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- Dec 5, 2013
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कुछ सयो को देख मुझे अजीब लग रहा था. में सोचने लगा ये कोण है और यहाँ क्या कर रहे है. में निचे बेथ कर अपना शिर निकले उनकी हरकते देख रहा था. दीदी अभी भी मूत रही थी तो उनके मूतने की आवाज आ रही थी.
लतादिदी : शिव, क्या कर रहा है, निचे क्यों बेथ रहा है (वो अपना मूतना रोक नहीं प् रही थी) मुझे शर्म आ रही है, तू दूर जा.
शिव : (लतादिदी का हाथ दबाते hue)Shhhhh. आवाज मात करो.
लतादिदी
धीमी आवाज me)Kya हुआ?
शिव : कोई है वह.
लतादिदी : (लता को दर लग रहा था पर वो कर भी क्या शक्ति थी, उसने जैसे तैसे मूतना ख़तम किआ, उसने देखा शिव, छत की दिवार से अपना शिर निकले कुछ देखने की कोशिस कर रहा था, जिस और शिव देख रहा था वो भी उस और देखने lagi,)Kaha hai?(Usne भी कुछ साये देखे जो आगे का गेट कूद कर अंदर आ रहे थे, उसने डरके मरे शिव की बाह पकड़ li)Kon है ये लोग?
शिव : पता नहीं दीदी, शायद चोर हो शक्ति है या और कोई भी.
लतादिदी : यहाँ क्या है चुराने को जो ये यहाँ चोरी करने आये है.
शिव : क्या पता दीदी, आप जल्दी से निचे जाओ और सबको बिना शोर किये जगादो, में निचे जा कर देखता हु.
लतादिदी : पर तू अकेला है और वो तीन चार लग रहे है. मुझे दर लग रहा है, तू वह मात जा.
शिव : आप चिंता मत कीजिये दीदी, मुझे देखना होगा, चलिए. (फटा फैट में कपडे के पास जाकर मेने कपडे पहनते hue)Didi आप लोगो के हाथ में जो आये वो ले लेना, लकड़ा, छुरी, या जो भी, आप समाज रही है na?(Unhone है में गर्दन हिलायी पर उनके चहरे पर दर साफ़ दिख रहा था, दोनों ने कपडे पहन लिए the)Hum निचे आ गए, मेने चूल्हे के पास से एक थोड़ा लम्बा लकड़ा लिया और पीछे के रस्ते से बहार निकल गया. लतादिदी ने पहले सरिता को जगाया, सरिता एक दम से नींद से जाग गयी तो लता ने उसका मुँह दबाते हुए उसे छुप रहने का इस्सर किआ, सरिता को कुछ समाज नहीं आ रहा था, फिर उन्होंने रंजन और विणा को भी उठाया और चुप रहने का कहा.
सरिता : क्या हुआ लता? तू इतनी घबराई क्यों hai?(Ass पास देखते hue)Shiv कहा है?
लतादिदी : कोई अनाथालय में घुस रहा है, शिव उस तरफ गया है, तुम लोग जो कुछ भी मिले ऐसा ले लो ताकि अगर कोई आये तो हमला कर शेक.
विणा : (वो बहोत दर गयी थी) अब क्या होगा दीदी?
रंजन : तू दर मत, चल कड़ी हो, (वो भी चूल्हे के पास से एक लकड़ा उठा लायी और विणा को एक बड़ा सा कडा दे दिया. सरिता ने एक पाइप का टुकड़ा उठा लिया और लता ने भी एक लकड़ा उठा लिया.)
में चुपके से पीछे के रस्ते से दीवाल की आड़ से उन सब को देख रहा था, वो चार लोग थे और चुपके से अनाथालय की और आ रहे थे. वो लोग नजदीक आ कर अनाथालय की दिवार से लग कर बेथ गए.
एक साया : देखो कोई आवाज नहीं, पहले घूम कर एक चक्कर लगा लेते है, फिर प्लान के मुताबित एक ऊपर जाने की कोशिस करेगा और हम वो खिड़की तोड़कर उसके अंदर पेट्रोल दाल कर आग लगा देंगे. कोनसी खिड़की कही थी, है वो बायीं वाली दीवाल पर दूसरी खिड़की.
दूसरा साया : भाई क्यों डरते हो, पहले उस लड़के को काबू कर लेते है, लड़कीअ अपने आप काबूमें आ जाएगी. फिर आराम से उनको छोड़ेंगे और फिर आग लगा कर चले जायेंगे.
शिव : (मान में )ये लोग ओफ्फिकेवली खिड़की की बात कर रहे है. पर इन्हे ऑफिस में आग क्यों लगनी है. शायद ये लोग वह रक्खे कागजात को जलना चाहते है ताकि सरे साबुत मिट जाये.
साया1 : ठरकी सेल, तू मानेगा नहीं, चल ठीक है, पहले पुरे माकन का जायजा ले लेते है. तू जाकर वो देख आ कही से ऊपर चढ़ा जा सकता है की नहीं. अगर ऊपर चले गए तो सीडीओ से अंदर दाखिल हो जायेंगे. और अगर ऐसा कुछ न मिले तो पीछे के दरवाजे पर ग्रिल नहीं है, अगर जरुरत पड़े तो वो तोड़ देंगे. तुम देख आओ तब तक हम लोग आग जलने के लिए मशाल बनाते है.
दूसरे दो साये : ठीक है.
शिव बिना आवाज किये वापस चला गया. वो पिछले दरवाजे से अंदर घुसा. बाकि सब बत्तिया तो बंद थी बस एक छोटा बल्ब, जल रहा था, वो फटाफट लड़कीओ के पास चला गया.
शिव : मुझे एक साड़ी या चुन्नी दो.
लता : क्या हुआ शिव, कोण है ये लोग.
शिव : ये लोग ऑफिस के कागजात जलने के लिए आये है, आप लोग डरिये मात और सब इक्कट्ठा रहना. शिव एक चुन्नी ले कर वापस दरवाजे की और चला गया. एक साया बाये और से चलते हुए हलकी सी रौशनी में ऊपर चढने का कोई जरिए जांचने लगा. और एक साया दाहिनी और से चलते हुए पीछे पहुंच गया. उसे एक दरवाजा दिखा. दरवाजे की दरार से हलकी रौशनी बहार आ रही थी, वो खुस हो गया क्यों की शायद दरवाजा खुला हुआ था. वो मान में सोचने लगा की चलो काम आसान हो गया, ये लोग शायद दरवाजा बंद करना भूल गए है, उसने हलके से दरवाजे को धकेला तो वो खुल गया. वो खुस हो गया, वो आहिस्ता से अंदर अपनी गर्दन दाल कर देखने लगा, अंदर हलकी रौशनी थी और एकदम शांति छायी हुई थी. उसने सोचा की एक बार अंदर जा कर देख लेता हाउ. वो थोड़ा और अंदर दाखिल हुआ, वो खुस हो रहा था की चलो अधकाम तो आसान हो गया, सब सो रहे होंगे, और उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी, अंदर दाखिल होने के लिए. वो ये खुशखबरी अपने साथियो को सुनाने के लिए वापस घूम hi रहा था की अचानक उसके मुँह पर एक कपड़ा आ गया वो कुछ समाज पता या चिल्ला पता उस से पहले hi वो जमीं पर था, उसके ऊपर कोई चढ़ा हुआ था, उलटे होने की वजह से वो उसे देख नहीं पाया, उसने अपने हाथ पीछे ले जाते हुए उसे धकेलने के कोशिस की पर उसने उसके हाथ को इतनी जोर से मरोड़ दिया की वो दर्द की वजह से चीखने लगा, पर मुँह पर कपड़ा होने की वजह से उसकी चीख उसके मुँह के अंदर hi घुट कर रह गयी, वो संभल ता उस से पहले उसके सर से कुछ जोर से टकराया और उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया. शिव ने दरवाजा बंद कर दिया, उस आदमी को घसीट कर एक खम्भे के पास बिठा दिया.
शिव : (लड़कीओ को) इससे बांध दो, पर आवाज मात करना.
