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इधर रागिनी और ममता हसीं ठिठौली करती हुई कमरे से बाहर निकली और गलियारे में आते आते ममता हस्ती हुई बाथरूम की ओर मुंह करके - अरे नंद रानी नहाने बैठ गई क्या , जरा जल्दी आओ दोपहर के खाने के समय हो रहा है भई हिहिहिही
रागिनी - मुझे लग रहा है ननदो समधन को हमारी बातों से प्रेसर ज्यादा ही आ गया हाहाहा आराम से आना दीदी हिहिही
वही बाथरूम में एक दूसरे से चिपक कर खड़े हुए जंगी और संगीता मुस्कुरा रहे थे मगर जंगी की फटी पड़ी थी कि ये लोग बाहर जाएंगी तो कही उसका भेद न खुल जाए तो वो संगीता को कैसे भी करके अलग किया और बाथरूम से निकलता हुआ - मुझे लग रहा है हमे बाहर चलना चाहिए, नही तो बात बिगड़ जाएगी
ममता ने हद कर दी और बाथरूम का दरवाजा बजाने लगी - अरे क्या कर रही हो
कामाग्नि में जलती संगीता गुस्से से बड़बड़ाती अपनी भौजाई को मन ही मन गरियाती हुई मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ बाहर आई और तीनो एक साथ हाल में जाने लगी , संगीता जैसे ही जीने के पास पहुंची तो वो जीने के और घूम गई ये बोल कर कि वो अपने कमरे से आ रही है
वही ममता रागिनी हाल से सबको किचन से लगे डायनिंग टेबल पर बैठने का बोलते हुए ममता - अरे दूसरे भाई साहब कहा चले गए
मुरारी उठ कर - अरे भाई वो पीछे बाथरूम में गए है , लग रहा है पकोड़े पचे नही हाहाहाहा
रंगी हंसता हुआ - उसका तो बचपन से ही ऐसा है बाथरूम में लंबा समय लेता है हाहाहह्ह
मुरारी - भाई लेकिन मुझसे और रुका जायेगा , अमन को ऊपर भेज दिया है सबको बुलाने के लिए तुम खाना निकालो , आओ भाई साहब तबतक बैठते है
रंगी हसता हुआ - जी चलिए
वही जंगी लाल अपना खड़ा लंड किसी तरह सेट करता हुआ बात पोंछता हाल की ओर आ रहा था कि जीने पर छिपी संगीता ने उसको लपक कर अपनी ओर खींच लिया
जंगी एकदम से हड़बड़ा गया और डर से हलकाता हुआ - येह्ह्ह क्क्याआ कर रही है आप रुकिए , सब बाहर ही है , गजब हो जाएगा
संगीता को चुदाई का सुरूर चढ़ा था और वो सीधा अपना पंजा जंगी के पेंट में उठे हुए तंबू पर जमाती हुई उसको मसलती हुई उसके चेहरे को अपनी ओर खींचती हुई अपने लिप्स उसके करीब ले जाकर - मुझसे नही रहा जा रहा है भाई साहब उम्मम्म ना जाने कब ये मौका मिले
जंगी का खूंटा संगीता की कामोतेक हरकत से ठुमके खाने लगा और उसके मुंह से आती गर्म सास उसको भीतर से सिहरा दे रही थी और जंगी से रहा नही गया उसने संगीता के लिप्स अपने होठों से जोड़ लिए , जैसे ही उसके लार की मिठास का स्वाद जंगी ने चखा उसके भीतर से वासना का एक झोंका सा उठा और उसने संगीता को अपनी ओर खींचते हुए उसके लिप्स चूसने लगा

उसके पंजे साड़ी के ऊपर से उसके विशाल चूतड़ों को मसलने लगे ।।
दोनो को एक दूसरे की नथुनों से सासो की गर्मी मिल रही थी और नीचे संगीता जंगी का खूंटा पेंट के ऊपर से मसले जा रही थी ।
वो जल्दी जल्दी उसका पेंट खोल कर उसका मोटा बीयर की कैन सा लंबा मोटा लंड निकाल कर उसको मसलने लगी , एक अजीब सी हसीं या फिर कहे जंगी के मोटे लंड की दीवानगी सी झलक रही थी संगीता के चेहरे पर और झट से वही जीने के पास ही बैठ जंगी का मोटा लंड मुंह में भर ली और चूसने लगी

जंगी तो मानो हवा में उड़ने लगा उसकी आंखे संगीता की जबरजस्त चुसाई से उल्टने लगी वो किचन की ओर गरदन फेर कर वहा का जायजा ले रहा था और वही नीचे बैठी संगीता उसका लंड घोटे जा रही थी
वही अमन जैसे ही ऊपर पहुंचा तो देखा कि कमरे में तो सिर्फ सोनल और निशा ही थे , और अमन को देखते ही निशा के दिल के जज्बात उड़ान भरने लगे , उसके इरादे उसकी आंखे जाहिर करने लगी ,
अमन - अरे बाकी सब कहा है
निशा उठी और उसको पकड़ कर बिस्तर तक लाती हुई - अरे जीजू सबकी छोड़ो इधर आओ , आप को तो फिकर ही नही है कि आपकी सेक्सी साली आई है हिहिहिही
अमन कुछ झिझकता तो कुछ सोनल से नज़रे चुराता हुआ मुस्कुराता हुआ निशा के पास गया और निशा उसको पकाने लगी - हम्मम फिर बताइए कैसा था हमारा सुहागरात वाला सरप्राईज उम्मम्म
सोनल को भी थोड़ी शर्म आ रही थी एक असहजता थी उसके भी मन अमन के जैसे मगर निशा एकदम फुल ऑन मूड में थी मस्ती के ।
सोनल - क्या कर रही है निशा , क्या वो सब बातें दोहरा रही है ।
निशा ठहाका लगाती हुई - अरे क्यू ना दुहराऊ हिहीही मेरे जीजू तो अपने खास पल में अपनी मनपसंद चीज के लिए तरस गए थे , कितना दुख हुआ था मुझे
सोनल - अच्छा जी , चुप कर अब जा नीचे
अमन हंसता हुआ - दरअसल सोनल , पापा ने बहु को आने को कहा है
निशा - हा तो फिर चलो चलो कमरा खाली करो हिहिहिही
निशा सोनल को ठकेलती हुई कमरे से बाहर ले जाने लगी - अरेह्ह क्या कर रही है
निशा - नही तुम जाओ जाओ , मुझे जीजू से कुछ बातें करनी है
सोनल ने उसको आंखे दिखाई तो निशा उसको आंख मारती हुई - अरे खा नही जाऊंगी जीजू को , ऐसे घूर रही हो अब जाओ
और फिर निशा ने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया , बाहर खड़ी सोनल जानती थी कि निशा जरूर अमन के साथ कुछ कांड करेगी मगर उसे डर था यहा कोई आ ना जाए , उसकी बेचैनी और बढ़ने लगी ।
वो एक दो बार दरवाजा हल्के हाथों से थपठपाती है ताकि आवाज ज्यादा ना हो मगर न ही निशा और न ही अमन दरवाजा खोलने के मूड में थे
जबकि अमन ने लपक कर निशा को अपनी बाहों में भरते हुए उसके गुदाज चूतड सूट के ऊपर से हाथ में भरते हुए उसके लिप्स चूसने लगा और निशा भी अपने हाथ उसके लंड पर लगा कर उसको मसलने लगी
अमन - उम्मम्म मेरी सेक्सी साली जी , हनीमून के लिए तैयार हो
निशा - इतने बड़े हथियार वाले जीजू के साथ कौन नहीं मनाना चाहेगा हनीमून अह्ह्ह्ह खोलो ना इसे उम्मम्म देखे तो कैसा है

ओह माई गॉड कितना बड़ा और प्यारा है जीजू उह्ह्ह्ह जी कर रहा है इसको खा जाऊं " , निशा अमन का बाहर निकला हुआ मोटा लंड देखते हुए बोली ।
अमन हसता हुआ - नही नही खाना मत कही दीदी तुम्हारी गुस्सा गई तो हाहाहहा
निशा आंखे फाड़े अमन का लंड पकड़ती हुई नीचे बैठ गई और लंड को चूमती हुई उसको मुंह में भर कर चूसने लगी

और देखते ही देखते दोनो की कामुक सिसकियां सोनल के कानो में पड़ी जिसे समझती देर नहीं लगी - साली कुतीया ने जीभ चलाना शुरू कर दिया मेरे माल पर , अह्ह्ह्ह मुझे भी बुला लेती कामिनी , खोल ना
अमन और निशा जरा भी दरवाजे की ओर ध्यान नहीं दिया और बीच कमरे में अपने काम क्रीड़ा में लगे रहे और निशा अमन का मोटा लंड गले तक घोंट रही थी ।
सोनल परेशान होकर खीझ कर नीचे जाने के लिए गलियारे से होती हुई जीने की ओर बढ़ रही थी , उसका दिमाग उलझा हुआ था और खुन्नस से भरा था , आस पास हो रही हल्की फुल्की आवाजों का उसपे जरा भी असर नहीं हुआ और वो जीने की घुमावदार सीढ़ियों से होकर जैसे ही चार सीढ़ी नीचे आई की उसकी नजर नीचे जीने की आखिर सीढ़ियों पर चल रही जांगीलाल और संगीता की कामलीला देखते ही उसका हाथ पाव सुन्न पड़ गए , एकदम से उसके शरीर अंग अंग एक भय और आश्चर्य से कांपने लगा , मुंह पर हाथ रख पर वो पीछे की तरफ अपने पैर चढ़ाते हुए नीचे देखने लगी

