Adultery Raj-- hero of the family - Page 38 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट 122

वॉर बिटवीन तवो..

ज़ीशान पशुपति और राज के बिच खड़ा था और उसके साथ खड़े थे 2 और दोनों के हे चारे एक जैसे मास्क से कवर थे …..

पशुपति ने एक बटन पुश किया और पीछे का दूर एक मोठे लोहे के दरवाजे से क्लोज हो गया…….

पशुपति--- अब तू ह और हम ह ……अजा और ले ले बदला ….है है है .. तुजे भी तेरी माँ के पास भेज देता हु है है है है…..

राज ने कोई रिएक्शन नहीं दिया बस चुप चाप सामने देखता रहा उसके चेहरे पर सिर्फ एक हे एक्सप्रेशन था उसने एक भी सब्द नहीं कहा और हाथ मई पकड़ी तलवार जो पशुपति का पीछे करते वक़्त गुंडों को मरते हुवे खून से सनी हुवी थी उसको एक बार झटका दिया जिसे सारा खून साफ़ हो गया उसे पीछे तंग लिया उसने सोच लिया था की वो अपने हाथो से सजा देगा और आगे बढ़ गया …..सामने से वो दोनों मास्क वाले भी आगे आ गए ….इनदोनो ने मार्टिकल आर्ट्स के फिघ्टर्स की तरह पोजीशन ले li…par राज की निगाहे पीछे बैठे हुवे पशुपति पर थी … उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया बस चलता गया और सामने से आरहे पहले वाले के वार को रोका तोह उसने तुरंत फुर्ती से किक मरी जिसे राज ने कोहनी से ब्लॉक कर दिया उसने लगातार कई सरे पंचेस मरे जिसे राज रोकता गया और एक किक उसकी रिब्स पे जड़ दी ….जिसे वो साइड मई जाकर गिरा …..दूसरे बन्दे ने आगे बढ़ किक मारनी चाही तोह राज ने लेफ्ट हैंड से ब्लॉक कर दी … तोह उसने लगातार पहले निचे लेग पर फिर रिब्स पर और फिर सर पर किक मरी ये तीनो किक उसने एक लेग पे खड़े होकर मरी थी जिसे राज ने एक पेअर से और हाथ से ब्लॉक कर ली थी और लास्ट मई राज ने घूमकर राउंड किक उसकी चेस्ट पर जड़ Di…jisai वो दुइ जा कर गिरा….. निचा गिरा हुवा आदमी और दूसरा आदमी. अब दोनों एक साथ खड़े होकर एक लेफ्ट से तोह एक राइट से वार करने आगये .. लेफ्ट वाले ने पंच मारा तोह राज अपने लेफ्ट हैंड से रोका और दूसरे की आरही किक को अपनी राइट लेग से ब्लॉक कर diya…….ab राज का गुसा भी बढ़ रहा था…….

उसने लेफ्ट वाले की आरही किक को ब्लॉक भी नहीं किया और अपने लेग मई फंसा कर मोड़ दिया जिसे एक दर्द नाक चिक गूंज गयी वो घुटनो के बल बैठ gaya..raj ने भी बिना रुके हे अपना राइट पंच उसके जबड़े के निचे से जड़ दिया ….कड़क से गर्दन टूट गयी ……और वो उल्टा हे लेट गया….. दूसरे ने अपनी साथी की मौत देखि तोह उसने लगातार कई वार किये राज ने सबको ब्लॉक कर दिए और हर वार को ब्लॉक करते वक़्त उसको भी कई पंच कई किक जड़ दी….. …और आखिर किक उसके साइन पर मरी वो तीख ज़ीशान के पास जाके गिरा….. और खून थूकता हुवा हमेसा के लिए दुनिया से निकल गया….

राज अभी भी बिना किसी एक्सप्रेशन के पशुपति को हे देख रहा था उसके मन मई तब से यही चल रहा थकी क्या माँ मर गयी …… ह ……उसे ये सवाल पशुपति से पूछना था की कौन था इन सबके पीछे आखिर उसने ये सब पूरी प्लानिंग के तहत हे तोह किया था ताकि किसी को उसका निर्वाण परिवार से होने का पता भी न लगे ….पशुपति को बर्बाद करना …..उसके पीछे से पॉलिटिशंस और बरषत पुलिसवालो का सपोर्ट हटाना ताकि जब ये गायब हो तोह सबको लगे फरार हो गया और सीबीआई पुलिस का चक्कर न पड़े और उसका नाम हाईलाइट न हो कोई भी उसके बारे मई न जान पाए और वो पशुपति से साडी जानकारी निकलवा सके इसीलिए उसने खुद को उनके हवाला किया उसे दर था की मौत के दर से पशुपति क्या पता सच न बताये तोह वो कैसे आगे भडेगा ..…….वर्ण वो पशुपति को कभी भी मार सकता tha…..yahi सब राज के दिमाग मई था…..

ज़ीशान----- मैंने तुज जैसा नहीं देखा ह जो आज इतने सालो बाद भी बदला लेने आगया …

राज--- तू कोठे की पैदाइश ह इसलिए माबाप का प्यार नहीं समजेगा…….

ज़ीशान का ये सून कर खून हे खोल गया क्योकि राज ने सच कहा था….

ज़ीशान----- तेरे हर अंग को मैं अपने हाथ से तोडूंगा विश्वासकर कोई हथियार नहीं…..

राज —- मी तू…

दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आगये जीशान जंहा 6 .5 फ़ीट के चौड़े सरीर के साथ खड़ा था तोह सामने राज करीब 6 फ़ीट की सालो …मेहनत की भट्टी मई ढले सरीर के साथ था ………

ज़ीशान ने एक हाथ का ताकतवर किया राज ने अपने हाथ से ब्लॉक किया पर जोर इतना था की राज साइड मई 2 कदम खिसक गया फिर ज़ीशान ने लात का वार किया जिसे राज ने साइड मई होक डॉज कर दिया…. और एक किक साइड से हे मू पर जड़ दी जिसे ज़िसन भी एक कदम पीछे हैट गया ….राज ने आगे बढ़ कर ज़ीशान के चेहरे पर एक साथ कई पंच जड़ दिए पर ज़ीशान ने दर्द मई भी राज को पकड़ा और उठाकर फेंक दिया ……राज ने गिरते वक़्त पेअर का उसे किया और साफल्य फर्श पर उतर गया ……

पशुपति--— मार डाल ज़ीशान …..हमे निकलना भी ह…

राज---- मार दाल मार दाल ………..मार दाल…….. तुजे मैं चुटिया लगता हु तू रूक सेल अपने हाथो से चिरुंगा फाड़ूंगा ये वडा ह …..मेरा tujse….tu बस इंतज़ार कर…

ये कहते कहते राज ने पहली बहार अपना आप खोया और ….तुरंत हे ज़ीशान की तरफ भागने लगा …

ज़ीशान ने फ़ौरन हे अपने हाथ से वार कर दिया ….. पर राज ने निचे झुक कर उसके वार से बचा और ज़ीशान को कमर से पकड़कर उठाते हुवे पूरी ताकत से पीछे की तरफ उठा के फेंक दिया ज़ीशान सीधा पीछे की दीवार से टकराया और निचे गिरा …….ज़ीशान दर्द से करते हुवे दुबारा से खड़ा होने की कोसिस करने लगा. तोह राज ने बिना रुके एक साथ कई पंचेस उसके पेट मई जड़ दिए ….. … ज़ीशान ने अपने हाथो से उसे ढाका दिया पीछे …..और दीवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया …..और कमर मई लगा खंजर निकल लिया ………राज ने ये देखा तोह उसने भी तुरंत दादा जी की दी हुवी तलवार निकल ली …..ज़ीशान ने पहला वार पेट पर किया ….एक दर्द नाक चीक वातावरण मई गुज गयी ज़ीशान का वार करने वाला हाथ काट गया था …..राज ने तुरंत हे झुकार उसका एक पेअर काट दिया …. और ज़ीशान निचे पड़ा तड़पने लगा और फिर राज ने उसका दूसरा पेअर भी काट दिया ये सब करते वक़्त वो सिर्फ पशुपति को देख रहा था ……….

पशुपति ने तुरंत गन निकली और कई सरे फायर कर दिए ….पर राज ने पास मई पड़े हुवे आदमी को आगे कर लिया .. …

राज ने वापस फिर पशुपति को देखा तोह वो गायब था राज भी तुरंत उसके पीछे भगा पर राज को कुछ नहीं दिखा उसने चारो तरफ निघाये घुमाई तोह उसे कुछ दिखाई नहीं दिया सिवाए दीवार ke….aur टेबल के

राज तोह यंहा कोई न कोई रास्ता ह …पर कान्हा ….उसने एक बार फिर निघाये घुमाई तोह चेयर के पास एक टेबल पर पॉट रखा हुवा था राज ने पॉट को हिलाकर उठाकर घुमाकर सब देखा पर कुछ नहीं हुवा…..

राज को बहुत जायदा गुसा आने लगा और उसने खींचकर टेबल को लात मार दी जिसे टेबल एक तरफ खिसक गयी और निचे सीढिया दिखी …..राज तुरंत हे निचे उतर गया उसके सामने एक लम्बी 10 फ़ीट की सुरंग जा रही थी ……..राज पूरी तेज़ी से उसमे भगा………. पशुपति जो पैदल जल्दी जल्दी जा रहा था उसे अहसास हुवा की कोई उसकी तरफ ारः ह वो जैसे हे पीछे पलटा राज का एक जबरदस्त पंच उसके मू पर पड़ा …..पंच मई इतनी ताकत थी की उसके मू के आगे के कई दन्त टूट गए …….. वो उड़ता हवा दूर जा के दूर गिरा …..वो उठनेकी सोचता उसे पहले राज ने उसके दोनों पैरो को पकड़ा और उठा के सुरंग की दीवार पर दे मारा ….. पशुपति की चिक निकल गयी…..

राज —- बोलै था न अपने हाथ से चिरुंगा तुजे …..मादरचोद मेरी माँ को मारा था….

राज ने उसे फिर गले से पकड़कर ऊपर उठाया और सीधा जमीं पे दे मारा ….एक बार फिर उठाया और घुमाकर सुरंग की दीवार पे दे मारा ….

राज--- मेरी माँ को इन हाथो से मारा था …..

औरउसके हाथो को कसकर अपने लेग मई फंसा लिया और एक एक ऊँगली की हड़िया तोड़ ने लगा हर ऊँगली को उसनेकई तरीके से तोडा ..पशुपति की छीके उस सुराग मई इतनी तेज़ गूंज रही थी की कोई और सुन लेता तोह दर से हे मर जाता….

