Adultery Raj-- hero of the family - Page 37 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

टुनाइट मेघा अपडेट ......

मिस्ट्री solved......update नाईट मई लेट आएगा ....
 
अपडेट 119

मिस्ट्री साल्व्ड…….

तभी रूम का दरवाज़ा खोल दीपिका बोलती हुवी एंटर हुवी भाभी आप…… बाकि वर्ड्स मू मई हे रहगये उसके क्योकि सामने दिव्या बैठी दिखी …… फिर वो बात पलटकर बोली अरे आप ….सोई नहीं वो दोनों सो गयी तोह मैं आगयी सोने ….

दिव्या--- ओह तोह तुम यंहा सोवोगी….

दीपिका— है मई जब भी अति hi इन्ही के पास हे सोती हु क्योकि लगभग हम अकेले हे होते ह घर मई इसलिए आदत हो गयी ह…..

इस अचानक एंट्री से वो हार दिखने वाली बात भूल हे हो गए ….

दिव्या--- अछि बात ह ..तोह तुम्हे पता ह सोनाली राज से प्यार करती ह ……

Deepika---ha पता ह ….भले हे ये आगे मई राज से बड़ी ह पर यही मेरी भाभी बनेगी …… क्योकि इनसे अछि लड़की कोई नहीं ह भाई के लिए ..और चाहे जो करना पड़े मैं इन्हे एक करके रहूंगी…

दिव्या--- मुस्कराकर सोनाली तुम्हे अब किस बात का दर ह जब सब तुम्हारे साथ ह …..

सोनाली--- पर वो गिफ्ट….

दीपिका---- गिफ्ट कौनसा गिफ्ट भाई जरा मुझे भी तोह पता लगे…..

दिव्या--- मैं वाशरूम जेक अति ह..

सोनाली--- राज की गफ ह और उसके लिए एक लड़कियों वाला बेशकीमती हार ख़रीदा ह ….

दीपिका---- शुतुप भाभी कुछ भी उसको कपडे तोह खरीदने का वक़्त नहीं ह अपने देखा ह न उसकी अलमीरा मई कपडे भी हमरे हे परचेस किये हुवे रहते ह आप भी न ……ग़लतफ़हमी पाल लेती ह…

सोनाली--- नहीं यार मैं सच बोल रही हु ट्रस्ट में..

दीपिका तोह दिखाओ जरा मुझे भी पता लगे…..

सोनाली--- तीख ह लती हु और वो कड़ी हो कर अलमीरा की तरफ चली गयी ..और निकल कर लायी ये देख …

दीपिका —उसको हाथ मई लेकर देखने लगी और बोली वो कितना ब्यूटीफुल ह …

सोनाली--- इडियट डिफर तुजे ब्यूटीफुल की पड़ी यंहा मेरी सौतन आगयी ह….

दीपिका---- कुछ भी कहो भाई को चॉइस बेस्ट ह पर ये ओल्ड डिज़ाइन का ान्तिक हार ह…….

पर कोई और भी था जो आंखे फाडे फाडे उस हार को हे देख रहा था और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन पल पल बदल रहे थे जैसे वो पहचान ने की कोसिस कर रही हो के ये वही ह क्या ..फिर बिना रुके वो जल्दी से गयी और दीपिका के हाथ से हार ले लिया और उसे देखने लगी …

दीपिका---- दिव्या से ह न acha.bhai ने मस्त हार ख़रीदा ह …

सोनाली--- शट उप ोथेरविसे ी विल किल यू …

Deepika--oh के ों भाभी …. आप यू हे अपना खून जला रही हो..

पर इनसे बेखबर दिव्या जिस चीज को ढूंढ रही थी वो उसे मिल गया डी का मार्क जो पीछे बना हुवा था और उसकी खुसी के अंशु फुट पड़े उसका दिल जज़्बातो से भर गया जो उसकी आँखों से निकलते आंसू भये करने lage….uske दिल मई इस हार की यादे उमड़ पड़ी क्योकि ये गिफ्ट उसके पिता और भाई की दी हुवी निशानी थी ….आज उसके पिता और भाई भले हे दुनिया मई नहीं ह पर उनकी ये याद जो उसे बिछड़ गयी thi…..aj उसके पास एक बार फिर से आगयीईइ thiii……usai यू हार को गले से लगाकर बिलख कर रोटा देखर सोनाली और दीपिका कंफ्यूज हुवी और दोनों ने हे पूछा..

क्या हुवा बुआ आपको आप रो क्यों रही ho…..batayiye हमे…

दिव्या ने गर्दन उठायी और बिलखते हुवी हे बोली

दिव्या--- ये ये ye……mera ह….

दिव्या की बात सून दोनों हे कंफ्यूज हो गयी ….. ..

सोनाली--- पर ये तोह राज ने परचेस किया ह शॉप से ..और आपका ह तोह राज के पास कैसे

दिव्या--- रट हुवे ये मेरे पापा और भाई की निशानी ह जो मुझे मज़बूरी मई बेचनी पड़ी थी जब मई खाने और रहने की मोहताज हो गयी थी पर आज इसे सामने देख मैं खुद को काबू नहीं रख पायी …तुम सही कहती हो ये राज का हे ह ये पहले मेरा tha…ab नहीं….

दीपिका— ने दिव्या को गले लगाया और बोलो भाई को मैं जानती हु ये वो आपको दे देंगे वो कोई दूसरा ख़रीदलेंगे.. इसलिए आप सोचे नहीं क्योकि उसके लिए फॅमिली से बढ़कर कुछ नहीं ह और वो तोह आपको दिल से अपनी बुआ और जहान्वी को छोटी बहन मंटा ह ….

दिव्या---- पता ह ….जब मैं 11 साल की थी तब मेरे बर्थडे पे ये मिला था ……. …

सोनाली---- आप हमे पूरी सचाई बता सकती ह ….. मैं एक पुलिस अफसर हु …. पशुपति के इलावा भी कोई ह तोह बता दीजिये हम सबको देख लेंगे आप घबराये nahi…..sayad आप हमे कमजोर समाज रहिह…

दिव्या सोनाली की बात सून मन हे बोली …तुम्हे क्या बताऊ उन्होंने जब भाई को मार दिया जिनसे हर कोई डरता था तोह तुम क्या कर पाओगी ….तुम्हे कैसे बताऊ की वो कितने पॉवरफुल ह ….तुम उनके बारे बारे मई न हे जानो तोह ाचा hoga……..phir बोली …..और कोई नहीं ह ……चलो अब सो जाओ सब…..

Deepika---ap भी यही सो जाओ ये रूम इसीलिए हे ऐसा ह क्योकि हम सब साथ सोते ह…

दिव्या भी लेट गयी पर उसके हाथ मई था वो हार जिसे जुडी थी उसकी यादे ……और उसे याद आगयी उस पल की बातिअन उसे ये हार मिला था और उन्ही यादे मई डूबती गयी ….

फलेश बैक…..

देख लेना पापा इस बार मैं नहीं सुनुँगी आपकी जो भाई नहीं ए तोह……

जगमाल सिंह--- दिव्या जिस नहीं करते ह आपको पता ह न आपके भाई कितना व्यस्त रहते ह….

दिव्या--- पापा भाभी आगयी ह बस उन्हें हे दिकत ह पर इस बार नहीं चाहे कुछ भी हो इस बार वडा किया था आने का उन्होंने और आना हे होगा …

विद्या--- बिलकुल आना होगा ऐसे कैसे काम चलेगा …मैं तुम्हारे साथ हु..

दिव्या —- भाभी अपराह्न दो मुझे सब पता ह आप हमेसा भैया की हे साइड लेती हो…

जगमाल सिंग्ज--- रहने दो बहु इस बार ये नहीं manegi……aur वो कम्बखत कान्हा रह गया पता नहीं ….अब तक तोह अजना चाहिए था……

पीछे से आवाज आयी कम्भखत आगया ह बाबूजी…..

ये आवाज सुनते हे सब खुस हो गए पीछे से सहदेव और उसके बॉडीगॉर्ड अली चलते हुवे आरहे थे….

सहदेव — बाबूजी के पाँव चुवे और राज को गॉधी मई लिया और दिव्या के पास गए जो रूठ कर अपने कमरे मई आगयी थी….. और बोले आखिर भाई पर गयी ह एक बार जिदकारली तोह कर्ली .

अपने भाई की आवाज सून वो तुरंत पलटी और भागकर समां गयी अपने भाई की बांहो मई ……

सहदेव— आप तोह चले बहार सरे मेहमान इंतजार कर रहे ह ….

