Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 27 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 148

पिछले अपडेट मे आपने पढा एक ओर जहा जंगीलाल की किस्मत लगातार उसे निशा के करीब लाये जा रही है । वही राज ने भी अपने नाना और मामी की चुदाई चोरी चुपके देख ली । लेकिन वो अभी भी उसकी तलाश अधूरी है तो हम लोग भी वापस वही चलते है उस कमरे मे जहा राज की मामी उसका लण्ड थामे बैठी हुई मदहोश हो रही है ।

राज की जुबानी

मामी मेरे लण्ड को थामे सहला रही थी ।

मैने उनकी कमर मे हाथ डाला और अपनी ओर खिच लिया ।

अब वो मुझसे लिपटी हुई मेरे लंड को सहलाने लगी ।

मै - मामी बताओ ना

मामी मुस्कुरा - अच्छा तुमको याद है वो पिछले साल राखी पर जब बाऊजी की तबीयत खराब हुई थी ।

मै - हा क्यू?

मामी मुस्कुरा कर - तुमको पता है बाऊजी को क्या सम्स्या होती है ??

मै जानता तो सब था। लेकिन मुझे अच्छे से ये भी याद था कि राखी वाले दिन मामी थी ही नही वो अगली सुबह आई थी और शायद उन्हे इस बात की जानकारी नही है कि मै सब जानता हू ।

मै - हा वो शायद उनको थोडी गर्मी की सम्स्या है ,,,बार बार पसीने से बेचैनी होने लगती है और तबीयत खराब हो जाती है ।

मामी मुस्कुरा कर - हा वो बात तो है , लेकिन असल बात कुछ और ही है जिससे उनको पसीना होता है ।

मै - वो क्या

मामी मुस्कुरा कर - उन्हे सेक्स की चसक और जब उन्हे मौके पर वो ना मिले तो उनके बदन मे ये सब चीजे होने लगती है ।

मै - ओह्ह फिर

मामी - और पता है बाऊजी हिहिहिही । वो अपने गोदाम पर एक दो काम करने वालियो को रखे हुए है, लगभग हर दुपहर मे ही .....।

मै - ओहो ये बात है ,लेकिन आप उनसे कैसे जुड़ गयी ।

मामी थोडा शर्मा कर - वो रमन बाबू की शादी के बाद से

मै - मतलब

मामी हस कर - रमन बाबू की शादी मे बाऊजी भी साथ गये थे और वहा पर उन्हे जो चाहिये था समय से मिला नही और शादी से वापस आने के बाद बाऊजी की तबियत बिगड़ गयी । फिर इसी बिच तुम्हारे मामा भी किसी काम को लेके बाहर चले गये थे ।

मामी की बाते सुन कर मेरे लण्ड मे कसावट बढ रही थी - तो फिर

मामी - अब मुझे चिंता होने लगी थी बाऊजी कि तो मैने रज्जो जीजी से बात की । तो उन्होने मुझे मालिश के लिए बताया कि बर्फ से सेकाई कर दो उन्हे आराम मिल जायेगा ।

मामी की बात सुन कर मुझे मेरे घर की याद आई जब मैने व्याग्रा खिला कर नाना के जिस्म की गर्मी बढा दी थी और मा उनके लण्ड की सेकाई कर रही थी । वो बीते पल याद करके मै और भी उत्तेजित हो उठा ।

मै - फिर क्या आपने उनकी ।

मामी शर्मा कर हस्ती हुई - हम्म्म करनी ही पडी ।

मै - फिर आगे कैसे हुआ

मामी - उधर दो दिन मैने दोपहर और रात मे उनकी सेकाइ की । जब उनकी तबीयत मे सुधार हुआ तो उन्होंने गोदाम पर हिहिहिही....।

मै - ओह्ह फिर

मामी - तब से सब कुछ सामान्य था । बाऊजी की तबियत ठीक होने के बाद मुझे उनका सामना करने मे झिझक होती थी और वो बस मुस्कुरा देते थे । लेकिन पिछले हफते जब तुम्हारे मामा वापस से शहर गये तो ....।

मै थोडा उत्सुक होकर - फिर क्या मामी । हिहिहिही बताओ ना

मामी मेरे आड़ो को हलोरती ही - और गीता बबिता भी अपनी मौसी के यहा गयी हुई थी । घर मे बस मै और बाऊजी ही थे ।


मामी की जुबानी

बाऊजी बडे सवेरे ही खा पीकर गोदाम चले जाते और फिर देर शाम तक ही आते थे । वो नही चाहते थे कि मुहल्ले बिरादरी मे कोई उनपे आक्षेप करे कि बहू के साथ दिन भर बुढा घर पर रहता है ।

मामी - उस दिन गर्मी बहुत थी । बाऊजी सवेरे 10 बजे तक खा पीकर ही गोदाम पर चले गये थे । मै भी किचन के सारे काम निपटा कर कपडे धुल कर नहा चुकी थी और तौलिया लपेट कर अपने कमरे आ गयी ।

उस दिन गर्मी ने हालत खराब कर दी थी और घर पर मौके से कोई था नही तो मैने बस एक लाल रंग पतली सी सिफान की साडी लपेट ली । उसमे मेरे जिस्मो को बहुत आराम मिल रहा था ।





मैने कमरे का दरवाजा भी ठिक से बंद नही किया था और ना जाने कबके बाऊजी घर आ चुके थे । वो दरवाजे के गैप मे से अंदर झाक रहे थे ।

मुझे इस बात की जरा भी भनक नही थी कि मेरे ससुर मेरे कमरे मे झाक रहे होगे और उस पतली सी साडी मे झलकते मेरे अंगो को निहार कर अपना लण्ड मसल रहे होगे ।

मै पंखे के निचे खड़ी हो कर अपनी साडी जांघो तक उठा कर अपनी चुत तक हवा देने लगी । थोडा बहुत मुझे रूमानी सा अह्सास भी हो रहा था ।

मुझसे रहा ना गया और तुम्हारे मामा की कमी मुझे खलने लगी । इतने आराम मे अचानक से मेरे जिस्म की गर्मी बढ । मै मेरे ही स्पर्शो से उत्तेजित होने लगी ।

मुझे से रहा नही गया और मैने पुरा नंगा होकर अपने जिस्म को शांत करके एक गहरी नीद मे जाने का तय किया । शायद इसी से मुझे शांति मिल सकती थी ।

मैने अपनी साडी खोलनी शुरु कर दी ।





इस बात से बेखबर कि दरवाजे पर खड़ा मेरा ससुर मेरे जिस्मो को बेपर्दा होता देख अपना मुसल हिला रहा है ।

मै दरवाजे की ओर अपना पिछवाडा किये अपनी साडी निकाल दी और जाने बाऊजी ने क्या क्या सोचा होगा मेरे बारे मे ।

मैने साडी को बिस्तर पर फ़क और खुद भी बिस्तर पर टेक लेके अपनी जान्घे खोल कर बैठ गयी ।

मेरे हाथ मेरे नंगे जिस्मो को मसल रहे थे । मै अपने छातियो को मसलकर अपनी कामाग्नी को और तेज कर रही थी । मगर मुझे क्या पता था कि दरवाजे पर खडे होकर बाऊजी मेरे सारे हरकतों को निहार रहे होगे और वो कुछ ऐसा कर देंगे कि मुझे इसकी उम्मीद भी ना रही होगी ।

मै अपने जांघो के बिच हाथ ले जाकर अपनी गीली चुत को दबाने लगी ,,जो मेरे हाथों से दबाव से बजबजाने लगी ।

मैने एक गहरी सास ली और आंखे बंद करके दो उन्गली चुत मे पेल दी ।

मै सिसकिया भर ही रही थी कि बाऊजी मुझे बुलाते हुए कमरे मे घुस आये ।

मैने फौरन अपनी साडी से अपने छाती और चुत को धक लिया ।





हमारी नजरे मिली और मैने शर्म से नजरे निचे करते हुए - बाऊजी आप यहा ,,,कुछ चाहिये था आपको

बाऊजी बडी बेशरमी से मेरे अधनंगे जिस्मो को निहार रहे थे । उनकी नजरे मेरे नंगी जांघो को निहार रहे थे ।

धोती मे उनका मुसल पूरी तरह से तना हुआ था और मुझे समझते देर नही लगी कि वो काफी समय से ही कमरे मे ताका झाकी कर रहे होगे ।

मैने फटाफट से साडी से अपनी जांघो भी कवर किया और बाऊजी मुह दुसरी को फेर कर खडे हो गये ।

बाऊजी - माफ करना बेटी वो मुझे थोडी बर्फ चाहिये थी ।

मै समझ गयी कि आज शायद उन्हे गोदाम पर कोई मिली नही थी और घर पर कोई था नहीं तो मुझे खोजते आये होगे ।

मै शर्म से पानी पानी हुइ जा रही थी और मन मे डर भी था । मै कैसे भी करके अपनी स्थिति सुधारना चाह रही थी ।

मै - बाऊजी आप चलिये मै अभी लेके आती हू

बाऊजी - ठिक है बहू मै मेरे कमरे मे हू

और बाऊजी बिना मेरे ओर देखे वहा से निकल गये ।

मै मन ही मन खुद को कोसा और जल्दी जल्दी ब्लाउज पेतिकोट पहन कर साडी लपेट कर किचन मे गयी।

वहा से मैने सिकाई वाला पैकेट लिया और उसमे बर्फ भर कर बाऊजी के कमरे की ओर गयी ।

मेरे पाव मानो जमने लगे थे । मेरी दिल की धडकनें तेज थी कि अभी जो हुआ उस्के बाद मै बाऊजी से सामना कैसे करूंगी । झिझक इस बात की भी थी कि बाऊजी के मुसल की सिकाई भी मुझे ही करनी थी ।

मै उनके कमरे मे गयी और बाऊजी सिर्फ धोती मे बिस्तर का टेक लिये पैर खोलकर बैठे हुए थे । मेरी नजर धोती मे तने हुए उनके मुसल पर गयी और मुझे डर सा मह्सूस हुआ ।

बाऊजी मुझे देखते ही - आजा बहू ,,,वो दरवाजा बन्द कर देना

मै जान रही थी कि मुझे उनके लण्ड की मालिश करनी है और बिना दरवाजा बंद किये वो होगा नही ।मगर मुझे डर भी लग रहा था कि कही बाऊजी मेरे साथ कोई जबरदस्ती ना करे ।

मै दरवाजा बन्द करके बिस्तर के पास आई और उन्होने मानो मेरी झिझक और लाज को भाप लिया हो ।

बाऊजी - माफ करना बहू मुझे ऐसे अचानक से नही आना चाहिए था ।

मै थोडी चुप रही और मेरी कोशिस थी कि उस मुद्दे पर कोई बात ना हो । मै जल्द से जल्द सेकाई करके वहा से निकल जाना चाहती थी ।

मै झिझक कर - बाऊजी इसे खोलिये ,,बर्फ गल रहा है

बाऊजी समझ गये कि मै उस बात को टाल रही हू।

बाऊजी - अह हा बहू रुको

फिर उन्होने अपनी धोती खोल कर अलग कर दी । अब बाऊजी मेरे सामने पुरे नन्गे थे और उनका मोटा लण्ड पूरी तरह से तनमनाया हुआ था ।

मै बीना उनसे नजरे मिलाए उनके बगल मे खडे होकर सेकाई का पैकेट उनके आड़ो और लण्ड के निचलर हिस्से पर रखा ।

लण्ड इतना तप रहा था कि बर्फ की शीलन भी भाप बन रही थी ।

वही बाऊजी की नजरे मेरे जोबनो को अपनी आंखो से नंगा किये जा रही थी । मुझे साफ आभास हो रहा था कि बाऊजी मुझे घूर रहे हैं । मेरी दिल की धड़कन अब बढने लगी थी जिससे ब्लाउज कसी मेरी चुचिया उपर निचे होने लगी थी ।

थोडे ही समय में बर्फ आधा हो गया लेकिन बाऊजी का लण्ड ज्यो का त्यो ही तना रहा ।

बाऊजी मुझे परेशान देख कर - रहने दे बहू , आज जो हुआ उसे देख कर नही लगता इससे कुछ भी आराम होगा ।

बाऊजी की बात सुन कर मुझे ग्लानि सी हुई कि शायद मेरी ही नादानी से बाऊजी को इतनी दिक्कत हो रही है ।

मै सफाई देते हुए - माफ कीजिएगा बाऊजी ,,मुझे लगा घर पर कोई नही है और आज गर्मी बहुत है तो ।

बाऊजी - अरे अरे नही बहू तु खुद को क्यू दोष दे रही है । गलती मेरी है , मुझे तेरे कमरे मे झाकना ही नही चाहिये था

मेरी आन्खे बडी हो गयी और मैने नजरे उठा कर उन्हे देखा और समझ गयी कि मेरा शक सही था । वो शुरु से ही मुझे कमरे मे निहार रहे थे ।

मुझे अपनी ओर घुरता देख बाउजि भी झिझके और सफाई देने लगे ।

बाऊजी - बेटा मै तो बस एक नजर देख कर हटने ही वाला था लेकिन ऐन मौके पर तुने अपनी साडी खोल दी और मै वही जम सा गया ।

बाऊजी की बाते सुन कर मेरा दिल जोरो से धडकने लगा ।

मैने उनसे नजरे फेर ली मुझे शर्म भी आ रही और झिझक भी कि मै मेरे ससुर से ये बाते कर रही हू .

इसिलिए मैने उनकी ओर पीठ कर लिया । बाऊजी को लगा कि मै ऐसे नजरे फेर कर उनसे नाराज हो रही हू तो वो वैसे ही नंगे मेरे पीछे खडे हो गये ।

बाऊजी - देख बहू तु ऐसे मुझसे नाराज ना हो । मै सच मे उस बात के लिए शर्मिंदा हू लेकिन जब मैने तेरे इन गोरे गोरे नितम्बो को देखा तो मै वहा से हिल भी नही पाया ।





बाऊजी ने अपनी बात पूरी करते हुए साडी के उपर से ही मेरे चुतडो पर हाथ फेरने लगे । मै अकड कर रह गयी और खुद को हर जगह से सिकोड़ने लगी ।

बाऊजी का स्पर्श मुझे उत्तेजित भी कर रहा था और शर्मीन्दा भी । मेरी जुबान को जैसे क्या हो गया था । डर से मेरी आवाज गायब हो गयी थी । डर ये कि आगे क्या होगा ? बाऊजी का स्पर्श मुझे एक रोमांचक डर से रुबरू करवा रहा था । जिसकी जिज्ञासा मुझे पल पल हो रही थी कि अब क्या अब क्या ?

