Adultery Manhoos se mahan tak - Page 28 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 203



‘कहाँ चले गए थे तुम ? आज भी कह दो किसी दोस्त से मिलने गया था . ‘ रीमा से मिलने क बाद मैं दिव्या मौसी क घर पहुंचा तो राधा मुझसे नाराज़गी दिखने लगी जबकि दिव्या मौसी अपने रूम में थी .

अमित : वो वो मुझे एक काम था .

राधा : क्या काम था ? साडी दुनिया क काम तुम्हे hi होते हैं? पता है एक्साम्स शुरू हो रहे हैं नेक्स्ट वीक में और तुम अभी भी क्लासेज बंक कर रहे हो .

अमित : वो मैं देख लूंगा तुम चिंता मत करो . मौसी कहाँ है. ?

राधा : माँ अपने रूम में है . तुम किसी की परवाह है क नहीं ? खाना खाने भी नहीं आये तुम. इतना भी क्या ज़रूरी काम था ?

अमित : था कोई काम ,, तुम ऐसे गुस्सा क्यों हो रही हो ?

राधा : गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ. जानते हो अभी तक मैंने भी खाना नहीं खाया .

अमित : क्या ??? पर क्यों ??

राधा : आज तुम गाओं जा रहे हो सोचा आज तो साथ में खाना खाएंगे पर तुम्हे तो कोई फरक नहीं पड़ता .

राधा की ये बात सुन कर मुझे बुरा लगा क मेरी वजह से वो अब तक भूखी बैठी है . पर अब मैं क्या करता मैं तो खाना खा चूका था अगर अब मैं उसे ये कहता क मैंने खाना खा लिया है तो उसे और बुरा लगता .

अमित : तुम मेरा इंतज़ार क्यों करती हो? तुम्हे पता था न मैं काम से बहार हूँ तो टाइम लग सकता है . और क्या पता मैं बहार से खाना खा कर hi आया हूँ .

राधा : तो ठीक है जाओ तुम . मुझे भी भूख नहीं है .

अमित : ये क्या बात हुई. कैसे भूख नहीं है . चलो खाना लगाओ .

राधा : मैंने कहा न मुझे भूख नहीं है . मैं जा रही हूँ अपने कमरे में .

इतना कह कर राधा अपने कमरे में चली गयी . मुझे राधा क लिए अब खुद पर गुस्सा आ रहा था. मैंने गाओं जाने से पहले राधा को ऐसे नाराज़ कर क नहीं जाना चाहता था . मैं तुरंत किचन में गया और एक प्लेट में खाना लगे और राधा क कमरे में गया . राधा अपने बीएड पर तकिये में मुँह दबाये लेती हुई थी. मैंने खाने की प्लेट साइड में राखी और राधा क पास बैठ गया .

अमित : अब ऐसे नाराज़ रहोगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा ? जानती हो न मैं गाओं जा रहा हूँ . फिर ऐसे अब मूड ख़राब मत करो. चलो उठो और खाना खा लो . देखो मैं ले कर आया हूँ .

राधा : मुझे नहीं खाना .

अमित : कैसे नहीं खाना ? चलो उठो जल्दी करो .

राधा : मुझे भूख नहीं है .

राधा वैसे hi लेती हुई थी तकिये में मुँह दबाये. मैंने राधा को थे अकड़ कर पलट कर सीधा किया तो उसके चेहरे पर दुःख क भाव देख कर एक तीस मेरे दिल में उठी . मैंने उसे सीधा कर क बीएड पर बिठा दिया .

अमित : ये क्या बात हुई ? ऐसा मुँह बना कर मुझे विदा करोगी ? चलो मुँह खोलो मैं अपने हाथों से खाना खिलता हूँ. देखत हूँ कैसे नहीं कहती.

मैंने प्लेट को अपनी गॉड में रखा और निवाला बना कर राधा क मुँह क पास किया तो राधा मुँह नहीं खोल रही थी और बस मेरी आँखों में देखे जा रही थी .

अमित : अब मुँह खोलो भी , देखो अगर तुमने खाना नहीं खाया तो फिर मैं भी नाराज़ हो जाऊंगा तुम से और देख लेना फिर बात भी नहीं करूँगा .

राधा : एक तो खुद ऐसा करते हो और ऊपर से ऐसे धमकियाँ देते हो . क्या नाराज़ भी नहीं हो सकती मैं ?

अमित : क्यों नहीं हो सकती , बिलकुल हो सकती हो पर नाराज़गी मुझसे करो न , इस खाने से क्यों ? चलो अब मुँह खोलो.

राधा ने मुँह खोला तो मैंने निवाला उसके मुँह में डाला. राधा ने खाना शुरू किया और साथ hi अपने हाथों से एक निवाला बना कर मेरे आगे कर दिया .

अमित : ये क्या ? खाना मैंने तुम्हारे लिए लगाया है . मुझे भूख नहीं है .

राधा : अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नहीं खाउंगी . चलो जल्दी मुँह खोलो .

राधा बच्चों क जैसे ज़िद कर रही थी तो मुझे भी उसकी बात माननी पड़ी और एक बार फिर से मैं कहाँ कहने लगा हालाँकि मैं रीमा क साथ पहले hi खाना खा चूका था पर अब राधा क लिए मुझसे फिर से खाना पड़ा. खाना कहते कहते राधा का मूड फिर से ाचा हो गया और उसके चेहरे पर अब वही मुस्कान थी जो मैं हमेशा देखना चाहता था .

अमित : ाचा अब मैं अपना बैग पैक कर लेता हूँ फिर मुझे जाना भी है .

राधा : अगले हफ्ते एग्जाम हैं न , तो तुम यहीं रुक जाओ तब तक .

अमित : तुम्हे पता तो है क अगर घर नहीं गया तो माँ नाराज़ होगी और फिर बड़ी मौसी क यहाँ भी तो जाना है .

राधा : यहीं रुक जाओ न . एक्साम्स क लिए साथ में तयारी कर लेंगे .

अमित : और निधि दीदी नैना दीदी का क्या ? क्या वो नाराज़ नहीं होंगी ? चलो अब मुझे तयारी करने दो .

राधा बेमन से उठी और बर्तन किचन में रखने चली गयी . मैं अपने रूम में आकर बैग पैक करने वाला . दिव्या मौसी अभी तक कमरे से बहार नहीं निकली थी . राधा ने मेरे पास आ कर सामान पैक करने में मेरी मदद की . जाने से पहले मैं दिव्या मौसी से मिलना चाहता था . इस लिए मैंने उनसे मिलने उनके कमरे में गया तो वो बीएड पर सर झुकाये बैठी हुई थी . मैं उन्हें देख कर हैरान हुआ क्यूंकि मैं सोच रहा था शायद वो सो रही होंगी .

अमित : मौसी मैं जा रहा हूँ .

दिव्या मौसी ने मेरी आवाज़ सुन कर चेहरा ऊपर किया और मेरी तरफ देखा . उनके चेहरे पर गहरे दुःख क भाव थे. मगर एक ख़ामोशी सी थी .

दिव्या : ठीक है , ध्यान से जाना . और जा कर फ़ोन कर देना .

अमित : मौसी आप ठीक तो हैं ?

दिव्या : मुझे क्या होगा ?

अमित : वो राधा कह रही थी क आप ....

दिव्या : मैं ठीक हूँ . अब तुम जाओ और ध्यान से जाना .

मैंने आगे बढ़ क दिव्या मौसी क पाऊँ छुए और बहार आकर अपना गांव उठा कर घर से बहार निकल आया. दिव्या मौसी अपने कमरे से बहार नहीं आयी . मुझे लगा क शायद वो मुझसे नाराज़ हैं. राधा बहार तक मुझे छोड़ने आयी . मैं जब बाइक स्टार्ट कर क जाने लगा तो राधा क चेहरे पर फिर से उदासी थी .

अमित : अब ऐसे गुडबाय कहोगी ?

राधा : मुस्कुराने की कोशिश करते हुए ) ध्यान से जाना और पहुँच कर मुझे कॉल ज़रूर करना .

अमित : हाँ हाँ कर दूंगा पर पहले एक अछि सी स्माइल दो मुझे .

राधा : मुस्कुराते हुए ) अब ठीक है .

अमित : हमेशा ऐसे hi खुश रहा करो .

राधा : तो हमेशा मेरे साथ hi रहा करो .

अमित : मैं चाहे पास हो या दूर , तुम हमेशा ऐसे hi रहा करो . Bye bye

इतना कह कर मैं चल दिया जब तक मैं मोड़ से मुद नहीं गया तब तक राधा दरवाज़े पर कड़ी हाथ हिलती रही और मैं भी उसे शीशे से देख रहा था . उसके बाद मैं नॉनस्टॉप चल दिया गाओं की तरफ.

उधर दिव्या अमित क साथ अचे से बात न कर क खुद पर hi गुसा हो रही थी. अमित क घर आने से लेकर राधा को खाना खिलने तक दिव्या अब कुछ छुप छुप कर देख सुन रही थी. एक मन से दिव्या अमित से बात करना चाहती थी पर दिमाग उसे अमित से दूर रहने को कह रहा था . वजह थी तो सिर्फ ये क वो अपने दिल क हाथों मजबूर थी और दिमाग उसे रिश्तों की दुहाई देता था. अमित को रूखेपन से विदा करना भी उसे चुभ रहा था. उसका दिल था क वो अमित को गले लगा कर चुम कर विदा करे पर वो अपना मन मर कर बैठी रही. और अमित की बाइक की आवाज़ सुनते hi वो दौड़ कर बहार आयी मगर दरवाज़े से पहले hi रुक कर वो अमित को बस जाता हुआ देखती रही और जब राधा अंदर आने क लिए पलटी तो अपनी माँ को सामने देख कर एक पल क लिए वो भी हैरान हुई मगर दिव्या की नाम आँखों ने उसे कोई सवाल करने न दिया . दिव्या भी बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापिस चली गयी . राधा भी उदास थी अमित क जाने से और वो ये भी समझ रही थी क माँ भी शायद उदास है या फिर नाराज़ है अमित से इस लिए उसने कोई बात नहीं की. दोनों माँ बेटी क दिल में एक hi इंसान क लिए एक जैसा hi दर्द था मगर दिव्या क दिल की तो दिव्या खुद भी नहीं समझ पति थी . खैर दोनों माँ बेटी अपने अपने कमरे में जा कर तकिये में मुँह छुपाये लेट गयी .

‘ उसे मरना नहीं है समझे ? पूरी होशियारी क साथ उसे उठा कर मेरे पस लाना है. ये काम इतनी सफाई से होना चाहिए क किसी को कानो कण खबर तक न हो . एक बार वो हाथ आ गयी तो फिर हमेशा क लिए मेरी पालतू बन कर रहेगी और हम पहले जैसे hi खुल कर काम कर सकेंगे . साली बड़ी अकड़ती है . वर्दी का बहुत घमंड है न . सारा घमंड उसके भोसड़े में hi घुसा दूंगा. बस एक बार मेरे हाथ आ गयी तो उसकी जवानी का ता भी अचे से निचोड़ दूंगा . ‘ ये बात नारायण दस् अपने अपने आदमियों से कह रहा था. शराब का थोड़ा सुरूर उसकी आँखों से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था जो लालिमा दिए हुए थी.

‘ पर मालिक वो तो बड़ी अफसर है हर वक़्त पोलिसवाले उसके आसपास रहते हैं . घर दफ्तर हर जगह पुलिस उसके साथ hi होती है. अगर हमने ऐसा कुछ किया तो बवाल हो जायेगा . हम तो जान से जायेंगे hi , आप पर भी बात आ जाएगी .’ ये नारायण दस का hi आदमी था जो बताये गए काम क जोखिम क बारे में अपनी शंका ज़ाहिर कर रहा था .

न. डी. : अबे सालो किसने कहा है क पुलिस से सीधा उलझो? अगर पुलिस वालों को खबर लगी तो पूरा डिपार्टमेंट पागल कुत्तों की तरह पीछे लग जायेगा . फिर तो वो कहीं से भी हमें ढूंढ hi निकालेंगे और मेरी कुर्सी भी जाएगी. इस लिए ये काम बड़ी होशियारी से सफाई से करना है. पहले उस पर नज़र रखो . वो कहाँ जाती है किस किस से मिलती है? कौन कौन है उसके परिवार में ? हर बात पर नज़र रखो. उसकी पल पल की खबर रखो . कहीं न कहीं तो वो पुलिस क पहरे से बहार होती होगी. या फिर कोई तो होगा जिससे वो अकेले में मिलती होगी. ऐसा कोई भी इंसान मिले बस वहीँ पर घात लगा देना. और बस एक रत की hi बात है. एक बार वो शिकंजे में आ गयी तो आगे का रास्ता अपने आप बन जायेगा.

‘ पर मालिक इसके लिए तो हमें उसके आस पास hi रहना होगा . कहीं कोई नज़र में आ गया तो ? ‘

न. डी. : नज़र में तब आये है जब कोई हरकत करेगा. और उस पर नज़र दूर से hi रखनी है . ज्यादा करीब जाओगे तो पकडे जाओगे . अपने साथ 10-15 लोग ले जाओ. सही माइका देख कर उसे उठा कर सीधा अपने अड्डे पर ले आना . और होशिअरपुर रहना . हर पल की खबर देते रहना और यद् रहे अगर कोई गड़बड़ हुई तो अपने तक hi रखना. मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश मत करना . एक आदमी तुम लोगों क साथ कांटेक्ट में रहेगा . अब जाओ तुम और ये पैसे लेते जाओ . जितना ज़रूरत हो और ले लेना .

नारायण दस् ने नोटों की दो गड्डियां अपने आदमी क सामने फेंकते हुए कहा. 500-500 क हरे नोट्स की गड्डियां देख कर आदमी खुश हो गया और जल्दी से नोट उठा कर खुश होता हुआ सलाम थोक कर निकल गया . उसके जाते hi नारायण दस ऋतू सिंह क बारे में सोचता हुआ अपना लैंड खुजाने लगा .

न. डी. : साली जब से वर्दी में देखा है तब से नंगा देखने को दिल तड़प रहा है. अब तो तुझे अपनी रंडी बना कर hi रहूँगा . बहुत छूट फाड़ी हैं ज़िन्दगी में पर पहली बार ऐसी पुलिसवाली माल मिली है . तुझे तो रंडी बनाऊंगा सबसे बड़ी रंडी .

‘ क्या बात है तुम कुछ परेशां लग रही हो ? ‘ ऋतू को टेंशन में देख कर मंजू ने उससे सवाल किया. ऋतू इस वक़्त मंजू क घर आयी थी उसे निराशा थी इस बात से क मैनेजर से वो कुछ पता न कर पायी. अब इस केस की साडी उम्मीदें लगभग ख़तम हो गयी थी. ऋतू आज हॉस्पिटल में एडमिट पुलिस वालों से मिल कर आयी थी और मैनेजर की डेड बॉडी को उसकी फॅमिली को दे दिया गया था. ऋतू इस लिए यहाँ आयी थी क वो अमित को मिल कर इस बारे में बता सके पर अमित आज आया hi नहीं था यहाँ .

ऋतू सिंह : क्या बताऊँ यार वो मैनेजर क इतनी मुश्किल से पकड़ा था मगर रस्ते में hi एक एक्सीडेंट में वो मारा गया. अब समझ नहीं आ रही आगे क्या करूँ . अब और कोई उम्मीद भी नहीं है.

मंजू : एक बात कहूं मानेगी? तू न ये केस यहीं रोक दे. मैंने पहले hi कहा था क तुम उससे न उलझ . वो बड़े hi खतरनाक हैं. तू इस केस को यहीं बंद कर दे. और अमित से भी कह दे क बस यहीं तक था जो भी था. वर्ण वो भी इस बारे में सोचता रहेगा और अगर कहीं वो खुद कुछ करने क लिए आगे बढ़ा तो कहीं उस पर कोई मुसीबत न आ जाये. मैं नहीं चाहती बलजीत राइ की परछाई भी अमित पर पड़े.

ऋतू सिंह : ये तू कैसी बातें कर रही है ? मैंने अमित से वडा किया था क मैं मंजरी को इंसाफ ज़रूर दिलवाऊंगी . अब तू ये कह रही है क मैं केस बंद कर दूँ और उस मासूम लड़की को इंसाफ न दिलों. पता नहीं क्या किया होगा उस मासूम क साथ इन दरिंदों ने. ऐसे कैसे मैं ये केस बंद कर दूँ. मेरा ज़मीर इस बात की इजाज़त नहीं देता .

मंजू : तू समझ क्यों नहीं रही ? देख तू और अमित मेरी ज़िन्दगी का सबसे ज़रूरी हिस्सा हो और मैं नहीं चाहती तुम दोनों में से किसी को भी कुछ हो.

ऋतू सिंह : मुझे क्या होगा ? जानती है न मैं खुद पुलिस की इतनी बड़ी अफसर हूँ. मुझे कोई हाथ लगाने से पहले भी 100 बार सोचेगा और फिर मेरा तो प्रोफेशन hi ऐसा है. ऐसे कई लोग मिलते हैं. अगर मैं ऐसे hi डर्टी रही तो इंसाफ की हिफाज़त कैसे करुँगी . तुझे अमित की चिंता है न , मैं उसे इस सब से बहार hi रखूंगी. वैसे है कहाँ वो आज ? मैं तो उसी से बात करने आयी थी.

मंजू : पता नहीं आज वो कॉलेज से भी निकल गया था . आज सैटरडे है तो शायद गाओं चला गया होगा. वैसे ाचा hi हुआ जो वो नहीं है वर्ण ये सब सुन क पता नहीं वो क्या करता. अब इतना करना क खुद उससे कोई बात न कारण इस बारे में और अगर कोई बात वो पीछे भी तो बात घुमा देना.

ऋतू सिंह : ाचा ठीक है बाबा , तुझे उसकी बहुत चिंता है. पर यकीन मन , वो आसानी से किसी क आगे झुकने वाला नहीं है. ट्रेलर तो तू देख hi चुकी है और मैं भी. एक बात तो बता , तुम उसके साथ हफ्ते में कितने दिन प्यार करती हो ?

ऋतू सिंह क अचानक इस तरह क सवाल से मंजू एक डैम से शर्मा गयी और ऋतू को मरने लगी .

मंजू : की ..... शर्म नहीं आती तुझे ?

ऋतू सिंह : आअह्ह्ह्ह ...... ककक मर क्यों रही है? इसमें शर्म कैसी ? मैंने कौन सा गलत बात पूछ ली ? अब इतना तो मैं जानने का हक़ तो रखती हूँ न. आखिर बेस्ट फ्रेंड हूँ तुम्हारी. वैसे एक बात तो है , तू बहुत लकी है जो तुझे अमित जैसा साथी मिल गया. यू डेसेर्वे आईटी. और एक मैं हूँ , लगता है ऊपर वाले ने अकेले रहने की सजा दी है .

मंजू : ऐसा क्यों कहती है ? देखना तुझे भी कोई न कोई ज़रूर मिलेगा .

ऋतू सिंह : नहीं यार अब तो दिल hi नहीं करता ऐसा कुछ करने का. वैसे भी दुनिया में हर इंसान अपने आप में अकेला hi होता है. अगर एक जैसे दो इंसान बनाये होते तो मैं अमित क दूसरे रूप क साथ ज़िन्दगी सेटल कर लेती.

मंजू ने ऋतू की आँखों में सचाई को देख लिया था चाहे वो चेहरे पर हंसी मज़ाक क भाव लिए हुए थी. आईटी वो उसकी पक्की सहेली थी.

मंजू : तू जानती है न क हम कभी एक नहीं हो सकते . ये दुनिया इस बात कोई कभी एक्सेप्ट नहीं करेगी. मगर अमित फिर भी कहता है क चाहे वो मुझसे शादी न भी कर सके वो मुझे अपने साथ रखेगा. और अगर तुम चाहो तो तुम भी हमारे साथ रह सकती हो . अमित की कोई और कॉपी नहीं होगी दुनिया में , पर अगर तुम उसे इतना पसंद करती हो तो तुम भी उसके साथ .....

मंजू की बात सुन कर ऋतू क चेहरे से साडी मुस्कान एक पल में गायब हो गयी. वो तो मंजू को बलजीत राइ की वजह से सीरियस होते देख उसका मूड ठीक करने क लिए ऐसे मज़ाक कर रही थी मगर अभी जो मंजू ने कहा था उससे ऋतू अंडे तक हिल गयी थी. वो यही तो चाहती थी मगर वो मंजू का दिल न टूटे इस लिए अपने अरमान दबा रही थी .

ऋतू सिंह : ये तू क्या कह रही है ?

मंजू : वही हो तू सुन रही है . देख ये सच है क मैं अमित को दिलो जान से चाहती हूँ. पर तुम भी मेरे लिए कुछ काम नहीं हो. मैं जानती हूँ तेरे दिल में भी अमित क लिए फीलिंग्स हैं . और वैसे भी अमित कल को किसी न किसी से शादी तो करेगा hi . तो उसके ऊपर मेरा अकेली का अधिकार तो नहीं होगा न तो फिर मैं उसका प्यार क्या अपनी बहिन क साथ नहीं बाँट सकती ?

मंजू का दिल सच में बहुत बड़ा था और ऋतू ये अचे से जानती थी मगर जो कुछ अभी मंजू ने कहा था वो सुन कर तो ऋतू का दिल भर आया था . उसने मंजू को कास क अपने गले से लगा लिया. ऋतू की आँखों से अपने आप आंसू बह निकले .

ऋतू सिंह : तू सच में बहुत अछि है मंजू . तू मेरी दोस्त नहीं मेरी सगी बहिन से भी बढ़कर है. मेरे दिल की तुझे साडी खबर है .

मंजू : बहिन बोलती है न मुझे फिर मुझे खबर नहीं होगी तो किसे होगी? ाचा ये बात अमित को मत बताना. और उसे फाॅर्स भी मत करना. वो बहुत ाचा है . देख लेना वो तुम्हे भी प्यार देगा मगर प्यार से hi.

ऋतू सिंह : उस बुद्धू राम को तो मैं डंडे से सीधा करुँगी . रुक ज़ार अभी उसे फ़ोन लगाती हूँ. हैं कहाँ वो , काम से काम बता कर तो जाता.

मंजू : नहीं नहीं , मैंने कहा न उससे प्यार से पेश आ तभी वो तुझे प्यार करेगा . अगर ऐसे बात करेगी तो बुरा मन जायेगा .

ऋतू सिंह : अरे मेरी भोली बेगम तू अभी नहीं जानती अपने मजनू को. उसके कई रंग हैं. मैं उसे देख चुकी हूँ . रुक तू अभी

इतना कह कर ऋतू ने अमित को फ़ोन लगाया मगर उसने उठाया नहीं .

मंजू : रहने दे न , बाइक चला रहा होगा .

ऋतू सिंह : रिलैक्स मैडम रिलैक्स , फ़ोन hi तो कर रही हूँ कोई गोली थोड़ा चला रही हूँ. तब तक तुम अपने हाथों की मस्त कॉफ़ी पिलाओ मुझे .

मंजू उठ कर किचन में चली गयी और ऋतू फिर से अमित को फ़ोन करने लगी . इस बार अमित ने फ़ोन उठा लिया और उसने बताया क वो गाओं जा रहा है. ऋतू ने उसे वापिस आने का पूछा तो उसने मंडे का बोलै तो ऋतू ने कुछ सोच कर उसे मंडे इवनिंग मिलने को कह दिया .

‘ आ गया तू ? शुक्र है आज ठीक टाइम से आ गए हो अँधेरा होने से पहले . चल बैठ मैं तेरे लिए दूध लती हूँ .’ घर पहुँचते hi मैं माँ से मिला तो उन्होंने मुझे गले से लगा कर प्यार दिया और बिठा दिया .

अमित : माँ बाबा कहाँ हैं ?

गौरी : ठीक हैं अभी आते होंगे तू आराम से बैठ.

इतना कह कर माँ किचन में चली गयी तो दीपिका ममी आरव को गॉड में उठाये चली आयी . आते hi उन्होंने मेरे होंठों को चूमा और आरव को मेरी गॉड में देते हुए मुझे एक साइड से बाँहों में भर लिया .

अमित : अरे अरे छोड़िये कोई देख लेगा , क्या कर रही हैं आप ?

दीपिका : कोई नहीं देखेगा. कौन है घर में जो देखेगा? दोनों दीदी तो वैसे भी सब जानती hi हैं तो उनसे कैसा दर? उनके इलावा कोई नहीं है यहाँ.

अमित : आज क्या बात है ? इतना प्यार किस लिए?

दीपिका : बहुत दिनों से तुम्हे मैंने अचे से टाइम नहीं दिया न , सोचा आज साडी कसार निकल hi दूँ.

अमित : कसार निकालनी है ? सोच लीजिये , अगर मैंने कुछ कर दिया तो .....

दीपिका : जो मर्ज़ी कर लो मैं मन नहीं करने वाली. मैं खुद अंदर से तड़प रही हूँ .

अमित : बस बस , रोकिये खुद को वर्ण रुकना मुश्किल हो जायेगा . पता है न डॉ ने मन किया हुआ है 5 महीने काम से काम .

दीपिका : आग लगे इन डॉ को , मैं कैसे अपने आप को समझा रही हूँ ये मैं hi जानती हूँ. मेरा बस चले तो अभी या हैं पर .... चल छोड़ वो सब. ाचा ये बता अब करिश्मा और रमा दीदी क साथ सब ठीक है न ?

अमित : जी , मैं गया था उनके घर . अब सब ठीक है.

‘ क्या ठीक है ? किस बारे में बात हो रही है ? ‘ माँ ने अनादर आते हुए सवाल किया.

दीपिका : कुछ नहीं , मैं वो दिव्या दीदी क बारे में पूछ रही थी .

गौरी : उन दोनों को भी साथ ले अत , दोनों माँ बेटी अकेली पता नहीं कैसे रह लेती हैं. यहाँ तो एक तू नहीं होता घर में तो सारा घर hi सुना लगता है.

दीपिका : सच कहा दीदी , बेचारी दिव्या ने साडी ज़िन्दगी अकेले hi गुज़र दी है. कभी कभी तो मुझे बहुत दुःख होता है उसकी हालत पर: वो अकेली hi राधा को कैसे संभल रही है. माँ और बाप दोनों का फ़र्ज़ निभा रही है. जब उन्होंने अमित को फिर से अपना लिया था तो मुझे सबसे ज्यादा ख़ुशी हुई थी . काम से काम अमित तो है न जिनको वो अपने साथ रख लेती हैं. वर्ण हमारे इतना कहने क बाद भी वो कभी हमारे साथ रहने नहीं आयी. अकेले hi साडी ज़िन्दगी वहां गुज़र दी.

गौरी : सच कह रही हो , बहुत दुःख देखें हैं उस बेचारी ने . बीटा , हो सके तो उसे कभी दुःख मत देना . वो तुम्हे बहुत प्यार करती है. एक तू और दूसरी राधा , बस तुम दोनों hi उसकी ज़िन्दगी हो.

अमित : मैं कभी उनको दुःख नहीं दूंगा माँ आप भरोसा रखो .

गौरी : मैं भी क्या बातों में लग गयी , तू ये दूध पि , मैं रत क लिए खाना तैयार करती हूँ . बता क्या खायेगा रत को?

अमित : आप जो भी बना देंगी सब ाचा hi है मेरे लिए .



मेरी बात सुन कर माँ मुस्कुराई और मेरे सर को सेहला कर बहार निकल गयी. मैं दिव्या मौसी क बारे में सोचने लगा. आने से पहले दिव्या मौसी का जो चेहरा मैंने देखा था. वो मुझे खटक रहा था. तभी मुझे यद् आया क मैंने राधा को फ़ोन नहीं किया . मैंने जल्दी से फ़ोन निकला और राधा को कॉल लगा दी. कुछ देर मैंने राधा से बात की और दीपिका ममी को फ़ोन पकड़ा कर मैं कामिनी ममी क पास चला गया. मुझे देख वो भी खुश हो गयी और उठ कर बैठते हुए मुझे गाल से लगा लिया . उन्होंने बताया क अब उनका टाइम आ चूका है और किसी भी दिन अब वो माँ बनने वाली हैं . खैर ऐसे hi कुछ देर मैंने उनके साथ बातें की और फिर बाबा अजय मां और कमलेश मां भी वापिस आ गए . रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला गया . माँ को मैंने सीढ़ियां चरने से मन कर दिया था . इस लिए आज मैं कमरे में अकेला hi सो रहा था. कुछ देर मैंने रीमा से बात की . वो बहुत खुश लग रही थी मगर उसे दर्द भी था . मैंने मंजू मम से भी बात की और उन्हें सॉरी कहा . रत को मैं आराम से सोया. मैं देर तक सोता रहा , बड़े दिनों बाद ऐसी नींद आयी थी . सुबह मेरी नींद किसी क हिलने से खुली. मेरी ऑंखें खुलने से पहले hi एक दिलकश सी खुशबु मेरी सांसो में घुलनि शुरू हो गयी और एक कोमल सा एहसास किसी लड़की क बदन का मुझे हो रहा था. मेरी ऑंखें खुली तो सामने वही चेहरा था जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करता था .
 
अपडेट 204



‘ अब उठ भी जाओ , कब तक सोते रहोगे? रोज़ तो जल्दी उठ जाते हो आज मैं आयी हूँ तो ऐसे अभी तक घोड़े बेच कर सो रहे हो . ‘ मुझे झंझोड़ते हुए किसी ने उठाया तो मैंने ऑंखें खोली. ऑंखें खुलते hi मुझे सामने निधि दीदी नज़र आयी तो मैं खुश हो गया और ऐसे hi उन्हें अपने गले से लगा लिया .

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , आप इतनी सुबह सुबह ??

( निधि का तो दिल एक डैम से तेज़ धड़कने लगा था जब अमित ने उसे ऑंखें खुलते hi अपने गले से लगा लिया . चाहे अमित अभी पूरी तरह से उठा नहीं था अपर जिस तरह उसने बेध्यानी में निधि को ऐसे गले से लगा लिया था ये सब निधि को बहुत ाचा लगा था. उसे तो बिलकुल ऐसे hi लग रहा था क जैसे कोई पत्नी अपने पति को उठाने आये और वो उसे ऐसे hi बाँहों में भर कर प्यार करने लगे. निधि क हाथ अमित की पीठ पर अपने आप का गए और ऑंखें बंद किये वो बस इन हसीं पलों को जी लेना चाहती थी. निधि को तो ये किसी सपने सा hi लग रहा था. उसे तो जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था क अमित क्या कह रहा है . )

अमित : बताइये न दीदी , आज इतनी सुबह सुबह कैसे ? आप अकेली आयी हैं ? कौन कौन आया है साथ ? दीदी ??? दीदी ????

