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मोहित ने जल्दी जल्दी में फ़ोन काट दिया और मुझे हॉस्पिटल का बताया hi नहीं. मैंने सोचा आंटी से बात कर लेता हूँ. इस लिए आंटी को फ़ोन मिला दिया
अमित : hello आंटी , कहाँ हैं आप ? अंकल की तबियत कैसी है और वो कौन से हॉस्पिटल में हैं?
आंटी : अरे रुको रुको आराम से . मैं बिलकुल ठीक हूँ और तेरे अंकल भी ठीक हैं .
अमित : क्या मतलब ? मुझे अभी अभी मोहित का फ़ोन आया था क अंकल को हार्ट अटैक आया है और वो हॉस्पिटल में हैं. आप मुझे जल्दी हॉस्पिटल का बताइये मैं आ रहा हूँ .
आंटी : अरे रुको तो सही , पहले बात ध्यान से सुन लो. तेरे अंकल बिलकुल ठीक हैं और उन्हें कोई हार्ट अटैक नहीं आया है.
अमित : तो फिर मोहित ....
आंटी : उसने वही कहा जो उसे बताया गया पर सचाई वो नहीं है
अमित : मतलब ? मैं समझा नहीं.
आंटी : भूल गए ? तू hi ने कहा था न करिश्मा को बुलाने क लिए हमें तेरे अंकल क बीमार होने का नाटक करना पड़ेगा. अब छोटे मोठे बुखार या चोट से वो आने वाली तो थी नहीं इस लिए ये ड्रामा किया है. तेरे अंकल बिलकुल ठीक हैं. बस हॉस्पिटल में दाखिल हैं जब तक करिश्मा नहीं आ जाती. मोहित को हमने कुछ नहीं बताया वर्ण हमारा झूठ पकड़ा जाता . क्यों की करिश्मा उससे ज़रूर बात करती और मोहित की बातों से वो पता लगा लेती. वैसे आईडिया काम कर गया है. करिश्मा निकल चुकी है घर से.
अमित : कोई और बहाना नहीं मिला था आपको? मैं तो दर hi गया था. अभी गाओं से शहर आने लगा था मैं .
आंटी : अरे तुम चिंता न करो और यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है . मैं मोहित से बात कर लुंगी .
अमित : आप गाओं फंक्शन पर तो आएंगे न ?
आंटी : क्यों नहीं आएंगे ? करिश्मा आज शाम तक आ जाएगी. और हम उसे भी साथ लेकर आएंगे. तुम अपना ख्याल रखो और यहाँ की चिंता छोड़ फंक्शन की तयारी देखो.
अमित : ठीक है आंटी गाओं आओगे तो मुलाकात होगी bye.
आंटी : bye
मोहित की बात से तो मैं दर hi गया था . शुक्र है ये सब झूठ था. मोहित का भी बुरा हल होगा पर आंटी संभल hi लेंगी . करिश्मा दीदी को बुलाने क लिए आईडिया तो मैंने hi दिया था पर इतना खतरनाक बहाना मैं सोच भी नहीं सकता था. आंटी से बात करने क बाद मैं अपने काम में लग गया . दोपहर का खाना खाने क लिए मैं घर आया तो निधि दीदी दीपिका ममी क साथ बैठ कर मुन्ने क साथ खेल रही थी. जमीं भी कुछ देर क लिए दीपिका ममी क पास hi चला गया.
दीपिका ममी : मिल गया समय हमारे पास आने का ?
अमित : कैसी बातें करती हो ममी आप भी . आपके सामने hi तो हूँ. मुन्ने क नामकरण की तयारी में hi लग गया आते hi.
दीपिका ममी : अपने मुन्ने क लिए थोड़ा टाइम नहीं निकल सकते ? काम तो होते रहेंगे.
अमित : इसी क लिए तो कर रहा हूँ सब . कल को ये यद् रखे न रखे काम से काम मुझे तो यद् रहेगा.
दीपिका ममी : यद् कैसे नहीं रखेगा ? इसे रखना होगा. मैं बताउंगी इसे, देख लेना बिलकुल तुम्हारे जैसा बनाउंगी इसे.
निधि दीदी : सही कहा ममी आपने, अमित जैसा hi बनाना इसे. अगर इसके जैसा बन गया तो सब इसे प्यार करेंगे .
दीपिका ममी : इसके जैसा hi बनेगा , आखिर इसी का तो है .
दीपिका ममी की इस बात पर मुझे झटका लगा. निधि दीदी क सामने hi उन्होंने सीधा सीधा ये बात कह दी.
निधि दीदी : इसी का मतलब ?
दीपिका ममी : अरे इसी का छोटा भाई है न तो इसके जैसा hi बनेगा .
निधि दीदी : वैसे ममी जी कोई नाम सोचा है अपने इसका ?
दीपिका ममी : नहीं अभी तक तो नहीं सोचा . तुम hi कोई बता दो
निधि दीदी : मेरा बस चले तो इसका नाम भी अमित hi रख दूँ . पर अगर अमित क नाम क पहले अक्षर से hi रख दें तो कैसा रहेगा ?
दीपिका ममी : बहुत ाचा रहेगा . वैसे मुन्ने क पापा अगर उसके लिए खुद कोई नाम रखे तो और भी ाचा होगा.
दीपिका ममी ने ये बात मेरी तरफ देखते हुए कही थी.
‘चलो अब तुम सब खाना खा लो. बाकि बाएं बाद में कर लेना ‘ माँ ने अंदर एते हुए कहा तो हम भी उठ खड़े हुए और फिर सब ने मिल कर खाना खाया. माँ बहुत खुश थी और अपने हाथों से खाना मुझे परोस रही थी. मेरे एक तरफ निधि दीदी और एक तरफ दीपिका ममी बैठी थी. बाबा अजय मां और कमलेश मां अपने अपने ज़िम्मे क काम कर रहे थे.
कमलेश मां तो फूले नहीं समां रहे थे और पूरे गाओं में ख़ुशी से नाचते फिर रहे थे. पूरे गाओं को उन्होंने दावत पर बुला लिया था. घर में नामकरण और गाओं वालों की दावत क इलावा कमलेश मां ने अपने दोस्तों क लिए अलग से दारू पार्टी का इंतज़ाम भी कर रखा था.
खाना खाने क बाद मैं कुछ देर रेस्ट करने क लिए अपने कमरे में गया तो निधि दीदी भी वहीँ आ गयी. मैं ऑंखें बंद कर क लेता हुआ था. क दीदी मेरे पास बैठ कर सर को सहलाने लगी तो मैंने आँखें खोल कर उनको देखा. दीदी बड़े स्नेह से मुझे देख रही थी.
निधि दीदी : मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ?
अमित : ऐसा भला हो सकता है ? मुझे तो ाचा लगता है जब आप मेरे पास होती हो. आप hi तो बचपन से मुझे सब से ज्यादा प्यार करती आयी हो.
निधि दीदी : मुझे भी तुम्हारे साथ रहना ाचा लगता है. मैंने हमेशा कारन से ज्यादा तुम्हे प्यार किया है.
अमित : मैं जनता हूँ दीदी , इसी लिए तो आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हो.
निधि दीदी : मेरा बस चले तो मैं तुम्हे कभी अपने से दूर न जाने दूँ. बचपन में जब भी तुमसे मिलने आती थी न तो मेरा घर जाने को दिल hi नहीं करता था. और जब माँ वापिस ले जाती तो कितने दिन तक बस तुम्हे hi यद् करती रहती थी. और फिर जैसे जैसे बड़े होते गए पता hi नहीं चला क कब ज़िन्दगी में इतने बिजी हो गए क तुमसे दूर हो गयी. और अब देख भगवन ने फिर से हमें मिला दिया है. अब मैं तुम्हे दूर नहीं जाने दूँगी .
अमित : पर दीदी जब आपकी शादी हो जाएगी तब तो जाना hi होगा न.
निधि दीदी : मुझे नहीं करनी शादी , मैं बस तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ.
अमित : ाचा ये तो बताइये क आपको कैसा लड़का पसंद है अपने लिए?
निधि दीदी : तुमने सुना नहीं मैंने शादी hi नहीं करनी
अमित : फिर भी बताइये तो सही
निधि दीदी : क्यों जानना चाहता हो तुम?
अमित : इस लिए क मैं आपके लिए वैसा लड़का ढूंढ कर लाऊंगा बिलकुल आपकी पसंद का.
निधि दीदी : क्या सच में तू ऐसा कर सकता है ? जैसा मैं लड़का कहूं वैसा ढूंढ सकता है ?
अमित : बिलकुल, आप बताइये तो सही
निधि दीदी : मुझे तुम .... मतलब तुम जैसा लड़का चाहिए
अमित : मेरे जैसा ??? आपने मुझ में क्या देख लिया ? आप क लिए तो कोई राजकुमार जैसा लड़का ढूंढना पड़ेगा . जो बहुत सुन्दर हो स्मार्ट हो पैसे वाला हो और आपको प्यार भी बहुत करे.
निधि दीदी: तो क्या तुम प्यार नहीं करते मुझे ?
निधि दीदी कुछ देर क लिए खामोश हुई और मेरी आँखों में देखने लगी . दीदी की नज़रें कुछ और कह रही थी मुझे उनको देख कर पहली बार उनका देखना कुछ अलग लगा
अमित : एक भाई क प्यार में और पति क प्यार में फरक होता है न दीदी. मैं आपको वो प्यार थोड़ा कर सकता हूँ वो तो आपके और पति देव hi करेंगे. आप लड़का बताइये कैसा चाहिए
निधि दीदी : संजीदगी से ) बताया तो है क तेरे जैसा. बिलकुल तेरे जैसा hi चाहिए अगर तू ढूंढ सके तो. जो तेरी तरह hi मेरी इज़्ज़त करे मेरे लिए किसी से भी लड़ सके मेरी हिफाज़त कर सके . जो दिल से मुझे चाहता हो तेरी तरह स्मार्ट हो . राज कुमार नहीं बस तुम जैसा hi चाहिए . यही मासूम चेहरा यही ऑंखें बस और कुछ नहीं.
अमित : ये तो मुश्किल हो जायेगा अब मेरे जैसे नेचर वाला तो शायद मिल भी जाये पर ये चेहरा और ऑंखें तो मिलने से रहे क्यूंकि मुझे खुद ये अपने माता पिता से मिल हैं.
निधि दीदी : इसी लिए कहा था क मैं शादी नहीं करुँगी . क्यूंकि मैं जानती हूँ हम दोनों शादी कर नहीं सकते और दूसरा तुम्हारे जैसा कोई और दुनिया में होगा नहीं .
अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं आज ?
निधि दीदी : ाचा छोड़ ये सब. आज तुमने क्रीम नहीं लगायी न . चल दिखा ज़रा क्या हालत है अब
अमित : अभी रहने दो दीदी कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी.
‘ कैसी मुश्किल हो जाएगी ? ‘ माँ ने आखिरी बात सुन ली थी और वो कमरे में आती हुई सीधा यही बात पूछने लगी .
अमित : क कक कुछ नहीं माँ . दीदी यहाँ सोने का कह रही थी मैंने कहा मुश्किल हो जाएगी ऐसे.
गौरी म : इतने कमरे हैं है घर में तो ज़रूरत क्या है परेशां होने की ? बगल में टीम कमरे पड़े हैं जो चाहे ले लो.
निधि दीदी : थी है ममी जी . मैं साथ वाले कमरे में hi रुक जाती हूँ.
गौरी म : तू क्या कर रहा है ?
अमित : कुछ नहीं मैं तो बस आराम करने आया था यहाँ.
