Adultery Manhoos se mahan tak - Page 21 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 160



मोहित ने जल्दी जल्दी में फ़ोन काट दिया और मुझे हॉस्पिटल का बताया hi नहीं. मैंने सोचा आंटी से बात कर लेता हूँ. इस लिए आंटी को फ़ोन मिला दिया

अमित : hello आंटी , कहाँ हैं आप ? अंकल की तबियत कैसी है और वो कौन से हॉस्पिटल में हैं?

आंटी : अरे रुको रुको आराम से . मैं बिलकुल ठीक हूँ और तेरे अंकल भी ठीक हैं .

अमित : क्या मतलब ? मुझे अभी अभी मोहित का फ़ोन आया था क अंकल को हार्ट अटैक आया है और वो हॉस्पिटल में हैं. आप मुझे जल्दी हॉस्पिटल का बताइये मैं आ रहा हूँ .

आंटी : अरे रुको तो सही , पहले बात ध्यान से सुन लो. तेरे अंकल बिलकुल ठीक हैं और उन्हें कोई हार्ट अटैक नहीं आया है.

अमित : तो फिर मोहित ....

आंटी : उसने वही कहा जो उसे बताया गया पर सचाई वो नहीं है

अमित : मतलब ? मैं समझा नहीं.

आंटी : भूल गए ? तू hi ने कहा था न करिश्मा को बुलाने क लिए हमें तेरे अंकल क बीमार होने का नाटक करना पड़ेगा. अब छोटे मोठे बुखार या चोट से वो आने वाली तो थी नहीं इस लिए ये ड्रामा किया है. तेरे अंकल बिलकुल ठीक हैं. बस हॉस्पिटल में दाखिल हैं जब तक करिश्मा नहीं आ जाती. मोहित को हमने कुछ नहीं बताया वर्ण हमारा झूठ पकड़ा जाता . क्यों की करिश्मा उससे ज़रूर बात करती और मोहित की बातों से वो पता लगा लेती. वैसे आईडिया काम कर गया है. करिश्मा निकल चुकी है घर से.

अमित : कोई और बहाना नहीं मिला था आपको? मैं तो दर hi गया था. अभी गाओं से शहर आने लगा था मैं .

आंटी : अरे तुम चिंता न करो और यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है . मैं मोहित से बात कर लुंगी .

अमित : आप गाओं फंक्शन पर तो आएंगे न ?

आंटी : क्यों नहीं आएंगे ? करिश्मा आज शाम तक आ जाएगी. और हम उसे भी साथ लेकर आएंगे. तुम अपना ख्याल रखो और यहाँ की चिंता छोड़ फंक्शन की तयारी देखो.

अमित : ठीक है आंटी गाओं आओगे तो मुलाकात होगी bye.

आंटी : bye

मोहित की बात से तो मैं दर hi गया था . शुक्र है ये सब झूठ था. मोहित का भी बुरा हल होगा पर आंटी संभल hi लेंगी . करिश्मा दीदी को बुलाने क लिए आईडिया तो मैंने hi दिया था पर इतना खतरनाक बहाना मैं सोच भी नहीं सकता था. आंटी से बात करने क बाद मैं अपने काम में लग गया . दोपहर का खाना खाने क लिए मैं घर आया तो निधि दीदी दीपिका ममी क साथ बैठ कर मुन्ने क साथ खेल रही थी. जमीं भी कुछ देर क लिए दीपिका ममी क पास hi चला गया.

दीपिका ममी : मिल गया समय हमारे पास आने का ?

अमित : कैसी बातें करती हो ममी आप भी . आपके सामने hi तो हूँ. मुन्ने क नामकरण की तयारी में hi लग गया आते hi.

दीपिका ममी : अपने मुन्ने क लिए थोड़ा टाइम नहीं निकल सकते ? काम तो होते रहेंगे.

अमित : इसी क लिए तो कर रहा हूँ सब . कल को ये यद् रखे न रखे काम से काम मुझे तो यद् रहेगा.

दीपिका ममी : यद् कैसे नहीं रखेगा ? इसे रखना होगा. मैं बताउंगी इसे, देख लेना बिलकुल तुम्हारे जैसा बनाउंगी इसे.

निधि दीदी : सही कहा ममी आपने, अमित जैसा hi बनाना इसे. अगर इसके जैसा बन गया तो सब इसे प्यार करेंगे .

दीपिका ममी : इसके जैसा hi बनेगा , आखिर इसी का तो है .

दीपिका ममी की इस बात पर मुझे झटका लगा. निधि दीदी क सामने hi उन्होंने सीधा सीधा ये बात कह दी.

निधि दीदी : इसी का मतलब ?

दीपिका ममी : अरे इसी का छोटा भाई है न तो इसके जैसा hi बनेगा .

निधि दीदी : वैसे ममी जी कोई नाम सोचा है अपने इसका ?

दीपिका ममी : नहीं अभी तक तो नहीं सोचा . तुम hi कोई बता दो

निधि दीदी : मेरा बस चले तो इसका नाम भी अमित hi रख दूँ . पर अगर अमित क नाम क पहले अक्षर से hi रख दें तो कैसा रहेगा ?

दीपिका ममी : बहुत ाचा रहेगा . वैसे मुन्ने क पापा अगर उसके लिए खुद कोई नाम रखे तो और भी ाचा होगा.

दीपिका ममी ने ये बात मेरी तरफ देखते हुए कही थी.

‘चलो अब तुम सब खाना खा लो. बाकि बाएं बाद में कर लेना ‘ माँ ने अंदर एते हुए कहा तो हम भी उठ खड़े हुए और फिर सब ने मिल कर खाना खाया. माँ बहुत खुश थी और अपने हाथों से खाना मुझे परोस रही थी. मेरे एक तरफ निधि दीदी और एक तरफ दीपिका ममी बैठी थी. बाबा अजय मां और कमलेश मां अपने अपने ज़िम्मे क काम कर रहे थे.

कमलेश मां तो फूले नहीं समां रहे थे और पूरे गाओं में ख़ुशी से नाचते फिर रहे थे. पूरे गाओं को उन्होंने दावत पर बुला लिया था. घर में नामकरण और गाओं वालों की दावत क इलावा कमलेश मां ने अपने दोस्तों क लिए अलग से दारू पार्टी का इंतज़ाम भी कर रखा था.

खाना खाने क बाद मैं कुछ देर रेस्ट करने क लिए अपने कमरे में गया तो निधि दीदी भी वहीँ आ गयी. मैं ऑंखें बंद कर क लेता हुआ था. क दीदी मेरे पास बैठ कर सर को सहलाने लगी तो मैंने आँखें खोल कर उनको देखा. दीदी बड़े स्नेह से मुझे देख रही थी.

निधि दीदी : मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ?

अमित : ऐसा भला हो सकता है ? मुझे तो ाचा लगता है जब आप मेरे पास होती हो. आप hi तो बचपन से मुझे सब से ज्यादा प्यार करती आयी हो.

निधि दीदी : मुझे भी तुम्हारे साथ रहना ाचा लगता है. मैंने हमेशा कारन से ज्यादा तुम्हे प्यार किया है.

अमित : मैं जनता हूँ दीदी , इसी लिए तो आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हो.

निधि दीदी : मेरा बस चले तो मैं तुम्हे कभी अपने से दूर न जाने दूँ. बचपन में जब भी तुमसे मिलने आती थी न तो मेरा घर जाने को दिल hi नहीं करता था. और जब माँ वापिस ले जाती तो कितने दिन तक बस तुम्हे hi यद् करती रहती थी. और फिर जैसे जैसे बड़े होते गए पता hi नहीं चला क कब ज़िन्दगी में इतने बिजी हो गए क तुमसे दूर हो गयी. और अब देख भगवन ने फिर से हमें मिला दिया है. अब मैं तुम्हे दूर नहीं जाने दूँगी .

अमित : पर दीदी जब आपकी शादी हो जाएगी तब तो जाना hi होगा न.

निधि दीदी : मुझे नहीं करनी शादी , मैं बस तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ.

अमित : ाचा ये तो बताइये क आपको कैसा लड़का पसंद है अपने लिए?

निधि दीदी : तुमने सुना नहीं मैंने शादी hi नहीं करनी

अमित : फिर भी बताइये तो सही

निधि दीदी : क्यों जानना चाहता हो तुम?

अमित : इस लिए क मैं आपके लिए वैसा लड़का ढूंढ कर लाऊंगा बिलकुल आपकी पसंद का.

निधि दीदी : क्या सच में तू ऐसा कर सकता है ? जैसा मैं लड़का कहूं वैसा ढूंढ सकता है ?

अमित : बिलकुल, आप बताइये तो सही

निधि दीदी : मुझे तुम .... मतलब तुम जैसा लड़का चाहिए

अमित : मेरे जैसा ??? आपने मुझ में क्या देख लिया ? आप क लिए तो कोई राजकुमार जैसा लड़का ढूंढना पड़ेगा . जो बहुत सुन्दर हो स्मार्ट हो पैसे वाला हो और आपको प्यार भी बहुत करे.

निधि दीदी: तो क्या तुम प्यार नहीं करते मुझे ?

निधि दीदी कुछ देर क लिए खामोश हुई और मेरी आँखों में देखने लगी . दीदी की नज़रें कुछ और कह रही थी मुझे उनको देख कर पहली बार उनका देखना कुछ अलग लगा

अमित : एक भाई क प्यार में और पति क प्यार में फरक होता है न दीदी. मैं आपको वो प्यार थोड़ा कर सकता हूँ वो तो आपके और पति देव hi करेंगे. आप लड़का बताइये कैसा चाहिए

निधि दीदी : संजीदगी से ) बताया तो है क तेरे जैसा. बिलकुल तेरे जैसा hi चाहिए अगर तू ढूंढ सके तो. जो तेरी तरह hi मेरी इज़्ज़त करे मेरे लिए किसी से भी लड़ सके मेरी हिफाज़त कर सके . जो दिल से मुझे चाहता हो तेरी तरह स्मार्ट हो . राज कुमार नहीं बस तुम जैसा hi चाहिए . यही मासूम चेहरा यही ऑंखें बस और कुछ नहीं.

अमित : ये तो मुश्किल हो जायेगा अब मेरे जैसे नेचर वाला तो शायद मिल भी जाये पर ये चेहरा और ऑंखें तो मिलने से रहे क्यूंकि मुझे खुद ये अपने माता पिता से मिल हैं.

निधि दीदी : इसी लिए कहा था क मैं शादी नहीं करुँगी . क्यूंकि मैं जानती हूँ हम दोनों शादी कर नहीं सकते और दूसरा तुम्हारे जैसा कोई और दुनिया में होगा नहीं .

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं आज ?

निधि दीदी : ाचा छोड़ ये सब. आज तुमने क्रीम नहीं लगायी न . चल दिखा ज़रा क्या हालत है अब

अमित : अभी रहने दो दीदी कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी.

‘ कैसी मुश्किल हो जाएगी ? ‘ माँ ने आखिरी बात सुन ली थी और वो कमरे में आती हुई सीधा यही बात पूछने लगी .

अमित : क कक कुछ नहीं माँ . दीदी यहाँ सोने का कह रही थी मैंने कहा मुश्किल हो जाएगी ऐसे.

गौरी म : इतने कमरे हैं है घर में तो ज़रूरत क्या है परेशां होने की ? बगल में टीम कमरे पड़े हैं जो चाहे ले लो.

निधि दीदी : थी है ममी जी . मैं साथ वाले कमरे में hi रुक जाती हूँ.

गौरी म : तू क्या कर रहा है ?

अमित : कुछ नहीं मैं तो बस आराम करने आया था यहाँ.

गौरी म : इतने दिनों बाद घर अत है और दो पल पास नहीं बैठने को मिलते. चल तेरी सर की मालिश कर दूँ नींद अछि आएगी.

निधि दीदी : ममी जी अगर आप कहें तो मैं कर दूँ इसकी मालिश ?

गौरी म : ये तो बहाना है बस वर्ण मौका कहाँ मिलता है अपने बेटे क पास बैठने का भी मुझे. जब से शहर गया है बस हफ्ते 1 दिन क लिए अत है उसने भी इसे गाओं वाले दोस्तों से मिलना होता है और इधर उधर में वक़्त निकल जाता है. मुझे तो ये वक़्त देता hi नहीं है .

अमित : ऐसा क्यों कहती हो माँ? मैं तो हमेशा hi आपके लिए हाज़िर हूँ आप बस हुकम

किया कीजिये.

गौरी म : पता है कितना हाज़िर है , बातें करवा लो बस. अभी फिर से तू घर से निकल जायेगा और कल परसों तो टाइम मिलेगा hi नहीं बात करने का भी .

माँ ने मुझे बिठा दिया और मेरे पीछे बैठ कर मेरे सर की मालिश करने लगी . निधि दीदी साइड में बैठी बस मुझे hi देख रही थी. माँ ने मुझे T-shirt उतरने को कहा भी पर मैंने मन कर दिया . कुछ देर तक माँ मेरी मालिश करती रही और सच में मेरी ऑंखें नींद से अपने आप बंद होने लगी. कब मैं नींद की वादियों में चला गया मुझे पता hi न चला.

शाम को नींद खुली तो कमरे में अकेला सो रहा था. हाथ मुँह धो कर निचे आया तो निधि दीदी फिर से दीपिका ममी और मुन्ने क साथ hi नज़र आयी .

गौरी म : उठ गया तू , तेरे बाबा कह रहे थे क तुझे उनके साथ जाना है. गाओं में कुछ लोगों को निमंत्रण देने क लिए वो तुझे साथ ले जाना चाहते हैं.

अमित : इसमें मेरी क्या ज़रूरत पद गयी माँ ? बाबा को तो सब जानते hi हैं.

गौरी म : ये ले पहले दूध पि ले . वो कह रहे थे क अखाड़े क उस्ताद जी डरा और सरपंच साहब क घर वो तुझे साथ लेकर hi जायेंगे. तू उनसे जुड़ा जो है. सब तुझे प्यार करते हैं.

वैसे तूने अपने दोस्तों को भी बुलाया हैं न कॉलेज से?

अमित : हाँ माँ सबको बुलाया है. वो लोग उसी दिन आएंगे .

गौरी म : तेरी मौसियां कल आ रही हैं फ़ोन आया था सबका . अपनी बहनो क लिए साथ वाले कमरे तैयार करवा देना निधि क साथ मिल कर.

निधि दीदी : आप चिंता मत करो ममी जी मैं कर लुंगी. वहां कौन सा कोई ज्यादा काम है.

अमित : मैं कर लंग दीदी. आप यहाँ मेहमान हो तो आप से थोड़ा काम करवाऊंगा

निधि दीदी : बड़ा आया मेहमान वाला. ये मेरा अपना घर है. और मैं कोई मेहमान नहीं हूँ समझे जहाँ तुम वहां मैं.

गौरी म : बिलकुल मेरी बची ये तेरा hi घर है.

‘ चल बीटा जल्दी से दूध ख़तम कर हम ज़रा तेरे उस्ताद जी को निमंत्रण दे आएं ‘ बाबा घर क अंदर आते hi मुझे कहने लगे. दूध पिने क बाद मैं बाबा क साथ निकल गया और 2 घंटे ऐसे hi निकल गए . रत क खाने से पहले हम वापिस घर आ गए और साथ में मिल कर खाना खाया. खाना खाने क बाद कुछ देर अजय मां और कामिनी ममी क साथ बैठ कर बातें की. कमलेश मां तो अपने दोस्तों को पार्टी करवा रहे थे बहार . निधि दीदी मुन्ने क साथ थी.

अजय मां : तुमने अपने दोस्तों को बुलाया क नहीं ?

अमित : बुलाया है मां जी सबको बुलाया है.

अजय मां : अचे से खातिरदारी करना. इस बार सब अचे से देख ले और सिख ले. कामिनी क माँ बनने पर मैं तो कुछ नहीं करुणा , सब तुझे hi करना पड़ेगा.

कामिनी ममी : ये hi करेगा , इसी का तो फ़र्ज़ है ये सब करने का. आप चिंता मत करो

मैं ममी तरफ देखने लगा.

कामिनी ममी : ऐसे क्या देख रहे हो ? सब काम तेरे मां hi करेंगे क्या ? तेरा भी तो फ़र्ज़ है.

अमित : हह हाँ हाँ मैं hi करूँगा , मां जी आपको चिंता करने को कोई ज़रूरत नहीं है मेरे होते हुए

अजय मां : मैं चिंता करने लगा ? मुझे पता है मेरा शेर बीटा है अपने मां का नाम ऊँचा करने क लिए . चल अब तू जा कर आराम करले. कल सब आ जायेंगे तो तेरी hi जान खाएंगे .

अमित : ठीक है मां जी ाचा ममी जी.

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया जहाँ निधि दीदी पहले hi बैठी थी .

अमित : दीदी आप ?

निधि दीदी : चल दरवाज़ा बंद कर और अपनी T-shirt उतर. क्रीम लगा देती हूँ तुझे

अमित : दीदी आप रहने दो न . कोई देखेगा तो क्या कहेगा. वैसे भी क्रीम तो आपके घर hi रह गयी.

निधि दीदी : मुझे पता है तू लापरवाह है. इसी लिए क्रीम मैं ले आयी थी अब ज्यादा नकारे न कर और T-shirt उतर अपनी.

मैंने ज्यादा बात नहीं बड़ाई और T-shirt उतर दी.

निधि दीदी : हे भगवन , ये तो सब काळा निशान बन गए हैं बड़े बड़े . तुझे दर्द भी हो रहा होगा न. कितनी बेरहमी से मारा है जल्लादों ने.

अमित : दर्द तो है दीदी पर डॉ रीना ने पैन किलर टेबलेट दी थी तो वो खा रह हूँ.

निधि दीदी : काश तेरा हर दर्द हर ज़ख़्म मुझे मिल जाये .

अमित : बिलकुल नहीं . अपना दर्द तो मैं सेह सकता हूँ दीदी पर आपको दर्द में नहीं देख सकता .

निधि दीदी: तो क्या मैं देख सकती हूँ तुझे इस दर्द में ?

अमित : आप एक लड़की हैं दीदी फूलों सी नाज़ुक आप बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी जबकि मैं तो पहले hi अखाड़े की मिटटी से तैयार हुआ हूँ तो मुझे ज्यादा फरक नहीं पड़ता . आप चिंता मत करो दर्द से तो पुराण नाता है मेरा.

निधि दीदी : क्यों करता है ऐसी बातें ? मुझे पता है तुम अंदर hi अंदर घुट ते रहे हो इतने साल बाद अब जब हम साथ हैं तो काम से काम अब तो यद् न करो वो सब.

अमित : मैं कहाँ यद् करता हूँ दीदी , ये तो मेरा अक्स hi है और उसे भला क्या यद् करूँ जिसे कभी भुला hi नहीं .

निधि दीदी ने बातों बातों में क्रीम लगा दी थी और मेरी इस आखिरी बात पर उनके हाथ रुक गए और वो खामोश हो गयी. मैंने पलट कर देखा तो

उनकी ऑंखें नाम हो चुकी थी.

अमित : क्या हुआ दीदी आपकी आँखों में आंसू? ी ऍम सॉरी अगर मेरी कोई बात आपको बुरी लगी तो.

निधि दीदी : कितना कुछ अपने अंदर दबा क रखा हुआ है तूने ? अपने सरे दुःख मुझे देदो और मेरे हिस्से की खुशियां तुम ले लो .

अमित : भगवन करे आपको मेरे हिस्से की खुशियां भी मिल जाये. मैं आपको हमेशा खुश देखना चाहता हूँ और आप मुझे अपनी खुशियां देने की बात कर रही हैं. चलिए अब मुस्कुराइए. अगर माँ ने देख लिया तो कहेंगी मैंने आपको रुला दिया.

मैंने दीदी क आंसू अपनी T-shirt से hi साफ़ किये और फिर पेहेन ली. तभी माँ कमरे में आ गयी दूध का गिलास हाथ में लिए.

गौरी म : अरे निधि बीटा तुम यहीं हो अभी तक ?

निधि दीदी : बस ममी जी अपने कमरे में जा hi रही थी. कल सुबह मुझे मंदिर जाना है , ले जाओगे न मंदिर?

गौरी म : बिलकुल ले जायेगा तुम चिंता न करो और आराम से सो जाओ . तुम्हारे लिए भी दूध लायी हूँ मैं.

निधि दीदी : ठीक है ममी जी पर मैं दूध नहीं पीती .

अमित : कैसे नहीं पीती ? आपको पीना पड़ेगा

इतना कह कर मैंने माँ क हाथ से दूध का गिलास ले कर निधि दीदी क होंठों से लगा दिया तो वो मेरी तरफ देखते हुए एक hi बार में सारा पि गयी

गौरी म : अब करो बात , मुझे तो मन कर रही थी और इसके हाथ से एक hi बार में गिलास खली

निधि दीदी : इसे तो किसी बात से मन कर hi नहीं सकती ममी जी. ाचा अब मैं अपने कमरे में चलती हूँ सुबह जल्दी उठ जाना तुम. गुड नाईट

इतना कह कर दीदी अपने कमरे में चली गयी और माँ भी खली गिलास ले कर नीचे चले गयी . मैं भी आराम से लेट गया. करीब एक घंटे बाद जब पूरे घर में सब सो चुके थे तो कमरे का दरवाज़ा खुला और एक मधुर महक हवा में बिखर गयी. मैं अभी सोया नहीं था . जैसे hi मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो माँ दरवाज़ा बंद कर रही थी. बालों से कुछ बूंदे गिर रही थी मतलब माँ नाहा कर आयी थी इस वक़्त . मैं समझ गया क वो आज खुल कर प्यार करने क मूड में आयी हैं. जैसे hi माँ पलटी तो हमारी नज़रें मिली. माँ ने मुझे देखा और कमरे की बड़ी लाइट बंद कर क छोटी लाइट जला दी. धीरे धीरे कदम बताती वो मेरे पास आ रही थी और उनकी पायल की आवाज़ रत की इस ख़ामोशी में कमरे क साथ साथ मेरे दिल में भी शोर मचा रही थी. बीएड क पास आ कर वो मेरी तरफ पीठ कर क बैठ गयी जैसे कह रही हो क शुरुआत तुम hi करो.

मैं जल्दी से उठ कर बैठ गया और उनके पास आ कर उनके बालों से आ रही उस सुगंध को अपनी सांसो में भरने लगा. मैंने अपने होंठ माँ क गीले बदन पर जैसे hi रखे एक सिसकी उनके मुँह से निकल गयी . माँ क बालों क साथ साथ उनके बदन से भी मादक सुगंध आ रही थी . मैंने माँ क बालों को एक तरफ कर क उनकी गर्दन और ब्लाउज में से बहार निकली हुई पीठ पर जब किश किया तो माँ क शरीर में कम्पन सी महसूस हुई . नशे में खोई उनके मुँह से दबी दबी एक और ऐसी की निकली.

गौरी म : कक्ककक्कक्स उम्मम्मम आआह्ह

मैंने माँ की बगलों से हाथ आगे निकल कर उनके नरम चूचे अपने हाथों में थम लिए. माँ फिर से सिसकी . जैसे hi मैंने उनके बड़े बड़े कोमल स्तन दबाये तो उन्होंने अपना सर पीछे मेरे कंधे पर गिरा दिया . मैं उनकी गर्दन पर अपने होंठों से अपनी छाप लबाता हुआ उनके शैतान भींचने लगा.

अमित : माँ आप क बदन से ये खुशबु कैसी आ रही है? ये खुशबु सीधा मेरी सांसों क रस्ते मेरे दिलो दिमाग में उतर रही है.

गौरी म : तेरे लिए hi तो तैयार हो कर आयी हूँ आअह्ह्ह्हह कक्कक्स काम से काम इन पलों में तो माँ मत कहा कर

अमित : उमंमाहहह क्या करूँ माँ , आपके लिए मुँह से माँ hi निकलता है. आपका नाम लेने से मन में बोझ सा लगता है . पर जब आपको माँ कहता हूँ तो ाचा लगता है

गौरी म : कक्कक्स उम्म्म्म आअह्ह्ह अपनी माँ से भी कोई ऐसे प्यार करता है कक्कक्कक्स आह्ह्ह्ह धीरे दबा न आअह्ह्ह

अमित : आप ने hi तो कहा था न माँ क ऐसे प्यार करूँ आप क साथ. मैं बस आपको खुश देखना चाहता हूँ . अगर आपको ाचा नहीं लगता तो रहने देता हूँ

गौरी म : नहीं नहीं मैंने कब कहा क ाचा नहीं लगता . पर अजीब सा लगता है जब तू माँ कह कर मेरी टंगे उठता है तो ... भला ऐसा कहाँ होता है? अपनी माँ को hi माँ बना दिया तुमने . उईईईईई आराम से कर न

अमित : मैंने कभी नहीं सोचा था माँ क ऐसा कुछ होगा . सच कहूं तो जब आपने मुझसे मुँह फेर लिया था तो मेरा दिल किया था क खुद को ख़तम कर लूँ या घर से दूर चला जॉन कहीं कभी न वापिस आने क लिए .

गौरी म : अगर तू ऐसा करता तो मैं भी तेरे साथ hi मर जाती . पता है मैं कितना रोटी थी अंदर से ? पर फिर मुझे समझ आया क उसमे तेरा कसूर नहीं था. वो सब भगवन की hi मर्ज़ी थी. मैंने माँ बनना चाहा और उसने तुम्हे जरिया बना दिया मुझे माँ बनाने क लिए. आआह्ह्ह आराम से ... तुझसे दूर रह कर मैं अंदर से टूट गयी थी और जब साडी बात समझ आयी तो तुझे दिल से अपना सब कुछ मन लिया. मैंने जो तुम्हारी सेवा की थी बचपन में उसी का फल मिला है मुझे. उम्मम्मम आआअह्हह्ह्ह्ह

मैंने माँ को बह पर लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ कर उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया . माँ भी मेरे होंठों को चूमने लगी और मेरी गर्दन और पीठ पर हाथ चलने लगी . माँ क बाल बीएड पर बिखर गए थे और उनका दूध सा सफ़ेद रंग लिए चेहरा काली रत पर चाँद सा लग रहा था . मैंने किश करते हुए अपनी जीभ उनके मुँह में डाली तो वो उसे चूसने लगी . मैंने उनके दोनों स्तन हाथों में पकडे उनका मर्दन करना जारी रखा. माँ किश करते हुए गरम होने लगी थी और अपने पाऊँ मेरी टांगों पर रगड़ रही थी . होंठों का रास चूसने क बाद मैंने माँ क कण की लॉ को होंठों में लेकर डेंटन से दबाने लगा तो वो सिसक उठी.

गौरी म : कक्कक्क्स आआह्ह्ह्हह ये सब किसने सिखाया तुझे आअह्ह्ह ईशःठ

मैंने अपना काम जारी रखते हुए उनकी गर्दन पर चूमने क बाद दांतों से हल्का सा जाता तो माँ की पकड़ एक डैम से मेरी पीठ पर टाइट हो गयी जिससे से मुझे दर्द भी हुआ पर मैं आगे बढ़ता हुआ माँ क सीने से सदी का पलु सौदे हटा कर उनके ब्लाउज की हुक्स खोलने लगा. ब्लाउज क नीचे माँ ने ब्रा नहीं पहनी थी . ब्लाउज खुलते hi उनके बड़े बड़े रास भरे आम मेरी आँखों क सामने झूल गए. ब्राउन कलर क निप्पल अकड़ चुके थे. मैंने देर न करते हुए एक निप्पल को अंगूठे और उंगली में दबा दिया और दूसरे को मुँह में भर लिया और बच्चों की तरह पीने लगा.

गौरी म : आअह्ह्ह्ह कक्कक्स बचपन में तुझे दूध नहीं पीला पायी थी न पर अब तू इनमे दूध भर क जितना चाहे पि लेना . दोनों बाप बेटों को एक साथ दूध पिलाऊंगी आअह्ह्ह्ह ककक काट मत्तट ायःहज्ज मायआ उफ्फ्फ्फ़

अमित : ज़रूर पियूँगा माँ पर पहले आप अपने बचे को पिलाना फिर मैं पियूँगा

गौरी म : तू भी तो मेरा बचा है न और पहला हक़ तेरा hi होगा . अभी अगर इनमे दूध होता तो तुझे जी भर क पिलाती कक्कक्क्स भर दे इन्हे अपने प्यार से उम्म्म्म

मैंने माँ क दोनों दूध बरी बरी से पिए. माँ क निप्पल अकड़ कर सख्त हो गए थे. बूब्स चूसने क बाद मैं उनके कोमल नरम पेट पर अपनी जीभ फिरता हुआ नाभि तक पहुंचा. माँ मोती नहीं थी पर उनका पेट मांसल था . और वैसे भी अब पेट भरी होने लगा था. पेट को चूमने क बाद मैंने कमर पर बंधी सदी तक पहुंचा और फिर ु की साडी की गाँठ खोल कर सदी खींच कर अलग कर दी. पेटीकोट का नाडा खोल कर मैंने उसे भी खींचना चाहा तो माँ ने कमर उठा कर मेरा साथ देते हुए उसे भी निकल जाने दिया . ब्रा की तरह पेंटी भी जिस्म से गायब थी. ब्लाउज को माँ में खुद से hi अलग कर क रख दिया. अब माँ का दूध सा गदराया बदन मेरे सामने अलफ नंगी हालत में था . मैं माँ को पहले भी नंगी देख चूका था पर पता नहीं क्या कशिश थी माँ में क जब भी उन्हें देखता नज़रें जैसे जैम स जाती थी . माँ ने मुझे इस तरह खुद को घूरते हुए पाया तो एक हाथ अपने स्तनों और दूसरा छूट पर रख लिया.

गौरी म : ऐसा तो न देखो , मुझे शर्म आ रही है.

अमित : माँ आप बहुत खूबसूरत हो , जितना भी देखूं उतना ज्यादा दिल करता है आपको देखने का .

माँ ने खुद को छुपाते हुए टाँगें घुटनो से मोड़ कर पेट की तरफ करते हुए करवट ले ली तो उनके बड़े बड़े चूतड़ मेरे सामने आ गए जो मेरी कमज़ोरी hi बन चुके थे. मैंने बिना देर किये उनके चूतड़ थम लिए और एक पर दांत गाढ़ा दिए .

गौरी म : आअह्ह्ह्हह कक्कक्स उफ्फ्फ्फ़ क्या कर रहा है आआह्ह्ह्ह दर्द होता है कक्कक्स . तुझे कुछ ज्यादा hi पसंद है क्या ये ?

अमित : बहुत !!! दिल तो चाहता है यहाँ भी हर बार एक राउंड ज़रूर लगाया करूँ. आपके ये कितने बड़े और सख्त हैं.

गौरी म : पिछली बार जान निकल दी थी तूने कक्कक्स मत कर न आअह्ह्ह्हह रहने दे न वहां . पिछली बार तीन दिन तक ठीक से चल नहीं पायी थी . सारा भूगोल बिगड़ देगा तू वहां का. कक्कक्क्स आआअह्हह्ह्ह्ह

मैंने माँ की गांड क सुराख़ को उंगली से कुरेदते हुए आधी उंगली थूक से गीली कर क अंदर घुसा दी. माँ ने जल्दी से मेरा हाथ दूर हटाया और सीधी हो गयी .

गौरी म : आगे से कर जितना जी चाहे पीछे से रहने दे. वहां करेगा तो कल परसों क फंक्शन में ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी .

अमित : इसका मतलब अगली बार आप पीछे से करने देंगी ?

गौरी म : तुझे किसी बात से इंकार कर सकती हूँ भला ?

मैंने माँ की जांघों को फैला कर उनकी छूट पर नज़र मरी तो दिल खुश हो गया. माँ की छूट क आसपास का मैदान एक डैम साफा चक था.

अमित : ये आज hi साफ़ किये हैं आपने ?

गौरी म : अभी किये हैं , मुझे पता है तुझे वहां बाल पसंद नहीं . तुझे ाचा लगा ?

अमित : अभी बताता हूँ

इतना कह कर मैंने माँ की टंगे उनके पेट की तरफ दबा कर फैलते हुए उनकी छूट पर अपने होंठ रख दिए और उनकी छूट से बहार लटक रहे मांस की चोंच को होंठों में जकड लिया. माँ क मुँह से सिसकी निकल गयी . इतनी देर की काम क्रीड़ा से छूट में कुछ नमी आ चुकी थी. मैंने अपनी जीभ उस अमृत कुंड में घुसा कर अमृत की वो बूंदे चाट ली. माँ की सिसकियाँ बढ़ने लगी तो उन्होंने अपना ब्लाउज मुँह में ठूंस लिया. माँ क काम रास की वो बूंदे मुझे इतनी अछि लगी क मैं लग गया उस कुंड से सारा अमृत निकलने. मैं अपनी जीभ को और अंदर तक घुसा कर अंदर बहार करते हुए उनके छूट क डेन को भी कुरेदने लगा तो माँ अपनी कमर हिलने लगी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी. ज्यादा देर माँ खुद को रोक न पायी और झटके लेते हुए मेरे मुँह में अपना काम रास बहाने लगी . माँ तो मदहोशी क आलम में ढीली पद गयी और मैंने आखिरी बूँद तक चाट ली उनके कामर्स की . उनकी छोट को साफ़ करने क बाद मैं सीधा हुआ और उनकी जांघों को चाटने लगा . माँ का बदन इतना गदराया हुआ था क देखने भर से अचे ाचों का काम तमाम हो जाये . उनकी मांसल जांघों को चूमने क बाद मैंने उनके पाऊँ को चूमा . उनके पाऊँ की पायल उनकी पाऊँ की खूबसूरती को चार चाँद लगा देती थी.

अमित : माँ आपके ये पाऊँ कितने सुन्दर हैं और ये पायल तो जैसे सीधी दिल पर दस्तक देती है.

गौरी म : तुझे पसंद है मेरा पायल पहनना?

अमित : बहुत ज्यादा

गौरी म : शरमाते हुए ) तो रुक क्यों गया , उठा ले इन्हे और बजा ले पायल की छम छम

मैंने जल्दी से अपना लोअर उतरा और अपने लैंड को उनकी छूट पर लगा कर छूट पर रगड़ने लगा . छूट में फिर से नमी आने लगी तो मैंने उनकी टंगे घुटनो से पकड़ कर उनके पेट की तरफ दबाते हुए लैंड को छूट पर सेट कर क हल्का धक्का दिया जिससे लैंड छूट को फैलता हुआ 3 इंच अंदर चला गया

गौरी म : आह्ह्ह्ह कक्कक्क्स सच में बहुत बड़ा और सख्त है ये आअह्हह्ह्ह्ह दर्द भी देता है और मज़ा भी . अब रुक मत करदे पूरा अंदर

मैंने माँ क ऊपर झुक कर उनके होंठ अपने होंठों में लिए और खैक्स स ज़ोरदार धक्का दे कर पूरा लैंड जड़ तक छूट में घुसा दिया . माँ दर्द से तड़प उठी और उनकी चीख मेरे मुँह में hi डाब कर रह गयी . मेरी पीठ पर उन्होंने अपने नाख़ून गाढ़ा दिए . वो तो ाचा था मैंने T-shirt नहीं उतरी वर्ण ज़ख़्म छील जाते. जड़ तक लैंड घुसाने क बाद मैंने आहिस्ता आहिस्ता लैंड को 3-4 इंच अंदर बहार करना शुरू किया तो माँ की पकड़ ढीली होने लगी. जैसे hi वो मुझे कुछ नार्मल लगी तो मैंने उनके होंठ छोड़ दिए

गौरी म : आआह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स अभी भी दर्द देता है ये पता नहीं कक्कक्स कब ये आराम से जाने लगेगा आआह्ह्ह्ह अब रुकना मत आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म

मैं अब सीधा हो कर घुटनो पर बैठा माँ की टंगे उनके कंधो की तरफ दबाये धक्के मरने लगा. माँ की कमर बीएड से ऊपर उठी हुई थी जिससे उनका पेट इकठ्ठा हुआ पड़ा था. मैंने उनकी कमर क नीचे तकिया रख कर उनके लिए इसे आराम दायक कर दिया. कुछ hi धक्कों में लैंड आराम से छूट में जाने लगा तो कमरे में माँ की सिसकियों क साथ फच फच की आवाज़ आने लगी . माँ अब खुद hi अपने बूब्स मसलती सर इधर उधर पटक रही थी . माँ ने मेरी आँखों में नशीली ऐडा से देखते हुए अपने पाऊँ मेरी छाती पर रख दिए और धीरे धीरे उन्हें मेरे मुँह तक ले आयी . माँ का ये कामुक अंदाज़ मुझे और भी पागल बनाने लगा . मैंने उनकी जांघें पकड़ कर अपनी कमर तेज़ तेज़ हिलनी शुरू कर दी

गौरी म : आआह्ह्ह्ह ककक ऐसे hi करो आह्ह्ह्ह और तेज़ आअह्ह्ह्ह और तेज़ करो तभी पायल की आवाज़ आएगी न ाःह्ह्ब तुम्हे पसंद है न ज़ोर से बजाओ ककक ुकम्म्म आआह्ह्ह

अमित : बहुत पसंद है माँ आप की हर ऐडा मुझे पागल बना रही है . आप सच में काम देवी हो ककक आह्ह्ह्ह

माँ का पूरा शरीर इस धक्काम पेल में हिल रहा था और वो अपने पाऊँ मेरी छाती पर मर कर पायल की आवाज़ के रही थी . ये आवाज़ मुझे आउट ऑफ़ कण्ट्रोल कर रही थी. माँ खुद को और रोक नहीं पायी और उनका पानी निकल गया . मुझे अपने लैंड पर उनके गरम काम रास का एहसास हुआ तो मैंने उन्हें रुक कर अचे से झड़ने दिया. जैसे hi उनका कम्पना रुका तो मैंने उन्हें करवट क बल कर दिया और उनके पीछे लेट कर उनकी ऊपर वाली तंग घुटने से पकड़ कर उठा दी और पीछे से लैंड डेल अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी . 2 मिनट्स में hi माँ फिर से गरम होने लगी . मैं उनके कंधे उनकी पीठ को चूमता कमर हिलता जा रहा था . माँ ने खुद hi मेरा हाथ अपने बूब्स पर रख दिया और सर पीछे घुमा कर मुझे किश करने लगी . कुछ देर इस आसान क बाद मैंने माँ को घोड़ी बना लिया और उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मरता उनकी घुड़सवारी करने लगा .

गौरी म : और तेज़ आअह्ह्ह्ह शाबाश और ज़ोर से कर उम्म्म्म ऐसे hi आआह्ह्ह्ह ककक इन्हे भी दबा ज़ोर से आअह्ह्ह्ह ककक मैं फिर से आने वाली हूँ कक्कक्स और कर न ज़ोर से कर आअह्ह्ह मैं आ रही हूँ आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह abhhhhhhhhhhhhh

माँ का एक बार फिर से पानी निकल गया और वो आगे को गिरने लगी तो मैंने उन्हें ऐसे hi बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी जांघों पर बैठ कर छूट में ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. मेरा भी अब होने hi वाला थो मैं पूरे जोश में लगा था. माँ ने बीएड की पुष्ट को हाथों से थाम लिया और मेरे तूफानी धक्के झेलने लगी

गौरी म : आआह्ह्ह आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह अब जल्दी निकल दे आअह्ह्ह्हह जलन होने लगी है बीटा आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह कक्कक्स आईईईई निकल दे जल्दी से उम्म्म्म म्मम्माआआ आआह्ह्ह्हह

अमित : मैं आए रहा हूँ माँ आह्हः ुड़फ्फ्फ आअह्ह्ह्ह

आखिर क ज़ोरदार धक्कों क साथ hi मैंने जड़ तक लैंड छूट में थोक दिया और पानी निकलने लगा. वीर्य की आखिरी बूँद निकलने तक मैंने माँ को ज़ोर से भींच लिया था और माँ की छूट भी जैसे लैंड को कास क निचोड़ रही थी . मैं माँ क ऊपर ऐसे hi गिर गया. कुछ देर माँ ऐसे hi मेरे नीचे दबी अपनी साँसे ठीक करती रही और फिर मुझे साइड में पलट कर पाऊँ फैला कर चलती हुई बाथरूम में चली गयी . उसके बाद पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी .

सुबह मुझे निधि दीदी ने जगाया .

निधि दीदी : उठ जाओ अब देखो टाइम कितना हो गया है . 5 बज चुके हैं. जल्दी से तैयार हो जाओ फिर मुझे मंदिर भी जाना है तुम्हारे साथ .

अमित : आप चलो दीदी मैं अभी आया .

मैं जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया. माँ पता नहीं कब चली गयी थी . मैं तो रत को ऐसे hi सो गया था शुक्र है अब लोअर पहना हुआ था शायद माँ hi नींद में पहना गयी थी मुझे रात को. मैं जल्दी से नाहा कर कमरे में वापिस आया तो निधि दीदी सफ़ेद सूट में किसी सफ़ेद गुलाब सी खिली खुली मेरे सामने बैठी थी. सर पर सलीके से दुपट्टा लिए वो अपने आप में सुंदरता और सीरत की पूरक लग रही थी. मुझे इस तरह खुद को देखता प् कर उनके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी .

निधि दीदी : चलें ?

मैं जैसे किसी अनजाने जादू की पकड़ से बहार निकला और बड़बड़ा कर जल्दी जल्दी निकलने लगा.

अमित : ह ह ह हाँ दीदी चलो . वैसे आप आज बड़ी खूबसूरत लग रही हैं बिलकुल वाइट रोज की तरह

निधि दीदी : थैंक्स . तुम्हे ाचा लगा तो फिर ठीक है वर्ण ये सब तो नार्मल hi है. चल अब जल्दी से.

मैं दीदी क साथ नीचे आया और बाइक निकलने लगा तो दीदी ने मन कर दिया .

अमित : दीदी बाइक से चलते हैं न .

निधि दीदी : नहीं मुझे पैदल hi जाना है , माँ से बहुत सुना है क इस मंदिर में मनोकामना ज़रूर पूरी होती है. इस लिए मैं पैदल नंगे पाऊँ जाउंगी.

अमित : क्याआ??? दीदी आपके इतने कोमल पाऊँ छील जायेंगे रस्ते में कंकर पत्थर से.

निधि दीदी : कुछ पाने क लिए इतनी तपस्या तो करनी hi पड़ेगी न. चल अब वर्ण सूरज सर पर आ जायेगा.

इतने में माँ बाथरूम से नाहा कर निकली तो हमें बहार जाते हुए देख कर पूछने लगी तो दीदी ने बता दिया क मेरे साथ मंदिर जा रही हैं . मंदिर हैं में hi था ज्यादा दूर तो नहीं पर फिर भी 10-15 मिनट्स तो लगने hi वाले थे. मुझे तो दीदी क नंगे पाऊँ की फ़िक्र थी . खैर मैं दीदी क साथ चल दिया. दीदी ने जाते हुए ज्यादा बात नहीं की शायद वो मन में hi कोई मंतर वगैरह पढ़ रही थी और में उनके साथ चल रहा था. मंडी में अभी इक्का दुक्का लोग hi थे . ये मंदिर काफी प्राचीन था और लोगों में इस मंदिर क प्रति बड़ी आस्था थी. हमारी फॅमिली क भी सब लोग यहाँ आते रहते थे. दीदी घर से पूजा की थाली और फूल लायी थी. माता क मंदिर क सामने खड़े हो कर दीदी ऑंखें बंद किये पता नहीं मन में क्या बात करती रही.

निधि ( मन में ) हे माँ ,, अमित क खून से मेरी मांग भरी जाना ज़रूर तेरा hi फैसला था. न मैंने कभी ऐसा सोचा था न hi उसने. जो कुछ भी हुआ मैं उसे तेरा hi फैसला मानती हूँ. अगर वाकई में तुमने मेरे लिए अमित को चुना है तो मुझे फिर से एक बार इशारा दे माँ. और मुझे उसकी बना दे. मैं चाहती हूँ मैं सिर्फ उसी की बन कर रहूं. मैं जानती हूँ ये सब आसान नहीं पर तुम चाहो तो क्या नहीं हो सकता . मुझे सिर्फ उसी की बनाना माँ मैं उसे अपना पति मन चुकी हूँ. अब मेरी लाज तुम्हारे हाथ है मेरी डोर तुम्हारे हाथ में है.

निधि ने जैसे hi माथा टेकने क लिए सर झुकाया तो एक फूल माता की मूर्ती से गिर कर सीधा निधि क सर पर गिरा और जैसे hi उसने सर उठाया तो उसके माथे पर सिन्दूर लग चूका था . असल में वो सिन्दूर माँ क चरणों में किसी चढ़ाया हुआ था जो निधि क माथा टेकते hi उसके माथे पर लग गया. पर लगा भी ऐसे जैसे सुहागन लगाती है. निधि माथा टेकने क बाद जैसे hi अमित की तरह पलटी तो अमित की मज़ार उस सिन्दूर पर गयी .

अमित : ये क्या दीदी ?

निधि दीदी : क्या हुआ ?

अमित : आपके माथे पर तो इतना सारा सिन्दूर लग गया.

मेरी बात सुनते hi दीदी ने जल्दी से मंदिर में hi लगे कांच में अपना अक्स देखा तो उन्हें अपने माथे पर सिन्दूर नज़र आया . दीदी उस सिन्दूर को हाथ से चुकार देखने लगी और फिर मुस्कुरा उठी. वो फिर से माता की मूर्ति क आगे झुक गयी और फिर से माथा टेका.



निधि ( मन में ) मुझे मेरा जवाब मिल गया माँ . तुझे हमारा ये रिश्ता कबूल है. अब कैसे भी कर क मुझे अमित की बना दो माँ. अब जो करना है तुझे hi करना है.
 
अपडेट 161



निधि दीदी फिर से माथा तक कर वापिस पलटी तो सिन्दूर अभी भी लगा हुआ था. दीदी क चेहरे पर अलग hi मुस्कान थी.

अमित : दीदी आपने माथा साफ़ नहीं किया . देखो तो कितना सिन्दूर लगा हुआ है. लाओ मैं साफ़ कर देता हूँ

मैंने दीदी क माथे पर लगे सिन्दूर को साफ़ करने क लिए हाथ आगे किया तो वो एक डैम से पीछे हैट गयी

निधि दीदी : ख़बरदार जो इसे हाथ लगाया तो , ये तो माता का आशीर्वाद है. इसे ऐसे hi रहने दो. चलो अब घर चलें

दीदी मुस्कुराती हुई बहार को चल पड़ी. दीदी की चल बदल गयी थी . उनके चलने से hi लग रहा था क वो बहुत खुश हैं . बच्चों क जैसे उछाल उछाल कर वो मंदिर से बहार को निकल पड़ी.

अमित : लगता है आप बहुत खुश हैं . ऐसा क्या हो गया मंदिर में. क्या माँगा था अपने भगवन से?

निधि दीदी : ये कोई बताने वाली बात है ? बस जो माँगा था वो मिल गया .

अमित : इतनी जल्दी मिल गया ?

निधि दीदी : मैंने माँ से सवाल पूछा था और उसने जवाब दे दिया. अब देर स्वर सही वो मिल hi जायेगा जो मैंने माँगा है पर माँ ने बता दिया क वो मिलेगा . मुझे उस पर यकीन है .

दीदी ने ये बात मेरी आँखों में देखते हुए कही. उनकी ख़ुशी आँखों से भी झलक रही थी. दीदी क माथे पर सिन्दूर और चेहरे की ख़ुशी देख कर मुझे लगा ज़रूर उन्होंने अपने लिए जीवन साथी की मन्नत मांगी होगी .

अमित : हम्म्म्म मैं समझ गया . आप ने भगवन से अपने लिए किसी लड़के की बात की है न ? तभी आप इस सिन्दूर की वजह से इतनी खुश हो रही हैं और इसे हटा भी नहीं रही.

निधि दीदी : हाँ और भगवन ने मन भी ली है अब खुश .

अमित : कौन है वो लड़का मुझे भी तो बताइये

निधि ( मन में ) तुम hi तो हो जिसे मैंने माँगा है .

अमित : बताइये न ऐसे क्या देख रही हैं

निधि दीदी : तुम

अमित : मैं ??

निधि दीदी : मैंने तुम्हारी सलामती मांगी है ताकि तुम हमेशा मेरे साथ रहो और मेरी हिफाज़त करो

अमित : आप बात को घुमा रही हैं , क्या मुझे नहीं बताएंगी

निधि दीदी : बुद्धू

इतना कह कर दीदी उछलते हुए आगे आगे चलने लगी. मैं उनके पीछे पीछे चल रहा था. आज वो बिलकुल अलग hi लग रही थी. हमेशा सलीके से रहने वाली सबसे समझदार आज किसी अल्हड लड़की की तरह मुस्कुराती उछलती चल रही थी . हम अपने घर वाली गली में मुड़े hi थे क दीदी का पाऊँ एक कंकर पर आ गया. नंगे पाऊँ होने और एड़ी क नीचे पत्थर आने से दीदी को एक डैम से दर्द हुआ और वो वहीँ बैठ गयी. मैं उन से 4-5 कदम क फासले पर था.

निधि दीदी : आअह्ह्ह्हह आईई मायआ

अमित : क्या हुआ दीदी ?

निधि दीदी : एड़ी क नीचे पत्थर आ गया.

अमित : (चिंता से ) दिखाओ मुझे .

मैंने दीदी का कोमल पाऊँ अपने हाथ में लिया और उसे साफ़ कर क देखने लगा. खून तो नहीं निकला था पर एक डैम वजन पड़ने से दीदी को बहुत दर्द हो रहा था. मैंने उनके पाऊँ की मालिश की.

अमित : देखा नंगे पाऊँ चलने का नतीजा. मैंने कहा था क जुटे पेहेन लो. देखो कैसे निशान पद गया है दर्द भी हो रहा होगा. ये सब काम आपके लिए नहीं हैं. आप फूलों जैसी नाज़ुक हैं और ऐसे चल रही हैं. अब तो चला भी नहीं जायेगा आपसे . घर में फंक्शन हैं और आप पाऊँ पकड़ कर बैठ जाएँगी अब. मैं क्या जवाब दूंगा माँ को. साथ भी आया और भी आपकी ये हालत हो गयी

मुझे दीदी की चिंता हो रही थी और मैं पाऊँ की मालिश कार्य पता नहीं क्या क्या कहे जा रहा था जबकि दीदी बस ख़ामोशी से मुझे देख रही थी.

अमित : ज़्यादा दर्द तो नहीं हो रहा?

निधि दीदी : तुम्हारे हाथ लगते hi सारा दर्द चला गया . इतनी चिंता न कर ये बस मामूली सी बात है.

अमित : पता है मुझे कितनी मामूली है ये. चलो उठो ज़रा चल कर दिखाओ.

मैंने दीदी को एक तरफ से पकड़ कर खड़ा किया और उन्हें चलने को कहा. दीदी ने जैसे hi एड़ी निचे राखी उनके मुँह से दर्द भरी ाही निकली

निधि दीदी : आआअह्ह्ह्हह

अमित : देखा अब बोलो , आपसे इस पाऊँ से चला भी नहीं जायेगा अब. घर जा कर अचे से मालिश करनी पड़ेगी.

निधि दीदी : मुस्कुराती हुई ) कितना प्यारा लग रहा है तू ऐसे गुस्सा करता हुआ भी

अमित : आपको मज़ाक सूझ रहा है. चलो मैं आपको उठा कर ले चलता हूँ .

निधि दीदी : मैं भी तो यही चाहती हूँ तुम मुझे उठा कर अपने साथ ले चलो.

मैंने दीदी को अपनी पीठ पर लाड लिया. घर ज्यादा दूर नहीं था वैसे भी सुबह का समय था तो लोग इस वक़्त या तो खेतों में होते हैं या घर में. मैं दीदी को लिए चल पड़ा. दीदी का नरम बदन मुझे फूलों जैसा लग रहा था . मेरे गले में बहन डेल दीदी अपना सर मेरे सर क साथ hi लगाए थी.

निधि ( मन में ) कितनी परवाह है तुझे मेरी. अब तो भगवन ने भी सहमति से दी है. मुझे अपनी बना लो न . ऐसे hi साडी ज़िन्दगी मुझे अपने साथ रख लो न.

निधि ऑंखें बंद किये इन पलों को जैसे अपने दिल में उतर रही थी. अमित क गले में बहन दाल कर उसके सर से अपना सर लगाए उसे अपने पति अपने प्रेमी रूप में hi देख रही थी . अमित ने निधि को पीठ पर लाड कर उसकी दोनों टांगों को साइड्स से आगे कर क उसके घुटनों क नीचे से अपने हाथ आगे किये हुए थे जैसे बचे को उठाते हैं अक्सर लोग. निधि तो मदहोश हुई उन पलों को अपने अंदर सामने में खोई थी क उसे बड़ी ममी की आवाज़ सुनाई दी. आंख खोल कर देखा तो सामने बड़ी ममी कड़ी थी. और चिंता से उस से कुछ बात कर रही थी . निधि का दिमाग तो जैसे कहीं और hi पहुंचा हुआ था. हकीकत में आने में उसे वक़्त लग गया.

गौरी म : क्या हुआ ? मैं कुछ पूछ रही हूँ और तू बस देखे जा रही है ?

निधि दीदी : हह हाँ ममी जी मैं बिलकुल ठीक हूँ . मुझे कुछ नहीं हुआ . वो मंदिर गए थे तो वापिस आते पाऊँ क नीचे कंकर आ गया .

गौरी म : अब बच्चों की तरह पीठ पर hi लड़ी रहेगी क्या ? चल नीचे उतर और दिखा तेरा पाऊँ. क्या ज़रूरत थी नंगे पाऊँ जाने की और ये माथे पर इतना सिन्दूर ?? अभी तेरी शादी थोड़ा हुई है.

निधि दीदी : वो मंदिर में माथा टेकते वक़्त लग गया था ममी जी.

अमित : मैंने कहा भी था साफ करलो पर दीदी ने नहीं किया.

निधि दीदी : मैंने सोचा माता का आशीर्वाद है ऐसे मंदिर में hi साफ करना ाचा नहीं लगता .

गौरी म : सही कहा , चल अब नीचे उतर और मेरे पास बैठ मैं मालिश कर देती हूँ.

