Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 11 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 67

मै और विमला साथ मे निचे उतरे तब तक कोमल अपने रूम मे जा चुकी थी और मनोज विमला के कमरे मे जा चुका था

मै विमला से खुसफुसा कर - जानू कमरे मे तो मनोज होगा ना

विम्ला मुस्करा कर मेरे गालो को छुते हुए - उसे उसके कमरे मे भेज देती हू मेरे राजा हिहिहिही

फिर हम दोनो कमरे के पास गये तो दरवाजा बन्द था लेकिन खिडकी खुली थी और मेरी नजर खिडकी से अंदर गयी तो कमरे मे मनोज बेड पर टेक लगा कर सिर्फ अंडरवियर मे बैठा हुआ था और अंडरवियर के होल से अपना लण्ड बाहर निकाल कर सहला रहा था

इधर विमला दरवाजा खोलने को होती है कि मै लपक कर उसका हाथ पकड लेता हू और उसे अपने पास खिच कर खिडकी से कमरे मे मनोज की करतूत दिखा देता हू

विम्ला पहले गुस्सा करती है लेकिन मेरे वजह से शर्म से मुह झुका लेती है

मै - मौसी ये मनोज तो

विमला गुस्से मे - इसकी आदत से तो मै तंग आ चूकी हू

मै उस्क्क शांत करते हुए - पहले आप उसको उसके कमरे मे भेजिए फिर हम इस पर बाते करते है ।

फिर विमला ने दरवाजा खटखटाया और मनोज ने दरवाजा खोला तो

विमला गुस्से मे - तू जा अपने कमरे मे सो मुझे राज से कुछ जरुरी बाते करनी है औए कल बडे शहर जाना है

मनोज विमला को गुस्से मे देख सहम गया और बिना कोई सवाल जवाब के अपने कमरे मे चला गया

फिर मैने कमरे की खिडकी बन्द की और बिस्तर पर बैठ गया लेकिन विमला के चेहरे पर चिन्ता साफ दिख रही थी ।

मै उसे पकड कर बिस्तर पर बिठाते हुए - मौसी आप परेशान न हो समय के साथ वो समझदार हो जायेगा

विमला चिंता के भाव मे - ऐसा कुछ नही बेटा , तू जो समझ रहा है ये बात उससे कही ज्यादा बड़ी है

मै - क्या बात है मौसी खुल कर बताईये न

विमला झिझक कर - मै क्या बताऊ बेटा , एक मा के लिए ये सब सह पाना बहुत मुश्किल है कि

मै विमला को तसल्ली देते हुए - मौसी आप मुझ पर भरोसा कर सकती है ये बात बस इस कमरे मे रहेगी और हो सकता हो मेरे पास आपकी इस सम्स्या का हल भी हो

विमला - मुझे तुझ पर भरोसा है बेटा लेकिन मै किस मुह से तुझे बताऊ कि मेरा बेटा मेरे मोह मे पड़ गया है और मुझसे संबंध बनाना चाहता है

मै तो इस बात को पहले से ही जानता था लेकिन फिर भी एक बनावटी आश्चर्य भाव लाकर - ये क्या कह रही हो मौसी , मनोज आपके साथ ...

विमला परेशान होकर - पता नही उसे मुझमे क्या दिखता है जो वो ऐसे पेश आ रहा है, तू ही बता मै कौन सा कही की अप्सरा हू जो वो मेरे पीछे पागल हुए जा रहा है

मै - देखिये मौसी मनोज वाली सम्स्या तो हल हो जायेगी लेकिन

विमला चेहरे पर खुशी के भाव लाकर - लेकिन क्या बेटा

मै एक कातिल मुस्कान के साथ- लेकिन मनोज का आपके लिए दीवाना होना जायज है, मै तो सोचता हू कि काश मै आपका बेटा होता तो रोज इस संगमरमरी हुस्न का दिदार कर पाता

विमला मेरे बातो से शर्म से पानी पानी होने लगी और मुस्कराते हुए बोली - अब तू भी शुरू हो गया

मै - अब मेरी जानू है इतनी हसिन तो तारिफ क्यू ना करू हिहिहिहिही

विमला शर्मा कर - बस भी कर भई

मै - ह्य्य्य देखो कैसे शर्म से गुलाबी हुए जा रही है मेरी गुलाबो

विमला के गाल खीचते हुए बोला

विमला मेरे हाथ झटक कर खड़ी हुई और साडी निकालने लगी

मै - लग रहा है आज अपने राजा को खुश करने मे मूड मे मेरी रानी

विमला - बस भी बेटा कितना परेशान करेगा अब

मै - परेशान मै नही आप करने वाले हो

विमला अचरज से - अच्छा वो कैसे

मै - आप कपड़े निकाल रहे हो तो मै परेशान होउँगा ना

विमला हाथ मे उधेड़ी साड़ी लेके मेरी बातो से बेजुबान होकर हस्ते हुए बैठ गयी ।

मै ह्स्ते हुए - क्या हुआ बोलो ना

विम्ला हसते हुए वापस खड़ी हुई और साडी निकाल कर फ़ोल्ड करने लगी - पागल मै साडी निकाल कर ही ऐसे सोती हू और तू ....

मै ह्स्ते हुए - मै क्या आगे तो बोलो

विमला साडी किनारे रख कर घोड़ी बन कर बिस्तर पर चढ़ने लगी और उसी भरी हुई 42 की गाड़ और फैल कर मेरे सामने आ गई

बिस्तर पर चढ़ कर वो टेक लेते हुए पैर फैला कर बैठ गयी

विमला - अब वो लाईट बंद कर और आजा सो जा

मै एक नजर विमला के कसे चुचे ब्लाउज मे देखा और बोला - मौसी कोई तौलिया है क्या

विमला - क्या करेगा अब

मै हस्ते हुए - वो मुझे भी अंडर के कपडे मे सोने की आदत है ना

विमला मुझे छेड़ते हुए - हय्य देखो यहा तो राजा खुद अपनी रानी के सामने शर्मा रहा है

मै ह्स्ते हुए लोवर निकालने लगा - वो बात नही है मेरी रानी

विमला - फिर क्या बात है

विमला की जवानी और उसके साथ चटपटि बातो से मेरा लण्ड टनटना गया था और अंडरवियर मे उभार दिखने ल्गा था मैने अपना टीशर्ट भी निकाल कर सिर्फ अंडरवियर मे आगया और बिस्तर पर चढ़ गया ।

विमला मुझे ऐसे देख कर सच मे झेप सी गयी लेकिन फिर भी मुझे निहारते हुए बोली - अरे ब्ताओगे क्या बात है

मै विमला के गोद मे सर रखते हुए - बात ये है कि कही रात मे इधर उधर हाथ गया मेरी रानी का तो वो डर ना जाये

विमला ह्स्ते हुए मेरे गालो को खीच कर बोली - बहुत बदमाश हो गया है तू , वैसे डरने लायक है भी कुछ या बस फेक रहा है

मै विमला के चुची पर ऊँगली घुमाते हुए - आपके इन मोटे थनो की कसम जान, छुआ तो दुर देख भी लिया तो भी डर जाओगी हाह्हाह्हहा

विम्ला अपनी चुची पर रेग्ते मेरे हाथ पर चट्ट से मारते हुए - बहुत नटखट है रे तू हा

मै - अब अपनी रानी से शरारत ना करू तो किस्से करू

विमला मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए - पगला कही का , काश तू सच मे मेरा बेटा होता

मै हसते हुए - अच्छा है नही हू ,, नही तो मनोज की तरह मुझे भी डाट देती

विमला मेरे बालो मे हाथ फेरते हूए - तू मनोज की तरह थोडी ना वो सब करता

मै ह्स्ते हुए - क्यू मेरे पास भी तो वही है जो मनोज के पास है हाहाहाहाह

विमला मेरे गाल खिचते हुए -

तो क्या तू भी वही सब करेगा हा बदमाश

मै थोडा म्ज़ा लेते हुए - ओह्ह गॉड, आपके रहते मुझे अपने हाथो से करना पड़ेगा , ये दिन आ गये मेरे हिहिहिहिही

विमला - तू ना बस कर अब उठ जा , मुझे सोने दे । मै तुझसे नही जीत सकती हूँ

मै हस कर विम्ला के बगल मे बैठ गया और बोला - लो देखो आपके हाथों का सुख जान कर ये भी जाग गया

मै विमला को अंडरवियर मे बने टेन्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा

विमला की नजर मेरे अंडरवियर के खडे लण्ड पर गयी तो मेरे तरफ घूम कर शरारत भरी अंदाज मे मेरे लण्ड को निहारते हुए बोली - लग तो नही रहा है की खड़ा हुआ है

मै समझ गया विमला मूड मे है और अगर पहल हुई तो आज कुछ ना कुछ हाथ साफ हो ही जायेगा

मै - कहो तो बाहर निकाल दू वैसे भी अन्दर कैद मे फड़फ्ड़ाता बहुत है

विमला मेरे नंगे पेट को सहलाते हुए मादक होने लगी और हाथ को सरका कर मेरे अंडरबियर की इलास्तिक मे फसा कर निचे करने लगी

मै कमर उठा कर झट से अंडरवियर को सरका दिया जिससे मेरा मोटा लण्ड फनफन कर खड़ा हो गया

विमला ने एक नजर मुझे देखा और बोली - सच मे ये तो अन्दर कैद में परेशान था

मै अपना अंडरवियर पैर से निकाल कर विमला की चुचियो पर इशारा करते हुए कहा - कैद मे तो आपने भी इनको रखा है

विमला की सांसे मेरे खडे लण्ड को देख कर उखड़ने लगी थी और वो टकटकी लगाये मेरे लण्ड को निहार रही थी उसे होश ही नही था कि मै अभी क्या बोल गया उसे ।

मै विमला की बेचैनी और बढाने के लिए एक हाथ से लण्ड को थामकर उसकी चमडी को खीच कर मोटे सुपाडे के निचे लाया जिससे मेरे सुरुवाती रस की एक हल्की सी बूद मेरे सुपाडे से निकाली और मैने उसे अंगूठे से सुपाडे पर मल दिया

ये देख कर विमला की सासे और तेज हो गयी और उसकी जीभ उसके सुखे फड़डके होठो पर घूमने लगी

मै विमला की आंखो मे देखकर - आपने मेरी बात का जवाब नही दिया मौसी

विमला मानो किसी गहरे सपने से जगी हो - हह क क कुछ कहा तूमने बेटा

मै ह्स्ते हुए - मै ये कह रहा था कि आपने इन्हे क्यू कैद कर रखा है,,, विमला के चुचे को छुते हुए बोला

विम्ला मेरे स्पर्श से सिहरते हुए - सीईईईई उम्म्ंम्ं वो बेटा बात ये है ना कि अगर इन्हे आजाद कर दू तो ये मुझे बहुत परेशान करते है

मै विमला की तरफ घूम कर उत्सुकता भरे लहजे मे - वो कैसे

विमला शर्म से मुझसे आंखे चुराते हुए - वो बेटा मै कैसे बताऊ अब तुझे

मै शरारती अंदाज मे विमला के ब्लाउज के बटन पर हाथ ले जाकर एक एक बटन चटका कर खोल्ते हुए - रुकिये फिर मै ही देख ले रहा हू कि आखिर कैसे परेशान करते हैं ये

आखिरी के दो बटन पर जाते जाते विमला ने मेरे हाथ को रोक लिया और बोली - नही बेटा , मुझे शर्म आ रही है

मै दुसरे हाथ से विमला के हाथों को अपने हाथ से हटाया जिसका विरोध विमला ने तनिक भर नही किया और आराम से अपने हाथ वापस कर लिये और मदहोशि मे बेड से सर टिका कर मुझे अपना ब्लाउज खोलते देखने लगी ।

मैने बाकी के दोनो बटन खो कर ब्लाउज के दोनो हिस्सो को अलग थलग किया और एक गुलाबी ब्रा मे कैद विमला की चुचिया सास लेती उपर निचे होती दिखने लगी ।

ब्लाउज खुलने के बाद विमला और ढीली पड़ गयी और मै एक एक करके ब्लाउज को उसके कन्धे से उतारने लगा

विमला मेरे इस कृत्य मे साथ दे रही थी और जैसे जैसे मेरे हाथ उसके मुलायम कंधो से ब्लाउज के साइड को हटाते वो सिहरती जाती

आखिरकार उसने अपने गरदन को बेड के पाटी से टिकाते हुए सीने को उचका कर बाजुओ को ढिला छोड दिया और उसका बलाऊज उसकी कमर के पास गिर गया ।

मै वापस से विमला के गोरे और दूधिया संगमरमरी कंधो से अपनी उंगलियो को सहलाते हुए उसके ब्रा के कप के किनारे किनारे फिराने लगा ।

विमला अपने मुलायम मोटे चुचो की पतली चमडी पर मेरे उंगलियों की थिरकन से बेचैन होने लगी थी ।

मै नशीले अंदाज मे - क्या हुआ मौसी

विमला हफते हुए - कुछ नही बेटा ,

मै हस्ते हुए - अब आप इनको खुद खोलोगे या मै हाथ डाल कर निकालू

विमला थोडा खुद को सामान्य करते हुए अपनी पीठ बेड के पाती से लगाकर बोली - नही मै कर लुंगी

फिर विमला वापस से अपने चुचे उठा कर अपने हाथ पीछे ले गयी और ब्रा का हुक खोल दिया जिससे उसके भारी चुचे ब्रा की कप छोड कर झूल गये और ब्रा विमला के सीने पर ढीली हो गयी ।

मै अपने एक हाथ को आगे कर ऊँगली से विमला के ब्रा को पकड कर सामने की तरफ खीचा तो विमला ने अपने दोनो हाथ सीधे कर ब्रा निकालने मे मदद की और वापस बेड के पाटी से गरदन लगाकर तेज सासे लेने लगी।

ब्रा हटते ही विमला के मुलायम गोरे चुचे पर गहरे भूरे रंग की घुंडीया मुझे ललचाने लगी ।

मै विमला के चुचो को निहारते हुए - ये तो एकदम शांत है मौसी , आप तो कह रही थी कि ये परेशान करेंगे

विमला तिरछी नजरो से मुझे देख कर बोली - धत्त बदमाश वो ऐसे थोडी ना होता है

मै - फिर कैसे अब तो बता दो अब तो ये आजाद भी है

विमला मुस्कुराई और विस्तर पर चुतडो को खसकाते हुए लेटने लगी और चुतड खस्काते समय उसकी चुचिया उछल जाती थी

फिर विमला लेट गयी और मेरे तरफ करवट लेली जिससे उस्की चुचिया बेड पर फैल गयी

विमला मुझे अपने बेड पर फैले चुचे दिखाते हुए बोली - देखा ये कैसे फैल गये , ऐसे पूरी रात कभी इधर तो कभी उधर होते रहते है

मै विम्ला के बराबर मे उसकी तरफ करवट लेके लेटते हुए उसकी उपर की चुची को दोनो हाथो से थामा जिससे विमला कापने लगी

मै - ये तो भारी है मौसी , कैसे ढो लेते हो आप दिनभर

विमला हस्ते हुए - धत्त बदमाश ये और भी बडे हो जाये तो भी औरतो को फर्क नही पडेगा

मै हैरान होने के भाव से - इससे भी बडे होते है क्या मौसी

विमला ह्स्ते हुए मेरे गाल खिंच कर - क्यू तेरे रज्जो मौसी का नही देखा

मै ना मे सर हिला कर - नही मौसी

और अपने अंगूठे से विम्ला के निप्प्ल को रगड़ दिया

विम्ला सिस्क कर - अह्ह्ह क्या कर रहा है बदमाश

मै मुस्कुरा कर - कुछ नही ब्स सोच रहा हू

विमला - क्या बोल ना

मै विमला के चुचे पर हाथो को गोल गोल घुमाते हुए - काश सच मे मै आपका बेटा होता तो इन्हे चुसा होता ना , कितने नरम और रसिले है ये

विमला मेरे चेहरे को दुलार कर नशे में बोली - सीईई अह्ह्ह तो बन जा ना मेरा बेटा और चुस के इन्हे

मै विमला के निप्प्ल की टिप पर नाखून से कुरेदकर - क्या मै आपका मनोज बन कर चुसू इसको

विमला मदहोश होकर सिस्कते हुए - आह्ह्ह्ह हा बेटा बन जा ना

मै वापस विमला के दुसरे चुची को थाम कर - मै आपको मा बुलाऊ मौसी

विमला नशे मे आंखे बंद कर मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए - हा मै तेरी मा हू बेटा चुस ले अब अह्ह्ह्ह्ह

मै एक नजर विमला को मदहोश होता देख बोला - देखो ना मा आपका मनोज फिर से आपके दूध पी रहा है

ये बोल कर मैने विमला का एक निप्प्ल अपने मुह मे भर कर चुसने लगा

विमला एक नये रोमांच गनगना गयी और मेरे सर को अपनी चुचियो मे दबाते हुए बोली - अह्ह्ह मेरा बच्चा मनोज , चुस ले अपनी मा के दूध अह्ह्ह बेटा उफ्फ्फ

मै दोनो हाथो से चुचियो को थाम के भर भर कर चुस्ता रहा और धीरे धीरे अपना हाथ विमला के गाड़ पर के जाकर एक मटके को सहलाना शुरू कर दिया

वही विमला अपने बेटे के नाम पर उत्तेजित हुए जा रही थी

मै उनकी मोटी जांघो को थाम कर अपने तरफ खिच कर अपना लण्ड विमला की चुत से सटा दिया जिससे विमला मुझे अपने और करीब करते हुए बोली - अह्ह्ह बेटा क्या कर है ये तू अपनी मा के साथ

मै विमला के रसिले चुचे से मुह हटा कर बोला - वही कर रहा हू मै जिसका मै रोज सपना देखता हू मा

विमला मेरे कमर से नीचे हाथ फेरते मुझे अपनी तरफ खिच कर अपनी चुत पर मेरे लण्ड को सटाते हुए बोली - उफ्फ़फ्फ क्या देखता है बेटा तू

मै विमला की पेतिकोट के अन्दर हाथ डाल कर उसकी मुलायम जांघो को सहलाते हुए उसकी गरदन पर किस्स करते हुए - मै सपने आपको भोगते हुए देखता हू मा

विमला मेरे इस व्यंग से और ज्यादा सिहर गयी और उसने मुझे अपने उपर कर अपने सीने से मुझे चिपकाते हुए मेरे बालो से लेकर कमर तक मदहोशि मे हाथ फेरने लगी

मै अब विमला के उपर आ गया था और उसका पेतिकोट जांघो तक पहुंच गया था ।

वही मेरा लण्ड तन कर विमला की चुत की दिवारो पे पेतिकोट के उपर से टकरा रहा था ।

मै विमला के कान मे - मा सुनो ना

विमला मदहोशि मे मुझे अपने गर्म बदन पर और कसते हुए - हा बेटा बोलना

मै - मै आपको चोदना चाहता हू मा

विमला सिस्क्ते हुए अपनी कमर उचकाने लगी और बोली - उम्म्ंम्ं क्या सच मे तू ऐसा सोचता है मेरे बारे मे

मै विमला के चुचे मस्ल्ते हुए और लण्ड को पेतिकोट के उपर रगड़ते हुए - हा मा , मुझे आप बहुत सेक्सी लगती हो

