Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 14 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 88

मै तैयार होकर सीधा कमरे से बाहर आकर पापा का कमरे मे ठक-ठक किया

जब तक पापा दरवाजा खोलते तब तक एक नजर गेस्टरूम पर मारा जो अभी अंदर से बंद था ,जिसका मतलब था मा अभी तैयार नही हुई थी औए मुझे मा के ड्रेस को लेके बहुत एक्साईटमेन्ट हो रही थी ।

तभी दरवाजा खुला और कमरे मे गजब का महोल था ।

पापा ने कमरे की सारी वाइट बलब निकाल कर उनकी जगह पिक्सल वाली घूमने वाली लाईटस लगा दी और दो रेड नाइट बलब जल रहे थे ।

कमरे मे वाइट बेडशिट पर तीन बडे रेड कवर वाले तकिये सेट थे । कमरे के एक किनारे पापा ने खुद पर्सनल टेबल को बार टेबल बना रखा था और वहा बियर की दो बोतल थी । कुछ स्नैक्स भी थे । उसी टेबल के निचे पापा ने एक म्यूज़िक सिस्टम सेट कर रखा था जिस्पे DDLJ फिल्म का उदित नारायण का सुपरहिट गाना "रुक जा ओ दिल दिवानी " बज रहा था ।

मै तो कमरे के decoration मे खोया हुआ था कि पापा ने मुझे कन्धे से पकड़ा और उनका खुला सीना मेरे कन्धे से टच हुआ और मै होश मे आया तो देखा पापा ने सेम मेरे जैसा ही गेटअप ले रखा है ।

पापा - क्यू बेटा पसंद आया ना , सरप्राइज़

मै हस कर - वॉव पापा , बहुत मस्त है और ये सब आप कैसे किये

पापा - तू मजे कर देख क्या क्या होता है आगे हिहिही , अभी अपनी मा को आने दे ,, आ बैठ यहा

फिर हम दोनो कमरे की सोफे पर बैठ गये और मेरा सोच सोच कर ही लण्ड झटके खा रहा था कि आखिर मा क्या पहन के आने वाली है और क्या मजे होने वाले है ।

इधर मै बैठा सोच रहा था कि कमरे का दरवाजा खुला और

ओह्ह्ह माय गॉड

मेरी आंखे बड़ी हो गयी और मुह खुला रहा गया , कोसिस करके एक बार मैने थूक गटक कर एक नजर मा को देखा उफ्फ्फ क्या सेक्सी अदा से वो खड़ी थी उस शाइनि रेड सेक्सी ड्रेस मे





मा इस वक्त एक प्योर रेड ट्रांसपैरंट नाईटी मे खड़ी थी ।

उसने अंदर कोई ब्रा भी नही पहनी थी और निचे एक पतली सी धागे वाली पैंटी जो मुस्किल से चुत के हिस्से को ढक पा रही थी

उस शार्ट पारदर्शि नाईटी मे मा की चिकनी वैक्स की हुई जान्घे चमक रही थी और हाथ पैर मे रेड कलर की मैचींग नेल पालिश , होठो पर डार्क मैट रेड लिपस्टिक और हल्का सा मेकअप ।

उफ्फ्फ उन्के कमरे मे आते ही एक ताजगी का अह्सास हुआ और एक अलग ही खुस्बु फैल गयी । जिसकी महक पाते ही मेरा लण्ड झटके लेने लगा और एक बार मैने बॉक्सर के उपर से खडे लण्ड को दबाते हुए पापा को देखा तो वो भी मा को देखते हुए थूक गटक रहे थे और उनका हाथ भी उनके फन्फनाते लण्ड पर था ।

फिर मा एक अपने खुले वालो को ब्ड़ी ही सेक्सी अदा से झटक कर एक तरफ से दुसरे तरफ लाई इस दौरान हम दोनो की नजर मा की हिल्ती चुचियो पर गयी जो उस पारदर्शी नाईटी से झाक रहे थे और उन्के निप्प्ल तो फाड कर बाहर आना चाह रहे थे ।

फिर मा एक हिल वाली रेड सैन्ड्ल पहने कमरे मे हमारे तरफ आती है तो मै और पापा सोफे पर बैठने के थोडी जगह खाली करते है और मा ब्ड़ी कामुक अदा से मुस्कुरा कर घूम जाती है और जान बुझ कर अपनी मोटी फैली हुई गाड़ को और बाहर की तरफ कर बिच मे बैठती है। इस दौरान मै और पापा दोनो मा के गाड के दरारो मे गायब उस पैंटी की डोरी को देख रहे थे की कहा फसी होगी वो और कितनी गहराई मे गयी होगी ।

खैर मा बैठी और बारी बारी मेरे और पापा की ओर एक मुस्कान से देख कर थोडा रिलैक्स हुई और बोली - लो जी मै तो आ गयी अब बोलिए सरप्राइज़

पापा मा की तरफ मुह करते हुए एक हाथ से मा की सेक्सी चिकनी जांघ पर हाथ फेर कर बोले - जानू यही तो है सरप्राइज़ ,, आज हम लोग खुल के मजे करेंगे जैसे किसी कलब पार्टी मे लोग करते है

मा - हमम वैसे कमरा अच्छा सजाया है पुरा पार्टी वाला फील है हम्म्म

मै खुशी से- तो पापा शुरु करे पार्टी

पापा हस कर - हा बेटा क्यू नही

और फिर मा को इशारे से सामने के टेबल पर रखे बियर और स्नैकस के लिये इशारा करते है ।

तो मा भी मुस्कुरा कर हम दोनो के जांघो को सहलाते हुए उठती जिससे हम दोनो हिल जाते है और मा अपनी भारी चुतडो को मटका कर आगे जाती है और 3 ग्लास मे वियर और स्नैक्स एक ट्रे मे लेके आती है और फिर वापस बैठ जाती है ।

फिर मा ही हमे एक एक ग्लास बियर की देती है और खुद एक ग्लास लेके हम लोग चीयर्स करते है

पापा - बेटा तुझे कोई दिक्कत तो नही है वैसे ये लो पावर वाली ही है मान के चल सोडा जितना

मै हस कर - जी पापा कोई दिक्कत नही होगी

फिर हम सब ने एक एक घुट लेने के बाद वापस ग्लास ट्रे मे रखा लेकिन वही मा अपना ग्लास लेके पापा की ओर घूमी और अपनी हाथो से उन्हे बियर पिला कर उन्के होठो को जकड़ लिया और शुरु ही गयी उन लोगो की किसिंग ।

मा ने पापा के होठो को चुस्ते हुए ही अंदाजा लगाकर ग्लास टेबल पर रखा और वापस पापा पर टुट गयी और वही पापा ने भी मा को खिच कर अपने उपर कर लिया और मा की गाड पर हाथ फेरते हुए मा के होठ चूसे जा रहे थे ।

इधर इन लोगो का सीन देख कर मै वापस से बियर का ग्लास लेके एक हाथ से लण्ड सह्लाते हुए बियर की सिप लेने लगा ।

इधर मा पापा को किस्स करते हुए अपनी चुत को पापा के बॉक्सर पर रगड़ रही थी और पापा के हाथ मा की गाड को फैलाने मे लगे थे ।

थोडी देर मे वो अलग हूए और पापा ने मेरे तरफ इशारा किया और मै मा को लेके खड़ा होकर कमरे मे बिस्तर के बगल मे खाली जगह पर लेके मा को डान्स करते हुए उन्के होठो को अपने मुह मे भर लिया और उन्के चुचे मेरे सीने पर छूने लगे वही मा भी ब्ड़ी जोर से मुझे अपने तरफ खिच ली और मेरे भी हाथ मा की कमर और गाड पर रेंगने लगे ।

मै थोडा झुक कर बॉक्सर के उपर से ही मा के चुत वाले हिस्से पर अपना खड़ा लण्ड रगड़ने लगा ।

इधर पापा भी बेसबर होकर मा के पीछे चिपक गये और हमने शरारत मे बारी बारी से झुले की पेंग मारने के स्टाइल मे धक्का देने लगे ।

एक बार मै मा को सामने उन्के चुत पर धक्का देता तो वही पापा मा को पीछे से उनकी मोटी मोटी गाद के दरारो मे ध्क्का देते ।

जल्द ही मा सीधी हुई तो पापा ने मा का चेहरा पकड कर उन्के होठो को चुसने लगे वही मा ने अपने हाथ ह्मारे बॉक्सर के उपर रख कर सहलाने शुरु कर दिये । वही मै मौका देख कर एक हाथ को साम्ने से मा की बाई चुची पर रख दिया और सह्लाते हुए मसलने लगा और मुझे ऐसा करता देख का पापा ने भी मा की दाई चुची को पकड लिया और उधर मा मदहोश होने लगी तो हम दोनो मा को क्मर के पास से पकड कर अच्छे से उनकी चुची को नाईटी के उपर से सहला रहे थे वही मा ने उत्तेजित होकर हमारे बॉक्सर मे हाथ डाल दिया और अंदर ही लण्ड को पकड कर मुठियाने लगी ।

इधर मुझसे रहा नही गया तो मा के नाइटी का फीता खोल दिया और झुक कर बाई चुची को मुह मे भर लिया और दुसरा हाथ अभी भी मा की गाड के दरारो का जायजा ले रहा था ।

वही पापा भी दुसरी चुची को खुला पाकर झपट पडे और झुक कर मा की चुची को चुसने लगी

यहा मा की हालत दोहरी चुसाई से खराब होने लगी और उनसे हाथ ह्मारे बॉक्सर से निकाल कर हमारे सर को अपनी चुचीयो पर दबाने लगी

थोडे देर तक अपनी चुचियॉ मिज्वा चुस्वा कर मा ने एक एक बार हम दोनो की किस किया और बॉक्सर के उपर से ही हमारे लण्ड को सहलाते हुए एक कातिल मुस्कान के साथ हमारी आन्खो मे देखते हुए घुटनो के बल बैठ गयी और वापस पापा के जांघो को सहलाते हुए बॉक्सर के उपर से ही पापा के लण्ड को मुह मे भरने लगी ।

मा के हवस से भरे इस रूप से मै अलग ही दुनिया मे उड़ रहा था वही पापा भी आहे भरने लगे । फिर मा मेरे तरफ घूमी और मेरी आन्खो मे देख्ते हुए लण्ड को बॉक्सर के उपर से ही मेरे आड़ो के पास से उपर तक सहलाया और एक झटके मे बॉक्सर निचे खीच दिया जिससे मेरा खड़ा मोटा लण्ड फंनफना कर मा के मुह के ठीक सामने झुलने लगा और मा एक शरारत भरी हसी के साथ गप्प से मुह मे भर मेरी आंखो मे देख्ते हुए बहुत ज्यादा होर्नी साउंड करते हुए मेरे लण्ड को चूसना शुरु कर दी

मा के मुह मे लण्ड जाते ही मेरा लण्ड और मोटा होने लगा और फिर मा ने मुह से मेरा लण्ड निकाल कर एक हाथ से मुथियाते हुए दुसरे हाथ से पापा के बॉक्सर मे हाथ डाल कर उनका लण्ड बाहर निकाला और ग्प्प्प से मुह मे भर और चुस्ना शुरु कर दी ,,,इस दौरान वो मेरा लण्ड मुठ्ठि मे कस कर सहला रही थी ।

फिर वापस से उसने मेरे लण्ड को मुह मे भर लिया और पापा का लण्ड मुथियाने लगी ।

ऐसे ही बारी बारी से उसने हमारे लण्ड को काफी समय तक चूसा और इस दौरान मा किसी पोर्न स्टार से कम नही थी ।

फिर मा उठी और एक एक बार हमे किस्स किया और मा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और अपना नाइटी निकाल दिया और मै भी अपना बॉक्सर निकाल दिया

वही मा बिस्तर पर चढ़ कर मेरे मुह पर बैठ गयी और अप्नी चुत को पैन्ती के अन्दर से ही मेरे मुह और नथुने पर तेजी से रगड़ने लगी ।

फिर थोडी देर मे अपनी पैंटी को थोडा साइड कर अपना खुला गिला चुत मेरे मुह पर लगा कर दबाने लगी ।

वही पापा भी बिस्तर पर चढ़ कर मा के सामने खडे हो गये और अपना लण्ड मा के मुह मे घुसा दिया

इधर मा काफी कामुकता से पापा के लण्ड को मुह मे उतारने लगी और यहा मैने अपनी जीभ को मा की चिकनी चुत पर फेरते हुए जीभ को अंदर घुसेड़ कर घुमाने लगा

जिससे मा पापा का लंड मुह मे भरे भरे ही अपनी गाड को और जोर से मेरे मुह पर दरने लगी मानो झडने के करीब हो गयी थी ।

वही पापा भी मा के चेहरे को थाम कर तेजी से मुहपेलाई चालू किये थे और यहा मैने मा की गाड को फैलाते हुए जीभ को चुत मे नचा रहा था।

तभी पापा की अह्हे तेजी से आने लगी

शायद वो मा गले मे लण्ड उतारे झड़ते हुए उन्हे गाली दे रहे थे और सिस्क रहे थे

पापा - अह्ह्ह्ह मेरी जान मेरी रन्डी और ले अह्ह्ह आह्ह मै झड़ रहा हू उह्ह्ह अह्ह्ह ले सालि बहनचोद चुस ले पुरा हा ऐसे ही

वही मा बड़ी ही मादकता से अपनी गाड को मेरे नाथनो पर घिसते हुए पापा की आंखो मे देखते हुए लण्ड को निचोड रही थी ।

वही पापा को झडता देख मै वापस और तेजी से अपनी जीभ को मा के चुत पर च्लाने लगा ,,नतिजन थोडी ही देर मे मा मेरे मुह मे झडने लगी और

वही पापा बिस्तर पर टेक लगा कर थोदा आराम फरमा रहे थे लेकिन यहा मा का जोश झडने के बाद भी कम नही हुआ और वो झट से उलट कर निचे लेट गयी और उनका इशारा मै समझ गया और बिना किसी देरी के उन्के उपर आकर जांघो को फैलाते हुए घ्प्प्प से लण्ड को पनियायि चुत मे एक साथ उतार दिया

मा - अह्ह्ह्ह बेटा उह्ह्ह्ह आह्ह मा ऐसे ही आह्ह बहुत गरम है तेरा लण्ड रे अहहह और चोद आह्ह

मै जोर शोर से मा की जांघो को थामे गचागच पेले जा रहा था लेकिन अभी भी मा की पैंटी वही थी जिससे मुझे दिक्कत हो रही थी चोदने मे

तो मै थोदा रुक गया और मा मुझे सवालिया नजरो से देखने लगी तो मैने झट से उनकी पैंटी को पकड़ा तो वो मुस्कुरा कर अपनी गाड को उठा दि और मैने झट से वो छिनी सी पैंटी निकाल के पापा की ओर फेक दी जिसे पापा ने अपने नाक पर ल्गा कर सुन्घ्ते हुए अपना लण्ड सहलाने लगे और य्हा मै वापस मा की चुत की गहराई मे उतर गया और जोर दार धक्को से पच पच्च्चच पच्च्च की आवाजे आ रही थी

वही पापा मुझे मा को चोद्ता देख वापस अपना लण्ड खड़ा कर चुके थे ।

मै - आह्ह पापा आप भी आओ ना

मा - हा जी आप भी आओ ना मुझे कल की तरह दोनो मे लेना है अह्ह्ह बेटा और तेज्ज्ज आह्ह

पापा हसते हुए उठे और एक सोफे के पास रखी हुई बियर की ग्लास को उठा कर वापस मा के सर के पास बैठते हुए बोले - अभी मुझे मेरे सपने को हकीकत बनते देखने दो मेरी रानी ,,,बरसो बाद मेरा सपना आज हकीकत बन रहा है ,,,आज तुझे कोई मेरे सामने बेरहमी से चोद रहा है । यही तो मै चाहता था ,,और तेज फाड बेटा अपनी मा के भोस्दे को , मै भी ये ड्रिंक खतम कर तुझे जॉइन करता हू ।

इधर मैने थोडी देर बाद मा को डॉगी पोज मे किया और तेज धक्के मा की चुत मे लगाने लगा और वही मा सामने बैठे पापा के लण्ड को वापस चुस कर अपनी गाड़ के लिये खड़ा करने लगी ।

