Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 25 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

1. राज के नाना के सामने तौलिया खोजती उसकी मा रागिनी







2. राज के नाना उसकी मा रागिनी के गाड़ का तिल चूमते हुए




 
3. रज्जो मौसी के घर जाने से पहले उनकी जी भर के चुदाई करता राज





4. शालिनी चाची और राज



 
5. काजल भाभी का राज के संग सपना





6. चंचल और मासूम निशा





 
7. नरायनपुर गाव की सरला





8. शिला बुआ अपने भाई रंगीलाल का लण्ड निहारती हुई



 
अपडेट 143 .... दोपहर 12 बजे तक आयेगा
 
अपडेट 143


पिछले अपडेट मे आपने पढा एक ओर जहा शालिनी अपने पति के लिए परेशान है और उसमे भी निशा की शरारते और तंग कर रही है । वही दुसरी ओर राज के परिवार मे सोनल की शादियो की तैयारिया शुरु हो गयी है ।



लेखक की जुबानी


धीरे धीरे ऐसे दो हफते का समय बीत गया । इन बीते हफतो मे जहा जंगीलाल निशा से लागतार किसी ना किसी संयोग से आकर्षित होता रहा और इस दौरान इस मुद्दे पर शालिनी के उसकी चर्चा बनी रही । समय के साथ शालिनी की चिंता भी इस मामले को लेके बढने लगी थी । वही जंगीलाल की छुट और निशा की चंचलता ने निशा को बेफिकर बना दिया ।

रोज रात मे और शाम मे कभी कभी अनुज से चुदाई होने से निशा और भी निखरने लगी थी ।

इधर राज के परिवार मे कपड़ो की शॉपिंग को छोड कर सारी तैयारिया हो गई थी और आज रागिनी सोनल को लेके जंगीलाल के यहा चल दी थी ।

जंगीलाल अपनी दुकान पर व्यस्त था , जैसे ही उसने अपनी भाभी और सोनल को दुकान पर देखा तो काफी खुस हुआ ।

खड़ा होकर उनकी आवभगत की और उन्हे अन्दर भेज दिया ।

रागिनी और सोनल अन्दर हाल मे गये थे । निशा इस समय किचन के काम खतम कर रही थी ।

सोनल तो सिधा किचन मे चली गयी ।

रागिनी - निशा बेटी तेरी मम्मी कहा है

निशा - बडी मम्मी वो कमरे मे सो रही है ,,रुकिये मै बुलाती हू

रागिनी - अरे नही तु काम कर मै देख लेती हू

रागिनी सीधा शालिनी के कमरे मे जाती है जहा शालिनी ब्लाऊज पेतिकोट मे सो रही थी ।

रागिनी को शरारत सुझी और उसने कमरे का दरवाजा बंद करके शालिनी के पास गयी ।

उसकी सास लेती चुचिया ब्लाउज मे उपर निचे हो रही थी । रागिनी ने धीरे से उसके ब्लाउज के दो हुक खोले और अपने होठो से दो चुम्मिया उसकी छातियो पर की और भी जीभ को उसके चुचियो के गहरी दरारो मे चलाने लगी ।

कि शालिनी की आन्खे खुली और वो चौक कर उठते हुए हाथो को क्रॉस करके अपनी छातीयो को धक ली ।

रागिनी बडे जोर की ठहाका लगा के हसी ।

शालिनी की भी हसी छूट गयी और वो अपना ब्लाऊज बन्द करते हुए - क्या जीजी आपने तो डरा ही दिया मुझे ,,,,मै तो समझी कौन ऐसे मेरे जोबनो को चाट रहा था

रागिनी हाथ बढा कर शालिनी के चुचे हाथ मे मसलकर - अरे शालिनी तेरे जोबन है ही ऐसे कि देखते ही कोई भी ललचा जाये

शालिनी शर्मा गयी और उठ कर साडी पहनने लगी - वैसे आज अपनी देवरानी की याद कैसे आ गयी

रागिनी तुनक कर - हुह किसने कहा कि मै तेरे लिये आई हू ,मै तो मेरे देवर से मिलने आई थी हिहिहिही

शालिनी - अच्छा , फिर बैठो मै भेजती हू उनको ,,जल्दी जल्दी निपट लेना आप लोग हिहिहिही

रागिनी हस कर - धत्त पागल क्या कुछ भी बोलती है ,,,वो मुझे साड़िया लेनी है । सोनल की शादी के दिन अब नजदीक आ रहे है ना ।

शालिनी - अरे हा ,,और जेठ जी भी आये हैं कि बस अकेली

रागिनी - अरे इत्नी याद आती है अपने जेठ की तो एक आध रात उन्के साथ ही रुक जा ना

शालीनी शर्मा कर - धत्त जीजी आप भी ,,मेरा मतलब था कि आप अकेले ही आई है कोई और भी है ।

रागिनी हस कर - अरे नही वो सोनल भी आई है ।

शालिनी फिर तैयार होकर रागिनी के साथ बाहर आती है और फिर निशा सब्के लिये पानी लगाती है ।

थोडी देर हसी ठिठौली हो रही होती है कि रागिनी निशा के लिये शादी की बाते छेड़ देती है

रागिनी शालिनी से - अब तो तु निशा के लिए भी लड़के खोजने शुरु कर दे

शालिनी मुस्कुरा कर - हा जीजी , बस सोनल बिटिया की हो जाये फिर देखती हू

इतने मे निशा मस्ती करते हुए - क्या मम्मी आप तो मुझसे प्यार ही नही करती ,,जल्दी से मुझसे पीछा छुड़ाना चाहती है ।

शालिनी हस कर - अरे आज नही कल तेरी भी शादी होगी ही ना

निशा जिद दिखाते हुए - नही मैने कहा ना , मै शादी नही करूंगी बस ,,मै तो बूढ़ी होकर भी यही रहूंगी हिहिहिही आपके पास

