Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 48 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 020

इरोटिक संडे 04


प्रतापपुर

पीछे आंगन वाले बाथरूम में रंगी मोबाइल में सोनल की तस्वीरें खोलकर देख रहा था , जो हाल ही एल्बम वाले में भेजी थी ।

उन क्लोज अप विडियोज में उसके बड़े रसीले मम्में उसके लहंगे के ब्लाउज की गहरे गले से साफ साफ झलक रहे थे

और सारे लोग उसकी पलाजो उठा कर उसकी पिंडलियों और जांघों तक हल्दी मल रहे थे






: उफ्फ मेरी लाडो मेरी सोनल अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह तेरे ये गुलाबी दूध उम्मम सीईईई क्या तुझे अपने पापा पर जरा भी तरस नहीं आता बेटा उम्मम ओह्ह्ह्ह तेरी ये गोरी दूधिया टांगे सीई अह्ह्ह्ह्ह

रंगी बाथरूम में लंड निकाल कर अपनी बेटी को अपने कल्पनाओं में नंगा करता हुआ लंड हिला रहा था

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम जमाई बाबू तो तुझे खूब चोदते होंगे , ऐसा माल उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बेटा उम्मम कितनी मस्त उठी हुई गाड़ है तेरी एकदम तेरे शिला बुआ पर गई है तू ओह्ह्ह्ह , कितनी बार कुर्ती में उन्हें झटके खाते देखा ओह्ह्ह्ह बेटा

सोनल के कुर्ती में झटके खाते गोल मटोल चूतड़ों को याद करते ही वो चरम पर आगया


अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह आ रहा है उम्ममम ले ले बेटा झड़ रहा हूं मै ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह





एक के बाद एक मोटी गाढ़ी पिचकारियां रंगी के लंड से छुटने लगी और वो आंखे बंद कर सोनल को अपनी आंखों के बसाने झड़ने लगा

फिर मोबाइल जेब में डाल पर हाथ लंड साफ कर जैसे ही दरवाजे से बाहर आया तो एकदम से ठिठक गया

सामने बेसिन में गीता अपने हाथ धूल रही थी और उसने एक नजर रंगी को देखा और खनक भरी मुस्करा कर निकल गई ।

रंगी समझ गया कि उसके चीखों की गूंज बाथरूम के बाहर तक आ रही थी और वो अपना माथा पकड़ लिया।

किसी तरह वहा से निकल कर हाथ धूल कर आंगन के बाहर आया तो उसने सबसे पहले गीता को तलाशा जो उसे ही तिरछी नजरों से देख रही थी किचन में अपनी मां के पास खड़ी ।

रंगी थोड़ा असहज होकर निकल गया अपने कमरे में आराम करने ।

वही दूसरी ओर गीता अपनी मां के साथ किचन में हाथ बटाने लगी और थोड़ी देर बाद ही खाना तैयार हो गया

सुनीता: जा तेरे फूफा और दादू को जगा दे , मै तेरे पापा को फोन करती हूं अभी तक आए नहीं साढ़े 10 बजने वाले हैं।

अब गीता के लिए बड़ी उलझन हो गई कि वह अपने फूफा को कैसे बुलाने जाए

लेकिन बुलाना तो था ही और वो हिम्मत करके चली गई उसके कमरे में ,

कमरे में रंगीलाल बाथरूम से आने के बाद थोड़ा गिल्ट में था फिर सोनल के एल्बम देख रहा था

, अभी भी उसका लंड अकड़ा हुआ था सोनल की तस्वीरें देखते हुए

हल्दी फंक्शन की तस्वीरों में उसकी पायजामी घुटनों तक थी और वहा तक हल्दी लगी फोटो निकाली गई थी , उसकी गोरी दूधिया ग़ुलाबी पिंडलियों को देख कर रंगी का लंड फड़क रहा था और उसका हाथ लंड पर चला गया था।

एकदम से गीता कमरे के आई और वो हड़क गया लेकिन गीता ने देख लिया कि रंगी का हाथ कहा था और वो मुस्कुराने लगी : फूफा चलो खाना हो गया है

रंगी इस बार और असहज हो गया और उसका चेहरा पीला पड़ने लगा

गीता फिर खनक भी मुस्कुराहट से उसे देखा और निकल गई ।

रंगी : अरे यार ये हो क्या रहा है , उम्ममम । अकेले नहीं जाऊंगा बाउजी को भी साथ ले लेता हूं ।

रंगी उठ कर कमरे के अंदर वाले दरवाजे से बनवारी के कमरे ने दाखिल होने वाला था कि उसकी नजरे सोए हुए बनवारी के पास खड़ी हुई गीता पर गई जो शायद अपने दादू को जगाने आई थी ।

लेकिन बनवारी तो रज्जो और रागिनी के नाम पर झड़ने के बाद से बेसुध हो कर सोया था और उसका लंड अभी भी बाहर था धोती के

जिसे गीता बड़ी लालच भरी नजरो से निहार रही थी और उसने हौले से उसका मोटा सोया हुआ लंड पकड़ा और हिलाने लगी

रंगी की आंखे बड़ी हो गई और लंड के हरकत होने लगी

गीता अपने दादू का लंड पकड़ कर ऊपर नीचे कर रही थी और उसकी नजरे अपने दादू के चेहरे पर थी

उसके स्पर्श से बनवारी के लंड में हरकत होने लगी थी






और गीता का मन कल से ही खूब ललचा रहा था उसकी चुदाई नहीं हुई थी । सुपाड़े के आस पास निकले वीर्य के सूखे धब्बे देख कर उसकी जीभ ललचाने लगी और वो हौले से झुक कर मुंह खोलकर लंड मुंह में ले रही थी





उसकी गीली लार से बनवारी की सुखी मलाई फिर से पिघलने लगी जिसे गीता चाट रही थी , सोया हुआ ही सही लेकिन बनवारी की इंद्रियां सजग थीं और गीता की इस हरकत से उसके लंड में कड़कपन आने लगा था

और फिर उसने अपने दादा का लंड आड से पकड़ कर सहलाते हुए उसका टोपा मुंह में ले लिया






कि उसकी नजर सामने कमरे के अटैच दरवाजे पर गई जहां से रंगी उसे देख रहा था ।

एकदम से वो सकपका गई और चेहरा सफेद होने लगा , हाथ उसने पीछे कर लिए और इससे पहले रंगी उसे कुछ कहे वो तेजी से कमरे भाग गई ।

रंगी अभी तक इस ताजा मिले झटके से उभर नहीं पाया था , उसकी समझ में गीता की उम्र लगभग अनुज जितनी ही थी , शायद थोड़ी ही बड़ी ।

इस उम्र में भी ये शौक । उसके लिए तो गीता अभी बच्ची ही थी ।

लेकिन उसकी आज की हरकत से वो समझ गया कि गीता के संस्कार उम्र से बड़े है और फिर उसके दूध भी रज्जो जैसे है एकदम डिट्टो उन्हीं पर गई है गदराई और मस्त ।

रंगी ने अगले ही पल खुद को झटका और पूरा सिहर गया कि वो क्या सोच रहा था । फिर वो अपने ससुर को उठा कर उन्हें खाने के लिए लेकर चला गया ।

रसोई के पास बरामदे में लगी चौकी पर दोनों ससुर दामाद बैठे थे । बारी बारी गीता ने दोनों को थाली परोसी

रंगी से एक पल को थाली रखते हुए गीता की नजरे मिली और वो नजरे झुका कर चली गई और






जाते हुए पीछे से रंगी ने उसके गोल मटोल चर्बीदार चूतड़ों के झटके देखे उसकी लोवर में

और रंगी के आंखों की चमक बढ़ गई ये सोच कर कि मामला उसकी सोच से बहुत आगे बढ़ गया है ।

इधर दोनों खाना खा रहे थे वही मेन गेट से राजेश और बबीता भी घर में दाखिल हुए ।

बबीता राजेश के साथ बड़ी चहक खेल रही थी दूर से बनवारी ने देखा और उसने राजेश के व्यवहार में भी बदलाव पाया

रंगी : आज राजेश कुछ अलग दिख रहा है बाउजी

बनवारी : हा जमाई बाबू देख तो मै भी रहा हूं , मुझे लगता है गुड़िया के साथ रहने का नतीजा है

रंगी : सच कहा बाउजी, एक बेटी ही है जो बाप के जीवन को स्वर्ग बना सकती......

रंगी अभी अपनी बात कर रहा ही था कि सामने गीता आ गई , गर्म रोटियों की प्लेट लिए

रंगी थोड़ा असहज हुआ

गीता : रोटी दूं

रंगी : हा एक बस

फिर गीता अपने दादू को पूछ कर निकल गई रसोई में।

वही बबीता ने आते ही रसोई में हल्ला शुरू कर दिया : मम्मी क्या बना है , बताओ न भूख लगी है ।

सुनीता : हट गंदी लड़की , जा नहा कर आ पहले

बबीता : मम्मी प्लीज न

गीता : मत देना मम्मी , ये महक रही है छीईईई

बबीता थोड़ी चिढ़ कर : तू भी तो महक रही है कुत्ती कही की

सुनीता ने एकदम से डांट लगाई बबीता को और नहाने को भेजा , फिर गीता को भी डांट दिया फिजूल उलझने के लिए

ये सब प्रकरण रंगी सुन रहा था और तभी गीता सुबकते हुए किचन से निकल गई । इधर बनवारी हाथ धुलने बाथरूम चला गया था तो उसे भनक नहीं था कि अभी अभी क्या हुआ रसोई में।

रंगी ने खाना खाया और हाथ धूल कर बाथरूम से निकल कर आया तो देखा गीता अभी भी नहीं आई , लेकिन फिर भी उसने बच्चों का झगड़ा समझकर इस बात को तूल नहीं दी और बरामदे में आगे बढ़ कर अपने कमरे की ओर जाने लगा था कि उसे एक कमरे से सिसकने की आवाज आई

रंगी ने अंदर देखा तो गीता बिस्तर पर बैठी रो रही थी और रंगी को समझ आया कि उसे मनाने वाला कोई भी था ।

तो वो खुद उसके पास चला गया

कमरे में अपने फूफा को आते देख गीता एकदम से शांत हो गई

: क्या हुआ बेटा , रो क्यों रही है उम्मम

गीता अपनी बहती आंखों से रंगी को देखा , उसे अभी भी बनवारी के कमरे में जो हुआ उसका डर था ।

रंगी उसके पास चला गया

: क्या हुआ ?

: गुड़िया ने मुझे गाली दी

: ओफ्फो तू भी न , उससे क्या हो गया इसका बुरा नहीं मानते बेटा ( रंगी अपने हाथ से उसके गालों से बहते आंसू साफ किए )

: हम्ममम , लेकिन वो ऐसे ही करती है मेरे साथ । कितना कुछ मै उसकी बातें छिपाती हूं

: कैसी बातें ?

गीता एकदम से हड़बड़ा गई और उसका हलक सूखने लगा

: कुछ नहीं ( वो अपने गाल से आंसू साफ करती हूं सीधा बैठ गई )

: क्या वो भी कुछ शरारत करती है , जैसे तू कर रही थी दादा जी के साथ ( रंगी ने अनुमान लगाया )

गीता का हलक सूखने लगा , उसकी बोलती बंद आंखे थम गई बस धड़कनें तेज थी ।

: बोल न बेटा , देख तू मुझे बताएगी तो तेरी वो बात मै किसी से नहीं कहूंगा । क्या कहते वो तुम लोग पिंकी प्रोमिस

गीता एकदम से मुस्कुरा दी ये सुनते ही

रंगी उसको मुस्कुराया देख कर खुश हुआ : ठीक है अब बताओ

गीता : प्लीज किसी को बताना मत प्लीज , नहीं तो वो करेगी मुझे

रंगी : नहीं बताऊंगा अब बोल

गीता : फूफा वो न उसके पास एक मोबाइल है जो उसको किसी ने गिफ्ट दिया है

रंगी को समझते देर नहीं लगी कि मामला gf bf वाला है : क्या , किसने ? क्या वो उससे बात करती है

गीता : हम्म्म और मिलने भी जाती है

रंगी की सांसे तेज हुई , उसे बबीता की फिक्र भी हुई : कौन है वो लड़का तू जानती है उसे

गीता : हम्ममम , हम लोग जहां सिलाई सीखने जाते है वो आंटी का लड़का है । बहुत गंदा है मै कितना समझाती हूं नहीं मानती ये ।

रंगी : अच्छा ? तो वो लड़का इसके साथ वो

गीता ने रंगी की आंखों में देखा : हम्ममम , मुझे मम्मी की कसम देकर बाहर रखवाली करवाती हैं और खुद कमरे में उसके साथ गंदी गंदी बातें करती है

रंगी : सिर्फ बातें ?

गीता थोड़ा मुस्कुराई : नहीं वो सब भी

रंगी का लंड अब विस्तार लेने लगा ये सोच कर कि हवस की कोई उम्र नहीं होती

रंगी मुस्कुरा कर : अच्छा तभी तेरा भी मन करता है और तूने अपने दादा जी के साथ उम्मम

गीता : सॉरी , अब आगे से नहीं करुंगी पक्का

रंगी : अरे मै ये नहीं कह रहा हूं , लेकिन अगर बाउजी को पता चल गया कि तू चुपके चुपके ये सब करती है तो

गीता थोड़ा डर रही थी वो राज साझा करने में जो उसके और बनवारी के बीच था । लेकिन रंगी को कुछ तो जवाब देना था

रंगी : कितनी बार किया है

गीता ने आंखे उठा कर देखा

रंगी : वही जो आज कर रही थी तू

गीता : बस दो तीन बार ,, नहीं दूसरा ही था

रंगी : तुझे अच्छा लगता है

रंगी का लंड अकड़ रहा था

गीता : पता नहीं , लेकिन गुड़िया को देखते देखते मन करने लगता है और मेरा कोई दोस्त नहीं है न

रंगी उसको दुलारते हुआ उसके पीछे से हाथ ले जाकर उसका कंधा थपथपाने लगा : अच्छा कोई बात नहीं , अभी तेरी उम्र ही क्या है बन जाएगा नहीं तो शादी के बाद हाहाहाहाहा

गीता हसने लगी

रंगी : देख कुछ भी करना लेकिन किसी ऐसे पर भरोसा मत करना जो उसके लायक न , घर की बदनामी न हो

गीता : जानती हूं फूफा , इसलिए मैने कोई दोस्ती नहीं की , पता है वो लड़का एक दिन मुझे भी खींच रहा था अपने कमरे में तो मै भाग आई

रंगी : क्या उसने तेरे साथ जबरजस्ती की

गीता : हा लेकिन मैने एक मुक्का मारा उसके पेट कर हाहाहा और भाग आई

रंगी खुश होकर : तू भी बहादुर है पूरी

गीता हसने लगी

रंगी : मेरी सोनल भी तेरे जैसी ही है बहादुर और प्यारी सी

गीता : लेकिन आप उनका नाम लेकर वो सब क्यों कर रहे थे

रंगी थोड़ा असहज हो गया : तूने सब सुना था क्या

गीता खिलखिलाई : हम्म्म, आप बोल ही इतना तेज रहे थे

रंगी चुप था

गीता : सोनल दीदी अच्छी है भी

रही समझ गया गीता उसे चढ़ा रही है : मजे ले रही है अब मेरे, बदमाश कही की

गीता खिलखिलाई : नहीं सच में, कितनी गोरी है और सुंदर भी तभी तो जीजू ने उन्हें पसंद किया था ।

रंगी : हा वो तो है

गीता : आप उनको चाहते हो न

रंगी मुस्कुरा कर : हर बाप अपनी बेटी को चाहता है

गीता : नहीं वो वाला , जिसमें सब कुछ कर लेते है

रंगी हस कर : हा , लेकिन क्या फायदा

गीता : क्यों अगर आप मेरी मम्मी को पटा सकते हो तो उन्हें क्यों नहीं

रंगी एकदम से चौका : क्या ? ये क्या कह रही है तू

गीता थोड़ी पीछे होकर मुस्कुराई : मैने तो रात में ही देखा था आपको मम्मी के कमरे से निकलते हुए और रात भी आपकी आवाजें तेज थी हीही

रंगी थूक गटकने लगा : देख ये सब किसी को कहना मत , तू जो कहेगी सब दिलाऊंगा

गीता : पक्का न

रंगी : हा पक्का

गीता ने धीरे से उसके पेंट पर हाथ रख : मुझे ये चाहिए , बस देखना है






रंगी का हलक सूखने लगा और गीता के नरम हथेली के नीचे पेंट के अंदर से उसका लंड झटके देने लगा

गीता मुस्कुराई और उसका लंड पकड़ लिया

रंगी आंखे बंद कर सिहर उठा : सीईईई अह्ह्ह्ह मीठी बेटा, क्या कर रही है ये गलत बात है ओह्ह्ह्ह

गीता उसके लंड को छूती हूं : पर मुझे अच्छा लगता है, यहां पर गुदगुदी होती है

रंगी मदहोश भरी नजरो से उसे देखा : कहा पर

गीता ने उंगली से अपने रसीले मम्में पर इशारा किया

रंगी ने उसके टीशर्ट में बड़े बड़े रसीले मम्में देखे बिना ब्रा के उसके निप्पल उभरे हुए थे






और रंगी तुरत हाथ बढ़ा कर उसका उसका एक दूध पकड़ लिया

रंगी सिहर कर : उफ्फ बेटा कितना बड़ा हैं तेरा दूध

गीता एकदम से मदहोश ही गई रंगी के हाथ का स्पर्श पाकर उसके रंगी के पंजे को पकड़ कर अपनी चुची को दबाया और दूसरे हाथ से उसका लंड सहलाने लगी

गीता : फूफा मेरे दूध पर क़िस्सी करो न

रंगी ने उसको पकड़ कर अपने ऊपर बिठा दिया और वो अपने गाड़ को रंगी के लंड पर मथने लगी और रंगी ने उसके दोनों नारियल जैसे दूध पकड़ कर सहलाने लगा टीशर्ट के ऊपर से काटने लगा

एकदम से गीता ने टीशर्ट ऊपर किया और उसकी नंगी चूचियां रंगीलाल के सामने थी

वो मुलायम कोरेपन का अहसास और मोटी मोटी चूचियों के भारीपन पर उसके हथेली में अहसास रंगी का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा और उसके मुंह में पानी आने लगा






एकदम से अपने होठ उसके रसीले मम्में के मटर के दाने जितने निप्पल पर लगाए और गीता सिसक पड़ी , उसने रंगी का सर अपने सीने से दबा दिया और रंगी उसके निपल चुबला रहा था

इतना नरम और मादक अहसास था

गीता उसके लंड पर अपनी बुर घिस रही थी और रंगी के सर को अपने सीने से लगा रही थी और रंगी उसके दोनों रसीले मम्में को पकड़ कर उसके निप्पल के पास जीभ फिरा रहा था






गीता सिसकियां ले रही थी कि एकदम से दोनों चौक तब गए तब कमरे में सुनीता आ धमकी

और एक आवाज से गीता को डांटती हुई । थप्पड़ लगा कर रंगी से अलग किया और वो बाहर खदेड़ दिया ।

सुनीता : छीईईई आप इतने गिरे हुए हैं कि अपनी हवस में मेरी बच्ची को शामिल कर लिया

रंगी : ओहो मेरी जान , तू समझ नहीं रही हो वो इतनी भी छोटी नहीं है अब

सुनीता : कुछ भी हो लेकिन ये गलत किया है आपने , हुंह

भूनक कर वो ताव दिखा कर जाने लगी थी कि रंगी बोल पड़ा: उसे पता चल गया है हमारे बारे में

सुनीता के पैर थम गए और उसने अपने गुस्से का घूंट पी लिया

रंगी चल कर : हा उसे पता चल गया था हमारे बारे में , फिर आज सुबह मैने उसे बाउजी के कमरे में .....

रंगी ने बताया कि कैसे उसने गीता को पकड़ा और फिर जब रसोई से भाग कर आई तो रो रही थी । उसे मनाने गया और बाते इस कदर बढ़ गई कि ये सब हो गया ।

रंगी ने सोनल और बबीता का जिक्र नहीं किया

रंगी एक गहरी सांस लेते हुए : यकीन करो मेरा , मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था ये उसकी ही पहल थी ।

सुनीता उदास हो गई : बहुत बिगड़ गई है वो , मुझे तो उसने कल रात ही बताया था हमारे बारे में लेकिन खोद खोद इतने सवाल पूछ रही थी कि गुस्से में मैने बबीता की जगह उसे भी डांट दिया ।

रंगी : कुछ नहीं बिगड़ी है अभी, उसे जरूरत है एक दोस्त की जो उसे सही गलत समझाए । अगर तुम उसकी सहेली नहीं बनोगी तो शायद वो बाहर से चीजें सीखेगी । ये उम्र ही ऐसी है या फिर उसकी शादी करा दो

सुनीता एकदम से डर गई : क्या शादी , नहीं नहीं मै उसे समझाऊंगी लेकिन अभी उसकी उम्र क्या है ।

रंगी उसको पीछे से पकड़ कर : तो बात करो उससे , समझाओ फिर मै तुम्हे समझाता हूं ।

रंगी के हाथ पीछे से सुनीता के दूध की ओर बढ़ने लगे कि उन्हें झटक कर अलग हुई : धत्त मौका मिला नहीं कि शुरू हो जाते हो, मै जा रही हूं उनको खाना देने

रंगी हस कर : सिर्फ खाना ही देना

सुनीता मुस्कुरा कर निकल गई और रंगी लाल अपने कमरे में चला गया

चमनपुरा

काफी दिनों बाद आज संडे के दिन अनुज अपनी मां के साथ दुकान पर था और ग्राहक भी अच्छी खासी थी ।

आज वो लोग नए समानों की लिस्ट भी तैयार कर रहे थे और दुकान में समान भी सेट कर रहे थे ।

ऐसे में एक मोटी औरत आई , उसके साड़ी और सूती ब्लाउज में ठूंसे हुए चूचे देख कर अनुज की लार टपकने लगी ।






उसकी नजर उस औरत के उठे हुए चौड़े चूतड़ों पर , और पेट भी निकला था । हालांकि कि वो थोड़ी नाटी थी कद में लेकिन उसके बड़े बड़े थन जैसे चूचे किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच लेते ।

रागिनी उसे देख कर अचरज से एक नजर अनुज को देखा और अनुज ने ऐसे जताया कि वो देख नहीं रहा है उस औरत को और वो काम लग गया ।

: जी बहन जी कहिए क्या चाहिए ?