राज क्या कहा था tune..randiya …..मक वो बुआ थी हमारी … एकः कर कंडे से उसके हाथ को toddiya…par राज तो उसके साथ आज पूरी बेहरहमी पर उतराया था उसकी आंख से आंसू निकल रहे the….wo बोलै माँ थी हमारी जिसे तूने चीन लिया हमसे हमे अनाथ बांया तूने ….उसके आंसू गिरने लगे ..उसने फिर बोलै मैं तड़पता रहा माँ के प्यारके लिए तू क्या समजे की बिन माँ के कैसा महसूस होता ह कितना दर्द होता ह …जब कोई आंसू पूछने वाला न हो पर तू …..एकः कर उसके दूसरे हाथ को भी कंधे से तोड़ diya……..aur पशुपति की चिक गूंज uthi…..raj फिर घुरैया….

चीक चीक तू जितना चीखेगा मेरी माँ की आत्मा को उतनी हे ठंडक मिलेगी फिर राज पशुपति के दोनों हाथ की कोहनी को तोड़ दिया ……पशुपति का दर्द से मूट निकल गया …..

क्या कहा था तूने ….की इतने टुकड़े किये the..ki गिनना मुश्किल हो गया था ………

राज जोर से चीखा ………..देख मा देख. उसकी चीक मई दर्द और वो गुसा था जो बरसो से दबा हुवा था उसने पूरी ताकत से खड़े होकर अपने झूटः से पशुपति के घुटने पर मारा पशुपति की चीक एक बार फिर गूंज गयी वो दर्द से बेहोश गया …… पर राज को सिर्फ अपनी माँ का अपने चाचा का अपने परिवार का दर्द से भरा चेहरा हे आँखों के आगे दिख रहा था ….राज ने उसे गले से पकड़ा और बोलै उठ भड़वे उठ …….दर्द दर्द …ये ले दर्द और बेहोश पड़े पशुपति को फिर उठा कर दीवार से मरने लगा ……..

चीक कुत्ते चीक ……मुझे सुन्नी ह तेरी चीक मेरी मा सुन रही ह तेरी cheekhe……cheek kutte…..tu अब भोख्ता क्यों nahii….raj पूरी तरह अब पागल पैन पर उतर आया था ….पर पशुपति बेहोश हो गया था …..पर राज उसे इधर उधर उठके फेकता raha……..raj की आवाज पूरी सुरंग मई गूंज रही थी….. चीक चीक तू छीकता क्यों नहीं …….

पीछे शिवानी और जगमाल सिंह भीमा अभय अज्जू श्रुति भी अंदर सुरंग मई आगये …जनहस राज की जोर जोर से बोलने की आवाज आरही थी …वो सब जल्दी अंदर ए तोह उन्होंने देखा पशुपति पास मई बेसुध बुरी हालत मई था और राज उसका गाला पकड़कर हिला रहा tha…..jagmaal सिंह ने ये देखा तोह वो समाज गए की राज इस वक़्त एमोशनालय टूट गया ह …….जगमाल सिंह ने उसके कंधे पे हाटकः और बोले…..

अगर तुम अभी से इतना टूट कर ऐसा करने लगे तोह ये तोह सुरुवात थी…..

Raj----ne एक बार पीछे देखा और बोलै दादाजी इसने हमारी माँ को मारा ……हमारी माँ को कौन बीटा ये सबज़ां कर चुप रहेगा ….मुझे इसे बहुत दर्द देना इसे जागना होगा …….उठ कुत्ते उठ …..

जगमाल सिंह---- वो तुम्हारी माँ से पहले हमरी बहु हमारी बेटी थी…. इसलिए सम्भालो और खड़े हो जाओ ……

राज पशुपति को घूरता रहा और खड़ा हो गया

जगमाल singh---chalo अब

राज ने पशुवति के पेअर को पकड़ा और उसे घसीट ते हुवे ले कर चलने लगा तोह जगमाल सिंह बोले…..

उसे छोड़ दो निर्वाण ……फिर पलटकर भीमा….

भीमा आगे बढ़ता उसे पहले हे अजय और अभय आगे आ गए और पशुपति को उठा लिया ……और जब वो वापस ए तब बिच मई ज़ीशान तड़पता हुवा मिल….

राज--- उम्मीद करता हु अगले जनम तुम एक नेक दिल इंसान बनोगे वफादार तुम इस जनम पहले हे थे….. इसे दर्द से मुक्त कार्डो दो अज्जू bhai…..isai इज़्ज़त से दफना देना हम जब तक कुछ जरुरी काम निपटा के बहार मिलते ह……….

सब बहार आगये तब राज अभय भाई आप दादाजी के साथ यही रुको हम अभी एते ह ……राज भीमा चाचा को लेकर पहुंच उसी जगह जंहा उसने देखे थे वो बॉक्सेस निचे उतारते हुवे…

भीमा क्या ह राज इस्माई …

राज--- चाचा आप कुढ़ dekh…..lo….

भीमा ने आगे बढ़ वो सब खोले तोह उसकी आंखे फटी रह गयी …वो बॉक्सेस आधे से जायदा ड्रग्स से और नोटों से और कुछ वेपन्स से भरे हुवे थे …….वो पलटकर बोले जैकपोट ………राज…..

राज--- हमारे पुलिस वालो के काम आएगा चाचा जी इसे बहार लेके चलना ह जरूर यहाँ इनको मूव करने के लिए कुछ मिनी व्हीकल होगा …..

और उनको एक व्हीकल मिल गया जो बेस मई ट्रांसपोर्ट के लिए रखा गया था वो उसकी हेल्प से सब बॉक्सेस को बहार बहार ले ए ….जिसमे एक ऑवर लगे …तब तक अज्जू और श्रुति भी बहार आगये…..

जगमाल सिंह---- ये क्या ह निर्वाण…

Raj---apne सिखाया उसी रहा पर पहला कदम….

जगमाल सिंह के साथ जब सबने देखा की बॉक्स मई क्या ह तोह उनकी आंखे फैट गयी ….

जगमाल सिंह —- शाबाश मुझे पता ह क्या ह तुम्हारे दिमाग मई तोह अब क्या चाहते हो……

राज--- पलटकर अज्जू भाई अभय भाई आपके नंबर पे एक फ़ोन ayega…….pahle आप फ़ोन ों करलेना यंहा से निकल कर ये सरे बॉक्सेस वंही लेकर जाना ह स्वाति आप हमरे साथ चलेंगी और आप शिवानी जी …… अज्जू की मदद से सिग्नल जैमर हटा कर इस पुरे बेस को उदा दीजियेगा ये लीजिये remote..aur इनके साथ हे चले jayiyega…….main कुछ दिन बाद आपको डेल्ह हे मिलूंगा ……. वैसे भी सुभे के 6 बज गए ह अब निकलना चाहिए हमे ….

दिल्ली मई 2 ऑवर पहले ….

दिव्या जो बिस्तर पर करवट हे ले रही थी उसे 4.30 बजे का इंतज़ार था क्योकि उसकी इतनी जिद की जल्दी निकलने की पर फिर भी जोगिन्दरसिंघ ने उन सब को सुभे 4.30ऍम पर जाने की इज़्ज़ज़त हे दी ….

इसलिए वो 3 बजे से हे तैयार होकर बैठी थी और कमरे मई मौजूद दीपिका और श्वेता और मनीषा को तोह 3.30 पर हे तैयार करवा दिया था…. …जल्द हे 4.30बज गए और जोगीन्दार सिक्योरिटी के लिए 2 पुलिस की बोलेरो भी साथ भेज दी क्योकि वो सब बहुत खास और पॉवरफुल बैकग्राउंड से थी जिसमे मनीषा के बारे मई अभी तक पता नहीं था सिवाए राज के सिर्फ वो हे मनीषा की फॅमिली के बारे मई जनता था …..

ये सब निकल गए मंडावा के लिए …………सबके अपने अपने ख्याल थे …..

वंही

पशुपति बेस

फिर राज ने दादा जी को देखा तोह जगमाल सिंह ने भीमा को इशारा किया और हेलीकाप्टर के अंदर पशुपति को डाला और स्वाति के साथ उड़ गए मंडावा के लिए जंहा पशुपति को धरती का नरक दिखना था…….

रस्ते मई राज पूरी तरह नार्मल हो गया था ….किसी की आपस मई कोई बात नहीं हुवी …….पर एक थी जिसे बहुत बड़ा शॉक लगा हुवा था वो थी श्रुति ….जो अब तक राज को धीरे धीरे समाज हे रही थी की अब उसे पता लगा की वो तोह ट्रेलर ह उससे जायदा खूंखार उसके दादा और चाचा ह क्योकि राज के जाने के बाद उसने देखा था की दोनों कैसे बात करते हुवे गुंडों के सर को सिगार फूंकते हुवे खरभुजो की तरह फोड़ रहे थे और गिनता ह की किसने कितने सर उड़ाए ….वो पुरे रस्ते भर एक बार ठाकुर जगमाल सिंह को देखती तो एक बार भीमा को उसका सोच सोच कर सर घुमा हुवा था …….

तोह वंही 3 ऑवर के सफर के बाद सुभे 7 बजे दिव्या पहुंच गयी अपने घर के पास करो के काफिले और पुलिस की गाड़ी को देख गांववालों ने सोचा आज क्या हो गया ह ठाकुर साब के यंहा….. और जल्द हे कार आकर रूखी एक बड़ी सी हवेली के आगई दिव्या ने एक बार …..सोनाली को देखा तोह सोनाली ने गर्दन है मई हिला दी

दिव्या अपनी डबडबाती आँखों से उत्तरी और अपने घर को देखते हुवे आगे बढ़ने लगी ….उसके पीछे सोनाली और बाकि सब आने लगे पर श्वेता तुरंत हे अंदर भाग गयी और चिल्लाती रही दादाजी बहार औ ……आपके लिए सुप्रिसे ह आप बहार ayiye….tab पहरेदारो ने कहा श्वेता बिटिया ..ठाकुर साहब तोह कल रात को हे बहार चले गए थे ….

तब तक दिव्या भी अंदर आ गयी बहार का शोर शराबा सून सुप्यार और इंद्रा और दादी बहार आगयीईइ…….

अपनी माँ और भाभियो को देख दिव्या बेचारी के आंसू बाह गए …. उसने अपने हाथ से आंसू पूछने की बहुत कोसिस कर पर वो निकलते रहे….

छोटी चची--- अरे श्वेता तुम और ये क्या सोनाली भी आयी ह औ औ अंदर औ…

पर दादी की नज़र रो रही दिव्या पर हे थी और दिव्या की नज़र अपनी माँ पर वो धीरे धीरे उनकी तरफ हे चलती हुवी जा रही थी….. दिव्या की माँ की आँखों से भी आंसू निकल पड़े एक माँ कैसे अपनी बेटी को न पहचान पति …..वो धीरे से कंकंपाते होतो से बोली दिव्या..

दिव्या ने बस रट रट हे धीरे से गर्दन हिलाड़ी ….

