Anita Singh - Story of a Seductive Housewife - Page 14 - SexBaba
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Anita Singh - Story of a Seductive Housewife

अपडेट 106

रामु उस नाले के साइड बने रोड के तरफ रिक्शा मोड़ दिया. वह रोड पूरा खली था मगर पुराण और थोड़ा टुटा फूटा था क्यूंकि शायद इस्तेमाल नहीं होता था. उस रोड के एक तरफ जिधर नाला था उधर नाले के किनारे लाइन से पेड़ लगे हुए थे और दूसरी तरफ पुराने छोटे मोठे फैक्ट्रीज थी जो बांध पड़े थे. तो देखा जाये तो अनीता को रामु के साथ रिक्शा पर जाते कोई नहीं देख सकता था. पेड़ होने से छाओं भी था और धुप से भी वह बच रही थी मगर रोड ख़राब होने से रिक्शा जर्क कर रहा था.

रिक्शा के जर्क होने से अनीता की दोनों बड़ी चूँचियाँ जो बिना ब्रा के पतले कपडे के ब्लाउज में थी वह खुल कर हिल रही थी. अनीता की पल्लू बायीं ब्लाउज के एक चौथाई हिस्से के ऊपर hi थी. बायीं चूंकि का बाकी का हिस्सा का ब्लाउज और दये चूंकि के ऊपर का पूरा ब्लाउज पर कुछ नहीं था जिसके कारण से उसकी दोनों बड़ी चूँचियों का हिलना साफ़ साफ़ पता चल रहा था.

अनीता की नज़र चलते हुए सामने रिक्शा के आईने में पड़ी तो वह देखि की उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ कैसे रिक्शा जर्क होने के कारण हिल रही थी, कैसे ऊपर नीचे और दये बाये हो रही थी. अनीता साथ hi यह देखि की पतले कपडे के ब्लाउज में उसकी दोनों चूँचियों के निप्पल का छाप उसकी ब्लाउज पर साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. कोई भी देखकर समझ सकता था की अनीता ब्रा नहीं पहनी है.

अनीता यह देखकर आईने से नज़र हटाने वाली hi थी की आईने में उसे रामु का चेहरा दिखा जो आईने में उसकी चूँचियों को hi देख रहा था. अनीता की दिल यह देख कर धड़क गयी.

अगले पल रिक्शा थोड़ा और जर्क हुआ तो अनीता हलकी चीखती हुयी boli,"ouch आअह्ह्ह रामु जी"

रामु अनीता की चीख सुनकर आईने में उसको देखकर bola,"memsaheb आप ठीक है तो कहीं..."

रामु इतना बोलै hi था की उसका नज़र अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियों पर पड़ा जो ब्लाउज में कैद हुयी हिल रही थी. रामु ध्यान दिया तो देखा की अनीता की निप्पल उसकी ब्लाउज से सटी हुयी अपनी आकार दिखा रही थी तो वह अपना बात पूरा बोले बिना hi रूककर अनीता की चूंकि देखने लगा.

वहीँ अनीता भी रामु का बात सुनकर आईने में देखि तो उसे ध्यान आया की रामु उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता फिर से एक नज़र अपनी चूँचियों पर डाली तो देखि की उसकी चूँचियों थोड़ा थोड़ा हिल रही है और निप्पल का इम्प्रैशन ब्लाउज के कपडे पर दिख रही है. अनीता समझ गयी की रामु वही देख रहा है और यह समझते hi उसकी धड़कन तेज़ हो गयी.

वह धड़कते दिल और तेज़ सांस से रामु को आईने में देखि तो रामु को ध्यान आया की अनीता उसे hi देख रही है तो वह जब नज़र उठाया तो अनीता से उसकी नज़र मिली तो वह घबराकर सामने देखते हुए bola,"maaf कीजियेगा मेमसाहेब. यह रोड बहोत ख़राब है तो आपको परेशानी हो रही है, मगर इस रोड में छाओं है और थोड़ी शान्ति भी है. हम कोशिश कर रहा हूँ की अच्छे से रिक्शा चलौं ताकि ज़्यादा हिल दोल न हो. अगर आपको परेशानी हो रही है तो हम दूसरे रास्ते से चल सकत हैं"

अनीता यह सुनकर boli,"Nahin रामु जी कोई बात नहीं. मैंने hi तो आपको बोलै इधर से चलने के लिए".

रामु यह सुनकर वापस आईने में अनीता को देखा तो वह अपनी बात जारी रखती हुयी आगे boli,"Yeh रोड hi सही है, ठंडा भी है और शान्ति भी है".

रामु यह सुनकर अपना नज़र नीचे करके फिर से अनीता की चूँचियों को देखने लगा वहीँ अनीता रामु को अपनी चूँचियों पर नज़र ले जाते हुए देखकर भी अपनी बात आगे boli,"Rahi बात ख़राब रोड की तो आप कोशिश कर रहे हैं अच्छे से रिक्शा चलने की और रिक्शा की सीट भी अच्छी है. मुझे कोई परेशानी नहीं है, बस थोड़ा आराम से चलाइये"

रामु यह सुनकर अनीता को वापस देखा तो अनीता मुस्कुरा दी. रामु अनीता को मुस्कुराते देख हल्का मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब आराम से चलते हैं. पहली बार आप हमरे रिक्क्षा पर बैठी हैं ससुरा आपको तकलीफ होगा तो हुंका अच्छा नहीं लगेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर आईने में रामु को देखि तो वह मुस्कुराने के बाद नज़र नीचे करके अनीता की चूँचियों को देखने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Aese रामु जी आप बुरा न माने तो एक बात पूछूं?"

रामु यह सुनकर थोड़ा घबराकर अनीता को देखा तो उसके चेहरे पर नार्मल भाव देखकर थोड़ा रिलैक्स होकर bola,"Are मेमसाहेब हुंका आपका बात कहे बुरा लगेगा. पूछिए का पूछना चाहती हैं आप?"

अनीता मुस्कुरा कर puchhi,"Aap तो हरिया जी के साथ दूकान में काम करते हैं, तो फिर यह रिक्शा?"

रामु यह सुनकर bola,"Kabhi कभी मौक़ा मिलता है तो चला लेट हैं. थोड़ा कमाई हो जाट है ऊपर से ज़रूरत पड़ने पर कहीं आने जाने में काम भी आ जावत है, जैसे आज"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी रामु को देखकर boli,"Ohh. चलिए इसी बहाने मुझे भी घर जाने के लिए कुछ मिल गया"

रामु मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब. अगर रिक्क्षा नहीं होता तो हम कउनो इंतज़ाम कर देते. आपको हम परेशानी कैसे होने देते"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर रामु को देखि तो वह मुस्कुराते हुए hi अनीता की चूँचियों को एक नज़र फिर से देखकर वापस सामने सड़क पर देखकर रिक्शा चलने लगा.

अनीता देखि की कैसे रामु पहले उसकी चूँचियों को देखकर फिर सड़क पर देखने लगा तो वह एक नज़र खुद भी अपनी हिलती हुयी चूँचियों को देखि की कैसे सड़क पर जेर्किंग होने से उसकी चूँचियाँ हिल रही है की तभी वह देखि की रामु जल्दी से एक नज़र फिर उसकी चूँचियों पर डालकर puchha,"Abhi ठीक है तो मेमसाहेब? आपको परेशानी तो नहीं हो रहा है?"

रामु यह बोलकर वापस सड़क पर देखने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Haan रामु जी ठीक है. आप बहोत संभलकर रिक्शा चला रहे हैं".

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह भी मुस्कुरा दी और फिर रामु नज़र नीचे करके उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा.

अनीता देखि की रामु कैसे उसकी हिलती हुयी चूँचियों को बार बार देख रहा था मगर वह बुरा नहीं मानी. वह अपनी गांड पर रामु का लुंड एक बार महसूस कर चुकी थी तो वह जानती थी की रामु भी एक भरपूर मर्द है और एक मर्द होने के नाते उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देखेगा hi. यह तो प्रकृति का नियम है.

अनीता रामु को एक नज़र देखि और फिर अपनी कान के पास के बालों में हाथ फेरकर उसे कान के पीछे करके आस पास देखने लगी.

रामु फिर से आईने में देखा तो पाया की अनीता आस पास देख रही थी. अगले पल रामु अपना नज़र नीचे करके आईने में अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखा तो अनीता की भी नज़र आईने में अपनी चूँचियों पर गयी जो हिलकर ऊपर नीचे हो रही थी. वह एक नज़र रामु के तरफ देखि जिसका ध्यान कभी सड़क पर तो कभी उसकी हिलती हुयी चूँचियों के तरफ जा रहा था और फिर बिना कुछ रिएक्शन के वापस आस पास देखने लगी. वहीँ अनीता की चूँचियों को हिलते और ऐसे अनीता की निप्पल का इम्प्रैशन उसकी ब्लाउज पर देखकर रामु का लुंड धोती में खड़ा होने लगा था.

कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता puchhi,"Ramu जी" और इतना बोलती हुयी वह वापस आईने में देखि तो अभी भी उसकी चूँचियों हिल रही थी जिसे रामु देख रहा था. वह यह देखकर अपनी बातें आगे boli,"yeh सभी फैक्ट्रीज बहोत सालों से बांध पड़ा लग रहा है"

अनीता देखि की रामु का नज़र उसकी हिलती चूँचियों पर था और वह बात सुनकर जवाब देने के लिए मुंह खोला तो उसे आईने में देखते हुए देख अपना नज़र रोड के तरफ करते हुए bola,"Haan मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर उससे puchhi,"Koi शुरू करना नहीं चाहता है क्या? इसके शुरू करने से कितना रोज़गार मिलता यहाँ के लोगो को"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब ी फैक्ट्री सब झमेला वाला हो गवा है, ु केस मुक़दमा चल रहा है, राजनीती, गुंडा हर एक चीज़ का मसला है"

और बोलकर वह एक नज़र आईने में अनीता की चूँचियों को देखने लगा की तभी अनीता उसे देखती हुयी boli,"Achha" तो अनीता की बात सुनकर वह नज़र ऊपर करके देखा तो समझ गया की अनीता उसे अपनी चूँचियाँ देखते हुए देख ली मगर वह रियेक्ट करता इससे पहले एक गड्ढा आया और रामु का नज़र सामने न होने से गड्ढे से रिक्शा गुज़रा तो जोर से जर्क हुआ और अनीता की चूँचियाँ जोर से हिलने लगी.

रामु तुरंत आईने में देखकर अनीता से माफ़ी maanga,"Maaf कीजियेगा मेम..." की तभी ऊपर नीचे होती अनीता की बड़ी चूँचियाँ पर उसका नज़र पड़ा और वह उतना hi बोले मुंह खोलकर अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए 2-3 सेकण्ड्स बाद अपना बात पूरा किया,".. साहेब"

अनीता रामु को ऐसे मुंह खोलकर उसे आईने में देखते हुए देख चेहरे पर बिना कोई रिएक्शन लायी शांत मिज़ाज़ से boli,"Koi बात नहीं रामु जी"

रामु यह सुनकर नज़र उसकी चूँचियों से ऊपर करके उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता boli,"Ab रोड hi ऐसा है तो क्या किया जा सकता है"

रामु यह सुनकर थोड़ा घबरा कर bola,"Haan मेमसाहेब. सच में आप बहोत अच्छी है. हालात समझ रही हैं की ी रोड hi ऐसा है"

रामु यह बोलकर एक नज़र अनीता की ऊपर नीचे हिलती चूँचियों को देखा. वहीँ अनीता उसका बात सुनकर मुस्कुरा boli,"Haan रामु जी हालत तो समझनी hi चाहिए. हर चीज़ इंसान के बस में थोड़े होता है. अब सड़क में गड्ढे हैं तो आप क्या कर सकते हैं. बस जब गड्ढे आये तो थोड़ा ध्यान से रिक्शा चलाइये"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Theek है मेमसाहेब" और रोड पर ध्यान देकर चलने लगा. रामु अब कोशिश करने लगा की बड़े गड्ढो से बचा कर रिक्शा चलाये और अचानक कोई जर्क न हो, मगर रोड ख़राब होने से थोड़ा बहोत जेर्किंग हो hi रहा था जिससे अनीता की चूँचियाँ हर कुछ सेकण्ड्स बाद हिलने लग रही थी.

अनीता जैसी इतनी खूबसूरत, सेक्सी और जवान औरत की बड़ी बड़ी चूँचियाँ खासकर बिना ब्रा के जब हिले तो कोई भी मर्द देखने से कैसे रोक सकता था. रामु के साथ भी ऐसा hi हो रहा था. वह न चाहते हुए भी जब जब रिक्शा जर्क हो रहा था आईने में अनीता की चूँचियाँ देखने लगता था. अनीता भी यह बात समझ चुकी थी तो वह भी जब जब रिक्शा जर्क हो रहा था अपनी आँखों के कोने से आईने में देखती की रामु उसकी चूँचियाँ देख रहा है या नहीं.

एक जगह ऐसे hi जर्क होने पर अनीता देखि की रामु का ध्यान आईने में उसकी चूँचियों पर नहीं है तो वह रामु के चेहरे पर देखि जो सामने देख रहा था. उसी वक़्त रामु सामने देखते हुए bola,"Memsaheb रिक्शा को थोड़ा जोर से पकड़ लीजिये"

अनीता यह सुनकर सामने देखि तो पूरा रोड का चौड़ाई hi गड्ढा था और उससे बचने का कोई उपाय नहीं था. रिक्शा को उससे होते हुए hi जाना पड़ता. अनीता को अच्छा लगा की रामु ध्यान से रिक्शा चला रहा है और गड्ढे में जाने से पहले उसे बोल भी दिया की वह जोर से रिक्शा पकड़ ले.

अनीता जोर से रिक्शा पकड़ ली उसके कुछ सेकण्ड्स बाद रिक्शा उस गड्ढे में उतरा तो फिर से अनीता की चूँचियाँ हिलने लगी. अनीता आईने में देखि तो रामु नहीं देख रहा था. उसका ध्यान सड़क पर था. अगले कुछ सेकण्ड्स तक रिक्शा उस गड्ढे से चला और फिर ऊपर के तरफ उठकर सड़क के नार्मल लेवल पर अब गया.

नार्मल लेवल पर आने के बाद रामु अनीता से puchha,"Ab ठीक है तो मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया और न चाहते हुए भी उसका नज़र आईने में अनीता की हिलती चूँचियों पर चला गया तो अनीता boli,"Ab ठीक है. आप ध्यान दे रहे हैं अब"

रामु यह सुनकर नज़र अनीता की चूँचियों से ऊपर उसके चेहरे पर किया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Aese hi ध्यान से चलाइये"

रामु का लुंड यह सुनकर धोती में hi तन तना गया. अनीता की बात का टाइमिंग ऐसा था की लग रहा हो वह रामु को अपनी चूँचियों को ध्यान से देखने के लिए बोल रही है. सच्चाई क्या था यह तो अनीता hi जानती थी मगर बात यह था की रामु पूरा गड्ढे को सड़क पर देखते हुए hi पार किया था तो वह गड्ढे के वक़्त सड़क पर hi ध्यान दिए था.

खैर जो भी हो रामु का कॉन्फिडेंस अनीता को मुस्कुराता देख थोड़ा बढ़ गया था और वह भी अनीता को देखकर मुस्कुरा दिया और नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र आगे सड़क पर देखि तो कोई गड्ढा नहीं था तो वह बिना कुछ बोले आस पास देखने लगी.

अब सड़क के नार्मल लेवल पर आने के बाद रिक्शा पहले जैसे चलने लगी और छोटे मोठे गड्ढे से गुज़रते वक़्त रिक्शा में थोड़ा जर्क हो रहा था, मगर इतना नहीं की अनीता को बहोत परेशानी हो, हाँ उसकी चूँचियाँ ज़रूर हिल रही थी और हिलती भी क्यों नहीं. उसकी चूँचियाँ बड़ी बड़ी थी और बिना ब्रा के थी तो थोड़ा सा भी रिक्शा जर्क होने पर तो हिलना hi था. अनीता को इससे कोई परेशानी नहीं थी. वह भी पहले के जैसे जब जब गड्ढा आता तो आईने में देखती तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए पाती. अनीता भी आईने में एक दो बार अपनी चूँचियों को देखि की गड्ढे आने पर कैसे हिल रही हैं और निप्पल का छाप तो साफ़ साफ़ पता चल रहा है मगर उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आयी.

आगे चलकर एक दो जगह थोड़ा बड़ा गड्ढा था और आराम से चलने के बाद भी थोड़ा जर्क हुआ तो अनीता हलकी cheekhi,"ouch आआअह्ह्ह" और उसकी चूँचियाँ हिलने लगी तो रामु bola,"maaf कीजियेगा मेमसाहेब.."

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी अब बार बार माफ़ी मांग कर मुझे शर्मिंदा मत कीजिये. आप अच्छे से रिक्शा चला रहे हैं. रोड hi ऐसा है तो क्या कर सकते हैं"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर आईने में अनीता को देखा तो रिक्शा हल्का हल्का जर्क होने से उसकी चूँचियाँ लगातार हिल रही थी.

