Adultery Manhoos se mahan tak - Page 7 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 50

ट्रैन अपने टाइम पर चल पड़ी और हमारी यात्रा शुरू हो गयी . हमने अपनी सीट पर सामान रख कर कुछ देर आराम किया 200 कम दूर मंदिर था जिसमे से 50 कम बस से जाना था. हम दोपहर को अपने आखरी स्टेशन पर पहुँच गए उसके बाद ह्यूमेन बस पकड़ी और रत होने से पहले हम आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए जहाँ से आगे पैदल यात्रा थी . मैंने एक होटल में कमरा ले लिया और खाना खा कर सुबह की यात्रा शुरू करने क लिए आराम से सो गए. मैं भगवन से यही प्रार्थना कर रहा था क माँ की मुराद पूरी हो और उनके मन को भी शांति मिले शायद माँ बनने का बाद मेरे प्रति उनका बर्ताव बदल भी सकता है मगर मैं यही चाहता था क उनकी मुराद पूरी हो

अब आगे -


अगली सुबह जल्दी उठ कर मैं और माँ तैयार हो गए होटल से नाश्ता किया और अपनी यात्रा पर निकल पड़े . ये यात्रा बहुत मुश्किल थी पहाड़ों में सीधी चढ़ाई थी . यात्रा में और भी बहुत से लोग थे ज्यादातर लोग फैमिलीज़ क साथ थे और रस्ते में कहीं कहीं यात्रियों क लिए लंगर भी लगे हुए थे यहाँ का मौसम ठंडा था और बदल भी थे रस्ते में एक तरफ नदी बह रही थी .

कुदरत क बहुत सरे नज़ारे यहाँ पर देखने को मिल रहे थे हर तरफ हरियाली थी मगर कहीं कहीं रास्ता इतना संकरा था क पाऊँ फिसला तो सीधा परलोक पहुँच जाये आदमी . सीधी चढ़ाई किसी को भी थका देने क लिए काफी थी . मैं तो कसरत करने से मजबूर कद काठी वाला था मुझे कोई खास फरक नहीं पद रहा था अपने बैग मैंने hi उठा रखे थे. मगर माँ तो कोमल थी बेचारी इतनी मुश्किल यात्रा वो कैसे कर रही थी इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल था.

सुबह से लेकर शाम तक चलते चलते माँ का बुरा हल हो गया था और अब उनसे पाऊँ उठाना भी मुश्किल हो रहा था मगर फिर भी मन में आस लिए वो लगातार बढ़ती जा रही थी . जब अँधेरा होने लगा तो मैंने रस्ते में आते रहत शिविर में एक तम्बू में हम दोनों क लिए रहने की व्यवस्था की .

माँ का बुरा हल हो चूका था हम आधे से ज्यादा रास्ता पर कर चुके थे. मैंने माँ क पाऊँ दबाये और उन्हें कुछ आराम मिला थकावट इतनी ज्यादा हो चुकी थी क बिस्तर पर पड़ते hi नींद आ गयी. सुबह उठ कर ह्यूमेन फिर से यात्रा शुरू कर दी कल क मुकाबले आज माँ थकी हुई थी और धीरे चल रही थी जैसे जैसे हम आगे बढ़ते जा रहे थे मौसम और भी ठंडा होता जा रहा था देखते hi देखते बदल उमड़ आये और ऐसा लगने लगा क बारिश होगी .

दोपहर को हम दोनों मंदिर में पहुँच गए . माँ ने दर्शन किये और मन्नत मांगी पंडित जी से हमने पूजा भी करवाई और पंडित जी ने कहा ‘ जाओ देवी तुम्हारी मनोकामना ज़रूर पूरी होगी ‘

पंडित जी क मुँह से ऐसी बात सुन कर माँ तो जैसे फूली नहीं समां रही थी जैसे उनकी मन्नत अभी पूरी हो गयी हो. एक नयी उम्मीद एक नयी ख़ुशी उनके चहरे से झलक रही थी . मंदिर में दर्शन करने क बाद मैंने आराम करने का सोचा

अमित : माँ आज हम यहीं रुक जाते हैं आप भी थकी हुई हैं कल सुबह वापिस चलेंगे.

गौरी ममी : नहीं बीटा भगवन क दर्शन कर क मेरी साडी थकावट उतर गयी है अभी तो काफी टाइम पड़ा है अब तो रस्ते में सिर्फ ढलान है हम रत तक निचे पहुँच जायेंगे

अमित : मगर माँ बदल घिर आये हैं अगर बारिश आ गयी तो रस्ते में फस्स जायेंगे

मेरे कहने पर भी माँ नहीं मणि और मुझे उनकी बात माननी पड़ी . हम वापिस चल पड़े. माँ तो वापसी में मुझसे भी आगे निकल रही थी एक नया जोश आ गया था उनमे जैसे hi अँधेरा होने लगा बारिश शुरू हो गयी और देखते hi देखती बहुत तेज़ हो गयी.

बहुत सरे लोग बारिश क अनुमान से पहले hi रुक गए थे हम रस्ते में अकेले hi थे क बारिश ने हमें घेर लिया . बारिश इतनी तेज़ थी क अब आगे बढ़ना मुश्किल हो गया था. मैं और माँ पूरी तरह भीग गए थे. मैं सर छिपाने क लिए जगह ढूंढने लगा मगर मुझे बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं हो रहा था क हम कहाँ है और आगे यात्री शिविर कितनी दूर हैं. ऐसी हालत में आगे बाद पाना बहुत मुश्किल था .

बारिश क साथ साथ ठण्ड बहुत बाद गयी थी और अब हमारे शरीर कम्पनी लगे थे मुझे रस्ते से हैट कर पत्थर की दीवारों से बनाई गयी चार दीवारी नज़र आयी. मैं माँ को साथ लेकर उसके भीतर घुस गया. अंदर घास पड़ी थी कच्ची ज़मीन थी ऊपर कुछ लकड़ी और पत्थर की छोटी छोटी सलेटों से छत बानी हुई थी. जो भी था सर छुपाने क लिए काफी था.

अमित : मैंने कहा था न माँ रुक जाते हैं अब न आगे जा सकते हैं न पीछे जब तक बारिश नहीं थमती यहीं रुकना होगा.

मैं माँ से बात कर रहा था मगर माँ मेरी बात का जवाब नहीं दे रही थी . मैंने जब माँ की तरफ देखा तो वो कांप रही थी और उनको बेहोशी छाने लगी . मैं उनकी हालत देख कर घबरा गया

अमित : माँ क्या हुआ माँ आप ठीक तो हैं माँ मुझसे बात कीजिये .

माँ मेरी बात का कोई जवाब नहीं दे रही थी मैंने जल्दी से अपने बैग साइड में रखे और माँ को नीचे घास पर लिटा दिया और उनके हाथ पाऊँ को घिसने लगा.

एक पल में hi ज़िन्दगी क्या से क्या हो जाती है कभी कभी लगता है सब ठीक है और अबले पल में सब कुछ तबाह हो जाता है.

मैंने अपने माता पिता को नहीं देखा था भगवन ने बचपन में hi मुझे अनाथ कर दिया था मगर गौरी ममी और विजय मां ने मुझे माँ बाप की कमी महसूस नहीं होने दी. अब जब सब कुछ ठीक चल रहा था कामिनी ममी भी अब मुझे प्यार करने लगी थी . दीपिका ममी कामिनी ममी पूजा भाभी मंजरी इन सब क साथ मैं अपनी ज़िन्दगी हंसी ख़ुशी गुज़र रहा था और अब मुझे फिर से अपने सर से माँ की ममता दूर होती नज़र आ रही थी

मैं लगातार माँ की हाथ पाऊँ की तालियों को घिस रहा था मगर माँ पर कोई असर नहीं हो रहा था . बारिश पूरे ज़ोरों पर थी और किसी तरह की कोई मदद का कोई चांस नहीं था माँ का शरीर कम्प रहा था और मेरा भी सर्दी से बुरा हल था मगर मुझे अपनी कोई परवाह नहीं थी

मेरी आँखों क सामने अँधेरा छाने लगा अगर कहीं माँ को कुछ हो गया तो मैं क्या करूँगा मैं क्या जवाब दूंगा बाबा को . मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क क्या करूँ मगर और कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था .

मैंने सोचा माँ क गीले कपडे उतर कर दूसरे कपडे पहना देता हूँ वर्ण गीले कपड़ों में तो सर्दी और ज्यादा लगेगी. इस जगह पर रौशनी क लिए कुछ भी नहीं था और बहार पूरा अँधेरा हो चूका था मैंने मोबाइल से रौशनी करनी चाही मगर वो भी पानी में भीग कर बंद हो गया था. मैंने माँ क कपडे उतरने क लिए हाथ बढ़ाया मैंने माँ की साडी निकली . साडी साइड में रख कर मैंने माँ क पेटीकोट को खोलने क लिए जैसे hi नाड़े को खोलना चाहा तो मेरी उंगलियां माँ क जिस्म से टच हुई माँ की बॉडी बर्फ की तरह ठंडी हो गयी थी मैं और ज्यादा घबरा गया.

मैंने जल्दी से पेटीकोट का नाडा खोला और खींच कर उतर दिया माँ की पेंटी भी गीली थी इस लिए मैंने उसे भी उतर दिया. अब माँ क जिस्म पर ब्लाउज hi बचा था मैंने उसे भी उतर दिया . अब माँ क जिस्म को मैंने जल्दी से बैग उठाया और माँ क दूसरे कपडे निकलने चाहे तो देखा सब कुछ पूरी तरह से भीग चूका था .

अब तो मेरा दिमाग ख़राब हो गया अब मैं क्या करूँ उधर माँ बेहोश थी इधर हमारे कपडे भीग गए थे सर्दी से बचने का और कोई रास्ता नहीं दिखाई पद रहा था तभी स्कूल में मास्टर जी की सिखाई हुई बात यद् आ गयी क जब सर्दी से बचने का कोई रास्ता न हो तो शरीर को शरीर की hi गर्मी बचा सकती है . मगर एक बेटे क लिए माँ क साथ कैसे ऐसा किया जा सकता है.

मैं दुविधा में फस्स गया था अब उनकी जान बच्चों क लाज बच्चों . मेरे पास ज्यादा वक़्त नहीं था इस लिए मैंने माँ को हाथ जोड़ते हुए माफ़ी मांगी और अपने गीले कपडे उतर कर माँ क ऊपर लेट गया . माँ का जिस्म बर्फ हो चूका था मैं माँ क ऊपर लेट तो गया मगर सिर्फ लेटने से क्या होने वाला था .

आज मैं उस मोड़ पर था जहाँ मेरे न कुछ करने से मैं माँ को हमेशा क लिए खो सकता था और अगर करता हूँ तो मैं हमेशा क अपनी और माँ की नज़रों से गिर जाऊंगा . मैंने आगे बढ़ना hi ठीक समझा . मैंने माँ क जिस्म से अपना जिस्म रगड़ने लगा मगर फिर भी कोई हलचल नज़र नहीं आयी फिर मैंने माँ क दोनों दूध मसलने शुरू किये ये कोशिश भी कोई असर न दिखा सकीय फिर मैंने माँ की छूट को हाथों से रगड़ना शुरू कर दिया.

5 मिनट्स तक छूट को रगड़ने पर भी जब कोई असर नज़र न आया तो मुझे साडी उम्मीदें ख़तम होती नज़र आने लगी. फिर मैंने सारा कुछ एक साथ तरय किया अपने होंठो से माँ क होंठ चूसने लगा अपने हाथो से दोनों दूध मसलने लगा और अपना लैंड जो अभी सोया हुआ था माँ की छूट से रगड़ने लगा . माँ की छूट से लैंड रगड़ते हुए और दूध दबाते हुए मेरे लैंड में तनाव आने लगा . मेरी मेहनत से माँ को होश तो आया नहीं मगर उनका जिस्म अब पहले की तरह ठंडा नहीं था मुझे उम्मीद नज़र आने लगी

मेरा लैंड अब पूरा खड़ा हो चूका था मैंने लैंड का सूपड़ा छूट क मुँह में थोड़ा थोड़ा घुसाने लगा मुझे छूट में लैंड डालना सही नहीं लग रहा था मगर अब यही एक रास्ता था.

मैंने मन को मरते हुए अपना लैंड माँ की छूट में घुसाने क लिए दबाव बनाया छूट क मुकाबले लैंड मोटा था जिससे मुझे थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ा और मेरा लैंड धीरे धीरे अंदर जाने लगा. करीब 6 इंच तक लैंड छूट में घुस गया अब आगे और ज़ोर लगाने की ज़रूरत थी . और किसी कंडीशन में लैंड छूट में घुसता तो अब तक जड़ तक घुसा कर धक्के मर रहा होता मगर यहाँ मेरे अंदर वासना लेस मात्र भी नहीं थी.

मैंने उतने लैंड को hi छूट में अंदर बहार करना शुरू कर दिया. मैं धीरे धीरे लैंड को छूट में अंदर बहार कर रहा था और साथ में माँ क दूध मसल रहा था . मेरे जिस्म में अब गर्मी आ चुकी थी और मैं अपने लैंड क रस्ते अपनी गर्मी माँ की छूट में दाल रहा था . थोड़ी देर में hi मेरी मेहनत रंग लेन लगी और माँ क जिस्म में हलचल महसूस हुई मगर अभी भी वो बेहोश थी .

मुझे उम्मीद की किरण नज़र एते hi मैंने लैंड की स्पीड बड़ा डी ताकि जल्दी से माँ की बॉडी में हीट आ जाये. मेरा ध्यान चुदाई की तरफ नहीं था इस लिए मेरा पानी अभी निकलने वाला नहीं था. मैं लगातार अपनी कमर चला रहा था मुझे अब लैंड छूट में आसानी से अत जाता महसूस होने लगा इसका मतलब था छूट में लैंड की जगह बन गयी थी और छूट में भी थोड़ा पानी आ गया था.

मैं जैसे जैसे माँ की छूट में धक्के मर रहा था वैसे वैसे माँ का जिस्म थोड़ा थोड़ा गरम होने लगा. मैं 15 मिनट्स से छूट में धक्के मरे जा रहा था इसी बीच छूट ने बेहोशी की हालत में भी पानी छोड़ दिया था . तकरीबन आधे घंटे तक माँ की छूट छिड़ने क बाद अब मेरा भी सबर टूट गया और मैंने आखिरी धक्के पूरे जोर से लगा दिए जिससे माँ का पूरा जिस्म हिल गया और मेरा पूरा लैंड भी जड़ तक छूट में घुस गया. मैं खुद को और रोक नहीं पाया और छूट क अंदर पूरा लैंड घुसा कर अपना पानी छोड़ दिया.

मैं पहले hi थक चूका था और अब इस चुदाई ने मुझे भी निढाल कर दिया मैं ऐसे hi माँ क ऊपर गिर गया . मैं पता नहीं कब तक माँ क ऊपर ऐसे पड़ा रहा लैंड वैसे hi छूट में सो गया था. मुझे जैसे hi थोड़ा होश आया मैंने फिर से माँ को चेक किया तो वो अभी भी वैसे hi थी . मैंने फिर से उनका जिस्म मसलने लगा और एक बार फिर से उनकी ऐसी hi कंडीशन में चुदाई करदी.

सुबह होने तक मैंने माँ क जिस्म को गर्मी देने क लिए उनके ऊपर से नहीं उतरा और 4 बार अपना पानी माँ की छूट में hi दाल दिया मगर लैंड बहार नहीं निकला और न hi पोजीशन बदली आखरी बार पानी छोड़ते वक़्त बहार अँधेरा काम होने लगा था मतलब दिन चढ़ने वाला था और मैं भी पूरा टूट कर थक चूका था . मैं ऐसे hi माँ पर गिर गया और पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी.

मेरी नींद झटके से खुली जब माँ ने मुझे अपने ऊपर से धक्का दिया. माँ को होश आ गया था मैं खुश होकर जैसे hi माँ क पास गया माँ ने लगातार मेरे मुँह पर थप्पड़ मरने शुरू कर दिए और तब तक मरती रही जब तक वो थक नहीं गयी और बाद में ज़ोर ज़ोर से रोने लगी . मुझे माँ क थप्पड़ से दर्द नहीं हो रहा था मगर माँ क आंसुओं से मेरी आत्मा छलनी हो रही थी मुझे अब अपनी और माँ की कंडीशन का एहसास हुआ . हम दोनों hi नंगे थे बहार दिन निकल आया था .

हमारी ऐसी हालत हो चुकी थी क न माँ मेरी तरफ देख रही थी न मेरी हिम्मत हो रही थी कुछ भी कहने और करने की. मगर इस कंडीशन से बहार तो निकलना hi था. मैंने दिल पर पत्थर रख कर अपने कपडे पहने जो पूरी तरह सूखे तो नहीं थे पर अब पहनने तो थे hi . मेरा शरीर जैसे मेरी आत्मा पर बोझ सा बन गया था मगर माँ को वापिस घर तो लेकर जाना होगा चाहे बाद में खुदखुशी कर लूँ.

मैंने अपने कपडे पहनने क बाद माँ क कपडे उठाये और माँ को दिए मगर उन्होंने कोई भी रिस्पांस नहीं दिया

अमित : माँ ये कपडे पेहेन लो

गौरी ममी : मत कह मुझे अपनी गन्दी ज़ुबान से माँ तू मर क्यों नहीं गया मेरे साथ ऐसा करने से पहले

अमित : मैं मजबूर था माँ मैं कैसे तुमने अपनी आँखों क सामने मरने देता क्या जवाब देता मैं बाबा को कैसे मैं जवाब देता अपनी आप को क मैंने अपनी माँ को मरने दिया

गौरी ममी : अब कौन सा ज़िंदा हूँ मैं ये दिन देखने से पहले मैं मर क्यों नहीं गयी. तुमने सरे रिश्ते एक बार में hi तोड़ दिए काश मुझे मर जाने दिया होता अब तो मुझे अपने आप से नफरत होने लगी है तू मुझे मार क्यों नहीं देता . मैं क्या मुँह दिखाउंगी जा कर क अपने बेटे क हाथों अपनी इज़्ज़त लुटवा कर आयी हूँ. आखिर आज तूने साबित कर hi दिया क तू मेरा बीटा नहीं है

अमित : माँ मैंने जो भी किया आपकी जान बचने क लिए किया है और मैंने हमेशा आपको अपनी माँ hi मन है आप चाहे जो भी कहें अगर आपको मुझसे इतनी hi नफरत हो रही है तो मैं अभी अपनी जान दे देता हूँ

गौरी ममी : तेरे जान देने से क्या मेरी इज़्ज़त वापिस आ जाएगी . नहीं मैं ये दाग अपनी आत्मा पर बर्दाश्त नहीं कर सकती मैं अभी जान दे दूंगी

अमित : अगर कोई जान देगा तो वो मैं हूँ मैंने hi पाप किया है आप दोषी नहीं हैं

माँ ने जल्दी से अपने कपडे पहने और बहार भागने लगी मगर मैंने उन्हें पकड़ लिया

गौरी ममी : छोड़ दे मुझे पापी दूर रख अपने गंदे हाथ मुझ से

अमित : आप चाहे मुझे गलियां दो चाहे मुझे मारो मगर आपको आपके सुहाग का वास्ता आप अपनी जान नहीं देंगी. आप पहले घर चलिए मैं आपको सही सलामत घर पहुंचा दूँ उसके बाद ये मनहूस चेहरा कभी आपको नज़र नहीं आएगा

सुहाग की कसम देने से माँ रुक तो गयी मगर वो रोटी रही और मैंने बैग उठाये और दोनों चुप चाप वापिस चल पड़े.

कल और आज में ज़िन्दगी कितनी बदल गयी थी कल माँ कितनी खुश थी और हम ख़ुशी ख़ुशी वापिस जा रहे थे मगर आज ऐसा लग रहा था क अब ज़िन्दगी में कुछ बाकि नहीं रहा.

हम दोनों चुप चाप चलते हुए दोपहर तक निचे उतर आये और बिना वक़्त गंवाए बस पकड़ ली. बस क बाद ट्रैन पकड़ी और अगले दिन तक हम घर पहुँच गए
 
अपडेट 51



सुहाग की कसम देने से माँ रुक तो गयी मगर वो रोटी रही और मैंने बैग उठाये और दोनों चुप चाप वापिस चल पड़े.

कल और आज में ज़िन्दगी कितनी बदल गयी थी कल माँ कितनी खुश थी और हम ख़ुशी ख़ुशी वापिस जा रहे थे मगर आज ऐसा लग रहा था क अब ज़िन्दगी में कुछ बाकि नहीं रहा.

हम दोनों चुप चाप चलते हुए दोपहर तक निचे उतर आये और बिना वक़्त गंवाए बस पकड़ ली. बस क बाद ट्रैन पकड़ी और अगले दिन तक हम घर पहुँच गए

अब आगे-

घर पर इस वक़्त सिर्फ दीपिका ममी और कामिनी ममी hi थे जैसे hi हम घर पहुंचे दोनों हमें देख कर बहुत खुश हुई और दीपिका ममी रसोई से हमारे लिए पानी लेने चली गयी . गौरी ममी बिना कोई बात किये अपने कमरे में चली गयी कामिनी ममी उनके साथ चली गयी और मैं अपने कमरे में आ गया.




मेरे अंदर शर्मिंदगी और आतम गलानि क भाव थे मैं जनता था अब माँ कभी मुझे माफ़ नहीं करेगी और न hi मेरी शकल देखना चाहेगी इस लिए मैं भी सारा रास्ता यही सोचता आया था क अब या तो मैं आत्महत्या करलूं या फिर हमेशा क लिए घर छोड़ दूँ.

मैंने कमरे में एते hi अपना सामान बांधना शुरू कर दिया एक बैग में अपनी ज़रूरत का सामान बंधा और घर से जाने का फैसला कर लिया क्यूंकि खुदखुशी करना बुज़दिल लोगों का काम है मैंने अपनी मनहूस ज़िन्दगी को नए सिरे से शुरू करने क लिए सब से दूर चला जाना चाहता था.

मैं अपना सामान बांध रहा था क दीपिका ममी पानी का गिलास लिए कमरे में दाखिल हुई और मुझे यूँ अपना सामान बांधते हुए देख कर उनको शक हुआ

दीपिका ममी : ये क्या कर रहे हो अभी अभी ए हो अब कहाँ जा रहे हो

अमित : सीरियस) पता नहीं मगर अब मैं यहाँ से दूर जा रहा हूँ जहाँ मैं सुकून से जी सकूँ और मर सकूँ

मेरी बात सुनते hi ममी क हाथ में पकड़ी ट्रे निचे गिर गयी और वो भाग कर मेरे पास आयी और मेरे हाथ से बैग चीन लई

दीपिका ममी : ये क्या बकवास कर रहे हो क्या हो गया है तुम्हे ? क्या कोई बात हुई है दीदी भी बात नहीं कर रही. बताओ मुझे ऐसा क्या हुआ है क तुम हमें छोड़ कर जाना चाहते हो

दीपिका ममी की आवाज़ रुआंसी हो गयी थी और उनकी आँखों में पानी आ गया था

अमित : छोड़िये मेरा हाथ ममी जी मैं अब अगर इस घर में रहा तो मैं मर जाऊंगा मुझे जाने दीजिये

दीपिका ममी : मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी मुझे बताओ क्या हुआ है तुमने मेरी कसम

अमित : कसम मत दो ममी जी मेरे जैसे मनहूस और घटिया इंसान का यहाँ रहना ठीक नहीं मुझे जाने दो और समझ लो मैं इस दुनिया में नहीं रहा वो अमित मर गया जो इस घर का बीटा था

मेरी बात सुनकर ममी जोर से रोने लगी और मुझसे लिपटने लगी

दीपिका ममी : ऐसा मत कहो मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती अगर तुम इस घर से गए तो मैं भी अपनी जान दे दूंगी तुम्हारे बिना मेरे लिए भी इस घर में कुछ नहीं है

अमित : ये घर आपका है मुझ जैसे घटिया इंसान क लिए आप अपनी ज़िन्दगी बर्बाद मत करो और मुझे भूल जाओ

दीपिका ममी : कैसे भूल जॉन मैं तुम्हे अपना सब कुछ मानती हूँ मेरे पेट में तुम्हारा बचा पल रहा है मेरी नहीं तो अपने बचे की खातिर रुक जाओ तुम्हे तुम्हारे बचे की कसम बताओ क्या हुआ है क तुम ऐसे घर छोड़ कर जाना चाहते हो

अमित : मेरे जैसे घटिया इंसान क गंदे खून से कोई पापी hi जनम लेगा आप उसे जनम से पहले hi मर दो वर्ण वो कल इस घर को बदनाम करेगा मर डालो इसे

दीपिका ममी : मैं खुद को hi मर लुंगी पहले तुमने बचा लिया था न और तुम्हारे सहारे मैं अब तक ज़िंदा हूँ मगर अब मैं अपनी जान दे दूंगी

अमित : ऐसा मत कहो ममी जी आपको मेरी उम्र भी लग जाये मेरे लिए जान मत दो . मैं तो वो किसी की नफरत क काबिल भी नहीं हूँ

दीपिका ममी : अगर मुझे ज़िंदा देखना चाहते हो तो इस घर से मत जाओ वर्ण मैं अपनी जान दे दूंगी ान अगर कभी तुमने मुझे अपना मन है तो मुझे सच बताओ क्या बात है

फिर मैंने रट हुए ममी को सब कुछ बता दिया जिसे सुनकर ममी भी रोये जा रही थी

दीपिका ममी: जो भी हुआ वो गलत हुआ उसे बदला नहीं जा सकता पर तुम्हारे ऐसे चले जाने से क्या सब ठीक हो जायेगा? तुमने जो किया दीदी की जान बचने क लिए किया. मैं जानती हूँ दीदी शायद कभी तुम्हे माफ़ न करे मगर वक़्त क साथ हर ज़ख़्म भर जाता है एक दिन उन्हें इस बात का एहसास ज़रूर होगा क तुम गलत नहीं थे. तुमने सिर्फ दीदी की वजह से घर छोड़ने का फैसला कर लिया एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा मेरे पेट में पल रहे अपने बचे क बारे में भी नहीं सोचा कामिनी दीदी और उनके पेट पे पल रहे बचे का क्या?. घर क बाकि लोगों का क्या ? तुमने कोई पाप नहीं किया तुमने तो दीदी की जान बचाई है तुम पापी नहीं हो . मैं जानती हूँ तुम कितने अचे हो हर कोई जनता है तुम कितने अचे हो फिर आज क्यों खुद को ऐसे घटिया बोल रहे हो

अगर भगवन भी आकर ये कहे क तुमने पाप किया है तो मैं कभी नहीं मानूंगी . अगर तुम यहाँ से गए तो क्या होगा बड़े भैया का जो तुमने अपने बेटे से बढ़कर प्यार करते हैं . तुम इस घर की जान हो अगर तुम hi यहाँ न रहे तो ये घर शमशान बन जायेगा और फिर तुम्हारे जाने क बाद दीदी भी एहि समझेगी क तुम उनकी वजह से चले गए और वो भी अपनी जान देदेगी फिर क्या तुम चैन से रह पाओगे बोलो

अमित : मेरी तो शकल भी अब माँ कभी नहीं देखेगी और न hi मैं कभी उनके सामने आऊंगा मुझसे ये पाप का बोझ नहीं उठाया जा रहा ममी जी मैं क्या करूँ मैं नहीं जी सकता इस बोझ क साथ

दीपिका ममी : चलो ठीक है जहाँ तुम जाना चाहते हो मुझे भी साथ ले चलो मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती और अगर तुमने मुझे खुद से अलग किया तो मुझे तुम्हारे प्यार की कसम मुझे मेरे बचे की कसम मैं अपनी जान दे दूंगी

ममी का प्यार देख कर मेरा मन दुविधा में फास गया अगर मैं घर से जाता हूँ या खुद को ख़तम करता हूँ तो ममी भी ज़िंदा नहीं रहेगी और घर पर रहना मतलब हर रोज़ हर पल मरना. मुझे अपने दिल पर हर ज़ख़्म काबुल था मगर मेरी वजह से ममी अपनी जान दे ये मुझे काबुल नहीं था. एक रिश्ते की हत्या तो मैं कर hi चूका था अब ममी और उनके पेट में पल रहे बचे की खातिर मैं दिल पर पत्थर रख कर घर छोड़ने का फैसला ताल दिया

अमित : ठीक है ममी जी अगर आप यही चाहती हैं क मैं ज़िंदा रहकर हर रोज़ पल पल मरुँ तो यही सही मैं कहीं नहीं जाऊंगा मगर अब मैं पहले वाला अमित भी नहीं रहूँगा

इतना कह कर मैं घर से निकल गया ममी मुझे आवाज़ देती रही मगर मैं तेज़ कदमो से बहार निकल गया . मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था मैं फुट फुट कर रोना चाहता था इस लिए बिना किसी की तरफ देखे मैं सीधा जंगल में बानी उस झोंपड़ी में पहुँच गया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगा . कहते हैं रोने से दुःख तो काम नहीं होता मगर इंसान को दर्द बर्दाश्त करने का हौसला मिल जाता है.