जल्द ही पापा और मै एक साथ मा की सेवा शुरु कर दी और मै वापस से निचे गया और पापा ने पीछे खडे होकर गाड मे पेल दिये मा के

और वही कल के अंदाज मे झूले के पेंग जैसे एक एक जोर जोर एक झटके हम दोनो ने बारी बारी से देने लगे और आज बियर का असर था की स्पीड भी बढ़ गयी

जल्द ही मा झड़ने लगी और कल के जैसे आज हम काफी ज्यादा खुल के बाते कर रहे थे और शोर मचा कर जोरदार चुदाई चल रही थी

फिर मैने और पापा थोडी देर मे पोजीशन की अदला बदली की और मैने भी मा की गाड के छेद को मोटा करना शुरु कर दिया ।

और जल्द ही हम दोनो वापस झडने के करीब आये और इस बार मा थक गयी थी तो वो बिस्तर पर सीधे लेट गयी और हम दोनो अपना लण्ड की पिचकारी मा के चुचो और मुह के पास छोडी और मा के मुह मे डाल कर साफ करवाया ।

वही मा ने अपनी चुचियॉ और चेहरे पर लगे माल को चाट कर साफ किया ।

थोडी देर तक हम तीनो वाप्स बिस्तर पर लेते रहे और शान्ति छाई रही , म्यूज़िक सिस्टम ना जाने कबका खुद ही बंद हो गया था और उसकी परवाह भी किसे थी ना किसी लाईटस या ड्रेस कोड की ,, एक राउंड चुदाई के बाद तो सारी तैयारीया बोरियत थी ,,बस चाह थी तो बस सेक्स की और ब्स सेक्स की

फिर मैने पहल की

मै - आज सच मे मजा आ गया पापा ,

पापा - अरे बेटा मजा तो मुझे आया देख कर जब मेरी जान मेरे सामने ही मेरे बेटे का लण्ड ले रही थी । मेरा बरसो का सपना आज हकीकत बन गया ।

मै अचरज भाव से - मतलब

पापा हस कर - रुक बताता हू , बात ये थी कि सुहागरात से ही मुझे पता चल गया था कि तेरी मा बिल्कुल मेरे टक्कर की माल है और बहुत ही ज्यादा प्यासी है । वही मै शादी के पहले से ही आवारा था और शादी के बाद धीरे धीरे जब हम दोनो आपस मे खुलने लगे तो तेरी मा को मेरे मन की भावनाये समझ आने लगी कि मुझे गदराई और मोटी गाड वाली औरतो की चाह है और वो भी इसका फाय्दा उठा कर मुझे उत्तेजित कर भरपुर सेक्स का मजा लेती थी । फिर उसने मुझे छूट भी दे दी कि मै बाहर मस्तिया कर सकता हू अगर मेरी इच्छा है तो उसे कोई ऐतराज नही है ब्स उसे उसके हिस्से के प्यार मे कोई कमी नही मिलनी चाहिए थी,,,क्यू जान सही कह रहा हू ना

मा शर्मा कर - धत्त आप भी ना क्या क्या बाते लेके बैठ गये

मै ह्स कर - नही पापा आप बताओ फिर

पापा हस कर - फिर मैने थोडे बहुत बाहरी औरतो से सम्बंध बनाये , इससे मेरे दिल मे एक इच्छा होने लगी की तेरी मा को भी एक बार गैर लण्ड से चुद्ते देखू कि कैसे वो चुदेगी , लेकिन ये मेरी जानू ने तो जिद कर ली कि वो कभी किसी गैर का लण्ड नही लेगी लेकिन समय के साथ मैने इसके मानसिक रूप से बहकाया और फिर तुझे अपने प्लान मे शामिल किया और फिर ये तैयार हो गयी ।

मै पापा की बाते सुन कर हसने लगा वही मा मुझे देख कर हसने लगी ।

क्योकि मा और मै दोनो जानते थे कि पापा खुद मे कितने भी डीन्गे हाक ले लेकिन ये प्लान हम दोनो का ही था जो आज हकीकत हुआ है ।

खैर ऐसे ही चटपति बाते चलती रही और पापा ने अपने शादीशुदा जीवन के बाद से जितने के साथ सेक्स किया था उनके बारे मे कबूला यहा तक की विमला को भी और रज्जो मौसी के बारे मे अपना दिवानापन भी बताया ।

जितने लोगो के बारे मे पापा ने बताया उनसब के बारे मे मै जानता ही था ।

इनसब वार्ता के दौरान ना मैने ना ही मा ने अपने राज खोले बस मस्ती और मजे किये और उस रात 3 बजे तक 4 राउंड मा की चुदाई और सुबह 9 बजे तक सोये हम लोग ।

देखते है दोस्तो आगे क्या होता है

जारी रहेगी
 
सूचना


मौजुदा समय और अगले महीने के आखिरी हफ्तो तक मै निजी और विभागीय दोनो कारणो से व्यस्त रहने वाला हू तो ऐसे मे हो सकता है कि अपडेट लेट ही मिले , लेकिन कहानी जारी रहेगी ।

अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे ।
 
अपडेट 89

सुबह 9 बजे के करीब मेरी निद मा के जगाने पर खुली तो पता चला की पापा नहा कर दुकान पर निकल गये और मा खाना बनाने की तैयारी कर रही थी ।

मै भी उठा और अपने कमरे मे गया तो देखा मेरा मोबाईल मे कुल 17 मिस्काल और 12 मैसेज है और डाटा ओपेन करते ही भर भर के notification की बिप कुछ सेकेण्ड तक आती रही ।

फिर थोडा देर मे जब मोबाईल थामा तो देखा की सरोजा के अकेले 12 मिस्काल और 4 sms थे । बाकी के सोनल और कोमल के थे ।वही whatsaap पर एक दो मैसेज सरोजा के थे लेकिन सोनल ने तो अपनी और निशा के साथ रात मे की गयी मस्तीयो की तस्वीरे भेजी थी और एक वीडियो भी जिसमे निशा रिकॉर्ड कर थी सामने से सोनल उसकी चुत चुस रही थी ।

देख कर ही सुबह सुबह मूड बन गया । समझ ही नही आया कि क्या करु किसको रिप्लाई करू ।

फिर थोडा विचार कर सोनल से बाद मे बात करने का बोल कर एक दो तस्वीरो पर हार्ट रिएक्शन की एमोजी भेज दी और गुड मॉर्निंग लिख दिया ।

वही सरोजा जी को गुड मॉर्निंग का sms किया और रात मे कोई रेपोंस ना देने के सॉरी भी लिख दिया ।

फिर कोमल को भी गुड मॉर्निंग विश कर दिया ।

फिर मै फ्रेश होने चला गया और जब नहा कर वापस आया तबतक सरोजा जी का मैसेज आ चूका था और वो फुल गुस्से मे रिप्लाई की थी कि,,,मै समझ गया कि ये काफी समय से भुखी है और कल रात बात ना करके मैने कुछ ज्यादा ही इसे नाराज कर दिया । जल्द ही इसको चोदने का प्लान करना पडेगा नही तो इस गर्म तवे पर कोई और ना अपनी रोटी सेक ले ।

खैर इस बार मैने सीधा काल किया और थोडा बहुत बहाना बना कर कि अनुज बडे सहर गया और दीदी चचा के यहा है तो काम का दबाव ज्यादा है और थोडी बहुत सफाई देने के बाद वो मान गयी तो मैने जल्द ही उससे मिलने को मिला और फिर फोन रख दिया ।

फिर मै नहा धोकर तैयार हुआ और मा ने नाश्ता करने को दिया , फिर मै उनको बोल कर दुकान के लिए निकल गया ।

थोड़ा देर काम करने के बाद वापस से मोबाईल चेक किया तो कल रात मे हुए निशा और सोनल के बीच की मस्तीयो की तस्वीरे याद आई और मैने वापस से व्हाटसअप खोल कर एक एक तस्वीर को खोलकर ध्यान से देखा जिससे मेरा लण्ड खड़ा हो गया ।

मन तो करने लगा की अभी जाकर इनदोनो की खुजलाती चुत को बल भर पेलू

लेकिन इस वक़्त दुकान पर कोई था भी नही ।

और अभी सुबह के 10 बज रहे थे इसका मतलब था की वो दोनो सिलाई सेंटर गयी होगी । फिर दुकान भी देखना था

खैर समय बिता और 11 वजे तक मा खाना लेके आई और फिर हमने खाना खाया और मैने जब पापा के बारे मे पुछा तो मा ने बताया कि उनका खाना बबलू काका लेके गये थे ।

फिर मा और मैं दुकान मे आये ग्राहको को डील करने लगे और करिब 12 वजे मै मा को एक काम का बहाना कर निकल गया चाचा के यहा और उनके यहा गया तो शटर आधा गिरा हुआ था ।

मै सोचा कि घर पर चाची और राहुल नही है और निशा दुकान पर बैठती नही है तो शायद खाना खाने गये होगे ।

तो मै भी बिना किसी रोक तोक के झट से झूक कर अन्दर दुकान मे घुस गया और गलियारे से हाल की तरफ गया तो सब खाली था मुझे लगा कि शायद चाचा दुकान बंद कर बाहर तो नही गये कही । और ये निशा - सोनल भी नही नजर आ रही थी ।

क्योकि किचन निचे ही था और चाचा चाची का कमरा भी भिड्का हुआ था तो मै ज्यादा ताक झाक ना करते हुए वापस दुकान की ओर जाने को हुआ कि, तभी चाचा के कमरे का दरवाजा खुला और चाची बाहर आई , जो इस समय सिर्फ पेतिकोट मे थी उनकी 36 की झुल्ती हुई चुची लटक रही थी और वो हस कर कमरे देख रही थी ।

मै झट से गलियारे की दीवाल से चिपक गया और तभी चाचा बाहर आये ।

चाचा - आजाओ ना जानू प्लीज , कल जबसे गयी हो तब से पूरी रात नींद नही आई

मेरी नजर चाचा पर गयी तो वो इस समय सिर्फ शर्त मे थे और निचे उनका झूलता करीब 6-6.5" लण्ड था ।

वो लपक कर वापस से चाची को पीछे से पकड कर दीवाल से लगाते है और झट से उनकी पेतिकोट उठा कर अपना लण्ड उन्की चुत मे उतार देते है । ऐसे खडे खडे लण्ड लेने मे चाची को बहुत दिक्कत हो रही थी और चाचा बडे जोश मे पेल रहे थे ।

मै समझ गया कि अब ये लोगो का लम्बा चलेगा लेकिन एक बात नही समझ आई चाची इतनी जल्दी क्यो चली आई ।

खैर मै इस बात को इग्नोर किया और थोडा देर तक उनकी चुदाई देखी और वापस बाहर आ गया क्योकी मै जिस मकसद से आया था वो होने नही वाला था ।

फिर मै वापस अपने दुकान की ओर जाने लगा तभी मेरे जहन मे चंदू के मा की याद आई और मै एक कातिल मुस्कान के साथ उसके घर में घुसा और बिना कोई

आहट किये और एक नजर निचे के कमरे मे देखा तो सब बंद पडा था तो मै झट से उपर की ओर गया वहा हाल मे भी कोई नही था फिर मै लपक कर बेडरूम की ओर गया जो भिड्का हुआ था और हलका सा गैप से अन्दर देखा जा सकता था ।

मैने धीरे से दरवाजे पर लगा तो कुलर चलाने की आवाज आ रही और थोड़ी बहुत सिस्कियो की भी । एक बार फिर मै अपनी किस्मत को कोसते हुए सोचा कि इस समय चंदू का बाप अपने काम पर जाता है और दोपहर मे लग्भग रोज चंदू अपनी मा को चोदता है ।

रामवीर दरअसल संजीव ठाकुर के अनाज के गोदाम पर मुनिबी करता है । तो रोज दोपहर मे चंदू को मौका मिल ही जाता है ।

खैर मैने थोडा सा अन्दर झाका तो रजनी वही बेड पर घोड़ी बनी थी और चंदू पीछे से तेज गति से अपनी मा को पेल रहा था ।

मै तो सुबह से चुत के लिए तडप रहा था और पहले चाचा के यहा निशा नही मिली और अब यहा इन लोगो को मै छेड़ना नही चाहता था क्योकि चंदू ने बोला था कि इसी हफते उसकी बहन चंपा आयेगी और वो मुझे उसके साथ मौका देगा ।

तो मै फिर उतरे हुए मन से वापस नीचे आया और चंदू के घर के बाहर निकला तो सामने करीम खां की दुकान पर सब्बो दिखी और मै झट से उसकी दुकान पर चला गया ।

करीम खां , इसका परिचय हो चुका है पहले भी । ये काफी मजाकिया मिजाज का आदमी है हालाकि उम्र हो गयी है लेकिन मजे लेता रहता है चाहे किसी भी उम्र के लडके हो ।

मै भी झट से करीम की दुकान मे घुसा और सब्बो मुझे देख कर मुस्कुरा दी ।फिर मैने भी एक मुस्कान दी उसको ।

मै - कैसे हो करीम काका

करीम - अच्छा हू सेठ तुम बताओ

मै ह्स कर - मै भी मस्त हू , ये क्या सिलवाने आई हो सब्बो दीईईइदीईईई

मैने जानबुझ कर सब्बो को दीदी बूलाया जिसका मतलब तो बखूबी समझ रही थी और मुझे झूठ के इशारे मे गुसस भी किया

स्ब्बो इतरा कर - ये ब्लाउज ठीक करवाने लाई थी

मै करीम से - क्या काका , अरे कम से कम साइज़ बराबर नाप लेते दीईइदीईई का

मेरे फिर से दीदी बुलाने पर सब्बो मुह ब्नाने लगी

मै उसके बगल मे काउंटर से लग कर खड़ा था तो थोड़ा आड़ देख कर उसके चुतडो को दबा दिया जिससे वो हिचक गयी । लेकिन खुद को स्म्भाल भी लिया और बडे गुस्से से मुझे देख रही थी ।

ऐसा भी नही था कि करीम खा सब्बो और उसकी मा के हरकतो से अंजान था बल्कि रुबीना के तालाब मे वो भी तैर चुका था ।

करीम खां एक कातिल मुस्कान के साथ- सही कर रहे हो सेठ आज सब्बो बिटिया का नाप ले ही लेता हू ,

फिर करीम खां अपने गले से फीता निकालता है

करीम - थोड़ा सही से खड़ा हो बिटिया ,,,, हा ,,, जरा हाथ खोलो ,,हा अब सीना फुलाओ

सब्बो इस समय एक टीशर्ट और लोवर मे थी लेकिन बिना ब्रा के टीशर्त मे उसके निप्प्ल सख्त थे ही लेकिन सीने मे सास भरने पर मानो गुब्बारे जैसे फुल गये हो ।

करीम खा भी सब्बो की जवानी के गुब्बारो का नजारा आंखो मे भरते हुए इंचीटेप के फिते को एक चुची के निप्प्ल के ठीक उपर ही रख कर फिते को कसता है जिससे सब्बो की सिसकी निकल जाती है और वही करीम नाप लेने के बाद भी सब्बो के निप्प्ल पर से अंगूठा नही हटाता है बल्कि उसे वही दबाते हुए घुमाता भी है ।

जिसे देख कर मुझे वापस से तनाव होने लगता है और एक बार फिर मेरे हाथ सब्बो की गाड़ पर घूमने लगते है ।

इधर सब्बो हमारे दोहरे अटैक से खुद को ढिला करने लगती है कि तभी सड़क पर एक गाड़ी की होर्न से हम तीनो का ध्यान भांग होता है और हम तीनो असहज महसूस करने ल्गते है ।

सब्बो हड़बड़ा कर - हो गया ना काका , शाम को मा आयेगी लेके जायेगी ब्लाउज, मै जाती हू

फिर वो झट से निकल जाती है

मै मस्ती भरे अंदाज मे - ओह्हो काका आज तो मनमानी कर ही ली हा

करीम थोडा खुद पर घमंड दिखाते हुए - अरे सेठ मैने तो ना जाने कितनी मनमानीया की है ये तो सालि एक नं की छिनार है , दोनो मा बेटी ,,,अब देखना शाम को आयेगी इसकी अम्मा रुबीना और पैसे के बदले अपना भोस्डा देके जायेगी

