Adultery Manhoos se mahan tak - Page 5 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 37



गौरी ममी: ाचा ाचा तू चुप कर मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध ले कर अति हूँ और दवा दीपिका क पास होगी मैं उसे कहती हूँ




मैं अपने कमरे में आ गया और माँ का इंतज़ार करने लगा थोड़ी देर में माँ दूध और दवा ले आयी

मैंने दूध पिया और दवा खा कर सो गया

अब आगे -

अभी मुझे लेते हुए थोड़ी देर hi हुई थी क दीपिका ममी कमरे में आ गयी

दीपिका ममी : अमित क्या सो गए हो तुम ?

अमित : नहीं ममी जी बस अभी लेता hi था आइये

दीपिका ममी : मैं आज बहुत खुश हूँ तुमने आज हम सब क सर ऊँचा कर दिया है

अमित : ये तो सब आपका आशीर्वाद है ममी जी

दीपिका ममी: तो फिर मुझे पार्टी कब मिलेगी ?

अमित : जब आप कहें

दीपिका ममी : जी तो चाहता है अभी पार्टी ले लूँ मगर घर में सब मेहमान मौजूद हैं इस लिए फिर कभी मौका देख कर ले लुंगी

दीपिका ममी बात करती हुई मेरे लैंड की तरफ इशारा कर रही थी और मैं उनका इशारा समझ गया , प्रैक्टिस क चलते मैंने कामिनी ममी और दीपिका ममी को किंतने दिनों से छोड़ा नहीं था इस लिए अब उनकी छूट लैंड क लिए तड़प रही थी

अमित : आप जब कहेंगी आपको पार्टी मिल जाएगी

दीपिका ममी : दीदी कह रही थी तुझे दर्द हो रही है अगर ज़रूरत है तो मैं तेरी अभी मालिश कर देती हूँ

अमित : नहीं ममी जी ये तो नार्मल स बात है आप चिंता का करें वैसे भी अगर किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा

दीपिका ममी : उसकी तू चिंता मत कर मुझे परवाह नहीं है

अमित : नहीं ममी जी मैं नहीं चाहता क कोई आप पर उंगली उठाये अब आप जाइये और मैं भी अब सोता हूँ

उसके बाद दीपिका ममी अपने कमरे में चली गयी और मैं फिर से आँख बंद कर क लेट गया और कोई 15 मिनट्स बाद hi कामिनी ममी भी आ गयी और वो hi सब कहने लगी जो दीपिका ममी कह रही थी मैं जनता था क उनको भी लैंड की प्यास सत्ता रही थी मगर अभी ऐसा कुछ नहीं हो सकता था इस लिए मैंने उनको भी समझा बुझा कर भेज दिया और सो गया

सुबह मैं देर तक सोया शायद दर्द और पैन किलर खाने की वजह से या फिर कल बहुत ज़ोर आज़माइश हो गयी थी उसकी वजह से

सुबह जब मैं सो रहा था तो नाश्ता करता हुए दिव्या मौसी ने वापिस जाने की बात कह दी

दिव्या मौसी : भैया मुझे आज वापिस जाना होगा

विजय मां: ऐसी क्या ज़रूरत ाँ पड़ी अभी तो तुम आयी हो और वैसे भी तुम कहाँ आती हो हमसे मिलने

गौरी ममी : दिव्या क्या तुम्हे हमारे पास रहना ाचा नहीं लगता

दिव्या मौसी : वो बात नहीं है भाभी आप तो जानती हैं शहर में कितनी चोरियां होती हैं उधर घर पर कोई भी नहीं है पीछे से कोई सब लूट कर ले गया तो फिर मैं क्या करुँगी

रजनी मौसी : दिव्या एक दिन और रुक जा कल चली जाना कितनी मुश्किल से तो हम सब इकठ्ठा हुए हैं

दिव्या मौसी : नहीं दीदी 2 दिन से घर टाला लगा हुआ है अब मुझे जाना चाहिए आप आ जाना मेरे पास और रीता दीदी आप भी आ जाना आप लोग तो एते hi नहीं हो

रीता मौसी : तुम तो जानती हो तेरे जीजा जी की नौकरी hi ऐसी है मैं घर से बहार जा hi नहीं पति

रजनी मौसी : दिव्या तू चिंता मत कर अगर भगवन ने चाहा तो शायद हम तेरे शहर में hi आ जाये

दिव्या मौसी : वो कैसे मैं समझी नहीं

रजनी मौसी : तेरे जीजा जी का ट्रांसफर होने वाला है और मैंने उन्हें कहा है क वो तेरे शहर में अपना ट्रांसफर करवा ले फिर तो तेरे पास जब चहु आ जाया करुँगी

दिव्या मौसी : सच दीदी अगर ऐसा हो गया तो कितना ाचा होगा मैं और राधा बस एक दूसरे से hi बातें कर दिल बेहला लेती हैं हमारा कोई रिश्तेदार तो है नहीं मिलने वाला और यहाँ भी भाई भाभी मेरे पास नहीं एते

दिव्या मौसी की बातों से सब उनकी उदासी का अंदाज़ा लगा लेते हैं

गौरी ममी : ऐसा मत कहो दिव्या तुम तो सबकी लाड़ली हो तुम जब कहो हम तुम्हारे पास आ जायेंगे

दिव्या मौसी : अपनों को क्या बुलाना पड़ता है ये तो आपको खुद सोचना चाहिए

विजय मां : अरे मेरी गुड़िया मैं अत तो हूँ जब भी शहर में कोई काम होता है फिर तू दिल क्यों छोटा करती है

दिव्या मौसी : आप hi एते हैं भैया अजय भैया और कमलेश भैया तो नहीं एते मेरे पास . कभी भूले से एक अध् बार आ गए तो आ गए और मेरी तीनो भाभियाँ मुझे तो अपना मानती hi नहीं वर्ण ये भी तो आ सकती हैं

गौरी ममी : अरे बस बस अब ताने मत मारो मैं हर महीने तेरे पास आया करुँगी अब तो अमित ने मोटरसाइकिल ले लिया है वो मुझे ले चलेगा तेरे घर

दिव्या मौसी : मैं लेट हो रही हूँ अब मैं तयारी करती हूँ जाने की , चलो राधा अपना सामान पैक करो

दिव्या मौसी क इस तरह गौरी ममी की बात पर रिएक्शन को रजनी मौसी रीता मौसी और कामिनी ममी अछि तरह समझ गए थे क वो अमित को तो देखना भी पसंद नहीं करती तो उसे अपने घर कैसे आने देगी

थोड़ी देर में दिव्या मौसी और राधा ने अपना सामान पैक कर लिया . सब से मिलने क बाद विजय मां और कमलेश मां दोनों को बस स्टॉप पर बस में बिठा ए

मैं सो hi रहा था क मेरे ऊपर किसी ने पानी दाल दिया

नैना दीदी : उठ जाओ कुम्भ कारन कब तक सोते रहोगे अब तो सूरज भी सर पर आ गया

मैंने पानी पड़ने से हड़बड़ा क उठ गया मेरे सामने नैना दीदी और करुणा दीदी दोनों कड़ी है रही थी और नैना दीदी क हाथ में पानी की बाल्टी पकड़ी हुई थो अभी उन्होंने मुझ पर खली की थी

करुणा दीदी : अभी होश अति या थोड़ा और पानी लॉन तुम्हारे लिए

अमित : ाचा अभी बताता हूँ मैं

मैं जल्दी से बीएड से उठा तो मुझे आगे बढ़ता देख कर दोनों भागने लगी मेरे कमरे से निकल कर दोनों नीचे भागी और में उन दोनों को पकड़ने क लिए उनके पीछे भाग रहा था करुणा दीदी जल्दी से गौरी ममी क कमरे में घुस गयी और दरवाज़ा बंद कर लिया . नैना दीदी भगति हुई बाथरूम में घुस गयी और जैसे hi दरवाज़ा बंद करने लगी तो मैंने दरवाज़े में तंग फसा कर दरवाज़ा रोक लिया और ज़ोर लगाकर अंदर घुस गया

नैना दीदी : देखो अमित मुझे हाथ मत लगाना हम तो बस तुम्हे जगाने ए थे ममी जी ने कहा था

अमित : जगाने ए थे या नहलाने ए थे अभी मज़ा चखता हूँ

इतना कह कर मैंने बाथरूम में पानी की बाल्टी उठाकर नैना दीदी क ऊपर दाल दी और वो शोर मचने लगी

नैना दीदी : मैं तुझे छोडूंगी नहीं

अमित : पहले पकड़ क तो दिखाओ

इतना कह कर मैं भाग गया . हमारी आवाज़े सुन कर सब आँगन में आ गए थे और हमारी शरारतों का मज़ा ले रहे थे . अब आलम ये था क मैं और नैना दीदी दोनों भीगे हुए थे . मैं आगे दौड़ रहा था और वो मुझे पकड़ने क लिए डी

पीछे दौड़ रही थी

रजनी मौसी : अरे बस करो ये सब क्या हो रहा है . नैना तुम कब बड़ी होगी रुक जाओ

मैं भाग कर गौरी ममी क पीछे छुपने लगा और नैना दीदी मुझे पकड़ने की कोशिश करने लगी

नैना दीदी : ममी जी आप पीछे हटिये मैं इस सांड को अभी मज़ा चखती हूँ

मैं नैना दीदी को चकमा देकर ऊपर भाग गया और नैना दीदी मेरे पीछे पीछे सब हमारी हरकतों से है रहे थे . मैं अपने कमरे में घुस गया और जैसे hi दरवाज़ा बंद करने क लिए पलटा , नैना दीदी भगति हुई सीधा मुझसे टकरा गयी और इस धक्के से हम दोनों गिरते चले गए

मैं पीठ क बल निचे गिरा और नैना दीदी मेरे ऊपर . उनको बचने क लिए मैंने दोनों हाथो से उन्हें थम लिया . गिरते वक़्त मुझे ज़रा भी ख्याल नहीं रहा क मेरे हाथ नैना दीदी क किस हिस्से पर हैं.

हम दोनों hi पानी में भीगे हुए थे जिसकी वजह से हमारे कपडे हमारे जिस्मो से चिपके हुए थे . मेरे हाथो नैना दीदी की पीठ और उनके चूतड़ों पर थे और मैंने अपने दोनों हाथो से उन्हें कास क पकड़ा हुआ था

नैना दीदी को जब सिचुएशन का एहसास हुआ तो उनको अपने नितम्बो पर मेरा हाथ महसूस हुआ . अपने कुंवारे यौवन पर किसी जवान लड़के क हाथों की मजबूत पकड़ का एहसास उनके लिए पहली बार था . वो जल्दी से शर्मा कर मेरे ऊपर से उठ गयी और मुझे डफ्फर कह कर बहार निकल गयी

मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस कर नाहा धोकर तैयार हुआ और नीचे आ गया

गौरी ममी : आ गया मेरा बीटा अब तबियत कैसी है

रजनी मौसी : क्या हुआ इसे

रीता मौसी : हाँ दीदी क्या हुआ इसे आपने हमें बताया नहीं

अमित : अरे मेरी प्यारी प्यारी माताओ मुझे कुछ नहीं हुआ वो बस कल क मैच की वजह से थोड़ा दर्द था बस अब मैं बिलकुल ठीक हूँ

कामिनी ममी मेरे लिए नाश्ता लती है

कामिनी ममी : तभी तो सुबह सुबह इतनी उछाल कूद कर रहा है

करुणा दीदी : उछाल कूद तो करेगा hi बन्दर जो ठहरा

अमित : और बन्दर की बहिन यानि क बंदरिया

मेरी बात पर सब हसने लगे मगर करुणा दीदी ने मुँह बना लिया

करुणा दीदी : मुझे बंदरिया कहा अभी मज़ा चखती हूँ

नेहा दीदी : बस करो करुणा उसे नाश्ता करने दो हर वक़्त मस्ती करती रहती हो

मैं नाश्ता कर रहा था क नैना दीदी भी आ गयी और मुझे पीठ पर चिकोटी काट ली जिसकी वजह से मेरे मुँह से आह निकल गयी

नैना दीदी : डफ्फर तेरी वजह से मुझे दूसरी बार नहाना पड़ा और कपडे बदलने पड़े

रजनी मौसी : ये क्या हरकत है नैना आखिर तुम कब समझदार बनोगी

अमित : ाचा हुआ न दीदी वैसे तो घर पर नहाती hi नहीं हो और यहाँ दो दो बार नहाने को मिल रहा है

नैना दीदी : तुझे तो बाद में देख लुंगी

रीता मौसी : कितना ाचा लगता है बचो को एक साथ मस्ती करते देख कर हम भी बचपन में ऐसे hi करते थे कमलेश और अजय भैया क साथ

रजनी मौसी : कितने अचे दिन थे जब हम सब साथ हुआ करते थे और दामिनी और दिव्या तो सबकी नक् में डैम कर देती थी

रजनी मौसी की बात पर सबकी नज़रें रजनी मौसी की तरफ घूम गयी और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ

मैं ये नाम सुन कर मौसी की तरफ देखने लगा और वो जल्दी से अपने आंसू चिपटी हुई उठ कर चली गयी उनके पीछे पीछे गौरी ममी और रीता मौसी भी चली गयी मगर मेरे हाथ वहीँ रुक गए

आजतक मुझे मेरे माता पिता क बारे में किसी ने कुछ बताया नहीं था और आज दामिनी नाम सुन कर मुझे पता चल गया क ये ज़रूर मेरी माँ का नाम है . माँ का नाम पता चलते hi मेरे दिलो दिमाग में दर्द की लहर उठने लगी और मैं अपने आप में hi खोता चला गया तभी दीपिका ममी ने मुझे हिलाया

दीपिका ममी : क्या हुआ अमित तुम खाना क्यों नहीं खा रहे

मैं कुछ नहीं कह पाया और बस खाना छोड़ कर रजनी मौसी क पीछे चला गया मगर दरवाज़ा अंदर से बंद था अब मुझे अपने माता पिता क बारे में जानने की इच्छा होने लगी . हालाँकि माँ बाबा ने कभी अपने प्यार में कमी नहीं राखी थी और मैं जनता था क उन्होंने ने hi सबको मन कर रखा मुझे कुछ बताने से इसी लिए आजतक मैंने उनकी कोई तस्वीर तक नहीं देखि मगर अब मेरा सबर का बांध टूट रहा था और मेरी आँखों में पानी आने लगा था

मेरी हालत देख कर कामिनी ममी और दीपिका ममी दोनों मेरे पास आ गयी और मुझे सँभालने लगी

दीपिका ममी मुझे अपने कमरे में ले गयी और बीएड पर बिठा कर दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आयी

दीपिका ममी : क्या हुआ अमित तुम कुछ बोल क्यों नहीं रहे

अमित : मुझे आखिर मेरे माता पिता क बारे में क्यों नहीं बताया जाता आखिर क्यों सब मुझसे उनके बारे में हर बात छुपाते हैं

दीपिका ममी : क्या आज तक बड़ी दीदी और बड़े भैया ने क्या माता पिता क प्यार में कमी अनिमे दी है जो तुम ऐसी बातें मर रहे हो

अमित : उनके प्यार में तो कोई कमी हो hi नहीं सकती ममी जी पर क्या मुझे हक़ नहीं है अपने माता पिता क बारे में जानने का आखिर किस वजह से मुझे कोई उनके बारे में नहीं बताता. काम से काम आप hi बता दीजिये

दीपिका ममी : मैं मजबूर हूँ अमित बड़े भैया और गौरी दीदी ने सबको अपनी कसम दे राखी है और तुम क्या चाहते हो क हम उनकी कसम तोड़ दे ?

अमित : ठीक है अगर आप भी मुझे नहीं बताना चाहती तो आज क बाद आप मेरे कमरे में मत आना

इतना कह कर मैं गुस्से में उनके कमरे से निकल गया और सीधा घर से बहार निकल गया मुझे इस वक़्त बहुत गुस्सा आ रहा था और अंदर से मैं बहुत दुखी भी था मैं गुस्से में किधर जा रहा था मुझे कोई खबर नहीं थी और चलते चलते में जंगल की तरफ चला गया

मेरे मन अंदर से बहुत दुखी था और मुझे एकांत चाहिए था जहाँ बैठ कर मैं अपना मन हल्का कर सकू इसी लिए अपने hi ख्यालों में दुबे हुए मेरे कदम जंगल वाले झोंपड़े की तरफ चल पड़े और चलता चलता मैं झोंपड़े क पास पहुँच गया

जैसे hi मैं झोंपड़े क पास पहुँच मुझे एहसास हुआ जैसे कोई अंदर है . झोंपड़े क अंदर से सिसकिओन की आवाज़ आ रही थी . सिसकिओन की आवाज़ सुनते hi मेरे दिमाग सब कुछ भूल कर उस आवाज़ की तरफ हो गया

मैं सोचने लगा क यहाँ कौन हो सकता है यहाँ पर तो मां आया करते थे मीणा को लेकर और अब तो वो यहाँ से जा चुकी है . छोटे मां भी अब सुधर चुके हैं फिर कौन है. ये जानने क लिए मैं छिप कर अंदर देखने लगा

अंदर का नज़ारा देखते hi मुझे गुस्सा आ गया

‘ लगता है ये सुधरने वाले नहीं हैं इन्हे बहार की छूट मरने का चस्का लग चूका है’

अंदर कमलेश मां एक औरत को घोड़ी बना कर पीछे से उसकी छूट में लैंड पेल रहे थे . औरत ने सदी पहनी हुई थी शायद जल्दी जल्दी में दोनों ने ये प्रोग्राम बनाया था इसी लिए तो दोनों ने कपडे नहीं उतरे थे .

औरत का झुकी हुई थी जिसकी वजह से मुझे उसका चेहरा नहीं नज़र आ रहा था मगर उसका जिस्म काबिले गौर था

उसका जिस्म गदराया हुआ था और रंग गोरा था पेट हल्का सा था मगर छोटाड बड़े थे जिसे देख कर किसी का भी लैंड खड़ा हो जाये. धक्को क साथ उस औरत की सिसकिओन क इलावा चूड़ियों और पायल क छनकने की आवाज़ भी आ रही थी

औरत : कक्कक्स आअह्ह्ह आआह्ह्ह आह्हः सीसीसी. ोुह्ह्ह हम्म्म्म जल्दी करो मुझे देर हो रही है कक्कक्स आअह्ह्ह्हह कोई आ गया तो मैं बर्बाद हो जाउंगी कक्कक्स आह्ह्ह्ह और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ आआह्ह्ह्ह आह्हः आह्हः

छोटे मां : बस 2 मिनट और मेरा होने hi वाला है

मां फुल स्पीड में धक्के मर रहे थे ऐसा लग रहा था क उनका काम होने hi वाला है और उनका पानी निकल गया इसके साथ hi मां शांत पद गए जबकि वो औरत अपनी कमर हिला रही थी शायद उसका पानी नहीं निकला था . वो मां को और धक्के मरने को कह रही थी मगर मां अब पास्ट हो चुके थे

पानी निकलते hi मां ने जल्दी से लैंड पेण्ट क अंदर किया और अपने कपडे ठीक कर क बहार निकल गए मैं जल्दी से छिप गया

मां क जाते hi मैंने सोचा क्यों न इस औरत का चेहरा देखूं आखिर ये है कौन. जैसे hi मैंने अंदर झाँका तो वो औरत सीधे लेती हुई अपनी टंगे फैलाकर सदी को उठाये हुए अपनी छूट में तेज़ तेज़ उंगली कर रही थी और अपनी आग को ठंडा करने की कोशिश कर रही थी. मैंने जब उस औरत का चेहरा देखा तो मैं हैरान हो गया

ये तो पूजा भाभी थी जो हमारे गाओं में hi रहती थी 3 साल पहले hi ये ब्याह क हमारे गाओं आयी थी इसका पति विदेश में नौकरी करता था और यहाँ वो अपनी सास ससुर और ननद क साथ रहती थी

पूजा भाभी की उम्र लगभग 25 साल थी रंग गौरा था जिस्म गदराया हुआ था

36 क बूब्स 30 की कमर और 38 क चूतड़

पूजा भाभी देखने में बहुत खूबसूरत थी मुझे हैरानी हो रही थी क इतनी खूबसूरत औरत मां ने कैसे पता ली और पूजा भाभी को मां में क्या नज़र आया वो तो उम्र में उससे कितने बड़े हैं

मैं ये सब सोच hi रहा था क पूजा भाभी की तेज़ सिसकी से मैं अपनी सोच से बहार आया. पूजा का शायद पानी निकल गया था और उसका शरीर झटके ले रहा था .

मैंने सोचा क क्यों न कुछ तस्वीरें उतर लूँ मगर जब जेब में हाथ डाला तो पता चला साला मोबाइल तो घर में hi रह गया था .

पूजा भाभी का मस्त फिगर देख कर मेरा मन मचलने लगा था कितने दिनों से मैंने चुदाई नहीं की थी और ऐसा स्नेहरा मौका मैं हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसी लिए मैंने अंदर जाने का फैसला किया
 
अपडेट 38



मैं ये सब सोच hi रहा था क पूजा भाभी की तेज़ सिसकी से मैं अपनी सोच से बहार आया. पूजा का शायद पानी निकल गया था और उसका शरीर झटके ले रहा था .


मैंने सोचा क क्यों न कुछ तस्वीरें उतर लूँ मगर जब जेब में हाथ डाला तो पता चला साला मोबाइल तो घर में hi रह गया था .

पूजा भाभी का मस्त फिगर देख कर मेरा मन मचलने लगा था कितने दिनों से मैंने चुदाई नहीं की थी और ऐसा स्नेहरा मौका मैं हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसी लिए मैंने अंदर जाने का फैसला किया

अब आगे -

मैं जब अंदर घुसा तो पूजा भाभी अपने कपडे ठीक कर रही थी और मुझे देख कर घबरा गयी

अमित : भाभी इतनी जल्दी क्या है ज़रा मुझे भी तो थोड़ा प्यार करने दीजिये

पूजा भाभी : ये ये तुम क क क्या कह रहे हो

अमित : वही जो आप सुन रही हैं मैं जनता हूँ आपकी प्यास अभी बुझी नहीं जो मैं बुझा सकता हूँ

पूजा भाभी : ये तुम क्या कह रहे हो

अमित : मैंने सब कुछ अपनी आँखों से देख लिया है और अब मैं आपकी साडी प्यास बुझा दूंगा आप चिंता मत करो

पूजा भाभी : ( मन में ) अब मैं क्या करूँ इसने तो सब देख लिया अगर मैंने इसकी बात न मणि तो कहीं मुझे गाओं में बदनाम न करदे ऐसा हुआ तो मेरा पति मुझे घर से निकल देगा मगर मैं और लेट हुई तो मेरी सास को शक हो जायेगा

पूजा भाभी : रट हुए ) मैं तुम्हारे पाऊँ पड़ती हूँ किसी को कुछ मत बताना वर्ण मैं कहीं की नहीं रहूंगी मैं बर्बाद हो जाउंगी

पूजा भाभी को रट हुए देख कर मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा ये मैं क्या कर रहा था किसी की मज़बूरी का फायदा नहीं उठाना चाहिए . आंसू मेरी कमज़ोरी थे और पूजा भाभी क आंसुओं ने मेरा मन बदल दिया

अमित : आप रोइये मत भाभी प्लीज चुप हो जाइये मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा

पूजा भाभी : तुम जो कहोगे मैं करुँगी मगर अभी मुझे जाने दो मुझे पहले hi देर हो गयी है मेरी सास मुझ पर शक करेगी

अमित : आप जाइये भाभी मुझे आपके साथ कुछ नहीं करना किसी की मज़बूरी का फायदा उठाना मेरी आदत नहीं मगर आज क बाद अगर अपने कभी कमलेश मां से दोबारा मिलने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

पूजा भाभी : ( मन में ) तो ये कमलेश का भांजा है कितना फर्क है दोनों में एक ने मेरी मेरी मज़बूरी का फायदा उठाया तो दूसरा हाथ ए मौके को ऐसे जाने दे रहा है

पूजा भाभी : मैं कभी उससे नहीं मिलूंगी मैं किसी से भी नहीं मिलूंगी तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया

इतना कह कर पूजा भाभी भाग गयी और मैं खुद को गलियां देने लगा क किसी क आंसू देख कर मैं क्यों पिघल जाता हूँ खामखा हाथ आया मौका गवा दिया

मैं वहीँ बैठ कर आज जो कुछ हुआ उसके बारे में सोचता रहा तभी मुझे राजू की आवाज़ सुनाई दी तो मैं ख्यालों की दुनिया से बहार आया

राजू : तू यहाँ बैठा है वहां तेरे घर वाले तुझे ढून्ढ रहे हैं

अमित : क्या बात है? और तुझे कैसे पता क मैं यहाँ हूँ

राजू : सेल तेरा यार हूँ मुझे क्या नहीं पता होगा तू कहाँ हो सकता है और जल्दी चल तुम्हारी माँ बहुत परेशां है और रो रही है

राजू की बात सुनकर मेरा सारा गुस्सा उतर गया और मुझे माँ की चिंता होने लगी

अमित : चल जल्दी

हम दोनों घर की तरफ निकल पड़े और जब मैं घर पहुंचा तो सभी आँगन में बैठे थे गौरी ममी बैठ कर रो रही थी और रजनी मौसी रीता मौसी उन्हें संभल रही थी. मुझे देखते hi गौरी ममी भाग कर मेरे गले लग गयी और आंसू बहते हुए कहने लगी

गौरी ममी : कहाँ चला गया था ? तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं मेरा क्यों करता है बार बार ऐसे ? क्या मैंने कभी तुझे माँ की कमी महसूस होने दी है जो तू ऐसे करता है मेरे साथ