गौरी म : इतने दिनों बाद घर अत है और दो पल पास नहीं बैठने को मिलते. चल तेरी सर की मालिश कर दूँ नींद अछि आएगी.
निधि दीदी : ममी जी अगर आप कहें तो मैं कर दूँ इसकी मालिश ?
गौरी म : ये तो बहाना है बस वर्ण मौका कहाँ मिलता है अपने बेटे क पास बैठने का भी मुझे. जब से शहर गया है बस हफ्ते 1 दिन क लिए अत है उसने भी इसे गाओं वाले दोस्तों से मिलना होता है और इधर उधर में वक़्त निकल जाता है. मुझे तो ये वक़्त देता hi नहीं है .
अमित : ऐसा क्यों कहती हो माँ? मैं तो हमेशा hi आपके लिए हाज़िर हूँ आप बस हुकम
किया कीजिये.
गौरी म : पता है कितना हाज़िर है , बातें करवा लो बस. अभी फिर से तू घर से निकल जायेगा और कल परसों तो टाइम मिलेगा hi नहीं बात करने का भी .
माँ ने मुझे बिठा दिया और मेरे पीछे बैठ कर मेरे सर की मालिश करने लगी . निधि दीदी साइड में बैठी बस मुझे hi देख रही थी. माँ ने मुझे T-shirt उतरने को कहा भी पर मैंने मन कर दिया . कुछ देर तक माँ मेरी मालिश करती रही और सच में मेरी ऑंखें नींद से अपने आप बंद होने लगी. कब मैं नींद की वादियों में चला गया मुझे पता hi न चला.
शाम को नींद खुली तो कमरे में अकेला सो रहा था. हाथ मुँह धो कर निचे आया तो निधि दीदी फिर से दीपिका ममी और मुन्ने क साथ hi नज़र आयी .
गौरी म : उठ गया तू , तेरे बाबा कह रहे थे क तुझे उनके साथ जाना है. गाओं में कुछ लोगों को निमंत्रण देने क लिए वो तुझे साथ ले जाना चाहते हैं.
अमित : इसमें मेरी क्या ज़रूरत पद गयी माँ ? बाबा को तो सब जानते hi हैं.
गौरी म : ये ले पहले दूध पि ले . वो कह रहे थे क अखाड़े क उस्ताद जी डरा और सरपंच साहब क घर वो तुझे साथ लेकर hi जायेंगे. तू उनसे जुड़ा जो है. सब तुझे प्यार करते हैं.
वैसे तूने अपने दोस्तों को भी बुलाया हैं न कॉलेज से?
अमित : हाँ माँ सबको बुलाया है. वो लोग उसी दिन आएंगे .
गौरी म : तेरी मौसियां कल आ रही हैं फ़ोन आया था सबका . अपनी बहनो क लिए साथ वाले कमरे तैयार करवा देना निधि क साथ मिल कर.
निधि दीदी : आप चिंता मत करो ममी जी मैं कर लुंगी. वहां कौन सा कोई ज्यादा काम है.
अमित : मैं कर लंग दीदी. आप यहाँ मेहमान हो तो आप से थोड़ा काम करवाऊंगा
निधि दीदी : बड़ा आया मेहमान वाला. ये मेरा अपना घर है. और मैं कोई मेहमान नहीं हूँ समझे जहाँ तुम वहां मैं.
गौरी म : बिलकुल मेरी बची ये तेरा hi घर है.
‘ चल बीटा जल्दी से दूध ख़तम कर हम ज़रा तेरे उस्ताद जी को निमंत्रण दे आएं ‘ बाबा घर क अंदर आते hi मुझे कहने लगे. दूध पिने क बाद मैं बाबा क साथ निकल गया और 2 घंटे ऐसे hi निकल गए . रत क खाने से पहले हम वापिस घर आ गए और साथ में मिल कर खाना खाया. खाना खाने क बाद कुछ देर अजय मां और कामिनी ममी क साथ बैठ कर बातें की. कमलेश मां तो अपने दोस्तों को पार्टी करवा रहे थे बहार . निधि दीदी मुन्ने क साथ थी.
अजय मां : तुमने अपने दोस्तों को बुलाया क नहीं ?
अमित : बुलाया है मां जी सबको बुलाया है.
अजय मां : अचे से खातिरदारी करना. इस बार सब अचे से देख ले और सिख ले. कामिनी क माँ बनने पर मैं तो कुछ नहीं करुणा , सब तुझे hi करना पड़ेगा.
कामिनी ममी : ये hi करेगा , इसी का तो फ़र्ज़ है ये सब करने का. आप चिंता मत करो
मैं ममी तरफ देखने लगा.
कामिनी ममी : ऐसे क्या देख रहे हो ? सब काम तेरे मां hi करेंगे क्या ? तेरा भी तो फ़र्ज़ है.
अमित : हह हाँ हाँ मैं hi करूँगा , मां जी आपको चिंता करने को कोई ज़रूरत नहीं है मेरे होते हुए
अजय मां : मैं चिंता करने लगा ? मुझे पता है मेरा शेर बीटा है अपने मां का नाम ऊँचा करने क लिए . चल अब तू जा कर आराम करले. कल सब आ जायेंगे तो तेरी hi जान खाएंगे .
अमित : ठीक है मां जी ाचा ममी जी.
उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया जहाँ निधि दीदी पहले hi बैठी थी .
अमित : दीदी आप ?
निधि दीदी : चल दरवाज़ा बंद कर और अपनी T-shirt उतर. क्रीम लगा देती हूँ तुझे
अमित : दीदी आप रहने दो न . कोई देखेगा तो क्या कहेगा. वैसे भी क्रीम तो आपके घर hi रह गयी.
निधि दीदी : मुझे पता है तू लापरवाह है. इसी लिए क्रीम मैं ले आयी थी अब ज्यादा नकारे न कर और T-shirt उतर अपनी.
मैंने ज्यादा बात नहीं बड़ाई और T-shirt उतर दी.
निधि दीदी : हे भगवन , ये तो सब काळा निशान बन गए हैं बड़े बड़े . तुझे दर्द भी हो रहा होगा न. कितनी बेरहमी से मारा है जल्लादों ने.
अमित : दर्द तो है दीदी पर डॉ रीना ने पैन किलर टेबलेट दी थी तो वो खा रह हूँ.
निधि दीदी : काश तेरा हर दर्द हर ज़ख़्म मुझे मिल जाये .
अमित : बिलकुल नहीं . अपना दर्द तो मैं सेह सकता हूँ दीदी पर आपको दर्द में नहीं देख सकता .
निधि दीदी: तो क्या मैं देख सकती हूँ तुझे इस दर्द में ?
अमित : आप एक लड़की हैं दीदी फूलों सी नाज़ुक आप बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी जबकि मैं तो पहले hi अखाड़े की मिटटी से तैयार हुआ हूँ तो मुझे ज्यादा फरक नहीं पड़ता . आप चिंता मत करो दर्द से तो पुराण नाता है मेरा.
निधि दीदी : क्यों करता है ऐसी बातें ? मुझे पता है तुम अंदर hi अंदर घुट ते रहे हो इतने साल बाद अब जब हम साथ हैं तो काम से काम अब तो यद् न करो वो सब.
अमित : मैं कहाँ यद् करता हूँ दीदी , ये तो मेरा अक्स hi है और उसे भला क्या यद् करूँ जिसे कभी भुला hi नहीं .
निधि दीदी ने बातों बातों में क्रीम लगा दी थी और मेरी इस आखिरी बात पर उनके हाथ रुक गए और वो खामोश हो गयी. मैंने पलट कर देखा तो
उनकी ऑंखें नाम हो चुकी थी.
अमित : क्या हुआ दीदी आपकी आँखों में आंसू? ी ऍम सॉरी अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगी तो.
निधि दीदी : कितना कुछ अपने अंदर दबा क रखा हुआ है तूने ? अपने सरे दुःख मुझे देदो और मेरे हिस्से की खुशियां तुम ले लो .
अमित : भगवन करे आपको मेरे हिस्से की खुशियां भी मिल जाये. मैं आपको हमेशा खुश देखना चाहता हूँ और आप मुझे अपनी खुशियां देने की बात कर रही हैं. चलिए अब मुस्कुराइए. अगर माँ ने देख लिया तो कहेंगी मैंने आपको रुला दिया.
मैंने दीदी क आंसू अपनी T-shirt से hi साफ़ किये और फिर पेहेन ली. तभी माँ कमरे में आ गयी दूध का गिलास हाथ में लिए.
गौरी म : अरे निधि बीटा तुम यहीं हो अभी तक ?
निधि दीदी : बस ममी जी अपने कमरे में जा hi रही थी. कल सुबह मुझे मंदिर जाना है , ले जाओगे न मंदिर?
गौरी म : बिलकुल ले जायेगा तुम चिंता न करो और आराम से सो जाओ . तुम्हारे लिए भी दूध लायी हूँ मैं.
निधि दीदी : ठीक है ममी जी पर मैं दूध नहीं पीती .
अमित : कैसे नहीं पीती ? आपको पीना पड़ेगा
इतना कह कर मैंने माँ क हाथ से दूध का गिलास ले कर निधि दीदी क होंठों से लगा दिया तो वो मेरी तरफ देखते हुए एक hi बार में सारा पि गयी
गौरी म : अब करो बात , मुझे तो मन कर रही थी और इसके हाथ से एक hi बार में गिलास खली
निधि दीदी : इसे तो किसी बात से मन कर hi नहीं सकती ममी जी. ाचा अब मैं अपने कमरे में चलती हूँ सुबह जल्दी उठ जाना तुम. गुड नाईट
इतना कह कर दीदी अपने कमरे में चली गयी और माँ भी खली गिलास ले कर नीचे चले गयी . मैं भी आराम से लेट गया. करीब एक घंटे बाद जब पूरे घर में सब सो चुके थे तो कमरे का दरवाज़ा खुला और एक मधुर महक हवा में बिखर गयी. मैं अभी सोया नहीं था . जैसे hi मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो माँ दरवाज़ा बंद कर रही थी. बालों से कुछ बूंदे गिर रही थी मतलब माँ नाहा कर आयी थी इस वक़्त . मैं समझ गया क वो आज खुल कर प्यार करने क मूड में आयी हैं. जैसे hi माँ पलटी तो हमारी नज़रें मिली. माँ ने मुझे देखा और कमरे की बड़ी लाइट बंद कर क छोटी लाइट जला दी. धीरे धीरे कदम बताती वो मेरे पास आ रही थी और उनकी पायल की आवाज़ रत की इस ख़ामोशी में कमरे क साथ साथ मेरे दिल में भी शोर मचा रही थी. बीएड क पास आ कर वो मेरी तरफ पीठ कर क बैठ गयी जैसे कह रही हो क शुरुआत तुम hi करो.
मैं जल्दी से उठ कर बैठ गया और उनके पास आ कर उनके बालों से आ रही उस सुगंध को अपनी सांसो में भरने लगा. मैंने अपने होंठ माँ क गीले बदन पर जैसे hi रखे एक सिसकी उनके मुँह से निकल गयी . माँ क बालों क साथ साथ उनके बदन से भी मादक सुगंध आ रही थी . मैंने माँ क बालों को एक तरफ कर क उनकी गर्दन और ब्लाउज में से बहार निकली हुई पीठ पर जब किश किया तो माँ क शरीर में कम्पन सी महसूस हुई . नशे में खोई उनके मुँह से दबी दबी एक और ऐसी की निकली.
