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अपडेट 203
‘कहाँ चले गए थे तुम ? आज भी कह दो किसी दोस्त से मिलने गया था . ‘ रीमा से मिलने क बाद मैं दिव्या मौसी क घर पहुंचा तो राधा मुझसे नाराज़गी दिखने लगी जबकि दिव्या मौसी अपने रूम में थी .
अमित : वो वो मुझे एक काम था .
राधा : क्या काम था ? साडी दुनिया क काम तुम्हे hi होते हैं? पता है एक्साम्स शुरू हो रहे हैं नेक्स्ट वीक में और तुम अभी भी क्लासेज बंक कर रहे हो .
अमित : वो मैं देख लूंगा तुम चिंता मत करो . मौसी कहाँ है. ?
राधा : माँ अपने रूम में है . तुम किसी की परवाह है क नहीं ? खाना खाने भी नहीं आये तुम. इतना भी क्या ज़रूरी काम था ?
अमित : था कोई काम ,, तुम ऐसे गुस्सा क्यों हो रही हो ?
राधा : गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ. जानते हो अभी तक मैंने भी खाना नहीं खाया .
अमित : क्या ??? पर क्यों ??
राधा : आज तुम गाओं जा रहे हो सोचा आज तो साथ में खाना खाएंगे पर तुम्हे तो कोई फरक नहीं पड़ता .
राधा की ये बात सुन कर मुझे बुरा लगा क मेरी वजह से वो अब तक भूखी बैठी है . पर अब मैं क्या करता मैं तो खाना खा चूका था अगर अब मैं उसे ये कहता क मैंने खाना खा लिया है तो उसे और बुरा लगता .
अमित : तुम मेरा इंतज़ार क्यों करती हो? तुम्हे पता था न मैं काम से बहार हूँ तो टाइम लग सकता है . और क्या पता मैं बहार से खाना खा कर hi आया हूँ .
राधा : तो ठीक है जाओ तुम . मुझे भी भूख नहीं है .
अमित : ये क्या बात हुई. कैसे भूख नहीं है . चलो खाना लगाओ .
राधा : मैंने कहा न मुझे भूख नहीं है . मैं जा रही हूँ अपने कमरे में .
इतना कह कर राधा अपने कमरे में चली गयी . मुझे राधा क लिए अब खुद पर गुस्सा आ रहा था. मैंने गाओं जाने से पहले राधा को ऐसे नाराज़ कर क नहीं जाना चाहता था . मैं तुरंत किचन में गया और एक प्लेट में खाना लगे और राधा क कमरे में गया . राधा अपने बीएड पर तकिये में मुँह दबाये लेती हुई थी. मैंने खाने की प्लेट साइड में राखी और राधा क पास बैठ गया .
अमित : अब ऐसे नाराज़ रहोगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा ? जानती हो न मैं गाओं जा रहा हूँ . फिर ऐसे अब मूड ख़राब मत करो. चलो उठो और खाना खा लो . देखो मैं ले कर आया हूँ .
राधा : मुझे नहीं खाना .
अमित : कैसे नहीं खाना ? चलो उठो जल्दी करो .
राधा : मुझे भूख नहीं है .
राधा वैसे hi लेती हुई थी तकिये में मुँह दबाये. मैंने राधा को थे अकड़ कर पलट कर सीधा किया तो उसके चेहरे पर दुःख क भाव देख कर एक तीस मेरे दिल में उठी . मैंने उसे सीधा कर क बीएड पर बिठा दिया .
अमित : ये क्या बात हुई ? ऐसा मुँह बना कर मुझे विदा करोगी ? चलो मुँह खोलो मैं अपने हाथों से खाना खिलता हूँ. देखत हूँ कैसे नहीं कहती.
मैंने प्लेट को अपनी गॉड में रखा और निवाला बना कर राधा क मुँह क पास किया तो राधा मुँह नहीं खोल रही थी और बस मेरी आँखों में देखे जा रही थी .
अमित : अब मुँह खोलो भी , देखो अगर तुमने खाना नहीं खाया तो फिर मैं भी नाराज़ हो जाऊंगा तुम से और देख लेना फिर बात भी नहीं करूँगा .
राधा : एक तो खुद ऐसा करते हो और ऊपर से ऐसे धमकियाँ देते हो . क्या नाराज़ भी नहीं हो सकती मैं ?
अमित : क्यों नहीं हो सकती , बिलकुल हो सकती हो पर नाराज़गी मुझसे करो न , इस खाने से क्यों ? चलो अब मुँह खोलो.
राधा ने मुँह खोला तो मैंने निवाला उसके मुँह में डाला. राधा ने खाना शुरू किया और साथ hi अपने हाथों से एक निवाला बना कर मेरे आगे कर दिया .
अमित : ये क्या ? खाना मैंने तुम्हारे लिए लगाया है . मुझे भूख नहीं है .
राधा : अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नहीं खाउंगी . चलो जल्दी मुँह खोलो .
राधा बच्चों क जैसे ज़िद कर रही थी तो मुझे भी उसकी बात माननी पड़ी और एक बार फिर से मैं कहाँ कहने लगा हालाँकि मैं रीमा क साथ पहले hi खाना खा चूका था पर अब राधा क लिए मुझसे फिर से खाना पड़ा. खाना कहते कहते राधा का मूड फिर से ाचा हो गया और उसके चेहरे पर अब वही मुस्कान थी जो मैं हमेशा देखना चाहता था .
अमित : ाचा अब मैं अपना बैग पैक कर लेता हूँ फिर मुझे जाना भी है .
राधा : अगले हफ्ते एग्जाम हैं न , तो तुम यहीं रुक जाओ तब तक .
अमित : तुम्हे पता तो है क अगर घर नहीं गया तो माँ नाराज़ होगी और फिर बड़ी मौसी क यहाँ भी तो जाना है .
राधा : यहीं रुक जाओ न . एक्साम्स क लिए साथ में तयारी कर लेंगे .
अमित : और निधि दीदी नैना दीदी का क्या ? क्या वो नाराज़ नहीं होंगी ? चलो अब मुझे तयारी करने दो .
राधा बेमन से उठी और बर्तन किचन में रखने चली गयी . मैं अपने रूम में आकर बैग पैक करने वाला . दिव्या मौसी अभी तक कमरे से बहार नहीं निकली थी . राधा ने मेरे पास आ कर सामान पैक करने में मेरी मदद की . जाने से पहले मैं दिव्या मौसी से मिलना चाहता था . इस लिए मैंने उनसे मिलने उनके कमरे में गया तो वो बीएड पर सर झुकाये बैठी हुई थी . मैं उन्हें देख कर हैरान हुआ क्यूंकि मैं सोच रहा था शायद वो सो रही होंगी .
अमित : मौसी मैं जा रहा हूँ .
दिव्या मौसी ने मेरी आवाज़ सुन कर चेहरा ऊपर किया और मेरी तरफ देखा . उनके चेहरे पर गहरे दुःख क भाव थे. मगर एक ख़ामोशी सी थी .
दिव्या : ठीक है , ध्यान से जाना . और जा कर फ़ोन कर देना .
अमित : मौसी आप ठीक तो हैं ?
दिव्या : मुझे क्या होगा ?
अमित : वो राधा कह रही थी क आप ....
दिव्या : मैं ठीक हूँ . अब तुम जाओ और ध्यान से जाना .
