Adultery Kundali Bhagya - Page 24 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 165

में और नाज़िआ दीदी बस से सफर कर रहे थे, वो थोड़ी अपसेट थी, वो खिड़की के पास बैठी थी और में साइड में, बस तवो सीटर थी, जब बस सिटी से बहार निकली तो मेने उनके हाथ पर हाथ रख दिया, उन्होंने मेरी और देखा फिर आस पास देखा, कोई नहीं देख रहा है ये सुनिश्चित होते hi, वो फिर से बहार को देखने लगी, पर अपना हाथ नहीं छुड़ाया.

शिव : क्या हुआ? (हलाकि में जनता था)

नाज़िआ : तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था, क्या जरुरत पद गयी थी?

शिव : (उनके हाथ को अच्छे से पकड़ा और ऊँगली ो में ऊँगली फसा kar)Aapne hi तो कहा था की वो और आपकी सास मिल कर आपको परेशान करते थे, तो मेने सोचा की वो मेरे साथ जुड़ जाएगी तो आपके साथ भी अच्छे से रहे गई, बस मेने इतना hi सोचा था.

नाज़िआ : बच्चे की खुशखबरी के बाद, वैसे भी वो सब अच्छे हो hi गए थे na.(Usne नाराजगी से कहा)

शिव : मुझे थोड़ी न पता था, वैसे भी वो सब शायद नाटक भी कर रहे हो सकते थे, और मेने कुछ नहीं किआ था, वो खुद hi आयी थी. (उसने शिव की और देखा, वो बस भोली सूरत बनाये उसको सफाई दे रहा था, हलाकि वो समाज रही थी की उसको सफाई देने की कोई जरुरत नहीं थी, वो उसका पति नहीं था, न hi उसके साथ वफादार रहने की उसको कोई जरुरत थी, पर फिर भी वो उसको अपनी सफाई दे रहा था, जिस से पता चल रहा था की उसकी नाराजगी भी शिव के लिए मायने रखती है, उसका मान शांत होने लगा, वो उसके चेहरे के देख ने लगी, वैसे भी वो भी तो इसके चेहरे और उसकी पर्सनालिटी से उसकी और खींची चली गयी थी, उसके फंक्शन में भी न जाने कितनी कुवारिओ के दिल उसने लुटे थे, इनायत तो फिर भी एक तलाक सुदा थी, उसको देख कर उसका मान मचलना स्वाभाविक था, पर इतनी जल्दी वो सब हो गया उसका उसे आश्चर्य था, वो फिर मुस्कुरादि और खिड़की से बहार देखने लगी, वो अपनी मुस्कराहट छुपा रही thi)(Meri समाज में नहीं आया, तो मेने puchha)Ab मुस्कुरा क्यों रही है?

नाज़िआ : (मुस्कुराते हुए मेरी और dekha)Bechari इनायत (वो है पड़ी)

शिव: अब ऐसे क्यों कह रही हो?

नाज़िआ : तो और क्या कहु, इस भोली भली सूरत को देख कर वो उस पर मर मिटी होगी, उसे क्या पता होगा की क्या हालत होगी उसकी, रहें नहीं आया तुम्हे उस पर? (वो है रही थी)

शिव : (शरमाते hue)Mene आराम से hi किआ था. (दोनों फुसफुसाते हुए बात कर रहे थे)

नाज़िआ : मेने देखि उसकी हालत, आराम से किया था wale.(Unki हसी रुक नहीं रही थी)

शिव : सच बोल रहा हु में.

नाज़िआ : जब पागल हो ते हो तो कहा होश रहता है तुम्हे, मुझे मात समजाओ, क्या हालत होती है मुझे नहीं पता क्या, अब वो भी समाज गयी होगी, वैसे उसे बताना मात के मुझे पता है.

शिव : क्यों?

नाज़िआ : क्यों क्या, वो क्या सोचेगी, की भाभी को पता है फिर भी भाभी कुछ नहीं बोली, उसको हम दोनों के सम्बन्ध पर भी शक हो सकता है, वैसे तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, पर फिर भी सामने से क्यों बताना, और तुम थोड़ी न मेरे वह आनेवाले हो.

शिव : क्यों? आप नहीं चाहती की में वह औ?

नाज़िआ : लगता है बहोत पसंद आयी मेरी नानन्द (उसने मुस्कुरा के कहा)

शिव : उसके लिए नहीं कह रहा, आप भी तो आ जाएगी यहाँ, आपको नहीं मिलना मुझसे?

नाज़िआ : सचमे, मुझसे मिलने आओगे तुम? (उन्होंने प्यार से कहा)

शिव : (उनके हाथ को दूसरे हाथ से सहलाते hue)Apane बच्चे और उसकी माँ को मिलने आना तो पड़ेगा hi. (नाज़िआ शर्मा गयी और उसकी बाह पकड़ कर उसपे अपना शिर रख दिया)

नाज़िआ : कितना अजीब है न, कुछ समय पहले तो में तुम्हे जानती भी नहीं थी और अब पूरी जिंदगी तुम मेरे साथ रहोगे (फिर मुस्कुरा kar)Waise भी एक बच्चे से क्या होगा, दो- तीन तो चाहिए hi (बोलते बोलते वो खुद शर्मा गयी, में बस मुस्कुरा दिया)

ऐसे hi बाटे करते हुए पूरा सफर कैसे ख़तम हो गया पता hi नहीं चला. दोनों स्टेशन पर उतरे और रिक्शा से घर चले गए. जब घर पहुंचे तो आंटी ने दरवाजा खोला, अपनी बेटी को गले लगते हुए उन्होंने मुझे देखा, पर फिर नज़ारे झुका ली, वो दोनों अंदर गए, में सामान लिए उनके पीछे अंदर दाखिल हुआ. अंकल भी नहीं थे न hi संयम थी. अंकल बहार गए थे और संयम स्कूल गयी होगी. आंटी पानी ले आयी, में और नाज़िआदिदी वही सोफे पर बैठे हुए थे, पानी पि कर मेने कहा.

शिव : अब में चलता हु दीदी, और कोई काम हो तो कहियेगा.

ज़ोया : (हिचकिचाते hue)Wo... खाना बन गया है. (मेने उनकी और देखा पर उन्होंने नजर घुमा ली)

नाज़िआ : चलो, हाथ मुँह धो लो, खा कर hi जाना. (में क्या बोलता, तो हाथ मुँह धोया और खाने बेथ गया, में और नाज़िआ दीदी hi खाने बैठे थे)

शिव : (आंटी ko)aap नहीं खाएंगी.

ज़ोया : (नज़ारे इधर उधर करते hue)Nahi, अभी संयम भी आ जाएगी, उसके साथ खाउंगी.

हम खाना खा रहे थे की संयम भी आ गयी, में ने उसको देखा, उसने मुझे देखा तो में मुस्कुराया पर वो मुस्कुरायी नहीं, बस अपना बैग वह रखा.

नाज़िआ : कैसी है संयम?

संयम : (बजे मन se)Achchhi हु आप.

नाज़िआ : ऐसे क्यों बोल रही है, कुछ हुआ है क्या?

संयम : (उसने अपनी अम्मी को देखा फिर शिव ko)Kuchh नहीं आप, बस थक गयी हु, आती हु, (कह कर वो बाथरूम में चली गयी.).

ज़ोया : (उसका मान बैठने लगा, उसे अब यकीं हो रहा था की ये जरूर देख चुकी है, उसे अपने आप पर बहोत गुस्सा आ रहा था, वो अपनी hi बेटी के आगे शर्मशार हो रही थी, उसका भी चेहरा लटक गया)

नाज़िआ : इससे क्या हुआ है?

ज़ोया : (वो परेशान हो रही थी, क्या बताती अपनी बेटी को की शायद उसे मेरी रंगरलिओ के बारेमे पता चल गया hai)Pata नहीं, शायद थक गयी होगी, साइकिल से गयी थी न आज. (उसने ऐसे hi बहाना दिया)

नाज़िआ : क्यों?, वैस्वी नहीं आयी थी?

ज़ोया : नहीं, वो आज कही बहार गयी है. (तभी संयम बहार आयी, उसको देख कर ज़ोया ने बहोत प्यार से puchha)Khana लगा दू? (उसने अपनी अम्मी को देखा फिर शिव को देखा, दोनों ऐसे बेहवे कर रहे थे जैसे उनके बिच कुछ है hi नहीं, संयम को गुस्सा आ रहा था)

संयम : नहीं, थोड़ी देर बाद, में कपडे बदल कर आती हु. (उसने रूखे पैन से जवाब दिया, और बैग ले कर ऊपर चली गयी)

नाज़िआ : हुआ क्या है इससे, शिव से एक शब्द भी नहीं बोली वो, क्या हुआ है तुम दोनों के बिच शिव? लड़ाई वादे तो नहीं hui(Mene बस इससरए से कहा की क्या pata)Kamal है. (हम खाने लगे, वो निचे नहीं आयी, मेरा खाना भी हो गया, मेने हाथ धो लिए.

शिव : अब में चलता हु.

नाज़िआ : एक मिनट (संयम को आवाज देते hue)Samim, ो संयम.

संयम : (ऊपर se)Ha आप?

नाज़िआ : शिव जा रहा है.

संयम : है ठीक है. (उसने ऐसे जवाब दिया जैसे उसको कोई फर्क नहीं पद रहा, नाज़िआ को कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था)

शिव : में चलता हु, फिर मिल लूंगा.

नाज़िआ : है, ठीक है, कब वापस आओगे?

शिव : दो तीन दिन बाद.

नाज़िआ : अच्छा ठीक है, अच्छे से करना, और अपनी कामियाबी के बाद फ़ोन जरूर कर देना. (संयम ऊपर से सब सुन रही थी, उसका मान हुआ की जा कर शिव को आल थे बेस्ट कहे, पर वो नहीं गयी)

शिव : पहले कामियाब तो हो जाऊ.

नाज़िआ : जरूर हो ो गए, में उपरवाले से दुआ करुँगी, वो तुम्हे जरूर कामियाबी देगा.

शिव : थैंक यू, ठीक है में चलता हु, bye (मेने आंटी को देखा तो उन्होंने बस मुस्कुरा कर गर्दन हिलायी, में वह से निकल गया)

वही आज सुबह मिक्की ने वैस्वी के लिए फार्म हाउस पर छोटी सी ट्रीट रक्खी थी, उसने वैस्वी को कहा था पर उसने मन कर दिया था तो उसने प्रकाश अंकल को hi बोलै तो वैस्वी को मान मार का आना पड़ा था, पर वो अकेले नहीं जाना चाहती थी, उसने झंविदिदी को फ़ोन किआ और उन्हें साथ चलने को कहा, वो नहीं मान रही थी तो उसने भी आने से इंकार कर दिया, तो जहान्वी भी आ गयी थी. वैस्वी जहान्वी के साथ hi बैठी थी. वो चुप चुप hi थी.

जहान्वी : क्या हुआ, अच्छा नहीं लगा, यहाँ आकर? (उसने कोई जवाब नहीं दिया, जहान्वी ने अपने भाई को देखा जो अपने दो दोस्तों के साथ बियर पि रहा था, उसको भी अच्छा नहीं लग रहा था पर क्या करती) उसने तुम्हारे लिए hi यहाँ ये ट्रीट रक्खी है, तुम उस से मिलोगी, बात करोगी तभी तो उसके साथ बनेगी तुम्हारी. (वैस्वी फिर भी कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये बैठी थी, जहान्वी जानती थी की वैस्वी उसके भाई को पसंद नहीं करती) देखो वैस्वी, तुम्हारे घर वालो ने भी सहमति जताई है, फिर ऐसे रहने से क्या फायदा, घुलेगी मिलोगी तो तुम्हारा भी मान लग जायेगा. (वैस्वी के आँख में अस्सू भर आये, जहान्वी को भी समाज नहीं आ रहा था की वो क्या कहे, वो उठ कर गयी और उसके लिए पानी ले aayi)Lo पानी पीओ.

वैस्वी : (पानी ले कर पिया और अपनी आंख से आंसू pochhe)Me ये शादी नहीं करुँगी. (वो बस इतना hi बोली)

जहान्वी : इसमें में क्या कहु, ये तो तुम्हारे पापा लोग hi डीडे करेंगे. (वैस्वी ने तप्ले पर गिलास रक्खा और वाश रूम की और चली गयी, जहान्वी उसे जाते देख रही थी, मिक्की की भी नजर पड़ी तो वो बियर रख कर उसके पीछे चला गया, जहान्वी ने भी ये देखा, पर वो क्या कर शक्ति थी, वो बस बैठे रही, वैसे भी उसको साइट पर जाना था, शिव से बात करनी थी, उसने अपना मोबाइल देखा, और सोचने लगी की पुछु की न पुछु की आएगा की नहीं. पर फिर मश्ग नहीं किआ और फ़ोन रख दिया)

वह वैस्वी वाश रूम में जा कर चेहरा साफ़ कर के बहार निकली तो मिक्की खड़ा था, वो घबरा गयी, और साइड से जाने लगी.

मिक्की : सुनो तो. (वो नहीं रुक रही थी तो मिक्की ने उसकी बाह पकड़ li)Ruk बोलै न.

वैस्वी : छोडो मुझे.

मिक्की : क्या प्रॉब्लम है तेरी, तेरे लिए hi सब अर्रंगे किआ है मेने, सोचा था की अकेले में मिलेंगे.

वैस्वी : मुझे नहीं मिलना (उसने अपनी बाह छुड़ाने का प्रयास किआ)

मिक्की :(उस पर नशा तो चढ़ा हुआ था hi, उसे गुस्सा भी आ रहा tha)Tuje प्यार से समजा रहा हु तो समाज में नहीं आता तेरे (उसने दोनों बाह पकड़ ली)

वैस्वी : (अपने आपको छुड़ाने का प्रयास करते hue)Chhodo मुझे.

मिक्की : किस बात का घमंड है तुजे है, जरा सा भाव क्या दिया, तू तो शिर पे चढ़ रही है, आज तेरी अकड़ ठिकाने लगा ता हु, चल (कहते हुए वो उसे एक और ले जाने लगा, वैस्वी रोने लगी)

वैस्वी : छोडो मुझे, में चिल्लाऊंगी.

मिक्की : जितना मर्जी हो चिल्ला, ये मेरे बाप की जगह है, किस मई के लाल में हिम्मत है जो यहाँ आये.

वैस्वी : प्लीज मुझे छोड़ दो, में तुम्हारे हाथ जोड़ती हु.

मिक्की : हाथ जोड़ या पैर पकड़, आज तेरी अकड़ ठिकाने लगा कर hi रहूँगा, बहोत नखरे दिखा लिए तूने, साली, फ़ोन नहीं उठाएगी, बात नहीं करेगी, क्यों? (वह जहान्वी अकेले बोर हो रही थी तो उसने कान में लगे ब्लू टूथ में गण चला दिया था और आंख बंद किये कुर्शी पे बैठी थी तो उसे ये सब पता नहीं चला, मिक्की उसे घसीट के एक रूम की और ले जाने लगा, उसके दोस्तों ने ये देखा और हसने लगे)

एक दोस्त : आज तो ये गयी. (दोनों हसने लगे, वही दूसरे काम करनेवाले भी थे, पर सब ने ान देखा hi कर दिया)

वैस्वी : (रट हुए, जोर se)Chhodo मुझे.

मिक्की : छोड़ दूंगा, पहले देख तो लू की साली तू चीज क्या है.

वैस्वी : में जानती थी की तुम एक नंबर के घटिया इंसान हो, इसीलिए मुझे शादी नहीं करनी है. (उसने रट हुए कहा)

मिक्की: क्यों, उस लम्बू के साथ तो बड़ी चिपक के बेथ टी है, तू क्या समजती है, मुझे पता नहीं है, उस लम्बू से भी हिसाब देखना है, पहले तुजसे तो निपट लू.

वैस्वी : (चटपटेने लगी, और खुद को जोर जोर से छुड़ाने का प्रयास करने लगी, मिक्की के लिए भी संभालना मुश्किल हो रहा था, वैसे भी वो उसके बराबर लम्बी थी, और शरीर से भी अच्छी खासी थी, वो जी तोड़ प्रयास करने लगा, उसकी भी हालत ख़राब हो रही थी उसको खींचने में और पकड़ने me)(Tabhi जहान्वी ने आंख खोली, सब लोग किसी और देख रहे थे, उसने बस ऐसे hi देखा तो उसको मिक्की और वैस्वी दिखे, मिक्की वैस्वी को खिंच रहा था और वैस्वी अपने आपको छुड़ाने का प्रयास कर रही थी, वो फ़ौरन उठी)

जहान्वी : मिक्कीीीी. (अभी वो बोली hi थी की वैस्वी ने जोर से मिक्की को धक्का दिया तो वो लदखते हुए दो तीन कदम पीछे हुआ और धड़ाम से जमीं पर लुढ़क गया, और वैस्वी वह से बहार के गेट की और जल्दी से चलते हुए जाने लगी)

मिक्की : (वो नशे में भी था और ऊपर से वैस्वी में ताकत भी थी, उसके अंदर के मर्द को ये सेहन नहीं हुआ, उसने अस्स पास देखा तो सब उसे hi हैरत से देख रहे थे, वो लड़खड़ाके उठा और वैस्वी की और lapka)Sali, मुझे धक्का देती है. (जहान्वी तब तक वह पहुंच गयी थी, मिक्की वैस्वी तक पहुचनेवाला hi था की जहान्वी ने बीचमे आ कर उसे पकड़ लिया)

जहान्वी : मिक्कीीी, क्या कर रहा है?

मिक्की : (गुस्से me)Sali मुझे धक्का देती है, होनेवाला पति हु उसका, मेरी जो मर्जी होगी में करूँगा.

जहान्वी : (मिक्की को पकड़ते hue)Chup कर, क्या बोल रहा है तू.

मिक्की : छोडो मुझे, आज में उसको उसकी औकात दिखा के रहूँगा.

जहान्वी : क्यों तमसा बना रहा है, (उसके दोस्तों की और देख ke)Eeiiii, इसको ले के जाओ (वो दोनों दौड़ कर आये और मिक्की को पकड़ लिया, जहान्वी ने देखा की वैस्वी गेट तक पहुंच गयी hai)Vaiswiiiiiii, सुनो तो.

(गेट पर खड़ा दरबान गेट नहीं खोल रहा था तो वैस्वी ने उसे घर कर देखा तो वो दर गया और दरवाजा खोल दिया, वो बहार निकल गयी, जहान्वी अपनी गाड़ी की और बढ़ी, वो भी गाड़ी ले कर बहार निकली, वैस्वी पैदल hi चलते हुए जा रही थी, वो उसके पास पहुंच गयी, वैस्वी ने देखा पर वो रुकी नहीं चलती hi रही)

जहान्वी : अंदर आ जाओ, में तुम्हे घर छोड़ देती हु. (वैस्वी ने गुस्से से देखा, उसके पास और कोई रास्ता नहीं था तो वो बेथ गयी, जहान्वी ने गाड़ी चला दी, दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, थोड़ी दूर जा कर वो boly)Sorry यार. (वैस्वी ने उसको देखा, फिर अचानक उसकी आँखों से आंसू निकल आये) तुम रो मात, वो बेवकूफ है, उसको इतनी भी तमीज़ नहीं की कैसे बेहवे करना चाहिए. मुझे नहीं पता था की ऐसा होगा यार. अगर मुझे पता होता तो में तुम्हे लती hi नहीं. सॉरी.

वैस्वी : (अपने अस्सू पोछते hue)Aap क्यों सॉरी बोल रहे हो, मेरी किस्मत hi ख़राब है, पर में ये शादी हरगिज़ नहीं करुँगी, मार जाउंगी पर ये शादी नहीं करुँगी. बोल देना अपने भाई को.

जहान्वी : ये सब घर पे मात बोलना यार, बबल हो जायेगा.

वैस्वी : आपको क्या लगता है की ये सब बोलूंगी तो कोई फर्क पड़ेगा, सब जानते है, आपका भाई मशहूर है, मेरे पापा को भी पता है, और आपको भी पता hi होगा की आपका भाई कैसा है, पर अब बहोत हो गया, अब न में अपने पापा की सुनूंगी न और किसी की, देखती हु कोण मुज पर जबरदस्ती करता है. (उसने गुस्से से कहा, जहान्वी ने गाड़ी रोक दी और वैस्वी को देखने लगी)

जहान्वी : यार तुमतो बड़ी खतरनाक हो. (वैस्वी कुछ नहीं बोली) में भी एक लड़की हु यार, मुझे कदर है तुम्हारे जज्बात की, में तुम्हारे साथ हु Vaiswi(Usne अपना हाथ वैस्वी के हाथ पर रख दिया, वैस्वी ने उसकी और देखा, उसकी आँखों में सच्चाई थी, वैस्वी हल्का मुस्कुरायी, जहान्वी ने मुस्कुराते हुए kaha)Waise भी तुम्हे संभालना उसके बस की बात नहीं. (अपने भाई के बारे में बोलते हुए वो है दी, वैस्वी शर्मा gayi)Achchha है, उसे भी समाज आ गया होगा की लड़कीअ एंटनी भी कमजोर नहीं होती, वो खुसी से सबकुछ दे तो ठीक है वर्ण किसी की मजाल नहीं जो जबरदस्ती कर ले, क्यों? (वैस्वी अब थोड़ी रिलैक्स हो गयी थी, वो मुस्कुरायी, दोनों फिर घर की और निकल गए, दोपहर हो रही थी, जहान्वी ने वैस्वी को घर छोड़ दिया, स्वर्ण थोड़ी टेंशन में थी क्यों की वो जानती थी की वैस्वी को पसंद नहीं फिर भी गयी थी.)

स्वर्ण : आ गयी?

वैस्वी : (नार्मल हो kar)Ha भाभी, खाना है?

स्वर्ण : क्यों खा कर नहीं आयी?

वैस्वी : नहीं भाभी, है तो बोलो वर्ण चलेगा.

स्वर्ण : खाना क्यों नहीं होगा, में भी बाकि hi हु, चल साथ में कहते है. (स्वर्ण ने खाना निकला और दोनों साथमे बेथ गए, खाना कहते हुए वैस्वी को देखते हुए वो बोली) वह क्यों खा कर नहीं आयी, मेने तो सुना था की तू खा कर आएगी.

वैस्वी : छोडना भाभी, में उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती. (स्वर्ण ने भी ज्यादा कुछ नहीं पूछा, वैस्वी खाना खा कर अपने कमरे में चले गयी, वह जा कर वो सोचने लगी, जो हुआ था उसके bareme)Me क्यों बताऊ किसी को, अब मुझे कोई दर नहीं है, आने दो दोबारा, देखती हु, बड़ा आया मुज पे जबरदस्ती करनेवाला, है क्या उसमे जो मेरे साथ जबरदस्ती करेगा, ये तो सिर्फ धक्का दिया था, अगर अब सामने आया न तो पूरा मुँह नोच लुंगी, कमज़ोर समजा है क्या मुझे, और एक वो है, जो ऐसे पकड़लेता है की छूट hi न पाओ. (शिव को याद करते हुए उसकी आंखे बंद हो गयी, तभी उसे याद आया की आज वो जानेवाले है, उसने अपना फ़ोन निकला और मश्ग किआ.)

वैस्वी : Hi. (वो थोड़ी देर मोबाइल को देखती रही पर सामने से कोई मश्ग नहीं आया, वो आंखे बंद किये हुए लेट गयी, दस मिनट बाद उसके फ़ोन की मश्ग टोन बजी, उसने फ़ौरन फ़ोन देखा)

शिव : Hi.

वैस्वी : कॉल करू? (उसने फ़ौरन मश्ग किआ, थोड़ी hi देर में सामने से शिव का कॉल आने लगा, उसने फ़ौरन उठा liya)Hiii (बहोत प्यार से)

शिव : (वो अपने रूम में बैठा था, सब खाना खा रहे थे, वो खा कर आया tha)Hi, कैसी हो?

वैस्वी : आ गए तुम?

शिव : है, एक दो घंटे पहले hi आया. आज स्कूल नहीं गयी थी?

वैस्वी : है (थोड़ा रूखी आवाज me)Kaam था.

शिव : क्या हुआ?

वैस्वी : (सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं, आज जानेवाले हो न तुम?

शिव : है शाम को निकलना है?

वैस्वी : कितने बजे जाओगे?

शिव : 6 बजे की बस है, क्यों.

वैस्वी : (घडी देखते hue)Me मिलने औ, मिलोगे?

शिव : कहा?

वैस्वी : (सोचते hue)Me घर hi आती हु, चार बजे, चलेगा न?

शिव : है है, आ जाओ.

वैस्वी : तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी वह से.

शिव : नहीं, मुझे जूही के वह जाना पड़ेगा, हम दोनों साथमे जा रहे है न, तो 5 बजे उसके घर जाना है.

वैस्वी : कोई बात नहीं, में उनके घर छोड़ दूंगी. आती हु फिर.

शिव : ठीक है, मिलते है.

में अपनी पैकिंग कर रहा था, एक घंटे बाद लता मेरे कमरे में आयी. में चेयर पर बैठा था, और बैग वही पड़ा था.

लता : तूने क्यों की पैकिंग, में कर देती न.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mene कर दी. खा लिया.

लता : है, (थोड़ी उदासी se)Kab आएगा?

शिव : बताया तो था, फिर क्यों पूछ रही हो? (उनका हाथ पकड़ कर, अपने पास खिंचा, वो नजदीक आ गयी)

लता : नहीं बस ऐसे hi.

शिव : कुछ लाना है (में जा रहा था तो वह से लेन के लिए मेने पूछा)

लता : है.

शिव : क्या?

लता : खुशखबरी. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, और मेरे शिर को पकड़ कर अपने स्तन पे दबा दिया, प्यार se)Me भगवन से प्राथना करुँगी, अच्छे से करना सब. (तभी दरवाजे पर खत खत हुई)

सरिता : उह्हू uhhuuu(Khasne की एक्टिंग) (लता तुरंत दूर हो गयी, सरिता को देख कर एकदम शर्मा gayi)Baad में औ क्या?

शिव : है. (मेने बस चिढ़ाने के लिए कहा)

लता : (घबराते hue)N न नहीं, आआआओ. (सरिता मुस्कुराते हुए अंदर आयी).

सरिता : शुभकामनाये देने का मेरा भी हक़ है. (उसने भी शिव को वैसे hi अपने उरोजों में दबा दिया जैसे लता कड़ी thi)Bhagvan तुजे मेरे भाग्य का सारा सुख दे. (उन्होंने बहोत बड़ी बात बोल दी थी, वो मुझसे कितना प्यार करती है ये उनकी इस बात से पता चल रहा था, में खड़ा हुआ और उनको अपने गले लगा लिया, वो भी मुझसे लिपट गयी, लता कड़ी देख रही थी तो मेने दूसरा हाथ भी बढ़ाया तो वो भी मेरे गले लग गयी)

रंजन : में bhiiiiiiiiii (वो चिल्लाते हुए अंदर दौड़ी, और आ कर हमसे लिपट गयी, गायत्री और विणा ने भी उसकी आवाज सुनी तो वो दोनों भी रूम की और आयी, वह का दृश्य देख कर वो दोनों मुस्कुराने लगी तो मेने उनको भी इस्सर किआ तो वो दोनों भी आ गयी, सब की सब मेरे गले लगे हुए थी, ये बस प्रेम था, और इस बात का प्रमाण की हम सब साथ है. मुस्कुराते हुए सब अलग हुए)

लता : रंजन, जा तो दिया और कम कम ले आ. और है चावल भी लाना थोड़े से. विणा एक कुर्शी ले आ.

रंजन : अभी लायी दीदी. (तभी बहार जीप की आवाज आयी, हम सब रूम से बहार आये तो देखा की भार्गवी मैडम अंदर आ रही थी)

शिव : मैडम आप?

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Kyu, नहीं आ सकती?

शिव : नहीं नहीं, जरूर आ शक्ति है, वो तो आप अचानक आयी तो पूछा. आइये.

भार्गवी : तो, तयारी हो गयी सब?

शिव : (मुस्कुराते हुए) जी हो गयी. (तभी रंजन एक थाली में दिया ले कर आ गयी, और विणा एक चेयर)

भार्गवी : अरे वह, सही टाइम पर आयी में.

लता : (शरमाते hue)Ha वो जा रहा है न तो ...

भार्गवी : बिलकुल सही किआ तुमने, सुरु करो.

लता : जी. (सरिता की और देख kar)Tu सुरु कर. तू बेथ कुर्शी पर.

सरिता : (हस्ते हुए आयी और थाली में दिया जलाया, फिर रंजन के हाथ से थाली ले कर लता को देते hue)Sabse पहले तेरा hi हक़ है, क्यों शिव? (में बस मुस्कुराया, लता ने प्यार से सरिता को देखा और शिव को टिका लगाया फिर, चावल, भार्गवी फोटो लेने लगी, लता ने फिर थाली सरिता की और बधाई)

सरिता : अरे आरती तो उतर.

लता : वो सब साथमे करेंगे. (सरिता भी मुस्कुरा दी, उसने थाली ली और टिका किआ और चावल लगाए, फिर उसने गायत्री को देखा तो उन्होंने भी लगाया, उन्होंने रंजन को बुलाया)

रंजन : मैडम को दो पहले. (सब रंजन को देखने लगे) ऐसे क्या देख रहे हो, वो इतनी दूर शिव को विश करने hi तो आयी है क्यों दीदी? (भार्गवी को भी बहोत मान था पर सबके सामने उसको संकोच हो रहा था, पर उस नटखटने उसके मान की बात पढ़लि थी, वो बस मुस्कुरायी, रंजन ने थाली उनकी और बढ़ा दी और उनके हाथ से मोबाइल ले लिया, भार्गवी ने अपने जुटे निकले और शिव के सामने कड़ी हो गयी, उसको बहोत अच्छा लग रहा था, आज वो सबके सामने जैसे एलान कर रही थी की शिव का उसके साथ कोई खास रिस्ता है, उसने शिव को टिका लगाया, और चावल भी लगाया, शिव उनको hi देख रहा था, भार्गवी के चेहरे पर बहोत छुपाने पर भी हलकी सी शर्म उभर आयी थी, तभी बहार स्कूटर की आवाज आयी, सब दरवाजा देख रहे थे, की वैस्वी अंदर आयी, साथमे स्वर्ण भी thi.Vaiswi ने जब स्वर्ण को बहार जाने के लिए कहा था तो उसने पूछा की कहा जा रही है तो उसने सही सही बता दिया की वो शिव को बेस्ट विशेष देने जा रही है तो स्वर्ण से रहा नहीं गया और वो भी साथ चली आयी, वैस्वी ने भी बुरा नहीं मन न आश्चर्य किआ क्यों की वो भी शिव को जानती थी)

वो दोनों अंदर का माहौल देख कर मुस्कुरायी और नजदीक आ कर कड़ी हो गयी. रंजन ने टिका लगाया और चावल लगाया, फिर विणा को बुलाया, वो भी शरमाते हुए आ गयी, उसने भी वैसे hi किआ, सब का ख़तम हो गया था. (ये सब देख कर स्वर्ण और वैस्वी का दिल भी कर रहा था पर संकोचवश कुछ नहीं बोली) विणा आस पास देखने लगी की अब किसको थाली दे.

लता : वैस्वी, तुम भी करो (वैस्वी का दिल जोरो से धड़क गया, उसकी हिम्मत नहीं हुई की वो किसी की नजर का सामना करे, वो शिर झुकाये आगे बढ़ी और उसके हाथ से थाली ले ली)

वैस्वी : (थाली लिए शिव के पास गयी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर वो इस मौके को खोना नहीं चाहती थी, उसने शिव के कपल पर दोनों लगा दिए, शिव उसको hi देख रहा था तो उसे बहोत शर्म आ रही थी और साथ में खुस भी थी)

लता : (वो स्वर्ण के बारेमे ज्यादा जानती नहीं थी तो boli)Aap सुभकामना देना चाहेंगी?

स्वर्ण : है क्यों नहीं (उसने ऐसे hi बोलै जैसे जाता रही हो की सब कर रहे है तो में भी कर रही हु, पर अपने दिल का हल वो hi जानती थी, वो ये जानती थी की जिस तरह का शक मनीषा दीदी और बिना भाभी दर्शा रही है उस हिसाब से तो वो उसका भाई है, और दूसरी और उसके बच्चे का बाप भी, वो दिल hi दिल में ढेर साडी सुभकामनाये देने लगी, उसने भी तिलक किआ और चावल लगाए पर अचानक उसने दोनों हाथ फैला कर उसकी बलए भी ले ली, उसकी आँखों से आंसू भी चालक aaye)(Sab हैरानी से देख रहे थे, वैस्वी को भी आश्चर्य हो रहा tha)(Swarna को भी ध्यान आया की उसने भावनाओ में बह कर कुछ ज्यादा hi कर दिया है पर अब हो चूका था, उसने अपने ासु पोछे)

स्वर्ण : वो मुझे किसी अपने की याद आ गयी. (लता उसके पास ेयी, और उनके कंधे पर हाथ रख कर मुस्कुरायी जैसे कह रही हो की कोई बात नहीं)

लता : आओ फिर आरती उतारते है इसकी. (लता के आस पास सह कड़ी हो गयी और एक दूसरे के हाथ को अपना हाथ टच करवादिया, लता आरती उतरने लगी)

शिव : (में सबको देख रहा था और मान में सोच रहा था की पूरी फ़ौज है यार ये तो और वो भी आधी )

सरिता : (उसको ऐसे देखते dekh)Kyu दार लग रहा है? (मुस्कुराते हुए वो बोली)

शिव : (उन्होंने मेरे मान की बात पकड़ ली थी, मेने शांत हो कर kaha)Kaisa दर?

सरिता : इतना की जिम्मेदारी का dar(wo मेरी खिंचाई कर रही थी)

भार्गवी : (उसको भी अंदाजा हो रहा था, शिव उसको काफी कुछ बता चूका tha)Usko क्यों जिम्मेदारी लेनी है, हम सब है न, सब मिल कर उसकी जिम्मेदारी उठालेंगे, क्यों क्या कहती हो? (सब है pade)Are सुन तो (रंजन को देख kar)Wo आगे सीट पर एक पैकेट पड़ा होगा ले आ तो. (रंजन बहार भागते हुए गयी और वो पैकेट ले आयी, उसने पेंदे थे, सबने मुँह मीठा किआ, तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी मेने देखा तो जूही का फ़ोन था)

शिव : Hello.

जूही : हो गए तैयार?

शिव : है वो...

लता : किसका फ़ोन है?

शिव : जूही का.

लता : दे मुझे. Hello, जूही.

जूही : है, लता (आवाज पहचान कर)

लता : तुम तैयार हो गयी हो?

जूही : है, क्यों?

लता : सामान ले कर यही आ जाओ.

जूही : पर क्यों?

लता : आओ बोलै न (हक़ से)

जूही : हां आती हु. (उसको समाज नहीं आया, उसने सोचा था की शिव को जल्दी बुला कर थोड़ा टाइम बिताएगी, वो सामान उठायी और स्कूटर ले कर चली गयी, जब वो वह पहुंची तो सब को देख कर वो हैरान हो गयी)

लता : आओ बैठो yaha(Pehle जहा शिव बैठा था वही बैठा दिया, बरी बरी सबने टिका और चावल लगाए, पहले जूही बहोत खुस हुई पर फिर जैसे जैसे सबने उसकी आरती उतरी उसकी आंखे भर आयी, लता उसके पास गयी और गाल सेहला kar)Kya हुआ?

जूही : ऐसा लग रहा है जैसे कितना बड़ा परिवार है मेरा.

लता : तो नहीं है क्या. (उसके आंसू पोछे, वो लता के गले लग गयी)

साब ने फिर दोबारा से बधाई दी, मेने भार्गवी मैडम को अनाथालय की देखभाल के लिए दोबारा बोलै तो उन्होंने भी मुझे असस्वस्थ किया. वो hi हम दोनों को स्टेशन छोड़ गयी, वैस्वी और स्वर्ण दोनों चले गए, वैस्वी को भी शिव को अकेले न मिलने का गाम था पर जो हुआ था उस से वो और ज्यादा खुस थी.

में और जूही बस में बेथ गए, लम्बा सफर था तो रिजर्वेशन करवलिया था जूही ने तो सीट मिल गयी थी, बस पूरी रिजर्व्ड सीट वाली hi थी, हम दोनों बैठे हुए थे और बस अपनी रफ़्तार से चल रही थी, जूही बार बार अनाथालय में जो हुआ उसे याद कर के मुस्कुरा रही थी.

शिव : क्या हुआ, अकेले अकेले क्यों मुस्कुरा रही हो?

जूही : (शिव को प्यार से देखते hue)Aaj में बहोत खुस हृषिव, इस तरह से तो कभी मुझे किसी ने विश नहीं किआ था, थैंक यू.

शिव : विश उन सबने किआ और थैंक यू मुझे कह रही हो.

जूही : क्यों की तुम्हारी वजह से hi में उनसे जुडी हु, तो हुम्हे hi थैंक यू कहूँगी न. (तभी मेरी मश्ग टोन बजी, मेने मोबाइल निकल कर देखा तो और भी मश्ग थे जो में देख नहीं पाया था, मेने देखा तो बिना मैडम का मश्ग था, जूही मोबाइल में hi देख रही थी तो मेने उसकी और देखा, वो मुस्कुरायी और kaha)Na देखु? (में कुछ न बोलै, मेने मश्ग ओपन किआ तो उन्होंने भी मुझे और जूही दोनों को सुभकामनाये दी थी, मेने दूसरा मश्ग ओपन किआ जो काव्य मैडम का था, उन्होंने भी मुझे सुभकामनाये दी थी, नाज़िआ दीदी का भी था, और एक अननोन नंबर से था, मेरी समाज में नहीं आया की ये किसका है) ये किसका मश्ग है?

शिव : पता नहीं?

जूही : ऐसे कैसे पता नहीं, फ़ोन करो उन्हें, पता चल जायेगा.

शिव : (मुझे भी लगा तो मेने फ़ोन लगा diya)Hello.

आवाज : (ये लड़की की आवाज thi)Hello, कोण? (आवाज बहोत सुरीली थी)

शिव: आप कोण?

आवाज : (थोड़ा ाटिटूडे se)Phone आपने किआ है, मेने नहीं, आप बताओ, किसका काम है?

शिव : (मुझे आवाज समाज नहीं आ रही thi)Me शिव बोल रहा हु, आपके नंबर से मुझे मश्ग आया था.

आवाज : ओह! शिव. (आवाज में नर्माहट आ गयी, और आवाज और मधुर हो gayi)mene तो कोई मश्ग नहीं किआ. कैसे हो आप?

शिव : (अभी भी मेरी समाज में नहीं आ रहा था की कोण hai)Me अच्छा हु, आप कोण है, सॉरी में पहचान नहीं प् रहा हु.

आवाज : (सामने वाली मुस्कुरा di)Kaise पहचानो गए, कभी बात hi नहीं की तुमने मुझसे.

शिव : आपके पास मेरा नंबर कैसे आया? कोण हो आप?

आवाज : (आवाज नटखट सी हो गयी thi)Me क्यों बताऊ, बस इतना बता दू की मश्ग मेने नहीं किआ है.

शिव : पर मश्ग तो आपके नंबर से hi आया है न.

आवाज : तो क्या हुआ, किसी और ने मेरे नंबर से किआ होगा, में फ़ोन छुपके नहीं रखती. (उनकी आवाज से लग रहा था की उनको बहोत मज़ा आ रहा था मेरी खिंचाई करने में)

शिव : ठीक है, में रखता हु फिर. (मेने हथियार डालते हुए कहा)

आवाज : लगता है मेरी आवाज पसंद नहीं आयी आपको, हीहीही. वैसे मेरी और से भी सुभकामनाये आपको, अच्छे से प्रयास करना, इस्वर आपको कामियाबी जरूर देगा.

शिव : (वो मुझे जानती थी और मेरे कॉम्पिटिओं के बारेमे भी, पर अभी भी मुझे समाज नहीं आ रहा tha)Thank यू, आप बताइये न, कोण है आप?

आवाज : में क्यों बताऊ, आप खुद hi पता कर लो.

शिव : क्या में आपसे मिला हु?

आवाज : है मिले हो. (सामने आवाज जो आ रही थी उस से लग रहा था की उनको बहोत मज़ा आ रहा है ऐसे)

शिव : कब?

आवाज : वो में नहीं बताउंगी.

शिव : क्यों?

आवाज : हिहि hi, मेरी मर्जी.

शिव : आप कोण हो, कैसे मुझे जानते हो, बताइये न, या ऐसे hi बोल रहे हो.

आवाज : तो अभी भी आपको यकीं नहीं हो रहा की में आपको जानती हु, है न? आपका नाम शिव है जो अपने बताया पर ये तो नहीं बताया की आप बहोत लम्बे हो, आप 11व् कक्षा में साइंस में पढ़ते हो, और दुखकी बात है की आप अनाथ हो. (में अपने दिमाग पर जोर देने लगा और उस आवाज को याद करने की कोशिस करने laga)Ab यकीं हुआ की और भी कुछ बताऊ?

शिव : और क्या बताएंगी?

आवाज : बहोत कुछ है, पर वो में नहीं बता शक्ति, hihihi.(Me चुप हो गया, क्या बोलता, वो अपना नाम नहीं बता रही thi)Jyada अपने दिमाग पर जोर मात डालिये, और अपने लक्ष्य पर ध्यान दीजिये, में जो भी हु आपके जीवन में कोई महत्व नहीं रखती, तो ज्यादा परेशान मात होना, फिर से मेरी सुभकामनाये, bye.

शिव : प्लीज, अपना परिचय दीजिये न.

आवाज : मिलोगे तो दूंगी, bye.

शिव : पर कहा?

आवाज : वो भाग्य को पता, bye. (उन्होंने फ़ोन काट दिया)

जूही : (उसने थोड़ा थोड़ा सुना tha)Kon थी?

शिव : (वो अभी भी फ़ोन को देख रहा tha)Pata नाही?

जूही : तो ितनिदर क्या बात कर रहे थे?

शिव : वो मुझे जानती hai(Me अभी भी सोच रहा था)

जूही : आवाज से पता नहीं चला? (शिव ने ना में गर्दन हिलायी) होगी कोई, छोडो उसे. मेरी कोच सर से बात हुई थी, वो कल हमे वही मिलेंगे, वो बता रहे थे की कुछ लोग हमारी एंट्री का विरोध कर रहे है, पता नहीं क्या होगा कल.

शिव : किस बात का विरोध?

जूही : है कुछ लोग, जो अपना कोचिंग इंस्टिट्यूट चलते है, अगर ऐसे hi बहार से कोई आ के उनके वह के बच्चो को हरा देगा तो उनके वह कोण जायेगा, इस लिए ऐसे डायरेक्ट एंट्री को वो मन कर रहे है, कोच सर बात कर रहे है, देखते है क्या होता है.

शिव : (में जूही की बातो को भी सुन रहा था और साथ में उस आवाज के बारे में भी सोच रहा था की कोण थी वो? हमारी बाटे लगातार चल रही थी, लोगो को डिस्टर्ब न हो इस लिए हम धीमी आवाज में hi बात कर रहे थे, सूरज भी ढल चूका था, बस में भी लाइट चालू हो गयी थी, तभी बस एक जगह पर रुकी, चाय नास्ता करने के लिए)

जूही : चलो.

शिव : कहा?

जूही :चलो तो. (हम दोनों बस से उतरे और वो आस पास देखने लगी, फिर )चलो. (वो जिस और बढ़ी मेने देखा की वह शौचालय था, में कुछ नहीं बोलै, में बहार खड़ा रहा उसने अपना पर्स मुझे दिया और वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर बाद वो वापस आयी, वो शर्मा रही थी, उसने शरमाते हुए मेरे हाथ से पर्स लिया और kaha)tumhe नहीं जाना?

शिव : हम्म्म्म. (में भी वाशरूम हो आया, हम दोनों ने कॉफ़ी ली और बस के पास खड़े रह कर पिने लगे, थोड़ी देर बाद बस फिर से अपने सफर पर निकल गयी, बस वाले ने एक लाइट छोड़ कर साडी लाइट बजा दी, मेने देखा की जूही बंद खिड़की के कांच से बहार देख रही थी, वो जीन्स टॉप में थी, वो बहोत खूबसूरत लड़की थी और उसका मेरे प्रति समर्पण उसे और प्यारा बनता था, उसने अपने दोनों हाथ अपनी गॉड में रक्खे हुए थे, हम दोनों एक दूसरे से सात कर बैठे थे, मेने अपने दाहिने हाथ से उसका बया हाथ पकड़ा तो उसने मेरी और देखा, उसकी आँखों में शर्म चालक आयी, मेने बस उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया, वो हल्का मुस्कुरा के मुझे देखने लगी, मेने उसके हाथ को उठाया और उस पर किश की तो वो और शर्मा गयी और मेरे कंधे पर अपना शिव रख दी, थोड़ी देर हम ऐसे hi बैठे रहे, मेरे शरीर में गर्मी बढ़ रही थी, और उसकी सांसो से पता चल रहा था की उसकी भी वैसी hi हालत है, उसके साथ मस्ती करने का मान कर रहा था पर ऐसे पुब्लिकल्ल्य में रिस्क नहीं लेना चाहता था, मेने बाजूवाली सीट पर देखा तो वह दो बुजुर्ग दम्पति बैठे हुए थे और आंखे बंद किये हुए थे, जूही मेरे कंधे पर शिर रक्खे थी तो उसके बालो की खुसबू मुझे आ रही थी, मेने उसके थोड़े लम्बे नाखुनोवलि बड़ी ऊँगली को अलग किआ और उसे अपने मुँह में भर लिए )(शिव की इस हरकत से जूही ने हलकी सी सिसकी ली, जो बस मुझे hi सुनाई दी, उसने कोई विरोध नहीं किआ, उसको शिव की ऐसी हरकत अच्छी लग रही थी, उसके गरम मुँह का एहसास उसके अंदर हलचल मचा रहा था, उसने ऊँगली बहार निकली और दूसरी ऊँगली को अपने मुँह में लिए, जूही की सांसे भरी होने लगी थी, उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और शिव की झंघ पर रख दिया और हलके से दबा दिया, शिव उसकी उंगलिओ से खेल रहा था और वो गरम हो रही थी, उसकी योनि में गीलापन आने लगा था)

जूही : (फुसफुसाते hue)Koi देख लेगा (उसने बस इतना hi कहा)

शिव : में कहा कुछ कर रहा हु, बस हाथ hi तो है.

जूही : मुझे कुछ हो रहा है शिव, होटल में हम साथ hi रहनेवाले है.

शिव : तो??

जूही: वह जो चाहे कर लेना, यहाँ मेरी आवाज निकल जाएगी, में कण्ट्रोल नहीं कर पाऊँगी.

शिव : बस इतने से hi?

जूही : हा, तुम्हारे जरा सा छूने से hi में बेकाबू हो जाती हु शिईयिव. फिर मुझे मात दोष देना, में सबके सामने hi सुरु हो जाउंगी, बता दे रही हु. (उसने नशीली आँखों से मुझे देखते हुए कहा, उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था, में उसकी तड़प समाज सकता था)

शिव : ठीक है, (मेने उसका हाथ मुँह से निकल लीयपर अपने हाथ में hi रक्खा)

जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Bura लगा? (उसने मायूसी से कहा)

शिव : बुरा क्यों लगेगा, में समझता हु.

जूही : सॉरी यार, पर तुम्हारे छूने से में अपने आपको कण्ट्रोल नहीं कर पति.

शिव : तुम बहोत ज्यादा गर्म हो. (मेने उसके कान में कहा, वो मुस्कुरायी और शर्मा गयी) सच कहा न मेने? (उसने मुस्कुराते हुए हां में गर्दन हिलायी, मान तो मेरा भी बहोत कुछ करने का था पर हम दोनों इतने लम्बे थे की सीट से भी बहार दिख जाते थे, तो फिर हाथ में हाथ लिए बैठे रहे, वो मेरे कंधे पर अपना शिर टिका देती तो कभी सीट पर रख कर मुझे देखती, एक दूसरे के हाथ से बस खेल रहे थे, ऐसे hi वक़्त बिट गया और हम उस सहर पहुंच गए. दोनों ने अपने अपने बैग कंधे पर दाल लिए और बहार निकले, एक ऑटो रिक्शा से हम होटल पहुंचे जो जूही ने पहले से hi बुक किआ हुआ था. हम अंदर रिसेप्शन पर पहुंचे.

जूही : Hello, I’m जूही, ी हैवे बूकेड ा रूम ऑनलाइन फॉर तवो डेज.

रिसेप्शनिस्ट : जस्ट ा मूवमेंट मैडम (उसने अपने कंप्यूटर में चेक kia)Ya मां, प्लीज शो में योर ईद. (जूही ने सब फॉर्मलिटीज कम्पलीट की, वो 30-32 साल की लेडी थी, दिखने में खूबसूरत भी थी, वो बार बार मुझे देख रही थी, मुझे थोड़ी शर्म आयी तो में आस पास देख रहा था, थोड़ी देर baad)You हैवे बूकेड ओनली ओने रूम मां.

जूही : वे बोथ स्टे तोहिथेर, अन्य ऑब्जेक्शन माड़.

रिसेप्शनिस्ट : No मान नॉट ात आल, व्हाट इस यू पर्पस तो स्टे मां?

