है और करीब 10 मं बाद दरवाजे पे आके अपनी देवरानी हर्षिता क बेटे सोनू को बुलाती है और उसे टॉवल देते हुए
"जा मालती पीछे वाले स्नानघर में है"
सोनू ये सुनते hi खिल उठता है और लगभग भागते हुए स्नानघर की और चल पड़ता है.. वही उसे जाता हुआ देख क सविता वही कड़ी कड़ी मुस्कुराती रहती है
"जरा मैं भी तोह जणू.. बड़ा हो गया है या अभी भी बचा है"



आशा करता हु अपडेट 19 क दोनों सन एक साथ पड़के आप सभी को आनंद आया होगा.. मैं आप सभी क विचार और आगे क लिए सुझाव जानने को उत्सुक्त रहूँगा
ऐसी क साथ एक जरुरी बात ये भी की नवरात्री और फिर दिवाली क कारन मैं कुछ दिनों तक कुछ लिख नहीं पाउँगा.. ककी इस समय दुकान का काम कई गुना बाद जाता है, और अभी क लिए पूरा समय काम पे hi देना जरुरी है
पर इस बीच एक शार्ट स्टोरी जरूर लेके आऊंगा, जिसका पूरा आईडिया
मुझे 'शालिनी मम' Pornstar Bhabhi जी ने दिया है.. बल्कि पूरी कहानी उन्ही की है, मैं बस उसे अपने सब्द दूंगा
ऐसी क साथ अपडेट #19 पूर्ण होता है


"किया हुआ रैंड.. घर नहीं चलना अब तोह बारिश भी बंद हो गयी है
वर्ण बोल तोह फिर से एक बार और...."
सत्यम मुस्कुराते हुए जैसे hi ये बोलता है मैं टपक से अपनी आँखों को खोल क देखती हुई तोह बारिश अब लगभग रुक चुकी थी और उसे अपने ऊपर से हटते हुए
"कमीना आज दुरबा तोह सोचना भी नहीं.. एक hi दिन में 3 बार चुदाई करि है मेरी, कमीने अपनी चची को रैंड बना डाला"
मैं ये बोलती हुई तोह खुद hi है पड़ती हु, जिसपे सत्यम भी हस्ते हुए उठ क अपने कपडे पहनना सुरु कर देता है
पर जब मैं अपनी पेंटी पहनने क लिए ढूंढती हुई तोह देखती हु की वो बिस्तर क दूसरी तरफ खेत की खीचड़ भरी मिटटी मैं पड़ी हुई थी
सत्यम मेरी पेंटी की हालत देख क है पड़ता है
"पहले ब्रा और अब पेंटी... वाह्ह्ह
मैं तोह कहता हु आप नंगी hi घर चलो"
मालती- (मुस्कुराते हुए अपनी बड़ी बड़ी आँखें दिखते हुए) चुप कर कमीने
अब मेरे पास और कोई रास्ता तोह था नहीं, इसलिए मुझे बिना पेंटी क hi पेटीकोट और ब्लाउज पेहेन क उसपे साड़ी पहनी पड़ती है और फिर जल्दी hi हम दोनों एक दूसरे को देख क कभी मुस्कुराते तोह कभी मैं शर्मा क दूसरी तरफ देखते हुए अपने घर की चल पड़ते है
वैसे मैं ये भी बता दू की इस सफर क दौरान मुझे बीच में कई बार अजीब से गन्दी उबकाई भी आयी मानो जैसे उलटी हो जाएगी.. सायद इसकी वजह मेरी वो टट्टी थी जिसे सत्यम ने अपनी ऊँगली पे लगा क मुझे hi खिला दी थी
सत्यम ने आज सही मायने में मुझे एक रैंड बना दिया था.. और ये रैंड आज बहुत खुस थी, और अलग बात है की इस समय मेरे सरीर का एक एक हिस्सा टूट रहा है
दोनों जैसे hi घर पहुंचते है मुझे सभी लोग छप्पर क नीचे hi बैठे नज़र आ जाते है
मैं बुरी तरह दर जाती हु की कही किसी को कुछ सक न हो जाये.. इसलिए जल्दी से एक बड़ा सा घूँघट कर लेती हु और अपने पल्लू का बाकि कपडा अपनी बड़ी बड़ी चूचियों क ऊपर ले आती हु ताकि किसी को मेरी बिना ब्रा वाली चूचियों का पता न चले, और पेंटी का पता चलने का तोह सवाल hi नहीं था ककी उसके लिए किसी को मेरी साड़ी उठानी होगी
मैं इतनी जल्दी से घर क अंदर जाती हु मानो दर हो की कही कोई रोक क मुझसे सवाल जवाब न करने लगे
मैं घर क अंदर आते hi जल्दी से अपना घूँघट हटती हु और अपना पल्लू सही करती हुई चैन की सांस लेती हु, पर मुझे कुछ पल और रुकना चाहिए था.. ककी जैसे hi मैं रहत की सांस लेती हु मुझे मेरे कानो में आवाज़ सुनाई पड़ती है
"कहा रह गए थे दोनों इतनी दिएर.. हम लोग परेशां हो रहे थे ?"
