Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 20 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

UPDATE 124

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE

पिछले अपडेट मे आपने पढा कि कैसे एक ओर जहा रंगीलाल ने शकुंतला के साथ नजदीकिया बढ़ाने मे लगा हुआ है वही जानीपुर मे राज ने रात मे एक बढिया प्रोग्राम हुआ और सारे परिवार वालो मजा लिया । मगर दिन मे मेहमानो के लिए सोने की व्यवस्था नही हो पाई थी तो सब्के सोने के लिए सम्स्या होने लगी थी ।

अब आगे

राज की जुबानी

रात मे सोने पर चर्चा होने लगी तो मौसी और मौसा आपस मे बात कर रहे थे । मौके की नजाकत पर चाची थोडा बहुत मौसी पर गुस्सा जरुर हुई थी कि दिन मे मौसी ने ये सब वयवस्था क्यू नही की ।

फिर कुछ तय करने के बाद मौसी ने चाची जी और मा को एक साथ अपने कमरे मे सुला दिया और मामी और बुआ एक कमरे मे सुला दिया ।

फिर ने सारी लडकियो के लिये उपर हाल मे ही बिस्तर डाल दिया जहा वो लोग सो गयी ।

फिर मौसी और हम सारे जेन्स निचे आ गये ।

निचे के कमरो मे नाना पहले ही मौसा के चाचा जी के साथ सो चुके थे तो मैने अगुआई की और अनुज को रमन भैया के साथ उनके कमरे मे भेज दिया और एक कमरे मे मौसा और राजन फुफा को ।

मौसी - सारे लोग तो हो गये तो अब तू कहा सोयेगा

मै - अरे आप जाओ आराम करो मै यही सोफे पर सो जाऊंगा

मौसी - नही नही तू यहा कैसे सो पायेंगा , तू भी उपर चल हाल मे मेरे साथ सो जाना

मै - अरे लेकिन उपर दादी जी अगर गुस्सा हुइ तो

मौसी - हा तो होने दे ,,मै मेरे लाडले को ऐसे थोडी ना सोने दूंगी

मै मुस्करा कर धीमी आवाज मे उनके कान के पास जाकर - फिर तो मै आपको पीछे से पकड कर सोउँगा

मौसी हसके- बदमाश कही का ,,चल अब तू उपर मै आती हू पानी लेके

मै उपर चला गया जहा अभी भी चारो लड़कियो मे कोई सोया नही था सब खुसरफुसर कर रही थी ।

मेरे आने की आहट पर पल्लवि तुरंत उठ कर बैठ गयी और अपना चुन्नी फौरन सीने पर ले लिया ,,मगर उस्से पहले ही मैने उसे नारीयल कैसे मोटे चुचो का उभार देख लिया था और गले के कट से उसकी दरारो को भी ।

मै - अरे आराम मे सो जाओ ,,मै भी यहा सोने आया हू

मेरी बात सुन कर गीता चहकी - सच भैया ,,आओ ना इधर सोवो मेरे

मै - अरे नही मीठी , तुम सो जाओ ना मै इधर सो जाता हू ,ये बोलकर मै पल्लवि के बगल खाली जगह पर सोने लगा ।

चुकी हाल मे तीन चटाई बिछाई गयी थी , तो एक ओर से बबिता फिर सोनल, फिर गीता और फिर पल्लवि सोयी थी । पल्लवि के बाद एक चटाई पुरी खाली थी तो मै वही लेट गया ।

मेरे लेटेते ही गीता उठकर आई और मेरे और पल्लवि के बिच के गैप मे जबरदस्ती घुसने लगी ।

पल्लवि हस कर सोनल की ओर खसक गयी और गीता खिलखिलाकर पल्लवि के जगह पर सरक गयी और मेरा हाथ पकड कर अपनी ओर खिच लिया

मुझे उसके स्पर्श से गुदगुदी सी महसुस हो रही थी तो मै हसे ही जा रहा था ,,बहुत दिनो बाद गीता के मुलायम हाथो का स्पर्श मिला था ।

गीता मुझसे चिपक गयी और मोबाईल खोलने को बोलने लगी और मै भी उसकी जिद पर हार गया ।

इधर पल्लवि बार बार हम दोनो को देख रही थी तो सोनल ने उसे गीता और बबिता के बचपने के बारे मे बताया कि ये दोनो तो ऐसी ही है ,,,ह्मेशा भैया भैया हिहिहिही

बबिता सोनल की बात सुनकर उससे चिपक गयी - नही तो ,,मै तो दीदी दीदी ही कहती हू ,,,दीदी मोबाइल दिखाओ ना

सोनल हस के - देखा अब मोबाईल चाहिये तो दीदी ,,,नही तो तू भी भाग गयी होती उस्के पास ना

सोनल की बात पर बबिता हसने लग जाती है ।

इधर थोडी देर हम लोग मोबाईल चालू करके देख रहे ।

इधर करिब 15 मिंट हो गया और मौसी अभी तक पानी लेके नही आई थी ,,,तो मेरा दिमाग ठनका कही मौसी नाना जी के साथ लगी तो नही ।

मेरे लण्ड एक बार को टनं हो गया और अब मेरे दिल मे बेचैनी सी होने लगी ।

मै उठकर बैठ गया

गीता - क्या हुआ भैया

मैने एकनजर सबको देखा और मुस्कुरा कर बोला - कुछ नही तुम देखो मै पानी पीकर आता हू ।

फिर मै उठ कर सीढियो से निचे चला गया और देखा तो हाल मे पुरा सन्नाटा है ।

रमन भैया का कमरा बन्द था और नाना भी जिस कमरे मे थे वो भी बन्द था । मतलब ये था कि मौसी अब वहा अपने ससुर के सामने नाना से चुदेगी नही ।

फिर मैने सोचा शायद वो पीछे बाथरूम के पास वाले कमरे मे गयी हो कुछ बात करने जहा मौसा और राजन फूफा हो

तो मै उधर ही चला गया

मगर वो कमरा भी अन्दर से पुरा बंद मिला

मैने बाथरूम देखा तो दरवाजा खुला ही था दोनो का

फिर मुझे एक सिसकी सी सुनाई दी और मेरे कान खडे हो गये ।

मैने फौरन कमरे के दरवाजे से कान लगाया तो अन्दर मौसा जी के कराहने की आवाज आ रही थी जो शायद मौसी का नाम लेके झड़ रहे थे ,,तभी मुझे राजन फूफा की भी आवाज आई ।

मेरा दिल धक्क करके रह गया । मतलब मौसी मौसा और अपने नंदोई से एक साथ चुद रही थी ।

कुछ ही पल मे कमरे मे आवाजे तेज हो गयी और मै समझ गया ये लोग दरवाजे की ओर आ रहे है ।

मै फौरन बाथरूम की ओर चला गया और वहा से झाका तो दरवाज खुल चुका था ।

मौसी कमरे के बाहर आ गयी थी और मौसा जी नंगे दरवाजे से बाहर गरदन निकाल कर मौसी से गुहार कर रहे थे

मौसा- रज्जो एक बार और हो जाने दो ना

तभी राजन फुफा ने भी सर निकाला बाहर - हा भाभी जी बस एक और बार बस एक

मौसी थोडा नुकुरते हुए - आप लोगो को तो वही लग रहा है ,,मेहमानो का मेला लगा है ,,अभी कोई खोजता हुआ आ जाये तो सब चौपट हो जायेगा

मौसी की टोंट से दोनो चुप हो गये तो मौसी प्यार से बोली - मै कही भागी नही जा रही हू ,,मेरा भी मन है लेकिन समझिये ना रमन के पापा

मौसा - अच्छा ठिक है जाओ तुम ,,लेकिन कल भी यही व्यव्स्था कर देना

मौसी शर्मायी और हा मे सर हिला कर किचन की ओर चली गयी ।

ये दोनो भी कमरे मे घुस गये और दरवाजा बन्द के लिया ।

मै फौरन वहा से निकला और किचन गया जहा मौसी पानी लेके निकल ही रही थी ।

मौसी - अरे बेटा तू यहा

मै - हा मुझे प्यास लगी थी तो ये बोल कर मैने तुरंत उन्के होठ मुह मे भर लिये

मौसी कसमसा कर मुझसे अलग हुई - धत्त पागल कही का ,,चल पानी पी ले और सोटे है

मै उनके कूल्हो को पकडते हुए - और ये कब दोगी ,,चलो ना यही कर लेते है एक बार

मौसी आन्खे ब्ड़ी करके - नही पागल है क्या ,,,अभी कोई भी आ जायेगा

मै थोडा उदास होकर - तो उपर भी तो नही कर पायेंगे ना

मौसी मुस्कुरा कर - तू चिंता क्यू करता है ,,मुझे भी ये चाहिये हिहिह्जी

मौसी लोवर के उपर से मेरा खड़ा लंड पकडते हुए बोली

फिर हम दोनो उपर चले गये

मौसी - तुम लोग सोये नही अभी ,, कल इतना सारा काम है चलो मोबाइल बंद करो ।

फिर मैने तुरंत गीता से मोबाइल लेके बन्द कर दिया और मौसी ने हाल की बत्ती बुझा दी फिर मेरे बगल मे आकर लेट गयी ।

थोडी देर बाद एक चुप शान्ति छा गयी ,,हालकी बिच मे गीता ने मुझे परेशान किया तो मैने उसे समझाया कि ये सही जगह नही है । लेकिन जब वो नही मानी और बार बार मेरा लण्ड छुने लगी तो मैने मौसी की ओर करवट लेली ।

क्योकि नाजाने क्यू मुझे लग रहा था कि पल्लवि मुझपर खास नजर रख रही है । फिर मेरा उसको मना करने का एक कारण ये भी था कि अगर वो जल्दी सोयेगी नही तो मै मौसी के साथ अपनी मस्ती कैसे कर पाऊन्गा

इसिलिए मैने मौसी की ओर करवट ली जो सीधा लेती हुई थी ।

मैने अपना हाथ उन्के पेट पर रखा वो समझ गयी मै ही हू तो उम्होने मेरा हाथ पकड कर अपने और करिब खिच लिया ।

मै एकदम धीमी आवाज मे मौसी के कान मे - मौसी , अभी नही थोडा रुक कर उपर चलते है ।

मौसी ने मुस्कुरा के हम्म्म्म किया ।

धीरे धीरे मेरे हाथ उन्के बदन पर घूमते रहे और मै ब्लाउज के उपर से ही उनकी चुचिया मिज रहा था और मौसी भी मेरे लण्ड को पकडने की कोसिस कर रही थी ।

धीरे धीरे हम दोनो की उत्तेजना बढ़ी और समय भी काफी हो चुका था ।

मै मौसी से धीरे से कान मे बोला - मौसी छत पर चले

मौसी भी धीरे खुसफुसायि - सब सो गये क्या

मै - हा लग तो रहा है

मौसी - ऐसा कर तू उपर चल मै आ रही हू

मै खुश हुआ और धीरे धीरे अन्धेरे मे जीने का अनुमान लगाता हुआ छत पर निकल गया । उपर बडी सावधानी से जीने के दरवाजे को खोल के उपर निकल गया ।

आह्ह मस्त मौसम था आज , हल्के बादल थे और चादनी रात ।

मै छत पर घूम ही रहा था कि मुझे कुछ आहट सी आई और तभी दरवाजा चुं किया और मौसी उपर आ गयी ।

मै खुश हुआ और उन्हे हग कर लिया ।

मै चौका - अरे मौसी आपकी पायल और चूडिया कहा है

मौसी हस कर-वो तो मैने वही निचे पहले निकाल दिये तब मै आई

मै - तब अब रुकी क्यू हो जल्दी करो ना प्लीज ,,,तडप गया इसपे पर प्यार के लिए

मैने मौसी का हाथ पकड़ कर अपने लोवर से बाहर निकले हुए लण्ड पर रख दिया ।

मौसी गनगना गयी औरा अगले ही पल झुक कर मेरे कदमो मे बैठ गयी और मेरा लण्ड चूसना शुरु कर दी ।

मानो कितने समय बाद मै जन्नत मे आया हू ,, जैसे जैसे मौसी अपने लार से मेरा लंड गिला करती रही , मेरे लण्ड मे सख्ती बढती रही और फिर मैने उन्हे वही चारदिवारी के सहारे घुमा कर खड़ा किया ।

उनकी साडी पेतिकोट को एक साथ उठाते लण्ड को सीधा मौसी की चुत मे पेल दिया

थोडी देर मौसी को चोद लेने के बाद मैने उनको मुह मे माल भर दिया ।

फिर हम दोनो बाथरूम की ओर जाने लगे। मौसी आगे जा चुकी थी और मै जैसे ही मुड़ा ,,मुझे सीढियो पर से तेजी से किसी के नीचे जाने की आहट हुई । मानो कोई दबे पाव सरसराता हुआ अपने हाथ जीने के दिवाल पर रगडता उतरा हो ।

मेरा कलेजा धक कर गया

मैने ये बात मौसी को ब्ताना उचित नही समझा कि जीने पर अभी हमे कोई देख रहा था या फिर मेरा कोई वहम ही हो । क्योकि अब तक सारे लोग सोये हुए थे ।

थोडी देर बाद हम दोनो निचे आ गये और मैने बत्ती जलाई ये देखने के लिए कोई जगा तो नही ।

तो लगभग सभी के चेहरे शांत दिखे सिवाय पल्लवि के ,,उसकी सासे तेज मह्सूस हो रही थी और उसने अपना चेहरा चुन्नी से ढका हुआ था ।

मै समझ गया कि वो पल्लवि ही थी क्योकि सोने का नाटक कैसे करते ये मुझसे बेहतर कौन समझ सकता था ,,मैने खुद कयी बार इसी से अपना फायदा लिया था ।

मुझे एक डर सा लगने लगा था ,,,आजतक मेरे जिस छिपाये संबंधो को कोई दुसरा नही जान पाया था ,,उसके बारे मे अब पल्लवि को खबर थी । मै बुत बन कर वही बोर्ड पर खड़ा होकर कुछ सोचने लगा और जब मौसी ने मुझे बोला तो मैने बत्ती बुझा दी और अपनी जगह पर आकर सो गया ।

मुझे नीद नही आ रही थी

एक भय सा लगा हुआ था अन्दर,,,मन मे आ रहा था कि पल्लवि से बात कर लू और उसे थोडी सफाई दू ,,मगर अगले पल मे लगता कि नही ,,अगर मान लो वो नही उसकी जगह कोई और था तो ???

लेकिन हर बार मेरे शक की सुई पल्लवि पर ही जा रही थी क्योकी कल से जब मै आया तबसे उसकी नजरे मै खुद पर ज्यादा पाई है ।

मेरा दिमाग लगातार इसी उधेड़बुन मे लगा रहा और फिर मैने तय किया कि अब कल सुबह ही ये चार लोगो के चेहरे पढने पड़ेंगे और अंजान होकर इनकी प्रतिक्रियाये देखुगा । तब शायद कुछ कन्फर्म हो पाये ।

बस इसी तसल्ली के साथ रात के किस पहर मे मै सोया मुझे पता नही लेकिन सुबह 5 बजे ही मुझे मौसी ने जगाया ।

मौसी - उठ लल्ला , झाडू पोछा करना है

मै नीद मे कुनमुनाते हुए करवट बदल लिया - नही मौसी सोने दो ना

मौसी हसी और बोली - ठिक है जा मेरे कमरे मे सो जा ,,नही तो चाची जी भी गुस्सा करेंगी

मै उखड़ कर उठा , मेरी आंखे सही से खुली नही थी । थोडी दुर पर किसी से खिलखिलाने की आवाजे आ रही थी तो मौसी उसे डांट रही थी ।

मै उबासी लेते हुए मौसी के कमरे मे चला गया और पेट के बल सो गया ।

पता नही कब लेकिन जब मेरी आंखे खूली तो कमरे मे कोई गोरी औरत थी ,,जो पेतिकोट मे खड़ी होकर अपने ब्लाऊज के हुक बंद कर रही थी और उसकी पीठ मेरी ओर थी ।

कमरे मे साबुन की भीनी खुश्बू फैली हुई थी ।

मैने बस लेटे हुए पूरी आंखे खोली तो देखा ये तो ममता बुआ है और उनका मोटा कुल्हा पेतिकोट मे ये बाहर की ओर फैला हुआ है ।

देख कर मेरे होठ और लण्ड दोनो फैल गये

भाई मै मुस्करा उठा और मेरा लण्ड भी ममता बुआ ने सख्त कूल्हो को देखने के लिए पागल होने लगा ।

इधर मैने सोचा कि अभी अंगड़ाई लेके उठू तभी कमरे का दरवाजा खुला और मौसी भी पीले रंग के ब्लाउज पेतिकोट मे अन्दर आई और दरवाजा बंद कर दिया ।

मैने फौरन आंखे मूंद ली ,,तभी मौसी की आवाज आई - अरे आज अपने भईया को घायल करके के छोडोगि क्या मेरी ननद रानी

ममता - वो तो पहले से ही घायल है भाभी ,,, कुछ बचा ही कहा है अब

मौसी हस कर - अरे मेरी लाडो रानी अभी तो ये पिछ्ला आँगन मे घूमाया ही नही अपने भैया को

मैने थोडी सी बारीक आंखे खोली और देखा तो मौसी का हाथ ममता बुआ के बडी सी गाड पर घूम रहा था ।

ममता बुआ - वो तो भैया की मर्जी है ,,जब चाहे घूम ले हिहिही

मै उनदोनो की बाते सुन कर मन ही मन बहुत मस्त हो गया । मुझे समझ आने लगा कि मा की तरह मौसी ने भी ममता बुआ को मौसा के लिये सेट किया होगा ,,, फिर मैने रात मे मौसा और राजन फुफा के कमरे वाली बात याद आई ।

मै मन मे - यार अगर ममता बुआ और मौसि एक साथ मौसा से चुदते है और वही राजन और मौसा मिलकर मौसी को चोदते है तो कल रात इन्होने ममता बुआ को क्यू नही बुलाया ,,कही मौसी ने ममता बुआ से राजन फूफा से चुदने वाली बात और राजन फूफा से ममता बुआ और मौसा की चुदाई की बात छिपा के तो नही रखी ।

मै थोडा सोचा विचार रहा था कि इतने मे मौसी ने मुझे आवाज दी उठने के लिए

ममता बुआ जो कि अभी ब्लाउज पेतिकोट मे थी - अरे भाभी रुको मुझे साडी तो पहन लेने दो

मौसी हस कर- तू भी ना ममता ,,अरे बच्चा है वो

मौसी - राज उठ जा लल्ला

मै कुनमुना कर उबासी लेते हुए उठा

मै आंखे मिजते हुए एक बडी सी उबासी लेते हुए - गुड मॉर्निंग मौसी

मौसी - 8 बजने वाले है और तेरा अभी गुड मॉर्निंग हो रहा है ,,जा जल्दी से नहा धोकर आ ।

मै कमरे से बाहर आया तो मौसी ने कमरे का दरवाजा बन्द कर लिया ,,,मुझे सामने सीढि दिखी तो निचे जाने के बजाय मै उपर छत पर चला गया ।

जीने से बाहर छत पर पहुचा तो मुझे वही रात वाली जगह पर मेरे वीर्य के कुछ बडी बुन्दे दिखी और मुझे रात का सब याद आने लगा ।

मैने उस गाढे चिपचिपे सुख चुके वीर्य को चप्पल से घिसा तो वो अभी भी निचे से गिला ही था तो वहा फैल गया ।

मैने अपना माथा पिट लिया कि अबे यार ये क्या गन्दगी फैला दी मैने ,,लग रहा है पानी डालना पडेगा ,,वैसे तो किसी की नजर नही जाती ,,लेकिन अब जरुर जायेगी ।

मै आस पास देखा तो छत पर कोई नजर नही आया तो मै बाथरूम की ओर गया कि पहले खाली करता हू फिर इसे साफ करता हू ।

मै जल्दी जल्दी चल कर पाखाने मे घुस गया और जैसे ही बैठा ,,मुझे बगल मे नहाने वाले हिस्से से किसी के गुनगुनाने की आवाज आई ,,,, ये कोई और नही पल्लवि ही थी जो रात का वही गाना गुनगुना रही थी जिसपे उसने डांस किया था - कजरा रे कजरा रे

मगर इधर जैसे ही मैने पाखाने की टोटी चलाई उसने गाना बंद कर दिया ।

फिर नहानघर का दरवाजा खुला और इधर मै भी पल्लवी के नहाने के बाद उसके खिले हुए जिस्म को देखने के लिए लालायित हो गया ।

तो मै फटाफट अपनी धुलाई करके जैसे ही दरवाजा खोल कर बाहर निकला

मेरी आंखे फैल गयी और मुह खुल गया

क्योकि छत की अरगन पर पल्लवि सिर्फ़ एक पीले सूट पहने कपडे डाल रही थी ,,हालाकी उसने ब्लूमर पहना हुआ था ।

उसने जैसे ही मूड मुझे बुत बने हुए देखा तो मेरी नजरे उसकी सूट के बगल से नंगी दिखती जांघो से उसके चेहरे पर गयी ।

उसके चेहरे के भावो से लगा कि अब चिल्लाने वाली है तो मैने लपक कर उसके मुह पर हाथ रख दिया ।

उसकी सासे भारी होने लगी वो उउउऊ उउउउऊ किये जा रही थी ।

बदले मे मै माफी मागते हुए बड़बड़ाते हुए समझा रहा था कि ये सब अनजाने मे हुआ तो प्लीज शोर ना करे वो

मै उसे बाथरूम की दिवाल के एक ओर ले गया और वहा उसके मुह से हाथ हटाया

मै आंखे भीच कर - सॉरी प्लीज ,,चिल्ल्लाना मत

पल्लवी मौका पाते ही फौरन दौड़ कर बाथरूम मे घुस गयी और भागते हुए उसके मोटे कूल्हो की थिरकन अह्ह्ह

वो तस्वीर मेरे जहन मे बैठ गयी ,मगर अगले ही पल मै चेता और वापस से बाथरूम के पास जाकर पल्लवि से माफी मागी

थोडी देर बाद पल्लवि ने दरवाजा खोला तो मै नजरे निचे किये खड़ा रहा ,,

पल्लवि वापस से अरगन की ओर गयी और बाकी बचे हुए कपड़े फैलाने लगी ।

मैने एक नजर उठा कर पल्लवि को देखा तो उसने सल्वार पहन ली थी । तो मै मुस्कुरा कर जैसे ही उसके पास गया और इतना ही बोल पाया - सॉरी ना पल्लवि ,,वो बस अन.....