दिव्या - मैंने जब मन किया हे हे हे

धूम धाम से घर की सबसे लाड़ली का जनम दिन मनाया गया आखिर पुरे परिवार की सबसे चंचल और लाड़ली थी जो घर मई शोरे मचा कर रखती थी


……

सहदेव--- ये ह आपके लिए हमरे और पापा की तरफ से जन्मदिन का तोहफा…..

दिव्या ने जल्दी से लिया और उसे खोल्दिया…. और उसमे से निकला वो हार …..

दिव्या--- वो भैया ये तोह बहुत सूंदर हमे बहुत पसंद आया ….थैंक यू थैंक यू यू अरे बेस्ट इन थे वर्ल्ड……. बड़े भैया आप कंजूस हो …..मैं आपको छोडूंगी नहीं खैर नहीं आपकी …..और छोटे भैया ( पर्वत सिंह) आप भी खेती का पूरा काम सँभालते हो आपको भी इस बार आसानी से नहीं छोडूंगी ……..

सब हसने लगे उसकी बाते सुनके ……..

फलेश बैक ख़त्म..

दिव्या के चेहरे पर भी मुस्कान आगयी हलकी नींद मई bhi………aur उसकी नींद और गहरी होती गयीईइ……….

पर एक की आंख मई नींद नहीं थी वो थी सोनाली…..

वो मन हे मन सोच चुकी थी की सुभे हार के बारे मई जरूर राज से puchegi…..uska पुलिस का दिमाग उसे साफ़ कह रहा था की कुछ तोह गड़बड़ ह …. सुभे कॉल करके पुचिनगी ……यू घुट घुट के जलने से ाचा ह एक बार पूछ हे लू …..

सुभे………

सोनाली जो रात से हे सोच के बैठी वो राज को फ़ोन करके इस हार के बारे मई पूछेगी वो कन्फूसिओं मई आकर हॉल मई बैठ जाती ह …. और इसी बारे मई सोचने लगती ह…. वो बैठी अभी फ़ोन हे निकल रही होती ह कॉल के लिए तभी दिव्या भी अजय ह ….

दिव्या--- सुभे सुभे किस सोच मई घूम हो ….

सोनाली —- सोच रही हु हार के बारे मई राज से

पुछ्लऊ

…..

दिव्या--- सोचकर ाचा ह मुझे भी पता लग जायेगा ये हार राज के पास हे क्यों आया …..क्या भगवन कुछ राह दिखा रहा मुझे ……फिर बोली है पूछो मुझे भी जानना ह……

सोनाली भी बिना किसी देरी के फ़ोन मिला देती h…….aurkuch हे दिएर मई कैल्पिक होता ह…..

राज नींद मई —- हांजी मैडम आज सुभे सुभे हे मेरी याद आगयी …….

सोनाली--- मुझे कुछ पूछना ह ी मैं जानना ह….

राज--- अरे रे सुभे सुभे इतनी सीरियस ….कौनसा जुर्म हो गया मुझसे अब…..

दिव्या धीरे से स्पीकर ों करो….

सोनाली---- स्पीकर ों करके राज से … तुम बाटमट घुमाओ…..

राज--- ok ok ok फाइन मैडम जो हुकुम आपका पूछो …मैं सच कहूंगा सच के शिव कुछ नहीं…..

Sonali---+wo हार कान्हा से ख़रीदा और किसके liye….kharida….

राज--- मन मई ओह तोह इसे जलन हो रही ह ……फिर …. आप ह न गफ से बीवियों वाली हरकतों मई आगयी हो साडी तलाशी कर्ली….

सोनाली--- शर्मा कर साफ़ साफ़ जवाब दो ……

राज--- मेरी गफ के लिए ह …ऋचा याद ह न उसके लिए हे ह…..

सोनाली-- बेचारी रुवासी आवाज मई बोली वो फिर से आगयी …..

दिव्या को स्पीकर परसब सुनकर ढक हुवा क्योकि वो जानना कुछ चाहती थी पर हो कुछ और गया तोह उठकर चली गयी …..

राज — समाज गया की गड़बड़ हो गयी ह इसलिए वो रुक कर बोलै…. आप भी न वो हार मैंने किसी गफ के लिए नहीं ख़रीदा ह आपकी कसम अब आप रोना बंद करो प्लीज ….

सोनाली--- तोह फिर …..

Raj---wo हार मेरी …..bu…wo इतना हे बोलै था की…

अज्जू अभय अंदर आगये और बोले …..मिल गया मिल गया ..

राज--- bye मैं बाद मई फ़ोन करता हु…

सोनाली--- राज राज वो हार मेरी क्या ..बोलो

पर फ़ोन डिसकनेक्ट हो चूका था पर उसके चेहरे पर मुस्कान थी की फाइनली जो उसने सोचा वैसा नहीं ह

वो चिल्लाई बुआ वो हार किसी गर्ल फ्रेंड के लिए नहीं ह .पर वो बताने वाला था तब कोई आगया इसलिए बाद मई कॉल करके पुचिनगी

Divya---aate हुवे चलो ाचा हुवा वर्ण तुम ऐसे हे अनाप सनाप सोच के दुखी होती रहती लो ये कफ पियो…

अभी 2 ऑवर हे बीते थे की बंगले के दरवाजे से आवाज आयी अरे भाई क्या हमे कोई इन्विते नहीं करेगा …………

इस आती हुवी आवाज को सून श्वेता चीक पड़ी papaaa……aur भाग कर गले लग गयी …….

जोगिन्दर सिंह--- बस बस अब पास हु तोह पापा …… वर्ण तोह लड़ने से फुर्सत हे नहीं ह तुजे ……मैंने सोचा फिर से और नाराज हो इसलिए सब छोड़ कर आ गया……

श्वेता--- लव ु लव ु सो मच पापा रियली यू र बेस्ट डैड इन वर्ल्ड …… …

सोनाली —- जय हिन्द सर…..

जोगिन्दर—- के ों सोन …. तुम मेरी बेटी की तरह हो कितनी बार कहा ह यंहा औ ….और सोनाली को भी गले लगाया फिर पलटकर अरे भाई इनसे पहचान नहीं करवाओगे…..

श्वेता--- ये ह मनीषा मेरी और भाई की बेस्ट फ्रेंड ह स्पेशलय भाई की ..और ये दिव्या…..

जोगिन्दर--- डॉ दिव्या ….राइट ाचा किया बेटी तुम भी आगयी वंहा उस कुत्ते के दिन बस भर चुके ह कल इस दुनिया से उसका नमो निशान मिट jayega….phir तुम बिना दर के अपनी जिंदगी जी पाओगी….

सबका परिचय हुवा और सब वंही दोपहर तक rahe…kyoki शामको सबको जाना था जोगिन्दर सिंह के घर …..आज सायद दिव्या के सालो का इंतज़ार ख़त्म होने वाला था…… …जितनी परीक्षा उसने देनी थी वो दे चुकी थी अब उसकी जिंदगी खुसियो से भरने वाली थी …..

तोह दूसरी तरफ …..

पशुपति के साथ क्या हुवा ये जान लेते ह….

कोर्ट के अंदर उन औरतो ने कहा की हमे जान से मारने की धमकी दी गयी थी इसलिए ये करना पड़ा …..और कोर्ट मई ये केस बेबुनिअयत बताकर बंद करदिया गया और पशुपति आगया अपने घर जंहा सबसे पहले उसने अपनी बेटी और बीवी को मारा फिर उन औरतो को अपने आदमियों के हवाले कर दिया ……और आगया अपने ख़ुफ़िया बेस जो उसका मैं अड्डा था ….जंहा कितने हे राज दफ़न थे ये सिर्फ वो हे जानता था या ज़ीशान……..

पशुपति ज़ीशान के साथ 2 ऑवर तक मीटिंग करता रहा और फिर मीटिंग ख़त्म होते हे पुरे बेस मई हलचल हो गयी ….. ये सब दूर से अज्जू और अभय नोटिस कर चुके थे. ….और रात तक का पूरी हरकत देखने के लिए छिपे रहे …..ताकि आगे …राज को इन्फॉर्म कर सके

Ajju---raj ने बोलै था वैसे हे हो रहा ह यार पर जो राज ने सुभे कहा था वो सुनके हे फटी पड़ी ह वो सच मई ऐसा करेगा…

अभय---- है भाई बुटकुच भी कह दम ह बन्दे मई मैं तोह सपने मई न sochu.ab फोकस कर फिर हमे भी तयारी के करनी ह….. …….

इवनिंग 7 पं

जोगिन्दर होम ……

गेट नॉक …..एंड दूर ओपेनस……..

इतने सरे गेस्ट्स देख कर …..श्वेता की माँ….

