Adultery Manhoos se mahan tak - Page 29 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 211



मैंने घर का दरवाज़ा खटखटाया तो निधि दीदी ने दरवाज़ा खोला.

निधि : इतनी देर कैसे हो गयी? तुमने तो कहा था क डिनर तक आ जाऊंगा .

अमित : दीदी मैं तो मन कर रहा था पर शीना ने ज़बरदस्ती खाना खिला दिया . कह रही थी पहली बार आये तो खाना खाये बगैर जाने नहीं दूंगी .

निधि : और मैं यहाँ तुम्हारा खाने पर इंतज़ार कर रही थी .

अमित : तो क्या आपने खाना नहीं खाया ?

निधि : कैसे खा लेती? सोचा था तुम्हारे साथ hi खाना खाउंगी. पर तुम तो ...

अमित : सॉरी दीदी , वो शीना ने मजबूर कर दिया था. चलिए आप पहले खाना खाइये .

निधि : मुझे नहीं खाना

अमित : ऐसे कैसे नहीं खाना .

मैं किचन में गया और निधि दीदी क लिए खाना एक प्लेट में दाल कर ले आया. दीदी मन करने लगी पर मैंने अपने हाथों से खिलाया तो खाने लगी. फिर ऐसे hi मैंने उन्हें खाना खिला दिया .

अमित : शाबाश ,, दीदी मौसी गुस्सा तो नहीं हैं न .

निधि : नहीं , मैंने उन्हें बता दिया था क तुम देर से hi आओगे. अभी कुछ देर पहले hi वो सोने गयी हैं. नैना भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी.

अमित : सुबह मिल लूंगा उनसे. ाचा दीदी मैं सोने जा रहा हूँ.

निधि : जा कहाँ रहे हो, मैं भी आ रही हूँ तुम्हारे साथ hi सोना है मुझे . तुम चलो मैं दूध ले कर अति हूँ .

मैं अपने रूम में चला गया . अभी मैं अपने कपडे उतर hi रहा था क दरवाज़ा किसी ने खोला मैंने पीछे मुद कर देखा तो कारन भैय्या खड़े थे .

कारन : किसके साथ खड़ा था बहार ?

अमित : वो भैया शीना थी . मुझे ड्राप करने आयी थी .

मुझे अंदर से दर लग रहा था कहीं भैया ने कुछ देख तो नहीं लिया .

कारन : और तूने उसे बहार से hi जाने दिया . तू क्या अब हमें उसके सामने ज़लील करना चाहता है. अपनी तो इज़्ज़त है नहीं तो क्या हमारी इज़्ज़त भी ख़राब करेगा ? जनता भी है वो कितने बड़े बाप की बेटी है ? तुझे क्या , तुझे तो किसी की परवाह होती hi नहीं. दूसरों क टुकड़ों पर पलने वाला तू क्या जाने इज़्ज़त क्या होती है. वो तुझे यहाँ तक तरस खा कर छोड़ने चली आयी और तूने उसे अंदर तक नहीं आने दिया . छी ,, थी है तुझ पर .

मुझे कारन भैया की बातों पर गुस्सा आ गया . और मैं गुस्से से बोल पड़ा.

अमित : भैया आप ये गलत कर रहे हैं . वो मेरी दोस्त है और मैं अछि तरह से जनता हूँ मैं क्या कर रहा हूँ .

कारन : मुझसे ज़ुबान लड़ता है. अपने घरवालों की वजह से बर्दाश्त कर रहा हूँ तुझे वर्ण मैं .....

तभी नीचे से दीदी क ऊपर आने की आवाज़ आयी तो कारन भैया मुझे गुस्से से देखते हुए निकल गए . निधि दीदी हाथ में दूध का गिलास लिए रूम में आ गयी. मैं एक डैम गुस्से में था पर दीदी को देख कर खुद को नार्मल करने लगा और उनकी तरफ पीठ कर ली.

निधि : क्या हुआ ? अभी तो अचे भले थे अब एक डैम से गुस्सा कैसे आ गया तुम्हारे चेहरे पर .

अमित : नहीं तो मुझे तो कोई गुस्सा नहीं है.

निधि : इधर देखो मेरी तरफ .

अमित : क्या दीदी , मैं कपडे बदल रहा था और आप ऊपर से आ गयी . ज़रा बहार जाइये मुझे कपडे चेंज करने हैं .

निधि : तो कर ले न , मैंने कब रोका है तुम्हे .

अमित : आपके सामने कैसे कर सकता हूँ .

निधि : तो क्या हुआ , ाचा लो मैं उधर घूम जाती हूँ.

दीदी ने मेरी तरफ पीठ कर ली और मैंने कपडे बदल लिए .

अमित : लाइए दूध दीजिये .

निधि : गिला पकड़ते हुए ) अब बता क्या हुआ जो तू एक डैम से गुस्से में आ गया ?

अमित : मैं कब गुस्से में हूँ आप को ऐसे hi लगा होगा .

निधि : खा मेरी कसम .

अमित : इसमें कसम देने वाली बात कहाँ आ गयी . ाचा तो सुनो . वो शीना बहार से hi चली गयी न. मैं उसे अंदर आने को कह रहा था मगर वो आयी नहीं . ये बात जब मौसी को पता चलेगी तो वो नाराज़ होंगी न . इसी बात पर खुद पर गुस्सा आ रहा था .

निधि : ये को बात है भला , माँ क्यों गुस्सा होगी ? वैसे भी रत बहुत हो चुकी थी इसी लिए नहीं आयी होगी वो. तेरी दोस्त है और तुझे बहुत मानती है तो तू क्यों किसी की परवाह करने लगा . ाचा छोड़ वो सब, ये बता आज का एग्जाम कैसा हुआ ?

अमित : बहुत ाचा . सरे क़ुएस्तिओन्स आगे थे मुझे . थैंक्स दीदी आपने ने जो गाइड किया था वो काम आ गया .

निधि : मरूंगी अगर मुझे किसी बात क लिए था का कहा तो . वैसे भी तुम बॉस हो मेरे और मैं तुम्हारी सेक्रेटरी.

अमित : दीदी आप फिर शुरू हो गयी. मैं आपसे बात नहीं करूँगा अगर आप ऐसा कहेंगी तो .

निधि : ाचा ाचा चल अब सो जा . कल जल्दी उठ कर अगले एग्जाम की तयारी करनी है .

फिर हम दोनों साथ में सो गए . दीदी रोज़ की तरह मेरी बाजु पर सर रख कर सो गयी . सुबह मेरी आँख खुली मेरे फ़ोन पर लगातार बज रही रिंगटोन से. मैंने देखा तो अनजान सा no. था .

अमित : hello

‘ सो रहे थे क्या ? ‘

ये एक लड़की की आवाज़ थी , मैं अभी उठा hi था इस लिए मुझे पहचान नहीं हो प् रही थी .

अमित : आप कौन बोल रही हैं ?

‘ इतनी जल्दी भूल गए ? अभी तो कुछ घंटे hi हुए हैं तुमसे दूर आये और अभी से भूल गए ? ‘

अब मेरा दिमाग होश में आया और मुझे समझ में आ गया क ये तो रीना है .

अमित: रीना ??

रीना : हाँ रीना , तुमने मेरी आवाज़ नहीं पहचानी ?

अमित : सॉरी यार वो मैं सो रहा था इस लिए पता नहीं चला .

तभी दीदी मेरी आवाज़ सुन कर उठ कड़ी हुई .

निधि : किस से बात कर रहे हो सुबह सुबह ?

रीना : ये किसकी आवाज़ है ? ये लड़की कौन है तुम्हारे साथ ? इतनी सुबह ये क्या कर रही है तुम्हारे साथ ?

अमित : सुबह कहाँ वो तो रत से hi यहाँ हैं

रीना : क्याआ ????

रीना ( मन में ) हे भगवन नहीं ऐसा नहीं हो सकता . प्लीज प्लीज प्लीज भगवन जी ऐसा न हो जो मैं सोच रही हूँ .

अमित : अरे क्या हुआ आप चुप क्यों हो गयी ? लो आप खुद hi बात कर लो .

रीना : नहीं no.....

मैंने फ़ोन दीदी को पकड़ा दिया क्यूंकि को मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देख रही थी .

अमित : लो दीदी बात करो , डॉ रीना है.

रीना का नाम सुनते hi दीदी क चेहरे पर यकायक स्माइल आ गयी जहाँ थोड़ी देर पहले hi उलझन सी थी.

निधि : गुड मॉर्निंग डॉ साहिबा कैसी हैं आप ? पाहुबच गयी लंदन ?

रीना : आप ????

निधि : ओह सॉरी , मैं निधि बात कर रही हूँ . हम मिले थे ने ? अमित मेरी मौसी का बीटा है .

रीना : ओह्ह्ह्हह्ह अआप निधि दीदी हैं मैंने सोचा .....

निधि : क्या सोचा ?

रीना : कुछ नहीं , आप कैसी हैं ?

रीना ( मन ने ) हे भगवन तेरा लाख लाख शुक्रिया . मैं भी न क्या क्या सोचने लगी थी. मेरा अमित ऐसा नहीं है .

निधि : मैं बिलकुल ठीक हूँ. आप बताओ कब पहुंची लंदन.

रीना : 2 घंटे हो गए अभी रूम पर आ कर सामान रख कर सोचा पहले सबसे बात कर लूँ.

निधि : ाचा किया , लो बात करो अमित से

अमित : हांजी , तो कैसा रहा सफर ?

रीना : ाचा रहा, तुम्हे यही बताने क लिए फ़ोन किया था क मैं अचे से पहुँच गयी हूँ. और इस वक़्त अपने रूम पर हूँ . ये मेरा hi फ़ोन है. सेव कर लेना no.

अमित : ठीक है. वहां क्या टाइम है अभी?

रीना : यहाँ रत क 12 बजने वाले हैं.

अमित : क्या ? अभी वहां रत hi है? तो आप जग क्यों रही हो ? इतना लम्बा सफर कर क पहुंची हो . चलो जल्दी से सो जाओ और रेस्ट करो.

रीना : नहीं अभी तुमसे बात करनी है मुझे.

अमित : बातें तो जब चाहो कर लेना . पर पहले रेस्ट कर लो. मैं रख रहा हूँ. और आप भी रेस्ट करो . Bye

रीना : सुनो तो ......

मैंने फ़ोन काट दिया . और तब तक दीदी जा चुकी थी. मैं भी फ्रेश हुआ और एक्ससरसीसे करने ऊपर चला गया . उसके बाद तैयार हो कर मैंने सबके साथ नाश्ता किया. और फिर मोहित क साथ कल्पना सीमा क यहाँ. हम ने अभी किताबें बंद hi की थी क मेरे फ़ोन पर नैना दीदी का फ़ोन आने लगा.

अमित : hello

नैना : घबराई हुई ) तुम कहाँ हो ? जल्दी से घर आ जाओ ?

अमित : चिंता में ) क्या गया आप ऐसे क्यों बात कर रही हैं ?

नैना : रट हुए ) वो कारन को .....

अमित : क्या हुआ कारन भैया को ?

नैना : कारन को पुलिस ने पकड़ लिया है . माँ और पापा वहीँ गए हैं. मैं घर पर अकेली हूँ मुझे बहुत दर लग रहा है प्लीज जल्दी आ जाओ.

अमित : आप रोइये मत मैं अभी आया .

मैंने फ़ोन बंद किया तो कल्पना सीमा और मोहित मेरी तरफ हैरानी से देख रहे थे

कल्पना : क्या हुआ ? किसका फ़ोन था ?

अमित : कुछ नहीं , वो नैना दीदी का फ़ोन था कोई प्रॉब्लम हो गयी है घर पर .

कल्पना/ मोहित : कैसी प्रॉब्लम?

अमित : मुझे जाना होगा बाद में बताता हूँ .

कल्पना : अरे बताओ तो सही शायद हम कोई मदद कर दें .

अमित : अभी तो मुझे खुद नहीं पता. घर जा कर देखता हूँ. अगर तुम्हारी ज़रूरत पड़ी तो फ़ोन करूँगा .

कल्पना : ठीक है. अगर कहो तो मैं चलती हूँ न साथ में .

अमित : कोई बात नहीं . अगर ज़रूरत हुई तो फ़ोन करूँगा .

मैं जल्दी से मोहित क साथ निकल गया . मैंने सीमा क सामने जान बुझ कर नहीं बताया क क्या बात है . मोहित कार में बैठता hi सवाल करने लगा. मैंने उसे बस इतना hi कहा क कारन भैया का झगड़ा हो गया है . हम जल्दी से घर पहुंचे तो नैना दीदी घर पर अकेली थी. वो बेचारी रो रही थी. मुझे देखते hi भाग कर मेरे गले लग गयी.

अमित : शह्ह्ह्हह्ह , दीदी प्लीज चुप हो जाइये खुद को सम्भालिये . मैं आ गया हूँ न. कुछ नहीं होगा भैया को. मौसा जी गए हैं न .

नैना :रट हुए ) मुझे बहुत दर लग रहा है . उसके दोस्तों का फ़ोन आया था क कॉलेज में झगड़ा हुआ है और ...

अमित : और क्या ?

नैना: जिसको चोट लगी है वो पुलिस वाले का बीटा है. और उसी ने पकड़ा है .

अमित : कुछ नहीं होगा आप हौंसला रखिये .

मोहित : अंदर अत हुआ ) क्या हुआ है ?

अमित : कुछ नहीं यार कारन भैया का कॉलेज में कोई पन्गा हुआ है. आओ तुम बैठो यहाँ .

नैना दीदी अभी तक मेरे सीने से लगी हुई थी. मोहित क आने पर मैंने उन्हें खुद से अलग किया और उनके आंसू पोंछे.

मोहित : दीदी आप क्यों इतना रो रही हैं? कॉलेज में ये सब तो नार्मल बात है.

अमित : यही तो मैं भी समझा रहा था. चलिए हाथ मुँह धो कर आइये अपने. छोटी छोटी बातों पर ऐसे दर जाती हो. एग्जाम की तयारी करो अपनी.

नैना दीदी थोड़ी नार्मल हुई और बाथरूम में चली गयी. कल्पना का फ़ोन भी मुझे आ गया और मैंने उसे बता दिया क कारन भैया का झगड़ा हुआ है. मोहित पूछ रहा था क उसकी कोई ज़रूर है तो बोले वो अंकल से बात करेगा. मगर मैंने मन कर दिया. मुझे लगा क मौसा जी गए हैं तो निबटा hi लेंगे. मोहित कुछ देर बैठा रहा और फिर उसे घर से फ़ोन आने लगा तो मैंने उसे जाने को कह दिया. मैं मौसा जी का फ़ोन लगा रहा था पर उनका फ़ोन लग नहीं रहा था. नैना दीदी मेरे साथ hi लग कर बैठी रही. वो अंदर से बहुत घबराई हुई थी. हमेशा खुश रहने वाली और मज़ाक करने वाली नैना दीदी ऐसे रोटी हुई बिलकुल भी अछि नहीं लग रही थी. मुझे मौसा जी पर गुस्सा आ रहा था क काम से काम फ़ोन तो उठा ले. तभी निधि दीदी की कॉल आने लगी .

निधि : टेंशन में ) अमित तुम कहाँ हो ?

अमित : मैं तो घर पर हूँ दीदी , नैना दीदी क साथ. पर आप कहाँ हैं? और कारन भैया का क्या हुआ ? मौसा जी का फ़ोन कब से तरय कर रहा हूँ मगर लग नहीं रहा .

निधि : इसी लिए मैंने फ़ोन किया है . बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है . इस बेवकूफ ने दोस्तों क साथ मिल कर कॉलेज में झगड़ा किया है. और जिसे चोट लगी है वो पोलिसवाले का बीटा है. और उसी ने पकड़ा है. अब वो छोड़ नहीं रहा है और इन सब पर केस बनाने का कह रहा है . अगर ऐसा हो गया तो उसकी पड़े जाएगी वो अलग ऊपर से क्रिमिनल का ठप्पा लग जायेगा. पता नहीं कब अकाल आएगी इसे. माँ और पापा का भी बुरा हल है वो इंस्पेक्टर किसी की बात नहीं सुन रहा . मैंने वकील से बात की है पर वो भी कह रहा है क F.I.R क बाद hi वो कुछ कर सकता है . जब की अब तक उस इंस्पेक्टर ने न F.I.R कटी है न वो किसी की सुन रहा है. और पापा बता रहे हैं क वो सब को ......

इतना कह के दीदी रोने लगी.

अमित : क्या दीदी सबको क्या ?

निधि : वो सब को टार्चर कर रहा है और रत भर वो यही सब करने वाला है .

अमित : क्या ???? मैं ऐसा नहीं होने दूंगा . आप मुझे उस इंस्पेक्टर का नाम और पुलिस स्टेशन कौन सा है ये बताइये.

निधि : तुम क्या करोगे ? मैं कर रही हूँ वकील से बात .

अमित : आप बस मुझे नाम बताइये .

निधि : इंस्पेक्टर क्सक्सक्सक्सक्स ,,, क्सक्सक्सक्सक्स पुलिस स्टेशन. मगर तुम करोगे क्या ?

अमित : वो सब आप छोड़िये . बस अभी कारन भैया को वो लोग छोड़ देंगे . आप गाड़ी ले जाइये उन्हें लेन क लिए .

निधि : पर वो वकील .....

अमित : मुझ पर भरोसा नहीं है क्या ?

निधि : तुम पर तो खुद से भी ज्यादा भरोस है .

अमित : तो फिर जाइये और कारन भैया को ले आइये .

इतना कह कर मैंने फ़ोन काट दिया और फ़ौरन ऋतू सिंह को फ़ोन लगा दिया .

ऋतू : तो जनाब को हमारी यद् आ hi गयी . आज तो लड्डू बाँटने चाहिए .

अमित : यद् तो उन्हें किया जाता है जिन्हे भूले हो. और आपको कोई भूल सकता है क्या? ाचा मुझे आपसे एक बहुत ज़रूरी काम है जो सिर्फ आप hi कर सकती हैं .

ऋतू : हुकम करो , तुम्हारे लिए तो कुछ भी कर सकती हूँ .

अमित : मेरे कजिन को पुलिस ने पकड़ लिया है. कॉलेज में लड़कों में कुछ झगड़ा हो गया था और जिसे चोट लगी वो पुलिस वाले क बीटा था . अब उस इंस्पेक्टर ने सबको पकड़ के अंदर कर दिया है और केस बनाने को कह रहा है. अगर ऐसा हो गया तो भैया का कर्रिएर बर्बाद हो जायेगा. प्लीज आप कुछ करो .

ऋतू : ये तो सरासर गलत है. एक स्टूडेंट क साथ ऐसी झड़ती तो नहीं होनी चाहिए . चाहे कोई भी हो. मुझे उसका नाम और पुलिस स्टेशन बताओ अभी .

अमित : मेरे कजिन का नाम कारन है और इंस्पेक्टर का नाम क्सक्सक्सक्स , क्सक्सक्सक्सक्स पुलिस स्टेशन

ऋतू : आधे घंटे में तुम्हारा कजिन अपने घर होगा .

अमित : थैंक यू वैरी मच .

ऋतू : ख़बरदार ऐसा कहा तो . वैसे इसकी फी देनी होगी तुम्हे .

अमित : आप जो कहोगी वो करूँगा .

ऋतू : हम्म्म , जब मिलोगे तब बताउंगी. ाचा मैं रखती हूँ और अभी तुम्हारे कजिन को छुड़ाती हूँ. मुहाः ी लव यू स्वीट हार्ट. Bye

इतना कह कर ऋतू सिंह ने फ़ोन काट दिया .

नैना : किस्से बात कर रहे थे ?

मैं दीदी क इस सवाल से एक डैम से घबरा गया. मुझे लगा कहीं मैंने कोई ऐसी वैसी बात तो नहीं कह दी.

अमित : कुछ नहीं दीदी , आप ने सुना न . मैं कारन भैया क बारे में hi बात कर रहा था .

नैना : मगर किस्से ?

अमित : हैं एक पुलिस अफसर. अभी वो कारन भैया को छुड़ा देंगी.

नैना : सच में ? क्या वो बड़ी अफसर हैं ? तुम कैसे जानते हो उनको ?

अमित : दीदी आप सवाल बहुत करती हो. जनता हूँ बस . चलिए उठ कर खाना देखिये बना है या नहीं. अभी सब आएंगे तो भूख लगी होगी.

मेरी बात सुन कर नैना दीदी किचन में चली गयी . और मैं बैठ गया आराम से.

उधर पुलिस स्टेशन में-

‘ बहुत चर्बी चढ़ी है तुम लोगों को ? आज सबकी खाल उधेड़ कर रख दूंगा . सालो मेरे बेटे पर हाथ उठाया ‘ रोआबदार चेहरे वाला ये पोलिसवाले जिसके कंधे पर तीन सितारे लगे थे. हवालात क अंदर 4 लड़कों को तीन हवलदार क साथ मिलकर बुरी तरह डंडों से मर रहा था . और वो लड़के ज़ोर ज़ोर से चीख रहे थे. जिनमे से कारन भी एक था .

बहार रजनी अपने पति क साथ बैठी रो रही थी और ऐसा hi हल उनके साथ बैठे उन लोगों का भी था जो बाकि लड़कों क घर से थे. अंदर से आती लड़कों की चीखें सुन कर बेचारे सब रो रहे थे. और पुलिस वाले थे क उनकी बात भी नहीं सुन रहे थे .

रजनी : रट कुछ कीजिये न ? वो कितनी बुरी तरह मर रहे हैं .

राजेश : अब मैं क्या करूँ ? ये लोग तो कोई बात hi सुनने को तैयार नहीं . भगवन क आगे हाथ जोड़ो . ...... भाई साहब प्लीज आप इंस्पेक्टर साहब से कहिये न. वो सब बचे हैं. बचपने में गलती कर बैठे . कहें तो हम माफ़ी मांग लेते हैं उनके पाऊँ पकड़ कर .

राजेश ने एक पुलिस वाले से कहा तो वो भी सर झटक कर चला गया . हर कोई किसी न किसी को फ़ोन कर रहा था और सिफारिश करवा रहा था पर वो इंस्पेक्टर किसी से बात करने को भी तैयार नहीं था . थोड़ी देर डंडा परेड करने क बाद वो इंस्पेक्टर हवलदारों को काम पूरा करने को कह कर अपना पसीना पोंछते हुए बहार निकला जहाँ सब हाथ जोड़े बैठे थे. इंस्पेक्टर जैसे hi आकर अपनी चेयर पर बैठा तो उसकी नज़र रजनी पर पड़ी . जैसा की होता hi है आम तौर पर पुलिसवालों का हल , उसकी गन्दी नज़र रजनी क गदराये हुए जिसम को सराय करने लगी .

राजेश : हाथ जोड़ते हुए ) थानेदार साहब दया कर क हमारे बेटे को छोड़ दीजिये . वो सब नादाँ .....

इंस्पेक्टर : क्यों बे , बीटा पैदा किया है ता गुंडा? सेल पड़ने जातें हैं या दंगा फसाद करने ? जानते हो इन लोगों ने किसके ऊपर हाथ उठाया है ? मेरे बेटे क ऊपर . ऐसा हल करूँगा क सेल ज़िन्दगी भर दोबारा किसी से झगड़ा नहीं करेंगे .

‘ भगवन क लिए एक बार माफ़ कर दीजिये सर . आप जितने पैसे कहोगे .....’

ये भी किसी लड़के का बाप था

इंस्पेक्टर : तू मुझे पइसे देगा ? तेरी औकात क्या है साले? ले मैं देता हूँ तुझे पैसा बोल कितना चाहिए? तेरे बेटे की लाश ले जाना आ कर कल .

ये बात सुन कर रजनी की आँखों से मोठे मोठे आंसू बहने लगे. माँ जो थी .

रजनी : हाथ जोड़ते हुए ) प्लीज हमारे बेटे को छोड़ दीजिये . मैं आपने पाऊँ पड़ती हूँ .

इंस्पेक्टर: रजनी क हाथ पकड़ कर सहलाते हुए ) अरे अरे आप क्यों रो रही हैं? आप जैसी खूबसूरत औरत की आँखों में आंसू अचे नहीं लगते . आप क बेटे को मैं ऐसे hi छोड़ दूंगा. बस आपको मेरे साथ ......

इंस्पेक्टर ने कमीने हंसी हँसते हुए रजनी क हाथ मसल दिए तो रजनी ने अपने हाथ झटक दिए .

रजनी : शर्म नहीं आती ऐसी गन्दी हरकत करते हुए ?

इंस्पेक्टर: ऐ हवलदार निकालो सबको बहार और उन चरों की अचे से ठुकाई करो सैलून को पानी तक नहीं देना .

ये बात सुन कर सब और भी दर गए. रजनी और राजेश इंस्पेक्टर की गन्दी नज़र समझ चुके थे. मगर बेटे को बचने का और कोई रास्ता भी नज़र नहीं आ रहा था. रजनी अंदर hi अंदर इंस्पेक्टर की बात मैंने पर विचार कर रही थी क इंस्पेक्टर का फ़ोन बजने लगा और उसने मोबाइल पर no. देखते hi कॉल पिक की .

इंस्पेक्टर : यस मैडम

...............