अमित : नहीं माँ ऐसा मत कहो मैं तो किस्मत वाला हूँ क मुझे आप जैसी माँ मिली

तभी रजनी मौसी और रीता मौसी भी पास आ कर हम दोनों को सँभालने लगे

मैंने क्या क्या सोचा था अपने माता पिता क बारे में जानकारी निकलने क लिए मगर सब ख़तम. घर में ऐसा माहौल देख कर मुझे अपनी इस हरकत पर गुस्सा आने लगा

सबका मूड मेरी वजह से ख़राब हो गया था और अब मैं खुद को कसूरवार समझ रहा था मेरी बहने इतनी देर बाद आयी थी और मेरे साथ कितनी खुश थी सुबह अब उनके चहरे पर मायूसी थी

कुछ देर सब ऐसे hi बैठे रहे फिर कामिनी ममी ने सबको खाना खिलाया मुझे दीपिका ममी नज़र नहीं आ रही थी और न hi दिव्या मौसी

जब सब खाना खा कर आराम से बैठे थे तो मैं उठ कर अपनी बहनो क पास चला गया जो ऊपर क कमरे में बैठी हुई थी

जब मैं कमरे में घुसा तो मुझे देख कर नैना दीदी करुणा दीदी ने मुँह फेर लिया मैं समझ गया दोनों मुझसे नाराज़ हैं

अमित : लगता है सब मुझसे नाराज़ हैं

नेहा दीदी : कैसी बात करता है भला मैं तुझसे नाराज़ हो सकती हूँ

अमित : आप तो मेरी प्यारी दीदी हैं मैं जनता हूँ आप मुझसे नाराज़ नहीं हो सकती

मगर लगता है नैना और करुणा दीदी मुझसे नाराज़ हैं . मैंने तो सोचा था आज सबको पार्टी दूंगा और अपनी बुलेट पर घुमा कर लाऊंगा . चलो रहने दीजिये अब सिर्फ हम दोनों hi पार्टी करेंगे

मेरी बात सुन कर नेहा दीदी मुस्कुराने लगी मगर नैना और करुणा दीदी एक hi झटके में मेरे पास आ गयी

नैना दीदी: ऐसे कैसे हमें पार्टी नहीं देगा सबसे पहले मैं बैठूंगी बुलेट पर

करुणा दीदी : मैं तो जलेबियाँ खाउंगी और बुलेट पर पूरा गाओं घूमूंगी

नेहा दीदी हसने लगी तो नैना और करुणा दीदी उन्हें देखने लगी

नैना दीदी : तुम क्यों है रही हो

नेहा दीदी : हसीं नहीं तो क्या करूँ वो तुम दोनों को उल्लू बना रहा था और तुम पार्टी क नाम पर सब भूल गयी

नेहा दीदी की बात सुनकर नैना और करुणा दीदी बात समझ गयी और मुझे मरने डोडी मगर मैं पहले hi निकल गया और अपने कमरे में घुस गया जहाँ दोनों ने मुझे पकड़ लिया और मुझे धक्का दे कर बीएड पर गिरा दिया

नैना दीदी : हमें उल्लू बनता है बच्चू अभी तुझे बताती हूँ

मुझे गिरा कर नैना दीदी मेरे ऊपर बैठ कर मुझे गुड़ गुड़ी करने लगी और करुणा दीदी ने मेरे हाथ पकड़ लिए

हालाँकि मेरी ताकत दोनों से कहीं ज्यादा थी मगर दोनों क साथ यूँ हंसी मज़ाक करने बड़ा मज़ा आ रहा था

अमित : है है है है है बस करो दीदी है है है मैं पार्टी दूंगा सबको दूंगा

नैना दीदी मेरे पेट पर बैठी थी मेरे लगातार हिलने से वो खिसकते हुए मेरे लैंड पर आ गयी थी और अब उनकी छूट की रगड़ से मेरा लैंड जो पूजा भाभी की चुदाई से पहले hi आह भर कर रह गया था फिर से खड़ा होने लगा

नैना दीदी लगातार मुझे गुड़ गुड़ी करती जा रही थी उन्हें इस बात का ध्यान नहीं था क वो मेरे लैंड पर बैठी हैं मगर जैसे hi मेरे लैंड में तनाव आया उन्हें भी अपनी छूट पर मेरे लैंड का एहसास हो गया

नैना दीदी कॉलेज में पड़ती थी और अपनी फ्रेंड्स क साथ खूब मस्ती करती थी मगर उनका कोई बर्फ नहीं था और आज उन्हें एक hi दिन में दूसरी बार अपने जिस्म पर मर्द क टच का एहसास हो रहा था जो उनको अलग hi एहसास करवा रहा था

नैना दीदी इस एहसास को न चाहते हुए भी पसंद करने लगी और उनके अंदर की काम वासना को आज हवा मिलने लगी . नैना दीदी अपनी कमर को हिला कर अपनी छूट को और ज़्यादा लैंड पर दबाकर रगड़ रही थी जिससे उनकी छूट गरम होने लगी

मैं नैना दीदी को अपने ऊपर से हटाना चाहता था कहीं मेरे लैंड क तनाव का पता चलते hi वो मुझ पर गुस्सा न हो जाएँ मगर मुझे क्या पता था क नैना दीदी खुद hi अपनी छूट मेरे लैंड पर रगड़ कर मज़ा ले रही हैं

करुणा दीदी को कुछ पता नहीं चल रहा था क क्या हो रहा है वो क्या बोल रही थी मुझ कुछ सुनाई नहीं दे रहा था मेरा सारा ध्यान इस वक़्त मेरे लैंड की तरफ था

नैना दीदी बिना कुछ बोले मुझे अपनी दोनों टैंगो क बीच लिए तेज़ी से अपनी कमर हिला रही थी और मेरे पेट में अपने हाथ घुमा रही थी हालाँकि ये सिर्फ दिखावा था क्यूंकि अब मुझे कोई गुड़ गुड़ी नहीं हो रही थी

मुझसे अपने लैंड की अकड़न बर्दाश्त नहीं हो रही थी मैंने करुणा और नैना दीदी को मुझे छोड़ने को कहा मगर वो नहीं मणि

करुणा दीदी : अब आया है हमारे हाथ अब तो तुझे आसानी से नहीं छोड़ेंगे

नैना दीदी : बिलकुल नहीं कक्कक्स छोड़ेंगे ममम

नैना दीदी की छूट का दबाव मेरे लैंड पर बढ़ता जा रहा था और उनकी कमर भी तेज़ी से आगे पीछे हिल रही थी जिसे शायद करुणा दीदी ने नोटिस नहीं किया था और मैं मन में सोच रहा था क नैना दीदी ये सब क्या कर रही हैं

5 मिनट्स में नैना दीदी क जिस्म में हलके हलके झटके लगे मेरे लैंड पर उनकी छूट एक जगह रुक कर पूरी दबाव बनाने लगी और वो मेरी छाती पर लुढ़क गयी

मुझे एहसास हो गया क ज़रूर नैना दीदी ने छूट को लैंड पर रगड़ कर अपना पानी निकल लिया है अब वो मेरे ऊपर गिर कर खुद को सँभालने लगी

करुणा दीदी : आपको क्या हुआ दीदी आपकी तबियत तो ठीक है

नैना दीदी : हहम्म्मम्म

करुणा दीदी : आपका चेहरा क्यों लाल है और कितना पसीना आ रहा है मैं पानी लती हूँ

इतना कह कर करुणा दीदी जल्दी से पानी लेने चली गयी और नैना दीदी खुद को सँभालते हुए उठी और बिना मेरी तरफ देखे जल्दी से कमरे से निकल गयी . मैं समझ गया क वो शर्मा रही हैं .

दीदी क जाने क बाद मैं उठा और जब मेरी नज़र मेरे लैंड पर गयी तो वो अभी भी खड़ा था और उसके उभर वाली जगह पर हल्का से गीला पैन दिखाई दे रहा था

‘ज़रूर ये नैना दीदी क पानी का डेग है ‘

इसका मतलब था क नैना दीदी की सलवार भी गीली हो गयी होगी

मैं खुद को ठीक कर क फिर से अपनी बहनो क पास गया तो नैना दीदी कमरे में नहीं थी करुणा दीदी से पता चला क वो बाथरूम गयी हैं मतलब अपने कपडे चेंज करने गयी होंगी

अमित : बताओ दीदी क्या पार्टी चाहिए आपको

करुणा दीदी : पहले तो अपने बुलेट पर एक चक्कर लगवा फिर कुछ बढ़िए सी कोई खाने वाली चीज़ लेकर आ हमारे लिए

अमित : बस इतनी सी बात बताओ क्या खाओगी

करुणा दीदी : यहाँ गाओं में क्या क्या मिलेगा

अमित : आप ने जो खाना है आप वो बताओ अगर यहाँ से न मिला तो हम टाउन से ले आएंगे कौन सा दूर है

करुणा दीदी : हाँ ये आईडिया ठीक है

नेहा दीदी : ये क्या बात हुई करुणा बचपना छोडो टाउन यहाँ से कितना दूर है आधा घंटा काम से काम एक तरफ का लग जायेगा और आने जाने में hi इतना वक़्त लग जायेगा ऐसे तो रत हो जाएगी

अमित : दीदी आप चिंता मत करें मैं 15/20 मिनट्स में टाउन पहुँच जाता हूँ बुलेट पर

करुणा दीदी : एक काम करते हैं हम दोनों तेरी बुलेट पर चलते हैं वही जाकर जो ाचा होगा वो ले लेंगे और मुझे तेरी बुलेट पर राइड भी मिल जाएगी

अमित : हाँ ये आईडिया तो सही है

करुणा दीदी : आखिर स्मार्ट लोगों क स्मार्ट दिमाग का आईडिया है

नैना दीदी अभी तक नहीं आयी थी और इंतज़ार करते तो हम लेट हो जाते इस लिए मैंने करुणा दीदी से कहा की वो नैना दीदी से उनकी पसंद बाथरूम क बहार से hi पूछ ले . करुणा दीदी नैना दीदी से पूछने चली गयी

अमित : दीदी आपको क्या पसंद है ? क्या लॉन अपने लिए?

नेहा दीदी : कुछ भी ले आना जो तुम्हे ाचा लगे

नेहा दीदी की एहि सिंपल और शांत नेचर मुझे बहुत पसंद थी बिलकुल निधि दीदी की तरह थी

अमित : ऐसे नहीं अगर आप मुझे नहीं बताएंगी तो मैं आपसे नाराज़ हो जाऊंगा

नेहा दीदी : ठीक है बाबा मेरे लिए तुम टिक्की ले आना

अमित : बस टिक्की

नेहा दीदी : हाँ बस रत को खाना भी तो खाना है

नेहा दीदी से पूछ कर मैं निचे आ गया और बुलेट बहार निकलने लगा

मुझे बुलेट बहार निकलता देख कामिनी ममी मेरे पास आ कर पूछने लगी क मैं कहाँ जा रहा हूँ

मैंने बता दिया क करुणा दीदी क साथ खाने क लिए कुछ लेने जा रहा हूँ . इतने में करुणा दीदी आ गयी और मैं उनको लेकर टाउन की तरफ निकल गया

करुणा दीदी : लगता है तुझे बुलेट चलनी नहीं अति जो बैलगाड़ी की तरह चला था है

अमित : ाचा तो मैं बैलगाड़ी चला रहा हूँ तो ये लो

पहले मैं आराम से बाइक चला रहा था जिससे करुणा दीदी ने मज़ाक किया तो मैंने भी सोच लिया इनको दिखता हूँ स्पीड और एक डैम से बाइक की स्पीड तेज़ करदी . स्पीड तेज़ होते hi अब दीदी दरबे लगी और मुझे कास क पकड़ लिया . मगर मुझे कुछ कहा नहीं और मैं बाइक की रफ़्तार और बढ़ाता गया .

गाओं की सड़कों की हालत तो आप जानते hi होंगे और हमारे गाओं की सड़के भी कुछ अछि नहीं थी कई जगह पर गद्दे थे . तेज़ रफ़्तार में जाते हुए ऐसे hi एक गद्दे में बाइक तेज़ रफ़्तार से निकली तो हम दोनों को झटका लगा मैं तो बाइक चला रहा था मैं तो तैयार था मगर करुणा दीदी तैयार नहीं थी जिससे वो अपनी सीट से ऊपर उछाल गयी और उनका हाथ मेरे पेट से खिसक कर मेरे लैंड पर आ गया

करुणा दीदी शायद झटके से दर गयी थी वो समझी क वो गिर जाएँगी इस लिए उन्होंने मुझे पुरे जोर से पकड़ लिया. करुणा दीदी और मैं दोनों क मुँह से एक साथ आवाज़ निकली

करुणा दीदी : मैं गईइइइइइ

अमित : आआआआहहहहह

करुणा दीदी गिरने क दर से चिल्लाई थी और मैं अपने लैंड पर करुणा दीदी की मजबूत पकड़ से उन्होंने ज़ोर से मेरा लैंड मसल दिया था जिससे मुझे दर्द हुआ और मैंने ब्रेक लगा दी

करुणा दीदी : ऐसे बाइक चलते हैं क्या अभी मैं गिर जाती , और तू किस लिए चीखा तुझे क्या हुआ

अमित : आपने मुझे दर्द दिया इस लिए मैं चीखा

करुणा दीदी : मैंने क्या किया

अमित : पहले अपना हाथ हटाओ

करुणा दीदी ने जब गौर किया तो उनके हाथ में मेरा लैंड था जिसको उन्होंने ज़ोर से पकड़ा हुआ था अपनी भूल का एहसास होते hi उन्होंने तुरंत अपना हाथ हटा लिया और मैंने अपने लैंड को सहलाकर थोड़ा रिलैक्स किया

दीदी खामोश हो गयी थी शायद अब उनको शर्म आ रही थी . मैंने भी बात को और नहीं बढ़ाया और हम टाउन पहुँच गए जहाँ पर करुणा दीदी की पसंद से ह्यूमेन पेस्ट्रीज चाऊमीन और जलेबियाँ ली मैंने नेहा दीदी क लिए टिक्की अलग से पैक करवा ली और आते आते हलवाई से हलवा भी ले लिया जो बहुत मैश हूर था एरिया में

करुणा दीदी अब ज्यादा बात नहीं कर रही थी मुझे लगा शायद वो अब उस बात क लिए शर्मिंदा हैं इस लिए उनका मन हल्का करने क लिए मैंने बात छेड़ी

अमित : दीदी कैसी लगी मेरी बुलेट

करुणा दीदी : अछि है

अमित : बस अछि है , अरे पूरे गाओं में और किसी क पास नहीं है ये

करुणा दीदी : मुझे तो तू गिराने वाला था मैं क्या कहूं इसके बारे में

अमित : आप कहाँ गिरने वाली थी आपने तो कास क मेरा पकड़ा था मम मतलब मुझे पकड़ा था

( ये क्या मेरी ज़ुबान क्यों फिसल रही है )

करुणा दीदी : बस बस अब बातें न बना एक बार गलती हो गयी तो अब क्या माफ़ी मंगाएगा मुझसे

अमित : अरे दीदी आप तो गुस्सा कर गयी मैं तो ऐसे hi बात कर रहा था वैसे मुझे तो बुरा नहीं लगा था बल्कि ाचा hi लगा था

करुणा दीदी : तभी चीख मरी थी तुमने

अमित : अब आप ने एक डैम से मेरे नाज़ुक से हिस्से को ज़ोर से मसल दिया चीख तो निकलेगी hi

करुणा दीदी : तुझे शर्म नहीं अति ऐसी बात करते हुए

अमित : सॉरी दीदी मगर मैं क्या करूँ आप ने hi तो ज़ोर से पकड़ लिया था

करुणा दीदी : अब तू मर खायेगा मुझसे

ऐसे hi बातें करते हुए हम घर आ गए . करुणा दीदी से डबल मीनिंग बात करते हुए मुझे अलग hi मज़ा आ रहा था शायद ये मज़ा उन्हें सताने का था या फिर अपने लैंड क बारे में बात कर क मुझे मज़ा आ रहा था ये मुझे पता नहीं था

खैर हम घर आ गए और सबको खाने का सामान दिया नैना दीदी ने पेस्ट्रीज मंगवाई थी जिसे देख कर वो खुश hi गयी नेहा दीदी को जब मैंने अलग से टिक्की दी तो वो भी खुश हो गयी और मुझे थैंक्स कहा

दीपिका ममी मेरी बात से नाराज़ थी और अब तक अपने कमरे से बहार नहीं अति थी उन्होंने तबियत ख़राब का बहाना लगाया था मगर मैं जनता था वो क्यों बहार नहीं आ रही

मुझे भी अपनी गलती का एहसास हो गया था आखिर इस सब में उनकी क्या गलती थी मैं बिना वजह hi उन पर गुस्सा हो गया था जब की वो मेरा कितना ख्याल रखती थी और सच बात तो ये थी क वो मुझे अपना पति मैंने लगी थी.

मैं उन्हें मानाने क लिए उनके कमरे में गया . कमरे में जब मैं गया तो देखा वो बिस्तर पर करवट क बल लेती हुई हैं उनकी पीठ मेरी तरफ थी . मैं बिना कोई आवाज़ किये उनके पास गया और उनके एक झटके से पलट कर सीधा कर दिया .

दीपिका ममी का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था और रो रो कर उनकी आँखे लाल हो चुकी थी मुझसे उनका ये हल देखा नहीं गया और मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया और उनके आंसू पोछने लगा

अमित : ये क्या है ममी जी मैंने तो गुस्से में आपको कुछ भी कह दिया और आप ने ये हालत बना ली अपनी . ऐसा कोई करता है क्या

ममी ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया बस उनके मग से सिसकियाँ निकल रही थी

अमित: माफ़ कर दीजिये मुझे मैं कभी दोबारा ऐसी गलती नहीं करूँगा. आप चाहे तो मुझे सजा दो आप जो भी सजा डौगी मुझे सब मंज़ूर है प्लीज आप चुप हो जाइये

ममी अभी भी कोई जवाब माहि दे रही थी . मैं बीएड से उठा और अपने कान पकड़ कर उठक बैठक लगाने लगा अभी 10/12 बैठक hi लगायी थी की ममी ने खड़े होकर मुझे गले लगा लिया

दीपिका ममी : मैं मजबूर हूँ अमित मैं दीदी की कसम नहीं तोड़ सकती तू चाहे तो मुझसे मेरी जान मांग ले मैं वो भी दे दूंगी मगर मैं मजबूर हूँ मुझसे गुस्सा न करो मैं तुम्हे अपना सब कुछ मानती हूँ मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती , मुझे तुम्हारी नाराज़गी बर्दाश्त नहीं होती जब से मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ मैंने तुम्हारे मां को भी इस जिस्म को हाथ नहीं लगाने दिया प्लीज तुम मुझसे नाराज़ न हो मैं मर जाउंगी

ममी रोये जा रही थी और उनकी बातें सुन कर मुझे एहसास हो रहा था क वो मुझसे कितना प्यार करती हैं और मैं गुस्से में उन्हें क्या कह गया . मेरी बातों से उनको बहुत दुःख पहुंचा था

अमित : मैं ऐसी गलती दोबारा कभी नहीं करूँगा कभी नहीं मुझे माफ़ कार्डो

इतना कह कर मैंने ममी का चेहरा हाथो में लिया और उनके आंसू पोछे . ममी मेरी आँखों में hi देख रही थी मैंने अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिए और उनके होंठ चूमने लगा ममी भी मेरा साथ देने लगी . हमने 2 मिनट्स में hi किश ख़तम कर दी क्यूंकि कोई भी कमरे में आ सकता था

अमित : जाइये अपनी हालत ठीक कीजिये मुझे वही हस्ती खेलती मुस्कुराती हुई अपनी दीपिका ममी चाहिए कोई बंदरिया माहि चाहिए

दीपिका ममी : क्या मुझे बंदरिया बोलता है अभी बताती हूँ तुझे

मैं जल्दी से कमरे से बहार भाग गया और ममी भी अपनी हालत ठीक कर क बहार आ गयी अब उनके चहरे पर फिरसे रौनक आ गयी थी .

मैंने जो टाउन से हलवा लिया था वो तीनों मणियों को बहुत पसंद था और सबको खुश करने क लिए hi मैं लेकर आया था फिर हम सब ने मिलकर जो भी हम लेकर ए थे वो खाया और हंसी मज़ाक करते हुए माहौल को हल्का कर दिया

मां भी घर आ गए थे पहले तो मेरी आज की हरकत की वजह से वो मुझसे नाराज़ हुए मगर जब उन्होंने देखा क घर में सब खुश हैं तो उन्होंने भी मुझे कुछ नहीं कहा
 
अपडेट 39



मैं जल्दी से कमरे से बहार भाग गया और ममी भी अपनी हालत ठीक कर क बहार आ गयी अब उनके चहरे पर फिरसे रौनक आ गयी थी .


मैंने जो टाउन से हलवा लिया था वो तीनों मणियों को बहुत पसंद था और सबको खुश करने क लिए hi मैं लेकर आया था फिर हम सब ने मिलकर जो भी हम लेकर ए थे वो खाया और हंसी मज़ाक करते हुए माहौल को हल्का कर दिया

मां भी घर आ गए थे पहले तो मेरी आज की हरकत की वजह से वो मुझसे नाराज़ हुए मगर जब उन्होंने देखा क घर में सब खुश हैं तो उन्होंने भी मुझे कुछ नहीं कहा

अब आगे -

खाने कहते वक़्त मुझे दिव्या मौसी और राधा का ख्याल आया और मैंने पूछ लिया

अमित : माँ दिव्या मौसी नज़र नहीं आ रहे कहीं ?

गौरी ममी : बीटा उनके घर में कोई नहीं हैं न और शहर में चोरियां कितनी होती हैं इस लिए वो आज वापिस चली गयी

अमित : आपने मुझे बताया नहीं मैं उनसे मिल लेता

रजनी मौसी : बीटा तुम कल इतना थक गए थे और तुम्हे दर्द भी था तो दिव्या ने कहा की तुझे आराम करने दे बस इस लिए तुम्हे नहीं जगाया

रजनी मौसी : ( मन में ) बीटा अब तुझे कैसे बताऊँ वो तुझे देखना भी पसंद नहीं करती इसी लिए जल्दी चली गयी

थोड़ी इधर उधर की बातों क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए. मैं कमरे में बीएड पर लेता था क कामिनी ममी दूध का गिलास लेकर आ गयी

कामिनी ममी : अमित ये दूध पिलो इसमें हल्दी डाली है तुम्हे आराम मिलेगा

मैंने दूध क गिलास क साथ कामिनी ममी का हाथ पकड़ लिया

अमित : दूध तो मुझे पीना है मगर ये वाला नहीं

कामिनी ममी मेरी बात का मतलब समझ कर शर्मा गयी. मैंने गिलास साइड में रखा और कामिनी ममी को पास खींच कर उनके चहरे को दोनों हाथो में पकड़ कर अपने होंठ उनके होंठों क पास ले जाने लगा

कामिनी ममी : शर्मा कर ) सब घर में हैं अमित कोई आ जायेगा

मैं अपने होंठों को कामिनी ममी क होंठों पास ले जाकर रुक गया

अमित : क्या करूँ ममी जी इतने दिनों से मैंने आपसे प्यार नहीं किया और आज मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा

इसके बाद मैंने दीपिका ममी क होंठ चूमने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी बस 2 मिनट्स किश करने क बाद मैंने पीछे हैट गया . कामिनी ममी अभी भी शर्मा रही थी और उनका चेहरा लाल हो गया था

अमित : ममी जी जल्दी कुछ कीजिये ताकि मैं जी भर क आपको प्यार कर सकूँ

कामिनी ममी : मैं खुद कब से तड़प रही हूँ तुम्हारे लिए. अब तू दूध पि और सो जा

इतना कह कर कामिनी ममी वापिस चली गयी . मैं जनता था कामिनी ममी दीपिका ममी से ज्यादा प्यासी हैं , बरसों की प्यास भला इतनी जल्दी कैसे बुझ सकती है इसी लिए मैंने उन्हें इतने रोमांटिक तरीके से बात की ताकि उनको ाचा लगे

कामिनी ममी क जाने क बाद मैं दूध पि कर अभी लेता hi था क मेरे कमरे का दरवाज़ा फिर से खुला और दीपिका ममी कमरे में आ गयी. मैं कामिनी ममी को देख कर खुश हो गया मगर वो कमरे में आ कर मुँह फुला कर कड़ी हो गयी

अमित : अरे अरे ममी जी आपके हसीं चहरे पर ये गुस्सा बिलकुल ाचा नहीं लगता

दीपिका ममी : मुझसे बात मत करो तुम मैं तुमसे बहुत नाराज़ हूँ

अमित : मगर मैंने तो आपकी नाराज़गी दूर कर दी थी न

दीपिका ममी : ऐसे कैसे दूर करदी , पता है तुमने आज मेरा कितना दिल दुखाया है

मैं समझ गया क ममी जान बुझ कर ऐसा नाटक कर रही हैं

अमित : तो फिर बताइये कैसे दूर होगी आपकी नाराज़गी

दीपिका ममी : मैं क्या बताऊँ तुमने hi गलती है क तुम hi सोचो

मैंने दीपिका ममी को पीछे से धीरे धीरे पकड़ लिया और अपने दोनों हाथ उनके पेट पर कास कर उनको अपने साथ चिपका लिया . मैंने अपने होंठ दीपिका ममी की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और उनकी गर्दन पर छोटे छोटे किश करते हुए उनके कान की लो को होंठो से पकड़ लिया और चूसने लगा . दीपिका ममी मस्त होने लगी और उनकी आँखें बंद हो गयी और उनके मग से सिसकी निकल गयी

मैंने दीपिका मौसी को कंधो से पकड़ कर अपनी तरफ पलट दिया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख कर किश करने लगा दीपिका ममी भी पूरे जोश क साथ मेरा साथ देने लगी. 5 मिनट्स ममी क रास भरे होंठो का रास चूसने क बाद मैंने उनके होंठो को आज़ाद कर दिया.