विमला मदहोशि मेरे कान काटते हुए अपनी कमर उचका कर बोली - तो क्या सच मे मेरा मनोज मुझे चोदेगा

मै विमला के दोनो चुचियो को मसलते हुए - हा मा , मै आपको चोदना चाह्ता हू आपकी चुत मे अपना लण्ड डालना चाहता हू

विमला अपनी कमर उचका कर मेरे लण्ड को चुत पर महसूस करते हुए - अह्ह्ह चोद ले बेटा अपनी मा को अह्ह्ह

मै अब ज्यादा देरी नही करना चाहता था क्योकि अगर एक बार विमला झड़ जाती तो उसकी चेतना लौट आती और फिर मेरा प्लान बेकार हो जाता

मै देर ना करते हुए विमला के पेतिकोट को कमर तक चढाया और अन्दर नंगी चुत पर लण्ड को रगड़ने लगा

मै विम्ला की दोनो जांघो को खोल कर उसको सह्लाते हुए लण्ड विमला की चुत पर रगड़ने लगा

विमला सिस्कती रही और अपनी कमर उचकाती रही

मै अपने लण्ड को विमला के चुत पर सुपाडे को ल्गाते हुए बोला - देखो ना मा आपका मनोज आपको चोदने जा रहा है

विमला गर्दन उपर कर अपने फैले पेतिकोट को समेटते हुए एक नजर चुत मे टिके सुरक लाल मोटे सुपाडे को देखी और वापस बिस्तर पर लेटते हुए बोली - हा बेटा चोद दे अपनी मा की आह्ह

मै अपना सुपादा विमला के चुत के होठो पर ल्गाया और सररर से उसकी पानी से लबालब चुत मे उतार दिया और उसके उपर चढ़ गया

एक दो धक्के ल्गाने के बाद मै विम्ला के उपर लेट गया और उसके नुकीले कडक निप्प्ल वाप्स से मेरे सिने मे चुबने लगे।

मै हलके धक्कों के साथ विमला की चुत की गहराई मे लण्ड को उतारते हुए उसके कान मे बोला - कैसा लग रहा है मा आपको अपने बेटे का मुसल

विमला मेरे संवाद से सिहर कर मेरे लण्ड को निचोड़ते हुए बोली- बहुत ही अच्छा लग रहा है बेटा , अह्ह्ह्ह चोद ले अपनी मा को अब तुझे कभी भी मुठियाने नही दूँगी , रोज तुझे अपनी चुत दूँगी मेरे लाल

मै विमला की बातो से उत्तेजित होकर - अह्ह्ह मा मै भी आपको रोज चोदूँगा

विमला - हा बेटा और फाड अपनी मा की चुत को अह्ह्ह अह्ह्ह ऐसे ही बेटा अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं उफ्फ़फ्फ बहुत दिन बादद मिला है इतना मस्त लण्ड और चोद बेटा अह्ह्ह मै झड़ रही हू मनोज अह्ह्ह बेटा अह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह ह्य्य्य माआअह्ह्ह और तेजज्ज्ज्ज अह्ह्ह्ह

मै विमला की उत्तेजना से बहुत जोश मे आ गया और लम्बे लम्बे जोरदार शॉट लगाने लगा वही विमला मेरे लण्ड को निचोड़ना शुरू कर दी और झडने लगी और मै भी अगले कुछ ही धक्को मे झडने को होने लगा

मै - अह्ह्ह्ह मा अह्ह्ह मै झड़ने वाला हू

विमला - अपनी मा के मुह मे झड़ना बेटे , मुझे तेरा रस चखना है जल्दी आ और झड़ जा अह्ह्ह

मै झट से विमला के भोस्दे से अपना मुसल निकाला और उसके मुह के बगल मे बैठ कर लण्ड को मुठियाने ल्गा

मै - अह्ह्ह अह्ह्ह मा आह्ह लो मेरा पानी अह्ह्ह अह

विमला मेरे आड़ो को सह्लाते हुए - हा बेटा भर दे मेरे मुह मे अह्ह्ह आह्ह उफ्फ्फ आह्ह

मै विम्ला के मुह पर झड़ते हुए - अह्ह्ह्ह येईईईई अह्ह्ह आह्ह्ह लो मा और लो अह्ह्ह अह्ह्ह चुस लो हा ऐसे ही आह्ह अह्ह्ह निचोड लो अपने मनोज का लण्ड आह्ह्ह मा

विमला मेरे लण्ड को निचोड कर बेजान बना कर छोड दिया और सीधा लेट कर हाफने लगी

मै भी उसकी बगल में लेट गया और सांसे बराबर करने लगा ।

जब हमारी सांसे बराबर हुई तो मेरी नजर विमला से मिली तो वो हसने लगी जिस्से मेरी भी हसी छूट गयी

मै ह्स्ते हुए - मा आपको मज़ा आया है ना

विमला - धत्त बदमाश कही का , मै जान गई हू तू एक नम्बर का खिलाडी है इनसब मे

मै ह्स्ते हुए विमला के चुचे दबाते हुए - खिलाडी तो आप भी हो मौसी , इत्ना तेजी से मेरा लण्ड निचोड लिया था

विमला शर्मा के - अब बस कर सब कुछ तो कर लिया और बोल भी लिया

मै विमला को अपनी तरफ खिच कर - और मनोज वाली प्रोब्लम भी दुर कर दी है ना

विमला शर्मा कर - हम्म्म्म लेकिन उसके सामने मै नही कर पाऊंगी राज

मै - मै जानता हू मौसी आप बहुत गर्म औरत हो और आप अपनी जरुरत जानती ही हो कि ये गर्मी आपसे क्या कया करवा सकती है , उदाहरन के लिए महेश को ही लेलो उसने कैसे आपको जिस्म के जाल मे फ्सा लिया था

विमला - हमम सही कह रहे हो बेटा तुम

मै - देखो मौसी मै यही कहूंगा की मनोज आपको वो खुशी देना चाहता है जो आप चाहती है और आपकी जरुरत घर मे पूरी हो जायेगी तो कल को कोई खतरा भी नही होगा

विम्ला मेरे गाल खिचते हुए - वैसे बड़ी दुर की सोचता है रे तू हा

मै ह्स्ते हुए विमला को लण्ड की तरफ दिखा कर - मै कहा ये सोचता है हिहिहिही

विमला - बदमाश कही का चल सो जा

मै अचरज भाव से - सो जाऊ ???

विमला - तब !!

मै हस कर - अभी तक सिर्फ बेटे का जलवा देखा है थोडा मेरा जलवा भी देख लो ना मेरी जान

विमला एक कातिल मुस्कान से - तो शुरू करो ना मेरे राजा अह्ह्ह

फिर एक बार मेरे और विम्ला मे जोरदार चुदाई हुई और हम वैसे ही चिपक कर नंगे सो गये

देखते है आने वाली सुबह राज के लिए क्या नये रंग दिखाने वाली है ।

दोस्तो आज का अपडेट कैसा लगा पढ कर जरुर बताये

बिना फीडबैक के लिखने मे मज़ा नही आता

जब मेरे काम मे कंजूसी नही है तो आप भी दो शब्द लिख कर मेरा मनोबल जरुर बढाये

लास्ट के दो अपडेट मे सन्तोषजनक फ़ीडबैक ना मिलने के कारण ही अपडेट एक दिन रुक देना पडा मुझे

अपना प्यार और स्नेह बनाये रखें

धन्यवाद
 
अपडेट 68

मेगा



अगली सुबह विमला ने मुझे उठाया और कपडे पहनने को बोले । अभी सुबह के 5:30 बजे थे

तो मै उठा और कपडे पहन कर बाहर आया तो कोमल अपने कमरे से बाहर निकल रही थी और वो बाथरूम की तरफ जा रही थी

मै - गुड मोरनिंग कोमल

कोमल बडे बेतुके ढंग से - हा गुड मॉर्निंग हुउह्ह

मुझे बहुत अजीब लगा कि इसे क्या हुआ कही रात मे मै विमला के साथ सोया था उसका गुस्सा तो नही है ना

मै मुस्कुरा कर कोमल के पीछे चल दिया और पीछे आगन मे जाकर उसको पकड लिया और वो मेरे बाहो ने छटपटाने लगी

मै उसके चेहरे को पकड कर एक जोर का लिप किस्स किया और बोला - ये सुबह सुबह किस बात के नखरे भई

कोमल इतरा कर मुह फेरते हुए - कल क्यू नही आये मेरे पास , और कमरे मे भी नही थे , वो तो मैने ध्यान दिया कि मनोज है नही तो गडबड हो जाती

मै मुस्कुरा कर - क्या गडबड़ हो जाती

कोमल शर्मा कर - वो मै रात के 11 ब्जे तक गयी थी तो मुझे लगा तुम सो गये हो तो तुम्हे जगाने के लिए सोचा लेकिन तभी मुझे मनोज का चेहरा दिख गया और मै बाल बाल बच गयी

मै उसे छेड़ने के अंदाज मे - मनोज का चेहरा ही बस देखा या और भी कुछ

कोमल शर्मा कर - तूम वो बताओ जो मैने पूछा है , बाकी सब छोडो

मै ह्स्ते हुए - सॉरी कोमल वो आज मौसी को कोर्ट लेके जाना है ना सारे काम खतम होने को है इसिलिए वही उनसे बाते करते हुए वही सो गया

कोमल - ठीक है कोई बात नही, लेकिन आज रात मत दुर रहना मुझ्से। ठीक है

मै कोमल के गालो को चूम कर - ठीक है मेरी गुलाबो हिहिही

फिर मै कोमल को छोड कर वापस मनोज को जगाने आ गया

दरवाजा पहले ही खुला हुआ था और मनोज अपने लण्ड के उभार पर हाथ रखे सो रहा था ।

फिर मैने उसे जगाया और हम दोनों कल की तरह आज भी निकल गए टहलने लेकिन आज हम 6 बजे पहले ही निकले थे तो आज कल से ज्यादा औरते दिखी और सबसे नयी शादीशुदा औरते दिखी जो साडीयो मे थी ।

मुझे इनसब से अलग सरोजा ठाकुर का इन्तजार था ।

और तभी मुझे एक परफ्युम की खुशबू आई और मेरे पीछे से सरोजा जी जोगिंग करती हूई, मेरे बगल से आगे निकली

आज तो वो कल से ज्यादा खुबसूरत दिख रही थी और मै तो उनकी उभरी जवानी को आन्खो से ओझल नही होने देना चाहता था और उनके पीछे पीछे उनके मोटे मोटे झोल मारते चुतड के पाटो को देखते हुए जोग्गिंग सुरु कर दिया और मनोज भी मेरा साथ देने आ गया

मनोज मेरी मनोभावनाये और सरोजा के प्रति दीवानगी को बखूबी समझ रहा था

मनोज - भैया क्या बात है आज दौड़ रहे हैं

मै - हा अब सोच रहा हूँ कि जब आया तो थोडी बहुत कसरत दौड़ कर ही ले क्यू

आगे जाकर सरोजा जी एक जगह रुकी और अपनी सांसे थोडी बराबर की और वापस घूमने लगी और हमारी तरफ आने लगी तो उनकी नजर मुझ पर गयी और वही मै आंखे फाडे उन्के उछलते चुचे निहार रहा था ,, फिर जब उनसे नजर मिली तो वो एक मुस्कान देके सीधा चल दी ।

सरोजा की मुस्कान पाते ही मै जहा तक गया था वही से वापस सरोजा के पीछे घूम गया ।

मनोज मुझे सरोजा की तरफ जाते हुए देख कर मुस्कराया और मेरे साथ चल दिया ।

मै वापस से सरोजा के भारी चुतडो को निहारते जाने लगा और फिर एक समय आया कि वो हवेली के रास्ते पर मूड गयी और मै एक नजर देखा उनको और आगे निकल गया

मै और मनोज वापस घर आये और फिर मै और विमला 10 बजे तक तैयार होकर दुकान गये और फिर वही से तय गाड़ी से मै ,पापा, विमला और वकिल अंकल जिला कोर्ट गये और 2 बजे तक सारे कागजी काम खतम करा कर शाम 4 बजे तक हम सब वापस आ गये ।

रास्ते मे विमला ने पापा को महेश को माफ करने वाली बात बतायी तो पापा भी उनकी बात से सहमत हुए और विमला की उदारता के लिए उसकी तारिफ भी की साथ ही सतर्क रहने के लिए चेताया भी ।

शाम 4 बजे हम चमनपुरा वापस आये तो पापा ने विमला को घर चलने का आग्रह किया और फिर हमारी गाड़ी हमारे घर के लिए मुड गयी ।

घर पहुच कर हम सब दुकान के पीछे वाले कमरे मे एकठ्ठा हुए और मा ने वही नास्ता लेके आई

पापा - अरे रागिनी अब ये चाय नास्ता से काम नही चलेगा , अब तो पार्टी बनती है क्यू बहन जी

विम्ला मुस्कुरा के - हा जी बिल्कुल जब आप कहिये भाईसाहब

पापा - नही नही पार्टी तो हमारे तरफ से ही होगी वो भी हमारे नये वाले घर पर और अब तो होली को भी ज्यादा दिन नही बचे है हाहाहाहहा

मै खुश होकर - हा पापा क्यू ना इस बार की होली हम सब साथ मे नये घर पर मनाये

मा खुश होकर - हा जी मेरा भी मन यही कर रहा है

पापा - ठीक है फिर वही करते है सारा प्रोग्राम क्यू बहन जी ।

पापा विमला की तरफ हस्ते हुए उसकी रजामंदी लेने के लिए बोले लेकिन

विमला थोडी नाखुश सी दिखी तो पापा ने उसको पुछा

पापा - क्या हुआ बहन जी आप खुश नही है

विमला थोडा बनावती हस कर - अरे नही नही वो बात नही है

मा - फिर क्या बात है विमला अब तो सब ठीक है ना

विमला - हा रागिनी लेकिन मै कैसे होली खेल सकती हू मै तो

ये बोल कर विमला ने दुख से अपना सर झुका लिया

पापा - क्या बहन जी आप भी इतनी मोर्डन होकर पुराने ख्यालो मे जी रही है , माना की भाईसाहब हमारे बिच नही है अब लेकिन ये तो वो भी नही चाहेगे कि उनकी फैम्ली खुशिया ना मनाये ।

मा - हा विमला आजकल ये सब नोर्मल है और हम सब वहा अपने घर के लोग ही रहेंगे कोई बाहर का भी तो नही रहेगा ना

विमला अपने आसू पोछते हुए - ठीक है लेकिन

मा विमला के कन्धे को थामते हुए - लेकिन वेकिन छोड और जिंदगी के मज़े ले और उन मासूम बच्चों का सोच जो तुझे दुखी देख कर क्या कोई खुशिया मना पायेंगे

विमला मा के हाथ थामते हुए - नही रागिनी मै मेरे बच्चो की खुशियो पर अब और गम का साया नही आने दूँगी , अब से एक नयी विम्ला को जनमा पायेगी तू

मा ह्स्ते हुए - आ ले ले ले मेरी बच्ची आ दुधू दू तुझे हाहाहा बड़ी आई नया जन्म लेने वाली

फिर सारे लोग मा की बात से हसने लगे और विमला भी मा के सीने से लग कर आसू बहाते हुए ह्सती रही

फिर मै विम्ला को लिवा के उसके घर चल गया

जहा घर पर अनिता कोमल से बाते कर रही थी और हमे आते देख उठ कर दरवाजे तक आई

अनिता - आओ जीजी , कोमल बिटिया पानी ला अपनी मा के लिए

विमला के मन मे वैसे भी अनिता और महेश के लिए पहले ही कोई द्वेष नही था और वो कोमल को भी सुबह ही समझा चुकी थी ये सब

फिर हम हाल मे बैठे और कोमल ने हमे पानी दिया

कोमल - मा मै अपने सेंटर जा रही हू

विम्ला - ठीक है बेटा जाओ

फिर कोमल अपने सेंटर चली गयी ।

अनिता - और जीजी कहा गयी थी

विमला - बस वो थोडा बडे शहर गयी थी अपने दीदी से मिलने

अनिता थोडा भावुक होकर - अच्छा ,,और ये कौन है

मेरे तरफ इशारा करते हुए बोली

विमला मुस्कुरा कर - ये मेरी सहेली का बेटा है इसी की गाड़ी से तो गयी थी मै , वो बाजार मे रंगीलाल जी बर्तन वाले है ना ।

अनिता अंदाजा लगाने के भाव मे - अच्छा अच्छा

विमला - हा उन्ही का बेटा है

अनिता थोडा संकोच करते हुए - दीदी आपसे कुछ बात करनी थी

विमला निश्चिँत होकर - हा हा बोलो अनिता क्या बात

अनिता मुझे देख कर संकोच कर रही थी

विमला - अरे कोई बात नही ये घर का ही है तुम बता सकती हो

अनिता - दीदी क्या एक बार और नही सोच सकती है इस बारे मे

विमला - किस बारे मे

अनिता - इस घर को बेचने के बारे मे , उनकी तबियत ठीक नहीं है , आज भी दो बॉटल पानी चढा है । मै क्या करु जीजी मुझे समझ नही आ रहा है

अनिता बिलखते हुए बोली

विमला - अरे अनिता तुम ऐसे ,,,ओह्ह अब रोना बन्द करो सब ठीक हो जायेगा

अनिता बिलखते हुए - कैसे होगा जीजी मुझे समझ नही आ रहा है

विमला - तू चुप करेगी तो ना मै कुछ समझा सकती हू

अनिता - मतलब

विमला हस्ते हुए - अरे अनिता चिन्ता की कोई बात नही है मै ये घर नही बेच रही हू और वो कागज भी ठाकुर साहब से जल्द ही मुझे मिल जायेंगे , उसी सिल्सिले मे मै आज एसडीएम साहब से मिलने बडे शहर गयी थी ।

अनिता खुश होकर आसु पोछते हुए विम्ला के पैरो मे आ गई

विमला - अरे अरे अनिता ये क्या कर रही है तू उठ जा अब

और विमला ने उसे उठाकर बगल मे सोफे पर बिथाया लेकिन उठाते वक़्त अनिता के साडी का पल्लू उसकी छाती से हट गया और उसके खरबूजे जैसे चुचे जो बैगनी सूती ब्लाउज मे ठुसे हुए थे दिखने लगे ।

अनिता को भी अपने कपडो की फ़िकर नही थी वो तो बस विमला की दया की छाव मे गुम थी

विमला - तू हम सब एक परिवार ही है ना आज तक जो मेरे पर बीती है वो मै अपने दुश्मन पर ना बीते ऐसा सोचती हू

ऐसे ही विमला ने कुछ बनावटी बाते बोल के अनिता का मन शांत किया

अनिता आसू बहाते हुए विमला के आगे हाथ जोड़े - आपका पूरी जिन्दगी आभार रहेगा जीजी

मै जाती हू अभी उनको ये खबर देती हू

विमला उसका हाथ थाम कर - रुक मै भी चलती हूँ, चल राज बेटा तू भी आ

फिर हम तीनो कोमल के घर से निकल कर महेश के घर जाते है

जहा बरामादे मे एक तख्त पर महेश लेता हुआ था और छत की तरफ टकटकी लगाये निहार रहा था। महेश शारिरीक रूप से बहुत कमजोर दिख रहा था

