Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running - Page 14 - SexBaba
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Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running

करीब 15 मं बाद

"किया हुआ रैंड.. घर नहीं चलना अब तोह बारिश भी बंद हो गयी है

वर्ण बोल तोह फिर से एक बार और...."

सत्यम मुस्कुराते हुए जैसे hi ये बोलता है मैं टपक से अपनी आँखों को खोल क देखती हुई तोह बारिश अब लगभग रुक चुकी थी और उसे अपने ऊपर से हटते हुए

"कमीना आज दुरबा तोह सोचना भी नहीं.. एक hi दिन में 3 बार चुदाई करि है मेरी, कमीने अपनी चची को रैंड बना डाला"

मैं ये बोलती हुई तोह खुद hi है पड़ती हु, जिसपे सत्यम भी हस्ते हुए उठ क अपने कपडे पहनना सुरु कर देता है

पर जब मैं अपनी पेंटी पहनने क लिए ढूंढती हुई तोह देखती हु की वो बिस्तर क दूसरी तरफ खेत की खीचड़ भरी मिटटी मैं पड़ी हुई थी

सत्यम मेरी पेंटी की हालत देख क है पड़ता है

"पहले ब्रा और अब पेंटी... वाह्ह्ह

मैं तोह कहता हु आप नंगी hi घर चलो"

मालती- (मुस्कुराते हुए अपनी बड़ी बड़ी आँखें दिखते हुए) चुप कर कमीने

अब मेरे पास और कोई रास्ता तोह था नहीं, इसलिए मुझे बिना पेंटी क hi पेटीकोट और ब्लाउज पेहेन क उसपे साड़ी पहनी पड़ती है और फिर जल्दी hi हम दोनों एक दूसरे को देख क कभी मुस्कुराते तोह कभी मैं शर्मा क दूसरी तरफ देखते हुए अपने घर की चल पड़ते है

वैसे मैं ये भी बता दू की इस सफर क दौरान मुझे बीच में कई बार अजीब से गन्दी उबकाई भी आयी मानो जैसे उलटी हो जाएगी.. सायद इसकी वजह मेरी वो टट्टी थी जिसे सत्यम ने अपनी ऊँगली पे लगा क मुझे hi खिला दी थी

सत्यम ने आज सही मायने में मुझे एक रैंड बना दिया था.. और ये रैंड आज बहुत खुस थी, और अलग बात है की इस समय मेरे सरीर का एक एक हिस्सा टूट रहा है

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दोनों जैसे hi घर पहुंचते है मुझे सभी लोग छप्पर क नीचे hi बैठे नज़र आ जाते है

मैं बुरी तरह दर जाती हु की कही किसी को कुछ सक न हो जाये.. इसलिए जल्दी से एक बड़ा सा घूँघट कर लेती हु और अपने पल्लू का बाकि कपडा अपनी बड़ी बड़ी चूचियों क ऊपर ले आती हु ताकि किसी को मेरी बिना ब्रा वाली चूचियों का पता न चले, और पेंटी का पता चलने का तोह सवाल hi नहीं था ककी उसके लिए किसी को मेरी साड़ी उठानी होगी

मैं इतनी जल्दी से घर क अंदर जाती हु मानो दर हो की कही कोई रोक क मुझसे सवाल जवाब न करने लगे

मैं घर क अंदर आते hi जल्दी से अपना घूँघट हटती हु और अपना पल्लू सही करती हुई चैन की सांस लेती हु, पर मुझे कुछ पल और रुकना चाहिए था.. ककी जैसे hi मैं रहत की सांस लेती हु मुझे मेरे कानो में आवाज़ सुनाई पड़ती है

"कहा रह गए थे दोनों इतनी दिएर.. हम लोग परेशां हो रहे थे ?"