मै ह्स कर - ओहो काका , मतलब इस उम्र मे भी काकी की दबा कर लेते होगे फिर हा

करीम - अब तुमसे क्या छिपाना , मेरी पहली बेगम तो नही रही शादी के 5 बाद ही गुजर गयी । लेकिन दुसरी जो उसी की छोटी बहन थी , अल्लाह कसम बहुत गरम औरत है आज भी बडे जोश से निचोड लेती है अह्ह्ह

मै करीम की बाते सुन कर उत्तेजीत मह्सूस कर रहा था - फिर तो आज दो दो नदी नहाओगे काका मतलब

करीम - हा वो तो है हिहिहिही

फिर मै थोडी मस्ती किया और वापस दुकान पर आया एक दो बार कोसिस की मा ही राजी हो जाये तो वो नही मानी और शाम को घर निकल गयी ।

रात को 8 वजे तक मै भी दुकान बन्द कर घर गया जहा पापा और मम्मी पहले ही हाल मे बैठे बाते कर रहे थे वही दीदी किचन मे खाना बना रही थी ।

मै भी थकान से चुर मा के पास उन्के चुचो पर लदते हूए बैठ गया , मम्मी इस समय ब्लाउज पेतिकोट मे थी ।

मा - ओह्ह मेरा बच्चा कितना थक जाता है , जा जाकर नहा ले फिर खाना बन गया है साथ मे मिल कर खाते है ।

मै थोडा इशारे मे मा से दीदी के बारे मे पुछा की ये आज कैसे आ गयी और हमारी मस्ती का क्या होगा

पापा हलके आवाज मे - वो तेरी चाची बस उनदोनो को शहर छोडने गयी थी और एक दिन रुक कर वाप्स आ गयी तो आज ये

मै समझ गया पापा की बात

इतने मे सोनल किचन से बाहर आई और नहाने का बोल कर उपर चली गयी और मैने झट से मा को दबोच लिया

मा भी मेरे होठ चुसते हुए साथ देने लगी वही मेरे हाथ उनकी एक चुची को मिजने लगे थे कि तभी मेन गेट पर खट खट हुई और पापा जोकि बनियान और जान्घिये मे थे वैसे ही दरवाजे पर देखने चले गये , वही उनका भी लण्ड मेरे और मा के मस्ती से जांघिये मे खड़ा हो गया था ।

तभी थोडी देर मे शकुन्तला काकी की आवाज आई जो मा को आवाज देते हुए अन्दर आई ,,,और आज तो वो अस्मानी रंग की नायलान की मैकसी पहन के आई थी जिसमे उनकी ब्ड़ी चुचिया और गाड की गोलाई का पुरा शेप दिख रहा था ।

वही पापा उन्के पीछे खडे थे और उनकी उभरी हुई गाड को खा जाने वाले नजर से देख रहे थे , जिसे मै और मा बखुबी समझ रहे थे ।

शकुन्तला काकी मा के बगल ने बैठी जबकि पापा वही उसके बगल मे दीवाल से लग कर खडे होकर उसको अपने लण्ड का उभार दिखाने लगे जिसे शकुन्तला भी देख समझ कर मुस्कुरा रही थी

मा - अरे दीदी आप ,,,आओ आओ बैठो

शकुन्तला- अरे मुझे बिठा मत ,

फिर एक नजर पापा की ओर देखते हुए बोली - अरे वो मै कल बोली थी ना लाने के लिये

मा कुछ सोच कर ह्स्ते हुए - अरे हा ,,

मा - राज के पापा , वो जरा जो झोला टंगा है उसमे दीदी के कपडे होगे देना

फीर शकुन्तला एक नजर पापा की ओर देख्ती है तब उनदोनो की नजारे मिलती है और फिर उसकी नजर उस्के चेहरे के बराबर मे जांघिये मे खडे लण्ड के उभार पर जाती है । तब तक पापा बगल मे टंगी हुई खूटि से झोला खोलते है और निचे फर्श पर रख कर देखते हुए

पापा जो की बखूबी जान रहे थे कि कल शकुन्तला ने अप्नी ब्रा और पैंटी लाने के लिए मा को बोला था फिर भी वो नाटक करते हुए - अरे रागिनी इसमे तो कोई कपडे नही है ,, इसमे तो बस ये है

तभी पापा झोले मे शकुन्तला के लिए मा द्वारा लाई पैंटी को झोले के अन्दर ही उसकी पैकेट से खुला ही बाहर निकाल कर फैला कर हम सब के सामने दिखाते हुए बोल्ते है - अरे ये तो 40 नं की कच्छी है रागिनी देखो

शकुन्तला पापा की इस हरकत से झेप कर हस दी और वही मा भी हसने लगी ।

मा - अरे यही कपडे है दीदी है

पापा थोडा असहज होने का नाटक करते हुए शकुन्तला को देखते हुए - ओह्ह माफ करियेगा भौजी , हमको जानकारी नही थी कि ये आपकी है ,, लिजीये

पैंटी देने से पहले पापा जानबुझ कर शकुन्तला को देखते हुए उसके सामने ही पैंटी को हाथ मे मिजकर उसकी मुलायमता की जांच करते है जिसका इशारा शकुन्तला समझ रही होती है और पापा की हरकत से थोडी असहज महसूस करती है ।

शकुन्तला - साइज़ तो ठीक होगी ना रागिनी

मा हस कर - हा क्यू नही , अगर छोटी हुई तो बदल लेना उसमे क्या है

शकुन्तला- ठीक है , और वो भी तो था ना

मा ह्स कर - अरे हा , राज के पापा जरा उसमे दीदी का

मा के बात खतम करने से पहले ही पापा ने ब्ड़ी बेशर्मी से उनकी 38c की ब्रा निकाली और शकुन्त्ला को देते हुए - लो भौजी

शकुन्तला थोडा शर्मा कर पापा के हाथ से ब्रा लेती है ।

फीर थोडी देर बाते चलती है और फिर शकुन्तला अपने घर को जाने को होती है तो मा खुद उनहे गेट तक छोड़ने जाती है औ फिर वापस आती है ।

मा पापा से - जरा खुद के जज्बात को शांत रखिये , सबको एक जैसे ही समझ लेते है ,,अभी गेट के पास दीदी मुझे आपको हिदायत देने को बोली की घर मे कोई बाहर का आये तो कम से कम तौलिया ही लपेट लेते है

पापा हस कर - अरे अब मुझे क्या पता की कौन आ रहा है ,,, और क्या बोल रही थी वो

मा -वो ज्यादा नहीं बोली , मै ही बात को मजाक मे घुमा दी की , अरे अपने भौजी को देख कर भूल गये होगे ,

फिर हम सब हसने लगे ।

फिर थोड़ी देर बाद मै भी नहाने गया और खाना खाने बैठ गया, इधर हम लोगो प्लान फिक्स था रात के लिए लेकिन मुझे डर था कि अनुज है नही घर मे तो रात मे सोनल कही निचे ना आजाये या कोई गडब्ड़ ना हो जाये । क्योकि मेरे और सोनल की बाते मै मा और पापा को बताना नही चाहता था नही तो जो हाथ आने को था वो नही मिल पायेगा

लेकिन तभी मुझे ध्यान आया कि सोनल का तो अभी पीरियड चल रहा है तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आई और मै खाते हुए ही सोनल को मैसेज करता हू

मै - बरसात कब तक बंद होगी तुम्हारी

सोनल मेरी बात मतलब मेरे तरफ देख कर मेरे शरारती मुस्कान को देख कर समझ जाती है ।

सोनल - दो दिन और हो सकती है

मै जानबुझ कर मुह बनाने का नाटक किया मानो उसकी कितनी जरुरत हो मुझे

सोनल मुस्कराया कर एक मैसेज मुझे भेजती है - बस दो दिन और मेरे राजा , फिर जोत लेना जितना मन हो

मै मुस्करा कर - किस्स वाली एमोजी के साथ आई लव यू लिख दिया

बदले मे उससे भी किस्स वाली एमोजी के साथ आई लव यू टू मिला

खैर हम लोग खाना खा ही रहे थे कि पापा की नजर सोनल पर गयी और वो उसे छेड़ने के अंदाज मे - जानती हो रागिनी ,, आज मदनलाल जी का फोन आया था और वो अमन बाबू के बारे मे बता रहे थे कि उसका सेलेकशन गोवा के शिपयार्ड डिपार्टमेंट मे ऑफीसर की पोस्ट पर जॉब मिल गयी है ।

अमन की बात सुन कर सोनल शर्माने लगी लेकिन वही मा बहुत खुश हुई

मा - अरे वाह ये ती बहुत अच्छी बात है और क्या बात हूई ।

पापा - दरअसल , अमन बेटा का जुलाई से तीन महिने तक ट्रंनिंग होने वाला है तो मदनलाल जी चाहते है कि एन्गगेमेंट अगले महीने मे ही करा दिया जाये फिर ट्रेनिन्ग के बाद शादी भी हो जायेगी

मा थोडी परेशान होकर - अरे लेकिन एक महिने मे कैसे सब होगा जी , इतनी सारी तैयारीया करनी होगी क्या क्या करूंगी मै

पापा - अरे चिन्ता ना करो सब हो जायेगा

फिर ऐसे ही बाते हुई और फिर खाना खतम हुआ और सब अपने अपने कमरो मे चले गये ।

और रात मे थोडी सरोजा जी से बात हुई और फिर थ्रीसोम वाली मस्ती हुई दो राउंड और फिर मै वापस अपने कमरे मे सो गया

ऐसे ही दो दिन का समय बिता और मै दूकान पर था कि मा आई

और बोली कि मै आज घर जाकर ही खाना खा लू क्योकि कोई टिफ़िन था नही खाली जिसमे वो खाना लेके आती

मै बहुत खुश हुआ कि आज दीदी के साथ मस्ती करने का खुला मौका मिल गया और आज मै ये मौका छोडने वाला भी नही था तो मै झट से मा को बिठा कर निकल गया चौराहे वाले घर की ओर

जारी रहेगी
 
अपडेट 90

मै खुशी से रास्ते भर आने वाले मौके को लेके काफी उत्तेजित होने लगा था और पुरे रास्ते भर मेरा लण्ड तना हुआ था । मै एक बाइक से लिफ्ट मागी और 2 मिंट मे चौराहे वाले घर पहुच गया और मेन गेट खोल कर अन्दर गया

जहा सोनल हाल मे सोफे पर बैठे मोबाईल चला रही थी । वो नहा चुकी थी और उसके बाल खुले थोडे गीले थे हालकी उसने अभी तक उनको सवारा नही था जिससे वो और भी खुबसूरत लग रही थी । उसने एक हल्के गुलाबी रंग का टीशर्ट और लोवर पहन रखा था । वही टीशर्ट पर गौर करने पर मुझे लगा की शायद उसने कुछ पहना नही है ।

मै झट से उसके पास बैठ कर एक बार उसके बदन से आती भीनी सी खुस्बु ली और एक गजब की कामोत्तेजना भरी मुस्कान मेरे चेहरे पर आई वही पैंट मे लण्ड भी अंगड़ाई लेने लगा ।

मै झट से उसके कन्धे पर हाथ रख कर उसके गालो को चूम्ते हुए उसके मोबाईल मे देखते हुए - कया कर रही हो जानू

सोनल कुछ बोलती उससे पहले ही मेरे नजर मोबाईल मे हो रही चैट पर गयी , सोनल इस वक़्त अमन से ही बात कर रही थी और मै उनकी रोमांटिक चैट पढने लगा ।

सोनल जहा मुझे खुल कर प्यार देती है वही अमन को एक एक चुम्मी के एमोजी तक के लिए तरसा कर परेशान करती है ।

मै - अरे क्या इतना परेशान कर रही हो बेचारे को , कुछ माग रहा है दे दो

सोनल हस कर - तू नही जानता भाई ,, पतियो को इतना तरसा कर रखो कि जब वो मिले तो बेसब्रे होकर ही प्यार करे हिहिहिही

मै सोनल के कान के पास जीभ घुमाते हुए - तो मुझे भी तरसाओगी क्या जानू

बदले मे सोनल मेरे होठ को एक बार चुसते हुए मेरे आंखो मे देखते हुए बोली - नही रे , तेरे लिए मै खुद बेसबरी हू मेरे भाई

और वापस से हम दोनो डीप किसिंग मे खो गये ।

करीब 10 मिंट कर एक दुसरे को चुस्ते रहने के बाद ,, अचानक से अमन का वीडियो कॉल आने ल्गता है तो हम दोनो अलग होते है और सोनल वीडियो कॉल उठा लेती है ।

जहा अमन इस वक़्त सिर्फ तौलिया लपेटे अपने कपडे पहनने जा रहा होता है और तरह तरह से कोसिस कर सोनल को अपने लण्ड के उभार की ओर रिझा रहा होता है । मै सोनल से थोडा दुर होकर मोबाईल पर अमन की हरकते देख रहा होता हू और वही सोनल को देखता हू की वो भी उसे परेशान करने के लिए शर्माने का नाटक और झूठ मूठ नोक झोक करती है ।

फिर जैसे ही अमन वापस मोबाईल रख देता है

मै - ओह्हो मतलब बात कपडे निकालने तक आ गयी है हा

सोनल हस कर - हा वो कुछ ज्यादा ही उतावला है और कोसिस करता है कि मै भी खुल जाऊ उसके साथ लेकिन मै मजे लेती हू

मै सोनल से चिपक कर टीशर्ट के उपर से उसके 34B के चुचो को मिजते हुए - अरे इनके दर्शन करवाये की नही

सोनल कसमसा कर - आह्ह नही भाई , ब्स एक दो बार ब्रा की स्ट्रिप दिखा दी हू और नही ।

मै सोनल के गोरे मुलायम और खुस्बु से भरे गरदन को चूमते हुए उसकी एक चुची को हाथ मे भर कर मिजने लगता हू तो वो भी मेरे सर पर हाथ फेरते हुए अपनी दुसरी चुची को उत्तेजना मे दबाने लगती है ।

एक तो कल ही उसका महीना खतम हुआ था और आज मैने उसके जिस्मो को नोच्ना शुरु कर दिया ।

जल्द ही हमारे होठ मिले और फिर से एक दूसरे के बदन को घिसना शुरु कर दिया हमने ।

वही वो प्यासी झट से अपना हाथ मेरे पैंट के उपर से उभरे हुए लण्ड को दबाने लगी और मै भी उसकी एक नरियल जैसी चुचि को भीचने लगा ।

मै बेसबरा होने ल्गा था और मैने सोनल को सोफे पर लिटा कर उसके उपर आ गया और झट से टीशर्ट उपर कर उसके दो मोटे नारियल जैसे लेकिन गोरे मुलायम चुचो को देख कर पागल हो गया । मानो कितने समय से मै इनके लिये तरस रहा था और मै उन हल्के भूरे वाले दानेदार निप्प्ल के बटन की मुह मे भर लिय और खुब जोर से चूस्ने ल्गा ।

वही सोनल - अह्ह्ह माआआ आराम से भाआईईईई ओह्ह्ह मा उफ्फ़

मै दुसरे हाथ से एक चुची को मिजते हुए एक को मुह मे भरे चुस रहा था और ज्यदा से ज्यादा मुह मे भर रहा था वही सोनल भी उत्तेजना मे मेरे सर को अपनी चुची पर दबा रही थी । फिर मैने साइड बदल कर दुसरी को मुह मे भर लिया

हम दोनो बड़ी उत्तेजना से एक दुसरे को दबा नोच रहे थे

मै - आह्ह दिदी कितनी मस्त चुचिया है ,,एक बार दिखा दो ना उसे भी ,, पागल हो जायेगा

सोनल - दिखा दूँगी मेरे राजा अह्ह्ह और चुस उम्म्म्ं बहुत दिन से नही मिज्वाया था अह्ह्ह निकाल दे आज सारी कसर

मै सोनल को छेड़ते हुए - दिदी क्या आप अमन का लण्ड देखी हो

सोनल कसमसा कर - हा भाई वो कहा मानने वला है वो तो जिद करके दिखा देता है जबरजसती

मै सोनल की चुचियॉ को मिजते हुए - फिर आपका मन नही होता की दिखा दू उसे भी अपना माल

सोनल - करता है भाई और उसका लण्ड सोच कर तो कई बार मैने ऊँगली भी किया है अह्ह्ह भाई

