Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 49 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

दिवाली धमाका अपडेट पेज नं 1341 पोस्ट कर दिया गया है

पढ़ कर हिलाओ और रॉकेट उड़ाओ

:शैग:

थे इरोटिक संडे का आखिरी अपडेट भी रेडी है । :declare:

लेकिन बिना टारगेट पूरा किए मिलेगा नहीं 😁
 
💥 अध्याय : 02 💥

अपडेट 025 ( ा)

THE EROTIC SUNDAY 09

ऊपर के कमरे में मंजू अपना पिटारा खोल चुकी थी और समान बिखेर कर ममता को उसके और मुरारी के लिए जो कपड़े लाई थी वो निकाल कर दे रही थी

: हीहीही , अरे जींस पहनेगा कौन ?

: क्यों ? भइया से पूछा था तो बोले थे कि... !!

ममता उसे उदास नहीं करना चाहती थी और खुशी खुशी अपने और मुरारी के कपड़े के लिए

: चलो ठीक है , तुम भी ये सब साइड करो और आराम करो ठीक है

: जी भाभी ( मंजू ने मुस्कुरा कर कहा और फिर एकदम से उसे कुछ याद आया ) अरे एक मिनट

ममता हो उसके बेड से खड़ी होकर कमरे से निकलने वाली थी वो घूम कर वापस मंजू को देखा

: क्या हुआ ?

: वो एक चीज तो आपको देनी रह गई , हीहीही , रुकिए दूसरे बैग में है

फिर मंजू ने दूसरे बैग से वो दो जोड़ी ब्रा पैंटी सेट निकाल कर उसको दिए जो मॉल में मुरारी ने उसके लिए पसंद किए थे

ममता ने मुस्कुरा कर थोड़ा जिज्ञासु होकर वो पैकेट खोलने लगी : अरे इसमें क्या है ?

मंजू कुछ नहीं बोली बस मुस्कुराती रही

फिर जैसे ही ममता ने बिस्तर पर वो पैकेट निकाल कर फैलाया उसके नजर सामने दिख रहे थे ब्रा पैंटी के सेट पर गई । उसकी आंखे चमक उठी जब उसने वो लेस वाली मुलायम ब्रा पैंटी देखी थी और उन्हें खोलते हुए अपने गुलाबी होते चेहरे से खिलखिलाकर : अरे , उम्मम पसंद अच्छी है और साइज भी

: ये उन्होंने ने ही ली या तुमने ?

: अरे मुझे कहा पता होता आपका साइज ( थोड़ा शर्मा कर वो मुस्कुराई )

तभी मंजू की नजर दूसरी फूल कवर ब्रा के साथ आई थांग वाली पैंटी पर गई और जैसे ही उसने उसको खोला थोड़ी उखड़ गई : क्या यार फिर से वही , कितनी बार इनको कहा है ये पतली वाली मत लिया करो ,

: क्यों क्या हुआ भाभी ?

: अह , तुम मेरी दिक्कत नहीं समझोगी ये वाली पैंटी पीछे से अंदर घुस जाती है और फिर ...कितनी दिक्कत होती है क्या बताऊं खुजली सी होती रहती है

मंजू इस पर मुंह फेर कर मुस्कुराने लगी

: जरूर ये उनकी ही करामात है

: अरे नहीं भाभी वहा यही दो टाइप के थे ही

: अरे मंजू तुम नहीं जानती , ये मर्द बस दिखने में भोले होते है , करनी इनको अपनी मनमानी होती है और अमन के पापा बहुत छुपे रुस्तम है , पता है अभी अमन की शादी के बाद पता नहीं कहा से इन्होंने ऐसे ही एक ट्रांसपेरेंट ब्रा पैंटी ऑनलाइन मंगवाई थी जिसको पहनो या न पहनो कोई फायदा नहीं था । पूरा देह उघाड़ दिखता था , अब तुम ही बताओ ये चीज छिपाने के लिए पहनी जाती है या दिखाने के लिए

मंजू कुछ नहीं बोली बस ममता की बात पर हसने लगी थी ।

: मै तो इसको पहनूंगी ही नहीं , फिर देखती हूं कैसे फूटते है इनके अरमान हूह

मंजू हसने लगी

: तुम भी हंसो मत , बहुत जल्द ही इन मर्दों की फरमाइश से परेशान हो जाओगी और फिर भाई तो मेरे उनके ही है न देवर जी

इस पर मंजू थोड़ी शांत होकर बोली: लेकिन भाभी , ये तो अच्छा है न कि भइया आपके लिए इतना सोचते है , वरना किसी को तो ताउम्र इस साड़ी के लिए तरसना पड़ता है

ममता समझ रही थी कि मंजू अपने अतीत को लेकर भावुक है और वो उसके पास गई : देखो तुम उदास मत हो , और तुम आज पर ध्यान दो उम्मम और तैयार हो जाओ परसो हमें शॉपिंग के लिए निकलना पड़ेगा तो अपनी लिस्ट बना लो और सुनो कुछ ऑनलाइन पसंद आए ऐसी चीजें ( ममता ने हाथ में ली हुई ब्रा पैंटी को दिखाती हुई ) तो मंगवा लेना सोचना मत

: धत्त भाभी , मै नहीं पहनती

: अरे मेरे देवर जी की सुहागरात बिगड़ने नहीं दूंगी समझी , तुम मत करना मै खुद बोल दूंगी अमन के पापा से , वैसे तुम्हारा साइज क्या है ?

: क्या !! धत्त नहीं, आप भी न भाभी मुझे जो चाहिए मै लेकर आई हूं और प्लीज भैया से ये सब मंगवाने की जरूरत नहीं है ।

: अच्छा भैया के सामने मेरे लिए जब खरीद रही थी तो शर्म नहीं आई उम्मम

: भक्क भाभी , आप बड़ी वो हो

: हाहाहाहाहा अच्छा ठीक बाबा नहीं कहूंगी ओके

: चलो तुम आराम करो मै जा रही हूं

फिर ममता उठ कर नीचे चली आई, जहां मुरारी कमरे में उसकी राह देख रहा था ।

: अरे ये सब क्या है ?

: आप तो बात ही मत करो , क्या जरूरत थी ये वाली पैंटी लाने की ( ममता ने कमरे का दरवाजा लगाती हुई बोली और सारे कपड़े बिस्तर पर फेक दिए )

मुरारी समझ गया और उठ कर ममता के पास आ कर : अरे मेरी जान , उस समय यही मिल रहा था और मंजू साथ में थी जो जल्दी जल्दी जो मिला ले लिया, सोचा शादियों का दिन रहेगा थोड़ा नए रहेंगे तो पहन लोगी ।

: हूह बात मत बनाओ आप , सारी बदमाशी जानती हूं आपकी । पहना कर बस फोटो निकालोगे मेरी न

: उफ्फ मेरी जान , तेरे ये बड़े बड़े रसीले चूतड़ है ही ऐसे सीई ओह्ह्ह्ह( मुरारी पीछे से अपना लंड उसके गाड़ में कोचना शुरू कर दिया ) इनको पैंटी से नंगा करके चाटने में जो मजा है उम्ममम

: उम्मम फिर पहनाना ही क्यों ,वैसे ही चाट लो ओह्ह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह्ह उम्ममम ( मुरारी ने पीछे से उसके सूट के ऊपर से उसकी रसीली बिना ब्रा वाली चूचियां मिजनी शुरू कर दी थी )

: लेकिन उसको जब तुम पहन कर आओगे और धीरे धीरे उसे उतार कर तुम्हारे रसीले फांके चुंबलाने का उम्ममम वो मजा ही अलग है मेरी जान ( मुरारी ने एक हाथ से ममता के पेडू पर अपनी हथेली घिसने लगा )

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा लग रहा है कि आज की रात मुझे सोने नहीं दोगे

: हा लेकिन तुम ये नई ब्रा पैंटी और ये जींस पहनो फिर

: क्या धत्त , आपकी फरमाइश भी न रोज बढ़ती जा रही है अमन के पापा , सीधा सीधा हिसाब रखो न ( इतना कह कर ममता उसकी बाहों में घूम गई और उसके लंड को सामने से पकड़ कर पजामे के ऊपर से मसलने लगी और उसकी आंखों के देखते हुए ) बस खोलो चाटो और डाल दो

मुरारी की आंखे उलटने लगी जैसे जैसे ममता की उंगलियों उसके आड़ को टटोल रही थी

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान पूरी रात तो चाट चाट कर डालना ही है , बस एक बार इत्मीनान से खोलने का मौका तो दो उम्मम

ममता समझ रही थी कि मुरारी इतने दिनों से बेचैन था और उसके भी अरमान होंगे , कितना तड़पा होगा और कुछ सोच कर वो मुरारी को बाहर भेज देती है

मुरारी थोड़ी देर बाहर गलियारे में राह देखता है और उसने देखा कि मदन अपने कमरे से निकल कर जीने से ऊपर जा रहा है । ये देख कर मुरारी मुस्कुरा उठा कि लैला मजनू को रोमांस की सुध चढ़ी है ।

तभी कमरे से ममता की आवाज आई

: अरे ये तो टाइट है ?

मुरारी झटके से कमरे में दाखिल हुआ : क्या ? ( उसकी नजर ममता के टॉप पर गई जो सीने पर फैली हुई थी ) अरे लेकिन मैने तो तुम्हारे लिए व्हाइट टॉप ली थी न

: लेकिन मंजू ने तो यही दिए

: ओहो लगता है गलती से उसने दे दिए , लाओ निकालो मै बदल कर लाता हूं

ममता ने झटके से वो टॉप निकाली और मुरारी को दिया

मुरारी लपक कर उसकी नंगी कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींचा और उसके जींस में फुले हुए चूतड़ों पर हाथ फेर कर सिसक पड़ा : उम्मम मेरी जान कितनी बड़ी गाड़ है तुम्हारी

मुरारी उसके गाल चूम रहा था कि ममता ने खिलखिलाकर उसको धकेला : बक्क जाओ जल्दी से आओ लेकर

मुरारी मुस्कुरा कर ऊपर जाने लगा और जीने पर चढ़ते ही उसे ख्याल आया कि मदन भी ऊपर आया है और मंजू के कमरे के सामने गया तो दरवाजा बंद था

लेकिन उसको टॉप बदल कर वापस ले जाना ही था तो उसने थोड़ा हिचक कर मंजू का दरवाजा खटखटाया

एकदम से अंदर हड़बड़ाहट और फुसफुसाहट हुई और एक मिनट बाद मंजू ने दरवाजा खोला

मुरारी ने दरवाजे पर खड़े खड़े ही सामने मंजू को देखा और मुस्कुरा कर एक नजर कमरे में देखा

: जी भैया

: अरे तुमने अमन की मां को गलत टॉप दे दी , व्हाइट वाली दे दो ये उसे छोटी आ रही है

मंजू ने शरारती मुस्कुराहट से उसे आंखों से देखा और फिर घूम कर कमरे में बिस्तर तक गई , साड़ी में उसके मादक कूल्हे मटकते देख कर मुरारी का लंड पंप होने लगा

मुरारी कमरे का मुआयना किया और उसे लगा मदन अंदर नहीं हैं और वो मंजू को दबोचने का सोच कर लेकिन जैसे ही कमरे में घुसा , दरवाजे से लग कर ही मदन खड़ा था

: अरे मदन तुम यहां?

एकदम से दोनों की चोरी पकड़ी गई और मुरारी समझ गया कि ये छिपा हुआ था

: जी भैया वो मंजू कपड़े दिखा रही थी ( मदन अपने होठ पोंछता हुआ बोला , उसके होठ अभी भी मंजू के लिपस्टिक की लाली लिए हुए थे )

मुरारी मुस्कुरा कर मंजू को देखा और मंजू शर्माने लगी )

मुरारी टॉप लेकर कमरे के बाहर निकाल आया और नीचे चला गया मुस्कुराता हुआ

नीचे आकर उसने ममता को टॉप दिया और वो उसे एकदम फिट आया और उसके भारी भरी छातियों पर चिपक गया

मुरारी मुस्कुरा कर उसके पास गया और उसे बड़े भड़कीले चूतड़ों पर हाथ फेरता हुआ उसे अपनी ओर खींचा : उफ्फफ मेरी जान सीईईई ओह्ह्ह क्या गाड़ है तेरी उम्मम

फिर मुरारी उसके गुदाज मुलायम चूचे पर अपना मुंह रख कर रगड़ने लगा और ममता उसके सर को सहला रही थी : उम्ममम मेरे राजा दरवाजा तो लगा दो नहीं तो फिर से देवर जी आ जाएंगे अह्ह्ह्ह्ह






मुरारी टॉप के ऊपर से उसके रसीले मम्में पकड़ कर दबाता हुआ : उफ्फ मेरी जान कोई नहीं आएगा, मदन भी ऊपर गया है मंजू के पास उम्ममम कितने मुलायम है तेरे दूध उन्ह्ह्ह सीईईई

: क्या ? देवर जी ऊपर गए है ? आपने मुझे बताया क्यों नहीं ( एकदम से ममता भड़की और मुरारी से अलग हो गई )

: अरे तो क्या हो गया

: आप भी न अमन के पापा , शादी नहीं हुई उनकी और मैने बताया था कि देवर जी लार कुछ ज्यादा ही टपक रही है , रुको बताती हूं इनको

: अरे ? ( मुरारी उसे रोकता उससे पहले ही ममता भिनभिनाती हुई छत पर चली गई और मुरारी उसके पीछे जीने तक आया और निराश होकर वही हाल में खड़ा रहा और अगले दो मिनट में ही ममता मंजू की कलाई पकड़ कर नीचे लेकर आती हुई दिखी

ममता के तेवर थोड़े नाराज थे: अमन के पापा आप ऊपर मंजू वाले कमरे में सो जाइए , अब शादी तक ये मेरे साथ ही रहेगी । चलो मंजू

फिर एकदम से ममता अपने भड़कीले चूतड़ों को हिलाती हुई लेकर चली मंजू को अपने कमरे में और दरवाजा लगा दिया

" बहनचोद हुआ क्या उसको ? " अपना माथा पकड़ झल्लाया मुरारी और एकदम से उसकी नजर सीढ़ियों से नीचे आते हुए मदन पर गई और वो गुस्से से लाल हो गया। अच्छा खासा आज वो ममता के साथ अपनी फैंटेसी जीने जा रहा था और खड़े लंड पर धोखा हो गया , कितने अरमान सजा कर उसने सोचा था कि रात में ममता की चुदाई की वीडियो बनाएगा , उसकी सेक्सी तस्वीरें निकालेगा और अमन को भेजेगा लेकिन सब चौपट हो गया ।

: मिल गया चैन तुझे , भाई तुझे जब समझाया शाम को कि थोड़ा हिसाब से काम करना तो इतनी क्या चूल मची थी तुझे कि आज ही सुहागरात मनाने पहुंच गया

: नहीं भैया वो मैं कपड़े लेने गया था,मंजू ने खुद बुलाया था

: हा देखा मैने कैसे लेन देन कर रहा था , ये जो मुंह लाल करके घूम रहा है न

मुरारी अपने भड़ास में था , इस वक्त उसका लंड बोल रहा था और मदन बस चुप चाप सुन रहा था और समझ रहा था कि अच्छे खासे मूड की अम्मा बहन हो गई । भाभी को भनक लगी कि वो मंजू के साथ है और वो उसे परेशान करने के लिए मंजू को अपने साथ ले गई । लेकिन उनकी मस्ती में बेचारे उसके भैया फंस गए ।

मुरारी मुंह बना कर हाल में सोफे पर बैठ गया और मदन उसके लिए पानी लेने किचन में चला गया और पानी लेकर आया

जैसे ही मुरारी ने मदन को देखा उसका दिल पिघल गया और उसे अपनी गलती का अहसास हो गया

: सॉरी ( नजरे चुराते हुए उसके पानी का ग्लास उठाया )

: कोई बात नहीं, पता नहीं भाभी को क्या दिक्कत है मेरे मंजू के पास जाने से

: उसे तेरी नियत में खोट दिखती है , औरत है मर्द की आंखे पढ़ ही लेगी न

मदन चुप हो गया

: अब छोड़ जो हुआ , भाई बिस्तर लगा मै भी तेरे साथ नीचे ही सोऊंगा , तबतक जरा अमन से बात कर लूं उनकी फ्लाइट का समय भी हो गया है ।

: जी भइया

फिर मदन अपने कमरे में चला गया

वही दूसरी ओर ममता के कमरे में मंजू थोड़ी उलझी हुई थी ।

: भाभी , भइया गुस्सा तो नहीं होंगे न

मंजू का इशारा ममता की तैयारियों पर था , जिस तरह से वो तैयार हुई थी और ममत समझ गई

: अरे तो क्या हुआ , मन तो मेरा भी था लेकिन ये देवर जी तो पीछे ही पड़ गए तुम्हारे वो तो अच्छा हुआ आज सही समय पर अमन के पापा ने बता दिया कि ऊपर देवर जी भी है ? नहीं तो आज ही सुहागरात हो जाती तुम्हारी

: क्या ? धत्त कुछ भी बोलती है आप ( मंजू शर्मा कर बोली )

: अरे मुझे अच्छे से पता है, इस शेर के मुंह में पुराना खून लग गया है और वो शिकार के लिए बहुत राह नहीं देख सकता ( ममता का इशारा उन दोनों की किसिंग पर था और मंजू समझ कर बस लजा रही थी )

: तुम फिक्र मत करो मंजू , शादी से पहले मै उन्हें हाथ तक नहीं लगाने दूंगी

: लेकिन भइया का क्या ?

