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सब की ऑंखें नाम थी सिवाए कामिनी क
वो तो मन में खुश हो रही थे क ाचा हुआ मनहूसियत ताली
घर क आँगन में सबका रोना धोना चल hi रहा था क दरवाज़ा खुलता है और एक शख्स अंदर अत है, सबकी निगाहें उसकी तरफ मुद जाती हैं
अब आगे-
दरवाज़े पर खड़े शख्स को देखते hi गौरी उसकी तरफ दौड़ती है और जाते hi 3-4 थप्पड़ उसके चेहरे पर मर देती है
गौरी- कहाँ चला गया था बोल ? तुझे किसी की परवाह है क नहीं बोल कहाँ था? तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं आया क तेरी माँ का क्या होगा?
तूने कभी नहीं सोचा क तेरे बगैर तेरी माँ जियेगी या मर जाएगी बोल?
जी हाँ ये शख्स अमित hi था
अमित: मैं आपके बिना और कहाँ जा सकता हूँ माँ? मेरी दुनिआ आप से hi शुरू आप पर hi ख़तम हो जाती है, आप तो ममता की मूरत हैं जिसने मुझ जैसे मनहूस को गले लगा लिया वर्ण मेरा वजूद तो इस दुनिआ में रहने क काबिल भी नहीं, मुझे माफ़ कर दीजिये माँ
अमित क मुँह से निकला एक एक शब्द उसके दिल का दर्द बयां कर रहा था विजय और अजय तो समझ गए थे मगर गौरी का तो कलेजा hi छन्नी हो गया ये सब सुनकर
आज पहली बार अमित क मुँह से ऐसे शब्द निकले थे
गौरी से बर्दाश्त नहीं हुआ
गौरी: ये सब क्या कह रहा है तू? किसी ने कुछ कहा क्या तुझे? मुझे बता मैं उसकी जान ले लुंगी, तू मेरा बीटा है तेरे से hi तो मेरा संसार है बोल किसने तुझे बोलै क्या कहा तुझे बता मुझे
अमित की आँखों में आंसू थे जिसे देखकर गौरी से बर्दाश्त नहीं हो रहा था आखिर अमित hi तो उसका सबकुछ था हमेशा उसे अपने सेज बेटे क जैसे hi तो प्यार किया था उसने बल्कि वो तो ये भूल hi गयी थे क अमित उसका सागा बीटा नहीं है
विजय जनता था क गौरी अपने आंसुओं से अमित से सच उगलवा लेगी और अगर सचाई बहार आ गयी तो पता नहीं क्या कर बैठेगी, इस लिए वो जल्दी से आगे बढ़ता है
विजय: कहाँ चला गया था मेरे बचे काम से काम एक बार बता तो देता तूने हमारे बारे में एक बार भी नहीं सोचा अजा मेरे गले लग जा
इतना कह कर अमित को गले लगा लेता है और फिर कहता है
चल पहले अंदर चल अभी तक किसी ने खाना तक नहीं खाया तेरे इंतज़ार में चल पहले खाना खले
अमित की माँ जाओ पहले अपने बेटे और हमारे लिए खाना लगाओ कब से भूखा होगा
इतना कह कर विजय अमित को गले लगाए अंदर ले चलता है और गौरी भी खाना लगाने की तैयारी करने लगती है कामिनी भी उसके साथ थी मगर किसी का ध्यान दीपिका की तरफ नहीं गया था जो एक तरफ कड़ी अमित की बातों को सोच रही थी और उसकी आँखों से बहते आंसुओं से अंदाज़ा लगा रही थी उसकी तकलीफ का
विजय अमित से अभी कोई बात नहीं करना चाहता था इस लिए उसने चुपचाप सबको खाना खाने दिया और गौरी को भी समझा दिया क अमित को रेस्ट करने दो हम कल बात करेंगे उससे
खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं
गौरी को नींद नहीं आ रही थी उसके दिल को अमित क मुँह से निकले शब्द अभी भी दुखी कर रहे थे इस लिए वो अमित क कमरे में जाने क लिए उठती है, विजय भी जनता था इस लिए वो भी गौरी क जाने क कुछ देर बाद पीछे पीछे चला जाता है
गौरी फिर से जानने की कोशिश करती है मगर विजय फिर से गौरी को समझा बुझा क ले जाता है
कमलेश घर नहीं लौटा था मगर इस बात की किसी को टेंशन नहीं थी ये उसकी पहले की आदत बन गयी थी मगर दीपिका को अमित क दिल का दर्द महसूस हो रहा था इस लिए वो सब क सोने क बाद अमित क पास चली जाती है
कमरे में आके दीपिका दरवाज़ा बंद कर लेती है अमित करवट क बल ऑंखें बंद कर क सो रहा था
दीपिका: क्या मुझे भी अपने दिल क ज़ख़्म नहीं दिखाओगे? क्या तुम्हारे दिल में इतनी भी जगह नहीं मेरे लिए?