ममी का चेहरा लाल सुराख़ हो गया था उनकी आँखें बंद थी और सांसे तेज़ चल रही थी

अमित : अब तो नाराज़ नहीं हो न आप

दीपिका ममी मेरी बात सुन कर होश में आयी

दीपिका ममी : इतने से मेरा गुस्सा काम नहीं होगा

अमित : तो आइये अभी आपकी साडी नाराज़गी दूर कर देता हूँ

मेरी बात का मतलब समझ कर ममी शर्मा गयी

दीपिका ममी : नहीं अभी नहीं मैं खुद बताउंगी तुम्हे . अभी तुम आराम से सो जाओ

दीपिका ममी इतना कह कर वापिस जाने लगी तो मैंने उन्हें रोक लिया

अमित : ममी जी आपने मुझसे एक बात छुपाई है

दीपिका ममी मेरी बात सुन कर हैरान होकर मुझे देखने लगी

अमित : आप ने मुझे अभी तक ये नहीं बताया क माँ किस वजह से उस दिन रो रही थी

दीपिका ममी : किस दिन की बात कर रहे हो तुम

अमित : जिस दिन माँ बाबा क साथ फंक्शन पर गयी थी मैं उस दिन की बात कर रहा हूँ

दीपिका ममी : उस दिन गॉड भरे क दिन जब दीदी ने बहु की गॉड में अपना गिफ्ट रखना चाहा तो किसी ने ये कह कर उन्हें रोक दिया था क तुम तो एक बाँझ हो अगर तुमने गर्भवती की गॉड में कुछ रखा तो उसका बचा गिर सकता है बस फिर क्या था सब ने दीदी को मन कर दिया और कई तरह की बातें वहां होने लगी जिसकी वजह से दीदी क दिल को बहुत धक्का लगा और वो सारा दिन रोटी रही पता नहीं रत भी सोई होंगी या नहीं . उनके दिल में इस बात का गम हमेशा रहता हैं हालाँकि वो तुम्हे हमेशा अपने hi बेटे की तरह मानती हैं मगर फिर भी कहीं न कहीं उनके अंदर इस बात का गम है वो मगर वो ज़ाहिर नहीं करती

अमित : कितने घटिया किस्म क लोग हैं जो माँ पर उंगली उठाते हैं . उनके जैसी देवी पर कीचड़ उछलने वाले लोगो को तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी

दीपिका ममी : अब मैं चलूँ ?

अमित : एक बात और

दीपिका ममी : ?????

अमित : आपने कमलेश मां को खुद से दूर कर रखा है और वो बहार मुँह मरते फिर रहे हैं

फिर मैंने आज जो देखा था वो सब बता दिया जिसे सुन कर दीपिका ममी क चहरे पर कोई रिएक्शन नहीं था

अमित : अगर आप उन्हें पास नहीं आने देंगी तो वो फिर से बहार किसी न किसी औरत क पीछे लगे रहेंगे और सब उजाड़ देंगे

दीपिका ममी : उसकी तू चिंता न कर तुम्हारे मां को सिर्फ बचा चाहिए और वो मैं उसे दे दूंगी रही बात घर जायदाद की तो तेरे मां को मैंने मन लिया है क वो अपना हिस्सा हमारे बचे क नाम कर देंगे . अब वो जहाँ जाते हैं जाये जिससे जो करना है करें मुझे कोई परवाह नहीं मगर मैं अब सिर्फ तेरी हूँ और किसी को अपना जिस्म मैं चुने. नहीं दूंगी

अमित : मगर ममी

दीपिका ममी: कोई अगर मगर नहीं मैं अपना फैसला नहीं बदलने वाली और तुम भी मुझे कुछ मत कहना . रत बहुत हो गयी अब सो जाओ

इतना कह कर दीपिका ममी ने मेरे होंठो पर एक किश की और चली गयी. ममी क जाने क बाद मैं उनके बारे में सोचता रहा. दीपिका ममी मुझे अपना सब कुछ मन चुकी हैं और बिलकुल पत्नी की तरह मेरी हर बात का ख्याल रखती हैं कितनी अछि कितनी प्यारी हैं वो. मैंने आज उनका दिल दुख कर ाचा नहीं किया अब मैं उन्हें और भी ज्यादा प्यार दूंगा ताकि उन्हें पति क प्यार की कमी न महसूस हो

यूँ hi सोचते हुए मैं नींद की वादियों में खो गया

अगली सुबह मैं उठ कर अखाड़े गया तो वह सब ने बड़ी गर्म जोशी से मेरा स्वागत किया उस्ताद जी तो बार बार मेरी तारीफ़ करते हुए मुझे गले लगा रहे थे गाओं में हर कोई मुझे इज़्ज़त से मिल रहा था जिसकी वजह से मैं भी अंदर से बड़ा खुश था

अखाड़े से जब मैं घर आया तो सब नाश्ता कर रहे थे . खाना कहते हुए रजनी मौसी ने वापिस जाने की बात करदी मगर सब ने उन्हें और रुकने को कहा और 2 दिन और रुकने क लिए मन गयी

खाना खा कर मैं अपने कमरे में गया तो पीछे पीछे नैना दीदी और करुणा दीदी भी आ गयी

नैना दीदी : ोये दफर ये क्या बात है कल तू करुणा को बुलेट पर घुमा लाया और मुझे पुछा भी नहीं

अमित : आप खुद hi बाथरूम में घुस गयी थी तो मैं क्या करता , मैंने तो सोचा था आपको लेकर जाऊंगा मगर आप तो वहीँ जैम कर बैठ गयी इसी लिए मैं करुणा दीदी को लेकर चला गया

नैना दीदी : ठीक है ठीक है मगर आज मुझे भी बुलेट पर घूमना है अब जल्दी से तैयार हो जा और मुझे भी सैर करवा क लाओ

करुणा दीदी : और मुझे भी

अमित : आप ने तो कल सैर कर ली न तो आज क्यों

करुणा दीदी : आज फिर से अगर बुलेट पर बैठ जाउंगी तो क्या तेरी बाइक का नुकसान हो जायेगा

अमित : बुलेट का हो न हो मेरा ज़रूर हो जायेगा कल तो बड़ी मुश्किल जान बची थी क्या पता अगली बार आप क्या कार्डो

करुणा दीदी समझ गयी क मैं कल उनके द्वारा लैंड को दबाये जाने की बात कर रहा हूँ . मेरी बात सुन कर पहले वो शर्मा गयी और अबले hi पल मुझे मरने डोडी

करुणा दीदी : यौऊ. आज मैं तेरी गर्दन दबा दूँगी

इतना कह कर उन्होंने मेरा गाला पकड़ लिया .

अमित : अरे दीदी छोडो छोडो आए इसमें आपको मज़ा नहीं आएगा

मैं अपनी गर्दन छुड़ा कर भागने लगा तो नैना दीदी मेरे आगे आ गयी मैं उनसे टकरा गया और हम दोनों नीचे गिर पड़े .

अब नैना दीदी पीठ क बल फर्श पर गिरी थी और उनके ऊपर मैं था मेरा एक हाथ उनके एक चूचे पर था और डाब गया था .

पहले तो हम दोनों को इसका एहसास नहीं हुआ मगर जब होश आया तो उन्होंने जल्दी से मुझे अपने ऊपर से साइड में धक्का दे दिया

नैना दीदी : स्टुपिड दफर सांड कहीं का कितना भरी है तू मेरी जान लेगा क्या

अमित : स स सॉरी दीदी

करुणा दीदी मेरे कान खींचने लगी

करुणा दीदी : अब बोल क्या कह रहा था मज़ा नहीं आएगा ? अब देख बच्चू कितना मज़ा आ रहा है

अमित : सॉरी दीदी माफ़ कार्डो मेरी अछि दीदी मेरी प्यारी दीदी मैं आपको फिर से घुमा कर लाऊंगा अपनी बुलेट पर

तब कहीं करुणा दीदी में मेरे कण को छोड़ा फिर वो दोनों नीचे चली गयी और मैं भी जल्दी से तैयार हो कर नीचे चला गया

अमित : चलो दीदी जल्दी करो

गौरी ममी : कहाँ जा रहे हो तुम दोनों

नैना दीदी : ममी जी कल करुणा ने तो इसकी बुलेट की सवारी कर ली आज मेरी बरी है

दीपिका ममी : अछि बात है अमित क साथ तुम भी घूम कर आ जाओ और फिर नेहा को भी ले कर जाना

नेहा दीदी : अरे नहीं ममी जी मुझे ज़रूरत नहीं

अमित : ऐसे कैसे ज़रूरत नहीं क्या आप खुश नहीं हैं क अपने भाई की बुलेट देख कर ? अगर आप नहीं गयी तो मैं आपसे नाराज़ हो जाऊंगा

रीता मौसी : नेहा बेटी अपने भाई की इतनी स बात भी नहीं मानेगी

नेहा दीदी : मैं तो बहुत खुश हूँ तेरी ख़ुशी में मेरे भाई , ठीक है मैं भी बैठूंगी तेरी बुलेट . मुझे गिरायेगा तो नहीं न ?

अमित : बिलकुल नहीं दीदी आपको एक खरोंच भी नहीं आने दूंगा

नैना दीदी : अब चले महाराज या और भी बातचीत का इरादा है

नैना दीदी की बात पर मैं मुस्कुरा दिया और बुलेट को घर से बहार निकल कर स्टार्ट किया . नैना दीदी मेरे पीछे आ कर बैठ गयी

अमित : दीदी कहाँ चलोगी ?

नैना दीदी : सब से पहले मुझे गाओं का एक चक्कर लगवा फिर नदी पर ले कर चलना और फिर टाउन में

अमित : पहले टाउन hi चलते हैं दीदी फिर शाम को आप गाओं घूम लेना और नदी पर तो अभी कोई होगा नहीं तो क्या करोगी वहां जाकर

नैना दीदी : चल ठीक है पहले टाउन hi चल

हम दोनों बुलेट पर टाउन की तरफ निकल गए . टाउन में कुछ खास चीज़ तो थी नहीं बस हमारे गाओं क मुकाबले यहाँ अछि और बड़ी दुकाने थी और बाजार भी थे . नैना दीदी को मैंने इधर उधर घुमाकर टाउन का बाजार दिखा दिया और फिर उनको रेस्टोरेंट में फास्टफूड खिलाया जो उन्होंने अपनी मर्ज़ी से आर्डर किया था और साथ में कोल्ड ड्रिंक

नैना दीदी बहुत खुश नज़र आ रही थी मैंने पुछा मगर उन्होंने कुछ कहा नहीं . यूँही 3 घंटे हम घूमते रहे और वापिस घर आ गए . घर पर खाने का वक़्त हो गया था तो आते hi मैं खाना खाने लगा हालाँकि मुझे कुछ खास भूख नहीं थी मगर फिर भी थोड़ा खा लिया नैना दीदी ने तो साफ hi मन कर दिया उनका पेट शायद भर गया था

खाने क बाद 2 घंटे मैंने अपने कमरे में आराम किया और उसके बाद नेहा दीदी क पास चला गया जो कोई किताब पद रही थी

अमित : दीदी ये क्या आप किताब पद रही हैं

नेहा दीदी : ये तो मेरी स्टडी की किताब है

अमित : मगर आज कल तो सब स्कूल कॉलेज बंद हैं न

नेहा दीदी : तो क्या हुआ इसका मतलब ये तो नहीं क हमे पड़ना नहीं चाहिए

अमित : ो मेरी प्यारी दीदी कभी किताबों से बहार भी कुछ देख लिया करो ज़िन्दगी को जीना सीखो

नेहा दीदी : वह बड़ी बड़ी बातें करने लग गया है तू तो . अब बता क्या काम है

अमित : चलिए जल्दी से तैयार हो जाइये

नेहा दीदी : किस लिए

अमित : भूल गयी आपको बुलेट की सवारी करवानी है

नेहा दीदी : अरे छोड़ न मुझे ऐसे hi बहुत ख़ुशी है बाइक पर बैठना ज़रूरी नहीं

अमित : मगर मैं चाहता हूँ आप मेरे साथ बुलेट पर बैठें . अब जल्दी से नीचे आ जाइये मैं आपका इंतज़ार कर रहा हूँ

इतना कह कर मैं बिना जवाब सुने निचे चला गया और इंतज़ार करने लगा 5 मिनट्स में hi दीदी आ गयी . उन्हें तैयार होने में वक्त नहीं लगता क्यूंकि उन्हें कोई मेक उप वगेरा का शोक नहीं था और न hi कोई फैशन वगेरा का

नेहा दीदी : चलें?

अमित : चलिए

मैं नेहा दीदी को साथ लेकर टाउन की तरफ निकल पड़ा . मैंने सोचा क करुणा दीदी और नैना दीदी दोनों को hi टाउन का चक्कर लगवाया है तो क्यों न नेहा दीदी को भी टाउन का चक्कर लगवाएं

नेहा दीदी : कहाँ लेके जा रहा है मुझे

अमित : हम टाउन जा रहे हैं

नेहा दीदी : अरे इतनी दूर जाने की ज़रूरत क्या है बस हो गयी न सवारी अब घर चल

अमित : आप चुप चाप बैठी रहिये बस

उसके बाद नेहा दीदी ने कोई बात नहीं की और हम हलकी फुलकी बातचीत करते टाउन पहुँच गए . शाम का वक़्त था और बाज़ारों में चहल पहल हो रही थी .

मैं नेहा दीदी को लेकर उसी रेस्टोरेंट में आ गया जहाँ नैना दीदी क साथ आया था . ये एक बेसिस रेस्टोरेंट थे जो शायद इस टाउन का बेस्ट था . नेहा दीदी सवालिया नज़रों से मुझे देख रही थी मैं उन्हें एक टेबल पर बिठा कर अपने लिए आर्डर दे आया

नेहा दीदी : अब इसकी क्या ज़रूरत थी पार्टी तो तूने देदी न कल अब क्यों यहाँ ले ए

अमित : बस मेरा दिल किया तो के आया . वैसे भी आप किताबों से बहार कहाँ निकलती हैं सोचा मैं अपनी प्यारी दीदी को थोड़ी स सैर करवा दूँ और आज उनकी पसंद का कुछ खिला दूँ

इतने में वेटर 2 प्लेट टिक्की ले आया जिसे देख कर नेहा दीदी खुश हो गयी .

नेहा दीदी : कितना ख्याल रखता है तू सबका काश क तू मेरा सागा भाई होता

नेहा दीदी की बात से मुझे उनकी मायूसी का एहसास हुआ शायद उनके दिल में भी कई बातें होंगी जो वो किसी से नहीं करती क्यूंकि उनकी नेचर hi ऐसे है बहुत काम बात करती हैं. उन्हें एक भाई एक दोस्त की ज़रूरत हैं जिससे वो बातें कर सके करुणा दीदी तो है उनके पास मगर वो मस्ती पसंद हैं शायद इसी लिए नेहा दीदी उनसे दिल की बातें न करती हो

अमित : इतना कह कर आपने मुझे पराया कर दिया दीदी . मैंने तो हमेशा आपको अपनी सगी बैगन की तरह मन है मगर आज पता चला आप मुझे पराया समझती हैं

मेरी बात सुनकर नेहा दीदी की आँखों में पानी आ गया और वो अपनी चेयर से उठ कर मेरे गले लग गयी

नेहा दीदी : ऐसा मत कहो मेरे भाई तू तो मेरा प्यारा भाई है मुझसे गलती हो गयी माफ़ करदे अपने दीदी को

अमित : मैं आपको ऐसे माफ़ नहीं करूँगा पहले आप वडा कीजिये आज क बाद आप मुझे अपने सेज भाई की तरह hi समझेंगी और मेरे साथ अपनी हर बात करेंगी

नेहा दीदी : मैं हमेशा तुझे अपना सागा भाई hi समझूंगी मेरे भाई और तुझसे हर बात करुँगी बहुत बातें करुँगी तू मुझसे नाराज़ न होना कभी

हम दोनों ने मिल कर टिक्की खाई और घर वालों क खाने पीने क लिए भी सामान ले लिया और वापिस आ गए

नेहा दीदी की आँखों में अब मुझे ख़ुशी नज़र आ रही थी शायद उन्होंने दिल से आज मुझे अपना सागा भाई मन लिया था

घर एते hi पहले तो मेरी क्लास लगाई गई दोनों मौसियों और माँ द्वारा बिना बताये जाने की वजह से मगर नेहा दीदी ने बात को संभल लिया फिर जो ह्यूमेन सामान लिया था टाउन से खाने पीने का नैना दीदी और करुणा दीदी उस पर टूट पड़ी

अभी अँधेरा कुछ ज्यादा नहीं हुआ था इस लिए मैंने रीता मौसी और रजनी मौसी को भी बुलेट पर बिठा कर गाओं का एक चक्कर लगाया . रत का खाना हम सब ने मिल कर खाया और अपने अपने कमरों में चले गए

कमरे में एते hi पीछे पीछे करुणा दीदी और नैना दीदी भी आ गयी

अमित : आप दोनों इस वक़्त ? कोई काम था क्या

नैना दीदी : क्यों हम तेरे कमरे में इस वक़्त नहीं आ सकते क्या ?

अमित : अरे मैंने ये कब कहा आप जब चाहे आ सकती हैं मैं तो ये कह रहा था क कोई काम था तो मुझे बुला लेती

करुणा दीदी : हम ये कहने आयी हैं क कल सुबह तू हमें नदी और बगीचे दिखा कर लाएगा इस लिए जल्दी फ्री हो जाना और भूलना नहीं क्यूंकि शायद परसों हम सब वापिस चले जाएँ

अमित : ये क्या दीदी कुछ दिन और रहिये न कितना ाचा लगता है आप सब क साथ

नैना दीदी : अब क्या करें हमारा कॉलेज भी तो है और घर में जो दीदी पापा और कारन को छोड़ कर ाएँ हैं वो ?

अमित : ठीक है तो कल हम सब नदी पर जायेंगे और अपने बाग़ बगीचों में घूमेंगे आप नेहा दीदी को भी तैयार कर लेना

नैना दीदी / करुणा दीदी : ठीक है

फिर दिनों गुड नाईट बोल कर चली गयी उसके बाद कामिनी ममी और दीपिका ममी दोनों बरी बरी आयी मैंने दोनों को एक एक किश किया और फिर आराम से सो गया

कल का दिन खास होने वाला था मगर कैसे इसका अभी मुझे अंदाज़ा भी नहीं था
 
अपडेट 40



नैना दीदी / करुणा दीदी : ठीक है




फिर दिनों गुड नाईट बोल कर चली गयी उसके बाद कामिनी ममी और दीपिका ममी दोनों बरी बरी आयी मैंने दोनों को एक एक किश किया और फिर आराम से सो गया

कल का दिन खास होने वाला था मगर कैसे इसका अभी मुझे अंदाज़ा भी नहीं था

अब आगे -

सुबह अखाड़े से आने क बाद अभी मैं तैयार होने क लिए कमरे में घुसा hi था क करुणा और नैना दीदी दोनों मेरे पास आ गयी

नैना दीदी : ोये दफर चल जल्दी से खाना खा ले फिर हमें जाना भी है

अमित : अरे रुको दीदी मैं बस अभी नाहा क तैयार हो क अत हूँ

करुणा दीदी : वहीँ नदी पर नाहा लेना

अमित : अरे वहां कहाँ नहाएंगे आप बस 10 मिनट्स रुको मैं अभी आया

नैना दीदी : तुमने सुना नहीं नदी पर hi नाहा लेना और आज हम भी वहीँ नहाने का सोच कर एगो हैं

अमित : मगर दीदी वहां खुले में कैसे नहाओगी आप

करुणा दीदी: क्यों हम क्यों नहीं नाहा सकते ? गाओं में सभी वहीँ पर नहाते हैं और वैसे भी हम अपने बगीचों क पास नहाएंगे अब और टाइम ख़राब न कर और जल्दी चल

मरता क्या न करता दोनों अपनी बात मनवा hi लेती थी मुझे भी माननी पड़ी और निचे आ कर हम नाश्ता करने लगे

गौरी ममी : अमित ये क्या अभी तक तू नहाया नहीं

करुणा दीदी : वो क्या हिअ न ममी अमित हमें बगीचे दिखने ले क जा रहा है तो हमने कहा क वहीँ पर नाहा लेना यहाँ पर नहाने में टाइम लगा देगा ये

रजनी मौसी : वह क्या बात है आज बगीचों में जा रहे हो फिर तो हम भी चलेंगे

रीता मौसी : हाँ दीदी कितनी देर हो गयी हमें बगीचे में गए हुए

दीपिका ममी : तो आज हम सब चलते हैं एक साथ मैं दोपहर क लिए खाना पैक कर लेती हूँ

कामिनी ममी : हाँ ये सही रहेगा हम भी तो कहाँ जा पते हैं बहार

गौरी ममी : तो आज सब मिल कर चलते हैं

नैना दीदी : ममी जी मगर तयारी करने में तो आपको टाइम लग जायेगा और हम तो तैयार बैठे हैं

करुणा दीदी : और नहीं तो क्या ऐसा करते हैं आप सब बाद में आ जाना अभी हम चलते हैं

रीता मौसी : करुणा बीटा साथ में चलते हैं ऐसे अलग अलग मज़ा नहीं आएगा

करुणा दीदी : माँ प्लीज हम कल से प्रोग्राम सेट कर क बैठे हैं अब हम और नहीं रुक सकते आप सब आ जाना तब तक हम घूम लेंगे प्लीज

गौरी ममी : जाने दो रीता अमित है न इनके साथ और हम भी जल्दी पहुँच जायेंगे इनके पीछे

रीता मौसी : ाचा ठीक है मगर शरारत नहीं करना कोई वहां पर

मौसी की बात सुन कर दोनों खुश हो गयी मैंने भी नाश्ता कर लिया था सो मैं अपने कपडे साथ ले लिए नाहा कर बदलने क लिए . तभी करुणा दीदी भी भाग कर एक झोला ले आयी . मैंने झोला देख कर पुछा

अमित : इसमें क्या है दीदी

करुणा दीदी : कुछ नहीं है तू चल

अमित : नेहा दीदी कहाँ हैं

नैना दीदी : वो कह रही है वो बाद में आएगी

मैं जल्दी से उनके पास गया और वो हमेशा की तरह किताब पद रही थी

अमित : ये क्या दीदी आप हर वक़्त किताब में hi घुसी रहती हैं . चलिए जल्दी कीजिये उठिये और चलिए हमारे साथ

नेहा दीदी : मैं वहां क्या करुँगी तुम लोग जाओ

अमित : क्या आपको अपने इस भाई क साथ रहना ाचा नहीं लगता

नेहा दीदी : ये कैसी बातें कर रहा है तू अमित

अमित : तो जल्दी उठिये और चलिए

नेहा दीदी जल्दी से किताब बंद कर क मेरे साथ निचे आ गयी

हम चारो एक साथ तो एक बाइक पर जा नहीं सकते थे इस लिए हम पैदल hi निकल पड़े अपने खेत बगीचों की तरफ. पैदल चलते हुए कोई 15 मिनट्स में हम अपने खेतों में पहुँच गए वहां पर फसल की कटाई चल रही थी . अजय मां और कमलेश मां मजदूरों से कटाई करवा रहे थे हम उनसे मिल कर बगीचे में चले गए

बगीचे में कोई भी नहीं था क्यूंकि सब लोग फसल की कटाई में hi लगे हुए थे . मेरी तीनो बहने चल क शायद थक गयी थी और उन्हें पसीना भी आ गया था इस लिए एक बड़े पेड़ की छाया में हम आराम से बैठ गए.

नैना दीदी : कितनी गर्मी है आज तो पसीने से बुरा हल हो रहा है

करुणा दीदी : सच कहा दीदी और इतना पैदल चल कर तो मैं थक गयी हूँ

नेहा दीदी शांत बैठी थी हमेशा की तरह मगर पसीना उनके भी चहरे से झलक रहा था

अमित : अरे दीदी फसल कटाई पर मौसम ऐसा hi होता है और करुणा दीदी आप बस इतने से hi थक गयी ये तो कुछ भी नहीं. देखो नेहा दीदी की तरफ वो भी तो आपके साथ आयी हैं भला उनको कोई थकावट हुई

करुणा दीदी : दीदी तो बहुत मजबूत हैं उन्हें कोई फरक नहीं पड़ता . मैं तो नाज़ुक स हूँ मेरा तो बुरा हल हो गया है

नेहा दीदी बस शांत बैठी थी कोई बात नहीं कर रही थी

अमित : दीदी ( नेहा ) आप भी तो कोई बात करिये आप ऐसे चुप क्यों बैठी हैं

नेहा दीदी : मैं क्या बोलूं

अमित : आपको कैसा लगा यहाँ आ कर

नेहा दीदी : ाचा है कितनी शांति कितनी हरयाली है यहाँ पर

नैना दीदी : चलो हम एक काम करते हैं इस बगीचे में चुपम छुपाई या पकड़म पकड़े खेलते हैं तुम क्या कहती हो करुणा

करुणा दीदी : हाँ दीदी आईडिया ाचा है कितनी अछि जगह है मज़ा आ जायेगा यहाँ पर

अमित : ठीक है चलिए दीदी (नेहा ) आप भी हमारे साथ खेलिए

नेहा दीदी : अरे मुझे नहीं पसंद तुम सब खेलो मैं यहाँ से देखती हूँ

मैंने बहुत कहा पर दीदी नहीं मणि और फिर मैं नैना दीदी और करुणा दीदी क साथ पकड़म पकड़े खेलने लगा . 15/20 मिनट्स में hi दोनों थक गयी और हम फिर से नेहा दीदी क पास आ गए

अमित : बस इतना hi डैम था पहले तो बड़ा जोश दिखा रही थी अब क्या हुआ

नैना दीदी : तू तो हत्ता कट्टा सांड बन गया है हम तेरा मुकाबला थोड़ा कर सकती हैं

करुणा दीदी : और क्या कहाँ हम फूलों स नाज़ुक और कहाँ तुम जंगली सांड

अमित : तो मैं जंगली सांड हूँ हम्म्म आप क्या हो पूसी कैट

करुणा दीदी : क्या कहा पूसी कैट अब बच मुझसे तू

इतना कह कर करुणा दीदी मुझे मरने को डोडी और मैं उनसे बचके भागने लगा

नैना दीदी : छोड़ना नहीं इसे करुणा मैं भी आ रही हूँ

वो दोनों मेरे पीछे भागने लगी और मैं तेज़ी से भागता हुआ नदी की तरफ निकल गया . नदी हमारे बगीचों क साथ hi बहती थी. मैंने जल्दी से नदी में छलांग लगा दी मैं जनता था ये नदी में नहीं आएँगी

अमित : अब पकड़ क दिखाओ पूसी कैट

मैं मुँह बनाकर दोनों को चिढ़ाने लगा तो नैना दीदी ने करुणा दीदी क कण में कुछ कहा जिसे सुन कर करुणा दीदी क चहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी

करुणा दीदी : अब तो तू गया काम से बच्चू

इतना कह कर करुणा दीदी और नैना दीदी दोनों नदी में कूद गयी . मैं तो हैरान हो गया . मैं तो आज नहाया नहीं था और अपने नहाने क लिए कपडे भी साथ लाया था मगर इन दोनों ने भी पानी में छलांग लगा दी मुझे तो उम्मीद नहीं थी मैं अवाक् सा दोनों को देखने लगा और अगले hi पल दोनों ने मुझे दबोच लिया .

