Adultery Raj-- hero of the family - Page 75 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

अपकमिंग अपडेट लिस्ट ....

226 -- ऑलवेज में टुनाइट बिटवीन 10 पं तो 11पं

227 -- Nirwana...knows एवरीथिंग...

228 -- पास्ट 2 इयर्स...

229 -- युद्ध.... (फर्स्ट ... मूवमेंट)


230 -- डेथ हेलो...
 
भाई लोग विथल विथल कर रहे थे साला मर तोह गया ह और अचे से मारा ह और क्या बताना था उसके बारे मई .... वो मिडिल चैरेक्टर ह स्टोरी मई जो पहले चमचा हुवा करता था मां का ...मां आगे बढ़ा तोह ये भी आर्म्स डीलर बन गया...
 
अपडेट 226….

ऑलवेज में…..

रिकैप…

तभी डॉक्टर्स की टाम्बाहर आकर “ पता नहीं दिव्या ये कैसे हुवा ह इनफैक्ट आज तक ऐसा कोई केस मैंने नहीं देखा न सुना ह हार्ट बीट हर बॉडी इवन ब्रेन भी सही से वर्क कर रहा ह और कोई इंजरी भी नहीं ह …फिर भी पेशेंट कोमा मई चला गया ह”

कोमा का नाम सुनते हे ऋचा की हालत और ख़राब हो गयी और वो दिव्या से लिपट कर फुट फुट कर रोने लगी…

डॉ.. “अब कब तक ये कोमा मई रहेंगे कुछ कह नहीं सकते ह 1दिन या सायद 1 साल … पर है मैं इतना क्लियर कह सकता हु की उनकी जान को कोई खतरा नहीं ह क्योकि हर बॉडी part बिलकुल पर्फेक्ट्ली वर्क कर रहा ह ”

दिव्या को भी सदमा सा लगा …पर ऋचा की हालत की वजह से खुद को संभल लिया…

डॉ “एक महीने तक इन्हे ऑब्जरवेशन मई रखना होगा फिर तुम चाहो तोह इन्हे घर ले जा सकती हो बस कुछ बातो का धयाँरखना होगा जो मैंने नर्स को समझा दिया h….”itna कह डॉक्टर्स चले गए…

दिव्या लम्भी सांस chodkar“ha अब घर ले जाना हे होगा फिर मन मई बोली …अब मंडावा जाने का वक़्त आगया ह बस एक महीना और”

वंही राज के दिमाग मई कोहराम मचा हुवा था और यादो का एक बड़ा सैलाब बहे जा रहा tha…..jo दोनों दिमाग की यादो को आपस मई जोड़े जा रहा था ……

अब आगई..

Delhi…..jogindar सिंह होम

“श्वेता… kavita…chalo निचे ाजाओ ब्रेकफास्ट रेडी ह …”

जोगिन्दर सिंह अपनी वाइफ से “पता नहीं कब ये पहले के जैसी होंगी दोनों ….मुझे आज भी याद ह जब राज के बारे मई जानने के लिए दोनों ने भागकर बिखरी से शादी करने को भी तैयार हो गयी थी…. और आज देखो कोई डिमांड कोई फार्मिश नहीं ह दोनों की …कुछ भी नहीं जानना चाहती ह जैसे किसी बात की परवाह न हो इन्हे …”

श्वेता माँ “सुनील से बायत भी करवाई …उसी से ये कुछ दिएर बात करती ह या कविता से”

जोगिन्दर सिंह “तुम कविता को यंहा रहने के लिए क्यों नहीं बोलती ho…wo अकेली सुनील के बंगलो मई रहती ह दोनों साथ रहेंगी तोह मन लगा रहेगा”

श्वेता माँ “वो दोनों वंही तोह रहती ह पूरा दिन और राति हे तोह अलग होती ह … और कविता को बस अकेला रहना ह इसीलिए हे तोह वो यंहा आयी ह वो अभी तक सदमे से ुंहर नहीं पायी ह”

तभी दोनों निचे आगयी और चुप चाप नास्ता करने lagi….tab जोगिन्दर कुछ सोचकर बोले… “श्वेता तुम तोह राज के साथ देहरादून मई थी …….वंहा कुछ ऐसा हुवा था जो हमे नहीं पता ह”

श्वेता “कितनी बार एक हे सवाल papa…Nahi वंहा कुछ नहीं हुवा था जो बताने जैसा हो ”

जोगिन्दर “और कविता बेटी तुम्हे कुछ पता ह मतलब देहरादून के बारे मई”

कविता “नहीं बड़े पापा ”

जोगिन्दर गहरी सांस छोड़कर “पता नहीं फिर सुनील देहरादून क्यों गया ह…”

श्वेता ने चमच निचे राखी और बोली “ क्या मतलब ह आपका सुनील भाई देहरादून ह”

जोगिन्दर हैरानी से श्वेता को देखते “पता नहीं क्यों सुनील देहरादून गया ह मुझे लगा तुम्हे पता ह”

श्वेता ने खुद हे दिमाग मई सरे ख्याल बना लिए की जरुरराज के बारे मई पता लगा होगा और उसने तुरंत कविता को उठाया और बोली “चल हमे निकलना ह”

कविता “bye बड़ी माँ बड़े पापा”

जोगिन्दर “अरे नास्ता तोह करलो अरे सून तोह सही मुझे भी बताती जा की क्या याद आगया तुझे”

पर दोनों ने कुछ नहीं बोलै और बहार आयी तोह बहार श्वेता और कविता के स्पेशल बॉडी गॉर्डस रेडी थे..

श्वेता ने राज की दी हुवी मॉडिफाइड सुव को निकलने का इशारा kiya…body गॉर्डस भी पहले हैरान हुवे फिर तुरंत उन्होंने इशारा किया तोह सबको लगा खतरा ह तोह उन सब ने भी अपनी गन्स को अनलॉक करके सुव मई बैठ गए और दो कार आगे पीछे सुव के चल रही थी….

इन कार….

कविता “क्या हुवा मुझे बतायेगीइ”

श्वेता “बताती हु इतना कह उसने सीधा वीडियो कॉल सुनील को लगाया जो लगा नहीं उसने कई बार कॉल किया पर नहीं लगा

श्वेता “अब मुझे यकीं हो गया ह कुछ तोह सुनील भाई को पता लग गया ह भाई के बारे मई अब तोह एक हे बता सकते ह हमे…”

और अगली कॉल लगी सीधा अज्जू ko…aur इधर अपने मोबाइल पर शैतान की नानी श्वेता का नंबर देखते हे वो अपने सीट से उछाल पड़ा और बोलै “आज शैतान कैसे जाग गया भगवन रक्षा” वीडियो कॉल अटेंड करते हे दोनों को देखते हे अज्जू के हाथ कंपनी लगे….