वो औरत थोड़ा असहज हो रही थी और बार बार अनुज को देख रही थी

रागिनी समझ गई और उसने कुछ समान लेने का बहाना करके अनुज को ओर भेज दिया

अनुज भी समझ रहा था और वो दुकान में ही लगे जीने से होकर ऊपर गए लेकिन फिर दबे पाव जीने की सीढ़ियों पर दिवाल की ओट में छिपा हुआ उसकी बाते सुनने लगा

रागिनी : अब कहिए

वो औरत : बालसफा मिलेगा क्या ? वो टिकिया वाली

रागिनी मुस्कुरा कर : नहीं बहन जी वो टिकिया वाली अब नहीं आती , दूसरी दे दूं ये देखिए ये क्रीम वाली है । बस लगाइए और हल्का गर्म पानी से धूल लीजिए

वो औरत थोड़ा हिचक कर : इससे खुजली तो नहीं होगी न

रागिनी : उम्हू बिल्कुल भी नहीं , मै भी यही इस्तेमाल करती हूं , अब हर जगह रेजर भी तो नहीं जा सकता न और फिर उनके अपने ही शौक

वो औरत खिलखिलाई : सच कहा दीदी आपने , उन्हें तो जगह एकदम साफ चिकना चाहिए , अरे मेहनत हमारी लगती है न हाहाहा

रागिनी हंसती हुई : वैसे मैने कही देखा है आपको

वो थोड़ी असहज होकर : हा वो मै आपकी सहेली विमला की देवरानी हु अनीता

विमला की जेठानी का ख्याल आते ही रागिनी ने अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाए और उसे याद आया कि बीते साल तो अनीता के पति ने बिस्तर पर आ गया था , जब वो विमला का मैटर हुआ था।

रागिनी कुछ सोच रही थी और अनीता बोल पड़ी : माफ करना बहन , मुझसे बहुत बड़ी गलती तब हुई और अगर आपका बड़ा बेटा राज न आता शायद हम सड़कों पर होते ।

रागिनी मुस्कुरा कर : कोई बात नहीं , हम किसी को उसके अतीत से तौला नहीं करते , आइए बैठिए

रागिनी उसे कमरे में ले गई : और बताइए भाई साहब कैसे उनकी तबियत कैसी है ?

अनिता एकदम से चुप हो गई

रागिनी ने उसका हाथ पकड़ कर : क्या हुआ बोलिए न

अनिता थोड़ी रुआंसी होकर : दरअसल अब मेरे पति की दिमागी स्थिति ठीक नहीं है और हमने उन्हें बड़े शहर के ****** मानसिक आश्रम में रखा है और वही उनका इलाज होता है ।

रागिनी को अचरज : माफ कीजियेगा, मुझे पता नहीं था और कई महीने से विमला से भी बात नहीं हो पाई

अनिता : कोई बात नहीं दीदी , अब जो हुआ सो हुआ । शायद ये हमारी ही करनी का फल है ।

रागिनी : अच्छा ठीक है लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा है कि फिर आप ये किसके ?

अनिता थोड़ा शर्मिंदा हुई और मुस्कुराने लगी : अब स्थिति जैसी भी हो दीदी , इन सब का शौक कहा खत्म होने वाला है । जरूरत तो आप भी समझती होंगी

ये सब बाते सुनकर अनुज का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा

रागिनी मुस्कुरा कर : वैसे पूछना नहीं चाहिए लेकिन ... हीही

अनिता थोड़ा मुस्कुरा कर : समझ रही हूं आपके मन की बात , वो मेरे देवर है न सुरेश वो आए हुए है दिल्ली से ।

रागिनी मुस्कुरा कर : ओह्ह्ह फिर ठीक है , लेकिन घर में बच्चों का ध्यान रखियेगा

अनिता : हा समझती हूं अब क्या करु और दूसरी जगह भी तो नहीं है हमारे पास , बड़ी मुश्किल होती है ।

रागिनी मुस्कुरा कर कुछ सोचने लगी : देखिए बात अगर सिर्फ दिन की रहती तो मै मैनेज कर देती लेकिन रात में थोड़ा मुश्किल है

अनीता : वो भी चलेगा

रागिनी उसका उतावलापन देख कर मुस्कुराई : अरे , हीहीहीही अच्छा चलिए ठीक है करती हूं कुछ

अनीता खुश होकर : अगर आप कहो तो उन्हें बुला लूं

रागिनी चौकी और उसको हसी भी आई : अरे ऐसे एकदम से कैसे ? , मेरा मतलब यहां नहीं चौराहे वाले घर पर

अनीता: ओह्ह्ह लेकिन वहा कोई होगा नहीं

रागिनी : ऊहू तभी न कह रही हूं , और राज के पापा भी बाहर है

अनिता थोड़ी सोचने लगी तो रागिनी मुस्कुरा कर : आप फिकर मत कीजिए मै अनुज को भेज दूंगी वो घर खोल देगा

अनिता थोड़ी परेशान होकर : लेकिन वो रहेगा कहां ?

रागिनी : आप परेशान मत होइए वो बहुत समझदार है और मै उसे समझा दूंगी क्या करना है ओके

अनिता : ओह फिर ठीक है, लेकिन प्लीज आप ये किसी से ....

रागिनी हस कर : क्या तुम भी अरे तुम मेरे लिए विमला से कम हो क्या । मै अनुज को बुलाती हूं और फिर वही चौराहे पर ही आने देवर को बुला लेना ।

फिर रागिनी अनुज को आवाज देती है 3 से 4 बार में वो नीचे आता है अपन लंड सेट करता हुआ

: हा मम्मी

: बेटा , ये आंटी न तेरी विमला मौसी की रिश्तेदार है और इनके घर की चाबी इनके पति लेकर चले गए है ।

अनुज उनको नमस्ते किया और अनीता मुस्कुराई

रागिनी : इनकी थोड़ी तबीयत ठीक है और ये आराम करना चाहती है तो तू इन्हें चौराहे वाले घर लेकर चला जा , गेस्ट रूम में बिस्तर लगा देना । एक दो घंटे में इनके हसबैंड आ जाएंगे तो चली जाएंगी ।

अनुज : और मै क्या करूंगा

रागिनी : तू अपने कमरे में अपनी बोर्ड की पढ़ाई कर लेना न बेटा

अनुज : जी मम्मी , ठीक है

रागिनी खुश होकर : मेरा बेटा , ले ये चाबी , जाइए बहन जी

अनिता ने मुस्कुरा कर उसका धन्यवाद किया और दोनों निकल गए ई-रिक्शा से चौराहे वाले घर के लिए

अनुज को थोड़ा अजीब लग रहा था । अनिता उसके लिए पूरी तरह से अनजान थी और उसे समझ नहीं आ रहा था भला उसकी मां को इसमें क्या रस है कि दो वासना के भूखे अपनी प्यास बुझा लेंगे इसके लिए वो इंतजाम कर रही है ।

घर पहुंचने के बाद अनुज ने दरवाजा खोला और वो अंदर चले गए , उसने गेस्ट रूम खोलकर वहा बिस्तर लगा दिया

: अब आप आराम कर लो आंटी, मै ऊपर कमरे में हूं कुछ चाहिए होगा तो बताना

: अच्छा ठीक है बेटा और वो बाथरूम ?

अनुज ने अपनी मां के कमरे की इशारा किया और फिर चुपचाप ऊपर चला गया ।

हालांकि उसकी हालत खराब थी , जिस तरह की उसने अपनी मां और अनीता के बीच की बाते सुनी थी उससे उसके भीतर अलग ही खलबली मची थी ।

कुछ देर तक अनुज किताबें लेकर बैठा रहा ऊपर वाले हाल में जबतक कि उसके कानो में कुछ खिलखिलाहट नहीं सुनाई दी और उसका लंड एकदम से झटके देने लगा ।

वो लपक कर जीने की ओर आया उन रेलिंग के गैप से सीढ़ियों पर बैठ कर हाल में देखा तो उसका लंड उसके पैंट में झटके खाने लगा

" उम्ममम धत्त यहां नहीं , सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम आराम से मेरे राजा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह " , अनिता सिसकियां ले रही थी और उसका देवर उसकी मोटी मोटी चूचियां पीछे से पकड़ कर मिज रह था

" ओह मेरी चुदक्कड़ रानी तेरी ये मोटी मोटी चूचियों को मसले कितना समय ही गया , ओह्ह्ह सीईईई मेरी जान कितनी मुलायम चुची है तेरी ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह "

" अह्ह्ह्ह मेरे राजा निकाल के रगडो न उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह "

एकदम से अनीता ने देवर ने उसे सोफे पर लिटा दिया और उसका ब्लाउज खोलने लगा और ब्रा के ऊपर से उसकी मोटी मोटी चूचियां पकड़ कर मिजने लगा और अनीता को चूमने लगा






ये सब देख कर अनुज का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा और वो अपना लंड मिजने लगा

अनिता और उसका देवर दोनों हवस की आग में जल रहे थे और उसके देवर ने उसकी मोटी मोटी खरबूजे जैसे चूचे को निकाल कर मुंह में भर लिया और चूसने लगा






अनिता सिसकारियां लेने लगी , उसे इस बात का जरा भी डर नहीं था कि घर में एक छोटा बच्चा भी है और वो मस्ती में झूमने लगी ।

इधर उसके देवर ने उसकी चूचियों को बारी बारी से पीते हुए उसकी साड़ी निकाल दी और पेटीकोट समेटते हुए अपना लंड निकाल और सीधा अंदर पेल दिया

: ओह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है हथियार तुम्हारा सीई ओह्ह्ह्ह और डालो उम्मम कितना तड़पती हूं घर में लेकिन ले नहीं पाती ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

: उफ्फ मेरी रंडी भाभी तेरी चूत कितनी फूली है ओह्ह्ह कितनी रात तेरे नाम की मूठ लगाई मैने ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितना रस बह रहा है ओह्ह्ह्ह






: हा मेरे राजा मै भी तो कितनी तड़पी हुई इस लंड के लिए ओह्ह्ह्ह और डालो उम्मम अह्ह्ह्ह्ह चोदो मुझे ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह्ह

उसका देवर ताबड़तोड़ चोदने लगा अनिता के ऊपर चढ़ कर और फिर उसके मुंह पर लंड लेकर झड़ने लगा

अनिता ने उसका एक एक बूंद निचोड़ लिया और इधर अनुज की पेंट भी गीली हो गई अंडरवियर सहित

अनिता: अब तो चलो कमरे में

सुरेश उसका देवर उसको पकड़ कर अपनी गोद में वैसे ही उठा लिया और गेस्ट रूम में ले जाकर दरवाजा लगा दिया

कुछ मिनट बाद वापस से सिसकियां उठने लगी और अनुज वहां से उठ कर अपने कमरे में चला गया ।

उससे एक गलती हो गई थी , मुठियाते हुए उसे ध्यान नहीं रहा और वो पेंट में ही झड़ गया और अब उसे बदलना था लेकिन समस्या थी कि वो इसे धुलेगा कैसे ? नीचे मम्मी के कमरे में गए और अनीता आंटी आ गई तो

उसने अपना पेंट बदला और वो अंदर वियर और पेंट लेकर धीरे से अपनी मां के कमरे में गया और बाल्टी के डाल दिया कि शाम को जब उसकी मां रागिनी खाना बनाएगी तो उसी बहाने वो अपनी पेंट धूल लेगा ।

फिर वो वापस अपने कमरे में लौट आया और तबतक वही रहा जबतक उसे अनिता के पायलों की आहट नहीं मिली

अनिता उसके पास आई : बेटा चले तुम्हारे अंकल आ गए है

अनुज : जी ठीक है आंटी चलो

और अनुज लाली की नोट्स लेकर घर बंद करके निकल गया मार्केट की ओर ।

जारी रहेगी
 
थे वाइल्ड NEW YEAR PARTY

बहुत जल्द आने वाला

:rock1:



हिलाने के लिए रेडी हो जाओ :jerker:







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वरना मुझे जब लिखना होगा मै लिखूंगा ही अपने लिए 😁
 
💥 अध्याय : 02 💥

UPDATE 021


THE EROTIC SUNDAY 05

चमनपुरा

राज अपने पापा की दुकान पर बैठा हुआ था और ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर कुछ सर्च कर रहा था । और जब उसे उसकी मनपसंद चीज मिल गई उसने सीधा वसु को मैसेज किया

: hyy jaanu 😜

कुछ देर बाद ही वसु का रिप्लाई आया

: jaanu ke bchche , bahut maar padegi.. ye sb kya hai

( वसु का इशारा बीते रात फॉरवर्ड किए हुए फोटोज और वीडियो को लेकर था )

: 🤭🤭 mujhe laga apse delete ho jayega itni important photos videos hai to maine unhe apne paas safe rakh liya , ek private folder me

: kya ? Dhtt Badmash delete kro use

: Naa baba ye paap mujhse nhi ho payega 🤣🤣

: waise kroge kya un sb ka ?

: wahi jo har mard krta hai 🤪 chhipa kr dekhna

: dhtt ganda , marungi ye sb kiya to

: to kya sbke samne dekhu ?

: hey bhagwan tum n ...

: bahut samrt hun n

: nahi bahut shararati ho

: jaisa bhi hun apka hi dewar hu bhabhi 🤣🤣🤣

: pagal kahi ke , aur kya ho rha hai 😁

: kuch nhi bas apni janu ke liye shopping wishlist kar rha hun

: oho sach me , dikhana to jara ? ( वसु से रिप्लाई किया )

राज ने फौरन एक प्रोडक्ट लिंक को उसके व्हाट्सअप पर शेयर किया और लिंक खोलने के बाद उसका मैसेज आया

: oho not bad ? Nice choice

: to order kar dun apke liye ?

: kya ? Mere liye ? ( वो चौक कर बोली )

: Toh aur kon hai meri jaanu ? 🙄

: Dhtt nhi , ab jyada ho rhaa h , jaao kam dekho badmaash kahi ke 😁😁😁 bade aaye mujhe bra panty dilane wale

: Apka personal faishon designer hun , itna to khyal rakhna pdega n ?

: Tum ab chup kro , mujhe kaam hai , baad me bat krte hai bye

वो चली गई और राज हंसने लगा क्योंकि उसे पता था कि अभी भी तो शाम में जब संजीव अंकल अपने बिजनेस ट्रिप के लिए निकल जाएंगे तो वसु को उससे बात करने के सिवा और कोई चारा नहीं होगा ।

तभी उसे चंदू का काल आया और राज सुबह ही भड़का हुआ था

फोन पर

: हा भौंक ?

: सॉरी भाई , गलती हो गई कुछ कर न , ये संजीव ठाकुर आज ही गाड़ी तैयार करवा रहा है लग रहा है पक्का आज जाएंगे ये लोग

: तो क्या मै झूठ बोल रहा था , साले तुझे मुझ पर कभी भरोसा हुआ है एक लड़की के लिए अपने भाई से भरोसा तोड़ दिया

: अब माफ भी कर दे न

: ठीक ठीक है , कहा है तूं

: काम पर हूं भाई , शाम को आऊ दुकान पर

: ठीक है आजा लेकिन तब तक कोई बकचोदी नहीं जो हो रहा है होने दे।

: ठीक है भाई ( वो रुआंस होकर बोला )

और फिर राज ने फोन काट दिया ।

वही दूसरी ओर अनुज अनीता के साथ दुकान पर आया और उसकी मां और अनीता बातें कर रहे थे , अनुज समझ रहा था कि क्या बाते होंगी इसीलिए वो रागिनी को बोलकर निकल गया लाली के घर ...

आज उसने लाली को बताया नहीं था कि वो उसके घर आ रहा है ।

दोपहर के 2 बज रहे थे

लाली का घर चूंकि रिहायशी इलाके में था और बाजार से दूर था तो उसके मुहल्ले में सन्नाटा था इस वक्त भी ।

लाली के घर जाते ही आज अनुज ने देखा कि उसके घर की पार्किंग में दो गाड़िया खड़ी थी , ये गाड़ी तो उसने पिछली बार देखी थी जब उसने लाली की मम्मी को देखा था और ये दूसरी गाड़ी देख कर अनुज को शंका हुई कि कही लाली के पापा तो घर नहीं आए ?

अंदर से फट कर चार सी गई थी उसकी , हालांकि उसके घर में लाली की मम्मी और दीदी उसे अच्छे से जानती और समझती थी तो डर की गुंजाइश कम थी , लेकिन पता नहीं कैसा व्यवहार होगा उसके बाप का ।

फिर वो हिम्मत कर अंदर चला गया

हाल एकदम से सनासन खाली और चुप , कही कुछ भी चहल नहीं बस एक चुप्पी सी थी

थोड़ी हिम्मत कर हल्के आवाज में अनुज ने इधर उधर देख लाली को आवाज दी

लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं होता देख उसने सोचा था क्यों न उसके कमरे की ओर चला जाए

वो उस ओर बढ़ ही रहा था कि उसके ध्यान में उसकी मिस जी का ख्याल आया

आखिरी बार क्या दर्शन हुए थे और वो उनके नर्म गोरे चूतड़ों को याद कर अपना लंड मसलने को मजबूर हो गया ।

वो दबे पाव उस ओर बढ़ा और लाली की दीदी के कमरे के दरवाजे के पास जाकर रुक गया

कमरे में देखा तो लाली की दीदी बिस्तर पर लेटे हुए थी पेट के बल होकर और मोबाइल चला रही थी






वो इस वक्त टीशर्ट और लोवर में ही थी

उसके बड़े बड़े रसीले मम्में बिस्तर पर दबे हुए और पीछे चूतड़ हवा में उठे हुए थे

वो मैसेज करते हुए मुस्कुरा रही थी और एकदम से काल आया

उसने काल उठाया

: हम्ममम , मैसेज कर तो रही हूं न ( वो थोड़ा शर्मा रही थी )

फिर वो उधर की बात सुनने लगी

: ऊहू आप मुझे तंग मत करो , यार बच्चों के एग्जाम आने वाले है मुझे टेस्ट के लिए पेपर सेट तैयार करवाने मै ऐसे नहीं आ पाऊंगी

फिर कुछ देर की चुप्पी

: अच्छा ठीक है मै देखती हूं लेकिन ज्यादा से ज्यादा 2 दिन और नहीं ओके

" ओह तो मिस जी की अपनी सेटिंग है , साली तभी तो ये इतना गदराई है उम्मम कोई रगड़ के पेल रहा है इनको "

अनुज मुस्कुरा कर अपने मन में बड़बड़ाता हुआ निकल गया लाली के कमरे की ओर और वहां उसने उसकी आवाज दी , लेकिन वहां भी वो उसे नहीं दिखी

तो वापस हाल में आया

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें ?

तभी उसकी नजर ऊपर जीने से होकर दिख रहे कमरों पर गई , पिछली बार लाली ने बताया था कि उसके मम्मी पापा के कमरे ऊपर है ।

हिम्मत तो नहीं हो पा रही थी लेकिन फिर भी लाली को खोजना था और वो उसकी दीदी की बातें सुनकर उन्हें तो डिस्टर्ब करना नहीं चाहता था ।

उसे नोट्स भी लेने ही थे ।

इसीलिए वो ऊपर चला गया

दो कमरे खोजने के बाद आखिर के कमरे के बाहर आकर जैसे ही उसने अंदर देखा उसकी आंखे सन्न हो गई

वो जम सा गया अपनी जगह , कमरे का दरवाजा खुला था और उस बड़े से कमरे में अनुज ने लाली की मां को देखा लाल रंग की ब्रा पैंटी में सेक्सी लुक के साथ , उनके पीछे उसके पापा खड़े थे , किसी हैंडसम हंक जैसे






पीछे से लाली की मां के बड़े बड़े रसीले मम्में को हाथों से सहला रहे थे उसके ब्रा के ऊपर से और बहुत ही धीरे धीरे कुछ लाली की मां के कानों में फुसफुसा रहे थे और लाली की मां कसमसा रही थी

देखते ही देखते लाली के पापा ने उसकी मां के ब्रा कंधे से सरका कर नीच कर दिए और उसकी आजाद मोटी रसीली छातियो को हाथों में भर कर मसलने लगे

लाली की मां आंखे बंद सिसकने लगी और अपने चूतड़ पीछे लाली के पापा के लंड पर पेंट के ऊपर से रगड़ने लगी

तभी कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना खुद अनुज ने कभी नहीं की थी

लाली के मम्मी पापा पूरी तरह से मदहोश थे और ऐसे में लाली के पापा ने उसकी मां के कान में कुछ कहा और वो अपनी नशीली आंखों से सामने देखा

कि एकदम से कमरे में उसकी ओर एक दूसरा आदमी चल आया और लाली की मां उस दूसरे मस्कूलर आदमी जिसमें काले रंग की शर्ट पहनी थी उसके चौड़े सीने को शर्ट के ऊपर से छूते हुए उसके दूसरे आदमी के लिप्स से अपने लिप्स जोड़ कर चूसने लगी






" ओह बहिन चोद, ये क्या चल रहा है इस घर में सीईईई अगर पहले पापा लाली का बाप था तो ये दूसरा कौन है " , अनुज अपना लंड मसल कर अंदर का कामुक नजारा अपनी आंखों से देख रहा था और अब तो उसे कन्फ्यूजन लग रहा था कि असल में दोनों में से लाली का पापा कौन है । या फिर कोई भी नहीं । लेकिन उसने पहले कभी उसने लाली के पापा को देखा तो नहीं था ।





वही कमरे में लाली की मां उस दूसरे आदमी को डिप्ली किस कर रही थी और वो आदमी सामने से उसके रसीले मम्में हाथों में भर कर मसलने लगा था और वो पहला आदमी जिसे अनुज ने देखा था वो पीछे से लाली की मां के नंगे चूतड़ों को पैंटी के ऊपर सहलाने लगा था ।

फिर लाली की मां ने घूम कर उस पहले आदमी को भी चूमने लगी

दोनों आदमी लाली की मां के नंगे चूचों को पकड़ कर सहला रहे थे आगे से और

फिर एकदम से लाली की मां नीचे बैठ कर उस पहले आदमी के खड़े लंड को उसके पेंट के ऊपर से सहलाने लगी

और देखते देखते ही लाली की मां ने उसका लंड निकाल दिया






बड़ा सा लंबा सा लंड जिसे देख कर अनुज की आंखे फेल गई , ऐसा कुछ तो उसने फिल्मों में देखा था और उसका लंड उस नजारे को देख कर फड़कने लगा जब लाली की मां उस बड़े से लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू दिया और वो दूसरा आदमी लाली की मां के सर को उस लंड पर धकेल रहा था





जिससे लाली की मां उस लंड को गले तक ले जाने लगी

: उफ्फ आंटी कितना मस्त चूस रही हो ओह्ह्ह्ह उम्ममम सीईईई

फिर उसने दूसरे आदमी का लंड भी पकड़ कर टटोलने लगी और उसका भी लंड निकाल कर मुंह में ले लिया

उन्होंने दूसरे आदमी का लंड पूरा गले तक उतार लिया था






: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् ओह्ह्ह्ह कितना डीप उम्मम सीईईई





फिर वो बारी बारी से दोनों का लंड चूसने लगी , जिसे देख आकर अनुज अपना लंड पेंट के ऊपर से मसलने लगा

उसका लंड अकड़ कर रॉड सा कड़क हो गया था और वही लाली की मां दोनों बड़े बड़े बेलन जैसे लंड को पकड़ कर दोनो का सुपाड़ा एक साथ जीभ से चाट रही थी






अनुज वो नजारा आंखों में बंद कर कल्पनाओं में डूबता हुआ अपना लंड पेंट के ऊपर से भींच कर सिहरा था कि एकदम से किसी ने उसके कंधे को थपथपाया

एक पल को जैसे ही रूह उसके गाड़ से निकल गई हो , जब उसने घूम कर सामने लाली को देखा

अनुज कुछ रिएक्ट करता उसके पहले लाली ने मुंह पर उंगली रख कर चुप रहने का इशारा किया और अपने साथ नीचे लेकर आ गई

वो चुप चाप उसे अपने कमरे में ले आई

: तुम यहां क्या कर रहे हो ?

