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अपडेट 9
दोनों दोस्त चुप चाप वहां से निकलकर वापिस घर आ जाते हैं अमित चुपचाप बिना कोई आवाज़ किये अपने कमरे में चला जाता है जहाँ पहले से hi कोई उसका इंतज़ार कर रहा था जैसे hi अमित अपने कमरे में घुसता है सामने देखकर हड़बड़ा जाता है
अब आगे-
सामने छोटी ममी बीएड पर बैठी अमित का hi इंतज़ार कर रही थी जिसे देखकर अमित हड़बड़ा गया
अमित को समझ नहीं आ रही थी क अब मामी क सवालों का क्या जवाब देगा, वहीँ दीपिका मन में ये सोच रही थी क इतनी रत को घर से बहार चोरों की तरह जाने का क्या कारन है कहीं अमित कुछ गलत तो नहीं कर रहा जो भी हो आज पूछना hi पड़ेगा क्या पता ऐसा कब से चल रहा हो
दीपिका: इतनी रत को कहाँ गया था ? तू कब से रातों को बहार जाने लग गया है? ऐसा कौन सा काम है जो तू रत क अँधेरे में करने लग गया है?
अमित : वो मैं वो वो बहार सैर करने गया था मेरे पेट में गैस हो रही थी
दीपिका: ाचा गैस है,, अब मुझसे झूठ बोलेगा क्या इतनी hi इज़्ज़त रह गयी है मेरी अब? सच सच बता कहाँ था किसके साथ था?
अमित: ममी ऐसा न कहो मैं आपकी कितनी इज़्ज़त करता हूँ मेरे दिल से पूछो
दीपिका: तो सच क्यों नहीं बताता, बोल कहना गया था?
अमित : संजीदा होते हुए) ममी प्लीज ऐसा मत कहिये मैं आपको सब सच सच बताऊंगा मगर अभी नहीं बता सकता आपको मेरी कसम अभी कोई सवाल मत पूछिए मैं वक़्त आने पर खुद बता दूंगा वडा करता हूँ बस इतना सुन लीजिये मैं कुछ भी गलत नहीं कर रहा हूँ जो कर रहा हूँ इस घर की भलाई क लिए कर रहा हूँ
दीपिका अमित की आँखों में सच्चाई और संजीदगी देखकर चुप कर जाती है और कमरे से बिना कोई बात किये निकल जाती है, अमित सोचने लगता है क ममी पता नहीं क्या क्या सोचेगी मेरे बारे में पर उन्हें सच्चाई भी तो नहीं बता सकता अगर उन्हें सचाई पता लगी तो उनका दिल टूट जायेगा
मगर उस मीणा का मुझे जल्द hi कुछ करना पड़ेगा कैसे छोटे मां को बेवक़ूफ़ बना कर उन्हें लूट रही है, यूँही सोचते सोचते अमित की आँख लग जाती है
दूसरी और दीपिका भी परेशां थी मगर उसे इस बात की तसल्ली थी क अमित कुछ गलत नहीं कर रहा है मगर बात ज़रूर कोई बड़ी है जो उसने अपनी कसम देदी सवाल न पूछने क लिए
सुबह सुबह अमित अपनी रूटीन से अखाड़े चला जाता है घर में दीपिका तैयार हो कर गौरी क कमरे में जाती है
दीपिका: दीदी आप तैयार हैं? जल्दी कीजिये हम कहीं लेट न हो जाएँ
गौरी अपने बीएड पर चादर तान कर लेती हुई थी दीपिका की आवाज़ सुनकर दीपिका की तरफ साइड करती है
गौरी: अरे छोटी मुझे माफ़ करना मैं नहीं जा सकुंगी तेरे साथ आज नहाते वक़्त पाऊँ फिसल गया था ज़रा पाऊँ में मोच आ गयी है तू कामिनी को लेजा साथ
दीपिका गौरी की आवाज़ से अंदाज़ा लगा लेती है वाक़ई वो तकलीफ में थी
दीपिका: दीदी ये कैसे हो गया अपने मुझे आवाज़ क्यों नहीं दी
गौरी: बस अचानक पाऊँ फिसल गया था और आवाज़ क्या देती तब तुम्हारे जेठ जी यहीं थे वही मुझे यहाँ तक ले ए, तू मेरी चिंता न कर मैंने गोली खा ली है तू कामिनी क साथ चली जा
दीपिका: नहीं दीदी आपको देखभाल की ज़रूरत है मैं आपको ऐसे छोड़कर नहीं जा सकती हम फिर चले जायेंगे जब आप ठीक हो जायेंगे
गौरी: नहीं छोटी तू जा ऐसे कामो में देरी नहीं करते मैं अपना ध्यान रख लुंगी तू जा ये मेरा हुकम है
दीपिका: अगर कामिनी दीदी भी मेरे साथ चले गए तो घर का खाना कौन देखेगा? आपका ध्यान कौन रखेगा? नहीं नहीं आप रहने दीजिये
गौरी: नहीं छोटी तेरा जाना ज़रूरी है तू एक काम कर तू अमित को साथ लेजा उसको बोल आज स्कूल से छुट्टी करले
दीपिका: पर दीदी
गौरी: पर वॉर नहीं तू अभी उसे जा कर बोल दे देख आ गया होगा वो भी
दीपिका: ाचा दीदी मैं देखती हूँ
दीपिका अमित क कमरे में जाती है जहाँ अमित यूनिफार्म पहनकर तैयार हो रहा था स्कूल क लिए
दीपिका उसे जाकर बता देती है क कपडे बदल ले आज स्कूल से छुट्टी कर आज तुझे मेरे साथ शहर जाना है, इतना कहकर दीपिका रसोई में अमित को नाश्ता बनाकर देने चली जाती है
अमित : मन में ) लगता है छोटी ममी कल रत की बात क लिए गुस्सा हैं और मुझसे आज उसी क बारे में बात करेंगी अब कैसे समझों इनको जो मैं कर रहा हूँ इन्ही क लिए कर रहा हूँ
थोड़ी देर में अमित कपडे बदल कर रसोई में नाश्ता करते है और दीपिका उसे जल्दी करने को कहती है, दोनों जल्दी से बस स्टॉप जाते हैं और शहर क लिए बस पकड़ लेते हैं बस में अभी भीड़ नहीं थी सो दोनों को सीट मिल जाती है और दोनों शहर को निकल जाते हैं
रस्ते में दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा था फिर इस चुप्पी को अमित hi तोड़ता है
अमित : हम ऐसे अचानक कहाँ जा रहे हैं ममी? सब ठीक तो है?
दीपिका: हाँ हाँ सब ठीक है ऐसी कोई बात नहीं है, असल में आज दीदी जाने वाली थी मेरे साथ मगर उनके पाऊँ में मोच आ गयी सुबह सुबह इस लिए उनकी जगह तुम्हे ले जा रही हूँ
इतना सुनकर अमित चैन की सांस लेता है फिर उसे अचानक बात पर ध्यान जाता है और हड़बड़ा कर पूछता है
अमित: क्या माँ को मोच आ गयी मगर कैसे? किसी ने मुझे बताया क्यों नहीं
दीपिका: मुझे भी अभी थोड़ी देर पहले hi बताया उन्होंने , वक़्त नहीं था इस लिए नहीं बता पायी , वैसे घबराने वाली बात नहीं है तू चिंता मत कर घर पर कामिनी दीदी हैं उनके पास
अमित: वैसे हम शहर किस लिए जा रहे हैं अगर माँ को मोच आ गयी थी रहने देते शहर जाना
दीपिका: मैंने तो कहा था मगर दीदी नहीं मने, असल में पिछली बार हम दोनों जब शहर ए थे डॉक्टर ने मेरी जाँच करने क लिए टेस्ट लिए थे आज उनकी रिपोर्ट्स देनी थी उन्होंने इसलिए जाना ज़रूरी था, इसीलिए दीदी ने तुझे साथ लेजाने को कह दिया
अमित: चिंता से पूछता है ) आपको क्या हुआ है किस चीज़ का टेस्ट करवाया था अपने?
