- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
अपडेट 165
में और नाज़िआ दीदी बस से सफर कर रहे थे, वो थोड़ी अपसेट थी, वो खिड़की के पास बैठी थी और में साइड में, बस तवो सीटर थी, जब बस सिटी से बहार निकली तो मेने उनके हाथ पर हाथ रख दिया, उन्होंने मेरी और देखा फिर आस पास देखा, कोई नहीं देख रहा है ये सुनिश्चित होते hi, वो फिर से बहार को देखने लगी, पर अपना हाथ नहीं छुड़ाया.
शिव : क्या हुआ? (हलाकि में जनता था)
नाज़िआ : तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था, क्या जरुरत पद गयी थी?
शिव : (उनके हाथ को अच्छे से पकड़ा और ऊँगली ो में ऊँगली फसा kar)Aapne hi तो कहा था की वो और आपकी सास मिल कर आपको परेशान करते थे, तो मेने सोचा की वो मेरे साथ जुड़ जाएगी तो आपके साथ भी अच्छे से रहे गई, बस मेने इतना hi सोचा था.
नाज़िआ : बच्चे की खुशखबरी के बाद, वैसे भी वो सब अच्छे हो hi गए थे na.(Usne नाराजगी से कहा)
शिव : मुझे थोड़ी न पता था, वैसे भी वो सब शायद नाटक भी कर रहे हो सकते थे, और मेने कुछ नहीं किआ था, वो खुद hi आयी थी. (उसने शिव की और देखा, वो बस भोली सूरत बनाये उसको सफाई दे रहा था, हलाकि वो समाज रही थी की उसको सफाई देने की कोई जरुरत नहीं थी, वो उसका पति नहीं था, न hi उसके साथ वफादार रहने की उसको कोई जरुरत थी, पर फिर भी वो उसको अपनी सफाई दे रहा था, जिस से पता चल रहा था की उसकी नाराजगी भी शिव के लिए मायने रखती है, उसका मान शांत होने लगा, वो उसके चेहरे के देख ने लगी, वैसे भी वो भी तो इसके चेहरे और उसकी पर्सनालिटी से उसकी और खींची चली गयी थी, उसके फंक्शन में भी न जाने कितनी कुवारिओ के दिल उसने लुटे थे, इनायत तो फिर भी एक तलाक सुदा थी, उसको देख कर उसका मान मचलना स्वाभाविक था, पर इतनी जल्दी वो सब हो गया उसका उसे आश्चर्य था, वो फिर मुस्कुरादि और खिड़की से बहार देखने लगी, वो अपनी मुस्कराहट छुपा रही thi)(Meri समाज में नहीं आया, तो मेने puchha)Ab मुस्कुरा क्यों रही है?
नाज़िआ : (मुस्कुराते हुए मेरी और dekha)Bechari इनायत (वो है पड़ी)
शिव: अब ऐसे क्यों कह रही हो?
नाज़िआ : तो और क्या कहु, इस भोली भली सूरत को देख कर वो उस पर मर मिटी होगी, उसे क्या पता होगा की क्या हालत होगी उसकी, रहें नहीं आया तुम्हे उस पर? (वो है रही थी)
शिव : (शरमाते hue)Mene आराम से hi किआ था. (दोनों फुसफुसाते हुए बात कर रहे थे)
नाज़िआ : मेने देखि उसकी हालत, आराम से किया था wale.(Unki हसी रुक नहीं रही थी)
शिव : सच बोल रहा हु में.
नाज़िआ : जब पागल हो ते हो तो कहा होश रहता है तुम्हे, मुझे मात समजाओ, क्या हालत होती है मुझे नहीं पता क्या, अब वो भी समाज गयी होगी, वैसे उसे बताना मात के मुझे पता है.
शिव : क्यों?
नाज़िआ : क्यों क्या, वो क्या सोचेगी, की भाभी को पता है फिर भी भाभी कुछ नहीं बोली, उसको हम दोनों के सम्बन्ध पर भी शक हो सकता है, वैसे तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, पर फिर भी सामने से क्यों बताना, और तुम थोड़ी न मेरे वह आनेवाले हो.
शिव : क्यों? आप नहीं चाहती की में वह औ?
नाज़िआ : लगता है बहोत पसंद आयी मेरी नानन्द (उसने मुस्कुरा के कहा)
शिव : उसके लिए नहीं कह रहा, आप भी तो आ जाएगी यहाँ, आपको नहीं मिलना मुझसे?
नाज़िआ : सचमे, मुझसे मिलने आओगे तुम? (उन्होंने प्यार से कहा)
शिव : (उनके हाथ को दूसरे हाथ से सहलाते hue)Apane बच्चे और उसकी माँ को मिलने आना तो पड़ेगा hi. (नाज़िआ शर्मा गयी और उसकी बाह पकड़ कर उसपे अपना शिर रख दिया)
नाज़िआ : कितना अजीब है न, कुछ समय पहले तो में तुम्हे जानती भी नहीं थी और अब पूरी जिंदगी तुम मेरे साथ रहोगे (फिर मुस्कुरा kar)Waise भी एक बच्चे से क्या होगा, दो- तीन तो चाहिए hi (बोलते बोलते वो खुद शर्मा गयी, में बस मुस्कुरा दिया)
ऐसे hi बाटे करते हुए पूरा सफर कैसे ख़तम हो गया पता hi नहीं चला. दोनों स्टेशन पर उतरे और रिक्शा से घर चले गए. जब घर पहुंचे तो आंटी ने दरवाजा खोला, अपनी बेटी को गले लगते हुए उन्होंने मुझे देखा, पर फिर नज़ारे झुका ली, वो दोनों अंदर गए, में सामान लिए उनके पीछे अंदर दाखिल हुआ. अंकल भी नहीं थे न hi संयम थी. अंकल बहार गए थे और संयम स्कूल गयी होगी. आंटी पानी ले आयी, में और नाज़िआदिदी वही सोफे पर बैठे हुए थे, पानी पि कर मेने कहा.
शिव : अब में चलता हु दीदी, और कोई काम हो तो कहियेगा.
ज़ोया : (हिचकिचाते hue)Wo... खाना बन गया है. (मेने उनकी और देखा पर उन्होंने नजर घुमा ली)
नाज़िआ : चलो, हाथ मुँह धो लो, खा कर hi जाना. (में क्या बोलता, तो हाथ मुँह धोया और खाने बेथ गया, में और नाज़िआ दीदी hi खाने बैठे थे)
शिव : (आंटी ko)aap नहीं खाएंगी.
ज़ोया : (नज़ारे इधर उधर करते hue)Nahi, अभी संयम भी आ जाएगी, उसके साथ खाउंगी.
हम खाना खा रहे थे की संयम भी आ गयी, में ने उसको देखा, उसने मुझे देखा तो में मुस्कुराया पर वो मुस्कुरायी नहीं, बस अपना बैग वह रखा.
नाज़िआ : कैसी है संयम?
संयम : (बजे मन se)Achchhi हु आप.
नाज़िआ : ऐसे क्यों बोल रही है, कुछ हुआ है क्या?
संयम : (उसने अपनी अम्मी को देखा फिर शिव ko)Kuchh नहीं आप, बस थक गयी हु, आती हु, (कह कर वो बाथरूम में चली गयी.).
ज़ोया : (उसका मान बैठने लगा, उसे अब यकीं हो रहा था की ये जरूर देख चुकी है, उसे अपने आप पर बहोत गुस्सा आ रहा था, वो अपनी hi बेटी के आगे शर्मशार हो रही थी, उसका भी चेहरा लटक गया)
नाज़िआ : इससे क्या हुआ है?
ज़ोया : (वो परेशान हो रही थी, क्या बताती अपनी बेटी को की शायद उसे मेरी रंगरलिओ के बारेमे पता चल गया hai)Pata नहीं, शायद थक गयी होगी, साइकिल से गयी थी न आज. (उसने ऐसे hi बहाना दिया)
नाज़िआ : क्यों?, वैस्वी नहीं आयी थी?
ज़ोया : नहीं, वो आज कही बहार गयी है. (तभी संयम बहार आयी, उसको देख कर ज़ोया ने बहोत प्यार से puchha)Khana लगा दू? (उसने अपनी अम्मी को देखा फिर शिव को देखा, दोनों ऐसे बेहवे कर रहे थे जैसे उनके बिच कुछ है hi नहीं, संयम को गुस्सा आ रहा था)
संयम : नहीं, थोड़ी देर बाद, में कपडे बदल कर आती हु. (उसने रूखे पैन से जवाब दिया, और बैग ले कर ऊपर चली गयी)
नाज़िआ : हुआ क्या है इससे, शिव से एक शब्द भी नहीं बोली वो, क्या हुआ है तुम दोनों के बिच शिव? लड़ाई वादे तो नहीं hui(Mene बस इससरए से कहा की क्या pata)Kamal है. (हम खाने लगे, वो निचे नहीं आयी, मेरा खाना भी हो गया, मेने हाथ धो लिए.
शिव : अब में चलता हु.
नाज़िआ : एक मिनट (संयम को आवाज देते hue)Samim, ो संयम.
संयम : (ऊपर se)Ha आप?
नाज़िआ : शिव जा रहा है.
संयम : है ठीक है. (उसने ऐसे जवाब दिया जैसे उसको कोई फर्क नहीं पद रहा, नाज़िआ को कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था)
शिव : में चलता हु, फिर मिल लूंगा.
नाज़िआ : है, ठीक है, कब वापस आओगे?
शिव : दो तीन दिन बाद.
नाज़िआ : अच्छा ठीक है, अच्छे से करना, और अपनी कामियाबी के बाद फ़ोन जरूर कर देना. (संयम ऊपर से सब सुन रही थी, उसका मान हुआ की जा कर शिव को आल थे बेस्ट कहे, पर वो नहीं गयी)
शिव : पहले कामियाब तो हो जाऊ.
नाज़िआ : जरूर हो ो गए, में उपरवाले से दुआ करुँगी, वो तुम्हे जरूर कामियाबी देगा.
शिव : थैंक यू, ठीक है में चलता हु, bye (मेने आंटी को देखा तो उन्होंने बस मुस्कुरा कर गर्दन हिलायी, में वह से निकल गया)
वही आज सुबह मिक्की ने वैस्वी के लिए फार्म हाउस पर छोटी सी ट्रीट रक्खी थी, उसने वैस्वी को कहा था पर उसने मन कर दिया था तो उसने प्रकाश अंकल को hi बोलै तो वैस्वी को मान मार का आना पड़ा था, पर वो अकेले नहीं जाना चाहती थी, उसने झंविदिदी को फ़ोन किआ और उन्हें साथ चलने को कहा, वो नहीं मान रही थी तो उसने भी आने से इंकार कर दिया, तो जहान्वी भी आ गयी थी. वैस्वी जहान्वी के साथ hi बैठी थी. वो चुप चुप hi थी.
जहान्वी : क्या हुआ, अच्छा नहीं लगा, यहाँ आकर? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, जहान्वी ने अपने भाई को देखा जो अपने दो दोस्तों के साथ बियर पि रहा था, उसको भी अच्छा नहीं लग रहा था पर क्या करती) उसने तुम्हारे लिए hi यहाँ ये ट्रीट रक्खी है, तुम उस से मिलोगी, बात करोगी तभी तो उसके साथ बनेगी तुम्हारी. (वैस्वी फिर भी कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये बैठी थी, जहान्वी जानती थी की वैस्वी उसके भाई को पसंद नहीं करती) देखो वैस्वी, तुम्हारे घर वालो ने भी सहमति जताई है, फिर ऐसे रहने से क्या फायदा, घुलेगी मिलोगी तो तुम्हारा भी मान लग जायेगा. (वैस्वी के आँख में अस्सू भर आये, जहान्वी को भी समाज नहीं आ रहा था की वो क्या कहे, वो उठ कर गयी और उसके लिए पानी ले aayi)Lo पानी पीओ.
वैस्वी : (पानी ले कर पिया और अपनी आंख से आंसू pochhe)Me ये शादी नहीं करुँगी. (वो बस इतना hi बोली)
जहान्वी : इसमें में क्या कहु, ये तो तुम्हारे पापा लोग hi डीडे करेंगे. (वैस्वी ने तप्ले पर गिलास रक्खा और वाश रूम की और चली गयी, जहान्वी उसे जाते देख रही थी, मिक्की की भी नजर पड़ी तो वो बियर रख कर उसके पीछे चला गया, जहान्वी ने भी ये देखा, पर वो क्या कर शक्ति थी, वो बस बैठे रही, वैसे भी उसको साइट पर जाना था, शिव से बात करनी थी, उसने अपना मोबाइल देखा, और सोचने लगी की पुछु की न पुछु की आएगा की नहीं. पर फिर मश्ग नहीं किआ और फ़ोन रख दिया)
वह वैस्वी वाश रूम में जा कर चेहरा साफ़ कर के बहार निकली तो मिक्की खड़ा था, वो घबरा गयी, और साइड से जाने लगी.
मिक्की : सुनो तो. (वो नहीं रुक रही थी तो मिक्की ने उसकी बाह पकड़ li)Ruk बोलै न.
वैस्वी : छोडो मुझे.