निधि दीदी : आप रहने दो ममी मैं कर लुंगी. और अभी मैं अपने कमरे में जाना चाहती हूँ तो इसी लिए अपने घोड़े से नीचे नहीं उतर रही . ये मुझे मेरे कमरे तक ले जायेगा . वर्ण मैं सीढ़ियां कैसे चढूँगी?

दीदी की इस बात पर माँ हसने लगी और मेरी आँखों में देख कर बोली

गौरी म : सही कहा तुमने ये घोडा hi है. लम्बी रेस का घोडा. चल जा दीदी को कमरे छोड़ क आ . मैं दूध गरम करती हूँ.

मैं दीदी को लिए ऐसे hi सीढ़ियां चढ़ने लगा. सीढ़ियां चढ़ने से दीदी का बदन ऊपर निचे हो कर मेरी पीठ पर रगड़ने लगा तो मुझे अपने पीठ पर उनके रुई क गोलों का एहसास रोमांचित करने लगा. खुद को काबू में रखता मैं उन्हें उनके कमरे तक ले जाने लगा तो उन्होंने मुझे मेरे hi कमरे में चलने को कहा तो मैं उन्हें अपने कमरे में ले आया और अपने बीएड पर आराम से बैठ दिया.

अमित : अब आप यहाँ आराम से बैठो . मैं अभी आपके पाऊँ की मालिश कर देता हूँ

निधि दीदी : मैं कर लुंगी तुम रहने दो

अमित : क्यों रहने दूँ? आप मानती हैं क्या मेरी ? खुद hi ज़बरदस्ती शुरू हो जाती हैं. अब मैं भी नहीं सुनूंगा आपकी

निधि दीदी : पर मुझे ाचा नहीं लग रहा क तुम मेरे पाऊँ को हाथ लगाए

अमित : उससे क्या होता है ? आप बड़ी बहिन हो मेरी

निधि ( मन में ) बहिन नहीं पत्नी हूँ तुम्हारी और पति पत्नी क पाऊँ को हाथ लगाए ये ाचा नहीं लगता .

निधि दीदी : रहने दो न मैं कर लुंगी .

अमित : आप बस चुपचाप बैठिये वर्ण मैं बात नहीं करूँगा आपसे.

दीदी चुपचाप बैठ गयी और मैं ज़मीन पर बैठ कर उनके पाऊँ की अपने कमरे में पड़े मालिश वाले तेल से मालिश करने लगा. दीदी बस ख़ामोशी से मुझे देखि जा रही थी. इतने में माँ दूध ले आयी मेरे लिए.

गौरी म : शाबाश बड़ी बहिन की सेवा हो रही है.

निधि दीदी : देखिये न ममी जी ये मन hi नहीं रहा

गौरी म : तो गलत क्या कर रहा है वो ? अपनी बड़ी बहिन की सेवा hi तो कर रहा है. ले दूध पिले अब.

माँ मुझे दूध का गिलास पकड़ा कर चली गयी और मैं दीदी क साथ बैठ कर दूध पिने लगा. दीदी अभी भी मुझे hi देखे जा रही थी .

अमित : ऐसे क्या देख रही हो आप ?

निधि दीदी : कुछ नहीं , बस देख रही हूँ तुम कितनी परवाह करते हो मेरी.

अमित : सबसे ज्यादा. अब आप आराम से यहाँ लेट जाओ मैं नीचे जा रहा हूँ.

निधि दीदी : रुको, मेरी मालिश तो कर दी अब अपनी भी करवा कर hi जाना

अमित : आप रहने दो

निधि दीदी : मैंने मणि न तुम्हारी बात अब चलो जल्दी कर दरवाज़ा बंद कर दो और T-shirt उतर कर इधर आओ मेरे पास और वो क्रीम भी दो मुझे .

मैंने दरवाज़ा सत्ता दिया और क्रीम दीदी को दे कर T-shirt उतर कर उनकी तरफ पीठ कर क उनके पास बैठ गया.

निधि दीदी : अभी तक कुछ फरक नज़र नहीं आया बस ये निशान और भी काले हो गए हैं .

अमित : मगर अब मुझे दर्द काम महसूस हो रहा है दीदी इनमे.

निधि दीदी : पता नहीं कैसे जल्लाद लोग होते है ये लोग भी कुछ भी नहीं देखते.

अमित : दीदी छोडो वो सब एक गलतफहमी थी .

निधि दीदी : गलत फेहमी में किसी की जान भी ले लेंगे क्या? मेरा बस चलो उन सब का इससे भी बुरा हल करूँ जिन्होंने तुम्हारे साथ ये सब किया.

अमित : जो हो गया सो गया दीदी. अब आप आराम करो मैं चला नीचे. नाश्ता यहीं ले आऊंगा आपके लिए.

क्रीम लगवाने क बाद मैं T-shirt पहन कर नीचे आ गया. सुबह क 7 hi बजे थे अभी . बाबा आंगन में आ कर बैठ गए . अजय मां और कमलेश मां तो बहार जा चुके थे. मैं भी बाबा क पास आ कर बैठ गया .

दूसरी तरफ राधा का मन कल रत से अशांत था. जब उसे नैना दीदी से पता चला क अमित की बाइक छोड़ने क लिए पुलिस वाला आया था कल्पना क घर से. कल्पना ने भी जो जवाब दिया उससे राधा संतुष्ट नहीं थी . ऐसा नहीं था क उसे अमित पर कोई शक था बल्कि उसे ये बात सारा रही थी क एक तो अमित सारा दिन गायब रहा फिर उसकी बाइक कल्पना क घर कैसे पहुंची और फिर अगले दिन वो उससे बिना मिले hi गाओं चला गया . राधा को ये बात डरा रही थी क कहीं अमित क साथ कुछ हुआ तो नहीं है. और सुबह सुबह उसे सपने में भी अमित तड़पता हुआ दिखा था . राधा किसी तरह अमित को देखना चाहती थी पर वो अभी गाओं में था. अगर शहर में होता तो उसे बुला लेती या खुद मिलने चली जाती . दिव्या उसे उठा कर चली गयी थी तैयार होने का कह कर पर वो वैसे hi बैठी थी. कुछ देर बाद जब दिव्या उसे देखने क लिए कमरे में आयी तो राधा वैसे hi सोच में गम बैठी हुई थी. उसे अपनी माँ क आने का भी पता न चला. ये देख कर दिव्या भी हैरान हुई.

दिव्या : क्या हुआ राधा ? क्या सोच रही हो ?

राधा : कुछ नहीं माँ

दिव्या : अब मुझसे छुपाएगी तू ? माँ हूँ तेरी . और माँ से अछि सहेली कोई नहीं होती . बता मुझे क्या बात है ?

राधा : माँ आज मेरा कॉलेज जाने का मन नहीं है.

दिव्या : कॉलेज में किसी ने कुछ कहा है क्या ?

राधा : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है

दिव्या : तो फिर क्या बात है? कॉलेज क्यों नहीं जाना आज ?

राधा : बस ऐसे hi , माँ हम गाओं चलते हैं न . वैसे भी कल फंक्शन तो है hi हम अभी से चले जाते हैं.

दिव्या : अरे सुबह सुबह क्या करना है वहां जा कर? दीदी से बात हुई थी वो कह रही थीं क दोपहर को सब साथ में चलते हैं . रीता दीदी करुणा नेहा रजनी मौसी नैना और कारन भी चल रहे हैं साथ में.

राधा : अभी चलते हैं न माँ , मौसी लोग बाद में आ जायेंगे .

दिव्या : बेटी बात क्या है मुझे बता तो सही. मुझे ऐसा लग रहा है तू कुछ छुपा रही है मुझसे . देख मैं तेरी माँ भी हूँ सहेली भी. मुझे सच सच बता

राधा : माँ वो नैना दीदी बता रही थी क को सुबह अमित की बाइक पुलिस वाला देने आया था घर पर जो कल्पना क घर से hi भेजी गयी थी.

दिव्या : तो इसमें क्या है , अब उसके पापा इतने बड़े अफसर हैं पुलिस वाले hi तो बिंज उनके घर सब काम देखने क लिए. पर उस की बाइक वहां कैसे गयी? वो वहां गया था क्या?

राधा : कल्पना तो यही कह रही थी क अमित उसके पापा से मिलने आया था घर पर और बाइक पंक्चर होने की वजह से अमित को वो अपनी कार में छोड़ कर आयी थी.

दिव्या : तो इसमें दिक्कत वाली बात क्या है?

राधा : मुझे लग रहा है कल्पना सच नहीं बता रही. मेरा मतलब कल्पना तो हमारे साथ कॉलेज में थी. और अमित कॉलेज से जल्दी चला गया था . फिर वो सारा दिन गायब रहा और उसका फ़ोन भी नहीं लग रहा था . पहले तो वो उठा नहीं रहा था फिर फ़ोन hi बंद आने लगा और निधि दीदी नैना दीदी का भी फ़ोन आया था पूछने क लिए क वो हमारी तरफ तो नहीं आया. अमित ऐसे कभी नहीं करता. और फिर गाओं जाने से पहले वो किसी से मिला भी नहीं. मैंने सुबह सपने में भी उसे तड़पता हुआ देखा है माँ. मुझे उसकी चिंता हो रही है.

राधा क इस खुलासे से अब दिव्या का मन भी बेचैन हो उठा. उसे भी अमित की चिंता होने लगी. अमित उसके लिए अब सबसे खास बन चूका था . बचपन से की गयी अनदेखी और अब अपने लिए अमित का प्यार देख दिव्या उसे सबसे ज्यादा प्यार करने लगी थी . दूसरा उसके अंतर्मन में अमित की एक अलग hi छवि बन चुकी थी जो उसे अमित की और ले जा रही थी .

दिव्या : चिंता में ) चल तू नाहा कर तैयार हो जा और कल क लिए भी अपने कपडे निकल ले. मैं नाश्ता बनती हूँ फिर हम निकलते हैं. दीदी को मैं बता देती हूँ क हम जा रहे हैं.

इतना कह कर दिव्या कमरे से निकल गयी और राधा में भी जैसे नई ऊर्जा आ गयी. वो जल्दी से उठी और बाथरूम में घुस गयी. राधा क तैयार होने तक दिव्या ने नाश्ता बना लिया और अपनी बहनो को भी बता दिया क वो गाओं क लिए निकल रही है. ज्यादा कुछ बताना उसे ठीक नहीं लगा. बचे क लिए कुछ शॉपिंग की थी दिव्या ने और साथ में अपने कपडे और राधा क कपडे रख कर बैग पैक किया. नाश्ता करने क बाद दोनों माँ बेटी घर को टाला लगा कर बस स्टैंड क लिए निकल गए. राधा ने कल्पना और नेहा दीदी को बता दिया था क वो गाओं जा रही है.

नाश्ते क वक़्त निधि दीदी खुद hi सीढ़ियां उतर कर निचे आ गयी. अब उनके पाऊँ में दर्द काम था. नष्ट क बाद बाबा फिर से बहार निकल गए . मैं और निधि दीदी छोटी ममी क कमरे में मुन्ने क साथ hi खेल रहे थे आँगन में किसी क आने का पता चला. माँ कुछ कह रही थी इससे पहले क मैं कुछ समझ पता राधा कमरे में आ गयी. निधि दीदी और दीपिका ममी राधा को देख कर खुश हो गयी . मैं भी इतनी सुबह उसे यहाँ देख कर हैरान हो रहा था. राधा निधि दीदी और दीपिका ममी से मिलते हुए मुझे hi देख रही थी . तभी पीछे से दिव्या मौसी भी अंदर आ गयी और आते hi मेरे गले लग गयी . दिव्या मौसी ने कुछ देर मुझे अपने से लगाए रखा और फिर माथा चुम कर बोली .

दिव्या मौसी : तू ठीक तो है न ?

अमित : मैं तो ाचा भला हूँ मौसी आपको किसने कहा मैं ठीक नहीं ?

दिव्या मौसी : किसी ने भी कहा हो , तू सच सच बता क्या सब ठीक है ? कुछ हुआ तो नहीं न तेरे साथ ?

दिव्या मौसी क इस सवाल से एक पल को मुझे लगा क कहीं किसी से उन्हें कुछ पता तो नहीं चल गया पर फिर सोचा अगर ऐसा होता तो वो सीधा वही बात करती .

अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ मौसी . देखिये आपके सामने खड़ा हूँ.

‘ अरे आते hi शुरू हो गए, पहले बिठा तो को दोनों को. फिर बाद में बातें करते रहना. ‘

माँ दोनों क लिए पानी ले कर आयी थी . मैंने राधा की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी . उसकी आँखों में नाराज़गी साफ़ नज़र आ रही थी मगर वो गुस्से क बजाये चिंता में ज्यादा दिखी.

दीपिका ममी : दीदी आप अकेली आ गयी ? रजनी दीदी और रीता दीदी नहीं आयी ?

दिव्या मौसी : वो सब दोपहर को आएंगे. पहले हम भी उनके साथ आने वाले थे . फिर राधा ने कहा क उसका मन नहीं कॉलेज जाने का तो हमने सोचा अभी गाओं चले जाते हैं. वैसे तुम हमसे बिना मिले कैसे आ गए ? और परसों कहा थे तुम ?

अमित : वो मौसी जी मैंने सोचा क घर पर काम होगा तो उस लिए जल्दी चला आया था. और परसों मैं अपने एक दोस्त क पास गया था उससे मिलने .

दिव्या मौसी : किस दोस्त क पास गया था? सरे दोस्त तो तेरे कॉलेज वाले hi हैं .

अमित : मौसी वो ...

गौरी म : ये क्या तुम आते hi इन्क्वायरी करने लग गयी. आराम से बैठो और सांस लो . और मेरी बची कैसी है तू ? तू तो आती नहीं हमारे पास .

माँ ने राधा को गले लगते हुए राधा से कहा. मुझसे तो मौसी की बातों का जवाब नहीं दिया जा रहा था शुक्र है क माँ ने बात बदल दी.

दिव्या मौसी : इन्क्वायरी नहीं करूँ क्या? मेरे बेटे की चिंता नहीं होगी क्या मुझे? ये बिना मिले चला आया और ऊपर से एक दिन पहले इसका फ़ोन बंद था.

निधि दीदी : अरे मौसी आप ऐसे hi चिंता कर रही हैं . हमारे hi पास तो था कौन सा ये कहीं बहार था. वैसे भी सब जानते हैं क अमित कभी गलत काम नहीं करता .

दीपिका ममी : बिलकुल सही , ये कभी गलत काम नहीं कर सकता. देख लेना मैं मुन्ने को इसी क जैसा बनाउंगी.

दिव्या मौसी : नाम क्या सोचा है मुन्ने का?

दीपिका ममी : अभी नहीं सोचा है

निधि दीदी : मैं कह रही थी क अमित क नाम क पहले अक्षर से hi मुन्ने का नाम हो .

दिव्या मौसी : ये तो अछि बात है .

गौरी म : जा बीटा मौसी का बैग ऊपर कमरे में रख आ

मैं मौसी का बैग लेकर ऊपर कमरे में रखने गया तो पीछे पीछे hi राधा भी आ गयी .

राधा : क्या छुपा रहे हो तुम सब से ?

अमित : अरे राधा तुम , तुम्हे क्या ज़रूरत थी ऊपर आने की . वैसे आज कॉलेज क्यों नहीं गयी तुम ?

राधा : ये मेरे सवाल का जवाब नहीं है.

अमित : कुछ भी नहीं है ऐसा जो तुम सोच रही हो .

राधा : मैं कुछ नहीं सोच रही मुझे बस सच सुन्ना है. और तुम भी जानते हो क मैं तुम्हारा झूठ पकड़ लेती हूँ .

अमित : हम इस बारे में बाद में बात करेंगे अभी तुम आराम करो.

राधा : नहीं मुझे अभी बताओ. पता है कल से मैं कितनी टेंशन में हूँ . रत भी बुरे सपने आते रहे. बताओ आखिर हुआ क्या है.

‘ मैं बताती हूँ राधा ‘ दरवाज़े पर निधि दीदी कड़ी थी .

अमित : दीदी आप ?

निधि दीदी : मैं समझ गयी थी क राधा क्यों यहाँ आयी है. मेरी तरह इसे भी तुम्हारी चिंता है. इधर आ मेरी गुड़िया मैं तुझे बताती हूँ.

निधि दीदी ने राधा को पास बिठा लिया और उसे अपने साथ लगा कर एक एक कर क वो सब कुछ बता दिया जो मैंने उन्हें बताया था. राधा तो पहले से hi मेरे बारे में सोच सोच कर टेंशन में थी. और जैसे hi दीदी ने बताया क पुलिस वालों ने मुझे मारा है राधा की आँखों से आंसू बहने लगे.

राधा : इतना कुछ हो गया और तुमने मुझे बताना ठीक नहीं समझा . क्या इतनी hi कदर थी मेरी ?

अमित : नहीं राधा ऐसा मत कहो . मैं किसी को परेशां नहीं करना चाहता था.

राधा : और अब जो मुझ पर बीत रही है वो? कभी सोचा है कैसा लगता है जब तुम्हारे इलावा सबको पता हो उसके बारे में जिसकी तुम सबसे ज्यादा परवाह करते हो .

निधि दीदी : अरे मेरी गुड़िया मैंने hi इसे मन किया था. देख घर में यहाँ इतना बड़ा फंक्शन है ख़ुशी का मौका है. ऐसे में अगर इस बारे में सबको पता चलेगा तो क्या कोई खुश हो पायेगा? इसी लिए इसे मैंने रोक दिया था वर्ण ये तो तुम से मिल कर hi आना चाहता था.

निधि दीदी ने मुझे बचने क लिए साडी बात अपने ऊपर ले ली .

राधा : दीदी आपने मन किया पर एक बार बता तो सकता था चाहे फ़ोन पर hi. और कल्पना को शीना दीदी को भी पता था लेकिन मुझे hi नहीं .

निधि दीदी : चल छोड़ इस पर गुस्सा मत कर. चाहे तो मुझ से नाराज़ हो ले.

राधा : गुस्सा तो करुँगी न दीदी और है hi कौन जिससे गुस्सा करूँ या नाराज़ होऊं . रूठूँ भी तो मानाने कौन आएगा . एक यही तो है मेरे पास और अगर ये भी ऐसे करेगा दिल तो दुखेगा न दीदी.

अमित : मुझे माफ़ कर दो राधा तुम जानती हो न मैं तुम्हारी अंगों में आंसू नहीं देख सकता .

राधा : तो रुलाते क्यों हो ऐसे काम कर क?

निधि दीदी : अरे बस कर मेरी गुड़िया तू तो बच्चों की तरह तो रही है . मैंने कहा न इसने सब कुछ मेरी वजह से किया . गुस्सा करना है तो मुझसे कर पर इसे कुछ मत कह .

राधा : आप भी इसका साथ दे रही हैं . मैं जानती हूँ आप इसे बचने क लिए ये सब कह रही हैं. इसने तो आपको भी नहीं बताया होगा.

राधा की बात एक डैम सही थी. वो मुझे अछि तरह जानती थी. निधि दीदी राधा की इस बात पर निरुत्तर हो गयी .

राधा : दिखाओ मुझे कहाँ चोट लगी है तुम्हे

अमित : राधा मुझे कुछ .....

राधा : ज़ोर से ) तुमने सुना नहीं

राधा रो भी रही थी और मुझसे गुस्सा भी कर रही थी. राधा की बात न मन्ना मतलब उसे और गुस्सा दिलाना. अब सच तो पता चल hi गया था तो मैंने भी चुप चाप अपनी T-shirt गले तक ऊपर उठाई और मुँह दूसरी तरफ कर क खड़ा हो गया . मेरी पीठ पर शायद hi कोई जगह खली हो जहाँ सूजन और पुलिस की मर क काळा निशान न बने हो . ये सब देखते hi राधा क आंसुओं की धरा तेज़ हो गयी. राधा की सिसकियों क साथ एक और आवाज़ कमरे में गूंजी

‘ ये क्या हुआ मेरे बचे को किसने किया ये ‘ मैं आवाज़ सुनते hi पलट गया और दिव्या मौसी ने आकर मुझे गले लगा लिया .

दिव्या मौसी : ये किसने किया तेरे साथ बता मुझे ? ये सब कैसे हुआ.

दिव्या मौसी को देख कर मेरे साथ साथ निधि दीदी और राधा भी शॉकेड हो गयी.

दिव्या मौसी : बोलता क्यों नहीं तू ? किसने किया ये तेरे साथ ? दिखा मुझे

दिव्या मौसी ने ज़बरदस्ती मुझे पलट दिया और मेरी पीठ को हाथ लगा कर देखने लगी . दिव्या मौसी खुद को रोक नहीं पायी और मेरी पर जगह जगह चूमने लगी . साथ में रोये भी जा रही थी . वो मेरे घावों पर अपनी ममता का लेप अपने होंठों से और बहते आंसुओं से लगा रही थी. दिव्या मौसी को देख कर राधा क आंसू भी रुक नहीं रहे थे.

दिव्या मौसी : कितनी बुरी तरह मारा है , किसने किया है ये? कौन थे वो लोग ? तुमने किसी को बताया क्यों नहीं ? चल अभी भैया को साथ लेकर हम पुलिस क पास जाते हैं .

निधि दीदी : पुलिस ने hi तो मारा है मौसी .

दिव्या मौसी : क्याआ ??? पुलिस ने ???? क्या किया था तुमने ? पुलिस ने तुम पर हाथ क्यों उठाया ?

अमित : मौसी पहले आप खुद को शांत कीजिये . देखिये राधा भी रो रही है. ये सब एक गलत फेहमी का नतीजा है और कुछ नहीं .

दिव्या मौसी : मुझे पूरी बात बताओ

फिर से निधि दीदी ने साडी बात दिव्या मौसी को बताई . दिव्या मौसी तो गुस्से में आ गयी और पुलिस वालों को बुरा भला कहने लगी .

दिव्या मौसी : आग लगे कीड़े पड़ें उन लोगों को . उन्हें पता नहीं चलता अचे और बुरे लोगों का ?

अमित : मौसी आप प्लीज अब खुद को शांत कीजिये अगर घर में किसी को पता चला तो सारा माहौल ख़राब हो जायेगा. प्लीज आप इस बारे में किसी से कोई बात मत करना.

दिव्या मौसी : जानती हूँ सब , बची नहीं हूँ पर तू जो खुद इतनी तकलीफ झेल रहा है उसका क्या? तुझे भी तो दर्द हो रही होगी न?

अमित : नहीं मौसी अब नहीं है. डॉ से दवा ले ली थी मैंने.

दिव्या मौसी : इधर आ मेरे पास .

दिव्या मौसी ने फिर से मेरा माथा चूमा और मुझे गले लगा लिया .

दिव्या मौसी मुझे प्यार से गले लगाए थी . मेरी नज़र राधा पर पड़ी तो उसकी आँखों में अभी भी नमी थी पर वो खुश भी थी इस तरह मौसी को मुझे प्यार करता देख कर. तभी निचे से माँ ने मुझे पुकारा तो मैं मौसी को फिर आने का कह कर निचे भाग गया.

अमित क नीचे जाते hi दिव्या निधि से पूछने लगी .

दिव्या : तुम्हे ये सब पहले से पता था ?

निधि : नहीं मौसी , मुझे तो बस उसे देख कर अंदाज़ा हो गया था क वो कुछ छुपा रहा है और फिर उसके कमरे में जाकर उससे अपना वास्ता देकर पूछा तो कहीं जा कर उसने बताया. आप तो जानती हैं न उसको . वो किसी को भी अपनी वजह से तकलीफ नहीं देना चाहता.

दिव्या :ठीक कह रही हो तुम. पता नहीं और क्या क्या ये अपने अंदर छुपाये है.

निधि : मैंने भी महसूस किया है मौसी . वो अंदर बहुत अकेला और उदास रहा है शुरू से hi और शायद अभी भी वो खुद को अकेला महसूस करता है .

दिव्या : सब मेरी गलती है , मुझे उसे माँ का प्यार देना चाहिए था. मैंने hi हमेशा उससे नफरत की जिसकी वजह से वो ऐसा महसूस करता है

निधि : नहीं मौसी ऐसा नहीं है . वो तो सबसे ज्यादा आपसे hi प्यार करता है . आप और राधा दोनों hi उसके लिए खास हैं.

राधा जहाँ अपनी माँ की व्यथा और अमित की हालत पर दुखी थी पर निधि क मुँह से ये सुन कर उसका दिल ख़ुशी से झूम उठा क अमित उसकी कितनी परवाह करता है . चाहे वो ये जानती थी क अमित उसकी इतनी परवाह करता है पर दूसरे क मुँह से सुन कर ज्यादा ख़ुशी होती है हमेशा. राधा अकेले अमित से बात करना चाहती पर पहले निधि दीदी आ गयी और फिर उसकी माँ और अब तो अमित hi निकल गया था. राधा अमित से अकेले में बात करने का प्लान बनाने लगी. वहीँ उसकी माँ दिव्या भी अमित क लिए भावुक हो रही थी.

दोपहर तक छोटे मोठे कामो में वक़्त निकल गया और फिर हमने साथ में मिल कर खाना खाया . बाबा और अजय मां घर hi आ गए थे दिव्या मौसी क साथ खाना खाने और फिर बाबा में बता दिया क रजनी मौसी और रीता मौसी भी आ रही हैं. कुछ देर बाद बस का टाइम हो गया तो मैं बाबा और अजय मां तीनो hi अपने अपने मोटरसाइकिल ले कर बस स्टॉप पहुँच गए. मैंने दोनों मौसियों क पाऊँ छुए. और उन दोनों ने भी मुझे प्यार दिया. रीता मौसी थोड़ी नाराज़ लग रही थी मुझसे . कारन भैया ने औपचारिकता वश स्माइल दिखा कर हाथ मिला लिया. नौना दीदी और नेहा दीदी भी मुझसे मिल कर खुश हुई पर करुणा दीदी मुँह फुला रही थी . बाबा ने रजनी मौसी और कारन भैया को बिठा लिया और अजय मां ने रीता मौसी और नेहा दीदी को. नैना दीदी और करुणा दीदी दोनों मेरे पीछे बैठ गयी. घर आते hi पूरे घर में शोर मच गया . सब एक दूसरे से गले मिल रहे थे और सबके चेहरों पर ख़ुशी थी. सबको जलपान करने क बाद माँ ने मुझे सबका सामान ऊपर पहुँचाने को कहा. मेरे कमरे क साथ 3 कमरे थे. मैंने दोनों मौसियों का सामान एक एक कमरे में रख दिया . नीचे सब मुन्ने क साथ खेलने और कल क फंक्शन क बारे में बातें करने लगे. माँ ने मुझे एक दो ज़रूरी काम बताये और मुझे बहार भेज दिया.

दूसरी तरफ राघव हॉस्पिटल से घर आ चूका था. बेटी करिश्मा क आने क बाद डॉ ने राघव को रेस्ट करने का कह कर छुट्टी दे दी थी. मोहित आज ऑफिस चला गया था राघव क कहने पर और रमा ने करिश्मा को अपने कमरे में बिठा कर सब सचाई सुनने क लिए बिठा लिया .

रमा : करिश्मा देखो बेटी मैं तुम्हारी माँ हूँ और माँ से ज्यादा अछि सहेली और कोई नहीं होती . तू हर बार ताल जाती है पर इस बार तुझे सच बताना hi होगा . आखिर क्या बात है जो तुझे अंदर hi अंदर खाये जा रही है? हमने तुम्हारी शादी की है , बेचा नहीं है तुझे . अगर तुझे वहां कोई तकलीफ है तो हमें बता बेटी हम उनसे बात करेंगे . तेरी ये हालत मुझसे देखि नहीं जाती . मेरी फूल सी बची कैसे मुरझा गयी है. अपन दुःख बहार निकल दे बेटी वर्ण ये तेरी जान ले लेगा . मुझे बता क्या बात है तू किस बात से इतना दुखी रहती है?

करिश्मा : मैं ठीक हूँ माँ . सब कुछ तो है वहां . किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है. आप ऐसे hi सोचती रहती हैं.

रमा : आखिर बोल क्यों नहीं देती जो भी तुझे तकलीफ है? क्या तुझे अपनी माँ पर भरोसा नहीं है ?

करिश्मा : माँ आप ऐसे hi सोच रही हो . कुछ भी नहीं है ऐसा.

रमा : तो तू यहाँ क्यों नहीं अति ? क्यों तेरा चेहरा बुझा रहता है ? क्यों तेरे चेहरे पर पहले की तरह ख़ुशी नज़र नहीं आती ?

करिश्मा : माँ कुछ भी नहीं है ऐसा जो आप सोच रही हैं. मैं बहुत खुश हूँ . पापा ने मेरे लिए बहुत ाचा घर ढूँढा है. पति है सास ससुर है ननद है . सब तो है वहां . न पैसे की कोई कमी है न ज़मीन जायदाद की. मुझे भला क्या तकलीफ होगी.

रमा : तुझे मेरी कसम सच बता क तू क्यों दुखी है? ये झूठी बातें किसी और को बताना मैं तेरी माँ हूँ. अगर मुझसे ज़रा सा भी प्यार है तो सच बता वर्ण मेरा मारा मुँह देखना .

रमा क इतना कहते hi करिश्मा की सुनी आँखों में अचानक बढ़ आ गयी. जिस दर्द को वो अपने अंदर छुपाये घुट घुट कर जी रही थी वो अचानक छलक पड़ा . करिश्मा रट हुए अपनी माँ क गले लग गयी . देखते hi देखते करिश्मा हिचकियाँ ले ले कर ज़ोर से रोने लगी . रमा भी अपनी बेटी क दर्द को महसूस कर रही थी. रमा ने करिश्मा को चुप करवाने की कोई कोशिश नहीं की क्यूंकि वो जानती थी क इस दर्द को बहुत देर से उसकी बेटी ने अंदर छुपाया हुआ है.

रमा : रो ले बेटी रो ले, जी हल्का हो जायेगा. मैं जानती हूँ तू अंदर से कितना दुखी है. आज अपना सारा दर्द बहार निकल दे बेटी . मुझे सब सच बता . मैं तुझे ऐसे घुट घुट कर जीते हुए नहीं देख सकती.

करिश्मा : रट हुए ) माँ मैं जीना नहीं चाहती मैं जीना नहीं चाहती. वो लोग मुझे जीने नहीं देंगे . मैं मर जाना चाहती हूँ माँ .

रमा : मुझे सब बता बेटी क्या किया है उन लोगों ने तुम्हारे साथ ? क्यों तू जीना नहीं चाहती ?

करिश्मा : वहां बहुत घुटन है माँ. अपनी मर्ज़ी से मैं सांस भी नहीं ले सकती वहां . सारा दिन अपने कमरे की चारदीवारी में कैद रहती हूँ. न कोई अत है न किसी से बात करती हूँ. अब तो वो दीवारें भी मुझे काटने को आती हैं . मैं जीना नहीं चाहती माँ .

रमा : मुझे सब बता बेटी मैं सब कुछ सुन्ना चाहती हूँ. आज अपना दिल खोल दे मेरे सामने मेरी बची . अपने सरे दुःख मुझे दे दे .

करिश्मा : माँ आप जानती हैं मैं यहां क्यों नहीं आती . क्यूंकि मैं नहीं चाहती वो लोग आपको और पापा को कुछ कहें. मेरी सास मेरी ननद दोनों मिल कर मुझे ताने देती रहती हैं. मैं उनके सामने भी आ जॉन तो कुछ न कुछ कह देती हैं. मेरे पति भी उनका hi साथ देते हैं. सारा दिन घर में अकेली अपने कमरे में बंद रहती हूँ. पति सुबह क गए रत को आते हैं . उनके लिए तो जैसे मैं हूँ hi नहीं. 2 प्यार की बातें कभी नहीं करते वो मेरे साथ. माँ आप नहीं जानती 2 बार मेरा बचा पेट में hi ख़तम हो गया डिप्रेशन की वजह से. ननद अपने पति को छोड़ कर वहीँ पक्का डेरा जमाये बैठी है. हर बात पर मेरे साथ झगड़ा करती है. कुछ न कुछ कमी निकल कर वो रोज़ मेरे साथ झगड़ा करती है इसी लिए अब मैं कमरे से hi नहीं निकलती क्यूंकि सास भी हमेशा उसी की साइड लेती है और मेरे ोति भी बस अपनी माँ बहिन की hi सुनते हैं. कई बार मुझ पर हाथ उठाया है मुझ पर उन्होंने .

रमा : रट हुए ) मेरी फूल सी बची क साथ इतना कुछ होता रहा और मुझे पता तक नहीं . तूने मुझे कभी क्यों नहीं बताया बोल ? क्या तुझे अपने माँ बाप पर भरोसा नहीं था ?

करिश्मा : रट हुए ) नहीं माँ ऐसा मत कहो . मैं जानती हूँ आप दोनों मुझसे कितना प्यार करते हैं. पापा तो मेरी आंख में आंसू तक नहीं देख सकते . मेरी हर विश मुस से निकलने से पहले पूरी कर देते थे वो. उन्हें जब मेरे बारे में पता चलेगा तो क्या बीतेगी उन पर? वो तो टूट hi जायेंगे . ये रिश्ता उन्होंने खुद किया था और अब जब मेरी ऐसी हालत उन्हें पता चली तो क्या वो जी पाएंगे ? नहीं माँ नहीं वो मर जायेंगे . इसी लिए मैं कभी आपको कुछ बताती नहीं थी. मैं जानती थी अगर आपको कुछ भी पता चला तो आप मेरा डाइवोर्स करवा देंगी पर क्या पापा ये सदमा बर्दाश्त कर पाएंगे? नहीं माँ . वो ये बर्दाश्त नहीं कर सकते . और मैं अपने पापा को कुछ नहीं होने दूंगी .

रमा : पर तुझे क्या लगता है क उन्हें तेरी हालत का अंदाज़ा नहीं है ? वो भी तो अंदर से दुखी हैं बेटी. वो तुझे कहते नहीं पर वो तेरे दुःख को महसूस करते हैं . इसी लिए तो हम दोनों ने तुझे बहाने से यहाँ बुलाया है.

करिश्मा : क्या ??? बहाने से ????

रमा : हाँ ,, तेरे पापा को कुछ नहीं हुआ है. वो बिलकुल ठीक हैं . ये सब तुझे यहाँ बुलाने की चाल थी.

करिश्मा : इसका मतलब आप ने मुझसे झूठ बोलै ?

रमा : तो क्या झूठ सिर्फ तू अकेली hi बोल सकती है ? मुझसे साडी बात शुरू से बता क ये सब शुरू कैसे हुआ ? पहले तो ऐसा नहीं था.

करिश्मा : ये सब मेरी ननद क वापिस आने से hi शुरू हुआ है माँ. वो hi इसकी वजह है. अपने पति को छोड़ कर जब से वो मायके वापिस आयी है बस किसी न किसी वजह से मुझे जलील करती रहती है. शुरू शुरू में जब मैंने विरोध किया तो उसने सास क कान भर दिए और वो भी शुरू हो गयी. उसके बाद तो ये रोज़ का hi काम हो गया . धीरे धीरे मेरे पति भी मेरी अनदेखी करने लगे . और मेरे साथ वक़्त बिताना काम कर दिया . जानती हो माँ पहली बार मेरा बचा मेरे पति की वजह से hi मेरे पेट में मर गया . गुस्से में मुझे ज़ोर से धक्का से दिया था और उन्होंने . मैं पेट क बल गिरी और बचा पेट में hi मर गया . तब तो उन्होंने माफ़ी मांग ली पर फिर से वही सब शुरू हो गया . अगर मैं कुछ कह दूँ तो आपको और पापा को गलियां देने लगती हैं . मैं इसी लिए उनके सामने hi नहीं जाती. मैं अपने लिए तो कुछ भी बर्दाश्त कर सकती हूँ पर कोई आपको और पापा को बुरा कहे तो मैं कैसे बर्दाश्त कर सकती हूँ?

रमा : तेरे ससुर कुछ नहीं कहते उनको ?

करिश्मा: वो तो खुद अपना मुँह बंद रखते हैं सास क दर से. घर जमाई जो ठहरे.

रमा : पर तेरा पति तेरी साइड क्यों नहीं लेता?

करिश्मा : उनके लिए उनकी बहिन और उनकी माँ hi सब कुछ है.

रमा : मैं तेरे पापा से बात करती हूँ. अब मैं तुझे उस घर में दोबारा नहीं जाने दूंगी . वो घर नहीं जहन्नुम है. मैं तुझे इस हालत में नहीं देख सकती . मैं तुझे ऐसे टिल टिल मरते नहीं देख सकती . तू मेरी बेटी है मेरे दिल का टुकड़ा है . मैं आज hi तेरे डाइवोर्स पेपर तैयार करवाती हूँ.

करिश्मा: नहीं नहीं माँ . मैं ऐसा कर क पापा को दुःख नहीं देना चाहती. वो ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे . आपको मेरी कसम आप ऐसा कुछ भी नहीं करेंगी .

रमा : रट हुए ) तो क्या तुझे मरते हुए देखूं ? नहीं मैं ये बर्दाश्त नहीं कर सकती .

करिश्मा : ये तो सब अपनी अपनी तकदीर की बात है माँ. क्या पता कल को वो सुधर hi जाएँ .

रमा : ऐसे लोग सुधरते नहीं है बेटी सुधारना पड़ता है . और वो तुझसे नहीं होगा. तू क्यों अपनी ज़िन्दगी बर्बाद करना चाहती हैं वहां रह कर . अभी तुम जवान हो , हम तुम्हारे लिए कोई और ाचा सा लड़का देख लेंगे

करिश्मा : ये भी तो ाचा लड़का hi था न माँ , शादी क बाद कितने अचे से रखते थे मुझे और फिर अचानक सब बदल गया . कल को क्या भरोसा दूसरा भी ऐसा न निकले. अब तो जो भी है बस यही है. मेरा जीना मरना अब वहीँ है माँ.

रमा : ऐसा मत कह बेटी. मैं तुझे इस हालत में बर्दाश्त नहीं कर सकती .

करिश्मा : अब तो एहि तकदीर है माँ . और आप पापा को कुछ नहीं बताएंगी वर्ण मैं कभी वापिस नहीं आउंगी.

रमा : ठीक है बेटी अगर तू यही चाहती है पर मैं भी तेरी माँ हूँ. वडा करती हूँ उन लोगों को सुधर कर रहूंगी . तेरे एक एक आंसू का हिसाब लुंगी उनसे. वो खुद तेरे पाऊँ में गिर क माफ़ी मांगेंगे.



रमा मन hi मन जैसे कोई फैसला कर चुकी थी क वो कैसे अपनी बेटी की मदद करेगी और उन सबको सजा देगी.
 
अपडेट 162



‘ दीदी जीजा नहीं आये ? ‘ रीता और रजनी दोनों एक कमरे में बैठी थी कुछ देर आराम करने क लिए. सभी लड़कियां मुन्ने और दीपिका ममी क साथ थी. दिव्या कामिनी और गौरी क साथ बैठी थी अलग कमरे में. खाना तो अब रत में hi कहाँ था . वैसे भी खाने क लिए काम वाली लगी हुई थी रसोई में.

रजनी : कल आएंगे वो . कह रहे थे छुट्टी नहीं कर सकता आधे दिन की भी नहीं. कोई ज़रूरी काम है. नौकरी न हुई मेरी तो सौतें hi है. मेरी तरफ कोई ध्यान देते नहीं बस अपनी नौकरी का hi hi ख्याल है. मूई नौकरी क लिए चार 100 कम दूर जाना पड़े वो चले जायेंगे . उनकी मीटिंग फॅमिली फंक्शन्स से भी ज़रूरी हैं. मैं तो कहती हूँ ऐसी नौकरी से तो मजदूरी अछि. अरे फौजी भी इससे अचे हैं काम से काम साल में 2-3 बार 15-20 दिन क चक्कर लगा कर बीवी को प्यार तो कर लेते हैं. यहाँ तो नौकरी ने जवानी ले क बुढ़ापा दे दिया .

रीता : तो क्या जीजा जी आपके साथ .....

रजनी : 10 साल हो गए पीठ दिखा कर hi सकते हैं वो तो . और मैं करवटें बदलती रहती हूँ. अब तो उम्र भी हो चली. जवानी ख़तम नहीं हुई थी क बुढ़ापा पहले आ गया .

रीता : अभी बुढ़ापा कहाँ से आ गया आपको? अछि भली तो हैं आप . एक डैम फिट है अभी आप

रजनी : क्या फायदा ऐसे फिट होने का ? कोई ढीला करने वाला तो हैं नहीं.

रीता : आपको कोई और ....

रजनी : ये कैसी बातें कर रही है तू? इस उम्र में ये सब करना ाचा लगता है? जो काम भरी जवानी में नहीं किया वो अब करुँगी ? अरे क्या असर पड़ेगा बच्चों पर ? 2-2 जवान बेटियां हैं घर पर . लोग क्या कहेंगे बेटियों को बेयहने की उम्र में माँ गुलछर्रे उदा रही है. वैसे तूने ये बात कैसे कही ? कहीं तू भी तो किसी क साथ ?

रीता ने अपनी बड़ी बहिन क ऐसे तल्ख़ शब्द सुन कर समझ लिया क उसने गलती करदी. उसने तो स्नेह वाश अपनी बड़ी बहिन की व्यथा सुन कर ऐसा कहा था पर रजनी तो थी hi उसूलों वाली. चाहे पति कैसा भी था उसने कभी बहार मुँह नहीं मारा और अपनी आग उंगली से शांत करती रही. पर अब यहाँ रीता फास गयी थी क अब वो क्या जवाब दे.

रीता : वो वो मम मैं तो आपके लिए कह रही थी . मुझे क्या ज़रूरत है?

रजनी रीता क इस तरह घबरा जाने से समझ गयी क वो ज़रूर कुछ छुपा रही है.

रजनी : वैसे सिद्धार्थ तुम्हारा ख्याल रखता तो है न? वो क्यों नहीं आया तुम्हारे साथ?

रीता : मेरा भी हल आप hi क जैसा है दीदी. नौकरी hi ऐसी पकड़ क बैठे हैं क हफ्ते में 4-5 दिन टूर पर hi निकल जाते हैं. कल आने वाले थे मगर फ़ोन आ गया क काम बना नहीं इस लिए रुकना पद रहा है तो अब ट्यूसडे तक आएंगे .

रजनी : तेरा दिल लग जाता है उसके बगियर . मतलब वो इतने दिन घर से बहार रहता है और तू तो मेरे से भी छोटी है , जवान है .

रीता मौसी : पहले बुरा लगता था दीदी पर अब आदत हो गयी है . वैसे भी अब न उनका मन करता है न मैं कहती हूँ . बस एक hi बीएड पर अलग अलग सो जाते हैं जब साथ हों , नहीं तो वो घर से बहार hi रहते हैं.

रजनी : पहले तो सिद्धार्थ ऐसा न था. वो तो बड़ा रोमांटिक था न

रीता : दीदी किस ज़माने की बात करती हो आप? उस वक़्त को गुज़ारे तो ज़माना हो गया. अब तो बस आप जैसा hi हल है यहाँ भी.

रजनी : ाचा , अभी तो मुझे कह रही थी बहार देखने को तो खुद क्यों नहीं कर लेती. मुझे तो लगता है तू शायद बहार कहीं कुछ कर भी चुकी है . ऐसे hi ये बात तो तेरे मुँह पे न आयी .

रजनी बातों बातों में रीता से सच जानने की कोशिश कर रही थी. रीता भी अपनी बरी बहिन की बातों में खुद hi उलझ गयी थी पर फिर भी उसने बात को ताल hi दिया .

रीता : बस दीदी जवान बेटियों को देख कर मन मार लेती हूँ वर्ण ये बर्दाश्त तो नहीं होता. पति क होते हुए भी खुद hi अपनी आग ठंडी करना.

रजनी : मैं समझ सकती हूँ रीता पर फिर भी , तू तो इतनी खूबसूरत है और अभी तो देखने में भी अपनी उम्र से 10 साल छोटी hi लगती हो तुम. क्या कोई तुझे नहीं मिला ?

रीता : आप तो जानती hi हैं दीदी , किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता आज कल. क्या पता कौन कब बदनाम कर दे. वैसे आप भी तो अभी जवान hi हैं दीदी कोई कह नहीं सकता निधि आपकी बेटी होगी. आप भी कोई नहीं मिला क्या?

रजनी : तुझे क्या लगता है क मैं बदनाम होने का रिस्क ले सकती हूँ?

रीता : अगर कोई भरोसे वाला मिले तो ? मतलब फिर आप कर सकती हैं?

रजनी का दिमाग रीता की इस बात पर ठनका . रीता क इस सवाल का क्या मतलब हो सकता है . क्या ऐसा कोई है जो भरोसा का है और रीता का उसी क साथ रिश्ता है. पर ऐसा कौन हो सकता है?

रजनी : ऐसा कौन है है भला रीता ? अगर ऐसा कोई होता तो बात और थी . वैसे तू किसी ऐसे को जानती है ?

रीता : नहीं मैं तो बस ऐसे hi पूछ रही थी . अगर ऐसा कोई मुझे मिला तो मैं ज़रूर अपनी प्यास बुझा लूंगी.

रजनी : तू सच में ऐसा करेगी ?

रीता : दीदी मैंने कहा न , क अगर कोई भरोसे वाला मिला तो. जो भरोसे का होगा वो न बदनाम करेगा न फायदा उठाएगा. फिर भला क्या बुराई है अपनी प्यास बुझाने में ? जैसे पेट भरने क लिए खाना चाहिए , वैसे hi ये भी तो शरीर की एक ज़रूरत hi तो है.

रजनी : बात तो तू ठीक कह रही है. आखिर कब तक खुद को तड़पाया जाये ? चल छोड़ कोई और बात कर. वर्ण फिर से नाहा कर खुद को ठंडा करना पड़ेगा.

दोनों बहने ऐसे hi आपस में बातें करती आराम करने लगी. दोनों क hi मन में अलग अलग विचार थे. रीता जहाँ अपनी बड़ी बहिन की तड़प को महसूस कर क उसकी मदद करने क बारे में सोच रही थी वहीँ रजनी रीता क बारे में सोच रही थी क आखिर कौन हो सकता है जिस पर रीता भरोसा कर सकती है. मगर कन्फर्म वो भी नहीं थी क जो वो सोच रही है वाकई में वैसा है या सिर्फ ये उसका शक है.

इधर दीपिका ममी क रूम में चौपाल लगी थी. साडी मंडली वहीँ पर जमा थी. जैसे hi मैं वहां आया तो सबको बीएड पर एक साथ बैठे देखा. बीएड पर मेरी 5 बहने और दीपिका ममी सर्किल बना कर बैठी थी और इस वक़्त मुन्ना नेहा दीदी की गॉड में था.

अमित : यहाँ तो पूरी पंचायत लगी है. क्या बात चल रही है ? क्या मैं शामिल हो सकता हूँ आपकी पार्टी में ?

नैना दीदी : no , ये हमारी आपस की बात है तुम क्या करोगे? तुम जाओ यहाँ से. देखते नहीं जगह नहीं है यहाँ.

निधि दीदी : नैना !! आओ अमित तुम यहाँ बैठो मेरे पास.

निधि दीदी ने थोड़ा सा सरक कर मेरे लिए जगह बनाई और मैं उनसे सात कर बैठ गया.

अमित : निधि दीदी hi मेरी सबसे प्यारी दीदी हैं , देखा कितना प्यार करती हैं ये मुझे .

इतना कह कर मैंने निधि दीदी को ऐसे से बाँहों में भर लिया तो उनके चेहरे पर बड़ी सी स्माइल आ गयी.

करुणा दीदी : दीदी आप कुछ ज्यादा hi सर नहीं चढ़ा रही इसे ? आज कल कुछ ज्यादा hi हवा में उड़ने लगा है ये.

निधि दीदी : ये तो लाखों में एक है , इसके लिए तो जितना भी करूँ काम है. मैं किस्मत वाली हूँ क मुझे ये मिला है.

करुणा दीदी : तो इसका मतलब हम सब की कोई कीमत hi नहीं ? ये तो गलत बात है दीदी.

नेहा दीदी : करुणा !! दीदी सही कह रही हैं. हमारा भाई लाखों में एक है. कभी इसकी तुलना खुद से या किसी से मत करना. ये जो है वो कोई भी नहीं हो सकता. किस्मत से ऐसा भाई मिलता है. ये तो कभी कुछ सोचता hi नहीं बस कर देता है , पता नहीं कितनो की मदद कर चूका है अब तक बिना अपना पराया देखे. क्या तुमने सुनी नहीं थी सबकी बातें कॉलेज में? तुझे तो गर्व होना चाहिए क ये हमारा भाई है. ज़रा सोच जो दूसरों क लिए इतना कुछ कर सकता है वो हमारे लिए क्या नहीं कर सकता ? राधा का भूल गयी ??

नेहा दीदी ने जब इतना कुछ कहा तो सब शांत हो गए और करुणा दीदी को भी एहसास हुआ क वो गलत हैं . जबकि निधि दीदी मेरी तरफ गर्व से और स्नेह से देख रही थी. राधा की नज़रों में भी वैसा hi कुछ दिख रहा था. जबकि करुणा दीदी की नज़रें झुक गयी थी

अमित : अरे दीदी ये क्या आप ऐसे क्यों नज़रें झुका रही हैं ? मुझे तो आप की किसी बात का बुरा नहीं लगता. आप न हमेशा ऐसे hi मज़ाक करती रहा करो सबके साथ. ये नेहा दीदी और निधि दीदी सच में कुछ ज्यादा hi बता रही हैं मेरे बारे में. उन्हें क्या पता इनसे ज्यादा प्यार आप और नैना दीदी hi करती हैं मुझे

मेरे इतना कहते hi करुणा दीदी और नैना दीदी ने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराने लगी जैसे वो मेरी बात का कुछ और hi मतलब समझ रही हो .

करुणा दीदी : और नहीं तो क्या , तुझे तो मैं दिखाउंगी तू एक बार आ तो सही हमारे घर.

नैना दीदी : बिलकुल सही और अचे से दिखाना हमारे घर तो ये पता नहीं कौन कौन से चक्कर दाल क बैठा रहा.

दीपिका ममी : सही कहा तुम दोनों कोई लिहाज़ न करना इसका . इसे भी तो पता चले इसकी मर्ज़ी हर जगह नहीं चलेगी.

अमित : अरे वो सब बाद में देखा जायेगा पहले ये तो बताओ ये महा सभा किस लिए लगी हुई है यहाँ ?

करुणा दीदी : और किस लिए , मुन्ने का नाम सेलेक्ट किया जा रहा है.

अमित : तो क्या नाम सेलेक्ट हुआ फिर मुझे भी बताओ.

दीपिका ममी : अभी कोई सेलेक्ट नहीं हुआ है. सब अपना अपना बता रहे हैं . लेकिन फाइनल तो मुन्ने क पापा hi करेंगे.

करुणा दीदी : ये गलत है ममी , हमारे बताये किसी नाम में से रख लो न आप.

निधि दीदी : ममी ठीक कह रही हैं करुणा . नाम तो मां जी hi फाइनल करेंगे न.

दीपिका ममी : फाइनल मुन्ने क पापा करेंगे पर तुम लोग भी तो बताओ अपना अपना.

नैना दीदी : मेरे ख्याल से तो कमल ठीक है ममी , मां क नाम से मैच करेगा और नाम

भी ाचा है.

करुणा दीदी : सही कहा , वैसे दीदी दीपक भी ठीक है ममी क नाम से. आखिर मुन्ने पर ज्यादा हक़ तो ममी का hi है न.

दीपिका ममी : दोनों hi ठीक हैं , नेहा तुम भी बताओ कुछ .

नेहा दीदी : मैंने तो कुछ सोचा नहीं ममी जी . आप राधा से hi पूछ लो.

दीपिका ममी : राधा तुम hi बताओ

राधा : निधि दीदी बताएंगी न , सब से बड़ी हैं हमारे बिच .

निधि दीदी : मेरा बस चले तो मैं मुन्ने का नाम भी अमित रख दूँ ताकि वो इसके जैसा बने . मगर ऐसा हो नहीं सकता हाँ अगर अमित की तरह ा सक्षर से नाम शुरू हो तो ाचा रहेगा.

राधा : आरव कैसा रहेगा दीदी ?

निधि दीदी : ये तो बहुत ाचा रहेगा, छोटा भी है और ा से शुरू हो रहा है .

दीपिका ममी : तुम क्या कहते हो ?

दीपिका ममी ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा.

अमित : राधा ने जो नाम रखा है वो दीदी को भी पसंद है और मुझे भी . बाकि सब से भी पुछलो आप .

नेहा दीदी : मुझे भी एहि पसंद है.

दीपिका ममी : और तुम दोनों को ?

नैना दीदी : हमें भी कोई ऐतराज़ नहीं जब सब को पसंद है .

करुणा दीदी : सही कहा. वैसे भी फाइनल तो मां को hi करना है न तो चॉइस क लिए आप हमारे नाम भी बता सकती हैं.

दीपिका ममी : ठीक है अब फाइनल कल Hi पता चलेगा क किसका पास हुआ.

मुन्ना को करुणा दीदी ने उठाया तो वो रोने लग गया . वो उसे दीपिका ममी को वापिस पकड़ने तो ममी ने उसे मेरी गॉड में थमा दिया . मेरी गॉड में आते hi वो चुप हो गया .

निधि दीदी : अरे वह मुन्ना तो अमित को अचे से पहचानता है . देखो कैसे चुप हो गया .

दीपिका ममी : पहचानेगा कैसे नहीं ? सबसे ज्यादा अमित hi तो प्यार करता है इसे. देख लेना बड़ा हो कर इसके जैसा hi बनेगा ये.

अभी मैं मुन्ने को खिला hi रहा था क उसने मेरे ऊपर धार मर दी और मेरी T-shirt गीली हो गयी. जिसे देख कर सब खिल खिला कर हसने लगे.

अमित : अरे अरे ये क्या कर दिया मुन्ने राजा.

राधा : लाइन इसे मुझे दे दो , तुम अपनी शर्ट बदल लो.

राधा ने मुन्ने को मेरे हाथों से अपनी गॉड में ले लिया. मैं उठ कर अपने कमरे में चला गया कपडे बदलने. मैंने जल्दी से अपनी T-shirt उतरी और अपनी अलमारी में से दूसरी T-shirt निकली तभी बर्तन गिरने की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी मैंने पलट कर देखा तो सामने माँ कड़ी थी और दूध का गिलास नीचे गिरा पड़ा था. माँ की आँखों से आंसू बहने लगे और रोटी हुई वो बोल पड़ी.