दीपिका: अरे कुछ नहीं हुआ मुझे बस है कोई टेस्ट वो मैं नहीं बता सकती तुझे अब बस कोई और बात करो
दोनों ऐसे hi इधर उधर की बातें करते शहर पहुँच जाते हैं जहाँ से ऑटो कर क दोनों डॉक्टर क क्लिनिक पहुँच जाते हैं आधे घंटे की वेट क बाद दीपिका को डॉक्टर केबिन में बुलाती है ये एक लेडीज डॉक्टर थी जो बेऔलाद लोगों का इलाज करती थी दीपिका अमित को बहार hi रुकने का बोलकर अंदर चली हटी है
डॉ. : आइये दीपिका जी बैठिये
दीपिका: गुड मॉर्निंग डॉ प्लीज बताइये मेरी रिपोर्ट्स कैसी हैं? मैं माँ तो बन सकती हूँ न
डॉ. : अरे बैठिये तो सही
देखिये मैंने आपकी साडी रिपोर्ट्स चेक कर्ली हैं आप बिलकुल परफेक्ट हैं आप में कोई कमी नहीं है आप पूरी तरह से हेअल्थी हैं
मुझे लगता है क कमी आपके पति में है आप एक बार उन्हें मेरे क्लिनिक ले आइये हम उनको चेक करलेंगे
दीपिका: अपनी रिपोर्ट्स क बारे सुनकर खुश हो जाती है क वो माँ बन सकती है मगर डॉ की दूसरी बात सुनकर उसका चेहरा उतर जाता है
‘ नहीं डॉक्टर वो कभी नहीं मानेंगे भला कौन मरद अपनी कमजोरी मानेगा और मेरे हस्बैंड तो वैसे भी बहुत ज़िद्दी हैं ‘
डॉ. : देखिये मैडम आपकी रिपोर्ट्स क बिनाह पर मैं 100% सूरे हूँ कमी आपमें नहीं आपके पति में है ऐसे में माँ बनने क दो hi रस्ते हैं आपके पास
दीपिका: बताइये डॉ मैं कुछ भी करुँगी प्लीज आप मुझे माँ बना दीजिये बताइये कितने पैसे लगेंगे
डॉ. : देखिये ये तो ज़ाहिर है क आपके पति क वीर्य में hi कमी होगी इसीलिए आप माँ नहीं बन प् रही ऐसे में सेकंड ऑप्शन एहि होती है क किसी दूसरे क वीर्य को आपकी बच्चेदानी में इम्प्लांट कर क आपको माँ बनाया जाये
और इस काम क लिए मेडिकल साइंस ने आजकल बहुत तरक्की कर्ली है
एक छोटे से ऑपरेशन क ज़रिये आपकी बच्चेदानी में वीर्य डाला जायेगा और आपको प्रेग्नेंट किया जायेगा
दीपिका: डॉ इसमें कोई रिस्क तो नहीं होता?
डॉ. : नहीं रिस्क वाली कोई बात नहीं, हाँ कई बार एक बार की कोशिश से कुछ औरतें मिस भी हो जाती हैं तो उन्हें फिर से एक मौका दिया जाता है
दीपिका: डॉ इससे बचा तो स्वस्थ होता है न
डॉ. : देखिये बचे में गन तो उसके माँ बाप से hi एते हैं, जैसे गन उसके माता पिता में होंगे वैसे hi बचे में होंगे अब हम इसके बारे में तो गारंटी नहीं दे सकते न
दीपिका: डॉ इसमें कितना खर्च आएगा?
डॉ. : यही कोई 1.5 लाख से 2 लाख रूपए
दीपिका डॉ से ऑपरेशन की फीस सुनकर हैरान हो जाती है और उसे सोचकर बताने का कहकर बहार निकल अति है,, बहार अमित ममी का वेट कर रहा था जब वो बहार अति है तो अमित चुपचाप उसके साथ चल पड़ता है
दीपिका ख़ामोशी से चिंता में डूबी चली जा रही थी साथ में अमित भी चला जा रहा था,
अमित ने डॉ क केबिन क बहार खड़े होकर डॉ की बातें सुनली थी मगर वो शो नहीं करता और न hi कोई सवाल करता है वो जनता था ममी टेंशन में है इसलिए वो ममी का मूड ठीक करने क लिए कहता है
अमित : क्या ममी आप भी बस भागे जा रही हैं आइये कुछ खा लेते हैं
दीपिका: नहीं अमित मेरा मूड नहीं है तुझे भूख लगी है तो तू खा ले
अमित : ऐसे कैसे मूड नहीं है आपको भी मेरे साथ चलना होगा, भूल गयी आप उसदिन आपने क्या कहा था ?
दीपिका: कब ? क्या कहा था?
अमित : अरे मेरे जन्मदिन पर आपने कहा था न क आपको पार्टी चाहिए ! आज तो मौका है चलिए आज मैं पार्टी देता हूँ अपनी खास दोस्त को
दीपिका: नहीं अमित फिर कभी आज हम घर चलते हैं
अमित नहीं मंटा और अपना वास्ता देकर दीपिका को साथ ले जाता है एक रेस्टोरेंट में दीपिका भी उसका मन रखने क लिए चल पड़ती है
जहाँ दोनों हल्का फुल्का खा लेते हैं फिर अमित दीपिका को लेकर मार्किट में चला जाता हैं जहाँ उसे अपनी पसंद की सुन्दर स चप्पल लेकर देता है जब दोनों शॉप पर चप्पल लेने जाते हैं तो दुकानदार अमित से कहता है आइये भाईसाहब अपने लिए लेंगे या भाभी की लिए अमित शर्मा जाता है मगर दीपिका बात संभल लेती है
असल में अमित पहलवानी करने क कारन अपनी उम्र से बड़ा लगता था शरीर से बलिष्ठ था और दीपिका अभी 24/25 की दिखती थी अपनी सुंदरता क कारन
उसके बाद दोनों बस स्टॉप बस पकड़ने चले एते हैं, दीपिका अपने मन में अमित को लेकर बहुत खुश थी क वो कितना ाचा कितना केयरिंग है कैसे अपनी बातों में लगाकर उसने साडी टेंशन hi भुला डी और उसे पता है क अपने साथी को कैसे खुश रखना है कितनी अंडरस्टैंडिंग नेचर है काश कमलेश भी ऐसा होता
कुछ देर बाद दोनों बस में सवार हो जाते हैं बस में बहुत भीड़ थी दोनों को सीट नहीं मिलती मज़बूरी में खड़े होकर सफर करना पड़ता है
दीपिका: देखा मैंने कहा था न वापिस चलते हैं अब देख कितनी भीड़ है अगर उस वक़्त एते तो भीड़ न होती
अमित: ममी जी ये भीड़ तो हर बस में मिलेगी hi, ज़रा सोचिये हमने आज क्या क्या किया खाना पीना भी हो गया शॉपिंग भी और बातें भी
दीपिका: रहने दे रहने दे मुझे मत समझा वैसे थैंक्स मैं बहुत खुश हूँ तूने मुझे शॉपिंग करवाई और खाना भी खिलाया रेस्टोरेंट में
अमित: अरे क्या ममी हम तो दोस्त भी हैं न तो इसमें थैंक्स कैसा आपको पार्टी तो देनी hi थी
दोनों ऐसे बातें करते रहते हैं फिर नेक्स्ट स्टॉप से और लोग बस में घुस एते हैं भीड़ बाद जाती है और न चाहते हुए भी अमित पीछे से दीपिका क साथ चिपक जाता है, दीपिका भी समझती है क भीड़ hi इतनी है तो कोई क्या करे
ऐसे बस चलती रहती है बस को झटका लगता है जिससे की अमित दीपिका क ऊपर गिरने को होता है, दीपिका अमित क भर से थोड़ा आगे झुक जाती है और अमित का लैंड दीपिका क छुटड़ो क दरम्यान पहुँच जाता है दोनों जब सीधे होते हैं तो अमित का लैंड दीपिका को अपनी गांड क बीच महसूस होता है
वास्तव में गांड की गर्मी से अमित का बाबूराव उठ गया था मगर अमित का अभी इस तरफ ध्यान नहीं गया था