मिक्की : क्या प्रॉब्लम है तेरी, तेरे लिए hi सब अर्रंगे किआ है मेने, सोचा था की अकेले में मिलेंगे.
वैस्वी : मुझे नहीं मिलना (उसने अपनी बाह छुड़ाने का प्रयास किआ)
मिक्की
उस पर नशा तो चढ़ा हुआ था hi, उसे गुस्सा भी आ रहा tha)Tuje प्यार से समजा रहा हु तो समाज में नहीं आता तेरे (उसने दोनों बाह पकड़ ली)
वैस्वी : (अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करते hue)Chhodo मुझे.
मिक्की : किस बात का घमंड है तुजे है, जरा सा भाव क्या दिया, तू तो शिर पे चढ़ रही है, आज तेरी अकड़ ठिकाने लगा ता हु, चल (कहते हुए वो उसे एक और ले जाने लगा, वैस्वी रोने लगी)
वैस्वी : छोडो मुझे, में चिल्लाऊंगी.
मिक्की : जितना मर्जी हो चिल्ला, ये मेरे बाप की जगह है, किस मई के लाल में हिम्मत है जो यहाँ आये.
वैस्वी : प्लीज मुझे छोड़ दो, में तुम्हारे हाथ जोड़ती हु.
मिक्की : हाथ जोड़ या पैर पकड़, आज तेरी अकड़ ठिकाने लगा कर hi रहूँगा, बहोत नखरे दिखा लिए तूने, साली, फ़ोन नहीं उठाएगी, बात नहीं करेगी, क्यों? (वह जहान्वी अकेले बोर हो रही थी तो उसने कान में लगे ब्लू टूथ में गण चला दिया था और आंख बंद किये कुर्शी पे बैठी थी तो उसे ये सब पता नहीं चला, मिक्की उसे घसीट के एक रूम की और ले जाने लगा, उसके दोस्तों ने ये देखा और हसने लगे)
एक दोस्त : आज तो ये गयी. (दोनों हसने लगे, वही दूसरे काम करनेवाले भी थे, पर सब ने ान देखा hi कर दिया)
वैस्वी : (रट हुए, जोर se)Chhodo मुझे.
मिक्की : छोड़ दूंगा, पहले देख तो लू की साली तू चीज क्या है.
वैस्वी : में जानती थी की तुम एक नंबर के घटिया इंसान हो, इसीलिए मुझे शादी नहीं करनी है. (उसने रट हुए कहा)
मिक्की: क्यों, उस लम्बू के साथ तो बड़ी चिपक के बेथ टी है, तू क्या समजती है, मुझे पता नहीं है, उस लम्बू से भी हिसाब देखना है, पहले तुजसे तो निपट लू.
वैस्वी : (चटपटेने लगी, और खुद को जोर जोर से छुड़ाने का प्रयास करने लगी, मिक्की के लिए भी संभालना मुश्किल हो रहा था, वैसे भी वो उसके बराबर लम्बी थी, और शरीर से भी अच्छी खासी थी, वो जी तोड़ प्रयास करने लगा, उसकी भी हालत ख़राब हो रही थी उसको खींचने में और पकड़ने me)(Tabhi जहान्वी ने आंख खोली, सब लोग किसी और देख रहे थे, उसने बस ऐसे hi देखा तो उसको मिक्की और वैस्वी दिखे, मिक्की वैस्वी को खिंच रहा था और वैस्वी अपने आपको छुड़ाने का प्रयास कर रही थी, वो फ़ौरन उठी)
जहान्वी : मिक्कीीीी. (अभी वो बोली hi थी की वैस्वी ने जोर से मिक्की को धक्का दिया तो वो लदखते हुए दो तीन कदम पीछे हुआ और धड़ाम से जमीं पर लुढ़क गया, और वैस्वी वह से बहार के गेट की और जल्दी से चलते हुए जाने लगी)
मिक्की : (वो नशे में भी था और ऊपर से वैस्वी में ताकत भी थी, उसके अंदर के मर्द को ये सेहन नहीं हुआ, उसने अस्स पास देखा तो सब उसे hi हैरत से देख रहे थे, वो लड़खड़ाके उठा और वैस्वी की और lapka)Sali, मुझे धक्का देती है. (जहान्वी तब तक वह पहुंच गयी थी, मिक्की वैस्वी तक पहुचनेवाला hi था की जहान्वी ने बीचमे आ कर उसे पकड़ लिया)
जहान्वी : मिक्कीीी, क्या कर रहा है?
मिक्की : (गुस्से me)Sali मुझे धक्का देती है, होनेवाला पति हु उसका, मेरी जो मर्जी होगी में करूँगा.
जहान्वी : (मिक्की को पकड़ते hue)Chup कर, क्या बोल रहा है तू.
मिक्की : छोडो मुझे, आज में उसको उसकी औकात दिखा के रहूँगा.
जहान्वी : क्यों तमसा बना रहा है, (उसके दोस्तों की और देख ke)Eeiiii, इसको ले के जाओ (वो दोनों दौड़ कर आये और मिक्की को पकड़ लिया, जहान्वी ने देखा की वैस्वी गेट तक पहुंच गयी hai)Vaiswiiiiiii, सुनो तो.
(गेट पर खड़ा दरबान गेट नहीं खोल रहा था तो वैस्वी ने उसे घर कर देखा तो वो दर गया और दरवाजा खोल दिया, वो बहार निकल गयी, जहान्वी अपनी गाड़ी की और बढ़ी, वो भी गाड़ी ले कर बहार निकली, वैस्वी पैदल hi चलते हुए जा रही थी, वो उसके पास पहुंच गयी, वैस्वी ने देखा पर वो रुकी नहीं चलती hi रही)
जहान्वी : अंदर आ जाओ, में तुम्हे घर छोड़ देती हु. (वैस्वी ने गुस्से से देखा, उसके पास और कोई रास्ता नहीं था तो वो बेथ गयी, जहान्वी ने गाड़ी चला दी, दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, थोड़ी दूर जा कर वो boly)Sorry यार. (वैस्वी ने उसको देखा, फिर अचानक उसकी आँखों से आंसू निकल आये) तुम रो मात, वो बेवकूफ है, उसको इतनी भी तमीज़ नहीं की कैसे बेहवे करना चाहिए. मुझे नहीं पता था की ऐसा होगा यार. अगर मुझे पता होता तो में तुम्हे लती hi नहीं. सॉरी.
वैस्वी : (अपने अस्सू पोछते hue)Aap क्यों सॉरी बोल रहे हो, मेरी किस्मत hi ख़राब है, पर में ये शादी हरगिज़ नहीं करुँगी, मार जाउंगी पर ये शादी नहीं करुँगी. बोल देना अपने भाई को.
जहान्वी : ये सब घर पे मात बोलना यार, बबल हो जायेगा.
वैस्वी : आपको क्या लगता है की ये सब बोलूंगी तो कोई फर्क पड़ेगा, सब जानते है, आपका भाई मशहूर है, मेरे पापा को भी पता है, और आपको भी पता hi होगा की आपका भाई कैसा है, पर अब बहोत हो गया, अब न में अपने पापा की सुनूंगी न और किसी की, देखती हु कोण मुज पर जबरदस्ती करता है. (उसने गुस्से से कहा, जहान्वी ने गाड़ी रोक दी और वैस्वी को देखने लगी)
जहान्वी : यार तुमतो बड़ी खतरनाक हो. (वैस्वी कुछ नहीं बोली) में भी एक लड़की हु यार, मुझे कदर है तुम्हारे जज्बात की, में तुम्हारे साथ हु Vaiswi(Usne अपना हाथ वैस्वी के हाथ पर रख दिया, वैस्वी ने उसकी और देखा, उसकी आँखों में सच्चाई थी, वैस्वी हल्का मुस्कुरायी, जहान्वी ने मुस्कुराते हुए kaha)Waise भी तुम्हे संभालना उसके बस की बात नहीं. (अपने भाई के बारे में बोलते हुए वो है दी, वैस्वी शर्मा gayi)Achchha है, उसे भी समाज आ गया होगा की लड़कीअ एंटनी भी कमजोर नहीं होती, वो खुसी से सबकुछ दे तो ठीक है वर्ण किसी की मजाल नहीं जो जबरदस्ती कर ले, क्यों? (वैस्वी अब थोड़ी रिलैक्स हो गयी थी, वो मुस्कुरायी, दोनों फिर घर की और निकल गए, दोपहर हो रही थी, जहान्वी ने वैस्वी को घर छोड़ दिया, स्वर्ण थोड़ी टेंशन में थी क्यों की वो जानती थी की वैस्वी को पसंद नहीं फिर भी गयी थी.)
स्वर्ण : आ गयी?
वैस्वी : (नार्मल हो kar)Ha भाभी, खाना है?
स्वर्ण : क्यों खा कर नहीं आयी?
वैस्वी : नहीं भाभी, है तो बोलो वर्ण चलेगा.
स्वर्ण : खाना क्यों नहीं होगा, में भी बाकि hi हु, चल साथ में कहते है. (स्वर्ण ने खाना निकला और दोनों साथमे बेथ गए, खाना कहते हुए वैस्वी को देखते हुए वो बोली) वह क्यों खा कर नहीं आयी, मेने तो सुना था की तू खा कर आएगी.
वैस्वी : छोडना भाभी, में उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती. (स्वर्ण ने भी ज्यादा कुछ नहीं पूछा, वैस्वी खाना खा कर अपने कमरे में चले गयी, वह जा कर वो सोचने लगी, जो हुआ था उसके bareme)Me क्यों बताऊ किसी को, अब मुझे कोई दर नहीं है, आने दो दोबारा, देखती हु, बड़ा आया मुज पे जबरदस्ती करनेवाला, है क्या उसमे जो मेरे साथ जबरदस्ती करेगा, ये तो सिर्फ धक्का दिया था, अगर अब सामने आया न तो पूरा मुँह नोच लुंगी, कमज़ोर समजा है क्या मुझे, और एक वो है, जो ऐसे पकड़लेता है की छूट hi न पाओ. (शिव को याद करते हुए उसकी आंखे बंद हो गयी, तभी उसे याद आया की आज वो जानेवाले है, उसने अपना फ़ोन निकला और मश्ग किआ.)
वैस्वी : Hi. (वो थोड़ी देर मोबाइल को देखती रही पर सामने से कोई मश्ग नहीं आया, वो आंखे बंद किये हुए लेट गयी, दस मिनट बाद उसके फ़ोन की मश्ग टोन बजी, उसने फ़ौरन फ़ोन देखा)
शिव : Hi.
वैस्वी : कॉल करू? (उसने फ़ौरन मश्ग किआ, थोड़ी hi देर में सामने से शिव का कॉल आने लगा, उसने फ़ौरन उठा liya)Hiii (बहोत प्यार से)
शिव : (वो अपने रूम में बैठा था, सब खाना खा रहे थे, वो खा कर आया tha)Hi, कैसी हो?
वैस्वी : आ गए तुम?
शिव : है, एक दो घंटे पहले hi आया. आज स्कूल नहीं गयी थी?
वैस्वी : है (थोड़ा रूखी आवाज me)Kaam था.
शिव : क्या हुआ?
वैस्वी : (सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं, आज जानेवाले हो न तुम?
शिव : है शाम को निकलना है?
वैस्वी : कितने बजे जाओगे?
शिव : 6 बजे की बस है, क्यों.
वैस्वी : (घडी देखते hue)Me मिलने औ, मिलोगे?
शिव : कहा?
वैस्वी : (सोचते hue)Me घर hi आती हु, चार बजे, चलेगा न?
शिव : है है, आ जाओ.
वैस्वी : तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी वह से.
शिव : नहीं, मुझे जूही के वह जाना पड़ेगा, हम दोनों साथमे जा रहे है न, तो 5 बजे उसके घर जाना है.
वैस्वी : कोई बात नहीं, में उनके घर छोड़ दूंगी. आती हु फिर.
शिव : ठीक है, मिलते है.
में अपनी पैकिंग कर रहा था, एक घंटे बाद लता मेरे कमरे में आयी. में चेयर पर बैठा था, और बैग वही पड़ा था.
लता : तूने क्यों की पैकिंग, में कर देती न.
शिव : (मुस्कुराते hue)Mene कर दी. खा लिया.
लता : है, (थोड़ी उदासी se)Kab आएगा?
शिव : बताया तो था, फिर क्यों पूछ रही हो? (उनका हाथ पकड़ कर, अपने पास खिंचा, वो नजदीक आ गयी)
लता : नहीं बस ऐसे hi.
शिव : कुछ लाना है (में जा रहा था तो वह से लेन के लिए मेने पूछा)
लता : है.
शिव : क्या?
लता : खुशखबरी. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, और मेरे शिर को पकड़ कर अपने स्तन पे दबा दिया, प्यार se)Me भगवन से प्राथना करुँगी, अच्छे से करना सब. (तभी दरवाजे पर खत खत हुई)
सरिता : उह्हू uhhuuu(Khasne की एक्टिंग) (लता तुरंत दूर हो गयी, सरिता को देख कर एकदम शर्मा gayi)Baad में औ क्या?
शिव : है. (मेने बस चिढ़ाने के लिए कहा)
लता : (घबराते hue)N न नहीं, आआआओ. (सरिता मुस्कुराते हुए अंदर आयी).
