Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 45 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

कहानी का अगला अपडेट 09

पेज नं 1225 पर पोस्ट कर दिया गया है

पढ़ कर रेवो जरूर करें
 
💥 अध्याय : 02 💥

अपडेट 09

हाइवे पर गाड़ियां तेजी से पास हो रही थी । तेज हवा के झोंके मंजू के साड़ी को हवा में लहरा दे रहे थे मगर वो शांत और चुप खड़ी थी , गाड़ी के पास

वही सामने वाले ढाबे से मुरारी मुस्कुराता हुआ हाथ में दो चाय प्याले और कांख में पानी को बोतल को दबाए आ रहा था

: लो लो पकड़ो , जल रहा है ( मुरारी ने अपना कंधा आगे किया जिसमें बोतल दबाए था )

मंजू ने एक बुझी सी मुस्कुराहट से उसके कांख से बोतल लिया और मुरारी ने झट से वो गर्म बट्टे गाड़ी के बोनट पर रख दी और हाथ फूंकने लगा

: अरे ड्राइवर को कह देते न ( मंजू ने मुरारी को परेशान देख कर बोली)

: अरे वो गधा अपनी बोतल लेकर खेतों में गया है ( मुरारी ने खीझ कर कहा लेकिन मंजू उसके बात को समझ कर मुस्कुराने लगी )

फिर मंजू ने पानी की बोतल से मुंह धुला और अपने पल्लू से मुंह पोछा। फिर कुछ घूंट पानी गटकने लगी , तो पानी उसके चिन से होकर उसके रसीले मम्में के दरारों में जाने लगा

: अरे मुंह लगा कर पी लो न

: जूठा हो जा.... ( मंजू अपनी बात कहती, मुरारी फिर उसे टोकता है )

: मै दूसरी ले लूंगा ...

फिर मंजू बिना कुछ कहे पानी पीकर पल्लू से अपनी गीली छाती को सोक करने लगी ।

: हम्मम ये लो ...( मुरारी ने उसे चाय का बट्टा दिया ) आराम से गर्म है

मंजू ने साँवधानी से चाय पकड़ी और गाड़ी के पास खड़ी होकर चुस्की लेने लगी ।

अभी भी मंजू की आंखों वो उदासी गई नहीं थी जिसकी चाह मुरारी को थी , वो नहीं चाहता था कि मंजू ऐसे चेहरे के साथ घर पहुंचे ।

: वैसे मुझे नहीं लगता मदन तुम्हे ऐसे देख कर खुश होगा ( मुरारी ने चुस्की लेकर कहा और उसकी ओर देखा )

मंजू सवालिया नजरो से मुरारी को निहारा

: और ये तो बिल्कुल भी अच्छा नहीं होगा अगर उसे भनक भी लग गई आज सुबह के बारे में ... ( मुरारी ने सहज होकर कहा )

: नहीं भइया ... आपको भाभी की कसम है आप किसी से कुछ नहीं कहेंगे और अगर आपको लगता है इनसब में सिर्फ मेरी गलती है तो आप मुझे वापस मेरे घर छोड़ सकते है... ( मंजू ने कड़ा रुख रखते हुए कहा )

: अरे भाई ... तुम गलत समझ रही हो , मेरे कहने का मतलब है कि तुम ऐसे उदास होकर चलोगी तो ममता मदन तुम्हे देखेंगे तो क्या सोचेंगे । ( मुरारी हस कर बोला ) और वैसे भी तुम्हे वापस छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता , क्योंकि मुझे भरोसा है ।

: मत कीजिए , मै उस लायक नहीं ( मंजू मुरारी के प्यार भरे शब्दों से भीतर से पिघल गई और उसे अपने कर्मों पर अफसोस हो रहा था )

: ऐसा नहीं कहते ....

: ना मै अपने प्यार के लिए लड़ सकी और न ही उस प्यार की इज्जत कर पाई और अगर आप मेरी हकीकत जानेंगे तो मुझे नहीं लगता कि आप कभी मुझे अपनाना चाहेंगे । ( मंजू सुबकने लगी )


: मै किसी के अतीत से उसका चरित्र निर्धारित नहीं करता , मै लोगो को उनके स्वतंत्र विचारों के लिए पसंद करता हूं , अभी भी तुम्हारे आगे ये रास्ता खुला है अगर तुम नहीं चलना चाहती हो तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है मै अमन और उसकी मां.....(मुरारी के बोल लड़खड़ाने लगे मगर उसने अपना संयम नहीं खोया ) मै उन दोनों को समझा लूंगा तुम फिकर मत करो ।

मुरारी की बाते सुन कर मंजू की डबडबाई आंखों से पानी झरने लगा और वो भीतर से डर रही

: नहीइईई ....( उसने झट से सड़क किनारे ही खुलेआम मुरारी से लिपट गई ) मुझे वापस नहीं जाना है भैया , मै आपके साथ जाना चाहती हूं प्लीज ( बिलखते हुए बोली)

मुरारी मंजू के इस व्यवहार से सन्न रह गया मंजू का वो मुलायम स्पर्श उसके जिस्म में गुगुदाहट बढ़ा रहे थे और सड़क किनारे यूं एकदम से कस लेना अजीब सा झिझक हो रही थी उसको ।

: मंजू ... ( मुरारी ने उसके पीठ पर हाथ फेरा उसके ब्लाउज के ऊपर से और उसका पूरा जिस्म गिनगिना गया , मानो बिजली दौड़ गई हो जिस्म में )

: मुझे डर लग रहा है भैया .... ( मंजू की तेज सांसे मुरारी महसूस कर पा रहा था )

: आओ इधर आओ बैठो अंदर ( मुरारी ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उसके गाड़ी में बिठा कर खुद भी बैठ गया )

मंजू उसके कंधे से लग गई और उसने अभी भी मुरारी का पंजा अपने गोद में ले रखा था , जैसे कितना सहमी हुई हो वो मुरारी को खोने से ।

वही मुरारी की हालत पतली हो रही थी , उसके जिस्म एम गर्मी बढ़ रही थी जिस तरह से मंजू उसको पकड़े थी , और गोद में साड़ियों के ऊपर उसको अपने हाथ में और भी मुलायम सॉफ्टी सा महसूस हो रहा था ।

: तुम फिकर मत करो और तुम्हे डरने की जरूरत नहीं है बस मै कुछ पूछूंगा तो बताओगी? भरोसा है मुझपर ? ( मुरारी ने उसकी आंखों में गहरे देख कर बोला और उसने बहती आंखों से हा में सर हिलाया ).

: देखो मै ये तो नहीं कहूंगा कि तुम पिछली बातें भूल जाओ , क्योंकि चीजें इतनी आसान होती नहीं है । मगर मै चाहता हूं कि जब तुम अपने घर में आओ तो वो सारी चीजें सुलझा कर ही जाओ , तुम्हारे साथ तुम्हारे अतीत का कोई बंधन न हो और तुम्हारा जीवन एक नए सिरे से सुंदर बने । तुम समझ रही हो ?

मंजू ने हुंकारी भरी और चुप रही।

मुरारी ने मुस्कुरा कर उसकी देखा , अब उसके चेहरे पर थोड़ी सी शांति झलक रही थी , जो कि एक अच्छा साइन था ।

मुरारी : तो फिर अगर तुम्हे लग रहा है तुम्हारे अतीत का ऐसा कोई पल है जिसका तुम्हे बहुत अफसोस है और तुम उसको सुलझाना चाहती हो तो एक दोस्त के नाते तुम मुझसे साझा कर सकती हो । मै तुम्हे जज नहीं करूंगा मंजू , तुम्हारी मदद ही करूंगा । बोलो ?

मंजू मुरारी की बातें सुनकर सोच में पड़ गई , उसके चेहरे पर विचलितता स्पष्ट थी और एक डर अभी भी तैर रहा था उसकी आंखों में जिसे मुरारी समझ रहा था ।

: आप प्लीज गलत मत समझिएगा , क्योंकि जो कुछ भी मैने किया यहां वो सब हालात के हाथों मजबूर थी मै जब मै इस शहर में आई थी तो राजन ने ही मुझे सहारा दिया था फिर हम करीब आ गए थे । मगर उसने मेरा फायदा अपने कारोबार के लिए करने लगा था ( मंजू निगाहे गिरा कर बोली , उसकी हथेली में मुरारी अपने पंजे को ढीला महसूस कर पा रहा था ) तो मै उससे छुटकारा चाहती थी मगर उसने.... मुझे डरा कर अपने पास रखा था जबरन ( मंजू की आंखे छलक पड़ी और मुरारी ने झट से अपने जेब से रुमाल निकाल कर उसके गाल खुद साफ करने लगा )

: अब रोओ मत , सब ठीक है तुम वहा से निकल आई हो । अब फिकर मत करो , तुम पर मै आंच भी नहीं आने दूंगा ( मुरारी ने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसके सर को चूम कर बोला और मंजू उसके पास बैठी रही सुबकती हुई )

: बस मुझे एक ही बात का डर है !!

: क्या ?.

: उसके पास मेरे कुछ वीडियो है , वो बहुत कमीना है भैया , अगर उसे पता चला मेरे बारे में तो कल जरूर पैसे या फिर कुछ और के लिए तंग करेगा । ( मंजू साफ लफ्जों में बोली )

: उसका नंबर है क्या ? ( मुरारी सख्त होकर बोला )

: किसका ? ( मंजू के भीतर एक डर बैठने लगा )

: राजन का ?

: हा क्यों ? ( मंजू थोड़ा पीछे होकर बोली )

: लगाओ फोन उसको मै बात करता हूं

फिर मंजू ने उसको फोन लगा कर दिया और मुरारी उससे बात करता हुआ गाड़ी से बाहर निकल जाता है और करीब 10 मिनट बाद वापस आता है ।

इधर मंजू पूरी तरह परेशान थी , एक अनजाना सा डर उसे खाए जा रहा था और उसका मन बहुत उदास था । वही ड्राइवर भी वापस आ गया था ।

मुरारी मंजू को फोन देकर मुस्कुराया : चले ड्राइवर साहब ?

: जी बाउजी चलते है , माफ कीजिएगा सुबह चना खा लिए थे तो पेट गड़बड़ा गया था ।

: अच्छा अच्छा ठीक है चलो ( मुरारी ने हस कहा और गाड़ी निकल पड़ी )

मगर मंजू की उलझन कम नहीं हो रही थी वो एक टक मुरारी को निहार रही थी , कि आखिर क्या बात हुई होगी दोनों के बीच ।

: क्या हुआ , अब वो तुम्हे कभी भी तंग नहीं करेगा मैने उसे समझा दिया है अपने तरीके से , खुश !! ( मुरारी ने मुस्कुरा कर मंजू को देखा और मंजू ने अपने चेहरे पर फीकी मुस्कुराहट बिखेर दी )

: अरे ड्राइवर साहब जरा मेरा ये मोबाइल लगा देंगे चार्ज नहीं है और चाप कर चलिए किसी अच्छे होटल पर रोकिएगा वही खाना पीना किया जायेगा , क्यों ? ( मुरारी ने मंजू से उसकी इच्छा जाननी चाही तो मंजू मुस्कुरा कर हा सर हिला दी और गाड़ी तेजी से हाइवे पर निकल चुकी थी )

चमनपुरा

आज अनुज का मन खुश था , सुबह सुबह उसकी मां रागिनी ने उसका दिल पहले ही खुश कर दिया था और अब कालेज में आते ही लाली ने ।

कसी हुई पैजामी ने उसकी लंबी टांगे चलते हुए जब उसके गोल मटोल चूतड़ों को थिरकाती तो अनुज के अरमान भी ऊपर नीचे होने लगते , उसपे से उसका बार बार पलट कर अनुज की ओर देखना अपनी जुल्फे कानो में उलझाना , मुस्कुराना कभी कभी अनुज खुद शर्मा जाता मगर पहले जितना नहीं ।

तभी क्लास में लाली की दीदी की एंट्री हुई ,






खुले बाल वो शिफॉन की हल्की साड़ी नंगी कमर गुदाज चर्बीदार मुलायम पेट जिसकी नाभि की झलक रह रह कर पंखे के हवा से दिख जाती , अपने छातियों पर किताबें दबाए क्लास में आई ।

सभी ने खड़े होकर उनको ग्रिट किया और फिर क्लास चलती रही । अनुज का लंड अकड़ रहा था , वो लाली की दीदी के मटके जैसे चूतड़ों को निहार रहा था साड़ी में , उसकी आंखे साड़ी को भेद कर आज भी उनकी पैंटी का कलर जानने की कोशिश कर रही थी ।

क्लास कब खत्म हो गई पता ही नहीं चला , मगर लंड की अकड़न नहीं ।

वही अगला पीरियड खाली था और क्लास में लड़कियों की रो में लाली वाली बेंच पर खूब हंसी ठिठौली हो रही थी ।

लाली के आगे बैग वाली बेंच पर उसकी दोस्त पूजा बैठी थी उसके रसीले मम्में सूट में पूरे चुस्त थे , उसकी मोटी गदराई जांघें और कूल्हे उसके सूट के नीचे बगल से झलक रहे थे । ब्लूमर पैंटी की लास्टिक जांघों पर उभरी थी पैजामी के उसकी ।






सब खूब मस्ती कर रहे थे , वहां सबके पास मोबाईल थे ,क्लास में दूसरे लड़के भी थे जिनके पास मोबाइल थे वो भी सोशल मीडिया चला रहे थे ।

: भाग कुत्ती ... हीहीही ( एकदम से पूजा खिलखिलाई )

अनुज की नजर उस ओर गई तो लाली ने भी उसकी ओर देखा । दोनों की नजरे टकराई फिर अनुज नजरे फेर लिया और चुप चाप बैठ गया । अनुज के पास अपना कोई मोबाइल तो था नहीं , और ना उसके कोई ऐसे दोस्त थे स्कूल में , ज्यादातर तो इस बात से जलन रखते थे कि इतना सहज होने के बाद भी लाली जैसी खूबसूरत और अमीर घराने की लड़की उसके लिए पागल है ।

अगले ही पल लाली ने अनुज को आवाज दे ही दिया : अनुज ? अनुज ? आओ न

अनुज ने आस पास कुछ लड़कों को उसे देखता हुआ पाया , क्योंकि लाली की आवाज पर उनके भी कान बजे थे ।

अनुज चुपचाप उसके पास गया

: क्या कर रहे हो अकेले , बैठो न , हट न मोटकी ( लाली ने पूजा को सामने वाली बेंच से धकेला और जगह खाली कराई )

: उतर रही हूं कुत्ती अह्ह्ह्ह्ह

: आलू जैसी है गिरेगी तो भी तुझे कुछ नहीं होगा हाहाहाहाहा ( लाली ने उसे चिढ़ाया )

: मारूंगी न ( पूजा ने चिढ़ कर अपना मुक्का लाली की ओर ताना ताना और उसकी नजरें अनुज से टकराई )






मगर अनुज की निगाहे तो उसके डिजाईनर सूट के गले पर अटक गई थी , जहां से उसे पूजा के रसीले आमो की झलक आ रही थी । सेकंड नहीं लगा पूजा को वो अनुज की निगाह को भाप गई और शर्मा कर मुस्कुराते हुए अपना दुपट्टा सही करने लगी ।

अनुज भी नजरे फेर लिया ।

: यार तुम्हारा इंस्टा आईडी क्या है बताओ न ? ( लाली ने कैजुअल होकर बोली )

: नहीं मैने नहीं बनाई , दरअसल मेरे पास मोबाईल नहीं है मै लैपटॉप से काम करता हूं

: हा तो उसमें भी तो चलेगा इंस्टा , तुम डाउनलोड करके आइडी बना लो न ( लाली बेधड़क बोली)

: लेकिन मुझे वो भी नहीं आती ( अनुज ने सहज कहा )

: ओक रुको मै बना देती हूं अभी ,अपनी मेल आईडी बताओ ( लाली झट से अपना मोबाइल खोलने लगी और अनुज के मेल से एक अकाउंट बना दिया )

: लो हो गया , अब थोड़ा सा स्टाइल वाला पोज दो एक डीपी लगानी है । आओ खड़े हो जाओ

: साथ के खड़ी हो जा मै खींच देती हूं ( दूसरी पूजा ने पीछे से छेड़ा लाली को , अनुज ने आंखे बड़ी कर उसे देखा तो मुंह फेर कर मुस्कुरा रही थी । )

लाली ने उसे घूरा और बुदबुदा कर उसे गाली दे रही थी फिर अनुज को देख कर मुस्कुराई : तुम खड़े होवो न

फिर अनुज ने पोज दिया और लाली ने फोटो निकाल कर फिल्टर करके अपलोड कर दिया और सबसे पहले खुद को फ्रेंड बनाया।

: घर पर शाम को ओपन करना ,ओके

अनुज ने हा में सर हिलाया और फिर अगली क्लास के टीचर आ गए ।

प्रतापपुर

" अह्ह्ह्ह मै कह रही हूं छोड़ दो मुझे गुड़िया के पापा , मुझे कोई बात नहीं करनी आपसे हटिए " , संगीता ने राजेश का हाथ झटक कर आगे बढ़ गई ।

राजेश के एक नजर कमरे के भिड़के दरवाजे की ओर देखा और लपक कर सुनीता को फिर से पीछे से पकड़ लिया और उसके नरम चर्बीदार पेट को सहलाता हुआ उसको अपनी बाहों में भरने लगा और सुनीता उसके स्पर्श से परेशान होने लगी






: उफ्फ मेरी जान तेरे ये बड़े बड़े दूध अह्ह्ह्ह ( राजेश ने अपना हाथ ब्लाऊज के ऊपर से सुनीता के रसीले मम्मों पर फिराया )

: गुड़िया के पापा छोड़िए अह्ह्ह्ह सीईईईईई.....

तभी पीछे से बबीता की आवाज आई

राजेश झट से सुनीता से अलग हो गया और घूम कर देखा तो बबीता भीड़का हुआ दरवाजा खोलकर अंदर आ रही थी

बबीता : आपका मोबाईल कहा है ? दो न प्लीज

राजेश : बेटा वो मैने किचन में चार्ज लगाया है ले ले

बबीता खुश होकर : ओके पापा हीही

बबीता खुश हुई और निकल गई

सुनीता बिस्तर पर फैली हुई साड़ी को अपने कमर में खोसे हुए गुस्साए लहजे में : क्या जरूरत है उसे मोबाइल देने की , बिगाड़ना चाहते है क्या उसे भी ।

राजेश मुस्कुरा कर उसके पास गया और उसके नंगे पेट पर फिर से हाथ फिराया : मेरी जान अब मान भी जाओ न , थोड़ा अपने रसीले दूध पिलाओ न अह्ह्ह्ह ( उसने वापस से ब्लाउज के ऊपर से उसके चूचे मसलने लगा )

: अह मै कह रही हुं गुड़िया के पापा छोड़ दीजिए , नहीं तो मै बाउजी से अह्ह्ह्ह उम्मम नहीइईई, आप बहुत बुरे हो अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ( सुनीता राजेश को धकेल रही थी मगर राजेश उसे ही बिस्तर पर लिटा कर उसके ऊपर आ गया और उसके रसीले मम्मों को मसलता हुआ उसके गुलाबी होठ चूसने लगा ।

पहले तो सुनीता ने भी इंकार किया लेकिन एक ही चुम्बन में जैसे ही उसे राजेश के होठों से शराब की बू नहीं मिली वो समझ गई कि आज वो पीकर नहीं आया तो उसने खुद को ढीला छोड़ दिया ।

जोश में राजेश उसके रसीले होंठ चूसने लगा और उसके बड़े बड़े रसीले मम्में को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा , नीचे उसका लंड पजामे में तना हुआ था जो पेटीकोट के ऊपर से सुनीता के पेडू में चुभ रहा था , राजेश अपनी कमर हिला कर अपना लंड उसके पेडू में ही घिसने लगा

: अह्ह्ह्ह गुड़िया के पापा ओह्ह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह हा उफ्फ

सुनीता की सिसकिया उठने लगी , जब ब्लाउज के ऊपर से राजेश ने उसके चूचे सहलाते हुए काटने लगा और वो पूरी तरह से अकड़ने लगी

: उम्मम कितने मुलायम और रसीले है अह्ह्ह्ह जी कर रहा है खा जाऊ अह्ह्ह्ह

: उम्मम अह्ह्ह्ह्ह खा जाओ न अह्ह्ह्ह कितना तरसाते हो ओह्ह्ह्ह गुड़िया के पापा अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म उफ्फ हा ऐसे ही .






राजेश ने उसके ब्लाउज खोलकर निप्पल चुभलाने लगा और दूसरा हाथ उसके दूसरी छाती को मसल रहा था

: तू ही पास नहीं आने देती तो क्या करु हा बोल ( राजेश ने प्यार से एक चपत लगाई सुनीता के कामोत्तेजीत चेहरे पर , मानो भीतर की भड़ास को निकाल रहा हो )

: अह्ह्ह्ह्ह मारते काहे हो , पीकर कर आओगे तो फटकने नहीं दूंगी कह देती हो , मुझे चोदना है तो ऐसे ही आना अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना गर्म है अह्ह्ह्ह

राजेश ने उसका पेटीकोट उठा कर अपना लंड पजामे से निकाल कर चूत के मुहाने पर रख दिया था

: साली रंडी , बहुत नखरे है तेरे आह्ह्ह्ह

: ब्याह के लाए हो तो झेलेगा कौन उम्मम अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह

: उफ्फ कितनी गर्म बुर है तेरी ( राजेश अपना लंड उसकी चूत में उतारता हुआ बोला )

: क्यों उस कुलटा कमला की ठंडी हो गई क्या ? जो आज मेरी गर्म लग रही है अह्ह्ह्ह आराम से ओह्ह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह हा उफ्फ कितना टाइट है जी आपका उम्मन

राजेश मुंह भींचता हुआ करारे झटके मारता हुआ : जब रोज रोज लेगी नहीं तो टाइट ही रहेगा न , कमला की तो मै ढीली कर चुका आगे पीछे दोनो से अह्ह्ह्ह तू भी रोज लिया कर उसके जैसी फाड़ दूंगा

सुनीता जोश में पागल होने लगी और अपने जांघें कसती हुई सिसकने लगी राजेश का लंड तेजी से उसकी बुर में अंदर बाहर हो रहा था






: अह्ह्ह्ह बड़े गंदे हो आप , मुझे उसके जैसा बनवा कर किससे चुदवाना चाहते हो , बाउजी से ? ( सुनीता ने उकसाया ) उम्मम बोलो न

राजेश की स्पीड एकदम से ठहर गई चौक कर : अब इसमें बाउजी कहा से आ गए

सुनीता मुस्कुराई : क्यों बाउजी अब कमला को बुलाते नहीं है क्या ?

राजेश ऐसे सवालों से झेप महसूस कर रहा था , मगर सुनीता पूरे मूड में थी उसे राजेश को तंग करना भा रहा था

राजेश : मुझे क्या पता , बुलाते है या नहीं

सुनीता ने उसकी आंखों में देखा और मुस्कुरा कर : चलो झूठे , अह्ह्ह्ह मम्मीईईई ओह्ह्ह्ह उम्मम

राजेश ने वापस से झटके चालू कर दिए : तुझे बड़ी रुचि है बाउजी में , क्या बात है उम्मम चाहिए क्या बाउजी का लंड , बोल लेगी क्या उम्मम

सुनीता एकदम से अकड़ने लगी और राजेश के तेज करारे झटके से उसकी सिसकियां तेज होने लगी : अह्ह्ह्ह क्यों देख लोगे मुझे बाउजी से चुदते अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह और चोदो और अह्ह्ह्ह

राजेश : तू बता न साली रंडी , मेरे सामने चुद लेगी बाउजी से , अह्ह्ह्ह

सुनीता चरम पर जा रही थी उसकी बुर बुरी तरफ से फड़फड़ा रही थीं और पूरी तरह से पागल हुई जा रही थी राजेश के मोटे टोपे की रगड़ से : अह्ह्ह्ह मेरे राजा मै तुम्हारी रंडी हु न , बाउजी से क्या , कहोगे तो नंदोई जी का भी लंड घुसवा लूंगी अह्ह्ह्ह्ह रुको मत और तेज अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह पेलो मुझे कस कस के अह्ह्ह्ह मेरे राजा ऐस ही आ रहा है हा हा ओह्ह्ह्ह ममीइईई उम्ममम ईईईईई अह्ह्ह्ह्ह

सुनीता की बातें सुनकर राजेश का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा वो तेजी से उसकी बुर में पेलने लगा , वही सुनीता झड़ती हुई अपने बुर में उसका लंड निचोड़ने लगी : अह्ह्ह्ह बहनचोद मजा ला दिया तूने मेरी जान अह्ह्ह्ह सीईईईईई साली रंडी अह्ह्ह्ह लेह मेरा भी आ रहा है अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह

: भर दो मेरी चूत को मेरे राजा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है अह्ह्ह्ह्ह उफ्फफ अह्ह्ह्ह

राजेश उसके ऊपर आकर झड़ता रहा उसकी चूत में और फिर शांत उसके ऊपर ही फैल गया

जैसे ही दोनों का जोश ठंडा हुआ दोनो मुस्कुराने लगे

सुनीता लजाती हुई उसको अपने ऊपर से धकेल कर : हटिए , गंदे कही के क्या क्या कहलवाते है आप मुझसे छीइइइ

राजेश हंस के : अरे देखो तो भोली को , अभी कुछ देर पहले नंदोई का लंड घोंटने को तैयार थी अब देखो ... हाहाहाहाहा

सुनीता शर्म से लाल होती हुई : धत्त गुड़िया के पापा , बस कीजिए नहीं तो...

राजेश भी उठ गया : नहीं तो क्या

सुनीता एकदम मुंह में बुदबुदाई : सच में ले लूंगी नंदोई जी का लंड

राजेश साफ सुन नहीं पाया : क्या बोली

सुनीता हस कर : कुछ नहीं जाइए आप , गोदाम नहीं जाना क्या आज ?

राजेश : नहीं वो आज ट्रक रात में आयेंगे तो रात में जाना होगा

सुनीता उदास होने लगी : क्या रात में ? मतलब फिर तरसाओगे मुझे

राजेश उसके पास खड़ा होकर : वैसे नंदोई जी है ही तेरे , देख ले अगर जुगाड़ लग जाए तो

सुनीता लाज से उसके पेट पर कोहनी मार कर : भक्क गंदे

राजेश उसको शर्म से गुलाबी होता देख छेड़ता हुआ : वैसे जीजा जी तुझे देखते तो होंगे ही , कभी नोटिस किया क्या ?

राजेश की बात सुनकर सुनीता तो एक पल के लिए ख्यालों में गुम ही हो गई , क्योंकि रंगी तो उससे अपनी दीवानगी का इजहार कर चुका है , बस उसके ही हा कि देरी है ।

राजेश : तेरे इस दूधिया कमर पर नजर जरूर गई होगी क्यों ?