दीपिका मन में सोचने लगती है क अब क्या करे उसे शर्म आने लगती है अमित को कैसे कहे धीरे धीरे अमित क लैंड में सख्ती बढ़ती जाती है और वो पूरा लोहे की रोड जैसे सख्त सीधा दीपिका की गांड क बीच घुस रहा था
दीपिका लैंड की सख्ती से छुडासी होने लगती है आखिर कितने हफ्तों से वो चूड़ी नहीं थी लैंड की गर्मी पाकर छूट ने रोना शुरू कर दिया था
दीपिका से गर्मी बर्दाश्त नहीं होती न चाहते हुए भी वो काम वासना में बहने लगती है
दीपिका अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाने क पाऊँ की एडीएन उठा लेती है और आगे को थोड़ा झुकने की कोशिश करते हुए छूट को लैंड क मुँह पर सेट करती है
अमित को भी अपने लैंड पर जब दबाव महसूस होता है तो उसे ख्याल अत है क उसका लैंड पूरा टैंकर खड़ा है और ममी क चूतड़ों में घुसा हुआ है
अमित पसीने में भीगने लगता है और मन में डरने लगता है क ममी क्या सोचेगी कितना गन्दा हूँ मैं जो ऐसे उनका फायदा उठा रहा हूँ मगर लाख कोशिशों क बाद में अमित का अपने आप पर काबू नहीं था उसका बाबूराव तो मनो बगावत पर उतर आया था
दीपिका अपनी छूट पर दमदार मूसल को महसूस कर क लगातार दबाव बनाये जा रही थी उसे तो किसी भी कीमत पर चुदाई चाहिए थी एक दमदार लैंड से अपनी छूट की ठुकाई चाहती थी वो उसका पति तो उसे हाथ भी नहीं लगा रहा था आखिर वो करे तो क्या करे
अमित खुद को रोक नहीं प् रहा था इस लिए उसने अपनी ऑंखें बंद कर्ली थी मगर अंदर hi अंदर उसे भी मज़ा आने लगा था और उसने भी अपनी कमर को आगे धकेलना शुरू कर दिया था
ऐसे दोनों काम वासना में डूबते जा रहे थे दीपिका से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और कुछ hi पल में उसकी छूट का बाँध टूट गया उसकी पेंटी उसके काम रास से भीग गयी उसका जिस्म झटके खाने लगा और उसे खड़ा रहना मुश्किल हो गया तभी साथ वाली सीट खली हो जाती है और दीपिका बेसुध स वहीँ सीट पर गिर जाती है
दीपिका अपने इस स्खलन का आनंद ले रही थी उसकी आंखे बंद थी और मुँह से दबी दबी सिसकीअन छूट रही थी
अमित बस हैरानी से उसे देखे जा रहा था मुँह पर पसीना देखकर अमित चिंता से पूछता है ममी आप ठीक तो हैं
दीपिका खुद को सँभालने की कोशिश करती हुई जवाब देती हैं
‘ हाँ मैं ठीक हूँ बस खड़े खड़े थक गयी थी तो ज़रा चक्कर आ गया ‘
कुछ पल में दीपिका नार्मल हो जाती है पर उसकी पंतय से उसका कामर्स बहने लगता और उसकी जांघो और चूतड़ों को चिपचिपा कर देता है, दीपिका क मन में कई साडी बातें चल रही थी जो उसे चैन से बैठने नहीं दे रही थी
एक तरफ उसे डॉ की बातें यद् आ रही थी क कमी उसके पति में है , ऑपरेशन पर 2 लाख खर्च आएगा जो वो इकठा नहीं कर पायेगी अगर कर भी लिया तो इतनी बड़ी रकम क्या कहकर देगी उसका पति पकड़ लेगा
ऊपर से पता नहीं किस आदमी का वीर्य डालेंगे कैसी औलाद होगी पता नहीं क्या क्या सोच रही थी
फिर उसका मन अमित को कपड़े करने लगता है क अमित कितना ाचा है हैंडसम है कितना गाभरू जवान है कितना केयरिंग है हर एक गन उसमे है जो एक परफेक्ट लड़के में होने चाहिए अगर अमित का वीर्य मिल जाये तो उसका और अमित का बचा कितना क्यूट होगा कितना समझदार होगा
इतना सोचते hi उसे अमित क लैंड का एहसास अपनी छूट पर होने लगता है और वो सोचती है क अगर अमित का hi वीर्य इम्प्लांट करवाना है तो डॉ क पास जाने की क्या ज़रूरत है क्यों न मैं खुद अमित का वीर्य डायरेक्ट अपने अंदर लेलु इसतरह पैसे भी बच जायेंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा
मगर अमित कभी नहीं मानेगा वो तो मेरी इतनी इज़्ज़त करता है
दीपिका: हाय हाय ये मैं क्या सोचने लगी ये गलत है ऐसा नहीं हो सकता ये पाप है चिन्ह
अमित भी अपने मन में बहुत स बातें सोच रहा था मीणा की बातों और डॉ की बातों से एक बात कन्फर्म थी क कमलेश मां बाप नहीं बन सकते ऐसे में दीपिका ममी बेचारी की ज़िन्दगी बाँझ क तानो को सुन सुन कर तबाह हो जाएगी ऊपर से मां बहार मुँह मरता फिरता है
फिर अमित क दिमाग में आईडिया अत है क कमलेश क मीणा क पीछे जाने की वजह शायद बचा न होना है क्यों न मां को किसी तरह राज़ी किया जाये क वो ममी का और अपना इलाज करवाए अपना तो वो मानेंगे नहीं ममी का hi करवा दे तो काम से काम एक ऑपरेशन से ममी माँ बन जाएगी और फिर मां भी मीणा क चक्कर में नहीं फसेंगे
ऐसे hi दोनों अपने विचारों में खोये घर पहुँच जाते हैं
घर आने क बाद थोड़ी देर रेस्ट कर क अमित राजू से मिलने को निकल जाता है और दीपिका भी गौरी क पास चली जाती है
गौरी: छोटी क्या कहा डॉ ने?
दीपिका: कुछ नहीं दीदी डॉ ने कहा है क मैं माँ बन सकती हूँ मुझमे कोई कमी नहीं है कमी कमलेश में hi है
गौरी: सच? इसका मतलब तुम माँ बन सकती हो
दीपिका: कहाँ दीदी, कमलेश hi जब मुझे माँ नहीं बना सकते तो मैं अकेली माँ कैसे बन सकती हूँ
गौरी: अरे उसका कोई उपाए तो बताया होगा डॉ ने
दीपिका: आपको तो पता ये मानेंगे नहीं
गौरी : कैसे नहीं मानेगा, मैं समझाउंगी उसे तेरे जेठ जी से कहलवाती हूँ, बचे क नाम पर देखना कैसे नहीं मंटा
दीपिका मन में ( नहीं दीदी वो नहीं मानेगा अब तो वो मुझे हाथ भी नहीं लगता पता नहीं कहाँ जाता है रत रत
उधर अमित राजू से मिलकर मीणा को कैसे काबू करना है इसपर विचार करने लगते हैं मगर कोई रास्ता नहीं मिल रहा था उन्हें
ऐसे hi रत होने लगती है सब अपने अपने कमरों में खाना खाकर सोने लगते हैं कमलेश अभी घर नहीं आया था
अमित सोचता है क क्यों न माँ की तबियत का पता करूँ उनके पाऊँ में मोच आयी है काम से काम उनकी मालिश तो कर hi सकता हूँ अखाड़े में किसी न किसी को मोच तो अति रहती है उस्ताद जी ने जो सिखाया है उसका इस्तेमाल घर पे भी तो किया जा सकता है
इसी विचार से अमित तेल की बोतल साथ लिए गौरी क रूम में चला जाता है
विजय: आओ बेटे कैसे आना हुआ इस वक़्त?