गौरी म : ये तेरे साथ क्या हुआ है ? किसने किया ये ?

मैं जल्दी में दरवाज़ा बंद करना भूल गया और शायद माँ ने मुझे कमरे में आते देखा होगा और शाम का दूध का गिलास देने आ गयी रोज़ की तरह . माँ रट हुए दौड़ कर मेरे गले आ लगी. और मेरे शरीर पर लगे वो सरे निशान छू कर देखने लगी. मैं नहीं चाहता था क माँ को ये सब पता चले पर मेरी छोटी सी लापरवाही से ये हो गया.

गौरी म : रट हुए ) किसने किया ये सब ? क्या हुआ है तेरे साथ ? तू कुछ बोलता क्यों नहीं ? तूने बताया क्यों नहीं ये क्या हुआ है तेरे साथ? बोल कुछ तो बोल , ये सब कैसे हुआ है?

अमित : शांत हो जाओ माँ प्लीज आप शांत हो जाओ. कुछ भी नहीं हुआ है . मैं सब बता दूंगा आपको पहले आप शांत हो जाओ.

गौरी म : शांत हो जॉन ? तेरे साथ इतना कुछ हो गया और तू मुझे शांत होने को कह रहा है ? तू तो मौसी क घर था न तो ये सब कैसे हुआ तेरे साथ ? उन्होंने भी कुछ बताया क्यों नहीं मुझे ? मेरे बचे क साथ इतनी निडरता किसने की ?

अमित : माँ प्लीज पहले आप शांत हो जाइये प्लीज वर्ण घर में सबको पता चल जायेगा. मैं नहीं चाहता क किसी को इस बात का पता चले. और मौसी को भी कुछ नहीं पता है.

गौरी म : तूने बताया क्यों नहीं किसी को ? आखिर ये कैसे हुआ है ? किसने किया है? तेरी इतनी बुरी हालत है और तू ऐसे सब क साथ हस्ता खेलता फिर रहा है. और कल रत ..... कैसी माँ हूँ मैं मुझे अपने बचे क दर्द का भी पता न चला ? तू इतनी तकलीफ में था और मैं बस अपने सुख क लिए तेरे साथ वो सब ... मैं बहुत बुरी हूँ . मुझे माँ कहलाने का कोई हक़ नहीं . तेरा दर्द मुझे नज़र क्यों नहीं आया. मैंने कितना गलत किया तेरे साथ

अमित : शह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शांत हो जाओ माँ . आप ने कुछ नहीं किया . वो सब मैंने अपनी ख़ुशी से किया था. और यकीन मनो माँ मैं बिलकुल ठीक हूँ. मुझे दर्द नहीं है . दवा ले रहा हूँ मैं. ये सब भी एक दो दिन में ठीक हो hi जायेगा. पर आप ये बिलकुल भी मत सोचना क आप ने कुछ गलत किया है. कल रत मेरे लिए सबसे अछि रत थी. आप दुनिया की सब से अछि माँ हो जिसने कभी मुझे कभी तेज़ धुप भी न लगने दी और हमेशा अपनी ममता क साये में रखा . मैं hi शायद ाचा बीटा नहीं बन पाया. और मैं चाहता हूँ आप हर जनम में मेरी माँ बने. आपको मेरी कसम आप ऐसा कुछ भी नहीं सोचेंगी.

गौरी म : इतना प्यार करता है तू मुझे ?

अमित : अपनी जान से भी ज्यादा. माँ क्या होती है ये मैंने आपको देख कर hi तो जाना है. अपनी माँ को तो मैंने कभी देखा hi नहीं. और जानती हो माँ जब आप साथ होती हैं तो मैं हर दर्द भूल जाता हूँ.

माँ ने मुझे कास का गले लगा लिया . मैं भी कुछ देर शांत खड़ा उनके गले से लगा रहा.

गौरी म : पहले मुझे सब सच सच बता ये सब कैसे हुआ तेरे साथ ? किसने किया ये ?

माँ को शांत देख मैंने उन्हें अपने साथ बीएड पर बिठाया और उन्हें अपने साथ हुए इस वाक्य को बता दिया. जिसे सुन कर माँ फिर से रोने लगी साथ hi इस बात पर गर्व भी करने लगी क मैंने इतना ाचा काम किया है.

गौरी म : तूने मेरा सर आज गर्व से ऊंचा कर दिया मेरे लाल. मैं कितनी भाग्यशाली हूँ क तू मेरा बीटा है .

अमित : माँ मैं जैसा भी हूँ मुझे ऐसा बनाने वाली आप hi तो हैं. गर्व तो मुझे खुद पर होता है क मैं आपका बीटा हूँ.

गौरी म : पर ये तुमने ाचा नहीं किया . तू इतनी तकलीफ में था तो मुझे बताया क्यों नहीं ऊपर से कल रत ....

अमित : कल रत तो मेरी ज़िन्दगी की सब से हसीं रत थी माँ. सच में , एक पल को भी मुझे अपने दर्द का कोई एहसास तक नहीं हुआ. और जो प्यार कल मैंने आपके साथ महसूस किया उसके बदले में तो मुझे ऐसे हज़ार ज़ख़्म भी मंज़ूर हैं .

गौरी म : शरमाते हुए ) मर खायेगा , बड़ा आया हज़ार ज़ख़्म खाने वाला. चल अब कपडे पेहेन. मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध लती हूँ.

अमित : आप नाराज़ तो नहीं हो न माँ?

गौरी म : तुझसे भल नाराज़ हो सकती हूँ मैं ? पर अब जब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता तब तक कुछ नहीं करने दूँगी तुझे .

अमित : ऐसा मत कहो माँ , मैं तो सोच रहा था आज रत ...

गौरी म : शरमाते हुए ) चुप , पहले अपनी हालत ठीक कर फिर मेरी हालत बिगड़ना .

इतना कह कर माँ शरमाते हुए तेज़ कदमो से बहार निकल गयी और मैंने T-shirt पेहेन ली. थोड़े बहुत हंसी मज़ाक और शर्तों क साथ मेरी सब बहनो ने घर में रौनक लगा राखी थी. और अब बड़े घर में लगी इस रौनक को देख कर खुश हो रहे थे. मगर इस सब क बीच कारन भैया अपने में hi मस्त रह कर पता नहीं कहाँ गायब थे. रत क खाने क वक़्त भी सब एक साथ बैठे तो बड़ा मज़ा आ रहा था बातें करते करते हुए खाने का. कमलेश मां तो बहार hi थे अपने दोस्तों को खुश करने क चक्कर में. कारन भैया भी खाने पर सबके साथ शामिल हो गए . खाने क बाद माँ सबको रत में कैसे सोना है बताने लगी और सबके लिए स्टोर से कम्बल वगैरह. निकलने क लिए कारन भाइये से कहने लगी .

गौरी म : कारन बीटा जा ज़रा स्टोर से कम्बल निकल ला . रत को यहाँ अब ठण्ड होने लगी है तो सबके लिए कम्बल निकल लो.

कारन भैया : ठीक है ममी जी

करना भैया ने ढीला सा मुँह बना कर अटपटे मन से हाँ कह तो दिया पर उनका जवाब बता रहा था क वो ये सब करना नहीं चाहते . मैं भी वहीँ था पर माँ ने शायद मेरी हालत को देखते हुए ऐसा कहा था.

अमित : अरे माँ मैं हूँ न , मैं निकल देता हूँ. आप भैया को क्यों परेशां कर रही हैं ?

इतना कह कर मैं स्टोर की तरफ जाने लगा तो रीता मौसी कड़ी हो गयी .

रीता मौसी : मैं आती हूँ तुम्हारे साथ.

मैं स्टोर रूम की तरफ गया जहाँ पर बिस्तर वगैरह और गेहूं वगैरह रखा रहता था घर क लिए. ये एक छोटा कमरे था सब से कार्नर में. मैंने दरवाज़ा खोल कर अंदर जैसे hi प्रवेश किया तो रीता मौसी ने मुझे धक्का दे कर दीवार से लगा लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . उन्होंने ये सब इतना अचानक किया क मुझे सँभालने का वक़्त hi न दिया. एक पल तो मैं हक्काबक्का सा यह गया पर फिर उनका साथ देते हुए उनके होंठ चूमने लगा और साथ hi अपने हाथ उनके चूतड़ों पर रख कर उन्हें मसलने लगा . मौसी बड़ी प्यासी लग रही थी . वो खुद hi मेरा हाथ अपने चुचों पर ले गयी और दबाने लगी. मेरे मुँह में अपनी जीभ दाल कर वो किश को और जोशीला बनती जा रही थी. मैं भी ज़ोर ज़ोर से उनके चुके और गांड मसलने लगा. सांस जब फूलने लगी तो उन्होंने होंठ अलग किये

रीता मौसी : हुह्ह्ह्ह हहहहहहह हहहहहह तुझे मेरा ज़रा भी ख्याल नहीं है न ?? हहहहह कितने दिन हो गए मेरे पास आये हुए ???? पता भी है क्या हालत है मेरी ?

अमित : हहहह हहहहह सॉरी मौसी पर आप तो जानती हैं मैं कहाँ बिजी रहा .

रीता मौसी : मेरा भी तो सोच न क मैं कैसे दिन काट रही हूँ. तेरे मौसा तो अब हाथ भी नहीं लगते और इतने दिन में सिर्फ 4 दिन hi घर रहे जिनमे वो मेरे पास भी नहीं आये . मेरी हालत भी तो समझ . वैसे भी तेरे साथ करने क बाद अब तेरे मौसा का तो पता भी नहीं चलता मुझे.

अमित : मौसी खुद पर थोड़ा कण्ट्रोल रखिये न आप . आपके घर रहने आ तो रहा हूँ मैं. फिर कर लेना आप अपनी मर्ज़ी और मुझे मेरा इनाम भी चाहिए इस बार.

रीता मौसी : इस बार कर लेना तुम पीछे से भी मन नहीं करुँगी पर पूरा हफ्ता रोज़ मुझे अचे से ठंडी करना टेक साडी आग बुझ जाये. ये आग अब सिर्फ तुम hi बुझा सकते हो

अमित : आप चिंता मत करो . बस खुद पर थोड़ा काबू रखो . यहाँ सब हैं अगर कोई आ गया तो क्या होगा?

रीता मौसी : तुम से बात करने hi तो यहाँ आयी हूँ अकेले में. मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा प्लीज आज रत कैसे भी कर क एक बार कर दे न .

अमित : नहीं मौसी आज रत नहीं . मेरी अपनी तबियत भी कुछ ठीक नहीं है आज . हम आपके घर करेंगे न . जितना आप कहोगी उतना करूँगा .

रीता मौसी : तब तक तो मैं मर जाउंगी . चल आज तू आराम कर ले पर कल कैसे भी कर क एक बार मेरी प्यास बुझा देना वर्ण कहीं मैं बीमार न पद जॉन . उम्मम्मम्म

इतना कह कर मौसी फिर से मुझे किश करने लगी और मैं भी उनके बूब्स और गांड ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. तभी बहार से मुझे चूड़ियों की आवाज़ आयी तो मैंने जल्दी से मौसी को अलग किया और लाइट जलने क लिए स्विच ढूंढने लगा

‘ ये इतना अँधेरा क्यों कर रखा है यहाँ ?‘

ये आवाज़ रजनी मौसी की थी .

अमित : वो मौसी जी लाइट में कोई प्रॉब्लम हो गयी थी बस अभी जला रहा हूँ .

मैंने जब तक लाइट जलाई रीता मौसी आगे को निकल गयी थी जहाँ बिस्तर पड़े थे. लाइट जलते hi स्टोर रूम में रौशनी हो गयी. रजनी मौसी मेरे पास आ गयी और एक नज़र मुझे गौर से देखने क बाद रीता मौसी क पास चली गयी .

रजनी मौसी: ला मैं तेरी मदद करती हूँ .

रजनी मौसी ने रीता मौसी क हाथ से कम्बल के लिया . रीता मौसी तो अभी तक खुद को hi दुरुस्त नहीं कर पायी थी. उनके बल कुछ बिखर गए थे और शायद होंठों की लिपस्टिक भी बिखर गयी होगी. सदी भी थोड़ी अस्त व्यस्त हो गयी थी. रजनी मौसी ने कुछ कम्बल खुद hi उठा कर मुझे दिए और ऊपर कमरे में छोड़ कर आने को कहा . मैं तो फ़ौरन कम्बल ले कर वहां से निकल गया.

रजनी ( मन में ) रीता अमित क साथ ये सब कर रही है . अपने hi बेटे जैसे अमित क साथ ? बातों से तो लग रहा है ये सब पहले से hi चल

रहा है . तभी यह पूछ रही थी क कोई भरोसे का मिले तो ? यानि एहि है भरोसे का लड़का ? छिन्न शर्म भी न आयी ये सब करते हुए . हमारा बीटा hi तो है वो. और उसने भी कैसे कर लिया ? ज़रूर रीता ने hi पहल की होगी. पर क्या ये सच में इतना आगे बाद चुके हैं ? मुझे पता लगाना होगा.

रीता : दीदी मैं ये ले कर जा रही हूँ आप देख लो अगर कुछ और भी चाहिए तो .

रजनी : हाँ ठीक है तू जा.

रीता जल्दी से नज़रें नीची कर क वहां से निकल गयी . रजनी रीता और अमित क बारे में कुछ देर सोचती रही और फिर वो भी वापिस सब के पास आ गयी .

इधर मैं तो घबराया हुआ छत पर जल्दी से कम्बल सरे कमरों में रख कर छत क कार्नर में जा कर अपने हालत ठीक करने लगा. मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था . आज तो मरते मरते बचे थे. अगर मौसी की चूड़ियों की आवाज़ सुनाई न देती तो मरे गए थे. छत क इस अँधेरे हिस्से में खड़ा मैं अपनी सोच में hi गम था क किसे में मुझे पीछे से गले लगा लिया. ये एक कोमल बदन था जो किसी लड़की का hi था और सांसो में घुल रही महक मुझे जनि पहचानी लगी. दिल की धड़कने एक डैम से शांत हो कर एक रिधम में चलने लगी जैसे उन्होंने पहचान लिया हो क ये कौन है. मैंने अपनी छाती पर कैसे उन कोमल हाथों पर अपने हाथ रखे तो वो मधुर आवाज़ मेरे कानो में पड़ी.

‘ मुझे तुम पर गर्व है . तुम ने जो कुछ भी किया उसके बाद तो ये दिल कह रहा है क तुम्हारी देवता की तरह पूजा करूँ . तुम कितने अचे हो . खुद तकलीफ में रह कर भी किसी को कुछ नहीं बताते और फिर भी सबके साथ हस्ते खेलते रहते हो . कैसे कर लेते हो तुम ये सब ? ‘

मैं तो किसी मायाजाल में hi खो सा गया था. राधा की आवाज़ और उसका एहसास मुझे किसी और hi दुनिया में ले गया था. मैंने उसके हाथों पर हाथ तो रखे थे क उसे अलग कर सकूँ पर उसकी आवाज़ सुनने क बाद मैं सब भूल गया और उसके कोमल हाथों पर अपने हाथ रखे बस इस एहसास में खो सा गया .

राधा : मुझे कभी खुद से दूर तो नहीं करोगे न ?

अमित : ऐसा भला हो सकता है क चांदनी चाँद से खुशबू फूल से दूर हो जाये ? मैं कभी भी तुमसे दूर हो hi नहीं सकता .

मैं पता नहीं किस मदहोशी में ये सब बोल रहा था. मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था और ऐसा अक्सर होता था जब राधा मेरे गले लग जाती थी. पता नहीं क्या कनेक्शन था हम दोनों क बीच . मेरे इस जवाब को सुन कर राधा की पकड़ और मजबूत हो गयी .

राधा : तुम्हे बहुत दर्द हो रहा होगा न?

अमित : कैसा दर्द ? तुम पास हो तो दर्द का एहसास हो नहीं होता मुझे.

राधा : पर मैं बहुत नाराज़ हूँ तुमसे. तुमने मुझे बताया क्यों नहीं क तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया ?

अब कहीं जा कर मेरा दिमाग थोड़ा सा होश में आया . मैंने राधा क हाथ अलग करते हुए उसे अपने सामने किया. राधा क चेहरे पर थोड़ी नाराज़गी क साथ आँखों में अलग hi चमक थी .

अमित : इस लिए क मैं जनता हूँ तुम खुद को रोक नहीं पायी हो मुझे तकलीफ में देख कर. और मैं तुम्हारी आँखों में आंसू देख नहीं सकता .

राधा : मुझे कुछ नहीं पता . तुम्हे मुझसे बताना चाहिए था. पता भी है मुझे कितना बुरा लग रहा है क सब को पता था सिवाए मेरे. ये कोई बात हुई ?

अमित : मैंने कहा न मैं तुम्हे दुःख नहीं देना चाहता था. और वैसे भी मैं बिलकुल ठीक हूँ

राधा : देखा मैंने कितने ठीक हो तुम. अब माँ hi बताएगी तुम्हे . मेरी तो परवाह करते नहीं तुम .

अमित : तुम्हारी hi तो परवाह करता हूँ सब से ज्यादा . और तुम ऐसा कह रही हो. ज़रा अपने दिल से तो पूछो.

मेरे इतना कहने से राधा शर्मा गयी.

‘ तो तुम दोनों यहाँ खड़े हो , मैं कब से ढूंढ रही हूँ तुम दोनों को’ निधि दीदी हमारे पास आते हे ये बोली .

राधा : वो दीदी हम बस बातें hi कर रहे थे

निधि दीदी : मैंने कुछ पूछा क तुम क्या कर रहे थे ? वैसे भी और क्या करोगे तुम दोनों हनन ? चलो अब सोने की तयारी करो ममी तुम्हे ढून्ढ रही हैं ज़रा उनकी बात सुन लो जा कर .

निधि दीदी ने मुझे माँ क बारे में बताया तो मैंने जल्दी से नीचे चला गया.

माँ क साथ दिव्या मौसी भी मौजूद थी इस वक़्त.

गौरी म : अमित , कारन तेरे कमरे में सो जायेगा आज रत . एक कमरे में रजनी दीदी और रीता सो जाएँगी. वहीँ पर दिव्या क लिए भी इंतज़ाम कर दिया है. दो कमरों में लड़कियां अपने हिसाब से सो जाएँगी. तुम एक बार सबको पूछ लेना किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो .

अमित : ठीक है माँ .

दिव्या मौसी : भाभी अगर मैं भी अमित वाले कमरे में hi बिस्तर लगवा लूँ तो ?

गौरी म : दोनों भाई आराम से सो जायेंगे वहां . और तुम तीनो बहने एक साथ रहना 100 बातें हो जाती हैं इतने दिनों बात सब एक साथ हैं .

दिव्या मौसी : उदास मन से ) ाचा ठीक है .

गौरी म : चलो अब जा कर सो जाओ . सुबह जल्दी उठ जाना . पंडित जी टाइम से आ जायेंगे फिर मंदिर भी जाना है पूजा वहीँ होगी .

अमित : ठीक है माँ . आप चिंता मत करो मैं जल्दी उठ जाऊंगा.

इतना कह कर मैं अपने कमरे में आ गया. जहाँ कारन भैया पहले से hi बीएड पर सोये पड़े थे. मुझे कमरे से शराब की स्मेल आयी पर मैंने गौर नहीं किया और कपडे बदलने क लिए अलमारी से कपडे. निकलने लगा तो वहां भी कपडे बिखरे हुए थे. मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया. वैसे भी मेरी अलमारी में कपड़ों क सिवा और तो कुछ होता नहीं था . मैंने अपने लिए लोअर T-shirt निकली और कपडे बदल कर कारन भैया क बगल में hi आराम से पसर गया .

कारन सोने की एक्टिंग कर रहा था जब अमित उसके पास आ कर लेट गया. कारन मन hi मन खुश हो रहा था. उसने आज अमित को सबकी नज़रों से गिराने क लिए एक चल चल दी थी जो कल सबके सामने उसे बुरी तरह से बदनाम करने वाली थी.



कारन ( मन में ) सब बड़ी तारीफ करते हैं न अब देखना ये hi सब तुझे जूते मरेंगे. फिर मज़ा आएगा. मेरी माँ ने तुम्हारी वजह से मुझ पर हाथ उठाया था न . अब देख सब कैसे तुझे कल जूतों से मरते हैं . अब कोई भी तेरी बात तक नहीं करेगा . साला मुझे सीखने चला था . अब पता चलेगा बाप कौन है .
 
अपडेट 163



सुबह जल्दी उठ कर मैं जल्दी से तैयार हो गया. माँ बाबा अजय मां कमलेश मां और दीपिका ममी भी जल्दी उठ कर तैयार होने में लग गए. कारन भैया को मैंने अपने साथ hi उठा लिया था. माँ ने पूजा का सामान मुझे मंदिर ले जाने को कहा. मैं जल्दी जल्दी में बिना दूध पिए hi मंदिर चला गया. मंदिर में पंडित जी ने अपने साथ मुझे लगा लिया पूजा की तयारी करने में.

इधर घर में कारन मौके की तलाश में था . अमित का मोबाइल उसने रत को hi अपनी साइड दबा लिया था जो अमित जल्दी में भूल hi गया. घर में अभी आड़े से ज्यादा लोग तो कमरों में hi सर रहे थे. गौरी ममी तयारी में लग गयी थी विजय मां बहार निकल गए थे. अजय मां भी सुबह का चक्कर लगाने खेतों में चले गए कामिनी ममी अपने कमरे में hi थी . कमलेश मां रत क नशे से अभी बहार नहीं आया था और कमरे में बचे क साथ लेता था. दीपिका ममी नाहा कर तैयार होने चली गयी. कारन अपना काम करने में लग गया जो उसने सोचा हुआ था. सारा काम वो पहले hi सेट कर लेना चाहता था ता की आराम से सब करने क बाद वो बिना अपने ऊपर बात आये अमित को फसा सके. बस सही मौके पर उसे उंगली hi करनी थी.

निधि भी जल्दी से उठ कर तैयार हो गयी. वैसे तो

ममी ने बोलै था क मंदिर में सबका जाना ज़रूरी नहीं पर फिर भी वो जाना चाहती थी इस पूजा में . निधि क साथ राधा भी उठ कर तैयार होने लगी. बाकि सब अभी सो hi रही थी इतनी जल्दी उठने की आदत जो नहीं थी किसी को.

निधि : अरे राधा तुम भी तैयार हो गयी ? तुम्हे क्या ज़रूरत थी ? आराम से उठती सबकी तरह. ममी जी ने कहा तो था सबका जाना ज़रूरी नहीं. वहां पर बड़े मां और ममी hi जायेंगे छोटे मां और ममी क साथ. फंक्शन तो बाद में घर पर hi होगा.

राधा : दीदी आप भी तो जा रही हैं न. वैसे भी माँ और बड़ी मौसी भी जा रही हैं तो मैंने सोचा मैं भी भगवन से आशीर्वाद ले लुंगी.

निधि : तुम तो बड़ी हो गयी गुड़िया . मुझे लगा था तुझे ये सब ाचा नहीं लगता होगा.

राधा : ाचा कैसे नहीं लगेगा दीदी ? उसी पर तो भरोसा है मुझे . वैसे भी ऐसे मौके रोज़ रोज़ कहाँ मिलते हैं.

निधि : सही कहा , वैसे आज तो बिलकुल पारी जैसी लग रही हो . ये सूट तो बहुत hi ाचा लग रहा है तुम पर

राधा : शरमाते हुए ) थैंक्स दीदी. ये अमित ने hi दिलाया था.

निधि : सच !! ये तो बहुत ाचा है. और तुम पर और भी ाचा लग रहा है. चल तुम मौसी को देखो ज़रा मैं नीचे ममी क पास जा रही हूँ . सबको चाय भी तो पिलानी पड़ेगी, ममी अकेले hi लगी होंगी.

इतना कह कर निधि निचे चली गयी और राधा अपनी माँ क कमरे में. गौरी जल्दी से जल्दी से मंदिर जाने क लिए ज़रूरी चीज़ें देख रही थी और अभी सबको जाने से पहले चाय भी तो पिलानी थी. वैसे तो पूजा क लिए ज़रूरी सामान भेज दिया था अमित क हाथ पर और भी कुछ चीज़ें थी साथ में जो चाहिए थी वहां पर .

निधि : गुड मॉर्निंग ममी जी साडी तयारी हो गयी ?

गौरी म : अरे तुम उठ गयी बीटा ? तुम्हे क्या ज़रूरत थी इतनी जल्दी उठने की?

निधि : मैं भी मंदिर जाने वाली हूँ आपके साथ.

गौरी म : ये तो अछि बात है.

निधि : ममी जी ये अमित कहाँ है ? कमरे में भी नहीं और यहाँ भी नज़र नहीं आ रहा. कारन भी कमरे में नहीं है .

गौरी म : अमित तो कब का मंदिर चला गया पूजा का सामान लेकर . अभी तक आया नहीं शायद पंडित जी ने रोक लिया होगा. कारन का मुझे पता नहीं . तू बैठ मैं ज़रा चाय बना लूँ. मंदिर जाने वाले सब उठ कर तैयार हो रहे हैं. जाने से पहले काम से काम चाय तो पीला दूँ वर्ण वहां 1-2 घंटे लग जायेंगे और तब तक भूखे रहना पड़ेगा.

निधि : मैं इसी लिए तो आयी हूँ. आप अपना काम कीजिये चाय मैं बना देती हूँ

गौरी म : अरे नहीं बेटी मैं बनती हूँ तू बैठ. तुझ से भला काम करवाउंगी मैं?

निधि : ये कह कर पराया मत करो ममी जी. बेटी भी कहती हैं और काम भी नहीं करने देती .

गौरी म : ाचा ठीक है करले अपनी मर्जी.

निधि चाय बना कर सबको देने लगी . कामिनी ममी भी उठ चुकी थी. अजय मां अभी बहार थे. दीपिका ममी और कमलेश मां भी तैयार हो चुके थे लगभग . ऊपर जब गयी तो उसकी माँ और दिव्या मौसी भी तैयार थी. रीता मौसी भी तैयार हो रही थी . राधा भी वहीँ बैठी थी. अपनी बेटी को इस तरह सुबह सुबह तैयार देख कर और चाय लेकर अति देख रजनी को बड़ा ाचा लगा था. उसकी बेटी कितनी समझदार थी जो इतनी जल्दी उठ कर खुद hi काम करने लग गयी ज़रूरत को देखते हुए जबकि बाकि सब अभी सो hi रही थी .

दिव्या : ये मेरी सबसे समझदार बेटी. देखो बिना कहे hi सब कर रही है . सच में दीदी निधि आप पर hi गयी है. हर बात का खुद hi ख्याल रखती है. भगवन करे इसे ऐसा लड़का मिले जो इसे हमेशा खुश रखे.

रजनी : सच कहूं दिव्या तो मुझे भी निधि पर गर्व होता है जिस तरह ये खुद hi सब देखती है घर भी और जॉब भी . मेरे पता नहीं कौन से पुण्य करम का फल है ये मेरी बेटी .

निधि अपनी माँ और मौसी की बातों पर मुस्कुरा रही थी. और शर्मा भी रही थी. मगर मौसी की बात सुन कर दिल में अमित क नाम की hi घंटियां बजने लगी थी.

दिव्या : देखो कैसे शर्मा रही है. दीदी भी बिलकुल तेरे जैसी hi थी शादी से पहले. बस इतना फरक है क तुम्हारी तरह इन्होने जॉब नहीं की . वर्ण तुम पूरी कॉपी हो दीदी की. और देख लेना तेरे लिए कोई राजकुमार hi आएगा. मैं तो चाहती हूँ राधा भी तुम्हारे जैसी hi बने

राधा : मैं दीदी जैसे कैसे बन सकती हूँ माँ ? दीदी तो सब से अछि हैं. और इनके जैसे कोई भी नहीं बन सकता.

इतना कह कर राधा निधि क गले लग गयी

निधि : तू भी सब से प्यारी है . देख लेना मौसी राधा क लिए भी कोई राजकुमार hi आएगा. इसके लिए तो आपको लड़का ढूंढने की भी ज़रूरत नहीं पड़ने वाली .

राधा : मेरे लिए तो माँ को लड़का देखने की ज़रूरत है भी नहीं दीदी. पर आपके लिए भी रिश्ता खुद चल क आएगा देख लेना आप.

राधा की इस बात पर सब हसने लगे पर दिव्या राधा की बात में छिपे मतलब को समझ गयी थी. चेहरे पर मुस्कान लिए वो राधा को hi देख रही थी. राधा अब अमित को किस हद तक अपना समझने लगी है दिव्या ये साफ महसूस कर रही थी.

रीता : सुबह सुबह किसके रिश्ते की बात हो रही है भाई मुझे भी बताओ.

नाहा धो कर तैयार हो कर कमरे में आते हुए रीता ने पुछा.

दिव्या : निधि की बात कर रहे थे हम सब. देखो चाय बना कर लायी है सबके लिए.

रीता : ये तो है hi सब से समझदार काश मेरी करुणा भी इस जैसी बन जाये तो कितना ाचा हो. नेहा तो इसके जैसी hi है बस अभी पढ़ाई में लगी है.

दिव्या : करुणा भी बहुत प्यारी बेटी है दीदी बस उसमे थोड़ा बचपना है अभी. समझदार तो वो भी बहुत है.

निधि : ठीक कहा मौसी , नैना और करुणा में बचपना है बस मगर दोनों समझदार हैं.

बातों बातों में चाय ख़तम करने क बाद सब नीचे आ गयी. नेहा को रीता ने बाकि सब क ध्यान रखने को कह दिया था. करुणा नैना अभी सो रही थी और कामिनी भी घर पर hi रुकने वाली थी. सब अजय को भी विजय ने घर पर रुकने को कह दिया ताकि पीछे भी ध्यान रहे और सब काम सही से निबट सकें. अमित अभी भी मंदिर में hi था. कारन कमलेश मां क साथ उनका सामान ले कर बातें करता हुआ चल रहा था. सब पैदल hi मंदिर पहुँच गए जहाँ पूजा होनी थी. अमित ने पंडित क साथ सारा सामान सेट कर दिया था पूजा क लिए. सब ने पहले मंदिर में माथा टेका . निधि तो अंदर से बहुत खुश थी मंदिर आ कर . उसकी मनोकामना पूरी होने का सिग्नल जो मिला था यहीं पर. निधि और राधा दोनों hi चमक रही थी. राधा ने तो अमित क दिलाते हुए कपड़ों में hi चमक रही थी वहीँ निधि भी आज स्पेशल सूट पहने खूबसूरती की मिसाल लग रही थी . निधि और राधा ने जब अमित को देखा तो वो भी देखती रह गयी. आज मंदिर में पूजा क लिए गौरी ने उसे कुरता पाजामा सिल्वा कर दिया था पहनने क लिए जो उस पर बहुत जाँच रहा था. माथे पर तिलक लगाए इस सफ़ेद पोषक में में वो हीरो लग रहा था. पूजा क लिए पंडित जी ने हवन कुंड क पास कमलेश और दीपिका को सबसे आगे बिठाया . मुन्ना दीपिका की गॉड में था. दीपिका चाहती थी क मुन्ने का असली बाप उसके साथ रहे इस लिए उसने अमित को अपने पास hi बिठा लिया. गौरी तो सब जानती थी इस लिए वो भी खुश थी जबकि रीता भी खुश हो रही थी ये देख कर. अमित क पीछे hi राधा और निधि दोनों साथ साथ बैठी थी. कमलेश क एक तरफ विजय और गौरी भी बैठ गए और रजनी रीता दिव्या उनके पीछे. कारन पूजा में बैठने की बजाये इधर उधर टहल रहा था. लगभग डेढ़ घंटा इस हवन और पूजा में लगा और फिर पंडित जी ने लड़के क लिए ज्योतिष क हिसाब से कुछ नाम बताये. उसके इलावा उसने अपनी पसंद का नाम भी रखने की बात की तो बिना कमलेश की परवाह किये दीपिका झट से बोल उठी .

दीपिका म: पंडित जी मुन्ने का नाम आरव रखा है मैंने. और मुझे यकीन है क किसी को ऐतराज़ नहीं होगा.

कमलेश तो बस बेटे क hi चौ में हर बात मन जाता था और बाकि सब ने भी इस नाम पर समर्थन दे दिया .

गौरी म : बहुत hi ाचा नाम है अब से हम मुन्ने को आरव hi कहेंगे .

मुन्ने का नाम आरव सुन कर राधा अंदर से बहुत खुश थी. क्यूंकि अमित ने उसे पहले hi कहा था क जो वो कहेगी मुन्ने क वही नाम होगा. उसने प्यार से अमित की तरफ देखा जो मुन्ने की तरफ देख रहा था . निधि को भी ये नाम पसंद था तो उसे भी दिल से ख़ुशी हुई क जो नाम उन सब ने सेलेक्ट किया था वही नाम रखा गया मुन्ने का.

पंडित जी : अब लड़के को उसके पिता की गॉड में देकर उसे ये गंगा जल पिलाइये

कमलेश ने आरव को गॉड में लिया और उसे गंगा जल पीला दिया. दीपिका तो अमित क हाथों से सरे करम काण्ड करवाना चाहती थी.

दीपिका म : जी सुनिए मैं चाहती हूँ क आरव बड़ा हो कर हमारे अमित जैसा समझदार और पहलवान बने . तो क्यों न अमित क हाथों भी आरव को गंगा जल पीला दें.

कमलेश : हाँ हाँ क्यों नहीं जैसा तुम कहो .

कमलेश की सहमति मिलते hi दीपिका ने आरव को अमित को गॉड में दाल दिया और उसने अपने हाथ से अपने बेटे को गंगा जल पिलाया. दीपिका का मन इतने से hi संतुष्ट हो गया था . जबकि गौरी और रीता तो दीपिका इस हिम्मत पर हैरान थी. राधा और निधि भी अमित की इस तारीफ पर खुश हो रही थी. मगर अमित ने वो कर दिया जिससे दीपिका की आँखों में आंसू hi आ गए. अमित ने गले से सोने की चैन उतर कर आरव क गले में दाल दी. सभी अमित की इस हरकत पर खुश हो रहे थे मगर गौरी और रीता कुछ ज्यादा hi खुश थी. अमित का प्यार देख कर . जैसे तैसे पूजा समाप्त हुई तो पंडित जो को दान दक्षिणा देने क बाद विजय और कमलेश मंदिर क पास में hi लगे पंडाल में चले गए जहाँ पर गाओं वालों क लिए भोजन की व्यवस्था की गयी थी. भोजन अभी बन रहा था और गाओं वालों ने भी दोपहर का भोजन करना था तो अभी टाइम था उसमे इस लिए सब घर वापिस आ गए. अब तक नैना करुणा भी उठ कर तैयार हो चुकी थी आज सब ने अचे अचे कपडे पहने थे. अमित को देख कर नैना और करूँ की आँखों में खास चमक आ गयी थी. जब सब मिल कर बैठे तो मंदिर का सारा किस्सा सुनाने लगे . कामिनी भी खुश हो रही थी सुन कर जो अमित ने किया था आज.

नैना दीदी : ोये हीरो तेरा फ़ोन कहाँ है ? कल्पना का अभी फ़ोन आया था वो सब पहुँचने वाले हैं. तुझे फ़ोन कर रहे थे और तू फ़ोन नहीं उठा रहा.

अमित : वो दीदी जल्दी में फ़ोन घर hi भूल गया था. कमरे में पड़ा होगा .

नैना दीदी : ये राधा भी नहीं लेकर गयी थी . वो सब कितना परेशां हो रहे थे. रास्ता पूछने क लिए .

अमित : पर मोहित को पता होगा न वो पहले आ चूका है.

नैना दीदी : वो अलग आ रहा है अपनी फॅमिली क साथ.

‘ आ रहा नहीं आ गया हूँ दीदी ‘ मैं पलट कर देखा तो सामने से मोहित चलता हुआ मेरे गले लग गया . पीछे पीछे hi अंकल आंटी भी थे जो सब से गले मिल रहे थे. उनके साथ hi एक खूबसूरत लड़की भी थी जो देखने में बिलकुल आंटी जैसी थी दूध सी रंगत और खूबसूरती में उनसे भी एक कदम आगे. छरहरी काया सलीके से पहने दिसिगनेर सूट में वो सिंपल रह कर भी अकृषक लग रही थी. मैं देखते hi समझ गया क ये करिश्मा है मोहित की बड़ी बहिन. वैसे भी एक बार तस्वीर देख चूका था मैं.

विजय : अरे इतनी देर कर दी आने में , मुझे लगा था तुम तो पूजा से पहले hi आ जाओगे

राघव : आ तो जाता भैया पर आप तो जानते hi हैं. होम मिनिस्टर क बगैर हम चल नहीं सकते

रमा : देखा दीदी आते hi साडी बात मेरे पर दाल दी जैसे मैंने hi लेट करवाया हो. खुद hi भूल गए थे अपना ज़रूरी सामान और अब मुझे कह रहे हैं.

रमा ने गौरी से गले मिल कर नखरे से ये कहा.

गौरी : तू छोड़ इनको , सब मर्द एक जैसे hi होते हैं. मुझे बहुत ख़ुशी है क तुम लोग पहुँच गए टाइम से. अभी मंदिर से पूजा करवा कर hi आ रहे हैं. अरे ये फूल सी गुड़िया कहीं करिश्मा तो नहीं ?

रमा : हाँ दीदी यही है करिश्मा . करिश्मा पहचाना इनको? दामिनी चची क भैया भाभी हैं ये . आओ इनसे मिलो .

करिश्मा आगे आयी तो गौरी ने करिश्मा का माथा चूमते हुए उसे गले से लगा लिया. करिश्मा भी गौरी से गले लग कर मिली. रमा रजनी रीता और दिव्या से बरी बरी से मिली . ऐसे hi करिश्मा भी उनसे बरी बरी मिली और उनसे प्यार लिया . जब वो दिव्या क सामने आयी तो करिश्मा की आँखों में आंसू आ गए.

दिव्या : क्या हुआ बेटी तुम्हारी आँखों में आंसू क्यों आ गए ?

करिश्मा : इतने सैलून बाद आज दामिनी चची को hi अपने सामने देख कर ये अपने आप ये निकल आये मौसी.

दिव्या की आँखों में भी आंसू आ गए और उसने कास क करिश्मा को गले से लगा लिया . दोनों hi रोने लगी थी . रीता ने दोनों को अलग करते हुए दोनों को शांत किया .

रीता : आज ख़ुशी का मौका है और तुम दोनों रो रही हो. चलो बैठो आराम से यहाँ पर . करुणा इनके लिए ठण्ड लाओ इतनी दूर से आ रहे हैं .

करिश्मा : नहीं मौसी सब ठीक है किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है.

निधि : ज़रूरत कैसे नहीं है? ऋषिमा इतनी दूर से आयी है तो ठंडा कैसे नहीं पीयेगी ? ो सॉरी सॉरी ऋषिमा का तो आइस क्रीम चाहिए या वो बारात वाला गोला.

करिश्मा: आप ??

निधि : नहीं पहचाना न ? पहचानोगी भी कैसे अब तो तुम वो छोटी बची नहीं रही न जो मेरे साथ कुल्फी लेने जाती थी.

करिश्मा : निधि दीदी ???

निधि : हाँ निधि

करिश्मा ज़ोर से गले लग कर मिली निधि से . दोनों को बचपन की कुछ यादें अभी भी यद् थी. निधि क इस तरह करिश्मा क गले लगने से अब नैना और नेहा भी आ कर करिश्मा से मिली करिश्मा उनको भी पहचान गयी जब निधि ने उनके बारे में बताया इसी तरह करुणा क बारे में भी उसने बता दिया. बचपन में सब साथ खेला करते थे जब कभी दामिनी क घर जाना होता था सब बहनो का. राघव तो पवन क भाई सामान hi था तो दोनों में फरक नहीं था. करिश्मा का चेहरा जो कुछ देर पहले मुरझाया हुआ था वो अब खुल चूका था. जैसे वो अपने सरे गम यहाँ आते hi भूल गयी थी. रमा अपनी बेटी को खुश देख कर hi खुश हो रही थी. इधर मोहित भी बरी बरी से मिला सब से . अमित भी राघव और रमा से मिला तो रमा उसे करिश्मा क सामने ले आयी .

रमा : करिश्मा पहचानो तो भला ये कौन है .

करिश्मा अपने सामने खड़े इस 6 फ़ीट क लम्बे चोदे किसी फ़िल्मी हीरो जैसे लड़के को देख कर हैरान हो रही थी. मजबूत कंधे चौड़ा सीना दमदार बाजु . सफ़ेद कुर्ते पाजामे में एक मॉडल hi लग रहा था. करिश्मा उसे गौर से देखने लगी . अंदाज़ा तो उसे था hi क अमित से मुलाकात होगी पर यहाँ कारन भी था तो उसे पता नहीं था दोनों में से अमित कौन है . पर जब उसने चेहरे और आँखों को गौर से देखा तो पहचान गयी .

करिश्मा : अमित !!!!!

उछलती हुई करिश्मा दीदी मेरे गले से लग गयी. कुछ देर वो ऐसे hi मेरे गले लगी रही. जब मुझे अपने कंधे पर गीलापन महसूस हुआ तो मैंने उनको पीछे कर के उनका चेहरा देखा जो आंसुओं से भरा हुआ था.

अमित : ये क्या दीदी ? पहली बार आप मुझसे मिल रही हैं और रोने लगी ?

करिश्मा : ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. मैं आज बहुत खुश हूँ. तुम नहीं जानते मैं बचपन से hi तुम्हे कितना यद् करती रही हूँ. मेरे लिए तुम और मोहित दोनों hi मेरे सेज भाई थे. और जब चाचा चची क साथ तुम्हारे जाने का सुना था तो एक डैम से जैसे दुनिया hi बदल गयी थी मेरी. पापा भी तो अक्सर रट रहते थे चाचा को यद् कर क. जब माँ ने बताया था क तुम वापिस आ गए हो तो मुझे यकीन hi नहीं हुआ. मैं तो उसी पल उड़ कर तुम्हारे पास आ जाना चाहती थी तुम्हे एक बार देखने क लिए .

अमित : तो फिर आयी क्यों नहीं ? आप तो रखा दी पर भी नहीं आयी .

करिश्मा : वो वो कुछ ज़रूरी काम आ गया था.

मैं जनता था क वो झूठा बहाना कर रही हैं पर मैंने ज्यादा बात नहीं खींची.

करिश्मा : वैसे तुम तो चाचा से भी लम्बे हो गए हो और एक डैम पहलवान. शकल चाचा पर है पर ऑंखें चची पर. बड़ी तारीफ सुनी है माँ से तुम्हारी . अब लग रहा है क माँ ने भी काम hi बताया था.

निधि दीदी : इसे पहचानती हो ?

निधि ने राधा को करिश्मा दीदी क सामने कर दिया .

करिश्मा : हम्म्म देखने में फूलों सी नाज़ुक और खूबसूरती में दिव्या मौसी जैसी. शर्माना भी वैसा hi है , ज़रूर ये हमारी माँ की गुड़िया है राधा .

राधा करिश्मा दीदी की बातों से शर्मा रही थी पर करिश्मा दीदी ने उसे गले से लगा लिया. फिर बाबा अजय मां और कमलेश मम भी मोहित और करिश्मा दीदी से मिले . मोहित मेरे पास आ गया.

मोहित : अबे तू फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा था? चल जल्दी वो सब आ गए हैं फ़ोन आ रहा है मीनल का.

हम दोनों फटाफट बाइक ले कर शहर से गाओं आने वाले रस्ते पर पहुँच गए सामने से दो कार्स आ रही थी एक शीना की और एक कल्पना की. मैंने उन्हें पीछे आने का इशारा किया और उन्हें घर तक ले आया. घर क सामने आ कर जब दोनों कार्स रुकी तो एक में से शीना शिवानी रीमा और मीनल निकली जबकि दूसरे में से कल्पना और शालू . सब की सब आज ब्यूटी कांटेस्ट में शामिल होने आयी लग रही थी. मेकअप भी अचे से किया हुआ था और कपडे भी ऐसे जैसे शादी पर आयी हो. मगर एक बात थी क सबने आज इंडियन ड्रेस hi पहनी थी. आज तो कल्पना क बल भी सलीके से स्ट्रैट किये हुए थे जो हमेशा रबर बंद में बंधे रहते थे. पर मेरी नज़र तो बस रीमा पर hi थी . क्या लग रही थी वो . हलके कर्ली ब्रोनिश बाल झील सी ऑंखें चंडी सा रंग . मैं तो उसमे खो सा गया था. एक नज़र उसने भी मुझे देखा पर उसकी नज़रों में कुछ नाराज़गी थी .

कल्पना : घर बुला कर क्या बहार hi खड़े रखना है अब?

अमित : ो सॉरी सॉरी आओ अंदर आओ.

शीना : बहुत अचे लग रहे हो इन कपड़ों में.

अमित : तुम भी .

शिवानी : आज तो अलग hi लुक लग रही है तुम्हारी.

अमित : थैंक्स

मीनल मोहित क साथ hi अंदर चल दी. सबसे पीछे अब शालू रह गयी थी. मुझे देख कर उसके चेहरे पर दर्द क भाव आ गए थे.

अमित : क्या हुआ शालू तुम ऐसे ? कोई बात है क्या ?

शालू : तुम ठीक तो हो न ?

अमित : हाँ , मुझे क्या होगा ?

शालू : मुझे सब पता चल गया है. मेरे सरे दुःख दर्द तो तुमने दूर कर दिए . अपनी बरी आयी तो सब छुपा लिया.

अमित : ऐसा कुछ भी नहीं है. वो सब एक हादसा था और मैं बिलकुल ठीक हूँ प्लीज तुम ऐसा मत सोचो . घर पर फंक्शन न होता तो तुम्हे सबसे पहले बताता . अब मुस्कुराओ और चलो अंदर. तुम्हे सब से मिलवाता हूँ.

कारन आँगन में hi करिश्मा को देख रहा था जब बहार से परियों का तौला अंदर दाखिल हुआ . सबसे आगे तो वही थी जिसने कारन की गांड कूट दी थी ‘ कल्पना ‘ कारन ने सोचा था क वो बदला लेगा पर जब पता चला क वो दस की बेटी है तो इरादा अपने आप hi बदल गया . कल्पना आज सच में खूबसूरत लग रही थी कारन ने उसे एक नज़र देखा पर उसने तो कारन की तरफ देख hi नहीं और सीधा आगे बढ़ गयी. उसके पीछे hi जब शीना दाखिल हुई तो कारन की लार टपकाने लगी ऊपर से भी नीचे से भी. शीना भी आज ब्यूटी क्वीन hi लग रही थी. लगे भी क्यों न वो तो अमित को hi रिझाने आयी थी यहाँ. दूध सा सफ़ेद बदन और ज़बरदस्त फिगर क साथ ऊँची एड़ी क सेंडल पहने वो कैट वाक करती एक तरफ से बाल कण क पीछे करती आ रही थी . अभी कारन इस जलवे को देख क उभरा hi नहीं था क शीना क पीछे चलती फिरती साक्षात् पारी ( रीमा ) को देख कर तो कारन का मुँह खुला का खुला hi रह गया. और उसके पीछे पीछे शालू शिवानी भी अपने आप में कलम थी. शालू की फिगर तो सब से ज्यादा गदरायी हुई थी और कारन भी उसके एसेट्स को hi देख रहा था. सब की सब अमित की दोस्त हैं ये देख कर तो कारन की झांटें hi सुलग गयी . कहाँ उसे इस शहर में आ कर एक लड़की नसीब नहीं हुई थी अभी तक और यहाँ अमित तो परियों में रह रहा था . कारन का खुराफाती दिमाग अब नई सोच में पद गया क किस तरह वो इन परियों क झुण्ड में शामिल हो . उसने देखा क सब लड़कियां निधि दीदी नैना नेहा करुणा से गले मिल रही हैं तो उसे उम्मीद की किरण दिखाई दी.

निधि : वह आज तो लगता है शहर की साडी रौनक हमारे गाओं में hi आ गयी है.

निधि ने सबका स्वागत करते हुए कहा तो कल्पना उनसे गले लग कर मिली.

कल्पना : हमने सोचा आज गाओं की ठंडी हवा में भी आग लगा hi देते हैं इसी लिए अपने साथ एक से एक बम लेकर आयी हूँ हे हे हे

कल्पना का अंदाज़ अलग hi था. निधि क चेहरे पर भी ख़ुशी आ गयी थी कल्पना से गले मिलते हुए.

निधि : थैंक्स कल्पना तुमने जो अमित क लिए .....

कल्पना : नहीं दीदी , थैंक्स नहीं. हे डेसेर्वे आईटी . मुझे तो अफ़सोस है क उसकी मदद क लिए गयी पुलिस ने उसके साथ वो सब .

निधि : जो भी है अगर तुम न होती तो पता नहीं क्या होता उसके साथ

कल्पना : कुछ नहीं होने दूंगी उसे मैं. पता है दीदी आपका भाई न खुद hi मुश्किलों में जा कर सर फसा लेता है पर जैसा भी है अपने आप में वो अकेला hi है . पापा भी अब तो उसकी hi बात करते हैं क कितना बहादुर है वो.

निधि : चल आ बैठ मैं तेरे लिए कुछ लेकर आयी.

कल्पना : आप बैठो , मैं मेहमान थोड़ा hi हूँ कोई. अपना घर समझ कर आयी हूँ यहाँ

करुणा : हस्ते हुए ) कैसी हो पार्टनर ? सुना है तेरे पापा शहर क सब से बड़े डॉन हैं

कल्पना : हे हे हे डॉन नहीं दीदी दस हैं. कैसी हैं आप ?

करुणा : मैं तो फिट हूँ हमेशा की तरह . पर तू तो आज कमल hi लग रही है यार. आज तो फाइटर से ब्यूटी क्वीन बन गयी .

कल्पना : शरमाते हुए ) क्या दीदी , ब्यूटी क्वीन तो आप और निधि दीदी लग रही हैं .

शीना : hi दीदी कैसी हैं आप ?

निधि : अछि हूँ और तुम सब को देख कर और भी अछि हो गयी हूँ. एंड शीना थैंक्स तुमने जो अमित क लिए किया वो .....

शीना : ऐसा कह कर शर्मिंदा न करें दीदी. उसके लिए तो कुछ भी करूँ वो काम hi है . आप छोड़िये उस बात को.

करुणा : वैसे शीना यार तुम तो आज चलती फिरती आग hi बानी हुई हो .

शीना : शरमाते हुए ) क्या यार अब मेरी भी टांग खींचोगी तुम

नैना : सही कह रही है ये , तुम वाकई में आज आग लगाने hi आयी हो यहाँ . मैं लड़का होती तो आज तुम्हे उठा hi लेती .

शीना : इतनी भी कुछ खास नहीं हूँ . आप तीनो तो मुझसे भी ज्यादा सुन्दर हैं.

रीमा : नमस्ते दीदी

निधि : अरे वह आज तो लग रहा है सीधा स्वर्ग से उतर कर पारी मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी है. कितनी प्यारी लग रही हो. नज़र न लगे किसी की तुम्हे.

रीमा : शरमाते हुए ) आप से तो काम hi हूँ दीदी. सबसे प्यारी आप hi हैं.

करुणा : तुम इधर आओ रीमा डार्लिंग. तुम मेरी गफ हो

करुणा ने रीमा को खिंच कर अपने गले लगा लिया. रीमा तो शर्मा गयी जबकि बाकि सब हसने लगे

नैना : कण्ट्रोल करो ज़रा खुद पर करुणा की बची . ये शहर नहीं गाओं है और हम सब घर में हैं.

करुणा : तो क्या है ये मेरी डार्लिंग है. इसे तो मैं नहीं छोड़ने वाली.

शिवानी भी बरी बरी से तीनो से मिली. उधर से कारन मौके की तलाश में था पर कल्पना की वजह से वो रुका हुआ था . तभी गौरी वहां आ गयी . कल्पना भी गौरी को देख कर जल्दी से उसकी तरफ बढ़ गयी.

कल्पना : कैसी हैं आंटी

गौरी ने भी कल्पना को कास क गले से लगा लिया और उसका माथा चूमा. अमित से कल्पना क बारे में सुन कर वो कल्पना से खुद मिलना छह रही थी उसका शुक्रिया ऐडा करने क लिए. इस लिए वो इतने जोश और प्यार से मिल रही थी .

गौरी : जीती रही मेरी बची . मैं बता नहीं सकती मैं कितनी खुश हूँ तुम्हे अपने सामने देख कर . मैं कब से तुमसे मिलना छह रही थी. तुमने जो अमित क लिए किया मैं उसका एहसान कैसे चुकाऊँगी.

कल्पना : ऐसा कह कर मुझे पराया मत करो आंटी . वो मेरा बहुत अच्छा दोस्त है. और फिर वो भी तो सबकी मदद करता है और मेरी भी की है उसने.

गौरी : सच में तुम बहुत अछि हो. आओ बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ

कल्पना : नहीं आंटी आप बस पास में बैठिये , यहाँ हम सेवा करवाने नहीं आये बस आप सब से मिलने आये हैं .

कल्पना और गौरी को आपस में बातें करते देख कारन बाकि सब क पास पहुँच गया .

कारन : अरे दीदी मुझे नहीं मिलवाएंगी इन सब से? इन्हे पहले कभी नहीं देखा ?

निधि : शीना शिवानी रीमा शालू ये है मेरा छोटा भाई कारन. कारन ये सब अमित की फ्रेंड्स हैं.

कारन ने उनसे हाथ मिलाना चाहा तो पहले hi सब ने हाथ जोड़ दिए. उधर से नेहा और राधा भी आ गए .

नेहा : दीदी ये सिर्फ अमित की hi नहीं हमारी भी दोस्त हैं.