बाऊजी - बहू तु अपने मन मे कोई ग्लानि का भाव ना रख । मै जानता हू राजेश की कमी तुझे सता रही थी ।

बाऊजी की बाते सुन कर मेरे जहन मे वो तस्बिरे चलने लगी जब मै पूरी नंगी होकर कमरे मे अपनी चुत मे उन्गिलीया कर रही थी ।

बाऊजी आगे बढे और मेरे कूल्हो से हाथो को सहलाते हुए बडे प्यार से मेरी पीठ को छूआ । उनका स्पर्श पाकर मै गनगना गयी ।

बाऊजी - बहू अगर तु चाहे तो हम दोनो की सम्स्या दुर हो सकती है

बाऊजी की कहने का मतलब समझ गयी थी उन्होने साफ साफ मुझे चुदाई का आमंत्रण दे दिया था ।

मै उसी अवस्था मे खड़ी होकर - बाऊजी ये क्या कह ....।

बाऊजी मेरी बात काटते हुए मेरे कंधो को अपने दोनो हाथो से थामकर उन्हें सहलाते हुए - बहू मै वादा करता हु ये बात बस हमारे बीच ही रहेगी ।

मै उन्के स्पर्श से पिघलती जा रही थी और खुद को बेबस मह्सूस कर रही थी ।

मै बहुत हिम्मत करके उनकी ओर पलटी और उनसे नजरे मिला कर - बाऊजी ये सही नही है , किसी को पता चला तो बहुत बदनामी हो जायेगी ।

बाऊजी ने तो जैसे मेरी आखो की मदहोशि को पढ लिया था और उन्होने आगे बढ के मेरे चुतडो को पकड़कर उन्हे मसलते हुए मुझे अपनी ओर खिच लिया । मेरी चुत सिधा उन्के तने हूए मुसल से टकराई ।






बाऊजी ने मेरे लाल होठो मुलायम को मुह मे भर कर चुसना शुरु कर दिया और मै समझ गयी कि अब ये खेल नही रुकने वाला । क्योकि बाऊजी को किसी की परवाह ही नही ।

लण्ड की तडप मे मै पहले से ही पागल थी उपर से बाऊजी का मुसल था ही इत्ना जबरदस्त,,हर बार उसकी सिकाई के बाद मेरी चुत ने पानी छोडा था ।

आज आया ये मौका कैसे जाने देती और मैने भी उनका साथ देना शुरु किया । हमारी किस्सिंग जारी थी । बाऊजी मेरे जिस्मो को मसलते रहे ।

बाऊजी अपनी लण्ड की मुझे दिखा कर - अह्ह्ह बहू अब जरा मेरे इस्को भी अपने मुलायम होठो का सुख देदे ।

मै मुसकुराई और थोडी इथ्लाई भी और उनके लण्ड को हाथो मे भरने लगी ।

बाऊजी के हाथ अभी भी मेरे जिस्मो पर घूम रहे थे और मै उन्हे देखते हुए निचे बैठ गयी ।

फिर मुह खोल कर आधा लण्ड मुह मे भर ली ।

बाऊजी - अह्ह्ह बहूउऊ उम्म्ंम्म्ं ओह्ह्ह मस्त ठन्डक है यहा ,औम्म्ंंऔर चुस मेरी बेटी ओह्ह्ह हाआ





मै गप्प ग्प्प्प बाऊजी का लण्ड मुह मे भरने लगी । बाऊजी मेरे बालो को पकड कर मेरा सर लण्ड पर दबाने लगे ताकी मै उनका लण्ड और अन्दर ले सकू

मै भी वही किया ,,,उनका मोटा मुसल गले तक उतारने लगी और वही मेरी चुत मेरे जांघो पर रिसकर मेरी खुजली बढाने लगी ।

बाऊजी ने जब दो तिन बार मुझे साडी के उपर से अपनी चुत खुजाते देखा तो

बाऊजी - आह्ह बहू रुक मै तेरी मदद करता हू

फिर बाऊजी मे मुझे खड़ा किया और मुझे बिस्तर पर लिटाते हुए मेरी साड़ी पेतिकोट को जांघो तक उठा दिया और अपना मुह मेरे रस छोडती चुत पर लगा दिया ।

वो लपालप मेरी चुत को फैला फैला कर चाटे जा रहे थे और मै अपनी जिस्म की गर्मी से पगलाई अपनी छातिया मसल रही थी ।

तभी बाऊजी ने अपनी जीभ मेरे बुर मे घुसा दी और होठो से मेरे चुत की चमडी को जोरो से चुसने लगे ।

मै उत्तेजना से भर गयी और बाऊजी को अपनी जांघो मे बान्ध कर तेजी से अपनी गाड पटकने लगी ।





मै - ओह्ह बाऊजी और चुसिये उम्म्ंम आह्ह मै झड़ रही हूउउई उम्मममं ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह माआअह्ह ओह्ह्ह बाउजीईई

मै झड़ कर सुस्त पड गयी और बाऊजी भी उठ कर बिस्तर पर पैर लटका कर बैठ गये और हल्का हल्का मेरे जांघो को सहलाते हुए दुसरे हाथ से अपना लण्ड मुठिया रहे थे ।

कुछ मिंट बाद मै उठ कर बैठी और मुस्कुरा कर उन्हे देखा ।

बाऊजी - बहू जरा एक बार फिर से खोल ना इन्हे

बाऊजी ने मेरे मोटे थन जैसे चुचो की ओर इशारा किया और मै इतराते हुए खड़ी हुई और फिर से अपनी साडी निकालनी शुरु कर दी ।

बाऊजी मुझे देख कर बस जोरो से अपना लण्ड हिला रहे थे और मै धिरे धीरे करके अपना ब्लाउज फिर पेतिकोट सब निकाल कर पूरी तरह से नंगी होकर बाऊजी के पास आ गयी ।

उन्होने तो जैसे एक जादू सा कर दिया था मुझ पर । मै बस उनकी ओर खीची जा रही थी और फिर उन्होने मुझे अपनी जान्घो मे फसा कर मेरे नंगे चुचो को हाथो मे भर कर मस्लना शुरु कर दिया ।

मै फिर से एक बार आहे भरने लगी । फिर से बाऊजी का स्पर्श मुझे रोमांचक करने लगा ।

बाऊजी बेसब्रे होकर मेरे चुचो पर टुट पडे और उम्हे मुह मे भरने लगे ।





मै भी उनके सर को अपने चुचो मे दफनाने लगी ।

उन्की खुरदरी जीभ मेरे निप्प्ल को मानो खरोच रही हो और जिस जोर वो मेरे निप्प्ल को मुह मे भर कर चुस रहे थे ,,,वैसा अह्सास मुझे कभी नही हुआ ।

उनके गठिले पंजे मेरे चुचो को मसल कर लाल कर रहे थे और ये कम था कि वो मेरे नंगे चुतडो को नोचने लगे ।

मै बुरी तरह से उन्के बाहो मे पिस रही थी और बहुत ही उत्तेजित मह्स्स कर रही थी ।

फिर वो पल आया जब बाऊजी ने मुझे बिसतर पर धकेला । मै नंगी अपनी जांघो को फैलाये लेट गयी और बाऊजी मेरे उपर चढ़ कर अपने मुसल पर थोडा थुक लगाते हुए मेरे चुत के महानो पर रगड़ने ल्गे

मै सिस्क सिस्क कर पागल हुई जा रही थी और अचानक एक जोर के झटके के साथ बाऊजी ने आधा लण्ड मेरी चुत मे घुसेड़ दिया ।

मै दर्द से छ्टप्टा कर अपनी गाड उचका कर रह गयी और बाऊजी बडी बेरहमी से धिरे धीरे पुरा लण्ड मेरी चुत मे उतारते चले

कुछ ही धक्को मे मुझे नशा सा होने लगा । जैसे उनका मुसल मेरे चुत की सुराख को और मोटा किये जा रहा था ।

मै बहुत समय बाद इतना जबरदस्त चुदाइ का मजा ले रही थी और मै सिस्क्ते हुए अपनी चुचिया मसलने लगी

मै - सीईई अह्ह्ह बाऊजी उम्म्ंम्ं ओह्ह्ज्ज

बाऊजी - आह्ह बहुत तु तो सच मे बहुत गरम है उम्मममं मस्त चुत है तेरी । मुझे बहुत पहले ही तुझे पेल देना चाहिए था अह्ह्ज्ज

मै भी मदहोशि मे अपने चुचियो की घुंडीया मरोडते हुए - अह्ह्ह बाऊजी देर तो हुई है ,,,उम्म्ं और तेज्ज्ज ओह्ह्ह मजा आ रहा है ओह्ह्ह

बाऊजी - हा मेरी बेटी ,,अब हम दोनो खुब मजे करेंगे उम्म्ंम राजेश के लिए तुझे तडपना नही पडेगा ,,ले और ले अह्ह्ह ओह्ज बहू





मै बस सिसकती रही और अपनी चुचिय मस्लती रही ,,बाऊजी कुछ धक्को के बाद मेरे गदराये जिस्म पर चढ़ कर पेलने लगे और मेरी चुचियो को चुसने लगे

मै पागल सी होने लगी बाऊजी ताबड़तोड़ ध्क्के पेले जा रहे थे और मै मस्ती भरी आहे भरे जा रही थी ।

बाऊजी -आह्ह्ह बहू तू सच बहुत ही मस्त है ओह्ह्ह्ह कितना गदराया जोबन है तेरा ओह्ह्ह ये चुचि उम्मममंं ओह्ह्ह बहू तेरी कसी हुई चुत ने तो मजा दुगना कर दिया

मै- अह्ह्ह हा बाऊजी आपका भी मुसल बहुत मजबूत है अह्ह्ह माआआ इस उम्र मे भी उम्म्ंम ओह्ह्ह बाऊजी और तेज्ज पेलिये मुझे उम्म्ंं उफ्फ़फ्फ मा मै झड़ रही हू उंम्ंम्म्ं सीईई

बाऊजी तेज करारे धक्के लगाते हुए -हा ले बेटी झड़ जा ,,,अभी तो और चोदना है तुझे

मै झड़ गयी थी मगर बाऊजी का जोश कम नही हो रहा था

फिर पोजिसन बदला और बाऊजी ने मुझे घोडी बनने का इशारा किया और थोडा मेरे नंगे चर्बीदार गाडो से खेलने के बाद एक जोर का करारा धक्का मेरी चुत मे मारा और फिर से पेलने ल्गे

मै तो कबकी झडी हुई थी और उनके लण्ड को निचोड रही थी ,,मगर बाऊजी का लण्ड जरा भी ढिला नही हुआ ,,वो एक सुर मे मेरे गाडो को मसल्ते हुए तेज ध्क्के से मुझे चोदे जा रहे थे ।

तभी उन्ही आह्ह निकली - अह्ह्ह बहुउउऊऊ जल्दी निचे आ हहह

ये बोल कर बाऊजी ने मेरी चुत से लण्ड निकाल कर खडे होकर मुठीयाने लगे और मै फौरान उनके पैरो मे आ कर बैठ गयी ।

बाऊजी ने तेजी से हिलाते हुए लण्ड का सुपाडा मेरे खुले हुए मुह पर किया -अह्ह्ह बहुउउऊ ओह्ह्ह्ह लेएएहह अह्ह्ह ओह्ह्ह

मै उन्के लण्ड के सुपाड़े को पुरा मुह मे भर ली और उन्के लण्ड के झटको मह्सूस करती हूइ सारा माल गटकने लगी ।





झड़ने के बाद बाऊजी ने मेरे बालो को सह्लाया और सुस्त होकर बिस्तर पर लेट गये ।

मैने भी खुद को सही किया और जल्दी से ब्लाउज पेतिकोट पहन कर बाऊजी के पास लेट गयी ।

बाऊजी - शुक्रिया बहू ,,,आज तुने मुझे तृप्त कर दिया

मै शर्मा कर - आपने भी हिहिही

बाऊजी - बहू अगर हो सके तो आज रात मे भी

मै बस हा मे सर हिला दी ।

फिर उस रात बाऊजी ने दो बार मुझे उसी तरह पेला और अगले दो दिन हमारी चुदाई जारी रही । फिर तीसरे दिन गिता बबिता वापस आ गयी ।

फिर मैने खुद से बाऊजी से कहा कि अब थोडा सबर करे ।

आज उनका प्रोग्राम था दोपहर मे जब गीता बबिता सिलाई सिखने जाये तब ।लेकिन आज तु आ गया ।


राज की जुबानी

मै - हा लेकिन फिर भी तो नही माने ना आप लोग ,,शुरु हो गये मेरे सामने ही हिहिही

मामी हस कर- धत्त बदमाश

मै - वैसे मानना पडेगा नाना को ,,इस उम्र मे भी ऐसी चुदाई

मै - उनकी कहानी सुन के ही मै झड़ गया

मामी मुस्कुरा कर - हा वो तो है हिहिहिही

मामी - अब उठो और जाओ नहा लो ,,गीता बबिता भी आ गयी होगी ।

मै हस के - मै तो लेकिन आज ट्यूबवेल पर जाऊंगा नहाने उनलोगो के साथ

मामी - नही नही आज नही । कल चले जाना । अभी फ्रेश हो लो मै नासता बना रही हू

मै - अच्छा ठिक है मेरी डार्लिंग मामी उउउउम्म्माआह

मामी मेरे चुम्मी लेने से थोडा शर्माइ और उठ खड़ी हुई फिर मै भी कमरे से बाहर निकल कर बाथरूम मे चल गया ।


फ्रेश होकर मैने गीता बबिता के साथ नासता किया और फिर हम लोग ऐसे ही नाना के साथ बैठ कर थोडा मस्ती मजाक किये । रात हुई खाने के बाद मै गीता बबिता के साथ उनके कमरे मे चल गया ।

लेकिन जाने से पहले मामी को इशारे से रात के लिए आल द बेस्ट बोल दिया । वो भी मुस्कुरा कर आंखे दिखाने लगी। मै हसते हुए गीता बबिता के कमरे मे चला गया ।

जारी रहेगी

दोस्तो इस अपडेट के लिये स्पैशल gif और pics खोजे है जो कंटेंट से रिलेटेबल लग सके ।


अपडेट पसंद आये तो कृपया टिप्पणी जरुर करे मुझे भी लगेगा कि मेहनत सफल रही ।

धन्यवाद
 
अपडेट 149

चमनपुरा


रात का पहर ढल चुका था । करीब 10 बज चुके थे ।

राहुल अनुज के यहा उसके कमरे मे लैपटाप खोलकर बैठा हुआ था और दोनो नयी नयी वीडियो ईयरफोन लगाये चला रहे । वही बगल के कमरे मे सोनल का अमन के संग कुछ रोमांटिक पल गुजर रहे थे तो निचे कमरे मे रन्गीलाल रागिनी की गाड़ मे घुसा हुआ उसे चोद रहा था । साथ ही कभी रज्जो को तो कभी सोनल की होने वाली सास ममता की चर्चा पर वो और जोश मे आकर अपनी बीवी की दमदार चुदाई कर रहा था ।

इनसब के अलग निशा के घर पर कुछ अलग ही माहौल था । खाने के बाद जन्गीलाल की बेताबी बहुत बढ गयी थी ।

उसने अपने कमरे का माहौल ठिक किया ताकि किसी भी बात को लेके उसकी लाडो का ध्यान भटके नही । वही शालिनी अपने पति की बेताबी देख कर मन ही मन खुश थी ।

जंगीलाल खाने के बाद अपने कमरे मे था और दोनो मा बेटी किचन मे बतरन खाली कर रहे थे ।

शालिनी - तो तु भी अब साड़ी पहनेगी हम्म्म

निशा हस कर - क्यू आपको जलन हो रही है क्या कि मै आपसे अच्छी दिखून्गी । हिहिहिही

शालिनी - धत्त , मै वो नही कह रही थी

निशा - फिर ??