मैं अकेला बैठा रोटा रहा जब तक क अँधेरा नहीं हो गया . मेरा फ़ोन भी परसो से बंद hi था घरवाले फ़ोन करते रहे होंगे मगर किसी को मेरा पता चलना मुश्किल था. हर बार की तरह मेरा दोस्त राजू मुझे ढूंढता हुआ चला आया मेरी आँखें रो रो कर सूज गयी थी जब राजू ने आ कर मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मैं अपने ख्यालों की दुनिया से बहार आया

राजू : अबे कहाँ खोया हुआ है मैं कब से तुझे आवाज़ दे रहा हूँ चल घर तुझे सब ढून्ढ रहे हैं और परेशां हो रहे हैं

मेरा एक hi तो दोस्त था राजू मेरा साथी जिससे मैं अपनी साडी बातें करता था उसकी बात सुनते hi मैं उससे लिपट गया और रोने लगा . राजू मेरे इस तरह रोने से शॉकेड हो गया

राजू : क्या हुआ तू रो क्यों रहा है बता मुझे क्या हुआ है

मैं राजू को क्या बताता क क्या हुआ है वो भी मुझे कितना घटिया इंसान समझेगा और गलियां hi देगा मगर मैं उसे कुछ भी बता नहीं सकता था इस लिए उसके बार बार पूछने पर भी नहीं बताया और इससे पहले की वो मुझे कोई कसम दे या दोस्ती का वास्ता दे मैंने hi उसे कसम दे दी

अमित : तुझे मेरी कसम मेरे यार मुझसे कुछ मत पूछ मैं नहीं बता सकता

राजू : ाचा ठीक है मत बता मगर जब तुझे ठीक लगे मुझे बता देना अब घर चल सब तुझे ढून्ढ रहे हैं.

घर क नाम से hi मेरे पेअर वहीँ जैम गए मेरी आँखों क सामने माँ का चेहरा आने लगा . मैं कैसे उनके सामने जा सकता हूँ मगर फिर दीपिका ममी की बात यद् आ गयी अगर मैं घर नहीं गया तो कहीं वो खुद को कुछ कर न लें. इसी लिए मैंने जल्दी से खुद को ठीक किया और राजू क साथ घर की तरफ निकल पड़ा

उधर घर में मेरे जाने क बाद दीपिका ममी मेरे कमरे में बैठ कर रोटी रही. कामिनी ममी ने माँ से बात करने की बहुत कोशिश की मगर वो थकावट का बहाना बना कर सो गयी. कामिनी ममी मुझसे मिलने मेरे कमरे में आयी तो दीपिका ममी को फर्श पर बैठ कर रट हुए देख कर वो भी घबरा गयी . कमरे मुझे न पाकर कामिनी ममी दीपिका ममी क पास गयी

कामिनी ममी : चिंता में) क्या हुआ दीपिका ऐसे नीचे बैठ कर क्यों रो रही है अमित कहाँ है

दीपिका ममी : मैं मर जाउंगी दीदी मैं अमित क बिना नहीं रह सकती उसे रोक लो उसे रोक लो

कामिनी ममी : हुआ क्या है बता तो सही बात क्या है अमित कहाँ है

दीपिका ममी : सब बर्बाद हो गया दीदी वो हम सब को छोड़ कर चला जायेगा उसे रोक लो

कामिनी ममी दीपिका ममी की बातों से शॉकेड हो गयी और उनकी आँखों में भी पानी आने लगा इतने सालों की नफरत क बाद ममी ने मुझे प्यार करना शुरू किया था और अब मेरी वजह से उनकी सुनी ज़िन्दगी में बहार आ गयी थी उनके सपने सच होने लगे थे . मेरे चले जाने की बात से कामिनी ममी भी अंदर तक हिल गयी

कामिनी ममी : रट हुए ) हुआ क्या है अमित कहाँ है मुझे बता क्या हुआ है वो कहाँ चला गया है

दीपिका ममी ने साडी बात रट हुए कामिनी ममी को बता दी और जो मेरे साथ उनकी बातें हुई थी वो भी . कामिनी ममी भी रोये जा रही थी

कामिनी ममी : हम उसे कहीं नहीं जाने देंगे मेरी बहिन मैं भी उसके बिना नहीं रह सकती उसने मेरी सुनी ज़िन्दगी में रंग भर दिए हैं उसी की वजह से मैं माँ बन पाने का सुख देखने वाली हूँ दीदी को तो शायद हम कभी समझा नहीं पाएंगे मगर अमित को मैं कहीं नहीं जाने दूंगी चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े

कामिनी ममी ने जल्दी से अजय मां को फ़ोन लगा दिया और मेरे घर से जाने की बात बता दी फिर क्या था अजय मां ने कमलेश मां और बाबा को भी बता दिया और थोड़ी देर में hi मेरी खोज शुरू हो गयी . मुझे हर जगह ढूंढा जा रहा था यहाँ तक की बस स्टॉप और अस्स पास क गाओं तक खोज पड़ताल शुरू हो गयी जब राजू को बात पता चली तो वो मुझे ढूंढ़ता हुआ मेरे पास आ गया उसे पता था मैं यहीं हो सकता हूँ

राजू क साथ मैं घर की तरफ निकल पड़ा अपनी लाश को खुद hi घसीट ते हुए रस्ते में नदी से पानी लेकर अपना मुँह धो लिया क किसी को पता न चले मैं रो कर आया हूँ

जब मैं राजू क साथ घर पहुंचा तो घर में कामिनी ममी और दीपिका ममी गेट क पास hi रस्ते पर नज़रें लगाए बैठी थी . मुझे देखते hi दीपिका ममी और कामिनी ममी दौड़ कर मेरे गले लग गयी और रोने लगी

राजू ने माहौल की नाज़ुकता देखते हुए वापिस चले जाना hi ठीक समझा

दीपिका ममी और कामिनी ममी मेरे लगे हुए रोये जा रही थी हम गेट पर hi खड़े थे इस लिए मैं अपने आंसुओं को दबाये हुए दोनों को अंदर ले आया गेट बंद कर दिया.

दीपिका ममी : कहाँ चला गया था बोल तुझे मुझ पर ज़रा भी तरस नहीं अत अगर तू वापिस न अत मैं भी कल का सूरज नहीं देखती

कामिनी ममी : तू कब से मतलबी हो गया जो अपने बारे में hi सोचने लगा ? एक बार भी मेरा ख्याल नहीं आया तुझे क्या मैं ज़िंदा रह पति तेरे जाने क बाद मेरी सुनी ज़िन्दगी में तूने hi तो बहार खिलाई है वर्ण मैं तो कब की मर चुकी थी और अपने अरमानों की अर्थी उठाये फिर रही थी . बोल जायेगा मुझे छोड़ कर बोल जायेगा

कामिनी ममी ने रट हुए मुझे 3/4 थप्पड़ मर दिए और फिर से मुझे गले लगा कर रोने लगी . दीपिका ममी और कामिनी ममी का ये हल देख कर मुझे बहुत बुरा लग रहा था . मैं तो अपनी मनहूस शकल को माँ की नज़रों से दूर रखना चाहता था ताकि उन्हें दुःख न हो मगर जाने अनजाने मैं अपनी दोनों ममियों क दुःख का कारन बन गया था

अपने लिए तो हर कोई जीता है इंसान तो वो है जो दूसरों क लिए जिए. मैंने भी मन में सोच लिया क मुझे दीपिका ममी और कामिनी ममी क लिए घर में रुकना होगा चाहे माँ मुझसे नफरत करे मैं बर्दाश्त कर लूंगा और घर में रह कर भी कभी उनके सामने नहीं आऊंगा. मैंने दीपिका ममी और कामिनी ममी क आंसू पोंछे और उनके साथ आँगन में आ गया

मैंने माँ क कमरे की तरफ देखा मुझे लगा माँ मुझे दरवाज़े क पीछे से देख रही है मगर अगले hi पल इस बात को छिटक दिया क्यूंकि वो तो मेरी सूरत कभी देखना नहीं चाहेगी .

अमित : मैं कहीं नहीं जाऊंगा आप दोनों चुप करो मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जा रहा .

मैंने दोनों को पानी पिलाया और इतने में बाबा घर आ गए वो भी मेरे ऐसे गायब हो जाने से परेशां थे . बाबा ने आते hi गुस्से में मुझे बोलना शुरू कर दिया

विजय मां : ये क्या हरकत है कहाँ था तू अब तक ? बिना बताये कहाँ चला गया था सरे घर वाले परेशां हो रहे हैं तुझे किसी की परवाह है क नहीं देख तेरी माँ और दोनों ममियों का रो रो कर क्या हल है

माँ क बारे में सुनकर मेरा दिल पसीज गया मगर शायद वो दिखने क लिए बाबा क सामने रोने की एक्टिंग कर रही हों वर्ण मैंने जो पाप किया है उसके बाद तो वो मेरी शकल भी नहीं देखेंगी मैं चाहे जियूं क मर जॉन . वैसे भी उन्होंने कह तो दिया था क मैं मर गया उनके लिए

मैं अपनी सोच में गम था क बाबा फिर से बोले

विजय मां : जवाब क्यों नहीं देता मेरी बात का कहाँ गया था ? कब से मैं अजय और कमलेश तुझे ढूंढ़ते हुए मरे मरे फिर रहे हैं

अमित : वो बाबा मैं वो दोस्त से मिलने गया था पता hi नहीं चला थकावट की वजह से कब नींद आ गयी जैसे hi आँख खुली मैं घर आ गया

विजय मां : तेरा फ़ोन क्यों बंद है और तू किसी को बता कर क्यों नहीं गया और बहु क्या कह रही थी क तू घर छोड़ कर चला गया है

अमित : बाबा वो फ़ोन बारिश में ख़राब हो गया था इस लिए बंद है और ममी क साथ तो मैं मज़ाक कर रहा था

मेरी बात सुन कर दीपिका ममी और कामिनी ममी मेरी तरफ देखने लगी

विजय मां : ये कोई मज़ाक करने वाली बात है . तूने एक बार भी नहीं सोचा तेरी इस बात का क्या असर होगा . तुझे अपनी माँ का और मेरा ख्याल नहीं आया क हमारा क्या होगा

बाबा की आवाज़ बोलते बोलते भरी हो गयी थी और उनकी आँखों में नमी आने लगी मुझसे देखा नहीं गया और मैं जल्दी से बाबा क गले लग गया

अमित : मुझसे गलती हो गयी बाबा मैं कभी ऐसी गलती दोबारा नहीं करूँगा मुझे माफ़ कर दीजिये

थोड़ी बहुत बातों क बाद बाबा ने मुझे माफ़ कर दिया वो मुझे माँ क पास ले कर जाना चाहते थे मगर मैं बहाना बना कर बाथरूम में घुस गया . अजय मां और कमलेश मां भी घर लौट ए वो भी परेशां थे और मुझ पर गुस्सा भी हुए . मगर किसी को असल बात पता नहीं थी वर्ण शायद अपने hi हाथों से मुझे मर देते . खैर खाने वक़्त मैंने सब क साथ खाना खाया मगर माँ अपने कमरे से नहीं निकली मैं भी चुप चाप खाना खा कर अपने कमरे में वापिस आ गया.

मेरी वजह से माँ ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था और जब तक भी मैं घर में मौजूद रहूँगा वो मेरे सामने कभी नहीं आएँगी इस लिए मैंने सोचा मैं भी सारा दिन घर से बहार hi रहा करूँगा.

रत को सबके सोने क बाद दीपिका ममी और कामिनी ममी दोनों मेरे पास आ गयी और मुझसे गिला करने लगी मगर मैंने उन्हें समझा दिया क मैं कहीं नहीं जाऊंगा बातों बातों में मुझे पता चल गया क कामिनी ममी को दीपिका ममी ने सब बता दिया है. मैं उनके आगे भी शर्मिंदा होने लगा तो उन्होंने कहा

कामिनी ममी : तूने कुछ गलत नहीं किया अमित तुझे शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है एक न एक दिन दीदी तुझे ज़रूर माफ़ करदेगी और ख़बरदार अगर कभी कोई उलटी सीधी हरकत की वर्ण इस घर से एक नहीं दो लाशें उठेंगी एक दीपिका की एक मेरी. क्यूंकि मैं भी तेरे बिना ज़िंदा नहीं रहूंगी दीपिका की तरह मैं भी तुझे अपना सब कुछ मानती हूँ

रत देर तक हम एक दूसरे को समझते रहे और मेरे घर से न जाने क वेड क बाद दोनों अपने कमरे में वापिस गयी. हालाँकि वो दोनों मेरे पास रुकना चाहती थी मगर मैंने उन्हें वापिस भेज दिया

अब ज़िन्दगी मुझे नए मोड़ पर ले आयी थी जहाँ से मुझे कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था. और इस समय मुझे सहारे की ज़रूरत थी . दीपिका ममी और कामिनी ममी मुझे बहुत प्यार करती थी मगर फिर भी मुझे मंजरी की कमी महसूस हो रही थी इस वक़्त मुझे उसकी बहुत ज़रूरत थी मगर जब से वो गयी थी उसने एक बार भी फ़ोन नहीं किया था .

अगली सुबह मैं देर से उठा और अखाड़े नहीं गया वैसे भी अब मेरे अंदर अखाड़े जाने की कसरत करने की इच्छा hi कहाँ बची थी. दीपिका ममी मेरे पास कमरे में आ गयी और मुझे गले लग कर किश किया और प्यार किया . मेरा बिलकुल भी मन नहीं था इस लिए मैंने कोई जवाब नहीं दिया ममी समझ गयी मुझे ये सब ाचा नहीं लग रहा इस लिए उन्होंने मुझे खाना खाने क लिए नीचे बुलाया . मैंने कह दिया क नाश्ता कमरे में hi ले आओ . ममी नाश्ता ले आयी और मैं नाश्ता कर क घर से निकल गया.

सारा दिन मैं घर से बहार hi रहा और शाम क वक़्त hi घर आया इस बीच मैं खेतों में भी कुछ वक़्त बिता आया था ता की कोई शक न करे.

रात क खाने क वक़्त भी मैं बहाना बना कर लेट हो गया और अपना खाना अपने कमरे में hi खाया.

अब तो मेरी यही रूटीन हो गयी थी सारा दिन घर से बहार रहना और अकेले अपने कमरे में खाना . मैंने चुदाई क बारे में सोचना hi छोड़ दिया था और दीपिका ममी कामिनी ममी ने भी मेरे मन की दशा समझते हुए मुझे कभी नहीं कहा. मैंने इतने दिन से अपना फ़ोन भी नहीं चलाया था जिस वजह से मेरी बहनो से भी मेरी बात नहीं हुई थी और न hi पूजा भाभी से कोई बात हुई थी.

अभी मेरी ज़िन्दगी में एक और तूफ़ान का आना बाकि था जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी और पांचवे दिन hi मुझे अपनी ज़िन्दगी की अब तक की सबसे मनहूस खबर मिली
 
अपडेट 53



एडमिशन का काम ख़तम होने क बाद हम घर को लौट गए . अजय मां बार बार प्रिंसिपल वाला किस्सा hi मुझे पूछ रहे थे और प्रिंसिपल की बातें करते हुए कह रहे थे क उसके दोस्त की तो बोलती बंद हो गयी . उसका प्रोफ. तो कुछ कर नहीं पाया मगर प्रिंसिपल ने बिना किसी डोनेशन क बिना किसी फीस क सीधा एडमिशन करवा दिया. ऐसे hi बातें करते हम शाम को घर आ गए.

अब आगे -

घर पर अजय मां ने सबको आज जो कुछ हुआ वो बताना शुरू कर दिया. हर कोई खुश हुआ कॉलेज का किस्सा सुन कर.

अजय मां : पता है भैया शहर का सबसे बेस्ट और सबसे मेहेंगा कॉलेज है वो एक से एक बड़ी बड़ी गाड़ियां वहां पर मौजूद थी . शहर का बड़ा आदमी उसी कॉलेज में अपने बच्चों को पड़ना चाहता है. ऐसे कॉलेज तो फिल्मो में hi दिखाई देते हैं. भला हो प्रिंसिपल साहब का जिन्होंने अमित का एडमिशन खुद करवा दिया

विजय मां: तो वो साहब प्रिंसिपल थे मैंने देखा था उन्हें. ये तो बड़ा ाचा हुआ. हमारा बीटा शहर क बड़े बड़े लोगों क साथ पड़ेगा .

कमलेश मां : ये तो वाकई में बड़ी अछि बात है मगर भैया अगर कॉलेज इतना मेहेंगा है तो और भी तो खर्चे होंगे न वहां पर किताबों क और रोज़ मर्रा की ज़रूरतों क मेहेंगा कॉलेज है तो उस हिसाब से हर बात पर खर्चा ज्यादा hi होगा और वहां तो घर का खाना भी साथ नहीं ले जाते होंगे ऐसे तो अमित को हर रोज़ पैसों की ज़रूरत रहेगी

अजय मां: किताबों की और किसी कॉलेज की फीस की टेंशन प्रिंसिपल साहब ने hi ख़तम करदी उन्होंने कहा है की उसकी चिंता करने की ज़रूरत नहीं बस अमित को मन लगा कर मेहनत करनी होगी

विजय मां: मेहनत तो करेगा hi पड़े में किसी से काम थोड़ा है हमारा अमित

अजय मां : भैया आप समझे नहीं प्रिंसिपल साहब का मतलब था क उन्होंने अमित उसकी पड़े क लिए नहीं बल्कि उसकी कुश्ती की काबिलियत क डैम पर चुना है और उनको यकीन है अमित और आगे जा सकता है इस खेल में जिससे उनके कॉलेज का नाम होगा

विजय मां : बात तो सही है मगर गौरी इसके लिए मानेगी नहीं

अजय मां : भाभी को तो आप समझा सकते हैं ये अमित की लाइफ क लिए ज़रूरी है नहीं तो कॉलेज वाले भी कितनी देर देखेंगे

कमलेश मां : भैया आप भाभी को मानलो कैसे भी कर क

विजय मां : वो मैं देख लूंगा मगर पैसे तो फिर भी चाहिए hi होंगे इस लिए मैं कल hi अपने बैंक से पैसे निकल कर अमित क बैंक में दाल देता हूँ जब जितने चाहिए हो निकल लेगा

अजय मां : भीता अभी उसकी चिंता मत करो मैंने बैंक से 50000 इसके लिए जो निकले थे वो मैं अभी इसे दे देता हूँ

अजय मां ने तुरंत मुझे 50000 दे दिए मैं मन करने लगा मगर सब ने मुझे पैसे लेने क लिए ज़ोर दिया तो मुझे मन्ना hi पड़ा. माँ आज भी हमारे बीच नहीं बैठी थी . ऐसे hi बातों में वक़्त निकल गया और खाना खा कर सब अपने कमरों में चले गए .

मैं अपने कमरे में बीएड पर लेता मंजरी की hi यादों में खोया हुआ था क दीपिका ममी मेरे पास आयी.

दीपिका ममी: क्या सोच रहे हो

अमित : और क्या सोचने को है अब मेरे पास

दीपिका ममी: अमित तुम कब समझोगे इस बात को क अब तुम्हे आगे बढ़ना hi होगा . जीवन किसी क लिए ठहरता नहीं है . लोग अपने माँ बाप क मरने पर क्या मर जाते हैं या जीना छोड़ देते हैं? एक माँ अपने बचे से सबसे ज्यादा प्यार करती है तो क्या वो बचे क न रहने पर जीना छोड़ देती है? एक औरत का पति उसके लिए सब कुछ होता है तो क्या वो विधवा होने पर जीना छोड़ देती है? तुम मंजरी की माँ को hi देख लो क्या उसने जीना छोड़ दिया है?

अमित : जीना तो कोई नहीं छोड़ता मगर ऐसी ज़िन्दगी भी ज़िन्दगी तो नहीं.

दीपिका ममी : अमित जीने की वजह इंसान को खुद तलाशनी पड़ती है वर्ण ज़िन्दगी सजा hi नज़र अति है. तुम जो हर वक़्त मंजरी को यद् कर क दुखी होते हो क्या उससे मंजरी की आत्मा को दुःख नहीं होता होगा ? क्या वो तुम्हे इस हल में देख कर खुश होगी? सिर्फ मंजरी hi अकेली नहीं थी जो तुमसे प्यार करती थी मगर लगता है तुमने मंजरी क इलावा किसी को प्यार नहीं किया. तुम मर चुके लोगों क लिए ज़िंदा लोगों को भी मर डिगे एक दिन

इतना कह कर दीपिका ममी आँखों में आंसू लिए भाग कर कमरे से बहार चली गयी. ममी तो चली गयी मगर उनकी कही हुई हर बात मेरे दिमाग में घूमती रही. सच hi तो कह गयी थी ममी क मंजरी क इलावा भी तो मेरी ज़िन्दगी में मुझे प्यार करने वाले लोग थे . और खुद दीपिका ममी एक प्रेमिका की तरह मुझे प्यार करती थी . कामिनी ममी भी मुझे कितना चाहने लगी थी और मैंने मंजरी क दुःख में उनकी तरफ देखना भी छोड़ दिया था . उनको भी तो प्यार की ज़रूरत थी मगर मैं उनको क्या दे रहा था सिर्फ आंसू. जो बुरा हुआ मेरे साथ हुआ जो पाप किया मैंने किया इसकी वजह से सबको दुखी करून ये कहाँ का इन्साफ है. मुझे खुद को संभालना होगा मंजरी की जगह तो कोई नहीं ले सकेगा मगर दीपिका ममी और कामिनी ममी को तो उनके हिस्से का प्यार मिलना हो चाहिए

मैं साडी रत इन सब बातों पर hi विचार करता रहा और मैं इस नतीजे पर पहुंचा क मैं अपने गम को अपने अंदर hi छुपा कर रखूँगा किसी को शो नहीं करूँगा ताकि सब मेरे चहरे पर मुस्कराहट देख कर खुश रहें. इसके इलावा दीपिका ममी और कामिनी ममी जो मुझसे इतना प्यार करती हैं उनको भी प्यार दूंगा

अगली सुबह मैंने ज़िन्दगी को नए सिरे से जीने का फैसला किया. सुबह जब दीपिका ममी मुझे नाश्ता देने आयी तो वो चुप चाप नाश्ता टेबल पर रख कर जैसे hi बहार जाने लगी मैंने आवाज़ देकर उन्हें रोक लिया

अमित: ममी जी ज़रा रुकिए

दीपिका ममी वैसे hi बिना पालते रुक गयी. मैं बिना आवाज़ किये ममी क पास गया और उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया. मेरे बाँहों में एते hi ममी क जिस्म में कम्पन हुई और वो एक डैम से पलट गयी . मैंने देखा उनकी आँखों में आंसू आ गए थे मगर चहरे पर मुस्कराहट थी

दीपिका ममी: तुझे मुझ पर तरस आ गया मैं कब से तरस रही थी तेरी बाँहों में आने क लिए . तू मुझे प्यार करेगा न? मुझे भूलेगा तो नहीं ? मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती अमित मैं मर जाउंगी

अमित : ऐसा मत कहिये मैं समझ गया हूँ मुझे आगे बढ़ना होगा मैं अपने गम में डूबा ये भूल गया था क आप और कामिनी ममी भी तो मुझे वैसे hi प्यार करती हैं अगर मैं ऐसे hi आपको अनदेखा करूँगा तो आपको कितनी तकलीफ होगी. इस लिए मैं अब फिर से पहले जैसे आपको प्यार करूँगा.

मैंने दीपिका ममी की आँखों से आंसू साफ़ किये और उनके होंठो पर एक छोटा सा किश किया. मेरे होंठ हटते hi ममी मेरे होंठों को अपने होंठो में पकड़ कर चूमने चूसने लगी . जब से माँ क साथ मेरा वो इंसिडेंट हुआ था मैंने ममी को खुद से दूर कर दिया था और वो तब से तड़प रही थी. उनके किश करने से मैं उनकी तड़प का अंदाज़ा लगा सकता था.

मैं उनका साथ देता रहा जब हमारी सांसे उखाड़ने लगी तब जाकर ममी ने मेरे होंठों को छोड़ा

अमित: अब तो खुश हो न दीपिका आज मेरे पास आओगी न रत में?

दीपिका ममी मेरे मुँह से अपना नाम सुन कर ख़ुशी से उछाल पड़ी

दीपिका ममी : क्या कहा दीपिका , तुमने मेरा नाम लिया मैं बता नहीं सकती मैं कितनी खुश हूँ कितने दिनों से मेरे कान तरस गए थे ये सुनने क लिए . अब रत तक मुझसे इंतज़ार नहीं होगा तुम अभी मुझे प्यार करो कोई नहीं आएगा यहाँ

दीपिका ममी बेसब्री होने लगी और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर क मुझे फिर से चूमने लगी

अमित : नहीं दीपिका अभी नहीं हम रात में करेंगे थोड़ा और इंतज़ार कर लो मैं साडी कसार निकल दूंगा तुम जितना तदपि हो उतना hi तुम्हे प्यार दूंगा मगर रत में. मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता इस लिए रत का इंतज़ार करो

दीपिका ममी: मुझसे इंतज़ार होगा तो नहीं मगर तुम्हारे लिए ये भी करुँगी अब जल्दी से खाना खाओ और रत क लिए तैयार रहना आज मैं साडी कसार निकलूंगी

अमित : जैसे चाहो कर लेना पहले जा कर कामिनी ममी को भेजो उनसे भी बात कार्टून वो भी तड़प रही होंगी

दीपिका ममी : ये तुमने सही कहा वो भी कितनी तड़प रही हैं मैं उन्हें अभी भेजती हूँ

दीपिका ममी जल्दी से बहार निकल गयी और मैं खाना खाने बैठ गया. अभी मैंने शुरू hi किया था क कामिनी ममी भी आ गयी

कामिनी ममी : तुमने मुझे बुलाया अमित?

अमित : हाँ ममी जी आइये बैठिये

कामिनी ममी मेरे पास बैठ गयी

अमित : आपने नाश्ता कर लिया ?

कामिनी ममी : बस अभी करने hi वाली हूँ

मैंने एक निवाला हाथ से बनाया और कामिनी ममी क मुँह क आगे कर दिया ममी मेरी आँखों में देखने लगी और चुप चाप अपना मुँह खोल लिया. मैंने जैसे hi उनके मुँह में निकला डाला ममी की आँखों में पानी आने लगा वो निवाला कहते हुए भीगी आँखों से मुझे hi देख रही थी.

मैंने एक बाजु में ममी को लपेट लिया और उनके माथे पर एक किश करदी. ममी की रुआई फुट पड़ी.