शीना सबसे पहले गले लग कर मिली नेहा से . ऐसे hi नेहा और राधा उन चरों से मिली. कारन किसी तरीके इन सब से बात करना छह रहा था पर नेहा सबको घर वालों से मिलाने का कह कर आगे बढ़ गयी और गौरी क पास ले गयी . कारन वहां अकेला hi खड़ा रह गया मन में गालियां बकता हुआ. एक एक कर क पूरी फॅमिली से इन सब लड़कियों को मिलवा दिया घर की लड़कियों ने. राधा तो रीमा का हाथ पकड़ कर hi चल रही थी . दोनों में अछि बॉन्डिंग बन चुकी थी पिछले कुछ समय में जब से रीमा को अमित ने फिर से बुलाना शुरू किया था . राधा को भी पता था क रीमा ने hi उसकी मदद की थी और फिर वो थी भी तो अछि . इसके इलावा डॉ रीना भी उसकी बहना थी जो अमित क इतने काम अति थी. इन लड़कियों से मिल कर सब से ज्यादा खुश दिव्या हुई. खास कर क कल्पना से मिल कर. दिव्या ने भी कल्पना को शुक्रिया कहा और साथ hi उसका माथा चूम कर उसे प्यार दिया.

टाइम 11 से ऊपर हो गया था तो अजय और विजय अमित को साथ लिए उधर चले गए जहाँ फंक्शन रखा गया था. गाओं वाले आने शुरू हो गए थे तो सबके लिए खाना शुरू करवा दिया गया . इधर घर में अभी सभी लेडीज और लड़कियां आपस में लगी हुई थी. राधा ने रीमा को अपने साथ hi रख लिया था. निधि बड़ी होने क नाते सबको समय दे रही थी. नैना और करुणा ने बाकि सब को साथ बंधा हुआ था . कारन मोके की तलाश में मारा मारा फिर रहा था. नेहा कारन को मौका नहीं दे रही थी किसी क पास आने का क्यूंकि वो जानती थी कारन क इरादे ठीक नहीं हैं. मीनल मोहित से मिलने की फ़िराक में थी तो मोहित भी नज़र बचा कर घर से निकल गया मीनल को पीछे आने का इशारा कर क. कार तो थी hi मोहित क पास तो वो मीनल को साथ लिए निकल गया कहीं अकेले में टाइम बिताने क लिए .

राधा रीमा क साथ आरव को खिलने लगी. दीपिका भी इस पारी जैसी लड़की को देख रही थी. पता तो उसे भी था क रीमा को अमित पसंद करता है. राधा और रीमा दोनों एक जैसी लग रही थी मगर रीमा के कर्ली ब्रोनिश बाल और ग्रे ऑंखें उसे सब से अलग बना रही थी.

दीपिका : बहुत hi खूबसूरत हो रीमा तुम और ये तुम्हारी ऑंखें सब से अलग हैं.

रीमा : शरमाते हुए ) थैंक्स ममी जी , मुझे ये ऑंखें माँ से hi मिली हैं.

दीपिका : मतलब तुम्हारी माँ भी तुम्हारे जैसी खूबसूरत होंगी फिर तो

रीमा : वो तो मुझसे भी ज़्यादा सुन्दर हैं .

दीपिका : तो उन्हें क्यों नहीं लेकर आयी ?

रीमा : वो बुआ ठीक नहीं थी तो माँ उनके पास hi hi रुक गयी.

दीपिका : वैसे तुम इतनी खूबसूरत हो तो कोई न कोई लड़का तो पसंद किया होगा न तुमने अपने लिए ?

रीमा दीपिका क इस सवाल पर और भी शर्मा गयी .

राधा : नहीं ममी ये भी मेरी तरह hi है. No बर्फ

दीपिका : पर कोई पसंद तो होगा क नहीं ? वैसे हमारा अमित भी बुरा तो नहीं है. पर लगता है तुम्हे वो पसंद नहीं आया .

दीपिका ने जानबूझ कर रीमा को छेड़ते हुए ये बात कही थी. राधा को अमित का रीमा क लिए इस तरह ज़िकर करना ाचा नहीं लगा था पर वो क्या कहती. मगर रीमा तो झट से बोल पड़ी.

रीमा : मैंने ऐसा कब कहा

जल्दी से रीमा बोल तो पड़ी पर दीपिका क चेहरे पर आयी कुटिल स्माइल देख कर रीमा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वो शर्मा गयी .

रीमा : मेरा मतलब था अमित को सब पसंद करते हैं. वो सबकी इज़्ज़त करता है . उसे कोई नापसंद कैसे कर सकता है ? वैसे भी मेरी दीदी की उसने मदद की थी तो मैं उसकी बहुत इज़्ज़त करती हूँ.

दीपिका इतने पर hi नहीं रुकी और फिर से लपेट लिया रीमा को.

दीपिका : ाचा तो तुम इस लिए उसे पसंद करती हो क उसने तुम्हारी दीदी की मदद की. वर्ण तुम्हे उसमे ऐसी कोई बात न लगी क उसे पसंद किया जाये. चलो कोई बात नहीं हम उसके लिए कोई और देख लेंगे.

राधा तो दीपिका को देखे जा रही थी क ममी ये कैसी बातें कर रही है. रीमा तो दीपिका की बात से फिर उतावली हो गयी . उसे लगा क कहीं सचमुच दीपिका अमित क लिए किसी और को hi सेलेक्ट न कर ले

रीमा : पसंद क्यों नहीं होगा ? इतना ाचा है वो दिल का कितना सच्चा है और सबकी परवाह करता है. पर्सनालिटी भी हीरो की तरह है . बिलकुल एक आइडियल है. कौन सी लड़की होगी जो उसे पसंद नहीं करेगी ?

दीपिका : मतलब तुम्हे वो पसंद है . तो बात करें तुम्हारे घरवालों से .

अब तो रीमा शर्म से ज़मीन में गढ़ी जा रही थी उसके गाल गुलाबी हो गए थे शर्म से. जल्दी से वो वहां से उठ कर भाग गयी . जबकि राधा को दीपिका की ये बात बिलकुल पसंद नहीं आयी थी. उसने भी आरव को वापिस उनकी गोद में पकड़ा दिया और पेअर पटक कर चल दी मगर करिश्मा ने उसे अपने पास बिठा लिया.

कारन जो किसी एक लड़की पर तरय मरने की फ़िराक में था उसने रीमा को जब अकेली उत् कर जाते देखा तो वो जल्दी से उसके पास पहुँच गया .

कारन : hi

रीमा : नमस्ते भैया

रीमा ने उसे रेस्पेक्ट दी क्यूंकि वो अमित बड़ा भाई था. पर भैया सुन कर कारन की झांटे सुलग गयी. फिर भी चेहरे पर स्माइल लाते हुए बोलै.

कारन : अरे ये भैया कहाँ से आ गया ? कॉमन रीमा वे अरे फ्रेंड्स. तुम पहली बार यहाँ आयी हो और हमारी मेहमान हो आओ मैं तुम्हे अपना गाओं दिखता हूँ.

रीमा : थैंक्स , पर मैं फंक्शन पर आयी हूँ तो गाओं फिर कभी देख लुंगी अभी तो फॅमिली से hi मिलने आयी हूँ.

कारन : अरे वो तो तुमने मिल hi लिया होगा न. फंक्शन तो सारा दिन चलेगा . हमारे गाओं क पास एक नदी भी निकलती है और हमारे अपने खेत , बाघ भी हैं. चलो तुम्हे वो दिखा के लता हूँ. आखिर मेहमान नवाज़ी का कुछ मौका हमें भी तो दो.

रीमा : जो वो फिर कभी देख लेंगे. वैसे भी सब यहीं पर तो हैं . अगर आप दिखाना hi चाहते हैं तो मैं अभी सबको पूछती हूँ.

कारन क तो अरमानों पर पिने hi फिरने लगा था जैसे .

कारन : वो सब आपस में बिजी हैं . तुम अपनी बात करो , यहाँ बोर हो जाओगी . चलो मेरे साथ मैं तुम्हे बोर नहीं होने दूंगा. वैसे भी इस माहौल में तुम जैसी लड़की क्या करेगी.

‘ अरे रीमा , मैं कब से तुम्हे ढूंढ रही हूँ . चलो मेरे साथ तुमसे एक बात करनी है ‘ नेहा कारन को रीमा से बात करता देख वहीँ आ गयी. रीमा बेचारी भी कारन की बातों का जवाब नहीं दे प् रही थी वो जल्द से जल्द अपना पीछा छुड़ाना छह रही थी. नेहा क आते hi वो जल्दी से उसके साथ निकल गयी. कारन एक बार फिर हाथ माल्टा रह गया .

12 बजे कमलेश ने सबको कार्यक्रम वाली जगह चलने को कहा तो सब मिलकर उधर चल दिए. सभी लड़कियां एक साथ चल रही थी. रस्ते में जो भी मिलता वो ऑंखें बड़ी बड़ी कर क इन परियों को देखने लगता. करना भी उनके पीछे पीछे दम हिलता चल रहा था. जब सब कार्यक्रम वाली जगह पर पहुंचे तो वहां लगभग सारा गाओं पहुँच चूका था. बहार hi खड़े अजय और विजय सबका स्वागत कर रहे थे. पंडाल ाचा सजाया गया था . गाओं का संपन्न परिवार होने क नाते इंतज़ाम भी उसी हिसाब से थे. विजय और अजय सज्जन व्यक्ति थी तो सारा गाओं उनकी इज़्ज़त करता था और इसी लिए यहाँ आज पूरा गाओं आया था. अपने परिवार को आया देख दोनों भाई उनके साथ hi हो लिए. कामिनी इस हालत में भी धीरे धीरे चल कर यहाँ तक आ hi गयी थी. हालाँकि पाऊँ भरी थे और महीना भी आठवां था. गौरी कामिनी का खास ध्यान रख रही थी. अजय भी उनके साथ हो लिया. राघव विजय क साथ . कमलेश तो दीपिका को साथ लेकर शाम से चल रहा था लोगों को गर्व से अपना बचा दिखते हुए.

लड़कियों की नज़र यहाँ आते hi खाने की बजाये अमित को ढूंढ रही थी जो जल्दी hi नज़र आ गया खाने पीने क सामान की व्यवस्था को सँभालते हुए. इस काम में डरा भैया और राजू उसके साथ लगे हुए थे. अमित को ऐसे काम करता देख सब अंदर hi अंदर खुश भी थे . पर अकेले में मिलने की चाहत कई दिलों को मायूस भी कर रही थी.

विजय ने सरे परिवार को एक अलग कोने में ले जाकर सबके लिए बैठने और खाने की व्यवस्था करने क लिए अमित को hi आवाज़ लगाई. अमित और राजू ने जल्दी से 4 टेबल और चेयर्स लगवा कर सबको बिठाया और उनके लिए जो भी कुछ बना था सब एक एक कर क भिजवा दिया. बाएं करते हुए सब खाना खा रहे थे . गाओं क नौजवान तो बस आहें भर रहे थे. कर तो कोई कुछ सकता नहीं था , सब जानते थे क इनसे पन्गा लिया तो सहमत आ जाएगी. कारन मौका तलाश रहा था और नेहा कारन पर नज़र लगाए थी. खाना खाने क बाद अब सब लड़कियों ने अमित को अपने पास बुल लिया.

कल्पना : ये क्या बात हुई ? हम सबको यहाँ बुलाकर तुम खुद गायब हो. काम से काम हमारी मेहमान नवाज़ी तो करो.

शिवानी : बिलकुल सही कहा . हमें बुलकर खुद गायब हो , हमारा यहाँ आने का क्या फायदा हुआ.

अमित : देख तो रही हो यार मैं कितना बिजी हूँ और फिर सब हैं तो यहाँ आपके साथ.

शीना : हम तो यहाँ आये थे क तुम हमें गाओं दिखाओगे पर तुम तो खुद hi नहीं दिख रहे .

अमित : गाओं देखना हो तो फिर कभी आ जाना . आज तो अभी मुश्किल है .

कारन : मैं दिखा देता हूँ जी आपको अपना गाओं , अमित जो तो अभी टाइम नहीं मिलने वाला. क्यों अमित ठीक है न ?

कारन यहाँ भी अपनी टांग फ़साने आ hi गया .

कल्पना : शुक्रिया , हम फिर कभी देख लेंगे. अब तो रास्ता भी पता चल गया और सब से मिल भी लिया है. फिर कभी आ जायेंगे.

कारन की झांटे फिर से सुलग गयी थी इस बार पर कल्पना की इस बात पर ऊपर ऊपर से स्माइल करने लगा और कल्पना ने नज़र बचने लगा.

निधि : अरे आप सब यहाँ हो. चलो घर चलते हैं अब यहाँ हमारा क्या काम है? घर क बड़ों को अभी लोगों ने बधाई वगैरह देनी है हम सब घर चलते हैं. अमित तुम भी साथ चलो आखिर ये तुम्हारे लिए hi तो आये हैं .

अमित : जी दीदी चलिए.

इसके साथ hi निधि करिश्मा और सभी लड़कियों को साथ लिए घर की तरफ चल दी. गौरी ने hi उसे ऐसा करने को कहा था. क्यूंकि अभी गाओं वाले बचे को उपहार दे रहे थे और फॅमिली क सभी बड़े लोगों का यहीं रहना ज़रूरी था. घर पर इस वक़्त गाओं की हो दो औरतें घर क ज़रूरी काम और देखभाल क लिए छोड़ राखी थी. निचे क दरवाज़े बंद hi छोड़ कर निधि सबको लेकर ऊपर वाले कमरों में ले गयी . राधा रीमा को अपने साथ hi रख रही थी. रीमा बार बार अमित की तरफ देखती कुछ कहना चाहती हो जैसे पर अमित भी ऐसे में कुछ नहीं कर सकता था. सब अमित क साथ वाले कमरे में बैठे थे . निधि ने अमित को फॅमिली एल्बम लेन को कहा ताकि सबको अपनी सबकी पुराणी तस्वीरें दिखा सके. करिश्मा ने hi ये डिमांड की थी. ताकि वो अमित क बचपन को देख सके . इतने साल जो वो उन सब की आँखों से दूर था.

अमित : जी दीदी मैं अभी लाया.

शालू : दीदी मैं ज़रा वाशरूम हो कर आयी

निधि : रुको मैं चलती हूँ तुम्हारे साथ

शालू : it’s ok दीदी अपना hi तो घर है.

इतना कह कर शालू भी अमित क पीछे hi निकल गयी. अमित सीढ़ियां नीचे उतर क माँ क कमरे में गया तो शालू भी उसके पीछे hi आ गयी और अमित को पीछे से बाँहों में भर लिया . अमित ने गर्दन घुमा कर शालू को देखा तो शालू की आँखों से आंसू टपक रहे थे.

अमित : ये क्या शालू तुम तो रही हो ? क्या हुआ है ? किसी ने कुछ कहा क्या?

शालू : किसी ने कुछ नहीं खा . पर मैं खुद को रोक नहीं प् रही थी जब से तुम्हारे बारे में पता चला. तुम मेरे लिए क्या हो जानते हो न. तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया और मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कर सकती .

अमित : फिर वही बच्चों जैसी बात , मैं बिलकुल ठीक हूँ. अपने ये आंसू ऐसे मत बहाया करो. तुम सबसे प्यारी दोस्त हो मेरी जानती हो.

शालू : बस कहते hi हो पर अपने पास भी नहीं आने देते .

अमित : मैंने कब मन किया तुम्हे ?

शालू : मन नहीं किया पर गले भी तो नहीं लगाया . मैंने सोचा था उसके बाद तुम खुद मुझे अपने पास बुलाओगे पर तुम ... मैं hi लायक नहीं हूँ मैं जानती हूँ.

अमित : ख़बरदार जो ऐसा कहा तो . तुम बहुत अछि हो और मैं तुम्हे दिल से अपना मंटा हूँ.

इतना कह कर मैंने शालू क होंठों पर अपने होंठ रख दिए और हम एक दूसरे को किश करने लगे . शालू क हाथ मेरी पीठ पर कास गए. मैंने भी उसकी पीठ कमर सहलाते हुए उसकी गांड मसलने लगा. शालू ने मुझे दीवार से लगा लिया और मेरे साथ ज़ोर ज़ोर से किश करती हुई लिपटने लगी . कुछ देर हम ऐसे hi एक दूसरे को किश करते रहे और फिर मैंने hi किश तोड़ी .

अमित : अब यकीन आया ?

शालू : रुक क्यों गए ?

अमित : इससे ज्यादा नहीं , यहाँ कोई भी आ सकता है . हम फिर किसी दिन फुर्सत में मिल लेंगे . और मेरी चिंता न करो मैं बिलकुल ठीक हूँ. अब जाओ मैं एल्बम ले कर आया.

शालू फिर से एक किश कर क मुस्कुराती हुई आंगन में बने बाथरूम में चली गयी . पर उसे इस तरह से कमरे से निकल कर बाथरूम जाते हुए कारन ने देख लिया था जो अभी बाहर से आया hi था. शालू की हालत और कमरे का दरवाज़ा खुला देख कर उसका दिमाग चलने लगा . अभी वो सोच hi रहा था क कमरे से अमित निकला और दरवाज़ा फिर से लगा दिया. अमित क हाथ में एल्बम थी जिसे लेकर वो ऊपर चला गया

कारन ( मन में ) तो ये सेटिंग है इसकी . इस पर नज़र रखता हूँ .

कारन ने देखा शालू भी बाथरूम से आ गयी है और सीढ़ियां चढ़ रही है तो वो उसके पीछे पीछे उसकी मटकती गांड देखता हुआ सीढ़ियां चढ़ने लगा.

कारन ( मन में ) क्या मस्त फिगर है , साला हर मामले में लकी है. अगर मैं भी उस कॉलेज में होता तो इसके जैसी कोई मेरी भी सेटिंग होती . देखता हूँ शायद कोई न कोई इनमे से लाइन दे hi दे. हैं सब बड़े घरों की . ऐश तो पूरी करवाएंगी.

एल्बम खोल कर निधि सबको तस्वीरें दिखने लगी . सब लड़कियों ने उनके आसपास सर्किल बना लिया था . कारन भी अब कमरे में आकर अमित क साथ बैठ गया था. रीमा भी तस्वीरें देख रही थी पर उसकी नज़र अमित पर भी थी. अमित भी उससे मिलने का बहाना सोच रहा था.

अमित : दीदी मैं वो दूसरी एल्बम भी लेकर अत हूँ जो अजय मां क कमरे में पड़ी है शायद . कोई एक मेरे साथ आ जाओ मदद की ज़रूरत पड़ेगी ऊपर से उतरने में.

मैंने पहले hi रीमा को इशारा कर दिया था . इससे पहले क कोई और बोलता रीमा hi बोल पड़ी.

रीमा : मैं आती हूँ वैसे भी मुझसे भी वाशरूम जाना है.

राधा : मैं भी आती हूँ साथ

रीमा : तुम बैठो आराम से , कौन सा कहीं बहार जाना है .

राधा : ाचा ठीक है जल्दी आना

मैं जल्दी से बहार निकल गया और रीमा भी पीछे आ गयी . सीढ़ियों से निचे जाने की बजाये मैं बगल में अपने कमरे में चला गया और रीमा को भी अंदर खींच कर दरवाज़ा बंद कर लिया . दरवाज़ा बंद करते hi मैंने रीमा को बाँहों में भर लिया .

रीमा : छोडो मुझे , मुझे तुमसे बात नहीं करनी .

अमित : ाचा !! वो क्यों भला ? मुझे भी तो पता चले मेरी जान क्यों नाराज़ है मुझसे .

रीमा : ाचा तो ये भी मैं बताऊँ ? इतना कुछ हो गया और तुमने मुझे कुछ बताया तक नहीं . बस इतना प्यार है न मुझसे ? जान कहते हो पर जान समझते नहीं हो . तुम्हे पता है मेरी क्या हालत हो गयी थी जब दीदी ने बताया क तुम्हारी कैसी हालत देखि थी उन्होंने .

रीमा की आँखों में हलकी नमी आ गयी थी.

अमित : तो मेरी बड़ी साली साहिबा ने आखिर बता hi दिया . तुम जानती हो मैंने तुम्हे क्यों नहीं बताया था?

रीमा : क्यों ?

अमित : क्यूंकि मुझे उन ज़ख्मों से इतना दर्द नहीं हुआ जितना तुम्हारी आँखों में ये आंसू देख कर होता है. तुम कहती हो मैं तुम्हे जान नहीं समझता, जान समझता हूँ तभी तो इन आँखों में आंसू नहीं देख सकता. ऐसा कभी मत सोचना क मेरे प्यार में कोई कमी है . कमी मुझ में हो सकती है मेरे प्यार में नहीं . ऐसा फिर कभी मत सोचना.

रीमा : ी ऍम सॉरी , पर मुझे कैसा लगा था वो भी तो समझो . मेरा प्यार इतने दर्द में था और मैं उसके पास नहीं थी .

अमित : समझता हूँ रीमा सब समझता हूँ , तुम मुझसे अलग नहीं हो . ी लव यू फ्रॉम बॉटम ऑफ़ माय हार्ट ी कैन फील यू .

रीमा ने मेरी पीठ पर अपने हाथ कस्ते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . हम दोनों एक दूसरे को महसूस करते हुए इस मधुर मिलान में खोते चले गए . रीमा ने मेरे गले में बहन दाल ली थी और मैंने भी उसके सर क पीछे हाथ रख कर दूसरे हाथ से उसकी कमर को थम रखा था.

रीमा क निकलते hi कारन भी बहाने से कुछ देर बाद बहार निकला था रीमा से चांस मरने क लिए . पर जब वो नीचे आया तो निचे न रीमा दिखी न hi अमित . काम वाली से पूछा तो उसने भी कहा क कोई नहीं आया निचे . कारन का माथा ठनका. वो इधर उधर देख कर फिर से वापिस ऊपर जाने लगा तो अमित का दरवाज़ा बहार से खुला देख कर उसने धीरे से उसे खोलने की कोशिश की तो वो नहीं खुला . फिर उसने दरवाज़े से कान लगा लिए. पर अंदर ऐसा कुछ हो नहीं रहा था क उसके कुछ सुनाई देता. अंदर तो बस प्यार भरा किश hi चल रहा था. जब उसे कदमो की आवाज़ दरवाज़े की तरफ आती सुनाई दी तो वो जल्दी से दूर हैट गया और देखने लगा. अंदर से रीमा मुस्कुराती हुई निकली और पीछे hi अमित भी. रीमा दूसरे कमरे में चली गयी और कारन उसे देख कर फिर से जलने लगा .

एल्बम देख देख कर सब हंस रहे थे और मेरी hi तस्वीरों पर कमेंट कैसे जा रहे थे. कल्पना तो कुछ तस्वीरों की फोटो खींच रही थी फ़ोन से. करिश्मा दीदी भी खुश हो रही थी उन तस्वीरों को देखती. 4 बजे तक एहि सब चलता रहा. और जब सब वापिस घर आ गए तो ये कॉलेज वाली मंडली भी वापिस जाने क लिए तैयार हो गयी . जाने से पहले माँ ने सब को शगुन क तौर पर कुछ पैसे और मिठाई दी. सब लड़कियां आरव क लिए कुछ न कुछ गिफ्ट भी लायी थी . जैसे वो सब आयी थी वैसे hi वापिस चली गयी . कारन भैया भी लास्ट तक उन्हें सी ऑफ करने क लिए साथ hi थे. उनके जाने क बाद अंकल आंटी भी जाने का कहने लगे . बाबा ने रोका भी पर उन्होंने बताया क उन्हें ज़रूरी मीटिंग में जाना है सुबह तो बाबा में ज्यादा ज़ोर नहीं दिया. आंटी ने जाते जाते मुझे घर आने का कहा और उनकी आँखों में एक इशारा था . मोहित आज दिन में गायब रहा था मीनल क साथ पर या तरफ किसी का ध्यान नहीं गया.

सब मेहमानो क जाने क बाद बाबा ने मुझे एक बार पंडाल वाली जहह पर चक्कर मर कर सामान देख कर आने को कहा तो मैं उधर चला गया. पंडाल में मैं चक्कर मर रहा था और राजू वहीँ था . हम दोनों दोस्तों ने ज़रूरी सामान समेटा और मंदिर और हलवाइयों को उनका सामान पहुंचा दिया . उसके बाद हम बैठ कर बातें करने लगे . वक़्त कोई 8 से ऊपर हो चूका था. कारन भैया भी कुछ देर में वहीँ आ गए

कारन : और क्या हो रहा है?

अमित : कुछ नहीं भैया बस एक बार नज़र मरने आये थे.

कारन : मैं तो बहुत थक गया हूँ यार , तुमको थकावट नहीं हुई?

अमित : थकावट तो होगी hi भैया सुबह से लगा हुआ हूँ . घर जा कर आराम से सोऊंगा तो सब ठीक हो जायेगा सुबह तक.

कारन : इतना इंतज़ार करने की ज़रूरत क्या है ? ये देखो एनर्जी ड्रिंक , अभी पिटे hi 15 मिनट्स में साडी थकावट उतर जाएगी.

राजू : क्या सच में भैया ? इतनी जल्दी थकावट उतर जाती है इसे पिने से ?

कारन : और नहीं तो क्या , मैं जब कभी ज्यादा थक जाता हूँ मैच खेलने क बाद तो यही पिता हूँ. सब खिलाडी पिटे हैं ये. तूने कभी नहीं पि?

अमित : नहीं भैया मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता

कारन : ाचा तो चल आज पि कर देख .

मैंने उनके हाथ से वो रेड बैल लिखा हुआ एनर्जी ड्रिंक लिया. मेटल क इस कैन का छोटा सा ढक्कन उन्होंने खुद hi खोल कर दिया था. पहले मैंने उसे नाक से लगा कर सुंगा . शराब की स्मेल नहीं थी

कारन : अरे कुछ नहीं है यार , मैं तुझे क्या कुछ ख़राब चीज़ दूंगा .

अमित : अरे ऐसी बात नहीं है भैया. आप तो बड़े भाई हैं मेरे

इतना कह कर मैंने वो उसका घूँट भरा तो अजीब सा टास्ते था.

अमित : इसका टास्ते कुछ अजीब सा लग रहा है भैया.

कारन : अरे ये ऐसा hi होता है. दवाई समझ कर एक बार में पि ले.

मैंने एक hi बार में पूरा कैन खली कर दिया. राजू मेरा मुँह देख रहा था .

राजू : मेरे लिए तो रख लेता थोड़ा सा.

कारन : अरे तुम चिंता क्यों करते हो तुम्हारे लिए भी है.

कारन भैया ने एक और कैन दिखते हुए खोला तो इस बार उसमे से झाग निकली .

अमित : भैया पहले वाले से तो झाग नहीं निकली थी , ये अलग है क्या ?

कारन : नहीं नहीं एक hi तो है खुद देख लो. वो तो उसको मैंने आराम से खोला था न. ाचा राजू तुम ये पियो मैं अपने लिए घर से और ले अत हूँ .

इतना कह कर कारन भैया वापिस चले गए और हूँ आराम से बातें करने लगे. कुछ देर बाद मुझे अपने शरीर में थकावट की जगह ताकत बढ़ती महसूस होने लगी . एक सुरूर सा छाने लगा था. मेरा लैंड अपने आप टाइट हो कर खड़ा हो गया . मेरा गाला खुश्क होने लगा और तालाब होने लगी सेक्स की.

अमित : राजू यार मैं अब घर चलता हूँ तबियत थोड़ा ठीक नहीं लग रही है .

राजू : अचानक तुझे क्या होने लगा?

अमित : पता नहीं यार समझ नहीं आ रही . मैं घर चलता हूँ .

राजू : चल तेरे साथ मैं भी चलता हूँ.

राजू और मैं घर को चल दिए .

कारन अमित और राजू क पास से सीधा उस जगह पहुँच गया जहाँ कमलेश अपने दोस्तों को पार्टी करवा रहा था. कारन ने अपने मां क पास कुछ देर बैठ कर माहौल देखा और जब कमलेश सुरूर में आ गया तो उसने कमलेश को अकेले कुछ कहा जिसे सुन कर कमलेश एक डैम गुस्से में आया . उसने गुस्से में कारन का गाला पकड़ लिया .

कमलेश : ये क्या कह रहा है तू ? अगर तेरी बात गलत निकली तो तेरी चमड़ी उधेड़ दूंगा.

कारन : मां गई अगर गलत निकलूं तो जो चाहे सजा दे देना . पर मैं सच कह रहा हूँ . घर की इज़्ज़त मुझे पहले है मां जी . मैं घर में किसी को बताता तो कोई यकीन नहीं करता . सब की नज़र में तो वो बहुत ाचा है. आपको बताना मेरा फ़र्ज़ था . अब आप जो चाहे करें पर मेरा नाम नहीं आना चाहिए ये आप ध्यान रखियेगा .



कमलेश : अगर तूने जो कहा वो सही है तो उसकी खाल उधेड़ दूंगा और अगर तुम गलत निकले तो वही तेरे साथ करूँगा मैं.
 
अपडेट 164



मैं जब घर पहुंचा तो सब खाना खा रहे थे. माँ ने मुझे खाना खाने क लिए बुलाया पर मैं भूख नहीं है कह कर ऊपर अपने कमरे में चला गया . मुझे अपने अंदर गर्मी बढ़ती हुई महसूस हो रही थी और लैंड तो कितनी hi देर से खड़ा खड़ा अब दर्द से फटने लगा था. अंडकोष अकड़ गए थे और ऊपर की नसों में भी खिंचाव महसूस होने लगा था. आँखों में जलन हो रही थी गाला सुख रहा था. मैं जल्दी से सीढ़ियां चढ़ कर अपने कमरे में पहुँच गया . दरवाज़ा बंद कर क मैंने अपने कपडे उतरे और बाथरूम में घुस कर ठन्डे पानी से नहाने लगा . लोअर T-shirt पहन कर मैं अपने बिस्टेर पर लेट गया पर लैंड इतने पर भी शांत नहीं हुआ. मैं बीएड पर करवटें बदल रहा था. जब और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने अपना लैंड मसलना शुरू कर दिया पर उससे तो और भी जकड़न होने लगी . मेरी हालत बुरी होती जा रही थी . माथे और कनपटी पर पसीना आ गया था. तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया . मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने निधि दीदी और राधा थी.

अमित : दीदी आप ?

निधि दीदी : तुझे हुआ क्या है ? तबियत तो ठीक है न तेरी ? ये इतना पसीना क्यों आ रहा है तुझे? ये तेरी ऑंखें ?

अमित : कक कुछ नहीं हुआ दीदी बस थोड़ी बेचैनी स हो रही है और कुछ नहीं . अभी सो जाऊंगा तो सब ठीक हो जायेगा.

मैं जल्दी से पलट गया था क कहीं दीदी या राधा की नज़र मेरी लोअर में बने टेंट पर न पद जाये.

निधि दीदी : इधर मेरी तरफ देख , तू कुछ छुपा रहा है मुझसे? ये अचानक तेरी तबियत ख़राब कैसे होने लगी ?

अमित : कुछ नहीं है दीदी बस थकावट है आप चिंता मत कीजिये .

निधि दीदी : मेरी चिंता न कर , मुझे कुछ नहीं हुआ है तू इधर बैठ.

दीदी ने मुझे बांह पकड़ कर बीएड पर बिठा लिया . मैंने जल्दी से हाथ अपनी गॉड में रख कर लैंड को नीचे दबा लिया. एक साइड पर दीदी बैठ कर मेरा माथा चेक करने लगी .

निधि दीदी : तुझे बुखार है क्या ? इतना गरम हो रहा है तू . राधा जा ज़रा बड़ी ममी से बुखार की गोली तो ले कर आ.

राधा सामने कड़ी मेरी तरफ चिंता से देख रही थी. दीदी की बात सुनते hi वो तेज़ी से निचे चली गयी.

अमित : दीदी मुझे बुखार नहीं है . पता नहीं क्यों पर अंदर से आग सी लग रही है. गर्मी बढ़ती जा रही है.

निधि दीदी : ये बुखार hi तो है

अमित : नहीं आप समझ नहीं रही . मुझे किसी तरह की वीकनेस नहीं महसूस हो रही बल्कि .....

निधि दीदी : क्या ?? बता मुझे

तभी राधा क साथ माँ भी कमरे में आ गयी और तेज़ी से मेरे पास आ कर मेरे माथे पर हाथ रख कर चेक करने लगी. उनके चेहरे पर टेंशन साफ़ नज़र आ रही थी.

गौरी म: क्या हुआ तुझे ? ये तेरा माथा इतना गरम क्यों है? तेरी ऑंखें इतनी लाल क्यों हो रही हैं?

माँ क पीछे पीछे दिव्या मौसी भी आ गयी और उनका हल भी माँ जैसा hi था. एक तरफ अब माँ बैठी थी और दूसरी तरफ दिव्या मौसी . दोनों hi मेरी चिंता कर रही थी .

दिव्या मौसी : तू तो घर से ाचा भला गया था न फिर अचानक से क्या हो गया ? कुछ खाया पिया तो नहीं तूने ?

अमित : खाया तो कुछ नहीं मौसी बस भैया ने एक एनर्जी ड्रिंक दी थी

‘ कैसी एनर्जी ड्रिंक थी वो ? ‘ ये सवाल नेहा दीदी ने किया था और नैना करुणा दीदी भी उनके साथ थी.

अमित : रेड बैल लिखा था उस पर , भैया ने कहा था इससे साडी थकावट दूर हो जाएगी .

गौरी म : तुझे क्या ज़रूरत थी कुछ भी ऐसी वैसी चीज़ पीने की ? ज़रूर उसी से तेरी तबियत ख़राब हो रही है. मैं अभी तेरे बाबा को बोलती हूँ तुझे डॉ क पास ले कर चलते हैं.

दिव्या मौसी : ये रेड बैल क्या चीज़ है ? कोई शराब वगैरह तो नहीं ?

करुणा दीदी : अरे नहीं मौसी वो तो एनर्जी ड्रिंक hi होती है.

करुणा दीदी ने इतना कहा . पर नेहा दीदी किसी सोच में डूबी लग रही थी . मैं तो जैसे तैसे अपना लैंड टांगों में फसाये अपनी इज़्ज़त बचने की कोशिश कर रहा था. अब तो कमरे में रीता मौसी रजनी मौसी अजय मां और बाबा भी आ पहुंचे थे. सबके चेहरे पर टेंशन थी. बाबा को देख कर तो माँ झट से बोल पड़ी .

गौरी म : सुनिए जी देखो क्या हो गया है मेरे बेटे को जल्दी से इसे डॉ क पास ले कर जाओ. इसका माथा कितना गरम हो रहा है और पसीना आ रहा है . पता नहीं क्या पि लिया है इसने .

‘ मैं बताता हूँ क्या पिया है इसने ‘ कमलेश मां कमरे में अंदर आते हुए ऊँची आवाज़ में गुस्से से बोले. ऑंखें लाल थी उनकी हालत देख कर hi पता चल रहा था क वो दारू पि कर आये हैं. उनके पीछे पीछे दीपिका ममी भी कमरे में आ गयी थी . उनके चेहरे पर चिंता साफ नज़र आ रही थी.

अजय म: क्या कह रहे हो तुम ? तुम्हे पता है कुछ इस बारे में?

कमलेश म: सब पता लग गया है भैया. सब को बेवक़ूफ़ बना कर ये इस घर में क्या क्या गुल खिला रहा है , आज सब पता चल गया है मुझे. जिसे आप बचा समझ कर सर पर चढ़ा रहे हैं ये कितना बड़ा कमीना है मुझे पता चल गया है.

विजय म : गुस्से में) कमलेश !!! लगता है तू होश में नहीं है . जा अपने कमरे में जा कर सो जा.

कमलेश म : मैं तो होश में हूँ भैया और अब आप सब क भी होश ठिकाने आ जायेंगे. इसकी सचाई अभी आपके सामने आ जाएगी

मुझे मां की बातों से लगने लगा कहीं उन्हें कुछ पता तो नहीं चल गया मेरे और दीपिका ममी क बारे में. दीपिका ममी भी टेंशन में थी . रीता मौसी भी टेंशन में आ गयी थी और माँ का भी यही हल था.

अजय म : तेरा दिमाग तो ठीक है ? चल मेरे साथ बहार

अजय मां ने कमलेश मां को बहार ले जाना चाहा तो उन्होंने खुद को उनकी गिरफ्त से आज़ाद करवा लिया .

कमलेश म : रुक जाओ भैया . मैं क्या कह रहा हूँ पहले वो तो सुन लो . जिसे आप सब बड़ा ाचा कह कर सर पर चढ़ाये बैठे हैं असल में ये ये हवस का पुजारी है. अपनी hi माँ जैसी ममी पर गन्दी नज़र रख रहा है ये. मेरी बीवी पर गन्दी नज़र रखता है .

विजय म : गुस्से में ) कमलेश !!

छोटे मां की बात सुनते hi बाबा गुस्से में चिल्लाये. वहीँ सब क चेहरे पर अलग अलग भाव थे . माँ दिव्या मौसी गुस्से में थी जबकि रीता मौसी और दीपिका चिंता में थी . रजनी मौसी गहरी नज़रों से मुझे और कमलेश मां क साथ दीपिका ममी को भी देख रही थी. जबकि मेरी साडी बहने शॉक में लग रही थी.

कमलेश म : यकीन नहीं आ रहा न , अभी क्या चल जायेगा. मोबाइल कहाँ है तेरा ? अपना मोबाइल दिखा मुझे .

मोबाइल तो आज मैं सुबह घर पर hi भूल गया था . और जब कमरे में वापिस आया तो वहीँ बीएड पर पड़ा था. मैंने अपना मोबाइल मां के हवाले कर दिया. मां ने मोबाइल में कुछ देखा और गुस्से में ज़ोर से मुझे थप्पड़ मर दिया . इससे पहले वो और मरते माँ बीच में आ गयी.

गौरी म : कमलेश !! ख़बरदार अमित पर हाथ उठाया तो

कमलेश म : हैट जाओ भाभी , आप उसे बचा रही हैं ? ये देखिये इसकी करतूत

कमलेश मां ने मोबाइल माँ को दिखते हुए कहा तो मेरी नज़र भी अब मोबाइल पर गयी जिसमे दीपिका ममी की अधनंगी फोटो थी जिसमे वो बाथरूम में नाहा रही थी. फोटो देखते hi मैं शॉकेड हो गया . मैंने तो ऐसी फोटो क्या कोई भी ऐसी वैसी फोटो कभी खींची hi नहीं थी. माँ और दिव्या मौसी दोनों hi शॉकेड हो गयी . जबकि निधि दीदी की आँखों में पानी आ गया.

कमलेश म : ये देखो अपनी आँखों से देख लो इसकी करतूत .

छोटे मामा ने मोबाइल बाबा और अजय मां को दिखते हुए कहा . बाकि सबकी नज़र भी मोबाइल पर दीपिका ममी की फोटो पर पड़ी तो सबकी नज़रें मेरी तरफ हो गयी. राधा बेचारी तो रोने hi लगी थी. वो न में सर हिला रही थी नेहा दीदी ने उसे अपने साथ लगा लिया और उसे चुप करवाने लगी.

कमलेश म : है किसी क पास इसका कोई जवाब ? हमने इसे प्यार दिया अपने बचे की तरह पला और ये ऐसी गन्दी नज़र रखता है घर की औरतों पर . इसे मैं नहीं छोडूंगा .

अमित : नहीं मां जी ये मैंने नहीं खींची हैं . मैं कसम खा कर कहता हूँ .

गौरी म : मेरा बीटा ऐसा नहीं कर सकता . ज़रूर ये किसी और का काम है .

दीपिका म : अमित ऐसा नहीं कर सकता . ये ज़रूर किसी ने शरारत की है .

कमलेश म : आँखों से देख कर भी यकीन नहीं हो रहा सबको ? दिमाग ख़राब हो गया है सबका . ये फ़ोन तेरा hi है न ? तो ये फोटो और किसने खींची है? बोल .

दिव्या मौसी : ये मैंने खींची है .

दिव्या मौसी की बात सुनते hi सब शॉकेड हो कर दिव्या मौसी की तरफ देखने लगे .

कमलेश म : ये क्या कह रही हो दिव्या ? इसे बचने क लिए झूठ बोल रही हो ? मुझे पता है ये इसी का काम है .

दिव्या मौसी : ये फोटो मैंने hi खींची हैं . असल में मैं दीपिका क साथ थोड़ा मज़ाक करना चाहती थी तो जब ये नाहा रही थी मैंने रोशनदान से ये तस्वीरें खींची थी.

कमलेश म : ाचा ??? तो बताओगी इसी क फ़ोन से क्यों खींची ?

दिव्या मौसी : वो वो अमित का फ़ोन या वक़्त मेरे पास था और मेरा अपना फ़ोन कमरे में पड़ा था. दीपिका को बाथरूम जाते देखा तो मुझे ये शरारत सूझी और मैंने फोटो खींच ली.

रजनी मौसी : दिव्या ये क्या हरकत है ? तुम झूठ तो नहीं बोल रही ? आज तक तो तुमने कभी ऐसा नहीं किया ?

कमलेश म : तुम झूठ बोल रही हो दिव्या

दिव्या मौसी : मैं सच बोल रही हूँ .

कमलेश म : ाचा !! अभी पता चल जायेगा .

इतना कह कर कमलेश मां मेरी अलमारी को खोलने लगे . सरे कपडे उन्होंने बहार फेंकने शुरू कर दिए और बीच में से एक काळा रंग की पेंटी निकल आयी . कमलेश मां ने हाथ में पकड़ कर उसे देखा और सबके सामने दिखने लगे. मैं तो शॉकेड हो गया ये देख कर. मेरे कपड़ों में ये कहाँ से आ गयी . मेरी तरह सभी शॉकेड थे.

कमलेश म : अब इसके बारे में क्या कहोगी ? ये भी तुमने राखी थी यहाँ पर .

माँ ने जल्दी से छोटे मां क हाथ से वो पेंटी छीन ली .

गौरी म : शर्म नहीं आती ऐसे हाथ में पकड़ते हुए ार्टिन क कपड़ों को . ये मेरी है , कपडे रखते वक़्त गलती से यहाँ राखी गयी होगी.

कमलेश म : ये तो दीपिका की .....

गौरी म : ये मेरी है . दीपिका से पूछ लो नहीं यकीन तो .

दीपिका म : ये दीदी की hi है . मेरी नहीं है .

गौरी म : और कुछ कहना है तुम्हे? मेरे बेटे पर इलज़ाम लगाने से पहले एक बार भी नहीं सोचा तुमने क इस घर क लिए ये क्या है ? अरे इसकी दुआओं की वजह से hi आज घर में रौनक आयी है और तू इस पर इलज़ाम लगा रहा है. कितना प्यार करता है ये सबको. कितनी इज़्ज़त करता है . तू उस पर ऐसा घटिया इलज़ाम लगा रहा है जो औरतों की इज़्ज़त क लिए अपनी जान तक जोखिम में दाल देता है . पूछ ज़रा राधा से क अमित ने उसकी इज़्ज़त की खातिर अपनी जान खतरे में डाली या नहीं ? एक से एक लड़कियां मेरे बेटे क आगे पीछे घूमती हैं और तू इस पर ऐसा इलज़ाम लगा रहा है ?

माँ की इस बात पर तो राधा क साथ सभी बहने जोश में नज़र आने लगी और माँ का समर्थन करती नज़र आयी . दिव्या मौसी भी में क इस तरह से बात को बदल देने से अब खुल कर आगे आ गयी

दिव्या मौसी : भाभी सच कह रही है . ये सबकी इज़्ज़त करता है और ऐसा घटिया काम तो ये कर hi नहीं सकता . देखा नहीं कैसे इतनी साडी लड़कियां इसके कहने पर यहाँ तक चली आयी. और सब की सब अचे घरों से हैं. अगर ये ऐसा होता तो क्या वो यहाँ तक आती ?

कमलेश म : आप सब लोग इसको बचने क लिए ये सब कर रहे हो . यद् रखना एक दिन सब को पछताना पड़ेगा

विजय म : तेरा दिमाग ख़राब कर दिया है इस शराब ने . अजय ले जा इसे बहार , कहीं बात बढ़ गयी तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा अब.

अजय मां कमलेश मां को बहार ले गए.

विजय म : बीटा तेरा छोटा मां होश में नहीं है . उसकी बात का बुरा मत मन्ना. शराब में दिमाग ख़राब कर दिया है इसका. मुझे तुझ पर पूरा भरोसा है . तू किसी बात को दिल पर मत लेना.

बाबा ने प्यार से मुझे गले लगाया और बहार निकल गए. दीपिका ममी की आँखों में आंसू थे . वो अपने आंसू छुपाती हुई बाबा क पीछे hi बहार निकल गयी .

गौरी म : चलो बचो तुम सब जाकर आराम करो. दीदी आप सब को ले जाओ मैं अमित का साथ रूकती हूँ.

दिव्या मौसी : भाभी मैं रूकती हूँ अमित की साथ आप जाओ .

गौरी म : नहीं दिव्या तुम आराम करो . मैं मेरे बेटे क साथ रूकती हूँ . कल फिर ये शहर चला जायेगा.

दिव्या मौसी मेरे पास रुकना चाहती थी पर माँ की बात मानते हुए वो चली गयी. राधा और निधि दीदी की ऑंखें भी नाम थी और वो दोनों भी जैसे कुछ कहना चाहती थी पर सबको जाना पड़ा. सब बहार निकल गयी तो माँ ने उठ कर दरवाज़ा बंद किया और मेरे पास आ कर बैठ गयी .

अमित : मैंने ऐसा कुछ नहीं किया माँ . मैं ....

गौरी म : शहहहहह क्या मैं नहीं जानती ? तू कमलेश की बातों को दिल पर मत लेना . शराब क नशे में उसे पता नहीं वो क्या क्या कह गया. ज़रूर किसी ने उसके दिमाग में ये बात डाली है. जिसे वो अपनी पत्नी कह कर तुमसे झगड़ रहा है उसे क्या पता क वो अब तुझे अपना पति मानती है. और भला तुझे उसकी ऐसे तस्वीर खींचने की क्या ज़रूरत है. जब वो खुद साडी की साडी तुम्हारी है. दिव्या ने तुम्हारे ऊपर लगे इलज़ाम को अपने सर लेकर ये साबित कर दिया है क वो तुम्हे कितना प्यार करती है. ये काम दिव्या का भी नहीं हो सकता ज़रूर किसी ने ये जानबूझ कर किया है तुम्हे फ़साने क लिए और फिर खुद hi कमलेश को सब बता दिया. वो पेंटी भाई वहां किसी ने तो राखी है न. तू चिंता मत कर किस बात की आज नहीं कल पता चल hi जायेगा. ये सब छोड़ तू मुझे बता तेरी तबियत कैसी है अब?

अमित : मुझे कुछ समझ नहीं आ रही माँ. बस अंदर आग सी लगी हुई है और .....

गौरी म : और क्या ? मुझे सब बता .

अमित : यहाँ बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है .

मैंने अपने खड़े लैंड की तरफ इशारा करते हुए कहा. माँ ने भी जब मेरे लोअर में तम्बू बना देखा तो वो मेरी हालत कुछ कुछ समझ गयी .

गौरी म : तू थोड़ी देर इंतज़ार कर मैं सब को देखने बाद आती हूँ वापिस.

इतना कह कर माँ कमरे का दरवाज़ा बंद कर क निचे चली गयी . मैं छोटे मां की बातों पर सोचने लगा क आखिर ऐसा कौन कर सकता हुआ ? पर दिमाग तो तब काम करता न जब शांति मिलती . लैंड में जो दर्द हो रहा था वो दिमाग कहीं और जाने hi नहीं दे रहा था .

जब सब अमित क कमरे में थे और ये सब बातें हो रही थी तो कारन कमरे क बहार खड़ा सब सुन रहा था. सारा कुछ उसने बहार से देखा भी और सुना भी. पर जब दिव्या ने फोटो वाली बात अपने सर ले ली तो कारन क प्लान पर पानी फिर गया . तस्वीरें तो कारन दे खुद खींची थी सुबह अमित का फ़ोन चालाकी से अपने पास रखते हुए. अमित क जाने क बाद उसने बाथरूम में नहाती हुई दीपिका ममी की तस्वीरें रोशनदान में हाथ दाल कर खींच ली थी . पेंटी भी दीपिका की hi थी जो उसने नहाने क बाद बाथरूम में hi छोड़ दी थी और कारन ने उठा ली थी . गौरी ने जब कहा क वो पेंटी उसकी है तो कारन को डबल झटका लगा. लेकिन कुछ और भी था जो उसने कमलेश से कहा था पर वो मिला नहीं . अश्लील तस्वीरों वाली कॉपी , सेक्स बढ़ाने वाली गोलियां और शराब की खुली हुई बोतल. शराब और गोलियां तो उसने अलमारी में खुद राखी थी. जबकि नंगी चुदाई तस्वीरों वाली वो कॉपी उसने बीएड पर अमित क तकिये क नीचे राखी थी फ़ोन क साथ. कारन ने देखा जब कमलेश को अजय बहार ला रहा है तो वो जल्दी से वहां से गायब हो गया.

अजय कमलेश को नीचे ले आया और उसके कमरे में उसे धकेलते हुए गुस्से में बोलै .

अजय : बहुत हो गयी तेरी ये बकवास . शराब पी कर तमाशा करते और उस बचे पर इलहाम लगते तुझे शर्म नहीं आयी .

कमलेश: आप को मज़ार नहीं आ रहा क दिव्या झूठ बोल रही है ? और भाभी भी उसे hi बचा रही है . सबके दिमाग ख़राब हो गए हैं.

अजय : दिमाग तेरा ख़राब हो गया है जो उस पर इलज़ाम लगा रहा है . वो ऐसा कर hi नहीं सकता . खुद से ज्यादा उस पर यकीन है मुझे. अब एक शब्द और भी कहा तो रत खेतों में सोना जा क.

कमलेश: आप सब की आँखों पर पट्टी बंधी है. उसकी सचाई तो मैं सामने ला क रहूँगा.

कमलेश गुस्से में फिर से बहार निकल गया . अजय क अपने कमरे में जाते hi कारन भी कमलेश क पीछे चला गया.

कारन : देख लिया मां सब कैसे उसकी साइड ले रहे हैं? सब क दिमाग पर धुल जमा दी है उस मनहूस ने.

कमलेश : उसको तो मैं देख लूँगा. पर इन बाकि सब का क्या करूँ ? दिमाग ख़राब हो रखे हैं सबके

कारन : मां आप बाकियों की चिंता मत करो. कब तक बचाएंगे उसे ? क hi तो सचाई सामने आ hi जाएगी . आप कहाँ जा रहे हो अब.?

कमलेश : तू घर जा मैं ज़रा अपने दोस्तों क पास जा रहा हूँ. साला सारा मूड hi ख़राब कर दिया .

कारन वापिस घर आ गया . तब तक सब अपने कमरों में है आपिस जा चुके थे. कारन दबे पाऊँ अपनी माँ और मौसी क कमरे में hi चला गया .

निधि और राधा दोनों एक hi कमरे में थी और दोनों hi अपने अपने मन में अमित क बारे में सोच कर दुखी हो रही थी . तभी नेहा भी उनके कमरे में आ गयी. नेहा वैसे तो ऊपर सी शांत दिख रही थी पर दिल उसका भी अंदर से बहुत दुखी था. वो खुद को और रोक नहीं पायी और निधि से बात करने चली आयी.

नेहा : क्या कर रही हो दीदी ? सोई नहीं अभी तक? गुड़िया तू भी जग रही है?

निधि : बस नेहा नींद hi नहीं आ रही . तेरे सामने तो हुआ सब कुछ . सारा दिन कितना ाचा गुज़र था और रत आते आते देखो क्या हो गया. मेरा दिल नहीं मंटा क अमित ऐसा कुछ कर सकता है. दिव्या मौसी ने भी ऐसा कुछ नहीं किया हो सकता . कुछ तो बात ज़रूर है .

नेहा : अमित ने ये सब नहीं किया है दीदी . ये बात आप भी जानती हैं और बाकि सब भी जानते हैं. दिव्या मौसी ने भी अमित को बचने क लिए सबके सामने झूठ कहा है . क्यूंकि उन्हें भी पता है अमित ऐसा कुछ नहीं कर सकता .

निधि : इसका मतलब तुझे पता है ये किसने किया है. बता मुझे ये किसकी करतूत है . कौन अमित पर ऐसे घटिया इलज़ाम लगाना चाहता है?

नेहा की बात सुन कर राधा भी सीधी हो कर बैठ गयी थी सच जानने क लिए .

नेहा : राधा तुम ज़रा बहार जाओगी ?

निधि : इसको बहार क्यों भेज रही हो ? इसके सामने hi बता दो

नेहा : आपको ाचा नहीं लगेगा दीदी इस लिए राधा को बहार भेज रही थी.

निधि : कोई बात नहीं तुम बताओ. राधा भी कितना दुखी है इस बात पर . इसे भी सच पता चलना चाहिए .

नेहा : ये सब कारन का काम है दीदी.

कारन का नाम सुनते hi निधि शॉकेड हो गयी. राधा को भी हैरानी हुई पर उसे कारन क बारे में पहले hi पता चल चूका था क वो अमित को पसंद नहीं करता इस लिए ज्यादा हैरानी नहीं हुई.

निधि : ये तू क्या कह रही है नेहा? वो ऐसा क्यों करेगा ? वो ऐसा नहीं कर सकता .

नेहा : ये hi सच है दीदी. अमित तो सुबह जल्दी निकल गया था . जबकि छोटी ममी तो बाद में नहीं थी. और आपने ध्यान नहीं दिया क अमित क पास उसका फ़ोन था hi नहीं . मैं तो घर hi थी न आपके जाने क बाद . मैंने कारन क हाथ में अमित का फ़ोन देखा था और उसे अमित क कमर में छेड़ छड़ करते हुए भी देखा था. कारन जब चला गया तो मुझे अमित की अलमारी से दो चीज़ें मिली थी. जो अमित को फ़साने क लिए hi राखी गयी होंगी . मैंने hi उसे वहां से हटा दिया था. मुझे शक था और दूसरी चीज़ तो वो थी क अगर किसी को नज़र आ जाती तो अमित की कोई बात भी नहीं सुनता शायद.

निधि : क्या था वो?

नेहा : एडल्ट फोटोज थी दीदी . आप समझ रही हैं न और ये देखिये ये डिब्बी , ऊपर लिखा हुआ है वियाग्रा . अब बताओ ये सब उसकी अलमारी में अब मिल जाता तो अमित क साथ क्या करते मां जी ? क्या वो सुनते किसी की ? वो पेंटी भी ज़रूर कारन का hi काम होगा . कपड़ों में मुझे नज़र नहीं आयी . और अभी देखि आपने अमित की हालत ? शायद आपने गौर नहीं किया . उसे शायद ऐसी hi कोई गोली एनर्जी ड्रिंक में मिला कर दी गयी है.