: सो,,सॉरी यार मै तो ये नोट्स देने आया था और मैने तो तुम्हे आवाज भी दी

: हा वो मै बाथरूम में थी जब तुम कमरे में आए और मुझे आवाज दी । लेकिन तुम्हे ऊपर नहीं जाना चाहिए था

: सॉरी , मुझे नहीं पता था

लाली एकदम से चुप थी और अनुज भी हैरान था कि अभी जो कुछ भी हुआ वो सही तो नहीं था ।

: वो उनकी लाइफ है अनुज , मै या दीदी इसमें कोई दखल नहीं करते ( कुछ देर शांत रहने के बाद वो बोली और फिर वो सर पकड़ कर बिस्तर के किनारे बैठ गई )

अनुज समझ रहा था जो कुछ भी हुआ उसके लिए लाली बहुत शर्मिंदा हो रही है और वो उसके पास आ गया

: पता नहीं मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मै तुमसे क्या कहूं , लेकिन मेरा भरोसा करो मै तुम्हे तुम्हारे पैरेंट्स के लिए जज नहीं कर रहा हूं

बड़ी उम्मीद भरी नजरो से लाली ने अनुज को देखा , अनुज का दिल धड़कने लगा जब उसकी आंखे लाली से टकराई और लाली ने भी अनुज की बेचैनी समझ रही थी

: थैंक यू ( एक फीकी मुस्कुराहट से उसने अनुज को देखा )

अनुज को डर सा लग रहा था लाली के प्यार भरी नजरो से , उसका दिल बेचैन था , पेट में अजीब सा कुछ हो रहा था और लाली थोड़ा सा आगे आई उसके करीब और दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखा

दोनों के होठ सूखने लगे और थोड़े खुल गए थे , मन ही मन दोनों आगे बढ़ना चाहते थे और लाली थोड़ा और आगे झुकी । दोनों के लब थोड़े ही फासले पर थे और दोनों एक दूसरे की गर्म सांसे महसूस कर रहे थे ।

लाली ने अपनी आंखे बंद कर अनुज को इजाजत दे दी थी और अनुज ने बस उसे देखा और उसके होठों को चूमने के बजाय उसके होठों के पास बाई तरफ किस करके पीछे हो गया

लाली थोड़ा शर्म से मुस्कुरा उठी और आंखे उठा कर देखा तो अनुज थोड़ा शर्मा रहा था आंखे नीचे किए हुए

: तुम कल रात ऑनलाइन नहीं आए , मै वेट कर रही थी

: सॉरी वो , भैया पार्टी में गया था तो डाटा नहीं था मेरे पास

: ओह्ह्ह , आज आओगे ?

अनुज ने इस बारे में सोचा और उसे अपनी मां का ख्याल आया कल रात की मस्ती और आज सुबह के कामुक अहसास फिर अनीता को लेकर उसको अपनी मां से बात करनी थी ।

: पता नहीं, कोशिश करूंगा । मुझे नोट्स देदो मुझे जाना है

लाली मुस्कुरा कर : ओके

लाली खुश होकर खड़ी हुई और अपने नोट्स निकाल कर लाई : हम्ममम ये लो

अनुज मुस्कुरा कर उसे देखता हुआ : थैंक यू , मै जल्दी लौटा दूंगा

लाली हस कर : ओके

अनुज : ओके तो मै जाऊ

लाली मुस्कुरा कर : हम्ममम ठीक ( तभी कुछ आहट उसे मिली और वो एकदम से हड़बड़ा गई ) नहीं ठीक है... तुम अभी नहीं जा सकते

अनुज भी उसे बेचैन देख कर परेशान होने लगा : क , क्या हुआ

लाली : अरे वो पूजा आ रही है ,तुम प्लीज थोड़ी देर बाथरूम में रुकोगे प्लीज प्लीज

अनुज बिना कुछ बोले मान गया और बाथरूम में चला गया

अंदर आते ही उसकी नजरे बाथरूम के हैंगर में टंगी लाली की ब्रा पैंटी पर गई

उफ्फ उसके ब्रा पैंटी के ब्रांड देख कर ही अनुज ने ताज्जुब किया और असहज हो गया ।

वो उन्हें छुना चाहता था कि एकदम से बाहर कमरे से आती कुछ आवाज ने उस ओर उसका ध्यान खींचा

: कैसी हो मेरी जान , सॉरी मै लेट हो गई उम्ममम

: पूजा यार अभी नहीं प्लीज

: कमिनी तेरे नखरे बढ़ गए है , देख अब और मै नहीं रोक पाऊंगी खुद को सीईईई ( पूजा की आवाज अनुज पहचान रहा था लेकिन कमरे का नजारा क्या है वो देखने के लिए उसकी तलब बढ़ने लगी ) तूने खुद बुलाया है तो उम्ममम अह्ह्ह्ह

: उम्मम पूजा मत कर रुक्क्क उम्ममम अह्ह्ह्ह हम्ममम

एकदम से चुप्पी सी छा गई बाहर और हौले से अनुज ने हिम्मत कर बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो उसकी आंखे बड़ी हो गई और उसका गला सूखना शुरू हो गया






कमरे में पूजा ने लाली को खड़े होकर कर अपनी बाहों के भर रखा था और उसके लिप्स चूस रही थी , दोनो एक दूसरे के लिए इतनी उतावली थी ,साफ था कि ये उनका पहली बार नहीं था । लेकिन अनुज को इसकी उम्मीद तो नहीं थी

लाली ने एकदम से किस तोड़ा और हांफते हुए : प्लीज पूजा तू जा , मै फोन करती हूं तुझे , पापा आए है

पूजा : और आंटी ? वो है क्या ?

लाली एकदम से घबराई : नहीं पूजा ऊपर नहीं जाएगी तू , दोनो किसी मीटिंग में बिजी है

पूजा : अच्छा ठीक है लेकिन आज रात मै यही रुकने वाली हूं स्टडी के लिए

खिलखिला कर पूजा ने लाली के गाल चूम कर निकल गई

और अनुज ने वापस बाथरूम का दरवाजा लगा दिया ।

कुछ देर बाद लाली ने दरवाजा खटखटाया और अनुज बाहर आया

खुद से असहज और लाली भी नजरे चुरा रही थी

लाली कुछ सफाई देना चाहती थी लेकिन अनुज की हिम्मत नहीं थी कुछ नए झटके झेलने के लिए , आज के लिए उसने बहुत कुछ सहन कर लिया शायद

: मुझे लेट हो रहा है , बाय

लाली का दिल उसे रोकना चाह रहा था मगर वो हिम्मत नहीं कर पाई , वो अनुज को कुछ कहना चाह रही थी लेकिन बोल नहीं पाई , रह गए तो उसके आंखों में आंसू और उससे दूर जाता हुआ अनुज का ख्याल ।

शिला के घर

अरुण रज्जो के साथ सुबह का नाश्ता करके अपने कोचिंग क्लास के लिए निकल गया था । अक्सर रविवार की सुबह में कम्मो और शिला गांव वाले घर पर अपने सास ससुर के पास जाती है

ताकि वहां पर साफ सफाई और थोड़ा उनके खाने पीने का भी देख सुन सकें । हालांकि उनकी नौकरानी मीना वैसे तो देख सुन लेती थी लेकिन फिलहाल वो छुट्टी पर थी तो उन्हें जाना ही था ।

ये उनका फिक्स रूटीन था

लेकिन आज रामसिंह और मानसिंह ने अपने रूटीन में थोड़ा बदलाव कर लिया था , आज दुपहर का लंच वो रज्जो के साथ करने का प्लान कर चुके थे और स्टार्टर तो शुरू भी हो गया था

" ओह्ह्ह्ह भाभी उम्ममम अह्ह्ह्ह और और ओह गॉड फक्क्क् यूयू ओह्ह्ह्ह सीईईई " , रज्जो ने गहरे तक गले में रामसिंह का मोटा काला लंड मुंह में ले लिया और बाहर निकाल कर वापस चूसने लगी । वही उसक दूसरे हाथ में मानसिंह का लंड था।






मानसिंह : सीईईई ओह भाभी थोड़ी नजरे हम भी डाल दो , सारी रात तो छोटे को ही निचोड़ा तुमने सीई ओह्ह्ह्ह ये हुई न बात अह्ह्ह्ह कितना नशा हो रहा है ओह्ह्ह्ह

रज्जो ने बिना कुछ बोले रामसिंह का लंड छोड़ मानसिंह का मुंह में भर लिया था और बड़े चाव और फुर्सत से चूस रही थी उसके आड़ सहलाते हुए ।

इतने में रामसिंह ने अपना मोबाइल खोला कर वीडियो रिकॉर्ड करने लगा

" ओह्ह्ह सीईईई क्या सेक्सी लुक है भाभी और लो ओह्ह्ह्ह हम्ममम डिप और सीईईई ओह्ह्ह " , रामसिंह ने रज्जो की लंड चूसते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगा और रज्जो मोबाइल की ओर देखती हुई लंड को गले तक ले जाने लगी

मानसिंह अपना लंड उसके गले तक उतारते हुए पेलने लगा उसका सर पकड़ कर

रामसिंह दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर उसको हिलाते हुए थोड़ा झुक कर अपना लंड रज्जो की झूलती चुचियों पर घिसाने लगा : ओह्ह्ह्ह भाभीईई उम्ममम सीईईई कितनी सॉफ्ट चूचियां है आपकी ओह्ह्ह्ह सीईईई मन कर रहा है इन्हीं में पेल कर झट जाऊ ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसे ही भाभी वाव यू नैस्टी बीच यश बेबी ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् सीईईई अह्ह्ह्ह

भइया ये पकड़ना






ये बोल कर रामसिंह ने मोबाइल अपने भाई मानसिंह को दे दिया और खुद रज्जो की चूचियां पकड़ कर उनमें अपना लंड पेलने लगा और रज्जो के मुंह में अभी भी मानसिंह का लंड भरा था जिसे वो किसी भी कीमत पर वो छोड़ने को राजी नहीं दिख रही थी

रामसिंह भी लगातार उसकी चूचियों में पेले जा रहा था

: हाहाहा भैया लग रहा है भाभी को आपका लंड कुछ ज्यादा ही भा गया है

: सीईईई ओह्ह्ह सच कहा छोटे सीईईई ओह्ह्ह यस्स रज्जो रानी और लो ओह्ह्ह तुम्हारे जीभ से तो जादू कर रखा है

: लेकिन मुझे भी अपनी जीभ कही चलानी है भैया , भाभी की बुर में सीईईई कल रात इतनी रसीली और मुलायम थी अभी भी सोच कर पानी आ रहा है

: बात तो तेरी सही है छोटे है , रज्जो की बुर के पानी का नशा ही अलग है सीईईई आजा बिस्तर में आजा ( मानसिंह ने अपने बुलाया)


और रज्जो को उठा कर बिस्तर के पास ले गया उसके लिप्स चूसते हुए उसको सुला दिया और वापस से उसके मुंह के पास अपना लंड ले जाकर चुसवाने लगा )

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई आराम से






रज्जो मानसिंह का लंड पकड़े हुए सिसकियां लेने लगी और मानसिंह ने जब मोबाइल के कैमरे को रजजो की चूत की तरफ ले गया तो देखा उसका भाई रामसिंह अपनी थूथ को रज्जो की बजबजाई बुर में रगड़ रहा है और रज्जो के जांघें कमर सब अकड़ने लगी लेकिन उसने पल भर के लिए भी अपनी जुबान को मानसिंह के सुपाड़े से अलग नहीं किया

मानसिंह ये देख कर और जोश में आ गया और उसकी नंगी चूचियां पकड़ कर उसके मुंह में पेलने लगा : अह्ह्ह्ह साली रंडी रज्जो सीईईई ओह्ह्ह तू कितनी चुदक्कड़ है वो तेरी चूत चाट रहा और और तुझे फर्क नहीं पड़ रहा है उम्मम ले और चूस मेरा लंड ओह्ह्ह्ह

: बस भइया अभी फर्क पड़ जाएगा सीई ओह्ह्ह्ह

अगले ही पल रामसिंह में अपना टोपा रज्जो की बुर में लगाया और उसकी रसीली चूत ने उसे सुरक लिया और रामसिंह ऊपर चढ़ कर हच्च हच्च पेलने लगा

एकदम से रज्जो की आँखें बड़ी हो गई जब 8 इंच बड़ा मोटा खीरे जैसा लंड उसकी बुर की दीवारें फाड़ता हुआ अंदर चोट करने लग : ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह नंदोई जी

रामसिंह ने शुरुआती दौर में ही तगड़ी पेलाई शुरू कर दी और रज्जो ने मानसिंह का लंड छोड़ दिया और गरदन उठा कर नीचे देखने लगी जहां रामसिंह उसकी गदराई मोटी जांघें फैलाए खूब हचक हचक कर पेले जा रहा था और उसने वापस ने मानसिंह का लंड पकड़ लिया: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मजा आ रहा है ओह्ह्ह्ह और पेलो सीईईई ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह

: क्यों रज्जो रानी कैसा लग रहा है उम्ममम ( मानसिंह झुक कर रज्जो की चूचियां पीने लगा )






: सीईईई अह्ह्ह्ह जन्नत सा लग रहा है मेरे राजा ओह्ह्ह्ह उम्ममम और कस के ओह्ह्ह्ह सीईईई उम्मम

: क्यों छोटे थक तो नहीं गया उम्ममम भाई भाभी की खातिरदारी में कमी नहीं रहे चोद साली कुतिया को फाड़

रामसिंह अपने भाई की बात सुनकर और जोश में पेलने लगा

: ओह्ह्ह्ह भैया आपका चेला हूं कैसे थक जाऊंगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई बस सोच रहा हूं भाभी से थोड़ा लंड की धार बढ़वा लूं , तब तक आप संभालोंगे

: हा हा क्यों नहीं , मै तो इसकी गाड़ में घुसने को बेताब हूं आजा मेरी कुतिया

अगले ही पल पोजिशन में उलट फेर हुआ और रज्जो ने डॉगी पोज में मानसिंह के आगे अपनी गाड़ फैला दी और थोड़ा सा थूक लगा कर बिना एक पल गवाए मानसिंह ने रज्जो की गाड़ में अपना फूला हुआ सुपाड़ा भेद दिया

: ओह्ह्ह्ह बहिनचोद आराम से अह्ह्ह्ह अपनी दीदी का भोसड़ा समझ रखा है क्या

: हाहाहाहाहा अब आई भाभी आप अपने असली रंग में , थोड़ा और खुलने की जरूरत है भैया ( रामसिंह अपना लंड मुठियाता हुआ रज्जो के मुंह के आगे खड़ा होकर बोला )

वही रज्जो की कसी गाड़ के छेद में लंड उतार कर मानसिंह की हालत भी कम खराब नहीं थी लेकिन जोश में होश कहा , पूरी ताकत से एक और झटका और लंड गाड़ की गहराई में

और आगे से रामसिंह ने अपना लंड रज्जो के मुंह में दे दिया






: सीईईईई ओह्ह्ह्ह गॉड कितनी टाइट गाड़ है तुम्हारी रज्जो रानी सीई ओह्ह्ह्ह छोटे लग रहा है तूने रात में अच्छे से खोली नहीं क्या ?

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह भइया सच कहूं तो भाभी के चूत से लंड निकालने का मन ही नहीं हुआ और उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह भाभी और चूसो मेरे आड़ उम्ममम सारी मलाई तो यही से तैयार होंगी उम्मम सीईईई

: तभी तो सोचूं इतनी कसी क्यों है अह्ह्ह्ह सीईईई मजा आ गया है रज्जो मेरी जान उम्मम कितनी बड़ी गाड़ है तेरी , तूने बताया नहीं लेकिन ये तो तय है कि बहुत लंड घोंटे है तूने इसमें अह्ह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह बहिनचोदो तुम साले मर्दों को बस कहानियां सुनने का शौक है , कि किसने कितनी लंबी चोदी है अह्ह्ह्ह अरे थोड़ी मर्दानगी दिखाओ न , मजा नहीं आ रहा क्या उम्म्म और कस लूं

एकदम से रज्जो ने अपने गाड़ के छल्ले को मानसिंह के लंड पर कस दिया और गाड़ पीछे फेंकने लगी

: ओह्ह्ह यस्स मेरी जान ओह्ह्ह ऐसे ही क्या बवाल चीज है तू मेरी रांड सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम ( मानसिंह ने रज्जो के4 बाल पकड़ कर खूब करारे झटके देने लगा )

: ओह्ह्ह अब लग रहा है मेरी गाड़ के कोई दमदार खूंटा गया है पेलो न बहिनचोद अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह ऐसे ही ओह्ह्ह






रज्जो की गालियां सुनकर मानसिंह जोश में आ गया और रज्जो के चूतड़ पर पंजे जड़ने लगा ओर हमच हमच कर पेलने लगा । ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम भाभी ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू

: हा मेरे राजा ऐसे ही ओह्ह्ह और रगड़ो ओह्ह्ह उम्म्म कितना तड़पा रहे थे सीईईई मै तो ऐसी ही तगड़ी रगड़ाई के लिए आई हूं न ओह्ह्ह पेलो मुझे फाड़ दो मेरी गाड़ सीई ओह्ह्ह्ह आप क्यों रुक गए छोटे मियां सीई लाओ न अपना खूंटा उम्ममम सीईईई कितना टाइट कर रखा है , घुसाओगे नहीं मेरी रसीली बुर में , ऐसे सुखाने का इरादा है क्या

रज्जो के कहे एक एक शब्द से दोनों भाइयों का जोश और तगड़ा हुआ जा रहा था

रामसिंह : भैया सैंडविच हो जाए

मानसिंह हंसता हुआ : हा क्यों नहीं भाई , उसका अपना ही मजा है ( फिर वो रज्जो के गाड़ से लंड निकाल कर बिस्तर पर लेट गया ) आजा मेरी रंडी सीईईई आजा ऊपर से सवारी कर ले ओह्ह्ह्ह बहिनचोद अह्ह्ह्ह्ह क्या माल है तूं ओह्ह्ह्ह सीईईई कितनी नरम बुर है तेरी ओह्ह्ह्ह झड़ गई है न

रज्जो : हा इतना तगड़ा चोदोगे तो क्या होगा ओह्ह्ह्ह आराम से छोटे नंदोई जी ओह्ह्ह नीचे पहले से ही घुसा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम रुकिए मोटा है

: बस भाभी अब नाटक मत करो , भैया ने पहले ही जगह बना रखी है ओह्ह्ह्ह

: हा बहनचोद तुम्हारी अम्मा का भोसड़ा है न जो दोनों साथ में ही अह्ह्ह्ह मर गई रे सीईईई ओह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई ओह

मानसिंह ने नीचे से बुर में तो रामसिंह ऊपर चढ़ कर रज्जो की गाड़ के अपना लंड भर चुका था और चुदाई चालू हो गई थी दोहरी वाली रज्जो की

उसकी चीखे कमरे में गुंज रही थी






: पेल छोटे आज छोड़ना नहीं

: छोड़ कौन रहा है भैया ओह्ह्ह्ह अब हुआ न ताल से ताल ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मेरी रज्जो भाभी आपकी गाड़ तो जन्नत का दरवाजा है ओह्ह्ह्ह कितना पेलो साली खूब उछाल रही है ओह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह आज तुम दोनों के लंड ने मस्त कर दिया , आना सफल हो गया ओह्ह्ह रुको मत चोदो मुझे ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: उम्ममम मेरी रंडी तेरी गाड़ और बुर को चोद चोद के लाल कर देंगे और फिर उसी के अपना बीज डाल कर भर भी देंगे

: बीज तुम दोनों अपनी अम्मा की बुरिया में डालना मुझे तो मेरे इन चूचों पर चाहिए जैसे तुम दोनों कम्मो के निप्पल गर्म करते हो न वैसे अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह भईया ये तो पूरी तैयारी से आई है साली तब तो तेरी खातिरदारी अच्छे से होगी ओह्ह्ह मेरी जान ( रामसिंह पूरी ताकत से रज्जो की गाड़ में लंड उतारता हुआ बोला )

: हा छोटे सीईईई ऐसे ही ओह्ह्ह

दोनों भाई बारी बारी से रज्जो की गाड़ और चूत में लंड पेले जा रहे थे और






अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह और और दोनों साथ साथ डालो ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह ऐसे ही आयेगा मेरा ओह्ह्ह्ह सीईईई

रज्जो एकदम से तड़पने लगी थी और जांघें कसने लगी उसने अपने दोनों छेद के छल्ले कस लिए

: ओह्ह्ह भईया इसने तो सिल कर दिया है

: हमच के फाड़ न मादरचोद की गाड़ को

अह्ह्ह्ह जल रहा है मादरचोदों ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह भईया अब और नहीं रुक पाऊंगा बहुत टाइट निकलने वाला है ( रामसिंह ने रज्जो के टाइट गाड़ के छल्ले में लंड पेलता हुआ बोला )

: हा छोटे मेरा भी वही हाल है , उठ उठ मेरी जान आयेगा ओह्ह्ह्ह उम्ममम

रामसिंह जल्दी से पीछे हटा और रज्जो बिस्तर पर ही घुटने के बल बैठ गई और गले ही पल रामसिंह अपना लंड हिलाता हुआ रज्जो के चूचों पर झड़ने लगा






ओह्ह्ह्ह मेरी रंडी भाभीई ओह्ह्ह्ह मजा आ गया सीई ओह लो अपनी चुची गर्म कर लो ओह्ह्ह्ह

: लेह मेरी रांड साली ओह्ह्ह्ह तेरी चुची क्या तुझे ही पूरा नहला दूंगा ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू बिच ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह






मानसिंह के भी एक के बाद एक तेजी मोटी गर्म पिचकारियों से रज्जो की चुची को नहला दिया और रज्जो पूरी तरह छनमना गई उन गर्म वीर्य के छीटों से और उसके अपने निप्पल पर दोनों हाथों से उन्हें लिपा और मस्त हो गई

सच था वो एक एक लहजा जो शिला ने उसे बताया था , जिस सपने में वो आई थी अपनी चूचियों को नहलाने के लिए आज वो हकीकत हो गई थी






उसने बारी बारी से दोनों का लंड निचोड़ कर चूसा और कमरे में लगे उस कैमरे की ओर देखा जहां से ये पूरी धुंआधार ताबड़ तोड़ रिकॉर्डिंग ऑन थी ।

फिर हाफ कर सब बिस्तर पर फैल गए ।

जारी रहेगी

( अगर THE WILD NEW YEAR PARTY जल्दी चाहिए तो अब से हर अपडेट पर मिनियम 25 लाइक्स आने चाहिए , नहीं तो मै लिखूंगा अपनी मर्जी से समय लेकर , अगर मुझे अपने लिए ही लिखना है तो )
 
नई अपडेट किंग सून.... टुमारो होपफ़ुल्ली 🤞
 
💥 अध्याय : 02 💥

UPDATE 022


THE EROTIC SUNDAY 06

: उम्मम छोड़िए न वो देख लेंगे

: उफ्फ मेरी जान जरा इस सफेद साड़ी के नीचे से अपना गुलाबी जिस्म दिखाओ न






( ये कहते हुए मुरारी ने मंजू के साड़ी का पल्ला पकड़ कर खींच लिया और उसकी अधखुली ब्लाउज से झांकती चूचियां और नंगा पेट देख कर मुरारी का लंड अकड़ने लगा और वो अपना लंड पकड़ कर मसलने लगा हिलाने लगा ।

वही उसके समाने मंजू अपने जिस्म से खेलने लगी ,अपनी छातियां मिजने लगी और मुरारी उसकी ओर बढ़ ही रहा था कि

: पापाजी ये लीजिए दूध

एकदम से मुरारी ने अपने कमरे के दरवाजे की ओर देखा तो सामने से उसकी संस्कारी बहु सोनल लाल जोड़े में बिना ब्लाउज में सिर्फ मरून ब्रा के हाथ में दूध का ग्लास लेकर उसकी ओर बढ़ रही थी ,






उसकी बड़ी बड़ी गोरी दूधिया ग़ुलाबी चूचियां और गोरा पेट जिस पर उसकी ही दी हुई शादी वाली करधनी चढ़ी थी जो उसकी कमर को और सेक्सी दिखा रही थी

: हा

: आओ पी लो

: क्या

: चाय ? चाय ?