गौरी म : कक्ककक्कक्स उम्मम्मम आआह्ह
मैंने माँ की बगलों से हाथ आगे निकल कर उनके नरम चूचे अपने हाथों में थम लिए. माँ फिर से सिसकी . जैसे hi मैंने उनके बड़े बड़े कोमल स्तन दबाये तो उन्होंने अपना सर पीछे मेरे कंधे पर गिरा दिया . मैं उनकी गर्दन पर अपने होंठों से अपनी छाप लबाता हुआ उनके शैतान भींचने लगा.
अमित : माँ आप क बदन से ये खुशबु कैसी आ रही है? ये खुशबु सीधा मेरी सांसों क रस्ते मेरे दिलो दिमाग में उतर रही है.
गौरी म : तेरे लिए hi तो तैयार हो कर आयी हूँ आअह्ह्ह्हह कक्कक्स काम से काम इन पलों में तो माँ मत कहा कर
अमित : उमंमाहहह क्या करूँ माँ , आपके लिए मुँह से माँ hi निकलता है. आपका नाम लेने से मन में बोझ सा लगता है . पर जब आपको माँ कहता हूँ तो ाचा लगता है
गौरी म : कक्कक्स उम्म्म्म आअह्ह्ह अपनी माँ से भी कोई ऐसे प्यार करता है कक्कक्कक्स आह्ह्ह्ह धीरे दबा न आअह्ह्ह
अमित : आप ने hi तो कहा था न माँ क ऐसे प्यार करूँ आप क साथ. मैं बस आपको खुश देखना चाहता हूँ . अगर आपको ाचा नहीं लगता तो रहने देता हूँ
गौरी म : नहीं नहीं मैंने कब कहा क ाचा नहीं लगता . पर अजीब सा लगता है जब तू माँ कह कर मेरी टंगे उठता है तो ... भला ऐसा कहाँ होता है? अपनी माँ को hi माँ बना दिया तुमने . उईईईईई आराम से कर न
अमित : मैंने कभी नहीं सोचा था माँ क ऐसा कुछ होगा . सच कहूं तो जब आपने मुझसे मुँह फेर लिया था तो मेरा दिल किया था क खुद को ख़तम कर लूँ या घर से दूर चला जॉन कहीं कभी न वापिस आने क लिए .
गौरी म : अगर तू ऐसा करता तो मैं भी तेरे साथ hi मर जाती . पता है मैं कितना रोटी थी अंदर से ? पर फिर मुझे समझ आया क उसमे तेरा कसूर नहीं था. वो सब भगवन की hi मर्ज़ी थी. मैंने माँ बनना चाहा और उसने तुम्हे जरिया बना दिया मुझे माँ बनाने क लिए. आआह्ह्ह आराम से ... तुझसे दूर रह कर मैं अंदर से टूट गयी थी और जब साडी बात समझ आयी तो तुझे दिल से अपना सब कुछ मन लिया. मैंने जो तुम्हारी सेवा की थी बचपन में उसी का फल मिला है मुझे. उम्मम्मम आआअह्हह्ह्ह्ह
मैंने माँ को बह पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ कर उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया . माँ भी मेरे होंठों को चूमने लगी और मेरी गर्दन और पीठ पर हाथ चलने लगी . माँ क बाल बीएड पर बिखर गए थे और उनका दूध सा सफ़ेद रंग लिए चेहरा काली रत पर चाँद सा लग रहा था . मैंने किश करते हुए अपनी जीभ उनके मुँह में डाली तो वो उसे चूसने लगी . मैंने उनके दोनों स्तन हाथों में पकडे उनका मर्दन करना जारी रखा. माँ किश करते हुए गरम होने लगी थी और अपने पाऊँ मेरी टांगों पर रगड़ रही थी . होंठों का रास चूसने क बाद मैंने माँ क कण की लॉ को होंठों में लेकर डेंटन से दबाने लगा तो वो सिसक उठी.
गौरी म : कक्कक्क्स आआह्ह्ह्हह ये सब किसने सिखाया तुझे आअह्ह्ह ईशःठ
मैंने अपना काम जारी रखते हुए उनकी गर्दन पर चूमने क बाद दांतों से हल्का सा जाता तो माँ की पकड़ एक डैम से मेरी पीठ पर टाइट हो गयी जिससे से मुझे दर्द भी हुआ पर मैं आगे बढ़ता हुआ माँ क सीने से सदी का पलु सौदे हटा कर उनके ब्लाउज की हुक्स खोलने लगा. ब्लाउज क नीचे माँ ने ब्रा नहीं पहनी थी . ब्लाउज खुलते hi उनके बड़े बड़े रास भरे आम मेरी आँखों क सामने झूल गए. ब्राउन कलर क निप्पल अकड़ चुके थे. मैंने देर न करते हुए एक निप्पल को अंगूठे और उंगली में दबा दिया और दूसरे को मुँह में भर लिया और बच्चों की तरह पीने लगा.
गौरी म : आअह्ह्ह्ह कक्कक्स बचपन में तुझे दूध नहीं पीला पायी थी न पर अब तू इनमे दूध भर क जितना चाहे पि लेना . दोनों बाप बेटों को एक साथ दूध पिलाऊंगी आअह्ह्ह्ह ककक काट मत्तट ायःहज्ज मायआ उफ्फ्फ्फ़
अमित : ज़रूर पियूँगा माँ पर पहले आप अपने बचे को पिलाना फिर मैं पियूँगा
गौरी म : तू भी तो मेरा बचा है न और पहला हक़ तेरा hi होगा . अभी अगर इनमे दूध होता तो तुझे जी भर क पिलाती कक्कक्क्स भर दे इन्हे अपने प्यार से उम्म्म्म
मैंने माँ क दोनों दूध बरी बरी से पिए. माँ क निप्पल अकड़ कर सख्त हो गए थे. बूब्स चूसने क बाद मैं उनके कोमल नरम पेट पर अपनी जीभ फिरता हुआ नाभि तक पहुंचा. माँ मोती नहीं थी पर उनका पेट मांसल था . और वैसे भी अब पेट भरी होने लगा था. पेट को चूमने क बाद मैंने कमर पर बंधी सदी तक पहुंचा और फिर ु की साडी की गाँठ खोल कर सदी खींच कर अलग कर दी. पेटीकोट का नाडा खोल कर मैंने उसे भी खींचना चाहा तो माँ ने कमर उठा कर मेरा साथ देते हुए उसे भी निकल जाने दिया . ब्रा की तरह पेंटी भी जिस्म से गायब थी. ब्लाउज को माँ में खुद से hi अलग कर क रख दिया. अब माँ का दूध सा गदराया बदन मेरे सामने अलफ नंगी हालत में था . मैं माँ को पहले भी नंगी देख चूका था पर पता नहीं क्या कशिश थी माँ में क जब भी उन्हें देखता नज़रें जैसे जैम स जाती थी . माँ ने मुझे इस तरह खुद को घूरते हुए पाया तो एक हाथ अपने स्तनों और दूसरा छूट पर रख लिया.
गौरी म : ऐसा तो न देखो , मुझे शर्म आ रही है.
अमित : माँ आप बहुत खूबसूरत हो , जितना भी देखूं उतना ज्यादा दिल करता है आपको देखने का .
माँ ने खुद को छुपाते हुए टाँगें घुटनो से मोड़ कर पेट की तरफ करते हुए करवट ले ली तो उनके बड़े बड़े चूतड़ मेरे सामने आ गए जो मेरी कमज़ोरी hi बन चुके थे. मैंने बिना देर किये उनके चूतड़ थम लिए और एक पर दांत गाढ़ा दिए .
गौरी म : आअह्ह्ह्हह कक्कक्स उफ्फ्फ्फ़ क्या कर रहा है आआह्ह्ह्ह दर्द होता है कक्कक्स . तुझे कुछ ज्यादा hi पसंद है क्या ये ?
अमित : बहुत !!! दिल तो चाहता है यहाँ भी हर बार एक राउंड ज़रूर लगाया करूँ. आपके ये कितने बड़े और सख्त हैं.
गौरी म : पिछली बार जान निकल दी थी तूने कक्कक्स मत कर न आअह्ह्ह्हह रहने दे न वहां . पिछली बार तीन दिन तक ठीक से चल नहीं पायी थी . सारा भूगोल बिगड़ देगा तू वहां का. कक्कक्क्स आआअह्हह्ह्ह्ह
मैंने माँ की गांड क सुराख़ को उंगली से कुरेदते हुए आधी उंगली थूक से गीली कर क अंदर घुसा दी. माँ ने जल्दी से मेरा हाथ दूर हटाया और सीधी हो गयी .
गौरी म : आगे से कर जितना जी चाहे पीछे से रहने दे. वहां करेगा तो कल परसों क फंक्शन में ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी .
अमित : इसका मतलब अगली बार आप पीछे से करने देंगी ?
गौरी म : तुझे किसी बात से इंकार कर सकती हूँ भला ?
मैंने माँ की जांघों को फैला कर उनकी छूट पर नज़र मरी तो दिल खुश हो गया. माँ की छूट क आसपास का मैदान एक डैम साफा चक था.
अमित : ये आज hi साफ़ किये हैं आपने ?
गौरी म : अभी किये हैं , मुझे पता है तुझे वहां बाल पसंद नहीं . तुझे ाचा लगा ?
अमित : अभी बताता हूँ
इतना कह कर मैंने माँ की टंगे उनके पेट की तरफ दबा कर फैलते हुए उनकी छूट पर अपने होंठ रख दिए और उनकी छूट से बहार लटक रहे मांस की चोंच को होंठों में जकड लिया. माँ क मुँह से सिसकी निकल गयी . इतनी देर की काम क्रीड़ा से छूट में कुछ नमी आ चुकी थी. मैंने अपनी जीभ उस अमृत कुंड में घुसा कर अमृत की वो बूंदे चाट ली. माँ की सिसकियाँ बढ़ने लगी तो उन्होंने अपना ब्लाउज मुँह में ठूंस लिया. माँ क काम रास की वो बूंदे मुझे इतनी अछि लगी क मैं लग गया उस कुंड से सारा अमृत निकलने. मैं अपनी जीभ को और अंदर तक घुसा कर अंदर बहार करते हुए उनके छूट क डेन को भी कुरेदने लगा तो माँ अपनी कमर हिलने लगी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. ज्यादा देर माँ खुद को रोक न पायी और झटके लेते हुए मेरे मुँह में अपना काम रास बहाने लगी . माँ तो मदहोशी क आलम में ढीली पद गयी और मैंने आखिरी बूँद तक चाट ली उनके कामर्स की . उनकी छोट को साफ़ करने क बाद मैं सीधा हुआ और उनकी जांघों को चाटने लगा . माँ का बदन इतना गदराया हुआ था क देखने भर से अचे ाचों का काम तमाम हो जाये . उनकी मांसल जांघों को चूमने क बाद मैंने उनके पाऊँ को चूमा . उनके पाऊँ की पायल उनकी पाऊँ की खूबसूरती को चार चाँद लगा देती थी.
अमित : माँ आपके ये पाऊँ कितने सुन्दर हैं और ये पायल तो जैसे सीधी दिल पर दस्तक देती है.
गौरी म : तुझे पसंद है मेरा पायल पहनना?