मेरी नजर पल्लवि के हाथो मे पकडे हुए नीले ब्रा पर गयी जिसका 34B का लेबल साफ दिखा मुझे

पल्लवि ने जैसे ही मुझे अपने बगल मे पाया वो शर्मा गयी और अपना ब्रा वापस बालटी मे डाल दिया ।

मै तुरंत उसकी ओर पीठ कर लिया और धीमी आवाज मे बड़बड़ाया - हे भगवान ये क्या हो रहा है मेरे साथ ,,,फिर से सॉरी पल्लवी

इसबार पल्लवी की थोडी सी खिलखिलाने की आवाज आई और मुझे बडी राहत हुई ।

फिर पल्लवि ने पीछे से ही मेरे कन्धे पर तौलिया रखा और बोली - नहा कर धूप मे डाल दिजियेगा इसे ,,हिहिही

फिर वो मुस्कुरा कर भागती हुई निचे जाने लगी और मै उस गीले तौलिये को कन्धे से उतार जीने की ओर पल्लवि को उसके भारी कुल्हे हिलाते जाते देखकर मुस्कुराया ।

तभी पल्लवि अचानक से जीने के दरवाजे के पास उस जगह पर जाकर रुक गयी जहा मेरा वीर्य गिरा था ।

पल्लवि वो गन्दगी देखी और फिर मुस्कुराकर मुझे देखा तो मै फौरन मुह दुसरी ओर कर लिया । क्योकि मेरी फट चुकी थी । मेरा शक सही निकला ,,कल रात मे पल्लवि ही थी जो सीढिओ पर खड़े होकर मेरी और मौसी की चुदाई देख रही थी ।

मुझे अब समझ नही आ रहा था कि मै कैसे उसका सामना करूँगा , हालकि उसके हरकतो से नही लग रहा था कि वो किसी से कुछ कहने वाली है । मगर एक डर जरुर था मन मे ।

मुझे उपर नहाना था नही क्योकि मेरे ब्रश और कपडे सब निचे थे । तो मै वो तौलिया निचोड कर उसे छत पर डाल दिया और सबसे जरुरी एक गिले कपडे से वो दाग साफ करके निचे चला गया ।

फिर मैने भी नहा धोके पिला कुर्ता और सफेद पाजामा डाला । आज नाश्ता तो बना था लेकिन हम बच्चो को और मौसा मौसी नही मिलने वाला था । क्योकि आज हल्दी थी जब तक कथा और हल्दी का कार्यक्रम हो नही जाता तब तक हमे सिर्फ पानी पीने का आदेश मिला था ।

सारे लोग पीले कपड़ो मे थे ।

सुबह से ही घर मे चहल पहल थी , मौसा के गाव से उनके कुछ रिश्तेदार आ गये थे ,,यहा मुहल्ले की भी कुछ औरते और लडकिया आ गयी थी ।

सबसे उपर की मंजिल पर एक टेंट लगाया गया । फिर वही कथा शुरु हुई । करीब 11 बजे तक कथा समाप्त हुई ,,सबकी आवभगत से लेके प्रासाद बाटने मे हर जगह भागा दौडी लगी थी ।

राहत तब हुई जब पंडित जी ने हमे प्रसाद खाने के लिए बोला ,,,, प्रासाद खाने के बाद हमने पानी पिया ,,,सुबह से सर चकरा रहा था तो मौसी ने चाय भी बनवाया ।

थोडी देर बाद पंडित जी निकल गये ।

फिर उसके बाद वही कथा वाले जगह पर ही रमन भैया को एक छोटी चौकी देके बिठाया गया ।

फिर एक मीडियम साइज़ पतिले मे रखी हल्दी लाई गयी । पहले मौसा मौसी ने भैया को हल्दी लगायी ।

फिर मा , फिर ममत बुआ ने ।

लेकिन जब मामी की बारी आई तो वो भी हल्का हल्का ही भैया के गाल , बाजू पर हल्दी लगा रही थी

मै हस कर मामी को छेड़ते हुए - मामी अगर आप ऐसे कन्जुसी करोगी तो मै अपनी शादी मे आपसे हल्दी नही लगवाउँगा

मेरी बात पर सब हस पडे

मामी हस के - आओ हीरो तुम भी बैठो और जहा कहो वहा लगा दे

मै चल कर रमन भैया के पीछे गया और धीरे से उनका ढिला कुर्ता पकड कर एक ही बार खिच दिया ।

रमन भैया अब उपर से पुरे नंगे हो गये । पेट और सीने पे बाल ही बाल थे और वो शर्मा रहे थे ।

मा मुझे डाटती है - बदमाश ये क्या रहा है

मै हस कर पतिले मे से ठंडी ठंडी हल्दी लेके रमन भैया के गरम पीठ पर उंगलियो से बडे आराम से लगाते हुए - अरे मा रसम है तो अच्छे से करना चाहिए ना हिहिहिह

रमन भैया अपनी पीठ पर ठंडी हल्दी का लेप पाते ही खिलखिलाए और मुझे पकड कर आगे कर दिया ।

हालकी रमन भैया भले ही उतने भारी शरीर के नही थे लेकिन उनकी पकड बहुत मजबूत थी ।

उन्होने मेरा हाथ ऐठ के मुझे सामने किया और फिर हल्दी लेके मेरे कुर्ते के अन्दर नाभि के आस पास लगाने लगे ।

मै गुदगुदी से छ्टकने लगा और मुझे फसा हुआ पाकर मामी को मानो मौका मिल गया ।

वो भी उठ कर आई और पीछे से मेरे कालर मे हाथ डाल कर पीठ मे ठंडी हल्दी पोतने लगी ।

इधर मुझे फसा देख के सब हस रहे थे सिवाय गीता बबिता के ,,,मेरी मासूम बहनो को मुझे परेशान होता देखा नही गया और वो रमन भैया को पकड कर गुदगुदाने लगी ।

इधर रमन भैया ने मेरे हाथ छोड़े तो मैने लपक कर हल्दी के पतिले मे डाला और मामी की मुलायम कमर पर हल्दी मल दिया ।

वो खिल्खिला कर उठ कर भागी तो मैने उन्हे ताड़ा और दौड़ा कर बाथरूम के दिवाल के कोने मे ले गया जहा सबसे छिपते ही मामी चुप हो गयी ।

फिर मै हसते अपने हाथो मे हल्दी मलने लगा।

मामी ने इतराकर खुद से ही अपने पेट से पल्लू हटा कर बोली - आओ लगा लो ना

मै उनकी इस अदा से उत्तेजित हो गया और उन्हे पकड के घुमाया । फिर उनकी नाभि के पास मुलायम पेट पे हल्दी मलते हुए पीछे से अपना लण्ड उनकी गाड़ पे घिसने लगा ।

इधर मुझे फसा हुए देख के मामी ने धीरे से मेरे दुसरे हाथ को पकड़ा और मेरे ही चेहरे पर मल दिया । फिर हस्ते हुए टेन्ट की ओर भाग गयी ।

मै हस्ते हुए वापस आया तो लोगो को लगा इस झड़प मे मेरी ही हाल हुई क्योकि मामी ने अपना पेट वापस पल्लू से ढक लिया था ।

इधर गीता बबिता और सोनल पलल्लवी ने रमन भैया को हल्दी ल्गायी । मैने भी गीता के गुलगुले गालो मे हल्दी लगाई

तस्वीरे निकाली गयी और फिर हम सबने वो स्पेशल बिना नमक हल्दी वाली उड़द की दाल , चावल सब्जी पूरी खाई

स्वाद तो जमा नही लेकिन रस्मो की खाना पूर्ति के लिए थोडा थोडा खाना ही पड़ा ।

लेखक की जुबानी

अब इधर एक ओर जहा राज ने खाना खा लिया ,,,वही राज के पापा यानी रंगीलाल काफी समय से शकुन्तला की राह देख रहे थे कि कब वो खाना लेके आये

क्योकि दोपहर के 1 बजने को थे ,,, सुबह के नास्ते की दही जलेबी ने रंगीलाल की भूख को और बढा दिया था ।

राह जोहते करीब डेढ़ बजे शकुन्तला एक रिक्शा से दुकान पर थैला लेके उतरि ।

रंगीलाल के जान मे जान आई

इधर शकुन्तला ने आते ही माफी मांगी ।

रंगीलाल - अरे भाभी जी क्यू शर्मिंदा कर रही है आईये अन्दर चलिये

शकुन्तला- अरे नही नही ,वो रोहन आ गया है ना तो मै बस ये खाना देने आयी थी

रंगीलाल - अच्छा ठिक है फिर मै ये टिफ़िन रात मे वापस दे दूँगा ।

शकुन्तला हस कर - अरे आप क्यू आयेगे ,,मै वैसे भी रात मे आऊंगी ही , ,ठिक है मै जाती हू

रंगीलाल अवाक होकर रह गया और शकुन्तला उसके सामने मुस्करा कर वापस उसी रिक्से से निकल गयी ।

इधर रंगीलाल का लण्ड अंगड़ाई लेने लगा और वो अन्दर खाना खाने के लिए चला गया

राज की जुबानी

हल्दी का रस्म अदायगी के बाद घर मे सभी मेहमानो के खाने पीने की व्यव्स्था मे जुट गये हम लोग ।

सब्जी तैयार हो रही थी और मै वही रसोई मे मौजूद था ,, इधर भंडारी के साथ राजन फूफा ने कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर काम मे लगे थे ।

वही बगल के एक लोग आंटा लगा रहे थे ।

तभी भंडारी ने बोला कि सब्जी बस तैयार है, जल्दी जल्दी पुरिया बेलवा ,,लेकिन दिक्कत की बात थी कि बेलेगा कौन ???

राजन - अरे बेटा घर मे जाकर पल्लवि और अगर उसकी अम्मा कुछ काम नही कर रही हो तो बुला लाओ , फटाफ़ट हो जायेगा और हा बेलना ले लेना 2 3

इधर मै भाग कर सबसे उपर की छ्त पर गया और वहा औरते आपस ने मेहदी रख रही थी ।

मै हाफते हुए - पल्लवि चलो फूफा बुला रहे है

मुझे हाफ्ते देख कर मौसी परेशान होकर- क्या हुआ लल्ला तू हाफ क्यू रहा हौ

मै हस्कर - अरे मौसी कुछ नही बस सीढिया चढने मे ये अह्ह्ह ,,,, वो मुझे एक्स्ट्रा बेलन चाहिये पुरिया निकलवानी

मौसी ने इधर उधर नजर घुमायि लेकिन उन्के मतलब का कोई नजर नही आ रहा था ,,क्योकि ममता बुआ को सोनल दिदी मेहदी लगा रही थी और मौसी को मामी ,,,मा शायद निचे ही थी ।

मौसी मुझ से - अच्छा बेटा पल्लवि निचे जा रही है तो

मौसी -पल्लवि ,,बेटी जरा स्टोर रूम से बेलन निकाल लेना नये वाले वहा दो होंगे और एक निचे किचन से ले लेना

पल्लवि मे हा मे सर हिलाया ।

इधर मै - और कोई फ्री है पूरी बेलने के लिए

मौसी- अरे तेरी मा निचे ही है , उसे लिवा लेना

मै हा मे सर हिलाया और फिर पल्लवि को देख कर मुस्कुराते हुए निचे चलने का इशारा किया ।

पल्लवी ने भी मुस्कुरा कर हा मे सर हिला दी और हम दोनो स्टोर रूम मे चले गये ।

वहा जाने के बाद पल्लवि थोडा बहुत खोज बिन करने लगी ।

मैने मौका देख के थोडा बात करने की कोशिस की - वैसे मै कल शर्त जीत गया था

पल्लवि एक ट्रंक मे खड़बड़ाती हुई बेलन खोज रही थी और मेरे बात को सुन कर थोडा चुप रहने के बाद बोली - हा तो मैने भी डांस किया था ना

मै - तो शर्त जीतने के पहले ही,,वो थोडी ना गिना जायेगा

पल्लवि - तो फिर अब क्या शर्त बदल दोगे ,,कुछ और करना पडेगा मुझे

मै - नही वो बात नही है ,,मै तो ये सोच रहा था अगर मै हार जाता शर्त तो तुम मुझसे क्या करवाति

पल्लवि हाथ मे बेलन लेके उसे मुझे थमाते हुए इतरायी - मै तो बस एक सलाह देती आपको

मै थोड़ा असमंजस भरा हसी के भाव लाता हुआ - सलाह ? मतलब किस चीज़ के लिए

पल्ल्ल्वी मुस्कुरा कर - यही कि कुछ चीजे सही जगह पर ही करनी चाहिये एकदम से खुले मे नही

पल्लवी की बाते सुन कर मेरी फ़ट गयी क्योकि मै समझ गया वो रात मे मौसी के साथ मेरी चुदाई की बाते कर रही थी ।

मै अटकते हुए -क क क क्या आ मतलब है तुम्हारा ,,,साफ साफ बोलो

पल्लवि मुस्कुरा कर दरवाजे की ओर जाते हुए - वही जो तुम समझ रहे हो ,,,वैसे मै ये किसी से नही कहूँगी । अब चलो ।

मेरी फट रही थी और पल्लवि का डेयरीन्ग अंदाज मुझे और भी डरा रहा था तो पता नही मेरे दिमाग मे क्या सुझा कि मै बस अपने बचाव के लिए एक तुक्का फेका ,,,जोकि शायद मुझे उसकी जरुरत भी थी और वो बात बस वही खतम हो जाती ।

मगर नियती का खेल वो ही जाने और बात आगे बढ गयी ।

मै हकला कर - त त तुम अगर बता दोगी किसी को तो मै भी तुम्हारे और अनुज के बीच की बात सबको बता दूँगा

पल्लवि के पाव रुक गये तो मुझे लगा मेरा दाव चल गया तो मैने बात को और लपेट कर बोला - अनुज ने मुझे सब बता दिया है ,,वो मुझसे कुछ नही छिपाता

पल्लवि के पाव हिल रहे थे और गुस्से से तमतमाती हुई घूमी और मुझे ऊँगली दिखाते हुए - सुनो मिस्टर मुझे धमकी देने की सोचना भी मत , और वैसे भी मै अपने मामी जी की इज्जत किसी के सामने नही उछालने वाली ।

पल्लवि की ऐसी प्रतिक्रिया देख कर मै समझ गया कि मेरा तुक्का सही जगह पर लगा था और पल्लवि ने अभी अभी उसका प्रमाण दे दिया था । अपनी जीत पर मुझे बहुत खुशी हुई और मेरे मन से डर अब पूरी तरह गायब हो गया था ।

मैने लपक कर पल्लवी के कमर मे हाथ डाला और उसे अपनी ओर खीचा ,,,वो मेरे बाहो मे छ्टपटाने लगी ।

पल्लवि - गन्दे इन्सान छोड दो मुझे ,,नही तो मै उम्म्ंम्म्ंमम्मम्ंं

पल्लवि और कुछ कहती उस्से पहले ही मैने उसके होठ अपने मुह मे भर लिये और चुस कर छोड दिया ।

पल्लवि हाफते हुए - ये क्या किया तूमने ,,मुझे लगा तुम जैसे भी होगे लेकिन अच्छे इन्सान होगे । कम से कम एक लड़की की भावनाओ की इज्जत तो करोगे ।

पल्लवि की बाते सुन कर मुझे समझ आया कि मै ये क्या करने लगा था और मुझे खुद पर घिन सी हुई । फिर एक पल को मै ग्लानि मे तब भर गया जब मुझे अनुज का ख्याल आया कि ये तो उसकी गर्लफ्रैंड है और मैने मेरे भाई के साथ धोखा किया ।

मै उदास सा हो गया लेकिन खुद के लिए एक गुस्सा भर गया और मैने पल्लवि के हाथ को पकड कर जोर से अपने गालो पर मारा और सॉरी बोल कर कमरे से बाहर आ गया ।

पल्लवि बुत बनकर वही खड़ी रही ।

मैने खुद के आंसू पोछे और बेलन लेके निचे चला गया ।

किचन मे मा मिली तो उन्हे भी साथ लेके बगल के घर मे चला गया ।

इधर मा मुझे पुरिया बेलना बताने लगी ,,मा के साथ हसी मजाक मे कुछ पलो के लिए मै भूल गया था । मगर जैसे ही पल्लवि वहा आई मै शांत हो गया ।

वो मा के बगल मे बैठ कर पुरिया बेलने लगी ।

मुझे अचान्क से चुप देख कर मा को कुछ शक हुआ ।

मा - क्या हुआ राज तु चुप क्यू हो गया ,

मै जबरन की हसी चेहरे पर लाता हुआ जिसमे मेरी आन्खे डबडबा सी गयी - कुछ तो नही मा ,,,वो बस खाने का देखकर पापा की याद आ गयी कि पता नही उन्होने खाया कि नही ।

मा- अरे हा आज कामो मे फस कर उनसे बात भी नही हुई , जरा लगा ना उनको फोन

मै - रुको मा मै मोबाईल लेके आता हू ,फिर मै उठा और मेरी लाल हुई आन्खो से पल्लवी को देखा और घर मे रमन भैया के कमरे मे चला गया ।

मैने अपना बैग खोलकर उसमे से मोबाइल निकाला और जैसे ही कमरे के बाहर जाने को हुआ तो कमरे मे पल्लवि खड़ी थी ।

मै चौक के - अरे तुम यहा ,,कुछ चाहिये क्या मम्मी को

पल्लवि धीमी आवाज मे नही बोल कर सर हिलाई

मै - तो फिर

पल्लवि मुह गिरा कर - वो सॉरी , मुझे आपको ऐसे नही कहना चाहिये था

मै जबरन की हसी लाता हुआ भरे गले से - अरे तुम क्यू सॉरी कह रही ,,,गलती तो मेरी थी मैने अपने छोटे भाई की जीएफ के साथ वो सब किया

पल्लवी चौकी और जिज्ञासू होकर - जीएफ मतलब

मै मुस्कुरा कर - गर्लफ्रेंड

पल्लवि हसी - हा लेकिन मै तुम्हारे भाई की गर्लफ्रेंड नही हू ,,लेकिन मेरा बॉयफ्रेंड अनुज ही है

मै फसा हुआ मह्सूस किया - क्या मतलब कि तुम उसकी GF नही हो लेकिन वो तुम्हारा BF है

पल्लवि मुझे समझाते हुए - अरे नही वो मेरा अनुज मेरे गाव मे रहता है ,,, मेरे ताऊ जी का लड़का है ।

मै पहले उसकी बात पर हसा लेकिन फिर कुछ सवालो ने मुझे उलझा दिया - अच्छा,,,मगर ,,,लेकिन

मै - अगर वो गाव वाला अनुज तुम्हारा BF है तो तुमने मेरे अनुज से वो सब क्यू ???

पल्लवि मुस्कुरा कर शर्माते हुए मुह फेर ली - वो बस ऐसे ही जरूरतें थी कि हो गया ,,, लेकिन आपका अनुज बहुत ही अच्छा है ।

मुझे बहुत शौकीन्ग सा ल्गा और मन ही ग्लानि शांत हुई कि चलो दिल का बोझ हल्का हो गया । लेकिन इंसानी फितरत है कि मौके और दस्तूर की ताक मे हमेशा रहता है और वही फिलहाल मुझे जो चाहिये वो बस एक इजाजत थी ।

मै आगे बढा - वैसे कुछ जरूरते मेरी भी है , अगर तुम कुछ मदद कर सको तो

पल्लवि की आंखे बडी हो गयी और उसके चेहरे पर मुस्कान थी ।

मै हस कर उसकी आँखो मे देखता हुआ - मै पुछा मदद करोगी मेरी

वो शर्म से नजरे झुका ली और बाहर की ओर जाने लगी ।

मै उसके पीछे जाता हुआ - मुझे तुम्हारे जवाब का इन्तजार रहेगा और फिर मै फोन लेके मा के पास चला गया ।

फिर मैने पापा से बात की उनका हाल चाल लिया ,,तो बातो ही बातो मे पता चला कि रोहन भैया आ गये है । मै भी मन ही मन काजल भाभी को सोच कर मुस्कुराया कि आज रात काजल भाभी अपने औजारो का प्रयोग करेंगी रोहन भैया पर हिहिहिह

खैर थोडी देर मे पल्लवि भी आई और उसने मुझे देख कर स्माइल पास की ।

फिर मै खुश होकर सारे कामो मे भिड़ गया

इधर खाना तैयार हुआ तो बारी बारी करके खाना सबको खिलाया गया ।

खाना एक ही टाईम मे एक्स्ट्रा बनाया गया था ताकी जिसे रात मे भूख हो वो खा सके ।

इधर काफी सारी मस्तिया हुई और रात मे कुछ खास होना तो था नही इसिलिए मै निचे के हाल मे कुछ नये आये मेहमानो के साथ सोया ।

बाकी की सारी औरते उपर छत पर ही सोयी ।

****______******______****______

जानीपुर मे तो सब सो गये लेकिन चमन्पुरा मे रंगीलाल की रात आज बहुत लम्बी होने वाली थी ।

जारी रहेगी
 
Sunday मतलब छुट्टी :bat1: फिर भी रेवो नही आ रहे हैं
 
UPDATE 125

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE

पिछले अपडेट मे आपने पढा एक ओर हल्दी के रस्मो के बिच राज ने मस्ती करते हुए पल्लवि से कुछ प्रस्ताव रखे है ,,,वही रंगीलाल का दिल भी रात के लिए गार्डन गार्डन हुआ जा रहा है ।

देखते आगे क्या होने वाला

लेखक की जुबानी

समय : रात के 8 बजे

लोकेशन : राज का चौराहा वाला घर

रंगीलाल इस वक्त मस्त अपने कमरे की बेड को सेट करने मे व्यस्त था और बेड के पास ही तेल की सिशी रख दी । कुछ एक वैसलीन के डिबिया मे रख दी ।

कमरे मे झाडू लगा कर उसमे अच्छा वाला इत्र मे छिड़क दिया और फिर नहाने चला गया ।

इधर किचन मे शकुन्तला खाना बना रही थी । गर्मी से परेशान होकर उसकी हालत खराब हो रही थी

इधर रंगीलाल नहा कर फुल बनियान और पाजामा पहने बाहर आया । सीधा किचन मे चला गया ।

रंगीलाल - ओह्हो आपको कितनी गरमी हो रही है भाभी

शकुन्तला मुस्कुरा कर - हा वो मुझे जरा गरमी ज्यादा होती है ।

रंगीलाल - अच्छा तो अभी समय लगेगा

शकुन्तला - नही बस ये दो रोटी बाकी है , फिर हो गया

रंगीलाल - अच्छा ठिक है फिर मै बाथरूम मे पानी लगा देता हू और आपके कल वाले कप्डे निकाल देता हू ,,,आप नहा लिजिए तुरन्त

शकुंतला कल के कपड़ो पर विचार करते हुए - अच्छा ठिक है लेकिन क्या रागिनी की कोई नाइटी नही होगी ,,,वो क्या है मुझे साडी मे सोने की आदत नही है ।

रंगीलाल ने कुछ बिचार किया - अब ब ब आल्मारि चेक करके बताता हू भाभी जी ,,क्योकि इस बार मै गरमी मे उसके लिए कोई मैकसी लाया नही था ,,वो ब्लाऊज पेतिकोट मे ही सोती थी रोज

शकुंतला रंगीलाल की बात पर मुस्कुराती है - अरे रहने दीजिये परेशान ना होयीये मै कल वाले कपडे ही पहन लूंगी ,,

रंगीलाल - अरे इसमे परेशान होने जैसा क्या है ,,बस खोजना है ,मिल जायेगा ??

शकुंतला हस के - अरे मिल तो जायेगा ,,लेकिन उस खोजबिन के चक्कर मे आप रागिनी के समान को उलट पलट कर रख देंगे और जब वो वापस आयेगी तो बहुत नाराज होगी ।।

रंगीलाल कुछ सोच कर हस्ता हुआ - हा भाभी जी बात तो आपकी सही है ,,रागिनी को बिल्कुल नही पसंद की बिना पुछे कोई उसके सामानो मे उलटफेर करे तो

शकुन्तला हस कर - अरे ये सिर्फ रागिनी की नही ,,,सब औरतो की आदत है ,किसी को नहो पसंद आता है हिहिहिही

रंगीलाल - अच्छा ठिक है फिर आप आईये मै कपडे आपको दे देता हू

शकुन्तला- अरे लेकिन पहले मुझे साड़ी भी प्रेस करनी पड़ेगी

रंगीलाल हस कर - अरे उसकी कोई जरुरत नही है ,,मै आज सुबह की आपके सारे कपडे प्रेस करके रख दिये थे ।

शकुंतला शर्म से लाल हो गयी कि रंगीलाल ने उस्के पैंटी को फिर से छुआ होगा ।

फिर वो दोनो कमरे मे गये जहा रंगीलाल ने बडी तह के साथ शकुन्तला के कपड़ो को रखा था । सबसे निचे साड़ी, फिर पेतिकोट फिर ब्लाऊज और फिर उपर पैंटी ।

रन्गिलाल जब सारे कपड़ो को हाथो मे लेके शकुन्तला के सामने हुआ तो शकुन्तला अपनी प्रेस हुई पैंटी देख कर शर्माने लगी । एक मुस्कराहट उसके होठो पर थी ।

पैंटी इतनी स्लिम थी मानो रंगीलाल ने सारा जोर पैंटी पर लगा कर उसे चिपटा कर दिया था और क्रिच भी एक दम टाइट ।

रंगीलाल - लिजिए भाभी जी ,,आप नहा लिजिए मै बाहर ही हू

फिर रंगीलाल बाहर निकल आता है ।

इधर शकुंतला नहा कर तैयार होती है और रंगीलाल की दी हुई साड़ी पहन कर हाथ मे बालटी लिये हुए बाहर आती है ।

जिसमे सबसे उपर रंगीलाल का बनियान और कच्छा रखा हुआ था ।

रंगीलाल - अरे भाभी आज तो मैने धुल दिया था फिर क्यू

शकुन्तला मुस्कुरा कर - अरे वो मैने सोचा बाकि के कपडे छत पर ले जाने ही है तो क्यू ना इनहे भी

रंगीलाल हाथ बढा कर बालटी पकडता हुआ - अच्छा लाईये मै ले चलता हू

फिर दोनो उपर की छत पर चले जाते है ,,जहा मस्त ठंडी बयार चल रही थी ।

जीने की बत्ती जल रही थी और उसी से छत पर उजाला था ।

इधर शकुन्तला ने छत पर कपडे डालने लगी । तभी उसे अपने घर के जीने की आवाज आई और उसने देखा कि रोहन छत पर आया है ।

शकुन्तला फौरन रंगीलाल को पकड कर निचे बैठ गयी ।

रन्गीलाल चौका - क्या हुआ भाभी जी ,,आप मुझे ऐसे क्यू खीची

शकुन्तला थोडी परेशान होती हुई - वो रोहन छत पर आया है और कही उसने आपको देख लिया तो

रंगीलाल अचरज से - मै समझा नही भाभी जी ,,, क्या हुआ अगर वो मुझे देख लेगा तो

शकुंतला ने तभी वापस से अपने छत का दरवाजा बंद होता पाया तो गरदन उचका कर अपने घर की ओर देखी तो छत पर कोई नही था ।

फिर वो खड़ी हुई और जीने की बत्ती बुझा दी

रंगीलाल असमंजस से भरा हुआ खड़ा होकर - हुआ क्या भाभी जी ,,आप इतनी परेशान क्यू है ???