निधि : तुम ऐसा कैसे कह सकती हो?

नेहा : आपने उसकी हालत पर गौर किया होता तो समझ जाती. हे इस इन हीट दीदी.

नेहा को समझ नहीं आ रही थी वो ये बात कैसे कहे इस लिए उसने निधि को इशारे में hi समझाया. निधि भी नेहा का इशारा समझ गयी. राधा तो कारन की इन हरकतों क बारे में सुन कर गुस्से से भर गयी थी पर अपनी बड़ी बहनो क सामने चुप थी.

निधि : मेरा भाई ऐसी घटिया हरकतें कर सकता है मैं सोच भी नहीं सकती थी. मुझे शर्म आ रही है खुद पर . मेरे लिए उसने क्या नहीं किया और मेरा hi भाई उसके साथ ....

निधि सचमुच hi रोने लग गयी थी ये सब कहते हुए.

निधि : तुमने ये सब सबके सामने क्यों नहीं कहा ? अमित क ऊपर ये इलज़ाम कैसे लगने दिए तूने?

नेहा : दिव्या मौसी और ममी ने सब कुछ संभल लिया था दीदी इसी लिए मैं चुप रही . वर्ण सब बता देती . आखिर कारन भी तो भाई hi है न. मैंने आप को ये सब इस लिए बताया है दीदी क्यूंकि कारन बार बार अमित क खिलाफ जा रहा है. वो अमित से नफरत करता है शायद और आपको उसे रोकना होगा . इससे पहले भी वो कल्पना क साथ बदतमीज़ी कर चूका है हमारे घर क बहार hi. कल्पना ने उसे कुछ नहीं कहा था पर जब कारन ने अमित क बारे में अपशब्द कहे तो उसने कारन पर हाथ उठाया था.

निधि : ये बात तुमने पहले क्यों नहीं बताई ? कल्पना कितनी अछि लड़की है और उसने अमित की मदद भी की है. कारन उसके साथ भी बदतमीज़ी कर चूका है और फिर भी उसने मुझे ज़रा सा भी फील नहीं होने दिया.

राधा : दीदी आपने ये बात मुझे भी नहीं बताई ? अमित को भी नहीं पता होगी ये बात ?

नेहा : नहीं मैंने ये किसी को नहीं बताया था. कल्पना ने hi कहा था ये किसी को न बताऊँ . और आज भी कारन जिस तरह शीना रीमा शालू और शिवानी को देख रहा था मुझे दर था क किसी क साथ ये कोई हरकत न कर दे इस लिए मैंने उस पर नज़र राखी और उसे मौका नहीं मिला.

निधि : छिन्न कैसा भाई मिला है . एक तरफ वो है जो कर लड़की को इज़्ज़त देता है अपनी जान तक जोखिम में दाल लेता है उनकी इज़्ज़त बचने क लिए और एक तरफ ये है . इज़्ज़त क्या करनी उस भोले भले नेक इंसान पर hi इलज़ाम लगवा दिया . शर्म आ रही है मुझे खुद पर क मैं उसकी बहिन हूँ . मैं अभी जा कर सबको बताती हूँ इसकी करतूत

नेहा : रुक जाओ दीदी , ऐसा मत करो . ऐसा करने से कारन की सबके सामने बेइज़्ज़ती हो जाएगी फिर खून उसने गुस्से में कुछ कर लिया तो? आप उसे प्यार से समझा लेना घर में. अभी तो वैसे भी सारा मामला शांत हो hi गया है . दिव्या मौसी ने आज अमित क लिए वो बात अपने सर ले कर बहुत ाचा किया है.

राधा : माँ बहुत प्यार करती है अमित को . इसी लिए उन्होंने ऐसा किया.

‘ अरे नेहा तुम यहाँ हो ? मुझे लगा तुम नैना करुणा क साथ होगी ‘

दिव्या ने अंदर आते हुए कहा. तीनो एक पल को हैरान तो हुई का कहीं उन्होंने कुछ सुन तो लिया. पर उनके चेहरे से ऐसा कुछ नज़र नहीं आया.

नेहा : वो दीदी से कुछ बात करनी थी तो यहाँ आ गयी .

राधा : माँ आप सोई नहीं ?

दिव्या : वो कारन दीदी क पास सोने आ गया था तो मैंने सोचा मैं इधर तुम लोगों क साथ सो जाती हूँ. अमित क साथ तो आज भाभी सो रही हैं न.

निधि : मौसी आप ने अमित क लिए .....

दिव्या : मेरा बीटा है वो , अछि तरह जानती हूँ उसे. चलो अब सब बातें बंद करो और सो जाओ सुबह तुम लोगों को कॉलेज भी जाना है तो जल्दी निकलना होगा.

नेहा : ाचा दीदी फिर मैं चलती हूँ अपने कमरे में. ाचा मौसी .

नेहा जाने लगी तो दिव्या ने उसे गले से लगा लिया और उसका माथा चूमते हुए कहा

दिव्या : जग जग जियो बेटी . तुम बहुत अछि हो. जाओ जा कर आराम करो.

दिव्या ( मन में ) शुक्रिया नेहा वर्ण मुझे पता hi न चलता मेरे बेटे को फसाया जा रहा है. अब मैं अमित को दीदी क घर जाने hi नहीं दूंगी और न hi कारन को अमित क आसपास दरकने दूंगी. मुझे दीदी से बात करनी होगी.

सब अपनी अपनी जगह पर सो रहे थे. मगर बंद आँखों में भी सब के मन में बहुत साडी बातें चल रही थी . दिव्या निधि और राधा क साथ सो रही थी बंद आँखों में बहुत कुछ सोचती हुई . नेहा नैना और करुणा एक कमरे में थी अपनी अपनी जगह सोचती हुई. रजनी रीता और कारन एक कमरे में . दीपिका अपने बीएड पर लेती रो रही थी क अमित पर इलज़ाम लगाया गया और नाम भी उसका जुड़ा . जबकि अमित तो उसका पति hi था उसके लिए . उसे कमलेश पर गुस्सा आ रहा था जो इस वक़्त घर पर नहीं था. वो अमित क पास जाना चाहती थी मगर एक तो सब घर पर थे दूसरा गौरी ने उसे मन किया था अमित क पास जाने को. विजय और अजय भी दोनों कमलेश की वजह से दुखी थे और गुस्से में भी.

गौरी सबके सोने क बाद अमित क कमरे में गयी जहाँ अमित अपना लैंड मसल रहा था. गौरी को अमित की हालत का अंदाज़ा था . अमित क चेहरे पर दर्द की रेखाएं देख कर गौरी ने जल्दी से दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया .

मैंने माँ को कमरे में देखा तो अपने लैंड से हाथ हटा लिया. नसों में खिंचाव बढ़ता hi जा रहा था. मैं उठ कर बैठ गया. माँ ने बड़ी लाइट बंद की और अपनी सदी जल्दी से खोल कर साइड में रख दी. अपना ब्लाउज और पेटीकोट भी साइड में रखती हुई वो मेरे पास आ गयी. अब उनके जिस्म पर ब्रा और पेंटी hi थी.

गौरी म : मैं तुम्हे और तड़पने नहीं दूंगी . अपनी साडी तड़प मुझे देदो .

माँ ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी साथ hi मेरे हाथ पकड़ कर अपनी चुचों पर रख दिए. मैंने माँ को किश करते हुए माँ क चूचे दबाने शुरू कर दिए . मैं तो पहले से hi गरम था और दिमाग की नसें भी खींची खींची थी. माँ क चुके हाथ में आते hi मैंने उन्हें मसलना शुरू कर दिया . मेरे सर पर वासना सवार हो चुकी थी . मैंने ज़ोर ज़ोर से माँ क चुके मसलने शुरू कर दिए . माँ की भी मेरी हालत पता थी इस लिए वो मुझे रोक नहीं रही थी . मैंने माँ की ब्रा को ऊपर खींच कर उनके दोनों कबूतर आज़ाद कर दिए . माँ भी लगातार मुझे किश करती हुई मेरे बल सेहला रही थी. माँ ने एक हाथ नीचे ले जा कर मेरे अकड़े हुए लैंड को पकड़ लिया . मैंने एक हाथ से माँ की गांड मसलते हुए उन्हें अपनी गॉड में खिंच लिया और वो भी भी घुटने मोड़ कर मेरी गॉड में बैठ गयी . मेरी गॉड में बैठते hi उनके चूतड़ों क बीच मेरा लैंड डंडे की तरह अकड़ा खड़ा था . माँ भी आज प्रेमिका की तरह लगातार मुझे चूमती किश करती जा रही थी . मेरा लैंड मुझे चैन नहीं लेने दे रहा था. मैंने माँ क चूतड़ ज़ोर से मसलते हुए उनकी पेंटी में हाथ दाल कर छूट को छेड़ना शुरू कर दिया . माँ अब ज़ोर ज़ोर सिसकियाँ लेने लगी . मुझसे और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मैंने माँ को बीएड पर पटकते हुए जल्दी से अपने कपडे उतर दिए . माँ मेरा उतावलापन देख रही थी. उसने भी अपनी ब्रा और पेंटी खुद hi उतर दी. मेरे कपडे उतारते hi मेरा लैंड लकड़ी क खूंटे जैसा अकड़ा आज कुछ ज्यादा hi बड़ा लग रहा था . लैंड पर मोती मोती हरी नीली नसें उभर आयी थी . माँ मेरे लैंड को hi देख रही थी पर बोली कुछ नहीं. मैंने माँ की टाँगें फैलते हुए उनके दोनों पाऊँ को पकड़ कर उठाया और एक बार चुम कर अपने चेहरे पर लगाया . अगले hi पल माँ ने खुद मेरा लैंड पकड़ कर अपनी छूट पर से किया .

गौरी म : मुझ में समां जाओ और अपना सारा दर्द मुझे आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

माँ की बात पूरी होने से पहले hi मैंने ज़ोरदार धक्का मर दिया . माँ ने अपने हाथों से अपने मुँह दबा कर अपनी आवाज़ रोक रही थी. मुझे भी माँ की छूट कुछ ज्यादा hi टाइट लग रही तू और मेरा लैंड किसी खूंटे की तरह गाढ़ा हुआ था माँ की छूट में. मुझे इस वक़्त कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मैंने माँ की टंगे पकड़ कर आगे को दबाते हुए एक और ज़ोर दर धक्का मर पूरा लैंड छूट में जड़ तक गाड़ दिया . माँ ने मुँह में अपनी ब्रा दाल ली थी आवाज़ रोकने क लिए पर इस धक्के क साथ हलाल की हुई मुर्गी की तरह तड़पने लगी. मैंने उनकी तरफ ध्यान न देते हुए धक्के पेलने शुरू कर दिए . मैं लगातार धक्के पेल रहा था और माँ बस पड़ी रही. पता नहीं कितनी देर तक मैं उन्हें रोंद्ता रहा . जान एक hi पोजीशन में मैं थक गया तो मैंने माँ को अपने ऊपर बिठा लिया . माँ धीरे धीरे मेरे ऊपर बैठ कर अपनी कमर हिलने लगी. पर मुझे उनका धीरे धीरे करना ाचा नहीं लग रहा था मैंने खुद hi उनकी चूतड़ों को पकड़ कर हिलना शुरू कर दिया . और फिर उनकी गांड को थोड़ा ऊपर उठा कर नीचे से कमर उठा कर धक्के मरने लगा . माँ लगातार सिसकियाँ ले रही थी. कुछ देर बाद मैंने माँ को घोड़ी बना लिया और कमर पकड़ कर एक hi धक्के में पूरा लैंड घुसा दिया . माँ की टाँगें कम्पनी लगी

गौरी म : आआह्ह्हह्ह्ह्ह आराम से कर बीटा वर्ण कल मैं चल भी नहीं पाऊँगी

अमित : मुझसे रुका नहीं जा रहा माँ ये जकड़न बढ़ती जा रही है हहहहह हहहहह

मैं पसीने में भीग चूका था . माँ का भी पानी पता नहीं कितनी बार निकला था जिस पर मैंने ध्यान न दिया . माँ की टंगे कुछ देर में सचमुच कम्पनी लगी और वो बीएड पर गिर गयी. गौरी म : बस बीटा मैं अब और नहीं झेल सकती. मुझे अब जलन होने लगी है . मैं और नहीं ले सकती इसे .

मैंने माँ बीएड पर उल्टा लिया दिया और उनकी छूट क नीचे दो तकिये रख दिए जिससे उनकी गांड ऊपर को हो गयी . मैंने उनकी जांघों पर बैठे हुए लैंड को छूट से निकला और उनकी गांड पर लगा दिया . माँ ने एक बार मुझे रोकने की कोशिश की पर मुझे तो बस अपना पानी निकलना था. मैंने लैंड को गांड पर लगा कर ज़ोर से अंदर पुश कर दिया . गांड क छल्ले को चौड़ा करता हुआ लैंड धीरे धीरे अंदर घुस रहा था. माँ ने बिस्तर में मुँह दबा दिया और अपने पाऊँ बीएड पर पटकने लगी . ‘गूंणन्न गुणणणण हम्मम्मम्मम्म ‘ की आवाज़ें आ रही थी माँ क इस तरह मुँह दबा लेने से. पर मैं लगातार लैंड गांड में घुसता जा रहा था. हम दोनों hi पसीने में भीग चुके थे. मैंने जड़ तक लैंड घुआने क बाद hi सांस ली . उसके बाद मैंने न की कमर को थामे शुरू हो गया . शुरू शुरू में थोड़ी दिक्कत हुई पर फिर गांड में भी लैंड की जगह बन hi गयी. पता नहीं मैं और कितनी देर तक माँ पर ऐसे hi लगा था. मेरा शरीर पूरी तरह टूट चूका था पर लैंड था क पानी निकल नहीं रहा था. माँ मेरे नीचे किसी मुर्दे की तरह पड़ी हुई थी. जब मेरे लैंड से पानी निकलने को हुआ तो मैंने माँ की गांड में लैंड जड़ तक घुसा कर पिचकारियां मारनी शुरू कर दी. मुझे लैंड क रस्ते अपनी जान hi निकलती महसूस हो रही थी . इसी क साथ मैं माँ क ऊपर गिर गया और पता भी न चला कब मेरी आँख लग गयी .

गौरी जानती थी क अमित को किसी तरह का नशा दिया गया है जो वो होश में नहीं है. वर्ण अमित जो उससे इतना प्यार करता था वो कभी ऐसा न करता. एक बार भी आज उसकी चुदाई करते वक़्त अमित ने कोई रेहम नहीं दिखाया . गौरी का रो रो कर बुरा हल हो गया था. छूट तो जैसे पानी निकल निकल कर सुख गयी थी और दर्द भी करने लगी थी . गांड का भी कबाड़ा कर दिया था अमित ने. अमित जब रुका तब तक तो मरने वाली हालत हो चुकी थी गौरी की. अमित क रुकने क बाद कुछ देर तो गौरी से हिलने की भी हिम्मत न हुई पर उसे पता था क उसे अभी यहाँ से जाना होगा वर्ण सुबह तो उससे उठा भी नहीं जायेगा . घर पर सभी मौजूद हैं इस बात का उसे दर भी था. जैसे hi गौरी थोड़ा सा हिली तो उसे ऐसा लगा जैसे उसकी छूट और गांड में ब्लेड से बहुत सरे कट मर दिए गए हों. गौरी ने पलट कर अपनी छूट देखि तो छूट क होंठ अपने आकर से दुगने मोठे हो चुके थे. अंदर का मांस बहार को कुछ ज्यादा hi लटक गया था. और छूट ऐसे खुली हुई थी जैसे बांस दाल दिया हो लैंड की जगह. गांड का तो और भी बुरा हल था. चूतड़ तो नीचे लगाने से hi दुःख रहे थे. ले और कमर भी दुःख रही थी. चुके भी इतनी ज़ोर से मावली थी अमित ने क वो भी दर्द कर रहे थे. गौरी ने अमित की तरफ देखा तो पसीने में लथपथ वो बेसुध पड़ा हुआ था. गौरी ने प्यार से अमित क चेहरे पर हाथ फिराया और झुक कर उसे किश किया. अमित की पीठ पर ज़ख़्म देख कर आँखों में फिर से नमी आ गयी

गौरी म : पता नहीं क्यों तुझे बेवजह बार बार दर्द मिलते हैं . तू तो किसी का भी बुरा नहीं करता. भगवान् करें तेरे सरे दर्द तकलीफें मुझे मिल जाएँ . तुम हमेशा खुश रहो . आआआअह्ह्ह्हह माआआ पता नहीं किस कमीने ने इसे ये क्या खिला दिया है. पहले hi झेलना मुश्किल होता था आज तो जान hi निकल दी है . कल तो बिस्टेर से उठा भी नहीं जायेगा. आआह्ह्ह्ह कक्कव

गौरी ने जैसे hi ज़मीन पर पाऊँ रखे तो दर्द से उसकी जान hi निकलने लगी . जैसे तैसे वो बाथरूम तक गयी . गांड से निकलता अमित का वीर्य उसकी जांघों से नीचे तक बेहटा आ रहा था . बाथरूम में खुद को साफ़ करने क बाद गौरी ने अपने कपडे पहने और अमित को लोअर पहना कर उसको ऊपर चादर दाल कर दीवार का सहारा ले कर नीचे उतर गयी . कमरे में जाते hi उसने पैन किलर की गोली खाई और बिस्टेर पर विजय क पास लेट गयी . घडी पर नज़र मरी तो 3 बजे से ऊपर समय हो चूका था .

गौरी म : हे भगवन 4 घंटे

दिव्या रत भर चैन से सो नहीं पायी थी और सुबह भी सब से पहले उठ कर वो सीधा अमित क कमरे में गयी . अमित की तबियत को लेकर उसे फ़िक्र हो रही थी . दिव्या जैसे hi अमित क कमरे में पहुंची तो अमित कमर तक चादर में लूटा हुआ सो रहा था. मद्धम रौशनी में अमित की पीठ पर बने वो निशान देख कर दिव्या अंदर से भर गयी और लगभग दौड़ती हुई अमित क पास पहुँच कर उस पर झुक कर उसके माथे को चूमने लगी .अभी सुबह क पांच भी नहीं बजे थे और आसमान का रंग भी काले से नीला हो रहा था. अमित तो सोया hi देर से था ऊपर से जो म्हणत कर क वो सोया था उसे होश कहाँ होनी थी. दिव्या भरे मन से अमित को चुम रही थी . चेहरे पर चूमने क बाद उसने अमित की पीठ पर छू कर उन ज़ख्मों क दर्द को महसूस करने की कोशिश की तो अपने आप उसकी आँखों से आंसू बहने लगे.

दिव्या : मैं तुझे कुछ नहीं होने दूँगी. मैं हमेशा तेरे साथ हूँ . चाहे कोई कुछ भी करले तेरे लिए मैं किसी से भी टकरा जाउंगी मेरे बेटे .

दिव्या फिर से अमित पर झुकी तो नींद में अमित ने करवट बदली और दिव्या सीधा उसकी छाती पर आ लगी. अमित ने नींद में hi उसे बाँहों में दबोच लिया जिससे दिव्या पूरी उसके साथ चिपक गयी और अमित क होंठों से उसके होंठ लग गए. दिव्या खुद को रोक hi न पायी और अमित क होंठों पर खुद hi अपने होंठ लगा दिए . अमित तो नींद में hi शायद ऐसा कोई ख्वाब देख रहा था और वो दिव्या क होंठों को चूमने लगा . दिव्या की कमर को थामे अमित ने फिर से करवट बदली और दिव्या बचे की तरह उसके चौड़े बलिष्ठ जिसम के ऊपर लेट गयी और अगले hi पल उसे आगोश में लेते हुए अमित दूसरी तरफ करवट ले कर दिव्या को अपने साथ लगाए एक तंग उसके ऊपर रख कर पूरी तरह आगोश में लिए ऐसे hi सो गया. दिव्या तो जैसे एक चुम्बन से hi किसी और hi दुनिया में पहुँच गयी थी . और अमित ने नींद में hi जिस तरह उसे फूलों की अपनी आगोश में लेकर ऐसे अपने नीचे कर लिया था . दिव्या का मन गंगना गया था . एक झुरझुरी सी पूरी जिसम में दौड़ गयी थी. दिव्या खुद को भूल कर अमित की आगोश में ऑंखें बंद किये ऐसे hi लेट गयी और उसके अपने हाथ अमित की पीठ पर चले गए . दिव्या जो रत भर सो नहीं पायी थी अब अमित की आगोश में आते hi उसे ऐसे नींद आयी जैसे उसने नींद की गोली खा ली हो. अमित की चौड़ी मांसल छाती से लगी दिव्या उसके मजबूत शरीर में अपने कोमल बदन को सौंप कर नींद की वादियों में खो गयी.



6 बजे जब किसी ने दरवाज़ा खोला तो दिव्या को बीवी की तरह अमित की आगोश में देख कर उसका मुँह खुला का खुला रह गया.
 
अपडेट 165



रजनी और रीता टाइम से hi उठ गयी थी. बच्चों को कॉलेज भेजने क लिए सबको वापिस जल्दी पहुंचना ज़रूरी था. रजनी जल्दी से तैयार होने क लिए नहाने चली गयी और रीता को कह दिया क वो दिव्या को भी जगा दे. रीता दिव्या को उठाने साथ वाले कमरे में गयी तो वहां नैना नेहा करुणा सो रही थी. फिर वो अगले कमरे में गयी तो वहां निधि क साथ राधा सो रही थी. दिव्या को यहाँ भी न पाकर रीता को लगा शायद दिव्या उठ चुकी है. फिर उसे अमित का ख्याल आया. वो अमित को उठाने क लिए उसके कमरे में गयी तो दरवाज़ा खोलते hi सामने अमित क साथ दिव्या को सोई हुई देख कर रीता का मुँह खुला का खुला रह गया. वैसे तो ये इतना अजीब न था. क्यूंकि दिव्या अमित की मौसी hi तो थी पर जिस तरह वो अमित से चिपक कर उसकी आगोश में सो रही थी वो उसकी बीवी hi लग रही थी. ऊपर से अमित का धड़ पूरा नंगा था. दिव्या भी संकुचित सी उसकी नंगी छाती से चिपकी पड़ी थी और अमित का एक हाथ और पूरी तंग दिव्या क ऊपर थी. अमित क विशाल बलिष्ठ जिस्म में फूलों सो नाज़ुक नव विवाहिता की तरह समायी हुई थी.

इतना तो रीता को पता hi था क दिव्या ऐसी नहीं है और न hi दोनों में ऐसा कोई रिश्ता है . कपड़ों से भी पता चल hi रहा था क कुछ हुआ तो है नहीं. पर अमित की बाँहों में ऐसे दिव्या को सुकून से सोई देख कर रीता को बड़ा ाचा लग रहा था. रीता बिना आवाज़ किये बीएड क करीब आयी और दिव्या को हिलाया. दिव्या जो रत भर ठीक से सोई नहीं थी अमित की बाँहों में आकर hi उसे अचे से नींद आयी थी. गहरी नींद में होने की वजह से उसे पता भी नहीं चला रीता ने जब उसे हिलाया . रीता ने दिव्या को होश में न अत देख कर एक दो बार उसे और हिलाया पर फिर भी जब वो न हिली तो उसने दिव्या को चिकोटी काट ली . दिव्या की दर्द से ऑंखें खोल गयी और अपनी बहिन को देख कर उसकी नींद उड़ गयी.

दिव्या : क्या है दीदी सुबह सुबह क्यों तंग कर रही हो ?

रीता : धीरे से ) तंग कर रही हो की बची . खुद को देख कैसे सो रही है इसके साथ . बीटा है पति नहीं है . चल उठ बच्चों को कॉलेज भी भेजना है. दीदी देख लेती तो क्या कहती ?

दिव्या ने जब खुद को इस तरह अमित क नीचे पाया तो उसे भी शर्म आ गयी. धीरे से उसने अमित की तंग और बाजु अपने ऊपर से हटाई जिसमे रीता ने भी मदद की. अमित नींद में hi दूसरी साइड को पलट गया तो रीता की नज़र उसकी पीठ पर बने निशानों पर पड़ी.

रीता : हे भगवन ये सब क्या है ?

रीता अमित की ये हालत देख कर अचानक hi रोने को हो गयी . पर दिव्या ने जल्दी से उठ कर उसके मुँह पर हाथ रख दिया .

दिव्या : इसे सोने दो दीदी . मैं सब बताती हूँ आपको . आप मेरे साथ चलो .

रीता अमित को hi देख रही थी और दिव्या ने अमित पर फिर से चादर दाल दी और रीता को लेकर कमरे से बहार आ कर दरवाज़ा बंद कर दिया .

रीता : ये क्या हुआ है अमित क साथ ? किसने किया है ये ? क्या कल रत .....

दिव्या : नहीं कल रत तो सबके सामने hi हुआ था न सब कुछ. ये सब गाओं आने से पहले hi हुआ है इसके साथ . दीदी क घर hi था तब. आप चलो सब बताती हूँ मैं . यहाँ कोई सुन लेगा . पहले बच्चों को भेज देते हैं फिर आराम से बात करुँगी. वैसे भी दीदी से भी बात करनी है मुझे कल जो कुछ हुआ उसके बारे में.

रीता : दीदी से क्या बात करनी है ?

दिव्या : आपके सामने hi करुँगी , इतना सुन लो क कल अमित को फ़साने की कोशिश की गयी थी और ये कारन का hi काम है.

रीता : क्या ??? ये क्या कह रही हो तुम ?

दिव्या : मैं सही कह रही हूँ. अब चलो पहले बच्चों को जगाओ .

दिव्या और रीता ने सबको जगा दिया. और सब उठ कर जल्दी से नहाने क लिए ऊपर और नीचे बने बाथरूम में बरी बरी से घुसने लगे . निधि तो उठते hi पहले अमित क कमरे में गयी उसे देखने . अमित आराम से सोया पड़ा था . निधि ने प्यार से अमित क गाल पर किश की और उसकी पीठ से चादर हटा कर वहां पर हाथ से चुकार उसका दर्द महसूस करने की कोशिश करती उसने वहां भी चूम hi लिया .

निधि ( मन में ) मुझे माफ़ कर देना मेरे भाई ने hi तुम्हारे खिलाफ इतना कुछ कर दिया. मेरा बस चले तो तुम्हारा हर दर्द मैं अपने ऊपर ले लूँ . तुम hi मेरे सब कुछ हो . तुम्हे मेरी भी उम्र लग जाये .

अमित को एक बार फिर से चूमने क बाद निधि वहां से हैट कर बहार आने लगी तो राधा भी वहीँ ा गयी

निधि : राधा तुम यहाँ ?

राधा : हाँ दीदी वो कॉलेज जाना है तो सब बाथरूम बिजी हैं . मैंने सोचा अमित क कमरे में भी तो है न बाथरूम मैं इसी में नाहा लेती हूँ .

निधि : अरे हाँ मुझे तो ख्याल hi नहीं रहा . तुम नाहा लो मैं भी अपने कपडे ले आती हूँ और यहीं नाहा लेती हूँ.

निधि जैसे hi कमरे से बहार निकली राधा ने दरवाज़ा बंद किया और सीधा अमित क पास चली गयी . अमित को ऐसे सुकून से सोया देख कर राधा को बड़ा ाचा लग रहा था. उसे यद् आया क कैसे अमित उसे नींद से जगाया था घर पर. राधा ने अमित पर झुक कर उसके गाल पर अपने गुलाबी होंठ रख कर एक किश किया . राधा क तन बदन मचल गया इतने से hi स्पर्श से जो उसने खुद hi किया था. अपनी इस हरकत पर खुद hi शर्मा गयी .

राधा : बुद्धू कहीं क , पता नहीं कब समझोगे मुझे.

प्यार क इस मधुर एहसास और इस चुम्बन क नशे में शर्माती वो भाग कर बाथरूम में घुस गयी. नहाते वक्त भी वो बस शरमाते जा रही थी अपनी इस हरकत पर. जब बाथरूम से बहार आयी तो निधि कमरे में hi थी और अमित क पास बैठी हुई थी.

राधा : चलिए दीदी आप भी नाहा लीजिये . इसे मैं जगा देती हूँ अब. वर्ण आज भी छुट्टी हो जाएगी इसकी.

निधि : ठीक है , वैसे तो मैं इसे आज कॉलेज जाने नहीं देना चाहती पर वो भी तो ज़रूरी है .

निधि उठ कर बाथरूम में चली गयी . राधा क गीले बालों से अभी पानी की कुछ बूंदे टपक रही थी . राधा क मन में एक विचार आया . जल्दी से उसने दरवाज़े को कुंडली लगायी और अमित क पास आकर उसके ऊपर झुक कर अपने गीले बल अमित क चेहरे पर गिरा दिए. गीली बालों से गिरती वो चाँद बूंदे जब अमित क चेहरे पर पड़ी तो उसके जिस्म में हलचल हुई. वो नींद से जागने लगा. राधा ने एक दो बार अपने बल उसके चेहरे से हटाए और फिर गिराए. अमित की नींद इससे खुल गयी . अमित ने ऑंखें खोली और सामने राधा के चेहरे पर मुस्कान देख कर वो कुछ देर ऐसे hi उसे देखता रहा. राधा जो अमित क साथ शरारत कर रही थी अब वो शर्माने लगी .

राधा : ऐसे क्या देख रहे हो ? तुम्हे जगाने आयी थी . चलो उठ जाओ कॉलेज भी जाना है.

राधा बड़ी मुश्किल से बोल रही थी . अंदर से उसकी धड़कने इतनी ज्यादा बढ़ गयी थी क उससे वहां बैठे रहना भी मुश्किल हो रहा था. कहाँ अमित को सोया हुआ देख कर वो किसी नव विवाहित युवती की तरह अमित को अपना पति समझ कर अठखेलियां करती जगा रही थी और अब अमित क इस तरह देखने से वो शर्म से गढ़ी जा रही थी .

अमित : जगाने आयी थी या नहलाने? बहुत खूबसूरत लग रही हो तुम इस तरह. और मुझे भी ाचा लगा तुम्हारा इस तरह उठाना.

राधा का दिल तो अमित की इन बातों से उछलने लगा था. वो खुद को कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी .

राधा : इसी तरह हमेशा जगती रहूंगी तुम्हे

इतना कह कर वो हिरणी की तरह उछलती हुई बहार भाग गयी .

अमित ( मन में ) ये भी शरारत करना सीख रही है . सच में कितनी भोली है ये.

मैं फ्रेश होने क लिए बाथरूम में जाने लगा तो अंदर से किसी क नहाने की आवाज़ आ रही थी . मैं वापिस अपनी जगह बैठ गया . कुछ देर बाद निधि दीदी बाथरूम से बहार निकली तो वो इस वक़्त बिलकुल किसी ताज़ा खिले गुलाब सी लग रही थी . वाइट गुलाबी कॉम्बिनेशन क इस फूलों वाले सूट में उनका गोरा रंग गुलाबी रंगत hi दिख रहा था ऊपर से बालों से गिरती वो ौस की बूंदें. मैं दीदी को देख hi रहा था क वो मेरे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया.

निधि दीदी : तू ठीक तो है न ? अब तबियत कैसी है तुम्हारी ?

अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ दीदी आप चिंता न करो .

निधि दीदी : चिंता क्यों न करूँ ? कल तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया

अमित : दीदी मैं सच कहता हूँ मैंने कुछ नहीं किया .

निधि दीदी : जानती हूँ मैं क तूने कुछ नहीं किया . तुम ऐसा कर hi नहीं सकते. जिसने भी ये किया है उसे इसकी सजा ज़रूर मिलेगी. चल तू अब तैयार हो जा कॉलेज भी जाना है .

निधि दीदी ने मेरे गलों पर किश किया और मुस्कुराती हुई बहार चली गयी. मैं भी तैयार होने क लिए बाथरूम में घुस गया .

दिव्या और रीता जब अपने कमरे में गयी तो कारन सोया हुआ था. कारन को देख कर तो एक बार दिव्या को गुस्सा आ गया . पर खुद को काबू करती वो अपना बैग उठा कर दूसरे कमरे में चली गयी. रीता ने hi कारन को जगाया और उसे तैयार होने को कहा. साढ़े सात बजे तक सब ने नाहा लिया था. गौरी को बुखार हो गया था इस लिए रजनी रीता और दिव्या जल्दी से बच्चों क लिए खुद hi नाश्ते की तयारी में लगी थी . कारन सबके साथ नाश्ता करने बैठा था पर कोई उससे बात नहीं कर रहा था सिवाए करुणा और नैना क. ये फिर उसकी माँ रजनी hi उससे बात कर लेती एते जाते. दिव्या तो किचन से hi बहार नहीं आ रही थी कारन को वो देखना भी नहीं चाहती थी. विजय बच्चों क साथ hi मौजूद था. अजय खेतों में जा चूका था और कमलेश सुबह hi घर आया था जो अभी सो रहा था.

मैं जब तैयार हो कर नीचे आया तो माँ की तबियत क बारे में पता लगते hi मुझे रत का मंज़र यद् आ गया . मुझे माँ की चिंता होने लगी मैं जल्दी से उनके कमरे में गया तो बीएड पर कम्बल लिए लेती हुई थी .

अमित : माँ , आप ठीक तो हैं ? मेरी वजह से अआप ....

गौरी म : शह्ह्ह्ह , मैं बिलकुल ठीक हूँ . बस थोड़ा सा बुखार आ गया है और थकान हो गयी है. इसी लिए दवा खा कर आराम कर रही हूँ . तू मेरी चिंता मत कर. तू बता अब तेरी तबियत कैसी है? अब तो ठीक हो न ?

अमित : सॉरी माँ मुझे पता है नहीं चल रहा था मैं क्या कर रहा हूँ.

गौरी म : मैंने कहा न मैं ठीक हूँ .तूने कुछ नहीं किया. आज थोड़ा आराम करुँगी तो ठीक हो जाउंगी . मुझे तो तेरी चिंता थी अब तो ठीक है न तू ?

अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ . पर मुझे ाचा नहीं लग रहा है.

गौरी म : मेरा प्यारा बीटा है न तू ? क्या मैं तेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती ? अगर मैं नहीं करुँगी तो और कौन करेगा. चल अब मेरी चिंता न कर जा कर नाश्ता कर ले फिर तुझे जाना भी है.

अमित : मैं नहीं जाऊंगा आज कॉलेज . आज आपकी सेवा करूँगा आपके पास रह कर.

गौरी म : मेरा प्यारा बीटा , कितना प्यार करता है मुझे . मैं बिलकुल ठीक हूँ मेरी चिंता छोड़. चुपचाप कॉलेज जा वर्ण दीदी क्या कहेंगी क तुझे पास बिठा कर मैं पाऊँ दबवाती रहती हूँ . चल जा भाग वैसे भी रत को अचे सेवा कर तो दी थी तुमने.

माँ ने जान बुझ कर मुझे छेड़ते हुए ये कहा तो मैंने भी कह दिया .

अमित : अगर आप को ाचा लगा तो फिर से कर देता हूँ अचे से .

गौरी म : इतने से जी नहीं भरा या अब हॉस्पिटल क बीएड पर देखना चाहता है मुझे . अब जा जल्दी नाश्ता करले वर्ण देर हो जाएगी.

मैंने माँ को गले से लगाया और माँ ने भी मेरा माथा चुम कर प्यार दिया. बहार आ कर मैंने सब क साथ नाश्ता किया . कामिनी ममी को मैं उनके कमरे में hi जा कर मिल लिया. शायद उन्हें अभी रत वाली घटना पता नहीं थी या जान बुझ कर उन्होंने ज़िकर नहीं किया . दीपिका ममी अपने कमरे से बहार नहीं निकली थी इस लिए मैं उनके कमरे में hi उनसे मिलने चला गया. कमलेश मां बीएड पर सो रहे थे और दीपिका ममी कल वाले कपड़ों में hi अस्त व्यस्त बैठी हुई थी . मुझे देखती hi उनकी आँखों से पानी बहने लगा . मैंने उनकी ये हालत देखि तो जल्दी से उनके पास गया . वो भी उठ कर मेरे गले से लग गयी . दीपिका ममी हिचकियाँ ले कर रोने लगी थी. मैंने उन्हें शांत किया .

अमित : क्या हुआ आप रो क्यों रही हैं ?

दीपिका म : तो और क्या करूँ ? तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया वो भी मेरी वजह से .

अमित : आपकी वजह से ? इसमें आपका क्या कसूर है ? आप खुद को सम्भालिये . मुझे तो पता है न क आप मुझसे कितना प्यार करती हैं. अब ये आंसू बहन बंद कीजिये और आरव का ध्यान रखना. मुझे अब कॉलेज जाना है . जाने से पहले आप से मिलने आया था .

दीपिका म : मुझे अपने साथ ले चलो , मैं इस आदमी क साथ नहीं रहना चाहती . कितनी घटिया सोच है इसकी. जिसने इसके माथे से नपुंसक का कलंक हटाया है उसी पर नाथ उठ रहा है उसी पर इलज़ाम लगा रहा है .

अमित : शहहह . शांत हो जाइये . उन्हें गलत फेहमी हुई है या किसी ने उन्हें भड़काया है . सचाई तो हम दोनों को पता है न . आप चिंता मत करो सब ठीक हो जायेगा. ाचा अब मैं चलता हूँ

दीपिका म : रुको , ऐसे hi चले जाओगे ?

मैंने फिर से दीपिका ममी को बाँहों में लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर प्यार भरा चुम्बन लिया . उसके बाद अपने बेटे को प्यार देकर मैं बहार आ गया. तभी बहार एक कार आ कर रुकी. मैं बहार जाने लगा क कल्पना अंदर आ गयी .

कल्पना : गुड मॉर्निंग, तैयार तो हैं सब ?

अमित : तुम यहाँ ? इतनी सुबह ?

कल्पना : तो क्या हुआ ? नहीं आ सकती क्या ? मैं तो अपनी ड्यूटी पर हूँ . राधा और नेहा दीदी को ले जाने आयी हूँ .

कल्पना बात करते हुए अंदर आ गयी . कल्पना को यहाँ देख कर सब खुश भी थे और हैरान भी . कल्पना बरी बरी सब से मिली . मौसी ने उसे नाश्ता करने को कहा पर उसने कह दिया क वो कर क आयी है . नेहा दीदी और राधा क साथ करना और नैना दीदी को भी कल्पना अपने साथ ले गयी मुझे जल्दी आने का कह कर . मैं भी घर से निकलने लगा तो रजनी मौसी ने कारन भैया को अपने साथ ले जाने को कहा .

रजनी मौसी : अमित बीटा कारन को भी साथ ले जा . बस में कहाँ धक्के खता फिरगा?

निधि दीदी : माँ करना बस में चला जायेगा . कौन सा कोई लम्बा सफर है . मुझे अमित एक ज़रूरी काम है ऑफिस में . बस में गयी तो लेट हो जाउंगी . अमित क साथ hi चली जाउंगी .

दिव्या मौसी : हाँ ये ठीक है , तुम ामित्वक साथ चली जाओ . कारन तो बस में चला hi जायेगा .

कारन भैया : दीदी मैं ले जाता हूँ आपको बाइक पर . अमित बस में आ जायेगा.

विजय म : अरे बीटा तुझे बाइक चाहिए तो मेरी ले जा . वैसे भी घर में 2 और कड़ी तो हैं

निधि दीदी : मैं अमित क साथ जा रही हूँ तुम माँ को ले जाना . चलो अमित . ाचा मां जी मैं चलती हूँ .

निधि दीदी बाबा से मिली और मेरा हाथ खींचती हुई मुझे ले गयी बाइक क पास . मैंने भी बाइक पर दीदी को बिठाया और चल पड़ा शहर की तरफ .

अमित : दीदी , आपको किस ऑफिस में जाना है ? मैंने कहा था न अडपको क अंकल क ऑफिस में आपको जॉब मिल जाएगी. फिर ये ऑफिस ?

निधि दीदी : वो तो मैंने ऐसे hi कहा था. मुझे बस में नहीं आना था . इस लिए तुम्हारे साथ आ गयी.

अमित : कारन भैया को बुरा लगा होगा न ?

निधि दीदी : तुम उसकी परवाह न करो , वैसे भी वो आजकल बहुत सर चढ़ा हुआ है. मुझे घर छोड़ कर तुम कॉलेज चले जाना.

बातें करते हुए हम उनके घर पहुँच गए. मैं दीदी को घर छोड़ कर कॉलेज चला गया . पहला लेक्चर चन्दर्कांता मैडम का था. उन्होंने मुझे घर से किसी को लाने को कहा था और मैं तो इतने दिनों बाद आज कॉलेज आया था. मुझे देखते hi मैडम को गुस्सा आ गया .

चन्दर्कांता: तुम मेरी क्लास में कैसे आ गए ? मैंने कहा था न जब तक घर से किसी को लेकर नहीं आओगे मेरी क्लास में माता आना. निकला जाओ मेरी क्लास से.

मैंने कोई बात नहीं की और चुपचाप क्लास से बहार को जाने लगा तो दरवाज़े क बहार hi ऋतू सिंह सिंपल से सूट में कड़ी थी . ऋतू सिंह को अपने सामने यूनिफार्म की जगह सूट में देख कर मैं थोड़ा हैरान तो हुआ पर चुपचाप उनके पास से निकलने लगा तो उनहोंने मुझे रोक लिया.

सप ऋतू सिंह : एक्सक्यूज़ में मैडम , क्या मैं जान सकती हूँ आप अमित को किस लिए बहार निकल रही हैं ?

सप ऋतू सिंह पहले भी कॉलेज आ चुकी थी और चन्दर्कांता ने उसे वर्दी में देखा हुआ था . ऋतू सिंह की सधी हुई आवाज़ को सुन कर जब चन्दर्कांता में ऋतू सिंह की तरफ देखा तो एक डैम से उसके हावभाव बदल गए .

चन्दर्कांता: अरे मैडम आप !! आइये आइये .

सप ऋतू सिंह : जी शुक्रिया ये आपकी क्लास है . मैं जानना चाहती हूँ आप अमित को क्लास से क्यों निकल रही हैं?

चन्दर्कांता को पता था क वो अमित को अरेस्ट करने hi आयी थी पहले भी और शायद अभी भी इसी लिए आयी होंगी .

चन्दर्कांता: ये बहुत hi इर्रेगुलर स्टूडेंट है मैडम . कॉलेज टीम का प्लेयर है तो खुद को पता नहीं क्या समझता है. मैंने इसे घर से किसी को लाने को कहा था और ये अभी तक किसी को नहीं लाया है .

सप ऋतू सिंह : सिर्फ अटेंडेंस काम होने का मतलब ये तो नहीं क ये गलत है ? कॉलेज का नाम रोशन कर रहा है इसे तो आपको सपोर्ट करना चाहिए . फिर भी अगर आप इतना hi ज़रूरी समझती हैं इसके किसी फॅमिली मेंबर या गार्डियन को यहाँ बुलाना तो आप मेरा नाम लिख सकती हैं . मैं सिग्न कर देती हूँ .

चन्दर्कांता तो शॉकेड हो गयी ऋतू सिंह की ये बात सुन कर. उसे तो उम्मीद hi न थी क चन्दर्कांता ऐसा कुछ कह सकती है .

चन्दर्कांता : नं नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैडम it’s ok . वैसे ये आपका ???

सप ऋतू सिंह : अपना hi समझिये. अब तो आप इसे बहार नहीं निकलेंगी ?

चन्दर्कांता: कैसी बातें कर रही हैं मैडम , आपका कहना भला कोई मोड़ सकता है . आओ अमित अंदर आओ , तुमने पहले क्यों नहीं बताया क मैडम तुम्हारी रिश्तेदार हैं ?

मैंने तो ऋतू सिंह की बातों से hi शॉकेड में था . अब चन्दर्कांता की बात का मैं क्या जवाब देता .

सप ऋतू सिंह : अगर आपको ऐतराज़ न हो तो क्या मैं कुछ देर अमित से बात कर सकती हूँ?

चन्दर्कांता: जी जी आप करिये बात it’s ok . जाओ अमित बात करलो .

मैं ऋतू सिंह क साथ क्लास रूम से थोड़ा दूर पार्क में आ गया . मुझे समझ में नहीं आ रही थी क ऋतू सिंह आखिर किस लिए आयी है और क्या बात करना चाहती है.

सप ऋतू सिंह : तुम सोच रहे होंगे मैं यहाँ किस लिए आयी हूँ ? देखो उस दिन जो भी हुआ वो एक गलतफहमी थी. मौका और हालत ऐसे थे क हमने तुम्हे गलत समझ लिया . ऊपर से तुम्हारे खिलाफ 2-3 बातें मेरी नोटिस में आयी थी तो मुझे लगा तुम उन लोगों क साथ hi मिले हुए हो. हो जाती है कभी कभी गलती इंसान से . जब सचाई मेरे सामने आयी तो मुझे खुद बुरा लगा जो भी तुम्हारे साथ हमने किया. ी होप यू अंडरस्टैंड. ये कोई पर्सनल मटर नहीं था . हो सके तो

सप ऋतू सिंह आयी तो माफ़ी मांगने थी क्यूंकि वो उस दिन से आराम से सो नहीं प् रही थी . हर वक़्त एक गिलटी की फीलिंग उसके मन में उसे परेशां कर रही थी . ऊपर से अमित की जब अच्छाइयां उसके सामने आयी तो उसके लिए और भी मुश्किल हो गया . ज़िन्दगी में कभी ऋतू सिंह ने किसी क आगे नज़रें नहीं झुकाई थी और मारसों से तो उसका 36 का आंकड़ा था . इस लिए आज माफ़ी मांगना भी उसे किसी सजा जैसा लग रहा था . वो कोशिश तो कर रही थी माफ़ी मांगने की पर उससे हो नहीं रहा था.

अमित : आपकी एक छोटी सी गलतफहमी किसी की साडी ज़िन्दगी तबाह कर सकती है मैडम और फिर उस इंसान क साथ जुड़े उसके परिवार और उसके हर चाहने वाले की . इतनी ज़िंदगियाँ तबाह कर क क्या माफ़ी मांग लेने से सब ठीक हो जाता है? अगर मेरे लिए मुझे बचने वाले सही समय पर न आते तो क्या फिर आपका माफ़ी मांगना किसी काम अत ? मेरी पूरी ज़िन्दगी एक गलत फेहमी से उस दिन बर्बाद हो गयी होती . खैर आप में सही कहा , इंसान से गलती हो जाती है . पर क्या एक इंसान की गलती क लिए हर इंसान को गलत hi समझा जाना चाहिए ? आप एक बड़ी अफसर हैं आप कुछ मांगे और मैं इंकार कर दूँ ऐसा तो हो नहीं सकता . मुझे अभी पड़ना है और ज़िन्दगी में कुछ करना है. आपको इंकार कर क मैं जेल नहीं जाना चाहता. इस लिए आप सब भूल जाइये , मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है . आप अपनी ड्यूटी करिये . मैं चलता हूँ .

इतना कह कर मैं वापिस अपनी क्लास में चला गया . जबकि ऋतू सिंह वहीँ कड़ी रही .

ऋतू सिंह अमित की बात से विचलित हो गयी थी. हमेशा अपने hi हम जो सबसे ऊपर रखने वाली ऋतू सिंह का जैसे सारा वजूद हिला दिया था अमित ने. एक तो उसने तंज में वो सब बातें कहीं और ऊपर से पीठ दिखा कर चला गया . ऐसी जुर्रत तो कोई पुलिस अफसर भी नहीं करता था ऋतू सिंह क साथ . दूसरा उसने अमित ने जो बात कही थी वो सीधी ऋतू सिंह क दिल पर लगी थी. ‘ क्या एक इंसान की गलती क लिए हर इंसान को गलत समझा जाना चाहिए ?’ ये बात ऋतू सिंह को हिला गयी थी . और ये सच भी थी. ऋतू सिंह हर मर्द को नफरत की निगाह से hi देखती थी जो क एक गलत इंसान की वजह से हुआ था. ऋतू सिंह की ज़िन्दगी में भी किसी मर्द ने उसे ऐसा घाव दिया था क वो हर किसी से नफरत करने लगी थी . अमित क साथ पहली hi मुलाकात में इसी लिए वो आग बबूला हो गयी थी और वहीँ से उसकी नज़रों में अमित गलत इंसान साबित होता गया और उसकी नफरत बढ़ती गयी . किसी और ने ऐसे पीठ दिखाई होती तो ऋतू सिंह अपनी इस इंसल्ट क बदले उसे नानी यद् दिला देती पर यहाँ मामला उल्टा था. एक तो पहले से ग्लानि की भावना थी ऋतू सिंह क अंदर ऊपर से अमित ऐसा पहला शख्स उसे मिला था जो लड़कियों को इतनी इज़्ज़त देता था. शालू की कहानी सुन कर तो अमित का कद और भी बढ़ गया था उसके मन में. ऋतू सिंह अंदर से कमज़ोर पड़ने लगी थी अमित की बातों और उसके इस तरह चले जाने से. उसे एहसास हो रहा था क वो आज भी अपनी अकड़ में hi उससे माफ़ी नहीं मांग रही थी बल्कि पुलिस कार्रवाही की गलती बता रही थी. ऋतू अमित से बात करना चाहती थी पर अब वो जा चूका था. भरी मन से वो वापिस लौट गयी पर अमित से वो फिर से मिलने का सोच चुकी थी.

चन्दर्कांता ने मुझे क्लास में बैठने दिया और कोई बात नहीं की . अगला लेक्चर फ्री था क्यूंकि मंजू म आज भी नहीं आयी थी . मंजू म की चोट का ख्याल आते hi मेरा दिल किया क मैं उनके घर चला जॉन . पर फिर सोचा क छुट्टी की बाद जाऊंगा. मैं मोहित और कल्पना कैंटीन में चले गए .

कल्पना : तो क्या कहने आयी थी ऋतू मैडम ?

मोहित : यार ये लेडी थी कौन ? ऐसे लगता है इसे कहीं देखा है पहले . और चन्दर्कांता तो एक डैम से बदल गयी थी जब उसने अमित की साइड ली

कल्पना : न्यूज़ नहीं देखते क्या ? सप ऋतू सिंह है वो . हमारे शहर की सप

मोहित : ो तेरी की ,, तभी मैं कहूं उसे कहीं देखा है. उसकी फोटो हमेशा यूनिफार्म में hi आती है तो इस लिए पहचान नहीं सका. पर वो तुमसे मिलने क्यों आयी थी ?

कल्पना : कुछ नहीं , कुछ दिन पहले लड़कियों को किडनैप करने वाला गैंग नहीं पकड़ा था उन्होंने , उसकी इनफार्मेशन अमित ने hi दी थी .

मोहित : तू कहाँ कहाँ टंगे फसता रहता है यार ? क्यों दुश्मनी ले रहा है ऐसे लोगों से ?

अमित : तो क्या चुपचाप देखते रहना चाहिए क्या अपने सामने अगर किसी क साथ गलत हो रहा हो तो ? आज दूसरे क साथ हो रहा है कल को अपने साथ भी हो सकता है . ऐसे लोगों को ख़तम करना सिर्फ सिस्टम की hi ज़िम्मेदारी नहीं है . हमें भी मदद करनी चाहिए .

मोहित : सही कह रहे हो तुम . वैसे वो क्या कह रही थी ?

अमित : कुछ. नहीं शुक्रिया ऐडा करने आयी थी . उस दिन मिल नहीं पाए थे न . मैं गाओं जो चला गया था .

कल्पना : वैसे यार एक कमी रह गयी फंक्शन में.

अमित : क्या ?

कल्पना : सोचा था गाओं देखेंगे पर देख hi नहीं पाए

अमित : कोई बात नहीं तुम मेरे साथ चलना अचे से दिखा दूंगा . एक दो दिन हमारे घर रहना . वैसे भी माँ बहुत खुश हुई है तुमसे मिल कर .

कल्पना : सच ?? फिर तो मैं ज़रूर आउंगी . मगर जब छुट्टियां होंगी एक दो तब hi. ऐसे छुट्टी की तो पापा नाराज़ होंगे .

उधर गाओं में जब सब बचे चले गए तब दिव्या ने रीता और रजनी को ऊपर कमरे में ज़रूरी बात करने क लिए बुलाया.

रजनी : क्या बात है दिव्या ? कौन सी ज़रूरी बात करनी है तुझे ?

दिव्या : दीदी आपको बुरा तो लगेगा पर ये ज़रूरी है. प्लीज आप मुझे गलत मत समझना.

रजनी : बात क्या है खुल क बता , तुझे पता है न मैं तेरी किसी बात का गुस्सा नहीं करती .

दिव्या : दीदी कल जो कुछ भी हुआ मैं उसी बारे में बात करना चाहती हूँ .

रजनी : मैं भी तुमसे इस बारे में पूछना चाहती हूँ. मुझे पता है कल तुमने अमित को बचने क लिए झूठ बोलै है. तू ऐसी हरकत कर hi नहीं सकती

दिव्या : क्या अमित कर सकता है ऐसी हरकत ? क्या आपको लगता है ये उसने किया होगा?

रजनी : वो फ़ोन तो उसी का था न तो और किसने खींची होंगी ?

दिव्या : आप ऐसा कैसे सोच सकती हैं दीदी ? उसे फसाया गया था . फ़ोन ज़रूर उसका था पर वो तस्वीरें उसने नहीं खींची . और जानती हैं किसने खींची हैं वो तस्वीरें ? कारन ने

रजनी : शॉकेड ) ये तू क्या कह रही है ? बेवजह मेरे बेटे पर इलज़ाम लगा रही है . वो ऐसा क्यों करेगा ?