अमित : बहुत ज्यादा
गौरी म : शरमाते हुए ) तो रुक क्यों गया , उठा ले इन्हे और बजा ले पायल की छम छम
मैंने जल्दी से अपना लोअर उतरा और अपने लैंड को उनकी छूट पर लगा कर छूट पर रगड़ने लगा . छूट में फिर से नमी आने लगी तो मैंने उनकी टंगे घुटनो से पकड़ कर उनके पेट की तरफ दबाते हुए लैंड को छूट पर सेट कर क हल्का धक्का दिया जिससे लैंड छूट को फैलता हुआ 3 इंच अंदर चला गया
गौरी म : आह्ह्ह्ह कक्कक्क्स सच में बहुत बड़ा और सख्त है ये आअह्हह्ह्ह्ह दर्द भी देता है और मज़ा भी . अब रुक मत करदे पूरा अंदर
मैंने माँ क ऊपर झुक कर उनके होंठ अपने होंठों में लिए और खैक्स स ज़ोरदार धक्का दे कर पूरा लैंड जड़ तक छूट में घुसा दिया . माँ दर्द से तड़प उठी और उनकी चीख मेरे मुँह में hi डाब कर रह गयी . मेरी पीठ पर उन्होंने अपने नाख़ून गाढ़ा दिए . वो तो ाचा था मैंने T-shirt नहीं उतरी वर्ण ज़ख़्म छील जाते. जड़ तक लैंड घुसाने क बाद मैंने आहिस्ता आहिस्ता लैंड को 3-4 इंच अंदर बहार करना शुरू किया तो माँ की पकड़ ढीली होने लगी. जैसे hi वो मुझे कुछ नार्मल लगी तो मैंने उनके होंठ छोड़ दिए
गौरी म : आआह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स अभी भी दर्द देता है ये पता नहीं कक्कक्स कब ये आराम से जाने लगेगा आआह्ह्ह्ह अब रुकना मत आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म
मैं अब सीधा हो कर घुटनो पर बैठा माँ की टंगे उनके कंधो की तरफ दबाये धक्के मरने लगा. माँ की कमर बीएड से ऊपर उठी हुई थी जिससे उनका पेट इकठ्ठा हुआ पड़ा था. मैंने उनकी कमर क नीचे तकिया रख कर उनके लिए इसे आराम दायक कर दिया. कुछ hi धक्कों में लैंड आराम से छूट में जाने लगा तो कमरे में माँ की सिसकियों क साथ फच फच की आवाज़ आने लगी . माँ अब खुद hi अपने बूब्स मसलती सर इधर उधर पटक रही थी . माँ ने मेरी आँखों में नशीली ऐडा से देखते हुए अपने पाऊँ मेरी छाती पर रख दिए और धीरे धीरे उन्हें मेरे मुँह तक ले आयी . माँ का ये कामुक अंदाज़ मुझे और भी पागल बनाने लगा . मैंने उनकी जांघें पकड़ कर अपनी कमर तेज़ तेज़ हिलनी शुरू कर दी
गौरी म : आआह्ह्ह्ह ककक ऐसे hi करो आह्ह्ह्ह और तेज़ आअह्ह्ह्ह और तेज़ करो तभी पायल की आवाज़ आएगी न ाःह्ह्ब तुम्हे पसंद है न ज़ोर से बजाओ ककक ुकम्म्म आआह्ह्ह
अमित : बहुत पसंद है माँ आप की हर ऐडा मुझे पागल बना रही है . आप सच में काम देवी हो ककक आह्ह्ह्ह
माँ का पूरा शरीर इस धक्काम पेल में हिल रहा था और वो अपने पाऊँ मेरी छाती पर मर कर पायल की आवाज़ के रही थी . ये आवाज़ मुझे आउट ऑफ़ कण्ट्रोल कर रही थी. माँ खुद को और रोक नहीं पायी और उनका पानी निकल गया . मुझे अपने लैंड पर उनके गरम काम रास का एहसास हुआ तो मैंने उन्हें रुक कर अचे से झड़ने दिया. जैसे hi उनका कम्पना रुका तो मैंने उन्हें करवट क बल कर दिया और उनके पीछे लेट कर उनकी ऊपर वाली तंग घुटने से पकड़ कर उठा दी और पीछे से लैंड डेल अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी . 2 मिनट्स में hi माँ फिर से गरम होने लगी . मैं उनके कंधे उनकी पीठ को चूमता कमर हिलता जा रहा था . माँ ने खुद hi मेरा हाथ अपने बूब्स पर रख दिया और सर पीछे घुमा कर मुझे किश करने लगी . कुछ देर इस आसान क बाद मैंने माँ को घोड़ी बना लिया और उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मरता उनकी घुड़सवारी करने लगा .
गौरी म : और तेज़ आअह्ह्ह्ह शाबाश और ज़ोर से कर उम्म्म्म ऐसे hi आआह्ह्ह्ह ककक इन्हे भी दबा ज़ोर से आअह्ह्ह्ह ककक मैं फिर से आने वाली हूँ कक्कक्स और कर न ज़ोर से कर आअह्ह्ह मैं आ रही हूँ आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह abhhhhhhhhhhhhh
माँ का एक बार फिर से पानी निकल गया और वो आगे को गिरने लगी तो मैंने उन्हें ऐसे hi बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी जांघों पर बैठ कर छूट में ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. मेरा भी अब होने hi वाला थो मैं पूरे जोश में लगा था. माँ ने बीएड की पुष्ट को हाथों से थाम लिया और मेरे तूफानी धक्के झेलने लगी
गौरी म : आआह्ह्ह आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह अब जल्दी निकल दे आअह्ह्ह्हह जलन होने लगी है बीटा आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह कक्कक्स आईईईई निकल दे जल्दी से उम्म्म्म म्मम्माआआ आआह्ह्ह्हह
अमित : मैं आए रहा हूँ माँ आह्हः ुड़फ्फ्फ आअह्ह्ह्ह
आखिर क ज़ोरदार धक्कों क साथ hi मैंने जड़ तक लैंड छूट में थोक दिया और पानी निकलने लगा. वीर्य की आखिरी बूँद निकलने तक मैंने माँ को ज़ोर से भींच लिया था और माँ की छूट भी जैसे लैंड को कास क निचोड़ रही थी . मैं माँ क ऊपर ऐसे hi गिर गया. कुछ देर माँ ऐसे hi मेरे नीचे दबी अपनी साँसे ठीक करती रही और फिर मुझे साइड में पलट कर पाऊँ फैला कर चलती हुई बाथरूम में चली गयी . उसके बाद पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी .
सुबह मुझे निधि दीदी ने जगाया .
निधि दीदी : उठ जाओ अब देखो टाइम कितना हो गया है . 5 बज चुके हैं. जल्दी से तैयार हो जाओ फिर मुझे मंदिर भी जाना है तुम्हारे साथ .
अमित : आप चलो दीदी मैं अभी आया .
मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया. माँ पता नहीं कब चली गयी थी . मैं तो रत को ऐसे hi सो गया था शुक्र है अब लोअर पहना हुआ था शायद माँ hi नींद में पहना गयी थी मुझे रात को. मैं जल्दी से नाहा कर कमरे में वापिस आया तो निधि दीदी सफ़ेद सूट में किसी सफ़ेद गुलाब सी खिली खुली मेरे सामने बैठी थी. सर पर सलीके से दुपट्टा लिए वो अपने आप में सुंदरता और सीरत की पूरक लग रही थी. मुझे इस तरह खुद को देखता प् कर उनके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी .
निधि दीदी : चलें ?
मैं जैसे किसी अनजाने जादू की पकड़ से बहार निकला और बड़बड़ा कर जल्दी जल्दी निकलने लगा.
अमित : ह ह ह हाँ दीदी चलो . वैसे आप आज बड़ी खूबसूरत लग रही हैं बिलकुल वाइट रोज की तरह
निधि दीदी : थैंक्स . तुम्हे ाचा लगा तो फिर ठीक है वर्ण ये सब तो नार्मल hi है. चल अब जल्दी से.
मैं दीदी क साथ नीचे आया और बाइक निकलने लगा तो दीदी ने मन कर दिया .
अमित : दीदी बाइक से चलते हैं न .
निधि दीदी : नहीं मुझे पैदल hi जाना है , माँ से बहुत सुना है क इस मंदिर में मनोकामना ज़रूर पूरी होती है. इस लिए मैं पैदल नंगे पाऊँ जाउंगी.
अमित : क्याआ??? दीदी आपके इतने कोमल पाऊँ छील जायेंगे रस्ते में कंकर पत्थर से.
निधि दीदी : कुछ पाने क लिए इतनी तपस्या तो करनी hi पड़ेगी न. चल अब वर्ण सूरज सर पर आ जायेगा.
इतने में माँ बाथरूम से नाहा कर निकली तो हमें बहार जाते हुए देख कर पूछने लगी तो दीदी ने बता दिया क मेरे साथ मंदिर जा रही हैं . मंदिर हैं में hi था ज्यादा दूर तो नहीं पर फिर भी 10-15 मिनट्स तो लगने hi वाले थे. मुझे तो दीदी क नंगे पाऊँ की फ़िक्र थी . खैर मैं दीदी क साथ चल दिया. दीदी ने जाते हुए ज्यादा बात नहीं की शायद वो मन में hi कोई मंतर वगैरह पढ़ रही थी और में उनके साथ चल रहा था. मंडी में अभी इक्का दुक्का लोग hi थे . ये मंदिर काफी प्राचीन था और लोगों में इस मंदिर क प्रति बड़ी आस्था थी. हमारी फॅमिली क भी सब लोग यहाँ आते रहते थे. दीदी घर से पूजा की थाली और फूल लायी थी. माता क मंदिर क सामने खड़े हो कर दीदी ऑंखें बंद किये पता नहीं मन में क्या बात करती रही.
निधि ( मन में ) हे माँ ,, अमित क खून से मेरी मांग भरी जाना ज़रूर तेरा hi फैसला था. न मैंने कभी ऐसा सोचा था न hi उसने. जो कुछ भी हुआ मैं उसे तेरा hi फैसला मानती हूँ. अगर वाकई में तुमने मेरे लिए अमित को चुना है तो मुझे फिर से एक बार इशारा दे माँ. और मुझे उसकी बना दे. मैं चाहती हूँ मैं सिर्फ उसी की बन कर रहूं. मैं जानती हूँ ये सब आसान नहीं पर तुम चाहो तो क्या नहीं हो सकता . मुझे सिर्फ उसी की बनाना माँ मैं उसे अपना पति मन चुकी हूँ. अब मेरी लाज तुम्हारे हाथ है मेरी डोर तुम्हारे हाथ में है.
निधि ने जैसे hi माथा टेकने क लिए सर झुकाया तो एक फूल माता की मूर्ती से गिर कर सीधा निधि क सर पर गिरा और जैसे hi उसने सर उठाया तो उसके माथे पर सिन्दूर लग चूका था . असल में वो सिन्दूर माँ क चरणों में किसी चढ़ाया हुआ था जो निधि क माथा टेकते hi उसके माथे पर लग गया. पर लगा भी ऐसे जैसे सुहागन लगाती है. निधि माथा टेकने क बाद जैसे hi अमित की तरह पलटी तो अमित की मज़ार उस सिन्दूर पर गयी .
अमित : ये क्या दीदी ?
निधि दीदी : क्या हुआ ?
अमित : आपके माथे पर तो इतना सारा सिन्दूर लग गया.
मेरी बात सुनते hi दीदी ने जल्दी से मंदिर में hi लगे कांच में अपना अक्स देखा तो उन्हें अपने माथे पर सिन्दूर नज़र आया . दीदी उस सिन्दूर को हाथ से चुकार देखने लगी और फिर मुस्कुरा उठी. वो फिर से माता की मूर्ति क आगे झुक गयी और फिर से माथा टेका.
निधि ( मन में ) मुझे मेरा जवाब मिल गया माँ . तुझे हमारा ये रिश्ता कबूल है. अब कैसे भी कर क मुझे अमित की बना दो माँ. अब जो करना है तुझे hi करना है.