अनीता अपनी चूँचियों को हिलता महसूस करती हुयी आगे बोलना जारी rakhi,"Aur ऐसे भी आपने तो मुझसे बोलै hi था की रोड ख़राब है. यह तो मेरा फैसला था की इधर से hi आप ले चले. बस मैं बड़े गड्ढे के बारे में बोल रही थी की उस वक़्त थोड़ा ध्यान देकर चलाये जो आप कर hi रहे हैं"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को आईने में देखने के बाद एक नज़र सामने देखा तो रिक्शा एक छोटे गड्ढे से गुज़रा. रामु रिक्शा ठीक से चलाया मगर फिर भी हल्का जर्क हो hi गया तो अनीता फिर ी हल्का cheekhi,"ouch आह्हः" मगर इस बार उसे हसी आ गयी और वह खिलखिलाने lagi,"Hehehe ओह माय गॉड यह रास्ता सच में हेहेहे".

अनीता खिलखिला रही थी और साथ hi उसकी चूँचियाँ फिर हिलने लगी. अनीता को खिलखिलाते देख रामु भी मुस्कुराने लगा और अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा. अनीता आईने में देखि की रामु उसकी चूँचियों को hi देख रहा है मगर वह बिना बुरा माने बस खिलखिला रही थी.

इसके बाद आगे चलकर कोई गड्ढा नहीं था मगर सड़क बनाने के लिए जो एग्रीगेट इस्तेमाल होता है वह अब टूट चूका था और रोड पर चिकनाहट नहीं थी. पूरा रोड पर बस वह टूटे हुए एग्रीगेट hi भरे हुए थे जिससे रोड रफ़ हो चूका था. इस पर रिक्शा चलने के कारण अब लगातार हिलने लगी थी हालाँकि बहोत जोर से नहीं हिल रही थी की अनीता को बहोत परेशानी हो मगर इतना तो था hi की उसकी चूँचियाँ लगातार हिलने लगी.

अनीता पहले से hi खिलखिला रही थी और अब लगातार रिक्क्षा के जर्क होने से वह अपनी चूँचियों को लगातार ऊपर नीचे होते महसूस करके खिलखिलाती हुयी आगे boli,"Aahhh रामु जी हेहेहे मैंने ज़िन्दगी में कभी ऐसा रास्ता नहीं देखा हेहेहे ओह माय गॉड सीरियसली"

रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसे आईने में देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप बड़े शहर से आयी हैं. यहां तो रास्ता एक दम चिकना रहता होगा" और वह बोलकर मुस्कुराते हुए वापस अनीता की चूँचियों को हिलता देखने लगा.

अनीता देखि की रामु फिर से उसकी चूँचियों को देखने लगा था. वह उसका बात सुनकर खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe हाँ रामु जी मगर वहां भी बरसात में कहीं कहीं थोड़े गड्ढे हो जाते हैं मगर यह रास्ता तो यूनिक hi है".

अनीता अपनी बात आईने में रामु को देखती हुयी बोल रही थी मगर रामु का ध्यान उसकी चूँचियों पर थी. अगले पल रिक्शा थोड़ा तेज़ जर्क हुआ तो अनीता हलकी cheekhi,"aaahhh रामु जी हेहेहे" और उसकी दोनों चूँचियाँ भी वैसे hi तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी. अनीता की चीख सुनकर रामु उसकी चूँचियों से नज़र ऊपर किया तो अनीता को खिलखिलाते देखा. रामु को यक़ीन था की अनीता उसे अपनी चूँचियों को हिलता देखते हुए देख चुकी थी मगर वह कुछ बोली नहीं बस है रही थी.

अनीता को ऐसे हस्ता देख रामु को अच्छा लगा और साथ hi कॉन्फिडेंस भी बढ़ा तो वह मुस्कुराते हुए अनीता की चेहरे पर देखने के बाद उसकी हिलती हुयी चूँचियों को वापस देखकर bola,"Memsaheb कउनो परेशानी तो नहीं है. रोड ससुरा ऐसा hi है"

अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe नहीं रामु जी. मुझे तो अब लगने लगा है जैसे मैं झूला झूल रही हूँ. देखिये कैसे पूरी बदन हिल रही है मेरी हेहेहे जैसे मैं सच में झूल रही हूँ"

रामु यह सुनकर एक नज़र सड़क पर डालने के बाद वापस अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए bola,"Hahaha मेमसाहेब हाँ सच में पूरा हिल रही है मेमसाहेब. सच में लग रहा है की आप झूला झूल रही हैं"

रामु का बात सुनकर अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe ओह माय गॉड रामु जी" तो रामु मुस्कुराते हुए अनीता की आँखों में देखा तो अनीता हस्ती rahi,"Hehehe" तो रामु वापस उसकी चूँचियों के तरफ देखकर मुस्कुराने लगा तो अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe रामु जी और कितना झूला झुलाएंगे आप मुझे"

रामु यह सुनकर अनीता की आँखों में देखा तो फिर से समझ गया की अनीता उसे अपनी चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए देख चुकी थी.

रामु अनीता को देखकर मुस्कुरा कर bola,"Jab तक आप झूलना चाहेंगी"

फिर एक नज़र वह अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"hum झुलाएंगे मेमसाहेब".

रामु यह बोलकर वापस अनीता की चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Hehehe रामु जी और कितना झुलु मैं. देख तो रहे हैं आप कैसे जबसे इस रोड पर रिक्शा आया है तबसे तो हिल hi रही हूँ"

रामु का लुंड अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखकर तन तना कर धोती में खड़ा हो चूका था और जेर्किंग के कारण वह भी उसके धोती में हिल रहा था. अनीता की बात सुनकर उसका लुंड और बौखका गया और हिलने लगा. वह अपना धड़कन काबू में करते हुए अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब देख रहे हैं की कितना हिल रहा है"

रामु यह बोलकर अनीता की आँखों में देखा तो वह मुस्कुराकर boli,"Aap को नहीं लगता रामु जी की इतना झूलने के बाद थोड़ा आराम भी मिलना चाहिए"

रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब आराम तब मिलना hi चाहिए. बहोत देर से हिल रहा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुरा दी और boli,"Aur कितनी देर है घर पहुँचने में?"

रामु यह सुनकर bola,"Bas दो तीन मिनट और मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और फिर आस पास देखने लगी. कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता एक नज़र आईने में देखि तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. रामु को भनक लगा तो वह आँख ऊपर करके अनीता को देखा तो वह मुस्कुराती हुयी अपनी कान के पास के बाल को कान के पीछे करके बिना कुछ बोले आस पास देखने लगी. वहीँ रामु सड़क पर एक नज़र डालने के बाद बेझिझक अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र फिर से आईने में देखि तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते पायी. अनीता एक नज़र अपनी चूँचियों को देखि जो ऊपर नीचे होकर हिल रही थी और ब्लाउज के पतले कपडे में उसकी निप्पल्स की छाप साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. बल्कि लगातार ब्लाउज के कपडे से उसकी निप्पल घिसने से कड़ी हो चुकी थी और ब्लाउज के कपडे पर पहले से ज़्यादा उसकी छाप दिख रही थी.

अनीता अपनी चूँचियों और निप्पल के छाप को देखकर एक गहरी सांस ली और आस पास देखने लगी. उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आयी की कैसे उसकी चूँचियाँ लगातार हिल रही है, उसकी निप्पल्स का छाप उसकी ब्लाउज में साफ़ साफ़ समझ आ रही थी और कैसे एक ग़ैर मर्द जो न सिर्फ एक गंवार मज़दूर था, बल्कि उससे लगभग 20 साल बड़ा है वह लगातार उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देख रहा था.

दो तीन मिनट बाद रिक्शा अनीता के दरवाज़े के पास पहुँच गयी. रामु जिस रास्ते से उसे लाया था वह अनीता की घर के बाये तरफ के सड़क था जिसके कारण उसे ऑटो स्टैंड के तरफ से नहीं आना पड़ा था जो की उसके घर से सामने सीधा रास्ता था. वह रास्ता हरिया के घर से लेकर उसके घर तक पूरा सुननसँ था और रोड ख़राब था. वह इसलिए की उस रास्ते पर पुराण बांध पद चुके फैक्ट्रीज थे जिसके बांध होने के कारण रोड का मेंटेनेंस नहीं हो रहा था. हरिया के घर से कुछ दुरी तक एक तरफ नाला दूसरे तरफ फैक्ट्रीज थे मगर थोड़ी दुरी के बाद, मतलब अनीता की घर से लगभग एक किलोमीटर पहले वह नाला दूसरे तरफ घूम जा रहा था और अनीता की घर से लेकर वहां तक एक तरफ खली ज़मीन थी जो की राज के कंपनी का था और दूसरे तरफ एक पुराण फैक्ट्री और फिर एक बड़ा सा पार्क था जो की बांध था और ज़्यादातर पियक्कड़ और जुआरी लोग कभी कभी रात में इकठ्ठा होते थे.

पूरा रास्ता में दोनों तरफ पेड़ था जिसके कारण वह छाओं में hi आयी और सुननसँ होने के कारण कोई दिखा भी नहीं. घर के पास जब रिक्शा रुका तो रामु रिक्शा से उतारते हुए bola,"Ek मिनट हम आपके उतरने में मदद करते हैं"

अनीता यह सुनकर उसे देखकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी नहीं तो फिर से मैं कहीं गिरने न लागु"

रामु उतारकर रिक्शा के पास आया और दये हाथ से सीट को पकड़ कर उठने लगी फिर वह उतरने लगी तो उसकी हाथ अपने आप रामु के बाये कंधे पर चली गयी और रामु का दया हाथ उसकी बायीं कमर पर जिसे पकड़ कर वह अनीता को संभाला. अनीता जैसी अमीर, खूबसूरत और पढ़ी लिखी औरत जो किसी हीरोइन और मॉडल से काम नहीं थी उसकी कमर पर हाथ रखकर रामु का दिल धड़क गया और लुंड में बेचैनी होने लगा मगर वह अनीता की कमर पर हाथ उसको छेड़ने के इरादे से नहीं बल्कि सच में मदद करने के लिए किया था.

खैर उसका इरादा भले hi अनीता को छेड़ने का नहीं था मगर था तो वह मर्द hi तो अनीता जैसी औरत की नंगी कमर पर हाथ रखने से उसे कैसे अच्छा नहीं लगता. उसे अनीता की कमर पर हाथ रखकर अच्छा लग रहा था. इतना चिकना, मुलायम और गोरी कमर था की उसे लग रहा था की फूल पर हाथ रखा हुआ है.

अनीता उसके कंधे पर हाथ रखकर उतर कर मुस्कुरा कर boli,"Thank यू रामु जी मुझे घर तक छोड़ने के लिए"

रामु यह सुनकर अनीता की कमर पर हाथ रखे हुए hi bola,"Are मेमसाहेब हुंका कहे शर्मिंदा कर रही हैं आप. आप हम ग़रीब लोगन का इतना ख्याल रखती हैं. हरिया के ग़रीब झोपड़े में उसे देखने आयी. उसका इलाज के लिए पैसे दी. इतना कौन करता है. सच में आप बहोत अच्छी है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Ramu जी फिर से अमीर ग़रीब की बातें करने लगे आप"

रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब. अब जो हमलोगां है ु तो है"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Mere लिए नहीं है. आप सब बस इंसान हैं मेरे लिए."

रामु यह सुनकर bola,"Memsaheb एक बात बोले आप बुरा नहीं मानियेगा तो?"

अनीता यह सुनकर एक ऐडा से boli,"Kya रामु जी? बोलिये जो भी बोलना है"

रामु यह सुनकर अनीता की कमर को देखते हुए bola,"Aap जतना खबसूरत हैं उतना hi दिल की अच्छी भी हैं. और जैसे हरिया कहत हैं आपका दिल भी बहोत बड़ा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo रामु जी"

और फिर वह एक ऐडा से boli,"Aap और हरिया जी भी तो मेरी कितनी मदद करते रहते हैं. उस दिन आप नहीं होते तो क्या मेरा पानी का प्रॉब्लम इतनी जल्दी सोल्वे होता? यहाँ मैं जानती hi किसे हूँ. यह तो आप और हरिया जी हैं जो मेरा इतना ख्याल रखते हैं और कोई भी प्रॉब्लम होता है तो मदद करने आ जाते हैं"

रामु यह सुनकर अनीता की कमर पर हाथ रखे hi bola,"Memsaheb कउनो परेशानी होगा तो बोलियेगा. आप बहोत अच्छी हैं. आपका मदद करके हुंका अच्छा लगेगा"

अनीता यह सुनकर एक ऐडा से boli,"Haan रामु जी ज़रूर बोलूंगी. आप और हरिया जी hi तो है जिन्हे मैं जानती हूँ. कोई भी परेशानी होगी तो ज़रूर बताउंगी"

रामु आगे bola,"aese आपको रिक्शा पर ज़्यादा परेशानी तो नहीं हुयी?"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Shuru में तो परेशानी हुयी क्यूंकि इतना बड़े बड़े गड्ढे थे मगर बाद में तो मुझे हसी hi आ रही थी क्यूंकि लग रहा था की मैं झूला झूल रही हूँ हहहहए"

अनीता को खिलखिलाते देख रामु भी हस्ते हुए bola,"Hahaha मेमसाहेब ससुरा रास्ता hi वैसा है"

यह बोलकर रामु का ध्यान फिर से अनीता की चूँचियों पर चला गया तो अनीता खिलखिलाती हुयी रामु को अपनी चूंकि देखते हुए देखकर boli,"Hehehe सच में मैंने ऐसा रास्ता आज तक नहीं देखा हेहेहे"

रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसे देखा तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Meri तोह पूरी बदन hi हिल रही थी. आप देख रहे थे न रामु जी कितनी हिल रही थी"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब हम देख रहे थे की कितनी हिल रही थी"

फिर वह अनीता की आँखों में देखकर bola,"Hum कोशिश कर रहे थे की रिक्शा अच्छा से चलाये और काम हिले लेकिन फिर भी ससुरा रोड hi ख़राब था"

अनीता मुस्कुराकर जवाब di,"Haan रामु जी अब रोड ख़राब था तो आप क्या कर सकते थे. वैसे रोड पर सफर करने से तो हिलना hi था. फिर भी आप अच्छे से रिक्शा चला रहे थे ताकि काम से काम हिले मेरी बदन"

रामु यह सुननकट मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Achha अब मैं चलती हूँ. अगर आप अंदर आकर कुछ पीना चाहते हैं, पानी या जूस तो पी सकते हैं"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया की तभी हरिया का फ़ोन आने लगा. रामु यह देखकर bola,"Woh मेमसाहेब ससुरा हरिया इंतज़ार कर रहा होगा. आप तो देखि hi की वह दारु पीना चाहता है और अब फ़ोन भी करात है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan ठीक है. मैं चलती हूँ"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता घूमकर गांड मटकती हुयी दरवाज़े के तरफ जाने लगी. रामु अनीता की मटकती गांड और अधनंगी पीठ देखने लगा जिससे उसका लुंड तन तना गया. अनीता गेट खोलकर अंदर चली गयी और रामु रिक्शा लेकर हरिया के घर चला गया.
 
अपडेट 107

घर पहुँच कर अनीता पूरी नंगी होकर आईने में अपनी गांड देखि जो हल्का लाल हो चूका था हरिया के थप्पड़ मारने से. अनीता अपनी गांड देखकर हल्का मुस्कुरा दी और याद की की कैसे वह झुककर अपनी गांड हरिया के तरफ कर दी ताकि वह उस पर थप्पड़ मारे और हरिया भी एक मर्द के तरह जोर से थप्पड़ मारकर उसकी गांड लाल कर दिया.

अनीता मुस्कुराती हुयी फिर अपनी चूँचियों को देखो की कैसे आज हरिया भूखे भेड़िये की तरह उसकी नंगी चूँचियों को चूस और काट रहा था. अनीता को चूसने पर ध्यान आया की वह भी हरिया का तगड़ा लुंड आज चूसी और छाती. यह ध्यान आते hi अनीता की छूट में हलचल हुयी तो उसे ध्यान आया की उसकी छूट भी गीली है. अनीता की सांस तेज़ होने लगी और वह बाथरूम में नहाने चली गई.

वह बाथटब में बैठकर कुछ देर पूरा घटना याद करती रही की कैसे हरिया भूखा और प्यासा नज़र से उसकी चूँचियों को देख रहा था और कैसे वह अपनी ब्लाउज हटाकर चूँचियों को नंगी करके उसे अपनी चूंकि पिलाई. यह याद करते hi अनीता की निप्पल कड़क होने लगी और हरिया के होंठों का छुअन अपनी निप्पल पर याद करने लगी.

फिर वह याद की कैसे हरिया उसे अपना लुंड चुसाया आज. अनीता अपनी मुंह में उसके लुंड का कड़कपन याद करने लगी और साथ hi याद की की उसका लुंड यथा मोटा और बड़ा था की वह एक चौथाई hi मुंह में ले पायी. वह तो हरिया उसकी मदद किया तो वह उसका लुंड एक तिहाई मुंह में ले पायी.