सब लड़कीओ ने चुन्नी और साड़ी की मदद से उसके हाथ पेअर बांध कर उसे खम्बे के साथ बांध दिया.
शिव : वो लोग चार थे, एक ये रहा तो अब बचे तीन, वो लोग ऑफिस जलने की बात कर रहे है, अगर खिड़की टूटने की आवाज हो तो उस तरफ मत jana.(Aur कोई कुछ कहता उस से पहले शिव वापस चला गया)
वो दूसरा साया पूरा चक्कर लगाकर वापस अपने साथियो के पास पहुंच गया.
दूसरा साया : साइड में बरसाती पाइप है शायद उस से ऊपर चढ़ा जा शक्ति है.
पहला साया: वो दूसरा अभी तक क्यों नहीं लौटा.
दूसरा साया : क्या वो अभी नहीं आया, में तो पूरा घूम कर आया, मुझे तो वो नहीं दिखा.
पहला साया : क्या, ऐसा कैसे हो शक्ति है, कोई गड़बड़ तो नहीं?
दूसरा साया : क्या गड़बड़ होंगी, यहाँ चार लड़कीअ और एक hi लड़का है और बाकि सब बच्चे है. और जब से हम आये है तब से कोई हलचल नहीं है मतलब सब सो रहे है. वो साला मूतने चलागया होगा, में अभी देख कर आता हु.
वो वह से दबे पांव वापस उलटी और निकल गया, वो बड़ी सतर्क ता से चलते हुए आस पर देख रहा था, चाँद की हलकी रौशनी में भी उसकी आंखे अभ्यस्त हो गयी थी तो वो अस्स पास देखते हुए जा रहा था. जब दीवाल ख़तम हुई तो उसने वह रुक कर अपनी गर्दन निकल कर उस तरफ देखना चाहा तो उसे एक लम्बा साया नजर आया वो कुछ और सोचता उस से पहले hi उसके मुँह को किसी ने दबा दिया, वो छूटने की कोशिस कर रहा था पर जिसने उसे पकड़ा था वो बहोत ताकतवर था, वो हिल भी नहीं प् रथा था, उसने छत पटटे हुए अपने आपको छुड़ाने की कोशिस की पर, वो शिव की बहो के घेरे में और कसता गया, उसकी पसलीओ में जोर का दर्द उठा, वो गऊ गऊ की आवाज करने लगा, उसके शिर पर भी वॉर हुआ और वो धड़ाम से नीचे गिरा. शिव ने उसे जांचा तो वो हिलडुल नहीं रहा था. शिव ने उसे कंधे पर उठाया और अंदर ले गया और उसे भी बांध दिया.
यहाँ बचे हुए दोनों ने जलने की साडी तयारी कर्ली थी. उन्होंने मसल बना लिथि. जब काफी देर हो गयी और दूसरा भी वापस नहीं आया तो.
पहला साया: लगता है कुछ तो गड़बड़ है, ये दोनों कहा गायब हो गए.
दूसरा : क्या करे? उन्हें ढूंढे?
पहला साया : नहीं, अब जो करने आये है वो पहले करलेते है. ये केरोसिन खिड़की तोड़कर अंदर डालते है और आग लगा देते है.
दूसरा : पर हमें आग क्यों लगनी है, और लगनी है तो सिर्फ उसी कमरे में क्यों?
पहला : वो मुझे पता नहीं पर लगता है उस कमरे में कुछ है जो हमे तबाह करना है. अब बाते छोड़ और खिड़की तोड़ कर केरोसिन अंदर दाल.
दूसरा : पर आवाज होगी तो सब जाग जायेंगे.
पहला : अब वो सब सोचना छोड़ और काम कर, अगर वो लोग जाग भी गए तो उनके कुछ समजने के पहले हम आग लगा चुके होंगे.
में ये सब चुपके से सुन रहा था, अब मुझेलगा की सामने जाना hi पड़ेगा वर्ण ये लोग आग लगा देंगे, वैसे वह कुछ ज्यादा है नहीं, जो वो लोग धुंध रहे है. वो कागजात तो पहले से hi वह से निकल लिए है. में दबे पाव आगे बढ़ने लगा, अब खतरा ये भी था की वो लोग मुझे देख सकते थे पर खतरा लेना hi था. उपरवाले की मेहरबानी की उन्दोनो की पीठ मेरी और थी और दोनों अपने काम में व्यस्त थे, एक ने वह पड़ा पत्थर उठाया और खिड़की पे मर दिया जिस से ऊपर का शिक्षा टूट गया. में तेज कदमो से आगे बढ़ा, वो जैसे hi केरोसिन अंदर डालनेवाला था मेने जोर से उस को लात मरी, वो चिल्लाता हुआ दो कदम आगे जा कर निचे गिर पड़ा और साथ में केरोसिन का चैने भी उसके हाथ से छूट गया जिस से केरोसिन निचे गिरने लगा. उसकी गंध वातावरण में फ़ैल गयी, पर तब तक दूसरेवाले ने मसल जला दी थी. अब वह काफी उजाला हो गया था. हमदोनो की आंखे आपस में टकराई, वो एक हट्टाकट्टा आदमी था, काळा संध जैसा लग रहा था. वो जलती हुई मसल लेकर मेरी और बढ़ा. मेने भी मजबूती से अपना लकड़ा पकड़ा. जैसे hi उसने मुज पर प्रहार किआ मेने उसकी मसल पर जोर से लकड़ा मारा तो वो उसके हाथ से छूट गया और जहा केरोसिन गिरा था उस के ऊपर गिरा, अचानक एक आग का गोला बन गया और चारो और बहोत रौशनी हो गयी, में थोड़ा पीछे हैट गया और वो भी दूर हैट गया, जो निचे पड़ा हुआ था उसका पैरमे केरोसिन लग गया था तो उसका पेअर जलने लगा तो वो चिल्लाता हुआ इधर उधर भागने लगा और अपने पेअर की आग को बजाने की कोशिस करने लगा. मेने देखा की मसलवाले आदमी ने अपने हाथ में चाकू निकल लिया है. वो चाकू लेकर मेरी और सतर्क ता से बढ़ने लगा. मेरे हाथ में लकड़ा था तो में भी तैयार था. जैसे hi उसनेवार किआ मेने लकड़ा उसके कंधे पर दे मारा वो चिल्लाता हुआ दो कदम पीछे हैट गया और अपना कन्धा दबाने लगा. में उसकी और बढ़ने लगा तो वो एकदम से चाकू छोड़ कर भागने लगा, में भी उसके पीछे भगा. दौड़ में तो वो जितने से रहा, मेने भागते हुए hi उसकी पीठ पर लकड़ा मारा तो वो लड़खड़ाता हुआ नीचे गिर पड़ा. उतने में सब की चिल्लाने की आवाजे आने लगी. मेने देखा की लतादिदी और बाकि सब बहार आ गए थे और आग और उस आदमी को जलता हुआ देख सब चिल्लाने लगे थे. मेरा ध्यान उनकी और चला गया था तो वो आदमी उठकर वह से भागने लगा. में दौड़ते हुए सबके पास पंहुचा. उस आदमी के कपडे भी जलनेलगे थे तो वो जमीं पर लुढ़क कर आग बजाने की कोशिस कर रहा था और चिल्ला रहा था. में फटाफट अंदर गया और एक मोटा सा कम्बल ले आया और दौड़ कर उस आदमी के उप्पर दाल दिया. और उसे दबा दिया तो आग बुजगायी, पर वो चिल्ला गहा था. उतने में हमें पुलिस की सिरान सुनाई दी. पुलिस की गाड़ी हमारे गेट के बहार कड़ी थी, में दौड़ता हुआ अंदर गया और टेल की चाबी ले कर गेट खोल दिया तो पोलिसवाले अंदर आ गए.
पोलिसवाले : क्या हो रहा है यहाँ?
शिव : पता नहीं ये लोग यहाँ आये और उन्होंने आग लगा दी.
