Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 43 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]





नई किरदार मिस जूली

अनुज आजकल इनकी इंस्टा आईडी खोज रहा है

क्या आप उसकी मदद करेंगे ।
 




उफ्फ !! कोई बहुत चीखने वाला है लगता है
 
💥 अध्याय : 02 💥



अपडेट 001


: हाहा क्या मस्त नजारा है उम्मम






: धत्त बंद करो , अरुण सड़क पर ही है हटाओ , मान जाओ न भाभी ( शिला ने मिन्नतें करते हुए बोली और झट से उठते हुए पैंटी खींच कर, साड़ी नीचे गिरा कर खड़ी हो गई )

: इसको तो मै तुम्हारे भैया के पास भेजूंगी हीही ( रज्जो चहकी मोबाइल पकड़े हुए बोली )

: धत्त नहीं प्लीज ये सब नहीं ( शिला उसको मना कर रही थी ।

" ओह क्या मस्त नजारा था उफ्फफ उम्ममम कितनी बड़ी गाड़ है बड़ी मम्मी की अह्ह्ह्ह्ह और कैसे वो अपने गाड़ फैला कर मूत रही थी उम्ममम सीईईई बड़ी मम्मी ओह्ह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् ओह्ह्ह्ह " , कमरे के बिस्तर में लेटा हुआ अरुण आज दुपहर हुई घटना को याद कर रहा था । जब वो शिला और रज्जो तीनों गांव वाले घर के लिए गए थे ।

अरुण अपनी बड़ी मम्मी के नंगे चुतड़ और धार छोड़ती चूत के दर्शन पाकर उन्हें सोचता हुआ हिला रहा था ।

" ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बड़ी मम्मी आपकी गाड़ बहुत मस्त है कब दोगी मुझे ahhh पेल पेल कर फाड़ दूंगा ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह मुझे आपके मूत से नहला दो न अह्ह्ह्ह्ह कितना नमकीन होगा उम्ममम मेरी बड़ी मम्मी अह्ह्ह्ह्ह " , अरुण अपनी टांगे फैलाए आंखे उलटता हुआ चरम पर जा रहा था ।

उसके जहन में रज्जो की कही हुई वो बात घूम रही थी जब उसने फोटो शिला के भईया यानी कि अरुण के मामा के पास भेजने को कही थी ।

" ओह्ह्ह गॉड मामा तो पागल हो जाएंगे बड़ी मम्मी की गाड़ देखकर अह्ह्ह्ह मुझे देदो न रज्जो मामी उम्ममम मेरे पास भेज दो फोटो अह्ह्ह्ह मह्ह्ह्ह फक्क्क् यूयू ओह्ह्ह्ह सीईईईई अह्ह्ह्ह्ह ।

तभी कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई

अरुण झल्लाया : बहिनचोद किसकी मां चुद गई अब , साला शांति से हिलाने भी नहीं देते ।

उखड़ कर अरुण अपना लंड चढ्ढे में घुसाते हुए उसको सेट करता हुआ, गहरी आह भर कर अपने चेहरे के भाव शांत करता हुआ दरवाजा खोला ।

सामने देखा तो रज्जो खड़ी थी ।








सिफान साड़ी के झलकते ब्लाउज से झांकती उसकी मोटी चूचियां और गहरी नाभि देख कर अरुण के आंखों की चमक बढ़ गई ।

रज्जो : बेटा चल नाश्ता कर ले

अरुण : चलो मामी मै आता हूं

रज्जो : जल्दी आना हा

रज्जो ये बोलकर चली गई और अरुण साड़ी में उसके थिरकते बड़े बड़े मटके जैसे चूतड़ों को देख कर सिहर उठा ।

" अह्ह्ह्ह बहिनचोद घर में दो गदराई माल कम थी जो ये भी आ गई मेरी तड़प बढ़ाने आह्ह्ह्ह क्या मस्त चूतड़ है साली के उम्मम , साला कोई तो चुदवा लो मुझसे " , अरुण झल्लाकर अपना लंड भींचते हुए बोला ।

अरुण खुद को शांत कर फ्रेश होकर हाल में नाश्ते के लिए आ रहा था ।

जहां रज्जो और शिला पहले से ही आपस में बातें कर रही थी ।

" नजर देखी उनकी , कैसे आंखे कर देख रहे थे तुम्हे हीही" , रज्जो ने शिला को छेड़ा ।

शिला शर्मा कर : धत्त भाभी , वो मेरे ससुर है आप भी न

रज्जो शिला के पास आकर : क्यों सास भी तो पूरी टाइट है अभी , लेते नहीं होंगे क्या हीही।

शिला मुस्कुरा कर रज्जो को देखा और हस दी : वैसे कुछ दिनों पहले देखा था , बापूजी तो नहीं लेकिन हा अम्मा जरूर जिद दिखा रही थी उसके लिए।

रज्जो चौक कर : क्या सच में ?

शिला : हा और फिर बापूजी गए थे अंदर मैने देखा ....।

शिला बोलते हुए रुक गई क्योंकि उसकी नजर हाल में आते हुए अरुण पर पड़ गई थीं और उसने रज्जो को इशारा कर दिया था ।

अरुण ने सामने देखा डायनिंग टेबल पर रज्जो एक कुर्सी पर बैठी है उसके बड़े चौड़े कूल्हे दोनो तरफ से झूल रहे थे और उनकी चौड़ी नंगी पीठ का हल्का सावला रंग बहुत ही कामुक नजर आ रहा था ।






रज्जो ने घूम कर अरुण की ओर देखा और मुस्कुराई ।

अरुण भी नाश्ते के लिए बैठ गया ।

रज्जो : वैसे कम्मो और बाकी सब कब तक आयेंगे ।

शिला : सुबह बात हुई थी शायद कल तक आ जाए , वैसे मैने उनलोगों को बताया नहीं है कि तुम भी यहां आई हो ।

रज्जो : अच्छा है कुछ चीजें सरप्राईज होनी चाहिए क्यों अरुण

अरुण अपने ख्यालों से उभर कर : जी , जी मामी ।

" बहिनचोद यहां मेरा लंड परेशान है और इसको देखो साली ऐसे गाड़ फैला कर बैठी है उफ्फ पापा और बड़े पापा आयेंगे तो वो दोनों तो ऐसे ही पागल हो जायेंगे , इतना बड़ा भड़कीला सरप्राईज देखेंगे तो " , अरुण रज्जो के चेयर पर फैले हुए चूतड़ों की गोलाई तिरछी नजर से देखता हुआ मन में बडबडा रहा था ।

शिला : आओ भाभी टैरिस पर चलते है अच्छी हवा चल रही होगी ।

रज्जो चाय की चुस्की लेकर प्याला वही रखते हुए बोली : हा चलो ।

फिर दोनों ऊपर निकल गए और अरुण भी लपक कर अपने कमरे की ओर चला गया ।

*************************

एक बहुत सुंदर और मनोरम पार्क में मुरारी टहल रहा था । वहा के पेड़ बागानों में उसे गजब का सुकून मिल रहा था । हर तरफ हरियाली और फूलों की खुशबू से उसका हृदय गदगद हुआ जा रहा था । मगर हैरत की बात थी कि पूरे बागान में उसके अलावा वहा कोई दूसरा नहीं नजर आ रहा था । कही से चिड़ियों की मधुर चहचहाहट तो कही से हल्की सर्द हवा , दुपहर की धूप में गजब की शांति थी वहां । उसके कानो में पास ही पानी की कलकल सुनाई दे रही थी । मुरारी उस ओर बढ़ गया ।

आगे बड़े बड़े घने सजावटी आकार में पेड़ और ऊंची फूलों की झाड़ियां सजी हुई थी । एक बड़ा सा फूलों से बना हुआ गेट था , वहा से इत्र चंदन और सुगंधित फूलों की खुशबू आ रही थी ।

मुरारी का रोम रोम पुलकित हो उठा ।

उसका दिल ऐसे मनोरम दृश्य को बहुत खुश था । वो गेट से दाखिल हुआ और आगे एक बड़ा सा सरोवर था , जिसमें नक्काशीदार टाइल लगे हुए थे चारो तरफ से गिरा हुआ बिल्कुल गोपनीय । वहा का तापमान ना गर्म था न सर्द , मुरारी आगे बढ़ता कि उसकी नजर सरोवर में एक तरफ पक्की सीढ़ियों के पास पानी में उतरी हुई एक महिला पर गई ।

अह्ह्ह्ह्ह गजब उभार था उसके चूतड़ों में , उसके जिस्म पर मात्र एक लाल रंग की चुनरी थी जो उसके कंधे पर थी , वो आधी जांघों तक सरोवर में उतरी हुई थी । मुरारी एक पेड़ की ओट में छिप गया ।

उसके जिस्म पर उस चुनरी के अलावा और कोई वस्त्र नहीं था मगर हैरत की बात थी कि वो अपने सभी जेवर गहनों से सुशोभित थी ।

मुरारी की नजर उस महिला के गोरे मोटे उभरे हुए नंगे चर्बीदार चूतड़ों पर अटक सी गई ।






तभी उस महिला ने एक केतली में सरोवर से पानी भरा और उसको अपने पीठ पर गिराने लगी

उस केतली से पानी थोड़ा थोड़ा उसके पीठ से रिसकर उसके गाड़ के सकरी दरारों में जाने लगा । और अगले ही पल मुरारी की हलक तब सूखने लगी जब उसने अपनी गाड़ फैला कर उठे ऊपर उठाया । चूत के फांके सहित गाड़ फैल कर मुरारी के आगे आ गए

" अह्ह्ह्ह क्या मस्त चूतड़ है इसके उम्ममम " , मुरारी उस नहाती हुई महिला को निहारता हुआ उसका पजामे में अपना लंड सहलाते हुआ बोला ।

तभी वो महिला ने अपने लंबे चिकने नंगे पैर उठा कर पानी में ही सीढ़ी पर किए जिससे उसके चूतड़ और बाहर की ओर निकल गए और चूत की फांके विजिबल हो गई । और अगले ही पल उस कामदेवी ने अपने लंबे लंबे नाखून वाले कोमल कोमल सुंदर हाथों से अपने मुलायम चूतड को सहलाते हुए दरारों में उंगली करने लगी उसके जिस्म में कामवेग का लहर उठ रहा था और जैसे ही उसकी पतली उंगलियों ने उसके चूत के रसाते फांके को स्पर्श किया वो सिसक उठी और गर्दन ऊपर कर दी ।






उस महिला की सिसकी से मुरारी का ध्यान उसके चेहरे पर गया और उसका लंड और वो दोनों ही मुंह बा दिए ।

" बहु " , मुरारी ने उस कामदेवी की पहचान की और उसका कलेजा धकधक होने लगा ।

मुरारी को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी नई नवेली बहु सोनल इस कामरस से सराबोर सरोवर में ऐसे कामुक होकर नहा रही थी ।

सोनल आंखे उलट कर अपने हाथ पीछे किए हुए अपने फांके सहला रही थीं और इधर मुरारी का लंड पूरा टनटना गया था ।

जांघियों में पूरा तंबू बन गया था और अब उसको निकालने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था , ।

मुरारी जल्दी जल्दी अपना कुर्ता पकड़ कर अपने पजामे का नाडा खोलने लगा और मगर वो खोल नहीं पा रहा था

इस हड़बड़ी में उसका मनमोहक दृश्य बदल चुका था और सोनल अब सरोवर के टाइल पर पैर लटका कर बैठी हुई थी और उसने वापस से केतली में पानी भरा और इस बार उसने अपने आगे सीधा चूत के फांके पर गिराने लगी ।






ठन्डे पानी की धार जैसे ही सोनल के चूत के दाने पर गिरी वो मजे से छटपटा पड़ी उसके चेहरे पर शरारती मुस्कुराहट फैल गई और उसने हाथ आगे कर अपनी मुनिया सहलाई

" ओह्ह्ह बहु तुम मुझे पागल कर दोगी , कितनी मस्ती कर रही हो अकेले अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म कितनी रसीली चूत है तुम्हारी उम्मम " , मुरारी अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाये हुए बोला .






उधर जैसे जैसे सोनल की उंगलियां उसके चूत के फांके पर रेंग रही थी उसके जिस्म में गुदगुदी बढ़ रही थी उसकी सांसे चढ़ने लगी थी और अगले ही पल उसने चूत में उंगली घुसाई और एक मादक सिसकी उस s कलकल भरे वातावरण में गुम सी हो गई ।

और देखते ही देखते सोनल अपनी उस लाल चुनरी पर टाइल पर ही लेट गई और उसके जिस्म पर आप कोई कपड़े नहीं थे उसके नुकीले कड़क गुलाबी निप्पल देखकर मुरारी के मुंह और लंड दोनो में पानी आ रहा था ।






सोनल वहा अपना चूत मसल रही थी अपने जिस्म को रगड़ मिज रही थी और उसकी मादक सिसकिया मुरारी के लंड की नसे फड़कने पर मजबूर कर रही थी

" अह्ह्ह्ह पापा जी आजाओ न उम्ममम " , सोनल के शब्द जैसे ही मुरारी के कान में पड़े मुरारी का लंड एकदम चरम पर पहुंच गया

" आजाओ न पापाजी उम्ममम चाटो ना मेरी बुर उम्ममम अह्ह्ह्ह पापाजी ओह्ह्ह" , सोनल ने फिर से मुरारी को पुकारा ।

मुरारी पागल हो गया और अपना खड़ा लंड लेकर सोनल की ओर बढ़ा

मगर वो हिल नहीं पा रहा था , पेड़ की टहनियों और लताओं ने उसको बाध लिया था , मुरारी की हालत खराब होने लगी वो जमीन पर गिर पड़ा और तड़पने लगा था , उसने सोनल को आवाज देना चाहा तो उसके गले की आवाज जा चुकी थी ।

मुरारी ने पूरी ताकत लगाई और हाथ झटक कर सारे बंधन तोड़ते हुआ उठ कर बैठ गया ।

मगर ये क्या वो तो इस वक्त बिस्तर पर था , कमरे में गुप अंधेरा था । रोशनदान से हल्की स्लेटी रोशनी आ रही थी ।

अपना माथा पकड़ पर अपने पंजे से अपना चेहरा आंख सहलाता हुआ मुरारी मुस्कुरा पड़ा , क्योंकि वो सपना देख रहा था ।

मुरारी ने उठ कर कमरे की बत्ती ऑन की और कमरे से लगे बाथरूम में फ्रेश होकर नहा धोया और अपना बैग लेकर होटल से चेक आउट कर निकल आया ।

पास ही एक ढाबे पर नाश्ता करने लगा कि उसके मोबाइल पर ममता का फोन आने लगा ।

फोन पर ...