जूही : वे अरे हेरे फॉर ा कॉम्पिटिओं, व्हाई अरे यू आस्किंग?

रिसेप्शनिस्ट : यू haven’t मेंशन योर रिलेशन मां, जस्ट ाकिंग फॉर सिक्योरिटी पर्पस, यू क्नोव व्हाट हप्पेंस नाउ ा डेज, आईटी इस कंसर्न अबाउट आवर रेपुटेशन, सॉरी िफ़ यू उनकंफर्टबले.

जूही : No नॉट ात आल, यू अरे दोंग यू ड्यूटी, वे अरे फ्रेंड्स एंड पार्टिसिपेटिंग इन कॉम्पिटिओं (डाक्यूमेंट्स दिखते हुए) थिस इस डाक्यूमेंट्स िफ़ यू वांट तो चेक.

रिसेप्शनिस्ट : (डाक्यूमेंट्स को देखते hue)Thank यू मां, ी ऍम सतीसेफिइड, योर रूम नंबर इस 303 मैडम, थिस इस योर के card.(Usne के देते हुए कहा)

जूही : थैंक यू मैडम.

रिसेप्शनिस्ट : कॉल में राशि, मां (उसने मुस्कुराते हुए कहा और मुझे देखा, में बस मुस्कुराया).

जूही : थैंक यू राशि.

राशि : हैवे नीस स्टे मां.

जूही : यू कैन कॉल में जूही, राशि. (उसने मुस्कुराते हुए शिर हिला के हां कहा, हम दोनों लिफ्ट की और बढ़ गए, मेने लिफ्ट में जा कर देखा तो वो अभी भी मुझे hi देख रही थी, जूही ने भी ये देखा, जैसे hi लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ उसने मेरी बाह पर जोर से मारा)

शिव : ोूछ! मर क्यों रही हो.

जूही : मेरी मर्जी (राशि को ऐसे घूरते देख उसे जलन हुई थी इस लिए उसने शिव को मारा था, वैसे शिव की कोई गलती नहीं थी, वो hi उस पर लट्टू हो रही थी)

वह वो लड़की बीएड पर लेती हुई थी और शिव के बारेमे सोच रही थी, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किआ था, वो सोच रही थी की वो बता सकती थी की वो कोण है, पर ऐसा कर के उसे बहोत मज़ा आया था, वो बहोत सीधी सदी लड़की थी, ऐसा कभी नहीं किआ था उसने, पर ऐसे hi सुरु हुई बात इस मोड़ पर ख़तम होगी उसे खुद नहीं पता था, उसने फ़ोन निकला और टाइम देखा, फिर मुस्कुराते हुए उसने मश्ग टाइप किआ,

‘गुड नाईट, don’t थिंक अबाउट में’. उसने मश्ग किआ और मुस्कुराने लगी, उसे भी मज़ा आ रहा था ऐसे, उसने जान बुज कर ऐसा लिखा था ताकि अगर वो भूल भी गया हो उसे तो फिर उसके बारे में सोचे, क्यों वो तो उसको भी पता नहीं था, वो बार बार शिव को याद कर रही थी, ऐसे hi वो सो गयी.
 
अपडेट 166

हम दोनों रूम में आगये, रूम काफी अच्छा था, डबल बीएड था, में रात को जूही के साथ सोनेवाला था ये सोच कर hi मेरी नजर अपने आप जूही पर चली गयी, शायद वो भी यही सोचरही थी क्यों की उसने भी बीएड को देख कर मुझे देखा था, हमारी नज़ारे मिली तो वो शर्मा गयी, में उस खूबसूरत बाला को ऊपर से निचे तक देख रहा था, चेरे से भोला पाना टपक रहा था पर उसका खूबसूरत शरीर बयां कर रहा था की वो पूर्ण परिपक्व है और मिलान के लिए संपूर्ण रूप से तैयार है, मेरी नज़ारे उसके स्तन की और गयी जो दर्शा रहे थे की ये एक कुवारी के स्तन है, न ज्यादा बड़े न छोटे, अपनी गोलाई लिए वो मुझे आकर्षित कर रही थे, मेने उसकी नजरो को देखा तो वो शर्मा गयी और अपना बैग रख कर वो सीधे वाशरूम चली गयी, में बीएड पर hi बेथ गया और उसी दरवाजे को देखता रहा जहा से वो अंदर गयी थी, बाथरूम से पानी की आवाजे आ रही थी, थोड़ी देर बाद वो बहार आयी, बिना मेरी और देखे वो boli(Dhimi शर्मीली आवाज में),

जूही : तुम्हे भी जाना हो तो जा आओ, फिर खाने के लिए चलते है. (में कुछ नहीं बोलै और बाथरूम चला गया, बाथरूम भी साफ़ सुथरा था, मेने कमोड को देखा और सोचने लगा की अभी थोड़ी देर पहले वो इसी कमोड पर मूत रही थी, मेरे लुंड में हल्का सा कड़क पैन आने लगा, मेने पेशाब किआ और हाथ धो कर बहार चला आया. (वो बीएड पर बैठे हुए hi किसी खयालो में थी, मेने उसे देखा)

शिव : क्या हुआ? (वो एकदम चौंकी और मेरी और देख कर शर्मा गयी)

जूही : नहीं, कुछ नहीं, चले?

शिव : हम्म्म. (हम दोनों बहार आ गए, निचे वो hi लेडी बैठी हुई थी, वो 27-28 साल की खूबसूरत औरत थी, मंगलसूत्र या सिंदूर ऐसा कुछ नहीं था, उसे लड़की कहना hi ठीक रहेगा क्यों की वो ऐसी hi दिखती थी, उसने हमे आते हुए देखा, हम नजदीक गए तो वो हमे देख कर मुस्कुरायी.

जूही : (जूही को पता था की वो शिव को ताड़ रही है, वो मुस्कुरा के boli)Yaha, नजदीक, कोई अच्छा रेस्टोरेंट है?

राशि : है, राइट साइड थोड़ी hi दुरी पर है, सब तरह का खाना मिल जायेगा, वह दो चार और भी रेस्टोरेंट है.

जूही : थैंक यू.

राशि : मोस्ट वेलकम (उसने मुस्कुरा के देखा और इस लम्बे कपल को जाते हुए देखती रही और मान में सोची, क्या परफेक्ट जोड़ी है, वो भी कितना हॉट है, पैर क्या फायदा, इतनी मस्त लड़की साथ में है तो क्यों देखेगा मेरी और, है रे किस्मत, वो मुस्कुरायी और काम में लग गयी)

हम दोनों बहार चलते हुए एक रेस्टोरेंट में पहुंचे, रात का टाइम था तो कई लोग खाना खा रहे थे, हम अंदर गए तो कई लोगो की निगाहे हम दोनों की और हुई, उन्हें इग्नोर कर के हम दोनों एक टेबल पर बेथ गए, खाने का आर्डर किआ, वैसे भी बहार का खाना थोड़ा ऑयली और मसाले वाला होता है तो हम दोनों ने सदा खाना hi आर्डर किआ, में उसे hi देख रहा था, वो कभी कभी मुझे देखती पर नज़ारे झुकाये hi बैठी रही, में उसका ये अलग hi रूप देख रहा था, में उसके चेहरे के दीदार में खोया था की खाना आ गया, खाना कहने के बाद हम दोनों बहार निकले तो मेने उसका हाथ पकड़ लिया, उसने मेरी और देखा और शर्मा गयी, हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर चल रहे थे, हम दोनों की हिघ्त की वजह से लोग आते जाते हम दोनों को देखते थे, या किसी और वजह से पर किसे परवाह थी, हम वापस होटल पहुंच गए, हमने देखा की उस लेडी के साथ एक आदमी भी है, वो लेडी अपना पर्स वगैरह लिए तैयार थी, हम अंदर जा रहे थे और वो बहार निकल रही थी, हमे देख कर वो मुस्कुरायी और बोली.

राशि : खाना मिल गया?

जूही : जी है, आप जा रही है?

राशि : है, मेरी ड्यूटी ख़तम हो चुकी है, पर आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, कल रात की ड्यूटी है मेरी (ये उसने शिव की और देख कर कहा था, बस एक पल के लिए, जूही सब समाज रही थी पर बोली कुछ नहीं बस मुस्कुरायी, में नार्मल hi था) अच्छा में चलती हु, गुड नाईट.

जूही : गुड नाईट (वो मेरी और देख कर मुस्कुरायी तो मुझे भी मुस्कुराना पड़ा, वो चली गयी, हम दोनों अपने रूम की और निकल गए, रूम में दाखिल होते hi)Nyota दे रही थी, अगर इंट्रेस्टेड हो तो. (उसने मेरी और देख कर मुस्कुराते हुए अदा से कहा)

शिव : मुझे क्या जरुरत है उसकी, तुम हो न. (मेने मुस्कुरा के कहा तो वो भी मुस्कुरायी और शर्मा गयी)

जूही : तुम बैठो में चेंज करलेती हु (उसने मुस्कुरा के कहा) तुम्हे भी चेंज करना है तो कर लो. (उसने अपने बैग से कपडे निकले और बाथरूम में चली गयी, मेने भी कपडे निकले और एक शार्ट और टीशर्ट पहन लिया, अंदर कुछ नहीं पहना था. कपडे लटका के में बेथ गया, बाथरूम से पानी की आवाजे आ रही थी, लग रहा था की वो नाहा रही है (अंदर जूही अपनेपूरे कपडे निकल कर शावर के निचे कड़ी थी, वो अपने शरीर को अच्छे से साबुन लगा कर साफ कर रही थी, जब उसने अपनी हलके ब्लोवाली योनि को छुआ तो उसके शरीर में सिरहन सी दौड़ गयी, उसने साबुन लिया और अपनी योनि को अच्छे से साफ़ करने लगी जैसे उसे पता हो की आगे क्या होनेवाला है, वो शर्मा भी रही थी और साथ में मुस्कुरा भी रही थी, साफ़ करने के बाद उसने निचे झुक कर अपनी योनि को देखा, गुलाबी रंगत लिए योनि चमक रही थी, वो शर्मा के मुस्कुराने लगी, तौलिये से सब अच्छे से रगड़ रगड़ कर साफ़ करने के बाद उसने एक काली ब्रा और पंतय पहन ली, उसके ऊपर एक पिंक कलर की टीशर्ट और उसके निचे शार्ट पहन ली. उसके शरीर में अजीब सा रोमांच था और ढेर श्री शर्म, बहार निकलने से पहले उसने अपने आपको मिरर में देखा और कूद hi शर्मा गयी, उसकी धड़कने तेज चल रही थी, दरवाजा खोलने से पहले वो कुछ पल रुकी और अपने आपको शांत करने लगी, एक लम्बी साँस छोड़ कर वो बहार निकली.) में बस पानी की आवाजे सुन रहा था, वो नाहा रही है ये सोच कर hi मेरे शरीर में भी हरकते हो रही थी, तक़रीबन बिस मिनट बाद वो बहार निकली, उसे देख कर hi लग रहा था की मेरा अनुमान सही है.



भीगे बालो को पोछ रही थी वो, एकदम तजा काली के जैसे लग रही थी, उसने टॉवल वही लटका दिया, और मेरी और देखने लगी, उस खूबसूरत पारी को मेने ऊपर से निचे तक देखा, उसने गुलाबी टीशर्ट और उसी कलर का शार्ट पहना हुआ था, लम्बी पेअर भी बहोत खूबसूरत लग रहे थे बिलकुल किसी मॉडल के जैसी, मुझे ऐसे ऊपर से निचे देखते देख वो शर्मा गयी. वो नज़ारे निचे किये हुए hi नजदीक आयी, में अभी भी उसे hi देख रहा tha.)Bas भी करो, मुझे शर्म आ रही है (उसने मुस्कुराते हुए कहा).





शिव : (मुस्कुराते hue)Mene क्या किआ?

जूही : (नखरे se)Jyada बनो मात, ऐसे कोई देखता है क्या?

शिव : यू लुक सो हॉट यार. (मेने भी अपनी दिल की बात कह hi दी और साथ में मेरी आवाज में अरमान भी चालक आये थे)

जूही : (वो शर्मा gayi)Chal जूठा. (लड़कीओ को अक्सर तारीफ पसंद आती है पर वो नखरा नहीं छोड़ती). पानी पिओगे? (वो वह रक्खे फ्रेज़े की और जाते हुए बोली, में देख रहा था की चल में एक मादकता थी उसके, उसके कूल्हे कुछ ज्यादा hi हिल रहे थे, कमर में ज्यादा hi लचक थी, में भी उसके पीछे चला गया, जूही को एहसास था तो वो भी मुस्कुरा रही थी, उसने फ्रेज़े से बोतले निकली और पानी पिने लगी, थोड़ा पानी उसकी टीशर्ट पर भी गिरा, में उसे देख रहा था, उसके उभरे हुए स्तन पर मेरी नजर गयी, सुडौल तने हुए स्तन देख कर मेरे हाथ मचलने लगे, फिर मेने उसके चेहरे को देखा, दमकता बेदाग चेहरा था उसका, सुराहीदार गर्दन पानी पिने की वजह से हिल रही थी, पानी की बुँदे उसके गले से निचे की और जा रही थी, मान किआ की उसे चाट लू, पर में बस देखता hi रहा, पानी पिने के बाद उसने बोतले मेरी और बधाई तो मेने भी जल्दी जल्दी पानी पि लिया, उसने बोतले वापस फ्रेज़े में रख दी, में अभी भी वही खड़ा था, वो मेरी आँखों में देखने लगी, में उसकी, दोनों में से कोई कुछ नहीं बोलै. सीरत तेज सांसे सुनाई दे रही थी. दोनों hi जानते थे की क्या करना है पर फिर भी दोनों एक दूसरे को निहार रहे the,me आगे बढ़नेही वाला था की वो आगे बढ़ी और मेरे होठो को चुम लिया,





होठो को चूसते हुए उसकी तड़प साफ़ दिख रही थी. मेरे निचले होठो पर उसने दांतो से काट लिया और उसे जोरो से चूसने लगी, हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए थे, लगातार चूमने और चाटने की आवाजे हो रही थी.

उम्म्म्म श्रुणुप सृउप ुम्मम्ह उम्मंहहहहहहह, दोनों पशनातल्य एक दूसरे को किश कर रहे थे, मेने उसे कमर से पकड़ कर उठाया तो अपने पेअर मेरी कमर में लपेट ते हुए वो मेरे ऊपर चढ़ गयी,



लगातार हहम दोनों एक दूसरे को किश कर रहे थे, वो मेरे बालो को पकड़ कर खिंच रही थी, दोनों के मुँह थूक से भीग गए थे, होठ और उसके आस पास सारा मुँह थूक से सं गया था, जीभ में तो जैसे जंग छिड़ी हुई थी, में उसको वैसे hi उठाये हुए बीएड पर बेथ गया, मेरा लुंड पूरी तरह से कड़क हो गया था, जिसका एहसास उसे भी था क्यों की बैठते hi वो अपनी योनि मेरे लुंड पर रगड़ रही थी, वो सच में बहोत गर्म थी, उसने मेरी टीशर्ट भी ऊपर करते हुए निकल दी,



थोड़ी देर के लिए हमारी किश रुकी पर टीशर्ट निकलतेते हुए उसने फिर मेरे होठो पर हमला कर दिया, टीशर्ट शिर में थी तो मेने उसे पूरा निकल कर फेंक दी, और उसकी कमर को पकड़ कर खींचते हुए उसके नरम होठो को जोरो से चूसने लगा, लगातार वही स्कर्प स्लुर्र्प की आवाजे आ रही थी





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उम्म्म्म उम्म्म्म ुम्मःहहह स्लुर्र्प सलूरररपपपप चूमने चाटने का दौर चल रहा था और वो अपनी कमर मेरे लुंड पर रगड़ते हुए हिला रही थी, मेने भी उसके कूल्हों को पकड़ लिया और अपने लुंड पर उसकी योनि को कपड़ो के ऊपर से hi रगड़ने लगा. मेरे हाथ उसके टॉप के अंदर चेले गए, उस गरम शरीर का एहसास मेरे हाथो को होने लगा, उस नंगी पीठ को के सहलाने लगा, मखमली त्वचा का एहसास मेरे मान मस्तिक में बाहरणे लगा. मेने भी उसके टॉप को ऊपर काने लगा,



उसने अपने हाथ उठा कर मेरी मदद की अब वो ऊपर से ब्रा में थी, फिर हम दोनों किश करने लगे. में उसको गॉड में लिए उठा और पलट कर उसको बीएड पर फेंक दिया, वो जंगली बिल्ली के जैसे मुझे देखने लगी, मेने उसके शार्ट को पकड़ कर खिंच दिया, वो अब सिर्फ ब्रा और पंतय में थी, और मुझे देख रही थी, उसने अपने आपको छुपाने की जरा भी कोशिस नहीं की, वो खुल कर मेरा साथ देने को तैयार थी. में बस खड़े हो कर उस सुडौल मादा के शरीर को देख रहा था,





वो पूरी गर्मी में थी और मिलान को आतुर लग रही थी, मेरी और देख कर उसने अपनी ऊँगली से आने का इस्सर किआ. में फिर बीएड में चढ़ गया और उसके ऊपर हावी होने लगा,





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वो मुझे अपने ऊपर खींचते हुए वो मेरे गले को चाटने लगी, मेने उसके बाये स्तन को अपने दाहिने हाथ से ब्रा के ऊपर से hi दबा दिया.

जूही : शह्ह्हह्ह्ह्ह आराम सीए. (मेने उसकी और देखा तो वो नशीली आँखों से मुझे देख रही थी, मेने ब्रा के ऊपर hi महसूस हो रहे उस कड़क निप्पल को मसला तो उसकी आँखों में हलके दर्द के साथ मस्ती भर gayi)Aiiiiiiii shhhhhhhhhhhh.

शिव : दर्द हो रहा है? (उसने रोनी सूरत से हां में शिर हिलाया, मेने दाहिने स्तन के निप्पल को मुहमे लिया और उसे दांतो से हलके से कांटा)

जूही : आईईईई शीइइइइइइइ.

शिव : दर्द हुआ?

जूही : हाआआ (रोनी सूरत से उसने कहा)

शिव : तो न करू फिर? (मेने अंगूठे से निप्पल को मसलते हुए कहा)

जूही : (रोनी सूरत se)Aiiiii shhhhhhhhhh.

शिव : बोलो न, न करू. (वो मुझे गुस्से से देखने लगी, और जोर लगा कर उठने लगी, मुझे पलट कर मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी अपने पोनी किये हुए बालो से रबर निकल कर अपने बालो को हवा में लहराया, और मेरी और खींखकर नजरो से देखा, में कुछ समझता उस से पहले वो जोकि और मेरे निप्पल को अपने दांतो से काट li)Aiiiiiiii (फिर उसे जोरो से चूसने लगी, अजीब सी सनसनाहट मेरे पुरे शरीर को महसूस होने लगी, उसने दूसरे निप्पल को भी काट liya)Aiiiiiiii शह्ह्हह्ह्ह्ह.

जूही : (मेरी आवाज सुन कर उसने मुझे खूंखार हो कर देखते hue)Kyu क्या हुआ, दर्द हुआ?

शिव : (मुस्कुराते hue)Jangli कही की. (वो मुस्कुराने लगी, फिर वो मेरे ऊपर झुक गयी और मेरे निप्पल को जीभ से चाटने और हलके हलके काट ते हुए उसे चूसने लगी, एक ाजीप सी तरंग दौड़ रही थी, मेरे निप्पल को चूसते हुए अपनी कमर हिलाते हुए अपनी छूट को मेरे लुंड पर रगड़ने लगी, अब सिसकने की बरी मेरी thi)Shhhhh पगालल्ल शहहहहह. (थोड़ी देर बाद उसने मेरी और देखा और मेरे होठो पर टूट पड़ी और उसे काटने और चूसने लगी, मेने उसके कूल्हों को पंतय के समेत मसल दिया, उसे भी दर्द हुआ तो वो और वाइल्ड तरीके से मेरे होठो को काटने लगी और चूसने लगी, मेने उसकी पंतय के अंदर हाथ दाल दिए और उसके नंगे कठोर कूल्हों को मसल दिया, वो मसल कूल्हे एक दम कड़क थे, ऐसे कूल्हे थो किसी के भी नहीं थे, सिवाय भार्गवी के, पर वो भी इतने सख्त नहीं थे, मेने उसकी पंतय को निचे खिसकने लगा तो उसने मेरी और देखा, में रुक गया और उसको देखने लगा.

शिव : क्या हुआ (उसके चेहरे पर आयी परेशानी को देख कर मेने पूछा, वो बस मुझे निहार रही थी पर बोली कुछ नहीं, मेरे हाथ अभी भी उसके कुल्हापार hi थे, वो जिस तरह से मुझे देख रही थी में समाज गया की कोई न कोई बात जरूर है) क्या हुआ जान, किस दुविधा में पद गयी.

जूही : मुझे तुम पर गुस्सा आ रहा है (वो ये गुस्से में तो नहीं बोली थी, उसकी आवाज में मायूसी थी)

शिव : क्या हुआ, नहीं करना चाहती क्या?

जूही : कितनी बार तुमसे कहा था की कर लो सब पर नहीं, और दिन भी कोनसा चुना, आज. (उसने हलके गुस्से से कहा)

शिव : कुछ समाजमे आये ऐसा कहो, बात क्या है आखिर.

जूही : में कोई मेडिसिन नहीं ले पाऊँगी, न दर्द की न और कोई. (उसने मायूसी से kaha)Kal मेडिकल भी होगा, ब्लड सैंपल भी लिए जायेंगे. (मेरे हाथ जो उसके कूल्हों पर थे मेने बहार निकल लिए, उसने मेरी आँखों में देखा) क्या सचमे बहोत दर्द होता है क्या?

शिव : (उसकी पीठ सहलाते hue)Wo में कैसे बता सकता हु, ये दर्द लड़कीअ hi सेहती है, कितना होता है मुझे क्या पता.

जूही : (थोड़ी देर सोचती रही फिर जैसे किसी नतीजे पर पहुंची और kaha)Dekh लेनेगे, जो होता है होने दो.

शिव : (मेने उसे पलट कर अपनी दाहिनी और साइड में लेता दिया, और अपने दही ने हाथ के पंचे पर अपना शिर रखते हुए उसके साइड में लेट गया) पागल हो क्या, अच्छा हुआ अभी रुक गए. (वो मेरी साइड पलटी और अपना पैर मेरे ऊपर चढ़ाते हुए बोली)

जूही : पर तुम्हारा मान कर रहा है न? (उसने मेरी आँखों में देखा, में कुछ नहीं bola)Maan तो मेरा भी बहोत कर रहा है यार, इसीलिए तो गुस्सा आ रहा है तुम पर, पहले hi सब कर लिए होते तो आज आराम से कर शक्ति थे न.

शिव : तो क्या हुआ, कुछ दिन बाद hi सही, न तुम भागी जा रही हो न में, और ये तड़प hi तो है जो रिस्ता और मजबूत करती है.

जूही : (हलकी मायूसी se)Par मेरा बहोत मान कर रहा है यार. (उसने रोनी सूरत बना कर कहा, में मुस्कुराया)

शिव : में अभी तुम्हारी तड़प मिटा देता हु, जरुरी तो नहीं की वो सब करने से hi तड़प मिटेगी, और भी रस्ते है, और वैसे भी इतनी जल्दी तुम्हे प् लिया तो क्या hi मज़ा फिर.

जूही : (हलकी मायूसी se)Na जाने कब इंतजार ख़त्म होगा?

शिव : (उसके गाल को चूमते hue)Jald हो जायेगा, में तुम्हे उस से भी ज्यादा मज़ा दूंगा अभी, मायूस क्यों होती हो?

जूही : मेरा बहोत मान कर रहा है यार, में तुम्हे अपने अंदर महसूस करना चाहती हु (उसने मेरी आँखों में देखते हुए मायूसी से कहा)

शिव : वो भी दिन आएगा मेरी जान, उदास मात हो. अभी तो मुझे इस प्यारी सी बंद छूट का मज़ा लेने दो. (मेने मुस्कुराते हुए कहा, वो भी मुस्कुरा दी)

जूही : गंदे कही के, ऐसा बोलता है कोई.

शिव : और क्या कहु उसको फिर, मुझे उस छोटे से छेड़ को जी भर के प्यार करना है, फिर तो वो खुल hi जानेवाला है. पर ये तड़प और ज्या मज़ा देगी हमको.

जूही : एक बात पुछु शिव, वो तुम्हारा वह अंदर चला जायेगा? (उसने सवालिया नजरो से मुझे देखा)

शिव : ऐसा क्यों पूछ रही हो?

जूही : मेने वह अपने निचे देखा है, वह बहोत छोटा सा छेड़ है, और तुम्हारा वो कितना बड़ा है, कैसे जायेगा वह.

शिव : वो जरूर चला जायेगा, और पूरा चला जायेगा. (वो शर्मा गयी)

जूही : एक बात पुछु?

शिव : इसमें पूछनेवाली क्या बात है, पूछो जो पूछना है.

जूही : मैडम, भाभी, स्नेहा वो सब तो शादीशुदा है, उन्होंने पहले से hi किआ हुआ है, क्या तुमने किसी कुवारी लड़की के साथ किआ है?

शिव : (वो फ्लो में बोल गयी थी पर में चौंक gaya)Tum भाभी के बारे में जानती हो?

जूही : (उसे भी अपनी गलती का एहसास हुआ पर फिर वो संभल कर boli)Ha, उस दिन भी तो मेने कहा था, शायद तुमने ध्यान नहीं दिया.

शिव : मुझे याद है, तुमने सिर्फ मैडम और स्नेहा का नाम लिया था, और तीसरा नाम लेते लेते रुक गयी थी.

जूही : सच कहु तो में इसीलिए तुम्हे वह ले गयी थी, हलाकि मुझे नहीं पता था की तुमदोनो का होगा की नहीं पर मेने सोचा की हो जाये तो भाभी की कमी पूरी हो जाती.

शिव : मतलब तुम जानती हो की वो मेरी वजह से माँ बन रही है?

जूही : है, मेने तुम्हारे और स्नेहा के बारे में सुना था तभी मेने ये फैसला कर लिया था. मुझसे उनका दर्द देखा नहीं जा रहा था, वो बच्चे के लिए तड़प रही थी. तुमसे अच्छा कोण hi होता.

शिव : पागल है क्या तू, मुझे लगा था की पहले से hi तू मुझसे प्यार करने लगी है.

जूही : (मेरी और देख kar)Tu जनता था ये?

शिव : (मुस्कुराते hue)Teri आँखों से सब पता चल रहा था. (उसने मेरे शाइन पर मारा)

जूही : तो फिर आगे क्यों नहीं बढ़ा (उसने हल्का गुस्सा किआ)

शिव : में कैसे आगे बढ़ता, न मेरी औकात है न मेरी हैसियत.

जूही : तू भी पागल hi है, लड़कीअ ये सब नहीं देखती, और है, ये सब भाभी को मात बताना की मुझे उनके और तुम्हारे बारे में पता है.

शिव : क्यों?

जूही : में नहीं चाहती की वो मेरे सामने शर्मिंदा हो, आखिर वो मेरे भाई की बीवी है.

शिव : चल ठीक है, अब जो अधूरा है वो भी पूरा कर ले?

जूही : (वो शर्मा गयी और muskurayi)Rehne दे, में रुक नहीं पाऊँगी फिर.

शिव : कुछ नहीं होगा (मेने उसको अपनी बहो में भरा और उसे कूल्हों को फिर से मसलने लगा)

जूही : (कसमसाते hue)Rehne दो न प्लेस, मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता फिर.

शिव : (उसके सुराहीदार गले में किश करते hue)Control तो मुझसे भी नहीं हो रहा, तुजमे बहोत कामुकता भरी है जूही, शहहहहह ऐसी अवस्था में रुक जाऊ ये हो नहीं सकता. (अपनी बातो और सांसो की तपिस से में उसे फिर से गर्म करने लगा, और उसकी सस्ते भी तेह चल रही थी वो भी मेरे गले को कान को छत रही थी)

जूही : शहहहहह सलूऊऊररप, सलूरररप शहहहहह रुक जा यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कुछ हो जाएगाआ शहहहहह. (मेने उसकी पंतय में हाथ दाल कर उसके कूल्हे मसलने लगा, उसकी कमर झटके खाने lagi)Shhhhhh मेरी जाएं में रुक नहीं पाउँगीीी शह्ह्ह्हह्ह समझता क्यों नहीं शह्ह्हह्ह्ह्ह पागल हो रही हु में शहहहहह. (में उसकी पंतय निचे खिसकने लगा, उसने रोका नहीं मुज को, अपने पारी से मेने उसकी पंतय निकल दी, वो निचे से नंगी हो चुकी थी, मेने उसके कूल्हे को फैलते हुए उसके पकड़ा तो मेरी ऊँगली दरार के गरम हिस्से को छूने लगी जिस से मेरे शरीर में ऊर्जा का संचार होने लगा)

शिव : तू बहोत गर्म है मेरी जाएं, (उसकी गर्दन को कहते हुए मेने कहा)

जूही : शह्ह्हह्ह्ह्ह रुक जा यार शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : कुछ नहीं होगा, में हु न (में ये कह तो रहा था पर मेरी भी हालत ख़राब थी, मेरा पूरा मान कर रहा था की उसकी गरम छूट में समां जाऊ) कुछ नहीं होगा शह्ह्ह्हह्ह. (मेने उसे पलट दिया और उसकी ब्रा के हुक खोल दिए, और उसकी नंगी पीठ को चाटने लगा, उसकी गर्मी में मुसुस कर रहा था, वो मासपेशिओ वाली पिक्थ अपनी सख्ताई दर्शा रही थी, वो कह रही थी की ये माड़ कितनी मजबूत है)

जूही : (मचलते hue)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह. (में उसकी पूरी पीठ को चाट रहा था और साथ में उसके कूल्हे मसल रहा था, मेने देखा की वो सुडौल कूल्हे अपनी ऊंचाई से मुझे अपनी और खिंच रहे थे, में निचे की और सरकते हुए उनके ऊपर पहुंच गया और उसे चूमने laga)Shhhhhhh शीइइइइइव शहहहहह (जूही को बहोत अच्छा लग रहा था, उसके शरीर में शोले दहक रहे थे और जीभ से निकलती थूक उसे ठंडा करने की कोशिस में लगी thi)Shhhhhhhh (में निचे की और चला गया और उसके दो पैरो के बिच चला गया, उसके दोनों कूल्हों को फैला कर मेने देखा तो उसकी गुदा का छेड़ गहरे रंग के गोलाकार के मध्य में था, निचे छूट का आभास हो रहा था, में कूल्हे फैला कर उसको अच्छे से देख रहा था, जूही ने मेरी कलाई पकड़ li)Shhhhhhh मात कर यार शह्ह्ह्हह्ह में पागल हो जाउंगी (मेने उसकी बातो पर ध्यान नहीं दिया और झुक कर उस छेड़ पर गहरा चुम्बन लेने laga)Shhhhhhhhh aaaahhhhhhhhhh (उसने अपने कूल्हे और ऊपर उठा दिय्ये, में उसे फैला कर अपनी जीभ से चाटने laga)(Juhi की हालत ख़राब हो रही थी, ऐसे एहसास से वो पूरी तरह कामाग्नि में जल रही थी, वो अपने आप पर का आप खोटी जा रही थी, वो सब भूल गयी थी बस उसको अपनी गुदा पर हो रहे उस जीभ का स्पर्श hi महसूस हो रहा था, एक हाथ से उसने शिव की कलाई पकड़ी थी और दूसरे हाथ से बिस्तर की चादर और अपने चेहरे को सिरहाने पर रगड़ रही thi)Shhhhh शहीीीव शह्ह्हह्ह्ह्ह (शिव उसकी छूट तक अपनी जीभ ले जाने का प्रयास कर रहा था पर उसके पेअर बिच में आ रहे थे तो वो और ऊपर हो गयी और घोड़ी बन गयी और अपने पेअर फैला दिए ताकि शिव को आसानी हो, शिव ने भी तुरंत छूट के होठो पर कब्ज़ा कर लिया और उन होठो को भी मुँह के होठो की तरह चूसने और चाटने लगा, जूही बहोत मचल रही थी, वो चद्दर को खिंच रही थी और पुरे कमरे में सिस्किअ गूंज रही थी, शिव उसकी छूट को अच्छे से चाट रहा था, उस से रहा नहीं जा रहा था, उसे अपनी छूट के अंदर कुछ चाहिए था, शिव ने जैसे उसकी बात सुन ली और अपनी जीभ को नुकीला बना कर छेड़ में डालने लगा, जूही ने तेह सिसकी li)Shhhhhhhhhh शीइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (उसकी गुलाबी कुवारी छूट की महक मुझे दीवाना बना रही थी, हलके हलके नुकीले बाल बता रहे थे की ये लड़की पॉर्न जवान हो चुकी है, और संगम को आतुर है, उस छेड़ से सेहद टपक रहा था जिसे में चाट कर आनंद ले रहा था, वो मादक गंध मुझे और गर्म कर रही थी, में अपनी जीभ को और अंदर डालने लगा पर छेड़ छोटा सा hi था, मेने उसे पलट ते हुए सीधा लेता दिया और उसके पेअर फैला कर उसका मुआइना करने लगा, भरे हुए होठ मुझे अपनी और आकर्षित कर रहे थे, में फिर से झुक गया और उसके होठो को चाटने लगा, उसने अपनी मांसल झांघो से मेरे शिर को दबोच लिया, उसकी पकड़ दर्शा रही थी की ये मादा कितनी ताकतवर है, मेरे जैसे को भी छूटने नहीं दे रही थी, पर में उसकी छूट को चाट ता रहा तो उसने अपनी पकड़ खुद hi ढीली कर दी और मेरे शिर पर हाथ रख कर मुझे अपनी छूट पर दबाने लगी)

जूही : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइव shhhhhhhhhh प्लीज फ़क में सीईव shhhhhhhhhhhh फ़क मीटीए. (में उसकी तड़प को महसूस कर रहा था, में फिर भी छूट चाट रहा था, वो मेरे शिर को धक्का देने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फ़क में यार शह्ह्हह्ह्ह्ह पलासी shhhhhhhhhh बस करूऊओ शहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा shhhhhhhhhhh (वो मेरे बालो को खिंच कर मुझे अपने ऊपर खींचने लगी, उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी की मुझे दर्द होने लगा, में उसके ऊपर चढ़ने लगा, उसने मुझे खींचते हुए अपने ऊपर चढ़ा लिया, मुझे बहो में भरते हुए मेरी पीठ पर अपने नाख़ून घुसाने लगी, पुरे नशेमे थी वो, नशीली आँखों से मुझे देख रही थी और अपनी कमर हिला रही थी, मेरी चड्डी का एहसास होते hi वो उसे निचे उतरने की कोशिस करने लगी, में उसको hi देख रहा tha)Isse उतरो शीइइइइव (उसकी आवाज पूरी तरह मादक हो गयी थी, उसने अपने पैरो से मेरी चड्डी उतर दी, और अपने मजबूत पैरो से मुझे अपनी और खींचने लगी, में दूर रहना चाहता था पर वो नहीं मणि और मुझे अपनी और खिंच लिया, लुंड छूट से सात गया, वो हम दोनों के बिच ऊपर की और था, वो अपनी छूट को उस पर घिसने lagi)Shhhhhhh शीइइइइइव shhhhhhhhhh प्लीज फ़क मई shhhhhhhhhhh. (में कैसे भी अपने आपको संभाले हुए था, मान मेरा भी कर रहा था, पर में अपने आपको नियंत्रित किये हुए था) (जब जूही ने देखा की वो कुछ नहीं कर रहा है तो उसने अपनी ब्रा को ऊपर खिसकाया और शिव के मुँह को अपने स्तन पर लगा दिया, शिव भी उसके तने हुए छोटे से निप्पल को मुहमे भर कर चूसने लगा, वो अपनी कमर हिला रही थी और लुंड को भिगो रही थी, शिव के कूल्हों पर अपने नाख़ून चूहों रही थी और उसे अपनी और खिंच रही थी, उसने दूसरी और की भी ब्रा को ऊपर किआ और अपनी छाती मोड़ कर दूसरे निप्पल को भी शिव के मुँह के सामने कर दिया, वो पूरी तरह से गर्म thi)Please फ़क मी यार शह्ह्ह्हह्ह ी वांट यू बेबी शह्ह्हह्ह्ह्ह ी रॉय वांट यू shhhhhhhhhhh. (उसकी मादकता से भरी सिस्किअ और उसका निमंत्रण मुझे आगे बढ़ने को प्रेरित कर रहा था, पर में जैसे तैसे अपने आपको संभाले हुए tha)(Juhi से बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसने शिव की कमर को ऊपर की और धकेला और उसके लुंड को सीधा किआ और अपनी योनि पर रखने लगी, लुंड छूट पर सेट हो चूका था, जूही को उसका एहसास हो चूका था, वो शिव को अपनी और खींचने लगी, पर शिव निचे नहीं आ रहा था, उसने झुंझलाते ुए शिव को देखा, वो मुस्कुरा रहा था, उसने रोनी सूरत से उसे देखा और उसे अपनी और खिंचा, वो चाहे जितनी भी बल शैली थी पर उसका नर भी वैसा hi बलिस्त था, उसकी नहीं चल रही थी, वो बिनती भरे स्वर में boli)Please फ़क में बेबी, ी वांट यू इनसाइड में. (में उसकी हालत समाज रहा था, मेने अपने लुंड को फिर से ऊपर की और किआ और छूट को ऊपर से hi रगड़ते हुए जटके मरने laga)Shhhhhh माय लव शह्ह्ह्हह्ह फ़क में बेबी shhhhhhhhhh प्लीज उसे अंदर दाल दो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो बहोत गरम हो रही थी और अपनी कमर को झटका रही थी, में उसको कोई भी मौका दिए बगैर उसको अपने निचे दबोचे बस धक्के लगा रहा tha)Shhhhh यहा शह्ह्ह्हह्ह आईईईई shhhhhhhhhh ी लव यू शह्ह्ह्हह्ह ी लव यू माय लव shhhhhhhhhh ी ऍम योर्स shhhhhhhhhh जस्ट फ़क में डार्लिंग शहहहहह ी ऍम योर्स shhhhhhhhhh. आईईईई शह्ह्ह्ह में नहीं रह सकती shhhhhhhhhh मुझे कुछ हो रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह सोम्थिंग हैपन तो में शहहहहह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुजमे समां जाओ shhhhhhhhhh आईइइइइइइइ में सहलूंगी याआर shhhhhhhhhhh बस थोड़ा सा दाल दो शह्ह्हह्ह्ह्ह (मेने उसकी बात मान ली और अपने लुंड को छूट के छेड़ पर सेट किआ अहुर हलके हलके धक्के लगाने लगा, वो मुझे खिंच रही थी पर में पूरी तरह से ध्यान रख रहा था, वो बहोत गर्म हो रही थी, और अपनी कमर उचक कर लुंड को अंदर लेने की कोशिस कर रही थी)

शिव : नहीं जूही, में हटा लूंगा उसको.

जूही : नहीं शिव, नहीं शह्ह्ह्हह्ह थोड़ा अंदर जाने दो शह्ह्ह्ह कुछ नहीं होगा यार शह्ह्ह्ह बस थोडा शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : तुम धक्के मात मरना सामजी.

जूही : शह्ह्ह्ह हा.

शिव : अगर किआ तो में निकल लूंगा याद रखना.

जूही : (रोनी सूरत se)Nahi करुँगी शहहह तुम hi कर लो शह्ह्ह्हह्ह बस थोड़ा सा दनेर दाल दो में पागल हो रही हु यार, shhhhhhhhhh मेरी जान शह्ह्ह्ह बस थोड़ा सा. (में उसकी छूट पर हलके हलके धक्के मरने लगा, छूट बंद थी तो अंदर नहीं जा रहा था बस उसे छूट पर चक्को का एहसास हो रहा था, में लगातार धक्के लगा रहा था, वो मेरे गले को कान को गाल को सब जगह चुम रही thi)Shhhhh थोड़ा सा शह्ह्ह्ह और अंदर शह्ह्हह्ह्ह्ह उम्म्म उम्म्म उम्म्म्म शहहहहह (छूट के हॉट फैलने लगे थे, लुंड पूरी तरह चिकना हो चूका था और लुंड का टोपा आधे से ज्यादा अंदर घुस रहा tha)Yesss बेबी शहहहहह ी ऍम योर्स शह्ह्ह्हह्ह जस्ट फ़क में शह्ह्हह्ह्ह्ह उम्म्म्म उम्म्म्म उम्मम्मम. डोंट वोर्री अबाउट एनीथिंग शह्ह्ह्ह जस्ट फ़क में बेबी शह्ह्हह्ह्ह्ह (में उसके निप्पल को जोरो से चूसने लगा और धक्के लगाने laga)Yes माय लव शह्ह्ह्ह जोस्ट फ्यू मोरे शह्ह्ह्ह ी ऍम क्युम्मिंग शह्ह्ह्ह जस्ट पुश आईटी शह्ह्हह्ह्ह्ह जस्ट बेबी shhhhhhh(Wo मुझे अंदर डालने के लिए उकसा रही थी, में अपने आपको कण्ट्रोल करने की कोशिस कर रहा था, आज पहली बार मेरा भी बिना कुछ किये छूटनेवाला था, में सोचने लगा की दाल hi दू, में थोड़ा जोर से धक्के लगाने लगा तो लुंड का टोपा और अंदर सरकने लगा, जूही को उसका एहसास हुआ, उसे हल्का दर्द भी हो रहा था, पर वो कामातुर हो चुकी thi)Yeesss बेबी जस्ट पुश मोरे शह्ह्हह्ह्ह्ह ी लव यू शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जस्ट पुश मोरे shhhhhhhhhhh (वो बर्दास्त नहीं कर पायी और झड़ने लगी, झड़ते हुए उसकी कमरे झटके खाने लगी और लुंड का टोपा अंदर पूरी तरह से घुस gaya)Aiiiiii शह्ह्हह्ह्ह्ह माय लव shhhhhhhhhh आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह shhhhhhhhhhhhh (मेरी भी आंख बंद हो चुकी थी, में टोपे को अंदर बहार करने laga)Yessss एसससस शहहहहह जस्ट दो आईटी शहहहहह जो अहेड बेबी शह्ह्हह्ह्ह्ह जो ाहीद shhhhhhhhhhhh (में पूरा थोड़ देता उसको, मेने अपने आपको कण्ट्रोल किआ और लुंड को बहार निकला और उसके मुँह में दाल दिया, वो लेती हुई थी, में लुंड को अंदर ठोकने laga)Guuuu गूऊऊऊ guuuuuu(Wo आवाजे कर रही थी, पर में बस निकलना चाहता था, मेने थोड़े झटके मारे पर मुझे जूही की दया आ गयी और मेने लुंड बहार निकल लिया और अपने हाथ से हिलने लगा, जूही ने देखा, वो थोड़ी ऊपर हुई और उसके लुंड को अपने मुँह में वापस भर लिया, में हिला रहा था वो अपने मुँह में भरे हुए थी, और मुझसे रहा न गया और में छूटने laga(Juhi अपने मुँह में गिरते उस गरम तरल को महसूस करने लगी, पर वो वही रही, पीछे नहीं हटी, आखिर कर शिव शांत हुआ, जूही फ़ौरन बाथरूम की और भागी और सिंक में अपने मुँह में भरे हुए वीर्य को उगलने लगी, अज्जेब लग रहा था उसे, उसने कुल्ला किआ और अपने मुँह को साफ़ किआ, उसको अपनी योनि पर हल्का दर्द महसूस हुआ तो उसने कमोड पर बेथ कर अपनी योनि को देखा, उसका छोटा छेड़ वापस बंद हो गया था, उसको छूने पर हल्का सा दर्द महसूस हुआ पर ज्यादा नहीं था, वो अब संत हो चुकी थी, सेक्स का खुमार उतर चूका था, वो सोचने लगी की अगर शिव ने सच में कर दिया होता तो वो यक़ीनन कल हिस्सा न ले पति, उसे याद आया की उसने शिव को कितना उकसाया था पर उसने कण्ट्रोल नहीं खोया, उसकी छूट से मूत निकल रहा था और वो शिव को याद कर के मुस्कुरा रही थी, उसको शिव से और ज्यादा प्यार हो गया था, उसने तौलिये से अपने आपको लपेटा और बहार आयी, शिव अभी भी नंगा लेता हुआ था, वो उसके ऊपर चढ़ गयी और उसको किश करने लग्गी, थोड़ी देर बाद वो उसकी आँखों में देख रही थी,

जूही : थैंक यू?

शिव : (उसको देखते हुए, muskuraya)Kis बात के लिए?

जूही : तुमने मुझे संभाला, अपना कण्ट्रोल नहीं खोया, थैंक यू माय लव, ी रॉय रॉय लव यू माय स्वीटहार्ट. (उसने फिर किश कर ली)
 
ी ऍम रियली वैरी सॉरी, बूत पास्ट फ्यू डेज र वैरी क्रुशल फॉर में, माय फादर वास् एडमिटेड एंड नाउ ी लॉस्ट हिम. ी ऍम बिजी विथ हिज फ्यूनरल, ी ऍम वैरी डिस्टर्ब राइट नाउ. ी विल कंटिन्यू आफ्टर सम टाइम.
 
एव्री ओने हु व्रिठे एंड ठोस हु don't व्रिठे बूत प्रे फॉर पीस ऑफ़ माय फादर, It's रियली ा लोट फॉर में. ी don't क्नोव हु यू अरे एंड वेयर यू अरे बूत योर कंसर्नस एंड प्रे इस रीछेड तो में एंड माय फादर.

थैंक यू एवरीवन.

वे विल कंटिन्यू आफ्टर थ्री डेज.
 
अपडेट 167

रात भर मेरी बहो में सोई रही थी जूही, सुबह में पहले उठ गया था तो में नाहा लिया, जब तौलिया लपेटे बहार आया तो जूही बिस्तर में बैठी हुई थी, मुझे देख कर वो शर्मायी, में भी मुस्कुराया तो वो बाथरूम में चली गयी, जब वापस आयी तो सिर्फ तौलिया लपेटे हुए थी, में अपने बल सूखा कर रौलिये में hi था और उसका इंतजार कर रहा था, वो अभी भी मुझे ऐसे देख कर संकुचन लगी, नज़ारे निचे किये हुए hi वो मिरर के सामने गयी और अपने बालो से पानी झटकने लगी, उसको ऐसे देख कर मुझसे रहा नहीं गया और उठ कर उसके पीछे खड़ा हो गया, उसने हलके से आईने से मुझे देखा फिर नज़ारे झुका ली, मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, मेने उसको पीछे से पकड़ लिया तो उसकी आंखे बंद हो गयी.

जूही : (शरमाते hue)Chhodo न क्या कर रहे हो? (मेने उसके कड़क स्तन को अपने पंजो में भर liya)Shhhhhhh मात करो ऐसा shhhhhhhhhhh.

शिव : बस थोड़ी देर स्वीटी (में उसके कड़क गोलों को सहलाने लगा और वो सिस्किअ लेने लगी, उसके गले को चूमते hue)Tum बहोत स्वीट हो स्वीटी. (वो शर्मगाई और मुस्कुराने लगी, मेने उसको अपनी और घुमाया और उसकी आँखों में देखने लगा, वो भी बड़े प्यार से मुझे देख रही थी, मेने उसके गाल पर आये बाल को ठीक किआ) दर लग रहा है?

जूही : नहीं शिव, मुझे तुम पर पूरा भरोषा है, शायद में अपना आप खो दू पर तुम मुझे संभल hi लोगे.

शिव : (हलके से उसके होठो पर किस कर ke)Niche दर्द तो नहीं है न? (मेरी बात से वो शर्मा गयी और अपना शिर निचे कर के ना में गर्दन हिलने लगी, उसकी शर्म और उसके होठो की हसी मुझे पागल बना रही थी, पर मेने अपने आप को कण्ट्रोल किआ, उसके गल्ल को अपने हाथो में थम कर में ने kaha)I लव यू बेबी. (उसने एक पल मेरी आँखों में देखा और मुझसे लिपट गयी)

जूही : ी लव यू तू माय लव.

शिव : (थोड़ी देर ऐसे hi खड़े रहने के बाद मेने kaha)Taiyar हो जाओ, निकलना है.

जूही : हम्म्म्म.

फिर हम दोनों तैयार हुए, अपना ट्रैक, शूज और दूसरा सामान ले कर हम बहार निकले, निचे काउंटर वही आदमी बैठा हुआ था, हमने उसे देखा और उसने हमें देखा, हम बहार निकल आये और रिक्शा से स्टेडियम की और चले गए, जब हम वह पहुचेतो काफी चहल पहल थी, जूही ने कोच सर को फ़ोन किआ और हम उनके पास चले गए. हमने उनके पेअर छुए.