सरिता : शुभकामनाये देने का मेरा भी हक़ है. (उसने भी शिव को वैसे hi अपने उरोजों में दबा दिया जैसे लता कड़ी thi)Bhagvan तुजे मेरे भाग्य का सारा सुख दे. (उन्होंने बहोत बड़ी बात बोल दी थी, वो मुझसे कितना प्यार करती है ये उनकी इस बात से पता चल रहा था, में खड़ा हुआ और उनको अपने गले लगा लिया, वो भी मुझसे लिपट गयी, लता कड़ी देख रही थी तो मेने दूसरा हाथ भी बढ़ाया तो वो भी मेरे गले लग गयी)
रंजन : में bhiiiiiiiiii (वो चिल्लाते हुए अंदर दौड़ी, और आ कर हमसे लिपट गयी, गायत्री और विणा ने भी उसकी आवाज सुनी तो वो दोनों भी रूम की और आयी, वह का दृश्य देख कर वो दोनों मुस्कुराने लगी तो मेने उनको भी इस्सर किआ तो वो दोनों भी आ गयी, सब की सब मेरे गले लगे हुए थी, ये बस प्रेम था, और इस बात का प्रमाण की हम सब साथ है. मुस्कुराते हुए सब अलग हुए)
लता : रंजन, जा तो दिया और कम कम ले आ. और है चावल भी लाना थोड़े से. विणा एक कुर्शी ले आ.
रंजन : अभी लायी दीदी. (तभी बहार जीप की आवाज आयी, हम सब रूम से बहार आये तो देखा की भार्गवी मैडम अंदर आ रही थी)
शिव : मैडम आप?
भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Kyu, नहीं आ सकती?
शिव : नहीं नहीं, जरूर आ शक्ति है, वो तो आप अचानक आयी तो पूछा. आइये.
भार्गवी : तो, तयारी हो गयी सब?
शिव : (मुस्कुराते हुए) जी हो गयी. (तभी रंजन एक थाली में दिया ले कर आ गयी, और विणा एक चेयर)
भार्गवी : अरे वह, सही टाइम पर आयी में.
लता : (शरमाते hue)Ha वो जा रहा है न तो ...
भार्गवी : बिलकुल सही किआ तुमने, सुरु करो.
लता : जी. (सरिता की और देख kar)Tu सुरु कर. तू बेथ कुर्शी पर.
सरिता : (हस्ते हुए आयी और थाली में दिया जलाया, फिर रंजन के हाथ से थाली ले कर लता को देते hue)Sabse पहले तेरा hi हक़ है, क्यों शिव? (में बस मुस्कुराया, लता ने प्यार से सरिता को देखा और शिव को टिका लगाया फिर, चावल, भार्गवी फोटो लेने लगी, लता ने फिर थाली सरिता की और बधाई)
सरिता : अरे आरती तो उतर.
लता : वो सब साथमे करेंगे. (सरिता भी मुस्कुरा दी, उसने थाली ली और टिका किआ और चावल लगाए, फिर उसने गायत्री को देखा तो उन्होंने भी लगाया, उन्होंने रंजन को बुलाया)
रंजन : मैडम को दो पहले. (सब रंजन को देखने लगे) ऐसे क्या देख रहे हो, वो इतनी दूर शिव को विश करने hi तो आयी है क्यों दीदी? (भार्गवी को भी बहोत मान था पर सबके सामने उसको संकोच हो रहा था, पर उस नटखटने उसके मान की बात पढ़लि थी, वो बस मुस्कुरायी, रंजन ने थाली उनकी और बढ़ा दी और उनके हाथ से मोबाइल ले लिया, भार्गवी ने अपने जुटे निकले और शिव के सामने कड़ी हो गयी, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, आज वो सबके सामने जैसे एलान कर रही थी की शिव का उसके साथ कोई खास रिस्ता है, उसने शिव को टिका लगाया, और चावल भी लगाया, शिव उनको hi देख रहा था, भार्गवी के चेहरे पर बहोत छुपाने पर भी हलकी सी शर्म उभर आयी थी, तभी बहार स्कूटर की आवाज आयी, सब दरवाजा देख रहे थे, की वैस्वी अंदर आयी, साथमे स्वर्ण भी thi.Vaiswi ने जब स्वर्ण को बहार जाने के लिए कहा था तो उसने पूछा की कहा जा रही है तो उसने सही सही बता दिया की वो शिव को बेस्ट विशेष देने जा रही है तो स्वर्ण से रहा नहीं गया और वो भी साथ चली आयी, वैस्वी ने भी बुरा नहीं मन न आश्चर्य किआ क्यों की वो भी शिव को जानती थी)
वो दोनों अंदर का माहौल देख कर मुस्कुरायी और नजदीक आ कर कड़ी हो गयी. रंजन ने टिका लगाया और चावल लगाया, फिर विणा को बुलाया, वो भी शरमाते हुए आ गयी, उसने भी वैसे hi किआ, सब का ख़तम हो गया था. (ये सब देख कर स्वर्ण और वैस्वी का दिल भी कर रहा था पर संकोचवश कुछ नहीं बोली) विणा आस पास देखने लगी की अब किसको थाली दे.
लता : वैस्वी, तुम भी करो (वैस्वी का दिल जोरो से धड़क गया, उसकी हिम्मत नहीं हुई की वो किसी की नजर का सामना करे, वो शिर झुकाये आगे बढ़ी और उसके हाथ से थाली ले ली)
वैस्वी : (थाली लिए शिव के पास गयी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर वो इस मौके को खोना नहीं चाहती थी, उसने शिव के कपल पर दोनों लगा दिए, शिव उसको hi देख रहा था तो उसे बहोत शर्म आ रही थी और साथ में खुस भी थी)
लता : (वो स्वर्ण के बारेमे ज्यादा जानती नहीं थी तो boli)Aap सुभकामना देना चाहेंगी?
स्वर्ण : है क्यों नहीं (उसने ऐसे hi बोलै जैसे जाता रही हो की सब कर रहे है तो में भी कर रही हु, पर अपने दिल का हल वो hi जानती थी, वो ये जानती थी की जिस तरह का शक मनीषा दीदी और बिना भाभी दर्शा रही है उस हिसाब से तो वो उसका भाई है, और दूसरी और उसके बच्चे का बाप भी, वो दिल hi दिल में ढेर साडी सुभकामनाये देने लगी, उसने भी तिलक किआ और चावल लगाए पर अचानक उसने दोनों हाथ फैला कर उसकी बलए भी ले ली, उसकी आँखों से आंसू भी चालक aaye)(Sab हैरानी से देख रहे थे, वैस्वी को भी आश्चर्य हो रहा tha)(Swarna को भी ध्यान आया की उसने भावनाओ में बह कर कुछ ज्यादा hi कर दिया है पर अब हो चूका था, उसने अपने ासु पोछे)
स्वर्ण : वो मुझे किसी अपने की याद आ गयी. (लता उसके पास ेयी, और उनके कंधे पर हाथ रख कर मुस्कुरायी जैसे कह रही हो की कोई बात नहीं)
लता : आओ फिर आरती उतारते है इसकी. (लता के आस पास सह कड़ी हो गयी और एक दूसरे के हाथ को अपना हाथ टच करवादिया, लता आरती उतरने लगी)
शिव : (में सबको देख रहा था और मान में सोच रहा था की पूरी फ़ौज है यार ये तो और वो भी आधी )
सरिता : (उसको ऐसे देखते dekh)Kyu दार लग रहा है? (मुस्कुराते हुए वो बोली)
शिव : (उन्होंने मेरे मान की बात पकड़ ली थी, मेने शांत हो कर kaha)Kaisa दर?
सरिता : इतना की जिम्मेदारी का dar(wo मेरी खिंचाई कर रही थी)
भार्गवी : (उसको भी अंदाजा हो रहा था, शिव उसको काफी कुछ बता चूका tha)Usko क्यों जिम्मेदारी लेनी है, हम सब है न, सब मिल कर उसकी जिम्मेदारी उठालेंगे, क्यों क्या कहती हो? (सब है pade)Are सुन तो (रंजन को देख kar)Wo आगे सीट पर एक पैकेट पड़ा होगा ले आ तो. (रंजन बहार भागते हुए गयी और वो पैकेट ले आयी, उसने पेंदे थे, सबने मुँह मीठा किआ, तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी मेने देखा तो जूही का फ़ोन था)
शिव : Hello.
जूही : हो गए तैयार?
शिव : है वो...
लता : किसका फ़ोन है?
शिव : जूही का.
लता : दे मुझे. Hello, जूही.
जूही : है, लता (आवाज पहचान कर)
लता : तुम तैयार हो गयी हो?
जूही : है, क्यों?
लता : सामान ले कर यही आ जाओ.
जूही : पर क्यों?
लता : आओ बोलै न (हक़ से)
जूही : हां आती हु. (उसको समाज नहीं आया, उसने सोचा था की शिव को जल्दी बुला कर थोड़ा टाइम बिताएगी, वो सामान उठायी और स्कूटर ले कर चली गयी, जब वो वह पहुंची तो सब को देख कर वो हैरान हो गयी)
लता : आओ बैठो yaha(Pehle जहा शिव बैठा था वही बैठा दिया, बरी बरी सबने टिका और चावल लगाए, पहले जूही बहोत खुस हुई पर फिर जैसे जैसे सबने उसकी आरती उतरी उसकी आंखे भर आयी, लता उसके पास गयी और गाल सेहला kar)Kya हुआ?
जूही : ऐसा लग रहा है जैसे कितना बड़ा परिवार है मेरा.
लता : तो नहीं है क्या. (उसके आंसू पोछे, वो लता के गले लग गयी)
साब ने फिर दोबारा से बधाई दी, मेने भार्गवी मैडम को अनाथालय की देखभाल के लिए दोबारा बोलै तो उन्होंने भी मुझे असस्वस्थ किया. वो hi हम दोनों को स्टेशन छोड़ गयी, वैस्वी और स्वर्ण दोनों चले गए, वैस्वी को भी शिव को अकेले न मिलने का गाम था पर जो हुआ था उस से वो और ज्यादा खुस थी.
में और जूही बस में बेथ गए, लम्बा सफर था तो रिजर्वेशन करवलिया था जूही ने तो सीट मिल गयी थी, बस पूरी रिजर्व्ड सीट वाली hi थी, हम दोनों बैठे हुए थे और बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी, जूही बार बार अनाथालय में जो हुआ उसे याद कर के मुस्कुरा रही थी.
शिव : क्या हुआ, अकेले अकेले क्यों मुस्कुरा रही हो?
जूही : (शिव को प्यार से देखते hue)Aaj में बहोत खुस हृषिव, इस तरह से तो कभी मुझे किसी ने विश नहीं किआ था, थैंक यू.
शिव : विश उन सबने किआ और थैंक यू मुझे कह रही हो.
जूही : क्यों की तुम्हारी वजह से hi में उनसे जुडी हु, तो हुम्हे hi थैंक यू कहूँगी न. (तभी मेरी मश्ग टोन बजी, मेने मोबाइल निकल कर देखा तो और भी मश्ग थे जो में देख नहीं पाया था, मेने देखा तो बिना मैडम का मश्ग था, जूही मोबाइल में hi देख रही थी तो मेने उसकी और देखा, वो मुस्कुरायी और kaha)Na देखु? (में कुछ न बोलै, मेने मश्ग ओपन किआ तो उन्होंने भी मुझे और जूही दोनों को सुभकामनाये दी थी, मेने दूसरा मश्ग ओपन किआ जो काव्य मैडम का था, उन्होंने भी मुझे सुभकामनाये दी थी, नाज़िआ दीदी का भी था, और एक अननोन नंबर से था, मेरी समाज में नहीं आया की ये किसका है) ये किसका मश्ग है?
शिव : पता नहीं?
जूही : ऐसे कैसे पता नहीं, फ़ोन करो उन्हें, पता चल जायेगा.
शिव : (मुझे भी लगा तो मेने फ़ोन लगा diya)Hello.
आवाज : (ये लड़की की आवाज thi)Hello, कोण? (आवाज बहोत सुरीली थी)
शिव: आप कोण?
आवाज : (थोड़ा ाटिटूडे se)Phone आपने किआ है, मेने नहीं, आप बताओ, किसका काम है?
शिव : (मुझे आवाज समाज नहीं आ रही thi)Me शिव बोल रहा हु, आपके नंबर से मुझे मश्ग आया था.
आवाज : ओह! शिव. (आवाज में नर्माहट आ गयी, और आवाज और मधुर हो gayi)mene तो कोई मश्ग नहीं किआ. कैसे हो आप?
शिव : (अभी भी मेरी समाज में नहीं आ रहा था की कोण hai)Me अच्छा हु, आप कोण है, सॉरी में पहचान नहीं प् रहा हु.
आवाज : (सामने वाली मुस्कुरा di)Kaise पहचानो गए, कभी बात hi नहीं की तुमने मुझसे.
शिव : आपके पास मेरा नंबर कैसे आया? कोण हो आप?
आवाज : (आवाज नटखट सी हो गयी thi)Me क्यों बताऊ, बस इतना बता दू की मश्ग मेने नहीं किआ है.
शिव : पर मश्ग तो आपके नंबर से hi आया है न.