अमित फिर भी सो रहा था मगर दीपिका जानती थी क वो ऐसे हालत में सो नहीं सकता भला कोई कैसे इतने दर्द क बाद सो सकता है
दीपिका अमित को पकड़ कर सीधा लिटा देती है और उसके होंठो को चूम लेती है
दीपिका: तुम्हे पता है न क मैं अब तुम्हे hi अपना सबकुछ मानती हूँ और सिर्फ तुम्हारे लिए hi इस घर में हूँ, तुमने hi तो रोका था न उसदिन मुझे वर्ण मैं ये घर क्या ये दुनिआ hi छोड़ देती मगर लगता है तुम मुझे उतना प्यार नहीं करते
इतना सुनते hi अमित अपनी ऑंखें खोल लेता है , उसकी ऑंखें रोने से अभी भी लाल थी मगर दीपिका की बातों से उसका दिल भर आया और उसने उठते हुए दीपिका को गले लगा लिया
अमित: ऐसा मत कहिये ममी जी मेरे दिल की गहराईयों में अगर झांक कर देखेंगी तो आपको वहां आपके और माँ क सिवा और कोई नहीं है
दीपिका: तो बता क्या बात है जो तुझे इतना दुःख दे रही है बता मुझे आखिर क्या हुआ है और तू कहाँ चला गया था
अमित दीपिका क सामने अपना दिल खोल देता है और बता देता है जो भी आज हुआ
दीपिका को भी बहुत दुःख होता है और कमलेश क लिए उसके दिल में नफरत बाद जाती है
दीपिका: एक आदमी की वजह से तू कितने लोगो का दिल तोड़ रहा था तुझे ये ख्याल नहीं आया, देखा था क्या हालत हो गयी थी दीदी की और मेरा क्या होता मैं उसी पल खुद को ख़तम कर लेती आखिर तुझसे hi तो अब मेरी दुनिआ है
अमित : मुझे माफ़ कार्डो ममी जी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था बस इसीलिए अकेला तन्हाई में बैठकर दिल को हल्का कर रहा था
दीपिका : अगर दोबारा ऐसा किया तो सोच लेना तेरे पीछे न मैं ज़िंदा रहूंगी न दीदी
अमित : मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा ममी जी
दीपिका: तेरे मां को तो अब सबक सीखना hi पड़ेगा एक रंडी क लिए तुझपर हाथ उठाया उसने तू वो वीडियो बड़े भैया को दिखा नहीं तो मुझे दे मोबाइल मैं दीदी को बताती हूँ और वो भैया को बता देंगी इसे घर से निकलवा देते हैं तभी इसकी अकाल ठिकाने आएगी
अमित : नहीं ममी जी ऐसा किया तो मां हमें hi गलत समझेंगे और मीणा क पास चले जायेंगे और फिर आपका क्या होगा आप पर भी तो सवाल उठ सकते हैं मैं ऐसा बिलकुल नहीं करूँगा,
मगर मां ने मेरा एक भला तो किया मुझे ये बता कर क मेरी एक और फॅमिली है
और अब आप बताएं क आप क्या जानती हैं मेरी दूसरी फॅमिली क बारे में
दीपिका: क्या ? तुम्हारी दूसरी फॅमिली? मगर मैंने तो आजतक बिलकुल नहीं सुना किसी क भी मुँह से
अमित : हम्म तो अब इसका पता लगाना होगा आखिर क्यों मुझे आजतक बताया नहीं गया क्या वजह है इसके बारे में, माँ बाबा ने भी कभी ज़िकर क्यों नहीं किया और न hi कोई कभी मुझसे मिलने आया
दीपिका: मुझे नहीं लगता तुम्हे इस सब को जानना चाहिए अगर दीदी और भैया ने ये बात तुमसे छुपाई है तो इसका एक hi मतलब है क वो लोग अचे नहीं होंगे वर्ण कभी न कभी कोई तो अत और मैंने आजतक न किसी को देखा न किसी से सुना
अमित और दीपिका देर तक बातें करते रहे साडी रत ऐसे hi काट गयी दीपिका ने एक पल भी अमित को उदास नहीं होने दिया और उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठी रही और ऐसे hi दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए,
आज हकीकत में दीपिका ने अमित क दिल क ज़ख्मो को छू लिया था , प्यार भरी बातों से जो दिल क घावों पर मलहम लग सकता है वो सब से परे है
साडी रत दोनों चिपके रहे मगर एक बार भी दोनों क दिल में वासना रत्ती भर भी न जगी
सुबह दोनों देर तक सोते रहे मगर दीपिका अमित से पहले उठकर अपने कमरे में चली गयी वो जानती थी क दीदी कमरे में आ सकती है
गौरी सुबह उठकर नहा कर चाय बना क अमित क कमरे में जाती है जहाँ वो अभी भी सो रहा था
गौरी को रत भर उसकी चिंता सताती रही और सुबह भी भगवन का नाम लेने से पहले वो अमित क पास चली गयी
अमित को सोते हुए देखकर उसके मन को तसल्ली हो रही थी आखिर था तो वो गौरी क कलेजे का टुकड़ा क्या हुआ जो उसने उसे पैदा नहीं किया मगर पला तो सगी माँ से भी बढ़कर है
गौरी अमित क पास बैठ जाती है और उसके सर पर प्यार से हाथ फिरने लगती है
विजय भी तैयार हो कर अमित क कमरे में आ जाता है और गौरी को देखकर वहीँ ठहर जाता है
विजय: अब उठा भी दो उसे क यूँही बैठी रहोगी उसके पास दिन निकल आया है और आज ये कसरत करने भी नहीं गया
गौरी: सोने दीजिये मेरे बेटे को कल क्या कुछ हुआ भूल गए आप, क्या बीती होगी इसके दिल पर कितना दुःख हुआ होगा इसे पता नहीं कौन वो दुश्मन है जो मेरे मासूम से बचे को इतना दुःख दे रहा है
विजय: वो मैं देख लूंगा अभी इसे जगाओ और जल्दी तैयार करो मैंने शहर जाना है और अमित को भी मेरे साथ जाना है