शालिनी धीमी आवाज मे - अरे मतलब पापा के सामने ब्लाउज पेतिकोट मे जायेगी तो थोडा अन्दर के कपडे पहन लेना

निशा उखड़ कर - ओह्हो मम्मी आप भी ना , इतनी गर्मी मे मै ब्रा पैंटी नही पहनने वाली । गर्मी से आराम रहे इसिलिए तो साडी पहनना सिख रही हू

शालिनी मुस्कुराते हुए मन मे - ये देखो इस पगली को ।मै इसके भले के लिए कह रही हू तो नखरे कर रही है । अरे बेटी तेरा बाप तो तुझे पुरा नंगा करने के मूड मे है । हुउह मुझे क्या तू ही झेलेगी ।

निशा अपनी को देख कर - क्या हुआ मम्मी ? क्या सोच रही हो ??

शालिनी मुस्कुरा कर - कुछ नही बेटा । जा तु अपने कपडे पहन ले मै भी हाथ धुल कर आती हू । तेरे पापा भी इन्तजार कर रहे होगे ।

इधर निशा खुश होकर कमरे मे चली जाती है और अपने कपड़े निकाल कर एक पीले रंग का सूती ब्लाउज जो बिना अस्तर का था । उसको पहनाते हुए मन मे बड़बड़ाती है - क्या कह रही थी मा कि ढ़क कर आना । हुह । मेरे पापा ना जाने कितना तरसते है मेरे जोबनो को देखने के लिए

निशा ने ब्लाऊज पहन कर आईने मे खुद को निहारा तो उसके गहरे भूरे निप्प्ल उसके ब्लाउज से साफ साफ झाक रहे थे ।

निशा इतरा कर - हमम ये हुई ना बात ,,,आज तो पापा को ऐसा सताउन्गी की पागल ही हो जायेगे वो हिहिहिही । बहुत चोरी छिपे मेरे जोबनो को निहारते रहते है ना । आज मौका मिला तो खोल कर दिखाने से मै भी बाज नही आऊंगी हिहिहिही

निशा ने फिर मैचिन्ग पेतिकोट पहना । फिर अपना दुसरा ब्लाऊज पेतिकोट और दोनो साड़िया लेके पापा के कमरे की ओर चल दी ।

जहा जन्गीलाल और शालिनी पहले से ही खुस्फुसा कर बाते कर रहे थे ।

शालिनी - देखीये जी जरा आप खुद पर काबू रखियेगा । मै कोसिस करूंगी की उसकी शादी की बात छेड़ दू और अगर उसने आपके सामने मना किया तो आप समझ रहे है ना क्या करना है ??

जंगीलाला चहक कर अपना फन्फ्नाता मुसल जान्घिये के उपर से मसल कर - हा मेरी जान,,, मुझे पता है

शालिनी अपने पति को उसके लण्ड पर इशारा करते हुए - हा तो जरा उसे छेड्ना बन्द करिये । वो आ रही है ।

फिर दरवाजे पर दस्त्क हुई और शालिनी अपने सृंगार वाले आईने के पास चली गयी और वही बैठे हुए ही बोली - हा बेटा आजा ,,खुला ही है दरवाजा

निशा कमरे मे घुसती है तो जन्गीलाल टीवी चालू किये हुआ था और शालिनी अपने गहने उतार कर बाल सवार रही थी । दोनो यही दिखा रहे थे कि सब कुछ समान्य हो रहा है ।

तभी निशा की आहट से जंगीलाल ने एक नजर उसे देखा और उसकी सासे अटक गयी । सामने निशा पीले रंग के ब्लाउज पेतिकोट मे अपने हाथ मे झोला लेके खड़ी थी। और उसके खडे हुई निप्प्ल डीप गले वाले ब्लाउज से झाक रहे थे ।





चुचियो का फुलाव इतना था कि लगभग एक तिहार उभरी हिस्सा बाहर ही झलक रहा था । उस नजारे को देखते ही जन्गीलाल का लण्ड ठुमक उठा ।

जंगीलाल मुसकुरा कर टीवी म्यूट पर डालते हुए - अरे बेटा तु आ गयी

अपने पति की बात सुन कर शालिनी भी घूम कर निशा की ओर देखा और उस्के ब्लाऊज से झाकते निप्प्ल देख कर उसे थोडी हसी आई । लेकिन उसने खुद पर कन्ट्रोल किया ।

निशा चहक के - हा पापा । देखो मै दोनो साड़ीया लाई हू

जंगीलाल - अच्छा ठिक है आजा इधर पहले एक ट्राई करते है फिर दुसरा देखेंगे

निशा मुस्कुरा कर इठलाती हुई अपने पापा के पास गयी जो सोफे पर बैठा हुआ था ।

निशा अपने पापा के सामने आकर खड़ी हो गयी । वही जंगीलाल सोफे पर बैठे हुए बडे गौर से निशा के नंगी चर्बीदार पेट और गहरी नाभि देख रहा था । पास ने निशा के चुचे और भी रसिले दिख रहे थे ।

निशा अपनी थैली से एक पीले रंग की साडी निकाल कर उसे देती है ।

जन्गीलाल होश मे आता हुआ - हा हा बेटी दे मुझे

फिर जंगीलाल साडी खोल कर फर्श पर गिरा कर उसका अन्दर वाला सिरा खोजने लगता है । इस सब हरकतो को शालिनी वही आईने सामने बैठी नोटिस कर रही थी और हस रही थी ।

मगर जंगीलाल के लिये साडी पहनाना कोई बडी बात नही थी । वो सालो से इस फील्ड मे धंधा कर रहा था तो उसे हर तरीके से साडी पहनाने आता था । यहा तक कि वो कभी कभी कुछ खास ग्राहको के लिए खुद ही साडी लपेट कर दिखाता । खैर वो बाते और माहौल अलग है और यहा अलग ।

यहा तो जन्गीलाल की हवस ने उसे आज अपनी बेटी के लिए मज्बुर कर दिया था । साड़ी पहनाना मजह के एक बहाना था अपने बेटी के कोमल और अनछुए जिस्मो का स्पर्श लेने का ।

जंगीलाल ने साडी का सिरा पकड़ा और निशा के पीछे से घुमाकर उसे पेतिकोट मे अच्छे से अपनी उन्गलिया घुसा घुसा कर खोसने लगा ।

अपनी बेटी के कमर के निचले हिस्से और सामने पेड़ू पर उंगलियाँ घुसा कर जन्गीलाल को बहुत अच्छा महसूस हुआ । वही निशा गुदगुदी से थोडी खिलखिला रही थी ।

फिर जंगीलाल ने पल्लू का पलेटींग बना कर उसे निशा के कन्धे पर डालते हुए - इसे जरा सम्भालना बेटी हा ,,,मै जरा निचे साडी खोस दू ।

फिर जंगीलाल ने बाकी की बची हुई साडी का हिस्सा जो सामने रहता ,,उसकी तह लगा कर तैयार किया ।

जन्गीलाल - बेटा जरा तू अपना पेट पचकायेगी ताकी मै ये साड़ी खोस सकू

निशा खिलखिला कर - हीहीहीही ओके पापा

फिर निशा ने पुरा जोर लगा कर सारी सास अपने सिने मे भर ली जिससे उसके चुचे फुल कर कुप्पे हो गये और वही जन्गीलाल ने जब उसका पेतिकोट मे सामने से गैप बनाकर साडी को खोसने गया तो उसे निशा के चुत की ढलान साफ साफ नजर आई ।

जन्गीलाल का लण्ड निशा के चिकने और हल्के बालो वाली चुत की ढलान देख कर फड़फडा कर तन गया ।

लेकिन जल्द ही निशा की सासो पर पकड ढीली होने लगी और उसका पेट वापस ए सामान्य होने लगा तो ना चाहते हुए भी जंगीलाल को साडी खोसनी पडी ।

फिर वो खड़ा हुआ और निशा के साड़ी का पल्लू उस्से चुचो पर चढ़ाने के बहाने उससे मुलायम चुचो का स्पर्श लेने लगा ।

फिर सब सेट करके वापस इत्मीनान से बैठता हुआ - हा अब हो गया ,,, देखो तो कितनी प्यारी लग रही है मेरी लाडो

निशा चहक कर अपना पल्लू उड़ा कर घूमते हुए - सच मे पापा हिहिही





निशा - मम्मी कैसी लग रही हू मै

शालिनी अपनी लाडो को साड़ी मे देख कर थोडी भावुक तो हुई लेकिन उसने खुद को सम्भाल कर - बहुत प्यारी लग रही है मेरी गुड़िया

इधर निशा अपने पापा के सामने घूम चहक रही थी कि जंगीलाल को एक शरारत सुझी उसने अपने पाव की उन्गिलीयो से निशा के साडी पल्लू हल्का सा खीचा तो बिना पिन का पल्लू उसके कंधे से सरका और निचे गिर गया

जिसे सम्भालने के लिए निशा को अपने पापा के सामने झुकना पडा और उसके आधे से ज्यादा ब्लाऊज मे कसे हुए उस्के चुचे जन्गीलाल के सामने दिख गये ।





शालिनी ने अपने पति की सारी हरकतो पर नजरे रखे हुई थी और जब निशा झुकी तो जन्गीलाल की आंखो की चम्क और जान्घिये मे लण्ड का उभार कैसा बढा ये भी उसने देख लिया ।

वही निशा को भी थोडी बहुत भनक लग गयी जब उसने अपने पापा का तना हुआ लण्ड टेन्ट बनाये जान्घिये मे खड़ा देखा । तो उसने भी अपने पापा को रिझाने के लिए बडी अदा से अपना पल्लू आधा ही उठाया और चुचिय खुली ही रखी ।

इधर शालिनी समझ गयी कि बात अब आगे बढानी चाहिये इसिलिए उसने योजना अनुसार निशा के पीछे गयी और उसके साडी का पल्लू उसके सर पर चढाते हुए ।

शालिनी - अरे तु और भी खुबसूरत लग रही है मेरी बच्ची

निशा चहक कर सर पर पल्लू काढ़े एक नजर आईने मे देखा खुद को तो उसे थोडी शर्म आई और वो अपना मोबाइल शालिनी को दे कर - मम्मी प्लीज मेरा फ़ोटो निकालो ना ,प्लीज





फिर शालिनी खुश होकर कुछ तस्वीरे निकलती है और वापस उसे दिखाते हुए - देख लग रही है ना एकदम नयी नवेली दुल्हन हिहिहिही

जंगीलाल भी निशा के पास खड़ा होकर - अरे वाह , हमारी लाडो तो सच मे बडी हो गयी है । इसके लिए तो कोई अच्छा सा रिश्ता देखना ही चाहिये

निशा को शर्म आई और वो भी अपनी शादी के लिए काफी excited होती है । दुल्हन बनने का अह्सास , ढेर सारी शॉपिंग और फिर एक नये लण्ड से जी भर के चुदाई ।

मगर निशा अपने पापा के सामने अपनी शालीनता ही दिखाती हुई शर्मा कर - धत्त नही ,,,पापा मुझे शादी नही करनी अभी

निशा की प्रतिक्रिया सुन कर जंगीलाल और शालिनी की नजरे आपस मे टकराई और वो मुस्कुरा दिये कि उनका दुसरा स्टेप भी कम्प्लीट हो गया ।

शालिनी - इसका तो हर बार का हो गया है जी । हमेशा मना करती है । आखिर कब तक उस डर से भागेगी बेटा । हर लडकी को वो दिन का सामना करना पड़ता है ।

निशा की आंखे बडी हो गयी कि उसकी मा ये क्या बोल रही है ।

तभी जन्गीलाल - क्या हुआ शालिनी क्या बात है । कैसा डर??

निशा मन मे - हे भगवान अब क्या मा ये सब भी पापा को बतायेगी क्या ??? धत्त मुझे कितनी शर्म आ रही है हिहिहीही । और पापा क्या सोचेंगे मेरे बारे मे कि मै चुदाई से डरती हू

शालिनी हताश होने का दिखावा कर - अब क्या बताऊ जी आपको ,,, इसको शादी के बाद के कामो से डर लगाता है ।

जन्गीलाल हस कर - अरे इसमे क्या डरना बेटी , जैसे तु यहा हमे बनाती खिलाती है और हमारा ध्यान रखती है । वैसे ही शादी के बाद वो घर का ध्यान रखना

निशा को जब अह्सास हुआ कि उसके पापा उसकी मम्मी की बात समझ नही पाये तो वो खिखी करके हस दी और शालिनी की भी हसी छूट गयी ।

जंगीलाल अचरज का भाव दिखाता हुआ - क्या हुआ ? तुम लोग हस क्यू रहे भई!!