एकदम से चौक कर मुरारी की आंखे खुली और पता चला कि ममता उसे आवाज दे रही है चाय पीने के लिए

उसने एक नजर अपने लंड पर मारा जो पूरी तरह से कम्बल में बौराया हुआ था पजामे में

अपने लंड को सहलाता हुआ मुस्कुरा कर : अह्ह्ह्ह बहु उम्मम कितनी सेक्सी लग रही थी तू उम्ममम और मंजू सीईईई ये दोनो तो मुझे दीवाना कर देंगी

: ओहो क्या खोए हो उठो ( एकदम से ममता ने उसका कम्बल हटाया और पजामे में बना बड़ा सा तंबू देख कर उसकी आंखे फेल गई )

: कही अपनी बहनिया का सपना तो नहीं देख रहे थे उम्मम( ममता उसके पास आकर बैठ गई )

मुरारी का मूड एकदम टाइट था और लंड भी , सर्दी का मौसम और अपनी लाडली बहु और सेक्सी भयोह को देख कर उसका रोम रोम मस्त हुआ जा रहा था ।

: सीईईई अह्ह्ह्ह क्या करती हो अमन की मां ( एकदम से मुरारी सिहर उठा जब ममता के उसके पास बैठ कर उसका लंड पकड़ लिया )

: हाय दैय्या कितना टाइट है , जी कर रहा है खोल कर बैठ जाऊ उम्मम अह्ह्ह्ह्ह कितना गर्म है ओह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान कितना समय हो गया तेरे हाथों ने इन्हें छुआ नहीं सीई ओह्ह्ह निकाल दे थोड़ा आराम हो जायेगा

और ममता ने पजामे में हाथ डाल कर मुरारी का लंड बाहर निकाल दिया और पकड़ कर उसकी चमड़ी नीचे सरका दिया






वो पूरा टाइट खूंटे के जैसा

: सीईईई ओह्ह्ह ममता मेरी जान सीई ओह्ह्ह्ह

: उफ्फ कितना कड़ा कर रखा है , सच सच बताओ सपने में अपनी बहिनिया पेल रहे थे न ( उसने मुरारी का लंड सहलाते हुए पूछा )

मुरारी क्या जवाब देता और उसने हुंकारी भर दी

: हम्ममम तुम तो मेरे दिल की बात समझ लेती हो ओह्ह्ह्ह आओ न बैठ जाओ न सीईईई आह्ह्ह्ह

ममता की बुर भी पनियाने लगी थी और मुरारी ने उसे अपने ऊपर खींचने लगा और उसकी चूचियां नाइटी के ऊपर से मिजने लगा

: अरे दरवाजा खुला है रुको न अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: कोई नहीं आएगा मेरी जान आओ न

: अच्छा सच में बहुत मन क्या ? ( ममता मुरारी के ऊपर आती हुई बोली और उसकी आंखों में देखते हुए अपनी नाइटी निकाल फेकी और पूरी नंगी उसके ऊपर आ गई )

मुरारी उसकी नंगी चूचियां देख कर उन्हें पकड़ने लगा और ममता ने नीचे से उसका मोटा खूंटे जैसा लंड पकड़ कर अपनी रस छोड़ती बुर में लेकर बैठ गई

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह कितना मोटा है आज ये ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह ( ममता की चूत की सूजन अभी कम नहीं हुई थी और मुरारी का सूखा लंड उसकी चूत की कसी दीवारों को फाड़ता हुआ अंदर जा रहा था )

: उफ्फ मेरी जान तेरी चूत कितनी कसी है आज ओह्ह्ह कितनी रस भरी मुलायम है सीई अह्ह्ह्ह्ह

ममता अब हल्का हल्का ऊपर उछलने लगी थी






: इतने दिन तक आपका लंड नहीं मिला तो क्या होगा , ओह्ह्ह्ह कितना बड़ा हो गया है सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

ममता उसके लंड पर उछल रही थी और चूत में लंड ले रही थी और उसकी मोटी मोटी पपीते जैसी चूचियां उसके मुंह पर हिल रही थी





जिसे देख कर उसके मुंह में पानी आने लगा

: क्या देख रहे हो राजा ओह्ह्ह्ह पी लो न ओह्ह्ह लो दूध पी लो ( ममता ने अपनी चूचियां पकड़ कर आगे कर दी )

एकदम से ममता के शब्दों से मुरारी के जहन में सपने की याद ताजा हुई जब सपने उसकी सेक्सी बहु सोनल उसके लिए दूध लेकर आई थी , उसके लंड की नशे फड़कने लगी और उसका लंड और कड़क हो गया






उसने दोनों पंजों से ममता के नरम बड़े बड़े पपीते जैसे चूचे पकड़ लिए और बारी बारी से मुंह में रख कर चुबलाने लगा और ममता की सिसकिया तेज हो गई

वही मुरारी ने अपने घुटने फोल्ड किए और ममता को अपने लंड पर उछालने लगा तेजी






ममता की चीखे और तेज हो गई जब मुरारी का कड़ा बांस जैसा लंड उसकी सूजी हुई बुर को अंदर से छिलने लगा

दर्द से ममता अपने गाड़ पकड़ उसको फैलाने लगी ताकि चूत के फांकों पर रगड़ कम हो , लेकिन मुरारी की स्पीड बहुत तेज थी

ताबड़तोड़ चुदाई करते हुए उसने झटके से ममता को बिस्तर पर घुमा दिया और उसके ऊपर आकर उसकी बुर में लंड डाल दिया , ममता तो चौक सी गई

: ओह्ह्ह्ह हाहाहाहा ये तो अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा उम्मम

मुरारी ने कम्बल उठा कर अपने ऊपर चढ़ा लिया पीछे से और ममता को जांघें फैला कर पेलने लगा

: उम्मम मेरे राजा ऐसे ही ओह्ह्ह मजा आ रहा है उम्मम कितनी तड़पी हुई आपके लंड के लिए ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह मेरे राजा उम्मम पेलो और तेज ओह्ह्ह्ह पेलो न बहिनचोद ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह






मुरारी बहिनचोद सुनते ही और जोश में आया और उसको जकड़ कर ताबड़तोड़ पेलने लगा

" भैया वो फूलपुर से महाराज जी आए है " , एकदम से मदन मुरारी के खुले दरवाजे से कमरे में दाखिल होता हुआ बोला

और सामने बिस्तर पर चल अपने भैया भाभी की कम्बल चुदाई देखकर ठिठक कर रह गया और वो दोनों भी आंखे सन्न कर एक दूसरे को देखते हुए जस के तस रुक गए ।

मदन ने तुरंत नजरे फेर ली और वापस जाने लगा बिना कुछ बोले

तो मुरारी ने उसे रोका : क्या बात मदन ?

: भैया वो फूलपुर से महाराज जी आए है । ( उन दोनों की ओर पीठ किए हुए दरवाजे के पास से मदन बोला )

: ठीक है उनको बिठाओ पानी पिलाओ मै आता हूं 05 मिनट में

: जी भैया ( ये बोलकर मदन तेजी से निकल गया )

: बोला था आपको दरवाजा खुला है , हटो अब

: कहा हटूं , अह्ह्ह्ह मै नहीं हटने वाला ( मुरारी मुस्कुरा कर वापस से अपना लंड उसकी बुर में चलाने लगा )

: अह्ह्ह्ह धत् पंडित जी आए है , पानी वगैरह देना है हटिए

: वो मदन देख लेगा , काहे परेशान हो

: ओह्ह्ह्ह मान जाइए न सीई ओह्ह्ह्ह मेरे राजा रात में कर लेना सीईईई ओह्ह्ह्ह ,

: तो ऐसे ही करूंगा दरवाजा खोल कर सोच लो

: धत्त बेशर्म हो आप , मै तो अह्ह्ह्ह सोच रही हूं कीईईई अब देवर जी के सामने कैसे जाऊंगी ओह्ह्ह्ह आराम से अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह

: तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे उसे पता नहीं है कि हम लोग सेक्स नहीं करते , अरे कौन सा उसने हमें नंगा देखा है और कुछ दिन के बाद तो वो भी करेगा ही हाहाहाहाहा

: बड़े गंदे हो आप अह्ह्ह्ह जल्दी निकालो न

: जल्दी चाहिए

: हम्ममम ( ममता ने मुंह बना कर कहा )

: तो पीछे से देना पड़ेगा

: तो रोका किसने है मेरे राजा लेलो न, मै तो तुम्हारी ही हूं न सीईईई आह्ह्ह्ह

इतना कह कर मुरारी ने चादर निकाल फेंका और ममता को घोड़ी बना का पीछे से उसकी बुर में लंड डाल दिया और पेलने लगा

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान तेरी ये मोटी मोटी गाड़ सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

: उम्मम अह्ह्ह्ह्ह पेलो और तेज अह्ह्ह्ह आज आपका सरा रस निचोड़ लूंगी ऐसे ( ममता ने एकदम से उसके लंड पर अपनी बुर का छल्ला कस लिया)






: ओह्ह्ह सीईईई बहुत चालाक है रे तू ओह्ह्ह्ह ऐसे लग रहा है कोई कुंवारी जवान चूत पेल रहा हूं

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा पेलो न किसकी पेलोगे उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह चोद लो कोई हो तो मै नहीं रोकूंगी

एक पल को मुरारी के जहन में आया कि वह अपनी बहु के बारे में अपनी बात कह दे लेकिन फिर उसे लगा कि जल्दी बाजी हो जाएगी और उसने बाद बदल दी

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह मेरी रानी तू ही दिला दे ओह्ह्ह्ह सीईईई अपने पहचान वाले में भी चलेगी सीई

: रिंकी की लोगे उम्ममम वही एक कुंवारी लड़की है अपने रिश्तेदारी में

: ओह्ह्ह्ह वो तो बहुत छोटी है मेरी जान ( मुरारी पूरा प्रयास कर रहा था ममता किसी तरह सोनल का नाम लेले)

: फिर तो उसकी मम्मी ही है तुम्हारी बहिनिया संगीता उसकी कुंवारी गाड़ मार लो सीईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या कितना तेज ओह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह मेरी रानी तूने तो मेरी कमजोर नस पकड़ ली , संगीता की गाड़ उफ्फफ ओह्ह्ह्ह

: हा मेरे राजा अपनी बहिनिया संगीता की कुंवारी गाड़ पेल लो , देवर जी की शादी में मै दिलाऊंगी उसकी चूत और गाड़ बोलो अह्ह्ह्ह पेलोगे उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

: हा क्यों नहीं उस चुदक्कड़ की गाड़ में लंड डाल कर भर दूंगा ओह्ह्ह्ह ममता मेरी जान अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यस्स आ रहा है आ रहा है

: ओह मेरे राजा भर दो न अपनी रंडी बहिनिया की गाड़ को नहला दो उसको अपने पानी से ओह्ह्ह्ह






एकदम से मुरारी ने अपना लंड निकाला और ममता की गाड़ पर पिचकारी मारने लगा और झटके खाने लगा

फिर हांफते हुए बैठ गया बिस्तर पर

: अह्ह्ह्ह हाहा जाओगे नहीं , बाहर पंडित जी आए है

: अरे हा यार

एकदम से मुरारी को ख्याल आया और वो अपने कपड़े पहन कर बाहर चला आया ।

देखा तो किचन में मंजू चाय बना रही थी और मदन पंडितजी से बात चित कर रहा था

मुरारी के आते ही मदन खड़ा हो गया और मुरारी जरा भी मदन के आगे असहज नहीं हुआ

मुरारी ने भी ऐसा ही दिखाया कि सब कुछ नॉर्मल ही है

: प्रणाम महाराज जी

: खुश रहिए सेठ , बताइए किस प्रयोजन से बुलवाया हमें

: दरअसल ( मुरारी ने एक नजर मदन और फिर किचन में काम कर रही मंजू को देख कर ) बात थोड़ी गोपनीय है , मतलब बाहर न खुले कुछ दिनों तक

: बेफिक्र होकर कहिए सेठ जी , आप हमारे व्यवहार से परिचित है

: जी महाराज जी , दरअसल मै विचार किया कि मदन बाबू की शादी कर दी जाए

पंडित जी थोड़ा हिचके लेकिन जजमान की बात कौन टाल सकता था

: ये बड़ा उत्तम विचार , लेकिन वधु कौन है ? उसकी कुंडली क्या है ? कितने गुण मिल रहे है ? ग्रहों की दशा क्या है ? इनसब पर विचार करना होगा

इधर पंडित जी ने अपनी बात कह रहे थे कि इतने में मंजू चाय लेकर आ गई और उसने झुक कर सर पर पल्लू रख कर पंडित जी के पाव छुए

: अखंड सौभाग्यवती भव:

मुरारी मुस्कुरा उठा

: बस अब मुझे नहीं लगता कि कुछ गुण गृह देखने की आवश्यकता है , आपका आशीर्वाद मिल गया तो और क्या चाहिए ?

एकदम से पंडित जी चौके और मंजू को देखा सुनी मांग एक सुंदरता की धनी , साड़ी में खुद को सहेज कर इस तरह खड़ी थी मानो इस घर की मां मर्यादा और सामाजिक दर्जे को बेहतर से समझती हो

: इसका मतलब वधू यही है

: जी महाराज जी , और ये दोनों एक दूसरे को पसंद करते है और शादी करना चाहते है ( मुरारी ने मदन को देखा और फिर पंडित जी को थोड़ा उलझा हुआ देख कर मदन से ) अरे भाई मदन बोलो कुछ , करनी है न

: जी भैया जैसा आप कहें

: अब ब क्या कहूं मै ( पंडित जी मामले को गंभीरता से समझना चाह रहे थे )

: देखिए महाराज जी आप बहुत सोच विचार मत कीजिए , वर वधू दोनों इसी घर में है और शादी भी इसी घर में होगी तो कोई अच्छा सा मुहूर्त देखकर बताइए जो इसी लगन में हो जाए , बहुत लंबे समय तक इसको रोकना उचित नहीं होगा , आप भी समझ रहे है ।

पंडित जी थोड़े गंभीर हुए और अपनी पोथी खोलकर कुछ आंकड़े और वर वधू के नाम का मिलान कर बहुत विचार कर कहा : ये समझ लीजिए सेठ जी आपने मुझे बहुत उचित समय पर बुलवाया , इनकी राशि का फल देखकर साफ पता चल रहा है जैसे सब कुछ तय हो पहले से । मानो छोटी सेठानी को इसी मुहूर्त में घर आना ही था और उनके जीवन में अगले सप्ताह में हो वैवाहिक योग भी है ।

सबके चेहरे खिल उठे और इतने में ममता सूट सलवार पहन कर सर पर दुपट्टा लिए आ गई , सबके के चेहरे और निगाहे पंडित जी की पत्रिका में थी

लेकिन ममता के पायलों की आहट से सबसे पहले मदन से उसकी ओर देखा और ममता खिले हुए चेहरे उसको आंख मार दी । फिर मुस्कुराते हुए पंडित जी के पाव छू कर आशीर्वाद लेते हुए मंजू के पास खड़ी हो गई

: क्या तारीख मिली महाराज जी ये बताइए , भाई मुझे मेरी देवरानी को जल्द जल्द से दुल्हन बनाना है

ममता की बात पर खुद ममता के साथ मुरारी और पंडित जी भी हस पड़े तो मदन और मंजू एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुरा रहे थे ।


: आज से 8 दिन बाद का ही शुभ मुहूर्त है , फिर उसके बाद इस अगहन में कोई सही दिन नहीं मिल रहा है लगन के लिए । नहीं तो फिर बैशाख की राह देखिए नई पत्रिका आने तक

सबके चेहरे थोड़े बुझ गए , खुशी थी तो कुछ उदास चेहरे कि कम से 12 - 15 दिन तो मिलेंगे और फिर अभी तक अमन और सोनल भी हनीमून से वापस नहीं आए थे । सब एक दूसरे को देख रहे थे कि क्या किया जाए ? मंजू का चेहरा तो एकदम से उतर ही गया था और मुरारी की नजर उसपर गई

: ठीक है महाराज जी , आप शादी की तैयारी से जुड़ी सारे समानों की लिस्ट तैयार करवाइए , शादी अगले हफ्ते ही होगी

: लेकिन भैया इतनी जल्दी कैसे कुछ ?

: देखो ये शादी बहुत ही धूमधाम से लेकिन इसी घर में और तय समय पर ही संपन्न होगी । शादी व्यवस्था देखने की जिम्मेदारी मेरी है और मै मदद के लिए भोला को भी कुछ रोज पहले ही बुला लूंगा ।

अपने नंदोई भोला का जिक्र आते ही ममता ने एक कातिल मुस्कुराहट से मुरारी को देखा और मुरारी समझ गया कि ममता उसे उसकी बहन संगीता के लिए चिढ़ा रही है , सच बात तो ये थी कि ममता की इस हरकत से मुरारी के लंड में ऐंठन होने लगी थी ।

: अमन की मां , कल तक अमन और बहु भी वापस आने वाले है तो उस हिसाब से खरीदारी करने की सारी जिम्मेदारी भाई तुम्हारी अब तुम्हे जिसके साथ जमे खरीदारी कर लेना ।

: अच्छा सुनिए , अगर आप कहे तो बहु के मायके से आपकी समधन से बात कर लूं

: अरे ये तो बहुत अच्छी बात है , भाभी जी की राय बहुत जरूरी है आखिर हमारे यहां दोनों जिम्मेदारी है लड़का लड़की की । ये तो बहुत अच्छा हो जाएगा और फिर जंगी भाई भी कपड़ो की खरीद में कुछ मदद करा देंगे । सब मैनेज हो जायेगा परेशान मत हो ।

थोड़ी चर्चाओं के बाद फाइनली महाराज जी भी निकल गए और इधर में शादी की तैयारी के लिए होड़ हो गई ।

प्रतापपुर

रूठी हुई गीता को मनाने के लिए बनवारी उसको लेकर घूमने निकल गया था और दो टहलते हुए ट्यूबवेल की ओर चल गए

सुबह से रज्जो और रागिनी के सपने दिखा कर रंगी ने बनवारी का लंड अकड़ा दिया था और सामने उसके अपने स्कर्ट में चूतड़ मटका कर चलती गीता को देख कर उसका लंड बार बार झटके दे रहा था । रह रह कर बनवारी में भीतर का दादा उसे रोकता अपनी लाडली नातिन के प्रति वासना से भरने से लेकिन उसकी नियत तक एकदम से बिगड़ गई जब पगडंडी के किनारे गीता एकदम से पेशाब करने के लिए अपनी स्कर्ट उठा कर बैठ गई

उसके गोल मटोल चूतड़ों को देख कर अब बनवारी का लंड झटके देने लगा था , घर पर रंगी के साथ होने से वो जरा भी गीता पर ध्यान नहीं दे पा रहा था ।

दुपहर की धूप में आज उसका बदन हल्का लग रहा था और फिर वो दोनों ट्यूबवेल वाले मकान में चले गए

: दादू यहां साफ सफाई करवा दो

: हा बेटा सही कह रही है तू ( गीता के उठे पतीले जैसे चूतड़ों को उसकी स्कर्ट के थिरकता हुआ देख कर बनवारी बोला)

: लेकिन अभी मत करवाना अब होली बाद

: क्यों ( बनवारी उसके पास गया अपने पेंट के बने हुए तंबू को लेकर )

: अह्ह्ह्ह क्या दादू यहां नहीं

: क्यों बेटा उम्मम तुझे तो पसंद है न ( बनवारी ने अपना लंड पीछे से उसकी कमर के पास चुभोया )

गीता जान रही थी अभी थोड़ी ही देर में बबीता नहाने आएगी जरूर इसीलिए वो कतरा रही थी

: हम्म्म दादू घर पर , अभी गुड़िया नहाने आएगी अह्ह्ह्ह ( बनवारी ने पीछे से उसके नरम नारियल जैसे चूचे को टीशर्ट के ऊपर से पकड़ लिया)

: घर पर तो जमाई बाबू साथ होते है और तू भी तो यही चाहती है न उम्मम ( बनवारी ने उसके मोटे मोटे चूचे को दोनो हाथों में भर कर सहलाया )






: सीईईई अह्ह्ह्ह दादू कोई आ गया तो उम्ममम अह्ह्ह्ह सीई ओह्ह्ह्ह

: कोई नहीं आएगा बेटा जरा इन्हें खोल तो ( बनवारी ने उसके कंधे से उसके स्ट्रेचबल टीशर्ट सरका कर उसके चूचे नंगे कर दिए )

: ओह्ह्ह्ह दादू उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई और दबाओ ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई खुजली हो रही है अह्ह्ह्ह्ह

: क्या देख रही है बेटा बाहर ( ट्यूबवेल के बरामदे में गीता की नंगी चूचियां पीछे से पकड़ कर मिज़ता हुआ बनवारी बोला )






: उम्ममम देख रही हूं गुड़िया न आ जाए सीईईई ओह्ह्ह दादू ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई अच्छा लग रहा है और चूसो उम्म्म कितना अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह

बनवारी ने उसको घुमा कर उसके किशमिश जैसे निप्पल को मुंह में ले कर चुबलाने लगा और गीता सिसक पड़ी और उसने हाथ आगे बढ़ा कर अपने दादू का लंड पेंट के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी

गीता के स्पर्श करते हुए बनवारी का लंड झटके देने लगा लेकिन उसने गीता के निप्पल चूसने नहीं छोड़े बल्कि खुद गीता ने ही पेंट खोलकर बनवारी का लंड बाहर कर दिया






: अह्ह्ह्ह कितना गर्म है दादू

: तुझे पसंद है न दादू का मोटा लंड

: हा दादू बहुत ( गीता बनवारी का मोटा काला लंड हाथ में सहलाती हुई बोली वो एक टक उसको घूरे जा रही थी )

: चुम्मी करेगी उसको

: हम्ममम ( थोड़ा शर्मा कर उसने मुस्कुरा कर हा में सर हिलाया और बैठ गई नीचे )

दोनों हाथों से उसने अपने दादू का लंड पकड़ा और चमड़ी पीछे कर सुपाड़ा खोल दिया एकदम से लंड के सूखे हुए वीर्य की मादक गंध गीता के नथुनों में भर गई और उसने मुंह खोलकर अपने दादू का सुपाड़ा गपुच कर लिया

: ओह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह बेटा उम्मम कितने मुलायम होठ है तेरे सीई अह्ह्ह्ह्ह कितनी नरमी है ओह्ह्ह्ह आराम से बेटा ओह्ह्ह्ह सूखा है अभी

गीता के सर पर हाथ फिरा कर बनवारी बोला और गीता ने अगले ही पल उसके सुपाड़े पर अपनी गीली नरम जीभ फिराई और बनवारी के चूतड़ टाइट हो गए वो एड़ियों के बल उठ गया : उफ्फ मेरी मीठी कितना मीठा सा चूस रही है तू ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कहा से सीखती है तू






गीता आधे से ज्यादा बनवारी का लंड मुंह में ले रही थी और अपनी चूचियां मिज रही थी बिना कुछ बोले

मानो एक पल को वो इसका स्वाद छोड़ना न चाहती हो

थोड़ी सी ही चुसाई में बनवारी का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था और पूरा रॉड की तरह टाइट हो गया था

उसने गीता को खड़ा कर वही नीचे बैठ गया और उसके स्कर्ट को उठा कर पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चाटते हुए सूंघने लगा

: उम्ममम दादू नहीं , सुसु किया है मैने साफ नहीं है

: सीईईई तो क्या हुआ तेरे सुसु करने से इसकी महक और मस्त हो गई

: भक्क गंदे हो आप कैसे कर लेते हो अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह उम्ममम मै गिर जाऊंगा दादू ओह्ह्ह ( बनवारी ने नीचे अपनी जीभ उसके फांकों पर भिड़ा दी थी और गीता के पैर कांपने लगे थे उसने डर से खिड़की का सलीया पकड़ लिया और तड़पने लगी सिसकने लगी






: ओह्ह्ह्ह दादू उम्मम अच्छा लग रहा है और करो ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह दादू ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह

गीता एकदम फड़फड़ाने लगी थी बनवारी उसके चूतड़ फैलाते हुए अपने होठ से उसके बुर के फांके चूस रहा था और उसकी मलाई जीभ से साफ कर रहा था

: ओह्ह्ह दादू ओह्ह्ह्ह यशस्स डाल दो न उम्ममम प्लीज पेलो न मुझे ओह्ह्ह्ह बस एक बार प्लीज ओह्ह्ह्ह मुझे अंदर लेना है

एक बार को बनवारी की हालत खराब हुई कि क्या गीता की कुंवारी चूत उसका लंड ले पायेगी , लेकिन फिर उसका सेक्स को लेकर दीवानगी और जिद देख कर उसके पास शायद ही कोई चारा और फिर खुद उसे भी गीता की नरम कोरी चूत का स्वाद चाहिए था

इसके लिए जरूरी था कि सही पोज क्या हो

और वो कुछ सोच कर खुद खुले फर्श पर लेट गया और अपना लंड खड़ा कर उसको हिलाते हुए : आजा बेटा बैठ

बनवारी ने जानबूझ कर गीता को उसके डर का सामना करने दिया ताकि वो कोई जबरजस्ती न करे , अभी भी उसके जहन में गीता उसकी गोद के खेलती उसकी दुलारी नातिन से बढ़ कर नहीं थी

लेकिन उसकी आंखे तब फैल गई जब गीता ने दोनों तरफ पैर फेक कर उसकी ओर गाड़ करते हुए लंड को पकड़ अपनी चूत पर लगाते हुए खुद बैठ गई

बनवारी का मोटा लंड गीता की गीली चूत की चिपकी हुई फांकों को चीरता हुआ अंदर जाने लगा और देखते ही देखते बनवारी का मोटा काला मूसल गीता की बुर में समा गया






बनवारी समझ गया था कि उसकी लाडली नातिन अब बड़ी हो गई और जब वो उसका इतना बड़ा मोटा खीरे जैसा लंड बिना दर्द के ले सकती है तो बात शायद उसकी सोच से बहुत आगे की है जरूर गीता ने पहले भी लंड लिए है और वो कहानी अभी बनवारी के आगे पर्दे में है

अपनी लाडली नातिन को किसी और चुदने का सोच कर ही बनवारी का लंड एकदम टाइट हो गया

: ओह्ह्ह्ह दादू ये तो और बड़ा हो रहा है अह्ह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह

अब गीता को अपने दादू के असल साइज का अंदाजा होने लगा था और वो ऊपर नीचे होने लगी थी खिड़की का सहारा लेकर

: ओह्ह्ह बेटा तुझे दर्द तो नहीं हो रहा है

: उम्मम नहीं दादू अच्छा लग रहा है अंदर ओह्ह्ह खुजली हो रही है मन कर रहा जल्दी जल्दी ले लूं ऐसे देखो






ये बोलकर गीता अपने दादू के लंड पर कस कस के हुँमचने लगी : अह्ह्ह्ह दादू ऐसे लेना है मुझे ओह्ह्ह्ह ऐसे मजा आ रहा है ओह्ह्ह्ह आपका लंड बहुत मस्त है दादू ओह्ह्ह मै झड़ जाऊंगी ओह्ह्ह्ह

: झड़ जा मेरी लाडो ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह झड़ जा सीईईई

: ओह्ह्ह दादू मुझे भी नीचे से पेलो न जैसे मम्मी को पेलते हो

गीता की बाते अब उसे और जोश दिला रही थी और उसने नीचे से अपने कमर उठा कर पेलना शुरू कर दिया

: ओह्ह्ह दादू ऐसे ही ओह्ह्ह आ रहा है उम्मम पेलो और तेज ओह्ह्ह कितना बड़ा है ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई फक्क मीईई दादू ओह्ह्ह्ह

गीता पूरी ताकत से खिड़की की जाली पकड़ कर खुद को हवा में रोके हुए थी और नीचे से बनवारी तेजी से कमर उठा कर लंड अपनी नातिन ने रस छोड़ती बुर में पेले जा रहा था और उसके लंड की कसावट बढ़ती जा रही थी , नसे टाइट हो गई थी सुपाड़ा फूलने लगा था : ओह्ह्ह्ह बेटा आयेगा मेरा ओह्ह्ह्ह सीईईई उठ जा जल्दी ओह्ह्ह्ह

गीता : दादू दूधू पर प्लीज

बनवारी एक पल को मुस्कुराया और झटके से उठ कर खड़ा हो गया और अपनी नातिन के चूचों पर लंड हिला कर झड़ने लगा






: सीईईई अह्ह्ह्ह मम्मीइई जल रहा है ओह्ह्ह्ह गर्म है दादू ओह्ह्ह्ह और निकालो उम्ममम मै चूस दूं

: हा बेटा ओह्ह्ह्ह कितनी समझदार है तू ओह्ह्ह्ह

गीता ने वापस अपने दादा का लंड मुंह ले लेकर उसका लंड साफ करने लगी और बनवारी के दिमाग कुछ बाते उठने लगी , कुछ सवाल आने लगे थे ।

इन सब के अतिरिक्त दूसरी ओर रंगीलाल कमरे में अकेला था । दोपहर के राजेश और सुनीता अपने कमरे में भिड़े हुए थे बंद करके दरवाजा ।

रंगी ने ऐसे ही हाल चाल के लिए पहले राज के पास फिर जंगी के पास फोन मिलाया

दो रिंग के बाद ही फोन उठ गया

: नमस्ते भइया ( उधर से जंगी का कॉल आया )

: कैसे हो जंगी , सब ठीक है

: जी भइया, आप बताओ वहा ससुराल में क्या हाल है ?

: अरे भाई यहां तो सब मस्त है ( कमरे से निकल कर बनवारी के कमरे के बगल से लगे जीने की सीढ़ियां चढ़ता हुआ रंगी फोन पर बोला )

: कब तक वापस आ रहे है या फिर वही से रज्जो भाभी के यहां हाहाहाहाहा

: सीईईई भाई जाने को तो चला जाता लेकिन रज्जो भाभी तो शिला दीदी के यहां गई है

: क्यों वहां क्यों ?

: पता नहीं भाई , लेकिन शादी में उनकी दोस्ती हो गई तो टहलने के लिए चली गई , तू बता तेरे घर में सब ठीक है । निशा की मां के साथ कुछ बात हुई

: अरे भईया आप वापस आओ फिर मै कुछ बताता हूं आपको

: अरे भाई क्या बात है बता न

: ऐसे मजा नहीं आएगा , आप आओ सामने बैठ कर बात करेंगे इस बारे में

: ठीक है और निशा कब तक आएगी बात हुई

: हा आज रात की फ्लाइट है कल तक आ जाएंगे सब

: चलो अच्छा ही है उफ्फ बेटीचोद सीईईई

: क्या हुआ भैया

रंगी लाल ने सामने देखा तो बबीता छत पर धूप में टीशर्ट लोवर में झुक कर एक चादर बिछा रही थी और झुकने की वजह से लोवर में उसकी गाड़ यू फेल कर रंगी के सामने आ गई






एक पल उसको गीता की बताई की कहानी याद आई कि कैसे बबीता अपने bf से चुदवाती है और रंगी का लंड सर उठाने लगा

: कुछ नहीं भाई , चल ठीक है मै बाद में बात करता हूं

फिर रंगी ने फोन रख दिया और अपना लंड पजामे में सहला कर बबीता की ओर बढ़ गया

: क्या कर रही है गुड़िया

: अह फूफा वो मै पापड़ सुखाने लाई हूं ( एकदम से घूम कर उसने अपनी शॉर्ट टीशर्ट पीछे खींच कर अपने उघड़े हुए चूतड़ छुपाने लगी एक असहज और शॉक्ड मुस्कुरा से जैसे उसे वहां रंगी के होने की उम्मीद नहीं थी )

: मै मदद करूं

फिर रंगी बबीता के पास बैठ कर पापड़ डालने लगा और बबीता उसके सामने आई और चादर पर झुक कर पापड़ डालने लगी तो टीशर्ट से उसके नरम मौसमी की झलक रंगी को साफ दिखी और उसने बड़ी बेशर्मी से उन्हें देखा

बबीता ने जैसे ही रंगी की आंखे पढ़ी थोड़ी असहज होकर सीधी हो गई ।

उसने जल्दी से पापड़ फैलाए और नीचे जाने

उसके लोवर में मटकते चूतड़ देख कर रंगी का लंड अकड़ गया : कहा जा रही हो

: उम्मम वो मुझे लिखना है

: अच्छा !!! ठीक है जाओ फिर

: क्या हुआ ( रंगी का उतरा हुआ चेहरा देख कर वो बोली )

: कुछ नहीं बस अकेले बोर रहा हो रहा हूं तो सोचा तुझी से बात करूं

बबीता थोड़ी हिचक रही थी लेकिन रंगी फिर भी उसके घर का मेहमान था तो उसे कैसे मना करती ।

: तो बोलो क्या बात है ?

: कुछ नहीं छोड़ , पता नहीं क्या सोचेगी तू

: अरे बताओगे भी ( थोड़ी हस कर वो बोली )

: नहीं भाई तुझे तेरे मम्मी पापा नहीं रोकते तो मै क्यों कहूं

: अरे क्या बात है फूफा जी बोलो न

: देख बेटा तू नाराज मत होना लेकिन अब तू बड़ी हो गई है और

: और ?

: और तुझे अब ढंग के कपड़े पहनने चाहिए जिसमें देह ढका रहे और इसमें देख पीछे से कैसा लग रहा है

बबीता समझ गई कि रंगी का इशारा उसके शॉर्ट टीशर्ट के नीचे लोवर में उभरे हुए चूतड़ों की ओर है । उसे थोड़ी शर्मिंदगी हुई।

: देख तू बुरा मत मानना

: नहीं फूफा जी आप सही कह रहे हो , वो आज कपड़े सूखे नहीं थे तो यही पहन ली

: वैसे ये रंग तुझ पर खिलता है लेकिन बेटा ये देख यहां से कितना उघाड़ लग रहा है ( मौका देख कर रंगी ने बबीता के चूतड़ों पर हाथ फेर दिया लोवर के ऊपर से और बबीता सिसक उठी)

: हा लेकिन मै सिर्फ घर में ही ऐसे कपड़े पहनती हूं ( उसकी धड़कने तेज थी क्योंकि अभी भी उसके कमर पर रंगी का हाथ था )

: हा लेकिन अगर कोई बाहर आ जाए तो , वो क्या सोचेगा इन्हें देख कर और मिठी को देख वो कैसे खुद को ढक कर और अच्छे से पहन ओढ कर रहती है ।

: हा लेकिन मेरे कहा उसके जैसे बड़े बड़े है ( हल्की सी बुदबुदाई लेकिन रंगी में सुन लिया था )

: बड़े नहीं हैं लेकिन कम भी नहीं देख मेरे तो पूरे हाथ में भी नहीं आ रहे है

एकदम से पीछे से रंगी ने उसके चूतड़ को पंजे में भरने लगा और बबीता सिसकी

: उम्ममम सीईईई ठीक है मै बड़े कपड़े पहनूंगी ताकि आपको दिक्कत न हो

: मुझे ? ( रंगी लाल चौक कर पूछा )

: हा , इस घर में मेरे कपड़ो से सिर्फ आपको ही दिक्कत दिख रही है हीहीहीही ( बबीता ने खिलखिला कर रंगी के पजामे के बजे तंबू को देख कर कहा और रंगी ने झट से उसको पकड़ कर दबाने लगा )

: वो तो मै......

" गुड़िया "

" आई मम्मी "

फिर वो मुस्कुरा कर रंगी को देखी और हस्ती हुई जीने से निकल गई और रंगी अपना लंड मसल कर रह गया ।

जारी रहेगी


( अगर THE WILD NEW YEAR PARTY जल्दी चाहिए तो अब से हर अपडेट पर मिनियम 25 लाइक्स आने चाहिए , अब चाहे लंड से करो या उंगली से मुझे नहीं पता 😜 )

कंजूसी करोगे तो अपडेट लेट मिलेगा 🤷
 
💥अध्याय : 02 💥

अपडेट 023


THE EROTIC SUNDAY 07

चमनपुरा

: भाई कुछ कर न , तू चुप क्यों है

चंदू की बाते राज को चिड़चिड़ा कर रही थी

: बहन के लौड़े थोड़ा शांत रहेगा और तू ये दीवानगी छोड़ भाई ये लड़कियां किसी की सगी नहीं होती । जिस दिन उसपर आएगी वो तुझे छोड़ देगी

: नहीं भाई मेरी वाली सबसे अलग है

: हर चूतिए का कटने से पहले यही डायलॉग होता है ( राज ने ताना दिया और चंदू चुप हो गया )

: तू बता क्या करूं

: उम्मम देख भाई मै सिर्फ तेरे लंड के स्वाद के लिए इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकता मुझे कुछ जांच पड़ताल करनी होगी और तू अगर ईमानदारी से मुझे सब बताएगा तो ही कुछ हो सकता है और अगर मुझे सब ठीक लगा तो हो सकता है कि आगे तुम्हारी शादी भी हो जाए

एकदम से चंदू फूल के गदगद हो गया

: क्या जानना है भाई तुझे , मम्मी कसम कुछ नहीं छिपाने वाला मै

: देख भाई जहा तक मैने उसके परिवार को समझा है सब के सब एक नंबर के चोदू है तो ऐसा हो नहीं सकता कि तेरी बंदी का तुझसे पहले कोई रहा न हो , यहां नहीं तो रिश्तेदार में कही

राज की बात पर चंदू एकदम चुप हो गया

: क्या हुआ ?

: हा वो उसका एक Bf था वो 10वीं में थी तब उसके मामा के लड़के का दोस्त था लेकिन अब वो उससे बात नहीं करती भाई , जबसे मेरे साथ है । ( चंदू थोड़ा डर कर बोला )

: अच्छा वो सेक्स के लिए क्या कहती है , मतलब जल्दी से मान जाती है या फिर तुझे ज्यादा मनाना पड़ता है ?

चंदू बत्तीसी दिखाने लगा

: अबे बोल न भोसड़ी के दांत दिखा रहा है ( राज ने चिढ़ कर कहा )

: भाई वो कहती है तुम जब कहो जहां कहो मै आ जाऊंगी देने , लेकिन कभी मुझे छोड़ना मत

: ओह्ह्ह मतलब चुदाई का कीड़ा उसमें भी कम नहीं है

: हीहीहीही और उसकी यही अदा मुझे पसंद है भाई , क्या मस्त गाड़ रगड़ कर लंड को बुर में मसलती है सीईईई

: वैसे तुम लोग नॉर्मल सेक्स करते हो या कुछ गंदी बाते भी , रोल प्ले टाइप

: उसका नहीं पता लेकिन भाई कभी कभी जोश में मेरा मन करता है कि कितनी बड़ी चुदक्कड़ है इसके दोनों छेद में लंड डाल कर उसको बीज से नहला दूं और

: और क्या ?

: सीईईई हीही भाई मैने उसका फोन टटोला है उसके मोबाइल में bbc गैंगबैंग वाली पोर्न भी थी मैने चेक किया था और जब मैने उसके बारे में पूछा तो बोली बस अच्छा लगता है देखना ये सब वीडियो ।

: हम्ममम

: लेकिन ये सब शौक तो किसी के भी हो सकते है न , कैसे पता चलेगा कि वो मुझे इस्तेमाल नहीं कर रही

: देख भाई लड़की सबसे कमजोर तब होती है जब वो झड़ने के करीब हो और सेक्स में चुदाई के नशे में हो । तू उसको गर्म करके लंबी चुदाई कर और बात उगलवा ले

: भाई उसके घर में हम लोग बस क्विकी ही कर पाते है , ना जगह मिल पाती है और न पूरा टाइम

: तो ?

: हीहीही तो मै कह रहा था कि अगर तू हेल्प करे हमें यहां मिलने में तो शायद काम बन जाए

: अबे चूतिया है क्या ? मेरे बाप को भनक हुई तो गाड़ तोड़ देगा

: अरे यार नानू तो है नहीं न बस एक दो बार की बात है और तू मदद नहीं करेगा तो कैसे मै उसको समझ पाऊंगा ।

मिमियाते हुए वो बोला

कुछ देर सोचने के बाद राज : देख शाम को मेरी बात हुई है उसके मम्मी से तो पता चला है कि वो अभी गई नहीं है और बहुत चांस है कि दो दिन में पापा वापस भी आ जाए तो कल और परसो में जो करना है कर ले लेकिन उसके बाद मुझसे कोई उम्मीद नहीं रखना ।

चंदू खुश हो गया और फिर निकल गया घर के लिए वहीं शाम ढल गई थी और वो भी दुकान बढ़ा कर निकल गया चौराहे वाले घर के लिए

वही चौराहे वाले घर पर अनुज और रागिनी पहुंच गए थे

अनुज का मन आज पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था ,लाली के यहां जो कुछ भी हुआ उसके दिमाग से चीजें उतर नहीं रही थी । अभी भी वो दृश्य उसकी आंखों के आगे ताजा था जब पूजा उसके होठ चूस रही थी ।

एक लंबे समय से टालने के बाद आखिरकार अनुज को लाली की मुहब्बत का अहसास हो गया था वो खुद उसकी केयर और प्यार की ओर धीरे धीरे खींच रहा था और आज उसने लाली को पहला किस भी किया था लेकिन फिर वो पूजा ..... नहीं मै उसे किसी और के साथ नहीं देख सकता हूं , वो मेरे साथ ऐसा कैसे ? वो तो मुझे पसंद करती है फिर उसे क्यों ?

सवाल और सवाल

मन उदास था और हताश भी था उसका

एकदम से रागिनी की नजर उस पर गई और अपने बेटे की रुकी हुई कलम और उसे गहरे खोया हुआ देख कर वो उसके पास आई सोफे पर और उसके बाल सहला कर : क्या हुआ अनुज ?

एकदम से चौक कर अनुज ने अपनी मां को देखा

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दे और रागिनी ने वापस अपना सवाल दुहरा दिया : क्या सोच रहा है

अनुज : मम्मी वो ...

रागिनी : हा बोल न ?

अनुज थोड़ा शांत होकर एकदम से बात घुमा दिया : मम्मी वो आंटी ने आपसे झूठ बोला था कि उनके हसबैंड आयेंगे , वो तो उनके देवर थे ।

रागिनी की हालत खराब हो गई और अब उसके दिमाग में आए खयाल आने लगा कि कही अनुज ने उनकी चुदाई तो नहीं देख ली

रागिनी : हम्म्म और कुछ देखा क्या तूने

अनुज थोड़ा हिचक कर अपनी मां की ओर देख कर हा में सर हिलाया

रागिनी की धड़कने तेज हो गई और हलक सूखने लगा : क्या ?

अनुज : वो लोग वो सब कर रहे थे

रागिनी ने कन्फर्म करने के लिए सवाल आगे बढ़ाया : क्या ?

अनुज : सेक्स?

रागिनी : तुझे कैसे पता ? देखा तूने क्या कमरे में ?

अनुज : कमरे में कहा , वो लोग यही हाल में कर रहे थे इतना शोर था कि मेरे रूम तक आवाज आ रही थी

रागिनी समझ गई कि उससे बड़ी लापरवाही हो गई थी और वो चुप हो गई उसके पास क्या जवाब होता आखिर अपने बेटे को देने के लिए

: मम्मी एक बात पूछूं?

: हम्म्म बोल

: आपको पता था कि वो उनके हसबैंड नहीं है न

रागिनी एकदम से सन्न हो गई

: तूने सब सुना था न दुकान में ? शरारती कही का ( रागिनी थोड़ी मुस्कुराई ताकि चीजें असहज न हो )

अनुज मुस्कुरा कर नजरे फेरने लगा

: अरे नहीं मै तो बस ये सुन रहा था कि वो आंटी क्या चाहिए तो मेरे सामने नहीं बोल रही थी

: पागल ( रागिनी थोड़ा हस कर )

: मम्मी एक बात और पूछूं

: हम्म्म बोल भाई , फिर मुझे खाना बनाना है

: वो , आप कह रहे थे कि पापा के अपने शौक है , उसका क्या मतलब था?