दिव्या तुम जिन्दा हो मेरी बचीयी और वो जल्दी जल्दी चलती हुवी दिव्या के पास पहुंची…

दिव्या बोली है माँ मैं हे हु आपकी दिव्या ………

दोनों माँ बेटी बस दुनिया को भूल एक दूसरे से लिपट गयी …दिव्या की माँ दिव्या के चेहरे को चूमती जा रही पीछे कड़ी छोटी चची--- भी भावुक होगयी थी आखिर वो कुढ़ छोटी उम्र मई हे शादी करके इस घर मई आगयी थी और दिव्या हे तोह उनकी दोस्त बानी हर ढक शुक mai…..sab इस मिलान को देख इमोशनल होगये पीछे आरहे शैतान सिंह ने जब वंहा की बाते सुनिटोह पहली बार वो परिवार के प्यार तरफ खिंचा चला गया और आगे बढ़ उसने भी दिव्या को गले लगा लिया आज उसकी आँखों मई भी आंसू थे…. .यही छोटी बहन उसके पीछे पीछे घुमा करती थी दिन भर ……….

तभी पीछे से आवाज आयी mumma……..aur सबके बिच से छोटी जहान्वी आगे निकल कर आगे आयी और अपनी माँ के गले लग गयीईइ .

जहान्वी-- मुम्मा क्यों रो रही हो किसने डांटा आपको मुझे बताओ मैं अभी दादाजी से कहके उसकी पित्ती करवाउंगी ….

दिव्या--- नहीं मेरी बची आपकी मुम्मा बहुत खुस ह इसलिए रो रही ह ….आपको पता ह ये आपकी मुम्मा का रियल. होम ह और आपके दादा जी हे मेरे पापा ह …

जहान्वी सच्ची मुम्मा दादा जी आपके पापा ह एहहहहह ी म हैप्पी …..

तभी सोनाली का फ़ोन रिंग होने लगा

Sonali----tumhara फ़ोन बंद क्यों था..

शिवानी---- दी घुसा मत karo…meri गलती नहीं ह राज ने सबके फ़ोन बंद करवा दिए थे….

सोनाली-— ी विलल किल ु idiot…..usne कहा तूने मान लिया ….तू मेरी तरफ ह या उसकी ….उल्लू की पठियई ….और वो कुढ़ कान्हा ह…..

शिवानी—- मैं आपके पास दिल्ली आरही hu……aur राज ठाकुर साब मंडावा जा रहे h…..pashupati को लेके…

सोनाली---- kyaa…..main मंडावा हे हु ….गुड तीख ह बाकि बाद मई करती हु कॉल…….

सब घर के अंदर agaye………janha दिव्या की आरती उतरी gayi…….aur शैतानी सिंह ने फरमान सुनाया की रात का भोज हवेली वालो कीतरफ से ह घर की छोटी मालकिन दिव्या सालो बाद ईई ह…..

हेलीकाप्टर भी मंडावा केपास पहुचगया था मंडावा मई हलचल मची हुवी थी सुभे की शांति मई सरे लोग हवेली के पास काम मई लगे हुवे the………subhe के 9 बज रहेथे. हेलीकाप्टर की आती गड़गड़ाहट ने सरे सहर का धयान खिंच लिया था… जो हवेली से 100 मीटर की दुरी पर utara….manisha और सोनाली हवेली से बहार देखने lagi……..aur हेलीकाप्टर से उतरे ठाकुर जगमाल सिंह जिनके जय करे की गूंज चारो तरफ गूंज gayi……..unke पीछे भीमा utara….aur अंत मई उतरा राज जिसे ढक …….छोटे मालिक ……छोटे मालिक के नारे गूंज uthe……..wo दोनों सबको अपना हाथ जोड़कर शुक्रिया और आदर देने लगे …….भीमा पीछे रुका रहा क्योकि उसे पशुपति को लेके आना था …..

ऊपर से देख रही मनीषा के जैसे हाल बेहाल थे सब देख कर वैसा हे हाल श्रुती का था जो राज और ठाकुर जगमाल सिंह के पीछे थी इनदोनो लड़कियों ने ये सब फिल्म्स मई देखा था पर वो यंहा रियलिटी मई देख रही thi………ab जय करे के बाद …..भाधायी हो भाधायी ho…….ke सवार गूंज उठे …… हजारो की भीड़ के बिच दोनों हवेली की तरफ चलते हुवे जा रहे थे… ..

इस उठ रहे शोरे की गूंज हवेली तक जा रही जो पहले हलकी फिर तेज़ होती जा रही थी……

राज —मैं पूछ तेज़ के लिए जा रहा हु….

दादाजी--- तीख ह …..पर जान से मत मरना ….

राज वंही से हवेली के पीछे की तरफ चला गया जंहा 50 मीटर की दुरी पर बेसमेंट बना हुवा था जंहा पहले से मौजूद भीमा पशुपति को लटका कर बैठा था……. और उसके मू पर पानी के छींटे मार रहा था…

भीमा--- उठ भोस्डिके अभी तोह तुजे मेरा टार्चर सहना ह……..

भीमा पानी के छींटे मरता रहा और वेट करता रहा …..थोड़ी हे दिएर मई राज भी वंहा पहुंच गया…..

हवेली के अंदर जब ये कब्जे तेज़ी से पहुंचने लगी तोह वो सब बहार देखने लगे ….तब सोनाली हॉलमै आकर बोली दादा जी आगये ह और राज भी आया ह ये सून कर छोटी चची और दिव्या खुस हुवी तोह राज का नाम सुनकर दादी इंद्रा का मू सिकुड़ गया…..

बहार …..एक bujurg….thakur साब भाधायी हो छोटी मालकिन दिव्या घर आगयीईइ…..

ठाकुर जगमाल सिंह ने ये सुना तोह वो एक बार लड़खड़ा गए ………soonkar……aur हैरानी से बोले …..शम्भू क्या बोलै तू …..दिव्या आयी ह…..

बुजुर्ग— है ठाकुर साब मैं सच बोल रहा हु अंदर जा कर देखलो …..

जगमाल सिंह जल्दी से अंदर गए तोह…

वंही दिव्या भी फुर्ती से बहार भगति हुवी ayi…aur अपने पिता को सामने खड़ा देख ….. वो वंही जैम सी गयी और कुछ पल बाद एक बात याद कर बोली….

दिव्या---- पहले बहुत मन करते थे चॉक्लेट्स के लिए ….कहा था न बड़ी होने पर डॉ बनूँगी और आपको ड्रिंक नहीं करने दूंगी अब पीना आप…..

दिवा की ये बाते सून कर मजबूत जिगर वाले जगमाल सिंह भी अपने आंसू न रोक सके उनके आंसू बाह निकले क्यों की दिव्या को चॉकलेट जायदा खाने से मन करते थे और दिव्या उनसे लड़ती थी और झगड़ती थी……

जगमाल सिंह--- नहीं रोकूंगा अब कभी नहीं रोकूंगा जितनी कहानी हो खाना जो करना हो वो करना बस मुझे छोड़कर मत जाना मेरी बची अब मैं और ढक नहीं सह पाउँगा ….

दिव्या भागकर अपने बाप के गले लग गयी 17 सालो का ढक और जुदाई बाप बेटी के धुको को दूर कर रही थी ….एक बाप के लिए उसके बेटो से बढ़कर बेटी होती ह और दिव्या तोह पुरे घर की लाड़ली थी जिसकी हंसी से घर गुंजा करता था …..नौकर क्या सबको अपने सर पर उठाकर रखते थी ……आज वो लड़की एक माँ बन गयी थी और 17 साल अकेले घर से दूर रहकर समझदार हो गयी thi…….pata हे नहीं चला बाप बेटी कितनी हे दिएर गले लगे रहे और बाते करते रहे… ….

जगमाल सिंह —- औ तुम्हे तुम्हारे दीपू से मिलवौ जिसे तुम परेशां करती रहती थी ….


सोनाली--- दादाजी दिव्या बुआ राज के पास हे रहती थी और जहान्वी आपकी पोती हे ह ……

जगमाल—- हैरानी से kya…..us नालायक ने हमे बताया नहीं….

दिव्या--- पापा उसे नहीं पता ह की वो जिसे ढूंढ रहा ह वो मैं हे हु वो तोह बस अनजाने मई सचाई बहार aagayi…..ye सब बाद मई वो कान्हा ह ….

जगमाल singh…chalo दिखता हु …..फिर पलट कर शैतान ..

शैतान--- पिताजी वो सब बोल दिया ह हम वंही कर रहे ज …..अब भीमा भी आगया ह तोह जल्दी हो जायेगा…..

सोनाली और दिव्या जगमाल सिंह के रूम मई आगये …..तब जगमाल सिंह ने एक बुक उठायी और एक दरवाजा खुल gaya….jismai से वो दस मिनट तक चलते रहे और वो सुरंग खुली एक बड़े से हॉल मई ..

जगमाल सिंह--- बेटी एक बार जो हो चूका ह वो दुबारा न हो इसलिए ये सब ह ….किसने धोखा किया ये आज तक नहीं पता ह इसलिए राज के अल्वा तुम दोनों हे हो जो रास्ता जानती हो और सोनाली इसलिए क्योकि ये तुम्हरे बेटे दीपू की अर्धांगिनी बनेगी भविष्य मई…….

जगमाल सिघ की ये बात सून सोनाली जंहा शर्मा गयी वंही दिव्या मुस्कराने लगी……

थर्ड हॉल का दरवाजा खोला तोह राज बैठा हुवा था और भीमा पशुपति को जागकर करंट के झटके दे रहा था…. और पशुपति तड़प रहा था….

जगमाल सिंह — रूक जाओ वर्ण तुम दोनों …….ऐसे काम करते ह भीमा तुम जाओ तैयारी करवाओ….

भीमा —- पर बाबूजी मैं ….

चुप बिलकुल चुप जाओ बहार शाम की तैयार karo……aur तुम राज …

राज दादाजी मैंने कुछ नहीं किया ह वो भीमा चाचा ने मुझे भी यंहा दन्त कर बैठा दिया tha……uski नज़र दिव्या पर पड़ी तोह बुआ आप यंहा….

जगमाल सिंह--- तुम्हे दिकत ह …….इसके यंहा होने से और तुम्हारे संस्कार कान्हा गए…..

राज ने जल्दी से दादाजी के पाँव चुवे तोह दादाजी ने फिर डांटा अपनी बुआ के पेअर कौन chuvega…..raj ने जल्दी से हड़बड़ाकर उनके पेअर चुवे ….दिव्या बस राज को निहारे जा रही थी ……की बरसो पहले उसकी गोद मई सुसु कर दिया करता था बूबू पिलाने पर मू को अजीब सा कर रोने लगता था आज वो उसे भी बड़ा हो गया h…..Divya ने उसी भाव से उसे अपने सीने से लगा लिया और काफी दिएर लगाए रखा उसने आँखों मई ए आंसू को पूछ लिया क्योकि वो नहीं चाहती थी राज ये dekhe..wanhi राज को लगा की पशुपति को देखर बुआ भावुक हो गयी इसलिए उसने भी गल्ले लगाए रखा …..