शकुन्तला हिचकती हुई - चलिये पहले निचे चलते है ।

रन्गीलाल को समझ नही आया कि क्या चल रहा है ।

फिर वो दोनो निचे के हाल मे आगये ।

रंगीलाल - क्या हुआ भाभी ,, क्या बात है ।

शकुंतला अब थोडा समान्य होती हुई मगर मुस्कुरा कर - वो दरअसल मैने रोहन से झूठ बोल कर यहा आयी हू

रन्गीलाल अचरज से - कैसा झूठ भाभी जी मै कुछ सम्झा नही।

शकुन्तला शर्मा कर मुस्कुराते हुए - वो मैने कहा कि आप यहा कोई है नही तो मुझे घर की देख रेख के लिए यहा सोना पडेगा

रंगीलाल की आंखे चमक गयी कि शकुंतला ने उस्के लिये झूठ बोला फिर भी वो अपनी भावनाये छिपाता हुआ - अरे तो इसमे झूठ बोलने की क्या जरूरत थी भाभी ।

शकुंतला शर्मा कर मुस्कुराते हुए - जरुरी था तभी मैने ऐसा किया

रंगीलाल को लगने लगा कि शायद शकुंतला खुद से ही कुछ पहल करने वाली है तो वो गदगद हो गया और शकुन्तला के करीब जाकर धीरे से चढ़ती सासो के साथ बोला - बताईये ना भाभी जी क्या बात है

शकुंतला रंगीलाल को अपने इतने करीब मह्सूस कर थोडी कमजोर सी होने लगी , एक सिहरन सी होने लगी थी उस्के देह मे उस बात को लेके जो वो रंगीलाल से छिपा रही थी ।

शकुंतला एक कदम बढ कर रन्गीलाल से दुरी बनाई और एक गहरी सास लेके हस कर बोली - वो आज रोहन आया है ना इसिलिए

रंगीलाल - मतलब

शकुंतला हस कर किचन मे जाती हुई - क्या देवर जी आप भी ,,जैसे कुछ समझते नही । बैठिए मै खाना लगाती हू ।

रंगीलाल समझ तो पुरा रहा था मगर वो शकुन्तला से खुल कर इस मुद्दे पर बाते करना चाहता था । इसिलिए फिलहाल के लिए उसने ये बात टाल दी ।

करिब आधे घंटे बाद खाना खा पीकर हाल मे बैठे थे ।

रंगीलाल - चलिये भाभी जी कमरे मे चलते हैं सोते हुए ही बात किया जाये

शकुन्तला को थोडा अटपटा सा लगा कि उसे रंगीलाल के साथ एक ही बिस्तर पर सोना पडेगा

रंगीलाल - दरअसल मुझे नही लगा था कि आप सच मे रात मे रुकेंगी ,,नही तो मै एक रूम तैयार कर देता । फिर कोई चिंता की बात नही है आप आराम से लेतिये मै यही सोफे पर सो जाऊंगा

शकुंतला रंगीलाल के वक्तव्य पर - अररे नही नही ,,इत्ना बडा बेड है , आप भी सो जायिये

रन्गीलाल हस कर - सोच लिजिए भाभी जी मेरे हाथ पाव सोटे समय बहुत चलते है ,,इसिलिए तो रागिनी मुझे पकड कर सोती है हिहिहिही

शकुन्तला शर्मा कर हसते हुए - हिहिहिही आप भी ना देवर जी ,,,चलिये आईये

रंगीलाल और शकुन्तला बिस्तर पर आ गये और उन्होने थोडा जगह बना लिया बिच मे ।

रंगीलाल - भाभी आपने बताया नही अभी

शकुन्तला हस कर - अब क्या

रन्गीलाल - यही कि आपने रोहन से झूठ क्यू बोला

शकुन्तला हसते हुए अपना माथा पिट ली - मतलब आप अभी नही समझे

रंगीलाल ने ना मे सर हिलाया ।

शकुन्तला थोडा शर्मा कर नजरे नीची करते हुए - वो आज रोहन बहुत दिन बाद आया है घर तो वो और बहू रात मे मिलाप कर सके इसिलिए ।

रंगीलाल हस कर- अरे तो वो लोग अपने कमरे मे करते ना हिहिहिही

शकुन्तला शर्मा कर हस्ती हुई - धत्त , आप भी ना ,,दरअसल वो लोग शोर बहुत करते हैं इसिलिए हिहिहिही

रंगीलाल हस कर - अरे तो आपको उनलोगो को समझाना चाहिए ना ,,,अभी जवाँ खुन है जोश मे ..... । समझ रही है ना मेरा मतलब

शकुन्तला शर्माते हुए हस कर - हम्म्म्म लेकिन अब ये सब बाते बच्चो से कैसे कर सकते है । उन्हे खुद समझना चाहिए इससे उनकी मा को परेशानी होती है ।

रंगीलाल शकुन्तला की बात पकडता हुआ - परेशानी मतलब

शकुंतला की आंखे ब्ड़ी हो गई और वो मुस्कुराने लगी कि हसी हसी मे वो क्या बोल गयी ।

शकुन्तला- वो वो ,कुछ नही । हिहिहिही

रन्गीलाल - अरे भाभी मुझे चिंता हो रही है और आप हस रही हैं ।

शकुन्तला रंगीलाल के सवालो और जिज्ञासुकता से थक कर थोडे रुखे स्वर मे - क्या देवर जी आप भी ,,,मतलब जैसे कुछ समझते नही है । कि ऐसे स्थिति मे किसी औरत को क्या परेशानी तंग कर सकती है जब उसका पति बाहर हो ।

रंगीलाल - अ ब ब सॉरी भाभी जी । मैने सच मे ऐसा कुछ नहीं सोचा था ।

शकुन्तला रन्गिलाल के भोले स्वरुप पर हसते हुए - कोई बात नही ।

थोडी देर चुप्पी छायी रही तो शकुन्तला- क्या हुआ क्या सोच रहे हैं?

रन्गिलाल - वो एक सवाल था ,,,लेकिन जाने दीजिये ये उचित नही होगा ।

शकुन्तला हस कर - अरे आप पूछिये तो उचित अनुचित मै देखूँगी ना हिहिही । बोलिए

रंगीलाल हिचक कर - वो दरअसल कल से रागिनी नही है तो थोडा ..... । समझ रही है ना आप ?

शकुन्तला मुस्कुरा कर - हम्म्म्म तो

रंगीलाल - तो मेरा एक सवाल था कि आप कैसे खुद को संयम मे रख लेती इतने समय से ,,,मतलब भाईसाहब नही है तो । मेरा दो ही दिन मे बुरा हाल है ।

रंगीलाल अपनी बातो पर शकुन्तला की आखे बडी होता देख सफाई देता हुआ - मतलब ऐसा क्या करती है कोई योगा वोगा या कोई और तरीका जिससे वो सब थोडा कन्ट्रोल मे रहे मतलब परेशान ना करे ।

शकुन्तला रंगीलाल की बात पर हस पडी और काफी समय तक हस्ती रही ।

रंगीलाल - सॉरी सॉरी ,,मुझे लगा ही था कि सवाल ठिक नही है ।

शकुंतला हसी रोकते - देखीये आपका सोचना जायज है कि अगर आपसे अपनी दिल की वेदना संभाली नही जा रही तो मै कैसे रह लेती हू ।

रंगीलाल ने शकुन्तला के बात पर सहमती दिखाई ।

शकुन्तला - ये सब प्यार की बात है ,, आपका प्यार यानी रागिनी कुछ समय मे वापस आयेगी ही इसिलिए आपकी इच्छाए तीव्र है मगर मेरे मे कोई उम्मीद नही है ,,,मै बस कुछ पुराने बीते ख्यालो के साथ ही जी सकती हूँ और तरस सकती हू क्योकि मेरे पति अब नही आने वाले ।

ये बोलते हुए शकुंतला का गला भर सा गया - तो बस यही अन्तर है , औए इस्का कोई खास योगा नही होता है । परेशान मै भी होती हू इसिलिए तो आज यहा भाग कर आ गयी हू हिहिहिहिही

रंगीलाल हस कर - अरे हा ,,, हिहिहिही वैसे भाभी एक बात पूछू

शकुन्तला - हा हा जो भी मन मे पुछ लिजिए ,,

रन्गीलाल हसता हुआ - वो मै बस सोच रहा था कि अगर मान लो रोहन आया है और आपको घर पर रूकना पड़ता तो ऐसे मे आप खुद पर कैसे .....। हिहिहिही

शकुन्तला हसकर अपने बगल का तखिया उठा कर रंगीलाल के पैर पर मारती हूई- धत्त बेसरम कही के ।

रंगीलाल हस्ता हुआ -सच मे भाभी बताओ ना

शकुंतला मुस्कुरा कर - मै सब समझ रही हू कि आप क्या सुनना चाह रहे है मुझसे ।

रंगीलाल हस कर - क्या ? हिहिहिही

शकुन्तला मुस्कुराती हुई - यही ना कि मै अपनी आग कैसे शांत करती हू । हम्म्म ऐसे ही शब्द सुनना चाहते हैं ना आप मुझसे

रन्गीलाल हसकर - नही नही मेर ऐसा कोई इरादा नही है। बस जिज्ञासा थी

शाकुंतला - अच्छा सिर्फ जिज्ञासा हम्म्म्म ।क्यू आप रागिनी के बिना कैसे खुद को शांत करते है ।

शकुन्तला - बोलिए! चुप क्यू है ?? बोलिए बोलिए !!!

रंगीलाल थोडा हसता हुआ हिचकता हुआ - अ ब ब वो वो बस हाथो से थोडी मेहनत करनी पड़ती है । कभी कभी आराम होता है कभी नही ।

शकुन्तला हस कर - धत्त बेशर्म आदमी । मतलब पुछ ली तो बता ही दोगे हम्म्म

रंगीलाल - अब आप ही बार बार पुछ रही थी तो

शकुन्तला हस कर - आप ना ,,,चलो सो जाओ अब

रंगीलाल - हा हा ,,,वो मै जरा बाथरूम से आता हू

फिर रंंगीलाल उठ कर बाथरूम गया और पाजामा खोल कर लन्ड़ बाहर निकालते हुए एक गहरी सास लेकर बड़बड़ाया - ये साली बडी चालाक है ,,इतनी आसानी से हाथ नही आने वाली । कुछ अलग करना पडेगा ताकि ये नोटिस करे मेरे लण्ड को और क्या पता प्यासी मोर है चोच लगा ही दे हिहिहिहिही ।

फिर रंगीलाल ने मुस्कुरा कर अपना बनियान और पाजामा पेट के पास भिगो लिया ।

कमरे मे आते ही वो आलमारी से कपडे निकालने लगा

शकुन्तला उत्सुक होकर - अरे क्या खोज रहे है जी आप ,,,आईये सो जाईये

रन्गिलाल शकुन्तला की ओर घूम कर जबरन की हसी मुह पर लाता हुआ - वो भाभी जी ये हाथ धुल्ते समय भीग गया कपडा तो बदलने जा रहा हू

शकुन्तला ने रम्गिलाल के पेट के निचले हिस्से और लण्ड के उभार पर नजर मारी तो खड़े लण्ड का तनाव साफ दिख गया उसे । वो फौरन नजर फेरते हुए - अच्छा बदल लिजिए हिहिहिही

फिर रंगीलाल ने शकुंतला की ओर पीठ करके पहले बनियान निकाली फिर वैसे ही पाजामे मे आलमारी मे खोजने लगा ।

रन्गीलाल - ओह्हो ये रागिनी ने मेरे बाकी के बनियान और कपड़े कहा रख दिये

शकुन्तला रंगीलाल को अधनंगा देख कर हस्ती है।

कपडे तो सारे आल्मारि मे ही थे मगर रंगीलाल पहनना नही चाह रहा था ।

उसने थोडा खोज बिन कर एक पाजामा निकाला और कपडे देखने लगा ।

शकुंतला को लगा सच मे रंगीलाल परेशान है - अरे क्या हुआ भाई साहब इसपे कुर्ता ही डाल लिजिए

रंगीलाल - भाभी वो मुझे गरमी बहुत होती है और फुल कपडे पहन कर मै सो नही पाता ,,,वो तो आप है नही तो मै ये पाजामा भी .....।

शकुन्तला मुस्कुराकर - अच्छा कोई बात नही आप अपने हिसाब के कपडे पहन लिजिए ।

रंगीलाल उखड़ कर - क्या पहनू भाभी जी ,,मेरा तो जांघिया भी नही मिल रहा है ।

शकुन्तला रंगीलाल की स्थिति पर हस रही थी ।

फिर रंगीलाल वो पाजामा लेके बाथरूम मे चला जाता है क्योकि तौलिया तो था नही निचे । वो तो शकुंतला के नहा लेने के बाद छत पर सुखने के लिए पड़ा था ।

इसिलिए मजबुरन रंगीलाल को कमरे के बजाय बाथरूम मे जाना पड़ा नही तो वो अपना जलवा कमरे मे ही दिखाने वाला था ।

इधर शकुन्तला मुह मे हसती रही ,,वही रंगीलाल बाथरूम मे चला गया ।

रंगीलाल को गये अभी 2 मिंट हुई ही थे कि बाथरूम से कुछ भडभड़ाने की और चिखने की आवाज आई जो रंगीलाल की थी ।

शकुन्तला की आंखे फैल गयी वो दौड़ कर बाथरूम के दरवाजे को खोल कर अंडर घुस गयी

शकुन्तला घबराई हुई - अरे आप ठिक तो है

जैसे ही उसने रंगीलाल को देखा तुरंत उसकी हसी छूट गयी और उसने मुह फेर लिया ।

कारण था रंगीलाल बाथरूम मे बेसिन के पास निचे फर्श पर पाव फैलायी पसरा पडा हुआ था उसके एक पाव मे पाजामा घूटने तक जबकि दुसरे पाव मे एड़ियो मे फसा हुआ था और उसका मोटा लण्ड साफ नंगा दिख रहा था ।

बेसिन के उपर के रैक के साबुन शैंपू और टूथपेस्ट ब्रश सब बाथरूम के फर्श पर बिखरे पड़े थे और पानी की की बालटी भी लुढ्की हुई थी ,,जिससे रंगीलाल का बेसमेन्ट भीग गया ।

रंगीलाल ने जैसे ही शकुन्तला को देखा तो वो हड़बड़ी दिखाता हुआ पाजामा खिचने लगा और एक दर्द की टीस से कराह दिया ।

शकुन्तला ने तुरंत रंगीलाल के हाथो की स्थिति देखी और उसके भिचे हुए चेहरे से उसके दर्द की असहनीयता को परखा और मानवता के तौर पर उसे जो

सही लगा उसने रंगीलाल के बगल मे बैठते हुए उसका पाजामा खिच्ते हुए बोली - अरे आप गिर कैसे गये ।

रंगीलाल अपने हाथो से अपना मोटा लण्ड छिपाता हुआ - वो ये पैर पाजामा मे फस गया और उसी मे बैलेंस बिगड़ गया ।

शकुनत्ला थोडा जोर लगाते हुए पाजामा खिच्ती है - ओह्ह्ह ये चढ़ क्यू नही रहा है देवर जी

रंगीलाल परेशान होता हुआ - पता नही भाभी जी ,, तभी ना मै गिर गया ,,,और ये पाजामा भी भीग गया है ।

शकुन्तला ने भी पाजामे का गिला पन नोटिस किया और उसे पैर से निकालते हुए - चलिये इसको निकाल देती हू और कोई और कपड़ा देती हू ।

इधर शकुन्तला की बात सुन कर रंगीलाल की आंखे बडी हो गयी क्योकि अगर शकुन्तला आलमारी चेक करती तो उसका सारा भेद खुल जाता ।

उसका सारा ड्रामा और लण्ड दिखाने के लिए जो उसने खुद को बाथरूम मे गिराया सब शकुन्तला जैसी तेज औरत भाप लेगी ।

रंगीलाल - अरे भाभी वहा बस यही पाजामा भर था ,,रागिनी ने सारे कपडे शायद बकसे मे रखे हुए है ।

शकुन्तला ने बडी जद्दोजहद के बाद वो गिला पाजामा रंगीलाल के पैर से निकाला और एक तिरछी नजर रंगीलाल के हाथो पर मारी को अपना लण्ड ढके हुए था ।

शकुन्तला की हसी छूटी मगर वो मुस्कुरा कर रंगीलाल का बाजू पकड कर उससे उठाने लगी - उठ जायेंगे ना ,,

रंगीलाल कराहने का नाटक करता हुआ एक हाथ से अपना लण्ड छिपाता हुआ लड़खड़ाते हुए खड़ा हुआ ।

शकुन्तला मुस्कुरा कर - कही दर्द तो नही है ना

रंगीलाल कुछ सोचा और बोला - नही बस ये बालटी कूल्हे पर लग गयी थी ।

शकुंतला ने फौरन रंगीलाल के उसी कुल्हे पर जिस ओर बालटी थी यानी बाई तरफ ,,उसे हाथो से मलने लगी ।

रंगीलाल ने शकुन्तला के स्पर्श से चहका और हस्ते हुए - अह्ह्ह भाभी हिहिहिही दर्द हो रहा है हिहिही

शकुन्तला हस कर- अरे तो आप हस रहे है क्यू ?

रंगीलाल थोडा शर्माता हुआ - वो आप छू रहे हो तो गुदगुदी सी लग रही है ह्हिहिहिही अह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं धीरे धीरे करिये

शकुन्तला - अच्छा आप चलिये मै मालिश कर देती हू

फिर शकुन्तला रंगीलाल को पकड कर बिस्तर पर ले गयी तो रंगीलाल ने लपक कर एक तकिया अपने लण्ड के आगे कर लिया ।

अब तक शकुन्तला के स्पर्श से रंगीलाल का लण्ड पूरी तरह से तन चुका था

जिसको तकिया रखते समय शकुन्तला ने भी देखा था ।

शकुन्तला कमरे मे इधर उधर कुछ ढूँढने लगी और तभी रंगीलाल की नजर शकुन्तला की चुतड पर एक तरफ भीगी हुई साडी पर गयी ।

रंगीलाल - अरे भाभी आप कैसे भीग गयी

शकुन्तला चौकी और उसने खुद को निहारा की कहा से भीगी हुई है वो

रंगीलाल हस कर - अरे वो पीछे से ,

शकुन्तला ने फौरन अपने चुतड पर हाथ फिराया तो उसे अपनी साडी भीगी हुई मिली - अरे हा ये कैसे भीग गयी

रंगीलाल - शायद जब आप मेरे बगल मे बैठी होगी तभी ,,,,कोई बात नही बदल लिजिए आप

शकुन्तला - लेकिन पहनू क्या,,मेरे भी कपडे धुले हुए है ना

रंगीलाल एक बार खुद देखा और किसी तरह से खड़ा होता हुआ - अरे रुकिये मै देखता हू कुछ है क्या

कारण था रन्गिलाल शकुन्तला को आल्मारि नही देखने देना चाहता था ।

रंगीलाल उठा और तकिया आगे किये हुए आलमारी तक गया और इधर शकुन्तला ने मुह फेर कर हसने लगी ,,क्योकि रंगीलाल का गहरे भूरे रंग की गाड़ दिख रही थी उसे ।

इधर रंगीलाल ने एक भारी साड़ी निकालते हुए - भाभी जी ये चलेगा

शकुन्तला साडी देखते ही - अरे नही नही इत्नी गर्मी मे ये कैसे ,,वैसे भी मुझे बिना साडी के ही सोने की आदत ..... । मतलब मुझे भी गर्मी ज्यादा होती है हिहिहिही

रंगीलाल ने फिर सिफान की सफेद चुन्नी निकाली और तकिया बेड पर फेककर वो चुन्नी कमर मे लपेट लिया ।

फिर रंगीलाल के लण्ड का कालापन और मोटा उभार साफ दिख रहा था ।

रन्गिलाल वो चुन्नी लपेट कर - अरे ऐसी बात है तो आप भी आराम से सोयिये ना ,,,अब जो भी कोई बाहर का आने वाला है नही तो ।

तभी शकुन्तला की नजर रंगीलाल के कमर मे बधि सफेद चुन्नी पर गयी तो उसने रंगीलाल से आग्रह किया - अच्छा ऐसी कोई चुन्नी और है क्या ,,देखेंगे

रंगीलाल हस कर - अरे नही ,,अब नही है ,,ये भी पुरानी है देखीये

रंगीलाल उस चून्नी का एक छोटा सा कटा हुआ भाग शकुन्तला को दिखाता है तो उसके चेहरे का भाव बदल जाते है ।

रंगीलाल हस कर अपने क्मर से चुन्नी खोलने लगा - अगर आपको चाहिये तो ले लिजिए,,,मै तकिये से .....।

शकुनत्ला हसी और मना करते हुए -अरे नही नही आप रखिये उसे ढकना जरुरी है नही तो आनायास ही मेरा ध्यान .... ।सॉरी वो हिहिही

रंगीलाल हस कर - हिहिहिही आप तो ऐसे डर रही है जैसे मानो आप अपना नियन्त्रण खो देन्गी

शकुन्तला हस्कर अपनी साडी निकालते हुए - धत्त बेशरमी कही के ,,, ऐसी कोई बात नही है मै बहुत संयमि हू समझे हिहिहिही लेकिन अच्छा नही लगता ना आखिर मर्यादा भी तो ....

रंगीलाल शकुन्तला को रोकता हुआ - नही नही आप झूठ बोल रही है ,,,आपके चेहरे से साफ दिख रहा है हिहिहिही

शकुन्तला अब झेप सी गयी कि रंगीलाल उस्से कैसी बाते लेके बैठ गया ,,मगर माहौल ऐसा था कि मानो उसके स्वाभिमान को रंगीलाल ने ललकारा हो ।

शकुन्तला तुनक कर - तो आपको लगता है कि मै बाकी औरतो की तरह आम हू और बहक सकती हू ।

रंगीलाल हस कर - अरे आप नाराज ना हो ,,मै तो बस मजाक कर रहा था

शकुन्तला- नही नही अब आप इसे निकालिये ,, मै आपको गलत साबित कर दूँगी

इधर रंगीलाल ना नुकुर करने लगा और वही शकुन्तला जो अब ब्लाउज पेतिकोट मे थी वो रंगीलाल के कमर की चुन्नी जबरदस्ती खोलने लगी और इसी ना हा मे चुन्नी फट गयी ।

रंगीलाल चाह कर भी उसे लपेट नही सकता था और उसका खुला काला मोटा लण्ड अब शकुन्तला के सामने था ।

शकुन्तला ने पहली बार नजर भर के रंगीलाल के लण्ड की फुली हुई नसो को देखा ,,वो मचल उठी ,,उसके सुखे चुत मे उफान सा उठ गया ।

रंगीलाल ने जब शकुन्तला को ऐसे खोया देखा तो समझ गया अब मंजिल दुर नही ।

रंगीलाल हस कर अपने हाथ को अपने लण्ड पे लाता हुआ - क्या भाभी ये क्या किया ,,फट गया ना वो

शकुन्तला चौकी और उसे अपने बेहोसी का ध्यान आया और फिर कुछ पलो मे उसने रंगीलाल के वक्तव्य को समझा और हस्ते हुए - अरे तो क्या हुआ आप ही चैलेंज कर दिये मुझे ,,, हिहिहिही तो मै क्या करती

रंगीलाल तिरछी नजरो से शकुन्तला के छातियों को निहारता हुआ - हा लेकिन फिर भी आप हार ही गयी ना

शकुन्तला हस कर - अरे कैसे ,, मुझे तो कुछ हुआ ही नही

रंगीलाल चल कर बिस्तर की ओर जाता हुआ - जाने दीजिये मै जान गया ना ,,, चलिये सो जाते है

रंगीलाल के ऐसे इग्नोर करके जाने से शकुन्तला के स्वाभिमान को ठेस लगी और वो चल कर रन्गीलाल के पास गयी - अरे तो मुझे भी बताईए ना कि आपने ऐसे कैसे समझ लिया कि मै हार गयी ।

रंगीलाल मुस्कुरा कर - रहने दीजिये भाभी जी , मै जान रहा हु आप हार गयी ,,भले ही आप दिखावा करे ।

शकुन्तला को समझ नही आ रहा था और रंगीलाल जैसे जैसे बात टालता उसकी बेचैनी उस बात को जानने के लिए और बढ जाती ।

और जब बार बार पूछने पर रंगीलाल ने उसे बताने से मना किया तो वो आवेश मे आकर आगे बढी और रम्गिलाल का गर्म मोटा लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी ।

रंगीलाल को इसकी उम्मीद नही थी ,,वो तो बस बाते सोच रहा था कि कैसे शकुन्तला को बातो मे उल्झाऊ लेकिन उस्से पहले ही शकुन्तला ने उसका लंड थाम लिया ।

रंगीलाल गनगना गया उसके पैर हिलने लगे । वो कापते स्वर मे - हिहिहिही भाआआभीईई ये ये ये क्याआ कर रही है आप्प्प्प हुहिही अह्ह्ह्ह प्प्लिज्ज्ज छोओओड़ दीजिये अह्ह्ह आह्ह

शकुन्तला इस वक़्त बस गुस्से मे थी और उसे जवाब चाहिये था - नही आप बतायिये पहले , देखीये मैने तो इसे पकड भी रखा है फिर भी नही हुआ मुझे कुछ

रंगीलाल समझ गया कि क्या करना है तो वो बाते बढ़ाते हुए - मै इसका प्रमाण दे सकता हू भाभी जी ,,एक नही दो दो

शकुन्तला की आंखे और बड़ी हो गयी ,,,वो एक असमंजस की स्थिति में आ गयी , बस यही उसका गुस्सा हल्का पड़ा और उस्का ध्यान अपने हाथ मे पकड़े रंगीलाल के मोटे लण्ड पर गयी । जिसे वो भीच रही थी ।

शकुन्तला को अब खुद पर शरम आने लगी कि आवेश मे ये उसने क्या कर दिया

इधर रन्गीलाल हस कर अपना हाथ ऊँगली सीधा शकुन्तला के नुकीले हो चुके निप्प्ल पर रख कर उसे सहला देता है जिससे शकुन्तला की सिसकी निकल जाती है

रन्गीलाल हस कर - देखा भाभी जी , हो गया ना असर

शकुन्तला शर्म से पानी पानी हो गयी और वो उसका लण्ड छोड कर घूम कर अपना मुह ढक ली ।

रंगीलाल समझ गया कि यही सही मौका है

लेकिन वो आगे बढता उस्से पहले शकुन्तला ने गरदन पीछे कर एक सवाल पुछ लिया - लेकिन आप बोले दो प्रमाण, दुसरा कौन सा है ??