मै ऊँगली करने की बात से थोडा मुस्कुर कर खसक कर निचे हुआ और सोनल की जांघ को फैलाते हुए उसके चुत के उपर हाथ घुमाते हुए - इसमे ऊँगली करती हो क्या दीदी

सोनल मेरे हाथ का स्पर्श अपने चुत पर पाते ही सिहर गयी और कापने लगी - अह्ह्ह अह हा हा भाई उम्म्ंम बहुत मोटा लण्ड है उस्का अह्ह्ह

मै उसके चुत को सहलाते हुए लोवर के उपर से ही - मेरे से भी मोटा है क्या

सोनल ना मे सर हिलाते हुए - ना ह नह अह्ह्ह भैया मै आउन्गी आह्ह मेरा निकलेगा और रगडो उसको आह्ह मा तेज्ज्ज्ज रगडो ना उम्म्म्म्म्मीई अह्ह्ह मुम्म्यीईईई उम्म्ंम अह्ह्ह हा ऐसे ही ऐसे ही

मै सोनल की बेताबी समझ गया और मै झट से उठ कर उस्का लोवर पैंटी के साथ ही एक झटके मे निकाल दिया और जांघो को कन्धे पर चढा कर झुक कर अपना मुह उसके चुत पर ल्गा दिया ।

मेरे तपते होठो का स्पर्श अपनी गर्म चुत के मुलायम सिराहने पर पाते ही सोनल अकड गयी और मैने उसकी जांघो को थाम कर अपनी जीभ को उसकी चुत मे उतार दिया और वो पागल होकर अपनी गाड को झटकने लगी और मेरे मुह मे उसके गर्म पानी का लावा बहने लगा मैने हर झटके पर उसके चुत पर अपने होठो से मजबूत पकड बनाता और एक एक बूंद को चुस्ते हुए सारा माल मुह मे निगल लिया और बचा खुचा चाट कर साफ किया

तब तक सोनल सोफे पर हाफ्ते हुए शांत थी लेकिन तेज सांसे उसकी चुचियॉ को और फुला रही थी ।

मै भी एक गहरी सास लेके थोडी देर खुद की बराबर किया और फिर एक एक करके सोनल के सामने ही अपने सारे कपडे निकाल दिये

और मेरा लण्ड सोनल की कसी गोरी छाती को देख कर बौराया खड़ा और सख्त हुए जा रहा था ,,, वही सोनल की नजर मेरे टमाटर से लाल सुपड़े पर गयी और उसकी मोटाई देख कर वो सहम गयी

मै उसको इशारा किया और वो धीरे से सोफे पर मेरे सामने बैठ गयी । मेरा लण्ड खड़ा तनमनाया सोनल की नाक को छुता हुआ उसके सामने ही हुकार ले रहा था । सामने आते ही एक बार फिर झुक कर उसकी नारियल सी मोटी और सख्त चुची को मसला और वो सिहर कर एक हाथ से मेरे लण्ड को पकड ली ।

लण्ड की तपन ने सोनल के जिस्म मे सरसारी दौड़ गयी और वो गनगनाई , एक गहरी सास और फिर ग्प्प्प्क से सुपाडा मुह मे ।

एक ठन्दक सी लगी मुझे लण्ड की उपरी सतह पर और फिर उसके मुलायम होठ रिंग बनाते हुए पिस्टन के जैसे चलने लगे ।

जहा तक उसके होठ मेरे लण्ड की सतह को घिसते वहा एक मुलायम बर्फ की ठन्डक सी मह्सूस होती ।

हालकी सोनल को उतना अच्छे से लण्ड चुसने नही आता था जितना मा और रज्जो मौसी को आता था ।

लेकिन सेक्स की कहानिया पढ कर और पोर्न वीडियो देख कर काफी कुछ सिख गयी थी वो

जैसे भी कर रही थी एक नया अह्सास होता था और उसका लण्ड को गले मे उतार कर काफी समय तक रोके रखने की कला का तो मै दीवाना था ।

उसके मुह मे वो लटकती घंटी जब सुपाडे को दबाती तो मानो लगता चुत मे बच्चेदानी को छू रहा हो मेरा लण्ड

जल्द ही उसे मैने थामा और खड़ा कर उसके होठ चूसने शुरु किया और उसे अपने बेडरूम मे ले आया

थोडी देर हमारी चूमा चाटी चली कुछ मैने उसको मसला कुछ उसने मुझे नोचा काटा नाखून गाड़े ।

मैने भी जोश मे खड़े खडे उसके जांघो के बीच लण्ड को घुसेड़ कर दो चार बार चुत के निचले हिस्सो पर हच्क कर रगड़ और उसके गाड के पाटो को सहलाते हुए मिजा ।

वो सिम्टी, मेरे बाहो मे चिपकी हुई सिस्कने लगी और मैने अपने होठ उसके होठो से जोड दिये एक गहरे चुंबन के बाद मैने वापस से उसे बिस्तर पर बिठा और उसके सामने खड़ा हुआ

मै उसकी आंखो मे एक नशा सा देखा और वो मुस्कराई

फिर शर्मा कर मेरे नंगे पेट पर चेहरा छिपा लिया । मै भी मुस्कुरा कर उसके सर मे हाथ फेरा कि तभी मेरे लण्ड मे कसाव बढ़ा और एक गिलापन सा मह्सुस हुआ और नजर गयी तो देखा सोनल मेरे लण्ड को उपर कर पेट से चिपके हुए ही सुपाडे को मुह मे भर ली और निचे मेरे आड़ो को सहलाते हुए चूसने लगी ।

मै वापस से मदहोश होने ल्गा और उसका चेहरा पिछे कर उसे लिटा दिया

सोनल बिस्तर पर अपनी दोनो जांघो को खोल कर चित लेट गयी , वो हाफ रही थी और एक मुस्कान सी थी उसके चेहरे पर ।

मै उसकी आंखो मे नजरे जमाए उस्के मन के भावो को पढता हुआ वापस से उसकी घाटियो मे गया और जुबान से चुत के उपरी हिस्सों की साफ सफाई मे लग गया ।

थोडी ही देर मे उसकी सिसकिया आने लगी और उसकी चुत ने रोना सुरु कर दिया ।

वही शुरुवाती आसू जो चिपचिपे कम लेकिन महकते ज्यादा थे

मै भी बडे दुलार मे उसके आसुओ को चाट गया और वापस से खड़ा हो कर अपना सुपाडे को खोल से बाहर निकाला और तपता ही उसे सोनल के चुत के बटन पर धंसा दिया

वो हिचकी , अकडी लेकिन छाती वो तो और भी फुलने लगी ।

मैने उसके एक पैर को उठाया उसे अपने चेहरे के पास लाया उसकी पिंडलियों को सहलाते हुए हल्का सा लण्ड सोनल के चुत की होठो पर दरा

फिर से सिसकी और इस बार थोडा सा गरदन उठा कर निचे भी देखा और वापस से चित लेट गयी

मै झुका और उसने अपनी आंखे भीचते हुए जांघो को फैलाया और मैने भी सुपाडा को उसके चुत के फलको को खोल कर छेद पर लगाते हुए एक पैर को थामा और कचकचा कर एक जोर का झटका दिया , सुपाडा अन्दर

सोनल - अह्ह्ह्ह मुम्मीईईईई

मै झुका और गाल को सह्लाया उसके होठो को चूमा और उसके आंखो से बहते आसू पर ही चूम के उससे इजाजत मागी और वो अपने होठ भिचते हुए थूक गटक कर बहते आसु से भरे चेहरे को हा मे हिला कर आगे बढ़ने को कहा

मै उसे एक फ्लाईन्ग किस्स दिया और उसने भी खुद को तैयार किया

फिर मै कुछ MM पीछे होकर लण्ड को जोर से अंदर घुसेडा आधे से ज्यादा सोनल के चुत मे चिरते हुए धस गया और कुछ लाल सी बुन्दे पच्च्च की आवाज से बाहर आई और

वही सोनल मुझे अपने सिने से ल्गा चुकी थी

ना मै हिल पा रहा था ना ही सोनल मुझे हिलने दे रही थी

मेरे होठ उसके होठ मे दबे थे वो अपने कुल्हे कड़े कर दी और जांघो को सिधा कर दर्द को कम करना चाह रही थी

मै उसे थपथपा कर थोडा उपर उठा तो उसके सीने से मेरा वजन कम हुआ और वो एक गहरी सास से हाफने लगी ।

चेहरे पर कोई भाव नही थे लेकिन आखो से झरना बह रहा था । वो जबरजसती अपने चेहरे पर मुस्कान ला रही थी लेकिन उसकी चुत मे अड़सा हुआ मेरा लण्ड शायद इसकी इजाजत नही दे रहा था

तो मैने उस्के गाल चुमे और वापस से उसे सीने से लगा कर - आई लव यू दीदी

वो फफक पड़ी और - लव यू सो मच भाई बहुत दर्द हो रहा है

मै थोड़ा छेडने के मुड़ मे थोडा सा उपर होकर ह्स्ते हुए - तो निकाल दू

वो शर्मा कर मुस्कुराते हुए ना मे इशारा की

मै उसकी नाचती आन्खो मे देखते हुए - तो फिर चालू करू इंजन

वो कुछ प्रतिकिया करती उससे पहले ही लण्ड को पीछे खिच कचकचा कर एक और जोर का झटका और करीब 3/4 से उपर लण्ड उसकी चुत मे घुस गया और हल्के हल्के मालिश वाले धक्के के जैसे अन्दर बाहर शुरु हुआ

धिरे धीरे उसका दर्द कम हुआ लेकिन इतना भी नही कि एकदम तुफान मेल पेलवा ही ले

लेकिन उसकी सिसकी बढी और हल्की सी आहट आई - सीईई उन्म्म्ंंं आह्ह थोडा तेज्ज्ज

मै सुना और झट से उसकी आंखो मे देखा वो शर्मा कर मुस्कुराते हुए मुह फेर ली और उसको अप्नी तरफ मुह कराने के लिए मैने धक्के की गति बढ़ा दी वो उसकी उम्मीद से कुछ ज्यादा ही जोर मे

वो ह्च्कने लगी और उसकी आवाज सिस्किया सब रुक रुक कर आने लगी एक मुस्कान थी जो उसकी सहमती का इशारा कर रही थी जल्द ही उसने अपने हाथ मेरे कमर हिल्ती कमर मे फेरा और थोडा दबाने को इशार किया और मैने धीरे धीरे उसकी चुत मे और निचे जाने ल्गा और जल्द ही पुरा लण्ड उसकी चुत मे उतार दिया

अब लम्बे लम्बे धक्के लग रहे थे और जब भी लंड उस्के चुत की गहराई मे जाती वो गहरी सासे लेती और बाहर निकालते समय सास को छोड देती ।

फिर मैने खुद को थोडा खड़ा किया और दोनो पैर वापस कंधो पर , उसको इशारे से तकिया अपने निचे रखने को कहा

वो लगाई और मैने वापस लण्ड को उतार दिया उसकी जड़ मे इस बार हर बार से गहरा गया और बच्चेदानी का सिरा मेरे सुपाड़े को छुआ

सोनल मे अपने पेड़ू मे हाथ लगा कर ह्स्ते हुए इशारे मे बताने लगी की कहा तक उसे लण्ड मह्सूस हो रहा है

मानो ऐसा कर उसने मेरा जोश बढ़ा दिया हो और मैने धक्के तेज कर दिये वही सोनल झड़ने के करीब थी और उसने अपने चुत के अन्दर का छ्ल्ल्ला मेरे लण्ड पर कसना शुरु कर दिया ।

मै भी ज्यादा देर तक खुद को रोक न सका और मै झडने को बाहर निकालने की कोसिस की तो सोनल आंख दिखाते मुझे रोकि

मै - मेरा होने वाला है दीदी

सोनल मुस्कुरा कर तकिये के निचे रखी पिल की गोली मुझे दिखाई और बड़ी अदा से मेरे लण्ड की निचोडते हुए कमर को हचकाया

मै भी खुश हुआ और उसके चेहरे के बराबर मे आकर धक्के को बढ़ा दिया और चुत मे जड मे जाकर लण्ड को रोक दिया एक दो सेकंड रुका था की मेरे लण्ड का लावा फुटा और गरम पानी सोनल की चुत मे भरने लगा ।

वो वापस से गनगना गयी और मुझसे लिपट गयी । मै भी उससे चिपके अपनी कमर झटकते हुए आखिरी बूद तक झड़ता रहा

फिर थोडी देर मै उठा और वो हिली तो जांघो मे टीस सी हुई । अभी तक मेरा लण्ड चुत मे घुसा हुआ था और मेरा वीर्य उसके रस और खुन की बुन्दो से मिल कर हल्का गुलाबी सा हो गया था । जो मेरे लण्ड के जड के कुछ हिस्सो मे च्ख्टा था ।

मै धीरे धीरे उसके जांघो की मालिश की और हौले से अपना लण्ड बाहर निकाला । एक दम क्रीमी हल्की गुलाबी रंग लिये टपकती बुन्दे ,, सोनल ने एक कप्डे से मेरा लण्ड को लपेटा और मै उसको थामे खड़ा हुआ और साफ किया ।

फिर वापस वो कपडा सोनल को दिया वो भी उस कपडे को अपने वीर्य से भरे चुत के मुहाने पर लगा कर बैठी और मैने उस्का हाथ थाम का उसे खड़ा किया ।

उस्के पाव काप रहे थे शायद झुनझुनी थी या वो टीस ही हो

अभी उसके कुल्हे कड़े जान पर रहे थे मैने उसकी कमर को सहलया और उसके होठ चूमे फिर मै उसे बाथरूम लेके गया ।

हम दोनो ने खुद को साफ किया और फिर कपडे पहनने के लिये बाहर हाल मे आये ।

मैने हम दोनो के लिए खाना लगाया एक ही थाली मे फिर मैने उसे खुद से ही खिलाया ।

वो खुश थी उसके चेहरे पर एक चमक थी और खाने के बाद मैने उसके पानी दिया ।

फिर जब मेरे वापस दुकान जाने का समय हुआ तो उसने मुझे हग किया और देर तक चिपकी रही । हम दोनो पिघल रहे थे लेकिन उसकी आंखे भरी थी । मैने प्यार से उसकी आसू साफ कर उसके चेहरे का हर भाग चूमा वो वापस से मुस्करा कर मेरे सिने से लग गयी ।

सोनल - थैंक यू भाई लव यू सो मच

मै ह्स कर बोला - लव यू टू दीदी

मै - मै जाऊ फिर

दीदी उदास मन से - हा ठीक है

मै उस्के गाल चूम कर - शाम को आऊंगा ना मै

वो खुश हुई - हम्म्म ठीक है जाओ अब ,,,

तब तक सोफे पर पड़ी उसकी मोबाइल रिंग हुई अमन का ही फोन था

मै हसी मे उसे छेड़ने के अन्दाज मे - अच्छा तो जनाब के पति का फोन आ रहा है तो भेज रही हो मुझे

वो हस कर - धत्त , ठीक है मत जाओ

मै ह्स कर उसको अपना मोबाईल दिखाते हुए - जा रहा हू , देखो मा का दो बार फोन आ गया है ,,, वो दवा खा लेना और आराम करना और ज्यादा दर्द हो तो मालिश कर लेना

सोनल मुझे धकलेते हुए मेन गेट तक ले आई और बोली- तू जाओ और मेरी चिन्ता ना करो मै कर लूंगी सब हिहीही

मै जाने से पहले से एक बार उसके होठ को चूसा और निकल गया दुकान के लिए

दुकान पर गया तो मा ने थोडी पुछ ताछ की तो नहाने का बहाना मार दिया और फिर मा के साथ आने वाले महिने मे सोनल की शादी को लेके थोडा बात चित हुई और तय किया गया कि अनुज के आने के बाद ही पांडित जी को बुला कर एक मुहूर्त पर सोनल और अमन की सगाई हो जाये । उसी हिसाब से मेहमान भी आयेंगे फिर सब कुछ मैनेज किया जायेगा