सुनीता : धत्त गुड़िया के पापा , कैसी बात कर रहे है आप , जाइए हा नहीं तो ।

इधर इनकी बाते चल रही थी तो वही बबीता के कमरे में बिस्तर पर उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी ।

उसकी नजरें कभी कमरे के दरवाजे पर जाती तो कभी मोबाइल स्क्रीन पर






अगर कुछ शतत था तो उसके उंगलियों का उसके चूत पर रेंगना

" उफ्फ पापा कितने गंदे हो आप , कमला आंटी के दूध दबा रहे हो अह्ह्ह्ह्ह "

उसकी नजरें मोबाइल स्क्रीन पर चल रही एक वीडियो पर थी जिसमें राजेश ने कमला की खेतों में चुदाई करते हुए वीडियो बनाई थी ।






" अह्ह्ह्ह कमला तेरे दूध कसम से कितने रसीले है उम्मम अह्ह्ह्ह सीईईईईई" , वीडियो में राजेश कमला के चूचे सहलाते हुए बोल रहा था और कमला की सिसकिया फूट रही थी । अपने पापा की हरकते देख कर बबीता की उंगलियां खुद ब खुद उसकी चूत पर रेंग रही थी । ये दूसरी वीडियो थी जो वो तबसे देख रही थी ।

उसने वीडियो को आगे भगाया और अब वीडियो में उसके पापा अंडरवियर के होल से अपना बड़ा सा लंड निकाल कर खड़ा किए थे और सामने बैठी हुई कमला पहले उसको हिलाती है और फिर मुंह में भर लेती ।






" ओह्ह्ह्ह कमला रानी अह्ह्ह्ह्ह कितना रसीला है तेरी जीभ उम्मम और ले न अह्ह्ह्ह ऐसे ही "

बबीता अपने पापा का लंड और उनकी सिसकी सुनकर सिहर उठी और उसने अपनी जांघें कस ली और उंगलियों से अपनी बजबजाती बुर पैंटी के ऊपर से दबाने लगी : अह्ह्ह्ह्ह पापा उफ्फ कितना बड़ा है उसने वीडियो और आगे बढ़ाया तो उसकी आंखे फेल गई और उसने अपनी टांगे पसारते हुए तेजी से अपने चूत को सहलाने लगी

वीडियो में उसके पापा तेजी से कमला की बुर में लंड डाले हुए चोद रहे थे और उसकी नंगी चूचियां मसल रहे थे , वही कमला उसके पापा को सिसकते हुए उकसा रही थी






अपने पापा के मुंह से निकलते गंदे अल्फ़ाज़ और लगातार चूत में घुसते लंड से उसकी बुर बुरी तरह से गीली हो गई थी , बस तलब थी तो एक लंड की

बबीता अपनी बुर मसल रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और उसके पापा ने आवाज दी : गुड़िया बेटा, देख ली मोबाइल

बबीता की एकदम से फट गई उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे उसका हॉफ कैफरी टांगे में नीचे तक जा चुकी थी पैंटी पूरी बजबजाई हुई हाथ में मोबाइल पर वीडियो चल रही थी

उसने झट से मोबाइल का पावर बटन दबाया और उसको तकिए के पास रख कर एक चादर ओढ कर सोने का नाटक करने लगी ।

राजेश कमरे में दाखिल हुआ और उसने अंदर की बत्ती जलाई

तो देखा कि सामने उसकी लाडली गुड़िया सोई हुई है और उसका मोबाइल साइड में है ।

सुबह से अपनी बिटिया को देखकर जो अरमान राजेश के लंड और जहन में उठे, सुनीता को चोद कर थोड़ी देर के लिए शांत हुए थे मगर कमरे में लेती हुई अपनी बिटिया के टीशर्ट में उभरे हुए मौसमी जैसे चूचे को देख कर उसका लंड एकदम से अकड़ गया ।

वो धीरे से बबीता के पास गया और प्यार से उसके सर को सहलाया और हौले से उसके गाल चूम कर मोबाइल उठा लिया।

अपने पापा को इतने करीब पाकर बबीता भीतर से कांप रही थी डर था कि अगर उसके पापा मोबाइल खोलेंगे तो सबसे पहले वो वीडियो ही चलेगी ।

और हुआ भी वही मोबाइल लेकर जैसे ही राजेश बिस्तर से दरवाजे की ओर बढ़ा था कि उसने लॉक खोलकर मोबाइल देखा तो एकदम से मध्यम आवाज में वो वीडियो स्क्रीन पर चलने लगी ।

राजेश एकदम से हड़बड़ाया और सन्न रह गया , वो पलट कर बबीता की ओर देखा वो अभी भी वैसे ही करवट लिए सोई थी आंखे बंद किए

राजेश के जहन में काफी सारे सवाल थे और उनसे बढ़ कर एक डर कि कही उसकी बेटी उससे नाराज न हो जाए । वही बबीता की हालात अलग खराब थी , उसे अब पक्का यकीन होने लगा कि उसकी पिटाई तय थी ।

राजेश दबे पाव चल कर बबीता के पास गया और उसे आवाज दिया हल्का सा , ये जांचने के लिए कि वो जाग रही है या सो गई , मगर मारे डर के बबीता अपने पापा का सामना नहीं करना चाहती थी ।

राजेश ने देखा कि वो कुछ जवाब नहीं दे रही थी , उसके जहन में कुछ शंकाए उठ रही थी कि कही उसकी बेटी ने उसकी चुदाई की वीडियो देखकर ऊंगलीबाजी करके थककर तो नहीं सो गईं, क्योंकि उसने वीडियो जस का तस छोड़ा था ।

उसने धीरे से बबीता के ऊपर से चादर उठाई और वही बबीता अपने जांघें कसने लगी , उसका दिल जोरो से धड़क रहा था कि अब तो बेटा पक्का पकड़ी गई और मार मिलेगी।






जैसे ही चादर हटी बबीता कैफ़री उसके पैरो में नीचे थी और वो अपनी जांघें साट कर करवट होकर लेती थी उसकी नंगी जांघें और छोटे छोटे गोरे मुलायम चूतड पर कसी हुई पैंटी देखकर राजेश का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा , अब उसे यकीन होने लगा कि जरूर उसकी बेटी ने उसकी वीडियो देख कर अपनी चूत मसली है , ये भावना से राजेश के बदन में कंपकपी सी हो रही थी उसका हल्क अपनी बेटी की पैंटी को देख कर सुख रहा था ।

उसकी नजरें बबीता के गुदाज मुलायम चूतड़ों से हट ही नहीं रही थी , उसकी सांसे बेकाबू हुई जा रही थी और उसने एक बार बबीता को सोता हुआ देखा और खुद को रोक नहीं पाया






आगे झुक आकर बबीता के नंगे चूतड़ों के हिस्सों को छूने लगा, अपने पापा के पंजों का स्पर्श पाते ही बबीता एकदम से सन्न रह गई, उसकी सांसे चढ़ने उतरने लगी कलेजा तेजी से धकधक हो रहा था । उसे यकीन नहीं हो रहा था उसके पापा ऐसा कुछ करेंगे । वो खुद को जबरन किसी भी हरकत करने रोकने लगी और वही अपनी बेटी के गुदाज मुलायम चूतड़ों को मसलकर राजेश भी अपना खड़ा लंड पजामे के ऊपर से मसलने लगा और उसकी नियत यही तक नहीं रुकी उसने जांघों के बीच झांकते अपनी लाडली के चूत के गिले फांके उंगलियों से छूने लगा





एकदम से अपने गीली बुर पर अपने पापा के उंगलियों को रेंगता पाकर बबीता की आंखे उलटने लगी ,उसका दिल जोरो से धड़कने लगा ,उसके नथुनों से गर्म सांसे उठने लगी और उसका काबू खुद से छुटने लगा , उसकी बुर बुरी तरह से फड़फड़ाने लगी और उसके पैरो में हरकत हुई

जिसे देख कर झट से राजेश पीछे हो गया और बेटी के रस से गीली हुई उंगली को चाटने लगा और लंड भींचता हुआ बत्ती बुझा कर कमरे से बाहर आ गया ।

वही पापा के जाते ही बबीता ने अपनी टांगे फैलाई और अपनी चूत मलने लगी : अह्ह्ह्ह पापा क्यों छू रहे थे मुझे आप सीईई देखो आपके छूने से खुजली हो रही अह्ह्ह्ह्ह पापा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई






बबीता अपने पापा का नाम लेकर झड़ने लगी और सुस्त होके आखिर कार सो गई ।

जारी रहेगी
 
फोरम पर हफ्ते भर से साइट सम्बन्धी कुछ अड़चनें आ रही है

जिस वजह से अपडेट देने में दिक्कत आ रही है ,

बार बार host error जैसी समस्या हो रही है ।

जैसे ही साइट सुचारू रूप से चलता है अगला अपडेट दिया जाएगा

खुश रहिए , मस्त रहिए और जबरदस्त रहिए
 
Update 10 कुछ तकनीनी कारणों से थ्रीड से हट गया

जल्द ही उसको सुधार करते हुए पोस्ट किया जाएगा औरअगला अपडेट दिया जायेगा ।

सब्र रखें , जल्द ही मिलेगा अपडेट ।
 
हो जाइए तैयार

आगामी अपडेट्स के लिए

राज - अनुज और रागिनी

Hard-core threesome

बहुत जल्द






(सिर्फ पनौती न लगे बस 😁)
 
💥 अध्याय: 02 💥

अपडेट 10



" आओ न , धत्त देखो कैसे शर्मा रही है " , शिला ने रज्जो की कलाई पकड़ कर सीधा मानसिंह के पेंट पर उभरे है लंड पर रख दिया






मानसिंह एकदम से सिहर गया : उफ्फ भाभी जी अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म

शिला : धत्त खोलो जी , आप काहे लजा रहे हो , मै चली जाऊ क्या उम्ममम

मानसिंह लपक कर शिला को पकड़ा और अपने ऊपर खींच लिया: तुम कहा चली मेरी जान , इधर आओ न उम्ममम

अगले ही पल मानसिंह ने शिला के मोटे रसीले होंठ चूसने लगा और इधर रज्जो ने पेंट खोलकर उसका लंड बाहर कर दिया , रज्जो के गुदाज नर्म हथेली में अपना खड़ा लंड महसूस कर मानसिंह के भीतर वासना का गुबार उठने लगा : ओह्ह्ह्ह भाभी जी उम्ममम कितना मुलायम टच है आपका अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह






शिला : मेरी जान जरा इनको अपनी रसीले होठों का भी अहसास कराओ न

रज्जो ने मानसिंह का लंड हाथ में लेकर मुठियाते हुए उसकी आंखों के निहारा और अगले ही पल उसका सुपाड़ा गापूच गई

रज्जो ने नर्म गिले होठ आप स्पर्श अपने सुपाड़े पर पाते ही मानसिंह उछल पड़ा : ओह्ह्ह्ह भाभी सो सॉफ्टी उम्ममम अह्ह्ह्ह और लो न उम्ममम ओह गॉड फक्क्क् ओह्ह्ह्ह यशस्स भाभी जी अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह गॉड

शिला भी अपने कपड़े निकाल कर रज्जो के पास आ गई और मानसिंह के लंड पर उभरी हुई नसे देख कर मुस्कुराते हुए उसके आड़ छूने लगी: उफ्फ कितना टाइट है जी , सलहज की जीभ ने जादू कर दिया






रज्जो अपने मुंह से लंड निकाल कर उसे सहलाती हुई : आप भी दिखाओ न अपना जादू दीदी

और अगले ही पल शिला ने लपक कर अपने मुंह में अपने पति का लंड भर लिया और रज्जो अपनी ब्रा खोलने लगी

शिला ने मानसिंह का लंड गले तक ले गई और बाहर कर दिया

मानसिंह : ओह्ह्ह्ह गॉड आज तो पूरे मूड में है मेरी जान उम्मम रुको मै भी कपड़े निकाल दूं

रज्जो मुस्कुराकर शिला के हाथ से मानसिंह का लंड छिनती हुई : उसकी जरूरत नहीं है काम की चीज तो बाहर ही है उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना बड़ा और उम्ममम अह्ह्ह्ह

रज्जो तेजी उसका लंड मुंह ने लेते हुए चूसने लगी






शिला : अह्ह्ह्ह भाभी तुम तो बड़ी प्यासी हो अह्ह्ह्ह खा जाओ और लोह उम्ममम ऐसे ही अह्ह्ह्ह अब आई न अपने असली रूप में

शिला उसका सर लंड पर दबाते हुए बोली और रज्जो पूरा लंड गले तक ले गयि

मानसिंह : ओह गॉड भाभी आप तो एकदम ट्रेंड लगती है ओह्ह्ह्ह और और अह्ह्ह्ह यस्स उम्मम डिप डीप ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क्

शिला रज्जो के बड़े चौड़े कूल्हे सहलाती हुई मानसिंह को देखकर : तुम्हे क्या लगा मेरे राजा के लिए मै कोई अनाड़ी लेकर आऊंगी , रज्जो बेबी शो योर मूव्स

शिला ने रज्जो ने के चूतड़ पर चट्ट से पंजा मारते हुए बोली

रज्जो अपने होठ चबाती हुई खड़ी हुई और मानसिंह का लंड अभी भी उसके हाथ में था , वो बड़े ही शरारती निगाह से उसको मुस्कुरा कर देखती है और उसका लंड पकड़ कर बिस्तर को खींच कर ले आती है

रज्जो का ऐसे रंडीपना वाला रूप देखकर मानसिंह का लंड फड़कने लगा

अगले ही पल रज्जो उसके आगे बिस्तर के मुहाने पर ही घोड़ी बनकर अपने नंगे चूतड़ हवा में लहराने लगी

मानसिंह आंखे फाड़े रज्जो की नंगी गाड़ और गदराई जांघों के बीच से झांकती हुई उसकी रसीली चूत के फांके देख कर पागल हो गया और अगले ही उसके रज्जो के चूतड़ पकड़ कर लंड को बुर में सेट करता हुआ हचाक से उतार दिया

रज्जो आँखें भींच कर अपनी 3 रोज से कसी हुई बजबजाई बुर में मानसिंह का लंड गहराई में घुसता महसूस करने लगी

मानसिंह उसके गर्म तपती बुर में लंड डाल कर पागल हो उठा : उफ्फ बहनचोद क्या गर्म माल है अह्ह्ह्ह सीईईई

शिला भी अगले ही पल रज्जो के बगल में घोड़ी बनती हुई मुस्कुरा कर अपने पति को छेड़ती हुई : क्यों मेरे राजा है न तुम्हारी दीदी की बुर से गर्म उम्मम

रज्जो आँखें फाड़ कर मानसिंह के करारे झटके खाते हुए शिला को देखा तो उसने आंख मार कर हस दी ।

मानसिंह : हा मेरी जान मुझे तो तेरे गाड़ की गर्मी पागल करती है ,मगर भाभी जी तो अह्ह्ह्ह






रज्जो सिसकती हुई : उफ्फ अह्ह्ह्ह्ह और उम्ममम देखूं जरा दीदी तुम्हारी गाड़ कितनी गर्म है

और गले ही पल रज्जो ने शिला की गाड़ के सुराख को छेड़ने लगी और शिला मचल उठी

रज्जो : अह्ह्ह्ह ऐसी मुलायम गाड़ को देखकर कोई भी बहनचोद बन जाए , क्यों नंदोई जी

रज्जो ने भी मानसिंह को छेड़ा

मानसिंह तेजी से उसकी बुर में लंड पेलता हुआ हांफता हुआ : हा भाभी सच कह रही हो शिला के गाड़ की सुराख देखकर कोई भी पागल हो जाए

रज्जो और शिला समझ रही थी कि मानसिंह अभी भी कतरा रहा है और अगले ही पल रज्जो ने शिला को आंख मारी और सरक कर आगे हो गई , एकदम से उसकी रसीली बुर से मानसिंह का लंड बाहर हो गया

रज्जो : जरा डाल के दिखाइए न अपनी बहनिया के गाड़ में

रज्जो ने सरककर अपनी टांगे शिला के आगे फैला दी और उसकी आंख मार कर खिलखिलाने लगी

मानसिंह अब शिला की शरारत समझ रहा था और उसने खुल कर मैदान में आने का फैसला कर लिया ।

उसने शिला को गाड़ को पकड़ कर फैलाया और उसके दरारों में मुंह दे दिया

शिला एकदम से मचल उठी : अह्ह्ह्ह मेरे राजा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह खा जाओगे क्या अपनी दीदी की गाड़ को

रज्जो उसके आगे अपने चूत को शिला के मुंह के पास रखे हुए बोली: भैया की दीदी तुम भी खाओ न अह्ह्ह्ह सीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्मम काट काहे रही हो दीदी अह्ह्ह्ह सीईईईईई

और अगले ही पल जो जीभ रज्जो के बुर के फांके पर लहरा रही थी एकदम से अंदर घुस गई , पीछे देखा तो मानसिंह उसकी गाड़ में लंड उतार चुका था : अब ठीक है न भाभी






शीला : उम्मम मेरे राजा पेलो न हचक के अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम ऐसे ही अह्ह्ह्ह्ह और तेज

रज्जो : क्यों दीदी के गाड़ फाड़ रहे हो मजा नहीं आ रहा है क्या उम्मम अह्ह्ह्ह मुझे तो बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी दीदी से अपनी बुर चटवाने में अह्ह्ह्ह्ह काटती है साली अह्ह्ह्ह्ह नंदोई जी जरा कस कर फाड़ना तो

मानसिंह रज्जो के बातों से उत्तेजित हुआ जा रहा था और वो हुमच कर लम्बे लंबे शॉट शिला की गाड़ में लगाने लगा जिससे शिला के होठ बार बार रज्जो की बुर में रगड़ खाने लगे : अह्ह्ह्ह्ह हा नंदोई जी ऐसे ही ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

शिला : ओह्ह्ह और उम्मम मजा आ रहा है और उम्मम यस मेरे राजा रुकना मत अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह फक मीई फक मीईई ओह्ह्ह्ह यश उम्ममम और फास्ट ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क्क् मीईईईई

मानसिंह : उफ्फ माय सेक्सू यू वाना मोर उम्मम जस्ट लाइक दैट उम्मम , कम हीयर

और अगले ही पल मानसिंह ने शिला को पकड़ कर घुमाते हुए उसे अपने पास खींच लिया और लंड उसकी बुर में सेट करता हुआ हचाक से उतार दिया और तेजी से पेलने लगा

रज्जो उन दोनों की आपसी ट्यूनिंग और चुदाई के लिए जोश को देखकर पागल होने लगी और सरक कर मानसिंह के पास आने लगी






मानसिंह ने उसको पकड़ कर अपने पास किया और उसके लिप्स चूसने लगा , रज्जो उसके लिप्स का स्पर्श पाते ही पिघलने लगी उसकी बुर बुरी तरह से बजबजा रही थी और उसे लंड की तलाश थी

उसने मानसिंह से अपने होठ छुड़ाते हुए हांफते हुए बोली: फ़क मीईईई

इतना सुनने की देरी थी कि मानसिंह ने शिला को झटक कर दूसरी ओर किया और रज्जो को कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया , रज्जो ने उसके चेहरे को थाम कर उसके लिप्स चूसने लगी और मानसिंह उसके नरम चूतड़ मसलते हुए उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी एक टांग उठा कर उसके बुर को मुठ्ठी में सहलाने लगा और अगले ही पल उसने अपना लंड जो पहले से ही शिला के रस से नहाया हुआ था उसको रज्जो की बुर के उतार दिया

रज्जो का आग्रह मानसिंह में दुगना जोश भर चुका था और उसका लंड पूरा फूल चुका था जिससे रज्जो अपनी बुर में कसा महसूस कर रही थी

रज्जो : अह्ह्ह्ह्ह नंदोई जी ये और मोटा हो गया है अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम






मानसिंह करारे झटके लगता हुआ : निकाल दूं क्या भाभी जी उम्ममम

रज्जो एकदम से तड़प उठी : नहीं नहीं मुझे चाहिए और कस के पेलो मुझे अह और तेज आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह आएगा और तेज अह्ह्ह्ह सीईईईईई रुकना मत ओह्ह्ह्ह सीईईईई

शिला : झड़ जाओ मेरी जान आह्ह्ह्ह सीईओ ओह्ह्ह ओम

रज्जो ने शिला को अपने पास पाकर उसके दूध चूसने लगी और वही मानसिंह और तेज झटके देने लगा

रज्जो की आंखे फैलने लगी उसने अपनी बुर का छल्ला कस दिया उसके लंड पर : हा नंदोई जी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह और और वही हा ओह्ह्ह्ह सीईईई आएगा अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

रज्जो भलभला कर झड़ने लगी , वही रज्जो की चूत में मानसिंह का लंड पूरी तरह कसा था और सुपाड़े पर गर्म लावा महसूस हो रहा था

रज्जो की कामुक सिसकिया और उसकी लंड पर पकड़ ने उसे चरम पर ला दिया था और उसने झटके से लंड बाहर निकाला और रज्जो के पेट पर झड़ने लगा : अह्ह्ह्ह भाभी मजा ला दिया तुमने अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क्क् ओह्ह्ह्ह गॉड

एक के बाद एक लंबी पिचकारी रज्जो के दूध तक मानसिंह छोड़ता रहा और शिला रज्जो के जिस्म पर लगी मलाई को जीभ से चाट रही थीं।

रज्जो : हीहीही बस करो दीदी अब गुदगुदी हो रही है

शिला उसके रसीली चूचि के निप्पल चुबला कर : अभी मेरे सैया का मोटा लंबा लंड ले रही थी नहीं लग रही थी गुदगुदी है उम्ममम ,

रज्जो ने सिसक कर मानसिंह को देखा और दोनों नजरे टकराई , साफ झलक रहा था कि दोनों अभी भी एक दूसरे के लिए प्यासे है ।

शिला ने नोटिस किया दोनों एक दूसरे को ताड़े ही जा रहे है : ओहो देखो तो तोता मैना को उम्मम

रज्जो मुस्कुरा कर लजा गई और उठने लगी तो शिला ने उसे धर लिया: अहा अभी कहा ?

रज्जो ने एक नजर मानसिंह को देखा : फिर ?

शिला उसके ऊपर आती हुई उसके होठों से होठ जोड़ने लगी और उसकी गुदाज नरम फूली हुईं छतिया रज्जो की मोटी चूचियो से रगड़ खाने लगी जिससे रज्जो सिसकने लगी : फिर क्या , और नहीं लेना उम्मम , चाहिए न

रज्जो ने उसकी ओर देख कर हा में सर हिलाया और आंखे बंद करने लगी क्योंकि नीचे उसकी चूत के फांके पर उसे मानसिंह का कड़क लंड एक हर फिर अपने सुपाड़े को चुभोने लगा था

तभी शिला का मोबाइल बिस्तर पर बजा और उसने स्क्रीन पर आ रही unknown number की काल को देख कर हल्की सी भुनभुनाई , जिसे सिर्फ रज्जो ही सुन पाई और जैसे ही फोन कटा , मानसिंह वापस से अपना लंड घिसने लगा और रज्जो की सिसकिया उठने लगी कमरे में ।

चमनपुरा

दुकान में बैठा राज आज बहुत बोरियत महसूस कर रहा था , इन दिनों उसकी तलब किसी नई चूत के लिए उठ रही थी । रह रह कर उसकी नजर काजल भाभी के ऑर्डर वाले box पर जा रही थी और जिसका पैकेट पहले ही राज ने खोल कर देखा चुका था । वो बड़ा मोटा डिल्डो काले रंग का , काजल भाभी की इस तरह ही ख्वाहिश ने राज की भीतर से वासना से भर दिया था ।

उसने व्हाट्सअप पर काजल भाभी को कई मैसेज भेजे थे मगर उसे किसी का कोई जवाब नहीं मिला अभी तक , स्क्रॉल करते हुए उसकी नजर सरोजा के व्हाट्सअप स्टेट्स पर गई । जिसमें सरोजा ने एक गदराई महिला का फोटो डाला था और लिखा था , happy birthday bhabhi

वो औरत कोई और नहीं संजीव ठाकुर भी बीवी थी , चटक लाल होठ ,बड़े भड़कीले कूल्हे और गोरे गुलाबी गाल उसपे से बड़े बड़े थन जैसे चूचे जो साड़ी में ढके थे । कातिल लग रही थी ठकुराइन ।

राज को कुछ सुझा और उन्हें वाट्सअप पर जन्मदिन की बधाई का मैसेज कर दिया ।

राज : HAPPY BIRTHDAY MY DEAR BEAUTIFUL AUNTY 😍🥳🎂

अगले ही पल ठकुराइन ने मैसेज सीन किया और टाइप करने लगी

ठकुराइन : thank you beta , god bless you

इतना जल्दी रिप्लाई पाकर राज खुश हो गया

राज : Aunty apni ek pyaari si photo send kro

ठाकुराइन: kyo?

राज: wo status lagani hai aapki b'day wali

ठाकुराइन: so sweet beta , ruko deti hu , abhi wali du ya koi puraani

राज का जी ललचाया : abhi wali hi dedo , kya pahana hai aapne waise ? Saree me pyari lgati hai ap 🥰

ठकुराइन: oh really , abhi maine ye pahana hai

और ठकुराइन ने एक सेल्फी खींच कर भेजा , जिसमें वो खुद को बोल्ड दिखाने की कोशिश कर रही थी , शायद ये राज ने उसकी तारीफ की थी इस वजह से असर रहा होगा ।






जैसे ही वो तस्वीर राज ने देखी उसकी आंखे बड़ी हो गई , ठकुराइन इस वक्त एक नाइटी में अपनी सेल्फी लेकर भेजी थी जिसमें उसके निप्पल पूरी तरह से नाइटी पर उभरे हुए थे ।

राज उन्हें देख कर सन्न रह गया ।

राज : aunty, ye waali foto lgaaunga to maar padegi mujhe 🐀򐐽򐐊
ठकुराइन : kyo?

राज: aap khud dekh lo 😁

और कुछ ही देर में वो फोटो डिलीट हो गया ।

ठकुराइन: badmaash kahi ke , chalo mai nahane ja rahi Hu, bye

राज: aur photo?

ठकुराइन : aaker deti hu baba ,achchi waali jise lgane se mar na pde 🤣🤣

राज: ok 🤣🤣 waity waity

ठाकुराइन: paagl

फिर राज दुकान के कामों में लग गया और ग्राहकों की भीड़ में कब 2 बज गए पता ही नहीं चला । उसकी नजर मोबाइल पर तब गई जब उधर से ठकुराइन का व्हाट्सएप पर वीडियो काल आने लगा ।

राज झट से उठ कर केबिन में चला गया और वीडियो कॉल उठाया

सामने ठाकुराइन गजब की लग रही थी वीडियो काल पर , ब्लू सिफान साड़ी में। गिले बालों में उसकी कामुकता निखर रही थी । और बड़े बड़े रसीले मम्में ब्लाउज में पूरे चुस्त कसे थे ।

ठकुराइन: कहा बिजी हो

राज : बस आंटी कस्टमर थे दुकान पर , ओहो तो नहा ली आप

ठकुराइन : हा भाई नहा ली , देखो कैसी लग रही हूं ये वाली फोटो भेज दूं






ठाकुराइन ने बैक कैमरा करके आइने के आगे खड़ी हो गई । उफ्फ क्या कातिल कमर थी , भरी हुई चर्बीदार और गुदाज नाभि साड़ी से झाक रही थी , ब्लाऊज में भरे हुए चूचे साड़ी के पल्लू से बाहर निकल गए थे और पीछे उठे हुए चूतड़

राज : वाव आंटी कितनी प्यारी लग रही हो , ये वाली ही भेजो

ठाकुराइन : वैसे अभी तक तुम्हारी अंकल ने भी नहीं देखा मुझे ऐसे , लकी हो तुम , वो बाहर खड़े राह दे रहे है ।

राज : सच्ची में ? लग रहा है आप कही बाहर जाने वाली है ?

ठकुराइन : हा बस यही घाट वाले मंदिर पर ही जा रहे हैं हम लोग , और शाम को पार्टी है और तुम्हे आना है ।

राज एकदम से चौक गया : अरे लेकिन मै कैसे ? अंकल ने पूछा तो ?

ठाकुराइन: तुम्हारे अंकल तो पहले ही तुम्हारे पापा को बोल चुके है मगर वो तो ससुराल है तो तुम ही आ जाओ

राज ने कुछ सोचा: ओके लेकिन गिफ्ट क्या लोगे ?

ठकुराइन: गिफ्ट ? उसकी क्या जरूरत है तुम आ जाना बस ?