अज्जू “hello बेब्स आज भाई की बहुत महीनो बाद याद आयी”

कविता “कोई फालतू बात नहीं अज्जू भाई …सवाल हम पूंछेंगे और आपको सीधा और सही जवाब देना होगा”

अज्जू “ok पूछो देवियो”

श्वेता “सुनील भाई कान्हा ह….”

अज्जू “हवा मई “

कविता “फिर मज़ाक”

अज्जू “अरे सच मई वो अभी एयर ट्रेवल कर रहे ह”

श्वेता “राज भाई के बारे मई क्या पता लगा”

अज्जू “कुछ भी नहीं”

कविता “झूट सफ़ेद झूट”

अज्जू “तुम दोनों की कसम यार वर्ण अपनी भाभी से पुछलो कहो तोह बुला दू”

श्वेता “तोह सुनील भाई देहरादून क्यों गए ह”

अज्जू “ यार बताया तोह वो मरेगा और नहीं बताया तोह तुम नाराज हो जाओगी”

कविता “भाई प्लीज राज भाई से जुडी बात ह तोह बताओ न प्लीज”

अज्जू कुछ दिएर चुप रहा पर कविता और श्वेता के उतरे हुवे मू देख कर उसे भी बुरा फील हुवा और उसे बोलना हे पड़ा… “वो वंहा किसी राज भाई के साथ मैडम मधु को ढूंढने गए थे क्योकि उसकी जान को खतरा था पर वो उसे बचा नहीं paye…par मुझे लगता ह लगता क्या यकीं ह वो उसके दोनों बचो को बचने गए थे”

कविता श्वेता “ बचो को पर क्यों”

अज्जू कुछ बोलता उसे पहले हे श्वेता बोल पड़ी “क्योकि उन का रिलेशन राज से ह सायद”

अज्जू “सूरे नहीं हु बूत है ऐसा कुछ हो सकता ह वर्ण वो अपनी जान दांव पर नहीं लगते”

श्वेता “ी लव यू भाई …थैंक यू सो मच bye bye भाभी को मिस यू बोलना”

कॉल कट होते हे…

कविता “श्वेता को घूरने लगी तोह”

श्वेता “मतलब मधु मम और राज के बचे ह वो”

कविता “ पागल हो गयी तू …कुछ भी बोले जा रही ह भाई को जानती ह न”

श्वेता “ जानती तोह हु पर यार सरे इन्सिडेंट्स उसी और इशारा कर रहे ह और सुनील ऐसे हे तोह नहीं जायेगा कुढ़ उसे बचने ….सोच सोच…. और वंहा मधु मम भाई को अत्त्रक्ट करने के लिए सब कुछ करती थी खाना खिलाना केयर करना और तू समाज जा और भाई कुढ़ उसके साथ उसके गाँव अकेले गए थे और उसके बाद हे वो प्रग्नेंट हुवी thi…baki सच तोह हमे सुनील भाई से हे पता लगेगा”

कविता “ मतलब मंडावा जाकर हे पता चलेगा”

श्वेता “ तोह चले”

कविता “यार मनीषा भाभी से हमने आज तक बात नहीं करि मंडावा भी नहीं गयी किस मू से उनके सामने जायेंगे”

श्वेता “वो हमेशा जायदा समझदार ह तुझे पता ह न उन्होंने खुद क्या किया था सचाई पता चलने par….dekh जो होगा सह लेंगे मुझे पता ह वो माफ़ कर देंगी”

कविता “और जो हमने किया उनके साथ जबकि उनकी गलती भी नहीं thi…unki माँ भी नहीं रही उन्हें सबसे जायदा जरुरत थी तब हम यंहा आगये उनको बुरा भला कहकर”

श्वेता “हम्म्म पर चलना पड़ेगा जो सजा देगी सब सह लेंगी अब चले या यंहा हे बाटे करती रहेगी”

कविता “ तोह चल फिर मैं कुछ कपडे पैक करती हु तेरे मेरे लिए तू जब तक घर पर बता दे”

श्वेता “गुड” और फिर घर पर कॉल लगाकर … “है hello पापा मैं और कविता मंडावा जा रहे ह”

जोगिन्दर कुछ पूछते उसे पहले हे कॉल कट कर दिया …

जोगिन्दर वाइफ से “कुछ तोह बड़ा जरूर हुवा ह मुझे पता लगाना होगा…”

श्वेता माँ “हम भी चलते ह na…bahut दिन हो गए ह मंडावा गए हुवे बाबूजी और सुप्रिया से भी मिल लेंगे प्लीज चलते ह न”

जोगिन्दर “ok मैं ऑफिस से काम निपटा कर अत हु फिर चलते ह”

फलेश बैक

सुनील राजीव और नरपत सिंह साइड का…

इन होटेर बलून

नरपत सिंह जो अभी भी दारू पिता हुवा बिच मई हँसता था “ है है है सेल सबके सब मरे गए और तू बता छोटे ये बचो का क्या सीन ह”

सुनील “मेरे भाई की आखिरी निशानी ह”

नरपत सिंह दारू का घुट लगाकर पुराणी यदि याद करता हुवा“ मैं तोह साला किसी को भी नहीं बचा पाया …तू लकी ह छोटे कभी खोने मत देना इन्हे क्योकि ये तुझे तेरी भाई की याद दिलाएंगे उसकी कमी सस नहीं होने देंगे …मैं तोह साला कमजोर था जो बचा नहीं पाया सबको मार दिया हरामियों ने…”

सुनील “अपने जायदा पि ली ह”

नरपत “पीना कौन चाहता ह छोटे ….दर्द इतना ह की सहा नहीं जाता ह आग सी जलती रहती ह सीने मई जो उन सबको मार कर हे ख़तम होगी खैर छोड़ इन बातो को फिर राजीव की तरफ इशारा करके …हर किसी पर भरोसा मत करना सेल अपने हे धोखा देते ह”

राजीव गुसाई se“tuu”

नरपत सिंह आंखे दिखा कर “चीरकर यही से फेंक दूंगा समझा ”

सुनील “प्लीज शांत हो जाईये और सुखरिया मैं आपका दर्द समाज रहा हु …पर ये वो ह जिन्होंने मेरे परिवार के लिए अपनी जान भी जोखिम मई दाल दी इन पर आंख बंद करके विस्वास करता हु मैं”

नरपत सिंह “okk..phir तोह तीख ह सॉरी भाई माफ़ करना क्या करू आदत हो गयी ह और छोटे अब सुभे उप से बहार होंगे हम आगे क्या प्लान ह”

सुनील “बस फिर हम किसी की भी नज़र मई ए बिना गायब हो जायेंगे”