आवाज : तो क्या हुआ, किसी और ने मेरे नंबर से किआ होगा, में फ़ोन छुपके नहीं रखती. (उनकी आवाज से लग रहा था की उनको बहोत मज़ा आ रहा था मेरी खिंचाई करने में)
शिव : ठीक है, में रखता हु फिर. (मेने हथियार डालते हुए कहा)
आवाज : लगता है मेरी आवाज पसंद नहीं आयी आपको, हीहीही. वैसे मेरी और से भी सुभकामनाये आपको, अच्छे से प्रयास करना, इस्वर आपको कामियाबी जरूर देगा.
शिव : (वो मुझे जानती थी और मेरे कॉम्पिटिओं के बारेमे भी, पर अभी भी मुझे समाज नहीं आ रहा tha)Thank यू, आप बताइये न, कोण है आप?
आवाज : में क्यों बताऊ, आप खुद hi पता कर लो.
शिव : क्या में आपसे मिला हु?
आवाज : है मिले हो. (सामने आवाज जो आ रही थी उस से लग रहा था की उनको बहोत मज़ा आ रहा है ऐसे)
शिव : कब?
आवाज : वो में नहीं बताउंगी.
शिव : क्यों?
आवाज : हिहि hi, मेरी मर्जी.
शिव : आप कोण हो, कैसे मुझे जानते हो, बताइये न, या ऐसे hi बोल रहे हो.
आवाज : तो अभी भी आपको यकीं नहीं हो रहा की में आपको जानती हु, है न? आपका नाम शिव है जो अपने बताया पर ये तो नहीं बताया की आप बहोत लम्बे हो, आप 11व् कक्षा में साइंस में पढ़ते हो, और दुखकी बात है की आप अनाथ हो. (में अपने दिमाग पर जोर देने लगा और उस आवाज को याद करने की कोशिस करने laga)Ab यकीं हुआ की और भी कुछ बताऊ?
शिव : और क्या बताएंगी?
आवाज : बहोत कुछ है, पर वो में नहीं बता शक्ति, hihihi.(Me चुप हो गया, क्या बोलता, वो अपना नाम नहीं बता रही thi)Jyada अपने दिमाग पर जोर मात डालिये, और अपने लक्ष्य पर ध्यान दीजिये, में जो भी हु आपके जीवन में कोई महत्व नहीं रखती, तो ज्यादा परेशान मात होना, फिर से मेरी सुभकामनाये, bye.
शिव : प्लीज, अपना परिचय दीजिये न.
आवाज : मिलोगे तो दूंगी, bye.
शिव : पर कहा?
आवाज : वो भाग्य को पता, bye. (उन्होंने फ़ोन काट दिया)
जूही : (उसने थोड़ा थोड़ा सुना tha)Kon थी?
शिव : (वो अभी भी फ़ोन को देख रहा tha)Pata नाही?
जूही : तो ितनिदर क्या बात कर रहे थे?
शिव : वो मुझे जानती hai(Me अभी भी सोच रहा था)
जूही : आवाज से पता नहीं चला? (शिव ने ना में गर्दन हिलायी) होगी कोई, छोडो उसे. मेरी कोच सर से बात हुई थी, वो कल हमे वही मिलेंगे, वो बता रहे थे की कुछ लोग हमारी एंट्री का विरोध कर रहे है, पता नहीं क्या होगा कल.
शिव : किस बात का विरोध?
जूही : है कुछ लोग, जो अपना कोचिंग इंस्टिट्यूट चलते है, अगर ऐसे hi बहार से कोई आ के उनके वह के बच्चो को हरा देगा तो उनके वह कोण जायेगा, इस लिए ऐसे डायरेक्ट एंट्री को वो मन कर रहे है, कोच सर बात कर रहे है, देखते है क्या होता है.
शिव : (में जूही की बातो को भी सुन रहा था और साथ में उस आवाज के बारे में भी सोच रहा था की कोण थी वो? हमारी बाटे लगातार चल रही थी, लोगो को डिस्टर्ब न हो इस लिए हम धीमी आवाज में hi बात कर रहे थे, सूरज भी ढल चूका था, बस में भी लाइट चालू हो गयी थी, तभी बस एक जगह पर रुकी, चाय नास्ता करने के लिए)
जूही : चलो.
शिव : कहा?
जूही :चलो तो. (हम दोनों बस से उतरे और वो आस पास देखने लगी, फिर )चलो. (वो जिस और बढ़ी मेने देखा की वह शौचालय था, में कुछ नहीं बोलै, में बहार खड़ा रहा उसने अपना पर्स मुझे दिया और वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर बाद वो वापस आयी, वो शर्मा रही थी, उसने शरमाते हुए मेरे हाथ से पर्स लिया और kaha)tumhe नहीं जाना?
शिव : हम्म्म्म. (में भी वाशरूम हो आया, हम दोनों ने कॉफ़ी ली और बस के पास खड़े रह कर पिने लगे, थोड़ी देर बाद बस फिर से अपने सफर पर निकल गयी, बस वाले ने एक लाइट छोड़ कर साडी लाइट बजा दी, मेने देखा की जूही बंद खिड़की के कांच से बहार देख रही थी, वो जीन्स टॉप में थी, वो बहोत खूबसूरत लड़की थी और उसका मेरे प्रति समर्पण उसे और प्यारा बनता था, उसने अपने दोनों हाथ अपनी गॉड में रक्खे हुए थे, हम दोनों एक दूसरे से सात कर बैठे थे, मेने अपने दाहिने हाथ से उसका बया हाथ पकड़ा तो उसने मेरी और देखा, उसकी आँखों में शर्म चालक आयी, मेने बस उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया, वो हल्का मुस्कुरा के मुझे देखने लगी, मेने उसके हाथ को उठाया और उस पर किश की तो वो और शर्मा गयी और मेरे कंधे पर अपना शिव रख दी, थोड़ी देर हम ऐसे hi बैठे रहे, मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी, और उसकी सांसो से पता चल रहा था की उसकी भी वैसी hi हालत है, उसके साथ मस्ती करने का मान कर रहा था पर ऐसे पुब्लिकल्ल्य में रिस्क नहीं लेना चाहता था, मेने बाजूवाली सीट पर देखा तो वह दो बुजुर्ग दम्पति बैठे हुए थे और आंखे बंद किये हुए थे, जूही मेरे कंधे पर शिर रक्खे थी तो उसके बालो की खुसबू मुझे आ रही थी, मेने उसके थोड़े लम्बे नाखुनोवलि बड़ी ऊँगली को अलग किआ और उसे अपने मुँह में भर लिए )(शिव की इस हरकत से जूही ने हलकी सी सिसकी ली, जो बस मुझे hi सुनाई दी, उसने कोई विरोध नहीं किआ, उसको शिव की ऐसी हरकत अच्छी लग रही थी, उसके गरम मुँह का एहसास उसके अंदर हलचल मचा रहा था, उसने ऊँगली बहार निकली और दूसरी ऊँगली को अपने मुँह में लिए, जूही की सांसे भरी होने लगी थी, उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और शिव की झंघ पर रख दिया और हलके से दबा दिया, शिव उसकी उंगलिओ से खेल रहा था और वो गरम हो रही थी, उसकी योनि में गीलापन आने लगा था)
जूही : (फुसफुसाते hue)Koi देख लेगा (उसने बस इतना hi कहा)
शिव : में कहा कुछ कर रहा हु, बस हाथ hi तो है.
जूही : मुझे कुछ हो रहा है शिव, होटल में हम साथ hi रहनेवाले है.
शिव : तो??
जूही: वह जो चाहे कर लेना, यहाँ मेरी आवाज निकल जाएगी, में कण्ट्रोल नहीं कर पाऊँगी.
शिव : बस इतने से hi?
जूही : हा, तुम्हारे जरा सा छूने से hi में बेकाबू हो जाती हु शिईयिव. फिर मुझे मात दोष देना, में सबके सामने hi सुरु हो जाउंगी, बता दे रही हु. (उसने नशीली आँखों से मुझे देखते हुए कहा, उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था, में उसकी तड़प समाज सकता था)
शिव : ठीक है, (मेने उसका हाथ मुँह से निकल लीयपर अपने हाथ में hi रक्खा)
जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Bura लगा? (उसने मायूसी से कहा)
शिव : बुरा क्यों लगेगा, में समझता हु.
जूही : सॉरी यार, पर तुम्हारे छूने से में अपने आपको कण्ट्रोल नहीं कर पति.
शिव : तुम बहोत ज्यादा गर्म हो. (मेने उसके कान में कहा, वो मुस्कुरायी और शर्मा गयी) सच कहा न मेने? (उसने मुस्कुराते हुए हां में गर्दन हिलायी, मान तो मेरा भी बहोत कुछ करने का था पर हम दोनों इतने लम्बे थे की सीट से भी बहार दिख जाते थे, तो फिर हाथ में हाथ लिए बैठे रहे, वो मेरे कंधे पर अपना शिर टिका देती तो कभी सीट पर रख कर मुझे देखती, एक दूसरे के हाथ से बस खेल रहे थे, ऐसे hi वक़्त बिट गया और हम उस सहर पहुंच गए. दोनों ने अपने अपने बैग कंधे पर दाल लिए और बहार निकले, एक ऑटो रिक्शा से हम होटल पहुंचे जो जूही ने पहले से hi बुक किआ हुआ था. हम अंदर रिसेप्शन पर पहुंचे.
जूही : Hello, I’m जूही, ी हैवे बूकेड ा रूम ऑनलाइन फॉर तवो डेज.
रिसेप्शनिस्ट : जस्ट ा मूवमेंट मैडम (उसने अपने कंप्यूटर में चेक kia)Ya मां, प्लीज शो में योर ईद. (जूही ने सब फॉर्मलिटीज कम्पलीट की, वो 30-32 साल की लेडी थी, दिखने में खूबसूरत भी थी, वो बार बार मुझे देख रही थी, मुझे थोड़ी शर्म आयी तो में आस पास देख रहा था, थोड़ी देर baad)You हैवे बूकेड ओनली ओने रूम मां.
जूही : वे बोथ स्टे तोहिथेर, अन्य ऑब्जेक्शन माड़.
रिसेप्शनिस्ट : No मान नॉट ात आल, व्हाट इस यू पर्पस तो स्टे मां?
जूही : वे अरे हेरे फॉर ा कॉम्पिटिओं, व्हाई अरे यू आस्किंग?
रिसेप्शनिस्ट : यू haven’t मेंशन योर रिलेशन मां, जस्ट ाकिंग फॉर सिक्योरिटी पर्पस, यू क्नोव व्हाट हप्पेंस नाउ ा डेज, आईटी इस कंसर्न अबाउट आवर रेपुटेशन, सॉरी िफ़ यू उनकंफर्टबले.
जूही : No नॉट ात आल, यू अरे दोंग यू ड्यूटी, वे अरे फ्रेंड्स एंड पार्टिसिपेटिंग इन कॉम्पिटिओं (डाक्यूमेंट्स दिखते हुए) थिस इस डाक्यूमेंट्स िफ़ यू वांट तो चेक.
रिसेप्शनिस्ट : (डाक्यूमेंट्स को देखते hue)Thank यू मां, ी ऍम सतीसेफिइड, योर रूम नंबर इस 303 मैडम, थिस इस योर के card.(Usne के देते हुए कहा)
जूही : थैंक यू मैडम.
रिसेप्शनिस्ट : कॉल में राशि, मां (उसने मुस्कुराते हुए कहा और मुझे देखा, में बस मुस्कुराया).
जूही : थैंक यू राशि.
राशि : हैवे नीस स्टे मां.
जूही : यू कैन कॉल में जूही, राशि. (उसने मुस्कुराते हुए शिर हिला के हां कहा, हम दोनों लिफ्ट की और बढ़ गए, मेने लिफ्ट में जा कर देखा तो वो अभी भी मुझे hi देख रही थी, जूही ने भी ये देखा, जैसे hi लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ उसने मेरी बाह पर जोर से मारा)
शिव : ोूछ! मर क्यों रही हो.
जूही : मेरी मर्जी (राशि को ऐसे घूरते देख उसे जलन हुई थी इस लिए उसने शिव को मारा था, वैसे शिव की कोई गलती नहीं थी, वो hi उस पर लट्टू हो रही थी)
वह वो लड़की बीएड पर लेती हुई थी और शिव के बारेमे सोच रही थी, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किआ था, वो सोच रही थी की वो बता सकती थी की वो कोण है, पर ऐसा कर के उसे बहोत मज़ा आया था, वो बहोत सीधी सदी लड़की थी, ऐसा कभी नहीं किआ था उसने, पर ऐसे hi सुरु हुई बात इस मोड़ पर ख़तम होगी उसे खुद नहीं पता था, उसने फ़ोन निकला और टाइम देखा, फिर मुस्कुराते हुए उसने मश्ग टाइप किआ,
‘गुड नाईट, don’t थिंक अबाउट में’. उसने मश्ग किआ और मुस्कुराने लगी, उसे भी मज़ा आ रहा था ऐसे, उसने जान बुज कर ऐसा लिखा था ताकि अगर वो भूल भी गया हो उसे तो फिर उसके बारे में सोचे, क्यों वो तो उसको भी पता नहीं था, वो बार बार शिव को याद कर रही थी, ऐसे hi वो सो गयी.