निधि दीदी मेरी किसी बात का जवाब नहीं दे रही थी तो मैंने उन्हें खुद से थोड़ा अलग किया. उनकी ऑंखें बंद थी और चेहरे पर एक मुस्कान. मैंने फिर से उन्हें हिलाया तो उन्होंने ऑंखें खोली और मेरी आँखों में देखने लगी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क वो क्या कर रही हैं.

अमित : दीदी क्या हुआ ? आप जवाब क्यों नहीं दे रही ?

निधि : होश में आते हुए ) हम्म्म

अमित : क्या हम्म्म्म

निधि : मैं ठीक हूँ बल्कि अब तो और भी अछि हूँ. तुम बताओ तुम अभी तक सो क्यों रहे थे ?

अमित : पता नहीं , आज आँख hi नहीं खुली . पर आप यहाँ अचानक कैसे ?

निधि : क्यों ? मैं नहीं आ सकती क्या ? तुमसे मिलने का दिल किया तो चली आयी . तुम तो खुद आने से रहे . कभी यद् भी नहीं करते मुझे .

अमित : ऐसा क्यों क ह रही हैं आप ? मन क मैं वक़्त मिल नहीं पता पर आप को यद् करने की बात अगर आप कर रही हैं तो सुन लीजिये , यद् उन्हें किया जाता है जिन्हे भूला दिया जाये. और आप को तो मैं कभी भूल सकता hi नहीं. आखिर आप hi तो हैं तो मुझे सब से ज्यादा प्यार करती हैं .

मेरी बात सुनते hi निधि दीदी की मुस्कान गहरी हो गयी .

निधि : चलो अब उठ जाओ , आज सारा दिन तुम मेरे साथ रहोगे समझे ? और सुबह मैं तुम्हे अपने साथ hi लेकर जाउंगी. और हाँ , माँ भी आयी है साथ में . अब जल्दी से नीचे आ जाओ साथ में नाश्ता करते हैं.

दीदी ने उठने से पहले मेरे गलों को चूम लिया और मुस्कुराती हुई कमरे से बहार निकल गयी. निधि दीदी को देख कर हमेशा hi मैं खुश हो जाता था और आज भी ऐसा hi था. मगर उनका मेरे गाल पर ऐसे चूमना ये थोड़ा अलग था. खैर मेरे दिन की शुरुआत इतनी अछि हो रही थी तो मैं भी बीएड से उठा और रीमा राधा को गुड मॉर्निंग माँ मैसेज करने क बाद बाथरूम में घुस गया नहाने क लिए . तैयार हो कर जब मैं नीचे आया तो सब साथ में hi बैठे थे . मुझे देखते hi रजनी मौसी खोह हो गयी. मैं उनके पाऊँ छूने लगा तो उन्होंने मुझे अपने साथ लगा लिया. मेरा मुँह सीधा मौसी क बड़े बड़े स्तनों पर जा लगा. मैंने पीछे हटने की कोशिश की पर मौसी ने कुछ देर ऐसे hi मुझे अपनी छाती से लगाए रखा .

रजनी : कैसा है मेरा बचा ? देख खुद hi तुझे लेने आ गयी हूँ . तेरा क्या भरोसा अपनी बड़ी मौसी को भूल कर रीता क घर चला जाये .

अमित : ऐसा भला हो सकता है मौसी? आओ तो सब से पहले हैं. आप कहें तो मैं किसी और क पास जाऊंगा hi नहीं .

रजनी : मैं तो ऐसे कह रही थी , मुझे पता है तू मुझे कितना प्यार करता है. मैं भला तुझे क्यों मन करुँगी ? वो भी तो मेरी तरह तुम्हे प्यार करती हैं. चल बैठ यहाँ मेरे पास hi . अपनी बहिन से मिल लिया न ? दिन चढ़ने से पहले hi ये तो यहाँ आने वाली थी. वो तो तेरे मौसा जी ने रोक लिया . अब करले बात तू भी .

निधि : क्या माँ , आप भी ? देखो न ममी , एक तो कल से खुद hi कहे जा रही थी क पता नहीं अमित आएगा या नहीं . इस लिए मैंने इनकी चिंता दूर करने क लिए खुद hi इन्हे यहाँ ले आयी ताकि यहाँ से हम अमित को साथ लेते हुए जाएँ. और अब देखो साडी बात मुझ पर hi दाल रही हैं .

विजय : अरे भाई कोई कुछ नहीं कहेगा मेरी बेटी को . ये जब चाहे यहाँ आये उसमे क्या ? इसका अपना घर है .

गौरी : और नहीं तो क्या ? वैसे भी ये जाती कहाँ है? निधि जैसा समझदार है कोई ? मैं तो भगवन क आगे हाथ जोड़ती हूँ क इसके लिए कोई राजकुमार ढून्ढ कर भेजे.

निधि : क्या ममी आप भी , मुझे अभी जॉब करनी है और बहुत कुछ करना है . काम से काम 3 साल तो मैं शादी नहीं करने वाली . ( मेरी तरफ देखते हुए )

रजनी : देखा ?? मेरी तो सुनती hi नहीं है ये. और इसके पापा को भी कोई फ़िक्र नहीं है . आप लोग hi इसे समझाइये. उम्र निकल गयी तो फिर ाचा रिश्ता भी नहीं मिलेगा. अभी तो बहुत रिश्ते आ रहे हैं. 3 साल बाद तो रिश्ता ढूंढना भी मुश्किल हो जायेगा .

निधि : आप उसकी चिंता मत करो. अमित है न , मुझे कोई चिंता नहीं है .

रजनी : वो बेचारा क्या करेगा इसमें ? वो अभी छोटा है तू तो बड़ी है. फिर क्यों बच्चों जैसी बात कर रही है ?

दीपिका : ठीक hi तो कह रही है निधि . अमित अपनी दीदी क लिए ाचा सा रिश्ता ढूंढ कर ले आएगा . आप चिंता मत करो. भाई होने क सरे फ़र्ज़ निभाएगा ये .

दीपिका ममी की बात पर जहाँ सब में मेरी तरफ गर्व से देखा वहीँ निधि दीदी क चेहरे पर एक पल क लिए भाव कुछ बदले से नज़र आये और वो दीपिका ममी को एक नज़र देखने क बाद मुझे देखने लगी .

विजय : अरे भगवान अब खाना लगा भी दो. या भूखा रखने जा इरादा है ?

गौरी : हाँ हाँ , पहले तो जैसे मैं भूखा hi रखती हूँ आपको . आज मेरी बेटी आयी है मेरे पास तो उसके लिए स्पेशल आलू क परांठे बनाने वाली हूँ माखन क साथ .

अजय : वह भाभी सुनते hi मुँह में पानी आ गया.

निधि : चलिए ममी जी . आज मैं भी आपके साथ परांठे बनती हूँ .

गौरी : नहीं नहीं , तुम बैठो . मैं कर लुंगी सब . वैसे भी ससुराल में तो साडी ज़िन्दगी काम करना है.

निधि : मैं आज अपने हाथों से सबको नाश्ता खिलाऊंगी . और अमित क तो ये फेवरेट हैं न

माँ ने फिर से मन करने की कोशिश की पर दीदी नहीं मणि और माँ क साथ किचन में चली गयी नाश्ता तैयार करने . दीपिका ममी भी उनकी मदद क लिए चली गयी . रजनी मौसी आरव को गॉड में खिलते हुए मुझसे बातें करने लगी. कुछ hi देर में दीदी ने नाश्ता तैयार कर दिया. वाकई में दीदी क हाथों में जादू था. रजनी मौसी की तरह वो भी खाना बनाने में एक्सपर्ट थी .

अजय : वह भाई वह , दीदी निधि तो आप को भी पीछे छोड़ गयी है. सच में बहुत स्वादिष्ट बने हैं परांठे.

विजय : सही कहा , निधि बेटी जिस घर में भी जाएगी स्वर्ग बना देगी .

रजनी मौसी निधि दीदी की तारीफ सुन कर खुश हो रही थी . निधि दीदी खुद परांठा लिए मेरी प्लेट में रखने आ गयी. मैं पहले hi 4 परांठे स्वाद स्वाद में खा चूका था . ऊपर से दीदी ने एक और रख दिया . मैं मन कर रहा था

निधि : क्या हुआ अचे नहीं लगे ?

अमित : अचे ? ये तो बहुत hi अचे हैं. मैं तो 3 खता हूँ अब देखो छे खा चूका हूँ और आप एक और रख रही हैं . मेरा तो पेट फैट जायेगा

निधि : कुछ नहीं होता , अभी तो एक और खाना पड़ेगा तुम्हे .

अमित : अरे नहीं दीदी और खाया तो फिर मुझसे उठा भी नहीं जायेगा .

निधि : तुम्हे अचे तो लगे न ?

अमित : अचे तो इतने लगे हैं क दिल कर रहा है आपके हाथ चूम लूँ .

निधि : खुश होते हुए ) सच ??

विजय : और नहीं तो क्या . हम सब तेरी hi तो बात कर रहे थे अभी . शाबाश बीटा ऐसे hi सबको अपने प्यार से भर देना जहाँ भी जाना .

निधि : मैं कहीं नहीं जाने वाली मां जी . मैं यहीं आपके पास रहूंगी हमेशा . और इसे ( मुझे ) ऐसे hi प्यार से खिलाती रहूंगी .

ऐसे hi बातों बातों में हूँ सब ने नाश्ता कर लिया. सबके खाने क बाद दीदी मेरे पास आ कर बैठ गयी.

निधि : लाओ अब मेरा इनाम .

अमित : इनाम ?

निधि : हम्म्म , परांठे अचे लगे हो तो मुझे इनाम तो दे hi सकते हो न .

अमित : दीदी , अगर आप को मुझसे कुछ भी चाहिए हो तो सीधा हुकम किया करो. इसके लिए कुछ करने की ज़रूरत थोड़ी है आपको . कहिये क्या चाहिए .

निधि : तुम

अमित : मैं ???

निधि : मेरा मतलब है आज सारा दिन तुम मेरे साथ रहोगे. मुझे आज गाओं और खेत घुमाओ और जो जो भी तुम चाहो. बस आज का दिन मेरे साथ रहना होगा .

अमित : ाचा ठीक है, तो कहिये कहाँ चलना है ?

निधि : चलो पहले खेतों में चलते हैं फिर नदी पर

अमित : ठीक है , और भी पूछ लीजिये किसी को

निधि : माँ तो यहीं रहेगी मां ममी क पास , तुम मेरे साथ चलो .

निधि दीदी ने मौसी और माँ को बताया और जल्दी से तैयार हो गयी चलने क लिए. वैसे तो मैं आज राजू क साथ वक़्त बिताने वाला था पर अब दीदी की बात को कैसे ताल सकता था. सो मैं भी जल्दी से तैयार हो गया. और फिर अपने रानी ( बुलेट ) को निकल और दीदी को पीछे बिठा कर पहले खेतों की तरफ चल दिया. खेतों में अभी गेहूं की फसल की बिजाई हुई थी तो कहीं कहीं आज पानी लगाया था . एक जगह किनारे पर चलते हुए दीदी का पाऊँ फिसल गया . मैं आगे आगे चल रहा था तो दीदी की आवाज़ सुन कर एक डैम से पलटा . तो देखा दीदी गिरी हुई थी और उनके सूट में मिटटी लग गयी थी.

अमित : अरे ये क्या ? दीदी आप फिर कैसे गयी ?

निधि : पता नहीं कैसे पाऊँ फिसल गया. अब तो मेरे कपडे भी गंदे हो गए .

अमित : चलिए उठिये , घर चलते हैं .

निधि : नहीं , घर नहीं . थोड़ी सी मिटटी लगी है नदी क पानी से साफ़ कर लेंगे. चल मुझे उठा . इस फिसलन में मुझसे चला नहीं जायेगा.

मैंने आगे बढ़ कर दीदी को गॉड में उठाया तो दीदी ने अपनी दोनों बहन मेरे गले में दाल ली . मैं उन्हें ऐसे hi उठाये आराम से नदी की तरफ चलने लगा .

निधि ( मन में ) क्या क्या नहीं करना लड़ रहा , पता नहीं कब मेरे दिल की आवाज़ तुम तक पहुंचेगी.

अमित : दीदी आप कुछ कहती नहीं हो क्या ? कितनी दुबली पतली हो आप .

निधि : तुम्हे मैं ऐसे अछि नहीं लगती?

अमित : मैंने ऐसा कब कहा? वो तो मैं इस लिए कह रहा हूँ क्यूंकि आप का तो बिलकुल भी भर नहीं है.

निधि : तो ाचा है न , हमेशा ऐसे hi मुझे अपनी बाँहों में उठाये रखना.

अमित : मैं कैसे उठाये रखूँगा ? शादी म बाद तो जीजा उठाएंगे आपको

निधि ( मुझे हलके से मरते हुए ) मैं तुम्हारी बात कर रही हूँ. क्या उठा नहीं सकते मुझे ऐसे ?

निधि ( मन में ) मैं तो अब सिर्फ तुम्हारी बाँहों में रहना चाहती हूँ.

अमित : क्या दीदी ,,, आप भी पता नहीं कैसी बातें कर रही हैं. लो आ गए हम नदी पर . अब अपने कपड़ों से मिटटी हटा लो

मैंने दीदी को नदी क किनारे पर उतर दिया तो वो वहीँ एक पत्थर पर बैठ कर घुटनो तक सलवार ऊपर कर क अपने पाऊँ धोने पगी और कपड़ों पर लगी मिटटी हटाने लगी . निधि दीदी क गोर पाऊँ देख कर एक बार तो मेरी नज़र वहीँ जैम गयी. मैंने अपनी नज़ारा वहां से हटाने क लिए दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी .

अमित : दीदी मैं उधर जाता हूँ आप आ जाना

मैंने अपनी नज़रें चुराते हुए दीदी से कहा . मुझे लगा दीदी ने मुझे ऐसे उन्हें घूरता हुआ देखा है तो उन्हें बुरा लगा होगा इस लिए मैं वहां से निकलना चाहता था.

निधि : तुम यहीं रुको , अगर मैं फिर से फिसल कर बड़ी में फिर गयी तो ? रुको और ये पकड़ो

निधि दीदी ने अपना दुपट्टा उतर कर मुझे पकड़ा दिया . मरता क्या न करता , दीदी की बात तो माननी hi थी पर दीदी ने जिस तरह अपना दुपट्टा मुझे उतर कर पकड़ा दिया था उससे एक बार फिर से मेरी नज़रें गुस्ताखी कर गयी और दीदी क उठे हुए सीने पर चली गयी जहाँ से हलकी से उनकी क्लीवेज दिख रही थी. मैंने खुद को कोसते हुए अपनी नज़रें दूसरी तरफ कर ली .

निधि : बुद्धू

अमित : दूसरी तरफ मुँह किये हुए ) दीदी आप ने कुछ कहा ?

निधि : उस तरफ क्या देख रहे हो ? इधर देख कर बात करो न .

अमित : आप पहले अपनी सफाई कर लीजिये आराम से.

निधि : इसमें उधर मुँह करने वाली क्या बात है? इधर देख के बात करो .

मैंने फिर से दीदी की तरफ देखा तो दीदी भी मुझे hi देख रही थी.

अमित : जी

निधि : तुम ऐसे नज़रें क्यों चुरा रहे हो ? मैं क्या इतनी बुरी हूँ ?

अमित : ये क्या कह रही हैं आप ? आप से ाचा तो कोई हो hi नहीं सकता.

निधि : ाचा एक बात तो बताओ , तुम्हे मैं कैसी लगती हूँ ?

अमित : अभी तो बताया , बहुत अछि

निधि : मेरा मतलब है , एक लड़के की नज़र से कैसी लगती हूँ तुम्हे ?

अमित : आप मेरी बड़ी बहिन हैं. मैं भला कैसे उस नज़र से देख सकता हूँ आपको?

निधि : बताओ न, मुझे जानना है मैं कैसी लगती हूँ.

अमित : पर ....

निधि : बताओ न प्लीज

अमित : आप बहुत अछि हैं दीदी. कोई किस्मत वाला hi होगा आप जिसे मिलोगी.

निधि : क्या तुम मेरी जैसी लड़की से शादी करना पसंद करोगे ?

अमित : ये आप क्या पूछ रही हैं?

निधि : बताओ न? क्या मेरे जैसी लड़की से तुम शादी करना पसंद करोगे ?

अमित : मैंने अभी कहा न क कोई किस्मत वाला hi होगा जिसे आप जैसी लड़की मिलेगी.

निधि : मतलब तुम्हे मंज़ूर है ?

अमित : क्या ?

निधि : मेरे साथ शादी मम मेरा मतलब है मेरे जैसी लड़की क साथ शादी.

अमित : मेरे ख्याल से हमें अब चलना चाहिए पता नहीं आप क्या क्या सवाल पूछे जा रही हैं. पकड़िए इसे

मैंने दीदी को उनका दुपट्टा पकड़ते हुए कहा. दीदी ने पानी क कुछ छींटे मेरे ऊपर उछाले तो मैं उछाल कर दूर हैट गया.

अमित : क्या दीदी ,, आप भी बच्चों क जैसे कर रही हैं आज. आपको हुआ क्या है? तबियत तो ठीक है न?

निधि : बिलकुल ठीक हूँ मैं. बस तुम्हारे साथ ये सब करने का मन कर रहा है.

अमित : ाचा !!! और क्या मन कर रहा है?

निधि : बहुत कुछ , चलो अब कहीं और चलते हैं.

अमित: चलिए

उसके बाद दीदी मेरा हाथ पकडे मेरे साथ चलने लगी . खेतों और नदी तक हमें एक डेढ़ घंटा लग गया था. उसके बाद मैं दीदी को बाइक पर बैठा कर मंदिर लेकर गया और उन्हें बाजार से टिक्की और जलेबी भी खिलाई . ज्यादा कुछ तो यहाँ मिलता नहीं था. दीदी बहुत खुश नज़र आ रही थी. आज उनका एक अलग hi रूप देख रहा था मैं. उसके बाद हम घर आ गए और फिर हम घर में सबके साथ बातें करने बैठ गए .

उधर शहर में नारायण दस क आदमी ऋतू सिंह लार नज़र रखने लगे थे. मगर ऋतू क आसपास हर वक़्त पुलिस वाले रहते hi थे चाहे वो जैन भी जाये. जबकि ऋतू सिंह क मन में कल से नई उमंग उठने लगी थी. अपने अंदर की लड़की को वो कब से दबा चुकी थी वर्दी क पीछे मगर अब वो लड़की वर्दी का बोझ उतर फेंकने को मचल रही थी. हर वक़्त सख्त लहजा रखने वाली ऋतू सिंह का ये बदला रूप देख कर उसके अंगरक्षक भी हैरान थे. जो चेहरा हमेशा सख्त और सपाट रहता था अब वहां कल से मुस्कान बार बार उभर रही थी और वो भी बिना किसी बात क.

‘ मैडम ,कल गर्ल्स कॉलेज क पास रेस्टोरेंट में कुछ लड़के लड़कियों को बिठाने की वजह से हमने उस रेस्टोरेंट को बंद करवा दिया था. उसका ओनर आप से मिलना चाहता है . उसका क्या करना है ? ‘ ऋतू सिंह अपनी सोच में दू hi मंद मंद मुस्कुरा रही थी क उसकी तन्द्रा को तोड़ते हुए एक इंस्पेक्टर ने उसके पास आ कर ये बात कही.

ऋतू सिंह : वहां कॉलेज क hi लड़के लड़कियां आते हैं या आवारा बदमाश ?

‘ मैडम वहां तो सब कॉलेज क hi स्टूडेंट्स होते हैं ‘

ऋतू सिंह : तो उसे जाने दो और कह दो क अपना रेस्टोरेंट आराम से चलाये. और वहां किसी को तंग न करे .

ऋतू ने मुस्कुराते हुए इतना कहा तो इंस्पेक्टर हैरानी से इंस्पेक्टर की ऑंखें बहार आ गयी . ऋतू सिंह हमेशा hi गुस्से में रहती थी और ये रेस्टोरेंट को खुद उसी ने सील करवाने को कहा था जब उसे शिकायत मिली थी क वहां लड़के लड़कियां बैठे रहते हैं कॉलेज से क्लासेज बंक कर क.

‘ मैडम आप ने खुद hi तो बंद करवाने को कहा था तो अब .....’ इंस्पेक्टर को जैसे अभी भी यकीन नहीं था जो भी ऋतू सिंह ने कहा. इसलिए उसने कन्फर्म करना चाहा.

ऋतू सिंह : हाँ मैंने कहा था और अब भी मैं hi कह रही हूँ. अब उन बेचारों को भी तो कहीं बैठ कर मिलने की जगह चाहिए क नहीं. वैसे भी वो कौन सा कोई जुर्म कर रहे हैं ? जवान हैं , इतना तो मौका मिलना hi चाहिए न बात करने का ? हम कोई प्यार क दुश्मन थोड़ा हैं. जाओ उसे कह दो क अपना रेस्टोरेंट चलाये जा कर. और तुम लोग भी उस तरफ जाकर उन लोगों को तंग न करना. अगर कोई अपनी मर्जी से मिलना चाहता है तो मिले. ये सबका हक़ है.

इंस्पेक्टर बेचारा अपना सा मुँह बना कर बहार निकल गया . जबकि ऋतू फिर से कुछ यद् करती हुई मुस्कुराने लगी और अपने मोबाइल को उठा कर किसी को कॉल करने का सोचती फिर रुक जाती. कुछ तो हलचल हो रही थी उसके मन में जो उसे आराम से बैठने नहीं दे रही थी.

अमित क साथ प्यार भरे लम्हे बिताने क बाद उस संगम से मिले दर्द को भी रीमा प्यार से सहेज रही थी ताकि वो इसे हमेशा महसूस कर सके यादों में. इस लिए उसने दुबारा पैन किलर नहीं ली थी. मगर इस वजह से शीना क साथ वो वहीँ रुक गयी थी रत को. और सुबह तक उसको काफी आराम मिल गया था मगर अभी भी योनि पर सूजन थी. शीना ने एक बहिन और दोस्त की तरह रीमा का ख्याल रखा था. सुबह दोनों घर वापिस आ गयी जहाँ आज वो अपनी माँ क साथ रीना क लिए शॉपिंग करने वाली थी. 3 दिन बाद रीना की फ्लाइट बुक थी विदेश जाने क लिए . रीना भी सब तयारी कर रही थी पर जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था उसके दिल में एक दर्द सा बस्ता जा रहा था और वो था अमित से दूर जाने का दर्द. दर्द क साथ hi दर भी था क कहीं वो अमित से सच में hi दूर न हो जाये. पर वक़्त क्या करवट लेने वाला था ये तो किसी को पता तक नहीं था. दोनों बहनो को एक hi शख्स से मुहब्बत हो गयी थी और उनकी माँ भी उसी शख्स क पहलु में अपने ज़ख्मों पर मलहम लगवा चुकी थी. वो ज़ख़्म जो उसकी ज़िन्दगी का नासूर थे. ज़िन्दगी में वो वक़्त एक दिन ज़रूर आने वाला था जब सब को इस कड़वी सचाई का सामना करना था .

‘ रमा , मैंने उन लोगों को नोटिस भिजवाया था अब उनकी तरफ से ये कहा गया है क हम डाइवोर्स का फैसला बदल दें. इसके बदले में वो करिश्मा को अलग घर ले कर देंगे रहने को अगर वो साथ नहीं रहना चाहती. और वो अपनी श्री जायदाद भी करिश्मा और उसके बचे क नाम करने को तैयार हैं. वो सब माफ़ी मांग रहे हैं. और एक मौका चाहते हैं . तुम क्या कहती हो ?’

रमा : हमे क्या कमी है किसी चीज़ की जो हम उनकी इन बातों पर मन जाएँ ? हमारे पास उनसे ज्यादा hi है काम नहीं . आप ने ऐसा सोचा भी कैसे क हम सब भूल कर उन्हें माफ़ कर दें?

राघव : एक बार ठन्डे दिमाग से सोचो रमा. ये करिश्मा की ज़िन्दगी का सवाल है. मैं भी उसका पिता हूँ. क्या मैं नहीं चाहता क वो ख़ुशी से रहे. उसका घर बस जाये. गलती इंसान से हो जाती है. अगर वो अपनी गलती सुधारना चाहते हैं तो क्या हमें उन्हें एक मौका नहीं देना चाहिए ?

रमा : आप ऐसा इस लिए कह रहे हैं हैं क्यूंकि आप पूरी सचाई नहीं जानते. अगर जानते तो ऐसी बात कभी नहीं करते.

राघव : तुम कहना क्या चाहती हो ? और कौन सी सचाई है जो मुझे नहीं पता?

रमा : वो सचाई जिसे बोलने में भी मुझे शर्म आ रही है. रुकिए अभी आपको दिखती हूँ. अपनी आँखों से देख लेना फिर कहना जो भी कहना है.

रमा जल्दी से अपने कप्बोर्ड में राखी वो पैन ड्राइव ले आयी जिसमे करिश्मा ने वीडियोस एडिट कर क सेव कर दी थी. रमा ने वो पंड्रिवे लैपटॉप में लगा कर जब राघव को दिखाई तो एक बार राघव का दिमाग भी चक्र गया.

रमा : अब बोलिये क्या कहना है आपको ? क्या अब भी आप वही कहेंगे जो पहले कह रहे थे ?

राघव : गुस्से में ) कितने घटिया लोग हैं ये . मुझे तो शर्म आ रही है ऐसे लोगों में मैंने अपनी फूल सी बची को भेजा. उन लोगों की तो अकाल मैं ठिकाने लगता हूँ. साडी दुनिया थूकेगी अब उन पर .

रमा : आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे वर्ण छींटे हमारी बेटी पर भी गिर सकते हैं. आप बस उनको साफ कह दो क हमें डाइवोर्स hi चाहिए. और अगर वो न मानें तो फिर ये उनको दिखा देना.



राघव को रमा की बात ठीक लगी. पर रमा तो इस लिए राघव को रोक रही थी क कहीं अमित का नाम बीच में न आ जाये. राघव ने उसी वक़्त फ़ोन लगाया और करिश्मा क ससुर को जवाब दे दिया धमकी भरे लहजे में.
 
अपडेट 205



रत का खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में सोने चले गए . मेरे बगल वाले कमरे में hi मौसी और दीदी का बिस्तर सेट कर दिया था दीपिका ममी ने . मैं अपने कमरे में बीएड पर लेता रीमा क साथ बात कर रहा था क निधि दीदी दरवाज़ा खोल कर मेरे पास आ गयी .

निधि : क्या कर रहे थे ?

अमित : कुछ नहीं दीदी बस सोने वाला था . आप यहाँ ?

निधि : नींद नहीं आ रही थी सोचा तुम्हारे साथ थोड़ी देर बात कर लूँ . राधा बता रही थी तुम्हारे एक्साम्स शुरू हो रहे हैं .

अमित : हाँ दीदी , वेडनेसडे से शुरू हैं .

निधि : तयारी तो है न ? वैसे मुझे पता है क तुम पड़े में अचे हो पर किसी भी हेल्प की ज़रूरत हो तो मुझसे कहना. नैना क तो शुरू हो गए हैं और कारन क भी शुरू हो रहे हैं इस वीक में hi .

अमित : तो तभी नहीं आई दीदी.

निधि : हम्म और वैसे भी तुम्हे बता दूँ क वो तुमसे नाराज़ है .

अमित : मुझसे ?? पर क्यों ?

निधि : पता नहीं , खुद hi पूछ लेना .

अमित : वैसे दीदी आपकी जॉब कैसे चल रही है ?

निधि : कैसी चलेगी ? अछि चल रही है. तुम्हारा ऑफिस है तो मुझे क्या दिक्कत होगी वहां . वैसे आज कल तो करिश्मा भी आने लगी है तो उसके साथ भी थोड़ी बहुत बातें हो जाती हैं.

अमित : करिश्मा दीदी ऑफिस आने लगी हैं ?

निधि : हम्म , इसमें हैरानी की कौन सी बात है? वैसे भी ाचा है न . घर में बैठ कर तो वही अपनी ज़िन्दगी क बारे में सोच सोच के दुखी होती रहती. वैसे तुम्हे बहुत यद् करती है वो . अक्सर तुम्हारे बारे में बात करती रहती है.

अमित : क्या बात करती हैं ? अछि या बुरी ?

निधि : बुरी क्यों करेगी ? वो तो तुम्हारी तारीफ hi करती है . तुमने उसे नरक से बहार निकला है यही कहती है वो . और अब तो वो खुश भी दिखने लगी है. लास्ट टाइम जब तुम उससे मिले थे उसके बाद वो काफी पॉजिटिव नज़र आने लगी है. मगर अभी भी लगता है क जैसे तुम ज्यादा बात नहीं करते उससे .

अमित : वक़्त hi कहाँ मिलता hi दीदी. आप खुद hi देखो जितना भी व टी होता है उसमे किस किस से बात करूँ ? और जिसके पास हूँ अगर उसी को वक़्त नहीं दूंगा तो क्या वो नाराज़ नहीं होंगे.

निधि : हम्म्म सही कहते हो तुम . अब अकेली जान कहाँ कहाँ लगेगी. इसी लिए मैं तुमसे नाराज़ नहीं होती . क्यूंकि मैं जानती हूँ क तुम्हे टाइम नहीं मिल पता. मगर नैना ये बात नहीं समझती और शायद इसी वजह से नाराज़ है. खैर छोडो , कल से हमारे साथ रहने आ रहे हो तो मुझे रोज़ टाइम देना पड़ेगा मैं ज्यादा कुछ नहीं मांगती.

अमित : जो हुकम मेरे आका

निधि : हे हे हे ,,, ाकाआ ??? तो मैं जो कहूँगी वो मानोगे ?

अमित : पहले कभी मन किया है आपको ? कहिये क्या करना है .

निधि : ( मन में ) मुझे हमेशा क लिए अपनी बना लो . मैं तुम्हारी बाँहों में रहना चाहती हूँ हमेशा हमेशा क लिए .