शाम को 5 बजे तक मा घर के लिए निकल गयी और मै भी थोडा दुकान मे व्यस्त रहा

फिर समय से निकल गया घर के लिए जहा पापा आ गये थे नहाने गये थे ।

मैने मा किचन मे अकेले काम करते हुए देखा तो उससे दिदी के बारे मे पुछा

मा परेशान होकर - बेटा उसका बदन दर्द हो रहा था वो अपने कमरे मे आराम कर रही है

मै कुछ सोचा और बोला - दवा ली की नही उन्होने

मा मुस्कुरा कर - हा बेटा वो दवा ली है अभी आराम करने दे जा तू भी कपडे बदल ले और फ्रेश हो जा

फिर मै मा को एक किस्स कर अपने रूम मे गया जहा दीदी ने मेरी बेडसित चेंज की थी

फिर मै फ्रेश हुआ और बाहर आया तो देखा किचन खाली था और मा का कमरा बंद था । मै मुस्कुराया और उपर दीदी के कमरे मे गया ।

जहा दीदी सोयी हुई थी मै बडे आराम से अन्दर गया और दीदी के सिरहाने पहुच कर बैठ गया और फिर उसके मुस्कराते गालो को चूम लिया

वो थोडी कसमसाई और थोड़ी बूदबुदाइ फिर मेरे हाथ को थाम कर करवट लेली ।

मै मुस्करा कर उसके बालो को उस्के कान मे खोसा और हल्का हल्का मालिश किया सर पर और दोपहर मे हुए मस्ती को आने वाले समय से जोड कर वही बिस्तर की पाट से टेक लगा कर बैठे हुए ही सोचने लगा । एक अगल ही जुडाव सा था आज सोनल के साथ मेरा , एक अलग ही खिचाव , एक नये रिश्ते के जैसा जहा से मै बाहर नही आना चाहता था ।

मेरे हाथ दीदी के सर को थपकी दे रहे थे और धीरे धीरे 20 मिंट का समय बित गया यहा तक की मा और पापा दोनो छ्त पर हमारे कमरे मे आ गये फिर मै सोनल के सर को थप्की देता हूआ बन्द आन्खो से अपने सपने बुन रहा था एक मोह लेने वाली मुस्कान थी मेरे चेहरे पर

तभी मेरे बालो मेरे किसी का हाथ फिरा और मैने आंखे खोली तो देखा मा मेरे बगल मे खड़ी थी और मुझे बडे प्यार से देख रही थी उसके चेहरे के भाव मे ममता थी और एक खुशि भी जो उसकी छ्लकी हुई आखे बया कर रही थी ।

मै ह्स कर - अरे मम्मी पापा आप लोग

मा मेरे सर को चूम कर - तू यहा है , मै कबसे खोज रही हू , तेरे पापा ने फोन भी लगाया फिर ये हुआ की उपर देख लू

मै मा की बातो जवाब देता तब तक सोनल की निद खुल जाती है और वो आंखे उठाती है उसका चेहरा मेरी गोद मे था और सामने मम्मी पापा खडे थे ।

वो थोडा उत्सुकता से उलझन भरे भाव मे बोली - आप लोग यहा और तू ऐसे क्यू

बैठा है भाई

उसकी बाते सुन कर सब हसने लगे और मा भी मेरे सामने और दिदी के बगल मे बैठ कर उसके चेहरे को दुलारते हुए बोली - कैसी है तबियत बेटा

सोनल एक नजर मुझे मुस्कुराता हुए देखी और मेरी जांघ को चन्गोट कर बोली - अभी थोडा आराम है मा

पापा - तो चलो बेटा खाना खाने चलते है , हम तो तुम दोनो को बुलाने आये थे

सोनल अचरज के भाव मे - दोनो को

फिर सोनल मुझे देखते हुए उठ कर बैठ जाती है

मा ह्स कर - वो क्या है ना बेटा, राज दुकान से आया तो तुम्हारे बारे मे पुछा तो मैने बोला की तेरी तबियत नही ठीक है तू आराम कर रही है तो ये पागल फ्रेश होकर तेरे पास चला आया और तबसे तेरे पास ही बैठा था और निचे हम लोग खोजते हुए यहा आये तो देखा कि ये तुझे आपनी गोद मे सुलाये हुए खुद सो गया था ।

सोनल एक मुस्कान के साथ मेरे तरफ देख्ती है और मै हस देता हू

पापा - चलो इसी बहाने पता तो चला ह्मारे साथ ह्मारे बेटा भी है जो हमारी बच्ची को बहुत प्यार करता है ।

फिर ऐसे ही कुछ भावनात्म्क बाते चली और रात में खाने के बाद मैने खुद से फ़रमयिश की मै दीदी के साथ सोने वाला हू तो पापा थोडा इशारे से हिचके लेकिन मा ने उन्हे रोका और मुझे इजाजत देदी ।

फिर हम दोनो छ्त पर दिदी के कमरे मे चले गये और मा पापा अपने कमरे मे

जारी रहेगी
 
अपडेट 91



खाने के बाद मै मम्मी पापा को बोल कर उपर छत पर दीदी के साथ सोने चला गया ।

कमरे मे जाते ही

दीदी अपना स्टाल जो अक्सर टीशर्ट पर डाले रहती है जब पापा या कोई बाहर का आता है उसको निकाल कर सोफे पर रखते हुए मटकते हुए चुतड को लोवर मे और भी कामुक अदा से थिरका कर एक कातिल मुस्कान के साथ गरदन घुमा कर बोली - ओह्ह क्या बात है आज बड़ी फ़िकर हो रही है मेरी हम्म्म

मै अपनी तारिफ सुन कर थोडा शर्माया और फिर मुस्कुरा कर उसको पीछे से हग करते हुए उसके गाल से अपने गाल सटा कर बोला - आपका हक बनता है दीदी , आज जो कुछ भी आपने मुझे दिया उसके आगे ये सब कुछ नही है

सोनल थोडा जिज्ञासू भाव से ह्स कर - तुझे अच्छा लगा ना बस ,,तू खुश तो मै खुश

मै उसको अपने सामने कर उसकी आंखो मे देखते हुए बोला - दीदी , मै जानता हू आप अमन से कितना प्यार करती है फिर भी मेरे लिए क्यू

सोनल ह्स कर मेरे गाल दुलारते हुए - हम्म्म , तो तू ये जानता चाहता है कि मै अमन से प्यार करती हू फिर भी मैने तेरे साथ कैसे राजी हो गयी इनसब के लिए

मै हा मे सर हिलाया

सोनल - भाई मेरे दिल मे जो अमन के लिए प्यार है वो सच्चा है , मुझे उसके साथ एक आजादी एक सुकून सा मह्सूस होता है और वो बहुत ही केयरिंग है और दिल का बहुत ही अच्छा है । तो उस्के लिये जो भी फीलिंग है वो सब मेरे दिल से है

मै - और मेरे लिए

सोनल थोडा माप तोल कर बोलने के अंदाज मे - हम्म्म्म तु तो मेरी फैंटेसी है हिहिहिही

मै हस कर - मतलब

सोनल हस कर - मतलब की मै भले ही अमन से प्यार करू और उसके साथ फिजीकल हो जाऊ लेकिन अपने सगे भाई के साथ सेक्स करने का ख्याल आना ही एक अलग जोश है भाई तू नही समझेगा हिहिहिही और मेरी लाइफ का पहला सेक्स ही मेरे भाई से हुआ तो हुई ना फैंटेसी हाहाहा

मै थोड़ा उलझन मे था लेकिन थोड़ी देर तक सोच विचार कर बात समझ गया कि दीदी को वो सेक्स स्टोरी पढने का असर था और उन्के दिल मे कही ना कही मेरे लिए फैंटेसी तभी बनी होगी ,,,जैसे मेरे दिल मे हुई थी

मै सोचा क्यू ना दीदी से पुछ लू की कही उनको पापा के लिए भी तो कोई फैंटसी होगी

फिर सोचा ऐसे नही , शायद ऐसे सीधे पुछने पर वो बात घुमा दे या बात ही छुपा ले क्योकि बाते ब्नाने और लपेटने मे वो काफी माहिर थी और उसका उदाहरन अमन था ।

कैसे मेरे साथ चुदाई भी कर ली और वही अमन को एक एक किस्स के एमोजी तक के लिए भी तरसा रही थी ।

इसलिए मैने सोचा इसको अभी अपने रंग मे रंग जाने दो थोडा खोल लू फिर इसके दिल की भड़ास को बाहर लेके आना है ।

खैर जो भी हुआ हो आगे बहुत मजा आने वाला था ।

ऐसे कुछ देर बाते चली और उस रात एक बार और मैने दीदी को चोदा । इस बार खुले शब्दो मे जी भर उसने अपने दिल की बाते बाहर निकाली ।

रात बीती सुबह दीदी ने मुझे 5 बजे जगा दिया और बोली कपडे पहन और निचे जा

मै भी उसको एक बार किस्स किया और अपने कमरे मे गया फ्रेश हुआ और निकल गया सुबह सुबह टहलने के लिए और उम्मीद लेके की काश आज सरोज मिल जाये

मै घर से निकला और बस स्टैंड की ओर गया वहा सुन सन्नाटा था और अभी 5.30 ही हो रहे थे ज्यादा लोग क्या मेरे अलावा कोई नही था ।

हा कुछ आवारा कुत्ते बस स्टैंड के बाथरूम के तरफ भौक रहे थे । उनका तो रोज का काम होता है साले सुबह सुबह शुरु हो जाते है ।

खैर मै वही शान्ति से बैठा और सरोजा के आने का इन्तेजार करने लगा लेकिन ये कुत्ते शान्ति से रहने दे तब ना

मै झिझक कर बस स्टैंड के कम्पाउंड मे गिरी एक आम के पेड़ की छोटी लड्की उठाई और उन कुत्तो को हाक दिया

वो सब भाग गये ।

फिर वापस आकर चेयर पर बैठ गया कि तभी पीछे से एक आवाज आई जिससे मै खुश हो गया

?? - थैंक यू यार आज तो तुमने बचा लिया

मै खुशी से पीछे घुमा तो देखा कि ये तो सरोजा जी है

मै थोडा उलझन भरे लहजे मे हस कर - अरे आप इधर से,, अच्छा तो बाथरूम ने आप ही थी क्या जिस पर ये ....

सरोजा हस कर - हा क्यू तुमने देखा नही

मै हस कर - अरे मुझे पता होता कि ये आप पर भौक रहे होते तो मा चो ....

इतना बोल के रुक गया और मुझे समझ मे आया और मैने खुद पर नियंत्रण किया

जिससे सरोजा हसने लगी

मै ह्स कर थोडा शर्म के भाव मे - सो सो सॉरी

सरोजा ह्स कर - इट्स ओके राज , होता है कभी कभी

सरोजा - वैसे आज बडे सवेरे आ गये क्यू , वो भी इतने दिन बाद मिले हा

मै - आज थोडा जल्दी उठ गया तो सोचा क्यू ना एक नजर सुबह सुबह चांद देख लू

सरोजा थोडा उत्सुक भाव से हस कर - अरे सुबह सुबह सूरज देखते है चान्द कहा

मैने एक नजर सरोजा के तरासे हुए जिस्म मे मारा और उनकी नशीली आंखो मे झाक कर बोला - सुबह सुबह सूरज की लाली मे इस चांद को देखने का म्जा आप नही समझ सकती हो मैडम

मेरी बात का मतलब समझ कर सरोजा पूरी तरह से शर्मा कर झेप सी गयी और मुह फेर कर हाथ रख कर हसने लगी

सरोजा - तुम नही सुधरोगे हा

मै ह्स कर - किसी को बिगडा हुआ ज्यादा पसंद हू मै , बस इसिलिए

सरोजा मुस्कुरा रही और वही मेरी नजर उसकी लोवर मे उभरी गाड की गोलाई माप रही थी जिससे मेरे लण्ड मे कसाव हो रहा था ।

सुबह का समय था और बस स्टैंड के कम्पाउंड मे हम दोनो की थे मौका मेरे हाथ मे था बस पहल की जरुरत थी और सरोजा मेरे बाहो मे होती

लेकिन सरोजा ऐसी रबड़ी थी जिसे मै बडे आराम से छोटे चम्मच के चिख चिख कर खाना चाहता था , हालकी वो काफी गरम औरत थी फिर भी अपने होश हवास मे खुद को बहुत ही अव्वल दर्जे की सहूलियत मे रखती थी और अपना स्तर कभी भी कम नही होने देती थी समाज मे ।

और मै भी उसके इस स्वभाव का सम्मान करता था इसिलिए मै खुले कोई रिस्क नही लेना चाहता था ।

सरोजा मुझे सोच मे डूबा देख कर और मेरी नजर अपनी उभरी हुई गाड पर पाता देख कर बोली - कुछ ज्यादा गहरे मे तो नही चले गये राज बाबू हिहिही

मै झेपा और उसके सवाल का दोहरा मतलब समझ गया और बोला - मेरा क्या है सरोजा जी मुझे गहरी चीजे बहुत पसंद है । अब वो बातो की गहराई हो या ,,,

सरोजा ह्स कर आगे चलते हुए -बस बस समझ गयी

मै भी उसके साथ चलते हुए - वैसे आपकी दिल्ली की ट्रिप कैसी गयी

सरोजा - अच्छी थी और थोडी बेकार भी

मै उत्सुकता से - बेकार थी मतलब ,,सब कुछ ठीक ठाक तो था ना

सरोजा हस कर - हा सब ठीक ठाक था ब्स फ्लाइट मे मेरे एक्स हस्बैंड मिल गये थे और मुझे देख कर थोडा शौक्ड हुए और फिर मुझसे बात करने के लिए उत्सुकता दिखाई लेकिन मैने इग्नोर किया

मै समझ गया कि सरोजा का एक्स हस्बैंड ने सरोजा को क्यू छोडा था और क्यू अब वो मिलने को बेकरार था

मै - तो फिर कुछ बात हुई की नही उनसे

सरोजा - नही यार मै उस घटिया इन्सान से बात करने वाली नही थी और ना ही मौका दिया उसे

मै थोडा सोच मे था तो मुझे देख कर सरोजा बोली- अरे उसकी चिन्ता ना करो मै बीते हुए बुरे वक़्त की याद नही रखती

मै थोडा खुश हुआ और बोला - सरोजा जी बुरा ना मानिये तो एक बात पूछू

सरोजा मुस्कुरा कर - हा हा क्यू, और तुम कबसे परवाह करने लगे कि मुझे कुछ बुरा लगेगा, इतने दिनो से मेरे साथ फलर्ट कर पाते क्या अगर मुझे बुरा लगता हिहिहिही

मै ह्स्ते हुए - हा जी ये बात है ,,लेकिन मै जो पुछने जा रहा हू वो आपने बीते जीवन से है

सरोजा थोडा शांत हुई और बोली - पुछ लो ना उसमे क्या है

मै थोडा हिचक कर - वैसे आपकी तलाख किस बात को लेके हुई थी ,

मेरी बात सुन कर हसती चहचहाती सरोजा थम सी गयी

मै थोडा नरम भाव से - माफ कीजिएगा, मै आपको कोई तकलीफ नही देना चाहता ,,बस आपकी मर्जी है अगर आप मेरे साथ शेयर करना चाहो तो

सरोजा एक गहरी सास लेते हुए - अरे नही राज तुम क्यू माफी माग रहे ,,,,वैसे भी ये सवाल मेरे लिए नया नही है मै काफी लोगो को जवाब दे चुकी हू तो कोई बात नहीं अगर तुमने भी पुछा तो

मै थोडा रिलैक्स हुआ और बोला - तो बताईये ना क्या हुआ था

इधर हम बाते करते हुए मेन सड़क पर आ गये थे और धीरे धीरे उजाला ज्यादा होने से बाकी के लोग भी आने जाने लगे थे ।

सरोजा मुस्कुरा कर - तुम कब फ्री इधर

मै उलझन भरे लहजे मे - मतलब

सरोजा हस कर - अरे यार ,,ये टॉपिक बहुत बड़ा है और ऐसे सड़क पर तो तुम्हारे साथ मै ये सब नही बाट सकती ना ,,कभी आओ ऑफ़िस मेरे वही बात करते है ठीक