इंस्पेक्टर : hi वो मेरे बेटे ....

................

इंस्पेक्टर: सॉरी मैडम .....

................

इंस्पेक्टर : सॉरी मैडम प्लीज .........

................

इंस्पेक्टर: जी मैडम , अभी मैडम ......

................

इसी क साथ कॉल कट हो गयी . सब इंस्पेक्टर की तरफ hi देख रहे थे . पता नहीं किसका फ़ोन था पर जो भी था वो कोई बड़ी शख्सियत थी . जिसके फ़ोन से इंसान सिर्फ अपनी जगह पर खड़ा हो गया था बल्कि चेहरे पर पसीना आ गया था. सब ख़ामोशी से इंस्पेक्टर को hi देख रहे थे

इंस्पेक्टर: हवलदार , सबको छोड़ दो .

हवलदार : पर सर ......

इंस्पेक्टर: तुम्हे सुना नहीं . जल्दी बहार ला सबको .

हवलदार भागता हुआ अंदर गया और 5 मिनट्स क अंदर hi सब लड़के सामने हाज़िर थे देख कर hi पता चल रहा था क उनकी अचे से खातिरदारी हुई है.

इंस्पेक्टर: तुम में से कारन कौन है ?

कारन : मैं हूँ

इंस्पेक्टर: कौन है इसके साथ ?

रजनी / राजेश : ये हमारा बीटा है .

इंस्पेक्टर : हाथ जोड़ते हुए ) सॉरी सर . मुझे पता नहीं था आप मैडम क पहचान वाले हैं. अगर आप पहले बता देते तो ऐसा नहीं होता. प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये और मैडम प्लीज मेरी गलती क लिए मुझे माफ़ कर देना. मेरा कोई गलत मतलब नहीं था. प्लीज मैडम से ऐसा वैसा कुछ मत कहना

रजनी को तो समझ hi नहीं आ रहा था क एक डैम से ऐसा क्या हो गया. अभी जो हवस की नज़रों से उसे देख रहा था अभी वो माफ़ी मांग रहा है . राजेश और रजनी दोनों यही सोच रहे थे क ये किस मैडम की बात कर रहा है. अब दोनों ये भी पूछ नहीं सकते थे क कौन सी मैडम वर्ण कहीं फिर से कारन को अंदर hi कर दे . इस लिए चुपचाप वो कारन को साथ लेकर बहार निकल आये. वो इंस्पेक्टर बार बार हाथ जोड़ कर माफ़ी मांग रहा था . अभी कुछ देर पहले सब उस इंस्पेक्टर आगे हाथ जोड़ रहे थे और अब वो हाथ जोड़े खड़ा था . बाकि सब लोग भी हैरान थे . बहार निकलते hi सब राजेश और रजनी का शुक्रिया ऐडा करने लगे और साथ hi पूछने लगे क किस मैडम का फ़ोन आया था वो किसकी जान पहचान वाले हैं ? मगर राजेश और रजनी दोनों hi खामोश थे. यहाँ तक क खुद कारन भी हैरान था मगर फ़िलहाल उसकी अपनी गांड फटी पड़ी थी ठुकाई से . अभी वो दोनों बहार तक hi ए थे क सामने निधि की कार आकर रुकी. निधि अपने सामने अपने माँ बाप और कारन को देख कर हैरान भी हुई. फिर उसने उनको गाड़ी में बैठने को कहा . राजेश ने अपना स्कूटर ले कर आना था इस लिए वो कारन और रजनी को गाड़ी में बैठने का कह कर स्कूटर की तरफ चला गया . निधि ने गाड़ी घर की तरफ मोड़ ली .

निधि : माँ , वो इंस्पेक्टर मन गया ? पापा तो कह रहे थे वो मन नहीं रहा .

रजनी : हाँ बेटी वो किसी की नहीं सुन रहा था. पर पता नहीं किसका फ़ोन आया क एक डैम से उसके सुर बदल गए और उसने हमसे माफ़ी मांगी और सबको छोड़ दिया.

निधि : किसका फ़ोन आया था ?

रजनी : पता नहीं , पर वो फ़ोन पर बार बार सॉरी मैडम कह रहा था. और जानती हो वो हमसे कह रहा था हम मैडम से कुछ न कहें. मुझे तो समझ नहीं आ रही आखिर ये मैडम कौन है? क्या तुमने किसी मैडम से कहा था?

निधि : नहीं तो . ( कुछ सोचते हुए ) समझ गयी ये किसका काम है .

रजनी : किसका ??

निधि : घर चलो अभी पता चल जायेगा .

कुछ देर में hi निधि ने कार घर क सामने रोक दी.

गाड़ी की आवाज़ सुनते hi मैं और नैना दीदी बहार आये . सामने मौसी और निधि क साथ कारन भैया को देख कर नैना दीदी दौड़ कर उनके पास चली गयी और निधि दीदी ने दौड़ कर मुझे गले लगा लिया .

निधि : थैंक यू थैंक यू थैंक यू थैंक यू वैरी मच . मुआअआआअह्हह्ह्ह्ह

निधि दीदी ज़ोर से मेरे गले मिलती हुई मुझे गलों पर चूमने लगी . मैं तो उनके ऐसा करने से हैरान हो गया. यही हल रजनी मौसी का भी था.

निधि : हस्ते हुए ) जानती हो माँ वो मैडम का फ़ोन क्यों आया था ? इसी की वजह से . अभी एक घंटा भी नहीं हुआ मेरी इससे बात हुए. इसने कहा था क आप पुलिस सतसतातिओं जाओ और सबको लेकर घर आ जाओ. पता नहीं वो मैडम कौन है पर जो भी है उसने फ़ोन इसी क कहने पर किया है . अब बताओ जल्दी से कौन है वो मैडम ?

रजनी मौसी ये बात सुनते hi तेज़ी से मेरे करीब आयी और मेरा सर पकड़ कर मुझे चेहरे पर लगातार चूमने लगी .

रजनी : मुहाहह मुआअह्ह्ह्ह मेरा बीटा , तूने मुझे बचा लिया .

अमित : आपको ???

रजनी : मम मेरा मतलब है कारन को बचा कर तुमने हम सब को बचा लिया .

निधि : चलो माँ पहले अंदर तो चलो .

हम सब अंदर आ गए और हॉल में hi सोफे पर मेरे एक तरफ दीदी और एक तरफ मौसी बैठ गयी . मौसी तो मेरा चेहरा छोड़ hi नहीं रही थी . और दीदी मेरी एक बाजु पकड़ कर बैठ गयी. कारन भैया जिनका मुँह पहले hi सुजा हुआ था और ऊपर से मुँह फुला लिया .

कारन : माँ मुझे भूख लगी है और आप दोनों इसे लेकर बैठी हो .

रजनी : गुस्से से ) भूख लगी है तुझे ? शर्म नहीं आयी तुझे या वो भी बेचकर खा गया है? तेरी वजह से आज मुझे और तेरे पापा को ज़लील होना पड़ा. तेरी वजह से आज ज़िन्दगी में पहली बार पुलिस स्टेशन जाना पड़ा. तेरी वजह से हमको अपराधियों की तरह बिठाया गया . तुझे भूख लगी है. थोड़ी सी भी शर्म बाकि है तो अभी इसके पाऊँ में पकड़ कर माफ़ी मांग .

अमित : अरे मौसी ये आप क्या कह रही हैं

रजनी : तुम चुप रहो. तुम नहीं जानते आज क्या हो जाता अगर तुम हमारी मदद न करते . तुम्हारा एहसान मैं कैसे उतरूंगी ?

अमित : ये क्या मौसी आप ये क्या कह रही हैं ?

रजनी : मैं ठीक कह रही हूँ. चल माफ़ी मांग सुना नहीं तुझे .

मौसी ने गुस्से से करना भैया को कहा तो वो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगे . तभी रजनी मौसी ने खिंच कर एक क बाद एक 4-5 थप्पड़ कारन भाई क मुँह पर लगा दिए .

रजनी : ऑंखें किसे दिखा रहा है . चल माफ़ी मांग वर्ण घर से बहार निकल .

मौसी ने कारन भैया को थप्पड़ मर कर उनका कलर पकड़ कर बहार की तरफ धकेला . तो मैं उठ कर मौसी की तरफ दौड़ा .

अमित : मौसी छोड़ दीजिये जाने दीजिये .

रजनी : तू चुप रह . आज इसके भूत निकल कर रहूंगी .

अमित : रहने दीजिये मौसी , देखो न पहले hi भैया की बुरी हालत है और आप उन्हें ऐसे मर रही हैं. आप छोड़िये छोड़िये इन्हे. अगर मेरी ज़रा सी भी परवाह है तो छोड़ दीजिये

मौसी ने मेरे कहने पर कारन भैया को छोड़ दिया . चाहे मौसी कारन भैया को मर रही थी पर उनकी आँखों में आंसू थे. मेरे इशारे पर नैना दीदी कारन भैया को खिंच कर ले गयी और मैं मौसी को अपने गले से लगा कर फिर से सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर में मौसा जी भी आ गए और उनहोंने भी कारन भैया को काफी कुछ कहा. निधि दीदी मेरे साथ hi बैठी रही और एक बार भी उनहोंने कारन भैया की तरफ नहीं देखा और न hi कोई बात की . हमने मिल कर साथ में खाना खाया. मौसा जी को मौसी ने बता दिया और वो भी मुझसे पूछने लगे तो मैंने यही बहाना बना दिया क वो मेरी मैडम की दोस्त हैं सप ऋतू सिंह और उन्होंने ने hi फ़ोन किया है तो सब मन गए और फिर मुझे अपनी मैडम से मिलवाने को कहने लगे . करते करते ऐसे hi शाम हो गयी और फिर मेरे फ़ोन पर एक फ़ोन आया जिसको सुनते hi मेरे पाऊँ नीचे ज़मीन खिसक गयी .

अमित : दीदी जल्दी से कार निकालो



रजनी / निधि / राजेश / नैना : क्या हुआ ????
 
आएगा भाई , थोड़ा वेट कर लो
 
अपडेट 212



‘ क्या हुआ बीटा ? किसका फ़ोन था ? क्या बात है ? ‘ मुझे चिंता में देख कर रजनी मौसी ने मुझसे पूछा मौसा जी क साथ निधि दीदी और नैना दीदी का भी यही हल था .

अमित : अजय मां का फ़ोन था मौसी , कामिनी ममी की तबियत अचानक से ख़राब हो गयी है. डॉ ने कहा है क हालत ख़राब है और वो ममी को हॉस्पिटल ले कर आ रहे हैं.

रजनी : चिंता में ) क्या ??? हे भगवन , कितने सैलून बाद वो बेचारी माँ बनने जा रही है और अब ,,, चल जल्दी चल मैं भी साथ चलती हूँ.

नैना : मैं भी साथ चलूँ माँ ?

रजनी : नहीं तू घर पर hi रुक. और आप भी घर hi रहिये . अगर ज़रूरत पड़ी तो फ़ोन करुँगी .

मैं रजनी मौसी और निधि दीदी जल्दी से बहार निकले और दीदी कार चलने लगी. मैं मां को फ़ोन लगाने लगा . बाबा भी मां क साथ hi आ रहे थे. उन्होंने बताया क वो सीधा हॉस्पिटल hi जा रहे हैं और मुझे वहीँ आने को कहा . दीदी ने गाड़ी उस हॉस्पिटल की तरफ घुमा ली. हम जल्दी पहुँच गए थे. थोड़ी देर में hi एक गाड़ी आ कर रुकी और उसमे से बाबा और अजय मां निकले , उनके चेहरे पर परेशानी साफ नज़र आ रही थी. मैंने तब तक स्ट्रेचर का इंतज़ाम कर रखा था. जल्दी से कामिनी ममी को गाड़ी से निकल कर स्ट्रेचर पर डाला. कामिनी ममी बेसुध थी और अजय मां की आँखों में भी आंसू थे. मैं भी चिंता में था. बाबा मैं और अजय मां वार्ड बॉय क साथ साथ भागते हुए ममी को अंदर ले जा रहे थे . डॉ भी पहले hi तैयार थे ममी को सीधा िक में ले जाया गया. बाबा अजय मां को हौंसला दे रहे थे. मैं भी अंदर से घबरा रहा था कामिनी ममी को इस हालत में देख कर पर मैं किसी तरह खुद को संभाले हुए था. मैं अकेला खड़ा था तो पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा . मैंने मुद कर देखा तो दीपिका ममी थी . उन्हें देखते hi मैं खुद को रोक न पाया और ममी क गले लग गया . मेरी आँखों से आंसू बहने लगे थे. ममी मेरा सर सहलाते हुए मुझे हौंसला देने लगी.

दीपिका : शह्ह्ह्ह चुप हो जाओ. कुछ नहीं हुआ है दीदी को. सब ठीक हो जायेगा . डॉ देख रहे हैं न. दीदी बस बेहोश हुई हैं दर्द की वजह से. सब ठीक है . खुद को सम्भालो .

अमित : ममी को कुछ हो तो नहीं जायेगा न

दीपिका : मैंने कहा न कुछ नहीं होगा. डॉ देख रहे हैं उनको. अभी सब पता चल जायेगा. जूनियर ो बस दर्द की वजह से बेहोश हैं. और तुम ये क्या बच्चों की तरह रो रहे हो. तुम्हे तो खुश होना चाहिए तुम फिर से बाप बनने वाले हो. अब क्या ऐसे रो रो कर सब को दिखाओगे. चलो अपना मुँह साफ करो और खुद को ठीक करो.

ममी की बात सुन कर मैंने अपनी हालत ठीक की. उनकी बातों से मुझे कुछ हौंसला हो गया था .

अमित : आप किसके साथ आयी हैं ?

दीपिका : मुँह बनाते हुए ) मुझे पता था तुम मुझे देखोगे भी नहीं . कोई ऐसा करता है क्या अपनी बीवी क साथ ? मैं दीदी क साथ hi थी. तुमने तो देखना भी ज़रूरी नहीं समझा .

अमित : सॉरी मेरा ध्यान नहीं गया . मैं वो ममी .......

दीपिका : पता है इसी लिए छोड़ रही हूँ वर्ण इसकी सजा देती तुम्हे. अब ज़रा अपने बेटे से भी मिल लो.

ममी ने इशारा किया एक तरफ जहाँ निधि दीदी आरव को गोद में उठाये कड़ी थी. मैं जल्दी से उनके पास गया और आरव को गॉड में उठा लिया. आरव को सीने से लगाकर मुझे बड़ा सुकून मिला. ये देख कर दीपिका ममी भी खुश हो गयी.

अमित : ममी जी माँ नहीं आयी ?

दीपिका : डॉ ने उन्हें मन किया है आने जाने से . इसी लिए उन्हें घर पर छोड़ कर आये हैं .

वो तो मन hi नहीं रही थी फिर बड़े भैया ने किसी तरह उन्हें मनाया.

अमित : आप उन्हें अकेला छोड़ कर आ गयी? उनका ख्याल कौन रखेगा ?

दीपिका : अकेला छोड़ कर नहीं आये . वहां राजू की माँ है न उनके पास. और तेरे छोटे मां भी वहीँ हैं. बाद में वो आ जायेंगे तो बड़े भैया दीदी क पास चले जायेंगे.

रजनी मौसी अजय मां को हौंसला दे रही थी. और इधर मैं दीदी और ममी क साथ खड़ा था . थोड़ी देर में hi डॉ अंदर से बहार आया. हम सब जल्दी से डॉ क पास गए .

अजय : डॉ कैसी है कामिनी ? वो ठीक तो हैं न ?

डॉ : हाँ वो ठीक हैं . बस बप हाई होने की वजह से ऐसा हो गया. फ़िलहाल हमने ने उन्हें सुला दिया है. सब कुछ नार्मल हो जायेगा थोड़ी देर में पर अभी हम कुछ नहीं कर सकते. जब तक बो नार्मल नहीं होता तब तक डिलीवरी नहीं करवा सकते. इस लिए फ़िलहाल अभी वेट करना होगा . रत में या कल को शायद डिलीवरी हो जाये अगर कॉम्प्लीकेशन्स हुए तो ऑपरेशन करना पद सकता है इस लिए आप कुछ पैसे जमा करवा दीजिये .

अमित : कितने पैसे चाहिए डॉ मैं अभी लता हूँ .

डॉ : जी फ़िलहाल 1 लाख जाना करवा दीजिये . और आप ऑफिस में मिल लीजिये. इतना कह कर डॉ चला गया . मैं पैसों का इंतज़ाम करने क लिए वहां से जाने लगा तो बाबा ने मेरा हाथ पकड़ लिया

विजय : कहाँ जा रहे हो ? ये को पैसे जा कर जमा करवा दो .

बाबा ने मेरे हाथ में पैसों के दो बण्डल रख दिए . मैं कुछ कहता उससे पहले उन्होंने मुझे जाने का इशारा कर दिया. मैं चुपचाप पैसे जमा करवाने चला गया . वापिस आया तो अब माहौल ठीक था. अजय मां भी अब शांत थे .

विजय : लगता है रत भर हमें यहीं रुकना होगा. मैं सोच रहा था .....

रजनी : इसमें सोचना क्या है . मैं यहाँ रूकती हूँ . अगर कामिनी को ज़रूरत पड़ी तो मैं देख लुंगी. दीपिका हमारे घर जाएगी. आरव अभी छोटा है. उसे हॉस्पिटल में रखना ठीक नहीं .

दीपिका : दीदी मैं कर लुंगी , आप ...

रजनी : मैंने कहा न , और अजय तुम यहीं रुक जाओ भैया आप निधि दीपिका और अमित क साथ हमारे घर चले जाइये . रत का खाना निधि तैयार कर देगी.

रजनी मौसी ने अपना हुकम चलते हुए कहा. अब उनकी बात कौन ताल सकता था वैसे भी वो सही कह रही थी.

विजय : रीता और दिव्या का भी फ़ोन आया था मैंने उन्हें बता दिया है. वो भी आने का कह रही हैं. खाना वो लेती आएँगी . निधि को क्यों टेंशन दे रही हो . और मैं गाओं वापिस जा रहा हूँ , वहां गौरी को भी देखना पड़ेगा. मैं छोटे को भेज देता हूँ.

अजय : भैया मैं हूँ न यहाँ पर और बाकि सब भी हैं. मैं तो कहता हूँ आप दीपिका और आरव को भी साथ ले जाओ. भाभी की देख भल हो जाएगी .

रजनी : हाँ ये भी ठीक है. यहाँ तो हूँ सब है hi. आप इसे ले जाओ.

दीपिका : पर मैं .....

रजनी : यहाँ हम हैं न . तुम गौरी का ध्यान रखो. उसके लिए अब संभल कर रहना ज़रूरी है. तुम तो जानती वो घर का काम करने से बाज़ नहीं आएगी. तुम उसे आरव की ज़िम्मेदारी दे देना तभी वो आराम से बैठेगी .

दीपिका ममी मौसी की बात मन गयी . अँधेरा हो रहा था तो बाबा दीपिका ममी को लेकर उसी गाड़ी में वापिस चले गए जिसमे आये थे .

रजनी : बीटा अब तुम भी जाओ. कल तुम्हारा एग्जाम है न .

अमित : नहीं मौसी मैं कहीं नहीं जाऊंगा ममी को छोड़ कर .

अजय : बीटा दीदी ठीक कह रही हैं. तुम कल एग्जाम देकर आ जाना. नहीं तो तुम्हारी पड़े पर असर पड़ेगा . मैं हूँ न यहाँ पर.

मुझे न चाहते हुए भी उनकी बात माननी पड़ी. मैंने जाने से पहले एक बार कामिनी ममी को देखा . वो दवा क असर से सो रही थी. उनको ड्राप लगी हुई थी. मैं उन्हें देख कर भगवन से प्रार्थना करता हुआ बहार आ गया . फिर निधि दीदी मुझे अपने साथ कार में लेकर घर आ गयी.

निधि : don’t वोर्री मां जी और माँ हैं न वहां पर. ऐसे टेंशन मत लो वर्ण कल एग्जाम कैसे डोज? चलो अब सब कुछ भूल कर पड़े पर ध्यान दो और कल की तयारी करो.

घर आ कर निधि दीदी ने मुझे चीयर उप करते हुए कहा . निधि दीदी और नैना दीदी ने मिल कर खाना बनाया . फिर हम ने साथ में डिनर किया . मैंने फ़ोन पर अजय मां से बात की उन्होंने बताया क रीता मौसी और दिव्या मौसी भी मिलने आयी थी साथ में राधा और नेहा दीदी भी . ममी की हालत स्टेबल थी . फिर मैं भी खुद को समझते हुए किताब लेकर बैठ गया . थोड़ी देर में नैना दीदी मेरे कमरे में आ गयी और आते hi मेरे गले में बहन दाल कर मुझे किश करने लगी.

अमित : दीदी हटो ,,, क्या कर रही हैं आप . अभी निधि दीदी आ जाएँगी उन्होंने देख लिया तो?

नैना : रोमांटिक होते हुए ) दरवाज़ा लॉक है कैसे देखेंगी . वैसे भी दीदी किचन में हैं अभी.

अमित : फिर भी ....

नैना : शह्ह्ह्ह , कुछ मत बोलो. आज तुम्हे प्यार करने को बड़ा दिल कर रहा है. तुमने आज कारन को छुड़ा कर हम पर बहुत बड़ा एहसान किया थैंक यू उम्मम्मम्मम्म

इतना कह कर दीदी फिर से मुझे किश करने लगी और किश करते हुए मेरी कमर क दोनों तरफ टंगे लपेट कर मेरी गॉड में बैठ गयी. कुछ देर तक मैंने भी उनका साथ दिया और फिर से किश बंद कर दी.

अमित : बस अब हैट जाइये दीदी कभी भी आ सकती हैं. और मैंने कोई एहसान नहीं किया है. मैं भी तो इस परिवार का हिस्सा हूँ न .

नैना : कितना फर्क है तुम में और कारन में. एक वो है क इतना बड़ा एहसान होने पर भी तुम्हे एक थैंक्स तक नहीं कहा और तुम हो क हर बार सबकी मदद करते हो. ी लव यू वैरी मच. काश क हम एक हो सकते .

अमित : मैं तो अब भी आपका हूँ न. और हमेशा आपके साथ रहूँगा . रही कारन भैया की बात तो उनको छोड़िये . पता नहीं किस बात का इतना गुस्सा है उन्हें मुझ पर. मैंने ये सब उनसे ठनका सुनने क लिए नहीं बल्कि आप सब की ख़ुशी क लिए किया है.

नैना : किश करते हुए ) इसी लिए तो तुम्हे इतना चाहती हूँ मैं.

तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई और निधि दीदी की आवाज़ आने लगी . नैना दीदी ने जल्दी से उठ कर दरवाज़ा खोला .

निधि : दरवाज़ा क्यों लॉक किया था ?

नैना : वो दीदी वो ,,, अमित पड़े कर रहा था तो मैंने बंद कर दिया ताकि कोई डिस्टर्ब न करे.

निधि : तेरा भी तो एग्जाम है न सुबह तो तू क्यों नहीं पद रही ? चल तू भी अपनी तयारी कर.

नैना : दीदी आज मैं रूकती हूँ न अमित क साथ. हम साथ में पड़े कर लेंगे रत भर जग कर.

निधि : कोई ज़रूरत नहीं है. तू अपने कमरे में जा कर पड़े कर. अगर यहाँ रहेगी तो न खुद पड़ेगी न इसको पड़ने देगी .

नैना : डीडीई .....

निधि : सुना नहीं एक बार ? चल जा अपने कमरे में .

नैना दीदी बुरा सा मुँह बना कर कमरे से निकल गयी और निधि दीदी मेरे पास आ गयी. उनके हाथ में दूध का गिलास था. मुझे देते हुए वो मेरे पास hi बैठ गयी .

निधि : आज तुम्हारी पड़े बीच में hi रह गयी न ? कारन की वजह से.

अमित : अरे नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है. मेरी पूरी तयारी है. बस रेविसिओं hi करनी है. वैसे भी कोई इतना मुश्किल नहीं है ये सब्जेक्ट.

निधि : हम्म्म , फिर भी तुम्हे परेशानी तो हुई न . ाचा एक बात पूछूं ?

अमित : आपको कुछ भी पूछने क लिए ऐसे पूछने की ज़रूरत नहीं . सीधा पूछ लिया कीजिये जो भी पूछना हो.

निधि : कौन सी मैडम का फ़ोन गया था इंस्पेक्टर को ?

अमित : सप ऋतू सिंह.

निधि : तुम कैसे जानते हो उन्हें ?

अमित : मैंने बताया तो , वो हमारी टीचर की फ्रेंड हैं.

निधि : ये तो तुमने सबको बताया . पर मैं सच जानना चाहती हूँ. इतनी जल्दी उनका फ़ोन इंस्पेक्टर को चला गया मुझसे बात करने क बाद. ज़रूर तुमने सीधी बात की होगी वर्ण इतनी जल्दी तो फ़ोन नहीं जाता. इसका साफ़ साफ़ मतलब है क तुमने सीधा उनको फ़ोन किया होगा. और कोई भी इतनी बड़ी अफसर बिना खास जानकर क किसी क फ़ोन पर ऐसे एक्शन तो नहीं लेंगी. तो सच सच बताओ तुम कैसे उनके इतना क्लोज हो ?