मालती ये आवाज़ सुनते hi बुरी तरह काँप सी पड़ती है ककी सच वो बता नहीं सकती थी और झूठ वो सविता से बोलना नहीं च रही थी.. पर इस समय तोह झूट hi एकलौता विकल्प था

और आप सब भी अब जान hi चुके होंगे की ये आवाज़ सविता की थी जिसके बेटे ने आज मोनू की माँ को एक hi दिन में 3 बार छोड़ा था.. और पहलवान क खेत में हुई चुदाई क बाद तोह ज्यादा दिएर वह वो दोनों रुके भी नहीं थे

मालती हिम्मत करके अपनी इस्तिथि को सँभालते हुए जैसे hi सविता की तरफ मुद क कुछ बोलने को होती है.. उससे पहले hi सविता बोल पड़ती है

"अरे तेरी गर्दन पे ये निशान.... और तेरे निचले होंठ को किया हुआ, किसी चीज़ ने काट लिया था किया.. सूजन जैसी है"

पर फिर सविता भी आगे नहीं बोलती बस मुस्कुरा पड़ती है और मालती को ऊपर से नीचे तक देखने लगती है, मालती का हाल तोह ऐसा था की वो प्राथना करने लगती है की काश धरती पहात जाये और वो उसमे समां जाये.. ककी मारे शर्म क वो अपनी जेठानी से आँखें भी नहीं मिला प् रही थी

मालती- (नीचे अपने पैरों क अंगूठे को देखते हुए, धीरे से कांपते हुए) वो.. मैं वो... आते हुए रस्ते में गिर पद.. गिर पड़ी थी

इस पल तक सविता की परकी नज़रें मालती क पुरे सरीर का भूगोल नाप चुकी थी और उसकी नज़रें मालती क बिना ब्रा क नज़र आते मोठे मोठे निप्पल्स पे अटक चुकी थी

सविता- (मुस्कुराते हुए) सही कह रही है.. जरूर गिरी होगी, पर कहा

फिर धीरे से मालती क कान क पास आगे अपनी गरम गरम साँसें उसपे चोरते हुए

"लुंड पे...."

मालती को काटो तोह खून नहीं, उसे समझ hi नहीं आता की वो बोले तोह किया बोले

पर आगे बोलने का काम भी सविता hi करती है.. वो भी मुस्कराहट क साथ

"जा पहले अचे से नाहा ले.. ककी तेरी हालत बता रही है की आज तू 1 बार से ज्यादा बार गिरी है.. उम्मीद है ज्यादा दर्द नहीं होगा, क्यू नहीं है न"

मालती बस शर्म से लाल और बुरी तरह झेपते हुए बस 'है' में अपना सर हिला क रह जाती है

सविता- जा पहले नाहा ले.. तेरे कपडे भिजवाती हु, और है चलते हुए अपनी चाल पे थोड़ा धियान रखा.. तेरी चाल इस बात की चुगली कर रही है की तू कहा गिरी है

और ये कहते हुए धीरे से आँख मार देती है.. बेचारी मालती तोह पानी पानी हु चुकी थी वो जल्दी से वह से भाग जाना चाहती थी और मौका मिलते hi लगभग दौड़ती हुई वह से सीधा घर क पीछे वाले स्नानघर की तरफ चल पड़ती है

इधर उसकी हालत और उसकी लज़्ज़ा देख क सविता khil-khila क है पड़ती है, फिर खुद से कहती है

"लगता है अचे से रगड़ी गयी है बेचारी"

फिर अपनी साड़ी क ऊपर से hi अपने चूतड़ वाले हिस्से पे अपना हाथ फिरते हुए और अपने पिछले छेद में उठते उस मीठे मीठे दर्द का एहसास लेते हुए खुद से कहती है

"वैसे रगड़ा तोह उसने मुझे भी जैम क है.. उफ्फ्फ्फ़ कमीने ने छेद बड़ा कर दिया.. हैईईई"

सविता फिर हस्ते हुए कमरे में जाने लगती है ताकि मालती क कपडे निकल क उसे दे सके, पर तभी उसके चेहरे पे एक शरारत भरी मुस्कान खिल पड़ती है और वो कमरे से जेक सिर्फ एक टॉवल उठती है और करीब 10 मं बाद दरवाजे पे आके अपनी देवरानी हर्षिता क बेटे सोनू को बुलाती है और उसे टॉवल देते हुए