मोहित ने जल्दी जल्दी में फ़ोन काट दिया और मुझे हॉस्पिटल का बताया hi नहीं. मैंने सोचा आंटी से बात कर लेता हूँ. इस लिए आंटी को फ़ोन मिला दिया
अमित : hello आंटी , कहाँ हैं आप ? अंकल की तबियत कैसी है और वो कौन से हॉस्पिटल में हैं?
आंटी : अरे रुको रुको आराम से . मैं बिलकुल ठीक हूँ और तेरे अंकल भी ठीक हैं .
अमित : क्या मतलब ? मुझे अभी अभी मोहित का फ़ोन आया था क अंकल को हार्ट अटैक आया है और वो हॉस्पिटल में हैं. आप मुझे जल्दी हॉस्पिटल का बताइये मैं आ रहा हूँ .
आंटी : अरे रुको तो सही , पहले बात ध्यान से सुन लो. तेरे अंकल बिलकुल ठीक हैं और उन्हें कोई हार्ट अटैक नहीं आया है.
अमित : तो फिर मोहित ....
आंटी : उसने वही कहा जो उसे बताया गया पर सचाई वो नहीं है
अमित : मतलब ? मैं समझा नहीं.
आंटी : भूल गए ? तू hi ने कहा था न करिश्मा को बुलाने क लिए हमें तेरे अंकल क बीमार होने का नाटक करना पड़ेगा. अब छोटे मोठे बुखार या चोट से वो आने वाली तो थी नहीं इस लिए ये ड्रामा किया है. तेरे अंकल बिलकुल ठीक हैं. बस हॉस्पिटल में दाखिल हैं जब तक करिश्मा नहीं आ जाती. मोहित को हमने कुछ नहीं बताया वर्ण हमारा झूठ पकड़ा जाता . क्यों की करिश्मा उससे ज़रूर बात करती और मोहित की बातों से वो पता लगा लेती. वैसे आईडिया काम कर गया है. करिश्मा निकल चुकी है घर से.
अमित : कोई और बहाना नहीं मिला था आपको? मैं तो दर hi गया था. अभी गाओं से शहर आने लगा था मैं .
आंटी : अरे तुम चिंता न करो और यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है . मैं मोहित से बात कर लुंगी .
अमित : आप गाओं फंक्शन पर तो आएंगे न ?
आंटी : क्यों नहीं आएंगे ? करिश्मा आज शाम तक आ जाएगी. और हम उसे भी साथ लेकर आएंगे. तुम अपना ख्याल रखो और यहाँ की चिंता छोड़ फंक्शन की तयारी देखो.
अमित : ठीक है आंटी गाओं आओगे तो मुलाकात होगी bye.
आंटी : bye
मोहित की बात से तो मैं दर hi गया था . शुक्र है ये सब झूठ था. मोहित का भी बुरा हल होगा पर आंटी संभल hi लेंगी . करिश्मा दीदी को बुलाने क लिए आईडिया तो मैंने hi दिया था पर इतना खतरनाक बहाना मैं सोच भी नहीं सकता था. आंटी से बात करने क बाद मैं अपने काम में लग गया . दोपहर का खाना खाने क लिए मैं घर आया तो निधि दीदी दीपिका ममी क साथ बैठ कर मुन्ने क साथ खेल रही थी. जमीं भी कुछ देर क लिए दीपिका ममी क पास hi चला गया.
दीपिका ममी : मिल गया समय हमारे पास आने का ?
अमित : कैसी बातें करती हो ममी आप भी . आपके सामने hi तो हूँ. मुन्ने क नामकरण की तयारी में hi लग गया आते hi.
दीपिका ममी : अपने मुन्ने क लिए थोड़ा टाइम नहीं निकल सकते ? काम तो होते रहेंगे.
अमित : इसी क लिए तो कर रहा हूँ सब . कल को ये यद् रखे न रखे काम से काम मुझे तो यद् रहेगा.
दीपिका ममी : यद् कैसे नहीं रखेगा ? इसे रखना होगा. मैं बताउंगी इसे, देख लेना बिलकुल तुम्हारे जैसा बनाउंगी इसे.
निधि दीदी : सही कहा ममी आपने, अमित जैसा hi बनाना इसे. अगर इसके जैसा बन गया तो सब इसे प्यार करेंगे .
दीपिका ममी : इसके जैसा hi बनेगा , आखिर इसी का तो है .
दीपिका ममी की इस बात पर मुझे झटका लगा. निधि दीदी क सामने hi उन्होंने सीधा सीधा ये बात कह दी.
निधि दीदी : इसी का मतलब ?
दीपिका ममी : अरे इसी का छोटा भाई है न तो इसके जैसा hi बनेगा .
निधि दीदी : वैसे ममी जी कोई नाम सोचा है अपने इसका ?
दीपिका ममी : नहीं अभी तक तो नहीं सोचा . तुम hi कोई बता दो
निधि दीदी : मेरा बस चले तो इसका नाम भी अमित hi रख दूँ . पर अगर अमित क नाम क पहले अक्षर से hi रख दें तो कैसा रहेगा ?
दीपिका ममी : बहुत ाचा रहेगा . वैसे मुन्ने क पापा अगर उसके लिए खुद कोई नाम रखे तो और भी ाचा होगा.
दीपिका ममी ने ये बात मेरी तरफ देखते हुए कही थी.
‘चलो अब तुम सब खाना खा लो. बाकि बाएं बाद में कर लेना ‘ माँ ने अंदर एते हुए कहा तो हम भी उठ खड़े हुए और फिर सब ने मिल कर खाना खाया. माँ बहुत खुश थी और अपने हाथों से खाना मुझे परोस रही थी. मेरे एक तरफ निधि दीदी और एक तरफ दीपिका ममी बैठी थी. बाबा अजय मां और कमलेश मां अपने अपने ज़िम्मे क काम कर रहे थे.
कमलेश मां तो फूले नहीं समां रहे थे और पूरे गाओं में ख़ुशी से नाचते फिर रहे थे. पूरे गाओं को उन्होंने दावत पर बुला लिया था. घर में नामकरण और गाओं वालों की दावत क इलावा कमलेश मां ने अपने दोस्तों क लिए अलग से दारू पार्टी का इंतज़ाम भी कर रखा था.
खाना खाने क बाद मैं कुछ देर रेस्ट करने क लिए अपने कमरे में गया तो निधि दीदी भी वहीँ आ गयी. मैं ऑंखें बंद कर क लेता हुआ था. क दीदी मेरे पास बैठ कर सर को सहलाने लगी तो मैंने आँखें खोल कर उनको देखा. दीदी बड़े स्नेह से मुझे देख रही थी.
निधि दीदी : मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ?
अमित : ऐसा भला हो सकता है ? मुझे तो ाचा लगता है जब आप मेरे पास होती हो. आप hi तो बचपन से मुझे सब से ज्यादा प्यार करती आयी हो.
निधि दीदी : मुझे भी तुम्हारे साथ रहना ाचा लगता है. मैंने हमेशा कारन से ज्यादा तुम्हे प्यार किया है.
अमित : मैं जनता हूँ दीदी , इसी लिए तो आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हो.
निधि दीदी : मेरा बस चले तो मैं तुम्हे कभी अपने से दूर न जाने दूँ. बचपन में जब भी तुमसे मिलने आती थी न तो मेरा घर जाने को दिल hi नहीं करता था. और जब माँ वापिस ले जाती तो कितने दिन तक बस तुम्हे hi यद् करती रहती थी. और फिर जैसे जैसे बड़े होते गए पता hi नहीं चला क कब ज़िन्दगी में इतने बिजी हो गए क तुमसे दूर हो गयी. और अब देख भगवन ने फिर से हमें मिला दिया है. अब मैं तुम्हे दूर नहीं जाने दूँगी .
अमित : पर दीदी जब आपकी शादी हो जाएगी तब तो जाना hi होगा न.
निधि दीदी : मुझे नहीं करनी शादी , मैं बस तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ.
अमित : ाचा ये तो बताइये क आपको कैसा लड़का पसंद है अपने लिए?
निधि दीदी : तुमने सुना नहीं मैंने शादी hi नहीं करनी
अमित : फिर भी बताइये तो सही
निधि दीदी : क्यों जानना चाहता हो तुम?
अमित : इस लिए क मैं आपके लिए वैसा लड़का ढूंढ कर लाऊंगा बिलकुल आपकी पसंद का.
निधि दीदी : क्या सच में तू ऐसा कर सकता है ? जैसा मैं लड़का कहूं वैसा ढूंढ सकता है ?
अमित : बिलकुल, आप बताइये तो सही
निधि दीदी : मुझे तुम .... मतलब तुम जैसा लड़का चाहिए
अमित : मेरे जैसा ??? आपने मुझ में क्या देख लिया ? आप क लिए तो कोई राजकुमार जैसा लड़का ढूंढना पड़ेगा . जो बहुत सुन्दर हो स्मार्ट हो पैसे वाला हो और आपको प्यार भी बहुत करे.
निधि दीदी: तो क्या तुम प्यार नहीं करते मुझे ?
निधि दीदी कुछ देर क लिए खामोश हुई और मेरी आँखों में देखने लगी . दीदी की नज़रें कुछ और कह रही थी मुझे उनको देख कर पहली बार उनका देखना कुछ अलग लगा
अमित : एक भाई क प्यार में और पति क प्यार में फरक होता है न दीदी. मैं आपको वो प्यार थोड़ा कर सकता हूँ वो तो आपके और पति देव hi करेंगे. आप लड़का बताइये कैसा चाहिए
निधि दीदी : संजीदगी से ) बताया तो है क तेरे जैसा. बिलकुल तेरे जैसा hi चाहिए अगर तू ढूंढ सके तो. जो तेरी तरह hi मेरी इज़्ज़त करे मेरे लिए किसी से भी लड़ सके मेरी हिफाज़त कर सके . जो दिल से मुझे चाहता हो तेरी तरह स्मार्ट हो . राज कुमार नहीं बस तुम जैसा hi चाहिए . यही मासूम चेहरा यही ऑंखें बस और कुछ नहीं.
अमित : ये तो मुश्किल हो जायेगा अब मेरे जैसे नेचर वाला तो शायद मिल भी जाये पर ये चेहरा और ऑंखें तो मिलने से रहे क्यूंकि मुझे खुद ये अपने माता पिता से मिल हैं.
निधि दीदी : इसी लिए कहा था क मैं शादी नहीं करुँगी . क्यूंकि मैं जानती हूँ हम दोनों शादी कर नहीं सकते और दूसरा तुम्हारे जैसा कोई और दुनिया में होगा नहीं .
अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं आज ?
निधि दीदी : ाचा छोड़ ये सब. आज तुमने क्रीम नहीं लगायी न . चल दिखा ज़रा क्या हालत है अब
अमित : अभी रहने दो दीदी कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी.
‘ कैसी मुश्किल हो जाएगी ? ‘ माँ ने आखिरी बात सुन ली थी और वो कमरे में आती हुई सीधा यही बात पूछने लगी .
अमित : क कक कुछ नहीं माँ . दीदी यहाँ सोने का कह रही थी मैंने कहा मुश्किल हो जाएगी ऐसे.
गौरी म : इतने कमरे हैं है घर में तो ज़रूरत क्या है परेशां होने की ? बगल में टीम कमरे पड़े हैं जो चाहे ले लो.
निधि दीदी : थी है ममी जी . मैं साथ वाले कमरे में hi रुक जाती हूँ.
गौरी म : तू क्या कर रहा है ?
अमित : कुछ नहीं मैं तो बस आराम करने आया था यहाँ.