अमित : दीदी !!! कहिये क्या करना है ?

निधि : आ हाँ , फ़िलहाल तो मैं यहीं सोने वाली हूँ तुम्हारे साथ. और बाकि कल बताउंगी.

अमित : मौसी क्या कहेंगी .

निधि : मैंने माँ से कह दिया है. वैसे भी वो जल्दी सो जाती हैं. अब तक तो सो भी गयी होंगी .

अमित : ाचा ठीक है . आप भी यहीं सो जाइये पर जगह थोड़ी काम है यहाँ .

निधि : मेरे लिए बहुत है. हम साथ में लेट जाते हैं . वैसे भी ठण्ड तो है hi .

निधि दीदी मेरे कम्बल में hi घुस गयी . हूँ दोनों करवट क बल लेट गए . दीदी मुझे hi देख रही थी. मैंने सोने क लिए ऑंखें बंद की . कुछ देर बाद मैंने ऑंखें दोबारा खोली तो दीदी अभी भी मुझे hi देख रही थी .

अमित : क्या हुआ दीदी ? नींद नहीं आ रही ?

निधि : ुँहुँणन

अमित : क्यों ?

निधि : वो मुझे तकिये क बगैर नींद नहीं आती .

अमित : तो पहले क्यों नहीं बोलै अपने , ये ले लीजिये आप . मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है.

मैंने अपने सर क नीचे से तकिया निकल कर दीदी को देने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे रोक दिया .

निधि : नहीं ये नहीं चाहिए मुझे. मेरा तकिया तो ये है .

दीदी ने मेरी बाजु खोल कर अपने सर क नीचे रख ली . ऐसा करने से दीदी और भी मेरे क्रीम आ गयी. इतना करीब क अब हमारी सांसे एक दूसरे से टकराने लगी थी .

अमित : दीदी ये क्या . इससे तो आपको अचे से नींद नहीं आएगी .

निधि : इसी से मुझे अछि नींद आएगी.

निधि दीदी मेरे बिलकुल करीब थी और उनकी सांसे मुझे अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी. खैर कुछ देर में मुझे नींद आ गयी . सुबह मेरी आंख जल्दी झुक गयी . मैंने देखा तो निधि दीदी का सर अब मेरी छाती पर था. और वो मेरे साथ ऐसे लिपटी हुई थी जैसे छोटा बचा चिपका होता है . दीदी क बल उनके चेहरे क ऊपर थे. मैंने उनके चेहरे से बाल हटाए तो उनका मासूम सा दमकता चेहरा सामने आ गया. मैंने मन hi मन सोचने लगा क कितना किस्मत वाला होगा वो जिसके साथ दीदी की शादी होगी. दीदी को सुकून में सोया हुआ देख कर मेरी हिम्मत hi नहीं हुई क मैं उन्हें जगाऊँ. मैं उनका सर धीरे से उठाकर निचे से निकलने लगा तो उनका हाथ मुझे बगल से कास क पकडे हुए था जिससे उनकी नींद टूट गयी. दीदी ने ऑंखें खोल कर देखा तो इस वक़्त उनका चेहरा मेरे हाथों में था. और वो बस ऐसे hi मेरी आँखों में देखने लगी.

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी एंड सॉरी वो मैं आपको जगाना नहीं चाहता था वो बस .....

निधि : शहहहहह ,,, जानते हो आज सुच में मेरी मॉर्निंग गुड हुई है. आंख खुलते hi तुम्हारा चेहरा जो सामने है. काश क ऐसी hi हर सुबह हो मेरी.

इतना कह कर दीदी ने मेरे ऊपर खिसक कर मेरे गलों पर प्यार से किश कर दिया और मुस्कुराती हुई करवट बदल कर उठ गयी. दीदी क बल बिखर गए थे और वो उन्हें समेत कर बांधने लगी .

अमित : दीदी मैं थोड़ा एक्सरसाइज के लेता हूँ तब तक आप भी तैयार हो जाइये.

मैं एक्सरसाइज करने को चला गया और दीदी भी अपने कमरे में वापिस चली गयी . एक्सरसाइज क बाद मैं तैयार हुआ और अपना बैग पैक करने लगा. मगर दीदी पहले hi वो सब कर चुकी थी. खैर हमने साथ ने नाश्ता किया जो माँ और मौसी ने मिल कर बना दिया था जल्दी से. नाश्ता करने क बार दीदी ने कार निकली और मुझे अपने साथ आगे वाली सीट पर बिठा कर वो ड्राइव करने लगी. 9 बजे से पहले हम शहर मौसी क घर पहुँच चुके थे. हमारे घर पहुँचते hi दरवाज़े पर hi हमें नैना दीदी मिल गयी. वो एक्साम्स देने जा रही थी आज उनका पहला एग्जाम था. मुज्जे देख कर उन्होंने नाराज़गी दिखते हुए मुँह फेर लिया . निधि दीदी और मौसी ने उन्हें बेस्ट ऑफ़ लक कहा .

निधि : अमित से नहीं मिलेगी ? आज तेरा एग्जाम है न . काम से काम अचे से मिल तो ले .

नैना : मुझे इससे बात नहीं करनी है. इसे तो मेरी ये तक नहीं आती . बाँदा काम से काम एक फ़ोन hi कर लेता है . पर नहीं , दुनिया क सरे काम इसे hi है .

रजनी : ऐसा नहीं कहते बीटा, ये बेचारा भी क्या करे. जिसके पास भी जाता है वो इसे छोड़ ता hi नहीं.

नैना : सब जानती हूँ मैं क किसने किसने इसे पकड़ा हुआ है. बड़ा हीरो बना घूमता फिर रहा है आजकल. तुमसे तो बाद में बात करती हूँ .

नैना दीदी गुस्से से मुझे देखते हुए कहा तो मैंने आगे बढ़ कर उन्हें अपने गले से लगा लिया . दीदी ने मुझे पीछे करने की कोशिश की पर मैंने नहीं छोड़ा और नज़र बचा कर नैना दीदी की गर्दन पर कण क नीचे चुम लिया . दीदी एक डैम से शांत हो गयी .

अमित : बेस्ट ऑफ़ लक डीडीए मैं जनता हूँ आप मुझसे नाराज़ हैं पर अब मैं यहीं हूँ इस लिए आप अचे से अपना पेपर लिखना और बाद में आके जो सजा देना चाहें दे लेना पर पेपर ाचा कर क आना.

नैना दीदी एक डैम से शांत हो गयी थी जैसे वो हैंग हो गयी हो. वो ऐसे क्यों हो गयी थी अब ये तो मैं जनता था यान नैना दीदी खुद.

रजनी : अब चुप क्यों है? अभी तो बहुत बोल रही थी . अब एक डैम से शांत हो गयी.

नैना : वो ,,,, इसने ,,,, हँ तुझे तो बाद में देखती हूँ आ कर.

इतना कह कर नैना दीदी . बहार को निकलने लगी और निधि दीदी अपने रूम में चली गयी ऑफिस क लिए उन्हें रेडी होना था. मौसी भी अंदर चली गयी . तभी नैना दीदी दरवाज़े से वापिस भाग कर आयी और पीछे से hi मुझे गले से लगा कर मेरी गर्दन पर किश कर क दांतो से काट भी दिया.

अमित : आआह्ह्ह ककक

मैं गर्दन पर हाथ रख कर पलटा तो नैना दीदी ने मेरे होंठों पर होंठ रख कर किश करनी शुरू कर दी और एक हाथ से मेरे सर क बल पकड़ लिए .

नैना : उम्म्म्म ुम्माआअह्ह्ह थैंक यू वैरी मच. आ कर मिलती हूँ .

इतना कह कर नैना दीदी मुस्कुराती हुई बहार को भाग गयी . मैं दीदी की इस हरकत पर हैरान भी हुआ क मौसी और निधि दीदी क घर में होते हुए भी उन्होंने इतनी हिम्मत दिखा दी. मेरे चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ गयी और मैं अपनी गर्दन पर हाथ फेरता हुआ अंदर अपने कमरे की तरफ चल दिया.

मैंने ऊपर जा कर कमरे में अपना सामान रखा . तभी मेरे मोबाइल पर मोहित का फ़ोन आने लगा .

मोहित : कहाँ हो यार ? आज किसके घर हो ?

अमित : बड़ी मौसी क यहाँ हूँ , क्यों क्या बात है ?

मोहित : कुछ नहीं यार , अब 2 दिन हमारा तो एग्जाम है नहीं तो सोचा था थोड़ा रिलैक्स हो जाऊंगा पर ..... ाचा तू बता अभी क्या करने वाला है ? साथ में स्टडी करते हैं .

अमित : तू ठीक तो है न ??? आज स्टडी की बात कहाँ से आ गयी तेरे भेजे में ?

मोहित : ाचा अब तू भी मज़ाक करेगा ? जल्दी बोल आऊं लेने ? साथ में स्टडी करते हैं आज .

अमित : ाचा ठीक है अजा .

मोहित : चल मैं आधे घंटे में तेरे पास आ रहा हूँ. तैयार रहना . Bye

मोहित क मुँह से स्टडी की बात सुन कर मैं वाकई में हैरान था वर्ण उसे तो मीनल क सिवा कुछ पता hi नहीं होता था . मैंने अपना सामान सारा सेट कर क रखा क इतने में निधि दीदी ऑफिस ड्रेस में तैयार हो कर मेरे पास आ गयी . मैं एक पल दीदी को देखता hi रह गया. रबर बंद में बंधे उनके रेशमी बल और एक टाइट फिटिंग का कोट पेण्ट, पाऊँ में हील वाली जुटी . बिलकुल एक मॉडल hi लग रही थी दीदी.

निधि : क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : कक कुछ,,, कुछ नहीं . आप बहुत अछि लग रही हैं स

निधि : शरमाते हुए ) चलें ?

अमित : कहाँ ?

निधि : तुम्हे कॉलेज जाना है न ?

अमित : नहीं आज छुट्टी है . बस एग्जाम की तयारी करनी है.

निधि : फिर तो तुम ऑफिस भी चल सकते हो. वहां कोई तुम्हे डिस्टर्ब नहीं करेगा.

अमित : वो दीदी अभी मोहित का फ़ोन आया था. वो मुझे लेने आ रहा है . कह रहा था साथ में स्टडी करनी है.

निधि : हम्म्म ाचा ठीक है . मैं शाम को जल्दी वापिस आ जाउंगी. तुम्हे जो भी हेल्प की ज़रूरत हो बता देना. ......... bye

दीदी ने आगे बढ़ कर मुझे गले लगाया और bye कह कर चली गयी . उनके पास से आती महक अभी तक मेरी सांसो में थी. कुछ देर बाद रजनी मौसी भी कमरे में आ गयी .

रजनी : आज तुम्हे कॉलेज नहीं जाना ?

अमित : नहीं मौसी . आज और कल छुट्टी है इस लिए एग्जाम की तयारी करनी है.

रजनी : अछि बात है, अगर कुछ चाहिए तो बता दो मैं ला देती हूँ.

अमित : नहीं मौसी जी , मुझे कुछ नहीं चाहिए वैसे भी मोहित मुझे लेने आ रहा है.

इतने में बहार कार का हॉर्न बजा तो मैं बहार आ गया. सामने मोहित hi था. मौसी को बता कर मैं मोहित क साथ निकल गया .

अमित : अबे किधर जा रहा है ? हम तो घर जा रहे थे न ?

मोहित : मैंने कब कहा हम घर जा रहे हैं. मैंने तो साथ में स्टडी करने का कहा था .

अमित : तो हम जा कहाँ रहे हैं ? कहाँ जाना है स्टडी करने? हम स्टडी करने क लिए hi जा रहे हैं न , या कहीं और ?

मोहित : एक मिनट चुप बैठ न , स्टडी hi करनी है . एक्साम्स में फ़ैल नहीं होना मुझे .

मोहित की बात सुन कर मैंने और कोई सवाल नहीं किया. इतने में मोहित ने कार को एक घर क सामने रोक दिया . मैं यहाँ पहले कभी नहीं आया था. इस लिए हैरानी से देख रहा था .

अमित : ये किसका घर है यार ?

मोहित : अपनी hi क्लास मात का है. अब अंदर चल.

अमित : पर है कौन ?

मोहित ने बेल्ल बजे तो किसी ने गेट खोला. ये एक लड़की थी जिसे मैंने क्लास में देखा था . पर मेरी कभी उससे बात नहीं हुई थी .

मोहित : हाय सीमा , और क्या चल रहा है? इसे तो जानते हो न तुम? अपनी hi क्लास में है.

सीमा ने मोहित से हाथ मिलाया और मेरी तरफ अपना हाथ आगे किया. मैंने भी उससे हाथ मिलाया. सीमा हमारी क्लास की hi स्टूडेंट थी. देखने में ठीक थी पर वो भी क्लास में रेगुलर नहीं होती थी मेरी तरह इस लिए उसे मैंने काम hi देखा था .

सीमा : ऐसे हैरान क्यों हो रहे हो यार ? चलो अब अंदर आओ .

मैं तो पहले hi सीमा को देख कर और ऐसे मोहित क साथ उसके घर आ कर हैरान था. पर असली झटका तो सामने देख कर लगा मुझे.



उधर ऋतू सिंह आज भी खुश थी और आने वाले कल क लिए एक्ससिटेड भी थी. मंजू से उसे पता चल गया था क अमित क एग्जाम शुरू हो गए हैं और 2 दिन उसके छुट्टी क हैं. उसके बाद कब कब पेपर और छुट्टी है सब डिटेल ले ली थी ऋतू ने. आने वाला कल ऋतू की ज़िन्दगी क खास दिन था जिसे वो मन hi मन सोच रही थी क कैसे मनाएगी पर अमित क एग्जाम का सुन कर उसे थोड़ी मायूसी हुई मगर फिर भी वो खुश थी. इस दिन को खास बनाने क लिए ऋतू सिंह ने और भी कुछ सोच लिया था . इस लिए उसने एक ब्यूटी पारलर वाली लड़की को शाम को अपने सरकारी आवाज़ पर आने को कह दिया था. चाहे अभी बहुत वक़्त था इस सब में पर ऋतू फिर भी ऐसे एक्ससिटेड थी जैसे कोई लड़की पहली बार अपने बर्फ से अकेले मिलने को लेकर होती है . आज उसका मन बिलकुल भी काम में नहीं लग रहा था . मगर उसे ये पता नहीं था क उस पर नज़र राखी जा रही है और आने वाले वक़्त में ये उसके लिए नुकसान देह भी हो सकता है .
 
अपडेट 206



अमित आराम से सो रहा था मगर निधि को नींद कहाँ थी. वो तो बस अमित को देखती जा रही थी . उसकी सांसों को महसूस कर रही थी. उसको चैन से सोता देख कर निधि को और ज्यादा प्यार आ रहा था. निधि ने अमित क गाल पर हलके से किश किया और एक पल को रुक कर अमित को देखा पर वो अभी भी वैसे hi सो रहा था. तब निधि ने हिम्मत इकठी कर क अपने फूलों से नाज़ुक कोमल होंठ अमित क होंठ पर रख दिए. समय मनो वहीँ थम सा गया. निधि ऑंखें बंद किये जैसे सपनो की दुनिया में कहीं खो सी गयी. ये उसकी ज़िन्दगी की पहली किश थी. धड़कने इतनी तेज़ हो गयी क उसके अपने कानो से धड़कन सुनाई देने लगी. निधि को किश करना तो अत नहीं था पर वो इस एहसास को दिल से महसूस कर रही थी. बस अपने होंठ अमित क होंठों से चिपकाये बिना कोई और मूवमेंट किये . पर अमित तो सो रहा था. कुछ पल बाद जब निधि की धड़कन कुछ संभाली तो उसने पीछे हैट कर अमित को देखा जो वैसे hi सो रहा था.

निधि : कितने आराम से सो रहे हो मेरी नींदे चुराकर. क्या तुम्हे महसूस नहीं होता मेरा प्यार ? तुम कब समझोगे , क मैं तुम्हे कितना चाहती हूँ . तुम्हे मैं अपना सबकुछ मानती हूँ. एक बार मुझे अपने गले से लगा लो बस एक बार कह दो क तुम भी मुझे प्यार करते हो

‘ वह वह वह , तो आखिर हमारी दीदी को प्यार हो hi गया किसी से . अब तो आपको बताना hi पड़ेगा क वो कौन है वर्ण मैं सब को बता दूंगी क हमारी सबसे प्यारी संस्कारी निधि दीदी किसी को दिल दे बैठी हैं .’

निधि तो को रत की घटना यद् कर क जैसे उसी पल में खुद को महसूस करती सपनो में खोयी थी. उसे एहसास भी नहीं हुआ क ों करिश्मा उसके केबिन में आ गयी और उसे इस तरह छेड़ते हुए सपनो से बहार निकला . निधि क तो होश hi हूँ हो गए एक बार. वो इतनी हड़बड़ा गयी क उससे कोई बात hi नहीं हो प् रही थी .

निधि : मम मम मैं मैंने कब ,,,,, तट तू तू तुम कब आयी करिश्मा .

करिश्मा : छेड़ते हुए ) तभी जब आप अपने सपनो क राजकुमार क साथ सपनो में इज़हारे मुहब्बत कर रही थी .

करिश्मा की बात सुन कर निधि सेहम गयी. करिश्मा ने उसकी बातें सुन ली ये सोच कर hi निधि दर गयी क क्या होगा अगर किसी को पता चला क वो अपने hi छोटे भाई से प्यार करती है .

निधि : नं न नहीं आए आईसीई कोईई बात नहीं है .

करिश्मा : अब मुझसे क्या छुपाना दीदी . हम तो दोस्त भी हैं न. क्या मुझे नहीं बताएंगी आप उसके बारे में ?

निधि : मैंने कहा न ऐसा कुछ नहीं है . वो तो मैं एक मूवी का सन यद् कर रही थी

करिश्मा : तो मुझे भी बताओ वो कौन सी मूवी है जिसका सन आप यद् कर रही हैं . और कब देखि आपने ?

निधि : वो वो वो .,,.......

करिश्मा : कॉमन दीदी , मुझे तो बता सकती हो आप .

निधि : ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम सोच रही हो. वो असल में ....

करिश्मा : बताइये न ,,, आप तो बच्चों की तरह दर रही हैं .

निधि : प्लीज किसी से कहना मत तुम्हे मेरी कसम .

करिश्मा : तौबा इतनी सी बात क लिए कसम ??? ाचा ठीक है नहीं बताती . अब बताओ.

निधि : ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ . असल में मुझे एक लड़का ाचा लगता है है. और सच कहूं तो दिल hi दिल में मैं उसे बहुत पसंद करती हूँ. मगर उससे कहने की हिम्मत नहीं हो रही. उससे कैसे बात करूँ बस यही सोच रही थी.

करिश्मा : तो ये बात है . इसमें इतना सोचने वाली क्या बात है? आप को तो कोई मन कर hi नहीं सकता . बल्कि आप क पीछे तो लड़कों की वैसे hi लाइन लग सकती है. फिर भी आप सोच रही हैं. एक बार सीधा सीधा उसे बोल दो ,, देख लेना सर क बल आपके पीछे पीछे चलेगा .

निधि : ये सब इतना भी आसान नहीं है. मुझे तो ये भी नहीं पता क वो मुझे पसंद करता है या नहीं .

करिश्मा: दीदी अगर ऐसे hi सोचती रहोगी न तो ज़िन्दगी की गाड़ी प्लेटफार्म से आगे निकल जाएगी . और फिर क्या पता दोबारा वक़्त मिले न मिले. वैसे वो लड़का है कौन? आप कहें तो मैं आपकी कुछ मदद करूँ?

निधि : नं नहीं नहीं , तुम उसे नहीं जानती. मैं ,,, मैं खुद बात करुँगी .

करिश्मा : ाचा !!! जैसे आपकी मर्जी . पर अगर मेरी हेल्प की ज़रूरत हो तो बोल देना और मुझे एक बार मिलाना ज़रूर. पक्का कोई स्पेशल hi होगा जिसे आपने पसंद किया है.

निधि : ाचा बाबा मिलवा दूंगी पर अभी तो माफ़ कर . हम ऑफिस में हैं.

करिश्मा : अरे वह !!! अभी तो आप खुद hi सपनो में खोयी हुई थी और अब मुझे कह रही हैं. ाचा ठीक है ठीक है , मैं तो आपसे मिलने hi आयी थी. मैं अपने केबिन में जा रही हूँ. और अगर फिर से आपको सपने आने लगे न तो मैं फिर उसके बारे में जाने बिना कोई बात नहीं सुनूंगी .

इतना कह कर करिश्मा हस्ती हुई केबिन से बहार निकल गयी . निधि खुद पर hi हसने लगी . एक पल तो वो घबरा गयी थी क उसकी चोरी पकड़ी गयी पर शुक्र है मुँह से अमित क बारे में कुछ नहीं निकला . निधि को तो ऐसा लग रहा था जैसे उसने कोई बहुत बड़ा क्राइम कर दिया हो जिसे वो पूरी कोशिश से छुपा रही थी . अब फिर से निधि अमित को यद् कर क मुस्कुराने लगी

निधि : सबको खबर हो जाएगी पर लगता है तुम्हे hi नहीं होगी. पता नहीं कब समझोगे.

‘ ऐसे क्या देख रहे हो ? पहली बार देखा है क्या? मैंने hi यहाँ साथ में स्टडी करने का प्रोग्राम बनाया था. मेरे घर तो तुमने आना नहीं था. सोचा यहीं ठीक रहेगा. ‘

मैं जिसे देख कर चौंका था वो कोई और नहीं कल्पना थी. और अब नखरे से मुँह बनती मुझसे शिकायत कर रही थी .

अमित : आ ऐसी बात नहीं है. तुम कहती तो मैं वहां भी आ hi जाता. पर तुम तो पहले hi इंटेलीजेंट हो फिर तुम्हे हमारी क्या ज़रूरत?

कल्पना : देखा ( सीमा मोहित को देखते हुए ) महाराज कह रहे हैं क मुझे क्या ज़रूरत . साथ में स्टडी करने से क्या कोई नुकसान हो जायेगा क्या? वैसे भी ज़रूरत इन दोनों को है . हमारी तरह सीमा भी स्पोर्ट्स में है. इस लिए क्लासेज काम hi लगा पति है. और मोहित तो है hi अपनी लैला का मजनू. सो इन दोनों की मदद क लिए hi मैंने सोचा क हम सब साथ में स्टडी करते हैं . इससे इन दोनों की भी मदद हो जाएगी .

सीमा : कल्पना ठीक कह रही है अमित . मैं hi कल्पना से मदद मांगी थी . इसी ने सुग्गेस्ट किया क तुम दिनों को भी साथ मिला लिया जाये . तुम्हे भी तो ज़रूरत होगी न.

मोहित : इसे क्या होगी ? ये तो मैडम क घर जा कर कर hi लेता है सब तयारी. सबसे ज्यादा ज़रूरत तो मुझे है. अगर अचे मार्क्स न मिले तो डैड गुस्सा होंगे .

कल्पना: तो पहले सोचना चाहिए न. हम तो स्पोर्ट्स में हैं इस लिए क्लासेज छूट जाती हैं पर तुम ??? बस लैला क पीछे लगे रहते हो .

मोहित : ाचा , शुक्र है क तुम्हे कोई मजनू नहीं मिला वर्ण बेचारा तुम्हारे डिसिप्लिन वेक टार्चर से परेशां हो जाता.

कल्पना : क्या कहा ???

अमित : छोडो न यार ,, यहाँ पड़ने आये हो ता लड़ने? अगर यही सब करना है तो मैं वापिस जा रहा हूँ .

कल्पना : ऐसे कैसे जा रहे हो ? चुपचाप बैठ जाओ. और आज से रोज़ ऐसे hi यहाँ आना होगा जिस दिन एग्जाम नहीं होगा . सीमा कोई चाय कॉफ़ी का इंतज़ाम तो करो कुछ .

सीमा : अभी लती हूँ.

सीमा क जाते hi कल्पना मेरे पास खिसक आयी. पहले नीचे में सीमा थी मगर अब हम दोनों पास में थे.

कल्पना : कैसे हो ? गाओं से कब आये ?

अमित : ठीक हूँ और आज सुबह hi आया हूँ .

कल्पना : तुम सच में मेरे घर आ जाये अगर मैं कहती तो ?

अमित : तुम्हे अभी भी शक है ? वैसे ाचा hi किया यहाँ बुला कर. वर्ण वहां थोड़ा कम्फर्टेबले नहीं रहता.

मोहित : अब कुछ स्टडी का भी हो जाये या चैटिंग करनी है .

मोहित की बात से कल्पना ने फिर से मुँह बनाया और किताब खोल कर कुछ इम्पोर्टेन्ट क़ुएस्तिओन्स बताने लगी. सीमा सबके लिए कॉफ़ी ले आयी और हम साथ में बैठ कर स्टडी करने लगे . स्टडी में मैं और कल्पना सीमा और मोहित की मदद कर रहे थे. कब लंच का टाइम हो गया पता hi नहीं चला. लंच का टाइम हुआ तो मौसी का फ़ोन आने लगा. मोहित की भी बस हो गयी थी इस लिए वो भी अब ब्रेक छह रहा था. तो मैंने मोहित को घर छोड़ने को कह दिया. कल्पना और सीमा मुझे रुकने को कह रही थी पर कल आने का कह कर मैं मोहित क साथ निकल गया. मोहित ने मुझे रजनी मौसी क घर ड्राप किया और चला गया. मैं जब घर आया तो तो 2 बजने वाले थे . घर आते hi मौसी ने मुझे फ्रेश हो कर आने को कहा . मैं सीधा अपने कमरे में गया . जैसे hi मैंने कमरे में घुस कर दरवाज़ा बंद किया और पीछे पलटा तो नैना दीदी उछाल कर मेरी गॉड में चढ़ गयी और मुझे किश करने लगी . नैना दीदी ने मेरी कमर पर अपनी टंगे लपेट ली थी . अचानक हुए इस हमले को समझने में मुझे थोड़ा वक़्त लगा पर फिर मैं भी दीदी क होंठ चूसने लगा और मेरे हाथ अब उनकी नरम मुलायम गांड पर थिरक रहे थे .

नैना : उनममम उनममम यमममम उम्म्म्म आआह्ह्ह्हह्ह आज नहीं छोडूंगी उम्म्म्म उनममम उनममम

अमित : उनमममम उम्म्म्म उम्म्माःह्ह्ह्ह रुको तो दीदी उम्मम्मम्म उनममम यंममआजहठ मौसी घर में hi उम्म्म्म उम्म्म्म उम्म्म

नैना : उम्म्म्म उम्मम्माह्ह मुझे कुछ नहीं सुन्न्ना उम्मम्मम बहुत सताते हो न उम्म्म्म उनममम

नैना दीदी तो मेरी बात सुनने को भी तैयार नहीं थी. मैं भी क्या करता . मैंने दीदी को ऐसे hi गॉड में उठाये हुए दीवार से लगा लिया और उनकी गांड मसलते हुए एक हाथ उनके स्तनों पर रख कर उन्हें मसलना शुरू कर दिया .

नैना : उम्म्माःह्ह्ह कक्कक्क्स आअह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ आराम से आअह्ह्ह्ह कक्कक्स

अमित : अब क्या हुआ ? अभी तो बड़ी उछाल रही थी आप हाँ ?

नैना : तो क्या करूँ ? अपने आप तुम्हे मेरी यद् नहीं आती न? कोई परवाह नहीं है कक्कक्स आआह्ह्ह्ह धीरे परवाह नहीं न मेरी ? ककक

अमित : क्या आपको ऐसा लगता है ? क्या हमारे बीच बस यही एक रिश्ता है ?

मैं एक डैम से रुक गया था और दीदी की आँखों ने देखते हुए ये सवाल किया तो वो भी शांत हो गयी.

नैना : सॉरी , मुझे पता है तुम जान बुझ कर ऐसा नहीं करते पर क्या करूँ. इस दिल को कैसे समझों. तुम्हे कितना यद् करती हूँ तुम्हे पता भी है .

अमित : पता है , आपकी ऑंखें सब बता देती हैं. आप मुझे कितना प्यार करती हैं मैं जनता हूँ. पर आपको भी ये समझना होगा न क हमारे बीच जो रिश्ता है उसका वजूद कभी हो नहीं सकता. पर फिर भी मैं आपको वो प्यार देता रहूँगा जो आपको मुझसे चाहिए. क्यूंकि आप मुझे दिल से चाहती हैं. उम्मम्मम उम्म्म्म

नैना दीदी की आँखों में हलकी से नमी थी जो उनके दर्द को बयां कर रही थी. मैंने उनके होंठों पर जैसे hi अपने हो तह रखे तो वो मेरे गले में बहन दाल फिर से किश करने लगी . तभी मौसी की आवाज़ आयी जो खाने क लिए बुला रही थी. हम दोनों अलग हुए

अमित : हहह क्या कहती हो दीदी , आप तो पहले से भी ज्यादा स्वीट हो गयी हो .

नैना : मुझे मरते हुए ) बताऊँ तुझे ? चल जल्दी , साथ में खाना कहते हैं मुझे भी बहुत भूख लगी है .

हम दोनों नीचे आ गए और मौसी ने खाना लगा दिया . हम अभी खाना खा hi रहे थे क बहार का दरवाज़ा ज़ोर से खुला और कारन भैया सामने आ गए. मुझे देख कर उनके चेहरे पर थोड़ा गुस्से क भाव आ गए . मैंने उन्हें नमस्ते करने क लिए उठ hi रहा था क

कारन : बस बस , दिखावा करने की ज़रूरत नहीं. मैं अछि तरह जनता हूँ तू मेरे बारे में क्या सोचता है . मैं भी तुझे पसंद नहीं करता. जब तक यहाँ है तब तक मेरे मुँह मत लग्न .

इतना कह कर कारन भैया ऊपर चले गए . मुझे उनका ये रवैया बहुत बुरा लगा. आखिर मैंने उनके साथ ऐसा क्या किया था जो वो मुझसे इतना खफा रहते थे. मुझे बुरा लग रहा था और अब खाना भी ाचा नहीं लग रहा था .

नैना : मेरा हाथ दबाते हुए ) उसकी तरफ ध्यान मत दो. वो पता नहीं किस वजह से तुम से इतना उखाड़ा रहता है . मगर हम सब तो तुम्हे पसंद करते हैं न. देख लेना एक दिन इसे भी अपनी गलती का एहसास ज़रूर होगा .