मैं दीदी क इस सवाल से हैरान हो गया क वो कैसे सब समझ गयी. दीदी सच में बहुत समझ दर थी. बनियों की तरह उन्होंने मेरी बात पर आँख मूँद कर यकीन नहीं किया बल्कि सही अंदाज़ा लगाया. दीदी मेरी आँखों में hi देख रही थी और मैं उनसे नज़रें चुरा रहा था . मुझे लगा दीदी सब समझ रही हैं. अगर मैंने झूठ बोलै तो वो पकड़ लेंगी.

निधि : अब बताओ भी या फिर मुझ पर यकीन नहीं है ?

अमित : क्या दीदी आप भी ,,,, आपको तो डिटेक्टिव होना चाहिए था. हाँ मैंने डायरेक्ट उन्हें फ़ोन किया था. मगर ये भी सच है क वो मेरी टीचर की फ्रेंड हैं. रही बात जान पहचान की तो आपको यद् है न मेरे साथ क्या हुआ था जब पुलिस ने गलती से मुझे कुछ और समझ कर ठुकाई कर दी थी ?

निधि : हाँ तुमने बताया था ,, इसका मतलब ...

अमित : हाँ , ये वही हैं . सप ऋतू सिंह . बहुत अछि हैं वो. मैंने उन्हें जब बताया क ऐसे ऐसे हुआ है तो उन्होंने कहा क आधे घंटे में कारन भैया घर पर होंगे और देख लो सब आपके सामने है.

निधि : तो ये बात है. जो भी है , तुमने आज इस घर की इज़्ज़त बचा की और उस बेवक़ूफ़ की ज़िन्दगी उसका कर्रिएर भी. मगर उसको तो शर्म hi नहीं है. मैंने तो सोच लिया है अब मैं उससे कभी बात hi नहीं करुँगी. जब तक वो तुमसे माफ़ी नहीं मांगेगा और अपना बेहेवियर ठीक नहीं करेगा तब तक मैं उसे माफ़ नहीं करुँगी .

अमित : अरे ये क्या दीदी . आप तो समझदार हैं. आप उनकी सगी बहिन हैं.

निधि : मेरे लिए तुम उससे पहले हो. और जो तुम्हारी इज़्ज़त नहीं जाता मैं उससे रिश्ता नहीं रखूंगी. वैसे भी वो कौन सा अपना फ़र्ज़ निभा रहा है. तुम उसको छोडो. कोई और बात करो.

मैंने दूध फिनिश किया और फिर से किताब लेकर बैठ गया . दीदी भी मेरे पास अपना लैपटॉप लेकर बैठ गयी और ऑफिस का काम करने लगी. फिर 12 बजे तक पड़ने क बाद मैंने किताब बंद कर दी और दीदी ने मुझे देख कर अपना लैपटॉप बंद कर दिया और रोज़ की तरह वो मेरे साथ hi सो गयी.

सुबह मुझे दीदी ने hi जगाया. मैं जल्दी से तैयार हो गया. नाश्ता दीदी ने hi बनाया था. मैं कॉलेज जाने से पहले एक बार हॉस्पिटल जाना चाहता था तो दीदी भी जल्दी से तैयार हो गयी और मुझे साथ लेकर हॉस्पिटल चली गयी. अजय मां और रजनी मौसी वहीँ थे. दीदी उनके लिए चाय नाश्ता ले कर गयी थी. मैं उनसे मिल कर कामिनी ममी क पास चला गया जो अभी होश में थी. मुझे देख कर उनके दर्द भरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

अमित : ममी कैसी हैं आप ?

कामिनी : मैं ठीक हूँ. तू कैसा है ?

अमित : मैं भी ठीक हूँ. आप ने तो कल डरा hi दिया था.

कामिनी: तुम क्यों डरते हो ? वो तो कल दर्द ज्यादा होने लगी थी तो मुझे होश hi नहीं रही .

अमित : अब दर्द कैसा है?

कामिनी : ये दर्द तो ान डिलीवरी क बाद hi ख़तम होगा. तू चिंता मत कर. दीदी बता रही थी क तेरा एग्जाम है आज. अचे से करना और मेरी चिंता मत करना . यहाँ डॉ हैं मेरा ख्याल रखने क लिए.

अमित : चिंता क्यों न करूँ? आपको तकलीफ होगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा.

कामिनी : ये दर्द तो सहना hi पड़ता है हर औरत को. और मैंने तो उम्मीद hi छोड़ दी थी मगर तेरी वजह से मुझे फिर से मौका मिला है. बस अब जल्दी से मैं माँ बन जॉन फिर सब दर्द भूल जाउंगी.

अमित : वो तो आप ज़रूर बनोगी. और अजय मां पापा.

कामिनी : तू भी तो बनेगा न . मैं चाहती हूँ मुझे बिलकुल तेरे जैसा बीटा हो. उसे मैं बिलकुल तेरे जैसा बनाउंगी.

अमित : पर मुझे तो आप जैसी प्यारी बेटी चाहिए .

मेरे ऐसा कहने पर कामिनी ममी शर्मा गयी . तभी निधि दीदी भी िक में आ गयी और ममी से मिली. फिर दीदी ने कहा क मैं लेट हो रहा हूँ तो मैं ममी से इजाज़त लेकर दीदी क साथ चल दिया. दीदी मुझे कॉलेज ड्राप कर क चली गयी. आज साइंस वालों का एग्जाम नहीं था. इस लिए सिर्फ हमारी hi क्लास की मंडली थी कॉलेज गेट पर . कल्पना मोहित और सीमा मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे. हम ने एक दूसरे को विश किया. रीमा और राधा का मुझे सुबह hi मैसेज आ गया था. बातों बातों में मैंने बता दिया क कामिनी ममी हॉस्पिटल में हैं और उनकी डिलीवरी होने वाली है. इस बात पर मोहित मुझ से नाराज़ होने लगा क मैंने कल क्यों नहीं बताया . फिर उसने अपने घर फ़ोन कर क बता दिया. हम अपनी क्लास में चले गए और अपने फ़ोन स्विच ऑफ कर क अपनी अपनी सीट पर बैठ गए. आज भी हमारी क्लास में एक मैडम hi थी जो हमें तो नहीं पड़ती थी पर हमारे hi डिपार्टमेंट की थी . एक घंटे बाद क्लास में प्रोफ बसरा आ गए और मैडम को कुछ कह कर उन्हें भेज दिया . अब वो खुद इस क्लास में इंचार्ज बन कर बैठ गए . उनकी नज़र मुझ पर hi थी मगर मैं अपना पेपर करने में hi लगा था. आज मैं जल्दी जल्दी लिख रहा था ताकि जल्दी से फिनिश कर क जा सकूँ. मुझे हॉस्पिटल वापिस जाना था ममी क पास . प्रोफ बसरा ने मुझे ऐसे तेज़ी से लिखता देख कर मेरे पास आ कर मेरा बेंच चेक किया क कहीं मैंने किताब तो नहीं राखी है नीचे पर उन्हें कुछ नहीं मिला. कुछ देर बाद चंद्रकांता और प्रोफ वर्मा आ गए. पिछली बार की तरह आते hi चन्दर्कांता ने मुझे खड़ा कर लिया और प्रोफ वर्मा को फिर से मेरी चेकिंग करने क लिए बहार भेज दिया उनके साथ. चेकिंग तो बहाना था वो जान बुझ कर मेरा टाइम वास्ते कर रहे थे और मुझे गुस्सा आ रहा था . पर मैं कर भी क्या सकता था . खैर मुझे 20 मिनट्स परेशां कर ने क बाद उन्होंने वापिस मुझे बिठा दिया. चन्दर्कांता मुझे चिढ़ाती हुई वापिस चली गयी. मैं गुस्से से उसे देखता रहा . कल्पना और मोहित की नज़र मेरी तरफ hi थी और वो भी गुस्से में थे. खैर मैं फिर से पेपर लिखने में लग गया. घंटी बजते hi प्रोफ बसरा आंसर शीट कलेक्ट करने लगे. मैं अभी लिख hi रहा था क उन्होंने मेरी आंसर शीट खिंच ली.

अमित : सर प्लीज , मुझे थोड़ा सा टाइम और दे दीजिये ,

बसरा : घंटी की आवाज़ सुनाई नहीं दी तुम्हे ? तुम्हारे लिए कोई अलग से टाइम रखा है क्या ? चलो निकलो यहाँ से .

कल्पना : सर ये गलत है, इसका टाइम भी तो वास्ते किया न चेकिंग में . आपको एक्स्ट्रा टाइम देना चाहिए .

बसरा : मुझे मत सिखाओ क्या करना है. चलो जाओ अब .

प्रोफ बसरा ने रूडली कहा तो हम चुपचाप बहार आ गए मगर कल्पना गुस्से में थी.

कल्पना : ये बहुत गलत हो रहा है . हमें प्रिंसिपल सर से बात करनी चाहिए .

अमित : छोडो यार , मुझे अभी हॉस्पिटल जाना है. ममी की डिलीवरी होने वाली थी आज क्या पता अब तक हो भी गयी हो.

मैंने जैसे hi फ़ोन स्विच ों किया तो बहुत सरे मॉस्कल्स क मैसेज आने लगे. मैंने जल्दी से अजय मां का फ़ोन लगाया पर वो बिजी आ रहा था . मैंने रजनी मौसी का फ़ोन लगाया तो वो भी बिजी आ रहा था . तभी अजय मां का मुझे फ़ोन आ गया .

अजय : ख़ुशी से ) बीटा मैं बाप बन गया मैं बाप बन गया . तेरी ममी ने बेटे को जनम दिया है. तू कहाँ है जल्दी से अजा .

मां की ये बात सुन कर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा . मेरे मुँह से तो अल्फ़ाज़ नहीं निकल रहे थे बल्कि ख़ुशी क मरे आँखों से पानी बहने लगा. और ये सिर्फ अजय मां की वजह से था. मुझे कामिनी ममी क माँ बनने से ज्यादा अजय मां की बात सुन कर ख़ुशी हो रही थी. जिस तरह उन्होंने मुझ से फ़ोन पर बात की थी. मैं फील कर रहा था उनकी ख़ुशी को. वो ज़रूर रो रहे थे ख़ुशी क मरे. वो मुझे बहुत प्यार करते थे और मैं दिल से चाहता था क वो बाप बने. एक पल में hi मैं सब कुछ भूल गया और मोहित को जल्दी से हॉस्पिटल चलने को कहा . मोहित और कल्पना ने मुझे बधाई दी. मैं मोहित को साथ लेकर जल्दी से बहार की तरफ भगा. कल्पना बाद में आने का बोल कर वहीँ रुक गयी. मोहित तेज़ी से कार चलता हुआ मुझे हॉस्पिटल ले आया . हॉस्पिटल में सब मौजूद थे. बाबा अजय मां कमलेश मां रजनी मौसी रीता मौसी दिव्या मौसी और साथ में अंकल आंटी भी. सब क चेहरों पर ख़ुशी थी. मुझे देखते hi अजय मां ने दौड़ कर मुझे गले से लगा किया और रोने लगे .

अजय : मैं बाप बन गया अमित मैं बाप बन गया.

अजय मां से ख़ुशी नहीं संभाली जा रही थी. और उन्हें ख़ुशी में ऐसे रोटा देख कर तीनो मौसियों की आँखों से गंगा जमुना बह रही थी.

अमित : हाँ मां जी आप बाप बन गए ममी जी माँ बन गयी. भगवन ने आपकी सुन ली. ममी कैसी हैं ?

अजय : वो ठीक है तुझे hi यद् कर रही है. चल मैं तुझे उससे मिलवाता हूँ.

अजय मां मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचते हुए अंदर ले गए . ममी को रूम में शिफ्ट कर दिया गया था . हम अंदर गए तो वहां माँ और दीपिका ममी भी थी जो आरव को गॉड में उठाते हुए थी. जैसे hi मेरी नज़र कामिनी ममी पर पड़ी तो देखा वो मुझे hi देख रही थी. उनके चहरे पर ख़ुशी और आँखों में आंसू थे. उनकी बगल में उनका बीटा कपडे में लूटा हुआ सो रहा था.

दीपिका: देख क्या रहे हो ? आगे आओ

मैं कामिनी ममी की तरफ बढ़ा और बचे को गॉड में उठा लिया. मुझे उस पर बहुत प्यार आ रहा था .

दीपिका : चलो दीदी हम बहार चलते हैं वर्ण डॉ गुस्सा होंगे. चलिए भैया और लड्डू लाइए.

दीपिका ममी माँ और अजय मां को लेकर बहार निकल गयी. मैं बचे को चूम कर गले लगाकर वापिस रखने लगा तो ममी रोटी हुई मेरे आगे हाथ जोड़ रही थी .

अमित : ये क्या ममी ? आप हाथ क्यों जोड़ रही हैं ?

कामिनी : मैं तुम्हारा एहसान कैसे उतरूंगी. तुमने आज मुझे माँ बना कर मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी कमी को दूर कर क मुझे पूरी औरत बना दिया है. वर्ण लोग मुझे बाँझ और नजाने क्या क्या कहते रहते. तुम्हारी वजह से आज मैं माँ बानी हूँ. मैं साडी ज़िन्दगी तुम्हे ज़लील करती रही और तुमने मेरी ज़िन्दगी का सब से बड़ा कलंक हटा दिया मुझे माँ बना दिया.

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं. मैंने कोई एहसान किया है. ये तो वो ख़ुशी है जो आपको बहुत पहले मिल जनि चाहिए थी. आप ने क्या कुछ नहीं सहा होगा . पर मैं खुश हूँ क आपको वो मिला जो आप चाहती थी. अजय मां भी कितने खुश हैं. इतना खुश मैंने उन्हें पहले कभी नहीं देखा. भगवन करे आपका बीटा आपको हर वो ख़ुशी दे जो एक माँ को मिलनी चाहिए .

कामिनी : सिर्फ मेरा नहीं हमारा बीटा . मैं भगवन से थी चाहती थी क मुझे बीटा हो जिसे मैं तुम्हारे जैसा बनाऊं. और देखो भगवन ने मेरी सुन ली.

अमित : भगवन आपकी बात जल्दी सुनता है. अब आपको मेरी ज़रूरत नहीं पड़ेगी. ये हमेशा आपके पस रहेगा.

कामिनी : तुम्हारी ज़रूरत क्यों नहीं पड़ेगी? मैं तुम्हे कभी खुद से दूर नहीं होने दूंगी. और अब तो बिलकुल भी नहीं. तुम सामने रहोगे तभी तो तुम्हारे जैसा बनेगा. तेरे मां बहुत खुश हैं क वो बाप बन गए पर असल में तो बाप तुम हो बने हो न . इस लिए तुम्हे आरव की तरह इसके भी सभी काम खुद करने होंगे.

‘ और कितनी देर लगाओगे ? भाई हम भी हैं लाइन में ‘ हूँ बातें कर hi रहे थे क दरवाज़े खोल कर नैना दीदी अंदर आती हुई बोली . वो आगे आ कर ममी से मिली और फिर बचे को देखने लगी. मैं बाहर निकला तो सभी वहीँ खड़े थे और निधि दीदी क साथ राधा सबका मुँह मीठा करवा रही थी . राधा और निधि दीदी दोनों ने एक साथ मेरे मुँह में लड्डू ठूंस दिए . तभी माँ चल कर मेरे पस आयी और मुझे गले से लगा लिया .

गौरी : कैसा है तू? एक्साम्स तो अचे से हो रहे हैं न ?

अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ. और एक्साम्स भी अचे से हो रहे हैं. पर आप ये बताइये जब डॉ ने आपको मन किया है तो आप यहाँ आयी क्यों ?

गौरी : तो क्या मैं घर बैठी रहती? इतना ख़ुशी का मौका है मैं कैसे रुक सकती थी . वैसे भी मैं ठीक हूँ डॉ तो ऐसे hi कहते हैं.

‘ अब आ गयी हो न आप तो अब यहीं रहो हमारे घर. आपका भी तो टाइम आने वाला है. ऐसे में गाओं से शहर आने में इतना टाइम लगता है इस लिए आप यहीं रुक जाओ और कामिनी दीदी को भी हम यहाँ से अपने साथ अपने घर ले चलते हैं. तुझसे तो मैं बहुत नाराज़ हूँ . बाकियों का तो छोडो काम से काम तुम तो कल बता सकते थे न क ये लोग यहाँ हैं ? ‘ रमा आंटी ने पहले माँ से घर चलने को कहा और फिर मुझसे नाराज़ होने लगी.

अमित : वो कल टेंशन hi इतनी हो गयी थी एक डैम से क यद् hi नहीं रहा

अंकल : अरे क्यों दांत टी हो मेरे बेटे को ? आज ख़ुशी का मौका है जाने दो सब. और भाभी रमा ने हो कहा मैं भी वही कहूंगा. बल्कि आप सब लोग हमारे साथ hi हमारे घर चलिए .

गौरी : ऐसे कैसे ......

अंकल : मैं कुछ नहीं सुनूंगा भाभी. आप सब हमारे साथ हमारे घर पर hi रहोगे. हमारे पास सबके लिए कमरे हैं. और वहां सब अचे से मैनेज भी हो जायेगा . ज्यादा मत सोचिये क्यूंकि आप न मणि तो मैं सबको ज़बरदस्ती अपने साथ ले जाऊंगा .

विजय : ाचा भाई ाचा जैसा तू कहे पर फोन हुए कामिनी को तो छुट्टी मिले.

अंकल : वो मैंने बात कर ली है . डॉ ने कहा है क कामिनी भाभी को अछि रेस्ट चाहिए. छोटा ऑपरेशन था इस लिए कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होगी. बस आज रत उन्हें यहाँ रहना होगा कल उन्हें हम अपने साथ ले जा सकते हैं. और मैंने एक नर्स का भी बोल दिया है जो साथ रहेगी और भाभी का ख्याल रखेगी.



अंकल ने बाबा और माँ को मन लिया . अब भला और कोई कैसे मन कर सकता था . इधर राधा और निधि दीदी मुझसे एग्जाम क बारे में पूछने लगी. मैं रीता मौसी और दिव्या मौसी से भी मिला. पर दिव्या मौसी से ज्यादा बात नहीं हो पायी क्यूंकि वो कामिनी ममी क पास चली गयी. कुछ देर बाद कल्पना भी वहां आ गयी और सब से मिली. ख़ुशी क इस माहौल में पता hi नहीं चला कब दोपहर से शाम और फिर रत हो गयी. कल हमारा फिर से एग्जाम था इस लिए कल्पना ने मुझे रेमिंद करवाया और तयारी करने को कहा. मेरा दिल तो नहीं कर रहा था कहीं जाने का पर सब बार बार कहने लगे तो मुझे निधि दीदी क साथ वापिस घर आना पड़ा. पर आने से पहले एक बार फिर से मैं कामिनी ममी और बचे से मिलकर आया.
 
आज नहीं भाई कल अपडेट दूंगा . वैसे तो काफी लिख लिया था पर पूरा नहीं कर पाया. अब कल तक पूरा कर क अपडेट दूंगा .
 
अपडेट 213



घर आने क बाद निधि दीदी ने खाना बनाया और हम सब ने मिल कर खाया. उसके बाद मैं अपने कमरे में पड़ने बैठ गया . कल जो एग्जाम होने वाला था वो सब्जेक्ट चन्दर्कांता का hi था. मुझे यकीन था क वो कल भी कोई पन्गा ज़रूर करेगी. मुझे आज सारा दिन समय hi नहीं मिला था और न hi मेरा इस तरफ ध्यान गया था पर अब मैं सीरियस होकर पड़ने बैठ गया . वैसे तो मंजू म ने मेरी अचे से तयारी करवा राखी थी. पर एक बार साडी रेविसिओं करना बहुत ज़रूरी था . इस लिए मैं पूरी कंसंट्रेशन क साथ पड़ने बैठ गया. नैना दीदी जब कमरे में आयी तो मुझे ऐसे पड़ता देख कर वो बिना कुछ कहे वापिस चली गयी . उसके बाद निधि दीदी भी रूम में आ गयी और मुझे दूध दिया . दीदी अपना लैपटॉप ले कर बैठ गयी और मैं पड़ता hi रहा. 12 बजे दीदी में लैपटॉप बंद किया

निधि : चलिए जनाब अब सो जाइये . कल सुबह उठ कर बाकि का पढ़ लेना वर्ण फिर नींद पूरी नहीं होगी .

अमित : दीदी बस एक बार सारा ख़तम कर लूँ फिर सुबह दुबारा रेविसे कर लूंगा . आप सो जाओ मुझे थोड़ा टाइम और लगेगा .

दीदी बीएड पर लेट गयी और मैं पड़ता रहा. रत एक बजे क करीब मैंने किताब बंद की और बीएड पर आ गया . दीदी आँखें बंद किये सो रही थी. मैं भी चुपचाप उनके पास hi लेट गया . मैंने अभी ऑंखें बंद hi की थी क दीदी ने मेरी बाजु पर सर रख दिया . मैंने देखा तो दीदी मुझे hi देख रही थी .

अमित : आप सोई नहीं अब तक ?

निधि : मुस्कुराते हुए ) कैसे सो जाती? मुझे अपने इस तकिये क बिना नींद नहीं आती .

अमित : मैं जब यहाँ से चला जाऊंगा तब क्या करेंगी फिर ?

निधि : मैंने सोच लिया है मैं भी तुम्हारे साथ hi चलूंगी .

अमित : आप भी न , कल को आप की शादी होगी तब क्या करेंगी ?

निधि : मन में ) शादी तो मेरी हो चुकी तुम्हारे साथ वो भी भगवन की मर्ज़ी से. अब और किसी की मुझे परवाह नहीं है .

निधि : मुझे कुछ नहीं पता मुझे बस तुम्हारे साथ रहना है. अब जल्दी से सो जाओ सुबह जल्दी उठना है .

दीदी मेरी तरफ करवट लिए हुए मेरी छाती ी ार हाथ रखे मेरे साथ लगी हुई लेती हुई थी और उनका सर मेरे कंधे क पास था . कुछ देर हम दोनों ऑंखें बंद कर क सोने लगे . दीदी की दायीं तंग मेरी दायीं तंग क ऊपर आ गयी और वो मेरे साथ और भी ज्यादा सात गयी. शायद उन्हें ज्यादा ठण्ड लग रही होगी . मैंने अपनी बाजु उनके साथ लपेट ली और आराम से सो गया . सुबह मुझे दीदी ने hi जगाया. मैं देर से सोया था और थका हुआ भी था इस लिए अभी भी नींद का असर था पर

निधि : अमित जल्दी से उठ जाओ. आज तुम्हारा एग्जाम है और तुमने अभी एक बार रेविसे भी करना हैं जल्दी से तैयार हो जाओ और रेविसिओं भी करलो.

दीदी अपने बल सर क पीछे बांधते हुए मुझे कह रही थी. इस वक़्त वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. सच में कुदरत ने उन्हें खास तौर पर कड़ी म्हणत से बनाया था . मैंने मन ने उनकी खूबसूरती की तारीफ करता हुआ सोच रहा था और मुझे पता hi नहीं चला क दीदी क्या कह रागी है

निधि : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : आप बहुत खु ........ आ अम्मा मैं कह रहा था आप चाय बना दीजिये .

मुझे पता hi नहीं लगा और कह मुँह से उनकी तारीफ निकलने लगी थी पर जैसे hi मुझे थोड़ी होश आयी मैंने अपनी बात बदल ली . मगर दीदी शर्मा गयी और उनके गाल लाल हो गए .

निधि : तुम बैठो मैं अभी बना कर लती हूँ .

इतना कह कर दीदी शर्माती हुई उठी और दरवाज़े तक जाकर पीछे मुद कर मुझे एक बार देखा और हस्ती हुई कमरे से बहार निकल गयी .

अमित : बच गए यार ये मैं क्या बोलने जा रहा था. दीदी क्या सोचती मेरे बारे में क मैं किस नज़र से देख रहा था उनको . बच गए .

निधि ( मन में ) बुद्धू , कहते कहते रुक गया. मैं जानती हूँ तुम क्या कहना छह रहे थे. कह hi देते किसने रोका था ? मैं तो कब से तरस रही हूँ क तुम मुझे कुछ कहो . मुझे उस नज़र से देखो . पता नहीं कब तुम्हे समझ आएगी क मैं भी तो यही चाहती हूँ क तुम मुझे एक लड़के की नज़र से देखो . मुझ पर सिर्फ तुम्हारा हक़ है. मेरा तन मन सिर्फ तुम्हारे लिए hi तो है .