निशा अपनी मा से चिपकते हुए बोली और उसे देख कर सब लोग हस पड़े ।

लेकिन शालिनी को निशा का यू शादी के लिये मना करना जमा नही , मगर उसने फिल्हाल के लिए कोई प्रतिक्रिया नही दी ।

थोडे देर बाद सारे लोग दुकान मे गये और साड़िया पसंद की ।

जंगीलाल - और कुछ भौजी ,

रागिनी - अरे नही देवर जी बस ,, ये समान और बिल राज के पास भिजवा देना

जंगीलाल - क्या भौजी आप भी , घर की शादी है और आप पैसे की बात कर रही है ।

रागिनी - हा लेकिन हिसाब तो....।

शालिनी - रहने दो जी , आप बिल जेठ जी को दे देना । जीजी तो हमे अपना समझती ही नही , जैसे सोनल हमारी कोई नही है

रागिनी - अररे आप लोग .... अच्छा ठिक है भई पैसे मत लिजिए लेकिन बिल दे दीजियेगा ,,वो इसके पापा को शादी के खर्चो का हिसाब किताब रखना होगा ना

जन्गीलाल - हा ये कहो तो कर दू ,,, ठिक है आप लोग जाईये । अभी राहुल सब समान लेके आ जायेगा ।

रागिनी भी वहा से निकलने से पहले - और हा शालिनी परसो ध्यान से तैयार रहना दूल्हा दुल्हन के लिए कपडे लेने जाना है । निशा को भी लिवा लेना

शालिनी - हा जीजी मै आ जाऊंगी ।

फिर रागिनी और सोनल निकल गये अपने घर के लिये।यहा शालिनी और जंगीलल भी खुश थे कि घर की शादी मे उन्होने भी योगदान दिया ।



राज की जुबानी


शाम को मै जब घर पहुचा तो हाल मे ढेर सारी साड़ियो के बैग थे ।

मा पापा के पास बैठ कर हिसाब लिखवा रही थी ।

मै खुश होकर एक दो झोले खोलकद देखने ल्गा - मम्मी आपने कौन सा लिया ??

मा हस कर - अरे रुक मै दिखाती हू ,,,ये 5 मैने मेरे लिये ली है और 3 ये सोनल के लिए

मै - और इतना सारा किसके लिये

मा - अरे बेटा वो सोनल की सास और उसके ससुराल के भी तो जायेगा ना ।

पापा की दिलच्स्पी सोनल की सास ममता के साडी पर गयी - अरे रागिनी समधन जी के लिये कोई अच्छा सा ली हो ना

मा - हा जी रुके दिखाती हू ,,उनके लिये ये दो साडी और दो सूट के कपडे ली हू

पापा - चलो ये तो हो गया और आज मदन भाई का फोन आया था । दामाद जी घर आ गये है ।

मा खुश होकर - हा समधन जी से बात हुई थी मेरी और जमाई बाबू से थोडा हाल चाल भी ली हू ।

अनुज - मम्मी मेरे लिये कुछ नही ली

मा - अरे बेटा परसो सारे लोग जायेंगे ना माल मे तो तुझे जो चाहिये ले लेना और ....।

अनुज - और क्या मम्मी ।

मै - और तेरे लिए कुछ सरप्राइज भी है ,,,वो भी ले लेना

अनुज - लेकिन वो क्या ??

मा मुस्कूरा कर - तेरा भैया इस बार तेरे जन्मदिन पर लैपटाप दिला रहा है

अनुज चहक कर - सच मे

मै - हा लेकिन तु पहले प्रोमिस कर की पढाई पर पुरा ध्यान देगा

अनुज खिलखिलाकर - हा भैया हिहिहिही

थोडी ऐसे ही चर्चा चलती रही और इधर मम्मी खाना बनाने किचन मे चली गयी ।



लेखक की जुबानी


रात के खाने का चूल्हा जल चुका था और शालिनी निशा के साथ खाना ब्ना रही थी ।

शालिनी - निशा तुने शादी के लिए मना क्यू किया ?

निशा को अपनी मा को ऐसे छोटे से मजाक पर परेशान होता देख उसे हसी आई तो उसने अपनी मा को और भी परेशान करने का सोचा ।

निशा - मम्मी आप जानती हो ना मैने मना क्यू किया ??

शालिनी को दो हफते पहले की वो बात चित याद आई और वो मुस्कुरा कर - धत्त पागल उस चीज़ के लिए डर रही है तु

निशा तुनकते हुए - हुउह आपका क्या है ,,आपको पापा मिल गये । लेकिन मेरे साथ पापा नही ना करने वाले वो सब जो प्यार से करेंगे

शालिनी उसके भोलेपन पे हसी - अरे पगलेट ,, वो तो तेरे हाथ मे है ना कि तु अपने पति को कैसे काबू मे करती है ।

निशा आंखे उठा कर - मतलब ???

शालिनी हस के - तुझे नही पता मतलब कुछ भी वो सब के बारे मे

निशा शर्मा कर - हा जानती हू लेकिन कभी किसी को करते थोडी ना देखा है । जो चीज़ कभी देखा-किया नही तो उससे डर ही लगेगा ना

शालिनी - अरे तो मैने कौन सा किसी का देख के सिखा था पागल ।

निशा - तो आपको कैसे आ गया ??