गौरी म : इतने दिनों बाद घर अत है और दो पल पास नहीं बैठने को मिलते. चल तेरी सर की मालिश कर दूँ नींद अछि आएगी.
निधि दीदी : ममी जी अगर आप कहें तो मैं कर दूँ इसकी मालिश ?
गौरी म : ये तो बहाना है बस वर्ण मौका कहाँ मिलता है अपने बेटे क पास बैठने का भी मुझे. जब से शहर गया है बस हफ्ते 1 दिन क लिए अत है उसने भी इसे गाओं वाले दोस्तों से मिलना होता है और इधर उधर में वक़्त निकल जाता है. मुझे तो ये वक़्त देता hi नहीं है .
अमित : ऐसा क्यों कहती हो माँ? मैं तो हमेशा hi आपके लिए हाज़िर हूँ आप बस हुकम
किया कीजिये.
गौरी म : पता है कितना हाज़िर है , बातें करवा लो बस. अभी फिर से तू घर से निकल जायेगा और कल परसों तो टाइम मिलेगा hi नहीं बात करने का भी .
माँ ने मुझे बिठा दिया और मेरे पीछे बैठ कर मेरे सर की मालिश करने लगी . निधि दीदी साइड में बैठी बस मुझे hi देख रही थी. माँ ने मुझे T-shirt उतरने को कहा भी पर मैंने मन कर दिया . कुछ देर तक माँ मेरी मालिश करती रही और सच में मेरी ऑंखें नींद से अपने आप बंद होने लगी. कब मैं नींद की वादियों में चला गया मुझे पता hi न चला.
शाम को नींद खुली तो कमरे में अकेला सो रहा था. हाथ मुँह धो कर निचे आया तो निधि दीदी फिर से दीपिका ममी और मुन्ने क साथ hi नज़र आयी .
गौरी म : उठ गया तू , तेरे बाबा कह रहे थे क तुझे उनके साथ जाना है. गाओं में कुछ लोगों को निमंत्रण देने क लिए वो तुझे साथ ले जाना चाहते हैं.
अमित : इसमें मेरी क्या ज़रूरत पद गयी माँ ? बाबा को तो सब जानते hi हैं.
गौरी म : ये ले पहले दूध पि ले . वो कह रहे थे क अखाड़े क उस्ताद जी डरा और सरपंच साहब क घर वो तुझे साथ लेकर hi जायेंगे. तू उनसे जुड़ा जो है. सब तुझे प्यार करते हैं.
वैसे तूने अपने दोस्तों को भी बुलाया हैं न कॉलेज से?
अमित : हाँ माँ सबको बुलाया है. वो लोग उसी दिन आएंगे .
गौरी म : तेरी मौसियां कल आ रही हैं फ़ोन आया था सबका . अपनी बहनो क लिए साथ वाले कमरे तैयार करवा देना निधि क साथ मिल कर.
निधि दीदी : आप चिंता मत करो ममी जी मैं कर लुंगी. वहां कौन सा कोई ज्यादा काम है.
अमित : मैं कर लंग दीदी. आप यहाँ मेहमान हो तो आप से थोड़ा काम करवाऊंगा
निधि दीदी : बड़ा आया मेहमान वाला. ये मेरा अपना घर है. और मैं कोई मेहमान नहीं हूँ समझे जहाँ तुम वहां मैं.
गौरी म : बिलकुल मेरी बची ये तेरा hi घर है.
‘ चल बीटा जल्दी से दूध ख़तम कर हम ज़रा तेरे उस्ताद जी को निमंत्रण दे आएं ‘ बाबा घर क अंदर आते hi मुझे कहने लगे. दूध पिने क बाद मैं बाबा क साथ निकल गया और 2 घंटे ऐसे hi निकल गए . रत क खाने से पहले हम वापिस घर आ गए और साथ में मिल कर खाना खाया. खाना खाने क बाद कुछ देर अजय मां और कामिनी ममी क साथ बैठ कर बातें की. कमलेश मां तो अपने दोस्तों को पार्टी करवा रहे थे बहार . निधि दीदी मुन्ने क साथ थी.
अजय मां : तुमने अपने दोस्तों को बुलाया क नहीं ?
अमित : बुलाया है मां जी सबको बुलाया है.
अजय मां : अचे से खातिरदारी करना. इस बार सब अचे से देख ले और सिख ले. कामिनी क माँ बनने पर मैं तो कुछ नहीं करुणा , सब तुझे hi करना पड़ेगा.
कामिनी ममी : ये hi करेगा , इसी का तो फ़र्ज़ है ये सब करने का. आप चिंता मत करो
मैं ममी तरफ देखने लगा.
कामिनी ममी : ऐसे क्या देख रहे हो ? सब काम तेरे मां hi करेंगे क्या ? तेरा भी तो फ़र्ज़ है.
अमित : हह हाँ हाँ मैं hi करूँगा , मां जी आपको चिंता करने को कोई ज़रूरत नहीं है मेरे होते हुए
अजय मां : मैं चिंता करने लगा ? मुझे पता है मेरा शेर बीटा है अपने मां का नाम ऊँचा करने क लिए . चल अब तू जा कर आराम करले. कल सब आ जायेंगे तो तेरी hi जान खाएंगे .
अमित : ठीक है मां जी ाचा ममी जी.
उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया जहाँ निधि दीदी पहले hi बैठी थी .
अमित : दीदी आप ?
निधि दीदी : चल दरवाज़ा बंद कर और अपनी T-shirt उतर. क्रीम लगा देती हूँ तुझे
अमित : दीदी आप रहने दो न . कोई देखेगा तो क्या कहेगा. वैसे भी क्रीम तो आपके घर hi रह गयी.
निधि दीदी : मुझे पता है तू लापरवाह है. इसी लिए क्रीम मैं ले आयी थी अब ज्यादा नकारे न कर और T-shirt उतर अपनी.
मैंने ज्यादा बात नहीं बड़ाई और T-shirt उतर दी.
निधि दीदी : हे भगवन , ये तो सब काळा निशान बन गए हैं बड़े बड़े . तुझे दर्द भी हो रहा होगा न. कितनी बेरहमी से मारा है जल्लादों ने.
अमित : दर्द तो है दीदी पर डॉ रीना ने पैन किलर टेबलेट दी थी तो वो खा रह हूँ.
निधि दीदी : काश तेरा हर दर्द हर ज़ख़्म मुझे मिल जाये .
अमित : बिलकुल नहीं . अपना दर्द तो मैं सेह सकता हूँ दीदी पर आपको दर्द में नहीं देख सकता .
निधि दीदी: तो क्या मैं देख सकती हूँ तुझे इस दर्द में ?
अमित : आप एक लड़की हैं दीदी फूलों सी नाज़ुक आप बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी जबकि मैं तो पहले hi अखाड़े की मिटटी से तैयार हुआ हूँ तो मुझे ज्यादा फरक नहीं पड़ता . आप चिंता मत करो दर्द से तो पुराण नाता है मेरा.
निधि दीदी : क्यों करता है ऐसी बातें ? मुझे पता है तुम अंदर hi अंदर घुट ते रहे हो इतने साल बाद अब जब हम साथ हैं तो काम से काम अब तो यद् न करो वो सब.
अमित : मैं कहाँ यद् करता हूँ दीदी , ये तो मेरा अक्स hi है और उसे भला क्या यद् करूँ जिसे कभी भुला hi नहीं .
निधि दीदी ने बातों बातों में क्रीम लगा दी थी और मेरी इस आखिरी बात पर उनके हाथ रुक गए और वो खामोश हो गयी. मैंने पलट कर देखा तो
उनकी ऑंखें नाम हो चुकी थी.
अमित : क्या हुआ दीदी आपकी आँखों में आंसू? ी ऍम सॉरी अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगी तो.
निधि दीदी : कितना कुछ अपने अंदर दबा क रखा हुआ है तूने ? अपने सरे दुःख मुझे देदो और मेरे हिस्से की खुशियां तुम ले लो .
अमित : भगवन करे आपको मेरे हिस्से की खुशियां भी मिल जाये. मैं आपको हमेशा खुश देखना चाहता हूँ और आप मुझे अपनी खुशियां देने की बात कर रही हैं. चलिए अब मुस्कुराइए. अगर माँ ने देख लिया तो कहेंगी मैंने आपको रुला दिया.
मैंने दीदी क आंसू अपनी T-shirt से hi साफ़ किये और फिर पेहेन ली. तभी माँ कमरे में आ गयी दूध का गिलास हाथ में लिए.
गौरी म : अरे निधि बीटा तुम यहीं हो अभी तक ?
निधि दीदी : बस ममी जी अपने कमरे में जा hi रही थी. कल सुबह मुझे मंदिर जाना है , ले जाओगे न मंदिर?
गौरी म : बिलकुल ले जायेगा तुम चिंता न करो और आराम से सो जाओ . तुम्हारे लिए भी दूध लायी हूँ मैं.
निधि दीदी : ठीक है ममी जी पर मैं दूध नहीं पीती .
अमित : कैसे नहीं पीती ? आपको पीना पड़ेगा
इतना कह कर मैंने माँ क हाथ से दूध का गिलास ले कर निधि दीदी क होंठों से लगा दिया तो वो मेरी तरफ देखते हुए एक hi बार में सारा पि गयी
गौरी म : अब करो बात , मुझे तो मन कर रही थी और इसके हाथ से एक hi बार में गिलास खली
निधि दीदी : इसे तो किसी बात से मन कर hi नहीं सकती ममी जी. ाचा अब मैं अपने कमरे में चलती हूँ सुबह जल्दी उठ जाना तुम. गुड नाईट
इतना कह कर दीदी अपने कमरे में चली गयी और माँ भी खली गिलास ले कर नीचे चले गयी . मैं भी आराम से लेट गया. करीब एक घंटे बाद जब पूरे घर में सब सो चुके थे तो कमरे का दरवाज़ा खुला और एक मधुर महक हवा में बिखर गयी. मैं अभी सोया नहीं था . जैसे hi मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो माँ दरवाज़ा बंद कर रही थी. बालों से कुछ बूंदे गिर रही थी मतलब माँ नाहा कर आयी थी इस वक़्त . मैं समझ गया क वो आज खुल कर प्यार करने क मूड में आयी हैं. जैसे hi माँ पलटी तो हमारी नज़रें मिली. माँ ने मुझे देखा और कमरे की बड़ी लाइट बंद कर क छोटी लाइट जला दी. धीरे धीरे कदम बताती वो मेरे पास आ रही थी और उनकी पायल की आवाज़ रत की इस ख़ामोशी में कमरे क साथ साथ मेरे दिल में भी शोर मचा रही थी. बीएड क पास आ कर वो मेरी तरफ पीठ कर क बैठ गयी जैसे कह रही हो क शुरुआत तुम hi करो.
मैं जल्दी से उठ कर बैठ गया और उनके पास आ कर उनके बालों से आ रही उस सुगंध को अपनी सांसो में भरने लगा. मैंने अपने होंठ माँ क गीले बदन पर जैसे hi रखे एक सिसकी उनके मुँह से निकल गयी . माँ क बालों क साथ साथ उनके बदन से भी मादक सुगंध आ रही थी . मैंने माँ क बालों को एक तरफ कर क उनकी गर्दन और ब्लाउज में से बहार निकली हुई पीठ पर जब किश किया तो माँ क शरीर में कम्पन सी महसूस हुई . नशे में खोई उनके मुँह से दबी दबी एक और ऐसी की निकली.