जहा उसका अपना सगा चाचा उसके ससुराल में उसके पति की सगी बुआ को सीढ़ियों पर झुकाए हुए पीछे से साड़ी उठा कर सटासट लंड उसकी चूत में उतार रहा था और संगीता मजे से मुस्कुराती हुई सिसकियां ले रही थी । सोनल का गला सूखने लगा , उसे समझ नही आ रहा था कि कैसे वो लोग बिना डरे नीचे ही चालू हो और सबसे बड़ी बात इनका अफेयर कब हुआ
सोनल की हालत डर के मारे खराब हो रही थी उसे समझ नही आया कि अभी अमन को ऊपर आए 10 mint नही हुए और ये लोग कब
सोच में डूबी हुई सोनल के पैर लगातार पीछे हो रहे थे और वो पीछे हल्का सा लड़खडाई तो हाथ बढ़ा कर उसके दुलारी के कमरे के दरवाजे का पर्दा खींच कर पकड़ लिया और खुद को सहारा देते हुए उठ ही रही थी कि उसके कानो में एक और कामुक और महीन सिसकी सुनाई दी जो दुलारी के कमरे में से आ रही थी । सोनल ही हालत और खराब हो गई - यार ये सब हो क्या रहा है , दुलारी भाभी के कमरे में कौन हो सकता है और वो कुछ देर कान लगाए रही
वही दरवाजे के दूसरी ओर

अनुज दुलारी भाभी की जांघें उठाए उनकी बुर में उंगलियां पेलता हुआ चूत के दाने को चूबला रहा था - उह्ह्ह्ह मेरे हीरो तुम तो पक्के खिलाड़ी निकले , आह्ह्ह्ह्ह्ह क्याआआ मस्त चूसते हो उह्ह्ह्ह्ह् और खा जाओ मेरी चूत उम्मम्मम सीईईई अअह्ह्ह्ह फक्क्क उह्ह्ह्ह मममीईईईईईई आआआह्ह्ह्ह सीईईई
अनुज ने देर न करते हुए खड़ा हुआ और अपना लौड़ा दुलारी के चूत लगाता हुआ हचाक से आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में घुसाता चला गया और दुलारीईई की तेज सिसकी कमरे में फेल गई जिसकी फ्रीक्वेनसी दरबाजे पर कान लगाए खड़ी सोनल के कानो में गई और उसे पक्का यकीन हो गया कि भीतर कमरे में दुलारी की चूत कोई बजा रहा है मागे कौन?

वही कमरे में अनुज सटासट दुलारी की जांघें उठाए उसकी चूत में लंड पेले जा रहा था दोनो कामुक सिसकियां ले रहे थे और सोनल ने गर्दन फेर कर जीने की ओर फिर बढ़ी कि आगे का क्या नजारा है और वहा का नजारा सच में बदला हुआ था , जंगी संगीता को खड़े किए हुए पीछे से उसकी चूत में लंड पेले जा रहा था और संगीता किचन की ओर झांकती हुई मुंह पर हाथ रख कर अपनी सिसकियां निगलती हुई जंगी का मोटा लंड अपनी चूत की जड़ो में ले रही थी

जंगी पूरे जोश में सटासट संगीता की चूत मारे जा रहा था और बेटी के ससुराल में सबके सामने छिप कर संगीता जैसा कसा हुआ माल पेलने का जुनून उसे चरम पर ले जाया और आखिर 10 झटको के साथ ही वो संगीता की बुर में झड़ लगा , जिसके छींटे संगीता अपनी बच्चेदानी में महसूस कर रही थी और उसकी गर्मी ने संगीता की बुर की मलाई भी पिघलने लगी और जंगी ने अपना रस से सराबोर लंड बाहर खींचा और उसके लंड से संगीता की चूत के रस में सना हुआ था

और सोनल ऊपर से अपने चाचा का कड़क चमकता लंड देख कर थूक गटकने लगी ।
तभी बगल में दुलारी के कमरे से उसकी तेज लगातार सिसकियां आने लगी

भीतर कमरे में दुलारी अनुज के लंड पर स्वार हो चुकी थी और अपनी चूत को उसके लंड पर मथनी की तरह मथे जा रही थी , अनुज का लंड उतना ही उसकी बुर के जड़ो में फूलता जा रहा था
वही बाहर सोनल की हालत खराब होने लगी ये सोच कर कही नीचे से संगीता ऊपर न आ जाए इससे पहले वो कमरे में भाग जाना चाहती थी
वो दौड़ती हुई अपने कमरे के दरवाजे पर पहुंची और दरवाजा बजाने लगी , मगर निशा नही मानने वाली थी वो तो अमन को लिटा कर उसका मोटा मूसल अपनी चूत के मुहाने पर लगाती हुई चूत में घुसाती चली गई,

जैसे जैसे उसकी चूत की दिवारे फेल रही थी निशा की आंखे भी बड़ी हो रही थी उसका मुंह दर्द और मजे से खुलता जा रहा था और देखते देखते ही वो अमन का 3/4 लंड चूत में भर ली और उछलने लगी उसकी मादक दर्द भरी सिसकियां सोनल के कानो तक आने लगी , जिसे सुनते ही सोनल समझ गई कि भीतर भी मामला शुरू हो गया है और सोनल की हालत खराब होने लगी, उसे डर था कि कही संगीता बुआ ऊपर आ गई और उसे बाहर देख लिया तो गजब हो गया और वो थोड़ा तेज और हदबड़ी में दरवाजे पर हाथ से खट खताने लगी । मगर निशा को अभी तक कोई फर्क नहीं नजर आ रहा था वो बिना रुके अपनी गाड़ उछाल उछाल कर लंड को बुर में भर रही थी - अअह्ह्ह्ह जीजू कितना मजा रहा है आह्ह्ह् लग रहा है मैं झूले पर हूं उह्ह्ह्ह फक्कक मी जीजू येसेस्स येस्सस हार्ड उह्ह्ह्ह्ह उम्म्म मम्माआ ओह्ह्ह्

कमरे से निकलती सिसकियां सोनल की दिल का डर और बढ़ा रही थी जिससे वो लगातार निशा को हल्की आवाज देती हुई दरवाजा थपथपा रही थी जिसकी गूंज अनुज और दुलारी ने अपने कमरे में पाई और अनुज को लगा बाहर कोई है इसीलिए वो तेजी ने दुलारी का कुल्हा पकड़ कर नीचे से सटासट पेलने लगा - उह्ह्ह्ह्ह्ह भाभीई लग रहा है कोई आया है बाहर आवाज दे रहा है
दुलारी - तुम मत रुकना प्लीज आआआह्ह्ह्ह्ह निकाल रहा है मेरा फकक्क्क्क मीईईईई उह्ह्ह्ह येसस्स बाबू अअह्ह्ह्ह्ह आ रहा है आआह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह ओह गॉड उह्ह्ह्ह