शालिनी शर्मा कर - वो मुझे मेरी चाची ने समझाया था शादी के कुछ समय पहले ,,सच कहू तो पहले दिन मै भी डरी थी लेकिन तेरे पापा ने मुझे थोडी भी तकलिफ नही होने दी ।

निशा मुस्कुरा कर अपनी मा को परेशान करने के मूड मे - मा मै क्या सोच रही हू , एक बार पापा के साथ कर लू फिर ना डर रहेगा और शादी भी कर लूंगी हिहिहिही

निशा ये बोल कर किचन से भाग गयी और शालिनी हस कर - अरे पागल भाग कहा रही है,,सब्जी जल जायेगा इधर आ ।

निशा हसते हुए - नही आप मारोगे !!! हिहिहिही

शालिनी - अब आ नही तो सच मे मारुन्गी ।

फिर निशा डरते हुए सब्जी चलाने लगी और वही शालिनी रोटिया सेकते हुए मुस्कूरा रही थी । कि निशा भी कितनी भोली है एक प्यार भरे दर्द से बचने के लिए अपने ही पापा से वो सब करने के तैयार हो रही है । पागल कही की

तभी शालिनी का दिमाग ठनका और एक पल को ये विचार आया कि क्यू ना निशा की चुदाई उसके पापा से करवा दू । इस्से निशा शादी के लिए डर खतम हो जायेगा और उसका पति जो दिन ब दिन चिंता मे घिर हुआ है उसे भी राहत मिल जायेगी ।

शायद एक बार निशा को चोद लेने के बाद उसके पति की हवस शांत हो जाये और वो सामन्य जीवन जीने लगे ।

लेकिन अगले ही पल शालिनी के दिमाग ने इस चीज़ को दूतकारा - छीई ये मै क्या सोच रही , सगी बेटी को कैसे उसके बाप से चुदवा सकती हू मै । नही ये गलत होगा ।

इधर निशा शालिनी को चुप देख कर हसती हुई बोली - अरे मम्मी बस एक बार की बात है हिहिहिही सौतन नही बनूंगी आपकी

शालिनी ने जैसे ही निशा की बाते सुनी वो हस दी और बोली - तो जा कर ले ,,तेरे पापा है मै कौन सा रोक रही हू

निशा हस कर - नही रहने दो , आपको जलन होने ल्गेगि कही पापा मुझसे ज्यादा प्यार ना करने लगे हिहिहिही

शालिनी मन मे - हा वो तो इस समय तेरे ही दीवाने हुए जा रहे है ,,

शालिनी हस कर - अब तु चुप करेगी । जा पापा को बोल कि दुकान बंद करके आये । खाना बन गया है

निशा तुनक कर - कितना जलती हो आप मुझसे मम्मी हुह

निशा ऐसे तुन्क कर बाहर गयी कि शालिनी की हसी छूट गयी - ये पुरी पागल है हिहिही

थोडी देर मे खाना का समय हुआ । हमेशा के जैसे पहले राहुल और उसके पापा खाने के लिये बैठे ।

शालिनी किचन से थाली लगा दी जिसे निशा ने बारी बारी करके लेके गयी ।

इस दौरान शालिनी ने जंगीलाल को देखा तो वो उसे ही मुस्कुरा कर देख रहा था क्योकि बीते इतने दिनो मे वो जान चुका था कि शालीनी ऐसे मौके पर उसे देखती ही है जब भी वो निशा के हिलते कूल्हो पर नजर मारता है ।

शालिनी अपने पति को मुस्कुराता देख खुद भी मुस्कुरा देती है और सोचती है क्यू ना एक बार अपने पति को परख कर देखू ।

शालिनी ने जैसे ये सोचा उसके मन मे ढ़ेरो सवाल ने जगह बना ली

" अगर इसके पापा सच मे निशा को चोदना चाहते होगे तो "

" क्यू ना दोनो का सेक्स करवा दिया जाये , लेकिन कैसे और किसी को भनक लग गयी तो "

"अरे मेरा और राज का किसी को पता नही है तो ये भी पता चलेगा "

"क्या निशा राजी होगी और ये ? "

" क्या ये सही होगा बाप बेटी को मिलाना जबकि मेरी बेटी बहुत भोली है "

शालिनी ने ढ़ेरो सवाल से घिरी हुई थी आखिर उसने तय किया कि वो पहले जंगीलाल को परखेगी फिर निशा से उसका मन टटोलेगी ।

फिर कुछ तय करेगी ।

थोडी देर बाद सारे लोग खाना खा कर अपने कमरो मे चले गये ।

जंगीलाल भी अपने कमरे मे बैठा हुआ था और शालिनी अपनी साडी गहने निकाल कर उसके पास ब्लाउज पेतिकोट मे जाती है ।

जंगीलाल खाने के समय हुई बात को लेके - तुम मुझे हर बार ऐसे क्यू देखती हो

शालिनी उसकी गोद मे जाकर दोनो ओर पैर रख कर उसके सामने बैठ गयी - कुछ नही मै तो बस अपने बेटी के दिवाने पर नजर रखे हुए थी ।

जन्गीलाल उसके कमर मे हाथ डालते हुए - हम्म्म तो क्या देखा तुमने

शालिनी मुस्कुरा के उसके होठ चुस्ते हुए - आजकल बड़ा शरीफ हो गये हो ,,नजर तक नही डालते उम्म्ं

जंगीलाल का लण्ड तनने लगा और वो शालिनी के कूल्हो को सहलाते हुए - नजर कैसे नही जायेगी ,,वो तुम्हारा ही अंश है तुम जितनी ही कातिल है वो भी

शालिनी इतराते हुए अपने चुतडो को जन्गीलाल के जांघो पर घिसते हुए ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया और उसकी आंखो मे देखते हुए बोली - ओह्ह तो इतनी पसंद आने लगी है वो अब उम्म्ंम

जंगीलाल अपने लण्ड के मुहाने पर पेतिकोट के अन्दर से शालिनी की चर्बीदार गाड़ की घिसाई से सिहर उठा और उसके कूल्हो को मजबूती से पकड कर दबोचते हुए अपना लण्ड सख्त करते हुए उसके चुतडो मे घिसने लगा ।