अमित : अरे अरे ये क्या ममी जी मैं आपसे प्यार कर रहा हूँ और आप रो रही हैं. लगता है आपको मेरा प्यार करना ाचा नहीं लगा

कामिनी ममी : मैं कब से तड़प रही थी तेरे प्यार क लिए मुझे तो लगा था अब तू कभी मुझे प्यार नहीं करेगा

अमित : ऐसा भला कभी हो सकता है. कोई पागल hi होगा जो इतनी खूबसूरत अप्सरा को प्यार न करे . मेरी कामिनी तो लाखों में एक है

मेरी ज़ुबान से अपना नाम सुन कर ममी ने एक डैम से अपना चेहरा पीछे किया और मेरी आँखों में देखती हुई बोली

कामिनी ममी : बदमाश अपनी ममी का नाम लेता है

अमित : गलत ! मैं ममी का नहीं अपने होने वाले बचे की माँ का नाम ले रहा हूँ.

ममी मेरी बात सुन कर खुश हो गयी और ज़ोर से मुझे गले लगा कर मुझे किश करने लगी.

कामिनी ममी : आज मैं बहुत खुश हूँ अमित तुम मुझे ऐसे hi बुलाया करो मेरे दिल को कितना सुकून मिला है तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुन कर मैं बता नहीं सकती.

अमित : तो फिर आज रात आ रही हो न मेरे पास मैं तुम्हे बहुत प्यार करूँगा

कामिनी ममी : तुम कहो तो अभी अपने कपडे उतर देती हूँ हम अभी प्यार करेंगे

अमित : अभी नहीं रत को आप रत क लिए तयारी करो

कामिनी ममी जल्दी से निकल भागी पता नहीं किस बात की जल्दी थी उन्हें खाना भी नहीं खाया मेरे साथ. मैंने दिनों को रत का बोल तो दिया था मगर एक साथ कैसे होगा ये सोचा नहीं था खैर रत को देखेंगे

मैंने खाना खाया और उसके बाद मैं राजू से मिलने गया आज मेरी चल ढल और बातचीत से राजू भी खुश था मैंने उसे भी बता दिया क अब मैं नए सिरे से ज़िन्दगी शुरू कर दूंगा. उसके बाद मैं खेतों में गया और आज मैं डरा भैया से भी मिला उनको बता दिया क मैं फिर से अखाड़े में आना शुरू कर दूंगा

रत को सब क साथ खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में सोने चला गया. रत को 12 बजे मेरा दरवाज़ा खुला . कामिनी ममी और दीपिका ममी दोनों एक साथ कमरे में दाखिल हुई दीपिका ममी क हाथ में दूध का गिलास था. मैं दोनों को साथ में देख कर चौंक गया .

अमित : आप दोनों एक साथ

दीपिका ममी : तो क्या अलग अलग आते ? तुमने हम दोनों को बुलाया था न तो ह्यूमेन सोचा एक साथ hi चलते हैं. वैसे भी हम में कौन सा पर्दा है अब

कामिनी ममी : बिलकुल ठीक हम दोनों hi तुम्हारी बीवियां हैं तो आज ह्यूमेन सोचा इतने दिनों की तड़प का हिसाब तुमसे एक साथ लें

अमित : फिर तो मैं गया काम से लगता है आपके इरादे ठीक नहीं.

दीपिका ममी : तुमने हमें जितना तड़पाया है आज हम उसका बदला लेंगे .

अमित : मगर मैं आप दोनों को एक साथ कैसे खुश कर पाउँगा ?

दीपिका ममी : उसकी चिंता मत करो चुप चाप ये दूध पियो

मैंने ममी क हाथ से दूध का गिलास लिया और एक बार में hi गिलास खली कर दिया. दूध पिटे hi मैंने दीपिका ममी को बाँहों में भर लिया और उनको किश करने लगा. किश की शुरुआत मैंने की थी मगर जल्दी hi ममी ने कण्ट्रोल अपने हाथ में ले लिया और वाइल्ड तरीके से मुझे किश करने लगी. कामिनी ममी की तरफ मेरा ध्यान नहीं था की वो क्या कर रही हैं अगले hi पल मुझे अपने लैंड पर दो हाथ महसूस हूजे जो मेरे लैंड को पायजामे से बहार निकल रहे थे और लैंड क बहार निकलते hi दोनों हाथों ने मेरा लैंड मसलना शुरू कर दिया. मैंने किश तोड़ कर निचे देखा तो कामिनी ममी घुटनो पर बैठ कर मेरा लैंड दोनों हाथो से मसल रही थी .

दीपिका ममी ने मेरा ध्यान फिरसे अपनी तरफ करने क लिए मुझे किश करना शुरू कर दिया. आज दोनों एक साथ प्लान कर क आयी थी क क्या करना है और मुझे उनके वाइल्ड रूप को देख कर ये दर सत्ता रहा था क मैं दोनों को एक साथ कैसे संभल पाउँगा. 5 मिनट्स किश करने क बाद दीपिका ममी ने मुझे छोड़ा और पालक झपकते hi अपने कपडे उतर दिए अब उनके जिस्म पर ब्रा और पेंटी hi थी . ममी ने मेरी शर्ट को भी जल्दी से निकल दिया नीचे से मेरे कपडे कामिनी ममी ने उतर दिए . मैं दिनों क सामने पूरी तरह नंगा था और मेरा लैंड खड़ा हो कर झटके मर रहा था. दीपिका ममी ने धक्का दे कर मुझे बीएड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर लेट कर फिर से मुझे किश करने लगी और अपने हाथ मेरी छाती पर चलने लगी.

कामिनी ममी ने मेरा लैंड छोड़ कर अपने कपडे उतर दिए और फिर से मेरे लैंड को दोनों हाथो में जकड कर उस पर किश करने लगी . दीपिका ममी ने अपनी ब्रा उतर दी और अपने दूध मेरे चहरे पर कर दिए . वो मुझे अपने कलमी आम चूसने को इन्विते कर रही थी मैंने भी उनको इंतज़ार नहीं करवाया और दोनों हाथो से उनके रास भरे आम मसलते हुए एक एक करके चूसने लगा. दीपिका ममी क मौसे सिसकारियां निकलने लगी.

दीपिका ममी : आअह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्ह उम्म्म्म कक्कक्क्स ोुह्ह्ह्ह और दबाओ ककक और ज़ोर से आअह्ह्ह्हह और ज़ोर से कक्कक्क्स खा जाओ इन्हे खा जाओ कक्कक्क्स ऊऊह्ह्हब इनको खूब दबाओ और बड़े बड़े कार्डो कक्कक्स आअह्ह्ह्हह ताकि हमारे बचे क लिए इनमे ढेर सारा दूध भर सके ोुह्ह्हह्ह कक्कक्क्स

मैं ममी की बात सुन कर और जोश में आ गया . मैं और भी ज़ोर लगा कर दीपिका ममी क दूध मसलने और चूसने लगा मैं उनके निप्पल्स को भी डेंटन में लेकर काटने लगा जिससे वो तेज़ सिसकारियां निकलने लगी. उधर कामिनी ममी अब मेरे लैंड को मुँह में लेकर चूस रही थी जैसे उनको मनपसंद लॉलीपॉप मिल गया हो.

दीपिका ममी बहुत गरम हो रही थी वो अपनी टंगे मेरे पेट क दोनों तरफ फाइल्स कर अपनी छूट मेरे पेट पर रगड़ रही थी . मैंने कामिनी ममी क मुँह से लैंड निकला और दीपिका ममी को पलट कर खुद उनके ऊपर आ गया और उनकी छूट पर जा पहुंचा .

मैंने दीपिका ममी की टांगों को ऊपर उठा लिया और उनकी छूट पर किश करने क लिए जैसे hi झुका तो मैंने देख उनकी गुलाबी छूट पूरी साफचक थी बालों का नमो निशान नहीं था. दीपिका ममी की गोरी गुलाबी छूट गीली हो कर चमक रही थी मैंने बिना देर किया अपने होंठ छूट पर रख दिए और चूमने लगा मैंने अपने जीभ छूट में घुसा दी .

छूट में जीभ क घुसते hi ममी क मुँह से एक तेज़ सिसकारी निकल गयी . कामिनी ममी ने जल्दी आगे बढ़कर उनका मुँह हाथो से बंद किया मगर दीपिका ममी तो पूरी आग बन गयी थी . दीपिका ममी ने कामिनी ममी का हाथ अपने मुँह से हटाया और जल्दी से कामिनी ममी का सर पकड़ कर उनके होंठों से अपने होंठ चिपका लिए और किश करने लगी.

कामिनी ममी शॉकेड थी और वो दीपिका ममी का साथ नहीं दे रही थी . कामिनी ममी घुटनो पर थी और दीपिका ममी उनके होंठों पर किश कर रही थी. मेरे सामने कामिनी ममी की छूट और गांड थी मैंने अपने एक हाथ से उनकी छूट को मसलना शुरू कर दिया और उनकी छूट में उंगली घुसकर अंदर बहार करने लगा.

कामिनी ममी की छूट भी गीली हो रही थी. छूट में उंगली चलने से वो भी और गरम हो गयी और दीपिका ममी का साथ देने लगी. दीपिका ममी और ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पति और मेरे मग में अपना पानी छोड़ दिया . दीपिका ममी का जिस्म पहले अकड़ा और फिर झटके लेता हुआ शांत हो गया. दीपिका ममी ने मेरे सर को अपनी जांघों में कास लिया था और उनके ढीले पड़ते hi मैं उनके टैंगो क बीच में से निकल गया

कामिनी ममी और दीपिका ममी की किश भी टूट गयी थी मैं जल्दी से कामिनी ममी क पीछे गया और उनके ऐसे झुके हुए hi उनको पीछे से पकड़ कर उनकी छूट को चूमने लगा . मेरे मुँह पूरी तरह से छूट पर नहीं पहुँच रहा था इस लिए ममी अपनी छूट को उभरने क लिए अपना पेट निचे कर रही थी और चुरड़ ऊपर कर रही थी.

कामिनी ममी काफी गरम हो रही थी मुझसे इस तरह छूट छाती नहीं जा रही थी इस लिए मैंने अपना मुँह हटा लिया. कामिनी ममी को मेरा ऐसा करना ाचा नहीं लगा और वो मुझे फिरसे कंटिन्यू करने को कहने लगी मगर मैंने छूट चाटने की बजाये घुटनो पर होकर अपना लैंड कामिनी ममी की छूट पर सेट किया और एक तगड़ा खटका मर दिया . आधे से ज्यादा लैंड एक hi झटके में अंदर घुस गया और कामिनी ममी क मुँह से दबी दबी चीख निकल गयी . मैंने देर न करते हुए एक और तेज़ झटका मारा और मेरा लैंड जड़ तक अंदर जा कर ममी की बचे दानी में घुस गया . कामिनी ममी इतने दिनों बाद मेरा लैंड ले रही थी उनके मुँह से तेज़ चीख निकली . दीपिका ममी ने जल्दी से कामिनी ममी क होंठ अपने होंठों से बंद कर दिए. और मैं कामिनी ममी क लटके हुए दोनों आम पकड़ कर तेज़ झटके मरने लगा.

मैं कामिनी ममी क दोनों मस्त आम पकड़ कर मसलता हुआ तेज़ झटके मर रहा था मेरे हर झटके से ममी का पूरा जिस्म हिल रहा था मगर उनका मुँह दीपिका ममी ने बंद कर रखा था इस लिए उनकी आवाज़ नहीं आ रही थी. मैं पूरे जोर शोर से अपना काम कर रहा था . कामिनी ममी ज्यादा देर मेरा सामना नहीं कर पायी और झटके लेती हुई पानी छोड़ने लगी.

कामिनी ममी ने मेरे लैंड को अपने पानी से नेहला दिया. ममी पानी निकलते hi ढेर हो गयी और मैं अपना लैंड लेकर दीपिका ममी की टैंगो क बीच आ गया. मैंने दीपिका ममी की टाँगें अपने कन्धों पर राखी और छूट पर लैंड रख कर एक ज़ोरदार झटका मारा . मैं कामिनी ममी की चुदाई करते हुए बहुत गरम हो चूका था इस लिए पूरी ताकत से झटका मारा जिससे एक hi बार में लैंड सीधा दीपिका ममी की बचे दानी में घुस गया . लैंड घुसते hi दीपिका ममी दर्द से चिल्लाई .

दीपिका ममी : aaaiiiiiiiiiiiii मम्माआआ माअररररर डाला आआह्ह्ह्हह ाआईईई फट्ट्ट्ट गयी आआह्ह्ह्हह्ह एआइइइइ मर गयीईइ

मैंने दीपिका ममी की दर्द की परवाह किये बगैर उनके होंठो को अपने होंठो से बंद करते हुए तेज़ तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए . दीपिका ममी की चीखें मुँह में hi दबकर रह गयी. मैं लगातार तूफानी धक्के मरता गया . मुझे कोई होश नहीं था . मई अपने लैंड की मार से दीपिका ममी की छूट का कचूमर निकलने में लगा हुआ था . दीपिका ममी की छूट ने फिर से पानी बहा दिया और वो निढाल हो गयी मैंने उनकी छूट से लैंड बहार निकला और कामिनी ममी की तरफ बड़ा. कामिनी ममी उलटी hi पड़ी हुई थी मैंने उनको सीधा किया और उनकी टंगे अपने कंधे पर चढ़ा कर एक hi झटके में पूरा लैंड जड़ तक घुसा दिया . कामिनी ममी फिर से चीखे मगर इस बार आवाज़ काम थी मैं ममी की टैंगो को पकड़े हुए तूफानी धक्के मर रहा था .

ममी मेरा साथ देते हुए अपनी कमर उछलने लगी. उन्हें बहुत मज़ा आ रहा था . मैं खुद पर हैरान हो रहा था क इतनी देर से मैं दोनों क साथ सेक्स कर रहा हूँ और अभी तक मेरा पानी नहीं निकला. मैं कामिनी ममी की छूट का भोसड़ा बनाने में लगा हुआ था क एक बार फिर से कामिनी ममी का पानी निकल गया और वो निढाल हो गयी.

मैंने उनकी छूट से लैंड बहार निकला और दीपिका ममी को सहारा देकर घोड़ी बना दिया मैंने एक झटके में लैंड उनकी छूट में पूरा घुसा दिया और उनके बाल पकड़ कर ज़ोरदार झटके मरने लगा ममी पहले तो मज़ा लेती रही मगर जैसे hi उनका पानी निकला उनकी छूट में जलन होने लगी . मैंने छूट से लैंड निकला तो मेरी नज़र उनकी गांड पर गयी मैंने सोचा क्यों न गांड में लैंड घुसा दूँ शायद गांड की तिघटनेस से लैंड से पानी जल्दी निकल आये.

मैंने लैंड को गांड पर सेट किया और धक्का मारा लैंड 4 इंच तक गांड में घुस गया ममी को तेज़ दर्द हुआ और वो चीख पड़ी. अब तक सिर्फ एक बार hi उन्होंने गांड में लैंड लिया था . मगर मुझे तो जैसे किसी बात की परवाह नहीं थी मैंने जल्दी जल्दी 2 धक्के और मरे और पूरा लैंड गांड में घुसा दिया ममी चीख पड़ी

दीपिका ममी : आयआईईई मर दिया फट्ट्ट्ट गयी मेरी गांड बहार निकालो

मैंने कोई परवाह न करते हुए गांड में धक्के मरने लगे कुछ देर चीखने क बाद ममी की चीखें सिसकियों में बदल गयी . मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था बस किसी तरह मैं अपना पानी निकलना चाहता था जो आज निकल hi नहीं रहा था.

मैंने कितनी देर तक गांड मरता रहा मुझे पता नहीं मगर दीपिका ममी अधमरी हो गयी थी मेरी इस चुदाई से . दीपिका ममी की हालत देख कर कामिनी ममी मेरे पास आयी और मुझे अपने ऊपर खींच लिया . मेरा लैंड दीपिका ममी की गांड से निकल गया मैंने जल्दी से कामिनी ममी को घोड़ी बनाया और अपना लैंड कामिनी ममी की छूट में एक झटके में घुसा दिया .

कामिनी ममी भी मेरे धक्कों की ताब न झेलते हुए फिर से झाड़ गयी और मेरे लैंड को पानी सी नेहला दिया. मैं फ़्रस्ट्राटे हो गया था और अब पानी मेरे दिमाग पर चढ़ गया था मैंने कामिनी ममी की छूट से लैंड बहार निकला और उनकी गांड पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मर दिया लैंड 4 ऊँचा तक गांड में घुस गया . कामिनी ममी की गांड वर्जिन थी मेरे लैंड क घुसते hi वो ज़ोर से चिल्लाई और एक चीख मेरे मुँह से भी निकली. मुझे लगा जैसे मेरा लैंड छील गया है. मगर पानी दिमाग में घुसा पड़ा था मैं किसी नशे में गम कामिनी ममी और अपने दर्द की परवाह न करते हुए 2/3 धक्के तेज़ी से मरकर पूरा लैंड गांड में घुसा दिया और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा .

कामिनी ममी लगातार चीख रही थी और रो रही थी मगर मैं उन पर बिना रेहम किये धक्के मरता जा रहा था . ममी दर्द से निढाल हो कर बीएड पर गिर गयी मगर मैंने उनकी कमर को थामे रखा और उनके ऊपर आ कर लगा तर धक्के मरते रहा जब तक की मेरा पानी नहीं निकल गया.

पानी निकलते hi मैं कामिनी ममी क ऊपर गिर गया . मेरा लैंड ममी की गांड में hi था इस लम्बी और धुआंधार चुदाई से मैं इतना ज्यादा थक गया था क मुझे पता भी नहीं चला क कब मैं सो गया.

सुबह जब मेरी आँख खुली तो कोई मुझे जगा रहा था . मैंने मुश्किल से आँख खोली तो देखा दीपिका ममी थी.

दीपिका ममी : जल्दी से उठो इससे पहले क कोई जाग जाये मेरी मदद करो दीदी की हालत बहुत ख़राब है तुमने सारा कबाड़ा कर दिया

मैं ममी क मुँह से ये सुन कर एक hi झटके में उठा तो देखा कामिनी ममी मेरे नीचे hi पड़ी हुई थी उनकी गांड पर खून लगा हुआ था जो सुख चूका था. मेरे लैंड पर भी खून लगा हुआ था और लैंड से निकले पानी क दाग भी थे जो ममी की गांड पर भी दिखाई दे रहे थे . मैं जल्दी से बीएड से नीचे उतरा .

कामिनी ममी की हालत बहुत पतली हो गयी थी वो दर्द से सिसकीअन ले रही थी उनको बैठने में भी परेशानी हो रही थी.

दीपिका ममी : तुम तो जानवर बन गए थे रत को ऐसे भी कोई करता है क्या देखो क्या हालत हो गयी है दीदी की और मेरा भी हाल कुछ ाचा नहीं है . अब दीदी को बाथरूम में लेकर चलो.

मैंने कामिनी ममी को अपनी बाँहों में उठाया और बाथरूम में लेकर चला गया.

ममी ने पानी गर्म करने क लिए गीज़र चला रखा था . गरमा पानी से पहले कामिनी ममी की गांड को उन्होंने साफ किया और थोड़ी सिकाई भी की. हम तीनो ने खुद को साफ़ किया और दीपिका ममी कपडे पहन कर जल्दी से अपने कमरे से एक पैन किलर ले आयी और कामिनी ममी को खिला दी.

दवा खाने क बाद कामिनी ममी दीपिका ममी का सहारा लेते हुए नीचे चली गयी . मुझे भी दर्द हो रही थी मगर इतनी भी नहीं थी मगर नींद बहुत आ रही थी अभी दिन नहीं निकला था इस लिए मैं फिर से सो गया

 
अपडेट 56

हम दोनों निकल पड़े नेहा दीदी मुझे रास्ता बताती गयी और हम 15 मिनट्स में hi रीता मौसी क घर पहुँच गए . घर ाचा बना हुआ था डबल स्टोरी माकन था . ज्यादा बड़ा तो नहीं मगर ज़रूरत क हिसाब से ठीक था . नेहा दीदी ने बुलेट से उतर कर गेट क बहार लगी बेल्ल बजायी और दरवाज़ा खुल गया

अब आगे -

सामने रीता मौसी को देख कर मैं बहुत खुश हुआ और उनके पाऊँ छुए. मौसी भी मुझे अपने सामने देख कर सरप्राइज हो गयी और मुझे गले लगा लिया.

रीता मौसी : आज ये सूरज किधर से निकल आया . अमित आज हमारे घर कमल है तुम तो आज तक इतनी बार बुलाने पर भी नहीं आये कभी

अमित : मौसी जी क्या मैं आपके घर नहीं आ सकता ? वो तो आप पहले इतनी दूर थी इस लिए अकेला नहीं आ सकता था और माँ आ नहीं पति थी. मगर अब तो मैं इसी शहर में पड़ने अत हूँ रोज़ जब आप कहेंगी मैं हाज़िर हो जाऊंगा.

नेहा दीदी : माँ अब क्या बहार hi खड़े रखोगी हमें

नेहा दीदी के यद् दिलाने पर मौसी का ध्यान इस तरफ गया क हम बहार hi खड़े हैं. मौसी ने हमें अंदर आने दिया और दरवाज़ा बंद कर दिया

रीता मौसी : तो बताओ कैसे सेवा करूँ अपने बेटे की आज पहले दिन तू हमारे नए घर में आया है

अमित : इसकी कोई ज़रूरत नहीं है मौसी जी मैं कोई मेहमान थोड़ा hi हूँ . वैसे आप आयी क्यों नहीं मां जी ने आपको बुलाया था न

रीता मौसी : अरे हाँ पहले तो तुम्हे बहुत बहुत मुबारकबाद तुम्हारी कामिनी ममी माँ बनने वाली है . तुम तो सब से ज्यादा खुश होंगे न ?

( तुम्हारे बचे की hi तो माँ बनने वाली है बाप बनने की ख़ुशी कैसे नहीं होगी)

अमित : बिलकुल मैं तो सबसे ज्यादा खुश हूँ मेरे छोटे भाई बहिन आने वाले हैं

नेहा दीदी : माँ कुछ खाने को है ? भूख लग रही है

रीता मौसी : तुम बैठो मैं अभी लायी

रीता मौसी किचन में चली गयी

अमित : दीदी करुणा दीदी कहीं नज़र नहीं आ रही

नेहा दीदी : वो भी आती hi होगी कॉलेज से

इतने में रीता मौसी खाने को ले आयी साथ में चाय भी

रीता मौसी : आज तो तू यहीं रहेगा न हमारे साथ ? आज तुझे मैं जाने नहीं दूंगी

अमित : अरे नहीं मौसी जी मैं तो घर से कॉलेज आया हूँ ऐसे बिना बताये अगर रुक गया तो सब नाराज़ होंगे पर मैं वडा करता हूँ जब भी आप बुलाएंगी मैं आ जाऊंगा

रीता मौसी : देख बहाने मत बना तेरे मौसा जी भी शाम को आ जायेंगे तू कब से मिला नहीं उनसे भी और करुणा भी आने वाली है.

अमित : मौसी जी मैं मन थोड़ा कर रहा हूँ बस आज माफ़ कर दीजिये फिर किसी दिन रुक जाऊंगा

हम बातें कर रहे थे क इतने में बहार बेल्ल बजी और मौसी दरवाज़ा खोलने चली गयी. मौसी क साथ करुणा दीदी आ गयी और मुझे सामने देख कर शॉकेड हो गयी

करुणा : अमिततटत ! तू यहाँ ये चमत्कार कैसा हुआ

करुणा दीदी उछाल कर मेरे गले लग गयी

अमित : आप ने मेरा फ़ोन क्यों नहीं उठाया कल

करुणा : क्यों उठाऊं फ़ोन मैं तुमसे नाराज़ हूँ . कितने दिन हो गए तुम्हारा फ़ोन क्यों बंद था और इतने दिनों में एक बार भी तुमने फ़ोन नहीं किया

अमित : मेरा फ़ोन ख़राब था दीदी कल hi ठीक हुआ है और इसी लिए मैं आपको फ़ोन कर रहा था . सॉरी दीदी फिर ऐसी गलती नहीं होगी अब तो माफ़ कार्डो

करुणा दीदी ने फिर से मुझे गले लगा लिया

करुणा दीदी : आगे से ऐसा मत करना तुम मेरे भाई hi नहीं मेरे दोस्त भी हो और पता है नैना दीदी भी तुमसे नाराज़ हैं

अमित : मैं उसने भी माफ़ी मांग लूंगा

रीता मौसी : अरे बस भी करो जाओ हाथ मुँह धोलो फिर आकर खालो कुछ अमित कहीं भगा नहीं जा रहा

करुणा दीदी हाथ मुँह धो कर वापिस आ गयी.

करुणा दीदी : तो कैसा लगा कॉलेज ? सुना है यहाँ का सबसे बेस्ट कॉलेज है हमारे कॉलेज में भी लड़कियां बात कर रही थी . काश मैं भी उसी कॉलेज में होती तो हम सब मिल कर कितना मज़ा मरते

रीता मौसी : पड़े में ध्यान दिया होता तो तू भी नेहा क साथ होती.

करुणा दीदी : दीदी तो किताबों से बहार अति hi नहीं ज़िन्दगी को जीना भी आना चाहिए

रीता मौसी : ज्यादा भाषण मत दे चुप चाप खाना खा

मैं 2 घंटे रीता मौसी क यहाँ रुका इस बीच दीपिका ममी का फ़ोन भी आया क्यूंकि मैं आज समय पर घर नहीं पहुंचा था. मैंने ममी को बता दिया क मैं मौसी क घर हूँ और जल्दी hi निकल रहा हूँ. ममी ने मौसी करुणा दीदी और नेहा दीदी से भी बात की.

मौसी क घर से मैं घर क लिए निकल पड़ा . मैं कॉलेज वाली रोड से आ रहा था की एक लड़का तेज़ी से भागता हुआ मेरे आगे से निकला उसके कपडे खून से भीगे हुए थे सर पर चोट लगी थी खून बह रहा था और बाकि बॉडी पर भी चोट लगी थी.

उसके पीछे पीछे 8/10 लड़के हाथ में बसेबत और रोड लिए उसे मरने क लिए दौड़ रहे थे. लोग दर क मरे पीछे हैट गए उस लड़के की मदद क लिए कोई आगे नहीं आ रहा था . वो लड़का भागता हुआ गिर गया और उन बदमाशों ने उस पर वॉर करना शुरू कर दिया . लड़का मदद क लिए चिल्ला रहा था मुझसे देखा नहीं गया मैंने बुलेट को स्टैंड पर लगाया और उस लड़के को बचने भगा . एक लड़के को मैंने पीछे से धक्का मर कर गिरा दिया और दूसरे को बाजु पकड़ कर घुमा का दूर फेंका . इतने में 2 और लड़के मुझ पर हमला करने आगे बड़े. मैंने एक का वॉर हवा में hi रोक लिया मगर दूसरे ने मेरे कंधे पर रोड मर दी मुझे तेज़ दर्द हुआ. मैंने तनु से उस लड़के को अपनी तरफ खिंचा जिसके हाथ की रोड को मैंने पाक लिया था. मैंने एक घुटना उसके पेट में मारा और उसके हाथ से रोड छीन कर दूसरे लड़के की गर्दन पर वॉर कर दिया .

मेरे हाथ में रोड क एते hi मैं पूरे गुस्से से उन पर टूट पड़ा क्यूंकि मुझे भी बहुत दर्द होने लगा था कंधे पर . मैंने जल्दी से बाकि लड़को पर टूट पड़ा और रोड से उनको एक एक वॉर में ढेर कर दिया तभी पीछे से किसी ने मेरे सर में किसी चीज़ से हमला कर दिया मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ और एक बार क लिए मैं चक्र गया मगर जल्द hi खुद को संभल कर मैंने पलट कर हमला करने वाले को भी ज़ोर से रोड मर कर गिरा दिया और एक बार फिर से सब को तबियत से ठोका.