नरपत सिंह “ तू भी मेरे यार की तरह बात करता ह उसकी साली कोई बात पल्ले नहीं पड़ती थी”

सुनील के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और फिर उसने कॉल लगाया…

“जीपीएस ट्रैकर ों ह इसे ट्रैक करवाते रहना और मुझे वंहा पर व्हीकल चाहिए ह मैच और माइक को हे भेजना पूरी तयारी के साथ इमरजेंसी ह …और एक चॉपर का अरेंजमेंट करके रखना”

सामने से एक लड़की की आवाज आयी “ हो जायेगा और फ्री होने के बाद मुझे कॉल करोगे प्रॉमिस”

सुनील “ok दोने”

नरपत सिंह “तू तोह सच मई बड़ी टॉप लगता ह छोटे चॉपर एक कॉल से”

सुनील “सब उसी दोस्त का दिया ह मैं तोह अनाथ था पर अब भाई बहने दोस्त बीवी माँ बाप सब ह”

नरपत सिंह शराब देते हुवे “ये ले छोटे फिर लगा एक घूँट दारू बुरी नहीं ह पता ह छोटे …मैं भी अनाथ हे था फिर सब मिले और अब फिर अनाथ की जिंदगी जी रहा हु”

सुनील ने शराब ली और2 घूँट mari…agai बाते चलती रही

अगले दिन मैच और माइक के साथ वो लोग पहले दोनों बचो का डॉ के लेकर गए जंहा उनका फुल चेकउप करवाया gaya…janha दोनों बिलकुल तीख पाए गए …

करंट टाइम …

इन चॉपर…

सुनील “बस हम पहुंचने वाले हे ह”

नरपत सिंह “यंहा रेगिस्तान मई”

सुनील “दोस्त की हवेली और परिवार यही रहता ह जो की अब मेरा परिवार ह”


और चॉपर की आवाज सुनते हे सरे मंडावा के आदमी लेथ सरिये लेकर हवेली की तरफ भागने लगे की हमला हो गया ह…

पर बिच मई हे भीमा ने सबको रोक लिया और सब तीख ह बोलै ….मंडावा के लोग पहले सब देख चुके थे और अब 2 साल मई पके लठैत बन गए थे उन्हें भरमा ने पूरा तैयार कर दिया था….

चॉपर की आवाज सून सोनाली ने भी खिड़की से बहार देखा तभी मनीषा रूम मई आगयी और सोनाली का हाथ पकड़कर जबरदस्ती बहार ले ayiii….aur एक पूजा की थाली हाथ मई थमा दी….

मनीषा “घर की बहु हो आप मेहमान आरहे ह”

सोनाली थाली वापस देने लगी तोह

मनीषा “सोचना भी मत वापस जाने का कड़ी रहिये आप यंहा”

जगमाल सिंह पहले हे बहार खड़े थे…

और फिर हेलीकाप्टर लेंड हुवा और उतरे उसमे से सुनील …राजीव और नरपत सिंह और साथ मई टोकरी मई दोनों बचे …

जगमाल सिंगन “सोनाली बेटी आगे औ और आरती उतरो”

सोनाली को देख सुनील की आंखे भी भर ayiii….aur वो सीधा सोनाली के पास पंहुचा और दोनों बचो को टोकरी मई से निकलकर गॉधी मई ले लिया…

सोनाली ने आरती उतरी और टिका लगाकर वापस जाने लगी तोह

सुनील “ पूछेंगी नहीं ये बचे किसके ह ..”

सोनाली फिर भी वापस चलने लगी तोह..

सुनील “ये दोनों राज की निशानी ह राज के बचे ह क्या अब भी आप वापस जाएँगी”

बस सोनाली के पाँव जंहा थे वंही रूक गए और वो वापस भागकर आगयी …और सुनील की गोदी से दोनों बचो को ले लिया…

मनीषा ने सोनाली के कंधे पर हाथ रख दिए

सुनील “ है ये राज के जुड़वाँ बचे ह उसकी आखरी निशानी दी …और अब ये भी अनाथ ह इनका इस दुनिया मई कोई नहीं ह”

सोनाली .. गुसाई से एक थपड सुनील को खींचकर मारा थपड इतना तगड़ा था की झाँटेदार थपड की आवाज चारो तरफ दिन मई भी गूंज गयी…

सोनाली “ख़बरदार दुबारा ये कहा toh….ye अनाथ नहीं ह मैं हु इनकी माँ समझा”

सुप्रिया हैरानी से “ये राज के बेटे ह”

शेरदिल माँ की आँखों मई ख़ुशी के आंसू आगये

ममता रिफत भी खुसी से ज़ूम उठी तोह जानवी भी सुप्रिया की गोदी मई चढ़ कर देखने बचो को देखने लगी

सोनाली एक तक बचो को चूमे और निहारे जा रही thi…pura परिवार आज 2 साल बाद खुस हुवा tha….par साइड मई खड़े जगमाल सिंह की आँखों मई आंसू थे …. पर तभी उन्हें अहसास हुवा की उनके पाँव मई किसी का सर रखा हुवा ह …जगमाल सिंह अपने आंसू पौंछते हुवे … “,खड़े हो जाओ बीटा…” फिर खड़े होने वाला शख्स को देख कर “राजीव इनसे मिलाया नहीं हमे”

राजीव कुछ बोलते उसे पहले हे … “बाबूजी मई आपका नरपत ….सहदेव का दोस्त बेवकूफ नरपत ..”

Jagmaal…kafi दिएर धयान से देखने के बाद “हैरानी से नरपत टट्टूं तुम जिन्दा हो मेरे बचे”

नरपत सिंह “है बाबूजी मैं जिन्दा हु बदकिस्मती से खास मैं भी मर जाता तोह तीख रहता”

जगमाल सिंह “नहीं मेरे बचे ऐसा नहीं बोलते चल अंदर मुझे बहुत साडी बाते करनी ह …बहुत कुछ जानना ह …अरे भीमा …आज ख़ुशी का दिन ह भाई”

भीमा अपने आंसू पौंछते हुवे “है बाबूजी पंडितजी को बुला लिया ह मिठाईया आरही ह”

जगमालसिंह “हर घर मई भिजवाओ आज मेरा बीटा और पोते घर ए ह आज जश्न मनाया jayega…daru मंगवाओ”

ये सुनते हे नरपत सिंह फुट फुट कर रो पड़े तोह पीछे खड़े राजीव और साइड मई थपड खाकर खड़ा सुनील अभी तक समाज नहीं पाए थे की क्या हुवा…

“भीमा … “ आप दोनों हैरान क्यों हो वो सहदेव भाई के दोस्त ह”

सुनील और राजीव “हहहहह”

भीमा “आप दोनों नाहा धो लो पहले आप मेरे साथ औ राजीव मैं आपको गेस्ट रूममे ले चलता हु”

अंदर ….