मुरारी : कैसी हो अमन की मां , मै तुम्हे ही फोन करने वाला था ।

ममता : रहने दो रहने दो , भाई की दुल्हन के चक्कर तो आप मुझे भूल ही गए है हुह

मुरारी : हाहा ऐसा नहीं है अमन की मां , सच में अभी नाश्ता कर ही रहा था और तुम्हे फोन करने वाला था ।

ममता : ठीक है ठीक है , मेरी देवरानी का पता चला कुछ , दो दिन हो गए है आपको गए घर से । यहां जरा भी मन नहीं लग रहा है ।

मुरारी : हा एक पहचान वाले उसके किराए के घर का पता मिला है , अभी नाश्ता करके देखता हूं

मुरारी : और तुम चिंता न करो , अमन से कुछ बात हुई

ममता : नहीं न , उसका नंबर ही नहीं लग रहा है ।

मुरारी : अरे मोबाइल पर बात नहीं हो पाएगी अमन की मां ,जहां वो गया है वहां इधर के सिम नहीं काम करते है । तुम फिकर न करो , उससे बात होगी मेरी तो कहूंगा कि बात कर ले ।

ममता : जी ठीक है

मुरारी : ठीक है रखता हु बाय

ममता : अच्छा सुनिए

मुरारी उठ कर मोबाइल कंधे से कान के पास लगाए ढाबे वाले को पैसे दे रहा था : हा बोलो

ममता : आई लव यू हीही

मुरारी मुस्कुराते हुए : हम्म्म

ममता : क्या हम्म्म आप भी बोलो न

मुरारी मुस्कुरा लगा : अमन की मां मै सड़क पर हूं

ममता इठलाई : तो क्या हुआ , बोलिए न । आपको तो मेरी याद ही नहीं आती है

मुरारी ने आस पास देखा और धीरे से फुसफुसाया : अच्छा ठीक है लव यू

ममता खुश होकर : हीही थैंक यू बाय

फोन कट गया और मुरारी ममता की हरकतों पर मुस्कुराता हुआ सड़क पार करने लगा ।

उसने एक ऑटो वाले को शहर में एक एरिया का नाम बताया और निकल गया ।

दोपहर सर पर चढ़ रही थी और वो शहर के पिछड़े इलाके में गलियों में बैग टांगे घूम रहा था ।

2 बजने को हो गए

पूछते हुए वो आखिर मदन की प्रेमिका के घर तक आ ही पहुंचा ।

एक मंजिला मकान था पीछे दिवाल पर तक उठे थे , छोटा ही घर था ।

मगर वहां भी ताला जड़ा था ।

आस पास पता किया तो पाया कि वो किसी ऑफिस में नौकरी करती है शाम तक आएगी ।

एक भले आदमी ने मुरारी को अपने घर बरामदे में आसरा दिया और वो देर तक शाम तक वही ठहर गया ।

" उठो बाबू साहब , वो मंजू आ गई " , उस बूढ़े आदमी ने मुरारी को जगाया ।

मुरारी खटिए से उठा और बैग लेकर मंजू के घर के बाहर खड़ा हो गया ।

दो बार दरवाजा खटखटाने पर मंजू ने दरवाजा खोला और जैसे ही उसने सामने मुरारी को देखा ।

झट से अपने कमर में खोंसी हुई साड़ी जिसमें से उसकी गोरी गुदाज नाभि झलक रही थी उसने खोलकर अपने सर पर रख लिया ।






मंजू : नमस्ते भाईसाहब , आप यहां इस वक्त

" अरे बाबू साहब तो बेचारे दुपहर से आए है तेरी राह देख रहे थे " , वो बूढ़ा आदमी बोला ।

मंजू : वो मै काम पर गई थी , मगर आप ऐसे अचानक

मुरारी को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दे ।

मंजू : आप बाहर क्यों है अंदर आईंये न

मंजू ने किवाड़ खोलकर मुरारी को घर में आने का आमंत्रण दिया ।

मुरारी जैसे ही अंदर घुसा तो आगे एक चौकी रखी थी । बगल में एक छोटी आलमारी और रस्सी की अरगन पर लटके हुए मच्छरदानी समेत ढेर सारे कपड़े ।

यही एक कमरा था और पीछे खुला हाता था जहां एक कोने पर नल और वही दिवाल लगकर चूल्हा बना था मिट्टी का ।

मुरारी को समझ आ रहा था मंजू की स्थिति बहुत बदतर हो चुकी है ।

वो जल्दी जल्दी अलमारी से एक चादर निकाल कर बिछाने लगी

मुरारी उसके पीछे खड़ा था , उसके चौड़े कूल्हे मुरारी के आगे थे ।

मगर मुरारी का ध्यान वहा नहीं था ।

मंजू : बैठिए भाई साहब , मै पानी लाती हूं

फिर मंजू आलमारी में रखे डिब्बे से पेड़े निकाले और कटोरी में रख कर बिस्तर पर मुरारी के पास रख दिए और पानी लेने पीछे चली गई।

नल चलने की आवाज आ रही थी , मुरारी कमरे में देख रहा था , उसकी नजर छत पर गई , कमरे की दिवाल पर प्लास्टर हुआ था मगर छत पर वैसे ही चूना किया हुआ था । पंखा भी काफी पुराना था ।

मंजू पानी रखते हुए : और घर सब कैसे है ?

मुरारी : सब ठीक है , तुम बताओ कैसी हो ?

मंजू जबरन होठों पर मुस्कुराहट लाकर: जी मै भी ठीक हूं

मुरारी : बगल वाले चाचा बता रहे थे तुम ऑफिस जाती हो?

मंजू मुस्कुरा कर : जी वो पास में ही एक ऑफिस है , वही नौकरी करती हूं।

मुरारी : अच्छा ससुराल में किसी से बात चीत होती है क्या ?

मंजू उदास होकर : जी नहीं , काफी साल हो गए

मुरारी : हम्मम , मैं यहां एक प्रस्ताव लेकर आया हूं मंजू

मंजू को डर लग रहा था : जी कहिए

मुरारी : अमन की मां की इच्छा है कि तुम घर आ कर रहो , हमारे साथ

मंजू चौक कर : क्या ? नहीं मै कैसे ? आप ये क्या बोल रहे है ?

मुरारी : देखो मै तुम्हे यहां ले जाने ही आया हूं , मै अमन की मां को फोन करता हूं तुम बात करो ।

फिर मुरारी ने ममता को फोन मिलाया और मंजू को दे दिया

करीब घंटे भर बाद वो पीछे से वापस कमरे में आई ।

वो मोबाईल मुरारी को दी ।

मुरारी : तो क्या निर्णय लिया तुमने

मंजू : मै ऐसे कैसे जा सकती हूं, आप अपने भाई के बारे में सोचिए न , मै किस मुंह से उनके सामने जाऊंगी

मुरारी हंसता हुआ : भई इसी मुंह से चल चलो , नहीं पसंद आया उसे तो थोड़ा मेकअप कर लेना हाहा , शादी में वैसे भी तैयार होना ही है ।

मंजू हंसने लगी : धत्त भाई साहब आप भी

मुरारी : देखो मुझे पता है कि तुम अमन की मां को हामी भर चुकी हो , हा कि ना

मुरारी ने कबूलवाया

मंजू मुस्कुरा कर : हम्म्म

मुरारी खड़ा होता हुआ : फिर क्यों फालतू के सवाल जवाब , अपने जरूरी समान पैक कर लो कल सुबह मै आऊंगा फिर हम निकलेंगे ।

मंजू : आप कहा जा रहे है इतनी रात को

मुरारी थोड़ा हिचक कर : देखो मेरा यहां ऐसे रुकना उचित नहीं है , और यहां बिस्तर भी एक ही है ।

मंजू : अरे भईया आप उसकी फिक्र न करे मै नीचे सो जाऊंगी , आप इतनी रात कहा भटकेंगे । यहां तो आसपास न होटल मिलेगा न कोई सवारी ।

मुरारी वापस अपने कंधे से बैग सरका कर बिस्तर पर बैठ गया और मंजू बातें करते हुए खाना बनाने लगी ।

वही दूसरी ओर ममता अपनी होने वाली देवरानी से बाते कर बहुत खुश थी ।

हालांकि उसके दिल में बेचैनी हो रही थी कि अभी वो मदन के कमरे के जाए और उसे खुशखबरी दे दे मगर मुरारी ने ममता को मना कर रखा था क्योंकि वो उसे चौंकाना चाहते थे ।

ममता दिल ही दिल में आज अपने पति को बहुत प्यार दिए जा रही थी , उसका तो जी चाह रहा था कि अभी वो पास होती तो कस कर उससे लिपट जाती और आज तो उसने अपने पति को कैसे छेड़ा , कैसे बीच सड़क पर उनसे आई लव यू बुलाया ।

तभी अचानक से ममता के जहन में रागिनी का ख्याल आया और उसकी डेयरिंग बाते सोच कर उसके तन बदन के सरसरी फैल गई ।

अब उसका दिल जोरो से धड़कने लगा , भीतर गजब का कौतूहल मचा हुआ था । वो करे या न करे

आज तो उसके पास मौका भी है और दस्तूर भी मगर देवर जी भी तो है घर में । अरे यही तो असली डेयरिंगबाजी है ट्राई करते है ।

और ममता ने अपने जिस्म से नाइटी उतार दी ।

फिर पूरी की पूरी नंगी

आइने में खुद को देख कर अपने भरे गदराए मोटे मोटे मम्मे हाथों में भर कर आपस में सताने लगी जिससे उसके निप्पल टाइट हो गई ,

फिर वो अपने बड़े से कूल्हे को हिलाती हुई मोबाइल लेकर दबे पाव अपने कमरे का दरवाजा खोली ।

ममता ने अपना पूरा जिस्म दरवाजे की ओट में रखे हुए कमरे से बाहर झांका गलियारा एकदम सुनसान

दबे पाव अपने पायलों की रुनझुन को हल्का रखते हुए वो जीने के पास आई और हाल में देखा फिर मदन के बंद कमरे की ओर देखा। फिर धीरे धीरे जीने की सीढ़िया चढ़ने लगी ।






ऊपर गुप अंधेरा था तो उसने मोबाईल की टॉर्च जलाई और पीछे बाल्कनी में आई गई ।

उसे बहुत खुशी हो रही थी , सर्द हवाएं उसके जांघों और चूत पर लग रही थी उसके चूचे के निप्पल ठंडे पड़ने लगे थे ।

उसका रोम रोम पुलकित हो उठा था जिस्म पर दाने ऊबर आए हो मानो , रागिनी द्वारा दिखाया हुआ एक एक ख्वाब ममता को सच होता दिख रहा था और जैसा उसने कहा था , कि ऐसे मौके पर अपने पति की गर्म बाहों में लिपटने को मिल जाए तो मजा और आ जाए ।

ममता भी अपने बाहों को सहला कर चांदनी रात में दूर सिवान को निहार रही थी , ऐसे में उसे मुरारी की याद और आ रही थी ।

ममता कुछ ही देर में बेचैन होने लगी थी और उसने रागिनी से बात करनी चाही , मगर रागिनी के पास खुद का फोन नहीं था और इतनी रात के रंगीलाल के पास फोन मिलाना उचित नहीं लग रहा था ।

मगर भीतर की तड़प बढ़ती जा रही थी, रागिनी के बहकावे में वो ऊपर चली आई थी मगर भीतर प्रेम की आग जो भड़क उठी थी उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी । अब जिसने रोग दिया वो इलाज भी जानती होगी ये सोच कर ममता ने ना चाहते हुए भी रंगीलाल के पास फोन घुमा दिया

वही दूसरी ओर रंगीलाल आज रागिनी के गाड़ के घुसा हुआ था

रंगी : अह्ह्ह्ह्ह मेरी जान लह्ह्ह ओह्ह्ह्ह कितनी टाइट है तेरी गाड़ उम्मम

रागिनी : अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा फाड़ तो ऐसे रहे हो जैसे दुबारा वापस नहीं आना है अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म






रंगी : उम्मम तेरी मोटी चौड़ी गाड़ को देख कर मै पागल हो जाता हु और फिर कल से हफ्ते भर कहा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह हा और और फेक अह्ह्ह्ह और नचा उम्ममम

रागिनी सिसकारियां लेते हुए रंगी के लंड पर आने चूतड़ फेकने लगी और उसका सुपाड़ा फुलने लगा और अगले ही पल वो उसकी गाड़ में झड़ने लगा






रंगी : अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरी रॉड अह्ह्ह्ह रागिनी मेरी जान अह्ह्ह्ह भर दूंगा तेरी गाड़ अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

तभी रंगी का फोन बजने लगा

और वो आखिरी बूंद तक रागिनी की गाड़ में निचोड़ कर लंड बाहर निकाला

फिर बिस्तर पर आ गया

हेडबोर्ड का टेक लेकर मोबाइल चेक किया तो देखा अंजान नंबर से फोन आया था ।

दरअसल ममता ने हाल ही में एक मोबाइल लिया था , जिसका नम्बर ज्यादा लोगो के पास नहीं था ।

रागिनी पेटीकोट से अपनी गाड़ पोंछती हुई : किसका फोन है जी

रंगी : पता नहीं नया नंबर कोई , तुम इधर आओ मेरी जान

रंगी लाल ने रागिनी को अपने पास खींचा

रागिनी सिसकारियां भरती हुई : उम्ममम देखो तो थके नहीं क्या अभी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह उफ्फ रुको न थोड़ा

रंगी उसकी चूचियां मिज़ता हुआ : तुम्हे पेल कर भला कब थकान हुई है मेरी जान

तभी फिर से मोबाइल बजने लगा

रंगी चिढ़ कर : ये मादरचोद है कौन इतनी रात को ।

रंगी फोन उठा कर : हैलो

ममता : जी नमस्ते भाई साहब मै अमन की मां बोल रही हूं

एकदम से रंगी के हावभाव बदल गए : अरे भाभी जी आप , नमस्ते नमस्ते कहिए कैसी है ?