रंगीलाल इस सवाल से गदगद हो गया और वो शकुन्तला के बगल मे आकर अपना हाथ उसकी दुसरी चुची के निप्प्ल पर रख कर मसल दिया - ये है भाभी दुसरा वाला

वो फिर से सिहर गयी और वही रंगीलाल ने पीछे से शकुन्तला को पकड कर उसकी दोनो चूचियो पर क्बजा कर लिया

शकुन्तला सिस्की - अह्ह्ह देवर जी ये क्याआअह्ह्ह कर रहे उम्मममं सीईई

रन्गीलाल अपना मोटा लण्ड शकुन्त्ला के गाड मे घिसता हुआ उसकी चुचिया मिजते हुए - वही बता रहा हू भाभी जो पुछ रही थी ,,यही दोनो आपके निप्प्ल मेरे लिंग को देख के खड़े हो गये थे ।

शकुन्तला कसमसा कर - अह्ह्ह लेकिन आपको कैसे पता कि हहह येएह्ब खड़े हो गये है उम्म्ंम्म्ं ये तो अंदर है ना

रंगीलाल उसकी चुचियो को मसलता हुआ

भाभी आपके दूध इतने मोटे और बडे है कि ब्लाउज मे छिप नही सकते ,,ये देखो ना निप्प्ल आपका कितना कड़ा हो गया है ।

रंगीलाल शकुन्तला के ब्लाउज मे हाथ घुसा कर एक चुची को बाहर निकालता हुआ बोला ।

शकुनत्ला पूरी तरह से पिघलने लगी थी रंगीलाल के बाहो मे ,,,

रन्गीलाल ने एक एक करके शकुन्तला के सारे हुक खोल दिये और उसकी नंगी चुचियो को हाथो मे लेके मसल दिया ।

शकुन्तला ने अरसे बाद अपने छातियो पर एक मरदाना स्पर्श मह्सुस कर पागल सी होनी लगी ।

रंगीलाल ने उसे अपने गिरफ्त मे ले रखा था और उसकी गोरी चुचियो को मसलते हुए बोला - अह्ह्ह भाभी आपके दूध सच मे कड़े है ,,कैसे आप खुद को रोक लेती है उम्मममंं क्या मस्त दूध है

ये बोल कर रंगीलाल शकुन्तला के बगल मे आते हुए सामने से अपने मुह उसकी चुची भर ली

शकुन्तला - अह्ह्ह देवर जीईई मर गयीईई उम्म्ंम्ं अह्ह्ह माआ आरामम्मं से उम्म्ंम्म्ं

रंगीलाल सामने होकर शकुन्तला के कूल्हो को थाम कर अपने ओर खिचकर अपना लण्ड पेतिकोट के उपर से ही उसकी चुत पर धसाने लगा । फिर उसकी आंखो मे देखते हुए बोला - आह्ह भाभीई क्या सच मे इतने सालो से किसी से इन्हे नही छुआ ।

शकुन्तला अपनी पिचपिचाती चुत पर लण्ड की कड़क चुबन पाकर मद मे थी और रंगीलाल के तारीफो से लाल हुई जा रही थी ।

रंगीलाल ने शकुन्तला की मद भरी आंखो मे निहारा और उसकी मुस्कुरा देख के एक उतेज्ना से भरते हुए अपना लण्ड की ओर उसके कूल्हो को खिचते हुए उसके होठ चुसने लगा ।

शकुन्तला एक प्यासी मछली के जैसे रंगीलाल से लिपट गयी । इधर रंगीलाल उसके होठो को चुसते हुए उसके फैले हुए चुतडो को मलने मे कोई कसर नही छोड़ी ।

पेतिकोट के आगे पीछे सीलवटे आ चुकी थी ।

रंगीलाल लगातार अपने लण्ड को उसके चुत के उपर ठोके जा रहा था । लण्ड की घिसन से शकुन्तला व्याकुल हुई जा रही थी उसे बहुत तलब सी थी की रंगीलाल अब उसे ना तड़पाये ,,बस उसकी चुत मे घुसा दे।

इधर रन्गिलाल ने धीरे से मद भरे स्वर मे उसके कानो मे बोला - भाभी चुस दो ना

शकुन्तला ने नजर भर उठा कर रंगीलाल को देखा और फिर शर्मा कर ना मे सर हिलाते हुए मुस्कुराने लगी ।

रंगीलाल ने गुहार की तो - वो मैने कभी किया नही,,,मेरे वो मना करते थे ।

रंगीलाल ने उसका हाथ पकड कर अपने गर्म सख्त लण्ड पर रखता हुआ - तो मै कह रहा हू ना भाभी जी प्लीज

इधर अपने हथेली मे रंगीलाल के लण्ड का कड़ापन और गर्मी मह्सूस कर वो सिस्क पडी और निचे एक नशे मे सरकती चली गयी ।

थोडा उसने अपनी नशीली आंखो से रंगीलाल को देखा और अगले की क्षण लण्ड मुह मे

रंगीलाल की एडिया खड़ी हो गयी और सासे गहरी ।

रंगीलाल - ओह्ह्ह भाभीईई उन्म्म्ं अह्ह्ह आप कमाल हो औम्म्ंं सीई ऐसे ही अह्ह्ह

मगर शकुंतला को लण्ड चूसना कुछ खास जम नही रहा था तो वो खड़ी हो गयी

रंगीलाल उसकी भावना समझ गया और उसको पीछे से दबोच कर उसकी चुचिया मसलते हुए - ओह्ह भाभी छोड क्यू दिया ? मेरी बात नही मानने की सजा देता हू मै उम्म्ंम्ं

शकुन्तला मादक सिसकिया लेती हुई - ओहहह आह्ह उम्म्ंम क्या देवर जीईई उउम्ंमम्मं

रंगीलाल ने हाथ निचे ले जाकर पेतिकोट का नाड़ा खोल दिया और वो शकुन्तला के पैरो मे था ।

शकुन्तला समझ गयी कि आगे क्या होने वाला है ,,लेकिन फिर भी उसे इस कामुक वार्ता मे एक जोश सा मह्सूस हो रहा था और वो जानती थी अगर ये बातचित रुकी तो उसकी मर्यादा उसपे हावी हो जायेगी और सालो से जिस सुख के लिए वो तरस रही है वो अधूरी रह जायेगी ।

शकुन्तला कसमसा कर - उम्म्ं कैसी सजा देवर जी उम्म्ंम

रंगीलाल ने उसे बिस्तर पर धकेला और तेल की शिशि से खुब सारा तेल अपने लण्ड पर चभेडने लगा ।

शकुन्तला बिस्तर पर चित नंगी टाँगे खोले लेती रंगीलाल के कृत्यो को निहारे जा रही थी ।

इधर रंगीलाल मुस्कुरा कर तेल मे सना हुआ लण्ड मसलता हुआ बेड पर चढ़ गया और शकुन्तला की एक टांग उठा कर अपने कंधे पर रख कर अपना लण्ड उसके झाटो से भरी चुत के उपर घिसने लगा।

शकुन्तला कसमसा कर- बोलिए ना देवर जी क्या सजा देने जा रहे है उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह

रंगीलाल - देखो इसी डंडे से आपकी पिटाई होगी ,,,ये बोलते ही उसने अपना लण्ड ख्चाक से उसकी बुर मे पेल दिया ।

शकुन्तला चीखी - अह्ह्ह माआआआ उह्ह्ह्ह देवर जी उम्म्ंम्ं ओह्ह बह्हुउऊऊत्त्त मोटाहह है उम्म्ं आह्ह

रंगीलाल ने वापस से धक्का दिया और लण्ड सीधा शकुन्तला के चुत को चिरता हुआ आधे से ज्यादा घुस गया

शकुन्तला के जांघो मे भी चिलिक सी होने लगी ,,नसो मे खिचाव सा होने लगा ,,मानो ये उसकी पहली चुदाई थी ।

इधर रंगीलाल ने अपना जगह तय कर लिया और धीरे धीरे चुत की गहराई मे जाने लगा।

शकुन्तला हर धक्के को मस्ती और दर्द मे लेती रही और सिस्क्ती मुस्कुराती कभी शर्माती रही ।

थोडे समय बाद रंगीलाल ने उसका पाव कन्धे से उतारा और जांघो को खोल कर उपर चढ कर घपाघ्प पेलाई शुरु कर दी

रंगीलाल - ओह्ह्ह भाभी आपकी चुत तो सच मे कसी हुई है ,, लग रहा है किसी जवान चुत मे .... अह्ह्ह्ह

शकुन्तला - हम्म्म वो तोहहह लगेगा ही ना देवर जी कितने सालो से कुछ गया नही था अन्दर,,,लेकिन आपने आज अह्ह्ह माआअह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं

रंगीलाल - मै तो जिस दिन से देखा था आपको तभी से नजर पड़ ज

गयी थी आपके इन मोटे दूधो पर ।

शकुन्तला मुस्कुराते हुए - हा जान रही हू ,,,पहले दिन ही मै भी आपकी नियत समझ गयी जब आपने मेरी कच्छी के साथ ....हिहिही

रंगीलाल उस पल को याद करते ही और जोश मे आ गया और गहरे धक्के लगाता हुआ - आह्ह भाभी उसी दिन से तय कर लिया था कि इस पैंटी के निचे का खजाना च्खना पडेगा अह्ह्ह बहुत ही मस्त हो आप भाभी उम्म्ंम

शकुन्तला तो दुसरी बार झड़ रही थी और कामुक होकर अपने चुत के छल्ले को लंड पर कसे जा रही थी ,,मगर जोशिला रंगीलाल कहा थमने वाला था ,,वो ताबड़तोड़ धक्के मारे ही जा रहा था और आखिर मे उसने कहा- अह्ह्ह भाभी निचे आओ मेरा होने वाला है अह्ह्ह

शाकुंतला - नही नही वैसे नही प्लीज ,,, अह्ह्ह मुझे पसन्द नही उम्मममं

इधर रंगीलाल ने जल्दी से लण्ड निकाला और हिलाने लगा और उसका सारा वीर्य तेजी से शकुन्तला की छातियो पर गया और एक दो छीटें उसके निचले होठो पर गये ।

दोनो हाफ रहे और हसे जा रहे थे और अभी के स्थिति को देख को कुछ पल पहले तक के माहौल को सोच रहे थे । कि कैसे हवस ने दोनो को अन्धा किया और वो बहक ही गये ।

इधर रंगीलाल ने पहले ही तय कर रहा था कि अगर शकुन्तला एक चुदाई के बाद झिझक या कोई दुखी भाव दिखायेगी तो वो उसे दुबारा पेल कर उसकी सारी झिझक दुर कर देगा ,,,मगर यहा सब उल्टा था ,शकुन्तला खुद ही फिर से रंगीलाल के लण्ड को थाम ली और अगले राउंड की तैयारी होने लगी थी ।

दोनो ने देर रात तक चुदाई की और शकुन्तला ने सालो की कसर पूरी की ,,क्योकि रंगीलाल के साथ उसे एक सिक्योरिटी मह्सूस की उसने ।

अगली सुबह शकुन्तला फटाफट नासता और दोपहर का खाना बना कर अपने घर चली गयी ,,,क्योकि उसने अपने घर पर झूठ बोला था तो वो दोपहर मे रंगीलाल को खाना देने भी नही जा सकती थी ।

इधर रंगीलाल भी खुशि खुशी अपना लंच लेके 9 बजे तक दुकान पर निकल गया ।

अब एक ओर जहा चमनपुरा मे ये सब हो रहा था वही जानीपुर की सुबह कैसे फीकी होती ।

राज की जुबानी

सुबह 5 बजे ही मेरी निद खुल गयी क्योकि मौसी ने हमसब की जगाया ,,,कारण था झाडू पोछा होना था ।

धीरे धीरे सारे जेन्स लोग कुछ इस घर मे तो कुछ बगल वाले घर मे जिसने खाने पीने के लिए व्यव्स्था की गयी थी ,,वहा जाकर नहाने लगे ।

सबके लिए वही पर चाय पकौड़ी बनवाया गया ।

सबने नासता किया और इधर फिर बारात के पहले के भोज की व्य्व्स्था होने लगी ।

कुछ आये हुए मेहमानो , राजन फूफा ,अनुज और मोहल्ले के लड़के मिल कर दोपहर के खाना बनवाने मे मदद करवाने लगे ।

इधर घर मे औरतो की अलग ही भागा दौडी चल रही थी ।

सुबह से दूल्हे की सारी तैयारिया हो रही थी ।

मै भी रसोई से लेके घर के कामो मे उल्झा था। मौसा भी सारे बुकिंग वालो से फोन पर बाते किये जा रहे थे ।

10 बजे से दूल्हे की कार की सजावट होने लगी थी ।

मेरे अलावा घर के और भी लोगो ने रमन भैया को छेड़ने मे कोई कसर नही छोड़ी ।

सारे लोगो ने मजा लिया ।

इधर मुहल्ले की सड़क पर ही बफर लगा कर सारे बरातियो को खाना खिलाया जाने लगा । घर की औरतो ने एक दो झुंड मे पहले ही खाना खा लिया क्योकि उन्हे ही दूल्हे को तैयार करना था ।

1 बजे तक सारा खाना पीना हुआ । अब तक राजेश मामा भी आ चुके थे ।

तो मैने राजन फूफा और मामा ने मिलकर सारा खाना पीना और बाहर का समान सेट करवाया और नहाने के लिए चले गये ।

घर मे हर कोई खुश था ,,सबके चेहरे पर हसी थी ।

क्योकि बैंड वाले आ चुके थे ।

मौसी ने पहले उनकी द्वारपूजा करवाई फिर उनहोने ने बजाना शुरु कर दिया ।

इधर घर की सबसे उपर की छत पर रमन भैया के नहलाने का कार्यक्रम हो रहा था ,,मामी और एक दो मुहल्ले की भाभिया उन्हे घिस घिस कर नहा रही थी और गुदगुदी की कोई रोक नही थी ।

लगभग सभी ने रमन भैया को इसी बात से चिढ़ाया कि आखीरी बार मामी और भाभी को छू लेने दो ,,फिर तो तुम्हारी वाली किसी को छूने नही देगी ।

कुछ जरुरी कामो के दौरान एक दो बार मेरा उपर जाना हुआ तो मामी मुझे भी खिच कर वही बिठाने लगी कि आओ तुम भी नहा लो ,,,

मै तो जान छुड़ा कर भागा और बगल के घर मे सबके साथ नहा कर तैयार हुआ ।

3 बजे तक सब लोग तैयार हो चुके थे ,,, घर की महिलाओ और लड़कियो के क्या कहने ,,, सेक्सी और गुदाज नाभिया दिखाने मे कोई भी पीछे न्ही रही ,,,चाहे साडी वाली हो या लह्गे वाली ।सब कयामत ढा रही थी । नाना मामा , मौसा , राजन फुफा तो छोडो कुछ बुजुर्ग मेहमानो ने भी घर की गदराई मालो के कूल्हो पर कसी साडी और रसिली नाभि को देख कर आहे भरी ।

इधर सारे जेन्स लोगो ने ड्रेस कोड के नाम पर एक पिंक साफा लिया हुआ था और सब ट्रेडिशनल कपड़ो मे थे ।

अनुज को सहबाला बनाया गया था ।

गाजे बाजे के साथ बारात क्षेत्र के स्थानीय देवी देवताओं के दरो से गुजरने लगी । औरत हो या मर्द सब डांस किये जा रहे थे ।

गीता बबिता सोनल और पल्लवि के साथ उनकी दोस्ती कुछ और मेहमान वाली लडकियो से हुई थी तो उनका गैंग अलग था ,,अनुज राजन फूफा मामा को लेके मै अलग ही नाच रहा था ।

बिच मे कभी मामी तो ममता बुआ के साथ ,,, हाथ पकड कर बडी सभ्यता से ठुमके लगाये जा रहे थे । मगर भोजपूरी गानो पर मामी ने जो अदाये दिखाई आह्ह वो मजा ही अलग था। बारात गाडी आगे बढती ,,, इधर जोड़ो वाला डांस होने लगा ,,ममता - राजन , मामा - मामी यहा तक कि मौसा के चाचा और चाची ने भी थोडे बहुत उछल कूद की ।

मगर फिर चाची को मौसी के साथ कार मे बिठा दिया गया क्योकि उन्हे थकान हो रही थी । इधर गीता बबिता के साथ मैने ठूमके लगाये लेकिन भोजपूरी गानो पर भिड़ मे बहनो के साथ मुझे मस्ती मे नाचता देख पल्लवि किनारे खड़ी हसी जा रही थी ।

थोडा बहुत जोर देके मैने उसको और अनुज को जानबुझ कर साथ मे नचवाया ये देखने के लिए कि अनुज का क्या रियेक्शन आता है ।, उम्मीदन वही हुआ ,,दोनो ने नजरो से बाते की और थोडा मुस्कुराते शर्माते डांस किये ।

अब इतने सारे रसिले माल्दार हसिन महिलाओ को लेके चल रहा हू तो लोगो की नजरे ना जाये उन्के मोटे कुल्हो पर ये कैसे हो पाये ।

जवाँ बूढ़ो सबने जमकर घर की औरतो के मटकते कूल्हो और हिलती चुचियो के नजारे सेके ।

धीरे धीरे अन्धेरा बढा और तय समय पर बारात निकल गयी ।

घर की औरतो मे सिर्फ मामी और सारी लड़किया बारात के लिए गयी ।

हमलोग भी अपने अपने बोलोरो मे बैठ कर निकल गये ।

दो घन्टे का सफर और होने वाली जनमासय मे पानी पीने की व्य्व्स्था करायी गयी थी । जो कि एक सरकारी स्कूल था । जैसा की आम बरातो मे होता था ,,यहा भी था सारे बराती एक साथ मीठे और चाट के स्टालो पर टुट पडे ।

इसलिये मुझे ही अकेले भाग दौड़ कर लडकियो के लिए मीठा और चाट चाऊमीन का इन्तेजाम करना पडा ।

पल्लवी के साथ अब तक एक खास रिश्ता बन चुका था ,,हम दोनो भी इशारे और मुस्कराहट मे बाते करने लगे थे ।

इधर मामी ने तो मेरे साथ अपनी मिठाई साझा करने लगी ।

मै - क्या भाभी इसमे भी आधा हिहिहिह

मामी धीमे से आंख मारते हुए - अरे मामी मे आधा होता ही है ।

(कहने का मतलब था हमारे उत्तर पूर्वी भारत के क्षेत्रों मे मामी के साथ भांजे का रिश्ता हसी मजाक वाला होता है ,,जैसे देवर भाभी और जीजा साली का ।)

थोडी देर बाद हम सब बारात लेके होने वाली भाभी के दरवाजे पहुचे ,,वहा से द्वारपूजा के जयमाल और फिर एक ओर बारातियो का खाना पीना होने लगा ।

वहा भी ग्लैमर मे कोई कमी नही थी ,, लडकी वालो के तरह से भी एक से एक कमसिन हसीनाये खड़ी थी मगर मेरी नजरे तो पल्लवि की कातिल मुसकान पर जमी थी । मेरा स्वार्थ तो उसी से था और कोसिस थी कैसे भी करके घर जाने से पहले ऐसी गदरायी माल को पेलना जरुर है । मगर वो यहा पोस्सिब्ल नजर नही आ रहा था ।

इधर धिरे मौसा , मामा नाना , ये लोग शादी करवाने लगे थे ।

हालकि शादी मे गाव मे हो रही थी । जयमाल के दौरान भाभी को पहली बार देखा । रमन भैया की किस्मत खुल गयी थी जो गाव की देसी छोरि मिली थी । मैने एक बार मा से सुना था कि लड़की यानी कि भाभी खेत मे बहुत काम करती हैं गौशाला मे भी काम करती है ।

तभी तो मैने उनके चौडे कन्धे देख कर समझ गया कि बहुत ही कसा हुआ माल है ,,रमन भैया ने अगर थोडा अच्छे से मेहनत कर दिया तो एक बच्चे के बाद भाभी एक दम गदरा कर मस्त देसी भाभी तैयार होंगी और तब उनको देखने वालो के लण्ड टपक जायेंगे ।

मगर मेरी किस्मत मे मौसा ने घर की औरतो की जिम्मेदारी थी कि भाई मै ही उनका ख्याल रखू और खाना पीने का इन्तेजाम कर दू ।

मेरी भागा दौडी जारी रही और भिड़ कम होने पर मैने अपनी बहनो और पल्लवि को लेके स्टेज पर गया । हमारी तस्वीरे निकाली गयी ।

इधर मैने अनुज को भी छेडा जो रमन भैया के बगल मे बैठा था ताकि भाभी की नजर मुझपर पडे । हुआ भी

मै अनुज के कन्धे पकड़ कर - अबे भैया का सारा सगुन आधा ले लिया तुने ,,,भाभी आधी ना ले लेना हिहिही

अनुज जो कबसे शर्म से लाल हुआ जा रहा था वो मेरे आने और भी परेशान हुआ ।

इधर गीता बबिता ने हसी ठिठोली मे रमन भैया को स्टेज की कुर्सी के हटा कर किनारे कर दी और नयी भाभी से बाते और तस्बिरे निकलवाने लगी ।

फिर मुझे भी साथ बिठा कर फ़ोटो निकल्वाया । हालकी मुझे थोडी हिचक हो रही थी भाभी के बगल मे बैठने पर मगर मामी जी ने तंज कस दिया - अरे हीरो लजा तो ऐसे रहे हो जैसे ,,रमन बहू तुम्को व्याह के ले जा रही है हिहिही

मामी हस कर - अरे नयकी दुल्हीन पहचान लो इनको ,,सबसे चालू देवर यही है बच के रहना

भाभी ने भी हस कर हा मे सर हिलाया ,,इधर मुझे इतनी शर्म आ रही थी कि मै नजरे उठा कर लड़की वालो की तरफ आयी लडकियो को नही देखा

थोडी देर बाद दुल्हन अंदर चली गयी और फिर हम सब घर वालो के लिए एक जगह व्यव्स्था करवाया गया कि घर की औरते दूल्हा सहबाला खाना खा सके ।

खाने के बाद ये तय हुआ कि लड़किया और मामी सब घर वापस जायेंगी रात मे ही ,,लेकिन घर का एक जेन्स आदमी गाडी मे होना चाहिये ।

सामने निकल कर दो ही आ रहे थे,,,एक मै और एक नाना

फिर मैने पहल की मै घर जाता हू ,,नाना जी को यही रहने दीजिये शादी मे बुजुर्ग का होना शुभ ।

फिर मै गाडी मे ड्राईवर के बगल मे बैठ कर निकल गया मौसी के घर वापस ।

जारी रहेगी
 
एक और धमाकेदार और रसदार अपडेट पोस्ट कर दिया है दोस्तो

करिब 11 हजार शब्दो का मेगा अपडेट है

उम्मीद है आपको पसंद आयेगी

पढ कर अपनी राय जरुर रखे ।

आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा


धन्यवाद
 
अपडेट 126

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE

( मिलन एवं विदाई )



पिछले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा रंगीलाल ने शकुन्तला के साथ अपना बिस्तर लगा लिया वही राज भौरे की तरह पल्लवि के आगे पीछे मडरा है ,,देखते है उसकी मेहनत क्या रंग लाती है ।

अब आगे



राज की जुबानी


तकरीबन आधी रात बीत चुकी थी और हम लोग रमन भैया के ससुराल से निकल गये थे ।

दिनभर की भाग दौड़ और लम्बे समय तक नाचने के कारण सभी के पैर थके हुए थे। बोलोरो मे बैठी सभी लड़कीया और मामी सब झपकी लेते लेते गहरी नीद मे सो गये ।

मै आगे ड्राईवर के साथ बैठा था , निद मुझे भी आ रही थी मगर उससे कही ज्यादा मेरे मन में एक बात घूम रही थी कि कैसे भी करके चमनपुरा वापस जाने से पहले पल्लवि के साथ मजे लेने ही है ।

उसी उधेड़बुन मे एक दो मै गरदन पीछे मोड कर पल्लवि को सोते हुए देखता भी हू और लहगे के साथ उसकी कसी हूइ चोली मे दो बडे मुलायम रसिले चुचे भरे मे हुए थे ।

लगभग डेढ़ घंटे के सफ़र के बाद रात के करीब 2 बजे हम लोग घर पहुचे ।

दरवाजा पिटने और फोन करने के बाद कही 15 मिंट बाद मौसी आई और फिर हम सब घर मे गये ।

सबकी हालत खराब थी ,, जिसको जहा जगह मिली वो वही सो गया ।

घर मे मर्द के नाम पर मै और मौसा जी के चाचा ही थे । क्योकि वो बारात नही गये थे ।

वो भी सो चुके थे ।

सोनल और पल्लवि ने अपना निचे वाला कमरा ले लिया और मै रमन भैया के कमरे मे गया तो मेरे पीछे गीता बबिता भी चली आई ।

मामी और मौसी उपर चली गयी ।

मै भी उन दोनो को अपने पास सूलाया ।दोनो ने मुझे एक एक तरफ से पकड लिया और सो गयी ।

मै भी बहुत थका था तो सो गया ।

सुबह 6 बजे निद खुली क्योकि कमरे मे सोनल दीदी मुझे जगाने आई थी । उसके साथ पल्लवि भी थी ।

वही गीता बबिता ने मुझे ऐसे कब्जा कर रखा था कि मानो कोई भी मुझसे अलग होना ही नही चाहती थी ।

सोनल हस कर पल्लवि से - ये देखो नवाब को ।

पल्लवि मुझे गीता बबिता के चिपक कर सोता देख हसती है ।

सोनल - अरे नवाब साहब ये बिस्तर खाली करो ,,,यहा अभी थोडी देर बाद भाभी आने वाली है ।

मै कुनमुना कर उठना चाहा तो देखा कि गीता बबिता ने अपने एक एक पैर मेरे उपर फेके हुए है और पेट को पकड कर सोयी हुई ।

मुझे परेशान देख कर सोनल कमरे मे आई और गीता बबिता के पिछवाड़े पर उन्के लहगे के उपर से ही मारते हुए उन्हे ज्गाने लगी ।

गीता थोडा बुदबुदा कर वापस से मुझे और कसके पकड कर सोने लगी ।

इधर बबिता के पिछवाड़े पर एक और चपाट लगी तो बबिता गुस्से से छ्टपटा कर उठती हुई - क्या दीदी आप इतना जलती क्यू हो ,,,हा नही तो सोने दो ना बहुत नीद आ रही है प्लिज्ज ।

सोनल हस कर - अरे मै क्यू तुझसे जलने लगी ,,तू कौन सा मेरी होने वाली सौतन है हिहिही ,,चल उठ अब भाभी आने वाली है ।

मुह बना कर बबिता उठी और गीता को सोता देख - उसे क्यू नही उठाया आपने ,,बस मेरे पीछे पडी रहती हो आप हा नही तो ।

सोनल हस कर वापस से गीता के पिछवाड़े को बजा देती है - उठ जा मोटी,,, खा खा के बस पिछवाडा बडी कर रही हौ ।

इनसब से अगल पल्लवि हम भाई बहनों की मस्तीया देख कर हस रही थी ।

गीता भी नीरस मन से उठते हुए अधूरी नीद के गुस्साती हूआई - हा तो आप भी कर लो ना दीदी बड़ा ,,,,वैसे भी जीजा जी कर ही देंगे शादी के बाद

सोनल चौकी की अभी ये इसे सब पता है कि कब क्या होना है ,और मुझे भी थोडा ताज्जुब हुआ कि शायद मेरी बहने अब शयानी होने लगी है ।

सोनल गीता के सर को टिपते हुए - बहुत बिगड़ गयी है तू ,,,बहुत जीभ चल रही है तेरी , रुक अभी मामी को बोलती हू क्या बोला तुने मुझे

इधर गीता के वक्तव्य के बाद मेरी नजरे पल्लवि से टकराई तो वो मुस्कुरा रही थी ।

सोनल गीता को धमका बाहर जाने लगी तो गीता ने जल्दी से उठी और उसको पीछे से पकडते हुए - अरे नही नही दिदि ना प्लीज ,,,,हिहिही आप मेरी प्यारी दीदी हो ना प्लीज

सोनल गीता के गुदाज हाथो और जिस्मो का अस्पर्श पाकर छ्टकने लगी क्योकि गीता इत्नी गोल म्टोल थी कि जिसको भी वो हग करती उसे गुदगुदी सी होने लगती ।

फिर सोनल उसे पकड हसते हुए बाहर चली गयी और बबिता भी उसके साथ निकाल गयी ।

इधर पल्लवि भी उन्के पीछे जाने को हुई तो मै फटाक से उठा - पल्लवि रुको ना !!

