अपडेट 211
मैंने घर का दरवाज़ा खटखटाया तो निधि दीदी ने दरवाज़ा खोला.
निधि : इतनी देर कैसे हो गयी? तुमने तो कहा था क डिनर तक आ जाऊंगा .
अमित : दीदी मैं तो मन कर रहा था पर शीना ने ज़बरदस्ती खाना खिला दिया . कह रही थी पहली बार आये तो खाना खाये बगैर जाने नहीं दूंगी .
निधि : और मैं यहाँ तुम्हारा खाने पर इंतज़ार कर रही थी .
अमित : तो क्या आपने खाना नहीं खाया ?
निधि : कैसे खा लेती? सोचा था तुम्हारे साथ hi खाना खाउंगी. पर तुम तो ...
अमित : सॉरी दीदी , वो शीना ने मजबूर कर दिया था. चलिए आप पहले खाना खाइये .
निधि : मुझे नहीं खाना
अमित : ऐसे कैसे नहीं खाना .
मैं किचन में गया और निधि दीदी क लिए खाना एक प्लेट में दाल कर ले आया. दीदी मन करने लगी पर मैंने अपने हाथों से खिलाया तो खाने लगी. फिर ऐसे hi मैंने उन्हें खाना खिला दिया .
अमित : शाबाश ,, दीदी मौसी गुस्सा तो नहीं हैं न .
निधि : नहीं , मैंने उन्हें बता दिया था क तुम देर से hi आओगे. अभी कुछ देर पहले hi वो सोने गयी हैं. नैना भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी.
अमित : सुबह मिल लूंगा उनसे. ाचा दीदी मैं सोने जा रहा हूँ.
निधि : जा कहाँ रहे हो, मैं भी आ रही हूँ तुम्हारे साथ hi सोना है मुझे . तुम चलो मैं दूध ले कर अति हूँ .
मैं अपने रूम में चला गया . अभी मैं अपने कपडे उतर hi रहा था क दरवाज़ा किसी ने खोला मैंने पीछे मुद कर देखा तो कारन भैय्या खड़े थे .
कारन : किसके साथ खड़ा था बहार ?
अमित : वो भैया शीना थी . मुझे ड्राप करने आयी थी .
मुझे अंदर से दर लग रहा था कहीं भैया ने कुछ देख तो नहीं लिया .
कारन : और तूने उसे बहार से hi जाने दिया . तू क्या अब हमें उसके सामने ज़लील करना चाहता है. अपनी तो इज़्ज़त है नहीं तो क्या हमारी इज़्ज़त भी ख़राब करेगा ? जनता भी है वो कितने बड़े बाप की बेटी है ? तुझे क्या , तुझे तो किसी की परवाह होती hi नहीं. दूसरों क टुकड़ों पर पलने वाला तू क्या जाने इज़्ज़त क्या होती है. वो तुझे यहाँ तक तरस खा कर छोड़ने चली आयी और तूने उसे अंदर तक नहीं आने दिया . छी ,, थी है तुझ पर .
मुझे कारन भैया की बातों पर गुस्सा आ गया . और मैं गुस्से से बोल पड़ा.
अमित : भैया आप ये गलत कर रहे हैं . वो मेरी दोस्त है और मैं अछि तरह से जनता हूँ मैं क्या कर रहा हूँ .
कारन : मुझसे ज़ुबान लड़ता है. अपने घरवालों की वजह से बर्दाश्त कर रहा हूँ तुझे वर्ण मैं .....
तभी नीचे से दीदी क ऊपर आने की आवाज़ आयी तो कारन भैया मुझे गुस्से से देखते हुए निकल गए . निधि दीदी हाथ में दूध का गिलास लिए रूम में आ गयी. मैं एक डैम गुस्से में था पर दीदी को देख कर खुद को नार्मल करने लगा और उनकी तरफ पीठ कर ली.
निधि : क्या हुआ ? अभी तो अचे भले थे अब एक डैम से गुस्सा कैसे आ गया तुम्हारे चेहरे पर .
अमित : नहीं तो मुझे तो कोई गुस्सा नहीं है.
निधि : इधर देखो मेरी तरफ .
अमित : क्या दीदी , मैं कपडे बदल रहा था और आप ऊपर से आ गयी . ज़रा बहार जाइये मुझे कपडे चेंज करने हैं .
निधि : तो कर ले न , मैंने कब रोका है तुम्हे .
अमित : आपके सामने कैसे कर सकता हूँ .
निधि : तो क्या हुआ , ाचा लो मैं उधर घूम जाती हूँ.