यह याद आते hi अनीता खुद से धीरे से boli,"Kitna बड़ा और मोटा है हरिया जी का हथियार. मेरे तो मुंह में hi नहीं जा पा रहा था. वह तो हरिया जी मदद किये तो एक तिहाई मैं चूस पायी. हरिया जी कैसे बोल रहे थे की मैं उनका पूरा निगल सकती हूँ लेकिन मुझे नहीं लगता मैं कर पाउंगी. इतना बड़ा और मोटा कैसे मैं पूरा चूस पाऊँगी. यह सोचते hi अनीता की बदन में सिहरन महसूस हुयी और छूट में बेचैनी होने लगी.

वह सोचने लगी की पता नहीं वह हरिया का लुंड अपनी छूट में ले पायेगी भी या नहीं और यह सोचकर वह अपनी हाथ छूट पर लेजाकर थोड़ा सहलाकर उसे अपनी इंडेक्स और मिडिल फिंगर से फैलाई तो उसे ऐसे लगा जैसे हरिया सामने है और वह उसके लिए अपनी छूट फैला रही है. यह सोचते hi अनीता अपना सर झटकी और छूट से हाथ हटाकर boli,"Offo मैं भी क्या सोच रही हूँ और क्या कर रही हूँ. मुझे नाहा लेना चाहिए"

अनीता यह बोलकर बाथटब से उठकर शावर के नीचे जाकर नहाने लगी और अपनी बदन पर शावर जेल लगाती हुयी जब उसकी हाथ चूँचियों पर पहुंची और उस पर वह जेल लगा रही थी तो उसे हिलता देख मुस्कुरा दी. उसे याद आने लगा की कैसे रास्ते भर उसकी दोनों चूँचियाँ हिल रही थी और रामु उसे देख रहा था. अनीता यह याद करती हुयी मुस्कुराकर नहायी और फिर बाहर आकर तैयार होकर लंच बनाई और खाकर सो गयी.

रात में राज आया तो दोनों पति पत्नी में थोड़ी छेड़ छड़ हुयी. दोनों पति पत्नी बिस्तर पर साथ में सोकर एक दूसरे के होंठों को थोड़ा चुम्बन लिए और फिर राज अनीता को नंगी करने लगा. अनीता को अच्छा लगा की आज उसका पति मूड में है क्यूंकि उसे भी एक मर्द की ज़रूरत थी आज.

दोनों पति पत्नी नंगे हो गए तो अनीता राज के छाती और पेट चूमने के बाद नीचे उसके लुंड के तरफ बढ़ी और पुरे वक़्त अनीता को हरिया का याद आ रहा था क्यूंकि उसके साथ भी ऐसे hi वह छाती और फिर पेट चूमती हुयी उसके लुंड के तरफ गयी थी मगर जब लुंड तक पहुंची तब अनीता को एहसास हुआ की दोनों में क्या फ़र्क़ है. उसके पति का लुंड कोई छोटा और पतला नहीं था. राज का भी लुंड एवरेज से बड़ा और मोटा था मगर दोनों लम्बाई और मोटाई में हरिया के मुक़ाबले आधा hi था या उससे थोड़ा काम. अनीता की दिल धड़कने लगी यह सोच कर फिर उसे बुरा लगा की वह अपने पति का लुंड को हरिया के लुंड से कपड़े कर रही है.

अनीता जितनी भी बेशर्म थी और उसके अंदर रान्दीपना कूट कूट कर भरा हुआ था मगर वह अपने पति से प्यार करती थी और इज़्ज़त भी करती थी. उसका बेशर्मी और रान्दीपना अपनी जगह थी और पति का प्यार और इज़्ज़त अपनी जगह इसलिए हरिया जब भी उससे पूछता की साहेब उसे छोड़ रहा है या नहीं तो वह बात को ताल देती क्यूंकि उसकी नज़र में हरिया का अपना जगह था और उसके पति का अपना जगह.

अनीता अपनी सर झटक दी और फिर अपने पति का लुंड चूसने लगी. राज मज़े से siskara,"Aaahhhh" तो अनीता अपनी सर ऊपर नीचे करके उसका लुंड चूसना जारी राखी. कुछ सेकण्ड्स चूसने के बाद अनीता अपनी सर नीचे की और एक बार में hi राज का तीन चौथाई लुंड निगल गयी. कुछ देर और चूसने के बाद वह उसका पूरा लुंड निगल गयी. न चाहते हुए भी अनीता की दिमाग़ में फिर से हरिया का लुंड का ख्याल आने लगा की वह कितना लम्बा और मोटा था की अनीता को उसे चूसने में मुश्किल हो रही थी.

राज देखने लगा की उसकी हीरोइन और मॉडल जैसी खूबसूरत और सेक्सी बीवी कैसे उसका पूरा लुंड निगल गयी. अनीता लगभग 4-5 मिनट राज का लुंड चूसी उसके बाद राज उठे हुए bola,"Let में गेट थे कंडोम"

अनीता समझ गयउ उसका पति क्या चाहता है तो वह बिस्तर पर पेट के बल लेट कर अपनी टाँगे खोल दी. राज अपने लुंड पर कंडोम चढ़ा कर अपनी पत्नी के टांगों के बीच आया और उसकी छूट में लुंड घुसकर उसके ऊपर लेट कर छोड़ने लगा.

इस बीच अनीता यही सोच रही थी की वह लगभग आधे घंटे तक हरिया का लुंड चूसी मगर वह नहीं झरा और उसका पति 4-5 मिनट के लुंड चूसै के बाद hi उसे छोड़ने लगा. अनीता को फिर बुरा लगा की वह हरिया के लुंड को याद कर रही है और वह अपनी सोच से बाहर आने की कोशिश में अपने पति के पीठ पर हाथ रखकर उसके कमर में अपनी टांगें लपेट कर चुदाई में उसका साथ देने लगी. लगभग दो मिनट के चुदाई के बाद अनीता गरम होने लगी तो हरिया का ख्याल थोड़ा बाहर आया और वह अपने पति के साथ चुदाई का मज़ा लेने लगी.

लगभग 10 मिनट छोड़ने के बाद राज आख़िरकार झाड़ गया और अनीता की होंठों को चूमने के बाद उसकी बगल में लेट कर तेज़ सांस लेने लगा. इस बीच अनीता का ख्याल फिर से हरिया के लुंड पर चला गया और वह आँख बांध करके हरिया के लुंड के बारे में सोचने लगी. इंसान का हे फितरत है की अगर कोई दो चीज़ का अनुभव हो तो वह दोनों को कपड़े करे. न चाहते हुए भी ऐसा हो hi जाता है. अनीता के साथ भी एहि हो रहा था की न चाहते हुए भी वह अपने पति के लुंड से हरिया का लुंड कपड़े करने लग रही थी. वह आँख बांध करके हरिया के लुंड के बारे में सोच hi रही थी की राज बिस्तर से उठ कर कंडोम ट्रैश बिन में फ़ेंक कर लुंड साफ़ करके सो गया. वह अपनी पत्नी को देखा की वह आँखें बांध की हुयी थी तोह वह चुप चाप उसके बगल में सो गया. थोड़ी देर के बाद वह आँख खोल कर देखि तो राज सो चूका था. वह उठकर वाशरूम जाकर खुद को साफ़ की और बीएड पर आकर वापस अपनी आँख बांध करके हरिया के लुंड के बारे में सोचती हुयी सो गयी.

अगले दो दिन कुछ ख़ास नहीं हुआ. संडे को अनीता अपने पति के साथ बाहर घूमने गई और मंडे को घर पर hi रही. ट्यूसडे को स्टोर रूम का सफाई के लिए चंदा के आने के थोड़े देर बाद रामु आया था. अनीता अपनी कमरे में थी.

अनीता अपनी कमरे में पेट के बल लेती हुयी मैगज़ीन पढ़ रही थी की तभी उसकी दरवाज़ा नॉक हुआ. वह पेट के बल लेती हुयी hi घूम कर देखि तो चंदा थी. वह अनीता को देखकर boli,"Memsaheb हम पूरा घर का सफाई कर दिए. वह बापू स्टोर रूम का सफाई कर रहे हैं. थोड़ा देर में ु भी हो जायेगा. मैं जा रही हूँ"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर सर हिलाई थी चंदा चली गयी. अनीता वापस मैगज़ीन पढ़ने लगी. लगभग 10 मिनट बाद रामु लिविंग रूम में आया और आस पास देखा तो अनीता नहीं थी. वह समझ गया की वह अपनी कमरे में होगी तो वह उधर जाकर दरवाज़ा खटखटाने का सोचा की तभी हल्का खुले दरवाज़े से अनीता दिखाई दी जो की बिस्तर पर पेट के बल लेती हुयी मैगज़ीन पढ़ रही थी. वह एक सलवार कमीज पहनी हुयी थी. कमीज बैकलेस थी जिसमे आधे से ज़्यादा पीठ नंगी थी और बस तीन डोरी बंधी हुयी थी.

रामु का दिल अनीता की नंगी गोरी पीठ देखकर धड़कने लगा और लुंड में हलचल होने लगा. अगले पल उसका नज़र उसकी पीठ से सड़क कर नीचे के तरफ आयी तो अनीता की पहाड़ जैसी उठी हुयी गांड देखकर लुंड तन तना गया. अनीता जो कमीज पहनती थी वह ज़्यादातर गांड के ठीक नीचे ख़तम हो जाती थी, मगर अभी लेती हुयी थी तोह थोड़ा ऊपर खिसक गई थी और उसकी गांड पर सिर्फ सलवार का कपडा था जिससे उसकी गांड की उभार साफ़ साफ़ पता चल रही थी.

रामु धड़कते दिल के साथ दरवाज़ा नॉक किया तो अनीता वैसे hi लेती हुयी घूमकर देखि तो रामु खड़ा था. रामु जो देखकर वह मुस्कुराकर boli,"Ramu जी आप? कुछ चाहिए क्या?"

रामु यह सुनकर एक नज़र उसकी गांड पर ले गया और फिर अनीता को देखकर bola,"Woh मेमसाहेब दूकान का टाइम हो गया है तो हम जा रहा हूँ. सोचे की आपको बता दे जाने से पहले"

रामु एक पल के लिए hi अनीता की गांड पर नज़र डाला था मगर अनीता वह देख ली. देखने के बावजूद भी वह कुछ रिएक्शन नहीं दी. रामु का बात सुनने के बाद वह बिस्तर से उठती हुयी boli,"Achha. आप थक गए होंगे. जूस पीकर जाइये"

रामु यह सुनकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब कउनो ज़रूरत नहीं है"

अनीता यह सुनकर बिस्तर से उठती हुयी रामु के तरफ जाती हुयी boli,"Are ज़रूरत कैसे नहीं है?"

फिर वह उसके सीने के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Dekhiye कितना पसीना से भीग गए हैं आप. थोड़ी देर लिविंग रूम में बैठ कर आराम से जूस पी लीजिये. आराम भी मिल जायेगा और जूस पीना भी हो जायेगा"

अनीता जब बिस्तर से उठी तो रामु उसकी चूंकि देखा जो गहरे गले के कमीज में एक चौथाई बाहर होकर नंगी थी. अनीता हमेशा के जैसी कोई दुपट्टा नहीं पहनी थी और उसकी चूँचियों का अकार और अच्छा ख़ासा क्लीवेज साफ़ साफ़ दिख रहा था. यह देखते hi रामु का लुंड धोती में बेचैन होने लगा.

अनीता अपनी बात बोलती हुयी दरवाज़े के पास आकर boli,"Agar कुछ और पीने का मैं है तो बोलिये"

रामु यह सुनकर अपना ध्यान अनीता की चूंकि से हटाकर उसे देखा तो अनीता मुस्कुरा दी. अनीता को मुस्कुराता देख रामु भी मुस्कुराकर bola,"Memsaheb जो आप पिलाना चाहती हैं पीला दीजिये"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Pyaas आपको लगा है रामु जी"

और फिर अनीता उसके सीने के तरफ पसीने को देखती हुयी boli,"Aur पसीने से आप भीगे है तो आप बताइयेगा न की आपको क्या पीना है?"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"khair चलिए आप सोफे पर बैठिये मैं आपके पीने के लिए कुछ लेकर आती हूँ"

रामु यह सुनकर दरवाज़े के पास से घुमा तो अनीता उसके बगल से अपनी गांड मटकती हुयी किचन के तरफ जाने लगी. रामु ध्यान से अनीता की मटकती गांड और उसके ऊपर अधनंगी पीठ को देखकर सीढ़ी के तरफ जाकर सीढ़ियों पर बैठ गया.

अनीता कुछ देर के बाद एक ट्रे में जूस के बॉटल्स लेकर घूमी तो रामु को सीढ़ियों पर बैठा देख नाराज़गी से boli,"Ramu जी वहां कहाँ बैठ गए. सोफे पर बैठिये"

रामु यह सुनकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब गन्दा हो जायेगा"

अनीता यह सुनकर boli,"Are कुछ गन्दा नहीं होगा. और हो भी जायेगा तो धूल जायेंगे. आप वैसे सीढ़ियों पर बैठेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा. आइये इधर बैठिये"

रामु यह सुनकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब हम ीहें ठीक हूँ. टाइल्स ठंडा ठंडा लग रहा है हुंका"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है जैसे आपको अच्छा लगे" और वह सीढ़ियों के तरफ जाने लगी तो रामु उठते हुए bola,"Rukiye हम आकर जूस ले लेता हूँ"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ आती हुयी boli,"Are कोई बात नहीं है मैं लेकर तो आ hi रही हूँ. आप बैठकर आराम कीजिये. फिर दिन भर तो आपको म्हणत hi करना है"

रामु यह सुनकर सीढ़ियों पर बैठ गया तो अनीता उसके पास आकर थोड़ी झुककर ट्रे को रामु के तरफ बधाई तो वह एक गिलास जूस ले लिया. अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Aap कुछ बोले नहीं की आपको कुछ और पीना है तो मैं जूस hi लेकर आ गयी"

रामु यह सुनकर अनीता की चूँचियों के तरफ उसकी गहरी क्लीवेज में देखकर bola,"Hum तो बोले hi मेमसाहेब की आपको जो मैं है ु पीला दीजिये"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी ट्रे को रामु के बगल में सीढ़ी पर रखती हुयी boli,"Mujhe लगा की जूस hi पीला देती हूँ."

फिर वह कड़ी होकर रामु को देखती हुयी boli,"Jab आपको कुछ और पीने का मैं होगा तोह बोल दीजियेगा"

रामु यह सुनकर मुस्कुरा दिया और फिर एक नज़र अनीता की चूंकि देखने के बाद जूस पीने लगा. वह गटागट जूस पि गया तो अनीता boli,"Aur जूस हैं इस पैकेट में. पीना है तो पि लीजिये"

रामु यह सुनकर अपना मुंह पोंछा और उठकर bola,"Nahin मेमसाहेब. अब हम काम पर जाते हैं नहीं तो लेट हो जायेगा. हरिया का तबियत ख़राब होने से हमरा ज़िम्मेदारी बढ़ गवा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है रामु जी" तो वह वहां से दरवाज़े के तरफ चल दिया. अनीता उसके पीछे पीछे गयी और जब वह चला गया तो दरवाज़ा बांध करके जूस का ट्रे किचन में रख कर अपनी कमरे में चली गयी.

उस दिन के बाद अनीता दो बार और रामु से मिली. एक बार बाजार में hi मिल गया वह और हरिया के तरह अनीता को ऑटो स्टैंड तक पहुंचा दिया. उसे पता नहीं था की हरिया भी अनीता की ऐसे मदद करता था मगर वह दिखी तो उसे लगा की वह अनीता का सामान ऑटो स्टैंड तक ले जाने में मदद कर दे. रास्ते में वह दोनों के बीच बात चीत हुयी और रामु कभी कभी अनीता की चूँचियों को देख लेता मगर वह हरिया के तरह अनीता से छेड़ छड़ नहीं किया.

दूसरी बार वह चंदा के साथ hi आया था अनीता के पैसे लौटने जो हरिया के हॉस्पिटल से डिस्चार्ज वाले दिन लिया था मगर अनीता पैसे लेने से मन कर दी.

रामु उसे पैसे देने का कोशिश किया तो अनीता नाराज़गी से boli,"Ramu जी कैसी बात कर रहे हैं आप. आप और हरिया जी मेरी हमेशा मदद करते रहते हैं तो क्या मैं इतना भी नहीं कर सकती आपके लिए. पिछले दिन भी आप कैसे मुझे सामान उठाये देखे तो मेरे हाथ से सामान लेकर ऑटो स्टैंड तक पहुँचाया आपने. आज कल कौन किसकी मदद करता है और आप और हरिया जी हैं की मुझे थोड़ी परेशानी में देखते हैं तो चिंता करने लगते हैं की आप दोनों के होते हुए मुझे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. तो मेरे होते हुए भी आप लोगो को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. मैंने थोड़े पैसे दे hi दिया तो क्या हो गया. क्या मैं आप लोगो के लिए इतना नहीं कर सकती"

चंदा अपने काम में लगी हुयी थी तो वह रामु और अनीता की बात नहीं सुन्न पा रही थी. रामु अनीता को देखकर bola,"Achha मेमसाहेब हम चलते हैं. कउनो ज़रूरत होगा तो बोलियेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी"

रामु यह सुनने के बाद एक नज़र अनीता की चूँचियों को देखा और चला गया.