जंगीलाल कसमसा कर - उसे देखता हू तो लगता है तु फिर से जवाँ होकर मेरे पास आ गयी है ,,जैसे शादी के पहले थी । फुल सी नाजुक और भरी हुई

शालिनी अपने चुतडो पर जन्गीलाल के पंजो की कसावात और जवानी के दिनो की यादे ताजा होते ही कसमसाइ ।

शालिनी अपना ब्लाउज खोल कर नंगी चुचियो के निप्प्ल सहलाते हुई - ओह्ह मेरी जान इतनी पसंद थी मै क्या तब

जन्गीलाल आहे भरता हुआ अपनी जीभ निकाल कर शालिनी के कड़े हुए मुंक्के जैसे निप्प्ल को चाटकर - हा मेरी जान,,जी तो चाहता है काश तु फिर से वैसे ही जाती और वो सुख मुझे फिर से मिल पाता

शालिनी अपने जवानी के दिनो की यादे ताजा करते हुए अपने चुची पर जंगीलाल के गीली जीभ को मह्सूस करती हू पागल सी होने लगी ।

जन्गीलाल ने देखा कि शालिनी को उसके जवानी के दिनो की यादो मे बहुत अच्छा मह्सूस हो रहा है तो वो बातो को आगे बढ़ाते हुए - एक बार फिर से मै तुम्हारे उन नाजुक मुलायम चुचो को मसल कर फुला देता और वो नरम चुतडो को हाथो मे भर लेता

शालिनी वो पल याद करके सिस्क रही थी और अपने चुचे भी मस्ल रही थी - उम्म्ंम तो लेलो ना मजे मेरी जान,

जंगीलाल शालिनी के चुचो को पकड कर उन्हे भर कर चुस्ते हुए -उम्म्ंम कैसे मेरी जान

शालिनी कससमा कर - उम्म्ं हमारि लाडो है ना सीईई आह्ह

शालिनी के मुह से निशा का जिक्र होते ही जंगीलाल का लण्ड फनफना गया और उसके शालिनी के चुचो और कस कर मसल दिया - उम्म्ंम ये क्या कह रही हो जान सीई वो हमारी लाडो है ना उम्म्ंम

शालिनी सिस्क कर - तुम ही कह रहे थे ना कि उसमे तुम्हे मेरी जवानी नजर आती है अह्ह्ह उन्मममं

जन्गीलाल का दिल जोरो से धडक रहा और उसके चुचो पर हरकत धीमी होने लगी थी - सीई हाआ मेरी जान, वो तुम जैसी ही है

शालिनी - तो लेलो ना मजे उससे ,मै नही रोकूँगी उम्म्ंम्ं

जंगीलाल तडप कर रह गया और फौरन वो शालिनी लेके लेट गया और खुद उसके उपर आ गया

जन्गीलाल शालीनी के पेतिकोट को जांघो तक चढा कर । उसके जांघो को खोलता हुआ उपर आ गया और शालिनी के दोनो हाथो को पकड कर उपर करते हुए उनकी नंगी चुचिया काटने लगा

शालिनी ने देखा कि जन्गीलाल तो जोश मे आ गया है - ओह्ह्ह मेरी जान उम्म्ं आराम से ,,,ऐसे तो लाडो की कोरी चुचियो पर निशान देदो तुम सीई ओह्ज्ज

जंगीलाल शालिनी की बातो से और भी जोशील हो गया मगर बहुत प्यार से शालिनी के चुचियो को सहलाकर उन्हे हल्के हल्के चुसने के बाद ,, बडी मदहोशि से शालीनी की आंखो मे देख कर - नही मेरी जान मै मेरी लाडो को थोडी भी तकलिफ नही दूँगा

जंगीलाल वापस से उसकी चुचिया बडे प्यार से पीने लगा

शालिनी मुस्कुराई और उसके सर को सहलाते हुए - बस उसकी चुचिया ही पीयोगे क्या मेरी जान

जंगीलाल सिहर गया और अपना लण्ड पेतिकोट के उपर से ही शालिनी चुत पर घिसता हुआ - नही मेरी जान,,मै तो उसकी कोरी कोरी चुत मे लण्ड भी डालूंगा ....ऐसे देखो ऐसे अह्ह्ह

जंगीलाल अपना लंड शालिनी के चुत के उपर घिस कर उसे बताता है ।

शालिनी - ओह्ह मेरी जान उसे भी ना बड़े प्यार से चोदना मेरी तरह ,, उसे डर लगता है

जंगीलाल समझ गया कि शालिनी की निशा के साथ कोई बात चित हुई थी । वो अपना लण्ड निकाल कर शालिनी का पेतिकोट उपर कर चुका था और एक करारा धक्का मारकर उसकी चुत मे जड़ तक घूसने के बाद ,वो उसके उपर आ गया ।

जंगीलाल- कैसा डर मेरी जान??

शालिनी - वो लाडो बता रही थी कि वो सेक्स के डर से शादी नही करेगी ,,,उसे आपके जैसा पति कहा मिलेगा जो आपके जैसे प्यार से उसकी चुदाई करे

जंगीलाल का लण्ड शालिनी की बुर मे अब और भी कसने लगा - ओह्ह्ह क्या लाडो ने ऐसा कहा ,,और कब बताओ ना जानू

शालिनी - वो आज जब सोनल की मा ने उसकी शादी की बात छेड़ी तो वो मना कर दी ,,उह्ह्ह उम्म्ंम बाद मे मैने पुछा तो बताया कि वो पहले सेक्स से डरती है

जन्गीलाल हल्का हल्का शालिनी के चुत मे लण्ड घिस्ता हुआ -फिर मेरी जान

शालिनी मुस्कुरा कर - फिर ऐसे ही बातो बातो मे उसने हमारे सुहागरात के बारे मे पुछा और मैने बताया कि पहली बार कैसे प्यार से आपने मुझे चोदा था । तो कहने लगी कि मम्मी मुझे भी पापा जैसे पति चाहिये जो प्यार से मेरी ले ।