में और नाज़िआ दीदी बस से सफर कर रहे थे, वो थोड़ी अपसेट थी, वो खिड़की के पास बैठी थी और में साइड में, बस तवो सीटर थी, जब बस सिटी से बहार निकली तो मेने उनके हाथ पर हाथ रख दिया, उन्होंने मेरी और देखा फिर आस पास देखा, कोई नहीं देख रहा है ये सुनिश्चित होते hi, वो फिर से बहार को देखने लगी, पर अपना हाथ नहीं छुड़ाया.
शिव : क्या हुआ? (हलाकि में जनता था)
नाज़िआ : तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था, क्या जरुरत पद गयी थी?
शिव : (उनके हाथ को अच्छे से पकड़ा और ऊँगली ो में ऊँगली फसा kar)Aapne hi तो कहा था की वो और आपकी सास मिल कर आपको परेशान करते थे, तो मेने सोचा की वो मेरे साथ जुड़ जाएगी तो आपके साथ भी अच्छे से रहे गई, बस मेने इतना hi सोचा था.
नाज़िआ : बच्चे की खुशखबरी के बाद, वैसे भी वो सब अच्छे हो hi गए थे na.(Usne नाराजगी से कहा)
शिव : मुझे थोड़ी न पता था, वैसे भी वो सब शायद नाटक भी कर रहे हो सकते थे, और मेने कुछ नहीं किआ था, वो खुद hi आयी थी. (उसने शिव की और देखा, वो बस भोली सूरत बनाये उसको सफाई दे रहा था, हलाकि वो समाज रही थी की उसको सफाई देने की कोई जरुरत नहीं थी, वो उसका पति नहीं था, न hi उसके साथ वफादार रहने की उसको कोई जरुरत थी, पर फिर भी वो उसको अपनी सफाई दे रहा था, जिस से पता चल रहा था की उसकी नाराजगी भी शिव के लिए मायने रखती है, उसका मान शांत होने लगा, वो उसके चेहरे के देख ने लगी, वैसे भी वो भी तो इसके चेहरे और उसकी पर्सनालिटी से उसकी और खींची चली गयी थी, उसके फंक्शन में भी न जाने कितनी कुवारिओ के दिल उसने लुटे थे, इनायत तो फिर भी एक तलाक सुदा थी, उसको देख कर उसका मान मचलना स्वाभाविक था, पर इतनी जल्दी वो सब हो गया उसका उसे आश्चर्य था, वो फिर मुस्कुरादि और खिड़की से बहार देखने लगी, वो अपनी मुस्कराहट छुपा रही thi)(Meri समाज में नहीं आया, तो मेने puchha)Ab मुस्कुरा क्यों रही है?
नाज़िआ : (मुस्कुराते हुए मेरी और dekha)Bechari इनायत (वो है पड़ी)
शिव: अब ऐसे क्यों कह रही हो?
नाज़िआ : तो और क्या कहु, इस भोली भली सूरत को देख कर वो उस पर मर मिटी होगी, उसे क्या पता होगा की क्या हालत होगी उसकी, रहें नहीं आया तुम्हे उस पर? (वो है रही थी)
शिव : (शरमाते hue)Mene आराम से hi किआ था. (दोनों फुसफुसाते हुए बात कर रहे थे)
नाज़िआ : मेने देखि उसकी हालत, आराम से किया था wale.(Unki हसी रुक नहीं रही थी)
शिव : सच बोल रहा हु में.
नाज़िआ : जब पागल हो ते हो तो कहा होश रहता है तुम्हे, मुझे मात समजाओ, क्या हालत होती है मुझे नहीं पता क्या, अब वो भी समाज गयी होगी, वैसे उसे बताना मात के मुझे पता है.
शिव : क्यों?
नाज़िआ : क्यों क्या, वो क्या सोचेगी, की भाभी को पता है फिर भी भाभी कुछ नहीं बोली, उसको हम दोनों के सम्बन्ध पर भी शक हो सकता है, वैसे तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, पर फिर भी सामने से क्यों बताना, और तुम थोड़ी न मेरे वह आनेवाले हो.
शिव : क्यों? आप नहीं चाहती की में वह औ?
नाज़िआ : लगता है बहोत पसंद आयी मेरी नानन्द (उसने मुस्कुरा के कहा)
शिव : उसके लिए नहीं कह रहा, आप भी तो आ जाएगी यहाँ, आपको नहीं मिलना मुझसे?
नाज़िआ : सचमे, मुझसे मिलने आओगे तुम? (उन्होंने प्यार से कहा)
शिव : (उनके हाथ को दूसरे हाथ से सहलाते hue)Apane बच्चे और उसकी माँ को मिलने आना तो पड़ेगा hi. (नाज़िआ शर्मा गयी और उसकी बाह पकड़ कर उसपे अपना शिर रख दिया)
नाज़िआ : कितना अजीब है न, कुछ समय पहले तो में तुम्हे जानती भी नहीं थी और अब पूरी जिंदगी तुम मेरे साथ रहोगे (फिर मुस्कुरा kar)Waise भी एक बच्चे से क्या होगा, दो- तीन तो चाहिए hi (बोलते बोलते वो खुद शर्मा गयी, में बस मुस्कुरा दिया)
ऐसे hi बाटे करते हुए पूरा सफर कैसे ख़तम हो गया पता hi नहीं चला. दोनों स्टेशन पर उतरे और रिक्शा से घर चले गए. जब घर पहुंचे तो आंटी ने दरवाजा खोला, अपनी बेटी को गले लगते हुए उन्होंने मुझे देखा, पर फिर नज़ारे झुका ली, वो दोनों अंदर गए, में सामान लिए उनके पीछे अंदर दाखिल हुआ. अंकल भी नहीं थे न hi संयम थी. अंकल बहार गए थे और संयम स्कूल गयी होगी. आंटी पानी ले आयी, में और नाज़िआदिदी वही सोफे पर बैठे हुए थे, पानी पि कर मेने कहा.
शिव : अब में चलता हु दीदी, और कोई काम हो तो कहियेगा.
ज़ोया : (हिचकिचाते hue)Wo... खाना बन गया है. (मेने उनकी और देखा पर उन्होंने नजर घुमा ली)
नाज़िआ : चलो, हाथ मुँह धो लो, खा कर hi जाना. (में क्या बोलता, तो हाथ मुँह धोया और खाने बेथ गया, में और नाज़िआ दीदी hi खाने बैठे थे)
शिव : (आंटी ko)aap नहीं खाएंगी.
ज़ोया : (नज़ारे इधर उधर करते hue)Nahi, अभी संयम भी आ जाएगी, उसके साथ खाउंगी.
हम खाना खा रहे थे की संयम भी आ गयी, में ने उसको देखा, उसने मुझे देखा तो में मुस्कुराया पर वो मुस्कुरायी नहीं, बस अपना बैग वह रखा.
नाज़िआ : कैसी है संयम?
संयम : (बजे मन se)Achchhi हु आप.
नाज़िआ : ऐसे क्यों बोल रही है, कुछ हुआ है क्या?
संयम : (उसने अपनी अम्मी को देखा फिर शिव ko)Kuchh नहीं आप, बस थक गयी हु, आती हु, (कह कर वो बाथरूम में चली गयी.).
ज़ोया : (उसका मान बैठने लगा, उसे अब यकीं हो रहा था की ये जरूर देख चुकी है, उसे अपने आप पर बहोत गुस्सा आ रहा था, वो अपनी hi बेटी के आगे शर्मशार हो रही थी, उसका भी चेहरा लटक गया)
नाज़िआ : इससे क्या हुआ है?
ज़ोया : (वो परेशान हो रही थी, क्या बताती अपनी बेटी को की शायद उसे मेरी रंगरलिओ के बारेमे पता चल गया hai)Pata नहीं, शायद थक गयी होगी, साइकिल से गयी थी न आज. (उसने ऐसे hi बहाना दिया)
नाज़िआ : क्यों?, वैस्वी नहीं आयी थी?
ज़ोया : नहीं, वो आज कही बहार गयी है. (तभी संयम बहार आयी, उसको देख कर ज़ोया ने बहोत प्यार से puchha)Khana लगा दू? (उसने अपनी अम्मी को देखा फिर शिव को देखा, दोनों ऐसे बेहवे कर रहे थे जैसे उनके बिच कुछ है hi नहीं, संयम को गुस्सा आ रहा था)
संयम : नहीं, थोड़ी देर बाद, में कपडे बदल कर आती हु. (उसने रूखे पैन से जवाब दिया, और बैग ले कर ऊपर चली गयी)
नाज़िआ : हुआ क्या है इससे, शिव से एक शब्द भी नहीं बोली वो, क्या हुआ है तुम दोनों के बिच शिव? लड़ाई वादे तो नहीं hui(Mene बस इससरए से कहा की क्या pata)Kamal है. (हम खाने लगे, वो निचे नहीं आयी, मेरा खाना भी हो गया, मेने हाथ धो लिए.
शिव : अब में चलता हु.
नाज़िआ : एक मिनट (संयम को आवाज देते hue)Samim, ो संयम.
संयम : (ऊपर se)Ha आप?
नाज़िआ : शिव जा रहा है.
संयम : है ठीक है. (उसने ऐसे जवाब दिया जैसे उसको कोई फर्क नहीं पद रहा, नाज़िआ को कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था)
शिव : में चलता हु, फिर मिल लूंगा.
नाज़िआ : है, ठीक है, कब वापस आओगे?
शिव : दो तीन दिन बाद.
नाज़िआ : अच्छा ठीक है, अच्छे से करना, और अपनी कामियाबी के बाद फ़ोन जरूर कर देना. (संयम ऊपर से सब सुन रही थी, उसका मान हुआ की जा कर शिव को आल थे बेस्ट कहे, पर वो नहीं गयी)
शिव : पहले कामियाब तो हो जाऊ.
नाज़िआ : जरूर हो ो गए, में उपरवाले से दुआ करुँगी, वो तुम्हे जरूर कामियाबी देगा.
शिव : थैंक यू, ठीक है में चलता हु, bye (मेने आंटी को देखा तो उन्होंने बस मुस्कुरा कर गर्दन हिलायी, में वह से निकल गया)
वही आज सुबह मिक्की ने वैस्वी के लिए फार्म हाउस पर छोटी सी ट्रीट रक्खी थी, उसने वैस्वी को कहा था पर उसने मन कर दिया था तो उसने प्रकाश अंकल को hi बोलै तो वैस्वी को मान मार का आना पड़ा था, पर वो अकेले नहीं जाना चाहती थी, उसने झंविदिदी को फ़ोन किआ और उन्हें साथ चलने को कहा, वो नहीं मान रही थी तो उसने भी आने से इंकार कर दिया, तो जहान्वी भी आ गयी थी. वैस्वी जहान्वी के साथ hi बैठी थी. वो चुप चुप hi थी.
जहान्वी : क्या हुआ, अच्छा नहीं लगा, यहाँ आकर? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, जहान्वी ने अपने भाई को देखा जो अपने दो दोस्तों के साथ बियर पि रहा था, उसको भी अच्छा नहीं लग रहा था पर क्या करती) उसने तुम्हारे लिए hi यहाँ ये ट्रीट रक्खी है, तुम उस से मिलोगी, बात करोगी तभी तो उसके साथ बनेगी तुम्हारी. (वैस्वी फिर भी कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये बैठी थी, जहान्वी जानती थी की वैस्वी उसके भाई को पसंद नहीं करती) देखो वैस्वी, तुम्हारे घर वालो ने भी सहमति जताई है, फिर ऐसे रहने से क्या फायदा, घुलेगी मिलोगी तो तुम्हारा भी मान लग जायेगा. (वैस्वी के आँख में अस्सू भर आये, जहान्वी को भी समाज नहीं आ रहा था की वो क्या कहे, वो उठ कर गयी और उसके लिए पानी ले aayi)Lo पानी पीओ.
वैस्वी : (पानी ले कर पिया और अपनी आंख से आंसू pochhe)Me ये शादी नहीं करुँगी. (वो बस इतना hi बोली)
जहान्वी : इसमें में क्या कहु, ये तो तुम्हारे पापा लोग hi डीडे करेंगे. (वैस्वी ने तप्ले पर गिलास रक्खा और वाश रूम की और चली गयी, जहान्वी उसे जाते देख रही थी, मिक्की की भी नजर पड़ी तो वो बियर रख कर उसके पीछे चला गया, जहान्वी ने भी ये देखा, पर वो क्या कर शक्ति थी, वो बस बैठे रही, वैसे भी उसको साइट पर जाना था, शिव से बात करनी थी, उसने अपना मोबाइल देखा, और सोचने लगी की पुछु की न पुछु की आएगा की नहीं. पर फिर मश्ग नहीं किआ और फ़ोन रख दिया)
वह वैस्वी वाश रूम में जा कर चेहरा साफ़ कर के बहार निकली तो मिक्की खड़ा था, वो घबरा गयी, और साइड से जाने लगी.
मिक्की : सुनो तो. (वो नहीं रुक रही थी तो मिक्की ने उसकी बाह पकड़ li)Ruk बोलै न.
वैस्वी : छोडो मुझे.