शालिनी हस कर - आप समझे नही क्या इधर आईये ।

फिर शालिनी जन्गीलाल को एक किनारे ले जाकर थोडा बहुत खुस्फुसाती है तो वापसी मे जंगीलाल के चेहरे के भाव मे थोडी गम्भीरता दिखने लगती है ।

वही निशा शर्म से लाल हुई जा रही थी कि उसकी मा ने पापा को सब बता दिया होगा ।पता नही वो क्या रियेक्शन देंगे ।

जन्गीलाल गला खराश कर निशा के पास जाता है सोफे पर बैठते हुए - इधर आ बेटी यहा बैठ मेरे पास

निशा थोडा मुस्कुराते , थोडा शरमाते हुए अपने पापा के पास बैठ जाती है । उसके दिल की धडकनें बहुत तेज हो गयी थी ।

फिर जन्गीलाल शालिनी को इशारा करता है कि वो निशा के पास जाकर बैठे ।

जंगीलाल एक हाथ से बडे प्यार से निशा के गालो को सहलाता है और उसके माथे को चूम लेता है । निशा मानो इस प्रेम स्पर्श से पूरी तरह पिघल ही गयी ।

जंगीलाल थोडा झिझक दिखा कर - अब देखा बेटा जैसा तेरी मा ने बताया मुझे , वो सब लड़कियो के साथ होता है । माना कि तुम उस लड़के से पहले बार मिलोगी और ऐसे अनजान लोगों से शरीरिक हो पाना शुरु मे बहुत मुश्किल होता है । लेकिन यही समाज और प्रकृति की रीति है बेटा , हमे ये रीति निभाने ही पडते है ।

निशा मन ही मन शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी । उसकी आवाज तो मानो गायब सी थी ।

शालिनी उसके कन्धे पर हाथ रख कर - हा बेटा तेरे पापा सही कह रहे है । मै भी जब पहली बार ,,,,मतलब हम दोनो जब पहली बार मिले थे तो मुझे भी डर था लेकिन सब धिरे धीरे सही हो गया था ।

निशा अब धीरे से बोली - हा लेकिन पापा तो आपको प्यार करते थे ना और वो क्यू आपको तकलिफ देंगे । मेरा कौन सा कोई ....।

ये बोलकर निशा चुप हो गयी और नजरे झुकाये रखी । वही शालिनी और जन्गीलाल को मह्सूस हुआ कि उसकी लाडो तो सच मे डर रही है । शालिनी ने आंखो से ही इशारा करके जंगीलाल से पुछा कि अब क्या करे तो जन्गीलाल ने उसे आश्वत किया ।

जंगीलाल - हा बेटा बात तो तेरी सही है लेकिन ससुराल मे तेरी जिम्मेदारी घर सम्भालने , सास ससुर की देखभाल के साथ साथ तुझे अपने पति को भी प्यार देना ही पडेगा । वो उसका हक है ।

निशा वैसे ही नजरे निची किये हुए अपना साड़ी का पल्लू उंगलियो मे घुमा रही थी - और पता नही मेरी जिस्से शादी होगी वो मुझसे खुश रहेगा या नही , मुझे तो पता भी नही है इस बारे मे कुछ भी ।

शालिनी को अपनी बेटी पर बहुत तरस आ रहा था और वो उसके अपने सीने से लगा लेती है । वही जंगीलाल चहक उठता है कि मानो निशा ने उसे एक बड़ा मौका दे दिया हो ।

जंगीलाल खुश होकर - अरे बेटा उसकी चिंता तू क्यू करती है । हर लडकी को उसके घर वाले सारे गुण सिखाने के बाद ही ससुराल भेजते है

शालिनी समझ गयी कि उसका पति ने आगे बढना शुरु कर दिया है - हा बेटी , और मैने तुझे बताया था मुझे भी किसी ने बताया था इस बारे । आमतौर अब ये सब बाते घर की भाभी या पड़ोस की कोई सहेली बताती है और अभी ऐसा कोई खास रिश्तेदार तो है नही तो वो सब तुझे बताने सिखाने की जिम्मेदारी भी हम मा बाप की ही है ।

निशा शर्म से लाल हो गयी कि अब उसके मम्मी पापा उसे सेक्स के बारे बताएगे ।

निशा ह्सते हुए शर्मा कर अपनी मा के सीने मे छिप गयी - धत्त नही मम्मी मुझे शर्म आयेगी

और उसे ऐसा कहते देख कर बाकि दोनो भी हसने लगे क्योकि वो जानते थे कि उनका तिन अपने निशाने पर लग गया है

शालिनी अब उसे थोडी डांट लगाते हुए - क्या नही !! इसमे भी तेरे ड्रामे खतम नही हो रहे है

जन्गीलाल - ओहो शालिनी तुम भी ना ,,अरे ये सब उसके लिए नया है तो शर्म आयेगी ही ना और हम उसके मा बाप है कोई दोस्त थोडी है ।

जंगीलाल निशा के बाह पकड कर उसे उठाता और अप्नी ओर घुमाता है । निशा शर्म से लाल हूइ मुसकुराते हुए नजरे निचे किये रहती है ।

जंगीलाल - देख बेटा माना की लाज शरम अच्छी बात है लेकिन मै चाहता हू तु इस मसले पर हम दोनो से खुल कर बाते करे । क्योकि ये बहुत ही नाजुक मसला है थोडी बहुत गलत जानकारी या लापरवाही से तुझे बहुत सम्स्या हो सकती है ।

निशा इस समय बस एक रोमांच से भरी हुई थी एक चंचल खुशी उसके तन को सिहरा रही थी लेकिन वो अपने पापा से व्यक्त नही करना चाहती थी ।

वो बस मुस्कुरा कर नजरे निचे किये हुए हमम्म बोल दी।

निशा की सहमती पर जंगीलाल शालिनी को देख कर मुस्कुराने लगता है ।



राज की जुबानी


खाने के बाद मै गीता और बबिता को लेके उनके कमरे मे चला गया । वो दोनो पहले के जैसे ही मुझसे चिपकी हुई मेरे साथ मोबाइल देखने लगी। पहले तो उन्होने रमन भैया के शादी की तस्विरे देखने को बोली और फिर जब मुझे लगा कि अब रात ढलने लगी है तो मै मोबाइल बबिता को देकर - गुड़िया जरा ये पकड़ो मै जरा पेसाब करके आता हू ।

पेसाब तो महज एक बहाना था मुझे तो नाना का कमरा चेक करना था और वापस आकर आज गीता की सील खोलनी थी । उस्के किचन से तेल की सीसी भी लेनी थी ।

मै बाहर आकर धिरे से कमरे का दरवाजा बन्द किया और दबे पाव पहले नाना के कमरे की ओर गया ।

नाना तो वैसे भी कमरे की खिडकी खुली रखते थे क्योकि एक तो उनका कमरा सबसे अलग और किनारे पर था वही उन्हे किसी का डर था ही नही

मै जैसे ही खिड़की खुली देखी तो मन ही मन बहुत खुश हुआ और कमरे मे झाका तो नजारा ही अलग था । देख कर लण्ड खड़ा हो गया ।

अन्दर नाना और मामी पुरे नन्गे होकर चुदाई कर रहे थे । नाना मामी को घोडी बना कर पीछे से जो करारे धक्के लगा लगा रहे थे कि मामी की आंखे फैल जा रही थी ।





मामी जैसा बताया उससे कही ज्यादा जोश मे नाना मामी की ध्क्क्मपेल चुदाई कर रहे थे ।

मै इनको बिजी देख कर बहुत खुश हुआ और वापस वहा से किचन की ओर चल दिया । वहा से मैने तेल की शीशी ली और दवाई वाले बॉक्स से दर्द वाली दवाइयों की पैकेट भी । सोचा क्या पता उसका क्या हाल हो क्योकि पिछले साल के मुकाबले अब मेरा लण्ड भी काफी आकार ले चुका था । उम्र और चुदाई के साथ उसकी नशे और भी मजबूत होने लगी थी ।

मै धीरे से बिना कोई खास आहट किये कमरे का दरवाजा खोला तो देखा कि गीता और बबिता मे किसी बात को लेके खुसफुसाहट भरी बहस हो रही थी और गीता के चेहरे पर गुस्से के भाव साफ झलक रहे थे ।

मुझे कुछ अजीब नही लगा क्योकि दोनो अकसर लड़ती झगड़ती रहती थी ।

मै कमरे मे वाप्स आया तो दोनो चुप हो गयी और गीता ने जैसे ही मेरे हाथ दवाई देखी वो परेशान हो गयी ।

गीता - क्या हुआ भैया आपकी तबीयत नही ठिक है क्या ??

मै मुस्कुराकर उनदोनो के बीच मे जाकर बैठ गया और उनहे अपनी ओर खिच कर - नही मेरी मीठी ये तो बस कुछ खास चीज़ के लिये है ।

गीता - मतलब

मै उसके नरम नरम कुल्हे मसलता हुआ - क्यू तु इसे लेगी क्या अपनी चुत मे । उम्म्ं बोल

गीता लोवर मे खडे हुए लण्ड को अपनी चुत मे लेके के अह्सास भर से गनगना गयी और नशीली भरी आंखो से मुझे निहारते हुए मेरा लण्ड थाम ली - हा लूंगी ना भैया ।

मै बबिता की ओर देख के - और तु नही लेगी क्या मेरी गुड़िया रानी उम्म्ं

तभी गीता भडक कर - उसे क्यू चाहिये उसे तो मिल जाता है ना

मै अचरज से - मिल जाता है मतलब

बबिता की आंखे ब्ड़ी हो गयी और वही गीता की जुबान हकलाने लगी - वो मेरा मतलब उसे तो आपने दिया है ना एक बार ,,,आज मुझे दो ना प्लीज भैया

मै मुस्कुराकर - उम्म इतना पसन्द है तुझे अपने भैया का लण्ड

गिता - बहुत ज्यादा भैया

मै - तो चलो सारे लोग कपडे निकाल लेते है जलदी जल्दी

मै गीता ही बाते किये जा रहे थे वही बबिता चुप सी थी ना वो कपडे निकालने के लिए उठी ना उसे मेरे लिए कोई उत्साह जगा ।

वही गीता ने फटाफट सारे कपडे निकाल दिये और घुटनो के बल आकर मेरा लण्ड चुसने लगी





उसके मुलायम होठो और छोटे छोटे कोमल हाथो का मेरे लण्ड पर स्पर्श मुझे रोमांचित कर दिया और मेरा लण्ड उसके मुह मे और कस गया ।

तभी मेरे जहन मे बबिता का ख्याल आया और मैने उसे देखा तो वो वैसी ही बैठी हुई गीता को लण्ड चुसते हुए निहार रही थी ।

मै - अरे क्या हुआ गुड़िया ,,तुझे नही करना अपने भैया को प्यार

बबिता उखड़ कर - अम्म नही भैया आज गीता को कर लेने दो

मै - अरे क्या हुआ मेरी गुड़िया को उम्म्ं क्यू उदास है ,,आना तु भी तेरे बिना अच्चा नही लग रहा है ।

बबिता बेबस होकर उठी और गिता के बगल मे घुटनो के बल आ गयी और उसने मेरे आड़ो को छुना शुरु कर दिया ।

उसके स्पर्श मे मुझे कुछ नयापन सा लगा वही गीता के स्पर्श मे वही भोलापन और मासूमियत । वो उसी अन्दाज से मेरे लण्ड को दुलार रही थी जैसे पहली बार मे थी ।

लेकिन बबिता के उंगलियो मे एक गजब की थिरकन मह्सूस की मैने जैसा शालिनी चाची किया करती थी ।

तभी उसके अपनी जीभ नुकीली करके मेरे लण्ड निच्ले नशो को छेडा और मै गनगना गया ।मैने फौरं गीता के मुह से लण्ड निकाल कर बबिता के मुह मे भर दिया ।

उसने लण्ड बड़ी ही अदा से पुरा रस ले ले कर चुसना शुरु कर दिया । उसकी आन्खे बन्द थी मगर मुह के अन्दर मेरे सुपाड़े पर फ्लिक होती जीभ से मै पागल होने लगा था ।





मेरे मन मे काफी सवाल थे कि ऐसा कुछ तो मैने कभी इसे नही सिखाया और तभी उसने लण्ड को गले मे उतार लिया ।

मै हवा मे उड़ने लगा । उसके हाथ मेरे आड़ो को मसल रहे थे वो गले मे लण्ड को भरे जा रही थी

मै अकड कर रह गया । उत्तेजना से सुपाड़ा जलने लगा मानो सारा वीर्य उसमे भर गया हो ।

आज पहली बार मेरी चिख निकली - अह्ह्ह गुड़िया ओह्ह्ह्ज ओह्ह्ह

मै भलभला कर उसके मुह मे झड़ रहा था और वो तेजी से मेरा लण्ड मुठिया रही थी ।





मै झड़ कर शांत हो गया और थक कर बिस्तर पर लेट गया ।

बबिता चुपचाप उठी और अपना मुह साफ कर मेरे बाई ओर लेट गयी । वही गीता नंगी ही मेरे दाई हो लेट गयी ।

मै थकने लगा था ,,मानो उसने मुझे बुरी तरह निचोड लिया हो । ऐसा अनुभव मुझे शालिनी चाची के साथ ही हुआ था पहली बार जब ऊनके साथ मेरी दुकान मे ।

मै ढ़ेरो सवालो से घिर गया और हाल ही की बीती बाते कुछ घटनाओ को आपस जोडने लगा । एक शक सा मेरे जहन मे ऊबरने लगा था और मेरी आन्खे बस बंद हो रही थी। क्योकि आज तीसरी बार था कि मै बुरी तरह निचुड गया था । दोपहर मे कमला , फिर शाम को मामी और अब बबिता ने ।

मेरी आंखे बन्द हो ही रही थी कि गीता के गीले जीभ का स्पर्श मेरे निप्प्प्ल पे मैने दाई हो से म्हसुस किया ।

मैने उसके अपने ओर खिच कर हग करते हुए - सॉरी मीठी ,,मै बहुत थक गया हू कल करेंगें ना ।

गीता मुझ्से लिपट कर - कोई बात नही भैया

मैने एक नजर बबिता को देखा जो बस चुपचाप छत को घुरे जा रही थी । मैने उसे भी पकड कर अपने से सटा लिया - आजा तु भी हिहिही अब सो जाते है ।

बबिता भी फीकी मुस्कराहट के साथ मेरे ओर करवट लेके मुझसे लिपट कर सो गयी ।

फिर हम सब सो गये ।

जारी रहेगी
 
अपडेट 150


पिछले अपडेट मे आपने पढा कि एक ओर जहा राज को बबिता को लेके कुछ शक हो रहा है वही दुसरी ओर निशा के मम्मी पापा उसे सेक्स की बाते बता रहे है

अब आगे

निशा मन ही मन बहुत ही रोमांचित मह्सूस कर रही थी । उसकी दिल की तेज धडकने उसके चुचो को फुला रही थी ।

वही पल पल जंगीलाल के लण्ड मे कसावट बढ रही थी साथ ही उसके सुपाडे मे खुजली होने लगी थी ।

कमरे का महोल गरम होने लगा था ,,वही शालिनी भी अपने पति के आगे के स्टेप को लेके बहुत उत्सुक हुइ जा रही थी ।

जन्गीलाल मुसकुरा कर - अच्छा बेटा तुझे मर्दो के शरीर के बारे मे पता है कि नही

निशा अपने पापा का इशारा समझ गयी कि शरीर के किस हिस्से की बात कर रहे है इसिलिए वो शर्म से लाल होते हुए हल्का सा खिस्खी लेके मुस्कुराई

जन्गीलाल हस कर - धत्त मै भी क्या पुछ रहा हू ,,,मेरी लाडो तो पढी लिखी है उसे तो पता ही होगा ,,,क्यू बेटी ।

निशा ने शर्म से नजरे झुकाये हुए हा मे सर हिलाया ।

जंगीलाल मुस्कुरा कर - पता है बेटी सबसे पहले तुझे अपने पति से शरमाना और झिझकना कम करना पडेगा ।

"हा बेटी , मर्दो को बार बार किसी काम के लिए कहना बिलकुल भी पसन्द नही वो बहुत जल्दी नाराज हो जाते है । ऐसे मे तुझे थोडी बहुत शर्म झिझक के साथ साथ अपने पति के मूड का भी ध्यान रखना पडेगा । " , शालिनी अपने पति की बातो को आगे बढ़ाया ।

जंगीलाल अपनी बीवी की बात पर सहमती दिखाता हुआ - बिल्कुल सही कह रही है तेरी मा, बेटी !