मैंने आगे बढ़ क दिव्या मौसी क पाऊँ छुए और बहार आकर अपना गांव उठा कर घर से बहार निकल आया. दिव्या मौसी अपने कमरे से बहार नहीं आयी . मुझे लगा क शायद वो मुझसे नाराज़ हैं. राधा बहार तक मुझे छोड़ने आयी . मैं जब बाइक स्टार्ट कर क जाने लगा तो राधा क चेहरे पर फिर से उदासी थी .
अमित : अब ऐसे गुडबाय कहोगी ?
राधा : मुस्कुराने की कोशिश करते हुए ) ध्यान से जाना और पहुँच कर मुझे कॉल ज़रूर करना .
अमित : हाँ हाँ कर दूंगा पर पहले एक अछि सी स्माइल दो मुझे .
राधा : मुस्कुराते हुए ) अब ठीक है .
अमित : हमेशा ऐसे hi खुश रहा करो .
राधा : तो हमेशा मेरे साथ hi रहा करो .
अमित : मैं चाहे पास हो या दूर , तुम हमेशा ऐसे hi रहा करो . Bye bye
इतना कह कर मैं चल दिया जब तक मैं मोड़ से मुद नहीं गया तब तक राधा दरवाज़े पर कड़ी हाथ हिलती रही और मैं भी उसे शीशे से देख रहा था . उसके बाद मैं नॉनस्टॉप चल दिया गाओं की तरफ.
उधर दिव्या अमित क साथ अचे से बात न कर क खुद पर hi गुसा हो रही थी. अमित क घर आने से लेकर राधा को खाना खिलने तक दिव्या अब कुछ छुप छुप कर देख सुन रही थी. एक मन से दिव्या अमित से बात करना चाहती थी पर दिमाग उसे अमित से दूर रहने को कह रहा था . वजह थी तो सिर्फ ये क वो अपने दिल क हाथों मजबूर थी और दिमाग उसे रिश्तों की दुहाई देता था. अमित को रूखेपन से विदा करना भी उसे चुभ रहा था. उसका दिल था क वो अमित को गले लगा कर चुम कर विदा करे पर वो अपना मन मर कर बैठी रही. और अमित की बाइक की आवाज़ सुनते hi वो दौड़ कर बहार आयी मगर दरवाज़े से पहले hi रुक कर वो अमित को बस जाता हुआ देखती रही और जब राधा अंदर आने क लिए पलटी तो अपनी माँ को सामने देख कर एक पल क लिए वो भी हैरान हुई मगर दिव्या की नाम आँखों ने उसे कोई सवाल करने न दिया . दिव्या भी बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापिस चली गयी . राधा भी उदास थी अमित क जाने से और वो ये भी समझ रही थी क माँ भी शायद उदास है या फिर नाराज़ है अमित से इस लिए उसने कोई बात नहीं की. दोनों माँ बेटी क दिल में एक hi इंसान क लिए एक जैसा hi दर्द था मगर दिव्या क दिल की तो दिव्या खुद भी नहीं समझ पति थी . खैर दोनों माँ बेटी अपने अपने कमरे में जा कर तकिये में मुँह छुपाये लेट गयी .
‘ उसे मरना नहीं है समझे ? पूरी होशियारी क साथ उसे उठा कर मेरे पस लाना है. ये काम इतनी सफाई से होना चाहिए क किसी को कानो कण खबर तक न हो . एक बार वो हाथ आ गयी तो फिर हमेशा क लिए मेरी पालतू बन कर रहेगी और हम पहले जैसे hi खुल कर काम कर सकेंगे . साली बड़ी अकड़ती है . वर्दी का बहुत घमंड है न . सारा घमंड उसके भोसड़े में hi घुसा दूंगा. बस एक बार मेरे हाथ आ गयी तो उसकी जवानी का ता भी अचे से निचोड़ दूंगा . ‘ ये बात नारायण दस् अपने अपने आदमियों से कह रहा था. शराब का थोड़ा सुरूर उसकी आँखों से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था जो लालिमा दिए हुए थी.
‘ पर मालिक वो तो बड़ी अफसर है हर वक़्त पोलिसवाले उसके आसपास रहते हैं . घर दफ्तर हर जगह पुलिस उसके साथ hi होती है. अगर हमने ऐसा कुछ किया तो बवाल हो जायेगा . हम तो जान से जायेंगे hi , आप पर भी बात आ जाएगी .’ ये नारायण दस का hi आदमी था जो बताये गए काम क जोखिम क बारे में अपनी शंका ज़ाहिर कर रहा था .
न. डी. : अबे सालो किसने कहा है क पुलिस से सीधा उलझो? अगर पुलिस वालों को खबर लगी तो पूरा डिपार्टमेंट पागल कुत्तों की तरह पीछे लग जायेगा . फिर तो वो कहीं से भी हमें ढूंढ hi निकालेंगे और मेरी कुर्सी भी जाएगी. इस लिए ये काम बड़ी होशियारी से सफाई से करना है. पहले उस पर नज़र रखो . वो कहाँ जाती है किस किस से मिलती है? कौन कौन है उसके परिवार में ? हर बात पर नज़र रखो. उसकी पल पल की खबर रखो . कहीं न कहीं तो वो पुलिस क पहरे से बहार होती होगी. या फिर कोई तो होगा जिससे वो अकेले में मिलती होगी. ऐसा कोई भी इंसान मिले बस वहीँ पर घात लगा देना. और बस एक रत की hi बात है. एक बार वो शिकंजे में आ गयी तो आगे का रास्ता अपने आप बन जायेगा.
‘ पर मालिक इसके लिए तो हमें उसके आस पास hi रहना होगा . कहीं कोई नज़र में आ गया तो ? ‘
न. डी. : नज़र में तब आये है जब कोई हरकत करेगा. और उस पर नज़र दूर से hi रखनी है . ज्यादा करीब जाओगे तो पकडे जाओगे . अपने साथ 10-15 लोग ले जाओ. सही माइका देख कर उसे उठा कर सीधा अपने अड्डे पर ले आना . और होशिअरपुर रहना . हर पल की खबर देते रहना और यद् रहे अगर कोई गड़बड़ हुई तो अपने तक hi रखना. मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश मत करना . एक आदमी तुम लोगों क साथ कांटेक्ट में रहेगा . अब जाओ तुम और ये पैसे लेते जाओ . जितना ज़रूरत हो और ले लेना .
नारायण दस् ने नोटों की दो गड्डियां अपने आदमी क सामने फेंकते हुए कहा. 500-500 क हरे नोट्स की गड्डियां देख कर आदमी खुश हो गया और जल्दी से नोट उठा कर खुश होता हुआ सलाम थोक कर निकल गया . उसके जाते hi नारायण दस ऋतू सिंह क बारे में सोचता हुआ अपना लैंड खुजाने लगा .
न. डी. : साली जब से वर्दी में देखा है तब से नंगा देखने को दिल तड़प रहा है. अब तो तुझे अपनी रंडी बना कर hi रहूँगा . बहुत छूट फाड़ी हैं ज़िन्दगी में पर पहली बार ऐसी पुलिसवाली माल मिली है . तुझे तो रंडी बनाऊंगा सबसे बड़ी रंडी .
‘ क्या बात है तुम कुछ परेशां लग रही हो ? ‘ ऋतू को टेंशन में देख कर मंजू ने उससे सवाल किया. ऋतू इस वक़्त मंजू क घर आयी थी उसे निराशा थी इस बात से क मैनेजर से वो कुछ पता न कर पायी. अब इस केस की साडी उम्मीदें लगभग ख़तम हो गयी थी. ऋतू आज हॉस्पिटल में एडमिट पुलिस वालों से मिल कर आयी थी और मैनेजर की डेड बॉडी को उसकी फॅमिली को दे दिया गया था. ऋतू इस लिए यहाँ आयी थी क वो अमित को मिल कर इस बारे में बता सके पर अमित आज आया hi नहीं था यहाँ .