उठते hi मैं फ्रेश हो कर फिर से किताब ले कर बैठ गया था और एक बार फिर से जितनी हो सकीय रेविसिओं कर ली. दीदी ने एक बार मुझे चाय भी बना कर दे दी. टाइम का पता hi नहीं चला. दीदी ने आकर यद् दिलाया तो मैं किताब बंद कर क नाहा धो कर तैयार हुआ . नाश्ता करने क बाद दीदी मुझे कॉलेज छोड़ने गयी. आज साइंस वालों का भी एग्जाम था इस लिए राधा रीमा और नेहा दीदी भी आयी थी. हमने एक दूसरे को बेस्ट ऑफ़ लक कहा और अपने अपने सिटींग प्लान क हिसाब से बैठ गए. सब्जेक्ट चूँकि चन्दर्कांता का था जो वैसे hi थोड़ा टफ था और उसकी हरकतों की वजह से मेरे अंदर थोड़ा दर भी था क पता नहीं मैं ाचा कर पाउँगा या नहीं . क्वेश्चन पेपर देख कर मुझे थोड़ा हौंसला हुआ . क्यूंकि मुझे वो सरे क्वेश्चन आते थे . हालाँकि सब क्वेश्चन थोड़े घुमा फिर कर पूछे गए थे ताकि सही से समझ न आये और थे भी मुश्किल. पर थैंक्स तो मंजू म क उन्होंने मुझे सब तयारी करवाई थी. मैं जल्दी से लिखने लगा . कोई 40 मिनट्स बाद hi चन्दर्कांता और वर्मा सर दोनों क्लास में आ गए . चन्दर्कांता ने आते hi मुझे देखा. मैं जान बुझ कर पेन रख कर बैठ गया और ऐसे दिखने लगा जैसे मुझे पेपर नहीं अत . क्यूंकि यही तो वो चाहती थी. और हुआ भी ऐसा hi, चन्दर्कांता मुझे ऐसे बैठा देख कर स्माइल करने लगी . जबकि मेरी तरह hi बाकि स्टूडेंट्स भी मुश्किल से hi कर प् रहे था या मदद की उम्मीद में इधर उधर देख रहे थे .

चन्दर्कांता : मुस्कुराते हुए ) क्यों , नहीं अत कुछ ? ऐसा hi होता है जब क्लास में से गायब रहो. तुम इस कॉलेज क लायक नहीं हो. जल्दी hi तुम वहां पहुँच जाओगे जहाँ से आये हो .

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था पर मैं खामोश रहा .

चंद्रकांता: वर्मा सर ज़रा इसकी चेकिंग तो करो .

वर्मा सर ने मुझे खड़ा होने को कहा और मेरे पास आये .

‘ रुकिए सर , इसकी ज़रूरत नहीं है ‘ ये आवाज़ प्रोफ वरिंदर की थी जो दरवाज़े से अंदर आ रहे थे . उनकी आवाज़ सुनते hi चन्दर्कांता और वर्मा सर ने मुद कर उनकी तरफ देखा . मैं भी सर को देख रहा था . मगर चंद्रकांता और वर्मा हैरान थे .

वरिंदर : प्रिंसिपल सर ने आपको बुलाया है इस लिए ये ड्यूटी अब मुझे दी गयी है . और मैडम आप भी प्लीज उन से मिल लीजिये. इसको मैं देख लेता हूँ.

चन्दर्कांता : पर ये तो मेरी ड्यूटी है न . उन्होंने खुद hi तो ......

वरिंदर : आप की ज़रूरत प्रिंसिपल सर को ऑफिस में है. इस लिए उन्होंने आपको वहां बुलाया है. आपकी ये ड्यूटी मैं देख लूंगा .

चंद्रकांता की तो झांटें hi सुलग गयी और एक बार मुझे घूर कर वो कमरे से बहार निकल गयी. उसके साथ hi वर्मा सर भी निकल लिए . मुझे बहुत ख़ुशी हो रही थी वरिंदर सर क यहाँ होने से . वैसे भी वो मेरे साथ हमेशा से hi अचे रहे थे .

वरिंदर : खड़े क्यों हो ? चलो बैठो और अचे से सरे क्वेश्चन करो . अब मैं हूँ यहाँ तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं .

वरिंदर सर ने प्यार से मेरे सर पर हाथ से सहलाया . मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी हो रही थी. मैंने सर को थैंक्स कहा . सर ने भी नज़रों से hi मुझे जवाब दिया और मैं बैठ कर आंसर शीट भरने लगा . जब घंटी बजने का टाइम हुआ तो वरिंदर और फिर से क्लास रूम में आ गए और इंचार्ज को 10 मिनट्स एक्स्ट्रा देने को कहा. जैसे hi एक्स्ट्रा टाइम ख़तम हुआ तो सब से पेपर कलेक्ट किये गए . मैं वरिंदर सर को बार बार दिल से शुक्रिया कह रहा था वर्ण मैं अचे से ये पेपर कर hi न पता .

मोहित : कैसा रहा ? पास तो हो जायेगा न ? चंद्रकांता ने जान बुझ कर इतना टफ पेपर डाला है क तू उसमे पास न हो सके . ये तो ाचा हो वरिंदर सर आ गए वर्ण आज भी वो तेरा टाइम ज़रूर ख़राब करती .

बहार निकलते hi मोहित चिंता ज़ाहिर करते हुए बात करने लगा.

अमित : सच में यार वरिंदर सर न आते तो मुश्किल हो जाती. वैसे मेरा तो ाचा गया तू सुना तेरा कैसा हुआ?

मोहित : पास हो जॉन इतना hi बहुत है.

कल्पना: मेरा तो ठीक रहा , आराम से पास हो जाउंगी . वैसे ये बात तो सही है. पेपर सच में hi उलझा हुआ था. कोई भी क्वेश्चन सीधा या सिंपल नहीं था. चंद्रकांता ने पूरी कोशिश करि है तुम्हे उड़ने की. अब देखो मार्क्स भी देती है या नहीं.

‘ hello यंग मन, कैसा रहा आज का एग्जाम? आज तो दिक्कत नहीं हुई न ? ‘ वरिंदर सर ने पीछे से हमारे करीब आकर मुझसे बात करनी शुरू की .

अमित : नहीं सर , सब ठीक रहा. आपने तो एक्स्ट्रा टाइम दिलवाकर और भी ाचा करवा दिया. थैंक यू सर. थैंक यू वैरी मच.

वरिंदर: इसमें थैंक्स वाली कौन सी बात है ? मैंने तो वो hi किया को एक टीचर को करना चाहिए. बाकि तुम सब ने तो अपनी म्हणत से hi किया जो किया . मगर मैं तुमसे नाराज़ हूँ .

अमित : किस लिए सर ? मुझसे कोई गलती हो गयी क्या ?

वरिंदर : तुम्हे ऐसे परेशां किया जा रहा था ये तुमने मुझे खुद आकर क्यों नहीं बताया? क्या मुझ पर भरोसा नहीं था ? यू अरे ओने ऑफ़ थे बेस्ट स्टूडेंट ऑफ़ थिस कॉलेज. कोई तुम्हे ऐसे परेशां करे ये न मैं बर्दाश्त करूँगा और न प्रिंसिपल सर. ाचा हुआ कल तुम्हारी इस दोस्त ने मुझे बता दिया वर्ण आज भी तुम्हारा टाइम ख़राब किया जाता . वैसे कल तुम्हारे मां क बीटा hi है न ? तो मुँह मीठा कब करवा रहे हो ?

वरिंदर सर ने जब कल्पना का नाम लिया तो मैं और मोहित कल्पना को देखने लगे . उसने स्माइल करते हुए नज़रें झुका ली मगर वरिंदर ने जब मां क बेटे का ज़िक्र किया तो मेरी ख़ुशी और भी बढ़ गयी.

अमित : अभी सर , मैं अभी आपके लिए कुछ मीठा ले कर अत हूँ.

वरिंदर : अरे नहीं नहीं मैं तो ऐसे hi कह रहा था . फिर किसी दिन ले आना कोई जल्दी नहीं है. और हाँ एक्साम्स क बाद अपनी प्रैक्टिस पर अचे से फोकस करना . नेक्स्ट मंथ कम्पटीशन है भूल मत जाना .

इतना कह कर वरिंदर सर ऑफिस की तरफ चल दिए . मैंने और मोहित ने कल्पना की तरफ देखा .

कल्पना : तुम दोनों ऐसे क्यों देख रहे हो ? मैंने कहा था न वो फिर से प्रॉब्लम करेगी. अगर आज वरिंदर सर न आते तो फिर क्या होता ?

अमित : थैंक यू वैरी वैरी वैरी मच , तुमने तो बिना बताये मेरी इतनी बड़ी मदद करदी .

कल्पना: तुम सबकी मदद करते जो तो क्या तुम्हारे लिए मैं इतना भी नहीं कर सकती. वैसे भी दोस्तों में नई सॉरी no थैंक्स. मैं तुम्हारे किसी काम आ सकूँ इससे ज्यादा मेरे लिए ख़ुशी की और क्या बात होगी.

‘कैसा रहा आज का एग्जाम? ‘ मैंने पीछे मुद कर देखा तो नेहा दीदी क साथ साथ साथ रीमा राधा और मीनल भी कड़ी थी.

अमित : ाचा रहा दीदी , और आप सब का कैसा hi ?

सब ने एक सुर में कहा ाचा हुआ. पर मोहित का उतरा चेहरा देख कर मीनल समझ गयी मोहित का ाचा नहीं हुआ .

मीनल : ाचा नहीं हुआ न ? कोई बात नहीं . पास तो हो जाओगे न ?

मोहित : पता नहीं यार. बहुत hi टफ था एग्जाम. और ये सब इसकी मेहरबानी से. इसका गुस्सा वो हम सब पर निकल रही है .

कल्पना : इसमें अमित की क्या गलती है ? वो तो उस चंद्रकांता का hi दिमाग ख़राब है. पता नहीं खुद को समझती क्या है .

राधा : चिंता में ) क्या मतलब ? तुम्हे कोई परेशानी तो नहीं होगी न ? तुमने टीचर से पन्गा क्यों लिया ? अगर उसने तुम्हे कॉलेज से निकलवा दिया तो?

कल्पना : रिलैक्स यार ऐसा कुछ नहीं है. और इसमें अमित की कोई गलती नहीं है. वो मैडम hi खुद को कुछ ज्यादा hi समझती है . और ऐसे कैसे वो निकल देगी इसे ? प्रिंसिपल सर खुद अमित क साथ हैं और बाकि सब भी. अब चलो चल क पार्टी करते हैं. कल तुम्हारे मां क बीटा हुआ है न. पार्टी तो अमित क साथ साथ तुम्हारी तेग से और नेहा दीदी की तरफ से भी बनती है. तो क्यों न एक साथ सेलिब्रेट करें वैसे भी कल संडे है.

मीनल : गुड आईडिया यार . मोहित का मूड भी ठीक हो जायेगा.

अमित : एक मिनट यार , तुम लोग चलो मैं अभी आया.

मैं जल्दी से भाग कर स्टाफ रूम की तरफ गया. मंजू म से मैंने बात की hi नहीं थी. मैं उन्हें खुद मिलकर बताना चाहता था. मैं स्टाफ रूम क पास गया और मंजू म मुझे देखा तो उठ कर खुद बहार आ गयी.

मंजू : कैसे हो ? कैसा रहा एग्जाम?

अमित : बहुत ाचा और एग्जाम भी बहुत ाचा हुआ. सॉरी मैं आपसे कल बात नहीं कर पाया. मेरे पास एक गुड न्यूज़ है.

मंजू : खुश होते हुए ) जल्दी बातो क्या है गुड न्यूज़?

अमित : कल ममी ने बेटे को जनम दिया है . कल का सारा दिन मैं वहीँ बिजी रहा और दिमाग से hi निकल गया था . पहले सोचा क फ़ोन पर hi बता दूँ फिर सोचा खुद मिल कर बताऊंगा तो ाचा रहेगा.

मंजू : ये तो तुमने बहुत अछि खबर सुनाई है. तुम्हारी दूसरी ममी को भी बीटा हो गया. अब तो जल्दी से मुँह मीठा करवाना पड़ेगा .

अमित : ज़रूर, मैं आपके पास घर पर मिलने आऊंगा.

मंजू : मैं इंतज़ार करुँगी.

मंजू म से मिल ने क बाद मैं पार्किंग में गया जहाँ सब मेरा वेट कर रहे थे .हम सब एक साथ निकले और कॉलेज क बहार एक रेस्टोरेंट में चले गए जहाँ हमने साथ में मस्ती करते हुए खाया पिया . मैंने अजय मां को फ़ोन कर क ममी का हल चल जानना चाहा तो पता चला अंकल आंटी उन सब को अपने घर hi ले गए हैं जैसा क वो कल hi कह रहे थे .

कल्पना : खाना पीना तो हो गया अब आगे की करना है?

नेहा : और क्या करना है ? घर जा कर अगले एग्जाम की तयारी करो .

अमित : ये क्या दीदी , इतना ख़ुशी का मौका है और आप आज भी पड़े की बातें कर रही हो . ये कौन सा फाइनल एग्जाम हैं. थोड़ा सा टाइम तो निकल hi सकते हैं न हूँ सब . चलिए सब मिल कर मोहित क घर चलते हैं .

कल्पना: वहां क्यों ?

अमित : क्यूंकि सब लोग अभी वहीँ पर हैं. और हम सब भी वहीँ जा रहे हैं. चलो चलें .

मेरे फाॅर्स करने से नेहा दीदी ने मन नहीं किया और राधा रीमा भी ख़ुशी ख़ुशी चल पड़ी. जब हम घर पहुंचे तो वहां पर पहले से hi सब इकठा थे . रजनी मौसी रीता मौसी माँ बाबा अंकल आंटी निधि दीदी नैना दीदी करुणा दीदी . नैना दीदी और करुणा दीदी ने तो अछि खासी रौनक लगा राखी थी. उनकी बातें सुन कर सब है रहे थे . जब हम दरवाज़े से अंदर एंटर होने लगे तो हमें बहार से सबके चहकने की आवाज़ें आ रही थी .

‘ hiiiiiiiiiiiiiii कल्पना मीनल तुम दोनों यहाँ ??? कितने दिनों बाद नज़र आयी हो तुम दोनों ‘ करुणा दीदी तो मीनल और कल्पना को देख कर ऐसे उछली जैसे कितनी पुराणी बेस्ट फ्रेंड्स हो . सब उनको hi देखने लगे .

मीनल : कैसी हो दीदी आप ?

करुणा : मैं तो बहुत अछि हूँ बस आज कल एक्साम्स की वजह से किताबों को चाट रही हूँ. तू बता ?

करुणा दीदी ने मीनल को गले से लगाया उधर से नैना दीदी भी आकर कल्पना से गले लग गयी .

नैना : कैसी हो कल्पना ? यार अचे दोस्त हो तुम सब . कभी यद् hi नहीं करते .

कल्पना : आपको भूले hi कब हैं . वो तो एक्साम्स की वजह से आज कल सब. सब बिजी हैं. आप बताइये .

नैना : बस यार मेरा भी करुणा जैसा hi हल है .

अमित : और भी हैं लाइन में अगर आपका मिलना हो गया हो तो .

मैंने रीमा की तरफ इशारा करते हुए कहा तो करुणा दीदी मुझे गुस्से से देखने लगी .

करुणा : तुझसे तो मुझे कोई बात hi नहीं करनी है . बाकि सब से मैं अपने आप मिल लुंगी चल हत्तत्त .

मुझे साइड में करते हुए करुणा दीदी रीमा से गले मिली. मैं करुणा दीदी को देखने लगा तो नैना दीदी मेरे करीब आयी .

नैना : धीमी आवाज़ में ) कहा था न , करुणा बहुत नाराज़ है तुमसे .

मैं करुणा दीदी और नैना दीदी को देखने लगा . तभी निधि दीदी भी आ कर सब से मिली . रीमा की खूबसूरती से सब इम्प्रेस थे . वो थी भी गोरी गुलाबी और ऊपर से उसके बल और आँखों का अलग रंग . एक बार फिर से पहले की तरह सब उसे देख कर उसकी तारीफ करने लगे . मैं भी सब से मिला बरी बरी से .

अमित : माँ , दीपिका ममी नज़र नहीं आ रही .

गौरी : बीटा वो कमलेश वापिस गया है न गाओं घर और ज़मीनों का भी तो ख्याल रखना है न. तो दीपिका साथ hi चली गयी. अभी गए हैं कुछ देर पहले . कामिनी सामने कमरे में है .

दीपिका ममी और आरव का जाना मुझे ाचा नहीं लगा पर उनका जाना भी तो ज़रूरी था . मैं कामिनी ममी क कमरे की तरफ बढ़ा . कामिनी ममी क कमरे में अजय मां और एक नर्स मौजूद थी . अजय मां तो बस बचे क पास बैठे उसी क साथ खेल रहे थे . मुझे देखते hi मां और ममी दोनों क चेहरे पर ख़ुशी आ गयी .

अजय : तू आ गया बीटा ? कैसा रहा पेपर ? ाचा हुआ न ? ले आ तू भी खेल इसके साथ . देख क्या कर रहा है ये .

मैंने बचे को देखा वो तो बेचारा अभी इतना छोटा था क ऑंखें भी ठीक से नहीं खोल रहा था और अजय मां इतने खुश थे क खुद hi पता नहीं क्या क्या सोच रहे थे उसे देख देख कर .

अमित : कितना प्यारा है न मां जी. बिलकुल ममी पर गया है .

मेरी बात पर ममी शर्मा गयी. मैं बचे को पास देखने लगा . तभी कमरे में रीमा राधा कल्पना तीनो आ गयी . पहले उन सब ने मां ममी को नमस्ते किया और कल्पना और रीमा ने उन्हें बधाई भी दी. मां जी कमरे से बहार चले गए .

राधा : हटो तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? देखा नहीं यहाँ सिर्फ लेडीज हैं. जाओ तुम भी बहार और हमें इसके साथ खेलने दो .

अमित : अरे अरे , ये क्या बात हुई . मैं तुमसे पहले आया हूँ. तुम जाओ बहार . मुझे पहले इसके साथ खेलने दो .

राधा : तुम्हारे पास hi तो रहेगा ये गाओं में जितना चाहे खेलते रहना. अभी हमें इसके साथ खेलने दो. आओ रीमा आओ कल्पना .

मुझे धकेलती हुई राधा मेरी जगह आ गयी और बचे क करीब रीमा को करते हुए मुझे देख कर हसने लगी .

राधा : देख क्या रहे हो ? जाओ अब .

अमित : देखा ममी ये क्या कर रही है.

कामिनी : राधा !!!

‘ राधा को कोई कुछ नहीं कहेगा . और तू यहाँ क्या कर रहा है ? चल बहार . ‘ माँ ने अंदर आते हुए राधा की साइड ली और मुझे बहार जाने को कहा . राधा के चेहरे पर मुस्कान और भी बढ़ गयी . मेरी नज़र रीमा पर गयी तो वो भी नज़रें नीचे कर क मुस्कुरा रही थी . जबकि कल्पना मुझे hi देख रही थी .

अमित : नाराज़ होते हुए ) जा रहा हूँ .

इतना कह कर मैं कमरे बहार निकल गया . और दरवाज़े को थोड़ा ज़ोर से बंद किया . रूम से बहार आया तो अजय मां मुझे अपने साथ बिठा कर बैठ गए और मैं सब क साथ बैठ गया . नैना और करुणा दीदी खाने पीने का सामान ले कर कामिनी ममी वाले रूम में hi चली गयी . निधि दीदी नेहा दीदी दोनों वहीँ हमारे करीब बैठ गयी. तभी मुझे दिव्या मौसी का ख्याल आया

अमित : मौसी , दिव्या मौसी कहाँ है ? वो नज़र नहीं आ रही कहीं ?

रीता : ओह्ह्ह हमारे तो दिमाग से hi निकल गया . वो तो घर गयी थी . कह रही थी राधा आने वाली है इस लिए घर चली गयी . उसको किसी ने फ़ोन भी नहीं किया. मैं अभी उसे फ़ोन कर क बताती हूँ क राधा इधर है .

रजनी : पर वो भी तो फ़ोन कर सकती थी . क्या उसका फ़ोन आया किसी को ?

मैंने और रीता मौसी ने न में गर्दन हिलाई और मुझे पता था क राधा की भी बात नहीं हुई मौसी से क्यूंकि वो तो मेरे साथ hi थी . रीता मौसी ने दिव्या मौसी का no . डायल किया तो वो आउट ऑफ़ रीच आ रहा था

रीता : दीदी दिव्या का फ़ोन नहीं मिल रहा है .

रजनी : क्या ??? कहीं कुछ ..... है भगवन वो अकेली गयी है . सब ठीक हो .

ये बात सुन कर एक पल क लिए सबके होश उड़ गए . खास कर क मुझे एक डैम से चिंता होने लगी . क्यूंकि दिव्या मौसी क साथ हुई घटना मैं तो अपनी आँखों से hi देख चूका था . वो खामोश रहती थी और न hi ज्यादा तेज तर्रार थी .

विजय : चिंता मत करो सब ठीक hi होगा . मैं अभी जा कर उसे ले अत हूँ



अभी बाबा उठने hi वाले थे क मैं अपनी सीट से उठा और मोहित को आवाज़ दे कर बहार निकल गया . जाते जाते मैंने कह दिया क मैं दिव्या मौसी को लेने जा रहा हूँ .
 
अपडेट 214



मोहित क साथ कार में बैठा मैं दिव्या मौसी का फ़ोन लगातार मिला रहा था मगर वो नॉट रचाबळे आ रहा था . मेरी बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही थी . दिल में अजीब अजीब ख्याल आने लगे. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा कहीं दिव्या मौसी क साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया . मोहित ने मुझे बीच बीच में बात इतने की कोशिश की पर मैनु उसकी किसी बात का सही से जवाब नहीं दिया क्यूंकि मेरा ध्यान सिर्फ दिव्या मौसी की तरफ था. मोहित भी मेरी हालत समझ रहा था और इसी लिए उसने भी तेज़ी से गाड़ी चलायी और हूँ दिव्या मौसी क घर पहुँच गए . घर का दरवाज़ा खुला देख कर मेरी धड़कन और बढ़ गयी क्यूंकि मौसी तो ऐसे दरवाज़ा खुला रखती hi नहीं थी. मैं गाड़ी से उतारते हो तेज़ी से अंदर की तरफ भगा .

अमित : मौसी !!!! मौसी !!!!! मौसी !!!!!

मैं घर में घुसा तो मौसी कहीं नज़र नहीं आ रही थी और न hi कोई और घर में था . मुझे अंदर से दर लगने लगा . मैं ज़ोर ज़ोर से मौसी मौसी चिल्लाता हुआ भाग भाग कर इधर उधर मौसी को ढूंढ रहा था पर मौसी कहीं नहीं थी. न अपने कमरे में न राधा क कमरे में न किचन में ने दूसरे कमरों में . मेरी आँखों में आंसू आने लगे थे क खून मौसी क साथ कुछ बुरा तो नहीं हो गया. मौसी कहाँ गयी आखिर . मेरे पीछे पीछे मोहित भी भागता हुआ आया और मेरी तरह वो भी परेशां हो गया .

अमित : चिंता में ) देख यार मौसी यहाँ नहीं है और घर भी खुला है . कहीं मौसी क साथ कुछ हुआ तो नहीं है

मोहित : हिम्मत रख यार वो शायद यहीं आसपास किसी क घर होंगी . एक बार हम पता करते हैं पहले .

अमित : अगर मौसी को कुछ हो गया तो मैं क्या करूँगा .....

वहीँ दिव्या अपने कमरे क दरवाज़े पर कड़ी अमित को देख रही थी. पहले तो भी परेशां हो गयी थी अमित क चिल्लाने की आवाज़ से पर अब अमित की बातें सुन कर और उसकी हालत देख कर अब दिव्या को एक सुकून सा भी महसूस हो रहा था दिल में . अपने लिए अमित को चिंता करते देख एक अंजनी सी ख़ुशी उसके दिल को महसूस हो रही थी . पर अमित को वो ऐसे परेशां भी नहीं देख प् रही थी .

‘ क्यों चिल्ला रहे हो ? क्या हुआ है ? एक मिनट रुक नहीं सकते थे क्या ? ‘ ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जो अपने रूम क दरवाज़े पर कड़ी हमे देख रही थी . मैंने उन्हें अपने सामने सही सलामत देखा तो मुझे इतनी ख़ुशी हुई क मैं बता नहीं सकता . अभी तो मेरा दिल दर से बैठा जा रहा था अभी एक पल में hi ख़ुशी से झूम उठा . मैं भाग कर मौसी क पास गया और मौसी क गले से लग गया .

अमित : आप कहाँ चली गयी थी मौसी ? मैं कितना दर गया था . कहाँ थी आप मैंने आप को सब जगह ढूँढा .

दिव्या : कहीं नहीं थी , बाथरूम में थी . तेरी आवाज़ सुनी पर क्या मैं वहां से तुझे आवाज़ देती क मैं अंदर हूँ ? तू तो चिल्ला चिल्ला कर सारा घर सर पर उठा रहा था . ऐसा क्या हो गया था ?

अमित : मुझे लगा क .....

दिव्या : क्या लगा ? क मुझे कुछ हो गया है ? कुछ नहीं हुआ मुझे अछि भाई हूँ . चल अब पीछे हैट .

मैं मौसी से अलग हुआ तो मोहित भी मौसी से मिला. मौसी ने उसे आशीर्वाद दिया और धीरे धीरे चलते हुए किचन की तरफ जाने लगी . मुझे उनकी चल में कुछ बदलाव लगा . वो संभल कर चल रही थी शायद कुछ छुपा रही थी .

दिव्या : तुम दोनों बैठो मैं तुम दोनों क लिए कुछ लती हूँ. राधा कहाँ है ? वो नहीं आयी अभी तक .