कोअक्सीर : जीते रहो, आओ. (हम लोग एक और जहा रजिस्ट्रेशन हो रहा था वह चले गए, हमने फॉर्म लिया) ये लो फॉर्म भर लो और डॉक्युमनेट की कॉपी इसके साथ आड़ कर लो. (हम लोग अभी बात कर hi रहे थे की तभी एक आदमी आया, उसके साथ कुछ लड़कीअ और लड़के थे, मेरी नजर उसके ऊपर गयी, उसने एक नजर मुझे देखा फिर जूही की और देखा, उसकी आँखों और चेहरे पर कमीना पैन साफ़ जलक रहा था, मेने देखा की जूही ने अपनी नज़ारे घुमा ली पर वो धित कामिनी मुस्कान से मुस्कुरा रहा था)

आदमी : तो आखिर आप नहीं मान रहे? (उसने कोच सर की और देख कर कहा)

कोअक्सीर : (मुस्कुराते hue)tum अपना काम करो में अपना काम कर रहा हु सुखविंदर. (ये भी एक कोच था)

सुखविंदर : में ने आपसे कहा भी था की ये नहीं होने dunga,par लगता है की आपको अपनी बेइज्जती करवाने का शौक है.

कोअक्सीर : वो में देख लूंगा, तुम अपना काम करो.

सुखविंदर : (कामिनी मुस्कान के sath)Me तो अपना काम hi कर रहा हु (जूही की और देख kar)Kaisi हो जूही (वो बहोत गन्दी हसी हँसा, जूही कुछ नहीं बोली) लगता है सब भूल गयी हो, खैर, अब आ hi गयी हो तो भुगतना फिर, इस चक्कर में नौकरी भी जाएगी तुम्हारी. (जूही कुछ नहीं बोली, मेरा मान किआ की एक घुसा मार दू उसको)

कोअक्सीर : अपना काम करो तुम, में भी देखता हु क्या करते हो तुम.

सुखविंदर : जरूर देखना, और वैसे भी अब ये आउटडेटिड हो चुकी है, (एक लड़की की और इस्सर कर ke)Vijaylakshmi, इधर आओ. (वो लड़की आगे aayi)Tumhe तान्या तो याद hi होगी, इसबार ये है, बस फॉर्मेलिटी के लिए hi आयी है, जीतेगी तो यही (जूही की और देख कर उसने kaha,Juhi कुछ नहीं बोली) आप भरो फॉर्म, उसको रिजेक्ट करवाने की जिम्मेदारी मेरी है. (वो कामिनी हसी हँसा और कुछ फॉर्म ले कर वह से चला गया)

कोअक्सीर : (जूही ko)Tum उस पर ध्यान मात दो.

जूही : (चिंतित हो kar)Par सर...

कोअक्सीर : मेने कहा न, वो कुछ नहीं कर पायेगा, तुम बस अपने पर फोकस करो. (मेने और शिव ने फॉर्म भर दिया और सब डाक्यूमेंट्स के साथ कोअक्सीर को दे दिए, उन्होंने सारा फॉर्म चेक किआ और फिर उसे वह सबमे करवा diya.)Tum लोग घूमो, थोड़ी देर बाद मेडिकल होगा. (वो चले गए)

शिव : ये hi है वो कोच?

जूही : है (उसने मायूसी से कहा)

शिव : (उसका हाथ पकड़ kar)Me हु न, क्यों फ़िक्र करती हो. (जूही ने बड़े प्यार से मेरी और देखा, उसके चेहरे पर बेचैनी थी तो मेने उसे गले लगा liya)Me हु. (मेने बस इतना hi kaha)(waha थोड़ी दूर कड़ी विजयलक्ष्मी की निगाहे इन दोनों पर hi थी, वो भी थोड़ी बेचैन लग रही थी, उसके पास कड़ी दूसरी लड़की ने कहा)

लड़की : उसे देख कर परेशान है क्या?

विजयलक्ष्मी : (उसने ुलजनवले भाव ने ना में शिर hilaya)Me क्यों परेशान हो.

लड़की : तेरे चेहरे से तो यही लग रहा है.

विजयलक्ष्मी : उनको मेने पहले भी देखा है, तब में छोटी थी, मेरी फवौराते थी ये, पर फिर पता नहीं क्यों, लास्ट में ये नहीं दौड़ी थी.

लड़की : तू तो जानती है अपने कमीने कोच को, एक नंबर का कमीना है, वो तुजे जीता hi देगा, तूने कीमत जो चुकाई है.

विजयलक्ष्मी : हम कितनी म्हणत करते है, फिर भी ऐसा गन्दा काम करना पड़ता है.

लड़की : यहाँ सब ऐसा hi है, सेल सब ऐसे hi है, तभी तो हमारा देश पीछे है, पर क्या कर शक्ति है, इन्ही के बिच हमे रहना है, तू अपना देख, वो कोई न कोई जुगाड़ लागहि लेगा, और इतनेसलो की तेरी भी म्हणत है, चिंता क्यों करती है. (विजयलक्ष्मी ने बस उसकी और देखा)

यहाँ हम सब को देखते हुए ऐसे hi टहल रहे थे, सब अपने अपने में लगे हुए थे. वह सुखविंदर किसी से बात कर रहा था.

आदमी : आप फ़िक्र मात करो, मेने मेडिकलवाले से बात कर ली है, उसको सब समजा भी दिया है, वो संभल लेगा सब.

सुखविंदर : अभी एकदम से मात करना, में एक बार उस लड़की से बात करता हु, अगर वो मान गयी तो फिर उसके मज़े लेंगे (उसने कामिनी हसी हस्ते हुए कहा तो वो भी मुस्कुराया).

आदमी : पर है वो बहोत लम्बी (उसने भी कामिनी हसी हस्ते हुए कहा)

सुखविंदर : लेने में मजा आएगा. उस लम्बू के साथ घूम रही है, पता नहीं सील पैक बची है की नहीं, पर जो भी हो, एक बार तो लेनी है साली की.

आदमी : ठीक है, जैसा भी हो आप बोल देना.

सुखविंदर जूही पर नजर रक्खे हुए था, वो उस लड़के के साथ hi घूम रही थी, उसे कोई मौका hi नहीं मिल रहा था, तभी उसने देखा की वो उसे कुछ कह कर अकेली जाने लगी, तो वो भी पीछे हो लिया, उसने देखा की वो वाशरूम की और जा रही थी, वो अंदर चली गयी तो वो वह बहार इंतजार करने लगा, कुछ लड़कीअ आते जाते उसे देख रही थी पर उसे कोई फर्क नहीं पद रहा था, थोड़ी देर बाद जूही बहार निकली तो सुखविंदर को देख कर वो घबरा गयी, वो वह से उसके साइड से हो कर जाने लगी.

सुखविंदर : अब बात भी नहीं करोगी? (वो दो पल के लिए रुकी पर फिर आगे बढ़ने lagi)Tumhare hi फायदे की बात कर रहा हु, सुन तो लो. (जूही रुक गयी, वो मुस्कुराते हुए उसके पास gaya)Mene कहा था न की अब दोबारा मात आना, तुमने मेरी बात मणि नहीं. (जूही कुछ नहीं बोली, उसे दर भी लग रहा था) खैर अब आ hi गयी हो तो फिर निकलवाडुंगा, है आज भी वो ऑफर खुला है, अगर मान जाती हो तो कुछ कर सकता हु (उसने जूही को गन्दी नजर से ऊपर से निचे तक देखते हुए कहा, जूही दर रही थी) सोच ले, उस ज़माने में भी मेरी कितनी पहोच थी, अब इतने साल बाद मेरा रुतबा और बढ़ गया है, वो तान्या इंटरनेशनल भी खेल आयी, तू मान जाती तो उसकी जगह पर तू होती, क्यों अपना करियर ख़राब कर रही है, मान जा. (जूही वह से जाने लगी, तो वो फिर बोलै) उस लम्बू की भी जन्मकुंडली पढ़ी है मेने, उसको भी में मौका दिलवासकता हु (जूही रुक गयी और उसकी और देखा, वो कामिनी हसी हँसा) उसको तो में आराम से निकलवाडुंगा, बॉयफ्रेंड है तेरा? (जूही के चेहरे पर चिंता की लकीरे थी, सुखविंदर समाज गया की ये जूही की दुखती रुग है) अगर तू चाहती है की वो और तू दोनों को मौका मिले तो मान जा मेरी बात, आगे तेरी मर्जी, (उसने देखा की वो लम्बा लड़का जूही को ढूंढते हुए उसी और आ रहा है) टाइम नहीं है मेरा पास जो भी फैसला हो जल्दी बताना. (शिव जैसे hi नजदीक आया तो वो वह से निकल गया, शिव ने उसे घर कर देखा, उसने भी बड़ी धित ता से देखा और आगे बढ़ गया)

शिव : (जूही के चेहरे पर परेशानी देख kar)Kya hua?(Juhi को लग रहा था की वो अभी रो देगी, पर उसने अपने आप को कण्ट्रोल किआ और ना में गर्दन हिलायी, शिव ने उसके हाथ को पकड़ा और बोलै) क्या कह रहा था वो. (जूही ने एक बार शिव को देखा, फिर ना में गर्दन हिलायी)

जूही : कुछ नहीं छोडो उसे, चलो. (वो कुछ बोल नहीं रही थी पर उसके चेहरे पर परेशानी साफ़ जलक रही थी, वो दोनों एक जगह पर बेथ gaye)(Muje समाज नहीं आ रहा था की वो किस बात को लेकर परेशान है, पर हो न हो वो उस कमीने कोच की वजह से hi परेशान थी, पर कुछ बोले तो समाज आये, मेने उसे पूछा पर वो बात को ताल दे रही थी, ऐसे hi एक घंटा बिट चूका था, थोड़ी देर बाद जूही ने देखा की वो कमीना उसके सामने देख रहा था, वो थोड़ा दूर था, उसने शिव की और देखा तो वो आस पास देख रहा था उसकी नजर नहीं थी, कोच ने अपनी घडी दिखाई जैसे कह रहा हो की टाइम नहीं है जल्दी फैसला लो. ऐसे hi पंद्रह बिस मिनट पसर हो गए, जूही को अपने से ज्यादा शिव की फ़िक्र थी, उसकी वजह से शिव पर कोई दिक्कत न आये, उसने मान में फैसला लिया) में आती हु शिव.

शिव : कहा जा रही हो?

जूही : आती हु थोड़ी देर में (कह कर वो कड़ी हुई और जाने लगी, मेरी कुछ समाज नहीं आ रहा था तो में बस बैठा रहा और उसको जाते देख रहा था, मुझे कुछ तो गड़बड़ लग रही थी, पर में कुछ नहीं बोलै, में बस उस पर नजर बनाये रहा, थोड़ी दूर जा कर मेने देखा की जूही ने एक नजर उस कोच पर डाली और आगे बढ़ गयी, पीछे पीछे वो कोच भी आगे बढ़ गया, मुझे कुछ गड़बड़ लग रही थी)

जूही थोड़ी दूर चली गयी जहा अब आस पास कोई नहीं था, स्पोर्ट्स का सामान पड़ा हुआ था वह, कुछ बड़े बॉक्स थे तो कुछ छोटे, वो बड़े हॉल जैसा था, कुछ दरवाजे भी थे वह, वो बखेड़ा नहीं करना चाहती थी, उसे अपनी फ़िक्र नहीं थी, उसे फ़िक्र थी तो शिव की, थोड़ी देर बाद वो कोच भी वह आ गया.

कोच : (उसके चेहरे पर कामिनी मुस्कान thi)Kaisi हो?

जूही : (Rudly)Kyu मेरे पीछे पड़े हो, मेरा करियर बर्बाद कर दिया तुमने, अब क्या चाहिए तुम्हे?

कोच : मुझे तो आज भी वही चाहिए जो उस वक़्त चाहिए था, अगर मान जाती तो अभी कहा की कहा होती, खैर अभी भी टाइम है, मेरी बात मान जाओ, फिर देखो में तुम्हे कहा से कहा पंहुचा देता हु. (उसने जूही की बाह को ऊँगली से छुआ तो जूही ने अपना कन्धा झटकते हुए उसके हाथ को दूर कर दिया) सच में एक दम कड़क माल है तू, आज भी तेरे सामने कोई नहीं टिकती (उसने गन्दी आह भरते हुए कहा)

जूही : देखिये, में अभी भी कहती हु, में कोई बात नहीं मानूंगी, चाहे मेरा करियर ख़तम hi क्यों न हो जाये.

कोच : वो तो होगा hi, साथ में तुम्हारे उस लम्बू का भी, लगता है सेल ने मेरे माल पर हाथ साफ़ कर लिया है, खैर कोई बात नहीं, अभी भी तेरी टाइट hi होगी, तेरे जैसी की लेने में मजा आएगा.

जूही : तुम्हे शर्म नहीं आती ऐसी बात करते हुए, एक कोच का काम होता है अपने देश के लिए खिलाडी तैयार करना, और तुम जैसे घटिया लोग न जाने किस तरह की सोच पीला हुए है.

कोच : (गन्दी हसी हस्ते हुए) अब घटिया कह hi दिया है तो घटिया पैन तो दिखाना hi पड़ेगा न, जैसी तुम्हारी मर्जी, अगर मेरी बात मान लेती तो अच्छा होता तुम्हारे लिए.

जूही : अभी थोड़ी देर पहले तो उस लड़की क्या नाम है है विजयलक्ष्मी, उसको जितने की बात कर रहे थे.

कोच : अरे मेरी रानी तू बस हां केहड़े एक बार, उसको तो में यु hi हटा दूंगा, वो कहा और तू कहा, और जल्दी सोच लेना, न मेरे पास टाइम है, न तेरे पास, एक बार तीर कमान से निकल गया फिर न तू कुछ कर पायेगी न में, वैसे भी तू मुझसे मिलने आयी है इस से तो यही लगता है की तू मान गयी है, अब जल्दी से है कह दे तो तेरा सिलेक्शन करवा दूंगा. वर्ण...

जूही : वर्ण क्या?

कोच : अच्छा तो तुजे मेरा पावर देखना है, चल यही सही, तू नहीं जानती की आज की तारीख में सरे सिलेक्टर मेरी मुट्ठी में है, किस को छूट से प्यार नहीं होता. और तू शायद भूल गयी की पिछली बार तेरे साथ क्या हुआ था, चाहे तू कितने भी हाथ पेअर मार ले मेडिकल में तो फ़ैल कारवाही दूंगा तुजे. अभी एक दो घंटा बचा है जल्दी अपना फैसला सुना दे, अपना भविष्य और उसका भविष्य तेरे हाथ में है, तेरी एक है तुजे और उसको कहा से कहा ले जाएगी वर्ण तू जानती hi है. (उसने जूही की बाह को सहलाया, पर इस बार जूही ने कोई विरोध नहीं किआ, उसके चाहर पर कामिनी मुस्कान आ gayi)Good. जल्दी hi बता ता हु की कहा मिलना है. (वो कामिनी हसी हस्ते हुए वह से चला गया, जूही की आँखों में आंसू आ गए, वो थोड़ी देर वही कड़ी रही, फिर अपने आंसू पोछ कर वह से निकल गयी, जब वो पहुंची तो शिव अभी भी वही बैठा हुआ था, और अस्स पास सब देख रहा था)

शिव : (जूही को देख kar)Kaha गयी थी, कितनी देर हो गयी?

जूही : (उदास हो कर) कही नहीं, बस थोड़ा काम था.

हम दोनों बस आस पास देख रहे थे, जूही चुप चाप बैठी हुई थी, थोड़ी देर बाद हमारे कोच सर आये, उनके चेहरे पर भी परेशानी थी.

कोअक्सीर : सब के सब कमीने भरे हुए है, सबको अपनी hi पड़ी है, देश के लिए कोई नहीं सोचता.

शिव : (में और जूही खड़े हो gaye)Kya हुआ सर?

कोअक्सीर : मेरी पहचान के एक दो लोगो से बात हुई तो पता चला की वो लोग तुम्हे डिसक्वालिफाई करने की प्लानिंग कर रहे है.

शिव : (जूही कुछ नहीं boli)Wo कैसे सर?

कोअक्सीर : वो तो पता नहीं, या तो वो तुम्हारी एंट्री को डिसक्वालिफाई करेंगे या फिर और कोई रास्ता अपनाएंगे.

शिव : पर कोई तो कारन कहेंगे न वो.

कोअक्सीर : सब लोगो को पैसा कामना है, चाहे देश को मॉडल मिले या नहीं, बस इनकी जेब गरम होनी चाहिए, जो टेलेंटेड है अगर उनको आगे नहीं लाएंगे तो फिर विदेशी खिलाड़िओ से हम कैसे कॉम्पिटे कर पाएंगे, बेवकूफ है सब के सब. सब कोचिंग के नाम पर सिर्फ पैसा छपने की मशीन चला रहे है, पर तुम लोग चिंता मात करो में अपनी जान लगा दूंगा, देखता हु कैसे वो तुम्हे नहीं दौड़ने देते, अगर जरुरत पड़ी तो मीडिया के सामने जाऊंगा, देखता हु कैसे वो अपनी मान मणि करते है. (वो वह से चले गए, जूही अपना शिर झुकाये किसी गहरी सोच में डूबी हुई थी)

शिव : तुम चिंता मात करो, कोई न कोई रास्ता निकल आएगा, इन्हे आज नहीं तो कल, हमे लेना hi होगा, कब तक हमे रोक पाएंगे. (वो अभी भी कुछ नहीं बोल रही thi)Tumhe क्या हुआ है जूही, कब से देख रहा हु चुप हो, कुछ हुआ है क्या? (वो मुझसे नज़ारे चुरा रही थी, पर मुझे एहसास हो गया की वो अपने आते आसुओ को रोक रही है) अरे क्यों फ़िक्र करती हो, में हु न. तुम बैठो में अभी आता हु.

जूही पूछना चाहती थी की कहा जा रहा है पर वो इतनी ज्यादा टूट गयी थी की उस से कुछ बोलै hi नहीं जा रहा था, शिव वह से चला गया, वो बस उसे जाते हुए देखती रही. और मान में सोचने लगी,

जूही : तू फ़िक्र मात कर, में सब ठीक कर दूंगी, चाहे उसके लिए मुझे अपने आपको hi क्यों न बेचना पड़े, मुझे पता है, में जानती हु इन लोगो को, ये लोग किसी भी हद तक जा शक्ति है, मेरे साथ चाहे जो भी हो पर में तुम्हारे साथ कुछ नहीं होने दूंगी, तू दौड़ेगा और जरूर दौड़ेगा. (वो ये सब सोचते हुए अपने आंसू बहते हुए वही बैठी रही, शिव भी पता नहीं कहा गायब था)

उधर शिव घूमते हुए किसी को धुंध रहा था, जब उसने उस सख्स को देखा तो वो उसके पास चला गया, ये विजयलक्ष्मी थी. वो भी दूसरी दो लड़कीओ के साथ एक जगह बैठी हुई थी.

शिव : (उसके पास जा कर) Hi. (वो तीनो लड़कीअ उसकी और देखने लगी, विजयलक्ष्मी थोड़ी सवाली थी, उसकी हैघट भी अच्छी थी, तक़रीबन 5 फ़ीट 9 इंच की हैघट होगी उसकी, घुंघराले बाल थे, साउथ इंडियन थी वो, में उसके सामने देख कर बोलै था तो वो भी बोली)

व् ल : Hi.

शिव : क्या में आपसे बात कर शक्ति हु? (इतना हैंडसम लड़का उसके साथ बात करना चाहता था, उसके अंदर तो लड्डू फूटने लगे थे, उसने अपनी सहेलिओ को देखा तो उनकी आँखों से hi पता चल रहा था जैसे वो कह रही हो की जा बात कर ले)

व् ल :(उसने शिव की और dekha)Kya बात करनी है? (अक्सर लड़कीअ जैसा करती है, उसने भाव खाया, उसका दिल तो मचल रहा था पर फिर भी लड़कीअ अक्सर ऐसे जताती है हैसे उसे कोई फर्क नहीं पद रहा हो)

शिव : थोड़ी पर्सनल बात है, अगर आपको एतराज न हो तो क्या हम अकेले में बात कर शक्ति है?

वल : (उसके चेहरे पर खुसी साफ़ झलक रही थी, उसने फिर अपनी सहेलिओ को देखा तो वो दोनों भी हां में शिर हिलने लगी, तो वो कड़ी हुई, और वो एक और आगे बढ़ गयी, शिव भी उसके पीछे पीछे उसके साथ चलने लगा, थोड़ी दूर जा kar)Kaho क्या बात करनी है? (उसे तो लग रहा था की अभी ये लड़का उसको कही चलने के लिए बोलेगा, या फिर कॉफ़ी या ऐसे hi कुछ पूछे गए, वो अंदर hi अंदर खुस हो रही थी, वैसे भी उसे कोई एतराज नहीं था)

शिव : आप उस कोच के साथ थी न, क्या नाम था उनका (वो जैसे सोचने लगा)

वल : सुखविंदर सर.

शिव : है सुखविंदर सर, लगता है तुम्हारे और उनके बिच कोई डील हुई है.

वल : (उसने घर कर शिव को dekha)Tumhe उस से क्या? (उसने थोड़ा चीड़ के kaha)Kya यही बात करनी थी?

शिव : वैसे तो है, पर अगर आप चाहो तो जो आप मान में सोच रही थी वो भी हो सकता है. (शिव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा)

वल : (वो सकपका gayi)m.. में कुछ नहीं सोच रही थी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Jaise तुम लड़कीअ, लड़को को देख कर समाज जाती हो न की वो क्या सोच रहा है वैसे hi लड़के भी समाज जाते है, खैर वो बाद की बात है, अभी तो में बस एक hi सवाल पूछना चाहता हु, क्या तुम्हे अपने आप पर भरोसा नहीं है जो तुम इन सब का सहारा ले रही हो.

वल : में क्या सहारा ले रही हु?

शिव : तुम जानती हो में क्या कह रहा हु, तुम उस कोच के सहारे आगे बढ़ना चाहती हो.

वल : ये तुम्हारी ग़लतफहमी है, दौड़ सबके सामने होगी, जो जीतेगा वही आगे जायेगा.

शिव : वैसे तो तुम सच hi कह रही हो, तो फिर दर किस बात का है, खुल कर मुकाबला करो, जिसमे डैम होगा वो आगे जायेगा, ऐसे जितने का क्या फायदा, जो तुम्हे सेटिस्फैक्शन hi न दे.

वल : क्या फर्क पड़ता है, कोई ये नहीं पूछता की तुमने टाइटल कैसे जीता, लोग बस उस टाइटल को hi देखते है.

शिव : मंटा हु तुम्हारी बात को, पर तुम्हे नहीं लगता की ये गलत है, उस कोच जैसे घटिआ लोगो का शिकार हो रही है तुम जैसी लड़कीअ.

वल : (उसके चेहरे पर हवइया उड़ने लगी thi)Aisa कुछ नहीं है, में अपने दम पर hi आगे आयी हु, समजे.

शिव : अच्छा, अब सोचो की वो कोच hi तुम्हे हटवा दे तो?

वल : वो ऐसा नहीं कर सकते. (उसनेझुंझलाते हुए कहा)

शिव : मतलब तुम मानती हो की तुम दोनों के बिच कोई डील हुई है. (वो कुछ नहीं बोली, शिव के चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Me भी एक खिलाडी हु, और में जनता हु की तुमने कितनी म्हणत की होगी यहाँ तक पहुंचने के लिए, और कुछ ऐसा भी किआ है जो तुम्हे नहीं करना चाहिए था, मुझे उस से कोई लेने देना नहीं है, पर तुम्हारा वो कोच तुम्हे hi हवा देगा देख लेना तुम.

वल : वो ऐसा नहीं कर शक्ति.

शिव : तुम इतने यकीं से कैसे कह सकती हो की वो नहीं करेंगे, मान लो की अगर उसने ऐसा कर दिया तो तुम क्या बिगड़ लोगी उनका?

वल : में उनकी वो हालत करुँगी की पूरी जिंदगी याद रखेंगे वो.

शिव : और ये तुम कैसे करोगी?

वल : तुम्हे उस से क्या.

शिव : क्यों की में जान न चाहता हु, में तुम्हे यकीं दिलाता हु की वो तुम्हे इस बार नहीं जितने देंगे.

वल : मेने कहा न वो ऐसा नहीं करेंगे.

शिव : लगता है तुम्हे बहोत भरोसा है, मेरे पास सबूत है.

वल :कैसा सबूत?

शिव : में भी तुम्हे क्यों बताऊ, है पर इतना जरूर कहूंगा की एक बार हार जाओगी उसके बाद तुम उनका कुछ बिगड़ भी लोगी तो भी क्या फायदा, फायदा तो तब है की पहले hi तुम कुछ करो.

वल : पहले तुम साबित करो की वो मुझे चीट कर रहे है.

शिव : लगता हे तुम्हे भरोसा नहीं है, आओ मेरे साथ, अकेले में बात करते है. (विजयलक्ष्मी, शिव को गौर से देखने लगी) इतना क्या सोच रही हो, अभी थोड़ी देर पहले तो तुम अकेले में आने को तैयार hi थी न, और अकेले में मतलब में ऐसा नहीं कह रहा की हम दोनों hi हो वह, अकेले से मेरा मतलब है की ऐसी जगह जहा हमारे पीछे कोई न हो, आगे भले hi पूरा मैदान दिखे (ाएस पास देखते हुए) चलो स्टेडियम की कुर्सिओं पर चलते है, वह पीछे की रौ में बैठेंगे, वह तो ठीक है न?

वल : (अपनी दोस्तों को देखते hue)Me आती हु थोड़ी देर में. (उसकी सहेलिओ ने सोचा की सेटिंग हो गयी है तो उन्होंने मुस्कुराते हुए है कहा, शिव और विजयलक्ष्मी एक और चल दिए)

उस तरफ जहान्वी बेचैन थी, आज भी शिव नहीं आया था न उसका कोई अत पता था, एक और तो वो उस से दूर रहना चाहती थी वही दूसरी और उसका दिल उस से मिलने को तड़प रहा था, उसने पिंकेश से भी पूछा पर उसे भी कुछ पता नहीं था.

जहान्वी : तुम पवनजी से बात कर के पूछो की वो क्यों नहीं आया?

पिंकेश : में ऐसा कैसे पूछ सकता हु मैडम, में ठहरा नौकर आदमी, आप hi पूछ लीजिये न.

जहान्वी : ठीक है (वो वह से चली गयी और ऑफिस में बेथ गयी, उसका बहोत दिल कर रहा था की एक बार पूछ लू पर फिर उसने अपने आपको रोक लिया, एक घंटे बाद भी जब शिव का कोई अत पता नहीं आया तो उसने पवनसीर को फ़ोन कर hi दिया)

पवन : Hello.

जहान्वी : Hello पवनजी, कैसे हो आप?

पवन : में ठीक हु, कैसे याद किआ?

जहान्वी : वो शिव नहीं आया, बस इसलिए फ़ोन किआ था.

पवन : वो तो बहार गया है, उसका कॉम्पिटिओं है न, दो तीन दिन नहीं आएगा वो.

जहान्वी : कैसा कॉम्पिटिओं, और कहा गया है वो?

पवन : स्टेट लेवल का सिलेक्शन है वह, क्सक्सक्स सहर में, वो वही गया है. कोई काम था क्या?

जहान्वी : नहीं, बस ऐसे hi पूछ रही थी, ठीक है रखती हु. (उसने फ़ोन रख दिया, मान me)Bataya भी नहीं, गुस्सा है तो क्या हुआ, काम तो साथ करते है न, काम से काम उस नाते तो बता देता. (उसका मान नहीं लग रहा था तो वो पिंकेश को बोल कर वह से निकल गयी)

दूसरी और करुणा और ध्रुव एक कमरे में चुदाई कर रहे थे, ध्रुव का भी एक फार्म हाउस था जहा वो अक्सर आते थे, करुणा भी एक भरी हुई गांड वाली लड़की थी, और सेक्स की आग कूट कूट कर भरी हुई थी, स्तन माध्यम आकर के थे पर गांड फैली हुई और भरी हुई थी, उसने अपने बॉयफ्रेंड को खुस करने के लिए उसका लुंड चूस कर तैयार कर दिया था, उसका 6 इंच का सवाल लुंड चूस चूस कर उसने खड़ा कर दिया था, वो अपने पेअर फैला कर लेट गयी और ध्रुव को अपने ऊपर खिंच लिया, ध्रुव का लुंड जैसे hi उस गरम गुफा में गया उसके मुँह से आह निकल गयी, करुणा उसको अपने ऊपर खिंच कर उसके होठो को बुरी तरह से चूसने लगी और साथ में अपनी कमर हिलाते हुए खुद hi उसके लुंड को अपने अंदर बहार करने लगी, ध्रुव भी अपनी कमर हिलके धक्के लगाने लगा.

करुणा : (पूरी मादकता se)Shhhhh एस्सस शहहह एस्सस फ़क शह्ह्ह्हह्ह एस्सस शह्ह्हह्ह्ह्ह. (ध्रुव धक्के लगाने लगा, करुणा उसके कूल्हों को पकड़ कर अपनी और खिंच रही थी, अपने बड़े बड़े नाखुनो को उसके कूल्हों में चुभो रही थी) हर्डर बेबी शह्ह्ह्हह्ह हर्डर शह्ह्ह्हह्ह फ़क में बेबी फ़क मई शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (होठो को चूसते hue)Ummmm उम्मंहहह शहहहहह एस्सस शहहहहह एसससस शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (दो तीन मिनट हुए थे, अभी करुणा रंग में आ hi रही थी की ध्रुव ने अपना लुंड बहार खिंच लिया, करुणा झुंझला gayi)Kya कर रहे हो, अंदर डालो.

ध्रुव : ऐसे करोगी तो फिर जल्दी छूट जायेगा, पीछे घूम जाओ. (करुणा ने हलके गुस्से से उसे देखा और पीछे घूम गयी, उसकी बड़ी बड़ी गांड ध्रुव के सामने थी, वो उसको चाटने लगा और उसकी छूट में ऊँगली करने लगा)

करुणा : ऊँगली नहीं लुंड दाल न.

ध्रुव : रुक न, तुजे बहोत जल्दी होती है, फिर कहेगी की जल्दी निकल गया, कैसे अपने आपको रोकता हु पता भी है तुजे, पता नहीं कितनी गर्मी भरी है तुजमे. (वो उसकी चूतमे ऊँगली करने लगा, करुणा को गुस्सा आ रहा था पर वो कुछ नहीं बोली, अपना शिर बिस्तर पर रख कर अपनी गांड को फैलाये रही वो, थोड़ी देर चाटने के बाद वो bola)Le मेरा चूस ले थोड़ा, ढीला हो गया है. (करुणा ने उसको झुंझलाते हुए देखा और उसके हलके मुरझाये लुंड को मुँह में भर लिया, उसके मुँह की गर्मी से लुंड फिर से कड़क होने लगा, ध्रुव जल्दी से पीछे गया और लुंड छूट में दाल दिया)

करुणा : Ahhhhhh.(Dhruv उसके बड़े बड़े कूल्हों को देख कर उसे मसल रहा था और लुंड अंदर बहार कर रहा tha)Shhhhhh अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह एस्सस फ़क में शहहहहह फ़क में हर्डर शह्ह्ह्ह (ध्रुव दे धना धन लुंड अंदर बहार कर रहा था) यस शहहहहह फुककक शहहहहह हर्डर शह्ह्ह्हह्ह थोड़ी देर और शहहहहह( पर दो मिनट में hi ध्रुव ने हर मान ली और अपने लुंड से वीर्य उसके कूल्हों पर छोड़ने लगा, करुणा ने निराशा से उसकी और देखा)

ध्रुव : (उसकी छूट में दो ऊँगली दाल कर अंदर बहार करने लगा, करुणा कैसे भी अपना पानी निकलना चाहती थी तो वो वैसे hi रही, थोड़ी देर की म्हणत के बाद उसका पानी भी निकल गया, वो बिस्तर पर लुढ़क गयी, ध्रुव भी साइड में लेट गया. थोड़ी देर दोनों नंगे hi लेते रहे. करुणा थोड़ी झुंझलाई हुई थी, वो उठ कर बाथरूम में चली गयी, ध्रुव नंगा hi लेता हुआ था, तौलिया लपेट कर करुणा वापस आयी और अपने कपडे पहन ने लगी, ध्रुव ने उसे देखा, वो जनता था की वो क्यों नाराज़ है.

ध्रुव : सॉरी यार.

करुणा : (बिना उसकी और dekhe)Ye तुम्हारा हर बार का है, नयी बात क्या है.

ध्रुव : तुम इतनी सेक्सी और गरम हो की देख कर कण्ट्रोल hi नहीं होता यार, आगे से ध्यान रखूँगा (करुणा भी कुछ नहीं बोली, वैसे भी क्या बोलती, ध्रुव अपनी सोच में था, वैसे आज वो एक मकसद से आया था, उसने करुणा को देखा और कहा) एक बात करनी थी तुमसे. (करुणा फिर भी कुछ नहीं बोली) सुन न यार.

करुणा : (बिना उसकी और dekhe)Sun रही हु.

ध्रुव : एक बार जहान्वी को अपने निचे लेटना है, मदद करेगी?

करुणा : (गुस्से से उसकी और देखते hue)Tumhe शर्म नहीं आती, मुझे hi किसी और लड़की के साथ करने के लिए मदद करने के लिए कह रहे हो, लगता है मेरे साथ भी सिर्फ खेल रहे हो, अगर ऐसा हुआ तो याद रखना ध्रुव में चुप नहीं बेठुंगी कह देती हु.

ध्रुव : तुम गलत समाज रही हो यार, उसके साथ सिर्फ एक बार करना है, कितना घमंड दिखती है वो, एक बार उसका घमंड तोडना है बस, और कुछ नहीं.

करुणा : (मान में : मेरे साथ तो ठीक से होता नहीं और चला है घमंड todne)(Usne झुंझला कर kaha)Tumhe लगता है ऐसा करने से उसका घमंड टूट जायेगा.

ध्रुव : एक बार निचे लेट गयी तो कभी आंख उठा कर बात नहीं करेगी, साली अपने आपको क्या समझती है, जब देखो तब अपना ऐटिटूड दिखती रहती है.

करुणा : वो क्या है वो तुम अच्छी तरह से जानते हो, अगर उसने बाद में कुछ किया न तो तुम्हारी हालत ख़राब हो जाएगी, समाज रहे हो न, आज बात की है सो की है, आगे से कभी ऐसा वैसा सोचना भी मात.

ध्रुव : (उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिठाते हुए) में तुम्हारा बॉयफ्रेंड हु, जब वो मेरा मज़ाक उड़ाती है तो क्या तुम्हे अच्छा लगता है? (करुणा को थोड़ा सेंटी करने के इरादे से कहा) जब देखो तब वो हमे निचा दिखने की कोशिस करती है, पता नहीं किस बात का घमंड है उसे, पैसा तो मेरे पास भी है, सिर्फ उसके अकेली के पास नहीं है, जब देखो तब हमे सुनती रहती है.

करुणा : तुम खुद hi अपनी बेइज्जती करवाते हो, तुम्हे क्या जरुरत है उसके मुँह लगने की?

ध्रुव : एक बात बताओ, साफ़ साफ़, तुम मेरी मदद करोगी की नहीं? (उसने हलके गुस्से से कहा, करुणा ने उसकी और देखा, वो जानती थी की अगर न कहेगी तो उसका रिस्ता टूट सकता था, उसने हथियार डालते हुए कहा)

करुणा : क्या चाहते हो तुम?

ध्रुव : तुम्हे और कुछ नहीं करना है, बस उसको ले आना है और जो में तुम्हे ड्रिंक दूंगा वो पीला देनी है बस, तुम्हारा काम ख़तम.

करुणा : (समजते hue)Dhruv, एक बार फिर सोच लो, कही लेने के देने न पड़जाये.

ध्रुव : (मान में: तू एक बार ले तो आ, साली की ऐसी वीडियो बनाऊंगा की कभी अपना मुँह नहीं खोलेगी) कुछ नहीं होगा, तुम टेंशन मात लो, अगर कुछ गड़बड़ हुई तो में तुम्हारा नाम नहीं आने दूंगा यार, इतना तो भरोसा करो मुज पर.

करुणा : ठीक है, काब करना है?

ध्रुव : में सब अर्रंगे कर के बता ता हु, थैंक यू डार्लिंग, मुझे समझने के लिए, तुम चिंता मात करो, बस एक बार hi, फिर कभी उसके साथ नहीं करूँगा, प्रॉमिस (मान में: एक बार आने तो दे साली को फिर में क्या पूरा ग्रुप रगड़ रगड़ कर छोड़ेंगे साली को)

वैस्वी और संयम दोनों रेसस्स में साथ में बैठे हुए थे, हर्ष और महेश कैंटीन में चले गए थे.

वैस्वी : मेरी समाज में नहीं आ रहा की तेरी प्रॉब्लम क्या है यार, पहले जब में कहती थी की दूर रह उस से तो तू hi कहती थी की वो अच्छा है, अब क्या हो गया है ऐसा.

संयम : (उसने वैस्वी की और देखा, एक लम्बी साँस ली और कहा) वो में नहीं बता सकती, बस इतना कहूँगी की वो वैसा नहीं है जैसा मेने सोचा था.

वैस्वी : तू क्यों ऐसे गोल गोल बाते कर रही है, कुछ समाज आये ऐसा बोल तो बात समाज भी आये. क्या उसने तुम्हारे साथ कोई बदतमीजी की?

संयम : नहीं.

वैस्वी : उसने तुम्हारा कोई फायदा उठाया?

संयम : नहीं.

वैस्वी : तो फिर, एक बात पुछु, अगर बुरा न मने तो (संयम ने उसकी और देखा) अगर वो तुजे किश करता तो तू क्या करती?

संयम : ये क्या बेहूदा सवाल है?

वैस्वी : ये सवाल बेहूदा नहीं है, अपने दिल पर हाथ रख कर जवाब दे, अगर उसने तुम्हारे साथ कुछ किआ होता तो तुम क्या करती. (संयम कुछ नहीं बोली) (मुस्कुराते hue)me जवाब जानती हु, और ये बात वो भी जनता है, अब मेरा सवाल ये है की फिर भी उसने तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं किआ, जिस तरह से तू बता रही है की ‘में नहीं बता सकती’, में समाज सकती हु की बात क्या हो सकती है, पता नहीं तूने क्या देखा क्या सुना पर अगर वो वैसा hi होता तो तुम्हारा फायदा उठता, और मुझे पता है की तू मन भी नहीं करती, फिर भी उसने तुम्हारा फायदा नहीं उठाया, समाज रही है न तू में क्या कह रही हु (संयम बस उसे देख रही थी तभी रेसस्स ख़तम होने की बेल्ल बजी, तो दोनों कड़ी होने लगी) मुझे नहीं पता की क्या प्रॉब्लम है पर हर चीज़ के दो पहलु होते है, वो जो कुछ भी हो तू अच्छे से समझने की कोशिस कर, फिर आगे तुम्हारी मर्ज़ी. (दोनों क्लास में चले गए और पढ़ाई सुरु हो गयी)

जूही अकेले बैठी हुई थी, अस्स पास क्या चल रहा है उसे कोई सरोकार नहीं था, वो बस अपनी सोच में hi बैठी थी, सुखविंदर अंदर बैठा था जहा सब की डिटेल्स चेक की जा रही थी, अभी फ़िलहाल के लिए उसने अपने बन्दे को रोक दिया था, वैसे भी अब वो इन सब में माहिर हो चूका था, वो जनता था की अगर उसने इंकार किआ या बाद में पलट गयी तो भी वो कभी भी उसको नुकसान पंहुचा सकता था, वो बहार आया और जूही को देखने लगा, उसे वो एक जगह अकेली बैठी दिखी, वो उसके पास गया. उसको देख कर जूही कड़ी हो गयी, उसको दर लगने लगा, उसने आस पास शिव को देखा पर वो कही नहीं दिख रहा था, उसने डरते हुए कोच को देखा.

कोच : इतना क्या सोच रही हो, अभी भी फैसला तुम्हारे हाथ में hi है, तुम्हे अभी भी करियर से प्यार नहीं तो बेशक मन कर दो, वैसे भी में किसी से जबर दस्ती नहीं करता (वो कामिनी मुस्कान देने लगा)

जूही : ये जबर दस्ती नहीं तो और क्या है?

कोच : में कहा जबरदस्ती कर रहा हु, में तो कह रहा हु की तुम्हारी मर्जी, तुम hi पागल हो, अरे क्या फर्क पद जायेगा एक बार में, वैसे भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ तो सोती hi होगी, एक बार मेरे साथ भी सो लो, फिर देखना कोण ज्यादा मज़ा देता है (उसने कमीने पैन से kaha)(Juhi का मान कर रहा था की अभी धार दे एक उसको, पर वो शिव के लिए चुप थी, अगर सिर्फ उसकी बात होती तो कब की वो यहाँ से सब छोड़ कर जा चुकी होती, या यु कहे की वो आती hi नहीं यहाँ, इसीलिए hi वो स्पोर्ट्स से दूर हो गयी थी, सिर्फ शिव के कहने पर hi वो आयी थी, पर यहाँ भी उसकी किस्मत ख़राब थी) अभी फ़िलहाल के लिए मेने अपने आदमीओ को रोक लिया है, और ये मात समझना की बाद में तुम बच जाओगी, आज रात तुम मेरे साथ रहोगी.

जूही : (बहोत दर गयी thi)Nahi, में रात को नहीं आ शक्ति.

कोच : क्यों?

जूही : हम दोनों साथ में रहते है, में क्या कहूँगी उस से?

कोच : जो है वो कह देना, उसे भी तो पता चले की उसके लिए उसकी गफ क्या क्या कर रही है, और उसने छोड़ भी दिया तो में तो हु न, छोडो उसे, वो क्या तुम्हे फायदा करवाएगा, मेरे साथ रहोगी तो देखना कहा से कहा पंहुचा दूंगा. में शाम को मिलता हु. (कहते हुए वो वह से निकल गया, जूही को रोना आ रहा था, वो काफी देर वही कड़ी रही और आंसू बहा रही थी, अगर बात सिर्फ उसकी hi होती तो वो एक सेकंड न लगाती और उसके गाल पर एक झापड़ रसीद कर देती, पर यहाँ बात शिव के भविस्य की थी, उसने आस पास देखा और शिव को ढूंढने लगी पर वो नहीं दिख रहा था, वो अपने घुटने में शिर रख कर बेथ गयी, उसके आंसू निकल आये, किसी ने उसके कंधे पर हाथ रक्खा, उसने अपना शिर उठाया तो वो शिव था)

शिव : (जूही की आँखों में आंसू देख कर उसका मान बेचैन हो उठा) क्या हुआ, रो क्यों रही हो?

जूही : (हलके गुस्से se)Kaha चले गए थे तुम मुझे अकेला छोड़ कर?

शिव : अरे यही तो था, क्या हुआ (वो उसके पास में बेथ gaya)(wo कुछ नहीं बोली बस रोटी रही)
 
अपडेट 168

शिव : (में उसके रोने की वजह जनता था, पर में चाहता था की वो खुद मुझसे kahe)Kya हुआ जूही, कोई परेशानी है क्या? (वो कुछ नहीं बोल रही थी, बस आँखों से आंसू बहा रही थी, आस पास के लड़के लड़कीअ भी हम दोनों को देख रहे थे, उसका शिर मेरे कंधे पर था, में उसके कंधे को सेहला रहा tha)lagta है मुज पर भरोसा नहीं रहा तुम्हारा. (में जान बुज कर बोलै, उसका असर भी हुआ, उसने मेरे कंधे से अपना शिर उठाया और मेरी आँखों में देखा) सच कह रहा हु न में?

जूही : (उसकी आँखों से आंसू तेज हो गए, उसने रोनी आवाज में kaha)Aisi बात नहीं है शिव.

शिव : तो तुम बता क्यों नहीं रही हो की क्यों रो रही हो?

जूही : में नहीं बता सकती तुम्हे. (वो रो रही थी)

शिव : इसका यही मतलब हुआ की तुम्हे मुज पे भरोसा नहीं है.

जूही : बात hi ऐसी है शिव, में कैसे कहु.

शिव : ठीक है जब भरोसा hi नहीं तो साथ रहने का क्या मतलब है (में खड़ा होने लगा तो वो मुझसे लिपट गयी और रोने लगी)

जूही : ऐसा मात कहो शिव, में मर जाउंगी.

शिव : मार तो तुम मुझे रही हो, ऐसी कोई बात जो तुम्हे इतना हर्ट कर रही है और तुम मुझे बताना भी सही नहीं समझती, में समाज सकता हु की तुम्हारी जिंदगी में मेरी क्या एहमियत है.

जूही : (वो बिलख uthi)Tum क्यों नहीं समझते शिव, तुम मेरे लिए क्या हो में कैसे बताऊ तुम्हे, तुम्हारे लिए hi आज वो करना पद रहा है जो में कह भी नहीं सकती.

शिव : (मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था और वैसे भी सब देख रहे थे तो में उठा और उसको भी उठाया और एक और चल nikala,)Aao मेरे साथ (वो भी मेरे पीछे पीछे खींचती चली आयी, स्टेडियम से बहार की और चल कर एक और में उसे ले गया, थोड़ी दूर पार्किंग था वह स्टेडियम की दीवाल के पास में उसे ले गया, हम सबसे थोड़ी दुरी पर आ गए थे, सब हमें देख सकते थे पर कोई हमे सुन नहीं सकता था, में उसके सामने खड़ा हो गया, वो मुझे देख रही थी, अपने चेहरे पर सख्ती ला कर मेने कहा) मन कर रहा है की एक कास कर झापड़ लगा दू तुम्हे. (वो रोटी आँखों से बस मुझे देख रही थी) मुझे सब पता है, तुम्हारे और उस कोच के बिच क्या बात हुई. (जूही के आंसू और तेज हो चले, उसे यकीं नहीं हो रहा था की शिव सब जनता है) में चाहता तो उसी वक़्त उसको मार मार के उसका भरता बना देता, कैसे मेने अपने आपको कण्ट्रोल किआ है वो में hi जनता हु. (मेने गुस्से से kaha)wo तो है hi ऐसा पर तुम्हे शर्म नहीं आयी उसकी बात मानते हुए.

जूही : (रट hue)Me क्या करती शिव, वो बहोत कमीना है, वो तुम्हारा करियर ख़तम कर देता.

शिव : हो जाने देती ख़तम, तुम्हारी कीमत पर में हासिल कर लेता तो भी क्या मिलता मुझे, तुमने एक बार भी ये नहीं सोचा की जब मुझे पता चलेगा तो क्या बीतेगी मुज पर.

जूही : (रट hue)Muje माफ़ कार्डो शिव, में दर गयी थी, उसने जो मेरे साथ किआ था वो hi वो तुम्हारे साथ करना चाहता था, तुम्हारे साथ ऐसा होते में नहीं देख सकती थी. (मेने उसको अपने गले लगा लिया)

शिव : मार दूंगा जो फिर कभी ऐसा किआ तो (वो फुट फुट कर रोने लगी) तुम्हारे लिए ये सब आसान है न, किसी के भी सामने झुक जाओ, ये कदम उठाने से पहले मेरा ख्याल नहीं आया?

जूही : मुझे माफ़ कार्डो Shiv(jor जोर से रोने लगी wo)me तुमसे बहोत प्यार करती हु शिव, में नहीं देख सकती थी की तुम्हारे साथ कुछ गलत हो.

शिव : पागल लड़की, ये सिर्फ एक कॉम्पिटिओं है, और वो कोई भगवन नहीं है जो हमारा भाग्य बदल देगा, आज नहीं तो कल कामियाब होते hi हम, उसकी तो में वो हालत करूँगा की वो जिंदगी भर याद रक्खे गए.

जूही : (डरते hue)Nahi शिव, ऐसा वैसा कुछ मात करना, अगर उसने कम्प्लेन कर दी तो तुम पर हमेसा के लिए बन लग जायेगा.

शिव : मुझे उसकी परवाह नहीं, और तुम क्या समझती हो, एक रास्ता बंद हो जायेगा तो क्या जिंदगी ख़तम हो जाएगी, सच में जूही, मान कर रहा है की तुम्हारा गाला दबा दू, दो चार कास के झापड़ लगा दू तुम्हे, तुमने बस यही सोचा मेरे बारे में, क्या में इतना गया गुजरा हु जो तुम्हारी कीमत पर कुछ हासिल करूँगा (वो रट हुए मुझसे लिपटी रही)

जूही : (रट hue)Muje माफ़ कार्डो शिव, गलती हो गयी, में बहोत दर गयी थी, मुझे कुछ सूज hi नहीं रहा था, मुझे माफ़ कर दो.

शिव : (थोड़ी देर हम ऐसे hi खड़े रहे, में समाज रहा था की वो आखिर क्यों जोकि थी, सच कहु तो उसके लिए मुझे बेहद प्यार आ रहा था, वो लड़की मेरे लिए अपने आपको बर्बाद करने को राज़ी हो गयी थी, वो किस हद तक मुझे प्यार कर रही थी में महसूस कर प् रहा था, में उसे शांत करने लगा) अब रो मात, उसको ठिकाने लगाने का रास्ता धुंध लिया है मेने. (ये सुन कर जूही चौंक गयी, वो आश्चर्य से शिव को देखने lagi)Muj पर भरोसा है न? (उसने हां में शिर हिलाया) चलो फिर. (उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक लिया)

जूही : (अपनी आंखे पोछते hue)Tumhe कैसे सब पता चला? (उसकी आँखों में ढेर सारा आश्चर्य था, और कई सवाल भी, में मुस्कुराया, मेने अपना मोबाइल निकला और उसे एक वीडियो चला कर दिखाया, ये जूही और उस कोच की बात चित का वीडियो था, उसने आश्चर्य से मेरी और dekha)Tum कब आये वह पर?