रागिनी एकदम से शर्म से गुलाबी हो गई उसे तो उस बात का यकीन नहीं था कि अनुज ऐसे सवाल लेकर बैठ जाएगा

: पागल है तू , क्या पूछ रहा है ये सब ( हंसती हुई वो बोली )

: बताओ न ?

: किसी से कहेगा तो नहीं

: उन्हूं ( अनुज ने ना में सर हिलाया )

: देख जहां तक मैने समझा है कि मर्दों को औरतों के देह पर बाल पसंद नहीं आते चाहे कही भी रहे , सिवाय सर के

: हम्म्म तो ?

: तो हीही तेरे पापा को भी नहीं पसंद है और मुझे हर हफ्ते साफ करने पड़ते है वहा नीचे

रागिनी का इशारा उसकी चूत की ओर था और अनुज का लंड कसने लगा ये सोच कर कि उसकी मां की चूत हर वक्त लगभग चिकनी होती है

: मम्मी

: हम्ममम

: एक और बात पूछूं गुस्सा नहीं करोगे न

: पूछ ले भाई अब क्या है फिर इसके बाद और सवाल नहीं , मुझे खाना बनाना है

: ठीक है , पता है वो अंकल न आंटी के वहां नीचे किस कर रहे थे

अनुज की बातें सुनकर रागिनी के कान खड़े हो गए और उस थोड़ी थोड़ी भनक होने लगी थी कि उसका अगला सवाल क्या आने वाला है । वो सोच कर ही रागिनी का कलेजा धड़कने लगा

: तो क्या पापा भी करते है आपको वहां पर ....

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और राज आ चुका था

रागिनी ने सोचा यही मौका है बच निकलने का : पहले जा दरवाजा खोल दे , बाद बात करेंगे हम लोग ठीक है

रागिनी ये बोलकर किचन में चली गई और गहरी सांस लेते हुए सोचने लगी कि अनुज के भीतर जिज्ञासा सेक्स को लेकर तेजी से बढ़ रही है और उसे अब एक ऐसा जवाब तैयार करना था जो अनुज को यकीन दिला सके और वो कुछ गलत भी न सोचे ।

इधर राज आया और हाथ मुंह धोने चला गया

मौका देखकर अनुज ने वाईफाई चालू कर दिया और लैपटॉप खोलकर बैठ गया इंस्टाग्राम पर देखने लगा तो वहा उम्मीद के हिसाब से लाली के मैसेज आए थे

कुछ मैसेज कल के थे , कुछ रिल थी फनी वाली और कुछ खास था वो आज शाम के मैसेज

hiii

sorry , wo thodi gandi hai 😔

plz gussa mat hona

online aao n

मैसेज देख कर अनुज का दिल थोड़ा पसीज गया और उसने मैसेज डाल दिया

: hyy

: hiii 🥲 ( लाली तो जैसे अनुज की राह निहार रही हो )

: mai gussa nhi hun , bas thoda ajib laga tha

: sorry yaar wo bahut kamini hai

: Koi baat nahi , tum logo ki apni life hai enjoy kro ( अनुज ने उसी की भाषा में लाली को ताना दिया )

: nhi mujhe ye sb nhi pasnd ( लाली ने सफाई देते हुए कहा )

: Fir usko mana kyo nhi krti ( थोड़ा पोजेसीव होकर )

: pata nhi , bas wo mujhe touch krti hai to kuch hone lagta hai , na chahte hue mai bahak jati hun ... Sorry

इनबॉक्स में अनुज लाली की उदासी और मजबूरी समझने की कोशिश कर रहा था

: ek bat puchu?

: hmm kaho ( लाली ने रिप्लाई किया )

: wo tumhare mummy ke paas jaane ke liye koi excited thi

अनुज के जहन में कुछ सवाल चल रहे थे और कही न कही उसे वो सब सच होने की उम्मीद थी

: kutti h wo kamini , bahut gandi najar hai uski meri mummy par

: matalb ? ( अनुज ने चीजें साफ होने के लिए आगे बढ़ा)

: Tumne dekha hai na mummy meri kaisi hai. Unka figure & all to wo kamini meri mummy ke sath wo sab karna chahti hai

: kya ?

अनुज का लंड अकड़ रहा था धीरे धीरे और वो बीच बीच में आस पास नजर बनाए था हाल में , कभी रागिनी को तो कभी राज को देखता था ।

: Hmmm , Tum bhi soch rahe hoge kaisi meri family aur friend hai , sorry

: Are nhi , Mujhe insb se koi dikkt nhi hai bas mere liye ye sb ekdm nayi si hai 😀

: Hmmm

कुछ देर चुप रहने के बाद आखिर अनुज ने एक सवाल कर ही दिया लाली से

: To wo kb aane wali hai

: kaun ?

: Pooja !! Aaj tum log group study kroge n 🤪

: bhkkk gande ho tum bhi , maje mt lo yar .. aaj to mai use mana kar dungi

: kyo ? Mana kyo karna hai enjoy kro . ( अनुज ने टटोला उसे )

: bas aise hi

: Lekin maine dekhaa hai tum darati ho usse , mujhe nhi lagta hai ki tum usko rok paogi

: 😔😔😔 to kya kru mai tum hi btao

: Enjoy kro agar tumhe pasnd hai to ( अनुज ने अपना लंड सहलाया )

: lekin mai tumse.....

: Janta hun ( अनुज ने भी उसकी अधूरी बात का अधूरा जवाब दिया )

: Fir bhi 🥲

: Agar tum uske sath khush ho to mai kyo rokunga bhala

: kyo nhi rokoge , kya mai tumhaari kuch nhi hun , sorry 🥺

अनुज समझ रहा था लाली की बेचैनी और दिल उसका भी तड़प रहा था लाली के लिए

: bolo n kya hua ( वापस से लाली का मैसेज आया )

: ek baat kahu kritika

: hmmm bolo

: Tum bahut achchi ho aur

: aur kya 🥺 bol do n kitna chhipaoge

: Dar lagta hai

: kyo ?

: pata nhi

: I love you Anuj 😭 Mai tumhe bahut chahti hun

ये मैसेज पढ़ कर अनुज का दिल पसीज गया , उसकी सांसे गर्म होने लगी और धड़कने तेज होने लगी । एकदम से लाली के मैसेज ने उसको बेचैन कर दिया

: Mujhe ptaa hai tum bhi mujhe pyar krate ho aur ye bhi janti hun ki tum kbhi nhi kahoge mujhse aur aaj jo hua uske bad to kbhi nhi ...😔

अनुज लाली के दिल की उदासी और टूटे हुए उम्मीद का दर्द महसूस कर रहा था और उसका साफ और संतोषी मन अब और लाली की तकलीफ में नहीं देख सकता था

: Aisa kaise soch li tum

: 😍 to kya tumhe mai abhi bhi pasnd hun

: mai kb kaha ki nahi karta

: Bkk ghumaao mat , saf saf kaho ki mujhe pyar krate ho

अनुज उसकी खुशी और उतावलापन महसूस कर पा रहा था

: kahana jruri hai kya ? Bin kahe samajh jaao na

: hehe pagal ho tum , I love you

: same 2 u ( अनुज ने थोड़ा सताया लेकिन उसके लिए शायद ये ही काफी था )

: ohhh God mummy bol diye 😍 thank you thank you 😘😘😘😘😘 I love you , love you , love you so so so much

: 🤭 bas karo inbox bhar jayega yaar ( अनुज ने हल्के दिल से मुस्कुराते हुए मैसेज टाइप करके बोला )

: heehee , ab dekhna us kamini ko kaise bhagati hun ,

: pagl ho tum bhi 😀

अभी अनुज बातें कर रहा था कि उसे रागिनी अपनी ओर आती दिखी और उसके झट से इनबॉक्स क्लॉज कर रील चलाने लगा

: क्या तू कबसे मुस्कुरा रहा है उम्मम

: हीही , मम्मी रील देख रहा था

: अच्छा देखूं तो

रागिनी उसके पास कर बैठ गई और देखने लगी और अनुज कीबोर्ड से रील बदलने लगा तो वो भी उसके पास बैठ कर कुछ फन्नी रील देखने लगी

रील में जब कुछ एक्सपॉजिव या फिर एडल्ट कंटेंट आते तो अक्सर अनुज और रागिनी असहज हो जाते , लेकिन तभी एक रील में एक औरत के बड़े बड़े मटके जैसे चूतड़ शिफॉन ट्रांसपेरेंट ड्रेस में चिपके हुए थे और उसकी पैंटी और गाड़ दोनों पूरी बिजीबल थी पीछे से वो उन्हें बड़े ही शरारती ढंग से हिला हिला कर चल रही थी और उस वीडियो में उस औरत के मोटे चूतड़ों को हिलाते देख रागिनी हस पड़ी






: अरे दादा , कितने बड़े हैं इसके और इन लोगों को शर्म नहीं आती ऐसे वीडियो डालने में हीही

: मम्मी ऐसे वीडियो पर इनको ज्यादा लोग लाइक करते है तो पैसे मिलते है देखो इस वाली पर इतने ज्यादा व्यू है और इसकी दूसरी वीडियो भी है वो सब और भी गंदी है । वहा और भी ज्यादा व्यू और लाइक है

: दिखा तो कैसी है ?

अनुज का लंड हरकत करने लगा और उसने वो औरत की प्रोफाइल दिखाने लगा , किसी में वो कपड़े पहनते हुए , ब्लाऊज पेटीकोट में नहाती हुई , नाइटी में नहाती हुई , एक वीडियो थी जिसमें वो ब्रा और पेटीकोट में थी ।

: उम्मम कैसी औरत है ये इसका पति कुछ नहीं कहता होगा ,

: मम्मी पैसे मिलते है न तो नहीं रोकता होगा शायद , एक वीडियो में इसका पति भी है वो बहुत गंदी है वीडियो

: क्या सच में इसने डाला है वीडियो

: हा रुको दिखाता हु , अनुज स्क्रॉल करके नीचे गयाऔर वो वीडियो दिखाया जिसमें वो औरत ब्रा और पैंटी में थी और एक चुनरी को अपने मोटी चूतड़ पर बांध कर अपने पति के साथ नाच रही थी






उसे देखते ही रागिनी की आंखे बड़ी हो गई

: चीइइ दादा, बंद कर , कितनी गंदी औरत हैं रे, तू यही सब मत देखा कर ,

: मै नहीं देखता मम्मी , बस वो आजाता है अपने आप , अभी देखो हर 3 4 वीडियो बाद न जाने क्यों ऐसी वाली वीडियो आ जाती है

: अच्छा ठीक है हटा इसको , कोई और लगा

फिर अनुज ने उसके प्रोफाइल से बैक होकर रिल देखने लगा कि तभी एक औरत आई ब्लैक शॉर्ट नाइटी में ट्रांसपरेंस नाइटी में और एकदम से अनुज को थोड़ा सा ख्याल आया और उसने वीडियो वैसे छोड़ दी जो लगातार स्क्रीन पर चल रही थी

जिसमें एक गोरी दूधिया रंग की औरत जिसके बड़े बड़े रसीले मम्में बिना ब्रा के उस ट्रांसपेरेंस नाइटी में झूल रहे थे और नीचे तक उसकी पैंटी झलक रही थी और उसके उभरे हुए चूतड़ों के क्या कहने






: क्या हुआ ? ( रागिनी ने उसे देखा और अनुज हसने लगा )

: क्या हुआ ? बोल न

: हीही आप ये वाले कपड़े क्यों नहीं पहनते ( अनुज ने लैपटॉप की स्क्रीन में एक शॉर्ट बिजीबल नाइटी में खड़ी औरत को दिखाया )

: तू पागल है क्या ( रागिनी के गाल गुलाबी होने लगे और उसने एक नजर राज को देखा जो मोबाइल में व्यस्त था कुछ चैटिंग सा कर रहा था )

: बताओ न ( धीरे से फुसफुसाया अनुज )

तबतक किचन में सीटी बजने लगी और रागिनी उठ कर चली गई हल्के से होठों से बुदबुदा कर : बाद में

एक बार फिर अनुज के अरमान अधूरे रह गए , और उसने देखा कि उसकी मां किचन से देख कर हस रही थी ।


प्रतापपुर

शाम का वक्त था धीरे धीरे सर्द मौसम में रात ढल रही थी और बनवारी थोड़ा आज शाम से ही हिसाब किताब में बिजी था

वही रंगी के दिमाग ये ख्याल आ रहा था कि अब उसको यहां बहुत रुकने का फायदा नहीं है , चूत के नाम पर बहुत होगा तो सुनीता को एक बार को हाथ लग जाए लेकिन उसके ससुर और गीता के रहते चीजे उतनी आसान नहीं दिख रही थी । फिर उसे अपनी इमेज का ख्याल रखना था आखिर बिना काम के और कितने रोज ससुराल रुकेगा और कोई चूत मिलने की उम्मीद नहीं थी सिवाय .....

सीईईई क्या कटीली चीज है ये

एकदम से रंगी की निगाहे बबीता के चूतड़ों पर गई जो लोवर में उसके गाड़ से चिपकी हुई थी । वो झुक कर कुछ सामान उठा रही थी और साफ पता चल रहा था कि उसने अंदर पैंटी नहीं पहनी है






घूम कर उसने एक नजर रंगी को देखा और मुस्कुरा कर इतराती हुई चली गई

रंगी उसके शरारती मुस्कुराहट से झन्ना गया , उसके लंड में हरकत हुई

: साली मां बेटी सब एक नंबर की चुदासी है और ये गुड़िया तो बहुत चापटर दिख रही है , इसको थोड़ा सबक सिखाना पड़ेगा जाने से पहले , साली के लंड खड़ा कर दिया । वैसे भी चुदवाती तो पहले से ही है मौका मिला तो दो झटके मै भी लगा ही लूंगा ।

: फूफा जी खाना बन गया है हुंहूं ( एकदम से मुस्कुराती हुई वो रंगी के सामने आई जैसे उसे किसी तरह का डर न हो )

: अच्छा ठीक है मेरे कमरे में लेकर आओ वही खाऊंगा मै ( रंगी ने कुछ सोच कर कहा और उठ कर अपने कमरे में चला गया )

बबीता थोड़ी आंखे उठा कर उसको देखी और एक नजर रंगी के पेंट में बने हुए तंबू को देख कर खिलखिलाई फिर अपने चूतड़ मटका कर किचन की ओर जाने लगी और फिर एक नजर घूम कर वापस देखा तो रंगी उसे ही निहार रहा था ।

बबीता मुस्कुरा कर वापस आगे चली गई

रंगी का अब मूड मन चुका था कि आज तो इसकी गाड़ मसल ही देनी है और वो अपने कमरे में बैठ गया उसकी राह देखने लगा

5 मिनट बाद ही बबीता थाली लेकर उसके कमरे में आई

: हम्म्म फूफा जी ये लो खा लो ( आगे झुक कर अपने ढीले टॉप से झांकते हुए बबले दिखाती हुई वो अपनी चमकती आंखों से बोली )

रंगी का जी ललचा रहा था , लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे ? कैसे पहल करे ?

और इतने में बबीता घूम कर जाने लगी और वापस से रंगी की नजर उसके नरम उभरे हुए चूतड़ों पर गई जिसपर बबीता की लोवर चिपकी हुई थी






: अरे गुड़िया रुक , इधर आ

: क्या ? ( वो थोड़ा हस्ती हुई आई रंगी के पास )

: जरा घूम तो ... तूने कच्छी नहीं पहनी न

बबीता ने घूम कर अपने चूतड़ दिखाने लगी और रंगी ने तुंरत उसके चूतड़ पर हाथ फेर दिया

: अह्ह्ह्ह धत्त फूफा जी हीही छोड़ो , इतना तो मम्मी भी नहीं बोलती मुझे

: बहुत बदमाश हो गई है तू , कैसे चिढ़ा रही थी मुझे बाहर उम्मम ( रंगी ने अपने पंजे से उसके नरम चर्बीदार चूतड़ों को सहलाते हुए कहा )

: अह्ह्ह्ह्ह हीही कब मैने उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई

: मार खाएगी तू , और फिर अब कच्छी निकाल कर आई है उम्मम ( रंगी ने अपनी उंगली पीछे से उसके लोवर के ऊपर के उसके चर्बीदार चूतड़ों के दरारों में घुसाते हुए बोला )






: सीईईई ओह्ह्ह फूफा जी रुको न वो तो मुझे सुसु लगी थी करने गई थी तोह गीली हो गई थी सीईईई सच कह रही हूं

: तो दूसरी पहन लेती , लेकिन तुझे तो मुझे चिढ़ाने में मजा आ रहा था क्यों उम्मम

: हीही सच में मेरे पास और कोई कपड़े नहीं है फूफा जी अह्ह्ह्ह सीईईईईई छोड़ो न अब

: क्यों अब नहीं सूझ रही मस्ती सीई तेरे चूतड़ कितने मुलायम है ( रंगी ने खुल कर अब बबीता के चूतड़ों को दबोचने लगा )

: उम्मम हीही मुझे पता है आप क्या चाहते हो , लेकिन मै करुंगी नहीं

: क्या चाहता हूं बता जरा

: अह्ह्ह्ह आपको बुआ की याद आ रही है तो मुझे तंग मत करो अह्ह्ह्ह मम्मी दर्द हो रहा है फूफा जी प्लीज छोड़ो न अब

: सीईईई तू तो बड़ी होशियार है तुरंत समझ गई

: उम्मम अह्ह्ह्ह्ह आपको देख कर कोई भी समझ जाएगा कि आपको बुआ की याद आ रही है सीईईई ओह्ह्ह

: कैसे ?

: आपका वो हीहीही


रंगी का लंड उसके पजामे में तंबू बना चुका था और उसने बबीता को पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया और उसके नरम चर्बीदार चूतड़ सीधे उसके फुले हुए सुपाड़े पर टच होने लगे । बबीता ने जैसे ही रंगी के कड़े सुपाड़े की नोख को अपने गाड़ के चुभता महसूस किया पूरी तरह से गिनगिना गई : उम्मम छोड़ो न फूफा जी ,

रंगी : बस थोड़ा सा आराम हो जाने दे फिर अह्ह्ह्ह्ह सीईईई

रंगी ने उसे पकड़ कर अपने लंड पर बिठा दिया गोद में और बबीता की चूचियां कड़क होने लगी

: सीईईई नही मुझे जाना है

: कहा जाएगी

: मम्मी डांटेगी अगर नहीं गई तो अह्ह्ह्ह

: बस थोड़ा देर और ओह्ह्ह्ह कितना अच्छा लग रहा है ( रंगी ने उसको पेट पर पकड़ रखा था और नीचे से अपना लंड पूरा टाइट कर उसके गाड़ में कोच रहा था )

: उम्ममम सीईईई कितना टाइट है आपका सीई ओह्ह्ह्ह

: तूने ही तो किया है इसको टाइट दिखा दिखा कर अपने चूतड़

: धत्त , आप गंदे हो । खुद निहार रहे थे और मुझे बोल रहे हो सीई ओह्ह्ह्ह वहा क्यों पकड़ रहे हो

रंगी ने अपने हाथ आगे से बबीता की मौसमी जैसी चूचियां पकड़ ली और सहलाने लगा : उफ्फ कितने कड़े दूध है तेरे गुड़िया सीईईई

: आह्ह्ह्ह छोड़ो न फूफा जी ,

: क्यों अच्छा नहीं लग रहा तुझे उम्मम

: सीईईई लग रहा है लेकिन ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई

: लेकिन क्या उम्म्म

: कोई आ गया तो उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

: कोई नहीं आएगा

रंगी बड़े इत्मीनान से बबीता को अपने लंड पर बिठा कर उसकी नर्म नर्म चुचियों को मिजने लगा और बबीता भी अपनी गाड़ अपने फूफा के खड़े लंड पर घिसने लगी

अपने खुद के पापा से चुदने के बाद बबीता को अब शायद ही कोई डर था , उसकी चूत की खुजली सुबह से बढ़ गई थी लेकिन पूरा दिन अपने पापा के पास फटकने पर भी राजेश ने उसे छोड़ कर सुनीता के साथ समय बिताने लगा और बबीता की चूत रस छोड़ती रही सारा दिन और ऐसे में रंगी का उसके करीब आना बबीता की कामुकता को हवा दे दिया था । उसे लंड की तलब थी

: ओह्ह्ह्ह फूफा जी उम्म्म सीई ओह्ह्ह

: पेलवाएगी गुड़िया मुझसे

: उम्मम्म ( बबीता की चूत एकदम से रस छोड़ने लगी )

: पेलवाएगी मुझसे बोल ,

: हम्ममम लेकिन अभी नहीं रात में आऊंगी मै

: पक्का न

: हम्ममम आप दादा जी के पास मत रहना यही रहना

फिर रंगी ने उसको घुमा कर उसके लिप्स चूसने लगा और बबीता ने उसका साथ देने लगी

: हीही अब जाने दो न , नहीं मम्मी डांटेगी

: ओके जल्दी आना ( रंगी ने उसके चूतड़ पर मारते हुए कहा )

: अह्ह्ह्ह दर्द होता है उम्मम

अपने चूतड़ सहलाते हुए वो बोली और रंगी हसने लगा

फिर बबीता वहा से निकल गई किचन की ओर और रंगी भी खाना खाने बैठ गया ।

जारी रहेगी

( दीवाली सीजन है guyss कंजूसी मत करना नहीं 🤭😜 ) नहीं तो दिवाली धमाका अपडेट लेट हो जाएगा 🤪
 




आप सभी को दीपावली की

हार्ड डिक

शुभकामवासनाएं


:फायरिंग:
 
💥अध्याय : 02 💥

अपडेट 024


THE EROTIC SUNDAY 08

" अरे खुशखबरी है मेरी नन्द रानी "

" क्या सच में अमन का छोटा भाई आ रहा है क्या ? "

" मेरी उम्र कहा अब आपको दूसरा भतीजा दे दूं , हा नयकी भौजाई से मांग लो हाहाहाहाहा " , ममता ने किचन में फोन पर संगीता से बात करते हुए मंजू को छेड़ा जो उसके साथ काम में लगी थी

: नयकी भौजाई मतलब ?