: अरे वो भी अपने भाई के लिए इतना ही झेल ही सकते है , और फिर मै भी तो अकेली रहूंगी उम्मम

: हीहीही , ठीक है जैसी आपकी मर्जी

तभी ममता की नजर आइने में गई

: अरे मैने तो ध्यान ही नहीं दिया , धत्त न दुपट्टा लिया न पीछे ढका । अच्छा तुमने देखा कि देवर जी मुझे पीछे से देख तो नहीं रहे थे ( ममता आइने में अपने बड़े चूतड़ों के उभार को देखकर कर मंजू से बोली )

इस पर मंजू मुस्कुरा रही थी

: अरे हस क्या रही हो , देखा था न

: हम्ममम , हम दोनो चौक गए थे आपको ऐसे देख कर हीहीही

: एक नंबर के लोफर है देवर जी , ना जाने कबसे घूर रहे थे

: धत्त क्या भाभी आप भी , वो ऐसे नहीं है

: अच्छा , तुम बड़ा जान रही हो , यही इस घर में 25 बरस साथ में बिताए है मैंने वो भी 3 3 मर्दों के बीच , किसकी निगाहे कब कहा है सब पता होती है ।

मंजू बस मुस्कुरा रही है

: वैसे फिटिंग तो अच्छी है इसकी बस ये यहां से थोड़ी गैप है , कूल्हे मोटे है न मेरे थोड़े






: हम्मम ( मंजू ने मुंह पर हाथ रख ममता की बड़ी सी गाड़ को देखा और वो पीछे कमर के नीचे बेल्ट के बीच में गैप भी जहां से उसके भड़कीले चूतड़ों की दरारें शुरू हो रही थी ।

: अरे सुनो मंजू !! एक दो तस्वीरें निकालो न

मंजू हसने लगी और अपने ही मोबाइल से फोटो क्लिक करने लगी

ममता ने जो पहना था वो व्हाइट रंग का वोट नेक क्रॉप टॉप था , जिसमें से एक तरफ की ब्रा स्ट्रिप दिख रही थी , उसके ऊपर और नीचे दोनों तरफ से उसका सीना और पेट दिख रहे थे और उसके बड़े बड़े रसीले पपीते जैसे चूचों की दरारें साफ दिख रही थी ।






ममता ने जींस के बेल्ट की स्ट्रिप के उंगलियां फंसा कर अपने चूतड़ टेढ़े कर एक कामुक सा पोज दिया जो बड़ा ही कैजुअल और नॉर्मल था : कैसी आ रही है ?

: अच्छी आ रही है भाभी ( मंजू ने कहा )

: एक मिनट रुको जरा ( ममता वही बेड के पास रखी हुई हील वाली सैंडल पहन कर खड़ी हुई और कमर पर हाथ रखते हुए पोज दिया ) हा ऐसे लो

मंजू हसने लगी और उसकी तस्वीरें निकाली






: और जरा पीछे से ही भी निकालो देखूं कैसी लग रही है

: हीही आप बहुत सुंदर लग रही है भाभी सब तरफ से

: हा तभी देवर जी घूर रहे थे उम्मम ( ममता ने तुरंत छेड़ा उसे और मंजू हसने लगी )

: दिखाना तो ( फिर ममता उसके पास गई और फोटो देखने लगी ) हम्ममम सही है इतना तो काफी है अमन के पापा के होश उड़ाने के लिए हीही

: क्या ? तो आप उन्हें दिखाएंगी

: हा भाई अब देवर जी के चक्कर में बेचारे अमन के पापा के साथ धोखा हो गया न , सुबह किसी तरह मनाना ही पड़ेगा न

: धत्त आप भी भाभी , ऐसी बात है तो मै चली जाती हूं

: नहीं यार थोड़ा छटपटाने दो , मजा आता है बाद में हीहीही

मंजू शर्मा कर हसने लगी

तभी एक झटके में अपना टॉप मंजू के सामने उठा दिया : चलो भाई बहुत हो गया फोटो फोटो मुझे चेंज करना है ।






आंखे फाड़ कर मंजू ने सामने देखा वो वही फूली कवर ब्रा थी जो उसने मुरारी के साथ पसंद की थी और उसके विजिबल कप से झांकते ममता के गोरे चूचों को देख कर उसका हलक सूखने लगा और फिर एकदम से उसने नजरे फेर ली ।

ममता ने इस बार बहुत ध्यान भी नहीं दिया कि मंजू उसे देख रही है या नहीं ,वो बस आइने में अपने देह को निहार रही थी और ब्रा की स्ट्रिप को उंगलियों से खींच कर ब्रा की क्वालिटी देख रही थी ।

फिर वो अपने जींस के बटन खोलने वाली थी कि उसे कुछ शरारत सूझी और वो मंजू की ओर घूम कर : हे सुनो जरा ऐसे निकालो न मजा आएगा हीहीहीही

मंजू की आंखे सन्न हो गई सामने से जब उसने ममता को देखा और अब तो उसकी जींस की बटन खुली थी और पैंटी की लास्टिक साफ झलक रही थी ।






: अरे निकालो न , मजा आएगा अमन के पापा को छेड़ने में हीहीही

मंजू थोड़ा शर्मा रही थी वो नजरे उठा कर ममता का आकर्षक बदन निहारने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी लेकिन ममता ने माहौल ऐसा चंचल कर दिया था कि वो थोड़ा सहज थी उसके साथ ।






फिर ममता ने दो फोटो निकलवाई एक आगे और पीछे से

फिर वो अपनी जींस निकालने लगी

: अरे दादा कितनी टाइट है ये तो , मंजू जरा खींचना था पीछे से

मंजू थोड़ा सकपकाई ये सोच कर कि क्या ममता उससे अपने कपड़े निकालने को बोल रही है

लेकिन ममता को परेशान देख कर वो उसके पीछे आ गई और उसकी जींस को कूल्हे से पकड़ कर खींचने लगी

पूरी ताकत लगा कर आखिर उसने घुटने के बल होकर ममता की जींस पकड़ कर जांघों तक कर दी और एकदम से ममता के चूतड़ पूरे गुलाबी होकर फुटबॉल जैसे हिलने लगे और नीचे से मंजू ने देखा और उसे ममता की कही बात याद आई और सच के वो थांग वाली पैंटी पीछे से उसके गाड़ के चिपकी दरारों में गहरे घुस गई थी बस ऊपर से उसकी लास्टिक के पास दिख रही थी






इतने बड़े बड़े भड़कीले पहाड़ जैसे चूतड़ों को देख कर मंजू की आंखे सन्न रह गई और उसका गला सूखना शुरू हो गया

फिर ममता ने बेड पर बैठ कर जींस उतारी और वैसे ही बिना किसी लाज शर्म के अपने बड़े बड़े चौड़े चूतड़ों को नंगे हिलाते हुए आलमारी के पास चली गई नाइटी निकालने के लिए






यही एक मौका था मंजू के पास और ना जाने क्या सूझा उसे उसने झट से मोबाइल में अपने पीछे से ममता की वो कामुक तस्वीर लेली बिना फ्लैश जलाए और झट से मोबाइल साइड कर दिया ।

फिर ममता ने नाइटी डाल ली और बेड पर रखे हुए कपड़े समेटने लगी

: अरे तुम भी कुछ पहन को नाइटी वगैरह या ऐसे ही सोना है

: उम्मम वो तो ऊपर है ,कोई बात नहीं मै ऐसे ही सो जाऊंगी

: पक्का न , नहीं हो तो साड़ी निकाल दो और आ जाओ कंबल में

मंजू थोड़ा शर्मा रही थी

: अरे यार इतना मत सोचो , मै कौन सा हथियार लिए हूं कि तुम्हारु इज्जत लूंट लूंगी हाहाहाहाहा

: क्या भाभी आप भी हीहीहीही ( मंजू मुस्कुरा कर बिस्तर के पास आई और अपनी साड़ी निकाल दी )






ममता ने मंजू के गुदाज और चर्बीदार बदन को देखा और पेटीकोट में उसके कर्व को देख कर उससे ताजुब किया कि माल अभी भी कसा है फिर उसके रसीले मम्में ब्लाउज के ठूंसे हुए थे एकदम कड़क

ममता मुस्कुरा कर बिस्तर में आ गई ।

फिर उसने मंजू को सारी तस्वीरें उसके मोबाइल पर भेजने को कहा

वही दूसरी ओर मदन ने कमरे में बिस्तर लगाया और मुरारी को आवाज दी वो अमन से हाल चाल रहे था और फिर फोन काट कर मदन के कमरे में आया

: अह्ह्ह्ह भाई लग गया बिस्तर हम्ममम

: जी भैया आइए

फिर मुरारी ने अपना कुर्ता निकाला और पजामा भी और बिस्तर में आ गया और मदन ने भी अपना कुर्ता पजामा निकाल कर बनियान और अंडरवियर में बिस्तर में आ गया

एक ही कंबल में दोनों भाई लेट गए

: भाई मदन बत्ती बुझा दो ऐसे नीद नहीं आएगी

: जी भैया

फिर कमरे की बत्ती भी बुझ गई और एक दम से चुप्पी थी । नीद दोनों में से किसी को नहीं आ रही थी , दोनो भाई रह रह कर करवट बदल रहे थे ।

: संगीता ने शाम को फोन किया था न

: जी भैया

: क्या बात हुई

: आप तो उनकी आदत जानते हो कितनी बातूनी है और शरारती

: हाहाहाहा क्या कह रही थी ( मुरारी रुचि लेकर बोला )

: कुछ नहीं छोड़िए भैया वो सब

: अरे भाई एक तो नीद नहीं आ रही उसपर से तू अब मत परेशान कर ( मुरारी थोड़ा खीझा )

: भइया आप गुस्सा मत होना लेकिन

: हा भाई बता अब

: वो कह रही थी कि आएंगी और सुहागरात से पहले मुझे ट्रेंड करेंगी

: ट्रेंड करेंगी मतलब ?

: मतलब कि वो नीचे मेरी मालिश करेगी थोड़ा प्रैक्टिस करवाएंगी ताकि मेरा जल्दी न होने पाए

: क्यों तुझे ऐसी कोई दिक्कत है क्या ?

: नहीं भैया ? लेकिन दीदी अब साफ साफ थोड़ी न कहेंगी वो तो ऐसे ही कहती है जब उनका मन होता है वो सब करने का । मतलब ऐसे ही उनका इशारा होता है

मदन की बातों से मुरारी का लंड अकड़ गया जांघिये में

: सॉरी भइया

: अच्छा ठीक है कोई बात नहीं , ये बता ये सब हुआ कैसे था

: भइया वो ... दीदी और भोला जीजा बड़े रंगीन थे और उनके इशारेबाजी पर अनायास मेरी नजर चली गई एक रोज और फिर अंदर से मन होने लगा उन्हें देखने का । फिर उनका तरीका इतना वाइल्ड था

: वाइल्ड मतलब ?

: मतलब भैया जीजा खूब तेज तेज दीदी को पीछे से करते थे और दीदी खूब चीखती थी

: हम्म्म आगे ?

: वो सब देख सुन कर मेरा मन और ललचाने लगा और फिर हर बार खत्म होने के बाद अगली बार कब और कहा करना है उसकी जगह और टाइम भी उसी समय डिसाइड कर लेते थे वो लोग तो मुझे पता होता था कब कहा पहुंचना है लेकिन एक बार मेरी चोरी पकड़ी गई !

: कैसे ? ( कम्बल के जांघिये के ऊपर से अपना लंड सहलाते हुए मुरारी ने पूछा)

: दरअसल मुझसे एक गलती हो गई थी

: क्या ?

: एकबार जब वो लोग स्टोर में सेक्स कर रहे थे तो मै उनकी वो सब बातें सुनकर झड़ गया था

: क्या ?

: हा फिर उन्हें शक हुआ कि कोई छुप कर उनको देख सुन रहा है और दीदी ने मुझे पकड़ने के लिए ये सब प्लान बनाया मेरे ही कमरे में और मै पकड़ा गया

: हे भगवान , क्या लड़की है ये संगीता , फिर क्या हुआ

: फिर उन्होंने मेरी परेशानी पूछी और मुझे कसम देकर मेरे मन की बात उगलवा ली फिर एक लालच दिया मुझे

: क्या ( मुरारी की सांसे तेज होने लगी )

: उन्होंने कहा देखोगे ?

: क्या ? ( मुरारी की धड़कने तेज थी )

: फिर वो अपनी साड़ी उठा कर बिस्तर पर घुटने के बल झुक गई

मुरारी उस सीन की कल्पना करने अपना लंड पकड़ कर भींच लिया और उसका हलक सूखने लगा ये सोच कर कि मदन का क्या हाल हुआ होगा अपनी सगी बहना के रसीले चूतड़ों को देख कर : फिर ?

: आप गुस्सा मत होना प्लीज , मै खुद को काबू नहीं कर पाया था और मुझसे रहा भी गया

: तो क्या डाल दिया सीधा? ( मुरारी ने अपना लंड जांघिया से निकाल कर सहलाने लगा )

: नहीं ..

: फिर ( मुरारी के जहन में वहीं चल रहा था जो अब मदन उससे कहने वाला था और वही सोच कर मुरारी का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था उसकी सांसे गर्माने लगी थी ) बता न भाई चुप क्यों है

: पता नहीं आपको कैसा लगेगा , लेकिन मै दीदी को पीछे से देख कर खुद को रोक नहीं पाया और उनकी गाड़ चाटने लगा

: क्या अह्ह्ह्ह ....( मुरारी तेजी से अपना लंड ऊपर नीचे कर रहा था )

: हा भइया वो सीन इतना कामुक था कि आप होते तो शायद आप भी खुद को रोक नहीं पाते , दीदी ने नीचे से बाल साफ कर रखे थे और वहा से सफेद पानी आ रहा था और मेरा मन ललचा गया

: तो क्या तूने संगीता की बुर भी ( मुरारी अपना सुपाड़ा मिजता हुआ बोला )

: हा भइया नहीं रहा गया मुझसे और फिर दीदी मुझे ऐसे उकसा रही थी कि फिर मैने डाल दिया अंदर

मुरारी का लंड एकदम तप रहा था और वो उसे सहलाए जा रहा था और कम्बल के हरकत इतनी तेज थी कि मदन को भनक हो गई थी

: देखा भैया आप सिर्फ सुन कर परेशान हो गए , सोचो मेरे सामने तो दीदी नंगी थी तो मै क्या करता

: अह्ह्ह्ह सच कहा तूने , तेरी भाभी भी ऐसे जब घोड़ी बन कर अपने चूतड़ फैला देती है तो रोकना मुश्किल हो जाता है और उसके चूतड़ तो तूने देखे ही है कितने बड़े है जैसे पहाड़

अपनी भाभी के भड़कीले चूतड़ों का ख्याल करते ही मदन का लंड अकड़ गया था लेकिन बड़े भाई के आगे लिजाह करना था : सॉरी भैया मैने कभी भाभी को उस नजर से नहीं देखा

: क्या बोला ? मुझे चूतिया मत बना , याद है मुझे शादी के बाद कैसे तू ममता की ब्रा कमरे में फेक कर भागा था और किस लिए तू उसे बाथरूम में लेकर गया था वो भी मुझे पता है

: अरे सच में भैया , आप चाहो तो बहु से पूछ लेना , वो आपको गलतफहमी है उस रोज जब आंधी आई थी तो भाभी की ब्रा छत से उड़ कर गोदाम के पास गिरी मुझे लगा बहु की होगी क्योंकि तब मैने छत पर उसे ही कपड़े उतारते देखा था अगरन से और जब मैने उसे देने गया तो उसने बताया कि ये भाभी की है और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे उन्हें लौटाऊंगा, आप तो भाभी की आदत जानते हो कितनी खिंचाई करती है मेरी और अगर उन्हें सामने से देने जाता तो मेरा मजाक बनाती इसीलिए बस कमरे में फेक कर भाग गया

: हा लेकिन उस वक्त वो गीली थी

: भइया मै सच्ची कह रहा हूं बाथरूम से आया था लेकिन मै भाभी को लेकर ऐसा कुछ भी नहीं किया जैसा आप सोच रहे हो

मुरारी को यकीन तो नहीं था लेकिन मदन ने जिस तरह से सफाई दी थी वो चुप हो गया था

: तो पक्का तूने कभी अमन की मां को वैसे नहीं देखा

: देखो भइया मै झूठ नहीं कहूंगा , कि मैने कभी उनको पीछे से देखा नहीं , आज जब महाराज जी आए थे तो आप लोग ... उसके बाद मै आज थोड़ा परेशान था और अभी थोड़ी पहले जब भाभी एकदम से ऊपर आ गई थी मंजू के कमरे में तो सच कहूं पहली बार भाभी को जींस में देख कर मेरी नजर उनपर गई , मुझे उम्मीद नहीं थी कि भाभी भी कभी ऐसा कुछ पहनेगी

: हा और तेरी वजह से मै यहां लेट कर हिला रहा हूं

: सॉरी भइया, मेरी वजह से आपका प्लान बिगड़ गया

: क्या करूंगा तेरी सॉरी का अब , कितना मनाने के बाद वो तैयार हुई थी पहनने के लिए सोचा था इतने दिन से दूर हूं थोड़ा मस्ती मजा करने को मिलेगा लेकिन सब गुड गोबर ,

: सॉरी भइया ( मदन बोलकर चुप हो गया और मुरारी भी थोड़ा शांत हो गया )

तभी मुरारी के मोबाइल के स्क्रीन पर मैसेज पॉपअप हुए और मदन की नजर पड़ी : भैया आपका मोबाइल बज रहा है

मुरारी ने करवट होकर मैसेज देखा तो ममता ने भेजे थे और उसने मैसेज खोले तो व्हाट्सअप पर ममता ने फोटो भेजे थे जो आज उसने क्लिक कराए थे

वो तस्वीरें देखते ही मुरारी की आंखे बड़ी हो गई और मदन को बोलकर : देख अब तो तेरी भाभी फोटो भेज कर चिढ़ा भी रही है

मदन थोड़ा शर्मिंदा था लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर चमकती ममता की जींस और टॉप में तस्वीर देख कर उसका हलक सुख रहा था

मुरारी एक के बाद एक फोटो स्वाइप कर रहा था और एक फोटो जिसने ममता ने अपने चूतड़ों के फोटो निकालते थे जींस में उसे देख कर दोनों भाइयों का लंड पंप होने लगा : देखा जानबूझ कर उसने मुझे परेशान करने के लिए फोटो भेजी है






मदन हसने लगा और करवट होकर मुरारी के मोबाइल में देखने लगा और एकदम से जैसे ही अगली फोटो स्वाइप हुई ममता की ब्रा वाली फोटो आ गई

झलक भर के लिए दोनों भाइयों की नजरे उस तस्वीर पर गई और मुरारी ने असहज होकर स्क्रीन ऑफ कर दिया

मदन भी अपनी जगह पर सीधा लेट गया और थोड़ी देर की चुप्पी के बाद

: मै जरा आता हूं बाथरूम से

ये बोलकर मुरारी बाथरूम में चला गया और ममता की तस्वीरें जूम कर देखते हुए हिलाने लगा और फिर झाड़ कर वापस आ गया कमरे में

और अब उसका दिमाग और लंड दोनों हलके हो गए और वो बिस्तर में आकर लेट गया

इधर मदन चुप था और बस करवट बदल रहा था

: अरे भाई तू क्यों शर्मा रहा है अब , जा बाथरूम चला जा , वैसे भी तेरी भाभी के रहते सुहागरात के पहले कुछ नहीं मिलने वाला , जा

: लेकिन मै किसका फोटो लेकर जाऊ

: हीहीही , बड़ा कमीना है तू , क्यों तेरे पास संगीता की फोटो नहीं है क्या ?