नदी में हम अभी ज्यादा आगे नहीं गए थे इस लिए पानी हमारे पेट तक hi था हमारे कपडे गीले होकर हमारे जिस्म से चिपक गए थे . मेरा गाला दबाते हुए करुणा दीदी मेरी छाती से लग गयी थी और नैना दीदी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया था .

एक दूसरे से ज़ोर आज़माइश में हमारे जिस्म एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे हालाँकि हम पेट तक पानी क अंदर थे मगर अब मेरा लैंड जिस्मो क इस मिलान से जागने लगा था उसने गर्मी बढ़ने लगी थी. मेरा लैंड खड़ा हो कर जब करुणा दीदी की छूट क आसपास उनके जिस्म से टकराने लगा तो उन्हें एहसास हुआ और वो पीछे हैट गयी .

नैना दीदी : क्या हुआ करुणा तूने इसे छोड़ क्यों दिया

करुणा दीदी : वी दीदी वो वो हम बहार चलते हैं

नैना दीदी : ये कैसी बात कर रही है इसे सबक सिखाये बिना बहार नहीं जायेंगे

इतना कह कर नैना दीदी घूम कर आगे आ गयी और अब उन्होंने करुणा दीदी की तरह मेरा गाला पकड़ लिया और वो भी मेरे साथ चिपक गयी . अब मेरा लैंड नैना दीदी क जिस्म से टकराने लगा मगर नैना दीदी को शायद अभी एहसास नहीं हुआ था

नैना दीदी ने जोर से मेरा गाला दबा दिया और मैंने उनके दोनों हाथ गले से हटा कर उन्हें धक्का दे दिया जिससे वो पानी में पूरी गिर गयी . मैंने जल्दी से उनको उठाने क लिए हाथ बढ़ाया तो उनकी बाजु पकड़ते हुए मेरे हाथ उनके बूब्स से टकरा गए जिससे मुझे झटका लगा जो सीधा मेरे लैंड पर असर कर गया .

नैना दीदी क पूरा भीग जाने से उनके बूब्स और भी ज्यादा शेप में नज़र आने लगा मैं एक तक उन्हें देखने लगा तभी करुणा दीदी मुझ पर झपट पड़ी और नैना दीदी भी खुद को संभल कर मुझ पर झपट पड़ी हम तीनो एक दूसरे से चिपके हुए थे . अब हम थोड़ा और गहरे पानी के पहुँच गए थे और छाती तक हम पानी क अंदर थे . मैं दोनों से खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था तभी एक हाथ मेरे लैंड की तरफ बड़ा और मेरे लैंड को पकड़ कर मसल दिया . मेरे मग से एक आह निकल गयी मैंने तुरंत वो हाथ पकड़ना चाहा मगर तब तक वो हाथ पीछे हैट गया था

नैना दीदी : अब क्यों चीख रहा है बोल लेगा हम से पन्गा

करुणा दीदी : लगता है इसे पानी में किसी कीड़े ने काट लिया है

मैं दोनों क चहरे देखने लगा और अंदाज़ा लगाने लगा आखिर ये हरकत किसकी हो सकती है मगर दोनों क फेस इम्प्रैशन एक जैसे थे मुझे कुछ समझ में नहीं आया

अमित : मेरे ख्याल से अब हमे बहार निकलना चाहिए

नैना दीदी : बस निकल गयी हवा अभी तो बहुत उछाल रहा था

करुणा दीदी : क्या बोल रहा था हमें अब बोल

अमित : मुझे माफ़ कार्डो देविओ अब बहार चलो

नैना दीदी : बिलकुल नहीं कितना मज़ा आ रहा है यहाँ बहार निकल कर क्या करेंगे चलो यहीं पर खेलते हैं

करुणा दीदी : बिलकुल सही अब हम भीग तो गए hi हैं तो क्यों न फुल एन्जॉय करें वैसे भी शहर में ऐसा मज़ा कहाँ मिलता है

अमित : मगर ऐसे यहाँ पर ठण्ड लग जाएगी ज्यादा देर पानी में रहने से वैसे भी आपके तो कपडे भीग गए हैं और आप कपडे भी नहीं लायी

नैना दीदी : किसने कहा तुझे , हम भी पूरी तयारी क साथ आये हैं

करुणा दीदी : तुझे क्या लगा क हम ये मौका हाथ से जाने देते . ऐसा नज़ारा शहरों में कहाँ मिलता है

अमित : मगर यहाँ पानी में क्या खेलेंगे बहार तो जाना पड़ेगा

नैना दीदी : यहीं खेलेंगे हम . हम तुम्हारी आँखों पर पट्टी बंधेंगे और तुम हमें पकड़ना

करुणा दीदी : और तू तब तक पट्टी नहीं खोलेगा जब तक तू पकड़ने वाले को पहचान नहीं लेता

अमित : क्या मैं अकेला पकडूँगा

नैना दीदी : अगर तुमने सही पहचाना तो जो पकड़ा जायेगा फिर उसकी आँखों पर पट्टी बंधेंगे

फिर नैना दीदी ने अपना दुपट्टा मेरी आँखों पर बांध दिया और मुझे धक्का दे दिया . मैं खुद को संभलकर दोनों को ढूंढने लगा

दोनों में से मुझे किसी की आवाज़ नहीं आ रही थी और नदी क चलते पानी की वजह से मुझे उनकी मूवमेंट का भी पता नहीं चल रहा था . तभी किसी ने मेरा लैंड पकड़ लिया मैंने झटके से सामने हाथ घुमाकर पकड़ना चाहा मगर सामने कोई नहीं था शायद जो भी था पानी क अंदर था और जब मैंने पानी में हाथ डाला तब तक वो हाथ दूर हैट गया .

मैं फिर आगे बड़ा तो किसी ने पीछे से हाथ डालकर मेरा लैंड पकड़ लिया मैं तेज़ी से हाथ पकड़ना चाहा मगर एक बार फिर वो हाथ मेरे हाथ में आते आते रह गया .

मैं हैरान हो रहा था आखिर ये हरकत कौन कर रहा है . मैंने जैसे hi पट्टी हटाने की कोशिश की तो दोनों मुझे टोकने लगी

अमित : मैं नहीं खेलूंगा

नैना दीदी : क्यों क्या हुआ तुझे

अमित : ये क्या पानी में घुस कर मुझे तंग कर रही हो

करुणा दीदी : ये तो खेल है हम तुम्हे हाथ लगा कर अपने पास होने का एहसास करवाते हैं तुम हमें पकड़ो

अमित : मगर आप गलत पकड़ रहे हो

नैना दीदी : पकड़ना तो तूने है हम तो भागेंगे

अब मैं क्या कहता क तुम मेरा लैंड पकड़ रही हो मगर कौन पकड़ रही है मुझे ये hi नहीं पता था. मैं फिर से उन्हें पकड़ने आगे बड़ा इस बार एक हाथ मेरी पीठ पर लगा मैं पलटा और फिर एक हाथ मेरे कंधे पर लगा . मैं जैसे hi पलटा तो पीछे से किसी ने फिर मुझे हाथ लगाने की कोशिश की मगर मैं चल समझ गया था इसी लिए पहले hi तैयार था और मेरे हाथ में एक बाजु आ गयी. मैंने जल्दी से उसे खींचा और पकड़ लिया मगर इस तरह पकड़ने में मेरा हाथ उसके साइन पर चला गया . मैंने सोचा शायद यही मेरा लैंड पकड़ रही होगी तो मैंने भी जल्दी से दूध मसल कर हाथ हटा लिया .

उसके मुँह से दबी दबी सिसकी निकली . मैं अंदाज़ा लगाने की कोशिश करने लगा क मेरी पकड़ में कौन आया है मगर इस तरह जान पाना मुश्किल था क्यूंकि दोनों एक जैसी hi तो थी .

मैंने सोचा अगर आवाज़ सुन लूंगा तो पता चल सकता है इस लिए मैंने एक बार फिर से एक बूब को ज़ोर से मसल दिया . मगर इस बार भी कोई आवाज़ आने की बजाये सिर्फ सिसकी hi निकली . वो जो भी थी मैंने सोचा था क वो मुझे कुछ कहेगी मगर उसने मुँह से कुछ नहीं कहा और बदले में मेरे लैंड को ऐसा कास क मरोड़ा क मुझे दर्द हुआ और मेरी पकड़ ढीली हो गयी और वो मेरे हाथो से निकल गयी

अमित : आआआहहह

नैना दीदी : क्या हुआ तू क्यों चीख रहा हज

अमित : मुझे नहीं खेलना आप लोग मुझे बस तंग कर रही हो

करुणा दीदी : बस इतना hi डैम था वैसे तो बड़ा पहलवान बनता है निकल गयी साडी पहलवानी

अमित : ऐसी बात है तो अब आओ फिर बताता हूँ

मैंने भी सोच लिया क अब जो भी मेरे हाथो में आएगा उसे ऐसा रगडूंगा क उसे मुँह से बोलना hi पड़ेगा

वो दोनों फिर से मुझे इधर उधर से हाथ लगाने लगी तभी किसी ने पानी क अंदर से आकर मेरा लैंड पकड़ा मैं इस बार चौकन्ना था मैंने जल्दी से उसे पकड़ लिया और खुद भी पानी क अंदर घुस कर जल्दी जल्दी से उसके दोनों बूब्स मसलने लगा . मैं और वो दोनों पानी क अंदर थे और मैं ज़ोर ज़ोर से उसके बूब मसलने लगा . सांस लेने क लिए हम दोनों hi पानी से बहार ए तो मैंने अपने हाथ उसके बूब्स से हटाकर उसकी छूट पर ले गया . उसकी पीठ मेरे सीने से लगी हुई थी जिसके कारन उसकी गोल गुदाज़ गांड मेरे लैंड पर रगड़ रही थी . वो लगातार मेरे हाथो से निकलने की कोशिश कर रही थी और उसके मुँह से दबी दबी सिसकीअन निकल रही थी

मैंने उसकी छूट पर हाथ चलते हुए अपने लैंड को उसके चूतड़ों की दरार में फसा दिया और लगातार अपने खड़े हुए लैंड को उसकी गांड में उतरने की कोशिश करने लगा

मेरे इतना ज़्यादा मसलने पर भी अभी तक उसने मुँह से कुछ नहीं बोलै था . मैं लगातार छूट को मसल रहा था तभी उसने मेरे अंडो को ज़ोर से दबाया और मेरे मुँह से एक तेज़ आआअह्ह्ह्हह निकली और मैंने उसे छोड़ दिया

मैंने जल्दी से अपनी पट्टी हटाई तो मेरी दोनों बहने hi मुझे नज़र नहीं अति दोनों पानी क अंदर थी

मैं फिर से चूक गया था और मुझे पता नहीं चल सका आखिर वो कौन थी . मैं अपने अंडो को दबाये जाने से दर्द महसूस कर रहा था इस लिए पानी से बहार चला गया नेहा दीदी की और

नैना दीदी : ोये कहाँ जा रहा है अभी तक तूने किसी को पकड़ा नहीं

अमित : मुझे नहीं खेलना आप खेलो

करुणा दीदी : बस निकल गयी हवा

अमित : मुझे माफ़ करो मैं चला

दोनों खिल खिला कर हसने लगी और मैं बहार आ गया . मैंने जा कर खुद को टॉवल से पोंछा और कपडे बदल लिए थोड़ी देर में वो दोनों भी आ गयी और अपने झोले में से कपडे निकल लिए

नैना दीदी : हम कपडे कहाँ बदलें

अमित : आप उस पेड़ क पीछे बदल लो यहाँ कोई नहीं अत

नेहा दीदी : चलो तुम दोनों मैं साथ अति हूँ

मुझे नेहा दीदी का यही नेचर पसंद था बिना कुछ बोले सब का ध्यान रखती थी

वो तीनो चली गयी और मैं बैठा सोचने लगा आखिर पानी में मेरे साथ वो सब हरकतें कोण कर रहा था और मैंने दोनों में से किसी एक को तो मसला hi है पर दोनों में से किसी ने कोई शिकायत नहीं की न hi कोई ऐसा इम्प्रैशन नज़र आ रहा है

थोड़ी देर में वो तीनो लौट आयी और हम इधर उधर की बातें करने लगे . बातें करते हुए भी मैं उनको hi देख रहा था शायद कुछ पता चल जाये मगर कुछ पता नहीं चला

इस सब से मुझे एक फरक ज़रूर पड़ा था क मेरे लैंड को अब चुदाई चाहिए थी उसकी काम वासना जग चुके थी जो अब किसी न किसी छूट में जाना चाहती थी . कोई आधा घंटा हम यूँही बातें करते रहे हमें घर से निकले करीब 2 घंटे से ऊपर हो गए थे इतने में मुझे रजनी मौसी रीता मौसी और तीनो मामिआं आती हुई नज़र आ गयी

फिर हम सब एक जगह छाया में चादर दाल कर साथ बैठ गए सब बातों में मशगूल थे मगर मेरा लैंड बस छूट मांग रहा था मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने नज़र बचा कर दीपिका ममी को इशारा किया साइड में चलने का. दीपिका ममी समझ गयी मगर उन्होंने सबकी तरफ इशारा कर क इंकार कर दिया.

मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था फिर मैंने कामिनी ममी को इशारा किया साइड में आने का उन्होंने भी पहले इंकार किया मगर मेरी रिक्वेस्ट भरी नज़रों पर तरस खा कर वो पेशाब जाने का बहाना बना कर उठ गयी

गौरी ममी : दीपिका जा तू भी साथ चली जा कामिनी क

कामिनी ममी : अरे कोई बात नहीं दीदी हम कौन सा किसी परायी जगह पर हैं अपने hi तो बैग बगीचे हैं ये मैं अभी आयी

कामिनी ममी क जाने क बाद मैं भी टॉयलेट का बहाना बना कर उठ गया और कामिनी ममी जिस तरफ गयी थी उससे दूसरी तरफ निकल गया ता की किसी को शक न हो

नदी किनारे पहुँच कर मैं कामिनी ममी की तरफ चल दिया . मैंने सब पर नज़र डाली वो हमें नहीं देख सकते थे

कामिनी ममी : क्या बात है यहाँ क्यों बुलाया सब यहीं पर मौजूद हैं अगर किसी ने देख लिया तो आफत आ जाएगी

मैंने जल्दी से अपना लैंड पेण्ट से बहार निकल लिया और ममी को दिखने लगा

अमित : मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है ममी देखिये क्या हल हो रहा है जल्दी कुछ कीजिये

कामिनी ममी मेरे खड़े लैंड को देखने लगी . प्यासी तो वो भी थी मगर ये जगह और हालत सही नहीं थे

कामिनी ममी : नहीं अमित अभी कुछ नहीं हो सकता यहाँ कोई भी आ सकता है बात को समझो हम मौका देख कर करेंगे न , मेरा भी दिल मचल रहा है महार अभी नहीं

अमित : नहीं ममी जी अगर मैंने अभी नहीं किया तो मेरी नस फैट जाएगी मुझे अभी करना है प्लीज आप समझो

ममी मन करती रही मगर मैं नहीं मन और उन्हें ज़बरदस्ती वहीँ झाड़ियों क पीछे झुका कर उनकी सदी और पेटीकोट उनकी कमर तक उठा दिया मैंने उनकी पेंटी उतरना सही नहीं समझा इस लिए पेंटी को साइड में कर क अपने लैंड पर थूक लगाया और छूट पर रख कर उनकी कमर को पकड़ते हुए एक ज़ोरदार धक्का मर दिया

कामिनी ममी लगभग एक महीने से मुझसे चूड़ी नहीं थी इस लिए उनकी छूट टाइट हो गयी थी और अब बिना उनको गरम किये मैंने लैंड घुसा दिया था जिससे उनकी सुखी छूट में दर्द हुआ और उनके मुँह से एक चीख निकल गयी मगर उन्होंने अपनी सदी का पल्लू मुँह में डालकर अपनी चीख को दबा लिया

लैंड अंदर घुसते hi मैं रुका नहीं और लगातार झटके मरने लगा . हमारे पास वक़्त बहुत काम था और कोई भी इस तरफ आ सकता था इस लिए मैं तूफानी धक्के मरने लगा मुझे जल्दी से पाना पानी निकलना था

10 मिनट्स की तूफानी चुदाई में ममी ने दो बार पानी निकल लिया शायद सब क आसपास होने क दर से वो ज़्यादा एक्साइट थी और दो बार झाड़ गयी. मैं भी और ज़्यादा बर्दाश्त नहीं कर सका और पूरा लैंड जड़ तक ममी क अंदर घुसा कर अपनी साडी ताकत लगा कर अपना पानी ममी क अंदर डालने लगा

हम दोनों अपनी सांसो को ठीक कर रहे थे मगर हमारी ये चुदाई देख कर किसी और की साँसे उखाड़ने लगी थी जो पिछले 5 मिनट्स से हमारा खेल देख रही थी

मैं खुद को ठीक कर क उसी तरफ चला गया जहाँ से मैं ममी क पास आया था और फिर अपना हाथ मुँह धोकर सबके पास वापिस चला आया . दूसरी तरफ से कामिनी ममी और रीता मौसी भी आ गयी . मैं रीता मौसी को देख कर चौंका मगर उनके चहरे पर मुस्कराहट देख कर और कामिनी ममी से उनके है है कर बातें करने से मैं समझ गया क सब ठीक है
 
अपडेट 41

मैं खुद को ठीक कर क उसी तरफ चला गया जहाँ से मैं ममी क पास आया था और फिर अपना हाथ मुँह धोकर सबके पास वापिस चला आया . दूसरी तरफ से कामिनी ममी और रीता मौसी भी आ गयी . मैं रीता मौसी को देख कर चौंका मगर उनके चहरे पर मुस्कराहट देख कर और कामिनी ममी से उनके है है कर बातें करने से मैं समझ गया क सब ठीक है

अब आगे -

हम सब ने मिल कर खाना खाया और बहुत स बातें की हर कोई खुश था आज फॅमिली क साथ पिकनिक मन कर बहुत ाचा लग रहा था . बार बार रीता मौसी मुझे गहरी निगाहों से देख रही थी मगर मैंने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिए . दिन ढलने तक हम वहीँ रहे और उसके बाद घर वापिस आ गए . घर आ कर सब रत क खाने की तयारी करने लगे.

मैं आँगन में अपनी बहनो क साथ बैठा था क रजनी मौसी और रीता मौसी ने मुझे अपने पास बुलाया

रजनी मौसी : अमित क्या तेरा दिल नहीं करता कभी मुझसे मिलने का मैं तो तेरी सबसे बड़ी मौसी हूँ न . क्या तू मुझसे अपना नहीं समझता

अमित : ऐसा मत कहो मौसी जी आप तो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती हैं भला मैं ऐसे कैसे सोच सकता हूँ


रजनी मौसी : तो फिर तू कभी अत क्यों नहीं मेरे पास

अमित : क्या करूँ मौसी जी माँ न खुद जाती है न मुझे कहीं जाने देती है वो तो यही चाहती है मैं हर वक़्त उसके पास रहूं

रजनी मौसी : वो तुझे बहुत प्यार करती है न इस लिए मगर टी तो अब बड़ा हो गया है न तो तू खुद भी आ सकता है

अमित : ज़रूर आऊंगा मौसी जी

रीता मौसी : ये नहीं आएगा दीदी अब ये बड़ा हो गया है न तो इसने यहीं दिल लगा लिया है अपनी मामिओं क साथ ये भला क्यों आएगा हमारे पास

( अब तो अपनी ममी की चुदाई करने लगा है अब ये उसे छोड़ कर भला कहाँ जायेगा )

अमित : ऐसा नहीं है मौसी जी जैसे मैं उनको प्यार करता हूँ वैसा hi आपको भी करता हूँ

रीता मौसी : ( मन में ) न बाबा न वो प्यार अपनी ममी को hi दे तौबा कैसे जंगली जानवर क जैसे धक्के मर रहा था और हथ्यार भी कितना बड़ा बना लिया है पता नहीं कैसे कामिनी इसे बर्दाश्त करती है

रजनी मौसी : तो इस बार तुझे मेरे पास आना पड़ेगा नहीं तो मैं तुझसे नाराज़ हो जाउंगी और वैसे भी अब हम यहीं आने वाले हैं दिव्या क शहर में तू जब चाहे आ सकेगा

अमित : ये तो बहुत अछि बात है मौसी जी मैं अपनी मोटरसाइकिल पर कभी भी आपसे मिलने आ सकूंगा और फिर मौसा जी और कारन से भी तो मिले देर हो गयी और निधि दीदी जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती हैं उनको भी मैं कितना मिस करता हूँ

रजनी मौसी : वो भी तुझे बहुत प्यार करती है कारन से भी ज्यादा वो तो आना चाहती थी मगर उसे नौकरी से छुट्टी नहीं मिली

मैं दोनों मौसियों क साथ लगभग एक डेढ़ घंटा बातें करता रहा और उसके बाद अपनी बहनो क साथ थोड़ी देर बात की इतने में खाना तैयार हो गया मां भी आ चुके थे . फिर हम सब ने मिल कर खाना खाया और अपने अपने कमरों में चले गए

कमरे में जाते hi नैना दीदी और करुणा दीदी मेरे पास आ गयी

नैना दीदी : ोये दफर क्या सोने लगा है तू

अमित : और क्या करना है दीदी आप बताओ कोई काम था क्या

नैना दीदी : थैंक्स तुमने हमारा आज का दिन स्पेशल बना दिया . सचमुच इस बार ह्यूमेन जितना एन्जॉय किया है आज तक नहीं किया था

करुणा दीदी : सच कहा दीदी इस बार तो इतना मज़ा आया है क दिल hi नहीं कर रहा वापिस जाने का

अमित : तो रुक जाइये न वैसे भी कौन सा पड़े हो रही है आजकल

नैना दीदी : जाना तो होगा न वापिस और कितने दिन रहेंगे . मगर तुम वडा करो क हमारे घर ज़रूर आओगे इस बार वैसे भी अभी तो तू फ्री है

करुणा दीदी : बिलकुल तुझे हमारे घर भी आना पड़ेगा तू कभी नहीं अत हमेशा हम लोग hi एते हैं

अमित : ठीक है मैं ज़रूर आऊंगा आप दोनों क पास

दोनों ने मुझसे मेरा मोबाइल no. लिया और बरी बरी मुझे गले लगाया और गुड नाईट बोल कर चली गयी

दोनों क जाने क बाद मेरे पास दीपिका ममी आयी

दीपिका ममी : क्या बात थी आज बड़ी आग लग रही थी तुम्हे

अमित : आप तो बात hi मत कीजिये . वैसे तो कहती हैं क तुम hi सब कुछ हो मेरे लिए मगर मेरी एक बात नहीं मानती

दीपिका ममी : सब वहां पर मौजूद थे न तुझे खुद नज़र नहीं अत क्या तू ये चाहता है क सब मुझ पर उंगली उठायें मुझे गलियां दे

अमित : मैंने ऐसा कब कहा

दीपिका ममी : तो फिर ? पता है आज तुम जब कामिनी दीदी क साथ गए थे तो रीता दीदी भी साथ कामिनी दीदी क पीछे उठ कड़ी थी वो तो मैंने उन्हें बातों में उलझाए रखा वर्ण आज तुम पकडे जाते

अमित : थैंक्स ममी जी आप मेरा कितना ध्यान रखती हैं

दीपिका ममी : मैं तो ध्यान रखती हूँ मगर तुझे भी हर बात का ध्यान रखना चाहिए अगर किसी को हमारे बारे में या कामिनी दीदी और तुम्हारे बारे में पता चला तो सोचो अंजाम क्या होगा

अमित : आगे से ध्यान रखूँगा ममी जी पर मैं क्या करता मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था

दीपिका ममी : खुद पर काबू करना सीखो अमित वर्ण किसी दिन गड़बड़ हो जाएगी

अमित : अब आप गुस्सा छोड़िये और मुझे एक प्यारी स किश दीजिये

दीपिका ममी : इसके लिए तुझे मांगने की ज़रूरत है क्या सब तेरा hi तो है बस ध्यान रखा कर

फिर मैंने दीपिका ममी को 5 मिनट तक किश की और उसके बाद ममी वापिस चली गयी मैं भी सो गया

अगले दिन जब मैं अखाड़े से लौटा तो रजनी मौसी और रीता मौसी अपना अपना सामान बांध रही थी . मैं जल्दी से तैयार हो कर अपनी बहनों क पास गया जो अपना सामान बांध चुकी थी और तैयार बैठी थी

अमित : तो आप लोग आज जा रहे हो

नैना दीदी / करुणा दीदी : हाँ

अमित : मैं फिर से अकेला हो जाऊंगा आप सब यहाँ थे तो वक़्त का पता hi नहीं चला अब फिर से वही अकेलापन

मैंने सीरियस लहजे में ये बात कही तो इस बार नेहा दीदी आगे बढ़कर आयी और मुझे गले लगा लिया

नेहा दीदी : ऐसा मत कहो मेरे भाई तुम मुझे अपनी बहिन कहता है न तो चला आया कर मुझसे मिलने जब हमारी यद् ए

नेहा दीदी से ऐसा न मैं एक्सपेक्ट कर रहा था न करुणा और नैना दीदी क्यूंकि वो तो हमेशा किताबों में घुसी रहती थी यान खामोश hi रहती थी

अमित : मैं ज़रूर आऊंगा दीदी काश हम सब एक साथ रह पते

बरी बरी से मैं तीनो से गले मिला और उनका सामान लेकर नीचे आ गया फिर मौसी योन का भी सामान निचे ला कर रख दिया

खाना खाने क बाद मैं और तीनो मां मिल कर मौसियों और नेहा नैना करुणा दीदी को बस में बिठा कर आ गए . जाते जाते फिर से सब ने मुझे आने को कहा

घर आने क बाद मेरा मन नहीं लग रहा था एक बार फिर घर में सूनापन सा लगने लगा था इस लिए मैं राजू से मिलने चला गया

राजू : तो मिल गया तुझे टाइम? मुझे लगा था तू तो अब आएगा hi नहीं

अमित : तुझे तो पता है न सब फिर भी ऐसी बात बोलता है

राजू : मैं तो जनता हूँ मगर उस बेचारी का ख्याल नहीं तुझे जो कितने दिनों से तेरा रास्ता देख रही है

अमित : हाँ यार वो भी मुझसे नाराज़ होगी पर मैं भी क्या करता पहले मेरे पेपर थे फिर उसके आ गए और फिर कुश्ती अब जा कर फ्री हुआ हूँ आज hi मैं उससे मिलूंगा

राजू : हाँ मैं भी आज रेनू से मिलने वाला हूँ उसे बोल देता हूँ वो मंजरी को बोल देगी

अमित : तू रहने दे मैं अभी उसके घर की तरफ जाने वाला हूँ अगर नज़र आयी तो मिल लूंगा अभी

राजू से थोड़ी देर बातें करने क बाद मैं मंजरी क घर की तरफ चल पड़ा . किस्मत से वो अपने घर क आँगन में hi नज़र आ गयी . जब उसकी नज़र मुझ पर पड़ी तो उसका चेहरा एक डैम खिल गया .