जगमाल सिंह---- क्या अब भी तुम इसे बचपन की तरह परेशां करने की सोच रही हो ……

दिव्या--- papa……isssshhhhhh दिव्या ये बोल मन हे मन बोली करदी गलती ……

राज ने दिव्या को अलग किया …..और घूरने लगा उसे पहले कुछ समाज नहीं आया पर जल्द हे उसकी नज़र दिव्या के गले मई पड़े हुवे हार पर गयी और उसका दिमाग प्रोसेस करने लगा और उसे याद आया हार पर भी डी हे लिख हुवा था ……उसका दिल जोर से धड़कने लगा papa….aur यंहा घर ana…..gale मई हार …उसने सोनाली को देखा तोह उसने हां मई गर्दन हिला डीई .और राज को यकीं हो गया की वो जो सोच रहा ह वो सच ह पर उसका दिगमग अभी भी कासम्म कासम्म मई tha…..par अगली आवाज सून वो भी शांत हो गया….

दीपउणु….. मई हे तेरी वो बदनसीब बुआ हु जिसे तू ढूंढ़ता रहा मेरे बचे मैं हे हु…….

राज तोह बस दिव्या के गले लग gaya..aur आंसू बहते रहे …..क्योकि आज उसका पहला पड़ाव पूरा हो गया था …उसकी बुआ मिल गयी थी उसे जिसे वो दिन रात ढूंढ़ता raha……usne एक भी सब्द नहीं कहे और वो हवेली आगये रात को जश्न हुवा ……सब खुस थे ….हवेली सजी हुवी थी और चारो तरफ नाच और जासं का महल था….

मनीषा राज के पास आकर बोली ……क्या तुम खुस नहीं हो…..

राज--- मैं हु न बहुत खुस हु……

मनीषा---- तुम्हे पता ह मैं पहले दिन से हे तुम्हारा झूट पकड़ लेती हु….

राज--- ने एक फीकी मुस्कान दी और बोलै नहीं मैं बहुत खुस हु …..पर एक सच जिसे मैं झूट मंटा रहा था वो सच हो गया ………….मनीषा…….

मनीषा---- और क्या पता वो सच झूट हे हो …..

राज ने मनीषा को देखा मनीषा भी उसे देखने लगी और बोली

अगर तुम्हारा ऐसा चेहरा किसी ने देखलिया तोह सब दुखी हो जायेंगे ये तुम जानते हो इसलिए खुस रहो और राज का हाथ पकड़कर चलो अब मुझे कुछ खिलाओगे नहीं…….

श्वेता जो जहान्वी के साथ डांस कर रही थी उसने राज को मनीषा का पकडे देखा तोह उसके दिमाग मई खुराफात आगयी और उसने जहान्वी के कान मई कुछ कहा …….और दोनों चल पड़ी ….. एक और जंहा सोनाली और श्रुति दीपिका बाते कर रही थी चोटिचचि और बुआ के साथ…..

श्वेता--- जहान्वी वो देखो आपके भैया ने हमरे लिए भाभी ढूंढ ली ह ……

ये उसने थोड़ा जोर से कहा और जो वो चाहती थी वही हुवा सोनाली ने सून लिया पर आज श्वेता की सोच से उल्टा हुवा …… सोनाली ने एक लुक राज को देखा और वापस अपनी बातो मई लग गयी……

श्वेता ने ये देखा तोह खून जल गया वो जो चाहती वो नहीं हुवा तोह ….वो जहान्वी के साथ वापस चली गयी…..

पर आज इन सब से विपरीत एक शख्स था जो वंहा से अलग पशुपति के सामने बैठा उसे तड़पाये जा रहा था ……उसको तड़पता देख उसे बहुत सुकून मिल रहा था…..

ी होप काफी कुछ क्लियर हो गया होगा की राज ने क्यों इतना पशुपति के साथ किया क्यों वो पकड़ा गया….


आज के लिए इतना हे …….मस्त मई पढ़ने का और लाइक्स और रेवोएस पेलने का ……
 
अपडेट 123 ों सैटरडे 2पं .....
 
अपडेट 123

Moments……Those नेवर फॉर्गेटस……

जश्न पूरी रात चला जिसमे …..

मनीषा और राज ने भी साथ डांस किया दोनों को साथ देख ज सोनाली को जलन तोह बहुत हुवी पर उसने चेहरे से कोई एक्सप्रेशन नहीं दिया वो चाहकर भी राज के पास नहीं जा रही थी दिव्या की वजह से…..…… सब आज की रात खुसी से झूम रहे थे ….पर दिव्या जो अब समाज दार हो गयी थी उसने ये महसूस कर लिया की छोटी चाची और दादाजी के इलावा सब राज को अवॉयड कर रहे ह …..उसने दिमाग मई ये बात बैठा ली थी ……….ये देख कर उसे ढक बहुत हुवा की जिसके पिता ने परिवार को इतना संपन्न बनाया पहचान दिलाई उसके साथ क्या हो रहा ह और वो समाज गयी की क्यों राज बहार अपनी बहनो और बाकि सब के साथ खुस रहता ह…. क्योकि उसके अपने हे उसके साथ बेगानो जैसा व्यवहार करते ह ….पर वो ऐसा नहीं होने देगी ……वो राज को अपने बीटा मानती ह इसलिए वो अब उसे माँ की कभी याद नहीं आने देगी ….उसे इतनाप्यार देगी की वो सब कुछ भूल जायेगा भले हे उसने उसे जनम न दिया हो पर वो प्यार ममता का ऐसा रिश्ता बनाएगी की माँ बेटे का रिश्ता भी फीका पद jayega…..ye सोच उसकी आंखे नाम तोह हुवी पर उसने आंसू बहार न आने diye…..raat के 2 बजे सभी सोने चले gaye…par आज सबसे जायदा बुरा जिसके साथ हुवा वो थी सोनाली जिसे दिव्या की जोरदार फटकार पड़ी थी क्योकि वो रात को राज के पास जाने की कोसिस कर रही थी और दिव्या ने ऐसा करते वक्तूसै देख लिया था….… दिव्या की दांत वो नीची गर्दन कर सुनती रही और चुप चाप मू लटका कर दीपिका के पास जा कर सो गयी और दीपिका उसे देख कर मुस्कराती रही पर बोली कुछ नहीं क्योकि पता था की अभी छेड़ना खुद की सहमत बुलाना hoga……Sonali को डांटने के बात दिव्या राज के रूम मई गयी जंहा राज ….बिस्तर पर सोने की तयारी कर रहा था….. दिव्या को देख वो उठने लगा तोह दिव्या ने उसे मन कर दिया और उसके पास बैठ gayi….aur उसके सर पर हाथ फिरने लगी….. राज को भी ाचा महसूस हुवा …..फिर दिव्या ने राज के सर को अपनी गोद मई ले लिया .. और बोली …..मैं तुम्हारी माँ की गोद मई हे सोती थी और पता ह तुम्हारे पापा क्या कहते थे

राज--- क्या कहते थे…

दिव्या--- वो कहते थे काम से काम रात को तोह छोड़ दिया कर अपनी भाभी को …और पता ह मैं उनकी एक नहीं सुनती थी उनकी गोद मई हे सो जाती थी और भैया फिर बहार जाकर सोते …..

राज —- और बताओ न बुआ मुझे और जानना h..maa पापा और आपके बारे मई …बताईये न..

दिव्या--- ाचा तोह सून जब तुम पैदा हुवे तोह पंडित ने तुम्हारा नाम राज रवि राजू राजेंद्र निकला था और मैंने बोलै डीप सिंह रखा जाये तोह पंडित गुसाई से बोलै नहीं ये नहीं हो सकता ह बस फिर क्या मैंने पूजा मई इस्तेमाल हो रही चमचे को हे पकड़ा और उस पंडित को पीटने लगी तब सहदेव भैया ने पकड़ लिया फिर भी वो पंडित बोलै आशम्भव ……असंभव…..

राज फिर क्या हुवा….

दिव्या मुस्कराने हुवे बोली मैं भैया से छुड़ाकर भागी और दीवार पर तंगी हुवी 2 नाली उठाकर तान दी थी पंडित पर ….और बोली आज तू डीप नाम रख कर हे जिन्दा जा पायेगा तब बेचारे पंडित ने उपाए निकला घर का प्यार का नाम आप रख सकती हो उसके लिए उसने और तीन घंटे पूजा की तब दीपू नाम रखा तुम्हारा .. पर बाद मई मुझे बहुत दन्त पड़ी ….

राज--- मतलब आप इतनी सररत करती थी…

दिव्या-— है बहुत करती थी क्योकि विद्या भाभी सबसे जायदा मुझे प्यार करती थी वो कभी किसी को डांटने नहीं देती थी वो पापा को भी दन्त देती थी इसलिए सब डरते थे मुझे डांटने से ………इसलिए मैं फुल मजे करती थी तुम्हारे पापा तोह मुझे भाभी के सामने पानी मांगने से भी डरते थे. सब मुझे तुम्हारी माँ की चमची कहते थे …..पुरे उदयपुर मई जब मैं विद्या भाभी के साथ जाती थी तब सब बड़ी मालकिन छोटी मालकिन कहकर बुलाते थे और पता ह कोई मुझसे पैसे नहीं लेता था और मैं फुल चॉकलेट्स कहती थी…….

राज मुस्कराने laga….raj को मुस्कराता हुवा देख दिव्या के दिल मई माँ का बेपनाह प्यार उमड़ pada……aur वो राज को निहारने लगी…….

राज क्या हुवा आप चुप क्यों हो गयी…..

दिव्या--- कुछ नहीं ….. ….पता ह ये हार भी तुम्हारी माँ ने पसंद किया था क्योकि मेरे पापा और तुम्हारे पापा को काम से फुर्सत नहीं होती थी और मेरा गुसा तुमने देख हे लिया ……तुम्हारी माँ घर मई सबका ख्याल रखती थी …. हर किसी का …..पर पहले पहले तुम्हारे दादाजी बहुत नाराज हुवे थे ये जानकार की तुम्हारे पापा ने बिना बताये हे शादी कर्ली….