मंडे को सुबह सुबह राज को साइट पर काम था तो दोनों पति पत्नी संडे का डिनर रेस्टोरेंट में करने का सोचे. अनीता एक बैकलेस ब्लाउज पहनी थी जिसमे पीछे पीठ पर सिर्फ तीन डोरियन थी और सामने से उसकी एक चौथाई चूंकि ब्लाउज के बाहर थी. साड़ी भी नाभि के अच्छा खासा नीचे बंधी थी और नाभि में लम्बा बेल्ली बटन रिंग लटक रही थी जिसके अंत में हार्ट शेप बना हुआ था. उसकी बेल्ली बटन रिंग रौशनी में चमक रही थी. उसकी दूध जैसी गोरी और सपाट पेट के बीच वह बेल्ली बटन रिंग उसे बहोत सेक्सी बना रही थी. देखा जाये तोह अपने पति के साथ रेस्टोरेंट में खाने के लिए अनीता अच्छे से सजकर निकली थी.

अनीता जब रेस्टोरेंट में घुसी तो गेटकीपर से लेकर वेटर तक सबका दिल धड़क गया. यहाँ तक की जो कस्टमर्स थे सबका नज़र उसके ऊपर चला जा रहा था और वह चुपके से एक नज़र अनीता को देख ले रहे थे. अनीता इन सबसे बेखबर अपने पति के साथ डिनर करके लगभग रात के 8:30 बजे निकली. राज रेस्टोरेंट से hi अपने सफर के लिए निकल गया. वह अनीता को घर छोड़ना छह रहा था मगर अनीता मन कर दी की ऐसे वह लेट हो जायेगा. वह बोली की वह ऑटो से चली जाएगी तो राज चला गया.

रेस्टोरेंट बाजार के पास hi था और क्यूंकि संडे था तो बाकी दिनों के मुक़ाबले थोड़ा सन्नाटा था. अनीता एक ऑटो देखकर उधर जाने लगी. रेस्टोरेंट से कुछ कदम के दुरी पर एक गली में कचरा फेंका हुआ था और उधर से बदबू आ रही थी. अनीता यह बदबू सूंघकर नाक सिकुड़ कर उस गली में देखि तो उसकी दिल धड़क गयी.

उस गली में एक आदमी पेशाब कर रहा था और अनीता को उसका लुंड साफ़ साफ़ दिख गया. अनीता की नज़र जैसे hi उसके लुंड पर पड़ी वह घबरा कर सामने देखती हुयी आगे जाकर जल्दी से आस पास देखि मगर कोई नहीं था. अनीता वहां रोड क्रॉस करने के लिए कड़ी हो गयी और जो अभी देखि थी उसके बारे में सोचने लगी. वह जो लुंड देखि थी वह काफी मोटा और बड़ा था, हरिया के लुंड जैसा hi.

अनीता तेज़ सांस लेती हुयी उस लुंड के बारे में सोचती हुयी रोड क्रॉस करने का इंतज़ार कर रही थी और कुछ सेकण्ड्स बाद वह रोड क्रॉस करने hi वाली थी की उसका ध्यान उस गली से बाहर निकलते हुए आदमी पर पड़ा और उसकी दिल धड़क गयी यह देखकर की वह रामु था.

रामु को देखते hi अनीता को याद आया की जब एक बार रामु का लुंड स्टोर रूम में उसकी गांड से सत्ता गया था तो उसे अंदाजा हो गया था की उसका लुंड बहोत बड़ा है मगर आज वह अनजाने में रामु का नंगा लुंड देख भी ली और जैसा अंदाजा लगायी थी उसका लुंड वैसे hi था, बड़ा और मोटा, ठीक हरिया जैसा.

अनीता रामु को देख hi रही थी की तभी रामु का नज़र उस पर पड़ा तो उसका दिल धड़क गया. उसे यक़ीन नहीं हो रहा था की अनीता उसे वहां मिल जाएगी और वह भी इतनी सज धज कर, एक दम सेक्सी लगती हुयी. अनीता तो बाकी दिनों में भी बेहद खूबसूरत ए सेक्सी लगती थी मगर आज वह बहोत hi मेहेंगी पार्टी साड़ी पहनी थी तोह कुछ ख़ास hi लग रही थी. रामु अपना धड़कन काबू करते हुए मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब आप?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी मैं"

रामु मुस्कुराते हुए उसके तरफ आते हुए puchha,"Memsaheb आप इहाँ, ी वक़त? हमरा मतबल है की आप घर जाने के लिए सवारी का इंतज़ार कर रही हैं?"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Haan. वह उधर ऑटो है वहीँ जा रही हूँ"

रामु यह सुनकर bola,"Achha. ऐसे आपको अगर रिक्शा में बैठने में परेशानी नहीं है तो हम छोड़ देता हूँ घर?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Nahin रामु जी मुझे कोई परेशानी नहीं है. मगर आपको काम होगा. बेवजह का आप परेशान हो जायेंगे"

रामु यह सुनकर अनीता के पास आकर bola,"Are मेमसाहेब आज तो रविवार है. काम तो ख़तम हो गवा है. वह हम हरिया के घर जा रहे थे. आपको घर छोड़ने के बाद चले जायेंगे"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर puchhi,"Hariya जी कैसे हैं? उनका तबियत अभी ठीक है तो?"

रामु यह सुनकर bola,"Haan थोड़ा ठीक है. अभी करवट ले पा रहा है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Achha है. मैं भी हरिया जी से उस दिन के बाद नहीं मिली"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब कइसन बात बोलत हैं आप. आप एक बार हम ग़रीब लोगन को देखने आये वही बड़ा बात है"

अनीता यह सुनकर नाराज़गी से boli,"Phir से आप शुरू हो गए अमीरी ग़रीबी की बात करना"

रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहेब माफ़ कीजिये"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hehehe कोई बात नहीं. चलिए आप वहां जा hi रहे हैं तो मैं भी चलती हूँ. वहां से फिर मुझे घर छोड़ दीजियेगा"

रामु यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Theek है मेमसाहेब. हमार रिक्क्षा उधर है. चलिए"

अनीता यह सुनकर देखि तो वह पेशाब वाले गली के पास hi रिक्शा खड़ा था. अनीता का ध्यान बदबू पर था और फिर उसे रामु का लुंड दिख गया था तो उसका ध्यान रिक्शा पर नहीं गया.

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है चलिए"

अनीता वहां गांड मटकती हुयी गयी. रामु का ध्यान एक दो बार अनीता की मटकती गांड और पूरी नंगी पीठ पर चला गया. उसका दिल धड़कने के साथ साथ लुंड भी बेचैन होने लगा. अनीता जब रिक्शा के पास पहुंची तो अनीता रिक्शा पर चढ़ने का कोशिश की मगर उसे समझ नहीं आ रहा था की कैसे चढ़े.

अनीता घूमकर रामु के तरफ देखि तो उसे अपनी गांड और कमर पर देखते पायी मगर बिना कोई रिएक्शन के boli,"Ramu जी मुझे समझ नहीं आ रहा है मैं कैसे चढ़ु"

अनीता जब बोलना शुरू की तो रामु उसकी बात सुनते हुए उसकी गांड से नज़र उसकी चेहरे पर ले गया और अनीता की बात सुनकर हड़बड़ाते हुए उसके नज़दीक जाकर bola,"Hum मदद कर डेट हैं मेमसाहेब"

अनीता उसे देखकर boli,"Haan" तो रामु bola,"Ee बया हाथ से ी आगे वाला सीट पकड़िए और दये हाथ से पीछे का सीट का ी रोड पकड़िए"

अनीता यह सुनकर अपनी दोनों हाथों से रामु के बताये जगह पर पकड़ ली मगर उठने से पहले रामु को देखकर boli,"Ramu जी देखिएगा उस दिन जैसे मैं कहीं गिरने न लागु"

रामु यह सुनकर अगले पल अनीता की नंगी कमर पर हाथ रख दिया. अनीता की गोरी चिकनी और पतली कमर पर हाथ रखते hi रामु के लुंड में हलचल होने लगा वहीँ अनीता को रामु का मज़दूर वाला खुरदुरा मरदाना हाथ अपनी नाज़ुक कमर पर महसूस करके अजीब सी गुदगुदी मेहसुआ हुयी और औरताना एहसास हुआ. लेकिन इसका मतलब यह नहीं था की अनीता चाहती थी की रामु उसे छेड़े या वह उसे सडके करने की सोच रही थी. उसके हिसाब से तो यह तो बस हालात hi ऐसे थे की उसे रिक्शा पर चढ़ना है और रामु उसकी मदद कर रहा है.

रामु अनीता की कमर पर हाथ रखकर उसकी आँखों में देखकर bola,"Aap चढ़िये मेमसाहेब. हम आपको संभल लूंगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और रिक्शा पर चढ़ कर बैठकर रामु को देखकर boli,"Thank यू रामु जी"

रामु को अनीता की चिकनी कमर छू कर अच्छा लगा मगर अनीता जब रिक्शा पर बैठने लगी तो वह वहां से हाथ हटा दिया.

अनीता जब बैठ गयी तो रामु भी सामने सीट पर जाकर बैठ गया और रिक्शा चलने लगा. थोड़ा आगे जाने के बाद अनीता देखि की रामु सामने का आइना थोड़ा एडजस्ट करने लगा. अभी आईने के ऊपर वाले हिस्सा में अनीता के सर के ऊपर का रिक्शा दिख रहा था और नीचे वाले हिस्से में सिर्फ उसकी चेहरा और गाला दिख रही थी.

रामु जब आइना एडजस्ट किया तो अब पूरा आईने में अनीता hi दिख रही थी, उसकी चेहरा से लेकर चूंकि तक. पहले उसकी चूंकि नहीं दिख रही थी मगर अब आइना एडजस्ट करने पर दिखने लगी थी. रामु आइना एडजस्ट करके अनीता की चूँचियों को देखकर हल्का मुस्कुराया. वह मुस्कुराते हुए आईने से नज़र हटाने लगा की तभी देखा की अनीता उसे hi देख रही है. रामु की नज़र जैसे अनीता की चेहरे पर गया तो वह मुस्कुरा दी.

अनीता को मुस्कुराते देख रामु भी फिर से हल्का मुस्कुरा दिया तो अनीता एक ऐडा से puchhi,"Ramu जी यहाँ से हरिया जी के घर जाने का रास्ता ठीक है या आज भी मुझे झूला झूलते हुए ले जायेंगे"

रामु यह सुनकर मुस्कुरा कर bola,"Nahin मेमसाहेब इधर से रास्ता ठीक है. बस वह आगे मोड़ पर थोड़ा सा रोड ख़राब है बाकी सब ठीक है"

अनीता यह सुनकर आगे थोड़ी दूर पर एक मोड़ देखि जहाँ बस एक जगह थोड़ा सा रोड ख़राब था. अनीता यह देखकर मुस्कुराकर boli,"Achha मैं रिक्शा अच्छे से पकड़ लेती हूँ"

अनीता यह बोलकर रिक्शा अच्छे से पकड़ ली और अगले पल वह मोड़ आ गया. रामु आराम से रिक्शा चलता मगर फिर भी थोड़ा जर्क हो hi गया तो अनीता हल्का सा cheekhi,"Ouch ाःह" और फिर हसने lagi,"Hehehe"

रामु यह सुनते hi मुस्कुराकर अनीता की चूँचियों को देखा जो हिलने लगी थी. अनीता आज पैडेड ब्लाउज पहनी थी तो ब्रा नहीं पहनी जिसके कारण पिछले दिन जितना तो नहीं मगर फिर भी उसकी चूँचियाँ जर्क होने के बाद हिलने लगी थी.

अनीता खिलखिलाती हुयी देखि की रामु का नज़र उसकी हिलती हुयी चूँचियों पर था जो वह मुस्कुराते हुए एक पल देखने के बाद अनीता की खिलखिलाहट सुनकर उसकी चेहरे पर देखकर puchha,"Aapko तकलीफ तो नहीं हुआ मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe नहीं रामु जी ठीक है हेहेहे".

रामु यह सुनकर वापस उसकी चूँचियों को देखा तो अनीता खिलखिलाती हुयी उसे अपनी चूँचियों को आईने में देखते हुए देखने लगी. रामु अनीता की चूँचियों को देखने के बाद नज़र हटाने लगा तो उसका नज़र फिर से अनीता की चेहरे पर पड़ी तो अनीता एक ऐडा से मुस्कुरा दी तो रामु bola,"Eeke बाद अब रास्ता एक दम ठीक है मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी समझ आ रहा है क्यूंकि अब तो मेरी बदन भी नहीं हिल रही है. देखिये एक दम नहीं हिल रही है"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की चूँचियों को आईने में देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी puchhi,"Dekh रहे हैं न आप कैसे हिलना बांध हो गयी है"

रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब हिलना बांध हो गवा है"

रामु यह बोलकर मुस्कुराते हुए अनीता को देखा तो अनीता मुस्कुरा दी तो रामु मुस्कुराते हुए bola,"Isi से पता चल रहा है की रोड कितना चिकना है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो रामु भी मुस्कुराकर एक नज़र अनीता की चूँचियों को फिर देखा और सामने रोड पर देखने लगा. अनीता मुस्कुराकर रामु को एक नज़र देखि और फिर आस पास देखने लगी.
 
अपडेट 108

अगले दिन मंडे सुबह के 4:30 बजे थे. बारिश तो रुकी हुयी थी मगर मौसम ठंडा था और बादल लगा हुआ था. हरिया के घर में लैंटर्न की बहोत hi हलकी रौशनी थी. अनीता की नींद खुली तो उसे अपनी गांड पर कुछ बड़ा सा चुभता हुआ महसूस हुआ. वह आँख खोलकर तो पहले आस पास देखि तो उसे याद आया की वह हरिया के घर पर hi है और उसके ठीक बगल में हरिया उसके तरफ मुंह करके सोया हुआ है.

अनीता भी उसके तरफ hi चेहरा की हुयी थी. अनीता अपनी बायीं हाथ देखि जो हरिया के लुंगी के अंदर उसका लुंड पकडे हुयी थी. यह एहसास होते hi वह अपनी हाथ उसके लुंगी से बाहर निकली और फिर ध्यान आया की रात में रामु के सोने के बाद हरिया उसकी हाथ पकड़ कर अपने लुंगी में घुसा दिया था. अनीता को याद आया की हरिया सिर्फ उसकी हाथ को अपने लुंगी में घुसाया नहीं था बल्कि वह रात में हरिया के लुंड को सांडे का तेल से मालिश भी की. यह याद करते hi अनीता देखि की सांडे का तेल का बोतल अभी भी हरिया के कमर के पास था.

अनीता को इसके साथ और एक बात याद आयी तो वह अपनी चूंकि के तरफ देखि तो पायी की हरिया सिर्फ उसके तरफ मुंह hi नहीं किये हुए था बल्कि उसके मुंह में अनीता की दायी चूंकि थी, वह भी नंगी ब्लाउज के बाहर.

अनीता को याद आया की रामु के सोने के बाद हरिया न सिर्फ अनीता की हाथ पकडे अपने लुंगी में घुसकर अपने लुंड पर रखा था और वह उसके लुंड का मालिश की थी बल्कि हरिया साथ में उसकी दायी चूंकि के ऊपर से ब्लाउज को ऊपर करके उसकी नंगी चूंकि को चूस भी रहा था और हरिया उसकी चूंकि चूसते हुए hi सो गए था और अनीता को भी नींद आ गयी थी.

अनीता को ध्यान आया तो वह खुद को थोड़ा पीछे करके अपनी चूंकि हरिया के मुंह से निकलने की कोशिश की मगर नहीं कर पायी तो उसे एहसास हुआ की उसके ठीक पीछे उससे चिपक कर रामु सोया है और खर्राटे ले रहा है.

अनीता को तब एहसास हुआ की उसकी गांड पर जो चीज़ चुभ रही है वह रामु का लुंड है तो उसकी धड़कन तेज़ हो गयी. वह एहसास की की रामु का लुंड भी बड़ा और मोटा है, हरिया जैसा hi और संग संग उसे याद आया की पिछली रात वह रामु को पेशाब करते वक़्त उसका लुंड देखि थी और वाक़ई में उसका लुंड बड़ा हुए मोटा था जिसे अभी वह साड़ी के ऊपर से अपनी गांड पर महसूस कर पा रही थी.

अनीता को कुछ ध्यान आया तो अपनी बायीं चूंकि पर देखि तो उसकी बायीं चूंकि ब्लाउज कप के साथ रामु के हाथों के मज़बूत गिरफ्त में था. अनीता की दिल यह देखकर धड़कने लगी थी.

अनीता कुछ सोचकर धीरे से रामु का कलाई पकड़ कर अपनी चूंकि से उसका हाथ हटाने की कोशिश की मगर असफल रही क्यूंकि वह ज़ोर से उसकी चूंकि पकडे हुए था. अनीता की सांस तेज़ होने लगी थी और दिल धड़क रही थी. वह एक पल सोचने के बाद हरिया का सर धीरे से पकड़ कर अपनी चूंकि उसके मुंह से निकलने का कोशिश की मगर असफल रही. हरिया सिर्फ उसकी निप्पल नहीं बल्कि चूंकि का एक हिस्सा भी मुंह में लिए हुए अनीता की सीने से चिपका हुआ था तो उसके मुंह से अपनी चूंकि निकलना अनीता के लिए मुश्किल हुआ. बल्कि उल्टा यह हुआ की अनीता द्वारा सर पर हाथ रखकर खींचने से हरिया नींद में hi सर हिलाते हुए अनीता की चूंकि और मुंह में लेकर दो तीन बार चूसकर वैसे hi उसकी चूंकि मुंह में लिए फिर से शांत हो गया.