: होती तो क्या बात थी भइया

मुरारी कुछ सोच कर : अच्छा ठीक है ये ले मेरा मोबाइल इसमें ममता की है जा देखकर कर ले

: क्या भइया कैसी बात कह रहे हो

: अरे भाई मै बोल रहा हूं न , ऐसे सारी रात न तू सो पाएगा और न मुझे सोने देगा और कल से बहुत काम रहेंगे तो जा अब

मुरारी ने मदन को मोबाइल दिया और मदन उठ कर जाने लगा

: सुन

: जी भईया

: सिर्फ कैमरा वाला फोल्डर खोलना जो है उसी में है

फिर मदन चुपचाप बाथरूम में चला गया और मुरारी चुपके से दबे पाव बाथरूम के दरवाजे तक आया

इधर मदन ने मुरारी के कहे अनुसार कैमरा फोल्डर खोला और एकदम से उसकी आंखे तब चकाचौंध हो गई जब उसको मोबाइल में ममता की वो तस्वीरें मिले जिसे मुरारी ने अमन के लिए खींचा था

गहनों से सजी हुई ममता को उसे ट्रांसपेरेंट ब्रा पैंटी में देखा जिसमें कल रात ही उसने ममता को चोदा था , देखते ही उसका लंड अकड़ गया बड़ा ही कामुक अंदाज था इस लुक में और उसके बालों में लगा परांदा उसके गाड़ के दरारों को धक रहा था वो नजारा देख कर मदन का लंड एकदम फौलादी हो गया और वो तेजी लंड सहलाने लगा






: उफ्फ भाभी कितनी सेक्सी हो आप अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क्

बाथरूम से आती मदन की सिसकिया सुनते ही मुरारी खिल उठा अब एक भी घर दो मर्द उसकी बीवी के दीवाने हो गए थे और ना जाने क्यों उसे इस खेल में मजा आने लगा और वही मदन को पूरी उम्मीद थी कि जरूर मुरारी बाहर खड़ा उसकी सिसकियां सुन रहा होगा इसलिए उसने ऐसा कुछ भी मुंह से भी निकाला ताकि मुरारी को उसके और ममता के रिश्ते पर शक हो

बस अपना लंड हिलाते हुए ममता के चूतड़ों का गुणगान करता रहा : सीई ओह्ह्ह्ह मेरी भाभी सेक्सी भाभी आपकी गाड़ बहुत बड़ी है आह्ह्ह्ह और आज जींस में आपके मटकते चूतड़ देख कर ही मै पागल हो गया था उफ्फ भैया तो रोज आपके चूतड़ों ओर झड़ते होंगे उम्मम रोज आपकी गाड़ चाटते होंगे कौन भी चाटेगा इतनी मस्त गाड़ मुझे मिल जाए तो ओह्ह्ह भाभी अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह सीईईई मै आपको गाड़ को नहला दूंगा ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू भाभीइई अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आ रहा है भाभी मेरा ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

इधर मुरारी मदन को झड़ता सुनकर दबे पाव वापस बिस्तर में आ गया और सोने के नाटक करने लगा और फिर कुछ ही देर बाद मदन बाथरूम से आया और मोबाइल मुरारी की तरफ रख कर अपने जगह पर सो गया ।

कुछ देर की चुप्पी के बाद मुरारी ने भी आंखे बंद कर ली ।

राज के घर

खाने के बाद अनुज ने पहले से ही आज अपनी मां के कमरे में ढेरा जमा लिया और उसको रागिनी के कमरे में देख कर राज भड़क गया , दो रोज से उसे चूत ढंग से चोदने को नसीब नहीं हुई थी और उसपर से ठकुराइन ने उसको अलग से गर्म कर रखा था और आज तो राज ने सोच रखा था कि कम से कम दो से तीन राउंड वो अपनी मां को पेलेगा लेकिन अनुज को कमरे में पढ़ाई करता देख उसका मन उखड़ गया और वो सीधा किचन में बर्तन धूल रही रागिनी के पास गया भन्नाता हुआ

: मम्मी वो क्या कर रहा है आपके कमरे में

: अरे उसकी परीक्षा है , पढ़ ही तो रहा है

: और मेरा क्या ? हम लोग कुछ नहीं करेंगे क्या ( राज उम्मीद बांधते हुए कहा रोंदू सी शक्ल से )

: अरे बेटा मै उसे कैसे मना करूं ? मै भी तो तड़प रही हूं

: मै नहीं जानता आज मुझे चाहिए , कितना मन हो रहा है आपको पेलने का ( राज अपनी मां से लिपटने लगा)






: ओहो छोड़ मुझे , अगर अनुज ने देख लिया तो दिक्कत हो जाएगी हट अब और समझ थोड़ा ऐसा करते है कल तू दुपहर में आ जाना या फिर अनुज स्कूल से आएगा तो मै ही आउंगी तेरे पास दुकान पर

: बक्क कल तक नहीं , मम्मी अभी बहुत मन है प्लीज न

: अच्छा ठीक है रात में अनुज जब सो जायेगा तो आऊंगी

: पक्का न

: हा बाबा पक्का , मुझे भी लेना है तेरा लंड , कितनी तड़प रही हूं तुझे क्या पता

: आई लव यू मम्मी

राज ने पीछे से उसको किस किया और छोड़ कर अपने कमरे में चला गया और उसने अपना व्हाट्सअप खोला तो देखा ठकुराइन के पहले से ही मैसेज आए हुए थे

Hiii

Kaha ho yrr

Wo maine done kar diya

Hello so gaye kya ?

Raj ??

राज इतने सारे मैसेज देख कर मुस्कुरा उठा और रिप्लाई करने लगा

: hayy janu, sorry late ho gaya


ठकुराइन तो जैसे उसकी राह देख रही थी और तुरंत उसका रिप्लाई

: yaar kabse wait kr rahi hun

: sorry janu 😘 ( राज ने मस्ती में रिप्लाई किया)

: pata hai maine wo order kar diya 🤭🙈

: kya ?

: are ye wala link ( वसु ने राज के भेजे हुए ब्रा पैंटी सेट की लिंक को कोट करते हुए रिप्लाई किया)

ये मैसेज पढ़ कर ही राज का लंड हरकत में आ गया ।

: woow baby sachchi mein 😍

: dhtt ganda marungi abhi tujhe , samjh kya rakha hai mujhe 😏

: apni janu 🤭😜

: bkkk

: call kru ( राज ने एकदम से उसे चौंकाया और बिना उसका रिप्लाई आए ही उसको काल घुमा दिया )

फोन पर


: हाय आंटी हीहीही

: अच्छा बच्चू , अब नहीं निकला बेबी जानू उम्मम ( वसु ने खिलकर कहा ) मिलो तुम फिर बताती हूं

: कहो तो अभी आजाऊ , वैसे भी अंकल है नहीं तो अकेले कैसे सोओगे आप हीहीही ( राज खिलखिलाया )

: अच्छा जी इतनी फिकर , जैसे पहली बार तुम्हारे अंकल बाहर गए हो हीहीहीही

: पहले की बात कुछ और थी , अब तो आपके पास आपका जानू है फिर कैसे आपको अकेले सोने दूं

: तो चले आओ

: पक्का ? ( राज उत्साही होकर बोला )

: हा आ पाओ तो आजाओ , दरवाजा भी खुला है

: लेकिन ?

: क्यों हवा निकल गई हीहीही

: ऐसी कोई बात नहीं है , मुझे अपनी जानू की इमेज का ख्याल है । रात में किसी ने गेट फांदते देख लिया तो ??

: हाहाहाहाहा पागल , और बताओ क्या कर रहे हो

: कुछ नहीं आपको याद कर रहा हूं आपकी तस्वीरें देख रहा हूं कल वाली ( राज ने मस्ती में फिर से बात घुमाई )

: छीइई तुम वही सब क्यों देख रहे हो ?

: क्योंकि और दूसरी फोटो नहीं है न मेरे पास , दूसरी भेजो तो वो देखूंगा

: अच्छा रुको एक मिनट हां

और कुछ ही देर में राज के मोबाइल पर व्हाट्सअप पर मैसेज आए राज ने उन्हें तुरंत ओपन किया और वसु ने एक बड़ा ही कामुक अंदाज में सेल्फी भेजी थी , जिसमें उसके स्लीवलेस ब्लाउज में उसकी मोटी मोटी चूचियां साफ दिख रही थी






: उफ्फ सो हॉट

: धत्त बदमाश

: वैसे आपने चेंज नहीं किया ?

: तुमने बताया ही नहीं कि क्या पहनूं

: वैसे अगर मै अपने कमरे में होता हूं अकेले तो कुछ नहीं पहनता

: क्या ? धत्त गंदे नंगे होकर कौन सोता है पागल ( वो थोड़ा शर्माई )

: अरे सच में बड़ा मजा आता है , सर्दियों में दरवाजा बंद करके पूरा ओपन होकर कम्बल में घुस जाओ और मै तो सच में वैसे ही सोया हूं

: चलो झूठा मै नहीं मानती

: अच्छा रुको

अगले ही पल राज अपने कपड़े निकाल कर कंबल को पेट तक करता हुआ अपने नंगे सीने की एक तस्वीरें भेज देता है

: हीही तुम पागल हो , नीचे तो पहने होंगे न

: अरे कसम से नहीं पहना कुछ रुको दिखाता हूं ( राज कहा ये मौका छोड़ने वाला था )

: अरे नहीं पागल मै मजाक कर रही हूं हीहीही कुछ मत भेजना प्लीज


वसु उसे रोकती रही लेकिन राज नहीं माना और कम्बल में अपने खड़े लंड की एक सेल्फी भेज दी





: भेज दी है देख लो आप , यकीन नहीं है तो

: धत्त मै नहीं देखने वाली गंदे कही के हीहीही

राज कुछ नहीं बोला बस व्हाट्सअप पर उसके भेजे हुए तस्वीरें की डबल टिक को बलू होने की राह देखा और कुछ ही सेकेंड में वो ब्लू हो गए थे जिसे देख कर राज का लंड और फौलादी हो गया था ।

वही वसु की हालत भी खराब होने लगी राज का मोटा कड़ा लंड देख और ये सोच कर कि राज का लंड उसके लिए ही खड़ा हुआ है

: देख ली न हीहीही

: धत्त बदमाश रखो फोन अब मै चेंज करने जा रही हूं

: अरे तो वीडियो काल पर कर लो न , मुझसे क्या शर्माना

( ये बोलकर राज ने उसको वीडियो काल की रिक्वेस्ट भेज दी )

: क्या यार तुम क्यों परेशान कर रहे हो ( वसु ने वीडियो काल उठाया )

: सच में परेशान कर रहा हूं न ओके बॉय गुड नाइट ( राज ने थोड़ा मुंह बना कर कॉल कट कर दिया )

और अपने उंगलियों से 10 से उल्टी गिनती शुरू की और अंदाजन 4 तक आते आते वसु ने वापस उसको वीडियो काल कर दिया और खुश होकर

: अब क्यों किया कॉल, जब मै आपको परेशान कर रहा हूं ( राज ने मुंह बनाया वीडियो काल पर )

: ओहो मेरा जानू गुस्सा हो गया उम्मम रुको मैं मना देती हूं

फिर वसु ने मोबाइल एक जगह रख दिया और साड़ी के पल्लू के नीचे से अपनी ब्लाउज खोलने लगी ये देख कर राज का लंड अकड़ रहा था और देखते ही देखते साड़ी के पल्लू के नीचे से उसके रसीले मम्में विजिबल हो गए उनके कड़क निप्पल की नोख साड़ी को आरपार करने को उतावली थी






: उफ्फ आंटी

: धत्त मारूंगी अब जो आंटी बोला तो

: सीईईई मेरी जानू , कितनी सेक्सी हो आप

: अच्छा अभी तो कुछ दिखाया भी नहीं , फिर भी ( वसु वीडियो कॉल पर साड़ी के ऊपर से अपने दूध मसलते हुए बोली )

: ओह्ह्ह्ह गॉड कितना बड़ा है आपका खोल के दिखाओ न प्लीज ( राज बस एक टक उसके रसीले चूचे पर नजर गड़ाए हुए लंड हिला रहा था )

: अंकल से नहीं कहोगे न कुछ

: उन्हूं कुछ भी नहीं ( राज की आंखों के नशा उतर चुका था और अगले ही पल वसु ने अपना ब्लाउज निकाल कर अपनी एक छाती नंगी कर दी






: उफ्फ कितनी बड़ी है आपकी ...

: क्या ? ( वसु भी वही उत्तेजना महसूस कर रही थी जो राज कर रहा था )

: आपके दूध कितने बड़े और मोटे है उम्मम मन कर रहा है आकर चूस लूं

: ओह्ह्ह्ह राज तो आजाओ न ( अगले ही पल वसु के हाथ फैला कर अपनी दोनों छातियों नंगी कर दी और राज अपने मोबाइल स्क्रीन पर ही उसकी नंगी चूचियां चूमने लगा )






: उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह राज उम्मम पी जाओ चूस लो ओह्ह्ह मेरे जानु कितना अच्छा लग रहा है काश सच के तुम होते तो ...

: अगर मै पास होता न तो पहले पता है कहा किस करता है

: कहा ? ( वीडियो कॉल पर वो नशीली आंखों से राज को देखते हुए बोली )

: आपकी सॉफ्ट और क्लिन बुर पर उसको खूब चाट कर लाल कर देता , कितनी रसीली दिख रही थी कल

: कब देखा तुमने बदमाश ( वो थोड़ा इतराई )

: जब अंकल पीछे से आपकी गाड़ फैला कर चाट रहे थे तब मैने आपके बुर के फांके देखे थे कितनी गुलाबी थे सीईईई आंटी कल आओ ने दुकान पर

: क्या दुकान पर ? लेकिन ?

: प्लीज न आंटी ( राज ने रिक्वेस्ट की )

: ठीक है मेरी जान , आऊंगी पक्का ( उसने मुस्कुरा कर कहा ) अब सो जाओ

: क्या सो जाऊं ( राज उखड़ कर बोला और फिर अपना लंड पूरा टाइट कर चमड़ी पीछे कर उसका पूरा साइज कैमरे के आगे लाता हुआ ) इसका क्या होगा






: उफ्फ , इसको भी सुला दो कल इसको भी दुलार दूंगी हीहीही

: पक्का न

: हा मेरी जान पक्का , मै भी तो तड़प ही रही हूं , चलो मै थोड़ा तुम्हारे अंकल से बात कर लूं ओके गुड नाइट

: ओके माय सेक्सी आंटी गुड नाइट

: पागल हीहीही

वसु ने भी फोन रख दिया और राज वापस बत्ती बुझा कर बिस्तर में घुस गया , रात ढल रही थी और रागिनी की राह देखते हुए उसे नीद आ गई क्योंकि रागिनी को अनुज ने आज लंबा लपेट लिया था ।

जारी रहेगी

( अपडेट बड़ा होने के कारण दो भाग में पोस्ट किया जाएगा , बाकी अपडेट रेडी है । टारगेट पूरा करो मिल जाएगा :declare: )
 
छठ पूजा में ड्यूटी लगी guyss

कल फ्री होने पर आयेगा अपडेट

तबतक एंजॉय करो

सभी को छठ पूजा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
 
💥अध्याय 02 💥

अपडेट 025 ( बी )

THE EROTIC SUNDAY 10

शिला के घर

ROUND 01

तीनों गदराई औरतें सोफे पर झुक कर अपनी नंगी गाड़ कैमरा के आगे हिलाती है और कैमरा रज्जो की रसीली गाड़ पर जूम होता है , उसके लचीले चूतड़ हवा में उछलते हुए बुर के फांके की झलक दे जाते , जिसे देख कर मानसिंह अपना लंड मसलने लगा था






: वाह भाभी क्या मस्त शॉट है , शेक इट बेबी उन्ह्ह्ह सीईईई वाट ए ह्यूज ऐश बीच उम्ममम

मानसिंह कैमरे से उनकी वीडियो बनाते हुए बोला और फिर कैमरे एक जगह सेट कर लपक कर उनकी ओर गया

: ओह्ह्ह्ह मेरे राजा सीईईई ओह्ह्ह


एकदम से मानसिंह ने शिला की उछलती गाड़ पकड़ उसके बुर के फांके पर उंगली चलाई और वो मचल उठी और फिर कम्मो की गाड़ फैलाते हुए तीन चार उसकी खुली बुर के फांके में उंगली पेली और रज्जो के पास पहुंच गया





उसके चूतड़ों को सहलाते हुए उसके गीली बुर को सहलाया तो रज्जो ने लपक कर उसका लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी : ओह्ह्ह्ह नंदोई जी बड़ा गर्म हथियार है , जरा इधर आना तो

फिर रज्जो उसको सोफे पर लिटा कर उसका लंड पकड़ कर सहलाने लगी

: ओह्ह्ह्ह भाभी जी आराम से , ओह्ह्ह्ह सूखा है उम्मम

: अभी गिला कर देती मेरे राजा उम्ममम सीईईई उम्ममम अह्ह्ह्ह

रज्जो ने उसका सुपाड़ा गपूच लिया और चूसने लगी , मानसिंह उसका सर पकड़ सहलाने लगा

: सीईईई ओह्ह्ह यस्स बेबी उम्मम सक इट उम्मम अह्ह्ह्ह्ह यस डिप और ओह्ह्ह गॉड उम्मम फक्क