राज : नहीं ऐसे कैसे , आप कहो तो उस वाली दुकान से मेकअप किट लेते आऊ , अंकल को तैयार होकर दिखाना हीही

ठकुराइन: अरे , कुछ ज्यादा नहीं हो गया , पागल कही के

राज हस कर : सॉरी आंटी ,

ठकुराइन : नहीं मेकअप के बहुत सारे प्रॉडक्ट है मेरे पास , लेकिन एक चीज चाहिए थी , पता नहीं होगी भी या नहीं तुम्हारे यहां।

राज : अरे आप कहो तो , खोज लाऊंगा

ठकुराइन हिचकने लगी : नहीं , अभी तुम मेरे बेटे जैसे हो । मै ये सब , नहीं छोड़ो

राज : आंटी , प्लीज कहिए न , इसमें इतना शर्माने या झिझकने जैसा क्या है ?

ठाकुराइन: वो दरअसल मुझे हेयर रिमूवर वैक्स चाहिए , होगी क्या तुम्हारे यहां

राज : बस , यही ? ठीक है लेते आऊंगा रात को

ठकुराइन : अरे बुद्धू रात को क्या करूंगी , वो तो पार्टी से पहले चाहिए होगा न ( ठकुराइन थोड़ी लजाती हुई बोली और राज भी थोड़ा हिचका)

राज : फिर मै तो अभी इस दुकान पर हु बर्तन वाले , अनुज भी नहीं आया है कालेज से !

ठाकुराइन: अच्छा तुम मुझे रास्ते में दे देना जब मै नदी की ओर आऊंगी तो ले लूंगी ।

राज अपना दिमाग तेजी से दौड़ाने लगा , पहली बात तो ये थी कि वो खुद की दुकान पर जा तो सकता नहीं था लेकिन पास वाली दुकान से जरूर ले सकता था और उसने हामी भर दी ।

फिर थोड़ी बात चीत के बाद फोन कट हो गया ।

राज खुश था कि उसे एक नई उम्मीद नजर आ रही थी और वो ठाकुराइन के समान की व्यवस्था करने लगा ।

वही दूसरी ओर अनुज कालेज से निकल कर अपने कास्मेटिक दुकान पर आया , जहां उसकी मां राह खोज रही थी

रागिनी परेशान होकर : तू आ गया बेटा , कबसे राह देख रही थी लेट क्यों हुआ

अनुज : मम्मी यार कल संडे है और मेरे प्रोजेक्ट पूरे नहीं है तो टीचर मुझे रोक कर समझा रही थी ।

रागिनी : अच्छा ठीक है, तू बैठ मै घर से आ रही हूं

अनुज : क्या ही गया ?

रागिनी : अरे बेटा इधर आ

रागिनी उसे पीछे वाले कमरे में ले गई

रागिनी : वो सुबह मै ये ब्लाउज पहन कर आई थी मगर यहां तो सब मुझे घूर रहे है । अच्छा नहीं लग रहा है बेटा

अनुज की नजर एकदम से अपनी मां की डोरी वाली ब्लाउज पर गई जिसने उसने सुबह खुद बांधा था

अनुज: अच्छी तो लग रही है मम्मी , क्यों बदलना फिर

रागिनी : हा लेकिन मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही है सब देख रहे है तो अजीब लग रहा है

अनुज : सुंदर चीजों को सब देखते है , इसमें क्या है ? आप सुंदर लग रही हो तो देखेंगे नहीं

रागिनी मुस्कुरा कर : धत्त पागल

अनुज : और क्या आपको तो और भी सेक... मतलब अच्छी अच्छी डिजाइन की सिला कर पहननी चाहिए

रागिनी ने उसे बड़े ताज्जुब होकर देख रही थी

अनुज : और पता है मेरी एक दोस्त है उसकी मम्मी एडवोकेट है वो जींस पहनती है और टॉप पहनती है

रागिनी हैरत से उसको देख कर हस्ती हुई : तो क्या अब मै जिंस पहन कर दुकान में बैठूंगी , पागल हीही

अनुज : धत्त आप समझ ही नहीं रहे हो , मेरा मतलब आप खुद को मॉर्डन बनाओ न । थोड़ा टीशर्ट प्लाजो स्कर्ट पहनो घर में ।

रागिनी : धत्त मै नहीं पहनने वाली वो सब कैसा लगूंगी मै भक्क

अनुज : अरे ब्लाउज पेटीकोट पहन कर रहती हो न आप , बस उसकी जगह टॉप और स्कर्ट पहन लो हल्का रहता है और आरामदायक भी

रागिनी कुछ सोचते हुए : हा लेकिन फिर भी नहीं , तेरे पापा देखेंगे तो बोलेंगे ।

अनुज : लेकिन अभी पापा है कहा ? जब तक वो नहीं आते पहन लो

रागिनी : बोल तो ऐसे रहा है कि खरीद कर रखा है मेरे लिए , बड़ा आया

अनुज : ओहो मेरी भोली मम्मी , सोनल दीदी के टीशर्ट ट्राई करो न

रागिनी एकदम से खिलखिला पड़ी और अनुज अचरज से उसको देखता हुआ : क्या हुआ ?

रागिनी : तुझे सोनल और मुझमें फर्क नहीं दिखता

अनुज : कैसा फर्क ?

रागिनी : अरे पागल उसके कपड़े मुझे चुस्त आयेंगे , सीने पर

अनुज की नजर सहसा अपनी मां के बड़े मोटे मम्मे पर गई थी जो बिना ब्रा के उनकी ढीली ब्लाउज में लटक रही थी ।

अनुज : एक बार ट्राई तो करो , टीशर्ट फैलता भी है , हो जाएगा आपको ।

रागिनी : अच्छा ठीक है दादा कर लूंगी ट्राई , अब खाना ले चल

अनुज : आप खिलाओगे ?

रागिनी मुस्कुरा कर उसके गाल खींचती हुई : क्यों नहीं मेरा बच्चा , बैठ आ जा

*******************************

वही ममता के घर उसके कमरे में मदन की बेचैनी बढ़ रही थी ,

वो कमरे में टहल रहा था , उसकी नजरें बेचैन होकर इधर उधर कमरे में चीजे देख रही थी

तभी बाथरूम से ममता ने आवाज दी : देवर जी जरा तौलिया देंगे

ममता की आवाज सुनते ही मदन ने लपक आकर बिस्तर पर रखा हुआ तौलिया उठाया और बाथरूम का दरवाजा खोल कर बिना अंदर झाके हाथ घुसा दी : पकड़िए भाभी

ममता : अरे कैसे पकडू, मै इधर हु इतना भी क्या शर्मा रहे है कपड़े पहने है मैने आइए

ममता के बात पर मदन थोड़ा मुस्कुराता हुआ नजरे चुराता हुआ बाथरूम खोलकर जैसे ही अंदर घुसा उसे ममता बाथरूम में एक कोने में शावर के नीचे नाइटी में भीगती हुई दिखी ,






पानी ने उसके जिस्म से नाइटी की इस कदर चिपका रखा था कि उसके जिस्म का हर कर्व नजर आ रहा था और उसके दोनों मोटे बड़े मुनक्के जैसे निप्पल बिजिबल होकर झलक रहे थे उस गीली नाइटी में

मदन ने नजर भर में ममता को ऊपर से नीचे तक स्कैन कर लिया और तालिया देते हुए उसकी नजर बाथरूम के हैंगर पर सूखते ममता के ब्रा पैंटी पर गई , ये वही विजिबल ब्रा पैंटी थी जिसे हालही के मुरारी ने अमन से ऑनलाइन मंगवाया था , मगर लाजन ममता ने उस रोज के बाद उसे दुबारा नहीं पहना था और न ही कभी उसे बाहर धूल आकर सूखने के लिए डाली थी

ममता ने देखा कि मदन एक तक उसकी ब्रा और पैंटी को निहार रहा था तो उसकी हसी छूट गई , आमतौर वो मदन को छेड़ती रहती थी भाभी के पद से : पसंद आ गई हो लेते जाओ , पहन कर बताना फिटिंग कैसी है ।

ममता की बात सुनकर मदन मुस्कुराने लगा और लजाता हुआ : धत्त भाभी आप भी न , बोलिएगा मै बाहर हूं

ममता उसकी बात सुनकर हसने लगी वही ममता की बातों से मदन भीतर से हिल गया , कल रात का वो नजारा , फिर आज अपनी भाभी को सहारा देकर बाथरूम तक लाना , उन्हें भीगी हुई विजिबल नाइटी में देखना , मदन का लंड सर उठाने लगा था

तभी ममता की आवाज आई : आ जाइए देवर जी

मदन बाथरूम के दरवाजे पर ही खड़ा था और उसने अपना लंड सेट किया और बाथरूम में घुसा , सामने ममता वही तौलिया लपेटे हुए थी ,






जिसमें उसकी चिकनी जांघें और ऊपर से मोटी चूचियो की पहाड़िया दिखाई दे रही थी

ममता ने उसको घूरता देख हस कर उसे छेड़ते हुए बोली : बस करिए देवर जी , तौलिया खोल कर ही मानेंगे क्या ? वैसे कुछ पहना है नहीं हीही

ममता के इस मजाक से मदन भीतर से चुलबुला उठा और उसके मुंह से हल्की बुदबुदाहट हुई : रात से तो ज्यादा ही पहनी हो

ममता एकदम से चौकी : क्या बोले ?

मदन की चोरी पकड़ी गई और वो बेशर्मी से मुस्कुराने लगा और ममता का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम से बाहर लाने लगा : कुछ भी तो नहीं !

ममता : तो रात में देख लिया था आपने मुझे , क्यों ?

मदन एकदम से लजा गया : हा , वो बस कमरे में जाते हुए नजर पड़ गई थी मेरी

ममता हस कर : बस नजर पड़ी थी , चलो झूठे , ऊपर से पीछा करते आ रहे थे मेरा

मदन सफाई देता हुआ : अरे तो आप भाग भी तो रही थी कितनी तेज , आवाज दिया फिर भी नहीं बोली कुछ

इस बार झेंपने की बारी ममता की थी : हा वो मै , छोड़िए , आलमारी से मेरी एक नाइटी निकाल देंगे ।

ममता ने जैसे ही टॉपिक बदला मदन ने भी लिहाजन चुप हो गया और आलमारी से उसकी एक नाइटी निकाल कर उसे देते हुए : भैया को पता है ?

तभी बाथरूम से ममता ने आवाज दी : देवर जी जरा तौलिया देंगे

ममता की आवाज सुनते ही मदन ने लपक आकर बिस्तर पर रखा हुआ तौलिया उठाया और बाथरूम का दरवाजा खोल कर बिना अंदर झाके हाथ घुसा दी : पकड़िए भाभी

ममता : अरे कैसे पकडू, मै इधर हु इतना भी क्या शर्मा रहे है कपड़े पहने है मैने आइए

ममता के बात पर मदन थोड़ा मुस्कुराता हुआ नजरे चुराता हुआ बाथरूम खोलकर जैसे ही अंदर घुसा उसे ममता बाथरूम में एक कोने में शावर के नीचे नाइटी में भीगती हुई दिखी , पानी ने उसके जिस्म से नाइटी की इस कदर चिपका रखा था कि उसके जिस्म का हर कर्व नजर आ रहा था और उसके दोनों मोटे बड़े मुनक्के जैसे निप्पल बिजिबल होकर झलक रहे थे उस गीली नाइटी में

मदन ने नजर भर में ममता को ऊपर से नीचे तक स्कैन कर लिया और तालिया देते हुए उसकी नजर बाथरूम के हैंगर पर सूखते ममता के ब्रा पैंटी पर गई , ये वही विजिबल ब्रा पैंटी थी जिसे हालही के मुरारी ने अमन से ऑनलाइन मंगवाया था , मगर लाजन ममता ने उस रोज के बाद उसे दुबारा नहीं पहना था और न ही कभी उसे बाहर धूल आकर सूखने के लिए डाली थी

ममता ने देखा कि मदन एक तक उसकी ब्रा और पैंटी को निहार रहा था तो उसकी हसी छूट गई , आमतौर वो मदन को छेड़ती रहती थी भाभी के पद से : पसंद आ गई हो लेते जाओ , पहन कर बताना फिटिंग कैसी है ।

ममता की बात सुनकर मदन मुस्कुराने लगा और लजाता हुआ : धत्त भाभी आप भी न , बोलिएगा मै बाहर हूं

ममता उसकी बात सुनकर हसने लगी वही ममता की बातों से मदन भीतर से हिल गया , कल रात का वो नजारा , फिर आज अपनी भाभी को सहारा देकर बाथरूम तक लाना , उन्हें भीगी हुई विजिबल नाइटी में देखना , मदन का लंड सर उठाने लगा था

तभी ममता की आवाज आई : आ जाइए देवर जी

मदन बाथरूम के दरवाजे पर ही खड़ा था और उसने अपना लंड सेट किया और बाथरूम में घुसा , सामने ममता वही तौलिया लपेटे हुए थी , जिसमें उसकी चिकनी जांघें और ऊपर से मोटी चूचियो की पहाड़िया दिखाई दे रही थी

ममता ने उसको घूरता देख हस कर उसे छेड़ते हुए बोली : बस करिए देवर जी , तौलिया खोल कर ही मानेंगे क्या ? वैसे कुछ पहना है नहीं हीही

ममता के इस मजाक से मदन भीतर से चुलबुला उठा और उसके मुंह से हल्की बुदबुदाहट हुई : रात से तो ज्यादा ही पहनी हो

ममता एकदम से चौकी : क्या बोले ?

मदन की चोरी पकड़ी गई और वो बेशर्मी से मुस्कुराने लगा और ममता का हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम से बाहर लाने लगा : कुछ भी तो नहीं !

ममता : तो रात में देख लिया था आपने

ममता मुस्कुरा कर : नहीं , क्यों ?

मदन उसकी शरारत को बढ़ावा देता हुआ : अगर पता चल गया तो ?

ममता : उन्हें बताएगा कौन आप ? हीही, आपने इतनी हिम्मत कहा जो अपने भैया से बोल पाओ , बोलो कह पाआगे

मदन एकदम से हड़बड़ा गया : नहीं , वो

ममता खिलखिलाती हुई : बस निकल गई हवा , बड़े आए मुझे ब्लैकमेल करने वाले हीहीही ,

ममता की बिंदास बोली सुनकर मदन बेजवाब हो गया और ममता मुस्कुराते हुए पैर रगड़ते हुए बिस्तर तक आई : जाते हुए दरवाजा बंद कर दीजियेगा

ममता ने थोड़ा ताना सा मारा मस्ती में मदन को और मदन उतरा हुआ मुंह लेकर कमरे से बाहर आ गया ।

कुछ देर बाद ममता काटन की नाइटी डाल कर हाल में आई तो देखा मदन चुप चाप बैठा है ।

ममता हस कर : अरे दादा , देखो तो कैसे बच्चों जैसे मुंह फूला कर बैठे है

ममता की बात पर मदन मुस्कुरा उठा : ऐसी बात नहीं है , वो मै सोच रहा था ...

ममता नहाने के बाद थोड़ी फ्रेश थी मगर अभी भी चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी और पैर में आई चोट से उसके बड़े चौड़े कूल्हे और भी झटके खा रहे थे चलने पर वो चलती हुई किचन में गई और उसकी बात काटते हुए : खाना खाएंगे ?






ममता ने घूम कर मुस्कुराते हुए देखा और मदन की नजर उसके बड़े चौड़े चूतड़ों पर गई जो नाइटी में पूरी उठे हुए थे , उसपे से ममता की कातिल मुस्कुराहट ने उसकी सांसे बेचैन कर रखी थी : हा , लेकिन वो मै कह रहा था कि आप ऐसे क्यों घूम रही थी छत पर

ममता कुछ बोली नहीं और खाना परोस कर थाली लेकर आती हुई मदन के पास खड़ी होकर उसकी आंखों में देखते हुए खाने की थाली झुक कर टेबल पर रखते हुए बोली : इतना क्यों बेसब्रे हुए जा रहे है देवर जी , रात में पता चल जाएगा न

ममता अपनी शरारती मुस्कुराहट से आंखे नचाते हुए बोली और खड़ी हो गई और इतना काफी था मदन को उत्तेजित करने के लिए।

मदन की भूख एकदम से गायब ही हो गई , और उसके पेट में अजीब सी हड़बड़ाहट होने लगी थी । उसके जहन में कुछ तो प्लानिंग चल रही थी

मदन : भाभी ! भइया कब आयेंगे ?

ममता : अरे हा मै भूल ही गई , जरा फोन करेंगे उन्हें , लगाइए न

मदन अजीब नजरो से ममता को देख और फिर फोन निकाल कर डायल करने लगा ।

रिंग गया और उधर मुरारी ने फोन उठाया

: हा मदन कहो ?

: जी प्रणाम भैया , वो भाभी पूछ रही थी कि आप कब तक आयेंगे

: अरे भाई , आ जाऊंगा कल शाम तक

: जी ठीक है ( मदन ने शांत होकर कहा और ममता हंसे जा रही थी जिस तरह से मदन का मुंह चोखा हुआ था )

: अच्छा सुनो , तुम्हारी भाभी कहा है , फोन दो ?

: जी लीजिए बात कीजिए ( मदन ने मोबाइल ममता को दिया और ममता किनारे होकर बात करने लगी , मदन खाना खाने लगा )

ममता से बात करने के बाद मुरारी ने मोबाइल जेब में रखा और वापस गाड़ी के पास आता हुआ मंजू के पास गया

मुरारी ने इशारे से उसे बाहर आने को कहा और मंजू चुपचाप निकल आई गाड़ी से

मुरारी उसके पास आकर धीरे से बोला : यहां तुम फ्रेश हो सकती हो , आओ

मंजू ने हा में सर हिलाया और दोनों बाथरूम की ओर बढ़ गए , जो हाइवे से लग कर एक बड़ा ढाबे जैसा होटल था ।

मुरारी ने मंजू को टॉयलेट की ओर ले गया , वहा दो टॉयलेट थे जो आपस में सटे थे और उनके बीच की दिवाल पूरी नहीं उठी थी थोड़ा गैप था ।

मुरारी उसको एक बाथरूम में भेज दिया और दूसरे वाले में खुद चला गया । मुरारी के भीतर वासना का गुबार तो 10 मिनट पहले ही उठ चुका था , जब वो बाथरूम चेक करने के लिए आया था , उसने पहले ही अंदाजा लगा दिया था कि वो अपने वाले टॉयलेट से उसकी सीट पर चढ़ कर दूसरी तरफ झांक सकता और उसे मंजू के नंगे चूतड़ देखने का इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था । लेकिन ऐन मौके पर मदन का फोन उसको इरिटेट कर दिया था और नतीजन मदन को फटकार मिली थी ।

बड़े ही डरते हुए मुरारी ने अंग्रेजी टॉयलेट सीट पर चढ़ा , डर था कि कही टूट न जाए और जैसे ही उसने दिवाल के पार दूसरी ओर झांका उसका लंड पजामे में झटके खाने लगा






मंजू अपनी पूरी साड़ी समेट कर अपने मोटे कूल्हे खोलकर मूतने बैठ गई और उसके बड़ी बड़ी गोल मटोल चूतड़ों को देख कर मुरारी की आंखे चमक उठी और जैसे ही मंजू उठने को हुई वो पीछे हो गया , मगर किसी साए के पीछे होने का अहसास जैसे ही मंजू को हुआ उसने झट से ऊपर देखा तो उसकी नजर टॉयलेट की अधूरी दिवाल पर गई और उसके जहन में शंका की बीज फिर उभरने लगा ।

बगल वाले बाथरूम में मुरारी का होना और पूर्व में उसकी जैसी हरकते रही है उसे देखते हुए मंजू को शक होने लगा कही वो झांक तो नहीं रहा था ।

इसीलिए वो जांचने के लिए बाथरूम में रुकी रही जबतक कि मुरारी बगल वाले टॉयलेट से निकल नहीं गया ।

उसके जाते ही मंजू निकल आई और बगल वाले टॉयलेट के खुले दरवाजे से अंदर देखा तो अंदर इंग्लिश सीट लगी थी और उसका शक यकीन में तब बदला जब उसने चप्पलों के ताजा निशान टॉयलेट सीट की ढक्कन पर देखे । उसकी सांसे तेज होने लगी , उसे मुरारी का किरदार समझ नहीं आ रहा था और वो हाथ धूल कर चुपचाप बाहर निकल आई ।

उसके बाद वही सबने खाना खाया , मंजू की चुप्पी मुरारी तोड़ने की कोशिश कर रहा था मगर सफल नहीं दिख रहा था ।

मंजू भी भीतर से उलझी हुई थी , उसके मन में एक ही सवाल उठ रहा था कि कही वो एक मुसीबत से निकल कर किस नई मुसीबत में फंस तो नहीं रही ।

मंजू : भैया ?

मुरारी : हा मंजू कहो!!

मंजू कुछ देर रुक कर : मुझे आपसे कुछ पूछना है !

मुरारी : हा कहो

मंजू : आप ये सही नहीं कर रहे है

मुरारी चौका : मैने क्या किया ?

मंजू उखड़ कर भुनभुनाई : जो कुछ भी आप कर रहे है , आपको अच्छे से पता है , बनिए मत

मुरारी असहज होकर बोला मानो जबान अटकने लगी हो : तुम कहना क्या चाहती हो ? साफ साफ कहो न

मंजू : रात में जो आपने किया और अभी बाथरूम में झांकना , ये सब क्यों ?

मुरारी एकदम से चौक गया उसकी फटने लगी कि मंजू को इनसब के बारे में पता है और वो बहुत शर्मिंदा ।

मुरारी सफाई देता हुआ : हा वो , सॉरी मंजू लेकिन तुम मुझे समझने की कोशिश करो । ये सब ममता से दूर होने का नतीजा है कल रात में उसने मुझसे ऐसी बाते की और जब मैने तुम्हे सोते देखा तो मेरा मन ललचा गया और अभी बाथरूम में हो कुछ हुआ उससे पहले ममता का फोन आया था ।

मंजू उसकी बाते सुनकर मुस्कुराने लगी क्योंकि कही न कही मुरारी की बातों में उसे सच्चाई झलक रही थी क्योंकि बीते रात उसने भी ममता और मुरारी की कामोत्तेजक बाते सुनी थी ।

मंजू चम्मच से खाने को कोचंती हुई मुस्कुराई : इतनी दिक्कत होती है तो भाभी को लेकर आना चाहिए था न

मुरारी उसकी बाते सुनकर हस दिया और शुक्र मनाने लगा कि मंजू ज्यादा नाराज नहीं हुई ।

मुरारी : हा लेकिन कहा कहा उसको लेकर भटकता , फिर घर पर मदन अकेला था खाने पीने की दिक्कत हो जाती ।

मंजू कुछ सोच रही थी और फिर मुस्कुराने लगी

मुरारी उसकी ख्यालों में मुस्कुराता देख : क्या हुआ क्या सोच रही हो

मंजू ने उसकी ओर देखा और ना में सर हिला कर मुस्कराई

मुरारी : अरे बोलो न ?

मंजू को एकदम से हंसी आई उसका निवाला गले से वापस में मुंह में आने को हुआ और वो मुंह पर हाथ लगा कर हस्ती हुई पानी पीने लगी । फिर न में सर हिलाती हुई मुस्कुराने लगी

मुरारी बेचैन हो उठा : क्या हुआ बोलो न ?

मंजू : सोच रही हूं कि अगर भाभी मायके जाती होंगी तो आप किसपर ताक झांक करते होंगे , हीही, सॉरी

मंजू मुंह पर हाथ रख कर हसने लगी ।

मुरारी मंजू को खुश देखकर और उसके मजाक पर थोड़ा शर्मिंदा हुआ मगर हस्ते हुए ही बोल पड़ा : पहले तो तकलीफ होती थी लेकिन अब देख रहा हूं इंतजाम हो गया है उसका भी ।

मुरारी ने खुले शब्दों में मंजू से मजाक किया और वो अपने चेहरे पर हाथ रख कर गर्दन फेर कर मुस्कुराने लगी हस्ते हुए उसकी भारी छातियां खूब हिल रही थी ब्लाउज में ।

मंजू मुस्कुरा कर : हा लेकिन अगर उनको ( मदन ) भनक लग गई तो ? हीही

मुरारी मंजू की बाते सुनकर हिल गया जिस तरह से वो इन बातों के इंटरेस्ट दिखा रही थी और उसका लंड अब हरकत करने लगा , उसने टेबल के नीचे से अपना लंड पजामे के ऊपर से मसला और मुस्कुरा कर : बस मेरा दोस्त मेरा साथ दे तो भनक भी नहीं लगेगी किसी को

मंजू ताज्जुब होकर मुस्कुराती हुई : अच्छा जी , दोस्त ? हम्मम ये सही है , हीहीही

मुरारी खाना खत्म कर : तो चले ! दोस्त ?

मंजू मुस्कुरा कर हा में सर हिलाती हुई उठ गई ।

प्रतापपुर

रंगी का लंड अकड़ गया था, जिस तरह से बनवारी रज्जो का नाम लेकर अपनी स्वर्गवासी पत्नी के साथ की चुदाई वाली कहानियां बयां कर रहा था ।

रंगी की हालत खराब थी , और उसका लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था ।

बनवारी मुस्कुरा कर : क्यों जमाई बाबू , अभी से हालत खराब हो गई

रंगी अपना सुपाड़ा खुज़ाता हुआ : अह्ह्ह्ह्ह बाउजी , आप जिस तरह से बता रहे हैं ऐसा लग रहा है सब कुछ आंखों के सामने घट रहा हो और खवाइश यही हो रही है कि काश आपको अम्मा जी के साथ देख पाता तो सीईईई

बनवारी : हाहाहाहाहा, आप भी न जमाई बाबू

रंगी : सच कह रहा हूं बाउजी , जिस तरह से आपने अम्मा जी के बारे में बताया खासकर उनके भड़कीले कूल्हे और भारी दूध उफ्फफ एक बार दर्शन हो जाते तो धन्य हो जाता

बनवारी : अरे तो उसमें क्या है ? रज्जो को देख लो । मैने बोला न डिट्टो रज्जो बिटिया जैसी थी तुम्हारी सास , और पोजीशन भी उसके जैसी ही करती है ( हल्की आवाज में बोला बनवारी )

रंगी की आंखे बड़ी हो गई : मतलब आपने रज्जो जीजी को देखा है मतलब कब कैसे ?

बनवारी थोड़ा असहज हुआ मगर हस्ते हुए : अब तुमसे क्या ही छिपाना जमाई बाबू , उन दिनों रज्जो लुधियाना से आई थी और यहां कुछ महीने रुकी थी । अब एक ही घर में कभी न कभी असहज परिस्थितियां आ ही जाती है समझ सकते हो । नहाते हुए गलती से एक दो बार मैने उसे देख लिया था और बस वही मन बहका ।

रंगी शौक्ड होकर : फिर ?