अगले ही पल अनुज भी उसको हटाया - सजाओ भाबी उह्ह्ह्ह आ रहा है मेरा भी आआह्ह्ह्ह्ह जल्दी अह्ह्ह्ह्ह्ह
अनुज उठ कर सीधा दुलारी का सर पकड़ कर उसके मुंह पर लंड हिलाते हुए झड़ने लगा
वही सोनल के लगातार हाथ पिटने से निशा खीझ कर अमन के लंड से उठी और फटाफट अपना सलवार चढ़ती हुई दरवाजा खोला
सामने देखा तो सोनल की हालत बुरी है - क्या हुआ क्या बात है
सोनल ने कमरे में झांक कर देखा तो अमन पेंट पहन रहा था
सोनल इशारे से - हो गया क्या ?
निशा मुंह बनाती हुई - तुझे ही जल्दी थी हुह , अब बोल बात क्या है
सोनल कुछ बोलती कि तबतक अमन भी उनके पास आ गया - अरे चलो सब राह देख रहे है भाई , मां ने आवाज दी सबको तो भागी भागी आई
अमन हसता हुआ - किसकी मां ने मेरी या तुम्हारी हाहाहहहा
सोनल चिढ़ती हुई - सासू मां ने बुलाया है , किसी मां ने ? हूंह
निशा अमन को आंख मारती है और सोनल को लेकर हस्ती हुई नीचे चली जाती है और थोड़ी देर में ही अमन और दुलारी कपड़े पहन कर बाहर आते है - लग रहा है सब नीचे चले गए है
अनुज - तो हम लोग भी चलते है
दुलारी मुस्कुरा अनुज के करीब आई - बस एक मिनट , हा अब ठीक है हिहिहिही
अनुज गर्दन के पास हाथ घुमाता है जहा अभी अभी दुलारी ने हाथ लगाया था - क्या हुआ क्या था
दुलारी हस्ती हुई - लिपस्टिक
अनुज मुस्कुराता हुआ दुलारी के साथ नीचे जाने लगता है
वही इनसब से उलट राज जबसे रिंकी के कमरे में दाखिल हुआ था , उसकी नजर रिंकी के कोमल गुलाबी देह पर अटकी थी , रिंकी की मादकता भरी महीन सिसकियां और अपनी गुलाबी चूत को सहलाते हुए अनुज को गुनगुनाते उसके पतले मुलायम होठ
जिसे देख राज अवाक भी था और वासना का सुरूर भी चढ़ रहा था । ये अनुज की दूसरी गर्लफ्रेंड थी जिसको वो ऐसी अवस्था में निहार पा रहा था , उसको फिर वही उलझन हो रही थी जिसके लिए उसने चोदमपुर से आई पल्लवी को छोड़ दिया और जिसका मलाल उसे आज तक था ।
रिंकी जैसी गर्म और रसाल लड़की जिसने अभी अभी जवानी के पंखों को फड़फड़ाया सीखा था , उसे वासना के ऊची उड़ान की कहा ही अनुभव था जो राज अब तक पा चुका था ।
अपना लंड मसलता हुआ राज रिंकी को निहारे का रहा था
कि रिंकी की गर्दन सिसकियां लेते हुए अपने बेड के पास के पिलर पर गई जिसकी आड में राज बंद कमरे में छिपकर उसे निहार रहा था ,

लालच और गहरी वासना से लिपट उसकी आंखे देखते ही रिंकी ने झट से एक चादर से अपना जिस्म ढक लिया और कांपते हुए स्वर में राज से - आ आप यहां कैसे ?
राज मुस्कुराकर - वो मैं नीचे जा रहा था और मेरी नजर खुले दरवाजे से आप पर गई
रिंकी लाज और झेप से आंखे बंद कर खुद को कोसती हुई कि अनुज को भी मन ही मन गालियां दे रही थी ।
रिंकी - किसी और ने तो नही देखा न
राज मुस्कुराता हुआ रिंकी के पास बिस्तर पर बैठता हुआ - जी नहीं नही , मैं फौरन दरवाजा लगा दिया
रिंकी मुस्कुरा कर लाजाती हुई - प्लीज आप ये सब भाभी (सोनल) से मत कहिएगा
राज - नही बिलकुल नहीं , मगर वो आप अनुज का नाम ?
रिंकी के चेहरे अब शर्म से और भी गुलाबी होने लगा तो राज मुस्कुरा कर - तो क्या आप दोनो एक दूसरे से प्यार करते हो
रिंकी चौक कर - क्या ? नही वो बस हम लोग।
राज मुस्कुरा कर - हम्म्म समझ गया , तो इसमें इतना झिझक क्यू , मुझे भी अपनी पसंद के लोगो के बारे में सोच कर ये सब करना अच्छा लगता है । कॉलेज की क्रस के बारे में सोच कर तो मैं हिहिहिही समझ रही है ना
रिंकी का कलेजा भीतर से कांप रहा था कि अब तक वो कैसे राज के आगे इतनी देर तक खुद को बिना कपड़े के बैठे हुए और वही राज बिना उसे कुछ ब्लैकमेल किए उसके साथ बहुत प्यार से पेश आ रहा था जैसे उसे इससे कोई खास फर्क ही नहीं पड़ रहा हो ।
राज का संयम और उसकी बातें रिंकी को भीतर से उसकी ओर आकर्षित किए जा रहा था
राज ने गौर किया कि वो उसे ही निहार रही थी और चादर के नीचे कुछ तो हरकत हो रही है तो उसने हौले से रिंकी के आगे से चादर हटाया

तो देखा रिंकी की उंगलियां उसकी चूत के गुलाबी रस से लिभड़ी फाकों को मीज रही थी और रिंकी के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी
राज थूक गटक कर रिंकी की हिम्मत और उसकी काम के आवेग को देख कर जोश से भर गया और उसका लंड पूरा अकड़ गया ।
राज अपना पेंट खोलता हुआ - मैं भी आपका साथ दूं
रिंकी मुस्कुरा कर उसकी आंखो मे निहारती हुई चूत मसल रही थी - आप किसको सोचेंगे
राज मुस्कुरा और रिंकी की चूत को देखता हुआ अपना लंड सहलाने लगा - आपके रहते किसी को सोचने की क्या जरूरत
राज के ये शब्द रिंकी के भीतर काम का तूफान उमड़ा दिया उसकी चूत बजबजा उठी और उसने लपक कर राज का मोटा तपता लंड हाथ में पकड़ लिया । जिसकी तपिस अभी से रिंकी अपनी बुर के दरखतो में महसूस करने लगी थी - सच में इतनी पसंद हू मै आपको उह्ह्ह्ह कितना गर्म है अहह्ह्ह्ह्ह

राज रिंकी के कोमल गोरे हाथों का स्पर्श पाकर सिहर उठा उसका लंड और कसने लगा रिंकी की मुठ्ठी में - अह्ह्ह्ह्ह अपने आप को कम मत जानो , जो भी आपकी इन गुलाबी पंखुडियों का रस पिएगा वो बहुत भाग्यशाली होगा
राज की कामुकता से भरी बातें रिंकी को एक अलग ही रोमांच पर ले जा रही थी , आज तक किसी ने उससे ऐसी लुभावनी बातें नही कि थी जो उसकी कामाग्नी को भड़का दे।
वो राज का लंड मसलती हुई अपनी बुर को दुलारती हुई हिम्मत कर बोल ही पड़ी - आप पियोगे
राज चौका और मुस्कुरा कर - क्या बोली फिर से कहिए न अअह्ह्ह्ह
रिंकी शर्मा कर मगर काम के नशे में तैरती हुई - आप पीना चाहोगे मेरे गुलाबी पंखुड़ियों का रस
राज की टांगे एकदम से सीधी हो गई और उसके जिस्म ने एक जोर की अंगड़ाई ली और देखते ही देखते वो रिंकी जांघो के बीच पहुंच गया ।
सफेद गाढ़ी मलाई से लिभड़ी उसकी चूत रगड़ने से और भी गुलाबी हो गई थी , उसके बुर के दाने पर अजीब सी सफेदी नजर आ रही थी शायद वहा उसके चूत का और वहा से उठती आंच और मादक गंध को अपने चेहरे नाक पर महसूस कर रहा था
राज ने नथुने होठ और उनसे उठती गर्म सांसे अपनी चूत के मुहाने पर पाकर रिंकी भीतर से राज के अगले कदम के लिए बहुत ही उत्तेजित हुई जा रही थी और जैसे ही राज ने उसकी फाकों पर अपनी जीभ फिराई , रिंकी का पूरा जिस्म अकड़ सा गया मानो ,
राज उसके जिस्म में होती हरकत से उसकी जांघ को पकड़ कर उसके बुर के गुलाबी फाकों को मुंह में लेके चुबलाने लगा रिंकी की हालत और खराब होने लगी , जिस तरह से राज उसके बाहर निकले बुर के छिलकों पर दांत लगा कर चूस रहा था मानो ऐसे दशहरी आमों की कल्लियां काट कर चूस रहा हो
रिंकी उसके सर पकड़ कर अकड़ रही थी उसके पैर झटके खा रहे थे गाड़ हवा में उठ गिर रहे थे और अगले ही पल राज ने अपनी उंगली उसकी बुर में पेल दी , रिंकी की आंखे फेल गई वो हवा में दोनो पैर उठा कर हाफ रही थी

क्योंकि राज की जीभ लगातार उसके बुर के दाने पर रेंग रही थी और नीचे से राज की उंगली उसकी चूत का g-स्पॉट खुरुच रही थी , भलभला कर रिंकी की बुर रस छोड़ने लगी तो राज ने मुंह लगा दिया
रिंकी पागल सी होने लगी उसकी दबी हुई कुनमुनाती गर्म मादक सिसकियां कमरे में गूंज रही थी और राज का सर अपनी चूत में घुसा रही थी - उह्ह्ह्ह मममाआ ओहह्ह गॉड फक्क़ मीईई प्लीज अअह्ह्ह्ह येस्सस्स
राज ने सर उठा कर मुस्कुरा कर उसकी ओर देखा और रिंकी शर्मा कर मुस्कुराने लगी
राज उठ कर बैठ गया और पेंट निकाल दिया , रिंकी उसका लंड सहलाती हुई बिना रुके उसका लंड मुंह में भर कर चूसने लगी , राज उसके सर को पकड़े लंड की ओर ठेल रहा था - आआआआअह्ह कितना मस्त चूसते हो जी आप उह्ह्ह्ह खा जाओ उह्ह्ह्ह और लोह्ह्ह ऐसे ही अअह्ह्ह्ह्ह