पल्लवि मुस्कुरा कर - ह्म्म्ं बोलिए क्या हुआ ???

मै बिस्तर से उतर कर उसकी ओर जाने लगा तो मेरे पाजामे मे तना मेरा लण्ड कुर्ते को उठाए हुआ था।।जिसपर पल्लवि की नजर गयी थी ।

मै एक नजर बाहर देखा और थोडा रुक कर बोला - वो तुमने जवाब नही दिया अब तक

पल्लवि समझ गयी मेरे कहने का मतल्ब तो वो शर्मा कर नजरे फेरते हुए मुस्कुराने लगी ।

मै आगे बढा और उसके कलाई को पकड कर उपर लाते हुए अपने दोनो हाथो से सहलाते हुए उसकी उंगलियो को चुमा और मुस्कुरा कर आगे बढ कर उसके गालो को चुम लिया ।

हालकी आज तक मैने किसी को भी ऐसे व्यवहारित नही किया था ,,जितना पल्लवि के लिए क्योकि वो इस लायाक थी । मैने उसके गालो को चूमा और उसके कानो मे बोला - मुझे हा तुम्हारे मुह से सुनना है ।

ये बोल कर मै वहा से निकल गया और पल्लवि वही सिहर कर रह गयी ,,,मेरे हरकतो ने उसे पिघलाना शुरु कर दिया और मुस्कुरा कर रह गयी ।

इधर मै फ्रेश होकर नहाने चला गया । 9 बजे तक भाभी आ गयी उनके स्वागत मे तैयारियाँ होने लगी और धीरे धीरे करके 2 वजे तक का समय बीत गया ।

नयी दुल्हन से मिलने के बाद सारे मेहमान छ्टने लगे ।

इधर मामा की पूरी फैमिली भी घर चली गयी । मौसा के चाचा चाची भी अपने परिवार के साथ गाव चले गये ।

पुरे घर मे अब सिर्फ़ तीन फैमिली थी । एक मेरी ,,एक मौसी की और एक उनकी ननद की ।

खाना पीना कुछ बनाना नही था । हा अलबतक मौसा और राजन फुफा ने मिल कर टेन्ट बर्तन के समानो उनके मालिक के हवाले करने मे व्यस्त रहे ।

इधर जब तक रमन भैया का कमरा रात के सजाया जा रहा था जब तक भाभी को उपर मौसी के कमरे मे रखा गया था । सारी महिला मंडली वही जमी थी यहा तक कि अपना अनुज भी ।

मगर रमन भैया के कमरे की सजावट की जिम्मेदारी तो भाभी के नन्दो की थी । हालकि सुहागरात के सेज के लिए मैने पहले ही फुलो और सजावटी सामान का इन्तेजाम किया था ,,मगर समय समय पर बिच बिच मे सोनल मुझे बुलाती रही ।

थोडे समय बाद मै निचे एक कमरे मे रमन भैया के पास गया जहा वो मोबाईल मे थोडे अपने दोस्तो से बाते कर के आराम फरमा रहे थे ।

मै उन्के पास गया और हस कर - वैसे भैया अगर कोई जानकारी चाहिए तो बेहिच्क पुछ लेना हिहिही मुझसे ।

रमन भैया हस कर - अच्छा अब तू मुझे बतायेगा

मै मजे ले कर - हा ,अब देखो ना । हमारे पास कोई और बडे भैया है और ना ही जीजा जी है तो मैने सोचा क्यू ना मै ही थोडा समझा दू हिहिहिह

रमन भैया हस कर मुझे पीछे गले से पकड के - अच्छा जैसे तुझे बड़ा अनुभव है इनसब का

मै हस कर - अरे अनुभव हिहिहिही..... अनुभव नही भैयाआआ हिहिही वो नेट पर पढा था ना हिहिही

मै उठकर उन्के चंगुल से अलग हुआ - अच्छा वो छाता लिये हो की नही हिहिही या मै लाऊ स्टोर से हीही

ये बोल कर मै भागा और रमन भैया मुझे पकडने के लिए मेरे पीछे भागे ।

मै जान बुझ कर उपर गया सीधा मौसी के कमरे की ओर और भैया भी मेरे पीछे पीछे घुस गये और कमरे का माहौल देख कर वो शांत हो गये ।

मै हस कर उन्हे छेड़ता हुआ - आओ भैया भाभी से मिल लो हिहिहहीही

इतने मे कमरे मे मुहल्ले की एक भाभी बैठी थी वो रमन भैया को छेड़ते हुए बोली - अरे देवर जी तनी पलंग सज जाने दो फिर ये देसी माल तुम्हारा ही है ।

उन मुहल्ले के भाभी के व्यंग पर सबने ठहाके लगाये तो मैने अपनी नयकी भौजी के चेहरे के मुस्कान पर फॉकस किया ,,उन्होने भी अपने मुहल्ले की जेठानी के तन्ज पर होठ दबा कर मुस्की मार ली ।

इधर मौसी - अरे लल्ल्ला तुम लोग यहा क्या करने आये हो

मै हस कर - मौसी वो भैया कह रहे थे कि चलो चोर सिपाही खेलते है और तुम भाग कर भाभी के पास जाना ,,उसी बहाने वो भाभी को देख लेंगे ।

मेरी बात पर सब हसे और रमन भैया शर्म से पानी हो कर मुझे आंखे दिखाने लगे तो मै फटाक से नयी वाली भाभी के बगल बैठता हुआ - देखो ना भाभी ,,भैया मुझे परेशान कर रहे है हिहिही

रमन भैया समझ गये कि यहा उनका चौपट होना ही है तो वो चुपचाप निकल गये ।

मा - चल अब तू भी जा ,,बदमाश कही का ।

मै तुनक कर - मै क्यू जाऊ ,मै तो भाभी से मिलने आया हू

इधर हसी ठिठौली चल रही थी और धीरे धीरे कमरे से एक दो जो मुहल्ले की औरते थे वो भी अपने घर चली गयी ।

मैने एक दो बार भाभी से बात करने की कोसिस की तो वो चुप ही रही तो मै मौसी से - मौसी आपने भाभी का रेमोट कहा रखा है ।

सब चौके और मौसी - मतलब

मै हस कर - अरे देख रहा हू कब से किसी ने इनको म्यूट पर रखा हुआ है हिहिहिही

मेरे जोक पर पहली बार भाभी खिस्स से हसी और चेहरे पर मुस्कान फैल गयी । फिर खासने का नाटक करते हुए चुप हो गयी ।

मौसी हस्ते हुए - धत्त बदमास कही का ,,,तू भी ना

मै - हा अब और क्या ,,देख रहा हू भाभी ने तो तय कर रखा है कि वो सिर्फ भैया से ही बात करेंगी ।

तभी भाभी की पहली महीन से आवाज आई - कहिये क्या बात करनी है आपको ??

सब खुश और अट्टाहस करने लगे कि देखो देखो बहू बोल पडी ।

मै हस कर - चलो चलो अब आप लोग बाहर जाओ ,,मुझे भाभी से कुछ बात करनी है ।

मैने मौसी, मा और ममता बुआ को कमरे से बाहर ख्देड़ा और वो लोग भी हस कर बाहर चली गयी । मगर कमरे का दरवाजा खुला था और वो लोग उपर हाल मे ही थे ।

मै - हम्म्म लो , आपकी तीनो सासो को बाहर खदेड़ दिया,,अब आपको डरने की जरुरत नही है ।।

भाभी धीमी आवाज मे - मै नही डरती किसी से

मुझे उन्के जवाब मे थोडा बचकानापन नजर आया और कुछ वो सिख नजर आई जो शायद मायके से विदा होते समय उनकी मा बुआ ने समझाया होगा ।

मै हस कर - ये हुई ना बात ,,वैसे भाभी आपका नाम क्या है

भाभी - रीना और आपका ??

मै - मै राज ,,आपका लाडला देवर हिहिहिही

भाभी मुस्कुराइ और बोली - अच्छा एक बात पछू

मै - हा हा क्यू नही

भाभी - आपके भैया क्यू आये थे यहा ???

मै हस कर - अरे पता नही क्या हुआ जब से आये हैं बस आपको याद कर रहे है । पता नही क्यू बार बार रात होने का इन्तेजार कर रहे है ।

भाभी हसी और शर्मायी मगर कुछ बोली नही ।

मै उनकी प्रतिक्रिया देख कर बोला - हा तभी ना हम दोनो चोर सिपाही खेलते हुए यहा घुस आये ।

भाभी हसी - आप बहुत नटखट है ।

इधर तब तक कमरे मे मौसी के साथ एक मुहल्ले की औरत आई थी भाभी से मिलने तो मै उनके पास से उठता हुआ धीरे से बोला - मुझसे ज्यादा तो भैया नटखट है ,,बच के रहियेगा हिहिही

फिर मै बाहर निकल कर जाने लगा तो मौसी ने मुझे शरारती भाव से मुस्कुराता देखा तो मेरे पिछवाड़े पर चपट लगायी और मै निचे भाग गया ।

रात हुई हमसब ने खाना पीना किया और फिर दुल्हन को उसके कमरे मे शिफ्ट कर दिया गया ।

इधर चाची जी के जाने के घर के बडे दम्पतियो ने भी अपने अपने कमरो मे सोने का विचार मन मे बना लिया था और मा की इस बात को लेके मौसी से शायद पहले ही बात चित हो गयी थी ।

इसीलिये मौसा मौसी और ममता - राजन और पल्लवि को उपर उनका व्यक्तिगत कमरा दिया गया ।

मा और सोनल एक साथ एक कमरे मे निचे सो गये । फिर मुझे और अनुज को एक साथ सोने के लिए कहा गया ।

लगभग सारे लोग अपने अपने कमरे मे चले गये थे ।

निचे हाल मे मै , मौसी - मौसा और रमन भैया हाल मे थे ।

इधर मौसा ने इशारे से मौसी को मुझे दुर ले जाने को कहा ताकी वो रमन भैया से कुछ बात कर सके ।

मै समझ गया तो मस्ती मे - अरे मुझे भी सुनने दो ना मौसी ,,,आखिर कुछ टाईम बाद मुझे भी काम ही आयेगा।

मौसी मुझे पकड के किचन की ओर ले गयी - चल बदमाश कही का । तेरा समय आयेगा तो रमन सिखा देगा

हम दोनो किचन मे आ गये और मै धिरे से मौसी से - मौसी ,, वैसे तो रमन भैया को सब आपने सिखाया ही है तो अब मौसा क्या बता रहे होगे उनको

मौसी रमन भैया के लिए दुध का ग्लास तैयार करती हुई - चुप पागल कही का ।

फिर हम दोनो बाहर आये

और सीधा भैया के कमरे मे गये जहा भाभी सोफे पर बैठी शायद अपने मायके बात कर रही थी । जैसे ही उन्होने हमे आते देखा तो हमारे मन मे कोई संदेह ना उठे इसिलिए उन्होने फौरन मौसी फोन देते हुए बोली - मा , वो मम्मी जी आई है मै देती हू आप बात कर लो ।

फिर भाभी ने फोन मौसी को दे दिया और मौसी ने फोन लेते हुए वो दूध का बड़ा वाला ग्लास बेड के पास एक स्टूल पर रख दिया ।

इधर मौसी फोन पर बाते कर रही थी और मै खड़ा होकर कमरे में नजरे घुमा रहा ।

कमरे की सजावट बहुत मस्त थी ,,जगह गुब्बारे लगाये हुए थे ।

तभी मुझे मेरे पैंट के पास कुछ हलचल मह्सुस हुई मै चिहुका तो देखा कि वो भाभी थी जो मेरा पैंट घुटने के पास से चुटकी से पकड़ी हुई मुझे इशारे बुला रही थी ।

मैने उनको मुस्कुराते देखा तो फौरन उनके बगल मे - क्या हुआ भाभी , ये कैसे कैसे इशारे कर रही हो?? हिहिही

भाभी ने एक बार मौसी को देखा और धीरे से मेरे टखने के पास चट्ट से हाथ मारते हुए - बदमाश कही के ,,, अभी उपर क्या बोल के गये थे हम्म्म्म

मुझे हसी आई और धीरे से बोला - वही बोला जो सच है, आप बच के रहना हिहिहिही

भाभी मुस्कुरा कर - ऐसी बात है तो आने दो ,,,आज बान्ध कर रखुन्गी आपके भैया को

मै मुस्कुरा कर - हा भाभी कस के पकड़ के रख्ना , बहुत भागते हैं हिहिही

भाभी मेरे दोहरे व्यंग को समझ कर मुस्कुराने लगी तभी मौसी अपनी समधन से बात खतम की और हमे खुसफुसाते देखा ।

मौसी - अरे क्या बाते हो रही है तुम दोनो मे हा ।

मै हस कर - अरे मौसी ये हम देवर भौजी वाली बाते है ,आपको नही जानना चाहिये ।

मै हस कर -अच्छा आप भी भाभी को कुछ समझाओगे ,जैसे बाहर मौसा भैया को समझा रहे है हिहिही

मौसी मेरे गाल खिचते हुए - तू बहुत शरारती हो गया है ।

इधर भाभी मुह अपने होठ दबाए हसी जा रही थी ।

मौसी - चल तू जा बाहर मुझे बहू से कुछ बात करनी है

मै हस कर - आप बताओ या ना बताओ । मै तो भाभी से पुछ लूंगा क्यू भाभी ? हिहिहिही

फिर मै बाहर आया तो देखा रमन भैया अकेले थे ।

मै - अरे मौसा कहा गये

रमन भैया - वो सोने गये उपर

मै - फिर आप भी जाओ , नही तो अगर मै लिवा के गया भाभी तक तो 21000 का सगुन लूंगा हिहीहिही

रमन भैया - चल चल भाग यहा से ,ब्डा आया सगुन लेने वाला ,,,अभी सोनल पल्लवी ने कम लुटा है क्या

मै उत्सुकता से - अच्चा बताओ ना कितना मिला उनको

रमन - पुरे 11 हजार ले गयी मेरे से

मै मुह बिचका के - बस 11 हजार भैया ,,,बस 11 ....। मै होता तो यू यू करके 21000 देता सबको हिहिहिही

ये बोल कर मै वापस मौसी के पास भागा ,लेकिन मौसी कमरे से बाहर आ रही थी ।

मौसी - ओहो तुम लोगो की शैतानी कब खतम होगी ,,रमन तू जा अंदर

मै - हा और दरवाजे की चटखनि लगा लेना हिहिहिही

मौसी मेरे कान पकड मुझे बाहर खिच कर लाई - चल अब तू भी सो जा

मै हस कर - ना मै तो आज जागूँगा और सुनूंगा हिहिहिही

मौसी मुझे लेके हाल मे आगयी थी और उधर रमन भैया कमरे मे चले गये थे ।

मौसी - बदमाश कही का , चल सो जा

मै मुह बनाते हुए - मौसी मुझे भी आज करना है ,,,कितना मन है

मौसी - लेकिन आज तेरे मौसा भी मेरा इन्तजार कर रहे है

मै चहक कर - तो मै भी चलू आपके साथ सोने ,, मौका मिला तो थोडा बहुत हिहिही

मौसी - धत्त नही रे ,,, तू यही सो जा

मै - अच्छा कम से कम दरवाजा खोल कर रखना ,,थोडा बहुत हिला कर काम चला लूंगा

मौसी मुस्कुरा कर - तू नही मानेगा ना

मै हस के - ना

मौसी - ठिक है लेकिन कोई शोर मत करना

मै - हम्म्म ओके मौसी

फिर मै थोडा अपने कमरे में गया और देखा कि सोया हुआ है ।

इधर मै भी थोडा लेता । करीब आधे घण्टे तक मोबाईल मे सर खपाने के बाद मै उठा और कमरे से बाहर आया ।

सबसे पहले मै दबे पाव रमन भैया के कमरे के पास गया और कान लगा कर सुना तो कुछ खास समझ नही आया ।

फिर मै सीधा उपर निकल गया और मौसी ने अपना काम कर रखा था ,,,हल्का सा दरवाजा भिड्का रखा था ।

इधर मै आंखे महीन कर अन्दर देखता हू तो मौसा , मौसी को बाहो मे भरे उनकी नंगी चुचिया मसल रहे थे ,,,मगर कुलर की अवाज मे मुझे कुछ आवाज नही आ रही थी ।

मैने अपना मोटा लण्ड निकाला और हिलाना शुरु किया ,,क्योकि आज शायद यही होने वाला था । मा और सोनल एक साथ सोये थे । वही पल्लवि ने मेरा मस्त काटा था । साली ने मुस्कुरा मुस्कुरा कर मुझे बस लपेटे रखा ।

अब मौसी भी मौसा के साथ थी ।

इधर बारी बारी से मौसा ने एक एक पोज बदल कर मौसी को चोद्ना शुरु किया । हाल मे अन्धेरा था, बस एक नाइट बलब जलने से कोई डर नही था

मगर तभी मुझे कुछ आहट सुनाई दी और मै सतर्क होकर निचे वाले जिने की सीढिओ पर चला गया

तभी राजन फुफा का कमरा खुला । पहले ममता बुआ ब्लाउज पेतिकोट मे , फिर राजन फूफा जान्घिये के साथ फुल बनियान मे बाहर निकले । वो दोनो ने बडी सावधानी से बिना कोई आहट के चुपचाप उपर चले गये ।

मै समझ गया कि शायद कमरे मे पल्लवि के सोने का इन्तेजार कर रहे थे ये दोनो और अभी उपर छत पर जाकर अपनी टपाटप वाली मस्ती शुरु करने वाले है ।

मैने सोचा क्यू ना एक बार इनको भी देख लू ,मगर कमरे का दरवाजा भिड़का हुआ था और पल्लवि का लालच मुझे परेशान कर रहा था ।

इसिलिए मै उपर ना जाकर सोचा क्यू ना पल्लवि के साथ थोडा ....।

फिर मै दबे पाव उनके कमरे की ओर बढा और एक बार जीने पर नजर मारी फिर चुपचाप से कमरे का दरवाजा खोल कर जैसे ही कमरे मे घुसा मेरी आंखे फैल गयी ।

पल्लवि इस समय पूरी नंगी होकर आईने के सामने खड़ी होकर अपने ब्रा के हुक लगा रही थी और ... ।

उफ्फ्फ क्या कयामत थी ,उसके उभरे हुए कुल्हे , नंगी कमर , सुडौल जान्घे और पपीते जैसी चुचिया ।

उसने मुझे देखा तक नही बस अपने काम मे लगी रही ।

मुझे समझ नही आया कि अभी एक मिंट पहले ही तो पल्लवि के मम्मी पापा बाहर गये है तो ये इत्नी जल्दी पूरी नंगी कैसे । कही पल्लवि अपने पापा से तो नही ....।

मेरे दिल की धडकनें तेज हो गयी और फिर मैने खुद को शांत किया और मुस्कुराते हुए गले को खरासा

पल्लवि की नजरे जैसे ही मुझ पर गयी वो मूरत जैसी अकड गयी । फिर उसने मुझे मुस्कुराते देखा तो जल्दीबाजी मे अपना दुपट्टा अपने सीने पर रख दिया ,,मगर शायद वो इस जल्दीबाजी मे भूल गयी कि उसकी चुत अभी भी दिख रही है ।

मैने आंखो से उसकी चुत पर इशारा करके मुस्कुराया तो उसकी आंखे फैल गयी और वो फटाक से बिसतर मे घुस गयी और एक चादर से खुद को ढक लिया ।

मै मुस्कुरा कर एक बार बाहर देखा और उसकी ओर बढा

पल्लवि हडबड़ा कर - तुम यहा क्या कर रहे हो ,,जाओ यहा से पापा आ जायेंगे

मै मुस्कुरा कर - वैसे मुझे नही पता था कि तुम अपने पापा से ही ....।

पल्लवि ने शर्मिंदी से नजरे फेर ली और उतरे हुए चेहरे से - त त त तुम जाओ यहा से प्लीज

मै मुस्कुरा कर - अरे डरो नही मै नही किसी से कहूँगा प्रोमिस

पल्लवि को कुछ उम्मीद जगी और वो नजरे उठा कर - हा फिर भी तुम जाओ यहा से ,,,नही कही पापा मम्मी ने देख लिया तो

मै - हा लेकिन मेरे सवाल का जवाब नहो दिया तुमने

पल्लवि परेशान होकर - अब यहा कैसे , तुम जाओ

फिर वो थोडा डर मे उठी और बाहर नजरे घुमाते हुए चादर से खुद को ढके हुए मुझे बाहर निकालमे लगी ।

मै भी हस कर बाहर चल गया ,,तभी उपर के जीने से आहट हुई और मै निचे अपने कमरे मे चला आया

मै बिस्तर पर लेटा हुआ जब से मै यहा आया और जितनी भी अजीब घटनाये हुई उनको सोचने लगा कि मौसी , मौसा और राजन फूफा के साथ अलग ,,वही ममता बुआ और मौसा के साथ अलग मस्ती कर रही है । उधर राजन फुफा अपनी बीवी और बेटी एक साथ चोद रहा है ।

बाप बेटी के सम्बंध से बार बार मेरा ख्याल मेरे पापा की ओर जा रहा था कि अब तक पापा ने क्यो सोनल दीदी पर ट्राई क्यू नही किया ।

सोनल ही क्या उन्होने तो कभी किसी जवाँ लडकी को अपने लपेटे मे नही लाया और ना ही कभी किसी जवाँ लडकी के साथ सेक्स करने की कोई बात छेड़ी ।

ना जाने क्यू मुझे पापा को लेके ये ख्याल बार बार आने लगे । क्या पता पापा को जवाँ लड़कीयो मे रुचि ना हो या नये जमाने की पढी लिखी लड़कियो ने ही उन्हे दरकिनार कर दिया हो । क्योकि पापा भले ही बातो और चुदाई के जादूगर थे मगर शकल सूरत मे वो एक आम परिवार के मर्द जैसे ही थे ।

ना कोई विशेष कपड़ो पर ध्यान ना अपने बदन पर । पेट थोडा निकला हुआ , दाढ़ी और बालो मे भी सफेदी आ ही गयी थी । मगर ना जाने कैसे अपने उम्र की औरतो को लपेट ले जाते ???

इन्ही विचारो में घिरा हुआ मै सोने की कोसिस मे था

मगर मेरे जहन मे कुछ नये सवाल आने लगे थे ।

कि अब घर जाने के बाद पापा पर थोडी निगरानी करु , क्या पापा का सोनल दीदी या किसी और जवाँ लड़की मे कोई रुचि है भी या नही । मेरा लंड तो ये सोच कर ही तन गया कि वो सीन कैसा होगा जब पापा सोनल दीदी के चुत मे लण्ड डालेन्गे ,,,क्या ये इतना आसान है ? क्या ये हो भी पायेगा ?