दीदी ने मेरी तरफ पीठ कर ली और मैंने कपडे बदल लिए .
अमित : लाइए दूध दीजिये .
निधि : गिला पकड़ते हुए ) अब बता क्या हुआ जो तू एक डैम से गुस्से में आ गया ?
अमित : मैं कब गुस्से में हूँ आप को ऐसे hi लगा होगा .
निधि : खा मेरी कसम .
अमित : इसमें कसम देने वाली बात कहाँ आ गयी . ाचा तो सुनो . वो शीना बहार से hi चली गयी न. मैं उसे अंदर आने को कह रहा था मगर वो आयी नहीं . ये बात जब मौसी को पता चलेगी तो वो नाराज़ होंगी न . इसी बात पर खुद पर गुस्सा आ रहा था .
निधि : ये को बात है भला , माँ क्यों गुस्सा होगी ? वैसे भी रत बहुत हो चुकी थी इसी लिए नहीं आयी होगी वो. तेरी दोस्त है और तुझे बहुत मानती है तो तू क्यों किसी की परवाह करने लगा . ाचा छोड़ वो सब, ये बता आज का एग्जाम कैसा हुआ ?
अमित : बहुत ाचा . सरे क़ुएस्तिओन्स आगे थे मुझे . थैंक्स दीदी आपने ने जो गाइड किया था वो काम आ गया .
निधि : मरूंगी अगर मुझे किसी बात क लिए था का कहा तो . वैसे भी तुम बॉस हो मेरे और मैं तुम्हारी सेक्रेटरी.
अमित : दीदी आप फिर शुरू हो गयी. मैं आपसे बात नहीं करूँगा अगर आप ऐसा कहेंगी तो .
निधि : ाचा ाचा चल अब सो जा . कल जल्दी उठ कर अगले एग्जाम की तयारी करनी है .
फिर हम दोनों साथ में सो गए . दीदी रोज़ की तरह मेरी बाजु पर सर रख कर सो गयी . सुबह मेरी आँख खुली मेरे फ़ोन पर लगातार बज रही रिंगटोन से. मैंने देखा तो अनजान सा no. था .
अमित : hello
‘ सो रहे थे क्या ? ‘
ये एक लड़की की आवाज़ थी , मैं अभी उठा hi था इस लिए मुझे पहचान नहीं हो प् रही थी .
अमित : आप कौन बोल रही हैं ?
‘ इतनी जल्दी भूल गए ? अभी तो कुछ घंटे hi हुए हैं तुमसे दूर आये और अभी से भूल गए ? ‘
अब मेरा दिमाग होश में आया और मुझे समझ में आ गया क ये तो रीना है .
अमित: रीना ??
रीना : हाँ रीना , तुमने मेरी आवाज़ नहीं पहचानी ?
अमित : सॉरी यार वो मैं सो रहा था इस लिए पता नहीं चला .
तभी दीदी मेरी आवाज़ सुन कर उठ कड़ी हुई .
निधि : किस से बात कर रहे हो सुबह सुबह ?
रीना : ये किसकी आवाज़ है ? ये लड़की कौन है तुम्हारे साथ ? इतनी सुबह ये क्या कर रही है तुम्हारे साथ ?
अमित : सुबह कहाँ वो तो रत से hi यहाँ हैं
रीना : क्याआ ????
रीना ( मन में ) हे भगवन नहीं ऐसा नहीं हो सकता . प्लीज प्लीज प्लीज भगवन जी ऐसा न हो जो मैं सोच रही हूँ .
अमित : अरे क्या हुआ आप चुप क्यों हो गयी ? लो आप खुद hi बात कर लो .
रीना : नहीं no.....
मैंने फ़ोन दीदी को पकड़ा दिया क्यूंकि को मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देख रही थी .
अमित : लो दीदी बात करो , डॉ रीना है.
रीना का नाम सुनते hi दीदी क चेहरे पर यकायक स्माइल आ गयी जहाँ थोड़ी देर पहले hi उलझन सी थी.
निधि : गुड मॉर्निंग डॉ साहिबा कैसी हैं आप ? पाहुबच गयी लंदन ?
रीना : आप ????
निधि : ओह सॉरी , मैं निधि बात कर रही हूँ . हम मिले थे ने ? अमित मेरी मौसी का बीटा है .
रीना : ओह्ह्ह्हह्ह अआप निधि दीदी हैं मैंने सोचा .....
निधि : क्या सोचा ?
रीना : कुछ नहीं , आप कैसी हैं ?