देखते ही देखते रिंकी राज का लंड गले तक घोटने लगी और राज उसकी लटकती चूचियां मिजता हुआ उसके नंगे गाड़ को सहलाने लगा ।
उसकी गोरी चिकनी गुलाबी गाड़ की सुराख को रगड़ते हुए उसने उसे अपनी ओर खींचा और घोड़ी बनाते उसकी चूत पर लार से उंगली घुमाने लगा , रिंकी आंखे उलटने लगी जब राज ने नीचे से अपना सुपाड़ा उसके फाकों पर रगडा और राज नेनिशाना साधा फिर हाचाक से लंड उसकी चूत में उतार दिया

राज के लंड की मोटाई के जैसे ही रिंकी को चूत की दीवारों को खोला तो उसका मुंह भी खुला का खुला रह गया , राज का गर्म रॉड सा लंड उसकी चूत की भीतरी दीवारों को छीलता हुआ अंदर चला जा रहा था और रिंकी मस्ती में झूमने लगी थी - ओह्ह् गॉड ओह्ह्ह्ह् गॉड टू बिग उह्ह्ह्ह फक मीईई प्लीज उह्ह्ह्ह्ह येसेस्स्स और फास्ट उम्मम्म
राज भी जोश में उसकी चूत में सटासट लंड पेलने लगा - क्या मस्त बुर है आपकी उह्ह्ह्ह, गर्म रसीला और भरा हुआ उह्ह्ह्ह लग रहा है सब जल जाएगा आआआआअह्ह्ह
रिंकी उम्मम्म आपका डिक भी बहुत हार्ड है उम्मम्म येसस्स्स आआआह्ह्हह मम्माआआ उह्ह्ह्ह फक्कक मीई लाइक दैट उह्ह् गॉड यासस्सस फक फक फक उम्मम्म्म फास्ट फास्ट
राज उसकी अंग्रेजी शब्दों से एकदम मस्ती में झूम उठा - जैसे किसी अंग्रेज पोर्नस्टार को पेल रहा हो

जल्द ही पोजिशन बदला और रिंकी की टांगे उठा कर राज उसकी बुर में पेलने लगा , सामने से रिंकी उसकी आंखो में देख कर उसे और भी कामोतेजीत किए जा रही थी
राज मुस्कुरा कर - क्या देख रही हो ?
रिंकी उसके करारे झटके सहती हुई सिसकियां लेती हुई मुस्कुरा कर न में सर हिलाया
राज उसकी और करीब खींच कर उसके बगल में लेट गया और उससे सट कर बगल से सटासट उसकी बुर में लंड घुसाने लगा , अब रिंकी की चूत की चमड़ी खिंचने लगी और सुपाड़े का सीधा उसके चूत के दाने के नीचे ठोकर मारने लगा जिससे रिंकी एकदम से पागल होने लगी .
राज - बोलो ना क्या बात है ? मजा नही रहा है
रिंकी हाफती हुई - उह्ह्ह्ह बहुत a रहा है उह्ह्ह्ह तुम्हारा तरीका बहुत अलग है अअह्ह्ह्ह्ह
राज मुस्कुरा कर उसकी मौसमी सी चूचियां मसलता हुआ - किस्से अनुज से
रिंकी लजाई - उम्म्म नही भक्क्क्क वो सब नही बोलो ना प्लीज
राज - क्यू अभी जब उसका लंड हचक के ले रही थी तब नही आई शर्म उह्ह्ह्ह और मुझसे लजा रही हो
रिंकी के पैर फड़फड़ा रहे थे वो राज के लंड पर झड़ रही थी
राज पूरी ताकत से लगातार उसकी चूत में लंड दे रहा था - देखो तो कैसे उसका नाम सुनते ही झड़ने लगी उह्ह्ह्ह कितना गर्म है अअह्ह्ह्हह् निकाल जाएगा मेरा भी

अअह्ह्ह्ह फक्क्कक बहिनचोद आ रहा है उह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह एलो ओहह्ह्ह सीईईईईईआई अअह्ह्ह्ह्ह ममीइइ
राज अपना लंड निकाल कर रिंकी की चूत पर झाड़ने लगा और रिंकी राज का गर्म माल पाकर खुश हो गई ।
उसने घूमकर राज के लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिए - तुम्हारा कोई जवाब नही , उसका भी । तुम दोनो जबरजस्त हो हिहिहिही
राज - तो एक बार और हो जाए
रिंकी - उम्म्म अभी नही , बाहर हलचल हो रही थी किसी का दरवाजा खटखटाया जा रहा था , हम लोग भी निकलते है
राज को भी रिंकी की बाते सही लगी और वो कपड़े पहन कर बाहर निकल आया
इधर जैसे दुलारी और अनुज जैसे ही साथ में नीचे उतरे तो वहा मौजूद लोगो मे सबसे ज्यादा कोई शॉक्ड था तो सोनल थी ।
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका छोटा भाई जो बेहद शर्मिला और दब्बू सा है , वो दुलारी भाभी के साथ कमरे में था ।
कुछ ही मिनट में सारे लोग एकजुट हो गए और खाने के लिए एक साथ बैठ गए ।
खाना पीना हुआ हसीं ठिठौली का दौर देर तक चलता रहा , इधर मुरारी लगातार रंगी को आज रुकने के लिए मना रहा था , तो ममता ने भी किचन रागिनी से पहल की - रूक जाइए न दीदी प्लीज
रागिनी हस्ती हुई - मैं रुक जाऊंगी लेकिन शर्त वही रहेगी हिहिहिही
रागिनी के मजाक पर ममता को याद आया कि रागिनी ने उसकी पैंटी मांगी थी अभी तो वो हंसते हुए बोली - अच्छा ठीक है ले लेना , लेकिन वीडियो भी चाहिए
रागिनी - अरे ऐसे कैसे भाई , एक चीज पर एक सौदा, दूसरी के लिए दूसरी चीज लगेगी
ममता हस कर - अब क्या ? दो लेकर जाएंगी क्या ?
रांगिनी - उहु, ऊपर नीचे का दोनो हिहिहि
ममता लाज से - धत्त आप बहुत गंदी हो छीईई
रागिनी - में तो कल लेके जाऊंगी दोनो , और आज रात समधी जी का बिस्तर भी मेरा हिहीहि
ममता हस्ती हुई - बिस्तर ही क्यों , समधी जी को भी लेके सो जाना मैं एतराज नहीं करूंगी हिहिहिही
रागिनी - अरे मेरी बहना बाते गोल गोल न घुमाओ , सीधे सीधे बोलो ना अपने दीवाने उस कच्छी सूंघवा समधी के साथ सोना है
ममता शर्मा कर - धत्त दीदी चुप करो मैं नहीं जीत सकती आपसे , कैसे बोल लेती है आप
रागिनी - आज रात सारे गुर सीखा दूंगी ठीक है ना
ममता उसकी बातो पर हसने लगी
इधर ममता ने रागिनी की हामी भर ली थी तो रंगी भी मना नही पाया ।
रंगी - अच्छा ठीक है भाईसाहब आज रात रुक के जाएंगे फिर मदन भाई से मुलाकात भी नही हुई है लेकिन ?
मुरारी - क्या हुआ भाई साहब
रंगी - दरअसल घर पर सिर्फ औरतें है तो बच्चो को घर जाने देते है और जंगी भी कह रहा था कि निशा की मां बीमार है तो वो भी जायेगा
मुरारी - अरे सारे लोग चले ही जा रहे है
रंगी - अरे हम लोग है ना , और सोनल की मां के रहते लगेगा ही नही कि घर में बच्चे नही है हाआआहाहह
रागिनी बुदबुदाई - अच्छा जी , घर चलो बताती हूं।
रागिनी की आंखे और उसका झूठा गुस्सा सब लोगो ने पढ़ लिया और हाल में ठहाके लगते रहे देर तक ।
इधर अपने पापा के कहने पर राज और अनुज को घर के लिए जाना पड़ा दोनो भाई उदास मन से गए , तो जंगी निशा को लेकर अपने घर निकाल गया ।
वही मुरारी ने रंगी को गेस्ट रूम में आराम करने के लिए कह दिया और ममता रागिनी को अपने कमरे में ले गई , घर की बाकी औरते काम निपटा कर आराम करने चली गई।
मुरारी और रंगी की गेस्ट में देर तक बातें हो रही थी कि शाम 3 बजे के करीब मुरारी का मोबाइल बजा । फ़ोन देख कर मुरारी असहज हुआ और समझ गया कि ये काल किस लिए आ रहा है
फिर वो रंगी को आराम करने का बोल कर बाहर निकल गया ।
जारी रहेगी
इधर रागिनी और ममता हसीं ठिठौली करती हुई कमरे से बाहर निकली और गलियारे में आते आते ममता हस्ती हुई बाथरूम की ओर मुंह करके - अरे नंद रानी नहाने बैठ गई क्या , जरा जल्दी आओ दोपहर के खाने के समय हो रहा है भई हिहिहिही
रागिनी - मुझे लग रहा है ननदो समधन को हमारी बातों से प्रेसर ज्यादा ही आ गया हाहाहा आराम से आना दीदी हिहिही
वही बाथरूम में एक दूसरे से चिपक कर खड़े हुए जंगी और संगीता मुस्कुरा रहे थे मगर जंगी की फटी पड़ी थी कि ये लोग बाहर जाएंगी तो कही उसका भेद न खुल जाए तो वो संगीता को कैसे भी करके अलग किया और बाथरूम से निकलता हुआ - मुझे लग रहा है हमे बाहर चलना चाहिए, नही तो बात बिगड़ जाएगी
ममता ने हद कर दी और बाथरूम का दरवाजा बजाने लगी - अरे क्या कर रही हो
कामाग्नि में जलती संगीता गुस्से से बड़बड़ाती अपनी भौजाई को मन ही मन गरियाती हुई मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ बाहर आई और तीनो एक साथ हाल में जाने लगी , संगीता जैसे ही जीने के पास पहुंची तो वो जीने के और घूम गई ये बोल कर कि वो अपने कमरे से आ रही है
वही ममता रागिनी हाल से सबको किचन से लगे डायनिंग टेबल पर बैठने का बोलते हुए ममता - अरे दूसरे भाई साहब कहा चले गए
मुरारी उठ कर - अरे भाई वो पीछे बाथरूम में गए है , लग रहा है पकोड़े पचे नही हाहाहाहा
रंगी हंसता हुआ - उसका तो बचपन से ही ऐसा है बाथरूम में लंबा समय लेता है हाहाहह्ह
मुरारी - भाई लेकिन मुझसे और रुका जायेगा , अमन को ऊपर भेज दिया है सबको बुलाने के लिए तुम खाना निकालो , आओ भाई साहब तबतक बैठते है
रंगी हसता हुआ - जी चलिए
वही जंगी लाल अपना खड़ा लंड किसी तरह सेट करता हुआ बात पोंछता हाल की ओर आ रहा था कि जीने पर छिपी संगीता ने उसको लपक कर अपनी ओर खींच लिया
जंगी एकदम से हड़बड़ा गया और डर से हलकाता हुआ - येह्ह्ह क्क्याआ कर रही है आप रुकिए , सब बाहर ही है , गजब हो जाएगा
संगीता को चुदाई का सुरूर चढ़ा था और वो सीधा अपना पंजा जंगी के पेंट में उठे हुए तंबू पर जमाती हुई उसको मसलती हुई उसके चेहरे को अपनी ओर खींचती हुई अपने लिप्स उसके करीब ले जाकर - मुझसे नही रहा जा रहा है भाई साहब उम्मम्म ना जाने कब ये मौका मिले
जंगी का खूंटा संगीता की कामोतेक हरकत से ठुमके खाने लगा और उसके मुंह से आती गर्म सास उसको भीतर से सिहरा दे रही थी और जंगी से रहा नही गया उसने संगीता के लिप्स अपने होठों से जोड़ लिए , जैसे ही उसके लार की मिठास का स्वाद जंगी ने चखा उसके भीतर से वासना का एक झोंका सा उठा और उसने संगीता को अपनी ओर खींचते हुए उसके लिप्स चूसने लगा