मैं मौसी की चल देखते हुए उनके पीछे पीछे hi किचन में आ गया

अमित : राधा मोहित क घर hi है सबके साथ. आप ये बतिये आपका फ़ोन क्यों नहीं कग रहा था ? कब से हम सब फ़ोन मिला रहे हैं. कितनी चिंता हो रही थी सबको आपकी , पता भी है .

मौसी किचन में गिलास में पानी डालती हुई मेरी बात सुन रही थी और मेरी तरफ पलटी.

दिव्या : इसमें चिंता करने वाली कौन सी बात है? मैं बता कर तो आयी थी क मैं घर जा रही हूँ. राधा क आने से पहले मुझे घर भी तो आना था . और वो फ़ोन इस लिए नहीं लग रहा था क्यूंकि मेरा फ़ोन ख़राब हो गया है . ले पानी पि.

मैंने मौसी क हाथ से पानी क दोनों गिलास पकड़ लिए. और मोहित को खुद hi कबीर पकड़ दिया . मौसी अभी भी किचन में hi थी तो मैं फिर से उनके पस गया .

अमित : फ़ोन को क्या हुआ है ?

दिव्या : वो गिर गया था हाथ से . शायद टूट गया है .

अमित : दिखाइए कहाँ गई फ़ोन

दिव्या : मेरे कमरे में hi बीएड पर पड़ा है जा देखले.

मैं जल्दी से मौसी क कमरे में गया और देखा फ़ोन वहीँ पड़ा था और टूटा हुआ था . मैंने उसे अचे से देखा और उसे मोहित को दे कर खा क वो जल्दी से इसे ठीक करवा कर लाये . मोहित फ़ोन लेकर निकल गया . असल में मैंने मोहित को जान बुझ कर भेजा था ताकि मौसी से बात कर सकूँ . मुझे लग रहा था वो कुछ छुपा रही हैं . मैं फिर से मौसी क पास गया वो कुछ बना रही थी . और शेल्फ पर हाथ रख कर उसी क सहारे कड़ी थी .

अमित : क्या हुआ है आपके साथ ?

दिव्या : चौंकते हुए ) क्या मतलब ? क्या कह रहे हो तुम ?

अमित : आप कुछ छुपा रही हैं . सच सच बताइये क्या हुआ है ? आपका फ़ोन कैसे टूट गया ? और आप दरवाज़ा तो कभी खुला नहीं छोड़ तो फिर आज अजैव खुला था ?

दिव्या : बड़बड़ाते हुए ) क को कुछ भी तो नहीं हुआ . तू ऐसे hi सोच रहा है. देख तेरे सामने hi तो कड़ी हूँ .

मैं मौसी क करीब गया और उनका हाथ पकड़ कर अपने सर पर रख दिया .

अमित : आपको मेरी कसम सच सच बताइये क्या हुआ है .

दिव्या मौसी ने झटके से अपना हाथ पीछे खिंच लिया .

दिव्या : नज़रें चुराते हुए ) मम मैं क्यों झूठ बोलूंगी .

अमित : मेरी तरफ देख कर कहिये . मैंने आपको अपनी कसम दी है. आप चाहें तो मेरी कसम तोड़ सकती है फिर मेरे साथ चाहे जो हो.

मेरी बात सुनते hi दिव्या मौसी को झटका लगा और वो मेरी आँखों में देखने लगी.

दिव्या : एक थप्पड़ पड़ेगा तुझे तो साडी अकाल ठिकाने आ जाएगी . खुद को समझता क्या है? सब तेरी मर्ज़ी से होगा? जो तू कहेगा वो सबको मन्ना पड़ेगा ? जैसा तू चाहेगा वैसा रहेगा किसी क भी साथ ?

मौसी गुस्से में आकर मुझे क्या क्या करह रही थी मुझे समझ नहीं आ रहा था . पर उनकी आँखों में भी नमी आ गयी थी क्यूंकि वो मुझे दिल से चाहती थी शायद राधा से भी ज्यादा.

दिव्या : हाँ झूठ बोल रही हूँ मैं . इस लिए क मैं नहीं चाहती तू मेरी इतनी परवाह करे.

अमित : सीधा सीधा मेरी बात का जवाब दीजिये क हुआ क्या है आपके साथ ?

मैंने मौसी की बात काट ते हुए कहा . मौसी ने एक पल को खामोश हुई और मेरी आँखों में hi देखती रही .

दिव्या : वो रोड पर ऑटो से टकरा गयी थी तो .....

अमित : क्या ? ? आपका एक्सीडेंट हुआ है और आप छुपा रही हैं . चलिए मेरे साथ हम अभी डॉ क पास चलते हैं.

मैंने मौसी का हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा तो मौसी क मुँह से दर्द भरी आह निकली .

दिव्या : आआह्ह्ह्हह

अमित : घबरा कर ) क्या हुआ ? कहाँ चोट लगी है आपको ?

दिव्या : कुछ नहीं हुआ मुझे , मैं ठीक हूँ बस ज़रा सी .

मौसी अपने दाएं घुटने पर हाथ रख कर मालिश करने लगी .

अमित : दिखाइए मुझे .

दिव्या : अरे नहीं छोड़ क्या कर रहा है छोड़ आअह्ह्ह

मैंने मौसी का घुटना चेक करने क लिए उनकी साडी को उठाने लगा तो मौसी मुझे रोकने लगी . मगर मैंने उनकी परवाह न करते हुए सदी को घुटने तक ऊपर किया . मौसी का घुटना कुछ ज्यादा hi छिला हुआ था और वहां पर खून भी लगा हुआ था जो बह तो नहीं रहा था मगर सूजन आ चुकी थी . साथ hi तंग पर और टखने पर भी चोट से सूजन थी . मौसी की ये हालत देख कर मुझे एक डैम से गुस्सा आ गया .

अमित : गुस्से में ) ये ज़रा सी चोट है ? ज़रा स ? ऐसे क्या ये अपने आप ठीक हो जाएगी ? चुप चाप मेरे साथ डॉ क पास चलिए अब .

दिव्या मौसी मुझे गुस्से में देख कर कुछ नहीं बोली . मौसी को दर्द था इस लिए मैंने मौसी को अपनी गोद में उठा लिया .

दिव्या : अरे अरे ये क्या कर रहा है ? नीचे उतर मुझे .

अमित : गुस्से में ) चुप रहिये आप . खुद को समझती क्या हैं आप ? हर बात पर गुस्सा दिखती हैं . अपनी मर्ज़ी करती हैं. कुछ भी करेंगी आप ? मैं एक लफ्ज़ नहीं सुन्ना चाहता . चुप रहिये अब आप .

मैंने मौसी को बहार ले जाने लगा तो मुझे यद् आया क मोहित को तो मैंने भेज दिया था. मैंने मौसी को हॉल में hi सोफे पर बिठाया और अपना मोबाइल देखने लगा तो वो भी मेरी जेब में नहीं था . शायद कार में hi रह गया था . तब मेरी नज़र राधा की स्कूटी पर पड़ी जो घर में hi कड़ी थी. मैंने मौसी से स्कूटी की चाबी का पूछा तो उन्होंने बता दिया . मैंने जल्दी से चाबी ली और स्कूटी को बहार निकल कर स्कूटी को स्टार्ट किया . मौसी को मैं उठा कर बहार ले आया और स्कूटी पर बिठाया . घर को लोच लगा कर मैं मौसी क साथ निकल गया . थोड़ी दूर hi एक डॉ का क्लिनिक था . मैं मौसी को वहां भी अपनी गोद में उठा कर ले गया . और डॉ क पास बिठा दिया . डॉ ने मौसी की चोट को देखा और ड्रेसिंग कर ने क बाद उन्हें एक इंजेक्शन लगवाने को कहा .

डॉ : ज़ख़्म ज्यादा गहरा नहीं है . जल्दी ठीक हो जायेगा . सूजन आयी है उसकी लिए एक तुबे लिख देता हूँ वो लगा लीजियेगा 2-3 दिनों में ठीक हो जायेगा . ये एक इंजेक्शन लगवाना पड़ेगा इन्फेक्शन न हो .

दिव्या : मुझे इंजेक्शन नहीं लगवाना है .

अमित : ऐसे कैसे नहीं लगवाना. सुना नहीं इन्फेक्शन हो जाएगी. डॉ साब आप इंजेक्शन लगाइये .

मैंने मौसी को गुस्से से देखते हुए कहा. मुझे गुस्से में देख कर मौसी चुप कर गयी . डॉ ने मौसी को इंजेक्शन लगाया और कुछ मेडिसिन दी . मौसी के घुटने पर पट्टी बंधी थी और पाऊँ क पास भी. वो खुद hi उठ कर चलने लगी तो फिर एक बार दर्द से आह निकली .

दिव्या : आअह्ह्ह माआ

अमित : गुस्से से ) किसने कहा आपको चलने को ? हर जगह अपनी मर्ज़ी करनी होती है आपको ?

मौसी मुझे देख कर बोली कुछ नहीं बस चुप रही. मैंने फिर उन्हें गॉड में उठाया और बहार ले आया. स्कूटी पर मौसी को बिठा कर मैं घर की तरफ चल पड़ा . घर पहुँच कर मैं फिर से मौसी को गॉड में hi उठा कर लाया और उन्हें उनके कमरे में ले जाकर बीएड पर लेता दिया . फॉर मैं पानी लेकर आया और अपने हाथों से मौसी को दवा खिलाई . मौसी चुप थी वो कुछ भी नहीं बोल रही थी .

अमित : अब चुप क्यों बैठी हैं बोलिये कुछ

दिव्या : क्या बोलूं ? तू खुद को समझता क्या है ? कैसे बात कर रहा था मुझसे ? क्या सोच रहे होंगे सब लोग. ऐसे मुझे गॉड में उठा कर घूम रहा था .

दिव्या मौसी इतनी देर से शांत थी और अब अपना गुस्सा निकल रही थी . मैं चुपचाप उनकी बात सुनता रहा क्यूंकि मुझे भी पता था वो भी गुस्से में होंगी मेरी वजह से .

अमित : सॉरी मौसी , पर मैं क्या करता आपकी चोट देख कर मुझे गुस्सा आ गया था बस फिर हो गया सब.

दिव्या : चोट मुझे लगी थी , तू क्यों गुस्सा कर रहा था ? और कैसे बात कर रहा था डॉ क सामने हाँ ?

अमित : आप क्यों मन कर रही थी फिर ? जब डॉ कह रहा था क इंजेक्शन ज़रूरी है तो आप कैसे बच्चों की तरह मन करने लगी थी.

दिव्या : क्यों न मन करती ? जनता भी है कितना दर्द होता है जब सुई लगती है.

मौसी ने मुँह बना कर ये बात कही तो मेरी हंसी छूट गयी .

अमित : है है है , मौसी आप एक सुई से डर्टी हो ? है है है

दिव्या : है मत वर्ण दन्त तोड़ दूंगी तेरे. मैं किसी से नहीं डर्टी. वो तो बचपन से hi वो ...

अमित : हस्ते ) आज पता लगा मौसी सुई से डर्टी है . अब देखना जब कभी आप मुझे डाँटोगी तो मैं आपको सुई लगवा दूंगा .

दिव्या : रुक तुझे अभी बताती हूँ.

मौसी बीएड से उठने लगी तो मैं पहले hi उठ के भगा मगर जैसे hi मौसी ने पाऊँ ज़मीन पर रखा तो उनके मुँह से फिर से दर्द भरी आह निकली. बेध्यानी में मौसी ने वो hi चोट वाला पाऊँ नीचे रखा था जिससे उन्हें दर्द हुआ. मैं भागते हुए मौसी की आवाज़ से पलटा और फिर से मौसी क पास आ गया. उनके चेहरे पर दर्द क भाव थे .

अमित : सॉरी सॉरी मौसी , आप को क्या ज़रूरत थी उठने की ?

दिव्या : आअह्ह्ह कक्ककक्कक्स

मैंने मौसी का पाऊँ को पकड़ कर अपने घुटने पर रखा और ढीले हाथ से उन्हें दबाने लगा . मौसी को कुछ आराम मिला तो मैंने उन्हें वापिस लेता दिया और उनके पाऊँ क पास hi बैठ कर उनके घुटने तक हलके हाथ से दबाने लगा .

अमित : अब कैसा लगा रहा है मौसी ?

दिव्या : अब ठीक है , तू बस कर अब.

अमित : नहीं , मुझे करने दीजिये . आप चाहे तो मुझे मर लो पर मुझे मत रोको .

दिव्या : हैट जा न , मुझे ाचा नहीं लग रहा . रहने दे.

अमित : आप बस चुप चाप लेती रहो.

मैं कुछ देर ऐसे मौसी की तंग दबाता रहा . मौसी बस मुझे देखती जा रही थी मगर बोल कुछ नहीं रही थी . मैं भी अपने काम में मगन था . हमारे बीच की ये शांति भांग हुई मोहित की आवाज़ से जो दरवाज़ा खटखटा रहा था . मैं उठने लगा तो मौसी जल्दी से बोली .

दिव्या : अमित मोहित को कुछ मत बताना . वर्ण सबको पता चल जायेगा .

अमित : मगर क्यों ?

दिव्या : छोटी सी तो चोट है , 2-3 दिन में ठीक हो जाएगी. उन सबको पता चला तो बेवजह टेंशन में आ जायेंगे .

मुझे भी उनकी बात सही लगी . मैंने जा कर दरवाज़ा खोला तो सामने मोहित खड़ा था .

मोहित : इतनी देर क्यों लगा दी ? ले पकड़ तेरा फ़ोन कार में hi रह गया था . कितने फ़ोन आ गए घर से.

अमित : फ़ोन पकड़ते हुए ) तूने बात नहीं की ?

मोहित : हाँ मेरी बात हो गयी थी. मैंने बता दिया था क सब ठीक है . एक बार तू भी बात कर ले . मौसी कहाँ हैं ?

अमित : अपने कमरे में हैं . मौसी का फ़ोन ?

मोहित : इसी लिए उनका पूछ रहा हूँ. उनका फ़ोन टूट गया था बुरी तरह से इस लिए नया ले लिया है . पुराने फ़ोन से डाटा निकलवाने में टाइम लग गया .

मोहित क हाथ में नया फ़ोन था . मुझे मोहित पर बड़ा गर्व हुआ क वो भी दिव्या मौसी को अपनी मौसी की तरह रेस्पेक्ट देता है .

अमित : ये तूने ाचा किया , कितना का है ?

मोहित : तुझे क्या लेना है ? वो मेरी भी मौसी है. पैसों की बात करेगा तो मरूंगा .

बात करते करते हम मौसी क पास आ गए. मौसी बीएड पर तक लगाए बैठी थी .

मोहित : लीजिये मौसी जी , अपना फ़ोन .

दिव्या : ये , ये तो मेरा नहीं है .

मोहित : आपका hi है , वो वाला फ़ोन पूरा टूट गया था इस लिए दूसरा ले आया हूँ . अब और कुछ मत कहियेगा. अगर मुझे अपना मानती है तो चुपचाप रख लीजिये . मैं भी तो अमित जैसा हूँ आपके लिए .

दिव्या मौसी ने चुपचाप फ़ोन रख लिया और हम दोनों को देखने लगी .

दिव्या : भगवन करे तुम दोनों हमेशा ऐसे hi साथ रहो. किसी की नज़र न लगे .

मोहित : हमेशा साथ रहेंगे मौसी . चलिए अब उठिये घर से कितने फ़ोन आ गए हैं .

दिव्या : नहीं नहीं बीटा , अभी तो आयी हूँ तुम्हारे घर से . सुबह से वहीँ तो थी . तुम दोनों जाओ . यहाँ पर भी कोई नहीं है तो मैं यहीं रहती हूँ. अमित तुम राधा को छोड़ने आ जाना .

मोहित : ऐसे कैसे चलेगा मौसी . घर को कुछ नहीं होता . आप चलो .

मोहित मन नहीं रहा था तो मैं hi बीच में बोल पड़ा .

अमित : मोहित मौसी थक गयी हैं इस लिए आराम करना चाहती हैं . वैसे भी मौसी का पाऊँ फिसल गया था इस लिए थोड़ी मोच भी आयी है . मौसी को आराम hi करने दो . वहां नहीं कर पाएंगी . ऐसा करो तुम जाओ , मैं मौसी क पास रुकता हूँ .

दिव्या मौसी मेरी तरफ देखने लगी क मैं क्या कह रहा हूँ .

मोहित : पर यार वहां भी तो .....

अमित : नहीं होगा वहां पर . समझा कर. तू जा मैं यहीं रुकता हूँ .

दिव्या : तू क्यों यहाँ रुकेगा? मुझे क्या हुआ है ? मैं ठीक हूँ. तुम दोनों जाओ .

मैंने मौसी को घूर कर देखा तो वो चुप कर गयी .

अमित : तुम जाओ मोहित और बता देना क मैं यहीं हूँ मौसी क पास. ये मत बताना क मौसी को मोच आयी है .

उसके बाद मोहित चला गया . मैंने फ़ोन पर एक बार माँ से बात कर क बता दिया क मौसी क पास हूँ . ताकि वो चिंता न करें. मौसी की भी उनसे बात करवा दी .

अमित : तो अब बताइये , ये सब हुआ कैसे था ?

दिव्या : बताया तो , ऑटो से टकरा गयी थी . रोड क्रॉस करते समय पीछे से आ रहे ऑटो से टकरा गयी .

अमित : मगर आपके कपडे तो बिलकुल ठीक लग रहे हैं.

दिव्या : कपडे hi बदल रही थी जब तुम आये थे . चोट लगी थी तो उसे भी चेक करना था न. दर्द बहुत हो रही थी .

अमित : दर्द हो रही थी तो छिपा क्यों रही थी आप ? और दरवाज़ा क्यों खुला छोड़ रखा था ? अगर कोई और आ जाता ?

दिव्या : वो जल्दी जल्दी में ध्यान hi नहीं रहा . मुझे लगा पहले कपडे बदल लूँ कहीं राधा न आ जाये .

अमित : पता भी है कितना दर गया था मैं . एक तो आपका फ़ोन नहीं लग रहा था ऊपर से दरवाज़ा खुला देख कर मैं घबरा गया था . आपको कितनी आवाज़ दी मगर आप ने एक बार भी जवाब नहीं दिया . मेरी क्या हालत हो रही थी आपको पता भी है ?

दिव्या : जानती हूँ , रोने hi वाले थे तुम अगर मैं और थोड़ी देर न आती . दरवाज़े पर कड़ी सब देख रही थी मैं.

अमित : क्या ? देख रही थी ? मतलब मज़ा ले रही थी आप मेरा ?

दिव्या : मैंने कब कहा मज़ा ले रही थी ? वो तो तुम्हे अपने लिए इतनी परवाह करता देख कर मुझे खुद पता नहीं चला क मैं ....

अमित : चलिए जाने दीजिये , अब आराम करो . मैं यहीं बैठा हूँ आपके पास .

दिव्या : तू भी आराम कर ले . कब तक बैठा रहेगा . थक गया होगा . वैसे एक बात तो बता ? आज से पहले तो तूने कभी मुझसे ऐसे बात नहीं की फिर आज कैसे तू मुझसे ऐसे बात कर रहा था ?

अमित : सॉरी मौसी मुझे खुद नहीं पता . आपकी चोट देख कर और आपको दर्द में देख कर बस खुद पर काबू नहीं रहा . और मैं वो सब ... सॉरी मौसी .

दिव्या : कोई बात नहीं . वैसे मुझे बुरा नहीं लगा . बल्कि ाचा लगा . तुम्हे अपने लिए परवाह करता देख कर बहुत ाचा लगा . आ इधर hi लेट जा मेरे पास और कुछ देर आराम कर ले .

दिव्या मौसी ने मुझे अपने पास लिटा लिया . मुझे पता hi नहीं चला कब मेरी आंख लग गयी और मैं सो गया .

दिव्या एक तक अपने पास लेते अमित को hi निहार रही थी . अमित को चैन से सोया देख दिव्या उसके चेहरे पर नज़रें टिकाये आज जो कुछ भी हुआ सब यद् कर रही थी . कैसे अमित बेचैन हो उठा था उसे घर में न प् कर. और जब दिव्या की नज़र उसके चेहरे पर गयी तो एक पल को उसका दिल मचल उठा था . अमित क चेहरे पर आये दुःख क भाव से नहीं बल्कि उस दुःख उस चिंता की वजह खुद को पाकर . अमित का इस तरह उसके लिए बेचैन होना उसे आज बहुत hi ाचा लगा था और उसके दिल को ठंडक मिली थी . कितने दिनों से खुद को कौस रही दिव्या क मन में आज वो मलहम लग गया था जो फिर से उसे सुख प्रदान करने लगा था . वो तो एक तक अमित को निहारे जा रही थी मगर अमित को ज्यादा देर तो परेशां भी तो नहीं देख सकती थी इस लिए खुद को रोक न पायी. मगर सच ये hi है क उस वक़्त वो उन पलों में कहीं खो सी गयी थी . वजह साफ़ थी उसका दिल आज दिमाग पर फिर से फ़तेह प् चूका था . जो दिमाग उसे माँ बेटे क रिश्ते की दुहाई देता था आज उसे दिल ने हरा दिया था . अमित को अपने लिए तड़पता देख कर उसने इसे प्यार hi समझा . और फिर अमित का उस पर गुस्सा होना . अगर और कोई ऐसा करता तो शायद दिव्या डबल गुस्सा दिखती जैसी की उसकी आदत थी . पर आज तो वो जैसे भीगी बिल्ली बन गयी थी. यही तो वो चाहती थी अंदर से क कोई उस पर अधिकार जताये उस पर हावी हो . उसे दिलो जान से प्यार करे. आज अमित ने वो भी कर क दिखा दिया था . और फिर कैसे फूलों की तरह उसे गॉड में उठाये पहले वो बहार तक लेकर गया और फिर डॉ क पास भी ऐसा hi किया . लोग क्या सोच रहे होंगे देख कर और वो नर्स जो डॉ क पास थी . कैसे देख रही थी . पक्का वो समझ रही होगी क हम दोनों क बीच कुछ ... उसने पूछा भी तो था क ये लड़का आपका देवर है या .... ये सब बातें सोचती दिव्या खुद hi मुस्कुरा दी . न चाहते हुए भी उसके अंदर फिर से जज़्बात अंगड़ाई लेने लगे . उसने हाथ बढ़ा कर अमित के चेहरे पर रखा और उसे छूटे hi एक अजीब सी फीलिंग उसके अंदर से उठने लगी . उसे पता hi नहीं चला कब उसका हाथ अमित क चेहरे से उसकी चौड़ी छाती पर फिसलने लगा . दिव्या की ऑंखें इस सुखद आनंद में अपने आप बंद हो गयी और उसको वो पल यद् आ गया जब अमित ने उसकी सदी उठा कर उसके घुटने पर हाथ रखा था . उसकी उँगलियों का कुछ हिस्सा दिव्या की जांघों पर भी लगा था . अमित की सख्त उंगलियां उसकी नाज़ुक जांघों पर डाब गयी थी . वो यद् आते hi दिव्या की छूट में एक करंट सा लगा और वो गीली हो गयी . दिव्या का जिसम अकड़ने लगा और वो एक साथ से अपनी छूट को साडी क ऊपर से दबाने लगी और दूसरा हाथ अब अमित की छाती को सहलाता हुआ पेट की तरफ आ गया . दिव्या ऑंखें बंद किये अपनी मस्ती में खोयी जा रही थी . उसे ज़रा भी एहसास नहीं हो रहा था क उसका हाथ अमित क जिस्म क किस हिस्से तक आ गया है . जैसे hi उसका हाथ अमित की पेण्ट में बने उसे उभर पर पहुंचा तो दिव्या को झटका लगा और उसकी ऑंखें खुल गयी . उसने अपना हाथ देखा तो वो अमित क लैंड वाले भाग पर था . उसकी नज़र जल्दी से अमित क चेहरे पर पड़ी तो वो चैन से सो रहा था . मगर उस कंडीशन में भी लैंड का उभर बता रहा था क वो मामूली नहीं है . दिव्या की उंगलियां अभी भी उसी जगह पर थी . दिव्या का मन हुआ क वो हाथ हटा ले पर वो ऐसा कर नहीं पायी . पता नहीं वो कौन सी अंजनी ताकत थी जो उसको ऐसा करने नहीं दे रही थी . दिव्या अपने मन को hi समझने में लगी थी क उसकी उँगलियों ने लैंड पर अपना असर दिखा दिया और उस सोये हुए लैंड में जान आने लगी . ये देख कर दिव्या की नज़र तो वहीँ जैम गयी और दिमाग ने काम करना hi बंद कर दिया . दिव्या लैंड को हलके हलके दबाने में hi लगी थी क बहार से कोई दरवाज़ा खटखटाने लगा . एक डैम से दिव्या मज़े की वादियों में उड़ती ज़मीन पर आ गिरी . उसने जल्दी से हाथ हटाया और उसी पल फिर से आवाज़ हुई जिससे अमित की भी नींद टूटने लगी . पहली बात दिव्या को किसी का ऐसे आना बहुत ज़ुरा लग रहा था . अपने मन में hi वो कोसने लगी.

अमित : उम्म्म्म मममम कौन है मौसी ?