"जा मालती पीछे वाले स्नानघर में है"

सोनू ये सुनते hi खिल उठता है और लगभग भागते हुए स्नानघर की और चल पड़ता है.. वही उसे जाता हुआ देख क सविता वही कड़ी कड़ी मुस्कुराती रहती है

"जरा मैं भी तोह जणू.. बड़ा हो गया है या अभी भी बचा है"

✅✅ ✅✅

आशा करता हु अपडेट 19 क दोनों सन एक साथ पड़के आप सभी को आनंद आया होगा.. मैं आप सभी क विचार और आगे क लिए सुझाव जानने को उत्सुक्त रहूँगा

ऐसी क साथ एक जरुरी बात ये भी की नवरात्री और फिर दिवाली क कारन मैं कुछ दिनों तक कुछ लिख नहीं पाउँगा.. ककी इस समय दुकान का काम कई गुना बाद जाता है, और अभी क लिए पूरा समय काम पे hi देना जरुरी है

पर इस बीच एक शार्ट स्टोरी जरूर लेके आऊंगा, जिसका पूरा आईडिया 💡 मुझे 'शालिनी मम' Pornstar Bhabhi जी ने दिया है.. बल्कि पूरी कहानी उन्ही की है, मैं बस उसे अपने सब्द दूंगा

ऐसी क साथ अपडेट #19 पूर्ण होता है


🙏🙏
 
Latest Update 🆕 on Page 📃 No. 361-362

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)'
 
नई 🆕 अपडेट ों पेज 📄 No. 361-362

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बारिश में भीगी हुई मेरी कामुक माँ



 
नई अपडेट 🆕

Post in thread 'गंदी वाली कहानियाँ (Gandi waali Kahaniyan)'
 
सविता अपने कार्य में इतना खोयी हुई थी की उसे पता hi नहीं चलता की कब कोई उसके ठीक पीछे आके खड़ा हो गया है और हैरानी की बात तोह ये थी.. की उसका लुंड पहले से hi अपना सर उठाये हुए था, मानो जैसे वो सत्तू की माँ क लिए अपने हतियार पे धार लगा क आया हो

पर सवाल ये था की ऐसा कोण है जिसमें इतनी हिम्मत हो की वो सविता जैसी हथनी को ठंडा कर सके.. ??

- फ्रॉम अपकमिंग अपडेट (सबको मेरी गांड चाहिए)
 
अपडेट अभी पूरा नहीं हो पाया है, इसलिए पोस्ट नहीं किया है

पर 1-2 दिनों में पूर्ण होते hi पोस्ट करूँगा
 
प्रीवियस अपडेट ों पेज No. 📃 361



अपडेट #20


सन 🖼️ #01

सुबह का जोश

सूरज की किरणों ने एक नए दिन का आगाज कर दिया था, और अभी तक ये दिन कैसा बीता है ये तोह आप बहुत अचे से जानते है..

फिर चाहे..

मालती का अपने जवान बेटे मोनू का लुंड चूसना हो या फिर सविता का अपने बेटे सत्यम क लुंड पे उछलना हो

गौरैया क पति की अद्भुत और अनोखी सोच हो या फिर खंडहर में आग जला क जिस्म की गर्मी का आनंद लेती मोनू की माँ

मालती का अनोखा 3 लुंड वाला कामुक सपना हो या फिर चाहे गौरैया क ससुर की हवस भरी नज़रिये

जंगल में रॉकी का रोमांचक कारनामा कहे या पहलवान क खेत मालती क महा रंडी अवतार की कहानी

हमने काफी कुछ देखा और पड़ा है, पर ये दिन अब भी पूरा नहीं हुआ है.. बल्कि अभी तोह यही कहूंगा की हम अभी आधा hi जान पाए है इस दिन क बारे में अभी इतना कुछ बचा हुआ है, जिसे लिखते हुए मैं पक्का थकने वाला हु.. पर रुकने वाला नहीं

काफी दिनों बाद लौटा हु और आते hi आपको पकने लगा.. चलिए सीधा आगे बढ़ते है, किया करू भाई लोग आदत से मजबूर हु 😉