अनीता को समझ नहीं आ रहा था की वह क्या करे तो एक बार वह अपनी गांड को थोड़ा पीछे करके रामु को पीछे करने की कोशिश की मगर हुआ यह की रामु नींद में hi थोड़ा और आगे कमर करके अनीता की गांड में लुंड सताते हुए अपना बया पेअर उठाकर अनीता की बाये पेअर पर रख कर उसकी चूंकि को और ज़ोर से पकड़ लिया और नींद में hi धीरे धीरे कमर हिलाकर अनीता की गांड में अपना लुंड चुभने लगा.

अनीता यह महसूस करके अपनी कमर के तरफ देखि तो पायी की रामु उससे पीछे से पूरा सटकर अपना बया पेअर उसकी बायीं पेअर के ऊपर चढ़ाया हुआ था जिससे उसकी दोनों पेअर रामु के पैरों के बीच कैद थी और रामु उससे पीछे से चिपका हुआ अपना कमर हिला रहा था. साथ hi वह उसकी चूंकि को और ज़ोर से पकड़ कर अपना मुंह अनीता की कंधे के पास रखकर खर्राटे लिए सोता रहा और दो तीन बार उसकी चूंकि को नींद में hi ज़ोर से दबा दिया.

अनीता अपनी चूंकि ज़ोर से दबाये जाने पर थोड़ा सिसकारी "सीई" और अपने आप hi उसकी मुंह से कामुक अंदाज़ में "ुहह्म्म" निकल गयी. वह अपनी सर को थोड़ा बाये तरफ करके आँखों के कोने से रामु को देखि जो उसकी कंधे के पास सर रखे खर्राटा लिए सो रहा था. अनीता सोचने लगी की कहाँ वह उन दोनों को अलग करना चाहती थी और कहाँ पहले से और ज़्यादा चिपक गए वह दोनों और रामु के पेअर चढाने से वह अब हिल भी नहीं सकती थी. रामु तो अब उससे पूरा चिपका हुआ उसकी कंधे के पास मुंह रखकर खर्राटे ले रहा था. अनीता को इसके बावजूद रामु पर थोड़ा भी गुस्सा नहीं आया और वह रामु को ग़लत भी नहीं समझ रही थी. वह जान रही थी की वह नींद में हैं और उसकी गांड में लुंड इसलिए घिस रहा था क्यूंकि सुबह सुबह बाकी मर्दों के तरह उसका भी लुंड खड़ा होकर बेचैन था.

भले hi अनीता समझ रही थी की रामु नींद में था मगर जो भी हो वह उसका लुंड अपनी गांड और उसका मज़बूत हाथ अपनी चूंकि पर महसूस कर पा रही थी. साथ hi हरिया के मुंह में उसकी नंगी चूंकि भी थी और वह कभी कभी नींद में hi मुंह चलता तो अनीता उसका होंठ और ज़बान अपनी निप्पल पर महसूस कर रही थी. अब भले hi यह सब वह दोनों नींद में कर रहे थे मगर अनीता तो महसूस कर पा रही थी और एक जवान औरत होने के नाते ऐसे इस हालत में दो मर्दों के बीच सैंडविच होने पर उसे भी एक कामुकता का एहसास हो रहा था जिससे उसकी बदन में एक अजीब सा मज़ा मिलने लगा था और छूट में एक बेचैनी होने लगी थी.

रामु द्वारा ऐसे उससे चिपक कर सोने पर उसे ऐसा लगने लगा जैसे वह उसका प्रेमी हो जो उसे अपने बांहों में लेकर सोया हुआ हो.

हरिया को भी अनीता देखि की कैसे वह उसकी चूंकि चूसते हुए hi सो गया मगर यह कोई नयी बात नहीं थी. अनीता जानती थी की हरिया उसके लिए कैसा सोच रखता और जब वह रात में उसकी चूंकि चूस रहा था तो अनीता खुद उसके सर के बालों में उँगलियाँ फेरती हुयी उस्क्स उसका लुंड का मालिश करती हुयी उसे अपनी चूंकि चूसते हुए देख रही थी और वह चूसते हुए hi सो गया मगर

रामु के साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था. हाँ वह भी जब भी मिलता था उसकी बदन को घर कर देखता था और पिछले तीन चार मुलाक़ातों से खुल कर उसकी चूँचियों को देखने लगा था और रिक्शा चढ़ने और उतरने में मदद करते वक़्त उसकी कमर पर हाथ रखता था, मगर अनीता के लिए यस सब बस नार्मल बात थी की वह खूबसूरत और जवान औरत है तो रामु जैसे मर्द उसे देखेंगे hi और कमर पर हाथ तो रिक्शा चढ़ने और उतरने में मदद करने के लिए करता था.

लेकिन अभी वह नींद में उससे ऐसे लिपट कर सोया था जैसे उसका प्रेमी हो. एक प्रेमी के तरह वह उसकी चूंकि को मुट्ठी में भरकर उसकी पेअर पर अपना पेअर चढ़कर अपने मज़बूत बाँहों में भरकर उसकी गांड पर अपने तगड़ा लुंड सताए सो रहा था जिसे अनीता साफ़ साफ़ अपनी गांड पर महसूस कर सकती थी.

अनीता समझ गयी की वह इन दो दुमदार मर्दों के मज़बूत बांहों से आज़ाद तब hi हो पायेगी जब दोनों उठेंगे. उसके बस की बात नहीं थी की वह उनके मज़बूत बांहों में से आज़ाद हो पाए अब तो अनीता भी एहि सोचकर उनके बांहों से आज़ाद होने का कोशिश छोड़ दी और थोड़ी देर में फिर से सो गयी.

लगभग आधे घंटे बाद अनीता की नींद दुबारा खुली जब वह महसूस की की उसकी चूंकि को कोई मसल रहा है और गांड पर लुंड रगड़ रहा है. अनीता यह महसूस करके आँख खोली तो देखि की रामु अभी भी उसे ऐसे hi अपने बाँहों में पकडे हुए उसकी चूंकि पर हाथ रखे हुए था और नींद में hi उसे मसल रहा है और उसकी गांड पर धक्के लगा रहा है. अनीता हलकी गर्दन पीछे करके रामु को देखि तो वह सो रहा था.

अनीता समझ गयी की वह अभी भी नींद में है इसलिए शायद सपना देखते हुए धक्का लगा रहा है. वह यह भी जानती थी की वह अपने आप को उसके मजबूत गिरफ्त से छुड़ा नहीं पायेगी इसलिए वह ज़रा सा भी कोशिश नहीं की रामु का हाथ अपनी चूंकि से हटाने और उसके कमर को अपने कमर से पीछे करने का. वह चुप चाप वैसे hi लेती हुयी रामु का लुंड का धक्का साड़ी के ऊपर से अपनी गांड पर महसूस करती हुयी अपनी नज़र अपनी बायीं चूंकि के तरफ करके देखने लगी की रामु कैसे अपने मजबूत हाथों से उसे मसल रहा है. रामु इतनी मजबूती से उसकी चूंकि मसल रहा था की अनीता की मुंह से सिसकारी निकल gayi,"sssiiiii" जिसे वह अपनी निचली होंठ को दांतों से दबाकर रोकने का कोशिश की.

अनीता वैसे hi अपनी होंठो को दांतों के बीच दबाये हुए रामु को अपनी चूंकि मसलते देख मैं hi मैं sochi,"Ramu जी इस उम्र में भी कितने मजबूत हैं. कितनी मजबूती से वह मुझे पकड़ कर रखे हैं"

अनीता अगले पल महसूस की की हरिया हिल रहा है तो वह उसके तरफ देखि. हरिया नींद में hi अपना दया हाथ लुंगी के अंदर घुसकर लुंड सहलाने लगा और साथ hi मुंह चलकर अनीता की दायी चूंकि चूसने लगा जैसे वह उसकी दूध पी रहा हो. अनीता यह महसूस करके अपनी दायी चूंकि के तरफ देखि तो हरिया आँख बांध किये सोये हुए hi अपना मुंह चलकर उसकी चूंकि चूस रहा था.

अनीता की चेहरे पर न जाने क्यों यह देखकर मुस्कान आ गयी और वह प्यार से हरिया के सर के बाल में एक बार ऊँगली फेर दी.

अब अनीता चुप लेती हुयी देख रही थी की कैसे हरिया नींद में hi उसकी नंगी दायी चूंकि मुंह में लेकर चूसते हुए अपना लुंड सेहला रहा है और रामु उसकी गांड पर धक्का देते हुए बायीं चूंकि मसल रहा है. यह सब मगर बस 15 सेकण्ड्स के आस पास hi हुआ उसके बाद रामु अपना कमर हिलना बांध करके अनीता की चूंकि मसलना भी बांध कर दिया मगर उसकी चूंकि अभी भी मुट्ठी में लिए हुए hi सो रहा था.

अनीता को थोड़ी राहत मिली रामु के रुकने से. दो मजबूत मर्दों के बीच ऐसे कामुक अवस्था में रहने से अनीता की सांस तेज़ होने लगी थी मगर रामु जब रुक गया तो वह गहरी सांस ली.

अगले 5-6 सेकण्ड्स बाद हरिया भी उसकी चूंकि चूसना बांध कर दिया. अनीता वापस उसके लुंड के तरफ देखि तो हरिया अपना हाथ लुंगी से निकाल कर पेट पर हाथ रखे स्थिर हो गया. अनीता पजीर उसके लुंगी के तरफ देखि तो उसमें उभर देखकर उसकी दिल धड़क गयी. हरिया का लुंड भी अब तन्न कर खड़ा था लुंगी में, जैसे सुबह सुबह होता है और नींद में एहि महसूस करते हुए हरिया अपना हाथ लुंगी में लेजाकर एक दो बार अपने लुंड को सेहला दिया.

अनीता उसके लुंगी के तरफ देख hi रही थी की तभी वह अपना हाथ वापस लुंगी के पास लेजाकर ऊपर से लुंड को मसला और नींद में hi लुंगी को थोड़ा नीचे खिसका कर अपना लुंड नंगा करके उसे थोड़ा खुजाकर हाथ वापस पेट पर रख लिया. नींद में होने से उसे ध्यान नहीं था की उसका लुंड नंगा है तो वह लुंगी वापस ऊपर उठाया नहीं. अनीता धधकते दिल से उसका लुंड देखने लगी.

वह हरिया का नंगा लुंड पहली बार नहीं देख रही थी मगर हमेशा के जैसे उसका नंगा लुंड देखकर उसकी छूट में बेचैन होने लगी. इतना बड़ा और मोटा लुंड देखकर उसके जैसी बेशर्म औरत जिसके अंदर रान्दीपना कूट कूट कर भरा हो उसकी छूट में बेचैनी कैसे नहीं होती. मगर अनीता भले hi पूरी बेशर्म थी और उसके अंदर रान्दीपना कूट कूट कर भरी थी, लेकिन वह थी तो एक शरीफ घर की बहु बेटी, वह नंगा लुंड देखकर भी खुद को कण्ट्रोल करने का कोशिश कर रही थी.

वह हरिया का लुंड देख hi रही थी की तभी उसे अपनी गांड पर रामु का लुंड से फिर धक्का महसूस हुआ और फिर अगले पल अपनी चूंकि पर उसका गिरफ्त महसूस की. रामु उसकी चूंकि को ज़ोर से दबाते तीन चार बार उसकी गांड पर धक्का दिया. अनीता यह महसूस करके अपनी गर्दन थोड़ा घुमा कर रामु को देखि तो वह गहरा नींद में hi था.

अनीता आँखों के कोने से रामु को देखि की कैसे वह सुकून से सो रहा था तो पता नहीं क्यों उसकी चेहरे पर मुस्कान आ गयी और वह sochi,"Ramu जी कितना सुकून से सो रहे हैं. दिन भर म्हणत मज़दूरी करके थकान से सुकून की गहरी नींद आती है इन्हे. इतनी गहरी नींद में सोये हैं की इनको एहसास भी नहीं हो रहा की वह लगभग मेरी बदन पर चढ़ चुके हैं. जब नींद से उठेंगे और देखेंगे की कैसे वह मुझसे पूरा चिपक कर सोये हैं तो पता नहीं कैसा सिचुएशन होगा और कैसे रियेक्ट करेंगे यह. बस इनके उठने से पहले हरिया जी अपना मुंह मेरी बूब्स से हटा ले ताकि मैं ब्लाउज नीचे कर लू. अगर रामु जी मेरी बूब्स को ऐसे देखेंगे तो पता नहीं कैसा रियेक्ट करेंगे. सिचुएशन थोड़ा ावक्वार्ड हो जायेगा"

अनीता को ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी की वह दो ग़ैर मर्दों के बीच ऐसी हालत में थी जहाँ एक उससे चिपके हुए उसकी चूंकि मुट्ठी में भरकर उसकी गांड पर लुंड रगड़ रहा था और दूसरा उसकी चूंकि ब्लाउज से बाहर निकल कर उसकी नंगी चूंकि को मुंह में लिए सो रहा था और उसका लुंड नंगा होकर तन्न कर खड़ा था.

अनीता जब रामु के रिएक्शन के बारे में सोची तो उसे ध्यान आया की अगर वह उठकर देख लिया की अनीता की दूसरी चूंकि ब्लाउज के बाहर है और हरिया उसे मुंह में लेकर सोया है तो क्या सोचेगा. अनीता की दिल धड़क गयी यह सोचकर. वह फिर धीरे से हरिया का सर पकड़ कर उसे पीछा करने का सोची तो हरिया नींद में hi सर हिलाते हुए अनीता की सीने से और चिपक कर उसकी चूंकि और मुंह में भर लिया और फिर से चूसने लगा.

अनीता यह देखकर अपनी निचली होंठ को दांत के बीच दबाकर सोचने lagi,"Main बेकार hi कोशिश कर रही हूँ रामु और हरिया जी को अलग करने के लिए. इतने मज़बूत और दुमदार मर्द मेरे हटाने से थोड़े हटेंगे और वह भी दो मर्द. इतनी गहरी नींद में दोनों सोये हैं की इन्हे कुछ खबर hi नहीं की यह दोनों मुझसे पुरे चिपक कर सोये हैं और मैं इनके बीच सैंडविच हो गयी हूँ. अब दिन भर इतनी म्हणत मज़दूरी करने के बाद तो गहरी नींद आएगी hi रामु जी को और हरिया जी भी बीमार हैं. सोने देती हूँ इन्हे. जब उठेंगे तो अपने आप hi मुझसे अलग हो जायेंगे. रामु जी हरिया के मुंह में मेरी बूब्स देखने से पहले खुद अपना हाथ मेरी बूब्स पर देखेंगे तो उन्हें एहसास होगा की वह नींद में मेरी बूब्स मुट्ठी में भर लिए थे. उसी तरह उन्हें लगेगा की हरिया जी भी नींद में मेरी बूब्स मुंह में ले लिए थे. जगह काम होने पर लोग नींद में तो चिपक तो जायेंगे hi. नींद में तो जो भी मिलता है लोग उससे लिपट जाते हैं, यह तो नार्मल बात हैं. हाँ इतनी सी तो बात है मैं भी क्यों इनको अलग करने की कोशिश कर रही हूँ."

अनीता खुद को समझने लगी की अगर रामु हरिया को उसकी नंगी चूंकि मुंह में लिए देखेगा तो कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए. यह उसकी बेशर्मी hi थी की वह यह नहीं सोच रही थी की रामु उसकी चूंकि नंगी देख लेगा वह भी हरिया के मुंह में, बल्कि यह सोच रही थी की अगर वह उसकी चूंकि हरिया के मुंह में देखेगा तो उसे कुछ सरप्राइज नहीं होना चाहिए क्यूंकि वह खुद उसकी चूंकि मुट्ठी में भरकर उससे चिपक कर सो रहा था.

अनीता यह सब सोच hi रही थी की तभी हरिया का आँख हल्का सा खुला और वह अनीता को देखकर आधे नींद में hi मुस्कुराया और फिर उसकी चूंकि को मुंह में लिए चूसने लगा की तभी अनीता धीरे से boli,"Hariya जी उठिये सुबह हो गयी. मुझे घर जाना होगा".

हरिया यह सुनकर भी उसकी चूंकि चूसते रहा तो अनीता फिर धीरे से boli,"Hariya जी मुझे घर जाना है. उठिये सुबह हो गयी"

हरिया यह सुनकर उसकी चूंकि मुंह से निकल कर धीरे से bola,"Memsaheb आपका चूंकि चूसने में मज़ा आ रहा है हुंका"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखों से अपने पीछे सोये रामु के तरफ इशारा करके boli,"Hariya जी धीरे बोलिये"

हरिया यह सुनकर रामु के तरफ देखा तो अनीता अपनी दायी चूंकि के ऊपर ब्लाउज खिसककर उसे ढंकती हुयी रामु के हाथ जो उसकी बायीं चूंकि पर थी उसके तरफ इशारा करके boli,"Ramu जी का हाथ हटाइये. मुझे उठना है"

हरिया को तब ध्यान आया की रामु अनीता से चिपक कर उसकी चूंकि मुठी के भरकर सोया है तो वह bola,"Ee ससुरा का कर रहा है. आपका चूंकि दबाकर सोया है"

अनीता आँखें बड़ी करके boli,"Ssshhh धीरे बोलिये. रामु जी सोकर हैं और उन्हें ध्यान नहीं होगा"

हरिया यह सुनकर धीरे से bola,"Are ध्यान नहीं का का मतबल? नींद में कुछ हो भी करेगा का?"