मिक्की : क्या प्रॉब्लम है तेरी, तेरे लिए hi सब अर्रंगे किआ है मेने, सोचा था की अकेले में मिलेंगे.
वैस्वी : मुझे नहीं मिलना (उसने अपनी बाह छुड़ाने का प्रयास किआ)
मिक्की
वैस्वी : (अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करते hue)Chhodo मुझे.
मिक्की : किस बात का घमंड है तुजे है, जरा सा भाव क्या दिया, तू तो शिर पे चढ़ रही है, आज तेरी अकड़ ठिकाने लगा ता हु, चल (कहते हुए वो उसे एक और ले जाने लगा, वैस्वी रोने लगी)
वैस्वी : छोडो मुझे, में चिल्लाऊंगी.
मिक्की : जितना मर्जी हो चिल्ला, ये मेरे बाप की जगह है, किस मई के लाल में हिम्मत है जो यहाँ आये.
वैस्वी : प्लीज मुझे छोड़ दो, में तुम्हारे हाथ जोड़ती हु.
मिक्की : हाथ जोड़ या पैर पकड़, आज तेरी अकड़ ठिकाने लगा कर hi रहूँगा, बहोत नखरे दिखा लिए तूने, साली, फ़ोन नहीं उठाएगी, बात नहीं करेगी, क्यों? (वह जहान्वी अकेले बोर हो रही थी तो उसने कान में लगे ब्लू टूथ में गण चला दिया था और आंख बंद किये कुर्शी पे बैठी थी तो उसे ये सब पता नहीं चला, मिक्की उसे घसीट के एक रूम की और ले जाने लगा, उसके दोस्तों ने ये देखा और हसने लगे)
एक दोस्त : आज तो ये गयी. (दोनों हसने लगे, वही दूसरे काम करनेवाले भी थे, पर सब ने ान देखा hi कर दिया)
वैस्वी : (रट हुए, जोर se)Chhodo मुझे.
मिक्की : छोड़ दूंगा, पहले देख तो लू की साली तू चीज क्या है.
वैस्वी : में जानती थी की तुम एक नंबर के घटिया इंसान हो, इसीलिए मुझे शादी नहीं करनी है. (उसने रट हुए कहा)
मिक्की: क्यों, उस लम्बू के साथ तो बड़ी चिपक के बेथ टी है, तू क्या समजती है, मुझे पता नहीं है, उस लम्बू से भी हिसाब देखना है, पहले तुजसे तो निपट लू.
वैस्वी : (चटपटेने लगी, और खुद को जोर जोर से छुड़ाने का प्रयास करने लगी, मिक्की के लिए भी संभालना मुश्किल हो रहा था, वैसे भी वो उसके बराबर लम्बी थी, और शरीर से भी अच्छी खासी थी, वो जी तोड़ प्रयास करने लगा, उसकी भी हालत ख़राब हो रही थी उसको खींचने में और पकड़ने me)(Tabhi जहान्वी ने आंख खोली, सब लोग किसी और देख रहे थे, उसने बस ऐसे hi देखा तो उसको मिक्की और वैस्वी दिखे, मिक्की वैस्वी को खिंच रहा था और वैस्वी अपने आपको छुड़ाने का प्रयास कर रही थी, वो फ़ौरन उठी)
जहान्वी : मिक्कीीीी. (अभी वो बोली hi थी की वैस्वी ने जोर से मिक्की को धक्का दिया तो वो लदखते हुए दो तीन कदम पीछे हुआ और धड़ाम से जमीं पर लुढ़क गया, और वैस्वी वह से बहार के गेट की और जल्दी से चलते हुए जाने लगी)
मिक्की : (वो नशे में भी था और ऊपर से वैस्वी में ताकत भी थी, उसके अंदर के मर्द को ये सेहन नहीं हुआ, उसने अस्स पास देखा तो सब उसे hi हैरत से देख रहे थे, वो लड़खड़ाके उठा और वैस्वी की और lapka)Sali, मुझे धक्का देती है. (जहान्वी तब तक वह पहुंच गयी थी, मिक्की वैस्वी तक पहुचनेवाला hi था की जहान्वी ने बीचमे आ कर उसे पकड़ लिया)
जहान्वी : मिक्कीीी, क्या कर रहा है?
मिक्की : (गुस्से me)Sali मुझे धक्का देती है, होनेवाला पति हु उसका, मेरी जो मर्जी होगी में करूँगा.
जहान्वी : (मिक्की को पकड़ते hue)Chup कर, क्या बोल रहा है तू.
मिक्की : छोडो मुझे, आज में उसको उसकी औकात दिखा के रहूँगा.
जहान्वी : क्यों तमसा बना रहा है, (उसके दोस्तों की और देख ke)Eeiiii, इसको ले के जाओ (वो दोनों दौड़ कर आये और मिक्की को पकड़ लिया, जहान्वी ने देखा की वैस्वी गेट तक पहुंच गयी hai)Vaiswiiiiiii, सुनो तो.
(गेट पर खड़ा दरबान गेट नहीं खोल रहा था तो वैस्वी ने उसे घर कर देखा तो वो दर गया और दरवाजा खोल दिया, वो बहार निकल गयी, जहान्वी अपनी गाड़ी की और बढ़ी, वो भी गाड़ी ले कर बहार निकली, वैस्वी पैदल hi चलते हुए जा रही थी, वो उसके पास पहुंच गयी, वैस्वी ने देखा पर वो रुकी नहीं चलती hi रही)
जहान्वी : अंदर आ जाओ, में तुम्हे घर छोड़ देती हु. (वैस्वी ने गुस्से से देखा, उसके पास और कोई रास्ता नहीं था तो वो बेथ गयी, जहान्वी ने गाड़ी चला दी, दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, थोड़ी दूर जा कर वो boly)Sorry यार. (वैस्वी ने उसको देखा, फिर अचानक उसकी आँखों से आंसू निकल आये) तुम रो मात, वो बेवकूफ है, उसको इतनी भी तमीज़ नहीं की कैसे बेहवे करना चाहिए. मुझे नहीं पता था की ऐसा होगा यार. अगर मुझे पता होता तो में तुम्हे लती hi नहीं. सॉरी.
वैस्वी : (अपने अस्सू पोछते hue)Aap क्यों सॉरी बोल रहे हो, मेरी किस्मत hi ख़राब है, पर में ये शादी हरगिज़ नहीं करुँगी, मार जाउंगी पर ये शादी नहीं करुँगी. बोल देना अपने भाई को.
जहान्वी : ये सब घर पे मात बोलना यार, बबल हो जायेगा.
वैस्वी : आपको क्या लगता है की ये सब बोलूंगी तो कोई फर्क पड़ेगा, सब जानते है, आपका भाई मशहूर है, मेरे पापा को भी पता है, और आपको भी पता hi होगा की आपका भाई कैसा है, पर अब बहोत हो गया, अब न में अपने पापा की सुनूंगी न और किसी की, देखती हु कोण मुज पर जबरदस्ती करता है. (उसने गुस्से से कहा, जहान्वी ने गाड़ी रोक दी और वैस्वी को देखने लगी)
जहान्वी : यार तुमतो बड़ी खतरनाक हो. (वैस्वी कुछ नहीं बोली) में भी एक लड़की हु यार, मुझे कदर है तुम्हारे जज्बात की, में तुम्हारे साथ हु Vaiswi(Usne अपना हाथ वैस्वी के हाथ पर रख दिया, वैस्वी ने उसकी और देखा, उसकी आँखों में सच्चाई थी, वैस्वी हल्का मुस्कुरायी, जहान्वी ने मुस्कुराते हुए kaha)Waise भी तुम्हे संभालना उसके बस की बात नहीं. (अपने भाई के बारे में बोलते हुए वो है दी, वैस्वी शर्मा gayi)Achchha है, उसे भी समाज आ गया होगा की लड़कीअ एंटनी भी कमजोर नहीं होती, वो खुसी से सबकुछ दे तो ठीक है वर्ण किसी की मजाल नहीं जो जबरदस्ती कर ले, क्यों? (वैस्वी अब थोड़ी रिलैक्स हो गयी थी, वो मुस्कुरायी, दोनों फिर घर की और निकल गए, दोपहर हो रही थी, जहान्वी ने वैस्वी को घर छोड़ दिया, स्वर्ण थोड़ी टेंशन में थी क्यों की वो जानती थी की वैस्वी को पसंद नहीं फिर भी गयी थी.)
स्वर्ण : आ गयी?
वैस्वी : (नार्मल हो kar)Ha भाभी, खाना है?
स्वर्ण : क्यों खा कर नहीं आयी?
वैस्वी : नहीं भाभी, है तो बोलो वर्ण चलेगा.
स्वर्ण : खाना क्यों नहीं होगा, में भी बाकि hi हु, चल साथ में कहते है. (स्वर्ण ने खाना निकला और दोनों साथमे बेथ गए, खाना कहते हुए वैस्वी को देखते हुए वो बोली) वह क्यों खा कर नहीं आयी, मेने तो सुना था की तू खा कर आएगी.
वैस्वी : छोडना भाभी, में उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती. (स्वर्ण ने भी ज्यादा कुछ नहीं पूछा, वैस्वी खाना खा कर अपने कमरे में चले गयी, वह जा कर वो सोचने लगी, जो हुआ था उसके bareme)Me क्यों बताऊ किसी को, अब मुझे कोई दर नहीं है, आने दो दोबारा, देखती हु, बड़ा आया मुज पे जबरदस्ती करनेवाला, है क्या उसमे जो मेरे साथ जबरदस्ती करेगा, ये तो सिर्फ धक्का दिया था, अगर अब सामने आया न तो पूरा मुँह नोच लुंगी, कमज़ोर समजा है क्या मुझे, और एक वो है, जो ऐसे पकड़लेता है की छूट hi न पाओ. (शिव को याद करते हुए उसकी आंखे बंद हो गयी, तभी उसे याद आया की आज वो जानेवाले है, उसने अपना फ़ोन निकला और मश्ग किआ.)
वैस्वी : Hi. (वो थोड़ी देर मोबाइल को देखती रही पर सामने से कोई मश्ग नहीं आया, वो आंखे बंद किये हुए लेट गयी, दस मिनट बाद उसके फ़ोन की मश्ग टोन बजी, उसने फ़ौरन फ़ोन देखा)
शिव : Hi.
वैस्वी : कॉल करू? (उसने फ़ौरन मश्ग किआ, थोड़ी hi देर में सामने से शिव का कॉल आने लगा, उसने फ़ौरन उठा liya)Hiii (बहोत प्यार से)
शिव : (वो अपने रूम में बैठा था, सब खाना खा रहे थे, वो खा कर आया tha)Hi, कैसी हो?
वैस्वी : आ गए तुम?
शिव : है, एक दो घंटे पहले hi आया. आज स्कूल नहीं गयी थी?
वैस्वी : है (थोड़ा रूखी आवाज me)Kaam था.
शिव : क्या हुआ?
वैस्वी : (सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं, आज जानेवाले हो न तुम?
शिव : है शाम को निकलना है?
वैस्वी : कितने बजे जाओगे?
शिव : 6 बजे की बस है, क्यों.
वैस्वी : (घडी देखते hue)Me मिलने औ, मिलोगे?
शिव : कहा?
वैस्वी : (सोचते hue)Me घर hi आती हु, चार बजे, चलेगा न?
शिव : है है, आ जाओ.
वैस्वी : तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी वह से.
शिव : नहीं, मुझे जूही के वह जाना पड़ेगा, हम दोनों साथमे जा रहे है न, तो 5 बजे उसके घर जाना है.
वैस्वी : कोई बात नहीं, में उनके घर छोड़ दूंगी. आती हु फिर.
शिव : ठीक है, मिलते है.
में अपनी पैकिंग कर रहा था, एक घंटे बाद लता मेरे कमरे में आयी. में चेयर पर बैठा था, और बैग वही पड़ा था.
लता : तूने क्यों की पैकिंग, में कर देती न.
शिव : (मुस्कुराते hue)Mene कर दी. खा लिया.
लता : है, (थोड़ी उदासी se)Kab आएगा?
शिव : बताया तो था, फिर क्यों पूछ रही हो? (उनका हाथ पकड़ कर, अपने पास खिंचा, वो नजदीक आ गयी)
लता : नहीं बस ऐसे hi.
शिव : कुछ लाना है (में जा रहा था तो वह से लेन के लिए मेने पूछा)
लता : है.
शिव : क्या?
लता : खुशखबरी. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, और मेरे शिर को पकड़ कर अपने स्तन पे दबा दिया, प्यार se)Me भगवन से प्राथना करुँगी, अच्छे से करना सब. (तभी दरवाजे पर खत खत हुई)
सरिता : उह्हू uhhuuu(Khasne की एक्टिंग) (लता तुरंत दूर हो गयी, सरिता को देख कर एकदम शर्मा gayi)Baad में औ क्या?
शिव : है. (मेने बस चिढ़ाने के लिए कहा)
लता : (घबराते hue)N न नहीं, आआआओ. (सरिता मुस्कुराते हुए अंदर आयी).