रीना ( मन ने ) हे भगवन तेरा लाख लाख शुक्रिया . मैं भी न क्या क्या सोचने लगी थी. मेरा अमित ऐसा नहीं है .
निधि : मैं बिलकुल ठीक हूँ. आप बताओ कब पहुंची लंदन.
रीना : 2 घंटे हो गए अभी रूम पर आ कर सामान रख कर सोचा पहले सबसे बात कर लूँ.
निधि : ाचा किया , लो बात करो अमित से
अमित : हांजी , तो कैसा रहा सफर ?
रीना : ाचा रहा, तुम्हे यही बताने क लिए फ़ोन किया था क मैं अचे से पहुँच गयी हूँ. और इस वक़्त अपने रूम पर हूँ . ये मेरा hi फ़ोन है. सेव कर लेना no.
अमित : ठीक है. वहां क्या टाइम है अभी?
रीना : यहाँ रत क 12 बजने वाले हैं.
अमित : क्या ? अभी वहां रत hi है? तो आप जग क्यों रही हो ? इतना लम्बा सफर कर क पहुंची हो . चलो जल्दी से सो जाओ और रेस्ट करो.
रीना : नहीं अभी तुमसे बात करनी है मुझे.
अमित : बातें तो जब चाहो कर लेना . पर पहले रेस्ट कर लो. मैं रख रहा हूँ. और आप भी रेस्ट करो . Bye
रीना : सुनो तो ......
मैंने फ़ोन काट दिया . और तब तक दीदी जा चुकी थी. मैं भी फ्रेश हुआ और एक्ससरसीसे करने ऊपर चला गया . उसके बाद तैयार हो कर मैंने सबके साथ नाश्ता किया. और फिर मोहित क साथ कल्पना सीमा क यहाँ. हम ने अभी किताबें बंद hi की थी क मेरे फ़ोन पर नैना दीदी का फ़ोन आने लगा.
अमित : hello
नैना : घबराई हुई ) तुम कहाँ हो ? जल्दी से घर आ जाओ ?
अमित : चिंता में ) क्या गया आप ऐसे क्यों बात कर रही हैं ?
नैना : रट हुए ) वो कारन को .....
अमित : क्या हुआ कारन भैया को ?
नैना : कारन को पुलिस ने पकड़ लिया है . माँ और पापा वहीँ गए हैं. मैं घर पर अकेली हूँ मुझे बहुत दर लग रहा है प्लीज जल्दी आ जाओ.
अमित : आप रोइये मत मैं अभी आया .
मैंने फ़ोन बंद किया तो कल्पना सीमा और मोहित मेरी तरफ हैरानी से देख रहे थे
कल्पना : क्या हुआ ? किसका फ़ोन था ?
अमित : कुछ नहीं , वो नैना दीदी का फ़ोन था कोई प्रॉब्लम हो गयी है घर पर .
कल्पना/ मोहित : कैसी प्रॉब्लम?
अमित : मुझे जाना होगा बाद में बताता हूँ .
कल्पना : अरे बताओ तो सही शायद हम कोई मदद कर दें .
अमित : अभी तो मुझे खुद नहीं पता. घर जा कर देखता हूँ. अगर तुम्हारी ज़रूरत पड़ी तो फ़ोन करूँगा .
कल्पना : ठीक है. अगर कहो तो मैं चलती हूँ न साथ में .
अमित : कोई बात नहीं . अगर ज़रूरत हुई तो फ़ोन करूँगा .
मैं जल्दी से मोहित क साथ निकल गया . मैंने सीमा क सामने जान बुझ कर नहीं बताया क क्या बात है . मोहित कार में बैठता hi सवाल करने लगा. मैंने उसे बस इतना hi कहा क कारन भैया का झगड़ा हो गया है . हम जल्दी से घर पहुंचे तो नैना दीदी घर पर अकेली थी. वो बेचारी रो रही थी. मुझे देखते hi भाग कर मेरे गले लग गयी.
अमित : शह्ह्ह्हह्ह , दीदी प्लीज चुप हो जाइये खुद को सम्भालिये . मैं आ गया हूँ न. कुछ नहीं होगा भैया को. मौसा जी गए हैं न .
नैना :रट हुए ) मुझे बहुत दर लग रहा है . उसके दोस्तों का फ़ोन आया था क कॉलेज में झगड़ा हुआ है और ...
अमित : और क्या ?
नैना: जिसको चोट लगी है वो पुलिस वाले का बीटा है. और उसी ने पकड़ा है .