फिर मैं उस घायल लड़के की तरफ बड़ा वो खून से लेथ पैट था . देखने में ाचा खासा पहलवान था मगर इतने गुंडों क आगे बेचारा पास्ट हो गया था. मैंने जल्दी से उसे सहारा देकर उठाया उसकी हालत ख़राब हो गयी थी . मैंने पास में खड़े एक आदमी को मदद करने क लिए बुलाया और उस लड़के को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठा कर हॉस्पिटल ले गया . लड़का होश में नहीं था और उसका बहुत सा खून बह गया था . डॉ ने पुलिस को फ़ोन कर क उस लड़के को एडमिट कर लिया और उसका इलाज शुरू कर दिया

मैं बेंच पर बैठ कर डॉ का इंतज़ार कर रहा था तभी एक लेडी डॉ आयी और मुझसे उस लड़के क बारे में पूछा

डॉ : तुम इस लड़के क क्या लगते हो ?

अमित : जी मैं इसे नहीं जनता मैंने कुछ गुंडों को इस लड़के पर हमला करते देखा और इसकी मदद की मैं इसे उनसे बचा कर यहाँ ले आया . अब कैसा है वो लड़का ?

डॉ : वो अब ठीक है खून ज्यादा बह जाने से बेहोश हो गया है और बहुत सरे ज़ख़्म भी हैं कुछ दिन तो लगेंगे ठीक होने में . मगर तुमने एक अनजान आदमी की मदद क्यों की?

अमित : ये तो तो इंसानियत क नाते किया मैंने आखिर इंसान hi इंसान क काम अत है

डॉ : नीस . बहुत अछि सोच है तुम्हारी तुम एक अचे इंसान हो

बात करते हुए डॉ की नज़र मेरी गर्दन से बह रहे खून पर गयी और उन्होंने मुझे पलटने को कहा. मैं पलट गया

डॉ : ओह माय गॉड तुम्हारे सर से तो कितना खून बह रहा है तुम्हे पता नहीं तुम्हे चोट लगी है ?

डॉ ने मुझे जल्दी से केबिन में लेजा कर मेरे ज़ख़्म को साफ़ कर क मलहम पट्टी कर दी

डॉ : शुक्र कर ज़ख़्म ज्यादा गहरा नहीं है वर्ण स्टीट्चेस लगाने पड़ते . और कहीं चोट तो नहीं लगी

अमित : जी शायद कंधे पर लगी है

डॉ : दिखाओ मुझे . अपनी शर्ट निकालो

अमित : मैडम वो मैं आपके सामने कैसे

डॉ : मैं डॉ हूँ और तुम मरीज़ जितना कहा है उतना करो

मैंने अपनी शर्ट निकल दी डॉ मेरे कैसे हुए शरीर को गौर से देखने लगी .

अमित : देख लीजिये डॉ

डॉ : देख तो रही हूँ

अमित : जी क्या कहा अपने

मेरी बात से डॉ जैसे नींद से जगी

डॉ : आ हाँ वो कन्धा इधर करो .

चोट अंदरूनी है मैं दवाइयां लिख देती हूँ वो खा लेना

मैंने शर्ट फिर से पहन ली.

अमित : मैडम क्या अब मैं जा सकता हूँ ?

डॉ : रुको अभी पहले एक इंजेक्शन लगवा लो इससे इन्फेक्शन नहीं होगी

डॉ ने मुझे एक इंजेक्शन लगा दिया. उसके बाद डॉ उस लड़के क घर का अड्रेस निकलवाकर उन्हें इन्फॉर्म करने चली गयी . मैंने टाइम देखा तो पता चला एक घंटा और ख़राब हो गया घर में सब टेंशन में होंगे मुझे जल्दी यहाँ से निकलना पड़ेगा वर्ण पता नहीं कितना टाइम यहाँ और लग जायेगा. मैं बिना किसी को बताये चुप चाप अपनी बाइक ले कर निकल गया घर की तरफ .

रस्ते में फिर से दीपिका ममी का फ़ोन आया और मुझसे नाराज़ होने लगी क मैं अभी तक घर नहीं पहुँच. मैंने बता दिया मैं रस्ते में हूँ अभी पहुँच जाऊंगा. मेरे कंधे में दर्द तो हो रही थी मगर मैं परवाह न करते हुए स्पीड बड़ा कर जल्दी घर पहुँच गया .

मां लोग घर आ चुके थे मेरे घर आते hi मेरी हालत देख कर सब टेंशन में आ गए सर पर पट्टी बंधी हुई थी कपड़ों पर खून लगा हुआ था . दीपिका ममी क तो हाथों से बर्तन नीचे गिर गया और उन्होंने चीख कर मेरा नाम पुकारा .कामिनी ममी के चहरे पर भी टेंशन साफ़ नज़र आ रही थी

दीपिका ममी : ये क्या हुआ तुझे अमित ये चोट कैसे लगी

विजय मां और अजय मां भी दौड़ कर मेरे पास आये .

विजय मां : ये क्या हुआ अमित तुझे चोट कैसे लगी

अजय मां : ये इतना खून कैसे निकला तेरा

अंदर से माँ भी आवाज़ सुन कर बहार आयी और मुझे देखने लगी मेरी ऐसी हालत देख कर उनको भी दुःख हो रहा था और उनकी आँखों में आंसू आ गए मगर उन्होंने ने खुद को वहीँ रोक लिया.

अमित : कुछ नहीं बाबा वो मैं गिर गया था इस लिए सर में थोड़ी चोट लग गयी.

विजय मां : बीटा ध्यान से चलाया कर मोटरसाइकिल देख कितना खून निकला है .

अजय मां : और कहीं चोट तो नहीं लगी तुम्हे

अमित : जी बस कंधे पर थोड़ी स चोट है

दीपिका ममी पीछे कड़ी आंसू बहा रही थी जैसे पता नहीं क्या हो गया हो . कामिनी दीदी दीपिका ममी को हौसला दे रही थी जबकि माँ कुछ देर मुझे देखने क बाद फिर से अंदर चली गयी . मैं कपडे बदलने का बोल कर कमरे में चला गया और दूसरे कपडे पहन लिए. रत का खाना सब क साथ मिल कर खाया सब मुझे रेस्ट करने को कह रहे थे और 1-2 दिन कॉलेज न जाने को बोल रहे थे मगर मैंने कहा मैं बिलकुल ठीक हूँ

खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . दीपिका ममी मेरे लिए हल्दी वाला गरम दूध ले कर आयी .

दीपिका ममी : ये चोट कैसे लगी

अमित : अभी बताया तो है सबके सामने

दीपिका ममी : मुझे सच सुन्ना है

अमित : सच hi तो बताया है

दीपिका ममी : ाचा ! अगर तू बाइक से गिरा था तो बाइक पर कोई निशान क्यों नहीं आया . कितनी बार कहा है मुझसे झूठ न बोलै करो.

अमित : आप तो हर बात पकड़ लेती हैं ठीक है सुनिए

मैंने साडी बात ममी को बता दी .

अमित : अब आप ये बात किसी को मत बताइयेगा वर्ण मेरे लिए मुश्किल कड़ी हो जाएगी

दीपिका ममी : चल मुझे अपना कन्धा दिखा मैं उस पर तुबे लगा देती हूँ.

ममी ने मेरे कंधे पर मलहम लगा मर हलकी मालिश करदी और जो दवाई मैं शहर से ले आया था उसको भी खा लिया . थोड़ी देर ममी मेरे पास रही होर मुझे लड़ाई झगड़ों से दूर रहने को बोलती रही . मेरी चोट की वजह से आज ममी ने मुझे आराम करने दिया और मैं भी आदम से सो गया
 
अपडेट 57

ममी ने मेरे कंधे पर मलहम लगा मर हलकी मालिश करदी और जो दवाई मैं शहर से ले आया था उसको भी खा लिया . थोड़ी देर ममी मेरे पास रही होर मुझे लड़ाई झगड़ों से दूर रहने को बोलती रही . मेरी चोट की वजह से आज ममी ने मुझे आराम करने दिया और मैं भी आदम से सो गया

अब आगे -

मैं आराम से सोया पड़ा था मगर घर में कोई और अभी जग रहा था और मेरे कमरे क बहार से मुझे देख कर चुप चाप आपने कमरे में लौट गया.

विजय मां: आ गयी उसे देख कर ?

माँ मुझे कमरे क बहार से सोता हुआ देख रही थी और मेरी ऐसी हालत पर वो दुखी थी मगर मुझसे बात भी तो नहीं करना चाहती थी. अपनी आँखों में आंसू लिए वो अपने कमरे में वापिस चली गयी . एक माँ क दिल को कोई समझ नहीं सकता इतना सब होने क बाद भी मुझे तकलीफ में देख कर वो खुद को रोक न पायी और चली आयी मुझे देखने. वो बाबा को सोता हुआ छोड़ कर आयी थी मगर उसे नहीं पता था क बाबा सोये नहीं हैं. और बाबा क इस सवाल से वो चौंक गयी.

गौरी ममी : मैं तो वो मैं बाथरूम गयी थी

विजय मां : मुझे पता है तुम कहाँ गयी थी . क्या अब मुझे बताओगी की आखिर तुम क्यों उससे बात नहीं करती ? पहले तो तुम उसे देखे बगैर रहती नहीं थी और अब उसके सामने भी नहीं अति . आखिरी ऐसा क्या हुआ है जो तुम्हारा मन बदल गया? या फिर अब वो तुम्हे पराया लगने लगा है . शायद अब तुम्हारे मन में ये बात आ गयी है क वो तुम्हारा बीटा नहीं है और तुम उससे ऐसे मुँह मोड़ रही हो . मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी गौरी.

बाबा की बातों से माँ फुट फुट कर रोने लगी बाबा की बातों से माँ को धक्का लगा.

गौरी ममी: भगवन जनता है मैना उसे हमेशा अपना बीटा मन है और आज भी उसे तकलीफ में देख कर मुझसे रहा नहीं गया. चोट उसे लगती है तो दर्द मुझे होता है . मैं उसकी माँ हूँ तो क्या हुआ मैंने उसे जनम नहीं दिया मगर एक माँ की तरह पला तो है न. उसने ऐसी काम कर दिया है क मैं उसका सामना नहीं कर सकती वो जब भी मेरे सामने अत है तो वो सब मुझे यद् आने लगता है. मैं खुद को कैसे समझों न उसे सजा दे सकती हूँ न उसे माफ़ कर प् रही हूँ.

विजय मां : आखिर ऐसा क्या कर दिया है उसने जो तुम खुद को और उसे भी इतनी बड़ी सजा दे रही हो? आज तुम्हे सच बताना hi होगा मैं कितने दिनों से पूछ रहा हूँ तुम हर बार ताल देती हो. तुम्हे मेरी कसम मुझे सच बताओ मैं और बर्दाश्त माहि कर सकता.

गौरी ममी :रट हुए) मुझे कसम मत दीजिये मैं आपको नहीं बता सकती अपनी कसम वापिस ले लीजिये भगवन क लिए मुझसे मत पूछिए मैं नहीं बता सकती

विजय मां : मैंने तुम्हे कसम दे दी अब तुम या टी सच बताओ या फिर मेरा मारा हुआ मुँह देखना

गौरी ममी : रट हुए) ऐसा मत कहिये मैं मर जाउंगी आपको कुछ हो गया तो मैं भी नहीं रहूंगी . आप को सच सुन्ना है न तो मैं सच बता दूंगी मगर उसके बाद मैं भी ज़िंदा नहीं रहूंगी.

माँ ने बाबा को उस दिन जो कुछ हुआ वो बता दिया जिसे सुन बाबा को धक्का लगा और उनकी आँखों से आंसू बहने लगे . माँ फुट फुट कर रोने लगी तब बाबा ने हालत को समझते हुए पहले माँ को संभाला कहीं माँ खुद को कुछ कर न बैठे और फिर माँ को समझने लगे

विजय मां : जो भी हुआ वो नहीं होना चाहिए था. मगर देखा जाये तो इसमें अमित का भी कसूर नहीं है. उसने ये सब जान बूझकर तो नहीं किया. उस वक़्त उसे तुम्हारी जान बचने क लिए जो सही लगा उसने किया. अगर उसकी जगह मैं होता तो मैं भी यही करता फिर तुम्हे अफसोस नहीं होता. मगर अब तुम्हे सिर्फ इस बात का अफ़सोस है क वो सब तुम्हारे बेटे नई किया. पर ठन्डे दिमाग से एक बार सोच कर देखो. क्या वो तुम्हे अपनी आँखों क सामने मरता हुआ देख कर कभी चैन से रह पता . जो तुम्हे सबसे ज्यादा प्यार करता है जो तुम्हारी आँखों में एक आंसू नहीं देख सकता वो तुम्हे अपनी आँखों क सामने कैसे मरने देता. कभी तुमने ये नहीं सोचा क उसके दिल पर क्या बीत रही होगी . मैंने देखा है उसकी आँखों में वो सूनापन वो दर्द जो हम सब से छुपता है और मुस्कुराता रहता है. उसके दिल पर क्या बीत रही है शायद तुम्हे इसका अंदाज़ा नहीं है . तुम्हारे इस तरह करने से वो खुद को दोषी मन कर जो सजा दे रहा है तुम्हे उसका एहसास नहीं हुआ कभी? उसने तो जो किया था तुम्हे बचने क लिए किया था मगर उसे क्या सिला मिला तुमने उसे नज़रों से गिरा दिया. ज़रा सोचो क क्या कभी उसने तुम्हारे साथ कोई भी ऐसी हरकत की थी कभी क तुम उस पर उंगली उठाओ ? अरे तुम क्या पूरे गाओं में आज तक किसी ने अमित पर कोई उंगली नहीं उठाई यहाँ तक क दिव्या और कामिनी का भी उसके साथ सलूक सही नहीं रहा कभी मगर फिर भी उसने कभी किसी क खिलाफ कुछ नहीं कहा और आज देख लो उसने प्यार से कामिनी का दिल भी जीत लिया. अरे वो तो इतना प्यारा है क कोई उससे नफरत कर hi नहीं सकता. जो कुछ हुआ उसे बदला तो नहीं जा सकता मगर क्या तुम उस एक दुर्घटना क लिए साडी उम्र क लिए उसे सजा देना चाहती हो . एक गलती क लिए अपने रिश्ते को hi मर देना चाहती हो. उसने तो तुम्हे ज़िंदा रखने क लिए खुद को मर लिया मगर तुमने उसे माफ़ करने की बजाये ऐसे खुद से दूर कर लिया क जैसे वो कभी तुम्हारा था hi नहीं. तुमने एक बार फिर से उससे माँ का प्यार छीन लिया. मैं जनता हूँ तुम आज भी उसे दिल से प्यार करती हो और तुम ये भी जानती हो क इसमें अमित का दोष नहीं है तो फिर उसे किस लिए सजा दे रही हो . मेरी मनो तो जो हुआ उसे बुरा सपना समझ कर भूल जाओ वर्ण कहीं देर न हो जाये और तुम हमेशा क लिए उसे खो दो

गौरी ममी : ऐसा मत कहिये वो मेरा बीटा है मैं उसके बिना नहीं रह सकती मगर मैं कैसे भूल जॉन . जब भी उसे देखती हूँ वो सब मुझे फिर यद् आ जाता है और मैं खुद से hi नफरत करने लगती हूँ.

विजय मां : तुम सिर्फ इस वजह से दुखी हो न क तुम्हारा पति धरम इससे ख़राब हो गया . मैं जब तुम्हारा पति हो कर तुम्हे कह रहा हूँ वो सब भूल जाओ तो तुम क्यों नहीं भूल जाती . वो हमारा बीटा है और कभी मुझे कुछ हो गया तो वो hi तुम्हारा सहारा है . मेरी बात मनो और उसे माफ़ कार्डो . जो भी होता है भगवन की मर्ज़ी से hi होता है इसे भी भगवन की मर्जी समझ कर भूल जाओ

बाबा माँ को समझते रहे मगर माँ वो सब भूल नहीं प् रही थी . ऐसे hi दोनों देर तक बात करते रहे और फिर सो गए . मैं सुबह जब उठा तो सर और कंधे में दर्द हो रहा था. मैं आज अखाड़े नहीं गया और आराम करता रहा . दीपिका ममी सुबह मेरे कमरे में मेरी तबियत का हल जानने आयी और मुझे आज छुट्टी करने को कहा मगर मैं नहीं मन आखिर घर पर रह कर मैं माँ क सामने नहीं आना चाहता था.

मैं अपने टाइम से तैयार हुआ और कामिनी ममी ने मुझे नाश्ता दे दिया कमरे में आ कर वो भी मुझे मन कर रही थी मगर मैंने उनको भी समझा दिया.

नाश्ता करने क बाद मैं जब निचे उतरा तो बाबा ने भी मुझे रोका मगर मैं फिर भी कॉलेज को निकल गया.

मैं क्लास में बैठा था तो सब मेरे सर पर बंधी पट्टी को देख कर खुसर फुसर कर रहे थे. तभी क्लास में चन्दर कांटा मैडम क्लास लेने आ गयी.

उनकी नज़र जब मुझ पर पड़ी तो उन्होंने मुझे खड़ा किया

चन्दर कांटा : ये पट्टी किस लिए बंधी है तुम्हारे सर पर क्या फिर से किसी से झगड़ा कर क ए हो ? तुम पड़ने आते हो या गुंडागर्दी करने ? ये सब इस कॉलेज में नहीं चलेगा

अमित : मदन वो कल मैं

चंद्रकांता : बस बस अपनी सीट पर बैठ जाओ और ख़बरदार कभी झगड़ा किया तो वर्ण कॉलेज से निकलवा दूंगी.

मेरी बात बिना सुने मुझे फिर से धमकी दे कर बैठा दिया . मैं गुस्से को अंदर hi अंदर दबा कर रह गया . लेक्चर ख़तम होते hi मंजू मैडम आ गए उन्होंने ने भी मेरे सर पट्टी बंधी देखि तो मुझसे पुछा.

मंजू म : अमित ये पट्टी किस लिए बंधी है सर पर क्या हुआ है तुम्हे ये चोट कैसे लगी?

अमित : मम वो कल मेरा छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था

मंजू म : फिर तुम क्यों आये कॉलेज आज तो तुम्हे रेस्ट करनी चाहिए थी. तुम चाहो तो वापिस जा सकते हो

अमित : नहीं मम ऐसी कोई बात नहीं मैं ठीक हूँ

उसके बाद मम पड़ने लगी. बेल्ल बजने क साथ hi लेक्चर ख़तम हुआ और मम चली गयी तब मोहित क्लास में आया

मोहित : यार ये चोट तुझे कैसे लगी

अमित : कुछ नहीं यार कल छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था . तू बता आज लेट कैसे हो गया

मोहित : लेट कहाँ मैं तो कैंटीन में hi था आज नाश्ता कर क नहीं आया था न तो सोचा नाश्ता कर लेता हूँ. वैसे तू अभी क्या करने वाला है चल मेरे साथ कैंटीन में बैठते हैं

अमित : यार लेक्चर शुरू होने वाला है

मोहित : कौन सा लेक्चर अब 2 लेक्चर फ्री हैं एक क प्रोफ आज छुट्टी पर हैं और दूसरे प्रोफ ड्यूटी पर बहार गए हैं चल चलते हैं

मैं मोहित की बात मन कर कैंटीन में चला गया वैसे भी फ्री लेक्चर था. हम दोनों एक कार्नर टेबल पर बैठे थे क एक लड़की जिसने शार्ट स्कर्ट और रेड टी शर्ट पहनी हुई थी मटकती हुई मेरे पास से गुज़री और मेरे कंधे को छूटे हुए निकल गयी . मैं पलट कर उसकी तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी और स्माइल दे रही थी .

मैं उसकी तरफ एक बार देख कर फिर से मोहित क साथ बातें करने लगा तभी एक और लड़की मेरे साथ आ कर चिपक कर बैठ गयी.

शालिनी : तो हीरो क्या चल रहा है ? बड़े इशारे हो रहे हैं . जा तुझे hi बुला रही है करले बात जा कर

मैं शालिनी को देख कर हैरान हुआ मगर अगले hi पल खुद को संभाला आज वो सिंपल सूट में थी और अछि लग रही थी

अमित : मैं क्यों उसके पास जॉन मुझे किसी में इंटरेस्ट नहीं है .

शालिनी : अजीब लड़के हो जो कह रहे हो क लड़की में इंटरेस्ट नहीं है . कहीं तुम्हे लड़के तो नहीं पसंद

शालिनी इतना कह कर जाने लगी और मोहित भी उसके साथ हसने लगा

अमित : गुस्सा करते हुए ) क्या कहा आपने ?

शालिनी : सॉरी सॉरी मुझे लगा अगर लड़कियों में इंटरेस्ट नहीं तो लड़कों में होगा . वैसे आज किसके साथ झगड़ा कर क आये हो ?

अमित : वो कल मैं बाइक से गिर गया था

शालिनी : पक्की बात है न ? कहीं किसी ने तुम्हारे साथ कोई पन्गा तो नहीं किया?

अमित : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है . वैसे आज आप नई लुक में है . आप पर सूट ज्यादा ाचा लगता है. ऐसे hi ड्रेस पहना करिये न आप इसमें अछि लगती हैं

शालिनी मेरी बात पर मुस्कुरा दी

शालिनी : लाइन मर रहे हो ? बच्चू मैं तुम्हारी सीनियर हूँ ये बात यद् रखना. क्या बातों से hi पेट भरोगे चलो कुछ मंगवाओ खाने को.

अमित : बोलिये क्या खाएंगी आप?

शालिनी : पहले तो ये आप आप कहना बंद करो मैंने कल भी कहा था मुझे नाम से बुलाओ. और खाने को कुछ भी ले आओ जो तुम्हे ाचा लगे

मैं कोल्ड ड्रिंक और समोसे ले आया और हम तीनो ने मिल कर खाये. हम जब कैंटीन से बहार निकलने लगे तो फिर से वो पहले वाली लड़की मटकती हुई आयी और मेरे हाथ में एक कागज़ का टुकड़ा पकड़ा मर फ़ोन करने का इशारा कर गयी.

शालिनी : लगता है ये तुम्हे छोड़ेगी नहीं तुमको हो न हो उसको तुम में इंटरेस्ट है

शालिनी फिर से बसने लगी और मैं शर्मा गया . उसके बाद वो चली गयी और हम भी अपने ब्लॉक की तरफ चल पड़े रस्ते में hi हमें प्रोफ वरिंदर मिल गए

प्रोफ वरिंदर : अमित ये पट्टी कैसी ? कहीं किसी ने तुमसे झगड़ा तो नहीं किया?

अमित : नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं वी कल एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था ज़रा स चोट है.

प्रोफ वरिंदर : पक्का ऐसा hi हैं न ? अगर कोई और बात है तो खुल कर बता दो

अमित : सर यकीन मानिये और कोई बात नहीं है

प्रोफ व् भी अपने रस्ते चले गए और हम घूमते हुए अपनी क्लास में चले गए अभी लेक्चर क टाइम ख़तम नहीं हुआ था इस लिए क्लास में स्टूडेंट्स बातें कर रहे थे . 2 लेक्चर और लगा कर हम फ्री हो गए उसके बाद मैं साइंस ब्लॉक में गया . कल की तरह थोड़ा वेट करने क बाद नेहा दीदी और राधा. से मुलाकात हुई . नेहा दीदी ने भी मेरी चोट क बारे में पुछा और मैंने उन्हें वही बहाना बता दिया . आज नेहा दीदी राधा क साथ चली गयी उनको दिव्या मौसी क यहाँ जाना था. इस लिए मैं घर आ गया .

आज मोंटी और उसकी गैंग कहीं नज़र नहीं आयी मगर मैंने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया. घर आया तो करुणा दीदी और नैना दीदी का फ़ोन आ गया उन्होंने ने भी चोट क बारे में पुछा.

घर में कुछ खास माहि हुआ रत में भी दीपिका ममी और कामिनी ममी मेरे पास नहीं आयी .और मैं मंजरी को यद् करता हुआ सो गया .

अगली सुबह मैं कॉलेज गया तो नोटिस बोर्ड पर भीड़ थी मैंने भी जानने क लिए उस तरफ बाद गया तो पता चला क नई स्टूडेंट्स क लिए टैलेंट सर्च और स्पोर्ट्स क इवेंट नेक्स्ट वीक में होंगे . प्रोफ वरिंदर ने भी मुझे नेक्स्ट वीक क लिए तैयार रहने को कहा . मैंने अपने लेक्टर्स अटेंड किये और राधा और नेहा दीदी से मिलने क बाद घर आ गया. एक हफ्ता ऐसे hi गुज़र गया सब कुछ नार्मल चल रहा था. रीता मौसी और रजनी मौसी ने मुझे घर बुलाया मगर मैंने गले हफ्ते आने का बोल दिया . मेरी चोट भी काफी हद तक ठीक हो गयी थी. और आखिर वो दिन आ गया जिस दिन टैलेंट सर्च और स्पोर्ट्स क इवेंट थे . आज क्लासेज नहीं लग रही थी इस लिए जो स्कॉलर्स थे या तो वो और नहीं या लाइब्रेरी में चले गए .


ज्यादा तर लड़के लड़कियां ऐसे बन थान क आये थे जैसे क कोई शूटिंग होनी हो . खैर स्पोर्ट्स क ट्रायल ग्राउंड में थे . अलग अलग स्पोर्ट्स क अलग अलग ट्रायल हो रहे थे जिनमे कॉलेज क सीनियर खिलाडी थे और कोच थे . प्रोफ वरिंदर भी ग्राउंड में मौजूद थे . मुझे भी ट्रायल देने को बोलै गया और मेरे सामने एक सीनियर खिलाडी था . गाओं में हम मिटटी में कुश्ती करते थे मगर यहाँ पर गद्दों क ऊपर करनी पास रही थी . यहाँ पर रूल्स भी कुछ अलग थे . मैं पहली बार ऐसे कुश्ती कर रहा था इस लिए मुझसे अछि तरह से हो नहीं रही थी मगर फिर भी सीनियर खिलाडी मेरे सामने ज्यादा देर टिक नहीं पता था . ट्रायल क बाद सबको उनके सिलेक्शन क बारे में बता दिया गया. मुझे चुन लिया गया था. प्रोफ वरिंदर ने मुझे अपने साथ आने को कहा. हम दोनों प्रोफ क ऑफिस में आ गए

प्रोफ वरिंदर : अमित लगता है तुमने कभी मत क ऊपर कुश्ती नहीं खेली

अमित : जी सर मैं आज तक मिटटी क अखाड़े में hi खेलता आया हूँ

प्रोफ व् : हम्म तुम्हे रूल्स और टेक्नीकेस सीखनी पड़ेंगी . तुम में ताकत और फुर्ती तो है मगर इस स्टाइल में अलग रूल्स होते हैं इस लिए पहले तुम्हे वो सिखने होंगे. हमारे कॉलेज का स्टार खिलाडी चोट लगने की वजह से कॉलेज नहीं आ रहा है जैसे hi वी आएगा मैं उसको तुम्हे त्रिनेड करने को बोल दूंगा और तुमसे भी उम्मीद करता हूँ दिल लगा कर जल्दी सीख लोगे . और मुझे ये बताओ तुम प्रैक्टिस कैसे करोगे.

अमित : प्रैक्टिस तो मैं अपने गाओं क अखाड़े में करता हूँ सर

प्रोफ व् : नहीं उससे बात नहीं बनेगी यहीं कॉलेज में इंडोर स्टेडियम में कुश्ती की प्रैक्टिस करते हैं हमारे प्लेयर्स और गयम का सामान भी वहीँ है. तुम यहाँ हॉस्टल में कमरा ले लो मैं अभी बोल देता हूँ तुम्हे कमरा मिल जायेगा. तुम सैटरडे संडे को घर जा सकोगे मगर बाकि दिन यहीं रहोगे जिससे तुम सुबह शाम प्रैक्टिस कर सकोगे और हमारे सब प्लेयर्स यहीं पर प्रैक्टिस करते हैं . ट्रेनिंग क लिए कोच भी साथ मौजूद रहते हैं . और मैं भी चक्कर लगत रहता हूँ . तो फिर मंडे से तुम अपना सामान ले कर यहीं हॉस्टल में शिफ्ट हो जाओ .