दिव्या : पता नहीं , तू सो जा मैं. देखती हूँ .

अमित : रुको , आपको चोट लगी है मैं देखता हूँ .

मैं जल्दी से उठा और जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने राधा क साथ निधि दीदी कड़ी थी . पीछे hi नैना दीदी और रजनी मौसी भी थे .

राधा : माँ कहाँ है ? तुम क्यों खोल रहे हो दरवाज़ा?

अमित : वो मौसी अपने कमरे में हैं . और मैं दरवाज़ा नहीं खोल सकता ?

राधा : मैंने कब कहा क नहीं खोल सकते. पर माँ खुद दरवाज़ा खोलने अति हैं इस लिए पूछा .

मुझे साइड में कर क राधा सीधा मौसी क कमरे में चली गयी . नैना दीदी रजनी मौसी और निधि दीदी सब अंदर गए . रजनी मौसी भी दिव्या मौसी क पास चली गयी .

निधि : वापिस क्यों नहीं आये ? सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे .

अमित : वो दीदी मौसी को मोच आयी थी तो इस लिए मैं यहीं रुक गया . उन्हें अकेला कैसे छोड़ देता ?

निधि: शाबाश , तुम सब का hi ख्याल रखते हो. हमेशा ऐसे hi रहना . अब कैसी हैं मौसी ?

अमित : ठीक हैं पर उन्हें आराम की ज़रूरत है .

निधि दीदी और नैना दीदी दोनों अंदर चली गयी मौसी क पास और मैं भी उनके पीछे पीछे चल दिया. दिव्या मौसी ने शायद मोच वाली कहानी hi कह दी थी अंदर . कुछ तो कहना hi थी . पर रजनी मौसी और राधा इसी बात से hi टेंशन में आ गयी थी .

रजनी : तूने मुझे बताया क्यों नहीं ? और ऐसे कैसे मोच आ गयी तुझे ? एक बार फ़ोन कर क बता नहीं सकती थी मुझे ?

दिव्या : दीदी मैं ठीक हूँ , और फिर अमित था तो यहाँ . इसने मेरा पूरा ध्यान रखा .

दिव्या मौसी क ऐसा कहते hi सब मेरी तरफ देखने लगे . रजनी मौसी उठ कर मेरे करीब आयी और मुझे गले से लगा लिया.

रजनी : तू इतना ाचा क्यों है रे ? सब की चिंता रहती है तुझे . भगवन करे तुझे मेरी भी उम्र लग जाये. आज दामिनी ज़िंदा होती तो कितनी खुश होती .

रजनी मौसी की आँखों में नमी आ गयी थी और ऐसा hi कुछ हल दिव्या मौसी का भी था . माँ का ज़िकर होने पर ऑंखें तो मेरी भी नाम होने लगी थी पर मैंने खुद को संभाला.

अमित : क्या मौसी , मैं आपकी उम्र लेकर क्या करूँगा ? मैं तो हमेशा अपनी स्वीट सी मौसी क साथ रहना चाहता हूँ . पता नहीं लोग मर कर कौन से स्वर्ग में जाने की बात करते हैं . मैं तो जीते जी स्वर्ग में हूँ . मेरी तीनो मौसियां इतनी हसीं हैं क यही फील होता है जैसे मैं स्वर्ग में हूँ. इतनी सुन्दर अप्सराएं तो वहां भी नहीं होंगी.

रजनी : धत्त बदमाश कहीं का . बड़ी हो गयी हूँ मैं और तू मेरे साथ मज़ाक कर रहा है .

अमित : मज़ाक कहाँ मौसी , पूछ लो किसी उसे भी . आप तो निधि दीदी की बड़ी बहिन लगती हो . और दिव्या मौसी तो खुद hi ये सब सुन चुकी हैं क वो राधा की बड़ी बहिन लगती हैं . उम्र का असर तो आप में से किसी पर हुआ hi नहीं .

निधि : बिलकुल सही , मौसी तो लगती hi नहीं क वो राधा की माँ होंगी . और आप भी किसी से काम नहीं हो माँ .

निधि दीदी ने मेरा समर्थन किया तो नैना दीदी भी शुरू हो गयी .

नैना : मौसी अगर हमारे कपडे पेहेन ले तो ये भी कॉलेज स्टूडेंट hi लगेंगी शर्त लगा लो .

दिव्या : ठहर तुझे मैं अभी बताती हूँ.

सब खिलखिला रहे थे और कमरे में ख़ुशी का माहौल बन गया था . तब दिव्या मौसी ने राधा को सबके लिए चाय बनाने को कहा .

दिव्या : राधा , जाओ सबके लिए चाय बना लो.

रजनी : इसे क्यों कह रही है ? मैं बनती हूँ . तू बैठ बीटा .

राधा : खाए होते हुए ) नहीं मौसी आज तो चाय मैं hi बनाउंगी . वर्ण ये फिर कहेगा क मुझे चाय बनानी नहीं आती .

राधा ने मुझे देखते हुए कहा . उसके चेहरे पर एक ख़ुशी थी .

निधि : तू बैठ मैं बना देती हूँ .

राधा : नहीं दीदी आप सब बैठो चाय तो मैं hi बनाउंगी . ( मुझे देख कर ) एक मिनट मेरे साथ आओगे ?

मैं राधा क साथ कमरे से निकला और हम किचन में आ गए . राधा मेरे आगे थी . किचन में आते hi वो एक डैम से पलटी और मेरे गले से लग गयी .

राधा : थैंक यू , थैंक यू वैरी मच .

अमित : ये क्या , किस लिए ?

राधा : गले लगे हुए ) तुमने माँ का ध्यान रखा. तुम हमारी कितनी पर करते हो .

अमित : वो क्या सिर्फ तुम्हारी माँ हैं , मेरी कुछ नहीं ? इसमें थैंक यू कहने की क्या ज़रूरत है ? चलो अब चाय बनाओ या ऐसे hi कड़ी रहोगी ?

मेरी बात सुनते hi राधा को एहसास हुआ क हम किस हालत ने हैं. वो जल्दी से अलग हुई और शर्माने लगी . मैं उसे एक तक देख रहा था तो वो मुझे ऐसे खुद को देखता देख कर और भी ज्यादा शर्माने लगी .

राधा : शरमाते हुए ) ऐसे क्या देख रहे हो? जाओ मुझे चाय बनानी है .

राधा को ऐसे शर्माता देख कर मुझे ाचा भी लग रहा था पर मेरी वजह से वो इतना शर्मा रही थी क मैंने वहां से हटना hi ठीक समझा और वापिस सबके पास आ गया . कुछ देर में राधा चाय बना कर ले आयी और सब उसकी चाय की तारीफ करने लगे . अगर मैं जान बुझ कर चुप था. राधा मेरी तरफ hi देख रही थी बार बार . मुझे पता था वो मुझे सुन्ना चाहती हैं और मैं भी उसके मज़े ले रहा था .

नैना : यार राधा , चाय तो सच में ज़बरदस्त बनाई है तुमने . ऐसी तो मुझ से भी नहीं बनती .

निधि : सच में , राधा क हाथों में तो कमल है .

राधा : हम्म्म थैंक्स दीदी

नैना : क्या हुआ ? तू खुश नहीं हुई सुन कर ?

राधा : नहीं तो ऐसा मैंने कब कहा . पर लगता है सबको पसंद नहीं आयी .

रजनी : किसे पसंद नहीं आयी ? इतनी अछि चाय तो मुझसे भी नहीं बनती .

नैना : ोये तू चुप क्यों है ? तू भी तो कुछ बोल .

अमित : अब मैं क्या बोलूं . मैं कुछ कहूंगा तो राधा को ाचा नहीं लगेगा .

राधा मेरी आँखों में देखने लगी .

अमित : मुँह बनाते हुए ) चाय तो एक डैम ....... बी.......

मैं जान बुझ के गन्दा सा मुँह बना रहा था . राधा को लगा क मैं चाय की बुराई करने वाला हूँ तो उसके चेहरे पर भाव बदलने लगे .

अमित : बी.... बी...... बेस्ट बानी है . मज़ा आ गया

राधा की नज़रें झुक गयी थी मगर जैसे hi उसने मेरे मुँह से बेस्ट सुना तो एक डैम से उसने मेरी तरफ देखा और उसके चेहरे पर अचानक से ख़ुशी आ गयी . यही तो मैं देखना चाहता था . राधा क चेहरे पर आयी वो ख़ुशी सच में अनमोल थी. मैं इस पल को आँखों में कैद करने लगा . राधा मेरी आँखों में hi देखे जा रही थी और एक पल को मेरी भी नज़रें जैसे राधा की नज़रों में कैद हो गयी .

नैना : देख देख कैसे खुश हो रही है . इसका मतलब ये तेरी वजह से hi परेशां हो रही थी . लगता है तू इसे बहुत तंग करता है . कोई न बच्चू मैं देखती हूँ. मेरी छोटी बहिन को तंग करता है तू .

निधि : उसने तो तारीफ की है . देख राधा भी कितनी खुश है. है न राधा ?

राधा ने दीदी की तरफ देखते हुए हाँ में गर्दन हिलाई.

नैना : ये क्या , तुमने पार्टी बदल ली. ये ाचा नहीं है .

रजनी : बहुत हुआ , चलो अब घर जाओ तुम लोग .

नैना : हम लोग ? आप नहीं जाएँगी क्या ?

रजनी : नहीं , मैं दिव्या क पास रूकती हूँ. इसे कोई ज़रूरत पड़ी तो राधा बेचारी कैसे संभालेगी ? उसे अपनी पड़े भी करनी है .

अमित : अरे मौसी आप ऐसे hi चिंता कर रही हैं . मैं रुक जाता हूँ यहाँ . दिन को भी तो मैं hi तह न यहाँ . क्यों मौसी ? मैं ठीक कह रहा हूँ न ?

दिव्या : हाँ दीदी . आप चिंता मत करो .

रजनी : बिलकुल नहीं , आज का दिन तो तुझे हमारे घर hi रहना होगा समझा . इतने दिनों बाद तो अत है तू. मैं रुक जाती हूँ यहाँ .

निधि दीदी और नैना दीदी चुप थी. जबकि राधा क चेहरे पर मेरी बात सुन कर एक पल को ख़ुशी दोगुनी हो गयी थी . मगर रजनी मौसी की बात से फिर से काम हो गयी. फिर भी वो आशा से देख रही थी .

अमित : मौसी मैं ...

रजनी : मैंने कहा न , तुम आज हमारे घर hi रहोगे . अब जाओ देर हो रही है .

अब मौसी की बात पर न मैं कुछ बोल सकता था न दिव्या मौसी कुछ बोली . बाकि सब तो वैसे hi चुप थे . मैं जाने क लिए उठा और दिव्या मौसी से विदा लेने लगा तो दिव्या मौसी ने मुझे झुका कर अपने गले से लगा लिया .

दिव्या : धीरे से ) थैंक यू .

अमित : अपना ख्याल रखियेगा और दवा .

दिव्या : सब पता है तुम अपना ध्यान रखना. अब जा कर पड़े करो .



उसके बाद मैं रजनी मौसी से मिला . उन्होंने भी मुझे गले से लगा लिया . फिर हम बहार आ गए . राधा बहार तक हमें छोड़ने आयी. उसका ध्यान मुझ पर hi था . निधि दीदी ने कार स्टार्ट की तो मैं उनके साथ आगे बैठ गया . फिर नैना दीदी भी बैठी और हूँ निकल पड़े. घर आ कर निधि दीदी और नैना दीदी खाना बनाने में लग गयी. मौसा जी को शायद पहले hi पता चल चूका था इस लिए उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किया . कारन भैया तो वैसे hi अलग hi रहते थे सब से. हम सब ने मिल कर खाना खाया . उसके बाद अपने अपने कमरों में चले गए . आज तो नैना दीदी कमल कर रही थी . हमेशा काम से जी चुराने वाली नैना दीदी आज निधि दीदी को कमरे में भेज कर खुद बर्तन साफ कर रही थी और फिर खुद सबके लिए दूध गरम कर क ले आयी. निधि दीदी आज भी मेरे साथ hi सो गयी . बीएड पर लेट ते hi कब आंख लग गयी पता hi नहीं चला . पर रत में किसी पहर मुझे ऐसे लगा क कोई मुझे हिला रहा है . मेरी नींद एक डैम से टूट गयी .
 
भाई लोगो थोड़ा और इंतज़ार कर लो . आज अपडेट दे दूंगा .
 
अपडेट 215



मेरी आंख खुली पर मुझे कुछ नज़र नहीं आ रहा था क्यूंकि कमरे में इस वक़्त अँधेरा था . मगर इतना पता था क कोई मुझे हिला रहा है और धीमी आवाज़ में मेरा नाम ले रहा है . मैंने उठने की कोशिश की तो निधि दीदी को अपने ऊपर पाया.

‘ सो गए क्या ? उठो , मैं कब से तुम्हे जगा रही हूँ . उठो भी . ‘ मैंने आवाज़ पर ध्यान दिया तो पता चला ये नैना दीदी हैं . पर इस वक़्त वो यहाँ कैसे. मुझे दर लगने लगा का हैं दीदी उठ गयी तो वो क्या सोचेंगी . मैंने नैना दीदी का हाथ पकड़ लिया ताकि उन्हें पता चल जाये मैं उठ गया हूँ. फिर मैंने धीरे से दीदी को को एक तरफ बीएड पर पलट दोउ और खुद उठ गया .

अमित : धीमी आवाज़ में ) क्या कर रही हो दीदी, मरवाओगी क्या ?

नैना : मरवाने hi तो आयी हूँ . चल जल्दी से मर ले. आज साडी रत मारवणी है मैंने .

अमित : दीदी आपका दिमाग तो ठीक है ? कैसी बातें कर रही हैं आप ? अभी दीदी उठ गयी तो क्या कहेंगी ?

नैना : क्या कहेंगी ? मुझे परवाह नहीं है. आज मैं कुछ नहीं सुनने वाली . मैं यहीं दीदी क सामने तुम्हारे साथ प्यार करुँगी .

अमित : लगता है आपका दिमाग हिल गया है . जाइये अपने कमरे में जा कर सो जाइये .

नैना : मैंने कहा न आज मैं साडी रत मरवाने वाली हूँ और तू मरेगा. कितने दिनों से खुद को रोक रखा है पर आज नहीं . आज मैं खुल कर मज़ा करना चाहती हूँ. और तू मेरे साथ मज़ा करेगा. चल जल्दी से कपडे उतर.

इतना कह कर दीदी मेरे साथ चिपक गयी और मेरी T-shirt खिंच कर निकलने लगी . मैंने उन्हें दूर हटाया. मुझे दर लग रहा था क कहीं दीदी न उठ जाएँ और ऊपर से नैना दीदी ऐसी हरकतें कर रही थी .

अमित : आपने नशा किया है क्या जो ऐसी बातें कर रही हैं ? जाइये यहाँ से .

नैना : नशा hi तो किया है , तेरे प्यार का . जितना भी कोशिश कर लूँ ये नशा उतरता hi नहीं. अब बातें मत कर और जल्दी से मुझे प्यार कर. एक लड़की तेरे सामने खुद कपडे उतर कर सब करने को तैयार है और तू उसे यहाँ से भेज रहा है .

अमित : दीदी आप होश में नहीं हो. आप जाओ अभी यहाँ से इससे पहले क दीदी उठ जाएँ .

नैना : दीदी का दर है तुम्हे तो ये देखो .

नैना दीदी ये कह कर दरवाज़े की तरफ गयी. मुझे लगा शायद वो जा रही हैं पर उन्होंने तो लाइट ों कर दी . कमरे में एक डैम से रौशनी हो गयी. मेरी नज़र नैना दीदी पर पड़ी तो वो एक शार्ट निक्कर में थी और ऊपर से टाइट T-shirt . जिसमे से उनके निप्पल साफ़ दिखाई दे रहे थे मतलब उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी . नैना दीदी को गोरी चिंकी नंगी टांगों और उनके T-shirt में से नज़र आगे निप्पल देख कर मेरी धड़कन भी तेज़ होने लगी . दीदी मादकता से कमर हिलती हुई मेरे करीब आयी और मेरे होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया . मैं तो बस उनके हुस्न में खोया वही कर रहा था जो वो कर रही थी . फिर मुझे दीदी का ख्याल आया तो मैंने उन्हें खुद से अलग किया .

अमित : आप समझ क्यों नहीं रही ?

नैना : समझ तो तुम नहीं रहे . एक मिनट

इतना कह कर दीदी निधि दीदी क पास गयी और उन्हें ज़ोर से हिलाया और उनका नाम भी लिया . पर निधि दीदी नहीं उठी . ऐसा उन्होंने 2-3 बार किया पर दीदी नहीं हिली . मैं ये देख कर हैरान हो रहा था. मुझे लगा कहीं दीदी को कुछ हुआ तो नहीं .

अमित : दीदी ,,,, दीदी ,,,,, क्या हुआ दीदी को ?

मैं निधि दीदी को देख कर चिंता में था क नैना दीदी ने मेरे हाथ पकड़ लिए.

नैना : रिलैक्स , कुछ नहीं हुआ उन्हें. बस गहरी नींद में हैं और सुबह तो वो नहीं उठने वाली . न दीदी उठेंगी न पापा और न कारन . कुछ समझे ?

अमित : तो क्या अपने ??

नैना : जी हाँ , मैंने नींद की दवा मिला दी थी दूध में . सिर्फ तुम्हारा छोड़ कर.

अमित : पर अपने ये सब क्यों किया ?

नैना : तो और क्या करती ? इतने दिनों में एक बार भी तुम मेरे पस नहीं आये. हर रोज़ दीदी यहाँ कब्ज़ा कर लेती हैं. आज तुम्हारी यहाँ आखिरी रत है कल तो तुम चले जाओगे न. तो मैं कैसे मिस करती इस मोमेंट को ? इस लिए मिला दी नींद की दवा. अब कोई भी सुबह से पहले नहीं उठने वाला. अब सिर्फ हम दोनों हैं यहाँ और तीसरा कोई नहीं. आज मुझे इतना प्यार करो मैं एक महीने तक तुम्हारी जुदाई बर्दाश्त कर सकूँ .

नैना दीदी की साडी बात सुन कर मैं निश्चिन्त हो गया और दीदी को प्यार करने क लिए तैयार हो गया . वैसे भी मैंने उनसे वडा किया था . ाचा हुआ उन्होंने खुद hi ये सब कर लिया वर्ण ये भी पॉसिबल न होता .

अमित : तो आप प्यार करना चाहती हैं. पूरी रत कहना चाहती हैं . अभी बताता हूँ .

इतना कह कर मैंने नैना दीदी की कमर में हाथ दाल कर उन्हें खिंच कर अपने साथ. हूला लिया और एक हाथ उनके सर क पीछे रख कर उनके होंठों को अपने होंठों में दबोच लिया . मैं दीदी को ज़ोर शोर से किश करने लगा और एक हाथ से उनके नरम नितम्बों को मसलने लगा . दीदी तो पहले hi हीट में थी . वो भी मेरे साथ ज़ोर से चिपकने लगी . और अपनी तंग मेरी टांगों से लपेटने लगी. साथ hi मेरे बालों में हाथ चलने लगी.

नैना : उम्म्म्म उम् उम्म्म्माःह्ह्ह्ह किश में लव में . लव में हर्डर उम्म्म्म उम्म्म

दीदी की ऑंखें उलटी हो रही थी जैसे वो होश में न हो और पागलों की तरह वो मुझे चूमती हुई मेरे बल नोचने लगी . मैंने दीदी क टॉप क अंदर अपने हाथ घुसा दिए और उनके स्तनों को पकड़ लिया जो अंदर से बिलकुल नंगे थे और इस वक़्त कामवासना में सख्त हो चुके थे . दीदी क मुँह से एक तेज़ सिसकी निकली और वो मेरा दिर अपनी छाती की तरफ झुकने लगी . मैंने उनकी गर्दन चूमते हुए अपना सर नीचे किया तो दीदी ने एक झटके में अपना टॉप उतर कर अपने चुके मेरे सामने नंगे कर दिए .

नैना : खा जाओ इन्हे कक्कक्क्स उम्म्म्म सूचक थम उम्म्म्म ककक

मैंने दीदी क एक स्तन को हाथ में कास क पकड़ा और दूसरे पर अपना मुँह लगा दिया . दीदी मेरा सर अपनी छाती पास ज़ोर से दबाने लगी . Bari-bari से मैंने दोनों स्तनों को अछि तरह चूसा और उनके निप्पल को भी कुरेदा जो अब पूरी तरह अकड़ चुके थे . दीदी ने मेरी T-shirt खिंच कर जल्दी से उतर दी और नीचे बैठ कर मेरा लोअर उतरने लगी. मेरी नज़र पास में लेती निधि दीदी पर पड़ी तो मैंने नैना दीदी को रोका .

अमित : दीदी आपके कमरे में चलते हैं यहाँ दीदी हैं , अगर वो जग गयी तो ?

नैना : लैंड को हाथ में थमते हुए ) वो सुबह तक नहीं उठने वाली तू चिंता मत कर.

इससे पहले मैं कुछ और कहता दीदी ने मेरे लैंड का सूपड़ा अपने होंठों में कैद कर लिया और मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी. मेरी ऑंखें बंद हो गयी और मैं मज़े की वादियों में उड़ने लगा . दीदी अपने नाज़ुक कोमल होंठों में सुपडे को कैद कर क अपनी जीब सुपडे पर लगा रही थी . मुझे एक पल में hi सब भूल गया क यहाँ और भी कोई है . मेरे हाथ नैना दीदी क सर पर चले गए और मैं उनका सर थामे उनके मुँह में लैंड ठेलने की कोशिश करने लगा

नैना : उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म कक्कक्क्स आआह्ह्ह बहुत तड़पते हो तुम . मैं कैसे खुद को कण्ट्रोल करती हूँ तुम्हे अंदाज़ा भी नहीं है. उम्म्म्म उम्मम्मम

अमित : आअह्ह्ह्हह ककक दीदी ऐसे hi करो कक्कक्स मज़ाआआअह्ह्ह कक्कक्स

नैना दीदी धीरे धीरे आधा लैंड मुँह में लेने लगी और तेज़ तेज़ मुँह आगे पीछे करने लगी . मेरे लैंड की नसें उभर आयी थी और फटने जैसी हालत में सख्त हो चूका था . दीदी ने 5 मिनट्स लैंड को मज़े से चूसा और फिर कड़ी हो कर अपने शार्ट एक झटके से उतर दी. अब वो मेरे सामने पूरी नंगी कड़ी थी. उनका गोरा बदन रौशनी में चमक रहा था .

नैना : अब जल्दी कर मुझसे और कण्ट्रोल नहीं होता जल्दी घुसा दे इसे अंदर ककक

दीदी जल्दी से बीएड पर निधि दीदी की बगल में लेट गयी और टंगे ऊपर उठा ली. मैंने भी अपने कपडे जल्दी से अलग किये . नैना दीदी निधि दीदी क बगल में थी. मेरी नज़र निधि दीदी पर पड़ी तो मैं रुक गया .

अमित : कहीं और चलते हैं न , दीदी क सामने मुझे ाचा नहीं लग रहा .

नैना : मदहोशी में ) जल्दी करो मुझसे और इंतज़ार नहीं हो रहा . दीदी कौन सा कुछ देख लेंगी या सुन लेंगी . तू जल्दी से इसे अंदर घुसा अब .

नैना दीदी कुछ ज्यादा hi उतावली हो रही थी. मैं भी क्या करता . पर मेरा दिल निधि दीदी क बगल में ये सब करने को नहीं मन रहा था इस लिए मैंने दीदी की जांघों को थे अकड़ कर उन्हें बीएड क किनारे खिंच लिया और घुटने झुका कर अपना लैंड दीदी की छूट पर सेट किया . दीदी की छूट एक डैम साफा चक थी गोरी गुलाबी और होंठ पर लगा पानी बता रहा था क वो कितनी गर्म हो चुकी हैं. छूट की फांके थोड़ी सी hi खुली हुई थी क्यूंकि अभी तक वो ज्यादा चूड़ी hi नहीं थी . मैंने लैंड का सूपड़ा छूट में सेट कर क हल्का सा धक्का मारा और लैंड सुपडे से थोड़ा जयादा अंदर चला गया

नैना : कक्कक्क्स उम्मम्मम आअह्हह्ह्ह्ह धीरे धीरे ,,, आह्ह्ह्ह ये कितना बड़ा है ककक

नैना दीदी की छूट में पहले भी कई बार मेरा लैंड जा चूका था पर आज भी वो टाइट hi थी ज्यादा चुदाई न होने की वजह से. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे छूट ने अंदर से लैंड को पकड़ लिया हो. मैंने दीदी क दोनों पाऊँ अपने कंधे पर टिका कर उनके ऊपर झुक कर उनके दोनों स्तन पकड़ लिए और एक और धक्का मारा. इस बार आधे से ज्यादा लैंड अंदर घुस गया .

नैना : आअह्ह्ह्ह मायआ कक्कक्स मर गयी आअह्ह्ह आराम से करो कक्कक्क्स

अमित : आवाज़ मत कर वर्ण दीदी जाग जाएँगी .