अनिता तो घर मे घूसते ही अपनी साडी उठा कर महेश को आवाज देती हुई खुशी से भागी भागी उसके बिस्तर तक गयी

और महेश के बाजू के पास बैठ कर आसू बहाते हुए हस रही थी ।

महेश अनिता को रोता देख उठकर बैठ गया

महेश चिंतित भाव मे - क क क्या क्या हुआ अनिता तू रो रही है

अनिता अपने आसू पोछते हुए - मै रो नही रही ये तो खुशी के आसू है गुलशन के पापा

महेश अचरज से - मै कुछ समझा नही अनिता

अनिता मुस्कुरा कर हमारी तरफ इशारा करते हुए - देखीये जीजी आई है और उन्होने हमे माफ कर दिया है गुलशन के पापा

अनिता वापस से ह्सने लगती है लेकिन उसके आँखो से आसू झरने की तरह बहे ही जा रहे थे

महेश अनिता की बाते सुन कर एक आनन्द मे आ गया और अनिता अनिता बोलते बोल्ते वो भी रोने लगा

महेश अनिता के कन्धे पकड कर आसू बहाते हुए मुस्कुरा कर - तू तू सच कह रही है अनिता

अनिता मुस्करा कर आसू बहाते हा मे गरदन हिलाती है

तो महेश उम्मीद भरी नजरो से गिडगिदाते हुए विमला मे कदमो मे झुक जाता है

महेश - मुझे सजा दो भाभी , सजा दो ! मै अभागा रिश्तो के मायने समझ ना सका और आप ने सब कुछ सह कर भी मुझे माफ कर रही है

विम्ला अपने पाव पीछे करते हुए - अरे अरे देवर जी बस करिये जो हो गया सो हो गया , आप सब मेरे परिवार का हिस्सा ही तो है और आपको दुख पहुचा कर मै कैसे यहा से चली जाती

महेश अनिता दोनो हाथ जोड़े विमला के पैरो मे थे

विमला - अनिता उठाओ इनको और बिस्तर पर बिठाओ , अभी इनकी तबियत नही ठीक है

महेश अपने आसू पोछता हुआ खदा हुआ - नही भाभी मै अब ठीक हो जाऊगा ,,आपने मेरे सर से एक पाप का बोझ हल्का कर दिया है , अब मै ठीक हू , अब मै ठीक हू अब मै

ये बोल्ते बोल्ते महेश बेहोश होकर गिर पड़ा

महेश के बेहोश होने के बाद अनिता फूट फुट कर रोने लगी

फिर मैने मदद करके महेश को विस्तर पर लिटाया और हमारे फैमिली डॉक्टर दयाल को फोन लगा दिया ।

दयाल अंकल कुछ ही देर मे अनिता के यहा आये और फिर महेश को चेक कर एक इन्जेक्शन दिया और कुछ दवाईया दी और महेश को रेस्ट करने को कहा ।

इधर अनिता दयाल अंकल के फीस के लिये पैसे लेने घर मे गयी कि डॉ अंकल मुझसे मिले और निकल गये अपने क्लिनिक पर ।

अनिता - अरे डॉ साहब कहा गये

मै मुस्कुरा कर - वो चले गये आंटी

अनिता - अरे वो अपनी फीस नही ले गये बेटा

मै मुस्कुरा कर - अरे आंटी उसकी चिन्ता ना करिये वो हमारे फैमिली डॉ है वो पापा से हिसाब कर लेंगे

अनिता मुस्कुरा - शुक्रिया बेटा

विमला - देख अनिता अभी तू इनका ख्याल रख और कोई जरुरत हो तो बेहिचक मुझे बोल देना

अनिता आभार व्यक्त करते हुए- आपका उपकार कैसे चूकाऊ मै दीदी , आपने हमे बर्बाद होने से ब्चाया है

विमला मुस्कुरा कर - वो सब छोड और इनका ध्यान रख और ये सुरेश भाई नही दिखे

अनिता - वो भी नशे मे धुत होगे कही , अभी आकर इनको गालिया देंगे कि इन्होने उनको फसा कर उनको उन्के परिवार से दुर कर दिया और बर्बाद कर दिया

विमला - तू चिन्ता मत कर कल सुबह मै सुरेश से बात करती हू , आखिर उसे अपनी गलती समझ आ गयी न

अनिता - ठीक है जीजी मै कल बोलती हू देवर जी को

विमला - देख 8 बजने को है मुझे भी खाना बनाना है ,मै जाती है अब

फिर मै और विम्ला वापस कोमल के घर आ गये और रात के खाने मे कोमल ने स्पेशल खाना ब्नाया और खाने के बाद हम सब हाल मे बैठ कर आज की हुई घटनाओ पर बाते किये ।

मनोज और कोमल ने तो नयी नयी प्लानिंग भी की ।

फिर रात मे सोने की प्लानिंग हुई

मै - तो फिर आज कौन कहा सोयेगा मौसी

मनोज - अगर आपको दिक्कत न हो तो मै मा के साथ सो जाऊ भैया

मै हस कर एक नजर विमला की ओर देखा जो ना मे इशारे कर रही थी वही कोमल शर्म से निचे देख रही थी ।

मै - अच्छा ठीक है जा सो जा वैसे भी कल से मै घर पर रहूंगा

विमला - अरे कुछ दिन और नही रुक सकता

मै - अरे मै कौन सा बहूत दुर हू , आना जाना लगा ही रहेगा आप एक फोन करना मै आ जाऊंगा हिहिही

फिर मनोज विमला के कमरे चला गया और कोमल अपने कमरे मे

मै उठते हुए - चलो मौसी हम लोग भी सोते है

विमला आंखे दिखाते हुए खुसफुसा कर बोली - आज सो नही सकता था मेरे साथ , ब्स भर गया मन तेरा मुझसे

मै हस्ते हुए - अरे मौसी मै तो मौका दे रहा हू आपको आज रात कैसे भी करके मनोज जो चाह्ता है उसे कर लेने दो ताकि आप दोनो भी ... हिहिहिहो समझ रहे हो ना

मै विमला को आंख मारते हुए हस्ते हुए बोला

विमला शर्मा कर - धत्त मुझसे नही होगा

मै - आप कुछ मत करना जो वो करे उसे करने देना ,,देखा है मैने बहुत हिम्म्ती है मनोज आप उसे थोडा छूट देके देखो एक बार मे ही लण्ड अपकी चुत मे उतार देगा

विमला शर्मा कर - धत्त बदमाश जा अब सो जा

और विमला भी उठ कर जाने लगी

मै - और सुनो वो खिडकी खुली रहने देना

विमला हा मे इशारा कर मुस्कुरा कर कमरे मे चली गयी ।

एक बार फिर बाहर की सारी लाईट बंद हुई और सब अपने कमरे मे चले गये ।

थोडी देर हुआ और मै कोमल के कमरे मे गया और उसकी एक जोरदार चुदाई की फिर उसे सुला कर कमरे से बाहर आ गया ।

मेरी नजर विमला के कमरे की खिडकी से बाहर आती हल्की रोशनी पर गयी

और मेरे चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आई और मै विमला के कमरे की तरफ चल दिया ।

मै अन्दर हो रही घटना को लेके काफी उत्साहित था कि कैसे विमला अपने बेटे के साथ सम्भोग के लिए राजी होगी ।

इधर मै खिडकी के पास गया तो अन्दर का नजारा मेरे अनुमान से ज्यादा अलग नही दिखा । और शायद सब कुछ जल्द ही शुरू हुआ था

मनोज पुरा नंगा विमला के उपर चढा था

विमला का ब्लाउज खुला था और ब्रा के कप से एक चुची को बाहर निकाल कर मनोज उसे मुह मे भरे चुस रहा था और नीचे विमला ने पेतिकोट पहना हुआ था।

मनोज विमला की चुचिया चूसने मे मगन था

विमला सिस्क कर - सीईईई बस कर मनोज , दर्द हो रहा है ऐसे

मनोज उपर होकर - तो निकाल दो ना मा

विमला उसे चिढाते हुए मुह बना कर मनोज की बाते दुहराते हुए - निकाल दो ना मा ,,,,,हुउह्ह्ह चल हट अब बहुत हो गया

विमला मनोज को हटा कर चुची को ब्रा मे डालने लगी लेकिन वो ब्रा मे जा नही रही थी

विमला झल्ला कर - देख अब पुरा खोलना पडेगा तेरी वजह से

मनोज मुस्कुरा कर अपनी मा के गालो को थाम कर उसके होठो पर अपने गाल ले जाकर छुवाता है

जिससे विमला का नकली गुस्सा हसी मे बदल जाता है और वो मनोज के गाल को चूम लेती है

विमला इतरा कर - चल हत बदमाश कही का

मनोज - लाओ मै सही कर देता हू

फिर विमला उठ कर बैठ गयी और मनोज की तरफ पीठ कर ली

मनोज विमला के पीछे आकर खड़ा हुआ था की विमला चिहुक उठी

विमला सा शरीर गनगना गया - यीईई माआ

मनोज हसते हुए - वो मेरा नुन्नु आपकी पीठ पर छुआ गया था मा हिहिहिही

विमला डाटते हुए - दाँत ना दिखा और खोल पीछे से हुक

मनोज पहले विमला के ब्लाउज को निकालता है फिर हुक खोल कर ब्रा की स्ट्रिप आगे ले आता है

विमला अपने चुचियो को ढकते हुए - क्या कर रहा है वापस बंद करना है ना

मनोज - अब खोलदिया है तो निकाल दो ना मै वापस ब्लाउज पहना देता हू

विमला मुस्कुरा कर - ठीक है

और विमला अपने हाथ सामने से हटा लेती है और मनोज वापस ब्रा को आगे लेके जाता है जहा उसके हाथ विमला की चुचियो को साइड से छुते है जिससे विमला सिहर जाती है

और इस वक़्त मनोज के हाथ रुके थे फिर भी विमला अपनी बॉडी की हीचका कर सिस्क रही थी और जब मेरा ध्यान मनोज की कमर पे गया तो देखा कि वो अपना तने हुए लण्ड का सुपाडा विमला की नंगी पीठ पर घूमा रहा था

वही विम्ला को मदहोश होता देख मनोज पीछे से उसकी चुचियो को दबोच लेता है और उपर की तरफ उठाते हुए मिजना शुरू कर देता है ।

अन्दर कमरे का सिन देख कर मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो जाता है और मजबूरन मुझे उसे बाहर लाकर सहलाना शुरू कर देता हूँ

उधर कमरे मे मनोज अपनी मा की पीठ से चिपक कर उसके गर्दन कान कन्धो को चुमते हुए उसकी चुचियो को मसल रहा था और विमला सिस्क रही थी मनोज का नाम लेके

विमला - उम्म्म्ं बेटा अह्ह्ह ब्स कर सीई अह्जह्ह्ज येह्ह गलत ह्है बेटाह्ह्हह उफ्फ्फ मा

मनोज - मा मुझे नही अच्छा ल्ग्ता है जब आप बाहर के मर्दो से अपनी प्यास बुझाती हो मेरे सारे दोस्त आपको रन्डी बुलाने लगे है

विमला मनोज के मुह उसके लिए रन्डी शब्द सुन कर उत्तेजित हो जाती है और गहरी सास लेते हुए - क्याआआ मै तुझे भी रन्डीईई लगती हू अह्ह्ह उफ्फ्फ

मनोज अपनी मा के पेतिकोट का नाड़ा आगे हाथ लाकर खोलता हुआ - मै आपको दोनो चाचा के साथ चूदते देखा है मा

विमला सिस्कर - उफ्फ्फ अह्ह्ह फिर क्या लगा तुझे बेटा , कैसी है तेरी मा अह्ह्ह और सहला इन्हे उफ्फ्फ ह्य्य्य्य

मनोज विम्ला की चुचियो की घुंडीया घुमाते हुए - मै देखा था मा आपको दो दो लण्ड अपनी चुत और गाड़ मे लेके चूदते हुए , आप तभी मुझे रन्डी दिखने लगी थी

विमला मनोज की बातो और उसके हरकतो से उत्तेजित थी वही मनोज अपना हाथ विमला के पेतिकोट मे उपर से डाल चुका था

मनोज विमला की चुत सहलाते हुए - मा मुझे आप एक नमबर की चुद्क्क्ड लगती है और मै भी आपको रन्डी की तरह चोदना चाहता हू

विम्ला सिस्कते हुए - अह्ह्ह सीई उम्म्ंम्ं बेटा आह्ह और रगड़ अपनी मा की चुत को अह्ह्ह मा

मनोज विमला को छोड कर खड़ा हुआ और अपना लण्ड उसके मुह के आगे ले कर घुमाने लगा - मा चुसो ना इसे प्लीज

विम्ला आंखे खोलकर सामने खडे लण्ड को पाके झपट पड़ी और मुह्ह मे गले तक लेने लगी

मनोज के मानो पैर काफ गये ये उस्के लिये पहला अनुभव था शायद और वो अपनी के मुह्व मे लण्ड घुसेड़ के गालीया दते हुए - अह्ह्ह सालि रान्डी मा मेरी अह्ह्ह्ज और चुस मेरी चुद्क्क्ड मा अह्ह्ह बहुत म्ज़ा आ रहा है

विम्ला गपागप मनोज के लण्ड को चुस रही थी

वही मनोज अनाब सनाब बके जा रहा था - आह्ह और चुस मै तुझे अपनी रखैल ब्नाउगा मा

कुछ देर की मुह पेलाई के बाद मनोज अलग हुआ

मनोज - लेट जाओ मा मै अब आपको चोदूंगा

विमला तो मानो इसके लिये तैयार थी और झ्त से लेट कर अपनी पैंटी निकाल दी और पेतिकोट उपर चढाते हुए अपनी चुत पे चट्ट चट्ट चपट लगाते हुए बोली - अह्ह्ह बेटा चोद दे अपनी मा को बना ले अपनी रन्दी अह्ह्ह

दोनो की बाते सुन के मै बहुत ही उतेजीत मह्सूस कर रहा था

वही मनोज विमला के चुत दो बार थूक कर हाथ से उसकी मोटी फुली हुई चुत को मला और लण्ड के टोपे को चुत मे लगा कर पेल दिया और उसकी जन्घे उठा कर घपा घ्प घपा घ्प घपा घप चोदने लगा ।

वही विमला मनोज को उत्तेजित कर चुदवा रही थी

मनोज - अह्ह्ह मज़ा आ रहा है मा और निचोड लो मेरा लण्ड आज आपकी चुत मे

विमला कमर उचका कर पुरा लण्ड अपनी चुत मे समा लेती है और मनोज विमला की जन्घे थामे गचागच पेले जा रहा था

मनोज - मा मै आपको रोज चोदना चाहता हू रन्डी की तरह चुदवाओगी ना मा मुझसे

विमला - हा बेटा मुझे भी बहुत पसंद है ऐसे चुदना अह्ह्ह उह्ह्ह मा ह्य्य्य और पेल अपनी मा की बुर मे

मनोज - मा आपकी बुर तो भोस्डा बन गयी है इसमे तो मेरे दोस्त पन्नु का लण्ड डालना पडेगा आह्ह मा

विमला - आह्ह बेटा ये पन्नु कौन है उह्ह्ह आह्ह और चोद औउर आह्ह

मनोज विमला की चुत मे निचे उतरते हुए - वो मेरा दोस्त है मा , वो भी अपनी मा को चोदता है और मुझसे भी चुदवाया है । बहुत मोटा लण्ड है उस्का

विमला - आह्ह सच मे तुने पहले भी सेक्स किया है

मनोज - हा मा मैने पहली बार पन्नु की मा को चोदा था और पन्नु भी आपको चोद्ना चाहता है

विमला झडने के कारिब थी - अह्ह्ह बेटा मेरा निकलेगा

मनोज अब रुक रुक के धक्के लगाता हुआ - बोलो ना मा चुदोगी मेरे दोस्त से

मनोज वापस से एक जोर का धक्का चुत मे लगाते हुए - बोलो ना मा

विमला नशे मे मदहोश - आह्ह बेटा तू जिससे कहेगा चूदूँगी , तेरीईइह्ह र,,,,न्डीहह मा हू ना आह्ह पेल दे अब रुक मत बेटा अह्ह्ह्ह

मनोज खुश होकर विम्ला को तेजी से चोदते हुए - थैंक यू मा , हम चारो लोग एक साथ चुदाई करेंगे फिर अह्ह्ह

विमला कपकपाते हुए - अह्ह्ह हा बेटा कर लेना अह्ह्ह अभी चोद ना

फिर मनोज विम्ला की जांघ खोल कर उपर चढ़ कर तेजी से विमला की पिचपिचाती बुर मे सत सत स्त लण्ड चोदने लगता है ।

मनोज - आह्ह मा ऐसे ही निचोदो मै भी झडने वाला हू अह्ह्ह मा

विमला जो की झड़ चुकी थी तेजी से कमर उच्का कर पुरा का पुरा लण्ड अपनी भोस्डी मे भरने लगी और जल्द ही मनोज धिमा पड़ गया और उसकी कमर हिच्कोले खाने लगी और वो विमला की चुत मे झडने लगा ।

और मै वही खड़ा खड़ा दुबारा अपना लण्ड झाड़ दिया और वापस अपने कमरे मे आकर सो गया ।

अगली सुबह मै टहलने ना जाकर जल्दी ही नहा धोकर तैयार हुआ और नाश्ता करके जाने के लिए तैयार हो गया ।

मनोज ने मेरा समान पैक कर दिया

विमला थोडा भावुक होकर - फिर कब आयेगा मेरा राजा बेटा

मै हस कर - अरे मौसी मै यही हू बाजार मे जब मन हो बुला लेना अपने राआआजाआआ को

मेरा मतलब है राजा बेटा को हिहिहिही

विमला मेरी डबल मिनिंग की बात समझ गयी ।

मै - और हा आप सब लोग होली के लिए कोई प्रोग्राम ना बनाना है , सब कुछ हमारे नये वाले घर पर बुक रहेगा और सबको आना है ।

विमला - अरे बेटा वो मै ब्ताना भूल ही गयी

मै अचरज से - क्या मौसी

विमला - वो क्या है बेटा मेरी जौनपुर वाली दीदी का फोन आया था कल रात मे । उसकी बड़ी लडकी को देखने के लिए लड़के वाले आएगे तो कोमल और मनोज वही जायेंगे परसो ।

मै मन मार कर- ब्क्क्क फिर कैसे होगा सब प्लान बेकार

विम्ला एक कातिल मुस्कान से - मेरे रहते कोई प्लान थोडी ना खराब होगा हिहिही

मै विमला की मुस्कान भरी बात समझ गया

मै - लेकिन अगले महीने से तो मेरे और कोमल के एक्साम होने वाले है ना

विमला - अरे वो लोग होली बिता कर वापस आ जायेंगे बेटा

मै खुश होकर - ठीक है मौसी , चलो अब चलता हू और आप लोग अपना ख्याल रखना कोई दिक्कत हो तो बताना