पोलिसवाले ने फ़ौरन फ़िरेब्रिगडे को फ़ोन लगाया और भार्गवी मैडम को भी फ़ोन कर दिया. भार्गवी मैडम के कहने पर hi ये लोग यहाँ से गुजर रहे थे, उन्होंने hi यहाँ ज्यादा पेट्रोलिंग करने को बोलै था. जब तक भार्गवी मैडम आयी तब तक फायर ब्रिगेड ने आग बुजदिति और एम्बुलेंस भी आ गयी थी. वो सब से पहले शिव के hi पास गयी.
भार्गवी : क्या हुआ शिव? कौन है ये लोग?
शिव : पतानहीं मैडम, ये लोग यहाँ आये और ऑफिस को जलने की बात कर रहे थे. मेने उनको देख लिया तो हम बचगये.
भार्गवी : (जलने से कराहते हुए उस आदमी को देख kar)Isse हॉस्पिटल ले जाओ और दो कांस्टेबल इसके साथ hi रहना.
शिव : दो और है मैडम, जो अंदर बंधे हुए है.
भार्गवी : (आश्चर्य से मेरी और देख kar)Kya?,Kaha?
शिव : आइये मैडम में दिखता हु.
में और भार्गवी मैडम को अंदर ले गया और साथ में दो कांस्टेबल भी आये. वह दो बंधे हुए थे जिनके शिर से खून निकल रहा था और दोनों छूटने की कोशिस कर रहे थे.
भार्गवी : (कांस्टेबल ko)Pakado इन्हे भी और हॉस्पिटल ले जाओ. एम्बुलेंस में इनके साथ तुम भी जाना और पुलिस जीप को भी बोलो इनके पीछे चलने को. में वही मिलती hu.(Constable “जी मैडम” बोल कर उन दोनों के पेअर खोल कर उन्हें हत्कडी पहना कर बहार ले गया.
भार्गवी : तुमने मारा इन्हे?
शिव : सॉरी मैडम, में क्या करता, ये चार लोग थे और यहाँ ऑफिस जलने के अलावा वो लोग लड़कीओ के साथ....
भार्गवी : तुम्हे कैसे पता की ये ऑफिस जलने आये थे.
शिव : मेने छुपकर इनकी बाते सुनी थी.
भार्गवी : ये किसी का नाम ले रहे थे, मेरा मतलब है की इनको किसने भेजा है. क्यों की ये लोग तो गुंडे hi लगते है, ये काम वो पैसो के लिए hi कर रहे होंगे.
शिव : नहीं मैडम, उन्होंने नाम तो किसी का नहीं लिया, पर जो भाग गया हे वही इन सब का लीडर था.
भार्गवी : कोई बात नहीं, में देखती हु, वो भाग कर जायेगा कहा. वैसे तुमने काम तो बहादुरी का किया है. मान न पड़ेगा. पर ऐसे पंगे तुम्हे भी नुकसान पंहुचा शक्ति hai.(Me क्या kehta,bas मुस्कुराया) मेने रात की पेट्रोलिंग जीप को यहाँ निगरानी रखने को बोलै था, पर मुझे भी नहीं पता था की ये सब इतना जल्दी हो जायेगा, यहाँ में दो कांस्टेबल को छोड़ जाती हु. तुम्हे, कम्प्लेन करने के लिए पुलिस स्टेशन आयना पड़ेगा.
शिव : ठीक है मैडम.
में दीदी के पास चला गया तो सब मुझसे लिपट गए, विणा तो रो रही thi.(Bhargavi सब जायजा ले रही थी, उसकी नजर शिव पर गयी जो सब को दिलासा दे रहा था, सब लड़कीअ उसके गले लगे हुई थी, सब जायजा ले कर दो कांस्टेबल को वह छोड़ वो पुलिस स्टेऑन निकल गए, वह कम्प्लेन दर्ज करवा कर शिव को वापस अनाथालय छोड़ दिया, वो हॉस्पिटल की और निकल गयी) मेने कांस्टेबल को बैठने के लिए कुर्शिया दी और में अंदर आ गए. अंदर बच्चे सो रहे थे पर लड़कीअ सब जाग रही थी. मेने उन्हें सब बता दिया की क्या हुआ. रात बहोत हो गयी थी तो हम सब सोने लगे.
लतादिदी : तुजे कही लगी तो नहीं न शिव?
सरितादिदी : अरे इससे क्या होगा? देखा नहीं सब की बंद बजा दी.
लतादिदी : तू चुप कर, तुजे पता भी है कितना खतरनाक था ये सब, वो लोग चाकू के साथ थे, अगर कुछ हो जाता तो?
सरितादिदी : सॉरी यार, सही कह रही है तू. (चिंता se)Tu ठीक है न शिव?
शिव : है दीदी, में ठीक हु. मुझे कुछ नहीं हुआ है.
लतादिदी : ठीक है सो जा.
सब अभी सोये थे तो लतादिदी मुझसे दूर hi सो गयी, पर रंजन मुज से सात कर लेती थी, उसने अपनी उंगलिया मेरी उंगलिओ में फसा कर मेरा हाथ पकड़ लिया. मेने उसकी और देखा तो वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, विणा भी मुझे देख रही थी, में उसकी और भी मुस्कुराहा. मेने उन्हें सोने का इस्सर किआ तो उन्होंने आंखे बंद कर ली. थोड़ी देर बाद सब सो गए. रंजन मेरा हाथ पकड़े hi सो गयी.
रात को देर से सोया था पर सुबह अपने टाइम पर उठ गया और गयम के लिए निकल गया. जूही मैडम को भी सब कुछ बता दिया जो रात को हुआ था. पवनसीर को भी मेने सब बता दिया. उतने में काव्य मैडम भी वह आ गयी तो पवनसीर ने उन्हें ऑफिस में बुलाया और उन्हें बता दिया. ऑफिस से बहार आ कर वो मेरे पास आयी.
काव्य जी : तुम ठीक हो न? तुम्हे कही चोट तो नहीं लगी?
शिव : नहीं मैडम, में ठीक हु, मुझे कुछ नहीं हुआ.
काव्यजि : ठीक है, तो फिर मेरे ऑफिस आ जाना, मुझे साडी डिटेल बता देना, में भार्गवी जी से भी बात कर लुंगी. तुम थोड़ा संभल कर रहना.
शिव : जी मैडम. थैंक यू.
वो अंदर कसरत करने चली गयी. में भी वही सब रूटीन में लग गया, मेने जूही मैडम को भी बता दिया. उन्होंने कहा मेरा स्कूटर ले जाना. गयम से में फटाफट घर गया और वापस जूही मैडम के घर से स्कूटी ले कर काव्य मैडम के एड्रेस पर चला गया. मेने बेल्ल बजायी तो एक 50 साल के करीब महिला ने दरवाजा खोला.
महिला : किस से मिलना है.
शिव : काव्य मैडम से मिलना था.
महिला : तुम्हारा नाम शिव है?
शिव : जी.
महिला : आप बैठो, वो अभी आ रही है.
में वह बड़े से हॉल में रक्खे सोफे पर बेथ गया. वो भी वही बेथ गगयी, वह काम करनेवाली एक औरत ने मुझे पानी दिया. मेने पानी पिया और काव्य मैडम का इंतजार करने लगा. थोड़ी देर बाद वही कामवाली आयी.
कामवाली : आइये, दीदी आप को बुला रही है.
में उसके पीछे पीछे चल दिया, वो ऊपर बने ऑफिस में मुझे ले गयी, वह काव्य मैडम बैठी हुई थी. मुझे देख कर
काव्य मैडम : आओ शिव, बैठो. (में बेथ गया) कैसे हो?
शिव : में ठीक हु, अआप किसी है?
काव्य मैडम
मुस्कुरायी) में भी ठीक हु. शिव मुझे तुमसे कुछ पूछ न था. क्या तुम्हारे यहाँ कोई हॉस्पिटल वाले या डॉक्टर वगैरह कोई आता है.
शिव : वैसे तो नहीं पर कभी कभी चेकउप के लिए आते है.
काव्य मैडम : तुम्हारे यहाँ के लड़के लड़कीअ जो अब नहीं है वह, वो क्यों चले गए, और कहा गए इसके बारेमे तुम कुछ जानते हो.