दोनों बचे sonali…manisha …rifat…mamta…supriya…sherdil की माँ की गॉधी मई घूम रहे थे बरी bari…sabke चेहरे पर खुसी के एक्सप्रेशन थे…

मनीषा. “अब तोह आप खुस ह न”

सोनाली मनीषा को गले लगते हुवे “है मैं बहुत खुस हु मनीषा मुझे जीने का सहरा मिल गया …मैं इन्हे अपनी जान की तरह palaungi…ye मेरे प्यार की निशानी ह ”

मनीषा “मैं नहीं हम पालेंगे ….इन्हे कभी पता नहीं चलेगा इनकी माँ कौन ह ये आपको और मुझे दोनों को माँ हे बुलाएँगे…”

सोनाली ने कसकर मनीषा को गले लगा लिया …इन लगभग दो सालो मई मनीषा और सोनाली का रिश्ता बहुत गहरा हो गया था ..

इधर सुनील कन्फूसिओं और थपड खाकर रूम मई आकर कुछ दिएर बैठा हे था की मनीषा रूम मई आगयी और उसे गले लगा लिया…

मनीषा “क्या सोच रहे ह आप”

सुनील “ये दी इतने महीनो तक हिल भी नहीं रही थी और राज के बचो के एते हे पहले की तरह थपड कास दिया मतलब व्हाई ऑलवेज में मेरी तोह गलती भी नहीं होती ह पहले उसकी वजह से मार खता था और अब ये दो एंटर हे हुवे ह की थपड पद गया वैसे ताकत आज भी वैसी की वैसी ह”

मनीषा हंस पड़ी “ आप खुस नहीं ह”

सुनील “मैं तोह बहुत खुस हु वो मुझे मरे वही प्यार दिखाए मैंतोह यही चाहता यही हु”

मनीषा “थैंक यू”

सुनील “थैंक यू तो यू बस एक बार श्वेता और कविता भी मान जाये”

मनीषा “उनकी गलती नहीं ह आखिर मेरी वजह से हे तोह सब हुवा ह ñा मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं ह”

सुनील “उनकी गलती ह …उन्हें वो सब नहीं कहना चाहिए था …उन्होंने अपना भाई खोया ह तोह तुमने भी उसे खोया ह अपनी माँ को खोया और वो घटिया इंसान अपनी हे बेटी के घर ऐसा करेगा किसको पता था यंहा तक की उसने मुझे सबसे अलग करना चाहा अगर तुमने मारा नहीं होता तोह आज भी तड़पता उसे मैं”

सुनील को गुसा होता देख मनीषा “छोडिया न जो बीत गया सो बिट गया आज ख़ुशी का दिन ह और रही बात उन्दोनो की तोह वो भी एक्ने दिन मान हे jayengii…gusa ह वक़्त लगेगा दूर होते huve…bus चिंता ह तोह मुझे पूनम की …रणवीर अंकल उसे मिलने हे नहीं देते h…mujhe उसकी बहुत फिक्र होती ह”

सुनील “मुझे भी होती h…ranveer अंकल उसकी शादी करना चाहते ह ऐसी मुझे खबर मिली थी”

मनीषा “नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए ह क्योकि वो मर जाएगी पर किसी और से शादी नहीं करेगी मैंने देखि ह उसकी दीवानगी वो सोनाली दी से भी जायदा प्यार करती ह राज को”

सुनील “ मुझे भी यही दर लगा रहता ह मुझे दादाजी को बताना होगा …पर अभी वंहा सब तीख ह जब ऐसा कुछ होगा मैं खुद दादा जी के साथ जिक्र करूँगा”

Manisha”hmmm”


Niche…..Jagmaal सिंह के रूम मई …

जगमाल सिंह “सम्भालो खुदको नरपत”

नरपत सिंह दादाजी के सामने बैठा रोये जा रहे थे …

जगमाल सिंह “अगर रोने से हे सब तीख हो सकता ह तोह मैं भी तुम्हारा साथ देता हु”

नरपत “बापूजी तोह क्या करू …मैं भाई भाभी अली रविंदर पवन विपिन विक्रम किसी को बचा नहीं पाया …. खास मैं सहदेव की बात सुनता और लड़ाई करना सिख जाता तोह उनके काम अत”

जगमाल सिंह “विक्रम वो तोह गद्दार ह उसने हे तोह खबर दुश्मनो को दी थी…”

नरपत आंसू पौंकर हैरानी से “ये कैसे मुमकिन ह बाबूजी उसे तोह सहदेव भाई ने सबकुछ दिया वो भी बिन मांगे”

जगमाल सिंह “ यही तोह गलती हो गयी उस कुत्ते को सब नहीं मिला और उसने गद्दारी करि”

नरपत सिंह गुसाई से “हरामी कुत्ता”

जगमाल सिंह “वो अपनी मौत ले चूका ह …तुम कान्हा थे जब सब हुवा”

नरपत सिंह “मैं बंगलोरे गया हुवा था बाबूजी वंहा मुझे सहदेव ने कुछ जरुरु कार्टन थे उनकी डिलीवरी देने और वंहा उनका कॉम्पिटिटर था जो परेशां कर रहा था जो अभी भी ह रॉय इंडस्ट्रीज उसकी इनफार्मेशन निकालनी थी पर पता नहीं कैसे उन्हें सबपता लग gaya…mere बारे मई और मुझे घेर लिया …वो तोह मुझे सहदेव ने हमेशा स्मोक बॉम्ब्साथ रखने को कहते थे जिनकी वजह से उस दिन बच गया पर बंगलोरे से बहार बहुत मुश्किल से निकल पाया चारो तरफ उनके आदमियों से लड़ता बचता हुवा जब बंगलोरे से शिप से मुम्बई पंहुचा तब बहुत घायल tha…aur जब 3 महीने बाद फेक्टरी तीख हुवे तोह पता चला की सब उजाड़ गया ह …कोई जिन्दा नहीं बचा h…itna बड़ा एम्पायर रातो रात ख़तम हो gaya…….aur जब मैंने चानन बिन सुरु करि तब मुझे पता चल इनसबके पीछे कोई टट्टूवाले अजीब से लोग ह …जो बहुत ताकत वॉर h…kanha रहते ह कान्हा से एते ह कुछ पता नहीं h…par ये साफ़ ह की सहदेव प्रर हमला हुवा तब्ये लोग शामिल थे क्योकि येलोग कुछ चाहते थे सहदेव से …”

जगमाल “ये तोह हमे भी पता लगा ह की कुछ तोह गहरा राज ह इनसबके पीछे …वैसे सहदेव क्या क्या बिज़नेस करता था”