विमला - ठीक है बेटा

फिर विम्ला ने मेरे गाल को चुमा और खुश रहने को बोला

मै मनोज से हाथ मिलाया और कोमल को बाय बोलकर निकल गया अपने घर के लिये ।

अब देखते है राज की घर वापसी

नये घर मे गृहप्रवेश और आने वाली होली के कितने रंग देखने को मिलेंगे ।

अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखें और आनंद ले कहानी का

पढ कर अपना रेवियू जरुर दे

धन्यवाद
 
अपडेट 69



मै अपना बैग लेके सुबह 9 बजे घर पहुचा तो दुकान मे अनुज बैठा हुआ था

अनुज - नमस्ते भैया

मै मुस्कुरा कर - क्या भाई क्या हाल है छोटे

अनुज - ठीक हू भैया

मै - आज स्कूल नही गया

अनुज - भैया स्कूल तो एक हफ्ते के लिये बन्द है

तीन दिन बाद होली है ना

मै हस कर ओहो फिर तो मौज ही होगे आपके जनाब

अनुज शर्मा कर - कहा मौज मेरे तो कोई दोस्त ही नही है

मै - मै हू ना , वैसे मा कहा है

अनुज - वो छत पर गयी है नहाने

मै - ठीक है मै जरा अपना सामान रख लू

फिर मै छत पर आया तो किचन मे बर्तन की ख्त्पट सुनाई दे रही थी

मै बेडरूम मे अपना बैग सोफे पर रखा और घुमा ही था की सामने से दीदी एक मैकसी पहने अपने भिगे बालो को खोलते हुए कमरे मे आ गई ।

वो शायद अभी नहा कर आई थी

मुझे देख्ते ही वो खुशी से उछल कर मेरे बाहो मे आ गई

मै उसे गले लगाते हुए कहा- मुझे याद किया मेरी जान

दीदी - बहुत ज्यादा भाई

मै उसको साइड कर झट से दरवाजा बंद कर उसके होठो को चूसने लगा और उसके बदन को मसलने लगा ।

उसके बदन को छुने पर पता चला कि उसने अनदर कुछ नही पहने जिससे और उत्तेजित कर उसके चुतडो को मसलने लगा ।

हम दोनो एक दूसरे के लिए बहुत ही ज्यादा तडप रहे थे और मुझ्से रहा नही गया और मै सब कुछ जल्दी मे कर लेना चाहता था तो

मैने दीदी की चुत को भी सामने से हाथ लगा कर रगड़ना शुरु कर दिया जिससे सोनल मेरे होठो को और जोर से चुसने लगी ।

मै झट से उसको बिस्तर पर लिटा कर एक झटके मव उसकी मैक्सी को कमर तक चढा दिया और वो मदहोश होकर तेज सांसे लेते हुए मेरी हरकतो को देखने लगी

मेरे अन्दर हवस हावी हो चुका था और मैने झुक कर दो तीन बार उसकी गोरी मास्ल जांघो को चूमा और दीदी की झाटो से भरी चुत मे मुह लगा दिया और लपालप चाटना शुरू कर दिया

मेरे जीभ को अपनी चुत पर रेगता पाकर सोनल उछल पड़ी और इधर उधर पैर मारने लगी

मै उसकी जांघो को थाम कर उसके चुत मे दाने को झाटो सहित मुह मे चूब्लाने लगा

सोनल मुह पर हाथ रखे जल बीन मछली जैसे फड़फडाती रही , उसने अपने कन्धे झटकने शुरू कर दिये और कमर उचकाने लगी थी

उसकी चुत के होठ के दाने की फड़कन मेरे होठो को पता चल रही थी । जिसे मै अपने उपरी होठ के फलक से टच कर रहा था ।

और कुछ ही देर मे मुह पर उसकी चुत ने पिचकारी छोडनी शुरू की और 10 12 बार सोनल अपनी कमर को झटका देते हुए मेरे मुह पर झड़ कर चित पड़ गयी और हल्की सिस्किया लेने लगी ।

वही मै उसकी चुत को अच्छे से चाट कर मस्त हो गया ।

लेकिन मेरा लण्ड अभी भी खड़ा था और सोनल उस हाल मे नही दिख रही थी कि मेरे लण्ड को शांत कर पाये क्योकि ये उसका पहला स्खलन था ।

वैसे पड़े पडे कोमल थक कर सो गयी और मैने उसकी मैक्सि को ठीक किया और अपना लण्ड सेट करके बाहर आया तो देखा किचन मे कोई नही था फिर मै छत पर गया तो बाथरूम से मा के नहाने का पता चला ।

मै मा को दुपहर मे भोगने का सोच कर हाथ मुह धुल के दुकान मे किनारे बैठ गया औए मोबाईल चलाने लगा ।

दुकान मे अनुज अब भी मेन गद्दी पर था ।

कुछ समय बिता ही था कि एक लडकी दुकान मे कुछ सामान लेने आई और अनुज उससे बाते करते हुए शर्मा रहा था । वही उस लडकी की बात से लग रहा था कि वो अनुज को जानती हो ।

तभी उसने अनुज को अंडरगार्मेट दिखाने को बोले तो वो मुझे आवाज दिया

मै भी उसके पास पहुचा

मै - हा क्या हुआ अनुज

अनुज - भैया आप लाली को सामान दिखा दो मै पानी पीके आता हू

मै समझ गया कि वो शर्मा रहा था

फिर वो उपर चला गया

मै - ये तुम्हारे साथ ही पढता है क्या लाली

लाली - जी भैया , बहुत मुहदब्बू है किसी से कुछ बोलता ही नही और शर्माता ऐसे है कि दुल्हन हो हिहिहिही

मै हस कर - अच्छा कोई बात नही तब क्या दू तुम्हे

लाली - भैया मुझे एक 30 नं की ब्रा देदो और फुल वाली पैंटी दिखा दो

मै उसका मज़ा लेते हुए - मै थोडी ना पहनता हुआ फुल वाली पैंटी जो दिखा दू हिहिही

लाली हस कर शर्माते हुए - धत्त भैया वो मै कह रही थी कि मेरे लिए 32 नं का दिखाओ

मै लाली के साइज़ जानकर आश्चर्य हुआ की इस उम्र मे ही उसके अंग खिल चुके थे और कैफ्री मे उसके गोल मुलायम चुतडो के उभार देख कर मुझे मामा की लड्की गिता की याद आ गई ।

फिर मैने उसे ब्रा पैंटी दिखाई लेकिन मेरे पास 30 की ब्रा न्ही थी

मै - लाली मेरे पास 30 की ब्रा नही है 32 देदू

लाली - नही भैया वो ढिला होगा ना मुझे

मै उसके चुचे निहार कर - नही लाली हो जायेगा

लाली शर्मा के - बक्क नही होता है भैया मैने मेरे दीदी का ट्राई किया था

मै - ओहह फिर ये न्यू फ्री साइज़ वाला लेलो ये स्ट्रेच वाला कपदा है कोई भी पहन सकता है घर मे

लाली मुस्कुरा कर - ठीक है भैया देदो

मै लाली को समझ गया था कि वो एक अच्छी और फ़िकरमन्द लड्की है और शायद मेरे अनुज से इसकी दोस्ती हुई तो वो उसे थोडा मोटीवेशन देके समझा बुझा सकती है । क्योकि समय के साथ अनुज को समाज से मिलना जुलना भी जरुरी था और मैं तय कर लिया कि जल्द ही अनुज से फिर बात करूँगा ।

फिर वो चली गयी और मै अपने काम मे लग गया

दोपहर के खाने के बाद मा और मैने विमला के यहा की बातो पर चर्चा की और मौका देख कर मैने मा को पीछे के कमरे मे जाने का इशारा किया ।

मा मुस्करा कर - नही पागल त्योहार का समय है और ग्राहक आते जा रहे है ।

मै मुह बना कर - क्या मा वैसे ही 3 4 दिन आपसे दुर रहा हू आपको मन नही होता

मा परेशान होकर- मेरा भी बहुत मन है बेटा लेकिन अभी समझ तू

तभी दुकान पर ग्राहक आ गये

मै समझ गया कि यहा कुछ हाथ आने वाला है नही तो थोडा देर सर खपाने के बाद याद आया क्यू ना थोडा सब्बो के यहा घूम आऊ ।

मै खुश हुआ और निकल गया सब्बो के मुहल्ले मे

टहलते हुए उसके घर गया तो वहा उसकी मा रुबीना मिली

मै - और काकी कैसी हो

रुबिना हस कर - अरे छोटे सेठ आप, कहा दर्शन दे दिये मालिक

मै रुबिना से मस्ती भरे अंदाज ने लण्ड को पैंट के उपर से सहलाते हुए - दर्शन देने नही करने आया हू काकी

रुबीना - बेटा सब्बो तो सोनू को लिवा कर बडे शहर गयी है कुछ दवा लेना था ।

मै अचरज से - क्या हुआ काकी सब ठीक है ना

रुबीना - अब आपसे क्या छूपाना छोटे सेठ , दरअसल बात ये है कि सब्बो के जांघ मे खुजली हो रही है जिससे धंधे मे दिक्कत हो रही है और आप तो जान्ते हो ये बडे सेठो के नखरे

मै - अरे ये सब तो नोर्मल है गर्मी का दिन आ रहा है ना काकी तो उतना होता रहता है

रुबीना - हा छोटे सेठ

मै एक कातिल मुस्कान से - तब काकी कुछ होगा की सुखा सुखा जाना पडेगा

रुबीना मेरे लण्ड को पैंट के उपर से सहलाते हुए - कभी ऐसा हुआ है क्या छोटे सेठ

मै रुबीना की मोटी चुचियो को सूत के उपर से मस्ल्ते हुए - तो चलो ना कमरे मे काकी और रहा नही जाता

रुबीना मेरे लण्ड को निचे से पकड कर कमरे की तरफ ले जाने लगी और उसकी 44 की हैवी थिरकते गाड़ देख कर उत्तेजित होने लगा

रुबिना - लग रहा है बहुत ज्यादा ही फड़क रहा है ये छोटे सेठ

मै - तुम्हारी तरबूज जैसी भारी गाड़ देखकर इससे रहा नही जा रहा है

रुबीना कमरे मे जाकर तो आजाद कर दो ना उसको

मै - अब ये भी मै ही करू हा

रुबीना एक कातिल मुस्कान के साथ मेरे कदमो मे झुकने लगी ।

मै उसे रोकते हुए - ऐसे नही

मै यहा बैठ रहा हू तुम सारे कपडे निकालो आज तुम्हारी जवानी का एक एक गदराया हिस्सा देखना की क्या सच मे तुम्हारे बारे मे जो सुना है वो सही है ।

रुबिना एक कातिल मुस्कान से थोडा पीछे हत कर खड़ी हो गयी और मै वही उसके सामने एक सोफे पर बैठ कर पैंट के उपर से लण्ड सहलाने लगा

वही रुबीना के पहले मेरे सामने झुक कर अपने 40 साइज़ के हैवी चुचो को हाथो मे लेके सूत के उपर से ही पकड कर उनकी घाटी और गहरा करते हुए मुझे दिखाया और वापस से सूत को निकाल दिया

सूत निकलते ही ब्रा मे कैद उसके चुचे बाहर की तरफ फैल गये ।

मै अपनी जुबान से होठ को गिला करता हुआ रुबीना को आगे बढ़ने का इशारा करता हू और वो मेरी तरफ घूम के अपने भारी भरकम चुतडो को बाहर निकाल कर सल्वार का नाड़ा खोल देती है जिससे उसकी मोटे मोटे तरबूज जैसे चुतडो के पाटे नंगे होकर एक काली पैंटी मे दिखने लगते है ।

उसकी जांघो के पास के हल्के काले और भूरे धब्बे उसकी गाड़ के गोरेपन को और निखार रहे थे ।

उसकी रसभरी चर्बीदार गाड़ देख कर मै थूक गटकने लगा और वो घुमकर थिरकते हुए मेरे पास आई और मेरा टीशर्ट निकाला और मेरे सामने रुबिना के गोरे मुलायम चुचो की घाटी हिलती हुई नजर आई और मैने उसको लपक कर कमर मे हाथ डाल कर उसके एक मोटे चुचे को पकड कर काटने लगा ।

रुबिना के अंडरआर्म से किसी नशीले अत्र की खुस्बु आ रही थी और मै मादकता मे आकर उसको ऊचे उठे कूल्हो को सहलाने लगा और उसको चुचियो को बेहिसाब काटने लगा ।

रुबीना मेरे बालो को सहलाते हुए सिसकिया लेने लगी

रुबीना के बदन की खुशबू और उसके उठे हुए मुलायम कुल्हे मुझे गजब का सुख दे रहे थे।

वही रुबीना मेरा सर पकड कर अपने चुचो की घाटी मे दरना चालू कर दी । मै उसके चुतडो के पाट फैलाना शुरु कर दिया।

जल्द ही रुबीना मेरे जांघो पर बैठ कर अपनी चुत के निचले हिस्से को मेरे लंड के उपर रगड़ना शुरु कर दी और साइड से अपने ब्रा के स्ट्रिप निकाल कर चुचो को आजाद कर दिया ।

मै रुबीना के भारी चुचो मे से एक को दोनो हाथो से पकड कर उसका बडे काले घेरे वाला निप्प्ल अपने सामने कर मुह मे भर लेता हू ।

मून्क्के से भी ब्ड़ी घुंडीयो वाली रुबीना के निप्प्ल बहुत मुलायम थे और मेरे गुलाबी खुरदुरे जीभ ने उसकी दानेदार निप्प्ल पर अपनी धार लगाना चालू कर दी ।

रुबीना - ओह्ह्ह सेठ क्या करते हो उम्म्ंम्ंं छिल जायेगा मेरा दूध अह्ह्ह्ं मा इस्स्स्स

रुबीना जोश मे आकर अपने चुतड के गद्देदार पाटो को सख्त कर और भी ज्यादा मादकता से मेरे लंड के उपर रगड़ने लगी । जिससे पैंट मे कैद मेरे लण्ड दर्द सुरु होने लगा और मै उनको आजाद करना चाहता था ।

कुछ देर तक रुबीना के चुचो से खेलने के बाद मै उसे निचे जाने को बोलतो वो मुस्कुरा कर मुझसे हट हाती है और मै एक गहरी सास लेके खुद की ठीक करता हू ।

वही रुबीना घुटनो के बल आकर मेरे पैंट खोलकर उसे पुरा बाहर निकाल देती है और उसकी नजर जब मेरे मोटे तने हुए लन्द पर जाती है तो

रुबीना लंड को बिच से पकड कर उसकी चमडी को उपर निचे करते हुए - अरे वाह सेठ ये तो पिछ्ली बार से काफी मोटा दिख रहा है

वही मै रुबीना के हाथो का स्पर्श पाकर और उत्तेजित होने लगा और रुबीना का सर पकड कर सीधा सुपाडे पर ले गया और वो मुह खोल्के उसे गले तक घोट गयी ।

मै कमर उचका कर थोडी देर तक उसे गले की घंटी पर अपना सुपाडा रगड़ता रहा और वो गुउउउऊ गुउऊ करके मेरे लण्ड पर लार के ढेर छोडती रही जब रुबीना को बरदास्त न हुआ तो अपना सर पीछे लेते हुए ढेर सारा थूक मेरे सुपाडे पर छोड कर म्लने लगी ।

उसके मुलायम हाथो ने मेरे लण्ड को कसना शुरू किया और वापस चमडी को निचे ले जाकर रुबीना मे मेरे सुपाडे को मुह मे भर लिया और जीभ से मेरे लण्ड के सुराख मे हलचल करने लगी ।

मै रुबीना के अंदाज से मज़े मे आ गया और सिसिक्ते हुए बोला - ओह्ह्ह काकी इतना मस्त लण्ड चूसना कब सिखा इह्ह्ह बहुत ही मज़ा है अह्ह्ह

रुबीना लण्ड को मुह से निकाल कर - सबका कोई ना कोई गुरू होता है सेठ

मै थोडा रौब दिखा कर - तो क्या अपनी मा से सिख कर आई है सालि बता ना अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ और घुमा जीभ सुपाडे पर आह्ह मज़ा आ रहा है काकी उह्ह्ह

रुबिना - वो मै नही बता सकती तुमको मागता है तो करवाओ

मै समझ गया कि ये ऐसे नही मानेगी इसको पहले अपने कन्ट्रोल मे लेना पडेगा

मै उसका चेहरा उठा के उसे बिस्तर पर जाने को बोला

वो मुस्कुरा कर बिस्तर पर बैथ गयी और मै खड़ा होकर उसके सामने आया और उसे लिटा दिया ।

रुबिना ने अपनी जान्घे खोल दी और मैने पहले अपना लण्ड उसकी मुलायम जांघो मे रगड़ना शुरु किया और दुसरे हाथ से उसकी चुत को सहलाते हुए उसको उत्तेजित करने लगा ।

जल्द ही रुबिना अपनी पाव सी फुली हुई चुत पर मेरे हाथो के स्पर्श से गनगना गयी और कसमसाने लगी ।

वही मै अपना लण्ड अब रुबीना के चुत पर रख कर निचे गाड़ की तरफ रगड़ना शुरु किया जिससे रुबीना के भोस्दे पर मेरा पुरा लंड पैंटी के उपर से रगड़ खाने लगा ।

वही रुबिना मेरे अंदाज से मदहोश होकर अपनी मोती चुचिया खुद मुह मे लेके चूसने लगी ।

फिर मै निचे बैठ गया और दो तीन बार रुबिना के भोसड़े पर चपत लगा कर उसके चुत के दाने वाले हिस्से पे पैन्ती के उपर से ही हथेली लगा कर मिज्ना शुरु कर किया जिससे रुबीना सिसिकते हुए गाड़ पटकने लगी ।

एक बार मैने रुबिना के चुत को सूंघ और पैंटी के उपर से ही उसकी चुत को काटने लगा

और अपना मुह उसके जांघो और चुत के उपर रगड़ने लगा ।

रुबिना ने मेरे सर को पकड कर अपनी चुत मे दबाना शुरु कर दी

फिर मैने उसकी पैंटी निकाल दी जिसकी अन्दर की तरफ चुत के हिस्से वाले कपड़े पर उसके भोस्दे का सफेद पानी का दाग लगा था

मै एक बार हल्के हाथो से उसकी चीकानी बारीक झाटो वाली चुत पर हाथ फेरते हुए बोला - आह्ह काकी क्या मस्त चीकना किया है अपने भोस्दे को उम्म्ंम्ं

और जीभ लगा कर सटासट चात्ना शुरु कर दिया

रुबिना - अह्ह्ह आह्ह मा उफ्फ्फ हय्य मर गई रे अह्ह्ह सेठ उफ्फ्फ और चाट लो सेठ अह्ह्ह मा और और

मै थोडी देर चुत चाटने के बाद रुबिना के बगल मे आकर लेट गय और उसको मोटे होठो को चुस्ते हुए उसके मुह उसकी चुत का स्वाद दे दिया ।

फिर वापस उसके एक चुचे को मुह मे लेके उसकी फौलादी भारी जांघो को खोलकर चुत के दाने और उपर की चमडी को तेजी से सहलाने लगा ।

रुबिना मेरे दोहरे अटैक से झनझना गयी और मदहोशि मे पागल होने लगी ।

मै उस्के कान मे जाकर - कहो तो लण्ड घुसेड़ दू काकी आपकी भतीयान मे

रुबीना तडप भरे शब्दो मे - हा सेठ डाल दो ना

मै मुस्कुर उसके उपर जा जाता हू और अपना लण्ड उसके चुत पर लगाने लगा और उसकी चुचियो को दोनो हाथो से मिजने लगा ।