मै - हा हा क्यू नही ,,बस 3 4 दिन मे मेरा भाई आ जायेगा तो मै आता हू मिलने आपसे

फिर सरोजा मुझे बाय बोल कर घर की ओर निकल गयी और मै अपने घर की ओर

जैसा की मैने बताया था सरोजा एक अव्वल दर्जे की सहूलियत के साथ समाज मे पेश आती थी ताकि उसके सम्मान पर कोई टिप्पणि ना करे ना सामने ना पीठ पीछे ही ।

मै समझ गया कि ये बात जो मैने पूछी उस्से शायद वो मुझे कुछ अलग ही बताने वाली जो आज तक बाकियो को पता होगा उसके गुजरे कल के बारे मे । ये काफी हद तक भावनात्मक रूप भी ले ले शायद या वो अपनी भावना को जग जाहिर ना करने के उद्देश्य से ही मुझे व्यक्तिगत रूप से मिलने को बोला हो ।

खैर जो भी होना था मै उसके लिए तैयार था क्योकि अब तो मेरे दिल मे उसके गुजरे कल का सही रूप जानने का तलब थी ।

मै घर आया और नहा कर नाशत किया और निकल गया दुकान पर

समय बीता और उस बात को चार दिन बीत गये ।

आज अनुज घर आने वाला था । उसके आने के पहले ही बीते रात को खाने पर सोनल की शादी को लेके चर्चा हुई कि अनुज के आने के बाद एक बार अमन के परिवार और हमारे परिवार की मिटिंग कर ली जाय ताकि आगे की तैयारियो मे कोई दिक्कत ना और इसी बहाने हम सब आपस मे मिल जुल लेंगे ।

वही इन चार दिन मे मै रोज दोपहर मे दीदी को जम कर चुदाई करता और रात मे मा और पापा के साथ मस्ती होती । सुबह मे एक बार और बीच मे सरोजा से मुलाकात हुई लेकिन उसने तय किया था कि वो ये सब बाते ऑफ़िस मे ही करेगी तो मैने कोई खास चर्चा नही की ।

आज सुबह मै तैयार होकर दुकान गया और 12 बजे तक अनुज दुकान पर आया

मै उस वक़्त काम मे लगा था और ग्राहक के जाते ही

मै मुस्कुरा कर - और भाई कैसी रही छुट्टी तेरी

अनुज हा मे सर हिला कर - अच्छा था भैया

मै -फिर कहा कहा घुमे

अनुज - भैया हम लोग किला देखने गये थे , फिर अगले दिन सिनेमा भी गये , फिर उसके अगले दिन वाटरपार्क ,,,,

मै खुशी से अनुज की बात काटते हुए - वाह भाई वाटरपार्क हां,,, मस्त माल देख के आया तू हिहिहिही

अनुज मेरी बात से शर्मा रहा था

मै हस कर - अरे अब बोल ना , वहा देखते हुए नही शर्माया तो यहा क्यू ,,, मुझसे शर्म आ रही है

अनुज हस कर - नही भैया वो हम लोग फुल फैमिली गये थे वाटरपार्क के एक प्राइवेट पूल मे ,,,वहा घर की लेडीज़ के अलावा कोई नही था बाहरी

मै समझ गया कि अनुज का दिल साफ है और वो रिश्तो को अहमियत देना बखूबी जानता है लेकिन घरेलू माल को खुला देखना तो मजेदार होगा ही ना , मन के कोने में छुआ हवस थोडा सा ही सही लेकिन घरेलू माल को पानी मे गोता लगाते देख लंड को जगा जरुर देता है ।

फिर मैने अनुज का मन टटोलेते हुए - वैसे कौन कौन था भाई साथ मे

अनुज - सब घर वाले भैया ,, राहुल के मौसी - मौसा और उनका बेटा आकाश , बेटी सौम्या , मै और राहुल , आकाश के चाचा चाची भी थे ।

मै - हम्म्म फिर कोई पटाया कि नही हिहिहिही

अनुज शर्मा कर लेकिन खुले दिल से बोला - कहा भैया , ज्यादा समय तक तो हम लोग फैमिली के साथ ही थे अकेले घूमने का मौका नही मिला ज्यादा

मै - चल कोई बात नही , मजा किया ना तुने

अनुज - हा भैया ,,लेकिन आपको पता है

मै अचरज से - क्या बता

अनुज बडे ध्यान से - वो आकाश है ना वो बहुत ही घटिया है

मै - मतलब

अनुज संकोच करते हुए - भैया वो गंदी गंदी कहानिया पढता है और ,

मै - और क्या

अनुज - वो अपने मम्मी और चाची का नाम लेके बाथरूम मे वो सब करता है

मै समझ गया कि अनुज क्या कहना चाहता था

मै जानबुझ कर चौकने का नाटक किया - नही नही भाई तुझे गलतफहमी हुई होगी ।

अनुज अब अपनी बातो पर जोर देते हुए कहा - नही भैया मैने देखा है उसे बाथरूम मे अपनी मा और चाची का नाम लेके बाथरूम मे हिलाते हुए

ये बोल कर अनुज चुप हो गया

मै - चल कोई बात नही ,,तूझे कोई परेशानी तो नही है उस बात से

अनुज उलझन मे - नही भैया ,बस मेरे दिमाग मे आ रहा है कि कोई अपनी मा या चाची के बारे मे कैसे सोच लेता है ऐसे ,,,कितना गन्दा है वो छीईई

मै हस कर - फिर तो किसी लडकी के बारे मे भी सोचना गन्दा होगा ना भाई

अनुज - वो कैसे

मै हस कर - अरे वो भी तो किसी की बहन या बेटी होगी ना

अनुज बेजवाब था

मै वाप्स उसे समझाते हुए - अरे पगलु ,, तु अपना मन साफ रख और समाज के बुरे प्रभाव से दुर रह और अगर किसी से तेरा लगाव हो तो उसे कबूल करके आगे बढ़ ,,,,

अनुज - जी भैया

मै ह्स कर -अब बता सही सही कोई पसंद आई है या नही

अनुज मुस्कुरा कर - नही भैया , वो आकाश को लेके इतना परेशान था कि किसी और पर फोकस ही नही कर पाया

मै हस के - तू उसकी चिन्ता छोड वो गलत नही है

अनुज चौक कर - ऐसा क्यू

मै उसे समझाते हुए - अब देख उसे पता है कि वो उसकी मा और चाची है लेकिन उसके हथियार को थोडी पता ,,,ये ह्यूमन केमिकल रियेक्शन का प्रभाव है कि कोई भी अच्छी और खुबसुरत चीज पर हमारा अवचेतन मन तत्काल प्रतिक्रिया दे देता और जब तक चेतन मन रिश्ते की अहमियत का अह्सास दिलाये तब तक हवस उस इन्सान पर भारी हो चुका होता है और चेतन मन बार बार उस गलत भावना को हटाने के प्रेरित करता है और ऐसे लोग जल्द जल्द हस्तमैथुन कर वो हवस भरी ऊर्जा को बाहर निकाल देते है और फिर धीरे धीरे सब सामान्य हो जाता है ।

अनुज मेरे जवाब से खुश होकर - ओह्ह्ह ये बात है ,, वैसे आपको इतनी जानकारी कैसे है भैया

मै हस कर - बेटा तुझसे 3 साल बड़ा हू ,, समय आने दे वक़्त और समाज सब सिखा देगा और रही सही कसर मै पूरी कर दूँगा

फिर हम हसने

फिर मैने खाना खाया और उसी समय को रात मे खाने के बाद हम सब हाल मे बैठे हुए थे और सोनल की शादी को लेके चर्चा हो रही थी ।

मा - आपने बात की जी अमन के पापा से की नही

पापा - हा रागिनी बात हो गयी है और वो लोग घर पर ही बुला रहे हैं

मै - उन्के घर क्यू पापा ,,, हमारे घर ही बुला लो ना

पापा - बेटा मैने बोला था लेकिन मुरारीलाल जी का कहना है कि अमन की मा चाहती है शादी से पहले एक बार सोनल घर बार देख लेगी और उसकी कोई फरमयिश होगी तो वो भी बता सकती है कि उसके रूम मे कैसा सुविधा चाहिये ।

मै दीदी को छेड़ते हुए -ओह्हो बडे दिलदार है तेरे ससुराल वाले हा

सोनल तुनक कर - हा तो किस्मत है मेरी ,, क्यू मा

मा बडे प्यार उसे हग करते हूए - हा बेटी , मै तो बहुत खुश हू इस रिश्ते से

फिर तय हुआ कि तीन दिन बाद अमन के यहा जाना है और कल ही नये कपडे शगुन के सामान ले लिये जाये ।

मा - मै शालिनी को बोल देती हू

सोनल चहक कर - मै भी निशा को

पापा - हा हा भाई ठीक है तो फिर तय रहा कल दुकान पर अनुज बैठ जायेगा और मै तो मेरी दुकान पर रहूंगा ही और राज बेटा तू अपनी मम्मी चाची और दोनो बहानो के साथ सरोजा कॉमप्लेक्स जायेगा खरीदारी के लिए

सबने हामी भरी वही अनुज ने नये जुते की फरमयिश भी की जो खुशी खुशी पापा मान गये ।

रात मे दीदी मुझे समान की लिस्ट बनाने के बहाने अपने कमरे मे लिवा गयी और मैने उसकी जबरदस्त चुदाई की और फिर सोने कमरे मे आया तो देखा सरोजा के 10 से भी ज्यादा मिसकाल थे और मैसेज भी

मै सोचा कल इस्से मिल ही रहा हू तो क्यू ना थोडा और परेशान किया जाये क्योकि मै जानता था सरोजा मेरे से बात करने के लिए बेताब रहती थी ।

मै बिना कोई रिप्लाई के फोन वैसे ही रख कर सो गया ।

जारी रहेगी
 
आज Apun का Happy wala birthday है दोस्तो

Wish nhi karoge 😎
😍
 
अपडेट 92

अगली सुबह मै रात की चुदाई की थकान से देर से उठा । सुबह का नाशता कर अनुज और पापा दुकान पर चले गये ।

मै भी आराम से 10 बजे तक नहा धो कर तैयार होने की सोच रहा था क्योकि माल 10 बजे से पहले खुलता नही , इसिलिए सबके साथ नासता कर लिया और फिर अपने कमरे मे गया । नया पैंट और टीशर्ट , अंडरवियर निकाल कर बेड पर रखा और फिर तौलिया लेके निकल गया नहाने ।

जैसा मेरी आदत थी मै दरवाजा बंद नही रखता था और बाथरूम मे भी खुला ही नहाता था । क्योकि किसी से छिपाने जैसा कुछ था नही अब घर मे ना

तो मै नहा चुका था और गुनगुना हुआ तौलिया लपेटे कमरे मे आया तो देखा कि मेरा अंडरवियर गायब है मै वापस आलमारी चेक किया तभी मुझे आलमारी के सीसे मे किसी की झलक दिखाई दी जो मेरे पीछे कमरे के दरवाजे के पर्दे मे खड़ी थी ।

मै थोडा सावधान हुआ और एक मुस्कुराहट के साथ थोडा सीसा बराबर मे लाकर निचे पैर पर नजर मारी तो एक हिल वाली सैंडल पहने खुबसूरत पैर थे और पटियाला सलवार से पाव ढका था ।

मै समझ गया ये निशा थी तो मै जानबुझ कर नाटक करते हुए बोला - ओफ्फो कहा गयी मेरी अंडरवियर,,,मम्मी से पुछता हू

फिर मै अन्जान बन्ते हुए धीरे धीरे बिना

उसकी तरफ देखे दरवाजे तक गया और वो सिमट कर और दीवाल की ओर हो गयी और मै मौका देख कर दरवाजा खोलने के बजाय उसकी चटकनी लगा कर झट से पर्दे के पीछे घुस कर निशा को पकड लिया

वो मुझे अचानक देख कर चहकना चाही लेकिन मैने उसके होठ अपने होठो से बान्ध लिये और उसके कूल्हो को मलना शुरु कर दिया ।

निशा के बदन के स्पर्श से ही मै उत्तेजित होने लगा और तौलिये मे लण्ड अपनी जगह बनाने लगा ,,वैसे भी तौलिया कुछ खास सही से नही लपेटा था मैने और हमारी कसमसाहट मे वो खुल कर गिर भी गया

तभी निशा की नजर मेरे तनमनाये लण्ड पर गयी और वो मुस्करा कर लपक लेती है मेरे लण्ड को और उसकी तपन का अह्सास अपनी मुठ्ठि मे पाते ही गनगना जाती है

मै उसके होठ चुस्ते हुए उसे अपनी तरफ खिचता हू और वो मेरे सुपाडे वाले हिस्से को मुठिया रही होती है ।

फिर मै आंखो से इशारे करता हू और वो मुस्कुरा कर वही कोने मे बैठ जाती है और हम दोनो की कामक्रीड़ा परदे के पीछे चल रही होती है

निशा पुरे जोश मे मेरे लण्ड को चुस्ती है और मेरे आड़ सख्त होने लगते है,,,नहाने के बाद तुरंत लण्ड चुस्वाने का मजा मेरे लिये पहला अनुभव था एक नया जोश भर गया था मेरे लण्ड मे ।

लेकिन अफसोस हमारी मस्ती को मेरी ही जान की नजर लगी

सोनल निशा को बुलाने आ गयी

और हम दोनो झट पट अलग हुए क्योकि हो सकता था कि सोनल के साथ कोई और भी हो साथ मे

मै फौरन अपने कपडे लेके बाथरूम मे गया और सोनल के दरवाजा खटखटाने से पहले ही निशा ने चटखनि खोल दी और बाहर चली गयी ।

थोडी देर बाद मै कपडे पहन कर बाहर आया और तब हाल ने निशा, मा, चाची और सोनल सब तैयार खडे थे

चाची ह्स कर - औरतो से ज्यादा तो इसे टाईम लग जाता है ,,पता नही शादी मे क्या करेगा

चाची की बात पर सब हसे और फिर हमने एक ई-रिक्शा किया और निकल गये ।

मै आगे बैठ गया और बाकी सब पीछे बैठ गये ।

मै एक नजर मोबाईल मे देखा तो सरोजा के आज ने मैसेज पडे थे जो काफी गुस्से और भड़ास भरे लहजे मे थे तो कुछ चिन्ता की आश मे की कही मुझे कोई दिक्कत तो नही ,,,जैसा भी हो मै उसे बता दू ।

मै बस मुस्कुरा कर मोबाईल जेब मे रख दिया और 5 मिंट मे ही हम सब सरोजा कॉमप्लेक्स आ गये ।

अभी सुबह के 10 :30 बज रहे थे

फिर सारे लोग शॉपिंग ने व्यस्त थे तो मै मा को बोला की अभी आता हू थोड़ी देर मे एक दोस्त से मिल कर और फिर निकल गया , सरोज जी के ऑफ़िस मे

अन्दर जाने से पहले मैने सरोजा को कॉल लगाया और दो रिंग जाते ही उन्होने कॉल पिक कर लिया और शुरु हो गया उनका सारे सवालो और भड़ास भरे लहजे और अन्त तक आते आते

सरोजा - बोलो राज , तुम कुछ बोल क्यू नही रहे ,मुझसे कोई गलती हुई क्या

मै हस कर - सब ब्ताऊगा पहले दरवाजा खोलिये हिहिहिही

सरोजा अचरज के भाव से - मतलब , तुम यहा

तभी अन्दर कुछ खटपट हुई और सरोजा भाग कर खुद से दरवाजा खोली और सामने मुझे हस्ता पाकर

सरोजा ने फोन काटा और ह्स्ते हुए मेरा हाथ पकड कर अन्दर खीचा और भडकते हुए बोली - तुमने समझ कर क्या रखा है मुझे हा

सरोजा इस वक़्त मरून सिल्क साड़ी मे एक प्रोफेशनल लूक मे थी और उसके मैट मरून लिपस्टिक से होठ बोलते हुए मुझे आकर्षित कर रहे थे और मै उनकी आंखो मे देख रहा था लगातार और फिर मेरा चेहरा सीरियस होने ल्गा और सरोजा भी मेरे मन की मन्शा को जैसे भाप लिया हो और वो पीछे की ओर झुकने लगी , मै उनकी ओर लपकने ल्गा और आखिरकर उनकी कमर मे हाथ डाल कर एक बार फिर से उनके बड़बड़ाते होठो को थाम लिया अपने होठो मे