माँ-- क्या बात ह इतनी साडी परिया एक साथ घर पर ……इसका मतलब बेटी सही सांगत मई ह…

श्वेता अंदर एते हुवे माँ आपकी बेटी नहीं सब आपकी बेटी की सांगत मई सही ह….

उसकी ये बात सून सब हँसदीये ….

पर एक थी जो कड़ी एक तरफ हे देखे जा रही थी उसे और उसके कदम अपने आप हे उस तरफ बढ़ गए …और हर भड़ते कदम के साथ उसकी आँखों ने उसके दिल मई आरहे विचारो को व्यक्त करदिया …..

जब जोगिन्दर ने ये देखा की दिव्या दूसरी तरफ जा रही ह तोह वो भी उस तरफ चल दिए और …….दिव्या जो एक बड़ी सी फोटो के पास आगयी थी… और उसे देख उसके आंसू फुट पड़े…. उसने अपना हाथ भदया और उसके चेहरे को चुकार महूस करने लगी ……. उसके आंसू और तेजी से बाह निकले तब जोगिन्दर ने पीछे से उसके कंधे पे हाथ rakha……tab दिव्या सब कुछ भूल गयी और पलट ते हुवे बोली…..

Bha..bha….bhaiya……..mere……bhaiya………snifff…..mere bhaiya…..Sahdev……uske इतने से वर्ड्स वंहा उस माहौल मई सुनामी सी ले आया जोगिन्दर के हाथ भी कंपनी लगे ..और वो भी कुछ पल एक शॉक के ट्रांस मई चला गया यही हाल सोनलिई और सभी का था सब के सब जैसे स्टेचू से बने रह गए थे उन सब की हालत काटो तोह मनो खून नहीं वाली होगयी थी…….

तब दिव्या फिर से boli…….mere भैया ये मेरे भैया ह आपके साथ कैसे ह बताईये न …. ….

पर कोई क्या हे जवाब देता वो बस दिव्या को हे देख रहे थे ……फिर श्वेता की माँ ने दिव्या को गले लगाया और उसे पुचकारती हुवी बोली …….

स mom--ro मत मेरी बची तू क्यों रोटी ह ………सब तीख ह…

फिर जोगिंदर भी हीमत करके बोले है दिव्या बेटी तुम तुम्हारे अपनों के पास हे हो मैं सब जनता हु बेटी … तुम्हारे भैया मेरे दोस्त थे और हम आज उनके हे बदौलत ह……

दिव्या--- सिसकते हुवे पर ……

संयम-- पहले चुप हो जाओ ……..श्वेता पानी लाओ….

दिव्या के नार्मल होने पर सबसे पहले सोनाली का रिएक्शन आया …उसका माथा thanka…wo बोली ….

सोनाली---- आप दादाजी मतलब ठाकुर जगमाल सिंह की सबसे लाड़ली बेटी दिव्या हो ……

Divya---+chonk कर …..ता ता तुम कैसे जानती हो unhe…..unhe मरे तोह कितने हे साल हो गए ह…..

ये एक और शॉकलेगा सबको ……सोनाली अभी कुछ और बोलती या कोई और बोलता जोगिन्दर ने सबको चुप रहने को बोल्दिया …..

जोगिन्दर— ाचा तुम्हे कैसे पता की वो मर गए ….

दिव्या — वो मैं उदयपुर गयी थी जंहा मुझे पता लगा हवेली के साथ सब जल गए ……..इसलिए मैं वापस देहरादून आगयी और छिपकर वंही रही की कभी कोई मुझे मेरा अपना ढूंढने आएगा पर मुझे मिली सिर्फ जानकारी की भाई भाभी माँ पापा सब इस दुनिया मई नहीं रहे …….उन सबको मार दिया गया ह…..

जोगिन्दर--- बेटी तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुवा ह ….पर सचाई इसके उलट ह कुछ सही ह कुछ गलत ……

दिव्या आंसू साफ़ करके क्या मतलब ह आपका….

जोगिन्दर —- तुम्हारे मुंय पापा जिन्दा ह …..और तुम्हारे शैतान सिंह भाई भाभी और उनके बचे जिन्दा ह…….

दिव्या---- हैरानी और खुसी से क्या वो जिन्दा ह ….कान्हा ह वो मुझे उनसे मिलना ह उनके पास जाना ह…..

जोगिन्दर—- बेटी हम कल चलेंगे उनके पास सुभे हे तीख ह ….

Divya----mere सहदेव भैया और पर्वत भैया भाभी वो कान्हा ह….

ये सुनके तोह सब की हे बोलती बंद हो गयी क्योकि वो ये सवाल की उम्मीद पहले हे कर रहे थे…..

जोगिन्दर सिंह की हीमत हे नहीं हो रही थी की वो कैसे बताये ….. ….पर फिर भी हीमत कर वो बोले ….

जोगिन्दर सिंह —- वो अब इस दुनिया मई नहीं ह…..

दिव्या को पता तोह पहले हे था पर एक उम्मीद जग गयी थी की वो भी जिन्दा होंगे …..पर उसकी उम्मीद कुछ सब्दो से हे टूट गयी ……वो अपनी भाभी और बहन को तोह आँखों के सामने हे खो चुकी थी और उसके भाई भी उसे छोड़ कर जा चुके थे ……उसको वो दिन याद आने लगा और उसकी सांसे उखाड़ने लगी और आँखों के आगे अँधेरी च गयी और बेहोशी उस पर छाती गयी………

जोगिन्दर डॉ को बुलाओ जल्दी से…….

डॉ आया और चेक करके चला गया घर मई सब शांत बैठे हुवे the….sab को यकीन हे नहीं हो रहा था की राज जिसे ढूंढने पूरा देहरादून छान रहा ह वो उसी के साथ ह और वो उसकी मू बोली बुआ नहीं बल्कि उसकी रियल बुआ ह ……

सोनाली —- मैं राज को बताती हु……..

इतना कह वो फ़ोन मिलाने लगी पर…… उसका फ़ोन नहीं लग रहा था और लगता भी कैसे क्योकि वो तोह निकल गया था अपना बदला पूरा करने …

सोनाली--- फ़ोन नहीं लग रहा ह उसका वो कितना खुस होगा ये जानकार की दिव्या उसकी रियल बुआ ह …..और दिव्या भी खुस हो जाएँगी जानकार की राज हे उनका दीपू ह ……

जोगिन्दर--- उसके साथ तीन ह न उनमे से किसी को कॉल करो ……पता करो वो कान्हा ह…

सोनाली —- ने कॉल लगाया तोह सिर्फ स्वाति का हे मिला …

स्वाति--- जय हिन्द मम….

सोनाली--- वेयर इस raj…phone क्यों नहीं लग रहा ह….

स्वाति —- वो मम पशुपति को मरने के लिए निकल गए …..

सोनाली--- व्हाट वो तोह कल जाने वाला था …..

स्वाति —- वो वो मम आपकी वजह से हे क्योकि आपको पता लग जाता तोह आप आजाती इसलिए …और वो आपको खतरे मई नहीं दाल सकते थे….

सोनाली —- स्तूपित इडियट …..मैंने इसलिए वंहा भेजा था तुम्हे उसके साथ …….

कॉल कट….

स्वाति — हद ह यार एक बताने पे धमकी देता एक नहीं बताने पे धमकी देती ह …….

सोनाली — वो निकल गया h…..aj हे पशुपति को मारने …..वो नहीं चाहता था हम सब और पुलिस इन्वॉल्व हो…..

जोगिन्दर —- शेर के बीटा ह …..सीकर भी अकेला हे करेगा……

2 ऑवर बाद रात के 12 बजे ……..

बुऊमममम ………के साथ एक ब्लास्ट हुवा और जिस ट्रांसफार्मर से इलेक्ट्रिसिटी आरही थी वो एक ब्लास्ट के साथ उड़ गया……

पशुपति—- वो आगया ह ….वो आया अपनी मर्जी से पर जायेगा नहीं …………उसे और अंदर आने दो……

आज के लिए इतना he….padhte रहने का और लाइक्स थोक के जाने का ……
 
अपडेट 120….

No ओने कनौस…….

जंहा दिव्या बेहोस थी आज सचाई जानकार..

तोह दूर एक शख्स तैयार था कंही निकलने के लिए पर वो निकलता उसे पहले हे उसे आवाज सुनाई दी ुध के पीछे से…

तुम क्या करते हो क्या नहीं मुझे सब पता ह तुम ये करोगे ये हमे पहले हे पता था …..तुम्हारी आँखों मई सब दीखता ह ….