नरपत सिंह “गोल्ड बेचने का और प्रॉपर्टी सटटलेमेंट ka…jo बड़े बड़े ब्लैक मनी रखते थे उनको हम लूट लेते थे और अचे काम मई लगा देते थे”

जोगिन्दर सिंह “ तुम कार्टन मई क्या लेकर गए थे वंहा”

नरपत सिंह “बाबूजी वो कार्टन मई क्या था मैंने कभी पूछा नहीं ..वैसे भी आपको उसका गुसा पता h….par है वो अन्सिएंट चीजों को स्टडी करवा रहा था और काफी पैसे इन्वेस्ट करता था कई बार तोह विद्या भाभी भी उसके साथ गयी थी”

जोगिन्दर सिंह “हम्म्म”

नरपत सिंह “और इस काम मई रॉय इंडस्ट्री भी शामिल थी मुझे इतना पता ह एक बार कहते हुवे सून लिया था मैंने उन्हें”

जगमाल सिंह “रॉय इंडस्ट्रीज”

नरपत सिंह “ और अब तोह ये बहुत पावरफुल हो गयी ह सिर्फ अन्सिएंट आइटम और गोल्ड मई हे डील करती ह कहने को ये वेस्ट बंगाल से ह पर काम इनका सारा बंगलोरे हे ह आर्म्स साउथ के अंडरवर्ल्ड नेटवर्क को कंट्रोल करती ह ….”

जगमाल सिंह “मतलब रॉय इंडस्ट्रीज और टट्टूवाले लोग आपस मई जुड़े हुवे ह”

नरपत सिंह “है और परसो हे मई टट्टू वाले से उत्तरप्रदेश मई भीड़ चूका हु अब और पॉवरफुल हो गए ह वो खास सहदेव होता तोह उठा उठा के पटकता कुत्तो को”

जगमाल सिंह “अब वो नहीं ह नरपत अब हमे हे बदला लेना ह और हम लेंगे”

नरपत सिंह “ 10 को मार चूका हु अब तक अब आप साथ ह तोह बाकियो को भी मर डालूंगा पर ये सब बाबूजी और वो लड़का ये सब कौन ह “

जगमाल सिंह “अपना हे परिवार ह नरपत वो लड़का सुनील ह राज का दोस्त”

नरपत सिंह “और ये राज कौन ह बहुत नाम सुनलिया उसका मुझे भी मिलना ह”

जगमाल सिंह “तुमने आने मई दिएर करदी नरपत”

नरपत सिंह “कंही चला गया ह क्या”

जगमाल सिंह “ है बहुत दूर चला गया ह वो तेरे दोस्त कासहदेव और विद्या का बीटा था ”

नरपत सिंह “क्या दीपू जिन्दा था …” अब नपट की आंखे घुसाई से जल उठी क्योकि दोस्त को वो बचा नहीं पाया और अब उसकी निशानी जो उसके लिए मर चुकी थी और आज उम्मीद मिली वो भी टूट गयी उसने पूरी ताकत से दीवार पर पंच मारा तोह दीवार मई दरार आगयी…

नरपत सिंह “नहीं नहीं बाबूजी किसने किसने किया मैं उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा”

आवाज सुनकर सुनील अपने रूम से जगमाल सिंगब के रूम मई अंदर आगया…

जगमाल सिंह “शांत हो जाओ …अभी कुछ वक़्त हमे रूकना होगा क्योकि अभी सब बिखरा हुवा ह …हुम्हारा वक़्त भी आएगा नरपत”

सुनील “है हम किसी को नहीं छोड़ेंगे अंकल उन्होंने धोखे से मारा ह हम सामने से घुसकर उनकी नेसल हे मिटा देंगे”

नरपत सिंह “है छोटे …उनका नामी दुनिया से मिटा देंगे पर उसके लिए पूरी टीम चाहिए ह क्योकि उनकी पावर तुम देख चुके हो”

जगमाल सिंह “हमारे पास भी पूरी फौज ह और जब वक़्त आएगा हम भी तयारी के साथ आएंगे भले हे हम उन जितने ताकतवार न सही पर हम मरेंगे तोह उन्हें मारकर हे इस पुरे मांडवा मई जमीन के निचे इतना बारूद ह की यंहा ए तोह उनकी कब्र हमारे साथ हे बनेगी…”

सुनील “है औ चिंता न करे और आपके सभी दोस्त नहीं मरे ह सभी और आग सर जिन्दा ह और साथ हे गुरूजी भी ….”

नरपत सिंह “ क्या गुरूजी और सभी और आग भाई जिन्दा ह मुझे उनसे मिलना ह बाबूजी कान्हा ह वो”

जगमाल सिंह “ मिल लेना पर आज हम बाप बेटे जी भर जश्न मनाएंगे और सुनील पूजा हो जाने के बाद …नरपत के लिए स्पेशल दाल बत्ती बनाये जाये इसे बहुत पसंद ह ..”

सुनील “ जी दादा जी”

3 ऑवर बाद जब बहार मंडावा वालो के लिए भोजन बनाया जा रहा था …tab….modified ज़ ब्लैक विप नंबर सुव एंट्री हुवी…..

और उत्तरी दोनों श्वेता और कविता शामे ऑउटफिट mai….aur आज दोनों का स्टाइल अलग था चेहरे पर रौनक thi…..dono सबको देखती हुवी आगे बढ़ी…

कविता “तुम सही हो कुछ तोह खास हुवा ह”

श्वेता “ सही कहा चल अंदर”


दोनों दूर पर पहुंची तोह अंदर से काफी आवाजे आरही थी….

सुप्रिया ने जैसे हे कविता को देखा तोह भागकर आगयी ..और बोली “मेरी बची आंखे तरस गयी तेरी माँ की तुझसे मिलने के लिए…”

कविता “माँ मैं तीख हु”

सुप्रिया कविता को कुछ दिएर गले लगाने के बाद श्वेता को भी गले लगाकर “तुझे याद नहीं ह मेरी जो एक बार भी मिलने नहीं ईई”

श्वेता “आंटी मैं वो मैं”

सुप्रिया “अरे मैं भी न अंदर चलो” फिर जोर से “ममता जानवी रिफत देखो कौन आया h”phir सुप्रिया बोली “मैं भी न वो तीनो तोह बहार गयी मंदिर तक तुम ऊपर चलो मैं तुम्हारे लिए खाने पिने के लिए बनवाती हु साथ हे सुनील को भेजती हु ऊपर सुप्रिसे ह तुम्हारे लिए राज के रूम मई”