अमित : सर मुझे एक बार घर पर बात करनी होगी.

प्रोफ व् : करलो मगर दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है क्यूंकि गाओं से आने जाने में तुम प्रैक्टिस नहीं कर पाओगे . वैसे भी तुम्हे जल्द शुरू करना होगा . 2 महीने बाद कम्पटीशन आने वाले हैं अन्तर कॉलेज सो तुम्हे जल्दी से तैयार होना hoga.principal सर को तुमसे बहुत उम्मीद है निराश मत करना

अमित : मैं पूरी मेहनत करूँगा सर .

मैं प्रोफ व् से मिलने क बाद सीधा घर को निकल पड़ा अभी टैलेंट सर्च चल रहा था मगर मुझे इंटरेस्ट नहीं था. मैंने घर आ कर हॉस्टल में रहने की बात कही तो पहले कोई भी नहीं मन मगर फिर मैंने साडी बात समझे और ये भी बताया क प्रिंसिपल सर ने सिर्फ स्पोर्ट्स क बेसिस पर hi मुझे एडमिशन दिया है अगर मैं ऐसा नहीं करूँगा तो मुझे कॉलेज से निकल भी सकते है तब जा कर कहीं सब मने . मगर दीपिका ममी और कामिनी ममी उदास हो गयी क्यूंकि अब मैं सिर्फ 2 रातों क लिए hi घर पर रहा करूँगा.

रत को जब दीपिका ममी मेरे पास आयी तो मुझसे इस बात का गिला करने लगी.

दीपिका ममी : तू मुझे छोड़ कर शहर चला जायेगा मैं कैसे रहूंगी तेरे बगैर

अमित : मैं आपको छोड़ कर कहाँ जा रहा हूँ वो तो स्पोर्ट्स क लिए मुझे वहां रहना पड़ेगा वर्ण मैं आपसे दूर कहाँ जा सकता हूँ. आप चिंता मत कीजिये मैं सैटरडे संडे को तो रहूँगा न आपके साथ

दीपिका ममी : उससे क्या होगा . एक रत दीदी रहेंगी मुझे तो एक hi मिली न

अमित : हम्म तो ये बात है इसका भी एक हल है . आप दोनों को एक साथ प्यार किया करूँगा फिर तो 2 रत हो गयी न .

दीपिका ममी : दोनों को साथ कहाँ कर पाओगे उससे तो तुम थक जाओगे

अमित : क्यों ? पिछली बार की तरह hi करेंगे फिर तो मैं नहीं थकूंगा और आप को भी मज़ा आएगा .

दीपिका ममी : न बाबा न मेरी तौबा तुम तो किसी की सुनते hi नहीं हो बेरहम हो जाते हो

अमित : आपको प्यार करना है क नहीं . यही एक तरीका है

दीपिका मेरी बात को समझ कर मन गयी उसके बाद मैंने रत में एक राउंड चुदाई का खेल खेला और ममी अपने कमरे में वापिस चली गयी . संडे तक मैंने सब को मन लिया मेरे हॉस्टल जाने क लिए . माँ से अभी भी कोई बात नहीं हो पायी थी . कॉलेज में भी कोई खास बात नहीं हो रही थी सिवाय इस बात क . वो कैंटीन वाली लड़की हर रोज़ मेरे आसपास मंडराती रहती और मुझसे बात करने की कोशिश करती मगर मैं उससे दूर भागता रहा.
 
अपडेट 58

दीपिका मेरी बात को समझ कर मन गयी उसके बाद मैंने रत में एक राउंड चुदाई का खेल खेला और ममी अपने कमरे में वापिस चली गयी . संडे तक मैंने सब को मन लिया मेरे हॉस्टल जाने क लिए . माँ से अभी भी कोई बात नहीं हो पायी थी . कॉलेज में भी कोई खास बात नहीं हो रही थी सिवाय इस बात क . वो कैंटीन वाली लड़की हर रोज़ मेरे आसपास मंडराती रहती और मुझसे बात करने की कोशिश करती मगर मैं उससे दूर भागता रहा.

अब आगे -

आज संडे था और मैं कल क लिए अपना बैग पैक कर रहा था . प्रोफ व् ने मेरे लिए हॉस्टल में बात कर ली थी और कल से मुझे वहीँ रहना था. मैंने बैग में अपनी ज़रूरत का सामान पैक कर लिया. दीपिका ममी ने मेरी इसमें मदद की . सामान कोई ज़्यादा नहीं था क्यूंकि सैटरडे को तो घर वापिस आ hi सकता था. कामिनी ममी और दीपिका ममी उदास थी मगर मेरे लिए मन भी गयी थी. जब मैंने अपनी साडी तयारी कर ली तो बाबा ने मुझे बुलाया उनके साथ अजय मां और कमलेश मां भी बैठे हुए थे .

विजय मां : तो हो गयी तयारी तुम्हारी ?

अमित : जी बाबा ज़रूरत का सामान बैग में दाल लिया है शनिवार को तो वापिस आना hi है उस हिसाब से सामान रख लिया है.

विजय मां : बीटा तुम्हे घर से दूर भेजना तो नहीं चाहता पर अब तुम्हारा जाना भी ज़रूरी है तो एक काम क्यों नहीं करता वहां पर तुम्हारी तीनो मौसियां हैं तू उनके पास hi रुक जा हमें भी असर रहेगा क तू घर में hi है. और पता नहीं हॉस्टल वाले कैसा खाना खिलते हैं. काम से काम घर का ाचा खाना तो खा hi लेगा.

अमित : बाबा एक दो दिन की बात हो तो चल जाता है मगर मुझे तो वहां तीन साल रहना होगा ऐसे में उनके ऊपर मैं बोझ नहीं बनना चाहता . हाँ उनसे मिलता ज़रूर रहूँगा

अजय मां : बीटा ये भी तो सोच जब उन्हें पता चलेगा क उनके होते तू हॉस्टल में रह रहा है तो उनको कैसा लगेगा

अमित : वो मैं उनको बहाना बना दूंगा क कॉलेज वालों का हुकम है हॉस्टल में रहूं.

कमलेश मां : मगर हॉस्टल में पता नहीं कैसे कैसे लोग होंगे कहीं तुझे न बुरी आदतों में फंसा दें

अमित : आप चिंता मत कीजिये मां जी मैं कभी कोई गलत काम नहीं करूँगा.

विजय मां : बीटा एक बार अपनी माँ से मिल लेना वो बेचारी तेरे जाने से बहुत दुखी है

माँ क बारे में सुनते hi मेरा दिल भी पिघल गया आखिर कितनी देर हो गयी थी उनसे बात हुए . वो तो मुझे बीटा मैंने को भी तैयार नहीं थी और मेरी शकर देखना नहीं चाहती थी. बाबा क मग से मेरे लिए माँ का दुखी होना जैसे मेरे लिए उम्मीद की एक किरण थी जैसे रेगिस्तान में प्यासे को पानी मिल गया हो . मैं फ़ौरन माँ क पास उनके रूम में गया. माँ बीएड पर लेती हुई थी मुझे देख कर उन्होंने करवट बदल ली और मेरी तरफ पीठ कर ली मगर मैंने उनकी आँखों में आंसू देख लिए थे.

माँ मेरे जाने से दुखी भी थी और अभी तक मेरी उस गलती को माफ़ भी नहीं किया था. मैंने माँ से बात करनी चाही मगर मुझे शब्द नहीं मिल रहे थे आखिर मैं क्या बात करूँ कैसे बात करूँ. माँ क साथ हुई आखिरी बात चित मेरे ज़ेहन में गूंजती रहती थी. मैं कुछ देर वहीँ खड़ा रहा और माँ से बात करने का होंसला इकठा करता रहा मगर पता नहीं क्यों मेरी ज़ुबान ने मेरा साथ माहि दिया और दिल में उठ रहे हज़ारों ख़यालात दिल में hi रह गए .

मेरी आँखों में बेबसी क आंसू आ गए और मैं चुप चाप बिना कुछ कहे कमरे से बहार निकल गया

रत का खाना सब ने मिल कर खाया कल मुझे जाना था इस लिए आज मेरे लिए स्पेशल खाना बनाया गया था. रत सब क सोने क बाद दीपिका ममी और कामिनी ममी दोनों मेरे पास आयी और ह्यूमेन मिल कर थ्रीसम चुदाई की . वियाग्रा की टेबलेट की वजह से दोनों की अचे से प्यास बुझाई ताकि 5 दिन दोनों आराम से गुज़र सकें . दोनों क पेट भरी होने लगे थे इस लिए मैंने धक्के ज़्यादा तेज़ नहीं मरे कहीं बचे पर असर न हो. चुदाई क बाद वो दोनों वापिस अपने कमरे में चली गयी .

सुबह मैं तैयार हुआ और अपना बैग उठा कर निचे आ गया नाश्ता करने क बाद मैं जाने क लिए रेडी था और सब से मिला. माँ मुझे अभी भी मज़ार नहीं आयी मैं उनसे मिलने उनके कमरे में गया तो वो वहां भी नहीं थी .मैं निराश हो कर वापिस आ गया और बुलेट बहार निकल कर सब से विदा लेकर चल दिया शहर की और.

कॉलेज पहुँचते hi मैं पहले हॉस्टल में गया जो कॉलेज क साथ hi था मगर उसका गेट अलग था. मैंने जा कर अपने लिए रूम का पता किया तो मुझे मेरा रूम no. बता दिया गया. हॉस्टल 3 मंज़िला था और यहाँ पर 200 क लगभग कमरे थे . मैं अपने कमरे में गया तो जा कर देखा क मेरे रूम में पहले से hi 2 लड़के मौजूद थे . हर रूम में 4 सिंगल बीएड लगे हुए थे और सामान रखने क लिए ालमिरह थी. बाथरूम वगैरह हर मंज़िल पर थे अलग से. मैंने रूम में जा कर अपना सामान रखा . तो रूम में बैठे दोनों लड़को ने मुझसे मेरे बारे में पुछा.

लड़का 1 : क्या तुम भी इसी रूम में रहने वाले हो

अमित : हाँ

लड़का 2 : कौन स क्लास में हो ? नाम क्या है तुम्हारा ?

अमित : मेरा नाम अमित है और मैं B.A. फर्स्ट ईयर में हूँ

लड़का 1 : लगता है तुम किसी गाओं से हो . तो क्या तुम्हार गाओं बहुत दूर है?

अमित : हूँ तो मैं गाओं से मगर आपको कैसे पता

लड़का 1 : बस तुम्हारे कपड़ों से अंदाज़ा लगा लिया क्यूंकि शहरों में लड़के ऐसे कपडे नहीं पेहेनते . अन्य वे मेरा नाम है हरीश और मैं B.sc फर्स्ट ईयर में हूँ

मैंने उससे हाथ मिलाया और दूसरे लड़के की तरफ देखा

लड़का 2 : मेरा नाम है जतिन और हम दोनों एक hi क्लास में हैं.

मैंने उससे भी हाथ मिलाया

अमित : मेरा नाम तो आपको बता hi दिया मैं इस हॉस्टल में रहना तो नहीं चाहता था क्यूंकि मेरा गाओं ज्यादा दूर नहीं है मगर स्पोर्ट्स की प्रैक्टिस क लिए मुझे प्रोफ ने यहीं रहने को कहा ताकि प्रैक्टिस में कमी न आये . आप लोग घर छोड़ कर यहाँ कैसे रह रहे हैं

हरीश : यार मैं तो बहुत दूर से हूँ अछि स्टडी की वजह से इस कॉलेज में एडमिशन लिया है . इतनी दूर से आना जाना आसान नहीं था इस लिए हॉस्टल में आ गया

जतिन : मेरी भी शामे hi प्रॉब्लम है . वैसे तुम कौन स गेम में हो

अमित : कुश्ती में ो सॉरी रेसलिंग में

हरीश : मतलब क पहलवान हो भाई हमारा ख्याल रखना कही हमें न उठा कर पटक देना . अब अपना सामान उस ालमिरह में रख लो कॉलेज का टाइम होने वाला है चलो साथ में चलते हैं

सामान ालमिरह में रख कर मैं उन दोनों क साथ कॉलेज आ गया . दोनों देखने में अचे खासे थे लगता है अचे घरों से होंगे और नेचर भी मुझे ठीक लगा चलो इनके साथ अछि काट जाएगी.

कॉलेज में आ कर हम अपनी अपनी क्लास में चले गए. मैं इधर अपनी क्लासेज लगा रहा था और उधर कहीं एक मीटिंग मेरे खिलाफ चल रही थी .

मोंटी : कितने दिन हो गए शीना अभी तक तूने कुछ नहीं किया इससे तो ाचा था मैं खुद hi कुछ करता

शीना : मोंटी तू इतना उतावला क्यों रहता है मैं अपना काम कर रही हूँ बस काम बनते hi देखना उसका पूरे कॉलेज क सामने कैसा तमाशा बनता है.

मोंटी : लेकिन कब ? मेरे अंदर बदले की आग भड़क रही है . वो साला जब भी मेरी नज़रों क सामने से गुज़रता है जी चाहता है उसे जान से मर दूँ

शीना : रिलैक्स मोंटी उसे जान से मरने से तुम्हारी इंसल्ट का बदला पूरा नहीं होगा उसने हम दोनों को चुनौती दी है उसका तो वो हल करुँगी शर्मिंदगी से खुद hi जान दे देगा

मोंटी : रघु मैंने तुझे कहा था उस पर नज़र रखना वो क्या करता है किस्से मिलता है ? तूने पता किया?

रघु : मैंने सब पता कर लिया है उसके साथ उसकी क्लास का एक लड़का होता है मोहित . इसके इलावा वो साइंस ब्लॉक में जाता है 2 लड़कियों से मिलने और मैंने शालू को भी कई बार उसके साथ बात करते हुए देखा है

मिन्टी : शालू ? ाचा तो वो उस देहाती से यारी बना रही है ये तो अछि बात है वो हमारे काम आ सकती है. लेकिन वो 2 लड़कियां कौन हैं जिनसे वो मिलता है ? क्या उसकी कोई गफ है या कोई फॅमिली रिलेशन में

रघु : ये तो अभी पता नहीं चला मगर वो भी मैं पता लगा लूंगा . इतना ज़रूर है क एक तो वही लड़की जिसको उसने उस दिन बचाया था और दूसरी भी कोई नयी लड़की है मगर हैं दोनों hi ज़बरदस्त मॉल

मोंटी : ाचा तो वो लड़की उसकी दोस्त बन गयी है वाकई में है तो साली कमल उसे तो कैसे भी कर क अपने नीचे लाऊंगा और उसे काली से फूल बनाऊंगा तुम लोग काम पर लग जाओ उसे जो सेट कर क लाएगा उसे मैं इनाम दूंगा. और वो दूसरी लड़की का भी जल्दी पता लगाओ मैं भी तो देखूं कौन सा माल आया है नया.

इधर फ्री लेक्चर में मैं मोहित क साथ कैंटीन में बैठा था. मोहित को कोई कॉल आ गया और वो फ़ोन सुनने बहार चला गया. इतने में वो अनजान लड़की मेरे सामने आ कर बैठ गयी . आज वो ब्लैक टी शर्ट और जीन में कमल की लग रही थी उसका रंग दूध सा सफ़ेद था जो काळा कपड़ों में और भी ाचा लग रहा था .

लड़की : आखिर कब तक मुझे यूँ hi तड़पते रहोगे . मैं कितने दिनों से तुम्हारे आगे पीछे मरी मरी फिर रही हूँ और तुम हो की मेरी तरफ देखते hi नहीं. आखिर क्या कमी है मुझ में ? क्या मैं सुन्दर नहीं हूँ ?

अमित : देखिये मिस मैं यहाँ पड़ने आया हूँ इन सब फालतू बातों क लिए मेरे पास वक़्त नहीं है

लड़की : मिस नहीं शिवानी नाम है मेरा मुझे मेरे नाम से पुकारो . और प्यार क लिए वक़्त की ज़रूरत कहाँ होती है जब तुम कहोगे मैं तब तुमसे मिल लिया करुँगी बस एक बार मुझे अपना लो

अमित : देखिये शिवानी जी न मैं आपको जनता हूँ न आप मुझे फिर आप कैसे बिना किसी को जाने प्यार करने का दवा कर रही हैं मानिये पड़े पर ध्यान दीजिये

शिवानी : तुम्हे तो कॉलेज की हर लड़की जानती है . जिस तरह तुमने उस दिन उस लड़की की इज़्ज़त बचाई तुम तो सब क हीरो बन गए हो इतना काफी है तुम्हे प्यार करने क लिए और रही मेरी बात मेरा नाम शिवानी है और मैं B.A. फाइनल में हूँ

अमित : आप मुझसे दो साल सीनियर हैं और अपने से छोटे लड़के क पीछे पड़ी हैं क्या आपको और कोई नहीं मिला .

शिवानी : मेरी ज़िन्दगी को आज तक जिसकी तलाश थी वो तुम hi हो आज तक मुझे कोई लड़का पसंद hi नहीं आया लेकिन जब से तुम्हे देखा है बस तुम्हारे hi बारे में सोचती रहती हूँ

अमित : देखिये अपना और मेरा वक़्त बर्बाद मत कीजिये मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं है . आप किसी और को ढून्ढ लीजिये

शिवानी : काम से काम मुझे अपना दोस्त तो बना hi सकते हो तुम्हारे साथ दोस्ती कर क hi अपने दिल को तसल्ली देती रहूंगी.

अमित : ठीक है मगर सिर्फ दोस्ती की हद तक hi कभी इससे आगे जाने की कोशिश मत करना वर्ण ये दोस्ती भी ख़तम

शिवानी : बिलकुल भी नहीं . जैसा तुम कहोगे वैसे hi करुँगी

अमित : ठीक है तो मिलाइये हाथ

शिवानी : यहाँ पर दोस्ती हाथ मिलकर नहीं करते

इतना कह कर शिवानी अपनी सीट से कड़ी हुई और मुझे भी खड़ा किये और मेरे गले लग गयी. मैं हैरानी से उसे देखता रह गया कितनी बोल्ड लड़की है . कैंटीन में सब क सामने इसने मुझे गले लगा लिया मुझे शर्म आने लगी और मैंने जल्दी से उसे खुद से दूर किया . इतने में मोहित आ गया और मैं उसके साथ निकल गया

मोहित : तू तो बड़ा छुपा रुस्तम निकला उसके साथ सेटिंग भी कर्ली और बताया भी नहीं. वैसे कुछ उसके बारे में भी तो बता

अमित : क्या बताऊँ बड़ी पागल लड़की है कैसे सबके सामने मुझे ऐसे गले लगा रही थी . और मैंने कोई सेटिंग नहीं की वो तो बार बार प्यार का रोना रो रही थी मैंने उससे पीछा छुड़ाने क लिए दोस्त बनने की हामी भर दी .

मोहित : वैसे क्या नाम है और कौन स क्लास में है ये? देखने में तो अछि है कितने दिनों से तेरे पीछे पड़ी है हाँ कर देता तेरी भी मौज हो जाती.

अमित : अरे क्या बात करता है तू भी उस से तो बच क रहना पड़ेगा कहीं सब क सामने मेरी इज़्ज़त न उतर दे वैसे तू करले उससे सेटिंग इतनी अछि लगती है तुझे तो . फाइनल में है शिवानी नाम है उसका पता नहीं क्यों पीछे पड़ी है

मैं बाकि क लेक्चर अटेंड करने क बाद प्रोफ वरिंदर से मिला और उनको अपने हॉस्टल में शिफ्ट होने का बता दिया .

प्रोफ वरिंदर : ये तुमने ाचा किया अब कल सुबह 6 बजे ग्राउंड में आ जाना तुम्हे बाकि सब वहीँ मिल जायेंगे कोच साहब को मैंने तुम्हारे बारे में पहले hi बता दिया हुआ है और तुम तो उस दिन मिले भी थे उनसे अब जाओ . और हाँ शाम को भी लड़के अपनी प्रैक्टिस करते हैं उनसे पूछ लेना . किसी भी तरह की कोई ज़रूरत हो तो मेरे पास आना . अब जाओ

प्रोफ से मिलने क बाद मैं राधा और नेहा दीदी से मिलने चला गया आज मोहित और मीनल पहले hi चले गए थे शायद कहीं जाना होगा. राधा और नेहा दीदी को मैंने अपने हॉस्टल में रुकने क बारे में बता दिया और ये भी कह दिया क प्रिंसिपल सर क सख्त आर्डर हैं मैं हॉस्टल में hi रहूं.

इससे पहले क नेहा दीदी मुझसे कुछ कहती मैंने उन्हें ये कह दिया अब वो यही सब घर में बता देंगी. राधा ने मेरी बात पर कोई रिएक्शन नहीं दिया.

वो दोनों घर चली गयी और मैं हॉस्टल में आ गया . हरीश और जतिन पहले hi आ गए थे और अपने बीएड पर आराम कर रहे थे. आज तो मैंने कहीं जाना नहीं था इस लिए मैं भी आराम करने लगा . हॉस्टल का पहला दिन कोई खास नहीं था . हॉस्टल की मेस में सब स्टूडेंट्स क लिए खाना मिल जाता था. मैंने भी वहीँ पर खाना खाया कुछ लड़के बहार से अपनी मर्ज़ी का खाना होटल से मंगवाते या बहार hi खा कर आ जाते . रत 10 बजे तक हॉस्टल का गेट खुला रहता था. पहले दिन hi मैंने हॉस्टल क सभी रूल्स और सब सुविधाओं क बारे में जान लिया . रत को बिस्तर पर लेता मैं सब को यद् कर रहा था ज़िन्दगी में पहली बार मैं घर से अकेला बहार था इस लिए मुझे सब की यद् आ रही थी शाम को मुझे दीपिका और कामिनी ममी का फ़ोन आया था वो भी मुझे बहुत यद् कर रही थी . इसके इलावा बाबा अजय मां रजनी मौसी नीता मौसी करुणा दीदी नैना दीदी से भी फ़ोन पर बात हुई . सब से बात हुई मगर माँ से बात माहि हुई और आते वक़्त भी वो पता नहीं कहाँ गायब हो गयी थी शायद वो मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगी.

नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी और मेरा दिल अतीत की यादों में खोया हुआ था. कैसे मंजरी मेरी ज़िन्दगी में आयी कैसे दीपिका ममी ने मुझे प्यार करना सिखाया और फिर कामिनी ममी की नफरत प्यार में बदली . सब कितना ाचा चल रहा था और फिर मेरी एक गलती ने सब कुछ मुझसे छीन लिया. मुझे जान से ज़्यादा प्यार करने वाली माँ आज मेरी शकल देखना पसंद नहीं करती और मेरे उसी पाप ने मेरी मंजरी को मुझ से छीन लिया . मंजरी अपने साथ मेरी हर ख़ुशी और मेरी हंसी भी ले गयी थी . मैं सबको दिखने क लिए हस्ता तो था मगर ख़ुशी कहीं खो गयी थी. दीपिका और कामिनी ममी क साथ प्यार कर क मैं उनके प्यार का क़र्ज़ चूका रहा था. पता नहीं आगे ज़िन्दगी किस और मुझे ले जाएगी
 
अपडेट 59

नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी और मेरा दिल अतीत की यादों में खोया हुआ था. कैसे मंजरी मेरी ज़िन्दगी में आयी कैसे दीपिका ममी ने मुझे प्यार करना सिखाया और फिर कामिनी ममी की नफरत प्यार में बदली . सब कितना ाचा चल रहा था और फिर मेरी एक गलती ने सब कुछ मुझसे छीन लिया. मुझे जान से ज़्यादा प्यार करने वाली माँ आज मेरी शकल देखना पसंद नहीं करती और मेरे उसी पाप ने मेरी मंजरी को मुझ से छीन लिया . मंजरी अपने साथ मेरी हर ख़ुशी और मेरी हंसी भी ले गयी थी . मैं सबको दिखने क लिए हस्ता तो था मगर ख़ुशी कहीं खो गयी थी. दीपिका और कामिनी ममी क साथ प्यार कर क मैं उनके प्यार का क़र्ज़ चूका रहा था. पता नहीं आगे ज़िन्दगी किस और मुझे ले जाएगी

अब आगे -

अगली सुबह मैं जल्दी उठा और कसरत करने क लिए कॉलेज की ग्राउंड में पहुँच गया. मैंने जा कर अपने हिसाब से एक्ससरसीसे शुरू कर दी थोड़ी देर में hi कई लड़के लड़कियां आ गए जो अलग अलग स्पोर्ट्स में थे . हमारे भी कोच साहब आ गए उन्होंने मुझे बाकि खिलाडियों से मिलवाया और कुछ एक्सरसाइज बता कर कर दूसरी गेम्स क जो कोचेस थे उनके पास चले गए . मैंने एक घंटा एक्सरसाइज की और शाम का सचेडूले पता कर क अपने कमरे में आ गया तब तक हरीश और जतिन भी उठ गए थे . तैयार हो कर नाश्ता करने क बाद हम कॉलेज आ गए.

आज चन्दर्कांता मैडम लेक्चर लेने नहीं आयी तो मोहित मुझे क्लास से बहार ले गया . हम दोनों क्लास क बहार घूम रहे थे क मंजू मैडम हमारे पास आ गए

मंजू मैडम : क्या बात है अमित तुम क्लास में क्यों नहीं हो?

अमित : मैडम वो लेक्चर फ्री था तो सोचा ज़रा टाइम पास करलूं

मंजू म: अमित तुम एक अचे लड़के हो और अचे परिवार से हो तुम्हे पड़े पर ध्यान देना चाहिए अगर कोई लेक्चर नहीं लग रहा हो तो किताबे पदों लाइब्रेरी जाओ ऐसे इधर उधर टाइम पास कर क क्या मिलेगा . तुम्हे इस बात को समझना चाहिए . ये स्कूल तो है नहीं क तुम्हे कोई पड़ने को बोलेगा अगर तुमने खुद अपना ध्यान नहीं रखा तो रिजल्ट पर असर पड़ेगा

बात तो मैडम की सही थी स्कूल और कॉलेज में यही फरक होता है क कॉलेज में कोई आपको डंडा दिखा कर पड़ने को नहीं कहता इसी लिए ज्यादातर स्टूडेंट्स इस आज़ादी की मस्ती में पड़े से दूर हो जाते हैं

अमित : मैं आगे से ऐसा hi करूँगा मैडम

मंजू म : वैसे तुम कॉलेज से घर डेली आते जाते हो या यहीं पर कहीं रह रहे हो?

अमित : जी मम वो कल hi मैं यहाँ हॉस्टल में शिफ्ट हुआ हूँ प्रोफ वरिंदर जी ने कहा था क गाओं से उप डाउन में मैं गेम की प्रैक्टिस नहीं कर पाउँगा इसी लिए उन्होंने यहीं मेरा इंतज़ाम करवा दिया.

मंजू म : अछि बात है वैसे कौन स गेम खेल रहे हो तुम

अमित : जी रेसलिंग

मंजू म: अछि बात है मगर पड़े पर भी पूरा ध्यान देना और हाँ एक और बात , अब तुम यहाँ रह hi रहे हो तो तुम्हे मुश्किल नहीं होगी मेरे घर आने में . तुम्हारा अभी तक मैंने शुक्रिया ऐडा नहीं किया इस लिए अब बताओ तुम कब आ रहे हो मेरे घर

अमित : मम इसकी कोई ज़रूरत नहीं है आप तो मेरी टीचर हैं आप मुझे पड़ा रही हैं हिसाब बराबर

मंजू म : बहाने मत बनाओ मुझे ाचा नहीं लगेगा . तुम संडे को मेरे घर आ जाना उस दिन मैं भी फ्री होती हूँ वर्ण कुछ बच्चों को ट्यूशन देनी होती है शाम को

अमित : मम मैं तो संडे को गाओं में रहूँगा ऐसे में कैसे मैं आ पाउँगा

मंजू म : हम्म्म ऐसा करते हैं सैटरडे को गाओं जाने से पहले तुम मेरे घर से होते जाना. मैं स्टूडेंट्स को जल्दी फ्री कर दूंगी काम से काम एक कप चाय तो पि लोगे न?