वो शख्स आप

वो--- है हम बर्खुदार तुम्हरे बाप…

वो शख्स रट हुवे —— वो छोटी भाभी माँ थी हमरी उन्होंने हमे कभी ये महसूस नहीं होने दिया की हम गोद लिए हुवे ह या हम अनाथ ह उन्होंने हमेसा हमे परिवार का प्यार दिया …..अब जब हमे पता ह की जिस कुत्ते ने उन्हें मारा ह उसे राज कल मरने वाला ह तोह हम उसे मरता और उसके टुकड़े टुकड़े इन हाथो से करना चाहते ह …..

सामने से तोह फिर तुम अकेले हे जाओगे क्या हमारा हक़ नहीं ह क्या ह और तुम एक दिन पीछे हो वो आज हे हमला करने वाला ह रात को ……इसलिए देरी मत करो मुझे पता ह वो कान्हा ह….

वो शख्स — पर इतनी जल्दी जायेंगे कैसे…..

वो--- हम ठाकुर जगमाल सिंह ह भीमा…..

उनका इतना कहना हे था की दूर से एक गड गडाहट की आवाज सुनाई देने लगी जो धीरे धीरे पास अति gayiiii……aur उनके थोड़ी दुरी पर उतरा हेलीकाप्टर ………

..

चले जाओ मेरे हथियार ले औ…

तोह उधर 3 ऑवर बाद दिव्या को हल्का हल्का होश आने लगा ……

पूरा परिवार उनके पास हे बैठा था………

जोगिन्दर भी पता लगने के बाद उनके पास आगये थे….

जोगिन्दर —- अब कैसा महसु कर रही हो तुम बेहोश हो गयी थी

दिव्या--- मैं तीख हु अब …..

जोगिन्दर--- हम तुम्हारे होश मई आने का हे वेट कर रहे थे ….हम तुम्हे और भी बताना और पूछना चाहते ह बूत तुम मेंटली उन्स्तब्ले हो अभी इसलिए रेस्ट करो….

दिव्या--- उन्स्तब्ले थी पर अब स्टेबल हु ….मुझे पता था की भैयाभाभी अब नहीं रहे ह पर उम्मीद जग गयी थी….

सोनाली---- ाचा बुआ उस दिन क्या हुवा था …..क्या आप बता सकती हो ……

जोगिन्दर--- तुम कैसी बाते पूछ हो रही हो …….कोई जरुरत नहीं अभी ये सब बताने की अभी …. वैसे तोह रात हो गयी ह पर तुम चाहो तोह तुम्हारे पापा से बात कर सकती हो वो भी बहुत तड़पे ह सब को खोकर तुम्हारे मिलने का पता चलेगा तोह उन्हें बहुत खुसी होगी और उनके बरसो के घाव पर मलहम लगेगा…

दिव्या--- क्या आपके पास नंबर ह …..उनके..

Jogindar---muskarakar वो यंहा ए भी थे और ये श्वेता आपके घर रही भी ह ……पर ……

दिव्या —- क्या पर….

जोगिन्दर--- मुस्करा असली बात तोह तुम्हे बतानी ह … पर पहले बात karlo….phir पलटकर सोनाली कॉल लगाओ….

सोनाली ने कई बार कोसिस की पर फ़ोन तोह लगा हे नहीं…..

सोनाली--- कॉल नहीं लग रहा ह उनका ……वैसे हम सुभे चलेंगे हे न ….. सब का चेहरा देखने लायक होगा …..इवन उसका भी पर उसके चेहरे के रिएक्शन तोह हम देख हे नहीं पाएंगे……..

दिव्या — फ़ोन नहीं लग रहा ह सब तीख तोह होंगे न…

सोनाली--- वो अब उदयपुर नहीं मंडावा आगये जंहा आपके परदादा रहते थे जिसका पता आपके पापा को tha….aur सब तीख ह वो एक छोटा सहर ह …….

दिव्या---- मैं भी अब पापा माँ से जल्द से जल्द मिलना चाहती हु…… …

श्वेता--- है हां क्यों नहीं क्यों नहीं …….और जोर जोर जोर से हसने लगी ीी….

संयम--- तू नहीं सुधरेगी…..

सोनाली---- वो इसलिए हंस रही ह क्योकि …..आप अनजाने मई हे अपनों के पास थी खासकर उसके जिसे आप बहुत प्यार करती h…muje दादाजी ने आपकी पूरी बाते बताई ह…….

दिव्या —- कैसी बाते और तुम किसकी बाते कर रही हो …साफ़ साफ़ बताओ…….

दीपिका---- उसकी हे जिसकी बाते रात को हम कर रहे थे ….

दिव्या--- राज की….

जोगिन्दर--- है बेटी राज तुम्हारा अपना सागा ह ……

तुम्हारे हे वंश का ह ….तुम्हारा लाडला …ह जिसे तुम अपने साथ देहरादून लेके गयी थी …घूमने

जोगिन्दर सिंह की बाते सून कर दिव्या की दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी और दिल मई वापस भावनाओ का तूफ़ान उमड़ चूका था…

जोगिन्दर--- तुम्हारे भैया और भाभी का बीटा जिसे तुम मारा समाज चुकी हो वो हे तुम्हारा बचपन का दीपू ह जो तुमसे बिछड़ गया था जिसे अली के सबसे छोटे भाई ने जान पर खेल कर बचालिया था…. आज वो ऊपर वाले की किरपा और तुम्हारे पापा के त्याग से इस लायक हो गया की 100 पर भी अकेला भरी ह और वो निकल चूका ह अपने हर उस इंसान को मौत के घात उतरने जो जिम्मेदार ह सहदेव और विद्या की मौत के तुम्हे क्या लगा था होगा की पशुपति को तुम्हारे लिए मार रहा ह नहीं …..वो अपनी कसम और अपने दादा को दिए गए वचन को पूरा कर रहा ह उसे पता ह की पशुपति हे वो पहली कड़ी ह ….जिसे उसे आगे का रास्ता दिखेगा…….

दिव्या बेचारी अपनी आँखों से आंसू गिरती रही …..उसके होठ कंपनी लगे थे …..उसे यकीं हे नहीं हो रहा था की राज हे उसका दीपू ह जिसे ….वो अपनी भाभी से मांगती रहती थी की दीपू को अपने पास हे रखेगी….. और इसी अहसास से वो जोगिन्दर सिंह की तरफ नाम हुवी आँखों से बोली ….

दिव्या--- राज मेरा दीपू ह …..मेरा दीपू ह ……सुना सोनाली राज मेरा दीपू ह …….

सोनाली — गले लगा कर है बुआ वो आपका दीपू ह वो आपके लिए बहुत तड़पा ह जब से उसे पता लगा ह आप बच गयी थी … वो सबसे पहले देहरादून आ गया और कई महीनो से दिन रात आपको ढूंढ रहा ह…..

दिव्या--- क्या दीपू मुझे ढूंढने हे आया ह …….वो ये बोलते बोलते फुट फुट कर रो रही thi….kyo की वो आज तक अपनों के आने का हे वेट तोह कर रही थी और हुवा भी वही उसका अपना आया और उसे जब बचाया तब वो मरने वाली थी …… उसे कुढ़ समाज नहीं ारः था की वो क्या कहे ….

सोनाली बोली….

बुआ आप सोचो मत …..सब तीख ह अब आपको और नहीं रोना ह आप तोह खुस होवो की आपके अपने आपसे मिल कर कितने खुस होंगे …… …

दिव्या--- दीपू को बोलो वो अभी यंहा आने के लिए निकले …… और उसे सचाई मत बताना……

किसी ने कोई रिएक्शन नहीं diya…..Divya सबको देखने लगी…..

जोगिन्दर सोच कर बोले बेटी वो 2 दिन तोह नहीं ापायेगा…..

दिव्या सवाल भरी नज़रो से देखने लगी ….

जोगिन्दर क्योकि बेटी वो अपनी कसम का आज आगाज करेगा वो अपनी माँ और बुआ के कातिल को मरने गया ह आज पशुपति का इस दुनिया से नाम निशान मिट जायेगा…….

दिव्या--- क्याआआ ….इसीलिए उसने भेजा था हमे बिना बताये …..हमसे झूट कहा उसने….

मनीषा— वो बुआ मैंने हे मन किया वर्ण आप उसे जाने नहीं देती और उसके लिए उसकी कसम उसके दादाजी को दिया वचन पहले ह न ….

दिव्या बेचारी क्या हे बोलती ….फिर भी वो बोली क्या हम उसके पास जा नहीं सकते ह ……… ….मेरा दिल घबरा रहा ह…

जोगिन्दर जा सकते ह पर बेटी अपनी बातो बातो मई रात के 2 बज गए h…..aur अभी तक तोह वो पशुपति के बेस पर अटैक कर चूका होगा…

दिव्या--- पर अकेला कैसेकरेगा वो उसके साथ कोई नहीं ह……..