उसके पंजे साड़ी के ऊपर से उसके विशाल चूतड़ों को मसलने लगे ।।
दोनो को एक दूसरे की नथुनों से सासो की गर्मी मिल रही थी और नीचे संगीता जंगी का खूंटा पेंट के ऊपर से मसले जा रही थी ।
वो जल्दी जल्दी उसका पेंट खोल कर उसका मोटा बीयर की कैन सा लंबा मोटा लंड निकाल कर उसको मसलने लगी , एक अजीब सी हसीं या फिर कहे जंगी के मोटे लंड की दीवानगी सी झलक रही थी संगीता के चेहरे पर और झट से वही जीने के पास ही बैठ जंगी का मोटा लंड मुंह में भर ली और चूसने लगी

जंगी तो मानो हवा में उड़ने लगा उसकी आंखे संगीता की जबरजस्त चुसाई से उल्टने लगी वो किचन की ओर गरदन फेर कर वहा का जायजा ले रहा था और वही नीचे बैठी संगीता उसका लंड घोटे जा रही थी
वही अमन जैसे ही ऊपर पहुंचा तो देखा कि कमरे में तो सिर्फ सोनल और निशा ही थे , और अमन को देखते ही निशा के दिल के जज्बात उड़ान भरने लगे , उसके इरादे उसकी आंखे जाहिर करने लगी ,
अमन - अरे बाकी सब कहा है
निशा उठी और उसको पकड़ कर बिस्तर तक लाती हुई - अरे जीजू सबकी छोड़ो इधर आओ , आप को तो फिकर ही नही है कि आपकी सेक्सी साली आई है हिहिहिही
अमन कुछ झिझकता तो कुछ सोनल से नज़रे चुराता हुआ मुस्कुराता हुआ निशा के पास गया और निशा उसको पकाने लगी - हम्मम फिर बताइए कैसा था हमारा सुहागरात वाला सरप्राईज उम्मम्म
सोनल को भी थोड़ी शर्म आ रही थी एक असहजता थी उसके भी मन अमन के जैसे मगर निशा एकदम फुल ऑन मूड में थी मस्ती के ।
सोनल - क्या कर रही है निशा , क्या वो सब बातें दोहरा रही है ।
निशा ठहाका लगाती हुई - अरे क्यू ना दुहराऊ हिहीही मेरे जीजू तो अपने खास पल में अपनी मनपसंद चीज के लिए तरस गए थे , कितना दुख हुआ था मुझे
सोनल - अच्छा जी , चुप कर अब जा नीचे
अमन हंसता हुआ - दरअसल सोनल , पापा ने बहु को आने को कहा है
निशा - हा तो फिर चलो चलो कमरा खाली करो हिहिहिही
निशा सोनल को ठकेलती हुई कमरे से बाहर ले जाने लगी - अरेह्ह क्या कर रही है
निशा - नही तुम जाओ जाओ , मुझे जीजू से कुछ बातें करनी है
सोनल ने उसको आंखे दिखाई तो निशा उसको आंख मारती हुई - अरे खा नही जाऊंगी जीजू को , ऐसे घूर रही हो अब जाओ
और फिर निशा ने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया , बाहर खड़ी सोनल जानती थी कि निशा जरूर अमन के साथ कुछ कांड करेगी मगर उसे डर था यहा कोई आ ना जाए , उसकी बेचैनी और बढ़ने लगी ।
वो एक दो बार दरवाजा हल्के हाथों से थपठपाती है ताकि आवाज ज्यादा ना हो मगर न ही निशा और न ही अमन दरवाजा खोलने के मूड में थे
जबकि अमन ने लपक कर निशा को अपनी बाहों में भरते हुए उसके गुदाज चूतड सूट के ऊपर से हाथ में भरते हुए उसके लिप्स चूसने लगा और निशा भी अपने हाथ उसके लंड पर लगा कर उसको मसलने लगी
अमन - उम्मम्म मेरी सेक्सी साली जी , हनीमून के लिए तैयार हो
निशा - इतने बड़े हथियार वाले जीजू के साथ कौन नहीं मनाना चाहेगा हनीमून अह्ह्ह्ह खोलो ना इसे उम्मम्म देखे तो कैसा है

ओह माई गॉड कितना बड़ा और प्यारा है जीजू उह्ह्ह्ह जी कर रहा है इसको खा जाऊं " , निशा अमन का बाहर निकला हुआ मोटा लंड देखते हुए बोली ।
अमन हसता हुआ - नही नही खाना मत कही दीदी तुम्हारी गुस्सा गई तो हाहाहहा
निशा आंखे फाड़े अमन का लंड पकड़ती हुई नीचे बैठ गई और लंड को चूमती हुई उसको मुंह में भर कर चूसने लगी

और देखते ही देखते दोनो की कामुक सिसकियां सोनल के कानो में पड़ी जिसे समझती देर नहीं लगी - साली कुतीया ने जीभ चलाना शुरू कर दिया मेरे माल पर , अह्ह्ह्ह मुझे भी बुला लेती कामिनी , खोल ना
अमन और निशा जरा भी दरवाजे की ओर ध्यान नहीं दिया और बीच कमरे में अपने काम क्रीड़ा में लगे रहे और निशा अमन का मोटा लंड गले तक घोंट रही थी ।
सोनल परेशान होकर खीझ कर नीचे जाने के लिए गलियारे से होती हुई जीने की ओर बढ़ रही थी , उसका दिमाग उलझा हुआ था और खुन्नस से भरा था , आस पास हो रही हल्की फुल्की आवाजों का उसपे जरा भी असर नहीं हुआ और वो जीने की घुमावदार सीढ़ियों से होकर जैसे ही चार सीढ़ी नीचे आई की उसकी नजर नीचे जीने की आखिर सीढ़ियों पर चल रही जांगीलाल और संगीता की कामलीला देखते ही उसका हाथ पाव सुन्न पड़ गए , एकदम से उसके शरीर अंग अंग एक भय और आश्चर्य से कांपने लगा , मुंह पर हाथ रख पर वो पीछे की तरफ अपने पैर चढ़ाते हुए नीचे देखने लगी