अमित : मैं तो अपनी माँ क पाऊँ की मोच ठीक करने आया हूँ बाबा, मेरे होते हुए माँ क पाऊँ में मोच आ जाये क्या फायदा मेरी पहलवानी का मैं अभी मालिश कर क ठीक करदूंगा
विजय: हस्ते हुए) देख लेना कहीं कसरती मालिश कर क पाऊँ को तोड़ hi न देना औरतें नाज़ुक होती हैं पहलवान
गौरी: कैसी बातें करते हैं आप एक बीटा भला माँ को चोट पहुंचा सकता है और मेरा बीटा तो लाखों में एक है, कितनी फ़िक्र है इसे मेरी
विअज्य: हाँ भाई इसे hi फ़िक्र है और तो किसी को है नहीं
अमित: अरे बाबा आप ये क्या कह रहे हैं मैं तो आप दोनों की hi फ़िक्र करता हूँ कहिये तो आपकी भी मालिश कर देता हूँ
विजय: अरे नहीं भाई मैं ठीक हूँ तू मुझे माफ़ कर बस अपनी माँ की सेवा कर
इतना कहकर विजय दूसरी तरफ मुँह कर क लेट जाता है और अमित गौरी क पाऊँ क पास बैठ जाता है
अमित: माँ साडी थोड़ा ऊपर करलो तेल से ख़राब न हो जाये
गौरी अपनी साडी को थोड़ा ऊपर खींच लेती है और अमित पाऊँ में तेल लगाकर मालिश शुरू कर देता है दोनों हाथों से
गौरी ने पाऊँ में पायल डाली हुई थी जो उसके सुन्दर पाऊँ को चार चाँद लगा रही थी रंग गोरा होने से अमित को ये नज़र बहुत hi प्यारा लग रहा था हालाँकि उसने मन में कोई गन्दा ख्याल नहीं था
गौरी को भी मालिश से आनंद मिलता है थोड़ी देर की मालिश क बाद वो अमित को अब सोने को बोल देती है, अमित गौरी क कमरे से निकलता है तो उसे कमलेश मां नशे में झूमता अपने कमरे में जाता हुआ दीखता है, अमित क मन में जाने क्या अत है क वो कमलेश मां क कमरे क पास उनकी बातें सुनने चला जाता है
दीपिका: आप शराब पीकर आये हो? अब ये भी काम शुरू कर दिए आपने?
कमलेश: चुप साली बाँझ कहीं की तेरे बाप क पैसों से नहीं पि है अपने पैसों से पि है वो तो साला भिखारी है मादरचोद सेल बूढ़े ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी
बाँझ को मेरे पल्ले बांध दिए
ये सुनकर दीपिका रोने लगती है
दीपिका: रट हुए ) मेरे माता पिता को क्यों गली देते हैं आप? उनका क्या दोष है अगर मैं माँ नहीं बानी तो कसूर आपका भी तो है
कमलेश : क्या कहा मेरा कसूर है,, साली कुटिया ज़ुबान चलती है
इतना कहकर 3/4 थप्पड़ दीपिका क गलों पर रख देता है
अमित से बर्दाश्त नहीं होता वो अंदर जाना चाहता था मगर इस समय किसी क बैडरूम में में बीवी क बीच जाना भी सही नहीं होता
कमलेश: साली कमी तुझमे hi है जितना मैंने तुझे छोड़ा है अगर भैंस को भी छोड़ता तो वो माँ बन जाती तू मुझमे कसूर निकलती है
रुक जा थोड़े दिन फिर इस घर में बीटा आएगा जो मेरे खून से मेरे लैंड की धार से पैदा होने वाला है ,,
तू तो साली बाँझ है मगर दुनिआ की सब औरतें बाँझ नहीं है मैंने अपने लिए दूसरी ढून्ढ ली है और जल्द hi वो मेरे बेटे को पैदा करने वाली है
एक बार मेरा बीटा आ जाये फिर तुझे इस घर से लात मरकर निकल दूंगा
दीपिका कमलेश की बातों को बर्दाश्त नहीं कर पति उसे लगता है क अब उसकी दुनिआ लूट गयी सब ख़तम हो गया अब वो जी कर क्या करेगी थोड़ी देर रोटी रहती है फिर अचानक वो अपनी ज़िन्दगी को ख़तम करने क इरादे से कमरे से बहार निकलकर भगति है
कमलाह को उसकी कोई परवाह नहीं थी वो आराम से बीएड पर सो जाता है
अमित कमरे में दोनों की बातचीत ख़तम समझकर अभी अपने कमरे की तरफ जा hi रहा था क उसे बहार का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ अति है वो एक डैम पलट कर देखता है तो उसे छोटी ममी बहार जाती दिखती है
अमित जल्दी से सिडियन उतारकर बहार की तरफ भागता है उसे थोड़ी hi दूर ममी भगति हुई नज़र आ जाती है अमित जल्दी से से उसके पीछे भागता है
दीपिका रोटी बिलखती भागी जा रही थी उसकी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी थी अब वो किस मुँह से इस घर में रहेगी थोड़े दिनों में कमलेश उसे घर से वैसे भी निकलने वाला है तो वो कहाँ जाएगी वो अबला नारी बेचारी बस मरने क लिए नदी की तरफ भागे जा रही थी
अमित उसे रुकने क लिए आवाज़ देता है मगर दीपिका को तो जैसे कोई आवाज़ नहीं सुन रही थी
अमित तेजी से उसका पीछा कर रहा था मगर दोनों में जो फैसला था वो इतना जल्दी कवर नहीं हो रहा था फिर भी अमित पूरा जोर लगा रहा था
जैसे hi दीपिका नदी किनारे पहुँचती है और छलांग लगाने लगती है अमित पीछे से उसे पकड़ लेता है
अमित: ये क्या कर रही हो ममी आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या
दीपिका: रट हुए) छोड़ मुझे जाने दे मुझे, मैं जीना नहीं चाहती मैं उजाड़ गयी मैं लूट गयी मैं एक बाँझ हूँ मुझे मर जाने दे
अमित: पागल मत बनो ममी ये क्या अनाप शनाप बाके जा रही हो कौन कहता है आप बाँझ हो भूल गयी डॉ ने क्या कहा था? आप माँ बन सकती हो
दीपिका: वो सब झूठ है डॉ कुछ नहीं जनता मैं बस मर जाना चाहती हूँ तू मुझे जाने दे
अमित ममी को शांत होता न देखकर एक थप्पड़ जोर से मर देता है और दीपिका इतने जोर से थप्पड़ पड़ने से बेहोश हो जाती है
अमित घबरा जाता है और नदी से पानी लेकर दीपिका क मुँह पर डालता है जल्दी hi दीपिका होश में आ जाती है
अमित : मुझे माफ़ कार्डो ममी मगर मैं क्या करता आप होश में नहीं थी
दीपिका: सुबकते हुए) तूने मुझे क्यों रोका अमित अब मेरा सबकुछ लूट गया है मैं जीना नहीं चाहती
अमित: आपको मेरी कसम आप शांत हो जाइये और ख़बरदार अगर दोबारा मरने की बात की तो
क्या एक पल भी अपने सोचा क मेरा क्या होगा माँ का क्या होगा घर की कितनी बदनामी होगी आप बस चली आयी मरने
वैसे तो मुझे दोस्त कहती हो क्या इतना भी भरोसा नहीं था मुझपर , अरे मां तो नशे में अनाप शनाप बोल रहे थे आप तो होश में हो
दीपिका: अमित को सवालिया नज़रों से देखने लगती है
अमित: मैंने सब सुन लिया है, और मैं पहले से जनता था ये सब मगर एक बात आप भी सुनलो कमलेश मां एक साजिश का शिकार हैं वो जिसे अपना बचा समझ रहे हैं वो इनका नहीं किसी और का है और कल रत मैं इसी बात का पता लगाने गया था बाकि बातें मैं आपको बाद में बताऊंगा पहले आप घर चलो
दीपिका अमित की बातों को सुनकर अवाक थी , अमित को सब कुछ पता है पहले hi और ये भी क कमलेश जिसे अपना बचा समझ रहा है वो कमलेश का नहीं,,
दीपिका क मन में कई सवाल थे मगर फ़िलहाल वो चुप चाप अमित क साथ घर लौट अति है मगर उसका अपने कमरे में जाने का दिल नहीं करता उसे नफरत हो गयी थी कमलेश से आज उसने न सिर्फ उसे गलियन दी थी न सिर्फ उसपर हाथ उठाया था बल्कि उसके माता पिता को भी गलियन दी थी जो कोई भी लड़की बर्दाश्त नहीं करती
इसलिए दीपिका अमित क साथ उसीके क कमरे में चली जाती है, अमित बहुत कोशिश करता है मगर दीपिका नहीं मानती
अमित हारकर इसलिए भी मन जाता है कहीं वो फिर से न बहार भाग जाये
दीपिका और अमित दोनों अमित क कमरे में एते हैं
दोनों दोस्त चुप चाप वहां से निकलकर वापिस घर आ जाते हैं अमित चुपचाप बिना कोई आवाज़ किये अपने कमरे में चला जाता है जहाँ पहले से hi कोई उसका इंतज़ार कर रहा था जैसे hi अमित अपने कमरे में घुसता है सामने देखकर हड़बड़ा जाता है
अब आगे-
सामने छोटी ममी बीएड पर बैठी अमित का hi इंतज़ार कर रही थी जिसे देखकर अमित हड़बड़ा गया
अमित को समझ नहीं आ रही थी क अब मामी क सवालों का क्या जवाब देगा, वहीँ दीपिका मन में ये सोच रही थी क इतनी रत को घर से बहार चोरों की तरह जाने का क्या कारन है कहीं अमित कुछ गलत तो नहीं कर रहा जो भी हो आज पूछना hi पड़ेगा क्या पता ऐसा कब से चल रहा हो
दीपिका: इतनी रत को कहाँ गया था ? तू कब से रातों को बहार जाने लग गया है? ऐसा कौन सा काम है जो तू रत क अँधेरे में करने लग गया है?