शिव : ज्यादा तो मुझे कुछ पता नहीं, पर जो मैनेजर सब को मरता पिट ता रहता है तो कई लड़के वह से भाग गए, और अब इस हादसे के बाद मुझे ये भी पता चला है की उसने कुछ लड़कीओ के साथ वो सब किआ या करने की कोशिस की तो वो भी चली गयी. और आप जो हॉस्पिटल के बारेमे पूछ रही है, उसका पहले का तो मुझे खास ध्यान नहीं पर अभी एक लड़का था गुड्डू, जिसकी अभी हल hi में मौत हो गयी थी.
काव्य मैडम : ये काब की बात है? (मेने उन्हें डेट बताई तो वो, अपने कंप्यूटर में कुछ देखने लगी, एक जागर एंट्री देख कर उसकी आंखे चमक उठी)
काव्य मैडम : शिव, मेने तुम्हारे अनाथालय और उस मैनेजर के दस्तावेज को चेक किआ और अभी तुम जो मुझे बता रहे हो उस से मुझे इसकी एक और वजह भी दिख रही है.
शिव : वो क्या मैडम.
काव्य मैडम : मुझे लगता है वो लड़के और लड़कीओ को या उनके शरीर के अंगो को बेचता था.
शिव : अंगो को बेचता था से क्या मतलब है मैडम.
काव्य मैडम : यही की, वो उनके दिल, या किडनी या और कुछ.
शिव : ये क्या कह रही है मैडम, क्या सचमे?
काव्य मैडम : (अपने लैपटॉप का स्क्रीन शिव की और करते हुए, वो उठकर शिव के पीछे कड़ी हो गयी ) ये देखो शिव, यहाँ ये पैसे जमा हुए है और जो डेट तुम बता रहे हो उसके कुछ दिन बाद hi ये हुआ है, यहाँ देखो, ये हॉस्पिटल से जमा, ऐसा लिखा हुआ है, और ये एक बार नहीं कई बार हुए है, पिछले कुछ समय से ये बंद हो गया था. पर अभी गुड्डू की मोत के बाद ये फिर जमा हुआ है. हो सकता है अब तुम्हारे वह ज्यादा बच्चे बचे न हो इस लिए ऐसा हुआ हो.
शिव : मैडम कई लड़के लड़कीअ बीमार होकर मर गए the.(Shiv ने पीछे मुद कर जवाब दिया पर काव्य मैडम झुकी हुई थी तो उसका शिर उनके स्तन से टच कर गया, उसने फ़ौरन अपना शिर वापस खिंच लिया पर जो होना था वो हो गया था)
काव्य मैडम : (काव्य को भी ये एहसास हुआ तो वो शिव से थोड़ा दूर हो गयी) हो सकता है की वो बीमार न हो, उन्हें कुछ खिला कर बीमार बनाया गया हो और फिर उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया हो. और मेडिकल चेक उप के बहाने उनकी साडी डिटेल जमा की जाती हो जिस से जब भी किसी को कोई अंग चाहिए हो तो उस रिपोर्ट के आधार पर जिसका भी मच होता हो उसे बीमार बना कर लेजाया जाता हो.
शिव : (अचानक से) है मैडम, गुड्डू को भी उसने कोई दवाई खिलाई थी, उसके बाद hi वो ज्यादा बीमार हो गया था.
काव्य मैडम : शिव ये सब बहोत खतरनाक चीजे है, हो सकता है इन्हे छिपाने के लिए अनाथालय को और तुम लोगो को नुकसान पहुंचने की कोशिस की गयी है. मेने भार्गवी मैडम से भी ये सब कहा था तो उन्होंने तुम्हारे वह ध्यान रखने के लिए पुलिस को कह दिया थाई.
शिव : है मैडम, मेने देखा था पुलिस की गाड़ी थोड़ी थोड़ी देर में वह से गुजर रही थी.
काव्य मैडम : शिव, तुम्हे भी ध्यान रखना होगा, हो शक्ति है ये लोग तुम लोगो को नुकसान पहुंचने की फिर कोशिस करे. उन्हें नहीं पता है की हम ये सब कागजात वह से ले आये है तो इस कागजात के लिए वो फिर से वह आये, और उसे मिटने की कोशिस करे. तो तुम ध्यान रख न.
शिव : ठीक है मैडम. और थैंक यू, आप हमारा इतना ख्याल रख रही है, पता नहीं इसका एहसान में कैसे चुकाऊंगा.
काव्य मैडम : एहसान कैसा, में वकील हु, और मेने तुम्हे कहा था न के में बिना फीस लिए तो काम करुँगी नहीं, वार्ना ऐसे तो मेरी वकालत hi बंद हो जाएगी.
शिव : मैडम आपने जो बात कही थी वो सही थी. में वादा करता हु में आप को फीस जरूर दूंगा, अभी नहीं तो बादमे पर दूंगा जरूर.
काव्य मैडम : अच्छा, और वो kaise?(Wo मेरी बगलवाली कुर्शी पर बेथ गयी)
शिव : वो पता नहीं पर दूंगा जरूर, आज नहीं तो कल में कमाने लगूंगा तब दूंगा.
काव्य मैडम : (मुस्कुराते हुए) में मज़ाक कर रही थी शिव कुछ काम अपनी ख़ुशी के लिए भी किये जाते है.
शिव : मतलब आप हम अनाथो पर महेरबानी करना चाहती है, अक्सर लोग हम पर तरस खा कर हमारी मदद करते है, शायद पुण्य कमाने के लिए.
काव्य मैडम
शिव के हाथ पर हाथ रखते hue)Nahi ऐसी बात नहीं hai(Unhone अचानक हाथ रख दिया था पर फिर उन्हें एहसास हुआ तो उन्होंने अपना हाथ हटा लिया) शिव, में तुमपर कोई दया वाया नहीं दिखा रही, में तुम्हे जानती हु तो क्या में तुम्हारी मदद नहीं कर शक्ति, अगर कभी मुझे किसी मदद की जरुरत पड़ी तो क्या तुम अपना फायदा या नुकसान देखोगे.
शिव : नहीं मैडम, अगर कभी आप को मेरी मदद की जरुरत हो तो सिर्फ बोलके देखना, में आपके लिए कुछ भी करने से पीछे नहीं हटूगा.
काव्य मैडम
मेरी आँखों में देख रही thi)Dekha जैसे तुम मेरी मदद करने को तैयार हो गए वैसे क्या में तुम्हारी मदद नहीं कर शक्ति.
शिव : (उनकी बातो से प्रभावित हो कर, मेने उनका हाथ अपने दोनों हाथमे ले liya)Thank यू मैडम. थैंक यू वैरी मुछ. अब में चलता हु, मुझे स्कूल जाना है.
काव्य मैडम : ठीक है. पर अपना ध्यान rakhna.(Kavya उसे जाता हुआ देख रही थी, उसके जाने के बाद उसने अपने हाथ को देखा जिसे शिव ने पकड़ा था, फिर कड़ी हो कर कोर्ट जाने के लिए तैयार होने लगी, तैयार होते होते उसे एक आईडिया आया, उसने फ़ौरन भार्गवी को फ़ोन लगा दिया.
काव्य : Hello मैडम , में काव्य बोल रही हु.
भरवावी : बोलिये मैडम, कैसे याद किआ.
काव्य : मैडम, ये जो कल रात हुआ, वो अनाथालय के कागजात के लिए हुआ है, ये तो आप को पता चल hi गया होगा, एक बार वो लोग नाकाम हुए है, दोबारा भी हुम्ला कर शक्ति है, में क्या कह रही थी, अगर हम ये प्रेस और मीडिया में ये बात कह दे की पुलिस ने अनाथालय के कागजात को अपने कब्जे में ले लिया है, तो फिर वो लोग अनाथालय पर हुम्ला नहीं करेंगे.
भार्गवी : ये सही कहा आपने, ठीक है, में करवाती हु.
काव्य : पर फिर आप पैर परेसुरे बढ़ जायेगा मैडम.
भार्गवी : आईटी इस part ऑफ़ ड्यूटी मैडम, में हैंडल कर लुंगी. पर ऐसा करने से शिव और उन लड़कीओ के ऊपर से खतरा हैट जायेगा. आज hi में प्रेस में ये बयां दे देती हु.