अमित : आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं . आप जैसा कहेंगी वैसा करूँगा मगर मुझे आपका घर नहीं पता वो मैं तुम्हे समझा दूंगी अब तुम क्लास में जाओ थोड़ी देर में मैं भी आ रही हूँ

इतना कह कर मंजू मम चली गयी और मैं उन्हें जाते हुए देखता रहा. कितनी अछि है मैडम कितनी अछि नेचर कितनी शालीनता इतनी मधुर आवाज़ और एक अपने पैन का एहसास मैं जब भी उनसे बात करता हूँ दिल में ऐसे hi फील होता है क जैसे मैं माँ से बात कर रहा हूँ. मैं अपने ख्यालों में खोया था क मोहित ने मुझे पकड़ लिया और मेरे पेट में मुक्के मरने लगा

मोहित : कमीने कल से हॉस्टल में पड़ा है और मुझे बताया भी नहीं. मेरे होते हुए तू हॉस्टल में रह रहा है लाहनत है मेरे ऊपर. तूने मुझे बताया क्यों नहीं तुझे रहने की दिक्कत थी तो मेरे घर चलता . इतना बड़ा घर है मेरा और सुना सुना रहता है . तू आज hi अपना सामान उठा और मेरे साथ चल वर्ण आज क बाद तेरी मेरी दोस्ती ख़तम.

अमित : ऐसा क्यों बोलता है ? देख इस शहर में मेरी तीन मौसियां रहती हैं मैं उनके पास भी नहीं गया क्यूंकि मुझे यहाँ रह कर अपनी प्रैक्टिस करनी है और अगर मैं घर में रहा तो मैं प्रैक्टिस नहीं कर पाउँगा. तू मेरी बात को समझ

मोहित : मुझे कोई बहाना नहीं सुन्ना है. एक बार बोल दिया न तो चुप चाप मन जा वर्ण मैं समझूंगा तेरी नज़र में मेरी दोस्ती की कोई कीमत नहीं है .और रही बात तेरी प्रैक्टिस की शहर में रहते यहाँ पहुँचने में कितनी देर लगती है.

ये तो अजीब पन्गा पद गया अब अगर मन किया तो दोस्त खो दूंगा और अगर इसके साथ गया और मौसी को पता चल गया तो सहमत आ जाएगी. क्या करूँ समझ नहीं आ रहा

अमित : ठीक है मैं तेरे साथ चलूँगा मगर 2 बातें तुझे भी माननी होंगी. एक तो मैं तुम्हारे साथ रह रहा हूँ गलती से भी किसी को मत बताना क्यूंकि अगर मेरे घर वालो को पता चला तो सब नाराज़ हो जायेंगे

दूसरा ये क मैं हमेशा क लिए नहीं रहूँगा तुम्हारे साथ बीच में हॉस्टल भी रहना होगा वर्ण घर पता चल जायेगा

मोहित : तू इतना डरता क्यों है घर वालों से क्या कहेंगे वो

अमित : डरता नहीं हूँ भाई बस मैं किसी का दिल नहीं दुखाना चाहता और जब मौसी लोगों को पता चला क मैं उनका घर छोड़ कर किसी और क घर रह रहा हूँ तो मुझसे बहुत नाराज़ होंगी

मोहित : ठीक हैं मुझे मंज़ूर है तो आज hi तू अपना सामान लेकर मेरे घर चल रहा है

अमित : पहले अपने घर पूछ तो ले ? ऐसे सीधा घर गए तो कहीं मुझे घर से न निकल दें और मेरे साथ तुझे भी दन्त पड़ेगी

मोहित : है है है है तू भी भोलू राम है . मेरे घर वाले अगर मुझे किसी बात से मन करते तो क्या मैं सीधा ऐसे बोल देता क्या . अरे वो तो खुश होंगे तुम्हे मेरे साथ देख कर पता है मैंने तेरे बारे में सब बताया हुआ है और मम्मी डैडी तो तुमसे मिलना भी चाहते हैं. हमारा घर बहुत बड़ा है घर में मम्मी और नौकरों क इलावा और कोई नहीं होता . बड़ी दीदी हैं वो अपने ससुराल रहती हैं. मैंने ज़िन्दगी में दोस्त तो बहुत बनाये मगर ज़्यादातर मतलबी hi मिले जो मेरे पैसों से ऐश करने वाले hi थे. ज़िन्दगी में पहली बार एक ाचा दोस्त मिला है और मैं हमेशा तुम्हे अपने साथ रखना चाहूंगा

मोहित की इस बात ने मेरे मन को छू लिया आखिर मैंने भी तो दोस्त नहीं बनाये थे क्यूंकि मुझे कोई पहले पसंद hi नहीं करता था सब मनहूस hi समझते थे राजू क इलावा मोहित दूसरा दोस्त बना था मेरा . हालाँकि डरा भैया से भी दोस्ती थी मगर वो मुझसे बड़े थे और उनके साथ एक अलग रिश्ता था. मैंने मोहित को गले लगा लिया

अमित : मुझे बहुत ख़ुशी है मेरे दोस्त क तुम जैसा सेक्स दोस्त मुझे मिला मैं हमेशा तुम्हारा साथ दूंगा.

मोहित : चल अब ज्यादा सेंटी मत कर क्लास में चलते हैं

उसके बाद हमने अपने लेक्चर अटेंड किये आज हम कैंटीन नहीं गए . लेक्टर्स ख़तम होने क बाद जब हम बहार निकले तो शिवानी बहार हमारा इंतज़ार कर रही थी और मुझे इशारे से पास बुलाने lagi.main उसकी तरफ देखना नहीं चाहता था मगर मोहित ने उसे देख लिया और वो मुझसे उसके पास ले आया

शिवानी : आज मुझसे मिलने क्यों नहीं आये मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी

अमित : आज हमारा कोई लेक्चर फ्री नहीं था और तुम मेरा इंतज़ार मत किया करो

शिवानी : इसका मतलब तुम मुझे दोस्त नहीं मानते और कल मुझसे झूठा दोस्ती का वडा किया था

मोहित : ऐसे कैसे झूठा वडा किया था असल में इसका कहने का मतलब है क जब हम फ्री होंगे हम खुद आपके पास आएंगे न मिलने आप इंतज़ार क्यों करती हैं

शिवानी : तुम कितनी अछि बातें करते हो थोड़ा अपने दोस्त को भी सिखाओ ये तो मुझसे बात भी नहीं करता

तभी मेरी नज़र शालू पर पड़ी वो अपने में मस्त शायद बहार को जा रही थी मैंने उसे आवाज़ दी तो वो सुन कर रुक गयी. मैं शिवानी को वहीँ छोड़ कर शालू क पास चला गया ताकि शिवानी से पीछा छूटे

अमित : क्या बात है नाराज़ हो क्या कल भी नहीं मिली और आज भी ऐसे hi जा रही हो

शालू : मैं तो घर जा रही हूँ आज ज़रा बिजी थी तो नहीं मिल पायी और कल मैं तुमसे मिलने आयी थी कैंटीन में मगर तुम तो पहले hi किसी से मिल रहे थे . सबके सामने वो भी खुल्लम खुल्ला

अमित : क्या यार तुम भी . मैंने कहा न मुझे इन सब बातों में इंटरेस्ट नहीं है वो ज़बरदस्ती गले पद रही है देखो अभी भी पीछा छुड़ा क आया हूँ .

शालू : अजीब लड़के हो तुम भी . इतनी सेक्सी लड़की तुम्हे लिफ्ट दे रही है और तुम उससे भाग रहे हो. मेरी मनो तो मोके का फायदा उठा लो वैसे भी अमीर बाप की बेटी है पूरी ऐश करवाएगी.

अमित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो शालू मैं क्या तुम्हे ऐसा लगता हूँ. मैं थूकता भी नहीं ऐसे पैसे वालों पर और न hi ऐसी लड़कियां मुझे पसंद हैं

शालू : तो कैसी लड़कियां तुम्हे पसंद हैं ? और अगर कल को मैं भी ऐसी निकली तो क्या मुझसे भी दोस्ती तोड़ लोगे?

अमित : तुम ऐसी नहीं हो सकती मेरा दिल कहता है इसी लिए तो तुमसे दोस्ती की है. और हाँ मुझे प्यार वयर में कोई इंटरेस्ट नहीं मैं कभी कोई गफ नहीं बनाऊंगा

शालू : फिर टी लगता है मेरा कभी no. नहीं आएगा

इतना कह कर शालू हसने लगी

अमित : क्या यार तुम भी. वैसे तुम अगर कहो तो तुम्हे अपनी गफ बना लूंगा

शालू : चल चल रहने दे मुझे भी इंटरेस्ट नहीं है इन सब बातों में अब मुझे देर हो रही है मैं चलती हूँ और तू जा अपनी तितली के पास bye bye

शालू हस्ती हुई चली गयी और शिवानी मेरे पास आ गयी

शिवानी : उसके साथ तो बड़ी है है क बातें कर रहे थे . मैं क्या इतनी बुरी हूँ ?

अमित : ऐसी बात नहीं है वो भी मेरी अछि दोस्त है.

शिवानी : वो तो होगी hi . कॉलेज क बहुत से लड़कों की अछि दोस्त है वो

अमित : तुम्हारे कहने का क्या मतलब है

शिवानी : तुम्हे खुद hi पता चल जायेगा. वैसे अब अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो हम कहीं बहार चलें कहीं घूम कर आते हैं मैं तुम्हे अपना शहर दिखती हूँ

अमित : नहीं मुझे मोहित क साथ कहीं जाना है और हम अभी निकल रहे हैं bye

मैं मोहित को साथ ले कर निकल गया मगर शिवानी की शालू क बारे में कही हुई बात मुझे ज़रा भी अछि नहीं लगी. शायद वो शालू को मेरे साथ देख कर जल गयी होगी तभी तो ऐसा कहा उसने . मैं मोहित क साथ साइंस ब्लॉक में गया जहाँ मोहित अपनी गफ से मिला और मैं राधा और नेहा दीदी से

राधा और नेहा दीदी एक साथ वापिस जाती थी और मीनल मोहित क साथ कार में. मोहित ने मुझे अपना सामान पैक करने को बोलै और मीनल को उसके घर छोड़ने चला गया. मैंने रूम से अपना सामान पैक किया हरीश और जतिन ने मुझसे पूछ क क्या बात है मैंने बता दिया क मैं अपने दोस्त क घर रहने जा रहा हूँ कुछ दिन.

मोहित मीनल को छोड़ कर मुझे लेने आ गया . सामान को उसने कार में रखा और मैं बुलेट पर उसके पीछे पीछे उसके घर की तरफ निकल पड़ा. 15 मिनट में hi हम मोहित क घर क बहार थे

मोहित का घर , घर नहीं बांग्ला था गेट पर सिक्योरिटी गार्ड खड़ा था मोहित की गाड़ी देख कर उसने गेट खोला . मोहित ने उसे मेरे बारे में बता दिया और मैं भी बुलेट ले कर अंदर घुस गया . गेट से अंदर घुसते hi एक तरफ बड़ा सा लॉन था जिसमे सुन्दर सुन्दर फूल लगे हुए थे. एक कार्नर में कार्स कड़ी करने की जगह बानी हुई थी जहाँ एक लम्बी स कार कड़ी थी. मोहित का बंगला डबल स्टोरी था और बेहद उम्दा किस्म का डिज़ाइन किया हुआ था. मोहित की कार क पास hi मैंने बुलेट कड़ी कर दी और गाड़ी से बैग निकला . मैं मोहित क साथ घर क अंदर गया था अंदर की खूबसूरती देख जार दिल खुश हो गया ऐसे बंगले तो फिल्मो में भी देखने को नहीं मिलते. मैं अंदर की एक एक चीज़ को गौर से देख रहा था तभी नौकरानी हमारे लिए पानी ले आयी .

मोहित ने मुझे सोफे पर बिठाया और अंदर चला गया अपनी माँ को बुलंने . मैं घर की खूबसूरत देखने में hi खोया था का मोहित और उसकी मम्मी कब मेरे पास आकर खड़े हो गए मुझे पता hi नहीं चला.

मोहित : अमित ये है मेरी माँ दुनिया क बेस्ट माँ

मैं मोहित की आवाज़ सुनकर अपने ख्यालों से बहार आया और पलट कर मोहित की माँ की तरफ देखा. मैं तो मोहित की मम्मी को देखता hi रह गया. वो तो किसी भी एंजेल से मोहित की माँ नहीं लग रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वो मोहित की माँ नहीं बड़ी बहिन हो. एक डैम गोरा दूध सा सफ़ेद रंग बड़ी बड़ी आँखें तीखे नैन नक्श . मैं उनकी खूबसूरती में hi खोया हुआ था क मोहित की माँ की मधुर आवाज़ से मैं हकीकत में लौटा

मोहित की माँ: कैसे हो बीटा ? मोहित ने जब से तुम्हारे बारे में बताया है मैं तुम से मिलना चाहती थी . आज कल ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं जो किसी की इज़्ज़त बचने क लिए अकेले हो सब से भीड़ जाये.

मोहित : ये hi नहीं माँ वो हमारे इंग्लिश वाले मम भी इसकी तारीफ कर रहे थे इसने उनकी भी मदद की थी गुंडों से बचा कर

मोहित माँ: वाकई में तुम तो बहुत अचे और हिम्मत वाले हो

अमित : और ताकत वाला भी . अमित रेसलिंग खेलता है

मोहित माँ : वह इतनी साडी खूबियां . ये तुमने ज़िन्दगी में पहली बार अचे इंसान को दोस्त बनाया है

अमित : इतनी भी तारीफ मत कीजिये आंटी . सॉरी मैं आपको आंटी कहूं या कुछ और क्यूंकि आप आंटी लगती नहीं हैं

मोहित माँ : तो क्या लगती हूँ

अमित : जी अगर मोहित न बताता तो मैं आपको मोहित की दीदी hi समझ रहा था आपने खुद को इतना अचे से मेन्टेन किया है क आपकी उम्र का कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता.

मोहित की माँ मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर बहुत खुश हुई

मोहित माँ : अब घर में अकेले बोर होने से ाचा है क कुछ योग वगेरा कर लिया जाये . घर का सारा काम नौकर करते हैं मोहित कॉलेज चला जाता है और इसके पापा को अपने बिज़नेस से hi फुर्सत नहीं . मैं अकेली क्या करूँ घर पर बस इसी लिए योग करती हूँ और उसकी वजह से फिट रहती हूँ

अमित : जो भी हो आपको ऊपर वाले ने बहुत खूबसूरत बनाया है और ऊपर से आप ने आपने खुद को जो इतना मेन्टेन किया है ये तो सोने पे सुहागा है

मोहित माँ : बस बस कितनी तारीफ करोगे तुम लोगों को भूख लगी होगी मैं अभी खाना लगवाती हूँ

आंटी ने नौकरानी को बोल कर हमारे लिए खाना लगवा दिया . खाना कहते वक़्त मोहित ने अपनी माँ को मेरे घर पर रहने की बारे में बता दिया . वो भी इस बात से खुश हो गयी. मोहित ने बताया क उसके पापा का एक्सपोर्ट का बिज़नेस है और उनकी अपनी 3 फैक्ट्रीज हैं . मोहित क पापा सारा दिन काम में hi बिजी रहते हैं और कई कई दिन फॉरेन टूर पर भी रहते हैं. अकेले होने की वजह से उनको काम से फुर्सत नहीं मिलती . मोहित क और कोई रिश्तेदार नहीं है . एक बड़ी सिस्टर है जिसकी 3 साल पहले शादी हो चुकी है और वी दूसरे शहर में रहती है. उसके हस्बैंड का भी ाचा खासा बिज़नेस है. मोहित ने ऊपर अपने कमरे क साथ वाला कमरा मेरे लिए रेडी करवा दिया और मैंने अपना सामान वहां पर सेट कर दिया . उसके बाद मोहित उसकी माँ अपने अपने कमरे में आराम करने चले गए और मैं भी कुछ देर आराम करने का सोच कर कटे गया . मुझे पता नहीं चला मेरी कब आँख लग गयी.

मोहित क जगाने से मेरी आँख खुली

मोहित : ोये उठ तुझे प्रैक्टिस पर नहीं जाना था क्या ? टाइम देख क्या हो रहा है

मैंने जल्दी से उठ कर टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे . टाइम देख कर मैं जल्दी से उठा बाथरूम कमरे क साथ आत्ताच था मैं फ्रेश हुआ और ट्रैक कपडे बदल कर तैयार हो गया .

मोहित : अबे चाय तो पीले ठंडी हो रही है

अमित : थैंक्स यार तूने जगा दिया वर्ण लेट हो जाता पहले दिन hi

मोहित : तू टेंशन क्यों लेता है इतनी . वैसे अभी तो कुछ खास होगा भी नहीं कॉलेज अभी तो शुरू हुए हैं. तू जायेगा कैसे तुझे कार में छोड़ दूँ ?

अमित : उसकी टेंशन मत ले बाइक है न मेरे पास

मोहित से बातें करते मरते मैंने चाय पि और बाइक ले कर कॉलेज आ गया . सब लड़के कॉलेज क इंडोर स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहे थे नीचे मैट लगाए हुए थे और कोच साहब सीनियर्स को मूव्स सीखा रहे थे और उन्होंने नए खिलाडियों को रूल्स बताने क लिए एक लड़के की ड्यूटी लगा दी जो मुझे और मेरे साथ जो नए 2/3 लड़के थे उनको भी समझने लगा.

2 घंटे तक हमारी से प्रैक्टिस चली और 7 बजे मैं मोहित क घर की तरफ निकल पड़ा. मैं जब घर आया तो मोहित की कार कहीं नज़र नहीं आयी शायद कहीं बहार गया होगा. मैं चुप चाप घर क अंदर दाखिल हुआ और सीढ़ियां चढ़ कर अपने कमरे में जा रहा था क मुझे किसी औरत की सिसकियाँ सुनाई दी. मैं हैरान हो गया क घर क अंदर से इस वक़्त किसकी सिसकियाँ आ रही हैं . कहीं मोहित क पापा तो नहीं आ गए . वही हो सकते हैं और कौन होगा ? दोनों मियां बीवी प्यार कर रहे होंगे . मगर इस वक़्त ? खैर उनका घर है उनकी ज़िन्दगी है जो मर्ज़ी करें मुझे क्या . वैसे भी जिसकी इतनी खूबसूरत बीवी हो वो तो हर वक़्त लगा hi रहेगा . मन में ये सब सोचते हुए मैं अपने कमरे में चला गया और जा कर पहले नहाया क्यूंकि पसीने की बदबू मेरे कपड़ो से आने लगी थी . फ्रेश हो कर मैं आराम से बीएड पर लेट गया
 
अपडेट 60

2 घंटे तक हमारी से प्रैक्टिस चली और 7 बजे मैं मोहित क घर की तरफ निकल पड़ा. मैं जब घर आया तो मोहित की कार कहीं नज़र नहीं आयी शायद कहीं बहार गया होगा. मैं चुप चाप घर क अंदर दाखिल हुआ और सीढ़ियां चढ़ कर अपने कमरे में जा रहा था क मुझे किसी औरत की सिसकियाँ सुनाई दी. मैं हैरान हो गया क घर क अंदर से इस वक़्त किसकी सिसकियाँ आ रही हैं . कहीं मोहित क पापा तो नहीं आ गए . वही हो सकते हैं और कौन होगा ? दोनों मियां बीवी प्यार कर रहे होंगे . मगर इस वक़्त ? खैर उनका घर है उनकी ज़िन्दगी है जो मर्ज़ी करें मुझे क्या . वैसे भी जिसकी इतनी खूबसूरत बीवी हो वो तो हर वक़्त लगा hi रहेगा . मन में ये सब सोचते हुए मैं अपने कमरे में चला गया और जा कर पहले नहाया क्यूंकि पसीने की बदबू मेरे कपड़ो से आने लगी थी . फ्रेश हो कर मैं आराम से बीएड पर लेट गया

अब आगे -

मैं बीएड पर लेता हुआ था करीब मोहित ने रूम का दरवाज़ा खोला

मोहित : ये क्या तू आराम से लेता हुआ है. तू वापिस आ गया और किसी को बताया भी नहीं . वो तो मैंने तेरी बाइक देखली तो पता चला. चल अजा कहीं बहार घूम कर एते बैन

अमित : पहले ये बता तू कहाँ था मैं आया तो तू घर नहीं था . हॉल में कोई नज़र नहीं आया इस लिए यहाँ आकर लेट गया

मोहित : बस यार वो पापा ने बुलाया था ऑफिस कोई फाइल चाहिए थी अभी वहां से hi आ रहा हूँ

अमित : क्याआ ? अंकल ऑफिस में हैं ?

मोहित : पापा तो ऑफिस में hi हैं क्यों तू क्यों इतना हैरान हो रहा है

अमित (मन में) : तो फिर कौन था आंटी क पास ? कहीं कोई नौकरानी तो नहीं थी ? मगर नौकरानी की इतनी हिम्मत नहीं क घर क अंदर ऐसा कुछ करे तो फिर ?

मोहित : कहाँ खो गया ? चल अजा बहार घूम कर एते हैं

मैं अमित क साथ नीचे आया तो आंटी हॉल में hi थी और ऐसा लग रहा था क जैसे ताज़ी नहीं हैं . हमें देखते hi आंटी ने डाइनिंग टेबल पर बैठने को कहा और नौकरानी को आवाज़ दी

आंटी : रणीय ! जल्दी से अमित क लिए दूध और मोहित क लिए जूस लेकर आओ

अमित : अरे आंटी इसकी कोई ज़रूरत नहीं है

आंटी : ज़रूरत कैसे नहीं है . तुम इतनी मेहनत कर रहे हो तो दूध तो चाहिए hi न. दूध नहीं पियोगे तो ताकत कैसे मिलेगी और फिर तुम्हारी माँ क्या कहेगी क मैंने ख्याल नहीं रखा उनके बेटे का.

अमित : आंटी आप बिलकुल मेरी माँ की तरह हैं वो भी ऐसे hi ज़बरदस्ती मुझे दूध पीला देती थी घर पर

आंटी : मुझे भी अपनी माँ hi समझो जैसा मेरे लिए मोहित है वैसे hi तुम हो

अमित (मन में) : आंटी कितनी अछि हैं ये गलत नहीं हो सकती . हो सकता है वो आवाज़ किसी और की hi हो

अमित : बिलकुल आंटी आप मेरे लिए माँ जैसी hi हैं.

इतने में रानी मेरे लिए दूध का गिलास और मोहित क लिए जूस ले आयी साथ में कुछ ड्राई फ्रूट भी. ह्यूमेन कुछ देर बातें की और उसके बाद मोहित मुझे अपनी कार में बिठा कर साथ ले गया मॉल में

अमित : अब यहाँ क्या करना ए हैं हम?

मोहित : तुझे शहर का लड़का बनाने

अमित : मैं समझा नहीं

मोहित : तुझे पता है कॉलेज में तुम्हे देहाती क्यों कहा गया ? तेरे कपड़ों और लुक की वजह से . अगर तू यहाँ क हिसाब से रहेगा तो कोई भी तुझे दोबारा देहाती नहीं कहेगा

अमित : कोई कुछ भी कहे मुझे फरक नहीं पड़ता . दूसरों पर वही कीचड़ उछलते हैं जो खुद कीचड़ में रहते हैं

मोहित : वो सब ठीक है मगर मेरे दोस्त की कोई इंसल्ट करे मुझे ाचा नहीं लगता. इस लिए चुप चाप मेरे साथ चल और कुछ ढंग क कपडे खरीद

मैंने मोहित को ज्यादा इंकार नहीं किया आखिर वो मेरे भले क लिए hi तो कह रहा था. मॉल में बड़ी बड़ी शॉप्स थी बड़े बड़े ब्रांड की चीज़ें थी . मैंने आज तक ऐसा कभी देखा नहीं था. मोहित ने मुझे अचे ब्रांड की जीन्स और T-shirt’s लेकर दी मैंने कभी ऐसे कपडे पहने नहीं थे. मुझे बहुत अजीब लग रहा था कपड़ों की फिटिंग्स बहुत टाइट थी जिसकी वजह से मेरे मसल्स की शेप साफ़ नज़र आ रही थी और जीन्स पहन कर तो ऐसे लग रहा था जैसे मेरी टैंगो और हिप्स को जकड दिया गया हो. मैंने मोहित को पेमेंट नहीं करने दी हालाँकि उसने बहुत ज़ोर लगाया मगर मैंने भी कह दिया क अगर पैसे उसने दिए तो मैं ये कपडे नहीं पहनूंगा. कपड़ो क साथ मोहित ने मुझे ट्रैक सूट भी दिलाये जिसे पहन कर मैं एक्ससरसीसे क लिए जाया करूँ

शॉपिंग में हमें 9 से ऊपर टाइम हो गया और आंटी का फ़ोन भी आ गया खाने पर जल्दी वापिस आने क लिए. हम घर आ गए अंकल अभी तक नहीं आये थे. ह्यूमेन मिल कर डिनर किया . आंटी ने हमारी शॉपिंग क बारे में पुछा और वो कपडे देख कर खुश हुई. जब मोहित ने बताया की मैंने उसे पैसे नहीं देने दिए तो आंटी इसके लिए मुझसे नाराज़ भी हुई और ये भी कहा क वो खुद मेरे लिए शॉपिंग करेंगी. यूँ hi हम काफी देर तक बातें करते रहे और फिर अपने अपने कमरों में जा कर सो गए.

अगली सुबह मैं जल्दी उठा और बाइक ले कर चला गया कॉलेज ग्राउंड में एक्ससरसीसे करने. जब मैं वापिस आया तो मोहित अभी सो रहा था . मैं उसे देख कर अपने कमरे में जाने वाला था क मुझे ऐसे लगा कोई छत पर है मैं देखने क लिए उस तरफ गया. सामने देखा तो आंटी ज़मीन पर एक शीट बिछा कर योग कर रही थी उन्होंने काळा रंग क टाइट फिटिंग क कपडे पहने हुए थे जिसमे से उनके शरीर का एक एक अंग साफ़ साफ़ अपनी बनावट दिखा रहा था.

आंटी आँखें बंद कर क बैठी थी और काले रंग में से उनके गोर बदन ऐसे लग रहा था जैसे काले बादलों में से चाँद निकल आया हो. मैं उनकी खूब सूरति में खोने लगा तभी उन्होंने आँखें खोली और मुझे सामने प् कर बोली

आंटी : अरे तुम आ गए अमित ? तुम तो जल्दी उठ जाते हो मैंने देखा था तुम्हे बहार जाते हुए. आओ मुझे भी कुछ बताओ क तुम कौन सी एक्ससरसीसे करते हो?