ममता : जी अच्छी हूं, आप सब कैसे है ?

रंगी : जी मै भी , मेरा मतलब हम लोग भी ठीक है , लीजिए सोनल की मम्मी से बात करिए

रागिनी : कहिए संबंधन जी आज इतनी रात , हमारी याद कैसे

ममता : जरा भाईसाहब से किनारे होइए , कुछ बात का करनी है ।

स्पीकर पर ममता की बात सुनकर रागिनी और रंगी मुस्कुराए और रंगी ने इशारा किया कि मै यहां नहीं हु ऐसा बोलो ।

रागिनी हस कर : अरे बोलिए बोलिए वो बाथरूम में गए है

ममता : क्या बोलूं दीदी , आपने तो मुझे फसा दिया

रागिनी : अरे क्या हुआ ?

ममता झिझक कर : वो आपके कहने पर मै यहां ऊपर आई थी , मगर अब तो ऐसी बेचैनी हो रही है कि क्या करु ।

रागिनी को समझते देर नहीं लगी कि ममता जरूर बालकनी में नंगी खड़ी है ।

रागिनी : ओहो मेरी डेयरिंग बाज समधन हिहिही , लग रहा है समधी जी है नहीं उम्मम क्यों ?

ममता : हा वो कही बाहर है ?

रागिनी : हाय दैय्या और आपके देवर ?

ममता : वो तो अपने कमरे में है !

रागिनी : और आप अकेली नंगी खड़ी है

ममता : हा बाबा , बताओ न क्या करु अब कितनी तड़प हो रही है उम्ममम

ममता और रागिनी की बातें सुनके रंगी रंगीनी से इशारे में पूछ रहा था कि आखिर क्या माजरा है तो रागिनी हस्ती हुई उसको शांत रहने को बोल रही थी ।

रागिनी : कुछ नहीं वापस आ जाओ कमरे में और चादर खींच कर सो जाओ हीहिही

ममता : धत्त बताओ न , आप क्या करती थी ऐसे में जब भाई साहब नहीं होते थे तो

रागिनी शरारत भरी मुस्कुराहट से : सच बताऊं , मै तो उन्हें याद कर अपनी मुनिया सहलाती थी खुली छत पर

ममता लजा कर : धत्त , सच में ?

रागिनी रंगी को देखकर अपनी टांगे खोलने लगी और अपनी बुर सहलाते हुए बोली : हा , मुझे तो मेरे बालम के बारे में सोच कर अपनी मुनिया सहलाने में बड़ा मजा आता है आह्ह्ह्ह अभी भी सोच कर रस टपकने लगा ।

ममता : उम्मम सच में ओह्ह्ह्ह ठीक है रखो फिर

रागिनी : अरे कहा चली

ममता हस कर : मै भी उन्हें सोच कर सहलाऊंगी हीहीही

रागिनी चहक कर : किसे , अपने समधी को क्या ?

ममता एकदम से लजाई: धत्त दीदी आप भी न

रागिनी : अरे इसमें शर्माना कैसा , आपके समधी जब आपके बारे में सोच कर अपना सहला सकते है तो आप क्यों नहीं ।

ममता : धत्त झूठी

रागिनी : अरे सच कह रही हूं, वो जो आपसे आपकी ब्रा पैंटी लाई थी न , एक रोज बाथरूम में लेकर घुसे थे ये

रागिनी मुस्कुरा कर रंगी को देखी ।

ममता : क्या सच में ?

रागिनी : हा और क्या , और अपनी ब्रा को नीचे लपेट कर खूब रगड़ रहे थे ।

ममता एकदम से चुप हो गई

रागिनी : और तो और आपकी कच्छी को नथुनों पर रखे हुए सूंघ रहे थे फिर ब्रा में ही सब निकाल दिया

ममता: धत्त आप बहुत गंदी है दीदी , हीहीही रखो अब

रागिनी हसने लगी और फोन कट हो गया ।

अगले ही पल रागिनी की सिसकिया एक बार फिर उठने लगी क्योंकि रंगी एक बार फिर अपना मुंह उसके चूत के लगा चुका था ।

जारी रहेगी

*** कहानी के नए सीजन का पहला अपडेट पोस्ट कर दिया गया है। पढ़ कर अपने विचार जरूर साझा करें । ***

धन्यवाद
 
पिछले 4 दिनों में 32000 बार लोगों ने स्टोरी विजिट की है मगर गिनती के 12-13 लोगों ने ही अपडेट पर रिएक्ट किया और रेवो किया

गजब के आलसी लोग है ... किस मोटिवेशन पर अपडेट पोस्ट करूं । समझ नहीं आता
 
💥 अध्याय: 02 💥

अपडेट 002

" ओह येस बेबी उम्ममम कितनी सेक्सी सा चूस रही हो अह्ह्ह्ह्ह बाबू उम्ममम कितनी बड़ी गाड़ है तुम दोनों की एकदम गोरी गोरी दूधिया गाड़ अह्ह्ह्ह पागल कर दे रहे हो ओह्ह्ह्ह " , अमन बेड के किनारे अपना लंड बाहर किए खड़ा था और बिस्तर पर बेट के बल लेट कर सोनल और निशा बारी बारी उसका लंड चूस रही थी ।





" लुक हियर बेबी अह्ह्ह्ह्ह सेक्सी लग रही हो उम्ममम अह्ह्ह्ह " , अमन सोनल को कैमरे की ओर देखने को कहता है जिसमें वो दोनों की लंड चूसते हुए वीडियो बना रहा था ।

दोनो ने मैचिंग सेक्सी सी ब्रा पैंटी सेट पहनी थी और होटल के बेड पर लेती हुई अमन का लंड साझा करने लगी

निशा : उम्ममम जीजू कितना गर्म है उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह्ह लोहे जैसा लंड है तुम्हारा

सोनल अमन से मोबाइल लेकर फ्रंट कैमरे से निशा के साथ वीडियो बनाने लगी : निशा इधर देख अह्ह्ह्ह्ह सीईईई






निशा कैमरे में देखते हुए अमन का टोपा चुबला रही थी और उसकी आंखो में खुमारी उतर चुकी थी वो मदहोश नजरों से खुद को ही निहार रही थी ।

तभी अमन के मोबाइल पर रिंग हुआ

अमन : किसका है ?

सोनल : पापा जी का है !!

अमन समझ गया कि जरूर कुछ जरूरी बात होगी

अमन मोबाइल लेकर : मै बात करके आता हु

फिर वो वैसे हो कमरे निकल कर बालकनी में नंगा खड़ा होकर बात करने लगा

फोन पर

: नमस्ते पापा , कैसे हो ?

: मै ठीक हूं बेटा , तुम कैसे हो ? ( मुरारी की आवाज आई )

: मै तो एकदम मस्त हु पापा हीही ( अमन ने चहक कर जवाब दिया )

: हा हा भाई तेरी तो डबल मस्ती चल रही होगी क्यों ( मुरारी ने अंदाजा लगाया )

: उफ्फ पापा क्या बताऊं , आपकी बहु और उसकी बहन पूरा दिन मुझे कपड़े नहीं पहनने देते , अभी भी नंगा हु बालकनी में हीही

: ऐसी किस्मत सबको नहीं मिलती बेटा , मै तो 2 रोज से तड़प रहा हूं। शहर के शहर भटक रहा था अब तक आज कही पाव रुके है मेरे

: मतलब चाची मिल गई ( अमन खुश होकर )

: हा बेटा मिल गई , अभी उसके घर पर रुका हु कल सुबह हम लोग निकलेंगे घर के लिए

: वाव पापा फिर तो मै भी जल्दी आता हूं हीही मजा आएगा ( अमन एकदम से खुश हो गया )

: नहीं नहीं बेटा तुम आराम से अपनी ट्रिप इंजॉय करके आना , तबतक मै तैयारिया देख लूंगा , ठीक है (मुरारी बोला )

: पापा?

: हा बोल न बेटा ?

: पापा चाची कैसी दिखती है , मतलब sexy है या नहीं हीही ( अमन कमरे में झाक कर अंदर का माहौल देख कर अपना लंड सहलाते हुए मुरारी से सवाल किया )

: बदमाश कही का , आकर देख लेना न कैसी है ? हाहाहाहा ( मुरारी हंसा)

: पापा बताओ न प्लीज

: अब क्या बताओ बेटे , एकदम कड़क गदराया पीस है उफ्फ तेरी बुआ संगीता के जैसी कसी हुई मोटी मोटी छातियां है और कूल्हे उठे हुए है उसके जैसे ही । उम्मम अब क्या बोलूं , मेरा तो सोच कर ही मूड बन गया अह्ह्ह्ह

: वाव सच में फिर तो चाचू के भाग्य खुल गए हीही ( अमन बोला )

: किस्मत तेरी भी कम बुलंद नहीं है बेटा , बीवी के साथ साली को भी चोद रहा है उम्मम हाहाहा ( मुरारी ने अमन को छेड़ा )

: पापा एक गजब की चीज दिखाऊं, कलेजा थाम के देखना ओके ( अमन कमरे में झांकता हुआ बोला )

फिर वो मुरारी को वीडियो काल उठाने की रिक्वेस्ट भेजता है

: ऐसा क्या दिखाने वाला है तू ( मुरारी अंधेरे में वीडियो काल उठाता है

: श्शशश, चुप रहिएगा (अमन ने मुरारी को टोका और वीडियो काल पर बैक कैमरा से कमरे के अंदर का माहौल दिखाय






अंदर दोनो बहने सोनल और निशा 69 पोजिशन में एकदूसरे के बुर और गाड़ चाट रही थी और सोनल तो अपनी एक उंगली निशा की गाड़ में गुब्ब गुब्ब पेलते हुए उसकी झड़ती चूत चाट रही थी )

इधर मुरारी की आंखे फटी की फटी रह गई और लंड एकदम उफान पर था

कमरे से बाहर निकल कर

: क्या हुआ पापा होश उड़ गए न

: बेटा ये तो मैने पहली बार देखा , बहु अपनी बहन के साथ , अह्ह्ह्ह बेटा तेरे तो मजे ही मजे है । ( मुरारी पजामे में अपना लंड मसल कर बोला )

: पापा जल्द ही आपकी बहु को आपके आगे लिटाऊनंगा फिर आप भी मजे लेना , चलो मै चलता हु बाय

: हा बेटा मजे करे ( मुरारी फोन काटकर ) मेरे नसीब में तो अभी दो रात चूत का कोई ठिकाना नहीं है ।

मुरारी छत से नीचे आया और वो मोबाईल का टार्च जला कर नीचे आ रहा था कि उसके जहन में अमन के सवाल कौंधी " चाची कैसी है ? "

मुरारी कमरे में आया और उसकी नजर जमीन पर सोई हुई अपने भाई की प्रेमिका पर गई , जो इस वक्त साड़ी बदल कर नाइटी में सोई थी ।

उसके घुटने फोल्ड थे और पैर की ओर से नाइटी में पूरा गैप बना हुआ था ।

मुरारी का जी ललचा गया

वो दबे पाव दूसरी तरफ आया और मंजू के चेहरे पर टार्च जलाई , वो गहरी नीद में थी और उसने झुक कर हौले से मंजू की खुली नाइटी में टॉर्च दिखाई






आहे क्या नजारा था , हल्की फुल्की झुरमुट में झांकी एक रसीली फांक

देखते ही मुरारी का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा मगर वो ज्यादा देर तक ऐसे नहीं रुक सकता था इसीलिए वो उठ कर बिस्तर पर आ गया ।

वही दूसरी ओर अमन कॉल काट कर वापस आया कमरे में तो सोनल निशा की जांघें फाड़े हुए उसकी बुर में अपना मुंह दिए हुए थी

सोनल : अह्ह्ह्ह कितनी गर्म है तेरी चूत रे अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह , इसको खा जाऊंगी आज उम्ममम

निशा उसके गाड़ के सुराख को गिला कर रही थी वो पागलों के जैसे सिसकने लगी जब सोनल इसके चूत में जीभ घुमाने लगी


निशा : ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई यस्स अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सोनल उम्ममम मै पागल हो जाऊंगी

अमन अपना लंड सोनल के मुंह पर लाता हुआ : हाय बेबी इसे नहीं चूसोगी उम्मम

सोनल ने नजरे उठा कर देखा और मुस्कुराते हुए अमन का लंड पकड़ कर मुंह में भर ली






अमन : ओह्ह्ह्ह गॉड उम्मम माय डर्टी बीच सेक्सी डॉल उम्ममम सक इट बेबी अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म फक्क्क् यूयू ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह

अमन सिसकने लगा और सोनल उसका लंड गले तक ले जाने लगी उसकी उंगलियां अभी भी निशा के बुर को मसल रही थी