सरिता : शुभकामनाये देने का मेरा भी हक़ है. (उसने भी शिव को वैसे hi अपने उरोजों में दबा दिया जैसे लता कड़ी thi)Bhagvan तुजे मेरे भाग्य का सारा सुख दे. (उन्होंने बहोत बड़ी बात बोल दी थी, वो मुझसे कितना प्यार करती है ये उनकी इस बात से पता चल रहा था, में खड़ा हुआ और उनको अपने गले लगा लिया, वो भी मुझसे लिपट गयी, लता कड़ी देख रही थी तो मेने दूसरा हाथ भी बढ़ाया तो वो भी मेरे गले लग गयी)
रंजन : में bhiiiiiiiiii (वो चिल्लाते हुए अंदर दौड़ी, और आ कर हमसे लिपट गयी, गायत्री और विणा ने भी उसकी आवाज सुनी तो वो दोनों भी रूम की और आयी, वह का दृश्य देख कर वो दोनों मुस्कुराने लगी तो मेने उनको भी इस्सर किआ तो वो दोनों भी आ गयी, सब की सब मेरे गले लगे हुए थी, ये बस प्रेम था, और इस बात का प्रमाण की हम सब साथ है. मुस्कुराते हुए सब अलग हुए)
लता : रंजन, जा तो दिया और कम कम ले आ. और है चावल भी लाना थोड़े से. विणा एक कुर्शी ले आ.
रंजन : अभी लायी दीदी. (तभी बहार जीप की आवाज आयी, हम सब रूम से बहार आये तो देखा की भार्गवी मैडम अंदर आ रही थी)
शिव : मैडम आप?
भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Kyu, नहीं आ सकती?
शिव : नहीं नहीं, जरूर आ शक्ति है, वो तो आप अचानक आयी तो पूछा. आइये.
भार्गवी : तो, तयारी हो गयी सब?
शिव : (मुस्कुराते हुए) जी हो गयी. (तभी रंजन एक थाली में दिया ले कर आ गयी, और विणा एक चेयर)
भार्गवी : अरे वह, सही टाइम पर आयी में.
लता : (शरमाते hue)Ha वो जा रहा है न तो ...
भार्गवी : बिलकुल सही किआ तुमने, सुरु करो.
लता : जी. (सरिता की और देख kar)Tu सुरु कर. तू बेथ कुर्शी पर.
सरिता : (हस्ते हुए आयी और थाली में दिया जलाया, फिर रंजन के हाथ से थाली ले कर लता को देते hue)Sabse पहले तेरा hi हक़ है, क्यों शिव? (में बस मुस्कुराया, लता ने प्यार से सरिता को देखा और शिव को टिका लगाया फिर, चावल, भार्गवी फोटो लेने लगी, लता ने फिर थाली सरिता की और बधाई)
सरिता : अरे आरती तो उतर.
लता : वो सब साथमे करेंगे. (सरिता भी मुस्कुरा दी, उसने थाली ली और टिका किआ और चावल लगाए, फिर उसने गायत्री को देखा तो उन्होंने भी लगाया, उन्होंने रंजन को बुलाया)
रंजन : मैडम को दो पहले. (सब रंजन को देखने लगे) ऐसे क्या देख रहे हो, वो इतनी दूर शिव को विश करने hi तो आयी है क्यों दीदी? (भार्गवी को भी बहोत मान था पर सबके सामने उसको संकोच हो रहा था, पर उस नटखटने उसके मान की बात पढ़लि थी, वो बस मुस्कुरायी, रंजन ने थाली उनकी और बढ़ा दी और उनके हाथ से मोबाइल ले लिया, भार्गवी ने अपने जुटे निकले और शिव के सामने कड़ी हो गयी, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, आज वो सबके सामने जैसे एलान कर रही थी की शिव का उसके साथ कोई खास रिस्ता है, उसने शिव को टिका लगाया, और चावल भी लगाया, शिव उनको hi देख रहा था, भार्गवी के चेहरे पर बहोत छुपाने पर भी हलकी सी शर्म उभर आयी थी, तभी बहार स्कूटर की आवाज आयी, सब दरवाजा देख रहे थे, की वैस्वी अंदर आयी, साथमे स्वर्ण भी thi.Vaiswi ने जब स्वर्ण को बहार जाने के लिए कहा था तो उसने पूछा की कहा जा रही है तो उसने सही सही बता दिया की वो शिव को बेस्ट विशेष देने जा रही है तो स्वर्ण से रहा नहीं गया और वो भी साथ चली आयी, वैस्वी ने भी बुरा नहीं मन न आश्चर्य किआ क्यों की वो भी शिव को जानती थी)
वो दोनों अंदर का माहौल देख कर मुस्कुरायी और नजदीक आ कर कड़ी हो गयी. रंजन ने टिका लगाया और चावल लगाया, फिर विणा को बुलाया, वो भी शरमाते हुए आ गयी, उसने भी वैसे hi किआ, सब का ख़तम हो गया था. (ये सब देख कर स्वर्ण और वैस्वी का दिल भी कर रहा था पर संकोचवश कुछ नहीं बोली) विणा आस पास देखने लगी की अब किसको थाली दे.
लता : वैस्वी, तुम भी करो (वैस्वी का दिल जोरो से धड़क गया, उसकी हिम्मत नहीं हुई की वो किसी की नजर का सामना करे, वो शिर झुकाये आगे बढ़ी और उसके हाथ से थाली ले ली)
वैस्वी : (थाली लिए शिव के पास गयी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर वो इस मौके को खोना नहीं चाहती थी, उसने शिव के कपल पर दोनों लगा दिए, शिव उसको hi देख रहा था तो उसे बहोत शर्म आ रही थी और साथ में खुस भी थी)
लता : (वो स्वर्ण के बारेमे ज्यादा जानती नहीं थी तो boli)Aap सुभकामना देना चाहेंगी?
स्वर्ण : है क्यों नहीं (उसने ऐसे hi बोलै जैसे जाता रही हो की सब कर रहे है तो में भी कर रही हु, पर अपने दिल का हल वो hi जानती थी, वो ये जानती थी की जिस तरह का शक मनीषा दीदी और बिना भाभी दर्शा रही है उस हिसाब से तो वो उसका भाई है, और दूसरी और उसके बच्चे का बाप भी, वो दिल hi दिल में ढेर साडी सुभकामनाये देने लगी, उसने भी तिलक किआ और चावल लगाए पर अचानक उसने दोनों हाथ फैला कर उसकी बलए भी ले ली, उसकी आँखों से आंसू भी चालक aaye)(Sab हैरानी से देख रहे थे, वैस्वी को भी आश्चर्य हो रहा tha)(Swarna को भी ध्यान आया की उसने भावनाओ में बह कर कुछ ज्यादा hi कर दिया है पर अब हो चूका था, उसने अपने ासु पोछे)
स्वर्ण : वो मुझे किसी अपने की याद आ गयी. (लता उसके पास ेयी, और उनके कंधे पर हाथ रख कर मुस्कुरायी जैसे कह रही हो की कोई बात नहीं)
लता : आओ फिर आरती उतारते है इसकी. (लता के आस पास सह कड़ी हो गयी और एक दूसरे के हाथ को अपना हाथ टच करवादिया, लता आरती उतरने लगी)
शिव : (में सबको देख रहा था और मान में सोच रहा था की पूरी फ़ौज है यार ये तो और वो भी आधी )
सरिता : (उसको ऐसे देखते dekh)Kyu दार लग रहा है? (मुस्कुराते हुए वो बोली)
शिव : (उन्होंने मेरे मान की बात पकड़ ली थी, मेने शांत हो कर kaha)Kaisa दर?
सरिता : इतना की जिम्मेदारी का dar(wo मेरी खिंचाई कर रही थी)
भार्गवी : (उसको भी अंदाजा हो रहा था, शिव उसको काफी कुछ बता चूका tha)Usko क्यों जिम्मेदारी लेनी है, हम सब है न, सब मिल कर उसकी जिम्मेदारी उठालेंगे, क्यों क्या कहती हो? (सब है pade)Are सुन तो (रंजन को देख kar)Wo आगे सीट पर एक पैकेट पड़ा होगा ले आ तो. (रंजन बहार भागते हुए गयी और वो पैकेट ले आयी, उसने पेंदे थे, सबने मुँह मीठा किआ, तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी मेने देखा तो जूही का फ़ोन था)
शिव : Hello.
जूही : हो गए तैयार?
शिव : है वो...
लता : किसका फ़ोन है?
शिव : जूही का.
लता : दे मुझे. Hello, जूही.
जूही : है, लता (आवाज पहचान कर)
लता : तुम तैयार हो गयी हो?
जूही : है, क्यों?
लता : सामान ले कर यही आ जाओ.
जूही : पर क्यों?
लता : आओ बोलै न (हक़ से)
जूही : हां आती हु. (उसको समाज नहीं आया, उसने सोचा था की शिव को जल्दी बुला कर थोड़ा टाइम बिताएगी, वो सामान उठायी और स्कूटर ले कर चली गयी, जब वो वह पहुंची तो सब को देख कर वो हैरान हो गयी)
लता : आओ बैठो yaha(Pehle जहा शिव बैठा था वही बैठा दिया, बरी बरी सबने टिका और चावल लगाए, पहले जूही बहोत खुस हुई पर फिर जैसे जैसे सबने उसकी आरती उतरी उसकी आंखे भर आयी, लता उसके पास गयी और गाल सेहला kar)Kya हुआ?
जूही : ऐसा लग रहा है जैसे कितना बड़ा परिवार है मेरा.
लता : तो नहीं है क्या. (उसके आंसू पोछे, वो लता के गले लग गयी)
साब ने फिर दोबारा से बधाई दी, मेने भार्गवी मैडम को अनाथालय की देखभाल के लिए दोबारा बोलै तो उन्होंने भी मुझे असस्वस्थ किया. वो hi हम दोनों को स्टेशन छोड़ गयी, वैस्वी और स्वर्ण दोनों चले गए, वैस्वी को भी शिव को अकेले न मिलने का गाम था पर जो हुआ था उस से वो और ज्यादा खुस थी.
में और जूही बस में बेथ गए, लम्बा सफर था तो रिजर्वेशन करवलिया था जूही ने तो सीट मिल गयी थी, बस पूरी रिजर्व्ड सीट वाली hi थी, हम दोनों बैठे हुए थे और बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी, जूही बार बार अनाथालय में जो हुआ उसे याद कर के मुस्कुरा रही थी.
शिव : क्या हुआ, अकेले अकेले क्यों मुस्कुरा रही हो?
जूही : (शिव को प्यार से देखते hue)Aaj में बहोत खुस हृषिव, इस तरह से तो कभी मुझे किसी ने विश नहीं किआ था, थैंक यू.
शिव : विश उन सबने किआ और थैंक यू मुझे कह रही हो.
जूही : क्यों की तुम्हारी वजह से hi में उनसे जुडी हु, तो हुम्हे hi थैंक यू कहूँगी न. (तभी मेरी मश्ग टोन बजी, मेने मोबाइल निकल कर देखा तो और भी मश्ग थे जो में देख नहीं पाया था, मेने देखा तो बिना मैडम का मश्ग था, जूही मोबाइल में hi देख रही थी तो मेने उसकी और देखा, वो मुस्कुरायी और kaha)Na देखु? (में कुछ न बोलै, मेने मश्ग ओपन किआ तो उन्होंने भी मुझे और जूही दोनों को सुभकामनाये दी थी, मेने दूसरा मश्ग ओपन किआ जो काव्य मैडम का था, उन्होंने भी मुझे सुभकामनाये दी थी, नाज़िआ दीदी का भी था, और एक अननोन नंबर से था, मेरी समाज में नहीं आया की ये किसका है) ये किसका मश्ग है?
शिव : पता नहीं?
जूही : ऐसे कैसे पता नहीं, फ़ोन करो उन्हें, पता चल जायेगा.
शिव : (मुझे भी लगा तो मेने फ़ोन लगा diya)Hello.
आवाज : (ये लड़की की आवाज thi)Hello, कोण? (आवाज बहोत सुरीली थी)
शिव: आप कोण?
आवाज : (थोड़ा ाटिटूडे se)Phone आपने किआ है, मेने नहीं, आप बताओ, किसका काम है?
शिव : (मुझे आवाज समाज नहीं आ रही thi)Me शिव बोल रहा हु, आपके नंबर से मुझे मश्ग आया था.
आवाज : ओह! शिव. (आवाज में नर्माहट आ गयी, और आवाज और मधुर हो gayi)mene तो कोई मश्ग नहीं किआ. कैसे हो आप?
शिव : (अभी भी मेरी समाज में नहीं आ रहा था की कोण hai)Me अच्छा हु, आप कोण है, सॉरी में पहचान नहीं प् रहा हु.
आवाज : (सामने वाली मुस्कुरा di)Kaise पहचानो गए, कभी बात hi नहीं की तुमने मुझसे.
शिव : आपके पास मेरा नंबर कैसे आया? कोण हो आप?
आवाज : (आवाज नटखट सी हो गयी thi)Me क्यों बताऊ, बस इतना बता दू की मश्ग मेने नहीं किआ है.
शिव : पर मश्ग तो आपके नंबर से hi आया है न.