जंगीलाल का लण्ड उफान पर था और वो शालिनी की रिस्ती हुई चुत मे मोटा हुआ जा रहा था

जंगीलाल - कोई बात नही मेरी जान मै उसे भी बडे दुलार से चोदूंगा उम्म्ंम्ं

शालिनी खुश होकर - सच मे मेरी जान

जंगीलाल अपने धक्को की गति बढा कर - हा मेरी जान,,वो हमारी लाडो है और मै चाहता उसे थोडा भी दर्द हो

शालिनी समझ गयी कि उसका पति अपनी बेटी को चोदना चाहता ही है और वो इस अनुभव से बहुत उत्तेजित मह्सूस कर रही थी कि कैसा होगा वो मिलन जब जन्गीलाल उसके सामने अपनी बेटी की चुत मे लण्ड डालेगा ।

शालिनी रोमांच से भर गयी उसने अपनी झड़ती चुत को फिर से अपने पति के लंद पर कसा और बोली - ओह्ह तो सच मे आप हमारी लाडो को चोदोगो ,,,बिल्कुल मेरी तरह जैसा मुझे चोदे थे

जन्गीलाल जोशीला होकर लण्ड को शालिनी की बुर मे पेलता हुआ - हा मेरी जान उसको पहली चुदाई का सुख मै ही दूँगा ,,,

शालिनी कसमसा कर - आह्ह जान हा दे देना ,,वो भी मजे करना चाहती है ,,उसे अपने लण्ड से चोद दो उम्म्ंम्ं और पेलो मुझे ,,अह्ह्ज अह्ह्ह उम्म्ंम ऐसे ही कस कस के पेलना अपनी बेटी को ,,उसकी चुत भी खोल देना आह्ह

जंगीलाल अब पुरे जोश मे तेजी से शालिनी की चुत मे लण्ड पेल रहा था - हा मेरी जान,,बहुत पेलूउँगा उसे उम्म्ं अह्ह्ह मै आ रहा हू ओह्ह्ह

शालिनी तेजी से लण्ड निचोडते हुए कमर झटकने लगी -हा मेरी जान पेलो रुक्ना मत अह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह्व और तेज्ज्ज्ज उम्म्ंम्ं माआह्ह अज्ज्ज मजा आ रहा है मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह मेरे राअजज्आआ ओह्ह्ह हा ऐसे ही ओह्ह्ज उम्मममं

अगले कुछ झटको मे दोनो झड़ने लगे और ऊनके रस आपस मिलने लगे ।

जंगीलाल थककर शालिनी के उपर ढह गया और गहरी सासे लेने लगा ।

जारी रहेगी
 
1. अपनी बडी बहन शिला के ब्लाऊज का माप लेता रंगीलाल





2. शकुन्तला अक्सर ऐसे ही बिना दुपट्टे के कसी हुई मैक्सि मे रन्गीलाल का लण्ड खड़ा कर देती है



 
3. राज की मा ने अपने बाऊजी को कुछ ऐसे ही अपनी कसी हुई गाड़ पर पैंटी का उभार दिखा कर गरम किया था



 
4. ममता ( चोदमपुर ) अपने भैया कमलनाथ के सामने





5. अपने चुचो का साइज़ बढने पर राज को दिखाती बबिता



 
अपडेट 144

पिछले अपडेट के आपने पढा कि कैसे शालिनी ने बिस्तर पर जन्गीलाल से उसके दिल की बात निकलवा ली और उसे निशा को चोदने के लिए राजी भी कर लिया , देखते है आगे वो निशा को इस चीज़ के लिए कैसे बात करती है ।

लेखक की जुबानी

अगली सुबह निशा के घर मे रोज का रूटीन रहा , शालिनी नासता बना रही थी कि निशा नहा कर उसकी मदद के लिए किचन मे आती है ।

निशा इस समय एक टीशर्ट और प्लाजो के थी ।

शालिनी एक नजर उसे देखती है और मुस्कुराते हुए वाप्स काम मे लग जाती है ।

निशा को समझ नही आता है कि उसकी मा आखिर उसे देख कर मुस्कुराइ क्यू ?

निशा - मा आप मुस्कुरा क्यू रहे हो मुझे देख कर ,,मैने कपडे ठिक नही पहने क्या

शालिनी हाथ मे लिया बेलन से निशा के काले रंग के हल्के महीन सूत वाले पलाजो मे झलकती उसके गोरी गाड़ के उभार पर मारती हुई - ये क्या सुबह सुबह झलका रही है । तेरे पापा देख लिये तो ???

निशा समझ गयी कि उसके पलाजो का कपड़ा हल्का है और उसने पैंटी नही पहनी तो थोदा बहुत दिख रहा होगा । वो मुस्कुरा कर - अरे मा वो इस पलाजो का अस्तर खराब हो गया था तो कल काट कर निकाल दी हू हिहिहिही

शालिनी - तो जा बदल ले कुछ और पहन ,सब दिख रहा है

निशा हस कर - क्या मा आप भी , वैसे भी कौन निहारेगा । मै तो पुरा दिन घर मे हू हिहिहिही

शालिनी - अरे तो घर मे मर्द नही है क्या !!! तेरा भाई है और तेरे पापा ?

निशा मन मे - भाई ने तो सब देखा हुआ है ,,,हा पापा आजकल जरुर कुछ ज्यादा ही मेरे कूल्हो पर नजर रख रहे है हिहिही

निशा - ओहो तो क्या उससे ?