एकदम से उसकी नजर अपने बगल में गई तो शिला कम्मो के मुंह पर बैठ कर उससे अपनी बुर चटवा रही थी कम्मो अपनी जांघें फैलाए उसके आगे लेटी हुई थी : ओह्ह्ह्ह कम्मो चाट उम्मम तेरी जीभ मुझे पागल कर देती ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह

मौका देख कर मानसिंह कम्मो की चिकनी चूत की ओर झुक गया और उसकी गुलाबी फांकों वाली खुली हुई बुर चाटने लगता है : उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह दीदी भइया ने मेरी बुर लेली है ओह्ह्ह्ह मैयाआ ओह्ह्ह गॉड आराम से राजा ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: तू मत रुक , मेरी तड़प बढ़ रही है ओह्ह्ह चाट उम्मम






दोनों बहनों की रसदार चुसाई देख कर रज्जो ने मानसिंह का लंड और गहरे मुंह में लेने लगी , उससे आड़ सहलाती हुई चाटने लगी , जिससे मानसिंह का लंड पूरी तरह अकड़ गया और तैयार हो गया था , उसने कम्मो की बुर छोड़ दी और कम्मो मचल उठी : ओह्ह्ह् क्या हुआ चाटो न

: रुक मेरी जान ये है , ये चाटेगी, चाट मेरी जान , चूस ले उसकी बुर ( मानसिंह ने रज्जो को उठा कर सोफे पर घोड़ी बना दिया और रज्जो उसकी जांघों में आकर कम्मो की रस छोड़ती फांकों को चुभलाने लगी )

वही पीछे से मानसिंह ने अपना गिला लंड रज्जो की बुर में उतार दिया गहरे : हाय दैय्या सीईई ओह्ह्ह कितना अंदर डालोगे नंदोई जी ओह्ह्ह , लंड है या बास उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह






रज्जो से अपनी तारीफ सुनकर मानसिंह का जोश बढ़ गया और वो हुमुच कर रज्जो की चर्बीदार चूतड़ों को पकड़ कर हच्च हच्च पेलने लगा : ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह ऐसे ही उम्मम रुकना मत नहीं तो

: अगर रुके तो इनकी बहनिया मै पेलूंगी भाभी ( शिला कम्मो के मुंह पर अपनी चूत रगड़ते हुए बोली )

: ओह्ह्ह भाभी अपनी जुबान सही जगह चलाओ न ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई ओह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह उम्ममम और और उम्ममम

कमरे चीखे पूरे तेज से उठ रही थी किसी को कोई डर नहीं ,

मानसिंह रज्जो की गाड़ पकड़े ताबड़तोड़ पेले जा रहा था और उसके जीभ से कम्मो की बुर कुलबुला रही थी : मुझे भी दो न, मुझे भी लंड चाहिए ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई ओह मम्मीईईईई ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यस्स

मानसिंह ने रज्जो के चूतड़ थपथपा कर साइड किया और खुद सोफे के बीच में आकर कम्मो को अपनी ओर खींच लिया : आजा मेरी जान तुझे लंड की सवारी कराता हूं ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यस्स बेबी उम्मम फक्क ओह्ह्ह






कम्मो ने लंड की ग्रिप पकड़ कर तेजी से अपनी गाड़ उसके लंड पर पटकने लगी और पूरा लंड अपनी बुर की गहराई में ले जाने लगी उसके साथ रज्जो और शिला भी अपने चूतड़ हवा में उछाल रहे थे कैमरे के आगे

उस नजारे में तीनों चूतड़ एक साथ ऊपर नीचे हो रहे थे और मानसिंह ने नीचे से पेलने शुरू कर दिया

: सीईईई ओह्ह्ह यस्स बेबी फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह मम्मीईइई सीईईई

कम्मो की चीखे तेज ही गई और रज्जो ने अपने पंजे उसके उछलते चूतड़ों पर रख दिए , और पीछे से उसकी गाड़ कुरेदने लगी, शिला ने नहीं दूसरी ओर मानसिंह के आड टटोलने लगी

जिससे मानसिंह का लंड और फौलादी होने लगा और रज्जो ने कम्मो की गाड़ में उंगली पेल दी थी






,कम्मो की बुर का छल्ला खुद टाइट ही गया और वो तेजी से झड़ने लगी : उन्ह्ह्ह ममाआ ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यस भाभी ओह्ह्ह आ रहा है आ रहा है रुको मत डालो पेलो फक्क मीईई ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

कम्मो खुद से मानसिंह के लंड पर मथने लगी और उसके जांघें थरथरा रहे थे जब वो झड़ रही थी , और फिर सुस्त होने लगी तो शिला ने उसे खींच लिया और दोनों तरफ पैर फेक कर सामने से मानसिंह के लंड को बिना आराम दिए अपनी बुर में भर लिया और उछलने लगी






: अह्ह्ह्ह सीईईईईई मेरे राजा कितना मोटा कर रखा है आज तो ओह्ह्ह्ह पूरा डालो न उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह ( शिला ने उसके आड़ सहलाते हुए लंड को पूरा बुर में लेने लगी )

शिला की मादक सिसकिया सुन कम्मो और रज्जो ने दोनों तरफ से उसकी जांघों और सीने को सहलाना शुरू कर दिया दोनो उसकी उछलती चूचियों को पकड़ कर सहलाते हुए जांघें पकड़ कर फैलाने लगी जिससे उसकी बुर और कसने लगी लंड पर

: ओह्ह्ह्ह भाभीईई ओह्ह्ह क्या कर रही उम्मम कम्मो ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क्क् मीईईईई यश मेरे राजा और तेज ओह्ह्ह डालो और और कस के ओह

इधर मानसिंह ने नीचे से अपनी कमर उठानी शुरू आकर दी और कम्मो ने शिला की एक चुची मुंह में लेकर चूसने लगी

रज्जो की उंगलियां सरकते हुए शिला के फांकों पर आ गई और उसके दाने को छेड़ने लगी : ओह्ह्ह्ह भाभीईई नहीं ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह






अपने बुर के दाने पर रज्जो की उंगली पाते ही शिला अकड़ने लगी और कम्मो उसके चूचों को पकड़ मुंह ने भरने लगी तो रज्जो ने भी दूसरी चुची मुंह में ले ली और तेजी से उसकी बुर सहलाने लगी

वही नीचे से मानसिंह पूरी ताकत से उसको पेले जा रहा था

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह्ह भाभीईई ओह्ह्ह आयेगा मेरा भी

ये सुनते ही रज्जो ने नीचे से एक उंगली बुर में पेल दी और अब शिला के बुर में लंड के साथ साथ एक उंगली भी अंदर बाहर हो रही थी और देखते ही देखते शिला के कमरे झटके खाने लगे और झड़ने लगी : उन्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह आ रहा है पेलो मेरे राजा उम्मम पेलो और और उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह

इधर रज्जो की उंगली का असर मानसिंह के लंड पर भी होने लगा था , शिला की बुर एकदम कस चुकी थी और पिछले 30 मिनट से वो ताबड़तोड़ पेले ही जा रहा था और वो भी चिंघाड़ने लगा : ओह्ह्ह्ह मेरी रंडियों ओह्ह्ह आयेगा मेरा भी जल्दी पोजिशन लो सीईईई ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह

इतना कहने की देरी थी रज्जो फिर शिला और उसके ऊपर कम्मो अब एक दूसरे के ऊपर चढ़ कर अपने चूतड़ कैमरे की ओर करके हिलाने लगे






और मानसिंह ने अपना लंड निकाल कर हिलाते हुए बारी बारी से तीनों के चूतड़ पर झड़ने लगा : सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई मजा आ गया ओह्ह्ह् मेरी रंडियों उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह आज तुम तीनों के गाड़ को नहला दूंगा लो सीईईई ओह्ह्ह्ह

आखिर तक मानसिंह अपना लंड झाड़ता रहा और

फिर उसने उसी पोजीशन में अपने वीडियो थंबनेल के एक फोटो निकाली






जिसमें से तीनों की बुर से रस टपक रहे थे और उनके चूतड़ों से मानसिंह का वीर्य रिस रहा था ।

चमनपुरा

रागिनी ने किचन से काम निपटाया और इस दौरान उसने नोटिस किया कि कैसे अनुज बार बार बिस्तर पर बैठे हुए हुए कमरे से झांक कर उसके आने की राह देख रहा था

रागिनी मुस्कुरा कर हाथ पोंछते हुए कमरे में आई और अनुज एकदम से किताबें देखने लगा

अनुज ने देखा कि उसकी मां अपनी साड़ी उतार रही थी और पेटीकोट में उसके चौड़े कूल्हे देख कर अनुज का दिल मचलने लगा ।

चोर नजरो से वो अपनी मां को देखने लगा और फिर रागिनी ने कमरे का दरवाजा बंद कर उसके पास आकर पेट के बल होकर होकर लेट गई और उसके रखे हुए नोट बुक देखने लगी

ऐसा करने से सामने से अनुज को अपनी मां की गोरी चूचियों की चिपकी हुई लंबी घाटी दिखने लगी






: आज पढ़ने में मन नहीं है न क्यों ( रागिनी ने होठ सिकोड़ कर मुस्कुराते हुए अनुज को देखा और अनुज लजा कर मुंह छिपाने लगा )

: बदमाश कही का , देख रही हूं कबसे तांक झांक कर रहा है । जैसे मै आऊंगी नहीं क्या ?

अनुज थोड़ा शांत होकर मुस्कुरा रहा था

फिर रागिनी उसकी किताबें बंद करती हुई उन्हें उठा कर साइड करती हुई : हटा ये सब और चल सो जा जब नहीं पढ़ना है तब

रागिनी ने थोड़ा झूठ मूठ की डांट लगाई उसे और अनुज का मुंह बन गया सोने के नाम पर

उसे तो कितनी सारी बातें करनी थी और कबसे उसका लंड लोवर में पंप हो रहा था ।

: मम्मीइई ( मुंह बना कर रागिनी से बोला वो )

: बत्ती बंद कर के आजा , मै तो चली बिस्तर में हीहीही ( रागिनी कम्बल खोलती हुई बिस्तर में आ गई )

अनुज उतरे हुए मन से बत्ती बुझा कर बिस्तर में आ गया

कमरे में घुप्प अंधेरा था और नाइट बल्ब भी बंद थी , अनुज किसी तरह टटोलते हुए रागिनी की ओर से बिस्तर पर चढ़ने लगा

: अरे पागल ऊपर चढ़ेगा क्या हीहीही

अनुज उसकी खिलखिलाहट सुन कर खुश हो गया और उसके ऊपर से फांद कर बिस्तर के दूसरी ओर चला गया और खिखियाते हुए रागिनी के कम्बल में घुस गया

: अरे चिपक क्यों रहा है , दूर सो न तेरे पैर ठंडे है ( रागिनी ने उसे छेड़ा और अनुज को कल रात वाली रागिनी की मस्ती याद आई और वो वही नाटक दोहराने लगा )

: क्यों , आपने कल बोला था न रोज मुझसे चिपक कर सोओगे ( ये बोलकर अनुज ने अपना हाथ फेक कर उसके नरम चर्बीदार पेट को पकड़ कर एकदम से उससे सट गया बिनाये सोचे कि उसका लंड खूंटे जैसा नुकीला होकर उसकी मां के जांघ पर कोचना शुरू कर देगा , लेकिन रागिनी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी )

: हट बदमाश छोड़ मुझे , अह्ह्ह्ह सोनल के पापा बचाओ मुझे

: हीही हाहाहा कोई नहीं आएगा

अनुज ने अपनी मम्मी को गुदगुदाना शुरू किया और वो एकदम से उससे लिपट गई । जैसे ही रागिनी की बिना ब्रा वाली चूचियां ब्लाउज के ऊपर से उसके सीने पर धंसी अनुज एकदम से सिहर उठा और रागिनी उसकी ओर करवट लेकर हो गई थी , अनुज का हाथ सरक कर रागिनी के कूल्हे पर आ गया था जिसकी नरमी अनुज पेटीकोट के ऊपर से महसूस कर रहा था

अनुज एकदम से शांत हो गया उसका लंड लोवर में पूरा टाइट था और बड़ा सा नुकीला तंबू बन गया था , उसने अपने चूतड़ पीछे कर लिए ताकि उसकी मां के जांघ या पेट के पास कही चुभ न जाए ।

रागिनी उसकी चुप्पी को समझ नहीं पाई : क्या हुआ ?

: कुछ भी तो नहीं ( अनुज सीधा लेट गया ना चाहते हुए भी उसने अपनी मां के गुदाज चर्बीदार चूतड़ों पर से हाथ पीछे कर लिए )

अनुज के देह में हरकत होते ही रागिनी उसके पास सरक आई और अनुज के पेट पर छूने लगी एकदम से अनुज खिलखिलाने लगा उसे गुदगुदी हो रही थी जैसे जैसे रागिनी उसकी टीशर्ट में हाथ घुसा रही थी

: हीहीही मम्मी निकालो न गुदगुदी हो रही है

: क्यों निकालू, तूने भी किया था न

: अच्छा सॉरी न , हीही हाहाहा

: बड़ा आया मुझसे जितने वाला ( रागिनी ने उसे चिढ़ाया )

: मम्मी

: हा !!

: आपने बताया नहीं ?

एकदम से रागिनी की धड़कने तेज हो गई , कमरे में एक चुप्पी सी बढ़ने लगी और दोनों सांसे गर्माने लगी थी । लेकिन रागिनी के लिए मसला ये था कि अनुज किस बारे में सवाल कर रहा था ? रागिनी ने तो उसे दो बार टाल दिया था और रागिनी समझ रही थी कि उसे जवाब देना ही पड़ेगा ।

: क्या नहीं बताया ?

: वही कि आप वो वाली ड्रेस क्यों नहीं पहनते ? जो वीडियो के दिखा था

( हिम्मत कर अनुज ने अपना पहला सवाल दागा )

रागिनी चुप थी

: आपने बोला था कि आप बाद में बताओगे , बोलो न प्लीज

रागिनी ने अनुज को उसके हिसाब से समझाना सही समझा और बात घुमाती हुई: जितना तू तेरे पापा के बारे में जानता है , तुझे क्या लगता है कि उन्होंने मुझे वो वाले कपड़े पहनने को नहीं कहा होगा

: उम्मम हो भी सकता है , पापा तो बहुत रोमांटिक है न ( अनुज ने अनुमान लगाया )

: हीहीही वो ऐसी चीजों के बड़े शौकीन भी है , हे भगवान ना जाने कहा कहा से उनको मिल जाती है

: तो क्या आपके पास है ?

रागिनी एकदम से चुप हो गई और मुस्कुरा रही थी

: हम्म्म क्यों ?

: फिर आप पहनते क्यों नहीं ?

: तू पागल है , अब क्या वो पहन कर घर में घूमूं

: क्यों उसमें क्या है ? ( अनुज बस अपनी मां की लिमिट परख रहा है )

: तू पागल है क्या

अनुज : मम्मी बताओ न

रागिनी हंसती हुई : अरे पागल उसमें पूरा बदन झलकता है और घर में कैसे पहन कर रहूंगी

अनुज : क्यों ?

रागिनी : अरे मान ले तू छोटा है तेरे सामने रह लूंगी लेकिन राज , वो तो बड़ा हो गया है न

रागिनी की बातें सुनकर अनुज अपने मन में ख्याली पुलाव बनाने लगा और लंड में हरकत होने लगी ।

रागिनी : वो क्या सोचेगा मेरे बारे में

अनुज : यही कि आप मॉर्डन हो

रागिनी : ओहो तू बड़ा भोला है अभी इनसब के लिए, जब तेरी बीवी आएगी तब पता चलेगा

अनुज : ऐसा क्या पता चलेगा जब अभी नहीं पता है मुझे

रागिनी : देख जब तू राज जितना बड़ा हो जाएगा और तेरी शादी की उम्र हो जाएगी तब तुझे सब समझ आने लगेगा

अनुज : जैसे पापा फ़िल करते है वैसा ?

रागिनी : हा

अनुज : तो क्या भैया अगर आपको देखेगा उस नाइटी में तो उसको भी पापा जैसा फिल होगा

रागिनी एकदम से सन्न हो गई उम्मीद से विपरीत सवाल करेगा : क्या मतलब?

अनुज : अगर राज भैया आपको उस नाइटी में देखेगा तो क्या ..

रागिनी उसको टोकती हुई : हा हा समझ गई

रागिनी थोड़ा सोचने लगी

अनुज : बताओ न मम्मी, क्या ऐसा हो सकता है

रागिनी : अब पता नहीं , मै क्या जानू उसके मन में क्या चल रहा है ।

अनुज : तो पता करें ?

रागिनी चौकी : पता करें मतलब ?

अनुज : आप वो नाइटी पहन कर भैया के सामने आना तो देखते है वो क्या रिएक्ट करता है

रागिनी हंसते हुए : तू पागल है , अकल है या नहीं तेरे में

अनुज : आप ट्राई करो न एक बार , अगर भैया को दिक्कत नहीं हुई तो आप घर में आराम से पहन कर रह सकोगे न

रागिनी अनुज के तर्क पर मुस्कुराने लगी और सोचा अगर इसकी बात नहीं मानी तो ये ऐसे ही सवाल जवाब करता रहेगा और अंत में करवाएगा अपनी मन की ही है ।

रागिनी : अरे तू नहीं समझता , वो ड्रेस ऐसे नहीं अच्छी लगती , उसके लिए मुझे हेयर रिमूव करना पड़ेगा

अनुज : तो कर लो ?

रागिनी : तू नहीं मानेगा ,

अनुज : हीहिही, अच्छा सुनो न ?

रागिनी : अब क्या है बोल

अनुज : वो , हेयर रिमूव से याद आया पापा वाली बात तो आपने नहीं बताई न

रागिनी : अब क्या बताऊं उसमें ?

अनुज थोड़ा रुक कर : यही कि पापा आपको वहां किस करते है क्या नीचे ?

रागिनी चुप रही , उसको हंसी आ रही थी कि क्या ही बोले अब छिपाने जैसा अनुज के सामने कुछ रहा भी नहीं

रागिनी : हम्म्म

अनुज : और पीछे भी ?