गौरी: आप जाइये जहाँ जाना है मैं इसे कहीं नहीं भेजूंगी
विजय: बच्चों जैसी बात मत करो कागज़ी काम है इसका साथ जाना ज़रूरी है चलो जल्दी करो
इतना कहकर विजय वापिस निचे चला जाता है
गौरी अमित को जगती है , अमित गौरी को देखकर खुश हो जाता है और गौरी उसे बताती है क जल्दी तैयार हो जा तुझे बाबा क साथ शहर जाना है
अमित जल्दी से तैयार हो कर निचे आ जाता है और फिर नाश्ता कर क विजय क साथ निकल पड़ता है
विजय अमित को गाओं क बहार लेजाकर खली जगह में रुकने का कहता है और उससे कल जो भी हुआ सब पूछता है
अमित छिपाने क कोशिश करता है मगर विजय तो अजय से सब जान चूका था इस लिए अमित को भी सच बताना पड़ता है
विजय: तुम मेरी एक बात सुनलो तुम मेरे बेटे हो कोई कुछ भी कहे मेरा जो है सब तुम्हारा है मैं आज hi अपने हिस्से की साडी जायदाद तेरे नाम करवा दूंगा और जो तुझे मनहूस कहता है मेरा उससे कोई रिश्ता नहीं हम ये घर छोड़कर अलग घर में रह लेंगे
अमित : नहीं बाबा आप ऐसा नहीं करेंगे छोटे मां गुस्से में कुछ कह भी गए तो क्या हुआ वो बड़े हैं इतनी स बात क लिए क्या आप रिश्ते ख़तम करदेंगे फिर तो वाक़ई में मैं मनहूस hi तो कहलाऊंगा जो मेरी वजह से घर टूट गया
आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे आपको मेरी कसम, रही बात मां की तो मैं जनता हूँ उन्हें भी अपनी गलती का एहसास ज़रूर होगा
विजय : कितना ाचा है तू और एक वो है जिसे हीरे की पहचान hi नहीं है बस अपने आवारा दोस्तों क साथ मौज उडाता फिरता है
अमित : बाबा आपने मुझे कभी नहीं बताया क मेरी कोई और फॅमिली भी है? आपने कभी मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया
विजय: क्या तुझे हमारे प्यार में कोई कमी लगने लगी है? कमलेश की वजह से तू हमारे प्यार पर शक करने लगा है ?
अमित : नहीं नहीं बाबा अपने और माँ ने जितना मुझे प्यार दिया है कोई सेज बेटे को भी इतना प्यार नहीं देता होगा
विजय: ख़बरदार जो खुद को पराया समझा तो भगवन जनता है मैंने हमेशा तुझे अपना सागा बीटा hi समझा है
अमित : मगर मैं जानना चाहता हूँ क मेरी फॅमिली में और कौन कौन है? मैं उनसे मिलना चाहता हूँ क्या आप मुझे उनसे नहीं मिलवाओगे?
विजय: वो लोग इस काबिल नहीं क उनका ज़िकर भी किया जाये, अगर हमने तुम्हे नहीं बताया तो तुझे समझ जाना चाहिए क वो अचे लोग नहीं हैं
और तू अब उनका ज़िकर दोबारा नहीं करना , हमारे लिए वो मर चुके हैं और तू भी उनके लिए मर चूका है आयी बात समझ में अब इसके बाद और कोई बात नहीं होगी अब चल शहर और एक बात , भूलकर भी अपनी माँ से ज़िकर मत करना वर्ण उसके दिल को कितनी ठेस लगेगी तुझे नहीं पता, अब चल
अमित चुपचाप मोटरसाइकिल चलने लगता है, विजय अमित को तहसील ले जाता है जहाँ वो अपनी जायदाद क कागज़ात वकील से मिलकर तैयार करने को कहता है
विजय साडी जायदाद को तीनो भाइयों में बराबर बाँटने को कहता है और अपना हिंसा अमित क नाम करने को बोल देता है
अमित विजय को मना करता रहता है मगर विजय नहीं सुनता
शाम होते दोनों घर लौट एते हैं गौरी अमित को अपने कमरे में ले जाती है और उससे बातों में जानने की कोशिश करती है मगर विजय और अमित बातों को घुमाकर कल की बात पर पर्दा दाल देते हैं
फिर रत का खाना कहते हैं सब आज कमलेश फिर घर नहीं लौटा था
अमित को ये बात खटक रही थी
दरअसल कमलेश और अमित क खेतों से आने क बाद अजय ने रघु को बुलाकर फ़ौरन उसे अपने परिवार समेत उनके गाओं से निकल जाने को बोलै था और न जाने पर उसको अंजाम भुगतने की धमकी दी थी बेचारा हाथ जोड़ता रहा मगर अजय नहीं मन क्यूंकि उसे भी मीणा से नफरत हो गयी थी
बहरहाल रघु मीणा को लेकर गाओं से चला गया था
रत को जब कमलेश मीणा क घर की तरफ गया तो वहां उसे न पाकर जब उसने पता किया तो उसे अजय पर बड़ा गुस्सा आया और सबसे ज्यादा अमित पर
कमलेश तो बचे क मोह में अँधा होकर मीणा को ढूंढ़ता फिर रहा था इसी लिए वो घर नहीं आया था
रत को फिर से दीपिका अमित क पास hi रूकती है मगर दोनों प्यार भरी बातों क इलावा कुछ नहीं करते
अगले दिन अमित रूटीन से अखाड़े और फिर स्कूल चला जाता है मगर जाने से पहले राजू को कमलेश मां का पता करने को बोल देता है
वहीँ विजय और अजय भी कमलेश का पता करते हैं
स्कूल से आकर अमित राजू को साथ लेकर कमलेश को ढूंढ़ने जाता है विजय और अजय को भी अभी तक कमलेश नहीं मिला था
किस्मत से गाओं क बहार जाने वाले रस्ते पर hi अमित को कमलेश मिल जाता है जो गुस्से में था
कमलेश: आखिर तूने कर्ली न अपने दिल की तूने और अजय ने मिलकर मीणा को निकल दिया न, मैं भी उसे ढूंढ़कर रहूँगा और फिर देखता हूँ सबको