ऋतू सिंह : क्या बताऊँ यार वो मैनेजर क इतनी मुश्किल से पकड़ा था मगर रस्ते में hi एक एक्सीडेंट में वो मारा गया. अब समझ नहीं आ रही आगे क्या करूँ . अब और कोई उम्मीद भी नहीं है.
मंजू : एक बात कहूं मानेगी? तू न ये केस यहीं रोक दे. मैंने पहले hi कहा था क तुम उससे न उलझ . वो बड़े hi खतरनाक हैं. तू इस केस को यहीं बंद कर दे. और अमित से भी कह दे क बस यहीं तक था जो भी था. वर्ण वो भी इस बारे में सोचता रहेगा और अगर कहीं वो खुद कुछ करने क लिए आगे बढ़ा तो कहीं उस पर कोई मुसीबत न आ जाये. मैं नहीं चाहती बलजीत राइ की परछाई भी अमित पर पड़े.
ऋतू सिंह : ये तू कैसी बातें कर रही है ? मैंने अमित से वडा किया था क मैं मंजरी को इंसाफ ज़रूर दिलवाऊंगी . अब तू ये कह रही है क मैं केस बंद कर दूँ और उस मासूम लड़की को इंसाफ न दिलों. पता नहीं क्या किया होगा उस मासूम क साथ इन दरिंदों ने. ऐसे कैसे मैं ये केस बंद कर दूँ. मेरा ज़मीर इस बात की इजाज़त नहीं देता .
मंजू : तू समझ क्यों नहीं रही ? देख तू और अमित मेरी ज़िन्दगी का सबसे ज़रूरी हिस्सा हो और मैं नहीं चाहती तुम दोनों में से किसी को भी कुछ हो.
ऋतू सिंह : मुझे क्या होगा ? जानती है न मैं खुद पुलिस की इतनी बड़ी अफसर हूँ. मुझे कोई हाथ लगाने से पहले भी 100 बार सोचेगा और फिर मेरा तो प्रोफेशन hi ऐसा है. ऐसे कई लोग मिलते हैं. अगर मैं ऐसे hi डर्टी रही तो इंसाफ की हिफाज़त कैसे करुँगी . तुझे अमित की चिंता है न , मैं उसे इस सब से बहार hi रखूंगी. वैसे है कहाँ वो आज ? मैं तो उसी से बात करने आयी थी.
मंजू : पता नहीं आज वो कॉलेज से भी निकल गया था . आज सैटरडे है तो शायद गाओं चला गया होगा. वैसे ाचा hi हुआ जो वो नहीं है वर्ण ये सब सुन क पता नहीं वो क्या करता. अब इतना करना क खुद उससे कोई बात न कारण इस बारे में और अगर कोई बात वो पीछे भी तो बात घुमा देना.
ऋतू सिंह : ाचा ठीक है बाबा , तुझे उसकी बहुत चिंता है. पर यकीन मन , वो आसानी से किसी क आगे झुकने वाला नहीं है. ट्रेलर तो तू देख hi चुकी है और मैं भी. एक बात तो बता , तुम उसके साथ हफ्ते में कितने दिन प्यार करती हो ?
ऋतू सिंह क अचानक इस तरह क सवाल से मंजू एक डैम से शर्मा गयी और ऋतू को मरने लगी .
मंजू : की ..... शर्म नहीं आती तुझे ?
ऋतू सिंह : आअह्ह्ह्ह ...... ककक मर क्यों रही है? इसमें शर्म कैसी ? मैंने कौन सा गलत बात पूछ ली ? अब इतना तो मैं जानने का हक़ तो रखती हूँ न. आखिर बेस्ट फ्रेंड हूँ तुम्हारी. वैसे एक बात तो है , तू बहुत लकी है जो तुझे अमित जैसा साथी मिल गया. यू डेसेर्वे आईटी. और एक मैं हूँ , लगता है ऊपर वाले ने अकेले रहने की सजा दी है .
मंजू : ऐसा क्यों कहती है ? देखना तुझे भी कोई न कोई ज़रूर मिलेगा .
ऋतू सिंह : नहीं यार अब तो दिल hi नहीं करता ऐसा कुछ करने का. वैसे भी दुनिया में हर इंसान अपने आप में अकेला hi होता है. अगर एक जैसे दो इंसान बनाये होते तो मैं अमित क दूसरे रूप क साथ ज़िन्दगी सेटल कर लेती.
मंजू ने ऋतू की आँखों में सचाई को देख लिया था चाहे वो चेहरे पर हंसी मज़ाक क भाव लिए हुए थी. आईटी वो उसकी पक्की सहेली थी.
मंजू : तू जानती है न क हम कभी एक नहीं हो सकते . ये दुनिया इस बात कोई कभी एक्सेप्ट नहीं करेगी. मगर अमित फिर भी कहता है क चाहे वो मुझसे शादी न भी कर सके वो मुझे अपने साथ रखेगा. और अगर तुम चाहो तो तुम भी हमारे साथ रह सकती हो . अमित की कोई और कॉपी नहीं होगी दुनिया में , पर अगर तुम उसे इतना पसंद करती हो तो तुम भी उसके साथ .....
मंजू की बात सुन कर ऋतू क चेहरे से साडी मुस्कान एक पल में गायब हो गयी. वो तो मंजू को बलजीत राइ की वजह से सीरियस होते देख उसका मूड ठीक करने क लिए ऐसे मज़ाक कर रही थी मगर अभी जो मंजू ने कहा था उससे ऋतू अंडे तक हिल गयी थी. वो यही तो चाहती थी मगर वो मंजू का दिल न टूटे इस लिए अपने अरमान दबा रही थी .
ऋतू सिंह : ये तू क्या कह रही है ?
मंजू : वही हो तू सुन रही है . देख ये सच है क मैं अमित को दिलो जान से चाहती हूँ. पर तुम भी मेरे लिए कुछ काम नहीं हो. मैं जानती हूँ तेरे दिल में भी अमित क लिए फीलिंग्स हैं . और वैसे भी अमित कल को किसी न किसी से शादी तो करेगा hi . तो उसके ऊपर मेरा अकेली का अधिकार तो नहीं होगा न तो फिर मैं उसका प्यार क्या अपनी बहिन क साथ नहीं बाँट सकती ?
मंजू का दिल सच में बहुत बड़ा था और ऋतू ये अचे से जानती थी मगर जो कुछ अभी मंजू ने कहा था वो सुन कर तो ऋतू का दिल भर आया था . उसने मंजू को कास क अपने गले से लगा लिया. ऋतू की आँखों से अपने आप आंसू बह निकले .
ऋतू सिंह : तू सच में बहुत अछि है मंजू . तू मेरी दोस्त नहीं मेरी सगी बहिन से भी बढ़कर है. मेरे दिल की तुझे साडी खबर है .
मंजू : बहिन बोलती है न मुझे फिर मुझे खबर नहीं होगी तो किसे होगी? ाचा ये बात अमित को मत बताना. और उसे फाॅर्स भी मत करना. वो बहुत ाचा है . देख लेना वो तुम्हे भी प्यार देगा मगर प्यार से hi.