: अरे मतलब मुझे मेरी देवरानी मिल गई और अगले हफ्ते शादी भी है

: क्या सच में ? कौन है ? ( फोन पर संगीता एकदम से खुश हो गई )

: अरे वही पुराना माल वापस मिल गया है हाहाहाहाहा

ममता ने मंजू को छेड़ा और संगीता से बात कर रही थी

वही मुरारी अभी अभी बाहर से आ रहा था और हाल में बैठ हुए मदन को देख कर

: मदन जरा कमरे में आओ

: जी भैया

मुरारी उसे बोलकर अपने कमरे में चला गया और मदन थोड़ा असहज था , एक तो शादी और फिर आज दुपहर को कुछ हुआ था उसे लेकर

मदन कमरे में आया तो देखा मुरासुर सोफे पर बैठा हुआ डायरी खोलकर कुछ हिसाब लगा रहा था

: जी भइया

: अरे आओ बैठो , देखो टेंट और कैटरिंग वाले से अभी बात करके मै आ गया हूं, कल सुबह सजावट और लाइट साउंड के लिए बात हो जाएगी । अच्छा तुमने मेहमानों की लिस्ट बनाई

: अह हा भइया, ये देखिए

फिर मुरारी लिस्ट देखने लगा और मदन चुप था । एकदम से

मुरारी समझ रहा था कि मदन आज दुपहर की बात को लेकर असहज था

: तो कब तक चुप रहने का पक्का किया है ( मुरारी ने मेहमानों की लिस्ट पर पेन घुमाते हुए कहा )

: जी भैया ?

: अरे यार , मै दुपहर वाली बात कर रहा हूं

: सॉरी भैया , मुझे नहीं पता था कि आप लोग , सॉरी

: अरे यार हो गया , अब ज्वाइंट परिवार में ऐसी चीजें हो जाती है , इतना मत सोचो। देखो शादी की तैयारी करनी है और देखना तुम्हारी वजह अमन की मां को असहजता न हो

: जी भैया , ख्याल रखूंगा

: और क्या है तुम तो जान ही रहे हो कि इधर इतने दिन से मै था नहीं तो ... उसका भी मन हो गया और मेरा भी

: जी भैया ( थोड़ा शर्मा रहा था मदन )

: अरे यार तुम शर्मा क्यों रहे हो , हा , अगले हफ्ते तुम्हारी भी सुहागरात होगी हाहाहाहाहा

: क्या भैया आप भी ( मदन एकदम से शर्मिंदा हो गया और मुस्कुराने लगा )

: अरे हा , ममता बता रही थी कि आज तुम लोग थोड़े बहक गए थे उम्मम क्या ये सच है ?

मदन एकदम से चुप हो गया

मुरारी उसके कंधे पर हाथ रखता हुआ : हस कर : अरे तो क्या हो गया , इतना शरमाओ मत , मै भी मर्द हूं मेरे भी जज्बात डोल जाते है हाहाहा क्यों !!

मदन शर्मा कर मुस्कुराता हुआ : जी भैया

मुरारी : हा लेकिन अगर कुछ करना हो वो सब तो भाई ध्यान से कुंडी कड़ी लगा कर , समझे हाहाहाहाहा कही मै गलती से चला गया तो सही नहीं रहेगा न

मदन एकदम शर्म से गाढ़ हो गया : क्या भैया आप भी , शादी से पहले कैसे ?

मुरारी : अरे बेटा हमको चोदना मत सिखाओ , पकड़े गए थे उसी के साथ खेत में भूल गए हाहाहाहाहा

मदन मुस्कुराने लगा जब सालों पुरानी बात उसने खोद निकाली

कमरे का माहौल हसनुमा था कि मुरारी फिर एकदम से सीरियस होकर कहा : देखो मदन ये सब बाते ठीक है लेकिन मैने तुम्हे यहां कुछ बहुत खास बात करने के लिए बुलाया है

मदन थोड़ा शांत होकर : जी भइया कहिए

मुरारी का चेहरा अब एकदम सीरियस था और उसने नजरे उठा कर मदन की आंखों में देखते हुए : देखो अब तुम मंजू के साथ एक नए सफर पर जा रहे हो और शादी के बाद वही तुम्हारी संगिनी बन जाएगी तो ये तुम्हारी जिम्मेदारी है कि तुम उसके साथ ईमानदारी से पेश आओ

मदन : जी भइया मै समझ नहीं पा रहा हूं , साफ साफ कहिए

मुरारी थोड़ा रुक कर : हो सकता है दो दिन बाद ही संगीता आ जाए और तुम्हारा और उसका जो भी रिश्ता है मै चाहता हूं तुम उसे आगे न बढ़ाओ । यही तुम्हारे और मंजू के नए रिश्ते के लिए सही होगा

एकदम से मदन के चेहरे की हवाइयां उड़ गई और उसका माथा पसीना पसीना हो गया

मुरारी उसकी चुप्पी समझ सकता था : हा मुझे पता है और तुम्हारी हरकते ही ऐसी है कि किसी को भी भनक लग जाए , लैला मजनू जैसे इशारेबाजी चलती है तुम्हारी और कबसे चल रहा था तुम्हारा ये सब मुझे तो अमन की शादी के बात पता चली ?

मदन नजरे नीची किए हुए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था : भइया वो शादी के दिनों में ही हुआ था , दीदी का नेचर जानते ही हो आप कितनी चंचल है वो और भोला जीजा इतने खुल कर रोमांस कर रहे थे कि मै उनकी ताकि झांक करने को बेचैन हो गया और फिर बहक गया था । लेकिन जो कुछ भी हुआ सब दीदी के पहल से हुआ था

मुरारी का लंड अकड़ रहा था : हा तुम बड़े हरिश्चंद्र हो तुम्हारा खूंटा खड़ा नहीं हुआ होगा ? देखो बात जो भी रही हो आगे से ये सब हरकते नहीं होनी चाहिए और अगर संगीता की तरफ से पहल हो तो मुझे बताओगे , मै उससे बात करूंगा ।

मदन : जी भइया

मुरारी : हम्ममम ठीक है अब जाओ

शिला के घर

: यार भाभी इन मर्दों ने तो हमसे हमारी आजादी छीन ली है ( शिला ने रज्जो को हाल में बैठे हुए रामसिंह और मानसिंह को देखते हुए कहा )

दोनों भाई आज रात के जबर्दस्त गैंगबैंग की योजना का सोच कर अपना लंड मसल रहे थे पेंट में

: हीहीही लग रहा है भाभी आपने अच्छे से निचोड़ा नहीं इनको , देखो तो कैसे धार बढ़ा रहे ( कम्मो ने खिल कर रज्जो के कंधे पर ठोकर मारते हुए कहा )

: अरे तुम दोनों के मर्द तो जंगली सांड है , एक बार चढ़ जाए तो उतरते नहीं जल्दी

: हीहीही दीदी लग रहा है भाभी को अपनी ट्रिक बतानी पड़ेगी

: हा कम्मो सच कह रही है , रज्जो रानी बड़ी भोली है इन्हें जंगली सांडो को कैसे उतारना है पता नहीं है हाहाहाहाहा

: अरे मतलब करना क्या है बताओ तो ( रज्जो थोड़ा कन्फ्यूज थी )

शिला ने रज्जो के कान में फुसफुसाई

: ओह्ह्ह , उम्मम फिर तो कोई नहीं बचेगा इस ट्रिक से

वही दूसरी ओर हाल में बैठे हुए तीनों गदराई औरतों के चूतड़ नाइटी में उठे थे और उन्हें देख कर

: भैया मुझसे और नहीं रुका जाएगा सीई , मै जाऊ क्या ?

: अरे पागल अरुण अभी सोया नहीं है

: आप उसपर ध्यान रखो जरा मैं बस थोड़ी सी मस्ती करके आता हूं ( ये बोलकर रामसिंह उठ कर किचन की ओर आ रहा है )

मानसिंह ने उसे रोकना चाहा लेकिन रामसिंह नहीं माना और उठ कर अपना लंड मसल कर बढ़ गया

शिला उसको आता देख बुदबुदाई : एक सांड आ रहा है फिलहाल इसको थोड़ा सा मजा देकर उतावला करना है , तैयार हो जाओ रंडियों

शिला की बात पर रज्जो और कम्मो खिलखिलाई

रामसिंह आते ही कम्मो और रज्जो के बीच खड़ा हो गया और दोनों के कूल्हे पर हाथ रख कर सहलाता हुआ : क्या बन रहा है कम्मो , महक तो अच्छी है

कम्मो ने धीरे से अपना हाथ उसके टाइट पेंट के ऊपर रख दिया और लंड पकड़ कर : फिलहाल तो मेरा मूड बन रहा है मेरे राजा

रामसिंह को उम्मीद नहीं थी कि कम्मो एकदम से उसका लंड पकड़ लेगी

रामसिंह : ओह्ह्ह्ह थोड़ा सब्र करो न

फिर शिला ने रज्जो को इशारा किया और रज्जो ने भी दूसरी तरफ से हाथ बढ़ा कर उसकी जांघ को सहलाने लगी : कितना सबर करे हम सब उम्मम नहीं रहा जाता सीईईई ओह्ह्ह

दोनों गरमाई औरतों के स्पर्श से रामसिंह का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा और पेंट में पूरा टाइट हो गया और कम्मो और रज्जो दोनों मिलकर उससे चिपकने लगी उसके गर्दन और सीने पर अपने चेहरे रेंगाने लगी

जिससे रामसिंह की धड़कने बढ़ने लगी उसकी सांस भी उखड़ने लगी ,,आंखे बंद कर वो अपने दोनों पंजों में रज्जो और कम्मो के चूतड़ मसलने लगा था

इतने में शिला धीरे से उसके आगे आई और नीचे बैठ कर उसका पेंट खोल दिया और लंड बाहर कर दिया

एकदम से रामसिंह से आंख खोलकर देखा तो शिला नीचे थे उसके बेलन जैसे कड़े मोटे काले लंड देखती हुई

: भाभीईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: उफ्फ नंदोई जी कितना बड़ा बांस जैसा हथियार है आपका रज्जो ने साइड से रामसिंह के हवा में झूल रहे लंड को सहलाया और आड़ को हथेली में रख लिया

जिससे उसके लंड की नशे और तन गई

: सीईईई ओह्ह्ह रज्जो भाभीईईई

: हा मेरे राजा , आज तो आपका लंड बड़ा लग रहा है क्यों दीदी ( कम्मो ने दूसरी ओर से रामसिंह के लंड की चमड़ी पकड़ कर पीछे किया और रज्जो ने आड़ को हथेली में टाइट कर दिया

पूरा का पूरा लंड एकदम से टाइट और सुपाड़ा भी अपना मुंह खोल दिया

: हा कम्मो देवर जी के लंड की खुशबू तो देख उम्ममम क्या मस्त रसगुल्ले जैसा दिख रहा है

: चाट लो दीदी न या मै आऊ ( रज्जो ने रामसिंह के आड टटोलते हुए कहा )

: नहीं मै दूंगी किसी को उम्ममम सीईईई

एकदम से रामसिंह के चूतड़ टाइट हो गए और वो एड़ियों के बल खड़े होने लगा उसने दोनों पंजों से रज्जो और कम्मो के चूतड़ में नाखून गाड़ दिए हो मानो और वही नीचे शिला ने अपनी जीभ की टिप से उसके सूखे लाल सुपाड़े के होल को छेड़ रही थी : ओह्ह्ह्ह भाभीईई उम्ममम सीईईई कितनी सुखा है ओह्ह्ह्ह मै गिर जाऊंगा






रज्जो मुस्कुरा कर : हमारे रहते नहीं नंदोई जी , क्यों कम्मो

कम्मो उसका लंड सहला कर : हा मेरे राजा मै नहीं गिरने दूंगी आपको

: ओह्ह्ह्ह भाभी चाट लो न क्यों तंग कर रही हो उम्मम

शिला ने मदहोश नजरो से देखा और फिर अपने नरम होठ से उसका सुपाड़ा चूम लिया

: सीईईई ओह्ह्ह भाभी अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह गॉड

फिर शिला ने उसका लंड नीचे से जीभ से टच करते हुए ऊपर आई और पूरा सुपाड़ा मुंह में ले लिया और मुंह में पूरा लार से गिला कर दिया






इधर रज्जो ने अपनी उंगलियों से उसके आड़ को टटोल रही थी और दबा रही थी और कम्मो के हाथ उसके लंड के तने को भर पुर भर भर चमड़ी आगे पीछे कर रहे थे

: सीई ओह्ह्ह मेरे राजा कितना गर्म लंड है ओह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह तुम लोग मुझे पागल कर रहे हो उम्मम भाभी और लो न अंदर

: दीदी और नंदोई जी का लंड मुंह में सीईईई पूरा चूस लो , कहो तो मै आ जाऊ उम्मम नंदोई जी ( रज्जो के रामसिंह के कान के पास बहुत मादकता से फुसफुसाया और उसके कान को मुंह में लेकर काटने लगी

वही कम्मो ने अपने दूसरा हाथ पीछे से रामसिंह की शर्ट में घुसा कर पीठ पर सहला रही थी और रज्जो ने अपने दूसरे हाथ से रामसिंह के चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया






रामसिंह पूरी गिरफ्त में था और नीचे शिला अपनी जीभ का करतब दिखाती हुई बिना एक बार भी उसका लंड छूए सिर्फ मुंह से लंड को गले तक उतारने लगी





: उम्मम भाभी ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम वहा नहीं ( रज्जो ने उसके चूतड़ों पर रेंगते हाथों से अपनी उंगलियां उसके दरारों में घुसाने लगी और रामसिंह बिदकने लगा तो एकदम से कम्मो के उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिए

उम्ममम , रामसिंह की आंखे बड़ी हो गई

इधर रज्जो ने उसके आड़ो को कस लिया मुट्ठी में और पीछे से उसके गाड़ के सुखी सुराख पर थूक लगा चुकी थी जिसे रामसिंह ने अपने चूतड़ कस कर रोकना चाह रहा था और कम्मो ने उसे पूरी तरह अपनी गिरफ्त में लिया उसके लंड की चमड़ी तेजी से आगे पीछे किए जा रही थी और उसके लिप्स को छोड़ने को तैयार नहीं थी

नीचे शिला लगातार एक तय स्पीड के उसका लंड मुंह में लिए हुए थी और

रामसिंह के सबर का फब्बारा उसके आड़ से छूट चुका था और नसे पूरी फूल चुकी थी रज्जो ने हल्की सी ढील दी और उसके आड़ो को अपने हथेली की कटोरी बना कर दुलारा तो सारी मलाई खिसक कर लंड की नसों के भर गई ,लंड एकदम गर्म टाइट और सुपाड़ा पूरा लाल हो गया था , जिसे रामसिंह ने पूरी ताकत से रोका हुआ था

कम्मो ने उसके लिप्स छोड़ते और रामसिंह गहरी सांस लेने लगा मुंह खोलकर और हांफता हुआ : ओह्ह्ह्ह गॉड आने वाला है भाभी

इतना सुनते ही रज्जो ने भी उसका लंड लिया एकदम जड़ में अपनी उंगली की रिंग बनाते हुए , कम्मो ने पहले से ही अपने पंजे के पकड़ रखा और और आगे की बची 4 इंच की जगह को शिला ने मुंह में ले रखा था

कम्मो और रज्जो ने मिलकर तेजी से उसका लंड मुठियाना शुरू किया

रामसिंह की एडी एक बार फिर हवा में और आंखे बंद कर अपने चूतड़ टाइट कर पूरी ताकत से उसने सुपाड़ा सिला हुआ था और फिर एकदम से उसने सब कुछ अपना ढीला छोड़ दिया






: ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू बिच ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह यशस् अह्ह्ह्ह भाभीई ओह्ह्ह्ह कम्मो मेरी रानी सीईईई ओह्ह्ह

अब तो थोक के भाव में मलाई निकल रही थी और सारी सारी शिला के मुंह में

एक के बाद एक मोटी थक्केदार व्हाइट मलाई की पिचकारी छूट रही और रज्जो और कम्मो अखीर तक उसका लंड सहलाते रही और शिला उसका वीर्य पीती रही






फिर शिला ने अच्छे से उसका लंड चाट कर साफ किया और रामसिंह हाफ कर खड़ा हो गया किचन स्लैब का सहारा लेता हुआ , उसका लंड उस वक्त मूसल से चुचका हुआ बैगन हो गया था और चेहरा तो जैसे सफेद पड़ गया हो

शिला अपने मुंह साफ करते हुए उठी और हस कर रज्जो के कंधे पर हाथ रखते हुए : देखा भाभी , ऐसे निचोड़ा जाता है जंगली सांडो को हाहाहा

रामसिंह समझ गया कि तीनों की मिल कर उसकी रगड़ाई की योजना थी , वो तो बस रात के खाने के पहले थोड़ा सा नाश्ता करने का सोच कर आया था लेकिन यहां तो सबने उसे ही दूह लिया

वही इनसब से अलग मानसिंह काफी देर तक किचन में खिलखिलाहट पाकर उठ कर अंदर गया तो

कम्मो हस कर : आज जाइए भाई साहब आप भी लाइन में लग जाइए

मानसिंह वहा की स्थिति देखी और किचन स्लैब पर अपना कमर टीका कर रामसिंह को उसके चुचके लंड के साथ बुझा हुआ देख कर समझ गया कि ये तो गया और अगर वो रुका तो उसकी भी रगड़ाई रात के घमासान से पहले हो ही जाएगी , इसीलिए वो मुस्कुरा कर खिसक लिया और तीनों हस कर मस्त हो गई

प्रतापपुर

: क्या जमाई बाबू आज बड़ा जल्दी भोजन निपटा लिए

: जी बाउजी आप व्यस्त थे तो भूख भी लगी थी

: कोई बात नहीं और बताओ , कुछ उदास दिख रहे हो

: हम्ममम बाऊजी , सोच रहा हूं कल घर निकल जाऊ

: क्यों ? भाई यहां खतीरदारी में कोई कमी तो नहीं

: नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है , वो बस सोनल की मां , हाहाहा आप समझ ही रहे है

बनवारी मुस्कुरा कर : हा भाई यहां इस बात की दिक्कत है और कहो तो कमला को

: नहीं नहीं , बाउजी , बीवी की जगह रंडी थोड़ी ले पाएगी

: वाह जमाई बाबू आपकी यही अदा मुझे बड़ी भाती है

: क्या ? ( रंगी खिलकर )

: कि कुछ भी बात हो आप छोटकी ( रागिनी ) को शामिल कर लेते हो

: हाहाहा , आप तो जानते ही है , कितनी चंचल है वो और फिर ढलती रात में उसके साथ जो यादें है सीईईई

: हूं हूं समझ रहा हूं हाहाहाहा , पजामे में से भी कोई उसे याद कर रहा है

: बस एक बार आप उसका तरीका देख लो बाउजी , सच कह रहा हूं कि आप भी दीवाने को जाओगे

: ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू , क्यों दुखती रग पर हाथ रखते है , कहा छोटकी से मेरा कुछ

: अरे बाउजी आप बस हा तो करिए , सोनल की मां को मनाने की जिम्मेदारी मेरी

: क्या सच में ?

: आपसे क्यों झूठ कहूंगा बाउजी , और फिर उसपर तो आपका मुझसे ज्यादा हक है । मै तो रोकूंगा

: लेकिन इतनी जल्दी ? कैसे ?

: मेरे साथ चलिए कल देखते है कुछ जुगाड़ , नहीं हुआ तो अपनी लाडली के चूतड़ देख लेना और सच कहूं तो शायद इसी बहाने वो भी मेरे जज्बात समझे

: आपके जज्बात मतलब ?

: अरे बाउजी , सोनल को लेकर ? देखिए कई बहुत ईमानदार हूं उसके साथ कभी कुछ नहीं छिपाता उससे और मै चाहता हूं कि वो भी मेरी भावनाएं समझे सोनल को लेकर और मुझे इजाजत देदे और ये सब तभी होगा जब वो पहले आपके साथ

: ओह जमाई बाबू , कभी कभी समझ नहीं आता कि आपके अंदर इतनी दिलेरी आती कैसे है ?

: सच्चा प्यार किसी भी बात से नहीं डरता बाउजी

: ओह्ह्ह मेरे शेर दिल , फिर क्या कमला वाली बात भी करोगे छोटकी से

: हा जरूर थोड़ा अपने तरीके से बताता पड़ेगा

: वो कैसे? ( बनवारी जिज्ञासु होकर कहा )

: सच बताऊं सुन लोगे

: हा हा कहो न

: बाउजी रागिनी को अपनी गाड़ चटवाना बहुत पसंद है , क्योंकि उसे ये पता है कि मै रज्जो जीजी के भड़कीले चूतड़ों का दीवाना हूं तो अकसर मेरे ऊपर बैठ जाती है अपने चूतड़ रख कर और मै उसे चाटता हूं और उसकी बुर का पानी पिता हूं । उसके भी अरमान थे कि उसका भी बदन रज्जो जीजी जैसा हो जाए और फिर मुझे खुश रखने के लिए कभी कभी रज्जो जीजी बन आती है । और आप तो मेरी रज्जो जीजी के लिए दीवानगी जानते है उनके चूतड़ सामने हो तो मै खुद को रोक पाता हूं और उसे बहुत पसंद आता है

: ओह्ह्ह जमाई बाबू , सीईईई सच कहा रज्जो की गाड़ का कोई जवाब नहीं सीई इतने बड़े बड़े रसीले मटके जैसे है और झुक जाए तो पहाड़ जैसे फैल जाते है उम्ममम

: सच कह रहे है बाउजी एक बार आप रागिनी की गाड़ चाटना , वो अपने नरम चर्बीदार चूतड़ों को जब आपके मुंह पर फेकेगी न ओह्ह्ह और गंध ओह्ह्ह्ह बाबूजी मै तो सोच कर ही झड़ जाऊंगा

: अह्ह्ह्ह जमाई बाबू मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है सीईईई ओह्ह्ह

तभी एकदम से दरवाजे पर आहट हुई और दोनों सतर्क होकर अपने लंड को छोड़ दिए

ये गीता थी जो अपने दादू के पास आई थी

एकदम से वो रंगी को बनवारी के पास बैठा देख कर ठिठक गई कि कही उसकी बात तो नहीं कर रहे थे दादू से

: क्या हुआ मीठी

: दादू मुझे आपके पास सोना है , मै अब गुड़िया के पास नहीं सोऊंगी ( नजरे चुराते हुए रंगी को देख कर बोली )

: अरे लेकिन आज तो जमाई बाबू सो रहे थे ?