बनवारी : संयोग ही था कि उन्हीं दिनों कमल बाबू भी लुधियाना से आ गए थे।

रंगी : अच्छा

बनवारी : हा , अब मिया बीवी है तो समझ ही सकते हो कि मुहब्बत रहेगी ही

रंगी हंसकर : और रज्जो जीजी जैसी बीवी हो तो क्या कहना हाहाहाहाहा

बनवारी हस कर : तुम भी न जमाई बाबू मजे खूब लेते हो

रंगी मुस्कुरा कर : अच्छा आगे बताइए न फिर क्या हुआ

बनवारी मुस्कुरा कर : हा तो मै देख रहा था कि कमल बाबू और रज्जो बिटिया बड़े ही खुले दिल के थे । मस्ती मजाक और एक दूसरे को तंग करना । खासकर रज्जो जैसी चुलबुली है उसे देख कर उसकी अम्मा की याद आती है उसकी हरकते बड़ी आकर्षक होती थी। ना चाहते हुए भी आदमी रुचि लेने लगे ऐसा कुछ था मेरे साथ भी ।

फिर उस रोज बहु और बच्चे भी नहीं थे तो इनकी शरारते कुछ ज्यादा थी । घर में बुड्ढा कमरे में सो रहा है तो उसका फायदा लेकर कमल बाबू कभी किचन में तो कभी खुले बरामदे में ही उसको पकड़ लेते , मगर रज्जो लिहाजन छोड़ देती । उनकी हरकतों से मै बेचैन हो गया था, नीद नहीं आ रही थी रात में और ना चाहते हुए भी मैने रज्जो के कमरे का रुख किया । रात 3 बजे तक उनका खेल चलता रहा ।

रंगी : तो क्या उतनी रात तक आप बाहर खड़े रहे

बनवारी हस कर झेप गया तो रंगी मुकुराने लगा : वैसे मै होता तो मै भी ये मौका नहीं छोड़ता हाहाहाहाहा

बनवारी : पता नहीं रज्जो में कैसा आकर्षण है कि मेरे पैर जम गए, ना कमल बाबू हल्के पड़े और न रज्जो , जबर्दस्त कार्यक्रम चलता रहा।

रंगी उसकी बात सुनकर बड़ी बेशर्मी से अपना लंड पजामे के ऊपर से मसलने लगा

बनवारी उसकी हरकत देखकर : अगर आपको अजीब न लगे तो एक बात कहूं

रंगीलाल हस कर : मेरे अलावा किसी और से कहने का विकल्प है क्या हाहाहाहाहा तो कहिए न सोच काहे रहे है

बनवारी हस कर : सच कहूं आप बड़े दिलदार हो जमाई बाबू

रंगीलाल : अब बात मत पलटिए , पूरी कहानी बताइए नहीं तो मजा अधूरा रह जाएगा

बनवारी उसको मुस्कुराकर देख और बोला : वो दरअसल मैने देखा कि रज्जो खुद से कमल बाबू का हथियार बिना कहे मुंह में ले रही थी

रंगी आंखे बड़ी कर : क्या सच में?

बनवारी : हा आमतौर पर तो सब औरते ये सब करने में कतराती थी , ये कमला ससुरी आवारा भी जल्दी मुंह में नहीं लेती , लेकिन वो तो हाथ भर का एक बार में ..

रंगी की हालत खराब होने लगी , वो रज्जो के लंड चूसने की कला का पहले से ही दीवाना रहा है मगर ये बात तो अपने ससुर से कह नहीं सकता था ।

रंगी : उफ्फ बाउजी आपकी बातें सुनकर मेरी ये हालात है तो आपकी क्या हालत हुई होगी उस रोज

बनवारी सिहर कर : मत पूछो जमाई बाबू , कसम से उस रात की यादें आजतक मेरे जहन में ताजा है और ना जाने कैसे मै खुद उतनी रात तक 3 बार झाड़ कर भी खड़ा रहा।

रंगी चौक कर : क्या 3 बार ? क्या आपने सच में रज्जो जीजी को देख कर

बनवारी थोड़ा सा हिचका जरूर मगर उसका लंड भी अब बगावत पर उतारू हो गया था , मन में बस वासना चढ़ी हुई थी : आप रहते तो आप क्या करते

रंगी मुस्कुरा कर : मेरी ऐसी किस्मत कहा बाउजी कि रज्जो जीजी को प्रोग्राम देख पाऊं

बनवारी हस कर : अरे रज्जो का न सही लेकिन आज रात कमला का प्रोग्राम देख लेना हाहाहाहाहा

रंगी मुस्कुराने लगा कि तभी बनवारी के मोबाइल पर फोन बजा

सुनीता ने उसे फोन किया था कि गीता नाराज होकर अपने कमरे में सोई है , ना खाना खाया उसने और न आज बबीता के साथ ट्यूबवेल पर घूमने गई ।

रंगी : क्या हुआ बाउजी , कोई दिक्कत

बनवारी : क्या बताऊं जमाई बाबू , बच्चे है जिद करेंगे ही । राजेश की लड़की मीठी , वो मुंह फूला कर बैठी है । खाना भी नहीं खाया उसने

रंगी ने देखा बनवारी एकदम से हड़बड़ी में था जल्दी जल्दी चप्पल पहन रहा था तो वो भी उठ गया और दोनों साथ ही निकल गए घर के लिए।

जारी रहेगी
 
💥 अध्याय: 02 💥

अपडेट 11


गाड़ी तेजी से हाइवे से अपने डेस्टिनेशन के लिए आगे बढ़ रही थी और मंजू काफी खुश नजर आ रही थी।

मुरारी को उसका खिलखिलाता चेहरा भा रहा था और वो उसे हसाने से बाज नहीं आ रहा था । उसने नोटिस किया ममता को लेकर मंजू के दिल में काफी उत्सुकता है और जब भी वो मंजू से अपने और ममता के बारे में बात छेड़ता वो बड़े गौर से सुनती थी ।

मुरारी धीरे उसके कान के पास जाकर : अरे अमन की शादी के बाद तो वो भी बड़ी जिद करने लगी थी कि उसे भी हनीमून जाना है

मंजू मुरारी की बातें सुनकर आंखे बड़ी कर ली , कि ये क्या बाते छेड़ रहा है मुरारी । वो सन्न थी मगर उसके चेहरे पर एक छिपी मुस्कुराहट थी जो उसके भीतर की उत्सुकता को झलका रही थी , और वो चकित भी थी कि ममता के बारे में कल्पनाएं गढ़ कर की कैसी कामुक औरत होगी वो जो बेटे की शादी पर खुद हनीमून जाने के ख्वाब देखे ।

मंजू मुस्कुरा कर : धत्त क्या सच में ?

मुरारी : हा सच में , अमन की कसम

मंजू की बेचैनी तो अब और बढ़ गई कि आगे क्या हुआ होगा मगर फिर भी वो झिझक रही थी ।

मंजू खुद को हल्का रखती हुई खिड़की से बाहर देखने लगी और फिर थोड़ा चुप होकर बोली: ठीक तो है फिर घुमा लाना चाहिए था न

मुरारी : फिर तुम्हे कैसे खोजता

मंजू मुस्कुरा कर : अच्छा जी , लेकिन मेरे चक्कर में दीदी अकेली परेशान हो रही होगी न

मुरारी आंखे सिकोड़ कर : उसे भला क्या तकलीफ वहां

मंजू मुरारी के इस बात पर मुंह फेर कर हसने लगी और मुरारी जल्द ही उसकी दोहरी बात समझ गया और मुस्कुराने लगा ।

मुरारी : वैसे बात तो तुम्हारी ठीक ही है , अमन की मां को कहा कोई दोस्त मिल पायेगा वहां

मंजू आंखे बड़ी कर उसकी ओर देखी और मुरारी ने आंखे मार दी उसे ।

मंजू लजा कर : धत्त , चुप रहिए अब आप

मुरारी अंगड़ाई लेता हुआ : सोच रहा हूं जरा हाल खबर ले ही लू उसकी

और मुरारी ने जेब से मोबाइल निकाल कर ममता को फोन घुमा दिया ।

जब तक रिंग जा रही थी वो अपने बैग से एक वायर वाला इयरफोन निकालने लगा जो सफर में कभी कभार वो यूज करता था गाना सुनने के लिए

मंजू उसे देख रही थी और मुस्कुरा कर खिड़की से बाहर देखने लगी

कुछ ही देर में फोन पिक हुआ

मुरारी : कैसी हो भाग्यवान

.......

मुरारी मंजू को देख कर मुस्कुराया : बस पल पल आ रहे है तुम्हारे पास

मुरारी की बात सुनकर मंजू मुस्कुराती रही

मुरारी : हा वो भी ठीक है , नहीं वो तो सो रही है , थक गई है बेचारी

मंजू समझ रही थी मुरारी उसके बारे में ही झूठ बोल रहा था और वो हैरान होकर उसे देख रही थी तो मुरारी ने आंख मारी और मुस्कुराने लगा ।

मुरारी : अह्ह्ह्ह सच कहूं तो तुम बिन ये राहें खत्म ही नहीं हो रही है

मंजू मुस्कुरा कर उसे देख रही थी और मुरारी ने इयरफोन का दूसरा कान वाला बड्स उसकी ओर दिया तो मंजू मुस्कुरा कर ना में सर हिलाने लगी

मुरारी ने आंखे से ही उसको इशारे कर कान में लगाने को कहा, ना जाने कैसा सामंजस्य था कि मंजू चाह कर भी बोल नहीं पा रही थी और न मुरारी के प्रस्ताव को ठुकरा पा रही थी ।

और उसने कान में बड्स लगा कर मुरारी के पास आ गई ।

दोनों एकदूसरे से सर सटाए हुए थे और मुरारी बाते किए जा रहा था, आगे ड्राइवर अपनी धुन में मस्त था ।

मुरारी इयरफोन के माइक वाले हिस्से को मुंह के पास रखता हुआ धीरे से बोला : जानू याद नहीं आ रही क्या ?

ममता एकदम से सिहर उठी : उम्ममम क्या बताऊं, किस कदर आपकी याद आ रही है । वो कमरे के ढोलक वाला तकिया है न

मुरारी : हम्ममम

ममता : उसको कस कर सोई हु

मंजू को अब शर्म आ रही थी और उसने सोचा कि वो कान से निकाल दे लेकिन मुरारी ने उसकी कलाई पकड़ कर उसे रोक दिया

मुरारी : बस आज रात और , फिर तो मै आ जाऊंगा न

ममता : हा तो फिर भी मै तो इसी को पकड़ कर सोऊंगी

मंजू को हंसी आई मुरारी की किरकिरी पर और वो मुंह पर हाथ रख कर खुद को कंट्रोल करने लगी और मुरारी उसको हंसता देख मुस्कुराता हुआ : अच्छा , तो आजकल वही तुम्हारा दोस्त है उम्मम

मंजू ने एकदम से मुरारी को देखा और वो समझ रही थी कि वो जानबूझ कर उसे छेड़ रहा है ।

ममता इठला कर : और क्या ? कल रात से यही मेरा दोस्त है और आगे भी यही रहेगा अब समझे

मुरारी : ओहो, ऐसा क्या किया इसने जो बड़ा करीबी हो गया

ममता : ये मुझसे कभी अलग होकर नहीं सोता , आपके जैसे नहीं कि काम निपटा लो और फिर दूर सो जाओ । ये तो सब कुछ करके भी मेरे पास होता है

ममता की बातें सुनकर मंजू के कान खड़े हो गए और वो आंखे बड़ी कर खुद की हसी रोकती हुई मुरारी को देख रहे थी और मुरारी मुंह पर उंगली रख कर उसको चुप रहने का इशारा किया और बोला : अच्छा फिर तो ये तुम्हे तुम्हारी मनमर्जी भी करने देता होगा

ममता : हा और क्या , जैसे मै चाहूं वैसे , जब चाहूं तो इसको अपने नीचे कर लूं और आप हो कि

मुरारी समझ गया कि अब ममता बहक रही थी और मंजू ने कान से अपने बडस भी निकाल दी और बाहर हसने लगी

मुरारी का लंड भी पजामे में तंबू बनाने लगा था और उसकी नजर मंजू पर थी जो बाहर निहार रही थी मुस्कुराते हुए

मुरारी : ठीक है फिर तुम जरा खेलो उसके साथ लग रहा है मंजू उठ रही है

ममता भुनभुना कर : धत्त जाओ आप हा नहीं तो और इधर मुरारी ने फोन काट दिया ।

इधर गाड़ी एक जगह रुकी और ड्राइवर गुटखा लेने चला गया ।

वही मुरारी अपना लंड पजामे में सेट कर रहा था और मंजू कनआखियो से उसे ऐसे करते देख कर फिर से मुंह फेर ली

मुरारी हस कर : लो अब तो उसे भी दोस्त मिल गया हाहाहाहाहा

मंजू मुस्कुरा कर : हा लेकिन फिर भी उनकी दोस्ती फायदे में है

मुरारी मंजू की बात समझ कर मुस्कुराते हुए : हा भाई बात तो सही है, लेकिन मुझे भी अपनी दोस्ती पर पूरा यकीन है कि वहां मुझे निराशा नहीं मिलेगी

मंजू इस पर एकदम से झेप गई और गाड़ी से बाहर देख कर मुस्कुराने लगी ।

वही दूसरी ओर ममता अपने कमरे में बिस्तर के तड़प रही थी , हर बीतता पल उसको कामोत्तेजना के बहाव में बहा ले जा रहा था । मुरारी से बातें कर उसका चंचल मन खिल उठा और वो अपने जोबनो को मसलने लगी , अभी हफ्ते भर भी नहीं हुए थे कि उस आस पास उसके दीवाने मक्खियों के जैसे भिनभिना रहे थे और अब देखो वो खुद तरस रहे है , पहले उसका नंदोई भोला , कितना सताया बेचारे को और फिर अपने लाडले अमन को उसके लंड के सोचते ही ममता की चूत कुलबुलाने लगी और वो नाइटी के ऊपर से ही बुर रगड़ने लगी और उसके जहन में कभी कभी रागिनी की कही हुई बाते याद आती जब रंगी लाल ने रागिनी को ममता की दी हुई ब्रा पैंटी पहना कर पेला था , वो कहानी सोच कर ममता पागल होने लगी ।इस बात से बेखबर कि बाहर गया हुआ उसका देवर मदन घर में दाखिल हो गया था ।

हाथ में टिकिया-चाट की थैली लिए वो ममता के कमरे की ओर गया और जैसे ही उसने कमरे में झांका ठिठक कर रहा गया






सामने ममता अपनी नाइटी कमर तक उठा कर तेजी से अपनी बुर के उंगली कर रही थी और आंखे बंद कर सिसक रही थी , उसकी एड़ी टांगे पूरी तरह से अकड़ रहे थे और एकदम से वो उठी और अपने बदन से नाइटी निकालते हुए घूम गई और जांघों के बीच वही ढोलक वाला लंबा मोटा तकिया रखते हुए अपनी बुर उस तकिए पर घिसने लगी

मदन का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था पजामे में उनकी आंखे फटी हुई बस ममता के बड़े भड़कीले चूतड़ों को उस मुलायम गोल तकिए पर आगे पीछे होते हुए देख रही थी






ममता तेजी से सिसकियां लेती हुई अपनी बुर मसल रही थी और देखते ही देखते वो झड़ने लगी और मदन अपना लंड का सुपाड़े मिज कर पीछे हो गया हाल की तरफ । वही ममता हांफती हुई सो गई ।

प्रतापपुर

राजेश अपने कमरे में बेसुध सोया हुआ था , घड़ी में 3 बजने को हो रहे थे । पास में बैठी बबीता उसे जगा रही थी । सुनीता की दोहरी चुदाई से उसका बदन थक कर चूर था और नीद गहरी थी ।

बबीता के कोमल हाथ उसके दाढ़ी को छू कर उसे अपनी ओर टका रहे थे और हिला रहे थे । लेकिन रह रह कर उसकी नजर अपने पापा के अंडरवियर पर जा रही थी जिसमें उसका बड़ा सा लंड हल्की में नीद ने सोया था ,








बड़े मोटे आड़ और मूसल जैसा मोटा लंड देख बबीता की आंखे वही जम सी गई , वो तो भूल ही गई थी कि वो अपने पापा को जगाने आई थी ।

एकदम से उसकी आंखे चौक कर खुली और वो उठ कर देखा तो उसकी लाडली टीशर्ट यार शॉट्स के उसके पास बैठी है , जिस तरह से बबीता अपनी टांगे खोल कर बिस्तर पर थी ,






उसकी शॉर्ट्स कस कर उसके बुर के फांके में चिपक गई थी। पैंटी तो उसने तभी उतार दी थी वो अपने पापा का नाम लेकर झड़ रही थी ।

बबीता : पापा उठो न , देखो गीता मेरे साथ नहीं जा रही है घूमने

राजेश उसकी बाते सुनकर उसकी बुर से नजर हटाते हुए उसके शब्दों पर गौर करते हुए बोला : हा बेटा कहा घूमने जाओगी ?

बबीता: खेत में ट्यूबवेल पर , मीठी नहीं जा रही है

राजेश उसके ओर देखकर : क्यों ?

बबीता : पता नहीं ,

राजेश ने देखा बबीता का मूड कुछ उखड़ा सा है तो वो उसको पीठ पर हाथ रख दिया , उसके मुलायम बदन का स्पर्श और चूत के फांकों में फंसी चड्डी देख कर राजेश का लंड अकड़ने लगा और अंडरवियर के तंबू बनने लगा ।

तो राजेश खड़ा होकर अपना पेंट खोजता हुआ अपने खड़े लंड को अंडरवियर में सेट करने लगा








और बबीता चुपके से ये सब नजरे चुराती हुई देख रही थीं , जैसे कोई प्यारा खिलौना , जिसे वो हाथों में लेकर दुलारे अपने गालों से लगाए ।

राजेश ने झट से पेंट चढ़ाया और बबीता की ओर देख कर बोला : चल देखता हुआ क्या हुआ है उसे

बबीता ने एकदम से उसको टोका: नहीं वो दादू को मम्मी ने बुलाया है वो आ रहे है

राजेश उलझन में पड़ गया : तो अब ?

बबीता : तो आप चलो मेरे साथ

राजेश चौक कर : क्या ? नहीं नहीं मुझे नहीं नहाना

बबीता बिस्तर पर खड़े होकर उसके पास आ गई और जिद करते हुए अपने बाहों का छल्ला बना कर उसको पकड़ लिया, वो अपने पैरो पर उछलते हुए बोली: नहीं चलो न ,पापा प्लीज , मजा आएगा

राजेश : तुझे ठंड नहीं लगती क्या , मौसम देख कैसा हो रहा है अब , तू भी शाम को नहाना बंद कर दे ठंडी लग जाएगी तुझे

बबीता : अच्छा बंद कर दूंगी , लेकिन आज चलो न आप पापा प्लीज

बबीता उसके आगे अपने एड़ियों पर उछल कर उससे जिद दिखाने लगी और राजेश की नजर उसकी टीशर्ट में उछल रही मौसमियों पर गई और वो खुद से ही मना नहीं कर पाया

राजेश : अच्छा ठीक है , रुक मै कपड़े ले लेता हूं

बबीता : ठीक है , हीहीही

बबीता खुश थी और दोनों निकल गए घर के पीछे से ट्यूबवेल की ओर ।

बबीता राजेश का हाथ पकड़ कर चल रही थी , उसने शॉर्ट के ऊपर से एक लोवर डाल लिया था और झोले में एक गमछा नुमा तौलिया और राजेश ने अपनी एक अंडरवियर रख ली थी ।

कुछ ही देर में दोनों ट्यूबवेल पर थे , राजेश ने अपना पेंट और शर्ट निकाल कर मोटर चालू किया , पहले तो वो थोड़ा नहाने में झिझक रहा था लेकिन गर्म पानी का अहसास होते ही उसका दिल भी ललचा गया ।

राजेश : आजा गुड़िया , पानी गर्म है

बबीता ने ट्यूबवेल से लगे कमरे से बोली : हा पापा रही हूं

राजेश ने लपक कर देखना चाहा कि उसे क्यों समय लग रहा है तो उसने देखा कि वहां कमरे में एक परदे के पीछे बबीता अपने कपड़े निकाल रही थी,






परदे के पीछे लगे बल्ब की रोशनी से परदे पर उसकी परछाई उभर आई थी ।

राजेश ने देखा कि बबीता ने पहले अपना लोवर निकाला और फिर टीशर्ट निकाल कर ब्रा खोलने लगी और जैसे ही उसके नरम और कड़क संतरे जैसी चूचियां नंगी हुई उसकी परछाई उभर कर पर्दे पर दिखी और राजेश का लंड अकड़ गया , परछाई इतनी स्पष्ट थी कि किशमिश के दाने जैसी उसकी निप्पल की टिप भी नजर आ रही थी और फिर अगले ही पल बबीता ने टीशर्ट पहन लिया और राजेश लपक कर हाते में आ गया

बबीता राजेश को देख कर मुस्कुरा : मजा आ रहा है न हीही

राजेश : तू भी आजा बेटा

बबीता आई और हाते में उतरने लगी और जैसे जैसे उसके पैर भीगते उसके हाथों के रोंगटे खड़े होने लगे, टीशर्ट अभी भीगे नहीं थे लेकिन उसकी छातियों के निप्पल सिहर कर तन गए थे और राजेश इस ताख में था कि कब उसकी बेटी अपने स्तनों को पानी में डूबोएगी और जब उसके निप्पल विजिबल होंगे और अगले ही पल वो सरकती हुई घुटने के बल होकर हाते में बैठ गई और पानी उसके गले तक आ गया

राजेश उसको खुश और चहकता निहार रहा था , गुड़िया की कामुकता उसके मासूम चेहरे और हरकतों से बिलकुल नहीं झलकती थी वो बसी थी कही उसकी आंखों में गहरे ,

जैसे ही उसकी नजरें अपने पापा से टकराई वो असहज होने लगी जिस तरह से उसके पापा उसे घूर रहे थे और जिस तरह से उसके पापा का हाथ पानी में अन्दर था

बबीता ने झट से अंदर डुबकी मारी और बाहर आ गई हांफती हुई खड़ी होकर हाते के दिवाल पर बैठ गई और पैरों से छपकाइया मारने लगी हस्ती हुई

मगर राजेश मुस्कुरा कर उसके टीशर्ट को देख रहा था जो भीगने के बाद अब उसके कड़क छातियों से चिपक गई थी






और निप्पक विजिबल हो गए थे ,

राजेश भी पानी में खड़ा हो गया और जैसे ही वो खड़ा हुआ उसके भीगा अंडर वियर भी विजिबल पूरी तरह से लंड का शेप तना हुआ और कड़क

बबीता ने आंखे फाड़ कर उसे देखा फिर नजरे फेर ली , उसकी सांसे तेज हो गई थी






राजेश : क्या हुआ थक गई

बबीता मुस्कुरा कर ना में सर हिलाई , उसके जहन में उसके बाप की करतुते और उसका बड़ा मोटा लंड नाच रहा था और वो पल जब उसके पापा ने उसकी गीली बुर को छुआ था ।

बबीता अभी ख्यालों में घूम थी कि राजेश ने उसको बाहों में उठा कर पानी में बोर कर पानी में सुला दिया और खुद हाते की दिवाल पर बैठ कर हसने लगा

बबीता एकदम से पानी में नीचे गई और ऊपराई हांफते हुए खड़ी हुई उसके टीशर्ट चढ़ गए थे , पेट उघाड़ हो गया था , छोटी सी नाभि उसके गोरे चिकने पेट पर गजब की दिख रही थी और राजेश उसको देख कर हसने लगा तो बबीता पानी के चल कर उसके पास आई और पूरी ताकत लगा कर उसको पानी में खींचने लगी, हाथ पकड़ कर काम नहीं बना तो पैर पकड़ लिया और तभी उसकी उंगलियों ने राजेश के अंडरवियर को छुआ

एकदम से राजेश सतर्क हुआ : नहीं निकल जाएगा

यही राजेश हल्का हुआ और

बबीता दांत पिसती हुई उसकी जांघें पकड़ कर उसको पानी में खींचा तो राजेश ने उल्टे उसे ही पकड़ कर पानी में अपनी गोद में बिठा लिया: अब दिखा बहादुरी हाहाहाहाहा

बबीता ने छोटे चूतड़ राजेश की गोद में थे और उसका लंड बबीता की गाड़ के एक हिस्से में रोड के जैसे था

बबीता : अच्छा रुको मै आपको ऐसे भी डुबो दूंगी

बबीता उसको पीछे की ओर धकेलती हुई पानी में उसके सीने पर अपनी पीठ टिका कर नीचे धकेलने लगी और राजेश ने आस पास हाथ मारा , मगर फिसलन भरी हाते की दिवालो ने उसे सहारा नहीं दिया और बबीता ने उसको पानी में डुबोया

पानी में सर जाते ही राजेश की अफनाहट बढ़ी और उसने अब सहारे के लिए बबीता को पकड़ना चाहा और एक हाथ उसने बबीता के पेट पर रखे तो बबीता खिलखिलाती हुई उठने लगी , राजेश ने सहारे के लिए दूसरे हाथ से उसको पकड़ना चाहा और उसने जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया उसके हाथ में बबीता की मौसमी जैसी चुची आई ,इतना नरम और गुदाज चर्बीदार अहसास पाते ही राजेश के हाथों में गुदगुदी हुई और पल में ही बबीता पानी ने उठ खड़ी हुई हस्ती हुई , उसे भी अहसास था कि अभी अभी उसके पापा ने उसके नाजुक चुची को दबोच लिया था मगर उसने मस्ती को वेल्यू दी ताकि माैहौल असहज न हो

राजेश झट से पानी से हांफते हुए बाहर आया और बबीता को हंसता देख मुस्कुरा लगा अपनी हार पर

बबीता : हिही हार गए न

राजेश : तू बड़ी चालाक है , चल आजा फिर से

राजेश ने जिस तरह कहा बबीता के जहन में यही आ रहा था कि जरूर उसके पापा दुबारा से मौका चाह रहे है उसकी नरम चूचियों को छूने का , लेकिन वो इतनी आसानी से देगी नहीं ।

बबीता : नहीं नहीं मेरा हो गया , चलो चलते है शाम को रही है

मगर राजेश को इस मस्ती में मजा आ रहा था और उसने लपक कर फिर से बबीता की कलाई पकड़ी और उसे अपने ऊपर खींच लिया और इस बार बबीता की नर्म चूचियां सीधा उसके नथुने पर जा टकराई।

बबीता सिसकी और राजेश उस पल का भरपूर फायदा लेते हुए पानी में उसके नरम चर्बीदार चूतड़ों को पकड़ लिया और उसको अपनी गोद में बिठा लिया आगे

बबीता इस समय अपने पापा की गोद में उसके बाहों की गिरफ्त में थी और छटपटा रही थी

राजेश : बोल डुबो दु ( बबीता को पीछे की ओर गिराता हुआ बोला)

बबीता हाथ चलाने लगी और उसका टीशर्ट पानी के ऊपर होने लगा , जिसका मतलब रह कि पानी उसके टीशर्ट के नीचे से उसकी संतरे जैसी चूचियो को धूल रहा था और नीचे उसका लंड बबीता की गाड़ के ठीक नीचे ठोकर दे रहा था ।

हर बार राजेश जब बबीता को पीछे गिराने के इरादे से उसको पानी में झटका देता उसका लंड बबीता की बुर के निचले हिस्से पर घर्षण करता और बबीता की सिसकी निकल जाती उस कड़क पाइप के अहसास से

बबीता हस्ते हुए : मै गिरा दु आपको

राजेश : गिरा के दिखा , देखूं तो तेरी ताकत

अगले ही पल राजेश उसको पकड़ कर अपने सीने से कस लिया और बबीता कड़क चूचिया उसके सीने से दब गई , बबीता सिसकी और अपने पापा के सीने की गर्माहट पाकर वो कंपकपा सी उठी ।

राजेश हंसता हुआ : अब लगा ताकत , क्यों हार गई ।

बबीता बेचैन थी उसकी चूत बुरी तरह बिलबिला रही थी , छातियों पर अलग ही खुजली मची थी उसपे से उसके पापा ने उसको अपनी बाहों के कसा हुआ था

बबीता मुस्कुराई और उसकी आंखों में खुमारी उतर रही थी : उम्हू , नहीं तो , फिर भी मै ही जीती हूं

राजेश : वो कैसे

बबीता राजेश के सीने से लिपट गई : ऐसे

राजेश उसके अलिंगन से सिहर उठा एक गजब सी ठंडक उसके बदन में उतरने लगी और उसने अपनी लाडली को कस लिया बाहों में

बबीता : पापा आई लव यू

राजेश : मै भी मेरा बच्चा

उसने बबीता के कान के पास उसके गाल को चूमा और बबीता ने दोनों हाथों से उसके बड़े से दाढ़ी वाले चेहरे को थाम कर उसके लिप्स को चूम लिया

राजेश और बबीता दोनों की सांसे तेज थी और गले तक पानी में भी उसकी प्यास बढ़ रही थी , जिस तरह से बबीता ने उसे चूम लिया था । राजेश एक टक अपनी बेटी को निहार रहा था जिसके गुलाबी होठ अभी भी हल्के खुले हुए थे , नथुने भारी गहराती सांसों से फुले जा रहे थे , धड़कने दुगनी गति उसकी नुकीली मौसमियों को सीने पर कोंच रही थी ।

बबीता : पापा चले , लेट हो रहा है

राजेश गुमसुम सा : अच्छा नहीं लग रहा है क्या तुझे

बबीता उससे लिपट कर : लग रहा है लेकिन

राजेश : लेकिन क्या ?