शालिनी निशा के कन्धे दुलारती हुइ - और पति के पास जाने मे उसके अंगो को छूने मे झिझकना नही चाहिये । थोडी बहुत आतुरता तुम दिखाओगी तो वो और भी जोश से तुम्हे प्यार करेगा ।

अपनी मा बाप की बाते सुन कर निशा तो जैसे अपने सुहागरात के सपनो मे खो सी गयी । कि कैसा होगा वो पल जब एक अंजान शक्स के साथ वो हम बिस्तर होगी और उसका मोटा करारा लण्ड अपनी चुत मे लेगी ।

निशा अपनी कल्पना से गनगना गयी और उसकी चुत ने बजबजाना शुरु कर दिया ।

शालिनी - अगर वो कहे कि उसका वो पकडो,,उसे सहलाओ । वो तुम्हे करना पडेगा ।शुरु मे भले ही अजीब लगे कि वो काम मर्दो को बहुत पसंद आता है और अगर औरत खुद से ही वो सुख मर्दो को दे तो दोनो के बिच प्यार और भी गहरा जाता है ।

निशा सब समझ रही थी लेकिन उसे अपने मम्मी पापा से खुल कर मस्ती करनी थी तो वो नादान होते हुए - उसका वो मतलब ,,,और कैसा सुख ?? मै समझी नही मा ।

निशा से धीमी और जिज्ञासू अभिवक्ति दिखाई ।

तभी जंगीलाल - ओह्ह हो शालिनी तुम भी ना , अरे उसको इशारे मे समझाओगी तो कैसे जानेगी वो । उसे खुले और सटीक शब्दो मे बताओ ना

जंगीलाल - देख तेरी मा कहने का मतल्ब ये है कि .....। अच्छा ये बता तु मर्दो के लिंग के बारे मे क्या जानती है ।

निशा शर्म से लाल होकर मुह मे हाथ रख कर खिस्खी लेके हसने लगी ।

जंगीलाल - अरे शर्मा मत बेटी ,,बोल । तुझे इसका सामाजिक नाम पता है ना

निशा ने मुस्कुरा का हा मे सर हिलाया और धिरे से बोली - हा वो काफी लोगो से सुना है उस्का नाम । अक्सर लोग गाली देने मे ही यूज़ करते है ।

जंगीलाल ठहाका लेके हसा - हाहहहा बात तो सही है बेटा ! तो बता क्या कहते है उसे

निशा ने पहली बार अब नजरे उठा कर अपनी असमंजस की स्थिति दिखाई और पहले पापा को फिर मम्मी को निहारा ।

जन्गीलाल - बोल बेटा,, देख तू अगर झिझक करेगी तो सिखेगी कैसे ?? बोल ना

निशा मुस्करा कर नजरे नीची करती हुई बहुत ही धीमी आवाज मे - लल्लण्ड!!

जंगीलाल - क्या बोल रही है तु थोडा तेज बोला बेटा??

निशा थोडा हस कर समान्य आवाज मे - लण्ड!!

अपनी बेटी के मुह से लण्ड शब्द सुन कर जन्गीलाल जोश से भर गया वही शालिनी भी रोमांचित हो उठी । निशा की दिल की धड़कने भी तेज हो गयी थी अपने पापा के सामने वो ऐसे शब्द बोल पाई

जन्गिलाल निशा के पीठ को सहलाकर - शाबाश बेटा, अब ये बता तुने कभी किसी का लण्ड देखा है ।

जन्गिलाल के सवाल से निशा चौकी कि अब इस्का क्या जवाब दे , उसने तो अबतक तीन जबरदस्त लण्ड से चुदी हुई है । मगर जान्घिये मे उभरा उसके पापा का लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा था उसे ।

जन्गीलाल हस कर - अरे मेरा मतलब है कि ऐसे किसी वीडियो या किसी को पेसाब करते हुए ,,,

निशा मुस्कुरा कर ना मे सर हिला दी ।

जन्गीलाल रोमांच से भर गया कि उस्की बेटी पहली बार किसी का लण्ड देखेगी तो उसका ही ।

जन्गीलाल - कोई बात नही बेटा , रुक मै तुझे दिखाता हू

निशा की आंखे बड़ी हो गयी और वो मुस्कुराते हुए अपने पापा को अपना जांघिया खोलते तिरछी नजरो से निहारने लगी । वही शालिनी उसके बालो मे हाथ फेर कर उसे दुलार रही थी ।

इसी बीच जंगीलाल ने अपना जांघिया खोल कर निकाल दिया और अपने टाँगे खोल कर एक हाथ अपना मोटा काला फड़कता हुआ लण्ड सहलाने लगा ।

निशा ने तिरछी नजरो से अपने पापा का तना हुआ मुसल देखा। लण्ड की नसे फुली हुई थी और सुपाडे की लाली गहरा रही थी । मानो सारा खुन वही जमा हो रहा हो ।

उसकी नजरे निचे झुलाते जंगीलाल के मोटे मोटे आड़ो के झोली पर गयी । निशा मन ही मन बहुत ही उत्तेजित हुई जा रही थी । उसकी चुत रस बहाये जा रही थी । वही शालिनी की हालत भी कम खराब नही थी । आज तक उसने अपने पति के लिंग मे इतनी कसावट नही देखी । उसके भी निप्प्ल कड़े होने लगे । चुत की सिराये पनीयाने लगी थी ।

जंगीलाल मुस्कुराता हुआ अपना लण्ड की चमडी उपर निचे करता हुआ निशा को देखता है कि कैसे वो कनअखियो से उसका मोटा काला लण्ड निहार रही है ।

जंगीलाल - बेटा शर्मा मत देख अच्छे । ले पकड ना

निशा अब थोडा शर्माती हुई अपने पापा का लण्ड घुरने लगती ।

इतने मे शालिनी उसका हाथ पकड कर सीधा लण्ड पर रखते हुए - तु भी ना ,,,ऐसे डर रही है जैसे खा जायेगा ये हिहिहिही

निशा ने जैसे अपने पापा के मोटे तपते काले लण्ड को स्पर्श किया वो गनगना गयी और झिझक मे अपना हाथ खिच ली । वही जन्गीलाल अपनी लाडो के कोमल हाथो का स्पर्श पाकर उत्तेजना से भर गया और उसका लण्ड शालिनी की हथेली मे और कसने लगा ।

शालिनी की लार तो ना जाने कबसे अपने पति को मुसल को देख कर तपक रही थी ,,जैसे ही उसने अपने हाथो मे लण्ड की कसावट बढती मह्सूस की वो उसके उपर से निचे बडी ही मदहोशि मे सहलाते हुए - देख इसको ऐसे पकड कर सहलाते है ,, आ तु भी कर ले ।

निशा ने नजरे उठा कर अपने पापा को देखा जो उसे बडी लाड और उम्मीद भरे नजरे से देख रहे थे ।

शालिनी ने अपनी हथेली का कबजा अपने पति के लण्ड से हटाया और वापस से निशा के हाथ को पकड कर उसके पापा के लण्ड पर रख दी ।

निशा अपने पापा के लण्ड की तपिश मह्सूस कर सिहर उठी ,,उसका रोम रोम खड़ा हो गया । वो बहुत ही संवेदनशील मह्सूस करने लगी । उसकी पीठ पर सरकते उसके पापा के हाथो का स्पर्श उसे और भी मादक सा लगने लगा और कापने लगी थी ।

वही अपनी बेटी की ठन्डी उंगलियाँ अपने लण्ड पर पाकर जंगीलाल भी एक नयी रोमांचित ऊर्जा से भर गया । कमरे का माहौल काफी गर्म था लेकिन एक ठंडी चुप्पी सी थी ।

आंखे बंद किये जंगीलाल अपने आड़ो की सिकुडी हुई थैली पर अपनी बेटी के पंजो के निशान तक मह्सूस कर पा रहा था ।

वही जब निशा ने नजर उठा कर अपने पापा के चेहरे के भाव पढे तो उसने मुस्कुरा कर हल्का सा जोर अपने पापा के आड़ो पर बढाया और उन्हे सहलाया ।

सीईई अह्ह्ह .....। जंगीलाल ने मादक आह्ह भरी जिसे देख कर शालिनी भी मुस्कुराते हुए अपने बेटी के हाथो के उपर से अपने पति के आड़ो को सहलाने लगी ।

निशा को भी ये काफी पसंद आ रहा था जिस तरह से उसकी मा उसका साथ दे रही थी । दोनो मा बेटी मे आंखो से मुस्कुराहट भरी इशारेबाजी चल रही थी और शालिनी इशारो से ही निशा को लण्ड पर उन्गीलियो का जादू चलाने का तरीका बता रही थी ।

जो तरीके काफी ज्यादा कामुक होते उसको करने मे निशा खुद से ही झिझक दिखाती लेकिन शालिनी बडे दुलार से प्रेरीत करती रहती । वही अपने लण्ड पर अपनी बेटी के कोमल हाथो का स्पर्श पाकर जन्गीलाल आंखे बंद किये बस हल्की हल्की सिसकिया लेते हुए गहरी सासे लिये जा रहा था ।

उसे तो इस बात की भनक तक नही हुई कि कब दोनो मा बेटी लण्ड सहलाते हुए सोफे से उठ कर निचे फर्श पर आ चुकी थी । जहा शालिनी निशा को दोनो हाथो से लण्ड को भीचने का तरीका बता रहा थी ।

निशा ने भी अपने पापा का लण्ड दोनो हाथो से थामा और हल्का हल्का उसकी चमडी उपर निचे करने लगी ।

शालिनी ने मुस्कुरा कर - क्यू जी ,,कैसी कर रही है हमारी बेटी

जन्गीलाल ने नशे से गुलाबी होती आंखे खोल कर अपने सामने का नजारा देखा तो वो जोश से भर गया । निशा की हथेली मे उसका लण्ड और फुल गया , क्योकि उसकी बेटी उसके सामने बैठी हुई दोनो हाथो से बडे ही प्यार उसके लण्ड को दुलार रही थी ।

जंगीलाल ने हाथ बढा कर निशा के गालो को छूते हुए - अरे वाह मेरी लाडो तो बहुत जल्दी जल्दी सिख रही है

निशा शर्म से लाल होकर नजरे निचे करते हुए वैसे ही अपने पापा का लण्ड सहलाती रही ।

जंगीलाल शालिनी को इशारा किया कि अब थोडा आगे बढे तो उसने भी मुस्कुरा कर सहमती दिखाई ।

शालिनी - बेटी बस कर । अब ये काफी गरम हो गया है । तु खुद भी इसे मह्सूस कर पा रही होगी ...है ना !!

निशा ने अपने पापा के लण्ड की तपिश को एक बार फिर से मह्सुस कर सिहरते हुए हा मे सर हिलाई ।

शालिनी मुसकुरा कर - इसे थोडा ठंडा करने की जरुरत है ।

निशा ने आतुरता दिखाते हुए - वो क्यू मा ??

शालिनी और जन्गीलाल उसके सवाल पर एक दुसरे को देख कर मुस्कुराये ।

शालिनी - देख बेटा मान ले तु ससुराल मे दिन के कामो के कारण थकी हुई है और तेरी कमर और बदन मे तेज दर्द है । ऐसे मे तेरा पति तुझसे फरमायिश कर दे कि उसे शांत करना है और तु खराब तबियत की वजह से सेक्स के लिए तैयार नही होगी । ऐसे मे वो नाराज ना हो उसके लिए उसे शांत करने का आसान तरीका होता है ।

निशा सम्झ तो सब रही थी मगर फिर भी उसने आतुरता दिखाई - क्या मा ??

शालिनी - इसे चुस कर !!

निशा चौक कर - क्या !!!