जहा उसका अपना सगा चाचा उसके ससुराल में उसके पति की सगी बुआ को सीढ़ियों पर झुकाए हुए पीछे से साड़ी उठा कर सटासट लंड उसकी चूत में उतार रहा था और संगीता मजे से मुस्कुराती हुई सिसकियां ले रही थी । सोनल का गला सूखने लगा , उसे समझ नही आ रहा था कि कैसे वो लोग बिना डरे नीचे ही चालू हो और सबसे बड़ी बात इनका अफेयर कब हुआ
सोनल की हालत डर के मारे खराब हो रही थी उसे समझ नही आया कि अभी अमन को ऊपर आए 10 mint नही हुए और ये लोग कब
सोच में डूबी हुई सोनल के पैर लगातार पीछे हो रहे थे और वो पीछे हल्का सा लड़खडाई तो हाथ बढ़ा कर उसके दुलारी के कमरे के दरवाजे का पर्दा खींच कर पकड़ लिया और खुद को सहारा देते हुए उठ ही रही थी कि उसके कानो में एक और कामुक और महीन सिसकी सुनाई दी जो दुलारी के कमरे में से आ रही थी । सोनल ही हालत और खराब हो गई - यार ये सब हो क्या रहा है , दुलारी भाभी के कमरे में कौन हो सकता है और वो कुछ देर कान लगाए रही
वही दरवाजे के दूसरी ओर

अनुज दुलारी भाभी की जांघें उठाए उनकी बुर में उंगलियां पेलता हुआ चूत के दाने को चूबला रहा था - उह्ह्ह्ह मेरे हीरो तुम तो पक्के खिलाड़ी निकले , आह्ह्ह्ह्ह्ह क्याआआ मस्त चूसते हो उह्ह्ह्ह्ह् और खा जाओ मेरी चूत उम्मम्मम सीईईई अअह्ह्ह्ह फक्क्क उह्ह्ह्ह मममीईईईईईई आआआह्ह्ह्ह सीईईई
अनुज ने देर न करते हुए खड़ा हुआ और अपना लौड़ा दुलारी के चूत लगाता हुआ हचाक से आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में घुसाता चला गया और दुलारीईई की तेज सिसकी कमरे में फेल गई जिसकी फ्रीक्वेनसी दरबाजे पर कान लगाए खड़ी सोनल के कानो में गई और उसे पक्का यकीन हो गया कि भीतर कमरे में दुलारी की चूत कोई बजा रहा है मागे कौन?

वही कमरे में अनुज सटासट दुलारी की जांघें उठाए उसकी चूत में लंड पेले जा रहा था दोनो कामुक सिसकियां ले रहे थे और सोनल ने गर्दन फेर कर जीने की ओर फिर बढ़ी कि आगे का क्या नजारा है और वहा का नजारा सच में बदला हुआ था , जंगी संगीता को खड़े किए हुए पीछे से उसकी चूत में लंड पेले जा रहा था और संगीता किचन की ओर झांकती हुई मुंह पर हाथ रख कर अपनी सिसकियां निगलती हुई जंगी का मोटा लंड अपनी चूत की जड़ो में ले रही थी

जंगी पूरे जोश में सटासट संगीता की चूत मारे जा रहा था और बेटी के ससुराल में सबके सामने छिप कर संगीता जैसा कसा हुआ माल पेलने का जुनून उसे चरम पर ले जाया और आखिर 10 झटको के साथ ही वो संगीता की बुर में झड़ लगा , जिसके छींटे संगीता अपनी बच्चेदानी में महसूस कर रही थी और उसकी गर्मी ने संगीता की बुर की मलाई भी पिघलने लगी और जंगी ने अपना रस से सराबोर लंड बाहर खींचा और उसके लंड से संगीता की चूत के रस में सना हुआ था

और सोनल ऊपर से अपने चाचा का कड़क चमकता लंड देख कर थूक गटकने लगी ।
तभी बगल में दुलारी के कमरे से उसकी तेज लगातार सिसकियां आने लगी

भीतर कमरे में दुलारी अनुज के लंड पर स्वार हो चुकी थी और अपनी चूत को उसके लंड पर मथनी की तरह मथे जा रही थी , अनुज का लंड उतना ही उसकी बुर के जड़ो में फूलता जा रहा था
वही बाहर सोनल की हालत खराब होने लगी ये सोच कर कही नीचे से संगीता ऊपर न आ जाए इससे पहले वो कमरे में भाग जाना चाहती थी
वो दौड़ती हुई अपने कमरे के दरवाजे पर पहुंची और दरवाजा बजाने लगी , मगर निशा नही मानने वाली थी वो तो अमन को लिटा कर उसका मोटा मूसल अपनी चूत के मुहाने पर लगाती हुई चूत में घुसाती चली गई,

जैसे जैसे उसकी चूत की दिवारे फेल रही थी निशा की आंखे भी बड़ी हो रही थी उसका मुंह दर्द और मजे से खुलता जा रहा था और देखते देखते ही वो अमन का 3/4 लंड चूत में भर ली और उछलने लगी उसकी मादक दर्द भरी सिसकियां सोनल के कानो तक आने लगी , जिसे सुनते ही सोनल समझ गई कि भीतर भी मामला शुरू हो गया है और सोनल की हालत खराब होने लगी, उसे डर था कि कही संगीता बुआ ऊपर आ गई और उसे बाहर देख लिया तो गजब हो गया और वो थोड़ा तेज और हदबड़ी में दरवाजे पर हाथ से खट खताने लगी । मगर निशा को अभी तक कोई फर्क नहीं नजर आ रहा था वो बिना रुके अपनी गाड़ उछाल उछाल कर लंड को बुर में भर रही थी - अअह्ह्ह्ह जीजू कितना मजा रहा है आह्ह्ह् लग रहा है मैं झूले पर हूं उह्ह्ह्ह फक्कक मी जीजू येसेस्स येस्सस हार्ड उह्ह्ह्ह्ह उम्म्म मम्माआ ओह्ह्ह्

कमरे से निकलती सिसकियां सोनल की दिल का डर और बढ़ा रही थी जिससे वो लगातार निशा को हल्की आवाज देती हुई दरवाजा थपथपा रही थी जिसकी गूंज अनुज और दुलारी ने अपने कमरे में पाई और अनुज को लगा बाहर कोई है इसीलिए वो तेजी ने दुलारी का कुल्हा पकड़ कर नीचे से सटासट पेलने लगा - उह्ह्ह्ह्ह्ह भाभीई लग रहा है कोई आया है बाहर आवाज दे रहा है
दुलारी - तुम मत रुकना प्लीज आआआह्ह्ह्ह्ह निकाल रहा है मेरा फकक्क्क्क मीईईईई उह्ह्ह्ह येसस्स बाबू अअह्ह्ह्ह्ह आ रहा है आआह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह ओह गॉड उह्ह्ह्ह