रुबीना - आह्ह सेठ रहम करो चोद दो मुझे अजज तक इत्ना गर्म नही हुई मै आह्ह हय्य मा

मै उसकी तपते चुत मे लण्ड के सुपाडे को घुसाते हुए बोला - पहले मै जो पुछा वो बताओ कहा से सिखा ये लण्ड चूसना काकी

रुबिना मेरे गर्म मोटे सुपाडे को उसकी चुत की दिवारो मे घिसता मह्सूस पाकर के अपनी गाड़ उचका कर और गहराई मे लेना चाह रही थी ।

मै हस कर - ना ना पहले बताओ तभी आगे जायेगा काकी

रुबिना - मै अपने ग्राहको के बारे मे नही बता सकती सेठ समझो और मुझ पे रहम करो

मै उसकी चुत मे पुरा लण्ड उतार कर 10 12 बहुत तेजी से शुरुवाती धक्के लगा कर रुक जाता हू

रुबीना हाफते हुए हस रही थी - अह्ह्ह सेठ रोक क्यू दिया करो ना बहुत मज़ा आ रहा है ओह्जहह सेठ मै मान जाओ ना

मै मुस्कुरा - ऐसे चूदवाना है तो बताओ ना कहा से सिखा , वादा है मै किसी को नही कहूंगा

और एक बार फिर 8 10 धक्के तेजी से रुबीना के चुत मे मार कर रुक गया जिससे रुबीना हिल गयी

रुबिना अब बोलने को तैयार हो रही थी तो मैने अब हल्का हल्का मदकता से भरे ध्क्के लगाते हुए बोला - बताओ ना काकी

रुबिना नशे मे - वो मैने ये सब ठकुराईन से सिखा है सेठ अह्ह्ह

मै एक जोर का धक्का रुबिना के चुत मे डाल कर - पुरा बताओ ना

रुबीना सिहरते हुए - मै काफी समय से संजीव ठाकुर के यहा जाती रही हू और कभी कभी उनकी पत्नी के साथ मिल कर ठाकुर साहब को खुश किया है उसी दौरान उन्होने मुझे सिखाया ।

मै उसके जवाब से खुश हो गया था ।

और उसकी जांघो को अपने कंधो पर लाकर लण्ड को उसके चुत मे गहराई मे ले जाते हुए लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा ।

रुबिना आंखे और गला फाडे सिस्कने लगी ।

मै - तब तो ठकुराइन एक नं की चुद्क्क्ड होगी काकी

रुबीना मेरे तेज धक्को को सम्भाते हुए कांख के जवाब देती है - अह्ह्ह उम्म्ंम्म्ं हा सेठ ठकुराइन बहुत गरम औरत है और वो तो बडे ठाकुर ( राजीव ठाकुर) से भी चुदवाति है

मै रुबीना के चुत से लण्ड निकाल कर उसको कुतिया बनने का इशारा किया और वो एक कातिल हसी के साथ अपने गाड़ को फैला कर कुतिया बन गयी और उसकी चर्बीदार गाद को सह्लाते हुए वाप्स से लण्ड उसकी चुत मे उतार दिया और कूल्हो को पकड कर पहले से भी तेज गति से चोदने लगा ।

मै उसकी गाड़ के भुरे मोटे सुराख को देख कर ललचा रहा था और मैं उसके गाड़ की सुराख मे अपने थुक से गिला करना शुरु कर दिया

और धीरे धीरे कमर चलाते हुए अपना बाया अंगथा उसके गाड़ के मोटे होल मे घुसा दिया जो बड़ी आसानी से अन्दर चला गया ।

अब चुत के साथ साथ मैने रुबिना की गाड़ मे भी मेरे अंगूठे को अन्दर ले रही थी

मुझ्से रहा नही गया रुबीना तो झड़ चुकी थी और मेरा लण्ड उसकी गाड़ का सुराख देख कर और कडक हुए जा रहा था

मै झट से उसकी चुत से अपना गिला लण्ड निकाला और उसकी गड़ से अंगूठा निकाल कर लण्ड को घुसेड़ दिया

रुबिना चिख्ते हुए - ऐईईई मा उफ्फ्फ्फ सेठ क्या किया हे हुय्य्य्य मर गई अह्ह्ह

मै उसके कूल्हो को थाम कर उसके लचकते चुतडो पर हाथ फेरते हुए एक जोर का धक्का देकर उसकी गाड़ मे जड़ तक लण्ड को उतार दिया और उसकी मुलायम गाड़ के पात मेरे जांघो मे फैल गये ।

मै वाप्स से लण्ड को खिच कर सटास्त उसकी खुली गाड़ मे पेलना शुरु किया

रुबीना - अह्ह्ह्ह सेठ और और चोदो मेरी गाड़ औउउउर्र्र आह्ह बहुत जोरदार चोदते हो अह्ह्ज मा उफ्फ़फ्च मज़ा रहा है

मै रुबिना के बातो से बहुत उतेजीत हो गय था और पहले से तेज धक्के लगाने ल्गा जिस्से उसके गद्देदार गाड़ के मुलायम पात मेरी जांघो को उछाल देते और वाप्स रुबीना की गाड़ मे उतरने का म्ज़ा दुगना होने लगा

जल्द ही मैने झडने के करीब था और मेरा सुपाड़ा उसकी गाड़ मे फुलने लगा और रुबीना भी निचे हाथ ले जाकर अपनी गाड़ मेरे लण्ड पर फेकते हुए चुत के दाने को मसलते हुए चिल्ला रही थी ।

मै चरम पर था और आखिरी धक्को के साथ के लण्ड को गाड़ की जड़ो मे ले जाकर रोक दिया और अन्दर ही मेरा लण्ड झटके खाते हुए झडने लगा ।

मुझे परमानंद की प्राप्ति हो गयी थी और मेरे चेहरे पर एक सुखद मुस्कान थी वही रुबिना अपनी चुत रगड़ के दुबारा झड़ चुकी थी और पेट के बल बिस्तर पर लेती थी और मै उसके उपर निढ़ाल हुए सो गया ।

थोडी देर बाद सांसे बराबर हुई और मै वहा से निकल गया ।

मै उस गली से गुजर रहा था कि पीछे से मेरी चाची की आवाज आई और जब मेरी नजर उनसे मिली तो मेरी सिटीपिटी घूम हो गयी ।

देखते है दोस्तो आगे क्या नया हंगामा होने वाला है

पढ कर अपना रेवियू जरुर दे ।

अपडेट देरि के लिए सॉरी दोस्तो

बदलते मौसम ने तबीयत खराब कर दी है

तो अपडेट लिख न्ही पाया था ।
 
अपडेट 70

चाची की आवाज सुन कर मेरी तो फट कर हाथ मे आ गई थी ।

मै उनकी तरफ घुमा और वो तब तक तेजी से चलते हुए मेरे पास आई उन्के हाथ मे एक राशन वाला झोला था ।

मै थोडा खुद को स्म्भालने की कोसिस कर रहा था

चाची - अरे राज बेटा तू यहा

मै घबडाहट मे - वो वो चाची मै वो ऐसे ही आया था

चाची मुस्कुराते हुए - हम्म्म मुझसे भी झूठ बोलेगा अब तू

मै अंजान होने का नाटक करते हुए- मै समझा नही चाची

चाची हस्ते हुए - ले ये झोला पकड और घर तक चल बताती हू मै

फिर मै चाची के हाथ से राशन का झोला ले लिया और उनके साथ चलने लगा

चाची - मुझे नही पता था कि तू रुबीना के यहाँ जाता है

मै सुखे गले से थूक गटकने की कोसिस करता हुआ - हा वो थोडा दुकान का काम था ना पापा ने हिसाब लेने के लिए भेजा था तो

चाची मुस्कराकर -

अच्छा तो पूछू मै भाईसाहब से

चाची हाथ मे लिये मोबाईल को चलाते हुए बोली ।

मै सकपका गया - हालाकि मुझे डर नही था बाद मे मै पापा या मम्मी को समझा बुझा लेता लेकिन बात थी पापा के सम्मान की । शायद मेरी शिकायत से पापा को चाची के सामने शर्मिंदा होना पड़ता ।

मै घबडाहट मे कुछ बोल नही रहा था

चाची हस कर - चल नोर्मल हो जा नही लगा रही हू फोन , मै समझ सकती हू इस उम्र की भटकते मन को

मै चाची की बात सुन कर और उनकी समझदारी को ध्यान देते हुए उन्हे शुक्रिया कहा

चाची मुस्करा कर मुझे सम्झाने के भाव से - तेरी कोई दोस्त नही है क्या ,,, ऐसी जगह नही जाते बेटा कल को भगवान ना करे कोई बिमारी हो गयी तो

मै शर्म से सर निचे किये झोला लिये चल रहा था और चाची मुझे समझा रही थी ।

चाची - क्या सच मे तेरी कोई दोस्त नही है

मै मासूम बन कर रुआस भरे चेहरे से चाची की तरफ मुह करके ना मे सर हिलाया।

चाची बडे उदास मन से - ओफ्फ्फ हो , देख बेटा अब तू जवान हो गया है मानती हू कि तेरा मन अब वो सब करने का होता होगा लेकिन तू कुछ दिन इन्तजार कर , सोनल की शादी के बाद मै तेरे लिए एक खुबसूरत की हेरोइने के साथ तेरी शादी करवा दूँगी फिर तू जो चाहे करना हिहिहिहिही

चाची आखिरी के शब्दो तक आते आते हसने लगी ।

मै भी उनकी बाते सुन कर हस दिया और सोचा जब चाची को इत्नी फ़िकर है मेरी तो क्यू ना इसका थोडा अपने अंदाज मे मजा लिया जाय और इनके साथ थोडी मस्ती मजाक मे बाते आगे बढाई जाए

मै थोडा सीरियस होकर - लेकिन चाची मै ऐसे यहा नही आया था

चाची अचरज के भाव मे - फिर

मै संकोचवश - वो मै काफी दिन से परेशान था और वहा पर मेरे दर्द हो रहा था तो मेरे एक दोस्त ने बताया कि जब मै सेक्स करने लगूंगा तो दर्द कम हो जायेगा और वही मुझे यहा लिवा के भी आया था ।

चाची फ़िकरमन्द होकर - ओहो मेरा बच्चा कितना भोला है रे तू !!! लेकिन तुझे एक बार डॉ या घर मे मम्मी पापा से बात करनी चाहिए थी ना

मै मुह गिरा कर - मुझे शर्म आती है चाची तो कैसे बताता

चाची मुह पर हाथ रख कर हस कर मेरी भोलेपन से भरी बाते सुन रही थी ।

इतने मे चाची का घर आ गया और वो मुझे चुप रहने का इशारा की और हम फिर घर मे चले गये ।

मै सामान लेके कमरे मे गया तो निशा मिल गई और उसे देख मेरी चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो भी नजरे मटका कर मुस्कुरा रही थी ।

फिर चाची सामान लेके स्टोररूम मे चली गयी और मै वही खड़ा होकर उनके आने के इन्तजार मे था कि निशा मुझे खिच कर कमरे मे ले गयी और दरवाजा बंद कर दिया ।

मै उसको कुछ बोलता उससे पहले उसने अपने मुलायम होठो से मेरे मुह को बंद कर दिया और हम दोनो एक गहरे लिपलोक मे खो गये ।

जल्द ही वो मुझसे अलग हुई और मुस्कुरा कर अपने होठ पोछते हुए दरवाजा खोल दिया और इधर उधर की बाते करने लगी ।

तब तक चाची भी वापस आ गई और फिर हमने ढेर सारी बाते की ।

फिर चाची ने निशा को चाय ब्नाने को बोला।

और निशा किचन मे चली गयी ।

चाची - और बता बेटा घर पर सब ठीक है

मै - जी चाची और अब तो नया वाला घर भी बन गया है जल्द ही वही शिफ्ट होने का प्रोग्राम है ।

चाची खुश होते हुए - अरे वाह अब नये घर मे नयी बहू भी तो आनी चाहिए कब तक इधर उधर मुह मारेगा

मै शर्म से मुस्कुरा कर - क्या चाची आप भी , वो तो मै गलती से चला गया था वहा और कुछ किया भी नही

चाची मुह पर हाथ रखकर अचरज से - क्या !!! तू सच मे नही किया वो सब

मै ना मे सर हिला कर - नही चाची , वो मै गया तो सब्बो नही थी तो मै चला आया

चाची खुसफुसा कर मेरे कान मे हस्ते हुए बोली - क्यू सब्बो की मा तो थी ना हिहिहिही

मै शर्मा कर - भक्क कितनी बड़ी है वो मै कैसे संभाल पाता उनको

चाची हस कर - धत्त पागल कौन उसको तुझे लेके ढोना था अब अन्दर बाहर ही करना था ना

मै शर्मा कर - चुप रहो चाची मुझे शर्म आ रही है,, आपको नही पता मुझे अभी भी तकलीफ हो रही है

चाची मेरी तकलीफ के बारे सुन कर थोदा शांत हुई और बोली - ओह्ह्ह मेरा बच्चा ।

चाची खड़ी हुई और बोली - राज उठ बेटा

मै अचरज से खड़ा होता हुआ - क्या हुआ चाची

चाची - चल उपर चल मै बताती हू इसको आराम देने का तरीका बताती हू

मै खुश होने का दिखावा कर - सच चाची

चाची हा मे सर हिला कर मुस्कुरा कर हम्म्म्म बोलती है

फिर चाची किचन मे निशा को आवाज देती है कि वो मुझे छत पर लिवा जा रही है तबतक वो चाय के साथ कुछ नासट भी ब्ना ले ।

फिर मै और चाची उपर जाने लगे ।

सीढी पर मै चाची के साडी मे शेप लेते कूल्हो को देख कर उत्तेजित हो रहा था ।

मै - चाची क्या करने जा रहे है हम

चाची - चल बताती हू ना

फिर हम लोग उपर आये और चाची मुझे बाथरूम मे लिवा गयी ।

मै थोडा उत्सुकता से - यहा क्यू लाई हो चाची

चाची मुस्कुरा कर - तेरी तकलीफ दुर करने , चल बाहर निकाल उसे

चाची मेरे पैंट मे बने टेन्ट पर इशारा करते हुए बोली

मै झट से अपने लन्द के उभर पर हाथ रखते हुए - भक्क नही चाची मुझे शर्म आ रही है ।

चाची हस कर - चल चल निकाल अब ,,भूल गया बचपन मे बिना कच्छे से पुरे घर नंगा घूम रहा था

मै शर्मा कर - अब मै बड़ा हो गया हू ना चाची

चाची - अच्छा देखू फिर कितना बड़ा हुआ है चल निकाल अब

मै संकोचवश थोडा शर्माने की ऐक्टिंग कर अपना पैंट खोलने लगा हालांकि मुझे इस बात की बेहद की उत्तेजना हो रही थी कि मै चाची को अपना लण्ड दिखाऊँगा

मै जल्द ही पैंट को खोला और अंडरवियर को सरका कर अपना मुसल बाहर निकाल दिया ।

चाची थोडी अचरज से मेरे लण्ड को निहारते हुए - ओह्ह्ह ये तो काफी बड़ा हो गया है,,,हम्म्म वैसे कहा दर्द होता है बेटा

मै चाची के सामने अपने लण्ड की चमडी को सुपाडे के पीछे ले जाकर सुपाडे की टिप पर ऊँगली दिखा कर बोला - जब ये टाइट होता है तो पहले यहा होता है फिर धीरे धीरे इन सारे जगह पर होने लगता है ।

चाची मेरे लाल मोटे सुपाडे को देख कर एक गहरी सास लेते हुए - ओह्ह तू क्या करता है इसका दर्द कम करने के लिए

मै - वो मै इसकी चमडी आगे पीछे करके इसका पेसाब निकाल देता हू चाची ,,वो मेरा दोस्त बताया था । लेकिन

चाची अचरज से - लेकिन क्या बेटा

मै - वो एक बार निकालने के बाद भी ये छोटा नही होता और मेरा हाथ दर्द होने लगता है

चाची हस कर - हमम कोई बात नही आज मै इसका ऐसा इलाज करूंगी की इसको बहुत आराम मिलेगा

मै खुश होकर - क्या सच मे चाची

चाची मेरे कदमो मे आकर मेरे लण्ड को थामकर - हा बेटा

मै चाची के मुलायम हाथो का स्पर्श पाकर मै हिल गया और वही चाची मेरे सुपाडे की टिप पर एक हल्का सा चुम्बन करती है और देखते ही देखते मुह खोल्कर आधा लण्ड मुह मे भर लेती है ।

मै चाची के मुह का नर्म स्पर्श और गर्म अह्सास से और उत्तेजित हो गया जिससे मेरे लण्ड की नशे और तन गयी

मै सिहरते हुए - ओह्ह्ह चाची ये क्या कर रही हो बहुत आराम मिल रहा है

यहा चाची मेरे लण्ड को पकड कर मुह मे आगे पीछे करने और जल्द ही उनकी लार से मेरा लण्ड सन गया ।

और चाची मे मेरे लार से सने लण्ड को दोनो हाथ मे पकड कर सामने की तरफ आगे पीछे करते हुए अपने चेहरे पर एक कामुक भाव लाने लगी ।

मै धीरे धीरे झडने के करीब था और मेरे सुपाडा अब फुलने लगा था ।

मै - अह्ह्ह चाची मेरा पेसाब आने वाला है हट जाओ आगे से

चाची मुस्कुरा कर लण्ड हिलाते हुए - आने दे बेटा आने दे

और अपना मुह खोल कर मेरे पिचकारी छूटने का इंतजार करने लगी ।

मै ज्यादा कुछ बोलता उससे पहले ही मेरी पिचकारी छूट गई और चाची मे मुह और चेहरे पर धार जाने लगी

चाची ने वापस से लण्ड को मुह मे लेके चुसा और लण्ड को साफ किया ।

मै थोडा लड़खड़ा कर दीवाल से लग कर थोडी देर खड़ा रहा और इधर चाची अपना हाथ मुह धुल ली ।

चाची - अब आराम है ना बेटा

मै मुस्करा कर हाफ्ते हुए - हा चाची बहुत ज्यादा

चाची - ठीक है अब उसको अन्दर डाल और निचे चलते है ।

मै बिना कूछ बोले अपना कपडा ठीक किया और चाची के साथ चल दिया ।

मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही थी कि चाची जो कि चाचा से इतना प्यार करती है वो कैसे इतनी आसानी से मेरे साथ ऐसे कृत्य के लिए खुद को तैयार कर लिया ।

और काफी समय से देख रहा हू कि चाची के हावभाव मे काफी बदलाव है ।

उस दिन घर पर भी मा से शर्त लगा कर पापा के सामने खुद को एक्सपोज किया था ।

इनसब परिवर्तन के पीछे का कारण क्या हो सकता है इसका पता लगाना ही पडेगा ।

थोडी देर समय बिताने और चाय नास्ता करने के बाद मै चाची और निशा को बोल कर घर निकल गया और थकान की वजह से घर जाकर पापा के कमरे मे सो गया ।

शाम 6 बजे मेरी निद मा के जगाने से खुली और फिर उन्होने मुझे नास्ता करने को दिया और मै दुकान पर बैठ कर काम करने लगा ।

रात मे पापा आये और फिर हमने नये घर के लिए होने वाली तैयारियो के बारे मे बाते की और होली को लेके सारे इंतजामात की जिम्मेदारी पापा ने खुद लेली ।