निशा तड़पती हुई : डालो न जीजू उम्ममम प्लीज अह्ह्ह्ह

अगले ही पल सोनल ने लंड को मुंह से निकाल कर अमन का सुपाड़ा निशा के बुर के फांके पर रगड़ने लगा

निशा : अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म फक्क्क् मीईईईई अह्ह्ह्ह्ह डाल दे न कामिनी अह्ह्ह्ह बहनचोद अह्ह्ह्ह्ह जाने दे न अह्ह्ह्ह

अगले ही पल अमन ने हचक से लंड को झटका दिया और वो निशा के बुर के फाकों को चौड़ी करता हुआ अंदर घुसता चला गया

निशा : ओह्ह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई यस्स अह्ह्ह्ह्ह जीजू पेलो मुझे उम्मम कितना बड़ा है अह्ह्ह्ह रुकना नहीं उम्ममम यस्स जीजू उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क्क् फ़क्कक्क फक्क्क् ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यस्स बेबी

अमन निशा की जांघें उठा कर तेजी से उसकी बुर में पेलने लगा : अह्ह्ह्ह ले मेरी जान कितनी गर्मी है तेरी बुर में अह्ह्ह्ह्ह मजा आ रहा है ओह बहिनचोद सपना था तुझे पेलने का जबसे तेरे चौड़े कूल्हे देखे थे उम्मम अह्ह्ह्ह्ह






निशा : अह्ह्ह्ह हा जीजू मै भी पागल हु आपके लिए अह्ह्ह्ह फक्क्क् मीईईई ओह्ह्ह गॉड अह्ह्ह्ह सोनल उम्ममम ममममाआ अह्ह्ह्ह्ह

वही सोनल निशा के निप्पल चूस रही थी और उन्हें मिंज रही थी कि उसकी नजर वापस से अमन के मोबाइल पर गई और लपक कर वो निशा के बगल में अपनी टांगे खोलकर भी लेट गई और सेल्फी कैमरे पर वीडियो बनाने लगी

निशा : अह्ह्ह्ह्ह कामिनी किसको दिखाएगी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह जीजू और तेज अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म फक्क्क् बहिनचो ताकत नहीं है क्या अह्ह्ह्ह

अमन जोश में उसकी जांघें पकड़ कर फचर फचर पेलने लगा : साली मादरचोद फाड़ दूंगा अह्ह्ह्ह लह्ह्ह ओह्ह्ह्ह कितनी गरम है चूत अह्ह्ह्ह

निशा तेजी से चीख रही थी






और सोनल हस्ते हुए सेल्फी कैमरे पर वीडियो ब्लॉग बना रही थी : हाय गाइज वी आर ऑन हनीमून , माय बिग डिक्की हब्बी फकिंग माय सिस्टर हाहा , देखो गाइज मेरी चूत अह्ह्ह्ह कितनी गर्म है मुझे भी लंड चाहिए कोई चोदेगा मुझे हाहाहा

सोनल मस्ती कर रही थी और उसकी बातें सुनकर उसका लंड और फड़कने लगा कि क्या हो अगर ये वीडियो अपने पापा को दिखाएगा

अमन निशा को छोड़ कर लपक कर सोनल को अपनी ओर खींचा और गपक से लंड उसकी चूत में उतार दिया ।

सोनल : ओह्ह्ह्ह बेबी कितना टाइट है आह्ह्ह्ह मम्मा उम्मम्म फक्क्क् मीईईई ओह्ह्ह यस्स बेबी अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

अमन उसके हाथ से मोबाईल लेकर बैक कैमरा से वीडियो रिकार्ड करने लगा सोनल को चोदते हुए

सोनल अपनी जांघें खोलते हुए : अच्छे से बनाओ न बेबी अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह गॉड फक्क्क् मीईईईई यस्स बेबी उम्मम्म फक्क्क् मीईईईई अह्ह्ह्ह्हमम

निशा ने उसके लिप्स से लिप्स जोड़ लिए और चूत सहलाने लगी , सोनल ने बदन और जोश बढ़ने लगा । निशा झुक कर सोनल के बड़े बड़े रसीले मम्में मुंह में भरने लगी अपनी गाड़ फैला कर






अमन उसकी भी सारी हरकते रिकॉर्ड करता है सोनल को पूरे जोश ने पेले जा रहा : ओह्ह्ह्ह्ह बेबी कितनी मुलायम चूत है तुम्हारी ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू बाबू

सोनल : उम्ममम यस्स बेबी फक्क मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म फक्क्क् मीईईईई यस्स अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह


अगले ही पल निशा लपक कर अमन के हाथ से मोबाइल लेते हुए : जीजू मुझे दो न हिही

निशा ने सेम सेल्फी कैमरे से वीडियो चालू की और अपनी बुर सोनल के मुंह पर ले जाती हुई : देखो गाइज मेरी ये मेरी बहन है , ये मै हु और ये मेरी चूत चाट रही है , अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम और डाल ने जीभ ओह्ह्ह्ह गॉड उम्मम, अह्ह्ह्ह्ह गाइज देखो मेरी बहन को जीजू मेरे चोद रहे है अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म






सोनल ने निशा की दोनो जांघों को कस लिया और उसकी बुर के फांके चुंबलाने लगी

वही दूसरी ओर अमन सटासट उसकी बुर पेले जा रहा था , सोनल के बाद अब निशा की हरकते उसको और पागल किए जा रही थी , उसके पैर थक रहे थे ।

वो उठा और बिस्तर पर आ गया

लंड आसमान की ओर उठाए : आजाओ बेब्स

निशा : मेरी टर्न मेरी टर्न अह्ह्ह्ह उम्ममम

निशा दोनों पैर फेक कर अमन की ओर अपना गाड़ करके उसका लंड अपनी बुर में लेकर बैठ गई : अह्ह्ह्ह उम्मम अह्ह्ह्ह्ह उम्ममम

निशा कस कर अपने चूतड़ अमन के कड़क लंड पर पटक रहे थी और सोनल अमन के बाहों के लेती हुई उसके लिप्स चूसने लगी

सोनल : मजा आ रहा है मेरी जान उम्मम






अमन उसके नंगे चूतड़ नोचता हुआ : बहुत ज्यादा मेरी जान अह्ह्ह्ह

निशा : अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म फक्क्क् मीईईईई अह्ह्ह्ह्हमम यशस्स जीजू पेलो मुझे अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म फक्क्क् मीईईईई अह्ह्ह्ह्हमम यशस्स जीजू आयेगा अह्ह्ह्ह

अमन निशा की बातें सुनकर उसके चूतड़ पकड़ कर नीचे से झटके देने लगा : अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह ले साली रंडी अह्ह्ह्ह मेरी जान अह्ह्ह्ह्ह झड़ जा अह्ह्ह्ह

अमन कस कस कर नीचे से कमर उछाल कर पेलने लगा और निशा अपनी आँखें उलटती हुई झड़ने लगी ,

अमन : ओह्ह्ह यस्स बेबी फक्क मीईईई अह्ह्ह्ह आ रहा है मेरा भी ओह्ह्ह्ह

निशा झट से उसके लंड से उठ गई और सोनल ने लपक कर अमन का लंड मुंह में ले लिया और अमन उसक सर पकड़ कर झटके खाते हुए झड़ने लगा : अह्ह्ह्ह मेरी जान पी ले अह्ह्ह्ह्ह ममीईइई ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू बेबी अह्ह्ह्ह्ह






सोनल अमन के फड़कते लंड को पकड़े हुए आखिर से सारा पानी पीती रही और फिर उसका सुपाड़ा निशा के बहती चूत पर लगा कर वापस से चूसने लगी जिसे देखकर अमन के लंड में फिर से हरकत होने लगी

मगर सुबह से ये चौथी बार था जब वो इतने जोरदार तरीके से झड़ा था और सुस्ती उसके जिस्म पर हावी हो रही थी

फिर वो दोनों के साथ ही सो गया ।

अगली सुबह

मुरारी अंगड़ाई लेता हुआ उठा, उसको आंखों में हल्की फुल्की जलन महसूस हो रही थी और पता चला घर में धुआं उठ रहा था कही ।

मुरारी मच्छरदानी से निकल कर खड़ा हुआ और पजामे में उसके लंड एकदम कड़क उठा था सुबह सुबह । नीचे देखा तो मंजू उठ चुकी थी और पीछे हाते के पास चूल्हे से गर्मागर्म खाने की खुशबू आ रही थी। मुरारी ने घड़ी देखी तो 8 बजने वाले थे ।

अचरज नहीं हुआ मुरारी को मंजू इतनी सुबह क्यों खाना बना रही होगी ।

मुरारी अपना लंड पजामे में सेट करता हुआ हाते में चूल्हे के पास आया जहा मंजू रोटियां बेल कर सेक रही थी

मंजू मुरारी को अपने ओर आते देख मुस्कुरा उठी और झट से अपना दुपट्टा सर पर ले लिया । वो अभी भी रात वाली नाइटी में थी , जाहिर था अभी तक वो नहाई नहीं थी ।

मगर मुरारी को इससे फर्क नहीं पड़ने वाला था उसकी नजर तो मंजू को नाइटी की आधी खुली चैन पर थी जिसमें से मंजू के दो बड़े बड़े रसीले मम्में आपस में चिपके हुए थे और रोटियां बेलते समय मंजू के दोनों मम्मे खूब उछल रहे थे ।






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मुरारी का लंड एक बार फिर से सर उठाने लगा ।

मुरारी : अरे मंजू सुबह सुबह खाना

मंजू मुस्कुरा कर : हा भाईसाहब वो मुझे ऑफिस जाना है न

मुरारी : ऑफिस जाना है मतलब

मुरारी का हलक सूखने लगा कि कही उसने साथ चलने का प्लान कैंसिल तो नहीं कर दिया ।

मंजू : अरे मुझे मेरे सर को बताना पड़ेगा न कि मै अब काम पर नहीं आऊंगी और फिर हिसाब भी कराना पड़ेगा न

मुरारी की जान में जान आई : ओह ऐसा , मै सोचा कि

मंजू उसकी बात समझ कर मुस्कुराने लगी ।

मुरारी : बाथरूम में पानी आ रहा है क्या

मंजू : जी नहीं वो मैं पानी रख दी हूं आप जा सकते है

मंजू थोड़ा शर्मा कर मुस्कुराने लगी ।

फिर वो उठ कर झाड़ू लगाई और इधर मुरारी पाखाने में चला गया ।

मंजू ने सोचा कि जबतक मुरारी पाखाने में है क्यों न तबतक वो नहा ले , नहीं तो कपड़े बदलने की दिक्कत हो जाएगी ।

मंजू फटाफट से नल चला कर पानी भरने लगी और मुरारी को आवाज आने लगी नल चलने की

उसके भी जहन भी यही चल रहा था कि मंजू कैसे नहाएगी । क्या उसे देखना चाहिए ।

मुरारी खुद से बड़बड़ाया: वैसे कसे हुए रसभरे मम्मे है उसके एकदम टाइट ओह्ह्ह्ह लंड खड़ा कर दिया साली ने

तभी बाहर से पानी गिराने की आवाज आने लगी तो मुरारी की झटका लगा उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी ये सोचकर कि कही मंजू बहार नहाने तो नहीं बैठ गई । हड़बड़ी में वो बिना गाड़ धोए ही खड़ा होकर पाखाने के किवाड़ की जाली से बाहर नल की ओर झांका

तो देखा मंजू नाइटी में ही नल के पास बैठ कर अपने बदन पर पानी डाल रही थी ।






उसने नाइटी को जांघों तक उठा रखा था जिससे उसकी चिकनी नंगी सुडौल जांघें देख कर मुरारी का लंड ऐंठने लगा । उसकी नजर मंजू के भीगती नाइटी पर भी थी जिसमें से मंजू के चूचे शेप में आ रहे थे धीरे धीरे भीगकर

मुरारी : अह्ह्ह्ह बहनचोद बवाल चीज है यार मदन क्या किस्मत है साले तेरी , मस्त माल है आह्ह्ह्ह

मुरारी को फिर से प्रेशर आने लगा तो वो वापस हगने बैठ गया और उधर मंजू झटपट से नहा कर कमरे में चली गई और कड़ी लगा दिया ।

कुछ देर बाद वो कपड़े पहन कर बाहर आई और मुरारी तबतक बाहर आ चुका था । फिर वो भी नहाने बैठ गया और इधर तबतक मंजू ने पैकिंग के लिए ढेर सारे कपड़े बिस्तर पर फैला दिए थे ।

ब्लाउज पेटीकोट सारी नाइटी ब्रा पैंटी दुपट्टे जींस सूट सब कुछ ।

मुरारी नहा कर आया तो उसने बिस्तर पर बिखरे हुए कपड़े देखे , ज्यादातर पुराने थे । मुरारी को देख मंजू ने झट से दुपट्टे ब्रा पैंटी धक दिए ।

मुरारी ने भी थोड़ी नजरे फेरी मगर भीतर से तो वो पूरा जिज्ञासु हुआ जा रहा था कि मंजू की असल साइज क्या होगी ।

मुरारी : अरे इतने सारे समान लेकर कैसे जायेगे हम लोग , बस जरूरी समान और कपड़े रखो बाकी छोड़ दो

मंजू : तो ये सब सामान

मुरारी : देखो ये सब सामान आप पास जो भी तुम्हे खास लगे उसे देदो , वहां किसी चीज की कमी नहीं है ।

मंजू : जी ठीक है भाई साहब

मुरारी की बातों ने मंजू को सोच में डाल दिया था कि क्या करे वो , फिर उसे ये भी समझ नहीं आ रहा था कि उतने बड़े घराने में वो किन कपड़ो में जाएगी । ये सब पुराने कपड़े और अंडर गारमेंट किसी ने देख किया तो क्या सोचेंगे उसके बारे में । मंजू के जहन में झिझक हो रही थी । उसके जहन में कुछ योजना चल रही थी जिससे उसकी सारी झंझट ठीक हो सकती थी मगर वो मुरारी से साझा करने से कतरा रही थी

मुरारी : क्या हुआ , क्या सोच रही हो

मंजू : जी ? कुछ नहीं ! ऐसा नहीं हो सकता कि हम लोग कल चलें ?