अमित : वो मैं वो वो बहार सैर करने गया था मेरे पेट में गैस हो रही थी
दीपिका: ाचा गैस है,, अब मुझसे झूठ बोलेगा क्या इतनी hi इज़्ज़त रह गयी है मेरी अब? सच सच बता कहाँ था किसके साथ था?
अमित: ममी ऐसा न कहो मैं आपकी कितनी इज़्ज़त करता हूँ मेरे दिल से पूछो
दीपिका: तो सच क्यों नहीं बताता, बोल कहना गया था?
अमित : संजीदा होते हुए) ममी प्लीज ऐसा मत कहिये मैं आपको सब सच सच बताऊंगा मगर अभी नहीं बता सकता आपको मेरी कसम अभी कोई सवाल मत पूछिए मैं वक़्त आने पर खुद बता दूंगा वडा करता हूँ बस इतना सुन लीजिये मैं कुछ भी गलत नहीं कर रहा हूँ जो कर रहा हूँ इस घर की भलाई क लिए कर रहा हूँ
दीपिका अमित की आँखों में सच्चाई और संजीदगी देखकर चुप कर जाती है और कमरे से बिना कोई बात किये निकल जाती है, अमित सोचने लगता है क ममी पता नहीं क्या क्या सोचेगी मेरे बारे में पर उन्हें सच्चाई भी तो नहीं बता सकता अगर उन्हें सचाई पता लगी तो उनका दिल टूट जायेगा
मगर उस मीणा का मुझे जल्द hi कुछ करना पड़ेगा कैसे छोटे मां को बेवक़ूफ़ बना कर उन्हें लूट रही है, यूँही सोचते सोचते अमित की आँख लग जाती है
दूसरी और दीपिका भी परेशां थी मगर उसे इस बात की तसल्ली थी क अमित कुछ गलत नहीं कर रहा है मगर बात ज़रूर कोई बड़ी है जो उसने अपनी कसम देदी सवाल न पूछने क लिए
सुबह सुबह अमित अपनी रूटीन से अखाड़े चला जाता है घर में दीपिका तैयार हो कर गौरी क कमरे में जाती है
दीपिका: दीदी आप तैयार हैं? जल्दी कीजिये हम कहीं लेट न हो जाएँ
गौरी अपने बीएड पर चादर तान कर लेती हुई थी दीपिका की आवाज़ सुनकर दीपिका की तरफ साइड करती है
गौरी: अरे छोटी मुझे माफ़ करना मैं नहीं जा सकुंगी तेरे साथ आज नहाते वक़्त पाऊँ फिसल गया था ज़रा पाऊँ में मोच आ गयी है तू कामिनी को लेजा साथ
दीपिका गौरी की आवाज़ से अंदाज़ा लगा लेती है वाक़ई वो तकलीफ में थी
दीपिका: दीदी ये कैसे हो गया अपने मुझे आवाज़ क्यों नहीं दी
गौरी: बस अचानक पाऊँ फिसल गया था और आवाज़ क्या देती तब तुम्हारे जेठ जी यहीं थे वही मुझे यहाँ तक ले ए, तू मेरी चिंता न कर मैंने गोली खा ली है तू कामिनी क साथ चली जा
दीपिका: नहीं दीदी आपको देखभाल की ज़रूरत है मैं आपको ऐसे छोड़कर नहीं जा सकती हम फिर चले जायेंगे जब आप ठीक हो जायेंगे
गौरी: नहीं छोटी तू जा ऐसे कामो में देरी नहीं करते मैं अपना ध्यान रख लुंगी तू जा ये मेरा हुकम है
दीपिका: अगर कामिनी दीदी भी मेरे साथ चले गए तो घर का खाना कौन देखेगा? आपका ध्यान कौन रखेगा? नहीं नहीं आप रहने दीजिये
गौरी: नहीं छोटी तेरा जाना ज़रूरी है तू एक काम कर तू अमित को साथ लेजा उसको बोल आज स्कूल से छुट्टी करले
दीपिका: पर दीदी
गौरी: पर वॉर नहीं तू अभी उसे जा कर बोल दे देख आ गया होगा वो भी
दीपिका: ाचा दीदी मैं देखती हूँ
दीपिका अमित क कमरे में जाती है जहाँ अमित यूनिफार्म पहनकर तैयार हो रहा था स्कूल क लिए
दीपिका उसे जाकर बता देती है क कपडे बदल ले आज स्कूल से छुट्टी कर आज तुझे मेरे साथ शहर जाना है, इतना कहकर दीपिका रसोई में अमित को नाश्ता बनाकर देने चली जाती है
अमित : मन में ) लगता है छोटी ममी कल रत की बात क लिए गुस्सा हैं और मुझसे आज उसी क बारे में बात करेंगी अब कैसे समझों इनको जो मैं कर रहा हूँ इन्ही क लिए कर रहा हूँ
थोड़ी देर में अमित कपडे बदल कर रसोई में नाश्ता करते है और दीपिका उसे जल्दी करने को कहती है, दोनों जल्दी से बस स्टॉप जाते हैं और शहर क लिए बस पकड़ लेते हैं बस में अभी भीड़ नहीं थी सो दोनों को सीट मिल जाती है और दोनों शहर को निकल जाते हैं
रस्ते में दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा था फिर इस चुप्पी को अमित hi तोड़ता है
अमित : हम ऐसे अचानक कहाँ जा रहे हैं ममी? सब ठीक तो है?
दीपिका: हाँ हाँ सब ठीक है ऐसी कोई बात नहीं है, असल में आज दीदी जाने वाली थी मेरे साथ मगर उनके पाऊँ में मोच आ गयी सुबह सुबह इस लिए उनकी जगह तुम्हे ले जा रही हूँ
इतना सुनकर अमित चैन की सांस लेता है फिर उसे अचानक बात पर ध्यान जाता है और हड़बड़ा कर पूछता है
अमित: क्या माँ को मोच आ गयी मगर कैसे? किसी ने मुझे बताया क्यों नहीं
दीपिका: मुझे भी अभी थोड़ी देर पहले hi बताया उन्होंने , वक़्त नहीं था इस लिए नहीं बता पायी , वैसे घबराने वाली बात नहीं है तू चिंता मत कर घर पर कामिनी दीदी हैं उनके पास
अमित: वैसे हम शहर किस लिए जा रहे हैं अगर माँ को मोच आ गयी थी रहने देते शहर जाना
दीपिका: मैंने तो कहा था मगर दीदी नहीं मने, असल में पिछली बार हम दोनों जब शहर ए थे डॉक्टर ने मेरी जाँच करने क लिए टेस्ट लिए थे आज उनकी रिपोर्ट्स देनी थी उन्होंने इसलिए जाना ज़रूरी था, इसीलिए दीदी ने तुझे साथ लेजाने को कह दिया
अमित: चिंता से पूछता है ) आपको क्या हुआ है किस चीज़ का टेस्ट करवाया था अपने?