उसकी इस बात पर सब चुप हो गए …पर उसे क्या पता था की वो अकेले कान्हा था सुरुवात उसने अकेले जरूर करि थी पर एक तूफ़ान भी उसका साथ देने हवा मई उड़ता ारः था तेज़ी से जिसमे एक दिल मई भरसो का गुसा भरा था तोह एक इतनी मारकाट कर चूका था की उसे कुढ़ अंदाज़ा नहीं था और आज रात वो क्या करने वाला था ये अब वक़्त हे बताने वाला था..

ठाकुर जगमाल सिंह ला भीमा मेरी बोतल दे 2 पेग जाने दे सरीर मई फिर न दर्द होगा न थकन …….

भीमा--- ये लीजिये बाबूजी आज आपका अंदाज़ देख मुझे वो पल याद आज्ञा जब उन डकैतों के गाँव घुस अपने सबको काट दिया था…..

जगमाल सिंह मुस्करा दिए ………

तोह वंही ……..जब पशुपति के बेस मई बूम की आवाज हुवी तोह सरे बेस मई हल चल मच गयी …….एक साईरन की आवाज गूंज गयी चारो तरफ कहने को ये जगह मिलिट्री ट्रेनिंग देती थी जिनको मिलिट्री मई भर्ती होना होता था पर हकीकत मई यंहा पशुपति के नए भर्ती किये गए गुंडों को ट्रेनिंग मिलती thi….jo आगे विथल भाई को भी सप्लाई होते थे….. …

ज़ीशान जिसे पशुपति ने बता दिया आगया ह वो ml…..toh वो चरण निचे बेसमेंट से बहार आगया और …..सबको लीड करने लगे ….क्योकि बेस एक कम मई फैला हुवा था….

बूम की साउंड सून तोह अभय और अज्जू भी उछाल पड़े ………

अज्जू क्या राज ने अटैक कर दिया ह …. पर दस मिनट बाकि ह

अभय उसने कहता था साउंड के सुनते हे पोजीशन ले लेना duffer……bhag अपनी स्नाइपर संभल ……..

और दोनों भागे अपनी पोजीशन के लिए जो कल सुभे उन्होंने डीएड की थी ……..उन्हें पता था की राज ने क्या जिमि दरी दी ह…….

तोह दूसरी तरफ ……. अंदर सब्जी सप्लाई लेजाने वाले एक को खरीद लिया था राज ने ….और उसी ने वो बम प्लांट किया था डायवर्सन के लिए और सब को यही लगा की राज अंदर चुका ह पर वो बहार खड़ा था और उसके पीछे कड़ी थी 2 जिद्दी लड़किया जिन्होंने राज की एक बात नहीं मणि और उसके साथ लड़ने के लिए आगयी ……..राज दोनों से हे चिड़ा हुवा था पर वो भी क्या करती एक को जिमेदारी मिली थी तोह दूसरी ने सोनाली से वडा किया था…..

Raj---wo जो सामने फेंसिंग ह उसके पास पाथेर ह उसे 2 कदम लेफ्ट मई ी निचे जाने का रास्ता ह आप दोनों उसमे से घुसकर वो लेफ्ट वाला टावर ह उसको कब्जे मई करना होगा ….और फिर आप दोनों वंहा ब्लास्ट करेंगी दस मिनट बाद ..ok .

दोनों एक साथ ok …उन्दोनो के जाने के बाद ….

राज मन मई इन लड़कियों से पीछा छुड़ाना पड़ेगा वर्ण ये अपनी जान गँवा देगी कभी न कभी ………

राज मन हे मन ये बड़बड़ाता हुवा थोड़ी दूर झाड़ियों के बिच पंहुचा और वो रास्ता ढूंढने लगा और उसे मिल गया वो रास्ता जो बेहद हे सीक्रेट था …राज ने ढकन को हटाया तोह निचे अँधेरा नज़र आया …राज ने पीठ से दोनों कन्फेस निकले और दीवार मई घोप कर धीरे धीरे निचे उतरने लगा वो बड़ी सावधानी से निचे जा रहा था क्योकि उसे पता था की एक गलती उसे फांस्वा सकती ह करीब 25 फ़ीट निचे उतरने पर उसे निचे डिम लाइट नज़र आयी ..और वो निचे देख कर धीरे से उतर गया …जब उसके कदम निचे ठीके तोह उसने पाया की वो एक बड़ी कमरे मई ह जो बड़े बड़े बॉक्सेस से भरा हुवा h…..raj धीरे धीरे आगे भाड़ा उसे अहसास हुवा और वो तुरंत हे साइड मई कुढ़ गया तभी एक हथोड़ा आया और दीवार मई लगा …….उसने पीछे मुड़के देखा तोह एक 6 फुट का पहलवान पीछे खड़ा था और वो दीवार मई अंदर घुसा हथोड़े को बहार निकल रहा था…. उसने हथोड़ा निकला और तुरंत हे राज की तरफ बढ़ गया ….पर इस बार राज तैयार था उसने भी चाकू को हाथो मई कसल्या इस बार उसने राज के सर पर वार किया राज तुरंत अलग हो गया और जैसे हे उसने हथोड़ा वापस ऊपर उठाया राज ने फुर्ती से उसके एक पेअर मई चाकू घुसा कर निकालिये ………वो चीका और रियेक्ट करता राज ने उसके दूसरे पेअर मई घुसा दिया वो पहले हे नंगे पाँव था इसलिए दोनों पैरो से खून की धार बहने लगी और उसकी स्पीड धीमहि हो गयी ……राज ने अपना नाइफ को हवा मई उछाला और कुढ़ कर एक किक मरी जिसे चाकू तेज़ी से जेक सामने आदमी की चेस्ट मई जा घुसा और वो सीधा उल्टा निचे हमेसा के लिए गिर गया ….

राज ने आसपास देखा और एक बॉक्स को खोला और मुस्कराने लगा …फिर वापस बंद कर आगे की तरफ चल दिया ….

तोह वंही बहार…

शिवानी और श्रुति दोनों टनल के अंदर उतरगयी पर सामने मिले उन्हें 4 गुंडे जो उसी टनल को गार्ड कर रहे थे उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा और सामने अटैक करने केलिए कुढ़ पड़े पर वो करते उसे पहले हे 4 हलकी आवाज हुवी और वो चारो निचे गिर गए क्योकि श्विनी और स्वाति के पास सीलेंसर लगी पिस्टल थी…..

जब वो दोनों आगे बढ़ी थी उन्हें 2 रस्ते दिखे …. और उन्हें पता था की किस तरफ जाना ह और दोनों चल पड़ी …और थोड़ी दूर चलने पर वो एक हॉल मई पहुंची और उनके एक कदम रखते हे क्लिक की आवाज हुवी और कुछ हे सेकण्ड्समै उस कमरे मई 8 आदमी आगये जिनके हाथो मई 2 फ़ीट की आयरन रोड्स थी …….वो दोनों भी तैयार हो गयी अपनी पिस्टल अंदर दाल kar….dono की आंखे मिली और भीड़ गयी दोनों सामने जबरदस्त फाइट हुवी ….पर दोनों हे त्रिनेड थी इसलिए कुछ मिनट्स मई हे दोनों ने सबको मार गिराया पर शिवानी लड़ाई के बाद अपने बूब्स को बरी बरी मसल रही thi…..toh श्रुती हल्का सा लड़खड़ा कर चल रही thi…..dono हे 5 मिनट के लिए रूक गयी …

शिवानी— हरामियों की रोड्स मई करंट था मेरे सीने पे लगा दिया …….

श्रुति—- यंहा मम एक कुत्ते ने piche….se करंट लगा दिया..

दोनों ने हे अब अपनी गन्स को हाथ मई रख लिया और चल दी आगे टावर की तरफ अब वो गन उसे करनेवाली थी

तोह राज चलते हुवे पंहुचा एक बड़े से हॉल मई जंहा बहुत सरे गुंडे एक साथ कार्ड्स खेल रहे थे…. उनोहोने पीछे से आते राज को देखा तोह सभी एक साथ खड़े हो गए …….