आवाज : तो क्या हुआ, किसी और ने मेरे नंबर से किआ होगा, में फ़ोन छुपके नहीं रखती. (उनकी आवाज से लग रहा था की उनको बहोत मज़ा आ रहा था मेरी खिंचाई करने में)
शिव : ठीक है, में रखता हु फिर. (मेने हथियार डालते हुए कहा)
आवाज : लगता है मेरी आवाज पसंद नहीं आयी आपको, हीहीही. वैसे मेरी और से भी सुभकामनाये आपको, अच्छे से प्रयास करना, इस्वर आपको कामियाबी जरूर देगा.
शिव : (वो मुझे जानती थी और मेरे कॉम्पिटिओं के बारेमे भी, पर अभी भी मुझे समाज नहीं आ रहा tha)Thank यू, आप बताइये न, कोण है आप?
आवाज : में क्यों बताऊ, आप खुद hi पता कर लो.
शिव : क्या में आपसे मिला हु?
आवाज : है मिले हो. (सामने आवाज जो आ रही थी उस से लग रहा था की उनको बहोत मज़ा आ रहा है ऐसे)
शिव : कब?
आवाज : वो में नहीं बताउंगी.
शिव : क्यों?
आवाज : हिहि hi, मेरी मर्जी.
शिव : आप कोण हो, कैसे मुझे जानते हो, बताइये न, या ऐसे hi बोल रहे हो.
आवाज : तो अभी भी आपको यकीं नहीं हो रहा की में आपको जानती हु, है न? आपका नाम शिव है जो अपने बताया पर ये तो नहीं बताया की आप बहोत लम्बे हो, आप 11व् कक्षा में साइंस में पढ़ते हो, और दुखकी बात है की आप अनाथ हो. (में अपने दिमाग पर जोर देने लगा और उस आवाज को याद करने की कोशिस करने laga)Ab यकीं हुआ की और भी कुछ बताऊ?
शिव : और क्या बताएंगी?
आवाज : बहोत कुछ है, पर वो में नहीं बता शक्ति, hihihi.(Me चुप हो गया, क्या बोलता, वो अपना नाम नहीं बता रही thi)Jyada अपने दिमाग पर जोर मात डालिये, और अपने लक्ष्य पर ध्यान दीजिये, में जो भी हु आपके जीवन में कोई महत्व नहीं रखती, तो ज्यादा परेशान मात होना, फिर से मेरी सुभकामनाये, bye.
शिव : प्लीज, अपना परिचय दीजिये न.
आवाज : मिलोगे तो दूंगी, bye.
शिव : पर कहा?
आवाज : वो भाग्य को पता, bye. (उन्होंने फ़ोन काट दिया)
जूही : (उसने थोड़ा थोड़ा सुना tha)Kon थी?
शिव : (वो अभी भी फ़ोन को देख रहा tha)Pata नाही?
जूही : तो ितनिदर क्या बात कर रहे थे?
शिव : वो मुझे जानती hai(Me अभी भी सोच रहा था)
जूही : आवाज से पता नहीं चला? (शिव ने ना में गर्दन हिलायी) होगी कोई, छोडो उसे. मेरी कोच सर से बात हुई थी, वो कल हमे वही मिलेंगे, वो बता रहे थे की कुछ लोग हमारी एंट्री का विरोध कर रहे है, पता नहीं क्या होगा कल.
शिव : किस बात का विरोध?
जूही : है कुछ लोग, जो अपना कोचिंग इंस्टिट्यूट चलते है, अगर ऐसे hi बहार से कोई आ के उनके वह के बच्चो को हरा देगा तो उनके वह कोण जायेगा, इस लिए ऐसे डायरेक्ट एंट्री को वो मन कर रहे है, कोच सर बात कर रहे है, देखते है क्या होता है.
शिव : (में जूही की बातो को भी सुन रहा था और साथ में उस आवाज के बारे में भी सोच रहा था की कोण थी वो? हमारी बाटे लगातार चल रही थी, लोगो को डिस्टर्ब न हो इस लिए हम धीमी आवाज में hi बात कर रहे थे, सूरज भी ढल चूका था, बस में भी लाइट चालू हो गयी थी, तभी बस एक जगह पर रुकी, चाय नास्ता करने के लिए)
जूही : चलो.
शिव : कहा?
जूही :चलो तो. (हम दोनों बस से उतरे और वो आस पास देखने लगी, फिर )चलो. (वो जिस और बढ़ी मेने देखा की वह शौचालय था, में कुछ नहीं बोलै, में बहार खड़ा रहा उसने अपना पर्स मुझे दिया और वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर बाद वो वापस आयी, वो शर्मा रही थी, उसने शरमाते हुए मेरे हाथ से पर्स लिया और kaha)tumhe नहीं जाना?
शिव : हम्म्म्म. (में भी वाशरूम हो आया, हम दोनों ने कॉफ़ी ली और बस के पास खड़े रह कर पिने लगे, थोड़ी देर बाद बस फिर से अपने सफर पर निकल गयी, बस वाले ने एक लाइट छोड़ कर साडी लाइट बजा दी, मेने देखा की जूही बंद खिड़की के कांच से बहार देख रही थी, वो जीन्स टॉप में थी, वो बहोत खूबसूरत लड़की थी और उसका मेरे प्रति समर्पण उसे और प्यारा बनता था, उसने अपने दोनों हाथ अपनी गॉड में रक्खे हुए थे, हम दोनों एक दूसरे से सात कर बैठे थे, मेने अपने दाहिने हाथ से उसका बया हाथ पकड़ा तो उसने मेरी और देखा, उसकी आँखों में शर्म चालक आयी, मेने बस उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया, वो हल्का मुस्कुरा के मुझे देखने लगी, मेने उसके हाथ को उठाया और उस पर किश की तो वो और शर्मा गयी और मेरे कंधे पर अपना शिव रख दी, थोड़ी देर हम ऐसे hi बैठे रहे, मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी, और उसकी सांसो से पता चल रहा था की उसकी भी वैसी hi हालत है, उसके साथ मस्ती करने का मान कर रहा था पर ऐसे पुब्लिकल्ल्य में रिस्क नहीं लेना चाहता था, मेने बाजूवाली सीट पर देखा तो वह दो बुजुर्ग दम्पति बैठे हुए थे और आंखे बंद किये हुए थे, जूही मेरे कंधे पर शिर रक्खे थी तो उसके बालो की खुसबू मुझे आ रही थी, मेने उसके थोड़े लम्बे नाखुनोवलि बड़ी ऊँगली को अलग किआ और उसे अपने मुँह में भर लिए )(शिव की इस हरकत से जूही ने हलकी सी सिसकी ली, जो बस मुझे hi सुनाई दी, उसने कोई विरोध नहीं किआ, उसको शिव की ऐसी हरकत अच्छी लग रही थी, उसके गरम मुँह का एहसास उसके अंदर हलचल मचा रहा था, उसने ऊँगली बहार निकली और दूसरी ऊँगली को अपने मुँह में लिए, जूही की सांसे भरी होने लगी थी, उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और शिव की झंघ पर रख दिया और हलके से दबा दिया, शिव उसकी उंगलिओ से खेल रहा था और वो गरम हो रही थी, उसकी योनि में गीलापन आने लगा था)
जूही : (फुसफुसाते hue)Koi देख लेगा (उसने बस इतना hi कहा)
शिव : में कहा कुछ कर रहा हु, बस हाथ hi तो है.
जूही : मुझे कुछ हो रहा है शिव, होटल में हम साथ hi रहनेवाले है.
शिव : तो??
जूही: वह जो चाहे कर लेना, यहाँ मेरी आवाज निकल जाएगी, में कण्ट्रोल नहीं कर पाऊँगी.
शिव : बस इतने से hi?
जूही : हा, तुम्हारे जरा सा छूने से hi में बेकाबू हो जाती हु शिईयिव. फिर मुझे मात दोष देना, में सबके सामने hi सुरु हो जाउंगी, बता दे रही हु. (उसने नशीली आँखों से मुझे देखते हुए कहा, उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था, में उसकी तड़प समाज सकता था)
शिव : ठीक है, (मेने उसका हाथ मुँह से निकल लीयपर अपने हाथ में hi रक्खा)
जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Bura लगा? (उसने मायूसी से कहा)
शिव : बुरा क्यों लगेगा, में समझता हु.
जूही : सॉरी यार, पर तुम्हारे छूने से में अपने आपको कण्ट्रोल नहीं कर पति.
शिव : तुम बहोत ज्यादा गर्म हो. (मेने उसके कान में कहा, वो मुस्कुरायी और शर्मा गयी) सच कहा न मेने? (उसने मुस्कुराते हुए हां में गर्दन हिलायी, मान तो मेरा भी बहोत कुछ करने का था पर हम दोनों इतने लम्बे थे की सीट से भी बहार दिख जाते थे, तो फिर हाथ में हाथ लिए बैठे रहे, वो मेरे कंधे पर अपना शिर टिका देती तो कभी सीट पर रख कर मुझे देखती, एक दूसरे के हाथ से बस खेल रहे थे, ऐसे hi वक़्त बिट गया और हम उस सहर पहुंच गए. दोनों ने अपने अपने बैग कंधे पर दाल लिए और बहार निकले, एक ऑटो रिक्शा से हम होटल पहुंचे जो जूही ने पहले से hi बुक किआ हुआ था. हम अंदर रिसेप्शन पर पहुंचे.
जूही : Hello, I’m जूही, ी हैवे बूकेड ा रूम ऑनलाइन फॉर तवो डेज.
रिसेप्शनिस्ट : जस्ट ा मूवमेंट मैडम (उसने अपने कंप्यूटर में चेक kia)Ya मां, प्लीज शो में योर ईद. (जूही ने सब फॉर्मलिटीज कम्पलीट की, वो 30-32 साल की लेडी थी, दिखने में खूबसूरत भी थी, वो बार बार मुझे देख रही थी, मुझे थोड़ी शर्म आयी तो में आस पास देख रहा था, थोड़ी देर baad)You हैवे बूकेड ओनली ओने रूम मां.
जूही : वे बोथ स्टे तोहिथेर, अन्य ऑब्जेक्शन माड़.
रिसेप्शनिस्ट : No मान नॉट ात आल, व्हाट इस यू पर्पस तो स्टे मां?
जूही : वे अरे हेरे फॉर ा कॉम्पिटिओं, व्हाई अरे यू आस्किंग?
रिसेप्शनिस्ट : यू haven’t मेंशन योर रिलेशन मां, जस्ट ाकिंग फॉर सिक्योरिटी पर्पस, यू क्नोव व्हाट हप्पेंस नाउ ा डेज, आईटी इस कंसर्न अबाउट आवर रेपुटेशन, सॉरी िफ़ यू उनकंफर्टबले.
जूही : No नॉट ात आल, यू अरे दोंग यू ड्यूटी, वे अरे फ्रेंड्स एंड पार्टिसिपेटिंग इन कॉम्पिटिओं (डाक्यूमेंट्स दिखते हुए) थिस इस डाक्यूमेंट्स िफ़ यू वांट तो चेक.
रिसेप्शनिस्ट : (डाक्यूमेंट्स को देखते hue)Thank यू मां, ी ऍम सतीसेफिइड, योर रूम नंबर इस 303 मैडम, थिस इस योर के card.(Usne के देते हुए कहा)
जूही : थैंक यू मैडम.
रिसेप्शनिस्ट : कॉल में राशि, मां (उसने मुस्कुराते हुए कहा और मुझे देखा, में बस मुस्कुराया).
जूही : थैंक यू राशि.
राशि : हैवे नीस स्टे मां.
जूही : यू कैन कॉल में जूही, राशि. (उसने मुस्कुराते हुए शिर हिला के हां कहा, हम दोनों लिफ्ट की और बढ़ गए, मेने लिफ्ट में जा कर देखा तो वो अभी भी मुझे hi देख रही थी, जूही ने भी ये देखा, जैसे hi लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ उसने मेरी बाह पर जोर से मारा)
शिव : ोूछ! मर क्यों रही हो.
जूही : मेरी मर्जी (राशि को ऐसे घूरते देख उसे जलन हुई थी इस लिए उसने शिव को मारा था, वैसे शिव की कोई गलती नहीं थी, वो hi उस पर लट्टू हो रही थी)
वह वो लड़की बीएड पर लेती हुई थी और शिव के बारेमे सोच रही थी, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किआ था, वो सोच रही थी की वो बता सकती थी की वो कोण है, पर ऐसा कर के उसे बहोत मज़ा आया था, वो बहोत सीधी सदी लड़की थी, ऐसा कभी नहीं किआ था उसने, पर ऐसे hi सुरु हुई बात इस मोड़ पर ख़तम होगी उसे खुद नहीं पता था, उसने फ़ोन निकला और टाइम देखा, फिर मुस्कुराते हुए उसने मश्ग टाइप किआ,
‘गुड नाईट, don’t थिंक अबाउट में’. उसने मश्ग किआ और मुस्कुराने लगी, उसे भी मज़ा आ रहा था ऐसे, उसने जान बुज कर ऐसा लिखा था ताकि अगर वो भूल भी गया हो उसे तो फिर उसके बारे में सोचे, क्यों वो तो उसको भी पता नहीं था, वो बार बार शिव को याद कर रही थी, ऐसे hi वो सो गयी.





















