मुरारी : क्या हुआ , बताओ न ?

मंजू : जी वो मुझे कुछ कपड़े लेने है और ऑफिस भी जाना है । पूरा दिन लग जाएगा फिर पैकिंग भी बाकी है और ये सब सामान किसी को सौंपना है ।

मुरारी कुछ सोच कर : अच्छा ठीक है हम कल ही जाएंगे । पहले तुम खाना खा कर ऑफिस जाओ और निकल कर फोन करना मै आ जाऊंगा तो साथ में शॉपिंग पर चलेंगे

मंजू खुश होकर : जी ठीक है

फिर मंजू सारे कपड़े बिस्तर पर एक किनारे बटोर दी और मुरारी के लिए खाना लेने चली गई ।

अरुण के घर

सुबह का नाश्ता कर अरुण कालेज के लिए निकल गया था और रज्जो जो शिला के साथ उसके कमरे में थी वो नहाने चली गई और नहाने के बाद वो तैयार हो गई ।

रज्जो : अरे दीदी कब आयेंगे वो लोग , 9 बज गए है

शिला : रुको यार फोन करती हुं

फिर शिला ने अपने पति को फोन घुमा दिया

फोन पर

शिला : हैलो

मानसिंह : हा शीलू कहो

शिला : कहूं क्या कहू ?आपको तो मेरी फिकर ही नहीं है , सुबह आने वाले थे 9 बज गए है

मानसिंह : बस मेरी जान आधे घंटे में आ रहा हूं

शिला मस्ती भरे लहजे में : जल्दी आओ न मेरे राजा , कबसे तड़प रही हूं अह्ह्ह्ह

मानसिंह : ओहो मेरी जान मूड में है क्या

शिला रज्जो को देख कर मुस्कुराई और अपनी हसी रोक : अह्ह्ह्ह्ह हा बहुत ज्यादा , कितने दिन से मै तड़प रही हूं उम्मम जल्दी से आओ न

मानसिंह : बस मेरी आ ही गया हू रखो मै गाड़ी चला रहा हूं

फोन कट जाता है

रज्जो और शिला खिलखिला कर हस दिए

रज्जो - ये बढ़िया तरीका है जल्दी बुलाने का हीही उम्मम

शिला - अरे जब तड़पकर आयेंगे तभी तो और मजा आएगा हीही

कुछ देर मानसिंह की गाड़ी उसके घर के दरवाजे पर खड़ी थी ।

मानसिंह झट से उतरा और उसके साथ रामसिंह और कम्मो भी ।

कम्मो हस कर : अरे भाई साहब दीदी कही भाई नहीं रही है हाहा

रामसिंह : भाभी ने हड्डी फेक दी है कम्मो , अब भैया कहा किसी की सुनने वाले है हीही

मानसिंह अपना पजामा सेट करता हुआ : तुम दोनों चुप रहो , तुम्हारे आउटडोर क्विकी के चक्कर में लेट हो गया हमें

कम्मो : कॉम डाउन मेरी जान , मजा नहीं आया क्या आपको उम्मम खुले ने मुझे पेल कर

कम्मो पार्किंग में पजामे के ऊपर से ही मानसिंह का खड़ा लंड पकड़ते हुए बोली ।

मानसिंह सिहर उठा : अह्ह्ह्ह्ह कम्मो जाने दे न मुझे अह्ह्ह्ह

और मानसिंह झटके से घर में चला गया । वही कम्मो खिलखिलाने लगी

रामसिंह : भैया को तंग करने में तुम दोनों बहने एक सी हो हीही

कम्मो : क्यों जलन हो रही है

रामसिंह हस कर अपने लंड की ओर इशारा कर : मुझे नहीं इसे जरूर हो रही है

कम्मो ने हाथ बढ़ा कर रामसिंह का लंड पकड़ लिया : चलो इसको थोड़ा दुलार देती हूं मान जायेगा

और रामसिंह ने वही पार्किंग में ही कार पास खड़े हुए कम्मो के लिप्स चूसने लगा ।

कम्मो की सांसे चढ़ने लगी : जान ऊपर चलते है न

रामसिंह साड़ी के ऊपर से उसकी गाड़ दबोचता हुआ : यही कर लेते है न मेरी जान एक और आउटडोर क्विकी

कम्मो लजाई: धत्त

और निकल गई घर में ।

वही मानसिंह बड़े तेजी से हाल में घुसा और किचन में मीरा को काम करता देख शांत हुआ

मानसिंह : मीरा , नीलू की मां कहा है ?

मीरा : जी नमस्ते साहिब वो अपने कमरे में ही होगी

मानसिंह बिना कुछ बोले तेजी से अपने कमरे के पास चला गया ।

कमरे में कोई नहीं दिखा उसे जोरो की पेशाब लगी थी तो वो पहले फ्रेश होने लगा और जैसे ही बाहर आया और सोफे पर बैठ कर अपने जूते निकालने लगा

शिला हाथ में नाश्ते का ट्रे लेकर कमरे में दाखिल हुई , उसने आज नए तरीके से साड़ी पहनी हुई थी






शिला के चुस्त ब्लाउज के उसकी छातियां मुश्किल से बिना ब्रा के समा पाई थी । ज्यादातर तो बाहर निकल आई थी । उसने सीधा पल्ला का साड़ी पहन करअपना चेहरा पल्लू से पूरा ढक रखा था और आगे से उसका ब्लाउज से मोटी चूचियां और नंगा बड़ा पेट साफ साफ नजर आ रहा था ।

मानसिंह ने जैसे ही शिला को साड़ी में ऐसे कामुक अवतार में देखा तो उसकी हलक सूखने लगी

मानसिंह : आहा मेरी जान क्या मस्त लग रही हो , अह्ह्ह्ह्ह ये पर्दा क्यों , आओ न बैठो

शिला ने ट्रे टेबल पर रखा और पीछे होकर खड़ी हो गई

मानसिंह : आओ न मेरी जान

शिला ने बिना कुछ बोले न में सर हिलाया

मानसिंह की नजर शिला के गदराई हुई मोटी मोटी चूचियो पर थी जो उसे ललचा रही थी और उसकी गुदाज गहरी नाभि देख मानसिंह का गला सुख रहा था ।

मानसिंह : अह्ह्ह्ह जान अभी भी नाराज हो क्या

शिला ने घूंघट में ही बिना कुछ बोले हा में सर हिलाया तो मानसिंह हाथ आगे बढ़ा कर उसकी कलाई पकड़ ली तो शिला एकदम से चौक गई और कुनमुना कर अपनी कलाई छुड़ाने लगी और उससे दूर होने के लगी कि मानसिंह ने एक बार फिर से उसकी कलाई पकड़ते हुए उसको अपनी ओर खींचा और अपनी गोदी में बिठा लिया

शिला सिसकी और मानसिंह उसके बड़े चौड़े कूल्हे को मसलता हुआ अपने हाथ उसके नंगे पेट कर सहलाने लगा: अह्ह्ह्ह्ह मेरी जान क्यों नाराज है, अब तो आ गया न तेरे पास , जरा एक अपने मीठे होठों का रस तो पिला

जैसे ही मानसिंह ने शिला ने सर से पल्लू हटाया उसको जोर का झटका लगा वो उछल कर फर्श पर खड़ा हो गया और कमरे में एक तेज खिलखिलाहट गूंजने लगी

मानसिंह ने दरवाजे की ओर देखा तो वहां शिला लेगी कुर्ती में हस रही थी और अब तक जिसे मानसिंह शिला समझ रहा था वो रज्जो थी ।

रज्जो थोड़ी लजा शर्मा रही थी क्योंकि उसे ये उम्मीद नहीं थी कि मानसिंह एकदम से उसके जिस्म को मिजने लगेगा ।

मानसिंह : आ दादा , माफ कीजिएगा भाभी जी , मुझे लगा शिला है और आप कब आई तुमने बताया नहीं

मानसिंह जितना हो सकता था माहौल को बदलने की कोशिश कर रहा था मगर शिला ने रज्जो के सामने उसका मजा लेने से बाज नहीं आई और जमकर अपने पति को छेड़ा ।

शिला मजे लेते हुए : वैसे अब पता चल गया कि आप मुझसे जरा भी प्यार नहीं करते हूंह

मानसिंह कभी शिला को तो कभी मुस्कुराती लजाती रज्जो को देख कर सफाई देता हुआ : अरे मुझे कैसे पता कि घूंघट के नीचे भाभीजी होंगी , प्लीज भाभी जी मुझे माफ कीजिएगा प्लीज

रज्जो हस्ती हुई : कोई बात नहीं ये हम दोनो की ही शरारत थी

मानसिंह शिला की ओर देखकर : लो देखो ,

शिला : क्या देखो , भले ही ये हमारी शरारत थी मगर आपको तो मुझे पहचानना चाहिए था न हूह

रज्जो हसने लगी : हा ये भी .. हीही

मानसिंह शर्म से झेप कर : क्या भाभी आप भी मतलब

शिला : चलो भाभी , हम चलते है अब रहिए आप अकेले हूह

मानसिंह : अरे सॉरी न नीलू की मां , प्लीज

शिला मुंह बना कर : हा हा ठीक है , आप नहा धो कर नाश्ता कर लो हम आते है

मानसिंह : अरे कहा जा रहे हो

शिला : अरे रज्जो भाभी के कुछ कपड़े कल देने गई थी गांव में , तो वही लेने जाना है

मानसिंह : ओह ठीक है , जल्दी आना प्लीज

शिला मुंह बनाते ही अंगूठा दिखा कर : ठेंगा आऊंगी जल्दी हा नहीं तो

और दोनों कमरे से बाहर हस्ती खिलखिलाती निकल गई ।

*********************************

वही इन सब के अलग चमनपुरा में

रंगीलाल का बैग पैक हो चुका था और नाश्ता करके वो तैयार था

रंगी : राज बेटा दुकान के साथ घर का भी ध्यान रखना और तुम छोटे सेठ पढ़ाई न रुके बोर्ड है न इस बार

अनुज : जी पापा

रंगी : राज दुकान पर कुछ न समझ आए तो फोन कर लेना

राज : ठीक है पापा

रंगी : राज की मां तुम भी ख्याल रखना अपना

रागिनी कुछ बोले अनुज बीच में टपका : पापा मै हु न , मम्मी के पास हमेशा आप बेफिक्र जाओ

अनुज की बात पर सब हसने लगे

रागिनी मुस्कुरा कर : तेरा बैग रेडी हुआ , कालेज जाना है न तुझे भी

अनुज : कल से न मम्मी प्लीज

राज : कोई ड्रामा नहीं , चुप चाप कालेज जा

अनुज मन मारकर चुप हो गया और

रंगी भी मुस्कुरा कर सबसे विदा लेकर निकल गया आपने ससुराल के लिए।

वही राज आज से अपने पापा वाले दुकान पर बैठने वाला था और रागिनी कास्मेटिक वाले दुकान पर । अनुज भी अपने बैग रेडी कर निकल चुका था कालेज के लिए ।

जारी रहेगी
 
कहानी का नया अपडेट

पेज नंबर 1166 पर पोस्ट किया गया है
 
💥 अध्याय 02 💥

अपडेट 003


पिछले 3 हफ्ते थे अनुज घर और शादी के ऐसा उलझा था कि उसे न पढ़ाई के लिए समय मिला और न ही आने वाली परीक्षा की तैयारियों का

आने वाले महीनों उसके प्रैक्टिकल शुरू हो रहे थे और उसके प्रोजेक्ट अधूरे क्या शुरू ही नहीं हो पाए थे ।चिंता भरे मन से अनुज उलझा हुआ कालेज के लिए जा रहा था । उसका कालेज भी वही था जहां से पहले उसके भैया राज ने दसवीं और इंटर पास किया था ।

राज के अच्छे व्यवहार और पढ़ाई में अच्छा होने की वजह से उसके कालेज के टीचर अनुज से अकसर उसके बारे में हाल चाल ले लिया करते यहां तक कि अनुज की पहचान भी अभी तक राज के छोटे भाई के तौर पर ही थी । क्योंकि ना ही अनुज पढ़ाई के उतना अव्वल था और न ही खेल कुद जैसी प्रतियोगीताओ में कोई रुचि रखता था , हालांकि चढ़ती उम्र में वासना ने उसे लालची जरूर बना दिया था ।

कालेज को जाती सड़क पर चल रहा था , आमतौर पर ये सड़के बच्चों से व्यस्त होती थी मगर आज पापा की वजह से उसे थोड़ा लेट हो गया क्योंकि अनुज का तो आज जरा भी मन नहीं था ।

09.30 बजने को हो रहे थे और कालेज कुछ दूर ही था कि उसकी नजर आगे पुलिया पर गई , जहां दो लड़कियां एक दूसरे की तस्वीरें निकाल रही थी ।








उनमें से कालेज ड्रेस में एक लड़की का गोरा दुधिया चेहरा दूर से चमकता दिखा और अनुज समझ गया कौन थे वो दोनों ।

: अरे वो देख , तेरा हीरो आ रहा है हीही ( दूसरी लड़की ने पहली लड़की को छेड़ा )

: धत्त कमिनी, चुप कर वो आ रहा है ( उसने अपने सूट को कमर के पीछे से खींच कर अपने गोल मटोल चूतड़ों पर चुस्त किया और विजिबल चुन्नी से अपना क्लीवेज ढकती हुई बड़ी सहूलियत से खड़ी होकर अपने जुल्फे कान में खोसने लगी )

" हाय अनुज , बड़े दिन बाद " , उस पहली लड़की ने अनुज को टोकते हुए कहा ।

अनुज : ओह हाय कृतिका , हा वो मै दीदी की शादी में उलझा था । बताया तो था उस दिन दुकान पर ?