मैं उसे इशारा कर क नदी किनारे चला गया कोई 20 मिनट्स में hi वो कुछ कपडे हाथ में लिए आ गयी और आते hi मुझसे लिपट गयी

मंजरी : बड़े ज़ालिम हो अपने प्यार का रोग लगा कर हल भी जानने नहीं आते . आपको पता है 2 महीने हो गए आप से मिले हुए और ऐसे लग रहा है जैसे बरसों बीत गए

मंजरी ऐसे मुझसे गले मिल रही थी जैसे बरसो से बिछुड़े दो प्रेमी मिल रहे हो . वो लगातार मुझे चुम रही थी जिससे मुझे उसकी तड़प का पता चल रहा था

अमित : तुम्हे तो पता है न पहले हमारे एग्जाम और फिर ये कुश्ती की तयारी

मंजरी : काम से काम एक बार 2 पल क लिए मिलने आ जाते . उस दिन क बाद मैं तो हर पल आपका hi रास्ता देखती रहती हूँ. और मैं आपसे नाराज़ हूँ इतना बड़ा मुकाबला जितने क बाद आप मुझसे मिलने नहीं आये . बाबा बता रहे थे आपने सरे गाओं का सर ऊँचा कर दिया है और अब तो गाओं में हर कोई आपकी hi बात करता है. गाओं की लड़कियां तो आपके पीछे पागल हो रही हैं जिसे देखो वो यही बात कर रही है क काश आप उनसे प्यार करें

अमित : ाचा ऐसी बातें करती हैं वो मेरे बारे में फिर तो मुझे सोचना पड़ेगा

( मैंने जान बुझ कर मंजरी को तंग करने क लिए कहा)

मंजरी : मैं जान दे दूंगी अगर आप ने मुझे छोड़ कर किसी और की तरफ देखा भी तो आप बही जानते जब वो ऐसी बातें करती हैं तो मुझे कितना दर लगता है कहीं मैं आपको खो न दूँ

अमित : तुम तो मेरी जान हो और मैं अपनी जान को छोड़ कर किसी और क पास कैसे जाऊंगा और ख़बरदार अगर दोबारा जान देनी की बात की तो

इतना कह कर मैंने मंजरी को कास क गले लगा लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए वो भी बदले में मेरे होंठ चूमने लगी. उसके किश करने से उसकी प्यास का पता चल रहा था

अमित : लगता है आज फिर से तुम्हे उस दिन वाला प्यार करना पड़ेगा

मंजरी मेरी बात पर शर्मा गयी और मेरे सीने में अपना मुँह छुपा लिया

अमित : लो अब शर्मा रही हो चलो ठीक है नहीं करता तुम्हे दर्द होता है न

मंजरी फ़ौरन चेहरा उठा कर मेरी आँखों में देखती हुई बोली

मंजरी : मैंने ऐसा कब कहा

अमित : इसका मतलब तुम भी फिर से वही प्यार करना चाहती हो

मंजरी : आप जो चाहे जैसा चाहे मेरे साथ करें मैं सिर्फ आपकी हूँ

मुझे लगा मंजरी का दिल भी इतने दिनों से मचल रहा होगा इस लिए उसे आज थोड़ा सा प्यार ज़रूर देना चाहिए . फिर मैं मंजरी को साथ लेकर फिर से उसी जंगल वाले झोंपड़े में आ गया . और झोंपड़े में एते hi मैं उसे बाँहों में भर कर किश करने लगा . मंजरी भी पूरा साथ दे रही थी . देखते hi देखते हम दोनों क जिस्मो से कपडे उतर चुके थे .

मैंने मंजरी को नीचे लेता दिया और खुद उसके ऊपर आकर उसे किश करता हुआ उसके दूध दबाने लगा . मंजरी मचलने लगी उसका जिस्म गरम होने लगा . दूध मसलते हुए मैं नीचे हुआ और बरी बरी से उसके दूध पीने लगा . दोनों दूध पीने क बाद मैं उसे चूमता हुआ उसकी छूट पर आ आज्ञा . मंजरी की छूट को मैंने अभी तक एक hi बार छोड़ा था उसके होंठ थोड़े खुल गए थे मगर अभी भी वो बिलकुल कोमल देखती थी

मैंने मंजरी की छूट पर होंठ रखे और उसे चुनने लगा . मंजरी क मुँह से सिसकारिआं निकलने लगी . फिर मैं अपनी जीन अंदर घुसकर उसके डेन को छेड़ने लगा जिससे उसकी काम अग्नि और तेज़ हो गयी और वो मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी

मंजरी बहुत दिनों से प्यासी थी इस लिए जल्दी उसने झटके लेते हुए अपना पानी छोड़ दिया. मैं उसका सारा काम रास पी गया और थोड़ी देर और उसकी छूट चाटने क बाद उसकी टांगो क बीच अपनी पोजीशन लेकर लैंड को छूट पर रखा और एक झटका मर दिया जिससे लैंड 3 इंच अंदर घुस गया. मंजरी क मग से हलकी चीख निकल गयी

मंजरी : ाआईई कक्कक्क्स आआह्ह्ह

मंजरी की छूट अभी पूरी तरह खुली नहीं थी जिसे अब मुझे अछि तरह अपने लैंड क हिसाब से खोलना था और इसके लिए लगातार कई बार चुदाई करने की ज़रूरत थी

फिर मैंने एक और धक्का मारा जिससे लैंड आधे से ज्यादा अंदर चला गया और मंजरी से फिर से चीखी मगर उस दिन की तरह आज उसे उतना दर्द नहीं हो रहा था . कुछ पल इंतज़ार करने क बाद मैंने आखिरी धक्का मर कर पूरा लैंड छूट में घुसा दिया और मंजरी पर झुक कर उसके होंठ चूसने लगा

मंजरी 2 मिनट्स में hi नार्मल हो गयी और अपनी कमर हिलने लगी . मंजरी का इशारा पते hi मैंने लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया और मंजरी भी मज़ा लेती हुई अपनी कमर उठाने लगी .

धीरे धीरे मेरे धक्कों की स्पीड बढ़ती गयी और मंजरी की सिसकारिओं की आवाज़ भी बुलंद होने लगी

मंजरी : आअह्ह्ह्ह ककक आअह्ह्ह सीसीसी आह्ह्ह्ह उम्मंन ोुह्ह्ह मममम ऐसे hi ऐसे hi ममममम आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह और तेज़ और तेज़ उम्म्म्म

मंजरी अब मज़ा ले रही थी और मुझे तेज़ धक्के मरने को कह रही थी . मैं भी अपनी स्पीड बढ़ाता जा रहा था . मंजरी और ज़्यादा मेरे धक्कों को झेल नहीं पायी और उसकी छूट ने फिर से पानी बहा दिया . पानी निकलते hi वो निढाल हो गयी.

मैं कुछ पल रुका और फिर से हलके हलके धक्के लगाने लगा और उसके दूध मसलने लगा 2 मिनट में hi मंजरी फिर से गरम होब्ग्यी

अब मैंने मंजरी को घोड़ी बना लिया और पीछे से उसकी छूट में लैंड घुसा कर धक्के मरने लगा . मंजरी भी कमर को पीछे धकेल कर मेरा साथ दे रही थी . इस पोजीशन में मैंने 10 मिनट्स तक मंजरी को ताबड़ तोड़ धक्के मर कर छोड़ा और अपना पानी उसकी छूट में दाल दिया वो भी फिर से अपना पानी निकल चुकी थी .

हम दोनों चुदाई कर क पूरे संतुष्ट हो चुके थे और एक दूसरे की बाँहों में आँखें मूंदे पड़े थे . कोई आधे घंटे बाद हम दोनों उठे और एक दूसरे को चुम कर अपने कपडे पहन लिए. उसके बाद हम नदी पर लौट ए . मंजरी अपने कपडे लेकर कपडे धोने चली गयी और मैं घर लौट आया

घर आकर मैंने खाना खाया और अपने कमरे में आराम करने चला गया . मंजरी क साथ प्यार भरी चुदाई करने क बाद अब मुझे नींद आ रही थी इस लिए मैं सो गया

शाम को उठ कर मैं नीचे आ गया तो घर में पंडित जी आये हुए थे और आँगन में बैठे थे . गौरी ममी उनके पास बैठी थी मैं भी उनके पास जा कर पंडित जी क पाऊँ छू कर उनके पास hi बैठ गया

पंडित जी : बहिन तेरी कुंडली तो साफ साफ बता रही है क तेरे भाग्य में संतान का सुख है मगर तेरे पति की कुंडली में दोष है

गौरी ममी : पंडित जी इसका कोई उपाए तो होगा

पंडित जी : बहिन ये सब भगवन की माया है वो चाहे तो कुछ भी कर सकता है . मैं तो यही कहूंगा क भगवन की शरण में जाओ वो तुम्हारी मुराद ज़रूर पूरी करेगा

गौरी ममी : पंडित जी मैंने कितने मंदिरों में माथा रगड़ा कितनी मन्नतें की हैं मगर भगवन ने मेरी बात नहीं सुनी . फिर भी मैं शुक्र गुज़र हूँ क उसने मुझे अमित दे दिया इसे देखती हूँ तो मेरे मन से सरे गम दूर हो जाते हैं

पंडित जी : बहिन निराश न हो उसके घर में देर है अंधेर नहीं . यहाँ से 200 किलोमीटर दूर पहाड़ों में एक मंदिर है वहां पर सबकी मनो कामना पूरी होती है आज तक वहां से कोई खली हाथ नहीं लोटा तुम भी अपने पति को लेकर वहां जाओ भगवन की दया से तुम ज़रूर माँ बनोगी

मगर उसका रास्ता थोड़ा कठिन है 20 कम पेडल पहाड़ी रास्ता है . अगर तुम वहां एक बार मन्नत मांग लो तो तुम्हारी मुराद ज़रूर पूरी होगी

गौरी ममी : अगर आप को इतना यकीन है तो मैं भी एक बार ज़रूर जाउंगी

पंडित जी : अब मुझे आज्ञा दो बहिन मुझे बहुत दूर जाना है

गौरी ममी : पंडित जी ज़रा मेरे बेटे का भी भविष्य बता दीजिये

पंडित जी : इसका मस्तक बताता है क ये हमेशा दूसरों को खुशियां बंटेगा और जीवन में बहुत तरक्की करेगा . ये बहुत कोमल ह्रदय वाला है इस लिए खुद की परवाह किये बगैर ये हमेशा दूसरों क लिए जियेगा . ये पद लिख कर एक बड़ा आदमी बनेगा

उसके बाद पंडित जी को गौरी ममी ने दक्षिणा दी और पंडित जी ख़ुशी ख़ुशी चले गए . मैंने आज तक इस पंडित को कभी नहीं देखा था मैं जनता था माँ इन सब बातों पर बहुत विश्वास करती है इस लिए मैं भी इन सब चीज़ों का सम्मान करता था . पंडित जी क जाने क बाद मैंने माँ से पोछा

अमित : माँ ये पंडित जी कौन थे पहले कभी नहीं देखा

गौरी ममी : बीटा ये हरिद्वार से ए हैं बहुत ज्ञानी पंडित हैं मैं इन्हे बिमला क घर मिली थी तो इनको यहाँ ले आयी

तभी कामिनी ममी और दीपिका ममी आ गयी जो साडी बातें सुन रही थी

कामिनी ममी : मुझे तो पंडित जी की बातों पर पूरा यकीन है देखना दीदी आप भी जल्दी माँ बनेंगी जैसा पंडित जी ने कहा है आप वैसे कीजिये

गौरी ममी : हाँ कामिनी मैं भी यही सोच रही हूँ एक बार अमित क बाबा से कहूँगी क वो आखरी बार मेरे साथ उस मंदिर में चले क्या पता भगवन हमारी सुन ले

दीपिका ममी खामोश थी और मेरी तरफ देख रही थी उनकी ख़ामोशी से मैं समझ गया क उनके दिल में कोई बात है मगर वो माँ क सामने कहना नहीं चाहती . ऐसे hi कुछ देर में अँधेरा हो गया और तीनो मां भी लौट ए फिर हम सब ने मिल कर खाना खाया और अपने अपने कमरों में सोने चले गए .
 
अपडेट 42

दीपिका ममी खामोश थी और मेरी तरफ देख रही थी उनकी ख़ामोशी से मैं समझ गया क उनके दिल में कोई बात है मगर वो माँ क सामने कहना नहीं चाहती . ऐसे hi कुछ देर में अँधेरा हो गया और तीनो मां भी लौट ए फिर हम सब ने मिल कर खाना खाया और अपने अपने कमरों में सोने चले गए .

अब आगे-

मैं अपने बीएड पर लेता इंतज़ार कर रहा था मुझे पता था दीपिका ममी ज़रूर आएगी . रत 12 बजे क बाद दीपिका ममी कमरे में आ गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया.

अमित : मैं कब से इंतज़ार कर रहा था आपका

दीपिका ममी : आज बड़ा इंतज़ार हो रहा है क्या बात है

अमित : बात तो कोई नहीं बस आज मैं अपनी बीवी से प्यार करना चाहता हूँ

दीपिका ममी मेरे मुँह से अपने लिए बीवी शब्द सुन कर बहुत खुश हुई और भाग कर मेरे गले लग गयी . गले लगते hi ममी मुझे पागलो की तरह किश करने लगाई मेरा सारा चेहरा ममी ने गीला कर दिया . मुझे चुम कर ममी अपनी ख़ुशी ज़ाहिर कर रही थी

अमित : अरे बस बस , आज आपको बहुत प्यार आ रहा है मुझ पर क्या बात है

दीपिका ममी : तुम नहीं जानते तुम्हारे मुँह से बीवी सुन कर मुझे कितनी ख़ुशी मिली है. मैं तुम्हे मन से अपना पति मानती हूँ अमित आज तूने मुझे अपनी बीवी कह कर मुझे कितनी ख़ुशी दी है पूछो मत

अमित : सच ! तो फिर आज मेरी बीवी मुझे कैसे खुश करेगी

दीपिका ममी : जैसे तुम कहो जो तुम कहो मगर मेरी एक बात मानोगे

अमित : बोलिये मैं आपको भला इंकार कर सकता हूँ

दीपिका ममी : तुम मुझे अपनी पत्नी की तरह बुलाया करो और एक पति क जैसे हुकम दिया करो

अमित : मगर ऐसा कैसे हो सकता है आप मेरी ममी हो मैं आपका न नाम ले सकूंगा न हुकम दे सकूंगा

दीपिका ममी : सबके सामने मैं तुम्हारी ममी हूँ मगर अकेले में तो मुझे बीवी की तरह मिल सकते हो न

अमित : ठीक है ममी जी जैसा आप कहें

दीपिका ममी : ममी ? अब तो हम अकेले हैं मुझे मेरे नाम से बुलाओ

अमित : ठीक है दीपिका आज से मैं तुमने नाम से बुलाऊंगा

दीपिका ममी फिर से मुझे बेतहाशा चूमने लगी

ममी की बातों से मेरे अंदर एक अलग तरह की फीलिंग आने लगी थी और मैंने सोच लिया क अगर मेरे ऐसा करने से ममी को ख़ुशी मिलती है तो मैं ऐसा hi करूँगा

अमित : तो दीपिका आज तुम मेरी कैसे सेवा करोगी

दीपिका ममी : जैसे तुम कहो

अमित : आज कुछ अलग करते हैं

दीपिका : ??????

अमित : तुम ज़रा बैठो मैं अभी आया

मैं साथ वाले कमरे में गया और उस दिन जहाँ मैंने नंगी तस्वीरों वाली किताब राखी थी उसे ढूंढने लगा. मुझे वो किताब नहीं मिली तो मैंने सोचा शायद ममी ने कहीं रख दी होगी मैंने वापिस आ कर जब ममी से किताब क बारे में पुछा

अमित : दीपिका तुमने वो किताब तो नहीं ली तस्वीरों वाली

दीपिका ममी : नहीं तो मैंने तो उस दिन क बाद देखि hi नहीं क्या बात है

अमित : मैंने वो किताब वहीँ राखी थी अगर तुमने भी नहीं ली तो फिर वो किताब कहाँ गयी

दीपिका ममी : ये तो सोचने वाली बात है रामु का सामान भी तो हम लगो ने hi पहुँचाया है इसका मतलब है क वो किताब वो भी नहीं ले जा सकता . उसके बाद कमरे में नैना करुणा और नेहा रुकी थी मगर उनकी तरफ से भी कोई ऐसी बात सामने नहीं आयी. हो सकता है वो किताब उन तीनो में से किसी ने रख ली हो या फिर कामिनी दीदी ने सामान बांधते वक़्त देख ली हो

अमित : अगर नैना दीद नेहा दीदी या करुणा दीदी क हाथ आ गयी हुई तो ?

दीपिका ममी : तुम चिंता मत करो मुझे पूरा यकीन है वो किताब कामिनी दीदी को hi मिली होगी क्यूंकि उन्होंने सरे कमरे की सफाई खुद की थी. अब तुम वो सब छोडो और अपनी पत्नी को प्यार करो

ममी की बात सुनने क बाद मैंने जल्दी से अपने कपडे उतरे और ममी क कपडे भी उतर दिए .

अमित : दीपिका मैं चाहता हूँ आज हम खुल कर प्यार करें

दीपिका ममी : मतलब

अमित : मतलब ये क जो भी तुम्हारे दिल में कोई तमन्ना हो वो आज तुम पूरी करो मेरे साथ

दीपिका ममी : तो ठीक है मैं हमेशा से एक प्रेमी की तरह अपने पति से प्यार करना चाहती थी मगर कमलेश क साथ कभी मेरे अंदर वो फीलिंग hi नहीं आयी . आज तुम्हारे साथ मैं अपने वो सब अरमान पूरे करुँगी

इतना कह कर ममी मेरे ऊपर टूट पड़ी और मेरे होंठ चूसने लगी मैं भी ममी का साथ देने लगा . ममी ने मुझे बीएड पर लेता दिया और खुद कमांड संभल ली वो मेरे होंठ चूसने क बाद किश करते हुए मेरी छाती तक आयी और मेरे निप्पल्स को अपने होंठो में लेकर चूसने लगी हालाँकि वो बहुत hi छोटे थे पहले तो मुझे गुड़ गुड़ी हुई भला मर्द की छाती क निप्पल छेड़ने से क्या होता होगा . मगर अगले hi पल मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ने लगी और मेरे मुँह से सिसकीअन. निकलने लगी.

उसके बाद ममी किश करते हुए नीचे बड़ी और मेरे लैंड को दोनों हाथो में पकड़ कर पहले लैंड की कैप पर किश किया फिर धीरे धीरे लैंड को अपने मुँह क अंदर ले जाने लगी . आधे लैंड को मुँह में लेने क बाद ममी अपना मुँह ऊपर नीचे कर क लैंड चूसने लगी. मेरा मस्ती से बुरा हल होने लगा और मैंने अपना एक उनके गांड पर रख कर उनके चूतड़ों को मसलने लगा

ममी क मन में पता नहीं क्या आया और उन्होंने मेरा पूरा लैंड अपने मग में ले लिया आज तक उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया था . मेरा लैंड लम्बा होने की वजह से उनके गले तक चला गया . 10 सेकंड तक उन्होंने मेरा लैंड अपने गले में रखा उनका चेहरा पूरा लाल हो गया और आँखें बहार आ गयी फिर एक डैम से उन्होंने लैंड पूरा मुँह से बहार निकल लिया और ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हुए खांसने लगी

दीपिका ममी : ाखुन कहूं ाखुन उह्ह्ह ाखुन ाखुन

उनके मुँह से थूक की धार बहने लगी थी और मेरा लैंड भी पूरा थूक से लिथड़ा हुआ था. सांस ठीक होते hi वो फिर से लैंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी

सब कुछ ममी hi कर रही थी और मैं बस मज़ा ले रहा था मैंने सोचा मैं भी कुछ करूँ . मैंने ममी की कमर को अपनी तरफ खींचा तो ममी ने अपनी कमर मेरी तरफ घुमा ली . मैंने उनको घुटनो क बल किया और उनके घुटने अपने सर क दाएं बाएं कर क उनकी छूट को अपने चहरे क सामने ले आया. ममी की छूट गीली हो रही थी और बहुत hi प्यारी लग रही थी ममी हमेश अपनी छूट साफ रखती थी जो मुझे बहुत पसंद थी .

मैंने अपने होंठ ममी की प्यारी स छूट पर लगा दिए और एक किश ममी की छूट क होंठो पर कर दिया . ममी का जिस्म थोड़ा सा हिला फिर मैंने अपनी जीभ छूट क अंदर बहार कर क छूट को छोड़ने लगा . हम दोनों 69 पोजीशन में एक दूसरे को चूस कर मज़ा दे रहे थे .

ममी बहुत दिनों से प्यासी थी इस लिए ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायी और 5 मिनट्स में hi झटके लेती हुई मेरे मुँह में पानी छोड़ने लगी. पानी निकलते hi ममी निढाल हो गयी मैंने उन्हें पलट कर सीधा किया और खुद उनकी टैंगो क बीच आ कर अपना लैंड उनकी छूट पर रखा और एक झटके में आधे से ज्यादा लैंड छूट में घुसा दिया .

ममी की मुँह से एक हलकी स चीख निकली मुझे ाचा लगा और बिना इंतज़ार किये मैंने एक और ज़बरदस्त झटका मर कर पूरा लैंड जड़ तक छूट की गहराई में उतर दिया जिससे ममी ज़ोर से चीख पड़ी

मगर मैंने उनकी चीख बीच में उनका मुँह बंद कर क दबा दी

मैं धीरे धीरे लैंड अंदर बहार करने लगा दो मिनट्स में hi ममी कमर उठाने लगी . मैं उनका इशारा समझ कर तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा ममी ने अपनी टंगे खुद hi उठाकर मेरे कन्धों पर रख ली और मुझे और तेज़ धक्के मरने को कहने लगी .