इधर हम सब खुश थे कि मेरी चेहरे की हवाइया उड़ गयी क्योकि पापा ने बात ही ऐसी छेड़ दी ।

पापा - रागिनी एक खुशखबरी और है

मा खुश होकर - क्या जी बताईये न

पापा - दरअसल बात ये है कि आज हमारी दुकान पर सोनल के रिश्ते के लिए कुछ लोग आये थे और काफी खानदानी लोग है , खेती बारी करते है और दूध की देयरी भी और सबसे खास बात है ये कि वो सब राज के नाना के परिचय मे है ।

मा खुश से झूम कर - सच में राज के पापा , और लड़का क्या करता है

पापा - लड़का बडे शहर मे बाबू की पोस्ट पर सरकारी नौकरी करता है ।

मा खुश होकर - सुना राज तेरी दीदी के लिए कितना अच्छा रिश्ता आया है ।

लेकिन मै उदास था और मुझे खुश ना देखकर मा को चिन्ता हुई

मा फ़िकर होकर - क्या हुआ बेटा तू खुश नही है

मै - मम्मी-पापा आप लोग क्या एक बार दीदी से बात नही कर सकते कि वो क्या चाहती है ।

मा - उसमे बात क्या करना बेटा , हम लोग उसके लिए कुछ बुरा थोडी ना सोचेंगे । हम मा बाप है उसके

पापा थोडा सोच कर - नही रागिनी कैसी बात कर रही हो तुम ,,, हमारी एकलौती बेटी है वो उसकी पन्सद नापसन्द मायने रखती है और राज की बात ठीक है एक बार तो उसकी रजामन्दी भी तो चाहिये न

मा - ठीक है तो मै बात करती हू उससे

पापा - नही तू नही ,,,मै देख रहा हू इस मामले मे काफी सख्ती दिखा रही हो

मा थोडा सीरियस होकर - अरे इसमे सख्ती क्या है राज के पापा ,, आप तो ऐसे बोल रहे है कि जैसे मुझे मेरी बेटी की चिन्ता ही नही है ।

पापा मुस्कुरा कर - मै मानता हू रागिनी लेकिन सबसे पहले राज उससे बात करेगा ताकि वो अपने मन की बात बेझिझ्क उससे बोले क्योकी मै या तुम अगर बात किये तो शायद वो हमारा लिहाज करके अपने मन की बात हमसे ना कहे और तुम तो जानती ही हो हमारी बेटी कितनी संस्कारी है

मा खुश होकर - हा ये बात भी ठीक है ,,,तो राज बेटा ये तेरी जिम्मेदारी है तू सोनल से बात करके उसकी राय जान ले

मै हा मे सर हिलाया और पापा को एक बार फिर मन ही मन धन्यवाद किया उनकी समझदारि और दुनिया जमाने की दकियानुशी बातो को परे कर अपने परिवार की खुशियो के बारे मे सोचने के लिए ।

फिर पापा ने मुझे उस लड़के की तस्वीर दी जिसे हम सब ने देखा जो कि अच्छा दिख रह था और फिर मै वो तस्बीर लेके ऊपर छत पर चला गया दीदी से मिलने ।

देखते है दोस्तो आगे कहानी क्या नया मोड लेती है ।

आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा

पढ कर अपना बहूमूल्य रेवियू जरुर दे ।

धन्यवाद
 
Update comes late in night.

अभी दो सिटी ल्गा दी है थोडा तडका लगाकर 12 बजे तक मिल जायेगा 😂😂😂😂
 
अपडेट 71

मै तस्वीर लेके छत पर गया और दीदी किचन मे खाना बना रही थी ।

मै दीदी को फ़ोटो देते हुए - लो दीदी आपका एक और दीवाना हाजिर है

दीदी बडे गौर से तस्वीर को देखा और मज़ाक मे बोली - ये चिरकुटवा कौन है भाई हिहिहिही नाक देख इसकी हाहाहाहा

मै - आपका ही होने वाला पति है शायद मा पापा ने पसंद किया है

दीदी सीरियस होते हुए मुझे अवाक सा देख्ते हुए - तू झूठ बोल रहा है ना

मै हस कर - सच मे ये आपके लिये आया है रिश्ता ,,लड़का शहर मे सरकारी बाबू है

दीदी थोडा भौहे चढा कर - तो

मै आश्वस्त होकर - तो पापा ने मुझे भेजा है कि मै आपकी मन की इच्छा जान लू ,,,तो क्या कहती हो हा या ना

दीदी थोडा मन गिरा कर - तू जानता है ना भाई मै अमन से

मै थोडा दीदी को छेड़ कर - तो क्या हुआ मुझे कोई दिक्कत नही है और तेरा भी फाय्दा होगा ,,, यहा मायके मे दो दो अशिक़ भी रहेंगे हाहहाहा

दीदी हस कर - धत्त नही मुझे एक ही आशिक़ चाहिये और एक पति वो भी मायके मे ही

मै - तो मतलब मै मना कर दू

दीदी - बिल्कुल भाई

मै किचन से वापस निकलते हुए - ठीक है मै पापा को बता देता हू

दीदी मुझे रोकते हुए- लेकिन तू उनको कहेगा क्या

मै जल्दी जल्दी बोलता हुआ एक सास मे - यही की तुमको ये लड़का पसन्द नही है और तुम अमन को चाहती हो और मायके मे एक आशिक़ है उसको भी नही छोड़ना चाहती हो हिहिहिहिह

दीदी हाथ मे लिये कल्छुल उठाकर मारने को होती हुई बोली - ब्क्क्क ये सब नही , तू बस मना कर दे और बाकी मै अमन से बात करके बताती हू आगे क्या करना है

मै - हा उसको बोलो जल्दी से घर पर आये रिश्ता लेके नही तो कोई और कब्जा कर लेगा

दीदी हस कर - हा ठीक है लेकिन तू थोडा ध्यान से बोलना ताकि कोई बखेडा ना हो घर मे ,,समझ रहा है ना

मै बिंदास होते हुए - चिल करो दीदी सब सही होगा

फिर मै हस कर वाप्स निचे आ गया

और मुझे वापस देख कर मा उत्सुकता से - क्या हुआ बेटा क्या बोली वो

मै - अरे मा उसको सोचने का समय दो उसकी भी लाइफ है ना ,,यहा हम सब उसके अपने है व्हा के लोगो के बारे मे नही जान्ती वो और ऐसे सिर्फ तस्वीर देख के क्या होता है

पापा - हा बेटा ठीक कह रहा है तू ,,कोई बात नही उसे इत्मीनान से जवाब देने दे वैसे भी लड़के वालो को भी अभी कोई जल्दी नही है मै उनको होली के बाद जवाब देने को बोला है ।।

मा खुश होकर - ब्स ये रिश्ता हो जाये और मेरी बच्ची किसी अच्छे घर सेट हो जाये तो मै गंगा नहा लू

मा की बात सुन कर हम सब भी खुश थे लेकिन मेरे मन मे एक योजना ने जन्म ले लिया।

रात मे हम सभी ने खाना खाया और फिर मै सोने के लिए नये घर निकल गया और 11 बजे करीब सोनल का मेरे पास फोन आया ।

फोन पर



मै - हाय जानू क्या हुआ

दीदी - जानू के बच्चे तुने क्या बोला मम्मी से ,, तेरे जाने के बाद मम्मी मुझे convence करने मे लगी है कि मै इस रिश्ते के लिए हा कर दू

फिर मैने उनको मम्मी पापा की बात चित और अपना मास्टर प्लान समझाया

सोनल खुश होकर - अरे वाह सेम यही मैने सोचा था और इसके लिए अमन से मैने बात भी कर ली है और एक खुशखबरी भी है ।

मै उत्साही होकर - क्या दीदी बताओ ना

दीदी - भाई अमन ने बताया कि उसकी मा हमारे रिश्ते के लिए राजी है और होली के एक दिन पहले ही हमारे घर आने वाले है

मै खुशी से - ओह्ह हो ,, फिर तो आगे मम्मी पापा को मनाने की जिम्मेदारी मेरी

दीदी - हा भाई प्लीज तू सम्भाल लेना

मै - कोई नही दीदी चिल्ल ,, लेकिन बदले मे मुझे क्या मिलेगा

दीदी हस कर - तुझे क्या चाहिये

मै - वही जिसका वादा आप शादी से पहले मुझे देने का की है

दीदी - भाई एक बार रिश्ता होने दे सब कुछ तुझ पर लुटा दूँगी मै और मैने तुझे रोका है क्या कभी आज सुबह भी तो तुने जो किया वो

मै - क्यू मज़ा नही आया क्या मेरी जानू को

दीदी शर्मा कर - चुप पागल

मै - आज तो जीभ डाली थी जल्द ही उसमे वो भी जायेगा

दिदी - भाई प्लीज चुप हो जा ना मुझे शर्म आती है ऐसे


थोडी देर ऐसे ही दीदी से चटपटि बाते कर मै सो गया ।

अगली सुबह मै उठा और वही नये घर पर फ्रेश हुआ और निकल गया टहलने के लिए

आज फिर से सरोजा की मस्तानी जिस्मानी हुस्न का दिदार हुआ और सवेरे सवेरे लोवर मे तम्बू बन गया ।

आज मेरा मन नही माना और मै सरोजा जी के पीछे पीछे निकल गया। यहा तक की वापसी मे भी उन्के पीछे लगा रहा ,, सरोजा भी बखूबी मेरी दिवानगि को समझने लगी थी और मुस्कुरा कर एक दो पलट कर मुझे पीछे आता देखती भी थी ।

जब हवेली का मोड आया तो मै वही रुक गया और आगे जाने की हिम्मत नही हुई लेकिन सरोजा की बेकाबू जवानी ने मेरे लण्ड को और भी बेकाबू कर दिया तो मै छिप कर सरोजा के पीछे जाने लगा ।

सरोजा अब आराम से चल रही थी और वो हवेली के मेन गेट मे ना जाकर सीधा हवेली के बगल से गये एक चकरोड से होकर हवेली के पीछे की तरफ जाने लगी ।

चुकी ठाकुर की हवेली टाउन के थोडा बाहर ही पड़ती थी और उसके पीछे पुरा 50 बीघे का सिवान था जो ठाकुर की ही संपति थी ।

मै चुपचाप सरोजा के पीछे पीछे चला दिया , लेकिन हवेली के बगल की दीवाल की सीमा खतम होते ही वो हवेली के पीछे हाते की तरफ घूम गयी और इसी समय मै अपनी चाल तेज करके हवेली के पीछे आया तो वहा कोई नजर नही आया

मै हवेली के पिछवाड़े इधर उधर देख रहा था कि किसी ने मुझे पीछे से पकड़ा और हाते मे खिच लिया

पहले तो मै चौका फिर ध्यान दिया तो वो सरोजा जी ही थी

सरोजा - तुम पागल हो सड़क पर कम था क्या जो पीछे पीछे यहा तक चले आये

मै सरोजा को नोर्मल देख कर थोडा रिलैक्स हुआ और बोला - सॉरी वो मै रास्ता भूल गया था

सरोजा मुस्कुरा कर - ध्यान कहा था तुम्हारा जो रास्ता ही भूल गये

मै सरोजा की लुभाव्नी बाते सुन कर मस्ती मे - ध्यान तो सही जगह ही था ब्स मै गलत जगह आ गया उसके चक्कर मे

सरोजा ह्सते हुए - तुम पागल हो अब जाओ यहा से कोई देख लिया तो फालतू का बखेडा कर दोगे

मै - तो देख लेने दो हम कौन सा कुछ गलत कर रहे है कि लोगो का डर हो

सरोजा अपना माथा पिट कर - हे भगवान ये लड़का भी ना ,,,,अरे बुधु ये हवेली का पिछवड़ा है और कोई हमे देख लिया तो क्या सोचेगा

मै हस कर - हा वही तो क्या सोचेगा

सरोजा शर्मा कर ह्सते हुए - वो सोचेगा कि हम कि हम

मै उनको उक्सा कर - हा बोलिए ना

सरोजा शर्मा कर - तू बडे चालाक हो मेरे मुह से बाते निकलवा रहे हो ना मुझे जान्ते हो ना मै तुम्हे

मै - तो चलो जान पहचान बढ़ा लेते है हिहिही वैसे आपके भैया मुझे बहुत अच्छे से जानते है और मेरे पापा के दोस्त भी है

सरोजा ध्यान से मेरी बाते सुनते हुए - हम्म्म ये बात

मै - तो अब तो डरने की जरुरत नही है मै आपका अपना ही हू

सरोजा इतरा कर - ओहो इतनी जल्दी मेरा होने को जरुरत नही है हुउह

मै बालो मे हाथ फेरते हुए - फिर क्या करना होगा उसके लिए मुझे

सरोजा शर्मा के - अभी तुम जाओ यहा से बाद मे देखती हू क्या कर सकते है

फिर वो पीछे से ही हवेली मे चली गयी और मै मस्त होकर घर के लिए निकल गया ।

घर पर मै नहा धो कर काम मे लग गया ।

होली को अब कुछ ही दिन रह गये थे तो शाम को पापा के घर आने के बाद नये घर को लेके चर्चा हुई कि जब सारी तैयारियाँ हो ही गयी है तो क्यू ना होली के दिन ही छोटी मोटी पूजा करवा कर लगे हाथ गृह प्रवेश भी करवा लिया जाये और फिर आगे सोनल की शादी तक जब सारे मेहमान एक्थ्था होगे तब विधिवत तरीके से एक बार और पूजा पाठ करवा दिया जायेगा ।।

घर मे सबको पापा का सुझाव पसंद आया और सभी ने अपनी सहमती दिखाई ।

समय बीता और होली के एक दिन पहले तय योजना के अनुसार अमन के चाचा मदनलाल और उसकी मम्मी ममता देवी दोनो पापा से मिलने दुकान पहूचे ।

जिसकी सूचना मुझे सोनल के माध्यम से मिल गयी थी और फिर हम सब शाम को पापा के आने के इन्तजार करने लगे ।

दिन भर मेरी और अनुज की भी काफी भागदौड़ रही क्योकि कल होली के साथ साथ नये घर मे प्रवेश का प्रोग्राम भी था ।

लेकिन समय रहते मैने और अनुज ने सारी तैयारिया पुरी कर ली ।

मेरे अनुमान अनुसार और कल होली की तैयारी को देखते हुए पापा शाम को 5 बजे तक घर आ गये थे और उनके आने के बाद मै और अनुज भी नये घर से दुकान वाले घर आ गये ।

फिर पापा ने मुझे रोका और कुछ बात करने के लिए कहा

मै समझ गया कि क्या बात हो सकती थी ।

फिर पापा ने दुकान मे अनुज को बिठा कर मम्मी और मुझे लेके पीछे कमरे मे गये ।

मा थोडी चिन्ता के भाव मे - क्या हुआ जी क्या बात है , सब ठीक है ना

पापा मुस्कुरा के - हा रागिनी सब ठीक है वो तो एक और खुशी की बात है

मा खुश हो कर - अच्छा तो बताईये ना

पापा - लेकिन उससे पहले मुझे राज से बात करनी है

मै - जी पापा बोलिए

पापा - बेटा ये मुरारीलाल जी का बेटा तेरे साथ ही पढता है ना

मै - जी पापा क्या हुआ

पापा थोड़ा अनुमान ल्गाते हुए - बेटा ये अमन कैसा लड़का है , मतलब बात व्यव्हार कैसा है और तू उसके साथ बचपन से पढा है तो जानता भी होगा ना

मै खुश होकर - पापा वो तो बहुत ही अच्छा लड़का है और पढने मे होशियार है और हालही मे उसने इन्डियन नेवी की परीक्षा दी है और आंसर-की के हिसाब से वो पास हो गया है । जल्द ही उस्का फाइनल रिजल्ट आने वाला है

मा खुश होकर - अरे वाह फिर तो बहुत किस्मत वाले उसके मा बाप जो उनको इतने हीरे जैसी औलाद मिली है ।

पापा मुस्कुरा के मा को थोड़ा कन्फुज करने के अन्दाज मे - क्या हो रागिनी अगर हमारी सोनल की भी ऐसी किस्मत हो जाये तो

मा उत्सुकता से - मै समझी नही राज के पापा

पापा ह्स कर - क्या हो अगर सोनल की शादी अमन से हो जाये तो

मा पहले खुश हुई लेकिन फिर कुछ सोच कर - वो तो ठीक है लेकिन इतने पास मे क्या उसके घर वाले मानेगे

पापा खुशी से - अरे उसकी कोई चिन्ता नही है आज खुद अमन के चाचा और उसकी मा मेरे दुकान पे आये थे सोनल की रिश्ते की बात करने

मा खुश होकर - क्या सच मे राज के पापा ,,अगर ऐसा हो जाये तो कितना अच्छा होगा हमारी बेटी हमसे ज्यादा दुर भी नही होगी और खुश भी रहेगी ।

पापा - वही मै भी सोचा ही रागिनी

मा थोडी परेशान होकर - हा लेकिन क्या सोनल को अमन पसंद आयेगा

पापा ठहाका लगाते हुए - अरे मजे की बात तो तुम जानोगी तो और भी खुश होगी

मा एक अंजान खुशी का भाव लाते हुए - क्या बताओ तो सही

पापा हस कर - अरे रागिनी हमारी सोनल और अमन पहले से एक दूसरे को पसंद करते है और अमन ने खुद पहल करके अपने चाचा और मा को भेजा था ।

मा खुशी से आसू छलक देती - मुझे सम्भलिये राज के पापा ,,,मै मै कही मै पागल ना हो जाऊ ।

पापा ह्स कर मा को कन्धे को थाम कर बोले - कय हुआ जान

मा रोते हुए - मेरे जीवन की सबसे ब्ड़ी चिन्ता आज खतम हो गयी और आज इतनी सारी खुशिया एक साथ मिल रही है तो समझ ही नही आ रहा है कि मै क्या करु

पापा को सम्भालते हुए हस रहे थे लेकिन उन्के आंखे भी छलक गयी और इत्ना इमोसनल सीन देख के मेरे भी आंखे भर आई और मै पापा से चिपक कर उनको हग कर लिया और इधर पापा मेरा भार सम्भाल नही पाये और वो थोडा मा की तरफ झुके

पापा ह्सते हुए - अरे अरे अरे बेटा आराम से

जब तक पापा सम्भाल पाते तब तक देर हो गयी और मै भी मा के उपर आ गया और हम तीनो बिस्तर पे गिर गये bbu

थोडी देर हसी ठहाके बाद मैने ये खुशखबरी सोनल को दी और बदले मे मुझे प्प्पीया झ्प्पीया भी मिली । लेकिन मै ज्यादा इनसब पर ध्यान ना देके सोनल को अमन के साथ बात करने को बोलकर निचे चला आया

निचे आने पर मा पापा से सवाल पर सवाल पुछ रही थी और यहा पाप हस कर सब जवाब दे रहे थे ।

फिर मा - तो मतलब सारी तैयारियाँ हो गयी है

मै हस कर - हा मा , मैने पंडित जी को कल 8 व्जे के लिए बोल दिया है और चाचा चाची को भी बोल दिया है कि समय से 8व्जे तक सबको लेके नये वाले घर पहुचे ।

मा - और वो मीठाइयो का क्या

पापा - अरे तुम चिन्ता मत करो रागिनी सब कुछ हो गया

मा परेशान होकर- हा लेकिन

तभी पापा मा की बात काटते हुए - ऐसा करना राज आज रात तुम अपनी मा की लिवा चले जाना वो सारी तैयारियाँ भी देख लेंगी और सुबह सारा काम भी हो जायेगा

मै खुश होकर हामी भरता हू

और फिर ढेर सारी ना खतम होने वाली बाते होती रहती है और फिर रात के खाने के बाद मा अपना एक बैग लेके मेरे साथ नये घर पर सोने के लिए चल देती है ।

आने वाला पल और होली के रंग राज की दुनिया मे कितने बहार लेके आती है ।

आप सभी के रेवुयू का इंतजार रहेगा

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आज का अपडेट अभी तैयार नही है

जरुरी कार्यो से व्यस्त हू

कल ससमय अपडेट हाजिर होगा

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अपडेट 72



रात 10 बजे तक मै और मा दोनों साथ मे बाते करते हुए जा रहे थे। मम्मी काफी खुश नजर आ रही थी ।

मै - क्या बात है मा काफी खुश लग रही हो

मा मुस्कुरा कर - हा अब खुश रहूँगी ना मेरी सारी टेन्सन जो दुर हो गयी और अब तो जिवन मे खुशिया ही खुशिया है

मै खुशी के भाव मे - हा वो तो है लेकिन अभी एक टेन्सन और बाकी है मा

मा उत्सुकता से - वो क्या

मै ह्स कर - मेरे लिए लडकी कौन खोजेगा मा हाहाह्हा

मा - अरे हा !!!