शिव : तुम दोनों का पीछा कर के hi पंहुचा था वह पर, तुम्हारी हरकतों से में समाज गया था की कोई न कोई गड़बड़ है, जब मेने तुम दोनों को देखा तो में चाहता तो उसी वक़्त उसका फैसला कर देता, पर उसके लिए मुझे ये वीडियो सबको दिखाना पड़ता, में नहीं चाहता था की तुम्हारा नाम ख़राब हो, इसलिए मेने दूसरा रास्ता अपनाया है, देखते है की वो काम करता है की नहीं, अगर वो काम नहीं करेगा तो hi इस वीडियो का सहारा लेंगे.

जूही : कोनसा रास्ता?

शिव : (उसके गाल पर हाथ रख kar)Sab पता चल जायेगा, पहले चलो यहाँ से. (मेने उसका चेहरे साफ़ किआ तो वो फिर मुझसे लिपट गयी)

जूही : ी लव यू शिव. मुझे माफ़ कार्डो, में तुम्हारे साथ कुछ भी बुरा होते नहीं देख सकती.

शिव : मर दूंगा जो फिर ऐसा जूथ कहा तो, अगर प्यार करती हो तो भरोसा भी करो, वर्ण मात कहो.

जूही : सॉरी माय लव, बूत ी रॉय लव यू, थॉट्स व्हाई ी हैवे दोने थिस.

शिव : फिर कभी ऐसा मात करना, तुम इतनी सस्ती नहीं हो जो इतनी से बात के लिए ये सब करने लगो, अगर ऐसा वैसा कुछ हो जाता तो में जीते जी मर जाता. और सही से कड़ी हो, सब देख रहे है.

जूही : मुझे किसी की परवाह नहीं शिव, ी लव यू.

शिव : बड़ी आयी लव यू वाली, अब रोना बंद करो और मेरी बात ध्यान से सुनो, अभी ऐसे hi बेहवे करना जैसे तुमने उसकी बात मानली hai(Usne बिना कोई सवाल किये हां में गर्दन हिलायी, फिर मेने उसे सब संजय की क्या करना है, वो समाज गयी, अब उसके चेहरे पर रहत के भाव the)Chalo. (हम दोनों हाथ पकड़ कर वापस स्टेडियम की और चले गए)

हम दोनों जब अंदर आये तो थोड़ी देर बाद फिर अनाउंस हुआ की सब रसवाले लड़के एक हॉल में और लड़कीअ दूसरे हॉल में जायेंगे, वह नार्मल मेडिकल चेकउप होनेवाला था.

शिव : आओ में तुम्हे वह छोड़ देता हु. (हम दोनों उस और पहुंचे तो मेने देखा की वह लड़कीअ लाइन से कड़ी हो चुकी थी, मेने देखा की दरवाजे पर hi वो कोच खड़ा था, मेने जूही को साइड में kia)Wo वही खड़ा है, उसके सामने ऐसे hi बेहवे करना जैसे तुमने उसकी बात मान ली है, अभी वो जैसे बोले वैसा करती जाना, उसको शक नहीं होना चाहिए की तुम उसकी बात तलोगी, है अगर वो कुछ ज्यादा करे तो फिर धार देना एक, देखलेंगे फिर, सामजी. (जूही ने मुस्कुराते हुए हां कहा, उसके चेहरे पर खुसी थी, वो देख कर में भी muskuraya)Ab दर नहीं लग रहा?

जूही : नहीं शिव, तुम साथ हो फिर किस बात का दर.

शिव : (मेने देखा की विजयलक्ष्मी भी आ रही hai)Tum जाओ, अभी में यही हु. (वो वह से उस दरवाजे की और चली गयी, और वह लगी लाइन में सबसे पीछे कड़ी हो गयी, तभी विजयलक्ष्मी भी मेरे नजदीक आ गयी, मेने उस से kaha)Hi.

वल : (अपनी सहेलिओ ko)Tum जाओ में आती हु. (उसकी सहेलिए आगे जाने लगी, उसी टाइम वो कोच जूही के पास गया, वो हमें नहीं देख रहा था, उसका ध्यान जूही पर hi था)

कोच : (धीमी आवाज me)to क्या फैसला किआ तुमने, है है की न? (जूही ने अपने चेहरे पर मुस्कराहट लेन का प्रयास करते हुए है में शिर हिलाया)

कोच : (उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ gayi)Ab देखो में क्या करता हु, यहाँ पीछे क्यों कड़ी हो, में हु न, आ जाओ अंदर. (दूसरी लड़कीओ ने ये देखा पर वो कुछ नहीं बोली, जूही को भी अब कोई दर नहीं था, वो बस वही करना चाहती थी जो शिव ने उसे कहा था, वो उसके पीछे पीछे अंदर चली गयी, अंदर कुछ लड़के- लड़कीओ की टीम थी जिन्होंने वाइट अपप्रो पहना हुआ था, और भी बहोत सरे लोग थे तो वैसे भी डरने की कोई बात नहीं थी, एक कुर्शी की और इशारा कर के कोच bola)Tum बैठो, जैसे hi सुरु होता है में तुम्हारा करवा देता हु, ठीक है. (जूही ने मुस्कुरा के हां में शिर हिलाया, जूही को मुस्कुराता देख वो भी खुस हो गया की चिड़िया ने दाना चुग लिया, मान में खुस होते हुए वो वह से चला गया)

शिव : (बहार) देख लिया, तुम्हे यकीं नहीं हो रहा था न.

वल : एक नंबर का कमीना है साला, छोडूंगी नहीं में उसको. (वो झुंझलाते हुए उस दरवाजे की और बढ़गयी जहा सब खड़े थे, वह पहुंच कर उसने अपने मोबाइल से फ़ोन किआ तो थोड़ी hi देर में वो कोच बहार आया, में देख रहा था की वो उसको वह खड़ा होने के लिए कह रहा था पर वो मान नहीं रही थी, कोच ज्यादा तमसा नहीं करना चाहता था तो वो उसे भी अंदर ले गया, मेरा काम हो गया था, मेने आग लगा दी थी, अब मुझे बस ध्यान रखना था, वह मेरा भी मेडिकल होना था तो में जल्दी से वह पहुंच गया, वह भी सब खड़े थे, ज्यादातर लड़के अभी आये नहीं थे तो लाइन छोटी hi थी, तो में खड़ा हो गया. थोड़ी देर बाद मेडिकल टेस्ट सुरु हो गया, पहले बैच में hi मेरा नंबर आ गया, जब में अंदर गया तो देखा की 10 के करीब लड़के लड़कीअ वाइट अपप्रो पहने हुए थे, जैसा डॉक्टर पहनते है, हर एक खिलाडी के साथ एक लड़का या लड़की एक फाइल ले कर उसके साथ हो जाती थी या हो जाता था, और सब करवा रहे थे और फाइल में लिख रहे थे. तभी अंदर से आवाज आयी ‘नेक्स्ट’ मेरा नंबर था तो में अंदर दाखिल हुआ. वो जिसने बुलाया था में उनकी और गया, उसने ऐसे hi मेरी और देखा और बोलै ‘प्रकृतीयई’. में उसकी और hi देखा फिर वो जिस और देख रहा था मेने उस और देखा, एक बेहद खूबसूरत लम्बी लड़की, हाथ में फाइल लिए मेरी और आ रही थी, पता नहीं क्यों पर मेरी तो नज़ारे hi चिपक गयी थी, बाल बंधे हुए थे पर एक लत जैसे उसे परेशान किये हुए थी वो उसे अपने कण के पीछे एडजस्ट करते हुए हाथ में फाइल लिए मेरी और आ रही थी, पता नहीं क्यों पर मेरी नज़ारे hi नहीं हैट रही थी, कद भी लम्बा था, तक़रीबन 5 फ़ीट 10 इंच की तो होगी hi वो, नाजुक सी दिख रही थी और उतनी hi नजाकत से वो चल रही थी, उसने भी एक नजर मेरी और देखा पर फिर अनदेखा करते हुए आगे बढ़ रही थी, रंग तो मनो सफ़ेद दूध सा था, वो मेरे नजदीक आयी, उसने मुझे देखा, भले hi एक दो पल hi हुआ था पर जैसे उसने मुझे पूरा देख लिया था, उसकी बड़ी बड़ी आंखे जैसे मुझे अंदर तक देख रही थी, वो मुझे देख रही थी, में उसे देख रहा था, फिरसे वो आवाज आयी ‘प्रकृतीयईईई’

प्रकृति : (हड़बड़ाते hue)H ह है सर.?

सर : कहा ध्यान है तुम्हारा?

प्रकृति : स सॉरी सर, (मेरी और देख कर) आइये. (में उसके साथ हो liya)Kya नाम है आपका?

शिव : शिव. (मेने महसूस किआ की वो मेरी और देखने से कतराने लगी थी, वो मेरे बारे में डिटेल लेने लगी और अपनी फाइल में नोट करने लगी, फिर उसने मेरी हाइट नपी, फिर वेट, उसने मेरा बप चेक किआ, मेरी मेडिकल हिस्ट्री पूछी, मुझे भी लग रहा था की मुझे उसको ऐसे नहीं देखना चाहिए पर वो पूछ रही थी तो मेरी निगाहे उसके चेहरेपर hi तिकी हुई थी, वो कभी कभी मुझे देखती पर फिर अपनी नज़ारे चुरा लेती और अपने काम पर फोकस करने lagi)Aap डॉक्टर है? (वो इतनी बड़ी नहीं लग रही थी तो मेने पूछा)

प्रकृति : नहीं. (उसने एक बार मेरी और देखा और जवाब दिया)

शिव : तो फिर.

प्रकृति : (उसने इरिटेट होते hue)Tumhe उस से क्या?





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शिव : नहीं नहीं, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा हु, आप डॉक्टर जितनी बड़ी नहीं लग रही इसलिए बस पूछा.

प्रकृति : में डॉक्टरी का पढ़ रही हु, बस और कुछ?

शिव : में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था.

प्रकृति : अपना हाथ आगे बढ़ाइए. (मेने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो उसने मेरी ऊँगली पकड़ी, उसके स्पर्श से मुझे कुछ हुआ तो मेरी निगाहे उसके चेहरे पर चली गयी, वो भी मुझे देख रही थी और जैसे कुछ समझने की कोशिस कर रही थी, मुझे ऐसे देखते देख वो हड़बड़ा गयी और निचे देखने लगी, उसने कोई चीज ली और मेरी ऊँगली में चुभो दिया, मुझे हल्का दर्द हुआ, वह से खून की बुँदे निकली तो उसने एक स्लाइड पर लगाया और एक स्ट्रिप से चेक भी करने लगी. फिर उसने एक रुई से खून वाली जगह को बंद किआ और मुझे पकड़ने को कहा. फिर उसने एक डिब्बी ली उसके ऊपर कुछ लिखने लगी, बादमे वो मुझे दे दी, बिना मेरी और देखे वो बोली.

प्रकृति : इसमें उऋण भर के वह रख देना (उसने एक टेबल की और इस्सर किआ)

शिव : (वो थोड़ा धीमे बोली थी तो मुझे सुनाई नहीं diya)Kya भरु?

प्रकृति : (उसने अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे घुरा पर मुझे तो सुनाई नहीं दिया था तो में बस उसे देख रहा tha)Urin. (उसने थोड़ा सख्ती से कहा)

शिव : ओह! है, (में कुछ पल रुका, उसने फिर मेरी और घुरा, तो मेने puchha)Abhi? (उसने फिर मुझे घुरा जैसे कह रही हो, ‘है’) Ok ok. (में उठ के बाथरूम ढूंढने लगा, वह जा कर उऋण ला कर रख दिया, में उस लड़की को ढूंढने लगा तो वो किसी लड़के के साथ थी, में उसके पास गया, और खड़ा हो गया, उसने मुझे देखा, उसकी आँखों में सवाल था जैसे पूछ रही हो की ‘क्या hai’)Mera हो गया? (मुझे भी समाज नहीं आया था तो मेने पूछा)

प्रकृति : है (उसने हलके गुस्से से कहा)

शिव : ओह! सॉरी मुझे पता नहीं था, वैसे आपको गुस्सा बहोत आता है. (मेने मुस्कुरा कर कहा, तो वो फिर मुझे घूरने लगी, मेने फिर मुस्कुरा कर kaha)Waise गुस्सा आपको सूट करता है, सी यू. (कह कर में वह से निकल गया) (प्रकृति उसे जाता हुआ देख रही थी और कुछ सोच रही थी, जब वो बहार निकल गया तो वो अपने काम में लग गयी)

में वह से सीधा जूही की और चला गया, वो भी अभी अभी बहार निकली थी, में उसको ले कर थोड़ा साइड में हो गया.

शिव : क्या हुआ? (जूही मुझे वो बताने लगी जो टेस्ट में हुआ था) अरे वो नहीं, उस कोच ने कुछ किआ?

जूही : वो मुझे कुछ ज्यादा hi अटेंशन दे रहा था.

शिव : उसकी फ़िक्र मात करो, अब हमें सिर्फ इंतजार करना है.

जूही : किस बात का?

शिव : समाज जाओगी, आओ. (में और वो एक सुरक्षित जगह बेथ गए जहा से हमे उस हॉल का दरवाजा दिख रहा था पर वो हमे नहीं देख सकते थे, तक़रीबन 15-20 मिनट बाद मेने विजयलक्ष्मी को बहार आते देखा, बहार आ कर वो किसी को फ़ोन करने लगी, में समाज सकता था की वो किसको फ़ोन कर रही है. हलाकि उनकी बाते मेने नहीं सुनी थी)

वल : Hello.

कोच : क्या हुआ? (उसने रूखे पैन से कहा)

वल: मुझे आपसे बात करनी है.

कोच : अभी में बिजी हु, बाद में मिलता हु.

वल : मुझे पता है आप कहा बिजी हो, अगर आप नहीं आये तो...

कोच : ये धमकिए मुझे मात दो सामजी, अभी बिजी हु, एक घंटे बाद मिलता हु.

मेने देखा की वो गुस्से से फ़ोन को देख रही थी फिर वो एक और चली गयी, और अपनी सहेलिओ के साथ हो गयी, में और जूही सेफ जगह से उस पर hi नजर गढ़ाए हुए थे.

जूही : तुम उस लड़की पर नजर क्यों रक्खे हुए हो?

शिव : इसके और उस कोच के बीचमे वो सब है, तुम्हारी वजह से कोच उसको साइड कर रहा है, वैसे लड़की होसियार है, अब हमे बस उनपर नजर रखनी है, एहि है जो उस कोच को फ़साने में मदद करेगी, हमे बस उनपर नजर रखनी है. (ऐसे hi काफी समय बिट गया, मेने देखा की वल ने किसी के साथ फ़ोन पर बात की और वो अपनी सहेलिओ को बोल कर कही जाने लगी, में और जूही भी उसके पीछे हो लिए, वो स्टेडियम से बहार निकल गयी, वह से चलते हुए वो आगे बढ़ी तो थोड़ी दूर पर हमें वो कोच भी दिख गया, उन दोनों में थोड़ी बहस हुई फिर वो दोनों एक और जाने लगे. छुपते छुपाते हम भी उनके पीछे हो लिए. वो दोनों स्टेडिम के साइड में बानी एक बड़े हॉल जैसी बिल्डिंग में घुस गए, मेने देखा की ये टैब्लेटेनिस की इंदौर गेम्स के लिए बना हॉल था, हम छुपते हुए वह पहुंचे, वह एक दरवाजा था, अगर में दरवाजा खोलता और वो अंदर होंगे तो खेल बिगड़ सकता था, पर मेने रिस्क लिया, मेने आहिस्ता से दरवाजा खोला तो मेरे नशीब से वो एक पैसेज था, बिना आवाज किये हम अंदर दाखिल हो गए, वो पैसेज थोड़ा सा आगे जा कर एक दरवाजे के पास ख़तम होता था, वो दरवाजा खुला हुआ hi था, मेने अंदर देखा तो वो दोनों बात कर रहे थे, क्यों की यहाँ कोई नहीं था तो वो दोनों बिंदास बात कर रहे थे, मेने अपना फ़ोन निकला और वीडियो चालू कर दी.

कोच : क्यों दिमाग ख़राब कर रही हो तुम बार बार?

वल : अब में दिमाग ख़राब कर रही हु? में अंधी नहीं हु, मुझे सब दिखाई दे रहा है, कैसे तुम उस के पीछे घूम रहे हो.

कोच : ऐसा कुछ नहीं है, तुम्हारी गलतफैमी hai.(Usne अपना बचाव किआ)

वल : अच्छा मेरी गलतफैमी, में तुम्हे अच्छे से पहचानती हु, कैसे तुम यहाँ खिलाड़िओ का शारीरिक शासन कर रहे हो, तुमने मुझसे कहा था की तुम मुझे इस कॉम्पिटिओं में जिताओगे, इसीलिए मेने तुम्हारे साथ सबकुछ किआ, और अब जब तुमको वो सब मिल गया है तो फिर दूसरी के पीछे हो.

कोच : तुम गलत समाज रही हो, वो तो पहले मेरी स्टूडेंट रह चुकी है इस लिए में उसकी मदद कर रहा था, तुम सोच रही हो ऐसा कुछ नहीं है.

वल : में क्या बेवकूफ हु, मुझे पता है तुमने उसे भी ये कहा है की मेरे साथ सेक्स करो में तुम्हे आगे आने में मदद करूँगा, और ये मात कहना की में जूथ कह रही हु, मेने अपनी आँखों से और अपने कानो से सुना है.

कोच : (वो थोड़ा गुस्सा हो गया था पर अपने आप को सँभालते hue)Ye क्या बात कर रही हो तुम, ट्रैक पर दौड़ना तो तुम्हे hi होता है, में थोड़ी न उसमे कुछ कर सकता हु, मुझे यकीं है की तुम्ही जितोगी.

वल : मुझे बेवकूफ मात संजो, मुझे तुम्हारे बारेमे सब पता है, तुम किसी को भी जितने के लिए क्या क्या करते हो में जानती हु, मुझे पता है की तुम मेडिकल और दूसरी प्रोसीजर के नाम पर उन्हें कैसे फसते हो और उनको रेस से बहार करवाते हो, अभी तुम जिसकी मदद कर रहे हो कभी उसके साथ भी तुमने वैसा hi किआ था, जूते केस में फसा कर तुमने उसको रेस से बहार निकलवाडिया था, और उस लड़की क्या नाम था, है तान्या, उसको जितवाया था.

कोच : (अब वो गुस्से से bola)Tumhara इस से कोई लेना देना नहीं है, तुम अपना देखो, और मेने तुम पर कोई जबरदस्ती नहीं की थी, तुम खुद आयी थी मेरे निचे लेटने.

वल : अच्छा में आयी थी, कितना टॉर्चर किआ है तुमने मुझे, कितनी धमकिए, कितनी लालच दी है तुमने, शुरुआत में भले hi तुमने सावधानी रक्खी होगी पर बाद में जैसे में तुम्हारी प्रॉपर्टी हु वैसे तुमने मुझे वाट्सप चाट किआ है, और कॉल भी, सरे रिकॉर्ड है मेरे पास, तुमने बेवकूफी की जो मेरे साथ पन्गा लिया है, मेरे पास तुम्हारी साडी डिटेल है समजे.

कोच : (वो अंदर से घबरा गया, उसने बेवकूफी तो कर hi दी thi)Tum शांत हो जाओ यार, जैसा तुम सोच रही हो वैसा में कुछ भी नहीं कर रहा हु, उसके रेस में भाग लेने से क्या फर्क पद जायेगा, वो अब आउटडेटिड हो चुकी है, जितना तो तुम्हे hi है, (वो उसकी बाह सहलाने लगा) तुम तो ख़म खा नाराज हो रही हो यार, मेने तुमसे प्रॉमिस किआ है तो तुम hi जितोगी, तुम जानती hi हो वो एक दो लड़कीअ जो तुम्हारे सामने आ शक्ति थी उन्हें वैसे भी मेने हटवाडिया है, ये तुम्हारे रस्ते की अड़चन नहीं बनेगी, तुम क्यों टेंशन लेती हो. में हु न, मेने तुमसे वडा किआ है, तुम hi जीतो गई.

वल : (उसकी आवाज भी थोड़ी नरम हुई )आप सच कह रहे हो न?

कोच : तुम्हारी कसम, तुज जैसे गरम माल छोड़ कर उसके पास क्यों जाऊंगा, आज रात आ जाना, मज़े करेंगे.

(मुझे जो चाहिए था वो मिल गया था, तो मेने वीडियो बंद किआ और जूही को इस्सर किआ तो वो आगे बढ़ गयी)

जूही : अच्छा तो ये जीतेगी? (जूही को यहाँ देख कर कोच के चेहरे पर परेशानी छलक आयी)

कोच : तुम यहाँ?

जूही : है, में यहाँ, मेने सोचा की जब डील हो रही है तो अच्छी डील कर लू, ताकि फिर कोई कन्फूसिओं न रहे. हम दोनों hi यहाँ है तो बताओ की कोण जीतेगी? (कोच की हालत ख़राब थी, वो कभी जूही को तो कभी वल को देख रहा था, क्या कहे उसे समाज नहीं आ रहा था, पर था तो वो पक्का कमीना hi)

कोच : में तुम दोनों को hi मौका दे रहा हु, जो अच्छी होगी वो जीतेगी और फ़िक्र क्यों करती हो जो इस बार नहीं जीतेगी उसे अगली बार जितवाडुंगा, और कोई तुम दोनों के रस्ते में नहीं आएगा बस. हम सब साथ में मज़े करेंगे, क्यों फ़िक्र करती हो.

शिव : मज़े तो में करवाता हु तुम्हे. (अचानक हुई आवाजसे वो चौंक गया)

कोच : टी टी तुम...

शिव : है मई. तो भाई, बहोत सौक है तुम्हे लड़कीओ और खिलाड़िओ की जिंदगी के साथ खेलने का, क्यों?

कोच : टूउउ मुजीबी धमका रहा है, जनता भी है में कोण हूउउ. (उसने गुस्से से कहा)

शिव : है जान लिया है, अब तेरी बरी है जान ने की में कौन हु. अपनी जगह अपनी पोजीशन का गलत इस्तेमाल किआ है तूने, तेरा काम था देश के लिए खिलाड़िओ को तैयार करना पर तूने उनको hi देखा दिया ?

कोच : मुझे भासन मत दे समजा, और निकल यहाँ se,(Ek बच्चे से उसको क्या दर लगता और ऊपर से लड़कीअ भी थी, उसकी मर्दानगी का सवाल था) वर्ण ऐसे गायब करवा दूंगा की किसी को पता भी नहीं चलेगा, बच्चा है तू अभी. में चहु तो तुजे हिस्सा भी न लेने दू, ये तो सुकर मान अपनी गर्लफ्रेंड का की जिसकी वजह से तू हिस्सा ले पायेगा, अब निकल यहाँ से.

शिव : वैसे तो कोई भी लड़की होती तो में ये hi करता पर ये जूही है, तू जनता नहीं इसकी एहमियत, तूने उसे बहोत रुलाया है, अब तेरी बरी है.

कोच : क्या कर लेगा तू (वो हत्ता कट्टा था, उसने मेरा गिरेबान पकड़ा, पर अपना भी असल है, डरने का नहीं) चतत्ताक...... (उसे यकीं नहीं हो रहा था की उसको झापड़ पड़ा और झापड़ भी इतना जोर से था की वो दो कदम पीछे हैट गया, थोड़ी देर तो उसको कुछ सुनाई भी नहीं दे रहा था, और आँखों के सामने टारे नाच रहे थे, जब उसे समाज आया की दो लड़कीओ के सामने मेने उसे मारा है तो गुस्से से मेरी और बढ़ा) साली, मुझपर हाथ उठता हीी (वैसे hi में गुस्से में था तो जैसे hi वो नजदीक आया मेने उसका गाला पकड़ लिया)( अपने गले पर इतनी मजबूत पकड़ को महसूस करके उसकी हालत ख़राब होने लगी, उसका चेहरा लाल टमाटर जैसा होने लगा, वो उसका हाथ छुड़ाने की कोशिस करने लगा पर पकड़ इतनी मजबूत थी की वो छुड़ा नहीं प् रहा था, वो छत पता रहा था)

शिव : ये लड़की का हाथ नहीं है, सेल हिजड़े, लड़कीओ पर जोर आजमाता है, किसी मर्द का मुकाबला कर तो पता चले की क्या औकात है तेरी.

कोच : (घुटी आवाज me)Chhoood , छुड़.

जूही : (वो दर गयी की कही मर न jaye)Shiiiiiiv, वो मर जायेगा. (वल भी दर गयी थी) (मेने जूही की और देखा फिर कोच की और, वो छत पता रहा था, मेने एक लात मरी पेट me)Aiiiii. (वो दो चार कदम पीछे लुढ़कते हुए धड़ाम से गिर पड़ा, वो जोर जोर से सांसे ले रहा था, थोड़ी देर बाद वो संभाला)

कोच : तू जनता नहीं तूने क्या किआ है, तू देखता जा कैसे में तेरा और इसका करियर ख़तम करता हु, तूने मुज पर हाथ उठाया है, तू जनता नहीं मेरी पहोच कहा तक है.

शिव : तेरी पहोच बाद में देख लूंगा, अभी तू मेरी पहोच देख सेल, तूने जूही को इस गंदे हाथ से छुआ था न (में उसके हाथ पर खड़ा हो गया, वो तड़प उठा)

कोच : एआईईईई मर गया, haat(Wo तड़पता रहा और मुझे हटाने की कोशिस करता रहा, थोड़ी देर बाद में हैट गया, वो अपने हाथ को पकड़ कर खड़ा हुआ और मुझे गुस्से से देखने laga)Haramjade में छोडूंगा नहीं tumhe(Wo फिर मेरी और आगे बढ़ा में उस पर टूट पड़ा, और पेट में और चेहरे पर मुक्को की बरसात कर दी, वो हाथ पेअर मार रहा था पर में चौकन्ना था, मार मार कर उसकी हालत ख़राब कर दी, उसकी जेब से उसका मोबाइल भी निचे गिर गया था जिसे जूही ने उठा लिया, थोड़ी देर की जबरदस्त ठुकाई के बाद वो कोच निचे गिरा हुआ था, मेने वल से kaha)Muje तुमसे कोई गिला नहीं है, अभी तुम्हारे और इसके बिच जो भी बात हुई उसका मेरे पास वीडियो है, पर में नहीं चाहता की वो में किसी को दिखाऊ. तुम्हारे पास क्या है वो मुझे नहीं पता पर में इतना तो जनता हु की इसको फ़साने के लिए काफी होगा, तुम बस इतने hi साबुत दो ताकि ये साबित हो सके की ये तुमपे दबाव बना रहा था और तुम्हारा शारीरिक सोसन करना चाहता था, इतना काफी होगा, और अगर तुमने वैसा नहीं किआ तो फिर में इस वीडियो का सहारा लूंगा, जिस से तुम्हारी भी बदनामी होगी, समाज रही हो न मेरी बात. (उसने डरते हुए हां कहा) अभी के लिए तुम यही कहना की इसने तुम्हे यहाँ बुलाया था और ये तुम्हारे साथ जबरदस्ती करने का प्रयास कर रहा था, और हमने आ कर तुम्हे बचाया.

कोच : (शिव की बाते सुन कर उसकी फैट रही thi)Muje छोड़ दो, में आगे से कभी ऐसा नहीं करूँगा (वो समाज चूका था की वो फास गया है, उसने हांफ ते हुए कहा)

शिव : तू कर भी नहीं पायेगा, जो बोया है वो तो काटना hi पड़ेगा, ये तो एक केस है मुझे यकीं है की ऐसी तो कई लड़कीअ होगी, उसमे से कुछ तो हिम्मत दिखाएगी (मेने जूही के हाथ से कोच का फ़ोन लिया और उसको खोलने लगा पर वो लॉक था, मेने उसकी छाती पर पैर रक्खा और उसका हाथ पकड़ कर फिंगरप्रिंट की मदद से मोबाइल को ओपन किआ, उसके चहेरे का खौफ hi बता रहा था की उस भूत की छोटी हाथ में है मेरे, जैसे जैसे में मोबाइल देखता गया मेरी आंखे भी चौड़ी होती गयी, मेने वो सब विजयलक्ष्मी को भी दिखाया तो वो भी गुस्सा हो गयी)

वल : कमीने कुत्ते ( उसने भी दो तीन लात उस कोच को मार दी) तू देख में तेरी क्या हालत करती हु, तुज जैसे कमीने लोग hi इस प्रोफेशन को बदनाम करते है (दो तीन और लेट मार दी उसने)

शिव : तुम्हे गुस्सा नहीं आ रहा इस पर (मेने जूही की और देख कर कहा)

जूही : (मुझे प्यार से देखते hue)Tum हो न, इस घटिया इंसान को छू कर में अपने आपको गन्दा नहीं करना चाहती, और वैसे भी इसकी हालत ख़राब हो चुकी है.

शिव : अभी कहा, अभी तो और हालत ख़राब होनी है. (मेने उसे खड़ा किआ और दो तीन घुसे मारे तो वो लड़खड़ाते हुए भागने लगा, में उसके पीछे चलने लगा, मरते मरते में उसको बहार ले आया, शोर शराबा सुन कर लोग उस और आने लगे, किसी को कुछ समाज नहीं आ रहा था पर किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी बिच में आने की, शिव के चेहरे का गुस्सा देख कर hi कोई बिच में नहीं आया, में उसे मार रहा था वो यहाँ वह गिर रहा था और फिर खड़ा हो रहा था, तभी थोड़ी hi दुरी पर खड़े कुछ सिक्योरिटी वालो की नजर हम पर पड़ी तो वो दौड़ कर वह आये, मेने उस कोच को गिरेबान पकड़ कर उनके हवाले कर दिया, और बताया की वो लड़की के साथ जबरदस्ती कर रहा था, बहोत हंगामा हो गया था, स्टेडियम में से भी लड़के लड़कीअ और दूसरे कोच और अधिकारी भी बहार आ गए थे, उन्होंने पुलिस बुलवा ली, पुलिस आयी और पूछताछ करने लगी तो वल ने hi आगे आ कर कहा की वो उसके साथ जबरदस्ती करने का पुरायास कर रहा था और ये भी कहा की वो महिला खिलाड़िओ के साथ अक्सर ऐसी हरकते करता है, उसने सबूत देने को भी कहा और साथ में उस कोच का मोबाइल भी उन्हें दिखाया, दूसरे अधिकारिओ ने भी देखा, कुछ दार भी गए की उनका नाम आएगा, मीडिया भी आ गया था, विजयलक्ष्मी ने उसके खिलाफ कम्प्लेन कर दी, जूही ने भी हिम्मत दिखाई और उसने भी कम्प्लेन कर दी. मेने जूही को इन सब से दूर रहने के लिए कहा तो उसने कहा,

जूही : नहीं शिव, जूठी इज्जत के दर से में चुप नहीं रहनेवाली, जिसे जो सोचना है सोचे, जो समझना है समजे, में भी कम्प्लेन करुँगी hi, और तुम वो वीडियो भी पुलिस को दे दो जो तुम्हारे पास है, कब तक हम लड़कीअ इस इज्जत के दर के चक्कर में पिसती रहेगी, मुझे कोई दर नहीं है, इसने गलत किआ है तो उसको सजा मिलनी hi चाहिए, में इसके खिलाफ कम्प्लेन करुँगी hi. (मुझे भी उसकी बात सही लगी, तो मेने भी वो वीडियो पुलिस को दे hi दिया, पुलिस उसे पकड़ कर वह से ले गयी, बहोत हंगामा हुआ था, हमारा कॉम्पिटिओं था तो पुलिस हमे साथ में नहीं ले गयी थी, बस कहा था की जरुरत पड़ेगी तो बुलाएगी, जो अच्छे लोग थे उन्होंने हमारा हौसला बढ़ाया और वल और जूही को भी सबस्सी दी. इन सब में बहोत टाइम निकल गया था, शाम हो चुकी थी, में, जूही और विजयलक्ष्मी साथ में बहार निकले.)

शिव : मुझे यकीं है की तुम्हारी म्हणत भी इतनी होगी की इन जैसो के सहारे के बिना भी तुम कम्पित कर पाओ.

वल : खिलाडी अपने दम पर hi ऊपर आता है शिव, पर ऐसे कुछ लोग उनका मोरल डाउन कर देते है, अब जब मैदान में उतरी हु तो लड़ूंगी तो जरूर. (उसने खुमारी से कहा)

शिव : (उसकी और हाथ बढ़ा kar)Kal के लिए आल थे बेस्ट. तुम अच्छा hi करोगी.

वल: तुम्हे भी बेस्ट ऑफ़ लक, और तुम्हे भी जूही. (जूही ने मुस्कुरा कर हाथ मिलाया)

वो भी चली गयी. में और जूही भी होटल की और निकल गए, रिक्शा में भी वो मेरा हाथ पकड़ कर बैठी थी, जब हम होटल में एंटर हुए तो भी वो मेरा हाथ पकड़े हुए थी, जैसे hi हम अपने रूम में आये जूही मुझसे लिपटगाई और मुझे हर जगह किश करने लगी, मेने भी उसे बहो में भर लिया.

जूही : थैंक यू शिव.

शिव : इसमें थैंक यू कैसा, और है दोबारा ऐसा किआ न तो खैर नहीं तुम्हारी.

जूही : में दर गयी थी. पर अब कभी ऐसा नहीं करुँगी.

शिव : जिंदगी में ऐसे मौके बहोत आएंगे, तुम्हे डट कर सामना करना चाहिए, किसी पर क्या भरोसा करना, खुद बार यकीं होना चाहिए. चलो फ्रेश हो जाओ, फिर खाने चलते है, पुरे दिन इन सब की वजह से खाना भी नसीब नहीं हुआ.

वो मुस्कुराती हुई बाथरूम चली गयी, बाद में में भी फ्रेस हुआ, कपडे बदले और हम दोनों बहार निकल गए, खाना खा कर वापस लौटे तो हमे राशि मिल गयी, जूही मेरा हाथ पकड़े हुए hi थी, उसने भी वो देखा, वो मुस्कुरायी.

राशि : खाना खा लिया?

शिव : है. (राशि मुझसे से बात करना चाहती थी पर जूही की वजह से वो कुछ नहीं बोली. थोड़ी देर ऐसे hi वो हमसे बात करती रही हमने भी उस से बात की, वो बार बार जिस तरह से मुझे देख रही थी में समाज रहा था पर मुझे अभी कोई इंट्रेस्ट नहीं था, फिर अपने रूम में आ गए. कपडे बदल कर हम दोनों बिस्तर में घुस गए, वो मेरे नजदीक आ गयी और मुझसे लिपट गयी, तो मेने उसे बहो में भर लिया, वो मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर मेने भी उसका साथ दिया, पर जब वो ज्यादा करने लगी तो मेने उसे रोक दिया.

जूही : (हलके गुस्से से) हर बार मुझे रोक देते हो.

शिव : (मुस्कुराते हुए) आज का दिन रुक जाओ, फिर तुम्हारी साडी हसरते पूरी कर दूंगा.

जूही : (शरमाते हुए) पर थोड़ा तो कर शक्ति है न.

शिव : हर बार में रुक जाऊ ये हो नहीं सकता, कही कुछ हो गया तो कल चल नहीं पाओगी, दौड़ना तो दूर की बात है.

जूही : (उसे बहोत शर्म आ रही थी और शिव पर प्यार bhi)Tumhe मेरी कितनी फ़िक्र है न शिव.

शिव : (उसका माथा चूमते hue)Hai, तभी तो कह रहा हु, अब सो जाओ. (उसने भी मेरी बात मान ली और मेरी बाहोंमे पूरी तरह से गम होते हुए वो सो गयी. थकन की वजह से नींद भी जल्दी आ गयी.

रात को नाज़िआ और संयम साथ में बीएड पर लेट हुए थे, रात करीब 11 बज रहे थे. नाज़िआ ने संयम की और देखा.

नाज़िआ : तेरे और शिव के बिछ कुछ हुआ है क्या?

संयम : (वो कोई जवाब देना नहीं चाहती thi)Nahi आप.

नाज़िआ : तो फ्री उस से ठीक से क्यों बात नहीं कर रही है तू.

संयम : ऐसी कोई बात नहीं है.

नाज़िआ : कोई तो बात है, मुझे भी नहीं बताएगी क्या?

संयम : वो अच्छा लड़का नहीं है आप.

नाज़िआ : (ये सुन कर उसे आश्चर्य hua)Aisa क्यों कह रही है तू.

संयम : में नहीं बता सकती.

नाज़िआ : उसने कुछ किआ?

संयम : नहीं.

नाज़िआ : तो फिर?

संयम : में नहीं बता सकती आप, छोड़ा न उस बात को, इतना क्या इम्पोर्टेन्ट है वो.

नाज़िआ : ये तू कह रही है, में भी एक लड़की हु, मुझे पता है तू क्या सोचती है उसके बारे में, फिर ऐसा अचानक क्या हो गया.

संयम : उसका असली चेहरा सामने आ गया.

नाज़िआ : ऐसा क्या हो गया जो तू ऐसा कह रही है.

संयम : में नहीं बता सकती आप.

नाज़िआ : देख छोटी, कभी कभी चीज़े ऐसी नहीं होती जैसी हमें दिखती है (नाज़िआ को फिर ख्याल आया की शायद ये वैस्वी और शिव की वजह से ऐसा कह रही है) देख छोटी, ये उसकी जिंदगी है, उसकी मर्जी है वो जिसे चाहे पसंद करे.

संयम : (उसने अपनी आप की आँखों में dekha)Kiski बात कर रही हो आप?

नाज़िआ : में वैसिवि की बात कर रही हु.

संयम : (उसको समाज नहीं आ रहा था की आप को क्या samjaye)Chhoda न आप, सो जाओ, मुझे भी नींद आ रही है. (बीएड से उठते हुए) में आती हु. (वो निचे चली गयी, बाथरूम से बहार निकली तो फिर उसे अपने अम्मी अब्बू की वही झगड़ेवाली बहस सुनाई दी, वो बिना आवाज किये बाथरूम गयी और चुप चाप वापस लौट गयी, ऊपर आयी तो नाज़िआ अभी भी जाग रही थी और उसे देख रही थी, बीएड में लेट ते हुए). अम्मी की क्या प्रॉब्लम है, हमेसा अब्बू से लड़ती रहती है.

नाज़िआ : क्यों क्या हुआ?

संयम : कुछ नहीं. (नाज़िआ समाज रही थी)

नज़ाइअ : तू अभी छोटी है, ये सब नहीं समझेगी.

संयम : में कोई छोटी वोती नहीं हु, सब समझती हु.

नाज़िआ : अच्छा, जरा मुझे भी तो समजा की क्या समझती है तू?

संयम : छोड़ा न आप, अम्मी है, क्या कहु अब.

नाज़िआ : इसीलिए तो कहा की अभी तू छोटी है, वो भले hi अम्मी है पर साथ में एक औरत भी है.

संयम : पर अब इस उम्र में क्या सोभादेता है उन्हें.

नाज़िआ : क्या उम्र हो गयी ामी की जो ऐसा कह रही है, तू उन्हें अम्मी की नजर से देखती है, इसीलिए तो कहा की तू नहीं समझेगी अभी. कुछ बाते अभी तेरी समाज में नहीं आएगी संयम.

संयम : क्या समाज में नहीं आएगा, पता नहीं कैसी अम्मी मिली है.

नाज़िआ : ऐसा क्यों कह रही है तू, अम्मी कितनी अच्छी है, क्या कुछ नहीं किआ उन्होंने हम दोनों के लिए, कितना प्यार करती है, कितना ख्याल रखती है.

संयम : वो सब तो ठीक है पर...

नाज़िआ : वो सब ठीक है से क्या मतलब है तेरा, ये सब क्या मामूली है.

बुकमार्क

संयम : पर वो अक्सर अब्बू से लड़ती रहती है.

नाज़िआ : मेने कहा न तू अभी नहीं समझेगी, एक औरत की भी कुछ जरूरते होती है संयम, जब तू बड़ी हो जाएगी, शादी हो जाएगी तब तुजे समाज में आएगा.

संयम : मुझे तो शादी hi नहीं करनी, पता नहीं शादी hi क्यों करनी होती है.

नाज़िआ : इसीलिए तो मेने कहा की अभी तू छोटी है, नहीं समझेगी, चल सो जा, और अम्मी कोई गलत नहीं है, वो बहोत अच्छी है सामजी.

संयम : आप कुछ जानते नहीं न इस्सलिये कह रही हो.

नाज़िआ : तुजसे ज्यादा जानती हु में, अब सो जा.

संयम : (मान me)Aap क्या जजों आप की अम्मी शिव के साथ क्या करती है, कितनी बेशर्मी से उसके साथ वो सब कर रही थी. (पर वो कुछ नहीं बोली, और आंख बंद कर के सोने लगी, फिर से एक बार उसके सामने शिव और अपनी अम्मी की चुदाई की तस्वीर चलने लगी, उसके शरीर में भी अजीब सी हलचल हो रही थी, जैसे तैसे वो सो गयी)

में और जूही भी थके हुए थे तो गहरी नींद में सो गए थे, कल खास दिन था तो नींद भी जरुरी थी. सुबह जल्दी उठ गया में और सीधा बाथरूम चला गया, जब वापस आया तो जूही भी जग गयी थी. में सिर्फ तौलिये में hi था, उसने मुझे ऊपर से निचे तक देखा, वो हल्का सा शरमाते हुए मेरे साइड से जाने लगी तो मेने उसे पकड़ लिया, वो शार्ट और t-shirt पहने हुए थी.

जूही : (मुस्कुराते hue)Chhodo न, मुझे बाथरूम जाना है. (मेने उसके माथे पर किश किआ)

शिव : गुड मॉर्निंग.

जूही : (मुस्कुराते hue)good मॉर्निंग.

मेने उसे छोड़ दिया और वो बाथरूम चली गयी, मेने कपडे पहने और बैग तैयार कर दिया, वो भी तौलिया लपेट कर आ गयी, मुझे देख कर वो शर्मायी, मान तो बहोत किआ पर मेने कुछ नहीं किआ, वो भी तैयार हुई और बैग ले कर हम दोनों स्टेडियम चले गए. खिलाड़िओ के लिए अलग एंट्री थी और दूसरे लोगो के लिए अलग. हम कोअक्सीर के पास गए और उनसे मिल लिए, उनसे बात करके पता चला की सब सही था, फिर हम चेंजिंग रूम चले गए, वह कॉम्पिटिओं के लिए जो कपडे पहन ने थे वो पहन लिए, में बहार निकला तो कल वाली वो डॉक्टर लड़की दिखी, वो चार लोग चलते जा रहे थे, एक लड़का था और वो तीन लड़कीअ. में उनके सामने आगया,

शिव : Hi डॉक्टर. (उसने मुझे ऊपर से निचे तक देखा, पर बोली कुछ nahi)Lagta है पहचाना नहीं.

प्रकृति : (धीरे se)Janti हु. (वो बस इतना बोली)

शिव : (Muskuraya)Aaj भी चेकउप करना है क्या?

प्रकृति : (उसने कोई जवाब नहीं दिया बस अपने साथ वालो से kaha)Chalo. (वो सब चले गए, में उसको hi देख रहा था, पता नहीं क्या बात थी उसमे, में उसे वही खड़े देख रहा था, थोड़ी दूर जा कर उसने भी पलट कर देखा तो में मुस्कुराया पर वो फिर पलट गयी और आगे चली गयी, तभी जूही भी आ गयी)

जूही : यहाँ क्यों खड़े हो?

शिव : कुछ नहीं, तुम्हारा वेट कर रहा था.

फिर हम दोनों वह से चले गए, काफी लड़के- लड़कीअ थे, जूही लड़कीओ के ग्रुप में चली गयी, में लड़केवाले ग्रुप में, वह सबको नंबर दिए जा रहे थे, मेने अपने नंबर वाला बैनर अपने आगे पीछे लगा लिया, काफिर समय तक ये चलता रहा, वैसे hi 8-8 के ग्रुप भी बना दिए, फिर कॉम्पिटिओं सुरु हो गया, मुझे से पहले जूही का नंबर लग गया था, में दिल थामे खड़ा था, वो अपनी लेन में कड़ी हो गयी, उसने एक बार मेरी और देखा तो मेने उसे बहो में बाहर ने का इस्सर किआ और किश जैसा मुँह बनाया, उसके चेहरे की टेंशन थोड़ी काम हुई, मेरा भी दिल धड़क रहा था, 100म की रेस थी. सबने अपनी पोशण ली और फिर गेट- सेट- जो, साडी पब्लिक चिल्ला रही थी और हौसला बढ़ा रही थी, जूही किसी बिजली की भाटी दौड़ रही थी, में भी चिल्ला रहा था, के ों जूही, के ों. देखते hi देखते रेस ख़तम हुई, वो इस राउंड में पहले नंबर पर hi रही. उसने मुझे देखा तो मेने खुसी के मारे दो तीन बार फ्लाइंग किश दे दी, उसके चेहरे पर मुस्कान थी. वैसे hi फिर एक दो और लड़कीओ का राउंड हुआ, विजयलक्ष्मी भी अपने राउंड में फर्स्ट आयी थी. फिर मेरी बरी भी आ गयी, मेने थोड़ा कूद कर अपने आपको गरम किआ, ट्रैक पर आ कर 10 – 15 कदम तेज दौड़ कर खुद को तैयार किआ. मेने जूही की और देखा तो उसने शिर हिला कर हां में इस्सर किआ, जैसे कह रही हो की तुम कर लोगे. सब खिलाडी तैयार हो गए, मेने पोसिटिव ली, शोर थोड़ा शांत हो गया था, मेरे कान रेफ्री की आवाज पर ठीके हुए थे, मेने अपने मान को तैयार किआ, और पूरा फोकस अपने पैरो पर किआ, मुझे अपने पैरो में खून का बहाव तेज होता महसूस हो रहा था, Get-set-Go,





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मेने तेज दौड़ लगा दी, मुझे बस सामने लक्ष दिख रहा था, आस पास दौड़ते खिलाडी बस महसूस कर रहा था पर मेरा पूरा फोकस अपनी लाइन पर था, में पूरी ताकत से दौड़ रहा था, जब मेने फिनिश लाइन क्रॉस की तो मेने अस्स पास देखा पर कोई नहीं दिखा, लोग चिल्ला रहे थे, मेरा नाम भी अनाउंस हुआ, में पहले नंबर पर hi था, मेने जूही को देखा तो वो अपनी जगह पर कूद रही थी, मेने अपने दिल पर दो तीन मुक्के मार कर उसको अपनी मुठ्ठी दिखाई, उसने खुस हो कर मुझे फ्लाइंग किश दी, मेने भी सामने किश दी, विजयलक्ष्मी भी शिव को देख रही थी.

ऐसे hi सब चलता रहा, फिर सेमीफइनल हुआ, मेने और जूही ने वो भी क्लियर कर लिया था, हम दोनों फाइनल में पहुंच गए थे, विजयलक्ष्मी भी फाइनल में पचुच चुकी थी. दूसरी रेस भी साथ साथ में चल रही थी, में जूही के पास चला गया. वो मेरे गले लग गयी. मेरे चेहरे पर खुसी थी,

शिव : आखिर पहुंच गयी तुम.

वल : पर अभी रेस बाकि है. (मेने उसे देखा)

शिव : कोंग्रटुलतिओन्स, तुम भी फाइनल में हो.

वल : तुम्हे भी, तुम्हारा टाइम बेस्ट है, पर फिर भी ध्यान रखना, ये गेम है, बाज़ी कभी भी पलट सकती है.

शिव : थैंक यू फॉर एडवाइस, टाइम तो तुम्हारा भी बेस्ट hi है.

वल : वो तो है, जूही से भी आगे, क्यों जूही?

जूही : जिसकी ज्यादा म्हणत, तुम बेहतर हो तो तुम जितोगी.

वल : थॉट्स थे स्पिरिट, मेने देखा है की मेरी कॉम्पिटिटर तुम hi हो, बेस्ट ऑफ़ लक तुम्हे.

जूही : तुम्हे भी.

वल : वैसे अपनी ट्रॉफी तो तुम साथ में ले कर घूमती हो, सच कहु तो जलन होती है मुझे (उसने शिव की और इस्सर कर के कहा, जूही भी शिव को देख कर मुस्कुरायी)

जूही : तुम्हारा परफॉरमेंस देख कर तो लग रहा है की अब अक्सर मुलाकाते होंगी, तुम भी आगे तक जाने की काबिलियत रखती हो.