काव्य : थैंक यू वैरी मच मैडम. और कागजात मेरे पास सेफ है, में उसकी एक कॉपी आप को भी भिजवाडेति हु.
भार्गवी : Ok, चलिए, फिर मिलते है.
काव्य : जी मैडम.
उन्होंने फ़ोन रख दिया और वो कोर्ट के लिए निकल गयी.
कुछ सयो को देख मुझे अजीब लग रहा था. में सोचने लगा ये कोण है और यहाँ क्या कर रहे है. में निचे बेथ कर अपना शिर निकले उनकी हरकते देख रहा था. दीदी अभी भी मूत रही थी तो उनके मूतने की आवाज आ रही थी.
लतादिदी : शिव, क्या कर रहा है, निचे क्यों बेथ रहा है (वो अपना मूतना रोक नहीं प् रही थी) मुझे शर्म आ रही है, तू दूर जा.
शिव : (लतादिदी का हाथ दबाते hue)Shhhhh. आवाज मात करो.
लतादिदी
शिव : कोई है वह.
लतादिदी : (लता को दर लग रहा था पर वो कर भी क्या शक्ति थी, उसने जैसे तैसे मूतना ख़तम किआ, उसने देखा शिव, छत की दिवार से अपना शिर निकले कुछ देखने की कोशिस कर रहा था, जिस और शिव देख रहा था वो भी उस और देखने lagi,)Kaha hai?(Usne भी कुछ साये देखे जो आगे का गेट कूद कर अंदर आ रहे थे, उसने डरके मरे शिव की बाह पकड़ li)Kon है ये लोग?
शिव : पता नहीं दीदी, शायद चोर हो शक्ति है या और कोई भी.
लतादिदी : यहाँ क्या है चुराने को जो ये यहाँ चोरी करने आये है.
शिव : क्या पता दीदी, आप जल्दी से निचे जाओ और सबको बिना शोर किये जगादो, में निचे जा कर देखता हु.
लतादिदी : पर तू अकेला है और वो तीन चार लग रहे है. मुझे दर लग रहा है, तू वह मात जा.
शिव : आप चिंता मत कीजिये दीदी, मुझे देखना होगा, चलिए. (फटा फैट में कपडे के पास जाकर मेने कपडे पहनते hue)Didi आप लोगो के हाथ में जो आये वो ले लेना, लकड़ा, छुरी, या जो भी, आप समाज रही है na?(Unhone है में गर्दन हिलायी पर उनके चहरे पर दर साफ़ दिख रहा था, दोनों ने कपडे पहन लिए the)Hum निचे आ गए, मेने चूल्हे के पास से एक थोड़ा लम्बा लकड़ा लिया और पीछे के रस्ते से बहार निकल गया. लतादिदी ने पहले सरिता को जगाया, सरिता एक दम से नींद से जाग गयी तो लता ने उसका मुँह दबाते हुए उसे छुप रहने का इस्सर किआ, सरिता को कुछ समाज नहीं आ रहा था, फिर उन्होंने रंजन और विणा को भी उठाया और चुप रहने का कहा.
सरिता : क्या हुआ लता? तू इतनी घबराई क्यों hai?(Ass पास देखते hue)Shiv कहा है?
लतादिदी : कोई अनाथालय में घुस रहा है, शिव उस तरफ गया है, तुम लोग जो कुछ भी मिले ऐसा ले लो ताकि अगर कोई आये तो हमला कर शेक.
विणा : (वो बहोत दर गयी थी) अब क्या होगा दीदी?
रंजन : तू दर मत, चल कड़ी हो, (वो भी चूल्हे के पास से एक लकड़ा उठा लायी और विणा को एक बड़ा सा कडा दे दिया. सरिता ने एक पाइप का टुकड़ा उठा लिया और लता ने भी एक लकड़ा उठा लिया.)
में चुपके से पीछे के रस्ते से दीवाल की आड़ से उन सब को देख रहा था, वो चार लोग थे और चुपके से अनाथालय की और आ रहे थे. वो लोग नजदीक आ कर अनाथालय की दिवार से लग कर बेथ गए.
एक साया : देखो कोई आवाज नहीं, पहले घूम कर एक चक्कर लगा लेते है, फिर प्लान के मुताबित एक ऊपर जाने की कोशिस करेगा और हम वो खिड़की तोड़कर उसके अंदर पेट्रोल दाल कर आग लगा देंगे. कोनसी खिड़की कही थी, है वो बायीं वाली दीवाल पर दूसरी खिड़की.
दूसरा साया : भाई क्यों डरते हो, पहले उस लड़के को काबू कर लेते है, लड़कीअ अपने आप काबूमें आ जाएगी. फिर आराम से उनको छोड़ेंगे और फिर आग लगा कर चले जायेंगे.
शिव : (मान में )ये लोग ओफ्फिकेवली खिड़की की बात कर रहे है. पर इन्हे ऑफिस में आग क्यों लगनी है. शायद ये लोग वह रक्खे कागजात को जलना चाहते है ताकि सरे साबुत मिट जाये.
साया1 : ठरकी सेल, तू मानेगा नहीं, चल ठीक है, पहले पुरे माकन का जायजा ले लेते है. तू जाकर वो देख आ कही से ऊपर चढ़ा जा सकता है की नहीं. अगर ऊपर चले गए तो सीडीओ से अंदर दाखिल हो जायेंगे. और अगर ऐसा कुछ न मिले तो पीछे के दरवाजे पर ग्रिल नहीं है, अगर जरुरत पड़े तो वो तोड़ देंगे. तुम देख आओ तब तक हम लोग आग जलने के लिए मशाल बनाते है.
दूसरे दो साये : ठीक है.
शिव बिना आवाज किये वापस चला गया. वो पिछले दरवाजे से अंदर घुसा. बाकि सब बत्तिया तो बंद थी बस एक छोटा बल्ब, जल रहा था, वो फटाफट लड़कीओ के पास चला गया.
शिव : मुझे एक साड़ी या चुन्नी दो.
लता : क्या हुआ शिव, कोण है ये लोग.
शिव : ये लोग ऑफिस के कागजात जलने के लिए आये है, आप लोग डरिये मात और सब इक्कट्ठा रहना. शिव एक चुन्नी ले कर वापस दरवाजे की और चला गया. एक साया बाये और से चलते हुए हलकी सी रौशनी में ऊपर चढने का कोई जरिए जांचने लगा. और एक साया दाहिनी और से चलते हुए पीछे पहुंच गया. उसे एक दरवाजा दिखा. दरवाजे की दरार से हलकी रौशनी बहार आ रही थी, वो खुस हो गया क्यों की शायद दरवाजा खुला हुआ था. वो मान में सोचने लगा की चलो काम आसान हो गया, ये लोग शायद दरवाजा बंद करना भूल गए है, उसने हलके से दरवाजे को धकेला तो वो खुल गया. वो खुस हो गया, वो आहिस्ता से अंदर अपनी गर्दन दाल कर देखने लगा, अंदर हलकी रौशनी थी और एकदम शांति छायी हुई थी. उसने सोचा की एक बार अंदर जा कर देख लेता हाउ. वो थोड़ा और अंदर दाखिल हुआ, वो खुस हो रहा था की चलो अधकाम तो आसान हो गया, सब सो रहे होंगे, और उन्हें ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ी, अंदर दाखिल होने के लिए. वो ये खुशखबरी अपने साथियो को सुनाने के लिए वापस घूम hi रहा था की अचानक उसके मुँह पर एक कपड़ा आ गया वो कुछ समाज पता या चिल्ला पता उस से पहले hi वो जमीं पर था, उसके ऊपर कोई चढ़ा हुआ था, उलटे होने की वजह से वो उसे देख नहीं पाया, उसने अपने हाथ पीछे ले जाते हुए उसे धकेलने के कोशिस की पर उसने उसके हाथ को इतनी जोर से मरोड़ दिया की वो दर्द की वजह से चीखने लगा, पर मुँह पर कपड़ा होने की वजह से उसकी चीख उसके मुँह के अंदर hi घुट कर रह गयी, वो संभल ता उस से पहले उसके सर से कुछ जोर से टकराया और उसकी आँखों के सामने अँधेरा छ गया. शिव ने दरवाजा बंद कर दिया, उस आदमी को घसीट कर एक खम्भे के पास बिठा दिया.