राज —- क्या पापा ने शादी की तब दादाजी को नहीं पता था…

दिव्या--- नहीं किसी को भी नहीं पता था वो अपना नाम कमाने घर छोड़कर चले गए थे शैतान भैया से किसी बात को लेकर बहुत कहा सुनी हो गयी थी उस वक़्त पापा काम से गए हुवे थे और हमारे पास जमीने हे हुवा करती थी और तुम्हारे पापा सिर्फ दुसरो की भलाई के लिए लड़ते रहते थे….. खैर ये छोड़ो तुम ये suno…..aur पता ह सहदेव भैया जब शादी करके घर ए तब पापा से भाभी के सामने हे बहुत मार पड़ी पर जब उन्होंने सच बताया तब भी तुम्हारे दादाजी ने एक महीने बाद माफ़ किया पर विद्या भाभी ने एक हफ्ते मई हे सबका दिल जीत लिया था खासकर तुम्हरे दादाजी का वो तोह उठते बैठते विद्या विद्या हे करते the………..aur जब तुम्हारे दादाजी को ये पता लगा की विद्या भाभी किसकी बेटी ह तब तोह बहुत बवाल हो गया था….

राज —- hhhhhh…..maa किसकी बेटी thi..bua..

राज की ये बात सून दिव्या थोड़ा सोच मई पद गयी और बोली राज ये बात अगर तुम्हे अभी नहीं पता ह तोह कोई वजह होगी इसलिए मेरा बताना गलत होगा पर इतना बता दू …..की तुम्हारी माँ की शादी कंही और कर रहे थे तुम्हारे नाना जी …तुम्हारे पापा ने पुरे सहर मई तूफ़ान मचा दिया था पुलिस तक की हालत ख़राब हो गयी थी सबको सँभालने मई और तुम्हारे नाना जी को झुकना पड़ा क्योकि विद्या भाभी ने सहदेव भैया के साथ जाना चुना …पुलिस भी तुम्हारी माँ की ीचा जान पीछे हैट गयी … तब से लेके आज तक तुम्हारे ननिहाल वालो और हमरे बिच कोई बात नहीं हुवी ..तुम्हारे पापा मम्मी ने बहुत मनाया पर वो नहीं मने ………पर विद्या भाभी भी मानती रही …… आगे मुझे भी नहीं पता…..

राज--- ओह्ह्ह ..पापा बहुत खतरनाक थे…

दिव्या--- खतरनाक मेरा भाई शेर था शेर जिसके सामना कोई नहीं कर सकता tha….yaro का मलम यार थे गलत को बर्दास्त नहीं करते थे किसी को भी न्याय दिलाने के लिए तैयार रहते थे …….कभी किसी को खली हाथ नहीं जाने देते थे ….

राज अपनी माँ के और पापा के बारे मई जान कर बहुत खुस हो रहा था ….क्योकि आज बहुत कुछ उसे नया पता लगा था ….

दिव्या--- अब सो जाओ tum….main तुम्हारे सर को सहला देती हु….

राज--- आप बी थकी हुवी हो मैं सो जाऊंगा आप सो जाईये…

दिव्या--- चुप चाप सो जाओ मैं अपने आप सो जाउंगी …..

दिव्या ने राज का सर अपनी गोद मई रख लिया और उसके सर को सहलाती रही बहनो ने तोह हमेसा हे सुलाया था पर आज दिव्या की गोद मई राज को वो सुकून और चैन मिला जिसके लिए वो इतना तड़पा था कुछ हे पालो मई वो चैन की नींद सो गया ……राज को यू चैन से सोता देख देख दिव्या की आंखे भी भर आयी और वो मन हे मन बोली भाभी आप चिंता मत कर करना उसकी छोटी माँ अब उसके पास ह उसे कभी अपनी माँ की याद नहीं आने दूंगी ……भले हे जनम न दिया मैंने उसे पर जैसा मैं कहती थी राज मेरा बीटा ह इसे मैं हे rakhungi………..ye सब बोलते बोलते वो भी बैठे बैठे हे सो gayi…….aur दोनों माँ बेटे ु हे सुभे तक सोते रहे सुभे दीपिका आयी तोह वो ये सन देख कर बहुत खुस हुवी क्योकि वो जानती थी की राज बिना माँ के कैसा फील करता h………wo वापस चली गयी

सुभे के 9 बजे……

जगमाल सिंह--- निर्वाण को बुलाओ ….. …सोनाली ने दीपिका को इशारा kiya….kyoki वो कुढ़ दिव्या के रहते राज के पास जाने से भी दर रही थी….

छोटी चची--- मैं बुलाती हु …….

इतना कह वो ऊपर गयी और राज को जगाया…..

राज 10 मिनट मई हे निचे agaya…….aur पास मई बैठ गया

जगमाल सिंह--- पहले आप नास्ता करो फिर आपसे बात करेंगे हम …… और दूसरी तरफ श्रुति को देखकर बेटी आप तोह बहुत बहदुर हो…

श्रुती--- hadbadakar….main तोह बस सोनाली मम के अंडर टीम मई काम करती हु….

जगमाल सिंह — वो अलग बात ह हमने तुम्हारी बहदुरी की तारीफ की ह जो खुदसे आती ह…..

श्रुती जीई…. सुखरिया

जगमाल सिंह— और बेटी आपका परिचय नहीं huva..humse अभी तक

मनीषा — मेरा नाम मनीषा शर्मा ह और मैं राज के साथ हे पढ़ती हु…

श्वेता--- दादाजी झाँसी की रानी ह अकेले हे 5 पर भरी ह …..क्या धुनाई करती ह …

जगमाल सिंह-- वह बहुत खूब आप के पिता क्या करते ह …

मनीषा —- जी वो बिज़नेस करते ह और मम्मी कलेक्टर ह हम मुम्बई से ह …..

जगमाल सिंह मुस्कराने लगे और बोले बहुत अचे …..बहुत पहले गए थे हम जब बॉम्बे कहा जाता था मुम्बई को …..खैर आप सब हमरे मेहमान h…….phir ….raj….ap इनका धयान रखे और नास्ते के बाद हम से मिले……

राज--- जी दादा जी………

आफ्टर हाफ ऑवर…..

राज--- दादाजी अपने बुलाया था हमे……

राज ने अंदर देखा तोह भीमा चाचा कौन मई सर निचे किये हुवे खड़े थे……

जगमाल सिंह--- है हमने बुलाया दरवाजा लॉक कार्डो

हमने तुम्हे इसलिए बुलाया क्योकि तुम्हे याद होगा देहरादून बहुत पहले तुम्हे मरने उप से भाड़े के कातिल ए थे…

राज--- जी ..

जगमाल singh---palatkar बस बहुत हुवा भीमा …..हमारे समझने पर भी आप नहीं समझे …..अब आप जाईये….. …

फिर राज se….un कातिलों को भेजने वाले आपके चाचा थे ये भी पता ह …..आपको …

राज जीई

जगमाल सिंह--- उनको भेजने वाला ….हमारा बचपन का दोस्त ह ….. उसने तुम्हारे चाचा को पैसो का लालच दिया और अपने साथ मिला liyal…..hume बहुत ढक होता ह …निर्वाण हमारा बहुत बड़ा परिवार tha…….par कुछ चाँद रुपयों के लिए अपनों ने अपनों को देखा दे दिया .और अब ऐसी हे गलती शैतान ने की ह ….मैं अब किसी को नहीं खो सकता हु…

राज--- नफरत करने वालो को नफरत हे मिलेगी दादाजी मैं मेरे पिता की तरह दुबारा मौका नहीं दूंगा …..पर आप घर के मुखिया ह आपकी बात मैं कभी नहीं ताल सकता हु….

जगमाल सिंह--- मिलेगी राज मिलेगी जो जैसा करेगा उसे वैसा हे भरना होगा पर पहले तुम्हे सुनील से मिलना होगा ….. क्योकि दुनिया मई चाहे कुछ भी हो जाये वो तुम्हे धोखा नहीं dega…..wanha से तुम्हे मिलेगी आगे की जानकारी …..कप्तान तुम्हारे पिता का सच्चा साथी ह जिसके बारे मई तुम्हारे पिता ने किसी को नहीं बताया….

राज--- तीख ह दादाजी मुझे उसे मिलना भी ह ….मैं जल्द हे चला जाऊंगा उसके पास ….पर वो दिल्ली क्यों ह ……

दादाजी —- वो अपना ऑफिस हेड क्वार्टर दिल्ली बना चूका ह …..जंहा तुम जाओगे वो तुम्हारे पास रहेगा ….दिल्ली से सब जगह ट्रांसपोर्टेशन ह इसलिए ….अब बाकि उसी से पूछ लेना …..

राज —- दादा जी एक बात पुछू….

दादाजी बोलो…

राज--- हमारी बहाने कब आएंगी उनकी बहुत याद आती ह क्या हम उन्हें लेने जा सकते ह….

दादाजी--- वो जल्द आने वाली ह Nirwana….ap sirf..abhi जो सामने ह उसपे धयान दीजिये …….और है तुम्हारे भाई बहन बबिता भी गलत रहा पर ह उन्हें भी तुम्हे शैतान सिंह की रहा पर जाने से रोकना ह…

राज-- मुस्कराकर है जरूर dadaji..phir मन मई उनसे तोह बरसो पुराण हिसाब ह ……पूरा जो करना ह….. है दादाजी जरूर उन्हें ….सीधी रहा पर जरूर लेकर आऊंगा….

जगमाल सिंह — अब जाओ और सबको आस पास ghumao…aur मंदिर जरूर जाकर आना कल पूजा ह कुलगुरु और साधु संतो को बुलाया ह….

राज जी दादा जी ….

इतना कहकर वो सबके पास चला जाता ह ….और सब अपनी बातो मई घूम हो जाते ह फिर …दिव्या सबको घूमने जाने का बोलती ह और सभी अस्स पास की जगह मई घूमने चले जाते ह…. अब जाकर सोनाली को अकेले मौका मिला था राज के साथ वक़्त बिताने का तोह राज भी पास आ कर बात करने की कोसिस करता हु तब …

सोनाली--- ाचा तुम्हारे पास वक़्त ह बड़े ए ….मेरा हॉल चल पूछने वाले….

राज--- आप ह न आज कल लड़कियों की तरह करती हो

सोनाली--- मतलब क्या ह मैं लड़की नहीं हु…

राज--- अरे मतलब था…

सोनाली — क्या मतलब था….

राज--- शांत शांत देवी जी शांत मेरा मतलब था लड़ाकू गफ की तरह बेहवे कर रही हो…

सोनाली--- मू सिकोड़कर …..उसको पकड़कर मैं कर रही हु तुम करते हो सब अकेले जाना बिना बताये इधर उधर भटकना …….फिर श्रुती और मनीषा की तरफ देख कर बोली देख रही हु कुछ जायदा हे लड़किया के पास रहने लगे हो ……

राज — मुस्करा कर क्यों जलन हो रही ह

सोनाली---- हूउउ जलन और मुझे …..जाओ जाओ उड़ लो जितना उड़ना ह …देखती हुई कितना तंग कर सकते ho…..mera वक़्त भी आएगा….

इतना कह वो आगे चल दी….