कविता ममता दोनों हैरानी से …ऊपर की तरफ जल्दी जल्दी बढ़ी उन्हें लगा उनका आईडिया सही ह की राज लौट आया ह तोह दोनों की आँखों मई ख़ुशी के आंसू आगये और तेज़ी से ऊपर रूम की तरफ भागी और जल्दी से दरवाज़ा खोला और एक साथ बोली… “ Bhayiiiiiii”par वंहा सामने दिखी सोनाली और मनीषा और दोनों के हाथ मई bache….phir एक ने बाथरूम को खोल के देखा तोह वंहा भी कोई नहीं था दोनों मायूस हो गयी…

मनीषा बचे को गोदी मई लिए हुवे “तुम दोनों किसी ढूंढ रही हो राज को”

दोनों सिर्फ है मई गर्दन हिलायी क्योकि नज़रे मिलाने मई उन्हें झिझक और शर्म महसूस हो रही थी…

मनीषा “वो नहीं आया h…aur सच तुम दोनों भी जानती हो क्यों नहीं आया ह जितनी जल्दी सचाई को मान लोगी उतना दर्द काम होगा….”

दोनों के मू उतरे हुवे थे क्योकि सच वो भी जानती थी की राज अब इस दुनिया मई नहीं ह….

मनीषा “पर तुम्हारे भाई की खास चीज मिली ह”

दोनों की गर्दन ऊपर उठ gayi…agai मनीषा को बात सुनने के लिए …तब मनीषा ने बचे को कविता की गोदी मई दे दिया और बोली “ये राज के बचे ह जुड़वाँ बेटे एक वो रहा और एक ये ह”

कविता …और श्वेता की नज़रे बचे पर चली गयी और बचे की आंखे उसके होठ उसके कान राज से मिलता देख दोनों के हाथ अपने मू पर चले गए और आंखे भीगती चली gayiii….dono के दिल मई जो इस वक़्त चल रहा था वो मनीषा अचे से जानती थी इसलिए उसने उन दोनों को आगे कुछ नहीं बोलै …और दोनों को देखती rahi….kuch पल बाद…

श्वेता “ये भाई का बचा ह बिलकुल भाई की तरह आंखे ह …बेब हमे हमारा राज मिल gaya…wo भी जुड़वाँ दो दो राज”

तभी बचा रोया तोह… श्वेता को समाज नहीं क्या करे पर वो इतनी इमोशनल थी की बोली “ मेरा बचा क्यों रोया दूदू पियेगा बुआ दूदू पिलाएगी फिर अपनी टी शर्ट और ब्रा मई से अपने एक बूब को उसके होठो पर लगा दिया पर अब अब बचा और जोर से रोया तोह वो भी रोने lagi…aur बोली “ मैं बुआ हु रट नहीं ह बुआ दुधु लाएगी …” तभी मनीषा ने बोतल उसके हाथ मई दे di…aur पिलाने का इशारा किया ….कविता बस कड़ी कड़ी अपने आंसू पौंछे जा रही थी तभी सुनील रूम मई एंटर हुवा और जो चल रहा था उसे समझने लगा तभी अचानक कविता मनीषा के पैरो मई गिर गयी और बोली “ मुझे माफ़ कार्डो भाभी उस दिन मैंने आपको राज भाई के साथ जो हुवा उसके लिए जिम्मेदार ठहराया थपड mara….shadi वाले दिन आपको कलंकनी कहा घरके लिए ….गुसाई मई पता नहीं आपको क्या क्या कह गयी श्वेता भी पास आगयी “ ी म सॉरी भाभी हमने आपके दुख को समझा हे नहीं और वो सब कर दिया जो कोई अपने दुश्मन के साथ भी नहीं करता h…jabki अपने हमे कुछ भी नहीं कहा हमे माफ़ कार्डो हम सच मई गन्दी ह

सोनाली जो बचो के आने baad…Normal हुवी थी उसने जब दोनों की बात सुनी तोह वो कड़ी होकर आयी और मनीषा को पीछे करते हुवे बोली “क्या कहा तुम दोनों ने abhi…mujhe तीख से सुनाई नहीं दिया दुबारा बोलना”

मनीषा “कुछ नहीं कहा उन्होंने”

सोनाली “एक मिनट भाभी …आप रूकिये और तुम दोनों ने इन्हे भला बुरा कहा …किस हक़ से कहा” सोनाली का गुसा सर पर चढ़ने लगा और बचे को मनीषा को गोदी मई देते हुवे बोली “अभी जमीं से पूरी बहार निकली नहीं ho…aur तुम दोनों ने इन्हे थपड मारा …किस हक़ से मारा… और क्या कहा कलंकनी तुम दोनों की हीमत कैसे हुवी और गुंजी आवाज “ sataakkkk…..satakkkkk”do थपड दोनों के गाल पर एक एक पड़े … “तुमने अपना भाई खोया …तोह क्या इन्होने कुछ नहीं खोया …वो इनका दोस्त था भैई tha…devar tha…sabkuch था …..और तुम दोनों ने inhe…wo आगे बढ़ी तोह मनीषा ने पकड़ लिया और बोली “ नहीं दी बस “

सोनाली “ कैसे नहीं भाभी छोटे बड़े का लोहाज नहीं ह दोनों को क्या और नहीं ह इस लड़किया नहीं ह घर मई ममता ह रिफत ह वो बेचारी अनु उसके लिए तोह उसकी दुनिया हे राज था उसको देखो खुद को कैसे संभल रही ह akeli…aur सबको भूल भी जाऊ तोह आप …अपने क्या नहीं खोया मम्मी पापा dost….aur ये दोनों आपको दोष देती ह” फिर पलट कर अपने बाप को इन्ही हाथो से इन्होने मारा तड़पा तड़पा कर समझी …इस घर को जब तुम सबकी जरुरत थी तुम चली गयी तब संभल inhone…apne पति से पिछले 2 साल से दूर रही ये बिना शिकायत के ….और तुम इनको बुरा भला कहकर आज माफ़ी मांगने आगयी क्योकि राज की तुम्हे खबर लग gayii….agar राज सच मई यंहा होता तोह वो तुम दोनों को कभी माफ़ नहीं करता …समझी”

कविता श्वेता रोये जा रही thi…ab तक सुप्रिया भी आगयी थी जो चुप चाप ये सब सून रही थी उसने भी कुछ नहीं बोलै क्योकि सोनाली ने जो कहा वो सच हे तोह था…

मनीषा ने श्वेता के हाथ से बचा लिया और सोनाली को देते हुवे उन्हें बीएड पर बैठा diya…phir पलटकर कर बोली “ तुम सोनाली दी की बातो का बुरा मत मनो वो गुसाई मई हमेशा जायदा बोल देती ह तुम अचे से जानती हो ….मुझे तुम दोनों से कोई शिकायत नहीं ह …उस वक़्त मैं भी अगर तुम्हारी जगह होती तोह यही करती…”