ममी की उकसाने से मैं अपनी स्पीड बढ़ाता गया और मेरा बीएड धक्कों की वजह से हिलने लगा 5 मिनट्स में hi ममी ने फिर से अपनी कमर उछलते हुए अपना पानी छोड़ दिया और अपनी टंगे मेरी पीठ पर कास ली

ममी दूसरी बार पानी निकल चुकी थी जबकि मैं अभी नहीं झाड़ा था इस लिए मैंने फिर से लैंड हिलना शुरू किया तो ममी ने मुझे रोक दिया

दीपिका ममी : रुक जाओ अमित थोड़ा सांस लेने दो

अमित : पर मेरा अभी नहीं हुआ है

दीपिका ममी : मैं जानती हूँ बस 2 मिनट्स रुको

5 मिनट्स आराम करने क बाद ममी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया और कड़ी हो गयी

अमित : आप कहाँ जा रही हो मेरा तो कुछ करो

दीपिका ममी : आपका hi ख्याल है पति देव और आज मैं आपके साथ वो सब करुँगी जो मैं कभी करना चाहती थो जो किया नहीं आप 2 मिनट्स रुकिए. इतना कह कर ममी बाथरूम में चली गयी

मैं सोचने लगा आखिर ममी क्या करना चाहती हैं. अभी मैं सोच hi रहा था क ममी बाथरूम से वापिस आ गयी और उनके हाथ में तेल की बोतल थी

अमित : ये किस लिए

दीपिका ममी : बरसों से मेरे दिल में इच्छा थी क मैं भी एक बार अपनी गांड में लैंड ले कर देखूंगी . कॉलेज में मेरी कई दोस्त अपने किस्से सुनती थी क गांड में लैंड लेने में भी मज़ा अत है. आज तक मई. अपनी ये इच्छा पूरी बही कर पायी मगर आज ये तुम्हारे साथ करुँगी

अमित : मतलब आप गांड में लेना चाहती हैं मगर वहां पर तो बहुत दर्द होता है मैंने जब मीणा की गांड में डाला था तो उसकी हालत बहुत बुरी हो गयी थी

दीपिका ममी : वो तुमने गुस्से से किया था मगर मैं तो तुम्हारी बीवी हूँ न मेरे साथ तो तुम प्यार से करोगे

इतना कह कर ममी बीएड पर घोड़ी बन गयी और मुझे अपनी गांड पर तेल लगाने को कहा . मैंने उनसे तेल ले लिया और उनकी गांड में तेल लगाने लगा . गांड क अंदर तक मैं तेल दाल रहा था और अपनी ऊँगली जितनी अंदर तक जा सके दाल रहा था . पहले एक उंगली से करते रहा जब मेरी उंगली आसानी से गांड में जाने लगी तो दो उंगली से करने लगा अब गांड पहले से थोड़ी खुल गयी थी

दीपिका ममी : अब अपने लैंड पर भी तेल लगा लो और आराम से धीरे धीरे अंदर डालना . पहली बार है मुझे बहुत दर्द होगा

मैंने अपना लैंड तेल लगा कर चिकना किया और ममी क पीछे आकर पोजीशन ली

अमित : मैं डालने लगा हूँ

दीपिका ममी : डालो और पूरा डालने तक बहार मत निकलना चाहे मैं कुछ भी कहूं तुम्हे मेरी कसम पूरा डालना

इतना कह कर ममी ने अपने दोनों होंठ कास क बंद कर लिए . मैंने गांड क सुराख़ पर लैंड लगाया . गांड क मुकाबले लैंड बहुत बड़ा लग रहा था ममी को बहुत दर्द होने वाला था.

मैंने गांड में लैंड डालने क लिए एक झटका मारा मगर लैंड अंदर जाने को तैयार नहीं था . फिर मैं एक हाथ से लैंड को पकड़ कर एक हाथ से ममी की कमर को पकड़ कर ज़ोर लगाने लगा ममी ने भी अपने दोनों हाथो से अपने चूतड़ फैला दिया . हम दोनों क प्रयास से लुंड पुकककक की आवाज़ से गांड में 1 इंच घुस गया .

ममी का जिस्म दर्द से अकड़ गया और एक हलकी स चीख उनके मुँह से निकली मगर वो बड़े हौसले से बर्दाश्त कर रही थी

मैं ममी का दर्द देख कर रुक गया और उनकी पीठ पर झुक कर चूमने लगा . मैं एक हाथ से उनकी लटकती हुई चूची मसलने लगा ताकि उन्हें कुछ आराम मिले.

ममी की साँसे जब मुझे नार्मल लगी तो मैंने लैंड को हल्का सा पीछे कर क ज़ोर लगाकर एक और धक्का मर दिया इस बार लैंड गांड में 3 इंच तक घुस गया . फिर से ममी को दर्द हुआ और मैं उनकी पीठ चुमत हुआ उनके दूध मसलने लगा . ममी क चूतड़ों पर पसीना आ गया था जो संकेत था क वो बहुत तकलीफ में है मगर इस बार उनके मुँह से चीख नहीं निकली . जब मैंने देखा तो उन्होंने मुँह में अपना ब्लाउज दाल रखा था और उनकी आँखों से आंसू निकल रहे थे

मुझे ममी को यूँ तकलीफ देना ाचा नहीं लग रहा था मगर उनकी इच्छा की बात थी सो मैं मजबूर था. 2 मिनट्स बाद मैंने लैंड को थोड़ा बहार खींचा और एक शक्तिशाली धक्का मारा इस बार लैंड 6 इंच तक घुस गया . इस झटके क साथ ममी का जिस्म तड़पने लगा जैसे किसी ने गर्दन काट दी हो उनके मुँह से गुण गुणं गुणं की आवाज़े आने लगी

मैंने एक हाथ से उनके बूब्स मसलने लगा और दूसरे हाथ से उनकी छूट मसलने लगा . 5 मिनट्स तक मैं वैसे रुका रहा और उनको रिलैक्स करता रहा जब उनका जिस्म थोड़ा ढीला हुआ तो मैंने हल्का सा लैंड बहार खींचा और फिर से लैंड पर तेल डाला और धीरे धीरे उतने hi लैंड से गांड मरने लगा . मैं बड़े आराम से हलके हलके धक्के मर रहा था

10 मिनट्स हलके धक्कों और साथ में तेल की मदद से अब गांड में लैंड की थोड़ी जगह बन गयी थी मगर फिर भी छूट क मुकाबले गांड कुछ ज्यादा hi टाइट थी.

अब ममी को कुछ आराम था इस लिए वो भी गांड पीछे को धकेलने लगी.

मैंने देखा क अब गांड में लैंड आराम से जा रहा है तो मैंने लैंड को पूरा अंदर डालने का सोचा . अब सिर्फ 2.5 इंच लैंड hi बहार रह गया था मैंने सोचा बार बार तकलीफ देने से एक बार में hi अंदर दाल देना चाहिए इस लिए मैंने लैंड कैप तक बहार खींच कर ज़ोरदार धक्का मर कर जड़ तक गांड में दाल दिया

ममी शायद ये सोच रही थी क पूरा लैंड पहले hi मैं दाल चूका हूँ इस लिए वो रिलैक्स हो चुके थी और अपने मुँह से कपडा निकल चुकी थी. मगर इस आखिरी भीषण धक्के से उनके मुँह से एक तेज़ चीख निकल गयी और वो सर क बल बीएड पर गिरती चली गयी. मैं भी उनके साथ hi गिर उनके ऊपर गिर पड़ा मगर लैंड बहार नहीं निकलने दिया

दीपिक ममी: ाआईईईई अअअअअअअ निकालो निकालो बहार ाआईई म्मम्माआआ मारररर गईइइइइइ

अमित : बस हो गया ममी पूरा चला गया अंदर अब और दर्द नहीं होगा

दीपिका ममी : मैं मर जाउंगी एआईईईई मम्माआ उईईईईई फट्ट्ट्ट गयीईइ में गानंददद आआआआआ

मैं ममी की पीठ चूमता रहा उनके पीठ पर पसीना था मैं लगातार उनको शांत करने की कोशिश करता रहा . लगभग 10 मिनट्स बाद उनकी चीखें सिसकियों में बदल गयी . मैंने फिर से उनको घुटनो पर किया और अपना लैंड आराम से अंदर बहार करने लगा पहले तो ममी दर्द से करगति रही मगर 5 मिनट्स में hi मेरा साथ देने लगी.

अब उन्हें भी शायद मज़ा आने लगा था और वो भी अपनी गांड को पीछे धकेलने लगी

दीपिका ममी : शाबाश ऐसे hi शाबाश और ज़ोर लगाओ और ज़ोर से और तेज़

मैं ममी की बात सुन कर अपनी स्पीड बढ़ाने लगा और अब मेरे धक्के तूफानी हो चुके थे मैं लगभग आधे घंटे से ममी की चुदाई कर रहा था अब मुझे भी अपना पानी निकलना था

ममी की टाइट गांड मरने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. और ममी भी अपनी इच्छा पूरी कर रही थी हम दोनों पूरा मज़ा ले रहे थे गांड क आगे मेरा लैंड और ज़्यादा देर टिक नहीं सका और मैं एक ज़ोरदार धक्का मर कर पूरा लैंड जड़ तक घुसेड़ कर ममी क ऊपर गिर गया और पानी छोड़ने लगा . ममी भी मेरे वजन को संभल नहीं पायी और वो भी बीएड पर गिर गयी

मैं ममी क ऊपर पड़ा अपनी साँसे ठीक करता रहा . ममी की गांड मरने में बहुत ज़ोर लग गया था और लैंड भी इतनी टाइट जगह में जा कर थक चूका था और चुदाई करने की हिम्मत नहीं हो रही थी और न hi ममी दूसरी चुदाई क काबिल थी मैं ऐसे hi ममी क ऊपर hi सो गया

एक घंटे क बाद ममी ने मुझे हिलाया और मैं उठ गया

दीपिका ममी : उठो मेरी मदद करो मुझे बाथरूम तक ले क चलो

मैं जल्दी से उठा और ममी को सहारा देकर उठाया . वो थोड़ा आगे को झुक कर कड़ी थी उनसे सीधा नहीं हुआ जा रहा था. मैं उनको सहारा देकर बाथरूम तक ले गया और उन्होंने खुद को साफ़ किया . मैं पीछे से देख रहा था ममी की गांड सूज गयी थी

दीपिका ममी : ऐसे क्या देख रहे हो

अमित : कुछ नहीं आपकी गांड काफी सूज गयी है

दीपिका ममी : सब तुम्हारा कसूर है इतना बड़ा मुसल जब अंदर जायेगा गांड फटेगी नहीं तो और क्या होगा

अमित : मैंने कब कहा था करने को आप hi को करना था

दीपिका ममी : मैं तो मज़ाक कर रही थी . थैंक्स तुमने मेरी विश पूरी की और सच बताओ तुम्हे मज़ा आया

अमित : मज़ा का मत पूछो मई. अब रोज़ आपकी गांड मरूंगा

दीपिका ममी : न बाबा न एक बार में hi ये हालत हो गयी है अब भूल जाओ

अमित : अब तो रास्ता खुल गया है अगली बार तो इतना दर्द नहीं होगा प्लीज

दीपिका ममी : ठीक है ठीक है मगर अभी कुछ दिन भूल जाओ जब तक ये ठीक नहीं हो जाती

उसके बाद ममी ने और मैंने कपडे पहने और मैं उनको सहारा देकर उनके कमरे तक छोड़ आया. बीएड पर लेट कर मैं ममी की गांड मरने क एक्सपीरियंस क बारे में सोचता हुआ कब सो गया मुझे पता hi नहीं चला
 
ी एक्सट्रेमेली सॉरी दोस्तों शायद कुछ दोस्त ये सोच रहे हैं मैं एक hi चीज़ को रिपीट कर रहा हूँ जिससे टाइम वास्ते हो रहा है बूत मैं स्टोरी को शार्ट में ख़तम नहीं करना चाहता अभी तो शुरुआत है

मैं डिटेल में लिख रहा हूँ और हर इंसिडेंट को लिखूंगा अगर कहीं कुछ मिस भी हुआ तो उसको पीछे रहने नहीं दूंगा कुछ चीज़ों को डिले किया है मगर स्टोरी में आगे आगे सब पता चल जायेगा सो प्लीज वेट वाच एंड रीड

थैंक्स फॉर योर सपोर्ट
 
अपडेट 43

उसके बाद ममी ने और मैंने कपडे पहने और मैं उनको सहारा देकर उनके कमरे तक छोड़ आया. बीएड पर लेट कर मैं ममी की गांड मरने क एक्सपीरियंस क बारे में सोचता हुआ कब सो गया मुझे पता hi नहीं चला

अब आगे -

सुबह मैं अखाड़े से वापिस लौटा तो बाबा खाना खा रहे थे अजय मां भी पास बैठे थे

विजय मां : अमित जल्दी खाना खा कर तैयार हो जाओ तुम्हे मेरे साथ पंचायत में चलना है

अमित : पंचायत में ? मगर आज क्या बात है

विजय मां : अरे कुछ नहीं , आज पंचायत वाले सरे गाओं क सामने तुम्हे सम्मानित करने वाले हैं

मैं अपने कमरे में गया और जल्दी से तैयार हो कर नीचे आ गया फिर खाना खा कर बाबा और अजय मां क साथ पंचायत में गया जहाँ पर लगभग गाओं का हर आदमी मौजूद था.

सरपंच साहब ने सबके सामने मेरी बड़ा चढ़ाकर तारीफ की और उस्ताद जी की भी . डरा और उस्ताद जी दोनों मेरे साथ hi खड़े थे और मेरी तारीफ सुन कर उन दोनों को भी मुझ पर गरब हो रहा था

वहीँ बाबा और अजय मां भी मेरी तारीफ सुन सुन कर अपना सीना फुला रहे थे. पंचायत ने मुझे अपनी तरफ से 5000 रूपए इनाम में दिए और मेरे साथ बाबा अजय मां उस्ताद जी और डरा को भी शाल दे कर सम्मानित किया गया. उसके बाद हम घर लौट ए. अजय मां तो खेतों में चले गए और बाबा घर में सबको पंचायत की कहानी सुनाने लगे

जब हम पंचायत गए थे तो पीछे घर में कामिनी ममी दीपिका ममी क पास उनके कमरे में गयी

कामिनी ममी : क्या बात है दीपिका आज बहार नहीं आयी तुम

दीपिका ममी: दीदी वो ज़रा दर्द हो रही है इस लिए आराम कर रही हूँ

कामिनी ममी : दर्द ? क्या हुआ है तुम्हे कहीं चोट लग गयी है क्या

दीपिका ममी : कुछ नहीं दीदी वो कल रत को

कामिनी ममी : कल रत को क्या ?

दीपिका ममी : वो कल रत मैं अमित क पास गयी थी तो रत में पीछे से कर लिया बस उसी वजह से दर्द हो रही है

कामिनी ममी : तौबा ! पीछे से किया ? इतना बड़ा उसका मुसल तो आगे लेना मुश्किल हो जाता है और उसने तुम्हारे पीछे घुसा दिया. आखिर ये गन्दी आदत उसे किसने लगा दी भला वहां भी कोई करता है क्या.

दीपिका ममी : अरे दीदी आप गलत समझ रही हैं उसने नहीं किया मैंने hi उसे कहा था पीछे से करने को . मेरी कब से इच्छा थी एक बार पीछे से करवाने की

कामिनी ममी : तुम्हारा दिमाग तो ठीक है भला पीछे से क्या मज़ा मिला तुम्हे

दीपिका ममी : उसमे भी एक अलग hi मज़ा है दीदी एक अलग तरह का एहसास हुआ कल मुझे और सच कहूं तो मैं सोचती हूँ क बीएड पर अपने पार्टनर क साथ खुल कर मज़ा करना चाहिए. वैसे भी ये सब तो शहरों में नार्मल बात है. और सच कहूं मुझे पहले तो दर्द हुआ था मगर बाद में मज़ा भी आया

कामिनी ममी : तभी बीएड पकड़ क बैठी हो

दीपिका ममी : दीदी पहली बार तो आगे से भी दर्द होता है न और वैसे भी हमारे पास कोई आम इंसान नहीं लम्बी रेस का घोडा है जो जल्दी थकता नहीं इस लिए इतना तो होना hi था

कामिनी ममी : ज्यादा सवारी मत करना पीछे से ये न हो उस घोड़े की घोड़ी बनते बनते भैंस बन जाओ

दोनों हसने लगी और ऐसे hi कुछ देर बातें करने क बाद जब कामिनी वापिस जाने लगी तो दीपिका ने उसे रोक लिया

दीपिका ममी : दीदी एक बात पूछनी थी आपसे ?

कामिनी ममी : पूछो

दीपिका ममी: दीदी रामु क कमरे की सफाई आपने की थी तो क्या आपको उसके कमरे से कुछ मिला था

कामिनी ममी : तुम किस बारे में पूछ रही हो

दीपिका ममी : असल में दीदी मैंने उसके सामान में एक किताब देखि थी जिसने नंगी तस्वीरें थी और वो किताब मैंने उसके गद्दे क निचे देखि थी जब वो हॉस्पिटल में था . मैं कल जब सफाई करने हुई तो वो किताब वहां से गायब थी मुझे इस बात की चिंता है क उस कमरे में नैना नेहा और करुणा भी रुकी थी अगर वो किताब उनके हाथ में आ गयी हुई तो सारा इलज़ाम अमित पर आ जायेगा और मैं ये नहीं चाहती

कामिनी ममी : वो वो किताब तुमने देखि है ?

दीपिका ममी : इसका मतलब आप ने भी देखि है. तो क्या वो आपके पास है?

कामिनी ममी : हाँ नहीं वो मैंने फेंक दी

दीपिका ममी : नाराज़गी से ) ये आपने क्या किया दीदी मुझे वो चाहिए थी

कामिनी ममी : तुम्हे क्यों चाहिए थी

दीपिका ममी : शरमाते हुए ) वो क्या है दीदी उस किताब को देखते हुए अमित ने वो सब कुछ मेरे साथ किया था और उसमे हमें बड़ा मज़ा आया था कल भी अमित वो किताब ढून्ढ रहा था मगर मिली नहीं

कामिनी ममी : तू तो बड़ी तेज़ हो गयी है अंग्रेज़ों की नक़ल करने लगी है ये पीछे से करने का आईडिया कहीं उसी किताब से तो नहीं लिया

दीपिका ममी : वो तो मैं पहले से hi करना चाहती थी अब तो आपने किताब फेंक दी नहीं तो कितना मज़ा अत अमित क साथ

कामिनी ममी : क्या अमित को भी वो पसंद थी

दीपिका ममी : और नहीं तो क्या

कामिनी ममी : ाचा ! मैंने झूठ कहा था वो किताब मेरे पास hi है मैंने छुपा ली थी उस किताब क इलावा मुझे और भी सामान उसके बैग में से मिला था वो भी मैंने रखा है

दीपिका ममी : सच में ? आप मुझे ला कर दिखाइए वो सामान

कामिनी ममी : मैं अभी लती हूँ

कामिनी ममी जल्दी से अपने कमरे में गयी और वो सब कुछ ले आयी . दीपिका सबकुछ चेक करने लगी . दीपिका पड़ी लिखी थी वो देख कर सब समझ गयी

दीपिका ममी : दीदी आप जानती हैं ये सब क्या है?

कामिनी ममी : नहीं तो . तू hi बता दे

दीपिका ममी : ये तो कंडोम हैं ये तो आपको पता hi होगा और जे दवा है ये नींद की है लगता है ये hi दवा उसने आपको किसी चीज़ में मिलकर दी होगी . और ये है सेक्स पावर बढ़ाने की दवा इसमें से भी एक गोली काम है लगता है हरामी ने उस दिन खुद खाई होगी

कामिनी ममी : शॉकेड ) क्याआ ! तो ये सब कर रहा था वो कुत्ता

दीपिका ममी : अब आप ये सब छोड़िये , इसे मैं रख लेती हूँ शायद इसकी हमें ज़रूरत पद जाये आगे

दोनों ने कुछ देर बात की और फिर कामिनी ममी घर क कामों में लग गयी . दीपिका ममी ने भी कुछ देर आराम किया और पैन किलर खा कर वो भी घर क कामो में हाथ बताने लगी

मैं और बाबा जब घर आये तो दीपिका ममी रसोई में hi कामिनी ममी क साथ काम करवा रही थी . बाबा ने एते hi साडी बात बताई जिसे सुन कर माँ कामिनी ममी और दीपिका ममी बहुत खुश हुई . बाबा को कोई फ़ोन आ गया और वो चले गए . दीपिका ममी की चाल बिगड़ी हुई थी वो अपनी गांड बहार निकल कर चल रही थी और पाऊँ भी थोड़ा फैलाकर चल रही थी

गौरी ममी : अरे दीपिका तुझे क्या हुआ ऐसे क्यों चल रही है ? कहीं चोट लगी है क्या ?

कामिनी ममी : चोट कहाँ महारानी तो घुड़ सवारी करती फिरती हैं

इतना कह कर कामिनी ममी हसने लगी और दीपिका ममी शर्मा कर कामिनी ममी को चिकोटी काटने लगी

गौरी ममी : क्या मतलब ? ये घुड़ सवारी कहाँ से आ गयी

दीपिका ममी : दीदी ऐसे hi बोल रही हैं मैं तो बिस्तर से गिर गयी थी तो ज़रा कमर में चोट लग गयी है और ये मेरा मज़ाक उदा रही हैं जब खुद पर बीतेगी तो पता चलेगा

कामिनी ममी : न भाई न मुझे शोक नहीं घुड़ सवारी का ये शोक तुम्हे मुबारक

कामिनी ममी दीपिका ममी को छेद रही थी मगर माँ को उनकी बातें समझ नहीं आ रही थी मगर मुझे अंदाज़ा हो गया था क कामिनी ममी क्या कह रही हैं. मैंने दीपिका ममी का साथ देने क लिए कामिनी ममी से कहा

अमित : शोक हो या न हो आपको एक बार तो सवारी करनी hi चाहिए तभी तो पता चलेगा क्या फरक होता है घुड़ सवारी में

दीपिका ममी : बिलकुल अब तो आपको एक बार ये घुड़ सवारी करनी hi पड़ेगी वर्ण आप खेल से बहार

कामिनी ममी : ऐसे कैसे ? कोई ज़बरदस्ती है क्या ?

गौरी ममी : अरे ये क्या लगा रखा है तुम लोगों ने

उसके बाद वो रसोई में खाने की तयारी करने लगी . दोपहर क खाने क बाद मैं आज आराम करने की बजाये घर से निकल पड़ा बहार घूमने . पहले मैं राजू क घर गया मगर वो कहीं बहार गया हुआ था काम से . राजू जब नहीं मिला तो मैंने सोचा आज खेतों में hi चले मौसम आज थोड़ा ाचा था इस लिए मैं आज दूसरे रस्ते से घूमते हुए जाने लगा .

मैं लास्ट गली से गुज़र रहा था तो मुझे एक बुज़ुर्ग आदमी ने आवाज़ लगाई . मैं आवाज़ सुन कर रुक गया

आदमी : अरे अमित बीटा इस वक़्त किधर जा रहे हो

अमित : पाए लागु ताऊ जी मैं ज़रा खेतों में जा रहा हूँ

आदमी : अछि बात है मगर बीटा तुमने क्या ज़रूरत है खेतों में जाने की तुम तो हमारे गाओं की शान हो

अमित : ताऊ जी खेतों को तो देखना hi पड़ेगा न अगर मैं ये सब नहीं सीखूंगा तो कल को क्या करूँगा ज़िन्दगी में

आदमी : अछि बात है मगर खेतों में बाद में जाना पहले मेरे साथ मेरे घर आओ

मुझे आदमी को देख कर दिमाग में एक बात आ रही थी वैसे तो मैं गाओं में काम hi किसी से मिलता था मगर गाओं में रहते कहीं न कहीं आमना सामना हो hi जाता है

मैंने बहुत इंकार किया मगर फिर उनके बार बार कहने पर उनका दिल रखने क लिए मैं उनके घर क अंदर आ hi गया . घर क अंदर ले जाकर उन्होंने मुझे सोफे पर बिठाया . अंकल का घर ाचा बना हुआ था . घर क आगे आँगन था द्यिंग रूम किचन आगे थे फिर हाल फिर तीन कमरे थे ऊपर भी शायद कमरे हो एक दो और पीछे से गए भैंस की आवाज़ भी आ रही थी .

आदमी : तुम बैठो मैं अभी आया

अंकल मुझे बिठा कर अंदर गए शायद किसी को बुलाने गए हो तभी वो वापिस लौटे उनके साथ दो औरतें थी दोनों ने सदी पहनी हुई थी . एक तो उनकी पत्नी थी जिसकी उम्र 50 क लग भाग होगी और दूसरी शायद उनकी बहु थी जिसका चेहरा घूँघट में था

आदमी : बीटा ये है मेरे बीवी तुम्हारी तै

मैं आगे बाद कर उनके पाऊँ छू कर उनसे मिला और उन्होंने ने भी मुझे आशीर्वाद दिया

आदमी : ये है हमारी बहु तुम्हारी भाभी पूजा

पूजा नाम सुनते hi मेरे दिमाग की बत्ती जाली . ये तो वही पूजा भाभी है जिसे उस दिन मां छोड़ रहा था इसका मतलब मैं सही सोच रहा था क अंकल कौन हैं

मैंने आगे बाद कर पूजा भाभी क पाऊँ छूने चाहे मगर वो पीछे हैट गयी

पूजा भाभी : अरे अरे रहने दो देवर जी इसकी ज़रूरत नहीं है

पूजा की सास : लगाने दे बहु कितना संस्कारी बीटा है

मैंने पूजा भाभी क पाऊँ छुए और उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया

पूजा क ससुर : बहु अमित हमारे गाओं की शान है इसने इतनी स उम्र में इतना बड़ा काम किया है क हर कोई इस पर गर्व कर रहा है.

फिर पूजा का ससुर मेरे बारे में उन दोनों को बताने लगा

अमित : अरे बस भी कीजिये अंकल जी ये तो सब उस्ताद जी की वजह से हुआ है मैं भला इसके काबिल कहाँ

पूजा का ससुर: बीटा हीरे को खुद अपनी कीमत नहीं पता होती तुम क्या हो ये हम जानते हैं

पूजा की सास ने उसे कुछ कहा और वो रसोई में चली गयी . मैं पूजा क सास ससुर की बातें सुनता रहा और पूजा भाभी एक ट्रे में कुछ खाने का सामान और मेरे लिए दूध का गिलास भर क ले आयी . पहले जब पूजा भाभी आयी थी तो उसके सर पर घूँघट था मगर अब घूँघट क बगैर थी .