रागिनी : हा भई करते है , ऊपर नीचे आगे पीछे हर जगह , जहा नहीं करना चाहिए वहां भी , हो गया तेरा , कर ली जासूसी , जान गया सब

अनुज का हलक सूखने लगा और और वो कम्बल के हल्का सा लंड मसल कर : आपको पसंद है ?

रागिनी ने इस बार माथा पकड़ लिया : तुझे क्यों जानना है , कि मुझे क्या पसंद है या नहीं

अनुज : अरे बताओ न, पापा आपको जबरजस्ती किस नहीं न करते ?

रागिनी : हीहीही पागल , हा पसंद है

अनुज का लंड ये सोच और अकड़ गया कि उसकी मां को अपनी बुर चटवाने में मजा आता है ।

रागिनी : और कुछ

अनुज : नहीं

रागिनी : तो मै सो जाऊं

अनुज : हम्म्म ठीक है

रागिनी हसने लगी

अनुज : आप कल पहनोगे न ?

रागिनी : हा बाबा पहन लूंगी , भले मुझे सर्दी लग जाए लेकिन पहन लूंगी ।

अनुज : अरे नहीं बस भैया एक बार देख ले, उसके बाद आप चेंज कर लेना

रागिनी हस कर : नहीं नहीं मै तो वैसे दुकान भी जाऊंगी

अनुज : भक्क नहीं , कैसा लगेगा ? सब कोई देखेगा आपको

रागिनी हसने लगी और अनुज को अपनी ओर खींच लिया : चल बहुत हो गई बात चीत अब सो जा

अनुज भी खुश था अपनी नई कल्पनाओं में खो कर

आने वाली सुबह कुछ नए किस्से गढ़ने वाली थी ।

वही रागिनी ने भी कुछ अपने सपने सजोने लगी थी या यूं कहो कि कहानी गढ़ने लगी ।

शिला के घर

ROUND 02


झड़ने के बाद शीला अपने मेहनत की मलाई चाट रही थी जो मानसिंह के लंड पर लगी थी और उसकी लपलपाते जीभ ने मानसिंह के सुस्त पड़ती लंड की नसों में जान ला दी और मानसिंह ने उसका चेहरा पकड़ कर उसके मुंह में पेलना शुरू कर दिया : ओह्ह्ह्ह ले मेरी जान पूरा ले उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह





रज्जो जो मानसिंह के पास बैठी हुई वो अपनी रसीली छातियां मिज रही थी और तभी कम्मो के पीछे से रामसिंह अपना लंड मसलता हुआ कमरे में दाखिल हुआ

रज्जो : ओहो छोटे नंदोई जी ,मुझे लगा कि आप सुबह ही उठेंगे हाहाहाहाहा

रामसिंह : सुबह तक आपको इंतजार करवाना सही नहीं लगा , ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह बेबी आराम से ओह्ह्ह्ह पहले ही इसको निचोड़ चुकी हो

रज्जो कम्मो को रामसिंह का लंड लंड चूसता देख खड़ी होकर मानसिंह के चूतड़ सहलाती हुई उसके आड़ छूकर रामसिंह को चिटकाया: ये याद है नंदोई जी उम्मम






रामसिंह ने मानसिंह की स्थिति देख कर अपने ऊपर बीते वो कामुकता के पल याद करता हुआ सिहर उठा और कम्मो के मुंह में लंड पेलने लगा : ओह्ह्ह्ह भाभी कैसे भूल सकता हूं , शिला भाभी ने ऐसा चूसा था कि ओह्ह्ह्ह मेरी जान आराम से

रज्जो : अरे हटो न दीदी , सारा रस निचोड़ लोगी क्या जरा मुझे भी दो सीई उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या कितना टाइट है ओह्ह्ह्ह

रज्जो ने शिला को धकेल कर मानसिंह के लंड को मुंह में लेकर बैठ गई और शिला सरक कर रामसिंह की ओर चली गई और रामसिंह उसकी नंगी चूचियां पकड़ पर पीने लगा : उफ्फ भाभी आपके दूध उम्मम कितनी भी निचोड़ो बड़ा रस होता है इनके उम्ममम

: अह्ह्ह्ह पी लो देवर जी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह






वही दूसरी तरफ रज्जो के साथ साथ कम्मो भी मानसिंह का लंड छूने लगी, लेकिन मानसिंह का लंड मुंह में ना आता देख उसने रज्जो की चूचियां मुंह में ले ली और निप्पल काटने लगी : सीईईई ओह्ह्ह साली काट क्यों रही ही ओह्ह्ह्ह गॉड आराम से नंदोई जी

रज्जो ने तो कम्मो को रोकना चाहा लेकिन मानसिंह भी झुक कर रज्जो की रसीली छातियां पकड़ कर पीने कहा और वही दूसरी ओर रामसिंह ने अपना लंड शिला के आगे परोस दिया था






: ओह्ह्ह भाभी उम्ममम चूसो ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह आपका ये अंदाज उम्ममम अह्ह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू बिच ओह्ह्ह्ह कितनी रसभरी जीभ है तेरी ओह्ह्ह साली कुतिया ले चूस उम्मम्म और ले

रामसिंह अपना लंड उसके मुंह कर मारते हुए उसके बाल पकड़ कर वापस उसके मुंह में लंड पेलने लगा

: ओह्ह्ह साली रंडी ओह्ह्ह खा जाएगी क्या ओह्ह्ह , नंदोई जी जरा डालना तो उसकी गाड़ में अपना बास रज्जो ने कम्मो को खींच कर सोफे पर चढ़ा दिया और मानसिंह अपना गिला सुपाड़ा सीधा कम्मो के गाड़ के सुराख पर लगाता हुआ उतार दिया : ओह्ह्ह्ह भाई साहब ओह्ह्ह्ह कितना मोटा है ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई






कम्मो की कामुक तेज सिसकियों से रामसिंह का लंड अकड़ रहा था और वो शिला को खींच सोफे पर सुला दिया और लंड सीधा उसकी जांघें फैला कर चूत में उतारते हुए ओर जोश में पेलने लगा

ओह्ह्ह्ह देवर जी उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह और और उम्मम

इधर रज्जो की बुर दोनों भाइयों को एकदम दूसरे की बीवी बदल कर चोदते देख कुलबुलाने लगी , वो सोफे पर चढ़ कर अपनी बुर सहला रही थी और सिसक रही थी

मानसिंह तेजी से कम्मो की गाड़ चोद रहा था और कम्मो अपनी बहन को अपने पास सिसकियां खाता देख उसे दुलारती हुई उसकी ओर झुक गई और उसके लिप्स चूसने लगी






मौका देख कर मानसिंह कम्मो की गाड़ से निकल लंड लेकर रज्जो के आगे परोस दिया और रज्जो ने बिना हिचक के उसका लंड चूसने लगी :: सीई ओह मेरी रंडी भाभी ओह्ह्ह्ह सच में तुझ जैसी पक्की रंडी नहीं देखी ओह्ह्ह् और चूस मेरी जान उम्मम

इधर कम्मो शिला की ओर सरकती हुई रामसिंह के लंड को छूने लगी और रामसिंह समझ गया कि कम्मो को क्या चाहिए , उसने भी शिला की रस भरी बुर से अपना लंड निकाल कर नीचे बैठ गया सोफे पर टेक लगा कर और कम्मो उसके पैरो के आकर कैमरे के आगे अपनी गाड़ हवा में लहराती हुई उसका लंड चूसने लगी : ओह्ह्ह मेरी जान चाट ले अपनी बहन का बुर का रस ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह क्या मस्त चुस्ती है ओह्ह्ह्ह

: आप क्यों ललचा रहे देवर जी आप भी चाट लो न आओ

इतना बोलकर शिला भी उसके मुंह पर पैर फेक कर अपनी चूत रख दी






तभी एकदम से एक करारी चीख उठी सबकी नजरे सोफे पर गई , जहा मानसिंह रज्जो को सोफे पर खड़ा कर पीछे से उसकी गाड़ में अपना बांस जैसा मोटा लंड उतार चुका था और हच्च हच्च पेल रहा था : ले साली रांड आज की रात तू ताउम्र याद रहेगी तुझे , कि कभी तुझे गाड मरवाई थी

: हा मेरे राजा फाड़ दो ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मै ये पल कभी भी भूल सकती ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क्क् मीईईईई

: उफ्फ साली तेरी गाड़ हर वक्त कितनी कसी रहती कितना भी चोद लो ओह्ह्ह्ह हम्ममम

: चोद चोद के इतना सूजा दोगे तो क्या होगा ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई पेलो आयेगा मेरा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

रज्जो तेजी से झड़ने लगी और मानसिंह उसको छोड़ कर कम्मो के पास चला गया जो रामसिंह का लंड चूस रही थी और पीछे से उसकी लहराती गाड़ को देख कर अपने लंड को सीधा उसकी गाड़ के सुराख में उतार दिया और पेलने लगा : उफ्फ बहनचोद क्या मस्त लचीली गाड़ है तेरी साली तुम दोनों बहनों की

कम्मो की आंखे बड़ी हो गई जब एकदम से मानसिंह ने पीछे से अपना लंड उसकी गाड़ में उतार दिया : ओह्ह्ह्ह मेरे राज फाड़ दोगे क्या ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह फक्क मीईईई सीई ओह्ह्ह्ह।।

इधर कम्मो की मादक सिसकिया सुन कर रामसिंह उठ कर शिला को सोफे पर घोड़ी बना दिया और उसके गाड़ में लंड डाल दिया : ओह्ह्ह्ह देवर जी अह्ह्ह्ह सीईईईईई अब आए हो न सही जगह पर , फाड़ो ओह्ह्ह्ह रुकना मत ओह्ह्ह्ह कितना गर्म और गिला है सीई ओह्ह्ह






वही दोनों बहनों की चुदाई देख आकर रज्जो मानसिंह के आगे फिर से अपनी गाड़ हिलाने लगी और दोनों भाई उसके हिलते चूतड़ देख कर पूरे जोश ने दोनों बहनों की गाड़ फाड़ने लगे

इधर मानसिंह फिर से चिंघाड़ने लगा : आजाओ रंडियों ओह्ह्ह आयेगा मेरा ओह्ह्ह्ह शिला आजा मेरी जान उम्मम

तीनों फिर से अपनी गाड़ हिलाने लगी सोफे पर और मानसिंह ने एक बार तीनों की गाड़ पर पिचकारी छोड़ने लगा : ओह्ह्ह्ह बहिनचोद अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह लो साली रंडियों सीई फक्क्क् यूयू बिच ओह्ह्ह्ह






: ओह्ह्ह भैया मेरा भी आयेगा ( बगल के खड़ा रामसिंह अपना लंड हिलाने लगा और उसने भरी बारी बारी से तीनों के चूतड़ों को नहला दी

फिर दोनों भाई हांफते हुए सोफा पकड़ लिये

वही वो तीनो हसीन रंडियों के चेहरे पर सिकन तक नहीं थी , उनकी खिलखिलाहट अभी भी बरकरार थी और वो तीनो वापस उनकी ओर बढ़ रही एक और धमाकेदार राउंड के लिए

जारी रहेगी

( इस अपडेट के साथ THE EROTIC SUNDAY के सभी अपडेट खत्म हुए )
 
अपडेट 26

थे फंतासी मॉर्निंग






अवेलेबल ों 01 नवंबर 2025

 
💥 अध्याय : 02 💥

UPDATE 026


THE FANTASY MORNING 01

" उम्मम मम्मी वाव सो सेक्सी "

अनुज की आंखे चकाचौंध थी और वो बस एक टक अपनी मां को निहारे जा रहा था , उस सफेद बेबीडॉल नाइटी में

रागिनी के बड़े बड़े पपीते जैसे चूचे उन विजिबल ब्रा के कप से साफ झलक रहे थे , उसकी मां के सपाट पेट और चर्बीदार नाभि फिर नीचे पतली सी पैंटी जो बड़ी मुश्किल से उसकी मां के चूत को छिपा रही थी






उसने ऊपर देखा तो उसकी मां बड़ी अदा से हाथ ऊपर कर अपने बालों को सहेज रही थी

उसकी मां इस रूप में किसी अप्सरा से कम नहीं थी और फिर वो घूमी और टहलते हुए बिस्तर पर आ गई और घोड़ी बनकर अपने चूतड़ हवा में लहराने लगी






अनुज का लंड बागी हो गया ये देख कर जब उसने वो सिंगल डोरी वाली पैंटी को अपनी मां के बड़े चर्बीदार चूतड़ों के दरारों में गायब हुआ देखा तो और फिर वो अपनी मां के सामने आया तो देखा उसकी मां के चूचे झूल रहे थे उस स्ट्रेचेबल ब्रा बिस्तर को चूमने की चाह में





ओह गॉड मम्मी , भइया आपको ऐसे देखेगा तो पागल हो जाएगा उम्ममम अह्ह्ह्ह कितनी सेक्सी हो आप अअह्ह्ह्ह

अनुज वो तस्वीरें वो झलक अपनी आंखों में बसा लेना चाहता था , उसका लंड उस पल को जी लेना चाहता था वो पूरी बगावत पर फड़क रहा था और पूरा टाइट नुकीला उसके लोवर में अकड़ गया था






अनुज ने आंखे बंद कर अपना लंड मिसने लगा

: अनुज ये क्या कर रहा है तूं

: करने दो न मम्मी आप बहुत सेक्सी लग रहे हो आज सीई ओह्ह्ह

" अनुज ... अनुज "

" हा .. हा मम्मी " , एकदम से चौक कर अनुज की आंखे खुली तो सामने देखा कि उसकी मां रागिनी खड़ी थी एक साल को अपने देह पर डाले हुए

: अरे उठ न गजब हो गया

: क्या हुआ ( कम्बल में अपना लंड सेट करते हुए वो उठ कर बैठ गया )

रागिनी उसको खासा परेशान दिख रही थी वो उसके पास ही साल ओढ़े बैठी थी ।

: सब तेरी वजह से हुआ है , तेरी जिद की वजह से अब आगे न जाने क्या होगा ?

: क्या मतलब , मैने क्या किया ? ( अचरज से अनुज बोला )

: तेरी ही इच्छा थी कि मैं वो वैसे कपड़े पहन कर राज के सामने जाऊ , रात में तू बोला था न

: हा लेकिन हुआ क्या ? ( अनुज के सर के ऊपर से चीजें गुजर रही थी )

: वो मै ( रागिनी थोड़ी असहज थी ) नाइटी पहन कर राज कमरे में गई थी

: फिर ( अनुज का हलक सूखने लगा और नीचे से लंड उठने लगा )

: वो तो सो रहा था तो मैने पहले उसके अंगूठे से उसका फोन खोला , सोचा तेरे पापा को कुछ फोटो भेज दूंगी ताकि वो परेशान होकर जल्दी से आ जाए वापस , इसीलिए मैने उस नाइटी में ही फोटो निकालने लगी राज के मोबाइल से और इससे पहले कि मै तेरे पापा को वो फोटो भेजती , राज उठने वाला था और जल्दी जल्दी मैने उसका मोबाइल वापस रख दिया और फिर कमरे से बाहर आ गई । लेकिन उठने के बाद अपना मोबाइल लेकर बाथरूम में चला गया

अनुज की आंखे बड़ी हो गई , उसकी दिल की धड़कने तेज हो गई कि अभी अभी तो उसने ख्वाब में अपनी मां को एक सेक्सी सी नाइटी में अपने चूतड़ लहराते देखा था और असलियत में उसकी मां ने पहन भी लिए थे लेकिन इसमें भी उसके राज भैया की किस्मत तेज निकली

: अब क्या करु कुछ बताएगा

: आप शांत रहो मै अभी भइया का मोबाइल से वो फोटो डिलीट कर दूंगा ( अनुज रागिनी को संभालने की कोशिश कर रहा था )

: पागल , अब तक तो वो फोटो देख चुका होगा क्योंकि मैने कुछ बैक नहीं किया था झट से मोबाइल बंद कर रख दिया था ,क्योंकि मै नाइटी में वहा कैसे रुकती

अनुज के दिमाग में कुछ चल रहा था

: अच्छा उसमें सिर्फ सेल्फी है न ( अनुज ने सवाल किया )

: नहीं न , वो मै ... क्या बताऊं तुझे .. उसमें मैने मोबाइल पीछे करके फोटो निकाले थे ( रागिनी के कहने का साफ मतलब था कि उसने अपने चूतड़ों की सेल्फी ली है ये सोच कर ही अनुज का लंड झटके देने लगा ) थोड़ा तेरे पापा को तड़पा सकूं उसके लिए मैने अपने वहां की फोटो भेजी थी ,सुबह साफ करके ( रागिनी का इशारा उसके चूत की ओर था और ये सुनते ही अनुज का लंड झटके देने लगा ये सोच कर कि सारे जतन उसने किए और असल मलाई तो उसका भइया चाटेगा )

अनुज चुप था

: तू देख कर आ न क्या कर रहा है वो

: क्या ... म मै

: हा मै ऐसे कपड़े में वापस नहीं जाने वाली

रागिनी के ये कहने की देरी थी कि अनुज ने आगे लपक कर देखा कि उसकी मां की जांघें नंगी है इसका मतलब उसकी मां अभी भी उसी नाइटी में है और उसका लंड फुदकने लगा

: तू जा न देख कर बता , मै कपड़े बदल कर आती हूं ये कहा कर रागिनी ने वही बिस्तर पर ही अपनी साल उतार दी और टहलते हुए आलमारी की ओर गई और सामने का नजारा देख आकर अनुज का मुंह खुला का खुला रह गया , सामने उसकी मां एक गुलाबी शॉर्ट ट्रांसपेरेंट नाइटी में थी जो पीछे से बड़ी मुश्किल से उसके आधे चूतड़ों के उभार तक जा रहे थे ,






उसका मखमली गोरा बदन झलक रहा था और जैसे उसकी नजर अपनी मां के पतीले जैसे चूतड़ों पर गई उफ्फ क्या गठीले उभार थे लेकिन इसमें एक चीज बदल गई थी वो कि उसकी मां रागिनी ने डोरी वाली की जगह फूल कवर पैंटी पहनी थी , लेकिन जैसे ही रागिनी ने अपनी नाइटी निकालने के लिए पीछे से उठाया अनुज की आंखे चमक उठी