अमित : ये आप कैसी बातें कर रहे हैं मां जी, आप को पता भी है वो औरत क्या कर रही थी
कमलेश: जुबान बंद कर अपनी ख़बरदार एक लग्ज़ भी उसके खिलाफ बोलै तो
अमित : मां जी आपको मुझ पर यकीन नहीं है न मगर आप को मेरी कसम आप एक बार ये देख लीजिये उसके बाद आप जो कहेंगे वो मैं करूँगा
कमलेश: मैं क्यों देखूं मुझे तेरी कोई बात नहीं सुन्नी
अमित: आपको ममी की कसम आपको बाबा की कसम प्लीज आप एक बार अपनी आँखों से देख लीजिये
कमलेश अपने गुस्से को काबू करते हुए अमित क हाथो से मोबाइल पकड़ लेता है जिसमे अमित ने मीणा की वो वीडियो प्ले करदी थी जो उसने अजय को दिखाई थी
कमलेश जैसे जैसे वीडियो देखता जाता है उसका खून खौलने लगता है और गुस्से से उसकी आँखों में खून उतर अत है
कमलेश: ये सब तेरी कोई चाल है मीणा ऐसा नहीं कर सकती मैं तेरा खून पि जाऊंगा
कमलेश मोबाइल को फेंकने लगता है मगर अमित उसका हाथ पकड़ लेता है
अमित : अभी लगता है आपको यकीन नहीं हुआ रुकिए एक और सबूत दिखता हूँ
फिर अमित दूसरी वीडियो चला देता है जिसमे मीणा उसके कजिन क साथ चुदाई कर रही थी और कमलेश क बारे में बातें कर रही थी क कैसे वो चुटिया बना रही थी कमलेश को
मीणा की बातें सुनकर कमलेश को झटका लगता है और वो अपना सर पीटने लगता है
कमलेश: हरामज़ादी मेरे साथ खेल खेल रही थी मैं इस रंडी क टुकड़े टुकड़े कर दूंगा
अमित : मां जी जो हुआ भूल जाइये गलती आपकी भी है जो आप अपना घर छोड़कर उसके चक्कर में पद गए
आखिर क्या कमी है ममी में? कहाँ ममी और कहाँ ये गन्दी औरत, आपने एक पल भी न सोचा क्या होगा ममी का क्या बीतेगी उनपर और परिवार की मन मर्यादा का क्या होगा
आपने सब कुछ देव पर लगा दिया
कमलेश को पछतावा होने लगता है क कैसे वो अँधा होकर सबकुछ उस औरत पर लुटाने चला था जो क रण्डिओं से भी बढ़कर थी
कमलेश: सच में मुझसे बड़ी गलती हो गयी, मेरा दिमाग ख़राब हो गया था मगर अब मैं सब ठीक कर दूंगा , मैं दीपिका से माफ़ी मांगूंगा मैंने उसका दिल दुखाया है
अमित : बिलकुल मां जी और एक बात आप सिर्फ इस बात पर उस गन्दी औरत क झांसे में आ गए थे न आप बाप बनना चाहते हैं तो आपकी वो इच्छा भी पूरी हो सकती है आप ममी का इलाज करवाइये डॉ ने बोलै है क ममी माँ बन सकती है
कमलेश: बिलकुल मैं यही करूँगा मैं आज hi उसे डॉ क पास लेकर जाऊंगा
मगर सबसे पहले तू मुझे माफ़ करदे मैंने कल तुझसे बड़ी बदतमीज़ी करदी और तुझपर हाथ उठाया जबकि तू मेरा hi भला सोच रहा था तूने सबकुछ पता होते हुए भी किसी को बताया नहीं
मुझे माफ़ करदे अमित मैं तेरा गुनहगार हूँ
अमित : ये आप क्या कह रहे हैं मां जी आपने मुझे इतना प्यार दिया है क उसके आगे ये तो कुछ भी नहीं वैसे भी माँ बाप और बड़े बुज़ुर्ग हाथ उठा भी दे तो इस बात का गुस्सा नहीं करना चाहिए
कमलेश अमित को गले लगा लेता है
कमलेश: तू कितना ाचा है कितने बड़ा दिल है तेरा वाकई भाभी ने तुझे सबसे अचे संस्कार दिए हैं
फिर दोनों मां भांजा घर को चल पड़ते हैं विजय और अजय भी घर लौट ए थे वो दोनों कमलेश और अमित को साथ मुस्कुराता देखकर समझ जाते हैं क अब सबकुछ ठीक है इसलिए वो भी कोई बात नहीं करते
फिर कमलेश विजय से और अजय से माफ़ी मांगता है अपनी गलती क लिए दोनों उसके पछतावे को देखकर उसे माफ़ कर देते हैं
रत को कमलेश दीपिका से भी माफ़ी मांगता है और उसे मनाता है और उसका डॉ से इलाज करवाने की हामी भर देता है ताकि वो जल्दी माँ बन सके
दीपिका क दिल में जो कड़वाहट आ गयी थी वो भी निकल जाती है मगर डॉ से अब वो इलाज करवाना नहीं चाहती थी क्यूंकि अब तो उसे घर का डॉ मिल गया था जिसने उसके गर्भ में बीज दाल दिया था जिससे क वो माँ बन सकती थी
इस लिए वो कमलेश को कह देती है क डॉ ने जो दवा डी है बस उसी से वो माँ बन जाएगी आप चिंता न करो भगवन पर भरोसा रखो
कमलेश सब सेट होने क बाद दीपिका को चुदाई क लिए मानाने की कोशिश करता है मगर दीपिका तबियत ख़राब का बहाना बना कर सो जाती है और कमलेश भी बात मन जाता है
बातों में वक़्त ज्यादा हो गया था इस लिए दीपिका अमित क पास भी नहीं जा पति और अमित भी चैन की नींद सो जाता है
सब की ऑंखें नाम थी सिवाए कामिनी क
वो तो मन में खुश हो रही थे क ाचा हुआ मनहूसियत ताली
घर क आँगन में सबका रोना धोना चल hi रहा था क दरवाज़ा खुलता है और एक शख्स अंदर अत है, सबकी निगाहें उसकी तरफ मुद जाती हैं
अब आगे-
दरवाज़े पर खड़े शख्स को देखते hi गौरी उसकी तरफ दौड़ती है और जाते hi 3-4 थप्पड़ उसके चेहरे पर मर देती है
गौरी- कहाँ चला गया था बोल ? तुझे किसी की परवाह है क नहीं बोल कहाँ था? तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं आया क तेरी माँ का क्या होगा?