अनुज के जवाब पर वो दूसरी लड़की ने आंखे महीन कर कृतिका को घूरा तो कृतिका नजरे चुराती हुई मुस्कुरा दी : अच्छा हा , और कैसे हो ?

अनुज : अच्छा हु और तुम दोनों ?

" अच्छा तो तुम्हे दिख गई मै , ठीक हूं मै भी " , कृतिका के साथ वाली लड़की बोली जिसके नारियल जैसे चूचे सूट को सीने पर पूरा ताने हुए थे जिससे उसका दुपट्टा ज्यादा ही उठा नजर आ रहा था ।

अनुज थोड़ा झेप कर मुस्कुराता हुआ : अरे पूजा वो तो मै , अच्छा सॉरी बाबा

कृतिका पूजा से : क्या तू भी परेशान कर रही है , चलो अनुज

अनुज : हम्म्म चलो

अनुज थोड़ा आगे हुआ कि उसके कानो में पूजा की भुनभुनाहट आई : हरामीन तूने बताया नहीं न मिलने गई थी उम्मम ।

इसके बाद कृतिका की हल्की सी सिसकने की आवाज आई : सीईईई मम्मीई, कुत्ती....

कृतिका और दो चार गालियां पूजा को देती मगर उसकी नजर आगे अनुज से टकराई और वो थोड़ा शर्मा कर अपने कमर के पिछले हिस्से को सहलाते हुए मुस्कुराने लगी ।

" तुम्हारे प्रोजेक्ट्स कहा तक पहुंचे अनुज " , कृतिका ने सवाल किया ।

आगे वो बातें करते हुए निकल गए कालेज की ओर ।

वहीं दुकान पर आज राज का पहले दिन ही बड़ी मगजमारी झेलने पड़ी ।

बबलू काका की मदद से चीजे आसान थी मगर बाप की पहचान और रुतबे के आगे राज फीकी चाय से भी फीका था ।

11 बजने को हो रहे थे और राज केबिन में बैठा हिसाब बना रहा था ।

एक्जाम तो उसके भी आने वाले थे मगर अभी उसके पास डेढ़ माह का समय अतिरिक्त था अनुज से ।

बबलू काका : छोटे सेठ , बड़े घर से ठकुराइन आई है !

राज थोड़ा अचरज से : ठकुराइन कौन ?

बबलू काका थोड़ा हिचक कर : छोटे सेठ वो सेठ जी के दोस्त ठाकुर साहब है न उनकी मैडम ।

राज खुश होकर : अच्छा आंटी जी आई है , अरे तो भेजिए न उनको !

बबलू काका : जी छोटे सेठ

राज : और सुनिए कुछ देर में नाश्ता भेजवा दीजियेगा ओके

बबलू : ठीक है छोटे सेठ

कुछ ही देर में राज के सामने संजीव ठाकुर की बीवी खड़ी थी । ऊपर से नीचे तक खुद को बड़ी ही अदब और सादगी से ऐसे ढकी हुई थी कि उनका गदराया जिस्म की रत्ती भर झलक नहीं मिल पा रही थी सिवाय चेहरे के ।






पूरी बाजू की ब्लाउज जो क्लिवेज के साथ साथ पीठ गर्दन सब कवर किए हुए थी । सिम्पल हल्की साड़ी जिससे उन्होंने अपना पेट और कमर पूरी तरह से ढक रखा था और कूल्हे पर ऐसी चुस्त की गाड़ का उभार उठा हुआ नजर आ रहा था ।

ठुकराईन : कैसे हो बेटा ?

राज की नजर उसके चेहरे पर गई , गजब का आकर्षन था उनकी आंखों में और मुस्कुराहट से फैले हुए मोटे मोटे होठो के चटक लिपस्टिक और भी ललचा रहे थे ।

राज : जी ठीक हूं आंटी जी , नमस्ते आइए न

राज खड़ा होकर उनका अभिवादन किया और ठकुराइन राज के पास सोफे पर बैठ गई ।

ठकुराइन : बेटा पापा नहीं है ?

राज मुस्कुरा कर : जी वो नानू के यहां गए है हफ्ते दस दिन में आ जायेंगे ।

ठकुराइन हस्ती हुई : हाहा ससुराल गए है घूमने भाईसाहब

राज मुस्कुराकर : जी ,

ठकुराइन : और तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है , या फिर तुम भी पढ़ाई छोड़ कर पहले शादी ही करने वाले हो सोनल के जैसे

राज मुस्कुरा कर : अरे नहीं आंटी , अभी मेरी उम्र नहीं है और दीदी भी अभी अपनी पढ़ाई जारी ही रखेगी ।

ठकुराइन : तो क्या सोनल अपने पति के साथ नहीं जाएगी ?

राज उलझे हुए स्वर में : अभी कुछ कह नहीं सकते आंटी जी , मार्च बाद से हम लोगों के भी एग्जाम शुरू हो जायेंगे तो मुझे नहीं लग रहा है कि वो जा पाएंगी ।

ठकुराइन : बस ससुराल वाले राजी हो जाए उसे पढ़ाने के लिए

राज : मुझे नहीं लगता कोई कुछ कहेगा , अच्छे लोग है सब

ठकुराइन इधर उधर की बातों को खींच रही थी और राज को अब बेचैनी हो रही थी । कुछ देर बाद तो ठकुराइन के पास कहने को कुछ बचा ही नहीं । अब राज को शक होने लगा कि शायद वो किसी काम से आई थी और उससे कहने में हिचक रही है ।

राज : आंटी आप कुछ काम से आई थी ?

ठकुराइन : हा बेटा वो ...

बबलू काका : छोटे सेठ ये नाश्ता

ठकुराइन कुछ कहती कि बबलू काका आ गए और वो चुप हो गई थी । वो नाश्ता रख कर निकल गए ।

राज : हा आंटी जी कहिए , देखिए पापा नहीं है मगर कुछ भी मेरे लायक होगा मै कर दूंगा आप बेहिचक कहिए ।

ठुकराई थोड़ा सोच कर : बेटा मै तुम्हारे पापा से नहीं तुमसे ही बात करने आई थी ।

राज अचरज से : मुझसे ?

ठकुराईन : मैने कल दुपहर ही तुम्हारे पापा से बात की थी कि तुमसे कैसे मिल सकती हूं।

राज : हा तो कहिए ? क्या बात है ?

ठकुराइन : बेटा वो मै कैसे कहूँ,

राज : आंटी आप टेंशन मत लीजिए और मुझपर भरोसा करिए प्लीज , बताइए ..

ठकुराइन : बेटा वो तुम्हारा दोस्त है न , रामवीर का लकड़ा चंदू ?

चंदू का नाम सुनते ही राज का दिमाग सन्न हो गया , क्योंकि चंदू तो ठकुराइन की बेटी मालती का दीवाना था और काफी दिनों से वो ठाकुर साहब के यहां ही काम पर जाता था अपने बाप के साथ ।

राज का गला सूखने लगा : जी आंटी क्या बात चंदू के बारे में उसने कुछ किया क्या ?

ठकुराइन : बेटा तुम तो समझदार हो , उसको समझाओ ऐसे किसी के घर की इज्जत से खिलवाड़ नहीं करते ..

राज को यकीन होने लगा जरूर चंदू की कोई कारस्तानी की भनक लगी है ठकुराइन को : मै समझा नहीं आंटी , वो तो गोदाम में काम करता है न फिर क्या दिक्कत हो गई ?

ठकुराइन : कभी कभी बेटा वो .. कभी कभी क्या इन दिनों लगभग रोज ही वो घर में आ जाता है और उसने मेरी बेटी मालती के साथ ...

ठकुराइन बोलते हुए चुप हो गई ।

राज और उलझ गया और मन में बड़बड़ाया : बहिनचोद ये साला चंदू खुद भी मरेगा और मुझे भी मरवाएगा हरामी

राज : आंटी , उसकी गलती के लिए मै आपसे माफी मांगता हू। प्लीज इस बात को अंकल या उनके बाऊजी को मत कहिएगा । मै उसको बोल दूंगा वो सुधर जाएगा प्लीज

ठकुराइन कुछ देर चुप हुई और एकदम से उनके तेवर बदले : इसीलिए मै तुम्हारे पास आई हु राज , अगर मै ये बात कह दूं घर में मालती के पापा या फिर बाउजी से तो कही लाश भी नहीं मिलेगी उसकी । उसको समझाओ और दुबारा बिना कहे घर दिखा न तो खैर नहीं रहेगी उसकी ।

ठकुराइन का ऐसा बदला स्वरूप देख कर राज की फट गई और वो मन ही मन गाली दिए जा रहा था चंदू को ।

राज : आप बेफिक्र रहे आंटी जी , मै समझा दूंगा और प्लीज आप ये सब किसी ने मत कहिएगा मै रिक्वेस्ट कर रहा हु ।

ठकुराइन ने आगे कुछ देर तक अपनी बातों को घूमा फिरा कर रखती रही और फिर निकल गई ।

उनके जाते ही राज ने चंदू को फोन घुमाया

: भोसड़ी के जहां भी हो जल्दी से पापा वाली दुकान पर आ

: .......

: हा बर्तन वाले पर , जल्द आ

राज ने चंदू को हड़काया और फोन काट दिया । पानी का ग्लास गटागट खाली करता हुआ राज थोड़ा खुली हवा के लिए बाहर आया ।

मगर उसके जहन में एक सवाल खाए जा रही थी कि आखिर ठकुराइन ने ये बात सिर्फ मुझसे ही क्यों की । वो चाहती तो सीधा ही चंदू से कह देती या फिर उसे काम पर आने से मना कर सकती थी या फिर ऐसा कर देती कि वो घर के अंदर आए ही नहीं । जरूर कुछ बात है और राज गल्ले पर बैठा सोच रहा था कि इतने में चंदू आ गया ।

चंदू हांफता हुआ : क्या हुआ भाई , कुछ अर्जेंट है क्या ?

राज ने गुस्से से उसे घूरा , फिर अन्दर चलने का इशारा किया और दोनों केबिन में चले गए ।

शिला के घर

" चुप करो तुम , अगर एक मिनट और नहीं आती तो अबतक तो नंदोई जी मेरी साड़ी उतार चुके होते " , रज्जो शिला को डांटती हुई बोली ।

शिला खिलखिलाकर : अरे भाभी , आज नहीं तो कल साड़ी तो उठाएंगे ही वो आपकी हीही

रज्जो लजा कर : धत्त तुम भी न , सीधे चलो

शिला हस्ती हुई आगे बढ़ रही थी कि रज्जो की नजर सड़क से लग कर एक मकान पर गई जिसके बाहर एक खूबसूरत औरत साड़ी पहने हुए खड़ी थी ।








उसके कजरारी आंखो में गजब का आकर्षण था , उसपे से उसकी पतली कमर और गुदाज गोरा पेट , देखते ही रज्जो तो मानो उसके कातिलाना हुस्न की कायल हो गई ।

रज्जो धीरे से उसकी ओर दिखा कर : हे दीदी ये कौन है , बड़ी कातिल चीज है उम्मम किसका माल है ये ? एकदम रसभरी है

शिला मुस्कुरा कर आगे बढ़ गई

रज्जो : अरे बताओ न , क्या हुआ हस क्यों रही हो

शिला : क्यों दिल तो नहीं आ गया उसपे उम्मम

रज्जो मुस्करा कर : मेरा तो पता नहीं मगर जिस तरफ से वो तुम्हे निहार रही है पक्का वो तुम पर लट्टू है । कितना नशा है उसकी आंखों , शायद कल मैने इसको उधर बाग की ओर भी देखा था ।

शिला : हम्म्म हा वो उसका अड्डा है

रज्जो : अड्डा कैसा अड्डा ?

शिला : बताती हु अभी चलो यहां से

कुछ दूर आगे बढ़ते ही रज्जो : क्या हुआ बताओ न

शिला मुस्कुराई : अरे उधर उसके कस्टमर मिलते है उसको , गांव और कस्बा का कोई डायरेक्ट उसके घर में नहीं जाता

रज्जो उत्सुकता से : क्यों ?

शिला मुस्कुरा कर: अरे वो किन्नर है

रज्जो की आँखें फैली : हैं ? सच में .. इतना खूबसूरत

शिला : हा लेकिन उसका टेस्ट थोड़ा अलग है ?

रज्जो : मतलब ?