बबीता : कुछ नहीं

राजेश : बोल न बेटा , क्या हुआ

बबीता : ऊहू कुछ नहीं

राजेश : अरे उदास क्यों हो रही है

बबीता : आप पहले जैसे हो जाओगे तो , डर लग रहा है

राजेश उसको अपनी बाहों के भर कर : नहीं होऊंगा ,पक्का वाला प्रोमिस ।

बबीता चहक कर : ठीक है , आज रात मै आपके साथ सोऊंगी

राजेश अटक कर : लेकिन रात को तो मै गोदाम पर रहूंगा

बबीता : तो क्या हुआ मै भी चलूंगी ,

राजेश : तू क्या करेगी वहां ?

बबीता : आप काम करना मै आपके मोबाइल में फिल्म देखूंगी हीही

मोबाइल की बात सुनकर ही राजेश का लंड एकदम से अकड़ गया

राजेश हस कर : बदमाश कही की , नहीं मिलेगी तुझे अब मोबाइल

बबीता : क्यों ?

राजेश : देखा मैने दुपहर में तू क्या देख रही थी ।

बबीता एकदम से शर्मा गई : तो आपने रखी क्यों थी उसमें , मेरी क्या गलती

राजेश : लेकिन तुझे नही देखना चाहिए था न , बंद करके रख देना चाहिए था न उम्मम

बबीता : और आप उसमें जो कर रहे थे वो बोलूं मम्मी को

बबीता ने सीधे हड़काया

राजेश हस कर : तुझे कैसे पता उसमें मै ही था , कोई और नहीं ?

बबीता : आपकी आवाज सुनी मैने उसमें , हा , झूठ मत बोलो

राजेश का लंड नीचे से पंप हो रहा था और उसकी सांसे तेज थी ।

राजेश : और तू जो कर रही थी वो वीडियो देख कर वो ?

बबीता एकदम से शर्म से गाढ़ हो गई और उसे समझ नहीं आया क्या रिएक्ट करे : मैने क्या किया , मै तो मोबाइल रख कर सो रही थी

राजेश : और सोने से पहले जो किया वो ? कच्छी देखी थी मैने तेरी कितनी गीली थी

बबीता अब और शर्माने लगी : धत्त पापा , गंदे हो आप , मत याद दिलाओ न

राजेश : मै तो दिलाऊंगा , अगर तू तेरी मां को कहेगी तो ऐसे ही याद दिलाऊंगा

बबीता : और नहीं कहूंगी तो , मोबाइल दोगे न ?

राजेश : हम्म्म ठीक है ले लेना , लेकिन बस फिल्म देखने के लिए वो सब के लिए नहीं , ठीक है

बबीता अपने होठ चिपकाए मुस्कुराती हुई हा में सर हिलाई और दोनो उठ कर बाहर आ गए ।

राजेश का लंड एकदम अकड़ा हुआ था हुआ अंडरवियर में तंबू बना हुआ और बबीता ने उसे देखा और उसकी बुर की खुजली और तेज हो गई ।

कबसे वो लंड उसकी बुर के नीचे फुदक रहा था उसको घिस रहा था

राजेश: जा कपड़े बदल ले चल घर चलते है

बबीता न ज्यादा कुछ न बोलते हुए मुस्कुरा कर चली गई

वही दूसरी ओर घर पर बनवारी लाल कमरे में दाखिल हुआ तो देखा गीता पेट के बल होकर सोई हुई है और उसकी हल्की प्लाजो से उसकी गुलाबी ब्लूमर झलक रही थी ।






उसके बड़े मोटे चूतड़ देख कर बनवारी की नजरे वही जम सी गई मगर वो खुद को शांत करता हुआ कमरा बंद कर गीता के पास गया और उसको दुलारता हुआ उठाने लगा

बनवारी : क्या हुआ मीठी , क्यों घूमने नहीं गई आज

गीता सुबक रही थी : मुझे आपसे बात नहीं करनी

बनवारी उसको पकड़ कर उठाता हुआ बिस्तर पर बिठाया : अरे क्या हो गया मेरी लाडो को , क्यों रो रही है

गीता : आप मुझसे प्यार नहीं करते

बनवारी को समझते देर नहीं लगी कि गीता का इशारा किस तरफ , वो उसको अपने सीने से लगाए उसके माथे चूमता हुआ उसको दुलारने लगा : ऐसा नहीं कहते बेटा , तेरे दादू तुझसे बहुत प्यार करते है

गीता : नहीं करते हो आप

बनवारी उसकी जिद से अंजान नहीं था , वो बचपन से गीता की जिद को जानता था एक बार जो ठान ले वो तो करके ही मानेगी , लेकिन आज की स्थिति अलग थी । जिस नातिन को उसने अपनी गोद में खिलाया कैसे वो उसके नाजुक जिस्मों को मसलेगा , उन्हें नोचेगा। लेकिन उसके जहन में अपनी बेटियों का ख्याल भी आ रहा था ।

बनवारी उसके पीठ पर हाथ फेर रहा था जिससे गीता के जिस्म में गुगुदाहट सी हो रही थी : अच्छा ठीक है अब तुझे देखने के लिए नहीं डाटूंगा ठीक है लेकिन वादा कर इस बारे में तू किसी से नहीं कहेंगी

गीता चहक कर लिपट गई उससे तो बनवारी बिस्तर पर गिरने लगा था , मगर उसने खुद को संभालता : अरे हाहाहा देखो तो कैसे नाटक कर रही थी , अच्छा सुन खाना खाया तूने

गीता मुस्कुरा कर : आपको लगता है मै बिना खाए रह पाउंगी मैने चुपके से खा लिया था पहले ही हीही

बनवारी उसके चब्बी गाल पकड़ता हुए किस करता हुआ : बदमाश कही की , अच्छा ये बता तुझे कब ज्यादा अच्छा लगता है, मुझे अकेले देख कर या किसी के साथ देख कर ।

गीता शर्माने लगी और मुस्कुराकर बनवारी के कांख में दुबकने लगी अपने चेहरे छिपाने लगी ।

बनवारी : अरे अब क्यों शर्मा रही है बोल न ,

गीता बनवारी के सीने पर मुंह लगाए हुए : सब अच्छा लगता है दादू , बस आप वो कमला आंटी से वो सब मत किया करो

बनवारी चौक कर : क्यों ?

गीता : बस वैसे ही , वो कितनी गंदी है सबको आपके बारे में बताती है ।

बनवारी कमला के स्वभाव से परिचित था और ये भी जनता था गोदाम पर काम करने वाले बाकी दूसरे मजदूर भी उसके इस रिश्ते के बारे में जानते थे ।

बनवारी : अरे फिर तो उससे सावधान रहना होगा

गीता हस कर : और थोड़ा पापा से भी

बनवारी : उससे कैसा डर ?

गीता चहक कर : मम्मी से खूब पट रही थी आज उनकी

बनवारी चौक कर : क्या सच में

गीता : हम्ममम , अभी दोपहर में दोनों कर भी रहे थे अपने कमरे में , खूब देर तक

बनवारी का लंड अकड़ने लगा अपनी बहु की चुदाई सुनकर

बनवारी हस कर उसके पेट पर गुदगुदाते हुए : बदमाश कही की , तू सबको देखती है छिपकर

गीता खिलखिलाई : नहीं लेकिन मुझे अच्छा नहीं लग रहा है , आप रहते हो मम्मी के साथ तो अच्छा लगता है ।

बनवारी का लंड फड़का और अपना लंड सहला कर : तुझे अच्छा लगता है जब मै तेरी मम्मी के साथ करता हु

गीता ने शर्मा कर हुंकारी भरी : आप कितने प्यार से करते हो, और पापा बस नोचते है उनको और जल्दी जल्दी करते है

बनवारी पर अब नशा छा रहा था उसका लंड पजामे में तंबू बना चुका था और उसके बाहों में गीता का गुदाज चर्बीदार जिस्म उसको गुदगुदा रहा था उसका एक हाथ जो कुछ देर पहले ही गीता के पेट पर आया था वो वासना के जज्बात में बहने लगा और उसके नरम चर्बीदार मोटी छातियों की ओर बढ़ने लगा और गीता इस अहसास से पिघलने लगी थी, उसकी सांसे तेज हो रही थी ।

बनवारी : सच में क्या , तुझे कुछ नहीं होता जब मै तेरी मम्मी को छूता हूं

गीता सिहर उठी और कुंमुनाने लगी : होता है न , खुजली जैसी होती है

बनवारी का लंड फड़कने लगा उसके हाथों में कठोरता आने लगी और गीता हल्की दर्द से तड़पी।

बनवारी : कहा पर होता है उम्मम

गीता सिहर कर सिसकती हुई कुनमुनाई : सूऊऊ अह्ह्ह्ह वही पर जहां आप दबा रहे हो






बनवारी का हाथ अबतक उसके टीशर्ट में घुस कर उसके बाएं चूची को ब्रा के ऊपर से मसल रहा था और उसकी किशमिश जैसी निप्पल पर हथेली रेंग रही थी ।

बनवारी उसके गुदाज पाव जैसी फुली हुई चुचियों को टीशर्ट में हाथ घुसा कर सहलाते हुए : अभी भी हो रही है क्या बेटा

गीता सिहर कर: हम्ममम बहुत ज्यादा सीईईईई आह्ह्ह्ह वही पर वो निप्पल के पास

बनवारी ने ब्रा में उभरे हुए उसके किशमिश के दाने जैसे निप्पल को उंगली से रगड़ा और गीता अपनी टांगे फैला कर अकड़ने लगा ।

गीता : अह्ह्ह्ह सीईईईईई दादू उम्ममम अह्ह्ह्ह

बनवारी उसकी छटपटाहट देखकर और भी जोश में आ गया , उसकी गोद में उसकी लाडली नातिन थी जिसके नाजुक किशमिश के दाने को वो अंगूठे और उंगली से पकड़ कर घुमा रहा था ।

बनवारी : यही पर हो रहा है न बेटा रुक जा इसे भी खोल दूं

गीता : अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म दादू अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो ओह्ह्ह्ह कितना ठंडा है जीभ आपका अह्ह्ह्ह






बनवारी उसकी दोनों चूचियां ब्रा से बाहर निकाल कर मुंह लगा दिया और उसके दाहिए निप्पल को चुबलाने लगा , गीता पागल होने लगी ।

बनवारी का दूसरा हाथ उसकी बाई छाती पर था जिसे वो अपनी सख्त हथेली में मिज रहा था उसका लंड पजामे में खूब कड़ा हो गया था और गीता ने हाथ बढ़ा कर उसका लंड सहलाने लगी जिससे बनवारी की हालत खराब होने लगी ।

वही घर में ऊपर की छत पर सुनीता कपड़े उतारने पहुंची थी और रंगीलाल ने मौका देख कर दूसरी तरफ वाले जीने से ऊपर चला गया ।

सुनीता उसको ऊपर देखते ही मुस्कुराने लगी और रंगी भी मुस्कुराता हुआ उसके पास चला गया ।

सुनीता अरगन से साड़ी खींचती हुई : अरे ऊपर क्यों चले आए , नीचे आराम करना चाहिए था ।






रंगीलाल मुस्कुराता कर दूसरे कपड़े उतरता हुआ : अपने प्यार को काम करता देख मुझे आराम कैसे हो सकता है भला

संगीता लाज से गाढ़ होने लगी और हसने लगी : धत्त छोड़िए , कोई देखेगा तो क्या कहेगा

रंगीलाल ने देखा वो दोनों इस दोनों तरफ कपड़ो से घिरे थे , चादर साड़ीयो से

रंगी : यहां हमे कौन देख पाएगा

सुनीता ने आसपास देखा और वो हल्की सी सहम गई और वहां से निकलने का सोचा

रंगी ने लपक कर उसकी कलाई पकड़ ली और सुनीता की धड़कने तेज हो गई और उसकी तेज सांसों से ब्लाऊज में उसकी छातियां ऊपर नीचे होने लगी , पेट अंदर की ओर दबने लगे । रंगी भी उसकी कोमल कलाई को पकड़ कर सिहर उठा था , उसके भी भीतर एक डर सा था कि कही सुनीता इसका विरोध न करे ।

सुनीता : धत्त छोड़ो न , प्लीज , कोई देख लेगा

ये शब्द रंगी के कान में पड़ते ही वो समझ गया कि सुनीता अब उसे नहीं रोकने वाले उसे ही पहल करनी हैं और वो उसको पकड़ कर अपनी ओर खींचा और वो उसकी बाहों में आ गई

उसकी मोटी चूचियां गद्द से उसके सीने से जा लगी और सुनीता की नजरे उसकी आंखों से जा टकराई ।

दोनों की गर्म सांसे आपस में टकरा रही थी और दोनों हाफ रहे थे , धड़कने दोनों की तेज थी ।

सुनीता : आपने तो कहा थे जब तक मै न कहूं आप कुछ नहीं करेंगे

रंगी : कह तो रहे ये तुम्हारे होठ

रंगी ने उसके नरम लिपस्टिक वाले होठों को अपने उंगलियों से छुआ और वो आंखे बंद सिहर उठी

रंगी : ये कह रहे है मुझे चूम लो

सुनीता की सांसे तेज होने लगी और गला सूखने लगा और अगले ही पल रंगी ने अपने होठ उसके होठ से लगा दिए और उस अहसास से दोनों के बदन में कंपकपी सी महसूस हुई और दोनों एक दूसरे के होठ चूसने लगे ।






रंगी ने सुनीता को अपनी ओर और कस लिया जोश में और सुनीता बिना विरोध के उससे लिपट गई ।

तभी नीचे कुछ दस्तक हुई , कोई बनवारी को आवाज दे रहा था और दोनों अलग हुए और सुनीता लाज से मुस्कुराने लगी : धत्त गंदे , जाओ अब

रंगी हंसता हुआ : अरे सच में हेल्प करने आया था

सुनीता हस्ती हुई : अच्छा जी , बड़े आए

रंगी लाल दूसरे कपड़े खींचने लगा कि एक पेटीकोट खींचते ही उसके नीचे एक लाल जोड़े में उसकी ब्रा और पैंटी चिमटी से तंगी मिली और उसे देखते हुए रंगी वही रुक गया ,






एकदम से सुनीता की नजरे उस पर गई और वो शर्म से लाल होने लगी ।

रंगी : उफ्फ क्या रंग है , उम्ममम अह्ह्ह्ह क्या खुशबू है

रंगी उसके पास जाकर उसकी पैंटी को सूंघने लगा

तभी सुनीता आई और झट से वो ब्रा पैंटी खींच ली : धत्त गंदे , क्या करते हो

रंगी ने उसको पकड़ कर अपनी ओर खींचा और उसके लिप को छूता हुआ : ये होठ तो चख लिए , दूसरे होठों का स्वाद भी देदो न

सुनीता उसके स्पर्श से पिघलने लगी थी लेकिन जैसे ही रंगी ने इनडायरेक्टली उसके चूत की बात कही वो शर्मा कर हसने लगी : धत्त , नहीं कुछ ज्यादा तेजी नहीं है आपको

रंगी ने उसके कमर के पास उसके कूल्हे सहलाता हुआ : तुम्हे देख कर मेरी सांसे तेज हो जाती है तो क्या करु

सुनीता : अपनी सांसों से कहिए कि अभी सबर करें

रंगी लाल उसको अपनी ओर कसता हुआ : अब नहीं होता मेरी जान , दीदार ही करा दो न

सुनीता : अह्ह्ह्ह्ह छोड़िए , कुछ नहीं मिलेगा अब

सुनीता उससे अलग होकर जल्दी जल्दी चादर नीचे उतार दिए ताकी रंगी की मनमानी थमे और रंगी खुले में आते ही एकदम से नॉर्मल हो गया लेकिन बस हरकतों से , आंखे अभी भी दुनिया को छेड़ने से बाज नहीं आ रही थी ,

वो भी जीने से नीचे उतरने लगा सुनीता के साथ और उसके चौड़े चूतड़ों की थिरकन देखकर उसका लंड पजामे में तंबू बना रहा था ।

सुनीता ने मूड कर पीछे देखा तो रंगी की नजरे अपने चूतड़ों पर पाई और हस कर : लालची कही के ।

फिर वो कमरे में चली गई

रंगीलाल भी बरामदे में आया तो देखा कि बनवारी अपने कमरे के बाहर एक आदमी से बात कर रहा है और उसके साथ एक महिला भी थी जिसके मोटे चौड़े कूल्हे और थन जैसी चूचियां देख कर रंगी का लार टपकने लगा और रंगी अपना लंड सेट करता हुआ बनवारी के पास पहुंचा और बैठ गया ।

थोड़ा चिर परिचय हुआ और इतने देर में सुनीता पानी लेकर आई और उसने देखा उसके पास आने का रंगी पर कोई फर्क नहीं हुआ वो एक टक नजर गड़ाए उस औरत के ब्लाउज में ठूंसे हुए चूचे निहार रहा था जो पल्लू से बाहर निकल कर दिख रही थी ।

सुनीता एकदम से भूनकी और आंखे महीन कर रंगी को घूरा और एकदम से रंगी की नजर उससे टकराई तो उसकी हालत खराब होने लगी ।

बनवारी : लीजिए जमाई बाबू , पानी पीजिए , बहु जरा मेरे लिए भी पानी लाना

सुनीता मुंह बना कर रंगी को घूरती हुई : जी लाती हु बाउजी

रंगी उसके मटकते चूतड़ों को देखकर : नहीं बाउजी , आप पीजिए , मै थोड़ा कुल्ला करके पियूंगा बाथरूम में ही जा रहा हूं और वो उठ कर उधर ही चल सुनीता के पीछे ।

फिर जब सुनीता किचन में गई तो रंगीलाल ने एक नजर बनवारी की ओर देखा और उसे व्यस्त पाकर लपक कर सीधे किचन में घुस गया ।

सुनीता अभी गागर से पानी निकाल रही थी झुक कर कि रंगी ने उसको पीछे से पकड़ लिया और वो एकदम से चौकी : हाय दैय्या , आप छोड़ो मुझे

एकदम से सुनीता ने डांट लगाई और रंगी पीछे हो गया

सुनीता उसको पानी का ग्लास देते हुए : हम्म्म लीजिए , और जाइए

रंगी : अरे नाराज क्यों हो रही हो

सुनीता ने गुस्से से उसे घूरा तो रंगी की हालात खराब होने लगी

सुनीता: आप सारे मर्द एक जैसे होते है , जहां भी औरत दिखी लार टपकने लगती है आप लोगों की

रंगी समझ गया कि अभी भी सुनीता भड़की है

रंगी उसको अपनी बाहों के भर कर : वो मै बस उसके ब्लाउज के डिजाइन देखने की कोशिश कर रहा था

सुनीता उसकी बाहों में कसमसाती हुई मुंह बनाती हुई तुनकी: हूह , तो जाओ न देखो उसी का , मुझे छोड़ो

रंगी उसको अपनी बाहों को छटपटा देख हंसता हुआ : चला जाऊंगा , पहले तुम तो दिखाओ न

और रंगी एक उंगली से उसके पल्लू को सीने से हटाने लगा तो सुनीता मुस्कुराने लगी और उसका हाथ पकड़ कर रोकने लगी : धत्त नहीं रुको , पागल मत बनो कोई आ जाएगा

रंगी : बस थोड़ा सा दिखा दो न

सुनीता : अच्छा ठीक है छोड़ो पहले , उफ्फ

सुनीता अलग हुई और अपने कपड़े सही करते हुए : आप कमरे में चलो मै चाय लेकर आती हूं

रंगी चहक कर : सच में

सुनीता ने आस पास देखा : हा बाबा सच में अब जाओ

रंगी खुश होकर उसके गाल चूम लिया और निकल गया रसोई से , वही सुनीता ने राहत की सांस ली । ना जाने क्या हो जाता है उसे जब रंगी उसके साथ होता है वो बहकने लगती है । तभी बनवारी ने फिर आवाज दी और सुनीता जल्दी जल्दी चाय बनाने लगी



जारी रहेगी ।
 
💥 अध्याय:02💥

UPDATE 012


चमनपुरा

" अच्छा ये वाली पहन ले बेटा , काली वाली "

" हा ठीक है इसी को प्रेस कर दो मै नहाने जा रहा हूं"

अनुज ने अपनी मां के पास खड़ा होकर : क्या हुआ ?

रागिनी : अरे वो तेरे पापा के दोस्त है न ठाकुर साहब

अनुज : हा ?

रागिनी : तो राज को उनके यहां एक पार्टी में जाना है इसीलिए इतना हड़बड़ाया हुआ है

अनुज : क्या सच में ? पार्टी?

रागिनी अनुज को खिलता देख कर : हा लेकिन तुझे नही जाना, मै घर में अकेली नहीं रहने वाली सारी रात बोल देती हूं

एकदम से अनुज की आंखे चमकी और वो खुश होकर अपनी मां को बगल से हग करने लगा : मै नहीं जाने वाला आपको छोड़ कर अकेले , भैया जाए तो जाए

रागिनी ने आंखे महीन कर उसे घूरा : अच्छा बेटा , तेरे दिल में पार्टी के नाम पर जो फुगे फूटते है न बचपन से जानती हूं, चल छोड़ मुझे।

रागिनी अपने कमरे में आई और राज के कपड़े प्रेस करने लगी

अनुज भी उसके पीछे आकर बिस्तर पर बैठ गया

रागिनी : बैठा क्या है ? पढ़ाई नहीं करनी ?

अनुज : मम्मी यार , कल संडे है कल कर लूंगा न

रागिनी : जब तक तेरे पापा नहीं है , खूब मस्ती कर ले , आयेंगे तब तेरी खबर लेंगे और एग्जाम में कम नंबर आए तो बताएंगे

तबतक राज कमरे में दाखिल हुआ : ये तो पक्का फेल है मम्मी इस साल

अनुज ने घूर कर अपने भैया को देखा जो नहा कर तौलिया लपेटे कमरे में आया था बनियान पहने हुए ।

राज ने हस कर उसको देखा और अपने मा को दो चूड़ी और कसते हुए : मम्मी पता है , वो मेरा दोस्त है न बंटू

रागिनी : हा वो विजई का बेटा , क्या हुआ

राज : कुछ नहीं , वो बता रहा था अनुज कालेज जाते समय रोज पुलिया पर रुकता है

राज ने अनुज को आंख मारी और अनुज की हालत सन्न

रागिनी ने एकदम से अनुज को घूरा : तू पढ़ने जाता है कि पुलिया पर घूमने

अनुज की हालात खराब थी

राज हस कर उसके मजे लेता हुआ : और पता है मम्मी , वहां कैसे कैसे स्टूडेंट रुकते है

अनुज एकदम से तैस में आकर : हा बताओ , मै भी जानू

रागिनी उसको देख कर चौकी : अरे अब क्या लड़ाई करेगा ,भैया से ?

अनुज एकदम से शांत ही गया और उदास भी थोड़ा

राज उसका उतरा हुआ मुंह देख कर हंसता हुआ : मम्मी वहां न गोरी गोरी लड़कियां रुकी होती है , और इससे फोटो खिंचवाती है हाहाहाहाहा

अनुज की हालत पतली हो गई

रागिनी ने अचरज से अनुज को देखा उसको देख कर ऐसा लग रहा था कि अगर उसने जरा भी डांट लगाई तो रो ही पड़ेगा

रागिनी : क्या ? फोटो खींचता है ? बड़ा होकर कैमरा चलाएगा क्या ?

अनुज : नहीं मम्मी , भैया झूठ बोल रहे है

राज : लगाऊं फोन बंटू को

अनुज एकदम से चुप हो गया

रागिनी अनुज को इस हसी ठिठौली में अकेला देख कर उसकी तरफ से बोली : अरे सिर्फ फोटो ही खींच रहा था कि एक फोटो साथ में भी लिया उनके

अनुज और राज दोनों चौके ?

राज फिर मुस्कुराने लगा

रागिनी राज को कपड़े देते हुए बोली: बोल न

अनुज आंखे उठा कर अपने मां को देखा और फिर राज को घूरते हुए : हा सेल्फी ली थी

रागिनी : तो दिखा फोटो ?

अनुज : मेरे पास कहा मोबाइल है , उनलोगों के पास होगा । मै इंस्टाग्राम पर मंगवा लूंगा तो दिखा दूंगा

रागिनी: अच्छा ठीक है दादा , अब तू क्या दांत फाड़ रहा है जा तैयार हो ले । खबरदार मेरे बच्चे को तंग किया तो ? दिखता नहीं अभी पटाने के लिए पीछे पड़ा है

रागिनी एकदम से खिलखिलाई और राज को ताली दे मारी और राज भी ठहाका मारकर हस पड़ा ।

अनुज उखड़ कर : मम्मी यार , आप भी मजे लेलो

रागिनी हस कर उसके पास गई और उसे बाल सहलाती हुई : मजे नहीं ले रही , मै तो कह रही हूं पढ़ाई छोड़ और शादी कर ले हीहीही , घर में बहु आ जाएगी तो मुझे भी बड़ा आराम ही जाएगा ।

अनुज एकदम से आंखे महीन कर अपनी मां को घूरा तो रागिनी समझ गई कि अब मजाक ज्यादा हो रहा है और वो धीरे से सरक ली ये बोलते हुए राज तैयार हो जाए ।

रागिनी के जाते ही अनुज राज पर बिफर पड़ा: ये क्या बोल रहे थे मम्मी को आप

राज हंसता हुआ अपने शर्ट के बटन बंद करता हुआ : क्यों क्या हो गया भाई , जब तुझे समझाया था कि परीक्षा आ रही है तू पढ़ाई पर फोकस कर लेकिन तू है कि समझ नहीं रहा है । लड़कियों के पीछे लगा है।

अनुज: भैया मै नहीं , वो लाली .. वो ही लगी रहती है तो क्या करूं?

राज अचरज से : अच्छा वो लाली थी ?

अनुज भौहें टाइट कर राज के पीछे खड़े होकर शीशे में उसको आवाज बाल बनाते देखता हुआ : तो फिर आपको नहीं पता था

राज हस कर : नहीं ये तो नहीं पता था कि वो लाली थी , नहीं तो कसम से भाई मम्मी के आगे नाम भी लेता

अनुज : हूह ,अब मम्मी को फोटो दिखाने पड़ेगी न

राज : दिखा दे , होने वाली बहु है आखिर उनकी हाहाहाहाहा

अनुज पैर पटकने जैसा होकर : भैया , यार आप भी मजे मत लो । आप तो मेरा टेस्ट जानते हो न

राज : अबे इतना भी क्या भाव खा रहा है , कितनी प्यारी है और अभी उम्र कम है वो भी बड़ी होगी किसी रोज और उसके भी हाहाहाहाहा

अनुज को राज की आखिर की बाते पसंद नहीं आई , जैसे लाली के लिए एकदम से पोजेसिव होने लगा था ।

राज उसका उतरा मुंह देख कर : बेटा , प्यार तो तू भी करता है बस मानता नहीं है

अनुज एकदम से चौक गया : नहीं ऐसा कुछ नहीं

राज : चल चल ठीक है , आ गेट बंद कर ले

राज और अनुज घर के बाहर गेट तक आए

अनुज धीरे से : भैया बहुत मन कर रहा है , कितने दिन हो गए मौसी को गए

राज : हा तो मेरे पास कोई फैक्टी क्या चूत की , भाई मै भी तरस ही रहा हूं

अनुज : चाची पर ट्राई .....