तूने कभी नहीं सोचा क तेरे बगैर तेरी माँ जियेगी या मर जाएगी बोल?
जी हाँ ये शख्स अमित hi था
अमित: मैं आपके बिना और कहाँ जा सकता हूँ माँ? मेरी दुनिआ आप से hi शुरू आप पर hi ख़तम हो जाती है, आप तो ममता की मूरत हैं जिसने मुझ जैसे मनहूस को गले लगा लिया वर्ण मेरा वजूद तो इस दुनिआ में रहने क काबिल भी नहीं, मुझे माफ़ कर दीजिये माँ
अमित क मुँह से निकला एक एक शब्द उसके दिल का दर्द बयां कर रहा था विजय और अजय तो समझ गए थे मगर गौरी का तो कलेजा hi छन्नी हो गया ये सब सुनकर
आज पहली बार अमित क मुँह से ऐसे शब्द निकले थे
गौरी से बर्दाश्त नहीं हुआ
गौरी: ये सब क्या कह रहा है तू? किसी ने कुछ कहा क्या तुझे? मुझे बता मैं उसकी जान ले लुंगी, तू मेरा बीटा है तेरे से hi तो मेरा संसार है बोल किसने तुझे बोलै क्या कहा तुझे बता मुझे
अमित की आँखों में आंसू थे जिसे देखकर गौरी से बर्दाश्त नहीं हो रहा था आखिर अमित hi तो उसका सबकुछ था हमेशा उसे अपने सेज बेटे क जैसे hi तो प्यार किया था उसने बल्कि वो तो ये भूल hi गयी थे क अमित उसका सागा बीटा नहीं है
विजय जनता था क गौरी अपने आंसुओं से अमित से सच उगलवा लेगी और अगर सचाई बहार आ गयी तो पता नहीं क्या कर बैठेगी, इस लिए वो जल्दी से आगे बढ़ता है
विजय: कहाँ चला गया था मेरे बचे काम से काम एक बार बता तो देता तूने हमारे बारे में एक बार भी नहीं सोचा अजा मेरे गले लग जा
इतना कह कर अमित को गले लगा लेता है और फिर कहता है
चल पहले अंदर चल अभी तक किसी ने खाना तक नहीं खाया तेरे इंतज़ार में चल पहले खाना खले
अमित की माँ जाओ पहले अपने बेटे और हमारे लिए खाना लगाओ कब से भूखा होगा
इतना कह कर विजय अमित को गले लगाए अंदर ले चलता है और गौरी भी खाना लगाने की तैयारी करने लगती है कामिनी भी उसके साथ थी मगर किसी का ध्यान दीपिका की तरफ नहीं गया था जो एक तरफ कड़ी अमित की बातों को सोच रही थी और उसकी आँखों से बहते आंसुओं से अंदाज़ा लगा रही थी उसकी तकलीफ का
विजय अमित से अभी कोई बात नहीं करना चाहता था इस लिए उसने चुपचाप सबको खाना खाने दिया और गौरी को भी समझा दिया क अमित को रेस्ट करने दो हम कल बात करेंगे उससे
खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में चले जाते हैं
गौरी को नींद नहीं आ रही थी उसके दिल को अमित क मुँह से निकले शब्द अभी भी दुखी कर रहे थे इस लिए वो अमित क कमरे में जाने क लिए उठती है, विजय भी जनता था इस लिए वो भी गौरी क जाने क कुछ देर बाद पीछे पीछे चला जाता है
गौरी फिर से जानने की कोशिश करती है मगर विजय फिर से गौरी को समझा बुझा क ले जाता है
कमलेश घर नहीं लौटा था मगर इस बात की किसी को टेंशन नहीं थी ये उसकी पहले की आदत बन गयी थी मगर दीपिका को अमित क दिल का दर्द महसूस हो रहा था इस लिए वो सब क सोने क बाद अमित क पास चली जाती है
कमरे में आके दीपिका दरवाज़ा बंद कर लेती है अमित करवट क बल ऑंखें बंद कर क सो रहा था
दीपिका: क्या मुझे भी अपने दिल क ज़ख़्म नहीं दिखाओगे? क्या तुम्हारे दिल में इतनी भी जगह नहीं मेरे लिए?