अमित : कुछ नहीं होगा आप हौंसला रखिये .
मोहित : अंदर अत हुआ ) क्या हुआ है ?
अमित : कुछ नहीं यार कारन भैया का कॉलेज में कोई पन्गा हुआ है. आओ तुम बैठो यहाँ .
नैना दीदी अभी तक मेरे सीने से लगी हुई थी. मोहित क आने पर मैंने उन्हें खुद से अलग किया और उनके आंसू पोंछे.
मोहित : दीदी आप क्यों इतना रो रही हैं? कॉलेज में ये सब तो नार्मल बात है.
अमित : यही तो मैं भी समझा रहा था. चलिए हाथ मुँह धो कर आइये अपने. छोटी छोटी बातों पर ऐसे दर जाती हो. एग्जाम की तयारी करो अपनी.
नैना दीदी थोड़ी नार्मल हुई और बाथरूम में चली गयी. कल्पना का फ़ोन भी मुझे आ गया और मैंने उसे बता दिया क कारन भैया का झगड़ा हुआ है. मोहित पूछ रहा था क उसकी कोई ज़रूर है तो बोले वो अंकल से बात करेगा. मगर मैंने मन कर दिया. मुझे लगा क मौसा जी गए हैं तो निबटा hi लेंगे. मोहित कुछ देर बैठा रहा और फिर उसे घर से फ़ोन आने लगा तो मैंने उसे जाने को कह दिया. मैं मौसा जी का फ़ोन लगा रहा था पर उनका फ़ोन लग नहीं रहा था. नैना दीदी मेरे साथ hi लग कर बैठी रही. वो अंदर से बहुत घबराई हुई थी. हमेशा खुश रहने वाली और मज़ाक करने वाली नैना दीदी ऐसे रोटी हुई बिलकुल भी अछि नहीं लग रही थी. मुझे मौसा जी पर गुस्सा आ रहा था क काम से काम फ़ोन तो उठा ले. तभी निधि दीदी की कॉल आने लगी .
निधि : टेंशन में ) अमित तुम कहाँ हो ?
अमित : मैं तो घर पर हूँ दीदी , नैना दीदी क साथ. पर आप कहाँ हैं? और कारन भैया का क्या हुआ ? मौसा जी का फ़ोन कब से तरय कर रहा हूँ मगर लग नहीं रहा .
निधि : इसी लिए मैंने फ़ोन किया है . बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है . इस बेवकूफ ने दोस्तों क साथ मिल कर कॉलेज में झगड़ा किया है. और जिसे चोट लगी है वो पोलिसवाले का बीटा है. और उसी ने पकड़ा है. अब वो छोड़ नहीं रहा है और इन सब पर केस बनाने का कह रहा है . अगर ऐसा हो गया तो उसकी पड़े जाएगी वो अलग ऊपर से क्रिमिनल का ठप्पा लग जायेगा. पता नहीं कब अकाल आएगी इसे. माँ और पापा का भी बुरा हल है वो इंस्पेक्टर किसी की बात नहीं सुन रहा . मैंने वकील से बात की है पर वो भी कह रहा है क F.I.R क बाद hi वो कुछ कर सकता है . जब की अब तक उस इंस्पेक्टर ने न F.I.R कटी है न वो किसी की सुन रहा है. और पापा बता रहे हैं क वो सब को ......
इतना कह के दीदी रोने लगी.
अमित : क्या दीदी सबको क्या ?
निधि : वो सब को टार्चर कर रहा है और रत भर वो यही सब करने वाला है .
अमित : क्या ???? मैं ऐसा नहीं होने दूंगा . आप मुझे उस इंस्पेक्टर का नाम और पुलिस स्टेशन कौन सा है ये बताइये.
निधि : तुम क्या करोगे ? मैं कर रही हूँ वकील से बात .
अमित : आप बस मुझे नाम बताइये .
निधि : इंस्पेक्टर क्सक्सक्सक्सक्स ,,, क्सक्सक्सक्सक्स पुलिस स्टेशन. मगर तुम करोगे क्या ?
अमित : वो सब आप छोड़िये . बस अभी कारन भैया को वो लोग छोड़ देंगे . आप गाड़ी ले जाइये उन्हें लेन क लिए .
निधि : पर वो वकील .....
अमित : मुझ पर भरोसा नहीं है क्या ?
निधि : तुम पर तो खुद से भी ज्यादा भरोस है .
अमित : तो फिर जाइये और कारन भैया को ले आइये .