शिला : अरे उसको मोटी जैसी गदराई औरतें पसन्द है मगर यहां गांव का माहौल देख ही रही हो , इसीलिए उधर जाता है औरतों को निहारने ।

रज्जो : क्या सच में ? तुमको कैसे पता

शिला : अरे पिछले साल जब आया था तब उसने एक बार मेरा भी पीछा किया था , मगर उसको मना कर दिया

रज्जो : अह्ह्ह्ह मना क्यों किया , ले लेती न नए लंड का स्वाद हीही।

शिला हस्ती हुई : भक्क तुम भी न भाभी

फिर दोनों आगे बढ़ गए और गांव वाले घर के लिए।

घर में घुसते ही रज्जो ने बरामदे में बैठे हुए शिला के ससुर के पाव छूए : प्रणाम बाउजी

शिला के ससुर की नजर रज्जो के चुस्त ब्लाउज में चिपके हुए गदराये जोबनो पर गई और वो सिहर उठा ,








रज्जो ने वही शिला वाली साड़ी ही पहनी थी , जिसमें उसके दूध बुरी तरह से ठुसे हुए थे । शिला के ससुर के बदन में सरसरी फैल गई और रज्जो ने चुपके से शिला को आंख मारी । तो शिला भी मुस्कुरा कर रज्जो की शरारत को समझते हुए अपने ससुर के पाव छूए और फिर खड़ी होकर अपनी कुर्ती को पीछे से उठा कर अपने कूल्हे पर चढ़ाया ।








जिससे उसके ससुर की नजर लेगी के उभरी हुई उसके तरबूज जैसे चूतड़ों पर गई और वो थूक गटकने लगा ।

फिर दोनों फुसफुसाती हुई घर में चली गई , और अंदर देखा तो शिला की सास अभी नहाने की तैयारी भी थी । झूले हुए नंगे चूचे और नंगा पेट , कमर में अटकी हुई पेटीकोट ।

रज्जो : प्रणाम अम्मा , बड़ी देर से नहाने जा रही हो

शिला की सास : अरे क्या करु बहु वो मीरा कलमुंही टाइम से आती ही नहीं झाड़ू कटका के लिए इसलिए देर हो जाती है

शिला : ठीक है अम्मा आप नहा लो , हम लोग कपड़े लेने आए थे तो उधर से ही निकल जायेंगे

शिला की सास : अरे एक आध रोज के लिए बहु को यही छोड़ जा , आई है तो चार बात मुझसे भी कर लेगी ।

" आऊंगी अम्मा एक दो रोज में तो रुकूंगी ठीक है " , रज्जो ने दरवाजे पर खड़े शिला के ससुर की परछाई देख कर जवाब दिया ।

शिला : ठीक है अम्मा चलती हु प्रणाम

फिर वो निकल गए कपड़े लेने और कुछ देर बाद वो दोनों अपने घर के आगे से वापस टाउन की ओर जा रहे थे कि रज्जो की नजर घर गई , बरामदे में बैठे हुए शिला के ससुर गायब थे ।

रज्जो : हे दीदी बाउजी कहा गए

शिला : अरे भीतर गए होंगे चलो छोड़ो उनको

रज्जो हस कर : अरे अंदर तो अम्मा नहा रही थी न

शिला : हा तो ?

रज्जो के चेहरे पर फिर से शरारत भरी मुस्कुराहट फैलने लगी ।

शिला आंखे बड़ी कर रज्जो के इरादे भांपते हुए : नहीं मै नहीं जाऊंगी , चलो घर

रज्जो : धत्त चलो न , देखे तो हीही और दरवाजा भी खुला है

रज्जो शिला का हाथ पकड़ कर खींचने लगी और शिला ना नुकूर करती हुई उसके साथ चल दी

धीरे धीरे वो अंदर घर में गए और भीतर देखा तो आंगन खाली था , नल के पास पानी गिरा था और शिला के सास के गिले पैरो को छाप एक कमरे की ओर जाती दिख रही थी

रज्जो उसके फूट प्रिंट की ओर इशारा करते हुए उस कमरे का इशारा : हे उधर देखो हीही

शिला फुसफुसा कर : तुम न पागल हो पूरी

रज्जो खिलखिलाई और धीरे धीरे उस कमरे की ओर बढ़ गई

जैसे ही वो खिड़की के पास गए दोनों की आंखे फेल गई और मुंह पर हाथ रख कर एक दूसरे को भौचक्के निहारने लगे

सामने कमरे में शिला की सास पूरी नंगी होकर लेटी हुई थीं और उसका ससुर ऊपर चढ़ कर हचक हचक कर पेले जा रहा था । शिला की सास कराह रही थी








शिला की सास : अह्ह्ह्ह्ह मन्नू के बाउजी ओह्ह्ह्ह कितनी जल्दी जल्दी आप गर्म हो जाते हो , फिर से बहु को देखा क्या ?

शिला मुस्कुरा कर रज्जो को देखी और अंदर का नजारा देखने लगी

शिला का ससुर अपनी बीवी के फटे भोसड़े में लंड उतारता हुआ : हा मन्नू की अम्मा , बहु के साथ जो आई उसके जोबन देख कर मेरा बुरा हाल हो गया और बड़ी बहु के चौड़े कूल्हे अह्ह्ह्ह

शिला के ससुर की बातें सुनते ही रज्जो के भीतर से हंसी की दबी हुई किलकारी फूट गई और झट से वो खिड़की से हट गए

और कमरे से शिला के ससुर की कड़क आवाज आई : कौन है ?

शिला और रज्जो एकदम से हड़बड़ा उठी और झटपट घर से बाहर निकल गई

शिला रज्जो का हाथ पकड़ कर : इधर से नहीं , पीछे से चलो , बाउजी जान जायेंगे

रज्जो को भी आइडिया सही लगा तो वो घर के बगल की गली से तेजी से निकल गए ।

कुछ ही देर में शिला का ससुर लूंगी लपेटते हुए बाहर आया मगर उसे कोई नहीं दिखा तो वापस चला गया ।

घर से दूर हो जाने के बाद दोनों के जान में जान आई और दोनों खिलखिला कर हस पड़े ।

शिला : तुम न बड़ी पागल हो , चुप नहीं रह सकती थी हीही

रज्जो : अरे मुझे हसी इस बात की आई कि हमारी वजह से बेचारी तेरी सास की सांस चढ़ने लगती है हाहाहाहाहा

शिला हस्ती हुई : हा लेकिन बाल बाल बचे आज ,

रज्जो : बच तो गए मगर वापस घर कैसे जायेंगे

शिला : अरे उधर बागीचे से भी एक रास्ता है पगडंडी वो आगे सड़क में जुड़ेगा चलो

और दोनों आगे बातें करते हुए बगीचे की ओर निकल गए ।

मुरारी - मंजू

11 बजने वाले थे और मुरारी खाली समय बिस्तर पर बिखरे हुए मंजू के कपड़े खोल खोल कर उसके हिसाब से जो ठीक ठाक नजर आ रहे थे उन्हें अलग कर रहा था बाकी सब एक झोले में ठूस रहा था ।

तभी उसके हाथ में एक जींस आई

लेबल देखा तो 38 साइज कमर वाली जींस थी , साफ था मंजू का ही होगा

मुरारी खुद से बड़बड़ाया : उफ्फ कितना चौड़ा चूतड़ होगा इसमें उसका उम्मम

मुरारी ने जींस की मियानी को मुंह पर रख कर सुंघा और फिर उसको फोल्ड कर दिया ।

तभी कपड़े के ढेर एक चटक नीला रंग का फीता नजर आया , मुरारी ने उसको खींचा तो देखा कि वो तो पतले स्ट्राप वाली ब्रा थी , जिसके cups पर खूबसूरत लैस वाली डिजाइन थी ।

उस मुलायम ब्रा को मुठ्ठी में भर कर उसने अपने सर उठाते लंड पर घिसा : अह्ह्ह्ह मंजू क्या चीज है रे तू उम्मम

तभी मुरारी के मोबाईल पर रिंग हुई ये मंजू का ही फोन था

फोन कर

मंजू : हैलो भाई साहब , मेरा ऑफिस का काम हो गया है , आप आ जाइए

मुरारी : ठीक है , लेकिन आना किधर है

फिर मंजू उसको एक मॉल का पता बताती है और मुरारी घर बन्द कर के ऑटो से निकल जाता है

कुछ ही देर में वो मंजू के पास होता

बड़ी सी 4 मंजिला इमारत और सैकड़ों की भीड़ , इतनी चकाचौंध मुरारी के लिए बड़ी बात नहीं थी । मगर वहा की मॉर्डन सेक्सी कपड़ों में गदराई औरतें देख कर उसका ईमान और लंड दोनो डोल रहे थे और मंजू भी मुरारी के हाव भाव पर मुस्कुराती जब वो उसे टाइट जींस में फूली हुई चूतड़ों को निहारता पाती ।

मंजू : चले भइया






मुरारी एक मोटी औरत के कुर्ती में झटके खाते चूतड़ को मूड कर निहारता हुआ : हा चलो , यहां तो सब ऐसे ही कपड़े पहनते है क्या ?

मंजू मुस्कुरा कर : जी भइया, बड़ा शहर है तो यहां बहुत कामन है

मुरारी आगे देखा तो एक फैमिली जिसमें 2 औरते और दो लड़के और बच्चे थे । उस फैमिली की सभी औरते टाइट जींस और टॉप में थी ।








बड़े बड़े रसीले मम्में पूरे बाहर उभरे हुए । सनग्लास लगाए हुए आपस में बातें करते हुए आ रही थी ।






मुरारी तो टॉप में उसके बड़े बड़े रसीले मम्में देखता ही रह गया ।

मंजू मुस्कुरा रही थी जैसा मुरारी हरकते कर रहा था और तभी मुरारी की नजर मंजू से मिली तो वो झेप कर मुस्कुराने लगा ।

दोनो अब थोड़ा हिचक रहे थे नजरे फेर कर बिना कुछ बोले अंदर एंट्री करते है और अंदर और भी चीजें मस्त थी , दुनिया भर की दुकानें और सबसे बढ़ कर नए उम्र के जोड़े , हाथ पकड़े एक दूसरे से चिपके हुए ।

मंजू : भैया ऊपर चलना पड़ेगा लेडीज सेक्शन ऊपर है

मुरारी : सीढ़ी किधर है ?

मंजू मुस्कुरा कर सामने एलिवेटर की ओर इशारा किया मुरारी की हालत खराब ।

अब होने वाली भयोह के आगे कैसे मना करे , मन मार कर हिम्मत जुटाया और दो तीन प्रयास किया मगर कलेजे से ज्यादा तो पाव कांप रहे थे ।

इतने में दो लड़कियां उसके बगल से निकल कर आगे चढ़ गई और उसी धक्के में मुरारी भी उनके पीछे खड़ा हो गया

मगर जैसे ही वो सीधा हुआ आंखे फट कर चार , सामने वाली जो अभी अभी उसके बगल से आगे निकली थी वो ठीक उसके मुंह के आगे






क्रॉप टॉप और नीचे कसी जींस , मोटी मोटी मांसल गाड़ पूरा शेप लिए बाहर की ओर निकली हुई ।

मुरारी का गला सूखने लगा और जैसे ही उस लड़की ने मूड कर देखा वो नजरे फेरने लगा , लंड एकदम फड़फड़ाने लगा पजामे में ।

ऊपर पहुंचते ही वो लड़कियां तेजी से दूसरी ओर निकल गई और मुरारी उस लड़की के हिलकोर खाते चूतड़ देख कर अपनी बहु सोनल के बार में सोचने लगा

मंजू : भइया इधर से

मंजू के आवाज पर मुरारी उसके पीछे लेडीज सेक्शन की ओर चला गया ।

मंजू अपने पसंद के कंफर्टेबल कपड़े देखने लगी और मुरारी वहां की औरते

तभी उसकी नजर ट्रॉली लेकर घूमती एक औरत पर गई






" सीईईई क्या चीज है भाई , इतना बड़ा और गोल " , मुरारी मन ही मन बड़बड़ाया । उसके लंड में सुरसुरी होने लगी

जिस लेन में वो खड़ा था उसी लेन में दूसरी ओर एक मोटी गदराई महिला जो कि टीशर्ट और पैंट में थी , पेंट में उसके बड़े बड़े मटके जैसे चूतड़ों का शेप देख कर मुरारी जैसे खो ही गया ।

उसने बहुत से माल और शहर में घूमा था मगर यहां जैसा माहौल कही नहीं दिखा उसे ।

तभी उसे मंजू का ख्याल आया और उसने कुछ पल के लिए उस महिला के चूतड़ से नजरे हटा दी ।

वो मंजू के साथ ही इधर उधर रह कर देख रहा था , मंजू ने कुछ प्लाजो सेट और दो तीन काटन कुर्ती देखे , उसकी नजर जींस स्टॉक पर थी मगर वो मुरारी की वजह से हिचक रही थी ।

मुरारी : इसके साथ क्या लेना , जींस या फिर लेगिंग्स

मंजू मुस्कुराने लगी : मुझे समझ नहीं आ रहा है ,

मुरारी : तुम तो जींस भी पहनती हो न , तो लेलो । इस बात के लिए बेफिक्र रहो तुम्हे कोई कुछ नहीं कहेगा ठीक है

मंजू मुस्कुरा कर : जी ठीक है

फिर मंजू वहां से दो तीन जींस लेकर ट्रायल रूम की ओर बढ़ गई ।

जींस के स्टॉक के पास खड़े खड़े मुरारी ने साइज देखने लगा और उसकी नजर 4XL size की जींस पर गई और उसके ख्यालों के ममता का नाम आया , मगर बात वही थी कि पता नहीं वो पहनेगी या नहीं ।

इतने में मुरारी का मोबाइल रिंग हुआ देखा तो अमन फोन कर रहा था

फोन पर

मुरारी : हा बेटा

अमन : पापा कहा हो , निकल गए क्या ?

मुरारी : नहीं बेटा , वो तेरी चाची को कपड़े लेने थे और कुछ काम भी था तो आज रुक गया कल निकलूंगा

अमन : अरे वाह फिर से मेरी तरफ से भी चाची के लिए ले लेना , वैसे कैसे कपड़े पहनती है चाची

मुरारी : उम्मम बेटा वो लगभग सभी पहनती है , अभी अभी जींस लेकर गई है ट्राई करने

अमन : अरे वाव , पापा मम्मी के लिए भी लेलो न जींस

मुरारी : बेटा मै भी सोच रहा था और ये भी सोच रहा था कि ( मुरारी एक किनारे गया जहा उसकी आवाज कोई और न सुने फिर वो धीमी आवाज में ) तेरी मां के लिए कुछ जोड़ी फैंसी ब्रा पैंटी भी ले लूं , यहां मॉल में सब मिल रहा है

अमन : हा पापा क्यों नहीं , लेलो न फिर

मुरारी : अरे लेकिन वो लेडीज सेक्शन है उधर मै कैसे जाऊंगा और दूर से देखा तो एक से एक बढ़िया फैंसी सेट थे वहा ।

अमन : अरे तो चाची को बोल दो न ?