पूजा भाभी मेरे आगे तरह रखने क लिए झुकी तो मेरी नज़र उनकी ब्लाउज में से झांकती चूचिओं पर गयी मैं उनकी चूचियां देखने टैग्स तभी पूजा भाभी ने मेरे तरफ देखा और जब हमारी नज़रें मिली तो वो मुस्कुराने लगी .

अमित : इसकी क्या ज़रूरत थी

पूजा का ससुर : ज़रूरत कैसे नहीं थी तुम हमारी शान हो और तुम जैसे नौजवान ये सब नहीं खाएंगे तो क्या हूँ बड़े खाएंगे

पूजा भाभी : ले लीजिये देवर जी ये दूध आप hi क लिए है

पूजा भाभी ने इतना कहते हुए अपनी छाती को थोड़ा उभर लिया था मैं उनका ये स्टाइल देख कर चौंक गया

पूजा भाभी : मन में) कितना हैंडसम है और ऊपर से पहलवान भी अगर उस दिन इसकी बात मन लेती तो मेरी चंडी हो जाती . कहाँ ये और कहाँ वो भादवा इस का मां . हाय ऋ पूजा तेरी बुरी किस्मत हाथ आया मौका गवा दिया . अब मैं कैसे भी कर क इसे अपनी तरफ खींचूंगी और अपनी छूट का गुलाम बनाउंगी . ये तो जब चाहे घर भी आ सकता है कोई शक भी नहीं करेगा और मेरी भी प्यास बुझती रहेगी. मैं इसे कैसे भी कर क अपने हुसैन क जल में फसाऊँगी

पूजा ससुर : बीटा तुम मेरी एक बात मानोगे

अमित : जी ताऊजी बोलिये

पूजा ससुर : बीटा तुम कभी कभी आ जाया करो तुम्हे तो पता होगा हमारा बीटा विदेश में है अब हम बड़े मियां बीवी यहाँ अकेले बोर हो जाते हैं . आज तुमसे बात कर क बहुत ाचा लग रहा है और तुम्हारे परिवार की तो गाओ में हर कोई बड़ाई करता है . अगर तुम थोड़ा वक़्त हम बड़े मियां बीवी क लिए निकल सको तो बड़ी मेहरबानी होगी हमें लगेगा हमारा बीटा हमारे पास है

अमित : अरे ये कैसी बात कर रहे हैं आप इसमें मेहरबानी की क्या बात है मैं आपका बीटा hi तो हूँ आप हुकम कीजिये

पूजा सास : जग जग जियो बीटा भगवन तुम जैसा संस्कारी बीटा सब को दे

पूजा भाभी : देवर जी सिर्फ कहने से काम नहीं चलेगा अगर बीटा बोलै है तो बेटे क सब फ़र्ज़ निभाने पड़ेंगे ( बहु को भी छोड़ना पड़ेगा )

पूजा भाभी ने इतना कहते हुए एक कामुक स स्माइल दी जिसे देख कर मेरे मन में गुदगुदी होने लगी. इसका मतलब है भाभी लाइन दे रही है उस दिन तो मन कर रही थी फिर आज क्यों

अमित : जी वो तो है भाभी मैं पूरी कोशिश करूँगा क कोई शिकायत न हो किसी को मेरी तरफ से

इतना कह कर मैंने दूद का गिलास उठा कर पि लिया और उनसे जाने की इजाज़त मांगी . पूजा क सास ससुर और पूजा भी मुझे बहार तक छोड़ने आये . मैं फिर आने का कह कर अपने खेतो की तरफ चल दिया .

शाम तक मैं खेतों में रहा और शाम को अजय मां और कमलेश मां क साथ वापिस घर आ गया . रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में जाने hi वाला था क दीपिका ममी ने मुझे आवाज़ देकर मुझे बताया क वो आज नहीं आने वाली और किताब की भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है वे कामिनी ममी क पास है.

मुझे उनकी बात से तसल्ली हुई और फिर मैं अपने कमरे में आ कर लेट गया
 
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शाम तक मैं खेतों में रहा और शाम को अजय मां और कमलेश मां क साथ वापिस घर आ गया . रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में जाने hi वाला था क दीपिका ममी ने मुझे आवाज़ देकर मुझे बताया क वो आज नहीं आने वाली और किताब की भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है वे कामिनी ममी क पास है.




मुझे उनकी बात से तसल्ली हुई और फिर मैं अपने कमरे में आ कर लेट गया

अब आगे -

मैं अभी बीएड पर लेता hi था क मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगी मैंने देखा तो ये नैना दीदी थी . मैंने कॉल अटेंड की

अमित : आ गयी यद् आपको

नैना दीदी : तू तो यद् करेगा नहीं मैंने सोचा मैं hi करलु

अमित : ो मेरी प्यारी प्यारी दीदी कोई पागल hi होगा जो आपको यद् न करे . मैं हर वक़्त आपके साथ बिताये पल यद् करता रहता हूँ

नैना दीदी : झूठा ( मुस्कुराते हुए)

अमित : अरे सच दीदी आप इतनी प्यारी हैं क कोई आपको एक बार मिल ले तो आपको भूल hi नहीं सकता आप इतनी प्यारी हसने हँसाने वाली बातें करती हैं क जब भी मुझे वो बातें यद् अति हैं अपने आप हंसी आ जाती है

नैना दीदी : क्या सच में तुमने मेरी बातें अछि लगती हैं मैं तो हर वक़्त तुम्हे तंग करती रहती हूँ

अमित : आपका यही ऐटिटूड तो मुझे ाचा लगता है और मैं जनता हूँ आप मुझे प्यार भी उतना hi करती हैं

नैना दीदी : बस बस बड़ा प्यार वाला एक फ़ोन तो कर नहीं सकता डफ्फर कहीं का

नैना दीदी से थोड़ी देर बात करने क बाद कॉल कट कर दी और थोड़ी देर में hi करुणा दीदी का फ़ोन भी आ गया . लगता है दोनों सब मिल क hi करती हैं

अमित : मैं आपके hi फ़ोन का इंतज़ार कर रहा था

करुणा दीदी : तुझे कैसे पारा मैं फ़ोन करने वाली हूँ

अमित : वो इस लिए मेरी प्यारी प्यारी दीदी क अभी नैना दीदी की कॉल आयी थी और मुझे पता है आप दोनों आपस में बात करती हो और सब मिलके करती हो

करुणा दीदी : ज्यादा स्मार्ट मत बनो एक कॉल तो कर नहीं सकते बस बातें बनानी अति हैं

अमित : अरे दीदी मैं यहाँ बिजी था बस टाइम hi नहीं मिला मगर आपने कौन सा कर लिया और मुझे पता है अब भी नैना दीदी की वजह से आपने किया होगा

करुणा दीदी : एक तो मैंने खुद फ़ोन किया ऊपर से तुम मुझे बातें सुना रहे हो जाओ मैं नहीं बात करती तुमसे

अमित : अरे अरे आप तो गुस्स हो गयी प्लीज दीदी गुस्सा मत होना वर्ण

करुणा दीदी : वर्ण क्या

अमित : वर्ण आप फिर से मुझे कैसा क पकड़ लेंगी और मेरी जान निकल जाएगी

करुणा दीदी पहले तो समझी नहीं मगर जब उन्हें समझ आया तो बरस पड़ी

करुणा दीदी : ोूउउ ! अब जब मिलूंगी तो वो हल करुँगी क साडी अकड़ निकल जाएगी

अमित : अकड़ कैसे निकलती है पता है आपको

ये कुछ ज्यादा hi हो गया था पता नहीं कैसे मेरे मुँह से निकल गया

करुणा दीदी : यू स्टुपिड गन्दा

इतना कह क दीदी ने फ़ोन काट दिया मुझे लगा अब तो मैं गया कहीं दीदी मेरी शिकायत न करदे मैंने वापिस फ़ोन लगाया मगर उन्होंने काट दिया और बार बार मैं करता गया वो काट टी गयी

फिर मैंने मैसेज टाइप किया

‘ सॉरी दीदी गलती से निकल गया प्लीज माफ़ कार्डो प्लीज ‘

मगर दीदी का कोई जवाब नहीं आया . मुझे टेंशन होने लगी कोई 15/20 मिनट्स बड़ा मेरे फ़ोन की मैसेज टोन बजी . मैंने देखा तो करुणा दीदी का hi मैसेज था जिसमे सिर्फ गुड नाईट लिखा था . मैसेज पद कर मुझे थोड़ी शांति मिली और मैंने भी गुड नाईट और थैंक यू का मैसेज कर दिया

उसके बाद कोई मैसेज नहीं मिला और मैं भी लेट गया रात 12 बजे क बाद मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और कामिनी ममी कमरे में आ गयी. दरवाज़ा बंद कर क कामिनी ममी मेरे पास आयी

कामिनी ममी : अमित सो गया क्या

अमित : आप ? नहीं मैं बस अभी लेता hi था

कामिनी ममी : ये तुमने दीपिका क साथ क्या किया . भला वहां भी कोई करता है बेचारी की चल बिगड़ गयी है

अमित : वो तो बड़े मेक से करवा रही थी और उन्होंने खुद hi कहा था . आपको भी करना है क्या

कामिनी ममी : न बाबा न मुझे नहीं करना देखा है मैंने उसका हल मुझे तो माफ़ करो

अमित : इसका मतलब आप मुझे दीपिका ममी से काम प्यार करती हैं वर्ण आप ऐसा नहीं कहती

कामिनी ममी : ऐसा मत कहो अमित मेरा दिल जनता है अब मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ . तुमने तो मेरे सूने जीवन में रंग भर दिए हैं . अगर पीछे से करने से hi तुझे प्यार का परमं मिलेगा तो करले मेरे साथ भी मैं उफ़ तक नहीं करुँगी चाहे जितना भी दर्द हो

कामिनी ममी ने बड़े घम्बिर लहजे में ये बात कही थी जो सीधा मेरे दिल पर लगी और मैंने कामिनी ममी को अपने सीने से लगा लिया

अमित : मैं तो मज़ाक कर रहा था ममी जी मई अछि तरह जनता हूँ आप मुझे बहुत प्यार करती हैं

कामिनी ममी : मगर मैंने मज़ाक नहीं किया अब तू मेरे साथ भी पीछे से कर

अमित : नहीं ममी जी मैं तो वैसे hi करूँगा जैसे आपको ाचा लगता है

कामिनी ममी : मैं कह रही हूँ न क तू पीछे से कर तो कर मैं भी दीपिका क जैसे तेरे साथ प्यार करना चाहती हूँ

अमित : नहीं ममी जी इसकी ज़रूरत नहीं है

कामिनी ममी : नहीं अब तो तुझे करना hi पड़ेगा

अमित : ठीक है ममी जी अगर अपनी भी करवाना है पीछे से तो मैं करूँगा मगर आज नहीं क्यूंकि अगर मैंने अपने साथ आज किया तो कल आपकी भी चल बिगड़ जाएगी जिससे किसी को शक भी हो सकता है पहले दीपिका ममी फिर आप

कामिनी ममी : ठीक है मगर मुझे भी पीछे से तू करेगा जब तुझे ठीक लगे

अमित : ज़रूर ममी जी अब बताइये क्या इरादा है

कामिनी ममी : शरमाते हुए ) तुझे नहीं पता क्या इरादा है

कामिनी ममी की मुस्कराहट बहुत प्यारी थी मुझे बहुत प्यार आया उनपर और मैंने उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उनका रसपान करने लगा. ममी भी मेरा साथ देने लगी. 5 मिनट्स तक किश करने क बाद मैंने किश तोड़ी

अमित : उसदिन तो जल्दी जल्दी में मज़ा नहीं आया था आज तबियत से आपको प्यार करूँगा

कामिनी ममी : जो भी करना है जल्दी कर मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा

मैंने कामिनी ममी को किश करते हुए उनके कपडे उतरने लगा और थोड़ी देर में hi वो बिलकुल नंगी मेरे सामने बिस्तर पर पड़ी थी फिर मैंने भी अपने कपडे उतर दिए और उनके पास आ गया

अमित : ममी जी आपसे एक बात पूछनी थी क्या आपको रामु क कमरे से कोई किताब मिली थी तस्वीरों वाली

कामिनी ममी : हाँ मैंने वो दीपिका को दे दी है आज वो पूछ रही थी

अमित : आपने वो किताब तो देखि होगी उसमे जैसे अँगरेज़ करते हैं मैं वैसे hi अपने साथ करना चाहता हूँ पर अब तो किताब छोटी ममी क पास है

कामिनी ममी : तू जैसे चाहे कर और वो किताब कल ले लेना दीपिका से या मैं ले आउंगी कल को कर लेना उसके जैसे

कामिनी ममी बड़ी बेताब हो रही थी मैंने और उन्हें तड़पना ठीक नहीं समझा और उनके ऊपर आ कर उनके होंठ चूसने लगा . होंठो का रास चूसने क बाद मैं उनके दोनों दूध मसलता और चुस्त रहा उसके बाद मैंने उनकी छूट को चूस कर एक बार उनका पानी निकल दिया और फिर हुआ चुदाई का घमासान.

साडी रत ममी मज़े से चुदाई करवाती रही कितने दिनों की प्यास आज बुझ रही थी उस दिन तो जल्दी में मज़ा नहीं आया था मगर आज पूरी तबियत से ममी ने अपने प्यास बुझाई . सुबह क 3 बजे तक कभी ममी मेरे ऊपर होती कभी मैं ममी क ऊपर दोनों पूरे जोश क साथ लगे रहे . मैंने तीन बार ममी की बुर की अपना पानी पिलाया गैब जा कर उनको शांति मिली और उनकी छूट पता नहीं कितनी बार पानी पानी हुई थी खैर सुबह ममी आखिरी चुदाई क बाद चली गयी और मैं भी सो गया .

लेट सोने की वजह से मैं देर से जगा और अखाड़े से आज छुट्टी हो गयी . मैं तैयार हो कर जब नीचे गया तो घर में इस वक्त माँ कामिनी ममी और दीपिका ममी hi थी

कामिनी ममी की ऑंखें थोड़ी लाल थी शायद वो ठीक से सोई नहीं थी मगर उनका चेहरा आज चमक रहा था . रत की चुदाई से उनकी छूट को पूरी शांति मिल गयी थी

गौरी ममी : आज गया नहीं तू कसरत करने

अमित : वो आज आँख नहीं खुली सुबह

गौरी ममी : लगता है तू देर तक जागने लगा है अब से मैं रोज़ तेरे कमरे में खुद जा कर देखूंगी क तू सोया या नहीं

दीपिका ममी : अरे दीदी इतनी स बात क लिए आप क्यों चिंता करती हैं मैं हूँ न मैं देखूंगी और जग रहा होगा तो खुद इसे सुलाउंगी

मैं चुप चाप नाश्ता करता रहा और खाना कहते hi बहार निकल गया कहीं आज मेरी सहमत न आ जाये

मैं आज मंजरी से मिलने का सोच कर उसके घर की तरफ निकल पड़ा मगर वो नज़र नहीं आ रही थी सोचा चलो नदी पर चलता हूँ कहीं कपडे धोने न गयी हो

जब मैं नदी पर गया तो कुछ औरतें कपडे धो रही थी मगर उनमे मंजरी नहीं थी फिर मैं टाइम पास करने क लिए उनसे थोड़ा दूर जा कर बैठ गया और बहते पानी को देखते हुए अपनी ज़िन्दगी क बारे में सोचने लगा. इस बार जन्म दिन क बाद से मेरी ज़िन्दगी लगातार बदलती जा रही थी कैसे दीपिका ममी मंजरी और फिर कामिनी ममी क साथ मेरे रिश्ते बने . कहाँ पहले मुझे सेक्स क बारे में कोई ज्ञान नहीं था और आज मेरे पास तीन तीन मस्त छूट थी जिसे मैंने जब चाहे छोड़ सकता हूँ . कहाँ मैं मनहूस बना गिरता था और अब पूरा गाओं मुझ पर गर्व कर रहा था. मैं अपनी सोच में डूबा हुआ था क किसी ने मुझे मेरी सोच की दुनिया से बहार निकला

औरत : यहाँ अकेले बैठ कर क्या कर रहे हो देवर जी ज़रा मेरी थोड़ी मदद hi कर दो

मैं औरत की आवाज़ सुन कर हड़बड़ा कर उठा और जैसे hi पीछे देखा तो मेरे सामने पूजा भाभी कड़ी थी जो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी

अमित : भाभी आप यहाँ

पूजा भाभी : मैं तो कब से यहीं हूँ मगर लगता है आप कहीं खोये हुए हैं

किसके ख्यालों में खोये हो लगता है कोई दिल ले गयी है आपका

अमित : क्या भाभी आप भी मेरा मज़ाक बना रही हैं मैं तो बस ऐसे hi बैठा कुछ सोच रहा था

पूजा भाभी : ज़रा मुझे भी तो पता चले ऐसी कौन सी बात है जो इतनी देर से आपको मेरी आवाज़ नहीं सुनाई दे रही थी

अमित : वो सब छोड़िये आपको कोई काम था क्या

पूजा भाभी : वो मैं कपडे धोने आयी थी . कपडे ज़्यादा थे तो अब मुझसे उठाये नहीं जा रहे आपको देखा तो सोचा देवर जी मेरी मदद कर देंगे

अमित : चलिए मैं अपनी मदद करता हूँ

पूजा भाभी ने कपडे धो कर रखे हुए थे मैंने सरे कपडे बांध कर उठा लिए

पूजा भाभी : अरे आपने तो सरे उठा लिए थोड़े मुझे भी उठाने देते

अमित : अरे भाभी इतने से तो हैं आप चलिए आगे मैं पीछे पीछे अत हूँ

पूजा भाभी आगे आगे कमर लचकती हुई चलने लगी और मैं उनकी कमर क बल और उनके उठते गिरते चूतड़ देखता हुआ उनके पीछे चलने लगा . पूजा भाभी कुछ ज़्यादा hi कमर लचका कर चल रही थी और बिच बिच में बातें करती हुई मुद कर मुझे देखती थी . उनकी आँखों में मुझे कुछ अलग hi नज़र आ रहा था . थोड़ी hi देर में हम उनके घर पहुँच गए जहाँ पर सिर्फ उनकी सास hi थी

पूजा सास: अरे बहु ये क्या तुमने सरे कपडे इसे पकड़ा दिए ऐसे ाचा थोड़े लगता है

पूजा भाभी : मैंने तो मन किया था मगर देवर जी नहीं मने असल में कपडे उठाते हुए मेरी कमर में मोच आ गयी थी देवर जी वहां से गुज़र रहे थे तो मेरी मदद करने चले ए

मैं तो पूजा भाभी की बातें सुन कर हैरान हो रहा था

पूजा सास : बीटा ये कपडे नीचे रख दो मैं और पूजा कर लेंगी सब तुम बैठो आराम से मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने को लती हूँ

इतना कह कर आंटी तो अंदर चली गयी मैंने पूजा भाभी की तरफ सवालिया नज़रों से देखा वी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी

पूजा भाभी : ऐसे क्या देख रहे हो अब इतना तो मेरी मदद तुम कर hi सकते हो मैं बहुत थक गयी थी आज

अमित : मैं अब चलता हूँ

पूजा भाभी : ऐसे नहीं अभी तो ए हो घोडा हमें भी सेवा का मौका तो दो

इतने में आंटी अंदर से एक ट्रे में कुछ ड्राई फ्रूट्स और मिठाई ले आयी

पूजा भाभी : माँ जी बाबा नज़र नहीं आ रहे

पूजा सास: बीटा वो ज़रा बहार गए हैं किसी क साथ कह रहे थे शाम तक लौट आएंगे

पूजा भाभी : ये क्या माँ जी आप ऐसे रूखे सूखे से इन्हे भेज देंगी आप ज़रा इनको बैठाइये और मैं चाय बना कर लायी

अमित : रहने दो भाभी मैं बस जा hi रहा हूँ

पूजा सास : ऐसे कैसे तू जा बहु चाय बना कर ला

पूजा भाभी अंदर चली गयी और मैं आंटी क साथ वहीँ आँगन में चारपाई पर बैठ गया और उनसे बातें करते हुए मिठाई खाने लगा

थोड़ी देर में पूजा भाभी चाय बना कर ले आयी . मुझे और आंटी को चाय देने क बाद वो अंदर चली गयी .
 
अपडेट 45



पूजा भाभी अंदर चली गयी और मैं आंटी क साथ वहीँ आँगन में चारपाई पर बैठ गया और उनसे बातें करते हुए मिठाई खाने लगा


थोड़ी देर में पूजा भाभी चाय बना कर ले आयी . मुझे और आंटी को चाय देने क बाद वो अंदर चली गयी .

अब आगे -

चाय पीने क बाद मैं उठा और जाने की इजाज़त मांगी अभी मैं गेट पर hi पहुंचा था क पूजा भाभी ने मुझे आवाज़ दे कर रोक दिया

पूजा भाभी: देवर जी अगर आपको बुरा न लगे तो आप मेरी मदद कर देंगे स्टोर से कुछ सामान निकलना है और वो थोड़ा भरी है मुझसे अकेली से होगा नहीं और माँ जी को मैं उठाने नहीं दे सकती कहीं मोच न आ जाये

पूजा सास: अरे बहु और कितना काम बताएगी उसे चल मैं तेरी मदद करती हूँ

अमित : अरे आंटी इसमें कौन स बड़ी बात है क्या आप मुझे अपना बीटा नहीं मानती

पूजा सास : मगर बीटा ऐसे ाचा नहीं लगता

अमित : बस और कोई बात नहीं , चलिए भाभी मैं अपनी मदद करता हूँ

पूजा भाभी मुझे लेकर स्टोर में चली गयी जो पिछली तरफ था और स्टोर से थोड़ा आगे भैंसे बंधी हुई थी एक तरफ चारा रखने को कमरा बनाया हुआ था और बिछे में एक दरवाज़ा था जो बहार को निकलता था यहीं से भैंसो को बहार ले क जाते होंगे

पूजा भाभी मेरे आगे कमर लचकती हुई स्टोर रूम में चली गयी . स्टोर रूम एक छोटा सा अँधेरा कमरा था जिसमे एक तरफ ड्रम पड़ा था जो शायद गेहूं क लिए होगा एक तरफ चारपाई पर बिस्तर का ढेर लगा था और थोड़ा बहुत सामान था . दीवार क बिच 7 फ़ीट की ऊंचाई पर परछत्ती थी जिसके ऊपर कुछ बड़े बर्तन रखे हुए थे . भाभी ने एक तरफ से लाइट का स्विच ों कर दिया और एक बल्ब जग गया

पूजा भाभी : देवर जी वो ऊपर से गागर उतरनी है मेरा हाथ वहां नहीं पहुँचता आप ज़रा मुझे ऊपर उठाएंगे तो मैं उतर लूंगी

मैं मन hi मन सोचने लगा क ये इतनी ज़्यादा ऊंचाई तो है नहीं निचे चारपाई पर बिस्तर पड़े हैं आराम से उनपर पाऊँ रख कर भाभी ये गागर उतर सकती है फिर मुझे यहाँ क्यों लायी है.

पूजा भाभी : कहाँ खो गए चिंता मत करो मैं इतनी भी भरी नहीं हूँ

अमित : ा हाँ वो अरे ऐसी कोई बात नहीं आइये

मैं आगे बड़ा भाभी को उठाने क लिए तो भाभी मेरी तरफ मुँह कर क कड़ी हो गयी

अमित : भाभी आप पलट जाइये ऐसे आप बर्तन कैसे उतरेंगी

पूजा भाभी : तुम इस तरफ आ जाओ न और ऐसे hi मुझे उठाओ अगर तुम पीछे से मुझे पकड़ोगे तो मैं फिसल जाउंगी और गिर जाउंगी

मुझे पूजा भाभी की हरकतों पर शक हो गया था मगर मैंने भी सोचा अगर खुद ख़रबूज़ा काटना चाहता है तो ये hi सही मगर मैं पहल नहीं करूँगा

मैंने झुक कर भाभी की जांघों से दोनों बाज़ुओं में जकड कर ऊपर उठाया . पूजा भाभी का जिस्म बहुत नरम और नाज़ुक था उनको छूने से hi मेरे अंदर गर्मी बढ़ने लगी . पूजा भाभी क जिस्म से पसीने की खुशबु आ रही थी एक अलग तरह की खुशबु उनके जिस्म से आ रही थी जो मेरी नक् से होते हुए सीधा मेरे दिमाग की नसों में घुल रही थी

पूजा भाभी का हाथ गागर तक तो पहुँच गया था मगर वो जानभूझकर उसे उतर नहीं रही थी . मेरे चहरे क पास उनके दूध थे जो मेरे माथे मर रगड़ खा रहे थे मैंने अपनी पकड़ को थोड़ा लूसे कर क उन्हें थोड़ा नीचे किया अब मेरी नक् उनके दूध में पहुँच गयी थी और मैं उनको स्मेल करने लगा . उफ्फ्फ्फ़ क्या खुशबू थी मैं मदहोश होने लगा . पूजा भाभी भी पूरा मज़ा ले रही थी और बस ख़ामोशी से अपनी सिसकियाँ दबा रही थी .