शिव : (लड़कीओ को) इससे बांध दो, पर आवाज मात करना.
सब लड़कीओ ने चुन्नी और साड़ी की मदद से उसके हाथ पेअर बांध कर उसे खम्बे के साथ बांध दिया.
शिव : वो लोग चार थे, एक ये रहा तो अब बचे तीन, वो लोग ऑफिस जलने की बात कर रहे है, अगर खिड़की टूटने की आवाज हो तो उस तरफ मत jana.(Aur कोई कुछ कहता उस से पहले शिव वापस चला गया)
वो दूसरा साया पूरा चक्कर लगाकर वापस अपने साथियो के पास पहुंच गया.
दूसरा साया : साइड में बरसाती पाइप है शायद उस से ऊपर चढ़ा जा शक्ति है.
पहला साया: वो दूसरा अभी तक क्यों नहीं लौटा.
दूसरा साया : क्या वो अभी नहीं आया, में तो पूरा घूम कर आया, मुझे तो वो नहीं दिखा.
पहला साया : क्या, ऐसा कैसे हो शक्ति है, कोई गड़बड़ तो नहीं?
दूसरा साया : क्या गड़बड़ होंगी, यहाँ चार लड़कीअ और एक hi लड़का है और बाकि सब बच्चे है. और जब से हम आये है तब से कोई हलचल नहीं है मतलब सब सो रहे है. वो साला मूतने चलागया होगा, में अभी देख कर आता हु.
वो वह से दबे पांव वापस उलटी और निकल गया, वो बड़ी सतर्क ता से चलते हुए आस पर देख रहा था, चाँद की हलकी रौशनी में भी उसकी आंखे अभ्यस्त हो गयी थी तो वो अस्स पास देखते हुए जा रहा था. जब दीवाल ख़तम हुई तो उसने वह रुक कर अपनी गर्दन निकल कर उस तरफ देखना चाहा तो उसे एक लम्बा साया नजर आया वो कुछ और सोचता उस से पहले hi उसके मुँह को किसी ने दबा दिया, वो छूटने की कोशिस कर रहा था पर जिसने उसे पकड़ा था वो बहोत ताकतवर था, वो हिल भी नहीं प् रथा था, उसने छत पटटे हुए अपने आपको छुड़ाने की कोशिस की पर, वो शिव की बहो के घेरे में और कसता गया, उसकी पसलीओ में जोर का दर्द उठा, वो गऊ गऊ की आवाज करने लगा, उसके शिर पर भी वॉर हुआ और वो धड़ाम से नीचे गिरा. शिव ने उसे जांचा तो वो हिलडुल नहीं रहा था. शिव ने उसे कंधे पर उठाया और अंदर ले गया और उसे भी बांध दिया.
यहाँ बचे हुए दोनों ने जलने की साडी तयारी कर्ली थी. उन्होंने मसल बना लिथि. जब काफी देर हो गयी और दूसरा भी वापस नहीं आया तो.
पहला साया: लगता है कुछ तो गड़बड़ है, ये दोनों कहा गायब हो गए.
दूसरा : क्या करे? उन्हें ढूंढे?
पहला साया : नहीं, अब जो करने आये है वो पहले करलेते है. ये केरोसिन खिड़की तोड़कर अंदर डालते है और आग लगा देते है.
दूसरा : पर हमें आग क्यों लगनी है, और लगनी है तो सिर्फ उसी कमरे में क्यों?
पहला : वो मुझे पता नहीं पर लगता है उस कमरे में कुछ है जो हमे तबाह करना है. अब बाते छोड़ और खिड़की तोड़ कर केरोसिन अंदर दाल.
दूसरा : पर आवाज होगी तो सब जाग जायेंगे.
पहला : अब वो सब सोचना छोड़ और काम कर, अगर वो लोग जाग भी गए तो उनके कुछ समजने के पहले हम आग लगा चुके होंगे.
में ये सब चुपके से सुन रहा था, अब मुझेलगा की सामने जाना hi पड़ेगा वर्ण ये लोग आग लगा देंगे, वैसे वह कुछ ज्यादा है नहीं, जो वो लोग धुंध रहे है. वो कागजात तो पहले से hi वह से निकल लिए है. में दबे पाव आगे बढ़ने लगा, अब खतरा ये भी था की वो लोग मुझे देख सकते थे पर खतरा लेना hi था. उपरवाले की मेहरबानी की उन्दोनो की पीठ मेरी और थी और दोनों अपने काम में व्यस्त थे, एक ने वह पड़ा पत्थर उठाया और खिड़की पे मर दिया जिस से ऊपर का शिक्षा टूट गया. में तेज कदमो से आगे बढ़ा, वो जैसे hi केरोसिन अंदर डालनेवाला था मेने जोर से उस को लात मरी, वो चिल्लाता हुआ दो कदम आगे जा कर निचे गिर पड़ा और साथ में केरोसिन का चैने भी उसके हाथ से छूट गया जिस से केरोसिन निचे गिरने लगा. उसकी गंध वातावरण में फ़ैल गयी, पर तब तक दूसरेवाले ने मसल जला दी थी. अब वह काफी उजाला हो गया था. हमदोनो की आंखे आपस में टकराई, वो एक हट्टाकट्टा आदमी था, काळा संध जैसा लग रहा था. वो जलती हुई मसल लेकर मेरी और बढ़ा. मेने भी मजबूती से अपना लकड़ा पकड़ा. जैसे hi उसने मुज पर प्रहार किआ मेने उसकी मसल पर जोर से लकड़ा मारा तो वो उसके हाथ से छूट गया और जहा केरोसिन गिरा था उस के ऊपर गिरा, अचानक एक आग का गोला बन गया और चारो और बहोत रौशनी हो गयी, में थोड़ा पीछे हैट गया और वो भी दूर हैट गया, जो निचे पड़ा हुआ था उसका पैरमे केरोसिन लग गया था तो उसका पेअर जलने लगा तो वो चिल्लाता हुआ इधर उधर भागने लगा और अपने पेअर की आग को बजाने की कोशिस करने लगा. मेने देखा की मसलवाले आदमी ने अपने हाथ में चाकू निकल लिया है. वो चाकू लेकर मेरी और सतर्क ता से बढ़ने लगा. मेरे हाथ में लकड़ा था तो में भी तैयार था. जैसे hi उसनेवार किआ मेने लकड़ा उसके कंधे पर दे मारा वो चिल्लाता हुआ दो कदम पीछे हैट गया और अपना कन्धा दबाने लगा. में उसकी और बढ़ने लगा तो वो एकदम से चाकू छोड़ कर भागने लगा, में भी उसके पीछे भगा. दौड़ में तो वो जितने से रहा, मेने भागते हुए hi उसकी पीठ पर लकड़ा मारा तो वो लड़खड़ाता हुआ नीचे गिर पड़ा. उतने में सब की चिल्लाने की आवाजे आने लगी. मेने देखा की लतादिदी और बाकि सब बहार आ गए थे और आग और उस आदमी को जलता हुआ देख सब चिल्लाने लगे थे. मेरा ध्यान उनकी और चला गया था तो वो आदमी उठकर वह से भागने लगा. में दौड़ते हुए सबके पास पंहुचा. उस आदमी के कपडे भी जलनेलगे थे तो वो जमीं पर लुढ़क कर आग बजाने की कोशिस कर रहा था और चिल्ला रहा था. में फटाफट अंदर गया और एक मोटा सा कम्बल ले आया और दौड़ कर उस आदमी के उप्पर दाल दिया. और उसे दबा दिया तो आग बुजगायी, पर वो चिल्ला गहा था. उतने में हमें पुलिस की सिरान सुनाई दी. पुलिस की गाड़ी हमारे गेट के बहार कड़ी थी, में दौड़ता हुआ अंदर गया और टेल की चाबी ले कर गेट खोल दिया तो पोलिसवाले अंदर आ गए.