सोनू इस समय घर क पिछले हिस्से में उसी स्नानघर में खड़ा था जहा आज सुबह मोनू ने अपनी जवानी का रास अपनी hi सगी माँ 'मालती' को पिलाया था, पर अब उसी जहा लगभग उसी अवस्था में सोनू खड़ा था.. वो भी ठीक मोनू की भांति पूर्ण नंगी अवस्था में और उसका जवानी क जोश से तना हुआ लुंड अपनी जवानी का जलवा दिखते हुए उन कामुक होंठों क बीच घुसा हुआ था जिसकी गर्माहट और गीलेपन का अनोखा आनंद लेते हुए वीरेंदर क जवान बेटे की आँखें इस समय बंद थी

“Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh.. Badddddddddddddiiiiiiiiiiiiii माआआआ”


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जहा एक तरफ घर क बाकि लोग रज़ाई की गर्माहट से बहार आने से कटरा रहे थे वही आज इस सुबह की कोहरे वाली ठण्ड क बीचे सोनू पूर्ण नंगी अवस्ता में अपना जवानी क जोश से भरा हुआ.. अपना लुंड उस भरी और गदराई औरत क मुंह की गहराई में घुसाए हुए जोर जोर से अपनी कमर को हिलाते हुए आनंद की नयी परिभाषा सीख रहा था

“Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh.. और जोर से चुसो.. बड़ी Maaaaaaaaaaaaaaa… आआआआह्ह्ह्ह.. बहुत मज़ा आ रहा है…… Aaaaaaaaaaaaaaa”

घर क सबसे छोटे लड़के की बात सोनू की बड़ी माँ टालती भी नहीं पर उसके सवाल का जवाब उसकी अनोखी हरकत देती है.. जहा वो अपने जवान बेटे सामान भतीजे का मोटा लुंड अपने गले की इतनी गहराई तक घुसा लेती है की सोनू का जिस्म काँप उठता है, और ये इस बात का भी साबुत था की उसकी 'बड़ी माँ' इस खेल में कितनी निपूर्ण है

"सललललररररररपपपप........... slllluuuuuuuuuuurrrrrrrrrrrrpppppp"

दिन की शुरुवात एक जवान लुंड क चूसने से हो.. भला इससे खूबसूरत चीज़ कैसे कुछ हो सकती है किया ?

वही जवानी क जोश में अकड़ा हुआ सोनू का लुंड भी बता रहा था की उसे इस सब में कितना आनंद प्राप्त हो रहा है, सायद इसीलिए वो अपना एक हाथ अपनी बड़ी माँ क सर पे रख क जोर से अपनी कमर का धक्का मरते हुए अपने लुंड को और गहराई तक घुसाने की पूरी चैस्ता करता है, पर सायद सोनू ये भूल गया था की उसकी बड़ी माँ का नाम 'सविता' है.. जिसने ऐसे न जाने कितने hi धक्के झेले हुए है

सविता की आँखों की चमक बता रही थी की वो सोनू की हरकत का जवाब देने वाली है.. सायद इसीलिए वो पुरे लुंड को चूसते हुए टोपे तक अपने होंठो तक बहार लाती है और सोनू का लाल मोठे टमाटर जैसे टोपे पे अपने होंठों की जकड बना क उसे जोर से चूस लेती है

"Slllluuuuuuuuuuurrrrrrrrrrrrpppppp......."

सविता जैसी कामुक और गदराई मोती भैंस जैसी औरत क आगे भला सोनू जैसे जवान लड़के का दम कहा की टिक्का.. सायद ऐसी कारन उसकी बड़ी माँ की ऐसी कामुक हरकत पे उसका पूरा जिस्म सूखे पत्ते सामान काँप उठा था

"Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh........ हैईईईई"

सोनू की ऐसी हालत पे सविता का पूरा जिस्म ख़ुशी से झूम उठा था, मानो वो उसकी जीत की निशानी हो.. पर सविता इतने में कहा रुकने वाली थी वो उस लाल टोपे पे अपनी जीभ फिरना का काम सुरु कर देती है, और साथ hi साथ अपनी नज़रों को ऊपर उठा क सोनू क चेहरे पे लिखी कामुकता की पड़े भी पद रही थी