नैना : आअह्ह्ह्ह जग जाने दे , उईईईईई वो भी तो देखें कक्कक्स कितना बड़ा मुसल मेरे अंदर जा रहा है आआअह्ह्ह और मुसल का मालिक ककक उनका सबसे प्यारा भाई है आअह्ह्ह्ह आआआअह्हह्हैईईईई

नैना दीदी की बातें सुन कर पता नहीं क्यों मुझे एक झटका सा लगा और मैंने बाकि बचा हुआ लैंड एक झटके में छूट की गहराईयों में उतर दिया और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा .

नैना : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स आअह्ह्ह एआईईईई उम्मम्मम मायआ रुक जा आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह धीरे कक्कक्स क्या हो गया है तुझे कक्कक्क्स उईईईईई मेरी छूट आअह्ह्ह देखो दीदी तुम्हारा लाडला कैसे मुझे छोड़ रहा है कक्कक्स मेरी छूट को अपने मऊ आअह्ह्ह्ह एआईईईई मुसल से छोड़ रहा है कक्कक्कक्स

नैना दीदी की बातें मुझे पागल कर रही थी और मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी . मैंने दीदी की छूट में पूरे जोर से लैंड को अंदर तक थोक रहा था .

नैना : आह्हः दीदी बचा लो ककक माँ तुम्हारा लड़का मुझे मर डालेगा आअह्ह्ह सीसीसी मेरी छूट फाड़ डालेगा दीदी ाःह दीदी आइइइइइ आअह्ह्ह्हह

नैना दीदी जिस तरह निधि दीदी को नाम लेकर बातें कर रही थी उससे मेरा जूनून बढ़ता जा रहा था . यहाँ तक की मैंने दीदी की जांघों को थम कर उन्हें अपने साथ चिपका लिया और सीधा खड़ा हो गया जिससे दीदी की कमर बीएड से ऊपर उठ गयी और उनकी पीठ क हप्र वाला हिस्सा hi बीएड पर था . मेरे धक्के और भी तूफानी हो गए .

नैना : ाःह आह्हः ाःह मैं गयी सीसीसी मैं गयी दीदी आआह्ह्ह. मेरा होने वाला है दीदी तुम्हारे लड़के ने मेरा पानी निकल दिया छोड़ दिया मुझे आआह्ह्ह मायआ आआह्ह्ह

इसके साथ hi दीदी की छूट से जहर जहर पानी बहने लगा . इतना पानी निकला जैसे उन्होंने पेशाब कर दिया हो. उनकी छूट से निकल कर पानी मेरे पेट तक लगा और जांघों से नीचे बहने लगा . दीदी का जिस्म झटके कहते हुए शांत होने लगा पर मेरा हल बुरा था . मुझे नैना दीदी की बातों ने इतना एक्साइट कर दिया था क अब मैं भी जल्दी से पानी निकलना चाहता था . मैंने दीदी की परवाह किये बिना ज़ोर दर धक्के मरने लगा . छूट में बज रहे धक्कों से फच फच फच की आवाज़ें आ रही थी .

नैना : रुक जा थोड़ी देर मुझे सांस आअह्ह्ह आअह्ह्ह ले ले .... लेने दे

मैं बदस्तूर लगा हुआ था और नैना दीदी मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी. दीदी ने जब देखा क मैं उनकी तरफ धुन नहीं दे रहा हूँ तो उन्होंने झटके से अपनी टंगे मेरे कंधे से उतारते हुए वो एक डैम दूसरी तरफ पलट गयी. मैंने उन्हें पकड़ कर फिर से खींचने लगा तो वो आगे को खिसक गयी . वो अपने दोनों हाथों और घुटनो पर आगे को भागी तो मैं जल्दी से उन्हें पकड़ने क लिए बीएड पर चढ़ गया . मैंने दीदी को कमर से पकड़ा और घुटने बेंड कर क अपना लैंड उनकी छूट पर सेट किया और बिना देर किये एक hi धक्के में पूरा लैंड छूट में उतर दिया . नैना दीदी ज़ोर से चीख पड़ी .

नैना : ाआईईई मायआ मर गयीईइ आआह्ह्ह्हह

मैंने दीदी की गर्दन क पास दोनों हाथ रखे और ज़ोर ज़ोर से लैंड से उनकी छूट को उधेड़ने लगा. दीदी आगे से ऊपर को उठ गयी उनके चूचे हवा में पानी वाले गुबारों की तरह हिल रहे थे.

नैना : आआह्ह्ह मर गयी दीदी बचावूओ तुम्हारा लड़का मेरी छूट फाड़ देगा आअह्ह्ह बचाओ दीदी एआईईईई

नैना दीदी फिर से निधि दीदी को पीकर रही थी और मेरा ओह और भी बढ़ गया. मैं खुद को और रोक नहीं प्या और दीदी की छूट में लैंड को जड़ तक घुसा कर अपना ो ी छूट में hi छोड़ दिया. दीदी भी झटके खाने लगी और मुझे अपने लैंड पर गरम पानी का शावर चलता महसूस हुआ . मैं दीदी क ऊपर hi गिर पड़ा और उनकी पीठ को चूमने लगा . हम दोनों hi ऐसे गिरे जैसे जान hi न हो. हम दोनों की साँसे बहुत तेज़ चल रही थी. पता नहीं कब तक ऐन ऐसे hi पड़ा रहा. मेरी ऑंखें बंद थी और अपनी हालत का मुझे अंदाज़ा नहीं था . फिर मुझे नैना दीदी की आवाज़ आयी .

नैना : तौबा , क्या हो गया था तुम्हे ? जान hi निकल दी मेरी .

दीदी की आवाज़ पीछे से आ रही थी . जबकि वो तो मेरे नीचे थी . इससे पहले की मैं उनकी बात का जवाब देता मैंने महसूस किया क मैं किसी क ऊपर हूँ. मैंने देखा तो नीचे निधि दीदी थी और मैं उनके ऊपर नंगा लेता हुआ था . दीदी को सामने देखते hi मैं झटके से उठा और नीचे उतर गया .

नैना : क्या हुआ तुझे ?

अमित : मैं दी ... दी .... दीदी क ऊपर कैसे ?

नैना : ओह्ह्ह्ह तुझे तो कुछ होश hi नहीं था क तू क्या कर रहा है . दीदी क ऊपर hi तो मुझे पकड़ा हुआ था तूने भूल गए ?

अमित : मगर मैं तो आपके ऊपर था

नैना : अब मुझमे कहाँ इतनी जान थी क तुम्हारा भर उठती इस लिए साइड जो हो गयी और तू वहीँ रह गया .

मैंने फिर निधि दीदी की तरफ देखा वो अभी भी सो रही थी . मैं भगवन क शुक्र ऐडा किया .

नैना : वैसे तुझे हुआ क्या था ? पहले तो कभी ऐसे नहीं किया तुमने ? देखो क्या हालत कर दी है .

नैना दीदी ने अपनी छूट की तरफ इशारा करते हुए कहा . मैंने देखा तो वो लाल हुई पड़ी थी और पहले से ज्यादा खुली हुई थी. अंदर से अभी भी पानी रिस रहा था .

अमित : पता नहीं मुझे क्या हो गया था . आप क्या क्या बोले जा रही थी बस उसी से मैं आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गया .

नैना : तो अब पता चला , क तुम्हे गन्दी बातें सुन्ना ाचा लगता है .

अमित : मैंने ऐसा कब कहा .

नैना : तुमने नहीं कहा पर तुम्हारे इसने जो जोश दिखाया है उससे पता चल रहा है . अब तो मैं ऐसे hi करुँगी . दर्द तो हुआ पर मज़ा भी बहुत आया .

अमित : चलिए अब आराम से सो जाइये .

नैना : क्यों ? मैंने कहा न आज साडी रत मैं न सोऊंगी न तुम्हे सोने दूंगी .

अमित : पर अभी तो आप कह रही थी दर्द हो रही है .

नैना : ऐसा दर्द तो मज़ा hi देता है. चल अब इधर आ

अमित : नहीं , कहीं और चलते हैं .

नैना : दीदी क सामने शर्म आ रही है ? दीदी का नाम सुन कर तो बड़ा जोश आ रहा था . चक्कर क्या है ? कहीं दीदी क साथ भी तो ....

अमित : गुस्से में ) दीदी , आप ऐसा सोच भी कैसे सकती हैं.

नैना: तो क्या हुआ , मेरे साथ कर सकते हो तो दीदी क साथ क्यों नहीं? मेरी hi तो सगी बहिन है. और तुम्हारे साथ हम दोनों का एक जैसा रिश्ता है .

अमित : गुस्से में ) मुझे कुछ नहीं सुन्ना . आप जाओ अपने कमरे में .

नैना : सॉरी सॉरी नहीं कहती कुछ भी .

दीदी जल्दी से उठ कर मेरे पास आयी और माफ़ी मांगने लगी . मैं उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था पर वो बार बार माफ़ी मांगने लगी और फिर उनकी आँखों में आंसू आ गए . जिसे देख कर मैं पिघल गया .

अमित : आंसू पोंछते हुए ) ये क्या ? आप रोने लगी. क्यों करती हैं फिर ऐसी बातें ?

नैना : सिसकते हुए ) रोऊँ नहीं तो क्या करूँ ? मैंने तो ऐसे hi कहा था और तुम इतना गुस्सा कर रहे हो .

अमित : सॉरी सॉरी , अब चुप हो जाइये . ाचा जैसा आप कहेंगी मैं वैसा करूँगा अब चुप हो जाइये.

नैना : खुश होते हुए ) सच ? उम्म्म्म मम्माह्ह्ह

नैना दीदी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी. मैं भी दीदी का साथ देने लगा .

अमित : दीदी प्लीज यहाँ नहीं .

नैना : ठीक है मेरे कमरे में चलते हैं.

अमित : तो चलिए .

नैना : ुँहुँणन , मुझे अपनी बाँहों में उठा कर लेकर चलो .

अमित : ाचा ये बात है लो......

मैंने दीदी को बाँहों में उठाया और हम दोनों नंगे hi मेरे कमरे से निकल कर नैना दीदी क कमरे में चले गए जो पास में hi था . कमरे में जाते hi एक बार फिर से हम चुदाई क सागर में गोर लगाने लगे और सुबह तक मैंने दीदी को अलग पोज़ में 3 बार छोड़ा. इस बीच दीदी हर बार मेरा पानी निकलने तक 2-3 बार अपना पानी छोड़ देती थी. और जब लास्ट में मैंने उनके अंदर अपना पानी गिराया तो दीदी की ऐसी हालत हो गयी थी क जैसे बेहोश हो गयी हो. मैं किसी तरह हिम्मत जूता के उनके ऊपर चादर दाल कर अपने कमरे में आया और लोअर पहन कर ऐसे hi बीएड पर लेट गया . सुबह क 4 बजने वाले थे और मैं अब बिस्तर पर सोने क लिए लेता. पता hi नहीं चला कब आंख लगी और कब तक मैं सोता रहा .

निधि रात को नींद की दवा क असर से गहरी नींद में चली गयी थी. और बाकि सब का भी यही हल था. मगर सुबह जब उसकी नींद मोबाइल क अलार्म की आवाज़ से खुली तो उसकी नज़र पास में hi लेते हुए अमित पर पड़ी जो ऊपर से नंगा था . आज पहली बार अमित निधि क साथ ऐसे ऊपर से नंगा पड़ा हुआ था . निधि की नज़र अमित की चौड़ी मजबूत छाती पर hi जैम गयी . वो उसके पहलवानी जिस्म को गौर से देखने लगी और उसका हाथ खुद hi अमित की छाती पर पहुँच गया . जैसे वो उस चौड़े मजबूत मरदाना जिस्म को छू कर देखना चाहती हो . निधि का हाथ जैसे hi अमित की छाती पर पड़ा तो उसके अंदर एक दर्द लहर सी दौड़ गयी और उसका बदन कपकपा गया . निधि क अंदर छिपी लड़की एक डैम से मचल उठी . जिसे अपने सामने केवल अपना राजकुमार नज़र आ रहा था . निधि अपना हाथ अमित की छाती कन्धों से लेकर पेट तक चलने लगी और मंत्रमुग्ध सी उसके ऊपर hi लेट गयी और अपनी छाती को अमित की छाती से मिलकर अपने होंठ अमित क होंठो पर रख दिए . होंठ मिलते hi एक अलग hi दुनिया में पहुँच गयी निधि . वो खुद को अमित क ऊपर पूरी तरह बिछाने लगी जैसे अपने बदन को अमित क बदन पर ओढ़ा रही हो. निधि अमित को अपना पति hi मानती थी और अब वो एक बीवी की तरह hi अपने पति क जिस्म को महसूस कर रही थी जिससे उसके अंदर की काम अग्नि भड़क रही थी. वहीँ अमित आराम से सोया हुआ था क्यूंकि नैना क साथ साडी रत जागने और चुदाई क बाद जिस्म में जान बची hi कहाँ थी. निधि अभी अपनी सपनो की दुनिया में खोयी रोमांस में कर रही थी क किसी ने दरवाज़ा खटखटा दिया . निधि एक डैम नींद से जगी .

‘ निधि दरवाज़ा खोलो कब तक सोती रहोगी बीटा ? देखो टाइम कितना हो गया है .’

ये आवाज़ निधि क पापा की थी . निधि हड़बड़ा कर जल्दी से उठी और अपनी हालत देख कर खुद hi शर्मा गयी.

निधि : आ अभी आयी पापा .

बस इतना hi कह सकीय निधि , और एक बार फिर खुद को हालत पर शर्माने लगी. उसके स्तन कुछ ज्यादा hi सख्त हो गए थे और सर क बल भी बिखरे हुए थे वहीँ जांघों क बीच जकड़न और गीला पैन बढ़ गया था . निधि ने फिर अमित की और देखा तो वो वैसे hi सो रहा था . निधि को फिर से वो सब यद् आ गया जो अभी कुछ देर पहले वो कर रही थी .

निधि : शरमाते हुए ) पागल बना दिया है तुमने मुझे , कब तक ऐसे hi मुझे तड़पना होगा ? कभी तो मेरी आँखों में देख कर मेरे दिल का हल समझ लो.

निधि ने जल्दी से अमित क ऊपर कम्बल दाल दिया और झुक कर उसे चूम लिया.

निधि : ी लव यू माय स्वीट हार्ट माय बिलवेड हस्बैंड उम्म्माः

निधि जल्दी से अमित को किश कर क पीछे हटी और कमरे से बहार निकलने क लिए पलटी तो उसकी नज़र बीएड क पास नीचे गिरी पड़ी T-shirt और शार्ट पर पड़ी. निधि क कदम वहीँ थम गए और उसने झुक उन कपड़ों को उठा लिया .

निधि ( मन में ) ये तो नैना क हैं , यहाँ कैसे ?

‘ नमस्ते मैडम जी , कैसी हैं आप ? आप तो हमें यद् करेंगी नहीं सोचा खुद hi हाज़री लगवाने पहुँच जॉन आपके पास ‘

मला सुशिल कुमार आज संडे को अपने सब कार्यक्रम छोड़ कर ऋतू सिंह से मिलने उसके सरकारी आवास पर पहुँच गया. जहाँ वो सादे कपड़ों में बैठी और कहीं जाने की तयारी कर रही थी. सुशिल कुमार देख कर वो थोड़ा हैरान भी हुई क वो उसके घर पर क्यों आया है मिलने .

ऋतू : अरे मला साब आइये बैठिये. आप यहाँ और वो भी संडे को?

सुशिल : बहुत दिनों से मिलने की ीचा थी आपसे पर दिल्ली में था इस लिए मिलने नहीं आ सका. मुझे पता चला आप पर हुए हमले क बारे में. हम दोनों hi जानते हैं ये किसका काम है और मैं उसी बारे में बात करने आया हूँ.

ऋतू : जी कहिये आप क्या कहना चाहते हैं?

सुशिल: क्या यहाँ बात करना ठीक होगा?

ऋतू : डरिये मत यहाँ मेरी मर्ज़ी क बगैर कोई नहीं अत .

सुशिल : बात असल में ये है क आप जानती हैं मुझे फ़साने क पीछे सारा खेल नारायण दस् ने hi खेला था. और मुझे ये भी यकीन है क आप पर हुए हमले क पीछे भी वही है. क्यूंकि आपने उसकी चल नाकाम कर दी. उसने आपका ट्रांसफर भी करवाने की कोशिश भी की पर बात न बानी तो ये हथकंडा अपनाया. मुझे लगता है वो फिर से ऐसा कुछ कर सकता है. और उससे पहले आपको hi कुछ करना होगा.

ऋतू : मुझ पर जिसने भी हमला करवाया है उसे तो मैं इस बार की सजा ज़रूर दिलाऊंगी पर आप अपनी बात ज़रा खुल कर रखिये.

सुशिल : जी बात ये है क नारायण दस् मुझे मिनिस्टर बनने से रोकना छह रहा है और सुना है इसमें बलजीत राइ उसका साथ दे रहा है. अब अगर ऐसा आदमी मिनिस्टर बन गया तो सोचिये वो क्या क्या नहीं करेगा. अगर आप उसके खिलाफ पक्के सुबूत हासिल कर सकें तो मैं अपनी एप्रोच का इस्तेमाल कर क उसे मिनिस्टर बनने से रोक सकता हूँ और ऐसा हुआ तो फिर मुझे मंत्री पद ज़रूर मिल जायेगा. ऐसा मुझे विश्वास दिलाया है मेरे सीनियर्स ने. और मैं आपसे वडा करता हूँ क अगर मैं मिनिस्टर बना तो आपकी हर तरह से मदद करूँगा गलत लोगों को सजा दिलवाने में .

ऋतू : कुछ सोचते हुए ) मला साहब नेता लोग 5 साल क लिए कुर्सी पर बैठते हैं और गोवत एम्प्लोयी पूरी ज़िन्दगी क लिए. इस लिए दोनों का सोचने का नजरिया अलग होता है. मैं तो पहले hi किसी से नहीं डर्टी और बेख़ौफ़ अपनी ड्यूटी करती हूँ ताकि किसी क साथ अन्याय न हो . अगर ऐसा न होता तो अब तक आपका करें ख़तम हो चूका होता और आप माँ तरी बनने की बजाये एक कैदी बन जाते .

ऋतू की बात सुन कर सुशिल कुमार सकते में आ गया. उसे तो लगा था क ऋतू उसकी बात से सहमत होगी मगर यहाँ तो बात उलटी हो रही थी .

ऋतू : मैं तो अपनी ड्यूटी ठीक से करुँगी hi पर उस बात की क्या गारंटी है क आप मिनिस्टर बनने क बाद नहीं बदलेंगे ? ये राजनीति कितनी बड़ी दलदल है ये मैं अछि तरह जानती हूँ. आप मेरे पास भी तो अपने फायदे क लिए hi आये हैं.

सुशिल: नहीं नहीं ऐसा मत कहिये , मैं आपको वडा करता हूँ क मैं हमेशा आपको सपोर्ट करूँगा और जहाँ भी आपको मेरी मदद चाहिए होगी मैं हर हल में करूँगा . आपको यकीन न हो तो मैं अपने बीवी बच्चों की कसम खाने को तैयार हूँ .

ऋतू : रिलैक्स सर उसकी ज़रूरत नहीं है. मैं आप पर भरोसा करने को तैयार हूँ पर एक बात का आपको भी ध्यान रखना होगा क आप किसी क साथ कुछ गलत न करेंगे न होने देंगे और न hi कभी मेरा विश्वास तोड़ेंगे . अगर ऐसा हुआ तो आप जानते hi हैं क मैं न किसी से डर्टी हूँ न परवाह करती हूँ .

सुशिल : ऐसा hi होगा , मैं हमेशा आपका साथ दूंगा . आप बस उस नारायण दस् क खिलाफ सुबूत लाइए बाकि मैं देख लूंगा.

ऋतू : ठीक है मैं देखती हूँ क मैं क्या कर सकती हूँ . आप चाय लेंगे या कॉफ़ी?

सुशिल : जी शुक्रिया , मुझे आज ज़रूरी एक जगह जाना है. आपसे मिलना ज़रूरी था तो इस लिए पहले आपके पास चला आया. आप को कभी भी किसी बात पर भी मेरी ज़रूरत हो तो एक फ़ोन कर दीजियेगा . मैं हाज़िर हो जाऊंगा.



उसके बाद सुशिल कुमार आज्ञा लेकर चला गया . ऋतू ने कुछ देर इस बारे में सोचा और फिर चल दी अपनी दोस्त क पास
 
अपडेट 216



निधि ने ज़मीन पर पड़े कपड़ों को उठाया और उसे लेकर नैना क कमरे में गयी , जहाँ नैना गहरी नींद में थी. निधि ने वो कपडे कमरे में एक तरफ रखे और नैना को उठाने लगी .

निधि : नैना !! नैना ,, उठो देखो टाइम क्या हो रहा है? अभी तक सो रही उठो . ..... ये लड़की भी न ... नैना !!!!

नैना : उम्मम्मम क्या है दीदी सोने दो न

नैना नींद में hi कम्बल में लिपटी करवट बदलती बोली. नैना साडी रत चुआई क बाद सुबह hi तो सोई थी, उसका बदन बोली तरह टूट गया था और अब वो गहरी नींद में उस मीठे दर्द को महसूस कर रही थी. उसे ये बिलकुल भी यद् नहीं था क वो कम्बल क अंदर बिलकुल नंगी है. ऐसी हालत में निधि उसे देख ले तो क्या हो.

निधि : तुझे सुना नहीं ? उठ. वर्ण मैं पानी दाल दूंगी.

निधि की इस वार्निंग से नैना थोड़ी होश में आयी क्यूंकि ठण्ड में पानी से कौन नहीं डरता .

नैना : क्या है दीदी सोने भी नहीं दे सकती आज तो संडे है न ?

निधि : जल्दी उठ , ये कोई टाइम है सोने का ? 10 बज चुके हैं. पता नहीं मैं भी आज इतनी देर कैसे सोती रही .

नैना बेमन से उठने लगी तो यकायक उसके दिमाग की बत्ती जाली और उसे अपने नंगे होने का एहसास हो गया. वो उठते उठे रुक गयी. एक hi पल में उसकी धड़कन तेज़ हो गयी. कहीं दीदी को पता चल गया तो क्या होगा.

नैना : ा. आए. आप जाओ दीदी मैं अभी आयी .

निधि : तू फिर से सो जाएगी . उठ पहले और मुझे तुझसे बात करनी है .

नैना : दीदी प्लीज आप जाओ मैं अभी आयी मैंने कहा न . बस 5 मिनट्स में आयी

निधि : ाचा जल्दी आ नीचे मैं चाय बनाने जा रही हूँ .

निधि कमरे से बहार निकली तो नैना जल्दी से कम्बल को लपेटे हुए बीएड से उतरी. एक डैम से उसकी टंगे लड़खड़ा गयी. छूट और पेट में थोड़ा दर्द महसूस हुआ साथ hi टंगे भी थकी हुई लरज रही थी . नैना ने दरवाज़ा बंद किया और कपडे पहन कर हाथ मुँह धो कर नीचे चली गयी जहाँ निधि चाय बना रही थी और उसके पापा हॉल में बैठे थे .

नैना : गुड मॉर्निंग दीदी .

निधि : आ गयी तू ? इतनी देर तक सो रही थी आज . रत को क्या करती रही ?

नैना : क कक कुछ भी तो नहीं . मम मैं तो पड़े कर रही थी . पर आप भी तो आज लेट उठी आप क्या कर रही थी ?

नैना ने अपनी हड़बड़ाहट कण्ट्रोल करते हुए निधि पर सवाल दाग दिया .

निधि : पता नहीं आज कैसे इतनी देर तक सोती रही .

नैना : और वो अमित कहाँ है ? वो नहीं उठा ?

अमित का नाम सुनते hi निधि को अभी कुछ देर पहले अमित का साथ अपना वो रोमांस यद् आ गया और वो शर्मा गयी .

नैना : मैं अभी उठा कर लती हूँ उसे .

नैना जाने लगी तो निधि एक डैम से बोल पड़ी .

निधि : नहीं नहीं सोने दे उसे . वैसे भी आज संडे है.

नैना : ाचा ! तो मुझे क्यों नहीं सोने दिया आपने ?

निधि : घर का काम कौन करेगा ? पता है न माँ भी यहाँ नहीं है . वैसे एक बात बता तेरे कपडे वहां अमित क रूम में क्या कर रहे थे ?

निधि ने चाय कप में डालते हुए ये सवाल पूछ साधारण लहजे में hi . मगर नैना अंदर तक हिल गयी इसे सुन कर .

नैना : मम मेरे कपडे ? कक कौन से कपडे ?

निधि : तेरी शार्ट और टॉप. वहीँ रूम में बीएड क पास ज़मीन पर गिरे हुए थे . मुझे अछि तरह यद् है वहां रत को कोई कपडा नहीं था . फिर सुबह कैसे ? क्या तुम आयी थी रोऊं में ?

निधि ने अब ये सवाल नैना की तरफ देख कर पूछा तो नैना की मनो जान hi निकल गयी क वो अब क्या जवाब दे. उसकी चोरी उसकी बहिन में पकड़ ली थी. और अब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था . वो अब खुद को कोस रही थी क उसने इतनी बड़ी गलती क्यों करदी. अमित उसे रोक भी रहा था मगर वो निधि की प्रजेंस में वो सब करने में इतनी पागल हो गयी थी क पता नहीं रत को क्या या बोले जा रही थी . वो सब अब नैना की आँखों क सामने आने लगा . निधि नैना को खामोश देख कर फिर से बोली .