अभी तेरे लिए और अनुज के लिए भी तो देखना है

मै हस्ते हुए - अरे मा मेरे लिए ना मिलेगी तो भी चलेगा

मा उत्सुकता से- क्यू तू नही करेगा शादी

मै हस कर मा की कमर मे हाथ फेरते हुए - मेरे लिए तुम हो ना मेरी जान

रात मे सुनसान सड़क पर मेरी हरकत से मा घबरा गयी

मा - तू पागल है क्या रास्ते मे ये सब ,,,,कोई देख लेता तो

मै हस रहा था मा की प्रतिक्रिया पर

मा - मै हू तो क्या मतलब ,, तू शादी नही करेगा क्या

मै - शादी तो कर लू मा लेकिन पता नही वो कैसी होगी ,,आप जितनी गर्म और सेक्सी होगी भी या नही

मा हस कर - धत्त पागल , वो तो तेरे उपर है कि तू उसे कैसा बनाना चाहता है

मै संकोची होकर - मतलब मै कैसे

मा मुझे समझाते हुए - बेटा शादी शुदा औरत अपने पति पर ही निर्भर होती है और सुहागरात से लेके आने वाले जीवन के सभी नयी परिस्थितीयो मे वो अपने पति के बताये रास्ते पर ही चल कर आगे बढ़ती है और एक पति चाहे तो उसे संस्कारी बहू या एक सड़कछाप बेश्या बना सकता है ।

मै मा की बाते बहुत गौर से सुन रहा था और कही न कही खुद को इनसब से जोड कर एक नयी कलपना को मन मे जन्म देने लगा था ।

मा - इसिलिए मै कह रही थी कि तू जैसी चाहेगा वो वैसी ही हो जायेगी , अगर तू उसे रोज प्यार करेगा तो वो भी मेरे तरह गर्म और सेक्सी हो जायेगी और नही ज्यादा ध्यान देगा तो कही बाहर मुह मारेगी हाहहहहह समझा

मै मा की बातो मे सहमती जताते हुए हस रहा था

इतने मे हमारा नया घर आ गया था जो बाहर की लगी लाईट से जगमग था

नये घर का परिचय

2100 sq फिट मे बना 35×60 का मकान है ।

मेन गेट से घुस्ते ही थोडी खाली जगह रखी गई और फिर बीच से एक गलियारे से होते हुए हाल मे प्रवेश ।

गलियारे के दाई तरफ बाथरूम अटैच गेस्टरूम और बाई तरफ किचन है ।

हाल मे दाई तरफ सोफ़ा रखा गया है और बाई तरफ से सीधी उपर को जाती है ।

सामने की तरफ 2 बड़े मास्टर साइज़ बेडरूम है दोनो के सेप्रेट बाथरूम है ।

सामने दोनो बेडरूम के बिच से एक गैलरी पीछे जाती है जहा पर कपडे धोने के लिए जगह छोडी गयी है ।







फ़र्स्ट फ्लोर

उपर भी निचे के जैसे सेम दो बडे मास्टर साइज़ बाथरुम अटैच बेडरूम है

ब्स वॉशिंग एरिया को स्टोररूम मे बदल दिया गया है

और किचन को स्पेयर रूम के लिए रखा गया और गेस्टरूम को बालकीनि मे बदल दिया गया है ।

पुरा घर वेल फर्नीश्ड है

फर्श पर टायल , टीवी , फ्रिज, वॉशिंग मशीन की सुबिधा






सबसे उपर के फ्लोर पर एक टोइलेट बाथरूम बनवाया गया सबसे पीछे की तरफ

मा नये घर की रौनक देखकर काफी खुश नजर आ रही थी और मेरे द्वारा की गई तैयारीयो के लिए मेरी तारिफ भी की

फिर हम गेस्टरूम मे गये और वहा रखे सारे सामान के बारे मा ने देख परख की और जब मन से संतुष्ट हुई तो उसके चेहरे की लाली देखने लायाक थी ।

मै मा को पकड कर वही गेस्टरूम के बिस्तर पर लेट गया

मै - बाकी का काम होता रहेगा पहले हम अपना काम निपटा ले

मा समझ गयी औए शर्मा कर - नये घर का भी सत्यानाश करेगा क्या

मै हस कर मा की चुचियो को साडी के उपर से ही मिजते हुए बोला - सत्यानाश नही मा मै तो इस नये घर सबसे पहली चुदाई का उद्घाटन करना चाह रहा हू

मा शर्मा कर - धत्त बदमाश

मा को शर्माता देख मै उनके उपर चढ़ गया और उनको रगड़ने मसलने लगा ।

जल्द ही मा भी गर्म होके मेरे साथ लग गयी और मै मा के उपर चढ़ कर उसकी चुचियो को मसलते हुए उन्के मोटे होठो को चूसना शुरु कर दिया और मा भी मेरे सर को सहलाते हुए मेरे होठ खिचे जा रही थी ।

होठो के साथ हम दोनो एक दूसरे के जिभ को भी पकडने की भरपुर कोसिस मे अपनी चुम्बन को और गहरा करते गये जिससे मेरे कमर ने मा के जांघो को खोलना भी शुरु कर दिया

मा भी मेरे बदन पर हाथ फेरते हुए अपने जन्घो को खोल कर कमर उच्काना शुरु कर दी

जल्दी मैने मा की साडी का पल्लू उनकी छाती से हटाया और उनकी मुलायम चुचो को ब्लाउज के उपर से ही दबाते हुए काटने लगा । वही मा जबरदस्त मस्ती मे आ गई और मै उनकी मादकता को देख के उन्के ब्लाउज के बटन खोल दिये और ब्रा के एक कप से एक चुची को हलोर के बाहर निकाला जिस्से मा की सिसिकिया बढ़ गयी ।

और मै जीभ लपल्पाते हुए उनकी चुची को मुह मे भर लिया और चूसना शुरु कर दिया

मा अपने चुचे पे मेरे जीभ को साप के जैसा लोटता पाकर अपने कन्धे झटकते हुए गाड़ हिच्काने लगी और मै भी अपना लण्ड साडी के उपर से ही मा की पेड़ू वाले हिस्से पर रगड़ते हुए चुचियो को मिजते हुए चुसने ल्गा ।

जल्द ही मा की तडप बढी और वो खुद से अपनी साड़ी और ब्रा ब्लाउज निकाल दी और मेरे सर को वापस अपने चुचो मे घुसाते हुए - ले बेटा पी ले और चुस हा अह्ह्ह्ह मा ऐसे ही और्र ले बेटा उह्ह्ह्ह माआ ऐसे ही अझ्ह

मै मा को लिता कर झट से उनका पेतिकोट उथाया तो देखा अन्दर खुली चुत अपना सफेद क्रीम छोड रही थी और चोकोलेटी चुत की फल्के बहुत ही टेस्टि दिख रही थी तो मैने भी देर ना करते हुए झट से मा की जांघो को फैला के अपना मुह उन्के भोस्दे मे ल्गा दिया और किसी कुत्ते के ल्पालप जीभ चलाने ल्गा ।

मा की हल्के बालो वाली मुलायम चुत पर मेरे जीभ के मुलायम और नुकीले स्पर्श से मा कामूकता से भर गयी और मेरे बाल को खिचते हुए अपने भोस्दे के होठो पर मेरे नथुने और होठो को रगड़ते हुए गाड़ पटकने लगी ।

मा - अह्ह्ह बेटा डाल दे नही रहा जा रहा है उह्ह्ह मा अह्ह्ह मेरा लल्ल्ला आह्ह

मै सर उथा कर देखा मा आखे बंद किये अपने सर इधर उधर लण्ड की तडप मे झटक रही थी तो मै भी बिना देरी के अपना लोवर निचे के बिना किसी आव देख न ताव घ्च्च्च से सुखा मोटा लण्ड मा के भोस्दे मे पेल दिया जिस्से मा की चीख और आंखे और चीख बाहर आ गई एक साथ

मै मा की जांघो को कन्धे पर उठाए उनकी चुत की गहराइयों मे लण्ड को उतारते हुए बोला - क्या हुआ मा म्ज़ा आया

मा हाफ्ते हुए - आह्ह हा बेटा ऐसे ही फाड उफ्फ्फ अह्ह्ह ऊहह सीईई उम्म्ंम्ं ह्य्य्य कितना गर्म और मोटा है बेटा अह्ह्ह्ह और चोद फाड दे

मै घ्चा घच मा की चुत मे लण्ड चोदे जा रहा था और मा भी भरसक उत्तेजित किये जा रही थी और जल्द ही हमारी यात्रा को विराम लगा जब मा ने जोश मे आकर खुद को झडने से रोकने के लिए मेरे लण्ड को निचोड़ना शुरु कर दिया और मेरी सारी ऊर्जा मा की चुत मे घ्प घप पेलने जाने लगी

जल्द ही मेरे लण्ड की नशे सिथिल हुई और भलभला मै मा की चुत मे उन्का नाम लेते हुए झडने लगा और आखिरी धक्को के साथ मा के चुचो पर गिर गया ।

वही गेस्टरूम मे मैने मा को नये बेड पर देर रात तक चोदा और सुबह 5 बजे का अलार्म सेट कर एक दुसरे से चिपक कर सो गये ।

सुबह 5 बजे अलार्म बजा तो मेरी निद खुली और लण्ड भी हल्की ठण्डक भरी सुबह मे गरमाहाट से खड़ा होने लगा था ।

फिर मेरी नजर मेरे गदराई नंगी मा पर गयी और उसके सुखे मोटे होठ देख कर मुझसे रहा नही गया तो मै उन्के बगल मे आकर अपना लण्ड का सुपाडा उनके होठो से टच करने लगा ।

जल्द ही मेरे सुपाडा की गन्ध ने मा की निद मे खलल डालना शुरु कर दिया और वो धीरे धीरे मादक सिसकिया लेने लगी क्योकि मै एक हाथ उन्की मुलायम चुचियो को सहला रहा था और उन्के कडक मोटे किस्मिस के दाने जैसे निप्प्ल मेरे हथेली को टच कर मेरे बदन मे एक गजब का सिहरन पैदा कर रहे थे जिस्से मेरे लण्ड मे नयी ऊर्जा का संचार होने लगा और मै मा के हल्के खुले होठो के बिच सुपाड़े को डाल दिया और धीरे धीरे मा को सांस लेने दिक्कत आनी शुरू हुई जिस्से उन्होने गहरी सांस के लिए और मुह खोला और मेरा लण्ड गप्प से उन्के गले तक उतर गया जिससे अफ्नाहत मे मा की आन्खे झट से बाहर को आ गयी मानो और वो मेरे जाघो पर मारते हुए लण्ड बाहर निकालने को बोलने लगी ।

फिर मैने वाप्स लण्ड बाहर निकाला तो मा ने थोडी देर गहरी सांस ली और थोड़ी गुस्से मे मुझे देखने लगी तो मै मुस्कुरा कर अपना लण्ड वापस उन्के मुह पे पटकने लगा और वो एक कातिल मुस्कान के साथ मुह खोल कर मेरे लण्ड को चूसना शुरु कर दी जल्द ही उन्के होठो के जादू से मेरा सुबह का पहला वीर्यपान मा ने कर लिया ।

फिर समय देख के हम दोनो जल्दी नहा धो कर तैयार हुए और गृहप्रवेश की पुजा के लिए सारी तैयारियाँ कर ली और 7 बजे तक पापा दीदी और अनुज भी तैयार होके आ गये । फिर 8 बजते बजते चाचा का पुरा परिवाए और विमला मौसी भी आ गई ।

फिर तय मुहूर्त मे पंडित जी ने पूजा करवा कर नये घर मे प्रवेश करवाया और फिर पापा ने चाय नास्ते का व्यव्स्था करवाया और 10 ब्जे तक सारे कार्यकर्म समाप्त हुए

सभी ने घर का एक एक हिस्सा देखा और काफी तारिफ भी की ।

दीदी और अनुज ने तो उपर का दोनो बेडरूम बुक कर लिया और मा ने भी निचे का बाई तरफ का बेडरूम अपने लिये चुन लिया तो बचा आखिर मे एक ही वो मेरा हो गया ।

इधर सब घर देखने मे बिज़ी थे और उधर पापा ने सबसे उपर वाले फ्लोर पे होली खेलने के लिए व्यव्स्था कर दी और सारे समान मीठाईया, सब कुछ उपर एक छोटा स्ताल लगवा कर सेट कर दिया । और होली हो उसमे डीजे पर गाना बजाना ना हो तो सब फीका पड़ जाता तो मैने पापा को बोल कर वो अरेंजमेंट भी करवा दिया था ।

फिर 11बजे तक पापा ने सबको होली खेलने का प्रस्ताव रखा और सारे लोग अपने कपडे बदलने के लिए अलग अलग कमरो मे चले गये जो ये प्लान कल शाम को ही मैने चाचा और विमला को बता दिया था और सारे लोग अपने कपडे और समान लेके आये थे ।

देखते है दोस्तो ये होली कितनी रंगीन होगी ???

और क्या क्या धमाल होगा जब भाई बहन , देवर भाभी , जेठ - भयोह , पति- पत्नी और एक गर्म रसभरी गदरायी विधवा होली के रंग मे सारे एक साथ रगेंगे ।

आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा

पढ कर अपना कितनी रेवियू जरुर दे ।

धन्यवाद
 
अपडेट 73

पापा के कहने के बाद सभी अलग अलग कमरो मे चले गए ।

निशा और सोनल एक साथ एक बेडरूम मे

मा , चाची और विमला एक बेडरूम मे

और बाकी सारे जेन्स गेस्ट रूम मे चले गये ।

अक्सर होली मे लोग बडे शहरो मे नये कपडे सिलाते है लेकिन हम मिडिल क्लास के लोगो अपनी पुरानी जीन्स और जेब फटी शर्ट भी होली के दिन नयी लगने लगती है ।

जैसा ही आम छोटे शहरो मे होता है , मैने भी अपने पीछले साल के गर्मी वाले हाफ़ लोवर डाले और एक पुरानी टीशर्ट पहन ली जिसकी निचे की फोल्डिंग खुली थी और एक दो जगह होल बने हुए थे ।

वही अनुज मेहमानो के आने वजह से खुद को थोडा अच्छे साफ कपड़ो मे रखते हुए एक शर्त और जीन्स पहन लिया जो कि दिवाली पर ही लिया था उसने ।

राहुल भी शर्मिला था या कहू अनुज के साथ मिल कर उसने भी हालही मे खरीदे कपड़े पहने थे ।

वही पापा ने तो होली के स्पेशल सफेद कुर्ता पजामा सिलाया और चाचा ने भी सेम पापा के जैसे ही सिलाया था । मानो दोनो मे मिल के साथ मे कपड़े लेके सिलवाये हो लेकिन ऐसा नही था और पापा तो हर साल होली के लिए कपडे सिल्वाते है क्योकि वो अब टाउन मे नामी सेठ मे थे और शाम तक अपने कमेटी के बडे लोगो और दोस्तो के साथ उठना बैठना होता था इसिलिए ।

बाकी हम सब तैयार होकर हाल मे आये ।

पापा चाचा ने अपने मोबाईल बंद करके वही गेस्टरूम मे रख दिया लेकिन मैने नही रखा क्योकि मुझे काफी तस्वीरे निकाल्नी थी वो भी रंग बिरंगी

हाल मे आते ही मैने सारे जेन्स को साथ मे खड़ा कर एक सेल्फी ली ।

तब तक सामने के एक बेडरूम से मा विमला और चाची निकली

ओहो क्या बात थी

विमला ने पहले की तरह ही जैसा वो कपड़े पहना करती थी , हल्के गुलाबी कुर्ती और सफेद लेगी मे थी और एक सफेद दुपट्टे को एक साइड से क्रॉस करके कमर मे बाँधा हुआ था । लेकिन उसकी 40 के उभरे हुए चुतड ने कुर्ती को उठा रखा था और लेगी मे कसी जान्घे और कुल्हे , चुतड़ की निचले गोलाई के साथ साफ साफ दिख रही थी

वही चाची भी मॉडर्न लूक मे एक धानी रंग की कुर्ती प्लाजो सेट मे बिना दुपट्टे के थी जिससे उनकी 36की चुचीयो ने कुर्ती और सीने के बिच गैप बना कर अपनी घाटीया दिखा रही थी और वो पापा के सामने मा के पीछे होकर थोडी छिप कर थी ।

वही मा ने एक बैगनी सूती ब्लाउज के साथ हल्के अंगूरी रंग की सिफान की साड़ी पहने हुए थी । जिसमे उनका कामुक जिस्म का कताछ और भी निखर रहा था । सूती ब्लाउज मे भरे हुए चुचे साडी के पल्लू से झाक रहे थे और चुचियो की घाटी उस पारदर्शी सिफान की साडी के बाहर से भी दिख रही थी।

आज तीनो के तीनो क्या कमाल लग रही थी , लण्ड खड़ा करके रख दिया था

मा - अरे एक दो तस्बिरे हमारे साथ भी लेलो जी

मा की बाते सुन कर पापा - कहो तो फ़ोटोग्राफर बुला देता हू वैसे भी किसी हेरोइन से कम नही लग रही हो रागिनी

मा , पापा की बात सुन के शर्मा गयी और पापा को आंख दिखा कर - क्या जी बच्चे हैं फिर भी आप

पापा ह्स्ते हुए - अरे भाग्यवान आज होली है और आज कोई शर्म नही रखना चाहिए ,

पापा चाची को देखते हुए बोले - और राहुल की मम्मी तुम भी मत शर्माओ आओ सबके साथ तस्वीरे जो जाये