इतना कह कर मैंने फ़ोन काट दिया और फ़ौरन ऋतू सिंह को फ़ोन लगा दिया .
ऋतू : तो जनाब को हमारी यद् आ hi गयी . आज तो लड्डू बाँटने चाहिए .
अमित : यद् तो उन्हें किया जाता है जिन्हे भूले हो. और आपको कोई भूल सकता है क्या? ाचा मुझे आपसे एक बहुत ज़रूरी काम है जो सिर्फ आप hi कर सकती हैं .
ऋतू : हुकम करो , तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ .
अमित : मेरे कजिन को पुलिस ने पकड़ लिया है. कॉलेज में लड़कों में कुछ झगड़ा हो गया था और जिसे चोट लगी वो पुलिस वाले क बीटा था . अब उस इंस्पेक्टर ने सबको पकड़ के अंदर कर दिया है और केस बनाने को कह रहा है. अगर ऐसा हो गया तो भैया का कर्रिएर बर्बाद हो जायेगा. प्लीज आप कुछ करो .
ऋतू : ये तो सरासर गलत है. एक स्टूडेंट क साथ ऐसी झड़ती तो नहीं होनी चाहिए . चाहे कोई भी हो. मुझे उसका नाम और पुलिस स्टेशन बताओ अभी .
अमित : मेरे कजिन का नाम कारन है और इंस्पेक्टर का नाम क्सक्सक्सक्स , क्सक्सक्सक्सक्स पुलिस स्टेशन
ऋतू : आधे घंटे में तुम्हारा कजिन अपने घर होगा .
अमित : थैंक यू वैरी मच .
ऋतू : ख़बरदार ऐसा कहा तो . वैसे इसकी फी देनी होगी तुम्हे .
अमित : आप जो कहोगी वो करूँगा .
ऋतू : हम्म्म , जब मिलोगे तब बताउंगी. ाचा मैं रखती हूँ और अभी तुम्हारे कजिन को छुड़ाती हूँ. मुहाः ी लव यू स्वीट हार्ट. Bye
इतना कह कर ऋतू सिंह ने फ़ोन काट दिया .
नैना : किस्से बात कर रहे थे ?
मैं दीदी क इस सवाल से एक डैम से घबरा गया. मुझे लगा कहीं मैंने कोई ऐसी वैसी बात तो नहीं कह दी.
अमित : कुछ नहीं दीदी , आप ने सुना न . मैं कारन भैया क बारे में hi बात कर रहा था .
नैना : मगर किस्से ?
अमित : हैं एक पुलिस अफसर. अभी वो कारन भैया को छुड़ा देंगी.
नैना : सच में ? क्या वो बड़ी अफसर हैं ? तुम कैसे जानते हो उनको ?
अमित : दीदी आप सवाल बहुत करती हो. जनता हूँ बस . चलिए उठ कर खाना देखिये बना है या नहीं. अभी सब आएंगे तो भूख लगी होगी.
मेरी बात सुन कर नैना दीदी किचन में चली गयी . और मैं बैठ गया आराम से.
उधर पुलिस स्टेशन में-
‘ बहुत चर्बी चढ़ी है तुम लोगों को ? आज सबकी खाल उधेड़ कर रख दूंगा . सालो मेरे बेटे पर हाथ उठाया ‘ रोआबदार चेहरे वाला ये पोलिसवाले जिसके कंधे पर तीन सितारे लगे थे. हवालात क अंदर 4 लड़कों को तीन हवलदार क साथ मिलकर बुरी तरह डंडों से मर रहा था . और वो लड़के ज़ोर ज़ोर से चीख रहे थे. जिनमे से कारन भी एक था .
बहार रजनी अपने पति क साथ बैठी रो रही थी और ऐसा hi हल उनके साथ बैठे उन लोगों का भी था जो बाकि लड़कों क घर से थे. अंदर से आती लड़कों की चीखें सुन कर बेचारे सब रो रहे थे. और पुलिस वाले थे क उनकी बात भी नहीं सुन रहे थे .
रजनी : रट कुछ कीजिये न ? वो कितनी बुरी तरह मर रहे हैं .
राजेश : अब मैं क्या करूँ ? ये लोग तो कोई बात hi सुनने को तैयार नहीं . भगवन क आगे हाथ जोड़ो . ...... भाई साहब प्लीज आप इंस्पेक्टर साहब से कहिये न. वो सब बचे हैं. बचपने में गलती कर बैठे . कहें तो हम माफ़ी मांग लेते हैं उनके पाऊँ पकड़ कर .