पोलिसवाले : क्या हो रहा है यहाँ?
शिव : पता नहीं ये लोग यहाँ आये और उन्होंने आग लगा दी.
पोलिसवाले ने फ़ौरन फ़िरेब्रिगडे को फ़ोन लगाया और भार्गवी मैडम को भी फ़ोन कर दिया. भार्गवी मैडम के कहने पर hi ये लोग यहाँ से गुजर रहे थे, उन्होंने hi यहाँ ज्यादा पेट्रोलिंग करने को बोलै था. जब तक भार्गवी मैडम आयी तब तक फायर ब्रिगेड ने आग बुजदिति और एम्बुलेंस भी आ गयी थी. वो सब से पहले शिव के hi पास गयी.
भार्गवी : क्या हुआ शिव? कौन है ये लोग?
शिव : पतानहीं मैडम, ये लोग यहाँ आये और ऑफिस को जलने की बात कर रहे थे. मेने उनको देख लिया तो हम बचगये.
भार्गवी : (जलने से कराहते हुए उस आदमी को देख kar)Isse हॉस्पिटल ले जाओ और दो कांस्टेबल इसके साथ hi रहना.
शिव : दो और है मैडम, जो अंदर बंधे हुए है.
भार्गवी : (आश्चर्य से मेरी और देख kar)Kya?,Kaha?
शिव : आइये मैडम में दिखता हु.
में और भार्गवी मैडम को अंदर ले गया और साथ में दो कांस्टेबल भी आये. वह दो बंधे हुए थे जिनके शिर से खून निकल रहा था और दोनों छूटने की कोशिस कर रहे थे.
भार्गवी : (कांस्टेबल ko)Pakado इन्हे भी और हॉस्पिटल ले जाओ. एम्बुलेंस में इनके साथ तुम भी जाना और पुलिस जीप को भी बोलो इनके पीछे चलने को. में वही मिलती hu.(Constable “जी मैडम” बोल कर उन दोनों के पेअर खोल कर उन्हें हत्कडी पहना कर बहार ले गया.
भार्गवी : तुमने मारा इन्हे?
शिव : सॉरी मैडम, में क्या करता, ये चार लोग थे और यहाँ ऑफिस जलने के अलावा वो लोग लड़कीओ के साथ....
भार्गवी : तुम्हे कैसे पता की ये ऑफिस जलने आये थे.
शिव : मेने छुपकर इनकी बाते सुनी थी.
भार्गवी : ये किसी का नाम ले रहे थे, मेरा मतलब है की इनको किसने भेजा है. क्यों की ये लोग तो गुंडे hi लगते है, ये काम वो पैसो के लिए hi कर रहे होंगे.
शिव : नहीं मैडम, उन्होंने नाम तो किसी का नहीं लिया, पर जो भाग गया हे वही इन सब का लीडर था.
भार्गवी : कोई बात नहीं, में देखती हु, वो भाग कर जायेगा कहा. वैसे तुमने काम तो बहादुरी का किया है. मान न पड़ेगा. पर ऐसे पंगे तुम्हे भी नुकसान पंहुचा शक्ति hai.(Me क्या kehta,bas मुस्कुराया) मेने रात की पेट्रोलिंग जीप को यहाँ निगरानी रखने को बोलै था, पर मुझे भी नहीं पता था की ये सब इतना जल्दी हो जायेगा, यहाँ में दो कांस्टेबल को छोड़ जाती हु. तुम्हे, कम्प्लेन करने के लिए पुलिस स्टेशन आयना पड़ेगा.
शिव : ठीक है मैडम.
में दीदी के पास चला गया तो सब मुझसे लिपट गए, विणा तो रो रही thi.(Bhargavi सब जायजा ले रही थी, उसकी नजर शिव पर गयी जो सब को दिलासा दे रहा था, सब लड़कीअ उसके गले लगे हुई थी, सब जायजा ले कर दो कांस्टेबल को वह छोड़ वो पुलिस स्टेऑन निकल गए, वह कम्प्लेन दर्ज करवा कर शिव को वापस अनाथालय छोड़ दिया, वो हॉस्पिटल की और निकल गयी) मेने कांस्टेबल को बैठने के लिए कुर्शिया दी और में अंदर आ गए. अंदर बच्चे सो रहे थे पर लड़कीअ सब जाग रही थी. मेने उन्हें सब बता दिया की क्या हुआ. रात बहोत हो गयी थी तो हम सब सोने लगे.
लतादिदी : तुजे कही लगी तो नहीं न शिव?
सरितादिदी : अरे इससे क्या होगा? देखा नहीं सब की बंद बजा दी.
लतादिदी : तू चुप कर, तुजे पता भी है कितना खतरनाक था ये सब, वो लोग चाकू के साथ थे, अगर कुछ हो जाता तो?
सरितादिदी : सॉरी यार, सही कह रही है तू. (चिंता se)Tu ठीक है न शिव?
शिव : है दीदी, में ठीक हु. मुझे कुछ नहीं हुआ है.
लतादिदी : ठीक है सो जा.
सब अभी सोये थे तो लतादिदी मुझसे दूर hi सो गयी, पर रंजन मुज से सात कर लेती थी, उसने अपनी उंगलिया मेरी उंगलिओ में फसा कर मेरा हाथ पकड़ लिया. मेने उसकी और देखा तो वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, विणा भी मुझे देख रही थी, में उसकी और भी मुस्कुराहा. मेने उन्हें सोने का इस्सर किआ तो उन्होंने आंखे बंद कर ली. थोड़ी देर बाद सब सो गए. रंजन मेरा हाथ पकड़े hi सो गयी.
रात को देर से सोया था पर सुबह अपने टाइम पर उठ गया और गयम के लिए निकल गया. जूही मैडम को भी सब कुछ बता दिया जो रात को हुआ था. पवनसीर को भी मेने सब बता दिया. उतने में काव्य मैडम भी वह आ गयी तो पवनसीर ने उन्हें ऑफिस में बुलाया और उन्हें बता दिया. ऑफिस से बहार आ कर वो मेरे पास आयी.
काव्य जी : तुम ठीक हो न? तुम्हे कही चोट तो नहीं लगी?
शिव : नहीं मैडम, में ठीक हु, मुझे कुछ नहीं हुआ.
काव्यजि : ठीक है, तो फिर मेरे ऑफिस आ जाना, मुझे साडी डिटेल बता देना, में भार्गवी जी से भी बात कर लुंगी. तुम थोड़ा संभल कर रहना.
शिव : जी मैडम. थैंक यू.
वो अंदर कसरत करने चली गयी. में भी वही सब रूटीन में लग गया, मेने जूही मैडम को भी बता दिया. उन्होंने कहा मेरा स्कूटर ले जाना. गयम से में फटाफट घर गया और वापस जूही मैडम के घर से स्कूटी ले कर काव्य मैडम के एड्रेस पर चला गया. मेने बेल्ल बजायी तो एक 50 साल के करीब महिला ने दरवाजा खोला.
महिला : किस से मिलना है.
शिव : काव्य मैडम से मिलना था.
महिला : तुम्हारा नाम शिव है?
शिव : जी.
महिला : आप बैठो, वो अभी आ रही है.
में वह बड़े से हॉल में रक्खे सोफे पर बेथ गया. वो भी वही बेथ गगयी, वह काम करनेवाली एक औरत ने मुझे पानी दिया. मेने पानी पिया और काव्य मैडम का इंतजार करने लगा. थोड़ी देर बाद वही कामवाली आयी.
कामवाली : आइये, दीदी आप को बुला रही है.
में उसके पीछे पीछे चल दिया, वो ऊपर बने ऑफिस में मुझे ले गयी, वह काव्य मैडम बैठी हुई थी. मुझे देख कर
काव्य मैडम : आओ शिव, बैठो. (में बेथ गया) कैसे हो?
शिव : में ठीक हु, अआप किसी है?
काव्य मैडम
शिव : वैसे तो नहीं पर कभी कभी चेकउप के लिए आते है.