क्योंकि उसकी मां ने जो पैंटी पहन रखी थी वो पूरी तरह से नेट वाली थी और उसके मां के चूतड़ों के दरार साफ साफ झलक रहे थे , अनुज ने कस कर अपना लंड भींच लिया

नाइटी उठाती हुई एक नजर रागिनी ने अनुज को देखा : जा न , जल्दी मै कपड़े पहन कर आती हूं

अनुज समझ रहा था कि उसकी मां उसके सामने कपड़े नहीं निकालने वाली और वो अपने भैया के कमरे में आया और वही हुआ जैसा वो सोच रहा था

बाथरूम से राज की सिसकिया आ रही थी

" ओह्ह्ह सीईईई मम्मी कितनी मुलायम चूत है तुम्हारी ओह्ह्ह्ह क्या सुबह सुबह सरप्राइज दे दिया तुमने क्या सोच ओह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू मम्मी उम्ममम "

अनुज का लंड अपने भइया से अपनी मां के बारे में ऐसे अलफाज सुन कर सन्न था और थोड़ा उदास भी कि काश वो भी अपनी मां के रसीली चिकनी फांकों को देख पाता और हिला पाता

उसका लंड अकड़ा जा रहा था कि एकदम से रागिनी उसके पास आई , एक नॉर्मल नाइटी में उसका कंधा थपथपाने लगी : क्या हुआ

अनुज ने बस इशारे से बाथरूम की ओर दिखाया और राज अपनी धुन में रागिनी के नाम की मूठ लगाने लगा: उफ्फ मम्मी सीई ओह कितनी नरम गाड़ है आपकी , ओह्ह्ह गॉड फक्क्क् यूयू मम्मीइ ओह्ह्ह्ह गॉड आयेगा आपके ऊपर झड़ना है मुझे आपके गाड़ कर कितना सेक्सी गाड़ है आपका उफ्फ इस पैंटी में तो आर पार दिख रहा है इसी के ऊपर झड़ जाऊंगा ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह मम्मीइई

फिर एक के बाद एक मोटी थक्केदार पिचकारियां बाथरूम में छूट रही थी और इधर दोनों मां बेटे असहज होकर कमरे में आ गया

एकदम से चुप्पी सी छा गई कमरे में

: सॉरी मम्मी , ये सब मेरी वजह से .... ( उदास होकर अनुज ने कहा )

: देखा मै कह रही थी न उसकी शादी की उम्र हो गई है ऐसा कुछ करूंगी तो भटक जाएगा वो , मै कैसे उसके सामने जाऊंगी ( रागिनी ने मुरझाए चेहरे से कहा )

: हम्मम सॉरी मम्मी , अब क्या करें हम लोग

: इंतजार कर , शायद वो जो कर रहा था उसके बाद उसका दिमाग ठंडा हो और शायद वो इस बारे में मुझसे बात भी करें , समझ नहीं आ रहा है क्या जवाब दूंगी उसे ....

अनुज कुछ सोच रहा था : मै बताऊं

रागिनी : हा बोल

अनुज : आप साफ साफ कह देना कि आपको ये सब पापा को भेजना था , गलती से उसके मोबाइल ने रह गया

रागिनी : हलुआ लगता है तुझे सब , उसने जो अभी अभी कहा उसपर भी ध्यान तेरा , उसको मै पसंद आ गई हूं ना जाने क्या क्या करने के ख्वाब देख चुका है वो मेरे साथ

अनु चुप हो गया जिस तरह से रागिनी ने डांट लगाई

: मम्मी मुझे नहीं लगता कि भैया आपसे बात करेगा ?

: क्यों ?

: अरे जैसे आप बेचैनी महसूस कर रहे हो वैसे वो भी करेगा न, ऐसे एकदम से सामने और बंद बाथरूम में अपनी मन की बात करने में बहुत अंतर होता है ( अनुज ने अपने हिसाब से टूटी फूटी नैतिकता जोड़ कर रागिनी को समझाने की कोशिश की )

रागिनी थोड़ा चुप रही और फिर उठ गई

: कहा जा रही हो ?

: काम न करूं अब , तुझे भी तो कालेज जाना है न

अनुज बस चुपचाप अपनी मां के उखड़े मिजाज को सुना और फिर रागिनी उठ कर चली गई बाहर और अनुज भी ऊपर चला गया फ्रेश होने ।

ममता के घर

ममता की आंखे खुल गई थी और वो उठना भी चाहती थी लेकिन उसके साथ सोई हुई मंजू के हाथ उसके सीने पर थे और वो लगभग अपना मुंह उसके करीब करके सोई थी , उसके नथुने से आती गर्म सांसे ममता अपने गर्दन के पास महसूस कर रही थी और ये उसको बड़ा रोमांचित कर रहा था

मंजू को सुकून से सोया देखा ममता ने उसके बिखरे बालों को सहजने लगी उसी हाथ जिस बाह पर मंजू सोई थी

हल्की सी कुनमुनाहट और मंजू खिसक कर उसके और करीब हो गई और चिपक गई ममता से

ममता मुस्कुराई और हौले से सोती हुई मासूम सी दिख रही मंजू के सर को चूम लिया

एकदम से मंजू की आंखे खुली और वो चौक कर अलग हुई और कोहनी के बल उठ कर ममता को देखा : उठ गई मेरी लाडो उम्मम आजा

ममता ने उसको हंसी में पुचकारा

: धत्त भाभी , आपको मुझे उठाना नहीं चाहिए

: इतने सकून से सो रही थी कैसे जगा देती , आओ न इधर

: धत्त नहीं , क्या आप भी

: अरे भाई मुझे ठंडी लग रही है आओ इधर ( ममता ने उसको वापस खींच कर अपने देह से कस लिया , मंजू ममता के गुदाज चर्बीदार जिस्म की नरमी महसूस कर रही थी )

: हीहीहीही छोड़ो न भाभी उम्मम

: बड़ी गर्म हो तुम , मुझे तो देवर जी से जलन हो रही है , इतना गर्म माल मिल रहा है उनको

: धत्त भाभी छोड़ो न , आप जैसे कम हो

: क्या मतलब ( ममता ने उसको टटोलना चाहा )

: कुछ नहीं

: अरे बोलो न , इतना शरमाओ मत

: आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे भइया आपको पाकर खुश नहीं होंगे , उनको भी तगड़ा माल मिला है हीहीहीही

: अरे .. हाहाहाहाहा अब बोली मेरी देवरानी हीहीही थोड़ा ऐसे ही खुल कर रहा करो और सही कहा तुम्हारे भैया की किस्मत बहुत बड़ी है ( ममता ने आंख मारी और मंजू उसका इशारा समझ गई कि ममता अपने चूतड़ों की बात कर रही थी )

: धत्त आप भी न भाभी , चलो उठो मै आप लोगो के लिए चाय बना दूं

: ठीक है लेकिन ऐसे मत निकल जाना , वरना देवर जी तो राह निहारते घूम रहे है सुबह सुबह दबोच लेंगे तुम्हे हाहाहाहाहा

ममता की बात सुनकर मंजू थोड़ी झेप सी गई और उठ कर अपनी साड़ी पहन कर बाहर आ गई

वही दूसरी ओर दोनों भाई उठ गए थे , रोज की तरह टहलने के लिए निकल गया था और मुरारी फ्रेश होकर कमरे से निकल रहा था कि उसकी नजर मंजू पर गई

अकेले में उसे पाकर लपक कर वो किचन में गया और पीछे से पकड़ लिया

: हाय दैय्या क्या करते है छोड़िए भाभी देख लेंगी

: अरे कोई नहीं देखेगा , ये बता तुम तो मुझे भूल ही गई एकदम से अपना मर्द पाते ही उम्मम ( मुरारी ने साड़ी के ऊपर से गाड़ दबोचते हुए कहा )

: सीईईई ओह्ह्ह क्या करते है , मै क्या करु जब भाभी मुझे अकेला नहीं छोड़ती । उम्मम मत करो न तंग मुझे सीई ओह्ह्ह

: सारी रात तो मै तड़पा हूं मेरी जान , ममता तो मान गई थी कितना कहने के बाद , लेकिन अब तुम दोनों की वजह से चौपट हो गया

: हीहीही वैसे मैने सोचा नहीं था कि भाभी इतनी हैवी होगी

: अच्छा , बहुत मस्ती सूझ रही है तेरी , तू भी तो कम है क्या

: अह्ह्ह्ह सीईईईईई नोचों मत उम्मम मेरी तो उनके आधे में भी ना आए इतनी बड़ी है भाभी की

: क्या ?

: धत्त पीछे वाला और क्या ? अह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो हटो न ( मुरारी पीछे से हाथ आगे कर उसकी चूचियां मिजने लगा था ब्लाउज के ऊपर से )

: उफ्फ बड़ी गुलगुली सी चूचियां है तेरी

: अह्ह्ह्ह मुझे छोड़ो , अभी मौका है भाभी नहाने जा रही है हीहीही देख लो..... रात में मौका नहीं मिलेगा ये पक्का है हीहीही

ममता को दबोचने का ख्याल आते ही मुरारी का लंड अकड़ने लगा और उसने अपना लंड पजामे से निकाल कर बाहर कर दिया और मंजू का हाथ पकड़ कर उसपर रख दिया : सीईईई ओह्ह्ह मेरी जान बस थोड़ा सा धार लगा दो इसमें ताकि बस जाते ही अमन के मां की गाड़ में घुस जाए

: सीईईई क्या कर रहे है , कही वो आ गए तो

: उन्हूं मदन 7 बजे तक आयेगा अभी 10 मिनट समय है प्लीज न

मंजू ने उसे घूरा और उसके लंड को हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी

: चूस कर , प्लीज न ( मुरारी ने उसके गाल छू कर कहे ) मै बाहर देख रहा हूं जल्दी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई मेरी जान ओह्ह्ह्ह कितनी रसभरी जीभ है तेरी ओह्ह्ह्ह और अंदर ले न मेरी जान सीई ओह क्या मस्त चूस रही है तू ओह्ह्ह्ह उम्ममम






मंजू बड़े चाव से मुरारी का लंड चुभलाने लगी और सुपाड़ा मुंह में लेकर सुरकने लगी, धीरे धीरे सुपाड़े की गंध ने उसके भीतर सोए हुए वासना के ज्वर को जगा दिया था और वो लंड चूसते हुए अपनी मुलायम चूचियां मिजने लगी : मुझे चाहिए





मुरारी अपना लंड पकड़ कर उसके होठों पर पटकता हुआ : क्या चाहिए मेरी जान उम्मम बोल न

मंजू उसके सामने साड़ी के ऊपर से अपनी बुर सहलाने लगी : ये अंदर चाहिए

फिर वो लंड पकड़ कर खड़ी हो गई और मुरारी के होठ से होठ जोड़ कर उसका कड़क लंड सहलाने लगी, मुरारी भी उसके चूतड़ पकड़ कर अपनी ओर खींचने लगा

तभी हाल में कुछ आहट हुई और दोनों सरक कर फ्रिज के पास छिप गए

ये मदन था जो अभी अभी आया था और वो रुका नहीं सीधा बाथरूम की ओर चला गया

मुरारी ने गहरी सांस ली लेकिन मंजू तो वापस नीचे बैठ कर उसका लंड के सुपाड़े को जीभ से छेड़ती हुई पूरा लंड मुह में लेकर चूसने लगी थी






: ओह्ह्ह मेरी जान बस कर , बाद में ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई रुक जा न , मदन आ गया है

: मै कुछ नहीं जानती , जल्दी से डालो मेरा बहुत मन है क्यों परेशान किया मुझे सीईईई

ये बोलकर मंजू वही फर्श पर ही अपनी साड़ी उठा कर घोड़ी बन गई और उसके नंगे गठीले पतीले जैसे चूतड़ों को देख कर मुरारी का मन भी ललचा गया और उसने थूक लेकर झुक कर मंजू की बुर टटोली : सीई अह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह पेलो न

मुरारी उसकी जल्दी बाजी समझ रहा था और उसने लंड सेट करके उसके कूल्हे पकड़ कर पूरा लंड उतार दिया अंदर : ओह्ह्ह्ह कितनी जल रही है अन्दर से तेरी बुर






: हम्ममम बहुत ज्यादा ... अह्ह्ह्ह सीई पेलो न मुझे ओह्ह्ह्ह करो न भइया

मुरारी उसकी बातों से और जोश में आ गया और लंड अंदर बाहर करने लगा : लेह मेरी जान , उफ्फफ तेरी चूत तो मेरे लंड को पिघला देगी सीई ओह्ह्ह्ह मेरी जान

: कल रात से जल रही है मेरे राजा , वो तो भाभी आ गई थी नहीं तो वो कल ही सुहागरात मना लेते सीई ओह्ह्ह और कस कर डालो न ओह्ह्ह्ह सीईईईई हम्ममम ऐसे ही ओह्ह्ह कितना बड़ा है आपका ओह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह फक्क मीईईई सीई ओह्ह्ह्ह






: तो क्या तू सच में कल मदन से चुदने वाली थी उम्मम ,

: हा , उनके छूते ही मुझे कुछ होने लगा था , और उन्होंने तो अपना बाहर निकाल कर दिखाया भी मुझे , मै तो कल रात से ही कच्छी निकाल कर घूम रही हूं , बस लेने ही वाली थी उनका अह्ह्ह्ह कि भाभी आ गई ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना जोश आता है आपको मेरी बातें सुनकर सीई ओह्ह्ह्ह अगर देख लिए मुझे उनके साथ तो क्या होगा ?

: ओह्ह्ह्ह तू तो सच में बड़ी छिनाल है री उम्मम अह्ह्ह्ह्ह तेरी बुर बड़ी रसीली है देख कैसे पानी छोड़ रही है

: झड़ रही हूं न तो छोड़ेगी नहीं अह्ह्ह्ह आप भी निकाल दो न उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह

: ओह्ह्ह्ह उम्ममम बस आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह कुछ मत कर जल रहा है अंदर सब ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह कितनी मुलायम बुर है तेरी

मुरारी के घुटने में थोड़ा दर्द सा होने लगा था नंगी फर्श पर उसके टखने वापस उसे चुभने लगे थे और लगभग वही स्थिति मंजू की थी इसलिए मुरारी उसको पूरे पैर के बल उठा कर खुद खड़ा हो गया






और पूरा लंड उसकी चूत के गहराई में हच्च हच्च पेलने लगा उसके चूतड़ फैलाते हुए और चिंघाड़ते हुए झड़ने लगा उसकी बुर में गहरे घुस कर

और फिर हाफ कर सुस्त हो गया

मंजू भी मुस्कुरा कर आगे सरक गई और दोनों वही फ्रिज के कोने दिवाल का टेक लेकर हांफते हुए मुस्कुरा कर एक दूसरे को देख रहे थे और मंजू अपने पेटीकोट से अपनी बहती बुर साफ करने लगी और मुरारी ने उसकी साड़ी का पल्ला पकड़ कर अपने लंड को पोंछ लिया, जिसपर मंजू ने जरा भी ऐतराज नहीं किया

: हीहीही वैसे भाभी तो अबतक नहा चुकी होंगी

एकदम से ममता का ख्याल आते ही उसे मदन का ख्याल भी आया कि थोड़ी देर पहले मदन भी उधर ही गया था अभी तक लौटा नहीं , कही वो कुछ ताक झाक तो नहीं

मुरारी एकदम से उठा और पेंट बंद कर हड़बड़ाहट में निकल गया ममता के कमरे की ओर ।

जैसी ही वो गलियारे की ओर गया उसने तेजी से मदन को अपने कमरे के पास से बाथरूम की ओर जाते देखा

एकदम से मुरारी ठिठक गया क्योंकि मदन तो कबका निकला था बाथरूम जाने के लिए और मुरारी ने देखा कि उसके कमरे का दरवाजा भी खुला है । उनके दिमाग में कुछ शंकाए उठने लगी और वो लपक कर अपने कमरे की ओर बढ़ गया और जैसे ही अंदर देखा उसकी आंखे चौंधिया गई

ममता अभी अभी नहा कर आई थी और वो पूरी नंगी ही कमरे में झुक कर खड़ी थी और अपने बदन साफ कर रही थी और






उसके नंगे भीगे हुए चौड़े चूतड़ दरवाजे की ओर मुंह किए फैले हुए थे

मुरारी ये देखकर सन्न रह गया और उसे समझते देर नहीं लगी कि मदन ने जरूर उसके कमरे में तांक झांक की है लेकिन शायद वो इसका विरोध नहीं कर सकता था और खुले कमरे के दरवाजे से कोई भी अंदर झांक सकता था , इसमें तो ममता की लापरवाही होनी चाहिए।

उस पोजेसिव माहौल में एक पल के लिए मुरारी भूल ही गया था कि बीती रात ही उसने मदन को अपनी बीवी की तस्वीरें दी थी हिलाने के लिए

तेजी से मुरारी कमरे का दरवाजा भिड़काता हुआ कमरे में गया

: हाय दैय्या कौन ... आप है ? ( ममता ने हाथ में ली हुई ब्रा के अपनी छातियां छिपा रही थी ) धत्त मै तो डर गई

: अरे इतना डर है तो कम से कम दरवाजा तो लगा लेती , अभी अभी मदन को मैने बाथरूम जाते देखा है पीछे

: हा तो क्या हुआ ( ममता थोड़ा इतरा कर मुस्कुराई )

मुरारी चौका और लपक कर उसकी ओर आया : क्या हुआ , उसने देख लिया होता तुम्हे ऐसे तो

ममता तौलिए से अपने बदन को पोंछ रही थी टांगे उठा कर : अच्छा जी कल दुपहर में तो नहीं रुके थे , उनके सामने ही .... हीही

ममता ने उसे चिढ़ाया तो मुरारी ने उसको पीछे से दबोच किया और वो कसमसाने लगी

: उम्मम धत्त छोड़ो न

मुरारी बिना कुछ कहे उसकी आगे बिस्तर पर झुका कर उसके पहाड़ जैसे चूतड़ों को फैला दिया और गिले तरो ताजा चूतड़ों से आती मादक ताजा गंध उसे ललचाने लगी