गौरी म : कक्ककक्कक्स उम्मम्मम आआह्ह
मैंने माँ की बगलों से हाथ आगे निकल कर उनके नरम चूचे अपने हाथों में थम लिए. माँ फिर से सिसकी . जैसे hi मैंने उनके बड़े बड़े कोमल स्तन दबाये तो उन्होंने अपना सर पीछे मेरे कंधे पर गिरा दिया . मैं उनकी गर्दन पर अपने होंठों से अपनी छाप लबाता हुआ उनके शैतान भींचने लगा.
अमित : माँ आप क बदन से ये खुशबु कैसी आ रही है? ये खुशबु सीधा मेरी सांसों क रस्ते मेरे दिलो दिमाग में उतर रही है.
गौरी म : तेरे लिए hi तो तैयार हो कर आयी हूँ आअह्ह्ह्हह कक्कक्स काम से काम इन पलों में तो माँ मत कहा कर
अमित : उमंमाहहह क्या करूँ माँ , आपके लिए मुँह से माँ hi निकलता है. आपका नाम लेने से मन में बोझ सा लगता है . पर जब आपको माँ कहता हूँ तो ाचा लगता है
गौरी म : कक्कक्स उम्म्म्म आअह्ह्ह अपनी माँ से भी कोई ऐसे प्यार करता है कक्कक्कक्स आह्ह्ह्ह धीरे दबा न आअह्ह्ह
अमित : आप ने hi तो कहा था न माँ क ऐसे प्यार करूँ आप क साथ. मैं बस आपको खुश देखना चाहता हूँ . अगर आपको ाचा नहीं लगता तो रहने देता हूँ
गौरी म : नहीं नहीं मैंने कब कहा क ाचा नहीं लगता . पर अजीब सा लगता है जब तू माँ कह कर मेरी टंगे उठता है तो ... भला ऐसा कहाँ होता है? अपनी माँ को hi माँ बना दिया तुमने . उईईईईई आराम से कर न
अमित : मैंने कभी नहीं सोचा था माँ क ऐसा कुछ होगा . सच कहूं तो जब आपने मुझसे मुँह फेर लिया था तो मेरा दिल किया था क खुद को ख़तम कर लूँ या घर से दूर चला जॉन कहीं कभी न वापिस आने क लिए .
गौरी म : अगर तू ऐसा करता तो मैं भी तेरे साथ hi मर जाती . पता है मैं कितना रोटी थी अंदर से ? पर फिर मुझे समझ आया क उसमे तेरा कसूर नहीं था. वो सब भगवन की hi मर्ज़ी थी. मैंने माँ बनना चाहा और उसने तुम्हे जरिया बना दिया मुझे माँ बनाने क लिए. आआह्ह्ह आराम से ... तुझसे दूर रह कर मैं अंदर से टूट गयी थी और जब साडी बात समझ आयी तो तुझे दिल से अपना सब कुछ मन लिया. मैंने जो तुम्हारी सेवा की थी बचपन में उसी का फल मिला है मुझे. उम्मम्मम आआअह्हह्ह्ह्ह
मैंने माँ को बह पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ कर उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया . माँ भी मेरे होंठों को चूमने लगी और मेरी गर्दन और पीठ पर हाथ चलने लगी . माँ क बाल बीएड पर बिखर गए थे और उनका दूध सा सफ़ेद रंग लिए चेहरा काली रत पर चाँद सा लग रहा था . मैंने किश करते हुए अपनी जीभ उनके मुँह में डाली तो वो उसे चूसने लगी . मैंने उनके दोनों स्तन हाथों में पकडे उनका मर्दन करना जारी रखा. माँ किश करते हुए गरम होने लगी थी और अपने पाऊँ मेरी टांगों पर रगड़ रही थी . होंठों का रास चूसने क बाद मैंने माँ क कण की लॉ को होंठों में लेकर डेंटन से दबाने लगा तो वो सिसक उठी.
गौरी म : कक्कक्क्स आआह्ह्ह्हह ये सब किसने सिखाया तुझे आअह्ह्ह ईशःठ
मैंने अपना काम जारी रखते हुए उनकी गर्दन पर चूमने क बाद दांतों से हल्का सा जाता तो माँ की पकड़ एक डैम से मेरी पीठ पर टाइट हो गयी जिससे से मुझे दर्द भी हुआ पर मैं आगे बढ़ता हुआ माँ क सीने से सदी का पलु सौदे हटा कर उनके ब्लाउज की हुक्स खोलने लगा. ब्लाउज क नीचे माँ ने ब्रा नहीं पहनी थी . ब्लाउज खुलते hi उनके बड़े बड़े रास भरे आम मेरी आँखों क सामने झूल गए. ब्राउन कलर क निप्पल अकड़ चुके थे. मैंने देर न करते हुए एक निप्पल को अंगूठे और उंगली में दबा दिया और दूसरे को मुँह में भर लिया और बच्चों की तरह पीने लगा.
गौरी म : आअह्ह्ह्ह कक्कक्स बचपन में तुझे दूध नहीं पीला पायी थी न पर अब तू इनमे दूध भर क जितना चाहे पि लेना . दोनों बाप बेटों को एक साथ दूध पिलाऊंगी आअह्ह्ह्ह ककक काट मत्तट ायःहज्ज मायआ उफ्फ्फ्फ़
अमित : ज़रूर पियूँगा माँ पर पहले आप अपने बचे को पिलाना फिर मैं पियूँगा
गौरी म : तू भी तो मेरा बचा है न और पहला हक़ तेरा hi होगा . अभी अगर इनमे दूध होता तो तुझे जी भर क पिलाती कक्कक्क्स भर दे इन्हे अपने प्यार से उम्म्म्म
मैंने माँ क दोनों दूध बरी बरी से पिए. माँ क निप्पल अकड़ कर सख्त हो गए थे. बूब्स चूसने क बाद मैं उनके कोमल नरम पेट पर अपनी जीभ फिरता हुआ नाभि तक पहुंचा. माँ मोती नहीं थी पर उनका पेट मांसल था . और वैसे भी अब पेट भरी होने लगा था. पेट को चूमने क बाद मैंने कमर पर बंधी सदी तक पहुंचा और फिर ु की साडी की गाँठ खोल कर सदी खींच कर अलग कर दी. पेटीकोट का नाडा खोल कर मैंने उसे भी खींचना चाहा तो माँ ने कमर उठा कर मेरा साथ देते हुए उसे भी निकल जाने दिया . ब्रा की तरह पेंटी भी जिस्म से गायब थी. ब्लाउज को माँ में खुद से hi अलग कर क रख दिया. अब माँ का दूध सा गदराया बदन मेरे सामने अलफ नंगी हालत में था . मैं माँ को पहले भी नंगी देख चूका था पर पता नहीं क्या कशिश थी माँ में क जब भी उन्हें देखता नज़रें जैसे जैम स जाती थी . माँ ने मुझे इस तरह खुद को घूरते हुए पाया तो एक हाथ अपने स्तनों और दूसरा छूट पर रख लिया.
गौरी म : ऐसा तो न देखो , मुझे शर्म आ रही है.
अमित : माँ आप बहुत खूबसूरत हो , जितना भी देखूं उतना ज्यादा दिल करता है आपको देखने का .
माँ ने खुद को छुपाते हुए टाँगें घुटनो से मोड़ कर पेट की तरफ करते हुए करवट ले ली तो उनके बड़े बड़े चूतड़ मेरे सामने आ गए जो मेरी कमज़ोरी hi बन चुके थे. मैंने बिना देर किये उनके चूतड़ थम लिए और एक पर दांत गाढ़ा दिए .
गौरी म : आअह्ह्ह्हह कक्कक्स उफ्फ्फ्फ़ क्या कर रहा है आआह्ह्ह्ह दर्द होता है कक्कक्स . तुझे कुछ ज्यादा hi पसंद है क्या ये ?
अमित : बहुत !!! दिल तो चाहता है यहाँ भी हर बार एक राउंड ज़रूर लगाया करूँ. आपके ये कितने बड़े और सख्त हैं.
गौरी म : पिछली बार जान निकल दी थी तूने कक्कक्स मत कर न आअह्ह्ह्हह रहने दे न वहां . पिछली बार तीन दिन तक ठीक से चल नहीं पायी थी . सारा भूगोल बिगड़ देगा तू वहां का. कक्कक्क्स आआअह्हह्ह्ह्ह
मैंने माँ की गांड क सुराख़ को उंगली से कुरेदते हुए आधी उंगली थूक से गीली कर क अंदर घुसा दी. माँ ने जल्दी से मेरा हाथ दूर हटाया और सीधी हो गयी .
गौरी म : आगे से कर जितना जी चाहे पीछे से रहने दे. वहां करेगा तो कल परसों क फंक्शन में ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी .
अमित : इसका मतलब अगली बार आप पीछे से करने देंगी ?
गौरी म : तुझे किसी बात से इंकार कर सकती हूँ भला ?
मैंने माँ की जांघों को फैला कर उनकी छूट पर नज़र मरी तो दिल खुश हो गया. माँ की छूट क आसपास का मैदान एक डैम साफा चक था.
अमित : ये आज hi साफ़ किये हैं आपने ?
गौरी म : अभी किये हैं , मुझे पता है तुझे वहां बाल पसंद नहीं . तुझे ाचा लगा ?
अमित : अभी बताता हूँ
इतना कह कर मैंने माँ की टंगे उनके पेट की तरफ दबा कर फैलते हुए उनकी छूट पर अपने होंठ रख दिए और उनकी छूट से बहार लटक रहे मांस की चोंच को होंठों में जकड लिया. माँ क मुँह से सिसकी निकल गयी . इतनी देर की काम क्रीड़ा से छूट में कुछ नमी आ चुकी थी. मैंने अपनी जीभ उस अमृत कुंड में घुसा कर अमृत की वो बूंदे चाट ली. माँ की सिसकियाँ बढ़ने लगी तो उन्होंने अपना ब्लाउज मुँह में ठूंस लिया. माँ क काम रास की वो बूंदे मुझे इतनी अछि लगी क मैं लग गया उस कुंड से सारा अमृत निकलने. मैं अपनी जीभ को और अंदर तक घुसा कर अंदर बहार करते हुए उनके छूट क डेन को भी कुरेदने लगा तो माँ अपनी कमर हिलने लगी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. ज्यादा देर माँ खुद को रोक न पायी और झटके लेते हुए मेरे मुँह में अपना काम रास बहाने लगी . माँ तो मदहोशी क आलम में ढीली पद गयी और मैंने आखिरी बूँद तक चाट ली उनके कामर्स की . उनकी छोट को साफ़ करने क बाद मैं सीधा हुआ और उनकी जांघों को चाटने लगा . माँ का बदन इतना गदराया हुआ था क देखने भर से अचे ाचों का काम तमाम हो जाये . उनकी मांसल जांघों को चूमने क बाद मैंने उनके पाऊँ को चूमा . उनके पाऊँ की पायल उनकी पाऊँ की खूबसूरती को चार चाँद लगा देती थी.
अमित : माँ आपके ये पाऊँ कितने सुन्दर हैं और ये पायल तो जैसे सीधी दिल पर दस्तक देती है.
गौरी म : तुझे पसंद है मेरा पायल पहनना?