राज इसे क्या हुवा अब ….यार ये आज कल कुछ जायदा भड़की हुवी ह राज बीटा …इतना कह कर वो भी भागकर सोनाली के पसागया और उसका हाथ अपने हाथ मई ले लिया और मुस्कराने लगा …..हलकी फुलकी छेद चढ़ और नोख झोंक से दोनों के बिच फिर से प्यार agaya……par राज को ये अहसास नहीं था की सोनाली उसके जीवन का वो अटूट बंधन बनती जा रही ह जिसे …… वो चाहकर भी कभी तोड़ नहीं payega…..sab खुसी खुसी आस पास डेजर्ट दुनेस को देखते रहे और इवनिंग मई उन्होंने डूबता सूरज को देखा …..आस पास के खेतो के पार सूरज धीरे धीरे डूब गया ……और सब वापस आने लगे अँधेरा हो गया तब राज धीरे से पास जाकर सोनाली का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और एक हाथ उसकी कमर मई कस लिया…

सोनाली--- राज छोड़ा सब ह…

राज--- ाचा …..तोह…

इतना कहकर उसकी आँखों मई देखने सोनाली राज की आँखों मई देख अपना आप खोने लगी…

राज--- तोह आप मुझसे दूर रहना चाहती हो रह सकती हो…

सोनाली तोह राज की बांहो मई पहले हे अपना आप खो रही थी अब राज के होतो को अपने होतो के पास महूस कर उसकी दिल की धड़कन तेज हो गयी …. ..और अपनी आंखे बंद कर ली.

राज--- आपको पता ह आप कितनी हॉट हो ….आपके ये गुलाबी गुलाबी लिप्स को खा जाने का दिल करता ह …..

राज की सांसे की गर्माहट मई सोनाली पिगलति हुवी अपने आप को महसु करने लगी.

राज ने अपने होतो से सोनाली के लिप्स पर अपने लिप्स का अहसास कराया तोह सोनाली ने दोनों हाथो से राज को कसके पकड़ liya…..raj के होतो के अहसास से सोनाली का रोम रोम तड़प उठा धीरे धीरे राज के लिप्स सोनाली के लिप्स को अपने आगोश मई लेते गए राज के हाथ टी शर्ट के अंदर उसकी नंगी पीठ पर घूमने लगे जिसे सोनाली और तड़प उठी राज प्यार से सोनाली को किश करता रहा सोनाली के सुख चुके प्यार के तालाब मई रिमझिम हे सही कुछ बरसात प्यार की तोह हुवी …..किश ख़त्म होने के साथ हे सोना ने राज को कसकर गले लगा लिया ….राज ने भी उसे अपनी बांहो मई समां लिया …..सोनाली का रोम रोम राज के छुवन और चुम्बन के अहसास मई डूबा हुवा था ….वो कुढ़ को अलग हे दुनिया मई ाहसुस कर रही थी …..उसे अब न लाज शर्म की परवाह थी न किसी और की……

Raj---sona ….

सोनाली--- हूउउ

राज--- चले…

Sonali….no रिस्पांस…

राज--- सब ढूंढ़ने आएंगे…

सोनाली ने राज को और कसकर बांहो मई जकड लिया …जैसे कह रही हो नहीं बिलकुल भी नहीं..…..

राज--- कुछ पल रूक कर ….ok…..agar मई ये कहु आपके साथ दिल्ली चलूँगा …..

सोनाली--- ने तुरंत गर्दन ऊपर करके उसे देखा जैसे यकीन न हो ….

राज ने सोनाली के दोनों हाथो को हाथ मई लिया और बोलै प्रॉमिस ……

सोनाली के चेहरे बे प्यारी सी मुस्कान आगयी हो जैसे उसकी बरसो की खाविश पूरी हो गयी हो……..

राज —- अब चले……

सोनाली--- राज का हाथ पकड़कर गर्दन है मई हिला दी……

उसके चेहरे की मुस्कान पुरे रस्ते भर हे ऐसे हे रही और कोई और तोह ना समजा पर दीपिका समाज gayiii….ki क्या हुवा होगा ….पर सोनाली ने घर मई कोई रिएक्शन नहीं दिया …..रात को भी सभी रूफ पर एक साथ हे सोये …..सोनाली राज को दूर से देख कर हे खुस हो रही थी……..

दिएर रात ….

जगमाल सिंह--- कुछ बका इसने भीमा …

Bheema---babu जी ये बस एक हे नाम लेता रहता विक्टर विक्टर विक्टर

जगमाल सिंह--- विक्टर …..ये नाम ये नाम … सुना सा ह पर याद नाहीई …तोह अगली कड़ी विक्टर ह …toh….victor को भी जल्द इसके साथ सजा भुगतनी होगी ………वो भी ऐसे हे तड़पेगा….

भीमा--- शांत बाबूजी शांत …..

जगमाल singh---main तीख हु तुम जाओ आराम करलो…

Bheema—pashupati की तरफ देख कर जिसके 2no कान कटे हुवे the….pairo मई किल थुकि हुवी thi….babuji इसे तड़पना हे आराम ह मेरे लिए दिव्या ने भी कहा की इसे इतना तड़पना ह की मर ये सके न और जीने की इसकी ीचा न हो…

जगमाल सिंह--- तीख ह…

तोह दूर ……राजस्थान मई कंही…..

पता नहीं क्या हो गया ह इस लड़की को …. इसकी मुस्कान तो जैसे चली हे गयी h…..sirf पढ़ती रहती h……Hey भगवान् मेरी पूनम को पहले जैसा हे बना दो…

औरत---- जबसे हम हरिद्वार से ए ह तब से ये पूरी बदल गयी ह काम और padhayi….bus…iske इलावा इसकी आवाज हे नहीं अति ह….

Baba—-pata नहीं किसकी नज़र लग गयी मेरी बची को…

इनकी बातो से अनजान पूनम अपनी पढ़ाई मई पूरी तरह से डूबी हुव थी …..wo….raj की उस मुलाकात और दीपिका का गले लग्न ी लव ु बोलना उसे रोज अंदर हे अंदर खता जा रहा था वो राज को गंगा मैया से अपने पति के रूप मई मांग चुकी थी पहली नज़र का प्यार होगया था और …अब राज को दिल से अपना पति मान चुकी थी और भगवन से यही दवा करती थी की मुझे मेरी भक्ति मई सिर्फ राज चाहिए ह parbhu…..warna इस पूनम का आपके ऊपर से विस्वास उठ जायेगा …..

राज का पाने और मिलने की छह और दीपिका के गले लगने वाला दर पूनम को अंदर हे अंदर तोड़ रहा tha…..par उसने अपना विस्वास उपरवाले पे बनाये rakha……usai उम्मीद थी ऊपर वाले के घर दिएर ह अंधेर नहीं वो कभी उसके साथ बुरा नहीं करेगा…

पहली हे नज़र मई हुवा pyar…..gaanv की लड़की पूनम को पूरा बदल चूका था जो मस्त मगन हंसी ठिठोली करती थी …आज किसी के प्यार मई खो गयी थी …..उसके संस्कार गाँव की मीठी से मिले थे ….. एक प्यार एक साथी बस यही सब सीखा था उसने हमेसा से …… …..उसने अपने 12तह के फाइनल पेपर की तैयार मन लगा के सुरु करदी थी क्योकि उसे आगे बहार पढ़ने के लिए जाना था …….

तोह इधर 2 दिन निकल गए ….. कुछ पता हे नहीं लगा

और सब तयारी कर चुके थे वापस जाने ki….sonali ने सबके पेअर चुवे जब दिव्या के पेअर चुवे….

दिव्या--- खुस रहो और अपने प्यार को शादी के बाद के लिए भी बचा कर रखना ……

सोनाली--- जीई…..

दिव्या--- हँसते हुवे ….अब शर्मा रही हो और उस din….toh बड़ा रोना धोना कर रही थी

सोनाली बेचारी अब बुरी तरह शर्मा गयी ………

Deepika,shrutii, sonali,manisha,aur राज वापस जा रहे थे …..

दीपिका---- सो मेरे स्वीट लवली बरोथेर आप आगे कॉलेज दिल्ली से न ……ब कर लेना….

श्वेता--- ाचा ….मैं भी करुँगी…..

दीपिका---- चमची तू तेरा आईएएस आईपीएस का सपना पूरा कर….

राज--- दी अभी फाइनल एग्जाम आने वाले ह ……मुझे क्या करना ह आप सब को पता ह …….पर इस बार …. मुझे अकेला जाना होगा …..

श्वेता--- मैं साथ चलूंगी…

राज---- नहीं

श्वेता--- मैं आउंगी आउंगी पर न आपसे मिलूंगी न कुछ ….बस आपके साथ नहीं दिखूंगी khus……par करीब रहूंगी

राज —- श्वेता….

श्वेता--- भाई बोल दिया न …न मिलना न कोई डिमांड बस आपके पास रहूंगी दूर से देख कर खुस …..मेरा एक भाई बिज़नेस मई बिजी ह और दूसरा मुझे पास भी नहीं चाहता h……aahhhuuuuuuuu हुऊ हुऊ मेरा कोई नहीं ह

राज —- श्वेता कुछ बातो को समजा कर …..फिर काफी दिएर बाद अपनी बात से मत पलटना ……..ok….. हम एक दूसरे से बिलकुल अनजान रहेंगे….. ok..

श्वेता--- दोने भाई ी लव ु ी लव ु

मनीषा---- पहले पास तोह हो जाओ…

कॉल रिंगिंग…..

Hello……

सामने se--+Sir पशुपति का रातो रात नामोनिशान गायब हो गया ह …..उसको भगोड़ा करार दे दिया गया ….

ु हे सब कुछ नहीं होता ह जो भी हुवा ह वो सब किसी वजह से हुवा और हमारा माल

सामने se---sir वो वो सब धमाके मई बर्बाद हो गया …

ह्म्म्मम्म इंट्रेस्टिंग इंट्रेस्टिंग ा पता करो कौन ह …..हम इंडिया आरहे ह …….

सामने से--- जी जी जी सर…..

आज के लिए इतना he……..masti मई पढ़ने का और लाइक्स और रेवोएस पेलने का……
 
अपडेट 124 टुनाइट

कैट्स...
 
अपडेट टाइमिंग 9पं तो 9.30 पं
 
अपडेट 124.



साइलेंस एंड कैट्स वांट मिल्क

सब बाते करते हुवे दिल्ली पहुंच gaye……janha जोगिन्दर सिंह के निवास स्थान पर …….रात को पार्टी की व्यवस्था की गयी जंहा पर सभी …..चीफ …. सोनाली शिवानी, deepika,anjana, मनीषा ,Ajju,abhay,shrutii, सब मौजूद थे …

जोगिन्दर--- सो फाइनली एक chapter क्लोज कर दिया ..