अनीता यह सुनकर धीरे से boli,"Hariya जी आप भी तो नींद में" फिर अपनी दायी चूंकि के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Ise चूस रहे थे"

हरिया यह सुनकर दांत दिखा कर मुस्कुराने लगा तो अनीता भी मुस्कुराती हुयी boli,"To रामु जी भी नींद में hi हैं. उन्हें पता भी नहीं होगा वह क्या कर रहे होंगे"

हरिया यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाया. हरिया जानता था की अनीता बड़े शहर की पढ़ी लिखी हाई क्लास औरत है और उसके लिए मर्दों की नज़र और छूना कोई बड़ी बात नहीं होगी इसलिए वह रामु के हरकत का बुरा नहीं मान रही थी. वह जान रहा था की अनीता के साथ उसका जो रिश्ता है वह इसलिए बन पाया है क्यूंकि अनीता एक हाई क्लास की आत्मनिर्भर औरत है जो अपना ज़िन्दगी अपने तरीके से जीना चाहती है. ऐसे में वह उसे अगर बोले की रामु के साथ अलग तरीके से पेश आये तो अनीता उसे कमज़ोर मर्द समझेगी जिसे दूसरे मर्द से प्रतिस्प्रधा से डर है. ऊपर से हरिया को अपने मर्दानगी पर पूरा भरोसा था इसलिए उसे जलन भी नहीं हो रहा था.

हरिया को "हाँ" में सर हिलाते हुए अनीता उसके लुंड के धीरे से boli,"Ab रामु जी को हटाइये पीछे. मुझे घर जाना है. सुबह सुबह यहाँ से निकल जाउंगी तो अच्छा रहेगा"

हरिया यह सुनकर सर "हाँ" में हिलाया तो अनीता उसके नंगे लुंड के तरफ हाथ ले जाती हुयी उसे लुंगी से ढंकती हुयी boli,"Aur पहले यह लुंगी बांध लीजिये. कैसे नाग के तरह आपका हथियार बौखलाया हुआ है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर धीरे से bola,"Are मेमसाहेब बिल खोज रहा है घुसने के लिए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई की तभी रामु उसकी चूंकि जोर से पकड़ कर मसलने लगा और चिपक कर पीछे से उसकी गांड पर भी चढ़कर कमर हिलने लगा तो अनीता बेशर्मी से हरिया को देखकर अपनी कमर के तरफ आँखों से इशारा की.

हरिया यह देखकर रामु का हाथ पकड़ कर अनीता की चूंकि पर से हटाने का कोशिश किया की मगर नहीं हटाया तो हरिया bola,"Ee ससुरा ऐसे नहीं हटेगा" और फिर वह रामु का हाथ पकडे हटते हुए उसके गाल पर हल्का मारकर bola,"Abe ससुरा का कर रहा है. उठ और देख का कर रहा है"

अनीता तेज़ सांस लेती हुयी हरिया को देख रही थी. रामु नींद से उठते हुए आधा आँख खोलकर हरिया से bola,"Abe कहे उठा रहा है. हम इतना अच्छा सपना देख रहा हूँ की हम कउनो को छोड़ रहा हूँ" और वह कमर हिलाते हुए bola,"Ghapa है घापा है"

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ हो गयी और दिल तेज़ी से धड़कने लगी. वह आँखें बड़ी करके हरिया को देखि की तभी हरिया bola,"Abe ससुरा चुप और देख का कर रहा है. ध्यान नहीं है तोहार की मेमसाहेब यहीं सो गयी थी कल"

यह सुनकर रामु घबरा कर अपने बगल में ध्यान दिया तो देखा की वह किसी औरत से चिपक कर सोया है और उसकी चूंकि पकडे उसकी गांड पर लुंड रगड़ रहा था.

वह थोड़ा सर उठा कर देखा तो अनीता तिरछी नज़र से उसे देखि तो रामु घबराकर संग संग उसकी चूंकि छोर कर bola,"Maaf कर दीजिये हुंका मेमसाहेब. हम नींद में थे, जान बूझकर नहीं किये"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर बेशर्मी दिखती हुयी नार्मल भाव से boli,"Koi बात नहीं रामु जी, मगर अब हटिये मुझे उठना है"

रामु यह सुनकर अनीता के पीछे से सीना हटा लिया तो अनीता बेशर्मी से अपनी आँखों से अपनी गांड के तरफ इशारा की तो रामु देखा की वह उसकी गांड पर लगभग चढ़ा हुआ है और इतना hi नहीं अनीता की साड़ी के ऊपर से hi उसकी गांड की दरार में लुंड घुसाया हुआ है.

यह एहसास होते hi की उसका लुंड अनीता की गांड की दरार में है भले hi साड़ी के ऊपर से और वह अपने लुंड पर अनीता की गांड की मुलायम मांस महसूस कर सकता है उसका लुंड झटका मारा जिसे अनीता अपनी गांड पर महसूस की. अनीता को न जाने क्या हुआ मगर वह अपनी बेशर्मी का साबुत देती हुयी गांड से पीछे रामु के लुंड को ठेलती हुयी आँखों से अपनी गांड के तरफ इशारा करके boli,"Ramu जी हटिये न. मुझे उठना है"

रामु यह सुनकर अनीता की गांड के तरफ देखने लगा तो अनीता फिर से boli,"Ramu जी मुझे उठना है"

रामु यह सुनकर अनीता की चेहरे पर देखा तो वह फिर से बेशर्मी से अपनी गांड के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Ramu जी हटिये मुझे उठना है"

रामु को अब ध्यान आया की वह अभी भी अनीता की गांड से चिपका हुआ है तो वह घबराकर अपना कमर पीछे करके bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब वह हम नींद में थे तो..."

रामु जैसे hi अनीता की गांड से अलग हुआ अनीता उठती हुयी उसके बात को बीच में काटकर boli,"Theek है रामु जी मैं समझ गयी की आप नींद में थे. अब जो हो गया सो हो गया".

अनीता इतना बोलती हुयी उठकर बैठ गयी तो रामु का नज़र अनीता की पीठ पर गयी तोह देखा की उसकी बैकलेस ब्लाउज के तीन डोरियों में से सबसे नीचे वाला खुला हुआ था. उसे घबराहट हो गया की कहीं वह अनीता की ब्लाउज को नींद में खोलने का कोशिश तो नहीं किया. वह घबराहट से अनीता को देखा और उसकी चेहरे पर नार्मल भाव देखकर राहत महसूस किया.

यह एहसास होने पर की अनीता नार्मल है उसके अंदर का मरदाना एहसास फिर से जागने लगा और वह अनीता की चेहरे से नीचे देखा तो पीछे से अनीता की चूंकि का साइड का और नीचे का भाग नंगी दिखा. नीचे का डोरी खुलने से ब्लाउज का साइड का और नीचे का हिस्सा जो उसकी चूंकि से चिपके रहना चाहिए था वह ढीला होकर सामने के तरफ होकर उसकी चूंकि से थोड़ा अलग हो गया था जिससे उसकी चूंकि का साइड का हिस्सा दिखने लगा था. यहाँ तक की चूंकि का नीचे का हिस्सा लटक कर नीचे से ब्लाउज के बाहर हो गयी थी.

अनीता चुप चाप बिना शर्म और घबराहट के अपनी ब्लाउज को पकड़ कर नीचे करके दोनों चूँचियों को पकड़ कर ऊपर करके ब्लाउज के अंदर घुसकर ब्लाउज को अच्छे से चूँचियों के ऊपर एडजस्ट करने लगी तो रामु bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब. लगता है नींद में हमसे ग़लती से खुल गवा होगा"

अनीता यह सुनकर गर्दन साइड करके रामु को देखि और अपनी चूँचियों को ब्लाउज के अंदर एडजस्ट करती हुयी boli,"Are रामु जी कोई बात नहीं. नींद में तो इंसान क्या करता है उसे पता थोड़े रहता है. और यह भी तो हो सकता है की यह डोरी का छोर कहीं डाब गयी होगी और मैं जब नींद में करवट ली होगी तो डोरी खुल गई हो"

अनीता रामु को देखती हुयी उससे बात कर रही थी तो रामु अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता देखि की रामु उसे अपनी चूँचियों को ब्लाउज में एडजस्ट करते हुए देख रहा है मगर वह बिना कोई रिएक्शन दिए अपनी बात बोलना जारी राखी.

अनीता को ज़रा सी भी शर्म नहीं आयी की रामु उसकी चूँचियों को देख रहा है. रामु उसकी बात सुनकर वापस उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता उसे देखती हुयी boli,"To रामु जी माफ़ी मत मांगिये. जो हो गया सो हो गया"

रामु अपना सर "हाँ" में हिलाया तो अनीता मुस्कुराकर उसे देखि और पीछे हाथ लेजाकर डोरी बांधने की कोशिश कर रही थी की तभी हरिया अपना हाथ उसकी पीठ पर रखकर फेरते हुए bola,"Dijiye मेमसाहेब हम बांध देते हैं"

अनीता यह सुनकर हरिया के तरफ देखकर boli,"Haan हरिया जी मुझसे तो बिना आइना के बंधेगी नहीं. आप hi बांध दीजिये"

अनीता यह बोलकर थोड़ा खिसक कर अपनी लगभग पूरी नंगी पीठ हरिया के तरफ कर दी. ऐसा करने से अनीता की चेहरा रामु के लुंड के तरफ हो गयी और उसकी नज़र धोती में तन्न कर खड़े लुंड पर गयी जो धोती में तम्बू बनाये हुए था. अनीता की दिल वह देखकर धड़क तो गयी मगर वह खुद को नार्मल रखती हुयी अपनी बाल को पकड़ कर दये कंधे से सामने के तरफ करके एक नज़र रामु को देखि तो उसे अपनी ब्लाउज में कैद चूँचियों के उभर के तरफ देखते पायी.

रामु को जब ध्यान आया की अनीता उसे देख रही है तो वह उसकी चेहरे पर देखा तो वह बेशर्मी से मुस्कुरा दी. रामु भी अनीता को देखकर हल्का मुस्कुराया और फिर नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों के उभर को देखने लगा. अनीता उसके नज़र को अपनी चूँचियाँ देखते हुए देख कुछ नहीं बोली और एक नज़र खुद भी रामु के लुंड के उभर को देखकर गहरी सांस ली. अनीता की सांस लेने से उसकी चूँचियाँ ऊपर उठ गयी जिसे देखकर रामु का लुंड धोती में hi हिलने लगा. अनीता को दिल रामु के बड़े लुंड को धोती में हिलते हुए देख धड़कने लगी. अनीता गहरी सांस लेकर अपनी नज़र रामु के धोती से हटा दी.

वहीँ इस बीच हरिया सोये हुए hi अनीता की डोरी बांधने लगा और बांधने के बाद बाय हाथ अनीता की पीठ से सड़क कर उसकी दायी कमर पर रखकर सहलाते हुए bola,"Memsaheb डोरी बांध दिए हम"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर पीछे गर्दन करके हरिया को देखती हुयी boli,"Thank यू हरिया जी". रामु देख रहा था की हरिया कैसे बेझिजक अनीता की नंगी कमर पर अपना हाथ फेर रहा था और अनीता भी कैसे कोई ऐतराज़ नहीं कर रही थी.

रामु अनीता की कमर देख hi रहा था की अनीता उसके तरफ देखती हुयी boli,"Ramu जी उठिये और मुझे घर पहुंचा दीजिये"

अनीता रामु को अपनी कमर पर हरिया का हाथ रेंगते हुए देखते हुए देख चुकी थी मगर उसे शर्म ज़रा सा भी नहीं आ रही थी और रामु के देखने के बावजूद वह हरिया का न hi हाथ हटाई न कोई रिएक्शन दी. रामु भी अनीता की बात सुनकर थोड़ा रिलैक्स हो चूका था की कैसे उसे इस बात से फ़र्क़ नहीं पद रहा था की वह नींद में उसकी चूंकि पकडे हुए दबाकर सो रहा था और अपना लुंड उसकी गांड पर सटाकर धक्के लगते हुए सोया था.

अनीता को भी यह बात में कोई बुराई नहीं लगी और इसलिए नहीं की उसे रामु का ऐसा करना अच्छा लगा था और वह चाहती थी की रामु वैसे hi करे, उसे छेड़े, उसके साथ मस्ती करे, बल्कि इसलिए की वह समझ रही थी की नींद में इंसान वैसा कर सकता था. बेशर्म और बेहया औरत होने के कारण अनीता यह सब चीज़ें शर्म के लिहाज से नहीं बल्कि लॉजिक के हिसाब से देखा करती थी और उसका लॉजिक एहि कह रहा था की रामु नींद में था इसलिए उसकी चूंकि दबाये उसकी गांड पर लुंड रगड़ कर सो रहा था. इसलिए उसमे बुरा मानने की कोई ज़रूरत नहीं थी.

रामु यह सुनकर अनीता की कमर से नज़र बताकर उसकी चेहरे पर देखकर bola,"Are मेमसाहेब ी वक़त? अभी तो अँधेरा hi है"

हरिया यह सब बातें सुनते हुए अनीता की कमर सेहला रहा था.

अनीता यह सुनकर रामु को देखकर boli,"Nahin अभी चली जाउंगी तो अच्छा रहेगा. अभी बारिश नहीं हो रही है और बादल भी है तो पता नहीं फिर कब बारिश शुरू हो जाये"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब आधा घंटा रुक जाइये. थोड़ा रौशनी होगा तोह हम पहुंचा देंगे"

रामु यह बोलकर एक नज़र अनीता की चूंकि देखकर bola,"Aadhe घंटे का hi तोह बात है"

और फिर अनीता की आँखों में देखते हुए bola,"ruk जाइये न"

हरिया को भी लगा की अनीता थोड़ी देर रुक जाएगी तो अच्छा रहेगा. उसके जैसी खूबसूरत और सेक्सु औरत को ऐसे बिना पल्लू के बिस्तर पर पास में बैठे देख उसे अच्छा लग रहा था, खासकर जब वह आराम से उसकी गोरी चिकनी कमर पर हाथ फेर रहा था तो. वह उसकी कमर सहलाते हुए bola,"Haan मेमसाहेब रुक जाइये. आधे घंटे बाद चली जाइएगा"

अनीता चुप चाप हरिया से चिपकी बैठी हुई उसका हाथ अपनी कमर पर महसूस करती हुयी उसका बात सुन्न रही थी. उस की ऊपरी जिस्म पर साड़ी का पल्लू अभी भी नहीं था. वह वैसे hi बस ब्लाउज में hi बैठी हुयी थी और उसकी पल्लू बिस्तर पर पड़ी हुयी थी. उसे ज़रा भी शर्म नहीं आ रही थी की वह दो मर्दों के साथ बैठी हुयी है और उसकी पल्लू उसकी कंधे पर नहीं थी. बल्कि वह इतनी बेशर्म औरत थी की हरिया का हाथ भी अपनी कमर से नहीं हटा रही थी.

अनीता की यह बेशर्मी और बेहयाई हरिया और रामु दोनों को अच्छा लग रहा था. अनीता जैसी इतनी खूबसूरत और सेक्सी औरत ऐसे उनके सामने बैठी रहेगी तो वह तो चाहेंगे hi की वह और देर तक रुके मगर अनीता बेशर्म और बेहया होने के साथ साथ समझदार भी थी.

वह हरिया का बात सुनती हुयी boli,"Hariya जी मैं भी नहीं चाहती की आप दोनों को ऐसे सुबह सुबह परेशान करू. आपका तबियत ठीक नहीं है और रामु जी भी दिन भर काम करके थके होंगे तो आप लोगो को आराम की भी तो ज़रूरत है. मैं तो देख रही थी की आप दोनों कितनी गहरी नींद में सोये हुए थे. ऐसे में मुझे आप दोनों को जगाना अच्छा नहीं लग रहा था मगर मेरे हिसाब से अभी चली जाउंगी तोह अच्छा रहेगा. मेरा मतलब है की अभी बाहर थोड़ा सन्नाटा होगा तोह इस वक़्त मैं यहाँ से निकल जाउंगी तो अच्छा रहेगा"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए सर "हाँ" में हिलाते हुए bola,"Haan मेमसाहेब ठीक बोलत हैं आप. अभी निकल जाइएगा तो सही रहेगा"

फिर वह रामु को देखते हुए bola,"Thoda देर बाद रौशनी में मेमसाहेब इहाँ से निकलेगी और कउनो मेमसाहेब को ऐसे सुबह सुबह हमरे झोपड़ी से निकलते हुए देख लेगा तो का सोचेगा की मेमसाहेब रात भर ीहें हमरे झोपडी में थी तभी तो सुबह सुबह निकल रही है"

फिर वह अनीता की कमर सहलाते हुए hi अनीता को देखकर bola,"Memsaheb जइसन जवान औरत को ऐसे सुबह सुबह हमरे झोपडी से कोई निकलता देखेगा तो उल्टा पलटा hi न सोचेगा."