शालिनी - क्या हुआ की बच्ची ! तेरे पापा मुझे डांटते समझी

निशा को हसी आई और वो अपनी मा को छेड़ने के लिए- ऐसी बात है तो रुको मै खुद पापा से पुछ लेती हू कि उनको मेरे कपड़ो से क्या तकलिफ है ।

निशा किचन से बाहर निकाली और यहा शालिनी हड़बड़ा गयी कि एक तो पहले ही जन्गीलाल ने उसको निशा पर रोकटोक ना लगाने को कहा था और कल रात मे जो हुआ उसके हिसाब से उसे निशा को तो बिल्कुल भी नही रोकना चाहिए ।

मगर जबतक शालिनी उसे रोकती निशा पैर पटकते हुए अपने पापा के कमरे मे जा चुकी थी और वहा जन्गीलाल अपना कपड़ा पहन रहा था ।

तब तक शालिनी भी आ गयी और निशा के कुछ बोलने से पहले ही उसने उसे रोकना चाहा ।

निशा - पापा आपको मेरे कपडे खराब लगते है क्या ?

जंगीलाल को कुछ सम्झ नही आया और ऊसने निशा को उपर से निचे झाका तो पलाजो मे उसकी गोरी जान्घे झलकती दिखी और उसका लण्ड अकड गया - नही तो बेटा, मै कब कहा कुछ तुझे ।

निशा - तो देखो ना मा हमेशा आपका नाम लेके डराती है मुझे कि ये मत पहन वो मत पहन , तेरे पापा डाटेंगे

जंगीलाला शालिनी को आंख दिखाता हुआ इशारे मे पुछा कि ये सब क्या है ? क्यू कर रही है वो

शालिनी - अरे नही जी वो तो मै बस ऐसी ही बोली ,,,ये भी ना पागल है ।

जंगीलाल - ऐसे भी ना बोलो भई उसे । उसकी जो मर्जी पहने वो ।

जन्गीलाल निशा से - बेटा तेरी जो मरजी हो वो पहना कर ,,मै तो कहता हू कुछ ऐसा पहन कि तेरी मा को खुब जलन हो हिहिहिही

निशा भी खुश हुई कि उसके पापा ने उसका साथ दिया और वो अपनी मा को भौहे दिखा दिखा कर हसने लगी ।

निशा तुनक कर - हा और क्या ,,खुद तो साडी पहन कर रहती है तो इनको गर्मी मे प्रोब्लम नही होती है ,,लेकिन मुझे होती है ना

जन्गीलाल निशा के पास जाकर उसे अपने गले से लगा कर -तो तु भी पहन ले ना लाडो,, तेरे पापा की तो साड़ीयो की दुकान है तुझे कहा कुछ खोजने जाना है ।

निशा - हा लेकिन मुझे पहनाने कहा आता है और मम्मी मुझे सिखाती ही नही ।

जन्गीलाल - अरे तो क्या हुआ मै हू ना ,,मै तुझे पहनाना सिखा दूँगा

ये बोल कर जंगीलाल ने शालिनी को आंख मारा और इशारे ये कह दिया कि वो साडी वाले मामले से दुर ही रहेगी ।

शालिनी मुस्कुराने लगी और किचन मे चली गयी ।

जन्गीलाल - चल आज गर्मीयो पहनने वाली साड़ीया दिला दूंगा ,,तु अपने नाप के ब्लाउज बना लेना फिर मै तुझे पहनना सिखा दूँगा ??

निशा खुश हुइ और चहक कर अपने पापा के गले लगी रही ,,,उसके मन भी कुछ रोमांचक सा चल रहा था । क्योकि हाल के दिनो मे उसने भी अपने पापा की हरकतो और उनकी हवस भरी नजरो को ध्यान दिया था । वो जानती थी कि उसके पापा मौका पाकर उस्के साथ कुछ जरुर करेंगे । वो अनुभ्व की कल्पना से ही निशा की चुत गीली होने लगी थी ।

नासते के बाद निशा अपने पापा के पास गयी तो जन्गीलाल ने दो बढिया सिफान की हल्की साड़िया दी उसे ।

निशा - पापा इस्का ब्लाउज मै सोनल दीदी से बनवाउन्गी वो अच्छा सीलती है

जंगीलाल को लगा कि शायद ये आज ही हो जायेगा ,,मगर दो चार दिन की बात थी तो वो रुक गया ।

जन्गीलाल - कोई बात नही बेटा जब भी तेरा बन जाये मुझे बता देना

निशा खुश हुई और चहकते हाल चावल साफ करती हुई अपनी मा के सामने हसी मानो उसे जीत मिल गयी हो

शालिनी उसकी नादान भरी हरकतो और अपने पति की चालाकी पर हसी आ रही थी ।

शालिनी चावल साफ करते हुए - पापा की चमची ,,,ज्यदा दाँत ना दिखा ,,दाल चढा जल्दी से।

निशा - हा अभी आयी मा

उसके बाद निशा किचन के कामो मे व्यस्त हो गयी ।

रात मे कल की तरह आज भी जंगीलाल ने शालिनी के साथ निशा को चोदाने वाली बात चर्चा की और उसे अपनी योजना ब्तायी ।

शालिनी उसकी योजना सुन कर थोडा बहुत अपने पति को छेडा कि जलद ही उसे एक नयी चुत मिलेगी ।

फिर वो दोनो सो गये ।


राज की जुबानी

अग्ली सुबह मै उठा कर रोज की तरह नासता करके तैयार हुआ और दुकान चला गया ।

वैसे तो आज शॉपिंग के लिए जाना था लेकिन मा ने कहा कि शादियो का सीजन है तो दोपहर तक दुकान देख ले । फिर वही आजाना ।

मै दोपहर तक दुकान पर रहा और फिर सिधा सरोजा कॉम्प्लेक्स पहुचा

वहा पहुचकर मैने सोनल को कॉन्टैक्ट किया तो पता चला कि वो लोग उपर के फ्लोर पर है और अभी दुल्हे का ड्रेस देखा जा रहा है ।