शालिनी - हा बेटी ,,यही वो सुख है जो हर मर्द अपनी बीवी से कामना करता है । तुझे विश्वास नही तो अपने पापा से पुछ ले ।

निशा अपनी की बाते सुन कर लाजभरी नजरो से पापा को देखा ।

" हा बेटी , तेरी मा सही कह रही है । लण्ड चुसवाना हम मर्दो को बहुत पसंद आता है । इससे पति का प्यार उसकी पत्नी के लिए और बढ जाता है । यहा तक कि प्रेग्नेंसी या महावारी के समय में जब उसकी बीवी सेक्स के लिए तैयार नही होती है तो ऐसे मे बिविया अपने मरदो को शांत कर देती है और फिर मर्द कही बाहर नही भटकते ।

निशा अपने पापा की बात समझ गयी और मुस्कुराने लगी।

निशा थोडा मुह बिचका कर - लेकिन फिर भी मुझे अजीब लग रहा है ।

" अरे इसमे अजीब कैसा ? रुक मै दिखाती हू " , ये बोलकर शालिनी ने तत्परता दिखाते हुए गरदन आगे करके पहले लण्ड के सुपाड़े पर निकले हुए प्री-कम को चाटा और फिर आधा लण्ड मुह मे भर लिया और उसे मुह मे अंदर बाहर करने लेने लगी

फिर उसने बडी अदा से लण्ड के निचले हिस्सो पे जीभ फिराते हुए आड़ो को मुह मे भरके चुबलाया

वही जन्गीलाल के गर्म होते सुपाडे को भी पल भर के लिए ठंडक भरी राहत मिली ।

शालिनी लन्ड़ का मुह निशा की ओर करते हुए - ले !! तु भी कर

निशा का मुह तो पानी से भर हुआ था वो तो कबसे ललचाई जा रही थी ।

वही शालिनी और जन्गीलाल की निगाहे निशा पर जमी हुई थी कि कैसे वो धिरे धिरे अपने होठ खोलते हुए लण्ड की ओर बढ रही है ।

निशा ने हौले अप्नी मा के हाथ से लण्ड को थामा और लण्ड के बेहद करीब गयी ।

सुपाडे से आती गर्म और मादक खुस्बु से निशा को उत्तेजित कर दिया और उसने हौले मुह खोलते हुए अपनी जीभ निकाल कर अपने पापा का सुपाडा चाट लिया ।

जंगीलाल अपने बेटी की गीली और ठंडी जीभ का स्पर्श पाते ही जोश मे आ गया और उसका लण्ड अकड गया ।

देखते ही देखते निशा ने दुबारा से मुह खोला और इस बार सुपाड़े को पुरा मुह मे भरते हुए उसे लॉलीपॉप के जैसे चुस्ते हुए उसका रस अपने ठन्डे मुलायम होठो से सुरकते हुए बाहर निकाला ।





जन्गीलाल की सासे अटक सी गयी जिस तरह से निशा ने उसका सुपाडा चुबलाया । वही शालिनी भी मुस्कुरा उठी कि उसकी बेटी ने बडी जल्दी समझ गयी ।

फिर निशा ठिक अपनी मा के जैसे ब्डा मुह खोला और लण्ड को आधा मुह मे भर उसके जड़ को पकड के अपने मुह मे लेने लगी ।





जब निशा के होठ उसके पापा के लण्ड के सतहो पर घिसने लगे थे जंगीलाल की ऊर्जा पूरे तन से रिस कर उसके लण्ड मे जमा हो रही थी ।

उसके कांपते हाथ आनायास निशा के बालो के घूमने लगे और वो अपनी कमर उचका लण्ड को और भी अंदर ले जाना चाहता था । मगर बगल मे बैठी शालिनी की नजर बराबर अपने पति की हरकतो पर थी जैसे वो अपनी गाड उचकाता शालिनी उसके जांघो को दबा कर उसे शांत रहने का इशारा करती ताकि निशा को लण्ड लेने मे परेशानी ना हो । उसके दिमाग मे ये था कि एक बार निशा की झिझक दुर हो जाये और वो लण्ड चूसने का मजा ले ले तो उसके बाद वो उसे और नये तरीके और शरारते जरुर सिखायेगी ।

जन्गीलाल - सीई ओह्ह्ह बेटी,,,सच मे तु बहुत अच्छा कर रही है उम्म्ंम्ं

तभी निशा ने अपने मुह से लण्ड निकाला और उसे सहलाते हुए अपने पापा के आड़ो को मुह मे भर के चुबलाया । जिससे जन्गीलाल उछल पडा ।

शालिनी ने जैसे जैसे बताया था निशा वो सारे स्टेप कर चुकी थी और उसके हाथ अभी भी लण्ड की चमडी को उपर निचे किये जा रहे थे । वही जंगीलाल का सुपाडा वीर्य से भर कर तन चुका था ।

जंगीलाल कसमसाया और तेजी से लण्ड हिलाते हुए खड़ा हो गया - अह्ह्ह मेरी बेटी मुह खोल,,,मेरा आ रहा है ।

निशा चौक कर अपनी मा को देखा ।

"हा बेटी मुह खोल उसे मुह मे ले ,,, उसका स्वाद बहुत ही अच्छा होता है । एक बार ट्राई तो कर " शालिनी ने उसे दुलारते कहा ।

निशा ने भी मुह खोला और आंखे बन्द कर ली ।

इधर जंगीलाला ने अपना लण्ड निशा के मुह के ठीक उपर रखकर तेजी से आह्ह भरते हुए उसके मुह मे झड़ने लगा - ओह्ह्ह बेटी अह्ह्ब लेह्ह पी जह्ह्ह ओह्ह्ह उह्ह्ह्ह अह्ह्ह

निशा आंख बंद कर मुह खोले रही और अपने पापा सुपाडे से अपना माल उसके मुह ने गिराते रहे फिर अच्छे से दो बार झाड कर अपना लण्ड उसके होठो पर पटका और हाफते हुए सोफे पर बैठ गया ।

वही निशा ने वीर्य को मुह मे भरे हुए ही अपनी मा को देखा तो उसने इशारे से गटकने को कहा तो वो बडी ही मासूमियत से अपनी मा की आंखो मे देखते हुए गटक गयी । जैसे कोई बच्चा अपनी मा के सामने दूध की घूंट गटकता हो।





शालिनी ललचा कर रह गयी कि उसे उसके हिस्से का माल नही मिल पाया । लेकीन वो अपने बेटी के लिए खुश थी।

निशा ने जीभ नचा नचा कर मुह से बीर्य को साफ करके गटक गयी और वापस वही फर्श पर बैठते हुए अपने मा की ओर सवालिया नजरो से देखा कि अब इस्से आगे क्या ??

शालिनी मन ही मन समझ रही थी कि निशा की दिलचस्पी भी इसमे अब बढ रही है । लेकिन वो कोई जल्दीबाजी नही चाहती थी ।

इधर जन्गीलाल थोड़े ही पल मे आंख खोल के बैठा और निशा को उठा कर अपने बगल मे बिठा कर उसकी तारिफ करने लगा ।

निशा अब सच मे शर्म आ रही थी कि उसके पापा इनसब के लिए उसकी तारिफ कर रहे है ।

जंगीलाल - तो मेरी लाडो को और सिखना है ।

"मेरे ख्याल से आज इतना ही रहने दिजिये " , शालिनी ने अपने पति को टोका तो उसका चेहरा उतर गया ।

जंगीलाल - अरे शालिनी अभी तो उसने कुछ भी नही सिखा ।

शालिनी ने घड़ी की ओर इशारा करके कहा- समय देख रहे है । सवा 11 बजने वाले है । सिर्फ़ यही सिखाने मे एक घन्टे से ज्यादा समय लग गया । ऐसे तो काफी रात हो जायेगी जी ।

शालिनी की बात सुन कर जन्गिलाल थोडा उखड़ा लेकिन उसकी बात भी सही थी तभी वो चहका - आइडिया !!

अपने पापा को चहकता देख निशा की थोडी हसी छुट गयी ।

शालिनी भी अपने पति का उतावलापन देख कर मुस्कराई- क्या बोलिए !!

जंगीलाल- क्यू ना हम दोनो लाडो को सेक्स करके दिखाये जिससे वो जल्दी सिख जायेगी और उसे सारी बाते अच्छे से समझ आ जायेगी ।

निशा की आंखे बड़ी हो गयी वही उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी कि उसके मम्मी पापा उसके सामने ही चुदाई करने की योजना बना रहे है ।

शालिनी अपने पति की मंशा समझ गयी थी कि वो निशा को कामोत्तेजीत करना चाह रहा था जिससे मुझे मजा करता देख उसकी भी रुचि चुदने मे बढ जाये ।

लेकिन इनसब के पहले शालिनी ने अपनी बेटी की रजामंदी लेनी बेहतर समझी ।

शालिनी निशा के सर को दुलार कर - तुझे कोई दिक्कत तो नही है ना बेटी ।

निशा बस अपने पापा के वजह से झिझक रही थी नही तो वो ऐसे मौके पर अपनी को छेड़ने से बाज नही आती । इसिलिए वो बस शर्म से नजरे निचे करके मुस्कुराने लगी ।

जंगीलाल - ओह्हो जान,,लाडो को कोई दिक्कत नही है । आखिर ये सब हम उसी के लिए कर रहे है ना

शालिनी मुस्कुराकर - ठिक है फिर । बेटा तु भी ध्यान से देखना ना मै कैसे और क्या कर रही हू ।

निशा ने मुस्कुराकर अपनी मा को देखते हुए हा मे सर हिलाया ।फिर शालिनी उठी और खड़ी हुई ।

शालिनी - अरे अब वही बैठे रहेन्गे क्या ?? उठिए

शालिनी की बात पर निशा अपने पापा का आलस देख कर खिस्स से हस दी और वही जंगीलाल अंगड़ाई लेके उठने लगा , उस्का लण्ड भी अब थोडा थोडा सर उठाने लगा था ।

फिर दोनो निशा के सामने बिस्तर की ओर बढ गये ।

जारी रहेगी
 
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अपडेट 151

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लेखक की जुबानी



कमरे का माहौल काफी रूमानी हो चुका था , हल्की मादक सिसकिया और कसमसाहट भरे संवाद हो रहे थे ।

सोफे पर पालथी मारकर बैठी निशा के हाथ उसकी गोद मे थे और नजरे अपनी मा शालिनी की कामुक अदाओ पर जमी हुई थी । जो अपने पति के सामने एक एक करके साडी के अंदर से बडी ही अदा से अपने ब्लाऊज के हुक खोले जा रही थी ।

बिस्तर पर टेक लगा कर बैठा जंगीलाल अपना लण्ड मसल कर शालिनी की मादक हरकतो को निहार रहा था । बीच बीच में वो ये भी देख रहा था कि निशा की निगाहे कहा है । जब वो ऐसा करता तो निशा खिस्खी लेके मुस्कुरा देती ।

इधर शालिनी ने बडी अदा से अपना ब्लाउज निकाला और ब्रा खोलकर साडी के अंदर ही अपने चुचे नंगी कर चुकी थी ।

फिरोजी रंग की उस हल्की पारदर्शी साडी मे शालिनी की कामुकता और निखर रही थी । वही जन्गीलाल बेताब होकर अपनी बीवी के चुचे पूरे नंगे होने का इन्तेजार कर रहा था । मगर वही शालिनी ने शरारत करते हुए अपनी साडी का पल्लू को फैलाकर अपनी चुचो को पुरा धक कर उसे कमर मे खोस लिया ।

नतिजन साडी का पल्लू शालिनी के बडे बडे चुचो पर कस गया और भूरे निप्प्लो की बारीक सी झलक साडी के उपर दिखने लगी ।

जंगीलाल लण्ड भीच कर रह गया।

अपने पति को छेड़कर शालिनी एक विजयी मुस्कराहट के साथ निशा को देखा ,मानो उसे कह रही हो कि देख ऐसे करते है मर्दो के जजबातो से खिलवाड़

निशा थोडा खिलखिलाई लेकिन अपनी मा की कामुक अदा से उस्के भी निप्प्ल्स कड़े होने लगे थे ।

शालिनी एक कदम आगे बढ़ कर घोडी बन कर बिसतर पर चढ गयी और कैटवाक करते हुए अपने पति के फैले हुए जांघो के बीच गयी और उसकी आंखो मे देखते हुए अपने कड़े जोबनो को बडी बेरहमी से साडी के उपर से मसलने लगी ।

जंगीलाल कामुकता से और विचलित हुआ । उसने हाथ आगे बढा कर शालिनी के लटके हुए चुचे साडी के उपर से थाम लिये ।

जन्गिलाल - ओह्ह जान क्या मस्त चुचिया है तेरी ,,इधर आओ ना

फिर वो शालिनी को अपने पास बुलाता ,,शालिनी भी आगे होकर अपने पति की गोद मे दोनो टाँगे फेक कर बैठ जाती है और दोनो एक गहरी लिपकिस्स मे खो जाते है । जिसे देख कर निशा अपने थुक गटकने लगती है । वो इस वक़्त बेहिसाब तडप रही थी । अपने गोद मे रखे हुए हाथो से उसने तो अपनी जांघो को हल्का हल्का घिसना भी शुरु कर दिया था ।

वही जंगीलाल अपनी पत्नी की चुचिया नंगीकर उसे बडे जोश मे मुह मे भर कर चुस रहा था और शालिनी भी सिसिकिया लेते हुए मजे से अपने पति के सर को अपने सीने मे दफन किये हुई निशा को नशीली नजरो से निहार रही थी ।

मानो उसे दिखा रही हो देख कैसे मैने तेरे पापा को पागल कर दिया । निशा बस बेबस होकर मुस्कुरा देती ।

थोडे समय बाद ही पोजीशन बदला और शालिनी इस वक़्त पूरी नंगी थी । अपनी मा के जिस्मो की सेक्सी फिगर देख कर निशा खुद को नापने लगी कि इस जवानी मे भी वो अपनी मा के आगे कुछ भी नही है ।

वही उसके पापा उसकी मा के जांघो को फैला कर उसकी चुत मे मुह लगा चुके थे ।

शालिनी तडप उठी और जोर की सिसकिया लेने लगी ।

शालिनी एक नजर निशा को देखा और उसे अपने पास आने का इशारा किया ... निशा थोडा हैरान हुई और उसने उठने से पहले एक बार अपने हाथ से अपनी बजबजाती चुत को दबाया और खड़ी हो गयी ।

वही जंगीलाल शालिनी की जांघो को अपने कन्धे पर रखे हुए बडे ही चाव से लपालप जीभ चला रहा था ।

शालिनी कभी सिस्क्ती तो कभी निशा को अपने पास आते देख मुस्कुराती और फिर उसने उसे अपने पास बैठने का इशारा किया ।

निशा वही बिस्तर के मुहाने पर पैर लटका कर बैठ गयी और उसकी नजर अपने पापा पर गयी जो अपनी जीभ को उसकी मा की चुत मे घुसासे होठो से उपर की चमडी चुबला रहे थे ।





निसा पूरी तरह गनगना गयी ,,उसकी चुत रिसना शुरु कर चुकी थी और जांघो पर चखटने लगी थी ।

निशा को खुजली सी मह्सूस हो रही थी लेकिन अगर वो वैसा कुछ करने जाती तो कही उसकी मा को शक ना हो जाये की वो भी चुदवासी हो गयी । क्योकि शालिनी की निगाहे बराबर उसपे जमी हुई थी ।