वो आंखे ब्ड़ी किये मुझे घुर रही थी और उन्हे इत्मीनान कर उन्के होठ चुस्ते हुए आंखे बंद कर लिये वो सिहर गयी और मुझे अपनी ओर खींचने लगी ।

खैर हमारी होठो की बात चित लम्बी नही चली की डोर नॉक हुआ

फिर हम अलग हुआ और सरोजा ने मुझे सोफे पर बैठने का इशारा कर डोर खोला

सामने उनकी assistent थी जो बस फ़ॉरमैलिटी के लिए आई थी और उन्होने उसको किसी बॉय को भेजने को बोला और वापस मेरे पास गयी ।

हम दोनो के बीच कुछ सन्नाटा सा थ और तभी सरोजा और मै एक साथ बोले - वो कल रात

फिर हम दोनो हसे

सरोजा ह्स कर - हा बोलो कल मेरा फोन क्यू नही उठाया

मै - सॉरी वो कल दीदी के शादी को लेके बाते हो रही थी और आज उसी के शॉपिंग के लिए आये है मेरे फैमिली वाले यही पर ,,, और मेरा मोबाईल चार्ज मे था तो

सरोजा तुनक कर - तो सुबह नही फोन कर सकते थे , पता है मै कितनी परेशान थी

मै ह्स कर - वो मै सोच की आज जाना ही है मिलने तो क्यू ना सरप्राइज़ ही देदू

सरोजा - हा तुम्हारे सरप्राइज़ के चक्कर मे मुझे चक्कर आ रहे थे कल से

मै ह्स सरोजा को छेड़ते हुए - ओह्हो मेरे लिए इतनी फ़िकर क्यू जी

सरोजा थोडा संकोच दिखाते हुए - अब ब ब तुम दोस्त हो मेरे,, तो दोस्त की फ़िकर होगी न

मै उनकी बात को तब्ज्जो दते हुए -ओह्ह

मै उन्हे छेड़ने के अंदाज मे - सिर्फ दोस्त या और भी कुछ

सरोजा शर्मायायि और बोली - मै दोस्त ही समझती हू ,ब्स तुम्हारे लक्षण ठीक नही लग रहे हैं

मै हस कर उन्के पास हुआ और बोला -कैसे लक्षण

वो कुछ बोलती की बॉय अंदर आया और फिर सरोजा ने उसे दो काफी का ओर्डेर दिया

मै वापस से उन्हे इंसिस्ट करते हुए - बोलिए ना जी कैसे लक्षण

सरोजा हस कर - यही चिपकू होने के लक्षण ,,,हमेशा मेरे साथ फलिर्ट करने का लक्षण और क्या

मै - क्यू आपको मेरी शरारते पसन्द नही तो मै नही करूँगा आज से खुश

मेरे तेवर भरे जवाब से सरोजा सहमी और बोली - नही वो बात नही है राज ,, मुझे अच्छा लगता है लेकिन कभी कभी मै हमारे उम्र के दायरे को लेके बहुत सोच मे पड जाती हू कि लोगो जानेंगे हमारी दोस्ती के बारे मे तो क्या कहेंगे और एक बदनमी मै सह चुकी अब दुसरे की हिम्मत नही है

मै सरोजा के दिल के जज्बात समझ सकता था और मै उसके पास गया उसके हाथ पकड कर उसकी भरी हुई आंखो मे देखते हुए बोला - यार तुम फाल्तू का डर रही हो , मेरा ब्स चले तो मै हमारी दोस्ती के बैनर लगवा दू हिहिहिह

सरोजा मेरे बात पर खिलखिला कर हँस पड़ी और उसके आंख छलक गये

वो उन्हे साफ कर बोली - ब्स इसी जिन्दादिली और तुम्हारे बड़े दिल के कारण ही मै तुमसे बाते करती हू और तुम्हारा साथ नही छोड़ना चाहती

मै उदास होने नाटक मे - मुझे लगा कि आपको मेरा कुछ और बड़ा पसन्द आया था इसिलिए आप साथ हो

जैसे ही सरोजा मेरे बातो का मतलब समझी और उसकी आंखे ब्ड़ी हुई तो मै जोर से हसने लगा

सरोजा मेरे तरफ आके मेरे कान पकडने के लिए लपकते हुए बोली- बदमाश कही के तुम नही सुधर सकते ना

वो मेरी ओर लपकी तो मै सोचा क्यू ना एक किस्स और कर लू लेकिन उससे पहले ही डोर नॉक हुआ और एक बॉय काफी लेके आया ।

साला आज तीसरी मर्तबा था कि कोई हमे डिस्टर्ब कर रहा था सरोजा भी इस बात को समझ गयी थी तो उसने बॉय को बोल दिया की वो जाये और जब तक वो ना कहे कोई हमे डिस्टर्ब ना करे ।

उसके जाने के बाद सरोजा ने दरवाजा बन्द कर वपस मेरे बगल मे बैठी

सरोजा - लो कॉफी पीयो

मैने कॉफी ली और एक सिप लेते हुए बोला - और तब बताईए जी

सरोजा - हा पुछो

मै थोडा शांत रहा और बोला - अगर आपको ऐतराज ना हो तो आप उस दिन की बात आज पूरी कर सकती है

सरोजा मेरे कहने का मतलब समझ गयी और मुस्कुरा कर कॉफी टेबल पर रखते हुए बोली - देखो राज ,, वैसे मेरी बीती जिन्दगी के बारे मे काफी लोग जानते है , उनमे कुछ सच्चाई है और कुछ अफवाहे भी है ।

मै थोडा उत्सुकता और अचरज से - मतलब मै समझा नही

सरोजा मुस्कुरा कर - तो सुनो मै बताती हू

राज मै बचपन से घर की लाडली थी और शुरु से ही मेरा शरीर ऐसे ही भरा हुआ था या कहो की मै मोटी थी ।

संजीव भैया ने मुझे बहुत सहारा दिया यहा तक की मेरी जिद पर मुझे पढने के लिए घर मे बहस कर बाहर पढने के लिए भी भेजा ।

12वी के बाद मै दिल्ली मे अपने मौसी के यहा पढाई करने चली गयी और वही कामर्स से पढाई की । फिर MBA भी किया । MBA के दौरान ही मेरी मुलाकात मनीष से हुई , वो एक हाई प्रोफाइल और वेल एजुकेटेड इन्सान था और वहा कालेज मे मेरा सीनियर भी था ।

शुरु मे हम दोनो मे प्यार हुआ और फिर उसे एक मल्टीनेशनल कंपनी मे सीनियर पोस्ट की जॉब मिल गयी । समय आने पर हम दोनो ने अपनी बात शादी के लिए घर पर बताई और फिर उसकी अच्छी पर्सनैलिटी से प्रभावित होकर भैया ने घर मे सबको हमारी शादी के लिए मनाया ।

कुछ समय बाद हमारी शादी हो गयी और मै उसके साथ दिल्ली मे ही शिफ्ट हो गयी ।

समय आने उसने मुझे उसके ऑफ़िस मे एक सहायक के रूप मे जॉइनिग कराई ।

मेरी हैल्प से उसकी जॉब मे काफी तरक्की हुई लेकिन मै बदकिस्मती से एक अस्सीस्तेंट ही रही ।

समय के साथ मनीष मे घमंड होने लगा और धीरे धीरे वो मेरे साथ रूड बिहेव करने लगा । मुझे अह्सास होने लगा था कि उसको ये बात बहुत खल रही थी कि जिस कंपनी मे वो एक अच्छी रैंक पर काम कर रहा है उसी कंपनी मे उसकी वाइफ किसी छोटे कर्मचारी की अस्सीस्तेंट है । अब आये दिन मनीष मुझे नौकरी छोडने का दबाव देने लगा ।

मै उसकी खुशि और रेपोटेशन को देखते हुए नौकरी छोड दी और ऐसे ही 6 महीने बित गये । हमारी शादी को लगभग डेढ़ साल होने को थे और शादी के फिजिकल होने से और घर पर रहने से मेरी बॉडी मे फैट ज्यादा हो गया जिससे मै पहले से ज्यादा मोटी हो गयी । समय के साथ अब मनीष मेरे बॉडी को लेके ताने मारने लगा , उसे मुझे कम्पनी के किसी पार्टी या रेशप्सन मे लेके जाने मे हिचक होती थी । धीरे धीरे मै भी उसकी बातो से इरिटेट होने लगी । एक बोझ सा लगने लगा मेरे मन मे , मैने जिम जॉइन की थोडा वेट लॉस भी किया लेकिन अब मनीष को मुझे ताने देने की आदत सी हो गयी थी वो ऑफ़िस की भड़ास घर आकर मुझ पर निकालता था और मेरे लाख कोशिस के बावजूद भी हमारे रिश्ते मे कोई मिठास बाकी नही थी । महिनो हमारे बीच कोई फिजिक्ल रिलेशनशिप नही हुए वही मेरी सास मुझ पर बच्चे के लिए दबाव बनाने लगी थी

मै काफी समय दिया मनीष को लेकिन वो अब जुनुनी हो गया था और मै समझ गयी कि ये इंसान अब बदल गया ।

हार मान कर मैने ये बात अपने भैया को बताई और फिर उन्होने सलाह दी मै तलाख ले लू , और मुझे सही भी लगा ।

फिर मैने उसे तलाख दे दिया लेकिन फिर भी उसे कोई फर्क नही पडा ।

घर वापस आने के बाद भैया ने मेरे नाम से ये कॉमप्लेक्स खुलवा दिया और ब्स तबसे मै यही हू ।

मै एक गहरी सास ली और सरोजा को देखा तो उसकी आंखे नम थी

मैने जेब से रुमाल निकाला और उसे दिया । वो मुस्कुरा कर आंख साफ की

सरोजा ह्स कर - सुन ली मेरी दर्द भरी दास्ताँ

मै - हम्म्म वाकयी आप काफी हिम्मत वाली है ।

मै थोडा सोच कर - फिर आपने दुसरी शादी क्यू नही की

सरोजा मुस्कुरा कर - मुझसे शादी करेगा कौन राज , एक तो मेरी उम्र 34 की होने वाली है और मै तालाखशुदा औरत हू ,,वैसे भैया ने कोसिस की थी एक दो बार लेकिन मैने खुद मना कर दिया ।

मै - हा लेकिन आखिर कब तक ऐसे अकेले जीवन जियेंगी आप ,, आप कहो तो मै खोजू आपके लिये कोई लड़का

सरोजा खिलखिला कर - हिहिहिही तुम खोजोगे , वो भी मेरे लिये

मै - हा क्यू नही ,,बस आप बताओ कैसा लड़का चाहिये

सरोजा मुस्कुरा कर - तुम बहुत अच्छे हो राज ,, मेरा बस होता तो मै तुमसे ही शादी कर लेती हिहिहिही

मै अचरज से - मुझसे , लेकिन मुझसे ऐसा क्या है ,,, कही उसकी वजह से तो नही

मैने सरोजा की आंखो मे देखते हुए अपने लण्ड की ओर इशारा किया

सरोजा शर्मा कर - अब बस भी करो ,,क्यू बार बार उस रात वाली बात को लेके मुझे परेशान करते हो

मै ह्स कर - मै तो करूँगा हिहिहिही ,,,आप ने मेरा फायदा उठाया है

सरोजा अचरज से - कैसा फायदा राज

मै हस कर - आप मेरा वो देख कर खुद का काम कर ली और मेरे बारे मे सोचा तक नही हुउह

सरोजा मेरी बातो से झेप सी गयी - अब बस भी करो , तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो

मै हस कर - अच्छा ठीक है , वैसे एक बात पूछू सच सच बताना

सरोजा - हा बोलो

मै शरारती भाव मे - क्या सच मे उस दिन से पहले और तलाक के बाद वो सब नही किया था

सरोजा मेरी बाते सुन कर आंखे ब्ड़ी कर ली और फिर थोडी मुसकुराते हुए झेप सी गयी - धत्त बदमाश , ये सब कोई पुछता है

मै - नही उस दिन आप कह रही थी कि तालाक के बाद आज पहली बार तुम्हारा मोटा ,,,

सरोजा मेरे मुह पर हाथ रखते हुए ह्स कर - छीई गन्दे चुप कर ,,,हो गया एक बार मुझसे तो क्या अब परेशान करोगे मुझे

मै उसके हाथ पकड कर उसकी आंखो मे एक टक देखा और बोला - क्या सच मे आपका फिर से देखने क मन नही कर रहा है

सरोजा मेरी आंखो देखते ही खोने सी लगी उसकी सासे भारी होने लगी और वो मुह फेर ली - ओह्ह राज प्लीज ऐसी बाते मत करो

मै पीछे से उसके कन्धे पर हाथ रखा और बोला - मै किसी से ये शेयर नही करूँगा

सरोजा मेरे हाथो का स्पर्श पाकर सिहर सी गयी और उस्की आंखे बंद हो गयी थी । वो तेज गति से सास ले रही थी ।

मैने सोचा यही मौका कि कुछ बात आगे बढ़ाया जाये

मै खड़ा हुआ और धीरे से अपना पैंट खोला और अपना तना हुआ लण्ड पुरा का पुरा बाहर सरोजा के सामने रख दिया

सरोजा को मेरे लण्ड की गरमी का आभास हो गया था और वो धीरे धीरे खुद को नोर्मल कर बहुत हल्का सा एक अन्ख को खोल कर तिरछी से मेरे फंफनाते लण्ड को देख कर वाप्स से आंखे भीच लेती है ।

सरोजा

छीईईईई राज ये कया कर रहे हो अंदर कर लो प्लीज उसे ,,, यीईई मम्मी प्लीज राज

मै ह्स कर धीरे से सरोजा का एक हाथ झुक कर पकड़ा और वो उसे बार बार निचे खिच रही थी लेकिन मन उसका भी था कि वो उसे छू ले

वो आंखे भिचे बूदबुदाते हुए ना ना करती रही और मैने उसका हाथ पकड कर लण्ड पर रख दिया और लण्ड का स्पर्श पाते ही वो गनगना गयी ।वही मै भी सरोजा के मुलायम हाथ का स्पर्श पाकर पागल सा होने लगा ।

सरोजा अब चुप थी और धीरे धीरे उसने आंखे खोलनी शुरु की और तिरछी नज़र से मेरे लण्ड के टमाटर से लाल सुपाडे को देखा और अपनी थूक गटक ली ,,

मै धीरे से अपना हाथ सरोजा के सर पर रखा और वो मेरे लण्ड को थामे नजरे उपर कर मेरी आंखो मे देखी तो मै झुक कर उसके मोटे रसिले होठो को मुह मे भर लिया और सरोजा ने भी मेरा साथ दिया ।

मै वापस खड़ा हुआ और लण्ड को थोडा सरोजा के सामने लाया और सब सरोजा उसे अच्चे से निहार रही थी ।

मै हौले से सरोजा के गाल को सहलाया और लण्ड को उसके होठो के पास के ले गया ।

मेरे दिल की धडकनें तेज हो रही थी वही सरोजा मेरी आंखो मे देखते हुए धीरे से मुह खोला और सुपाड़े को मुह मे भर लिया ।

मेरी आंखे बन्द हो गयी । मेरे सुपाडे को एक ठन्दक सा अह्सास हुआ ,,, सरोजा के मुलायम होठो का स्पर्श मेरे लण्ड की नशो को फाडने लगा ।

मैने वापस आन्खे खोली तो सरोजा अपनी आंखे बंद किये बडे ही कामुक अदान्ज मे धीरे धीरे लण्ड को मुह मे ले रही थी और मेरा लण्ड और भी फौलादी हुए जा रहा था ।

मैने अपने हाथ सरोजा के बालो पर रखे और हौले से दबाया जिससे सरोजा ने लण्ड को और अन्दर लेके मेरी आंखो मे झाका

मेरे मुह से आह्ह्ह निकाली

मै - ओह्ह्ह सरोजा उम्म्ंम्ं थोडा जोर से चुसो ना

सरोजा अपनी मतवाली आंखे नचाते हुए लण्ड को धीरे धीरे मुह मे अन्दर बाहर करने लगी

मेरे हाथ उसके बदन पर सरकाने लगे और बालो से होकर गरदन और फिर कन्धे तक गये और फिर झुका तो हाथ उसकी मोटी चुचियॉ के उभार पर गये