मैंने नैना दीदी की तरफ देखा और उनका दिल रखने क लिए हलकी स्माइल दी. रजनी मौसी ने शायद कुछ नहीं सुना था . वो किचन में थी और ये सब कुछ hi पलों में हुआ था. जैसे तैसे बेमन से मैं बाकि का खाना ख़तम किया और उठ कर अपने कमरे में चला गया . नैना दीदी भी मेरे पीछे आयी पर मैंने उन्हें यही कहा क मुझे कुछ देर आराम करना है तो वो चली गयी . फिर मैं कुछ देर सोचता रहा और राधा का फ़ोन आ गया. कुछ देर उससे बात हुई तो दिल हल्का हो गया और फिर मैंने रीमा से भी बात की. उसके बाद मैं कुछ देर की लिए सो गया फिर पड़ना भी था.

मैं सो रहा था क मुझे अपने होंठो पर गिला गिला एहसास हुआ जिस से मेरी आंख खुल गयी. देखा तो नैना दीदी का हसीं चेहरा आँखों क सामने था. और वो प्यार से मुझे किश कर रही थी . मैं भी उनका साथ देने लगा.

नैना : उम्म्म उम्म्म उम्म्माह्ह्ह उठ गए? चलो माँ ने चाय बनायीं है और तुम्हे बुला रही हैं नीचे .

अमित : आप न किसी दिन मरवा देंगी.

नैना : दरवाज़ा लॉक है , इतनी भी लापरवाह नहीं हूँ बच्चू . वैसे कैसा लगा ?

अमित : हम्म्म बहुत hi ाचा. आप अगर ऐसे hi प्यार करती रहेंगी तो मेरी आदत बिगड़ जाएगी.

नैना : ाचा !! तो क्या करोगे फिर ?

अमित : फिर आपको मीठा दर्द दूंगा और आपकी चल बिगड़ जाएगी .

नैना : बड़े आये चल बिगड़ने वाले. देख लुंगी तुम्हे रत को कौन किसकी चल बिगड़ता है .

अमित : ाचा ! आप मुझे चैलेंज कर रही हैं ?

नैना : चैलेंज hi समझ लो , अभी उठो वर्ण माँ यहाँ आ जाएगी . ..... बुद्धू राम

नैना दीदी ने इतना कह कर मेरे होंठों जल्दी से चूमा और उठ कर जल्दी से दरवाज़ा खोल कर नीचे भाग गयी. मैं भी मुस्कुराता हुआ उठा और हाथ मुँह धो कर नीचे आ गया . मौसी और नैना दीदी क साथ मैंने चाय पि और फिर कुछ देर बाद मैं अपने कमरे में वापिस आ कर फिर से पड़ने लगा. स्टेडियम से कुछ दिन क लिए छुट्टी थी. इस लिए कहीं जाना तो था नहीं सो आराम से पड़ने बैठ गया. पड़ते पड़ते कितना टाइम गुज़र गया पता hi नहीं चला. फिर निधि दीदी मेरे रूम में आ गयी.

निधि : तो पड़े हो रही है , गुड . मैं कुछ मदद करूँ.

अमित : आप आ गयी ? ये क्या ? आपने अभी चेंज नहीं किया ?

निधि : वो भी कर लेती हूँ. सोचा पहले देख कर तो आऊं क्या कर रहे हो .

अमित : मैं तो बस रेविसिओं कर रहा था. आप आराम कीजिये लगता है अभी आ रही हैं ऑफिस से.

निधि : हम्म , पर अभी मेरी ड्यूटी ख़तम नहीं हुई .

अमित : मतलब?

निधि : मतलब मैं तो अपने बॉस की पर्सनल सेक्रेटरी हूँ न. तो अब बॉस की बाकि कामो में भी हेल्प तो करनी पड़ेगी न. अब बॉस एग्जाम की तयारी कर रहे हैं तो इसमें भी मुझे हेल्प करनी पड़ेगी न.

अमित : दीदी ,,,, मैंने कितनी बार कहा है आप ऐसा मत कहा करो. फिर भी आप ....

निधि : मुझे ाचा लगता है , मैं बस अभी आयी चेंज कर क

दीदी स्माइल करती हुई चली गयी और कुछ देर बाद चेंज कर क वापिस आ गयी और मेरे साथ hi बीएड पर चढ़ कर बैठ गयी. दीदी हमेशा hi मेरे साथ प्यार से पेश आती थी. वो सच में सब से अलग थी और सब से ज्यादा प्यार करने वाली . दीदी ने मेरी किताब ली और खुद hi मेरे लिए इम्पोर्टेन्ट क़ुएस्तिओन्स देखने लगी और मुझे टिप्स देने लगी. इस दौरान मंजू मम का फ़ोन भी आया और उन्होंने मेरा हलचल पूछा . मेरे न आने पर वो नाराज़ नहीं थी. बल्कि उन्होंने कहा क ाचा है मैं खुद स्टडी करूँ वैसे भी उन्हें पेपर चेक करने थे साथ में . इसी तरह रत हो गयी. और खाने का वक़्त हो गया. डिनर पर मौसा जी भी मिले पर कारन भैया नहीं थे. डिनर क बाद नैना दीदी मेरे रूम में आ गयी .

अमित : दीदी आप यहाँ ?

नैना : आज नहीं छोड़ने वाली तुम्हे . सुबह से बहुत स्टडी कर ली अब कुछ प्रैक्टिकल करते हैं.

‘ नैना तुम यहाँ ? ‘ हम दोनों hi चौंक गए. क्यूंकि दरवाज़े पर निधि दीदी कड़ी थी .

नैना : वो दीदी वो मैंने सोचा अमित अकेला स्टडी कर रहा है तो क्यों न मैं भी साथ में स्टडी कर लूँ. इसी लिए ...

निधि : अछि बात है. तुम्हारी बुक कहाँ है? जाओ ले आओ , मैं भी इसी लिए आयी हूँ क अमित को थोड़ा हेल्प कर सकूँ.

नैना : दीदी आप रेस्ट करो न , मैं हेल्प कर दूंगी इसकी.

निधि : तुझे अपनी तैयारी नहीं करनी क्या ? चल जा बुक ले आ. मैं यहीं हूँ तुम दोनों की हेल्प कर दूंगी.

नैना दीदी मायूस हो कर उठी और कमरे से बहार निकल गयी . और जाते जाते मुझे डनहीं कह रही थी. मुझे उनकी शकल देख कर हंसी आ गयी. जिससे वो मुझे गुस्से से देखती हुई निकल गयी. और फिर से निधि दीदी मेरे साथ आ कर बैठ गयी और मेरी किताब पकड़ कर बैठ गयी. नैना दीदी किताब लेकर वापिस आ गयी और हम पड़ने बैठ गए. रजनी मौसी इस दौरान हमारे लिए दूध ले कर आयी. रत करीब 10:30 बजे मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगी मैंने देखा तो ऋतू का फ़ोन था.

अमित : hello

ऋतू सिंह : कैसे हो ?

अमित : ाचा हूँ आप सुनाइए ?

ऋतू सिंह : कल सुबह 6 बजे क्सक्सक्सक्स जगह पर मुझे मिलना. हमें कहीं जाना है .

अमित : क्या बात है ? कोई ज़रूरी काम है ?

ऋतू सिंह : बहुत ज़रूरी , बाकि सब कल बताउंगी जब मिलोगे. मैं सुबह इंतज़ार करुँगी देर मत करना .

अमित : ठीक है मैं पहुँच जाऊंगा .

ऋतू सिंह : आना ज़रूर ,,,,bye ......

इतना कह कर ऋतू ने फ़ोन काट दिया. मैं ज्यादा सवाल इस लिए नहीं पूछे क्यूंकि दीदी अभी पास में hi थी. पर मैं सोच में पद गया आखिर क्या काम हो सकता था ऋतू सिंह ने जो इतनी सुबह मुझे आने को कहा.

निधि : इतनी रत को किसका फ़ोन था ?

अमित : एक दोस्त था, कल सुबह उसने बुलाया है .

नैना : दोस्त hi था न ?

निधि : और कौन होगा ? वो कह रहा है न .

नैना दीदी ने मेरी तरफ घूर कर देखा जैसे उन्हें मेरी बात पर यकीन न हो. खैर कुछ देर और हमने पड़े की फिर नैना दीदी सोने क लिए अपने कमरे में चली गयी. वो तो इस उम्मीद में थी क शायद दीदी चली जाएगी पर दीदी तो जैसे यहीं सोने वाली थी और हुआ भी यही.

निधि : चलो अब बस करो, अब रेस्ट भी करलो.

मेरे हाथ से दीदी ने किताब लेकर सारा सामान साइड में रख दिया .

अमित : ok दीदी गुड नाईट.

निधि : किताब बंद करते hi तुम्हे नींद भी आ गयी?

अमित : आपको भी तो आयी होगी न? आप भी सो जाइये जा कर.

निधि : मैं आज यहीं सोने वाली हूँ तुम्हारे साथ.

अमित : मेरे साथ ? पर ये बीएड तो सिंगल है . आप कैसे सोयेंगी?

निधि : तो क्या हुआ ? सो जायेंगे आराम से जैसे कल सोये थे. चलो अब लेट जाओ यहाँ .

अब मैं भला क्या कहता. और कल की तरह हम दोनों आज भी करवट क बल सो गए और दीदी ने आज भी मेरी बाजु का तकिया बना लिया.

उधर रजनी अपने कमरे में अपने पति क साथ लेती हुई थी पर उसे नींद नहीं आ रही थी. बार बार उसका मन उसे अमित क पास चलने को कह रहा था. जब से रीता क घर अमित क साथ उसने खुल कर मज़ा लिया था उसके मन में अमित क साथ फिर से वो सब करने की ललक थी. मगर एक पर्दा था अभी भी . क्यूंकि दमित को तो पता भी नहीं था क उसने अपनी बड़ी मौसी को भी छोड़ लिया था गलती से. मगर रजनी का मन बार बार अमित क तगड़े हथियार को फिर से अपने अंदर समाने को बेचैन था. रजनी वो सब यद् कर क गरम हो रही थी और खुद hi अपने हाथों से अपने स्तनों और छूट को रगड़ रही थी. उसे समझ नहीं आ रहा था क वो अमित क साथ फिर से वो सब कैसे करे. इसके लिए उसे फिर से रीता की मदद चाहिए थी .



वहीँ ऋतू सिंह भी शाम को अपनी पूरी बॉडी की वैक्स करा चुकी थी और कुछ फेसिअल वगैरह भी उसने करवाया था . अब उसे इंतज़ार था तो सुबह का मगर रत थी क काट नहीं रही थी. वो जाने क्या क्या सोच क बैठी थी अपनी ज़िन्दगी क इम्पोर्टेन्ट डे को यादगार बनाने क लिए . अब ये दिन कैसे यादगार होने वाला था ये तो आने वाला वक़्त hi बता सकता था .
 
अपडेट 207



सुबह जब मेरी आंख खुली तो निधि दीदी का चेहरा बिलकुल मेरे चेहरे क करीब था. आज वो कुछ ज्यादा hi मेरे साथ चिपकी हुई थी. उनकी बॉडी आधी मेरे ऊपर hi थी. यानि क उनकी एक बाजु और तंग मेरे ऊपर थी. और तो और मुझे अपनी छाती पर उनके स्तन भी फील हो रहे थे. मैंने थोड़ा सा हिलने की कोशिश की तो मुझे अपने लैंड पर दबाव महसूस हुआ . मैंने देखा तो दीदी की दायीं तंग का घुटना ठीक मेरे लैंड क ऊपर था और मेरा लैंड भी पूरा अकड़ा हुआ था. मैंने जल्दी से खिसक कर अपना लैंड दीदी की तंग से दूर किया. अगर कहीं दीदी को पता चल जाता तो वो क्या सोचती मेरे बारे में . ये तो ाचा हुआ दीदी सो रही थी. मैंने आराम से दीदी को बिना हिलाये उनके नीचे से निकल गया. बीएड से उतर कर मैंने दीदी को देखा तो वो बहुत hi प्यारी लग रही थी. एक तंग बेंड होने की वजह से उनके कूल्हे कुछ ज्यादा hi नुमाया हो रहे थे. नाईट सूट में कैद उनका जिस्म लेजर ढह रहा था. शायद सर्दी की वजह से वो कुछ ऐंठ रही थी और कम्बल भी उनके ऊपर ुरता हुआ था. मैंने जल्दी से उन्हें कम्बल से ढाका और खुद पर लाहनत भेजी क मैं दीदी को किस नज़र से देख रहा था. अभी 5:30 hi हुए थे मैं जल्दी से हाथ मुँह धो कर तैयार हो गया और इतने में मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने देखा तो ऋतू का hi फ़ोन था . मैंने जल्दी से फ़ोन उठाया .

ऋतू : गुड मॉर्निंग, कहाँ हो ? निकले क नहीं अभी?

अमित : गुड मॉर्निंग, मैं बस निकल hi रहा हूँ .

ऋतू : चलो जल्दी से पहुंचो मैं आ रही हूँ.

इतना कह कर ऋतू ने कॉल काट दी. मैं जैसे hi पलटा तो निधि दीदी भी उठ कर बैठ गयी थी . मुझे देख कर वो मुस्कुराने लगी .

निधि : गुड मॉर्निंग, मुझे जगाया क्यों नहीं ?

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , वो आप चैन से सो रही थी तो मैंने डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा . आप आराम कीजिये मैं ज़रा अपने दोस्त से मिल कर अत हूँ .

निधि : ऐसे कैसे , न कोई चाय नाश्ता न कुछ और. और जाओगे कैसे ? बाइक तो गाओं में है न ? चलो मैं तुम्हे अपनी कार में ले चलती हूँ.

अमित : अरे नहीं दीदी आप कहाँ जाएँगी. मैं अपने दोस्त से मिलने जा रहा हूँ . आप वहां क्या करेंगी ?

निधि : मगर जाओगे कैसे ? एक काम करो कारन की बाइक ले जाओ .

अमित : पर भैया .....

निधि : उसकी चिंता मत करो. वैसे भी उसके कॉलेज टाइम तक तुम आ hi जाओगे .

निधि दीदी ने मुझे कारन भैया की बाइक की चाबी दे दी. मैं चाहता तो नहीं था पर इस वक़्त और कोई ऑप्शन भी नहीं थी . बाकि सब अभी सो रहे थे. मैं भी लेट नहीं होना चाहता था तो जल्दी से बाइक ले कर निकल गया . कोई 10 मिनट्स में hi मैं वहां पहुँच गया जहाँ ऋतू ने कहा था . मुझे अभी 2 मिनट्स hi हुआ थे वहां खड़े हुए क एक बड़ी गाड़ी मेरे पास से निकल कर गली क अंदर कड़ी चली गयी.

‘ तो जनाब थान बैठे हैं ‘ मैं आवाज़ सुन कर पीछे पलटा तो सामने ऋतू कड़ी थी जिसे देख कर मैं बस देखता hi रह गया . पिंक और वाइट मैचिंग का टाइट फिटिंग वाला सूट पहने वो मुस्कुरा रही थी. मैं ऋतू को सर से पाऊँ तक देखने लगा. मैंने आज तक उसे जैसे भी देखा था वो उससे बिलकुल अलग लग रही थी. स्ट्रैट खुले बल चमकता गोरा मुखड़ा. बड़ी बड़ी ऑंखें जो काजल लगाने से और भी बड़ी लग रही थी . गुलाबी होंठ और गले में दुपट्टा. हाथों में कांच की चूड़ियां. पूरी फिटिंग क सूट में से पहाड़ की तरह सर उठाये उसके चुके पतली कमर और नीचे टाइट सलवार ( पजामी) जिसमे से उसकी जांघें अपनी शेप दिखा रही थी .

‘ hello मिस्टर , ऐसे क्या देख रहे हो ? कुछ बोलोगे भी ?’ ऋतू सिंह ने मेरे चेहरे क सामने चुटकी बजाते हुए कहा. तो मैं भी होश में वापिस लौटा .

अमित : अआप .....

ऋतू : क्या ? बोलो भी कुछ .

अमित : आज आप बिलकुल अलग लग रही हैं. बहुत hi ....

ऋतू : क्या

अमित : बहुत hi खूबसूरत लग रही हैं .

ऋतू : शरमाते हुए ) अब चलो भी हमें जाना है .

अमित : कहाँ जाना है ? और आप अकेली ?

ऋतू : वो बाद में बताती हूँ. और मैं अकेली कहाँ हूँ. तुम हो न साथ में . अब जल्दी करो वर्ण कोई देख लेगा.

ऋतू क कहने पर मैंने जल्दी से बाइक स्टार्ट की और ऋतू मेरे पीछे बैठ गयी. उसने दुपट्टा अपने चेहरे पर अचे से ओढ़ लिया ताकि चेहरा नज़र न आये. और हम दोनों चल पड़े.

अमित : हमें जाना कहाँ है?

ऋतू : शहर से बहार की तरफ. वहां कुछ दूरी पर एक मंदिर है बस वहीँ जाना है.

अमित : पर वहां क्यों ? कोई खास काम है क्या ?

ऋतू : हाँ है , अब क्या तुम सवाल hi पूछते रहोगे? पुलिस में मैं हूँ या तुम?

ऋतू की बात पर मैं चुप कर गया. मैं उससे बहुत कुछ पूछना छह रहा था . मेरे दिमाग में बहुत साडी बातें चल रही थी. पर वो गुस्सा न कर ले इस लिए चुप हो गया. मेरे चुप हो जाने से ऋतू खुद hi बोलने लगी .

ऋतू : अब ऐसे खामोश क्यों हो गए हो? कोई तो बात करो .

अमित : अब मैं कुछ पूछता हूँ तो आओ जवाब नहीं देती .

ऋतू : ाचा चलो पूछो

अमित : आप अकेली क्यों आयी हैं? और ऐसे मुँह क्यों छुपा रही हैं?

ऋतू : अकेली इस लिए आयी हूँ क मैं नहीं चाहती क किसी को पता चले क मैं तुम्हारे साथ हूँ और मुँह भी इसी लिए छुपा रखा है .

अमित : पर आप छुपा क्यों रही हैं ?

ऋतू : तो क्या सबको बताऊँ क मैं करती फिर रही हूँ? लोग क्या क्या बातें बनाएंगे जानते हो न? कितने सैलून से सिर्फ नौकरी को hi वक़्त दे रही थी आज पहली बार अपने लिए वक़्त निकला है इस सर्विस में से. और मैं नहीं चाहती क इस पल को कोई डिस्टर्ब करे.

अमित : शरारत से ) लगता है आपके इरादे नेक नहीं हैं ?

ऋतू : वो तो तुम्हे पता चल hi जायेगा बच्चू. ज्यादा खुश मत हो. जानते हो न मैं पुलिस वाली हूँ . अंदर कर दूंगी .

अमित : ाचा !!! किसे अंदर कर देंगी .

ऋतू : मरते हुए ) बदमाश !!! तुम क्या कह रहे हो सब जानती हूँ. लगता है तुम्हारी अचे से खबर लेनी hi पड़ेगी . . ...... वैसे एक बात पूछूं ?

अमित : पूछिए

ऋतू : मैं कैसी लग रही हूँ ?

अमित : मैं नहीं बताऊंगा .

ऋतू : क्यों ?

अमित : फिर आप गुस्सा कर जाएँगी और मुझे अंदर कर देंगी .

ऋतू : बताओ न ,, मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी प्रॉमिस .

अमित : सच कहूं तो आज बिलकुल hi अलग लग रही हो . इस्कूल ऐसे जैसे आप अभी भी कॉलेज स्टूडेंट हो. आप वाकई में बहुत खूबसूरत हैं. आज तक आपकी ये सुंदरता कहीं छिपी हुई थी. और आज सामने आयी है. कुछ तो अलग है जो मैं समझ नहीं प् रहा हूँ . पर जो भी है आज आप सच में स्वपन सुंदरी लग रही हो. आपको इस रूप में देख कर कोई भी लट्टू हो जायेगा.

ऋतू : बाइक रोको

अमित : क्या हुआ ? आपको मेरी बात अछि नहीं लगी ? सॉरी

ऋतू : मैंने कहा बाइक रोको .

ऋतू क एक डैम से ऐसे मुझे बाइक रोकने को कहा तो मुझे लगा क ऋतू बुरा मन गयी है. मैंने बाइक को साइड में रोक दिया . अब तक हम शहर से बहार आ चुके थे. सर्दियों की वजह से रोड पर लोग न क बराबर थे . मैंने बाइक रोकी तो ऋतू बाइक से उतर गयी . उसे देख मैं भी बाइक से उतर गया .

ऋतू : तो मैं स्वपन सुंदरी लग रही हूँ तुम्हे हाँ ? मुझे देख कर कोई भी लट्टू हो जायेगा हाँ ? जानते हो न मैं कौन हूँ?

अमित : सॉरी अगर आप को बुरा लगा हो तो. मैंने पहले hi कहा था आप बुरा मन जाएँगी .

ऋतू : तुम तो नहीं हुए लट्टू

अमित : मतलब

मुझे ऋतू की बात समझ नहीं आयी. फिर क दम से ऋतू क गंभीर चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उसने वो किया जो मैं सोच भी नहीं सकता था. खुली सड़क पर ऋतू ने मेरे सर क पीछे हाथ रख क मेरे बल पकडे और मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर किश करना शुरू कर दिया . मेरी ऑंखें बड़ी हो गयी मैं ऋतू को hi देख रहा था पर वो ऑंखें बंद किये बस मुझे किश करती जा रही थी . मैं भी फॉर ऋतू का साथ देने लगा और उसके होंठों को चूसने लगा . मैंने भी ऋतू की पीठ पर हाथ रख लिए और उन्हें सहलाते हुए उसकी कमर तक चला गया. ऋतू ऑंखें बंद किये किसी दुनिया में hi खोई लग रही थी. हम इस वक़्त कहाँ हैं इस बात की उसे कोई परवाह नहीं थी. तभी हमारे पास से एक ट्रक गुज़ारा तो उसकी आवाज़ से ऋतू ने किश तोड़ी. मैं उसे hi देख रहा था तो शर्मा कर उसने नज़रें झुका ली .

अमित : ये क्या था ?

ऋतू : पूछ क्या रहे हो ? तुम्हे नहीं पता ?

अमित : पता तो है मगर ये सब क्यों ?

ऋतू : मेरा दिल किया बस,, अब चलो यहाँ सड़क पर hi खड़े रहना है क्या ?

फिर से ऋतू आर्डर देने वाले लहजे में बोलने लगी. और खुद hi बाइक क पीछे बैठ गयी . इस बार वो लड़कों की तरह दोनों तरफ पाऊँ कर क बैठी थी . मैंने फिर से बाइक स्टार्ट की और हम चल पड़े. बाइक क चलते hi ऋतू मेरे साथ लवर की तरह चिपक कर बैठ गयी. उसने अपने दोनों हाथ मेरी छाती पर कास लिए और मेरी गर्दन पर फिर से किश कर दी. ऋतू आज अलग hi रंग दिखा रही थी जिस से मैं शॉक हो रहा था.

अमित : आज हुआ क्या है आपको ? आप ऐसी भी हो सकती हैं मैंने सोचा नहीं था .

ऋतू : क्यों ? पसंद नहीं आया क्या मेरा ये रूप ? मुझे कुछ नहीं हुआ है . ये जो भी हो रहा है इसकी वजह सिर्फ तुम हो .

अमित : मैं ? वो कैसे ?

ऋतू : तुमने मेरे अंदर सोये हुए प्यार क एहसास को जगा दिया है. और जो ये ऋतू तुम आज देख रहे हो ये वही है जो इस सर्विस में आने से पहले थी. तुमने कहा था न क मुझे अपने लिए भी जीना चाहिए . तो बस वही कर रही हूँ . मेरी ज़िन्दगी में सब से इम्पोर्टेन्ट अब तुम हो गए हो. ी ऍम इन लव . मैं जिस प्यार को खो चुकी थी वो मुझे तुम में मिला है. मैं इसी बात से परेशां थी क अगर मैंने तुमसे प्यार किया तो मेरी बेस्ट फ्रेंड मंजू क साथ कहीं ये धोखा न हो जाये. पर जानते हो ? मंजू ने खुद मुझे कहा है क मैं तुमसे प्यार कर सकती हूँ वो बिलकुल भी बुरा नहीं मानेगी. अब कहो तुम्हे मंज़ूर है न ?

अमित : क्या ???? आपने मम से बात कर ली ? और वो मन भी गयी ? पर ये सब ,,,, आप जानती हैं न क मैं. ......

ऋतू : मैंने तुमसे कुछ माँगा क्या ? मैं जानती हूँ इस रह की कोई मंज़िल नहीं पर काम से काम साथ तो दे सकते हो न जब तक वक़्त और किस्मत हम पर मेहरबान हो. मैं अकेले hi ज़िन्दगी गुजरने का फैसला कर चुकी थी और फिर तुम आ गए. नफरत से शुरू हुई मुलाकात अब प्यार तक पहुँच चुकी है. तुम चाहो तो मन भी कर सकते हो . मैं तुम्हे इसके लिए फाॅर्स नहीं करुँगी . यहीं रोक दो

ऋतू ने गंभीर लहजे में बात करते हुए मुझे बाइक रोकने को कहा तो मैंने बाइक रोक दी. सामने देखा तो एक बड़ा सा मंदिर था जो कुछ पुराण सा लग रहा था. कई लोग वहां माथा टेकने आ जा रहे थे. बाइक से उतारते hi ऋतू ने दुपट्टा अचे से अपने सर पर ले लिया और ख़ामोशी से कड़ी हो गयी. ऋतू की आँखों में अभी भी वही सवाल था जो उसने मुझसे पूछा था. मैं सोचने लगा इस बारे में. मैं तो पहले hi ऋतू क साथ वो सब कर चूका था जो किसी भी रिश्ते में अंतिम स्थान होता है पर अब बात फीलिंग्स की थी. जो पहले नहीं थी . ऋतू की मैं दिल से इज़्ज़त करता था और उससे प्रभावित भी था. अब ऐसे में उसका दिल मैं कैसे तोड़ सकता था. वैसे भी किसी औरत की आँखों में आंसुओं की वजह बनना मुझे कभी भी ाचा नहीं लगता था . ऋतू ख़ामोशी से कड़ी थी मेरी तरफ से कोई जवाब न पाकर उसने नज़रें झुका ली .

अमित : आपको क्या लगता है क आप बड़ी अफसर हैं तो जो चाहेंगी वो करेंगी ? जब चाहे उठा कर अंदर दाल देंगी जब चाहे किसी को भी टार्चर करेंगी , कोई कुछ नहीं करेगा ? प्यार दिल से होता है मैडम ओहदे से नहीं . आप होंगी बड़ी अफसर पर मुझे उससे क्या . वैसे आप यहाँ मुझे किस लिए लेकर आयी हैं?

ऋतू ने मेरी तरफ नज़र उठा कर देखा तो मैंने भी चेहरे पर सख्ती क भाव रखे. ऋतू की आँखों में नमी आ गयी.

अमित : बोलो , बोलती क्यों नहीं ? किस लिए लायी हो मुझे यहाँ पर ?

ऋतू : नाम आँखों से ) आज मेरा बर्थडे है , बहुत सैलून से मैंने अपना बर्थडे नहीं मनाया . आज क दिन मंदिर आती हूँ सोचा था आज मैं तुम्हारे साथ ........

अमित : पहले नहीं बता सकती थी ..... खामखाह आँखों में आंसू ला दिए न मैंने . मेरी टाइमिंग hi गलत है मज़ाक भी करूँ तो उल्टा पद जाट है .

ऋतू हैरानी से मुझे देखने लगी .

अमित : ऐसे क्या देख रही हो ? मज़ाक कर रहा था मैं. आप जैसी खूबसूरत लड़की का दिल दुख कर मुझे पाप का भागी बनना है क्या ? विश यू वैरी हैप्पी बर्थडे. एंड ी लव यू तू

ये सुनते hi ऋतू कास क मुझ से लिपट गयी और वहीँ सब क सामने मेरे गाल पहलों की तरह चूमने लगी. ऋतू की आँखों में आयी नमी अब आंसू बन कर बहने लगी थी मगर ये ख़ुशी क आंसू थे.

अमित : कण्ट्रोल ,,, कण्ट्रोल ,,, मरवाओगी क्या ? सब देख रहे हैं .

ऋतू को मेरी बात सुन कर एहसास हुआ क हम कहाँ हैं तो वो जल्दी से अलग हो गयी. शुक्र ज्यादा लोग नहीं थे पर जो थे वो देख कर है रहे थे . ऋतू की नज़र उन पर पड़ी तो वो खुद hi शर्मा गयी . ऋतू ने जल्दी से अपना दुपट्टा सर पर ठीक से सेट किया और तेज़ कदमो से शर्माती हुई मंदिर क पास बानी एक दुकान पर चली गयी और कुछ फूल और प्रसाद लेने लगी. मैंने तन तक बाइक को साइड में लगा दिया. जब तक मैं वापिस आया ऋतू सामान ले चुकी थी और सीढ़ियों क पास कड़ी थी. मेरे आते hi वो मेरे साथ शर्माती मुस्कुराती चलने लगी. ऋतू क चेहरे पर फिर से वही स्माइल लौट आयी थी जो पहले थी बल्कि उससे भी ज्यादा और अब तो वो शर्मा भी रही थी. हम साथ में मंदिर गए और पंडित जी से ऋतू ने पूजा करवा कर आशीर्वाद भी लिया. पंडित जी हमें कपल समझ रहे थे और हमारी जोड़ी बानी रहे ऐसा आशीर्वाद भी दिया . ऋतू का शर्माना और भी बाद रहा था . फिर हम मंदिर से बहार आये और बाइक पर बैठ कर वापिस चल पड़े .

अमित : एक बात पूछूं ?

ऋतू : पूछो

अमित : मंदिर तो शहर में भी हैं फिर हूँ इतनी दूर किस लिए आये हैं ?

ऋतू : बताती हूँ ज़रा बाइक को इस तरफ मोड़ लो .

सड़क से साइड में जाते एक कच्चे रस्ते पर ऋतू ने बाइक मोड़ने को कहा तो मैंने बाइक उधर घुमा ली कुछ दूर जा कर ऋतू ने फिर से बाइक मोड़ने को कहा . इस तरफ कोई रास्ता नहीं था . पर मैंने उसके कहने से बाइक मोड़ ली . हम बिलकुल जंगल जैसी वीरान जगह पर थे.