फिर मेरी नजर बगल मे सोये अनुज पर गयी तो पल्लवि का ख्याल वापस आ गया ।

मै मुस्कुराकर मन मे - ये भी साला मुझसे आगे निकला ,,पल्लवि जैसी माल को ठोक कर शुरुवात की है । लेकिन अब इसका क्या होगा ? इसे भी चुत की चस्क लग ही गयी होगी । इसपे भी बराबर नजर रखनी पड़ेगी ।

थोडी देर बाद मै भी सो गया ।

अगली सुबह उठा तो घर मे चहल पहल थी और नहा धो कर तैयार हुआ ।

इधर हम लोगो की विदाई का समय हो रहा था । मौसा ने हमारे लिए और पल्लवि के घर वालो के दो गाडी बुक करवा दी ताकी सब आसानी से अपने घर जा सके ।

दोपहर में खाना खाने के बाद हम सब अपना समान बान्ध कर तैयार थे ।

सारे लोग हाल मे एकजुट थे और सबके चेहरे खिले हुए थे तो मन मे थोडी उदासी भी थी ।

मै बारी बारी से सबसे मिला और फिर पल्लवि से भी मिला । उसकी वो कातिल मुस्कान ने मुझे अह्सास दिलाया मानो मुझे चिढा रही हो । हम सबने विदा लिया और अपने अपने गाडी मे बैठ कर निकल गये ।

कुछ दुर तक मेरी और पल्लवी की गाडी आगे पीछे होती रही फिर वो एक दुसरी सड़क से अपने गाव के लिए निकल गयी । सीसा खोल कर मै उसकी गाडी को जाता देखता रहा ।

फिर वापस अपनी सीट पर आकर एक गहरी सास ली और घर के लम्बे सफ़र के लिए इत्मीनान से बैठ गया ।

आंखे बंद करके मैने पल्लवि के साथ बिताये उन आखिरी पलो को याद करने लगा ,जब मै नास्ते के बाद करीब 11 बजे मम्मी का बैग लेने उपर मौसी के कमरे मे गया था ।

उस समय पल्लवि छत पर जा रही थी अपने कपडे उतारने जो सुबह उसने नहाते समय धुले थे ।

मै चुपचाप उसके पीछे चल पड़ा और छत पर जाकर बाहर से जीने का दरवाजा बन्द कर दिया ।

तेज धूप मे पल्लवि ने मुझे अपनी आंखे महीन करके देखा और मुस्कुराने लगी ।

मै भाग कर उसके पास गया और उसके हाथो से सारे कपडे वही अरगन पर डाल कर उसे लेके बाथरूम मे चला गया ।

पल्लवी हस कर - अरे राज छोडो मुझे कोई देख लेगा ।

मै उदास होकर बडी उम्मीद से पल्लवि के आंखो मे देखता हुआ - अभी तक तुमने मेरा जवाब नही दिया और फिर मै अभी चला जाऊंगा घर ।

पल्लवि मुझे देख कर हसी और बोली - तुम तो अनुज से भी भोले हो ,

फिर उसने मेरे गालो को चुम लिया

मै समझा गया और उसके कमर मे हाथ डाल कर उसके होठो को अपने मुह मे भर लिया ।

पल्लवि भी मेरा साथ देने लगी मेरे हाथ उसके कूल्हो को दबोचने लगे और वो भी कम जल्दीबाजी मे नही थी । पैंट के उपर से मेरे लण्ड को मसलने लगी ।

मै भी जल्दी करना चाहता था और अपना पैंट खोल कर फटाक से लण्ड निकाल दिया

पल्लवि ने मेरी आंखो मे देखते हुए मेरा लण्ड थाम लिया और उसे भीचना शुरु ही किया था कि जीने के दरवाजे पर खटख्ट हुई और हम दोनो की हवा टाइट हो गयी ।

पल्लवि मुझसे अलग हुई और बाहर जाने लगी ।

इधर मै भी अपना लण्ड अन्दर करके बाथरूम से निकल कर पाखाने मे घुस गया ।

पल्लवि ने जीने का दरवाजा खोला तो वहा सोनल दीदी आई थी ।

फिर वो उसी के साथ अपने कपडे लेके निचे चली गयी और मै हाथ मलता रह गया ।

मै निचे आया और मौसी के कमरे मे गया जहा पल्लवि तो थी साथ मे मा और मौसी भी ।

पल्लवि अब मेरे मजे ले रही थी और मै भी अपनी हाल पर मुस्कुरा रहा था कि किस्मत के बिना कुछ हासिल नही हो सकता ।

वैसे भी दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम और पल्लवि पर सिर्फ़ अनुज नाम वालो का ही हक है शायद हिहिहिही

बस उन पलो को याद कर आंखे बंद किये गाडी मे बैठा हुआ था कि अनायास मेरे मुह से खिस्स्स से हसी छूट गयी और तभी मा बोली - क्या हुआ राज हस क्यू रहा है ?

मै मेरे यादो से बाहर आया और मुस्कुरा कर - कुछ नही बस यहा की हुई मस्तिया याद करके हसी आ रही थी । कितना मजा आया ना यहा

सोनल - हा यार सच मे , पता ही नही चला कब 15 दिन बित गये और शादी भी हो गयी ।

मा - कोई बात नही ,,तेरी शादी को भी तो ज्यादा समय नही है अब । वो भी जल्द ही आ जायेगी हिहिही

सोनल शर्मा कर मा से लिपट गयी -मा आप भी ना

मा सोनल को अपने सीने से लगाते हुए - वैसे परसो लहगे मे बहुत प्यारी लग रही थी तू

मै तुनकते हुए - अच्छा और मै , मेरी तो कोई फ़िकर ही नही आपको

अनुज - हा मेरी भी नही हुउउह्ह

हम सब हस दिये ।

मा - चलो चलो हम लोगो की मस्ती तो हो गयी लेकिन तेरे पापा बेचारे 4 दिन से अकेले घर दुकान देख सम्भाल रहे है । मुझे तो उनकी फ़िकर है समझा

मै भी मा की बातो पर सहमती दिखाई और सही भी था जितना पापा सन्तोष करके रह जाते हैं और हम लोग घूम टहल कर मस्ती कर लेते है ।

इधर हम लोगो की गाड़ी लगातार आगे बढ़ी जा रही थी और मै भी कुछ यादो को दूहराते मुस्कुराते हुए । घर की ओर निकल गया ।



लेखक की जुबानी


इधर राज की घर वापसी हो रही थी । वही रन्गीलाल ने बीते दो रातो मे शकुन्तला की ताबड़तोड़ चुदाई करी थी । ना अब शकुन्तला को लण्ड मुह मे लेने मे झिझक थी ना उसका रस चाटने मे ।

वही उधर चोदमपुर से आये मेहमान अपने वतन लौट चुके थे । उनसे जुडे किस्से तो आपको हमारे TharkiPo भाई साहब की KATHAA CHODAMPUR KI मे ही मिलेंगे ।

एक बार फिर से TharkiPo भाई का आभार जो उन्होने इतने प्यारे मेहमान की खिदमत का मौका हमे दिया ।

आभार आप पाठको का भी जिन्होने इस EVENT पर अपना विचार रखा और इसे सफल बनाने मे मेरा साथ दिया ।

तो आज से ये CHODAMPUR SPECIAL UPDATES समाप्त होते है ।

आगे से चमनपुरा लाइव से सारे प्रसारण देखने को मिलेंगे कुछ राज की तो कुछ लेखक की जुबानी ।

कहानी जारी रहेगी


धन्यवाद
 
आभार पट्टीका 👩‍🏫

एक खुबसूरत इवेंट का अन्त हो चुका है ।

आखिरी अपडेट 126 पोस्ट कर दिया गया है ।






मुझे नही पता आप पाठको ने इस CHODAMPUR SPECIAL UPDATES के इवेंट को किस तरीके से देखा । मगर मेरी नजर मे मेरी कहानी के ये उत्तम विशिष्ट परिकल्पनाओ का बहुत ही सुन्दर रचना थी । इस इवेंट ने मेरे लेखन मे अभूतपूर्व सुधार किये और बहुत ही चंचल और रसप्रद कलपनाओ ने मुझे व्यकितगत तौर पर बहुत ही मनोरंजित किया ।

इसके लिए हमारे TharkiPo भाई साहब का बहुत बहुत शुक्रिया और आभार कि उन्होने इतने कामुक और मजेदार किरदारो से हमे रुबरू करवाया ।

इवेंट की झलकियां

आईये इस इवेंट की उन खास झलकियों पर एक नजर डालें जो आप लोगो मे से कुछ ने अगर स्किप किया हो तो उनकी रिकवरी हो जाये आगे कि कहानी के लिए ।


1. रज्जो और कमलनाथ(पति) का समागम

2. रज्जो और राजन ( नंदोई ) के साथ समागम

3. रज्जो का कमलनाथ और राजन के साथ मिलन

4. कमलनाथ और ममता (बहन) के साथ मिलन

5. कमलनाथ का ममता (बहन) और रज्जो (बीवी) के साथ मिलन

6 अनुज का पारिवारिक सम्बन्ध के बारे मे जानना (IMP)

7. अनुज का पहला सेक्स पल्लवि के साथ (IMP)

8. राज का चमनपुरा मे काजल भाभी से नजदीकिया बढना (IMP)

9. चमनपुरा मे राज के पापा और शाकुंतला का मिलन (IMP)

10. कहानी मे रीना भाभी की एन्ट्री जो कि एक गाव की देसी लड़की है (IMP)

11. राज का रीना भाभी से मस्ती मजाक (IMP)

12. राज का बाप बेटी के सम्भोग को लेके विचार आना (IMP)


धन्यवाद
 
अपडेट 128


पिछले अपडेट मे आप ने पढा कि एक ओर जहा राज तिगडम लगा कर अपने पापा से उनके विचार उगवा रहा है और इस कोसिस मे है कि कही से कोई लिंक मिल जाये । वही दुसरी ओर अनुज अपने निजी अंगो को शांत करने के लिए परेशान हो रहा है और वो उसका उपाय तालाश रहा है । देखते दोनो भाई की ये तालाश कहानी मे क्या रंग जमाती है ।

अब आगे



राज की जुबानी


शाम को मै रोज की तरह चौराहे वाले घर पर चला गया । फिर नहाने के बाद उपर छत पर चला गया कुछ खास लोगो से बात चित करने ।

काजल से बात की तो पता चला कि वो कुछ दिन अपने मौसी के यहा रुक कर आयेगी क्योकि अभी छुट्टिया चल रही है ।

फिर मैने सरोजा से बात की तो उन्होने मुझे कल माल मे आने का न्योता दे दिया क्योकि भी दिल्ली से अपनी किसी डील से वापस आ चुकी थी तो लण्ड की तलब उसे भी और मुझे उसे चोदने को बेताब हो उठा ।

थोडे समय बाद निचे आ गया । फिर हाल मे ही बैठ कर मोबाईल चलाने लगा।

मै WhatsApp पर काजल भाभी को चेक किया तो उनका कोई मैसेज तो नही था लेकिन डीपी चेंज हो गयी थी । डीपी पर काजल भाभी अपने पति के साथ की सेल्फी को सेट की हुई ती । मैने गौर से रोहन को देखा तो मुझे काफी फिट लगा और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन में मुझे वो एक गम्भीर और भावनाओ से भरा हुआ इन्सान लगा ।

फिर मैने उनके स्टेटस चेक किये तो वहा फुल तस्वीर थी । हालकि रोहन स्लिम ट्रिम था मगर ना जाने मुझे उसकी पर्सनालिटि मे कुछ गड़बड़ दिख रही थी जैसे मानो वो अंदर से काफी हिंसक विचार का हो । शायद मेरे मन में उसके लिए ये विचार इस लिये आ रहे थे क्योकि मैने काजल भाभी का मगाया हुआ वो सेक्स गैजेटस देख लिये थे।

खैर मैने उस बात को दिमाग से निकाला और उन्के स्टेटस पर रिप्लाई कर दिया - Nice couple

थोडी ही देर मे रिप्लाई आया - thanks

मै - kya ho raha hai bhaabhi 😍

काजल - main rohan hu. Kaajal kichten me hain

मेरी तो फट गयी कि रोहन कयू भाभी का मोबाइल चला रहा है ।

मै - thik hai, aap kaise ho kbhi aayiye ghar par

काजल (रोहन) - ha ha kyu nhi . Waise aaj aunty ji aayi thi

मै चौक कि मा क्यू गयी थी काजल भाभी के लिए

इधर मै कुछ मिंट तक मैसेज सीन करके सोच रहा था कि रोहन ने फिर से मैसेज किया।

काजल (रोहन) - wo kuch mithayi aur fal laayi thi . Shaayd saadi waala sagun raha hoga

मै जैसे ही पढा मै समझ गया कि कल जब हम मौसी के यहा से आये थे तो उन्होने काफी ज्यादा मात्रा मे फल मिठाईया बान्ध दी और मा ने उन्हे आस पास सभी घरो मे पहुचा दिया होगा ।

फिर मैने ओके बोला और मोबाईल बन्द करके मा के पास किचन मे चला गया

मै - मा वो मौसी के यहा जो फल मिठाई आयी थी सब बट गये है ।

मा - वो तो कुछ अनुज ने दे दिये है और बाकी मैने यहा बाट दिये है । बस गाव पर भेजना बाकी है रंजू दिदी के यहा

मेरी आंखे चमक गयी कि चलो काजल भाभी के यहा ना सही लेकिन अब पंखुडी भाभी से मिलना तो हो ही जाएग ।

मै - अरे कोई बात नही कल सुबह ही मै दे आऊंगा उसमे क्या है

मा - हा तु ही जाना क्योकि अनुज कह रहा था कि उसे घर नही याद है ।

मै मुस्कुरा कर- अच्छा ठिक है मै चला जाऊंगा ।

फिर थोडी देर बाद पापा भी आ गये और हमसबने खाना खाया और वही रोज का रूटीन फ़ालो किया ।

अगली सुबह मे उठा और अपने कमरे मे जाकर फ्रेश हुआ और फिर नासता करके 8 बजे तक निकल गया फुलपुर गाव की ओर ।

बस स्टैंड से एक ई-रिक्सा ली जो मुझे गाव के मुहाने तक ले गया , वहा से मुझे अन्दर जाना था तो मै पैदल चल दिया ।

आखिरी बार आया तो बडी पुछ ताछ करनी पडी थी मगर इस बार सीधा घर की ओर चल दिया

घर पर वैसा ही माहौल था जैसा आप गाव के घरो मे होता है ,, जनुमा ताऊ खेत जा चुके थे और बाहर बरामदे मे सलोनी सोयी हुई थी ।

मै बिना कोई आवाज के अंदर घुसा तो किचन मे पंखुडी भाभी साड़ी पहने खाना तैयार कर रही थी ।

उफ्फ़ इतनी गदराई गाड और कमर देख कर मन मचल उठा मेरा और लण्ड ने सर उठाना शुरु कर दिया ।

मै मस्ती भरा कुछ सोच कर आगे बढा और पंखुडी भाभी की कमर मे गुदगुदी कर दी। ज्यो ही भाभी चहकी मै हसने लगा और भाभी मुझे देख कर खीझ गयी फिर हस्ते हुए - तोहरी बहिन चोदो , तु हवा का

मै भाभी के भोजपुरी ट्यून पर हसा - हिहिहिही का हुआ भौजी डर गयी का ?

भाभी - तु का डेरवा (डरा) पयिबा हमके , तोहार बहिन चोदो

मै हस कर -वो तो ठिक है भौजी ,,लेकिन मेरी दिदी के साथ करोगे कैसे हिहिहिही आपके पास तो है ही नही हाहहहहहा

भाभी हसी और लपक कर मेरे पैंट के उपर से मेरा लण्ड पकडती हुई - अरे तोहार बा ना ,,, उहे घुसवा देंगे तोहरी दिदी के बुर मे

मै शर्म से पानी पानी हो गया और हसे जा रहा था । साथ ही उत्तेजित भी हो गया था कि भाभी ने मेरा लण्ड पकड लिया था ।

भाभी मेरे लण्ड को निहारते हुए -देखो देखो कैसे अफना रहा है दिदी के नाम पर ,,,पक्का बहिनचोद है

मैने माहौल गरम होता देखा तो फायदा लेने का सोचा कि थोडा और फूहड़पना किया जाये क्या पता भाभी इसी मे खुल जाए।

मै हस कर - अरे ये तो कुछ और देख कर परेशान है भौजी हिहिहिहिही

भाभी मेरा अर्थ समझ रही फिर भी वो बातो को खतम करने के बदले आगे बढा रही थी , कारण था घर पर उनके और सलोनी के सिवा कोई था नही तो वो बेहिच्क जो मन मे आ रहा था वो बोल दे रहीथी । उपर से मै ठहरा उनका लाडला देवर तो खिचाई कैसे नही करती मेरी ।

भाभी - अच्छा जी वो क्या

मै बस इसी सवाल की तालाश मे था और हाथ आगे उन्के उभरे हुए कूल्हो को सहलाता हुआ - इसे देख कर

भाभी इतने भी मे भी नही रुकी और ना ही मेरा हाथ हटाया ,,बस गरदन घुमा कर पीछे देखा कि मेरा हाथ कहा और हस कर बोली - बस इत्ने मे भी बहक गये तो काहे का भतार हो तुम हिहिहिही

मै पहले तो उनके कहने का मतलब समझ ही नही पाया - मतलब

भाभी - अरे जब औरत का कुल्हा देख कर ही तुम्हारा तन जा रहा है तो कही खुला माल पा गये तो ...... .हिहिहिहिही

मै समझ गया कि भाभी मूड मे है तो मैने उन्के कूल्हो की गोलाइयो को साडी के उपर से ही सहलाते हुए - रुको फिर तो मै खोल कर देख ही लेता हू कि क्या होता है ....। हिहिही

भाभी की आखे फैली और वो चिहुकी - हिहिहिही धत्त नही बदमाश कही के मै तो मजाक कर रही थी हिहिहिही

जैसे जैसे वो मुझे दुर होने की कोशिस करती मै उनकी कलाई तो कभी भरे हू मुलायम कमर को पकडता और साड़ी उपर खिचता ।

आखिर मैने उनकी दोनो कलाईयाँ ऐंठते हुए उनकी कमर पर ले आया और उन्हे किचन के तरख्त पर झुका कर एक हाथ से उनकी साड़ी उठाने लगा ।

भाभी छटपटाती रही और हसते हुए बोली - छोड दो नही तो सच मे तुम्हारी बहिनिया चोद देंगे ,,,

मै हसता हुआ उनकी साड़ी उठाने लगा लेकिन वो अब पैर झटकने लगी तो साडी मेरे हाथ से छिटकने लगी ।

मै - अरे तो जाओ चोद लो ना ,,,रोका कौन है ,,लेकिन आज तो हम देख के रहेंगे

इधर मैने अपने पैरो से उनका पैर भी फसा दिया । साड़ी और पेतिकोट एक साथ उठाने लगा तो भाभी अब हसते हुए बिनती करने लगी - हिहिहिही प्लीज बाबू मान जाओ ,,छोड दो ना ,अच्छा सॉरी नही कहेंगे कुछ सोनल बहिनी को हिहिही

मै कहा रुकने वाला था मैने उनकी साडी और पेतिकोट को कमर तक उठा दिया - अह्ह्ह क्या मस्त गोरी गाड थी उम्म्ं

फिर एक हाथो से उनकी नंगी गाड़ को मलने लगा जिस्से भाभी और छ्टकने लगी और मुझे गालिया देने लगी ।

भाभी - साले छोड दो ,नही तो पक्का तुमसे ही तुम्हारी दीदी ना चुदवा दी तो कहना

मै अब मस्ती मे आ चुका था और मैने अपनी बिच वाली ऊँगली को मुह मे लेक गिला किया और उसे भाभी गाड़ के सुराख पर रगड़ने लगा ।

भाभी छ्टकती लेकिन कलाई ऐन्ठी होने के कारण दर्द से परेशान भी थी । इधर मैने उनकी गाड़ के सुराख खोजकर अपनी उन्ग्ली पेल दी ।

भाभी चीखी मगर उनकी हसी बरकरार थी जो मुझे लगातार हिम्मत दे रही थी - ऐईईई साले बहिनचोद ,,,का कर रहे हो उम्म्ंम्ं माआआ सीईईई

मै हस्ता हुआ उनकी गाड से उन्गली निकाल कर अपने हाथ को निचे झाटो से भरी चुत पर ले गया ,,जिस्से भाभी की हालत और खराब होने लगी म

भाभी - अह्ह्ह बाबू प्लीज हाथ छोड दो अह्ह्ह दुख रहा है

मैने भी उनके दर्द को समझा और उनकी कलाई छोड दी और जैसे ही वो फ्री हुई तेजी से पल्टी - रुको तोहरी बहिनचोदो बता रहा है

मै अब थोडा मद मे आ चुका था तो इस बार सीधा सामने से उनकी चुत को साड़ी के उपर से रगड़ते हुए उन्हे किचन की दिवाल से चिपका दिया और इस बार उनकी दोनो कलाई वापस से पकड कर उपर कर दी

मै आंखो मे मद मे होके देखता हुआ अपने चेहरे को भीचता हुआ उनकी चुत को सहलाने लगा - हा किस्से चोदोगे आप ? यहा तो कुछ नही है

मैने भाभी के साड़ी के हाथ घुसाकर चुत टटोलता हुआ बोला ।

भाभी लगातार अपनी चुत पर मेरे हाथ से घिसाव से बहुत ही गरम हो गयी थी और लम्बे समय से ना चुदने के कारण उनकी चुत ने पिचपिचाना शुरु कर दिया था ।

बार बार मेरे पुछने पर भाभी मुस्कुरा कर शर्माते हुए मेरे लण्ड की ओर इशारा करके बोली -वो है ना ,उसी से चुदवाउन्गी

मै उन्के बातो से और भी उत्तेजित हो गया और एक हाथ से पैंट खोलते हुए लण्ड बाहर निकाल दिया ।

उसे हाथो मे लेके सहलाते हुए - इससे चुदवाओगी क्या हम्म्म बोलो

भाभी की नजरे मे मोटे लण्ड पर जम गयी और उनकी सासे तेज हो गयी

मैने अपना लण्ड से हाथ हटा कर पहले उन्के गुदाज गाल पर हल्के से चपत लगायी और भी उन्के दोनो गालो को निचे दबाते हुए कबूलवाने लगा - बोलो ना भाभी

भाभी नशिलि आन्खो से मेरे आंखो मे देखी और मुस्कुरा कर बोली - हा इसी को तुम्हारी बहिन के बुर मे डलवाउन्गी

मै और भी उत्तेजित हो गया और सामने आके अपना लण्ड भाभी की चुत पर लगाने लगा - और मै अगर इसमे डाल दू तो

भाभी अपनी चुत के पास मेरे लण्ड की सख्ती मह्सूस कर सिहर गयी और गहरी सासे लेने लगी ।

भाभी की सहमती तो कबकी मिल चुकी थी ,,बस धक्का लगाने की जरूरत थी

मैने अपने हाथ से लण्ड को चुत के मुहाने पर सेट करने के लिए थोडा घुटनो को झुकाया तो उपर मेरे हाथ से भाभी की कलाइया छूट गयी । मगर उन्होने मुझे रोका नही अल्बत्क अपने हाथो से मेरे कंधे थाम कर जांघो को खोल दिया

मै मुस्कुरा कर अपने लण्ड का सुपाडा खोलता हुआ भाभी की गीली चुत के मुहाने पर अपनी गाड़ उचका कर घुसेड़ दिया और फिर उनकी कमर थामते हुए ऐसे ही खडे खडे लण्ड को उन्की बुर मे आधा घुसा दिया ।

भाभी चीखी और सिसकी - अह्ह्ज उम्म्ंम

मैने उनकी साडी को और उपर करके एक जांघ को पकड कर उठाने लगा

भाभी - अह्ह्ह न्हीईई दर्द हो रहा है ,,नस अकड जायेगी रुको उम्म्ंम्म्ं

मै रुका और वो मुझसे अलग होकर एक नजर किचन से बाहर बरामदे की ओर मारा और मुझे पकड कर ऐसे ही खुले लण्ड के साथ उपर ले जाने लगी ।

मै खुश था और अपना लण्ड सहलाता हुआ उपर के हाल मे गया और पीछे से उनको दबोच लिया

भाभी वापस से सिसकिया लेने लगी ।

मैने साडी उपर से हटा कर ब्लाऊज के उपर से उनकी चुचिया मसलते हुए- अह्ह्ह भाभी कितना मिजवाति हो चुचि अपना ,अह्ह्ह मस्त मुलायम है

भाभी चुप रही और सिसकिया लेते हुए अपनी गाड़ मेरे लण्ड पर घिस्ती रही । मैने एक एक करके उन्के हुक खोल दिये और चुचो को आजाद कर दिया

अह्ह्ह 36DD वो गोल भारी चुचे उम्म्ं हाथो मे नही समा रहे थे ।

मै उन्हे मसलता हुआ भाभी के कानो मे - लग रहा है कमलेश भैया के अलावा और भी कोई रगड़ रहा है इन्हे

भाभी कसमसाई और बोली - हा है कुछ बहिनचोद ,,अहहहहह सीईई ओह्ह्ह्फ्फ्फ्फ

मैने भाभी की बात पूरी होने से पहले ही उन्हे घूमाया और मुन्क्के जैसा निप्प्ल मुह मे घूलने लगा ।