ऋतू सिंह : उस बुद्धू राम को तो मैं डंडे से सीधा करुँगी . रुक ज़ार अभी उसे फ़ोन लगाती हूँ. हैं कहाँ वो , काम से काम बता कर तो जाता.
मंजू : नहीं नहीं , मैंने कहा न उससे प्यार से पेश आ तभी वो तुझे प्यार करेगा . अगर ऐसे बात करेगी तो बुरा मन जायेगा .
ऋतू सिंह : अरे मेरी भोली बेगम तू अभी नहीं जानती अपने मजनू को. उसके कई रंग हैं. मैं उसे देख चुकी हूँ . रुक तू अभी
इतना कह कर ऋतू ने अमित को फ़ोन लगाया मगर उसने उठाया नहीं .
मंजू : रहने दे न , बाइक चला रहा होगा .
ऋतू सिंह : रिलैक्स मैडम रिलैक्स , फ़ोन hi तो कर रही हूँ कोई गोली थोड़ा चला रही हूँ. तब तक तुम अपने हाथों की मस्त कॉफ़ी पिलाओ मुझे .
मंजू उठ कर किचन में चली गयी और ऋतू फिर से अमित को फ़ोन करने लगी . इस बार अमित ने फ़ोन उठा लिया और उसने बताया क वो गाओं जा रहा है. ऋतू ने उसे वापिस आने का पूछा तो उसने मंडे का बोलै तो ऋतू ने कुछ सोच कर उसे मंडे इवनिंग मिलने को कह दिया .
‘ आ गया तू ? शुक्र है आज ठीक टाइम से आ गए हो अँधेरा होने से पहले . चल बैठ मैं तेरे लिए दूध लती हूँ .’ घर पहुँचते hi मैं माँ से मिला तो उन्होंने मुझे गले से लगा कर प्यार दिया और बिठा दिया .
अमित : माँ बाबा कहाँ हैं ?
गौरी : ठीक हैं अभी आते होंगे तू आराम से बैठ.
इतना कह कर माँ किचन में चली गयी तो दीपिका ममी आरव को गॉड में उठाये चली आयी . आते hi उन्होंने मेरे होंठों को चूमा और आरव को मेरी गॉड में देते हुए मुझे एक साइड से बाँहों में भर लिया .
अमित : अरे अरे छोड़िये कोई देख लेगा , क्या कर रही हैं आप ?
दीपिका : कोई नहीं देखेगा. कौन है घर में जो देखेगा? दोनों दीदी तो वैसे भी सब जानती hi हैं तो उनसे कैसा दर? उनके इलावा कोई नहीं है यहाँ.
अमित : आज क्या बात है ? इतना प्यार किस लिए?
दीपिका : बहुत दिनों से तुम्हे मैंने अचे से टाइम नहीं दिया न , सोचा आज साडी कसार निकल hi दूँ.
अमित : कसार निकालनी है ? सोच लीजिये , अगर मैंने कुछ कर दिया तो .....
दीपिका : जो मर्ज़ी कर लो मैं मन नहीं करने वाली. मैं खुद अंदर से तड़प रही हूँ .
अमित : बस बस , रोकिये खुद को वर्ण रुकना मुश्किल हो जायेगा . पता है न डॉ ने मन किया हुआ है 5 महीने काम से काम .
दीपिका : आग लगे इन डॉ को , मैं कैसे अपने आप को समझा रही हूँ ये मैं hi जानती हूँ. मेरा बस चले तो अभी या हैं पर .... चल छोड़ वो सब. ाचा ये बता अब करिश्मा और रमा दीदी क साथ सब ठीक है न ?
अमित : जी , मैं गया था उनके घर . अब सब ठीक है.
‘ क्या ठीक है ? किस बारे में बात हो रही है ? ‘ माँ ने अनादर आते हुए सवाल किया.
दीपिका : कुछ नहीं , मैं वो दिव्या दीदी क बारे में पूछ रही थी .
गौरी : उन दोनों को भी साथ ले अत , दोनों माँ बेटी अकेली पता नहीं कैसे रह लेती हैं. यहाँ तो एक तू नहीं होता घर में तो सारा घर hi सुना लगता है.
दीपिका : सच कहा दीदी , बेचारी दिव्या ने साडी ज़िन्दगी अकेले hi गुज़र दी है. कभी कभी तो मुझे बहुत दुःख होता है उसकी हालत पर: वो अकेली hi राधा को कैसे संभल रही है. माँ और बाप दोनों का फ़र्ज़ निभा रही है. जब उन्होंने अमित को फिर से अपना लिया था तो मुझे सबसे ज्यादा ख़ुशी हुई थी . काम से काम अमित तो है न जिनको वो अपने साथ रख लेती हैं. वर्ण हमारे इतना कहने क बाद भी वो कभी हमारे साथ रहने नहीं आयी. अकेले hi साडी ज़िन्दगी वहां गुज़र दी.
गौरी : सच कह रही हो , बहुत दुःख देखें हैं उस बेचारी ने . बीटा , हो सके तो उसे कभी दुःख मत देना . वो तुम्हे बहुत प्यार करती है. एक तू और दूसरी राधा , बस तुम दोनों hi उसकी ज़िन्दगी हो.
अमित : मैं कभी उनको दुःख नहीं दूंगा माँ आप भरोसा रखो .
गौरी : मैं भी क्या बातों में लग गयी , तू ये दूध पि , मैं रत क लिए खाना तैयार करती हूँ . बता क्या खायेगा रत को?
अमित : आप जो भी बना देंगी सब ाचा hi है मेरे लिए .
मेरी बात सुन कर माँ मुस्कुराई और मेरे सर को सेहला कर बहार निकल गयी. मैं दिव्या मौसी क बारे में सोचने लगा. आने से पहले दिव्या मौसी का जो चेहरा मैंने देखा था. वो मुझे खटक रहा था. तभी मुझे यद् आया क मैंने राधा को फ़ोन नहीं किया . मैंने जल्दी से फ़ोन निकला और राधा को कॉल लगा दी. कुछ देर मैंने राधा से बात की और दीपिका ममी को फ़ोन पकड़ा कर मैं कामिनी ममी क पास चला गया. मुझे देख वो भी खुश हो गयी और उठ कर बैठते हुए मुझे गाल से लगा लिया . उन्होंने बताया क अब उनका टाइम आ चूका है और किसी भी दिन अब वो माँ बनने वाली हैं . खैर ऐसे hi कुछ देर मैंने उनके साथ बातें की और फिर बाबा अजय मां और कमलेश मां भी वापिस आ गए . रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला गया . माँ को मैंने सीढ़ियां चरने से मन कर दिया था . इस लिए आज मैं कमरे में अकेला hi सो रहा था. कुछ देर मैंने रीमा से बात की . वो बहुत खुश लग रही थी मगर उसे दर्द भी था . मैंने मंजू मम से भी बात की और उन्हें सॉरी कहा . रत को मैं आराम से सोया. मैं देर तक सोता रहा , बड़े दिनों बाद ऐसी नींद आयी थी . सुबह मेरी नींद किसी क हिलने से खुली. मेरी ऑंखें खुलने से पहले hi एक दिलकश सी खुशबु मेरी सांसो में घुलनि शुरू हो गयी और एक कोमल सा एहसास किसी लड़की क बदन का मुझे हो रहा था. मेरी ऑंखें खुली तो सामने वही चेहरा था जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करता था .