राजेश ने एक पुलिस वाले से कहा तो वो भी सर झटक कर चला गया . हर कोई किसी न किसी को फ़ोन कर रहा था और सिफारिश करवा रहा था पर वो इंस्पेक्टर किसी से बात करने को भी तैयार नहीं था . थोड़ी देर डंडा परेड करने क बाद वो इंस्पेक्टर हवलदारों को काम पूरा करने को कह कर अपना पसीना पोंछते हुए बहार निकला जहाँ सब हाथ जोड़े बैठे थे. इंस्पेक्टर जैसे hi आकर अपनी चेयर पर बैठा तो उसकी नज़र रजनी पर पड़ी . जैसा की होता hi है आम तौर पर पुलिसवालों का हल , उसकी गन्दी नज़र रजनी क गदराये हुए जिसम को सराय करने लगी .
राजेश : हाथ जोड़ते हुए ) थानेदार साहब दया कर क हमारे बेटे को छोड़ दीजिये . वो सब नादाँ .....
इंस्पेक्टर : क्यों बे , बीटा पैदा किया है ता गुंडा? सेल पड़ने जातें हैं या दंगा फसाद करने ? जानते हो इन लोगों ने किसके ऊपर हाथ उठाया है ? मेरे बेटे क ऊपर . ऐसा हल करूँगा क सेल ज़िन्दगी भर दोबारा किसी से झगड़ा नहीं करेंगे .
‘ भगवन क लिए एक बार माफ़ कर दीजिये सर . आप जितने पैसे कहोगे .....’
ये भी किसी लड़के का बाप था
इंस्पेक्टर : तू मुझे पइसे देगा ? तेरी औकात क्या है साले? ले मैं देता हूँ तुझे पैसा बोल कितना चाहिए? तेरे बेटे की लाश ले जाना आ कर कल .
ये बात सुन कर रजनी की आँखों से मोठे मोठे आंसू बहने लगे. माँ जो थी .
रजनी : हाथ जोड़ते हुए ) प्लीज हमारे बेटे को छोड़ दीजिये . मैं आपने पाऊँ पड़ती हूँ .
इंस्पेक्टर: रजनी क हाथ पकड़ कर सहलाते हुए ) अरे अरे आप क्यों रो रही हैं? आप जैसी खूबसूरत औरत की आँखों में आंसू अचे नहीं लगते . आप क बेटे को मैं ऐसे hi छोड़ दूंगा. बस आपको मेरे साथ ......
इंस्पेक्टर ने कमीने हंसी हँसते हुए रजनी क हाथ मसल दिए तो रजनी ने अपने हाथ झटक दिए .
रजनी : शर्म नहीं आती ऐसी गन्दी हरकत करते हुए ?
इंस्पेक्टर: ऐ हवलदार निकालो सबको बहार और उन चरों की अचे से ठुकाई करो सैलून को पानी तक नहीं देना .
ये बात सुन कर सब और भी दर गए. रजनी और राजेश इंस्पेक्टर की गन्दी नज़र समझ चुके थे. मगर बेटे को बचने का और कोई रास्ता भी नज़र नहीं आ रहा था. रजनी अंदर hi अंदर इंस्पेक्टर की बात मैंने पर विचार कर रही थी क इंस्पेक्टर का फ़ोन बजने लगा और उसने मोबाइल पर no. देखते hi कॉल पिक की .
इंस्पेक्टर : यस मैडम
...............
इंस्पेक्टर : hi वो मेरे बेटे ....
................
इंस्पेक्टर: सॉरी मैडम .....
................
इंस्पेक्टर : सॉरी मैडम प्लीज .........
................
इंस्पेक्टर: जी मैडम , अभी मैडम ......
................
इसी क साथ कॉल कट हो गयी . सब इंस्पेक्टर की तरफ hi देख रहे थे . पता नहीं किसका फ़ोन था पर जो भी था वो कोई बड़ी शख्सियत थी . जिसके फ़ोन से इंसान सिर्फ अपनी जगह पर खड़ा हो गया था बल्कि चेहरे पर पसीना आ गया था. सब ख़ामोशी से इंस्पेक्टर को hi देख रहे थे
इंस्पेक्टर: हवलदार , सबको छोड़ दो .
हवलदार : पर सर ......
इंस्पेक्टर: तुम्हे सुना नहीं . जल्दी बहार ला सबको .
हवलदार भागता हुआ अंदर गया और 5 मिनट्स क अंदर hi सब लड़के सामने हाज़िर थे देख कर hi पता चल रहा था क उनकी अचे से खातिरदारी हुई है.