वल : (मुस्कुरा kar)Kya सच में. थैंक यू फॉर योर compliment(Hum सब मुस्कुराये, ऐसे hi थोड़ी देर हमने बात की, वो सच में अच्छी लड़की थी)

फिर लड़को की फाइनल रेस की पहले अनाउंस हुई, में फिर ट्रैक पर पहुंच गया, मेरे अस्स पास सब बेस्ट थे, मेने एक नजर उनपे डाली, फिर अपने आप पर कंसन्ट्रेट किआ, मेने मान में अपने सब लोगो को याद किआ, सबके चेहरे मेरे सामने आ गए, सब मेरी और आशा से देख रहे थे, बहोत जिम्मेदारी थी मुज पर. मेरी दिल की धड़कने तेज हो चुकी थी, शरीर में जैसे लावा दौड़ रहा था, मेने अपनी पोशण ली, आंखे बंद की, और एक बार फिर Get-Set-Go. में गोली की तरह तारक पर दौड़ पड़ा, मुझे सेकंड का दसवा हिस्सा तक महसूस हो रहा था, आस पास के खिलाड़िओ के कदमो को भी में महसूस कर रहा था, स्टेडिम का शोर जैसे गायब हो चूका था, जब मेने फिनिश लाइन क्रॉस की तो मुझे खुद नहीं पता था, ऑफिसियल रिजल्ट अनाउंस होने में कुछ सेकंड लगने थे, मेने जूही को देखा तो वो कूद रही थी, मेरे साथ दौड़नेवाले भी मुझे कोंग्रटुलते करने लगे थे, में इतना तो समाज गया की मेने कर दिखाया है, तभी रिजल्ट अनाउंस हुआ और में फर्स्ट hi था, पूरा स्टेडिम शोर कर रहा था, सब ने मेरी जीत को सराहा. कोच सर मेरे पास आये, तो मेने उनके पेअर छुए तो उन्होंने भी मुझे गले लगा कर पीठ थप थपाई, एक कमरे वाला मुझे रिकॉर्ड कर रहा था. दूर कड़ी प्रकृति भी ताली बजा रही थी. में इम्तेहान में पास हो चूका था, अब बरी थी जूही की. हम सब बहार निकल गए, लड़कीअ ट्रैक पर आ गयी, मेने आंख बंद कर के उपरवाले से प्राथना की. जूही ने मेरी और देखा, उसके चेहरे पर टेंशन साफ़ झलक रही थी, में जीत चूका था इस लिए उसकी टेंशन और बढ़ गयी थी. मेने इसरो से उसे हौसला दिया.





मेरी निगाहे वही जमी हुई थी, अपनी पोशण पर वो कड़ी थी, थोड़ी दुरी पर वल थी, मेरे खुद के हाथ पारी कैंप रहे थे, में जूही की स्थिति समाज रहा था, में जोर से चिल्लाया, के ों जूही, यू कैन दो आईटी. में पूरी ताकत से चिल्लाया था, मेरी आवाज उस तक पहुंच गयी थी, उसने हां में शिर हिलाया, Get-Set-Go, जूही और वल तक़रीबन साथ में hi दौड़ रही थी, 8 वे सेकंड में जूही आगे हो गयी, वो अपनी पूरी ताकत से दौड़ रही थी, उसके मजबूत पर इतनी गति से दौड़ रहे थे की वो जैसे हवामे उड़ रही थी, मुझे लगा की वल और जूही ने लगभग साथ में hi फिनिश किआ था, कुछ लोग जूही को तो कुछ लोग वल को बधाई दे रहे थे, उन दोनों ने भी एक दूसरे को विश किआ, सब की निगाहे ऑफिसियल टाइम पर तिकी हुई थी, जैसे जैसे समय बढ़ रहा था दिल की धड़कने तेज हो रही थी, पता नहीं रिजल्ट देक्लैर होने में क्यों टाइम लग रहा था. तभी रिजल्ट देक्लैर हुआ, सेकंड के 10वे हिस्से के अंतराल से जुहीपहले स्थान पर थी, में भी कूदने लगा, जूही ने मेरी और देखा तो उसकी और भगा, वो भी भागी, सब देख रहे थे पर मुझे किसी की परवाह नहीं थी, वो आ कर मेरे ऊपर कूद गयी और मुझसे लिपट गयी, मेने भी उसे कास के गले लगा लिया, कुछ कमरे वाले और पत्रकार आये तो हम अलग हुए, वो भी उसको सवाल पूछ ने लगे, वो बहोत खुस थी, मेने वल को देखा तो वो थोड़ी उदास दिखी, में उसके पास गया और उसको भी गले लगाया. वो हलकी भरी हुई थी, उसके शरीर का पूरा एहसास हुआ मुझे पर मेने उस और ध्यान नहीं दिया.

शिव : जस्ट मिस. (उसके चेहरे पर उदासी साफ़ झलक रही थी, पर क्या कर शक्ति थे)

उसके बाद ऑफिसियल रिजल्ट के हिसाब से स्टेट लेवल क्वालीफ़ायर की लिस्ट अनाउंस हुई, जिसमे वल का भी सिलेक्शन हो गया था, गोल्ड, सिल्वर और ब्रोंज तीनो को स्टेट लेवल क्वालीफाई किआ गया था, हम बहोत खुस हो गए, हमने साथ में खुसी मनाई.

वल : तो जूही, खेल अभी बाकि है, फिर मुलाकात होगी.

जूही : (उसको गले लगा kar)Intejar रहेगा. तुम्हे मिल कर सच में बहोत खुसी हुई, भले हम खेल में दुसमन है पर तुम्हे दोस्त बना कर खुसी होगी.

वल : (मुस्कुराते हुए उसके गले lagi)Muje भी.

ऐसे hi काफी देर सब चला, मैडल दिए गए, भासन हुआ, रात होनेवाली थी, हम दोनों वह से निकल गए, होटल पहुंचे, रात हो चुकी थी, हमारे सहर के लिए बस बुक कर ली थी तो हमने जल्दी से चेक आउट किआ और हमारे सहर के लिए निकल गए. बस में वो खिड़की के पास बेथ गयी और में बाजु में, वो बहोत खुस थी, खुस तो में भी था, वो मेरा हाथ पकड़ कर hi बैठी थी, हम कॉम्पिटिओं की hi बाते कर रहे थे, करीब एक घंटे बाद हाईवे होटल पर बस रुकी तो हमने खाना खाया और वापस बेथ गए. करीब आधे घंटे बस चलने के बाद खाने की वजह से सब सो चुके थे, जूही मेरी बाह पकड़ कर मेरे कंधे पर शिर रख कर बेथ गयी थी, उसके स्तन का एहसास मुझे हो रहा था, पर पुरे दिन की भगा दौड़ी से हम भी थके हुए थे तो हम दोनों भी सो गए, हमारा सहर आ गया तब हम उठे. रिक्शा ले कर हम दोनों जूही के घर पहुंच गए, रात के करीब 12 बज रहे थे. हम दोनों अंदर गए, वो किचन में गयी और पानी ले आयी, मुझे पानी देते हुए वो साइड में hi बेथ गयी, हम दोनों ने पानी पिया. पानी का गिलास टेबल पर रखते हुए मेने कहा,

शिव : चलो में चलता हु. (उसने आश्चर्य से मेरी और ऐसे देखा तो मेने पूछा) क्या हुआ?

जूही : (मायूसी se)Kuchh नहीं.

शिव : क्या हुआ, ऐसे क्यों देख रही हो?

जूही : (उसके चेहरे पर उदासी थी, उसने सोचा था की शिव आज रात उसके साथ रुकेगा, पर वो जाने की बात कर रहा था, उसने नज़ारे झुका कर kaha)Nahi, कुछ नहीं, तुम जाओ.

शिव : (में उसके जज्बात समझता था पर घर भी जाना था क्यों की में सबको खुस खबरि भी सुनना चाहता था, पर उसका चेहरा देख कर मेने मान बदल लिया, मेने उसका हाथ पकड़ा, उसने मेरी आँखों में dekha)Muje रोकना चाहती हो?

जूही : (मेरी आँखों में देखते hue)Me क्या कह सकती हु, तुम्हारी मर्जी, अगर तुम्हारा दिल नहीं है तो चले जाओ.

शिव : (मुस्कुराते हुए) ये भी तो मेरा hi घर है, चलो रुक जाता हु.

जूही : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी पर फिर भी उसने नखरे से kaha)Kisne कहा की ये तुम्हारा घर है?

शिव : (मेने भी मुस्कुराते हुए kaha)Ye घर क्या, ये घरवाली भी मेरी hi है. (मेरी बात सुन कर वो शर्मा गयी)

जूही : गलतफैमिअ मात पालो. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : गलतफैमी नहीं हकीकत है (कहते हुए में खड़ा हुआ और उसको अपनी गॉड में उठा लिया, वो सच में भरी थी, पर मेने उठा liya)Agar यकीं नहीं है तो रोक कर दिखाओ. (वो बहोत खुस हो गयी थी, उसने मेरे गले में बहे डालते हुए अपना शिर मेरे कंधे पर रख दिया और शर्माने लगी, वैसे भी आज मौक़ाभी था और दस्तूर भी, मेने सोचलिअ की आज इस हसीना को अपना बना hi लेता हु, में उसको उठाये हुए बैडरूम की और चलने लगा)
 
अपडेट 169

जूही को उठाये हुए में बैडरूम में आया, बहार की रौशनी की वजह से हल्का उड़जाला था, मेने उसे बीएड पर बिठाया और लाइट चालू कर दी, उसने शरमाते हुए मुझे देखा, और अपनी नज़ारे झुका ली, में उसके पास गया और उसके हाथ पर हाथ रखते हुए साइड में बेथ गया.

शिव : मुझे घर रोकना चाहती थी और जब अब रुक गया हु तो शर्मा रही हो. (मेने मुस्कुराते हुए कहा).

जूही : (निचे देखते हुए मंद मंद मुस्कुराते hue)Kyu तुम्हारा मान नहीं है रुकने का?

शिव : (उसके हाथ को पकड़ कर अपने होठो से लगते hue)Rukne का क्या बहोत कुछ करने का भी मान है, में सोच रहा था की मेरी इस नाजुक सी काली को क्यों दर्द दू इस लिए में चले जाना चाहता था, पर जब काली hi फूल बन ने को बेताब है तो मुझे क्या एतराज हो सकता है (मेरी बात से वो शर्मा गयी)

जूही : में कोई नाजुक काली नहीं हु (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : (में उसको लेटते हुए उसके ऊपर आ gya)Dikhne में तो नाजुक काली hi लगती हो, तुम्हारा ये मासूम चेहरा देख कर लगता है की तुम्हे कोई दर्द न दू.

जूही : (शिव की प्यारी बातो से वो पिघल रही थी, अपने सौंदर्य की तारीफ सुन कर वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी, उसकी छाती को सहलाते hue)Jo होना है वो तो होगा hi शिव, मेने बहोत इंतजार किआ है इस पल का. (में उसके एक स्तन को सहलाते हुए उस पर झुक गया और उसके नाजुक होठो को चूमने और चाटने laga(Ummmmm उम्मम्मम्मम (करते हुए वो उसको बहो में भरने lagi)Ummmhhh उम्मम्मम. (अपने स्तन पर उस कठोर पकड़ से उसकी हालत ख़राब हो रही थी, पर एक अजीब सा आनंद भी मिल रहा था, वो उसके ऊपर आ गया और उसके पैरो के बिच हो गया तो उसका वो कड़क अंग उसे अपनी योनि पर मेंसूस होने laga)Shhhhhhhhhhh (उसने अपने होठ छुड़ा कर जोर से सिसकी ली, फिर उसने शिव को देखा और खुद अपने होठ उसके होठो से जोड़ दिए और उसे जोरो से चूसने lagi)Ummm उम्म्म्म ummmmmm.(Thodi देर किश करने के बाद उसने शिव को देखा, उसे बहोत शर्म आ रही थी, वो जानती थी की इतने सफर के बाद उसके पशीने से भीगी है वो, वो ऐसे hi उसके साथ नहीं होना चाहती थी तो उसने कहा) तुम बैठो में फ्रेस हो कर आती हु.

शिव : क्या जरुरत है, ऐसे hi ठीक हो.

जूही : हर जगह कितना चिप छिपा हो रहा है शिव, बस थोड़ी देर.

शिव : जल्दी आना (मुस्कुराते हुए वो कड़ी हुई और जाने लगी, मेने उसका हाथ पकड़ा हुआ था तो उसे रोक लिए, वो मेरी और देखने लगी)

शिव : अब जा रही हो तो अच्छे से सब साफ़ कर देना (मेने उसकी छूट की और देख कर कहा तो वो शर्मा गयी, मेने उसका हाथ छोड़ दिया तो वो शरमाते हुए वह से जाने लगी, उसके मटकते कूल्हे मुज पर बिजलिया बरसा रहे थे, उसने पलट कर देखा फिर बाथरूम में घुस गयी, में भी मुस्कुराते हुए उठा और बाहरवाले बाथरूम में घुस गया, में भी नाहा लेना चाहता tha)(Juhi को आज बहोत शर्म आ रही थी, जिस दिन का वो बेसब्री से इंतजार कर रही थी आखिर वो दिन आ hi गयाथा, उसके दिल में सब कर गुजरने का रोमांच था तो साथ में एक दर भी था, उसे समाज नहीं आ रहा था की कैसे वो सब कर पायेगी, वो जानती थी की क्या होगा उसके साथ और मानसिक तौर पर वो तैयार भी थी पर फिर भी दिल के एक कोने में हल्का दर भी था, दर था पहली बार का, वो अपने गुप्तांग को जानती थी और वो शिव का वो विकराल लुंड भी देख चुकी थी, उसे याद आया की जब वो थोड़ा सा hi उसके अंदर गया था तो वो दर्द से बिलख उठी थी, पर ये एक न एक दिन तो होना hi था वो अपने आप को सँभालने की कोसिस कर रही थी, उसने अपने सरे कपडे निकले और शावर के निचे कड़ी हो गयी, वो नाहा तो रही थी पर उसका पूरा ध्यान आने वाले पालो को सोचने में गुजर रहा था, उसने अपने पुरे बदन पर साबुन लगाया और अच्छे से सब साफ़ करने लगी) (में नाहा लिया और तौलिया लपेट कर वापस बैडरूम में आया तो वो अभी भी नहीं आयी थी, में बाथरूम के दरवाजे के पास गया और अंदर की आवाजे सुन ने की कोशिस करने लगा, शावर चल रहा था, वो अंदर किस अवस्था में होगी ये सोच कर hi मेरे लुंड में हरकत होने लगी, मेने दरवाजा खत खतया, अंदर शावर बंद हुआ) कितनी देर है?

जूही : (उसको बहोत शर्म आ रही थी, इतनी बार वो उसके सामने नंगी हो चुकी थी पर फिर भी उसे बहोत शर्म आ रही थी, उसने शरमाते हुए कहा धीमी आवाज में kaha)Abhi आयी. (वो अपने गोर बदन को पोछने लगी, उसके चेहरे पर मुस्कान और शर्म दोनों थे, जब वो अपने शरीर को पोछ रही थी तो टॉवल की रगड़ से उसके निप्पल कड़क हो रहे थे, जब उसने अपनी योनि को रगड़ कर पोछा तो उसका रोम रोम खड़ा हो गया, आनेवाले पालो को सोच कर एक उन्माद भर रहा था, अपनी योनि को पोछते हुए उसके अंदर एक लहर दौड़ने लगी, एक अजीब सा एहसास उसे हो रहा था, उसने अपने पेअर फैला कर अपनी योनि को देखा, हलके बालोंवाली अपनी छूट को देख कर वो शर्मा गयी, उसने छूट की लकीर को सहलाया तो पता चला की छेड़ से चिकनाहट रिस रही थी, वो और शर्मा गयी की अभी से उसका ये हल है, जैसे तैसे अपने आपको साफ़ कर के उसने पंतय पहनी, उसने ब्रा उठायी पर फिर वापस रख दी, बिना ब्रा के उसने तौलिए लपेट लिए, वो उसके सामने वैसे hi जाना चाहती थी जैसे वो अक्सर उसको अपना बदन दिखती थी, वो जानती थी की उसका ये रूप शिव को बहोत पसंद है. आज वो उसके लिए सब कुछ कर गुजरना चाहती थी, वो दरवाजे के पास कड़ी हो गयी, उसकी धड़कने तेज चल रही थी, उसके पेअर भी हलके कैंप रहे थे, उसने दरवाजे के हैंडल को पकड़ा पर खोला नहीं, वो दो पल ऐसे hi कड़ी रही, फिर हिम्मत कर के उसने हैंडल घुमाया और दरवाजा खोला, और बहार आ गयी.





में तौलिया लपेट कर बीएड पर बैठा था, जब मेने दरवाजा खुलने की आवाज सुनी तो उस और देखा, दरवाजे से बहार आती उस जलपरी को देखा, मेने ये नजारा कई बार देखा था पर हर बार में अपना दिल थम कर रह जाता था, नज़ारे झुकाये कड़ी उस नव यौवना को देख कर मेरी भी हालत ख़राब हो रही थी, आज वो मेरी होनेवाली है ये सोच कर hi मेरे लुंड ने हरकत करना सुरु कर दिया था, में अपनी जगह से उठा और उस जलपरी की और बढ़ चला, मुझे अपनी और आता देख कर hi वो अप्सरा संकुचन लगी, पर आज में नहीं रुकनेवाला था. में उसके सामने जा कर खड़ा हो गया, बालो से टपकता पानी उसके स्तन के ऊपरी भाग को भिगोता हुआ निचे सरक रहा था, उसने हिचकिचाते हुए मेरी और देखा, हम दोनों की आंखे एक हुई, उसने मुस्कुराने का प्रयास किआ पर उसकी मुस्कराहट में भी गब्रहत साफ़ जलक रही थी, में उसके और नजदीक गया और उसकी कमर को पकड़ कर अपने से सत्ता लिया, वो अभी भी मेरी आँखों में देख रही थी, उसका चेहरा उत्तेजना के मरे लाल हुआ जा रहा था और सांसे तेज चल रही थी.





शिव : (उसकी भीगी हुई लत को चेहरे से हटते hue)Juhi (वो मेरी आँखों में देख रही थी) तुम बहोत खूबसूरत हो. (उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी, और शर्म भी चालक आयी, मेने उसके भीगे होठो को देखा, मेरी नजर उन गुलाबी पंखुडिओ पर ठहर सी गयी, मेने हाथ ऊपर कर के उसके चेहरे को थमते हुए उसके होठो को अंगूठे से sehlaya)Aaj इनका रास जी भर के पीना है मुझे. (वो शर्मा रही थी संकुचा रही थी, उसने अपना हाथ शिव की सख्त छाती पर रख दिया और अपनी नाजुक उंगलिओ से उसे सहलाने लगी)

जूही : में तो न जाने कब से तैयार बैठी हु शिव, में तुम्हारी हु, तुम जो चाहे कर lo.(Usne शरमाते हुए मुस्कुरा कर कहा)

शिव : तुम्हे जब पहली बार इस रूप में देखा था तभी से में तुम्हारा दीवाना हो गया था.





जूही : जानती हु, में जान बुज कर तुम्हारे सामने ऐसे आती थी, में चाहती थी की तुम मेरे दीवाने हो जाओ, पता नहीं क्यों पर पहले दिन से hi तुम मुझे भ गए थे, में तुम्हारे लिए साडी हाडे पर कर जाना चाहती थी. (में एक पल न रुका और उसके रसीले होठो पर झुक गया और उसके होठो का रास पिने लगा, वो भी मेरे होठो को निचोड़ने लगी, उसकी पीठ सहलाते हुए मेरे हाथ उसके सख्त नितम्बो पर चले गए, उसके हाथ भी मेरे नितम्बो को मसल रहे थे, थोड़ी देर किश करने से दोनों की सांसे तेज तेज चलने लगी थी) (जूही को आज पता था की आज वो लड़की से औरत बन जाएगी, इस लिए उसके दिल में कुछ ज्यादा hi रोमांच था, अपनी योनि पर दबाव बनाते उस सख्त अंग को महसूस कर के उसकी सांसे बेकाबू हो रही थी, उस से बर्दास्त न हुआ, उसकी सांसे उखाड़ने लगी तो उसने किश तोड़ दी और जोर जोर से हांफने लगी, पर शिव तो जैसे उसे छोड़ना hi नहीं चाहता था, उसने उसे पलट दिया और पीछे से उसको पकड़ लिया, उसके गले को किश करते हुए उसके पेट को मसलने लगा, वो बुरी तरह से कैंप रही थी, जैसे जैसे शिव के हाथ उसके सुडौल स्तन की और बढ़ रहे थे उसकी धड़कने बेकाबू हो रही थी, आखिर कर शिव ने दोनों पह्जो से उसके स्तन को मसल दिया तो एक तेज सिसकी उसके गले से निकल पड़ी, उसका शिर पीछे लुढ़क गया, ब्रा तो उसने पहनी नहीं थी, सिर्फ टॉवल था, शिव के मजबूत पंजी उसके कबूतरों को बे रही से मसल रहे थे, दर्द के बावजूद उसको बहोत नशा चढ़ता जा रहा था, उसने अपने एक हाथ को पीछे ले जाते हुए शिव के बालो को नोचना सुरु कर दिया. एक पल के लिए शिव पीछे हटा और उसने मेरा तौलिया हटा दिया, मुझे शर्म आयी पर मेने रोका नहीं उसे, तौलिया निचे गिर चूका था, में सिर्फ पंतय में थी, जब फिर से उसने मुझे पकड़ा और मेरे स्तन को दबोचा तो मेरे कूल्हों पर मुझे उस कड़क नंगे अंग का एहसास हुआ, वो पूरा नंगा हो चूका था, ये सोच कर hi मेरे तन बदन में चिंगारिया फुट पड़ी, में अपने कूल्हे उस सख्त अंग पर रगड़ने लगी, पता नहीं क्या जादू था उस अंग में की में उसकी दीवानी होती जा रही थी. मेरे मुँह से सिस्किअ बेकाबू हो कर निकल रही थी) शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव shhhhhhhhhhh (वो मेरे निप्पल को मसलने लगा तो पुरे बदन में करंट दौड़ gaya)Shhhhhh शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह आहिस्ता आईईईई शहहह दर्द हो रहा है शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (दर्द होने के बावजूद में उसे रोक नहीं रही थी, उसका हाथ फिसलते हुए मेरे पेट पर आया, कुछ पल वह ठहरने के बाद वो मेरी छूट पर चला गया, पंतय के ऊपर से hi उसके हाथ ने मेरी छूट को दबोचलिया, उत्तेजना के मारे मेरा शरीर कैंप रहा था, ये वो मर्द था जिसको मेने मेरे शरीर को छूने का अधिकार दिया हुआ था, आज तक वो सयमित था पर आज वो बेकाबू हो रहा था, मेरा रोम रोम उसका स्वागत कर रहा था, में महसूस कर प् रही थी की मेरी पंतय पूरी गीली हो चुकी है. वो मेरी छूट को मसल रहा था और में अपनी कमर को हिला रही थी, पीछे वो डंडा मेरे अंदर हलचल मचाये हुए थे, शिव का हाथ मेरी पंतय के अंदर चला गया और मेरी नंगी छूट उसके हाथो में थी, मुझसे भी रहा नहीं गया और मेने अपने हाथ को पीछे ले जा कर उस कड़क लुंड को पकड़ लिया, वो बहोत कड़क था, और गरम तो ऐसा की हाथ में छले पद jaye)Shhhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह माय लोवीएएए शहहहहह, मुझे कुछ हो रहा है जाएं shhhhhhhhhhhhh.

शिव : (में जूही के शरीर को महसूस कर रहा था, वो दिखती तो नाजुक थी पर उसका शरीर जैसे लोहे का था, सख्ताई के बावजूद एक नर्माहट थी उसके शरीर में, उसकी छूट के बालो को में महसूस कर प् रहा था, मेरी ऊँगली छूट की दरार पर रगड़ रहा था, वह चिकनाहट फ़ैल गयी थी, पुरे कमरे में एक मादक गंध फ़ैल गयी थी, उसके बदन की भीनी खुसबू मुझे पागल बना रही थी, उसके कई अंग सख्त थे तो कई जगह पर पर्याप्त कोमलता थी, उसकी छूट के होठ नरम थे, उन्हें मसलते हुए में उसका पूरा जायजा ले रहा tha)Tum बहोत गरम हो जूही, तुम्हे बर्दास्त करना हर किसी के बस की बात नहीं.

जूही : इसीलिए तो तुम आये हो शिव, तुम्हे मेरे लिए hi भेजा है, ताकि में पूरी हो सकू शह्ह्ह्हह्ह, मुझे तुम्हारा hi इंतजार था सीईव शह्ह्ह्ह में तुम्हारी हो कर hi रहना चाहती हु शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : इसीलिए उस कोच की बात मान गयी थी.

जूही : (मेरी बात से वो एकदम से रुक गयी, मुझे भी लगा की इस वक़्त ये बात नहीं करनी चाहिए थी, वो पलट गयी और मेरी आँखों में देखने लगी, उसकी आँखों में उदासी के साथ गुस्सा भी था, उसने बहोत सख्ती से मेरी आँखों में dekha)Me उसका जवाब दे चुकी हु शिव.

शिव : (मेरे मुँह से गलत वक़्त पर ये बात निकल गयी थी जिसका एहसास मुझे हो रहा tha)Sorry, वो ऐसे hi निकल गया. (मेने उसका गाल सहलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तो उसने जातक दिया)

जूही : नहीं, ये इस लिए निकला क्यों की तुम्हारे दिल में वो बात बेथ गयी है, मेने कहा था की उस वक़्त में दर गयी थी, मेने कभी ऐसी परिस्थिति का सामना नहीं किआ था, मुझे फ़िक्र थी तुम्हारी जो मेने वो गलत फैसला ले लिया था, पर में अब समाजचुकि हु, फिर भी तुम मुझे सुना रहे हो. (उसकी आँखों में नमी उभर आयी)

शिव : सॉरी यार, मेने ऐसे hi कहा था.

जूही : नहीं शिव, कोई भी बात ऐसे hi नहीं निकलती, में तुम्हारी कसम खा कर कहती हु, में अपने maa-baap की कसम खा कर कहती हु, अब कभी किसी ने भी मेरे सामने वैसी बात की तो में उसी वक़्त उसका मुँह तोड़ दूंगी, चाहे परिस्थिति कुछ भी हो, में मरना पसंद करुँगी पर वैसी बात नहीं मानूंगी.

शिव : (मेने उसे पकड़ कर अपने गले लगा लिया, वो मुझसे छूटने का प्रयास करती रही पर मेने उसे नहीं chhoda)Soryy जाएं, बस मुँह से निकल गया, मेरा वो मतलब नहीं था.

जूही : मेने कहा न शिव, कोई भी बात ऐसे hi नहीं निकलती, तुम्हे वो बात चुभी थी, तुम बर्दास्त नहीं कर पाए की में किसी और की ऐसी बात मान गयी, आखिर हो तो मर्द hi न.

शिव : (बात उसकी सही थी, शायद मेरे अंदर के मर्द को ये बात अच्छी नहीं लगी थी, और इसीलिए मेरे मुँह से ये निकल गया tha)Sorry यार, माफ़ करदे, फिर कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा.

जूही : इसमें तुम्हारी गलती नहीं है शिव, हर मर्द, औरत को अपनी जागीर समझता है, वो ये नहीं देखता की उसके भी जज्बात है, उसकी भी सोच है, उसकी भी ख्वाहिसे है, तुम चाहे जितना के साथ करो, सब सही, पर में किसी और के साथ करू तो गलत, में ये नहीं कह रही की में वैसा सोचती हु पर तुम hi सोचो, तुम्हारे जिनके साथ सम्बन्ध है क्या वो किसी की जागीर नहीं है? तुम किसी के फायदे के लिए, किसी की मदद करने के लिए उसके साथ सब करो तो वो जायज और मेने तुम्हारे लिए ये सोच लिया तो में गलत हो गयी, अगर वो मेरे साथ वो कर भी लेता तो क्या मेरे दिल में तुम्हारे लिए प्यार काम हो जाता, सिर्फ तुम hi नहीं कितने hi मर्द है जो ऐसा hi सोचते है, मर्द किसी और के साथ सब कर के आता है, फिर भी ये जताता है की वो तो सिर्फ टाइम पास था में तो तुम से hi प्यार करता हु, अगर औरत शामे चीज करे तो वो गलत हो गयी, क्यों?

शिव : मेने कहा न जान, गलती हो गयी, अब मूड मात ख़राब करो, आगे से ऐसी बात नहीं करूँगा, बस.

जूही : चाहे में जो भी करू?

शिव : (उसने एक गहरी साँस li)Haaa.

जूही: (उसकी आँखों में देख कर muskurayi)Rehne दो, रहने दो, तुम्हारा चेहरा hi बता रहा है, फ़िक्र मात करो, में कही नहीं जानेवाली. मेरे लिए तुम hi पर्याप्त हो.

शिव : सॉरी यार, मेने सारा मूड ख़राब कर दिया न?

जूही : (वो भी इस पल को खोना नहीं चाहती thi)Ab ख़राब किया है तो फिर ठीक भी तुम hi करो. (उसने प्यार से कहा)

शिव : जो हुकुम मेरी रानी. (कहते हुए मेने उसे अपनी गॉड में उठा लिया और बिस्तर पर लेता दिया, जूही भी मुकसकुराई, में उसके ऊपर हो गया और उसके होठो को चूसने लगा, मेरा लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर से कड़क होने लगा, उसके पेअर फैलते हुए में बिच में आ गया और पंतय के ऊपर से hi छूट पर लुंड को रगड़ने लगा, वो मचल रही थी, ऐसे hi लुंड रगड़ते हुए में निचे की और बढ़ा और उसके स्तन के निप्पल को मुँह में भर लिया और चूसने लगा, उसकी छाती ऊपर की और उठ गयी )





जूही : शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह (ऐसे निप्पल को चूसने से एक सरसराहट हो रही थी उसे, कभी कभी शिव जोर से चूस लेता था तो उसे दर्द होने लगा तो वो शिव के शिर को धकेलने लगी पर शिव ने उसके हाथ पकड़ लिए और ऊपर दबा diye)Shhhhhh दर्द हो रहा है यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (उसने रोनी सूरत बना कर कहा, पर शिव उसके निप्पल को बरी बरी चूस रहा था, उसका ऐसे चूसना उसके अंदर उत्तेजना भर रहा था, शिव ऐसे चूस रहा था जैसे उसमे से दूध निकल रहा हो, उसको अजीब सा आनंद आ रहा था, वो अपने निप्पल को चूसते हुए उसे देख रही थी, दूसरी तरप निचे लुंड उसकी योनि पर दबाव बढ़ाते हुए रगड़ रहा tha)Shhhhhh मात करो यार शह्ह्ह्ह बर्दास्त नहीं हो रहा है शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह.





शिव : तुम्हारे बदन की तपिस मुझे दीवाना बना रही है जान, ऊपर से ये बदन की खुसबू मुझे पागल किये जा रही है, आज तुजे पूरी तरह से प् लेना है मुझे. (शिव फिर से उसके निप्पल को चूसने लगा)

जूही : आईईईई शह्ह्ह्हह्ह में तेरी hi रहूंगी, हमेशा शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अहिस्ताआ शह्ह्ह्हह्ह में मर जाउंगी यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (उसकी आँखों में देखते hue)Abhi से इतना तड़प रही है तो सोच वो अंदर जायेगा तो क्या होगा (जूही उसकी आँखों में देख रही थी, अपनी योनि पर ठोकर मरते उस कड़क अंग को वो महसूस कर रही थी, उसे भी इसी बात का दर था, वो सेहमी हुई सी शिव को देख रही thi)(Usko ऐसे दरी हुई देख कर में muskuraya)Itna क्या दर रही है, में हु न, में तुजे मरने थोड़ी दूंगा.

जूही : वो बहोत बड़ा है शिव. (उसने अपना दर प्रदर्शित किआ)

शिव : कोई बड़ा नहीं है, तू सबसे मजबूत है, तू आराम से सेह लेगी, में आराम से करूँगा, अभी उस बात को बहोत देर है, अभी से क्यों घबरा रही है. अभी तो जी भर के मुझे तुम्हे महसूस करना है, हर जगह से.

जूही : तुजे में इतनी अच्छी लगती हु? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : है, बहोत ज्यादा, तू hi है जो मेरे जीवन में सवेरा बन कर आयी है, तू मेरे लिए बहोत खास है, दर मात में तेरा ख्याल रखूँगा.

जूही : (उसके चेहरे को सहलाते hue)Me घबरा नहीं रही बस थोड़ा दर लग रहा है, वह छोटा सा hi छेड़ है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kaha?

जूही : (शर्मा gayi)Gande कही के, तुम्हे पता है में क्या बोल रही हु. (उसने मुस्कुरा कर कहा)

शिव : (उसकी आँखों में देखते hue)Ek बार देख लू वह, कितना छोटा छेड़ है? (जूही के चेहरे पर ढेर साडी शर्म आ गयी, पर उसने मन नहीं kia)bol न, देख लू?

जूही : (नखरे se)Mere न कहने से जैसे तू रुक जायेगा. (वो मुस्कुरायी)

शिव : तेरी यही अदा तो मुझे दीवाना बना रही है, चल, आज तू hi अपना खजाना मुझे दिखा. (कहते हुए शिव उसके ऊपर से उठ गया और बेथ गया, जूही उसे देखने लगी, वो बैठे हुए उसे देख रहा था, उसे शर्म आने लगी)

जूही : ऐसा क्यों कर रहा है, तुजे जो देखना है खुद देख ले न.

शिव : नहीं, तू hi मुझे दिखा, में तेरा ये मादक रूप देखना चाहता हु.

जूही : (वो ऊपर से नंगी थी, पर शिव के ऐसे देखने से उसको शर्म आने लगी, वो अपने स्तन छुपाने lagi)Please शिव, ऐसा मात कर, मुझे बहोत शर्म आ रही है. तू hi कर ले न सब.

शिव : में कर लूंगा, पर पहले में तेरा वो कामुक रूप देखना चाहता हु.

जूही : तू जनता है न की मेने पहले कभी ऐसा नहीं किआ, में नहीं कर पाऊँगी, आज मेरी बात मान ले. मुझे बहोत शर्म आ रही है शिव.

शिव : (में भी उसकी हालत समाज सकता था, ऐसे hi पहली बार में वो इतना नहीं खुल सकती thi)Chal ठीक है, आज तेरी बात मान लेता हु, एक दिन तू खुद मुझे अपना सब दिखाएगी. (मेने उसे अपनी और खिंचा और अपने से सत्ता कर बिठा दिया, वो मेरी छाती पर पीठ लगाए बैठी थी, मेने अपने हाथ आगे किये और फिर से स्तन सहलाने और दबाने लगा)

जूही : (उसकी आंखे बंद हो गयी और सिसकने lagi)Shhhhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (जैसे जैसे शिव उसके स्तन को दबाते हुए उसके निप्पल से खेल रहा था उसके सरीर में चिंगारिया फुट रही थी, ऊपर से वो उसके गले को चाट रहा था, चुम रहा tha)Shhhhh शिईयिव, मुझे कुछ हो रहा है यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव उसके स्तन के साथ खेल रहा था तो उसे बहोत अच्छा लग रहा था, एक लड़की के सरीर का गहना होता है ये, शिव जिस तरह से उसके स्तन दबा रहा था उसे महसूस हो रहा था की उसे भी बहोत मजा आ रहा है, उसकी पीठ पर चुभता अंग इस बात की पुरस्ती कर रहा tha)Shhhhhh तुम्हे ये अच्छे लगते है शिव?





शिव : है, मेरी प्यारी, ये सुडौल स्तन बहोत आकर्षक है, और कड़क भी बहोत है, तुम्हे कैसा लग रहा है.

जूही : पता नहीं, एक अजीब सी फीलिंग आ रही है, हम लड़कीअ अक्सर ये सब छुपा के रखती है और आज देखो कैसे में तुम्हारे साथ हु. शह्ह्हह्ह्ह्ह आहिस्ता यार शह्ह्ह्हह्ह. (शिव का एक हाथ निचे फिसलने लगा तो उसने थोड़ा साइड हो कर उसकी आँखों में देखा, जैसे पूछ रही हो की किस और बढ़ चले तुम? पर शिव सिर्फ मुस्कुराया, और उसका हाथ आगे बढ़ता रहा उसके सख्त पेट से होते हुए आखिर कर उसकी योनि तक पहुंच gaya)Shhhhhh शिव (उस मरदाना हाथ को अपनी योनि पर महसूस कर के उसकी होनी फूलने और पिचकने लगी और उसमे से रास और ज्यादा निकलने लगा, पूरी पंतय आगे से भीग चुकी thi)Shhhh शिईयिव मुझे कुछ हो रहा है वह शह्ह्हह्ह्ह्ह मात करो वह.

शिव : (उसकी छूट के होठ मुझे महसूस हो रहे थे, उस फूली हुई छूट को महसूस कर के मेरा लुंड और फुदकने लगा tha)Kya महसूस हो रहा है, मज़ा नहीं आ रहा क्या?

जूही : बहोत मज़ा आ रहा है शिव, वह ऐसा कुछ हो रहा है जो में बयां नहीं कर शक्ति शह्ह्हह्ह्ह्ह में पागल हो रही हु शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने हाथ उसकी पंतय में दाल दिया, वह पूरी योनि चिप छिपे रास से भीगी हुई thi)Ooo माआ शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह शिईयिव क्या कर रहे हो शह्ह्ह्हह्ह में बर्दास्त नहीं कर प् रही हु shhhhhhhhhh.

शिव : तुम्हारी छूट बहोत गर्म है जूही, कितना पानी छोड़ रही है. (में लगातार उसके होठो को दबोच रहा था और साथ में ऊँगली से बिच की दरार सेहला रहा था, वो झटके खा रही थी)

जूही : शह्ह्ह्ह शिईयिव शहहहहह मात करो शह्ह्ह्हह्ह ये कैसा एहसास है यार शहहहहह (शिव ने ऊँगली उसकी छूट के छेड़ में डाली तो वो चिहुँक uthi)Nahiiii शहहहहह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.





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शिव : तुम्हारी छूट बहोत गर्म है जूही, अंदर तो जैसे आग लगी हुई है.

जूही : (जूही से बर्दास्त नहीं हो रहा था, शिव की ऊँगली उसके अंदर एक इंच तक चली गयी thi)Shhhh शिईयिव में पागल हो जाउंगी यार शह्ह्हह्ह्ह्ह ये क्या कर रहे हो तुम शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : वो hi कर रहा हु जो तुम चाहती थी, तुम चाहती हो न की में तुम्हे छोड़ू.

जूही : (ऐसी भासा उसको अजीब लग रही थी, पर सच तो यही था की वो यही चाहती thi)Shhhh ये क्या बोल रहे हो तुम शह्ह्ह्ह ऐसा कोई बोलता है क्या? शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (गरम गरम छेड़ में ऊँगली अंदर बहार करते hue)Me वही कह रहा हु जो तुम चाहती हो जूही. क्या नहीं चाहती तुम?

जूही : हा, शह्ह्ह्ह चाहती हु शह्ह्ह्ह पर अजीब लग रहा है सुन ने में शह्ह्हह्ह्ह्ह (मेरी ऊँगली और अंदर जा रही thi)Shhhhh और अंदर नहीं सीईव शह्ह्हह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है.

शिव : ज्यादा दर्द नहीं होगा, वह कौमार्य पटल नहीं है जूही, तुम्हे ज्यादा तकलीफ नहीं होगी.

जूही : (उसने नशीली आँखों से शिव को dekha)Kya नहीं है शिव?

शिव : वो hi जो लड़की कुवारी होने का साबुत मन जाता है, लड़की का कौमार्य पटल, जिसे सील भी कहते है.

जूही : वो क्यों नहीं है? मेने तो किसी के साथ नहीं किआ शिव, मेरा यकीं karo.(Usne चिंतित हो कर कहा)

शिव : पागल है क्या, मुझे पता है, तुम एक खिलाडी हो, और खिलाडी ो का वो पर्दा टूट जाता है, तुम्हारी गलती नहीं है. पर सिर्फ पर्दा न होने से कुछ नहीं होता, तुम्हारी छूट बहोत कासी हुई और संकरी है.

जूही : (शरमाते hue)Tum कितना गन्दा बोलते हो शिव, तुम्हे शर्म नहीं आती (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : अब जो है उसे वो न कहु तो और क्या कहु. तुम्हे वह अंदर कैसा लग रहा है?

जूही : बहोत अच्छा लग रहा है शिव, वो ऊँगली अंदर बहार हो रही है तो बहोत अच्छा लग रहा है.

शिव : सिर्फ ऊँगली से मज़ा लेना है की लुंड भी चाहिए? (मेने मुस्कुरा कर कहा)

जूही : गंदे (उसने मेरी झंघ पर मारा) मरूंगी जो इतना गांड बोलोगे तो. (उसने मुस्कुराते हुए जूठा गुस्सा दिखते हुए कहा, में बस मुस्कुराया, में पीछे से हटा और उसे बिस्तर पर लेटाया)

शिव : अब मुझे तुम्हारा छेड़ देखने दो, पता तो चले की मेरा अंदर जा पायेगा की नहीं.

जूही : (शरमाते हुए मुस्कुरा रही thi)Bahot गंदे हो तुम शिव, मेने सोचा नहीं था की तुम ऐसी भी बाटे करते होंगे.

शिव : (मुस्कुराते हुए) फिर तो ये भी नहीं सोचा होगा की में तुम्हे छोडूंगा.

जूही : मरूंगी में तुम्हे, मात बोलो यार, कितनी शर्म आती है.

शिव : तुम शर्माती रहो में तो अपना काम कर रहा हु (कहते हुए में उसकी छूट पर झुका जो अभी पंतय में छुपी हुई थी, और उसे जोर से सुंघा, उसकी मादक गंध मेरे नथुनों में भर gayi)wah क्या खुसबू है तुम्हारी (जूही मंद मंद मुस्कुराने लगी, मेने अपना मुँह छूट पर लगाया और पंतय के रास को जोरो से चूसा)

जूही : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (जैसे जैसे शिव उसकी योनि को चूस रहा था उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो थोड़ा ऊपर उठ कर उसे देखने लगी, जिस खजाने को वो छुपा के रखती थी उसे वो किसी के सामने परोस कर बैठी थी, उसे अजीब लग रहा था, पर उसका ऐसे चूसना उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो उसके शिर को सहलाने lagi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह तुम्हे वो अच्छी लगती है (शिव ने उसकी और देखा और मुस्कुराया, पर आपने काम करता रहा, वो फिर पीछे लुढ़क गयी, थोड़ी देर शिव उसकी पंतय को चुस्त और चाट ता रहा, वो जब पंतय को उतरने लगा तो उसने अपने कूल्हे उठा कर उसकी मदद की, और जब शिव के होठ उसकी नंगी छूट पर लगे तो उसका शरीर कमान की तरह अकड़ गया) शहहहहह शीइइइइव (वो लगातार उसकी छूट को चूस रहा था और उसके गरम मुँह के एहसास से वो मज़े से दोहरी होती जा रही थी, शिव पहले भी इसका मज़ा उसे दे चूका था, उसने अपने पेअर और फैला दिए ताकि वो अच्छे से उसकी योनि को चाट सके, वो बस सिसकती रही, शिव की जीभ जब उसके छेड़ में जाती तो वो बिस्तर पर उठ जाती थी, और फिर वापस धड़ाम से गिर जाती, शिव उसकी छूट को छोड़ hi नहीं रहा था, पर अब उस से बर्दास्त नहीं हो रहा tha)Shhhh बॉस करो शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह अब मुझसे रहा नहीं जा रहा शह्ह्ह्हह्ह (वो उसे अपने ऊपर खींचने lagi)Shhhhhh, शीइइइइव शहहहहह सुनो न शह्ह्हह्ह्ह्ह बस करो अब शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (अपना मुँह हटते हुए उसको देखा, दोनों की नज़ारे मिली, शिव बेथ गया, और उसका हाथ पकड़ कर उसे बिठाया, और अपने लुंड को पकड़ कर हिलाते hue)Chusogi??? (जूही शर्मा गयी, पर उसको भी यही छह थी, तो वो घुटनो के बल होते हुए झुक गयी और उसके लुंड तक पहुंच गयी, उसने लुंड को देखा, एक अजीब सी कशिश थी, वो ऊपर की और उठा हुआ था, एक और दर भी लग रहा था तो दूसरी और प्यार भी आ रहा था,





वो झुक गयी और लुंड को अपने गरम मुँह में प्रवेश करवा दिया, शिव की भी आह निकल gayi)Shhhhhhh तुम्हारा मुँह भी बहोत गरम है जूही शह्ह्ह्हह्ह

(उसके शिर को वो अपने लुंड पर दबाने लगा, जूही भी जितना हो सके उतना अपने मुँह में भर कर उसे चूसने लगी, वैसे वो नयी थी पर दो तीन अनुभव से उसे थोड़ा अभ्यास हो चूका था, वो गरम लुंड उसे भी बहोत अच्छा लग रहा था, उसने अपना हाथ आगे बाध्य और उसकी खाल पीछे करते हुए लाल लाल सुपडे को चाटने लगी, शिव सीखिए भर रहा था तो वो वो उसे नजर उठा कर देख रही थी, शिव के चेहरे पर आनंद था जिसे देख उसे अच्छा लग रहा था, वो और सिद्दत से लुंड चूसने लगी)





शह्ह्हह्ह्ह्ह तुम अच्छा चूस रही हो जूही शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो उसके शिर को अपने लुंड पर दबाने लगा, जूही के हलक तक लुंड पहुंच चूका था, उसकी सांसे रुक रही थी उसने बर्दास्त करने की कोशिस की पर न कर पायी और खासते हुए लुंड को बहार निकल दिया, उसकी आँखों में पानी आ गया था, उसने शिव को देखा, शिव को अपनी गलती का एहसास hua)Sorry यार, वो ध्यान नहीं रहा. (जूही बस मुस्कुरायी, मेने उसे पकड़ कर अपने सामने किआ, वो मेरी आँखों में देख रही थी, मेने उसका चेहरा सहलाया और puchha)Taiyar हो?

(वो भी समाज रही थी, किआ आखिर वो पल आ hi गया है, उसको दर भी लग रहा था पर उसने है का इस्सर किआ, में उसका दर समाज रहा था, मेने उसको अस्वासन diya)Kuchh नहीं होगा, में ख्याल रक्खूँगा. (उसने है में शिर हिलाया, मेने उसको बिस्तर पर लेटाया, उसके पैरो को फैलते हुए में बिच में आ गया, वो बस मुझे देख रही थी, मेने छूट को देखा, बंद थी वो,





मेने जल्द बजी नहीं की, मेने लुंड छूट पर लगाया और ऊपर निचे घिसने लगा और उसके ऊपर हो गया, उसकी आँखों में देखते हुए उसके होठो को चूसा, उसके चेहरे पर दर साफ़ चालक रहा था, में उसकी हालत समाज सकता था, पर जो होना है वो होना hi है, मुझे उसके दर्द का एहसास था पर एक कुवारी छूट का मज़ा भी मुझे पता है, में उसे रिलैक्स करना चाहता था, और लुंड को लगातार उसकी योनि पर घिस रहा था, उसके गले को चाट रहा था और उसके निप्पल को भी चूस रहा था, उसका दर काम हो गया और वो सिस्किअ लेने लगी)

जूही : शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव, ी लव यू बेबी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (वो भी अपनी छूट लुंड पर दबाने लगी और अपने हाथो को उसकी पीठ पर ले कर सहलाने lagi,Thodi देर और शिव उसको ऐसे hi प्यार करता रहा, अब वो बहोत गरम हो चुकी थी, लगातार लुंड के रगड़ने से छूट पूरी तरह चिकनी हो चुकी थी, अब उसको भी वो लुंड अपने अंदर चाहिए था, वो उसकी पीठ को सेहला रही थी, उसके कान को चाट रही थी, उसे उकसा रही thi)Fuck में बेबी, शह्ह्ह्ह ी ऍम रेडी, जस्ट फ़क में (वो बेकाबू हो कर शिव को चुम रही थी, उसे सेहला रही थी, उसका शरीर पूरी तरह से गरम हो चूका था, वो सब भूल चुकी थी, उसे बस वो लुंड hi महसूस हो रहा था, लुंड का सूपड़ा उसकी योनि की दरार में फिसल रहा था, वो उसे अपने छेड़ पर टिकना चाहती thi)Fuck में शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह ी ऍम रेडी फॉर यू कॉक, शह्ह्हह्ह्ह्ह ी लव यू, जस्ट दो आईटी. (मेने भी जयदा देर करना सही नहीं समजा और और लुंड को छूट के छेड़ पर लगाया और बिना किसी देरी के दबा दिया, लुंड छेड़ को फैलते हुए अंदर घुस गया)





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Aiiiiiiiiiiii मार gayiiiiiiiiiii. (जूही ने अपने नाख़ून शिव की पीठ में गधा दिए और उसके कंधे को जोर से काट लिया)

शिव : (दर्द मुझे भी hua)Kuchh नहीं होगा जान, बस थोड़ी देर (कहते हुए मेने फिर एक धक्का मारा, लुंड दो तीन इंच अंदर चला गया, छूट बहोत कासी हुई थी, लग रहा था की अंदर जगह hi नहीं है, वो मेरे लुंड को भी दबा रही थी, मेने फिर से जोर से धक्का मारा)

जूही : (तड़प uthi)Maaaaa..... मर जाउंगी शीइइइइइइव ahhhhhhhhhhh.

शिव : कुछ नहीं होगा, थोड़ा सहन कर लो (मेने फिर से धक्का मर दिया)

जूही : (जूही रो पड़ी, रट hue)Aiiiiii, Shiiiiiiiiiiv (वो रोने लगी)

शिव : थोड़ी देर जान.

जूही : (रट hue)Bahot दर्द हो रहा है सीईव. (उसने आंसू बरी हुई आँखों से मुझे देखते हुए कहा)

शिव : (में रुक गया और अभी ज्यादा डालने का ख्याल निकल दिया) ठीक है, में और नहीं दाल रहा.

जूही : (उसे लग रहा था की उसने सही नहीं किआ, पर वो भी क्या करती, दर्द हो रहा था उसे, उसने शिव को dekha)Sorry यार.