दिव्या : तो अमित हमारा बीटा नहीं है ? क्या आप मानती हैं वो ऐसा कुछ करेगा? आज तक ऐसी कोई बात कभी सुनने को मिली किसी से? ये सब कारन ने क्यों किया ये मुझे नहीं मालूम . पर ये उसी की हरकत है. मैंने खुद अपने कानो से नेहा को निधि को बताते हुए सुना है . और अमित की अलमारी में वो कपडे भी कारन ने hi रखे थे इसके इलावा शराब की बोतल अश्लील किताबें और गोलियां भी राखी थी सेक्स बढ़ाने वाली . जिसे नेहा ने hi निकल दिया था जब उसकी नज़र पड़ी. आप बताइये क्या ये सब नेहा झूठ बोलेगी निधि से ? और उस दिन कारन ने आपके सामने hi अमित को मनहूस और भला बुरा कहा था न ? फिर भी आपको यकीन नहीं है . बस दीदी बहुत हो गया . दामिनी नहीं है तो क्या हुआ मैं हूँ अमित का ध्यान रखने क लिए . कारन ने अगर अमित क साथ कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. आप का नाम न ख़राब इस लिए मैं चुप कर गयी पर अगर फिर उसने कुछ किया तो मैं भूल जाउंगी वो आपका बीटा है . अमित पर मुझे अपने से ज्यादा भरोसा है. वो ऐसा कुछ कर hi नहीं सकता और आखिर क्या किया है उसने कारन क साथ जो वो ऐसा कर रहा है ? आप hi बताइये.

दिव्या क इस खुलासे से रजनी और रीता दोनों hi शॉकेड थीं. रीता को तो ये भी नहीं पता था क कारन ने ऐसा कुछ कहा है अमित को. रीता को ये सब सुन कर अब कारन पर गुस्सा आ रहा था पर रजनी की विश्वास नहीं हो रहा था क उसका बीटा ऐसा कुछ कर सकता है .

रजनी : कारन ऐसा नहीं कर सकता , ज़रूर नेहा को गलती लगी होगी . वो अमित से गुस्सा ज़रूर है पर इतनी गिरी हुई हरकत ? मैं नहीं मानती

दिव्या : बस दीदी , आप बड़ी हैं मैं आपके खिलाफ नहीं जा सकती पर जब बात अमित पर आएगी तो मैं उसी क साथ हूँ फिर चाहे आप जो समझें.

रजनी : अमित मेरा भी बीटा है दिव्या . हो सकता उससे गलती हो गयी हो .

दिव्या : माफ़ करना दीदी , अगर अमित आपको नज़रों में ऐसा है तो आज क बाद वो आपके घर नहीं आएगा . वो मेरे पास हो रहेगा. अगर वो बुरा है तो बुरा hi सही . आपको अपने बेटे पर यकिल है और मुझे अपने बेटे पर . सचाई मैंने आपको बता दी . अब आपकी मर्ज़ी इसे सच मने या न मने .

इतना कह कर दिव्या कमरे से बहार चली गयी . रीता दिव्या क पीछे hi कमरे से निकल गयी . उसे लगा क दिव्या गुस्से में कहीं घर में इस बात पर हल्ला न मचा दे. इस लिए वो उसे रोकने इसके पीछे चली गयी. जबकि रजनी वहीँ खड़े खड़े जैसे पत्थर हो गयी थी. उसका दिल ये बात मन नहीं रहा था क उसका बीटा ऐसा कुछ कर सकता है . क्यूंकि वो गुस्से वाला और ज़िद्दी हो गया था पर ऐसी हरकत तो वो नहीं कर सकता था. जबकि अमित और रीता की बातें सुनने क बाद अब अमित क करैक्टर रजनी की नज़र में मैला हो चूका था . खैर तीनो बहनो का मूड ऑफ हो गया था तो वो ज्यादा देर नहीं रुकी और बस पकड़ कर वापिस शहर आ गयी. रीता ने दिव्या से कारन वाली बात पता कर ली थी क उसने अमित को क्या क्या कहा था अपने घर पर और ये भी क अमित क पीठ पर वो निशान कैसे हैं .

कैंटीन में आज सब कल क फंक्शन की hi बातें करते रहे. कल्पना तो अपने मोबाइल में खींची हुई मेरे बचपन की तस्वीरें hi दिखा रही थी . मीनल और मोहित की भी कल्पना क खूब टांग खींची उनके गायब रहने की वजह से . छुट्टी क वक़्त नेहा दीदी ने घर चलने का पूछा तो मैंने बता दिया क मुझे किसी से मिलना है इस लिए शाम को hi घर आऊंगा . कॉलेज से निकल कर मैं मंजू म क घर चला गया . मेरा बड़ा दिल कर रहा था उनसे मिलने को एक तो उनको चोट लगी थी और दूसरा उनसे बात भी नहीं हो पायी थी गाओं जा कर. मंजू म क जब घर पहुंचा तो दरवाज़ा रुपाली ने hi खोला.

रुपाली : आ गए तुम ? मंजू कह hi रही थी क तुम ज़रूर आओगे आज.

अमित : कैसी हैं आप आंटी ?

मैं उनके पाऊँ चुने लगा तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .

रुपाली : मैं ठीक हूँ और तुम मेरे पाऊँ मत छुआ करो मुझे ाचा नहीं लगता . अब चलो अंदर अपनी मम से भी मिल लो.

हम दोनों जब मंजू म क कमरे में आये तो वो बीएड से पीठ लगा कर बैठी हुई थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर रौनक आ गयी पर अगले hi पल मुँह बनाते हुए उन्होंने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया . उनके पाऊँ में अब प्लास्टर नहीं था बाद गरम पट्टी थी .

मंजू म : भाभी इससे केहदो मैं इससे नाराज़ हूँ . मुझे इससे कोई बात नहीं करनी है .

रुपाली : भाई तुम दोनों क झगडे में मैं नहीं बोलने वाली क्या पता बाद में तुम मुझे घर से बहार निकल दो अगर मैंने अमित को कुछ कहा तो .

इतना कह कर रुपाली हस्ती हुई किचन में चली गयी . मैं मंजू म क पास बैठ गया और उनका चेहरा अपने हाथों में ले कर अपनी तरफ किया . मम ने ऑंखें एक बार मेरी तरफ की फिर से झुका ली .

अमित : इतनी नाराज़गी की वजह जान सकता हूँ ?

मंजू म : तुम्हे नहीं पता मैं क्यों नाराज़ हूँ ? एक बार भी फ़ोन उठाया तुमने मेरा? कितने फ़ोन किये थे मैंने.

अमित : ओह तो इस लिए नाराज़ हैं आप . ी ऍम सॉरी . वैसे मेरा फ़ोन उस दिन मेरे पास नहीं था. और काम काज की भागदौड़ में यद् hi नहीं रहा .

मंजू म : हाँ अब मुझे यद् क्यों रखोगे ? मैं हूँ hi कौन .

मंजू म ने जब ये बात कही तो मुझे बिलकुल भी ाचा नहीं लगा और मैं खामोश हो गया . जब मैंने कोई हरकत नहीं की तो मम ने मेरी तरफ देखा और वो समझ गयी क मुझे उनकी ये बात बुरी लगी है . मम खुद hi जल्दी से मेरे गले लग गयी .

मंजू म : ी ऍम सॉरी वो गलती से मुँह से निकल गया . मैं ऐसा कहना नहीं चाहती थी प्लीज नाराज़ मत होना . मैं जानती हूँ तुम मुझे कितना प्यार करते हो . प्लीज .....

अमित : मैं कभी ऐसा सोच भी नहीं सकता जो आप कह रही थी. आपको मैंने दिल से अपना मन है और पता नहीं क्यों जब भी आपके बारे में सोचता हूँ तो ऐसे लगता है जैसे आप हमेशा से hi मेरी थी . मैंने आपको कितना मिस किया मेरे दिल से पूछिए .

मंजू म : मेरे दिल से नहीं पूछोगे क मेरा क्या हल है इतने दिनों से तुमसे दूर रह कर? बस इसी लिए गुस्सा कर रही थी . अब तुम नाराज़ मत होना किसी बात पे.

अमित : आपसे नाराज़ हो कर जाऊंगा कहाँ .

मम ने मेरे होंठों पर हलके से अपने होंठ रख कर किश किया और उनके चेहरे और आँखों में ख़ुशी नज़र आने लगी.

अमित : इतने दिनों बाद बस इतना hi ? लगता है आपने मुझे ज्यादा मिस नहीं किया

मंजू म : ाचा !!! भाभी यहाँ न होती तो तुम्हे बताती .

‘ क्या बताती ? अभी बतादो . कहो तो मैं बहार चली जाती हूँ .’ हाथ में जूस का गिलास ले कर अति हुई रुपाली ने कहा तो मंजू म शर्मा गयी .

मंजू म : देखो न भाभी ये कह रहा है क मैंने इसे यद् hi नहीं क्या . अब आप hi बताओ इसे

रुपाली: तुम यद् करने की बात करते हो ? यहाँ तो कोई भी बात हो तो तुम्हारा ज़िकर हो hi जाता है उसमे. मंजू तो करती hi है मेरी तीनो बेटियां भी हर बात में तुम्हे यद् करती हैं . सच में तुमने जो खुशियां हमें दे दी हैं वो तो जैसे कहीं खो सी गयी थी. अब तो दर लगता हैं कहीं फिर से ये सब हमसे कोई चीन न ले.

अमित : ऐसा क्यों सोचती हैं आप ? भगवन सब ाचा hi करेगा . मैं हमेशा आपका साथ दूंगा.

रुपाली : अब तो तुम hi एक हो जिससे मंजू क साथ साथ मुझे भी उम्मीदें हैं. ाचा तुम दोनों बाएं करो मैं खाना बना कर अति हूँ .

रुपाली कमरे से निकल कर किचन में चली गयी और मैं फिर से मंजू म क साथ बाथ गया .

मंजू म : अब पता चला क मैं यद् करती हूँ या नहीं ? फिर भी यकीन न हो तो इस दिल से पूछ लो जिस की हर धड़कन तुम्हारा नाम लेती है.

अमित : किसी से पूछने की ज़रूरत नहीं है मुझे . सब जनता हूँ मैं . मैं तो बस मज़ाक कर रहा था. चलिए अब ज़रा आप कहती है तो आपके दिल से भी बात के hi लेता हूँ

इतना कह कर मैंने मंजू म क गुलाबी होंठों को अपने होंठ में जकड लिया और उन्हें किश करने लगा . मम ने भी मेरा पूरा साथ दिया .

मंजू म : उम्मम्माह्ह्ह बहुत तड़पते हो मुझे तुम . अपनी आदत लगा कर अब खुद दूर दूर रहते हो. क्या तुम मुझे अपने साथ नहीं रख सकते ? तुमसे दूर रहना मुझे ाचा नहीं लगता .

अमित : आप हमेशा मेरे दिल में हैं . रही बात साथ रहने की तो वो दिन भी आएगा जब I’m साथ होंगे . पर अभी उसमे समय है .

मंजू म . जानती हूँ पर इस दिल को कैसे समझों ? तुम्हे सिवा और कुछ नहीं सोचता ये. मेरी सूनी ज़िन्दगी में ये रंग तुमने hi भरे हैं . तुम्हारे सिवा मैं और कुछ नहीं चाहती . इतने दिनों से मैं तुम्हारे प्यार को तरस रही हूँ कुछ कर नहीं सकते क्या ?

अमित : पहले आप ठीक हो जाइये फिर मैं आपको खूब प्यार करूँगा . हम दोनों कहीं बहार चलेंगे यहाँ तो हमें मौका मिलने से रहा अब .

मंजू म : मैं अब ठीक हूँ , कल से तो कॉलेज भी शुरू कर दूंगी . तुम देखो कब और कहाँ चलना है .

अमित : ठीक है जल्दी hi मैं आपको लेकर चलूँगा जहाँ आपको जी भर क प्यार कर सकूँ . उम्म्म्म

मैंने फिर से मंजू म को किश करना शुरू कर दिया और उन्होंने भी गरम जोशी से जवाब दिया. कुछ देर और बातें करने क बाद हमने साथ में खाना खाया . रुपाली ने जाते जाते मुझसे अकेले में मिलने को कहा तो मैंने उन्हें एक दो दिन में मिलने का कह दिया क्यूंकि अभी मुझे अंकल आंटी से भी मिलना था.

मंजू म क घर से निकल कर मैं मोहित क घर चल गया. रीता मौसी का इस दौरान फ़ोन भी आया तो मैंने उन्हें बता दिया क मैं मोहित क घर से होकर hi आऊंगा . उसके बाद मैं सीधा मोहित क घर पहुँच गया. आंटी तो मुझे देख कर खुश हो गयी . करिश्मा दीदी अपने कमरे में खाने क बाद आराम कर रही थी. आंटी को मुझसे कुछ ज़रूरी बात करनी थी इसी लिए मैंने यहाँ आया था.

आंटी : मिल गया टाइम ? कितने दिनों बाद हो यहाँ .

अमित : आप का हुकम था तो आना hi था. आप जब भी कहेंगी मैं आ hi जाऊंगा अब दिन का हिसाब मत रखा कीजिये वैसे भी अगले हफ्ते तो आपके पास hi हूँ मैं .

आंटी : क्या इस हफ्ते नहीं रुक सकते यहाँ ? करिश्मा भी यहीं है. वो भी खुश होगी अगर तुम पास रहोगे तो. पता है कितने दिनों बाद उसके चेहरे पर ख़ुशी देखि है मैंने . वो बहुत खुश है तुमसे मिल कर और फिर गाओं में जब सब से मिली तो घर आ कर भी बस वहीँ बातें करती रही. एक पल को तो लगा क मुझे मेरी बेटी वापिस मिल गयी पर अब फिर से वैसी hi हो गयी है यहाँ आ कर.

अमित : आंटी बात क्या है ? दीदी को क्या प्रॉब्लम है? आपको कुछ बताया उन्होंने ने ?

आंटी : इसी लिए तो तुम्हे बुलाया है . चलो मेरे कमरे में वहीँ बात करते हैं . मोहित और करिश्मा अपने कमरे में हैं . तेरे अंकल भी रत तक hi वापिस आएंगे .

आंटी मुझे अपने साथ अपने कमरे में ले गयी . दरवाज़ा बंद करने क बाद मुझे अपने साथ बीएड पर बिठाया और करिश्मा दीदी की सैर बताने लगी . मैं भी सुनता रहा . आंटी करिश्मा दीदी क बारे में बताते बताते रोने hi लगी थी . उन्हें अपनी बेटी की हालत पर बहुत दुःख था.

आंटी : रट हुए ) मेरी फूल सी बची की ज़िन्दगी नरक बना दी है उन लोगों ने.

अमित : अंकल ने कुछ नहीं कहा ?

आंटी : करिश्मा ने अपनी कसम दी है मुझसे क मैं उन्हें कुछ न बताऊँ . मैं उसे उन नरक में नहीं देख सकती .

अमित : एक बार उनसे बात तो करनी चाहिए न . अंकल नहीं तो आप बात करलो उनकी सास से

आंटी : नहीं वो लोग तो करिश्मा में hi दोष निकालेंगे न . वैसे भी करिश्मा की बातों से इतना तो पता चल hi गया है क वो सब मिले हुए हैं आपस में. ससुर तो कुछ बोलता नहीं है और घर में बस उसकी सास और ननद की hi चलती है. पति भी उन दोनों की hi मंटा है.

अमित : दीदी क्या कहती है ?

आंटी : वो तो कहती है क ये रिश्ता उसके पापा ने करवाया था इस लिए इसे वो टूटने नहीं देगी और सब कुछ चुपचाप सेहती रहेगी.

अमित : अगर वो लोग इस कदर तक घटिया है तो उनके साथ रहना कहाँ तक सही है ? ऐसे तो वो घुट ते घुट ते एक दिन खुद hi ..... जब अंकल ये सब पता चलेगा तो उन पर क्या बीतेगी?

आंटी : बहुत समझाया है मैंने पर वो नहीं मन रही और मानेगी भी नहीं. इसी लिए तुमसे बात कर रही हूँ. मोहित को भी नहीं बताया मैंने. सिर्फ तुम hi कुछ कर सकते हो .

अमित : मैं ?? मैं क्या कर सकता हूँ इसमें?

आंटी : तुम्हे करिश्मा क साथ उसके ससुराल जाना होगा .

अमित : मैं वहां क्या करूँगा जाकर ?

आंटी : तुम hi कर सकते हो अब जो भी करना है और मुझे पूरा यकीन है क ये तरीका काम कर सकता है. असल में करिश्मा की ननद है असली जड़ है उसकी तकलीफों की . खुद तो अपने पति को छोड़ आयी है और अब मेरी बेटी का घर बर्बाद कर रही है. उसकी माँ उसी की साइड लेती है और करिश्मा का पति भी वही करता है जो दोनों कहती हैं . मैंने देखा है वो कुछ ज्यादा hi गरम है . मॉडर्न कपडे पहनती है . इतनी गरम लड़की अपने पति से दूर रह कर खुद को ठंडा कैसे करती होगी ? कुछ तो वो ज़रूर करती होगी . या हो सकता है क वो किसी को ढून्ढ रही हो. तुम अगर उसे काबू करलो तो करिश्मा की ज़िन्दगी सुधर जाएगी .

अमित : नहीं आंटी मैं ये सब नहीं कर सकता. ज़रा सोचिये अगर मैंने कोई हरकत की और उसने मेरी शिकायत कर दी तो दीदी क साथ वहां क्या होगा ? क्या तब आप संभल पाएंगी इस बात को ? वैसे भी मुझे ये सब नहीं अत .

आंटी : देखो मैं एक औरत हूँ और दूसरी औरत को अचे से समझ सकती हूँ. वैसे भी तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. एक तो तुम्हारी पर्सनालिटी से वैसे hi वो इम्प्रेस हो जाएगी , दूसरा तुम्हारे पास जो जादू की छड़ी है न वो किसी को भी तुम्हारा गुलाम बना सकती है .

अमित : पैर आंटी

आंटी : पर वॉर कुछ नहीं, अगर करिश्मा को अपनी बहिन मानते हो तो क्या उसके लिए इतना भी नहीं कर सकते ?

अमित : ठीक है, एक भाई होने क नाते मैं उनके लिए जो कर सकता हूँ वो करूँगा पर अगर बात बिगड़ गयी तो ? अगर दीदी को इस बात का पता चल गया तो ?

आंटी : वो सब मैं देख लुंगी . तुम बस ये काम कर दो. उसकी ननद अगर तुम्हारे नीचे आ गयी तो फिर समझो उसकी सास भी फिर हमारी मुठी में होगी . फिर करिश्मा को कोई परेशां नहीं रहेगा.

अमित : ठीक है आंटी पर अब ये सब कैसे होगा ?

आंटी : करिश्मा को मायके छोड़ने तुम जाओगे और कुछ दिन वहीँ रुक जाना.

अमित : जाना कब है ?

आंटी : जब तुम कहो

अमित : दीदी को आप कुछ दिन यहीं रहने दो. यहाँ रहेंगी तो उन्हें भी ाचा लगेगा.

आंटी : मैं भी यही सोच रही हूँ . मैं करिश्मा से बात कर क तुम्हे बता दूंगी .

अमित : अंकल कब आएंगे आंटी मुझे उनसे काम है .

आंटी : वैसे तो वो शाम को आएंगे , अगर काम ज़रूरी है तो फ़ोन कर लो उन्हें.

मैंने अंकल को फ़ोन लगा दिया . अंकल ने तीसरी बेल्ल पर फ़ोन उठा लिया .

अंकल : और कैसे हो बेटे , आ गए गाओं से ?

अमित : जी अंकल मैं ठीक हूँ और अभी आपके घर पर hi हूँ.

अंकल : वो तुम्हारा hi घर है बेटे. अब बताओ क्या काम है ?

अमित : वो मैंने दीदी की बात की थी आपसे जॉब क लिए.

अंकल : ाचा ाचा , इसमें पूछने की क्या ज़रूरत है. सब कुछ तुम्हारा hi है. तुम जब चाहो उसे भेज दो.

अमित : पर मैं चाहता हूँ क उन्हें ये न लगे क ये जॉब उन्हें मेरी वजह से मिली है.

अंकल : ठीक है समझ गया. ऐसा करो कल तुम उसे ऑफिस में ले आना. मैं सब देख लूंगा.

अमित : ठीक है मैं उनको भेज दूंगा.

अंकल : भेजना नहीं तुम्हे खुद आना पड़ेगा.

अमित : ठीक है अंकल मैं आ जाऊंगा.

अंकल : ठीक है बीटा तुम घर पर बैठो अपनी आंटी और दीदी से बातें करो मैं भी जल्दी आ जाऊंगा .

अमित : ठीक है अंकल .

उसके बाद अंकल ने कॉल कट कर दी

आंटी : तो अब क्या इरादा है ?

अमित : कैसा इरादा ?

आंटी : कितने दिन हो गए हमने कुछ किया नहीं

अमित : दीदी घर पर हैं आंटी हमें रिस्क नहीं लेना चाहिए. अब मुझे चलना चाहिए.

आंटी : रुक तो जाओ थोड़ी देर करिश्मा से तो मिल लो .

अमित : मैं कल मिल लूंगा उनसे. आज मौसी क घर भी जाना है .

उसके बाद आंटी ने एक बार मुझे गले लगा कर अचे से किश किया और मैं रीता मौसी क घर आ गया.

रजनी दिव्या की बातों से आहत जब घर पहुंची तो घर पर सिर्फ निधि थी. रजनी को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था क कारन ने ऐसा कुछ किया होगा. उसे तो अमित पर hi शक था रीता क साथ उसकी बातों क कारन. रजनी ने निधि से hi पूछना बेहतर समझा.

रजनी : निधि मुझे तुमसे एक ज़रूरी बात करनी है .

निधि : कहिये माँ .

रजनी : कल घर पर जो कुछ हुआ तुम्हे उसके बारे में कुछ पता है ?

निधि : आप किस बारे में पूछ रही हैं माँ?

रजनी : मैं अमित की बात कर रही हूँ . उसके जो कुछ किया है उसके बारे में तुम्हे कुछ कहना है ?

निधि : अमित ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है . और वो ऐसा कुछ कर भी नहीं सकता . आपको जान कर दुःख होगा माँ. मुझे भी हुआ था पर ये सब कारन ने किया है.

रजनी : तुम्हे कारन पर किसे इलज़ाम लगा सकती हो ? वो भला ऐसा क्यों करेगा ? उसने कभी ऐसी कोई हरकत की है आज तक ?

निधि : तो क्या अमित ने कभी ऐसा कुछ किया है ? नेहा ने खुद खुद देखा है कारन को अमित क कमरे में वो सब सामान रखते हुए जो उसने हटा दिया था समय पर. वर्ण बेचारा अमित अपनी बेगुनाही भी साबित न कर पता ? मुझे तो शर्म आ रही है क कारन मेरा भाई है.

रजनी : शर्म आ रही है ? अपने भाई पर शर्म आ रही है तुझे ? क्या हो अगर नेहा से hi गलती हुई हो ?

निधि : अगर नेहा से गलती हुई भी होगी तो तब भी वो सब अमित क कमरे में कैसे आया माँ ? आप hi बताओ ? कारन hi था न उसके कमरे में. और यहाँ इतने दिन तक वो रहा क्या आपको कभी उसकी कोई हरकत गलत लगी ? जबकि कारन ने तो आपके सामने hi उसे क्या क्या नहीं कहा.

रजनी : हो सकता है वो सब वो सिर्फ अपने कमरे में hi रखता हो ?

रजनी ( मन में ) जो लड़का अपनी मौसी क साथ वो सब कर सकता है वो भला किसी को छोड़ेगा?

निधि : ये आप क्या कह रही हैं माँ? आप अमित पर शक कर रही हैं ?? आप जानती हैं वो क्या है ?? अगर अमित न होता तो आज आपकी बेटी आपको मुँह दिखने क लायक नहीं रहती .

रजनी : शॉकेड ) ये तू क्या कह रही है ?

निधि : रट हुए ) मैं सच कह रही हूँ माँ . जानती हैं उस दिन अमित की बाइक एक्सीडेंट कैसे हुआ था? क्यूंकि वो मुझे बचने आ रहा था. अगर उस दिन वो समय पर न पहुँचता तो मेरी इज़्ज़त लूट चुकी होती. और उसे क्या सिला मिला ? आपके सामने hi उसे क्या कुछ नहीं कहा कारन ने .

ये सब सुन कर रजनी की आँखों में भी आंसू आ गए .

रजनी : तेरे साथ इतना कुछ हो गया और तूने मुझे बताया भी नहीं . अपनी माँ से इतनी बड़ी बात छिपा hi तुमने?

निधि : अमित ने hi मन किया था माँ. और आप कह रही हैं न क अमित ऐसा कर सकता है तो सुनिए . उस दिन मैं उसके सामने बिना कपड़ों क थी मगर उसने एक बार भी मुझे नहीं देखा . सोचिये क्या वो ऐसा कुछ कर सकता है? अरे उसके तो पाऊँ धोकर पिने चाहिए और कारन ने इतनी गिरी हुई हरकत कर दी उसके साथ . राधा की इज़्ज़त भी अमित ने hi बचाई थी क्या वो भूल गयी आप ? अपनी जान पर खेल कर उसने राधा और शीना को बचाया था. उसके इलावा उसने तो जाने कितनी लड़कियों को बचाया उस लड़कियों को किडनैप करने वाले गिरोह को पकड़वाकर . उस दिन वो पुलिस वाला वो बाइक इसी लिए छोड़ने आया था क्यूंकि वो बाइक वहीँ रह गयी थी और इस दौरान उसे बहुत चोट भी लगी थी. ऐसे लड़के क बारे में आप ऐसा सोच रही हैं ? और अब कारन की भी सुन लो माँ. कल्पना क साथ बदतमीज़ी कर चूका है आपका लाडला. वो बेचारी अमित की वजह से चुप है वर्ण अब तक पता नहीं क्या होता आपके बेटे का . आप नेहा पर शक करने लगी जब मैंने उसका नाम लिया तो . ये नहीं सोचा क नेहा क लिए तो दोनों hi एक जैसे हैं ? मुझे तो शर्म आ रही है क जब अमित को पता चलेगा क ये सब कारन ने किया था तो मैं उससे नज़रें कैसे मिलाऊँगी .

इतना कुछ सुनने क बाद रजनी का तो दिल hi बैठ गया. जहाँ एक तरफ अमित क बारे में इतना कुछ सामने आया था आज उसके वहीँ दूसरी तरफ अपने बेटे की असलियत सामने आने पर अब उसकी आँखों से आंसू अपने आप बहने लगे थे. उससे कुछ बोलै hi नहीं जा रहा था. निधि अपने आंसू पांच कर अपने कमरे में चली गयी . रजनी को अपनी गलती का एहसास हो रहा था क वो पुत्र मोह में अमित को hi गलत समझ रही थी जबकि उसने उसकी बेटी की इज़्ज़त बचाई . रजनी अब खुद पर hi शर्मिंदा हो रही थी . रजनी कितनी hi देर तक अकेले आंसू बहती रही . दोपहर को जब कारन वापिस आया तो रजनी हॉल में hi बैठी थी . जैसे hi कारन अंदर आया रजनी ने कारन को ताबड़तोड़ थप्पड़ मरने शुरू कर दिए . कारन को तो सँभालने का मौका hi न मिला . रजनी ने भी कोई रेहम न किया और अपने दिल की आग शांत करने क लिए कारन को जुटे से डंडे से अछि तरह पिता निधि ने भी अपनी माँ को रोकने की एक बार भी कोशिश न की.
 
अपडेट 166



‘ कहाँ रह गए थे तुम ? मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ ‘ जैसे hi मैं घर पहुंचा रीता मौसी मुझसे नाराज़ होने लगी.

अमित : अरे मौसी मैंने बताया तो था , मोहित क घर गया था . आंटी को काम था कोई.

रीता मौसी : मैं खाने क लिए तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी और करुणा ने भी खाना नहीं खाया अब तक.

अमित : क्या ?? आप भी कमल करती हैं मौसी . मैंने बताया तो था.

रीता मौसी : तू पहले मेरे साथ चल

‘ इसे आप कहाँ ले जा रही हो माँ ? इसकी तो मैं खबर लेती हूँ. ‘ करुणा दीदी ने मेरे पास आते हुए कहा और आते hi मेरे पेट में मुक्के मरने लगी हलके हाथों से.

रीता मौसी : अरे अरे ये क्या कर रही है ? छोड़ उसे अभी तो आया है उसे सांस तो लेने दे.

रीता मौसी करुणा दीदी को दूर हटते हुए खुद मेरे आगे कड़ी हो कर मुझे दीदी से बचने लगी .

करुणा दीदी : इतने दिनों बाद आज पहली बार रहने आया है और घर आने की बजाये बहार घूम रहा है . इसे नहीं पता हम सब इसका इंतज़ार कर रहे हैं .

अमित : अरे दीदी आंटी को ज़रूरी बात करनी थी मुझसे . आप समझने की कोशिश करो .

करुणा दीदी : कुछ नहीं समझना मुझे आप पीछे हैट जाओ माँ.

रीता मौसी : जा पहले इसके लिए पानी लेकर आ . पता नहीं कब बड़ी होगी तुम.

‘ ये लो पानी पियो अमित ‘ नेहा दीदी पता नहीं कब किचन से खुद hi पानी ले आयी. मैंने दीदी क हाथ से पानी लिया और पिने लगा.

अमित : थैंक्स दीदी , आप ने तो खाना खा लिया था न दीदी ?

नेहा दीदी: हाँ मैंने खा लिया था. और इसकी भी चिंता मत कर. बहार से ये भी कुछ न कुछ खा कर hi आयी होगी .

अमित : मौसी अब मेरा कमरा कौन सा है मुझे बताओ . मैंने फिर जाना भी है बड़े दोनों से स्टेडियम नहीं गया .

रीता मौसी : तेरे मौसा जी तो हैं नहीं यहाँ तो तू मेरे साथ hi सो ले. जब तक वो नहीं आते . वैसे तेरे लिए ऊपर वाला कमरा तैयार कर दिया है करुणा क साथ वाला . और तू खून नहीं जायेगा अभी . जब तक पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता तब तक कहीं नहीं जायेगा.

करुणा दीदी : इसे क्या हुआ है ?

अमित : कुछ नहीं मुझे क्या होगा . आप ऐसा क्यों कह रही हैं मौसी ?

रीता मौसी : वो वो भाभी बता रही थी क तुझे कुछ चोट लगी है.

अमित : नहीं मैं ठीक हूँ मौसी ऐसी कोई बात नहीं है.

रीता मौसी : वो मैं देख लुंगी . तू चुपचाप घर बैठ एक बार कह दिया तो कह दिया . चल अब कपडे बदल ले जा कर. तेरे कपडे मैं ले आयी थी घर से. तब तक मैं सबके लिए चाय बनती हूँ.

करुणा दीदी : अब बताती हूँ तुझे , सबके लिए वक़्त है तेरे पास बस हमारे लिए hi नहीं है .

करुणा दीदी ने रीता मौसी क जाते hi फिर से मुझे दबोचने की कोशिश की तो नेहा दीदी ने उन्हें रोक दिया .

नेहा दीदी : करुणा !!! क्यों तंग कर रही हो इसे? एक तो इतने सैलून में पहली बार ये यहाँ आया है और तू आते hi तंग करने लगी. तू क्या चाहती है क ये दोबारा न आये ?

करुणा दीदी : मैं ऐसा क्यों चाहूंगी ?

करुणा दीदी नेहा दीदी की इस बात पर मायूस सी हो कर मुझे देखने लगी .

अमित : अरे दीदी आप चिंता मत करो , मैं जनता हूँ करुणा दीदी भी ऊपर ऊपर से मुझे तंग करती हैं पर अंदर से ये मुझे बहुत प्यार करती हैं .

इतना कह कर मैंने एक बांह करुणा दीदी क गले में दाल कर उन्हें अपने साथ लगाया तो वो भी दोनों हाथ मेरी पीठ पर काफी हुई मेरे साथ चिपक गयी .

अमित : देखा दीदी , अब कैसे भीगी बिल्ली की तरह चिपक रही हैं मुझसे .

करुणा दीदी : क्या कहा ???? भीगी बिल्ली ठहरा तुझे तो मैंने बताती हूँ . अब नहीं छोडूंगी तुझे.

मैं करुणा दीदी को जान बुझ कर छेड़ता हुआ ऊपर भाग गया और करुणा दीदी मेरे पीछे पीछे. नेहा दीदी आवाज़ देती रह गयी पर करुणा दीदी नहीं रुकी . सीढ़ियां चढ़ते hi मैं साथ वाले कमरे में घुस गया जिसका दरवाज़ा लॉक नहीं था . मैं जल्दी से दरवाज़े क पीछे hi छिप गया. जैसे hi दीदी अंदर आयी तो मैंने उन्हें पीछे से बाँहों में जकड लिया और उनकी गर्दन पर अपनी होंठ रख दिए . एक पल में hi करुणा दीदी की आवाज़ बंद हो गयी और मेरी बाँहों में वो पिघलने लगी .

करुणा दीदी : कक्कक्स उम्मम्मम ये क्या कर रहे हो कोई आ जायेगा

अमित : कोई नहीं आएगा . इतने दिनों बाद आज मिल रहे हैं तो क्या मैं आपको प्यार भी नहीं कर सकता ?

करुणा दीदी : पता है तुम्हारा प्यार , इतने दिन तो यद् भी न आयी और आज प्यार की बात कर रहे हो. पता भी है मैंने कैसे दिन बिताये हैं? एक बार तुमने प्यार किया और फिर इतनी लम्बी जुदाई . क्या यही है तुम्हारा प्यार ?

अमित : अब आ गया हूँ न. अब आपकी शिकायत दूर कर क hi जाऊंगा.

करुणा दीदी : सब बातें hi हैं , नैना दीदी बता रही थी . तुमने उनको भी टाइम नहीं दिया वह रह कर भी. अगर मेरे साथ ऐसा किया तो आआअह्ह्ह्ह कक्कक्स आराम से करों न आअह्ह्ह इतना ज़ोर से मत दबाओ

मैंने करुणा दीदी क दोनों कबूतर हाथों में पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा. दीदी मुझे रोक तो रही थी पर खुद hi मेरे हाथों पर अपने हाथ रख दबा भी रही थी. उनकी गर्दन मेरे कंधे पर गिर चुकी थी . दीदी अब मचलने लगी थी , वो खुद hi अब अपनी गांड मेरे लैंड पर रगड़ रही थी . तभी निचे से मौसी और नेहा दीदी की आवाज़ आयी चाय क लिए तो मैंने दीदी को छोड़ दिया.

करुणा दीदी : देखा अब नीचे जाना पड़ेगा . एक तो पहले hi सब सोच कर मैं पागल हो रही थी ऊपर से तुमने ये आग लगा दी है. अब जल्दी कुछ करना पड़ेगा तुम्हे .

अमित : चिंता मत करो दीदी अभी तो मैं यही हूँ आपके पास पूरा हफ्ता . चलिए अब

करुणा दीदी : तुम जाओ मैं ज़रा बाथरूम से हो कर आयी .

मैं नीचे आया तो मौसी और नेहा दीदी मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. मौसी ने मुझे अपने साथ बिठाया और बातें करते हुए हम चाय पीने लगे. कुछ देर में hi करुणा दीदी भी आ गयी.

रीता मौसी : तो तुझे कपडे भी नहीं बदलने दिए इसने ?

करुणा दीदी : मैंने कुछ नहीं किया माँ. आप ऐसे hi मुझे कहते रहते हो. इसे कुछ नहीं कहते

रीता मौसी : इस लिए क मुझे पता है शरारत कौन करता है . चाय पि कर अब अमित को कुछ देर आराम करने दो.

अमित : अरे मौसी अब इस टाइम आराम क्या करना. रत को तो सोना hi है.

रीता मौसी : तू चुप कर और चल मेरे साथ मैंने तुझे तेरा कमरा दिखा देती हूँ. इसने तो दिखाया नहीं लगता .

रीता मौसी मुझे अपने साथ ऊपर ले गयी और मेरा कमरा दिखाने लगी. अभी कुछ देर पहले मैं करुणा दीदी क साथ वो कमरा उनका hi था. उसके साथ वाला कमरा मुझे दिया गया था. मौसी ने मेरे कपडे पहले hi अलमारी में सेट कर क रख दिए थे. मुझे कमरा दिखा कर और मेरा सारा सामान बता कर मौसी ने दरवाज़ा बंद किया और मेरे गले में बहन दाल कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . मैंने भी उनका साथ देते हुए उन्हें किश किया .

रीता मौसी : उम्मम्मम्हाआआ आज रत तुम मेरे कमरे में मेरे साथ रहोगे. इस लिए अब सो जाओ क्यूंकि रत को मैं सोने नहीं दूंगी. इतने दोनों की कसार आज निकलूंगी.

अमित : मगर नेहा दीदी और करुणा दीदी तो घर पर hi हैं .

रीता मौसी : वो मैंने पहले hi सोच रखा है. उन्हें नींद की दवा दे दूंगी रत में .

अमित : लगता है आप पहले hi तयारी कर चुकी हैं साडी.

रीता मौसी : मैंने तो उसे दिन सब सोच लिया था जब दीदी ने तुम्हे सबके घर बरी बरी से रुकने को कहा था. इस हफ्ते मेरी बरी है तो रोज़ वसूल करुँगी अपने हिस्से का प्यार. आखिर मेरा भी तो कुछ हक़ है न तुम पर .

अमित : तो फिर आप भी तैयार रहना आज पीछे से भी करूँगा मैं.

इतना कह कर मैंने मौसी क दोनों चूतड़ मसल दिए .

रीता मौसी : आआअह्ह्ह कक्कक्स पता था मुझे तू बिना किये मानेगा नहीं . इस लिए मैं तैयार हूँ. पर पहले आगे से मेरी प्यार बुझा देना. कितने दिनों से तड़प रही हूँ.

अमित : चिंता मत कीजिये आपकी साडी कसार निकल दूंगा .

रीता मौसी : पहले मुझे ये बता क तेरा कारन से क्या चक्कर है ?

अमित : मेरा क्या चक्कर होगा उनसे ? कुछ भी तो नहीं .

रीता मौसी : दिव्या ने बताया था मुझे क उसने तुझे उल्टा सीधा बोलै था.

अमित : जाने दो मौसी वो गुस्से में कह गए थे . बड़े हैं न तो कुछ भी कह सकते हैं .

रीता मौसी : बड़े होने का ये मतलब तो नहीं हम चोटों की इज़्ज़त hi न करें . और जो गाओं में हुआ वो ?

अमित : मैंने कुछ नहीं किया मौसी कसम से . मुझे नहीं पता वो सब क्या था.

रीता मौसी ( मन में ) अमित को कारन क बारे में बताऊँ या नहीं ? अगर बताया तो कहीं ये दीदी क घर जाना hi न बंद कर दे यार फिर कारन क साथ लड़ाई झगड़ा न बढ़ जाये. नहीं रहने देती हूँ . अगर फिर से उसने कुछ किया तब देखूंगी .

रीता मौसी : ाचा अब तू कुछ देर सो जा. फिर रत को जागना भी तो है.

रीता मौसी ने फिर से मुझे किश किया और नीचे चली गयी.

मैं भी अपने कपडे बदल कर बीएड पर लेट गया . इस कमरे में डबल बीएड था और अलमारी क साथ आत्ताच बाथरूम भी. रत क लिए सोना ज़रूरी था तो मैं भी लम्बी तान कर सो गया.

उधर कारन कॉलेज से जैसे hi घर आया निधि अपने कमरे में थी जबकि रजनी गुस्से से भरी हॉल में hi बैठी हुई थी. नैना अभी तक नहीं आयी थी. कारन दरवाज़ा खोल कर जैसे hi अंदर आया तो उसने अपनी माँ को सामने देख कर बुलाया

कारन : hi माँ आप यहाँ अकेली क्यों बैठी हैं? आज कहाँ नहीं बनाना क्या ? मुझे बहुत भूख लगी है.

रजनी : गुस्से में ) भूख लगी है तुझे ये ले

इतना कहती हो रजनी ने दाएं हाथ का ज़ोरदार थप्पड़ कारन की गाल पर जमा दिया. कारन को तो उम्मीद hi नहीं थी क उसकी माँ उसके साथ ऐसा कुछ कर सकती है .

कारन : माँ .....

अपने मुँह पर हाथे रखे अभी कारन कुछ बोलने hi लगा था क एक और झन्नाटेदार थप्पड़ दूसरी गाल पर रसीद हो गया.

कारन : मैंने ...... माँ रुक........ मेरी बा........

रजनी लगातार थप्पड़ पे थप्पड़ मरे जा रही थी . कारन जब भी कुछ बोलने की कोशिश करता रजनी एक करारा थप्पड़ उसके मुँह पर जड़ देती.

रजनी : कमीने तुझे शर्म नहीं आयी ऐसी गन्दी हरकत करते हुए. उस मासूम पर तूने इलज़ाम लगाया अपनी गन्दी सोच से उसे बदनाम करने की कोशिश की . तू मेरा बीटा नहीं हो सकता . तूने मेरे मुँह पर कलंक लगा दिया.

रजनी मरते मरते कारन को ये सब बोल रही थी. कारन को भी समझ आ गया क उसे क्यों मर पद रही है. मगर वो खुद हो बचने क लिए जैसे hi कुछ बोलने की कोशिश करता उसे पहले hi उसके गाल सके जाते . रजनी क हाथ जब दर्द करने लगे तो उसने पास में hi पड़ा वाइपर उठा कर कारन को मरना शुरू कर दिया . वाइपर भी जल्दी hi टूट गया तो रजनी ने किचन में रखा पिसाई वाला डंडा उठा लिया और कारन की टंगे तोड़ने लगी. निधि कारन का चिल्लाना सुन कर बहार आयी तो सामने अपनी माँ को कारन की ठुकाई करते देखा.

कारन : दीदी आआआह्ह्ह्ह माँ को रोको ाआईईईईई aaaaaaaaaa दीदी बचाओ aaaaaaaaaaa रुक जाओ माँ आआआ

निधि ने भी अपनी माँ को रोकने की कोशिश नहीं की. उसे भी अपनी माँ का ये काम ाचा लग रहा था. निधि ने माँ को रोकने की कोशिश नहीं की. रजनी तब तक मरती रही जब तक क पूरी तरह ज़मीन पर नहीं लेट गया . उसके बाद निधि अपने कमरे में चली गयी और रजनी अपने कमरे में. नैना जब कॉलेज से आयी तो कारन को ऐसे ज़मीन पर गिरा कराहता देख कर वो दौड़ कर उसके पास आयी .

नैना : क्या हुआ तुझे ? किसने मारा तुझे .

कारन : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह माँ ने मारा है पता नहीं क्या हो गया आआह्ह्ह हो गया है उसे? आअह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है आआआहहह

नैना : पक्का कुछ न कुछ किया होगा तूने. कहा था न सुधर जा . चल खड़ा हो चल कमरे में.

नैना समझ गयी थी क कारन की कोई हरकत सामने आयी होगी माँ क . इसी लिए उसे मर पड़ी है. इससे पहले भी रजनी ने कारन पर हाथ तभी उठाया था जब वो अमित क बारे में गलत बोलै था. अभी भी शायद ऐसा कुछ हुआ है ऐसा सोच कर नैना कारन को सहारा देकर उसके कमरे तक ले गयी और उसे एक पैन किलर को गोली देदी.

कारन की अचे से ठुकाई हुई थी और उसे निधि ने भी छुड़ाने की कोशिश नहीं की. कारन से तो रजनी ने कोई सवाल भी न पूछा . क्यूंकि उसे अपनी बेटी की बातों पर पूरा विश्वास था . वैसे भी जो अपना राज़ निधि ने बता दिया था उसके बाद तो रजनी को अमित क बारे में अब दिल में कोई शंका बची hi नहीं थी. कारन को इतनी मर पड़ी थी क वो घर से बहार भागने की बजाये अपने कमरे में जा कर पद गया . उसे ये समझ नहीं आ रही थी क उसका राज़ खुला तो खुला कैसे . ऊपर से उसकी माँ ने कोई सफाई देने का मौका भी न दिया मतलब साफ़ था क सबूत पक्के hi होंगे. कारन की बॉडी पर भी अब लाशें पद चुकी थी और वो अपने बिस्तर पर गिरा कराह रहा था. न तो निधि को उस से कोई हमदर्दी हो रही थी न रजनी को. रजनी तो खुद को भी कोस रही थी . कारन की ठुकाई क बाद रजनी अपने कमरे में जा कर रोने लगी. आंसुओं की वजह उसके दिल में अमित क प्रति आयी शंका और उसके अपने hi बेटे की ये घटिया करतूत थी. दोनों hi केस में रजनी को अपने में hi कमी लग रही थी. एक तो दिव्या की बातें उसके मन पर चोट कर रही थी बार बार क दामिनी ज़िंदा नहीं है तो क्या दिव्या अभी है. इसका मतलब साफ़ था क रजनी को दिव्या ने कह दिया था क वो उसकी माँ नहीं है. हालाँकि रजनी ने hi शुरू से सबसे ज्यादा प्यार किया था अमित को जब दिव्या उससे नफरत करती थी . रजनी को ऐसे लग रहा था क उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है अमित पर शक कर क. उसकी अमित क प्रति साडी ममता यह hi बार में धुल में मिल गयी थी जबकि दूसरी तरफ उसका अपना सागा बीटा ऐसा निकला ये भी उसकी ममता पर hi तमाचा था. रजनी खुद को hi दोष देती रोटी रही. जब बहुत देर तक वो कमरे से बहार न आयी तो निधि उसके पीछे चली गयी . रजनी को इस तरह रीता देख कर निधि ने कास क अपनी माँ को गले लगा लिया और उसके आंसू पोंछने लगी.

निधि : ये क्या माँ , आप तो रही हैं ?

रजनी : रट हुए ) रोऊँ नहीं तो क्या करूँ ? क्या करूँ बताओ? मेरी अपनी hi औलाद ने मेरा सर शर्म से झुका दिया है. इसके लिए मैंने उस मासूम पर शक किया . इसकी वजह से उस पर इलज़ाम लगाया गया . अगर तू पहले मुझे बता देती तो उसी पल इसकी खाल सबके सामने उधेड़ देती. अब तो शर्म आ रही है मुझे खुद पर क कैसे सामना करूँ अपनी बहनो का ? कैसे सामना करुँगी गौरी का कैसे सामना करुँगी अमित का? उसने बिना कुछ ज़ाहिर किये इतना कुछ इस परिवार क लिए कर दिया और बदले में क्या मिला उसे ? दामिनी मुझे माफ़ कर देना मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी मेरी बहिन . मुझे माफ़ कर देना.

निधि : मत रोइये माँ , वो दिल का बहुत ाचा है. बहुत बड़ा दिल है उसका . वो तो आपको इतना प्यार करता है . आपसे भला वो नाराज़ क्यों होगा ? वैसे भी उसे कहाँ पता है क कारन ने उसके साथ ये सब किया है.

रजनी : नहीं बेटी तू नहीं जानती दिव्या में क्या कहा है. वो कह रही थिंक वो अब ामित्वको कभी हमारे घर नहीं आने देगी . वो बहुत गुस्सा है कारन की इस हरकत पर. अब अमित कभी यहाँ नहीं आएगा .

निधि : घबराते हुए ) ऐसा नहीं हो सकता माँ ऐसा नहीं हो सकता. मैं मौसी से माफ़ी मांगूंगी . अगर अमित न आया तो .... नहीं माँ वो ज़रूर आएगा उसे आना hi होगा . वो हमसे बहुत प्यार करता है माँ. मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ माँ उसे आना hi होगा .

रजनी : उससे पहले मुझसे उसके पास जाना है निधि . मैंने इस पर शक किया है बेटी मेरा दिल मुझे धिक्कार रहा है. मुझे मेरे बेटे क पास ले चल. मैं उससे माफ़ी मांगूंगी . एक बार उसे गले से लगा लूँ तभी मुझे चैन आएगा. वो मुझसे बहुत प्यार करता है. वो अपनी मौसी को माफ़ कर देगा मुझे उसके पास ले चल बेटी मुझे अभी ले चल.

रजनी खुद को रोक नहीं प् रही थी. निधि भी दिव्या वाली बात सुन कर अधीर हो रही थी और माँ की हालत तो थी hi बुरी. निधि ने भी हाथ मुँह साफ किया और रजनी को लेकर अपनी एक्टिवा से hi रीता मौसी क घर को निकल पड़ी.

दोनों जब रीता क घर पहुंची तब अमित अपने कमरे में सो रहा था . रजनी को देख कर रीता भी हैरान थी. इस लिए चाय पानी पिलाने क बाद रीता रजनी को अपने कमरे में ले गयी . निधि करुणा और नेहा क साथ बैठ गयी. उससे पहले वो एक बार अमित को उसके कमरे में सोया हुआ देख कर आ गयी थी.

रीता : क्या बात है दीदी आप यहाँ अचानक ? और ये आपके हाथ क्यों ऐसे हो गए हैं. आपकी ऑंखें भी भरी हुई हैं.

रजनी : जिसकी औलाद hi गन्दी हो वो तो शर्म से hi मर जायेगा न. तुम नहीं जानती मुझ पर क्या बीत रही है . उस मासूम पर इतना गन्दा इलज़ाम लगाया गया मेरे बेटे की वजह से. कितनी घटिया सोच है कारन की मुझे तो खुद पर hi शर्म आ रही है.

रीता : बस करो दीदी . इसमें आपकी क्या गलती है?

रजनी : मेरी hi गलती है साडी , अपनी hi गन्दी औलाद क मोह में या मासूम पर शक किया मैंने जिसने मेरी बेटी क लिए इतना कुछ किया.

रीता : किसकी बात कर रही हो दीदी ? क्या बात है ?

रजनी ने फिर उसे भी निधि वाली बात बता दी जिसे सुन कर रीता शॉकेड भी हुई और अमित पर उसे मान भी होने लगा.

रीता : वो है hi ऐसा दीदी. दामिनी क अचे कर्मो का hi गाल है वो और भाभी ने भी उसमे संस्कार कूट कूट क भरे हैं. बहुत बड़ा दिल है उसका. किसी अपने को दुःख में नहीं दे ओह सकता. जानती हो दीदी हमारे मायके में आज जो खुशियां आयी हैं वो भी उसी की वजह से है ( दीपिका कामिनी और गौरी का माँ बनना ) . पता है वो सब से बहुत प्यार करता है . आज वो मेरे पास रहने आया है तो मैं बता नहीं सकती मैं कितनी खुश हूँ. कितने सालों बाद वो यहाँ आया है. आप भी दिल छोटा न करो. वो आपको बहुत प्यार करता है वो कभी आपसे नाराज़ नहीं हो सकता . अगर आप ऐसे रोयेंगी तो उसे भी दुःख होगा. आप खुद को सम्भालिये और कारन क साथ क्या कर क आयी हैं आप . हाथ की सूजन बता रही क आज उसकी सेवा कर क आ रही हैं आप .

रजनी : और क्या करती ? मुझसे तो बर्दाश्त नहीं हो रहा था. बस लगा दिया फिर पहले हाथ से फिर जो भी हाथ आया उससे.

रीता : आप नहीं बदली इतने सैलून बाद भी आपका गुस्सा वैसा hi है. मैं अमित को उठा कर लती हूँ.

रीता जैसे hi उठने लगी तो रजनी ने उसका हाथ पकड़ लिया.

रजनी : नहीं सोने से उसे. जब वो खुद hi जायेगा तब मिल लुंगी उससे.

रीता और रजनी दोनों बैठी बातें करने लगी . रजनी रीता से पूछना तो चाहती थी अपना वो सवाल जो अभी उसके अंदर था पर अभी ये सब पूछना उसे सही नहीं लगा. दोनों बहने कितनी देर इधर उधर की बातें करती रही . दूसरे कमरे में निधि नेहा और करुणा क साथ बातें करती रही जिसका केन्डर अमित hi था.

रीता ने रत का बहाना शुरू किया तो रजनी भी उसके साथ लग गयी. रीता क पति ने तो आज और कल आना नहीं था तो रीता ने अपनी बहिन को यहीं रुक जाने को कहा. रजनी भी अमित क पास रहना चाहती थी तो उसने बात मन ली. निधि भी यहीं रुकना चाहती थी मगर घर पर खाना बनाने की भी ड्यूटी थी क्यूंकि नैना तो खाना बनती नहीं थी अभी उतना. इस लिए निधि को जाने को कह दिया. जाने से पहले भी निधि अमित को सोते हुए देख कर hi गयी. उसका मन तो नहीं था जाने का पर वो चली गयी. रत का खाना बनाते बनाते रीता ने देखा क टाइम ज्यादा हो रहा है तो वो ामित्वको जगाने क लिए जाने लगी तो रजनी उसे रोक कर खुद अमित को जगाने क लिए उसके कमरे में चली गयी . रजनी जैसे hi अमित क कमरे में पहुंची तो अमित को चैन से सोया देख कर वो कुछ देर उसे निहारती रही फिर उसके पास जा कर बैठ गयी और प्यार से उसके चेहरे पर हाथ फेरने लगी . अमित भी काफी देर से सो रहा था तो इस तरह किसी क छूने से उसकी जाग खुल गयी. सामने अपनी बड़ी मौसी को देख कर वो हैरान हुआ पर अगले hi पल उसने बीएड से थोड़ा सा उठ कर बैठते hi मौसी को गले से लगा लिया .

अमित : खुश होते हुए) मौसी आप यहाँ ?? आप कब आयी ?

अमित का ये प्यार देख कर रजनी की ऑंखें अपने आप hi भीग गयी .

रजनी मौसी: बस अपने बेटे को hi देखने आयी थी. गाओं में तो ठीक से देख hi नहीं पायी थी तुम्हे.

अमित : कैसी बातें कर रही हैं मौसी मैं तो आपके पास hi था एक हफ्ते से और वैसे भी आप जब भी हुकुम दें मैं तो हाज़िर हो hi जाता हूँ . ये क्याआ? आपकी आँखों में आंसू , क्या बात है मौसी ?

रजनी मौसी: कुछ नहीं बीटा ये तो ख़ुशी क आंसू हैं . तू मेरी कोख से पैदा क्यों नहीं हुआ ? सब बता दिया है मुझे निधि ने. तूने जो किया है उसका तो एहसान......

अमित : एहसान कैसा मौसी क्या मैं आपका बीटा नहीं हूँ ? ऐसा कह कर मुझे पराया मत करो

इतना सुनते hi मौसी ने मुझे कास क पाने सीने लगा लिया और मुझे चुनते हुए कहने लगी

रजनी मौसी : तू मेरा बीटा है मेरा . तू कभी मुझसे दूर नहीं हो सकता . कोई तुझे मुझसे दूर नहीं कर सकता.