दीपिका: अरे कुछ नहीं हुआ मुझे बस है कोई टेस्ट वो मैं नहीं बता सकती तुझे अब बस कोई और बात करो
दोनों ऐसे hi इधर उधर की बातें करते शहर पहुँच जाते हैं जहाँ से ऑटो कर क दोनों डॉक्टर क क्लिनिक पहुँच जाते हैं आधे घंटे की वेट क बाद दीपिका को डॉक्टर केबिन में बुलाती है ये एक लेडीज डॉक्टर थी जो बेऔलाद लोगों का इलाज करती थी दीपिका अमित को बहार hi रुकने का बोलकर अंदर चली हटी है
डॉ. : आइये दीपिका जी बैठिये
दीपिका: गुड मॉर्निंग डॉ प्लीज बताइये मेरी रिपोर्ट्स कैसी हैं? मैं माँ तो बन सकती हूँ न
डॉ. : अरे बैठिये तो सही
देखिये मैंने आपकी साडी रिपोर्ट्स चेक कर्ली हैं आप बिलकुल परफेक्ट हैं आप में कोई कमी नहीं है आप पूरी तरह से हेअल्थी हैं
मुझे लगता है क कमी आपके पति में है आप एक बार उन्हें मेरे क्लिनिक ले आइये हम उनको चेक करलेंगे
दीपिका: अपनी रिपोर्ट्स क बारे सुनकर खुश हो जाती है क वो माँ बन सकती है मगर डॉ की दूसरी बात सुनकर उसका चेहरा उतर जाता है
‘ नहीं डॉक्टर वो कभी नहीं मानेंगे भला कौन मरद अपनी कमजोरी मानेगा और मेरे हस्बैंड तो वैसे भी बहुत ज़िद्दी हैं ‘
डॉ. : देखिये मैडम आपकी रिपोर्ट्स क बिनाह पर मैं 100% सूरे हूँ कमी आपमें नहीं आपके पति में है ऐसे में माँ बनने क दो hi रस्ते हैं आपके पास
दीपिका: बताइये डॉ मैं कुछ भी करुँगी प्लीज आप मुझे माँ बना दीजिये बताइये कितने पैसे लगेंगे
डॉ. : देखिये ये तो ज़ाहिर है क आपके पति क वीर्य में hi कमी होगी इसीलिए आप माँ नहीं बन प् रही ऐसे में सेकंड ऑप्शन एहि होती है क किसी दूसरे क वीर्य को आपकी बच्चेदानी में इम्प्लांट कर क आपको माँ बनाया जाये
और इस काम क लिए मेडिकल साइंस ने आजकल बहुत तरक्की कर्ली है
एक छोटे से ऑपरेशन क ज़रिये आपकी बच्चेदानी में वीर्य डाला जायेगा और आपको प्रेग्नेंट किया जायेगा
दीपिका: डॉ इसमें कोई रिस्क तो नहीं होता?
डॉ. : नहीं रिस्क वाली कोई बात नहीं, हाँ कई बार एक बार की कोशिश से कुछ औरतें मिस भी हो जाती हैं तो उन्हें फिर से एक मौका दिया जाता है
दीपिका: डॉ इससे बचा तो स्वस्थ होता है न
डॉ. : देखिये बचे में गन तो उसके माँ बाप से hi एते हैं, जैसे गन उसके माता पिता में होंगे वैसे hi बचे में होंगे अब हम इसके बारे में तो गारंटी नहीं दे सकते न
दीपिका: डॉ इसमें कितना खर्च आएगा?
डॉ. : यही कोई 1.5 लाख से 2 लाख रूपए
दीपिका डॉ से ऑपरेशन की फीस सुनकर हैरान हो जाती है और उसे सोचकर बताने का कहकर बहार निकल अति है,, बहार अमित ममी का वेट कर रहा था जब वो बहार अति है तो अमित चुपचाप उसके साथ चल पड़ता है
दीपिका ख़ामोशी से चिंता में डूबी चली जा रही थी साथ में अमित भी चला जा रहा था,
अमित ने डॉ क केबिन क बहार खड़े होकर डॉ की बातें सुनली थी मगर वो शो नहीं करता और न hi कोई सवाल करता है वो जनता था ममी टेंशन में है इसलिए वो ममी का मूड ठीक करने क लिए कहता है
अमित : क्या ममी आप भी बस भागे जा रही हैं आइये कुछ खा लेते हैं
दीपिका: नहीं अमित मेरा मूड नहीं है तुझे भूख लगी है तो तू खा ले
अमित : ऐसे कैसे मूड नहीं है आपको भी मेरे साथ चलना होगा, भूल गयी आप उसदिन आपने क्या कहा था ?
दीपिका: कब ? क्या कहा था?
अमित : अरे मेरे जन्मदिन पर आपने कहा था न क आपको पार्टी चाहिए ! आज तो मौका है चलिए आज मैं पार्टी देता हूँ अपनी खास दोस्त को
दीपिका: नहीं अमित फिर कभी आज हम घर चलते हैं
अमित नहीं मंटा और अपना वास्ता देकर दीपिका को साथ ले जाता है एक रेस्टोरेंट में दीपिका भी उसका मन रखने क लिए चल पड़ती है
जहाँ दोनों हल्का फुल्का खा लेते हैं फिर अमित दीपिका को लेकर मार्किट में चला जाता हैं जहाँ उसे अपनी पसंद की सुन्दर स चप्पल लेकर देता है जब दोनों शॉप पर चप्पल लेने जाते हैं तो दुकानदार अमित से कहता है आइये भाईसाहब अपने लिए लेंगे या भाभी की लिए अमित शर्मा जाता है मगर दीपिका बात संभल लेती है
असल में अमित पहलवानी करने क कारन अपनी उम्र से बड़ा लगता था शरीर से बलिष्ठ था और दीपिका अभी 24/25 की दिखती थी अपनी सुंदरता क कारन
उसके बाद दोनों बस स्टॉप बस पकड़ने चले एते हैं, दीपिका अपने मन में अमित को लेकर बहुत खुश थी क वो कितना ाचा कितना केयरिंग है कैसे अपनी बातों में लगाकर उसने साडी टेंशन hi भुला डी और उसे पता है क अपने साथी को कैसे खुश रखना है कितनी अंडरस्टैंडिंग नेचर है काश कमलेश भी ऐसा होता
कुछ देर बाद दोनों बस में सवार हो जाते हैं बस में बहुत भीड़ थी दोनों को सीट नहीं मिलती मज़बूरी में खड़े होकर सफर करना पड़ता है
दीपिका: देखा मैंने कहा था न वापिस चलते हैं अब देख कितनी भीड़ है अगर उस वक़्त एते तो भीड़ न होती
अमित: ममी जी ये भीड़ तो हर बस में मिलेगी hi, ज़रा सोचिये हमने आज क्या क्या किया खाना पीना भी हो गया शॉपिंग भी और बातें भी
दीपिका: रहने दे रहने दे मुझे मत समझा वैसे थैंक्स मैं बहुत खुश हूँ तूने मुझे शॉपिंग करवाई और खाना भी खिलाया रेस्टोरेंट में
अमित: अरे क्या ममी हम तो दोस्त भी हैं न तो इसमें थैंक्स कैसा आपको पार्टी तो देनी hi थी
दोनों ऐसे बातें करते रहते हैं फिर नेक्स्ट स्टॉप से और लोग बस में घुस एते हैं भीड़ बाद जाती है और न चाहते हुए भी अमित पीछे से दीपिका क साथ चिपक जाता है, दीपिका भी समझती है क भीड़ hi इतनी है तो कोई क्या करे
ऐसे बस चलती रहती है बस को झटका लगता है जिससे की अमित दीपिका क ऊपर गिरने को होता है, दीपिका अमित क भर से थोड़ा आगे झुक जाती है और अमित का लैंड दीपिका क छुटड़ो क दरम्यान पहुँच जाता है दोनों जब सीधे होते हैं तो अमित का लैंड दीपिका को अपनी गांड क बीच महसूस होता है
वास्तव में गांड की गर्मी से अमित का बाबूराव उठ गया था मगर अमित का अभी इस तरफ ध्यान नहीं गया था