राज ने बिना सेकंड गंवाया मूव किया फर्स्ट कट ……मूव किया दूसरे की चेस्ट mai…chakuu घोंपड़िया

मूव तीसरे के गर्दन पर कट फिनिश

मूव किया फोर्थ के अटैक को डॉज किया और बैठ कर दोनों लेग्स मई 8 कट मार दिए वो कांपता हुवा निचे गिर गया …फिर भाग कर एक जम्प मरी और सामने वाले के सर मई चुरा पूरा घोप diya……akhri 2 बचे थे वो भागने लगे तोह पीछे से खिंच कर चाकू उनकी गर्दन मई घोप दिए …………राज ने चेक किया सब मर गए थे फिर उसने सामने का दरवाजा खोल आगे बड़ा तोह एक किक चेस्ट पर पड़ी और उड़ता हुवा वो पीछे आकर गिरा …और लेते लेते हे सामने देखने laga……ki किस्मे इतनी ताकत ह…. तोह सामने से एक 5.10 इंच का लोअर टी शर्ट मई बाँदा आया…. और पॉकेट से एक रोउंडिंग्कनीफे निकल लिया

आज के लिए इतना हे


सैटरडे या सुदय को फाइट सिंगल अपडेट मई ख़त्म हो जाएगी
 
121 अपडेट ों संडे आफ्टरनून 6पं

सॉरी पूरा नहीं कर पाया इसलिए 6पं तक पोस्ट कर दूंगा
 
एक part मई फिनिश हे नहीं हो रहा ह
 
अपडेट 121

बैटल एंट्री गाड़फाथेर

वो आदमी बिना बोले राज की तरफ भद्दा तोह राज भी फुर्ती से जम्प मार्के खड़ा हुवा और फाइट की पोजीशन मई आगया दोनों आमने खड़े हो गए …. सामने से एक वार आया राज ने रोका और एक किक फेस पे मार्डी उसके ….सामने वाले ने अपना चेहरा सहलाया और वापस फाइट की पोजीशन मई आगया ….. दोनों एक बार फिर एक दूसरे को घूरने लगे राज ने राइट पंच दिखा के लेफ्ट पंच मू पे जड़ दिया तोह सामने वाले ने भी गिरते वक़्त एक किक राज के पेट पे मार di…..raj उसकी स्पीड देख हल्का सा मुस्कराया और वापस पोजीशन मई आगया उसने 5 कदम पीछे लिए और सामने वाले को देखा और ज़िग जग पोस्टिव मई सामने की तरफ भगा सामने वाला शख्स समाज नहीं पाया की राज क्या करना चाहता ह ….उसने अपना नाइफ सामने कर लिया तभी राज ने नाइफ सामने उसकी तरफ भागते हुवे उछाल दिया सामने से अपनी तरफ नाइफ तेजी से अत देख वो एक तरफ झुका और जब तक संभल पता राज ने दोनों हाथो की मुठी बना के पूरी फाॅर्स से चेस्ट मई जड़ दिया जिसका फाॅर्स इतना तेज़ था की वो उड़ता हुवा पीछे दीवार से टकरा गया…. अभी वो दर्द से बिलबिलाता हुवा खड़ा हे हुवा था की राज ने अपना घुटना उसकी चेस्ट मई दे मारा और हड़िया टूटने की आवाज के साथ उसकी आंखे चौड़ी होती गयी और वो दीवार के सहारे निचे गिरता गया….

राज ने उसे एक लुक दिया और आगे निकल gaya…..phir एअर बड जो कान मई लगा था उसे तप किया …. और बोलो

राज--- 2 मिनट्स लेफ्ट ……

सामने से आवाज आयी गिव उस जस्ट ओने मिनट वे अरे रेडी ….और राज के एअर पीेछे मई फाइट की आवाज आने लगी और फिर आवाजाई ….. वे अरे इन पोजीशन ….

राज--- ok 5

10 मिनट्स एंड ब्लास्ट ……और है ….. जो फॉर नार्थ direction…..clear थे क्लियर आल कोई अंदर न आने पाए और कोई बहार न जाने पाए………

और राज अंदर की तरफ चल दिया…

राज--- इसने इतने सालो मई खूब पैसे जमा किये ह …. इतना तोह ये करेगा हे इसका बेस वाकई बहुत सेफ ह जंहा परिंदा भी पर नहीं मार सकता ह हरकदम पर खतरा हे खतरा ह…..

राज ये सब मन हे बोलता हुवा आगे चलता गया एक संकरी गली थी सामने जिसमे हल्का उजाला हे था राज उसमे संभल संभल के कदम रखने लगा ये उसका पहला मिशन था अकेले आज उसके साथ न सभी थे न आग भाई न सोनाली और न उसका साया सुनील…. आज वो अकेला था ….इसलिए वो कोई गलती नहीं करना चाहता था वो हर रूम को चेक करता जा रहा था ….तभी उसे जोर से बम फटने की आवाज आयी …..

बहार…….

शिवानी और श्रुती अगले टावर की तरफ चिपटे चिपटे जा रही थी ….राज के उम्मीद के विपरीत दोनों की जोड़ी ने 15 गुंडों को मार दिया tha……indono पर अलग हे भूत sawartha….abhi वो थोड़ी हे आगे भड़ी थी की दीवार के ऊपर से आवाज आयी हैंड्स उप …..वो दोनों चौंक सी गयी उन्हें उम्मीद नहीं थी की इतना धयान से एते हुवे भी उन्हें कोई देख लेगा ……पर अभी वो कुछ और सोचती जिस आदमी ने उन्हें हैंड्स उप के लिए कहा था वो निचे आके गिरा उसका सर खरभुजे की तरह फटा हुवा था ……..

शिवानी--- ईसाई किसने मारा….

श्रुती --- हमारे बैकअप अज्जू और अभय ने ….

दोनों धीरे धीरे सामने खड़े वाच टावर की तरफ बढ़ गयी उन्हें बहुत से लोग बेस के डोर्स की सेफ्टी के लिए तोह बहुत सरे जंहा बम ब्लास्ट हुवा था उस तरफ जाते हुवे दिखे ….

शिवानी--- ओह माय गॉड इतने सरे …..

स्वाति--- यंहा जरूर हमारी सोच से बड़ा ह …….

तोह अंदर राज उस संकरे हॉल को पार करके आगे आगया जंहा साइंस लैब टाइप बानी हुवी थी और एक स्टोरेज बना हुवा था… …राज ने झुक कर देखा तोह ड्रग्स अलग अलग टेबल्स पर बिखरा हुवा था और कुछ पर पैकेजिंग चल रही thi…..wo लोग पैकेजिंग मई इतने बिजी थे की बम फटने पर भी उन्हें फर्क नहीं पड़ा वंहा 4 आदमी गन के साथ सिक्योरिटी कर रहे थे राज ने कुछ पल देखा ….उनकी पोस्टिव को देखा और फिर एक पीछे जाकर उसका गाला काट दिया और तुरंत दूसरे के पीछे चला गया और पलट ते हे उसका गाला बी काट दिया अब एक कौन मई दो गॉर्ड जो बचे थे राज ने उनके साथ भी वही kiya……ab जो पैकेजिंग कर रहे थे वो हे बचे राज उनके पास गया और सबको चेक करके उन्हें वही बंद करके आगे निकल गया …… आगे 2 गुंडे मिले जिन्हे उसने बेहद हे आसानी से मार diya……tabhi उसका दिमाग ठनका ……

तोह बहार ….शिवानी और श्रुती ने जल्द हे दूसरे टावर को भी कब्जे मई ले लिया और पहली घेरा बंदी को पार करके वो अंदर बने हुवे लिविंग हाउसेस की तरफ चल दी jo..sarkari क्वार्टर्स की तरह वंहा 2 रूम्स वाले 2 मंजिला माकन बने हुवे थे जो कुछ बहार से बंद थे तोह कुछ अंदर से बंद थे वो दोनों सबको अवॉयड करती हुवी आगे निकल गयी और एक तरफ टेंट्स लगे हुवे थे उसमे हल्का हल्का उजाला था उसको 10 लोग गार्ड कर रहे थे उस तरफ बढ़ गयी ……..

तभी उनके एरा बड पे आवाज हुवी …….it's ट्रैप it's ट्रैप रन ……

एअर बड्स पे आरही आवाज को सुनते हे …. शिवानी और श्रुती तुरंत पीछे की तरफ भागी और जब वो सरकारी जैसे क्वाटर्स के पास गयी तब बहुत सरे गुंडों ने घेर liya…….unke पास अब कोई चांस हे नहीं था बच निकलने का इसलिए उन्होंने खुद को सरेंडर कर दिया………

उधर राज ….को जैसे हे ये महसूस हुवा की ये ट्रैप ह उसने तुरंत हे साथ मई लाये स्मोक बॉम्ब्स को फोड़ दिया और कुढ़ मास्क पहन कर धुंवे मई गायब हो गया ……..और कुछ दिएर बाद एक खुली जगह मई दीवार के पास पंहुचा एअर बड्स के थ्रू कांटेक्ट करने लगा बूत उसका कांटेक्ट किसी से नहीं हुवा ……राज समाज गया की बहुत बड़ी गड़बड़ ह उसने आसपास देखा तोह उसे एक बड़ा सा वेयरहाउस सा दिखा वो तुरंत हे उस तरफ भगा 3 जम्प मई रूफ परपहुच गया और आसपास का जायजा लेने लगा पर उसे चारो तरफ शांति हे दिखी ….