दोनों एक साथ मनीषा के गले लग गयी और रोने लगीई दोनों को ऐसे रोटा देख मनीषा की आँखों मई भी आंसू agaye…toh सुनील पीछे से आकर बोलै “ बस भी करो तुम दोनों कितना ड्रामा करती हो…”

दोनों ने एक साथ हे अलग अलग गाल पर सुनील के थपड मारा …

सुनील “ अब मैंने क्या किया”

कविता “सब आपकी गलती ह”

श्वेता “बिलकुल आपकी गलती ह…

सुनील “ ये तीख ह तुम लड़ी तुम्हारी भाभी से तुम्हे थपड मारा सोनाली डीई ने और तुम दोनों मुझे ब्लैम कर रही हो क्या कोई टीवी सीरियल चल रहा ह …जो करना ह करो मैं जा रहा हु निचे तभी श्वेता और कविता दोनों पीछे से आकर उसके गले लग गयी….

और सबके चेहरे पर मुस्कान थी….

सुनील “ये तीख ह पहले सब पितलो और फिर माना लो”

कुछ दिएर बाद कविता और श्वेता अपना बूबू बरी बरी पीला पीला कर दोनों बचो को तंग कर रही थी….

“,अले ले मेरा बचा मेरा दुधु पियेगा “

कविता “मेरा पि रहा ह देखो”

श्वेता ने देखा तोह कविता अपने भूपस के निप्पल पर बोतल वाला दूध गिरा रही थी जो धीरे धीरे बचे के मू मई जा रहा था दोनों को ऐसा करते देख सोनाली ने एक चपात मरी और बोली “ये निप्पल बड़े हो जायेंगे samjhi…jab खुद के हो तोह तब पीला लेना”

दोनों का मू बन गया पर रूम मई वो हे थोड़ी थी रिफत ममता भी बराबर ये सब करके बचो को कभी तंग तोह कभी खिलाती …और इनसबसे अलग जानवी को तोह दो भाई मिल गए तोह और उसे बाकि कौन क्या करता ह इस बात से अब बिलकुल मतलब नहीं था….

रात को जोगिन्दर सिंह पहुंचे तोह हवेली की रौनक लौट आयी थी ..सबके चेहरे पर खुसी thi….jagmaal सिंह जोगिन्दर भीमा राजीव एक साथ बैठे हुवे खुसी मन रहे थे तोह महिला मंडली अलग बातो मई लगी thi….sunil रूफ पर टी शर्ट उतारकर चोट के निशान को देख रहा tha…tabhi मनीषा हाथ मई पकोड़े लेकर लेकर आगयी…

मनीषा “राज आपको पिता देखकर खुस नहीं होता”

सुनील “ ख़ुशी का दिन ह आज के दिन तोह हम दोनों साथ बैठकर पिटाई ख़ुशी ”

मनीषा की नज़र नीले निशान पर गयी “ ये क्या हुवा आपको”

सुनील “कुछ नहीं”

मनीषा “वैलेंटाइन राइडर को मरना इतना आसान तोह नहीं ह न”

सुनील “ पता नहीं पहले मुझे कुछ याद नहीं रहता था जब मई उस पर्सनालिटी मई जाता था पर अब सब याद रहता h….is बार दुश्मन बहुत ताकतवार ह …मेरी इतने सालो की ट्रेनिंग से मई जिन्दा बच सकता था पर बचो को नहीं बचा पता और उन्हें बचा लेता तोह मैं बुरी तरह इन्जुरेड या मारा jata…ye तोह नरपत अंकल आगये जो हम बच gaye…par वो एक शख्स हम दोनों पर भरी था”

मनीषा “ ऐसा कैसे हो सकता ह”

सुनील “ मुझे भी नहीं पता… की कैसे वो इतना पावरफुल था मैंने सरे फाइटर की डिटेल्स देखि ह पर ऐसे फिघ्टर्स के बारे मई कभी नहीं सुना ह उसकी स्पीड फ़ास्ट थी मतलब बहुत फ़ास्ट उसके पंचेस की पावर बहुत जायदा थी”

मनीषा “अब क्या करेंगे आप”

सुनील “ अभी तोह हम सेफ ह पर वो हमे धुंध लेगा अगर वो और हुवे तोह बहुत बड़ा खतरा हमारी तरफ ारः ह Manisha…jis साई बचना नामुनकिन होगा हमारे लिए

मनीषा सुनील को गले लगते हुवे “आप राज के दोस्त ह आप निर्वाण के दोस्त ह …आप वैलेंटाइन राइडर ह जिसके आंतक से अंडरवर्ल्ड के लोग रात को निकलने से डरते h…ap सबकुछ कर सकते ह”

सुनील ने भी मनीषा को कास कर बांहो मई भर लिया और इतने महीनो बाद मनीषा को उसकी ख़ुशी और वो प्यार मिल रहा था जो उसे मिलना चाहिए था….

तोह वंही इनसे दूर …

पूनम विलेज…

“राम राम चौधरी साब

रणवीर सिंह “राम राम जी आज मला साब रास्ता कैसे भटक गए”

प्रधान “रास्ता नहीं भटका …गाँव मई लड़की देखने आया tha….par सही न लगी …उपरवाले की दया से सब ह पर कमी ह तोह एक सीधी और सुशिल बहु की …देखो चौधरी साब दूर दूर तक सब एक हे बात कहते ह की लड़की होये तोह पूनम जैसी होये …और इतनी तरफी सुनकर तोह अब मेरे से भी रहा नहीं गया”

रणवीर सिंह “मला साब पूनम अभी बीमार ह उसके कॉलेज मई हादसा हो हाय था तब से घूमसूम रहती ह”

मला “चौधरी साब जब तक पूनम तीख नहीं होती इंतेज़्ज़र करते ह मैं एक भेड़िया डॉ यही बुला लेता हु वो ट्रीटमेंट भी अचे से करेगा और जब पूनम बेटी तीख हो जाएगी ह तब हम आगे बढ़ेंगे

रणवीर सिंह “है ये ाचा रहेगा मला साब ….”

कुछ और बाते करके मला चला gaya…uske जाते हुवे चेहरे पर कामिनी मुस्कान thi…jiska क्या राज़ था वो तोह आगे हे पता चलने वाला था…


एंड प्रेडिक्शन विनर ेलिपेररय बीआरओ ह

आज के लिए इतना हे ….

मस्ती मई पढ़ने का और सिर्फ लाइक्स पेलने का
 
अपडेट 226 पोस्टेड मस्ती मई पढ़ने का और सिर्फ लाइक्स पेलने का अपकमिंग अपडेट लिस्ट ....