अगले ही पल अनुज भी उसको हटाया - सजाओ भाबी उह्ह्ह्ह आ रहा है मेरा भी आआह्ह्ह्ह्ह जल्दी अह्ह्ह्ह्ह्ह
अनुज उठ कर सीधा दुलारी का सर पकड़ कर उसके मुंह पर लंड हिलाते हुए झड़ने लगा
वही सोनल के लगातार हाथ पिटने से निशा खीझ कर अमन के लंड से उठी और फटाफट अपना सलवार चढ़ती हुई दरवाजा खोला
सामने देखा तो सोनल की हालत बुरी है - क्या हुआ क्या बात है
सोनल ने कमरे में झांक कर देखा तो अमन पेंट पहन रहा था
सोनल इशारे से - हो गया क्या ?
निशा मुंह बनाती हुई - तुझे ही जल्दी थी हुह , अब बोल बात क्या है
सोनल कुछ बोलती कि तबतक अमन भी उनके पास आ गया - अरे चलो सब राह देख रहे है भाई , मां ने आवाज दी सबको तो भागी भागी आई
अमन हसता हुआ - किसकी मां ने मेरी या तुम्हारी हाहाहहहा
सोनल चिढ़ती हुई - सासू मां ने बुलाया है , किसी मां ने ? हूंह
निशा अमन को आंख मारती है और सोनल को लेकर हस्ती हुई नीचे चली जाती है और थोड़ी देर में ही अमन और दुलारी कपड़े पहन कर बाहर आते है - लग रहा है सब नीचे चले गए है
अनुज - तो हम लोग भी चलते है
दुलारी मुस्कुरा अनुज के करीब आई - बस एक मिनट , हा अब ठीक है हिहिहिही
अनुज गर्दन के पास हाथ घुमाता है जहा अभी अभी दुलारी ने हाथ लगाया था - क्या हुआ क्या था
दुलारी हस्ती हुई - लिपस्टिक
अनुज मुस्कुराता हुआ दुलारी के साथ नीचे जाने लगता है
वही इनसब से उलट राज जबसे रिंकी के कमरे में दाखिल हुआ था , उसकी नजर रिंकी के कोमल गुलाबी देह पर अटकी थी , रिंकी की मादकता भरी महीन सिसकियां और अपनी गुलाबी चूत को सहलाते हुए अनुज को गुनगुनाते उसके पतले मुलायम होठ
जिसे देख राज अवाक भी था और वासना का सुरूर भी चढ़ रहा था । ये अनुज की दूसरी गर्लफ्रेंड थी जिसको वो ऐसी अवस्था में निहार पा रहा था , उसको फिर वही उलझन हो रही थी जिसके लिए उसने चोदमपुर से आई पल्लवी को छोड़ दिया और जिसका मलाल उसे आज तक था ।
रिंकी जैसी गर्म और रसाल लड़की जिसने अभी अभी जवानी के पंखों को फड़फड़ाया सीखा था , उसे वासना के ऊची उड़ान की कहा ही अनुभव था जो राज अब तक पा चुका था ।
अपना लंड मसलता हुआ राज रिंकी को निहारे का रहा था
कि रिंकी की गर्दन सिसकियां लेते हुए अपने बेड के पास के पिलर पर गई जिसकी आड में राज बंद कमरे में छिपकर उसे निहार रहा था ,

लालच और गहरी वासना से लिपट उसकी आंखे देखते ही रिंकी ने झट से एक चादर से अपना जिस्म ढक लिया और कांपते हुए स्वर में राज से - आ आप यहां कैसे ?
राज मुस्कुराकर - वो मैं नीचे जा रहा था और मेरी नजर खुले दरवाजे से आप पर गई
रिंकी लाज और झेप से आंखे बंद कर खुद को कोसती हुई कि अनुज को भी मन ही मन गालियां दे रही थी ।
रिंकी - किसी और ने तो नही देखा न
राज मुस्कुराता हुआ रिंकी के पास बिस्तर पर बैठता हुआ - जी नहीं नही , मैं फौरन दरवाजा लगा दिया
रिंकी मुस्कुरा कर लाजाती हुई - प्लीज आप ये सब भाभी (सोनल) से मत कहिएगा
राज - नही बिलकुल नहीं , मगर वो आप अनुज का नाम ?
रिंकी के चेहरे अब शर्म से और भी गुलाबी होने लगा तो राज मुस्कुरा कर - तो क्या आप दोनो एक दूसरे से प्यार करते हो
रिंकी चौक कर - क्या ? नही वो बस हम लोग।
राज मुस्कुरा कर - हम्म्म समझ गया , तो इसमें इतना झिझक क्यू , मुझे भी अपनी पसंद के लोगो के बारे में सोच कर ये सब करना अच्छा लगता है । कॉलेज की क्रस के बारे में सोच कर तो मैं हिहिहिही समझ रही है ना
रिंकी का कलेजा भीतर से कांप रहा था कि अब तक वो कैसे राज के आगे इतनी देर तक खुद को बिना कपड़े के बैठे हुए और वही राज बिना उसे कुछ ब्लैकमेल किए उसके साथ बहुत प्यार से पेश आ रहा था जैसे उसे इससे कोई खास फर्क ही नहीं पड़ रहा हो ।
राज का संयम और उसकी बातें रिंकी को भीतर से उसकी ओर आकर्षित किए जा रहा था
राज ने गौर किया कि वो उसे ही निहार रही थी और चादर के नीचे कुछ तो हरकत हो रही है तो उसने हौले से रिंकी के आगे से चादर हटाया

तो देखा रिंकी की उंगलियां उसकी चूत के गुलाबी रस से लिभड़ी फाकों को मीज रही थी और रिंकी के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी
राज थूक गटक कर रिंकी की हिम्मत और उसकी काम के आवेग को देख कर जोश से भर गया और उसका लंड पूरा अकड़ गया ।
राज अपना पेंट खोलता हुआ - मैं भी आपका साथ दूं
रिंकी मुस्कुरा कर उसकी आंखो मे निहारती हुई चूत मसल रही थी - आप किसको सोचेंगे
राज मुस्कुरा और रिंकी की चूत को देखता हुआ अपना लंड सहलाने लगा - आपके रहते किसी को सोचने की क्या जरूरत
राज के ये शब्द रिंकी के भीतर काम का तूफान उमड़ा दिया उसकी चूत बजबजा उठी और उसने लपक कर राज का मोटा तपता लंड हाथ में पकड़ लिया । जिसकी तपिस अभी से रिंकी अपनी बुर के दरखतो में महसूस करने लगी थी - सच में इतनी पसंद हू मै आपको उह्ह्ह्ह कितना गर्म है अहह्ह्ह्ह्ह

राज रिंकी के कोमल गोरे हाथों का स्पर्श पाकर सिहर उठा उसका लंड और कसने लगा रिंकी की मुठ्ठी में - अह्ह्ह्ह्ह अपने आप को कम मत जानो , जो भी आपकी इन गुलाबी पंखुडियों का रस पिएगा वो बहुत भाग्यशाली होगा
राज की कामुकता से भरी बातें रिंकी को एक अलग ही रोमांच पर ले जा रही थी , आज तक किसी ने उससे ऐसी लुभावनी बातें नही कि थी जो उसकी कामाग्नी को भड़का दे।
वो राज का लंड मसलती हुई अपनी बुर को दुलारती हुई हिम्मत कर बोल ही पड़ी - आप पियोगे
राज चौका और मुस्कुरा कर - क्या बोली फिर से कहिए न अअह्ह्ह्ह
रिंकी शर्मा कर मगर काम के नशे में तैरती हुई - आप पीना चाहोगे मेरे गुलाबी पंखुड़ियों का रस
राज की टांगे एकदम से सीधी हो गई और उसके जिस्म ने एक जोर की अंगड़ाई ली और देखते ही देखते वो रिंकी जांघो के बीच पहुंच गया ।
सफेद गाढ़ी मलाई से लिभड़ी उसकी चूत रगड़ने से और भी गुलाबी हो गई थी , उसके बुर के दाने पर अजीब सी सफेदी नजर आ रही थी शायद वहा उसके चूत का और वहा से उठती आंच और मादक गंध को अपने चेहरे नाक पर महसूस कर रहा था
राज ने नथुने होठ और उनसे उठती गर्म सांसे अपनी चूत के मुहाने पर पाकर रिंकी भीतर से राज के अगले कदम के लिए बहुत ही उत्तेजित हुई जा रही थी और जैसे ही राज ने उसकी फाकों पर अपनी जीभ फिराई , रिंकी का पूरा जिस्म अकड़ सा गया मानो ,
राज उसके जिस्म में होती हरकत से उसकी जांघ को पकड़ कर उसके बुर के गुलाबी फाकों को मुंह में लेके चुबलाने लगा रिंकी की हालत और खराब होने लगी , जिस तरह से राज उसके बाहर निकले बुर के छिलकों पर दांत लगा कर चूस रहा था मानो ऐसे दशहरी आमों की कल्लियां काट कर चूस रहा हो
रिंकी उसके सर पकड़ कर अकड़ रही थी उसके पैर झटके खा रहे थे गाड़ हवा में उठ गिर रहे थे और अगले ही पल राज ने अपनी उंगली उसकी बुर में पेल दी , रिंकी की आंखे फेल गई वो हवा में दोनो पैर उठा कर हाफ रही थी

क्योंकि राज की जीभ लगातार उसके बुर के दाने पर रेंग रही थी और नीचे से राज की उंगली उसकी चूत का g-स्पॉट खुरुच रही थी , भलभला कर रिंकी की बुर रस छोड़ने लगी तो राज ने मुंह लगा दिया
रिंकी पागल सी होने लगी उसकी दबी हुई कुनमुनाती गर्म मादक सिसकियां कमरे में गूंज रही थी और राज का सर अपनी चूत में घुसा रही थी - उह्ह्ह्ह मममाआ ओहह्ह गॉड फक्क़ मीईई प्लीज अअह्ह्ह्ह येस्सस्स
राज ने सर उठा कर मुस्कुरा कर उसकी ओर देखा और रिंकी शर्मा कर मुस्कुराने लगी
राज उठ कर बैठ गया और पेंट निकाल दिया , रिंकी उसका लंड सहलाती हुई बिना रुके उसका लंड मुंह में भर कर चूसने लगी , राज उसके सर को पकड़े लंड की ओर ठेल रहा था - आआआआअह्ह कितना मस्त चूसते हो जी आप उह्ह्ह्ह खा जाओ उह्ह्ह्ह और लोह्ह्ह ऐसे ही अअह्ह्ह्ह्ह