हरिया जब "मेमसाहेब जइसन जवान औरत बोलै" तो रामु अनीता को एक नज़र देखा. अनीता अभी भी बिना पल्लू के वैसे hi हरिया के सीने के पास अपनी लगभग पूरी नंगी पीठ किये हुए बैठी थी और हरिया उसकी कमर पर अपना हाथ फेर रहा था. रामु के देखने पर वह भी उसे देखि तो वह अपना नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखने लगा.

अनीता उसे अपनी चूँचियों को देखते हुए देखि मगर बिना कोई रिएक्शन के हरिया का आगे का बात सुनती हुयी उसे देखने लगी.

हरिया आगे bola,"Kauno ी थोड़े समझेगा की मेमसाहेब हम ग़रीब लोगन का भी ख्याल रखती हैं इसलिए हमरा तबियत खराब होने से हुंका इहाँ देखने आयी मगर बारिश के वजह से इहाँ अटक गयी"

एक तो अनीता बेशर्मी से बिना पल्लू के बैठी थी, इसके ऊपर से अपनी बेशर्मी का साबुत वह इस बात से दे रही थी की हरिया एक तरह से रामु से बोल रहा था की कोई अनीता को उनके झोपडी से निकलते देखेगा तो एहि सोचेगा की वह रामु और हरिया के साथ रात गुजरने के लिए, उनके साथ हमबिस्तर होने यहाँ आई थी और वह ज़रा सा भी ऐतराज़ नहीं कर रही थी. बल्कि उसे हरिया का बात सुनकर अच्छा लग रहा था की वह भी हालात समझ रहा है और जान रहा है की वह जल्दी क्यों यहाँ से चली जाना चाहती है और साथ hi रामु को भी समझा रहा था.

अनीता हरिया का बात सुनकर उसे देखती हुयी boli,"Hariya जी छोड़िये लोगो की बातें. लोग तो बस बातें बनाते हैं. मुझे किसी मदद की ज़रूरत होती है तो लोग थोड़े आते हैं मदद करने. वह तो आप और रामु जी आते हैं. इतना ख्याल रखते हैं आप दोनों मेरा तो ऐसे में आप लोगो का तबियत ख़राब होगा तो क्या मैं देखने नहीं आ सकती. रात में भी तो आप दोनों ने मेरी मदद hi किया. इतनी बारिश में मैं कहाँ जाती. आप दोनों इतना तकलीफ से सोये मगर फिर भी मुझे यहाँ सोने के लिए जगह दिया. मगर लोग यह थोड़े समझेंगे की आप दोनों खुद तकलीफ करके कैसे मुझे बारिश में यहाँ अपने घर में सोने के लिए जगह दिया. खैर मुझे तो लोगो की सोच से कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता है, वह तो कुछ भी सोचेंगे, मगर फिर भी सुबह सुबह चली जाउंगी तो अच्छा रहेगा"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए उसे देखकर bola,"Haan मेमसाहेब कहे बेवजह का लोगो को बात करने का मौक़ा दे हम. ससुरा ऐसे भी लोग जलेंगे अगर उनको पता चलेगा की हमरी मेमसाहेब इतनी अमीर होने के बावजूद भी कैसे हम ग़रीब लोगन का ख्याल रखती हैं. हमरा तबियत ख़राब होने पर हमरा झोपडी में भी हमरा हाल पूछने आ गयी"

अनीता यह सुनकर थोड़ी नाराज़गी दिखती हुयी हरिया से boli,"Hariya जी फिर से अमीरी ग़रीबी का बात करने लगे आप"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब हो जाट है"

अनीता भी यह सुनकर हरिया को देखकर मुस्कुरा दी तो रामु bola,"Lekin बात तो ठीक hi है मेमसाहेब. आप इतनी पढ़ी लिखी और अमीर हैं. फिर भी हमरा कितना इज़्ज़त करती हैं, कितना ख्याल रखती हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर रामु को देखकर boli,"Achha ठीक है ठीक है. बहोत हो गयी मेरी तारीफ. अब उठिये और चलिए रामु जी नहीं तो बात करते करते थोड़ी देर में रौशनी हो जाएगी"

फिर वह एक ऐडा से boli,"Aur मुझे कोई यहाँ से निकलते देख लेगा तो सच में आप लोग से जलने लगेंगे"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए हसने laga,"Hahahaha" तो अनीता भी उसे देखकर खिलखिलाने lagi,"Hehehe". रामु भी उन दोनों को देखकर हसने laga,"Hahahaha" और उस झोपडी में तीनो के हसने की आवाज़ गूंजने लगी. अनीता अभी भी बिना पल्लू के बैठी थी और हसने से उसकी चूँचियाँ थोड़ा हिलने लगी तो रामु उसे देखने लगा. हरिया का भी नज़र वहीँ चला गया.

अनीता खिलखिलाना रोककर मुस्कुराती हुयी पहले हरिया और फिर रामु को देखकर boli,"Ab चलिए भी रामु जी"

रामु यह सुनकर अनीता की चूंकि से नज़र ऊपर करके उसकी चेहरे पर देखकर मुस्कुरा दिया तो अनीता भी मुस्कुराकर boli,"Chaliye रामु जी"

रामु यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाकर बिस्तर से उठ गया तो अनीता boli,"Ramu जी वह मेरा पर्स दीजियेगा प्लीज"

रामु अपने बिस्तर के पास रखे एक टेबल पर से अनीता की बैग उठाकर उसे दिया तो अनीता वैसे hi बिना पल्लू के बैठी हुयी अपनी बैग से एक फेस वाइप और आइना निकलकर अपनी चेहरा पोंछने लगी.

रामु वैसे hi खड़ा हुआ अनीता को अपनी चेहरा पोंछते देखने लगा. हरिया भी उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसकी चेहरे को देखने लगा.

रामु को थोड़ा पेशाब लगा तो वह bola,"Hum बाहर थोड़ा फारस हो जाते हैं मेमसाहेब और रिक्क्षा पोंछ देते हैं. रात में भीग गवा होगा. आप तैयार होकर आ जाइएगा"

अनीता यह सुनकर रामु को देखकर अपनी सर हिलती हुयी boli,"Theek है रामु जी" और रामु वहां से बाहर चला गया.

रामु के बाहर जाने पर हरिया एक नज़र अनीता की चूँचियों को देखा जिसे महसूस करके अनीता हरिया के तरफ देखि. हरिया अनीता को देखकर bola,"Ab रामु वापस अंदर नहीं आएगा. वह बाहर hi इंतज़ार करेगा"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी और हरिया अपना बात बोलकर वापस उसकी चूँचियों को देखकर उसकी बायीं चूंकि के ब्लाउज कप को पकड़ कर ऊपर करके उसकी चूंकि नंगी कर दिया. अनीता कुछ नहीं बोली और आईने में देखकर अपनी फेस वाइप करने लगी. अगले पल उसे अपनी निप्पल हरिया के मुंह में महसूस हुयी.

अगले एक मिनट तक हरिया अनीता की चूंकि को भूखे भेड़िये के तरह चूसने लगा और अनीता चुप चाप अपना फेस वाइप करके बैग से एक पिन निकल कर हरिया को देखती हुयी boli,"Hariya जी मुझे अब चलना चाहिए"

हरिया यह सुनकर उसकी चूंकि मुंह से निकालकर bola,"Theek है मेमसाहेब"

अनीता हरिया को देखती हुयी अपनी बायीं ब्लाउज कप नीचे खिसका ली और फिर बिस्तर से पल्लू उठाकर उसे कंधे पर रखकर पिन लगा ली.

अनीता बिस्तर से उतारकर एक बार अपनी साड़ी ठीक करके मुस्कुराकर हरिया को देखकर boli,"Hariya जी अपना ख्याल रखियेगा" और फिर कामुक अंदाज़ में हरिया के लुंड के तरफ देखती हुयी boli,"aur उसका भी"

हरिया यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब हम अपना लौड़ा का तो ख़ास ख्याल रखेंगे. आपको छोड़ना जो है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुरा दिया तो अनीता भी मुस्कुराकर कामुक अंदाज़ में boli,"Uhhm हरिया जी"

हरिया मुस्कुराकर उसे देखा तो वह कामुक अंदाज़ में boli,"Achha चलती हूँ" और वह जाने के लिए घूमी तो हरिया bola,"Memsaheb"

अनीता यह सुनकर घूमकर उसे देखि तो वह मुस्कुराते हुए उसकी गांड देखकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता भी मुस्कुराकर अपनी सर हिलायी और रामु के बिस्तर के तरफ जो टेबल रखा था उधर दो कदम बढ़कर अनीता उसे पकड़ कर हरिया के तरफ अपनी गांड करके झुक गयी.

हरिया मुस्कुराकर उसकी गांड देखकर bola,"Uff बहनचोद का गांड है" तो अनीता मुस्कुराकर पीछे गर्दन करके हरिया को देखती हुयी अपनी गांड थोड़ा हिलने लगी. हरिया यह देखकर bola,"Aaye हाय मेमसाहेब का मस्त गांड हिला रही हैं आप"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी" तो वह अनीता को देखा. अनीता अपनी गांड हिलती हुयी उसके तरफ आँखों से इशारा करके फिर उसके हाथ के तरफ इशारा की तो हरिया मुस्कुरा दिया.

अनीता हरिया को मुस्कुराते देख कामुक अंदाज़ में मुस्करातो हुयी फिर से अपनी गांड के तरफ आँखों से इशारा की तो हरिया अगले पल चटक से उसकी बायीं गांड पर थप्पड़ जड़ दिया. अनीता अपनी गांड पर थप्पड़ महसूस करते hi कामुक अंदाज़ में अपनी निचली होंठ को दांतों के बीच दबाकर सिसकारी li,"sssiii ुह्ह्हम्म".

हरिया अनीता की गांड को हिलते देख उसकी सिसकारी सुनकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता अपनी गांड हिलती हुयी दायी गांड के तरफ इशारा की तो हरिया उसकी चेहरे पर देखते हुए चटक से उसकी दायी गांड पर थप्पड़ ज्यादा दिया तो अनीता वैसे hi उसे देखती हुयी कामुक अंदाज़ में अपनी निचली होंठ डेंटन के बीच दबाकर सिसकारी li,"Siiii उहहं हरिया जी" तो हरिया उसकी दोनों गांड पर हाथ फेरकर सहलाते हुए bola,"Uff मेमसाहेब का मस्त गांड है आपका"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में boli,"Chalti हूँ हरिया जी"

अनीता यह बोलकर सीढ़ी कड़ी हो गयी तो हरिया उसकी गांड से हाथ हटा दिया. अनीता उसे मुस्कुराकर देखि और गांड मटकती हुयी जाने लगी. वह दरवाज़ा के पास पहुँच कर घूमकर देखि तो हरिया अपना लुंड को लुंगी से बाहर निकालकर उसे हिलाते हुए अनीता की गांड देख रहा था.

अनीता उसे देखि तो हरिया अपने लुंड के तरफ आँखों से इशारा करके दूसरे हाथ से मुट्ठी बनाकर उसे छोड़ने का इशारा किया तो अनीता उसे देखती हुयी वहां का दीवार पकड़ कर झुक कर अपनी गांड हिलती हुयी कामुक अंदाज़ में आँखों से अपनी गांड के तरफ इशारा की तो हरिया मुस्कुरा दिया. अनीता हरिया को मुस्कुराता देख मुस्कुराई और फिर सीढ़ी कड़ी होकर गांड मटकती हुयी बाहर चली गयी.

अनीता बाहर जाकर रिक्शा के पास कड़ी होकर आस पास देखि तो रामु एक तरफ खड़ा होकर पेशाब करते हुए दिखा और अनीता की नज़र उसके लुंड पर चली गयी. कल रात की तरह अनीता फिर से रामु का नंगा लुंड दिखाई दे दिया. रामु का नंगा लुंड देखते hi अनीता की धड़कन तेज़ हो गयी और वह घबराकर रिक्शा के तरफ घूम गयी. वह घूमकर एक नज़र आस पास देखि तो कोई नहीं था. वहां पूरा सन्नाटा था और रौशनी पूरी तरह से अभी नहीं आयी थी.

अनीता को घूमे हुए कुछ सेकण्ड्स hi हुए थे की वह रामु का आवाज़ suni,"Memsaheb आप कब आयी?"

अनीता घूमकर देखि तो रामु गमछा में हाथ पोंछते हुए उसके तरफ आ रहा था. अनीता उसे देखकर मुस्कुराकर boli,"Bas अभी hi"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया और फिर उसके पास आकर bola,"Aaiye मेमसाहेब हम चढ़ने में मदद कर डेट हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और अगले पल अपनी नंगी कमर पर रामु का हाथ महसूस की. अनीता उसका हाथ अपनी कमर पर महसूस करके रिक्शा पकड़ कर चढ़ गयी और जब बैठने लगी तो रामु उसकी कमर की दायी तरफ से हाथ सङ्कटे हुए बायीं तरफ के कमर तक लाकर उसे पकड़ कर बैठते हुए देखने लगा. अनीता बैठने के बाद मुस्कुराकर उसे देख कर boli,"Thank यू रामु जी"

रामु मुस्कुराकर bola,"Aap आराम से बैठ गयी तो?"

अनीता मुस्कुराकर जवाब di,"Haan रामु जी" तो रामु उसकी कमर से हाथ बताकर अपने सीट पर बैठ गया और रिक्शा नाले के साइड वाले रास्ते के तरफ गया. वहां पहुंचकर वह आईने में देखते हुए bola,"Memsaheb रात में बारिश होने से रोड थोड़ा और ख़राब हो गवा होगा. आप जोर से रिक्शा पकड़ लीजिये"

अनीता यह सुनकर उसे आईने में देखती हुयी ज़ोर से रिक्शा पकड़ ली तो रामु आगे देखकर रिक्शा चलना जारी रखा. कुछ मिनट ऐसे hi ख़राब रास्ते से रिक्शा गुज़रा और अनीता को थोड़ी परेशानी हो रही थी. अनीता देखि की रामु का अभी पूरा ध्यान रास्ते पर hi है तो उसे अच्छा लगा की वह उसका ख्याल रखते हुए ध्यान रिक्शा चलने पर लगाए हुए था.

एक जगह वह अनीता से puchha,"Memsaheb आप ठीक है तो?"

अनीता यह सुनकर आईने में देखि तो रामु सामने रोड पर देख रहा था और बहोत ध्यान से रिक्शा चला रहा था. अनीता उसे देखती हुयी boli,"Haan रामु जी मैं ठीक हूँ. इतना संभल कर आप रिक्शा चला रहे हैं"

रामु यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब. कोशिश करात हैं की काम से काम तकलीफ हो आपको"

क्यूंकि पुरे रास्ते पर दोनों तरफ पेड़ थे और हवा भी बह रहा था तो पेड़ के पत्तो में लगे बारिश का पानी हवा के साथ छींटा बनकर अनीता की बदन पर लग रहा था. रिक्शा ऊपर से तो बांध था मगर हवा के कारण वह छींटे सामने से और साइड से आ रहे थे. अनीता जानती थी की इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता तो वह चुप रही. बल्कि उसे यह ठंडा हवा और हलकी छींटे अच्छा लग रहा था. उसे ऐसे भी जाकर बहाना था hi तो उसे कोई प्रॉब्लम नहीं हो रही थी.

जब गड्ढे वाला राष्ट्र ख़तम हुआ और थोड़ा रफ़ रोड शुरू हुआ जहाँ सड़क के स्टोन अग्ग्रेगेट्स टूट कर बिखरे हुए थे तो रामु आईने में अनीता को देखकर मुस्कुराकर bola,"Gaddhe वाला रोड ख़तम हो गया मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी"

अनीता की चेहरे पर हलकी हलकी पानी के छींटे थी जो उसके कामुक बना रही थी. एक तो वह बेहद खूबसूरत थी, ऊपर से बहोत गोरी थी और अब उसकी गोरी चेहरे पर पानी की छींटे जो उसे बेहद सेक्सी और कामुक बना रही थी.

रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराकर उसकी चेहरे पर देखा तो हलके पानी के छींटे उसकी गोरी चेहरे पर देखकर उसके लुंड में हलचल होने लगा. एक तो पानी के छींटे से अनीता की चेहरा हुए खूबसूरत हुए सेक्सी लग रही थी ऊपर से अनीता उसे देखकर मुस्कुरा रही थी तो रामु का लुंड धीरे बौखलाने लगा.

रामु अनीता को देख hi रहा था की रफ़ रोड शुरू हो गया और रिक्शा हल्का हल्का hi सही मगर लगातार जर्क करने लगा तो रामु नज़र नीचे करके अनीता की चूंकि के तरफ देखा तो पानी का हलके छींटे से उसकी ब्लाउज कप हल्का भीग चुकी थी मगर पैडेड ब्लाउज थी तो कुछ दिख नहीं रही थी, मगर रिक्शा जर्क होने के कारण उसकी चूँचियाँ लगातार ऊपर नीचे होकर हिल रही थी.