रंगी तो गीता के सारे इरादे भाप रहा था कि रात में वो अपने दादा के लंड के साथ क्या क्या करेगी और वो मुस्कुरा कर बिस्तर से उठने लगा : अरे नहीं बाउजी इसको सोने दीजिए नहीं तो फिर से नाराज हो गई तो हाहाहाहाहा , आजा गीता तू आराम कर मै चलता हूं बाउजी अपने कमरे में

गीता रंगी का सपोर्ट पाकर मुस्कुरा कर उसे देखा और झट से बनवारी के कम्बल में घुस गई ।

रंगी हस कर : देखिएगा बाउजी ये बड़ी चुलबुली है और जिद्दी भी

बनवारी हस कर गीता को कंधे से पकड़ कर अपनी ओर खींचता हुआ : अरे कोई बात नहीं जमाई बाबू हाहाहा मेरी लाडली है इसका तो हक होता है जिद करे , क्यों बेटा

गीता अपने दादू से लिपट कर मुस्कुराने लगी और रंगी ये देख कर सिहर उठा

रंगी ने उसे देखा और फिर मुस्कुराता हुआ निकल गया अपने कमरे में और अटैच दरवाजा अपनी ओर से बंद कर दिया ।

फिर बिस्तर पर लेट कर बबीता की राह निहारने लगा करीब 20 मिनट बीत गए लेकिन उसका कोई अता पता नहीं चला

रंगी बेचैन होकर उठा और उसके कमरे की ओर गया तो पाया दरवाजा अन्दर से बंद है और कान लगा कर सुना तो उसके हल्के खिलखिलाने और फुसफुसाहट आ रही थी ।

साफ था कि वो फोन पर किसी से बात कर रही है

रंगी की सुलग कर रह गई कि बबीता ने उसको ठेंगा दिखा दिया था , सुबह से ही रंगी का लंड खड़ा हो हो दर्द होने लगा था, पहले सोनल और रज्जो की बाते फिर गीता के साथ काम होते होते रह गया और सुनीता भी आज अपने पति के साथ लगी थी दुपहर से और बबीता से थोड़ी बहुत उम्मीद जगी थी तो वो भी आज लटका कर चली गई , अब तो रंगी ने पूरा मन बना लिया था कि कल के कल ही वो निकल लेगा घर के लिए कम से कम चूत के लिए तरसना तो नहीं पड़ेगा ।

निराश होकर वो अपने कमरे में चला आया और कुछ बैठे रहने के बाद एकदम से उसके जहन में गीता का ख्याल आया कि क्यों न अगर बनवारी सो गया हो तो गीता को बुला ले

एक टूटी हुई उम्मीद सी जगी उसके दिल में और वो हौले से अपने कमरे से अंदर अटैच वाला दरवाजा खोला और हल्का सा गैप से झांका तो एकदम से चौक गया

गीता तो बनवारी का लंड निकाल कर चूसना शुरू कर चुकी थी , बड़े ही इत्मीनान से हौले हौले वो सुपाड़े को चुभला रही थी और रंगी ने जब अपने ससुर को देखा तो वो आंखे बंद कर गीता के सर को सहला रहा था






सीईईई बाउजी गीता से खुद ओह्ह्ह्ह कितने रसीले होठ है उसके पूरा लंड गिला कर दिया है इसने तो अह्ह्ह्ह्ह

रंगी दरवाजे के गैप से अंदर देखता हुआ अपना लंड मिस कर बुदबुदाया

वही गीता को भनक पड़ गई थी कि रंगी उसे देख रहा है लेकिन अब उसे कोई डर नहीं था और उसने तो इस बार रंगी की आंखों में आंखे डाल कर अपने दादा जी का मोटा काला मूसल चूस रही थी और ये देख कर रंगी का लंड झटके खाने लगा और वो अपना लंड निकाल कर बाहर करके हिलाने लगा , गीता ने ये देख लिया और लंड छोड़ दिया

: दादू

: हा बेटा क्या हुआ

: मै आती हूं देखूं फूफा जी सो गए क्या ?

: हा बेटा देख ले फिर आ जल्दी से , उफ्फ तूने तो पूरा टाइट कर दिया है

ये बोलकर गीता बिस्तर से सरक कर नीचे उतरी और रंगी दरवाजे से हट कर कमरे की दिवाल से लग गया

गीता चुपके से कमरे के दरवाजे से अंदर गई और एकदम से रंगी उसके सामने आ गया

अपना बड़ा सा लंबा खीरे जैसा लंड पकड़ कर हिलाता हुआ

गीता उसे देख कर मुस्कुराई : आपका भी मन हो रहा है न

रंगी अपना लंड हिला कर सिसकता हुआ : सीईईई हा बेटा मेरा भी चूस दे न अह्ह्ह्ह्ह सीईईई

गीता : लेकिन दादू अभी सोए नहीं है

रंगी उसका हाथ पकड़ अपने लंड पर रख दिया : ओह्ह्ह्ह कितने मुलायम है तेरे हाथ बेटा सीईईई ओह्ह्ह

रंगी के लंड में खून का सैलाब आया हुआ था और उसका लंड पूरा टाइट होकर तप रहा था , गीता को उसके लंड का वजन बढ़ता महसूस हो रहा था और वो उसे अपने नरम हथेली से सहलाने लगी : उफ्फ कितना गर्म है और भारी भी लग रहा है

: हा बेटा कबसे तड़प रहा हूं इसको चाट कर ठंडा कर दे न जैसे अपने दादाजी का कर रही थी

गीता उसका लंड सहलाती हुई मुंह से हथेली में थूक लेकर अपने हथेली की कटोरी बना कर रंगी के सूखे सुपाड़े पर घुमाया और रंगी की आंखे उलटने लगी : सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम क्या करती है बेटा ओह्ह्ह्ह

गीता ने थूक को उसके मोटे मूसल जैसे लंड पर मल कर आगे पीछे करने लगी

गीता : आओ चलो

रंगी चौक गया : क्या ? कहा ?

गीता : दादू के पास वही मै आप दोनों को साथ में करूंगी

रंगी एकदम से चौक गया और उसकी थोड़ी फटने लगी : क्या कह रही हो तुम ,

गीता : ओके रुको अभी मै बुलाऊं तो आप आजाना, ओके

रंगी का दिमाग सुन्न हो गया था और गीता कमरे का दरवाजा पूरा खोलकर अपने दादू के पास चली गई और उसका लंड सहलाने लगी

: अरे मीठी , दरवाजा क्यों खोल दिया

गीता ने कुछ नहीं बोला सीधा अपने मुंह में उसका लंड लेकर चूसने लगी और बनवारी की सिसकारियां उठने लगी

: दादू पता है फूफा जी हमें कमरे से देख रहे है

बनवारी एकदम से सकपकाया और अपना लंड छुपाने लगा : क्या ? वो सोए नहीं

गीता उसका लंड कंबल के हाथ डाले सहलाती हुई : हीहीही नहीं , जब मै पहले इसको चूस रही थी न तभी मैने उन्हें देखा और पता है उनका भी बहुत बड़ा और गर्म हो गया है , उनको भी बुला लो न , मैने कहा कि चलो लेकिन वो नहीं आ रहे है

बनवारी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या चल रहा है और उसका लंड भी मुरझाने लगा था

इधर रंगी समझ गया कि गीता ने आधी अधूरी बात कह कर सारा खेल बिगाड़ दिया और वो अपने कमरे से निकल कर बनवारी के कमरे में आया

: ज जमाई बाबू आप ( बनवारी थोड़ा हिचका )

: परेशान न हो बाउजी जी , ये तो मैने आज सुबह ही देखा था जब आप सो रहे थे और तब भी ये चुलबुली अपनी मिठाई खोजती हुई यहां आ गई थी

: मतलब मै समझा नहीं

फिर रंगी हंसता हुआ आकर बनवारी के पास बैठ जाता है और उसे सुबह से हुई उसकी और गीता की वो सब बातें बताता है कि कैसे गीता ने उसे बाथरूम में लंड हिलाते पकड़ा , फिर रंगी ने गीता को लंड चूसते पकड़ा , फिर उन दोनों को मस्ती करते हुए सुनीता ने पकड़ा , और इतनी सारी पकड़ा पकड़ी का नतीजा है कि आज मै बहुत परेशान था और नीद नहीं आ रही थी तो सोचा आपसे बात कर लूं और देखा तो ये यहां खेल रही थी ।

बनवारी कुछ सोच कर गीता को देखते हुए : तो इसीलिए बहु ने तुझे मारा था दुपहर में, तू जमाई बाबू के साथ थी

: हीहीही ( गीता दांत दिखाने लगी )

: मै कह रहा था न बाउजी बहुत चुलबुली है ये और जिद्दी भी

बनवारी हस कर : फिर तो सही पिटाई हुई तेरी , और जमाई बाबू इसने आपके साथ जो शरारत की उसके लिए माफ कीजियेगा , थोड़ी जिद्दी है और इसकी जिद के आगे मै भी हार ही गया

: हाहाहाहाहा वो तो दिख ही रहा है , लेकिन अब जो इंजॉय कर रहे है तो खुल के कीजिए ये पर्दा क्यों

रंगी ने कम्बल हटाया तो लंड गीता उसका लंड पकड़े हुए थी : देखिए मीठी को उसका खिलौना कितना पसंद है वो नहीं छोड़ने वाली हाहाहाहाहाहाहा

बनवारी हंसता हुआ : सच कहा जमाई बाबू , वैसे आप भी अपना खिलौना निकालिए मीठी उसे भी दुलारेगी क्यों बेटा करेगी न

गीता ने थोड़ा शर्मा कर थोड़ा उत्साहित होकर हा में सर हिलाया और पजामे से अपना लंड बाहर निकाल कर सहलाने लगा

गीता ने एक नजर उसे देखा और वापस से बनवारी का लंड चूसने लगी : ओह्ह्ह्ह मीठी सीई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह क्या गजब का सुकून है जमाई बाबू

रंगी की लार टपकने लगी बनवारी की सिसकिया सुन कर और बनवारी ने गीता को इशारा कर रंगी के पास जाने को कहा

गीता थोड़ी मुस्कुरा कर खड़ी होकर रंगी के पास जा रही थी कि एकदम से रंगी ने उसे पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया और वो दोनों ससुर दामाद के बीच आ गिरी खिलखिलाती हुई

पूरा कमरा बनवारी के ठहाके और गीता की खिलखिलाहट से गूंज उठा

: जरा इधर आ और सुबह की उधारी पहले पूरी कर ( रंगी ने उसको अपनी बाहों में भरते हुए कहा )

: सुबह की उधारी मतलब जमाई बाबू ? ( बनवारी ने हस कर सवाल किया

: ओह्ह्ह बाउजी सुबह इसके रसीले दूध का स्वाद चखा ही था कि इसकी मम्मी आ गई थी और मै जीभ टपका कर रह गया , जरा इसको निकाल न ( रंगी ने गीता की टीशर्ट निकाल दी और वो अपने हाथों से हस्ती हुई अपने मोटी मोटी नारियल सी चूचियों को छिपाने लगी जो ब्रा में कैद थी )

: उफ्फ मीठी सीई तू तो बड़ी हो गई है , कितनी रसीले दूध है तेरे

: उम्ममम दादा जी आराम से ओह्ह्ह्ह फूफा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई

दोनों ससुर दामाद ने गीता की रसीली छातियां टटोलनी शुरू कर दी

: उफ्फ बाउजी कितनी मुलायम छाती है अभी से इसकी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह जरा निप्पल देखूं तो ( ये कहकर रंगी ने गीता के कंधे से उसकी ब्रा सरका दी और उसके रसीले मम्में को हाथों में भरने लगा ) अह्ह्ह्ह सीई कितनी भारी हो गई है अभी से तेरी छाती

: उम्ममम तो मै क्या करु , मम्मी कहती है कि मैं बड़ी बुआ पर गई हूं

रज्जो का जिक्र आते ही दोनों ससुर दामाद एक दूसरे को देख कर एक शरारत भरी मुस्कुराहट पास करते हैं और अगले ही पल उसके नंगी चूचियों पर टूट पड़ते है

: ओह्ह्ह्ह दादू उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम मम्मा ओह्ह्ह्ह सीईईई और उफ्फ फूफा ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई सीईईई






दोनों ससुर दामाद ने एक एक चुची को अच्छे घुला घुला कर निप्पल मुंह में लेकर चूसने लगे और गीता की सिसकियां उठने लगी और वो दोनों के सर को अपने चुचियों पर दबाने लगी

बनवारी तेजी से अपनी जीभ से उसके किशमिश जैसे निप्पल को फ्लिक करने लगा और उसके हाथ नीचे उसके स्कर्ट के अंदर घुस कर उसकी चूत टटोलने लगे और गीता का बदन ऐंठने लगा , वही रंगी उसकी चुची को पकड़ कर पंजे में कसता हुआ उसके निप्पल मुंह में लेकर चुसे जा रहा था ।








और वही बनवारी ने उसकी स्कर्ट खींच कर उसकी पैंटी में भी खींच कर निकाल दिया और उसकी गीली चूत पर नजर पड़ते ही रंगी ने बिना किसी देर किए अपने उंगलियों को उसके गीली बुर पर रख दिया : इश्श बाउजी उसकी बुर कितनी गीली है

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम फूफा जी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह

: क्या हुआ बेटा उम्मम अच्छा नहीं लग रहा है

: ओह्ह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है ओह्ह्ह्ह मै झड़ रही हूं ओह्ह्ह

रंगी ने अपनी स्पीड बढ़ाते हुए तेजी से उसके बुर के फांके रगड़ने लगा और वही दोनों ससुर दामाद वापस से उसकी निप्पल मुंह लेकर खींचना शुरू कर दिया






कमरा पूरा गीता की चीखों से गूंज रहा था और उसकी कामुक चीखों से दोनों ससुर दामाद को मजा आ रहा था उसे रंगी तेजी से उसकी बुर के फांके सहला रहा था और गीता अपने कूल्हे उठा कर झड़ रही थी और अपनी जांघें कसने लगी : ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फूफा जी ओह्ह्ह्ह मम्मीईइईइईई सीईईई ओह्ह्ह और और उम्ममम दादू ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई ओह मम्मीईईईई

रंगी का हाथ तबतक नहीं रुका जबतक कि उसकी हथेली गीता के रस से सराबोर नहीं हो गई और वो उसकी बुर पर उसके पानी को सहलाते हुए लिपने लगा और वही गीता झड़ने के बाद खिल रही थी और हाथ बढ़ा कर अपने दादू का लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी

मौका देखकर रंगी ने भी अपना लंड आगे कर दिया और गीता ने दोनों का लंड पकड़ कर हिलाने लगी और मुंह खोलकर रंगी का लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी

: ओह्ह्ह्ह बाउजी सीईईई ओह्ह्ह ये तो उफ्फ

: हा जमाई बाबू ओह्ह्ह्ह मुझे भी वही महसूस हुआ था पहली बार , इसने अपने मम्मी पापा की चुदाई देख कर सब सिखा है सीई ओह गीता उम्ममम






गीता ने लंड बदल कर बनवारी का लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी

रंगी : उफ्फ फिर तो बड़ी होनहार है ये तो सीई ओह्ह्ह इसका अंदाज तो उम्ममम आपको किसी याद आ रही है बाउजी

बनवारी मुस्कुरा दिया और हल्के से होठ से बडबडा कर रज्जो का नाम लिया और रंगी का लंड और कड़क हो ही गया : ओह्ह्ह्ह बाउजी उम्ममम मुझे तो मेरी सोनल की याद आ रही है वो भी जमाई बाबू का ऐसे ही लंड चूस रही होगी ओह्ह्ह्ह

गीता उन दोनों का लंड पकड़ कर हिलाती हुई हस कर : दादू पता है फूफा न हीहीही सोनल दीदी को पेलना चाहते है उम्ममम सुऊऊऊऊऊरूऊऊऊऊपपपपपप अह्ह्ह्ह

बनवारी रंगी को आंख मार कर हंसता हुआ : क्या सच में जमाई बाबू

रंगी : हा बाउजी आपसे क्या छिपाना अब ओह्ह्ह उसके चूतड़ तो क्या ही कहने ओह्ह्ह्ह सोचता हूं उसकी जवान चूत का स्वाद कैसा होगा

गीता : मेरी चाट के देख लो फूफा जी उम्म्म मै भी आपकी बेटी हूं ,

रंगी एकदम से जोश से भर गया और गीता से लंड छुड़ा कर उसकी जांघों के बीच आ गया और अपनी जीभ चला कर उसके रसीले चूत के फांकों को चाटने लगा

और गीता अपने दादू का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी : ओह्ह्ह मीठी सीईईई ओह तू बहुत तेज हो गई है पहले से सीई ओह्ह्ह्ह चाट ले और उम्मम

: उम्ममम अह्ह्ह्ह फूफा जी आराम से ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई ओह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह ( गीता बनवारी का लंड मुंह से निकाल कर हिलाती हुई नीचे देखने लगी कि कैसे रंगी उसकी बुर चूस रहा था






रंगी ने अपनी जीभ उसके बुर के फांके में डाल दिया था और नचाने लगा

: ओह्ह्ह्ह बेटा लग रहा है जमाई बाबू को अपनी बेटी की बुर बहुत भा गई है क्यों जमाई बाबू

रंगी ऊपर उठ कर गीता के चूचे पकड़ कर मुंह भर लिया और चूस कर : एक बार आप भी टेस्ट करके देखो बाउजी उम्मम बड़ा नमकीन पानी है आपकी नातिन का उम्मम

बनवारी की जीभ भी रस छोड़ने लगी और वो सरक कर गीता के चूत पर चला गया और अपनी जीभ से उसके बुर के फांके पर चलाने लग और रंगी उसकी चूचियां मिज मिज कर पीने लगा








: ओह्ह्ह्ह दादू मजा आ रहा है और और उम्मम सीईईई ओह्ह्ह डाल दो न प्लीज

: क्या चाहिए उम्मम बोल बेटा क्या लेगी

: लंड डाल दो न फूफा ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई मम्मीइई अह्ह्ह्ह गर्म है और टाइट भी ओह्ह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू सच में इसकी बुर कस गई है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

रंगी अपना लंड गीता के मुंह पर रगड़ता हुआ : ओह्ह्ह्ह बाउजी पेलीये न रगड़ कर ओह्ह्ह्ह ले बेटी चूस उम्मम ओह्ह्ह्ह कितनी रसभरी जीभ है तेरी ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

रंगी उसके मुंह ने लंड डाल कर उसकी छातियों को मिजने लगा और वही बनवारी तेजी से उसकी बुर में पेले जा रहा था






बनवारी की नजरे तो अपने जमाई के अनोखे अंदाज पर थी जिस तरह से रंगी नए नए तरकीब और चुदाई के पैंतरे खोल रहा था , अपनी दुलारी और गुलगुली नातिन की इतनी कामुक मुंह पेलाई देख कर उसका भी जी ललचाने लगा और वो देख रहा था कि रंगी का लंड गीता के लार से लिभड़ाया हुआ

: ओह्ह्ह जमाई बाबू आपका अंदाज तो सबसे अलग है सीईईई उम्ममम

: क्यों बाउजी जगह बदलेंगे क्या ?

बनवारी ने इस पर मुस्कुरा दिया और रंगी ने हस कर गीता ने मुंह से लंड निकाल कर उसको घोड़ी बना दिया और उसकी बजबजाई बुर में पीछे से लंड घुसा दिया : ओह्ह्ह्ह बाउजी ये तो पूरा मक्खन है सीई ओह्ह्ह कितनी गर्म और मुलायम है






: लेह बेटा चाट इसे उम्मम तेरे नर्म होठ और जीभ का करतब ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ऐसे ही उम्मम ( वही बनवारी अपने आड़ लेकर गीता के मुंह के आगे खड़ा हो गया और गीता उन्हें चूमने लगी चाटने लगी )

: उन्ह्ह्ह सीईईई क्या मस्त रसीली चूत है तेरी गीता ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह लंड तो एकदम मक्खन जैसे सरक रहा है अंदर गपागप ओह्ह्ह्ह बाउजी ऐसे ही रागिनी की बुर जब खूब रस छोड़ती है तो पीछे से पकड़ कर उसको चोदने में बड़ा मजा आता है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह






: ओह्ह्ह्ह जमाई बाबू कहे मेरी तकलीफ बढ़ा रहे है सीई ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम ले चूस इसको भी और और अंदर ले हा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई पूरी घोंट जा ओह्ह्ह ऐसे ही उम्मम

इधर रंगी ने देखा तो बनवारी ने भी अपना पूरा लंड गीता के गले में उतार दिया था और वो जोश में दुगने गति से उसकी नर्म रसीली चूत में पेलने लगा

: ओह्ह्ह्ह बाउजी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई बहुत रुक नहीं पाऊंगा मैं ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह इसकी चूत बहुत कसी है और सुपाड़ा जल रहा है मेरा अब

: हा जमाई बाबू वही हाल मेरा भी है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह चूस पूरा निचोड़ लें ओह्ह्ह मेरी जान मेरी लाडो उम्मम अह्ह्ह्ह पेलो जल्दी जल्दी जमाई बाबू मेरा बस आने ही वाला है ओह्ह्ह्ह

: आह बाउजी मेरा भी आयेगा ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह गीता बेटा आजा कहा लेगी मेरा बीज ओह्ह्ह्ह

: इसको तो अपनी छातियों पर लेना है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह जमाई बाबू आजाओ

रंगी समझ गया था कि पहले भी गीता की जबरजस्त चुदाई हो चुकी है और वो अपना लंड निकाल कर खड़ा हो गया और तेजी से हिलाने लगा गीता की चूची पर वही बनवारी भी अपना लंड उसके चूचों पर घिसने लगा

: ओह्ह्ह्ह बाउजी सीईईई ओह्ह्ह आ रहा है ले बेटा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई आह्ह्ह्ह






रंगी लाल ने अपनी पिचकारी छोड़ी और उसे देखते ही बनवारी ने अपना फब्बारा छोड़ दिया

एक के एक दोनों तरफ से मोटी गाढ़ी पिचकारियां गीता के मुंह पर चूचों पर गिरने लगी और गीता जीभ निकाल कर उनके आडू को सहलाती हुई उनके बीज से नहा रही थी

फिर एकदम से रंगी ने अपना रस से लिभड़ाया लंड गीता के होठों पर रगड़ने लगा : ले चाट से बेटा उम्ममम साफ कर दे इसे






देखा देखी बनवारी ने भी अपना लंड वही दूसरी तरफ से गीता के मुंह पर रख कर हिलाने लगा , गीता के होठ बचे से बीज से लसलसा रहे थे और गीता बारी बारी से दोनों सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसने लगी थी ।

कुछ ही देर बाद दोनों ससुर दामाद बिस्तर पर फैल गए और हांफते हुए थोड़ी बातें करने लगे गीता को लेकर , लेकिन अभी भी उनके लंड की कसावट कम नहीं हुई थी और गीता उनके पैरो में बैठकर वापस से उनका लंड पकड़ कर सहला रही थी अगले राउंड की तैयारी में

लेकिन शायद वो भूल चुके थे कमरे का अटैच दरवाजा खुला था जो रंगी के कमरे में जाता था और रंगी ने पहले से बबीता के आने की राह में अपने कमरे का मेन दरवाजा सिर्फ भिड़का रखा था । वही बबीता तो अपने बाबू सोना को बहला कर उसको सुला कर रंगी से मिलने अपना वादा पूरा करने आई थी । लेकिन उसकी आंखे तब चकाचौंध रह गई जब उसने अंदर का कामुक नजारा देखा






जहां गीता दोनों ससुर दामाद के पैरों के बीच बैठ पर उनके दोनों खड़े हुए लंड को पकड़ कर एक साथ हिला रही थी

जारी रहेगी

( बाकी डील जानते हो , टारगेट बनाए रखो अपडेट जल्दी और बड़े बड़े मिलेंगे 😁 )
 
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