‘कहाँ चले गए थे तुम ? आज भी कह दो किसी दोस्त से मिलने गया था . ‘ रीमा से मिलने क बाद मैं दिव्या मौसी क घर पहुंचा तो राधा मुझसे नाराज़गी दिखने लगी जबकि दिव्या मौसी अपने रूम में थी .
अमित : वो वो मुझे एक काम था .
राधा : क्या काम था ? साडी दुनिया क काम तुम्हे hi होते हैं? पता है एक्साम्स शुरू हो रहे हैं नेक्स्ट वीक में और तुम अभी भी क्लासेज बंक कर रहे हो .
अमित : वो मैं देख लूंगा तुम चिंता मत करो . मौसी कहाँ है. ?
राधा : माँ अपने रूम में है . तुम किसी की परवाह है क नहीं ? खाना खाने भी नहीं आये तुम. इतना भी क्या ज़रूरी काम था ?
अमित : था कोई काम ,, तुम ऐसे गुस्सा क्यों हो रही हो ?
राधा : गुस्सा न करूँ तो क्या करूँ. जानते हो अभी तक मैंने भी खाना नहीं खाया .
अमित : क्या ??? पर क्यों ??
राधा : आज तुम गाओं जा रहे हो सोचा आज तो साथ में खाना खाएंगे पर तुम्हे तो कोई फरक नहीं पड़ता .
राधा की ये बात सुन कर मुझे बुरा लगा क मेरी वजह से वो अब तक भूखी बैठी है . पर अब मैं क्या करता मैं तो खाना खा चूका था अगर अब मैं उसे ये कहता क मैंने खाना खा लिया है तो उसे और बुरा लगता .
अमित : तुम मेरा इंतज़ार क्यों करती हो? तुम्हे पता था न मैं काम से बहार हूँ तो टाइम लग सकता है . और क्या पता मैं बहार से खाना खा कर hi आया हूँ .
राधा : तो ठीक है जाओ तुम . मुझे भी भूख नहीं है .
अमित : ये क्या बात हुई. कैसे भूख नहीं है . चलो खाना लगाओ .
राधा : मैंने कहा न मुझे भूख नहीं है . मैं जा रही हूँ अपने कमरे में .
इतना कह कर राधा अपने कमरे में चली गयी . मुझे राधा क लिए अब खुद पर गुस्सा आ रहा था. मैंने गाओं जाने से पहले राधा को ऐसे नाराज़ कर क नहीं जाना चाहता था . मैं तुरंत किचन में गया और एक प्लेट में खाना लगे और राधा क कमरे में गया . राधा अपने बीएड पर तकिये में मुँह दबाये लेती हुई थी. मैंने खाने की प्लेट साइड में राखी और राधा क पास बैठ गया .
अमित : अब ऐसे नाराज़ रहोगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा ? जानती हो न मैं गाओं जा रहा हूँ . फिर ऐसे अब मूड ख़राब मत करो. चलो उठो और खाना खा लो . देखो मैं ले कर आया हूँ .
राधा : मुझे नहीं खाना .
अमित : कैसे नहीं खाना ? चलो उठो जल्दी करो .
राधा : मुझे भूख नहीं है .
राधा वैसे hi लेती हुई थी तकिये में मुँह दबाये. मैंने राधा को थे अकड़ कर पलट कर सीधा किया तो उसके चेहरे पर दुःख क भाव देख कर एक तीस मेरे दिल में उठी . मैंने उसे सीधा कर क बीएड पर बिठा दिया .
अमित : ये क्या बात हुई ? ऐसा मुँह बना कर मुझे विदा करोगी ? चलो मुँह खोलो मैं अपने हाथों से खाना खिलता हूँ. देखत हूँ कैसे नहीं कहती.
मैंने प्लेट को अपनी गॉड में रखा और निवाला बना कर राधा क मुँह क पास किया तो राधा मुँह नहीं खोल रही थी और बस मेरी आँखों में देखे जा रही थी .
अमित : अब मुँह खोलो भी , देखो अगर तुमने खाना नहीं खाया तो फिर मैं भी नाराज़ हो जाऊंगा तुम से और देख लेना फिर बात भी नहीं करूँगा .
राधा : एक तो खुद ऐसा करते हो और ऊपर से ऐसे धमकियाँ देते हो . क्या नाराज़ भी नहीं हो सकती मैं ?
अमित : क्यों नहीं हो सकती , बिलकुल हो सकती हो पर नाराज़गी मुझसे करो न , इस खाने से क्यों ? चलो अब मुँह खोलो.
राधा ने मुँह खोला तो मैंने निवाला उसके मुँह में डाला. राधा ने खाना शुरू किया और साथ hi अपने हाथों से एक निवाला बना कर मेरे आगे कर दिया .
अमित : ये क्या ? खाना मैंने तुम्हारे लिए लगाया है . मुझे भूख नहीं है .
राधा : अगर तुम नहीं खाओगे तो मैं भी नहीं खाउंगी . चलो जल्दी मुँह खोलो .
राधा बच्चों क जैसे ज़िद कर रही थी तो मुझे भी उसकी बात माननी पड़ी और एक बार फिर से मैं कहाँ कहने लगा हालाँकि मैं रीमा क साथ पहले hi खाना खा चूका था पर अब राधा क लिए मुझसे फिर से खाना पड़ा. खाना कहते कहते राधा का मूड फिर से ाचा हो गया और उसके चेहरे पर अब वही मुस्कान थी जो मैं हमेशा देखना चाहता था .
अमित : ाचा अब मैं अपना बैग पैक कर लेता हूँ फिर मुझे जाना भी है .
राधा : अगले हफ्ते एग्जाम हैं न , तो तुम यहीं रुक जाओ तब तक .
अमित : तुम्हे पता तो है क अगर घर नहीं गया तो माँ नाराज़ होगी और फिर बड़ी मौसी क यहाँ भी तो जाना है .
राधा : यहीं रुक जाओ न . एक्साम्स क लिए साथ में तयारी कर लेंगे .
अमित : और निधि दीदी नैना दीदी का क्या ? क्या वो नाराज़ नहीं होंगी ? चलो अब मुझे तयारी करने दो .
राधा बेमन से उठी और बर्तन किचन में रखने चली गयी . मैं अपने रूम में आकर बैग पैक करने वाला . दिव्या मौसी अभी तक कमरे से बहार नहीं निकली थी . राधा ने मेरे पास आ कर सामान पैक करने में मेरी मदद की . जाने से पहले मैं दिव्या मौसी से मिलना चाहता था . इस लिए मैंने उनसे मिलने उनके कमरे में गया तो वो बीएड पर सर झुकाये बैठी हुई थी . मैं उन्हें देख कर हैरान हुआ क्यूंकि मैं सोच रहा था शायद वो सो रही होंगी .
अमित : मौसी मैं जा रहा हूँ .
दिव्या मौसी ने मेरी आवाज़ सुन कर चेहरा ऊपर किया और मेरी तरफ देखा . उनके चेहरे पर गहरे दुःख क भाव थे. मगर एक ख़ामोशी सी थी .
दिव्या : ठीक है , ध्यान से जाना . और जा कर फ़ोन कर देना .
अमित : मौसी आप ठीक तो हैं ?
दिव्या : मुझे क्या होगा ?
अमित : वो राधा कह रही थी क आप ....
दिव्या : मैं ठीक हूँ . अब तुम जाओ और ध्यान से जाना .