दीपिका मन में सोचने लगती है क अब क्या करे उसे शर्म आने लगती है अमित को कैसे कहे धीरे धीरे अमित क लैंड में सख्ती बढ़ती जाती है और वो पूरा लोहे की रोड जैसे सख्त सीधा दीपिका की गांड क बीच घुस रहा था
दीपिका लैंड की सख्ती से छुडासी होने लगती है आखिर कितने हफ्तों से वो चूड़ी नहीं थी लैंड की गर्मी पाकर छूट ने रोना शुरू कर दिया था
दीपिका से गर्मी बर्दाश्त नहीं होती न चाहते हुए भी वो काम वासना में बहने लगती है
दीपिका अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाने क पाऊँ की एडीएन उठा लेती है और आगे को थोड़ा झुकने की कोशिश करते हुए छूट को लैंड क मुँह पर सेट करती है
अमित को भी अपने लैंड पर जब दबाव महसूस होता है तो उसे ख्याल अत है क उसका लैंड पूरा टैंकर खड़ा है और ममी क चूतड़ों में घुसा हुआ है
अमित पसीने में भीगने लगता है और मन में डरने लगता है क ममी क्या सोचेगी कितना गन्दा हूँ मैं जो ऐसे उनका फायदा उठा रहा हूँ मगर लाख कोशिशों क बाद में अमित का अपने आप पर काबू नहीं था उसका बाबूराव तो मनो बगावत पर उतर आया था
दीपिका अपनी छूट पर दमदार मूसल को महसूस कर क लगातार दबाव बनाये जा रही थी उसे तो किसी भी कीमत पर चुदाई चाहिए थी एक दमदार लैंड से अपनी छूट की ठुकाई चाहती थी वो उसका पति तो उसे हाथ भी नहीं लगा रहा था आखिर वो करे तो क्या करे
अमित खुद को रोक नहीं प् रहा था इस लिए उसने अपनी ऑंखें बंद कर्ली थी मगर अंदर hi अंदर उसे भी मज़ा आने लगा था और उसने भी अपनी कमर को आगे धकेलना शुरू कर दिया था
ऐसे दोनों काम वासना में डूबते जा रहे थे दीपिका से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और कुछ hi पल में उसकी छूट का बाँध टूट गया उसकी पेंटी उसके काम रास से भीग गयी उसका जिस्म झटके खाने लगा और उसे खड़ा रहना मुश्किल हो गया तभी साथ वाली सीट खली हो जाती है और दीपिका बेसुध स वहीँ सीट पर गिर जाती है
दीपिका अपने इस स्खलन का आनंद ले रही थी उसकी आंखे बंद थी और मुँह से दबी दबी सिसकीअन छूट रही थी
अमित बस हैरानी से उसे देखे जा रहा था मुँह पर पसीना देखकर अमित चिंता से पूछता है ममी आप ठीक तो हैं
दीपिका खुद को सँभालने की कोशिश करती हुई जवाब देती हैं
‘ हाँ मैं ठीक हूँ बस खड़े खड़े थक गयी थी तो ज़रा चक्कर आ गया ‘
कुछ पल में दीपिका नार्मल हो जाती है पर उसकी पंतय से उसका कामर्स बहने लगता और उसकी जांघो और चूतड़ों को चिपचिपा कर देता है, दीपिका क मन में कई साडी बातें चल रही थी जो उसे चैन से बैठने नहीं दे रही थी
एक तरफ उसे डॉ की बातें यद् आ रही थी क कमी उसके पति में है , ऑपरेशन पर 2 लाख खर्च आएगा जो वो इकठा नहीं कर पायेगी अगर कर भी लिया तो इतनी बड़ी रकम क्या कहकर देगी उसका पति पकड़ लेगा
ऊपर से पता नहीं किस आदमी का वीर्य डालेंगे कैसी औलाद होगी पता नहीं क्या क्या सोच रही थी
फिर उसका मन अमित को कपड़े करने लगता है क अमित कितना ाचा है हैंडसम है कितना गाभरू जवान है कितना केयरिंग है हर एक गन उसमे है जो एक परफेक्ट लड़के में होने चाहिए अगर अमित का वीर्य मिल जाये तो उसका और अमित का बचा कितना क्यूट होगा कितना समझदार होगा
इतना सोचते hi उसे अमित क लैंड का एहसास अपनी छूट पर होने लगता है और वो सोचती है क अगर अमित का hi वीर्य इम्प्लांट करवाना है तो डॉ क पास जाने की क्या ज़रूरत है क्यों न मैं खुद अमित का वीर्य डायरेक्ट अपने अंदर लेलु इसतरह पैसे भी बच जायेंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा
मगर अमित कभी नहीं मानेगा वो तो मेरी इतनी इज़्ज़त करता है
दीपिका: हाय हाय ये मैं क्या सोचने लगी ये गलत है ऐसा नहीं हो सकता ये पाप है चिन्ह
अमित भी अपने मन में बहुत स बातें सोच रहा था मीणा की बातों और डॉ की बातों से एक बात कन्फर्म थी क कमलेश मां बाप नहीं बन सकते ऐसे में दीपिका ममी बेचारी की ज़िन्दगी बाँझ क तानो को सुन सुन कर तबाह हो जाएगी ऊपर से मां बहार मुँह मरता फिरता है
फिर अमित क दिमाग में आईडिया अत है क कमलेश क मीणा क पीछे जाने की वजह शायद बचा न होना है क्यों न मां को किसी तरह राज़ी किया जाये क वो ममी का और अपना इलाज करवाए अपना तो वो मानेंगे नहीं ममी का hi करवा दे तो काम से काम एक ऑपरेशन से ममी माँ बन जाएगी और फिर मां भी मीणा क चक्कर में नहीं फसेंगे
ऐसे hi दोनों अपने विचारों में खोये घर पहुँच जाते हैं
घर आने क बाद थोड़ी देर रेस्ट कर क अमित राजू से मिलने को निकल जाता है और दीपिका भी गौरी क पास चली जाती है
गौरी: छोटी क्या कहा डॉ ने?
दीपिका: कुछ नहीं दीदी डॉ ने कहा है क मैं माँ बन सकती हूँ मुझमे कोई कमी नहीं है कमी कमलेश में hi है
गौरी: सच? इसका मतलब तुम माँ बन सकती हो
दीपिका: कहाँ दीदी, कमलेश hi जब मुझे माँ नहीं बना सकते तो मैं अकेली माँ कैसे बन सकती हूँ
गौरी: अरे उसका कोई उपाए तो बताया होगा डॉ ने
दीपिका: आपको तो पता ये मानेंगे नहीं
गौरी : कैसे नहीं मानेगा, मैं समझाउंगी उसे तेरे जेठ जी से कहलवाती हूँ, बचे क नाम पर देखना कैसे नहीं मंटा
दीपिका मन में ( नहीं दीदी वो नहीं मानेगा अब तो वो मुझे हाथ भी नहीं लगता पता नहीं कहाँ जाता है रत रत
उधर अमित राजू से मिलकर मीणा को कैसे काबू करना है इसपर विचार करने लगते हैं मगर कोई रास्ता नहीं मिल रहा था उन्हें
ऐसे hi रत होने लगती है सब अपने अपने कमरों में खाना खाकर सोने लगते हैं कमलेश अभी घर नहीं आया था
अमित सोचता है क क्यों न माँ की तबियत का पता करूँ उनके पाऊँ में मोच आयी है काम से काम उनकी मालिश तो कर hi सकता हूँ अखाड़े में किसी न किसी को मोच तो अति रहती है उस्ताद जी ने जो सिखाया है उसका इस्तेमाल घर पे भी तो किया जा सकता है
इसी विचार से अमित तेल की बोतल साथ लिए गौरी क रूम में चला जाता है
विजय: आओ बेटे कैसे आना हुआ इस वक़्त?