227 -- Nirwana...knows एवरीथिंग... ों वेडनेसडे नाईट 10 पं तो 11 पं

228 -- पास्ट 2 इयर्स...

229 -- युद्ध.... (फर्स्ट ... मूवमेंट)


230 -- डेथ हेलो...

चैरेक्टर लंफो कम्पलीट अपडेट हो गयी ह पेज ओने पर
 
अभी तक एक आंसर सही आया ह बूत विनर को रिवॉर्ड बाद मई मिलेगा...
 
फॅमिली इंट्रोडक्शन

ठाकुर जगमाल सिंह निर्वाण राज के दादा जी और सहदेव सिंह के फादर...

सुमित्रा देवी (दादी जी)

इनके तीन बेटे और 2 बेतिया है

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1) सैतान Singh(Bade chacha)aur वाइफ

इंद्रा देवी (बड़ी चची)

एक बीटा एक बेटी

बीटा: सुरेंदर

बेटी : बबिता

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2)लेट सहदेव सिंह निर्वाण Hero's फादर

विद्या सिंह निर्वाण हीरो मदर


फादर मदर की डेथ कैसे हुवी क्लियर नहीं ह

सहदेव और विद्या का बीटा

राज ( सेकंड पर्सनालिटी निर्वाण)

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3)लेट पर्वत सिंह निर्वाण (छोटे चाचा)

सुप्रिया (छोटी चची) केयरिंग नेचर...

3 बीटा बेतिया

बड़ी बेटी : ममता सिंह

छोटी बेटी: कविता सिंह

बीटा: अजय सिंह

ठाकुर जगमाल सिंह की बड़ी बेटी सीमा निर्वाण मिसिंग है लास्ट टाइम देहरादून विद्या के साथ थी

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छोटी बेटी : दिव्या सिंह निर्वाण

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भीमा चाचा ( ये एक अनाथ थे बूत ठाकुर साब इनको अपना बीटा मानते है जब ये छोटे थे तब hi उनको जगमाल सिंह अपने साथ हवेली ले केर आये थे )

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सुनील सिंघानिया: राज का दोस्त / भाई सेकंड पर्सनालिटी वैलेंटाइन राइडर बचपन से हे राज के साथ ह स्कूलिंग एक जगह से हुवी ह

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श्वेता सिंह : राज और सुनील की मुँह बोली बहन दोनों के सबसे जायदा क्लोज ह स्कूल से हे अटैचमेंट ह नौगहत्य नेचर ह दोनों भाईयो को सेज भाइयो से जायदा प्यार करती ह

जोगिन्दर सिंह: श्वेता फादर ( दिल्ली कमिश्नर)

Chief:Delhi चीफ ह सीक्रेट इनफार्मेशन और सपोर्ट करते ह निर्वाण और वैलेंटाइन राइडर को

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दीपिका सिंघणीअ: राज और सुनील की दूसरी मुँह बोली बहन सिंघानिया ग्रुप की वरिष्ठ...

कप्तान सिंघणीअ: ( सिंघणीअ ग्रुप्स ऑफ़

कंपनी के malik)Depika के पापा और सुनील के मुँह बोले पापा इन्होने सुनील को गॉड लिया हुआ है और सहदेव सिंह के पुराने परिचित ह

दीप्ति सिंघणीअ: दीपिका मदर (हाउस वाइफ सिंपल नेचर)

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अनिरुद्ध गोश्वामी

बेटी: ऋचा गोस्वामी हीरो का फर्स्ट क्रश विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल्स की ओनर

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मनीषा: राज के स्कूल की दोस्त ..राज की स्टूडेंट भी ह मोस्ट इम्पैक्टफुल करैक्टर इन स्टोरी

मनीषा माँ: कलेक्टर इन मुंबई

मनीषा फादर: रंजन शर्मा

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पूनम( हीरोइन) : राज और मनीषा की सोल्लगे दोस्त

(ये अपने चाचा चची के साथ रहती है इसके माँ बाप रविंदर सिंह और ऋतू बचपन में hi मर गए)

पूनम चाचा: रणवीर सिंह (गाँव के सरपंच)

पूनम चची:

ननिहाल. : ठाकुर उमेद सिंह इनके 2 बेटे और 3बेतिया ह जिसमे विद्या सबसे छोटी ह

बता: मनोहर सिंह स्टेट का बिज़नेस ह

वाइफ - हाउस वाइफ ह

बेटी: अनु सिंह मुंबई मई पढ़ती ह

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अज्जू और श्रुति ( कंप्यूटर एक्सपर्ट, हैकर)

अब्बे: अज्जू और श्रुति का दोस्त इसे सब हल्क कहते ह

ये तीनो फॅमिली की तरह रहते ह और सेक्रेटली पुलिस मैं अंडर कवर अफसर की तरह वर्क करते ह

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सोनाली: सुपरिन्टेन्डेन्ट ऑफ़ पुलिस. ( राज को प्यार करती है और राज भी बहुत मंटा ह इन्हे मोस्ट डेंजरस एंड डेडली लेडी पुलिस अफसर ह जिस साई बड़े बड़े क्रिमिनल कांपते है और राज के आगे नयी दुल्हन की तरह बेहवे करती ह🤪😀)

शिवानी: ैप सोनाली की मू बोली छोटी बहन ह

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राजीव सिंह: इंस्पेक्टर ह मोस्ट ट्रस्टबल पर्सन

बेटी: रिंकी सिंह( राज की कॉलेज दोस्त

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मधु : राज के पड़ोस की भाभी (देहरादून नर्सरी स्कूल की टीचर ह राज पर क्रश ह इन्हे )

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आग और सभी: राज और सुनील के गुरु साथ हे सहदेव सिंह के पुराने दोस्त , स्पेशलिटी एक क्लोज कॉम्बैट मई एक्सपर्ट ह तोह दूसरा वेपन एक्सपर्ट ह

सहदेव सिंह फ्रेंड्स...

रविंदर सिंह : कॉलेज फ्रेंड विद्या का लाडला देवर जिसके लिए विद्या उसकी भाभी माँ सामान h...aur एक इशारे पर कुछ भी कर सकता ह अभी स्टेटस अननोन ह

नरपत सिंह : फ्रेंड ..स्टेटस अननोन ...

एनिमी

डेथ हेलो : मार्टिकल आर्ट एक्सपर्ट फाइटर

मां : आइडेंटिटी सीक्रेट लिव्स इन मुंबई


स्कोर्पियन ट्राइब: ये कान्हा से किसी को नहीं पता ह पर पास्ट से इनका रिलेशन ह इनका फाइटिंग लेवल क्या ह अभी क्लियर नहीं ह..
 
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