ऋतू : बस यहीं रोक दो .

मैंने बाइक को रोका तो ऋतू बाइक से उतर कर कुछ दूर चली गयी और मुझे भी आने को कहा. मैं उसके पास चला गया .

ऋतू : तो मेरा मज़ाक उदा रहे थे तुम . अब बताती हूँ तुम्हे .

इतना कह कर ऋतू मुझ पर झपट पड़ी और उछाल कर मेरी गॉड में चढ़ गयी. मैंने मुश्किल से उसे संभाला और उसको कमर से थम कर संभल लिया. ऋतू ने मेरे होंठ फिर से अपने होंठों में जकड लिए और स्मूच करने लगी . मैं भी उसका साथ देने लगा . मगर इस बार हम एक वीरान जगह में थे जहाँ किसी क आने का दर नहीं था इस लिए ऋतू रुकने की बजाये और भी वीलडली किश किये जा रही थी. अब मैं कहाँ पीछे रहने वाले था. मैंने भी किश करते हुए अपने हाथ ऋतू क कूल्हों पर रख दिए और उसे मसलने लगा . हम दोनों का किश करना वाइल्ड होता जा रहा था. कुछ hi पलों में मेरे अंदर गर्मी इतनी बढ़ गयी क लैंड तन कर लोहे की रोड बन गया . मैंने ऋतू को वही एक पेड़ से लगा लिया और अपने हाथ आगे ला कर ऋतू क सख्त स्तनों पर रख कर उन्हें दबाने लगा .

ऋतू : उम्मम्मम उनमममम उम्मम्माह्ह्ह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह कक्कक्स हहहह कक्कक्क्स उम्मम्मम ी लव यू लव ोुउउउउउ. उम्मम्मम्म उम्मम्मम

ऋतू का चेहरा लाल गुलाबी हो गया था और आँखों में भी लाल डोरे आ गए थे. हम दोनों hi गरम हो गए थे.

ऋतू : उम्म्माह्ह्ह लव में कक्कक्स लव में फानन उम्मम्मम्म

ऋतू खुद hi अब मेरे हाथों पर अपने हाथ रखती अपने बूब्स को मसलना रही थी और कभी मेरी छाती मेरी गर्दन को सेहला रही थी. हम दोनों इस जंगल में मंगल कर रहे थे .मैंने अपना हाथ कमीज क अंदर दाल कर ब्रा में कैद ऋतू क स्तनों पर रख दिया जिससे ऋतू की एक और तेज़ सिसकी निकल गयी . थोड़ी देर और ऐसे hi हम करते तो यहीं मैं ऋतू क कपडे खोल कर चूड़ी शुरू कर देता पर ऋतू ने मुझे रोक दिया .

ऋतू : प्लीज स्टॉप ,,, स्टॉप वर्ण मैं रोक नहीं पाऊँगी कक्कक्कक्स

मैं वहीँ रुक गया और ऋतू से अलग हो गया. ऋतू की नज़र मेरे लोअर पर पड़ी जहाँ तम्बू बन चूका था .

ऋतू : सॉरी ,,, पर ये जगह ठीक नहीं .

अमित : it’s ok , चलो चलते हैं .

मैं पीछे मुड़ने लगा तो ऋतू ने मेरी T-shirt कंधे से पकड़ कर खींचते हुए मुझे पीछे घुमाया .

ऋतू : प्लीज बुरा मत मन्ना , मैं तुम्हारे साथ अपना बर्थडे मानना चाहती हूँ मगर यहाँ नहीं . उम्मम्मम उम्म्म्म

ऋतू ने फिर से मुझे किश किया .

अमित : कोई बात नहीं , मैं नाराज़ नहीं हूँ . तुम ठीक कह रही हो ये जगह ठीक नहीं . अब चलें .

ऋतू ने फिर से स्माइल की और हम बाइक क पास वापिस आ गए . मैंने बाइक स्टार्ट की और हूँ फिर से वापिस चल पड़े शहर की तरफ .

अमित : तो इसी लिए इतनी दूर लती थी मुझे क यहाँ जंगल में ...........

ऋतू : शह्ह्ह्हह्ह , गंदे . वो तो मैंने तुम्हारे मज़ाक की सजा दी है तुम्हे .

अमित : वह ,, बहुत hi अछि सजा दी है. पहले पता होता तो थोड़ा और मज़ाक कर लेता . फिर तो और भी कुछ ........

ऋतू : मरते हुए ) बेशरम , बस यही चलता रहता है तुम्हारे दिमाग में ? जहाँ देखो तम्बू बना कर खड़े हो जाते हो .

अमित : ये भी तो तुमने hi किया है . सुबह सुबह तम्बू बनवा दिया अब पता नहीं दिन कैसे निकलेगा .

ऋतू : लैंड को दबाते हुए ) लगता है इसे भी सजा देनी पड़ेगी. हर जगह सर उठा लेता है .

अमित : कक्कक्स अब इसे भी अंदर कर लो न .

ऋतू : तेरी तो ,,,, देखना अब क्या करती हूँ मैं. आज इसे छोडूंगी नहीं .

अमित : पकड़ तो रखा है तुमने अब और क्या करोगी .

ऋतू ने मेरी गर्दन पर अपने दन्त गाढ़ा दिए और काट लिया . मुझे दर्द हुआ और मैं कराह उठा

ऋतू : अब चुपचाप बाइक चलाओ वर्ण वहां भी कर दूंगी .

अमित : ाचा बाबा सॉरी पर करना मत. वर्ण प्यार किस्से करोगी .

ऋतू : चुप एक डैम चुप , बेशरम कहीं क. मंजू को बताती हूँ क कितने सीधे हो तुम .

ऐसे hi हंसी मज़ाक करते हम शहर वापिस पहुँच गए. शहर आने तक ऋतू लवर की तरह मेरे साथ चिपक कर बैठी रही और बीच बीच के मुझे किश करती रही. शहर क पास आ कर ऋतू ने बाइक रुकवाई और फिर से एक तरफ टंगे कर क अचे से बैठ गयी. मैं ऋतू को वहीँ ले कर आ गया जहाँ हम मिले थे .

अमित : तुम आयी कैसे थी ?

ऋतू : गाडी से , देखा नहीं था तुमने ? तुम्हारे पास से तो निकली थी . इस गली में hi कड़ी है मेरी गाड़ी . ाचा मैं अब चलती हूँ. तुम्हे फ़ोन करुँगी तो आ जाना . आज की शाम मैं तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ .

अमित : लगता है मैडम क इरादे ठीक नहीं हैं

ऋतू : वो तो तुम्हे पता चलेगा जब मिलोगे. ाचा अब मैं चलती हूँ जब फ़ोन करूँ तो उठा लेना .

इतना कह कर ऋतू मुस्कुराती हुई गली में घुस गयी और कुछ hi पलों में वो अपनी गाड़ी में बहार निकली . मुझे bye करते हुए वो आगे निकल गयी. मैंने भी बाइक स्टार्ट की और पीछे चल दिया . अभी मैं कुछ hi दूर पहुंचा था क तेज़ी से दो गाड़ियां आयी और ऋतू की गाड़ी का आगे पीछे रुक गयी . उन गाड़ियों से कुछ गुंडे टाइप क हट्टे करते लोग निकले और ऋतू को गाड़ी से खिंच कर बहार निकलने लगे. मैं ज्यादा दूर नहीं था . इस लिए मैंने बाइक की स्पीड बड़ाई और उन लोगों तक पहुँच गया. जाते hi मैंने एक गुंडे पर बाइक चढ़ा दी और जल्दी से बाइक से उतर कर दूसरे पर झपट पड़ा. जिस गुंडे ने ऋतू को बाज़ू से पकड़ रखा था मैंने ज़ोर से उसकी गर्दन क पीछे वॉर किया और वो आगे जा गिरा. ऋतू का एक हाथ आज़ाद होते hi वो भी दूसरे से भीड़ गयी. चौथे वाले क मुँह पर मैंने ज़ोर से पंच मारा तो उसकी नाक टूट गयी और वो भी पीछे का गिरा . तभी गाड़ियों में से और चार 5 लोग उतर कर हम पर टूट पड़े. उनके हाथ में हथियार थे . मैं उनकी तरफ लपका तब तक ऋतू ने उस गुंडे को पटक दिया जिसने उसे पकड़ा हुआ था और जल्दी से अपनी गाड़ी में घुस गयी . मैं उन लोगों पर लपका और एक ने मुझ पर बेस बात से हमला किया जिसे मैंने रोक लिया मगर दूसरे ने मेरी पसलियों पर ज़ोर से वॉर कर दिया. जिससे मुझे तेज़ दर्द हुआ मैं दोनों को धकेल कर पीछे हटा क एक ने और मुझ पर वॉर दिया जिसे मैंने रोक लिया. तभी एक और गुंडे ने मुझ पर हमला कर दिया . उसके हाथ में लोहे की रोड थी . वो मेरे सर पर मरने hi वाला था क ‘ धायें धायें धायें धायें ‘ की आवाज़ से गोली चलने की आवाज़ें आयी और मुझ पर हमला करने वाले क साथ साथ तीन और गुंडों को गोली लगी और वो पीछे जा गिरे . मैंने पीछे मुद कर देखा तो ऋतू हाथ में रिवॉल्वर लिए गोली चला रही थी. ऋतू ने जल्दी से 2-3 गोलियां और चला दी और मेरी तरफ बरही. वो गुंडे ऋतू को गोली चलता देखा जल्दी से वापिस गाड़ियों में घुसने लगे. ऋतू तेज़ी से मेरे आगे आकर कड़ी हो गयी उन लोगों पर फायर करती हुई. ऋतू के चेहरे पर गुस्सा साफ़ नज़र आ रहा था . वो साक्षात् चंडी लग रही थी. उन लोगों को अपनी मौत नज़र आयी तो जल्दी से गाड़ियों मैं बैठ कर निकल भागे .

ऋतू : चिंता में ) तुम ठीक तो हो ? तुम्हे कहीं लगी तो नहीं ?

मैं तो ऋतू का ये जलवा देख कर hi हैरान था. अभी अभी मेरे सामने उसने 5-6 गुंडों पर सटीक निशाना बांधते हुए उन्हें शूट कर दिया था.

अमित : मैं ठीक हूँ , आप तो ठीक हैं?

ऋतू : कहाँ ठीक हो ? दिखाओ मुझे

ऋतू ने मेरी T-shirt ऊपर करके देखा तो मेरी पसलियों पर जो वॉर हुआ था उसका निशान पद चूका था और सूजन आने लगी थी.

ऋतू : देखो कितनी ज़ोर से लगी है यहाँ . चलो मेरे साथ .

अमित : अरे कुछ नहीं हुआ है मुझे. ये अपने आप ठीक हो जायेगा . आप तो ठीक हैं न ? ये लोग कौन थे ?

ऋतू : पता नहीं , तुम उनकी चिंता छोडो . वो मैं देख लुंगी .

ऋतू ने जल्दी से अपनी गाड़ी से फ़ोन निकला और कॉल कर क पुलिस वालों को जल्दी वहां आने को कहा .

अमित : आप हमेशा अपने साथ गन रखती हैं ? पहले तो नहीं थी आपके पास ?

हम जब मंदिर गए तो मैंने कहीं भी ऋतू क पास गन नहीं देखि थी .

ऋतू: रखनी पड़ती है . देखा न , अभी ये न होती तो क्या हो जाता. तुम्हे क्या ज़रूरत थी बीच में पड़ने की ?

अमित : तो क्या मैं देखता रहता वो आप को उठा कर ले जाते ?

ऋतू : अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो ?

अमित : मुझे कुछ भी हो जाता उसकी परवाह नहीं मुझे ? पर मैं आपके साथ कैसे कुछ होने देता .

मेरी बात सुन कर ऋतू का गुस्सा एक डैम से शांत हुआ और उसने मुझे गले से लगा लिया .

ऋतू : ी ऍम सॉरी, पर तुम्हे कुछ हो जाता तो मैं क्या जवाब देती मंजू को और खुद को .

अमित : हुआ तो नहीं न . वैसे भी आपके होते मुझे कुछ हो सकता है क्या . अब छोड़िये हम सड़क पर हैं .

ऋतू : मर खाओगे अगर फिर से ऐसे अपनी जान जोखिम में डाली तो . अब ये जान सिर्फ तुम्हारी hi नहीं मेरी और मंजू की भी है .

अमित : पर एक बात तो बताइये ये गन आप ने राखी कहाँ थी? मुझे तो कहीं महसूस नहीं हुई आपके पास

ऋतू : तो क्या मंदिर में हूँ लेकर जाती ? यहीं गाड़ी में थी. सेफ्टी क लिए लेकर आयी थी. आ गयी न काम.

इतने में तेज़ी से दो गाड़ियां हमारे पास आ कर रुकी और उनमे से पुलिस वाले निकल कर भागते हुए हमारे पास आ गए.

‘ मैडम आप बिना बताये कहाँ चली गयी थी ? ‘ एक इंस्पेक्टर ने ऋतू को सलूट कर क सवाल पूछा.

ऋतू : वो सब छोडो . अभी क अभी वायरलेस कर क सरे रास्तों पर नाकाबंदी कार्डो. पता करो वो कौन लोग थे जिन्होंने मुझे किडनैप करने की कोशिश की.

‘ आपको किडनैप ‘ इंस्पेक्टर क होश उड़ गए ये बात सुन कर

ऋतू : हाँ , किडनैप करने hi आये थे वो लोग. 2 गाड़ियां थी काले रंग की. 10 से 12 लोग हैं. 5 को गोली मरी है मैंने . इस शहर क नहीं लगते अब ज़रूर बहार भागने की कोशिश करेंगे. या फिर डॉ क पास. मुझे वो सब अपने सामने हाज़िर चाहिए . फ़ौरन सब को अलर्ट कर दो.

ऋतू की बात सुनते hi फ़ौरन इंस्पेक्टर हरकत में आया और वायरलेस पर सबको आर्डर देने लगा. ऋतू पुलिस वालों क साथ बिजी हो गयी थी तो मैंने सड़क पर गिरी पड़ी बाइक को उठाया . बाइक की हेडलाइट टूट गयी थी और कुछ स्क्रैच आ गए थे . मैंने बाइक को स्टार्ट किया तो आवाज़ सुन कर ऋतू मेरे पास आ गयी .

ऋतू : कहाँ जा रहे हो ? तुम बाइक यहीं छोड़ दो . ये लोग ले आएंगे . मैं तुम्हे घर छोड़ देती हूँ डॉ को दिखने क बाद.

अमित : नहीं मैं चला जाऊंगा और इतनी भी चोट नहीं है मुझे. आप पहले उन लोगों को पकड़िए.

ऋतू : पर तुम ......

अमित : मैंने कहा न मैं ठीक हूँ. अब मैं चलता हूँ , आप अपना ध्यान रखियेगा.

ऋतू : थैंक्स , तुमने जो किया ......

अमित : थैंक्स कह कर अब पराया क्यों कर रही हैं ?

ऋतू : मुस्कुराते हुए ) ध्यान रखना अपना और डॉ को दिखा ज़रूर लेना.

हम दोनों धीरे बात कर रहे थे ताकि कोई तीसरा सुन न ले. फिर मैं बाइक पर घर क लिए निकल गया . ऋतू क चेहरे पर स्माइल थी और एक ख़ुशी जो दिल को सुकून देने क लिए काफी थी . कुछ hi देर में मैं मौसी क घर पहुँच गया . इस सब में वक़्त का ध्यान hi नहीं रहा था मुझे. और जब मैं घर पहुंचा तो कारन भैया कॉलेज जाने क लिए तैयार बैठे थे. वो मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे . मुझे देखते hi वो गुस्से से आग बबूला हो गए .

कारन : किस्से पूछ कर मेरी बाइक को ले गए थे ? तेरी वजह से मैं लेट हो गया कॉलेज जाने में . पता है न मेरा एग्जाम है आज

निधि : गुस्से में ) तो क्या हुआ तेरी बाइक ले गया था तो . मैंने hi कहा था उसे बाइक ले जाने को . और तू ऐसे कैसे बात कर रहा है उससे .

कारन भैया का ऐसे मुझ पर चिल्लाना निधि दीदी को बहुत बुरा लगा और वो भी बरस पड़ी . मैं पहली बार दीदी को गुस्से में देख रहा था .

रजनी : आ गया न वो टाइम से फिर क्यों झगड़ रहा है तू? जा चला जा बाइक लेकर.

कारन भैया गुस्से से मुझे देखते हुए मेरी तरफ बढ़े.

कारन : ला चाबी दे

अमित : वो भैया वो बाइक ....

कारन : क्या हुआ मेरी बाइक को ?

अमित : वो रस्ते में एक कुत्ता सामने आ गया था तो बाइक स्लिप हो गयी.

कारन : क्या????

कारन भैया जल्दी से बहार को भागे और जैसे hi बाइक की हालत देखि तो और भी ज्यादा गुस्से में आ गए . मैं भी उनके पीछे पीछे बहार आ गया और मेरे पीछे रजनी मौसी निधि और नैना दीदी भी. गुस्से में कारन भैया ने मेरी T-shirt गले से पकड़ ली .

कारन : ये क्या कर दिया तूने मेरी बाइक क साथ कमीने. मनहूस कहीं क आखिर मेरी बाइक hi मिली थी तुझे तोड़ने को . मुझसे बदला ले रहा है न बोल

‘ चटाक ‘

एक ज़ोरदार थप्पड़ निधि दीदी ने कारन भैया के मुँह पर दे मारा.

निधि : ख़बरदार एक लफ्ज़ भी और मुँह से निकला तो . तेरी हिम्मत कैसे हुई इसे बुरा भला कहने की . माफ़ी मांग माफ़ी मांग अभी क अभी .

रजनी : छोड़ निधि बीटा जाने दे . इसका दिमाग hi ख़राब है. तू जा जाकर अपना पेपर दे. तेरी बाइक मैं ठीक करवा दूंगी तेरे पापा को बोल कर .

कारन भैया ने अपने मुँह पर हाथ माला और बाइक को वैसे hi स्टार्ट कर क गुस्से से मुझे घूरते हुए चले गए . निधि दीदी का ये रूप देख कर मैं हैरान था. दीदी गुस्सा भी करती होंगी ये मुझे पता नहीं था. और आज तो मेरे लिए उन्होंने अपने सेज भाई पर हाथ तक उठा दिया था. मुझे इस सब क लिए बुरा लग रहा था. ये सब मेरी वजह से हुआ था.

निधि : मुझे अचे से देखते हुए ) एक्सीडेंट हुआ था ? तुम्हे कहीं चोट तो नहीं लगी?

अमित : नहीं दीदी मुझे कुछ नहीं हुआ. सॉरी मेरी वजह से ......

निधि : माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए. कारन को ऐसे नहीं बोलना चाहिए था. प्लीज मुझे माफ़ कर दो .

अमित : ये क्या कह रही हैं आप दीदी . आप को कोई ज़रूरत नहीं है माफ़ी मांगने की. वैसे भी गलती तो मुझसे hi हुई है न .

रजनी : छोडो ये सब , जो हुआ उसे भूल जाओ. चलो चल क खाना खा लो. अभी तक किसी ने भी नाश्ता नहीं किया है . तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहे थे हम.

रजनी मौसी अंदर आने को कह कर आगे बढ़ गयी. मैंने निधि दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखों में आंसू थे .

अमित : क्या हुआ दीदी? आपकी आँखों में आंसू?

निधि : सॉरी

अमित : मैंने कहा न आप कुछ मत कहिये . अगर दोबारा बोलै तो मैं आपसे बात नहीं करूँगा

निधि : तुम नाराज़ हो कर चले तो नहीं जाओगे न . प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाना

मैंने दीदी को गले से लगा लिया .

अमित : मैं कहीं नहीं जाऊंगा दीदी . आपको छोड़ कर भला मैं कहीं जा सकता हूँ. आप मुझसे कितना प्यार करती हैं ये आप ने अभी दिखा दिया . कोई पागल हो होगा जो इतना प्यार करने वाली दीदी को छोड़ कर जायेगा.

निधि दीदी ने मेरी पीठ पर अपने हाथ कास लिए और मेरे साथ चिपक गयी.

अमित : चलिए अब अंदर चल कर खाना कहते हैं . स्माइल प्लीज . थोड़ा सा , थोड़ा सा और



मैंने दीदी को खुद से अलग कर क स्माइल करने को कहा तो नाम आँखों से भी मुस्कुराने लगी और फिर से एक बार मुझे गले लगा लिया और हम अंदर आ गए .
 
अपडेट कुछ देर में आएगा भाई
 
अपडेट 208



‘ क्या हुआ दीदी आपकी आँखों में आंसू ? ‘ मैं निधि दीदी क साथ अभी नाश्ते क लिए टेबल पर बैठा hi था क नैना दीदी हमारे पास आ गयी और निधि दीदी की भीगी पलकों को देख कर उन्होंने चिंता से पुछा . उनके गीले बालों से लग रहा था क अभी वो नाहा कर निकली हैं . वो बाथरूम में होंगी इसी लिए उन्हें कुछ पता नहीं चला .

अमित : अरे कुछ नहीं हुआ , दीदी बस ऐसे hi कर रही हैं.

नैना : ज़रूर तूने hi कुछ कहा होगा , तुझे तो मैं बताती हूँ .

नाना दीदी मुझे मरने को हुई तो निधि दीदी बीच में आ गयी .

निधि : आँखों को साफ करते हुए ) नहीं नैना इसने कुछ नहीं कहा. वो कारन.......

अमित : कारन भैया तो चले गए कॉलेज . अब आप भी नाश्ता कर क ऑफिस जाओ.

मैंने निधि दीदी की बात को काट दिया और बात करते हुए उन्हें आँखों से इशारा किया क वो कुछ न कहे .

नैना : तू चुप कर . क्या बात है दीदी ?

निधि : कुछ नहीं , अमित तुम मेरे साथ चलो आज ऑफिस . अपनी बुक साथ में ले लेना . वहीँ बैठ कर पढ़ लेना और मुझे भी ाचा लगेगा.

तभी बहार से कार की आवाज़ आयी और मोहित हमारे सामने हाज़िर हो गया .

मोहित : वह क्या बात है , नाश्ता हो रहा है. आज तो ठीक टाइम पर पहुंचा हूँ.

रजनी : अरे मोहित तुम , आओ आओ बैठो बीटा. तुम भी साथ में नाश्ता कर लो .

मोहित ने मौसी क पाऊँ छुए और फिर निधि दीदी नैना दीदी से मिलने क बाद मेरे साथ hi बैठ गया . खाना कहते कहते मोहित ने बता दिया क वो मुझे लेने आया है और हम साथ में स्टडी करने वाले हैं तो दीदी ने भी इस बात पर हामी भर दी. खाना खाने क बाद दीदी ऑफिस चली गयी. और मैं मोहित क साथ कल की तरह सीमा क घर . आज कल्पना सिंपल सूट में आयी थी और कमल की लग रही थी. मैंने उसे गौर से देखा तो उसके होंठों पर स्माइल आ गयी.

कल्पना : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : आज तुम बहुत अछि लग रही हो .

कल्पना: शरमाते हुए ) थैंक्स, तुम भी अचे लग रहे हो .

सीमा : ोये तुझे क्या हुआ ? ऐसे शर्मा क्यों रही है ? वैसे आज तू ये सूट किस ख़ुशी में पेहेन कर आयी है? तुझे तो ाचा नहीं लगता न ऐसे कपडे पहनना.

कल्पना : मैंने कब कहा ? वो तो मैं बस स्पोर्ट्स की वजह से वेस्टर्न ड्रेसेस पहनती हूँ .

सीमा : चल जाने दे जाने दे. सब पता है मुझे. चल पहले ये समझा मुझे.

मैं मोहित क साथ और सीमा कल्पना क साथ रेविसिओं करने बैठ गए. 2 घाटे कब निकल गए पता hi नहीं चला . उसके बाद सीमा चाय नाश्ता ले आयी और बातें करते हुए हमने वो भी फिनिश की. कल्पना आज कुछ ज्यादा hi शर्मा रही थी. और बार बार अपने बल संवर रही थी जो उसने खुले छोड़ रखे थे. जब हम 2 बजने को हुए तो हम सीमा क घर से निकलने लगे .

कल्पना : अमित , क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो ?

अमित : कहाँ जाना है ?

कालापन : मेरे घर

अमित : क्यों ? कोई काम है क्या ?

कल्पना : बिना काम क नहीं आ सकते क्या ?

अमित : ऐसी बात नहीं है पर कल हमारा एग्जाम है और आज मुझे किसी क बर्थडे पर भी जाना है .

कल्पना : मायूस होते हुए ) ाचा , ठीक है . तुम जाओ .

अमित : क्या बात है कल्पना ? कोई ज़रूरी बात है तो मैं अभी चलता हूँ .

कल्पना : नहीं कोई ज़रूरी नहीं है . तुम्हे आज बर्थडे पर जाना है तो तुम जाओ .

कल्पना ने मुझे स्माइल देते हुए इतना कहा. पर उसकी आँखों में मायूसी साफ़ नज़र आ रही थी. मैं उसे कुछ और कहता उससे पहले hi वो bye bye करती अपने कार में बैठ कर निकल गयी. मैं भी मोहित क साथ उसकी कार में बैठ गया . हम अभी निकले hi थे क मंजू म की कॉल आने लगी .

अमित : गुड आफ्टरनून मम , आप कैसी हैं ?

मंजू : मम ? साथ में कोई है क्या ?

अमित : हम्म

मंजू : ाचा मैंने ये कहना था क मैं कॉलेज से घर जा रही हूँ . तुम भी मेरे घर hi आ जाओ .

अमित : कोई ज़रूरी काम है क्या मम ?

मंजू : आओगे तो पता चल जायेगा . जल्दी आ जाना साथ में लंच करते हैं .

अमित : ठीक है मम मैं अभी अत हूँ .

इतना कह कर मैंने कॉल काट कर दी .

मोहित : किसका फ़ोन था और कहाँ जाना है अभी तूने ?

अमित : यार वो मंजू म का फ़ोन था. उन्हें कुछ काम है इस लिए घर बुला रही हैं . तू सीधा वहीँ ले चल मुझे .

मोहित : मम को क्या काम है ? कहीं क्वेश्चन पेपर तो नहीं दिखने वाली मम तुझे ? देख मुझे ज़रूर बता देना . मेरा भी भला हो जायेगा .

अमित : बकवास बंद कर अपनी . तू क्या ऐसी समझता है मम को ? कोई और काम होगा उन्हें .

मोहित : हम्म्म , ाचा यार मम से मेरी थोड़ी सी सिफारिश तो कर देना क वो मुझे बस पास करवा दे कहीं गलती से किसी पेपर में फ़ैल हो गया तो मर जाऊंगा यार .

अमित : तो म्हणत कर न , चिंता मत कर तू फ़ैल नहीं होता. इतना तो तू कर hi सकता है मैं जनता हूँ. फिर भी अगर तुझे दर लगता है न तो थोड़ी और म्हणत कर ले मेरे साथ .

मोहित : ठीक है भाई अगर तुझे मेरी प्यार की नैया डूबती हुई देखनी है तो तेरी मर्ज़ी .

बातें करते करते हम मंजू म क घर पहुँच गए. मैंने मोहित से अंदर आने का पुछा तो उसने मन कर दिया और मुझे बहार hi उतर कर निकल गया. मंजू म की कार कड़ी थी मतलब वो आ चुकी थी. मैंने बेल्ल बजायी तो उन्होंने दरवाज़ा खोला मुझे देखते hi उनके चेहरे पर रौनक आ गयी . उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और दरवाज़ा बंद कर दिया . जैसे hi वो पलटी तो मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया . मंजू म ने भी मेरे गले में बाँहों का हर दाल दिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए

मंजू : उम्मम्मम्मम उम्मम्मम उम्मम्मम्हाःह्ह्ह्ह अपने आप यद् नहीं आती न मेरी ??

अमित : ाचा ??? आपको ऐसा लगता है ?

मंजू : सर हिलाते हुए) हम्म्म्म

अमित : तो ठीक है , अभी फैसला हो जाता है क मैं आपको यद् करता हूँ या नहीं .

मैंने मंजू को ऐसे hi अपने गले से लगाए हुए उनके कूल्हों क नीचे से हाथ दाल कर उन्हें उठाया और उन्हें चूमता हुआ अंदर को ले जाने लगा .

मंजू : आअह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो , मैं गिर जाउंगी ,, छोडो नीचे उतरो .

अमित : क्यों ? अभी तो आपको मेरा प्यार दिखाना है , ताकि आपको यकीन हो जाये क मैं आपको कितना यद् करता हूँ .

मंजू : सॉरी सॉरी बाबा माफ़ कर दो. मैं तो मज़ाक कर रही थी. देखो कोई आ जायेगा .

अमित : अब तो जिसे आना है आये मैं नहीं छोड़ने वाला आपको .

मंजू : ाचा !! बाद में तुम hi कहोगे क बताया क्यों नहीं .

मैंने मंजू म को बैडरूम में ले जाकर बीएड पर लिटा दिया और खुद भी उनके ऊपर लेट गया .

अमित : क्या मतलब ?

मंजू : मतलब क अभी ऋतू आने वाली है .

अमित : ओह तेरी की , आप भी न ,, अभी तो इतना ाचा मूड बना था सारा ख़राब कर दिया .

मंजू : हस्ते हुए ) ाचा जी , तो अब मूड ख़राब हो गया. अभी कौन सा आ गयी है वो , करलो जो करना है . मैं तो यहीं हूँ तुम्हारे सामने .

मंजू म जान बुझ कर अब मेरा मज़ा लेने वाले अंदाज़ में बात कर रही थी .

अमित : ाचा !! बड़ी हंसी आ रही है , अगर मेरा दिमाग घूम गया न तो फिर बाद में मत कहना .

मंजू : छू छू छू छू छू , मुन्ना राजा को गुस्सा आ गया ? कर लो न जो दिल कर रहा है ज्यादा से ज्यादा क्या होगा , पुलिस वाली क सामने नंगे hi तो होंगे.

अमित : लगता है आप ऐसे नहीं मानोगी . अभी बताता हूँ .