मै वहा पहुचा और पहले अमन से मिला और फिर उसके मम्मी के पाव छुए ।

अमन की मा को देख कर किसी का लण्ड ना खड़ा हो वो मर्द कैसा । क्या बवाल चीज़ थी यार ,,, कहने को तो सूट सलवार मे थी लेकिन इतने भारी चुतड तो मेरी शिला बुआ के नही थे । वो जब माल मे टहलती तो मेरी नजरे बस उसकी थिरकती हुई चुतडो पर जमी हुई थी ।

खैर थोडे समय बाद दूल्हा दुल्हन का ड्रेस ले लिया गया।

फिर मै राहुल अमन और अनुज जेन्स वाले सेकसन मे गये और वहा कपड़ो की शॉपिंग करने लगे ।

इधर सोनल, निशा को कुछ अच्छा सा ड्रेस दिलाने लगी । वही मा और चाची , ममता को लिवा कर साड़ियो वाले डिपार्टमेंट मे ले गये ।


लेखक की जुबानी

रागिनी - अरे समधन जी आईये तो ,, आप एक बार ट्राई करिये यहा बहुत अच्छी साड़िया मिलती है

ममता - नही नही समधन जी जिद ना करिये ,,मै सूट ही पहनूंगी

रागिनी - देखीये अगर आप बिना साडी पहने बारात लेके आयी तो , मै मेरी बेटी को विदा नही करूंगी

ममता हस कर - ओह्हो आप समझ क्यू नही रही है ,,मेरे लिए बड़ा मुश्किल हो जाता है साड़ी मे

शालिनी - क्या जीजी झूठ क्यू बोलती है ,, सगाई वाले दिन कितना खिल रही थी आप ।भाइसाहब(मुरारीलाल) तो नजर ही नही हटा पा रहे थे हिहिहिही

ममता शर्म से लाल होकर मन मे ( अरे सिर्फ वही देखे तो बात अलग थी ना ,,बाकी के मेहमानो ने भी तो मजे ले लिये उस्का क्या )

ममता - धत्त आप भी ना छोटी समधन जी हिहिही वो बात ऐसी है कि मै मेरे ब्लाउज पेतिकोट पड़ोस की एक बहू है उसे ही सिल्वाती हू । इस समय वो पेट से है और ब्लाउज तैयार नही हो पायेगा ना ।

रागिनी हस कर - धत्त बस इतनी सी बात , अरे आपकी बहू को सारे गुण आते है ।

शालिनी - हा तब क्या ? सोनल को सीलना आता है जीजी ,,आप उसी से सीलवा लो ना

ममता - अरे नही नही,,अभी से बहू को परेशान करू अच्छा नही लगता

रागिनी - मै कुछ नही जानती आप साडी पसंद करिये और आज शाम को सोनल के पापा दुकान से आते वक़्त आपके यहा चले जायेंगे । आप उन्हे अपना कोई ब्लाउज दे देना और नये वाले पीस भी

ममता हिचक कर - लेकिन समधि जी आयेंगे लेने ??

रागिनी हस कर - अरे आपके समधि जी ब्लाउज लेने आ रहे है उसके अंदर का खजाना नही ।

ममता हस कर शर्म से लाल हो गयी - धत्त आप भी ना । कैसी बाते कर रही है हिहिही

शालिनी - चलिये जीजी अब तो पसंद कर लिजिए साडी

ममता हस कर - अच्छा ठिक है चलिये

फिर दोनो ने ममता के लिए साड़िया पसन्द की और इस दौरान रागिनी ममता को किसी ना किसी बहाने छेड़ती रही और हसी मजाक करती रही । ताकी उसकी झिझक शादी तक कम हो जाये और उनकी रिश्ते मे थोडी मज्बुती भी आ जाये ।

थोडी देर बाद सारे लोग एकजुट हुए और अनुज को उसका नया लैपटॉप मिल गया था । वो भी काफी खुश था ।

बिलिन्ग के बाद सारे लोग अपने अपने घर चले गये ।

इधर चौराहे वाले घर पहुच कर रागिनी ने रन्गीलाल को कहा कि आते वक़्त समधन से उनका ब्लाऊज लेते आना ।

इस बात पर रन्गीलाल की आंखे चमक गयी और लण्ड फैल गया ।

इसी वजह से आज वो जल्दी ही दुकान से शाम को करीब 6 बजे ही निकल गया । फिर उसने एक किलो मिठाई ली और चल दिया अमन के घर की ओर

गेट खोलकर वो घर मे दाखिल हुआ तो अमन कही बाहर जा रहा है । उसने रंगीलाल को प्रणाम किया और थोडी देर मे आने का बोल कर निकल गया ।

रंगीलाल अन्दर हाल मे गया और आवाज दी - भाईसाहब कहा है ??

तभी ममता सूट सलवार पर दुपट्टा चढ़ाते हुए अपने कमरे से आई - अरे आप आ गये ,,,नमस्कार बैठीये , खड़े क्यू है ?

रन्गीलाल मुस्कुरा कर - अरे ठिक है भाभी , और बताईये क्या हाल चाल है ?