रजनी मौसी लगातार मुझे चूमती जा रही थी. कुछ देर बाद वो रुकी तो मुझे उठ कर नीचे चलने को कहा . मैंने टाइम देखा तो सादे 8 हो चुके थे. मैंने जल्दी से उठ कर मुँह हाथ धोया और मौसी क साथ hi नीचे आ गया. मौसी ने hi बताया क निधि दीदी भी आयी थी और बाद में वापिस चली गयी . मैंने झट से उन्हें फ़ोन लगा दिया. दूसरी बेल्ल पर hi दीदी ने फ़ोन उठा लिया.

अमित : दीदी मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ . आप आयी भी और मुझसे बिना मिले चली गयी .

निधि दीदी : तुमसे बिना मिले मैं कैसे जा सकती हूँ भला. बस मैंने तुम्हारी नींद ख़राब नहीं की.

अमित : ये क्या बात हुई ? आप मुझे जगा भी तो सकती थी. जाइये मैं आपसे बात नहीं करता.

निधि दीदी : तुम मुझे नाराज़ न हो अभी आती हूँ.

अमित : अरे नहीं नहीं दीदी मैं तो मज़ाक कर रहा था. मौसी ने बताया मुझे आप घर क्यों गयी हैं . खाना बनाना था न आपको. मैंने तो इस लिए फ़ोन किया है क कल सुबह आपको मेरे साथ चलना है . आपकी जॉब क लिए इंटरव्यू है कल जहाँ मैंने आपको बात की थी.

निधि दीदी : कल तुम कॉलेज नहीं जाओगे ?

अमित : नहीं कल मैं आपके साथ जाऊंगा . आप 9:30 बजे तक तैयार हो जाना.

निधि दीदी : उसके बाद तुझे कोई और काम तो नहीं है न ?

अमित : नहीं मगर क्यों ?

निधि दीदी : वो मैं कल बताउंगी .

अमित : ाचा दीदी अब रखता हूँ मौसी खाने क लिए दांत रही है.

निधि दीदी : ाचा ठीक है अपना ख्याल रखना.

अमित : आप भी.

दीदी से बात करने क बाद मैं सबके साथ बैठ कर खाना खाने लगा. रजनी मौसी मेरे साथ बैठी अपने हाथों से मुझे खाना खिला रही थी. मुझे बड़ा ाचा लग रहा था . रीता मौसी भी खुश थी मौसी को देख कर. मैंने भी बरी बरी से अपनी दोनों मौसी को अपने हाथ से कुछ निवाले खिलाये. खाना खाने क बाद मैं कुछ देर अपनी बहनो क साथ बैठा बातें करता रहा. पर मौसी ने जैसे hi किचन का काम ख़तम किया तो उन्होंने सबको अपने अपने कमरे में जाने को कहा. करुणा दीदी तो मेरे साथ hi मेरे कमरे में आ गयी . वो बार बार इशारों में आज रत क प्रोग्राम का कह रही थी . मुझे भी लगा क आज तो मौसी का प्रोग्राम कैंसिल है तो आज दीदी को hi टाइम दे दिया जाये. मगर रीता मौसी तो जैसे ठान hi चुकी थी क आज वो कुछ न कुछ कर क रहेंगी. कुछ hi देर में वो मेरे कमरे में दूध लेकर आ गयी और अपने हाथ से hi करुणा दीदी और मुझे दूध का गिलास दिया

रीता मौसी : चलो जल्दी से ये दूध पि लो.

करुणा दीदी : माँ ,,, पता है न मैं रत को दूध नहीं पीती.

रीता मौसी : कुछ नहीं होता आज पिले , देख अमित भी पि रहा है.

करुणा दीदी : मगर मुझे नहीं पीना

रीता मौसी : कैसे नहीं पीना ? चल जल्दी ख़तम कर. जब तक दूध नहीं पीयेगी मैं यहीं कड़ी रहूंगी .

करुणा दीदी : मायआ .....

अमित : पि लो न दीदी , मोती नहीं हो जाओगी आप .

मेरे कहने पर करुणा दीदी ने दूध पीना शुरू कर दिया और रीता मौसी क चेहरे पर ख़ुशी आ गयी जिसे मैंने नोट कर लिया.

रीता मौसी : चल अब अपने कमरे में चल कर लेट जा.

करुणा दीदी : मुझे अमित से कुछ देर बातें करनी है माँ मैं बाद में चली जाउंगी अपने कमरे में.

रीता मौसी : सुबह कॉलेज भी जाना है चल चल क सो जा .

रीता मौसी अपने साथ करुणा दीदी को ले गयी और कुछ hi पलों में वापिस आ गयी .

रीता मौसी : सोना मत , मैंने सबको दूध में नींद की गोलियां मिला कर दे दी हैं. सब आराम से सो जाएँगी. आज रत हमारी है. अब मैं चलती हूँ बाद में आती हूँ .



इतना कह कर मौसी नीचे चली गयी . मैं तो मौसी क इस उतावलेपन पर हैरान हो रहा था. कितनी तड़प रही थी वो चुदाई क लिए क अपनी बेटियों और बहिन क होते हुए भी वो रुक नहीं रही थी बल्कि उनको नींद की गोलियां तक मिला कर दे दी. मैंने भी मन में सोचा अगर मौसी इतनी hi तड़प रही हैं तो आज उनकी प्यार बुझा hi देता हूँ . मौसी का इंतज़ार करता हुआ मैं रीमा से बात करने लगा और कुछ देर चैटिंग राधा क साथ भी की. मुझे नींद तो आणि नहीं थी अभी, इस लिए काफी देर तक मैंने ऐसे hi बैठा मौसी का इंतज़ा करता रहा पर वो नहीं आयी और न hi कोई और आया. मैंने देखा क 12 बज गए हैं और अभी तक मौसी नहीं आयी तो मैं खुद hi उनके कमरे की तरफ चल दिया.
 
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पहले करुणा दीदी का कमरा देखा तो वो आराम से सो रही थी. फिर मैंने नेहा दीदी का कमरा देखा तो वो भी सो रही थी . लास्ट में मैं मौसी क कमरे में गया जहाँ अँधेरा था . मुझे लगा मौसी शायद सो गयी हैं . इस लिए मैंने धीरे से कमरे का दरवाज़ा खोला और दबे पाऊँ कमरे में घुस गया. दरवाज़ा खुलने से थोड़ी सी आवाज़ कमरे में हुई तो बीएड हिलने की आवाज़ मुझे सुनाई दी . मैं जैसे hi बीएड की तरफ बढ़ा तो चूड़ियों की खान खान से पता चल गया क रीता मौसी जग रही हैं. और वो रजनी मौसी की वजह से कुछ बोल नहीं रही . इस लिए मैंने भी कोई आवाज़ नहीं की और चुप चाप अँधेरे में hi अंदाज़े से बीएड क पास पहुँच गया . मैंने हाथ लगा कर बीएड पर मौसी को ढूंढने की कोशिश की तो मेरे हाथ किसी से टकराये. करवट क बल बिना हरकत क लेती हुई ये शायद रजनी मौसी hi थी फिर भी मैंने एक बार चेक करने क लिए उन्हें हिलाया मगर कोई भी हरकत नहीं हुई तो मैं समझ गया क ये रजनी मौसी hi हैं. फिर मुझे बीएड पर हलचल क साथ पायल की आवाज़ आयी तो मैं आवाज़ की तरफ बढ़ता रीता मौसी क पाऊँ की तरफ आ गया. मैं खुद अभी ज़मीन पर hi था . मैंने अंदाज़े से हाथ बीएड पर आगे बढ़ाया तो रीता मौसी क पाऊँ पर मेरा हाथ लगा. मैंने उनके पाऊँ को पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ घसीट लिया. मौसी थोड़ी भरी थी पर मेरे लिए ये इतना भी नहीं था. एक पाऊँ हाथ में आने क बाद मैंने दूसरा पाऊँ भी पकड़ कर उन्हें किनारे यह घसीट लिया और उनके पाऊँ उठा दिए जिससे सदी पेटीकोट क साथ hi उनकी जांघों तक सरक गयी . मैं समझ रहा था क मौसी रजनी मौसी की वजह से चुप हैं. पर मैं इतनी देर से उनका इंतज़ार कर रहा था मुझे मौसी पर थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था. मैंने भी सोच लिया क आज इनकी ख़ामोशी का भी टेस्ट ले hi लेता हूँ. मैं जल्दी से से नीचे झुका और सदी सरकते हुए उनकी छूट पर पहुँच गया. मौसी मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी पर कुछ बोल नहीं रही थी . मैंने उनके हाथ हटते हुए उनकी पेंटी खिंच कर घुटनो तक कर दी और छूट को उँगलियों से छेड़ने लगा. छूट पर बड़े बड़े बाल थे . मुझे लगा था क आज मौसी में छूट साफचक की होगी पर ऐसा नहीं था . मैंने उँगलियों से hi बाल साइड में किये और सीधा अपने होंठ छूट पर रख दिए और छूट की फैंको को अपने होंठों में जकड़ने लगा. मेरे ऐसा करते hi मौसी क मुँह से एक सिसकी निकल गयी और उनके हाथ जो मुझे पीछे हटा रहे थे वो एक डैम से मेरे सर पर hi रुक गए. मौसी का जिस्म वहीँ अकड़ गया . मैं छूट की फांकों को अपने होंठों में पकड़ कर खींचने लगा और साथ hi अपनी जीभ से छूट क डेन को छेड़ने लगा. मौसी का हाथ जो मेरे सर पर मुझे रोकने क लिए रखा था अब वो मेरे सर को छूट पर दबाने लगा. मौसी अपनी सिसकियाँ रोकने की लगातार कोशिश कर रही थी और उन्हें तड़पने में मुझे कुछ ज्यादा hi मज़ा आ रहा था . मैंने साथ hi एक उंगली भी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा . मौसी तो पहले hi इतने दिनों से प्यासी थी वो ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पायी और मेरे सर को ज़ोर से छूट पर दबाये अपनी कमर उठाने लगी . मैं समझ गया क मौसी का काम होने वाला है और हुआ भी ऐसा hi . अपनी कमर को हवा में उठाये मेरे सर को अपनी छूट पर दबाते हुए उनका जिस्म झटके खाने लगा और एक लम्बी सिसकी उनके मुँह से निकली जिसे वो दबाने की कोशिश कर रही थी .

‘ ummmmmmmmmmmm cccccccccccccc मममममम ‘

झटके लेते हुए मौसी की छूट से भर भर क पानी बहार आने लगा. पता नहीं कितना पानी मौसी की छूट में भरा हुआ था जो निकलता hi गया और मेरे मुँह पर भी लग गया . मैंने अछि तरह मौसी का पानी चूस लिया पर उनकी मोती मोती जांघों ने मुझे बुरी तरह दबोच लिया था जिससे मुझे भी परेशानी होने लगी थी. जैसे hi मौसी की पकड़ ढीली हुई मैंने अपना सर उनकी जाँघों से बहार निकला और अपना लोअर अंडरवियर क साथ hi नीचे खिसका दिया . लैंड तो पहले hi फौलाद बन चूका था इतनी देर में. मैंने मौसी की टांगों को पकड़ कर थोड़ा और उन्हें खींचते हुए बीएड क किनारे पर कर लिया और उनके ऊपर झुकते हुए अपना लैंड उनकी छूट पर सेट किया. छूट पर लैंड लगते hi मौसी जैसे होश में आयी और हाथ बढ़ा कर मुझे फिर से एक बार रोकने की कोशिश की पर मैं अब कहाँ रुकने वाला था. मैंने उनकी टंगे उनके सर की तरफ दबाते हुए लैंड छूट में फसाया और बिना देर किये ज़ोरदार झटका दे दिया. रीता मौसी तो पहले भी लैंड ले hi चुकी थी इस लिए को दिक्कत वाली बात नहीं थी पर बार बार उनका इस यह रोकना मुझे ाचा नहीं लग रहा था इस लिए मैंने उन्हें तड़पने क लिए ज़ोरदार धक्का मार दिया और लैंड एक hi बार में अद्धे से ज्यादा अंदर घुस गया . इतने दिनों बाद मौसी मेरा लैंड ले रही थी इस लिए शायद उनकी छूट फिर से टाइट हो चुकी थी मेरे लैंड क अकॉर्डिंग . छूट में लैंड जाते hi मौसी क मुँह से दबी हुई सिसकियाँ निकलने लगी जिसे वो मुँह पर शायद कपडा रख कर दबाने की कोशिश कर रही थी. ‘ ह्म्म्मम्म्म्म ममममममम मममममम ‘ बस ऐसी hi आवाज़ें आ रही थी . मुझे भी अपना लैंड छूट में पिस्ता हुआ महसूस हो रहा था . मैं भी इतने में नहीं रुखा और लैंड को थोड़ा सा पीछे खिंच कर एक और ज़ोरदार धक्का मरते हुए जड़ तक लैंड छूट में उतर दिया . इस झटके से तो मौसी जैसे तड़पने hi लगी और मेरी पकड़ से निकलने की कोशिश करने लगी . उनकी वो दबी दबी कररहतें और भी ज्यादा आने लगी थी. मैंने मौसी की टाँगें अपने कन्धों पर राखी और उन्हें चूमने लगा. उनकी पायल को मैंने खुद hi अपने हाथों से चाणकय तो बड़ा ाचा लगा. उनकी टाँगें मांसल थी जिन्हे चूमने का अपना hi आनंद आ रहा था . मैंने मौसी क ऊपर झुकते हुए अपने हाथ बीएड पर उनके कन्धों क पास रखे और उनके ऊपर झुकता चला गया. मौसी क चेहरे तक जब मैं आई गया तो उनके दोनों पाऊँ उनके सर तक आ गए . मेरे नीचे मौसी पूरी तरह दोहरी हो चुकी थी. पर उनका ये गद्देदार जिस्म मुझे अपने नीचे मज़ा भी दे रहा था. मैंने महसूस किया क उनके मुँह पर कोई कपडा खुद hi उन्होंने दबा रखा है. मैंने वो कपडा हटाने की कोशिश क थी वो मुझे ऐसा करने नहीं दे रही थी पर मैं उनसे बात करना चाहता था. मैंने ज़बरदस्ती उनके हाथ से वो कपडा खिंच लिया उनके हाथ हटते हुए उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए हालाँकि वो मुझे ऐसा करने से रोक रही थी

अमित : धीरे से ) क्या बात है मौसी ? खुद hi तो आप कह रही थी क आज साडी कसार निकालनी है और अब खुद hi ये नखरा कर रही हैं . और आपकी ये छूट आज इतनी टाइट क्यों है ? कुछ स्पेशल किया है क्या आपने? जो भी है नाडा मज़ा आ रहा है .

इतना कह कर मैंने मौसी क होंठों पर अपने होंठ रख लिए और उन्हें चूमने की कोशिश करने लगा . मौसी ने अपने होंठ दबा रखे थे और मेरे कन्धों पर हाथ रख का मुझे पीछे हटाने की कोशिश कर रही थी . मैंने भी कोशिश जारी राखी और उनके हाथ बीएड पर दबा दिए . मौसी अभी भी नखरा कर रही थी तो मैंने छूट में से लैंड को थोड़ा बहार खींच कर फिर से जड़ तक घुसा दिया . मौसी क होंठ जैसे hi खुले मैंने उन्हें अपने होंठों में दबा लिया और उनके होंठ चूसने लगा. मौसी अब पूरी तरह मेरी पकड़ में थी. मैंने किश करते हुए अब अपनी कमर हिलनी शुरू कर दी. कुछ देर तक मौसी विरोध करती रही पर फिर वो शांत हो गयी . अब लैंड छूट में आसानी से आने जाने लगा तो मैंने सुपडे तक लैंड खींच कर गहरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. मौसी की पायल भी अब संगीत देने लगी थी. कमरे में अब छूट में लग रहे धक्कों से पैदा हो रही आवाज़ क साथ पायल की आवाज़ भी आने लगी थी. पास में hi रजनी मौसी सो रही थी पर मुझे पता था क रीता मौसी ने उन्हें भी नींद की दवा दे दी होगी इस लिए बेफिक्र हो कर मैं अपना काम कर रहा था. मौसी की छूट में अब थोड़ी नमी आ गयी तो मौसी क होंठ भी अब खुलने लगे और उन्होंने खुद hi मेरे होंठों को चूम लिया . मौसी क रिस्पांस देते hi मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. अब मैंने उनके हाथ छोड़ दिए और उनके बड़े बड़े पपीते पकड़ कर मसलने शुरू कर दिए. मेरे ऐसा करते hi मौसी भी जोश में आ गयी और खुद hi किश करने लगी और मेरे सर दोनों हाथों में पकड़ने लगी . पर अब मौसी को तकलीफ भी होने लगी इस पोज़ से. उनको पूरी दोहरी जो कर रखा था . इस लिए मैं उनके ऊपर से उठा और उनकी टंगे हवा में करते हुए तेज़ धक्के लगाने लगा . मौसी की सिसकियाँ अब पहले से तेज़ हो गयी थी. मैंने मौसी क पाऊँ बरी बरी से अपने चेहरे पर लगाए और उन्हें चूमा जैसे क उनसे आशीर्वाद ले रहा हूँ. इसका असर मौसी की छूट पर पड़ा और वो फिर से पानी छोड़ने लगी. एक बार फिर मौसी का बदन ऐंठने लगा. लम्बी सिसकारियां छोड़ तो हुई मौसी फिर से झाड़ गयी. पर मैं अभी भी लगा हुआ था. छूट गीली होने की वजह से अब कमरे में ‘ फच फच ‘ की आवाज़ें आने लगी थी . मौसी की छूट क पानी की महक कमरे में घुल गयी थी जो माहौल को और भी मादक बना रही थी. मैंने धक्के रोकते हुए मौसी का ब्लाउज खोल दिया और उनकी सदी भी साडी उनकी कमर पर इकट्ठी कर दी. मैंने मौसी की कमर पर अपने हाथ लपेटे और उन्हें उठाते हुए ज़मीन पर सीधा खड़ा हो गया . मौसी दर गयी और जल्दी से मेरे गले से लग कर अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेट ली.

अमित : धीरे से ) क्या हुआ मौसी दर क्यों रही हो ? मुझ पर भरोसा नहीं है क्या ? वैसे आज आप कुछ भरी लग रही हो.

मौसी कुछ नहीं बोली बार ऐसे hi मेरे साथ चिपकी रही . मैंने मौसी क बड़े बड़े चूतड़ों को थम लिया और उन्हें हवा में उठाये ऐसे hi खड़े खड़े धक्के मरने लगा. मौसी तो बस मेरे साथ hi चिपके पड़ी थी इस लिए ज्यादा मज़ा नहीं आ रहा था क्यूंकि वो अभी भी दर रही थी . मैंने मौसी को नीचे उतरा और उनकी सदी खोल कर उतर दी. पेटीकोट का नाडा खोलते hi वो भी उनके पाऊँ में गिर गया. ब्लाउज तो मैंने पहले hi खोला हुआ था और उसे भी अब उनके जिस्म से हटा दिया. मौसी अब सर से पाऊँ तक मेरे आगे नंगी कड़ी थी. अँधेरे की वजह से मैं सही से उन्हें देख तो नहीं प् रहा था पर उनका एहसास हो रहा था. मैंने उन्हें वहीँ उन्हें बीएड की तरफ झुका दिया तो उन्होंने भी बीएड पर हाथ रख लिए. मैंने एक बार उनके बड़े बड़े चूतड़ों को मसला और घुटने बेंड करते हुए लैंड को छूट पर सेट कर क मौसी की कमर थम कर एक hi झटके में जड़ तक घुसा दिया .

‘ आआह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ‘ बस इतनी hi ावा मौसी क मुँह से आवाज़ आयी . मैंने मौसी की कमर थम कर मोटर शुरू कर दी. थोड़ी देर में hi वो खुद hi कमर पीछे धकेलने लगी. मैंने धक्के मरते हुए एक उंगली उनकी गांड क छेद पर लगा कर अंदर करने की कोशिश की तो उन्होंने हाथ पीछे कर क मेरा हाथ वहां से हटा दिया .

अमित : क्या हुआ मौसी ? आप तो कह रही थी क आज पीछे से भी कर लेना.

रीता मौसी : ुँहुँणन

मौसी इंकार कर रही थी शायद रजनी मौसी की वजह से . पहली बार में दर्द तो होगा hi कहीं आवाज़ से उनके नींद न टूट जाये . मैंने भी उनकी बात को समझा. मौसी ने खुद hi मेरा हाथ अपने लटक रहे पापियों पर रख दिया तो मैंने उनके वो बड़े बड़े पपीते थम लिए . अब मैंने दोनों हाथों से उनके बूब्स दबाता हुआ तेज़ धक्के मर रहा था. मौसी की पीठ को मैंने चूमना शुरू किया तो एहसास हुआ क उन्होंने कितना दर्द सहा होगा. उनकी पीठ ठंडी थी और पसीने की बूंदे वहां पर आयी हुई थी. मौसी आज कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड थी जो मेरे ऐसा करते hi एक बार फिर से उन्होंने पानी छोड़ दिया . मौसी की टांगें कम्पनी लगी तो मैंने उन्हें बीएड पर लिटा दिया. मौसी को करवट क बल करते हुए मैंने उन्हें लिटा दिया. इस पोज़ में उनकी गांड और भी बड़ी लग रही थी मैंने उनकी चूतड़ों को मसला और एक बार उनका किश कर क दांत भी गदा दिए. मौसी क मुस से दर्द और मज़े की सिसकी निकल गयी. मैंने उनकी ऊपर वे टंगे उठा कर अपने कंधे पर राखी और घुटनो क बल बैठ कर छूट में लैंड सेट कर क एक hi धक्के में पूरा घुसा दिया. मौसी फिर से ज़ोर से सिसकी लेने लगी. उन्हें दर्द क साथ मज़ा आ रहा था. मैंने अपना एक घुटना उनकी एक तंग पर दबाये तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए. इस पोज़ में लैंड ज्यादा अंदर तक जा रहा था. कुछ hi देर में मौसी भी फिर से रंग में आ गयी और उनकी सिसकारियां बढ़ने लगी. मैंने थोड़ी देर मौसी की इस पोज़ में चुदाई की और फिर लैंड बहार निकल लिया . मौसी तो फिर से गरम हो चुकी थी . उन्हें समझ नहीं आ रहा था क मैंने लैंड क्यों निकल लिया . अगले hi पल मैं उनके ऊपर झुक कर उनके बड़े बड़े पपीते मसलने लगा. एक निप्पल को मुँह में लेकर दूसरे को उँगलियों से पकड़ खींचने लगा. मौसी तो इतने में hi तड़पने लगी. वो मेरे सर को अपने बूब्स पर दबाने लगी. दोनों बूब्स का रास पिने क बाद मैंने मौसी क बल खोल दिए और उनके साइड में लेट कर उन्हें अपने ऊपर आने को कहा. मौसी ने भी कोई देर न की और जल्दी से मेरे ऊपर आ गयी. मेरे दोनों साइड बीएड पर पाऊँ रख कर वो बैठ गयी और फिर एक हाथ से लैंड को छूट पर सेट कर क धीरे धीरे लैंड को छूट में ले लिया . वो धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थी. मगर मुझे मज़ा नहीं आ रहा था ऐसे . मैंने उन्हें अपने ऊपर झुकाया और उनके खुले बल अपने हाथों में लेकर खींचते हुए नीचे से अपनी कमर उठा कर धक्के मरने शुरू कर दिए . मौसी को शायद बाल खींचने से दर्द हो रहा होगा पर साथ में उन्हें मज़ा भी आ रहा था जो उनकी सिसकियों से पता चल रहा था. मैंने ऐसे hi कमर उठा उठा कर मौसी को पेल रहा था . मेरा टाइम जब नज़दीक आया तो मैंने मौसी को पलट कर बीएड पर लिटा दिया. और उनकी टांगों क बीच आ कर उनके पाऊँ पकड़ कर उनके सर की तरफ दबाते हुए छूट में लैंड सेट कर क फिर से ज़ोरदार धक्का मर कर जड़ तक अंदर घुसा दिया . मौसी ने फिर से दर्द और मज़े की सिसकी ली. बस फिर मैं भी उनके पाऊँ उनके सर क दोनों तरफ बीएड से लगता हुआ ज़ोरदार धक्के मरने लगा. उनकी कमर बीएड से ऊपर उठ चुकी थी और उन्हें दर्द भी होने लगा था जिसकी वजह से वो मुझे रोकने की कोशिश भी कर रही थी पर उन्हें ऐसे रबड़ की तरफ फोल्ड कर क छोड़ने में भी बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरा टाइम अब पास hi था तो मैंने मौसी क दर्द की परवाह नहीं की और ताबड़तोड़ धक्के मर कर जड़ तक लैंड छूट में फसकर अपना पानी निकल दिया. इसके साथ hi मौसी भी और एक बार झाड़ गयी. जब तक मेरा पानी निकल नहीं गया मैंने मौसी को ऐसे hi जकड़े पड़ा रहा. और फिर जैसे hi उन्हें ढीला छोड़ा तो उन्होंने मुझे एक साइड को धकेल दिया. शायद वो कुछ ज्यादा hi दर्द में थी इस पोज़ में. कमरे में उनके ज़ोर से सांस लेने की आवाज़ आ रही थी .

अमित : आअह्ह्ह्हह मौसी मज़ा आ गया. आप को तो मज़ा आया न ? सॉरी वो लास्ट में मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था. अब तो आप खुश हैं न? मैं आपके लिए जो कर सकता हुनकारूँगा मौसी . मौसा जी आपको खुश नहीं कर पते इस लिए आप तड़पती रहती हैं न? चिंता मत कीजिये ऐसे hi मैं बीच में आकर आपकी प्यास बुझाता रहूँगा. मगर आप भी वडा कीजिये क ऐसा रोज़ रोज़ नहीं होगा. कहीं किसी को पता चल गया तो आप जानती हैं इसका असर क्या होगा और मैं नहीं चाहता क मेरी प्यारी मौसी पर कोई उंगली उठाये. अब कितने दिन मैं यहाँ हूँ 2-3 बार आपकी अचे से सेवा कर दूंगा फिर आप खुद पर काबू रखना.

मैंने जब ये बातें कहीं तो मौसी ने मेरी तरफ करवट ली और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर मुझे किश किया . मैंने भी उनकी गांड पर हाथ रख कर उसे मसल दिया.

अमित : वैसे आज फिर पीछे से रह गया. अब अगली बार मैं नहीं छोडूंगा.

मौसी ने फिर से किश की और मेरी छाती पर हलके साथ से थप्पड़ मारा . मैं भी उनकी बात समझता हुआ उठा और अपने कपडे ठीक कर कमरे से बहार निकल गया. घर में अभी भी वैसी hi शांति थी . मैं चुपचाप अपने कमरे में गया और जा कर सो गया .

अगली सुबह मेरी नींद अपने होंठों पर गीले गीले एहसास से hi खुली. मैंने ऑंखें खोली तो करुणा दीदी मेरे ऊपर खुली मुझे किश कर रही थी . मैंने उन्हें पलट कर अपने नीचे कर लिया और किश करते हुए उनके अनार मसलने लगा.

करुणा दीदी : आअह्ह्ह्हह ककक क्या करते हो इतनी ज़ोर से आअह्ह्ह मत करो .

अमित : रत कहाँ रह गयी थी आप ?

करुणा दीदी : सॉरी वो मुझे पता hi नहीं लगा कब मुझे नींद आ गयी .

मैंने मन में सोचा क पता कैसे लगेगा सारा प्लान तो मौसी का था.

करुणा दीदी : मुझे खुद बहुत बुरा लग रहा है .

अमित : कोई बात नहीं अब तो मैं यहीं हूँ . हम फिर मिल मिल लेंगे.

करुणा दीदी : आज रत पक्का , या कहो तो आज कॉलेज से छुट्टी कर क बहार चलते हैं .

अमित : नहीं कोई ज़रूरत नहीं , घर पर hi ठीक है . मैं आपको कहीं बहार नहीं लेकर जाना चाहता.

करुणा दीदी : इतनी परवाह है मेरी , ठीक है तो आज रत को कल का भी हिसाब बराबर कर लेंगे. अब उठो वर्ण माँ आ जाएगी यहाँ. टाइम देखो 7 बज चुके हैं.

करुणा दीदी ने एक बार फिर से मुझे किश किया और नीचे चली गयी. मैं भी उठा और फ्रेश हो कर नीचे आ गया. मौसी ने सबके लीजिये चाय बना ली थी. नेहा दीदी करुणा दीदी दोनों हाल में hi थी . मैंने सबको मॉर्निंग विश किया और जा कर मौसी क गले मिला.

रीता मौसी : उठ गया तू , चल बैठ चाय पि ले.

अमित : हांजी उठ गया. रत को नींद इतनी अछि आयी क सुबह आँख खुली hi नहीं टाइम से.

मेरी बात पर रीता मौसी मेरी आँखों में देखने लगी . मैं तो रत की बात पर उनका मज़ा ले रहा था पर वो ऐसे देख रही थी जैसे मैंने कोई अलग hi बात कर दी हो.

अमित : वैसे मौसी रजनी मौसी नहीं दिखाई दे रही , कहाँ हैं वो ?

रीता मौसी : वो दीदी की तबियत थोड़ी ठीक नहीं है तो वो आराम कर रही हैं .

अमित : चिंता से ) क्या हुआ मौसी को? कल तो अछि भली थी

रीता मौसी : अरे कुछ नहीं तू चिंता मत कर. ज़रा सा बुखार है बस. मैंने दवा से दी है वो आराम कर रही हैं .

मैं मौसी की बात सुन कर एक बार रजनी मौसी को देखने क लिए उनके कमरे में गया तो वो सो रही थी . मैं फिर से वापिस आ गया और सबके साथ चाय पिने लगा.

नेहा दीदी : चल अब तैयार हो जा फिर तुझे जाना भी है . कॉलेज तो आज जायेगा नहीं तू

अमित : आज तो निधि दीदी की जॉब लगवानी है और मेरा साथ जाना ज़रूरी है.

रीता मौसी : चलो तुम लोग नाहा लो मैं नाश्ता तैयार करती हूँ.

उसके बस करुणा दीदी नेहा दीदी और मैं अपने अपने कमरे में जा कर नाहा कर तैयार होने लगे. मैंने जल्दी से नाहा लिया और करुणा दीदी क कमरे में चला गया. दरवाज़ा खुला hi था और करुणा दीदी अभी कपडे पेहेन रही थी. अभी ऊपर से उन्होंने कमीज नहीं पहनी थी सूट क साथ वाली बस ब्रा में hi थी ऊपर से . करुणा दीदी का गोरा मखमल बदन देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने पीछे से उन्हें बाँहों में भर लिया और उनके बूब्स अपने हाथों में लेकर मसलते हुए उनकी गर्दन पर किश कर दिया.

करुणा दीदी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्स मत करो न क्यों आग लगा रहे हो. फिर सारा दिन तड़पती रहूंगी मैं.

अमित : चिंता मत करो आज आपकी साडी तड़प निकल दूंगा. आप बहुत प्यारी लग रही हो इस वक़्त

करुणा दीदी : जानते हो मैंने दरवाज़ा इसी लिए खुला रखा था. कक्कक्स मं चाहती थी तुम कमरे में आ जाओ और तुम आ गए. आअह्ह्ह सीसीसी ये सुबह सुबह hi खड़ा हो गया है

करुणा दीदी ने अपना एक हाथ पीछे कर क मेरे लैंड को पकड़ते हुए कहा. और फिर खुद hi अपनी गांड उस पर लगाने लगी.

अमित : कक्कक्स इतनी खूबसूरत अप्सरा जब बाँहों में हो तो मुर्दे में भी जान आ जाये मैं तो फिर भी ज़िंदा हूँ.

करुणा दीदी : अब बस भी करो आअह्ह्ह कोई ऊपर आ गया तो दोनों मरे जायेंगे.

मैंने करुणा दीदी को छोड़ दिया तो वो पलट गयी और खुद hi मेरे गले में बहन दाल कर किश करने लगी . मैंने भी उनका साथ दिया . किश करने क बाद वो मुझसे अलग हुई तो उनकी ऑंखें में लाल डोरे नज़र आ रहे थे.

करुणा दीदी : पता नहीं आज का दिन कैसे निकलेगा . रत को मैं सोने नहीं दूंगी इस लिए पहले hi अपनी नींद पूरी कर लेना.

अमित : है है है साडी रत आप मुझे झेल नहीं सकती इस लिए नींद की परवाह नहीं.

करुणा दीदी : ाचा बच्चू ? रत को देखती हूँ तुम्हे.

मैंने फिर से करुणा दीदी क होंठ चूमे और नीचे आ गया . नेहा दीदी भी तैयार हो चुकी थी . रीता मौसी नाश्ता करवाने लगी और करुणा दीदी भी निचे आ गयी . हम सब ने मिल कर नाश्ता किया उसके बाद करुणा दीदी स्कूटी ले कर निकल गयी नैना दीदी की तरफ. इधर से कल्पना भी आ गयी नेहा दीदी को लेने. मौसी से मिलने जब वो अंदर आयी तो मुझे देख कर खुश हो गयी.

कल्पना : मौसी आज तो घर में बड़े बड़े लोग आये हुए हैं आपके .

रीता मौसी : हाँ मेरा बीटा आया है और ये क्या काम है किसी से .

कल्पना : वैसे आज बाइक से जाना है या हमारे साथ hi चलोगे ?

अमित : मैंने आज निधि दीदी क साथ जाना है उनकी जॉब क लिए. इस लिए आज छुट्टी

कल्पना : तो आज तुम कॉलेज नहीं आओगे ?

अमित : नहीं

कल्पना : ये क्या बात हुई? तुम दीदी को छोड़ कर बाद में आ जाना चाहे थोड़ी देर क लिए hi सही .

अमित : ाचा देखूंगा अगर टाइम मिला तो. अब तुम लोग जाओ वर्ण देर हो जाएगी .

कल्पना नेहा दीदी को साथ लेकर चली गयी. अब घर में मैं रीता मौसी और रजनी मौसी hi थी. रीता मौसी दरवाज़ा बंद करने क बाद मेरे पास आयी और मेरे साथ चिपक कर कड़ी हो गयी.

रीता मौसी : कल रत ....

अमित : अभी तक नशा उतर नहीं क्या रत का ?? मुझे तो लगा था आप आज बिस्टेर पर पड़ी रहेंगी पर लगता है कुछ कमी रह गयी. कोई बात नहीं अगली बार अचे से करूँगा. और हाँ रत को तो मैंने पीछे से नहीं किया रजनी मौसी की वजह से पर नेक्स्ट टाइम पहले वहीँ करूँगा .

इतना कह कर मैंने रीता मौसी को किश किया और निधि दीदी को इंटरव्यू दिलवाने का कह कर निकल गया.

अमित क जाते hi रीता मौसी की तो ऐसी हालत हो गयी थी क जातो तो खून नहीं. अमित ने जो कहा था उसे सुन कर रीता क पाऊँ नीचे से ज़मीन hi खिसक गयी थी .

रीता ( मन में ) मैं तो रत में सो गयी थी इसका मतलब अमित दीदी क साथ ... हे भगवन ये क्या हो गया? इसी लिए दीदी बुखार का बहाना बना कर अभी तक बिस्टेर से नहीं हिली. दीदी को कहीं मेरे और अमित क बारे में पता तो नहीं चल गया ? अब मैं क्या जवाब दूंगी उनके सवालों का ? पर दीदी ने अमित को रोका क्यों नहीं ? और अभी तक कोई बात भी नहीं की इस बारे में . दीदी की हालत भी तो मेरे जैसी है इसका मतलब दीदी भी .... जो भी हो अब उनका सामना तो करना hi पड़ेगा.

रीता हिम्मत करते हुए रूम में गयी जहाँ रजनी अभी भी बिस्टेर पर hi थी.

रीता : अब तबियत कैसी है दीदी ?

रजनी : मैं ठीक हूँ तू चिंता न कर. अमित कहाँ है?

रीता : वो आपके घर hi गया है निधि को इंटरव्यू क लिए ले जाने .

रजनी : नेहा करुणा भी चली गयी ?

रीता : जी .

रजनी : इधर आ ज़रा मेरे पास बैठ . मुझे तुमसे ज़रूरी बात करनी है .

रीता समझ गयी क उसकी दीदी क्या बात करने वाली है . वो रजनी क पास जा कर बैठ गयी.

रजनी : देख तू मेरी छोटी बहिन है . मैंने हमेशा तेरा साथ दिया है. मुझे कुछ पता चला है तुम्हारे और अमित क बारे में.

रजनी ने आखिर वो बात कर hi दी जो ऋतू सोच रही थी. रीता की नज़रें अपने आप झुक गयी इतना सुनते hi.

रजनी : कब से चल रहा है ये सब ? मैंने गाओं में तुम दोनों की बातें सुनी थी स्टोर रूम में . तुम उसके साथ कैसे कर सकती हो ये सब ? वो तुम्हारा बीटा hi तो है . फिर कैसे तुमने उसके साथ .... चीन , मैंने सोचा भी नहीं था तू ऐसा करेगी .

रजनी सोच रही थी क रीता क साथ वो गाओं वाली बात कर क hi सचाई पता कर लेगी . उसे लगा था क रत वाली बात रीता को नहीं पता होगी.

रीता : तो क्या करती दीदी ? मैं खुद को नहीं रोक प् रही थी . हमेशा जलती रहती थी तड़पती रहती थी. सिद्धार्थ तो अब कुछ करते hi नहीं मेरे साथ. बहार कहीं कुछ करती तो बेटियों पर आंच आ सकती थी. ऐसे में मुझे कोई सहारा नहीं मिल रहा था. एक दिन अमित को बिना कपड़ों क देखा तो बस खुद को रोक hi नहीं पायी.

रजनी : ऐसा क्या देख लिया था जो तू खुद को रोक नहीं पायी?

रीता : क्या आप नहीं जानती ? आप ने भी तो नहीं रोका उसे कल रत .

ये बात सुनते hi रजनी क होश उड़ गए. उसने हैरानी से रीता की तरफ देखा .

रीता : मुझे पता है आपकी तबियत क्यों ख़राब हुई है.

रजनी : तू तू क कक कहना क्या चाहती है ?

रीता : यही क रत को वो सांड मेरी जगह आप पर चढ़ गया . इसी लिए तो आप आज बिस्टेर पाऊँ नीचे नहीं रख रही .

रजनी : ऋतायआ !!! ये ये तुम क्या कहा रही हो

रीता : दीदी , कब तक आप खुद को सजा डौगी ? मैं अछि तरह जानती हूँ क आपकी भी हालत मेरी जैसे hi है . जीजा भी अब आपके साथ कुछ नहीं करते न ? दीदी जैसे पेट की भूख खाने से बुझती है वैसे hi औरत क जिस्म की भूख मर्द hi बुझा सकता है. ये वो आग है जो बुझाने से और भड़कती है. कब तक खुद को रोक सकती है कोई औरत ? बदनामी क दर से किसी दूसरे क साथ हम रिश्ता नहीं बना सकती और फिर कोई गलत फायदा भी उठा सकता है. मेरी किस्मत अछि थी क टाइम पर मुझे अमित मिल गया वर्ण मैं तो बहार जाने वाली थी , इतनी मजबूर हो गयी थी मैं . मेरे साथ वो सब करने क बाद भी वो उसी तरह मेरी इज़्ज़त करता है जैसे पहले करता था. और कभी वो खुद से कहता भी नहीं कुछ करने को. मुझे hi कहना पड़ता है. कल रत कितने दिनों बाद मौका मिला था पर लगता है गलती से वो दूध मैं hi पि गयी.

रजनी : दूध ?

रीता : हाँ वो मैंने रत को दूध में नींद की गोली मिला दी थी ताकि सब सो जाएँ और मैं अमित क साथ आराम से ...

रजनी : तो वो सब तेरी कारिस्तानी थी. तभी मैं कहूं इतनी आवाज़ आने क बाद भी तू उठी क्यों नहीं .

रीता : बताओ न दीदी कैसा लगा अमित क साथ ?

रजनी : ठहरा जा तुझे बताती हूँ मैं . तेरी वजह से hi हुआ है सब कुछ .

रीता : मेरी वजह से ?

रजनी : और नहीं तो क्या ? खुद तो आराम से सो गयी और मेरी हालत पतली करवा दी . सच में पूरा सांड है वो

रीता : पर आप भी तो रोक सकती थी न उसे ? आपने रोका क्यों नहीं .

रजनी : उसने मौका hi कहाँ दिया . आते hi पाऊँ उठा क हो गया शुरू.

रीता : दीदी शुरू से बताओ न ये सब कैसे हुआ? मुझे पता है वो सीधा वो काम स्टार्ट नहीं करता . फिर भी आप मन नहीं कर पायी मतलब कुछ तो हुआ hi होगा .

रजनी : ठहर जा तू मेरे मज़े ले रही है . यहाँ हालत ख़राब हुई पड़ी है मेरी .

रीता : बताइये न दीदी ये सब हुआ कैसे ? मैं आपको दूध का गिलास दे कर गयी थी तो वो बदल कैसे गया? सब कुछ बताओ आप मुझे .

रजनी : मेरी भी गलती नहीं है वो सब बस हो गया

फ़्लैश बैक :-

रीता : दीदी ये दूध का गिलास पि लो आप

रजनी : मुझे ज़रूरत नहीं है.

रीता : आपके लिए लायी हूँ आपको पीना पड़ेगा .

रजनी : तेरा गिलास कहाँ है ?

रीता : मैं बाद में पि लुंगी

रजनी : बिलकुल नहीं , तू भी मेरे साथ पीयेगी चल गिलास ला.

रीता : नं नहीं नहीं दीदी आप पियो मैं अपने लिए भी ले आती हूँ .

रीता जल्दी से एक गिलास दूध ले आयी और अपनी साइड पे रख लिया . फिर वो बाकि सब को दूध देने क लिए चली गयी . रजनी को बाथरूम जाना था और वो बाथरूम चली गयी . जब वापिस आयी तो ऐसे hi बीएड क किनारे बैठ गयी और वहीँ साइड में पड़ा दूध का गिलास उठा कर पि लिया . जब वो बीएड पर लेटने लगी तो उसकी नज़र दूसरी साइड रखे दूध क गिलास पर पड़ी हो उसने खुद रखा था. रजनी ने वहां से दूध का गिलास उठा कर उस जगह रख दिया जहाँ से उसने दूध का गिलास उठा कर पि लिया था. कुछ देर बाद रीता कमरे में वापिस आयी तो आकर अपनी साइड रखे हुए दूध का गिलास उठा कर ली लिया. रजनी क खली गिलास को देख कर उसे लगा क रजनी ने दूध पि लिया दवा वाला इस लिए कुछ देर में उसे नींद आ hi जाएगी . इस लिए वो नींद का बहाना कर क ऑंखें बंद कर क लेट गयी और गहरी नींद में चली गयी दवा क असर से.

रजनी तो बस अमित क बारे में hi सोच रही थी. रीता तो पड़ते hi सो गयी . वो मन hi मन पता नहीं क्या क्या सोचती रही . देर रत जब कमरे का दरवाज़ा खुला तो कोई आहिस्ता से अंदर आया . रजनी अभी जग रही थी . उसे समझते देर न लगी क ये अमित hi है. रजनी देखना चाहती थी क अमित और रीता का आपस में रिश्ता कैसा है. इस लिए वो कुछ न बोली. अमित ने जब आवाज़ दी रीता को तो रजनी ने करवट बदली . जिससे अमित को लगा क रीता दूसरी साइड पर है. जब अमित ने रजनी का पाऊँ पकड़ कर उसे घसीटा तो रजनी को मनो सांप hi सूंघ गया. वो कुछ बोलना चाहती थी पर वो इस लिए भी चुप थी क कहूं अमित शर्मिंदा न हो जाये ऐसे अचानक उसकी हरकत से. एक ीचा उसके मन में ये भी थी क वो चुप रह कर देखे क अमित करने क्या वाला है? अमित ने जब उसकी टंगे उठा दी तो रजनी का दिल ज़ोर से धड़कने लगा . वो अमित को रोकने की कोशिश करने लगी पर अमित ने तो उसे सँभालने का भी मौका न दिया और पेंटी उतर का सिद्ध छूट पर हमला कर दिया. रजनी ने ज़िन्दगी में कभी छूट नहीं चटवायी थी . क्यूंकि उसके पति ने कभी ऐसा नहीं किया था. इस लिए जब अमित ने वो हरकत की तो मज़े क मरे रजनी से कुछ बोलै hi न गया वो तो वहीँ जड़ हो गयी. और फिर अमित ने इतनी कलाकारी से उसकी छूट को छठा क वो 2 मिनट्स भी न टिक पायी और उसका पानी निकल गया. ये एक अद्भुत एहसास था रजनी क लिए . वो मज़े की वादियों में उड़ती अभी ज़मीन पर भी न आयी थी क अमित ने उसकी छूट में लैंड सेट कर क ज़ोरदार धक्का मर दिया. रजनी ने ज़िन्दगी में एक hi लैंड लिया था जो इस बलिष्ठ लैंड से आधा hi था लम्बाई और मोटाई में. इस लिए 3 बच्चों की माँ होते हुए भी उसकी छूट की धज्जियाँ उड़ गयी इस प्रहार से. वो तो ज़ोर से चीखना चाहती थी पर मजबूर थी. इस लिए अपना मुँह खुद hi कपडे से दबा कर अपनी आवाज़ रोक ली. मगर अमित यहीं नहीं रुका और एक ज़बरदस्त धक्का और लगते हुए पूरा लैंड जड़ तक घुसा दिया. रजनी की हालत तो ऐसी hi गयी मनो किसी ने छूट में खूंटा गाड़ दिया हो. कुछ पल तो उसकी सांस भी ठीक से नहीं आ रही थी. वो अमित को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी पर उसमे भी कामयाब न हुई . उसके बाद तो अमित रुका hi नहीं. पता नहीं कितनी बार रजनी का पानी निकल उसे खुद भी पता नहीं चला . पर ऐसी चुदाई उसकी कभी नहीं हुई थी. उसे दर्द भी बहुत मिला था और मज़ा भी . धीरे धीरे जब छूट में लैंड ने जगह बना ली तो छूट लैंड की दीवानी हो कर बार बार पानी बहाने लगी . बरसो की तड़प आज ख़तम हो रही थी इस लिए रजनी खुद भी मज़े से उसका साथ देने लगी . जब अमित ने रजनी को हवा में उठाया तो एक पल वो दर hi गयी थी और अमित से बच्चों की तरह चिपक गयी. पर किस तरह अमित ने उसे हवा में उठाये चुदाई की वो अमित की फैन हो गयी. एक जवान मर्द वो भी इतने ताकतवर लैंड और स्टैमिना वाला , रजनी तो मनो किसी और hi दुनिया में बाउंसी गयी . जब तक अमित का पानी नहीं निकला वो बस अमित का साथ देती उससे चुदवाती रही . और जब लास्ट में अमित ने अपना पानी निकलने से पहले आखिरी दमदार धक्के लगाए तो उसकी जान hi निकल गयी. अमित खुद तो अपनी गर्मी निकल कर चला गया पर रजनी तो मनो ऐसे hi गयी थी क किसी ने हलाल कर क फेंक दिया हो. पता नहीं कितनी देर तक वो खुद को उठाने क लिए हिम्मत जुटती रही . और जैसे तैसे कपडे पहन कर सो गयी.

फ़्लैश बैक एंड्स

रीता : तो आपको मौका hi नहीं दिया उसने. वैसे आपका भी भला हो hi गया वर्ण पता नहीं कब तक तड़पती रहती आप. अब बताओ कैसा लगा उसका वो मुसल

रजनी ने रीता को हलके हाथ से थप्पड़ मारा

रजनी : बदमाश तू नहीं सुधरेगी , तुझे नहीं पता कैसा है . हालत देख मेरी क्या है फिर भी पूछ रही है. वैसे तू कैसे ले लेती है और वो तो पीछे से करने का भी कह रहा था . तू क्या सच में उसका पीछे लेने वाली है ?

रीता : क्या करूँ दीदी उसे मेरी बैक बहुत पसंद है . पहले भी कह चूका है और मैंने उसे वादा भी किया था. सच बताऊँ तो कल रत मैं पीछे से भी करवाने वाली थी . पर छोडो . वैसे दर तो मुझे भी लगता है क्यूंकि उसका है भी तो इतना बड़ा. आगे लेने में hi पसीने छूट जाते हैं तो पीछे कैसे जायेगा? जो भी हो उसकी ख़ुशी क लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ. ज्यादा से ज्यादा क्या हो जाएग 2 दिन बिस्टेर पर hi पद जाउंगी .

रजनी : वैसे ये गलत है रीता , वो हमारा बीटा है .

रीता : वो हमारा बीटा है दीदी इसी लिए तो वो हमारा दर्द दूर कर रहा है. अगर यही सब हम किसी और क साथ करें तो क्या होगा . और वैसे भी वो अब जवान हो गया है उसे भी तो ज़रूरत है न ये सब सिखने की . तो हम उसकी मदद hi कर रहे हैं .

रजनी : अगर कभी किसी को पता चल गया तो?

रीता : कैसे पता चलेगा दीदी ? वो किसी से कुछ कहने वाला नहीं और न hi हम . बस ज़रा सी सावधानी hi तो रखनी होती है. वैसे एक बात कहूं दीदी , आप कारन को समझाओ वो अमित क साथ ठीक नहीं कर रहा. जब कमलेश ने अमित पर वो इलज़ाम लगाया मैं तो तब hi समझ गयी थी क ये काम किसी और का है अमित ऐसा कर hi नहीं सकता .

रजनी : वो क्यों भला ?

रीता : कमल करती हो दीदी मुझसे बड़ी हो आप फिर भी अपने ध्यान नहीं दिया ? दीपिका की तस्वीर वो भला क्यों खींचेगा जब वो खुद hi उसके सामने कपडे उतर कर टंगे उठा लेती है.

रजनी ( शॉकेड ) क्या मतलब ?

रीता : आप ने देखा नहीं क आरव की शकल अमित से मिलती है न की कमलेश से .

रजनी : इसका मतलब अमित का दीपिका क साथ भी चक्कर है ?

रीता : चक्कर नहीं दीदी , अमित ने दीपिका को माँ बनाया है और कामिनी को भी. और जहाँ तक मुझे लगता है गौरी क पेट में भी अमित का hi अंश है . वर्ण आप खुद hi सोचो क इतने सैलून बाद अचानक से कैसे वो सब माँ बनने लगी ?

रजनी : इसका मतलब अमित गलत रस्ते पर चल

पड़ा है और तू उसका साथ दे रही है ?

रीता : नहीं दीदी , अपने दिल पर हाथ रख कर खुद सोचो क्या अमित ने ऐसी कोई भी हरकत किसी क भी साथ की क जिससे लगे वो गलत है ? वो ऐसा बिलकुल भी नहीं है . अमित को अपने लिए मैंने hi मनाया था और मुझे यकीन है दीपिका कामिनी ने भी ऐसे hi किया होगा. हाँ मुझे बड़ी भाभी का समझ नहीं आया . या हो सकता है मैं गलत हूँ. पर दीपिका और कामिनी का तो पक्का है क उन्होंने hi माँ बनने क लिए अमित को खुद मनाया होगा. वो गलत नहीं है दीदी वो तो सबको प्यार करता है बस . आप भी उसके बारे में कुछ गलत मत समझना. अगर यकीन न हो तो उसके सामने कपडे उतर कर देख लेना वो आपको तरफ देखेगा भी नहीं .

रजनी : ये तू निधि ने भी बताया था . पर इतनी सी उम्र में हम उसके साथ ये सब ....

रीता : आप उसकी उम्र देख रही हैं उसकी ताकत नहीं देख रही ? इतनी सी उम्र में वो बाप भी बन चूका है और आप जैसी खेलिखायी औरत की भी कैसी हालत कर दी है . ज़्यादा मत सोचिये. अब आप आराम कीजिये .

रजनी : पर मेरा दिल नहीं मन रहा , अगर उसे पता चला क कल रत उसने मेरे साथ वो सब किया तो ... मैं उसका सामना कैसे करुँगी ?

रीता : आपको क्या ज़रूरत है बताने की ? आप बस चुप रहिये. और जब वो आपके घर आएगा तो अचे से सेवा करवा लीजियेगा. शरत लगा लीजिये अब आप ज्यादा दिन खुद को उससे दूर नहीं रख पाओगी .

रजनी : नहीं मुझसे ये नहीं होगा

रीता : हस्ते हुए ) ये तो वक़्त hi बताएगा, मैं आपको पैन किलर देती हूँ और कहें तो मालिश भी कर दूँ थोड़ी ?

रजनी : नहीं बस वो टेबलेट देदे.

रीता : वैसे दीदी आपकी बैक मुझसे भी बड़ी है . उसकी नज़र कभी न कभी इस पर पद hi जाएगी .

रजनी : मैं नहीं करवाने वाली पीछे से कुछ भी तू जा अब टेबलेट ले क आ . कमर और पेट क साथ जांघें भी दुःख रही हैं और नीचे तो सूजन पहले hi आ चुकी है .

रीता : पहली बार था न , रंग तो दिखाना hi था उस सांड ने हे हे हे

जब मैं रजनी मौसी क घर पहुंचा तो निधि दीदी तैयार बैठी मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. वो पेण्ट शर्ट में थी और बड़ी आकर्षक लग रही थी. बालों को सलीके से पीछे रबर बंद में बंधा हुआ था. वाइट शर्ट और ग्रे पेण्ट में 5’7” की हाइट में वो कमल लग रही थी. एक बार तो मैं उनको देखने में hi इतना खो गया क उनकी आवाज़ तक न मुझे सुनाई दी.

निधि दीदी : क्या हुआ कहाँ खो गए ?

अमित : वो हाँ क्या क्या कहा अपने ?

निधि दीदी : मैंने पूछा कहाँ खो गए ?

अमित : कहूं नहीं , आप तैयार हैं ?

निधि दीदी : मैं तो कब से तैयार हूँ. तू पानी लोगे?

अमित : नहीं मैं भी घर से hi तो आ रहा हूँ . चलिए हम चलते हैं . वैसे दीदी आप बहुत अछि लग रही हो .

निधि दीदी : शरमाते हुए ) थैंक्स .