अमित : मैं तो अपनी माँ क पाऊँ की मोच ठीक करने आया हूँ बाबा, मेरे होते हुए माँ क पाऊँ में मोच आ जाये क्या फायदा मेरी पहलवानी का मैं अभी मालिश कर क ठीक करदूंगा
विजय: हस्ते हुए) देख लेना कहीं कसरती मालिश कर क पाऊँ को तोड़ hi न देना औरतें नाज़ुक होती हैं पहलवान
गौरी: कैसी बातें करते हैं आप एक बीटा भला माँ को चोट पहुंचा सकता है और मेरा बीटा तो लाखों में एक है, कितनी फ़िक्र है इसे मेरी
विअज्य: हाँ भाई इसे hi फ़िक्र है और तो किसी को है नहीं
अमित: अरे बाबा आप ये क्या कह रहे हैं मैं तो आप दोनों की hi फ़िक्र करता हूँ कहिये तो आपकी भी मालिश कर देता हूँ
विजय: अरे नहीं भाई मैं ठीक हूँ तू मुझे माफ़ कर बस अपनी माँ की सेवा कर
इतना कहकर विजय दूसरी तरफ मुँह कर क लेट जाता है और अमित गौरी क पाऊँ क पास बैठ जाता है
अमित: माँ साडी थोड़ा ऊपर करलो तेल से ख़राब न हो जाये
गौरी अपनी साडी को थोड़ा ऊपर खींच लेती है और अमित पाऊँ में तेल लगाकर मालिश शुरू कर देता है दोनों हाथों से
गौरी ने पाऊँ में पायल डाली हुई थी जो उसके सुन्दर पाऊँ को चार चाँद लगा रही थी रंग गोरा होने से अमित को ये नज़र बहुत hi प्यारा लग रहा था हालाँकि उसने मन में कोई गन्दा ख्याल नहीं था
गौरी को भी मालिश से आनंद मिलता है थोड़ी देर की मालिश क बाद वो अमित को अब सोने को बोल देती है, अमित गौरी क कमरे से निकलता है तो उसे कमलेश मां नशे में झूमता अपने कमरे में जाता हुआ दीखता है, अमित क मन में जाने क्या अत है क वो कमलेश मां क कमरे क पास उनकी बातें सुनने चला जाता है
दीपिका: आप शराब पीकर आये हो? अब ये भी काम शुरू कर दिए आपने?
कमलेश: चुप साली बाँझ कहीं की तेरे बाप क पैसों से नहीं पि है अपने पैसों से पि है वो तो साला भिखारी है मादरचोद सेल बूढ़े ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी
बाँझ को मेरे पल्ले बांध दिए
ये सुनकर दीपिका रोने लगती है
दीपिका: रट हुए ) मेरे माता पिता को क्यों गली देते हैं आप? उनका क्या दोष है अगर मैं माँ नहीं बानी तो कसूर आपका भी तो है
कमलेश : क्या कहा मेरा कसूर है,, साली कुटिया ज़ुबान चलती है
इतना कहकर 3/4 थप्पड़ दीपिका क गलों पर रख देता है
अमित से बर्दाश्त नहीं होता वो अंदर जाना चाहता था मगर इस समय किसी क बैडरूम में में बीवी क बीच जाना भी सही नहीं होता
कमलेश: साली कमी तुझमे hi है जितना मैंने तुझे छोड़ा है अगर भैंस को भी छोड़ता तो वो माँ बन जाती तू मुझमे कसूर निकलती है
रुक जा थोड़े दिन फिर इस घर में बीटा आएगा जो मेरे खून से मेरे लैंड की धार से पैदा होने वाला है ,,
तू तो साली बाँझ है मगर दुनिआ की सब औरतें बाँझ नहीं है मैंने अपने लिए दूसरी ढून्ढ ली है और जल्द hi वो मेरे बेटे को पैदा करने वाली है
एक बार मेरा बीटा आ जाये फिर तुझे इस घर से लात मरकर निकल दूंगा
दीपिका कमलेश की बातों को बर्दाश्त नहीं कर पति उसे लगता है क अब उसकी दुनिआ लूट गयी सब ख़तम हो गया अब वो जी कर क्या करेगी थोड़ी देर रोटी रहती है फिर अचानक वो अपनी ज़िन्दगी को ख़तम करने क इरादे से कमरे से बहार निकलकर भगति है
कमलाह को उसकी कोई परवाह नहीं थी वो आराम से बीएड पर सो जाता है
अमित कमरे में दोनों की बातचीत ख़तम समझकर अभी अपने कमरे की तरफ जा hi रहा था क उसे बहार का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ अति है वो एक डैम पलट कर देखता है तो उसे छोटी ममी बहार जाती दिखती है
अमित जल्दी से सिडियन उतारकर बहार की तरफ भागता है उसे थोड़ी hi दूर ममी भगति हुई नज़र आ जाती है अमित जल्दी से से उसके पीछे भागता है
दीपिका रोटी बिलखती भागी जा रही थी उसकी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी थी अब वो किस मुँह से इस घर में रहेगी थोड़े दिनों में कमलेश उसे घर से वैसे भी निकलने वाला है तो वो कहाँ जाएगी वो अबला नारी बेचारी बस मरने क लिए नदी की तरफ भागे जा रही थी
अमित उसे रुकने क लिए आवाज़ देता है मगर दीपिका को तो जैसे कोई आवाज़ नहीं सुन रही थी
अमित तेजी से उसका पीछा कर रहा था मगर दोनों में जो फैसला था वो इतना जल्दी कवर नहीं हो रहा था फिर भी अमित पूरा जोर लगा रहा था
जैसे hi दीपिका नदी किनारे पहुँचती है और छलांग लगाने लगती है अमित पीछे से उसे पकड़ लेता है
अमित: ये क्या कर रही हो ममी आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या
दीपिका: रट हुए) छोड़ मुझे जाने दे मुझे, मैं जीना नहीं चाहती मैं उजाड़ गयी मैं लूट गयी मैं एक बाँझ हूँ मुझे मर जाने दे
अमित: पागल मत बनो ममी ये क्या अनाप शनाप बाके जा रही हो कौन कहता है आप बाँझ हो भूल गयी डॉ ने क्या कहा था? आप माँ बन सकती हो
दीपिका: वो सब झूठ है डॉ कुछ नहीं जनता मैं बस मर जाना चाहती हूँ तू मुझे जाने दे
अमित ममी को शांत होता न देखकर एक थप्पड़ जोर से मर देता है और दीपिका इतने जोर से थप्पड़ पड़ने से बेहोश हो जाती है
अमित घबरा जाता है और नदी से पानी लेकर दीपिका क मुँह पर डालता है जल्दी hi दीपिका होश में आ जाती है
अमित : मुझे माफ़ कार्डो ममी मगर मैं क्या करता आप होश में नहीं थी
दीपिका: सुबकते हुए) तूने मुझे क्यों रोका अमित अब मेरा सबकुछ लूट गया है मैं जीना नहीं चाहती
अमित: आपको मेरी कसम आप शांत हो जाइये और ख़बरदार अगर दोबारा मरने की बात की तो
क्या एक पल भी अपने सोचा क मेरा क्या होगा माँ का क्या होगा घर की कितनी बदनामी होगी आप बस चली आयी मरने
वैसे तो मुझे दोस्त कहती हो क्या इतना भी भरोसा नहीं था मुझपर , अरे मां तो नशे में अनाप शनाप बोल रहे थे आप तो होश में हो
दीपिका: अमित को सवालिया नज़रों से देखने लगती है
अमित: मैंने सब सुन लिया है, और मैं पहले से जनता था ये सब मगर एक बात आप भी सुनलो कमलेश मां एक साजिश का शिकार हैं वो जिसे अपना बचा समझ रहे हैं वो इनका नहीं किसी और का है और कल रत मैं इसी बात का पता लगाने गया था बाकि बातें मैं आपको बाद में बताऊंगा पहले आप घर चलो
दीपिका अमित की बातों को सुनकर अवाक थी , अमित को सब कुछ पता है पहले hi और ये भी क कमलेश जिसे अपना बचा समझ रहा है वो कमलेश का नहीं,,
दीपिका क मन में कई सवाल थे मगर फ़िलहाल वो चुप चाप अमित क साथ घर लौट अति है मगर उसका अपने कमरे में जाने का दिल नहीं करता उसे नफरत हो गयी थी कमलेश से आज उसने न सिर्फ उसे गलियन दी थी न सिर्फ उसपर हाथ उठाया था बल्कि उसके माता पिता को भी गलियन दी थी जो कोई भी लड़की बर्दाश्त नहीं करती
इसलिए दीपिका अमित क साथ उसीके क कमरे में चली जाती है, अमित बहुत कोशिश करता है मगर दीपिका नहीं मानती
अमित हारकर इसलिए भी मन जाता है कहीं वो फिर से न बहार भाग जाये
दीपिका और अमित दोनों अमित क कमरे में एते हैं