मैने उसकी बाई चुची को अपने दाये हाथ से दबाया और सहलाने लगा और वही बाये हाथ से उसके सर को पकड कर अप्नी कमर को चलाते हुए मुह लण्ड पेलने लगा

फिर सरोजा रुकी और मुह से लण्ड निकाल कर खड़ी हूई और मैने झट से उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसके होठ चुसने शुरु कर दिये ।

वो भी एक हाथ से मेरे लण्ड को भीचते हुए मेरे होठ चुस रही थी और वही मेरे हाथ उसकी गाड पर घुम रहे थे ।

फिर सरोजा ने मेरे होठ छोडे और मेरा लण्ड पकड कर खिच्ते हुए ऑफ़िस मे ही बने एक इनडोर कमरे मे ले गयी और झट से दरवाजा बन्द किया ।

अन्दर एक फुल किंग साइज़ बेड था और सारे सुविधाये भी जो एक घर के bedroom मे होती है ।

मै झट से सरोजा को पीछे से पकड कर लण्ड को उसकी गाड मे धसाते हुए उसकी चुचियॉ को मिजने लगा ।

सरोजा क्समसा कर - ओफ्फ्फ राआआज्ज्ज्ज उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ज माआआ उम्म्ंम्म्ं

मै उसकी नंगी कमर मे हाथ डाल कर उसके गुदाज मुलायम पेट को मसलने लगा और नाभि मे ऊँगली करते हुए उसके गरदन को चूमने लगा ।

वही सरोजा मानो पागल सी होने लगी और अपनी गाड को मेरे लण्ड पर रगड़ते हुए सिस्किया ले रही थी ।

मै भो सरोजा के गाड का दीवाना था तो झट से सरोजा के बेड के पास झुका साडी को फटाक से उपर किया और अन्दर उसकी नंगी नंगी गोरी चमड़ी वाली मांसल जान्घो के उपर मरून पैंटी मे कैद फुटबाल कैसे गाड उफ्फ्फ

मैज झट से निचे बैठ कर अपना मुह पैंटी के उपर से ही सरोजा के गाड के दरार पर लगा कर नाक घुसाने लगा और दोनो हाथो को उसकी मुलायम गोरी जांघो पर फेरने लगा ।

सरोजा के चुत और उसकी रिस्ते रस की महक मेरे नकुरो तक आ रही थी । मैने मेरे हाथ उपर लाकर उसके चुतडो को फैलाते हुए निचे चुत के मुहाने से उपर तक होठ और नथुने को दरने लगा ।

सरोजा पागल सी होने लगी

मै झट से उसे घुमा कर बिस्तर पर धकेल दिया और साडी उठा कर उसकी पैंटी को एक झटके मे निकाल दिया ।

सरोजा आंखे बंद किये तेज सासे लेते हुए सिस्क रही थी

वही मेरी नजर उसकी झानटो से भरी चुत पर गयी जो चुत के रस से चिपक गयी गयी और काफी सारा माल फैला हुआ था

मैने एक बार थूक गटका और सरोजा की मोटी जांघो को खोला और एक बार अच्छे से नाक को चुत के करीब लाकर सूंघा और ल्पालप जीभ उसकी चुत पर चलाने लगा ।

सरोजा अकड सी गयी और अपनी जांघो से मेरे सर को जकड़ कर कमर झटक रही थी

सरोजा - ओह्ह्ह राज उम्म्ंम अह्ह्ह और चुसो उम्म्ंम अह्ह्ह मा

मै उसके चुत के झान्टो मे लगी उसकी रस को चुबला चुब्ला कर चाट रहा था और बीच बीच में उसकी गर्म तपती चुत मे जीभ घुसा कर चाट लेता जिससे सरोजा पागल सी हो जाती ।

आखिर कुछ ही पलो मे

सरोजा - आह्ह राज अब मत रुको प्लीज चोद दो मुझे अह्ह्ह प्लीज

मै झट से खड़ा हुआ और अपना मुह साफ कर एक नजर सरोजा की ओर देखा और पैंट निकाल दिया

फिर थोडा जगह बना कर लण्ड को उसकी चुत के मुहाने पर सेट किया ।

सरोजा इस वक़्त मेरे लण्ड को देख रही थी और वो बार बार मुझे हा मे इशारे कर लण्ड डालने को कह रही थी ।

मैने भी सुपाडे को एक बार अच्छे से उसकी पिचपिचाई चुत पर रगड़ा और गचाक से एक धक्के मे आधा लण्ड उसके चुत मे उतार दिया

सरोजा ने तुरंत मुह पर हाथ रख ली और चिख की दबा दिया और मैने वापस से धक्का मारा और इस बार आसानी से लण्ड उसकी चुत मे उतर गया ।

एक पल को मुझे थोडी उलझन सी हुई की अगर सरोजा काफी समय से चुदी नही है तो फिर इतनी आसानी से लण्ड कैसे चला गया

मैने उस बात को टाला और जोर जोर से धक्के उसकी चुत मे लगाने लगा

सरोजा कबसे से खुद को रोके हुए थी और मेरे शुरुवती धक्को से ही वो झड़ने लगी

उसने अपनी कमर को उचका कर अपनी चुत के दाने को सह्लाते हुए मेरे लण्ड को निचोडना शुरु कर दिया और झडने लगी ।

लेकिन मेरी तो अभी शुरुआत थी मैने बिस्तर पर जगह बना कर उपर चढा और पेल्ते हुए सरोजा के उपर झुका ,,, बदले मे सरोजा ने मुझे खिच कर अपने होठ से मेरे होठ को चूसने लगी और मैं भी उस्के होठ चुस्ते हुए उसकी साडी खोल कर ब्लाउज का एक एक बटन खोलने लगा ।

मै सारे बटन खोलने के बाद सरोजा के होठ छोड़ ब्रा के उपर से ही उसकी मोटी चुची को चाटने लगा ।

सरोज मेरे सर को अपनी चुचियॉ मे दबाने लगी और वही मै अपनी गति से उस्की चुत मे जगह बना रहा था ।

उसकी चुत भरने से लण्ड बहुत मजे से अन्दर बाहर हो रहा था

लेकिन अभी मै सरोजा की चुचियॉ के लिए पागल हो रहा था और मैने हाथ डाल कर ब्रा मे एक चुची के निप्प्ल को बाहर निकाला और सीधा मुह मे भर लिया

सरोजा सिस्क उठी और मेरे सर के बालो को नोचते हुए कमर पटकने लगी ।

वही मैं उसके निप्पल को मुह मे भरे अपनी जीभ से फ्लिक कर रहा था और उसकी घुंडी के चारो ओर जीभ को नचा कर सरोजा को और मस्त करने लगा ।

मुझसे फिर भी रहा नही जा रहा था मेरे धक्के थम गये थे और लण्ड सरोजा के चुत मे गहराई मे रुका हुआ अन्दर की फड़क रहा था

मै थोडा उपर हुआ और दुसरा चुची बाहर निकालना चाहा तो

सरोजा मदहोश आवाज मे बोली - आह्ह राज रुको ऐसे ,,,,आहहहह हा अब चुसो

चुकी सरोजा ने मॉर्डन ब्रा पहनी थी जिसका एक बड़ा हुक सामने ही लगा था जिसे खोलते ही उसकी चुचिया आजाद हो कर फैल गयी ।

मै ब्ड़ी ब्ड़ी आंखो से पागलो की तरह उसकी 38DD की मोटी काले घेरे वाली निप्प्ल वाली चुचिया बहुत ही कामुक लग रही थी ।

मै थूक गटक कर दोनो हाथो से उसकी चूचियो को समेटते हुए सामने लाया , उसके मूनन्के के दाने जैसे कड़े निप्प्ल सीधे तने थे ।

मैने बारी बारी से एक एक निप्प्ल को चुसना शुरु किया

मै बारी बारी से गार गार उसकी चूचिया चुस्ता

सरोजा - ओह्ह राज प्लीज चोदो ना रुक कयू गये

फिर मुझे ध्यान आया कि मेरा लण्ड तो रुका हुआ है ।

मैने वापस से अपने कमर को उसकी जांघो के बीच पटकना शुरु किया और कुछ ही ध्क्को मे मेरा लण्ड वापस से पुरा तन गया और मेरी स्पीड भी बढ़ गयी ।

मै थोडा खड़ा हुआ और सरोजा के एक पैर को अपने कन्धे पर रखा और सटासट लण्ड को उसकी चुत मे पेलता रहा

सरोजा - ओह्ह्ह राज बहुत मजा आ रहा है,,, सच मे जितना सोचा था उस्से कही ज्यादा मस्त हो तुम आह्ह मा और तेज उफ्फ्फ्फ

मै - हा सरोजा तुम भी बहुत मस्त हो बहुत मजा आ रहा है तुम्हे चोद्ने मे ,,,आज तक ऐसा माल नही मिला

सरोज इतरा कर - मै तुम्हे माल लगती हू हा अह्ह्ह इस्स्स्स्स उम्म्ंम्ं

मै जोर जोर के लम्बे शॉट लगाते हुए - तुम तो एक नं की चोदने लायाक माल ही तभी तो तुम्हारे लिए पागल था मै

सरोजा - अह्ह्ह हा मुझे पता था , और ना जाने तुम मे क्या था कि मै भी खीची चली आई

मै - ओह्ह्ह सरोजा अह्ह्ह बहुत मस्त चुत है ,, तुम्हारी चुचिया ,तुम्हारी गाड सब मस्त है जान ओह्ह्ह

सरोजा - तो पेलो ना पुरा जोर से अह्ह्ह हा और तेज्ज्ज अह्ह्ह अह्ह् मेरा फिर से होने वाला है अह्ह्ह माआआ

मै भी झडने के करीब था

मै - ओह्ह्व मै भी आऊंगा ,,,

आऊंगा क्या आ गया था मै ,,मै सरोजा से पहले ही उसकी चुत मे भल भला कर झड़ने लगा और सरोजा भी मेरे बाद झड़ने लगी

थोडी देर बाद मै निढ़ाल होकर उसका पैर छोड कर वैसे सी चुत मे लण्ड डाले सरोजा के उपर आ गया ।

हम दोनो की सांसे तेज थी और मै उसके दिल की तेज धडकनें सुन सकता था ।

मैने अपने हाथ से उसकी एक चूची को थामा और ऐसे ही लेता रहा

तभी मुझे मेरे मोबाईल की रिंग सुनाई दी और मुझे मम्मी का ध्यान आया

मै झट से उथा और फोन उठाया जो दीदी ने किया

मैने उसको 5मिंट मे आने का बोल कर वापस रख दिया

सरोजा भी उठ कर बैठ गयी थी ।

मेरे थोडे मुरझाए लण्ड से अभी भी हल्का हल्का मेरा और सरोजा का मिला जुला माल फर्श पर गिर रहा था ।

जिसे सरोजा से बेड पड़ी पैंटी से अच्छे से मसल कर साफ किया और एक किस्स किया

वो फिर से मुस्कुराई और खड़ी हुई

हम दोनो बिना कुछ बोले एक दुसरे को किस्स किये और मै कपडे पहनने लगा ।

सरोजा बेड पर वैसे ही बैठ गयी ,,,उसकी मोटी मोटी चुचिय वैसे ही खुली थी और साड़ी जांघो तक चढ़ी थी ,,,

मै ह्स कर - अरे कपडे नही पहनोगे क्या ,,,और सॉरी जल्दी मे मेरा अन्दर ही गिर गया

सरोजा मुस्कुराई और मुझे पकड कर मेरे पेट पर अपना सर रख कर हग कर ली

मै - अरे कुछ सोचा है क्या करोगी उसका

सरोजा - मेरे पास आई-पिल है राज मै ले लूंगी

मै चौका - है मतलब

सरोजा थोड़ी हड़बड़ाई और बोली - मतलब कॉमप्लेक्स मे मैडिकल है ना तो मै वहा से ले लूंगी

मै थोडा शांत हुआ लेकिन एक उलझन सी हुई सरोजा के जवाब से

इधर वापस सोनल मेरे पास फोन करने लगी ।

मै जल्दी से कपड़े पहने और बोला - मुझे जाना होगा ,,काफी समय हो गया है

सरोजा मेरा हाथ पकड कर खड़ी हुई - फिर कब आओगे

मै मुस्कुरा कर - जब तुम कहो मेरी जान

और उसके गाल चूम लेता हू

मै वापस जाने को हुआ तो बोली - ठीक है बिल अपने नाम से बनवाना

फिर मै उसको बाय बोलकर बाहर निकल गया ।

भाग कर मै मा के पास गया तो दीदी और निशा ने अपनी शॉपिंग कर ली थी और अनुज के लिए जुटे ले लिये थे। फिर मैने भी मेरे लिए एक सेट पैंट शर्त लिये ।

मै मा और चाची से - और आप लोग नही लोगे क्या कुछ

मा हस कर - अरे वो तेरे चाचा के यहा हम लोग लेंगे अपने लिये साड़िया

फिर मै

बिल करा कर पेमेंट दिया और फिर हम सब निकल गये चाचा के यहा

थोडी देर मे हम सब चाचा के यहा गये तो चाची हमे लिवा कर अंदर हाल मे ले गयी

फिर वही चाय नासता किया गया ।

वही थोडी देर के लिए मा और चाची दुकान मे साड़ियाँ देखने गयी और इधर मैं सोनल और निशा को लेके निशा के कमरे मे घुस गया और थोडा मुखमैथुन का आनंद लेने के बाद बाहर तो मा और चाची अभी भी दुकान मे ही थे।

मै - मा दोपहर के खाने का समय हो गया है और कितना समय लगेगा आपको ,, वहा पापा इन्तजार कर रहे होगे

मा मेरी बात का जवाब देती उससे पहले चाची बोली - बेटा चिन्ता ना कर , खाना यही बन जा रहा तुम सब खा लो और फिर मै तेरे पापा के लिए भी पैक कर दूँगी लेके चले जाना

मा को भी ये सुझाव सही लगा

फिर मै वही दुकान मे एक कुर्सी लेके बैठ गया

वही चाचा मा को साड़ियाँ दिखा रहे थे ।

मा - निशा की मा ,,ये सोनल की सास के लिए साडी अच्छी रहेगी ना

चाची - अब पता नही जीजी ,,मैने तो कभी देखा नही उनको

मा मेरे तरफ देख के - तू बता राज , ये साडी ठीक है अमन की मा के लिए

मै हस कर - अरे नही मा , वो साड़ी नही पहनती है

मा अचरज से - मतलब क्यू

मै चाचा के सामने थोडा झिझक रहा था - वो मा उनका शरीर कुछ ज्यादा ही लम्बा चौड़ा है तो वो सूट सलवार ही पहनती है

मा थोडा मुस्करा कर - ओह्ह्ह फिर भी एक ले लेती हू और देवर जी सुनिये

चाचा एक मुस्कान के साथ मा को देखते हुए बोले - हा भौजी बोलो ना

मा ह्स कर - जरा एक बढिया सूट का कपडा दिखा दिजीये वो भी दे देंगे ,,,क्यू निशा की मा

चाची - हा जीजी ये थिक रहेगा

फिर सारे समान की पैकिंग हुई और 2 बजे तक खाना तैयार हुआ तो राहुल अनुज को और मै पापा के लिए खाना लेके चले गये

फिर मै वापस आया और खाना खाने के बाद सारा समान लेके निकल गया सोनल और मा के साथ चौराहे पर

जारी रहेगी
 
सभी दृश्य और गुप्त पाठको को DREAMBOY40 की तरफ से

धनतेरस की हार्दिक शुभकामनायें

खुशियो का त्योहार है तो इसका आनन्द ले और परिवार के साथ फोरम के साथ भी खुशिया बाटे ।

अगला अपडेट दिवाली बाद ही मिलेगा

आप लोग भी त्योहारों का आनन्द ले और मजे करे

अपना प्यार और साथ बनाये रखें

बहुत जल्द ही ये कहानी अपने रेगुलर अपडेट के साथ वापस आयेगी

धन्यवाद


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