शिव : पागल है क्या, तू मेरी जान है, कितनी प्यारी है तू, अभी सब ठीक हो जायेगा (में उसके गाल को चूमने लगा) पहली बार में ऐसा होता है, अभी ठीक हो जायेगा (में उसे चूमने लगा, उसके दर्द का एहसास था मुझे पर बंद छूट पर फ़तेह हासिल करने का भी रोमांच था, में उसको चूमने लगा और उसके निप्पल को चूसते हुए उसके स्तन सहलाने और दबाने लगा, जूही शांत हो रही थी, शिव उसके बदन को चाट रहा था उसे प्यार कर रहा था, दर्द के बावजूद उसे ये अच्छा लग रहा था, शिव उसकी केयर कर रहा था, वो अपने अंदर धसे उसे लुंड को महसूस कर रही थी, उसको जलन हो रही थी वह जैसे किसी ने मिर्ची भर दी हो, पर शिव का ऐसे प्यार करना उसे अच्छा लगने लगा, उसका दर्द भी काम होने लगा था, वो शिव के शिर को सहलाने लगी जो उसका निप्पल चूस रहा tha)(Shiv को भी महसूस हुआ की जूही थोड़ी शांत हुई है तो उसने उसकी आँखों में dekha)Akhir कर तू मेरी हो hi गयी जूही. (रट हुए चेहरे पर भी हसी आ गई)

जूही : तुजे अच्छा लगा?

शिव : अभी कहा, अभी तो शुरुआत हुई है, आज पूरी तरह से तेरे अंदर समां जाना है. (वो शर्मा गयी) तू खुस है न? (उसने है में शिर hilaya)Tu कहे तो बहार निकल लू? (उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान उभर आयी, उसने मेरी आँखों में देखते हुए ना में शिर हिलाया) अब तुजे प्यार करू? (उसने हां में शिर hilaya)Meri जूही, (मेंउसके ऊपर हो गया और उसे किश करने लगा, वो भी मुझे बहोत में भर कर सहलाने लगी, थोड़ी hi देर बाद मेने लुंड को थोड़ा बहार खिंचा, वो किश करते हुए रुक गयी पर अगले hi पल फिर किश करने लगी, मेने लुंड अंदर किआ. ऐसे hi थोड़ी देर में करता रहा, छूट में फिर से पानी भरने लगा था, लुंड अब फिसल रहा था, वो भी मुझसे कास के लिपट रही थी, मुझे उसकी छूट की सख्ताई महसूस हो रही थी, अंदर नर्माहट नहीं एक सख्त दीवाल महसूस हो रही थी, में उस दीवाल को ढीला करने में लग गया, लुंड हलके हेल अंदर बहार हो रहा था, जूही को भी अब मज़ा आने लगा था, दर्द था पर एक अजीब सा मज़ा भी था, वो अपने पेअर फैला कर शिव को अपने अंदर खींचने लगी थी, ये पहली बार था की कोई चीज उसकी छूट के अंदर इतनी गहराई तक पहुंची थी, दर्द के बावजूद उसको मज़ा आ रहा था, उसकी छूट की अंदरूनी दिवलो में हो रहे घरसँ से एक अजीब सी सरसराहट हो रही थी.)





जूही : उम्म्म्म उम्मम्मम्मम ummmmmm(wo शिव को चुम रही थी और उसको अपनी बहो में कैसे जा रही थी)

शिव : (थोड़ा ऊपर उठा और जूही को देखने लगा, निचे लुंड अंदर बहार करते जा रहा था, जूही के चेहरे पर शर्म थी और खुसी भी thi)Achchha लग रहा है (वो शर्मा गयी, में थोड़ा और ऊपर हुआ और पैरो के बिच बेथ गया, में छूट को देख रहा था, मेरे लुंड पर खून लगा हुआ था, उसकी छूट के अस्स पास भी खून लग गया tha)(Juhi शिव को अपनी छूट की और देखते देख शर्माने लगी, वो उसकी छूट में जाते लुंड को देख रहा था, उसे अजीब लग रहा था, एक लड़का उसे छोड़ रहा था आज, शिव फिर उसके ऊपर आ गया और उसको किश kia)Achchha लग रहा है जूही?





जूही : हाआआ. तुजे कैसा लग रहा है शिव?

शिव : तुजे प् कर में खुस हु जूही.

जूही : में भी शिव, ी लव यू.

शिव : ी लव यू तू. (में हलके हलके धक्के लगा रहा tha)Tumhari छूट बहोत टाइट है जूही.

जूही : (शरमाते hue)Aisa मात कहो शिव, शर्म आती है.

शिव : इसमें क्या शर्माना, तुम्हे मेरा लुंड कैसा लगा? (वो शरमाते हुए देख रही थी पर बोली nahi)Bolo न जूही.

जूही : वो बहोत बड़ा है शिव, पर अच्छा भी है. मेरे साथ तुम्हे मज़ा आ रहा है?

शिव : है जूही, बहोत (उसके छोटे से छेड़ में लुंड अंदर बहार हो रहा था जो एक अलग hi एहसास था, उसके दर्द की चिंता न होती तो पूरा अंदर तक थोड़ दिया होता, पर में आराम से उसे छोड़ रहा था, कभी कभी धक्का तेज लग जाता था)

जूही : (आंखे बंद किये हुए उस लैंड को महसूस कर रही थी, दर्द भी हो रहा था पर अब भोत कम् था, वो महसूस कर रही थी की लुंड और अंदर जा रहा है पर उसने रोका नहीं, उसकी छूट में सरसराहट हो रही थी, लुंड के गार्सां से एक अजीब सा एहसास हो रहा था, लगातार चुदाई से वो झड़ने के कगार पर पहुंच गयी thi)Shhhhhh शीइइइइइव, शहहहहह में छूटनेवाली हु शह्ह्ह्हह्ह जल्दी करो जान शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : दर्द तो नहीं हो रहा?

जूही : नहीं, तुम करो शह्ह्ह्हह्ह जल्दी जल्दी करो shhhhhhhhhhh. (शिव की स्पीड बढ़ गयी थी, जूही को दर्द भी महसूस हो रहा था पर उसे अब उसकी परवाह नहीं थी, थोड़ी hi देर में शिव के धक्के बेकाबू हो रहे थे)





अह्हह्ह्ह्ह मा अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhh (धक्के तेज थे और लुंड अंदर जा रहा था, उसे दर्द भी हो रहा tha)Ahhhhh मा अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह शीइइइइइव मर गईइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह आहिस्ता शहहहहह आईइइइइइइइ मुझे कुछ हो रहा है शिईयिव में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्ह मेरा निकलने वाला है shhhhhhhhhhh (इतनी कसावट के कारन मेरा भी निकलनेवाला था, में उसके अंदर hi झड़ना चाहता था, में तेज तेज धक्के लगता raha)Me गयी सीईव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह mumiiiiiiiiii ayiiiiiiiiiiii shiiiiiiiiiiiiiiiiiv (उसने अपनी छूट को इतना कास लिया की में धक्के भी नहीं लगा प् रहा था, मुझे भी दर्द होने लगा था पर आखिर कार मेने भी अपना लावा छोड़ दिया और जूही की छूट मेरे वीर्य से भर gayi)(Apane अंदर हो रही उस गरम बौछार को महसूस कर के जूही तृप्त हो गयी और शिव से लिपट gayi)(dono हांफ रहे थे, कोई कुछ बोल नहीं रहा था, दोनों ने एक दूसरे को कास के पकड़ लिया था, काफी देर तक वो दोनों ऐसे hi रहे, जूही को शिव को छोड़ने का जैसे मन hi नहीं था पर उसको पेशाब लग रही थी तो आखिर कर उसे छोड़ना पड़ा, जूही की पकड़ जैसे hi ढीली हुई शिव उसके ऊपर से हैट गया, जूही की छूट से वीर्य बह कर निचे चद्दर को भिगोने लगा, एक मीठा दर्द उसके पुरे बदन में भर गया, उसे बाथरूम जाना था तो उसने उठने का प्रयास किआ पर अपनी झांघो के बिच हो रहे उस दर्द की वजह से वो वापस लेट गयी)

शिव : ऐसे hi रहो, उठ क्यों रही हो?

जूही : (अभी थोड़ी देर पहले वो शिव से चुद रही थी पर अब उसे शर्म आ रही थी, उसने पास में पड़े तौलिये को अपने ऊपर किआ और अपने बदन को ढकते हुए boli)Bathroom जाना है.

शिव : में ले चलता हु. (कहते हुए वो उठा और जूही को अपनी गॉड में उठा लिया, बिस्तर पर एक लाल धब्बा बन गया था जिस पर अभी भी जूही का ध्यान नहीं था, शिव उसे लिए बाथरूम में चला गया, उसे कमोड के पास उतर कर उसने शावर चालू कर दिया और अपने आप को पानी से साफ़ करने लगा, जूही को शर्म आ रही थी की शिव बाथरूम में है तो वो कैसे पेशाब कर शक्ति है, पर शिव नाहा रहा था तो उसने भी पेशाब कर लिया, हलाकि शिव उसको देख नहीं रहा था पर फिर भी उसे शर्म आ रही थी. पेशाब करते वक़्त उसको अपनी छूट में फिर से जलन हुई तो उसने निचे देखा तो उसकी छूट के अस्स पास खून लगा हुआ था, वो थोड़ा दर गयी और अपनी छूट को ध्यान से देखने लगी.

शिव : कुन रुक गया है, अब नहीं निकलेगा. (अचानक शिव के बोलने से जूही एक दम से झेंप गयी, वो शिव को देखने लगी जो उसकी छूट को hi देख रहा था, उसने अपने पेअर आपस में सत्ता लिए ताकि शिव देख न सके) अब इतना क्या शर्मा रही हो, आओ में तुम्हे साफ़ कर देता हु.

जूही : (सरमते hue)Nahi, में कर लुंगी.

शिव : में कर रहा हु न (उसने जूही का हाथ पकड़ कर उठाया और गरम पानी के शावर के निचे खड़ा कर दिया, जूही को भी गरम पानी से अच्छा लगने लगा, शिव उसको नेहला रहा था तो उसे शर्म भी आ रही थी साथ में अच्छा भी लग रहा था, वो उसके पुरे शरीर पर साबुन लगाने लगा, उसकी झांघो को भी साबुन से साफ़ करने लगा, हलके दर्द के बावजूद उसके शरीर में फिर से मस्ती छाने लगी, उसके पेअर कैंप रहे थे तो वो शिव का सहारा लिए कड़ी थी, शिव उसके कूल्हों और स्तन को भी रगड़ कर साफ़ करने लगा जिस से उसके निप्पल कड़क हो गए, जब उसको शिव का लुंड छुआ तो उसकी सांसे थम गयी, उसने तिरछी नजर से देखा तो वो फिर से कड़क हो चूका था, उसे महसूस कर के उसको शर्म आने लगी. शिव ने भी ये देख लिए की जूही कहा देख रही है, पर वो कुछ नहीं बोलै. नेहला कर उसे तौलिये से पूछने लगा, स्तन को पोछने से जूही के निप्पल खड़े हो चुके थे, वह बार बार तौलिया फास रहा था, शिव ने उसके पुरे शरीर को पोछा और खुद को भी पोछा, जूही की नजर बार बार शिव के तने हुए लुंड की और जा रही थी, एक बार फिर उसकी योनि में पानी आने लगा था, पर शर्म के मरे वो कुछ बोल नहीं रही थी, शिव उसको वैसे hi नंगी उठाये हुए बिस्तर पर ले गया, उसे लेटते हुए उसके साइड में बेथ गया. जूही ने भी वो लाल धब्बा देख लिया, उसे देख कर उसे दर लगा.

शिव : जो होना था वो हो गया जूही, क्या अभी भी दर्द हो रहा है?

जूही : (नज़ारे बचते hue)Hmmm, थोड़ा थोड़ा.

शिव : दिखाओतो मुझे, (कहते हुए वो उसके पेअर फ़ैलाने लगा तो जूही ने अपने पेअर आपस में सत्ता लिए )

जूही : नहीं रहने दो. (जूही को बहोत शर्म आ रही थी)

शिव : देखने दो मुझे (कहते हुए मेने उसके पेअर फैलाये और छूट की हालत देखने लगा, छेद कोने से फैट गया था वह लाल लकीर बानी हुई थी, पर खून रुक चूका था, मेने देखा की छूट से रास निकल रहा है तो मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, में जूही की हालत समाज सकता था, जिस छूट को मेने अभी फाड् दिया था उस पर मुझे प्यार आने लगा और मेने अपना मुँह वह लगा दिया और उसे चूमने और चाटने लगा)

जूही : शहहहहह क्या कर रहे हो ???? (जूही ने मादकता से कहा, हलाकि उसे शर्म आ रही थी पर फिर भी शिव का उसकी छूट को चूसना उसे अच्छा लगने लगा, शिव ने कोई जवाब नहीं दिया और वो उसकी योनि को चाटने और चूसने लगा, जूही भी फिर से उत्तेजित होने लगी और सिस्किअ लेने lagi)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मात करो shhhhhhhhhh. (वो मन तो कर रही थी पर उसका भी मान कर रहा था, जैसे जैसे शिव उसकी योनि को चाट रहा था उसके अंदर उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जूही के शरीर में उत्तेजना बच चुकी थी, दर्द के बावजूद वो एक बार फिर तैयार हो चुकी थी, थोड़ी देर बाद शिव एक बार फिर उसके ऊपर आ गया, जूही उसकी आँखों में देख रही थी, उसका लुंड उसकी योनि पर दस्तक दे रहा था)

शिव : (मदहोश आवाज me)Sachme दर्द है?

जूही : (वो भी अब फिर से छोड़ना चाहती थी, दर्द तो था पर फिर भी उसने ना में शिर हिलाया)

शिव : एक बार और कर लू? (जूही भी पूरी तरह से माध होश हो चुकी थी, उसने भीशर्माते हुए हां में शिर हिलाया) (उसकी रजामंदी प् कर मेने अपने लुंड को छूट पर सेट किआ और दबाव बनाया तो लुंड अंदर उतरने लगा, जूही हलकी सी करहि, में रुक गया और उसकी आँखों में dekha)Dard हो रहा है? (वो कुछ नहीं बोली बस मेरी आँखों में देखती रही, में उसकी हालत समाज रहा था, लुंड दो इंच तक अंदर घुस चूका था, मेरा बहोत मन कर रहा था पर में अपने लुंड को बहार निकलने लगा तो जूही ने मेरी कमर पकड़ ली और मुझे रोक दिया, में उसकी आँखों में देखने लगा, वो शर्माने लगी, वो मुझे बहार निकलने से रोक रही थी, मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी, में फिर उसके ऊपर झुक गया और उसके होठो को चूसने लगा तो वो भी मेरे होठो को चूसने लगी, थोड़ी देर बाद में फिर से लुंड अंदर डालने लगा, कशी हुई गरम छूट में एक बार फिर मेरा लुंड अंदर था, जूही मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गधा रही थी, पर मुझे उस दर्द की परवाह नहीं थी, सांसे फिर तेज होचुकी थी, उसको किश करते हुए में अपने लुंड को अंदर बहार करने लगा, जूही भी अपना मुँह छुड़वा कर जोर जोर से सांसे लेने लगी, उसके कामुक चेहरे को देखते हुए में लुंड अंदर बहार करने लगा, जूही की एक बार फिर सिस्किअ सुरु हो गयी थी)





जूही : शहहहहह शीइइइइव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (उसकी कामुक सिस्किअ मेरा जोश बढ़ा रही थी, मेने छूट को देखा जहा लुंड अंदर बहार हो रहा tha)Juhi. (मेने उसे पुकारा)

जूही : हम्म्म्म (वो बोली पर मेरी और देख नहीं रही थी)

शिव : मेरी और देखो. (वो मेरी और देखने lagi)Achchha लग रहा है (मेरी बात से वो शर्मा गयी और दूसरी और देखने लगी, में भी उसकी शर्म समाज रहा था, में झुका और उसके स्तन को चूसने लगा और नीचे धक्के लगाने लगा, वो भी मेरे शिर को सहलाने लगी, में लगातार उसको छोड़ रहा था, वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी की थोड़ी hi देर में वो झाड़ गयी, उसको झड़ने दिया मेने, में रुक गया और लुंड बहार निकल लिया, वो आंखे बंद किये हुए पड़ी थी और जोर जोर से सांसे ले रही थी, मने उसकी कमर को पकड़ कर उठाया तो वो मुझे देखने लगी, मेने उसको पकड़ कर पलट दिया और उसे घोड़ी बना दिया, जूही ये सब देख रही थी, उसके लिए ये सब कुछ नया था, पहली बार वो किसी लड़के के साथ ये सब कर रही थी, पर वो शिव को सब करने दे रही थी, वो किस पोसिटिव में शिव के सामने है ये सोच कर hi उसे शर्म आ रही थी, शिव उसके कूल्हे फैला कर उसकी योनि को चूसने लगा, जूही ने अपना शिर तकिये में छुपा लिया, शिव उसके गांड के छेड़ को चाट रहा था, उसके कूल्हों को मसल रहा था और उसे चुम रहा था, शिव को अपने कूल्हों के साथ ऐसे प्यार करना उसे बहोत अच्छा लग रहा था, उसकी सिस्किअ लगातार निकल रही थी, शिव ने उसकी कमर पकड़ी और लुंड फिर से उसकी योनि में सामने लगा, वो थोड़ी ऊपर हो गयी ताकि लुंड अंदर अच्छे से जा शेक, लुंड एक बार फिर उसकी योनि के अंदर था, उसने मुद कर शिव को देखा, वो उसकी और देख कर मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, क्या क्या करवा रही थी वो, पर उसे भी मजा आ रहा था, एक बार फिर शिव उसकी योनि को अपने बड़े लुंड से छोड़ रहा था, वो घोड़ी बानी हुई अपनी छूट छुड़वा रही थी, इस तरह से लुंड काफी अंदर तक जा रहा था, हर धक्के के साथ लुंड उसकी छूट को और गहराई तक खोल रहा था, दर्द के बावजूद उसको बहोत अच्छा लग रहा था.





जूही : शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मज़ा आ रहा है?

जूही : हआ शह्ह्ह्हह्ह बहोत मज़ा आ रहा है सीईव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करते रहो shhhhhhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह करते रहो शह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मुझे यकीं नहीं हो रहा जूही, में तुम्हारे साथ ये कर रहा हु.

जूही : (उसने पलट कर शिव को प्यार से dekha)Kyu यकीं नहीं हो रहा, क्या में लड़की नहीं हु?

शिव : तुम बहोत प्यारी हो जूही, सच कहु तो तुम मेरे बराबर की हो, तुम्हारा ये लम्बा शरीर जैसे मेरे लिए hi बना है.

जूही : तुम्हारे लिए hi है शिव, आज मुझे जी भर के प्यार करो, शह्ह्ह्हह्ह जो चाहे कर लो मेरे साथ शहहहहह (में उसकी कमर को पकड़ कर उसकी छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था, उसके गोल कूल्हे थिरक रहे थे, उन्हें मसलते हुए में उसे छोड़ रहा था, वो भी पुरे रंग में आ चुकी थी, छोड़ ते छोड़ते वो आगे झुकने लगी तो मेने उसे उल्टा लेता दिया और पीछे से उसकी छूट में लुंड दाल दिया, जूही लेते लेते अपनी योनि में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस कर रही थी) शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मेरे शिईयिव शहहहहह कितना मज़ा आता है इस खेल में शहहहहह तुमने पहले क्यों नहीं किआ शह्ह्ह्हह्ह कितना तड़पाया मुझे शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह ऐसे hi शहहहहह शीइइइइव.





शिव : तुम पूरी नंगी मेरे निचे लेती हो जूही (वो शर्माने लगी) मेरा ऐसा करना तुम्हे अच्छा लग रहा है?

जूही : है शिव, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, आज मुझे लड़की होने का सुख मिल रहा है, शह्ह्ह्हह्ह आज मेने तुम्हे प् लिया शिव शह्ह्ह्हह्ह आज तुम मेरे अंदर समां गए हो शह्ह्हह्ह्ह्ह (में जोर जोर से धक्के मार रहा tha)Shhhh शिईयिव शहहहहह आईईईई शहहहहह आहिस्ता मेरी जान शह्ह्ह्ह आज मुझे मरने का इरादा है क्या शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मरे तुम्हारे दुसमन, आज तो तुम्हे जी भर के प्यार करना है, तुम्हारी छूट को अच्छे से खोलना है.

जूही : (शरमाते hue)Aisa मात बोलो शिव श कितना गन्दा लगता है.

शिव : इसमें गन्दा क्या, में तुम्हे छोड़ रहा हु और मेरा लुंड तुम्हारी छूट में है, है की नहीं.

जूही : पर बोलना जरुरी है क्या शहहहहह आईईईई आरामसे जाएं शह्ह्ह्ह.

शिव : तुम्हे देख कर रहा नहीं जाता जूही, थोड़ा सहन कर लो.





जूही : वो बहोत बड़ा है शिव शहहहहह बहोत बड़ा.

शिव : क्या?

जूही : मुझे नहीं पता (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : उसे लुंड कहते hai,kya कहते है?

जूही : शह्ह्ह्ह आराम से शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : बोलो न जूही.

जूही : फिर कभी बोलूंगी शिव शह्ह्ह्हह्ह अभी मुझे बहोत शर्म आ रही है shhhhhhhhhhh, में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (शिव की बातो से उसका पानी निकलने को हो गया था, शिव ने भी ज्यादा फाॅर्स नहीं किआ और लगातार उसे छोड़ता रहा, आखिर कर वो फिर झाड़ गयी, शिव ने लुंड बहार निकल लिया, और जूही को सीधा कर दिया, वो 69 पोसिटिव में आ गया और जूही की छूट को चाटने लगा, जूही के चेहरे पर लुंड टकरा रहा था, उसने भी मुँह खोल दिया और लुंड को अपने मुँह में भर लिया, लुंड पर उसका hi पानी लगा हुआ था, एक और शिव उसकी छूट को चाट रहा था, और दुअरी और उसके मुँह में लुंड वो अंदर बहार कर रही थी, उसे बहोत मज़ा आ रहा था, उसको अपना मुँह बहोत खोलना पद रहा था, जिस से वो समाज सकती थी की उसकी छूट की क्या हालत हुई होगी, पर उसे परवाह नहीं थी, वो पुरे मान से लुंड चूस रही थी, शिव भी उसकी छूट को अच्छे से चाट रहा था, थोड़ी देर बाद फिर से वो उसके पैरो के बिच आ गया, उसके पेअर ऊपर करते हुए उसने लुंड अंदर दाल दिया, उसकी अहह निकल गयी, उसके कूल्हे बिस्तर से ऊपर हो गए थे और शिव का लुंड उसकी योनि में अंदर बहार हो रहा था, वो अपनी योनि में अंदर बहार होते उस लुंड को साफ़ साफ देख प् रही थी, थोड़ी देर पहले तक जहा एक ऊँगली नहीं जा रही थी वह अभी इतना बड़ा लुंड अंदर बहार हो रहा था, वो बुरी तरह से कैंप रही थी, हर धक्के के साथ वो हिल रही थी, शिव उसे अच्छे से निचोड़ रहा था, वो कभी शिव को तो कभी अपनी छूट में जाते लुंड को देख रही थी, पूरा लुंड उसके छूट के रास से भीग गया था,





शिव का लुंड अभी भी 2 इंच जितना बहार था, पर अभी उसकी हिम्मत नहीं थी उसको और अंदर लेने की, शिव भी उसकी हालत समाज रहा था ये उसके लिए अच्छी बात थी. उसे शिव पर बहोत प्यार आ रहा था, आज वो उसके शरीर का भी मालिक बन गया था, उसने अपना कौमार्य उसको समर्पित कर दिया था, वो उसे प्यार से देख रही थी, थोड़ी देर बाद शिव ने उसके पेअर छोड़ दिए, जूही ने अपने पेअर उसकी कमर पर लपेट लिए और उसे खिंच कर उसको किश करने लगी, लुंड तेजी से अंदर बहार हो रहा था, वो शिव को पूरी तरह से अपनी और खिंच रही thi)Ummm उम्म्म्म स्लुर्र्प उम्म्म्म शह्ह्ह्हह्ह उम्मम्मम्म.





एक बार फिर वो झड़ने को तैयार थी, और शिव की तेजी से लग रहा था की वो भी झड़ने को है, लगातार धक्को के बाद वो झाड़ गयी और शिव भी उसकी छूट की गेहराइओ में अपना लावा छोड़ने लगा, वो पूरी तरह से थक के चूर हो चुकी थी, थोड़ी देर बाद जब शिव उसके ऊपर से हटा तो वो वैसे hi पारी फैला कर hi सो गयी. थोड़ी देर बाद शिव उठा और बाथरूम गया, वापस आया तो जूही नंगी hi सो रही थी, उसकी छूट से वीर्य बह रहा था, उसने तौलिये से वो साफ़ किआ तो जूही थोड़ा कौमासायी, जूही को थपकी देते हुए उसने कहा,

शिव : जुहीईई

जूही : (नींद me)Ammmmmm.

शिव : जुहीई, पेनकिलर कहा है?

जूही : ड्रावर मेई. (नींद में hi) (मेने पेनकिलर ढूंढी तो पास में hi मुझे i-pill भी दिख गयी, जूही साडी तयारी करके बैठी थी, उसने मुस्कुरा कर उसे देखा और पानी ले आया, जूही को पकड़ कर uthaya)Sone दो नाआ.

शिव : पहले ये गोली खा लो, फिर सो जाना (उसने बिना आंखे खोले गोलीअ खा ली, मेने उसे वापस लेता दिया, गिलास रख कर में भी उसको बहो में भर के लेट गया, वो मुझसे लिपट गयी और अपना पेअर मेरे ऊपर चढ़ा दिया, मेने मुस्कुरा कर उसे देखा पर वो नींद में थी, में भी थोड़ी देर में सो गया)

सुबह मेरी आंख जल्दी खुल गयी, जूही अभी भी नंगी सोई हुई थी, में बाथरूम गया और ब्रश किआ, तौलिए लपेट कर वापस आया और जूही को जगाया.

शिव : जुहीईई, उत्थूऊओ.

जूही : (नींद में hi)aammmmm सोने दो न.

शिव : मुझे जाना होगा. (ये सुन कर जूही ने फ़ौरन आंख खोल दी और उठ बैठी) मुझे जाना होगा, तुम कैसी हो? दर्द है?

जूही : (वो शर्मा gayi)Nahiiiii. (शिव को देखते hue)Jana जरुरी है क्या?

शिव : पागल, होश में आ, घर नहीं जाना पड़ेगा क्या, और स्कूल भी जाना है. तुजे आना है घर?

जूही : नहीं, में शाम को आउंगी, अभी सोना है मुझे.

शिव : दर्द हो तो पेनकिलर खा लेना, और कुछ भी हो मुझे मश्ग कर देना में आ जाऊंगा.

जूही : (मुस्कुराते hue)School में होगा तो भी?

शिव : है, अगर कोई दिक्कत हो तो मश्ग कर देना.

जूही : (प्यार से देखते hue)Itnai फ़िक्र है मेरी?

शिव : तुजे क्या लगता है. चल अब में निकलता हु (में कपडे पहन ने लगा)

जूही : (बिस्तर से उठते hue)Me दूध बनती हु, पि कर जा. (वो किचन में चली गयी, चलने में उसे तकलीफ हो रही थी पर उसे ये सब अच्छा लग रहा था, दूध बनाते हुए भी उसे कल वाली बाटे याद आ रही थी, वो बार बार मुस्कुरा रही थी, शिव भी किचन में hi आ गया, उसे देख कर वो उस से लिपट गयी)

शिव : क्या हुआ?

जूही : ी लव यू शिव.

शिव : (उसको बहो में बाहर ke)I लव यू तू. तुम ठीक हो न, रह लोगी न अकेले, मुझे चिंता रहेगी यार तेरी, चल न घर रह लेना.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me ठीक हु, फ़िक्र मात कर, इतनी भी नाजुक नहीं हु में समजे.

हम दोनों ने दूध पिया, थोड़ी देर किश की फिर में वह से घर आ गया, लतादिदी और सरितादिदी किचन में थी, रंजन, विणा और गायत्रीदिदी बच्चो को संभल रही थी.
 
दो दिन छुट्टी थी तो लेट हो गया, सॉरी फ्रेंड्स, एन्जॉय थे अपडेट ऑफ़ जूही का मिलान.
 
अपडेट 170

जब में अनाथालय पंहुचा तब सब अपने अपने काम में लगे हुए थे, जैसे hi में अंदर दाखिल हुआ सबसे पहले लतादिदी ने hi मुझे देखा, ‘शीइइइइइइव’ उन्होंने जोर से कहा और वो अपना काम छोड़ कर मेरी और भागी, उन्हें ऐसा भागता देख सरितादिदी की भी नजर गयी, उन्होंने भी मुझे देखा तो वो भी दौड़ी, मेने अपना बैग वही रख दिया और लतादिदी आ कर मुझसे लिपट गयी, तो सरितादिदी रुक गयी, पर मेने उनको भी अपनी बहे खोल कर आनेका इस्सर किआ तो वो भी मुझसे लिपट गयी, दुसरो में भी आवाज सुनी तो वो भी वह आ गए.

सरिता : (मुझसे अलग होते hue)Tu तो कल आनेवाला था न?

शिव : में कल hi आ गया था, पर लेट हो गया था तो जूही के वह hi रुक गया था. (मेने जूथ का सहारा लिया)

लता : आते hi तूने पूछताछ सुरु कर दी? (हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : वो बस पूछ रही है, आप क्यों नाराज हो रही हो? (शिव को अपना पक्ष लेते देख सरिता भी खुस हो गयी.)

सरिता : क्या हुआ कॉम्पिटिओं का? (उन्होंने उत्सुकता से पूछा, मेने मुस्कुराते हुए अपना बैग खोला और उसमे से मैडल निकल कर उनको दिखाया, सब के चेहरे पर खुसी साफ़ चालक रही thi)Me जानती थी (कहते हुए उन्होंने वो मैडल मेरे हाथ से लिया और देखने लगी)

गायत्रीदिदी : कोंग्रटुलतिओन्स शिव.

शिव : ऐसे hi कहोगी (मेने बहे फैला कर कहा तो वो मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी और फिर कोंग्रटुलतिओं कहा, फिर रंजन भी मेरे गले लगी और फिर विणा भी, लतादिदी ऊपर हाथ जोड़ कर जैसे भगवन का सुक्रिया कर रही थी, मेरा मोबाइल बार बार मश्ग की टोन बजा रहा था)

सरिता : सुबह सुबह ये क्यों बार बार चिल्ला रहा है?

शिव : पता नहीं (कहते हुए मेने मोबाइल निकला तो कुछ मश्ग आये हुए थे, मेने देखा तो सबसे पहले भार्गवी मैडम का मश्ग था, मेने ओपन किआ)

भार्गवी : कोंग्रटुलतिओं शिव, अभी अख़बार पढ़ रही हु, तुम्हारी खबर पढ़ी, सच में बहोत खुसी हुई, मिलकर भी बधाई देती हु.

दूसरा मश्ग बिना मैडम का था, पवन सर का भी मश्ग था, नाज़िआदिदी का भी मश्ग आया था, दुसरो का भी मश्ग आ रहे थे.

लता : किसके मश्ग आ रहे है शिव?

शिव : शायद अख़बार में मेरे बारे में कुछ छपा है, वही पढ़ कर सबके मश्ग आ रहे है. (तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगी, मेने देखा की ये हमारे टीचर वरुणसीर का कॉल था, मेने कॉल uthaya)Hello सर.

वरुणसीर : Hello शिव, कोंग्रटुलतिओं भाई, तुमने तो स्कूल का नाम रोशन कर दिया.

शिव : थैंक यू सर.

वरुणसीर : आज स्कूल आ रहे हो न?

शिव : है सर.

वरुणसीर : वो प्रिंसिपल सर का फ़ोन आया था, उन्होंने कन्फर्म करने के लिए मुझे बोलै था की तुमसे पूछ लू, आ जाना, सर तुम्हे सबके सामने कोंग्रटुलते करना चाहते है.

शिव : जी सर. (उन्होंने फ़ोन रख दिया, मेने सबको बताया तो सब भी बहोत खुस हो गए, में जल्दी से तैयार हुआ और स्कूल के लिए निकल गया, रस्ते में देखा तो नाज़िआदिदी अकेले कड़ी थी) Hi.

नाज़िआदिदी : (खुस होते hue)Congratulation शिव, बहोत खुसी हुई जान कर, वैसे यकीं तो पूरा था की तुम ये कर लोगे.

शिव : आपकी दुवाओ का असर है शायद.

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Wo तो हमेशा रहेगी, दोपहर को घर आना, अभी जाओ, वो महारानी अकेली साइकिल ले कर गयी है.

शिव : साइकिल ले कर क्यों, वैस्वी नहीं आयी.

नाज़िआ : पता नहीं, वो कुछ बताती नहीं, कुछ हुआ है क्या तुम दोनों में?

शिव : नहीं, हमारे बिछ कुछ भी नहीं हुआ.

नाज़िआ : पता नहीं इस लड़की के मान में क्या चल रहा है.

शिव : आप फ़िक्र मात करो में देख लूंगा, अभी में चलता हु. (कहते हुए में स्कूल की और निकल गया, जब में स्कूल से थोड़ी दुरी पर था तो मेने संयम को स्कूल में दाखिल होते हुए देखा, में अंदर गया तो हर्ष, महेश और वैस्वी खड़े थे, संयम चलते हुए जा रही थी)

हर्ष एंड महेश : कोंग्रटुलतिओं शिव.

शिव : थैंक यू, तुम्हे कैसे पता चला?

हर्ष : वो भैया ने बताया था.

वैस्वी : कोंग्रटुलतिओं शिव (उसके चेहरे से लग रहा था की अगर अभी अकेले होते तो वो मेरे गले लग जाती, पर अभी वो अपने आपको संभाले हुए थी)

शिव : थैंक यू, (फिर संयम की और इस्सर कर ke)Aaj तुम दोनों साथ नहीं आये?

वैस्वी : वो ठीक से बात नहीं करती शिव, कल मुज पर गुस्सा हो गयी थी और कहने लगी की मुझे लेने मात आना, में क्या करती.

शिव : वो तो बेवकूफी कर रही है, तुम तो समझदार हो, तुम जानती हो की उसका यु अकेले आना ठीक नहीं है.

वैस्वी : में जानती हु पर वो मान hi नहीं रही.

शिव : ठीक है में देखता हु, चलो अभी, वरुणसीर का फ़ोन आया था, मुझे उनसे मिलना भी है.

वरुणसीर को ढूंढते हुए में स्टाफ रूम में गया तो वह बिना मैडम बैठी हुई थी, मेने एक टीचर को वरुणसीर के बारे में पूछ तो बिना मैडम मेरी आवाज सुन कर मुस्कुराते हुए मेरी और आयी.

बिना : कोंग्रटुलतिओं शिव.

शिव : (हम थोड़े दूर थे तो मेने धीरे से kaha)Thank यू पर ऐसा सूखा सूखा. (बिना मैडम मेरा मतलब समाज कर शर्मा गयी, पर कोई देख न ले इस लिए उन्होंने अपने आपको संभाला, वरुणसीर मेरी और आ रहे थे तो हम दोनों संभल गए)

वरुणसीर : तुम आ गए, चलो प्रिंसिपल सर तुम्हे बुला रहे थे.

शिव : जी सर.

बिना उन दोनों को जाते हुए देख रही थी, वो शिव की बात याद कर रही थी, उसका भी दिल शिव से लिपट जाने को करता था पर जो बात उसके दिल में घर कर गयी थी उसकी वजह से वो शिव को उस तरह से खुल कर नहीं मिल पति थी, अपनी सोच में डूबी वो अपनी जगह पर बेथ गयी. में प्रिंसिपल की ऑफिस में गया तो उन्होंने भी मुझे कोंग्रटुलतिओं कहा, और सब पूछ ने लगे, फिर बहार ग्राउंड में सब इकठ्ठा हो गए थे तो वो मुझे लिए वह आये और मुझे अपने साथ खड़ा करके उन्होंने सरे स्कूल को मेरी कामियाबी बताई, सब ने ताली बजा कर मेरा अभिवादन किआ, (संयम भी खुस थी पर वो दिखा नहीं रही थी, वो बस शिव को देखे जा रही थी)

प्रिंसिपल : न सिर्फ शिव ने ये कॉम्पिटिओं जीता है बल्कि उसने वह एक भ्रस्ट कोच का पर्दा फास करके कई लड़कीओ का जीवन भी बचाया है, शिव की कामियाबी और उसकी हिम्मत, दोनों ने hi हमारी स्कूल का शिर ऊँचा कर दिया है, आज अखबारों में शिव के साथ साथ हमारे स्कूल का नाम भी हर किसी की जबान पर है, शिव जैसा लड़का जिसके पास कोई बैकग्राउंड नहीं है, उसे किसी का सहारा नहीं है फिर भी वो इस मुकाम पर पहुंच गया है, आप सबको उस से प्रेरणा लेनी चाहिए, आपके माँ बाप आप सबके लिए कितना करते है, आप को उनका सहारा है, तो आप सबको भी ऐसे आगे आने का प्रयास करना चाहिए, इतनी मुस्किलो के बावजूद शिव न सिर्फ स्पोर्ट्स में अवल्ल है बल्कि पढ़ाई में भी होशियार है. में फिर एक बार मेरी और से, स्कूल के सरे स्टाफ की और से, सरे स्टूडेंट की और से शिव को बधाई देता हु. (सब ने तालिया बजा कर मेरा अभिवादन किआ) और साथ में ये आशीर्वाद भी देता हु की वो ऐसे hi आगे बढ़ता रहे, और पुरे देश का नाम रोसन करे. (फिर से एक बार पूरा मैदान तालिओं की गड गडाहट से गूंज उठा)

रेसस्स के दौरान भी कई सरे लड़के लड़कीअ मुझे बधाई दे रहे थे, संयम एक बार भी मुझे मिलने नहीं आयी, जब स्कूल की छुट्टी हुई तो संयम वह से अपनी साइकिल ले कर निकली तो मेने भी सबको bye कह कर उसके पीछे दौड़ लगा दी, रस्ते में hi मेने उसे पकड़ लिया और उसको रोका, वो नाराजगी से मुझे देख रही थी.

संयम : क्या है?

शिव : क्या हुआ है तुजे?

संयम : तुजे उस से क्या?

शिव : प्रॉब्लम क्या है तेरी?

संयम : (गुस्से से मुझे घूरते hue)Tuje उस से क्या?

शिव : अब ये ज्यादा हो रहा है, चल में तुजे घर छोड़ देता हु.

संयम : में चली जाउंगी. (आते जाते लोग हमें देख रहे थे)

शिव : तमाशा मात कर, सबको दिखने की जरुरत है क्या, चुप चाप बेथ पीछे. (मेने उसको हल्का सा खिंचा तो थोड़ी न नुकुर के बाद वो पीछे बेथ गयी, मेने साइकिल दौड़ा दी) तुम्हे पता है की तुम्हारा अकेले आना ठीक नहीं फिर वैस्वी को क्यों मन किआ?

संयम : मुझे कोई दर नहीं, देखलूँगी में सब, तुम्हे फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है.

शिव : प्रॉब्लम क्या है वो तो बताओ तो कुछ समाज आये.

संयम : कोई जरुरत नहीं है मुझे बताने की, तुम सब लड़के एक जैसे hi होते हो, वो जैसे है तुम भी वैसे hi हो न.

शिव : कहना क्या चाहती हो?

संयम : मेने कहा न की मुझे कुछ नहीं कहना.

शिव : तुम्हारा कुछ समाज में नहीं आ रहा है, पर तुम अकेली नहीं आओगी, में आज hi वैस्वी को बोल दूंगा, वो फिर से तुम्हे लेने और छोड़ने आ जाएगी.

संयम : तुम्हे मेरी फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है, जो होगा में देख लुंगी, ज्यादा से ज्यादा वो क्या करेगा, जो तुम दुसरो के साथ करते हो, वो मेरे साथ करेगा. तुम सब एक जैसे hi तो हो.

शिव : मेने क्या किआ तुम्हारे साथ?

संयम : दुसरो के साथ तो करते हो. (उसने हलके गुस्से से कहा)

शिव : क्या करता हु?

संयम : तुम्हे पता, क्या करते हो.

शिव : तुम सीधी बात का सीधा उत्तर नहीं दे सकती.

संयम : नहीं देना मुझे सीधा उत्तर, क्या कर लोगे तुम? (उसका मोड़ आ गया था तो मेने साइकिल रोकी, नाज़िआ दीदी वही कड़ी थी, मुझे देख कर उनके चेहरे पर सकूँ आया की में संयम को ले आया था, में साइकिल से उतरा, संयम ने साइकिल ले और घर की और चली गयी, में और नाज़िआ दीदी उसे देखते रहे)

नाज़िआ : क्या हुआ, कुछ बताया उसने?

शिव : आप फ़िक्र मात करो, में देखलूँगा.

नाज़िआ : चलो न तुम भी घर, मेने खीर बनायीं है तुम्हारे लिए. (में उन्हें देखने laga)Please, थोड़ी देर के लिए.

शिव : ठीक है चलिए. (में घर पंहुचा तो संयम बाथरूम से निकल रही थी, मुझे देख कर उसने मुँह टेढ़ा किआ, जो सिर्फ मेने देखा)

संयम : (किचन में देखते hue)Ammi, आपसे कोई मिलने आया है. (ज़ोया को उसका टोन थोड़ा अजीब लगा पर वो बहार को आयी, जब उसने शिव को देखा तो थोड़ी असहज हो गयी, उसने संयम को देखा संयम बिना उनकी और देखे अपना बैग ले कर ऊपर चली गयी)

नाज़िआ : तुम बैठो, में अभी खीर ले कर आयी. (रूम में, में और आंटी hi थे, उन्होंने एक बार मुझे देखा फिर दूसरी और देखने लगी, में उनसे बात करना चाहता था पर वो मेरी और देख नहीं रही थी तो में भी कुछ नहीं बोलै, थोड़ी hi देर में नाज़िआदिदी एक करोति में खीर और पानी ले कर आ gayi)betho न अम्मी, शिव स्टेट लेवल पर सेलेक्ट हो गया है, उसके लिए hi मेने खीर बनायीं थी.

ज़ोया : बहोत बधाई हो बीता (बीटा बोलते हुए उनकी जबान थोड़ी लड़खड़ाई)

शिव : थैंक यू आंटी.

ज़ोया : तुम दोनों बैठो मुझे काम है (कहते हुए वो किचन में चली गयी, में खीर खाने लगा)

नाज़िआ : कैसी बानी है?

शिव : मस्त है, बिलकुल आप जैसी. (मेने धीरे से कहा, मेरी बात सुन कर वो शर्मा गयी, पर उनकी हसी और बढ़ गयी, में खीर खा रहा था और वो मुझे देख रही थी)

नाज़िआ : (अस्स पास देख कर धीमी आवाज me)Kab आ रहे हो फिर मुझे मिलने?

शिव : (मेने भी अस्स पास dekha)jald hi मिलूंगा. (संयम भी कपडे बदल कर निचे आयी)

संयम : खीयीर????, किस खुसी में बनायीं है, आप.

नाज़िआ : शिव के लिए, उसकी कामियाबी के लिए. तू खायेगी?

संयम : जिसके लिए बनायीं है उसे hi खिलाओ आप.

नाज़िआ : तू मार खयेगी अब. (नाज़िआ ने गुस्से से कहा तो संयम चुप हो गयी और टेबल पर बेथ कर खाना खाने लगी, मेने खीर ख़तम की पानी पिया)

शिव : में चलता हु.

नाज़िआ : ठीक है, (अपनी अम्मी को आवाज देते hue)Amiiiii, शिव जा रहा है. (ज़ोया बहार आना नहीं चाहती थी पर अपनी बेटी की आवाज पर वो बहार आयी, सबसे पहले उसकी नजर संयम पर गयी, संयम ने उसे एक नजर देखा फिर अपना खाना खाने लगी)

शिव : Bye आंटी, bye संयम.

संयम : (बिना किसी भाव ke)Bye.

में वह से निकल गया, वह से में जूही के घर चला गया, सोचा उसका हल चल ले लू, मेने बेल बजायी तो थोड़ी देर में उसने दरवाजा खोला, मुझे देख कर वो शर्मा गयी, में अंदर दाखिल हुआ. वो मुझे देख रही थी और हल्का मुस्कुरा रही थी, उसे देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मेने उसे अपनी बहो में बाहर लिया और उसको किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद मेने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा.

शिव : कैसी हो?

जूही : (वो मेरे पूछ ने का मतलब समाज गयी, उसने शरमाते हुए kaha)Thik हु.

शिव : दर्द तो नहीं है?

जूही : (बुरी तरह से शर्मा gayi)Shiiiiiiv.

शिव: क्या हुआ, में तो बस पूछ की दर्द तो नहीं है न?

जूही : नहीं है, छोडो उसे, क्या हुआ, मुझे कई लोगो के फ़ोन आये, तुम्हारे और मेरे बारे में पेपर में छपा है.

शिव : है, (फिर मेने उसे सब बताया जो स्कूल में हुआ था)

जूही : मुझे भी बहोत लोगो के फ़ोन आये.

शिव : खाना खाया?

जूही : नहीं, अभी बनाने की सोच रही थी.

शिव : मेरे साथ चलो, साथ में खाएंगे.

जूही : (खुस हो kar)Do मिनट रुको, में कपडे बदल लेती हु.

वो तैयार होने चली गयी, उसके बाद हम दोनों वह से मेरे घर के लिए निकल गए, उसने एक फ्रॉक जैसा कुछ पहना था, वो मेरे पीछे अपने पेअर साइड में रख कर बेथ गयी, शायद वो दर्द की वजह से अपने पेअर फैलाना नहीं चाहती थी, जब भी में उसको देखता तो वो शर्मा जाती थी, ये एक नया रूप था उसका, हम दोनों मेरे घर पहुंच गए, जूही को देख कर सब खुस हो गए, सबने उसे भी बधाई दी, अभी हम बात कर hi रहे थे की रंजन सुर विणा स्कूल से आ गयी, साथ में दिव्या और कुसुम थे, उन्हें देख कर में थोड़ा सरप्राइज हुआ, मुझे देख कर वो मेरी और hi आयी.

दिव्या : कोंग्रटुलतिओं. (उसने मुस्कुराते हुए हाथ आगे बढ़ाया)

शिव : थैंक यू Divya,(Uske नाजुक हाथो को पकड़ कर) व्हाट ा सरप्राइज!

दिव्या : तुम्हारे बारे में सुना तो आ गयी, सोचा बधाई दे दू.

शिव : नहीं नहीं, बहोत अच्छा किआ, मुझे सच में अच्छा लगा की तुम आयी (मेने उस से कहा, मेरी नजर कुसुम पर गयी पर सो शर्मा और संकुचा रही थी तो मेने hi उस से kaha)Hi कुसुम, कैसी हो?

कुशुम: कोंग्रटुलतिओं. (उसने शरमाते हुए हाथ आगे बढ़ाया)

शिव : (उसके कोमल हाथ को पकड़ा तो वो एकदम ठन्डे the)Thank यू. वैसे अच्छे टाइम पर आये हो, हम खाने hi बेथ रहे थे, आओ तुम भी हमारे साथ खा लो अगर खाना चाहो तो.

दिव्या : ऐसा क्यों कह रहे हो, मुझे तो बहोत भूख लगी है और अभी घर भी देरसे जायेंगे, में तो खाउंगी.

फिर हमने साथ मिल कर खाना खाया, खाने के बाद मेने हाथ धोये और अपने रूम में गया, मेने मोबाइल चेक किआ तो और कई लोगो के मश्ग आये हुए थे, एक मश्ग जहान्वी का भी था, उसने बस कोंग्रटुलतिओं लिखा था, एक मश्ग उस अननोन नंबर से था जिसमे लिखा था ‘बहोत बहोत बधाई’. सच में अभी भी मेरी समाज में नहीं आ रहा था तो मेने फिर से कॉल किआ पर तुरंत hi सामने से कॉल काट दी गयी, और मश्ग आया

अननोन : कॉल क्यों कर रहे हो?

शिव : मुझे बात करनी है.

अननोन : क्या बात करनी है, जो कहना है वो मश्ग करो.

शिव : डायरेक्ट बात करनी है.

अननोन : क्या फायदा, उस दिन बात की थी न, आवाज तक नहीं पहचानी मेरी.

शिव : उसके लिए सॉरी, पर सच में में नहीं पहचान पाया, में इतना भी भुलक्कड़ नहीं हु की मेरे जान ने वाले की आवाज तक न पहचानू, इसीलिए जान न चाहता हु, आप कोण हो?

अननोन : जब आवाज hi नहीं पहचानते तो जान के क्या फायदा.

शिव : एक बार और बात कर लो, शायद पहचान लू.

अननोन : देखती हु, मौका मिला तो बात करुँगी, पर तुम कॉल मात करना.

शिव : ठीक है, जैसी आपकी मर्जी. (फिर मेने कोई मश्ग नहीं किआ, थोड़ी देर बाद फिर मश्ग आया)

अननोन : नाराज हो गए?

शिव : में क्यों नाराज होने लगा जब जनता hi नहीं.