मैं मंजू म पर टूट पड़ा और उन्हें होंठों को चूसते हुए उनके बूब्स कपड़ों क ऊपर से hi दबाने लगा. साथ hi मैंने उनकी साडी को ऊपर खींचना शुरू कर दिया .

मंजू : आअह्ह्ह सीसीसी क्या कर रहे हो ककक रुक जाओ ककक उम्म्म ऋतू आती hi होगी कक्कक्स .

अमित : बड़ी हंसी आ रही थी न अब हंसो उम्म्म्म ुजम्मं

मैंने मंजू म की साडी उनकी जांघों तक ऊपर खिंच ली और अपना एक हाथ उनकी पेंटी पर रख कर मसलने लगा . मंजू म पहले मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी पर अब वो भी गरम हो गयी और खुद hi मुझे अपने ऊपर खींचने लगी . उन्होंने अपने दोनों ूँ मेरी कमर पर कैंची की तरह लॉक कर लिए . तभी बहार से बेल्ल बजने लगी . हम दोनों रुक नहीं रहे थे . मगर बेल्ल बार बार बजने लगी तो मंजू म ने किश तोड़ते हुए मुझे अपने ऊपर से धकेला .

मंजू : सांसे सँभालते हुए ) हँ देखा हँ हँ , ऋतू आ गयी . इसी लिए ,,,,, इसी लिए रोक रही थी .

मंजू म क बल बिखर गए थे और उनकी लिपस्टिक होंठों से गायब हो चुकी थी. सदी भी अस्त व्यस्त हो गयी थी. वो मुझे दरवाज़ा खोलने का कह कर खुद बाथरूम में घुस गयी . मैंने जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने ऋतू यूनिफार्म में कड़ी थी. मुझे देखते hi वो हैरान हुई पर अगले hi पल उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी .

ऋतू : तुम यहाँ ? हम्म्म लगता है लैला मजनू झूला झूल रहे थे .

इतना कह कर वो अंदर को आयी और मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया

ऋतू : कहाँ है लैला , नज़र नहीं आ रही ?

तभी ऋतू की नज़र मेरी पेण्ट में बन्दे उभर पर पड़ी जहाँ लैंड अभी अकड़ा हुआ था .

ऋतू : ओह्ह्ह्ह लगता है गलत टाइम पर आ गयी . अभी काम हुआ नहीं लगता . सॉरी

ऋतू ने हँसते हुए मेरे लैंड की तरफ देखते हुए कहा तो मैंने आगे बढ़ कर उसे बाँहों में कास लिया .

अमित : बड़ी हंसी आ रही है ? अब तो आपको इसकी सजा मिलेगी. सुबह से मेरी हालत ख़राब कर दी है आपने . उम्मम्मम

मैंने ऋतू क होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे दीवार से लगा कर मैं किश करने लगा . ऋतू क सर से उसकी पुलिस को कैप नीचे गिर गयी . मैंने उसके बल जो उसके सर क पीछे बंधे हुए थे उन्हें खोल दिया और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा . ऋतू मुझे पीछे धकेल रही थी पर मैं कहाँ मैंने वाला था .

ऋतू : उनमममम उनमममम छोडो उम्मम्मम उम्म्म्म

ऋतू मेरे बल खिंच कर मुझे दूर हटाने की कोशिश कर रही थी. पर मैंने भी उसके बूब्स को ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया . साथ hi मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी पेण्ट की ज़िप खोली और अपना हाथ अंदर दाल कर उसकी छूट को पेंटी क ऊपर से मसलना शुरू कर दिया . तभी अंदर से मंजू म की आवाज़ आयी तो मैं ऋतू को छोड़ कर पीछे हैट गया . ऋतू की ऑंखें उसका चेहरा एक डैम से लाल हो गया था . और वो ज़ोर ज़ोर से सांस लेते हुए अपनी साँसे कण्ट्रोल कर रही थी . ऋतू ने जल्दी से अपने बाल समेटे और उन्हें बांधने लगी तभी मंजू म सामने आ गयी .

मंजू : चौंकते हुए ) ऋतू !!! क्या हुआ ???

ऋतू : कक को कुछ नहीं कुछ नहीं .

मंजू ने ऋतू को अछि तरह से देखा और फिर मुझे देखने लगी . मैं चुपचाप वहां से गेस्ट रूम में चला गया और सोफे पर बैठ गया .

मंजू : तुझे क्या हुआ ? चल बैठ मैं तेरे लिए कॉफ़ी बना कर लती हूँ.

ऋतू : हह हाँ हाँ

ऋतू मंजू म क जाते hi अपनी कैप को ज़मीन से उठा कर मेरी तरफ आ गयी. उसके चेहरे पर गुस्सा था.

ऋतू : ज़रा स भी शर्म नहीं है तुम में ? अभी मंजू देख लेती तो ?

अमित : तो क्या ? बड़े मज़े ले रही थी न . अब बोलो , और वैसे भी आपने खुद hi तो कहा था क अब उन्होंने आपको खुद इजाज़त दे दी है तो फिर ?

ऋतू : तो क्या अब उसके सामने hi ये सब ? उसे बुरा लगेगा . और तुम्हे नज़र नहीं अत मैं ों ड्यूटी हूँ और यूनिफार्म में भी हूँ .

अमित : यूनिफार्म में आप कितनी सेक्सी लगती हैं ये मेरे दिल से पूछिए. आप को जब यूनिफार्म में देखता हूँ तो दिल करता है क बस वहीँ पकड़ कर आपको ....

ऋतू : आँखें दिखते हुए ) चुप बेशरम. , अगर मंजू यहाँ न होती तो तुम्हे बताती.

अमित : तो अभी बता दो , वो कौन सा आज आपको मन करेंगी. वैसे भी आज आपका जन्मदिन है तो इस मौके पर इतना तो बनता hi है.

ऋतू : तुम ऐसे नहीं मानोगे .

इतना कह कर ऋतू झटके से उठी और कूद कर मेरी गॉड में आ बैठी. ऋतू घुटनो क बल बैठी थी जिस उसका घुटना वहीँ जा लगा जहाँ सुबह मेरे चोट लगी थी और मेरे मुँह से कराह निकल गयी .

अमित : आआह्ह्ह्हह

ऋतू : ो सॉरी सॉरी

ऋतू जल्दी से उठ गयी . उधर से मंजू म दौड़ती हुई आ गयी . उन्हें शायद मेरी आवाज़ सुन गयी थी.

मंजू : घबराई हुई ) क्या हुआ ? क्या हुआ तुम्हे.

मैं अपनी चोट पर हाथ मॉल रहा था तो मंजू म ने फ़ौरन मेरे कपडे ऊपर को खिंच दिए जिससे मेरी पसलियों पर लगी वो चोट सामने आ गयी. वहां पर अब और भी ज्यादा सूजन आ चुकी थी. थोड़ा थोड़ा दर्द तो पहले भी मुझे हो रहा था पर ऋतू का घुटना लगने से अब ज्यादा दर्द होने लगा था. मेरी बगल में पूरा रोड का निशान वैसे hi बना हुआ था . जो अब कला पद चूका था . मंजू म उसे देखते hi और ज्यादा घबरा गयी .

मंजू : ये ... ये ... क्या है ? ये कैसे हुआ ? ये चोट तुम्हे कैसे लगी ? बताओ मुझे ये कैसे हुआ ?

अमित : कुछ नहीं ये बस मामूली सी ......

मंजू : मामूली सी ? कितनी ज्यादा चोट लगी है तुम्हे और तुम इसे मामूली सी चोट कह रहे हो . चलो हम अभी डॉ क पास चलते हैं . चलो उठो .

अमित : अरे कुछ नहीं हुआ है मुझे. आप ऐसे hi चिंता कर रही हैं.

मंजू : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , चलो अभी डॉ क पास . तुमने मुझे बताया क्यों नहीं क तुम्हे चोट लगी है ? कैसे लगी ये चोट तुम्हे?

अब मैं क्या बताता क सुबह क्या हुआ. इससे मंजू म ज्यादा टेंशन में आ जाती. मंजू म क इस सवाल से और उनकी हालत देख कर ऋतू को भी टेंशन होने लगी थी .

अमित : वो सुबह रनिंग करते वक़्त पाऊँ फिसल गया था तो मैं गिर गया. वहां साइड में एक पाइप लगी थी तो उसी से टकरा गया . ये तो मामूली स चोट है . आप ऐसे hi टेंशन ले रही हैं. ऐसा तो होता रहता है. थोड़ी सी मालिश करूँगा तो ठीक हो जाएगी .

मंजू : ये मामूली स चोट है ?? मामूली स चोट है.

मैंने मंजू म का चेहरा दोनों हाथों में पकड़ लिया. उनकी आँखों में आंसू आ गए थे. मैंने उन्हें रिलैक्स करने क लिए उनके सर पर किश किया और उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया .

अमित : रिलैक्स , कुछ भी नहीं हुआ मुझे. मैं बिलकुल ठीक हूँ. ये तो बस थोड़ी स सूजन है. और कुछ नहीं . देखो आपको दोस्त आपके पास बैठी है. आज इनका बर्थडे है न? तो हमें इनका बर्थडे सेलिब्रेट करना चाहिए . बिलीव में मैं बिलकुल ठीक हूँ .

मंजू म ने भी मुझे बाँहों में भर लिया था. और मेरी बात सुन कर अब वो थोड़ा रिलैक्स हो गयी. फिर वो मुझसे अलग हुई .

मंजू : तुम बैठो मैं दो मिनट्स में आयी .

इतना कह कर मंजू म अंदर अपने बैडरूम में चली गयी.

अब मेरी नज़र ऋतू पर पड़ी तो वो भी चिंता में डूबी हुई थी .

अमित : अब आपको क्या हो गया ? तो कहाँ थे हम ?

ऋतू : शट उप , अपनी चिंता है क नहीं तुम्हे ? देखा उस बेचारी की क्या हालत हो गयी थी . मैं भी सुबह से परेशां थी क तुम्हारी चोट अब कैसी होगी. पर तुम तो आते hi शुरू हो गए. मंजू ठीक कह रही है. तुम पहले डॉ क पास जाओ और सही इलाज करवाओ .

अमित : शहहहहह , रिलैक्स. वो तो हैं hi ऐसी . जल्दी घबरा जाती हैं. पर आप तो समझदार हैं. ये बस मामूली स चोट है. इधर आइये बैठिये यहाँ. आज आपका बर्थडे है. और मैं नहीं चाहता आज आप कोई भी टेंशन ले.

मैंने ऋतू का हाथ पकड़ कर अपने साथ बिठा लिया . उनके चेहरे पर आयी चिंता की लकीरों को दूर करने क लिए मैंने उनके होंठों पर जल्दी से एक किश कर दी.

ऋतू : तुम न , मर खाओगे मेरे हाथों से .

अमित : मार्लो . बाँदा हाज़िर है .

तभी मंजू म आ गए उनके हाथ में क्रीम थी. आते hi उन्होंने मेरे कपडे ऊपर को खींचे और मेरी बगल में वो क्रीम लगाकर मालिश करने लगी . अपने नाज़ुक हाथों हाथों से बड़े hi प्यार से वो मालिश कर रही थी. मालिश करने क बाद वो फिर से अंदर चली गयी. और कुछ hi देर में वो ट्रे में कुछ स्नैक्स ले आयी और साथ में एक छोटा सा केक भी. केक क ऊपर ऋतू का नाम और बेस्ट फ्रेंड लिखा हुआ था. ये देख कर ऋतू क चेहरे पर ख़ुशी और आँखों में आंसू आ गए.

मंजू : हैप्पी बर्थडे ऋतू , मेरी सबसे प्यारी दोस्त मेरी बहिन.

ऋतू ने मंजू म को गले से लगा लिया और रोने लगी .

मंजू : ऋतू क आंसू पोंछते हुए ) ये क्या , तू रो रही है ? चुप , चुप हो जा. प्लीज चुप हो जा आज तो तेरा बर्थडे और तू रो रही है.

ऋतू : थैंक यू थैंक यू वैरी मच. तू hi मेरी सब कुछ है . जानती हो तेरे बाद मैंने आज तक कभी अपना बर्थडे नहीं मनाया था. और आज इतने सैलून बाद तू hi मेरा बर्थडे मन रही है . मैं बहुत खुश हूँ , बहुत खुश.

मंजू : अब चुप हो जा. मेरे लिए भी तो तू hi है मेरी फॅमिली मेरी सब कुछ. चल अब केक काट जल्दी से.

मंजू म ने एक छुरी ऋतू क हाथ में पकड़ते हुए कहा. तो ऋतू ने केक को कटा. मैं और मंजू म हैप्पी बर्थडे ऋतू गाने लगे . ऋतू ने केक काट कर पहले मंजू क का मुँह मीठा करवाया और फिर मेरा . हम दोनों ने भी उनका मुँह मीठा करवाया.

मंजू : अब बता बर्थडे गिफ्ट में क्या चाहिए तुम्हे ?

ऋतू : मेरी तरफ देखते हुए ) वो तो तू पहले hi दे चुकी है . इससे प्यारा और क्या गिफ्ट होगा मेरे लिए .

अमित : अहहूँ अहहूँ ,, सॉरी मैडम मेरे पास फ़िलहाल तो गिफ्ट नहीं है. पर मैं जल्दी hi आपको गिफ्ट दूंगा. बताइये आप क्या पसंद करेंगी ?

ऋतू : ाचा है जो गिफ्ट नहीं लाये. अब मैं अपनी मर्ज़ी से गिफ्ट लूंगी .

मंजू : वैसे एक बात तो बताओ , तुम्हे कैसे पता चला क आज ऋतू का बर्थडे है ?

अमित : वो ..... वो ......

ऋतू : क्या वो वो ? मैं बताती हूँ . सॉरी यार मंजू मैंने तुम्हे बताया नहीं. आज सुबह मैं अमित क साथ hi मंदिर गयी थी .

मंजू : तो ये बात है. मतलब अब मुझे बताये बिना hi तुम दोनों ......

ऋतू शर्मा गयी . मैं भी झेंप सा गया .

मंजू : अब शर्मा क्यों रही है ? मैं बहुत खुश हूँ. और ये तुम जो चोरी चोरी खेल खेल रहे हो न सब जानती हूँ. तेरी ज़िप अभी भी खुली है . बंद कर ले इसे .

मंजू म ने इतना कहा तो ऋतू का ध्यान अपनी पेण्ट की ज़िप पर पड़ा जो खुली हुई थी. ऋतू जल्दी से उठी और शरमाते हुए भाग गयी अंदर की तरफ. अब तो मुझे भी शर्म आ रही थी . इस लिए मैं मंजू म से नज़रें चुराने लगा.

मंजू : हम्म्म्म , अब बड़ी शर्म आ रही है. जीजा साली में कुछ ज्यादा hi रोमांस नहीं हो रहा?

अमित : वो .... वो मैं . वो आपको लेकर मज़ाक कर रही थी तो मैंने ........

मंजू : तो इस लिए तुमने उसके साथ भी वही सब कर दिया हाँ ? कल से एग्जाम हैं न , तो चुपचाप पड़े पर ध्यान लगाओ. एक्साम्स क बाद नहीं रोकूंगी फिर जो दिल आये करना. तुम दोनों hi मेरी ज़िन्दगी हो . मैं तुम दोनों से नाराज़ नहीं हो सकती.

ऋतू सर झुकाये वापिस आ कर बैठ गयी. मंजू म ने हम दोनों को बातें करने का बोल कर किचन में चली गयी खाना बनाने.

ऋतू : देखा , मरवा दिया न . क्या सोच रही होगी मंजू मेरे बारे में ?

अमित : क्या सोच रही होगी ? वो तो कह रही थी क तुम्हे खुली छूट है. जो चाहे करो. कह रही थी जीजा साली में इतना तो चलता है. और तो और वो कह कर गयी हैं क जब तक मैं खाना बनती हूँ तुम बाकि का काम भी पूरा कर लो.

ऋतू : शॉकेड ) क्या? ऐसा कहा मंजू ने ? ,,,,,,,,,, झूठे , एक no. क झूठे हो तुम. बेशर्म.

इतना कह कर ऋतू जल्दी से उठी और मुझे किश कर क हस्ती हुई भाग गयी किचन में . मैं वहीँ बैठा मुस्कुराता रहा . थोड़ी देर में दोनों खाना ले आयी और हमने साथ में खाना खाया.

ऋतू : ाचा मंजू अब मैं चलती हूँ. मुझे कुछ ज़रूरी काम है .

मंजू : ठीक है . फिर कब आओगी ?

ऋतू : जब तू कहेगी , यहीं तो हूँ तेरे पास.

मंजू : जब दिल करे आ जाना . और हाँ इसके एग्जाम हैं कल से. 10 दिन में ख़तम हो जायेंगे . उसके बाद करना जो करना हो .

ऋतू मंजू म की इस बात से फिर शर्मा गयी .

ऋतू : शरमाते हुए ) अब तू मेरी तंग खींचना बंद करेगी? नहीं डिस्टर्ब करती तेरे स्टूडेंट को .

मंजू : मेरा स्टूडेंट ? तेरा कुछ नहीं ? चल मिल ले मिल ले जाने से पहले . मैं बर्तन किचन में रख कर आती हूँ .

इतना कह कर मंजू म बर्तन समेत कर किचन में चली गयी और ऋतू मेरे करीब आ गयी .

ऋतू : सोचा तो था आज की शाम तुम्हारे साथ सेलिब्रेट करुँगी . खैर कोई बात नहीं . एग्जाम ख़तम होने क बाद यद् रखना एक शाम मेरे नाम है .

इतना कह कर ऋतू ने प्यार से अपने कोमल होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. बिलकुल किसी प्रेमिका की तरह ऋतू मेरे होंठ चूमने लगी . ये चुम्बन सिर्फ प्यार का एहसास था जिसने ज़रा सी भी उत्तेजना नहीं थी . मैं भी ऋतू को वैसे hi किश करने लगा. हम दोनों की hi ऑंखें बंद हो गयी और हम प्यार भरे इस पल में खो से गए .

‘ अहहूँ अहहूँ , अब देर नहीं हो रही तुम्हे ? ‘ मंजू म ने खांसते हुए हमें अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाया तो हम अलग हुए. ऋतू फिर से शर्मा गयी. फिर उसने मंजू म को गले से लगा लिया .

ऋतू : थैंक्स फॉर सुच ा ब्यूटीफुल गिफ्ट ऑफ़ माय लाइफ थैंक्स फॉर एवरीथिंग.

मंजू : दोस्तों को कभी थैंक्स नहीं कहते. और जो मेरा है वो तेरा भी है समझी. अब ज्यादा इमोशनल न हो. वर्ण तू मेरे जैसी हो जाएगी .

ऋतू हस्ती मुस्कुराती हुई हम दोनों को स्माइल करती घर से निकल गयी . और फिर मैंने भी मंजू म से इजाज़त मांगी. मेरे बस बाइक तो थी नहीं तो मंजू क खुद मुझे ड्राप करने आयी और मुझे रजनी मौसी क घर तक छोड़ गयी.

उधर ऋतू पर हमला करने वाले गुंडे किसी तरह बच कर निकल भागे थे. और सीधा अपने मालिक नारायण दास क पास पहुँच गए.

‘ तुम लोग खली हाथ क्यों आये हो ? उस सप को क्यों नहीं लाये साथ ? ‘ नारायण दास गुस्से से अपने आदमी को बोलै.

‘ हमने तो उसे उठा hi लिया था साब , वो अकेली थी और कोई था भी नहीं. पता नहीं कहाँ से एक लड़का बीच में आ गया और फिर साडी बजी पलट गयी. उस सप ने हमारे 5 आदमियों को गोली मार्डी . 2 की मौत हो गयी है और 3 लोग हॉस्पिटल में हैं. ‘

N.D.: एक लड़के ने तुम सब को चुटिया बना दिया और तुम लोग यहाँ आ गए अपनी माँ छुड़वाने . इससे ाचा था वहीँ मर जाते. तुम लोगों क पास हथियार नहीं थे ? मैंने पहले hi कहा था काम सफाई से करना . साली अब वो भी होशियार हो जाएगी. इसकी माँ की ....... साली को छोडूंगा नहीं .

उधर निधि बेचारी आज ऑफिस में सुबह जो कुछ भी हुआ उसकी वजह से टेंशन में थी. उसे ये hi दर लग रहा था क कहीं अमित उनके घर से रूत कर चला न जाये. उसे कारन पर भी गुस्सा आ रहा था. क्या क्या नहीं सपने सजा रही थी बेचारी पर उसके अपने सेज भाई ने आज उसके दिल को ठेस लगा दी थी. निधि अब सोच रही थी क क्यों न वो खुद अमित क साथ रहना शुरू कर दे. जैसे वो बरी बरी से कभी रीता मौसी कभी दिव्या मौसी क यहाँ रहता था. इन्ही बातों में निधि डूबी हुई थी. करिश्मा ने निधि को सोच में डूबा देख कर पुछा भी पर उसने बात ताल दी.



उधर कारन कॉलेज से एग्जाम देकर बाइक ठीक करवाने गया हुआ था. उसे अमित पर बहुत गुस्सा आ रहा था . आज उसकी बड़ी बहन ने उस पर पहली बार हाथ उठाया था वो भी अमित की वजह से. कारन आग बबूला था. इसी वजह से उसकी आज कॉलेज में कुछ लड़कों से कहा सुनी भी हो गयी थी जो अब झगडे की शकल लेने वाली थी.
 
अपडेट 209



‘ कहाँ चले गए थे ? खाना खाने क्यों नहीं आये ? ‘ घर आते hi नैना दीदी मेरे पीछे वोर्री अड़ गयी. हालाँकि मौसी भी थोड़ा नाराज़ हुई क मैं आज खाना खाने नहीं आया घर. मगर उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा. पर जब मैं अपने कमरे में आया तो नैना दीदी गुस्सा दिखते हुए पूछने लगी .

अमित : वो दीदी एक दोस्त का बर्थडे था तो वहीँ गया था .

नैना: ो हो हो हो , वैसे तो एग्जाम का पड़े का बहाना बना कर मुझे ताल देते हो और अब जनाब बर्थडे सेलिब्रेट कर क आ रहे हैं.

अमित : अरे दीदी कोई पार्टी वर्तय थोड़ा hi थी. वो तो जस्ट केक hi कटा था . और आपको कोई बहाने नहीं बनता मैं. आप क भी तो एग्जाम हैं न. ऐसे में अगर पड़े पर ध्यान नहीं देंगे तो हमें hi मुश्किल होगी न.

नैना : ये कौन सा फाइनल एक्साम्स हैं जो तू इतनी टेंशन ले रहा है. ये तो आराम से पास कर hi लेंगे . प्लीज मेरा भी सोच न.

अमित : अब मैं क्या करूँ दीदी. मैंने तो सोचा था कल hi आपकी रत रंगीन कर देता पर निधि दीदी रत को आ गयी .

नैना : ये दीदी भी न ,,, मेरे प्लान पर पानी फेर देती हैं. मुझे नहीं लगता वो आज भी तुम्हे मेरे साथ सोने देंगी.

अमित : तो ???

नैना : कारन , पापा और दीदी अभी घर पर नहीं हैं . माँ भी अभी कुछ देर आराम करेगी . तो हम इस वक़्त .....

अमित : पागल तो नहीं हो गयी आप ? इस वक़्त घर में कोई भी आ सकता है. और कारन भैया का एग्जाम भी हो चूका होगा क्या पता कब वापिस आ जाये . खुद तो मरोगी मुझे भी मरवाओगी.

नैना : तो तू hi बता मैं क्या करूँ. एक तो तू इतने दिन मिलता नहीं और अब आया है तो कोई न कोई बहाना बनाये जा रहा है.

अमित : दीदी ,,,,, समझने की कोशिश करो आप . मैं आपको मन तो नहीं कर रहा पर हमें ऐसे जल्द बजी में कदम नहीं उठाना चाहिए . अगर किसी को पता चला तो जानती है न क्या होगा.

नैना : मैं क्या करूँ , ज़रा मेरे बारे में भी तो सोच .

अमित : ाचा आप चिंता न करो. मैं वडा करता हूँ हम ज़रूर मिलेंगे. और ऐसे मिलेंगे क आप अगले दिन अचे से चल नहीं पाओगी मगर जल्दबाज़ी नहीं .

नैना दीदी क उदास चेहरे पर स्माइल आ गयी और उन्होंने मुझे गले लगा लिया और एक मीठी सी किश कर दी. उसके बाद कुछ देर आराम किया और लग गया रेविसिओं करने. निधि दीदी भी ऑफिस से जल्दी आ गयी . और मेरी हेल्प करने लगी . कारन भैया देर से आये और आते hi अपने कमरे में घुस गए . रत को खाने पर भी कारन भैया हमारे साथ शामिल नहीं हुए तो निधि दीदी उन्हें मानाने उनके कमरे में गयी मगर वो नहीं मने. खैर रत में फिर से दीदी मेरे पास hi आ गयी.

निधि : कल क एग्जाम की तयारी हो गयी ?

अमित : हाँ दीदी , मैंने तयारी कर ली.

निधि : तुम्हारे कॉन्फिडेंस से hi पता चल रहा है क तुम्हारा एग्जाम ाचा जायेगा.

अमित : ये सब आपकी हेल्प से hi हुआ है.

निधि : मैंने क्या किया ? ये सब तुम्हारी म्हणत है .

अमित : दीदी क्या बात है ? आप कुछ परेशां लग रही हैं

निधि : कुछ नहीं वो कारन

अमित : ी ऍम सॉरी दीदी मेरी वजह से ....

निधि : तुम्हारी वजह से क्या ? ये सब उसकी गलती थी. उसे तुम्हारे साथ ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी. तो क्या हुआ थोड़ा सा नुकसान हो गया तो. तुमने कोई जानबूझ कर तो नहीं किया था न. तुम क्या हो इसका उसे पता भी नहीं . अगर पता चल जाये तो माफ़ी मांगता फायर . एक तो तुमने hi मुझे मन कर रखा है किसी को बताने से. मुझे बिलकुल भी ाचा नहीं लगता जब वो तुम्हारे बारे में कुछ उल्टा सीधा बोलता है. अगर दोबारा उस ने कुछ भी ऐसा वैसा किया न तो मैं ये घर hi छोड़ दूंगी.

अमित : ये क्या कह रही हैं आप ? आप को ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं. वैसे भी ये घर आपका और कारन भैया का है. यहाँ से अगर किसी को जाना चाहिए तो वो मैं .....

निधि : ख़बरदार अगर ऐसा सोचा भी तो. अगर तुम यहाँ से गए तो मैं भी तुम्हारे साथ hi जाउंगी. वैसे भी जहाँ तुम्हारी इज़्ज़त नहीं तो अहम् मैं भी नहीं रुक सकती. चाहे वो मेरे माता पिता का घर hi क्यों न हो . मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती .

अमित : दीदी ,,, आप सच में मुझे इतना प्यार करती हैं . मैं कितना किस्मत वाला हूँ क मुझे आप जैसी इतना प्यार करने वाली बहिन मिली .

निधि : मन में ) बहिन नहीं रे , तू कब समझेगा क ये बहिन भाई वाला प्यार नहीं है . मैं तुम्हे दिलो जान से चाहती हूँ एक प्रेमिका की तरह एक पत्नी की तरह .

अमित : आप को कहीं भी जाने की ज़रूरत नहीं है . मैं आपके छोड़ कर नहीं जाऊंगा .

निधि : पर मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती . वो बार बार तुम्हारे साथ बदतमीज़ी कर रहा है . मैंने अभी भी समझने की कोशिश की पर पता नहीं किस बात का उसके दिमाग में इतना ज़हर घुला हुआ है. वो नहीं सुधरने वाला. एक बात बाटोगे?

अमित : पूछिए

निधि : मुझे कंपनी की तरफ से एक फ्लैट तो मिल hi सकता है . तो अगर मैं फ्लैट में रहने चलूँ तो क्या तुम मेरे साथ वहां रहोगे ?

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं दीदी ? अपना परिवार छोड़ कर आप अकेली रहेंगी वहां ? नहीं ऐसा नहीं हो सकता .

निधि : तो क्या करूँ फिर ? मैं और नहीं देख सकती कोई तुम्हारे बारे में कुछ भी गलत बोले.

अमित : वो मेरे से गुस्सा हैं न मुझे कहते हैं जो कहते हैं . आओ क्यों इतना टेंशन लेती हैं. खुद hi एक दिन सब ठीक हो जायेगा .

निधि : पर मुझे कितना दुःख होता है तुम्हे कैसे समझों.

मैंने निधि दीदी को अपने गले से लगा लिया और उनका सर सहलाने लगा . दीदी ने भी मेरी पीठ पर अपने हाथ कास लिए और अपना मुँह मेरी छाती में घुसा लिया.

अमित : आप न बहुत प्यारी हो सब से प्यारी. मैं जनता हूँ आप मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती हैं. इसी लिए आपको दुःख होता है जब कोई मुझे कुछ लगे तो. पर ये सब भी तो अपने हैं न. और अपनों क साथ थोड़ा बहुत चलता रहता है. इसी का नाम तो ज़िन्दगी है . चलिए अब सोते हैं फिर सुबह जल्दी उठना है .