अमित : बहुत ज्यादा
गौरी म : शरमाते हुए ) तो रुक क्यों गया , उठा ले इन्हे और बजा ले पायल की छम छम
मैंने जल्दी से अपना लोअर उतरा और अपने लैंड को उनकी छूट पर लगा कर छूट पर रगड़ने लगा . छूट में फिर से नमी आने लगी तो मैंने उनकी टंगे घुटनो से पकड़ कर उनके पेट की तरफ दबाते हुए लैंड को छूट पर सेट कर क हल्का धक्का दिया जिससे लैंड छूट को फैलता हुआ 3 इंच अंदर चला गया
गौरी म : आह्ह्ह्ह कक्कक्क्स सच में बहुत बड़ा और सख्त है ये आअह्हह्ह्ह्ह दर्द भी देता है और मज़ा भी . अब रुक मत करदे पूरा अंदर
मैंने माँ क ऊपर झुक कर उनके होंठ अपने होंठों में लिए और खैक्स स ज़ोरदार धक्का दे कर पूरा लैंड जड़ तक छूट में घुसा दिया . माँ दर्द से तड़प उठी और उनकी चीख मेरे मुँह में hi डाब कर रह गयी . मेरी पीठ पर उन्होंने अपने नाख़ून गाढ़ा दिए . वो तो ाचा था मैंने T-shirt नहीं उतरी वर्ण ज़ख़्म छील जाते. जड़ तक लैंड घुसाने क बाद मैंने आहिस्ता आहिस्ता लैंड को 3-4 इंच अंदर बहार करना शुरू किया तो माँ की पकड़ ढीली होने लगी. जैसे hi वो मुझे कुछ नार्मल लगी तो मैंने उनके होंठ छोड़ दिए
गौरी म : आआह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स अभी भी दर्द देता है ये पता नहीं कक्कक्स कब ये आराम से जाने लगेगा आआह्ह्ह्ह अब रुकना मत आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म
मैं अब सीधा हो कर घुटनो पर बैठा माँ की टंगे उनके कंधो की तरफ दबाये धक्के मरने लगा. माँ की कमर बीएड से ऊपर उठी हुई थी जिससे उनका पेट इकठ्ठा हुआ पड़ा था. मैंने उनकी कमर क नीचे तकिया रख कर उनके लिए इसे आराम दायक कर दिया. कुछ hi धक्कों में लैंड आराम से छूट में जाने लगा तो कमरे में माँ की सिसकियों क साथ फच फच की आवाज़ आने लगी . माँ अब खुद hi अपने बूब्स मसलती सर इधर उधर पटक रही थी . माँ ने मेरी आँखों में नशीली ऐडा से देखते हुए अपने पाऊँ मेरी छाती पर रख दिए और धीरे धीरे उन्हें मेरे मुँह तक ले आयी . माँ का ये कामुक अंदाज़ मुझे और भी पागल बनाने लगा . मैंने उनकी जांघें पकड़ कर अपनी कमर तेज़ तेज़ हिलनी शुरू कर दी
गौरी म : आआह्ह्ह्ह ककक ऐसे hi करो आह्ह्ह्ह और तेज़ आअह्ह्ह्ह और तेज़ करो तभी पायल की आवाज़ आएगी न ाःह्ह्ब तुम्हे पसंद है न ज़ोर से बजाओ ककक ुकम्म्म आआह्ह्ह
अमित : बहुत पसंद है माँ आप की हर ऐडा मुझे पागल बना रही है . आप सच में काम देवी हो ककक आह्ह्ह्ह
माँ का पूरा शरीर इस धक्काम पेल में हिल रहा था और वो अपने पाऊँ मेरी छाती पर मर कर पायल की आवाज़ के रही थी . ये आवाज़ मुझे आउट ऑफ़ कण्ट्रोल कर रही थी. माँ खुद को और रोक नहीं पायी और उनका पानी निकल गया . मुझे अपने लैंड पर उनके गरम काम रास का एहसास हुआ तो मैंने उन्हें रुक कर अचे से झड़ने दिया. जैसे hi उनका कम्पना रुका तो मैंने उन्हें करवट क बल कर दिया और उनके पीछे लेट कर उनकी ऊपर वाली तंग घुटने से पकड़ कर उठा दी और पीछे से लैंड डेल अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी . 2 मिनट्स में hi माँ फिर से गरम होने लगी . मैं उनके कंधे उनकी पीठ को चूमता कमर हिलता जा रहा था . माँ ने खुद hi मेरा हाथ अपने बूब्स पर रख दिया और सर पीछे घुमा कर मुझे किश करने लगी . कुछ देर इस आसान क बाद मैंने माँ को घोड़ी बना लिया और उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मरता उनकी घुड़सवारी करने लगा .
गौरी म : और तेज़ आअह्ह्ह्ह शाबाश और ज़ोर से कर उम्म्म्म ऐसे hi आआह्ह्ह्ह ककक इन्हे भी दबा ज़ोर से आअह्ह्ह्ह ककक मैं फिर से आने वाली हूँ कक्कक्स और कर न ज़ोर से कर आअह्ह्ह मैं आ रही हूँ आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह abhhhhhhhhhhhhh
माँ का एक बार फिर से पानी निकल गया और वो आगे को गिरने लगी तो मैंने उन्हें ऐसे hi बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी जांघों पर बैठ कर छूट में ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. मेरा भी अब होने hi वाला थो मैं पूरे जोश में लगा था. माँ ने बीएड की पुष्ट को हाथों से थाम लिया और मेरे तूफानी धक्के झेलने लगी
गौरी म : आआह्ह्ह आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह अब जल्दी निकल दे आअह्ह्ह्हह जलन होने लगी है बीटा आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह कक्कक्स आईईईई निकल दे जल्दी से उम्म्म्म म्मम्माआआ आआह्ह्ह्हह
अमित : मैं आए रहा हूँ माँ आह्हः ुड़फ्फ्फ आअह्ह्ह्ह
आखिर क ज़ोरदार धक्कों क साथ hi मैंने जड़ तक लैंड छूट में थोक दिया और पानी निकलने लगा. वीर्य की आखिरी बूँद निकलने तक मैंने माँ को ज़ोर से भींच लिया था और माँ की छूट भी जैसे लैंड को कास क निचोड़ रही थी . मैं माँ क ऊपर ऐसे hi गिर गया. कुछ देर माँ ऐसे hi मेरे नीचे दबी अपनी साँसे ठीक करती रही और फिर मुझे साइड में पलट कर पाऊँ फैला कर चलती हुई बाथरूम में चली गयी . उसके बाद पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी .
सुबह मुझे निधि दीदी ने जगाया .
निधि दीदी : उठ जाओ अब देखो टाइम कितना हो गया है . 5 बज चुके हैं. जल्दी से तैयार हो जाओ फिर मुझे मंदिर भी जाना है तुम्हारे साथ .
अमित : आप चलो दीदी मैं अभी आया .
मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया. माँ पता नहीं कब चली गयी थी . मैं तो रत को ऐसे hi सो गया था शुक्र है अब लोअर पहना हुआ था शायद माँ hi नींद में पहना गयी थी मुझे रात को. मैं जल्दी से नाहा कर कमरे में वापिस आया तो निधि दीदी सफ़ेद सूट में किसी सफ़ेद गुलाब सी खिली खुली मेरे सामने बैठी थी. सर पर सलीके से दुपट्टा लिए वो अपने आप में सुंदरता और सीरत की पूरक लग रही थी. मुझे इस तरह खुद को देखता प् कर उनके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी .
निधि दीदी : चलें ?
मैं जैसे किसी अनजाने जादू की पकड़ से बहार निकला और बड़बड़ा कर जल्दी जल्दी निकलने लगा.
अमित : ह ह ह हाँ दीदी चलो . वैसे आप आज बड़ी खूबसूरत लग रही हैं बिलकुल वाइट रोज की तरह
निधि दीदी : थैंक्स . तुम्हे ाचा लगा तो फिर ठीक है वर्ण ये सब तो नार्मल hi है. चल अब जल्दी से.
मैं दीदी क साथ नीचे आया और बाइक निकलने लगा तो दीदी ने मन कर दिया .
अमित : दीदी बाइक से चलते हैं न .
निधि दीदी : नहीं मुझे पैदल hi जाना है , माँ से बहुत सुना है क इस मंदिर में मनोकामना ज़रूर पूरी होती है. इस लिए मैं पैदल नंगे पाऊँ जाउंगी.
अमित : क्याआ??? दीदी आपके इतने कोमल पाऊँ छील जायेंगे रस्ते में कंकर पत्थर से.
निधि दीदी : कुछ पाने क लिए इतनी तपस्या तो करनी hi पड़ेगी न. चल अब वर्ण सूरज सर पर आ जायेगा.
इतने में माँ बाथरूम से नाहा कर निकली तो हमें बहार जाते हुए देख कर पूछने लगी तो दीदी ने बता दिया क मेरे साथ मंदिर जा रही हैं . मंदिर हैं में hi था ज्यादा दूर तो नहीं पर फिर भी 10-15 मिनट्स तो लगने hi वाले थे. मुझे तो दीदी क नंगे पाऊँ की फ़िक्र थी . खैर मैं दीदी क साथ चल दिया. दीदी ने जाते हुए ज्यादा बात नहीं की शायद वो मन में hi कोई मंतर वगैरह पढ़ रही थी और में उनके साथ चल रहा था. मंडी में अभी इक्का दुक्का लोग hi थे . ये मंदिर काफी प्राचीन था और लोगों में इस मंदिर क प्रति बड़ी आस्था थी. हमारी फॅमिली क भी सब लोग यहाँ आते रहते थे. दीदी घर से पूजा की थाली और फूल लायी थी. माता क मंदिर क सामने खड़े हो कर दीदी ऑंखें बंद किये पता नहीं मन में क्या बात करती रही.
निधि ( मन में ) हे माँ ,, अमित क खून से मेरी मांग भरी जाना ज़रूर तेरा hi फैसला था. न मैंने कभी ऐसा सोचा था न hi उसने. जो कुछ भी हुआ मैं उसे तेरा hi फैसला मानती हूँ. अगर वाकई में तुमने मेरे लिए अमित को चुना है तो मुझे फिर से एक बार इशारा दे माँ. और मुझे उसकी बना दे. मैं चाहती हूँ मैं सिर्फ उसी की बन कर रहूं. मैं जानती हूँ ये सब आसान नहीं पर तुम चाहो तो क्या नहीं हो सकता . मुझे सिर्फ उसी की बनाना माँ मैं उसे अपना पति मन चुकी हूँ. अब मेरी लाज तुम्हारे हाथ है मेरी डोर तुम्हारे हाथ में है.
निधि ने जैसे hi माथा टेकने क लिए सर झुकाया तो एक फूल माता की मूर्ती से गिर कर सीधा निधि क सर पर गिरा और जैसे hi उसने सर उठाया तो उसके माथे पर सिन्दूर लग चूका था . असल में वो सिन्दूर माँ क चरणों में किसी चढ़ाया हुआ था जो निधि क माथा टेकते hi उसके माथे पर लग गया. पर लगा भी ऐसे जैसे सुहागन लगाती है. निधि माथा टेकने क बाद जैसे hi अमित की तरह पलटी तो अमित की मज़ार उस सिन्दूर पर गयी .
अमित : ये क्या दीदी ?
निधि दीदी : क्या हुआ ?
अमित : आपके माथे पर तो इतना सारा सिन्दूर लग गया.
मेरी बात सुनते hi दीदी ने जल्दी से मंदिर में hi लगे कांच में अपना अक्स देखा तो उन्हें अपने माथे पर सिन्दूर नज़र आया . दीदी उस सिन्दूर को हाथ से चुकार देखने लगी और फिर मुस्कुरा उठी. वो फिर से माता की मूर्ति क आगे झुक गयी और फिर से माथा टेका.
निधि ( मन में ) मुझे मेरा जवाब मिल गया माँ . तुझे हमारा ये रिश्ता कबूल है. अब कैसे भी कर क मुझे अमित की बना दो माँ. अब जो करना है तुझे hi करना है.