अननोन : तुम मुझे जानते हो और मेरे घर भी आये हो तुम, hi hi hi.

शिव : लगता है आपको मुझे तंग कर के बड़ा मज़ा आ रहा है, क्यों?

अननोन : सच कहु तो है, मेने कभी ऐसे किसी से बात नहीं की थी, और सोचा नहीं था की तुमसे ऐसे बात होगी, मेने तो बस सिंपल सा मश्ग किआ था, पर बात इस मोड़ पर पहुंच जाएगी, पता नहीं था. वैसे ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है, अपनी पढ़ाई और खेल पर ध्यान दो, किस्मत में हुआ तो कभी मिलेंगे. शायद उस वक़्त तुम पहचान लो, देखते है.

शिव : ठीक है, bye.

अननोन : Hi hi hi, bye.

शिव : मेरी समाज में नहीं आ रहा कोण है ये, प्रोफाइल में भी कोई फोटो नहीं है. (अभी में सोच hi रहा था की मुझे भार्गवी मदम की कॉल आयी, मेने तुरंत कॉल उठा li)Hello.

भार्गवी : (चहकते hue)Congratulation.

शिव : थैंक यू.

भार्गवी : कहा हो?

शिव : घर पर हु, क्यों?

भार्गवी : आ शक्ति हो अभी?

शिव : कहा?

भार्गवी : पुलिस स्टेशन.

शिव : वह क्यों?

भार्गवी : आओ फिर बताती हु.

शिव : ठीक है में आता हु. (में बहार गया तो जूही, दिव्या, कुसुम और रंजन बैठी थी और सब अपने अपने काम में लगे थे, रंजन को देख kar)Tu क्यों बैठी है, सब काम कर रहे है, तुजे कोई काम नहीं है.

रंजन : (अपना मुँह चढ़ाते hue)Didi ने कहा बैठने को इस लिए बैठी हु.

शिव : क्यों, दीदी ने बैठने को क्यों कहा?

रंजन : तुजे क्या, तू अपना काम कर न, जब देखो तब हुकुम चलता रहता है.

लता : (उन्दोनो की बहस सुन kar)Kya है, मेने कहा है बैठने को, जूही अकेली बैठेगी क्या, और उसकी सहेलिया भी आयी है?

शिव : (मेने जूही की और देखा, वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका li)Thik है ठीक है, तुजे तो बहाना चाहिए, तुम रूम में आराम करो जूही, वर्ण तुम्हारे बहाने ये बैठी रहेगी.

रंजन : तुम ज्यादा तंग मात अदाओ, हम आपस में तय कर लेंगे की हमे क्या करना है, तुम अपना काम करो समजे.

शिव : तुजे तो में बता ता हु, अभी.

रंजन : क्या बताएगा बोल (वो ऐटिटूड दिखने लगी)

लता : क्या है तुम दोनों का, तू अपना काम कर न, जा तू hi जूही को रूम में ले जा.

जूही : (रूम में शिव के साथ जाने की बात से वो एक दम से झेप gayi)Nahi, में ठीक हु (रंजन को देख कर उसने kaha)Tum जाओ.

रंजन : तुम क्यों फ़िक्र करती हो, इसकी तो आदत है, ऐसे बोल रहा है जैसे में हर टाइम बैठी रहती हु.

लता : (चिढ़ते हुए शिव se)Kya है तुजे, तू अपना काम कर न, उसकी अभी हालत ठीक नहीं है तो बैठी है.

शिव : क्यों क्या हुआ है उसे?

लता : (दरअसल वो पीरियड में थी और थोड़ी थकन भी महसूस हो रही थी use)Tuje हर बात बतानी जरुरी है क्या?

शिव : ठीक है, वैसे भी में जा रहा हु, भार्गवी मैडम का कॉल आया था उन्होंने मुझे पुलिस स्टेशन बुलाया है.

लता : पुलिस स्टेशन?? क्यों?

शिव : (सब मुझे देखने लगे, रंजन के चेहरे पर भी चिंता चालक आयी, सब अपना काम छोड़ कर मेरी और देखने lage)Aise hi बुलाया है, तुम सब तो ऐसे टेंशन में आ जाती हो की पूछो hi मात. टेंशन मूत लो, में जा रहा हु, और वो भार्गवी मैडम है, कोई पुलिसवाली नहीं, समजे, जूही तुम यही रुकना, में स्कूटर ले जाता हु, और हो सकेगा तो में साइट पर भी हो आऊंगा, आज स्टेडियम तो जाना नहीं है, सही कहा न मेने? (उसको दर्द था तो स्टेडियम तो जाना नहीं था, उसने भी नज़ारे झुका के है में इस्सर किआ) में चलता हु.

लता : कुछ हो तो कॉल कर देना, जूही का फ़ोन है.

शिव : है ठीक है, वैसे एक घर के लिए भी मोबाइल लेना hi पड़ेगा. चलता हु में.

दिव्या : शिव. (में रुक गया और उसकी और dekha)Hume भी छोड़ डोज तुम, हमें भी घर जाना है.

शिव : रुको न, शाम को चले जाना.

दिव्या : नहीं, फिर आउंगी.

शिव : ठीक है चलो.

हम तीनो वह से निकल गए, दिव्या मौके का पूरा फायदा उठाते हुए मेरे पीछे चिपक कर बेथ गयी थी, अपनी चुचिओ को पूरी तरह से मेरी पीठ पर दबा रही थी, मेरी हालत ख़राब हो रही थी.

दिव्या : घर कब आओगे?

शिव : आऊंगा.

दिव्या : याद नहीं आती मेरी? (उसने हलके से अपने हाथ को मेरे लुंड के पास दबाया)

शिव : (उसके ऐसे छूने से मेरी हालत ख़राब होने लगी, दोपहर का टाइम था तो रस्ते पर ज्यादा लोग नहीं थे, पर जैसे उसे उनकी परवाह hi नहीं थी, मने थूक निगलते हुए kaha)Aunga बोलै न, तुम देख hi रही हो मेरी क्या हालत है, जैसे hi फ्री होता हु मिलता हु तुम्हे.

दिव्या : मेने सोचा था की तुम खुद आओगे, पर लगता है में अच्छी नहीं लगी तुम्हे. (दिव्या ने हलके से लुंड को दबाया जो अब सख्त होने लगा था, कुसुम को सब सुनाई दे रहा था, वो शर्मा रही थी पर क्या बोलती वो, चुप रही)

शिव :ऐसी बात नहीं है, आऊंगा मिलने.

दिव्या : में इंतजार करुँगी, जल्दी आना.

शिव : ठीक है. (जैसे तैसे में बस स्टेऑन पंहुचा, वो दोनों चली गयी, में पुलिस स्टेशन में पंहुचा और मैडम के केबिन में चला गया. वो कुछ काम कर रही थी, उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे देखा.

भार्गवी : आओ, सांगतारुलशन अगेन.

शिव : (बैठते hue)Thank यू. कहिये कैसे याद किआ?

भार्गवी : तुम तो याद करते नहीं हो तो सोचा में hi याद कर लू. (में बस मुस्कुराया) मुस्कुराते हुए शर्म भी नहीं आती क्यों.

शिव : सॉरी, आपको तो पता है मेरी हालत.

भार्गवी : है सब पता है, और जो तुम न बताओ वो खबर भी आ hi जाती है.

शिव : में समजा नहीं.

भार्गवी : क्या गुल खिलाकर आये हो वह? (में उन्हें सवालिए नजरो से देखने लगा) क्सक्सक्स सहर में जो कांड कर के आये हो उसकी रिपोर्ट आयी है, तुम और जूही मेरे पुलिस ठाणे के एरिया में आते हो तो उन्होंने रिपोर्ट भेजी है, तुम्हे हीरोगिरी करने का बुखार है क्या?

शिव :में क्या करता, क्या उसे करने देता वो सब.

भार्गवी : पुलिस को इन्फॉर्म करते, मुझे बताते, किसी दिन फंस जाओगे बता रही हु तुम्हे.

शिव : सॉरी, वो जूही के साथ उसने जो किआ में सेह नहीं पाया, वो दूसरी लड़कीओ का भी फायदा उठा रहा था उनको परेशान कर रहा था. में क्या करता?

भार्गवी : मेने कहा न की तुम मुझे बता सकते थे, तुम्हारे पास कोई अधिकार नहीं है ये सब करने का समजे, ये तो हम पोलिसवाले समजते है इसीलिए तुम्हारे खिलाफ कुछ नहीं किआ है वर्ण कानून अपने हाथ में लेने के जुर्म में तुम्हे भी हवालात की हवा कहानी पद सकती है, संभल कर रहा करो.

शिव : सॉरी. (उनके चेहरे पर सख्ती थी और उनकी बात भी सही थी)

भार्गवी : अगर इतना hi शौक है ये सब करने का तो पुलिस में आ जाओ, फिर करते रहना.

शिव : में और पुलिस, कैसे?

भार्गवी : अभी पढ़ाई करो, आफ्टर ग्रेजुएशन एग्जाम दे देना, वैसे भी तुम दौड़वीर हो तो कोई दिक्कत नहीं होगी.

शिव : आप भी कहा मुझे इन सब में घसीट रही है, आप हो न काफी है.

भार्गवी : (उसने भी बात को ज्यादा नहीं खींचा, एक पप्पेर मेरी और बढ़ा kar)Yaha सिग्न कर दो.

शिव : ये क्या है?

भार्गवी : तुम्हारी श्री जायदाद अपने नाम करवा रही हु (उन्होंने हलके गुस्से से कहा)

शिव : क्या आप भी, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था (मेने वह सिग्न कर दिया)

भार्गवी : (उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे देखा) ये बस इसलिए है की तुम यहाँ ए थे, मुझे ऊपर भेजना है.

शिव : मेने तो बस ऐसे hi पूछा था, आप कहो तो में किसी भी कागज पर सिग्न कर दूंगा, बिना पढ़े.

भार्गवी : (शिव की बात से उसके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ gayi)Bade आये, मिलना है नहीं और बाटे बड़ी बड़ी.

शिव : ऐसा क्यों कहती है, आपने बुलाया तो में आ गया न, आप hi बिजी होती है तो में क्या करू, अभी में फ्री hi हु, चलिए घर चलते है.

भार्गवी : घर क्यों? यहाँ मिल लिए न (उसने थोड़ी अदा से कहा)

शिव : ये मिलना भी कोई मिलना है, ये तो इस्पेक्टर भार्गवी से मिलना हुआ, (आस पास देख कर मेने धीमी आवाज में kaha)Muje तो मेरी भार्गविजई से मिलना है.

भार्गवी : (उसको बहोत अच्छा लगा, वो थोड़ी शर्मा भी गयी और मुस्कुराते हुए boli)Juthe कही के, बस बाटे बनाना आता है, अभी में बिजी हु, एक दो घंटा लगेगा मुझे.

शिव : में भी काम निपटा के आ जाता हु फिर, सीधे आपके घर hi मिलता हु.

भार्गवी : ठीक है.

शिव : (खड़े होते हुए मुस्कुरा kar)Bye (अपना हाथ आगे बढ़ाया तो भार्गवी ने भी शरमाते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाया, शिव ने हाथ थम कर हल्का सा दबाया और सहलाया तो भार्गवी शर्मा गयी)

भार्गवी : बहोत हिम्मत आ गयी है क्यों (नखरे से वो बोली)

शिव : आपको देख कर कण्ट्रोल नहीं होता.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Maar खाओगे तुम.

शिव : जो खिलाओगी सब खा लूंगा. आता हु. (कहते हुए में निकल गया, भार्गवी उसको जाते हुए देखती रही)

भार्गवी : (मान me)Pagal है पूरा, पर इसके साथ कितना अच्छा लगता है, पता नहीं क्या भविस्य होगा हमारा, कैसे होगा (उसके दिमागने भी सोचना बंद कर दिया, वो थोड़ी देर ऐसे hi ब्लेंक बैठी रही फिर जैसे होश aaya)Chhod अभी ये सब सोचना, जो होगा देखा जायेगा, आगे का सोच कर अभी जो है उसको क्यों खोना. (फिर वो अपने काम में लग गयी).

जहान्वी साइट पर ऑफिस में बैठी हुई थी की तभी उसकी फ्रेंड करुणा का फ़ोन आया. जहान्वी को किसी से बात करने का कोई इरादा नहीं था, वो बस शिव के बारे में सोच रही थी, उसने फ़ोन नहीं उठाया, थोड़ी देर बाद करुणा का फिर से फ़ोन आया. उसने बे मन से फ़ोन उठाया.

जहान्वी : (बे मन se)Hello.

करुणा : (वो अभी नंगी hi ध्रुव के साथ लेती हुई thi)Hello, फ़ोन क्यों नहीं उठा रही हो यार.

जहान्वी : काम कर रही थी, क्या हुआ?

करुणा : क्या, क्या हुआ, अब फ़ोन पे भी बात नहीं करेगी क्या?

जहान्वी : (बे मान se)Bol न क्या काम है, अभी मेरा मूड ठीक नहीं है.

करुणा : मेरी बात सुन कर तेरा मूड भी ठीक हो जायेगा.

जहान्वी : (उसको इर्रिटेशन हो रहा था, उसके चेहरे पर भी नाराजगी साफ़ दिख रही thi)Kya बात है बोल न.

करुणा : ऐसे कैसे बात कर रही है तू, में तेरा मूड ठीक करने की बात कर रही हु और तू कितना गन्दा एक्सप्रेशन दे रही है.

जहान्वी : देख करुणा, अभी मेरा मूड बिलकुल भी ठीक नहीं है, तुजे जो बात करनी है सीधे सीधे कर ले वर्ण में फ़ोन रख रही हु.

करुणा : (जहान्वी की बात से उसको भी गुस्सा आ रहा था पर ध्रुव की वजह से उसको बात करनी पद रही थी, उसने अपने आपको संभाला और kaha)Thik है सुन, तेरा मूड ठीक नहीं है तो चल पार्टी करते है, तेरा मूड भी ठीक हो जायेगा, बियर विइर पिएंगे और मोज़ करेंगे.

जहान्वी : देख यार, मेरा बिलकुल भी मूड नहीं है.

करुणा : मूड ठीक करने के लिए hi तो कह रही हु, सब दोस्त मिल कर ध्रुव के फार्म हाउस चलते है, हल्ला करेंगे सब मिल कर.

जहान्वी : (ध्रुव का नाम सुन कर उसका मूड और भी ख़राब हो gaya)Muje नहीं आना, तुम करो पारी.

करुणा : (उसने ध्रुव की और देखा जो स्पीकर फ़ोन पर सब सुन hi रहा था, उसने आगे बात करने का इस्सर किआ, करुणा ने भी बे मन से बात ki)Tu भी अजीब है, तुजे दोस्तों की कोई कदर hi नहीं है, यहाँ में हु जो तेरा मूड ठीक करने की कोशिस कर रही हु और एक तू है जो मेरा मूड ख़राब करने पे तुली हुई है. (करुणा ने हलके गुस्से से कहा).

जहान्वी : देख यार, अभी मेरा बिलकुल भी मूड नहीं है, में बाद में बात करती hu,(Kehte हुए उसने फ़ोन काट दिया)

करुणा : (उसने झुंझलाते हुए ध्रुव को देखा, वैसे भी आज भी ध्रुव जल्दी झाड़ गया था तो उसका मूड ठीक नहीं था, उसने नाराजगी से kaha)Tuje पता है वो कैसी है, तेरी वजह से मेने भी अपनी बेइज्जती करवाई. (कहते हुए वो उठी और नंगी hi अपने कूल्हे मटकती हुई बाथरूम में चली गयी)

में साइट पर पंहुचा तो जहान्वी की गाड़ी कड़ी थी, और वो बालकनी में hi थी, जैसे hi उनकी नजर मुझपर पड़ी दो पल के लिए उनके चेहरे पर खुसी उभर आयी पर जैसे उन्होंने आपने आपको रोक लिया और फिर वो सीरियस हो कर मुझे देखने लगी, मेने स्कूटर पार्क किआ और फिर ऊपर देखा तो वो गायब थी, वो अंदर चली गयी थी, मेने एक नजर साइट पर डाली तो बहार कोई दिख नहीं रहा था, शायद धुप की वजह से सब अंदर का hi काम कर रहे थे, में ऑफिस के अंदर चला गया. जब में ऑफीस में पंहुचा तो मेने देखा की जहान्वी कोई फाइल देख रही थी, मुझे पता चल रहा था की वो सिर्फ दिखावा कर रही है, में उसके सामने बेथ गया, वो अभी भी मुझे नहीं देख रही थी.

शिव : Hi. (उसने कोई जवाब नहीं दिया और न मेरी और देखा) मश्ग पर तो कोंग्रटुलतिओं कह रही थी और सामने मिला हु तो बात भी नहीं कर रही हो.

जहान्वी : वो एक फॉर्मेलिटी थी तो मेने कर दी, मुझे क्या तुम जो भी करो. (उसने बिना मेरी और देखे मुझे तना मारा)

शिव : आप किस बात पर नाराज हो, नाराज तो मुझे होना चाहिए. (में उस मतलब से कह रहा था की उस दिन वो मेरा खड़ा कर के चली गयी थी, वो भी मेरी बात समाज रही थी, पर उसने अपने चेहरे पर वो भाव आने नहीं दिए)

जहान्वी : (मुझे घूरते hue)Tumhe नाराज होना चाहिए, बिना बताये गायब हो गए तुम और मुझे नाराज भी नहीं होना चाहिए, एक मश्ग भी नहीं किआ की में नहीं आऊंगा, लोग पागल है जो तुम्हारा इंतजार करते है.

शिव : (मुझे हसी आ रही थी पर में हँसा नहीं और एक्टिंग करते hue)Achchha, कोण मेरा इंतजार कर रहा था? (जहान्वी गुस्से से मुझे घूर्णी लगी, में मुस्कुराया तो वो और घर के मुझे देखने लगी) शायद तुम भोली की बात कर रही ho,(Uthne की एक्टिंग करते हुए) अभी मिलके आता हु में. (वो हैरानी से मुझे देखने लगी, में हस्ते हुए वापस बेथ गया, वो चीड़ गयी और फिर से फाइल में देखने लगी) वैसे किस चीज़ की फाइल है ये? (उसने मेरी और देखा और फिर फाइल को ध्यान से देखने लगी, में है pada)matlab अभी तक पता नहीं था की किसकी फाइल है (में हसने लगा तो उन्होंने गुस्से से फाइल बंद कर दी और मुझे गुस्से से देखने लगी, में बड़ी मुश्किल से रुका, वो अभी भी मुझे घर रही थी, मेने मुस्कुराके puchha)Problem क्या है आपकी?

जहान्वी : (झुंझलाते hue)Tum हो मेरी प्रॉब्लम.

शिव : कहो तो में चला जाऊ, वैसे भी में सोच रहा था की नौकरी छोड़ दू, अब टाइम नहीं मिल रहा है. (ये सुन कर जहान्वी के चेहरे पर चिंता की लकीरे उभर आयी, मेने मुस्कुरा के kaha)Yahi चाहती है न आप?

जहान्वी : मेने कब ऐसा कहा. (उनकी आवाज नरम हो चुकी थी)

शिव : मुझे तो ऐसा hi लग रहा है, आप को अच्छा नहीं लगता न मेरा आना.

जहान्वी : अपने मान की मात बोलो, मेने ऐसा वैसा कुछ नहीं कहा है, बिना बताये खुद hi गायब हो जाते हो और चाहते हो की कोई पूछे भी न, नहीं पूछूँगी बस. तुम्हारी जो मर्जी है वो करो, में होती कोण हु पूछनेवाली. (उनके चेहरे पर गुस्से से ज्यादा तड़प थी)

शिव : नहीं में सीरियसली कह रहा हु, इस कॉम्पिटिओं के बाद अब मुझे और ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी और जहा तक मेने सुना है मुझे ट्रेनिंग के लिए गोवत सेण्टर भी जाना पड़ेगा, शायद दो तीन महीनो के लिए, तो ऐसे में ये जॉब तो कर नहीं पाउँगा.

जहान्वी : तुम्हे जो करना है करो, पर ये जॉब नहीं छोड़ोगे तुम.

शिव : (मुस्कुराते hue)Matlab में औ hi न तो कैसी जॉब.

जहान्वी : वो मुझे नहीं पता, पर जब भी टाइम मिले आओगे तुम, और है पहले से मुझे इंफोम कर डोज, समजे.

शिव : में आपको क्यों इन्फॉर्म करू, मुझे करना होगा तो में पवनसीर को इन्फॉर्म करूँगा. (मेने उन्हें चिडया)

जहान्वी : ज्यादा ओवरस्मार्ट मात बनो, मेने कहा है तो मुझे इंफोम करना hi पड़ेगा समजे, वर्ण तुम्हारी खैर नहीं.

शिव : (मुस्कुराते hue)Naukari से निकल देगी?

जहान्वी : (झुंझला kar)Yaha बंद के रखवाडुंगी समजे, तुम जानते नहीं मुझे, जहान्वी नाम है मेरा. (में मुस्कुराया तो वो भी है पड़ी, थोड़ी देर हम दोनों है रहे थे, फिर वो शांत hui)Tumhe शर्म नहीं आयी, एक बार भी नहीं सोचा की इन्फॉर्म कर दू, ऐसे hi चले गए.

शिव : मुझे लगा की आप नाराज हो, तो में क्या इन्फॉर्म करता. (मेने वो कार वाली बात छेड़ी)

जहान्वी : छोडो न उस बात को, भूल जाओ, चलो न कफ पिने चलते है.

शिव : ये अच्छी नौकरी है, काम पर आओ तो घूमने मिलता है.

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)To फिर, और तुम्हे ऐसी नौकरी छोड़नी है. (हम दोनों है दिए, और कफ पिने चले गए, वो मुझे उसी कफ शॉप पर ले गयी, और रस्ते में hi बता दिया था की वो hi बिल पाय करेगी, वो ट्रीट देना चाहती थी)
 
अपडेट 171

संयम स्कूल से घर आने के बाद भी शिव के बारे में hi सोच रही थी, आज जिस तरह से वो उसे साइकिल पर बिठा कर हक़ से ले कर आया था वो उसे अच्छा लगा था, वैसे भी वो उसे पहले से hi पसंद करती थी पर अपनी अम्मी के साथ उसका सेक्स करना उसको विचलित कर रहा था, अभी भी वो अपनी अम्मी को उस तरह के रूप में स्वीकार नहीं कर पायी थी, वो सोच में गुमसुम थी, खाना भी ठीक तरह से नहीं खाया था, वो सोच रही थी की नाज़िआ आ गयी.

नाज़िआ : क्या सोच रही है?

संयम : (अचानक हुई आवाज से हड़बड़ा गयी, पर जब अप्पा को देखा तो वो शांत हो gayi)Kuchh नहीं आप.

नाज़िआ : जूथ क्यों बोल रही है, कुछ तो सोच रही थी.

संयम : कुछ नहीं बस स्कूल के बारे में सोच रही थी, और कुछ नहीं.

नाज़िआ :(उसने भी ज्यादा नहीं पूछा, और बात को बदल di)Muje तो चिंता हो रही थी की तू अकेले गयी है, ये तो अच्छा था की शिव तुजे ले आया, सुबह भी तेरे पीछे hi आया था वो. (संयम ने कोई जवाब नहीं दिया) तू भले hi उसके साथ ठीक से पेश नहीं आ रही पर वो तो तेरे लिए अच्छा hi कर रहा है, वो सचमे अच्छा है, तू क्यों नहीं समाज रही.

संयम : (मान me)aapne उसका वो रूप देखा नहीं इसलिए कह रही हो आप, वो हमारी hi अम्मी के साथ वो सब कर रहा था, आपने देखा होता तब पता चलता.

नाज़िआ : फिर सोचने लगी, क्या सोचती रहती है.

संयम : कुछ नहीं आप, वो जैसा दीखता है वैसा है नहीं, आप नहीं संजोगी.

नाज़िआ : अच्छा तो तू मुझसे भी समझदार हो गयी क्यों. तुजसे बड़ी हु, तुजसे ज्यादा दुनिया देखि है, जो दीखता है सब सच नहीं होता, और दूसरी बात, इंसान सबके सामने अलग होता है और अंदर से अलग होता है, कोण कैसा है वो उसके व्यवहार से पता चल जाता है, कोई एक दो बार मिले तो वो ढोंग कर सकता है पर हर बार नहीं, शिव अच्छा है, तुजे मन न है तो मान वर्ण तेरी मर्जी, मुझे तो नींद आ रही है, में सोती हु.

संयम कुछ नहीं बोली, वो बस लेती रही और शिव के बारे में hi सोच रही थी, जबसे उसने शिव को ननगा देखा था उसके अंदर हलचल मची हुई थी, एक लड़के को ननगा देखने का ये उसका पहला अनुभव था, और उसने तो वो सब देखा था जो एक लड़का लड़की अपस्ने करते है, बार बार उसको शिव का वो बड़ा लुंड दिख रहा था, कैसे उसकी अम्मी की छूट में वो दाल कर अंदर बहार कर रहा था, और उसकी अम्मी कैसे मज़े से उसको अपनी और खिंच रही थी, एक तरफ तो उसे गुस्सा आता था पर वही दूसरी और वो गरम हो जाती थी, अभी भी ये सोचते हुए उसके हाथ अपनी छूट पर चला गया, उसकी बहन बाजु में hi लेती थी तो उसने ज्यादा तो कुछ नहीं किआ पर अपनी छूट को हलके हलके दबाने लगी, फिर से एक बार वो अपनी अम्मी की जगह खुद को देखने लगी, जैसे शिव उसकी छोटी सी योनि में अपना बड़ा लुंड दाल रहा है, उसके शरीर में एक अजीब सी तरंग उठने लगी, उसे पता नहीं था की एक्चुअल फीलिंग क्या होती है पर उसको एक अजीब सा एहसास हो रहा था, उसकी कुवारी छूट के छोटे से छेड़ से चीन रास बहार निकलने लगा, वो आंखे बंद किये हुए उस पल को hi सोच रही थी, उस से रहा नहीं गया और वो उठ गयी, उसने अपनी दीदी को देखा जो सो चुकी थी, उसको बाथरूम जाना था तो वो निचे चली गयी, उसकी अम्मी भी अपने कमरे में लेती हुई थी, उसने एक नजर डाली और बाथरूम में चली गयी, जैसे hi वो मूतने के लिए बैठी उसने अपनी छूट को देखा, जहा पेशाब के साथ कुछ चिका रास बह रहा था, छूट के ऊपर के बल अब कला रंग ले चुके थे जो इस बात का प्रमाण था की वो अब बड़ी हो चुकी है, वो अपनी छूट से निकलते मूत को देखती रही, फिर जब मूत ख़तम हो गया तो उसने अपनी छूट को छुआ जहा से रास निकल रहा था, उस छेड़ को छूटे hi उसके शरीर में झनझनाहट होने लगी, उसकी आंखे बंद हो गयी, वो आहिस्ता आहिस्ता उस छेड़ को सहलाने लगी, उसे अच्छा लगने लगा, वो ौस सहलाने लगी, वह से चिकना रास बह रहा था, और एक अजीब सी गंध बाथरूम में फ़ैल रही थी, उसने रास से भीगी हुई उंगलिओ को अपने नाक के पास ले जा कर सुंघा तो एक अजीब सी गंध उसको महसूस हुई, एक बार के लिए उसका मुँह बिगड़ गया पर फिर वो गांड उसको अच्छी लगने लगी, उसने दो तीन बार उसे सुंघा, उसको याद आया की शिव उसकी अम्मी की इस जगह को कैसे चाट रहा था, ये सोच कर hi उसको अज्जेब लगने लगा.

संयम : कैसे चाट रहा था वह, अजीब है शिव भी, कोई करता है ऐसा, और अम्मी भी कैसी कैसी आवाजे निकल रही थी, बिलकुल शर्म नहीं थी उन्हें, अपनी टंगे फैला कर उसके शिर को सेहला रही थी, दोनों अज्जेब है, अम्मी ने भी तो उसका वो अंग अपने मुँह में लिया था, छ्हीईई कितनी गन्दी है अम्मी. कैसा स्वाद आता होगा उन्हें (वो थोड़ी देर अपनी ऊँगली को देखती रही, फिर उसने हिचकिचाते हुए अपनी जीभ से टच करवाया और उस स्वाद को समझने की कोशिस करने लगी, हल्का नमकीन स्वाद आ रहा था पर ज्यादा समाज नहीं आया, उसने फिर से अपनी छूट को sehlaya)Shhhhh हआ (वो सहलाती गयी, उसको अच्छा लग रहा था, उसकी सांसे भरी हो रही थी, उसने ऊँगली हाली की उस छेड़ में डाली तो उसके चेहरे पर दर्द उभर आया, पर वो रुकी नहीं, वो थोड़ी ऊँगली अंदर डालने लगी, उसको अजीब सी फीलिंग आ रही थी, जैसे hi ऊँगली और अंदर गयी उसका दर्द बढ़ गया, तो उसने घबरा के ऊँगली बहार निकल ली, और अपनी छूट के छेड़ को देखने लगी, वह ज्यादा जगह hi नहीं थी की ऊँगली अंदर जा सके, और उसकी अम्मी पूरा लुंड अंदर ले रही थी, उसको अज्जेब लग रहा था, और ज्यादा करने की उसकी हिम्मत नहीं हुई, उसने अपनी छूट धोयी और अपने हाथ को भी धोया और कपडे पहन कर बहार आ गयी, फिर एक बार उसने अपनी अम्मी को देखा, वो साइड से लेती हुई थी, उसका मान किया की जा कर उसको सब पूछ ले की क्यों किआ उसने ऐसा, पर फिर हिम्मत नहीं हुई, भले उसकी अम्मी ने ऐसा किआ था पर वो बहोत अच्छी थी, वो उनसे ऐसे बात नहीं कर सकती thi,wo वही कड़ी अपनी अम्मी को देख रही थी, उसकी अम्मी को जैसे उसके वह होने का पता चल गया, उन्होंने थोड़ा साइड हो कर उसकी और देखा, दोनों की नज़ारे मिली.)

ज़ोया : क्या हुआ बेटी, वह क्यों कड़ी है?

संयम : (अपनी नज़ारे झुका kar)Kuchh नहीं ामी, बाथरूम गयी थी, जा रही हु.

ज़ोया : यहाँ आजा. (संयम के कदम अपनी अम्मी की और चले gaye)Aaja (अपने साइड में जगह करते हुए उसकी अम्मी साइड में हो गयी, उसने अपनी अम्मी को देखा फिर उनके बाजु में लेट gayi)(Zoya अपनी प्यारी बेटी के शिर को सहलाते हुए boli)Kya हुआ बेटी, नाराज है? (संयम अपनी अम्मी को देख रही थी, उनका प्यार वो महसूस कर रही थी, वो बस अपनी अम्मी को देखती रही पर बोली कुछ नहीं) (ज़ोया को अपनी बेटी की मनोस्थिति का अंदेसा था, पर वो बोल नहीं सकती थी, वो समाज सकती थी की उसकी बेटी उसके औरतवाले रूप को शायद देख चुकी है और इसलिए परेशान है, पर जो होना था वो हो चूका था, वो मान बनाली थी की वो उसकी बेटी की दन्त भी सुनलेगी, उसको उसकी परेशानी देखि नहीं जा रही thi)Kisi बात पर नाराज है मेरी बेटी? (वो अभी भी उसे देख रही थी) कुछ है तो बोल दे बेटी, तेरा यु नाराज रहना अच्छा नहीं लगता, मेरी हस्ती खेलती बेटी hi अच्छी लगती है.

संयम : (उसके गले तक आ गया की वो पूछ ले, पर फिर उसकी जबान ने साथ नहीं diya)Kuchh नहीं है अम्मी.

ज़ोया : तो फिर ऐसी उखड़ी उखड़ी क्यों रहती है, ठीक से बात भी नहीं करि, अगर कोई बात है तो कह दे.

संयम : (उसने बात को बदल di)Aap अब्बू से क्यों जगद्ति हो?

ज़ोया: में कहा झगड़ती हु?

संयम : जूथ मात बोलो अम्मी, आपके कमरे से आती आवाजे सुनी है मेने. (ज़ोया को ये बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की उसकी बेटी उसको ऐसा कुछ पूछेगी)

ज़ोया : (अपनी नजर झुकाते hue)Tu नहीं समझेगी बेटी, अभी तू छोटी है.

संयम : इतनी भी छोटी नहीं हु अम्मी.

ज़ोया : (मुस्कुराते हुए उसके गाल को चुम kar)Ha बड़ी हो गयी है पर अभी इतनी भी बड़ी नहीं हुई जो ये सब समाज सके.

संयम : पर अम्मी, अब्बू तो अच्छे है, फिर क्यों जगद्ति है आप?

ज़ोया: (मुस्कुराते hue)Shayad में अच्छी नहीं हु, इसलिए.

संयम : (उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)Aap भी अच्छी hi हो.

ज़ोया : बीटा कुछ बाटे अभी तेरी समाज में नहीं आएगी, जब तू मेरी उम्र की होगी तब तेरी समाज में आएगी, और ऐसा न हो के तुजे ऐसा दिन देखना पड़े, तेरे अब्बू अच्छे है, अच्छे क्या बहोत अच्छे है, पर... (वो बोलते बोलते रुक गयी)

संयम : पर क्या अम्मी?

ज़ोया : बेटी, ऐसी बाटे करना अच्छा नहीं लगता, छोड़ न उस बात को, अगर इसलिए तू मुझसे नाराज है तो में वादा करती हु की में अब कभी तेरे अब्बू से जगदा नहीं करुँगी, बस. (उसने अपनी बेटी को आगोश में ले लिया, संयम भी आगे कुछ नहीं बोली, उसको अभी भी समाज में नहीं आ रहा था की अम्मी का कोनसा रूप सच्चा है, ये वाला या वो वाला, ये सब सोचते सोचते hi वो सो गयी)

शिव और जहान्वी बेथ कर कॉफ़ी पि रहे थे.

जहान्वी : तो, कॉम्पिटिओं अच्छे से हो गया, पेपर में भी नाम आ गया तुम्हारा, कैसा लग रहा है?

शिव : (मुस्कुराते hue)Ye तो बस शुरुआत है, मंजिल अभी दूर है.

जहान्वी : (कॉफ़ी की चुस्की लेते hue)Konsi मंजिल पाना चाहते हो?

शिव : देश के लिए खेलना चाहता हु, और इतने पैसे कामना चाहता हु की अनाथालय के लोगो को अच्छी जिंदगी दे सकू. (मुस्कुराते हुए जहान्वी उसकी बाते सुन रही थी) आप क्या पाना चाहती हो?

जहान्वी : मुझे क्या पाना है?

शिव : मेरा मतलब है की जिंदगी में क्या पाना चाहते हो?

जहान्वी : ऐसा कुछ सोचा नहीं है, है पर इतना नाम कामना है की कोई मुझे अपने पापा के नाम से नहीं मेरे नाम से जाने.

शिव : जरूर होगा ऐसा, आप टेलेंटेड हो, और होशियार भी, आप जरूर अपना मुकाम हासिल करोगी.

जहान्वी : (कुछ याद करते hue)Mere साथ पार्टी में चलोगे?

शिव : कैसी पार्टी?

जहान्वी : बस ऐसे hi फ्रेंड्स गेट तो गठर.

शिव : आपके फ्रेंड्स के साथ में क्या करूँगा?

जहान्वी : तो क्या हुआ, वैसे तो मेरा भी जाने का मूड नहीं था, करुणा का फ़ोन आया था तो तुम्हारी वजह से मेने उसे मन कर दिया.

शिव : मेरी वजह से? (मेने सवालिया नजरो से उन्हें देखा)

जहान्वी : (Sharmagayi)Ha वो, तुम्हारा गुस्सा मेने उस पर निकल दिया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Muj पर क्यों गुस्सा थी?

जहान्वी : गुस्सा न हो तो क्या करू, कभी कुछ बताते नहीं हो, नहीं आनेवाले थे तो बातसकते थे न, तो गुस्सा हो गयी थी, और उसका फ़ोन आ गया तो उसपर भड़क गयी. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : (में समाज रहा था पर फिर भी अनजान बनते हुए मेने kaha)Meri समाज में नहीं आ रहा की मेरे आने न आने से आपको क्या फर्क पड़ता है, आप अपना काम कीजिये, में नहीं आऊंगा तो काम नहीं करेगी क्या?

जहान्वी : ज्यादा स्मार्ट बन ने की कोशिस मात करो, एक तो बोलते कुछ नहीं और अचानक छुट्टी, बस इंतजार करते रहो.

शिव : पर आप क्यों इंतजार करती हो?

जहान्वी : क्यों की मुझे भी दन्त ने के लिए कोई चाहिए न, और कुछ सुन न है? (हम दोनों है diye)Chalo न पार्टी में, तुम है कहते हो तो hi में है कहूँगी, मज़ा आएगा.

शिव : कब जाना है?

जहान्वी : वो तो पता नहीं, वो तो शायद आज रात hi कह रही थी, अभी पूछ लेती हु, पर तुम आओगे न? (में सोच में पद गया, अभी मुझे भार्गविमडम के घर भी जाना tha)Are इतना क्या सोच रहे हो, 8 बजे जायेंगे एक दो घंटे में आ जायेंगे. वैसे भी हम लड़कीओ को रात को कहा ज्यादा बहार रहने को मिलता है.

शिव : (सोच kar)Aaj रत नहीं आ सकता. कल का होता तो आ शक्ति था.

जहान्वी : (खुस होते hue)Abhi करुणा से बात करती हु (उसने फ़ोन लगाया, करुणा ने फ़ोन उठाया पर रूखी आवाज में कहा)

करुणा : Hello.?

जहान्वी : क्या हुआ, ऐसा रुखा रुखा क्यों बोल रही है?

करुणा : तो और कैसे बोलू, जब तेरी मर्जी हो मन कर देती है, में तो तेरे लिए hi कह रही थी.

जहान्वी : अच्छा सुन, वो तू पार्टी के लिए बोल रही थी, कल कर शक्ति है?

करुणा : तू आ रही है? (आश्चर्य से)

जहान्वी : है मेरी जान, तू कहे और में न औ.

करुणा : बड़ी आयी, तब तो कैसे बोल रही थी, अब अचानक ऐसा क्या हो गया?

जहान्वी : वो सब तू छोड़, कब आना है बता, हो सके तो 10 बजे से पहले फ्री हो जाये ऐसे hi रखना, और है कोण कोण आनेवाली है?

करुणा : तूने मन कर दिया तो फिर कुछ सोचा नहीं, में तुजे मश्ग करती हु, ठीक है?

जहान्वी : ठीक है, bye.

शिव : (उनके चेहरे पर खुसी thi)Lagata है आपको पार्टीज बहोत पसंद है.

जहान्वी : पार्टीज किसको पसंद नहीं होती, पर पार्टी में तब मज़ा आता है जब कोई अपना साथ हो, वर्ण बोरिंग लगती है. (उसने मुझे देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा, हम दोनों थोड़ी देर वैसे भी बाते करते रहे) (वह करुणा ने ध्रुव को सब बता दिया)

ध्रुव : अरे वह! थैंक यू करुणा, यू अरे सुच ा डार्लिंग.

करुणा : मुझे तो बहोत दर लग रहा है ध्रुव, एक बार फिर सोच lo,aisa न हो की लेने के देने पद जाये, और वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है यार.

ध्रुव : में जनता हु, पर क्या हर टाइम वो मेरा मज़ाक उड़ाती रहती है तुम्हे अच्छा लगता है, इसके बाद वो कभी मेरा मज़ाक नहीं उड़ाएगी, हमेशा शिर झुकाके रखेगी, तू फ़िक्र मात कर में हु न सब संभल लूंगा.

करुणा : कब पार्टी करनी है, और किसको बुलाना है?

ध्रुव : कुछ मेरे दोस्त होंगे, उनकी गिर्ल्फ्रेंड्स भी होंगी, तुम्हारी दोस्तों को भी बुला लो ताकि उसे शक न हो, सब एन्जॉय करने में लगे होंगे, में अपना काम कर दूंगा.

करुणा : (करुणा को बेचैनी हो रही थी, उसे दर भी लग रहा tha)Dhruv (उसने कुछ कहने का प्रयास किआ, ध्रुव ने बिच में hi उसको रोक दिया)

ध्रुव : तुम फ़िक्र मात करो, सब ठीक हो जायेगा, मुझपर भरोसा करो.

करुणा : (उसका दिल नहीं मान रहा था पर वो ध्रुव को मन नहीं कर शक्ति thi)Thik है. (उसने उदासी से कहा)

वह साइट पर सब काम कर रहे थे, झुमरी, भोली और कमली आज साथ मकाम कर रहे थे. कमली ने शिव को देखा था.

कमली : आज बाबू आया था, पर मैडम के साथ वापस चला गया. (उसने दोनों को बताया)

भोली : क्या कह रही है तू, वो आया और मिला भी नहीं.

कमली : तुम्हे क्या लगता है, ये बड़े लोग हमारे जैसो के पीछे पड़ेंगे क्या, तू देखती नहीं कैसे अपनी मैडम उसके पीछे पीछे घूमती है, वो नहीं आ रहा था तो भी पिंकेशबाबू को पूछ ने चली आती थी, जब वो नहीं आता था तो वापस चली जाती थी, जब इतनी बड़े घर की बेटी उसके पीछे पड़ी हो तो क्या वो हमारे जेसीओ के पीछे आएगा?

भोली : वो वैसा नहीं है, और हो भी तो मुझे क्या, मुझे बस वो पसंद है, बस.

कमली : पसंद तो तुजे कोई भी आ जायेगा, वो तुजे भी पसंद करना चाहिए, सामजी.

भोली : तुजे क्यों इतनी जलन हो रही है, एक बार अगर बाबू तुजे कह दे की आ कमली में तुजे छोड़ना चाहता हु, क्या करेगी बता (कमली चुप हो गयी) देखा, कैसे चुप हो गयी, मुझे पता है की तू भी अपना घाघरा उठा देगी, और वैसे भी मुझे पता है की वो मेरा नहीं हो सकता, पर अपनी सील तो में उसी से तुड़वॉंन्गी, देख लेने तुम, वैसे कब है तेरी शादी?

कमली : मेरी शादी से तुजे क्या?

भोली : अरे तेरी शादी में उसे बुलाएँगे, रात वो वह रुकेगा तो फिर (वो अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुरायी)

कमली : तू बस सपने देख, मेरी मान तो उसको भूल और अपनी शादी की सोच, वैसे भी इतने लोग पड़े हुए है तेरे पीछे, कोई पसंद कर और उसी से अपनी सील खुलवा, वो भी खुस हो जायेगा.

भोली : क्यों?, तू अपनी सील पहले hi खुलवा चुकी है न, फिर तुजे कोई फर्क पड़ा. हो रही है न तेरी शादी. मेरी भी हो जाएगी.

कमली : तुजसे तो बात करना hi बेकार है, जो मर्जी हो वो कर, मुझे क्या?

भोली : मुझे क्या, क्या. तुजे जलन हो रही है और कुछ नहीं.

कमली : में क्यों जलूँगी, मुझे क्या लेना देना.

भोली : अब मेरा मुँह मत खुलवा, अगर बाबू तेरी शादी के दिन भी कहेगा न की आजा कमली, तो चली जाएगी उसके साथ, पता है मुझे, मुझे मत समजा, सामजी.

कमली कुछ नहीं बोली, वो चुप चाप अपने काम में लग गयी, क्यों की कही न कही शायद ये सच भी था, पर अब वो जानती थी की ये संभव नहीं है, पहले उसने प्रयत्न भी किआ था पर फिर शिव के सामने वो सब हो गया था तो अब उसे लगता था की शिव उसके साथ कुछ नहीं करेगा, वो अपने काम में लग गयी.

एक घंटे बाद हम दोनों वह से निकले, फिर साइट पर पहुंचे, पिंकेश हमे मिल गया तो थोड़ी देर सबसे मिल कर में वह से निकल गया. जहान्वी भी निकल गयी. आज स्टेडियम जाना नहीं था तो में घर चला गया, जूही मेरे कमरे में आराम कर रही थी. मुझे देख कर वो बिस्तर पर बेथ गयी.

शिव : कैसी हो तुम?

जूही : (शरमाते hue)Thik हु.

शिव : (धीरे se)Dard है? (उसने एक पल मेरी आंख में देखा फिर शर्मा कर ना में शिर हिलाया. पता नहीं पर मेरे लुंड में अकड़न आने लगी, मेने उसके हाथ पर हाथ रक्खा औरउसके नजदीक खिसकते hue)Sach में नहीं है?

जूही : (शिव के इरादे वो समाज गयी, और एक दम से घबरा gayi)Wo..wo..

शिव : (मुस्कुराते hue)Ghabrao मात, में तो मज़ाक कर रहा था, मुझे पता है, एक दो दिन बाद करेंगे. (मेरी बात से वो बहोत शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी, मेने उसका हाथ सहलाते hue)Tum खुस हो न? (उसने शरमाते हुए हां में शिर हिलाया) अच्छा सुनो, तुम यही खाना खा कर जाना, मुझे कही जाना है.

जूही : कहा जाना है?

शिव : भार्गवी मैडम से मिलने, वो क्सक्सक्सक्साहेर में उस कोच की वजह से जो केस हुआ था उसकी इन्क्वायरी आयी थी मैडम के पास तो मिलना है unse(Mene जूथ बोलै, वैसे उसकी जरुरत नहीं थी पर अब में समाज रहा था की सब कुछ बताना भी ठीक नहीं है, लड़कीअ थोड़ी हर्ट होती है, मुझे जो बताना था वो में पहले hi बता चूका था, तो आहार बार बताना ठीक नहीं होता)

जूही : में भी चली जाती हु, अब काफी ठीक हु में.

शिव : क्यों? यहाँ अच्छा नहीं लग रहा?

जूही : ऐसी बात नहीं है, यहाँ तो मुझे अपने घर जैसा लगता है. पर मेरी वजह से सब परेशान हो रहे है.

शिव : कोई परेशान नहीं हो रहा, यही खा कर जाना, मेरा कोई ठिकाना नहीं, शायद में आ कर खो या खा कर औ.

जूही : स्कूटर चाहिए तो ले जाओ.

शिव : फिर तुम कैसे जाओगी?

जूही : चली जाउंगी.

शिव : कोई जरुरत नहीं, में चला जाऊंगा, वैसे भी मुझे आदत है. कल मिलते है फिर.

जूही : हम्म्म्म.

फिर में बहार सबको बोल कर वह से निकल गया. में अभी बहार निकला hi था की मेरे मोबाइल पर काव्यजि का फ़ोन आया.

शिव : Hello.

काव्य : कहा हो?

शिव : (मुस्कुरा kar)Kahiye न, कोई काम था?

काव्य : नहीं, बस ऐसे hi फ़ोन किआ था, मश्ग तो किआ था पर सोचा की फ़ोन कर लू, अभी कोर्ट से घर पहुंची हु, कोंग्रटुलतिओन्स वन्स अगेन.

शिव : थैंक यू मैडम.

काव्य : किसी के साथ हो?

शिव : नहीं तो, क्यों?

काव्य : वो मैडम कहा न इसीलिए. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : इतनी बड़ी वकील साहिबा को मैडम नहीं कहूंगा तो क्या कहूंगा?

काव्य : (नखरे se)Bade आये! मिलते तो हो नहीं, बस बाटे बनाना अत है.

शिव : बाटे बना न तो आपका काम है, मेरा नहीं, वैसे भी आपसे मिलने आने hi वाला था.

काव्य : क्यों, और कोई नया कांड?

शिव : आप भी न.

काव्य : अच्छे से समझने लगी हु तुम्हे, बताओ क्या किआ? (मेने संक्षिप्त में उन्हें सब बता दिया) ओह! में भार्गविजई से बात करती हु, डिटेल पूछ लुंगी उनसे.

शिव : में वही जा रहा था, आपसे बात करवाता हु.

काव्य : मुझसे मिलने का टाइम नहीं है और वह जाने का टाइम है. (उसने नखरे से कहा)

शिव : ऐसी बात नहीं है.

काव्य : सब समझती हु में, वकील हु, भूलो मत. तुम आओ फिर बताती हु में तुम्हे.

शिव : (मस्ती भरे अंदाज me)Me भी तो देखना चाहता हु, कब औ.

काव्य : (उसके टोन से शर्मा gayi)Mar खाओगे तुम.

शिव : और भी कुछ खाने का इरादा है मेरा.

काव्य : शिईयिव, में सचमे मरूंगी तुम्हे.

शिव : (पता नहीं में भी रंग में hi tha)Marunga तो me(Mene अर्थपूर्ण ढंग से कहा)

काव्य : (ये सुन कर उसकी सांसे चढ़ने lagi)Shiiiiiiiv.

शिव : क्या हुआ (मुझे उनकी सांसे सुनाई दे रही thi)Marne डौगी न?

काव्य : शीइइइइइव.

शिव : बताइये न.

काव्य : (अपनी उखड़ी सांसो se)Kya?

शिव : यही की मरनेडोगी अपनी.

काव्य : हआ. (उसने बड़ी मुश्किल से कहा)

शिव : कब औ फिर.

काव्य : अभीइइइइइ.

शिव : क्यों, घर पर कोई नहीं है?

काव्य : सब है.

शिव : फिर?