अमित फिर भी सो रहा था मगर दीपिका जानती थी क वो ऐसे हालत में सो नहीं सकता भला कोई कैसे इतने दर्द क बाद सो सकता है
दीपिका अमित को पकड़ कर सीधा लिटा देती है और उसके होंठो को चूम लेती है
दीपिका: तुम्हे पता है न क मैं अब तुम्हे hi अपना सबकुछ मानती हूँ और सिर्फ तुम्हारे लिए hi इस घर में हूँ, तुमने hi तो रोका था न उसदिन मुझे वर्ण मैं ये घर क्या ये दुनिआ hi छोड़ देती मगर लगता है तुम मुझे उतना प्यार नहीं करते
इतना सुनते hi अमित अपनी ऑंखें खोल लेता है , उसकी ऑंखें रोने से अभी भी लाल थी मगर दीपिका की बातों से उसका दिल भर आया और उसने उठते हुए दीपिका को गले लगा लिया
अमित: ऐसा मत कहिये ममी जी मेरे दिल की गहराईयों में अगर झांक कर देखेंगी तो आपको वहां आपके और माँ क सिवा और कोई नहीं है
दीपिका: तो बता क्या बात है जो तुझे इतना दुःख दे रही है बता मुझे आखिर क्या हुआ है और तू कहाँ चला गया था
अमित दीपिका क सामने अपना दिल खोल देता है और बता देता है जो भी आज हुआ
दीपिका को भी बहुत दुःख होता है और कमलेश क लिए उसके दिल में नफरत बाद जाती है
दीपिका: एक आदमी की वजह से तू कितने लोगो का दिल तोड़ रहा था तुझे ये ख्याल नहीं आया, देखा था क्या हालत हो गयी थी दीदी की और मेरा क्या होता मैं उसी पल खुद को ख़तम कर लेती आखिर तुझसे hi तो अब मेरी दुनिआ है
अमित : मुझे माफ़ कार्डो ममी जी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था बस इसीलिए अकेला तन्हाई में बैठकर दिल को हल्का कर रहा था
दीपिका : अगर दोबारा ऐसा किया तो सोच लेना तेरे पीछे न मैं ज़िंदा रहूंगी न दीदी
अमित : मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा ममी जी
दीपिका: तेरे मां को तो अब सबक सीखना hi पड़ेगा एक रंडी क लिए तुझपर हाथ उठाया उसने तू वो वीडियो बड़े भैया को दिखा नहीं तो मुझे दे मोबाइल मैं दीदी को बताती हूँ और वो भैया को बता देंगी इसे घर से निकलवा देते हैं तभी इसकी अकाल ठिकाने आएगी
अमित : नहीं ममी जी ऐसा किया तो मां हमें hi गलत समझेंगे और मीणा क पास चले जायेंगे और फिर आपका क्या होगा आप पर भी तो सवाल उठ सकते हैं मैं ऐसा बिलकुल नहीं करूँगा,
मगर मां ने मेरा एक भला तो किया मुझे ये बता कर क मेरी एक और फॅमिली है
और अब आप बताएं क आप क्या जानती हैं मेरी दूसरी फॅमिली क बारे में
दीपिका: क्या ? तुम्हारी दूसरी फॅमिली? मगर मैंने तो आजतक बिलकुल नहीं सुना किसी क भी मुँह से
अमित : हम्म तो अब इसका पता लगाना होगा आखिर क्यों मुझे आजतक बताया नहीं गया क्या वजह है इसके बारे में, माँ बाबा ने भी कभी ज़िकर क्यों नहीं किया और न hi कोई कभी मुझसे मिलने आया
दीपिका: मुझे नहीं लगता तुम्हे इस सब को जानना चाहिए अगर दीदी और भैया ने ये बात तुमसे छुपाई है तो इसका एक hi मतलब है क वो लोग अचे नहीं होंगे वर्ण कभी न कभी कोई तो अत और मैंने आजतक न किसी को देखा न किसी से सुना
अमित और दीपिका देर तक बातें करते रहे साडी रत ऐसे hi काट गयी दीपिका ने एक पल भी अमित को उदास नहीं होने दिया और उसे अपनी बाँहों में लेकर बैठी रही और ऐसे hi दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए,
आज हकीकत में दीपिका ने अमित क दिल क ज़ख्मो को छू लिया था , प्यार भरी बातों से जो दिल क घावों पर मलहम लग सकता है वो सब से परे है
साडी रत दोनों चिपके रहे मगर एक बार भी दोनों क दिल में वासना रत्ती भर भी न जगी
सुबह दोनों देर तक सोते रहे मगर दीपिका अमित से पहले उठकर अपने कमरे में चली गयी वो जानती थी क दीदी कमरे में आ सकती है
गौरी सुबह उठकर नहा कर चाय बना क अमित क कमरे में जाती है जहाँ वो अभी भी सो रहा था
गौरी को रत भर उसकी चिंता सताती रही और सुबह भी भगवन का नाम लेने से पहले वो अमित क पास चली गयी
अमित को सोते हुए देखकर उसके मन को तसल्ली हो रही थी आखिर था तो वो गौरी क कलेजे का टुकड़ा क्या हुआ जो उसने उसे पैदा नहीं किया मगर पला तो सगी माँ से भी बढ़कर है
गौरी अमित क पास बैठ जाती है और उसके सर पर प्यार से हाथ फिरने लगती है
विजय भी तैयार हो कर अमित क कमरे में आ जाता है और गौरी को देखकर वहीँ ठहर जाता है
विजय: अब उठा भी दो उसे क यूँही बैठी रहोगी उसके पास दिन निकल आया है और आज ये कसरत करने भी नहीं गया
गौरी: सोने दीजिये मेरे बेटे को कल क्या कुछ हुआ भूल गए आप, क्या बीती होगी इसके दिल पर कितना दुःख हुआ होगा इसे पता नहीं कौन वो दुश्मन है जो मेरे मासूम से बचे को इतना दुःख दे रहा है