मैंने आगे बढ़ क दिव्या मौसी क पाऊँ छुए और बहार आकर अपना गांव उठा कर घर से बहार निकल आया. दिव्या मौसी अपने कमरे से बहार नहीं आयी . मुझे लगा क शायद वो मुझसे नाराज़ हैं. राधा बहार तक मुझे छोड़ने आयी . मैं जब बाइक स्टार्ट कर क जाने लगा तो राधा क चेहरे पर फिर से उदासी थी .
अमित : अब ऐसे गुडबाय कहोगी ?
राधा : मुस्कुराने की कोशिश करते हुए ) ध्यान से जाना और पहुँच कर मुझे कॉल ज़रूर करना .
अमित : हाँ हाँ कर दूंगा पर पहले एक अछि सी स्माइल दो मुझे .
राधा : मुस्कुराते हुए ) अब ठीक है .
अमित : हमेशा ऐसे hi खुश रहा करो .
राधा : तो हमेशा मेरे साथ hi रहा करो .
अमित : मैं चाहे पास हो या दूर , तुम हमेशा ऐसे hi रहा करो . Bye bye
इतना कह कर मैं चल दिया जब तक मैं मोड़ से मुद नहीं गया तब तक राधा दरवाज़े पर कड़ी हाथ हिलती रही और मैं भी उसे शीशे से देख रहा था . उसके बाद मैं नॉनस्टॉप चल दिया गाओं की तरफ.
उधर दिव्या अमित क साथ अचे से बात न कर क खुद पर hi गुसा हो रही थी. अमित क घर आने से लेकर राधा को खाना खिलने तक दिव्या अब कुछ छुप छुप कर देख सुन रही थी. एक मन से दिव्या अमित से बात करना चाहती थी पर दिमाग उसे अमित से दूर रहने को कह रहा था . वजह थी तो सिर्फ ये क वो अपने दिल क हाथों मजबूर थी और दिमाग उसे रिश्तों की दुहाई देता था. अमित को रूखेपन से विदा करना भी उसे चुभ रहा था. उसका दिल था क वो अमित को गले लगा कर चुम कर विदा करे पर वो अपना मन मर कर बैठी रही. और अमित की बाइक की आवाज़ सुनते hi वो दौड़ कर बहार आयी मगर दरवाज़े से पहले hi रुक कर वो अमित को बस जाता हुआ देखती रही और जब राधा अंदर आने क लिए पलटी तो अपनी माँ को सामने देख कर एक पल क लिए वो भी हैरान हुई मगर दिव्या की नाम आँखों ने उसे कोई सवाल करने न दिया . दिव्या भी बिना कुछ कहे अपने कमरे में वापिस चली गयी . राधा भी उदास थी अमित क जाने से और वो ये भी समझ रही थी क माँ भी शायद उदास है या फिर नाराज़ है अमित से इस लिए उसने कोई बात नहीं की. दोनों माँ बेटी क दिल में एक hi इंसान क लिए एक जैसा hi दर्द था मगर दिव्या क दिल की तो दिव्या खुद भी नहीं समझ पति थी . खैर दोनों माँ बेटी अपने अपने कमरे में जा कर तकिये में मुँह छुपाये लेट गयी .
‘ उसे मरना नहीं है समझे ? पूरी होशियारी क साथ उसे उठा कर मेरे पस लाना है. ये काम इतनी सफाई से होना चाहिए क किसी को कानो कण खबर तक न हो . एक बार वो हाथ आ गयी तो फिर हमेशा क लिए मेरी पालतू बन कर रहेगी और हम पहले जैसे hi खुल कर काम कर सकेंगे . साली बड़ी अकड़ती है . वर्दी का बहुत घमंड है न . सारा घमंड उसके भोसड़े में hi घुसा दूंगा. बस एक बार मेरे हाथ आ गयी तो उसकी जवानी का ता भी अचे से निचोड़ दूंगा . ‘ ये बात नारायण दस् अपने अपने आदमियों से कह रहा था. शराब का थोड़ा सुरूर उसकी आँखों से साफ़ ज़ाहिर हो रहा था जो लालिमा दिए हुए थी.
‘ पर मालिक वो तो बड़ी अफसर है हर वक़्त पोलिसवाले उसके आसपास रहते हैं . घर दफ्तर हर जगह पुलिस उसके साथ hi होती है. अगर हमने ऐसा कुछ किया तो बवाल हो जायेगा . हम तो जान से जायेंगे hi , आप पर भी बात आ जाएगी .’ ये नारायण दस का hi आदमी था जो बताये गए काम क जोखिम क बारे में अपनी शंका ज़ाहिर कर रहा था .
न. डी. : अबे सालो किसने कहा है क पुलिस से सीधा उलझो? अगर पुलिस वालों को खबर लगी तो पूरा डिपार्टमेंट पागल कुत्तों की तरह पीछे लग जायेगा . फिर तो वो कहीं से भी हमें ढूंढ hi निकालेंगे और मेरी कुर्सी भी जाएगी. इस लिए ये काम बड़ी होशियारी से सफाई से करना है. पहले उस पर नज़र रखो . वो कहाँ जाती है किस किस से मिलती है? कौन कौन है उसके परिवार में ? हर बात पर नज़र रखो. उसकी पल पल की खबर रखो . कहीं न कहीं तो वो पुलिस क पहरे से बहार होती होगी. या फिर कोई तो होगा जिससे वो अकेले में मिलती होगी. ऐसा कोई भी इंसान मिले बस वहीँ पर घात लगा देना. और बस एक रत की hi बात है. एक बार वो शिकंजे में आ गयी तो आगे का रास्ता अपने आप बन जायेगा.
‘ पर मालिक इसके लिए तो हमें उसके आस पास hi रहना होगा . कहीं कोई नज़र में आ गया तो ? ‘
न. डी. : नज़र में तब आये है जब कोई हरकत करेगा. और उस पर नज़र दूर से hi रखनी है . ज्यादा करीब जाओगे तो पकडे जाओगे . अपने साथ 10-15 लोग ले जाओ. सही माइका देख कर उसे उठा कर सीधा अपने अड्डे पर ले आना . और होशिअरपुर रहना . हर पल की खबर देते रहना और यद् रहे अगर कोई गड़बड़ हुई तो अपने तक hi रखना. मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश मत करना . एक आदमी तुम लोगों क साथ कांटेक्ट में रहेगा . अब जाओ तुम और ये पैसे लेते जाओ . जितना ज़रूरत हो और ले लेना .
नारायण दस् ने नोटों की दो गड्डियां अपने आदमी क सामने फेंकते हुए कहा. 500-500 क हरे नोट्स की गड्डियां देख कर आदमी खुश हो गया और जल्दी से नोट उठा कर खुश होता हुआ सलाम थोक कर निकल गया . उसके जाते hi नारायण दस ऋतू सिंह क बारे में सोचता हुआ अपना लैंड खुजाने लगा .
न. डी. : साली जब से वर्दी में देखा है तब से नंगा देखने को दिल तड़प रहा है. अब तो तुझे अपनी रंडी बना कर hi रहूँगा . बहुत छूट फाड़ी हैं ज़िन्दगी में पर पहली बार ऐसी पुलिसवाली माल मिली है . तुझे तो रंडी बनाऊंगा सबसे बड़ी रंडी .