मुरारी कुछ सोचता हुआ : उससे!!! ठीक है देखता हूं और बता तू ठीक है

अमन : मै तो एकदम मस्त हू अभी जस्ट उठा हु नहाकर आपको फोन किया है

मुरारी : अभी उठा है ?

अमन : हा पापा रात में वैसे भी यहां किसे नीद आती है हीहीही

मुरारी : सही बेटा मजे कर

अमन हंसता हुआ : पापा आप कबतक चाची के घर पहुंचेनंगे ।

मुरारी : अभी एक दो घंटे बाद

अमन : अच्छा, वो मैने आपके व्हाट्सअप पर कुछ भेजा है हीही, फ्री होना तो देख लेना पसंद आएगा आपको

अमन की बात सुनते ही मुरारी के तन बदन में सरसरी उमड़ी और उसके पेट में अजीब सी हड़बड़ाहट होने लगी : क्या , क्या भेजा है बता न

अमन मुस्कुरा कर : आप देख लेना , आपकी लाडली बहु की वीडियो है , ओके मै रखता हु बाय पापा

अमन ने फोन काट दिया और यहां मुरारी एकदम से तड़प उठा , उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे , उसने झट से मोबाईल खोला तो देखा अमन ने 4 5 वीडियो और फोटो भेजे थे । तस्वीरें देखते ही मुरारी ने झट से मोबाईल लॉक कर दिया ।

लंड एकदम फड़फड़ाने लगा सुपाडे में चुनचुनाहट होने लगी , कुर्ते के नीचे हाथ घुसा कर पजामे के ऊपर से उनसे अपना सुपाड़ा मिज़ा। फिर वो चेंजिंग रूम की ओर देखा , मंजू को भी समय लग रहा था , उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे कहा जाए , बाकी से चेंजिंग रूम भी इंगेज दिख रहे थे और ऐसे में उसको बाथरूम का ख्याल आया ।

वो लपक कर बाहर आया और बाथरूम खोजने लगा , इधर उधर भागने पर उसे टॉयलेट बोर्ड दिखा और लपक कर वो उधर निकल गया ।

तेजी से चलते हुए वो बाथरूम में घुस गया और टॉयलेट सीट पर बैठ कर अपनी सास को आराम देने लगा

उसके पैर थरथर कांप रहे थे पेट में अजीब सी हड़बड़ाहट मची थी ।

गहरी सास लेते हुए उसने दुबारा से मोबाइल खोला तो मुरारी का मुंह भी खुला का खुला रह गया ।








मैचिंग ब्रा पैंटी में दोनों बहनों में बड़े ही कामोत्तेजक लुक दिए थे






उनके झूलते नंगे बूब्स और बाहर निकली हुई नंगी गाड़ देख कर मुरारी पजामे के ऊपर से ही अपना लंड मसलने लगा : अह्ह्ह्ह्ह बहु कितनी सेक्सी है उम्मम उफ्फ इसके गुलाबी निप्पल और ये लचीली गाड़ उम्मम जी कर रहा है खा जाऊ अह्ह्ह्ह

मुरारी टॉयलेट सीट पर बैठ कर अपना लंड बाहर निकलने लगा

तभी अगली तस्वीर में दोनों बहने अमन का मोटा लंड पकड़े हुए हस रही थी और एक दूसरे को निहार रही थी ।

किसी में सोनल अमन का लंड चूस रही थी किसी में निशा , मुरारी अपना लंड पकड़ कर उसको भींचे जा रहा था और अगली चीज एक वीडियो थी

जैसे ही मुरारी ने उसे क्लिक किया वो वीडियो तेज आवाज में शुरू हो गई , ये वही शॉर्ट ब्लॉग थी जिसे सोनल ने शूट किया था

सोनल की तेज आवाज आते ही मुरारी ने झट से स्पीकर पर हाथ रखते हुए आवाज कम किया और वीडियो में जो देखा उसकी आंखे फटी की फटी रह गई








और जब वीडियो में सोनल ने बोला " कोई है जो मुझे चोदना चाहेगा " मुरारी का लंड एकदम अकड़ गया , आड़ो में पंपिंग होने लगी

मुरारी अपनी बहु की कामोत्तेजना भरे हरकते देख कर पागल हो गया था , वो जोर से लंड भींचे जा रहा था और सोनल का नाम लेके बडबडा रहा था : अह्ह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बहु मै हु न अह्ह्ह्ह तुम्हारे पापाजी तुमको चोदेंगे बेटा आह्ह्ह्ह बहु उम्ममम अह्ह्ह्ह

मुरारी चरम पर था मगर ऐन मौके पर मंजू ने उसको फोन घुमाने लगी

मुरारी : ओह्ह्ह्ह यार , क्या करु

उधर मंजू लगातार मुरारी को काल किए जा रही थी , मुरारी लंड झाड़ना चाहता था मगर मंजू ने उसका फ्लो बिगाड़ दिया।

मन मारकर अपना लंड पजामे में डाल कर बाहर आ गया , अभी भी उसके लंड की अकड़न जस की तस थी , लपक कर वो मंजू की ओर गया ।

मंजू : कहा चले गए थे

मुरारी थोड़ा हिचक कर : वो मै थोड़ा फ्रेश होने ... हो गया तुम्हारा

मंजू : जी , आप भी कुछ ले लीजिए न

मुरारी : अह् मुझे मेरे मतलब का क्या मिलेगा

मंजू : अरे आप भी टीशर्ट जींस ले लीजिए न , मुझे उनके लिए भी लेनी है

मंजू लजाते हुए बोली

मुरारी समझ गया कि वो मदन के लिए भी खरीदारी करना चाहती है ।

मुरारी : ठीक है भई जिसमें तुम्हारी खुशी , अब मदन के लिए लोगी तो मेरे लिए भी एक ले लेना साइज तो एक ही हमारा

मंजू : अच्छा सुनिए , भाभी की साइज क्या होगी

मुरारी हंसकर : तो क्या उसके लिए जींस लोगी

मंजू बड़े ही कैजुअली होकर बोली : हा , अगर वो पहनती हो तो !

मुरारी हस कर : क्यों भाई सिर्फ मुझे ही ये सजा क्यों , अमन की मां भी परेशान हो तंग जींस पहन कर हाहाहाहाहा , उसको 4XL के कपड़े ही होते है ।

मंजू मुस्कुरा: जी ठीक है आइए पहले उनके लिए ही लेती हूं

फिर मंजू मुरारी के साथ ममता के लिए दो जींस , लांग कुर्ती और दो सूट लिए

मुरारी अभी भी हिचक रहा था कि कैसे आखिर वो ममता के लिए ब्रा पैंटी ले । बार बार उसकी नजर अंडरगार्मेंट एरिया में जा रही थी ।

मंजू : चले भइया , जेंस वाला फ्लोर ऊपर है

मुरारी थोड़ा अटक कर : हा चलो , वो जरा मै सोच रहा था । खैर छोड़ो चलो चलते है ।

मंजू : अरे क्या हुआ कहिए न , कुछ दूसरा पसंद आया क्या भाभी जी के लिए, वो देख लेती हु न

मुरारी : नहीं दरअसल , नहीं कुछ नहीं चलो छोड़ो , वो अपना ले लेगी जब शहर जाएगी ।

मंजू मुस्कुरा कर : अरे भैया बताइए न , क्या चाहिए भाभी के लिए

मुरारी थोड़ा नजरे फेर कर : दरअसल अमन की मां के नाप के अंडर गारमेंट नहीं मिलते चमनपुरा में , मुझे लगा यहां उसके नाप के कपड़े है तो शायद वो सब भी मिल जाए ।

मंजू मुस्कुरा रही थी थोड़ी खुद भी लजा रही थी ।

मुरारी : तुमने लिए क्या अपने लिए ?

मंजू ने शॉक्ड होकर मुस्कुराते होठों से आंखे बड़ी कर मुरारी को देखा ।

मुरारी बड़बड़ाता हुआ : सॉरी ये मै क्या पूछ रहा हूं , प्लीज चलो अब

मंजू ने एक गहरी सास ली और आगे बढ़ते मुरारी का हाथ पकड़ लिया और इशारे से उधर चलने को कहा बिना बोले ।

मंजू का स्पर्श पाकर मुरारी एकदम से चौक गया और मंजू जबरन उसे अंडर गारमेंट वाले काउंटर की ओर ले गई ।

वहा पर कई लड़कीया स्टॉफ में थी और दूसरे भी नवयुवा कपल वहां साथ में खरीदारी कर रहे थे ।

स्टाफ : जी मैम क्या दिखाऊं

मंजू ने बिना कुछ बोले मुरारी की ओर देखा

मुरारी हिचक कर : जी वो बढ़िया फैंसी सेट में अंडर गारमेंट चाहिए

स्टाफ : जी मैम आपका साइज क्या रहेगा

जैसे ही स्टाफ ने मंजू से उसका साइज पूछा दोनों मुंह फेर हसने लगे ।

मंजू ने आंखो से मुरारी को इशारा किया कि वो स्टाफ की बातों का जवाब दे ।

मुरारी थोड़ा असहज होकर : जी वो 44DD की ब्रा और 48 की पैंटी दिखाइए

ममता का साइज सुनकर मंजू और वो स्टाफ दोनों ताज्जुब हुए । मंजू कुछ देर तक मुस्कुराती रही जबतक कि वो स्टाफ कुछ बॉक्स ब्रा और पैंटी के निकाल कर नहीं लाई ।

स्टाफ : सर आपके साइज बड़े एक्सक्लूसिव है तो हमारे पास लिमिटेड ब्रा पैंटी है , इन्हें देखे आप

वो स्टाफ कुछ ब्रा पैंटी खोलकर काउंटर पर बिखेरने लगी और मंजू थोड़ा नजरे चुराने लगी ।

मुरारी उनमें से एक ब्रा जिसके cups विजिबल दिख रहे थे उसे चूना तो मंजू ने मुंह फेर कर मुस्कुराने लगी और मुरारी ने उसे छोड़ दिया और एक फूली कवर ब्रा देखने लगा ।

लेकिन उस ब्रा के साथ जो मैचिंग रंग की पैंटी थी वो एक पतली थांग जैसी थी । मुरारी को समझ नहीं आ रहा था । पसंद तो उसे दोनों आ रहे थे ।

स्टाफ : क्या हुआ सर कोई पसंद आए इसमें से

मुरारी : अह मुझे तो समझ नहीं आ रहा है

मंजू ने मूड कर मुरारी को देखा और उसके करीब होकर बोली : भाभी को कैसे पसंद है

मुरारी मुस्कुराने लगा और धीरे से उसकी ओर झुक कर कान में बोला : वहा उसके नाप की मिलती नहीं तो वो नीचे कभी कभार ही पहनती है ।

मंजू को अजीब लगा मगर वो मुस्कुराने लगी

मुरारी : तुम्हे कौन सा सही लग रहा है , दो सेट फाइनल कर दो

मंजू ने आंखे उठा कर मुरारी को देखा तो मुरारी मिन्नते करता हुआ नजर आया ।

मंजू ने मजबूरी में एक लेस वाली फैंसी और दूसरी सिंपल फूली कवर ब्रा उस थांग पैंटी के साथ फाइनल कर दी

वो स्टाफ दोनों को अजीब नजरो से देख रही थी वहां फिर जेंस वाले फ्लोर पर उन्होंने शॉपिंग की और फिर बिलिंग के लिए निकल गए ।

बिलिंग काउंटर जब मुरारी बिलिंग कराने लगा तो उसकी ट्रॉली में दो जोड़ी और ब्रा पैंटी निकल आई

मुरारी : एक मिनट भाई साहब , अंडरगार्मेंट के दो ही सेट होंगे , लगता है गलती से आ गया होगा

मंजू जो उसके बगल में खड़ी थी वो परेशान हो उठी इससे पहले वो बिलिंग स्टाफ उसके प्रोडक्ट को कैनसिल करता वो बोल पड़ी : अरे वो मैंने रखे है ?

मुरारी ने जैसे ही मंजू की आवाज सुनी उसको अपनी गलती समझ आई और बिलिंग स्टाफ वापस से सारी बिलिंग करने लगा ।

फिर मुरारी ने सारे पेमेंट किए ।

वहा से निकल कर दोनों ऑटो से मंजू के घर के लिए निकल गए ।

रास्ते भर मंजू के चेहरे पर मुस्कुराहट बनी रही

मुरारी समझ रहा था आज मंजू की नजर में उसकी खूब किरकिरी हुई है

मुरारी : अब बस भी करो भई , मुझे क्या पता था कि वो तुमने लिए थे पहले ही ।

मंजू हंसने लगी : सॉरी

मुरारी भी मुस्कुराने लगा

वही इनसब से अलग रंगीलाल खड़ी दुपहरी में अपने ससुराल पहुंच गया था ।

बरामदे में बनवारी के कमरे के बाहर लगी कुर्सी पर बैठे हुए घर का जायजा ले रहा था और तभी सामने से उसकी खूबसूरत गदराई हुई सलहज सुनीता साड़ी का पल्लू पूरे बरामदे में लहराते हुए हाथों में जलपान का ट्रे लिए आई और जैसे ही उसने रंगीलाल के आगे टेबल पर ट्रे रखा






बिना पिन की साड़ी का आंचल उसके सीने से सरक कर कलाई में आ गया और कसे चुस्त ब्लाउज में भरे हुए मोटे मोटे मम्मे झूलते हुए रंगीलाल को ललचाने लगे ।

जारी रहेगी ।

कहानी पर पाठकों की प्रतिक्रिया , व्यूज के हिसाब से बहुत कम मिल रही है ।

कहानी पर लेट अपडेट का कारण आप सभी कम प्रतिक्रियाए ही है ।

कृपया पढ़ कर समुचित रिप्लाई जरूर किया करे ।

धन्यवाद
 
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