राज की आंखे चमक उठी : देख रहा हु बहुत तेजी से बदल रहा है उम्मम, वैसे तेरी चॉइस की तो लगती नहीं चाची क्यों ?

अनुज थोड़ा शर्मा कर हंसता हुआ : अरे ऐसा नहीं है , कितनी सेक्सी लगती है और उनके दूध कितने मोटे और गोल है ।

राज : लेकिन तुझे तो बड़ी ( धीरे से उसके कान में ) गाड़ वाली पसंद है न

अनुज : हा लेकिन चाची में कोई बुराई थोड़ी है , अब सबकी बुआ और मौसी जैसी तो नहीं रहेगी न

राज मुस्कुरा कर अपने लंड में उठते जज्बात को पेंट के ऊपर से दबाता है : बस कर भाई , मुझ जाने नहीं देगा क्या । मौसी और बुआ की बात मत छेड़

अनुज हसने लगा : ओके आप जाओ और रात में वापस आओगे क्या ?

राज : नहीं

अनुज कुछ सोच कर : ठीक है जाओ

राज वहा से निकल गया अपना लंड सेट करता हुआ एक ईरिक्शा पकड़ कर वही अनुज खुश होकर गेट अच्छे से बंद कर दिया और घर में आने लगा ।

अनुज की खुशी का ठिकाना नहीं था , आज पहली बार वो और उसकी मां घर में अकेले थे और उसपे से रागिनी ने सोनल के कपड़े ट्राई करने को कहा था ।

अनुज : मम्मी , मम्मी ??

रागिनी अपने कमरे से आती हुई : हा क्या हुआ बेटा

अनुज एकदम से अपनी मां को ब्लाउज पेटीकोट में देखा , जो शायद नहाने की तैयारी करने वाली थी ।






अनुज : क्या करने जा रहे हो

रागिनी : बेटा सीने और पीठ में बहुत खुजली हो रही है , पानी गर्म है नहाने जा रही हूं

अनुज नजरे इधर उधर करता हुआ कमरे में देखा तो रागिनी ने एक नाइटी निकाल रखी थी : ये पहनोगे क्या नहा कर ?

रागिनी : हा क्यों ?

अनुज मुंह बना कर : फिर दीदी वाले कपड़े ?

रागिनी अपना माथा पकड़ ली और हस्ते हुए : अरे वो कल पहन लूंगी , जल्दी क्या है ?

अनुज : अरे घर में भैया भी नहीं है इसलिए बोला

रागिनी भौहें चढ़ा कर : उससे क्या मै डरती हूं

अनुज : नहीं वो, कही वो पापा से कह न दे इसलिए

रागिनी : तो क्या मै तेरे पापा से डरती हूं

अनुज : अरे यार , भक्क

रागिनी हस्ती हुई : अच्छा ठीक है बाबा चल देखती हूं उसके कपड़े चल

फिर दोनों ऊपर जाने लगे और अनुज एकदम से खुश हो गया ।

वही अमन के घर ममता की आंख अपनी बिस्तर पर खुली और जैसे ही उसे होश आया एकदम से वो घर में मदन के होने और दरवाजा भीडके होने के त्वरित ख्याल से चौक कर उठ गई । असल हालत उसकी तब खराब हुई जब उसने पाया कि उसके देह पर चादर पड़ी थी ।

ममता शर्म ने अपना माथा पकड़ ली , उसकी दिल की धड़कने तेज हो गई और उसे समझते देर नहीं लगी कि मदन उसके कमरे में आया था और उसी से उसे चादर उढ़ाई है ।

ममता को थोड़ी हंसी भी आ रही थी और बहुत सारी शर्मिंदगी , ओर उससे भी ज्यादा झिझक कि वो कैसे खाना बनाने जायेगी और मदन का सामना करेगी ।

उसने आस पास देखा और अपनी नाइटी पहनी , हल्की सिहरन सी हो रही थी तो उसने एक साल लेकर कमरे से बाहर निकल कर बाथरूम में चली फिर हाल में आने लगी कि उसे कुकर की सीटिया सुनाई देने लगी ।

मसाले की महक से ममता को समझते देर नहीं लगी कि मदन आज नॉनवेज बना रहा था।

ममता धीरे धीरे हाल में आई और किचन में उसे काम करते हुए देखा , मोबाइल पर मदन किशोर कुमार की रोमांटिक गाने चल रहे थे जिन्हें वो गुनगुना रहा था और सहसा उसकी नजर ममता पर गई ।

मदन ने जरा भी जाहिर नहीं होने दिया कि कुछ देर पहले वो ममता को किस हाल में देखते हुए आया : अरे भाभी उठ गई क्या ? पैर ठीक है अब

ममता शर्म से हुंकारी भर कर फीकी मुस्कुराहट से जवाब दी

मदन चहकता हुआ : खाना लगभग तैयार है , भाभी आप बैठ जाओ

ममता : और आप ?

मदन एकदम से रुक गया और मुस्कुराने लगा : वो भाभी , अगर बुरा न मानो तो । मेरा आज मूड था पैग बनाने का

ममता तो तभी समझ गई कि आज मदन अपनी बोतल खोलेगा जब उसके नथुनों में नॉनवेज की खुशबू आई थी ।

ममता मुस्कुरा कर उसको तंग करने के इरादे से : भई मै तो जरूर बुरा मानूंगी

मदन चौक कर मोबाइल का गाना म्यूट करता हुआ : क्यों ?

ममता : भई आप अकेले अपना मौसम बनाएंगे और मुझे पूछेंगे भी नहीं तो बुरा लगेगा ही न

मदन चौक कर : क्या भाभी ? आप ..

ममता हंसते हुए गालों से : हा क्यों ?

मदन एकदम से हड़बड़ाने लगा : नहीं नहीं भइया को पता चला तो , नहीं

ममता मुस्कुरा कर : वैसे आप बहुत कुछ ऐसा कर चुके है जिसके बारे में आपके भैया को भनक नहीं होनी चाहिए क्यों ?

मदन एकदम से सकपका गया और वो समझ गया कि ममता का इशारा किधर है और वो अटकते हुए लहजे में : लेकिन भाभी , मै आपके सामने नहीं नहीं , मुझसे नहीं होगा

ममता : ओफ्फो देवर जी , अब मूड न बिगाड़िए

मदन आंखे फाड़ कर ममता को देखने लगा

ममता मुस्कुरा कर : वैसे ही सर्द रात है , तो थोड़ी गर्माहट रहेगी

मदन मुस्कुराने लगा : वैसे अपने कभी पहले ट्राई किया है ?

ममता मुस्कुरा कर हा में सर हिलाया : लेकिन किसी से कहिएगा मत

मदन की आंखे चमक उठी : कब ?

ममता : वो शादी के पहले की बात थी , मेरी सहेली के भैया फौज में तो बस एक ढक्कन , हा सिगरेट बहुत बार

मदन आंखे फाड़ कर : क्या सिगरेट भी

ममता : लेकिन प्लीज इसके बारे में आपके भैया को पता न लगे

मदन ने आंखों ही मुस्कुराकर हुंकारी भरी

ममता : तो छत पर चले ?

मदन मुस्कुरा कर : जैसा आप कहें

ममता मुस्कुरा कर : वही चलते है हिहीही

मदन : बस भाभी 10 मिनट और लगेगा

ममता: ठीक है तब तक मै भी आपके भैया से बात करके उन्हें निपटा दूं , ताकि वो हमें डिस्टर्ब न करे

ममता की बात पर मदन को ताज्जुब हुआ लेकिन ममता के साथ हसने के सिवा उसके पास कोई और रिएक्शन नहीं शेष था ।

इधर मुरारी की घंटी बजी और मंजू की आंखे खुली और वो झट से मुरारी के कंधे से अलग हो गई । जो अभी तक चलती गाड़ी में ना जाने कब गहरी नींद में आ गई थी ।

मुरारी ने फोन उठा और कुछ बात चित हाल चाल लेकर फोन रख दिया

मुरारी : भाई ड्राइवर साहब, अगर आगे कोई बढ़िया होटल दिखे तो गाड़ी लगाइए , खाना खा लिया जाए , क्यों ?

मंजू ने हा में सर हिलाया और धीरे से बोली: मुझे फ्रेश होना है

मुरारी ने उसकी बात सुनी फिर : भैया थोड़ा देखते रहना

मुरारी : अगर ज्यादा तेज हो तो गाड़ी साइड लगवा दूं

मंजू : क्या भक्क आप भी , ड्राइवर भी तो है ?

मुरारी : अरे गाड़ी से थोड़ा दूर हो जायेंगे न

मंजू : ठीक है करवाइए , अब

मुरारी : अरे ड्राइवर साहब थोड़ा गाड़ी एक किनारे लगाइए

ड्राइवर ने गाड़ी हाइवे के एक साइड में लगाई ।

रात के 8 बजने को हो रहे थे । सड़कों से गाड़िया तेजी से निकल रही थी और मंजू की साड़ी का आंचल संभालने में दिक्कत हो रही है ।

मंजू ने मूड कर मुरारी की ओर देखा : किधर चले

मुरारी : अरे आगे चलो अभी

करीब 50 मीटर दूर आने के बाद मुरारी ने मोबाइल की टॉर्च जलाई और वही हाइवे के पास लगे एक सुनसान जगह पर एक जगह प्लॉटिंग की गई थी , मुरारी को वही जगह साफ और सुरक्षित लगी

मुरारी : तुम जाओ मै खड़ा हु

मंजू ने हुंकारी भरी और हाइवे ने नीचे उतर कर 10 कदम गई होगी फिर वापस आने लगी

मुरारी की तरफ जाता हुआ : क्या हुआ

मंजू : मुझे डर लग रहा है , कोई सांप बिच्छू हुआ तो ?

मुरारी: तो अब

मंजू हिम्मत कर : आप भी चलो मेरे साथ

मुरारी थोड़ा रुक कर उसे देखा तो मंजू मुस्कुरा कर शर्माने लगी : भक्क चलो न

मुरारी हंसता हुआ उसके साथ चला गए और वही प्लॉटिंग वाली जगह के चारदीवारी के लास खड़ा होकर : हम्मम जाओ अब

मंजू ने अच्छे से मोबाइल की टॉर्च जलाई और देखने लगी और फिर मुरारी को देखकर : घूमों न उधर ?

मुरारी ने हसने लगा और अपनी टॉर्च बुझा कर खुद भी एक ओर खड़े होकर पेशाब करने लगा

हाइवे पर गुजर रही गाड़ियो की लाइट मुरारी के आधे देह पर आ रही थी मगर कमर के नीचे तक नहीं

मुरारी ने अपना लंड झाड़ कर वापस रख रहा था कि एकदम से मंजू चिहुकी: अम्मी

मंजू एकदम से उठ कर भागती हुई उसके पास आई

मुरारी उसको चीखता देख : क्या हुआ

मंजू : पता नहीं पैर पर कुछ रेंग रहा था

मुरारी ने झट से वहा टॉर्च मारी जहां मंजू ने पेशाब किया था और उस जगह की मिट्टी पूरी गीली हो थी , जहां तक पेशाब फैला हुआ था ।

मंजू को शर्म आ रही थी जिस तरह मुरारी उसके पेशाब किए हुए जगह पर टॉर्च जला कर देख रहा था ।

मंजू : छोड़िए न चूहा रहा होगा , चलिए चलते है

मुरारी की नजर और टॉर्च अभी भी उस गीली मिट्टी को देख रहे थे : हा चलो

वापस दोनों गाड़ी में आ गए और गाड़ी निकल पड़ी , और कुछ ही देर में मंजू को अपने बुर के पास हल्की खुजलाहट होने लगी , क्योंकि उसने पेशाब करके पानी से उसे धुला नहीं था ।

उसकी जांघें कचोट रही थी और उसके चेहरे पर बेचैनी हो रही , रह रह कर वो अपने बुर के पास हाथ ले जाकर उसे खुजाती

मुरारी की नजर का रुकने वाली थी और उसने धीरे से उसके कान में बोला : क्या हुआ ?

मंजू एकदम से सकपकाई और थोड़ा चुप रही। लेकिन मुरारी वैसे ही झुका हुआ उसके जवाब की प्रतिक्षा में था तो मजबूरन उसे बोलना ही पड़ा : तो करने के बाद धूली नहीं तो खुजली ...

मुरारी : कहो तो फिर से गाड़ी रुकवा दु

मंजू फुसफुसा कर : नहीं , वो क्या सोचेगा ?

मंजू का इशारा ड्राइवर की ओर था

मुरारी कुछ देर चुप रहा है और फिर धीरे से उसके कान में बोला : मेरे पास एक आईडिया है ?

मंजू अचरज से उसकी ओर देख कर : क्या ?

मुरारी : एक बार ऐसे ही अमन की मां के साथ हुआ था , लेकिन तब हम बस में सफर कर रहे थे और रात का समय था । तो मैने उसे अपनी रुमाल पानी में भिगो पर दी और फिर उसने अपने आप को चादर से ढक लिया था और फिर नीचे उस गिले रुमाल से साफ किया था । रात का समय था तो किसी को कुछ पता नहीं चला

मुरारी का आईडिया सुनते ही मंजू भिनकी: धत्त क्या आप भी ,

मुरारी : सच कह रहा हूं , कहो तो ममता को फोन लगाऊं

मंजू : नहीं उसकी जरूरत नहीं है

मंजू को फिर से चुनचुनाहट हुई बुर में

मंजू ने इशारे से : लाइए

मुरारी : एक मिनट रुको

फिर वो अपने बैग से एक ओढ़ने वाली चादर निकाला और फिर उसे मंजू और अपने ऊपर ओढ लिया

फिर धीरे से अपने जेब से रुमाल निकाल कर अपने पैर के पास ही बोटल वाली पानी से उसको अच्छे से भिगोया और फिर चादर के नीचे ही उसने मंजू को थमा दिया ।

मंजू ने चादर के नीचे अपनी साड़ी उठाने लगी , मुरारी कभी ड्राइवर को देखता तो कभी मंजू के चेहरे को तो कभी चादर के ऊपर से उसमें चल रही हरकत को आंकता और तभी उसने मंजू के चेहरे पर एक गहरी शांति देखी , उसकी आंखे बंद हुई मानो उसके चूत को कितनी ठंडक मिली हो ।वही मुरारी इस खुमारी में अपना लंड खंड चादर में भींच रहा था कि जल्द ही मंजू की चूत के रस से सना हुआ रुमाल उसके हाथ में होगा ।

लेकिन उसके सपनो का आशियाना तब टूट गया जब मंजू ने धीरे से रुमाल कार से बाहर फेक दिया

मुरारी को एकदम से झटका लगा: अरे फेक क्यों दिया ?

मंजू भौहें टाइट कर : तो क्या करोगे उसका अब, गंदा हो गया था

मुरारी : अरे घर पर धुला जाता न

मंजू शर्माती हुई : भक्क, तो क्या आप वो रुमाल यूज करते

मुरारी : अरे धुलने के बाद क्या दिक्कत थी उसमें भला

मंजू: धत्त बहुत गंदे हो आप

मुरारी : तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे कभी तुम्हारे अंदर के कपड़ो में पेशाब नहीं लगा हो

मंजू शर्म से झेप गई और हसने लगी : अरे लेकिन उसने और इसमें फर्क है न , वो तो नीचे ही रहता और इससे आप मुंह पोछते

मुरारी हस कर : एक ज्ञान की बात कह रहा हु सुन लो

मंजू ताजुब से उसकी ओर गई : हा बोलो

मुरारी उसके पास जाकर : मर्द कपड़ों में भेद नहीं करते , मैने अमन की मां की साड़ी, पेटीकोट , दुपट्टे सबसे हाथ मुंह पोछा है

मंजू को उसकी बात पर हसी आ रही थी और वो हस्ते हुए : हा लेकिन , अंदर गारमेंट से तो नहीं न

मुरारी : पोंछ तो लू, लेकिन वो पहने तो न हिहीही

मंजू एकदम से लजा गई : धत्त

मुरारी : सच में , मैने खुद उसे कितनी बार तौलिया न मिलने मेरे बनियान और अंडरवियर से मुंह हाथ पोंछते देखा है

मंजू हैरत से : सच में ?

मुरारी : इसमें बुरा ही क्या है ? धुलने के बाद साफ ही रहता है न

मंजू सीधी होकर मुस्कुरा लगी

मुरारी उसको ओर झुक कर : और इसमें मेरा ही फायदा होता है

मंजू : फायदा कैसा ?

मुरारी : मेरे कच्छे की खुशबू से उसका मूड हो जाता है और फिर ...

मंजू : धत्त कितने गंदे हो आप भैया

मुरारी हसने लगा तो मंजू भी खुद को हसने से रोक नहीं

शिला के घर

किचन में शिला और रज्जो खाना बना रही थी और इतने में रामसिंह दोनों को देख कर दाखिल हुआ ।

रामसिंह : उम्मम बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है भाभी , अह क्या बना रही हो

शिला : लो आ गए लार टपकाने

रामसिंह ने एक नजर इतराती हुई रज्जो को देखा और आंख मार कर शिला के बगल में खड़े होकर उसके गर्दन के पास अपने नथुनों में सास भरता हुआ बोला: उम्मम भाभी खुशबू इतनी मस्त आ रही है तो मुंह में पानी आयेगा ही

रज्जो आँखें नचा कर : दीदी मै तो कह रही हूं पहले इन्हें ही परोस दो , इनके भैया बाद में भी खा लेंगे

रामसिंह : और क्या ? भइया ने तो शाम को कुछ नाश्ता किया ही होगा , मै तो सुबह से भूखा हूं

शिला मुस्कुरा कर : अरे भाई , कम्मो को बुला लो ऊपर से सब साथ में खाते है न

रज्जो रामसिंह की आंखों में देख कर शरारती मुस्कुराहट से : कम्मो को मै बुला लाती हूं तब तक इनको कुछ देदो

रज्जो मटकते हुए ऊपर निकल गई और जैसे ही जीने से ऊपर पहुंचने को हुई एकदम से ठिठक गई , सामने खिड़की से अरुण कम्मो के कमरे में झांक कर रहा था ।


रज्जो की समझते देर नहीं लगी जिस तरह से अरुण के हाव भाव थे और उसका हाथ पेंट के ऊपर था ।

रज्जो दबे पाव गई और उसके पीठ पर थपथपाया तो वो एकदम से सन्न रह गया और घूम कर रज्जो को देखा तो सिट्टी पिट्टी गुम ।

रज्जो ने एक नजर खिड़की के भीतर झांका तो उसकी आंखे फेल गई , अंदर कम्मो कपड़े बदल रही थी , लेकिन रात के इस प्रहर में उसे कपड़े बदलने का समय अजीब लगा । रज्जो अभी उलझी हुई थी कि इतने में अरुण तेजी से जीने की ओर भागा बिना कुछ बोले सरपट ,रज्जो ने उसको रोकना चाहता मगर अरुण तेज निकला ।

रज्जो ने अंदर झांका तो कम्मो अपनी ब्लाउज उतार कर सिर्फ पेटीकोट में थी और आलमारी से कपड़े निकाल रही थी ।

रज्जो धीरे से दरवाजा खोला और मुस्कुरा कर : ऐसे खुला रखेगी तो किसी रोज डाका पड़ जाएगा

रज्जो की आवाज सुनकर कम्मो एकदम से चौकी और अपनी नंगी छतिया हाथों से ढकने लगी : हाय दैय्या, भाभी आप ?

उसकी सांसे तेज थी, उसके गोरे जिस्म और नंगे पेट , पतली कमर बड़े बड़े रसीले मम्में हाथों से छुपाने में नाकाम

रज्जो मस्ती भरे लहजे में : अरे तुम तो ऐसे डर गई , मानो तुम्हारे जेठ आ गए हो

कम्मो लजाई: क्या भाभी जी आप भी

रज्जो : तो मुझसे क्या छुपा रही हो उम्मम

कम्मो शर्म से लाल होती : नहीं वो , बस ऐसे ही

रज्जो : अरे मेरे जितने बड़े भी तो नहीं है , या फिर है ? देखूं तो

रज्जो आगे बढ़ी

कम्मो खिलखिलाई और घूम गई अपने नंगे चूचों को पकड़े हुए : धत्त भाभी , नहीं

रज्जो ने पीछे से उसकी नंगी पीठ और कूल्हे पर उठे चौड़े उभार देख कर धीरे से एक उंगली उसकी नंगी पीठ ऊपर से नीचे पेटीकोट की डोरी तक रीढ़ पर सांप की तरह रेंगती हुई : उफ्फ तुम तो बड़ी कातिल चीज हो कम्मो

रज्जो के स्पर्श से कम्मो सिहर उठी : सीईईई भाभी , धत्त

और वो झट से उसने एक नाइटी उठाई और अपने ऊपर डालने लगी, इस दौरान रज्जो को पल भर के लिए कम्मो के खरबूजे जैसे गोल चूचों की झलक मिली जिसके भूरे निप्पल पूरी तरह टाइट हो गए थे ।

कम्मो का हाथ और सर नाइटी में था और वो कुछ देर के लिए उलझी थी और मौका पाते ही रज्जो ने धीरे से उसके चूचे पर हथेली घुमाई : उफ्फ कितनी कसी है यार

कम्मो एकदम से गिनगिनाई और उससे दूर होकर जल्दी से अपनी नाइटी नीचे करली : उम्मम धत्त भाभी , दीदी सही कहती है आप बहुत वो हो

रज्जो : तुम्हारी दीदी भी कम थोड़ी है उम्मम

कम्मो मुस्कुरा कर : उन्होंने क्या किया

रज्जो : खुले आम , देवर को खाना परोस रही है किचन में

कम्मो उसके मजाक कर हसने लगी : धत्त आप भी न

रज्जो : और क्या , मै खुद देखा है

कम्मो मुस्कुरा कर अपने बाल सही करती हुई : अरे भाभी है उनकी , हक है उनका कि अपने देवर को परोसे , कही आपका इरादा तो नहीं था अरुण के पापा को परोसने का

रज्जो हस्ती हुई : मै तो परोस दूं , लेकिन मुआ मेरा आंचल बड़ा ने बेईमान है

कम्मो एकदम से रज्जो के मजाक पर झेप गई: अरे , भक्क आप भी न

रज्जो : और क्या खाना छोड़ कर मुझपर टूट पड़े तो , रमन के पापा तो कई बार ऐसा कर चुके है , मर्दों की भूख बदलते देर नहीं लगती

कम्मो हस्ती हुई कमरे से बाहर निकलने लगी और रज्जो भी उसके साथ : हिहीही भाभी , अब बस करो , हम नीचे आ गए है शीईईई

रज्जो : लो देख लो ,मै न कहती थी कि मर्दों की भूख बदलते देर नहीं लगती

कम्मो एकदम से चौक कर किचन में देखा तो रामसिंह शिला को पीछे से पकड़ कर उसके चूतड़ों में अपना लंड निकाल कर दबा रहा था और उसके दोनों पंजे शिला के ब्लाउज के ऊपर से उसकी मोटी चूचियां मिज रहे थे ।






रज्जो : भाभी में आधा होता है , लेकिन लग रहा है नंदोई जी बड़ी साली वाला हक भी जोड़ रहे है हीही

कम्मो तुनक कर : भक्क भाभी , आपको मजाक लग रहा है । मुझे चिढ़ हो रही है कि दीदी हर बार मेरा हक मार लेती है

रज्जो : अरे तो रोका किसने है , जाओ छिन लो अपने दीदी के मुंह से इससे पहले कि सारी मलाई वो गपुच कर जाए

रज्जो के कहने की देरी थी कि कम्मो तेजी से चलती हुई किचन में गई

कम्मो कमर पर हाथ रखे हुए : ये क्या है दीदी ?

शिला : तू ऐसे क्यों भड़क रही है

कम्मो भूनकती हुई : सारा दिन जीजू को निचोड़ ली और अब इन्हें भी , मेरा क्या होगा

शिला खिल कर : तो तू भी आजा

रामसिंह मुस्कुरा कर उसको पकड़ कर अपने पास खींच कर उसके लिप्स चूसता हुआ : उम्मम मेरी जान नाराज मत हो

कम्मो एकदम से कातिल मुस्कुराहट देते हुए उसका लंड पकड़ कर उसके लिप्स चूसने लगी और ठीक अपने दीदी के बगल में बैठ कर शिला से पहले ही लंड को मुंह में ले लिया और रामसिंह मानो हवा में उड़ने लगा

इधर रज्जो इनकी बेशर्मी देख कर पागल होने लगी , उसकी जांघों में सरसराहट होने लगी और चूत के पास कुलबुलाहट सी उठने लगी ।

वही दोनों बहने बारी बारी से रामसिंह के लंड को चूसने लगी

रामसिंह : उफ्फ कम्मो तेरी टाइमिंग कमाल की है , अह्ह्ह्ह रज्जो भाभी की तो नजर ही नहीं हट रही अह्ह्ह्ह्ह

शिला : सच में , लेकिन उसकी वजह से तुम्हारे लंड में गजब का कड़कपन आया है उम्ममम

रामसिंह : तो चूसो न भाभी अह्ह्ह्ह उम्ममम सक इट ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू ओह्ह्ह्ह

इधर दोनों बहने भूखी शेरनी की तरह टूटी हुई थी और वही रज्जो की हालत खराब हो रही थी ऐसे में कब मानसिंह धीरे से उसको पीछे से पकड़ लिया और वो एकदम से चौकी


: अह्ह्ह्ह्ह आप है क्या ? उम्मम देखो तो कैसे भूखी शेरनी की तरह टूटी है दोनों अह्ह्ह्ह्ह

मानसिंह : क्यों कही तुम्हारी इच्छा तो नहीं ज्वाइन करने की

रज्जो ने हाथ पीछे करके मानसिंह के का लंड पजामे के ऊपर से जड़क लिया और उसको भींचती हुई : अह्ह्ह्ह्ह तो आपका क्या होगा उम्मम ,

मानसिंह हाथ बढ़ा कर उसके बड़े रसीले मम्में दबोचता हुआ : अह्ह्ह्ह्ह रज्जो मेरी जान , मै आज तक तुम्हारे जैसी गर्म औरत नहीं देखी अह्ह्ह्ह

तभी रज्जो की नजर अरुण के कमरे के दरवाजे पर गई और उसने अपने जगह से हटना जरूरी समझा : कमरे में चलो , आज आपको असल रूप दिखाती हूं

और रज्जो अरुण के कमरे पर नजर रखे हुए वापस मानसिंह के साथ उसके कमरे में चली गई ।

प्रतापपुर

" अब शर्माना छोड़िए भी जमाई बाबू, मै भी मर्द हु खूब समझता हूं अपने जात की दुखती रग को " , बनवारी ने रंगी को छेड़ते हुए ठहाका लगाया ।

रंगी थोड़ा मुस्कुरा कर : अब क्या करें , बाउजी वो चीज ही ऐसी है कि चाह कर भी निगाहे चल जाती है और फिर

रंगीलाल ने देखा उसका ससुर उसके आगे बोलने की राह देख रहा है

रंगी मुस्कुरा कर : आज दो रोज हो गए , सोनल की मां से दूर हुए तो वो तड़प महसूस भी हो रही है । उसपे से आपका तंबाकू हाहाहाहाहा

बनवारी हंसता हुआ : जमाई बाबू , मै कह रहा हूं न, थोड़ा सा... अरे मै इजाजत दे रहा हूं, अब तो मान जाइए

रंगी का लंड अकड़ रहा था और वो उसको पकड़ कर अपनी मुठ्ठी में भींचते हुए : बाउजी , मुझे लालच मत दीजिए कल को बहक गया या आदत बिगड़ गई तो ? मुझे डर लगता है और फिर कही रागिनी को भनक लगी तो?