‘ क्या बात है तुम कुछ परेशां लग रही हो ? ‘ ऋतू को टेंशन में देख कर मंजू ने उससे सवाल किया. ऋतू इस वक़्त मंजू क घर आयी थी उसे निराशा थी इस बात से क मैनेजर से वो कुछ पता न कर पायी. अब इस केस की साडी उम्मीदें लगभग ख़तम हो गयी थी. ऋतू आज हॉस्पिटल में एडमिट पुलिस वालों से मिल कर आयी थी और मैनेजर की डेड बॉडी को उसकी फॅमिली को दे दिया गया था. ऋतू इस लिए यहाँ आयी थी क वो अमित को मिल कर इस बारे में बता सके पर अमित आज आया hi नहीं था यहाँ .
ऋतू सिंह : क्या बताऊँ यार वो मैनेजर क इतनी मुश्किल से पकड़ा था मगर रस्ते में hi एक एक्सीडेंट में वो मारा गया. अब समझ नहीं आ रही आगे क्या करूँ . अब और कोई उम्मीद भी नहीं है.
मंजू : एक बात कहूं मानेगी? तू न ये केस यहीं रोक दे. मैंने पहले hi कहा था क तुम उससे न उलझ . वो बड़े hi खतरनाक हैं. तू इस केस को यहीं बंद कर दे. और अमित से भी कह दे क बस यहीं तक था जो भी था. वर्ण वो भी इस बारे में सोचता रहेगा और अगर कहीं वो खुद कुछ करने क लिए आगे बढ़ा तो कहीं उस पर कोई मुसीबत न आ जाये. मैं नहीं चाहती बलजीत राइ की परछाई भी अमित पर पड़े.
ऋतू सिंह : ये तू कैसी बातें कर रही है ? मैंने अमित से वडा किया था क मैं मंजरी को इंसाफ ज़रूर दिलवाऊंगी . अब तू ये कह रही है क मैं केस बंद कर दूँ और उस मासूम लड़की को इंसाफ न दिलों. पता नहीं क्या किया होगा उस मासूम क साथ इन दरिंदों ने. ऐसे कैसे मैं ये केस बंद कर दूँ. मेरा ज़मीर इस बात की इजाज़त नहीं देता .
मंजू : तू समझ क्यों नहीं रही ? देख तू और अमित मेरी ज़िन्दगी का सबसे ज़रूरी हिस्सा हो और मैं नहीं चाहती तुम दोनों में से किसी को भी कुछ हो.
ऋतू सिंह : मुझे क्या होगा ? जानती है न मैं खुद पुलिस की इतनी बड़ी अफसर हूँ. मुझे कोई हाथ लगाने से पहले भी 100 बार सोचेगा और फिर मेरा तो प्रोफेशन hi ऐसा है. ऐसे कई लोग मिलते हैं. अगर मैं ऐसे hi डर्टी रही तो इंसाफ की हिफाज़त कैसे करुँगी . तुझे अमित की चिंता है न , मैं उसे इस सब से बहार hi रखूंगी. वैसे है कहाँ वो आज ? मैं तो उसी से बात करने आयी थी.
मंजू : पता नहीं आज वो कॉलेज से भी निकल गया था . आज सैटरडे है तो शायद गाओं चला गया होगा. वैसे ाचा hi हुआ जो वो नहीं है वर्ण ये सब सुन क पता नहीं वो क्या करता. अब इतना करना क खुद उससे कोई बात न कारण इस बारे में और अगर कोई बात वो पीछे भी तो बात घुमा देना.
ऋतू सिंह : ाचा ठीक है बाबा , तुझे उसकी बहुत चिंता है. पर यकीन मन , वो आसानी से किसी क आगे झुकने वाला नहीं है. ट्रेलर तो तू देख hi चुकी है और मैं भी. एक बात तो बता , तुम उसके साथ हफ्ते में कितने दिन प्यार करती हो ?
ऋतू सिंह क अचानक इस तरह क सवाल से मंजू एक डैम से शर्मा गयी और ऋतू को मरने लगी .
मंजू : की ..... शर्म नहीं आती तुझे ?
ऋतू सिंह : आअह्ह्ह्ह ...... ककक मर क्यों रही है? इसमें शर्म कैसी ? मैंने कौन सा गलत बात पूछ ली ? अब इतना तो मैं जानने का हक़ तो रखती हूँ न. आखिर बेस्ट फ्रेंड हूँ तुम्हारी. वैसे एक बात तो है , तू बहुत लकी है जो तुझे अमित जैसा साथी मिल गया. यू डेसेर्वे आईटी. और एक मैं हूँ , लगता है ऊपर वाले ने अकेले रहने की सजा दी है .
मंजू : ऐसा क्यों कहती है ? देखना तुझे भी कोई न कोई ज़रूर मिलेगा .
ऋतू सिंह : नहीं यार अब तो दिल hi नहीं करता ऐसा कुछ करने का. वैसे भी दुनिया में हर इंसान अपने आप में अकेला hi होता है. अगर एक जैसे दो इंसान बनाये होते तो मैं अमित क दूसरे रूप क साथ ज़िन्दगी सेटल कर लेती.
मंजू ने ऋतू की आँखों में सचाई को देख लिया था चाहे वो चेहरे पर हंसी मज़ाक क भाव लिए हुए थी. आईटी वो उसकी पक्की सहेली थी.
मंजू : तू जानती है न क हम कभी एक नहीं हो सकते . ये दुनिया इस बात कोई कभी एक्सेप्ट नहीं करेगी. मगर अमित फिर भी कहता है क चाहे वो मुझसे शादी न भी कर सके वो मुझे अपने साथ रखेगा. और अगर तुम चाहो तो तुम भी हमारे साथ रह सकती हो . अमित की कोई और कॉपी नहीं होगी दुनिया में , पर अगर तुम उसे इतना पसंद करती हो तो तुम भी उसके साथ .....
मंजू की बात सुन कर ऋतू क चेहरे से साडी मुस्कान एक पल में गायब हो गयी. वो तो मंजू को बलजीत राइ की वजह से सीरियस होते देख उसका मूड ठीक करने क लिए ऐसे मज़ाक कर रही थी मगर अभी जो मंजू ने कहा था उससे ऋतू अंडे तक हिल गयी थी. वो यही तो चाहती थी मगर वो मंजू का दिल न टूटे इस लिए अपने अरमान दबा रही थी .
ऋतू सिंह : ये तू क्या कह रही है ?
मंजू : वही हो तू सुन रही है . देख ये सच है क मैं अमित को दिलो जान से चाहती हूँ. पर तुम भी मेरे लिए कुछ काम नहीं हो. मैं जानती हूँ तेरे दिल में भी अमित क लिए फीलिंग्स हैं . और वैसे भी अमित कल को किसी न किसी से शादी तो करेगा hi . तो उसके ऊपर मेरा अकेली का अधिकार तो नहीं होगा न तो फिर मैं उसका प्यार क्या अपनी बहिन क साथ नहीं बाँट सकती ?
मंजू का दिल सच में बहुत बड़ा था और ऋतू ये अचे से जानती थी मगर जो कुछ अभी मंजू ने कहा था वो सुन कर तो ऋतू का दिल भर आया था . उसने मंजू को कास क अपने गले से लगा लिया. ऋतू की आँखों से अपने आप आंसू बह निकले .
ऋतू सिंह : तू सच में बहुत अछि है मंजू . तू मेरी दोस्त नहीं मेरी सगी बहिन से भी बढ़कर है. मेरे दिल की तुझे साडी खबर है .
मंजू : बहिन बोलती है न मुझे फिर मुझे खबर नहीं होगी तो किसे होगी? ाचा ये बात अमित को मत बताना. और उसे फाॅर्स भी मत करना. वो बहुत ाचा है . देख लेना वो तुम्हे भी प्यार देगा मगर प्यार से hi.