आंटी की बातों से मैं जैसे नींद से जगा और और मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ . मैं उनके पास चला गया

अमित : आंटी जी मैं आपको क्या बताऊंगा आपकी फिटनेस तो पहले hi इतनी अछि है. आप तो कॉलेज की लड़कियों को भी मात देदें


आंटी अपनी तरीस से खुश हो गयी

आंटी : मैं इतनी भी कहाँ फिट हूँ तुम ऐसे hi मेरी तारीफ कर रहे हो

अमित : सच आंटी अगर आप मेरे सारः कॉलेज जाएँ तो लोग आपको मेरी फ्रेंड hi समझेंगे

आंटी : फ्रेंड या गर्ल फ्रेंड

मैं आंटी की बात से शर्मा गया ये मैंने कैसी बात करदी आंटी से और अपनी hi बात में फस्स गया . कहीं आंटी बुरा hi न मन जाएँ

आंटी : ाचा तुम बैठो में तुम्हारे लिए जॉइस लती हूँ

आंटी नीचे चली गयी और मैं अपने रूम में . मेरे कपड़ो से पसीने की दुर्गंद आ रही थी मैंने जल्दी नहाने का सोचा और अपनी T-shirt अभी उतरी hi थी क आंटी रूम में जूस का गिलास ले आयी. मेरा ऊपर का धड़ नंगा था आंटी गौर से मेरी कसरती बॉडी को देखने लगी. मैं आंटी को देखा तो हाथों में पकड़ी T-shirt फिर से पेहेन ली

अमित : सॉरी आंटी वो पसीने की बदबू आ रही थी मैंने सोचा नाहा लेता हूँ

आंटी : अरे कोई बात नहीं बीटा तुमने ये पसीने वाली T-shirt क्यों पेहेन ली . तुम भी तो मोहित जैसे हो तुम्हे मुझ से शर्माने की ज़रूरत नहीं. लो ये जूस पियो

मैंने जल्दी से जूस का गिलास पिया और नहाने क लिए बाथरूम में घुस गया. नाहा कर मैं तैयार हो गया और जीन्स T-shirt पेहेन कर नीचे आ गया . मोहित भी कुछ देर में तैयार हो कर आ गया . आंटी रसोई में नाश्ता रेडी करवा रही थी .

मोहित के आवाज़ देने पर आंटी रानी क साथ खाना ले कर आ गयी . मुझे नए कपड़ो में देख कर आंटी मेरी तारीफ करने लगी

आंटी : वह आज तो इन कपड़ो में तुम बिलकुल हीरो लग रहे हो.

मोहित : बिलकुल माँ आज देखो इस पहलवान की तगड़ी बॉडी पता चल रही है . पहले तो ढीले कपड़ों में पता hi नहीं चलता था. अब देखता हूँ कैसे कोई इस देहाती कहता है

आंटी : देहाती ?

मोहित : हाँ माँ इसके सिंपल कपड़ो की वजह से hi इसे वहां कुछ लोग देहाती कह रहे थे अब तो अमित को इन कपड़ो में देख कर उनकी बोलती बंद हो जाएगी.

अमित : अरे छोड़ यार तू किन बातों क लेकर बैठ गया मुझे फरक नहीं पड़ता किसी क कुछ कहने से. और आंटी थैंक्स तारीफ करने क लिए

आंटी : यू वेलकम बीटा अब जल्दी से नाश्ता कर लो

हम दोनों ने जल्दी से नाश्ता किया . मोहित क पापा शायद देर आये होंगे इसी लिए वो नज़र नहीं आ रहे थे. नाश्ता कर क मैं मोहित क साथ hi उसकी कार में कॉलेज चला गया. रस्ते में पहले मोहित ने मीनल को उसके घर से पिक किया. मुझे नए लुक में देख कर मीनल भी हैरान हुई और उसने भी मेरी तारीफ की. हम तीनो कॉलेज पहुँच गए . क्लास में हर कोई मुझे मुद मुद कर देख रहा था . नए लुक में मेरी पर्सनालिटी चेंज हो गयी थी और कई लड़कियां तो मुझे लाइन दे रही थी.

चंद्रकांता मैडम ने भी बड़ी गौर से मुझे देखा और हैरान हुई मगर उन्होंने कुछ कहा नहीं. मंजू मम ने मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा जैसे चुप चाप मेरी तारीफ कर रही हो और मैंने भी मुस्कुरा कर उनको थैंक्स कहा.

फ्री लेक्चर में जब हम कैंटीन में बैठे थे तो शिवानी भी वहां आ गयी. मेरी नई लुक देख कर उसकी भी आँखें बहार आ गयी और वो मेरे गले से लिपटने लगी और मैं उससे खुद को बचने लगा

शिवानी : वह आज तो पूरे हीरो लग रहे हो बिलकुल मेरे सपनो क राज कुमार . आज तो जी चाहता है तुम्हे लेकर कहीं दूर चली जॉन और जी भर कर प्यार करूँ.

अमित : शिवानी मैंने पहले भी कहा है क मुझे ये सब पसंद नहीं

शिवानी : जब तुम ऐसे मेरे दिल पर बिजलियाँ गिराओगे तो मैं कैसे खुद को सम्भालूंगी. चलो न आज कहीं बहार घूम कर एते हैं .

अमित : मुझे लेक्चर अटेंड करने हैं मेरे पास टाइम नहीं है

शिवानी : तुमने मुझे दोस्त कहा है न ? मगर तुम दोस्ती निभाते नहीं हो क्या यही है तुम्हारी दोस्ती?

अमित : देखो मैं यहाँ पड़ने आया हूँ मेरे लिए पड़े पहले ज़रूरी है . जब कभी फ्री टाइम होगा तब देखेंगे

शिवानी : ठीक है मगर अगली बार कोई बहाना नहीं चलेगा

मैंने शिवानी से पीछा छुड़ाने क लिए मोहित को इशारा किया और हम बहाना बना कर कैंटीन से बहार आ गए . रस्ते में हमे शालू मिल गयी वो भी मुझे नई लुक में देख कर बहुत खुश हुई मेरी तारीफ करने लगी . मैं उससे और बातें करना चाहता था मगर वो ये कह कर चली गयी क उसे ज़रूरी काम से जाना है .

लेक्टर्स ख़तम होते hi हम साइंस ब्लॉक में चले गए . नेहा दीदी भी मुझे इस नई लुक में देख कर बहुत खुश हुई. राधा की भी आँखें बड़ी हो गयीं

नेहा दीदी : अमित आज तो तुम सचमुच क हीरो लग रहे हो.

नेहा दीदी की बात से मैं शर्मा गया और राधा भी होश में आयी जो अब तक मुझे नए लुक में देख कर हैरान थी. राधा की आँखों से पता चल रहा था क उसे भी मेरी नई लुक पसंद आयी है मगर वो कुछ बोली नहीं.

नेहा दीदी और राधा घर जाने क लिए निकल गए . राधा जाते जाते भी मुझे देख रही थी मगर उसने कुछ कहा नहीं मगर मैं समझ गया था क वो अंदर से खुश है. मैं मोहित क साथ मीनल को उसके घर छोड़ कर घर जा रहे थे क मेरे फ़ोन पर दीपिका ममी का फ़ोन आ गया.

दीपिका ममी : अमित कहाँ पर हो?

अमित : ममी जी आप कैसी हो . मैं अभी कॉलेज से निकला हूँ

दीपिका ममी : ाचा ऐसे करो तुम्हे वो डॉ का क्लिनिक पता है न जहाँ से हम चेक करवाने एते हैं तुम वहां आ जाओ मैं और तुम्हारे मां यहीं पर हैं

इतना कह कर ममी ने फ़ोन काट दिया. मुझे टेंशन होने लगी आखिर अचानक ममी डॉ क पास कैसे आ गयी ? कहीं उनकी तबियत तो ख़राब नहीं हो गयी ?

अमित : मोहित जल्दी से घर चल मुझे अभी डॉ क पास जाना है मेरी ममी का फ़ोन आया है वो डॉ क पास हैं कहीं उनकी तबियत न ख़राब हो.

मोहित : तो घर क्यों जाना है हम सीधा उनके पास चलते हैं तू मुझे एड्रेस बता

अमित : मगर मेरी बाइक तो घर पर कड़ी है न

मोहित : अबे ये कार क्या किसी बेगाने की है ? जो मेरा है वो तेरा है तुम्हे दिल से दोस्त मन है मैंने . अब दोबारा ऐसी बात मत करना

मोहित की बात से मेरा दिल गड गड हो गया . भगवन ने मुझे कितना ाचा दोस्त दिया है मैं अपनी तकदीर पर खुश होने लगा. मैंने मोहित को एड्रेस बताया और उसने गाडी की स्पीड बड़ा दी और हम 20 मिनट्स में hi डॉ क क्लिनिक क बहार थे. मोहित गाड़ी पार्क करने लगा और मैं भाग कर अंदर चला गया
 
अपडेट 61

मोहित की बात से मेरा दिल गड गड हो गया . भगवन ने मुझे कितना ाचा दोस्त दिया है मैं अपनी तकदीर पर खुश होने लगा. मैंने मोहित को एड्रेस बताया और उसने गाडी की स्पीड बड़ा दी और हम 20 मिनट्स में hi डॉ क क्लिनिक क बहार थे. मोहित गाड़ी पार्क करने लगा और मैं भाग कर अंदर चला गया

अब आगे-

मैं जब अंदर पहुंचा तो दीपिका ममी और कमलेश मां वेटिंग हॉल में बैठे हुए थे. दोनों को देख कर मैंने चैन की सांस ली. मैंने मां क पाऊँ छुए और जब ममी क पाऊँ छूने लगा तो उन्होंने मुझे ऐसा नहीं करने दिया और मुझे गले लगा लिया.

दीपिका ममी : मैंने कहा था न भागता हुआ आएगा हमारे पास

अमित : ममी जी आपने तो मेरी जान hi निकल दी मैंने सोचा पता नहीं क्या बात है . काम से काम मुझे बता तो देते क्या बात है.

दीपिका ममी : अगर बता देती तो तुम्हारे चहरे पर अपने लिए इतनी फ़िक्र कैसे देखती? एक मिनट ज़रा सामने तो खड़ा हो

ममी मुझे सर से पाऊँ तक गौर से देखने लगी.

दीपिका ममी : वह अमित तुम तो पूरे हीरो लग रहे हो. इन कपड़ो में तुम पूरे शहरी लड़के लग रहे हो. लगता है कॉलेज का असर हो गया है. कोई गफ बना ली है क्या?

अमित : आप कैसी बातें कर रही हो ममी आप तो जानती हैं मैं इन सब बातों में इंटरेस्ट नहीं लेता .

कमलेश मां : अब बातें hi करते रहोगी या दीदी क घर भी चलोगी

अमित : दीदी क घर ?

दीपिका ममी : हाँ रजनी दीदी ने अपने घर बुलाया है. और वो तुम्हे भी अपने साथ लेन को कह रही हैं वो तुमसे नाराज़ हैं क तुम अभी तुक उनके घर नहीं गए. अब चलो तुम भी हमारे साथ.

अमित : मां जी आप कैसे आये हैं यहाँ

कमलेश मां : और कैसे आऊंगा ? मोटरसाइकिल पर ए हैं

अमित : क्या? मां जी ऐसी हालत में ममी को बाइक पर बिठा क लाना बिलकुल भी सही नहीं है अगर रस्ते में कहीं कोई झटका लग गया तो क्या होगा .

ममी मेरी बातों से एक तक मेरी आँखों में देखने लगी अपने लिए मेरी इतनी केयर देख कर शायद उनका मन भर आया. और मुझे कमलेश मां पर गुस्सा आ रहा था क वो कैसे रिस्क ले सकते हैं बात बचे की थी . चाहे बचे का असली बाप मैं हूँ मुझे ज्यादा चिंता होनी लाज़मी थी मगर वो भी तो बाप बनने वाले हैं.

कमलेश मां : तुम ठीक कह रहे हो हम अब टैक्सी में hi आएंगे दोबारा.

अमित : वैसे आप अचानक हॉस्पिटल क्यों ए

दीपिका ममी : वो पेट में दर्द हो रहा था तो चेक करवाने आये थे डॉ ने कहा है सब ठीक है बस कुछ बातों का ध्यान रखने को बोलै है.

कमलेश मां : चलो अब चलते हैं

अमित : अब आप बाइक पर नहीं कार में जायेंगे .

दीपिका ममी : मगर अब कार कहाँ से लाएं

मोहित : कार हाज़िर है और ड्राइवर भी

कमलेश मां और ममी मोहित की और सवालिया नज़रों से देखने लगे .

अमित : मां जी ये मेरा दोस्त है मोहित और हम दोनों एक hi क्लास में हैं

मोहित ने दोनों क पाऊँ छुए

मोहित : मां जी मेरे पास कार है हम सब साथ में चलते हैं और पहले आप मेरे घर चलिए.

कमलेश मां : नहीं मोहित हमें दीदी क पास जाना है वर्ण वो नाराज़ हो जाएँगी

मोहित : तो चलिए मैं आपको पहले वहीँ ले चलता हूँ

अमित : हाँ मां जी आप कार में बैठिये और मैं आपकी बाइक ले आता हूँ

कमलेश मां : नहीं में बाइक पर आगे चलता हूँ तुम लोगों को घर का नहीं पता चलेगा मैं रास्ता बताता हूँ.

मैं और ममी मोहित क साथ कार में बैठ गए मां आगे आगे अपनी बाइक पर चल रहे थे. हम आधे घंटे में मौसी क घर क पहुँच गए. मौसी का घर देखने में ाचा बना हुआ था. मां ने बेल्ल बजायी और रजनी मौसी ने दरवाज़ा खोला . सामने कमलेश मां और दीपिका ममी को देख कर रजनी मौसी खुश हो गयी और दोनों को गले लगा कर अंदर आने आने को रास्ता दिया.

मां ममी क अंदर घुसते hi मौसी की नज़र मेरे ऊपर पड़ी और उन्होंने ने मुझे पाऊँ चुने ने पहले hi गले लगा लिया.

रजनी मौसी : अब आया है तू ? कब से तुझे बुला रही थी इतने दिन लगा दिया तूने आने में. लगता है तुम्हे अपनी इस मौसी से प्यार नहीं है

अमित : ऐसा मत कहिये मौसी जी मैं जनता हूँ मुझे सबसे ज्यादा प्यार आप hi करती हैं. मैं कॉलेज और प्रैक्टिस ने इतना बिजी रहता हूँ क टाइम नहीं मिल पता.

मौसी इससे मिलो ये है मेरा दोस्त मोहित .

मोहित ने मौसी क पाऊँ छुए मौसी ने उसे आशीर्वाद दिया और उसकी कार को देखने लगी. फिर मौसी हमें अंदर ले गयी. घर में इस वक़्त कारन भैया hi थे. मैं कारन भैया से गले मिला और मोहित ने भी उनसे हाथ मिलाया. नैना दीदी अभी कॉलेज से नहीं आयी थी और मौसा जी अपनी जॉब पर थे. मैंने मौसी से निधि दीदी क बारे में पूछा तो मौसी ने बताया क उनकी जॉब लग गयी है और शाम को 5 बजे वापिस आती हैं.

मौसी ने कारन भैया को मार्किट से कुछ लेन भेज दिया और खुद किचन में हमारे लिए चाय नाश्ते का इंतज़ाम करने लगी. मौसी ने मुझे आवाज़ दे कर अपने पास बुलाया.

रजनी मौसी : अमित ये मोहित तो किसी अमीर घर से लगता है . बीटा अमीर घरों क बचे बिगड़े हूजे होते हैं तुम ज़रा बच कर रहना मैं नहीं चाहती तुम किसी गलत सांगत में पदों. तुम हम सब की आँखों क टारे हो अगर तुम्हे कुछ हुआ तो हम सब टूट जायेंगे बीटा

अमित : मौसी जी आप चिंता मत कीजिये मैं कभी गलत सांगत में नहीं पडूंगा और रही बात मोहित की तो वो बहुत ाचा है और बहुत अछि फॅमिली से है. आंटी तो बिलकुल माँ जैसी है और पता है मुझे भी वो मोहित की तरह प्यार करती हैं.

रजनी मौसी : देखने में तो मुझे भी ये लड़का ाचा hi लगता है जैसे उसने पाऊँ छुए मुझे भी लगता है क इसके संस्कार अचे हैं

इतने में कारन भैया भी कुछ सामान ले ए जो मौसी जी ने मंगवाया था. मौसी ने जल्दी से हमारे लिए चाय नाश्ता रेडी कर दिया. हम सब चाय नाश्ता कर रहे थे क नैना दीदी भी आ गयी और मुझे सामने देख कर ख़ुशी से उछाल पड़ी और भाग कर मेरे गले लग गयी.

नैना दीदी : आखिर तुझे टाइम मिल hi गया. तूने तो कहा था क मैं जल्दी hi आऊंगा और अब आ रहा है. वैसे तू तो पूरा हीरो लग रहा है कहीं कॉलेज में कोई गफ तो नहीं बना ली?

अमित : क्या दीदी आप भी मेरी टांग खींचने लगी वो तो मोहित ने मुझे ज़बरदस्ती ये कपडे दिलवा दिए ताकि कॉलेज में कोई मुझे कपड़ों की वजह से बातें न सुनाये

दीपिका ममी : अरे भाई हम भी यहाँ है हम से भी मिल लो

ममी की बात सुन कर दीदी ने ममी और मां को देखा और उनसे मिली. दीदी ने मोहित की तरफ देखा तो मैंने उन्हें मोहित क बारे में बताया

नैना दीदी : थैंक्स मोहित तुमने इस जंगली को हीरो बना दिया. सच सच बताओ इसने कोई गफ टी नहीं बना ली कॉलेज में. मैंने सुना है तुम्हारे कॉलेज में एक से एक बढ़कर फैशन करने वाली लड़कियां पड़ती हैं कहीं किसी ने इसे फसा तो नहीं लिया?

मोहित : अरे नहीं दीदी अमित ऐसा नहीं है . लड़कियां तो इसके पीछे पड़ी हैं मगर ये किसी से बात नहीं करता.

मोहित की बात सुन कर दीदी बहुत खुश हुई.

रजनी मौसी : मेरा बीटा तो पहले hi हीरो है अब तो इन कपड़ों में और भी ाचा लग रहा है.

नैना दीदी : मैंने अपने कॉलेज की लड़कियों से बहुत किस्से सुने हैं तुम्हारे कॉलेज क काश मैं भी तुम्हारे साथ होती कॉलेज में कितना मज़ा आता .

हम ऐसे hi बातें करते रहे और 5 बज गए मुझे प्रैक्टिस पर भी जाना था इस लिए मैंने मौसी से जाने की इजाज़त मांगी. हम घर से निकलने वाले थे क निधि दीदी घर आ गयी. मुझे सामने देख कर वह बहुत खुश हुई जॉब की वजह से पेण्ट शर्ट पहनती थी. इस ड्रेस में वो बहुत खूबसूरत और स्मार्ट लग रही थी . वो हम सब में सब से बड़ी हैं थी और सब से ज्यादा वो मुझे प्यार करती थी.

मुझसे गले मिलने क बाद वो मुझसे गिला करने लगी

निधि दीदी : अब मिला तुझे टाइम ? अब आयी यद् इस बहिन की ? तुम सब से बात करते हो नैना से करुणा से नेहा से मगर कभी मुझे फ़ोन नहीं किया.

अमित : सॉरी दीदी मगर मेरे पास आपका no. नहीं था पर आपने भी तो फ़ोन नहीं किया. वैसे अब तो मैं इसी शहर में हूँ आप जब बुलाएंगी मैं आपके पास आ जाऊंगा.

दीदी पहले से भी कहीं ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी. ऐसे लग रहा था क जैसे कोई हेरोइन हो. मोहित भी उनकी खूबसूरती को बड़ी गौर से देख रहा था मगर वो जनता था क निधि दीदी मेरी बहिन है. मैंने मोहित को दीदी से मिलाया और उसने भी निधि दीदी को दीदी कह कर बुलाया. मैंने निधि दीदी से 10 मिनट्स बात की और प्रैक्टिस पर जाने का बोल कर विदा ली उन्होंने मुझे फिर से आने को बोलै.

मां ममी ने आज रत रजनी मौसी क यहाँ रहना था और कल रीता मौसी क यहाँ जाना था. मैं मोहित क साथ घर आया और फिर चेंज कर क प्रैक्टिस पर चला गया. उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ और मैं वापिस आ कर थोड़ा बहुत मोहित क साथ टाइम पास किया और रत का खाना खा कर सो गया.

सुबह मैं ग्राउंड से एक्ससरसीसे कर क वापिस आया तो आज भी आंटी छत पर योग कर रही थी मगर आज उन्होंने अलग कपडे पहने हुए थे. आज उन्होंने स्लीव लेस्स T-shirt और झांगों तक शॉर्ट्स पहनी हुई थी. शॉर्ट्स क अंदर से झांकती उनकी गोरी मुलायम टंगे अपनी खूबसूरती को बयां कर रही थी. मैं उनकी गोरी गोरी टांगों को देख रहा था क उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया.

आंटी : तुम आ गए अमित . ज़रा इधर आओ मेरी मदद करो.

मैं आंटी क पास चला गया मेरी नज़र बार बार उनकी टांगों पर जा रही थी ये बात आंटी ने भी नोट कर्ली थी शायद.

आंटी : मैं यहाँ लेट टी हूँ तुम ज़रा मेरी टांगों को पकड़ कर मेरे सर की तरफ दबाओ और मेरी कमर को दबा कर रखना इससे मेरी टाँगें अछि तरह स्ट्रेच हो जाएँगी

मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं कैसे करूँ . आंटी ने लेट कर मुझे पाऊँ की तरफ आने का इशारा किया और अपनी टंगे सीधी कर क ऊपर उठा ली.

आंटी की गांड और छूट का भाग टाइट फिटिंग की वजह से कपड़ों क बीच में से पता चल रहा था. मेरी हालत पतली होनी शुरू गयी और मेरा लैंड भी नींद से जागने लगा था.

आंटी : अब घुटनो पर बैठ जाओ मेरे पास और मेरी टैंगो को मेरे सर की तरफ पूरा प्रेस करो.

मैं घुटनो बार बैठ गया और आंटी की नंगी टांगों को अपने हाथों से पकड़ लिया. आंटी की नंगी टांगों को हाथ लगते hi मेरे अंदर करंट दौड़ गया. मेरे हाथ कम्पनी लगे . मैंने खुद को काबू किया और आंटी की टैंगो को उनके सर की तरफ दबाने लगा .मेरे घुटने आंटी क चूतड़ों से टच कर रहे थे. जैसे जैसे मैं आंटी की टैंगो को उनके सर की तरफ दबाता गया उनकी कमर ऊपर उठाने लगी जिसे दबाने क लिए मैं थोड़ा आगे हुआ और कमर क साथ जुड़ कर उसे ऊपर उठाने से रोका और इस सब में मेरा लैंड जो पहले hi खड़ा हो रहा था आंटी की छूट पर टच हो गया. आंटी क जिस्म में भी एक कम्पन स हुई मगर उन्होंने कोई रियेक्ट माहि किया.

अब आलम ये था क मैंने ौंटी की टाँगे पूरी सर क साथ लगा दी . ऐसा करने से मैं उनके ऊपर झुक गया था और मेरा लैंड आंटी की छूट पर डाब गया था. ये मेरी फवौरीते चूड़ी पोजीशन थी और लैंड महाराज शायद इसे चुदाई समझ कर खड़े हो चुके थे और छूट में घुसने का राटा ढून्ढ रहे थे.

आंटी : आअह्ह्ह शाबाश ऐसे hi और ज़ोर लगाओ थोड़ा

आंटी मुझे ज़ोर लगाने को कह रही थी मगर टैंगो पर या छूट पर मुझे ये नहीं बताया और मैंने दोनों तरफ ज़ोर लगा दिया. लैंड पूरा अकड़ चूका था और छूट क मग पर लगातार दबाव बना कर छूट को दरवाज़ा खोलने क लिए कह रहा था.

कोई दूर से देखता तो उसे यही लगता क मैं आंटी की ज़बरदस्त चुदाई कर रहा हूँ. आंटी क जिस्म में बहुत लचक थी और मैं उनकी इस लचक को अछि तरह से चेक कर रहा था. आंटी ने मुझे ऐसे hi रुकने को कहा. मैंने टैंगो पर ज़ोर लगाना बंद कर दिया मगर लैंड को लगातार छूट पर दबा रहा था. आंटी खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी मगर उनसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . उनका चेहरा लाल पद गया था. और मुँह सिसकारियां बहार निकलने को थी.

आंटी : रुक जाओ ज़रा सांस लेने दो मैं सीधा हो गया और टैंगो को छोड़ दिया . आंटी ने अपनी टंगे मेरे कंधो पर दाएं बाएं रख ली जैसे मुझसे चुदाई करवाना छह रही हों. आंटी की नंगी टाँगें और गोर गोर पाऊँ अपने कन्धों पर देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. मैंने आंटी क दोनों पैरों को अपने हाथो में पकड़ लिया और उनके बिना कहे फिर से उनके सर की तरफ पूरा दबा दिया . एक बार फिर मैं आंटी क ऊपर था और मेरा लैंड छूट पर चढाई कर रहा था. आंटी क मुँह से एक सिसकी निकल गयी और वो मदहोश नज़रों से मेरी आँखों में देखने लगी जैसे कह रही हों क डाल्दो अपना लैंड मेरी छूट में. हम दोनों की नज़रें मिल रही थी अचानक मेरी अंतर आत्मा ने मुझे रोका और मैंने आंटी की टांगों को छोड़ दिया और अपनी जगह से खड़ा हो गया .

अमित : आंटी मैं कॉलेज क लिए लेट हो जाऊंगा मुझे तैयार भी होना है सॉरी

आंटी मेरी तरफ हैरानी से देख रही थी क मैं अचानक कैसे उनके ऊपर से उठ गया अभी हम दोनों मज़ा ले रहे थे . खैर उन्होंने ने भी बात को समझा और बोली

आंटी : कोई बात नहीं तुम तैयार हो जाओ मैं तुम्हारे लिए जूस लती हूँ एंड थैंक्स फॉर हेल्प

मैं भाग कर कमरे में गया क्यूंकि मेरा लैंड खड़ा था और आंटी को साफ नज़र आ सकता था . वैसे तो उन्होंने ने अपनी छूट ओर लैंड का दबाव अछि तरह फील किया होगा मगर मुझे शर्म आ रही थी.

मैंने जल्दी से कपडे उतरे और बाथरूम में घुस गया . शावर क नीचे खड़ा हुआ तो ठन्डे पानी से मेरे शरीर की गर्मी कुछ काम होने लगी. मैं खुद को कोसने लगा क मुझे क्या हो जाता है . आखिर आंटी को देख कर मैं खुद को रोक क्यों नहीं पता . वो क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में . आखिर वो मेरी दोस्त की माँ हैं. माँ से मुझे अपनी माँ यद् आ गयी कैसे मैंने अपने रिश्ते को चुदाई की बलि चढ़ा दिया. चाहे मैंने जो किया उसमे रत्ती भर भी वासना नहीं थी मगर शायद कोई और रास्ता भी हो सकता था उनकी जान बचने का . आखिर मैं क्यों खुद को रोक नहीं पता और वासना क आगे झुक जाता हूँ?

मैं शावर क नीचे नाहटा हुआ खुद को कोस्टा रहा. मैं जल्द बाजी में कपडे बहार hi भूल गया था. मैं तौलिया लपेट कर बाथ रूम से बहार आया तो सामने आंटी जूस का गिलास पकड़ कर कड़ी थी और मेरी बॉडी को बड़े गौर से देख रही थी. मैं जल्दी से कपडे निकलने लगा तो आंटी बोली

आंटी : अमित पहले ये जूस पि लो कपडे बाद में पेहेन लेना

मैं आंटी क सामने ऐसे बिना कपड़ो क शर्म महसूस कर रहा था मैंने सोचा जल्दी से जूस पि लेता हूँ तभी आंटी बहार जाएँगी. मैंने जूस का गिलास लेने आगे बड़ा तो आंटी मुझे गिलास पकड़ते हुए मेरे ऊपर गिर गयी जिससे जूस मेरे ऊपर गिर गया. मैंने आंटी को संभाला और उन्हें गिरने से बचाया मगर इस दौरान मेरा तौलिया कब निकल गया मुझे पता hi नहीं चला. आंटी तो संभल गयी मगर मुझे तौलिये क गिरने का पता नहीं था. आंटी जब एक तक मेरी जांघों क बीच देखने लगी तो उनकी नज़रों का पीछा करने से मुझे पता चला क मेरा तौलिया नीचे गिरा पड़ा है. मैंने जल्दी से तौलिया उठाया और कमर पर लपेट लिया

अमित : सॉरी आंटी वो गलती से हो गया प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये

आंटी : मुस्कुरा कर) अरे कोई बात नहीं इसमें तुम्हारी गलती थोड़ा है तुमने तो मुझे गिरने से बचाया. मैं तुम्हारे लिए दूसरा गिलास लती हूँ.