बनवारी उसके जांघ पर हाथ रख कर : तुम बड़े भोले हो जमाई बाबू , तुम्हारी जगह अगर अभी कमल बाबू होते तो ....

रंगी हस कर : हा , कमल भाई है भी थोड़े रंगीन मिजाज के ?

बनवारी : थोड़े ? हाहाहाहाहा अरे जमाई बाबू उन्होंने तो बस 2 घंटे में ही बात शुरू की और काम भी फाइनल कर दिया

रंगी अचरज से : कैसे और किसके साथ ?

बनवारी हस कर : वैसे ये राज की बात है , आपके और हमारे बीच ही रहे रज्जो या छोटकी तक न जाए

रंगी ने उसकी ओर झुक कर बिना आवाज ने हुंकारी भरी

बनवारी उसके पास आकर : ये सब मैने सोनल बिटिया की बारात में देखा था , वो तुम्हारे संबंधी है न मुरारीलाल ,

रंगी : हा !

बनवारी : अरे उनकी बड़ी बहन , क्या खूब चुस्त ब्लाउज़ पहनी थी और बड़े बड़े दूध , एक बार को मेरी भी नजर उसकी शरारती निगाहों से जुड़ी थी और मै उस छिनाल को भांप गया । तभी देखा कि कमल बाबू और उसके बीच कुछ तो खिचड़ी पक रही है , तो मैने इनका पीछा किया इधर वरमाला के बाद सब खाना पीना कर रहे थे तो ये दोनों वो बगल वाले घर में घुसे थे और पूरी तरह से नंगे होकर मजे कर रहे थे ।

रंगी का हलक सूखने लगा और उसका लंड पजामे में तंबू बना चुका था : उफ्फ बाउजी , वैसे मुरारी भाई की बहन है बड़ी कटीली चीज ,सीने से पल्लू कब सरक जाए पता नहीं चलता

बनवारी : वही तो ?

कमलनाथ : लेकिन बाउजी आपको नहीं लगता कि कमल भाई ने रज्जो जीजी को पर्दे में रख कर गलत किया ।

बनवारी : अरे भाई , जब चूत की तलब होती है तो उसमें सही क्या गलत क्या ? जैसे आप तड़प रहे है उन दिनों रज्जो बिटिया भी शादी के कामों के कितनी बिजी थी , कमल बाबू भी तड़प रहे होगे , तो हो गया होगा इसमें क्या है ?

रंगीलाल बनवारी की बेफिक्री से खुश होकर : बात तो सही कह रहे बाउजी , शादी के दिनों में मेरी भी हालत कम खस्ता नहीं थी , सोनल की विदाई के बाद भी रागिनी ने हाथ नहीं लगाने दिया क्योंकि उस रात आप थे उसके कमरे में

रंगी की बात सुनकर बनवारी को वो रात याद आई जब रागिनी ने रंगी को मना कर वापस उसके लंड पर बैठने आई थी और वो थोड़ा असहज होकर : अरे जमाई बाबू , सच में अगर मुझे जरा भी भनक होती तो मै खुद निकल आता कमरे से

रंगी हस कर : क्या बाउजी आप भी , तब तो हम इतने अच्छे दोस्त भी नहीं थे हाहाहाहा

बनवारी : हाहाहाहाहा सही कह रहे हो जमाई बाबू , लेकिन अब तक दोस्ती का मान रख लो

रंगी : लेकिन बाउजी मेरी एक शर्त है ?

बनवारी : शर्त ?

रंगीलाल हस कर : जो भी करेंगे एक साथ करेंगे

बनवारी अचरज से रंगीलाल को देखा और मुस्कुराने लगा ।

तभी कमरे में सुनीता दाखिल हुई और दोनों सामान्य हो गए

सुनीता को देखते ही रंगी का मुंह बन गया था क्योंकि शाम के वादे को अभी तक सुनीता ने पूरा नहीं किया था ।

सुनीता : बाउजी खाना लाऊ ?

बनवारी : अह हा भाई लाओ क्योंकि ( दिवाल घड़ी को देखता हुआ ) दवा का भी समय हो रहा है

रंगी : हा बाउजी आप खा लीजिए , मुझे अभी भूख नहीं है ( उसने घूर कर सुनीता को देखा )

बनवारी : अरे भाई अकेले मुझे भी नहीं जमेगा , जब आप खायेंगे मै भी खा लूंगा , अभी रहने दो बहु

रंगी उसे समझता हुआ : अरे नहीं बाउजी , आप समय से खा लीजिए और आपको दवा भी लेनी है । मुझे भूख लगी तो कहूंगा , क्योंकि मुझे लेट से खाने की आदत भी है थोड़ी ।

बनवारी : अच्छा ठीक है , बहु मेरी थाली लेकर आ फिर

सुनीता मुस्कुरा कर रंगी को देखा तो रंगी ने मुंह बना कर उससे नजरे फेर ली , सुनीता समझ रही थी कि रंगी उसकी वादाखिलाफी से नाराज है ।

फिर वो कूल्हे हिलाती निकल गई

बनवारी : अरे जमाई बाबू , आप भी खा लेते तो खाली हो जाते

रंगी : आप फिकर न करे बाउजी , वैसे भी वो 10 बजे बाद ही आएंगी कही क्यों ?

बनवारी : हा बात तो आपकी ठीक है , चलो जैसी आपकी मर्जी

रंगी हस कर : और पहले आ गई तो उसको निपटा लेंगे खाना बाद में हो जाएगा हाहाहाहाहा

बनवारी हंसता हुआ : आप भी जमाई बाबू , हो तो पक्के खिलाड़ी लेकिन छिपाते बहुत हो ।

रंगी मुस्कुराने लगा और तभी सुनीता एक बार फिर कमरे में दाखिल हुई, खाना लेकर ।

उसने झुक कर बनवारी के आगे थाली रखी और पानी दिया

सुनीता वही खड़ी हो गई और बस एक टक रंगी को देखने लगी कि कब वो उसकी ओर देखे : और कुछ लाऊ बाउजी

जैसे ही सुनीता ने बोला , रंगी ने उसकी ओर देखा और सुनीता ने अपने मोटी मोटी छातियों से चुस्त पल्लू को आधे ब्लाउज तक ले आई






जिससे उसकी एक चुची का पूरा मोटा फूला हुआ भाग उभर कर सामने आया और वो बड़े ही शरारती मुस्कुराहट से रंगी को देखी , एकदम से रंगी की आंखे चमक उठी ।

रंगी हड़बड़ा कर : बाउजी आप खाइए , मै थोड़ा कपड़े बदल लेता हूं

निवाला चबाते हुए बनवारी ने उसको हुंकारी भरी और रंगी बनवारी के कमरे से निकल कर अटैच दरवाजे से अपने कमरे में चला गया

इधर जैसे ही सुनीता कमरे से निकल कर किचन की ओर बढ़ी तो उसने बाहर वाले दरवाजे से लपक कर अपने कमरे में खींच लिया

और हच्च से सुनीता की गुदाज मुलायम छातियां रंगी लाल के सीने से जा लगी : अह्ह्ह्ह्ह सीईईई हाय दैय्या क्या करते है छोड़िए कोई देख लेगा

रंगीलाल ने दरवाजा भिड़का कर उसको अपने पास करते हुए : तुम कुछ ज्यादा होशियारी नहीं कर रही उम्मम

सुनीता मुस्कुरा कर उससे नजरे चुराने लगी तो रंगी उसका लोला पकड़ अपनी ओर मुंह करता हुआ दूसरे हाथ से उसके नरम चर्बीदार कूल्हे को मसलता हुआ : बहुत मस्ती सूझ रही है उम्मम

सुनीता : आपको भी तो आखिर वही चाहिए न






रंगीलाल ने अगले पल उसके गर्दन के नीचे खुले सीने पर उंगलियां फिराते हुए : मै बताऊं मुझे क्या चाहिए उम्मम

सुनीता की सांसे चढ़ने लगी उसकी धड़कन तेज हो गई , जिस तरह से रंगी उसके पल्लू को सीने से हटाना चाह रहा था मगर कंधे पर लगी पिन उसे रोक रही थी और देखते ही देखते रंगी आगे झुक कर उसके ब्लाउज के गले के पास खुली जगह पर जहा से सुनीता की मोटी चूचियो की पहाड़िया शुरू हो रही थी अपने होठ रख दिए और सुनीता मचल उठी : अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम रुक जाइए न प्लीज

इस दौरान रंगी के हाथ उसकी नंगी कमर और कूल्हे पर रेंग रहे थी और फिर सरकाता हुआ नीचे आया और पेट के ऊपर से पल्लू हटा कर अपना मुंह सीधा उसकी गुदाज चर्बीदार नाभि पर दे दिया और सुनीता एकदम से अकड़ गई : ओह्ह्ह्ह उम्ममम रुकिए न , बाउजी बगल में है अह्ह्ह्ह्ह






रंगी ने एक न सुनी और जीभ निकाल कर उसकी गुदाज नर्म नाभि पर गिराते हुए नाभि के नीचे का मास चबाने लगा जिससे सुनीता एड़ियों के बल उठने लगी और उसके ऐसा करते ही रंगी ने अपने दोनों पंजे उसके गोल मटोल चूतड़ों पर जमा दिया और उन्हें दबोचने लगा

सुनीता की हालत खराब हो रही थी कि इतने में बबीता की आवाज दोनों के कानों में पड़ी , सुनीता को याद आया कि उसे अभी राजेश को भी खाना परोसना है । और वो झट से रंगी से अलग होती हुई कमरे से भाग गई और रंगी अपने मुंह पोछता हुआ हसने लगा उसका लंड अभी तक तना हुआ था ।

जारी रहेगी
 
💥 अध्याय: 02 💥

UPDATE 13



चमनपुरा

मुहल्ले में घुसते ही वहां की रौनक ने राज को चकाचौंध कर दिया , डीजे पर चलते एक से बढ़कर एक गानों ने माहौल पूरा हाइ रहा था। वहां पर कसबे से एक से बढ़ कर एक धन्ना सेठ और आए थे । कुछ अंजान चेहरे भी थे जिनसे राज कभी रूबरू नहीं हुआ था और उनमें से कुछ उसे पहचान थे उसके पापा के नाम से तो हाल चाल भी हुआ ।

तभी उसकी नजर संजीव ठाकुर पर गई और उसने पाव छू कर उन्हें नमस्ते किया

संजीव : अरे राज , आजा बेटा , भाई तुम्हारे पापा तो ससुराल में मजे ले रहे है हाहाहाहाहा

उनकी बातों से राज को थोड़ी झेप भरी शर्मिंदगी सी लगी मगर वो समझ रहा था कि संजीव ठाकुर नशे की जकड़ के आ रहा है धीरे धीरे और दूसरे हाथ अभी भी विस्की का ग्लास था ।पार्टी ऑलमोस्ट चालू ही थी , लोग खा पी रहे थे ।

राज : अंकल , आंटी जी कहा है ?

संजीव : अरे अभी वो रेडी हो रही होगी , जाओ अंदर देखो और बोलो सब राह देख रहे है

राज : जी अंकल

फिर वो वहां से निकल गया और पहली बार घर के बरामदे से अंदर दाखिल हुआ

अंदर तो और बड़ा सा हाल था जहां पहले से ही सेलिब्रेट करना का पुख्ता इंतजाम था, कुछ कैटरिंग स्टाफ थे और सोफे पर कुछ औरते भी बैठी थी शायद मेहमान रही होगी ।

राज नीचे का माहौल देख कर समझ गया कि इनका कमरा ऊपर नहीं हो सकता था और उसे कुछ धुंधला सा याद भी था कि एक बार सरोजा ने उससे जिक्र किया था वीडियो काल पर जब वो नशे में थी और उसने अपना पूरा घर दिखाया था ।

उसी धुंधली याद के सहारे राज ऊपर चला गया ,

शायद ऊपर आने की सभी को सख्त मनाही थी , तभी तो वहां एकदम से एक चुप सन्नाटा था । बस डीजे पर चल रही गाने की आवाज थी । पूरा घर झालर और लाइट्स से रोशन मानो किसी की शादी हो ।

राज इधर उधर देखता हुआ बड़ा ही संकुचित था मगर भीतर से उत्साहित भी जिस तरह से आज उसने ठकुराइन से बात की थी । इतनी बिंदास औरत से उसका लगाव होना जायज भी था और नए चूत की तलब से उसकी बेचैनी और बढ़ रही थी ।

मगर हिचक भी थी कि कही किसी गलत कमरे में न दाखिल हो जाए ,

तभी उसके कानों कुछ आवाजें आई

" अह्ह्ह्ह नहीं बाउजी देर हो जाएगी , अह्ह्ह्ह मान जाइए न "

" ओह्ह्ह बहु तुम्हारी ये चिकनी जांघें देख कर अब और रहा नहीं जायेगा अह्ह्ह्ह "

इन शब्दों को सुनते ही राज के कान खड़े हो गए और उसका लंड फड़कने लगा , उसके जहन वो याद ताज़ा हुई जब रुबीना ने इस बारे में जिक्र किया था कि ठकुराइन और उसके ससुर का चक्कर है ।

राज का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था वो आस पास देखने के बाद धीरे से दरवाजे के पास पर्दो के बीच से झांका तो देखा कमरे में ठकुराइन पूरी तरह से सज धज कर तैयार है और बड़े ठाकुर ने उसे औंधे बिस्तर पर झुका रखा था और उसकी साड़ी उठा रहा था पीछे : ओह्ह्ह्ह बहु ये बाल हटाने के बाद तेरे चूतड़ कितने रसीले हो गए है उम्ममम

ठकुराइन बड़े ठाकुर के चुम्बन से सिहर उठी : अह्ह्ह्ह बाउजी जल्दी करिए, सब नीचे आ गए है । मालती के पापा फोन भी कर रहे है ।

तबतक बड़े ठाकुर ने अपना नाडा खोलकर अपने लंड को ठकुराइन की चूत पर लगाया और ठाकुराइन पगलाने लगी , उसकी आंखे उलटने लगी और देखते ही देखते एक जोर का झटका : ओह्ह्ह्ह बाउजी उम्मम कितना टाइट है अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह






बड़े ठाकुर : ओह्ह्ह बहु तेरी चूत की गर्मी मुझे पागल कर देती है , आज पार्टी के बाद तुझे लंबी सैर करूंगा अह्ह्ह्ह

राज आंखे फाड़ कर अंदर झाक रहा था और उसे लगा यही मौका है ठकुराइन को अपने जाल में फंसाने का और वो अपनी जेब से मोबाइल निकाल कर रिकॉर्ड करना चाह रहा था कि किसी ने उसे पीछे से थपथपाया

राज एकदम से सन्न हो गया और पलट कर देखा तो उसके पीछे सरोजा खड़ी थी, खूबसूरत झिलमिलाती साड़ी में उसका अंग और निखर रहा था और उसने अपने मुंह पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा करते हुए उसे एक कमरे में ले गई ।

वहां जाते ही वहां की दिवाल पर सजावटी चीजों को देखकर राज समझ गया कि वो सरोजा का कमरा है और अगले ही पल सरोजा ने उसे अपनी ओर खींचा : आज कल तुम बहुत खोए से हो , भूल ही गए हो मुझे

राज ने एकदम से उसके चौड़े चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से मसलने लगा और उसके लिप्स चूसते हुए : तुम भूलने वाली चीज नहीं हो मेरी जान, मै तो तुम्हे ही खोज रहा था लेकिन यहां देखा तो अलग ही खेल चल रहा है अह्ह्ह्ह

सरोजा : उम्मम उन्हें खेलने दो अपना खेल , तुम अपना शुरू करो और वो अपने कंधे से साड़ी की पिन निकालने लगी

तो राज ने झट से उसके हाथ रोके और साड़ी के नीचे से उसकी चिकनी गुदाज कमर में हाथ डाल कर : सीईई रहने दो न अभी रात बाकी है खोलने के लिए, फिलहाल क्विकी से काम चला लेते है क्यों

सरोजा मुस्कुरा कर उसक लिप्स चूसने लगी : सीईईई कुछ भी करो बस भर दो मुझे कितना तड़प रही हूं अह्ह्ह्ह

राज उसके गर्दन पर चूमता हुआ : उम्मम तो बुलाया क्यों नहीं

सरोजा : जैसे तुम बड़े फ्री थे , अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म

राज उसकी साड़ी और पेटीकोट उठा कर उसके नंगे मोटे चूतड़ों को पंजों से नोचने लगा : सॉरी न मेरी जान उम्मम तुम्हारे गाड़ कितने मुलायम है सीईईई ओह्ह्ह

सरोजा सिहर कर आंखे बंद कर राज के दोनों पंजे अपने चूतड़ों पर महसूस कर रही थी और आगे से उसके पेंट में बना तंबू उसकी पेडू के पास ठोकरें मार रहा था ।

एकदम से राज ने उसे घुमाया और एक टेबल पर झुकाया और उसके साड़ी उठाते हुए उनके नंगे मोटे चूतड़ों को सहलाते हुए उसपे अपने पंजे जड़ने लगा : अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म यश उम्मम फक्क्क् मीइ राज ओह गॉड उम्मन






राज उसके जांघों के बीच अपने पंजे से उसकी गीली बुर को टटोलने लगा और दूसरे हाथ से अपना लंड पेंट से निकालने लगा

राज उसके चूचे ब्लाउज के ऊपर से मसलते हुए: योर डिश इज रेडी माय सेक्सू बेबी उम्मम गो

सरोजा समझ गई और घूम कर नीचे बैठ गई और देखते ही देखते राज का मोटा लंबा लंड आधा उसके मुंह में: ओह्ह्ह्ह येस उम्मम अह्ह्ह्ह्ह और चूसो उम्ममम तुम्हारी यही अदा ने मुझे पागल कर रखा अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सीईईईईई

सरोजा बड़ी शिद्दत से राज के टोपे को चुबला रही थी उसकी आंखे ही राज से बात कर रही थी और एकदम से वो उठी और अपनी साड़ी उठा कर कमर तक करते हुए बिस्तर पर घोड़ी बन गई

राज ने अपना पेंट पूरा नीचे किया और लंड को सीधा उसके बुर के फांके में लगाते हुए हचाक से उतार दिया : ओह्ह्ह्ह गॉड कितना गर्म है अह्ह्ह्ह सीईईईईई

सरोजा अपनी बुर में राज के मोटे टोपे को घुसता महसूस कर पागल होने लगी : ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई फक्क अह्ह्ह्ह्ह इतने इतने दिन तक नहीं आओगे तो आग लगेगी न आहे और तेज उम्मम ऐसे ही अह्ह्ह्ह्ह और उम्ममम फक्क्क् मीईईईई






राज : तुम्हे नहीं लगता कि तुम्हे एक और साथी की जरूरत है , जो रोज तुम्हारा ख्याल रखे

सरोजा राज का लंड महसूस करती हुई : तुम तो जानते हो न , बाहर के लोग भरोसे लायक नहीं हैं और शादी मुझे करनी नहीं है

राज का लंड कुछ सोच कर और फूलने लगा जिसका अहसास सरोजा को हुआ : अह्ह्ह्ह्ह क्या सोच रहे हो उम्मम

राज मुस्कुरा कर उसके चूतड़ों को थामे और करारे झटके लगाने लगा : अह्ह्ह्ह्ह कुछ नहीं मेरी जान

सरोजा अपने चूत के छल्ले को राज के लंड पर कसती हुई : मुझसे झूठ नहीं बोल पाओगे राज , तुम्हारा अह्ह्ह्ह्ह येहह जोश उम्मम बता रहाअअ है कि तुमने मेरे बारे में कुछ बहुत गंदा सा सोचा क्यों

राज अपने टोपे की गांठ पर सरोजा के चूत के छल्ले की रगड़ से पागल होंने लगा उसकी सांसे बेकाबू होने लगी , उसके तपते फुले सुपाड़े पर एक तीखा घर्षण होने लगा था : अह्ह्ह्ह हा मेरी जान

सरोजा : क्या बताओ न उम्मम

राज : वो मै सोच रहा था कि अगर बाहर वालो से डर है तो अह्ह्ह्ह गॉड कितनी टाइट कैसे अह्ह्ह्ह सीईईईईई

सरोजा : बताओ न उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह प्लीज

राज : वही मै कह रहा था कि बाहर वालो से अगर दिक्कत है तो घर में ही किसी को देख लो न, कुछ लोग है जिन्हें जिस्म की जरूरत कुछ ज्यादा है अह्ह्ह्ह क्या कहती हो

सरोजा एकदम से अकड़ गई : तुम्हारा मतलब पापा से ,

राज मुस्कुरा और एकदम से अपना लंड तेजी से उसकी चूत में उतारने लगा : सोचो हर रात तुम्हारी बुर भरी रहेगी और बड़े ठाकुर है भी तो ठरकी पूरे उम्मम

सरोजा : अह्ह्ह्ह वो जो भी हो , लेकिन बाउजी से नहीइईई

राज अपना लंड एकदम जड़ तक ले जाता हुआ : तो संजीव अंकल से

एकदम से सरोजा के हाव भाव रुक गए और राज को कुछ कुछ अंदेशा होने लगा

राज अपनी स्पीड हल्की करता हुआ : क्या हुआ , कुछ बात है उम्मम

सरोजा : हा वो भइया की नजर है थोड़ी मुझपर लेकिन मै पक्का कुछ कह नहीं सकती इस बारे

राज का मोटा लंड एक बार फिर एक नई ऊर्जा से फड़का और उसने अपने लंड में वापस से गति देते हुए : उम्मम फिर आज पक्का कर ही लेते है क्यों

सरोजा : कैसे ?

राज मुस्कुरा कर अपना लंड तेजी से उसकी बुर में डालता हुआ : वो तुम मुझपर छोड़ दो

उफ्फ मजा आएगा हाहा .....

राज के घर

सोनल के कमरे में उसके बैग खोले जा रहे थे

रागिनी थोड़ी सी चिढ़ी हुई थी : अगर सोनल मुझसे पूछा कि उसका बक्सा किसने खोला तो मै तो तुझे ही बोलूंगी

अनुज थोड़ा डरा क्योंकि दो बैग और एक बक्सा खोलने के बाद भी अभी तक उन्हें सोनल के कैजुअल कपड़े नहीं मिले थे । एक बक्से में तो उसकी पढ़ाई और कालेज की चीजें थी अब यही एक आखिरी बक्सा था कमरे में

तभी अनुज चहका : मिल गई

रागिनी : क्या?

अनुज : दीदी की स्कर्ट , ये देखो

अनुज ने हाथ में एक लाल रंग की स्कर्ट पकड़ कर दिखाई , जो बड़ी ही चमकीली थी ।

रागिनी : हा इसपर वो कोई काले रंग की टॉप पहनती थी , वो भी होगी खोज

अनुज की झट से एक काली टॉप पर गई और उसने खींच ली : ये रही हीही

रागिनी आंखे महीन कर उसकी खुशी को पढ़ना चाह रही थी मगर सिवाय मासूमियत के उसे कुछ भी नजर नहीं आया और वो हंसती हुई : पागल कही का , ठीक है अब ये रख कर अच्छे से बंद करके नीचे आ

अनुज चौक कर : अकेले ?

रागिनी : हा अकेले हिहीही, मै तो चली नहाने

अनुज को थोड़ा सा खीझ तो हुआ कि फिर से मेहनत करनी पड़ेगी , लेकिन वो अपनी मां की चुलबुली मस्तियों से खुश था और इस बात के एक्साइटेड भी कि कैसे लगेगी उसकी मां टॉप स्कर्ट में

वो फटाफट में काम निपटाने लगा और इसी दौरान उसके कानो में कुछ आवाज आ रही थी और फिर एकदम से उसके कान खड़े हुए कि ये गाने की आवाज नीचे आ रहे थे , सोनल की शादी में घर के लिए भी एक टीवी लिया गया था मगर अनुज को कभी इसमें इंटरेस्ट नहीं रहा अपने लैपटॉप के आगे । लेकिन आज की बात कुछ और थी , टीवी पर 90s के एवरग्रीन गाने चल रहे थे और अनुज खुश होकर नीचे आने लगा । आमतौर पर अनुज अपनी मम्मी को कभी कभार गुनगुनाते सुना तो था , मगर उसका ये किरदार घर में सबसे छिपा था कि वो गाना सुनना भी पसंद है वो भी रोमांटिक

अनुज नीचे आया तो देखा कि कमरे का दरवाजा बंद है और उसने आवाज दी

कुछ ही देर में रागिनी की आवाज आई और उसने टीवी का वॉल्यूम कम करते हुए दरवाजा खोला और अनुज एकदम से ठिठक गया

सामने उसकी मां ब्लाउज और स्कर्ट में खड़ी थी

अनुज आंखे फाड़ कर उसके नंगे पेट और गुदाज नाभि को देख रहा था : वाव मम्मी , कितनी मस्त लग रही हो

रागिनी ने स्कर्ट की लास्टिक खींच कर अपने नाभि को कवर करती हुई : ये छोटी नहीं है

अनुज की नजर एकदम से नीचे गई और देखा कि ये स्कर्ट तो उसकी मां के घुटनों के कुछ इंच ही नीचे थे और उसकी नंगी गोरी दूधिया पिंडलियां साफ नजर आ रही थी : नहीं तो , स्कर्ट ऐसे ही होता है और आपने टॉप नहीं पहना

रागिनी थोड़ी असहज होकर : कल पहन लूंगी उसको , तुझे नहीं लगता मै नचनिया जैसी लग रही हूं

अनुज ने एक ही पल में अपनी मां को उस रूप में कल्पित किया और एकदम से खुद को झटका : भक्क नहीं तो

रागिनी हस कर : क्या नहीं , देख ऐसे ही लहराती है न सब अपना घाघरा हीहीही

अनुज कभी भी अपनी मां की उस रूप में कल्पना भी नहीं करना चाहता था : नहीइई बक्क

मगर रागिनी आज मस्ती के मूड में थी और उसने झट से रिमोट उठा कर चैनल बदला और एकदम से एक भोजपुरी चैनल का गाना लगा दिया : हीही रुक दिखाती हु

और गाना भी कम अश्लील नहीं था

" लहरिया लुटा ये राजा "

एकदम से रागिनी ने उसके आगे ठुमके लगाते हुए अपने स्कर्ट को हवा में लहराने लगी और इस दौरान बिना ब्रा के उसकी चूचियां हवा में खूब उछल रही थी , नीचे स्कर्ट उठने से उसकी चिकनी जांघें देख कर अनुज का लंड कसने लग






और एकदम से रागिनी ने खिलखिलाते हुए उसका हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा : नाच न

अनुज शर्मा रहा था और रागिनी उसके दोनों हाथ पकड़ कर अपने कूल्हे उसकी ओर झटक रही थी , अनुज ने आखिर दो बार अपने कूल्हे सेम रागिनी की तरह झटके तो रागिनी खिलखिला कर हसने लगी : तुझे नाचने नहीं आता हाहाहाहाहा

अनुज मुस्कुरा कर थोड़ा शर्माता हुआ : बक्क नहीं , भोजपुरी गाने पर कौन नाचता

रागिनी ने उसे घूरा : मै और कौन ? , तुझे अच्छा नहीं लगा क्या मेरा डांस

अनुज ने उसका डांस देखा ही कहा था उसकी नजरें अपनी मां के बड़े बड़े रसीले मम्में और चिकनी जांघों से हटे तब न

" नहीं वो बस गाना अच्छा नहीं था , आप हिंदी गाने पर करो न " , अनुज ने अपने दिल की बात कही

रागिनी खिलखिलाई : हिंदी गाने पर किसी को डांस करते देखा है ,पागल और होली पर तू भी भोजपुरी पर खूब नाच रहा था

अनुज : हा ... वो , लेकिन आप नचनिया न कहो खुद को

रागिनी को समझ गया कि अनुज को उसके डांस या भोजपुरी चॉइस से नहीं बल्कि उसके किरदार बदलने से दिक्कत है और वो हस कर उसको अपने सीने से लगा लेती : आ मेरा बेटा , इतना प्यार करता है मुझे

अनुज अपनी मां के सीने से लग कर एकदम से सिहर उठा और कुछ भावनाएं भी भर : हम्ममम , आप मेरी मम्मी हो न प्यारी थी ।

रागिनी : अच्छा ठीक है बाबा , नहीं कहूंगी कभी ऐसा कुछ , खुश

अनुज : हम्ममम आई लव यू

रागिनी हसने लगी : पागल , चल छोड़ मुझे मै ये कपड़ा ही निकाल देती हूं

अनुज एकदम से चौक कर : क्यों ?