उफ्फ क्या रसीली गाड़ है तेरी अह्ह्ह् उम्ममम ( मुरारी ने सीधा उसके गाड़ के सुराख पर अपनी जीभ फिराई और पानी के कुछ अंश थे वहां पर जिससे उसकी जीभ गाड़ पर अच्छे से फिसलने लगी )






: सीईईई ओह्ह्ह धत्त हटो सुबह सुबह शुरू हो गए उम्ममम

: अरे रात में भी तो तूने मौका कहा दिया , सारी रात ये लंड तसरा है तेरी गाड़ के लिए उम्ममम क्या खुशबू है

: ओह्ह्ह हटिए न , मुझे काम है भाई उफ्फफ अमन के पापा मान जाओ न

मुरारी नहीं माना और उसके गाड़ को फैलाए हुए उसके बुर के फांकों सहित उसकी गाड़ की छेड़ चाटने लगा

ममता को शरारत सूझी और वो सिसकती हुई : धत्त रुक जाओ , देवर जी हमे देख रहे है

: देखने दे मुझे फर्क नहीं पड़ता , मै तो उसके सामने तेरी गाड़ में पेल दूंगा

और अगले ही पल मुरारी ने अपना लंड निकाला और थूक लगा कर उसकी गाड़ की कसी छेद पर रख कर दबा दिया

पक्क से उसका सुपाड़ा ममता के ताजा गुलाबी गाड़ के सुराख में घुस गया और वो अंदर से तप रहा था

पहले मंजू की जलती चूत और अब ममता की गर्म गाड़

: उफ्फ कितनी गर्म है मेरी जान , ओह्ह्ह टाइट भी

: अह्ह्ह्ह धत्त आप बड़े वो हो , जिद्दी कही के सीईईई अब जल्दी करो न कोई आ जाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह






मुरारी : आने दे मेरी जान , अपनी बीवी को चोद रहा हूं दूसरे की थोड़ी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह कितनी कसी गाड़ है तेरी ufffff

ममता मुरारी के कड़े लंड को अपनी तरो ताजा गाड़ में पाकर मस्त हो गई और सिसकिया लेने लगी ,उसकी बुर पनियाने लगी थी और बुर के अंदर गाड़ की तरफ से मुरारी का लंड महसूस कर रही थी : क्यों अपनी बहिनिया नहीं चोदोगे उम्मम अह्ह्ह्ह उसकी गाड़ में डालना ये बांस जैसा लंड सीई ओह्ह्ह

संगीता के बारे में ख्याल आते ही मुरारी का लंड ममता की गाड़ में और फूलने लगा : सीईईई ओह्ह्ह मेरी जान किसकी याद दिला दी तूने सुबह सुबह ओह्ह्ह्ह उम्ममम उसकी गाड़ चीरने के सपने तो हर रोज देख रहा हूं उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम






: हा मेरे राजा ओह्ह्ह्ह पेलो और चोदो अपनी बहिनिया को उम्ममम फाड़ दो उसकी गाड़ ओह्ह्ह्ह खूब अंदर डालो ओह्ह्ह्ह अमन के पापा मै झड़ रही हूं उम्मम सीईईई ओह्ह्ह

ममता तेजी से नीचे हाथ डाल कर अपनी बुर सहला रही थी और अपनी बुर और गाड़ दोनों छेद को कस रही थी जिससे मुरारी के लंड की नसे पूरी तरह से गाड़ में चूसने लगी

: सीईईई ओह मेरी जान ऐसे ही उफ्फ मजा आ रहा है बस आयेगा सीई ओह्ह्ह्ह मेरी रांड सीईईई अह्ह्ह्ह्ह मेरी चुदक्कड़ रानी तेरी गाड़ ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उम्ममम भर दूंगा इसे आज ओह्ह्ह अमन की मां मेरी जान सीई ओह्ह्ह्ह मेरी रानी अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम






एक के बाद एक मोटी धार के साथ ममता के गाड़ में मुरारी पिचकारी छोड़ता रहा और झड़ता रहा

ममता ने भी उसको निचोड़ने में कोई कमी नहीं छोड़ी

सुबह सुबह आज उसकी दोहरी चुसाई हो गई थी ,पहले मंजू और फिर ममता

उठने भर की ताकत भी बची थी उसमे और वो बिस्तर पर लेट गया

ममता मुस्कुरा कर उठी और अपने चूतड़ साफ कर कपड़े पहनने लगी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई

ममता समझ रही थी कि वो मंजू ही होगी इसीलिए उसने कपड़े छोड़ कर बस तौलिया आगे लिए हुए अपनी चूचियां और चूत छिपा कर हल्के से दरवाजा खोला और सामने मंजू थी हाथ में चाय की ट्रे लिए हुए






एकदम से मंजू ने ममता को देखा और उसके पीछे बिस्तर पर बेसुध पसरे हुए मुरारी को देखा , जिसका पैजामा उसके घुटनों में था , गनीमत ये थी कि कुर्ते से उसका लंड छुपा हुआ था ।

मंजू कमरे की हालत देखते ही सारा माहौल समझ गई और ममता ने मुस्कुरा कर उससे चाय की ट्रे ले ली : जाओ या अंदर आना है ?

ममता ने उसको छेड़ा और वो शर्मा कर मुस्कुराने लगी : धत्त नहीं , लेकिन मुझे नहाना है ?

ममता : ठीक है थोड़ी देर रुक कर आओ मै इन्हें बाहर भेजती हूं ।

मंजू ने मुस्कुरा कर हुंकारी भरी और निकल गई और ममता ने दरवाजा लगा दिया।

वही दूसरी ओर दूर बड़े शहर में एक एयरपोर्ट पर अमन अपनी बीवी सोनल और साली निशा के साथ उतर चुका था और उन्होंने मदन को फोन करके सूचित कर दिया था ।

जारी रहेगी

( कहानी में आपके चहेते किरदारों की वापसी हो रही है , तो उनके स्वागत में आप भी कोई कमी नहीं छोड़े ऐसी उम्मीद रहेगी )
 
थे फंतासी मॉर्निंग 02





अवेलेबल ों प्रॉबब्ली 08 नोव 2025
 
💥 अध्याय 02 💥

अपडेट 027

THE FANTASY MORNING 02

प्रतापपुर

रात में अपने ससुर के साथ गीता की दोहरी चुदाई कर रंगीलाल अपने कमरे में वापस आ गया था ।

सर्दियों की सुबह अब धुंधली सी अंगड़ाई लेने लगी थी , और रंगी ने जिस्म में भी सुबह सुबह मॉर्निंग इरेक्शन का अलार्म बज चुका था ।

फड़फड़ाहट तो कही और भी हो रही थी , उसके एक कमरे बाद एक किनारे वाले कमरे में सुबह सुबह बबीता अकेली अपने कमरे में सोई हुई थी किसी कामुक सपने में अपनी चूत में मोटे लंड से चुदने का अरमान लिए तकिए को अपनी जांघो में कसे हुए उसे अपनी बुर पर घिस रही थी ।






फिर एकदम से उसकी आंखे खुल गई और अपनी स्थिति देख कर वो उखड़ कर बैठ गई ।

रात में रंगी ने उसे धोखा दिया और सबसे बढ़ कर कि उसके दादू ने उसे छोड़कर गीता को चोदा, पहले भी दोनों बहनों में ज्यादा प्यार दुलार के लिए होड़ लगी रहती थी और उनके आपसी झगड़े होते थे लेकिन फिर भी एक लिहाज में कैसे वो अपने दादू से खुद से कहेगी कि उसे भी चोदो जैसे गीता को चोद रहे थे और उसपर पर दो दो लंड का सुख

दोहरे जलन से बबीता का जिस्म तप रहा था , वो वक्त एक आरामदायक शॉर्ट में थी जो रात में अकसर वो पहन लेती थी सोने के लिए,

कमरे से निकल कर उसकी निगाहे अपनी मां पर गई जो अपने कमरे से निकल कर अपने बिखरे बालों को जुड़ा करते हुए निकल रही थी । उसकी साड़ी पूरी ढीली थी , साफ पता चल रहा था कि उसने जल्दी बाजी में पहना है और बबीता ये भी समझ रही थी कि जबसे इधर उसके पापा ने दारू छोड़ी है , उसकी मां ने तो कैसे अपने पल्लू में बांध लिया है , कल तो सारा दिन उसके पापा को नहीं छोड़ा और अभी ये मौका अच्छा था उसके पास

सुबह सुबह उसकी बुर बहुत कुलबुला रही थी और जैसे ही उनकी मां आंगन में गई वो लपक कर अपने पापा के कमरे की ओर बरामदे से होकर बढ़ गई

सर्द मौसम की ठंडी फिजाओं ने उसके नंगे टांगों में सिहरन पैदा हुई और तेजी से लपक कर अपने पापा के कमरे घुस गई

कमरे में जाते ही उसकी नजर सामने गई थी तो देखा कि उसकी मां ने जाते हुए उसके पापा के आधे देह से चादर हटा दी थी और वो उसका अंडरवियर दिख रहा था । जिसमें उसका लंड भी सुबह की सलामी देते हुए टाइट हुआ जा रहा था ।

बबीता का मन मचल उठा और वो कमरे का दरवाजा भिड़का कर धीरे से अपने पापा के पास आ गई

पैरो के सुबह की सरसराहट थी लेकिन अंदर से उसके जिस्म में आग भड़क रही थी ,उसका रोम रोम खड़ा हो गया था और उसकी नजरे अपने पापा के खड़े लंड को देख रही थी ।

हौले से उसने हाथ आगे अपने पापा का लंड अंडरवियर के ऊपर से छूना शुरू कर दिया और वो उसके बदन में कंपकंपी शुरू हो गई

उसकी नाजुक हथेलियां अपने पापा के सुपाड़े को गर्म कर रही थी और राजेश का लंड सतर्क होकर टनटना रहा था

: उम्ममम ... गुड़िया तू तेरी मम्मी कहा है

: वो बाथरूम गई ( अपने पापा ने लंड पर उंगलियां फिरा कर वो बोली )






: सीईईई बदमाश लड़की ये तू .... अह्ह्ह्ह ( राजेश ने धुंधली आंखों से बबीता को देखा और टॉप में उसके उभरे हुए निप्पल देखकर वो अपने उंगलियों से उनसे खेलने लगा और बबीता मचल उठी )

: सीईईई अह्ह्ह्ह पापा कस कर पकड़ो न उम्ममम( बबीता ने अपने पापा का हाथ पकड़ कर सीने मौसमी जैसे कड़क चूचे पर दबा दिए )

उसकी इस हरकत से राजेश के पूरे बदन में खून का सैलाब उमड़ आया और वो उसके जिस्म की नस नस जोश से भर गई , एक झटके में उसने बबीता को उठा कर अपने बिस्तर में खींच लिया

: हीही ( बबीता खिलखिलाई )

राजेश ने उसको कंबल में उसके शॉर्ट के ऊपर से उसके चर्बीदार चूतड़ों को हथेली में भरते हुए उसके लिप्स चूसने लगा और बबीता भी अपने पापा के लंड को अंडर वियर के ऊपर से मसलने लगी और दोनों के बीच जबरजस्त कामुकता का संचार होने लगा






सुबह सुबह अपनी लाडली के नरम होठों और चर्बीदार चूतड़ों का स्पर्श पाकर राजेश का लंड फनकार मारने लगा और वो बबीता को कमर से खींच कर उसकी चूत को अपने अंडरवियर में बने तंबू पर सटाने लगा और बबीता का जोश दुगना हो गया और वो अपने पापा के लिस्प को चुस्ती हुई उसके आड़ को हथेली में कस ली

: ओह्ह्ह्ह गुड़िया उम्ममम सीईईई कितना गर्म है तू

: उम्मम आप मुझे छोड़ दिए थे न मम्मी को पाकर सीईईई अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह पापा उम्ममम पता है मै सुबह सुबह आपका सपना देख रही थी

: सीई क्या देखा तूने गुड़िया

बबीता ने हाथ राजेश के अंडरवियर में घुसाने लगी और राजेश के पैर अकड़ने लगे वो अपने लंड की नसे पूरी तान चुका था और बबीता की ठंडी उंगलियां उसके तपते लंड को छू रही थी।।






: उफ्फफ बता न गुड़िया उम्ममम

: मैने देखा न आप पेल रहे हो उम्मम पीछे से सीईईई ओह्ह्ह पापा कितना बड़ा है और जल रहा है ये तो

: हा बेटा , तूने छू कर इसकी आग भड़का दी उफ्फ तेरे नाखून अह्ह्ह्ह फट जायेगा ऐसा लग रहा है

: उफ्फ पापा कितना टाइट है सीईईई मन कर रहा है खा जाऊ , चूस लू पापा प्लीज न

: आह्ह्ह्ह बेटा तेरी मम्मी बाथरूम गई है , अभी आ जाएगी तो सीईईई ओह्ह्ह

: तबतक मै चूस लूंगी

ये बोलकर बबीता सरक कर कंबल में ही अपने पापा के पैरों में चली गई और उसने अपने पापा का लंड छूने लगी और राजेश इस उत्तेजना से फड़फड़ा उठा कि कही उसकी बीवी न आ जाए

एक तरफ बीवी का डर दूसरी ओर उसकी लड़की की कामुक शरारत और लंड चूसने की जिद

राजेश ने आंखे बंद कर गहरी सांस ली और सिसकने लगा , जैसे जैसे बबीता कम्बल के अपने पापा ने सुपाड़े की खोल उतार कर उसपर अपने नथुने रख कर सूंघने लगी और नीचे से सुपाड़े की गांठ पर अपने जीभ की टिप फिराई , राजेश पूरी तरह मचल उठा : ओह्ह्ह्ह गुड़िया उम्ममम सीईईई कितना तड़पा रही है अपने पापा को उम्मम ओह्ह्ह्ह

बबीता को तो जैसे कितना नशा हो गया था सुबह सुबह अपने पापा का सुपाड़ा सूंघ कर वो अपने पतले पतले होठों से उन्हें चूमने लगी और जीभ से नीचे से चाटने लगी , जिससे राजेश का लंड कंबल में खड़ा होने लगा था ,बबीता नीचे सरक कर अपने पापा के आड़ को मुंह में लेने लगी






: ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह गुड़िया उम्ममम कहा से सीख रही है ये सब तू उम्ममम अह्ह्ह्ह खा जा बेटी उम्मम और सुपाड़ा भी लेले न मेरी गुड़िया जल रहा है ओह्ह्ह्ह हा ऐसे ही ओह्ह्ह कितना मजा आ रहा है

घोंट जा मेरी गुड़िया मेरी लाडो ओह्ह्ह और चूस उम्मम्म अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह






बबीता ने कम्बल में उठ कर अपने पापा का लंड चूसना शुरू कर दिया था और वो उसे गले तक ले जा रही थी जिससे राजेश का जोश और बढ़ने लगा और वो बबीता का सर पकड़ कर अपने लंड को उसके मुंह में गहरे घुसाने लगा : ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह ले मेरी सोना अह्ह्ह्ह्ह मेरी गुड़िया घोंट जा पूरा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

तभी एकदम से दरवाजे पर हड़ाक से आहट हुई और बबीता ने लंड छोड़ कर कंबल में सीधा लेट गई और राजेश भी हड़बड़ा कर सीधा हो गए ओर पीछे हेडबोर्ड का सहारा लेकर बैठ गया

: अरे उठ गए आप

: उम्ममम हा अभी अभी ( राजेश पूरी कोशिश कर रहा था कि अपना लंड छुपाने की कम्बल में, लेकिन अपनी मां के आने के बाद भी बबीता राजेश के लंड से खेले जा रही थी उसे छुए जा रही थी और राजेश कुछ कर नहीं पा रहा था )

फिर एकदम से सुनीता को कुछ अजीब लगा बिस्तर में और कम्बल को देखकर वो समझ गई कि कोई और भी सोया है और कम्बल उठाने को आई : अरे ये कौन सोया है

राजेश एकदम से हड़बड़ा गया और बबीता भी डर गई

: अरे सोने दो न , गुड़िया आई है

: आप ही उसे बिगाड़ रहे हो ( ये बोलकर सुनीता आलमारी से कपड़े निकालने लगी )

राजेश बस मुस्कुरा कर रह गया क्योंकि कम्बल में बबीता उसका लंड छोड़ नहीं रही थी और राजेश की नजरे अपनी बीवी सुनीता के दूधिया पीठ पर थी जो उसके डीप बैक वाले ब्लाउज से झलक रही थी और साड़ी भी कूल्हे पर खुली थी , उसकी गुदाज कमर को देख कर उनकी आंखे ललचा गई और लंड अंदर और फनकार मारने लगा

आलमारी बंद करते हुए सुनीता की नजर आइने में अपना पति पर गई जो कामुक होकर उसे ही देखे जा रहा है

: क्या ? ऐसे क्या देख रहे है ?