काव्य : मुझे नहीं पता (अपनी उखड़ी सांसो को सँभालते हुए)

शिव : (रोड के साइड में खड़े हो कर ऐसी बाटे करना ठीक नहीं लग रहा था पर अचानक टॉपिक ऐसा हो गया था) ठीक है में कल आता हु फिर.

काव्य : (मायूसी se)Muje कल बहार जाना है शिव. (में क्या बोलता तो में चुप रहा, थोड़ी देर बाद वो खुद boli)Kabhi कभी तो काम को ले कर इतना गुस्सा आता है न, की क्या कहु.

शिव : (में अब शांत हो चूका tha)Aap गुस्सा मत कीजिये, में कही भगा जा रहा हु क्या, परसो मिल लेंगे.

काव्य : में इंतजार करुँगी.

शिव : ठीक है bye, मिलते है.

काव्य : Bye. (उसने फ़ोन रख दिया, पर देख फ़ोन को hi रही थी, अभी अभी अचानक हुई बातो से वो शिव को बहोत मिस कर रही थी, ऐसा पहली बार हो रहा था, वो इतनी समझदार हो कर भी ऐसी भावनाओ में बहती चली गयी, वो मान में सोचने लगी) कैसी बाटे बोल रहा था वो, शर्म भी नहीं अति ऐसा बोलते हुए (उसके चेहरे पर मुस्कान thi)Besharma कही का, आने दो उसको, दिखती हु फिर उसको. (जैसे hi उसने सोचा फिर से उसको शिव की बात याद आ gayi)Pakka वो बेशर्म पूछता क्या दिखाओगी. (ये सोच कर hi उसके चेहरे पर शर्म और मुस्कान दोनों आ गयी, और अपने आपको िमागिन करने लगी की वो अपनी छूट खोल कर उसको दिखा रही है, उसने अपने होठो को अपने दन्त से काट liya)Shhhhh, पागल कर देगा ये लड़का मुझे. (पहले कभी उसको इस तरह का इंट्रेस्ट नहीं आया था पर जब से शिव के साथ सब सुरु हुआ था वो बेचैन हो जाती थी, वो अपने आपको इन सबसे दूर दिखने की कोशिस करती थी पर शिव जैसे hi उसके नजदीक आता तो वो अपने आपको रोक नहीं पति थी, वो सोफे पर बैठे बैठे शिव के बारे में hi सोच रही थी)

भार्गवी भी आज जल्दी से अपना काम निपटा कर घर लौट आयी थी, उसकी कामवाली सब साफ़ सफाई कर रही थी, उसे देख कर उसको चिंता होने लगी, वो कैसे भी उसे भेजना चाहती थी.

कामवाली : आज आप जल्दी आ गयी?

भार्गवी : है, काम जल्दी ख़तम हो गया आज.

कामवाली : चाय बना दू?

भार्गवी : है बना दो (वो कैसे उसको यहाँ से भेजे ये समाज नहीं आ रहा था, क्यों की ये उसका रोज़ का काम था, ऐसे कैसे वो उसको कह दे की आज चली जाओ, में सब कर लुंगी, वो कुछ पूछेगी तो क्या जवाब दूंगी, वो इसी उधेड़बुन में लगी हुई थी, उसको कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, उसने चाय पि और फिर नहाने चली गयी, उसके जहँ में बार बार शिव hi आ रहा था, वो नंगी कड़ी थी, पानी उसके शरीर को भिगो रहा था, उसका हाथ अपने आप hi अपने स्तन पर चला गया और उसको वो सहलाने lagi)Shhhh शीइइइइइव, जल्दी आ जाओ यार, अब बर्दास्त नहीं हो रहा. (वो बाद बड़ा रही थी, शिव के आने की खबर से hi उसका ये हाल था, उसने अपने आपको संभाला और साबुन और शैम्पू से अच्छे से खुद को साफ़ किआ, बिना ब्रा पहने hi उसने घर में पहन ने वाले कपडे पहन लिए, निचे एक लेहंगा और उसके ऊपर शामे शर्ट. अक्सर वो ऐसे hi ढीले कपडे पहन लेती थी. तारो तजा हो कर वो बहार आयी और सोफे पर बेथ कर टीवी में न्यूज़ देखने लगी. करीब साढ़े 6 बजे के आस पास उसके घर की घंटी बजी, उसकी कामवाली किचन में काम कर रही थी.

भार्गवी : में देखती हु. (वो जानती थी की कोण होगा, उसका दिल धड़कने लगा, उसे शर्म भी आ रही थी, पर जैसे तैसे उसने दरवाजा खोला तो उसके अनुमान के मुताबित शिव hi था, उसको देख कर उसकी मुस्कराहट देख कर hi उसका दिल खुसी से भर गया, मान किआ की उसके गले लग जाये, पर कामवाली थी तो उसने अपने आपको sambhala)Hi.

शिव : (वो बहोत खूबसूरत लग रही थी, कोई भी मेकअप के बिना भी वो बहोत खूबसूरत दिखती थी, हलके भीगे बाल खुले हुए थे, मुझे पता नहीं था की कोई अंदर है, तो में उनको देख कर hi आगे बढ़ा और उनको अपनी बहो में भरने लगा)

भार्गवी : (घबरा कर थोड़ा पीछे हुई और शिव की और देख कर धीमी आवाज me)Bai है घर पे. (में संभल गया और खड़ा रहा, वो muskurayi)Khade क्यों हो आओ अंदर. (में उनके साथ अंदर गया, उन्होंने अपनी बाई को आवाज lagai)Pani लाना तो. (बाई पानी ले आयी, मेने पानी पिया और गिलास वापस दे दिया, वो चली gayi)Kaise हो?

शिव : दो पहर को तो मिले थे, वैसा hi hu(Unke चेहरे पर नर्वस्नेस साफ़ दिख रही थी) क्या हुआ?

भार्गवी : नहीं कुछ नहीं. (वो अपने आपको संभल ने लगी, क्यों की उसका भी दिल नहीं संभल रहा था, अब शिव उसके लिए कुछ खास hi था, उसको भी ये फॉर्मेलिटी अच्छी नहीं लग रही थी, पर बाई थी तो क्या करती) और सुनाओ, कैसा रहा कॉम्पिटिओं और वो सब कैसे हुआ? (में और वो दोनों बाते करने लगे, मेने उन्हें सब डिटेल में बताया, आधा घंटा बिट गया tha)Bahot अच्छा किआ, पर जरा संभल कर सब किआ करो, कानून इन सब की इजाजत नहीं देता, समाज रहे हो न मेरी बात. (हम दोनों एक hi सोफेपर बैठे थे, पीछे की और उनका किचन था, उनकी नजर बार बार उसी और जा रही थी)

शिव : (धीरे se)Kab जाएगी वो?

भार्गवी : (उसकी बात का मतलब समाज रही थी, वो शर्मा gayi)Khana बना कर जाएगी. तुम हे कुछ खाना है तो बोल दो, में कह देती हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Muje जो खाना है वो मेरे सामने है.

भार्गवी : (उसकी बातो से वो एक दम से शर्मा gayi)Mar खाओगे (उसको भी शिव का ऐसा बोलना बहोत अच्छा लगा था, वो भी कबसे बेचैन थी)

शिव : जो खिलाना है वो खिलाओ, बस जल्दी (कहते कहते शिव ने उनकी झंघ पर हाथ रख कर हलके से दबा दिया, भार्गवी घबरा गयी और किचन की और देखने लगी)

भार्गवी : (उसने बेचैनी से kaha)Thodi देर रुको न, वो है अभी. (में उनके थोड़ा नजदीक गया तो वो दर gayi)Kya कर रहे हो, थोड़ा तो सबर करो.

शिव : आपको देख कर सबर नहीं हो रहा है.

भार्गवी : (शिव उसके इतना नजदीक था की उसकी सांसे चढ़ने लगी थी, और उसका हाथ उसकी झंघ को सेहला रहा था, वो उसे पकड़ रही thi)Kya कर रहे हो यार, वो देख लेगी.

शिव : आप उसे भेज नहीं सकती थी (शिव झांग को सेहला रहा था और हलके हलके दबा रहा था)

भार्गवी : (वो उसका हाथ पकड़ने की कोशिस कर रही थी, उसकी सांसे उखड रही thi)Kya कहके भेजती, ये उसका रोज का काम है. (शिव का हाथ छूट के नजदीक पहुंच गया था, उसने अपने नाख़ून उसके हाथ पर गधा diye)Ruko न शहहहहह. (उसने फुसफुसाते हुए कहा) क्यों इतने बेशब्री हो रहे हो?

शिव : पता नहीं, आज आप जयदा hi खूबसूरत लग रही हो, ऊपर से आपके शरीर से आती खुसबू मुझे और पागल बना रही है. (भार्गवी भी बेचैन हो रही थी, उस से भी रहा नहीं जा रहा था, उसकी निगाहे कीतचने पर hi थी, में उनकी परेशानी समाज रहा tha)Niche आ jao(Mene सोफे के निचे बैठने को कहा)

भार्गवी : पागल हो गए हो क्या?

शिव : है हो गया हु, आओ निचे.





(कहते हुए में निचे बेथ गया, और उनको भी निचे खिंच लिया)

भार्गवी : आज सचमे पागल हो गए हो तुम. (वैसे वो जानती थी की बाई अभी खाना बना रही है तो बहार तो आएगी नहीं पर फिर भी उसको दर लग रहा था, पर साथ में ऐसे चोरी छुपे प्यार करने का मज़ा भी आ रहा था, जैसे hi वो निचे बैठी शिव ने उसे अपनी और खिंचा और उसके होठो को चूमने लगा, वो दर और उत्तेजना दोनों से कैंप रही थी, शिव उसके होठो को चूमे जा रहा था, ये पहला ऐसा लड़का था जो उसकी एक नहीं सुनता था और उसके ऊपर हावी हो जाता था, उसे वो पसंद भी था, उसके होठ चूसते चूसते वो उसके स्तन दबाने लगा, वो छूटना चाहती थी पर उसकी पकड़ काफी मजबूत थी या फिर उसके छूटने के प्रयास में ज्यादा दम नहीं tha)Ummmm उम्मम्मम शिईयिव (घुटी घुटी आवाज में hi वो बोल रही थी, थोड़ी देर बाद जब शिव ने उसके होठ छोड़े तो वो जोर जोर से हांफ रही थी, उस से बोलै भी नहीं जा रहा था, वो शिव को मीठी नाराजगी से देख रही थी, पर शिव तो पागल हो रहा था, उसने शर्ट के ऊपर के दो बटन खोल दिए और एक स्तन को अपने हाथ में भर लिया, भार्गवी मचल कर रह gayi)Shhhhh रुकना यार, शहहहहह इतनी भी क्या जल्दी है तुम्हे?





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(वो तो जैसे उसे सुन hi नहीं रहा था, वो उसके गले की और बढ़ा और उसे चाटने laga)Shhhh मा, क्या कर रहे हो यार (उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसने रिक्वेस्ट ki)Maan जाओ न बाबू, थोड़ी देर बस, फिर जो चाहे कर लेना.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं होगा, मेरा ध्यान है वह पर, अगर आहत हुई तो में अलग हो जाऊंगा.

भार्गवी : (मीठे गुस्से से देखते hue)Kya अलग हो जाऊंगा, मेरी हालत देख रहे हो, उसे देख कर hi पता चल जायेगा. (वो मुस्कुराया पर रुका नहीं, और कही न कही वो भी नहीं चाहती थी की वो रुके, उसने दूसरे स्तन को भी बहार निकल लिए, और उसे सहलाते हुए मसलने लगा,





भार्गवी की हालत ख़राब थी, एक और दर था तो दूसरी और कही ज्यादा मज़ा था, उसका शरीर कैंप रहा था, ऐसा पहली बार वो अनुभव कर रही थी, अपनी आवाज को दबा रही थी ताकि बाई सुन न le)Shhhh सीईव शहहहहह.

शिव : मज़ा आ रहा है? (भार्गवी ने नाराजगी से देखा पर है कहा, मुझे भी ऐसे बहोत मज़ा आ रहा था, मेने एक हाथ उनकी छूट पर रख दिया और उसे सहलाने लगा तो वो फिर मेरा हाथ रोकने लगी, कपडे के ऊपर से hi मुझे छूट का आभास हो रहा था, वो नरम नरम होठ मुझे अनुभव हो रहे थे)

भार्गवी : शह्ह्ह्ह, मात कर यार, शहहह कंट्रोल नहीं हो रहा मुझसे शह्ह्ह्हह्ह. (पर कण्ट्रोल तो मुझे भी नहीं हो रहा था, मेने उनकी पजामी में हाथ दाल दिया, वो बेबसी से मुझे देखने लगी और मेरा हाथ पकड़ने lagi)Shhhhh मात करना शह्ह्ह्ह.





शिव : (उनके कान की लौ को चूसते hue)Kuchh नहीं होगा, (मुझे अपने हाथ पर चिप छिपे रास का एहसास हो रहा tha)apki पंतय तो भीग गयी है.

भार्गवी : (शरमाते hue)Aisa करोगे तो वो तो होगा hi, प्लीज अभी रुक जाओ न, बहोत कर लिया. (पर में छूट को दबाते हुए उस से खेलता रहा, वो मुझे रोनेवाली सकल से देख रही थी, उनसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, में झुका और उनके रसीले होतो को चूसने लगा, वो भी मेरे होतो को चूसने लगी,





मेने उन्हें लेटाया और एक बार किचन की और नजर डाली, वो अभी भी खाना बनाने में व्यस्त thi)(Bhargavi लेटने से इंकार कर रही थी, वो उसको रोकने का प्रयास कर रही थी, पर जैसे आज वो किसी और hi मूड में tha)Kya कर रहे हो, बस अब और नहीं शिव.

शिव : प्लीज यार, थोड़ी सी पजामी निचे करने दो, मुझे वो देखनी है.

भार्गवी : पागल हो गए हो क्या, मेने कहा न उसके जाने के बाद जो करना है कर लेना, अभी नहीं, प्लीज संजो न यार. उसने देख लिया तो गजब हो जायेगा.

शिव : क्या हो जायेगा, एक न एक दिन तो सबको पता चलना hi है न, क्या आप हमेशा इस रिश्ते को छुपा के रखना चाहती है, कभी न कभी तो दुनियाको पता चलेगा hi की हम दोनों के बिच क्या रिस्ता है. (वो मुझे देख रही थी और सोच रही thi)Kya सोच रही हो?

भार्गवी : भले पता चले पर भी बताना जरुरी है क्या, अभी तुम उस आगे पर नहीं पहुंचे की शादी कर लो, समाज रहे हो न.

शिव : सब समझता हु, और मेने कहा न में ध्यान रख रहा हु, बस एक बार देखने दो.

भार्गवी : तुम मानोगे नहीं है न (वो बस मुझे देख रही थी, में मुस्कुराया और उनकी पजामी को थोड़ा निचे सरकाया और पेअर ऊपर कर के छूट को देखने लगा, गुलाबी पंतय में कैद थी वो पर रास से चिपक गयी थी जिस से छूट का आकर स्पस्ट दिख रहा था,





में छूट को सहलाने लगा, वो अपनी सिस्किअ रोकने का प्रयास कर रही थी, थोड़ी देर bad)Bas देख लिया न अब सीधे हो जाओ.

शिव : रुको न, थोड़ा प्यार भी करने दो. (कहते हुए में झुक गया और पंतय के ऊपर से hi छूट को चाटने और चूसने लगा)





भार्गवी : शह्ह्ह्ह तुम आज मरवाओगे मुझे शह्ह्ह्ह बस करो न यार, (छूट की चटाई से वो भी पिघलती जा रही थी, उसने भी अपने पेअर थोड़े और फैला दिए और शिव के शिर को सहलाने लगी, उसे भी आनंद आ रहा था, पर उसका ध्यान किचन से आती आवाजों पर hi था, ऐसे चोरी छुपे करने का एक अलग hi आनंद वो महसूस कर रही थी. पर उस से बर्दास्त भी नहीं हो रहा था, और शिव कहा रुक रहा था, उसने पंतय को थोड़ा खिसकाया और नंगी छूट पर अपने होठ रख diye)Shhhhhhhh (बड़ी मुश्किल से उसने अपनी आवाज को कण्ट्रोल किआ, चिप छिपे रास से पूरी भीग चुकी छूट को वो बड़े प्यार से चाट रहा था, आखिर थी तो वो भी एक औरत, वो बस लेते लेते अपनी छूट की चटाई का आनंद लेने lagi)Shhhhhh शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव उसकी पंतय उतरने लगा तो उसने भी साथ दिया, पंतय भी अब उसकी झंगो पर चढ़ी थी, छूट के छेड़ में शिव ने ऊँगली दाल दी और अंदर बहार करने लगा, और साथ में उसे चाटने भी लगा)





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शहहहहह शिईयिव बस करना शहहहहह अब बर्दास्त नहीं हो रहा यार शह्ह्हह्ह्ह्ह कितना करेगा शह्ह्ह्हह्ह. (पर वो कहा रुक रहा था, उसे तो अपनी मन चाही चीज मिल गयी थी, और उसके अंदर से निकलते रास को वो बड़े चाव से पि रहा tha)Shhhhh बस यार शहहहहह (पुरे कमरे में छूट रास की गंध फ़ैल रही thi)Shhhhhhh बस कर शहहह में बर्दास्त नहीं कर पाऊँगी शह्ह्ह्हह्ह. (मेने उनकी और देखा तो वो बेबसी से मुझे देख रही थी और बिनती कर रही थी रुकने को, में रुक गया और सोफे पर बेथ गया, मेने किचन में देखा तो शायद वो रोटियां बेल रही थी, अभी भी वक़्त था, मेरा लुंड भी पूरी तरह अकड़ गया था, मेने पंत खोली और लुंड को बहार nikala)(Bhargavi ने वापस अपनी पंतय और पजामी पहन ली थी, जब उसकी नजर शिव पर पड़ी तो उसका लुंड बहार था, दो पल के लिए तो उस प्यारे अंग पर उसकी निगाहे चिपक गयी, पर फिर उसको बाई का ख्याल आया, घुटनो पर खड़े हो कर उसने किचन में देखा, वो काम में व्यस्त थी, वो समज रही थी की शिव क्या कहेगा पर वो अभी भी थोड़ी दरी हुई थी, पर लुंड को देख कर उसकी भी हालत खरब हो रही थी, वो बेबसी से कभी लुंड को तो कभी शिव को देख रही थी.)

शिव : आओ न, देख क्या रही हो.

भार्गवी : (थोड़ी आगे hui)Tum मानोगे नहीं शिव, थोड़ी देर रुक जावा यार.

शिव : कुछ नहीं होगा (कहते हुए उसने भार्गवी के शिर को खिंचा तो वो लुंड के पास पहुंच गयी, वो मन करने लगी पर शिव ने उसको झुका दिया और आखिर कर भार्गवी ने भी लुंड मुँह में ले hi लिया, वो तो वैसे भी तड़प रही थी, गरम गरम लुंड का एहसास होतेहि वो अपनी जीभी चलते हुए उसे चूसने lagi)Shhhhh है ऐसे hi.





(भार्गवी ने थोड़े गुस्से से मुस्कुराते हुए उसे देखा, पर लुंड को चूसना जारी rakkha)Thoda और अंदर लो (उसने भार्गवी के शिर को लुंड पर दबा डीएम भार्गवी अपने हाथ पर जोर दे कर उसे रोकना चाहती थी पर उसकी ताकत कही ज्यादा थी, आखिर कर उसने हर मान कर उसे करने दिया, वो उसके धीर को दबा कर अपने लुंड पर अंदर बहार कर रहा था, भार्गवी जोपूरे दिन सब पर हुकुम चलती रहती थी अभी वो किसी के इसरो पर नाच रही थी, और उसको ये अच्छा भी लग रहा था, जिस तरह से शिव उस पर अपना हक़ जाता रहा था वो उसे भी बहोत पसंद था, वो कभी कभी प्यार भरे गुस्से से उसे देखती पर लुंड को बराबर चूस रही थी.)





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तभी अंदर से बर्तनो की आवाजे आने लगी जो बता रही थी की वो सब सही कर रही है, तो भार्गवी ने जोर दे कर अपने आपको छुड़ाया, और कड़ी हो गयी, और बाथरूम की और भाग गयी, शिव ने भी अपने आपको सही किआ, लुंड अंदर नहीं जा रहा था तो बस शर्ट से धक् दिया और एक तकिया गॉड में ले लिया, और टीवी देखने का ढोंग करने लगा, थोड़ी देर बाद भार्गवी वापस आयी और उसी वक़्त बाई भी किचन से बहार आयी.

बाई : दीदी, खाना लगा दू?

भार्गवी : नहीं अभी नहीं, थोड़ी देर बाद खाएंगे. (वो बाई नाक से कुछ सूंघने का प्रयास करने लगी, भार्गवी समाज गयी पर अनजान बनते hue)Kya हुआ?

बाई : कोई बदबू आ रही है न दीदी.

भार्गवी : (उसने भी सूंघने का नाटक kia)Nahi तो, मुझे तो कोई नहीं आ रही, तुम्हे आ रही है शिव (उसने भी वैसा hi नाटक किआ और न kaha)Tumhe कोई भ्रम हो रहा है, शायद तुम्हारे कपड़ो पर कुछ लग गया होगा इस लिए तुम्हे hi आ रही है, हो गया सब काम?

बाई है दीदी. और कोई काम है?

भार्गवी : नहीं और कोई काम नहीं है.

बाई : तो में जाऊ?

भार्गवी : है. (वो दरवाजे की और बढ़ गयी, भार्गवी भी उसके पीछे पीछे गयी, वो बहार चली गयी, भार्गवी वही कड़ी उसके दूर जाने का इंतजार करती रही, जब वो चली गयी तो दरवाजा बंद कर के शिव की और aayi)Tumhe जरा भी अकाल नहीं है, क्या कर रहे थे तुम. (जूठा गुस्सा दिखते हुए वो उसके पास गयी पर शिव तो पहले से hi तैयार था, उसने भार्गवी का हाथ पकड़ा और अपनी और खिंचा, वो धड़ाम से उसकी गॉड में गिरी और शिव उसको अपने निचे करते हुए उसके होठो पर टूट पड़ा, भार्गवी छूटने का प्रयास करती रही पर नाकाम रही तो उसने भी प्रयास छोड़ दिया, और वो भी उसका साथ देने लगी, दोनों थोड़ी देर तक एक दूसरे को जोरो से किश करने लगे, दोनों काफी देर से गरम हो चुके थे, थोड़ी देर बाद शिव थोड़ा ऊपर हुआ और उनकी आँखों में देखने लगा, भार्गवी एक दम से मुस्कुरा दी और फिर से उसको अपनी और खिंच कर उसके होठो पर टूट पड़ी, थोड़ी देर बाद फिर दोनों एक दूसरे को देख कर हसने lage)Marungi में तुम्हे. (मुस्कुराते हुए उसने कहा)

शिव : मरूंगा तो में अभी.

भार्गवी : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Bahot गंदे होते जा रहे हो तुम.

शिव : (वो उनके ऊपर से उठा और अपने कपडे निकलने laga)Abhi देखा कहा है, (मुस्कुराते हुए में कपडे उतरने लगा और वो मुझे hi मुस्कुराते हुए देख रही थी, पंत बनियान और शर निकल कर में अंडरवियर में हो गया, मेरा लुंड पूरी औकात पर था, जिसे वो मुस्कुराते हुए देख रही thi)Kya देख रही हो, (वो और बड़ी मुस्कान से मेरी आँखों में देखने लगी) अपने कपडे भी उतरो.

भार्गवी : (नखरा करते hue)Muje नहीं उतरने, में तुम्हारी तरह बेशर्म नहीं हु.

शिव : (मेने उनका हाथ पकड़ कर खिंच कर खड़ा कर diya)Me निकल देता हु फिर. (कहते हुए में उनके शर्ट का बटन खोने लगा)

भार्गवी : कितने बे शर्म हो गए हो न तुम (उसने मुस्कुराते हुए कहा और साथ में उसकी मदद भी कर रही थी)

शिव : आपने सुना नहीं है शायद, जिसने की शर्म उसके फूटे करम. (मेने शर्ट निकल कर फेंक दी और पजामी को भी निचे सरका दिया, अब वो भी सीरत पंतय में थी, उनके गोर बदन को देख कर में उनसे पीछे से लिपट गया और उनके गर्म जिस्म को महसूस करने laga)Bahot गर्म हो आप, (कहते हुए मेने उनके स्तन को जोरो से मसल दिया)

भार्गवी : आआअह्ह्ह्ह, अहिस्ताआआ, दर्द हो रहा है यार.

शिव : सॉरी, पर आपको देख कर रहा नहीं गाय.

भार्गवी : ऐसा क्या हे मुजमे जो इतने पागल हो रहे हो.

शिव : शहहहहह ये बेदाग बदन, ऊपर से और निचे से हर जगह से एक दम कड़क हो आप, (शिव के हाथ स्तन और पेट पर हर जगह घूम रहे थे, और वो गले पर अपने गाल रगड़ रहा था)

भार्गवी : (अपनी तारीफ सुन कर उसे भी अच्छा लग रहा था, और शिव के ऐस छूने से वो भी बहोत गरम हो रही थी ऊपर से उसका वो लुंड पीछे चुभ रहा tha)Shhhhhhhh इतनी पसंद हु तुम्हे?

शिव : है बहोत पसंद हो, मान करता है खा jau(Kehte हुए उसने कंधे पर हलके से अपने दन्त गदा दिए)

भार्गवी : शह्ह्ह्हह्ह तो खा जाओ न, किसने रोका है तुम्हे (शिव का हाथ पंतय में चला gaya)Shhhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्ह पागल कर डोज तुम मुझे शहहहहह (छूट को मसलते हुए शिव ने ऊँगली फिर से छूट में दाल दी तो भार्गवी ने अपने पेअर फैला diye)Shhhhhhh शीइइइइव shhhhhhhhhhh, रोज़ क्यों नहीं आते तुम शहहहहह मुझे तुम्हारी बहोत याद आती है यार.

शिव : ऐसे तड़प कर मिलने का आनंद hi कुछ और होता है, (छूट को सहलाते hue)Kitna पानी छोड़ रही है ye(Bhargavi शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी, शिव उसकी छूट में ऊँगली कर रहा था उसने भी अपना हाथ पीछे किआ और शिव के लुंड को पदक कर दबाने lagi)Shhhhhhh, कोई सोच नहीं सकता की आप ऐसा सब भी करती होगी.

भार्गवी : (शरमाते hue)Kyu में लड़की नहीं हु क्या, मेरी भी अपनी निजी जिंदगी है. मेरा भी राजकुमार है जो मुझे पसंद करता है और मेरे शरीर का मज़ा लेता है. शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव आहिस्ता (शिव की ऊँगली जल्दी जल्दी अंदर बहार हो रही थी)

शिव : यही करना है की अंदर बैडरूम में?

भार्गवी : जहा तुम्हारी मर्जी, पूरा घर तुम्हारा है.

शिव : और आप?

भार्गवी : वो तो कब की तुम्हारी हो चुकी शिव. (मेने उन्हें सोफे पर धक्का दिया तो वो सोफे पर चढ़ कर घोड़ी बन गयी, मेने उनकी पंतय के ऊपर से hi उनके कूल्हों को मसल diya)Shhhhhhhh मेरा जाएं शह्ह्ह्हह्ह तुम पागल कर देते हो मुझे (मेने उनकी पंतय को निचे सरकाया और कूल्हों की दरार पर अपनी जीभी फिराई, गरम गरम दरार को में महसूस कर रहा था)





शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव shhhhh(Mene पंतय पूरी निचे घुटनो पर कर दी, और कूल्हों को फैला कर देखने लगा, छूट पूरी तरह से भीग चुकी थी, बल भी पुरे भीगे हुए थे, गांड का भूरा छेड़ भी उभर आया था, मुझसे रहा नहीं आगया और गांड के छेड़ को चाटने laga)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह उम्मम्मम्म ummmmmm(Wo अपने hi हाथ को चाटने lagi)Shhhhhh उम्मम्मम्मम. (मेने कूल्हे और फैलाये और छूट पर मुँह रख दिया और जोरो से चुने laga)shhhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (वो अपनी छूट चटाई का आनद लेती रही और में बड़ी सिद्दत से उसे चाट ता raha)Shhhhh तुजे वो बहोत पसंद है न शह्ह्हह्ह्ह्ह उसके पीछे hi पद जाता है बस.

शिव : Ha,aapki छूट बहोत स्वादिस्ट है. (उन्होंने मुस्कुराते हुए पीछे मुद कर dekha)Par ये इतना पानी क्यों बहा रही है.

भार्गवी : (फिर शर्मा गयी और kaha)Use वो चाहिए.

शिव : (में भी muskuraya)Kya चाहिए? (उन्होंने शर्मीली मुस्कान से मुझे dekha)Bolo न क्या चाहिए?

भार्गवी : (उसे बहोत शर्म आ रही thi)Wo, लाहाण्ड. (बोलते बोलते चुका चेहरा लाल हो गया)

शिव : तो डालदू लुंड (उन्होंने शरमाते हुए है कहा, वैसे भी में गरम था, मेने अपना ुंडेरवेर ुअत्तर दिया और लुंड पर थूक लगाया, छूट तो पहले से hi गीली थी, मेने लुंड पकड़ कर छूट पर घिसा (भार्गवी ने अपनी आंखे बंद कर दी, और लुंड का इंतजार करने लगी, शिव ने उसे ज्यादा तड़पाया नहीं और लुंड उसके छेड़ को फैलते हुए उसके अंदर उतरने लगा, छूट पूरी फ़ैल गयी, उसकी आ भी निकल गयी)





भार्गवी : Shiiiiiiiiiiv, shhhhhhhhhhh. (पर लुंड और गहराई में उतरता रहा, उसने मजबूती से सोफे को पकड़ liya)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv. (आहिस्ता आहिस्ता लुंड उसकी छूट को फैलता हुआ उसके आखिरी छोर पर जा लगा, वो रुक गया, भार्गवी ने रहत की साँस ली, वो जोर जोर से सांसे ले रही thi)Fuuuuuu, फूऊऊऊ फूऊऊऊ.

शिव : आप ठीक हो? (भार्गवी ने है में गर्दन हिलायी, में देख रहा था की लुंड ने छूट को पूरा गोल फैला दिया है, इस नज़ारे को देख कर मेरे लुंड ने ठुमका मारा, में उस गोर कूल्हों को सहलाने लगा, फिर मेने लुंड वापस खिंचा, लुंड पर भी छूट का रास लग गया था, थोड़ा बाहर खिंच कर मेने फिर अंदर किआ, ऐसे hi दो तीन बार किआ, वो जोर जोर से सांसे ले रही थी, उनकी फुक्कार मुझे भी सुनाई दे रही थी, मेने उस हसीना की कमर पकड़ी और लुंड हो होल होल अंदर बहार करने लगा, उन्होंने अपने पेअर एडजस्ट किये ताकि लुंड आसानी से अंदर बहार हो सके, में हलके हलके धक्के लगाने लगा)

भार्गवी : शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह. (में लगातार अंदर बहार कर रहा था, वो सिसक रही थी, छूट से ढेर सारा पानी निकल रहा था, मेने एक हाथ अधया और उनके स्तन को मसलते हुए लुंड अंदर बहार करने लगा तो वो थोड़ा ऊपर उठ गयी ताकि में अच्छे से उनके स्तन पकड़ saku)Shhhhhhh शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : मज़ा आ रहा है?

भार्गवी : शहहह हाआआ शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : आपकी छूट अंदर से भी बहोत गर्म है.

भार्गवी : शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह (अंदर तक गहरे धक्को से छूट में बहोत मज़ा आ रहा था use)Muje आप आप मत कहो शिव शहहहहह प्लीज शह्ह्ह्हह्ह मुझे अपनी समज कर बात करो शह्ह्ह्हह्ह में तुम्हे अपने पति के रूप में महसूस करना चाहती हु शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे अपनी बीवी समाज कर बात करो शहहहहह. (वो बहोत कामुक सिस्किअ ले रही थी, और उनको और मज़ा चाहिए था, वो अपने सपने को जीना चाहती थी, मेने अपनी स्पीड बढ़ा दी, और कमर को पकड़ कर थोड़े जोर से धक्के लगाने लगा)

शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह ऐसे hi जाहां शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : तुम्हे अच्छा लग रहा है भाग? (मेरे ऐसा कहने पर उन्होंने मुझे देखा वो एकदम से आगे हुई जिस से मेरा लुंड निकल गया, वो सीधी हुई और सोफे पर बैठे बैठे hi अपनी बहे फैला कर मुझे अपने पास बुलाया, में जैसे hi गया वो मुझे अपने ऊपर खींचते हुए निचे लेट गयी और मेरे होठो पर टूट पड़ी, मेरा लुंड बहार था तो उसे पकड़ कर उन्होंने खुदपानी छूट पर लगाया और मेरी कमर पकड़ कर अपने अंदर लिया और अपने पेअर मेरी कमर में लपेट दिए, और मुझे धक्के लगाने को कहने लगी, मेने फिर धक्के चालू कर दिए, थोड़ी देर वो मेरे होठो को चूमती रही पर फिर उनसे सं लेना दूभर हो गया तो उन्होंने मेरे होठ छुड़े और मुझे प्यार से देखते हुए बोली)

भार्गवी : क्या कहा तुमने अभी मुझे?

शिव : (में उनकी बात समज रहा था, में मुस्कुराया और फिर bola)Meri भाग.

भार्गवी : (मेरे गले लगते hue)I लव यू मेरे जान, ी लव यू. ऐसे hi बुलाओ मुझे, आज ऐसे hi बात करो मुझसे शिव.

शिव : मेरी भाग (कहते हुए में उन्हें छोड़ने लगा)

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Shhhhh है ऐसे hi शिईयिव शह्ह्ह्ह मुझे ऐसे hi बुलाओ shhhhhhhhhh.





(में लगातार छोड़ रहा था, मेरे धक्के भी गहरे हो गए the)Shhhhh ऐसे hi जान शह्ह्ह्ह बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह, तुम्हारा लुंड मुझे अंदर तक महसूस हो रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वो बहोत मोटा है सीईव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे बहोत पसंद है वो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. ऐसे hi करो अपनी भाग को शहहहहह ऐसे hi छोड़ो मुझे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : तुम्हे अच्छा लगता है मेरा लुंड. (में जोर जोर से लुंड को अंदर थोक रहा था)





भार्गवी : (उसके चेहरे पर दर्द उभर आया था, उसकी सकल रोने जैसी हो रही thi)Shhhhhh अह्ह्ह्ह हआ शह्ह्ह्हह्ह मुझे बहोत अच्छा लगता है shhhhhhhhhh ऐसे hi करते रहो शहहहहह में झाड़नेवाली हु जाएं शह्ह्ह्हह्ह जोर से छोड़ो मुझे शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (वो मेरे गले को मेरे कंधे को चुम रही thi)I लव यू डार्लिंग शह्ह्ह्ह ऐसे hi अह्हह्ह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह में झाड़नेवाली हु शिईयिव शह्ह्ह्ह और जोरसे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aiiiiiiiiiiiiiiii (में दे दाना दान उन्हें छोड़ रहा था, पूरा सोफे हिल रहा था, वो और में दोनों पशीने से भीगे हुए the)Me गईइइइइइइ shhhhhhhhhh माआआआआ shiiiiiiiiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhhhh (वो झटके खाने लगी और झड़ने लगी, मेरा लुंड पर हो रही गरम फुहार मुझे महसूस हो रही थी, वो मुझसे पूरी तरह से छिपा गयी, वो मुझे हिलने तक नहीं दे रही थी. में थोड़ी देर रुक गया, काफी देर बाद उन्होंने अपनी पकड़ ढीली की, में थोड़ा ऊपर हुआ, वो पशीने से भीगे चेहरे से मुझे देख कर मुस्कुराने लगी, चेहरे पर चिपके हुए कुछ बालो को मेने हटाया)

शिव : माज़ा आया?

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Haaa सीईव तुम जादूगर हो यार.

शिव : और मेरा डंडा, जादू का डंडा.

भार्गवी : (खुल कर मुस्कुराते हुए हां में शिर हिलने लगी, फिर थोड़ी देर baad)Ander चलो, यहाँ जगह काम पद रही है. (में मुस्कुराया और लुंड बहार निकला, वो भी कड़ी हुई, मेने उन्हें अपनी बहो में उठा लिया वो मुझसे लिपट gayi)I लव यू जान.

शिव : (उनको उठा कर बैडरूम की और चलते hue)Abhi क्यों?

भार्गवी : तुम हरकते hi ऐसी करते हो, ये सब सपने होते है लड़कीओ के, तुम वो सब करते हो तो प्यार तो आना hi है. (मेने उन्हें बीएड पर रक्खा तो उन्होंने मेरा हाथ खिंच कर मुझे बीएड पर लेता दिया और मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया, में मुस्कुराते हुए उन्हें देख रहा था, वो मेरे लुंड को हिलाते हुए चूस रही थी, लुंड चूसने की आवाजे भी आ रही थी, साथ में वो मेरे निप्पल को भी कुरेद रही थी, मेने भी उनके कूल्हे को पकड़ कर अपनी और खिंच लिया वो अपने पेअर फैला कर मेरे ऊपर हो गयी





और अपनी छूट को मेरे मुँह के सामने कर दी. हम दोनों एक दूसरे के अंग को चूसने और चाटें लगे.





थोड़ी देर ये खेल चलता रहा, वो फिर गरम हो गयी थी, वो उठी और मेरे लुंड को अपनी छूट में लेते हुए बेथ गयी उस par)Shhhhhhhh कितना बड़ा हैए. (उनके चेरे पर दर्द उभर आया, में कुछ नहीं बोलै, वो एडजस्ट हो कर मेर लुंड को अपनी छूट में अंदर बहार करने लगी, वो अपना शिर झुका कर उसे hi देख रही थी)

शिव : क्या देख रही हो? (उन्होंने मेरी और देखा और मुस्कुराते हुए कहा)

भार्गवी : कैसे अंदर चला जाता है वो देख रही थी. (वो मेरी आँखों में देखते हुए ऊपर नकिहे होते हुए मुझे मज़ा देने लगी,





में भी मुस्कुराते हुए उन्हें देख रहा tha)Kya देख रहे हो?

शिव : तुम्हारा ये रूप.

भार्गवी : करना पड़ता है, शास्त्र भी कहते है की बीवी को बिस्तर पर रम्भा और उर्वशी बन न पड़ता है वर्ण कोई और उदा ले जाती है पति को.

शिव : पति????

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Dil से मनो तो सबकुछ वर्ण कुछ भी नहीं. कैसा लग रहा है पति देव, तुम्हारी बीवी तुम्हे मज़ा दे रही है की नहीं?

शिव : मेरी बीवी का तो जवाब hi नहीं, बहोत हॉट है वो (मेने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, वो लगातार ऊपर निचे हो रही थी, ऐसा करते हुए वो बहोत गरम हो चुकी थी, उनकी छूट फिर से पिचकने लगी थी)





भार्गवी :शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह यार में फिर से झाड़नेवाली हु शहहहहह क्या करते हो तुम शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो जोर जोर से अपने कूल्हे मेरी झांघो पर पटकने लगी, जिस से लुंड बच्चेदानी पर चोट करने लगा, उनके चेहरे पर भी दर्द उभर aaya)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या हो रहा है याआर शहहहहह शीइइइइव शहहहहह मुझे बहोत कुछ हो रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह (मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रखते hue)Shhhhh प्लीज दबाओ इससे शह्ह्हह्ह्ह्ह आईईईई शह्ह्ह्ह (वो अपनी गांड पटक रही थी, थप थप की आवाजे कमरे में गूंज रही thi)Shhhhhh शीइइइइइव में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह (वो जोर जोर से ऊपर निचे हो रही थी, इतनी म्हणत करने से वो पशीने से नाहा रही thi)Shhhh में गईइइइइइ शह्ह्हह्ह्ह्ह mumiiiiiiiiiii shhhhhhhhhhh. (वो धड़ाम से मेरे लुंड पर बेथ गयी और पूरी मेरे ऊपर फ़ैल गयी और हांफ ने लगी, में अब रुक नहीं सकता था तो मेने उन्हें पलट दिया और उनको निचे ले लिया और पेअर उठा कर लुंड अंदर दाल diya)Aiiiiiii शीइइइइइइव.

शिव : सॉरी जाएं, पर में नहीं रुक शक्ति. (उन्होंने रोनी सूरत से मुझे देखा पर में नहीं रुका और धक्के मरने लगा)





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यू अरे सो बेऔतीबुल माय लव. (वो मुस्कुरायी, पर हक्को से फिर से उसका चेहरा रोने जैसा हो gaya)Dard हो रहा है भाग?





भार्गवी : नहीं जान, मेरी चिंता मात करो, मुझे मज़ा hi आ रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह जैसे करना हो करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे सब अछ्हा hi लग रहा है.

शिव : तुम बहोत अच्छी हो जान. (मेरा लुंड अपनी रफ़्तार से अंदर बहार हो रहा था)

भार्गवी : (थोड़ी hi देर में वो भी गरम हो गयी थी और अपनी कमर ुंचक कर शिव का साथ दे रही thi)Shhhhhhh मेरे शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह माय लव शह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ लो मुझे शह्ह्ह्हह्ह और जोरसे शह्ह्ह्हह्ह aiiiiiiiiii मायआ शह्ह्ह्हह्ह तुम्हारा बहोत बड़ा है शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे बहोत पसंद है वो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह और करो शह्ह्हह्ह्ह्ह आआह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, तुम्हे मज़ा आ रहा है न? मुझे छोड़ना अच्छा लगता है तुम्हे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (में उसे देख रहा था और उसे चोदे जा रहा tha)Batao न जान, मुझे छोड़ना कैसा लग रहा है तुम्हे शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह.

शिव : तुम मस्त हो जाएं, तुम्हारी छूट भी बहोत टाइट है है शह्ह्ह्हह्ह मुझे निचोड़ रही है शह्ह्ह्हह्ह दर्द तो नहीं हो रहा न?

भार्गवी : (उसके पेअर कैंप रहे थे, लुंड बच्चेदानी का मुँह फैला कर अंदर घुसने की कोशिस कर रहा था, हल्का हल्का दर्द था उसे पर मज़ा कई गुना ज्यादा tha)Nahi जान शहहहहह में तेरी हु शहहहहह चाहे जैसे मर्जी करो shhhhhhhhhhhh.

शिव : हम्म्म्म हम्म्म हम्म्म (धक्के लगते hue)Sach में?

भार्गवी : अह्ह्ह्हह शहहहहह ह्म्म्मम्म हाआआआ शहहहहह मर गईइइइइइ शह्ह्ह्हह्ह. तुम्हारे साथ जो मजा है वैसा मेने कभी नहीं पाया शिव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म उम्मम्मम माय लव शहहह ummmmmm(Wo शिव को चुम रही थी, दोनों पसीना पसीना हो चुके the)(Mene लुंड बहार निकल लिया और उसे उल्टा कर दिया, पीछे से छूट में लुंड दाल diya)Aiiiiii मायआ शह्ह्हह्ह्ह्ह मर जाउंगी यार शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : कुछ नहीं होगा जान कुछ नहीं होगा उम् उम्म्म ummmm(Uske गले को चाटने और चूमने laga)Tumhare नरम नरम कूल्हे बहोत मस्त है जान.

भार्गवी : सब तुम्हारे लिए hi है शहहहहह मेरे पुरे शरीर पर तुम्हारा hi हक़ है शहहहहह आईईईई मुमीइइइइइइ शह्ह्हह्ह्ह्ह (में लगातार उसे निचे दबाये हुए उसे छोड़ रहा था, पशीने से शरीर फिसल रहे the)Shhhhh माआ आईईईई शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मर जाउंगी यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आराम से अह्हह्ह्ह्ह आईईईई.





शिव : मज़ा नहीं आ रहा हम्म्म हम्म्म्म बोलो.

भार्गवी : आईई शह्ह्ह्ह बहोत आ रहा है शह्ह्ह्हह्ह पर वो बहोत ज्यादा बड़ा है शहहहहह.

शिव : हम्म्म हम्म्म क्या बड़ा है?

भार्गवी : तुम्हारा लुंड आईई शहहहहह मेरी फैट जाएगी शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.

शिव : वो फटने के लिए hi होती है उम्म्म हम्म्म्म हम्म्म हम्म्म्म.





भार्गवी : शह्ह्ह्ह में फिर झाड़नेवाली हु सीईव शह्ह्ह्ह मायआ क्या हो रहा है शहहहहह में बर्दास्त नहीं कर प् रही शह्ह्ह्हह्ह आईईईई में गयी शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह बस्सस आह्ह्ह्हह बससससस शिईयिव शहहहहह बस्सस.

शिव : थोड़ी देर मेरी जान बस होने वाला hi है, कहा निकलू?

भार्गवी: जहा मन करे मायआ शहहहहह बस्स्स करो अब शहहहहह जल्दी शह्ह्ह्हह्ह में मरजाऊँगी यार शहहहहह.

शिव : में नहीं मरने दूंगा, (मेरा निकलने hi वाला था तो मेने लुंड बहार निकल लिया और उनकी पीठ पर वीर्य की बरसात करने लगा.

भार्गवी ने रहत की साँस ली और साथ में अपनी पीठ पर हो रही गरम बरसात उसे और रहत पहुंचने लगी, वो हांफ रही थी और आंखे बंद किये हुए अपने आपको सँभालने की कोशिस कर रही थी, उसकी छूट की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो खुल बंद हो रही थी, उसकी गांड का छेड़ भी खुल बंद हो रहा था, आये इस तूफान ने उसका अंग अंग तोड़ दिया था, वो बस हांफ रही थी, हिलने की भी ताकत नहीं बची थी उसमे. 10 पंद्रह मिनट दोनों लेते रहे, शिव सीधा था और भार्गवी उलटी. शिव ने उठ कर देखा तो उसकी पीठ पर अभी भी वीर्य था, उसने वह पड़ी पंतय ली और उसकी पीठ से वीर्य साफ़ करने लगा, भार्गवी ने मुस्कुरा के उसको देखा, सब साफ़ होने के बाद शिव ने पंतय साइड में रख दी, भार्गवी सीधी हो गयी. और बहे फैला कर शिव को अपने पास बुलाया और उसके गाल को चूमा.

भार्गवी : जान निकल देता हो तुम. (उसने मुस्कुराते हुए kaha)(Me फिर से उसके स्तन सहलाने laga)Shhhh क्या कर रहे हो, में थक गयी हु, और भूख भी लग रही है यार. (उसने शिव को धक्का दिया तो वो साइड में लुढ़क गया, वो कड़ी hui)Ahhhhhhhh मायआ. भगवन बचाये तुमसे तो. (कहते हुए वो लंगड़ाते हुए बाथरूम की और चली गयी, में उस नंगी हसीना के हिलते चुत्तड़ो को देख रहा था, थोड़ी देर बाद वो टॉवल लपेट कर बहार आयी, मुझे ऐसे hi नंगा लेता dekh)Utho अब, खाना नहीं खाना क्या?

शिव : कहते है न थोड़ी देर बाद, (कहते हुए उसने बहे फैलाई)

भार्गवी : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Marungi जो मुझे हाथ भी लगाया तो, उठो, पहले खाना कहते है, फिर जो चाहे कर लेना.

शिव : सच में करने डौगी?

भार्गवी : और क्या करू, नहीं करने दूंगी तो कही और भाग जाओगे (उसने मुस्कुरा कर kaha)Utho अब बहोत भूख लगी है. (में भी उठ गया, बाथरूम गया तब तक उन्होंने खाना लगा दिया था, में भी टॉवल लपेट कर आ गया, वो खाना परोस रही थी तो मेने उनके साइड से हाथ डालते हुए उनके स्तन पकड़ liye)SAch में मरूंगी अब, (पर में स्तन मसलता raha)Shhhh छोडो न यार, दर्द हो रहा hai(Usne रिक्वेस्ट वाले चेहरे से कहा, मेने उन्हें छोड़ दिया और पासवाली चेयर पर बेथ गया, वो मुस्कुराते हुए खाना निकलने लगी, फिर मुझे देखते hue)Pehle खा लो फिर तुम्हे खुस करती हु (में भी मुस्कुराया और खाने लगा, अभी खाना ख़तम हुआ था की मेरा फ़ोन बजने लगा, मेने पंत से फ़ोन निकला तो स्नेहा मैडम का था, मेने फ़ोन उठाया)

शिव : hello.

स्नेहा : कहा हो?

शिव : क्यों क्या हुआ?

स्नेहा : में और पवन तुम्हारे घर आये थे और तुम hi गायब हो, कब आ रहे हो?

शिव : आता हु बस.

स्नेहा : जल्दी आओ. (उन्होंने फ़ोन रख दिया)

भार्गवी : कोण है?

शिव : पवनसीर और स्नेहंदम घर आये है. (भार्गवी का चेहरा उतर gaya)Sorry यार, वो आये है तो मन भी नहीं कर सकता.

भार्गवी : (अपने आपको सँभालते हुए muskurayi)Koi बात नहीं, तुम जाओ, और है बाइक ले जाओ.

शिव : (मेने उसको पीछे से बहो में भर liya)I लव यू.

भार्गवी : (मुस्कुरा kar)Love यू तू जान, पर जल्दी मिलने आना है.

शिव : ठीक है. (मेने जल्दी से कपडे पहने, एक बार उन्हें बहो में भरा और घर के लिए निकल गया)
 
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