रजधीरे से इतना बड़ा ब्लास्ट हुवा इतने लोग मरे गए पर यंहा इतनी शांति ……..

तभी माइक से आवाज आयी……

स्वागत ह आपका पशुपति के darbarmai……ap हमारे सम्मानित अतिथि ह …इसलिए दरबार मई हाजिर होव और हमे आपका राखत से सामान करने का सौभाग्य दे आखिर अपने हमारा इतना सम्मान जो भदया h….hamari बरसो की म्हणत पर ….कलंक जो पॉट दी h….ab हम भी तोह आपको डी वापस देंगे सम्मान राखत से …..

राज समाज गया की वो फंस गया पर वो भी तैयार था इसके लिए …..पर राज के पास अब कोई चार नहीं था ….उसे अंदाज़ा हो गया था की शिवानी और श्रुती भी पकड़ी गयी ह….

राज ने कुछ दिएर सोचता रहा …और फिर वापस से छिपकर एक तरफ निकल gaya……aur जंहा जंहा से निकलता वंहा छोटे छोटे बॉम्ब्स प्लांट करता जा रहा था जो अभय ने दिए थे फाॅर्स करके बुरे वक़्त के liye…………usne चारो तरफ मिनी बम प्लांट कर दिए…

और कुढ़ ग्राउंड मई आकर खड़ा हो गया …..

कुछ दिएर बाद ज़ीशान अपने 50 आदमियों के साथ निकल के आने laga…….zishan 50 मीटर की दुरी पर आकर रूक गया और राज को देख कर एक तरफ इशारा कर दिया ….राज ने उस तरफ देखा तोह शिवानी और स्वाति ….कड़ी thi…….raj ने गर्दन हिलाड़ी और ….अपना जैकेट उतारकर निचे गिरा दिया और अपने हाथ ऊपर कर दिए …..जैसे कह रहा हो सर्च कर सकते हो मेरे पास कुछ नहीं h……zishan का एक आदमी पास गया और सर्च करने लगा….

गुंडा — बॉस इसके पास कुछ नहीं. ह….

फिर ज़ीशान राज के पास आया….

ज़ीशान----- कीड़े तू बहुत उछाल लिया ….तेरी वजह से मेरी इज़्ज़त ख़राब हुवी .भाई को निचा देखना पड़ा….

इतना कह कर एक साथ कई पंच राज को जड़ दिए जिसे राज दूर जा कर पीछे गिरा ……..फिर ज़ीशान उसे घसीट कर वंहा ले आया जंहा शिवानी और श्रुती थे….

ज़ीशान----- तू और तेरी ये रंडिया सब मरोगी बहुत वीडियो बनता ह न तू अब तुम्हारे बनेगे वीडियो ….. बस देखते जाओ…..

राज जो अब दोनों के पास आगया था उसने हाथ को पीछे लेजके इशारा कर दिया जिसे वो दोनों भी समाज गयी…..

ज़ीशान ने आगे आकर खिंच कर एक लात और मरी ……जिसे राज पीछे की तरफ जाकर गिरा….

ज़ीशान----- सिर्फ एक रंडी के लिए तूने इतना सब किया तेरे मरने के बाद उसे हे मरेंगे hum………..sale चूतिये तू और तेरी ये छमिया हमे मरने आगये यंहा मजाक चल रहा ह… क्या सोचा था मेरे 100 आदमी मारकर डरा देगा 1000 खड़े कर दूंगा …..यंहा इसीलिए बुलवाया ताकि तू हमारे जाल मई फंसे. ……..

ज़ीशान ये बोलता जा रहा था और राज को मरता जा रहा था ….

ज़ीशान अपने आदमियों से जाओ भाई को बुलाओ …..

और कुछ हे दिएर मई आया पशुपति सामने और एते हे राज को बुरी तरह मरना सुरु कर दिया…..

पशुपति —सिर्फ एक औरत के लिए नहीं ह ये सब ह न ……ये मुमकिन नहीं ह बता क्या दुश्मनी ह तेरी मेरे साथ ……क्योकि एक औरत की वजह से होता तोह तू उन औरतो को जो गवाह थी मरने न देता वीडियो लीक कर देता तोह क्या वजह ह बता……

और फिर राज को लात जड़ दी …..

राज जो निचे गिरा हुवा था मू से निकलते हुवे खून को थूका और जोर से हसने laga….ha है है है है है है है है है …..

राज---- तू सच मई इतना बड़ा बेवक़ूफ़ ह जो अब समाज है है है है

राज की हंसी की आवाजसे सबकी रूह एक बार काँप गयी क्यों की उस सन्नाटे मई सिर्फ वो जोर से हांसे जा रहा था ..

राज--- तेरी मेरी दुश्मनी तेरी जवानी की ह chutiye…..tune क्या सोचा तूने मुझे यंहा पकड़ रखा ह है है है है ..

पशुपति भी जोर जोर से हसने लगा और बोलै तुजे मैंने कभी काम समजा हे nahi…..tu पुराणी दुश्मनी बता के गया तभी मई समाज गया था की पुराण झकम ह तोह तयारी करके आया होगा ……इसलिए ये dekh..tere लिए मैंने भी पूरा इंतजाम किया tha…….aur फिर उसने 3 बार तालिया बजायी और राज के लेफ्ट और राइट और पशुपति के पीछे बेसमेंट के दरवाजे से लघबघ 200 आदमी और आने लगे ….

पशुपति—- तूने क्या सोचा मैं यंहा से भाग जाऊँगा है है है मैं यही जंहा खड़ा हु न उसी के निचे से चला जाऊंगा इस ग्राउंड के निचे मेरा बेस ह .. ये जो देख रहा ये सब हठी के दन्त ह समजा एक ब्लास्ट न सबूत न सक ….. न gawah……ab भोंक क्या दुश्मनी ह मुझसे…..

Raj---kuch दिएर पशुपति को देखता रहा और बोलै ….. आज से 17 साल पहले तूने 3 औरतो को और एक बचे को मर था………

पशुपति मैंने तोह बहुतो को मारा ह ….

राज —- ाचा तोह तुजे याद नहीं तेरे 25 आदमी भी तोह मरे गए थे भूल गया ……

पशुपति ये सून कर चौंक गया और उसकी यादे ताजा होने लगी क्योकि उसके इतने आदमी झक्मी हुवे थे और वो खुद भी घायल हो गया था …फिर पशुपति बोलै तू ……tu……koun ह….

राज--- मैं मैं वही बचा हु जिसे तू उस दिन मार नहीं पाया था…..

पशुपति बुरी तरह चौंक गया क्योकि आज भी याद ह की उसने झूट कहा था की उसने सबको मार दिया ह ……यंहा तक की दिव्या को भी बाद मई पकड़कर मार दिया था….. ये भी झूट कहा था…

पशुपति---. ये झूट ह

राज--- खास तूने मार दिया होता पर तूने गलती की पशुपति…….

Pashupati---ne अपने आदमियों को ईशर किया राज को जान से मरने का ….

पशुपति के आदमी आगे की तरफ भड़ने लगे तब पशुपति बोलै ाचा हुवा तू आज मिल गया दिल मई बस तुजे और उस कुटिया को मरने का मलाल था चल आज एक तोह पूरा हो jayega…ha है है फिर गुसाई से ..है मैंने मारा था ……..

जब पशुपति ये बोल रहा था …तब पशुपति के आदमियों ने राज को पकड़ लिया था ..और एक जाने ने उसके पेट मई मुक्का मार दिया ….जिसे राज घुटनो पर आगया उसके कानो मई पशुपति की आवाज गूंज रही थी….

है मैंने मारा था और मुस्करा कर पता ह इन औरतो के साथ जो आदमी थे ने उनको घेरकर सबके सरीर के हर अंग पर इतने निशान दिए की उनकी चीखे गूंजती रही ……फिर धीरे धीरे सरीर के टुकड़े करे ताकि वो जिन्दा रहे और तड़पे खासकर वो अली और पर्वत सिंह जो मरते मरते भी चिक रहा था मेरी भाभी को छोड़ दो उन्हें मत मारो ……बहुत लड़ा था इतने झकम दिए थे उसके सरीर पर फिर भी लड़ता रहा ….. और साला मरते वक़्त भी अपने भाई की धमकी दे रहा tha….sale के इतने टुकड़े किये थे की गिनाई भी नहीं गए होंगे है है है है

राज के सरीर पर पंच पड़ते जा रहे थे वो दर्द तोह जैसे भूल हे गया अपने चाचा की दर्द नाक मौत का जिक्र soonkar….uski आँखों लाल हो रही thi…pal…..pal…..