निधि : तू चुप क्यों हो गयी ? बता न ? क्या तू आयी थी रत को रूम में ?

नैना : नं नहीं हह हाँ मेरा मतलब है मैं आयी थी रत को पर आप सो चुकी थी तब तक . असल में दीदी वो मैं वो कपडे आपको दिखने hi लायी थी.

निधि : मुझे दिखने ? मगर क्यों ?

नैना : वो दीदी दो , हाँ वो कपडे छुपाते हो गए हैं न तो मैं आपसे पूछने आयी थी क क्या वो कपडे हम करुणा को दे दें?

निधि : तो इसमें पूछने वाली क्या बात है ? पहले क्या इसके लिए तू किसी से पूछती है? तुझे पता है न वो कमरा अमित का है . फिर तूने वो कपडे वहां क्यों फेंके? ाचा लगता है ऐसा लड़कियों क कपडे उसके बिस्टेर क पास फेंकना? कोई देखता तो क्या सोचता ?

नैना : क्या सोचता ? वो क्या कोई बहार वाल है ? और यहाँ कौन सा कोई बहार से आकर देखने वाला है ? आप तो ऐसे hi परेशां हो रही हैं . लाइए मैं उसे चाय दे आती हूँ . अभी तक सो रहा है नवाब

नैना ने बड़ी चालाकी से बात को हैंडल कर लिया था और निधि बेचारी मन से बहुत भोली थी जिसके मन में ऐसा कोई गलत विचार ख्वाबो ख्याल में भी नहीं था क अमित और नैना क बीच ऐसा कुछ हो भी सकता है . वो तो बस अमित क लिए चिंता कर रही थी . क्यूंकि वो किसी भी कीमत पर किसी कोई मौका नहीं देना चाहती थी क कोई उसके बारे गलत सोचे . आखिर वो उसका पति जो था.

निधि : नहीं उसे अभी सोने दे . तू कारन को दे देना चाय वो कौन सा अभी उठा है . मैं पापा को दे देती हूँ. और जल्दी से नाहा कर वापिस आ नाश्ता भी बनाना है .

इतना कह कर निधि अपनी और अपने पापा की चाय ले गयी जबकि नैना अपनी और कारन की चाय ले कर ऊपर चली गयी . अमित क लिए चाय निधि ने डाली hi नहीं थी. वो नहीं चाहती क अमित को कोई उठाये अभी . क्यूंकि आज संडे था और आज अमित जाने वाला था यहाँ से . निधि जानती थी जैसे hi वो उठेगा वो तैयार हो कर चला जायेगा और वो अंदर नहीं छह रही थी अमित कहीं जाये. नैना चाय ले कर पहले कारन क कमरे में गयी जो सो रहा था. रत की दवा का hi असर था . नैना ने उसे जगाया और चाय पकड़ा दी . फिर वो अपना कप लिए अमित क कमरे में घुस गयी. हालाँकि निधि ने मन किया था पर वो अमित को देखने आयी थी . रूम में आते hi नैना की नज़र बीएड पर कम्बल में लिपटे अमित पर पड़ी तो रत क हसीं पल उसे यद् आने लगे . दरवाज़े को लॉक कर क वो चाय का कप साइड में रख कर अमित क करीब आयी और उसका कम्बल थोड़ा सा उठाया तो अमित को नंगा पाया. नैना एक डैम से घबरा गयी क कहीं निधि दीदी क साथ वो नंगा hi तो नहीं सो गया था ? वैसे भी जब आखिर बार अमित ने अपना पानी निकला था तो उस वक़्त नैना बिलकुल होश में नहीं थी और अमित की हालत भी कुछ अछि नहीं थी . उसने जल्दी से बाकि का कम्बल भी खिंचा तो अमित को लोअर में देख कर उसे कुछ तसल्ली हुई.

नैना : शुक्र है इतना तो ध्यान रहा इस बुद्धू को . बच गए . साडी रत मेरा कचूमर निकल कर देखि कैसे चैन से सो रहा है .

नैना दे झुक कर अमित क चोदे सीने पर हाथ फिरते हुए उसे चूमा और चूमती चूमती उसके उसके होंठों तक आ गयी और उसे किश करने लगी . अभी थोड़ी देर hi हुई थी क अमित का फ़ोन बजने लगा . नैना ने होंठ अलग किये और मोबाइल को देखा तो कल्पना का फ़ोन था . नैना ने जल्दी से उठा लिया . कल्पना नैना की आवाज़ से चूंकि मगर चूँकि वो दोस्त जैसे hi थी तो फिर है है क बात करने लगी . कल्पना ने बताया क वो अमित क साथ आज भी ग्रुप स्टडी का पूछने क लिए फ़ोन कर रही थी . नैना ने बता दिया क वो अबू सो रहा है और कुछ देर बाद उसकी बात करवाने को कह दिया. कुछ और इधर उधर की बात करने क बाद उसने फ़ोन काट दिया और नैना हुई अमित को फिर से कवर कर क अपना चाय का कप उठा कर चल दी .

दूसरी तरफ दिव्या की सुबह आज भी अमित क साथ ख्वाब में प्यार करने क बाद हुई बारिश से हुई . वो बारिश जिसने उसे टांगों क बीच से पूरी तरह भिगो दिया था . असल में दिव्या अपनी नंगी जांघों पर अमित क हाथों क एहसास को एक पल क लिए भी भुला नहीं पायी थी . और इसी वजह से वो अंदर से बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी. आँख खुलते hi दिव्या की नज़र पहले रजनी पर पड़ी हो अभी सोई हुई थी . रजनी को सोती हुई पाकर दिव्या ने अपनी हालत देखो तो खुद hi शर्मा गयी . पेंटी पूरी तरह गीली हो कर छूट पर चिपक गयी थी . दिव्या ने छूट पर हाथ लगा कर देखा तो साडी को भी गीला प्या. इतनी ज्यादा गीली होने की वजह से वो कपडे बदलने क लिए बीएड से उठी तो एक बार फिर से उसे दर्द महसूस हुआ पर उतना ज्यादा नहीं जितना कल था . दिव्या ने किसी तरह जाकर अपनी साडी चेंज की और फ्रेश हो कर वापिस रजनी क पास आयी जो अभी भी वैसे hi सो रही थी. दिव्या फिर से बीएड पर बैठी तो सपना यद् करते हुए दोबारा से वो खुद को उत्तेजित होती महसूस करने लगी . हो भी क्यों न , आज सपने में अमित ने उस नंगी कर क क कितने प्यार से पूरे जिस्म को चूमा था और रोमांटिकल्ल्य उसकी चुदाई की थी . अपनी छूट में अमित क लैंड का एहसास यद् आते hi वो मचल उठी . इससे पहले की वो फिर से आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होती उसने जल्दी से ऑंखें खोली . दिव्या का हाथ खुद hi अपने चुचों पर और दूसरा अपनी छूट पर था . उसने जल्दी से हाथ हटाए मगर उसे झटका तब लगा जब उसकी नज़र रजनी पर पड़ी जो उसे hi देख रही थी . दिव्या ने जल्दी से अपने हाथ अपने स्तनों और छूट से हटाए पर अब क्या हो सकता था. उसकी बड़ी बहिन सब देख चुकी थी. दिव्या घबरा कर नज़रें चुराने लगी पर रजनी क चेहरे पर मुस्कान आ गयी . दिव्या तो शर्म से ज़मीन में गढ़ी जा रही थी क वो अब अपनी बड़ी बहिन का सामना कैसे करे . क्यूंकि रजनी उससे काफी बड़ी थी और हमेशा एक इज़्ज़त और शर्म का पर्दा रहा था दोनों क बीच

रजनी : दीपक ( राधा क पापा ) की यद् आ रही है क्या ?

दिव्या तो अंदर से घबरा रही थी मगर अपनी दीदी क मुँह से अपने पति क बारे में सुन कर नजाने क्यों उसे बुरा लगा. लगे भी क्यों न , अपने पति को तो वो कब से भुला चुकी थी. दोनों क बीच जो रिश्ता था वो समाज की नज़रों या फिर राधा क लिए hi था. वर्ण दिव्या को नज़र में वो कब का अपनी जगह गँवा चूका था. अमित की जगह अपने पति का नाम सुन कर वो जल्दी से बोली

दिव्या : नं नहीं नहीं , ऐसी कोई बात नहीं . मैं तो बस ....

रजनी : सब समझती हूँ . तेरी बड़ी बहिन हूँ मैं और उससे पहले एक औरत भी . इतने साल तूने कैसे गुज़ारे हैं मैं अछि तरह समझ सकती हूँ. तू दीपक से कुछ कहती क्यों नहीं ? अब तो उसे वापिस आ जाना चाहिए. आखिर क्या रखा है वहां परदेस में ? अपने बीवी बच्चों को छोड़ कर वो वहां कर क्या रहा है ? साडी ज़िन्दगी तूने अकेले गुज़र दी काम से काम अब तो उसे आ जाना चाहिए .

दिव्या रजनी की ये बात सुन कर एक डैम से फट पड़ी. क्यूंकि अब उसकी ज़िन्दगी उसके दिल में दीपक क लिए कोई जगह थी hi नहीं . तो ऐसे में अब उसका वापिस आना भी किस लिए ?

दिव्या : कोई ज़रूरत नहीं है दीदी . वो वहां खुश हैं और मैं यहाँ . जब उनकी यहाँ ज़रूरत थी तब तो वो थे नहीं और अब वो आ भी जाएँ तो क्या करूँ मैं उनका ? आखिर हमारे बीच अब रहा hi क्या है? राधा भी अब जवान हो चुकी है. जब उसे बाप का प्यार चाहिए था तब तो उन्हें यद् आयी नहीं अपनी बेटी की . और मेरी तो बात hi छोडो . वो वहां बहुत खुश हैं. प्लीज आप उनकी बात मत कीजिये.

दिव्या ने गुस्से में ये सब कह दिया. रजनी पर तो मनो बेम फोड़ दिया उसने ऐसे कह कर. वो समझ गयी क कोई बात ज़रूर है जो दिव्या ने छुपाई है सब से. दीपक को ले कर दिव्या का रिएक्शन बता रहा था क दीपक ने ज़रूर कुछ ऐसा किया है जिससे दिव्या क दिल में दीपक क लिए अब कोई जगह नहीं है . या फिर ऐसा भी हो सकता है क वो गुस्से में ऐसा कह रही हो. सचाई जानने क लिए रजनी ने उसे थोड़ा और कुरेदने की कोशिश की

रजनी : बात क्या है दिव्या ? तुम दोनों में झगड़ा हुआ है क्या ? या उसने तुमसे कुछ कहा है क्या ? मुझे बता मैं उससे बात करती हूँ .

दिव्या : मैंने कहा न दीदी प्लीज आप उनकी बात मत करो . मुझे कोई बात नहीं करनी . आपको क्या लगता है क वो साल दो साल में कुछ hi दिनों क लिए आते हैं , क्यों ? क्या उन्हें अपनी बीवी की ज़रूरत महसूस नहीं होती ? अगर होती तो ऐसा नहीं करते . मैं वाशरूम में जा रही हूँ फिर चाय बनती हूँ .

इतना कह कर दिव्या अपने गुस्से को काबू करती हुई अपनी आँखों में आयी नमी छुपाते हुए बीएड से उठ कर वाशरूम चली गयी . और पीछे छोड़ गयी सोच में दू hi परेशां रजनी . रजनी तो अंदर तक हिल गयी थी दिव्या की आखिरी बात सुन कर. इसका साफ़ मतलब था क दीपक का ज़रूर कोई चक्कर है बहार या फिर वो फिरंगी औरतों से अपनी ज़रूरत पूरी करता है और इसी लिए वो यहाँ नहीं अत . ये सब सोचते सोचते रजनी की ऑंखें नाम होने लगी और साथ hi गुस्सा भी आने लगा उसे दीपक पर. जिसने उसकी मासूम सी बहिन की ज़िन्दगी को तबाह कर दिया . दिव्या क्यों चुप चुप रहती थी और किसी नहीं मिलती थी इसके पीछे सिर्फ दामिनी की मौत hi नहीं बल्कि दीपक की बेवफाई भी थी . रजनी अंदर hi अंदर रोये जा रही थी क वो दिव्या की ज़िन्दगी क इस दर्द को पहले क्यों नहीं समझ पायी. आखिर बड़ी होने क नाते ये उसका फ़र्ज़ था . रजनी दिव्या क बारे में सोचे लगी क अब वो क्या करे जिससे दिव्य की ज़िन्दगी से इस दुःख को दूर किया जा सके. किसी तरह दीपक से बात कर क उसे वापिस बुलाया जाये बस थी एक रास्ता नज़र आ रहा था उसे . दिव्या चाहे कितनी भी नाराज़ कुन न हो पर वो ऐसी थी क सबको माफ़ कर hi देती थी. और दीपक आखिर राधा का पिता था तो अगर वो सब छोड़ कर वापिस आ जाये तो दिव्या उसे ज़रूर माफ़ कर देगी . एहि सब सोचते रजनी अपने में hi हूँ थी क उसकी तंदरा दिव्या ने hi भांग की उसके सामने चाय का कप रखते हुए .

दिव्या : लो दीदी चाय पिलो .

रजनी : हह हाँ , चाय ? तुझे क्या ज़रूरत थी ? मैं बना देती न .

दिव्या : तो क्या हुआ जो मैंने बना ली? वैसे भी अब मैं काफी हद तक ठीक हूँ.

रजनी : एक दिन आराम कर लेगी तो क्या हो जायेगा ? ाचा होता अमित यहीं रुक जाता . उसकी बात तो तू चुपचाप मन लेती है .

अमित का नाम सुनते hi दिव्या ऐसे शर्मायी जैसे उसके पति न नाम ले लिया हो जबकि अपने पति क नाम पर वो गुस्सा हो रही थी .

दिव्या : शरमाते हुए ) मैं कब ऐसा करती हूँ? वैसे दीदी वो अब कल से ......

दिव्या अपनी बात कहते कहते रुक गयी. असल में वो पूछना छह रही थी क कल से अमित किसके घर रहने जायेगा . जवाब तो उसे भी पता था क वो रीता दीदी क यहाँ जाने वाला है . पर दिव्या का इस बात का ज़िकर करने का मतलब ये था क क्यों न वो रीता दीदी क बजाये उसके पास रहने आ जाये .

रजनी : तुम्हे तो पता hi है अब रीता की बरी है. अगर तू कहे तो मैं रीता से कह दूँ क वो अमित को पहले यहाँ भेज दे ?

ये सुन कर दिव्या को बहुत ाचा लगा और दिल में लड्डू फूटने लगे क काश ऐसा हो जाये . हालाँकि उससे कुछ होने वाला तो था नहीं पर दिव्या का दिल तो यही छह रहा था क अमित उसके पास रहे .

दिव्या : पर रीता दीदी ....

रजनी : बात कर क देखती हूँ . शायद मन जाये.

इतना कह कर रजनी ने दिव्या क सामने hi रीता को फ़ोन किया और अमित क बारे में पूछने लगी .

रजनी : रीता , कैसी हो ?

रीता : अछि हूँ दीदी , आप कैसी हैं ?

रजनी : मैं भी अछि हूँ. सुन वो मैं दिव्या क पास hi हूँ. और वो पूछ रही है अगर अमित उसके पास आ जाये कल से तो तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नहीं ?

रीता : क्या कह रही हो दीदी ? आप को तो पता है न मेरे और अमित क बारे में . मैं कैसे इतने दिन गुज़रती हूँ उसके बगैर ये बस मुझे hi पता है. और अब मेरी बरी है तो आप ऐसे कह रही हैं . दिव्या को तो नहीं पता पर आप तो सब जानती हैं. और आप भी तो कह रही थी कल क आप भी यहाँ आएँगी अमित क लिए तो फिर अब आप ऐसा कैसे कह सकती हैं ?

रजनी दिव्या क बारे में सोचती भूल hi गयी थी क कल उसने खुद hi रीता से कहा था क जब अमित उसके यहाँ आएगा तो वो भी वहां रहने आएगी ताकि वो अमित क साथ फिर से प्यार कर सके रीता बन कर . वैसे भी उस दिन पुलिस स्टेशन वाले केस क बाद से hi वो अमित को दिल से खुश करना छह रही थी .

रजनी : हाँ वो मैं तो भूल hi गयी थी . ाचा ठीक है मैं दिव्या को समझा दूंगी .

इतना कह कर रजनी ने जल्दी से फ़ोन काट दिया . दिव्या समझ चुकी थी क रीता दीदी नहीं मणि. इस बात पर उसे थोड़ी निराशा तो हुई पर उसने सबर कर लिया .

रजनी : दिव्या वो रीता कह रही है क .....

दिव्या : कोई बात नहीं दीदी . वैसे भी अगले वीक तो वो यहाँ आ hi जायेगा. आप बैठिये मैं राधा को भी उठा देती हूँ .

रजनी : तू बैठ मैं उठा देती हूँ राधा को और नाश्ता भी मैं hi बनाउंगी , आयी बात समझ में .

इतना कह कर रजनी कमरे से निकल गयी और दिव्या फिर से अमित क बारे में सोचने लगी. वो थोड़ी निराश तो हुई मगर फिर कल का किस्सा यद् करने लगी .

वहीँ ऋतू सिंह दोपहर को अपनी एक मात्रा खसम खास दोस्त छुम बहिन मंजू क साथ सिविल कपड़ों में एक मॉल में शॉपिंग क लिए आयी थी. सिक्योरिटी में तैनात गनमैन भी दूर से नज़र जमाये हुए थे . ऋतू बहुत खुश थी क आज वो आरसे बाद मंजू क साथ शॉपिंग कर रही थी जैसे क कॉलेज क दिनों में वो अक्सर किया करती थीं. मंजू क चेहरे पर रौनक और आँखों में ख़ुशी देख कर वो समझ गयी थी क कुछ तो खास है. मगर जब मंजू उसे साथ लेकर छोटे नवजात बच्चों क लिए कपडे और सामान देखने लगी तो वो शॉकेड हुई .

ऋतू : एक मिनट एक मिनट , तुम बचूं क लिए शॉपिंग करने मुझे यहाँ लायी हो , इसका मतलब ,,,,, ओह माय गॉड ,,, इसका मतलब अमित ने तुम्हारी मटकी में जाग लगा दी ? कब हुआ ये सब ? कितने दिन हो गए ?

मंजू ऋतू की बात सुन कर एक डैम से शर्मा गयी और ऋतू को मरते हुए बोली .

मंजू : छी, बेशरम, तुझे शर्म नहीं आती? मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ? ये सब उसके मां क बेटे क लिए है. तुझे बताया था न ?

ऋतू : ओह्ह्ह , मैं तो भूल hi गयी थी. मुझे लगा कहीं तुमने फॅमिली प्लानिंग तो नहीं कर्ली . वैसे कब कर रही हो तुम भी फ. ा. म. ी. ल. य. प्लानिंग?

ऋतू ने जान बुझ कर मंजू को सताते हुए पूछा.

मंजू : उसकी पड़े ख़तम होने क बाद. तुझे अगर जल्दी है तो तू hi करले , फॅमिली प्लानिंग .

मंजू ने नहले पे दहला मरते हुए कहा.

ऋतू : कहाँ यार , मैं ये सब नहीं कर पाऊँगी. तुझे तो पता hi है मेरी सर्विस कैसी है. ये सब अकेले मुझ से नहीं हो पायेगा . वैसे भी उसके साथ तो तुम भी शादी नहीं कर पाओगी तो मैं कैसे? हाँ तेरे बच्चों को गॉड में खिला कर अपने चाओ पूरे कर लुंगी .

मंजू : क्यों ? तू भी तो कर सकती है . कोई न कोई रास्ता निकल hi आएगा .

ऋतू : नहीं यार , मैं जिस पोस्ट पर हूँ तू जानती hi है. सबकी नज़र रहती है . इस लिए मेरी लिए इम्पॉसिबल है. मगर तेरी मदद मैं कर सकती हूँ . तू न मेरे साथ hi रहना जब तेरा ऐसा इरादा हो. कोई कुछ नहीं पूछेगा मैं सब हैंडल कर लुंगी.

मंजू : बस बस , हम यहाँ जिस काम क लिए आये हैं वो कर ले पहले. जब वक़्त आएगा तब देखेंगे .

ऋतू : वैसे है कहाँ हमारा हीरो? उसको देखे कितने दिन हो गए .

मंजू : ओहो बड़ी यद् आ रही है मैडम को . बुलाऊँ क्या ?

ऋतू : हाँ हाँ , तू तो मज़े लेगी hi . खुद तो उसे कॉलेज में रोज़ मिल लेती है. और इधर एक मैं हूँ क छह कर भी मिल नहीं पति. कब ख़तम हो रहे हैं उसके एक्साम्स ? मुझसे तो दिन काटने मुश्किल हो रहे हैं .

मंजू : सबर करले थोड़ा सा मेरी जान . बस 2 hi एक्साम्स और हैं उसके. इसी वीक में फ्री हो जायेगा. फिर मिल लेना अचे से और करवा लेना अपनी आग ठंडी .

दोनों सहेलियां एक दूसरे क साथ हंसी मज़ाक करती हुई शॉपिंग करने लगी . अपने अपने मन में भविष्य क बारे में सोचते हुए .

मैं अपने कमरे में आराम से सो रहा था क फ़ोन की लगातार बज रही रिंगटोन ने मुझे जगाया . देखा तो रीना का फ़ोन था . कुछ देर उससे बात की तो टाइम देखा 11 बज चुके थे और मैं अभी तक सोया हुआ था . मैं जल्दी से उठा और अपनी हालत देखि . मैं ऊपर से नंगा hi था एक बार तो मुझे दर भी लगा क निधि दीदी ने मुझे ऐसी हालत में देख कर कहीं गुस्सा तो नहीं किया होगा ? फिर मैं जल्दी से उठ कर नाहा धो कर तैयार हो गया और निधि दीदी मेरे रूम में आ गयी . मैं तब अपना बैग पैक कर रहा था क्यूंकि मुझे आज यहाँ से जाना जो था .

निधि : गुड मॉर्निंग, आज बहुत देर तक सोते रहे जनाब आप ? ये क्या बैग क्यों पैक कर रहे हो ? कहाँ जाने की तयारी है ?

निधि दीदी क चेहरे पर कोई गुस्सा या नाराज़गी न पाकर मुझे तसल्ली हुई . और फिर मैं उनकी बात का जवाब देने लगा.

अमित : पता नहीं आज आँख hi नहीं खुली . और आज संडे है न दीदी , तो मुझे जाना होगा . कल से रीता मौसी क यहाँ भी तो जाना है .

निधि : पता है , पर अभी क्यों तयारी कर रहे हो ? अभी पहले नीचे चल क मेरे साथ नाश्ता करो. उसके बाद अगले एग्जाम की तयारी करना. वैसे भी मौसी क यहाँ तो कल जाना है न? आज तो यहीं रुक जाओ. गाओं तो जाने से रहे , सब तो यहीं हैं. शाम को हम मोहित क घर चलेंगे . मैंने मां ममी को बोल दिया है और वो भी कह रहे थे क तुम पड़े करो .



मैंने बैग साइड में रखा और दीदी क साथ निचे नाश्ता करने चला गया . नाश्ते क बाद मैं पड़ने बैठ गया और दीदी भी मेरे साथ hi बैठ गयी मेरी मदद करने . नैना दीदी से थोड़ी बहुत बात हुई और नज़रों से इशारे भी. वो आज बहुत खुश थी. और रत भर की रासलीला की खुमारी उनके चेहरे पर अभी भी थी . खैर निधि दीदी मेरे साथ मेरे रूम में आ गयी और नैना दीदी फिर से सोने क लिए अपने कमरे में चली गयी. क्यूंकि उनकी नींद पूरी नहीं हुई थी . मैं दीदी क साथ बैठ कर अपनी तयारी करने लगा. शाम तक मैं पड़ता रहा और उसके बाद निधि दीदी मुझे और नैना दीदी को साथ लेकर मोहित क घर चल दी. माँ और बाबा अभी भी यहीं थे अजय मां और कामिनी ममी क साथ . मैंने सबके साथ यहाँ वक़्त बिताया और अपने बेटे क साथ भी कुछ पल बिताये. रजनी मौसी दिव्या मौसी क घर पर hi थी . रीता मौसी भी नहीं आयी मगर उन्होंने फ़ोन पर मुझे अपने घर आने को कहा मगर निधि दीदी ने आज भी मुझे अपने साथ अपने घर hi रहने को फाॅर्स किया तो मुझे मन्ना पड़ा. इस दौरान आंटी ने भी मुझे आज रत उनके यहाँ रुकने को कहा पर मैंने मन कर दिया जिससे वो थोड़ा निराश भी हुई पर उन्होंने गुस्सा नहीं किया. मगर करिश्मा दीदी खामोश थी और बस देख रही थी . रत को हम फिर से वापिस रजनी मौसी क घर आ गए और रोज़ की तरह निधि दीदी मेरे साथ hi सोई.
 
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