राज--- है अंकल

जोगिंदर-- बड़े पापा , या चाचा

राज--- सुर्रियययय बड़े papa…adono कान पकड़कर राज बोलै….

श्वेता माँ —- बीटा तुम इनकी छोड़ो तुम्हारे लिए ये चिकन स्पेशल बनाया ह मैंने तुम्हे बहुत पसंद ह न …..

राज--- मुस्करा आपके हाथो से बनाया सब पसंद ह बड़ी मा बस ….किसी और को हे क़द्र नहीं ह …..फालतू लोग …..पिज़्ज़ा बर्गर मई खुस रहते ह माँ के हाथो की बात हे अलग ह …..कल मई बना के खिलाऊंगा आपको pure….veg…..paneer special….apke बेटे के हाथ से सिर्फ अपनी स्पेशल बड़ी माँ के लिए…..

श्वेता--- ोये होये… बड़ा आया माँ का बीटा और आप माँ …बीटा मिला तोह बेटी को भूल गयी…. और आप भाई ….

जोगिन्दर-- है भाई हमने क्या गुनाह किया जो हमे खाना नसीब नहीं होगा….

बाकि सभी--- है राज हमने क्या किया …..हमे भी खिलाओगे ….समजे वर्ण जानते हे हो हमे…..

राज और श्वेता माँ---- है है है है हम मजाक कर रहे थे आप सबके लिए फिश स्पेशल मिलेगा गुड फॉर health…..aur विथाउट ड्रिंक्स….

जोगिन्दर--- अरे भाई मुझे तोह इज्जाजत मिलनी चाहिए ….

मनीषा---- तोह फिर राज हमे एक पार्टी …..सोनाली मम के यंहा देगा…

श्वेता माँ---- no यही कर लेना शांति से लिमिट मई ….और सोनाली बेटी तुम bhi………tumhari माँ को बताना padega……beti तुम तुम्हारी माँ को यंहा क्यों नहीं ले आती ho….wanha वो अकेली बेटी परेशां होती होंगी न

सोनाली का ये सून पूरा दिमाग कंही और हे चला गया उसकी आँखों के सामने उसकी माँ का उदास चहेरा आ गया….. जो आज कितने सालो से अपने बदले की आग मई जल रही थी

राज ने सोनाली के भावो को पढ़ लिया और वो खड़ा हुवा और सोनाली के कंधे पे अपना एक हाथ रखा और बोलै ….

राज--- जैसा मैंने आपसे पहले कहा था वो जो भी ह अगर वो जिन्दा ह तोह आज से मौत उसका पल पल पीछा करेगी …….आज तक आप अकेली उसे ढूंढ रही thi……ab मैं ….

राज की बार बिच मई काट कर

चीफ और जोगिन्दर---- अरे भाई मैं नहीं हम भी ढूंढेंगे….

अज्जू अभय श्रुति शिवानी —- और हम भी उस इंसान को खोद निकालेंगे ….चाहे वो कंही भी हो ……..

सोनाली--- की आँखों मई खुसी आगयीईइ …और वो बोली पता नहीं वो कान्हा ह बस इतना पता ह यंहा दिल्ली मई हे ये सब हुवा था….. वो मिल जाये …..तोह मेरी माँ जो आज तक अपनी कसम पूरी होने का इंतज़ार कर रही ह ….उनकी कसम पूरी हो जाये और वो मेरे साथ …. रहने के लिए मान जाये….

जोगिन्दर-— तोह फिर अज्जू अभय श्रुतीय ….अभी तुम किसी मिशन पर नहीं हो निकालो उसकी जानकारीय …

सोनाली मैंने ढूंढा था ..

राज--- कुछ काम ऐसे नहीं होते ह …

शिवानी--- यानि राज तुम्हारा कहना ह उस टाइम के गुंडों को ढूंढा जाये ….राइट ..

राज — राइट वंही से मिलेगी रियल info……aur वो जो भी होगा उसे वडा ह हमारा …..घसीट के लेके जायेंगे चाहे वो कोई भी हो मतलब कोई भी…..

सोनाली मन हे मन इमोशनल हो गयी थी उसका दिल भर आया था सबकी बाते सुनकर ….क्योकि आज तक वो अकेले हे धुनती रही पर अब सब उसके साथ ढूंढेंगे तोह उसे उम्मीद थी की जरूर पता लग जायेगा……..

संयम-- बस अब खाना खाइये सब……

सबके खाना खाने के बाद

चेइफ़ सोनाली जोगिन्दर और राज साथ बैठे हुवे थे…

राज--- बताईये सर मैं क्या कर सकता हु आपके लिए….

चीफ-- अरे यार एक जाम पीना था तुम्हारे साथ भाई अब रोज रोज तोह मिस्ट्री मन निर्वाण के साथ जाम तोह नहीं पि सकते ह न इसलिए अलग से यंहा बैठ गए….

राज भी मुस्करा दिया और वाइन पिने लगा …..

जोगिन्दर—- तोह अब …..राज बीटा….

राज--- मतलब चीफ सर ने आपके कंधे से बंदूक तानी ह….

रा की इस बात से सब मुस्करा दिए …

राज--- सर फिलहाल अभी मुझे देहरादून फाइनल पेपर देने ह जिसमे सिर्फ 2 मोनथस बाकि ह ….और उसके बादमे कुछ वादे ह जो पुरे करने ह……..

चीफ--- मतलब हमे अभी नहीं पता लगेगा..

राज--- निर्वाण का तोह बिलकुल nahi….par राज का बता सकता हु …….

सब एक साथ बताओ …

राज--- victor……ya thakur….ya चाचा और उसके बीटा बेतिया…..

जोगिन्दर--- जर victor……aur सर विक्टर…

चीफ मुस्कराकर ….है है है है ……….है है है ha……sonali ….तुम्हारा प्रमोशन फिर से होने वाला ह है है है है…

सोनाली--- क्या हुवा सर अब…

चीफ — अरे भाई …….रखा, पशुपति, अन्थोनी सब लिस्ट मई थे …और सब मरते जा रहे ह और ओफ्फिशलय वो तुम्हारे अकाउंट मई ऐड हो रहे ह इसलिए हंसी ईई और तुम विथल के पीछे हो जब की राज उसके बाप के पीछे …है है है है है है……

सोनाली--- सिर्र…

चीफ — ओह सॉरी …सॉरी ….बात हे ऐसी हुवी ह… और राज कल एक बार तुम मुझसे ऑफिस मई मिलो ……अभी ….फॅमिली टाइम एन्जॉय करो …….

राज के जाने के बाद ….

जोगिन्दर- ऑफिस …..मई क्यों बुलाया…

चीफ —- क्योकि सर विक्टर जर विक्टर कोई छोटे मोठे डॉन नहीं ह वो लोग पावर फुल ह उसके पीछे बहुत पावर ह तभी आज तक बचे हुवे h..…..hum ह पर हमारे ऊपर भी बहुत ह इसलिए …….हमे बहुत धयान रखना होगा ..आप और हम कानून से बंधे ह और इस बार उसका सामना कानून को खिलौना समझने वालो से होगा

सोनाली--- सर पर राज को आप जानते ह वो हर जगह प्लान करके घुसता ह और इस बार भी ऐसा हे होगा ……पर मुझे भी देखना ह की सर विक्टर की तोह नफो हे नहीं उस तक कैसे pahuchega…..par इतना पता ह वो बिलकुल अकेला जायेगा….

इनकी बाते होती रही और लेट नाईट सोनाली राज की बांहो मई सोई पर राज को किश से जायदा कुछ करने नहीं दिया जिसे राज नाराज हुवा पर सोनाली को दिव्या की बाते याद थी इसलिए वो भी प्यासी हे सो गयी …पर प्यार की बांहो मई भी सुकून होता ह ….

नेक्स्ट डे…..

इन कॉल —— है भाई….

सुनील--- ऑफिस अजा ……मैं कार भेजता हु….

राज--- रहने दे भाई मैं आजाऊंगा बस एड्रेस व्हाट्सप करदे ……

सुनील--- जैसी तेरी मर्जी

संयम-- बीटा मैं ड्राइवर को बोल देती हु….

राज बड़ी माँ आप परेशां मत होइए सब कॉलेज ऑफिस जा चुके ह मैं टैक्सी कर lunga……aur राज इतना कह कर चला गया…..

कुछ दिएर बाद वो एक ऑटो से उतरा सामने एक बड़ी सी बिल्डिंग थी ……..वो अंदर चलता हुवा गया …..

गार्ड सर एंट्री कर दीजिये ….

राज ने एंट्री की और अंदर रिसेप्शन डेस्क पर…… जाकर बोलै सिंघानिया इंडस्ट्रीज ऑफिस….

रिसेप्शनिस्ट—- 15ठफ्लूर …….

राज थैंक यू……

राज पहुंच गया 15 फ्लोर ….जंहा रिसेप्शनिस्ट ने उसको रोक लिए…

रिसेप्शनिस्ट—- जी सर….

राज--- मुझे सुनील सिंघानिया से मिलना ह..

रिसेप्शनिस्ट— अपॉइंटमेंट किस नाम से ह…

राज —- मुस्कराकर अपॉइंटमेंट तोह नहीं ह आप उन्हें इन्फॉर्म कर दीजिये राज आया ह ….

रिसेप्शनिस्ट सॉरी विथाउट अपॉइंटमेंट आप नहीं मिल सकते h….ap नंबर और डिटेल नोट करवा दीजिये अपॉइंटमेंट मिला तोह आपको इन्फॉर्म कर दिया जायेगा

राज — राज मन मई ओह बड़ा आदमी बन गया गुड बिज़नेस को बहुत सीरियसली ले रहा ह ……फिर मम अपने इन्फॉर्म नहीं किया तोह आपको नुकसान न हो जाये …..

रिसेप्शनिस्ट घबरा कर मैनेजर को कॉल लगाया और उसे बुला लिया

रिसेप्शनिस्ट — सर ये सुनील सर से मिलना चाहते और इनके पास अपॉइंटमेंट भी नहीं ह …

मैनेजर-- रिसेप्शनिस्ट से गुसाई से तुम्हे हर कोई आके कहेगा और तुम ु हे मेरा टाइम ख़राब करोगी थिस इस योर लास्ट वार्निंग …. अपॉइंटमेंट नहीं ह तोह नहीं मिल सकते ह …

रिसेप्शनिस्ट पर सर ये कह रहे…

बिच मई हे मैनेजर शुतुप ….कहकर वापस चला गया…..

राज--- रिसेप्शनिस्ट के पास जाकर कोई बात नहीं वैसे आपकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन क्या ह….

रिसेप्शनिस्ट— रूकर जी मैंने b.com किया h…..but सिफारिश नहीं थी इसलिए रिसेप्शनिस्ट की हे जॉब मिली …..बूत it's ok सर मैं आपकी अपॉइंटमेंट डिटेल लिख लेती हु….