ऋतू सिंह : उस बुद्धू राम को तो मैं डंडे से सीधा करुँगी . रुक ज़ार अभी उसे फ़ोन लगाती हूँ. हैं कहाँ वो , काम से काम बता कर तो जाता.
मंजू : नहीं नहीं , मैंने कहा न उससे प्यार से पेश आ तभी वो तुझे प्यार करेगा . अगर ऐसे बात करेगी तो बुरा मन जायेगा .
ऋतू सिंह : अरे मेरी भोली बेगम तू अभी नहीं जानती अपने मजनू को. उसके कई रंग हैं. मैं उसे देख चुकी हूँ . रुक तू अभी
इतना कह कर ऋतू ने अमित को फ़ोन लगाया मगर उसने उठाया नहीं .
मंजू : रहने दे न , बाइक चला रहा होगा .
ऋतू सिंह : रिलैक्स मैडम रिलैक्स , फ़ोन hi तो कर रही हूँ कोई गोली थोड़ा चला रही हूँ. तब तक तुम अपने हाथों की मस्त कॉफ़ी पिलाओ मुझे .
मंजू उठ कर किचन में चली गयी और ऋतू फिर से अमित को फ़ोन करने लगी . इस बार अमित ने फ़ोन उठा लिया और उसने बताया क वो गाओं जा रहा है. ऋतू ने उसे वापिस आने का पूछा तो उसने मंडे का बोलै तो ऋतू ने कुछ सोच कर उसे मंडे इवनिंग मिलने को कह दिया .
‘ आ गया तू ? शुक्र है आज ठीक टाइम से आ गए हो अँधेरा होने से पहले . चल बैठ मैं तेरे लिए दूध लती हूँ .’ घर पहुँचते hi मैं माँ से मिला तो उन्होंने मुझे गले से लगा कर प्यार दिया और बिठा दिया .
अमित : माँ बाबा कहाँ हैं ?
गौरी : ठीक हैं अभी आते होंगे तू आराम से बैठ.
इतना कह कर माँ किचन में चली गयी तो दीपिका ममी आरव को गॉड में उठाये चली आयी . आते hi उन्होंने मेरे होंठों को चूमा और आरव को मेरी गॉड में देते हुए मुझे एक साइड से बाँहों में भर लिया .
अमित : अरे अरे छोड़िये कोई देख लेगा , क्या कर रही हैं आप ?
दीपिका : कोई नहीं देखेगा. कौन है घर में जो देखेगा? दोनों दीदी तो वैसे भी सब जानती hi हैं तो उनसे कैसा दर? उनके इलावा कोई नहीं है यहाँ.
अमित : आज क्या बात है ? इतना प्यार किस लिए?
दीपिका : बहुत दिनों से तुम्हे मैंने अचे से टाइम नहीं दिया न , सोचा आज साडी कसार निकल hi दूँ.
अमित : कसार निकालनी है ? सोच लीजिये , अगर मैंने कुछ कर दिया तो .....
दीपिका : जो मर्ज़ी कर लो मैं मन नहीं करने वाली. मैं खुद अंदर से तड़प रही हूँ .
अमित : बस बस , रोकिये खुद को वर्ण रुकना मुश्किल हो जायेगा . पता है न डॉ ने मन किया हुआ है 5 महीने काम से काम .
दीपिका : आग लगे इन डॉ को , मैं कैसे अपने आप को समझा रही हूँ ये मैं hi जानती हूँ. मेरा बस चले तो अभी या हैं पर .... चल छोड़ वो सब. ाचा ये बता अब करिश्मा और रमा दीदी क साथ सब ठीक है न ?
अमित : जी , मैं गया था उनके घर . अब सब ठीक है.
‘ क्या ठीक है ? किस बारे में बात हो रही है ? ‘ माँ ने अनादर आते हुए सवाल किया.
दीपिका : कुछ नहीं , मैं वो दिव्या दीदी क बारे में पूछ रही थी .
गौरी : उन दोनों को भी साथ ले अत , दोनों माँ बेटी अकेली पता नहीं कैसे रह लेती हैं. यहाँ तो एक तू नहीं होता घर में तो सारा घर hi सुना लगता है.
दीपिका : सच कहा दीदी , बेचारी दिव्या ने साडी ज़िन्दगी अकेले hi गुज़र दी है. कभी कभी तो मुझे बहुत दुःख होता है उसकी हालत पर: वो अकेली hi राधा को कैसे संभल रही है. माँ और बाप दोनों का फ़र्ज़ निभा रही है. जब उन्होंने अमित को फिर से अपना लिया था तो मुझे सबसे ज्यादा ख़ुशी हुई थी . काम से काम अमित तो है न जिनको वो अपने साथ रख लेती हैं. वर्ण हमारे इतना कहने क बाद भी वो कभी हमारे साथ रहने नहीं आयी. अकेले hi साडी ज़िन्दगी वहां गुज़र दी.
गौरी : सच कह रही हो , बहुत दुःख देखें हैं उस बेचारी ने . बीटा , हो सके तो उसे कभी दुःख मत देना . वो तुम्हे बहुत प्यार करती है. एक तू और दूसरी राधा , बस तुम दोनों hi उसकी ज़िन्दगी हो.
अमित : मैं कभी उनको दुःख नहीं दूंगा माँ आप भरोसा रखो .
गौरी : मैं भी क्या बातों में लग गयी , तू ये दूध पि , मैं रत क लिए खाना तैयार करती हूँ . बता क्या खायेगा रत को?
अमित : आप जो भी बना देंगी सब ाचा hi है मेरे लिए .
मेरी बात सुन कर माँ मुस्कुराई और मेरे सर को सेहला कर बहार निकल गयी. मैं दिव्या मौसी क बारे में सोचने लगा. आने से पहले दिव्या मौसी का जो चेहरा मैंने देखा था. वो मुझे खटक रहा था. तभी मुझे यद् आया क मैंने राधा को फ़ोन नहीं किया . मैंने जल्दी से फ़ोन निकला और राधा को कॉल लगा दी. कुछ देर मैंने राधा से बात की और दीपिका ममी को फ़ोन पकड़ा कर मैं कामिनी ममी क पास चला गया. मुझे देख वो भी खुश हो गयी और उठ कर बैठते हुए मुझे गाल से लगा लिया . उन्होंने बताया क अब उनका टाइम आ चूका है और किसी भी दिन अब वो माँ बनने वाली हैं . खैर ऐसे hi कुछ देर मैंने उनके साथ बातें की और फिर बाबा अजय मां और कमलेश मां भी वापिस आ गए . रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला गया . माँ को मैंने सीढ़ियां चरने से मन कर दिया था . इस लिए आज मैं कमरे में अकेला hi सो रहा था. कुछ देर मैंने रीमा से बात की . वो बहुत खुश लग रही थी मगर उसे दर्द भी था . मैंने मंजू मम से भी बात की और उन्हें सॉरी कहा . रत को मैं आराम से सोया. मैं देर तक सोता रहा , बड़े दिनों बाद ऐसी नींद आयी थी . सुबह मेरी नींद किसी क हिलने से खुली. मेरी ऑंखें खुलने से पहले hi एक दिलकश सी खुशबु मेरी सांसो में घुलनि शुरू हो गयी और एक कोमल सा एहसास किसी लड़की क बदन का मुझे हो रहा था. मेरी ऑंखें खुली तो सामने वही चेहरा था जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करता था .