फिर मैं और दीदी बीएड पर साथ में लेट गए. आज दीदी मेरे साथ चिपक कर hi सोई और बच्चों को तरह मुझे अपनी बाजु और तंग से पकड़ कर रखा था जैसे मैं कहीं भाग जाऊंगा. कब मेरी आंख लगी पता नहीं पर सुबह जब मेरी आंख खुली तो दीदी पूरी तरह मेरे ऊपर थी. और मेरी छाती पर सर टिकाये पूरी की पूरी मेरे ऊपर सो रही थी. अगर कोई इस वक़्त हमें देख लेता तो पता नहीं क्या सोचता. मैं दीदी को साइड में करने लगा तो थोड़ा सा हिलने से hi मुझे एहसास हुआ क मेरा लैंड पूरा तनाव में था. शायद सर्दी क मौसम की वजह से या फिर कल जो बार बार इंसिडेंट हुए उसकी वजह से. मगर इस वक़्त मेरा लैंड तनाव में था और दीदी की जांघों क जोड़ में बिलकुल छूट क साथ लगा हुआ उनकी जांघों में फसा हुआ था. दीदी को हिलने से hi मुझे एहसास हो गया क मेरा लैंड दीदी की जांघों में फसा है. मुझे दर लगने लगा कहीं दीदी जग गयी तो क्या होगा. हम दोनों कम्बल क अंदर थे. मैंने दीदी की पीठ पर हाथ रख कर उन्हें अचे से अपने साथ लगा लिया और पलट गया जिससे दीदी अब मेरे नीचे थी . अब मैं दीदी क ऊपर से उठ सकता था बिना उन्हें जगाये. मेरी नज़र जैसे hi दीदी क चेहरे पर गयी तो वहां पर मनमोहक मुस्कान थी. मेरी नज़र वहीँ ठहर गयी. दीदी क चहरे में वो कशिश थी क मेरी नज़र हर बार वहीँ ठहर जाती थी. दीदी क गोर गाल गुलाबी लाल हो रहे थे. शायद सर्दी की वजह से . मैं दीदी को कुछ पल देखता रहा फिर मैं उनके ऊपर से उठने लगा तो अब की बार दीदी की बाँहों का हर मेरे गले में था. मैंने बड़े आराम से दीदी क दोनों हाथ खोले और ऊपर उठने लगा तो मेरा चेहरा उनके चेहरे क कुछ ज्यादा hi करीब चला गया और पता नहीं कैसे उनके होंठ मेरे गाल पर लग गए . मुझे अपने गाल पर गीला गीला सा लगा. तो मैंने उठ कर दीदी की तरफ देखा मगर वो वैसे hi सो रही थी. मैंने अपने गाल पर हाथ लगाया तो वाकई में वहां से थोड़ा सा चिपचिपा था . मैं दीदी की तरफ देख कर फिर रूम से बहार निकल गया फ्रेश होने .

वहीँ अमित क कमरे से निकलते hi निधि ने एक लम्बी सांस ली . वो खुद को बड़ी मुश्किल से रोके हुए थी. असल में वो अमित क जागने से पहले hi जग गयी थी . पर अमित को सोता हुआ देख कर वो मस्ती में उसके ऊपर hi चढ़ कर लेट गयी ताकि वो सामने से अछि तरह अमित को किश कर सके. पर अमित क ऊपर आते hi उसे एहसास हो गया उसके तने हुए लैंड का जो सुबह सुबह तन कर खड़ा था. निधि को समझ नहीं आयी क वो क्या करे. अब तो वो ऊपर आ चुकी थी. कहीं अमित को दर्द न हो इस लिए उसने अमित क उस सख्त मोठे डंडे को अपनी जांघों क बीच एडजस्ट कर लिया. मगर छूट पर उस सख्त मुसल का एहसास होते hi निधि की धड़कने तेज़ हो गयी और एक झुरझुरी स उसके बदन में हुई. इतने में hi कामर्स की कुछ बूंदे निधि की अनछुई छूट में आ गयी. निधि को अपना आप संभालना मुश्किल हो गया था. एक पल में hi उसका चेहरा काम वासना से लाल होने लगा . उसे खुद पता नहीं चला क कब वो अपनी छूट का दबाव लैंड पर देने लगी. ऐसा ज़िन्दगी में उसके साथ कभी नहीं हुआ था . धीरे धीरे निधि मदहोश होती अमित क ऊपर hi देह गयी थी और अमित की आंख खुल गयी. अमित को कुछ पता न चले इस लिए निधि वैसे hi सोने की एक्टिंग करने लगी . निधि की साँसे उखड रही थी जिसे वो मुश्किल से कण्ट्रोल किये हुए थी और अमित क बहार जाते hi उसने लम्बी साँस ली. मगर उतने से पहले जो उसने अमित को गाल को चूमा था उसे यद् करते अब वो खुद hi है भी रही थी और शर्मा भी रही थी इस छोटी सी चुहल पर . एक मस्त सी अंगड़ाई लेती अब वो बिस्तर पे उठ बैठी . एक मीठा मीठा सा एहसास उसे हो रहा था और साथ hi एक खुजली सी दोनों जांघों क जोड़ में . एक बार फिर से निधि शर्मा गयी और अपने हाथों में अपना चेहरा छुपा लिया .

मैं फ्रेश हो कर कमरे में वापिस आया तो दीदी बीएड पर बैठी मुस्कुरा रही थी . वो पता नहीं किन ख्यालों में खोयी थी क उन्हें मेरे आने का पता भी नहीं चला .

अमित : क्या बात hi दीदी अकेले अकेले मुस्कुरा रही हो ?

निधि : चौंक कर ) नं नं नहीं तो . वो तो बस ऐसे hi.

अमित : हम्म्म इसका मतलब कोई बात तो है. पर शायद आप मुझे नहीं बताना चाहती . चलो कोई बात नहीं .

मैं जान बुझ कर मायूसी भरा चेहरा बनाते हुए मुँह नीचे किया तो दीदी ने मेरा चेहरा दोनों हाथों में थम लिया और मेरी आँखों में देखने लगी .

निधि : तुम्हे तो कब से बताना चाहती हूँ पर तुम hi नहीं समझते . मेरी हर ख़ुशी हर मुस्कान की वजह तुम hi हो सिर्फ तुम .

इतना कह कर दीदी ने पहले मेरा माथा चूमा और फिर गालों पर और फिर मेरी आँखों में देखती हुई वो मेरे होंठों को चूमने hi वाली थी क एक डैम से वो होश में आ गयी और पीछे हैट गयी .

निधि : चलो तुम बैठ कर रेविसिओं कर को मैं दूध लेकर आती हूँ .

इतना कह कर दीदी जल्दी से कमरे से निकल गयी. मगर मैं सोच में पद गया . क्यूंकि अभी अभी जो हमारे बीच जो होने जा रहा था वो बहुत hi गलत था . मगर दीदी कैसे वो सब करने जा रही थी इस बात ने मुझे हैरत में दाल दिया. मुझे यकीन नहीं हो रहा था क निधि दीदी मुझे किश करने वाली थी. मैंने खुद को यही समझाया क शायद गलती से ऐसा हुआ क्यूंकि वो मुझे प्यार hi इतना करती हैं और फिर अपनी किताब पकड़ कर बैठ गया . थोड़ी देर में दीदी भी फ्रेश हो कर मेरे लिए दूध ले आयी . इतने में राधा की कॉल आ गयी .

राधा : गुड मॉर्निंग, क्या कर रहे थे ? अपने आप यद् नहीं आती न तुम्हे? मैं देख रही हूँ दो दिनों में अपने आप तुमने एक बार भी फ़ोन नहीं किया. अब अचे से तैयार हो कर जल्दी से कॉलेज आ जाना. आज हमारा साथ में hi एग्जाम है उसके बाद सब अलग अलग होंगे. मैं तुम्हारा वेट करुँगी मुझसे मिले बिना अंदर मत जाना . मेरा इंतज़ार करना . अच् अब रखती हूँ मुझे मंदिर भी जाना गई bye .

एक hi साँस में राधा ने सब कुछ बता दिया और कॉल काट दी . मुझे कुछ कहने का मौका तक नहीं दिया . कॉल बंद होते hi मैं राधा की इस बात पर हसने लगा तो निधि दीदी ने पूछा .

निधि : क्या हुआ ? किसका फ़ोन था जो ऐसे है रहे हो ?

अमित : आप सुनती तो आपको भी हंसी आ जाती . राधा का फ़ोन था. राजधानी की तरह एक hi साँस में कितना कुछ बोल गयी और मुझे कुछ बोलने का मौका भी नहीं दिया .

निधि : वो अभी भी छोटी बची hi है . तुम्हारे साथ रह कर अब कुछ बात करने लगी है वर्ण पहले कहाँ बात करती थी. चलो अब जल्दी से तैयार हो जाओ . मैं भी तैयार होती हूँ फिर नाश्ता भी करना है. और हाँ मोहित से कह दो क तुम खुद कॉलेज आ जाओगे वो तुम्हे लेने न आये .

अमित : पर मैं जाऊंगा कैसे दीदी ?

निधि : मैं हूँ न , मैं छोड़ कर आउंगी तुम्हे कॉलेज . आखिर पर्सनल सेक्रेटरी भी तो हूँ .

इतना कह कर दीदी मुस्कुराती हुई चली गयी. दीदी क जाते hi मैंने रीमा को फ़ोन किया और उससे कुछ देर बात की. फिर मैं जल्दी से नाहा धो कर तैयार हो गया. नाश्ता करने क बाद निधि दीदी ने अपने हाथों से मुझे दही शक्कर खिलाया जो अक्सर माँ भी खिलाया करती थी एग्जाम देने जाते वक़्त. आज नैना दीदी का भी एग्जाम था इस लिए मैंने उन्हें बेस्ट ऑफ़ लक कहा और उन्होंने मुझे. फिर मैंने मौसी से आशीर्वाद लिया .

रजनी : जीते रहो बीटा. मुझे पता है तू हर परीक्षा में अव्वल hi आएगा बिलकुल अपनी माँ की तरह.

रजनी मौसी की ये बात सुन कर मुझे अपने माता पिता की यद् आ गयी और दिव्या मौसी का चेहरा आँखों क सामने आ गया . मैंने मौसी को कॉल की तो उन्होंने पहली बेल्ल पर hi कॉल पिक कर ली जैसे फ़ोन हाथ में लिए इंतज़ार कर रही हो .

दिव्या : बेस्ट ऑफ़ लक , पेपर अचे से करना. दिमाग में कोई भी टेंशन मत रखना और रिलैक्स हो कर सब करना चाहे जितना भी अत हो.

अमित : थैंक्स मौसी पर उसके साथ मुझे आपका आशीर्वाद भी चाहिए .

दिव्या : मेरा आशीर्वाद तो हमेशा तेरे साथ है. हमेशा खुश रहो.

दिव्या मौसी ने ज्यादा बात नहीं की और कॉल काट दी. पर इतने में hi मुझसे तसल्ली हो गयी थी. फिर दीदी मुझे अपने साथ कार में ले गयी कॉलेज. इस बीच माँ और बाबा का भी फ़ोन आया और दीपिका ममी से भी बात हुई. हम जब कॉलेज पहुंचे तो दीदी ने मुझे कार में hi जग किया और मेरा गाल चूम कर मुझे बेस्ट ऑफ़ लक कहा. दीदी मुझे ड्राप कर क ऑफिस क लिए चली गयी. मैं जल्दी पहुँच गया था इस लिए बाकि सब अभी ए नहीं थे. फिर कुछ hi देर में एक एक कर क सब आने लगे. पहले मोहित और मीनल आये फिर कल्पना नेहा दीदी क साथ और फिर रीमा राधा क साथ मगर उनके साथ शीना भी थी. शीना की क्लास में से और कोई अभी तक नहीं आया था. मुझे देखते hi शीना और रीमा शर्माए लगी जबकि राधा चेहेक्ति हुई मेरे पास आ गयी.

राधा : तयारी पूरी है न तुम्हारी ? ये लो ये पेन रखो इसी से आंसर शीट पर लिखना. ये मैं खास हम दोनों क लिए मंदिर से माथा टिकवा कर लायी हूँ.

अमित : आंसर तो हमने लिखने है न फिर इसके लिए मंदिर से माथा टिकवा कर लेन की क्या ज़रूरत थी ?

राधा : इस लिए की भगवन का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहे . सब कुछ उसी की मर्ज़ी से तो होता है .

मैंने राधा क हाथ से पेन ले लिया. फिर नेहा दीदी भी करीब आ गयी.

नेहा : अचे से तयारी तो की है न तुमने? दीदी बता रही थी क तुम अचे से पड़े कर रहे हो.

अमित : तो आप मुझ पर नज़र रखती हैं.

नेहा : नज़र नहीं खबर रखती हूँ. एक तो भाई है मेरा क्या उसकी खबर नहीं रखूंगी .

नेहा दीदी ने जब ये बात कही तो मेरे दिल पर ये बात लगी. वो मेरी कितनी परवाह करती थी और एक मैं था क खुद उन्हें कभी फ़ोन भी नहीं करता था. मैंने नेहा दीदी को वहीँ अपने गले से लगा लिया और सब हैरानी से हमें देखने लगे .

अमित : ी ऍम सॉरी दीदी , मैं बहुत बुरा हूँ. आप मेरी इतनी परवाह करती हैं और एक मैं हूँ क आपको एक फ़ोन तक नहीं करता .

नेहा : चुप एक डैम चुप हो जा . मैंने कहा क मैं तुझ से नाराज़ हूँ? तू कहीं भी रहे चाहे मुझसे बात करे न करे पर मुझे पता है तू मुझे कितना प्यार करता है. इस लिए मैं कभी तुझसे नाराज़ नहीं होती. फैसले दूरियां जितने मर्ज़ी हो. मगर कभी दिलों में फैसले नहीं होने चाहिए. और हम तो हमेशा एक दूसरे क करीब रहेंगे .

नेहा दीदी ने मुझे प्यार से समझाया और फिर हम अलग हो गए. इतने में hi हम दोनों की आँखों में कुछ नमी आ गयी थी . उसके बाद कल्पना मीनल और रीमा ने भी मुझे बेस्ट ऑफ़ लक कहा . सब एक दूसरे को बेस्ट ऑफ़ लक कह रहे थे. हम अंदर जाने लगे तो शीना ने मुझे स्वाद से कर रोक दिया .

अमित : क्या बात है तुम अंदर क्यों नहीं आ रही ?

शीना : मैं अंदर आ कर क्या करुँगी ? आज मेरा एग्जाम थोड़ा hi है . मैं तो बस तुम्हे बेस्ट ऑफ़ लक कहने आयी थी.

अमित : बस इतनी सी बात क लिए तुम इतनी दूर तक आयी? ये तो तुम फ़ोन पर भी कह सकती थी .

शीना : अगर फ़ोन पर कह देती तो तुमसे मिलती कैसे ? तुम्हे देखने का तुमसे बात करने का मन हो रहा था तो चली आयी.

अमित : शीना तुम ......

शीना : जानती हूँ तुम क्या कहना चाहते ho.yahi न क तुम रीमा से प्यार करते हो और मेरे नहीं हो सकते. तो मैं कहाँ तुम्हे कुछ कह रही हूँ . मैं तो बस अपने दिल को तसल्ली दे रही हूँ जो तुम्हे देखे बिना चैन नहीं पता . ाचा अब मैं चलती हूँ बेस्ट ऑफ़ लक .

शीना : मुझसे हाथ मिला कर इतना कह कर चली गयी. पर मैं खड़ा सोचने लगा क शीना क दिल में मेरे लिए कितना प्यार है और ये मुझे भूला नहीं पायेगी. तभी मोहित ने मुझे आवाज़ दी तो मैं अंदर की तरफ चल दिया . तभी मेरे मोबाइल पर ऋतू सिंह , रीना , शालू शिवानी और करुणा दीदी क मैसेज आये बेस्ट ऑफ़ लक क लिए. मैंने फ़ौरन करुणा दीदी का फ़ोन तरय किया मगर वो स्विच ऑफ बताने लगा . शायद वो एग्जामिनेशन हॉल में चली गयी थी. खैर हम सब भी अपने अपने ब्लॉक में अपने सिटींग अर्रंगेमेन्ट्स देख कर बैठने लगे और अपने फ़ोन जमा करवा दिए . मैं मंजू म को यद् कर रहा था क सबसे बात हुई या मैसेज आये पर मंजू म से मेरी बात नहीं हुई. मैं भी उन्हें कॉल नहीं कर पाया बस यही एक बात दिमाग में आ रही थी . मगर जब रूम ों ड्यूटी फैकल्टी आयी तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. हमारे रूम में जो इंचार्ज बन कर आयी थी वो और कोई नहीं मंजू म थी. उन्हें देखते hi मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. मंजू म भी मुझे देख कर खुश हो गयी मगर उन्हीं ज्यादा इमोशंस ज़ाहिर नहीं होने दिए. मैं तो खुश था क चलो मंजू म सामने होंगी तो पेपर ाचा जायेगा और ऐसा हुआ भी मगर बीच में चेकिंग क लिए सीनियर टीचर क तौर पर मेरी पक्की दुश्मन चन्दर्कांता आ गयी. और आते hi उसका पहला अटैक मुझ पर hi हुआ .

चंद्रकांता: खड़े हो जाओ

अमित : खड़े होते हुए ) यस मम .

चन्दर्कांता: पॉकेट में क्या है? चलो सब बहार निकालो.

सबकी नज़र मेरी तरफ घूम गयी. चन्दर्कांता ऐसे कर रही थी जैसे मैं चीटिंग कर रहा हूँ. खैर मैं क्या करता मैंने अपनी पॉकेट में जो कुछ था सब बहार निकल दिया .

चन्दर्कांता: हम्म , सर इसे चेक करो अचे से. इस पर मुझे शक है . ज़रूर ये चीटिंग करता है हर बार .

चंद्रकांता ने अपने साथ आये प्रोफ बसरा को मेरी चेकिंग करने को कहा . मंजू म ये सब देख कर टेंशन में आ गयी थी .

अमित : मम मैंने आज तक चीटिंग नहीं की है

चंद्रकांता: शट योर माउथ .

प्रोफ बसरा ने मुझे बेंच से साइड में हटने को कहा और पहले बेंच की अचे से चेकिंग की और फिर मेरे कपड़ों को चेक करने लगे. वो इतनी धीमी रफ़्तार से चेक कर रहे थे क पहले 5 मिनट्स सिर्फ बेंच hi चेक किया और फिर मुझे जांचने में भी ज्यादा वक़्त लगा रहे थे. इससे मेरा वक़्त जाया हो रहा था .

अमित : सर प्लीज मुझे पेपर लिखना भी है ऐसे तो मैं पूरा लिख भी नहीं पाउँगा .

चन्दर्कांता: शट उप . बात तो ऐसे कर रहा है जैसे बड़ा स्कॉलर है. सर ीके कपडे अचे से चेक करो आप बहार लेजा कर.

मंजू म को भी गुस्सा आ रहा था पर वो कुछ के नहीं सकती थी. क्यूंकि वो कॉलेज में नयी थी और चन्दर्कांता सीनियर थी . प्रोफ बसरा मुझे अपने साथ बहार ले कर आ गए और आर्ट्स देप्तत. क ऑफिस में ले गए . मुझे पेण्ट और शर्ट उतरने को कहा और जुटे भी . मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था . मैं अचे से समझ रहा था क चन्दर्कांता जान बुझ कर ये सब कर रही है. चेकिंग क नाम पर आधा घंटा ख़राब कर दिया था मेरा . खैर अब मेरे पास उन्हें क्या मिलना था जब कुछ था hi नहीं. मैं जब वापिस अपनी जगह पर आया तो चन्दर्कांता मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी जैसे कह रही हो देखा मेरी ताकत का नमूना .

चन्दर्कांता: सर , कुछ मिला ?

बसरा : नहीं मैडम .

चन्दर्कांता: it’s ok. मैडम सब पर अचे से नज़र रखना कोई चीटिंग न कर पाए .

मुझे देख कर विजयी मुस्कान दिखती चन्दर्कांता मंजू म को निर्देश देती हुई वापिस चली गयी . मैं जल्दी से आंसर शीट भरने लगा . और वही हुआ जिसका दर था. चन्दर्कांता ने जो टाइम बर्बाद किया था वो टाइम मैं कवर नहीं कर पाया और बेल्ल बज गयी . मम ने सब क पेपर कलेक्ट करने शुरू कर दिए . मगर मुझसे पेपर नहीं लिया. उन्होंने बाकि सब को जाने को कह दिया और मुझे एक्स्ट्रा टाइम दे दिया. मैं फुल स्पीड से जल्दी जल्दी ख़तम करने में लग गया ताकि मैडम पर भी कोई बात न आये. फिर भी 15 मिनट्स एक्स्ट्रा मुझे लग hi गए.

अमित : मम ये लीजिये

मंजू : हो गया ? पर अभी तो तुम्हारे 15 मिनट्स बाकि हैं न .

अमित : नहीं मम मेरा कम्पलीट हो गया है. थैंक यू मम

मंजू : ख़बरदार जो ऐसा कहा. वैसे भी ये तुम्हारा हक़ था . जो टाइम तुम्हारा वास्ते हुआ था ये उसके लिए है.

अमित : आप बहुत अछि हो मैडम सच में. अगर इस वक़्त क्लास रूम में न होते तो .....

मंजू : यहाँ मैं तुम्हारी टीचर हूँ समझे. अब जाओ मुझे ये जैम जमा सबमिट भी करवाने हैं .

मंजू म को गले लगाने का दिल तो बहुत कर रहा था पर मैं खुद को काबू कर क बहार आ गया. मैं जब बहार निकला तो सब मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे . राधा रीमा नेहा दीदी और कल्पना क चेहरे पर चिंता की लकीरें थी.

राधा : कुआ हुआ ? कल्पना कह रही थे क .....

अमित : कुछ नहीं सब ठीक है. वो तुम ख़राब हुआ था न चेकिंग में तो मंजू म ने एक्स्ट्रा टाइम दे दिया था मुझे .

कल्पना : यार तुम्हे प्रिंसिपल सर से बात करनी चाहिए. चन्दर्कांता जान बुझ कर ऐसा कर रही है. आज तो मंजू म थी अगले एग्जाम में कोई और होगा . अगर उसने एक्स्ट्रा टाइम न दिया तो?

मोहित : कल्पना सही कह रही है . वो जान बुझ कर ऐसा कर रही है .

अमित : अरे यार हो गया न एक बार. वो बार बार थोड़ा hi ऐसा करेगी. वैसे भी मंजू म ने हेल्प कर दी न. अगर दोबारा वो ऐसा करेगी तो देखेंगे.

राधा : पर वो ऐसा कर क्यों रही है? तुमने क्या बिगाड़ा है उनका ?

कल्पना : इसने कुछ नहीं बिगाड़ा. वो ज़रा सनकी है. खुद को पता नहीं क्या समझती है. मैं अभी भी कह रही हूँ हमें प्रिंसिपल सर से बात करनी चाहिए .

अमित : रिलैक्स यार , अगर दोबारा उसने कुछ ऐसा वैसा किया तो देख लेंगे. अभी चलो .

हम सब मिल कर कैंटीन में गए और वहां साथ में थोड़ा बहुत खा कर बाएं करते हुए वापिस घर निकल लिए. मोहित मुझे घर ड्राप करने आ गया . घर आ कर मौसी और नैना दीदी ने एग्जाम क बारे में पुछा और हमने साथ में लंच किया फिर मैं कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में जाकर सो गया .

मेरी आंख मोबाइल की लगातार बजती रिंग टोन से खुली. मोबाइल उठा कर देखा तो डॉ रीना का फ़ोन था .

अमित : hello

रीना : कहाँ हो ? तुम्हे यद् नहीं आज मेरी फ्लाइट है ? तुम्हारा एग्जाम था इस लिए मैंने सुबह फ़ोन नहीं किया. जहाँ भी जल्दी से आ जाओ , मैं तुम्हारा वेट कर रही हूँ .

एक hi बार में सब कुछ कह दिया रीना ने और मैं तो अभी सो hi रहा था. आँख खुलने से पहले दिमाग को झटका दे दिया था रीना ने .

अमित : हाँ वो सॉरी मैं ,, ाचा तुम हो कहाँ पर अभी?

रीना : वहीँ जहाँ हम कॉफ़ी पिटे हैं. जल्दी से चले आओ और अकेले आना.

अमित : पर मेरे पास ......

मेरी बात पूरी होने से पहले रीना ने फ़ोन काट दिया. अब मरता क्या न करता . रीना ने पहले हो वडा लिया था तो जाना तो पड़ना hi था. मगर जॉन कैसे प्रॉब्लम ये थी. खैर मैं जल्दी से उठा और हाथ मुँह धो कर कपडे बदल कर जल्दी से नीचे आया तो मौसी हॉल में hi थी . मुझे ऐसे तैयार होता देख कर वो पूछने लगी .

रजनी : अरे अरे , कहाँ जा रहे हो ? तुम तो आराम कर रहे थे फिर अचानक कहाँ चल दिए ?

अमित : मौसी वो एक दोस्त बहार जा रहा है तो उसी से मिलने जा रहा हूँ.

रजनी : पर जाओगे कैसे ?

अमित : मैं चला जाऊंगा आप चिंता मत करो .

रजनी : रुक जाओ कारन को आने दो उसकी बाइक ले जाना या निधि को आने दो तो उसके साथ चले जाना .

अमित : नहीं मौसी फिर देर हो जाएगी. आप चिंता मत करो मैं चला जाऊंगा . ाचा मौसी मैं चलता हूँ bye . और हाँ वापिस आने में टाइम भी लग सकता है चिंता मत करना .

मैं मौसी को बता कर जल्दी से बहार निकल गया. फिर मैंने एक ऑटो किया और चल दिया उसी कैफ़े कॉफ़ी डे की तरफ जहाँ मैं डॉ रीना क साथ कई बार जा चूका था. ये उनके हॉस्पिटल क करीब hi पड़ता था. कोई 20 मिनट्स में मैं उस जगह पहुँच गया. मैं जब अंदर गया तो मेरी नज़र डॉ रीना पर पड़ी जो वहीँ पर मेरा इंतज़ार कर रही थी और उसकी नज़र भी मुझ पर थी. एक पल को तो उनको देख कर मेरी नज़रें थम सी गयी. ब्लैक जैकेट और सर पर सर्दियों वाली बड़ी सी कैप पहने ब्लैक लेग्गिंग में घुटनो तक क ब्लैक शूज में बैठी वो सच में हेरोइन hi लग रही रही थी . ऊपर से उनका गोरा रंग जो काळा लिबास में और भी निखार रहा था. मैं उनको देखने में hi खोया था क मुझे पीछे से किसी में आवाज़ दी पीछे हटने क लिए क्यूंकि मैं एंट्रेंस पर hi खड़ा था. मैं हड़बड़ा कर रास्ता दिया और मेरी नज़र जब दोबारा रीना पर गयी तो वो है रही थी. मैं अपनी हालत पर झेंप सा गया. फिर मैं चलता हुआ रीना क पास गया .

रीना : अब बैठ भी जाओ जनाब एक तो इतनी देर से आये हो ऊपर से नखरे कर रहे हो .

अमित : सॉरी यार वो बाइक नहीं थी तो ऑटो से आने में देर हो गयी. तुम अकेली आयी हो ?

रीना : तो क्या किसी और को भी लेकर आती? और ये तुम ऑटो में क्यों आये ?

अमित : मुझे लगा था शायद आंटी और रीमा साथ में होंगे . बाइक नहीं थी इस लिए ऑटो में आना पड़ा.

रीना : मुझे बात देते मैं लेने आ जाती . चलो ये भी ाचा hi हुआ. अब यहीं से तुम मेरे साथ चलना.

अमित : कहाँ ?

रीना : मुझे एयरपोर्ट तक छोड़ने और कहाँ .

अमित : वैसे हुए वहां मिलने hi वाले थे तो यहाँ किस लिए बुला लिया ?

रीना : इस लिए क जाने से पहले मैं फिर एक बार तुम्हारे साथ यहाँ कॉफ़ी पीना चाहती थी ताकि वहां इन पलों को यद् कर सकूँ .

अमित : हम्म्म तो चलो आर्डर करो फिर इंतज़ार किसका है?

रीना : तुम्हारा hi इंतज़ार था . बताओ क्या लोगे मैं लेकर आती हूँ.

अमित : मेरे होते आप जाओ ये ाचा नहीं लगता. आप बताओ क्या लोगी मैं लता हूँ .

रीना : वही अपना हर बार वाला स्पेशल .

मैं उठ कर काउंटर पर चला गया . मैं बीच बीच में रीना की तरफ देखता तो हर बार उनकी नज़र अपनी तरफ hi पता. पता नहीं क्या था उनके मन में पर वो उदास स लग रही थी आँखों से मगर चेहरे पर स्माइल रखे हुए थी. मैं काउंटर पर कॉफ़ी लेने लगा .

‘ hi मिस ब्यूटीफुल, अकेली बैठी हो ? क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ? ‘ एक लड़का रीना को अकेली बैठी देख कर उसके पास ज़बरदस्ती बैठ गया. देखने में अछि खासी बॉडी थी और नज़रों में हवस थी जो रीना का हुसैन देख कर पागल हो रहा था .

उधर ऋतू सिंह गुस्से से भरी अपने ऑफिस में बैठी थी. वजह थी पुलिस क हाथों में उन लोगों का न आना जो कल ऋतू का किडनैप करने आये थे. ऋतू होने सभी जूनियर्स की क्लास लगा चुकी थी क इनफार्मेशन होने क बाद भी वो लोग उन गुंडों को पकड़ क्यों नहीं पाए . ऋतू ने हॉस्पिटल्स चेक करने को कहा था पर वहां भी कुछ नहीं मिला. ज़ाहिर था क वो लोग इस शहर क नहीं थे जैसा क उसे पहले hi अंदाज़ा था. अब उसका फोकस इस बात पर था ऐसा कौन सा उसका दुश्मन पीड़ा हो गया जिसने उस पर हाथ डालने की कोशिश की. ऐसा पहली बार हुआ था क उसका इस तरह किडनैप करने की कोशिश की गयी थी . फ़िलहाल तो उसकी समझ में ऐसा कोई दुश्मन नहीं था न hi ऐसा कोई केस उसके हाथ में था जो उस पर ऐसा हमला करवा सके. फिर उसका ध्यान बलजीत राइ पर गया पास उसे लगा क वो ऐसी हरकत नहीं कर सकता मगर हल hi में जो कुछ हुआ था उससे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता था मगर फिर उसके दिमाग में नारायण दस् का नाम आ गया जिसकी बैकग्राउंड क्रिमिनल की थी. और फिर लड़कियों को अगवा करने वाले गैंग क साथ भी उसके तार जुड़े हुए थे. इस लिए उसका शक नारायण दस पर ज्यादा था. मगर एक मला को बिना पुख्ता सबूत क वो मुजरिम नहीं ठहरा सकती थी . पर खुद पर हुए इस हमले ने ऋतू को भड़का दिया था और अब वो ठान चुकी थे वो उस नारायण दस को छोड़ेगी नहीं.