चाचा - हा शालिनी यहा कोई दिक्कत नही है तुम चिन्ता ना करो आओ यहा

फिर मा पापा के सामने आई और पापा उन्हे अपने थोडा सा बगल मे किया। ठीक वैसे ही चाची आगे और चाचा उन्के कन्धे पकडे हुए उन्के पीछे और फिर बगल मे विमला मौसी फिर राहुल और अनुज एक दुसरे के कन्धे मे हाथ डाले हुए खडे हुए

मै सबके सामने आकर एक जगह चुनी जहा से सारे लोग एक ही सेल्फी मे आ जाये और फिर स्माइल बोलकर दो तीन सेल्फी ली

फिर मैने राहुल को बोला की वो तस्वीरे निकाले और मै विमला मौसी के पीछे खड़ा हो कर सामने देखते हुए स्माइल करने लगा कि मुझे विमला के बदन ने आती परफ्युम की खुस्बु ने उसके जिस्म को स्कैन करने पर मजबुर कर दिया और ना चाहते हुए भी सबकी मौजूदगी मे मैंने विमला के पिछवाड़े पर नजर मारी और गुलाबी कुर्ती मे उभरी गाड़ की गोलाई ने मुझे और मेरे लण्ड दोनो को एक अन्गडाई लेने को मजबुर कर दिया और मैं विमला के थोडा सट कर विमला की मखमली गाड़ की गोलाई को सहलाने लगा

पहले विमला सहम गई लेकिन फिर उसे अह्सास हुआ कि मै हू तो वो अपनी कोहनी से हल्का सा मार के आंख दिखाती हुई मुस्कुरा रही थी वही मै उसे एक शरारत भरी मुस्कान देके उसके गाड़ के मुलायाम पाट को एक बार अच्छे से दबा कर छोड दिया और फिर तस्बिरे निकलवाने लगा ।

इसी बीच सोनल और निशा स्कर्ट और टॉप मे कमरे से बाहर आई।

सोनल जो कि लॉन्ग आसमानी टॉप और मैटी पिंक मे लॉन्ग स्कर्ट पहने हुए थी वही निशा भी रानी कलर की टीशर्ट और एक हरे रंग की प्रिंटेड स्कर्ट पहने थी ।

सोनल - अरे अरे पापा हम लोग भी है ना

पापा हस के - हा बेटा आओ ना यहा आओ तुम

फिर पापा के आगे एक तरफ मा और एक तरफ दीदी खड़ी हुई और पापा ने दोनो के कमर मे हल्के हाथ डाल दिया जिससे पहले तो सोनल हिचकी लेकिन फिर नोर्मल होकर तस्वीरे निकलवाई

पापा को देख के चाचा ने भी चाची और निशा के साथ ऐसे ही पोज मे तस्वीरे निकलवाई

फिर हम सब भाई बहनो ने एक दूसरे से चिपका चिपकी करते हुए और एक दुसरे के गालो पर किस्स करते , और पाऊट करते हुए काफी तस्वीरे निकाली और फिर हम सब उपर की छत पर जाने लगे ।

जैसे ही हम सीढियो की ओर जाने को हुए की राहुल और अनुज मे होड़ हुई की कौन उपर पह्ले जायेगा और वो दौड़ लगाते हुए तेजी से उपर भागे और तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया

मै भी उन्के पीछे दौडता हुआ तेजी से उपर गया और जल्दी से अनुज और राहुल को अपना प्लान बताया ।

इधर अनुज ने राहुल से उसका मोबाईल लिया और झट से डीजे के पास गया फिर एक होली का मस्त गाना लगा दिया वो भी भोजपूरी ट्यून मे

भोजपुरी धुन पर खेसारी लाल की जबरदस्त होली की आईटम सोंग सुन कर मै भी मस्ती मे झूम गया और अपने फोन का कैमरा चालू किया

वही राहुल भी झट से एक बाल्टी भर अबीर लेके जीने के दरवाजे पर बने रैक पर जाकर खड़ा हो गया ।

मै सबके आने का इन्तेजार करने लगा और जैसे ही पापा चचा मम्मी चाची आगे आये मैने खुब तेज आवाज मे ह्ल्ल्ला करते हुए बोला - होली है !!!!!!

और तभी राहुल मे हाथ मे ली बाल्टी उल्टी करके स्ब्के उपर मिक्स रंग वाली अबीर गिरानी सुरु कर दी और सारे लोग ह्स्ते चिल्लाते भागते हुए छत के बीच मे आये और अबीर से सराबोर हो गये । लेकिन सोनल और निशा वही अन्दर ही रुक गये ।

पापा और चाचा जल्दी जल्दी अपने बाल झाड़ने मे लगे थे और

मा अपना पल्लू सिने से हटा कर ब्लाउज मे घुसे अबीर को सामने की तरफ झूक कर झाड़ रही थी जिससे उसकी मोटी चुचियो पर अबीर और फैलने लगा

विमला भी अपने सर झाड़े

लेकिन स्ब्से ज्यादा अगर किसी की दिक्कत थी वो थी चाची को

उनकी खुली कुर्ती और सीने के बिच खुली घाटियो मे अबीर स्ब्से ज्यादा भर गया था और वो तो मुथ्थीया भर कर निकाल रही थी ।

वही ये सब चीजे मै रिकॉर्ड करते हुए हस रहा था ।

मा हस कर झल्लाते हुए - ये क्या मज़ाक है राज

मै मा के सामने कैमरा ले जाकर हाथ मे लिये अबीर उन्के गालो पर मलते हुए कहा- हैप्पी होली मा येईईईईईईए

मा परेशान होकर मेरी तरफ आई और मै झट से मोबाईल बंद कर ह्स्ते हुए भागा । मा ने स्टॉल से हरे रंग की अबीर दोनो हाथ मे लेके मेरे तरफ भागी और विमला को बोली - पकड इसे विमला

मै ह्स्ते हुए भागरहा था पर

ज्यादा दुर नही जा पाया था कि विमला ने मुझे एक तरफ से दबोच लिया और ऐसा पकड़ा की मेरे हाथ भी उसके बाजुओ के गिरफ्त मे थे वही मेरे छटपटाने से उसकी मुलायम चुचिया मेरे पीठ मे गुदगुदी करने लगी और हसी इत्नी आ रही थी कि मै चाह कर भी कोई ताकत नही लगा पा रहा था और इसी ने मम्मी आई और दोनो हाथो से मेरे चेहरे को अबीर से रंग दिया ।

दो गदराई औरतो ने मिल कर मानो मेरी इज्ज्ज्त पर हमला कर दिया था और उन्के मदमस्त स्पर्श ने मेरे लन्ड मे तनाव ला दिया था ।

फिर विमला ने मुझे छोडा और वो मा के साथ हस्ते हुए स्टॉल पर चली गयी ।

इधर अनुज एक से एक अस्लील भोजपूरी गाना चला रहा था ।

सब केहू आपन चोख पिचकारी हूरे के चाहेला ।

हम सबकर भला चाहिला हमार सब बुरे चाहेला ।।


यहा गाने पर कहा कोई ध्यान दे रहा था । सब अपने मे मस्त थे ।

तभी पापा बोले - अरे बेटा थोडा हमारे समय का भी कोई मस्त गाना लगाओ

तभी मुझे एक मस्त गाने का ध्यान आया और मैने झट से यूट्यूब से एक 70s का सुपरहित राजेश खन्ना का होली का गाना चला दिया

जिसके शुरुवाती धुन सुन कर पापा चहक उठे और हाथो मे अबीर लेके मा के तरफ जाते हुए गाने की धुन पर लटके झटके लगाते हुए और गाने के साथ खुद भी तेज आवाज मे सुर मिलाते हुए गाना गाने लगे - हे आज ना छोड़ेंगे

दीपकक धी ढिपकक धी

दीपकक धी ढिपकक

मा पापा को अप्नी तरफ आता देख खुद को बचाने के लिए अपने गाल छिपाने लगी लेकिन पापा ने जबरजस्ती गाल गुलाबी करने लगे ।

और फिर मा के गाली को गुलाबी करते हुए - हा आज न छोड़ेंगे बस हमजोली ,,, खेलेंगे हम होली , खेलेंगे हम होली

मा पापा की हरकतो से शर्मा गयी और छत के दुसरी तरफ स्टॉल से दुर भागने लेकिन पापा गाने से सुर मिलाते हुए मा को प्यार जताते हुए पीछे से पकड कर उनकी नंगी क्मर और मुलायम पेट पर अबीर मल्ते हुए गाना गाते है - चाहे भीगे तेरी चुनरिया ,, चाहे भीगे रे चोली खेलेंगे हम होलीईईईईई

होली है!!!!!!

ये बोल कर पापा हवा मे अबिर उड़ा देते है और मा का हाथ पकड़कर नाचने लगते है ।

पापा की मस्ती देख कर अनुज भी मस्ती मे आकर मुझे अबीर लगाता है तो मै उसको राहुल से पकडवा कर स्टॉल तक लाता हू और निचे लिता कर एक एक रंग का अबीर ऐसे लगाता हू मानो शादी मे हल्दी ल्गाया जा रहा हो और हम सब की हरकते देख कर चाचा चाची विमला , और सोनल निशा सब मस्त थी ।

वही सोनल पहल करके थोडे अबिर लेके पहले चचा चाची को ल्गाती है और उन्के पैर छूकर आशीर्वाद लेती फिर विमला के पास जाकर उसको भी गालो मे रंग लगा कर उसके भी आशीवाद लेती है और ठीक वैसे ही निशा भी अपने मम्मी पापा को रंग ल्गा कर उन्के आशीर्वाद लेते हुए विमला को ल्गाती है और विम्ला उस्का माथा चूम कर उसको खुश रहने को कहती है

लेकिन जब मेरी नजर मेरी साफ सुथरी बहनो पर जाती है तो मै राहुल और अनुज को इशारा करके उनको घेरने को कहता हू , लेकिन सोनल मुझे ऐसा करते देख समझ जाती है और स्तर्क होने लगती है

लेकिन मै भी कम नही था भर कर मुठी मे अबीर लेके उसको पकड कर झुकाते हुए मुह पर हरा अबीर दर दिया और गालो को चूम भी लिया ,,,

सोनल ह्स्ते हुए - कमिने रुक बताती हू

इधर वो अबीर लेने गयी और यहा निशा को निचे लिटा कर अनुज और राहुल जमकर उस्के बालो गालो और गरदन पर रंग लगा के छोड दिया ,, जमीन पर गिरने से उसका टीशर्ट उपर होगया और उसकी नाभि दिखने लगी थी

वही सोनल मेरे तरफ अबीर लेके आती है तो मै उस्के सामने आंखे बंद कर बाहे फैला कर खड़ा हो जाता हू और फिल्मी होते हुए शाहरुख के अंदाज मे बोलता हु - आओ लगा लो मै नही रोकूँगा तुम्हे

इधर मम्मी पापा भी वाप्स स्टॉल तक आ गये थे ।

मेरे मस्त होकर रंग लगवाने के हरकत से सब हस रहे थे और मै आंखे बन्द किये सोनल के मुलायाम हाथो से अपने चेहरे पर अबीर लगने का इन्तेजार कर रहा था कि तभी मुझे मेरे लोवर की लास्टीक मे पीछे की तरफ से खिचाव मामूल पडा और मैने आन्खे खोली तो देखा सोनल सामने खड़ी हस रही थी और जब तक मै कुछ समझकर पीछे घूमता किसी के मुलायम हाथ मेरी नंगी चुतडो के गालो को गुलाल से ठण्डा कर रहे थे और मेरी नजर जब घूमी तो वो मा थी जो मेरे लोवर मे हाथ डाल कर मेरे पिछवाड़े मे अबीर डाल रही थी

मा को देखते ही मै झटक कर उनसे दुर हुआ और अपने लोवर की लास्टीक फैला के पिछ्वाडा झाड़ने लगा और मुझे ऐसा करते देख सारे लोग

हस हस कर लोटने लगे ।

मा मुह पे हाथ रखे हस कर भागने लगी और कभी विमला के पीछे छिपने लगी तो कभी चाची के और जब चाची के पीछे गयी तो मै चाची के सामने से उनको लपक कर पकड चाहा इस चक्कर मे चाची और मै डिसबैलेंस होकर गिरने लगे और चाची बगल मे खडे पापा के हाथ को पकड कर सहारा लेने चक्कर मे उनका पैजामा खिच दिया और फिर हम फर्श पर आ गए पापा के पायजामे क साथ ही

पापा ने झट से वापस पैजमा उपर चढ़ाया और हम खडे खडे हसने लगे ।

चाची शर्म से लाल हो गयी थी और वो पापा को सॉरी बोलती है तो पापा उनको रिलैक्स होंने का इशारा करते है ।

इधर हसी का महोल चल ही रहा होता है की मा छोटी वाली बाल्टी मे अबीर भर कर स्टॉल वाली टेबल पर चढ़ते हुए चुपके से चाचा के सर पर बाल्टी उडेल देती है

मा हस्ते हुए - देवर जी बडे साफ साफ लग रहे थे अब मज़ा आया हिहिहुही

इतने चाचा ने मा की कलाई पकड ली और निचे उतार कर दुसरे हाथ मे गुलाबी अबीर लेके छिटा मारते हुए मा के गरदन और छातियो पर मारते हुए बोले - म्ज़ा तो अब आया है भौजी हाहाहा हाह

और शुरु हो गयी देवर भौजी वाली मस्तीया रंग भरी वो उनको पुरे छत पे दौडाने लगे

इधर विमला अकेले किनारे खडे हस रही थी और पापा की नजर उसपे गयी तो वो भी बडे इत्मीनान से हाथो मे रंग लेके विम्ला की तरफ गये

पापा हस कर - अरे बहन जी थोडा बहुत आप भी मज़ा लिजिए आईये हम भी आपको गुलाल लगा देते है

विम्ला शर्मा कर नही नही करती रही लेकिन पापा एक हाथ से थोडा थोडा गुलाल विम्ला के गालों पर हल्के हाथो से लगा कर होली की बधाई दी

तो बदले मे विमला उनका हाथ पकड कर स्टॉल तक ले आई

और अबीर से भरी थाली मे केसरिया रंग हाथो मे भर के पापा के पुरे चेहरे पर मलते हुए कहा- आपको भी होली की बहुत बहुत बधाई भाईसाहब

पापा का चेहरा जब अबीर से भर गया तो वो भी बदले मे विम्ला की कलाई पकड कर बोले - आपने तो कुछ ज्यादा ही बधाई देदी बहन जी , आईये थोडा हिसाब बराबर कर लेते है

इधर पापा ने भी वापस से अबीर लेके विमला के गरदन और मूलायम गालो पर अबीर अच्छे से मला

इधर सारे लोग मस्ती मे मगन थे और डीजे पे गाना तेजी से चल रहा था जिसे मन हो रहा था मिठाइया खा रहा था पानी पी रहा था और मै भी ऐसा खोया था कि जो भी मिलता उसके साथ चिल्ला के रंग लगाते हुए नाच रहा था ।

फिर मुझे थोडा पेसाब मह्सुस हुआ तो मै स्टॉल से हट कर पीछे की तरफ पेसाब करने जाने ल्गा

डीजे पर बज रहे गाने पर झुमता हुआ मस्त बाथरूम् खोला और मुतना चालू किया और जेब से मोबाईल निकाल कर देखा तो चंदू के काफी मिसकाल आये थे और मैसेज मे काफी गालिया भरी हुई थू की

कहा है तू , फोन क्यू नही उठा रहा , उसने मेरी मा बहन को भी काफी इज्ज्ज्त भरे लहजे मे कुछ अच्छे सामाजिक शब्द लिखे थे

मुझे उसका मैसेज पढ कर हसी आई और मैने उसको एक मैसेज करके बोल दिया कि मै नये घर पर हू और यही होली खेल रहा हू, शाम को पंडाल मे मिलूंगा

फिर मैने मोबाइल वापस जेब मे रखा की तभी डीजे पर एक गाना खतम हुआ और दुसरा शुरु होने का था कि मुझे किसी के खिलखिलाने की आवाज आई बाहर से ही

मै चौका और बाथरूम से निकल कर बाथरूम के बगल और छत की चारदिवारी के बिच मे जो खाली जगह थी वहा बाथरूम की दिवाल से लग कर हल्का सा झाका

तो चाचा मा को पीछे से पकड के उनकी नाभि मे अबीर मल रहे थे और मा उन्हे ना ना कर रही थी । मा को चाचा की बाहो मे छतपताता देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया

चाचा - आज मना मत करो भौजी आज तो मै इनको रंग लगा कर ही रहुन्गा

मा - तो लगा लो ना कहो तो चोली खोल दू हिहिहुही

चाचा मा की बात से खुश होकर उन्की मुलायम नाभि वाले हिस्से के पेट को हाथ मे दबोचते हुए कहा - बड़ी जल्दी है भौजी आपको चोली खोलने की हा

मा मुस्कुराते हुए छटकती रही वही चचा ने मा का पल्लू हटा के मा की चुचियो पर गुलाबी अबीर मल दिया और बलाऊज के उपर से चुचियो को मिजने लगे

मा चाचा के स्पर्श से पागल होने लगी और वो चाचा की बाहो मे ढीली पडने लगी

चाचा - आह भाउजी आपकी छाती तो काफी मुलायम है अह्ह्ह

मा हफते हुए - बस करिये देवर जी कोई आ जायेगा अह्ह्ह उम्म्ंम

चाचा को ध्यान आया कि वो कहा खो गये थे तो उन्होने मा को छोडा और मा झट से हस्ती हुई भाग गयी और मै भी वहा से वापस बाथरुम मे घुस गया कि वो मुझे ना देख पाये

फिर थोडा रुक कर वापस स्टॉल की तरफ आया तो सारे लोग म्स्त थे लेकिन पापा और विमला कही नजर नही आ रहे थे ।

मै इधर उधर काफी देखा लेकिन वो नजर नाही आये

आखिर कहा गये होगे मै सोच ही रहा था की निशा मेरे पीछे से आकर मेरे गालो मे अबिर मला और हस्ते हुए बोली - क्या हीरो हमारे साथ नही खेलोगे क्या होली हिहिहिह

मै सब छोड कर उसकी तरफ भागा और वो भी ह्स्ते हुए भागी और मैने निशा को पकड कर अच्छे से उसके गालो गरदन मे अबीर मल्ते हुए उसकी चुचियो को छिप कर दबा कर छोड दिया और इधर मा ने चाचा के साथ चाची को दबोच लिया ,,, राहुल अनुज सोनल के पीछे लगे थे और उसे छत पर दौडा कर दुसरे तरफ ले गये ।

मैने सबको बिजी देखकर धीरे से निशा को डीजे के पीछे ले गया और उसकी चुचियो को मिजते हुए थोडी देर उसके उसके होठो को चुस कर स्टॉल की तरफ आ गया ,,,

जहा मा ने चाची के कुर्ती मे हाथ डाल कर उनकी चुची को मल कर रंग लगा रही थी और चाचा चाची के पैर पकडे हुए मा को चढा रहे थे- हा हा भौजी और लगाओ , हमसे बड़ा शर्माती है हाहाहहा

जैसे हम बाहर आये निशा यहा का सीन देख कर शर्मा कर छज्जे की तरफ चली गयी ।

वही छत के दुसरी तरफ बाथरूम के पास अनुज ने बाल्टी मे पानी वाला रंग घोल दिया था और पिचकारी दीदी और राहुल के उपर चला रहा था ।

इनसब के बीच मुझे वापस पापा और विमला नजर नही आये

To be continue in next update

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