विजय: वो मैं देख लूंगा अभी इसे जगाओ और जल्दी तैयार करो मैंने शहर जाना है और अमित को भी मेरे साथ जाना है
गौरी: आप जाइये जहाँ जाना है मैं इसे कहीं नहीं भेजूंगी
विजय: बच्चों जैसी बात मत करो कागज़ी काम है इसका साथ जाना ज़रूरी है चलो जल्दी करो
इतना कहकर विजय वापिस निचे चला जाता है
गौरी अमित को जगती है , अमित गौरी को देखकर खुश हो जाता है और गौरी उसे बताती है क जल्दी तैयार हो जा तुझे बाबा क साथ शहर जाना है
अमित जल्दी से तैयार हो कर निचे आ जाता है और फिर नाश्ता कर क विजय क साथ निकल पड़ता है
विजय अमित को गाओं क बहार लेजाकर खली जगह में रुकने का कहता है और उससे कल जो भी हुआ सब पूछता है
अमित छिपाने क कोशिश करता है मगर विजय तो अजय से सब जान चूका था इस लिए अमित को भी सच बताना पड़ता है
विजय: तुम मेरी एक बात सुनलो तुम मेरे बेटे हो कोई कुछ भी कहे मेरा जो है सब तुम्हारा है मैं आज hi अपने हिस्से की साडी जायदाद तेरे नाम करवा दूंगा और जो तुझे मनहूस कहता है मेरा उससे कोई रिश्ता नहीं हम ये घर छोड़कर अलग घर में रह लेंगे
अमित : नहीं बाबा आप ऐसा नहीं करेंगे छोटे मां गुस्से में कुछ कह भी गए तो क्या हुआ वो बड़े हैं इतनी स बात क लिए क्या आप रिश्ते ख़तम करदेंगे फिर तो वाक़ई में मैं मनहूस hi तो कहलाऊंगा जो मेरी वजह से घर टूट गया
आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे आपको मेरी कसम, रही बात मां की तो मैं जनता हूँ उन्हें भी अपनी गलती का एहसास ज़रूर होगा
विजय : कितना ाचा है तू और एक वो है जिसे हीरे की पहचान hi नहीं है बस अपने आवारा दोस्तों क साथ मौज उडाता फिरता है
अमित : बाबा आपने मुझे कभी नहीं बताया क मेरी कोई और फॅमिली भी है? आपने कभी मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया
विजय: क्या तुझे हमारे प्यार में कोई कमी लगने लगी है? कमलेश की वजह से तू हमारे प्यार पर शक करने लगा है ?
अमित : नहीं नहीं बाबा अपने और माँ ने जितना मुझे प्यार दिया है कोई सेज बेटे को भी इतना प्यार नहीं देता होगा
विजय: ख़बरदार जो खुद को पराया समझा तो भगवन जनता है मैंने हमेशा तुझे अपना सागा बीटा hi समझा है
अमित : मगर मैं जानना चाहता हूँ क मेरी फॅमिली में और कौन कौन है? मैं उनसे मिलना चाहता हूँ क्या आप मुझे उनसे नहीं मिलवाओगे?
विजय: वो लोग इस काबिल नहीं क उनका ज़िकर भी किया जाये, अगर हमने तुम्हे नहीं बताया तो तुझे समझ जाना चाहिए क वो अचे लोग नहीं हैं
और तू अब उनका ज़िकर दोबारा नहीं करना , हमारे लिए वो मर चुके हैं और तू भी उनके लिए मर चूका है आयी बात समझ में अब इसके बाद और कोई बात नहीं होगी अब चल शहर और एक बात , भूलकर भी अपनी माँ से ज़िकर मत करना वर्ण उसके दिल को कितनी ठेस लगेगी तुझे नहीं पता, अब चल
अमित चुपचाप मोटरसाइकिल चलने लगता है, विजय अमित को तहसील ले जाता है जहाँ वो अपनी जायदाद क कागज़ात वकील से मिलकर तैयार करने को कहता है
विजय साडी जायदाद को तीनो भाइयों में बराबर बाँटने को कहता है और अपना हिंसा अमित क नाम करने को बोल देता है
अमित विजय को मना करता रहता है मगर विजय नहीं सुनता
शाम होते दोनों घर लौट एते हैं गौरी अमित को अपने कमरे में ले जाती है और उससे बातों में जानने की कोशिश करती है मगर विजय और अमित बातों को घुमाकर कल की बात पर पर्दा दाल देते हैं
फिर रत का खाना कहते हैं सब आज कमलेश फिर घर नहीं लौटा था
अमित को ये बात खटक रही थी
दरअसल कमलेश और अमित क खेतों से आने क बाद अजय ने रघु को बुलाकर फ़ौरन उसे अपने परिवार समेत उनके गाओं से निकल जाने को बोलै था और न जाने पर उसको अंजाम भुगतने की धमकी दी थी बेचारा हाथ जोड़ता रहा मगर अजय नहीं मन क्यूंकि उसे भी मीणा से नफरत हो गयी थी
बहरहाल रघु मीणा को लेकर गाओं से चला गया था
रत को जब कमलेश मीणा क घर की तरफ गया तो वहां उसे न पाकर जब उसने पता किया तो उसे अजय पर बड़ा गुस्सा आया और सबसे ज्यादा अमित पर
कमलेश तो बचे क मोह में अँधा होकर मीणा को ढूंढ़ता फिर रहा था इसी लिए वो घर नहीं आया था
रत को फिर से दीपिका अमित क पास hi रूकती है मगर दोनों प्यार भरी बातों क इलावा कुछ नहीं करते
अगले दिन अमित रूटीन से अखाड़े और फिर स्कूल चला जाता है मगर जाने से पहले राजू को कमलेश मां का पता करने को बोल देता है
वहीँ विजय और अजय भी कमलेश का पता करते हैं