उधर दिव्या का मन फिर से व्यथित था. आज सुबह hi अमित ने उसे खुद फ़ोन किया था . जबकि राधा दिव्या से पहले hi अमित को फ़ोन करने का कह रही थी मगर वो खुद को रोक रही थी. जो भी था वो अमित क लिए माँ hi तो थी अपनी बहिन की जगह . मगर आज सुबह उसके पहले एग्जाम क वक़्त एक माँ होने क नाते उसे खुद अपने हाथों से उसे मुँह मीठा करवा कर आशीर्वाद दे कर भेजना चाहिए था मगर ऐसा करना तो दूर उसने खुद उससे बात तक नहीं की थी . पर अमित ने जिस तरह उसे फ़ोन कर क उससे बात की दिव्या का मन अंदर से भर आया आया था . वो खुद को hi कोस रही थी क वो आखिर क्यों उसे खुद से दूर कर रही है. अपने अंदर की औरत क हाथों मजबूर हो कर वो अपनी ममता को दबा रही है. एक औरत की वासना एक माँ की ममता पर भरी पद रही है. यही बात दिव्या को दुखी कर रही थी. पर बेचारी करे भी तो क्या , जब भी अमित उसके करीब अत था एक अंजनी ताकत उसे अमित की तरफ खींचने लगती थी. उसे अमित में वो सब नज़र आने लगता था जो कभी उसने अपने प्रेमी या पति में सोचा था पर उसे वो कभी मिला नहीं . दिव्या दिन बा दिन अपने अंदर चल रहे इस द्वन्द में घिरी टूट टी जा रही थी .



उधर गाओं में भी अब कामिनी का दर्द बढ़ने लगा था. उसके पेट में दर्द लगातार बढ़ने लगा था और उसका प्रसव का वक़्त नज़दीक आ गया था . जिस वजह से अजय और बाकि सभी पारिवारिक सदस्य चिंता में थे .
 
भाई अपडेट आज आएगा . 11 बजे से पहले
 
अपडेट 210



‘ देखिये मैं यहाँ अकेली नहीं हूँ. और न hi आपको जानती हूँ . इस लिए आप चले जाइये. ‘ रीना ने अपने सामने आ कर ज़बरदस्ती बैठे उस लड़के को देख कर कहा हो होंठों पर कमीनी मुस्कान लिए उसे गन्दी नज़र से hi देख रहा था .

‘ जान पहचान की कौन सी बात है वो तो हो hi जाएगी . आप जैसी हॉट एंड ब्यूटीफुल लड़की क साथ तो पहचान बन hi जाती है. और रही बात अकेले न होने की तो वो मैं देख लूंगा. ‘ वो लड़का पक्का कमीना था जो ढीठता से रीना की बात को अनसुना कर क उसे हवस की नज़रों से देख रहा था . रीना को अपने जिसम पर उसकी गन्दी नज़र चुभ रही थी .

रीना : कमीनेपन की भी कोई हद होती है. जाओ यहाँ से . मुझे तुम्हारी गन्दी शकल नहीं देखनी .

‘ शकल नहीं तो कुछ और देख लो . मेरे पास तुम्हारे काम की चीज़ है जो तुम्हे बहुत पसंद आएगी . चलो किसी होटल में चलते हैं . ‘ उस लड़के ने कमीने पैन को हदें पर करते हुए इतना कहा तो रीना को गुस्सा आ गया और उसने उस लड़के को थप्पड़ मरने की कोशिश की मगर उस लड़के ने रीना का हाथ पकड़ लिया .

रीना : हाउ डरे यू , छोडो मेरा हाथ कमीने कहीं क.

‘ ये तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी . मैं तो प्यार से मन रहा था पर लगता है तू ऐसे नहीं मानेगी . ‘ वो लड़का कुछ ज्यादा hi गुस्से में आ गया और रीना का हाथ कास क पकड़ कर गुस्से में उसे देखता हुआ बोलै. बातों से साफ ज़ाहिर था क ये कोई छोटा मोटा आशिक पता नहीं बल्कि हरामी किसम का इंसान है. रीना भी अंदर से दर गयी और उस लड़के से हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी .

मैं जब काउंटर से कॉफ़ी लेकर रीना को तरफ पलटा तो एक लड़के को रीना क साथ किसी लड़के को बैठे देखा . उसने रीना का हाथ पकड़ा हुआ था . मैं तेज़ कदमो से रीना की तरफ गया और टेबल पर कॉफ़ी रखते हुए बोलै .

अमित : रीना अन्य प्रॉब्लम ?

‘ कौन है बे तू ? चल कॉफ़ी रख और निकल यहाँ से ‘ वो लड़का गुस्से से मुझे बोलै . मैंने रीना की आँखों में देखा जहाँ दर और दर्द था .

अमित : हाथ छोड़ लड़की का .

‘ बोलै न निकल यहाँ से वर्ण पैरों पर चल कर नहीं जायेगा आआआहहहहहहह. ‘

‘ चटकककक ‘

मैंने ज़ोर से एक थप्पड़ उस लड़के क गाल पर जमा दिया. और वो चेयर से सीधा ज़मीन पर गिर गया. वहां आसपास बैठे सब लोग एक डैम से हैरान हो गए उस लकड़ी के मुँह से निकली कराह से .

‘ तूने मुझ पर हाथ उठाया, तेरी माँ की आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्ह ‘ वो लड़का अपना गाल सहलाता हुआ मुझे गाली देकर उठने लगा तो मैंने दो घूंसे उसके मुँह पर जड़ दिए. उसका होंठ फैट गए और मुँह से खून आने लगा . लड़ाई झगड़ा देख कर जल्दी से रेस्टोरेंट स्टाफ वहां आ गया और बीच बचाव करने लगा .

अमित : लड़कियों को इज़्ज़त करना शायद तुझे किसी ने सिखाया नहीं. या फिर तेरे खंडन में औरतों को इज़्ज़त है hi नहीं . अगर दुबारा मुँह खोला तो मुँह में ज़ुबान नहीं रहेगी .

‘ तेरी तो ... सेल तू रुक , तुझे मैं छोडूंगा नहीं . रुक अभी इधर hi रुक , तेरा वो हल करूँगा क अपने पाऊँ पर खड़ा नहीं हो सकेगा ‘ स्टाफ वाले लोग उसे पकड़ कर बहार निकलने लगे . इधर रीना भी घबरा गयी थी और वो मेरी बाजु पकड़ कर मुझे पीछे कर रही थी . वो लड़का स्टाफ वालों से भी उलझने लगा और बहार निकलते hi अपनी जेब से मोबाइल निकल कर कॉल करता हुआ एक साइड को चला गया. उसकी शकल से लग रहा था क ये अभी और मार खाना चाहता है और अपने साथियों को भी शामिल करना चाहता है . मैं भी गुस्से से भर गया था .

रीना : चिंता में ) चलो अमित हम यहाँ से चलते हैं .

अमित : अरे आप क्यों दर रही हैं? मैं देख लूंगा इसे . इन जैसे कुत्तों की सेवा तो होनी चाहिए .

रीना : प्लीज अमित चलो यहाँ से . खामखाह बात बढ़ जाएगी .

अमित : उसने आपके साथ बदतमीज़ी की तो क्या ऐसे hi जाने देता उसे? मैंने कहा न मैं देख लूंगा उसे. क्या आपको भरोसा नहीं मुझ पर ?

रीना : तुम पर तो सबसे ज्यादा भरोसा है. पर मैं नहीं चाहती जाने से पहले कोई ऐसी वैसी बात हो . प्लीज चलो .

मैंने भी रीना की बात मन ली और उसके साथ वहां से बहार निकल गया . रेस्टोरेंट स्टाफ ने रीना से सॉरी फील किया . हम बहार आये और रीना की कार में बैठ कर वहां से निकल लिए . रीना खामोश थी पर अब उसके चेहरे पर चिंता नहीं थी .

अमित : क्या सोच रही हैं आप ?

रीना : मेरी तरफ देखते हुए ) कुछ नहीं .

अमित : ी ऍम सॉरी मेरी वजह से कॉफ़ी बीच में hi रह गयी .

रीना : ख़बरदार सॉरी कहा तो. मैं तो खुश हूँ क तुमने उस लड़के को अचे से सबक सिखाया. कौन लड़की नहीं चाहेगी क उसको कोई बचने वाला हो. मैं जब भी किसी मुश्किल में होती हूँ तब तुम आकर मुझे बचा लेते हो. तुम तो मेरे बॉडीगार्ड हो. और तुम्हे हमेशा ऐसे hi मुझे प्रोटेक्ट करना होगा साडी ज़िन्दगी .

रीना क चेहरे पर अब स्माइल थी और हम ऐसे hi बातें करते हुए उनके घर पहुँच गए. घर क्या था पूरा महल hi था. मैं तो देख कर हैरान हो गया . बहार सिक्योरिटी पर hi यूनिफार्म में 6 गार्ड्स लगे हुए थे और 2 क हाथ में गन्स भी थी . बड़ी बड़ी दीवारें और शानदार बड़े गेट क अंदर गाड़ी क घुसते hi बड़ा सा लॉन और सामने महल जैसा घर. सफ़ेद रंग का वाइट हाउस जैसा बड़ा बांग्ला. गेट से अंदर घर क दरवाज़े तक काम से काम 400 गज का फैसला था. गाड़ी अंदर चलती हुई पोर्च में जा कर रुको तो मेरा ध्यान हटा इस बंगले से.

रीना : क्या देख रहे हो ?

अमित : मुझे पता नहीं था क आपका बांग्ला इतना बड़ा है .

रीना : घर बड़ा होने से कुछ नहीं होता . दिल बड़ा होना चाहिए चाहे घर कच्चा hi क्यों न हो . और इस बड़े घर में छोटे दिल वाले लोग रहते हैं . मैं तो इसे एक जेल hi समझती हूँ . ये घर हमारे तय जी यानि बलजीत राइ जिनका घर है . उन्हें अपनी शनि शौकत दिखने का शोक है. पर मेरे लिए ये एक खूबसूरत जेल से ज्यादा कुछ नहीं .

ऐसा कहने हुए रीना क चेहरे पर एक उदासी सी छ गयी थी . फिर हम गाडी से उतरे और उसे बड़े से लकड़ी क दरवाज़े से अंदर घुसे . सफ़ेद संगेमरमर का फ्लोर और बड़ा सा हाल जिसकी छत 3 मंज़िल ऊपर तक थी. एक तरफ मेहेंगा आधुनिक फर्नीचर और नीचे उतना hi मेहेंगा कालीन बिछा हुआ था. दो तरफ से चौड़ी सीढ़ियां घूम कर ऊपर एक जगह मिलती हुई . दीवारों पर बड़ी बड़ी तस्वीरें और हिरन बारह सुंघा क सर दीवार पर टंगे हुए. नीचे कुछ कमरे भी थे और किचन मगर ज्यादातर कमरे ऊपर hi थे. हमारे अंदर जाते hi एक नौकरानी ट्रे में कुछ ले आयी . मैं सोफे की तरफ बढ़ा तो रीना ने मेरा हाथ पकड़ लिया .

रीना : तुम यहाँ मेहमान नहीं हो . चलो मेरे साथ ऊपर मेरे कमरे में .

अमित : कमरे में क्यों ?

रीना : तो क्या यहाँ बैठोगे? माँ ऊपर मेरे कमरे में hi होगी . चलो

रीना मुझे खींचती हुई अपने साथ कमरे में ले गयी . जैसे hi दरवाज़ा खुला तो सामने बीएड पर रुपाली बैठी हुई बैग पैक कर रही थी . जैसी hi उसकी नज़र मुझ पर पड़ी तो वो एक डैम से कड़ी हो गयी . उसकी चेहरे पर ख़ुशी आ गयी .

रीना : देखलो माँ ले आयी हूँ इसे . अपने आप तो महाशय आते नहीं .

अमित : नमस्ते आंटी .

मैंने रुपाली को नमस्ते किया तो वो जल्दी से हमारे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया .

रुपाली : कितने दिनों बाद तुम्हे आज देख रही हूँ. क्या एक बार भी तुम्हे हमारी यद् नहीं आयी ? क्या नाराज़ हो हमसे ?

अमित : नहीं नहीं आप ऐसे क्यों कह रही हैं . वो तो मैं ......

रीना : बिजी रहता हूँ. पता है सब यही कहने वाले थे न तुम . माँ छोटी कहाँ है? सारा सामान रख दिया न आपने ?

रुपाली : सामान तो सारा रख दिया है . रीमा शीना क साथ कुछ लेने गयी है . तुम खड़े क्यों हो बैठो बीटा .

रीना का रूम भी काफी बड़ा था . एक तरफ कप्बोर्ड लगा हुआ था . आत्ताच बाथरूम नाडा किंग साइज मॉडर्न बीएड. एलसीडी एक ज़मीन पर कालीन और एक साइड में बैठने क लिए काउच भी . मैं वहीँ पर बैठ गया और रुपाली मेरे साथ hi बैठ गयी. तभी दरवाज़ा खुला और शीना रीमा दोनों एक साथ अंदर आ गयी .

शीना : चची इसे भी साथ में रख ...... अमित !!!!

शीना दरवाज़े से अंदर आती हुई बोल रही थी पर जैसी hi उसकी नज़र मुझ पर पड़ी तो वो ख़ुशी से चिल्ला उठी. उसके पीछे hi रीमा थी . मुझे सामने देख कर उसकी ऑंखें भी बड़ी हो गयी और चेहरे पर ख़ुशी आ गयी. शीना ने आगे बढ़ कर मुझसे हाथ मिलाया .

शीना : व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज. तुम यहाँ कैसे ??

रीना : मैं ले हूँ . अपने आप कहाँ आना था इसने .

शीना : ये तो आपने बहुत ाचा किया दीदी . तुमने कुछ लिया या नहीं ? मैं अभी लती हूँ .

शीना ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी. वो जल्दी से कमरे से बहार निकल गयी. मैंने उसे रोकने की कोशिश की पर वो पहले hi निकल गयी. फिर रीमा मेरे पास आयी. रीमा क साथ साथ मेरी भी धड़कने तेज़ धड़कने लगी. आज मैं उसके घर आया था पहली बार इस लिए हम दोनों hi एक्ससिटेड थे .

रीमा : hi , कैसे हो आप ?

अमित : मैं ठीक हूँ . तुम कैसी हो?

मेरा दिल कर रहा था क अभी रीमा को अपने बाँहों में भर लूँ. और रीमा क चेरे पर छाती लाली भी बता रही थी क उसका दिल भी ऐसा hi कुछ कर रहा होगा .

रीना : रीमा , जाओ देखो ज़रा शीना क साथ हेल्प करो कुछ खाने को ले आओ. और खुद लाना किसी नौकर को मत बोलना .

रीमा : मैं अभी लायी दीदी .

अमित : रहने दीजिये आप ये सब

रुपाली : कैसे रहने दें ? पहली बार हमारे घर आये हो. कुछ तो सेवा का मौका दो .

रीना अपना बैग चेक करने लगी और रुपाली मेरे पास hi बैठ गयी . शीना और रीमा दोनों एक एक ट्रे अपने हाथों ने लिए रूम में आ गयी . वो दोनों खाने का सामान ले आयी थी. मैंने थोड़ा बहुत खाया. रीना की फ्लाइट 8 बजे की थी. पहले यहाँ से डोमेस्टिक से दिल्ली और फिर वहां से लंदन. शीना ने नौकरों को बुलाकर सामान गाड़ी में रखवाया. ये एक बड़ी गाडी थी जिसमे सब आसानी से बैठ सकते थे .

रीना : शीना , ताई जी कहाँ हैं ? जाने से पहले उनसे मिल लेती एक बार .

शीना : माँ शायद कहीं पार्टी पर गयी हैं. मैंने उनसे कहा भी था क रहने दो पर वो ......

‘ मेरी बेटी मुझसे मिले बिना बहार कैसे जा सकती है . तुमने यद् किया लो मैं आ गयी. ‘ मैंने पीछे मुद कर आवाज़ की दिशा में देखा तो शी न की माँ यानि की मेघा एक शार्ट ड्रेस पहने कड़ी थी. अपनी आदत क मुताबिक अपने गदराये जिसम को दिखने वाले कपडे पहने वो कड़ी थी. रीना आगे बढ़ कर उससे गले मिली. और जैसी उसकी नज़र मुझसे मिली तो मुझे देख कर वो एक डैम हैरान हो गयी.

मेघा : ये ..... ये ....

शीना : माँ ये अमित है . हमारे साथ कॉलेज में पढ़ता है. बहुत hi ाचा है और हमारा बेस्ट फ्रेंड भी . मैं कब से आपको मिलवाना चाहती थी इससे. अमित ये है मेरी माँ .

अमित : नमस्ते आंटी

मैंने मेघा को वैसे hi बुलाया जैसे क बुलाना चाहिए था. ये देख कर मेघा भी स्माइल करने लगी अपनी घबराहट छिपाते हुए .

मेघा : ये क्या दूर नमस्ते कर रहे हो . ये सब तो ओल्ड फैशन है .

इतना कह कर मेघा मेरे गले से लग गयी और अपने बड़े बड़े स्तन मेरी छाती में धंस दिए और मेरे कण में बोली

मेघा : तो आखिर आ hi गए तुम. मैंने बात उन्हें बहुत मिस किया.

मेघा सच में बड़ी वाली रंडी थी. मैंने तो सोचा था क वो मुझसे दूर hi रहेगी जैसा मैंने उसे लास्ट टाइम बुरी तरह से छोड़ा था मगर वो यहाँ सब क सामने hi अपना रणदीपपण दिखने लगी. मैं जल्दी से उससे दूर हैट गया. किसी ने ये शायद नोट नहीं किया था. पर रुपाली क चेहरे पर गुस्सा देख कर मैं समझ गया क उसने नोट कर लिया है. वो मेघा को गुस्से से देख रही थी. क्यूंकि उसे तो पता hi था क मेघा मेरे साथ कैसे चुदाई कर चुकी है.

मेघा : ये क्या तुम सब एक hi गाडी में जा रहे हो ? अरे हमारी बेटी जा रही है. काम से काम 3-4 गाड़ियां तो जनि चाहिए. ऐसा करते हैं मैं भी अपनी कार ले चलती हूँ. तुम मेरे साथ मेरी कार में चलो .

मेघा ने मुझे अपने साथ कार में चलने को कहा .

रीना : अरे नहीं ताई जी . अमित मुझे सी ऑफ करने आया है. इस लिए ये तो मेरे साथ hi जायेगा. ऐसा करो आप माँ को अपने साथ ले जाओ.

मेघा : तो मैं भी तुम सब क साथ hi चलती हूँ.

मेघा तो जैसे मुझे छोड़ना hi नहीं चाहती थी. मैं परेशां होने लगा क अब क्या करूँ. पर उसका हल भी रीना ने hi कर दिया.

रीना : तै जी आप आगे बैठो शीना क साथ बीच में माँ और रीमा और कर में मैं अमित क साथ बैठ जाती हूँ ज़

मेघा फिर से अपनी चल चलने लगी पर शीना ने भी इसे आगे बैठने को कह दिया . फिर वो भी बुरा सा मुँह बना कर आगे बैठ गयी. और मैं लास्ट में रीना क साथ बैठ गया . मैं अंदर से भगवन का शुक्रिया ऐडा कर रहा था क चलो फ़िलहाल पीछा छूटा . हम एयरपोर्ट क लिए निकल गए. शहर से बहार शहर क लिए छोटा एयरपोर्ट था जहाँ सिर्फ डोमेस्टिक फ्लाइट hi आती जाती थी. कोई आधे घंटे में हूँ सब एयरपोर्ट पहुँच गए . एयरपोर्ट क अंदर तक हम सब रीना को छोड़ने गए. बरी बरी से रीना सब से मिली. कितनी देर से रुपाली ने खुद को रोक रखा था पर आखिर उसकी ऑंखें छलक hi पड़ी. आखिर एक माँ जो थी. बेटी इतनी दूर अकेली जा रही थी वो भी इतने महीनो क लिए. इस लिए उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. यही हल रीमा और शीना का भी था. रीना भी बेचारी अब रोने लगी. सब से मिलने क बाद रीना मेरे पास आयी .

रीना : मैं सिर्फ तुम्हारी वजह से सबको छोड़ कर अकेली इतनी दूर जा रही हूँ. अब माँ और रीमा का ख्याल तुम्हे रखना है. रखोगे न ?

अमित : ये भी कोई कहने की बात है. मैं हमेशा इनके टच में रहूँगा तुम बिलकुल चिंता मत करो. और तुम भी ख़ुशी ख़ुशी जाओ. ऐसे रट हुए जाओगी क्या ? रोटी हुई तुम बिलकुल भी अछि नहीं लगती.

मैंने इतना hi कहा था क रीना कास क मेरे गले लग गयी.

रीना : मैं तुम्हे बहुत मिस करुँगी . पता नहीं कैसे रहूंगी तुम्हारे बगैर .

अमित : अरे अरे छोडो , देखो सब देख रहे हैं . क्या सोचेंगे वो .

रीना मुझे थोड़ा पीछे हैट गयी और अपनी ऑंखें साफ़ करने लगी .

रीना : मैं फ़ोन करुँगी , उठा लेना . अगर नहीं उठाया तो वापिस आ जाउंगी कह देती हूँ.

बच्चों की तरह ज़िद करते हुए रीना ने कहा तो मैंने हाँ में सर हिला दिया. फिर रीना अपना सामान ट्राली में रख कर आगे बढ़ गयी. उसकी फ्लाइट की अनाउंसमेंट हो रही थी. जब तक रीना नज़र आती रही तब तक हम वहीँ खड़े रहे . फिर कुछ देर में उसका जहाज़ उड़ गया और हम वापिस कार की तरफ चल पड़े . सब खामोश थे रुपाली का रो रो कर बुरा हल था वो खुद को रोक नहीं प् रही थी. रीमा का हल भी कुछ ऐसा hi था. वापसी पर इस बार मैं रीमा और रुपाली क साथ बीच वाली सीट पर बैठ गया और दोनों को चुप करवाने लगा . गाड़ी चलते hi अँधेरा हो गया था कार में . एक तरफ से रीमा मेरी बाजु को पकड़ कर अपने सीने से लगाए मेरे साथ चिपक गयी और एक तरफ से मैंने रुपाली को अपने साथ लगा दोउ और दोनों को हौंसला देता रहा . घर पहुँच कर मैंने शीना को मुझे ड्राप करने को कहा तो मेघा मुझे फाॅर्स करने लगी खाना खा कर जाने क लिए. मैं मन कर रहा था पर फिर रीमा और शीना भी कहने लगी इस लिए मुझसे रुकना पड़ा. रुपाली तो अपने कमरे में चली गयी . मगर मेघा वहीँ मेरे साथ बैठ गयी . शीना रीमा को साथ ले गयी खाना लेन क लिए. मेघा मेरे करीब आ गयी .

मेघा : तुमने मेरे साथ ाचा नहीं किया. मुझे छोड़ कर अब उस रुपाली क साथ मज़े कर रहे हो न ? क्या मुझसे ज्यादा मज़ा देती है वो .

मैं सबको उदास देख कर उदास था और ऐसे में मेघा की ऐसी बात सुन कर मुझे एक डैम से गुस्सा आ गया .

अमित : मैंने कहा था न मुझे ये सब नहीं पसंद. और तुम सोच भी कैसे सकती हो क मैं रुपाली क साथ ऐसा वैसा कुछ कर सकता हूँ. रीमा और रीना मेरी दोस्त हैं. पहले जो कुछ हुआ वो अनजाने में हुआ तब मैं नहीं जनता था वो कौन है. पर अब ऐसा कुछ नहीं है .

मेघा : ओह्ह्ह्ह , तो जवान माल क साथ मज़े कर रहे हो. इसी लिए मुझे छोड़ दिया. मुझसे ज्यादा मज़ा देती हैं क्या दोनों ?

अमित : गुस्से में ) ज़ुबान संभल कर बात करो वर्ण मैं भूल जाऊंगा क तुम शीना की माँ हो. अगर एक लफ्ज़ भी और बोलै तो शीना को मैं सब बता दूंगा .

मेघा : ाचा , क्या क्या बताओगे उसे? और शीना को hi क्यों ? रीमा और रीना को भी तो बताओ क तुम उनकी माँ क साथ भी मज़े कर चुके हो. अगर तुमने मेरी पोल खोली तो मैं भी तुम्हारी पोल खोल दूंगी. फिर देते रहना जवाब . भलाई इसी में है क चुपचाप मेरी बात मन लो.

इतना कह कर मेघा ने मेरे लैंड पर हाथ रख कर मसल दिया . मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर मेघा की इस धमकी से मैं भी सकते में आ गया . मुझे समझ नहीं आ रहा था क क्या जवाब दूँ. तभी शीना और रीमा खाना के आयी. उनके साथ नौकरानियां भी थी . मेरे सामने बहुत साडी डिशेस रख दी थी उन्होंने . मेघा टेबल क नीचे से मेरे लैंड पर हाथ रख कर मसल रही थी . मैं कुछ नहीं कर प् रहा था.

अमित : रीमा आंटी को भी तो बुला लेते

मेघा : उसका अभी मन नहीं है . वो बाद में खा लेगी

अमित : ऐसे कैसे , रुको में खुद उन्हें ले कर अत हूँ.

मैं बहाना बना कर मेघा क पास से उठ गया और रुपाली को लेन ऊपर चला गया . रुपाली बीएड पर पड़ी आंसू बहा रही थी.

अमित : ये क्या ? आप यहाँ बैठ कर रो रही हैं. अगर आप ऐसा करेंगी तो रीमा को कौन संभालेगा ? चलिए उठिये और नीचे चल कर खाना खाइये सब क साथ .

रुपाली : तुम जाओ मेरा दिल नहीं कर रहा है .

अमित : मैं पूछने नहीं आया हूँ . चलिए मेरे साथ नीचे चल कर खाना खाइये. वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा . क्या आप चाहती हैं क मैं बिना खाये यहाँ से चला जॉन ?

रुपाली : मैं नहीं ......

अमित : क्या मेरी थोड़ी सी भी इज़्ज़त नहीं आपके दिल में ?

मैंने इतना कहा तो रुपाली उठ कर मेरे गले से लग गयी . मैंने भी उसे बाँहों में भर लिया और उसे हौंसला देने लगा . फिर रुपाली मुझसे अलग हुई और आंसू पोंछती हुई मेरे साथ नीचे चल पड़ी. रुपाली नीचे आकर डाइनिंग टेबल पर सबके साथ बैठ गयी. मैं उसके साथ hi बैठा था. मैंने खुद उसकी प्लेट में खाना लगाया और उसे खाने को कहा. रुपाली खाना खाने लगी . ये देख कर रीमा प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगी . जैसे उसे मुझे पर प्राउड फील हो रहा हो. मेघा की नज़रें मुझ पर hi थी . फिर हमने साथ में खाना खाया और खाने क बाद मैंने शीना को मुझे ड्राप करने को कहा.

मेघा : मैं ड्राप कर दूंगी तुम्हे . वैसे भी मुझे उस तरफ hi जाना है .

शीना : it’s ok माँ , मैं ड्राप कर दूंगी. और रीमा भी हमारे साथ चलेगी. इसी बहाने थोड़ा मन बेहाल जायेगा .

मेघा फिर से जल भून गयी. मगर अब अपनी बेटी को क्या कहती. मैं रुपाली से फिर से एक बार मिला और शीना रीमा क साथ बहार आ गया . शीना ड्राइव कर रही थी और मैं पीछे रीमा क साथ बैठा था .

रीमा : थैंक यू वैरी मच . तुमने माँ को संभल लिया. वर्ण वो खाना नहीं कहती और रोटी रहती.

अमित : वो तुम्हारी माँ है तो मेरी कुछ नहीं? और अब तुम भी अपना मूड ठीक रखना . एक्साम्स चल रहे हैं इस लिए पड़े पर ध्यान देना. ये न हो क मार्क्स काम आएं . मैं नहीं चाहता क मेरी गफ पीछे रह जाये.

रीमा क चेहरे पर स्माइल आ गयी और उसने चेहरा ऊपर उठा कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं भी रीमा को किश करने लगा. रीमा ने मेरे गले में बहन दाल ली और मेरे सर को कास क पकड़ कर किश करती हुई मेरी गॉड में आ गयी. हम दोनों अपनी धुन में लगे थे जबकि शीना ड्राइव करती हुई मिरर से हमें देख रही थी.

शीना : अहहह्ण अहहह्ण , भाई मैं भी यहीं हूँ. और तुम दोनों लैला मजनू यहीं शुरू हो गए . कुछ तो शर्म करो

शीना की बात सुन कर रीमा मुझसे अलग हुई और मेरी गोद से नीचे उतर कर साइड में बैठ कर शर्माने लगी .

शीना : देख रीमा मेरे सामने ये सब मत किया कर . वर्ण ...

रीमा : जानती हूँ आप क्या कह रही हैं. मेरी तरफ से परमिशन है .

अमित : किस बात की परमिशन?

रीमा : शरमाते हुए ) कुछ नहीं .

मुझे समझ नहीं आयी क दोनों क्या बात कर रही हैं. थोड़ी देर में hi हम मौसी क घर क करीब पहुँच गए. शीना ने गाड़ी रोकी तो मैं नीचे उतरा. रीमा भी साथ hi बहार आ गयी. उतारते hi रीमा फिर से मेरे गले लग गयी और फिर से एक किश मेरे होंठों पर कर दी. हम खुली सड़क पर थे और यहाँ कोई भी हमें देख सकता था. पर शुक्र था क रत हो चुकी थी और आसपास कोई नहीं था.

शीना : तुम फिर से शुरू हो गयी ?

रीमा : आप भी मिल लीजिये मैं गाड़ी में बैठती हूँ. ी लव यू वैरी मच माय लव

रीमा मुझे फिर से चूम कर गाडी में बैठ गयी. तब शीना मेरे करीब आयी और मेरे कुछ बोलने से पहले उसने भी मुझे किश कर दी मेरे गले में बहन दाल कर . मैं तो हैरान हो रहा था क शीना रीमा क होते हुए मुझे ऐसे किश कर रही है

शीना : इतना तो हक़ बनता है न बड़ी साली का ? अब समझ आया किस बात की परमिशन?

अमित : तो इसका मतलब तुम दोनों ?

शीना : स्माइल करती हुई ) हम्म्म

अमित : तौबा , कैसी गफ मिली है.

शीना : एक क साथ एक फ्री. ाचा अब हम चलते हैं . टेक केयर .



शीना फिर से अपनी सीट पर बैठ गयी. रीमा मुझे देख कर स्माइल कर रही थी. मेरे चेहरे पर भी स्माइल आ गयी. दोनों हाथ हिलती हुई वापिस चली गयी और मैं घर आ गया .
 
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