और तुजेपता ह वो दोनों औरतो को तोह दूसरे लोग ले गए क्योकि उनको मारने का आर्डर नहीं था न पर बचे वाली बहुत घायल हो गयी थी पक्का वो मर गयी होगी ……..साली मेरा नुकसान करा गयी

पशुपति की ये बात सून राज का दिल और तेज़ धड़कना सुरु हो गया…….

है वो तेरी माँ थी छोटी वाली को बचने के लिए आगे आगयी थी …..है है है है मेरे 5 करोड़ का नुकसान कर गयी वो …….

राज की आँखों से आंसू हे बाह निकले इतनी दिएर मार वो इसी हकीकत को जानने के लिए हे तोह खा रहा था उसे पता था की वो पशुपति के सामने हरा हुवा आएगा तब हे सचाई पता लगेगी और आज उसे पता लग गया की उसकी एक ाएस जो उसकी माँ के लिए थी वो भी ख़त्म हो गयी ……वो बस मार खता रहा ………

मुझे पता होता की तू उसी की औलाद ह तोह तुजे पहले हे मार देता वैसे भी तेरा खंडन मई कोई जीवित ह तोह वो भी जल्द हे मरेगा ….क्योकि तू जिन्दा ह मतलब किसी ने तेरी मदद की ह तोह वो भी मरेंगे वैसे हे जैसे तेरा बाप तेरी माँ मरी thi…….ha है है

राज जो अलग हे सोच मई चला गया था वो पशुपति की आखिरी बात से झटके से खड़ा हुवा और सामने वाले की गर्दन पकड़ झटके से मरोड़ di…..ye इतनी जल्दी हुवा जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी …….

राज ने अपना हाथ ऊपर किया और निचे कर दिया और उसी के साथ एक साथ कई ब्लास्ट हुवे …….. पशुपति के गुंडे जो राज के पास थे वो वापस pashupati---ke पास आगये….

तभी 2 गोलिया शिवानी और श्रुति के पास वालो के लगी और उनके चेहरे खरभूजे की तरह फैट गए उन्होने उनके हथियार उठा लिए

पशुपति---- मार दो इसे भी आज़ाद करो जिंदगी से इसकी लाश के हर टुकड़े के 10 लाख डुंग….…

पशुपति के ये बोलते हे एक साथ 200 गुंडों की भीड़ राज की तरफ दौड़ पड़ी….…..

शिवानी—- राज भागो जल्दी…..

राज हिला भी नहीं उसकी नज़र बस सामने की तरफ पशुपति पर थी अब पशुपति के गुंडों और राज के बिच सिर्फ 30 मीटर का फैसला था …

ये सब पशुपति मुस्करात हुवा देख रहा था उसके साथ उसके खास आदमी और जीशान थे जो धीरे धीरे पीछे की तरफ अपने बेसमेंट मई जा रहे थे……

अब राज निहथा खड़ा सबके सामने उसकी आँखों मई न दर था न खोफ्फ़ था तोह सिर्फ क्रोध जिसमे आज पशुपति को जलने का इरादा दिख रहा था ….जो कह रहा था आज सब जलेंगे राज के क्रोध मई पर उसने सामने से आरहे हथियारों से लेस्स आदमियों की तरफ देखा भी नहीं जो मौत बांके उसकी तरफ आरहे थे…

तभी रात के उस अँधेरे वातावरण मई मौत की गड़गड़ाहट सुनाई देने lagi….wo गुंडे राज पर हमला करते उसे पहले हे गोली की आवाज चलने की आवाज आयी जिसकी आवाज ये बता रही थी की ये गोली 10 इंच मोती दीवार को भी भेद सकती ह …..वो राज केपास से गयी और पशुपति के आदमी को लगी और वो गोली के झटके से पीछे की तरफ उड़ गया फिर एक और गोली फिर एक और गोली ….की लगातार आवाज अति रही फिर रीलोड की आवाज आती और गोली की आवाज गुज उठती.. जब गोली की आवाज रुकी तोह एक भरी भरकम आवाज घुन उठी…

खून मई उबाल इतना ह की बारूद हमरी सांसो से हे जल उठता ह …………

…और हेलीकाप्टर की लाइट्स निचे जमीं पर गिरी जंहा ठाकुर जगमाल सिंह और भीमा कंधे पे शार्ट गन लिए और मु मई सिगार जला कर खड़े थे……

शिवानी जगमाल सिंह को देखते हे खुस हो पड़ी ……

श्रुति--- कौन ह ये…

शिवानी---. ये बापू के baap......….Godfather ह

लाइट मई दोनों का चेहरा राज ने देखा तोह चेहरे पर एक फीकी मगर मुस्कान आगयी …..

दादाजी —- देख क्या रहा ह काट दाल कुत्तो को इन्हे हम देखलेंगे इतना कहकर अपनी पीठ मई लगी तलवार उछाल दी ….

याद रखना निर्वाण तड़पता ह तड़पता ह रूह को…

राज ने तलवार पकड़ी और सीधा भाग गया तोह पीछे 200 लोगो पर अजय और अभय की स्नाइपर शॉट्स तोह साइड्स से श्रुती और शिवानी फायर करने लगी और सामने मौत के 2 दूत लागर तार अपनी शार्ट गन्स से सरीर मई बड़े बड़े छेद कर रहे the…..charo तरफ लाशे हे लाशे थी और शॉर्ट्स से हुवे मांस के चिथड़े …. जब शोरे बंद हुवा तब अजय और अज्जू भी निचे आगये….

शिवानी नमस्ते किया और इशारे से सब समजा दिया …..और वो लोग भी दस मिनट तक हुवी लड़ाई के बाद राज के पीछे की तरफ चल दिए……..

तोह वंही राज उस बेसमेंट की तरफ जाने वाले रस्ते पर पाहुवच गया….. उसने बेस के दरवाज़े को खोला तोह निचे सीढिया दिखाई थी और राज बिना देरी के निचे उतर गया निचे सीढिया एक बड़े से हॉल मई खुली ……हॉल के चारो तरफ शीशे हे शीशे थे जिसमे उसका हे रिफ्लेक्शन दिख रहा था ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई मिरर हाउस हो राज को गल्लारी दिखी उसकी तरफ वो चल दिया बूत वो शीशे से टकरा गया क्योकि वो रिफ्लेक्शन था ..

राज कंफ्यूज हो गया तभी 2 लोग सामने से हाथ मई नाइफ लेके ए और राज को देखने लगे एक ने एक नाइफ धीरे से राज की तरफ फेंक दिया ….

राज ने वो नाइफ उठा लिया और दोनों को इशारा किया और वो दोनों एक साथ अटैक करने लगे एक ने नाइफ घुमाया तोह राज ने उसको ब्लॉक किया तोह दूसरे ने किक जड़ Di…..raj दुबारा से खड़ा हुवा और वापस तैयार हुवा अबकी बार उसने पहले वॉर किया और एक को आगे कर लिया ताकि दूसरा अटैक न कर सके राज ने उसके दोनों हाथ ब्लॉक करलिए और खींचकर पेट मई किक जड़ दी जिसे वो दूर जा कर गिरा …. और अब एक बचा उसने अटैक किया तोह राज ने तुरंत साइड हटकर उसकी चेस्ट मई चाकू घुसा दिया और दूसरा जल्दी से खड़ा हुवा और मरने आया तोह ….राज ने चेस्ट मई से चाकू निकल सामने वाले की तरफ फेंक दिया उसने चाकू को झुक कर डॉज किया तब तक राज सामने था उसने एक पंच पूरी ताकत से उसके दिल पे मार दिया उस पंच मई राज की पूरी पावर थी जिसकी वजह से उसका दिल उसी समय रूक गया और ववनहि मर गया …..राज आगे की तरफ निकल गया तोह उसके सामने खड़ा था ज़ीशान और उसके पीछे बैठा पशुपति…….

दोनों की आंखे आपस मई टकरा गयी जिसमे एक दूसरे का मरने का बुलंद इरादा था……


एक अपडेट मई फाइट ओवर नहीं हो पति क्योकि अभी बहुत कुछ बाकि ह………. और अपडेट काफी बड़ा हो गया था ी होप अब रेस्पॉन्स भी वैसा हे मिलेगा……
 
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