इंस्पेक्टर: तुम में से कारन कौन है ?
कारन : मैं हूँ
इंस्पेक्टर: कौन है इसके साथ ?
रजनी / राजेश : ये हमारा बीटा है .
इंस्पेक्टर : हाथ जोड़ते हुए ) सॉरी सर . मुझे पता नहीं था आप मैडम क पहचान वाले हैं. अगर आप पहले बता देते तो ऐसा नहीं होता. प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये और मैडम प्लीज मेरी गलती क लिए मुझे माफ़ कर देना. मेरा कोई गलत मतलब नहीं था. प्लीज मैडम से ऐसा वैसा कुछ मत कहना
रजनी को तो समझ hi नहीं आ रहा था क एक डैम से ऐसा क्या हो गया. अभी जो हवस की नज़रों से उसे देख रहा था अभी वो माफ़ी मांग रहा है . राजेश और रजनी दोनों यही सोच रहे थे क ये किस मैडम की बात कर रहा है. अब दोनों ये भी पूछ नहीं सकते थे क कौन सी मैडम वर्ण कहीं फिर से कारन को अंदर hi कर दे . इस लिए चुपचाप वो कारन को साथ लेकर बहार निकल आये. वो इंस्पेक्टर बार बार हाथ जोड़ कर माफ़ी मांग रहा था . अभी कुछ देर पहले सब उस इंस्पेक्टर आगे हाथ जोड़ रहे थे और अब वो हाथ जोड़े खड़ा था . बाकि सब लोग भी हैरान थे . बहार निकलते hi सब राजेश और रजनी का शुक्रिया ऐडा करने लगे और साथ hi पूछने लगे क किस मैडम का फ़ोन आया था वो किसकी जान पहचान वाले हैं ? मगर राजेश और रजनी दोनों hi खामोश थे. यहाँ तक क खुद कारन भी हैरान था मगर फ़िलहाल उसकी अपनी गांड फटी पड़ी थी ठुकाई से . अभी वो दोनों बहार तक hi ए थे क सामने निधि की कार आकर रुकी. निधि अपने सामने अपने माँ बाप और कारन को देख कर हैरान भी हुई. फिर उसने उनको गाड़ी में बैठने को कहा . राजेश ने अपना स्कूटर ले कर आना था इस लिए वो कारन और रजनी को गाड़ी में बैठने का कह कर स्कूटर की तरफ चला गया . निधि ने गाड़ी घर की तरफ मोड़ ली .
निधि : माँ , वो इंस्पेक्टर मन गया ? पापा तो कह रहे थे वो मन नहीं रहा .
रजनी : हाँ बेटी वो किसी की नहीं सुन रहा था. पर पता नहीं किसका फ़ोन आया क एक डैम से उसके सुर बदल गए और उसने हमसे माफ़ी मांगी और सबको छोड़ दिया.
निधि : किसका फ़ोन आया था ?
रजनी : पता नहीं , पर वो फ़ोन पर बार बार सॉरी मैडम कह रहा था. और जानती हो वो हमसे कह रहा था हम मैडम से कुछ न कहें. मुझे तो समझ नहीं आ रही आखिर ये मैडम कौन है? क्या तुमने किसी मैडम से कहा था?
निधि : नहीं तो . ( कुछ सोचते हुए ) समझ गयी ये किसका काम है .
रजनी : किसका ??
निधि : घर चलो अभी पता चल जायेगा .
कुछ देर में hi निधि ने कार घर क सामने रोक दी.
गाड़ी की आवाज़ सुनते hi मैं और नैना दीदी बहार आये . सामने मौसी और निधि क साथ कारन भैया को देख कर नैना दीदी दौड़ कर उनके पास चली गयी और निधि दीदी ने दौड़ कर मुझे गले लगा लिया .
निधि : थैंक यू थैंक यू थैंक यू थैंक यू वैरी मच . मुआअआआअह्हह्ह्ह्ह
निधि दीदी ज़ोर से मेरे गले मिलती हुई मुझे गलों पर चूमने लगी . मैं तो उनके ऐसा करने से हैरान हो गया. यही हल रजनी मौसी का भी था.
निधि : हस्ते हुए ) जानती हो माँ वो मैडम का फ़ोन क्यों आया था ? इसी की वजह से . अभी एक घंटा भी नहीं हुआ मेरी इससे बात हुए. इसने कहा था क आप पुलिस सतसतातिओं जाओ और सबको लेकर घर आ जाओ. पता नहीं वो मैडम कौन है पर जो भी है उसने फ़ोन इसी क कहने पर किया है . अब बताओ जल्दी से कौन है वो मैडम ?