राजेश ने कुछ नहीं कहा बस बबीता का हाथ हटा कर अपना लंड निकाल कर कंबल के बाहर कर दिया

एकदम से सुनीता की आंखे सन्न और चेहरे पर मुस्कुराहट , फिर थोड़ी हड़बड़ाई बबीता के कमरे में होने का सोच कर

वो आंखों से राजेश को डांट रही थी बिना कुछ बोले कि कमरे में बबीता सोई है और वो अपना लंड अंदर कर ले लेकिन राजेश को इस रोमांच में मजा आ रहा था और वो अपना लंड उसके सामने सहलाते हुए उसको अपने पास आने को कहने लगा , सुनीता शर्मा कर ना में सर हिलाने लगी और आंखों से उसे बबीता के होने की बात याद दिला रही थी

राजेश ने भी इशारे में कहा कि वो सो गई , जी तो सुनीता का भी ललचा गया था अपने पति के लंड की कसावट देख कर सुपाड़ा तो पहले ही बबीता ने चूस कर लाल कर रखा था

ना चाहते हुए भी सुनीता चल कर उसके पास आई और राजेश के पास बैठ कर उसका खड़ा लंड पकड़ लिया

: ठरकी हो आप पूरे , वो उठ गई तो ( सुनीता राजेश का तपता लंड थाम कर सिहर कर फुसफुसाई )

: वो सो रही है मेरी जान अह्ह्ह्ह्ह चूसो दो न थोड़ा

: उससे हो जाएगा क्या आपका उम्मम ( सुनीता उसका लंड हाथ के लेकर सहलाते हुए मदहोश हो रही थी ) सीई कितना तप रहा है जी

: तुम्हे देख कर गर्म हो रहा है मेरी जान ओह्ह्ह्ह कितनी रसभरी जीभ है तेरी ओह्ह्ह्ह

इधर राजेश ने सिसकना शुरू किया वही कम्बल में बबीता अपनी टांगे घिसने लगी उसकी बुर पनियाने लगी कि कैसे उसके साथ होते हुए उसके पापा झूठ बोल कर मम्मी से अपना लंड चुसवा रहे है , उसके निप्पल कड़क होने लगे






: ओह्ह्ह मेरी जान उम्मम और अंदर ले न ओह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह ( राजेश उसका सर पकड़ कर दबाने लगा और सुनीता उठा गई लार से लिभड़ाये अपने होठ साफ करती हुई

: अंदर डालना है न ( सुनीता खड़ी होकर बोली )

: हा मेरी जान

: श्शश्श चुप


ये बोलकर सुनीता ने राजेश के पैर पकड़ कर बिस्तर से लटका दिए और उसके सामने अपने चूतड़ मटका कर साड़ी उठाने लगी देखते ही देखते राजेश के सामने सुनीता ने अपने चूतड़ नंगे कर दिए और उन्हें राजेश के लंड के आगे नचाते हुए घूम कर उसे देखा , सुबह सुबह ये नजारा देख कर राजेश का लंड खुद से ही सर उठाने लगा और सुनीता ने हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ कर सहलाने लगी : सीई ओह्ह्ह मेरी जान उम्मम ओह्ह्ह्ह अब बैठ जा न उम्मम





: बैठ जाऊं ( सुनीता मुस्कुरा कर उसके लंड को खींच रही थी )

: ओह्ह्ह हा उम्मम ( राजेश की तड़प बढ़ती जा रही थी )

फिर सुनीता ने उसका सुपाड़े को अपनी बुर के फांके पर लगाया और उसके लंड पर बैठ गई और खुद ही उछलने लगी

उसके चर्बीदार चूतड़ों की जांघों से टकराने से ठप्प ठप्प की आवाज कमरे में उठने लगी साथ ही राजेश की सिसकिया : ओह्ह्ह्ह मेरी रानी कितनी गर्म चूत है तेरी ओह्ह्ह्ह और ओह्ह्ह्ह सीईईई उफ्फ

: श्शश्श चुप करो उम्मम मेरे राजा ओह्ह्ह्ह कितना टाइट है आपका लंड ओह्ह्ह पूरा अंदर चोट कर रहा है ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह दैय्या सीईई ओह्ह्ह

: हा मेरी जान ओह्ह्ह और और उछल ऐसे उम्मम

इधर दोनों चूत और लंड की ताल मिला रहा थे और वही बबीता को कम्बल में गर्मी होने लगी थी ,उसका बदन पूरी तरह से जल रहा था चूत पानी पानी हुई जा रही थी वो कम्बल से मुंह निकाल कर बाहर देखी तो उसकी आंखे फटी रह गई ,,उसकी मां उसके सामने उसके पापा के लंड पर अपनी गाड़ फेक रही थी तेजी से और पापा भी खूब सिसक रहे थे






: उम्मम ओह्ह्ह्ह मेरी रानी ओह ऐसे ही बस और और आयेगा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह आ रहा है ओह्ह्ह्ह

: उफ्फ मेरे राजा ओह्ह्ह्ह कितना गर्म है उम्मम सीईईई अह भर दो मेरी बुर उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

एक के बाद एक मोटी थक्केदार पिचकारियां राजेश सुनीता की बुर फेंकता रहा और दुनिया उसके गोद में बैठी हुई लंड को अपनी बुर के जड़ में लिए सारा रस निचोड़ती रही जब उसने महसूस किया कि राजेश का लंड फड़कना बंद हो गया तो वो खड़ी हो गई और राजेश का निचोड़ा हुआ लंड धीरे धीरे नीचे हो रहा था

: हीही , अब साफ कर लेना मै नहाने जा रही हूं

: अरे चूस तो दो

: धत्त अब करो खुद से हीही ( ये बोलकर सुनीता खिलखिला कर निकल गई कमरे से )

उसके जाते ही बबीता वापस कम्बल से निकली : ओह सॉरी बेटा वो तेरी मम्मी ने

बबीता थोड़ी उदास थी लेकिन थोड़ी उम्मीद के साथ : मै साफ कर दूं पापा

राजेश का दिल खुश हो गया और वो पैर उठा कर वापस बिस्तर पर आ गया और बबीता ने बिना हिचक के उसका वीर्य से सना हुआ लंड मुंह में लेकर चूसने लगी : सीई ओह्ह्ह बेटा चाट ले उम्मम ओह्ह्ह्ह इसमें तेरी मां के बुर की मलाई भी है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम

बबीता बिना किसी हिचक के अच्छे से अपने पापा का लंड चूस कर साफ किया और राजेश वापस सो गया

बबीता उठकर फ्रेश होने के लिए निकल गई ।

वही दूसरी ओर रंगी ने भी अंगड़ाई लेकर खड़ा हुआ और कमरे से बाहर गया और उसकी नजर सामने से आंगन की ओर आती बबीता पर गई । जिसे देखते ही उसके पजामे ने लंड और फौलादी होने लगा , उसने जैसे ही रंगी को देखा मुंह बना कर निकल गई बाथरूम की ओर और तभी पीछे से बनवारी ने उसे बबीता के लचीले चूतड़ों को निहारते देखा

: बड़ी तड़की लग रही है जमाई बाबू आपसे , कोई बात है क्या ?

एकदम से अपने ससुर को अपने पास खड़ा देख कर चौका और फिर मुस्कुरा उठा ।

: अरे बाउजी आप ? हाहाहाहा नहीं बस ऐसे ही देख रहा था कि गीता वाले गुण इसमें है या नहीं

: अरे क्यों नहीं होंगे , थोड़ा टटोल कर देखिए तो सही हाहाहाहा ( बनवारी खिल कर हंसा )

: अरे टटोला था बाउजी कल रात को

: हैं ? सच में !! कब कैसे

: अरे कल दुपहर को मैने इसे छत पर देखा और मुझे लगा कि इसमें कच्छी नहीं पहनी है तो मैने इसको डांटा और कहा कि पूरे कपड़े पहना कर और टॉप बड़े वाले पहने ताकि चूतड़ ढके रहे , आपको बताऊं बाउजी तबसे मेरे सामने खूब चूतड़ हिला हिला कर घूम रही थी , कसम से लौड़ा तो रात में इसी ने खड़ा किया था ।

: उफ्फ जमाई बाबू , सच कहूं तो इसके चर्बीदार चूतड़ों की लचक ने तो मुझे भी कई बार चौका दिया है । अब तो आप ही इसको सीधी करो जमाई बाबू , इसी बहाने मेरा भी कुछ कल्याण हो जाएगा हाहाहा

: सच में बाबूजी , आज तो मेरा घर जाने का प्लान था , लेकिन अब आपने कह दिया है तो इसकी गाड़ मसल कर जाऊंगा

: वाह ये हूं न बात , फिर डन करते है आइए चले टहलने बाहर

: जी चलिए हाहाहाह

फिर दोनों ससुर दामाद निकल गए खेतों की ओर

चमनपुरा

रागिनी नहा चुकी थी और किचन में खाना बना रही थी

इधर अनुज को भी कालेज जाना था और वो नहा धो कर तैयार होकर नीचे उतर रहा था कि जीने से आते हुए उसे कुछ फुसफुसाहट सी आई


उम्मम हट न बदमाश सीई ओहो राज मारूंगी अभी अह्ह्ह्ह धत्त पागल मत बन

अपनी मां के मुंह से ऐसे अलफाज सुनकर अनुज के कान खड़े हो गए और पैंट में लंड अपने पैर पसारने लगा सो अलग

धीरे धीरे दबे पांव वो नीचे आया

: उम्मम मैने कहा न उस बारे में बाद में बात करेंगे अह्ह्ह्ह राज मत तंग कर , नहाने जा न कपड़े निकाल कर खड़ा है

: उम्मम मम्मी कितना अच्छा लगता है आपको हग करना उफ्फ कितने गर्म हो आप






और अनुज ने झांक कर देखा तो राज ने रागिनी को पीछे से पकड़ रखा था

: हट जा , सब जान रही हूं तेरी चालाकी , मुझसे चिपक मत और जा कपड़े पहन ले

: अच्छा ठीक है एक किस्सीइ देखो उम्मम ( राज ने अपनी थूथ आगे कर अपनी मां का चेहरा पकड़ कर उसको चूमने लगा और रागिनी ने भी उसको लिप्स पर एक किस्स दीदी )






ये सब देख कर अनुज का लंड पैंट में पूरा टाइट हो गया

: अह्ह्ह्ह छोड़ अब और जो तुझे समझाया है उसे ध्यान रखा , जा अब

: ओके मेरी सेक्सी मम्मी हीही

जैस ही अनुज को लगा कि राज आने वाला वो दबे पाव पीछे होकर जीने की तरफ हो गया और राज मस्ती में खुश होकर अपने कमरे में जाने लगा था कि उसकी नजर अनुज पर गई और वो उसको आंख मारकर निकल गया अपने रूम में

अनुज की बेचैनी बढ़ गई थी कि अगर उसकी मम्मी राज भैया को समझाने की बात कर रही थी तो ये सब क्या था ?


अनुज रागिनी के पास गया जो खाना बना रही थी

: अरे आ गया तू , बैठ नाश्ता देती हूं

: जी मम्मी

अनुज की हिम्मत नहीं हो रही थी कि अभी जो उसने देखा उसके बारे में अपनी मां से बात करे , वो उलझा हुआ वही टेबल पर बैठ गया और रागिनी उसके लिए नाश्ता परोसने लगी ।

: मम्मी !! आपने भैया से बात की ?

एकदम से रागिनी के हड़बड़ाहट भरे हाथ शांत हो गई और उसने एक गहरी सांस ली

: हम्म्म , मै उसे समझाया तो लेकिन ...

: क्या लेकिन ?

: अरे तू तो उसकी शरारत जानता है , ऐसे भोला बन कर रहता है और इतना बेफिक्र होकर बातें करता है जैसे कुछ हुआ ही न हो

: हुआ क्या ?

: कुछ नहीं, मै उसका मोबाइल लेकर आई थी जब वो नहाने जा रहा था तो और नहाने के बाद वो उसे खोजते हुए आ गया मेरे पास , मैने उसे फोटो डिलीट करने को कहा तो कहने लगा क्यों करनी है ,इतनी .... सेक्सी लग रही हो पापा आएंगे तो दिखाएंगे उनको

: क्या ?

: हा , उसको तो तेरे पापा का भी डर नहीं , ना जाने किस दुनिया में मस्त रहता है और फिर मैने उसको कहा कि आगे वो सब हरकते मत करना जो सुबह बाथरुम में की थी तो कहने लगा कि जब मै किस्स मागूंगा तो देनी पड़ेगी । तो अब बता मै क्या करूं ? अभी भी वो मेरी चुम्मी लेकर गया है तेरी वजह से मेरा दीवाना बना घूम रहा है अब !!

मम्मी की बातें सुनकर अनुज एक एक करके सारी कड़ियां जोड़ने लगा और उसे अपने मा की बातों में सच्चाई तो दिखी ही लेकिन एक डर था कि उसने कही कुछ गलत तो नहीं कर दिया जिससे उसकी मां परेशान हो जाए और कही पापा के सामने भी राज भैया का यही व्यवहार रहा तो ?

: अब तू टेंशन न ले , देखती हूं इसको समझाऊगी दुकान पर जाकर और आज तू कालेज से जल्दी आ जाना

: जी ठीक है मम्मी

ये तो अनुज को और भी ज्यादा बेचैन करने वाली बात ही गई क्योंकि अगर वो दुकान पर अकेला रहेगा और मम्मी किचन राज भैया के पास जाएगी तो उसे कैसे पता चलेगा कि अकेले में उनकी क्या बाते हुई होंगी ।

खैर उसने नाश्ता किया और बैग लेकर निकल गया कालेज के लिए और रास्ते में उस पुल के पास कोई पहले से ही उसकी राह देख रहा था ।

: हाय अनुज ( फीकी मुस्कुराहट से लाली ने उसे ग्रिट किया)

: हाय .. अकेले ? पूजा कहा है ? (अनुज ने सवाल किया )

: वो ... मैने उससे फ्रेंडशिप तोड़ दी ( अनुज की ओर पीठ करते हुए बोली )

: तोड़ दी .. लेकिन क्यों ? मैने तो कहा था कि मुझे कोई दिक्कत नहीं ..( अनुज बोलते हुए चुप सा हो गया )

: लेकिन मुझे है .... मै इनसब से तंग आ गई हूं और छुटकारा चाहती हूं , प्लीज तुम मदद करो न

लाली घूम कर उसके पास आई और अनुज की सांसे बेचैन होने लगी उसकी धड़कने तेज हो गई

: कृतिका , यहां हमें कोई देख लेगा

: मुझे किसी का डर नहीं बस एक बार

: ओके ( अनुज ने अपने आप को भीतर से मजबूत करता हुआ एक गहरी सांस लेता हुआ अपनी बाहे खोल दिया )






बिना किसी हिचक कर लाली ने उसकी बाहों में अपनी बाह डाल कर उसके सीने से लग गई और अनुज ने भी उसके अपने पास कस लिया और उसके नरम मौसमी से दूध अनुज के सीने से हल्का हो दब गए जिसका अहसास दोनों को था ,मगर भीतर जो बिजली दौड़ रही थी एक दूसरे को हग करने के बाद वो फिलिंग से अनुज का लंड अकड़ रहा था ।

: आई लव यू अनुज आई लव यू ( लाली फफक पड़ी अनुज से चिपक कर )

: अरे ... आई लव यू टू न क्यों तो रहे हो ( अनुज ने उसको अपने सामने किया और उसके मासूम से चेहरे को अपने हाथों में भरा )

: प्लीज मुझे मेरी गलतियों के लिए छोड़ना मत , मै नहीं रह पाऊंगी तुम्हारे बिना , सच्ची मर जाऊंगी ।

: अरे ऐसा नहीं कहते, पता है मेरी मम्मी क्या कहती है ( अनुज वापस से उसको अपने सीने से लगाता हुआ बोला )

: क्या ? ( लाली ने सुबकते हुए कहा )

: वो कहती है कि हमें किसी को उसके अतीत से नहीं जज करना चाहिए ( अनुज ने वही बात दोहराई जो उसकी मां ने विमला की बहन अनीता को दुकान में कही थी जब वो अपने अतीत को लेकर शर्मिंदा थी )

: हम्ममम , सॉरी

: सॉरी क्यों ?

: वो ... गुस्सा नहीं करोगे न तुम , प्लीज और कई तुमसे कुछ भी छिपाना नहीं चाहती हूं अब

: हा कहो न

: वो कल रात पूजा आई थी

ये सुनते ही अनुज की धड़कने तेज होने लगी

: हा तो तुमने ग्रुप स्टडी की ( अनुज ने छेड़ा उसे , हालांकि भीतर से वो पोजेसिव नेस से भरा हुआ था लेकिन लाली को वो तकलीफ नहीं देना चाहता था )

: मजे मत लो अब तुम , वो कमीनी आई और आखिरी बार है बोलकर ....

: हा तो ठीक है कोई बात नहीं , अब से सब खत्म है न तो क्यों टेंशन ले रही हो छोड़ो उसे अपनी नई लाइफ पर ध्यान दो ( अनुज ने उसे समझाना चाहा ) देखो मुझे कोई दिक्कत नहीं है अगर तुम इसे आगे जारी रखती हो तो मेरे प्यार करने का मतलब ये नहीं कि मै तुम्हारी पसंद ना पसंद में दखल करूं

लाली बस अपने किए पर शर्मिंदा थी

: देखो तुम अभी तो आज़ाद हो अपनी लाइफ को अपने तरीके से जीने के लिए, पता है मेरी मम्मी कहती है कि अगर चीजें जोर जबरजस्ती से नहीं है तो उन्हें स्वीकार कर लेना चाहिए

: तुम अपनी मम्मी से ये सब बातें भी करते हो ( लाली ने मुस्कुरा कर कहा )

: अरे नहीं यार ( अनुज शर्मा गया और उसकी बातों से उसकी चोरी पकड़ी भी गई थी ) वो बस मै तुमको समझा रहा हूं उठो चलो अब यहां से , लेट हो जाएगा

: अरे कुछ नहीं होगा लेट , दीदी की क्लास खाली रहेगी आज

: तो ?

: तो चलो कालेज गार्डन में बैठेंगे हीही

: किसी ने देख लिया तो वहा ?

: हा जैसे किसी को हमारे बारे में पता नहीं है जैसे हाहाहा ( लाली ने हस कर अनुज को खींचा और लेकर कालेज की ओर चली गई )

वही इनसब से अलग रज्जो शिला के यहां से अपनी सवारी पकड़ चुकी थी अपने नए गंतव्य के लिए

उसने एक मोबाइल नंबर डायल किया

" हम्म्म मैने गाड़ी पकड़ ली है , तुम मिलोगे कहा ? , ठीक है मै पहुंच जाऊंगी "

मन में सपनो के कुछ अरमान सजाए बस की खिड़की से बाहर देखते हुए ठंडी हवाओ को अपने चेहरे महसूस करते हुए वो मुस्कुरा रही थी , उस रोमांच के लिए भीतर से थोड़ी बेचैन जिसकी तैयार उसने कल दोपहर को ही कर ली थी ।


जारी रहेगी

( कहानी की अगली कड़ी पोस्ट कर दी गई है , पढ़ कर कहानी को सपोर्ट जरूर करें )
 
कहानी की अगली कड़ी UPDATE 027 पोस्ट कर दी है

पढ़ कर लाइक रेवो जरूर करें
 
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