शालिनी - देखा बेटा मर्द को एक बार गर्म कर दो वो तुम्हे जी भर के प्यार करता है सीईई अह्ह्ह उम्म्ंम्ं अराआम्म्ं से मेरे राआज्ज्जाअह्ह सीई

निशा अपनी मा की बात सुन कर मुस्कुराई और बस अपने पापा को निहारे जा रही थी जो अभी अभी उसकी मा के चुत की मलाई साफ करके खडे हुए मुह पोछ रहे थे ।

जबकि शालिनी झड़ने के बाद थोडा सुसता रही थी वही जन्गीलाल का लण्ड फौलादी हुआ जा रहा था

जंगीलाल - आओ ना जान थोडा इसे चुस कर तैयार कर दो

शालिनी उठने को हुई ही थी कि उसकी नजर निशा पर गयी और वो वापस लेट गयी ।

शालिनी- आह्ह बेटा जरा तेरे पापा का लण्ड थोडा चुस दे ,,,इन्होने मेरी चुत ऐसी चाटी है कि पुरा जिस्म अकड गया है उम्म्ंम्ं

निशा को थोडी हसी आई मगर वो उठ कर अपने पापा के पास चली गयी

एक बार फिर से उसने झुक कर अपने पापा लण्ड मुह मे भर लिया ,,,इस बार उसने लण्ड को थोडा और अन्दर लेते हुए आड़ो को सहलाती रही ।

वही जन्गीलाल घुटनो के बल खड़ा होकर अह्हे भर रहा था - अह्ह्ह बेटी ओह्ह्ह उम्म्ंम क्या मस्त चुस्ती है रे तू उम्म्ंम

निशा ने गुउउग्गुऊऊ करके लण्ड को सुरुपे जा रही थी ,,वही शालिनी को डर था कही फिर निशा सारा माल गटक जाये

शालिनी अपनी जान्घे खोल कर चुत रगड़ते हुए - आह्ह जीईई आओ ना उम्म्ंम प्लीज

जंगीलाला की चेतना जगी ,,वो ना चाहते हुए भी अपनी बेटी को लण्ड मुह से निकालने को कहने लगा ।

निशा भी बडे बेमन से अपने पापा का सुपाडा सुरुकते हुए लण्ड छोड दिया और लाचार नजरो से अपने पापा को देखा ।

जन्गीलाल भी उदास होकर ही अपना लण्ड मुठियाता हुआ अपनी बीवी के चुत के पास ले गया और गच्च के लण्ड को एक बार मे आधा उसकी चुत मे उतार दिया ।

शालिनी दर्द से मचल उठी और निशा वापस अपने जगह पर मा के सिरहाने आ गयी ।

उसके पापा ने दो और करारे धक्के लगाते हुए उसकी मा चुत को चिरते हुए जड तक घुस गये ,,,वही शालिनी दर्द से छ्टप्टा उठी । वो जान रही थी आज सारा जोश और जुनून निशा के वजह से ही है । वो खुद भी इस चीज़ को इंजॉय कर रही थी ।





जंगीलाल ने ग्च्च ग्च्च धक्के लगाने शुरु किये

शालिनी मुस्कुरा कर - अह्ह्ह क्या जी आप तो लाडो को डरा रहे है ,,थोडा आराम से करिये ना

तभी जंगीलाल को भी ध्यान आया कि ये सब वो इसिलिए तो कर रहे हैं कि निशा की दिलचस्पी बढे ।

इसीलिये जन्गीलाल धीरे धीरे मादक धक्के लगाने और लण्ड को शालिनी की चुत मे न्चाने लगा

निशा अपने मम्मी पापा की कामुक बातचीत और चुदाई देख कर बहुत ही गर्म हुई जा रही थी ,,उसका तो जी चाह रहा था कि अभी सब कुछ खोल कर वो अपने पापा के निचे आ जाये और वो उसे हचक हचक के चोदे ।

शालिनी मादक सिसिकिया लेती हुई - उम्म्ंम्ं देख रही बेटी मर्दो को गर्म करने का नतिजा अह्ह्ज शादी के बाद तु भी ऐसे ही लेटी होगी और तेरा पति तुझे भी ऐसे मजे करायेगा उम्म्ंम अह्ह्ह मेरे राज्ज्जाअझ और चोदो ना उम्म्ंम्म्ं

निशा अपनी मा की बाते सुन कर काफी कामोत्तेजक हुई जा रही थी लेकिन बेबसी मे सिवाय मुस्कुराने के कुछ कर नही सकती थी ।

इधर उसके पापा ने धीरे धीरे गति बढा दी और शालिनी और ही तेज स्सिकिया लेते हुए मजे ले रही थी । वो थोडा बहुत तो जान बुझ कर ही ऐसे शब्दो का चुनाव कर रही थी कि निशा को लगे उसकी मा को चुदने मे कितना मजा आ रहा है ।

इधर जन्गीलाल भी अपनी ही बेटी के सामने चुदाई करके काफी कामोत्तेजक हुआ जा रहा था और जल्द ही वो फिर से चरम पर था

उस ने आखिरी कुछ जोरदार धक्को के साथ झड़ने के करीब आ गया था ।

उस्ने फटाक से लण्ड बाहर निकाला और शालिनी के पास जाकर उसके मुह पर लण्ड हिलाने लगा ।

शालिनी अपनी दोनो चुचिया पकड कर मुह खोले हुर जीभ बाहर निकाल ली और

"अह्ह्ह मेरी जाआअननन ओह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ब लेहह ओह्ह " , जन्गिलाल शालिनी के मुह ने झड़ते हुए आह्ह भरने लगा ।

उसने सारा माल निचोड लेने के बाद शालीनी के मुह पर अपना ढिला और लचीला लण्ड झाडा और वैसे ही घुटने बल खडे खडे ही सासे बराबर करने लगा ।

शालिनी ने सारा माल गटकने के बाद थोडा कोहनियों के बल होकर अपने पति के लण्ड को सुरक कर चाटा और वापस से लेट गयी । वही जन्गीलाल भी पास मे लेट गया ।

निसा उन दोनो को तृप्त देख कर मुस्करा रही थी और मौका पाकर उसने अपने बाई जांघो हल्के से खुजाया क्योकि उसकी चुत का रस बह कर सुखने लगा था । जिससे उसे खुजली हो रही थी ।

शालिनी ने फिर निशा की ओर करवट ली और बोली - कैसा लगा तुझे बेटी ,,, समझ आया ।

तभी जंगीलाल भी करवट लेके शालिनी को पीछे के पकडते हुए - हा बोल बेटी ।

निशा थोडा शर्म से नजरे झुका कर - हमम थोडा थोडा

जंगीलाल - कोई बात नही बेटा हम तुझे धीरे धीरे सब सिखा देंगे ,, अभी तु आराम कर ठिक है ।

निशा मुस्कुराई - जी पापा

फिर वो एक नजर अपनी मा को देखा जिसके चुचो पर उस्जे पापा का हाथ रेंग रहा था और वो अपने कपडे लेके वापस अपने कमरे मे चली गयी ।

निशा के जाते ही जंगीलाल खुशी से - ओह्हो मेरी जान आज तो कमाल ही हो गया । क्या मस्त चूसा है उसने लण्ड उह्ह्ह

शालिनी - हा हा ठिक है, लेकिन आप खुद पर काबू रखिये फुल सी बेटी है अपनी । थोडा संयम से और आराम आराम से ही उसे सिखाना है ये नही कि आप अपनी हवस मे मेरी लाडो को कुछ नुक्सान कर दे ।

जंगीलाल - हा मेरी जान मै जानता हू ,

इधर इन दोनो की बाते जारी रही निशा जल्दी से कमरे मे जाते ही अपने सारे कपडे निकाल फेके और घन्टे भर से भरी तडप को अपनी चुत रगड़ कर शांत करने लगी ।

झड़ने के बाद भी निशा को नीद नही आई और उस रात वो देर तक अपने पापा के संग चुदाई के सपने बुनते हुए दो बार और खुद को निचोड़ा और सुबह के 3 बजे के करीब वो सो गयी ।

अगली सुबह शालिनी समय के उठ कर नहा धो कर अपने कामो मे लग गयी , करीब 8 बजे जंगीलाल भी उठ कर फ्रेश होने और नहाने उपर चला गया ।

छत पर जाने के बाद उसे निशा का ध्यान आया कि शायद अभी तक वो सो रही है क्योकि आज उसके कोई भी कपडे सुख नही रहे थे ।

निशा का ख्याल आते ही जंगीलाल का लण्ड टनं होआ गया और जहन मे रात की घटनाये उभरने लगी ।

फिर वो फ्रेश होकर नहाने के लिए बाथरूम मे गया और इसी दौरान उसे मह्सूस हुआ कि पाखाने मे कोई आया है ।

जंगीलाल खुशी से झूम उठा कि शायद निशा आई हो और वो हाथ धुलने बाथरूम मे जरुर आयेगी ।

जन्गीलाल मन ही मन सुबह सुबह निशा के मुह मे अपने लण्ड घुसाने के सपने बुन रहा था लेकिन जल्द ही उसका भ्रम टुट गया क्योकि वो राहुल था ।

जंगीलाला नहाकर बाहर निकला - अरे बेटा तु आ गया

राहुल - मै तो 7बजे ही आ गया हू पापा और दुकान भी साफ कर दिया , अभी नहाने जा रहा हू

जन्गीलाल भले ही पहले निशा की जगह राहुल को देखकर चिढ़ गया था लेकिन जब राहुल ने उचित कारण बताया तो उसे अपने बेटे पर गर्व हुआ कि वो अपने कामो को महत्व देता है ।

उसके बाद जंगीलाल निचे आया और अपने कमरे मे जाके एक शर्ट डाल कर वैसे ही जान्घिये के उपर से गम्छा लपेट लिया । ये उसका रोज का था ।

तैयार होकर बाहर आया तो उसने किचन मे एक नजर मारी और वहा सिर्फ शालिनी दिखी तो वो समझ गया कि निशा अभी तक उठी नही शायद

इसिलिए वो उसको जगाने उसके कमरे मे चला गया

कमरे का दरवाजा तो बस हल्का ही भिड़का हुआ था और कमरे मे निशा सिर्फ एक टीशर्ट पहने हुए निचे से पूरी नंगी सोयी हुई थी । उसकी जान्गे खुली हुई थी और चुत की चिकनी फल्के साफ साफ दिख रही थी ।

जन्गीलाल एक बार दरवाजे से बाहर के हाल और किचन को जाचा और फिर एक नजर उपर जीने पर नजर दौडाई । फिर बड़ी सावधानी से वो कमरे मे घुस कर दरवाजा बन्द कर दिया ।

धिरे धीरे वो बेड के पास गया जहा उसकी बेटी आधी नंगी होकर अपनी चुत खोले बेसुध सो रही थी और बेड सीट पर उसके सोमरस के धब्बे साफ दिख रहे थे ।

जिस्से जंगीलाल के जहन मे कुछ सवालो का मेला लगने लगा और उसके लण्ड का तनाव बढने लगा । चेहरे पर एक शरारती मुस्कान सी छाने लगी और वो अपना लण्ड गमछे के उपर से ही भीचने लगा ।



राज की जुबानी


अगली सुबह मेरी खुली तो मुझे अपने लिंग पर एक ठंडक सी अह्सास हो रही थी

गरदन उठा कर देखा तो गीता निचे सरक कर मेरा तना हुआ लण्ड मुह मे भरी हुई थी ।

मै सिस्क कर - अह्ह्ह मीठी येह्ह्ह क्याअह्ह कर रही है

गीता - भैया ये बड़ा हो गया था तो .....हिहिहिही

मै उसकी मासूमियत पर मुस्कराया और बगल मे लेटी बबिता के माथे को चुम कर उसे उठाया तो वो वापस से कसमसा कर मुझसे लिपट गयी

मै दुबारा से उसे जगाता उस्से पहले ही दरवाजे पर दस्तक हुई और मैने गीता को देखा जो मुह मे मेरा लण्ड भरे टकटकी लगाये मुझे देख रही थी

डर हम दोनो के चेहरे पर था और मैने तो कोई कप्डे नही डाले थे ,,तभी दरवाजे पर दस्तक तेज हुई और गीता फटाक से लण्ड छोड कर खड़ी हुई ।

मैने इधर उधर नजर दौडाई और फर्श पर फेके हुए कपडे मुझे दिखे मै ध्म्म से कूद कर फर्श पर गया और अंडरवियर छोड कर डायरेक्ट लोवर और टीशर्ट डाल दी ।

वही गीता को डाट ना पडे इसिलिए मैने उसे सोने को कहा और खुद अपना अंडरवियर पैर से बिस्तर के निचे खिस्का कर दरवाजा खोलने चला गया ।

मामी - ओहो क्या खा के सोते हो तुम लोग ,,,सुबह के 8 बजने वाले है

मै हस कर - अब आप ही पता नही क्या खिलाती हो कि खा कर बडी थकान हो जाती है ....

मैने हस्ते हुए दोहरे अर्थ मे मामी से ये बात कही और मैक्सि मे कसे उनके जोबनो पर इशारा किया ।

मामी भी इतराकर मुस्कुराने लगी - धत्त बदमाश ,,,और इनको देखो अभी तक सो रही है । उठो महारानियो , नहाना धोना नही है क्या

मै मामी से धीमी आवाज मे - आपने रात वाला धुल लिया क्या ?

मामी मेरा इशारा समझ गयी और मुझे धकेल कर हस्ते हुए गीता बबिता को जगाने चली गयी ।

थोडी देर बाद हम लोग नहा धो कर फ्रेश हुए और नासता करने एकजुट हुए ।

नास्ते पर बातो ही बातो मे मामी ने बताया कि कल मामा आ रहे है ,,,ये इशारा उनका मुझे और नाना दोनो के लिए था ।

इसिलिए मैने भी बताया कि कल दोपहर बाद से मै भी रज्जो के यहा निकलूँगा।

मेरा इशारा गीता बबिता के साथ साथ मामी के लिए भी था कि सिर्फ नाना को ही समय ना दे ,मुझे भी दे दे ।

वो मुस्कुरा रही थी । नास्ते के बाद मै नाना के साथ उनके कमरे मे चला गया ।

गीता बबिता अपनी मा का हाथ बटाने लगी ।

कमरे मे

मैने एक बार नाना का मन टटोला कि क्या वो दोपहर मे गोदाम पर जाने के विचार मे है या गीता बबिता के सिलाई सेन्टर जाने के बाद मामी के साथ मस्ती करने का मूड है ।

मै हिचक कर - नाना वो हम लोग गोदाम कब चल रहे है ।

नाना मुझे देख कर मुस्कराये और बोले - लग रहा है कमला भा गयी है तुझे उम्म्ंम

मै शर्म से लाल होने लगा

नाना - लेकिन बेटा आज तो वो छुट्टी पर है

मै समझ गया कि नाना का बहाना है और वो मामी के साथ मस्ती जरुर करेंगे। मगर मेरे रहते कैसे ??