काव्य मैडम : तुम्हारे यहाँ के लड़के लड़कीअ जो अब नहीं है वह, वो क्यों चले गए, और कहा गए इसके बारेमे तुम कुछ जानते हो.
शिव : ज्यादा तो मुझे कुछ पता नहीं, पर जो मैनेजर सब को मरता पिट ता रहता है तो कई लड़के वह से भाग गए, और अब इस हादसे के बाद मुझे ये भी पता चला है की उसने कुछ लड़कीओ के साथ वो सब किआ या करने की कोशिस की तो वो भी चली गयी. और आप जो हॉस्पिटल के बारेमे पूछ रही है, उसका पहले का तो मुझे खास ध्यान नहीं पर अभी एक लड़का था गुड्डू, जिसकी अभी हल hi में मौत हो गयी थी.
काव्य मैडम : ये काब की बात है? (मेने उन्हें डेट बताई तो वो, अपने कंप्यूटर में कुछ देखने लगी, एक जागर एंट्री देख कर उसकी आंखे चमक उठी)
काव्य मैडम : शिव, मेने तुम्हारे अनाथालय और उस मैनेजर के दस्तावेज को चेक किआ और अभी तुम जो मुझे बता रहे हो उस से मुझे इसकी एक और वजह भी दिख रही है.
शिव : वो क्या मैडम.
काव्य मैडम : मुझे लगता है वो लड़के और लड़कीओ को या उनके शरीर के अंगो को बेचता था.
शिव : अंगो को बेचता था से क्या मतलब है मैडम.
काव्य मैडम : यही की, वो उनके दिल, या किडनी या और कुछ.
शिव : ये क्या कह रही है मैडम, क्या सचमे?
काव्य मैडम : (अपने लैपटॉप का स्क्रीन शिव की और करते हुए, वो उठकर शिव के पीछे कड़ी हो गयी ) ये देखो शिव, यहाँ ये पैसे जमा हुए है और जो डेट तुम बता रहे हो उसके कुछ दिन बाद hi ये हुआ है, यहाँ देखो, ये हॉस्पिटल से जमा, ऐसा लिखा हुआ है, और ये एक बार नहीं कई बार हुए है, पिछले कुछ समय से ये बंद हो गया था. पर अभी गुड्डू की मोत के बाद ये फिर जमा हुआ है. हो सकता है अब तुम्हारे वह ज्यादा बच्चे बचे न हो इस लिए ऐसा हुआ हो.
शिव : मैडम कई लड़के लड़कीअ बीमार होकर मर गए the.(Shiv ने पीछे मुद कर जवाब दिया पर काव्य मैडम झुकी हुई थी तो उसका शिर उनके स्तन से टच कर गया, उसने फ़ौरन अपना शिर वापस खिंच लिया पर जो होना था वो हो गया था)
काव्य मैडम : (काव्य को भी ये एहसास हुआ तो वो शिव से थोड़ा दूर हो गयी) हो सकता है की वो बीमार न हो, उन्हें कुछ खिला कर बीमार बनाया गया हो और फिर उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया हो. और मेडिकल चेक उप के बहाने उनकी साडी डिटेल जमा की जाती हो जिस से जब भी किसी को कोई अंग चाहिए हो तो उस रिपोर्ट के आधार पर जिसका भी मच होता हो उसे बीमार बना कर लेजाया जाता हो.
शिव : (अचानक से) है मैडम, गुड्डू को भी उसने कोई दवाई खिलाई थी, उसके बाद hi वो ज्यादा बीमार हो गया था.
काव्य मैडम : शिव ये सब बहोत खतरनाक चीजे है, हो सकता है इन्हे छिपाने के लिए अनाथालय को और तुम लोगो को नुकसान पहुंचने की कोशिस की गयी है. मेने भार्गवी मैडम से भी ये सब कहा था तो उन्होंने तुम्हारे वह ध्यान रखने के लिए पुलिस को कह दिया थाई.
शिव : है मैडम, मेने देखा था पुलिस की गाड़ी थोड़ी थोड़ी देर में वह से गुजर रही थी.
काव्य मैडम : शिव, तुम्हे भी ध्यान रखना होगा, हो शक्ति है ये लोग तुम लोगो को नुकसान पहुंचने की फिर कोशिस करे. उन्हें नहीं पता है की हम ये सब कागजात वह से ले आये है तो इस कागजात के लिए वो फिर से वह आये, और उसे मिटने की कोशिस करे. तो तुम ध्यान रख न.
शिव : ठीक है मैडम. और थैंक यू, आप हमारा इतना ख्याल रख रही है, पता नहीं इसका एहसान में कैसे चुकाऊंगा.
काव्य मैडम : एहसान कैसा, में वकील हु, और मेने तुम्हे कहा था न के में बिना फीस लिए तो काम करुँगी नहीं, वार्ना ऐसे तो मेरी वकालत hi बंद हो जाएगी.
शिव : मैडम आपने जो बात कही थी वो सही थी. में वादा करता हु में आप को फीस जरूर दूंगा, अभी नहीं तो बादमे पर दूंगा जरूर.
काव्य मैडम : अच्छा, और वो kaise?(Wo मेरी बगलवाली कुर्शी पर बेथ गयी)
शिव : वो पता नहीं पर दूंगा जरूर, आज नहीं तो कल में कमाने लगूंगा तब दूंगा.
काव्य मैडम : (मुस्कुराते हुए) में मज़ाक कर रही थी शिव कुछ काम अपनी ख़ुशी के लिए भी किये जाते है.
शिव : मतलब आप हम अनाथो पर महेरबानी करना चाहती है, अक्सर लोग हम पर तरस खा कर हमारी मदद करते है, शायद पुण्य कमाने के लिए.
काव्य मैडम
शिव : नहीं मैडम, अगर कभी आप को मेरी मदद की जरुरत हो तो सिर्फ बोलके देखना, में आपके लिए कुछ भी करने से पीछे नहीं हटूगा.
काव्य मैडम
शिव : (उनकी बातो से प्रभावित हो कर, मेने उनका हाथ अपने दोनों हाथमे ले liya)Thank यू मैडम. थैंक यू वैरी मुछ. अब में चलता हु, मुझे स्कूल जाना है.
काव्य मैडम : ठीक है. पर अपना ध्यान rakhna.(Kavya उसे जाता हुआ देख रही थी, उसके जाने के बाद उसने अपने हाथ को देखा जिसे शिव ने पकड़ा था, फिर कड़ी हो कर कोर्ट जाने के लिए तैयार होने लगी, तैयार होते होते उसे एक आईडिया आया, उसने फ़ौरन भार्गवी को फ़ोन लगा दिया.
काव्य : Hello मैडम , में काव्य बोल रही हु.
भरवावी : बोलिये मैडम, कैसे याद किआ.
काव्य : मैडम, ये जो कल रात हुआ, वो अनाथालय के कागजात के लिए हुआ है, ये तो आप को पता चल hi गया होगा, एक बार वो लोग नाकाम हुए है, दोबारा भी हुम्ला कर शक्ति है, में क्या कह रही थी, अगर हम ये प्रेस और मीडिया में ये बात कह दे की पुलिस ने अनाथालय के कागजात को अपने कब्जे में ले लिया है, तो फिर वो लोग अनाथालय पर हुम्ला नहीं करेंगे.
भार्गवी : ये सही कहा आपने, ठीक है, में करवाती हु.
काव्य : पर फिर आप पैर परेसुरे बढ़ जायेगा मैडम.
भार्गवी : आईटी इस part ऑफ़ ड्यूटी मैडम, में हैंडल कर लुंगी. पर ऐसा करने से शिव और उन लड़कीओ के ऊपर से खतरा हैट जायेगा. आज hi में प्रेस में ये बयां दे देती हु.
काव्य : थैंक यू वैरी मच मैडम. और कागजात मेरे पास सेफ है, में उसकी एक कॉपी आप को भी भिजवाडेति हु.
भार्गवी : Ok, चलिए, फिर मिलते है.
काव्य : जी मैडम.
उन्होंने फ़ोन रख दिया और वो कोर्ट के लिए निकल गयी.