भाभी मेरे सर को अपने सिने पर दबाने लगी।

मै बारी बारी उनकी दोनो चुचिय मुह मे लेके चुसने लगा । भाभी की मदहोशि बढती ही जा रही थी उनका हाथ मेरे लण्ड को भीच रहा था

भाभी की गहरे भूरे रंग की घुंडी पर जीभ फ्लिक करते हुए मै उनकी चुचिया मसलता हुआ - अह्ह्ह भौजी कितनी रसिली चुची है उम्म्ंम्ं ,,, नीचे जाओ ना

भाभी मुस्कुराइ और उसी हाल मे एड़ियो के बल बैठते हुए लंड को मुह मे भरने लगी

मै उन्के सर को अपनी लण्ड पर दबाते हुए एडिया उचकाने लगा और लण्ड को गले तक ले जाने लगा ।

भाभी के मुह मे मेरा लण्ड और तन गया था भाभी के गले की घंटी पर जैसे ही मेरे सुपाडे ने घिसा ,,भाभी खासने लगी और ढेर सारा लार मेरे लण्ड पर उडेलने लगी ।

फीर अच्छे से उसे मेरे लण्ड पर घिसा और लण्ड को चिकना करने लगी । मै बहुत बेताब हुआ जा रहा था तो फटाक से भाभी को पकड़ कर हाल मे रखी हुई चौकी पर लिटा दिया और जान्घे खोलते हुए साड़ी कमर तक उठा दी ।

काले घुघराले बालो के बिच भाभी के चुत का गोरा क्लिट मोटी जैसे चमक रहा था ,,मैने अपना हाथ आगे बढाया और चुत के सामने से बालो को हटाया फिर उपर की चमडी को उंगलियो मे गुथने लगा ।

भाभी पागल सी होने लगी मैने उनकी टांगो को खिच कर अपना लण्ड चुत के मुहाने पर लगाया और बोला - क्या हुआ भौजी अब नही दोगी गाली हम्म्म

भाभी मुस्कुराई और धीमे से बोली - तोहार बहिन चोदो

मै मुस्कुराया और लण्ड को एक झटके से उनकी चुत मे धकेलता हुआ - क्याआआ

भाभी सिसकी और थोडा दर्द भरे आवाज मे - अह्ह्ह तोहरी बहिनीया चोदो उम्म्ंम अह्ह्ह

मुझे जब भी भाभी गाली देती मै और भी उत्तेजित मह्सूस करता और लण्ड को बडी बेरहमी से रगडता हुआ पुरा जड़ मे घुसेड़ दिया और मुस्कुरा कर उनकी आंखो मे देखता हुआ - का बोली हिहिहिही

भाभी दर्द से छ्टपटा रही थी मगर मेरे छेड़ने पर वो अब शर्मा भी रही थी तो हस कर - अह्ह्ह तोहर बहिनचोदो रुक काहे गये ,,,पेलो ना अह्ह्ह नही तो उम्म्ंम्म्ं

मैने उनकी टांगो को थामा और धक्का लगाता हुआ - क्या नही तो ,,बोलो उम्म्ंम बोलो ना

भाभी सिस्कते हुए - अह्ह्ह नही तो अह्ह्ह्ह मा ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह सीईईई ओफ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह

मै लगातार धक्के लगाते हुए उनसे कबूलवाये जा रहा था और भाभी सिसकिया लिये जा रही थी ।

भाभी - उफ्फ्फ्फ्फ अह्ह्ह्ह माआआ इह्ह्ह्ह ऐसे ही पेलो अह्ह्ह मिलेगी बाबू सोनल भी मिलेगीयह्ह्ह्ज उसकी बुर भी ऐसे ही चोदना अह्ह्ह्ह माआ

मै दीदी के नाम पर और भी जोश मे आया और लम्बे लम्बे धक्के

लगाने लगा ।

भाभी भी उत्तेजीत होकर अपनी चुत को मेरे लण्ड पर कसती हुई शब्दो को पीसते हुए बोली - अह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम और कस से पेल ना बहिनचोद ,,,बहुत मजा आ रहा है दीदी के नाम पर चोदाने पर ह्न्मममं अह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्म्ंम्ं और तेज्ज्ज अह्ह्ह

मै उनकी बातो पर मुस्कुराया और अपना धक्का जारी रखा

भाभी सिस्क्किया लेती हुई मुझे और जोशीला करने मे लगी थी - अह्ह्ह हा बाबू और पेल्ल अह्ह्ह बहिनचौद ओह्ह्ह मस्त चोद रहा हौ आह्ह

मै - भाभी सच सच बताना ,और किसका लण्ड घोट चुकी हो उम्म्ंम्ं

भाभी कसमसा कर - आह्ह तुमको क्या लगता है अगर लण्ड मिलता तो ऐसे जन्गल रखती मै अह्ह्ज उम्म्ंम्ं बहुत दिनो बाद दमदार मुसल मिला है अह्ह्ह्ह और एज्ज्ज्ज मेरा होगा उह्ह्ह्ह राज्ज्ज और तेज बाबुउऊ उम्म्ंम

मै अपनी धक्के को तेज करता हुआ -अह्ह्ह फिर ये आपके चुचे इतने मोटे कैसे उम्म्ंम

भाभी मेरे सवाल का जवाब देने से पहले ही झडने लगी ,,उनकी चुत का गरमा गरम माल मेरे लण्ड की चमडी पर बघरने लगा,,,मै और तेज से थपाथप उनकी चुत मे पेलता रहा और मै भी झड़ने क्र करीब ही था

मै उतेजीत होकर - अह्ह्ह भाभी बताओ ना ,,आपके चुचे बडे कैसे हुए फिर

भाभी अब झड़ चुकी थी तो अपने होश मे थि और मुस्कुरा कर अपने चुत को मेरे लण्ड पर कस्ते हुए - आह्ह बाबू ये गाव है यहा कि होली मे बुढे जवां सब देवर हो जाते है ,,,अब कितनो को रोका जाये चोली रग्ने से ,,,, दो दिनो मे लाल कर देते है सीई अह्ह्ज और फिर ....

मै भाभी की बाते सुन कर कल्पना करने लगा कि कैसे होली के दिनो मे गाव के मनचले भाभी के ब्लाउज मे हाथ घुसा का उनकी चुचो की घुंडीया घुमाते होगे ।

मै इस कल्पना मात्र से ही पागल हो गया और जोश से भाभी की एक टांग उठा कर धकाधक पेलने लगा - अह्ह्ज फिर क्या भाभी ???

भाभी मेरे तेज धक्को को सहती हुई सिसकी - वोहहह अह्ह्ह वो बाकी की कसर तुम्हारे भैयाआअह्ह पूरी कर देते है अह्ह्ह उम्म्ं मा

मै अब झड़ने के करीब था तो फटाक से लण्ड निकाला और नसो दबाव बना कर लण्ड सहलाने लगा ।

भाभी फौरन सरकती हूई चौकी से निचे आ गयी और मेरा लण्ड पिचकारी छोड़ी

अह्ह्ज भाभी अह्ह्ह आह्ह

मै एक साथ सारा माल भाभी के मुह पर मारा बाकी कुछ चुचियो पर गयी

बचा कुचा भाभी ने निचोड लिया । थोडी देर बाद भाभी ने खुद को साफ किया और साडी सही करने लगी ।

मै उनके पीछवाड़े पर पन्जा कसता हुआ - तो भाभी अब क्या ख्याल है मेरी दीदी के बारे मे हिहिही।

भाभी शर्मायी और बोली - वो मै चोदवा के रहूँगी हिहिही ,,अच्छा ये बताओ यहा कैसे आना हुआ

मै हस के - वो मौसी के यहा शादी की मिठाईया आयी थी वही देने आया था ।

फिर हम दोनो निचे आये और उन्होंर मुझे पानी लाकर दिया ।

मेरा मन एक राउंड और करने को था लेकिन भाभी ने मना कर दिया कि फिर कभी और मुझे भी दुकान पर जाना था ।तो मै वापस घर आ गया ।

दिनभर दुकान मे व्यस्त था और शादियो की सीजन चल रहा था तो फुरसत नही मिली । दोपहर मे 2 बजे के करीब सरोजा का फोन आया लेकिन मै दुकान मे व्यस्त था तो फोन उठा कर उन्हे फिर कभी आने का बोला और वो मेरी मजबुरी को समझकर हा बोल दी ।

शाम को 5 बजे के करीब जब थोडा दुकान मे काम हल्का हुआ तो अनुज ने थोडा टहलने के लिए पहल की फिर मैने उसे भी जाने दिया कि छोटा है घूम टहल लेने दो ।

फिर मै अपने कामो मे लगा रहा ।

जारी रहेगी
 
नया अपडेट पोस्ट कर दिया है दोस्तो

पढ़ कर अपनी राय जरुर दे कि कहानी कैसी चल रही है ।

आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा
 
अपडेट 129


पिछले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा राज ने मस्ती ही मस्ती मे पंखुडी भाभी को पेल दिया और वही अनुज शाम को राहुल से मिलने के लिए निकल चुका है ।

अब आगे



लेखक की जुबानी


अनुज शाम को 5बजे के करीब अपने चाचा के यहा पहुचा और अंदर घर मे बैठा हुआ था ।

कारण था उसकी चाची ने उसे रोक लिया था कि चाय बना रही हू पी कर ही जाये ।

इधर जबतक किचन मे चाय बन रहा था तब तक अनुज की निगाहे घूम रही थी घर मे ।

बार बार उसकी नजर निशा पर जा रही थी जो सिलाई के काम कर रही थी । अनुज की नजरे टीशर्ट मे उभरे उसके चुचो पर थी ।

तभी वहा राहुल आता है और अनुज सावधान हो जाता है ।

अनुज राहुल को निशा से मोबाइल लेने का इशारा करता है ।

राहुल अपनी दीदी के पास जाकर - दीदी अपना मोबाइल देना

निशा जो कि सिलाई मशीन पर काम कर रही थी - क्या करेगा तू मोबाइल

राहुल थोडा हिच्का - वो हम लोग अभी टहलने जायेन्गे ना तो ऐसे ही गाना सूनने के लिए ।

निशा ने राहुल का उतरा हुआ चेहरा देखा तो हस पडी और बोली - ठिक है लेजा ,,,लेकिन ज्यादा डाटा खर्च मत करना ,,मेरा सीरियल बाकी है अभी आज का ।

राहुल चहक कर - नही करूँगा दीदी पक्का ।

फिर निशा ने उसे मोबाइल दे दिया जिसे राहुल ने सम्भाल कर अपने पास रख लिया ।

इधर कुछ चाय चिप्स के साथ अनुज की चाची हाल मे आई और सबने नासता किया ।

वापस जब चाची किचन मे जाने लगी तो अनायास अनुज की नजर अपनी चाची के मतकते कूल्हो पर गयी लेकिन तुरंत उसने नजरे फेर ली और मन मे खुद को समझाने लगा कि ये गलत है ।

थोडी देर बाद राहुल और अनुज निकल गये मंदिर की ओर टहलने ।

मंदिर से थोडा आगे जाकर चमनपुरा के छोर पर दुसरे गाव से जोडती हुई एक पुलिया पर दोनो बैठ गये ।

वहा आवागमन बहुत न्यून था इसिलिए उन्होने वो जगह चुनी और अनुज ने राहुल को मोबाइल खोलने को कहा ।

राहुल - हा लेकिन वो तेरी प्रोब्लम कैसे चेक करे ।

अनुज संसय भरा विचार रखता हुआ - गूगल से पूछे

राहुल उलझे हुए स्वर मे - मतलब

अनुज उसके हाथ से मोबाइल लेके - अबे यार वो टीवी मे बताता है ना गूगल से पुछो , बोलने से सब होगा

राहुल को हसी आई - अरे हा !! खोल खोल .. हिहिहिही

फिर अनुज ने मोबाइल मे गूगल सर्च मे जाकर माइक वाला बटन दबाकर- खडे लण्ड को कैसे शांत करे ।

अनुज की बात पर राहुल हसा ,,मगर जल्द ही वो चुप हो गया क्योकि वहा साइकिल से कोई गुजर रहा था । अनुज ने भी फौरन मोबाइल की स्क्रीन उल्टी कर दी ।

साइकिल वाले के जाते ही राहुल जिज्ञासू होकर - देख देख आ गया होगा ।

दोनो ने मोबाइल सामने किया सामने अनुज के सवाल के सन्दर्भ मे काफी साइट से जुडी खबरे थी । कुछ तो न्यूज़ चैनल वालो ने भी इस चीज से जुड़े आर्टिकल लगाये थे ।

अनुज ने एक एक करके बुदबुदाते हुए पढना शुरु किया

"लिंग को ज्यादा समय कैसे खड़ा रखे " , ये नही यार

" ज्यादा समय तक खड़ा रखने के घरेलू उपाय " धत्त ये भी नही

" सुबह सुबह लिंग खड़ा क्यू होता है ? जाने " , ये भी नही

"उत्तेजित लिंग को शांत करने के लिए युवक ने लगवाये इन्जेक्शन - अब नपुसंकता से परेशान " नही नही ये नही करना है यार

"योनि मे ज्लदी झड़ने से परेशान हो तो ये करके देखो " अबे यार ये सब क्या दिखा रहा है ।

अनुज परेशान होकर - यार इसमे नही दिखा रहा है

राहुल उसके हाथ से मोबाइल लेके - ला मुझे से मै ट्राई करता हू ।

राहुल फिर से माइक से बोलत है - लण्ड की गरमी कम करने के उपाय

फिर उसे भी वैसे ही मिलते जुलते आर्टिकल्स दिखे तो वो खीझ कर - यार तू हिला ले ना ,,फाल्तू का परेशान है

अनुज - न न नही नही भैया कहता है कि उससे बाल झड़ते है

राहुल चौक कर - अच्छा तो राज भैया को ये नही बताया कि तू किसी को पेल चुका है ।

अनुज डर से - नही , कही वो गुस्सा होकर पापा को बोल दिया तो और उसने वैसे भी इनसब से दुर रहने को बोला है मुझे

राहुल - यार लेकिन मैने तो नही सुना कभी ये बाल वाल झड़ते है ,,अगर झड़ते तो चोदने से भी झड़ते ना । निकलता तो बीज ही है ना

अनुज थोडा सोचमे पड गया और बोला - हा लेकिन फिर अगर कही लण्ड की नस खिच गयी तो हिलाते हुए

राहुल - अबे तो गूगल से पुछते है ना

अनुज हिचकते हुए - अच्छा ठिक है तू पुछ

राहुल मुस्कुरा कर गूगल से - लण्ड हिलाने का सही तरीका

फिर उन्के सामने हस्तमैथुन से जुडी काफी सारी खबरे आ गयी ।

अनुज ने मोबाइल स्क्रीन पर नजर डाली और एक डॉक्टर के लिखे हुए आर्टिकल को क्लिक किया ।

अनुज - इसे देखते है ,,ये डॉक्टर है गलत नही बतायेगा

राहुल ने भी मुस्कुरा कर सहमती दिखाई

फिर दोनो ने आर्टिकल को मन मे पढना शुरु किया

- हस्तमैथुन एक नेचुरल क्रिया ,,अमूमन हर कोई जीवन मे हस्तमैथुन करता ही है । आपके मन में काफी सवाल होंगे और काफी कुछ सामाजिक अफवाहो को सुन कर कुछ डर भी होगा । मगर एक डॉक्टर होने के नाते आपको यकीन दिलाता हू कि हस्तमैथुन से कोई नूकसान नही है अगर इसे कुछ तय सिमा और कुछ सावधानियो के साथ किया जाये । एक बिल्कुल बिना किसी पार्टनर के सेक्स करने जैसा है । जो जो सावधानिया आप सेक्स के लिए बरतते है वही आपको हस्तमैथुन के लिए करनी है। जैसे कि पहले कोई जल्दीबाजी ना करे । किसी अच्छे चिकनाई का प्रयोग करे ,,तेल घी या लोशन । बिना चिकनाई के करने से अपने चमडी मे घर्षण होगा और लिंग की चमडी छील सकती है ,जिससे आगे और भी बिमारियो का डर होता है ।

तो सबसे पहले इत्मीनान से अपने लिंग मे चिक्नाई करे और फिर जिस किसी भी महिला को लेके आपकी उतेजना है उसके बारे मे सोचते हुए ,उससे अपनी कलपना मे शारिरीक सम्बंध बनाते हुए धीरे धीरे चरम तक जाये और झड़ने के बाद लिंग को हल्के गुनगुने पानी से धुले ,,ठन्डे पानी से धुलने की गलती ना करे क्योकि झड़ने के बाद भी आपके लिंग मे खून का प्रवाह कुछ मिनटो तल तेज होता है और ऐसे मे ठंडा पानी डालने से लिंग की नसे विकृत हो सकती है । हा अगर आपके पास कोई कल्प्ना के लिए कोई महिला नही है और आप फिर भी खुद को उत्तेजित महसूस करते है तो आप किसी सेक्स साइट पर जाकर पोर्न वीडियो देख के या नेट पर कोई सेक्स कहानी पढ कर भी अपनी कामग्नी को शांत कर सकते है । लेकिन ध्यान रहे इसे आदत ना बनने दे ।


पूरी आर्टिकल पढने के बाद दोनो के मन में काफी जिज्ञासाये उठ रही थी और खुशी इस बात की थी कि हस्तमैथुन से उनका डर खतम हो गया था ।

राहुल हस्कर - देखा तु फाल्तू का डर रहा था ,,अब करना क्या है रोज रात मे मस्त तेल लगा कर उस लड़की के बारे मे सोचना और हिला कर सो जाना हिहिहिही

अनुज थोडा खुश हुआ और हा बोला फिर दोनो निकल गये अपने अपने घर की ओर ।



राज की जुबानी


शाम को साढ़े 6 बजे तक अनुज वापस उस वक़्त मै चंदू से बाते कर रहा था ,,वो मेरे दुकान पर ही आया था ।

अनुज - भैया वो कोकोनट आयल कहा रखा है

मै - क्या हुआ

अनुज -वो मेरे तेल की शीशी खतम हो गयी है

मै हस कर - अबे गर्मी मे तेल कौन लगाता है बे हिहिहिही

अनुज हिचक कर - अरे भैया वो बस हल्का सा बालो मे लगाने के लिए,,

फिर मैने उसे कोकोनट आयल की एक मीडियम साइज़ की शीशी निकाल के देदी ।

फिर वो घर जाने को बोला और मैने उसे जाने दिया क्योकि मै और चंदू कुछ खास बाते कर रहे थे ।

अनुज के जाते ही ...

मै - हा तो हम कहा थे

चंदू - अरे मै तुझे ठाकुर के यहा आज वाली बात बता रहा था ।

मै - हा हा बोल

चंदू - भाई आज गजब हो गया ,,एक तो मालती से बात हुई दोपहर मे हिहिही

मै चह्का - अबे सच मे ,,फिर फिर बोल ना

चंदू खुशी जाहिर करता हुआ - भाई घर पर वो हाल्फ जान्घिये और टीशर्ट मे थी ।

मै हस कर - अबे शॉर्टस कहते है उसको ह्हिहिही

चंदू - अरे जो भी हो ,,लेकिन क्या मस्त चिकनी टाँगे थी यार भरी हुई सीईई इतनी गोरी जैसे कुल्फ़ी उम्म्ंम

मै हस कर - अरे लेकिन तु तो गोदाम पर काम करता है ना

चंदू - हा ,,वो क्या हुआ आज दोपहर मे छोटे बाऊसाहब (संजीव ठाकुर) नही थे तो मुझे पापा ने चेक लेके घर मे भेज दिया कि बड़े बाऊसाहब ( राजीव ठाकुर) से दस्तखत करवा लू ।

मै उत्साही होकर - फिर फिर

चंदू- भाई फिर मै घर के अंदर गया और बाऊसाहब को आवाज दी तो मालती बाहर आई और वो मुझे देख कर पहले सोच मे पड़ गयी । फिर मैने उसको लपेटा

मै अचरज से - अच्छा वो कैसे ??

चंदू हस कर - अबे इतनी फिल्मे देखी है लडकिया पटाने के लिए तो उसे यकीन दिलाया मैने की मै खाली समय मे घूमने से अच्छा पापा का हाथ बटाना जरुरी समझा और फिर चंपा की शादी के लिए पैसा जुटाने का बहाना बना दिया ।

मै - हिहिहिही फिर

चंदू - फिर क्या ,,वो मुझसे प्रभावित हो गयी कि मै अपनी जिम्मेदारी समझता हू और अच्छा लड़का हू । मेरे लिये इतना ही काफी था उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए हिहिहिही

चंदू - फिर हमने पढाई के बारे मे बाते की और मुझे बिना चेक साइन करवाये वापस आना पड़ा क्योकि बडे बाऊसाहब भी नही थे घर ,लेकिन शाम को

मै उत्सुक होकर - शाम को क्या???

चंदू - यार शाम को मालती खुद टहलते हुए आई थी गोदाम में काम देखते हुए और मै मौके से काम मे लगा हुआ था ,,

मै उसकी उतावली भरी बाते बडे गौर से मुस्कुरा कर सुन रहा था ।

चंदू चहक कर एक गहरी सास लेते हुए - भाई भाई भाई सीईईई अह्ह्ह

मै हस कर - अबे क्या हुआ आगे बोल

चन्दू - भाई वो मुझे बडे गौर से देखे जा रही थी हिहिही ,,,लग रहा है अब काम बन जायेगा

मै भी खुश होकर - हा लेकिन कोई जल्दीबाजी या लापरवाही मत करना । नही बाऊसाहब को पता चला तो गाड़ फ़ाड देंगे तेरी हिहिहिह

चंदू - हा भाई जानता हू मगर क्या करू "इश्क है तो रिस्क है "हिहिही

फिर ऐसे ही हमारी बाते चलती रही फिर मै दुकान बन्द करके अपने चौराहे वाले घर के लिए निकल गया ।

रात मे खाना खाने के बाद मै वही रोज का रूटीन मा और पापा के साथ पुरा करता हुआ सो गया ।



लेखक की जुबानी


अगले दो हफते तक राज का जीवन समान्य रहा । बिच मे वो सरोजा से दो एक दिन मिला और थोडी मस्ती की । इधर चंदू ने धीरे धीरे मालती से नजदीकीया बढानी शुरु कर दी और वो कामयाब भी होने लगा ।

वही अनुज रोज रात मे पल्लवि के बारे सोच कर हस्तमैथन करके खुद को शान्त करता । मगर धीरे धीरे वो नीरस होने लगा था क्योकि जब भी वो पल्लवि को लेके सोचता तो यही कल्पना करता कि अगली बार वो मिलेगी तो इस तरिके ऐसे ऐसे उसे चोदना है । मगर झड़ने के बाद जब वो होश सम्भालता तो उसे समझ आता कि वो फाल्तू मे उसको लेके परेशान है वो कभी नही मिलने वाली ।

इसिलिए एक शाम मे राहुल के साथ उसके दीदी का मोबाइल लेके पुलिया पर चलने को कहा ।

राहुल - क्या हुआ भाई ,,तू परेशान है

अनुज उखड़ कर - याररर अब हिलाने मे मजा नही आ रहा है बोर हो गया हू पल्लवी के बारे मे सोच के ,,क्योकि वो अब कहा मिलने वाली है ।

राहुल - हम्म्म मतलब तु कुछ नया ट्राई करना चाहता है

अनुज - हा यार , लेकिन क्या करु अब किसे सोचू ,,इसिलिए मैने तुझे मोबाइल लेके आने को बोला था ,,चल इसमे कुछ खोजते है ।

राहुल - अरे उस दिन वो डॉक्टर लिखा था ना कि सेक्स वाली वीडियो भी देख सकते है

अनुज - हा लेकिन रात मे मेरे पास मोबाइल कहा है ,

राहुल - अरे तो इसमे देखते है ना अभी,,मेरा तो मूड भी हो गया है भाई सोच कर । देख लण्ड खड़ा हो रहा

अनुज - अच्छा ठिक है लेकिन आवाज कम रखना

फिर राहुल ने नेट पर जाकर सेक्स वीडियो सर्च किया और एक साइट खोला ।

राहुल - हा अब बोल सर्च मे क्या डालू

अनुज राहुल को देखते हुए - मतलब तू पहले भी देख चुका है

राहुल खिखी करके हसा - अरे तु बोल ना

अनुज - यार मुझे तो बडी दूध वाली औरते पसंद है और मै तो ऐसे ही लडकी से शादी करूँगा जिसकी दूध बडे हो ,,उनको रोज रात मे चुसुंगा

राहुल - हा यार मोटी चुचिया तो मुझे भी पसंद है ,,रुक वही डालता हू

फिर राहुल ने सर्च मे BIG BOOBS डाला और एक एक करके काफी सारी वीडियो सामने थी लेकिन अनुज ने जैसे ही उन वीडियो के टाईटल पढे वो राहुल से नजरे फेरने लगा ,,क्योकि ज्यादातर वीडियो मे BIG BOOBS MOM , MOM'S BIG BOOB , SON FUCK BIG BOOBY MOM , BIG SISTER'S BOOBS ,, BROTHER FUCKS WITH BIG BOOBS SISTER ऐसे ही tittle थे ।

अनुज - ये ये कैसा दिखा रहा है यार ,,नही नही ये नही देखना दूसरा देख

राहुल अनुज को चिल करता हुआ - अरे भाई तु टाईटल मत देख ,,वीडियो बहुत मस्त है । पहले मै भी नाम देख के बदल देता था लेकिन मुझे बडी चुची वाली ही वीडियो देखनी होती थी तो यही सब ही आ रही थी ।