ममता - जी सब ठिक है

रंगीलाल - वो सोनल की मा कह रही थी कि आपसे आपका ब्लाउज लेना है मुझे

रंगीलाल ने सीधे शब्दो मे बडी बेशरमी से ब्लाउज माग लिया जिससे ममता थोडी सी झेप सी गयी - अ ब ब हा वो बात हुई थी आज हमारी

रंगीलाल - अच्छा फिर लाईये

ममता - अरे आप बैठीये मै कुछ नासता लाती हू ,फिर

रंगीलाल ममता के पेट पर पसीने से भीग कर चिपके हुए सूट को निहारता हुआ - अरे नही भाभी जी वो गर्मी इतनी है कि कुछ खाने की इच्छा नही है । आप परेशान ना होईये

ममता - अच्छा ठिक है रुकिये मै वो कपड़ा लाती हू

रंगीलाल मुस्कुरा कर - जी जरुर

फिर ममता वाप्स कमरे की ओर घूमी , उसके कमर पर भी सूट पसीने से चिपक गया था और कुल्हे ही मादक थिरकन ने रंगीलाल को लण्ड मसलने पर मज्बुर कर ही दिया ।

थोडे समय बाद ममता एक कपडे का झोला लेके आयी और हाथ मे उसके एक अस्तरदार ब्लाउज लटक रहा था ।

ममता रंगीलाल के सामने वाले सोफे पर बैठ गयी । ब्लाउज का पीस और अपना एक ब्लाउज सिला हुआ उसे पकड़ाकर - लिजिए भाईसाहब और बहू से कहियेगा कि बाजू थोडा लम्बा वाला ही बनाये ।

रंगीलाल ने एक बार ममता के सामने उसका ब्लाऊज फैलाया और उसके बड़े बड़े गहरे कप देख कर उसको थुक गटकने की नौबत आ गयी थी ।

ममता को थोडा अटपटा महसूस हो रहा था कि उसका समधि उसके ब्लाउज को हाथ मे लेके उसे जाच परख रहा है

रंगीलाल उस ब्लाऊज को भी झोले मे रखता हुआ - भाभी जी एक बात कहू ,, अगर बुरा लगे तो माफ करियेगा

ममता मुस्कुरा कर - अरे भाईसाहब आप भी ना ,,कहिये क्या बात है ।

रंगीलाल - आप इस गर्मी मे पूरी बाह का ब्लाऊज बनवाने को कह रही है ???

ममता - हा लेकिन मुझे सूट पहनने की आदत है ना तो ब्लाउज पूरी बाह की ही बनवाति हू ।

रंगीलाल - लेकिन आप एक बार वैसे भी ट्राई करिये वो भी अच्छा दिखेगा

ममता को रन्गीलाल से ऐसी बात करने मे झिझक और लाज आ रही थी इसिलिए वो बात को खतम करने के लिए- अच्छा ठिक है आप बहू से कह दीजियेगा कि जैसा उसे पसंद हो वो सील दे । मै ऐतराज नही करूंगी

रंगीलाल खुश हुआ और मन ही मन उसने तय किया कि वो सोनल को ऐसा कुछ डिजाइन बतायेगा कि ममता की जवानी खुल कर सामने आयेगी और वो उसके मजे ले सकेगा ।

थोडी देर बाद रंगीलाल वहा से भी निकल गया

और अपने घर जाकर उसने रागिनी को बताया कि ममता ने कहा है कि ब्लाऊज डीप गले मे और स्लिवलेस मे सीलना ।

रागिनी हस कर - ये समधन जी का भी कुछ समझ नही आता ,,,अभी आज माल मे साडी लेने से मना कर रही थी और अब एकदम से मॉडर्न लूक चाहिये हिहिहिही

रन्गीलाल हस कर - अरे कोई बात नही ,,,उनकी इच्छा है सीलवाने दो , तुम बताओ तुम कैसा डिजाइन बनवा रही हो

रंगीलाल ने रागिनी के कुल्हो को सहला कर कहा ।

रागिनी उसे झटक कर - धत्त क्या जी आप भी ,, सोनल किचन मे ही है ।

रंगीलाल ने एक नजर किचन मे सोनल को काम करते देखा तो शांत हो गया ।

इधर अनुज उपर अपने कमरे मे आज जब से माल से आया था लैपटॉप मे व्यस्त था ।

उसने दो बार फुल एचडी क्वालिटी मे पोर्न देख कर हिलाया और सो गया था ।

आज का दिन भी रोज की तरह दोनो परिवारो मे बीत गया ।


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अगले दो तीन दिनो तक सब वैसे ही चलता रहा ।

जन्गीलाल बहाने बहाने से निशा के पास जाता और उसे थोडा दुलार देता , उसके कपड़ो के उपर से ही उसे अपनी नजरो मे नंगा कर लेता । निशा भी सब समझ रही थी लेकिन उसने कभी इस बात पर कोई खास ध्यान नही दिया ।

इधर सोनल के शादी के कार्ड छप कर आ चुके थे और उसे बाटने की तैयारिया शुरु होने वाली थी । वही सोनल ने निशा के ब्लाउज तैयार कर दिये थे ।


राज की जुबानी

शाम को रोज की तरह दुकां बंद करके मै घर आया था और शादियो की चर्चा ही जारी थी ।

कार्ड पर नाम लिखे जा रहे थे कि कैसे किसको कहा बाटना है । खैर कार्ड बाटने की जिम्मेदारि मेरी थी ।

मा - देख ये पहला कार्ड तो तेरे नाना के यहा जायेगा ,,फिर वहा दो एक दिन रुक कर तु रज्जो दीदी के यहा चला जाना ।

मै - और बुआ के यहा

मा - फिर वहा से शिला जीजी के यहा चला जाना और वहा भी एक दो दिन रुक लेना जैसी तेरी मर्जी

मै - हा मा बुआ के यहा गये काफी समय हो गया है , मै तो वहा रुकुंगा ही

मा - हा लेकिन रह मत जाना वही ,, यहा और भी काम रहेंगे ,,फिर गाव मे , फिर यहा टाउन मे भी सबको कार्ड देना है ।

मै - अरे मा आप टेन्सन ना लो ,, आप मेरा बैग पैक करवा दो कल सुबह ही मै निकल जाऊंगा मामा के यहा

मा - हा ठिक है

फिर ऐसे ही थोडी चर्चाये बढी और मै खा पीकर अपना बैग तैयार करने मा के साथ कमरे मे चला गया

जारी रहेगी
 
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