मैंने पूजा भाभी को थोड़ा और नीचे किया अब पूजा भाभी क दूध मेरे होंठो पर आ गए और मेरे हाथ पूजा भाभी की गांड पर कास गए मैं मजे की वादिओं में खोने लगा . मैंने धीरे से अपना मुँह खोल कर पूजा भाभी का एक दूध ब्लाउज क ऊपर से अपने मुँह में ले लिया और अपने हाथों से उनकी गांड को कास लिया और एक बार दबा दिया

पूजा भाभी क मुँह से सिसकी निकल गयी. पूजा भाभी की आँखें बंद थी हम दोनों भूल गए हम क्या करने आये थे और अब बस मज़े की वादिओं में खोते जा रहे थे.

पूजा भाभी को ज्यादा देर तक उठा क रख पाना मुश्किल हो रहा था मगर मैं ये मज़ा ख़तम नहीं होने देता चाहता था. मगर पूजा भाभी की सास क आने का भी दर था इस लिए मैंने जल्दी से खुद को संभाला और उन्हें निचे उतर कर पीछे हाथ गया.

मेरे ऐसा करते hi पूजा भाभी ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखने लगी जैसे पूछ रही हो रुक क्यों गए

अमित : भाभी आपका काम शायद ऐसे नहीं होगा मैं खुद उतर देता हूँ नहीं तो आंटी क्या सोचेंगी

पूजा भाभी समझ गयी मैं आंटी की वजह से दर रहा हूँ

पूजा भाभी : मेरे साथ आओ

पूजा भाभी स्टोर से बहार निकल गयी और मैं उनके पीछे चल दिया . पूजा भाभी मुझे एक कमरे की तरफ ले कर गयी दरवाज़ा खोल कर अंदर देखा तो आंटी बीएड पर घोड़े बेच कर सो रही थी . मैं सोच में पद गया क अभी तो अछि भली बातें कर रही थी ये अचानक कैसे सो गयी

मैं अभी सोच hi रहा था क भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे दूसरे कमरे में ले गयी अंदर जाते hi भाभी जे दरवाज़ा बंद कर दिया

पूजा भाभी : वो अभी 4 घंटे नहीं उठाने वाली मैंने उनकी चाय में नींद की गोली मिला दी थी और मेरे ससुर तो तुमने सुन hi लिया है क शाम को आएंगे इस लिए किसी की टेंशन नहीं है

मैं अवाक सा पूजा भाभी की बातें सुन रहा था और सोच रहा था क इतनी जल्दी इतनी प्लानिंग कर्ली लगता है बहुत ज़्यादा आग लग रही है इसकी छूट मैं मगर उस दिन तो मुझे मन कर रही थी फिर आज कैसे खुद hi छोड़ने को तैयार हो गयी

पूजा भाभी : अब कुछ करोगे या यूँ hi देखते रहोगे

अमित : आप वो ये सब

पूजा भाभी समझ गयी मैं ये सब एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था इस लिए इतना हैरान हो रहा हूँ

पूजा भाभी : उस दिन तुम चाहते तो मेरे साथ ज़बरदस्त भी कर सकते थे मगर तुमने ऐसा नहीं किया और न hi मेरे पीछे आने की कोशिश की मुझे पता लग गया क तुम दिल क अचे हो और जब अपने ससुर से तुम्हारे बारे में सुना तो इस दिल में तुम्हारी जगह और भी बाद गयी . तुम्हारे कहने से मैंने दुबारा तुम्हारे मां को अपने पास भी नहीं आने दिया और न hi किसी और की तरफ देखा मगर अपनी इस प्यास को मैं कैसे बुझाउन . इस गाओं में मुझे तुमसे ाचा और भरोसे मंद कोई और नज़र नहीं अत इस किये मैंने सोच लिया क मैं तुम्हारे सिवा किसी और को अपने पास नहीं आने दूंगी .

अब तुम फैसला करो क क्या तुम मुझे अपना थोड़ा सा प्यार दे सकते हो या मैं यूँही अपनी किस्मत पर आंसू बाहरी रहूं

इतना कह कर पूजा भाभी मेरी आँखों में देखने लगी उनकी आँखें भर आयी थी . सच मच एक औरत आखिर कब तक अपनी प्यास दबा सकती है. जैसे पेट की भूख खाने से बुझती है वैसे hi छूट की भूख लैंड से hi बुझती है . इसी भूख क चलते वो पहले भी कमलेश मां क पास जा चुकी थी जो उसकी प्यास बुझा नहीं पाए थे और बेचारी वहां से भी खली हाथ लौटी मगर मेरे एक बार कहने पर hi मां को छोड़ दिया. मुझे पूजा भाभी की हालत पर तरस आ गया और मैंने सोच लिया क मैं पूजा भाभी को वो ख़ुशी दूंगा जिसकी उन्हें ज़रूरत है.

पूजा भाभी मेरी आँखों में hi देख रही थी मैंने बिना कोई जवाब दिया आगे बढ़कर उनको अपने सीने से लगा लिए और उनके गर्दन पर अपने होंठ रख कर चुम लिया . पूजा भाभी ने मेरी पीठ पर अपनी बहन कस ली.

मैं पूजा भाभी से पूरा लिपट गया और उनकी गर्दन पर किश करते हुए अपनी जीभ से चाटने लगा . पूजा भाभी तो पहले hi तरसी हुई थी वो मुझे और ज़्यादा कसने लगी . उनके मुँह से सिसकारिआं निकलने लगी. मैं पूजा भाभी को किश करता हुआ बीएड क पास ले गया और उनके साथ hi बीएड पर गिर गया .

पूजा भाभी मेरे निचे थे और मैं ऊपर. मैंने उनके चहरे को दोनों हाथों में लिया एक पल उनके सुन्दर गोर मुखड़े को देखा और अपने होंठो उसके सुर्ख लाल होंठो पर रख दिए . मैं उनके होंठो का रास पीने लगा और वो भी मेरा साथ देते हुए मेरे होंठ चूसने लगी . पूजा भाभी क होंठ बहुत रसीले थे मैं उनके होंठो का सारा रास चूस लेना चाहता था 5 मिनट्स तक हम दोनों लगातार एक दूसरे क होंठो को चूसते रहे और हमारी सांसे उखाड़ने लगी तब जाकर मैंने किश को तोडा.

मैंने अपना चेहरा उठा कर भाभी का चेहरा देखने लगा उनकी आँखें मस्ती में बंद थी चेहरा लाल सुर्ख हो गया था और सांसे तेज़ चल रही थी . फिर मैं आगे बड़ा और पूजा भाभी की गर्दन से चूमते हुए उनकी छाती पर आ गया . साडी का पल्लू हटा कर ब्लाउज में से झांकती उनके दूध क बीच की लकीर पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा . भाभी क जिस्म में कम्पन हुई और उन्होंने मेरे बालों में अपने हाथ घूमने शुरू कर दिए . फिर मैं ब्लाउज क ऊपर से उनके दूध बरी बरी से अपने मुँह में लेने लगा और हाथ से दबाने लगा . भाभी क मुँह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और वो अपना सर इधर उधर पटकने लगी. भाभी का ब्लाउज आगे से गिला हो गया था.

मैं भाभी क ऊपर से उठा गया और खड़ा हो गया . मेरे हटने से भाभी ने अचानक अपनी आंखे खोली और मुझे देखा मैं अपने कपडे उतर रहा था भाभी ने भी देर न करते हुए अपनी सदी उतर दी और अपना ब्लाउज भी उतर दिया . ब्लाउज क नीचे गुलाबी रंग की ब्रा पहन राखी थी अब उनके जिस्म पर पेटीकोट और ब्रा थी . भाभी ने जैसे hi झुक कर कर अपना पेटीकोट उतरा उनकी गुलाबी पेंटी में कैद गांड मेरे सामने उभर कर आ गयी जिसे देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया .

मैंने जल्दी से अपना शरीर से आखरी कपडा यानि क मेरा ुंडेरवारे उतरा और पीछे से भाभी को पकड़ लिया . मेरा लैंड ुंडेरवारे में खड़ा था जो पूजा भाभी को अपनी गांड पर महसूस हो रहा था . पूजा भाभी सीधी कड़ी हो गयी और मैं उनके दूध दबाने लगा . पूजा भाभी क मुँह से सिसकीअन निकलने लगी और वो अपनी गांड मेरे लैंड पर दबाने लगी

मैंने जल्दी से पूजा भाभी को घुमाया और फिर से बीएड पर धक्का देकर लेता दिया. मैं पूजा भाभी क ऊपर आ गया और उनके गुलाबी ब्रा में कैद दूध मसलने लगा . मैं उनके गोर चिकने मुलायम दूध चूसना चाहता था मगर वो ब्रा में कैद थे मैंने जल्दी से ब्रा को ऊपर खींच कर उनके दूध बहार निकल लिए .

उफ़ क्या गोर गोल गोल और सख्त दूध थे उनके ऊपर पिंक निप्पल उनकी खूब सुरति को चार चाँद लगा रहे थे. मैंने जल्दी से दोनों दूध हाथो में पकड़ कर मसलने शुरू कर दिए . लगता है भाभी क पति ने ज्यादा मेहनत नहीं की थी इस लिए अभी भी सख्त थे , खैर जो भी हो अब मैं इन्हे ढीला करूँगा. मैंने पूजा भाभी का एक दूध मुँह में लिया और उनके निप्पल पर अपनी जीभ घूमने लगा दूसरे हाथ की उँगलियों में दूसरे निप्पल को पकड़ कर मरोड़ने लगा . भाभी क मुँह से तेज़ सिसकी निकल और वो मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी.

मैंने बरी बरी से दोनों दूध मसाले और चूसे पूजा भाभी अब काम वासना में तड़प रही थी वो जल्दी से लैंड छूट में लेना चाहती थी मगर उन्हें अब तक मेरा लैंड मज़ार नहीं आया था.

दूध का मज़ा लेने क बाद मैं नीचे बड़ा और उनके पेट पर अपनी ज़ुबान चलता हुआ उनकी छूट पर आ गया और पेंटी क ऊपर से छूट पर किश कर दिया . एक बार फिर भाभी क जिस्म में कम्पन हुई और एक सिसकती उनके मुँह से निकल गयी

पूजा भाभी की गुलाबी पेंटी गीली हो गयी थी. मैंने दोनों हाथो से पेंटी को पकड़ा और नीचे खींचने लगा भाभी ने कमर उठा कर मेरा साथ दिया और मैंने पेंटी खींच कर उनके पैरों से निकल दी

पूजा भाभी की छूट मेरे सामने आ गयी क्या बताऊँ दोस्तों कितनी हसीं छूट थी पता नहीं कमलेश मां क हाथ कैसे आ गयी . छूट क ऊपर हलके हलके बल थे जैसे 3/4 दिन पहले hi बाल हटाए हों. छूट एक डैम गोरी चिकनी थी और छूट क दोनों होंठ गुलाबी थे . छूट क होंठ अभी जयादा खुले नहीं थी ये इस बात का परमं थे क अभी तक पूजा भाभी की तबियत से चुदाई नहीं हुई है और न hi कोई तगड़ा मुसल इस छूट में गया है.

पूजा भाभी की छूट क होंठो से पानी की कुछ बूंदे बहार को निकलना छह रही थी मैंने पूजा भाभी का ये अमृत वास्ते नहीं होने दिया और जल्दी से झुक कर अपने होंठ भाभी की छूट क गुलाबी होंठो से मिला दिए .

छूट पर मेरे होंठो का एहसास होते hi पूजा भाभी का पूरा शरीर कम्पनी लगा और उन्होंने मेरा सर दोनों हाथो से अपनी छूट पर कास दिया . मैं भाभी की छूट क होंठो को चूमता हुआ अपनी जीभ छूट क अंदर घुसाने लगा जिससे भाभी मचलने लगी शायद उनकी छूट को आज तक किसी ने छठा नहीं था और ये उन्होंने खुद hi बता दिया

पूजा भाभी : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ऊऊह्ह्ह मममम आअह्ह्ह्ह ममममायआ खा जाओ आआह्ह्ह कक्कक्स खा जाओ मममम आज तक मेरे पति ने भी भी वहां किश नहीं किया कक्कक्स आअह्ह्ह्ह मममम

मैं अपनी जीभ को छूट क अंदर बहार कर क जीभ से hi छूट को छोड़ने लगा और साथ में छूट क डेन को भी होंठो में पकड़ कर खींचने लगा . भाभी से और बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने अपनी छूट का पानी मेरे मग में छोड़ दिया . भाभी का जिस्म पूरा अकड़ गया था और उन्होंने अपनी दोनों मुलायम जांघों मेरे सर को कास लिया था

पानी छोड़ने क बाद जैसे hi भाभी की पकड़ मेरे सर से ढीली हुई तो मैं उनके ऊपर से हैट कर उनके साथ लेट गया और अपनी सांसे ठीक करने लगा . भाभी भी आँखें बंद कर क तेज़ तेज़ सांसे ले रही थी .

सांसे सँभालने क बाद भाभी ने आँखें खोल कर मेरी तरफ देखा और एक सेक्सी स्माइल दी जैसे बताना छह रही हो की उन्हें अपनी छूट चटवाने में बहुत मज़ा आया है. भाभी की नज़र जैसे hi मेरे लैंड पर पड़ी तो वो चौंक गयी और अपने मग पर हाथ रख कर बोली

पूजा भाभी : हाय राम इतना बड़ा . ये मेरे अंदर कैसे जायेगा . मेरी तो छूट फैट जाएगी मेरे पति का तो इससे आधा hi है

अमित : पूरा चला जायेगा भाभी और आपको पता भी नहीं चलेगा . छूट तो बानी hi लैंड लेने क लिए है और पता है जितना बड़ा लैंड हो उतना hi ज़्यादा मज़ा देता है

पूजा भाभी : मज़ा तो तब आएगा जब मैं बचूंगी मुझे तो लगता है ये लैंड मेरी छूट फाड़कर पेट में घुस जायेगा

अमित : अगर आपको इतना hi दर लग रहा है तो रहने देते हैं मैं चलता हूँ

इतना कह कर मैं खड़ा हो गया और पूजा भाभी जल्दी से बीएड से उतर कर नीचे बैठ गयी

पूजा भाभी : अब तो मैं इसे किसी भी कीमत पर अपने अंदर लूंगी चाहे छूट फैट जाये मगर मैं तुमने ऐसे जाने नहीं दूँगी

इतना कह कर भाभी ने दोनों हाथों में मेरा लैंड पकड़ लिया और उसका साइज चेक मरने लगी . फिर उन्होंने धीरे से अपने होंठ मेरे लैंड क सुपडे पर लगा दिए और एक किश किया. मेरे मुह्ब्से एक सिसकी निकल गयी

पूजा भाभी किश करती हुई थोड़ा थोड़ा लैंड अपने मुँह में लेने लगी और मैं उनको देखता हुआ मज़ा ले रहा था. 2 मिनट्स तक भाभी ने मेरा लैंड थोड़ा थोड़ा मग में लेकर चूसा और फिर बीएड पर लेट गयी . मैंने भी देर करना ठीक नहीं समझा और उनकी टैंगो को उठाकर बीच में घुटनो पर बैठ गया . भाभी की कमर क नीचे एक तकिया लग कर मैंने भाभी की छूट को लैंड क निशाने पर किया

अब पोजीशन पूरी सेट थी और मैंने अपने लैंड को एक हाथ से पकड़ कर छूट पर सेट किया और एक धक्का मारा. भाभी ने एक दबी हुई सिसकी निकली और लैंड का सूपड़ा छूट में घुस गया . मैंने एक और धक्का मर दिया जो पहले से ताकतवर था इस झटके में लैंड 5 इंच तक छूट में घुस गया . भाभी क मग से एक चीख निकली

पूजा भाभी: ुह्ह्हह्ह एआइइइइ ममममम कक्कक्स. ऊऊह्ह्ह्ह

शायद यहाँ तक भाभी की छूट लैंड ले चुकी थी पहले hi मगर मेरे लैंड की मोटाई ज्यादा जिसकी वजह से लैंड छूट में पूरा कैसा हुआ था. मैं झुक कर भाभी क दूध चूसने और मसलने लगा ताकि भाभी जल्दी रिलैक्स हो जाएँ .

बूब्स मसलने से भाभी 2 मिनट्स में hi नार्मल हो गयी और अपनी कमर हिलाकर मुझे इशारा किया . मैंने अपने लैंड को थोड़ा बहार निकला और उतने hi लैंड से उनको धक्के मरने लगा . भाभी को मज़ा आने लगा और वो भी अपनी कमर हिलने ले

भाभी मस्ती से सिसकारिआं लेती हुई अपनी कमर उछाल रही थी मैंने मौका सही जान कर लैंड को सुपडे तक बहार खींचा और एक शक्तिशाली धक्का मर दिया .

पूजा भाभी ने इतनी अंदर तक कभी लैंड नहीं लिया था . इस झटके मेरा लैंड 7.5 इंच तक छूट में घुस गया और पूजा भाभी दर्द से चीख पड़ी .

पूजा भाभी : aaaiiiiiiiiii मम्माआआआ aaaaaaaaaaahhh मर गईइइइइइ निकालो बहार आआआआआ फट्ट्ट्ट गयी मायआ आआअह्ह्ह्ह निकालो बहार

पूजा भाभी इस बार बहुत ज़ोर से चिल्लाई थी अगर भाभी की सास जग रही होती तो अभी डोडी डोडी आ जाती. पूजा भाभी मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी

अमित : बस हो गया भाभी चला गया पूरा अब दर्द नहीं होगा बस थोड़ा बर्दाश्त कर लीजिये . मैं भाभी क दूध मसलता हुआ उनके होंठो को किश करने लगा . इस बार भाभी को रिलैक्स होने में बहुत देर लग गयी . मेरा लैंड उनकी छूट में ऐसे फसा हुआ था जैसे किसी ने जकड लिया हो.

पूजा भाभी क शांत होते hi मैंने लैंड को धीरे धीरे बहार खिंच और आधा लैंड बहार निकल कर फिर से अंदर दाल दिया भाभी क मुँह से फिर से कराह निकल गयी मगर मैं रुका नहीं और हलके हलके धक्के मरने लगा . 5 मिनट्स में hi भाभी पूरी रिलैक्स हो गयी और अब वो भी अपनी छूट उठाकर मेरा साथ देने लगी

मैंने धीरे धीरे अपनी स्पीड बड़ा दी और भाभी भी निचे से कमर तेज़ तेज़ उठाने लगी . लैंड ने छूट में अपनी जगह बना ली थी और छूट भी अंदर से गीली हो कर लैंड का स्वागत मर रही थी

पूजा भाभी : आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह मममम कक्कक्क्स आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ आआह्ह्ह आह्हः और तेज़ देवर जी और तेज़ आअह्ह्ह आअह्ह्ह ऐसे hi और ज़ोर से और ज़ोर सीए मम्मा मैं गयी मैं गयी aaaahhhhhhhhhh

ऐसे hi मज़े में चीखती चिल्लाती भाभी का जिस्म अकड़ गया और उन्होंने अपनी छूट ऊपर उठाकर अपना पानी छोड़ दिया . भाभी का जिस्म झटके ले रहा था . भाभी का तो हो गया मगर मेरा अभी नहीं हुआ था इस लिए मैं धक्के मरता रहा भाभी बेसुध निचे पड़ी थी और कोई रिस्पांस नहीं दे रही थी. मैं अपना काम करता गया जिसका असर ये हुआ क 5 मिनट्स में hi भाभी अपनी कमर हिलने लगी

मैं अब पोजीशन बदलना चाहता था इस लिए मैंने लैंड बहार निकला और भाभी को पलट दिया . भाभी मेरा मतलब समझ गयी और जल्दी से कमर उठा कर घुटनो पर हो गयी . मैंने लैंड को छूट पर रखा और एक तेज़ झटका मारा छूट और लैंड दोनों भाभी की छूट क पानी से लिथड़े हुए थे इस लिए एक hi झटके में 7.5 इंच लैंड छूट में चला गया अभी भी एक इंच लैंड बहार था जिसे मैं जल्दी से पूरा अंदर करना चाहता था मगर भाभी क दर्द की परवाह करते हुए मैं ऐसा नहीं कर था था

मैं भाभी की कमर को दोनों हाथो से थम कर तेज़ धक्के मरने लगा और भाभी भी अपनी कमर को पीछे धकेल कर पूरा साथ दे रही थी . मैं 5 मिनट्स तक ऐसे hi तेज़ धक्कों से भाभी की चुदाई मरता रहा अब मेरा सबर जवाब देने लगा था और भाभी भी फिर से अपना पानी छोड़ने वाली थी मेरी स्पीड एक डैम से बहुत तेज़ हो गयी और भाभी भी समझ गयी क मेरा होने वाला है . मैंने एक आह क साथ पूरा लैंड भाभी की छूट में उतर दिया जिससे क लैंड भाभी की बच्चेदानी में घुस गया और अपना पानी छोड़ने लगा . इस धक्के क साथ hi बचा हुआ लैंड भी छूट में घुस गया था जिससे भाभी को भी दर्द हुआ मगर लैंड क पानी को अंदर महसूस करते hi उनका भी पानी निकल गया और वो दर्द और मज़े क मिले जुले एहसास से आगे को गिर गयी . मैंने भी अपना लैंड पूरा अंदर घुसकर भाभी की कमर को कास क पकड़ा हुआ था इस लिए मैं भी भाभी क साथ hi उनके ऊपर गिर गया .

हम दोनों hi इस मज़ेदार चुदाई से पूरा थक गए थे . मैं भाभी क ऊपर था और मेरा लैंड जड़ तक भाभी की छूट में घुसा हुआ था . हम दोनों पसीने में भीग चुके थे . चुदाई क इस सुखद आनंद में दुबे हुए हम दोनों ऑंखें बंद किये अपनी सांसे सँभालने में लगे हुए थे .

कोई 10 मिनट्स बाद मुझे थोड़ा होश आया और मैं भाभी की पीठ को चुम कर उनके ऊपर से अलग हुआ मेरा लैंड भी छूट से बहार आ गया और छूट में से हम दोनों का पानी बहार एंड लगा. मैं भाभी की साइड में लेट गया . अभी तक भाभी क जिस्म में कोई हलचल नहीं हुई थी . मई कुछ देर लेता रहा और फिर उठ कर अपने कपडे पहनने लगा . कपडे पहन कर मैंने भाभी की देखा तो वो अभी भी वैसे hi आँखें बंद किया उलटी लेती हुई थी . मैं भाभी का खूबसूरत दूध सा गोरा जिस्म देखने लगा .

वाकई में पूजा भाभी बहुत खूबसूरत थी इतनी ज्यादा गोरी थी क हाथ लगाओ तो मैली हो जाये मुझे खुद पर गर्व हो रहा था क इतनी खूबसूरत औरत को छोड़ने का मौका मिला . भाभी की गांड बहुत प्यारी लग रही थी मुझ से रहा नहीं गया और मैं दोनों हाथो से उनके दोनों चूतड़ मसल दिए और झुक कर उनपर किश करते हुए काट भी दिया . भाभी होश में आयी और बोली

पूजा भाभी : मन नहीं भरा क्या कुछ देर आराम तो करने दो

अमित : आप जैसे हसीना से भला किसका मन भर सकता है मेरा बस चले तो सारा दिन आपके ज्ञान को यूँही मसलता रहूं मगर अभी देर हो रही है उठिये मैं चलता हूँ

मेरी बात सुन कर भाभी जल्दी से पलट गयी और उठ क बैठ गयी. मुझे कपड़ो में देख कर बोली

पूजा भाभी: इतनी जल्दी ? क्यों मज़ा नहीं आया क्या मेरे साथ

अमित : मज़ा तो इतना आया है क क्या बताऊँ दिल तो नहीं कर रहा मगर मुझे घर जाना होगा वर्ण मुझे दांत पद जाएगी . वैसे आपको मज़ा आया मेरे साथ ?

पूजा भाभी : आज तक ज़िन्दगी में मुझे इतना मज़ा कभी नहीं आया मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गयी हूँ . एक बार में hi तीन बार तुमने मेरा पानी निकल दिया मैं तो आज तक एक बार भी मुश्किल से पानी निकल पति थी तुमने तीन बार निकल दिया वाकई में तुम असली मर्द हो. वडा करो क ऐसे hi मुझे प्यार करते रहोगे न अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगी

अमित : आप चिंता मत करो मैं आपकी प्यास बुझाता रहूँगा मगर फ़िलहाल मुझे घर जाना होगा

पूजा भाभी ने अलमारी से एक मैक्सी निकल कर पहन ली और मेरे गले लग गयी .

पूजा भाभी : फिर कब आओगे

अमित : पता नहीं जब टाइम मिला आ जाऊंगा

पूजा भाभी : ऐसा मत कहो मैं कैसे रहूंगी , तुम ऐसा करना कल फिर आ जाना

अमित : ऐसे रोज़ रोज़ अगर आऊंगा तो अंकल आंटी को शक हो जायेगा और मैं नहीं चाहता कल को कोई बात बने


पूजा भाभी : तुम ऐसा करना कल शाम को पीछे क दरवाज़े से आ जाना . उस तरफ लाइट काम है और भैंसो क पास hi चारे वाले कमरे में जल्दी से मुझे छोड़ कर पीछे से निकल जाना किसी को पता नहीं चलेगा

अमित : नहीं खुद पर काबू रखो ऐसे रोज़ रोज़ करने से हम फास भी सकते हैं

पूजा भाभी : प्लीज मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ मैं कितने दिनों से तड़प रही हूँ मुझ पर तरस खाओ . कुछ दिन लगातार मुझे छोड़ कर मेरी आग ठंडी कर दो उसके बाद जैसे तुम चाहोगे वैसा hi होगा

अमित : ाचा ठीक है मैं कल 6 बजे आऊंगा तुम तयारी रखना

पूजा भाभी ख़ुशी से उछाल पड़ी और मेरे साइन से लग कर मेरे होंठ चूसने लगी. मैंने भी भाभी को किश किया और उनके दूध और गांड मसल कर उनसे इजाज़त लेकर घर आ गया
 
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