आंटी की नज़र बार बार मेरे लैंड की तरफ जा रही थी . मैं आंटी क जाते hi जल्दी से तैयार हो गया और नीचे चला गया . मुझे दर था कहीं फिर से कोई बात न हो जाये. आंटी ने मुझे जूस का गिलास दिया और अपने कमरे में चली गयी. इतनी देर में मोहित भी आ गया ह्यूमेन नाश्ता किया और कॉलेज क लिए निकल गए.
 
अपडेट 62

आंटी की नज़र बार बार मेरे लैंड की तरफ जा रही थी . मैं आंटी क जाते hi जल्दी से तैयार हो गया और नीचे चला गया . मुझे दर था कहीं फिर से कोई बात न हो जाये. आंटी ने मुझे जूस का गिलास दिया और अपने कमरे में चली गयी. इतनी देर में मोहित भी आ गया ह्यूमेन नाश्ता किया और कॉलेज क लिए निकल गए.

अब आगे -

कॉलेज में सब रूटीन से hi चल रहा था मगर मेरे दिमाग में आंटी क साथ हो रही घटनाएं घूम रहीं थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क क्या किया जाये. आंटी जान बुझ कर ऐसा कर रही हैं या फिर उनके लिए नार्मल स बात है कहीं मैं उनके नार्मल बेहेवियर को गलत समझ कर कुछ गलत न कर बैठूं. हम फ्री लैक्टुरे में कैंटीन में जा रहे थे क मेरा फ़ोन बजा उठा. फ़ोन दीपिका ममी का था वो रीता मौसी क घर पहुँच गए थे और उन्होंने मुझे मौसी क घर आने को कहा और ये भी क जल्दी आना खाना साथ में खाएंगे.

अमित : मोहित यार मुझे मौसी क घर जाना होगा

मोहित : तो चल साथ में चलते हैं

अमित : नहीं अभी एक लेक्चर पड़ा है और तुमने मीनल को भी तो घर छोड़ना है

मोहित : इसमें क्या है उसे बोल देता हूँ वो लेक्चर मिस कर देगी हम अभी चलते हैं

अमित : नहीं यार उसके तो अभी 2/3 लेक्चर पड़े होंगे मेरे लई उसकी स्टडी को वास्ते नहीं करना चाहिए. तू ऐसा कर मुझे घर ले चल मैं बाइक ले लेता हूँ और वहां से सीधा प्रैक्टिस क लिए चला जाऊंगा

मोहित : यार तू इतनी टेंशन क्यों लेता है वो मैनेज कर लेगी

अमित : तू मेरी बात नहीं मानेगा?

मोहित मेरी बात मान गया और हम चल पड़े घर की और. मोहित को मैंने गेट पर hi उतरने को बोलै और मोहित मुझे बहार से hi उतर कर चला गया. मैं अपने कमरे में बाइक की चाबी लेने क लिए गया . अंदर कोई नहीं था जैसे hi मैं अपने रूम से चाबी लेकर नीचे उतर रहा था मुझे सिसकारियों की आवाज़ सुनाई दी. मैं आवाज़ सुन कर ठिठक गया. आवाज़ रूम से आ रही थी. मैंने सोचा अंकल तो घर होते नहीं इस वक़्त चलो देखता हूँ ये आवाज़ किसकी है.

मैं दबे पाऊँ आवाज़ की दिशा में बड़ा . आवाज़ आंटी क रूम से hi आ रही थी

‘ आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स उम्मम्मम ओह्ह्ह ककक और तेज़ करो कक्कक्स आआह्ह्ह अंदर तक घुसाओ आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म और तेज़ शाबाश ऐसे hi आआह्ह्ह कक्कक्स’

आवाज़ से मैं समझ गया क ये आवाज़ आंटी की hi है. इसका मतलब वो किसी क साथ चुदाई कर रही हैं. मगर वो ऐसा कैसे कर सकती हैं और किसके साथ? मैं दबे पाऊँ आंटी क कमरे क पास पहुँच गया मेरी धड़कने तेज़ हो गयी थी पता नहीं अंदर आंटी किसके साथ हैं और वो किस हालत में होंगी. मैं खुद को कण्ट्रोल करता हुआ अंदर देखने की जगह ढूंढने लगा. मगर कोई खिड़की या रोशन दान नहीं था. मैंने दरवाज़े को खोलने की कोशिश की तो दरवाज़ा खुल गया.

दरवाज़ा हल्का सा खोल कर मैंने अंदर देखा तो सामने बीएड पर आंटी मदर जाट नंगी लेती हुई थी. उनको नंगा देख कर मेरी हलक खुश्क हो गयी. उनका चंडी जैसा गोरा चिकना बदन नंगा मेरी आँखों क सामने था. आंटी की मस्ती से आँखें बंद थी उन्होंने अपनी दोनों टांगें उठायी हुई थी और एक औरत उनकी छूट को चाट रही थी . वो औरत भी पूरी नंगी थी और उसका जिस्म भी देखने में ाचा था रंग गोरा और फिगर भी अछि थी.

आंटी मस्ती में अपने hi हाथों से कभी अपने पके आम जैसे दूध मसल रही थी कभी उस औरत क सर को अपनी छूट पर दबा रही थी. आंटी क दूध कैसे हुए लग रहे थे इतनी उम्र क बाद भी बूब्स ढीले नहीं हुए थे और बूब्स क ऊपर पिंक कलर क निप्पल कमल क लग रहे थे . आंटी क जिस्म पर कहीं भी फैट का नमो निशान नहीं था. उनकी गोरी मखमली जांघें देख कर मुझे सुबह की घटना यद् आने लगी.

वो औरत लगातार बिना सर उठाये आंटी की छूट को ज़ोरों से चाट रही थी.

आंटी : आह्ह्हह्ह ाःह ककक ोुह्ह्ह्ह उम्म्म्म आअह्ह्ह और ज़ोर से छतो और अंदर तक घुसाओ आअह्ह्ह और तेज़ आअह्ह्ह्ह ये गर्मी मेरी जान ले लेगी आआह्ह्ह ककक उम्म्म मेरी गर्मी को ठंडा कार्डो रानी कुछ करो आअह्ह्ह सीसीसी ये गर्मी रोज़ बढ़ती जा रही है कक्कक्क्स आअह्ह्ह्ह ये आग मुझे जला देगी. कक्कक्स आअह्ह्ह उम्म्म मुझे अपनी छूट में लैंड चाहिए कुछ कर रानी सीसीसी आआअह्ह्ह्हह तू आग बुझाने की बजाये और बड़ा देती है कक्कक्स आअह्ह्ह्ह और तेज़्ज़ज़ करो

तो ये रानी है जो आंटी की छूट चाट रही है. लगता है अंकल आंटी को छोड़ते नहीं है. और आंटी तड़पती रहती हैं इसी लिए मेरे साथ ज्यादा जुड़ने की कोशिश करती हैं. मुझे अब आंटी क बेहेवियर क बारे में पता चल गया था . थोड़ी देर में hi आंटी का पानी निकल गया और आंटी ठंडी पद गयी. आंटी क ठन्डे होते hi रानी ने अपना सर ऊपर उठाया. रानी का मुँह आंटी की छूट क पानी से भीग गया था

रानी : मालकिन कब तक आप खुद को यूँ hi तड़पती रहेंगी. अब आप की आग मुझसे नहीं बुझेगी मैं चाहे कितना भी कोशिश करूँ आप की आग नहीं बुझेगी. औरत की आग को सिर्फ मर्द hi ठंडा कर सकता है.

आंटी : मैं क्या करूँ रानी तुम्हारे साहब तो मुझे वक़्त hi नहीं देते और मैं तड़पती रहती हूँ

रानी : मालकिन बुरा न मने तो एक बात कहूं?

आंटी : हम्म्म

रानी : मालकिन आप तो जानती हैं मेरे पति यहाँ नहीं हैं और मैं भी इस आग में तड़पती रहती हूँ इस लिए मैंने अपनी आग बुझाने का रास्ता ढून्ढ लिया है .

आंटी : वो कैसे?

रानी : मालकिन औरत की छूट की गर्मी को सिर्फ मर्द का दमदार लैंड hi बुझा सकता है और मैंने अपने लिए एक दमदार लैंड ढून्ढ लिया है. और वो लैंड ऐसा है क मेरी छूट की साडी गर्मी को ठंडा कर देता है. जब वो मुझे बिस्तर पर कास क रगड़ता है तो मेरे जिस्म की साडी अकड़न दूर हो जाती है. और उसकी ताकत तो ऐसी है क साडी रत मुझे सोने नहीं देता. मेरी छूट तो हर पल उसके लैंड की यद् में तड़पती रहती है. औरत को कैसे ठंडा करना है उसे अचे से पता है.

आंटी : ये तो कैसी बातें कर रही है. पति क होते तू किसी दूसरे मर्द से कैसे ये सब कर सकती है.

रानी : औरत भूखे पेट तो रह सकती है मल्किक मगर लैंड क बिना नहीं रह सकती

आंटी : मगर तुमने कभी सोचा नहीं क अगर किसी को पता चल गया तो ? अगर तेरे पति को पता चल गया तो?

रानी : कैसे पता चलेगा और कौन बताएगा उसे? मेरा पति दूसरे शहर में रहता है. और मैं तो यहीं पर चुपके चिपके अपनी आग बुझती रहती हूँ.

आंटी : मगर तुम तो हमारे पास यहीं रहती हो तो फिर कैसे उस मर्द से मिलती हो?

रानी : मैं यहीं उससे मिलती हूँ मालकिन अपने hi क्वार्टर में.

आंटी : क्या कहा यहीं पर ? हमारे होते हुए तुम कैसे किसी को यहाँ बुला सकती हो ? तुमने इस घर को क्या समझ रखा है?

रानी : माफ़ कीजिये मालकिन मगर मैं किसी बहार वाले को नहीं बुलाती

आंटी : तो फिर कौन

रानी : वो आपका ड्राइवर है न लोकु . बड़ा ज़बरदस्त मर्द है मालकिन . मुआ अंग अंग तोड़ देता है . ऐसी हालत कर देता है क सुबह बिस्टेर से उठने का मन नहीं करता. ऐसा ताकतवर और मजबूर लैंड है क दिल करता है हर वक़्त छूट में लिए बैठी रहूं.

आंटी : क्या वाकई ऐसा है उसका ?

रानी : क्या बताऊँ कैसा है मालकिन जब छूट क अंदर जाता है तो कुछ यद् नहीं रहता.

आंटी : क्या सचमुच ऐसा है ?

रानी : हाँ मालकिन हाथ बराबर लम्बा और इतना मोटा है क अंदर जाते hi छूट की चींकहेन निकल जाती हैं . और इतना सख्त है जैसे लोहा हो.

आंटी : क्या सचमुच ऐसा है?

रानी : क्या आप देखेंगी मालकिन ? आप चाहें तो मैं आपको दिखा सकती हूँ.

आंटी : नहीं नहीं मैं नहीं देखना चाहती

रानी : मालकिन वो रत को 12 बजे मेरे क्वार्टर में अत है मेरी चुदाई करने आप जब चाहें देख सकती हैं . जब आप देखेंगी तो आपको यकीन हो जायेगा क मैंने जो उसके लैंड क बारे में बताया है वो एक डैम सही है.

मैं बहार खड़ा दोनों की बातें सुन रहा था. मुझे अंदाज़ा हो गया था क अंकल आंटी की चुदाई नहीं करते और आंटी रानी से अपनी प्यास बुझती हैं. औरत भला औरत को कैसे ठंडा कर सकती है इसी लिए आंटी की आग बुझने की बजाये और बाद रही है. एक बात और पता चल गयी क रानी का डाइवर क साथ चक्कर है . रत को देखूंगा क इनके बिच क्या कुछ चल रहा है. दोनों की बातें सुनने में बहुत वक़्त लग गया था और मुझे मौसी क घर भी जाना था. मगर ये सब देखते हुए मेरा लैंड रोड की तरह सख्त हो चूका था . मैंने अब यहाँ से निकल जाना ठीक समझा और दबे दबे बहार आ गया. अपनी बुलेट ले कर मैं रीता मौसी क घर की तरफ निकल पड़ा.

मैंने सोचा था क नेहा दीदी को साथ लेता हुआ जाऊंगा मगर आंटी का सन देखने क बाद मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और लैंड महाराज भी सर उठाये खड़े थे. मैं 20 मिनट्स में रीता मौसी क घर पर पहुँच गया. बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा करुणा दीदी ने खोला.

करुणा दीदी : अब आ रहा है तू ? कब से फ़ोन किया हुआ है ममी ने . तेरे लिए मैं आज कॉलेज से सरे लेक्चर छोड़ कर घर आ गयी और तूने इतनी देर करदी. एक मिनट्स ....

वाऊ तुम तो वाकई हीरो लग रहे हो . नैना दीदी सच कह रही थी क तुम एक मॉडल की तरह दिखने लगे हो . वैसे ये चमत्कार हुआ कैसे? कोई गफ तो नहीं मिल गयी? सुना है तेरे कॉलेज में एक से एक सुन्दर लड़कियां हैं.

अमित : चाहे कितनी भी सुन्दर हो आप से तो काम hi हैं .

मेरी बात सुनते hi करुणा दीदी क चहरे पर स्माइल आ गयी और उनकी गाल टमाटर जैसे लाल हो गयी

अमित : वैसे तारीफ क लिए शुक्रिया. अब क्या यहीं खड़े रखेंगी मुझे?

करुणा दीदी : ो स सॉरी औ अंदर आओ

करुणा दीदी अपनी तारीफ सुन कर बहुत खुश हो गयी थी और उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या बात करें

मैं करुणा दीदी क साथ अंदर गया तो कमलेश मां दीपिका ममी क साथ नैना दीदी भी बैठी हुई थी रीता मौसी किचन में थी.

नैना दीदी : आ गया हीरो कब से तेरा इंतज़ार कर रहे हैं

अमित : बस दीदी आते आते टाइम लग गया

मैंने मां क पाऊँ छुए और ममी ने मुझे गले लगा लिया उसके बाद मैं रीता मौसी से मिलने किचन में गया और उनके पाऊँ छुए. रीता मौसी खाना बना रही थी

रीता मौसी : जीते रहो मिल गया वक़्त तुझे उस दिन क बाद आज आया है. अपनी मौसी की यद् नहीं अति तुझे? सच कह रही थी दीपिका तू तो पूरा बदल गया है यहाँ आकर

अमित : मौसी कैसी बातें कर रही हैं मैं भला आपको कभी भुला हूँ. आप मुझे कितना प्यार करती हैं मैं जनता हूँ. और मैं बदला नहीं हूँ बस कपडे hi बदले हैं

मैं रीता मौसी से मिल कर सबके साथ बैठ गया और सब से बातें करने लगा. नैना दीदी और करुणा दीदी मेरे दोनों तरफ बैठ गयी. दोनों मेरे साथ चिपक रही थी और बात बात पर मुझे छेड़ रही थी. हम सब बातों में लगे रहे कुछ वक़्त बाद नेहा दीदी और राधा भी आ गए. राधा ने मुझे देखा मगर मेरे साथ कोई खास बात नहीं की . सब ने मिल कर खाना खाया . खाने क बाद मां ममी ने दिव्या मौसी क घर जाना था. और उनके साथ जाने क लिए नैना और करुणा दीदी भी तैयार हो गयी.

करुणा दीदी नैना दीदी मुझे साथ चलने का कहने लगी मगर दीपिका ममी जानती थी दिव्या मौसी मुझे देखना पसंद नहीं करती इस लिए वो बात को ताल रही थी.

नैना दीदी : अमित तू भी चल हमारे साथ कितना मज़ा आएगा. ममी जी बोलिये न इसे साथ चलने को

अमित : दीदी मुझे प्रैक्टिस पर जाना होता है आपको तो पता है न.

करुणा दीदी : हमें कुछ नहीं सुन्ना तू चलेगा मतलब चलेगा

दीपिका ममी : अरे रहने दो न उसे प्रैक्टिस करने जाना होता है

नैना दीदी : ममी जी वहां पर तो ये 5 बजे जाता है है और अभी तो 3 भी नहीं बजे

करुणा दीदी : राधा तू भी बोल न इसको चलने को . तू कहेगी तो ये मन जायेगा आखिर तुम्हारे hi घर तो जाना है. अगर ये नहीं गया तो मैं भी नहीं जाउंगी

नैना दीदी : और मैं भी नहीं जाउंगी

राधा करुणा दीदी की बात पर सोच में पद गयी . वो मुझे घर इन्विते नहीं करना चाहती थी मगर नैना दीदी और करुणा दीदी को घर ले जाने क लिए उनकी बात माननी पड़ेगी

राधा : तुम भी चलो हमारे साथ वर्ण दीदी भी नहीं जाएँगी

राधा ने बड़ी hi मासूमियत क साथ मुझसे इतना कहा . राधा मुझसे कभी कभार hi बात करती थी वो भी औपचारिकता क लिए. मगर उसकी मासूमियत क आगे मैं सब भूल जाता था. आज उसने पहली बार मुझे घर चलने को कहा तो भला मैं कैसे इंकार कर देता. मैंने हाँ करदी हालाँकि मैं जनता था दिव्या मौसी मुझे घर में घुसने भी नहीं देगी.

ममी मां क साथ उनकी बाइक पर बैठ गयी राधा अपनी स्कूटी पर करुणा दीदी अपनी स्कॉट्स पर और नैना दीदी मेरे पीछे बैठ गयी हालाँकि करुणा दीदी ने बहुत कहा क वो मेरे साथ बैठेंगी मगर नैना दीदी नहीं मणि. मुझे वापिस जल्दी चले जाना था इस लिए करुणा दीदी ने अपनी स्कूटी भी साथ ले ली थी.

हम घर से निकल पड़े रस्ते में नैना दीदी मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा चिपक रही थी. और ऐसे बैठी थी जैसे बर्फ क साथ गफ बैठी हो उनके कैसे हुए दूध और नोकीले निप्पल मुझे अपनी पीठ पर साफ महसूस हो रहे थे. हम 15 मिनट्स में hi दिव्या मौसी क घर पहुँच गए. मैं अपनी होश में पहली बार आज दिव्या मौसी क घर आया था. दिव्या मौसी क पति विदेश में पैसा कमाते हैं इस लिए घर ाचा बना हुआ था.

राधा ने घर की बेल्ल बजायी तो दिव्या मौसी ने दरवाज़ा खोला. मौसी सदी में थी और हमेशा की तरह खूबसूरत लग रही थी. मां ममी को सामने देख कर वो बहुत खुश हुई और उनसे गले मिली.

दिव्या मौसी: आखिर अपनी इस बहिन पर तरस आ hi गया आपको . मैं कब से रह देख रही थी आप लोगों की. मां ममी क बाद उनकी नज़र करुणा दीदी और नैना दीदी पर पड़ी तो मौसी और भी खुश हो गयी और दोनों को गले लगा लिया. सबसे पीछे मैं खड़ा था जब मौसी ने मुझे देखा तो पहले उन्होंने सर से पाऊँ तक मुझे गौर से देखा जैसे मेरी नई लुक को चेक कर रही हों मगर अबले hi पल उनकी आँखों में फिर से गुस्सा आ गया और मुझे गुस्से से देखने लगी. मैंने आगे बाद कर उनके पाऊँ छुए नैना दीदी और करुणा दीदी की वजह से मौसी ने मुझे कुछ कहा तो नहीं बस जीते रहो कह कर अंदर चली गयी.

मैं करुणा दीदी और नैना दीदी क साथ अंदर चला गया. मां ममी सोफे पर बैठ गए थे मैं नैना दीदी और करुणा दीदी क साथ बैठ गया . दोनों ने फिर से मुझे बीच में बिठा लिया. दिव्या मौसी ने राधा को किचन में बुलाया और उसे काम बता कर बहार जाने लगी तो दीपिका ममी ने मौसी को रोक दिया.

दीपिका ममी : कहाँ जा रही हो दिव्या ?

दिव्या मौसी : वो मार्किट से कुछ सामान लेने जा रही हूँ

दीपिका ममी : तुम यहीं बैठो ये क्या ाचा लगता है क हम यहाँ बैठे हैं और तुम बहार जा रही हो. जो मंगवाना है तुम बता दो अमित ले आएगा

दिव्या मौसी : नहीं मैं खुद ले आउंगी

कमलेश मां : दीपिका ठीक कह रही है तुम अमित को बता दो जो लाना है वो ले आएगा तुम हमारे साथ बैठो.

दिव्या मौसी : कहाँ से सामान लाना है उसे नहीं पता चलेगा मैं ले अति हूँ

दीपिका ममी : वो बचा नहीं है दिव्या तुम उसे सामान बता दो वो ले आएगा और अगर किसी खास दुकान से hi लाना है तो राधा को उसके साथ भेज दो

करुणा दीदी : मैं जाती हूँ अमित क साथ

दीपिका ममी : नहीं तुम्हे कहाँ पता होगा कहाँ से क्या लेना है राधा को hi जाने दो

दिव्या मौसी : मगर

कमलेश मां : कोई अगर मगर नहीं . क्या तुम मेरी इतनी बात भी नहीं मानोगी ?

दिव्या मौसी को न चाहते हुए भी राधा को मेरे साथ भेजना पड़ा. मौसी ने राधा को समझा दिया क्या क्या और कहाँ से लेना है . मैंने अपनी बुलेट को किक मरी और राधा को पीछे बैठने को कहा . राधा कुछ संकोच करती हुई मेरे पीछे बैठ गयी. आज पहली बार राधा मेरे साथ बाइक पर बैठी थी मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी मिल रही थी. पता नहीं क्यों मगर मेरे दिल में राधा क लिए एक खास जगह थी शायद उसकी मासूमियत की वजह से उसे मैं ज्यादा पसंद करता था. या फिर वो मेरी तरह hi अकेली थी क्यूंकि उसका कोई भाई बैगन नहीं था न hi कोई और रिश्तेदार. और तो और उसके पापा भी साल बाद कुछ दिनों क लिए hi एते थे.

मैं राधा को साथ लिए अपनी ख़ुशी में मगन बाइक लेकर जा रहा था क एक गली क मोड़ पर 3/4 लड़के खड़े थे उन्होंने हमारे पास से निकलते hi राधा पर कमेंट किया.

लड़का 1 : कहाँ जा रही हो बुलबुल हमें बता देती

मैंने उस लड़के का कमेंट सुन कर एक डैम से बाइक रोक ली

लड़का 2 : अपने कन्हैया को छोड़ कर किस क साथ जा रही हो राधा रानी

लड़का 3 : हम क्या मर गए हैं जो बहार से लड़के बुलाने लगी हो

लड़का 4 : दोनों माँ बेटी क्या माल हैं यार लोग तो आएँगी hi पता नहीं हमारा no. कब आएगा.

ये सब सुन कर मेरा खून खौल गया मैंने बाइक को स्टैंड लगाया और बाइक से उतर कर उनकी तरफ लपका. चारो मुझे अपनी तरफ अत देख कर होशिआर हो गए और एक साथ मुझ से भीड़ गए . मैंने जाते hi एक क पेट में लात मरी दूसरे क मुँह पर उलटे हाथ का ज़ोर से मुक्का मारा . तीसरे और चौथे लड़के ने मुझे एक एक घुसा मर दिया . मैंने दोनों को गर्दन से एक साथ पकड़ उठा दिया और पटक कर नीचे मारा . मैं गुस्से में पागल हो रहा था और पूरे ज़ोर से हमला कर रहा था वो हरामी लैंड हिलने वाले सड़क छाप थे मेरे आगे कहाँ ठहर सकते थे. मैंने चारो को ज़मीन पर hi ज़ोर ज़ोर से ठोकरें मर मर कर उनकी हालत बुरी कर दी

अमित : हरामजादो तुम लोगो ने राधा क बारे में गन्दी ज़ुबान बोली. मैं जान से मर दूंगा तुम लोगो को . आज क बाद तुम लोग किसी क बारे में में बोलने क लायक नहीं रहोगे.

मुझे गुस्से में उन लोगों की धुलाई करता देख राधा भी टेंशन में आ गयी और मुझे रुकने को कहने लगी मगर मैं नहीं रुक रहा था तभी आसपास क लोगों ने बीच बचाव किया. जब मुझसे लोगों को लड़ाई की वजह का पता चला तो उन्होंने भी लड़कों को बुरा भला कहा और मुझसे और राधा से माफ़ी मंगवाई . उन चरों की हालत ख़राब हो गयी थी मुँह से खून निकल रहा था. मैंने भी बात को ख़तम कर दिया.

मैंने बाइक पर राधा को बिठाया और आगे बाद गया.

राधा : तुम्हे क्या ज़रूरत थी झगड़ा करने की ? ये तो इन आवारा लोगों का रोज़ का काम है . मैं इन लोगों क मुँह नहीं लगती.

अमित : उन लोगों की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारे बारे में ऐसी बातें करने की और तुमने सुना नहीं उन्होंने मौसी क बारे में भी बकवास की थी

राधा : किस किस से लड़ोगे तुम यहाँ सारा शहर ऐसे लोगों से भरा हुआ है हर कोई अकेली लड़की देख कर कुछ न कुछ कहता है . तुम हर किसी से तो नहीं लड़ सकते वैसे भी तुम तो आज आये हो चले जाओगे हमें तो यहीं रहना है . कल को फिर कोई और ऐसी हरकत करेगा . और जिन लोगों को आज तुमने मारा है क्या ये बदला नहीं लेंगे? हम माँ बेटी अपनी लाइफ अपने हिसाब से जी रही हैं किसी को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. और तुम्हे अभी चोट लग जाती तो घर पर क्या जवाब देते.

अमित : तुम्हे किसी से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है . आज क बाद कोई तुम्हारे बारे में कुछ भी कहे मुझे बताना . एक एक को देख लूंगा . और मेरी चिंता मत करो मैं अखाड़े में जाने कितनी बार चोट खा खा कर पाक चूका हूँ. रही बात घर पर पता चलने की वो मैं नहीं पता चलने दूंगा और तुम भी मत बताना. एक बात यद् रखना राधा मेरे होते हुए कोई तुम्हे छू भी नहीं सकता

राधा मेरी बात सुन कर चुप हो गयी और मन में सोचने लगी . वास्तव में वो अंदर से बहुत खुश थी क्यूंकि उसे आते जाते लोफर टाइप क ये लड़के अक्सर कमेंट करते रहते थे . वो इन लोगो को सबक तो सीखना चाहती थी मगर वो नहीं चाहती थी कल को उसके और उसकी माँ क लिए कोई प्रॉब्लम हो . क्यूंकि इस शहर में दोनों माँ बेटी अकेली hi रहती थी ऐसे में वो किसी से कोई झगड़ा मोल नहीं लेना चाहती थी. मगर आज जो कुछ हुआ उससे राधा क मन को एक सुकून सा मिला था जैसे उसने बदला ले लिया हो. आज जो उन लड़कों का हल हुआ है अब दोबारा तो वो उसे नहीं छेड़ने वाले.

राधा चुप चाप अपने ख्यालों में खायी मेरे पीछे बैठी रही . ह्यूमेन मार्किट से सामान लिया और घर वापिस आ गए. दिव्या मौसी ने जल्दी से किचन में जा कर सारा इंतज़ाम किया और राधा उनका साथ दे रही थी. मैंने सब क साथ चाय पि और 5 बजे से पहले hi सबसे मिल कर मोहित क घर क लिए निकल पड़ा
 
Back
Top