अपने लुंड और अपने लाल टमाटर जैसे सुपडे पे अपनी बड़ी माँ की जीभ का स्पर्श पाते hi जवान सोनू और ज्यादा जवान होने जगा था

"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh.... बडीइइइइइइ Maaaaaaaaaa.. आप कितनी मस्त माल हो.. हैईईई.. लगता है मेरा पानी निकल क मानोगी.. आआह्ह्ह्ह"


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“हैई री.. लगता है मेरे बचे का पूरा रास आप hi चूस लोगी.. कुछ मेरे लिए भी चोर देना बड़की भौजाई"

सविता और सोनू क इस कामुक खेल क बीच ये तीसरी आवाज़ उठती थी

आनंद क कारन मस्ती में अपनी आँखों को बंद किये हुए सोनू जब इस सुरीली आवाज़ को सुनता है तोह उसकी आँखें खुद hi खुल जाती है और उसके पैरों क ठीक सामने उसकी सावली सलोनी माँ उसके लुंड को अपनी जेठानी क मुंह में जोर से अंदर बहार घुसते हुए देख क पियर से अपने बेटे क आनंदित चेहरे को निहार रही थी.. पर हर्षिता इतने पे नहीं रूकती वो आगे बढ़ती है और अपने hi जवान सेज बेटे का ाँद मुंह में भर लेती है, मानो उससे अब और रुका नहीं जा रहा हो


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सोनू को अपनी किस्मत पे यकीन hi नहीं हो रहा था की आज 2 सबसे कामुक औरते एक साथ उसके लुंड की प्यास भुजा रही है.. की तभी उसके कानो में वो सुरीला स्वर सुनाई पड़ता है, पर थोड़ी सी डाट वाली ध्वनि क साथ

“उठा न सुबह क 10 बज रहे है.. कितना सोयेगा”

सोनू को कुछ भी समझ नहीं आता की ये अचानक से पूरा दृस्य कैसे बदलने लगा था की तभी उसके सरीर में सुबह की ठंडी हवा आके टकराती है और उसकी आँखें खुद hi खुलती चली जाती है जहा अब पूरा दृश्य बदल चूका था.. ककी वो अपने बिस्तर पे लेता हुआ था और उसके सरीर क ऊपर से रज़ाई हाथ चुकी थी, बल्कि ये कहना ज्यादा सही होगा की खींच ली गयी थी

कुछ पलों तक तोह सोनू समझ hi नहीं पाटा की ये सब किया था पर जैसे hi सामने अपनी सलोनी सूरत वाली कासी बदन की मलिका यानि अपनी माँ को देखता है उसे समझते दिएर नहीं लगती है आज फिर एक और नया सपना देखा है.. सोनू जिस दिन से जवान हुआ है ऐसे hi अजीब और कामुक सपनो ने उसे परेशां करना सुरु कर दिया था

सोनू- (सुबह सुबह बदन से रज़ाई चीन जाने क कारन जहा उसका खूबसूरत सपना टूट गया था वही सुबह की सार्ड लहर ने उसके जिस्म में अपनी चाप चोरते हुए उसकी नींद भी उससे चुरा ली थी) Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh.. किया माँ दो न रज़ाई मुझे.. ?

पर हर्षिता तोह जैसे कुछ सुन hi नहीं रही थी उसके नज़रों की दिशा कही एक जगह अटकी हुई पड़ी थी

“माँ.. किया हो गया, दो न राज़...”