राहुल - अरे तू देख ना ,,ना मजा आये तो रहने देना

फिर राहुल ने एक वीडियो शुरु किया और वीडियो चलने लगा - सौभाग्य से उस वीडियो मे मा बेटे का सेक्स ना होकर , एक औरत किसी पोलिस अफिसर से चुद रही थी क्योकि उसका चलान कट जाता है ।

अनुज उस पूरी 20 मिंट वीडियो को देखता है और उसको बहुत मजा आता है ।

दोनो के लण्ड तने हुए और चेहरे पर हवस भरी मुस्कान थी ।

वीडियो खतम होने पर अनुज बोला - यार ये वीडियो तो दुसरी निकली , लेकिन इसका नाम तो गन्दा सा था ।

राहुल हस कर - वही तो ना ,,वो क्या है कि आजकल ऐसे वीडियो के नाम लोग जान बुझ कर रखते है ताकि लोग ज्यादा देखे ।

अनुज को थोडा अजीब मह्सुस हुआ कि आखिर लोगो को क्या मजा मिलता होगा मा बेटा और भाई बहन के नाम से सेक्स वीडियो देख कर ।

अनुज - हा लेकिन कौन देखता होगा इन्हे

राहुल - अरे भाई बहुत लोग है जो ऐसे ऐसे वीडियो खोज खोज कर देखते है और अब इंडिया वाले भी ऐसे वीडियो बनाने लगे है हिन्दी मे

अनुज ने राहुल की बात सुनी और मन मे सोचने लगा कि क्या सच मे ऐसी वीडियो होगी और होगी तो कैसी होगी । उसके संवाद कैसे होगे मतलब कैसे एक भारतीय बेटा अपनी मा के साथ उसके लिए पूछेगा ,,एक भाई अपनी बहन से । क्योकि अब तक अनुज ने कभी हिन्दी डायलाग वाले सेक्स वीडियो देखे ही नही थे ।

इधर राहुल ने एक और वीडियो चालू कर दिया और उन्होने उसे भी देखा जो एक teachar और student का था ।

दोनो मस्त हो गये और इधर अनुज ने सोचा कि जब सर्च करने पर कोई भी वीडियो मिल सकता है तो क्यू ऐसे ही वीडियो सर्च करु जो मेरे मतलब की हो । ताकि मुझे ये पारिवारिक वाला वीडियो ना देखना पडे ।

फिर उसने राहुल से मोबाइल लेके BIG BOOBS GIRLFRIEND सर्च किया और अनुज के मन मुताबिक वीडियो आये तो लेकिन suggesation मे girlfriend's mother big boobs भी आ गया ।

अनुज की नजर उस वीडियो पर गयी तो लेकिन उसने नजरन्दाज कर दिया ।

शाम होने लगी तो राहुल और अनुज अपने अपने घर वापस आ गये ।

रात मे खाने के बाद अनुज बेचैन था । बेचैन इस लिए नही कि उसने पारिवारिक वाले वीडियो के बारे जाना ,,बल्कि बेचैनी ये थी कि उसका मन फिर वो गर्लफ्रेंड वाली वीडियो देख कर हिलाने का हो रहा था ।

फिर उसने अपने लिंग पर तेल लगाया और अपनी फ्यूचर वाइफ के बडे चुचो को सोचते हुए लण्ड हिलाने लगा और आज उसे रोज से बहुत ज्यादा मजा आया । उस रात अनुज को बहुत ही शकुन की नीद आई ।

ऐसे ही ये सीलसिला कुछ दिन चलने लगा ,,रोजाना शाम को राहुल मोबाइल लेके आता और दोनो वीडियो देखते । फिर अपने अपने घर वापस आ जाते है । ये चीजे अनुज के साथ साथ राहुल के साथ भी घट रही थी । वो भी रात मे हिलाकर सोने लगा ।

जिससे लगभग रोज रोज ही दोनो मिल कर निशा का मोबाइल डाटा खतम कर देते थे तो बिच बिच मे एक एक दिन निशा गुस्सा कर राहुल को मोबाइल नही देती थी क्योकि बिना डाटा के वो अपनी मनपसंद सिरियल नही देख पाती थी ।

आखिर एक दिन निशा का दिमाग खटका और उसने अपने मोबाइल के डाटा यूज़ को चेक किया कि आखिर ऐसा क्या करते है ये लोग जो मेरा सारा डाटा खतम कर देते है ।

और जब निशा ने पिछले एक हफ्ते का डाटा गूगल से निकाला तो इनकी सारी हकीकत उसके सामने थी । पहले तो वो हसी कि अभी से इनकी ज्वानी फूट गयी पता नही नुनी लण्ड हुआ भी या नही ।

मगर जब उसकी नजर फैमिली सेक्स वीडियो पर गयी तो वो दहक गयी कि ये दोनो भी आगे निकल चुके है ।

इसिलिए उसने तय किया कि अब से वो इनको मोबाइल नही देगी और इस मसले पर राज से बात करेगी ।क्योकि अभी निशा राहुल और अनुज को छोटा ही समझ रही थी क्योकि दोनो थे तो हाईस्कूल और इंटर मे ही ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 130


पिछले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा चंदू मालती के करीब जा रहा है और राज की जीवन थोडा सामान्य रूप ले चुका था । दिन मे दुकान और रात मे पापा के मम्मी की ठुकाई ।

वही दुसरी ओर अनुज और राहुल के कांड की खबर निशा को हो गयी है तो देखते है आगे क्या होने वाला है ।



राज की जुबानी


मौसी के यहा से आये मुझे 3 हफ्ते हो चुके थे और मै एक नोर्मल लाइफ जी रहा था ।

ऐसे ही एक सुबह मै उठा और मैने मेरा मोबाइल चेक किया तो निशा के काफी सारे मैसेज और मिस्काल पड़े हुए थे । उसको मुझसे कोई जरुरी बात करनी थी और आज वो मुझे घर पर बुला रही थी ।

मै भी उसको दोपहर तक आने को बोला फिर नहा धो कर नासता किया । फिर अपने दुकान चला गया ।

दोपहर को जब अनुज खाना खाकर वापस आया तो मै उसे बिठाकर कर चाचा के यहा निकल गया ।

अंदर गया तो चाची से निशा को लेके पूछा

चाची - वो अपने कमरे मे होगी क्या हुआ बेटा

तभी निशा अपने कमरे से बाहर आई - हा मा मैने बुलाया है, वो मेरा मोबाइल थोडा हैन्ग कर रहा है ,,राज को पता है वो ठिक कर देगा

चाची - अच्छा ठिक है बेटा तू बैठ मै खाना लगा देती हू

मै - अरे नही नही मै खा के ही आया हू चाची ,,बस ये काम जल्दी से कर दू मुझे दुकान भी जाना है

चाची - अरे निशा भी पागल है ,,शाम को बुला लेती देखती नही समय नही होता उसके पास

मै हस कर - अरे कोई बात नही आप काम करो मुझे समय नही लगेगा ज्यादा

फिर चाची किचन मे चली गयी बर्तन साफ करनेऔर इधर मै जान छुड़ा कर निशा के कमरे मे गया ।

वहा जाते ही निशा ने पहले दरवाजा बंद किया और हमारी डीप किस्सिंग शुरु हो गयी

2 मिंट बाद मै किसिंग तोड कर हस्ता हुआ - अरे बताओ तो क्यू बुलाया है

निशा गुस्सा दिखाती हूइ - तुम जाओ ,, नही नही तुम जाओ । बडी जल्दी है तो

मै हस कर उसको अपनी बाहो मे भरता हुआ -अच्छा क्या हुआ बताओ ना

निशा इतरा कर - हा नही तो एक तो इत्ने दिन बाद आये तो सीधा काम,, आखिरी बार कब मुझे प्यार किया था याद भी है

मै - ह्म्म्ं तो इसिलिए मुझे बूलाया है ,,लेकिन मेरी जान यहा शुरु हुआ तो हिहिहिही चाचा चाची सब भाग कर आ जायेंगे

निशा शर्मायी - धत्त ,,

मै - हा तो तुम भी तो नही आती हो मुझसे मिलने

निशा - अच्छा ठिक है आऊंगी संडे को सोनल दीदी के साथ

मै - अच्छा तो बताओ काम क्या है

निशा - वो मुझे तुम्हे कुछ बताना है

मै - हा बोलो

निशा - वो क्या है कि अनुज और राहुल ये दोनो पोर्न वीडियो देखने लगे

मै - अरे लेकिन उनके पास मोबाईल कहा है

निशा - अरे मेरी पूरी बात तो सुनो

फिर निशा मुझे बताती कि कैसे बीते एक हफ्ते मे उसके मोबाइल डाटा खतम कर कर के ये दोनो उसकी मोबाईल वापस करते है । फिर निशा मुझे सबूत के तौर पर गूगल डाटा यूज़ की सारी जानकारी दिखाती है । जिसमे उन सभी साइट और टॉप सर्च किये हुए टोपीक्स साफ दिख रहे थे ।

मैने जब सारी डिटेल्स बारीकी से पढी और हाल ही के सर्च टॉपिक को देखा तो वहा भले ही वीडियो फ़ैमिली सेक्स की देखी गयी हो लेकिन सर्च रिजल्ट नोर्मल सेक्स के ही थे ।

मै समझ गया कि इनकी गलती इतनी है कि ये लोग जो खोज रहे वो उन्हे मिल नही पा रहा है और मजबूरी मे इन्हे फैमिली वाले वीडियो देखने पड़ रहे है ।

निशा - क्या हुआ ?? क्या सोच रहे हो ? अब क्या किया जाये ?

मै - देखो फिलहाल इनकी आदत इससे दुर करनी पड़ेगी क्योकि इन्लोगो ने अनजाने मे या मजबूरी मे ही ये वीडियो देखे है क्योकि सारे सर्च रिजल्ट नोर्मल है । ये खोज कुछ और रहे थे लेकिन इन्हे वहा मिल ऐसे वीडियो रहे थे ।

मै - तो अब से इनको मोबाइल मत देना तुम और जरा राहुल पर नजर रखो । मै भी कुछ दिन अनुज पर नजर रख रहा हू । फिर आगे ये क्या प्लानिंग करते है ।

निशा - हमम ठिक है

फिर मै वापस अपने दुकान पर चला गया ।

शाम को अनुज रोज की तरह उसी समय मुझसे घूमने जाने को बोला तो मैने उसे जाने दिया क्योकि मै जानता था कि आज इनकी मंशा पूरी नही होगी ।

और मेरा अनुमान सही निकला । अगले 20 मिंट मे ही अनुज वापस आगया । उस्का चेहरे पर उदासी साफ दिख रही थी ।

उसका मन नही लग रहा था तो वो चौराहे पर चला गया । क्योकि मै जानता था कि अनुज कुछ भी करेगा लेकिन अपने घर वालो को लेके गलत विचार नही लाएगा मन मे ।

रात होने लगी तो मै भी दुकान बन्द करके निकल गया चौराहे पर । मैने तय किया कि अब से रात मे मा की चुदाई के बाद एक बार छत पर अनुज को देखने जाना है ।

मैने अगले कुछ दिनों तक उसपे नजर बनाई रखी । हर रोज शाम को वो राहुल के पास जाता और वापस निराश होकर आता ।

ऐसे ही चार दिन बीते।

एक शाम वापस आकर उसने मुझ्से कहा - भैया मुझे भी मोबाइल ले दो ना ,, अकेले अच्छा नही लगता

मै - अरे तो मेरा मोबाइल लेले

मैने जान बुझ कर अनुज को ये ऑफ़र दिया और उसने मेरे मन मुताबिक ही रिप्लाई दिया - वो आप रात मे मुझे दिया करो मोबाइल,,मुझे फिल्म देखने का मन करता है और फिर घर मे टीवी भी नही है ।

मैने ऐसी कोई प्रतिक्रिया नही दी कि उसे शक हो और उसे रात मे सोने के समय मोबाइल देने के लिए बोल दिया ।

वो खुश हो गया ।

रात को मै जब घर गया तो पहले फ्रेश हुआ और फिर छत पर जाकर निशा को फोन किया ।

फोन पर

मै - हा हैलो ,,कहा हो अभी

निशा - वो मै खाना बना रही हू क्या हुआ

मै - थोडा अकेले मे आओ कुछ बात करनी है ।

निशा - हा बोलो

मै - देखो आज रात को मै अनुज को मोबाइल दे रहा हू तो तुम फोन या मैसेज मत करना

निशा - अरे लेकिन तुमने तो मना किया था ना

मै - हा , लेकिन मैने कुछ सोचा कि क्यू ना अलग अलग दोनो के विचार देखे जाये ।

निशा - मतल्ब

मै - अरे मै रात मे अनुज को पहले मोबाइल दूँगा तो कल वो राहुल को जरुर बतायेगा । फिर राहुल भी कल तुमसे मोबाईल रात के लिए मागेगा तो तुम उसे दे देना

निशा - लेकिन उस्से क्या फाय्दा

मै - अरे फायदा ये होगा कि हम उन दोनो के अलग अलग विचार जान सकेंगे कि कौन कैसी वाली वीडियो पसंद कर रहा है ।

निशा - हा ये भी सही है । ठिक देखते है कल क्या होता है ।

मैने फिर फोन कट किया और सारे जरुरी कॉन्टैक्ट छिपा दिये और मोबाईल क्लीन करके ऐसा स्पैशल ब्राऊजर इंस्टाल करके अनुज को दिया ताकि अनुज चाह के भी अपनी हिस्ट्री डिलीट ना कर पाये क्योकि उसके फंशन काफी टफ्फ थे ।

फिर रात मे मा और पापा के साथ रोज का खेल चालू रहा मेरा ।

अगली सुबह मै उठा और फ्रेश होकर नासते के टेबल पर बैठा तो अनुज ने मेरा फोन मुझे वापस किया । वो काफी खुश नजर आ रहा था ।

फिर मैने बिना कुछ चेक किये मोबाईल जेब मे रखता हुआ - अरे भाई चार्ज है ना

अनुज - हा भैया सुबह उठकर ही लगा दिया था

मै मुस्कुरा कर नासता करने लगा ।

उसके बाद मै दुकान निकल गया ।

दुकान पर पहुचते ही मैने ब्राऊजर की हिस्ट्री चेक की तो मुस्कुरा उठा । अनुज सच मे मासूम था । मैने सारे recent search चेक किये जिनमे सिर्फ दो ही content सर्च किये गये थे। Big boobs girlfriend, big boobs wife

फिर मैने हिस्ट्री चेक की तो उसमे से एक के बाद एक करके करीब आठ दस वीडियो big boobs aunty से related भी ओपन हुए थे ।

इसमे भी मुझे कोई खराबी नही दिखी ।

मैने वापस से history डिलीट की और सारे recent search को भी डिलीट किया और वापस काम मे लग गया ।

शाम को अनुज रोज की तरह आज भी राहुल से मिलने गया और आधे घंटे बाद वापस आकर आज के लिए भी मोबाईल मागा तो मैने उसको हा बोल दिया । वो वापस घर चल गया ।

इधर अनुज के जाने के बाद से मै निशा के फोन का वेट करने लगा ।

रात होने लगी लेकिन निशा का फोन नही आया तो मै दुकान बन्द करके चौराहे वाले घर के लिए निकल गया ।

घर पहुचने से पहले ही निशा का फोन मेरे पास गया ।

फोन पर

निशा - हा राज जैसा तुमने कहा था ,, आज राहुल ने रात के लिए मोबाइल मागा ये कह कर की दीदी आपका सीरीयल शाम को खतम हो जाता है तो मुझे रात मे फिल्म देखने के लिए देदो मोबाइल

मै - हा फिर ,तुमने हा कहा ना

निशा - हा बोल दिया है

मै - ठिक है फिर मै तुम्हे एक ब्राऊजर का लिंक देता हू उसे डाउन्लोड करके उसमे अपना gmail लिंक करो ।

निशा - अरे मेरे मे गूगल है ना

मै - अरे सुनो तो पहले

निशा - हा बोलो

मै - इस ब्राऊजर का फंशन ऐसा है कि इसकी डाटा डिलीट करना बहुत कठिन है तो राहुल रात मे क्या देख रहा है ये हम सुबह मे पता कर सकते है ।

निशा - ठिक है तुम वो लिंक भेज दो ,मै वो डाउन्लोड कर लुन्गी । मुझे खाना बनाना है बाय

मै - हा बाय

फिर मैने फ़ोन रखा और वो ब्राऊजर का लिंक निशा को भेज दिया ।

फिर वही रोज की तरह खाना खाने के बाद मोबाइल अनुज को दिया और मम्मी पापा के साथ मस्ती ।

मुझे बस सुबह का इन्तजार था क्योकि अगले दिन संडे था और आज निशा यही चौराहे पर आने वाली थी ।

मै सुबह दुकान पर आ गया लेकिन दोपहर मे अनुज को बिठा कर चौराहे वाले घर पर निकल गया ।

खाने के बाद मै उपर सोनल दीदी के कमरे मे गया जहा सोनल और निशा अमन से बाते कर रही थी ।

मुझे सबसे पहले निशा का मोबाइल चेक करना था तो मै सीधा उस्से पुछ लिया - अरे निशा दीदी अपना मोबाइल देना

निशा मेरे मुह से दीदी सुन कर मुस्कुराई फिर मुझे मोबाइल देदी । चुकी सोनल अमन के साथ वयस्त थी तो उसने इस बात पर कोई गौर नही किया कि मै निशा का मोबाइल क्यू ले रहा हू ।

मै फटाफट ब्राऊजर खोलकर history चेक की और resent search भी देखे वहा राहुल ने teacher student sex video , aunty big boobs सर्च किये थे । हिस्ट्री मे कुछ इन्ही सबसे से related video थे और कुछ big boobs mom वाले वीडियो भी देखे गये थे । लेकिन उन्हे सर्च नही किया गया था ।

मै संसय मे खड़ा हुआ दिमाग पर जोर दे रहा था कि आखिर कैसे पता किया जाये कि इन दोनो के दिमाग मे क्या चल रहा है ।

मेरा सारा ध्यान मोबाईल मे स्क्रोल हो रही वीडियो पर था जिसके थंबनेल देख कर मेरे लण्ड मे तनाव बना हुआ था ।

इधर मुझे पता ही नही चला कि कब सोनल और निशा मेरे पैर के पास घुटनो के बल खड़ी हो गयी और मेरे जांघो को सहलाने लगी ।

मुझे गुदगुदी लगी और जब नजरे निचे गयी थी उनकी नशीली आंखे और वो कामुक मुस्कुराहत देख कर मेरा लण्ड और भी तन गया पैंट मे ।

सोनल ने बडी कामुकता ने मेरी आंखो मे देखते हुए एक हाथ से मेरे लण्ड के उभार को सहलाया । मै पुरा गनगना गया ।

मैने फौरन दरवाजे पर नजर मारी तो देखा वो तो बंद था जबकि मै उसे खोल कर ही आया था अंदर

निशा अपने हाथ मेरे जांघो पर सहला रही ,,मुझे उनदोनो का स्पर्श पिघलाने लगा था । मेरे पैर हिलने लगे थे ।

इधर सोनल ने पहले बेल्ट और फिर मेरा चैन खोलते हुए मेरा पैंट बडी मदहोशि मे निचे किया ।

उसकी ये अदा मुझे पागल बना रही थी ।वही निशा सोनल के कन्धो को चूमने लगी थी उसके जिस्म पर हाथ घुमाने लगी थी जिस्से सोनल की आन्खे और भी कामुक से भर गयी थी ।

फिर जो उसने अंडरवियर के उपर से मेरे लण्ड के उभार को अपने होठो मे भरा ,,,मै पूरी तरह से कपकपा उठा और मेरा लण्ड एक दम रॉड के जैसे तन गया ।

सोनल ने अपनी अदाओ और स्पर्शो का जादू जारी रखते हुए अंडरवियर के उपर से ही मेरे आड़ो को थाम कर उन्हे आगे पीछे करते हुए मेरे लण्ड के उभार पर जीभ फिराते हुए मेरी आंखो मे देखने लगी ।

मुझसे बर्दाश्त ना हुआ और मैने फौरान अपना लण्ड अंडरवियर से बाहर निकाला । फिर सोनल के बालो को पकड कर खीचा एक हाथ से लण्ड को थामे हुए उसके मुलायम होठो पर दरने लगा ।

वो जब भी जीभ से छूती मै काप जाता और फिर मैने अपना लण्ड उसके मुह मे ठूस दिया ।

अगले ही पल सोनल सीधी हुई और मेरे लण्ड को गले तक ले गयी ,,,मै उत्तेजना से भर गया ।

इधर जैसे ही मेरा लण्ड गिला करके बाहर निकाला उसे निशा ने मुह मे भर लिया और गुउउउउउंंंं गुउउउऊऊऊ करके चुसते हुए सोनल को पास किया और फिर उसने भी थोडा चुस कर निशा को वापस से दिया ।

बारी बारी से दोनो ने मेरा लण्ड निचोड़ना शुरु कर दिया और लण्ड चुसते हुए दोनो ने एक साथ प्लाजो कमर से सरकाने लगी ।

मै समझ गया जन्मो की प्यासी ये आज मुझे निचोड कर रहेंगी

इधर निशा की नजर जब सोनल पर गयी कि वो भी अपना प्लाजो खोल रही है तो वो मेरा लण्ड मुह मे भरे हुए ही खड़ी होने लगी और खड़ा होकर जल्दी से पैंटी प्लाजो एक साथ निकालते हुए हसने लगी ।

निशा - दीदी प्लीज मुझे पहले ,,आप तो रोज लेते होगे ना प्लीज

सोनल भी अपनी पैंटी और प्लाजो निकालते हुए - कहा रोज ,, कितने दिन हो गये नही चोदा इसने मुझे

निशा अपनी चुत रगड़ती हुई - अह्ह्ह दीदी मान जाओ ना उम्म्ं देखो बहुत खुजली कर रही है उह्ह्ह्ह सीईई

सोनल उसके पास गयी और उस्के चुत को उपर से सहलाते हुए बोली - अह्ह्ह ला मै सहला दू मेरी गुड्डो उम्म्ंम क्या मुलायं चुत है तेरी है

इधर निशा सोनल के हाथो का स्पर्श अपनी चुत पर पाकर पागल सी होने लगी ,,उसकी एडिया खड़ी होने लगी और उसका सन्तुलन जाने लगा

सोनल ने मुझे आंखो से इशारा किया और खुद निशा को बिस्तर पर गिरा कर उसकी चुत मे मुह लगा दिया ।

मै सोनल को अपने सामाने झुका हुआ पाकर मस्त हो गया और उसके चिकनी मुलायम गोरी गाड़ के पाटो को फैलाते हुए चुत के पास ऊँगलीया फिराई जिस्से क़ो भी कसमसाने लगी ।

मैने सोनल का एक पैर उठा कर बिसतर पर रखा और मुझे चुत मे जाने की जगह दिखने लगी ।

मैने थोडा सा थुक लेके अपने सुपाडे पर लगाया और सोनल की चुत टटोल कर लण्ड को गच्च से उसकी चुत मे उतार दिया

बदलने दर्द और मजे से सोनल ने निशा की चुत को कस के मुह मे दबोच लिया और निशा सिसकी - अह्ह्ह दीदी उम्म्ंम्ं फ्क्क्क अह्ह्ह उम्म्ंम्ं शिटटत अह्हहह फ्क्क मीईई दिदीई ओह्ह माआय्य्य्य उम्म्ंम ओह्ह्ह

इधर मेरा धक्का सोनल की चुत मे जाने लगा और उधर निशा की सिसकिया तेज होने लगी

थोडे समय सोनल को गाड को थामे हूए पेलता रहा । फिर उसे हटा कर अलग किया और निशा की टाँगे खिच के बिस्तर के किनारे लाया ।

निशा मानो फुल तैयारी मे ही आई थी कि आज उसे मुझसे चुदना है इसिलिए उसकी चुत पर एक भी बाल न्ही थे । उसकी गुलाबी पाव सी फुली चुत देख कर मेरा जी ललचा गया और मैने भी झुक कर उसकी जांघो को फैलाया और मुह उसके चुत पर लगा दिया ।

उम्म्ंम क्या खुस्बु थी क्या नरम अह्सास ,,वही निशा मजे से सिसिकने और छ्टकने लगी । बगल मे सोनल जान्घे खोल कर लेती अपनी चुत मसले जा रही थी ।

मै वापस खड़ा हुआ और लण्ड निशा की चुत पर लगाते हुए गचाक से पेल दिया ।

निशा ने मुह पर हाथ रख लिया और सिस्कने लगी ,,काफी समय बाद चूदने से निशा की चुत टाइट थी लेकिन जल्द ही उसने मेरे लण्ड के लिये जगह बना ली ।

वही सोनल अब निशा के बगल मे करवट लेक सोयी हुई उसकी कुर्ती उठा कर ब्रा ने एक चुची निकाल के उसे पी रही थी । साथ ही सोनल के हाथ निशा के चुत के हिस्सो पर रेन्ग रहे थे तो कभी उसके अपने चुत पर

मै जोश मे धकाधक पेले जा रहा था ,

बारी बारी से कभी सोनल तो कभी निशा दोनो ने मुझसे पेलवाया और दो मुझको निचोडने के बाद ही मुझे जाने दिया ।

फिर मै निचे आया तो मा को चेक किया कि वो कहा तो वो अपने कमरे मे सो रही थी ।

मैने राहत की सास ली और अपने दुकान पर निकल गया ।

जारी रहेगी
 
Back
Top