राज क्या मैं यहाँ बैठ जाऊ..

रिसेप्शनिस्ट— जरूर…

राज फ़ोन निकल कर कॉल लगता ह और फिर बोलै अगर ऐसे हे बहार बैठना ह तोह बुलाया क्यों …सामने से कॉल कट ….और कुछ हे मिनट्स मई जोर से ऑफिस का मैं दूर खुला और सुनील सामने था जिसने बिना देरी के हे राज को गले लगा लियाऔर ऊँचा उठा लिया …

सुनील--- मेरा भाई आखिर ऑफिस आहे गया ……मुझे सब मिल gaya…..dekh तेरी वजह से तेरा भाई अनाथ से अब क्या बन गया ह…

राज — सटक …… फिर गले लगाकर दुबारा ये वर्ड उसे किया तोह कभी भी बात नहीं करूँगा समजा ….

सुनील — सॉरी भाई माफ़ करदे ….

इनकी बाते रिसेप्शनिस्ट मू फाडे हे सून रही थिई….

राज—- अबे तोह अंदर नहीं लेके जायेगा …….

सुनील राज को गले लगाए हे अंदर लेकर गया जंहा सारा ऑफिस बस उन दोनों को हे देख रहा था क्योकि सुनील सिंघानिया के व्यवहार के बारे मई सब जानते थे की वो बहुत सीरियस टाइप के h……par आज किसी अपने हम उम्र के लड़के के आगे एक बचे की तरह खुसी जाहिर कर रहे थे जिसे उसकी फवौरीते चॉकलेट मिल गयी ho…..wo दोनों चलते हुवे आगे गए तोह राज की नज़र उस मैनेजर की तरफ गयी और उसे बुलाया

मैनेजर —- जी जी सर…

सुनील--- क्या हुवा भाई…..

राज--- तुजे पता ह न मुझे किस चीज से नफरत ह….

Sunil-ladkiyo के साथ कोई बुरा करे .

राज —- बस ये बड़े ह आगे मई बड़े ह ….वो लड़की अपनी जॉब बहुत सिंकेरेली कर रही थी…

सुनील--- बस भाई मैं समाज गया ……. और पलटकर अभी के अभी रेसिग्नेशन देकर दफा हो जाओ …..भाई तू चल मुझे बहुत बाते करनी ह……

पीछे सारा स्टाफ उस मैनेजर को देखता ह जिसकी वजह से नई एम्प्लोयी हमेसा डरे हुवे रहते थे अब वो खुस हो रखे थे…..

इन ऑफिस राज को अपनी सीट पर बैठकर खुद सामने बैठ गया ….

सुनील ने रिंग बजायी और ब्रेकफास्ट के लिए आर्डर किया….

राज —- तू हटिये सच मई बहुत बड़ा आदमी बन गया ह …..

सुनील--- सब तेरा हे भाई ……फिर मन मई तुजे पता भी नहीं ह तू कितनी बड़ी टॉप ह इडियट…

राज---- ाचा ….अब बता वो अभय और अज्जू भाई सामान लाये थे वो कान्हा ह……

सुनील--- ब्रेकफास्ट कर ले जब तक अज्जू और अभय भी आजायेंगे …….उन्हें मैंने इन्फॉर्म कर दिया था फिर साथ हे चलते ह ….

राज--- ok …..वैसे मेरा चाचा ने सुपारी दी थी उसका प्रूफ मिल गया न

सुनील--- है…

राज — एक काम करदे …..जरा मेरे सो कॉल्ड चचेरे बड़े भाई और बहन की डिटेल भी निकल के रख….. बचपन का प्यार का बयाज इतना हो गया की अब लौटने का वक़्त आगया ह….

सुनील ले नास्ता कर भाई हो जायेगा …..तेरा हाथ का खाना खाये बहुत दिन हो गए ह भाई खिलायेगा न बहुत याद आती ह …..…..याद ह न कैसे तू फिश खिलता था आश्रम मई…

राज--- शाम को घर आना ह सभी ह wanha…khilaunga pakka….ab चल चलते ह……….

सुनील और दोनों चल दिए ….तब राज बोलै वो रिसेप्शनिस्ट समझदार ह उसे काबिलियत से जॉब दे देना bhai….aur सुनील ने है मई गर्दन हिला दी

एक ऑवर बाद ……

सुनील--- ये टोटल 50 कर कॅश ह और हथियार जोगीन्दार सर को हैंड ओवर करवा दिए ह और ड्रग्स जला दिए h…..bus ये कुछ वेपन्स रखे ह जिसमे नई वेरिओं ह वेक्टर का , फन pistal,AA12 गन्स ह और भी लेटेस्ट वेपन्स ह जो मुझे लगता ह पशुपति इलेक्शन मई उसे करने वाला था…

राज--- ok……Ajju ,अभय ,श्रुति ये आपके लिए ह ……और आप को इसकी और बुलेट्स सुनील अवेलेबल करवा देगा …..फिर पलटकर बैग्स रेडी ह ….

सुनील--- है ये रहे ….इन तीनो बैग्स मई 1 कर और एक कार्ड रखा हुवा ह जिसमे 4 कर डिपोसिट ह….

राज — ये आप तीनो के ह…

अभय पर राज भाई हमे सब मिलता ह….

राज--- मौत वो नहीं मिलती नहीं ह न …..उसी के लिए ह ये ……और वैसे भी हम सब साथ थे न मिशन मई तोह फिर

श्रुती— राज हम सब ये…..

राज--- बिच मई rok…kar ये आपकी फॅमिली के लिए h…apko जो चाहिए सब मिलेगा मैं नहीं चाहता मेरे साथ वाला किसी भी चीज का मोहताज ho….aur बदले मई सिर्फ मुझे वफादारी चाहिए …..मुझसे धोखा मतलब पुरे खानदान का नामोनिशान मिटवाना ……ok अब आगे काम की बात chahe…..kitna भी पैसा लगे उस कुत्ते को ढूंढ निकालो ………चीफ सर से परमिशन मिल हे चुकी …

अज्जू--- तीख ह राज भाई हम मई वफादारी देख कर हे चीफ सर ने हमे सीक्रेट मिशंस के लिए चुना ह और हम आपका विस्वास टूटने नहीं देंगे……

Ajju-—hum जल्द से जल्द ढूंढ निकालेंगे उसे…….

राज —- और फिर आप सब लग जाओ और कोई भी सपोर्ट चाहिए चाहे वो पैमेंट, लोजिस्टिक्स या कोई भी हो आप सुनील से ले सकते ह ……

इवनिंग

सबने जमकर पार्टी करि आखिर भाई बहन सब एक साथ जो हो गए थे और ……रात को नाच गण ेट्स किसी ने कोई कसार नहीं छोड़ी सब मस्ती मई जमकर नाचे क्योकि फुर्सत से हे सबको मौका मिला था एक साथ होना का क्योकि कल को जिंदगी कान्हा से कान्हा ले जाये किसी को पता नहीं था खासकर राज को इसलिए उसने अपना हर पल जिया अपनों के साथ वैसे भी अब यही उसका परिवार जो हो रहा था ….……. और रात उसने अपने भाई बहनो और अपने दोस्तों के साथ खुसी खुसी गुजर dii…..ye कुछ दिन उसकी रफ्तार भरी जिंदगी बेहद प्यार और शांति से गुजरे सोनाली ने जी भर राज के साथ डांस और खुसी के पल bitaye……agle दिन shamko……wo मनीषा और श्वेता लौट ए देहरादून………..

नेक्स्ट डे इन स्कूल…..

इन क्लास …….

रिंकी —- सो मर इंडिया कैसा लग रहा ह वापस आकर …….

राज--- लगता ह मन नहीं लगा हमारे बिना ….

रिंकी--- बिलकुल नहीं लगा यार ….बोर हो गयी थी खैर पढ़ाई के लिए नोट्स रेडी ह …….अब 2 मोनथस बचे ह फाइनल एग्जाम के ……. और आपके हाल बेहाल ह मर टोपर…..

मनीषा —- तू ह न यार ……मुझे वैसे भी अब हॉस्टल नहीं रहना ह …हम राज के घर हे पढ़ाई करते ह…….

रिंकी--- ok डार्लिंग मैं तोह कब से रेडी hu….aur मनीषा को आँख मार्डी

मनीषा---- पढ़ने के लिए बोल रही हु इडियट जब देखो मस्ती सूजती ह …..

रिंकी--- यही उम्र ह darling….phir शादी पति और पतानहीं कब मिलेंगे फिर हम..

सिर्फ रिंकी हे खुस नहीं थी कोई और भी थी जिसने सुभे हे अपनी साड़ी चेंज करके एक रेड कलर की साड़ी पहन ली आज वो बिलकुल नयी नयी शादी शुदा की तरह सजी धजी स्कूल मई श्वेता के साथ आयी थी………. और राज मनीषा भी उसी के साथ ए the…uski खुसी उसके चेहरे से पल पल झलक रही थी ….क्योकि की कितने हे दिनों से राज से मिली नहीं थी वो पर आज राज उसके साथ आगे बैठ कर आया था और वापस भी उसी के साथ हे गया tha……..wo आज इतनी खुस थी की शामको खाना भी सबके लिए अपने घर हे बनाया ………..अपने हाथो से वो राज को खाना परोस रही थी उसकी आँखों से बेशुमार प्यार बरस रहा था…..

रिंकी--- ये मैडम कोई मौका नहीं छोड़ेंगी राज को पास लेन के liye….par मुझसे पहले नहीं ….. और उसने सामने मधु की तरफ देखा ..बदले मई मधु भी मुस्करा दी …जैसे कह रही हो गेम ों डिअर………

मनीषा shweta----ye दोनों बिल्लियों की तरह लड़ रही ह अब पता नहीं कौनसी बिल्ली दूध पि पति …इतना कहकर दोनों मुस्कराने लगी…

राज दोनों को कन्फूसिओं से देखने लगा

पर यंहा रिंकी की किस्मत उसके साथ थी उसके पास वजह थी राज के पास रुकने की पर मधु शादी शुदा की वजह से रात को रूक नहीं सकती थी…………..

रात को लेट तक पढ़ाई करने के बाद ….. सब सोने चले गए तब रात को एक आया चुपके से उठा और नंगे पांवो से धीरे धीरे राज के रूम मई घुसकर उसके बिस्तर मई घुस गया …..और राज ने भी नींद मई उसे खुद से छिपकर सुला लिया…..

उदार मधु नींद मई राज के लिए तड़प रही थी तोह एक पल उसे अपने पिता की जान की परवाह हो रही थी …..और उसने सोच लिया की वो सुभे मौका मिलते हे राज से बात करेगी……..



आज के लिए इतना हे……
 
अनएक्सपेक्टेड एरर....
 
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