देखते ही देखते रिंकी राज का लंड गले तक घोटने लगी और राज उसकी लटकती चूचियां मिजता हुआ उसके नंगे गाड़ को सहलाने लगा ।
उसकी गोरी चिकनी गुलाबी गाड़ की सुराख को रगड़ते हुए उसने उसे अपनी ओर खींचा और घोड़ी बनाते उसकी चूत पर लार से उंगली घुमाने लगा , रिंकी आंखे उलटने लगी जब राज ने नीचे से अपना सुपाड़ा उसके फाकों पर रगडा और राज नेनिशाना साधा फिर हाचाक से लंड उसकी चूत में उतार दिया

राज के लंड की मोटाई के जैसे ही रिंकी को चूत की दीवारों को खोला तो उसका मुंह भी खुला का खुला रह गया , राज का गर्म रॉड सा लंड उसकी चूत की भीतरी दीवारों को छीलता हुआ अंदर चला जा रहा था और रिंकी मस्ती में झूमने लगी थी - ओह्ह् गॉड ओह्ह्ह्ह् गॉड टू बिग उह्ह्ह्ह फक मीईई प्लीज उह्ह्ह्ह्ह येसेस्स्स और फास्ट उम्मम्म
राज भी जोश में उसकी चूत में सटासट लंड पेलने लगा - क्या मस्त बुर है आपकी उह्ह्ह्ह, गर्म रसीला और भरा हुआ उह्ह्ह्ह लग रहा है सब जल जाएगा आआआआअह्ह्ह
रिंकी उम्मम्म आपका डिक भी बहुत हार्ड है उम्मम्म येसस्स्स आआआह्ह्हह मम्माआआ उह्ह्ह्ह फक्कक मीई लाइक दैट उह्ह् गॉड यासस्सस फक फक फक उम्मम्म्म फास्ट फास्ट
राज उसकी अंग्रेजी शब्दों से एकदम मस्ती में झूम उठा - जैसे किसी अंग्रेज पोर्नस्टार को पेल रहा हो

जल्द ही पोजिशन बदला और रिंकी की टांगे उठा कर राज उसकी बुर में पेलने लगा , सामने से रिंकी उसकी आंखो में देख कर उसे और भी कामोतेजीत किए जा रही थी
राज मुस्कुरा कर - क्या देख रही हो ?
रिंकी उसके करारे झटके सहती हुई सिसकियां लेती हुई मुस्कुरा कर न में सर हिलाया
राज उसकी और करीब खींच कर उसके बगल में लेट गया और उससे सट कर बगल से सटासट उसकी बुर में लंड घुसाने लगा , अब रिंकी की चूत की चमड़ी खिंचने लगी और सुपाड़े का सीधा उसके चूत के दाने के नीचे ठोकर मारने लगा जिससे रिंकी एकदम से पागल होने लगी .
राज - बोलो ना क्या बात है ? मजा नही रहा है
रिंकी हाफती हुई - उह्ह्ह्ह बहुत a रहा है उह्ह्ह्ह तुम्हारा तरीका बहुत अलग है अअह्ह्ह्ह्ह
राज मुस्कुरा कर उसकी मौसमी सी चूचियां मसलता हुआ - किस्से अनुज से
रिंकी लजाई - उम्म्म नही भक्क्क्क वो सब नही बोलो ना प्लीज
राज - क्यू अभी जब उसका लंड हचक के ले रही थी तब नही आई शर्म उह्ह्ह्ह और मुझसे लजा रही हो
रिंकी के पैर फड़फड़ा रहे थे वो राज के लंड पर झड़ रही थी
राज पूरी ताकत से लगातार उसकी चूत में लंड दे रहा था - देखो तो कैसे उसका नाम सुनते ही झड़ने लगी उह्ह्ह्ह कितना गर्म है अअह्ह्ह्हह् निकाल जाएगा मेरा भी

अअह्ह्ह्ह फक्क्कक बहिनचोद आ रहा है उह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह एलो ओहह्ह्ह सीईईईईईआई अअह्ह्ह्ह्ह ममीइइ
राज अपना लंड निकाल कर रिंकी की चूत पर झाड़ने लगा और रिंकी राज का गर्म माल पाकर खुश हो गई ।
उसने घूमकर राज के लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिए - तुम्हारा कोई जवाब नही , उसका भी । तुम दोनो जबरजस्त हो हिहिहिही
राज - तो एक बार और हो जाए
रिंकी - उम्म्म अभी नही , बाहर हलचल हो रही थी किसी का दरवाजा खटखटाया जा रहा था , हम लोग भी निकलते है
राज को भी रिंकी की बाते सही लगी और वो कपड़े पहन कर बाहर निकल आया
इधर जैसे दुलारी और अनुज जैसे ही साथ में नीचे उतरे तो वहा मौजूद लोगो मे सबसे ज्यादा कोई शॉक्ड था तो सोनल थी ।
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका छोटा भाई जो बेहद शर्मिला और दब्बू सा है , वो दुलारी भाभी के साथ कमरे में था ।
कुछ ही मिनट में सारे लोग एकजुट हो गए और खाने के लिए एक साथ बैठ गए ।
खाना पीना हुआ हसीं ठिठौली का दौर देर तक चलता रहा , इधर मुरारी लगातार रंगी को आज रुकने के लिए मना रहा था , तो ममता ने भी किचन रागिनी से पहल की - रूक जाइए न दीदी प्लीज
रागिनी हस्ती हुई - मैं रुक जाऊंगी लेकिन शर्त वही रहेगी हिहिहिही
रागिनी के मजाक पर ममता को याद आया कि रागिनी ने उसकी पैंटी मांगी थी अभी तो वो हंसते हुए बोली - अच्छा ठीक है ले लेना , लेकिन वीडियो भी चाहिए
रागिनी - अरे ऐसे कैसे भाई , एक चीज पर एक सौदा, दूसरी के लिए दूसरी चीज लगेगी
ममता हस कर - अब क्या ? दो लेकर जाएंगी क्या ?
रांगिनी - उहु, ऊपर नीचे का दोनो हिहिहि
ममता लाज से - धत्त आप बहुत गंदी हो छीईई
रागिनी - में तो कल लेके जाऊंगी दोनो , और आज रात समधी जी का बिस्तर भी मेरा हिहीहि
ममता हस्ती हुई - बिस्तर ही क्यों , समधी जी को भी लेके सो जाना मैं एतराज नहीं करूंगी हिहिहिही
रागिनी - अरे मेरी बहना बाते गोल गोल न घुमाओ , सीधे सीधे बोलो ना अपने दीवाने उस कच्छी सूंघवा समधी के साथ सोना है
ममता शर्मा कर - धत्त दीदी चुप करो मैं नहीं जीत सकती आपसे , कैसे बोल लेती है आप
रागिनी - आज रात सारे गुर सीखा दूंगी ठीक है ना
ममता उसकी बातो पर हसने लगी
इधर ममता ने रागिनी की हामी भर ली थी तो रंगी भी मना नही पाया ।
रंगी - अच्छा ठीक है भाईसाहब आज रात रुक के जाएंगे फिर मदन भाई से मुलाकात भी नही हुई है लेकिन ?
मुरारी - क्या हुआ भाई साहब
रंगी - दरअसल घर पर सिर्फ औरतें है तो बच्चो को घर जाने देते है और जंगी भी कह रहा था कि निशा की मां बीमार है तो वो भी जायेगा
मुरारी - अरे सारे लोग चले ही जा रहे है
रंगी - अरे हम लोग है ना , और सोनल की मां के रहते लगेगा ही नही कि घर में बच्चे नही है हाआआहाहह
रागिनी बुदबुदाई - अच्छा जी , घर चलो बताती हूं।
रागिनी की आंखे और उसका झूठा गुस्सा सब लोगो ने पढ़ लिया और हाल में ठहाके लगते रहे देर तक ।
इधर अपने पापा के कहने पर राज और अनुज को घर के लिए जाना पड़ा दोनो भाई उदास मन से गए , तो जंगी निशा को लेकर अपने घर निकाल गया ।
वही मुरारी ने रंगी को गेस्ट रूम में आराम करने के लिए कह दिया और ममता रागिनी को अपने कमरे में ले गई , घर की बाकी औरते काम निपटा कर आराम करने चली गई।
मुरारी और रंगी की गेस्ट में देर तक बातें हो रही थी कि शाम 3 बजे के करीब मुरारी का मोबाइल बजा । फ़ोन देख कर मुरारी असहज हुआ और समझ गया कि ये काल किस लिए आ रहा है
फिर वो रंगी को आराम करने का बोल कर बाहर निकल गया ।
जारी रहेगी





