रजनी मौसी ये बात सुनते hi तेज़ी से मेरे करीब आयी और मेरा सर पकड़ कर मुझे चेहरे पर लगातार चूमने लगी .
रजनी : मुहाहह मुआअह्ह्ह्ह मेरा बीटा , तूने मुझे बचा लिया .
अमित : आपको ???
रजनी : मम मेरा मतलब है कारन को बचा कर तुमने हम सब को बचा लिया .
निधि : चलो माँ पहले अंदर तो चलो .
हम सब अंदर आ गए और हॉल में hi सोफे पर मेरे एक तरफ दीदी और एक तरफ मौसी बैठ गयी . मौसी तो मेरा चेहरा छोड़ hi नहीं रही थी . और दीदी मेरी एक बाजु पकड़ कर बैठ गयी. कारन भैया जिनका मुँह पहले hi सुजा हुआ था और ऊपर से मुँह फुला लिया .
कारन : माँ मुझे भूख लगी है और आप दोनों इसे लेकर बैठी हो .
रजनी : गुस्से से ) भूख लगी है तुझे ? शर्म नहीं आयी तुझे या वो भी बेचकर खा गया है? तेरी वजह से आज मुझे और तेरे पापा को ज़लील होना पड़ा. तेरी वजह से आज ज़िन्दगी में पहली बार पुलिस स्टेशन जाना पड़ा. तेरी वजह से हमको अपराधियों की तरह बिठाया गया . तुझे भूख लगी है. थोड़ी सी भी शर्म बाकि है तो अभी इसके पाऊँ में पकड़ कर माफ़ी मांग .
अमित : अरे मौसी ये आप क्या कह रही हैं
रजनी : तुम चुप रहो. तुम नहीं जानते आज क्या हो जाता अगर तुम हमारी मदद न करते . तुम्हारा एहसान मैं कैसे उतरूंगी ?
अमित : ये क्या मौसी आप ये क्या कह रही हैं ?
रजनी : मैं ठीक कह रही हूँ. चल माफ़ी मांग सुना नहीं तुझे .
मौसी ने गुस्से से करना भैया को कहा तो वो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगे . तभी रजनी मौसी ने खिंच कर एक क बाद एक 4-5 थप्पड़ कारन भाई क मुँह पर लगा दिए .
रजनी : ऑंखें किसे दिखा रहा है . चल माफ़ी मांग वर्ण घर से बहार निकल .
मौसी ने कारन भैया को थप्पड़ मर कर उनका कलर पकड़ कर बहार की तरफ धकेला . तो मैं उठ कर मौसी की तरफ दौड़ा .
अमित : मौसी छोड़ दीजिये जाने दीजिये .
रजनी : तू चुप रह . आज इसके भूत निकल कर रहूंगी .
अमित : रहने दीजिये मौसी , देखो न पहले hi भैया की बुरी हालत है और आप उन्हें ऐसे मर रही हैं. आप छोड़िये छोड़िये इन्हे. अगर मेरी ज़रा सी भी परवाह है तो छोड़ दीजिये
मौसी ने मेरे कहने पर कारन भैया को छोड़ दिया . चाहे मौसी कारन भैया को मर रही थी पर उनकी आँखों में आंसू थे. मेरे इशारे पर नैना दीदी कारन भैया को खिंच कर ले गयी और मैं मौसी को अपने गले से लगा कर फिर से सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर में मौसा जी भी आ गए और उनहोंने भी कारन भैया को काफी कुछ कहा. निधि दीदी मेरे साथ hi बैठी रही और एक बार भी उनहोंने कारन भैया की तरफ नहीं देखा और न hi कोई बात की . हमने मिल कर साथ में खाना खाया. मौसा जी को मौसी ने बता दिया और वो भी मुझसे पूछने लगे तो मैंने यही बहाना बना दिया क वो मेरी मैडम की दोस्त हैं सप ऋतू सिंह और उन्होंने ने hi फ़ोन किया है तो सब मन गए और फिर मुझे अपनी मैडम से मिलवाने को कहने लगे . करते करते ऐसे hi शाम हो गयी और फिर मेरे फ़ोन पर एक फ़ोन आया जिसको सुनते hi मेरे पाऊँ नीचे ज़मीन खिसक गयी .
अमित : दीदी जल्दी से कार निकालो
रजनी / निधि / राजेश / नैना : क्या हुआ ????