स्कूल से आकर अमित राजू को साथ लेकर कमलेश को ढूंढ़ने जाता है विजय और अजय को भी अभी तक कमलेश नहीं मिला था
किस्मत से गाओं क बहार जाने वाले रस्ते पर hi अमित को कमलेश मिल जाता है जो गुस्से में था
कमलेश: आखिर तूने कर्ली न अपने दिल की तूने और अजय ने मिलकर मीणा को निकल दिया न, मैं भी उसे ढूंढ़कर रहूँगा और फिर देखता हूँ सबको
अमित : ये आप कैसी बातें कर रहे हैं मां जी, आप को पता भी है वो औरत क्या कर रही थी
कमलेश: जुबान बंद कर अपनी ख़बरदार एक लग्ज़ भी उसके खिलाफ बोलै तो
अमित : मां जी आपको मुझ पर यकीन नहीं है न मगर आप को मेरी कसम आप एक बार ये देख लीजिये उसके बाद आप जो कहेंगे वो मैं करूँगा
कमलेश: मैं क्यों देखूं मुझे तेरी कोई बात नहीं सुन्नी
अमित: आपको ममी की कसम आपको बाबा की कसम प्लीज आप एक बार अपनी आँखों से देख लीजिये
कमलेश अपने गुस्से को काबू करते हुए अमित क हाथो से मोबाइल पकड़ लेता है जिसमे अमित ने मीणा की वो वीडियो प्ले करदी थी जो उसने अजय को दिखाई थी
कमलेश जैसे जैसे वीडियो देखता जाता है उसका खून खौलने लगता है और गुस्से से उसकी आँखों में खून उतर अत है
कमलेश: ये सब तेरी कोई चाल है मीणा ऐसा नहीं कर सकती मैं तेरा खून पि जाऊंगा
कमलेश मोबाइल को फेंकने लगता है मगर अमित उसका हाथ पकड़ लेता है
अमित : अभी लगता है आपको यकीन नहीं हुआ रुकिए एक और सबूत दिखता हूँ
फिर अमित दूसरी वीडियो चला देता है जिसमे मीणा उसके कजिन क साथ चुदाई कर रही थी और कमलेश क बारे में बातें कर रही थी क कैसे वो चुटिया बना रही थी कमलेश को
मीणा की बातें सुनकर कमलेश को झटका लगता है और वो अपना सर पीटने लगता है
कमलेश: हरामज़ादी मेरे साथ खेल खेल रही थी मैं इस रंडी क टुकड़े टुकड़े कर दूंगा
अमित : मां जी जो हुआ भूल जाइये गलती आपकी भी है जो आप अपना घर छोड़कर उसके चक्कर में पद गए
आखिर क्या कमी है ममी में? कहाँ ममी और कहाँ ये गन्दी औरत, आपने एक पल भी न सोचा क्या होगा ममी का क्या बीतेगी उनपर और परिवार की मन मर्यादा का क्या होगा
आपने सब कुछ देव पर लगा दिया
कमलेश को पछतावा होने लगता है क कैसे वो अँधा होकर सबकुछ उस औरत पर लुटाने चला था जो क रण्डिओं से भी बढ़कर थी
कमलेश: सच में मुझसे बड़ी गलती हो गयी, मेरा दिमाग ख़राब हो गया था मगर अब मैं सब ठीक कर दूंगा , मैं दीपिका से माफ़ी मांगूंगा मैंने उसका दिल दुखाया है
अमित : बिलकुल मां जी और एक बात आप सिर्फ इस बात पर उस गन्दी औरत क झांसे में आ गए थे न आप बाप बनना चाहते हैं तो आपकी वो इच्छा भी पूरी हो सकती है आप ममी का इलाज करवाइये डॉ ने बोलै है क ममी माँ बन सकती है
कमलेश: बिलकुल मैं यही करूँगा मैं आज hi उसे डॉ क पास लेकर जाऊंगा
मगर सबसे पहले तू मुझे माफ़ करदे मैंने कल तुझसे बड़ी बदतमीज़ी करदी और तुझपर हाथ उठाया जबकि तू मेरा hi भला सोच रहा था तूने सबकुछ पता होते हुए भी किसी को बताया नहीं
मुझे माफ़ करदे अमित मैं तेरा गुनहगार हूँ
अमित : ये आप क्या कह रहे हैं मां जी आपने मुझे इतना प्यार दिया है क उसके आगे ये तो कुछ भी नहीं वैसे भी माँ बाप और बड़े बुज़ुर्ग हाथ उठा भी दे तो इस बात का गुस्सा नहीं करना चाहिए
कमलेश अमित को गले लगा लेता है
कमलेश: तू कितना ाचा है कितने बड़ा दिल है तेरा वाकई भाभी ने तुझे सबसे अचे संस्कार दिए हैं
फिर दोनों मां भांजा घर को चल पड़ते हैं विजय और अजय भी घर लौट ए थे वो दोनों कमलेश और अमित को साथ मुस्कुराता देखकर समझ जाते हैं क अब सबकुछ ठीक है इसलिए वो भी कोई बात नहीं करते
फिर कमलेश विजय से और अजय से माफ़ी मांगता है अपनी गलती क लिए दोनों उसके पछतावे को देखकर उसे माफ़ कर देते हैं
रत को कमलेश दीपिका से भी माफ़ी मांगता है और उसे मनाता है और उसका डॉ से इलाज करवाने की हामी भर देता है ताकि वो जल्दी माँ बन सके
दीपिका क दिल में जो कड़वाहट आ गयी थी वो भी निकल जाती है मगर डॉ से अब वो इलाज करवाना नहीं चाहती थी क्यूंकि अब तो उसे घर का डॉ मिल गया था जिसने उसके गर्भ में बीज दाल दिया था जिससे क वो माँ बन सकती थी
इस लिए वो कमलेश को कह देती है क डॉ ने जो दवा डी है बस उसी से वो माँ बन जाएगी आप चिंता न करो भगवन पर भरोसा रखो
कमलेश सब सेट होने क बाद दीपिका को चुदाई क लिए मानाने की कोशिश करता है मगर दीपिका तबियत ख़राब का बहाना बना कर सो जाती है और कमलेश भी बात मन जाता है
बातों में वक़्त ज्यादा हो गया था इस लिए दीपिका अमित क पास भी नहीं जा पति और अमित भी चैन की नींद सो जाता है