रागिनी : तुझे ही पसंद नहीं न तो ?

अनुज : नहीं अच्छी तो लग रही है , बस वो मत बुलाना खुद को

रागिनी हस कर तो क्या बुलाऊं : गांव को गोरी

अनुज को ये नाम बड़ा नया और लुभावना लगा तो खुश होकर : हा चलेगा

रागिनी हस्ती हुई : चलेगा ! , पागल हिहीही, चल अब खाना बना लू और तू भी पढ़ाई करने बैठ अब

अनुज : जी मम्मी

फिर रागिनी कमरे से निकल गई और अनुज ने टीवी बंद कर ऊपर अपने कमरे में चला गया किताबें लेने ।

अमन के घर

खुले आसमान के नीचे हल्की सर्द हवाएं चल रही थी , मदन और ममता दोनों साल ओढ़े छत की चारदीवाली के पास खड़े होकर दूर अंधियारे में निहार रहे थे , पास ही एक इलेक्ट्रिक अंगीठी जल रही थी और एक चटाई पर खाना और कांच के ग्लास के साथ शराब की सीसी रखी थी ।

मदन आंखे फाड़ कर छत पर दूर जीने के पास लगी 5 वाट की बल्ब की रोशनी में ममता को सिगरेट के कस लगाते देख रहा था और धुआं उड़ाते हुए : उफ्फफ अह , मजा आया गया , लीजिए आप भी न

ममता ने अपना झूठा सिगरेट मदन को ऑफर किया और मदन हिचकता हुआ उसको हाथ में पकड़ता हुआ: कितने साल बाद ?

ममता मुस्कुरा : जब अमन पेट में आ गया तो छोड़ दी थी उसके बाद सीधा आज

मदन सिगरेट की कस लेकर ममता को देता हुआ : आपको देख कर कोई कहेगा नहीं कि इतने साल का गैप है

ममता मुस्कुरा कर : ऐसे पलों के लिए दोस्त होना भी जरूरी है न , वरना अमन के पापा को तो आप जानते ही है

मदन हस कर : हा , वो इन मामलों में थोड़े कम फ्रेंडली है , दो चार बार तो मुझे भी फटकार मिली है । मगर तलब है क्या किया जाए

ममता हस कर : तो तलब मिटाया जाए हाहाहाहाहा

मदन समझ गया कि ममता का इशारा किधर है और वो पैग बनाने लग

मदन : वैसे सच कहूं भाभी , मैने सपने में भी नहीं सोचा था कि आप भी ड्रिंक कर सकती है , लीजिए

ममता मदन के हाथ से शराब का ग्लास पकड़ती हुई मुस्कुरा : क्यों भई इसपर सिर्फ मर्दों की मनॉपली है क्या , हाहाहाहाहा

मदन हस कर : नहीं बस ऐसे ही ख्याल आ रहा था कि मैने इतने सालों से आपको देखा लेकिन कभी आपके ऐसे रूप की की कल्पना नहीं की थी

ममता सीप लेती हुई : किस वाले , ये वाले ( ममता ने ग्लास उठा कर ) या फिर कल रात वाले हाहाहाहाहा

मदन शर्म से झेप गया : क्या भाभी आप भी

ममता मुस्कुरा कर : क्यों ? साफ साफ बोलिए न

मदन अटक कर मुस्कुराता हुआ ममता की बातों से सहमति दिखाता हुआ : हा मतलब दोनों ?

ममता हस कर : अभी मुझमें बहुत सी ऐसी बाते छुपी हुई जिनसे आप रूबरू नहीं है देवर जी

मदन जिज्ञासु होकर: जैसे की

ममता मुस्कुरा कर: ऊहू इतने उतावले मत हो , सबर रखो पूरी रात पड़ी है उन बातों के लिए

मदन के बदन में शराब की गर्मी उतर रही थी और एक अजीब अहसास से वो सिहर भी उठा था । वही ममता ने ग्लास किनारे रख खाना परोसने लगी और दोनों खाना शुरू भी कर दिये

ममता को हिचकी आ रही थी तो मदन ने पानी का ग्लास दिया और उसको पी कर : वैसे खाना बड़ा जायकेदार है देवर जी

मदन हस कर : आपकी बराबरी नहीं कर पाऊंगा भाभी ,

कुछ ही देर बाद खाना खा कर दोनों उठ गए : उह मजा आ गया देवर जी , सच में इस दावत के दिल से शुक्रिया आपका

मदन हाथ धुलता हुआ : क्या भाभी आप भी हाहाहाहाहा , इसमें दावत जैसा क्या था ,

ममता अपने कंधे से साल उतारती हुई : उफ्फ गर्मी होने लगी है अब

मदन अपने हाथ में ड्रिंक का ग्लास पकड़े हुए : हा ये थोड़ी तगड़ी है , धीरे धीरे असर करती है

ममता मुस्कुराने लगी तो मदन : क्या हुआ मुस्कुरा क्यों रही है

ममता मुस्कुरा कर : कुछ नहीं सोच रही हूं अगर मैं यही बेहोश हो गई तो मुझे नीचे कौन ले जाएगा ।

मदन ताव दिखा कर : क्यों आपको मुझपर कोई शक है क्या , फौज में रहा हूं भाभी यू टांग लूंगा

ममता खिलखिलाई : हाहाहा हा जैसे मै बड़ी हल्की हूं , आपके भैया के ऊपर हो जाती हूं तो सास फूलने लगती है हाहाहाहाहा

मदन ममता का जवाब समझ गया कि वो कब मुरारी के ऊपर होती है और थोड़ा असहज होने लगा

ममता उसको मुंह फेरता और चुप देख कर हसने लगी : ओ हेलो , बहुत आगे मत सोच लेना , वापस आओ वापस आओ मै बिस्तर पर सोने की बात कर रही हूं, वो वाला नहीं

मदन की हसी अब फुट पड़ी : हाहाहाहा आप जिस तरह से बोली उससे तो यही लगा कि... हीही

ममता की आंखों में नशा उतर रहा था साथ ही मदन के भी और धीरे धीरे मदहोशी हावी हो रही थी

ममता फैली हुई मुस्कुरा से : कि मै sex की बात कर रही हूं न हाहाहा

मदन एकदम से चौका और समझ गया कि ममता पर थोड़ी थोड़ी चढ़ रही है

मदन खुद को सम्भाल कर एक गहरी सास लिया : भाभी , चलिए नीचे चलते है

ममता : क्यों ? क्या हुआ , आप डरते क्यों हो देवर जी । अरे मर्द बनो मर्द

मदन हस कर : भाभी जी मै तो मर्द ही हू

ममता मुस्कुरा कर : ओह हा , हीहीहिही

मदन : भाभी , भाभी सुनिए चलते है कोहरा बढ़ रहा है ठंडी लग जाएगी

ममता : कहा ठंडी है , पता है कल रात को तो मै यहां नंगी..... (अपने मुंह पर उंगली रखते हुए ) अपने भैया को मत कहना.. मै यहाँ नंगी घूम रही थी हीहिही

ममता ने फुसफुसा कर मदन से बोली और ग्लास पूरा खाली कर दिया ।

मदन समझ गया कि अब अगर उसने देरी की मामला बिगड़ जायेगा , गनीमत यही है कि हलके कोहरे और सर्द मौसम से इतनी रात में कोई छत आस पास पर नहीं आया था ,मगर फिर उसे ममता की बेकाबू चीखों का डर था ।

मदन उसका हाथ पकड़ कर : आओ भाभी चलते है , आपको नहीं लेकिन मुझे लग रही है सर्दी

ममता ने उसको एकदम पास से घूरा : लगेगी न सर्दी , बीवी नहीं है आपके पास , इसीलिए शायाने कह गए हैं कि सही समय पर शादी कर लो

मदन हंसता हुआ उसको पकड़ कर बातों में उलझाए हुए जीने की ओर ले जाने की कोशिश करता हुआ : अब इतनी रात में किसकी बीवी लाऊ

ममता हस्ती हुई : किसकी बीवी ? हाहाहाहा , क्यों भाई दूसरों की बीवियां पसंद है क्या , कही मै तो पसंद नहीं आ गई

मदन हस कर : क्या भाभी आप भी , कैसी बात कर रही है

ममता : अरे दो बार , दो बार आपने मुझे नंगी देखा फिर भी कहते पसंद नहीं , क्या मै खूबसूरत नहीं देवर जी

मदन की आंखे बड़ी हो गई और सांसे चढ़ने लगी वो ममता की आंखों में देख रहा था और उसका हलक सूखने लगा , उसकी आंखों के सामने ममता का नंगा गदराया बदन नाचने लगा , वो बड़ी मोटी छातियां, फैले हुए भड़कीले चूतड़ बजबजाती बुर और भींचा हुआ सिसकता हुआ चेहरा , एकदम से उसका लंड पजामे में तंबू बनाने लगा

मदन की जबान लड़खड़ाने लगी : मैने कब कहा कि आप पसंद नहीं , आपकी जैसी बीवी होना किस्मत की बात है भाभी , और मै किस्मत वाला हूं कि मुझे इतनी प्यारी भाभी मिली है जो सबका ख्याल रखती है और सबको खुश रखती है ।

ममता मुस्कुरा कर : बात को गोल मटोल घुमाओ मत देवर जी , सच सच बताओ कमरे में जब मुझे चादर उढ़ाया तो जरा भी आपका ईमान नहीं डोला उम्मम

मदन हड़क उठा : कैसी बात कर रही है आप मेरी भाभी है , मै भला क्यों ऐसा सोचूंगा

ममता मुस्कुरा कर : अच्छा खाओ मेरी कसम कि आपको मुझे देख कर कुछ हुआ नहीं था और आपने मुझे छुआ नहीं

मदन की हालत खराब होने लगी और ममता हसने लगी : देखा पकड़े गए

मदन सीरियस होकर : आपकी कसम भाभी , मैने आपको देखा जरूर लेकिन छुआ नहीं

ममता मुस्कुरा: उफ्फ बड़े सख्त मर्द हो फिर तो हाहाहाहाहा

मदन मुस्कुराने लगा: बिलकुल सही समझा आपने

ममता मुस्कुरा कर थोड़ी पीछे हुई : फिर मुझे अब डरने की जरूरत नहीं आपसे

मदन अभी स्थिति समझने की कोशिश कर रहा था कि तबतक ममता ने एक झटके में खड़े खड़े अपनी नाइटी उतार फेंकी और एकदम से नंगी होकर मदन के आगे खड़ी हो गई ।

ममता खिलखिलाई : अह्ह्ह्ह्ह उफ्फ कितना मस्त मौसम हुआ है

मदन आंखे फाड़ कर उसे देख रहा था , कभी उसकी लटकी हुई बड़ी बड़ी पपीते जैसी चुचियों को तो कभी जांघों के बीच की झुरमुट को और कभी उसके चौड़े फैले चूतड़ों को

ममता हाथ फैला कर हवा में घूमते हुए पीछे वाली चारदीवारी की ओर जाने लगी और उसकी बड़े भड़कीले चूतड़ों को नंगा थिरकता देख मदन का लंड अकड़ गया, तेजी से भागता हुआ वो ममता के पास पहुंचा








लेकर उसे उढ़ाने लगा : भाभी , क्या कर रही है कोई देख लेगा

ममता हस्ती हुई : यहां कौन देखेगा अंधेरे में आपके सिवा, और आपसे कोई डर नहीं मुझे हाहाहाहाहा

मदन का लंड फड़क रहा था वो कैसे कहता कि उसके बड़े नंगे चूतड़ों की कसी दरारों को देख कर उसके मुंह ने पानी आ रहा है

मदन ने एक बार और कोशिश की कि ममता को चादर उढ़ाये लेकिन उसने चादर इस बार छत से बाहर फेक दिया

मदन समझ रहा था कि ममता अब बेकाबू हो चुकी है , उसे अब तक ही तरीका समझ आ रहा था और उसने बड़ी हिम्मत कर बोला: भाभी मुझे आपको कुछ बताना है ।

शिला के घर

शिला के कमरे में रज्जो आगे झुकी हुई थी और पीछे से मानसिंह उसके नरम चर्बीदार चूतड़ों को सहलाते हुए कस कस कर झटके दे रहा था उसकी चूत में और रज्जो के मोटे चूतड़ मानसिंह को खूब उछाल रहे थे जिसमें मानसिंह दुगनी ताकत से लंड भेदता

कमरे में तेज चीख भरी चीख गूंज रही थी : अह्ह्ह्ह्ह नंदोई जी उम्मम और ओह्ह्ह्ह सीईईई क्या मस्त हथियार है आपका अह्ह्ह्ह पेलो उम्मम






मानसिंह : तुम बड़ी चुदक्कड़ हो भाभी अह्ह्ह्ह तुम जैसी गर्म औरत आज तक नहीं देखी ओह्ह्ह्ह लंड को अपने छल्ले में कसने की कला तुम्हे अच्छे से आती है ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह भाभी

रज्जो ने अपनी बुर को मानसिंह के लंड पर कस लिया और मानसिंह की तड़प बढ़ गई और रज्जो खुद अपने चूतड़ उसके लंड पर फेकने लगी

जल्द ही मानसिंह के पाव कांपने लगे और उसका लंड एकदम फड़फड़ाने लगा सुपाड़े की नस फूल गई : अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह भाभी ढीला करो आने वाला है

रज्जो ने पूरे जोश में अपनी गाड़ को पूरा पीछे ले गई और चूत से उसका लंड पूरी ताकत से जकड़ किया , मानसिंह का सुपाड़ा रज्जो की बुर के जड़ में था और मानो रज्जो की बुर उसका लंड सुरक रही हो और एकदम से लावा रज्जो की बुर के गहराई में फूट पड़ा : अह्ह्ह्ह्ह भाभी ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू बिच ओह्ह्ह्ह कितनी बड़ी रंडी हो तुम अब समझ आया अह्ह्ह्ह

रज्जो ने अपनी बुर ढीली की और सरक पर बिस्तर पर गिर गई और हांफते हुए हसने लगी : अह्ह्ह्ह मजा आ गया नंदोई जी क्या गर्म माल था उम्मम

मानसिंह : कुछ दिक्कत तो नहीं होगी , गोली है मेरे पास

रज्जो बिंदास होकर उसे रिलैक्स होने का इशारा किया और मानसिंह उसके बगल में आ गया और एकदम से मदन जैसे ही उसके आगे से हटा रज्जो की नजर भीड़के हुए दरवाजे पर गई और एकदम से एक परछाई वहा से सरकी ।

मगर रज्जो की तेज निगाहों ने दरवाजे के गैप से उन नीले टीशर्ट को पहचान गई जिन्हें उसने कुछ देर पहले छत पर देखा था ।

रज्जो उठी और पेटीकोट से अपनी बुर साफ करती हुई खड़ी हुई

मानसिंह बिस्तर पर लेटा हुआ : कहा चली

रज्जो हस कर : जा रही हूं आपके भाई साहब की खबर लेने , देखूं ठीक ठाक तो है

मानसिंह रज्जो की दिलदारी और खुलेपन से एकदम से एक्साइटेड हो गया था और वो कुछ बोलने के लिए उठा मगर रुक गया ।

रज्जो : क्या हुआ

मानसिंह : नहीं , कुछ नहीं

रज्जो : अब बोलो भी

मानसिंह हिम्मत नहीं कर पा रहा था तो रज्जो मुस्कुरा कर : ऐसा कुछ भी नहीं है आप चारो के बीच जो मै नहीं जानती और ये भी जानती हूं कि मुझे यहां क्यों लाया गया है

मानसिंह एकदम से खड़ा हो गया और उसने रज्जो के हाथ पकड़ लिए: आपको सच में कोई ऐतराज नहीं भाभी जी

रज्जो : भला मुझे क्यों ऐतराज होगा , बस कम्मो थोड़ी सी झिझकती है मुझसे

मानसिंह उसके कंधे पकड़ कर अपने सामने करता हुआ : उसकी झिझक कैसे दूर करनी है मुझे पता है , बस तुम बताओ क्या तुम तैयार हो ।

रज्जो ने आंखे उठा कर मानसिंह को देखा और हा में सर हिलाया : लेकिन परसो मुझे घर जाना है याद रहे ।

मानसिंह : वैसे भी कल संडे है तो कल ही ये काम होगा , मगर उससे पहले जरूरी है कि तुम छोटे से बात कर लो

रज्जो : ठीक है जैसा आप कहें ,देखती हूं।

रज्जो कुछ सोचती हुई मन में बड़बड़ाई : बात तो मुझे करनी है लेकिन छोटे नंदाई से नहीं किसी और से । रज्जो की जासूसी , बच्चू बताती हूं

रज्जो वहां से निकल गई और हाल में आई तो देखा किचन खाली था समझ गई कि तीनों ऊपर गए है और उसकी नजर अरुण के कमरे पर गई ।

कुछ सोचते हुए रज्जो अरुण के कमरे के पास गई और भिड़के हुए दरवाजे को खटखटा कर उसे आवाज दी : अरुण बेटा आ जाऊं

अरुण एकदम से सकपकाया और कमरे में कुछ हलचल हुई और उसकी आवाज आई टूटे हुए आवाज में : हा बड़ी मामी आ जाओ

रज्जो कमरे में दाखिल हुई और कमरे का दरवाजा वैसे ही लगाया , चीजें इधर उधर बिखरी हुई , बिस्तर पर किताबें और समान पड़े थे ।

रज्जो : ओहो पढ़ाई चल रही है बेटा

अरुण नजरे चुराता हुआ : हा बड़ी मामी , वो मेरे हाफ ईयरली एग्जाम आ रहे है न तो....

रज्जो उसके जवाब पर मुस्कुराई और उसकी नजर चार्जिंग में लगे अरुण के मोबाइल पर गई : पढ़ाई तो करता ही है तू लेकिन शैतानी भी कम नहीं है तेरी क्यों ?

अरुण को समझते देर नहीं लगी कि रज्जो ऊपर छत की बात कर रही थी : सॉरी बड़ी मामी, प्लीज आप मम्मी से कुछ मत कहना

रज्जो समझ गई कि लड़के की कमजोर कड़ी क्या है और वो मुस्कुरा कर : अरे मै क्यों कहूंगी , भला उससे मेरा क्या फायदा , मै तो तेरे फायदे के लिए आई थी ।

अरुण चौक कर : मेरा फायदा , कैसे ?

रज्जो : जितनी तांक झांक तू करता है मुझे नहीं लगता इस घर में जो कुछ भी हो रहा है उससे तू अंजान है क्यों ?

अरुण की हालत पतली होने लगी : मै , मै समझा नहीं बड़ी मामी आप क्या कह रही है ।

रज्जो उसके पास बैठती हुई उसके मोबाइल को चार्जिंग से निकालती हुई : खोल इसे

अरुण की हालत खराब होने लगी : क क्यों?

रज्जो : अरे डर क्यों रहा है , खोल न

अरुण ने हिम्मत करके मोबाइल का लॉक खोलकर मोबाइल रज्जो को दिया ।

रज्जो ने झट से गैलरी खोली लेकिन वहां सब कुछ क्लीन था ,कोई फोटो न वीडियो

अरुण : क्या खोज रही है आप

रज्जो आँखें महीन कर : वही जो अभी थोड़ी देर पहले तू रिकार्ड कर रहा था अपने बड़े पापा के कमरे में उम्मम

अरुण की आंखे फेल गई और उसका चेहरा सन्न रह गया : न न नहीं तो

रज्जो : ओहो तू फिर हकला रहा है , भाई मुझे वो बस फोटो और वीडियो चाहिए

अरुण : लेकिन किस लिए

रज्जो : मतलब तूने रिकॉर्ड किया न

अरुण : सॉरी बड़ी मामी

रज्जो : अब दिखाएगा

अरुण ने झट से मोबाइल में कुछ टैप टैप किया और ढेर सारी हिडेन फाइल निकल आई और रज्जो ने झट से उसके हाथ से मोबाइल ले लिया

रज्जो ने स्क्रॉल करना शुरू किया था तो सैकड़ो की संख्या में वीडियो फोटो थे

अरुण : बड़ी मामी रुकिए , मै दे रहा हु न

तभी उसकी नजर एक ऐसे फोटो पर गई जिसे देख कर वो चौक गई और उसने अरूण को देखा : ये कैसे मिला तुझे






अरुण का मुंह शर्म से झुक गया , वो फोटो वही थे रज्जो के बाथरूम में नहाते हुए जिन्हें आज सुबह शिला ने अपने क्लाइंट को भेजे थे : इसका मतलब तू भी इनकी स्ट्रीम देखता है , कबसे ?

अरुण मुंह नीचे किए हुए : बहुत दिन हो गए

रज्जो शॉक्ड होकर : और तूने मेरे फोटो और वीडियो के लिए 2000 दिए थे

अरुण : हा , लेकिन प्लीज आप किसी से कहना मत । मै ये सब डीलिट कर दूंगा प्लीज

रज्जो : वो सब तुझे जो करना है कर , मगर मुझे कुछ और जानना है ।

अरुण : क्या

रज्जो ने एक नजर दरवाजे पर देखा और थोड़ी उसके और करीब आकर : क्या तेरी बड़ी मां का कही बाहर भी कुछ चक्कर है ? गांव में किसी से

अरुण अपने दिमाग पर जोर देकर रज्जो के सवाल को समझता हुआ : नहीं तो ? क्यों ?

रज्जो ने झट से अपना मोबाइल निकाला है और एक मोबाइल नंबर अरुण को दिखाती हुई : ये किसका नंबर है ।

वो नम्बर देखते ही अरुण की आंखे बड़ी हो गई और उसका हलक सूखने लगा : मै , मै नहीं जनाता बड़ी मामी । पता नहीं किसका नंबर है ।

रज्जो : देख तू मुझसे झूठ तो बोल मत और अगर तू मुझे इस नंबर के बारे में बताता है तो सोच ले इसमें तेरा ही फायदा होगा

अरुण आंखे उठा कर : मेरा क्या फायदा ?

रज्जो मुस्कुरा कर धीरे से अपना हाथ उसके लंड पर लोवर के ऊपर से रख दिया और वो सिहर उठा : क्यों तुझे कुछ नहीं चाहिए मुझसे उम्मम

अरुण की हालत खराब होने लगी : ठीक है बताता हूं, लेकिन वादा करो ये बात आप कभी किसी से नहीं कहोगी

रज्जो अपने गले पर चुटकी से पकड़ कर : पक्का वाला वादा , कसम से

और फिर वो मुस्कुराने लगी ।

प्रतापपुर

रंगीलाल खाना खा कर थोड़ा टहल रहा था और घड़ी की सुइयां गिन रहा था और इधर राजेश बबीता को लेकर गोदाम के लिए निकल रहा था ।

जैसे ही रंगीलाल ने किचन खाली देखा वो लपक कर सुनीता के पास जा पहुंचा और वो फ्रिज से दूध निकाल रही थी गर्म करने के लिए, वही रंगी ने उसकी पीछे से दबोच लिया : अह्ह्ह्ह धत्त बदमाश छोड़ो न मुझे

रंगी उसके पीछे खड़े होकर उसके कंधे को चूमता हुआ : क्या कर रही हो मेरी जानेमन

सुनीता सिसक कर : उम्मम बस आपके और बाउजी के लिए दूध गर्म करने जा रही थी

रंगीलाल उसके चर्बीदार पेट पर हाथ रख कर ऊपर सीने की ओर जाने लगा : उम्हू मुझे ये वाला चाहिए

सुनीता एकदम से सतर्क होती हुई रंगीलाल के हाथ रोकती हुई घूम गई : धत्त क्या कर रहे है






रंगीलाल उसके कंधे से साड़ी सरका कर उसके गर्दन गाल और सीने को चूमने लगा : प्यार कर रहा हूं तुम्हे मेरी रसभरी

सुनी
ता उसके होठों के स्पर्श से पागल होने लगी लेकिन उसने रंगी को झटक कर अलग किया : धत्त बदमाश, अभी भी

रंगी तड़प कर उसके नंगे पेट को सहलाता हुआ : फिर कब

सुनीता : सबर करो मेरे राजा , बाउजी और मीठी को सो जाने दो न

बाउजी का नाम आते ही रंगी को अपनी योजना याद आई ससुर के साथ वाली

रंगी समझ गया उसे क्या करना है इधर सुनीता ने चूल्हे पर दूध चढ़ा दिया

रंगी लाल : ये किसका है

सुनीता : मेरा क्यों ?

रंगीलाल उस ग्लास से भरे दूध को सूंघ कर : सच में तुम्हारा है

सुनीता शर्मा कर हस्ती हुई : धत्त पागल हो क्या ? वो मेरा है मतलब मै ठंडा दूध ही पीती हूं

रंगीलाल : मुझे भी पिलाओ न अपना ठंडा दूध

सुनीता उसकी आंखों में देख कर : पी लो न फिर

रंगीलाल उसके करीब आकर : ऊहू ऐसे नहीं

सुनीता उसकी आंखों में देखते हुए : फिर

रंगीलाल ने वो ग्लास सुनीता के मुंह में लगाया और उसे पिलाने लगा और दूध का कुछ हिस्सा उसके रस भरे होठों से भर आने लगा तो एकदम से रंगी ने अपने होठ उसके होठ से जोड़ दिए








और सुनीता के होठ चूसने लगा और उसकी थुड़ी फिर गले तक रिस दूध को चाटने और पीने लगा , सुनीता एकदम से मदहोश हो गई : उम्ममम अह्ह्ह्ह उफ्फफ आप पागल कर रहे हो मुझे

रंगी उसकी आंखों में देख कर : और तुम मुझे






अगले ही पल आधा गिलास दूध रंगी ने सीधा सुनीता के सीने पर उड़ेल दिया जो बह कर उसके ब्लाउज की दरारों में जाने और रंगी ने झट से अपना जीभ निकाल कर उसको चाटने लगा , सुनीता मचल उठी : ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह क्या कर रहे है अह्ह्ह्ह उम्मम

रंगीलाल खड़े खड़े उसके डिप नेक वाले ब्लाउज़ के दरारों में जीभ डालने लगा और सुनीता ने उसके सर को पकड़ लिया : अह्ह्ह्ह रुक जाओ प्लीज , रुक जाओ अह्ह्ह्ह

रंगीलाल उससे अलग होकर अपना लंड पजामे के ऊपर से सहलाता हुआ : अब और रुका नहीं जाता प्लीज

सुनीता हांफती हुई : बस 2 मिनट में मै अभी आई ये दे कर

और सुनीता एक ट्रे में दूध के दो ग्लास लेकर निकल गई और रंगी अपना लंड मसलने लगा , वही उसके मोबाइल पर एक कॉल रिंग हो रहा था ।

वो नम्बर देख कर रंगी की दुविधा बढ़ने लगी थी, कि अब वो किस ओर जाए । एक ओर सुनीता जैसी गदराई मोटी माल दूसरी ओर कमला जैसी रांड को ससुर के साथ भोगने का मजा

आखिर क्या करेगा रंगी .... किसे चुनेगा और किसे छोड़ेगा ।

जारी रहेगी
 
कुछ मेडिकल इमर्जेंसी की वजह से इन दिनों व्यस्त हूं दोस्तो और परेशान भी 🥲

समय मिलने पर अपडेट दिया जायेगा और सभी को सूचित किया जाएगा ।

तब तक के लिए क्षमा प्रार्थी हूं

🙏
 
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