इधर हम बाते कर रहे थे कि मामी हमारे पास आई - राज बाबू थोडा मेरे साथ आईये । एक मदद करिये

नाना चहक कर - क्या बात है बहू , मुझ्से कहो

मामी मुस्कुरा कर - अरे नही बाऊजी ,,वो कल बाबू रज्जो दीदी के यहा जा रहे हैं तो सोच रही थी थोडा सा कुछ समान भेज दू इनके हाथ से । वही निकलवाना है ।

नाना समझ गये कि मेहनत वाला काम है तो ठिक है बोल कर लेट गये

फिर मै और मामी वहा से निकल कर सीधा उनके कमरे की ओर चल दिये ,,,हम दोनो ने एक नजर किचन मे मारी तो देखा दोनो बहने दोपहर के खाने की तैयारी कर रही थी ।

फिर हम कमरे मे गये और दरवाजा बंद होते ही मैने उन्हे अपनी बाहो मे कस लिया ।

बाहो मे भरते ही मुझे आभास हुआ कि मामी ने मैक्सि के निचे कुछ भी नही पहन रखा है

मामी कसमसा कर मुझसे अलग होती हुई - ओहो बाबू छोडो मुझे । मै यहा सच मे काम से आपको बुलाई हू

मै उनको पीछे से पकड कर उनके कान के पास किस्स करता हुआ - तो बताओ ना क्या करना है मुझे

मामी हस्ती हुई मुझसे छूट कर - जाओ वो स्टूल लेके आओ ,,,मुझे वहा उपर से कुछ उतारना है

मामी कमरे के एक रैक पर इशारा किया ।

फिर मै वो बड़ा स्टूल लेके उनके पास गया और खुद चढ़ने लगा ताकि जल्दी से काम निबटा कर मामी के साथ थोडी मस्ती की जा सके ।

मामी - नही नही तुम नही ,,मै चढून्गी उपर

मै हस्कर दोहरे अर्थ मे बोला - मैने कब आपको उपर चढ़ने से रोका है ,,,हिहिहिही

मामी मेरा मतलब समझ गयी और मुझे हटाकर खुद स्टूल पकड कर चढ़ने लगी - हटो बदमाश कही के !! और जरा ध्यान से पकड़ो मै गिर ना जाऊ

फिर मैने थोडा खुद को सीरियस दिखाया और सामने जाकर स्टूल को अच्छे से पकड लिया ।

स्टूल मेरी कमर के बराबर ऊचा था और मेरे नथुने मामी के चुत के महज कुछ ही इन्च उपर थी । जिसकी मादक खुस्बु मुझे बेचैन करने लगी । मानो कोई नशिलि गन्ध मेरे दिमाग मे चढ़ गयी थी । मै आंखे बन्द किये उनकी ओर झुकने लगा

तभी मामी उपर से डाट कर मुझे चेताया कि सही से पकडे रहू ।

फिर मै मुस्कुरा उठा कर स्टूल को पकडे पकडे ही निचे सरक कर बैठ गया ।

फिर धिरे से उनकी मैक्सि का निचला सिरा आगे से पकड़ा और थोडा फैलाया

अह्ह्ह क्या नजारा था

चिकनी जान्घे और फुली हुई चुत ,,फिर सपाट चर्बीदार पेट और उपर दो मोटे मोटे पपीते जैसे चुचे । जिनके निप्प्ल तने हूए थे ।





मैने मस्ती मे एक जोर की ठंडी फ़ूक मामी के मैक्सि मे मारी और वो स्टूल पर हिलने लगी ।

मै फौरन खड़ा होकर उन्हे पकड कर हसने लगा

मामी मुझे हस्ता देख कर - तुम नही मानोगे उम्म्ं

मैने अपनी गरदन उचका कर मैक्सि के उपर से उनकी चुत पर नथुने रगड़कर उन्हे देखता हुआ ना मे सर हिलाया ।

फिर वो मुस्कुरा कर जल्दी जल्दी सामान निकाली और निचे आ गयी ।

फिर उन्होने लोवर के उपर से ही मेरा लण्ड भिच्ना शुरु कर दिया और मै मस्ती मे आ गया ।

मामी मेरे चेहरे के भावो को पढती हुई - क्यू बहुत अकड रहा है ये ना ,,,रुको इसका इलाज करती हू मै

फिर मामी ने अगले ही पल अपनी मैकसी निकाल दी और पूरी नंगी होकर खड़ी हो गयी ।

मामी - अब रुके क्यू हो ,,खोलो तुम भी । करना नही है क्या

मै मामी के कसे हुए जोबनो और चर्बीदार जिस्म मे खोया हुआ अपना लण्ड मसल रहा था । मामी की आवाज सुनते हि फटाफट नंगा होकर उनके सामाने लण्ड हिलाने लगा ।

वो मुस्कुरा कर मेरे कदमो मे बैठ गयी और अगले ही पल मेरा लण्ड उनके मुह मे था ।

वो भर भर के लण्ड को गले तक ले जाने लगी और मै मस्ती मे अपनी एडिया उचकाने लगा ।

वो तो मै समय पर रोक लिया नही तो मामी मुझे निचोड ही लेती ,,,हालाकी इसके लिए उन्होने मेरे इशारे मे मजे भी लिये । मै बस मुस्कुरा कर उनके गाड़ को मस्ल्ते हुए लण्ड सहला रहा था ।

फिर मैने उन्हे बिसतर पर लिटाया और निचे झुक कर उनकी जांघो के आस पास हाथ घुमाने लगा । उनकी फुली हुई चुत से आती नशीली गन्ध मुझे पागल कर रही थी ।

मैने उनकी जांघों फैलाते हुए अपना जीभ निकालकर चुत के आस पास फिराना शुरु कर दिया ।

मामी सिसकिया लेने लगी और मैने अपने होठ उनकी चुत के होठो से जोड लिये । फिर उनकी चुसाई शुरु कर दी ।मामी सिसकिया लेते हुए अपनी जान्घे मेरे सर पर कसने लगी और मै अपनी जीभ को चुत मे घुसेड़ के चाटे जा रहा था ।

फिर मैने अपना सर हटाया और जांघो को उपर उठाते हुए गाड के भूरे सुराख पर नजर डाली,, मेरे मुह मे पानी आ गया ।

वही लार मैने अपनी जीभ पर बटोरा और एक बार मामी के गाड़ के सुराख पर फिराया वो उछल पडी ।

मैने अब उनकी जांघो को और भी मजबूती से थाम लिया और गाड़ के सुराख से चुत के निचले हिस्से पर जीभ चलाने लगा ।

मामी हर मुमकिन कोशिस कर रही थी और अपने चुतड के पाटे सख्त कर रही थी । लेकिन मैने नही छोडा

मेरे जहन मे उनकी गाड़ चोदने की चसक चढ़ चुकी थी और मै खड़ा होकर इधर उधर कमरे मे नजर मारा और टेबल पर रखी तेल की शिसी देख कर खुश हुआ ।

मै लपक कर उसे लेने गया ,,वापस मुड़ा तो मामी अपनी चुचियॉ मिजते हुए अपनी चुत सहला रही थी ।

मै - मामी घोड़ी बनो ना ,,मुझे पीछे से लेना है

मामी कसमसा कर अपनी चुत मे ऊँगली डाल कर गाड़ पटकते हुए - अह्ह्ह नही बाबू ,,पहले मेरी चुत मे डालो सीईई अह्ह्ज





मामी - बाऊजी ने पूरी रात सिर्फ़ गाड़ मे ही तो डाला,,,तरस गयी हू चुत मे लेने के लिए

मै समझ गया और मुस्कुरा कर उनके पैरो के बिच गया और एक टांग उठा कर लण्ड को सेट करते हुए सरसरा कर पुरा लण्ड एक ही बार मे उनकी चुत मे उतार दिया

मामी की आंखे फैल गयी ,,सासे अटक सी गयी

मैने देर ना करते हुए 4 5 करारे धक्के मारे और फिर कस कस चोदना शुरु कर दिया

मामी अब सामान्य हो गयी थी और चुदाई का मजा लेने लगी थी ।





मामी - सीई अह्ह्ह और तेज बेटा अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं माआह हा ऐसे ही खुब अन्दर तक घुसाओ बाबू उम्म्ंम

मै मुस्कुरा कर कस कस के उन्हे पेलने लगा और उनकी ओर झूकते हुए लण्ड को और भी गहराई मे ले जाने लगा ।

मामी झड़े जा रही थी और मेरे लण्ड को निचोड रही थी ,,लेकिन मैने तय कर रखा था कि आज बिना गाड चोदे नही छोड़ूंगा इसिलिए मैने लन्ड बाहर निकाल दिया ।

मामी कुछ पल अपनी कमर झटकती रही और मै उनके बगल के आ के बैठ गया ।

करीब 3 4 मिंट बाद मामी ने आंखे खोली और बगल मुझे लेटकर लण्ड सहलाते हुए देख कर समझ गयी कि मै नही मानूंगा

फिर उन्होने मेरे लण्ड को थामा और सहलाते हुए - बिना गाड़ चोदे नही मानोगे उम्म्ंम

मै - उम्म्ं आपकी गाड़ है ही ऐसी कि ....सीईई ओह्ह्ह उम्म्ंम

फिर मामी निचे सरक कर बैठ गयी और झुक कर पहले मेरे लण्ड को सहलाया फिर मेरे लण्ड की चमडी को सरकाते हुए लण्ड को मुह ने भर लिया ।





मै सिस्क कर रह गया ,,वो उसे सुरकने लगी , वो मेरे लण्ड के आड़ो को मसल मसल कर मेरे लण्ड को फौलादी बना रही थी और सुपाड़े को मुह मे भरे लगातार चुसे जा रही थी ।

फिर उन्होने मुह से लण्ड निकाला और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी ।

मै समझ गया कि वो कह रही है लण्ड गाड़ मे जाने के लिए तैयार हो गया है ।

फिर मैने उठ कर एक किस्स किया और उन्हे घोडी बनने का इशारा किया ।

फिर मामी बिसतर पर घोडी बन गयी ,, क्या मस्त फैली हुई चर्बीदार गाड़ थी ,,,और चुतड के पाटो पर नाना के नोच खसोट के काफी सारे निशान थे ।





पीछे से उनकी चुत और गाड़ के छेद दिख रहे थे । मैने तेल की शीशी उठाई और टिप टिप करके अपने अंदाज मे मामी के गाड़ के दरारो मे तेल रिसाना शुरु कर दिया ।

फिर एक हाथ की उंगलियो से उन्हे अच्छे से मामी के गाड़ के सुराख पर अच्छे से लगाने लगा ।

लगातार तेल गिराने से मेरे उंगलियाँ तेल से चिप्डी हुई थी इसिलिए मैने एक उन्गली को मामी के गाड़ की सुराख मे घुसेड़ दिया और अन्दर भी तेल लगाने लगा।

वही मामी के चेहरे के भाव बदल रहे थे वो मेरे उंगलियो को अपनी गाड़ मे घूमता महसूस कर रही थी और उत्तेजित हुई जा रही थी ।

फिर मैने थोडा सा तेल अपने सुपाड़े पर लगाया और लण्ड को गाड़ के मुहाने पर रख कर थोडा सा ही दबाव बनाया ,,मेरा लण्ड स्टाक से मामी की गाड़ ने खिच लिया ।

मै समझ गया नाना ने बुरी तरह से भड़ास निकाल कर मामी की गाड़ मारी है । फिर मैने उन्के कूल्हो को थामा और बिना पीछे हुए आगे की ओर लण्ड ठेलता हुआ मामी की गाड चिरता हुआ आधा अन्दर घुस गया तब जाकर मेरा लण्ड अटका

मामी सिसकी - ओह्ह बाबू आराम से इह्ह्ह उम्म्ंम्ं

मैने वापस से मामी की फैली हुई गाड़ के सुराख के उपर अंगूठे से रब किया और लण्ड बाहर की ओर खीचते हुए एक करारा धक्का मामी की गाड़ मे दिया । मेरा लण्ड मामी की गाड़ की दिवारो मे जगह बनाता हुआ जड़ मे जा घुसा ।

मामी की आंखे बाहर आ गयी

मै उनका कुल्हा थामे हुए जोरदार धक्का उनकी गाड़ मे लगाने लगा

मामी - सीई अह्ह्ह्ह उम्म्ंम ओह्ह्ह बाबूउऊ उम्म्ंम्ं क्या मस्त लण्ड है ओह्ह्ह्ह

मै मस्ती मे और तेज धक्के लगा रहा था और मामी के गाड़ पर नाना के नोच खसोट के निशान देख कर और भी उत्तेजित हो रहा था। नाना ने कितनी बेरहमी से मामी की गाड़ चोदी होगी ।

अपनी कल्पना और मामी की उतेजना भरी सिस्कियो से मेरा लण्ड मामी की गाड़ के और फुलने लगा और मैने लपक के मामी के बालो को पकड लिया

अब मामी के बाल मेरे हाथो मे थे और मैं उन्हे खीचते हुए तेज धक्के से उनकी गाड़ चोदने ल्गा





मामी दर्द और मजे सिसकिया लेने लगी ।

मै लगातार अपना लण्ड उनकी गाड़ मे चोदे जा रहा था और वो खुद झड़ रही थी और अपने चुत के साथ गाड़ का छल्ला भी सिकोड़े जा रही थी ।

जिस्से मेरे सुपाडे और लण्ड की नीचली नशो पर घर्षण तेज हो गया

मै भी झड़ने के कगार पर था और आखिर कुछ धक्को मे मामी की गाड़ मे अपना लण्ड आखिर तक घुसेड़ दिया और अन्दर ही मेरा लण्ड झटके खाने लगा ।

मामी ने अपनी गाड़ का छल्ला कस कर मेरा सारा माल निचोड लिया और हम दोनो थक कर वही लेट गये ।

जारी रहेगी
 
सभी पाठको से अनुरोध है कि अगर उनकी नजर मे कोई बढिया INCEST कहानी हो

चाहे complete या running

Inbox मे suggest करे । प्लीज
 
अगला अपडेट बस कुछ ही समय मे मिलेगा
 
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