मालती ये आवाज़ सुनते hi बुरी तरह काँप सी पड़ती है ककी सच वो बता नहीं सकती थी और झूठ वो सविता से बोलना नहीं च रही थी.. पर इस समय तोह झूट hi एकलौता विकल्प था
और आप सब भी अब जान hi चुके होंगे की ये आवाज़ सविता की थी जिसके बेटे ने आज मोनू की माँ को एक hi दिन में 3 बार छोड़ा था.. और पहलवान क खेत में हुई चुदाई क बाद तोह ज्यादा दिएर वह वो दोनों रुके भी नहीं थे
मालती हिम्मत करके अपनी इस्तिथि को सँभालते हुए जैसे hi सविता की तरफ मुद क कुछ बोलने को होती है.. उससे पहले hi सविता बोल पड़ती है
"अरे तेरी गर्दन पे ये निशान.... और तेरे निचले होंठ को किया हुआ, किसी चीज़ ने काट लिया था किया.. सूजन जैसी है"
पर फिर सविता भी आगे नहीं बोलती बस मुस्कुरा पड़ती है और मालती को ऊपर से नीचे तक देखने लगती है, मालती का हाल तोह ऐसा था की वो प्राथना करने लगती है की काश धरती पहात जाये और वो उसमे समां जाये.. ककी मारे शर्म क वो अपनी जेठानी से आँखें भी नहीं मिला प् रही थी
मालती- (नीचे अपने पैरों क अंगूठे को देखते हुए, धीरे से कांपते हुए) वो.. मैं वो... आते हुए रस्ते में गिर पद.. गिर पड़ी थी
इस पल तक सविता की परकी नज़रें मालती क पुरे सरीर का भूगोल नाप चुकी थी और उसकी नज़रें मालती क बिना ब्रा क नज़र आते मोठे मोठे निप्पल्स पे अटक चुकी थी
सविता- (मुस्कुराते हुए) सही कह रही है.. जरूर गिरी होगी, पर कहा
फिर धीरे से मालती क कान क पास आगे अपनी गरम गरम साँसें उसपे चोरते हुए
"लुंड पे...."
मालती को काटो तोह खून नहीं, उसे समझ hi नहीं आता की वो बोले तोह किया बोले
पर आगे बोलने का काम भी सविता hi करती है.. वो भी मुस्कराहट क साथ
"जा पहले अचे से नाहा ले.. ककी तेरी हालत बता रही है की आज तू 1 बार से ज्यादा बार गिरी है.. उम्मीद है ज्यादा दर्द नहीं होगा, क्यू नहीं है न"
मालती बस शर्म से लाल और बुरी तरह झेपते हुए बस 'है' में अपना सर हिला क रह जाती है
सविता- जा पहले नाहा ले.. तेरे कपडे भिजवाती हु, और है चलते हुए अपनी चाल पे थोड़ा धियान रखा.. तेरी चाल इस बात की चुगली कर रही है की तू कहा गिरी है
और ये कहते हुए धीरे से आँख मार देती है.. बेचारी मालती तोह पानी पानी हु चुकी थी वो जल्दी से वह से भाग जाना चाहती थी और मौका मिलते hi लगभग दौड़ती हुई वह से सीधा घर क पीछे वाले स्नानघर की तरफ चल पड़ती है
इधर उसकी हालत और उसकी लज़्ज़ा देख क सविता khil-khila क है पड़ती है, फिर खुद से कहती है
"लगता है अचे से रगड़ी गयी है बेचारी"
फिर अपनी साड़ी क ऊपर से hi अपने चूतड़ वाले हिस्से पे अपना हाथ फिरते हुए और अपने पिछले छेद में उठते उस मीठे मीठे दर्द का एहसास लेते हुए खुद से कहती है
"वैसे रगड़ा तोह उसने मुझे भी जैम क है.. उफ्फ्फ्फ़ कमीने ने छेद बड़ा कर दिया.. हैईईई"
सविता फिर हस्ते हुए कमरे में जाने लगती है ताकि मालती क कपडे निकल क उसे दे सके, पर तभी उसके चेहरे पे एक शरारत भरी मुस्कान खिल पड़ती है और वो कमरे से जेक सिर्फ एक टॉवल उठती है और करीब 10 मं बाद दरवाजे पे आके अपनी देवरानी हर्षिता क बेटे सोनू को बुलाती है और उसे टॉवल देते हुए
"जा मालती पीछे वाले स्नानघर में है"
सोनू ये सुनते hi खिल उठता है और लगभग भागते हुए स्नानघर की और चल पड़ता है.. वही उसे जाता हुआ देख क सविता वही कड़ी कड़ी मुस्कुराती रहती है
"जरा मैं भी तोह जणू.. बड़ा हो गया है या अभी भी बचा है"
आशा करता हु अपडेट 19 क दोनों सन एक साथ पड़के आप सभी को आनंद आया होगा.. मैं आप सभी क विचार और आगे क लिए सुझाव जानने को उत्सुक्त रहूँगा
ऐसी क साथ एक जरुरी बात ये भी की नवरात्री और फिर दिवाली क कारन मैं कुछ दिनों तक कुछ लिख नहीं पाउँगा.. ककी इस समय दुकान का काम कई गुना बाद जाता है, और अभी क लिए पूरा समय काम पे hi देना जरुरी है
पर इस बीच एक शार्ट स्टोरी जरूर लेके आऊंगा, जिसका पूरा आईडिया
ऐसी क साथ अपडेट #19 पूर्ण होता है