दीदी ने घर को लॉक किया और मैं उन्हें पीछे बिठा कर चल पड़ा अंकल क ऑफिस की और. दीदी मेरी कमर में हाथ डेल मेरे साथ चिपक कर दूसरे हाथ में अपने डाक्यूमेंट्स लिए बैठी थी . कुछ hi देर में हम ऑफिस में पहुँच गए. ये एक 4 मंज़िला ईमारत थी जिस पर अंकल की फर्म का बोर्ड लगा हुआ था. मैंने जब रिसेप्शन पर नाम बताया तो उस लड़की ने अंदर किसी से फ़ोन पर बात की और तभी एक आदमी हमें लेने आ गया. सेकंड फ्लोर पर hi दीदी का इंटरव्यू था. दीदी इंटरव्यू हॉल में जाने से पहले मुझसे गले लग कर मिली. मैंने उन्हें बेस्ट ऑफ़ लक कहा. फिर दीदी अंदर चली गयी और मैं बहार वेट करने लगा तभी वहां अंकल आ गए.

अंकल : तुम बहार क्यों बैठे हो ? तुम यहाँ क मालिक हो नौकर नहीं चलो उठो और चलो मेरे साथ .

अमित : अंकल वो दीदी

अंकल : वो मेरी बेटी है और इस कंपनी क मालिक की बहिन . उसकी चिंता मत करो .चलो मेरे साथ . मैंने सब समझा दिया है मैनेजर को. अगर मैं वहां रहता तो उसे लगता क मेरी वजह से उसे नौकरी मिली है . उसे उसकी काबिलियत पर यकीन होना चाहिए तभी वो अचे से काम को दिल लगा कर सकेगी.

अमित : थैंक्स अंकल

अंकल : मार कहानी है क्या मेरे हाथों से?

अमित : नहीं नहीं अंकल सॉरी

अंकल : चलो अब मेरे साथ , निधि की चिंता मत करो.

अंकल मुझे अपने साथ ले गए . उधर निधि दीदी का इंटरव्यू तीन लोगों क पीनल ने लिया. निधि दीदी क जवाब सुन कर सभी संतुष्ट थे. इस लिए उन्हें चुन लिया गया.

मैनेजर : मिस निधि यू अरे वैरी इंटेलीजेंट एंड एलिजिबल फॉर थिस पोस्ट. वे सेलेक्ट यू फॉर थे पोस्ट ऑफ़ पर्सनल सेक्रेटरी तो थे डायरेक्टर. नाउ यू हैवे तो जो तो थे डायरेक्टर. लास्ट डिसिशन इस इन हिज हैंड . वे रेकमेंड यू फिर हिज सेक्रेटरी बूत हे कैन अप्पोइंट यू और मई नॉट. यू विल गेट योर अपॉइंटमेंट लेटर फ्रॉम हिम

निधि : थैंक यू सर , थैंक यू वैरी मच.

मैनेजर : डायरेक्टर ‘स केबिन इस ों 4तह फ्लोर. आल थे बेस्ट .

निधि : थैंक यू सर.

निधि ख़ुशी ख़ुशी हॉल से बहार आयी . पर सामने अमित को न पाकर वो घबरा गयी और उसे फ़ोन मिलाने hi लगी थी क सामने से राघव अंकल आ गए .

अंकल : छींकते हुए ) अरे बेटी तुम यहाँ ?

निधि : नमस्ते अंकल , मैं यहाँ इंटरव्यू क लिए आयी थी. आप को अमित ने बताया नहीं ?

अंकल : अरे हाँ उसने जॉब का पूछा था . तो हो गया इंटरव्यू? अगर ज़रूरत है तो मैं कह देता हूँ मैनेजर से

निधि : नहीं अंकल उन्होंने तो रेकमेंड कर दिया है पर अब डायरेक्टर क पास जाने को कहा है .

अंकल : तो इसमें कौन सी बात है. चली जाओ .

निधि : मुझे उसकी चिंता नहीं मैं तो अमित को ढूंढ रही हूँ वो मेरे साथ आया था यहीं तो बैठा था पर अब नज़र नहीं आ रहा.

अंकल : ाचा तो वो तुम्हारे साथ आया था ? मुझे बताया hi नहीं उसने. तुम चिंता मत करो वो अभी आ जायेगा मैंने hi उसे भेजा है . चलो मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ डायरेक्टर क पास.

निधि : अंकल अमित बता रहा था क ये आपकी कंपनी है फिर ये डायरेक्टर...

अंकल : बीटा मैं तो बस इस कंपनी को मैनेज कर रहा हूँ. असली मालिक कोई और है. इस कंपनी क 2 मालिक हैं 50-50 . उसी में से एक की सेक्रेटरी बनने वाली हो तुम . वैसे तुम कहो तो मैं तुम्हारी सिफारिश कर देता हूँ.

निधि : नहीं अंकल शुक्रिया , मैं ये जॉब अपनी क्वालिफिकेशन से लेना चाहती हूँ.

अंकल : that’s स्पिरिट, बहुत अचे बीटा. दिल

लगा कर काम करना. लो डायरेक्टर का केबिन भी आ गया .

दोनों बातें करते करते लिफ्ट से टॉप फ्लोर तक आ गए थे जहाँ एक तरफ बहुत बड़ा कांच की दीवारों से बना चमचमाता ऑफिस था. निधि भी इस ऑफिस को गौर से देख रही थी. कोई बड़ा आदमी hi होगा अंदर केबिन में जिसके बारे में न उसे कुछ पता था न hi अंकल ने बताया.

अंकल : जाओ बेटी अंदर जाओ .

निधि : नर्वस ) अंकल अमित कब आएगा ?

अंकल : बस वो अभी आ जायेगा. तुम घबराओ मत. कहो तो मैं ....

निधि : नहीं अंकल it’s ok .

अंकल : बेस्ट ऑफ़ लक बेटी .

निधि : थैंक यू अंकल .

निधि जैसे hi उस कांच क दरवाज़े से अनफेयर गयी तो एक तरफ वेटिंग क लिए काउच लगे थे. नीचे कालीन बिछा हुआ था. सामने बड़ी स एलसीडी लगी हुई थी. एक साइड में दरवाज़े क बहार hi यूनिफार्म में पेओन बैठा था जो निधि को देख कर उसके पास आ गया.

पेओन : आप hi मिस निधि हैं ?

निधि : जी मैं hi निधि हूँ .

पेओन : डायरेक्टर सर आप hi की वेट कर रहे हैं. चलिए .

निधि का दिल इंदौर से धक् धक् कर रहा था . वो जहाँ पहले भी जॉब करती थी वहां भी मैनेजर लेवल तक क सीनियर्स से hi मिली थी. पहली बार वो किसी इतने बड़े आदमी से मिलने जा रही थी वो भी इतनी बड़ी कंपनी क मालिक से. धड़कते दिल से वो केबिन में एंटर हुई तो पेओन दरवाज़ा बंद कर क बहार hi रुक गया. केबिन पे पूरी शांति थी. पूरे केबिन में कालीन बिछा हुआ था . बहुत hi मेहेंगा फर्नीचर लगा हुआ था केबिन में. 12 फ़ीट चौड़ी एंड्स लकड़ी से बानी टेबल जिस पर मोटा कांच बिछा हुआ था और उसके ऊपर 4 टेलीफ़ोन क सेट एक कंप्यूटर एक लैपटॉप पड़ा था. डायरेक्टर की चेयर घूमी हुई थी. यानि वो निधि की तरफ पीठ कर क बैठा था. केबिन में बिलकुल पिन ड्राप साइलेंस था जो निधि की धड़कनों को और बढ़ा रहा था. डरते डरते निधि ने हिम्मत करते हुए अपनी ज़ुबान खोली .

निधि : स सर , माय सेल्फ निधि . मैं आपकी पर्सनल सेक्रेटरी की जॉब क लिए आयी हूँ. क्या मैं ....



अभी निधि ने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी वो चेयर घूमी और उस पर बैठे शख्स को देख कर निधि हैरान हो गयी. उसे लगा जैसे वो कोई सपना देख रही है . क्यूंकि सामने डायरेक्टर की चेयर पर और कोई नहीं बल्कि अमित hi बैठा हुआ था
 
अपडेट 168



अमित को अपने सामने डायरेक्टर की कुर्सी पर देख कर निधि को तो मच समझ hi नहीं आ रहा था. वो बस ऑंखें मुँह खोले उसे देख रही थी. उसके दिल की धड़कन इतनी बढ़ गयी थी क कहीं हार्ट अटैक hi न आ जाये. जहाँ अंदर आते hi वो नर्वस हो गयी थी वहीँ अब अपने प्यार को उस गद्दी पर देख कर उससे अपनी ख़ुशी नहीं संभल रही थी .

निधि : अमित तुम !!! डायरेक्टर ?? ी can’t बिलीव, मैं कहीं सपने में तो नहीं हूँ? ये ज़रूर सपना है .

इतना कह कर निधि दीदी ने ऑंखें बंद कर ली और मन में कुछ बोलने लगी. मैं अपनी चेयर से उठा और उनके करीब आ गया . मेरे हाथ में उनके लिए बना अपॉइंटमेंट लेटर था जिसे मैंने उनके हाथ में थमा दिया . दीदी ने झट से ऑंखें खोल ली और एक बार मुझे और फिर अपने हाथ में पकडे अपॉइंटमेंट लेटर को देखा. अगले hi पल दीदी उछाल कर मेरे गले में बहन दाल ज़ोर से मेरे सीने से लग गयी. निधि दीदी अपने पंजों क बल हो खुद को ऊपर उठाये मेरे गले से लगी थी और उनके सख्त अनार मेरे सीने में गढ़े जा रहे थे .

निधि दीदी : ोू ी ऍम सो हैप्पी ये सच में तुम hi हो . मैं आज बहुत खुश हूँ . उम्म्माः तुम यहाँ क डायरेक्टर हो और किसी को कुछ पता भी नहीं . ये सब कैसे हुआ ? तुम यहाँ कैसे ?

दीदी ने ख़ुशी में पता नहीं कितनी बार मुझे चुम लिया था मेरी गर्दन मेरी गाल पर.

अमित : अरे बस करो दीदी कण्ट्रोल करो खुद पर. हम ऑफिस में हैं. मैंने कोई डायरेक्टर नहीं हूँ . ये तो अंकल ने hi मुझे यहाँ बिठा दिया था. ये कंपनी उनकी hi है. और ये आपका अपॉइंटमेंट लेटर है. अब आप यहाँ दिल

लगा कर काम करना . यहाँ आपको कोई दिक्कत नहीं होगी.

निधि दीदी ने अपॉइंटमेंट लेटर खोला तो उसमे में भी मेरा hi नाम लिखा हुआ था डायरेक्टर की जगह .

निधि दीदी : मुझे उल्लू बना रहे हो ? ये देखो ये तुम्हारा नाम नहीं है क्या ? कहीं मेरे साथ ये सब मज़ाक तो नहीं कर रहे न तुम? देखो मुझे जॉब की कोई ीचा नहीं है मैंने पहले Hi कहा था.

‘ अरे बेटी ये बुद्धू राम जान बुझ कर सब से छुपता रहता है . इसे कितनी बार समझाया है पर ये मंटा hi नहीं. अब तुम आ गयी हो तो तुम hi समझाना इसे क ये इस कंपनी का मालिक है और मालिक की तरह hi पेश आये ‘

ये बात अंकल अंदर आते हुए कही.

निधि दीदी : अंकल अमित क्या सच में डायरेक्टर है यहाँ ?

अंकल : हाँ बेटी , तुम्हारा भाई यहाँ का डायरेक्टर है और 50% का मालिक भी. असल में ये कंपनी मैंने उसके पापा क साथ शुरू की thi.mera दोस्त तो नहीं रहा पर उसका वारिस तो है न . इसी नाते ये यहाँ का मालिक हुआ क नहीं? मैं तो बस इस के को तब तक सम्भालूंगा जब तक ये और मोहित काम काज देखने क लायक नहीं हो जाते. उसके बाद सब इन दोनों क जिम्मे.

निधि दीदी की आँखों में ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. उन्होंने फिर एक बार मेरी तरफ देखा और अंकल से बात करने लगी .

निधि दीदी : अंकल क्या सच में मेरी यहाँ जॉब ...

अंकल : हाँ बेटी , ये तो यहाँ अत नहीं और पड़े ख़तम होने तक ये आएगा भी नहीं. इस लिए इसका सारा काम तुम देखोगी. मैं कब से इस काम क लिए किसी भरोसेमंद को देख रहा था और देखो ये मुश्किल भी इसने खुद hi हल करदी. तुम हर तरह से इस जॉब क काबिल हो. और मुझे पता है तू कभी अमित का कोई नुकसान नहीं होने डौगी .

निधि दीदी : इसके लिए तो मैं कुछ कर सकती हूँ अंकल. पर ये बात किसी को पता क्यों नहीं है?

अंकल : ये बात विजय भाई साहब और गौरी भाभी को पता है. बाकि सब को हम बाद में बताएँगे और तुम भी इस बात का ख्याल रखना. इसे अभी अपनी मर्ज़ी करने दो एक बार इसकी पड़े ख़तम हो जाये फिर देखतें हैं इसे.

निधि दीदी : मैं ख्याल रखूंगी अंकल . और तुझसे तो मैं बाद में बात करती हूँ .

निधि दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा तो अंकल को हंसी आ गयी .

अंकल : अब आया ुण्ठ पहाड़ क नीचे. अब निधि बेटी hi तुझे सीधा करेगी . ाचा बेटी मुझे ज़रा मीटिंग में जाना है तुम अपना काम अचे से समझ लेना मैनेजर से. ाचा अमित मैं चलता हूँ. और हाँ करिश्मा यद् कर रही थी तुम्हे , उससे मिल लेना वो नाराज़ है . कल तुम उससे मिल कर नहीं आये न ?

अमित : जी अंकल मैं घर होता जाऊंगा .

अंकल जैसे hi गए निधि दीदी फिर से मेरे गले लग गयी . वो बार बार मुझसे ऐसे चिपक रही थी क मेरा बुरा हल हो रहा था.

निधि दीदी : उम्म्माह्ह्ह . इतनी बड़ी बात तुमने सबसे छुपाई ? आखिर क्यों ? इतनी बड़ी कंपनी क मालिक हो तुम और सैंकड़ों लोग इसमें काम करते हैं फिर भी तुम ऐसे hi सिंपल से बने रहते हो ?

अमित : ये सब मेरा नहीं है दीदी , ये सब अंकल की म्हणत का है और उनके दोस्त यानि क पापा का. मैं भला क्यों इस पर घमंड करूँ ? अभी तो मैं इसके काबिल hi नहीं हूँ अगर कभी इसके काबिल बना तो ज़रूर इसे आगे बढ़ाने की कोशिश करूँगा और अगर न बन सका तो इसे ऐसे hi छोड़ दूंगा. पैसा इंसान की ज़रूरत पूरी करता है पर पैसा hi तो सब कुछ नहीं न. मन की शांति सब से ज़रूरी है. यही तो बचपन से सीखा है. रही बात सिंपल रहने की तो वो तो आप भी सिंपल hi रहती हैं जबकि आप क आगे अछि अछि लड़कियां भी पानी भरें.

मेरी इस बात पर निधि दीदी शर्मा गयी और नज़रें झुका ली .

निधि दीदी : जो भी हो तुम मालिक हो यहाँ क और अब मैं तुम्हारी एम्प्लोयी हूँ. पर्सनल सेक्रेटरी, यही जॉब है न मेरी. तो तुम्हे अचे से असिस्ट करुँगी. मैं कितनी खुश हूँ मैं बता नहीं सकती . मुझे अभी भी ऐसे लग रहा है जैसे मैं सपना देख रही हूँ . इस जॉब से तो मेरा डबल फायदा हो गया है. एक तो अछि जॉब मिल गयी ऊपर से तुम्हारे साथ रहने का मौका. तुम्हारे होते मुझे किसी बात का दर नहीं . मैं तो अंकल से कह दूंगी मुझे इस जॉब क लिए सैलरी भी नहीं चाहिए.

अमित : वो क्यों भला ?

निधि दीदी : जब कंपनी hi तुम्हारी है तो तुमसे भला मैं सैलरी लूंगी ? ये तो अब मेरी ड्यूटी है .

अमित : सैलरी आपको लेनी hi पड़ेगी . हाँ अगर काम है तो बता दो बढ़ा मैं दूंगा .

निधि दीदी : यस बॉस. अब तो तुम्हे मैं बॉस hi कहूँगी .

अमित : नहीं दीदी , ये सब किसी को पता नहीं चलना चाहिए .

निधि दीदी : अकेले में तो कह सकती हूँ न ? अकेले में मैं तुम्हारी , सॉरी आपकी सेक्रेटरी hi रहूंगी.

अमित : क्या दीदी आप भी ,, मेरी टांग खिंच रही हैं अब आप .

निधि दीदी : नहीं , ये hi तो मेरी प्रोफाइल है न . और कोई भी एम्प्लोयी अपने बॉस को रेस्पेक्ट हो देता है चाहे वो रिश्ते या उम्र में छोटा hi क्यों न हो .

अमित : पर मुझे नहीं चाहिए ये रेस्पेक्ट आप मुझसे बड़ी हो . आप बस वैसे hi रहो.

निधि दीदी : तो मैं ये जॉब नहीं करुँगी फिर .

अमित : क्या दीदी अब ये क्या बात हुई .

निधि दीदी : अगर चाहते हो क मैं ये जॉब करूँ तो मेरी बात माननी होगी .

अमित : ाचा ठीक है पर सिर्फ ऑफिस में .

निधि दीदी : नहीं अकेले में जहाँ भी हो हम .

अमित : बूत जॉब तो ऑफिस में है न बहार थोड़ा है

निधि दीदी : मंज़ूर है या नहीं ?

अमित : ाचा ठीक है करलो मर्ज़ी पर मुझे ये ाचा नहीं लग रहा .

निधि दीदी : हस्ते हुए ) पर मुझे बहुत ाचा लग रहा है. कहिये सर अब क्या करना है ?

मुझे दीदी की इस बात पर हंसी आ गयी.

अमित : अब आप वो करिये जो आपका दिल करे.

निधि ( मन में ) काश क मैं वो कर सकती जो मेरे दिल में है तो अभी अपने दिल की बात तुम्हे बता देती .

निधि दीदी : ाचा तो फिर आज इस नई जॉब की ख़ुशी में मेरी तरफ से पार्टी . आज मैं आपके साथ वक़्त बिताना चाहती हूँ अपने बॉस को जानना चाहती हूँ .

अमित : आप फिर मेरी टांग खींचने लगी .

निधि दीदी : अरे नहीं, सच में मैं आज का दिन आपके साथ बिताना चाहती हूँ. ये मैंने कल hi सोच लिया था.

अमित : तो चलिए कहाँ चलना है

निधि दीदी : क्या आप आज मुझे मूवी दिखने ले चलेंगे? मैंने बहुत सैलून से सिनेमा में पाऊँ तक नहीं रखा. मैं आपके साथ जाना चाहती हूँ.

अमित : ठीक है चलिए पर क्या सच में ऐसे hi बात करेंगी वहां पर भी ?

निधि दीदी : यही तो मेरी शरत है .

अमित : आप मेरी पिटाई करवा कर रहेंगी घर से .

निधि दीदी : हे हे हे ऐसा नहीं होगा कभी भी. चलिए अब.

निधि ( मन में ) आपको नाम से बुलाने का अब दिल hi नहीं करता . पति को नाम से थोड़ा hi बुलाया जाता है. आज तो भगवन में मुझे इस तरह आप क साथ जोड़ कर साबित कर दिया है क मेरी तकदीर आप से hi जुडी है. मैं हमेशा आपकी परछाई बन क रहूंगी .

ऑफिस से निकल कर मैं दीदी को लेकर एक मल्टीप्लेक्स में चला गया. दीदी का मुझे पता hi था क वो कहीं आती जाती नहीं है. इस लिए मैंने सोचा आज का दिन उनके हिसाब से उनके साथ hi बिताऊं. मैंने हमारे लिए 2 टिकट्स ली और मूवी देखने चले गए . ये एक रोमांटिक हिंदी मूवी थी . पूरी मूवी में दीदी का ध्यान मूवी पर काम और मुझ पर ज्यादा रहा. वो बस मेरी बाजु पकड़ कर hi बैठी रही. मूवी देखने क बाद हमने हल्का फुल्का रेस्टोरेंट से खा पि लिया और फिर मैं उन्हें शॉपिंग क लिए ले गया. दीदी ने भी मेरे लिए 2 तशीरतस और पेण्ट ली. मैंने भी अपनी पसंद क सूट उन्हें लेकर दिए. दीदी बस मुस्कुराती हुई मेरी हर बात मन रही थी. और एक भर भी उन्होंने मेरे नाम नहीं लिया और न hi मुझे तुम कह कर बुलाया. मुझे बड़ा अजीब लग रहा था पर दीदी की कंडीशन क आगे मुझे चुप रहना पड़ा . मॉल में बने एक जेवेलरी शोरूम को देख कर मेरे मन में एक बात आ गयी और मैं दीदी को लेकर वहीँ चला गया.

सेल्स मन : जी सर क्या लेंगे आप ?

अमित : पायल होंगी आपके पास ?

सेल्स मन : कैसी पायल चाहिए सर आपको ? सिल्वर में या गोल्ड में ? लेडीज क लिए या गर्ल्स क लिए ?

अमित : इनके लिए .

सेल्स मन ने निधि दीदी की तरफ देखा और जल्दी से पहले निकलने लगा. निधि दीदी मेरी तरफ देखने लगी .

निधि दीदी : ये सब ....

अमित : मुझे अछि लगती है पायल की आवाज़ और मैं चाहता हूँ आप भी पायल पहना करें.

मेरी ये बात सुन कर निधि दीदी शर्मा गयी .

निधि ( मन में ) आपको जो भी पसंद है आप बस कह दिया कीजिये . मैं आपकी हर बात मानूंगी हर ीचा पूरी करुँगी .

सेल्स मन ने बहुत साडी पायलें निकल कर हमारे सामने रख दी. पर मैंने दीदी की तरह सिंपल सी पायल hi पसंद की. एक तो दीदी को जॉब करनी थी दूसरा दीदी खुद hi सिंपल रहती थी इस लिए ज्यादा भरी या ज्यादा आवाज़ करने वाली पायल उनके लिए सही नहीं थी .

अमित : ये आपके लिए सब से बढ़िया रहेगी . जॉब पर चाहे मत पहनना पर घर बहार आप पहन सकती हैं.

निधि दीदी : ये बहुत खूबसूरत है सर. थैंक्स फॉर थिस लवली गिफ्ट.

मैंने कार्ड से पेमेंट की और फिर हम दोनों वहां से बहार आ गए. अब दीदी क पास 3-4 शोप्पेर्स थे इस लिए उनको बैठने में मुश्किल हो रही थी . दीदी ने पूरी तरह मेरे साथ जुड़ कर बैठ गयी थी . उनका हाथ मेरी छाती पर था और किसी गफ की तरह वो मेरे साथ चिपकी बैठी थी . अपनी पीठ पर मुझे उनके उभर महसूस हो रहे थे.

निधि दीदी : आप ने जो ये गिफ्ट दिया है न इसे आप अपने हाथों से hi पहनाएंगे तो मुझे ाचा लगेगा .

अमित : दीदी अब हम अंकल क घर जा रहे हैं . अब तो ये आप आप कहना बंद कर दो.

निधि दीदी : वहां जा कर नहीं कहूँगी पर यहाँ तो हम अकेले हैं न. वैसे आज पहली बार ऐसा लग रहा है क मेरी भी अपनी ज़िन्दगी है कोई. और ये एहसास आपने hi मुझे करवाया है. थैंक्स फॉर सुच ा लवली डे . मैं ये दिन हमेशा यद् रखूंगी .

निधि दीदी की बात सुन कर मुझे एहसास हुआ क वाकई में वो अपने बारे में तो सोचती hi नहीं. उनकी भी तो अपनी लाइफ है कुछ अपने सपने कुछ इच्छाएं उनकी भी होंगी पर वो बस अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में hi लगी रहती हैं.

अमित : आप बस मुझे बता दिया कीजिये फिर देखना मैं आपकी हर ीचा ोूरी करूँगा .

निधि दीदी : सच !! आप मेरी हर ीचा पूरी करेंगे ? उम्मम्माह थैंक यू वैरी मच

दीदी ने पीछे से hi मेरी गर्दन पर किश कर दिया मेरे साथ ज़ोर से चिपक गयी. मुझे ये थोड़ा अलग लगा पर मैंने कुछ नहीं कहा और थोड़ी देर में hi हम अंकल क घर पहुँच गए. जैसे hi हम घर में एंटर हुए आंटी और करिश्मा दीदी हॉल में hi बैठे थे. वो दोनों हमें देख कर खुश हो गयी . पर करिश्मा दीदी ने मेरे तरफ नाराज़गी से देखा. निधि दीदी गले लग कर आंटी से मिली

आंटी : कैसी हो निधि बीटा ? आज तो बड़ी अछि लग रही हो . शॉपिंग से आ रही हो क्या ?

निधि दीदी : मैं ठीक हूँ आंटी आप कैसी हैं ? हाँ वो आज जॉब इंटरव्यू था वहां से फिर आते वक़्त अमित ने ये शॉपिंग करवा दी . आपकी hi कंपनी में जॉब लगी है.

आंटी: तुम भी तो हमारी हो फिर वो कंपनी तुम्हारी भी तो हुई न ? इस ख़ुशी क मोके पर मुँह मीठा तो करना बनता है न . रानी !!!

आंटी ने रानी को आवाज़ दी और कुछ मीठा लेन को कहा. निधि दीदी अब करिश्मा दीदी से मिल रही थी और मैं आंटी से.

करिश्मा दीदी : कोंग्रटुलतिओन्स दीदी , ये आपने बहुत ाचा किया पापा को ज्वाइन कर क.

निधि दीदी : ये सब अमित की वजह से hi हुआ है.

मैं जब करिश्मा दीदी क पास आया तो वो नाराज़गी दिखने लगी.

करिश्मा दीदी : तुमसे तो बात hi नहीं करनी मुझे , एक बहिन को शॉपिंग करवा रहे हो और दूसरी से मिलना भी पसंद नहीं करते . मुझे तो लगा था इतने सैलून बाद मिले हो तो तुम खुश होंगे मुझसे मिल कर पर लगता है तुम्हे तो मेरी परवाह hi नहीं है.

अमित : ऐसा भला हो सकता है दीदी क मैं आपसे मिलना न चहुँ . आप सो रही थी तो मैंने आपको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा . आंटी अंकल ने जो प्यार मुझे दिया है उसके बाद तो मैं ऐसी गलती सपने में भी नहीं कर सकता और आप मेरे बारे में ऐसा सोच रही हैं? अगर आप को बुरा लगा है तो मैं कान पकड़ कर माँ.....

मैंने अभी अपनी बात ख़तम भी नहीं की थी करिश्मा दीदी मेरे गले लग गयी और ज़ोर से मुझे अपने साथ कास लिया.

करिश्मा दीदी : मैं तो मज़ाक कर रही थी मेरे भाई मुझे पता है तुम कितनी परवाह करते माँ डैड की. माँ ने बताया है मुझे सब . सच बताऊँ तो मैं तुमसे मिलना छह रही थी . सब तुम्हारी तारीफ करते हैं मेरा ये छोटा भाई कितना बड़ा हो गया है क अपने बेगाने सब तुम्हारी तारीफ hi करते हैं किसी एक ने भी कोई बुराई नहीं करि. मैंने तो सोचा भी नहीं था क कभी दुबारा अपने इस भाई को देखूंगी भी . हम तो यही सोचते थे क तुम...

आंटी : पहले कैसे गुस्सा कर रही थी क मैं ये करुँगी मैं वो करुँगी अब देखो कैसे चिपकी पड़ी है इससे.

आंटी ने करिश्मा दीदी को चिढ़ाते हुए कहा तो वो मुझसे अलग हुई और आंटी को देखने लगी.

करिश्मा दीदी : गुस्सा भी करुँगी और प्यार भी , मेरा भाई है मैं जो मर्ज़ी करूँ . आप बीच में नहीं बोलेंगी . आप की hi गलती थी कल मुझे जगाया क्यों नहीं?

आंटी : लो अब मुझ पर गुस्सा करने लगी. चलो पहले मुँह मीठा करो सब .

आंटी ने रानी क हाथ से बर्फी ले कर सब का मुँह मीठा करवाया . करिश्मा दीदी ने मुझे और निधि दीदी को अपने पास hi बिठा लिया और शॉपर चेक करने लगी जैसे क हर लड़की की आदत होती है .

करिश्मा दीदी : ये सूट तो बहुत ाचा है कहाँ से लिया?

निधि दीदी : ये अमित की पसंद है . इसी ने दिलाया है

करिश्मा दीदी : हम्म फिर तो मुझे भी शॉपिंग तुम hi करवाओगे . मेरा भी तो कुछ हक्क बनता है न अपने भाई की जेब पर.

अमित : क्यों नहीं , जब आप बोलोगी तब चलेंगे.

करिश्मा दीदी : ये क्या है इसमें ?

करिश्मा दीदी क हाथ में पायल वाला बॉक्स आ गया और उन्होंने इसे खोल लिया .

करिश्मा दीदी : वो ! ये तो बहुत अछि हैं . ये कहाँ से ली ? मुझे भी ऐसी hi पसंद हैं सिंपल और हलकी .

निधि दीदी : तुम्हे पसंद है तो तुम रख लो. वैसे ये भी अमित ने hi दिलाई है.

करिश्मा दीदी : तुम्हारी पसंद तो वाकई में बहुत अछि है . दीदी आप इसे रख लो. इसने इतने प्यार से लेकर दी है. मैं इससे और ले लुंगी . क्यों ? ले कर डोज न मुझे भी ?

अमित : क्यों नहीं दीदी , आप भी तो मेरी दीदी हो .

करिश्मा दीदी : सच में बहुत ाचा है तू सब से कितना प्यार करता है. थोड़ा मोहित को भी ये सब सीखा दे उसे तो परवाह hi नहीं मेरी कोई .

करिश्मा दीदी मुझे और निधि दीदी को घेर कर बैठी रही शॉपिंग से शुरू हुई बाएं बचपन तक पहुँच गयी. ऐसा hi होता है जब लड़कियां आपस में बातें करने बैठ जाये. आंटी ने हम सब को खाना वहीँ खिला दिया . उसके बाद भी करिश्मा दीदी आने नहीं दे रही थी पर जब रजनी मौसी और रीता मौसी का फ़ोन आने लगा तब कहीं उन्होंने आने दिया. उसके बाद मैं निधि दीदी को छोड़ने उनके घर चला गया. तब तक रजनी मौसी भी घर आ चुकी थी . जब हम घर पहुंचे तो मौसी अपने कमरे में hi आराम कर रही थी . निधि दीदी ने बेल्ल बजे तो दरवाज़ा नैना दीदी ने hi खोला .

नैना दीदी : दीदी कहाँ रह गयी थी आप ? शॉपिंग से आ रही हैं क्या ? तू ले क गया था दीदी को ?

निधि दीदी : नहीं मैं ले क गयी थी इसे . अब अंदर तो आने दे बाद में पूछ लेना सब. माँ कहाँ है

अंदर आते hi निधि दीदी ने मौसी का पूछा तो मौसी आवाज़ सुन कर अपने कमरे से बहार आ गयी. उनकी चाल थोड़ी बदली हुई थी . वो धीरे धीरे और पाऊँ फैला क चल रही थी .

रजनी मौसी : तू आ गयी बेटी ? मैं कब से इंतज़ार कर रही थी तेरा.

निधि दीदी मौसी से गले मिली . मौसी की नज़र मुझसे मिली तो वो शर्मा गयी पर मुझे उनका शर्माना समझ नहीं आया .

निधि दीदी : लो माँ पहले मुँह मीठा करो . मुझे जॉब मिल गयी है.

रजनी मौसी : सच !! ये तो बहुत अछि बात है . अब कहाँ लगी है जॉब ?

निधि दीदी : मेरी तरफ देखते हुए ) अपनी hi कंपनी है माँ . और जॉब भी बहुत अछि है . बिलकुल मेरी पसंद की. अपने बॉस का सारा काम अब मैं hi देखूंगी. पर्सनल सेक्रेटरी बना दिया है मुझे.

रजनी मौसी :( चिंता से ) पर्सनल सेक्रेटरी? बीटा वो लोग अचे तो हैं न?

निधि दीदी : अरे माँ तुम बिलकुल टेंशन मत लो. मैंने कहा न क अपनी hi कंपनी है. वहां तो कोई मेरे से ऊँची आवाज़ में बात भी नहीं करेगा. बॉस हो अपना है .

नैना दीदी : बॉस अपना है ? ये क्या चक्कर है दीदी ? कहीं आपको बॉस पसंद तो नहीं आ गया ?

निधि दीदी : (मेरी तरफ देखते हुए )हाँ बॉस तो मुझे पसंद है पर तू कुछ गलत मत सोच. असल में वो कंपनी राघव अंकल की है. और उन्होंने मुझे डायरेक्टर की पर्सनल सेक्रेटरी बनाया है. इस लिए कह रही थी क कंपनी अपनी hi है . वहां किसी तरह का दर नहीं है.

नैना दीद : वैसे डायरेक्टर कौन है जिसकी पर्सनल सेक्रेटरी बनाया है आपको ?

निधि दीदी : तू बस सवाल hi करती रहेगी क्या ? जा जा क चाय बना . और माँ आपको क्या हुआ है ? ऐसे क्यों चल रही हैं आप ?

रजनी मौसी : कुछ नहीं बीटा वो नस चढ़ गयी थी इस लिए थोड़ा चलने में दर्द सा है. वैसे बिलकुल ठीक हूँ मैं .

अब निधि दीदी पीछे हटी तो मैं भी रजनी मौसी से मिलने क लिए आगे हुआ और उनके पाऊँ छूने लगा तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया.

रजनी मौसी: सदा खुश रहो ऐसे hi सबको खुशियां देते रहो . तू तो सच में बहुत बड़ा हो गया है . मैं तो तुझे छोटा बचा hi समझती थी .

अमित : मौसी आपकी तबियत तो ठीक है न ? सुबह मौसी बता रही थी क आपको बुखार है और अब आप बता रही हैं क नस चढ़ी है?

रजनी मौसी : हाँ बीटा वो पाऊँ फिसलने से नस चढ़ गयी थी तो उसी से थोड़ा बुखार आ गया था. अब मैं बिलकुल ठीक हूँ.

अमित : आप कहें तो मैं मालिश कर क नस ठीक कर देता हूँ.

रजनी ( मन में ) ये दर्द भी तेरा hi दिया हुआ है. फिर से मेरे ऊपर चढ़ गए तो कहीं हड्डियां hi न चटक जाएँ.

रजनी मौसी : नहीं नहीं इसकी ज़रूरत नहीं है . मैं अब बिलकुल ठीक हूँ.

अमित : कारन भैया नज़र नहीं आ रहे वो कहाँ हैं?

रजनी मौसी : वो सो रहा है तू यहाँ बैठ .

मैं रजनी मौसी क साथ बैठ गया और निधि दीदी अंदर चली गयी कपडे बदलने. नैना दीदी थोड़ी देर में चाय ले आयी . निधि दीदी कपडे बदल कर वापिस आ कर मेरे साथ hi बैठ गयी . हमने बातें करते हुए चाय ख़तम की . जब मैं जाने लगा तो निधि दीदी ने मुझे उनके साथ उनके कमरे में चलने को कहा . मैं उनके साथ आ गया. निधि दीदी ने पायल वाला बोस मुझे पकड़ा दिया .

निधि दीदी : अपने हाथों से पहना दीजिये वर्ण मैं नहीं पहनूंगी .

अमित : ये फिर आप आप ?

निधि दीदी : यहाँ हम दोनों अकेले हैं इस लिए.

अमित : पर ...

निधि दीदी : अब पहनाइए न वर्ण फिर कोई आ जायेगा.

अमित : ाचा ठीक है . बैठिये यहाँ .

मैंने दीदी को बीएड पर बैठाया उनके सामने एक घुटना ज़मीन पर तक कर बैठते हुए उनका गोरा कोमल पाऊँ अपने हाथों में लरकर अपने खड़े घुटने पर रखा. दीदी बस चुपचाप मेरी तरफ देख रही थी. मैंने उनकी सलवार को पाऊँ से थोड़ा ऊपर करते हुए उनकी गोरी पिंडली आधी नंगी कर दी. दीदी की स्किन बहुत hi मुलायम थी . जिसे चुकार मुझे ाचा लग रहा था. मैंने एक पायल उठायी और उनके पाऊँ में पहना दी. इसी तरह मैंने दूसरे पाऊँ में भी पायल पहनाई. दीदी ने दोनों पाऊँ ज़मीन पर हलके से मरते हुए पायल की आवाज़ की और फिर नंगे पाऊँ कमरे में चल कर दिखाया. मुझे ये हलकी आवाज़ बहुत अछि लग रही थी जिसे मैं ऑंखें बंद कर क सुनने लगा . दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी तो वो मेरे पास आ गयी और अगले hi पल मुझे अपने गलों पर गीला गीला महसूस हुआ. दीदी ने मेरे गलों पर किश कर दी थी. मैंने ऑंखें खोली तो दीदी ने शर्मा कर नज़रें झुका ली

निधि दीदी : शरमाते हुए ) थैंक्स फॉर थिस लवली गिफ्ट. मैं इन्हे हमेशा अपने पास रखूंगी.

अमित : ये पायल आपके कोमल सुन्दर पाऊँ क लिए hi बानी थी दीदी. कहीं और शायद ये इतनी अछि न लगती . आप ने इसे पहन लिया मुझे बड़ा ाचा लग रहा है .

निधि दीदी : मुझे भी ाचा लग रहा है जिस तरह प्यार से आपने पहनाई .

अमित : ाचा दीदी अब मैं चलता हूँ .

निधि दीदी : फिर कब आओगे आप ?

अमित : जब आप कहेंगी .

निधि दीदी : मैं तो चाहती हूँ हमेशा आप मेरे पास hi रहो

अमित : पास hi तो हूँ दीदी . जब भी बुलाओगी हाज़िर हो जाऊंगा .

उसके बाद मैंने रजनी मौसी और नैना दीदी से इजाज़त ली और दीदी क दिलाये हुए अपने कपडे लिए और रीता मौसी क घर आ गया. शाम क 5 बज रहे थे जब मैं घर पहुंचा . आज मौसी नाराज़ नहीं हुई क्यूंकि उन्हें पता था मैं कहाँ हूँ. नेहा दीदी और करुणा दीदी अपने कमरे में आराम कर रही थी. मैं भी कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में चला गया. कोई एक घंटे बाद रीता मौसी ने hi मुझे जगा दिया . जैसा क मैंने उन्हें कहा था. मैंने फ्रेश होकर नीचे आ गया और सबके साथ बैठ कर बातें करते हुए चाय पि. उसके बाद मैं मंजू म क घर क लिए निकल गया. जैसे hi मैं वहां पहुंचा घर का दरवाज़ा अपने आप खुल गया और सामने शीना कड़ी थी.

शीना : कॉलेज क्यों नहीं आये आज ?

अमित : वो मुझे ज़रूरी काम था आज

शीना : पता है मुझे कहाँ गए थे तुम. . दीदी की जॉब इंटरव्यू क लिए गए थे न ? ये तुमने ाचा नहीं किया मेरे साथ .

अमित : मैंने क्या किया अब ?

शीना : पता है कितना बुरा लग रहा है मुझे ? मैंने तो पापा से भी कह दिया था क दीदी को अब उस मैनेजर की जगह जॉब दी जाये . उन दोनों घटिया लोगों को तो उनके किये की सजा जो तुमने दी सो दी. मैंने भी उनके खिलाफ कंपनी की तरफ से केस करवा दिया है. मैंने सोचा था 2-4 दिन दीदी को रेस्ट करने देती हूँ फिर उनसे बात करुँगी और तुम? एक बार भी मुझसे बात नहीं की तुमने ?

अमित : अब मुझे क्या पता था तुम क्या सोच रही हो ? वैसे भी दीदी को इतना धक्का लगा था क वो जॉब करना hi नहीं छह रहे थे इस लिए मैं उन्हें वहां ले कर गया जगह उन्हें बिलकुल भी कोई खतरा नहीं होगा और न दर लगेगा.

शीना : ऐसी कौन सी जगह है ?

अमित : मोहित क पापा की कंपनी, वो दीदी को बेटी की तरह मानते हैं. उससे सेफ जगह और क्या होगी दीदी क लिए ?

‘ अब बहार hi खड़े रहने का इरादा है क्या तुम दोनों का ?’ शीना क पीछे hi मंजू म भी उधर आ गए . उन्हें अपने पाऊँ पर चलता देख मुझे बहुत ख़ुशी हुई .

शीना : बस आ hi रहे थे बुआ. इससे पूछ रही थी क ये आज कॉलेज क्यों नहीं आया.

मंजू म भी मुझे देख कर खुश हो गयी पर शीना की मौजूदगी में उन्होंने भी खुद पर कण्ट्रोल रखा.

मंजू म: तो फिर आज कहाँ थे तुम ? इतने दिनों बाद आज मैं कॉलेज गयी और तुम hi गायब थे. ऐसे कैसे चलेगा ?

अमित : वो मम आज मैं अपनी दीदी को इंटरव्यू दिलाने ले कर गया था . मेरा जाना ज़रूरी था तो इस लिए आज कॉलेज नहीं आया.

मंजू म : ाचा चलो कोई बात नहीं आओ तुम बैठो यहाँ.

शीना : क्या बुआ, आप इसे कुछ कहती hi नहीं

मंजू म : क्या कहूं ? इसने कुछ गलत थोड़ा hi किया. तुम भी गुस्सा मत करो. जाओ भाभी से कहो क अमित आ गया है कॉफ़ी बना लें

रुपाली : मुझे भी पता चल गया था क ये अमित hi है इस लिए पहले hi कॉफ़ी शिरू कर दी है. कैसे हो अमित ?

अमित : मैं ठीक हूँ आप कैसी हैं ?

रुपाली : मैं भी ठीक हूँ . मैं अभी कॉफ़ी ले कर आती हूँ.

इतना कह कर रुपाली फिर से किचन में चली गयी जो शायद वहीँ से आयी थी . इधर मंजू म मेरे सामने बैठ गयी और शीना भी एक तरफ बैठ गयी. शीना ने मोबाइल से किसी को कुछ टाइप कर क मैसेज कर दिया.

मंजू म : बहुत दिन हो गए तुम पड़े पर अचे से ध्यान नहीं दे प् रहे हो इस लिए अभी से थोड़ा अलर्ट हो जाओ. वर्ण पीछे रह जाओगे . खोलो किताबें.

मंजू म क कहने पर मैंने किताब खोल ली जो उन्होंने hi राखी थी मेरे लिए. मेरे साथ शीना को भी उन्होंने पड़ने को कह दिया. अभी हमने शुरू hi किया था क रुपाली कॉफ़ी बना लायी . कॉफ़ी क साथ साथ भी मैं पढ़ रहा था. आज तो अचे से मम ने क्लास लगा दी. मुझे भी ाचा लगा क चलो इतने बाद आज थोड़ी पढ़ाई भी हो गयी. जैसे hi हम फ्री हुए तो डॉ रीना आ गयी और आते hi मेरे पीछे पद गयी .

डॉ रीना : तो मिल गया टाइम तुम्हे ? वापिस आ कर मेरे पास क्यों नहीं आये ? तुम्हे कहा था न डेली मेरे पास आना पर तुम्हे अपनी तो कोई परवाह है नहीं और दूसरों क लिए भी टाइम नहीं है .

मंजू म : अरे अरे इतनी गरम क्यों हो रही हो क्या बात है ? किस लिए बुलाया था तुमने इसे ?

अमित : वो मुझे चोट नहीं लगी थी जब मैं गिर गया था. बस उसके लिए hi बुला रही थीं ये मुझे . सॉरी रीना जी मैं कल आ नहीं पाया . आज मैं यहाँ से सीधा आपके पास hi आने वाला था .

डॉ रीना : पता है जो तुम आने वाले थे. ये तो शीना को मैंने कहा था क अगर तुम आओ तो मुझे बता दे वर्ण तुम तो आज भी ऐसे hi निकल जाते .

शीना : दीदी वैसे अगर बुरा न मनो तो एक बात कहूं?

डॉ रीना : कहो तुम्हारी बात का बुरा मैं क्यों मानूंगी ?

शीना : मैंने इसे कहा था क मैं इसकी शॉपिंग करवाउंगी पर ये हर बार बहाना बना देता है . क्यों न आज हम सब शॉपिंग करने चलें ?

डॉ रीना : गुड आईडिया, मैंने भी सोचा था क इसे शॉपिंग करवाउंगी . क्यों बुआ आप क्या कहती हो ?

मंजू म : मैं बस 10 मिनट्स में आयी .

इतने कह कर मंजू म अंदर चली गयी और उनके साथ hi रुपाली आंटी भी. अब मैं रीना और शीना क बीच अकेला रह गया था.

डॉ रीना : अब देखो मुझे अब कैसी हालत है पीठ की

अमित : यहाँ ?

डॉ रीना : हॉस्पिटल तो अब जाने से रहे . माँ और बुआ अभी थोड़ा टाइम लगाएंगी तब तक तुम T-shirt उठा कर दिखा दो मुझे.

मैंने शीना और रीना की तरफ एक बार देखा और झिझकते हुए T-shirt उठा दी. रीना अचे से देखने लगी और मेरी टीशर्ट ऊपर तक करवा कर कंधे की चोट भी चेक की .

डॉ रीना : पहले से काफी बेहतर है . पर इसका मतलब ये नहीं कर डॉ को दिखाना नहीं है. आज तो छोड़ रही हूँ कल सीधा मेरे पास आना पहले . एंड सॉरी मैं आ नहीं पायी फंक्शन पर . शीना और रीमा बता रहीं थी क सब ने बहुत एन्जॉय किया वहां .

अमित : आप आती तो और भी ाचा लगता मुझे. चलो कोई बात नहीं नेक्स्ट टाइम सही .

कुछ hi देर में मंजू म और रुपाली भी खुद को सही कर क आ गयी. मंजू म ने सूट पेहेन लिया था जो मैंने hi दिलाया था. दोनों hi कमल लग रही थी. रुपाली तो अपनी बेटी से भी ज्यादा कमल लग रही थी . मैंने दोनों को hi देख रहा था और वो दोनों भी मुझे ऐसे खुद को देखता देख शर्मा गयी . उनके आते hi जल्दी से दरवाज़ा लॉक किया और रीना की कार में बैठ कर हम सब चल दिए. कार रीना चला रही थी और मैं आगे उसके साथ बैठा था . शीना मंजू म और रुपाली क साथ पीछे बैठी थी . रीना कार को एक बड़े से मॉल में ले गयी जहाँ जहाँ बड़े बड़े ब्रांड क शोरूम थे . मैं यहाँ पहले नहीं आया था. प्राइस टैग देख कर hi मैं तो हैरान हो रहा था. इस जगह अमीर लोग hi आते होंगे मैं देखते hi समझ गया . हम जैसे hi मॉल में पहुंचे तो रीमा वहां कड़ी हमारा hi इंतज़ार कर रही थी . रीमा को देख कर मेरा दिल खुश हो गया और वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी . बस फिर क्या था वो सब मिल कर मुझे कभी इस तरफ खींचती कभी उस तरफ. सब ने अपनी अपनी मर्ज़ी से कपडे मुझे लेकर दिए. बात शीना ने की थी पर यहाँ तो रीना रुपाली मंजू म ने भी अपनी पसंद क कपडे मुझे ले कर दिए . रीमा तो बस ख़ामोशी से मेरे साथ साथ hi चल रही थी. वो आँखों आँखों से hi मेरे साथ बात कर रही थी और मुझे भी ाचा लग रहा था उसका मेरे साथ साथ चलना . मैंने बिल देने की कोशिश की तो शीना ने तो सबको पीछे कर दिया और खुद बिल दिया जबकि रीना और मंजू म भी बिल देने का कह रही थी . उसके बाद ज़बरदस्ती वो मुझे डिनर क लिए अपने साथ होटल ले गयी. इधर रीता मौसी का फ़ोन भी आ रहा था घर से . मैंने उन्हें बता दिया क मैं खाना खा कर आऊंगा. वो थोड़ा नाराज़ तो हुई पर मन गयी. होटल में डिनर करते वक़्त मेरे एक तरफ शीना और दूसरी तरफ रीना बैठी थी जबकि रीमा मंजू म और रुपाली सामने बैठी थी . मैंने टेबल क नीचे रीमा को पाऊँ से छेड़ने लगा . पर साथ hi एक पाऊँ मेरी तंग पर भी चलने लगा तो मैं हैरान हुआ . मगर मंजू म की स्माइल देख कर मैं समझ गया क ये वही हैं. रीमा भी खुश थी मेरे इस तरह छेड़छाड़ करने से . खाना खाने क बाद जब हम होटल से निकले तो बहार कुछ अमीर बाप की बिगड़ी औलादें गाड़ी क बोनेट पर बियर की बॉटल्स रख कर हुल्लड़ बाज़ी कर रहे थे. अब मेरे साथ आयी पांचों हसीनाएं अपने आप में क़यामत hi थी . उन जैसे मनचलों से कहा कण्ट्रोल होना था. बस हो गए शुरू .

लकड़ा 1 : क्या माल है यार क्या मस्त फिगर है .

लड़का 2 : क्या पटाखा है यार बिलकुल दूध सी गोरी हैं

लड़का 3 : यहाँ तो हर तरह की वैरायटी है यार कमसिन भी है मॉडल भी है मिलफ भी है . साला एक साथ इतनी हूरें

वो सब नशे में थे इस लिए मैंने उनको इग्नोर किया पर शीना तो आग बबूला हो गयी .

शीना : क्यों बे गटर की औलादों घर में माँ बहन नहीं है क्या या फिर गन्दी नाली की hi पैदाइश हो ?

रुपाली और मंजू म ने शीना को रोकने की भी कोशिश की पर वो तो जैसे खुद उन लड़की को सबक सीखना चाहती थी . शीना की बात सुन कर उन सबको भी आग लग गयी. इस लिए वो सब भी गुस्से में आ गए .

लड़का :4 हमे गली देती है साली , देख क्या रहे उठा लो सबको . आज इन्हे बताते हैं क हम कौन हैं .

वो कुल 6 लड़के थे पर सब क सब नशे में लग रहे थे . शकल से तो कोई भी स्टूडेंट नहीं लग रहा था . ज़रूर गलत कामों से hi जुड़े होंगे. जैसे hi वो सब हमारी तरफ बड़े मैंने अपने हाथ में पकडे सब शोप्पेर्स फेंक दिए. और तेज़ी से उनके सामने आ गया.

लड़का 1 : अबे गांडू हैट जा बीच में सी, अपनी खैर चाहता है तो निकल जा चुपचाप वर्ण इनके साथ तेरी भी गांड मर लेंगे. अअअअअअअ

उसने अपनी बात अभी पूरी भी नहीं की थी क मैंने दाएं हाथ से एक ज़ोरदार मुक्का उसके मुँह पर दे मारा और वो पीछे जा गिरा. नाक से बेहटा खून बता रहा था क मुक्का कितना असरदार था. अपने साथी की हालत देख कर दूसरे लड़के ने मुझे पर हमले की कोशिश की तो मैंने उसका वॉर हवा में रोकते हुए उसकी गर्दन पकड़ कर हवा में उठाया ज़ोर से दूर घुमा कर फेंक दिया. वो वहीँ साइड में कड़ी बाइक पर जा गिरा . तभी बाकि क लड़के एक साथ मुझ पर झपट पड़े एक ने तो बियर की बोतल hi मेरे सर पर मरने की कोशिश की पर शीना ने उससे पहले hi पत्थर उठा कर उसे मर दिया . मैंने भी एक क अंडे फोड़े और एक की आँखें hi अपनी उँगलियों से दबा दी और धक्का दे कर गिरा दिया. बाकि बचे दो को मैंने एक एक हाथ से गर्दन से पकड़ लिया . वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रहे थे पर मैंने कास क उनके गले दबा रखे थे . तभी जो गिरे हुए थे वो फिर से उठ कर आने लगे मुझ पर हमला करने क लिए मगर इतने में पुलिस आ गयी और आते hi उन सबको डंडों से पीटना चलो कर दिया . मैंने जिनको पकड़ा हुआ था उनको भी पुलिस ने मेरे हाथों से छुड़ा लिया और उनकी भी पिटाई शुरू कर दी. मैंने पलट कर देखा तो सप ऋतू सिंह अपनी सरकारी गाड़ी से उतर कर हमारी तरफ hi आ रही थी. इस वक़्त वो अपनी यूनिफार्म में थी और बड़ी रूआबदार लग रही थी . मंजू म जल्दी से मेरे पास आयी और देखने लगी कहीं मेरे कोई चोट तो नहीं आयी.

मंजू म : तुम ठीक तो हो न तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं ?

अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ मैडम मुझे कुछ नहीं हुआ .

सप ऋतू सिंह: इन सब की अचे से सेवा करो और आज रत इन सब को अपना मेहमान रखो. ले जाओ सबको

ऋतू सिंह ने गरजदार आवाज़ से पुलिस वालों को निर्देश दिया. शायद वो देख चुकी थी क माजरा क्या है . फिर वो हमारी तरफ बरही.

सप ऋतू सिंह: आप लोग ठीक तो हैं ?

शीना : जी मैडम हम सब ठीक हैं , वो लोग हमारे साथ बदतमीज़ी कर रहे थे .

सप ऋतू सिंह : देखा मैंने , उन सब को तमीज अचे से सिख दी जाएगी. आप लोग तो ठीक हैं न

रीना : थैंक यू मैडम आपने टाइम पर आ कर बचा लिया .

सप ऋतू सिंह : वैसे मैं टाइम पर न भी आती तो तो आप को कुछ नहीं होता . अमित ने अचे से संभल लिया था सबको .

ऋतू सिंह की बात पर अब मंजू म उसकी तरफ पलटी तो ऋतू सिंह और मंजू म दोनों एक दूसरे को गौर से देखने लगी



सप ऋतू सिंह : ( ज़ोर से ) मंजू !!!!!!
 
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