पर सोनू अपनी बात कहते हुए मानो रुक सा जाता है ककी वो अपनी माँ की नज़रों की दिशा की और जब देखता है तोह उसकी साँसे रुक सी जाती है, ककी वह उसके लोअर में एक विशाल तम्बू बना हुआ था, रोज़ hi सुबह सुबह उसके साथ होता था

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सोनू जल्दी से अपने सर क नीचे राखी हुई तकिया को निकल क अपने पैरों क बबीच वाले हिस्से पे रख लेता है.. पर इतनी hi दिएर में उसकी साँसे अटकनी सुरु हो गयी थी और ठण्ड का तोह जैसे वो भूल hi चूका था

हर्षिता की खुली आँखों वाली नींद भी मानो उसके बेटे की उस हरकत ने तोड़ी दी हो और वो जल्दी से, इधर उधर देखते हुए मंद hi मंद मुस्कुरा पड़ती है.. हर्षिता मुस्कुरा जरूर रही थी पर कही न कही एक अजीब सी कश्मकश भी उसके मन में चलने लगी थी

वही सोनू तोह मारे शर्म क अपना सर तक अपनी माँ की और नहीं उठा प् रहा था

“अब जाओ न.. उठ तोह गया न..”

सोनू लजा से लाल चेहरे क साथ अपना सर दूसरी और घुमा क कहता है, जिसपे हर्षिता उसकी ऐसी इस्तिथि का आनंद तोह नहीं लेना च रही थी पर वो करती भी किया.. हालत hi ऐसे थे

इसलिए वो पूरी इस्तिथि का भरपूर आनंद लेते हुए धीरे से हस्ते हुए कहती है

“है वह तोह देखा मैंने.. की कितना उठा है”

सोनू को समझ नहीं आता की उसकी माँ ने ये बात उसके लिए कही है या उसके..

“अब जाओ न.. आप”

सोनू जल्दी से अपने मन क विचारों को काबू करते हुए अपनी बात कहता है

हर्षिता मुस्कुराते हुए रज़ाई को वापस उसके ऊपर डालते हुए धीरे से अपनी हसी छुपाते हुए कहती है

“है.. है जा रही हु बाबा

सुबह सुबह hi दिखा दिया”

हरषिते ये बात मुड़ते हुए कहती है, पर उसके अधरों पे हसी अब भी थी.. इतने से समय में जो घटनाये घाटी उसके कारन उसके जिस्म में एक अजीब सी सुरसुरी सी दौड़ चुकी थी जिसे वो किसी को अभी समझा नहीं सकती थी

हर्षिता वह से चलते हुए सीधा रसोईघर की और अपने कदम बड़ा देती है और बिना पीछे मुड़े धीरे से अपने अधरों की लाली छुपाते हुए कहती है

“जिसे उठना था वह तोह उठा गया.. अब तू भी उठ जा..”

बेचारे सोनू तोह शर्म से लाल hi हो जाता है, उसके पास तोह सब्द hi नहीं था और अगर होते भी तोह कोनसा अपनी माँ को जवान दे पता.. जल्दी hi सोनू अपने दैनिक कृत्यों से निपटने क बाद घर क बहार छप्पर नीचे अपने पिता जी, बड़े ताऊ जी, और अपने बड़े भाई सत्तू क साथ बैठा हु बहार होती घनघोर बारिश को देखे जा रहा था

वैसे अभी सुबह क करीब 10:10 हो रहे थे

वही इस समय उस छप्पर क नीचे बैठे हुए किसी भी इन्शान को जरा भी भनक नहीं थी की इस समय वह से दूर उस खंडहर में इस घर की मंझली बहु चुद रही है..

"आआह्ह्ह्हह.. कामिनी साली मालती किया मस्त चीज़ है तू, उफ्फ्फ्फ़.... तेरी नाभि भी ऐसी है जैसे कोई छोटी सी छूट होऊ.. आआअह्हह्ह्ह्हह.... किया गरम छूट है सालिई तेरी.. मेरा लुंड निचोड़ लेगी.. हरामजादी छूट मैं गन्ने की मशीन लगा क बैठी है किया... उफ्फफ्फ्फ़.... ले खा साली मेरा लुंड.... मादरचोद रंडी साएलीई.... ये ले..."



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(हर्षिता ❤️)
 
नष्ट अपकमिंग अपडेट 👇

अपडेट #20


सन 🖼️ #02

मेरी बीवी चुद रही है..

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किया लगता है, किया होने वाला है ?
 
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