रामु का लुंड अनीता को ऐसे देखकर धोती में और भी हलचल मचने लगा. रामु अगले कुछ सेकण्ड्स अनीता की भीगी ब्लाउज में उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ को ऊपर नीचे होकर हिलते हुए देखा और फिर नज़र ऊपर करके अनीता की चेहरे पर देखा तो वह उसे देखकर मुस्कुरा दी.

अनीता को मुस्कुराते देख मुस्कुराते देख रामु bola,"Memsaheb अब झूले वाला रास्ता शुरू हो गवा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Haan रामु जी देख तो रहे हैं आप कैसे मेरी बदन लगातार हिलने लगी है"

रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए आईने में अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देख मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहेब हिलते हुए देख रहे हैं हम"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो रामु उसकी चूँचियाँ को देखने के बाद उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Sach में रामु जी, जैसे मैं पिछली बार बोली थी, मैंने ऐसा अजीब रास्ता कभी नहीं देखा है"

रामु यह सुनकर अनीता की चूँचियों को फिर से देखने लगा वहीँ अनीता अपनी बात पूरी करके खिलखिलाने lagi,"hehehe"

रामु अनीता की हसी सुनकर उसकी चेहरे पर देखा तो वह हसना जारी राखी. अगले पल एक थोड़ा सा बड़ा पत्थर के ऊपर से रिक्शा का एक चक्का गुज़रा तो रिक्शा थोड़ा जोर से जर्क हो गयी तो अनीता थोड़ा cheekhi,"Ouch आअह्ह्ह".

रामु यह सुनकर आईने में अनीता को देखा मगर उसे ज़्यादा परेशानी नहीं हुयी तो वह उसके बाद फिर से हसने lagi,"hehehe" तो रामु उसकी चूँचियों को देखकर मुस्कुराकर bola,"Memsaheb यह पत्ता का पानी से आप भीग रही है"

अनीता ध्यान दी तो देखि की पानी का एक बंध उसके क्लीवेज के ऊपर से फिसलते हुए क्लीवेज के अंदर घुसने लगा तो वह मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी मगर ठीक है. ऐसे भी घर जाकर मुझे नहाना hi है. यह ठंडी हवाएं और हलके छींटे अच्छे लग रहे हैं"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Tab तो अच्छा है मेमसाहेब. नहीं तो हुंका लग रहा था की आप भीग रही हैं"

फिर वह अनीता की चूँचियों के तरफ आईने में आँखों से इशारा करते हुए bola,"Eehan की आपका कपडा भी भीग रही है और हम कुछो नहीं कर रहा हूँ आपको भीगने से बचाने के लिए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Nahin रामु जी कोई बात नहीं" फिर वह अपनी ब्लाउज को आईने में देखकर boli,"Ghar जाकर नहाकर तो कपडा बदलना hi है मुझे"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा और फिर सामने से बाये तरफ का आइना एडजस्ट करने लगा. अनीता देखि की रामु आइना ऐसे एडजस्ट किया की बाये आईने में उसकी नंगी पेट दिख रही थी. अब दये आईने में उसकी चेहरा और चूँचियाँ दिख रही थी और बाये आईने में नंगी पेट.

अनीता ध्यान दी की उसकी गोरी पेट पर भी पानी के छींटे थे जिससे उसकी पेट भी कामुक लग रही थी. गोरी सपाट पेट के बीच गहरी नाभि में चमकती हुयी बेल्ली बटन रिंग और उसके आस पास पानी के छींटे, किसी भी मर्द का लुंड खड़ा कर सकता था. अनीता को अपनी पेट देखकर अपनी जवानी, अपनी ख़ूबसूरती पर गर्व हुआ और वह चेहरे पर गर्व का भाव ली हुयी दये आईने में रामु को देखकर अपनी कान के पास के बाल को कान के पीछे करके मुस्कुरा दी. रामु भी उसे देखकर मुस्कुराया और फिर उसकी चूँचियों को देखने लगा. अब रामु कभी अनीता की नंगी पेट तो कभी चूँचियों को देखने लगा. अनीता बेशर्मी से चुप चाप बैठी आस पास देखने लगी और रामु के नज़रो के अपने जिस्म पर पड़ने का ज़रा भी बुरा नहीं मान रही था और कभी कभी खुद भी आईने में उसे देखकर मुस्कुरा देती.

रामु अनीता के घर के पास पहुंचा तो अनीता boli,"Ramu जी अंदर दरवाज़े तक छोर दीजियेगा प्लीज. बारिश बहोत हुयी है तो अंदर घास में पानी होगा"

रामु यह सुनकर bola,"Haan मेमसाहेब अंदर छोड़ डेट हैं. चाबी दीजिये हम गेट खोलकर रिक्क्षा अंदर ले चालत हैं"

अनिते यह बोलकर अपनी कान के पास का बाल कान के पीछे करके बैग से चाबी निकलने लगी तब तक रामु रिक्शा से उतर चूका था और अनीता को देख रहा था. अनीता चाबी निकल कर उसे दी तो वह मैं गेट खोलकर आकर अनीता को चाबी दिया और रिक्शा पर बैठकर अंदर ले गया.

अंदर जाकर वह वरण्डः के सामने रिक्शा रोक कर उतारते हुए bola,"Ek मिनट मेमसाहेब हम उतरने में मदद कर डेट हैं"

अनीता चुप चाप बैठी हुयी रामु को रिक्शा से उतारते देखने लगी और जब वह उतारकर उसके सीट के पास आया तो अनीता अपनी दायी हाथ सामने रामु के सीट पर रखकर अपने सीट से थोड़ा आगे खिसकी तो रामु उसकी कमर पकड़ लिया. अपनी कमर पर रामु का हाथ महसूस करके अनीता बायीं हाथ रामु के बाये कंधे पर रखकर रिक्शा से उतरने वाले प्लेटफार्म पर पेअर रखकर उतरने लगी की तभी उसकी पतली सी हील वहां भीगा होने के कारण फिसल गयी और वह गिरने वाली थी की वह chillai,"Aaahh रामु जी" और दया हाथ से रामु का बया बांह पकड़ ली तो रामु अगले पल उसे संभल लिया.

अनीता को सँभालने के लिए रामु का दया हाथ अपने आप उसकी कमर से सड़क कर उसकी गांड के नीचे चला गया और वह उसकी गांड के निचले वाले भाग पर हाथ रखे उसे सँभालते हुए bola,"Araam से मेमसाहेब" तो अनीता उसके आँखों में देखकर boli,"Thank यू रामु जी"

रामु यह सुनकर bola,"Araam से उतरिये मेमसाहेब. हम हैं इहाँ"

अनीता रामु का कन्धा पर बया हाथ रखती हुयी दये हाथ से उसका बया बांह पकड़ कर उत्तरी तो रामु उसकी गांड के नीचे से हाथ ऊपर करके उसकी कमर पकड़ कर bola,"Aaiye मेमसाहेब हम अंदर तक छोर देते हैं"

अनीता यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाई और तीन चार कदम आगे चलकर वरण्डः में पहुँच कर वह puchha,"Ab ठीक है मेमसाहेब?"

अनीता यह सुनकर उसे देखकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी. थैंक यू. आप नहीं सँभालते तो मैं गिर hi जाती. आप भी सोच रहे होंगे मुझे रिक्शा पर चढ़ने उतरने भी नहीं आता हहहह"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब. हम जानत है आप बड़े शहर में रही हैं तो रिक्शा पर चढ़ने का ज़रूरत hi नहीं पड़ा होगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी. एक दो बार hi चढ़ी हूँगी मैं. पता नहीं कैसे चढ़ी और उत्तरी मैं हेहेहे"

रामु अनीता की चंचलता देख कर हसने laga,"Hahaha" की तभी उसका नज़र हसने के कारण हिलती हुयी अनीता की चूँचियों पर पड़ा. अनीता उसे अपनी चूँचियों पर देखते हुए देखि मगर कुछ नहीं बोली और हसी कण्ट्रोल करके मुस्कुराकर boli,"Ramu जी आप भीग गए हैं. आइये अंदर और बदन सूखा लीजिये. मैं आपके लिए चाय बना देती हूँ"

रामु यह सुनकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब कहे परेशान हो रही हैं आप"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Are इसमें परेशानी की कौन सी बात है. आप मुझे घर पहुँचाने आये हैं तो क्या मैं आपके लिए एक कप चाय भी नहीं बना सकती"

रामु यह सुनकर bola,"Achha ठीक है मेमसाहेब चलिए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर रामु को देखि और घूमकर गांड मटकती हुयी दरवाज़े के तरफ जाकर दरवाज़ा खोलने लगी. रामु पीछे खड़ा अनीता की पूरी नंगी पीठ और उसके नीचे उभरी हुयी उसकी बड़ी गांड देखने लगा.
 
अपडेट 109

अनीता के पीछे पीछे उसकी गांड और नंगी पीठ देखते हुए रामु घर के अंदर घुसा. रामु अनीता की गांड को चलते वक़्त हिलते हुए देख hi रहा था की अनीता घूमकर उसे देखि. अनीता के घूमकर देखने पर रामु अपना नज़र उसकी गांड से ऊपर करके चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Ramu जी आप बैठिये. मैं 10 मिनट में फ्रेश होकर आती हूँ तो चाय बना दूंगी".

रामु यह सुनकर सर "हाँ" में हिलाते हुए bola,"Theek है मेमसाहेब".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और वापस घूमकर गांड मटकती हुयी अपनी कमरे में चली गयी. रामु उसकी मटकती गांड को देखने लगा और तब तक देखते रहा जब तक अनीता कमरे में नहीं चली गयी. अनीता कमरे में जाकर दरवाज़ा अंदर से पुश की मगर वह सत्ता नहीं और थोड़ा सा खुला hi रह गया. अनीता जब रामु के नज़रो से ओझल हो गया तो रामु जाकर सीढ़ियों पर बैठ गया.

करीब 10 मिनट बाद अनीता कमरे से हाथ में एक तौली लेकर निकलती हुयी पहले सोफे के तरफ देखि और फिर सीढ़ियों के तरफ देखि तो रामु नज़र आया. अनीता उसे देखकर मुस्कुराती हुयी boli,"Ramu जी फिर से आप सीढ़ियों पर hi बैठ गए? आइये सोफे पर बैठिये"

रामु यह सुनकर हल्का मुस्कुराते हुए bola,"Are नहीं मेमसाहेब हम इहाँ hi ठीक हैं. हुंका इहाँ बैठना अच्छा लगता है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और फिर उसके तरफ मुस्कुराती हुयी जाते हुए boli,"Achha ठीक है. यह लीजिये तौलिया और अपना सर सूखा लीजिये. पानी के छींटे से आपका पूरा सर भीग गया है"

अनीता यह बोलती हुयी उसके पास जाकर तौली दी तो रामु मुस्कुराते हुए तौली ले लिया. अनीता मुस्कुराती हुयी उसे देखि. वह अभी भी वही कपडा पहनी थी. कमरे में जाकर वह सिर्फ ब्रश की थी और अपना बदन सूखे थी. ब्लाउज उसकी अभी भी भीगी हुयी थी.

रामु का नज़र तौली लेते हुए उसकी चूँचियों पर चला गया. अनीता उसे देखि मगर कुछ नहीं बोली. रामु उसकी चूँचियों से नज़र हटाकर अनीता को देखा तो वह हल्का मुस्कुराती हुयी puchhi,"Ramu जी कैसा चाय पिएंगे आप, लाल चाय या दूध वाली?"

रामु का नज़र यह सुनते hi उसकी चूँचियों पर चला गया और वह उसकी चूँचियों को देखते हुए bola,"Doodh वाली".

रामु यह बोलने के बाद नज़र अनीता की चूँचियों से हटाकर उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुरा दी. अनीता को मुस्कुराते देख रामु भी हल्का मुस्कुराया तो अनीता boli,"Aap बैठिये मैं चाय बना देती हूँ" और फिर वह एक ऐडा से boli,"Doodh वाली"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर फिर से उसकी चूँचियों को देखा तो अनीता बिना कुछ बोले घूमकर गांड मटकती हुयी किचन में चली गयी. किचन में जाने से पहले वह सोफे के पास टेबल पर रखे एक के रिमोट से लिविंग रूम का एक ों कर दी.

अनीता अगले कुछ मिनट तक चाय बनती रही और किचन से कभी कभी रामु को देखती तो पाती की उसका नज़र उसकी चूँचियों पर hi है. अनीता न hi कोई रिएक्शन देती और न hi कुछ बोलती रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए देखकर. हाँ कभी कभी दोनों की नज़रें मिल जाती तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा देती तो जवाब में रामु भी मुस्कुरा देता.

अनीता चाय के साथ बिस्किट्स को ट्रे में रखकर रामु के पास गयी तो वह चाय लेकर पीने लगा. अनीता भी खुद के लिए एक कप चाय ले गयी थी और वह वहीँ सीढ़ियों पर रामु के बगल में बैठकर चाय पीने लगी. अनीता को वहां बैठते हुए देख रामु bola,"Are मेमसाहेब आप सोफे पर बैठिये न"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Ramu जी आप अभी मेरे मेहमान जैसे हैं. आप यहाँ बैठेंगे और मैं वहां तो यह अच्छा लगेगा क्या?"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Sach में मेमसाहेब हमरी बिटिया और हरिया ठीक कहत है की आपके जैसी कउनो नहीं है. आप दिल की कितनी अच्छी है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Offo रामु जी अब आप भी मेरी तारीफ करना शुरू मत कर दीजिये"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता भी मुस्कुरा दी. दोनों अगले कुछ सेकण्ड्स तक चुप चाप चाय पिए. अनीता ठीक उसके बगल में बैठी थी और दोनों के बीच बस एक फ़ीट का गैप था. अनीता की बदन से खुशबु आ रही थी जिसे सूंघकर रामु को अच्छा लग रहा था. वहीँ रामु के बदन से शराब और पसीने की गंध आ रहा था जो अनीता को अच्छा लग रहा था. उसे न जाने क्यों हरिया और रामु के बदन से शराब और पसीने की गंध अच्छा लगने लगा था.

इस बीच रामु कभी कभी अनीता की चूँचियों को देख लेता. अनीता उसे देखती हुयी देख न hi कोई रिएक्शन देती और न hi कुछ बोलती. रामु का नज़र अपनी चूँचियों पर उसके लिए अब नार्मल बात हो गयी थी और उसका वह बुरा भी नहीं मान रही थी. वह जानती थी की रामु भी हरिया जैसा दुमदार मर्द है, उसके पास भी हरिया जैसा तगड़ा लुंड है तो ऐसे में एक औरत की चूँचियों पर नज़र तो जायेगा hi.

रामु चाय पीकर उठते हुए bola,"Hum चालत है मेमसाहेब. अभी हुंका अपना घर भी जाना है. यहां चंदा नाश्ता बनाकर देगी तो हरिया के घर हम ले जाऊंगा फिर काम पर भी जाना है".

अनीता को भी नहाकर फ्रेश होना था और थोड़ा आराम करना था. हरिया के घर में वह सो तो गयी थी मगर उसे आरामदायक गद्दे पर सोने की आदत थी जो वहां उसे मिला नहीं तो थोड़ा थकावट महसूस हो रही थी उसे.

अनीता रामु का बात सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है रामु जी" तो रामु अनीता की चूँचियों को फिर से देखा और ऐसा लगा की वह अनीता की मैं की बात समझ गया हो.

वह अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Aapko भी नहाना होगा. आपका कपडा भीग गवा है"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से रामु को देखती हुयी boli,"Haan रामु जी. मैं भी नहाकर थोड़ी आराम करुँगी".

रामु अनीता की बात सुनकर उसकी चूँचियों से नज़र ऊपर करके उसकी आँखों में देखा तो अनीता कुछ नहीं बोली.

रामु फिर जाने लगा तो अनीता दरवाज़ा बांध करने के लिए उसके पीछे गयी तो रामु खड़ा होकर उसे देखकर bola,"Humka चाय पिलाने के लिए धन्यवाद मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी धन्यवाद की क्या बात है. आप मुझे सुबह सुबह घर पहुँचाने आये तो क्या मैं आपको एक कप चाय नहीं पीला सकती"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता boli,"Aap दोनों मेरा इतना ख्याल रखते हैं. कल रात भी बारिश होने पर मुझे वहां रहने के लिए जगह दिया. मेरी वजह से आपको कितनी परेशानी हुयी रात में सोने में"

रामु यह सुनकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब परेशानी का का बात हैं. हुंका तो अच्छा लगा की हम आपके लिए कुछो कर पाए"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो रामु bola,"Memsaheb एक बात पूछे?"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी पूछिए? क्या पूछना चाहते हैं"

रामु हल्का मुस्कुराकर एक बार अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Woh हम रिक्क्षा सही चलाये तो? आपको ज़्यादा परेशानी तो नहीं हुयी न"

रामु यह बोलकर फिर से अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए देख मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी आपने अच्छे से चलाया. अब रोड hi वैसा है तो क्या कर सकते हैं. लेकिन फिर भी आप बहोत संभल कर चला रहे थे"

रामु यह सुनकर मुस्कुराकर वापस अनीता को देखा तो उसे मुस्कुराते देख अच्छा लगा. रामु खुलकर उसकी चूँचियों को देख रहा था मगर अनीता बुरा मान न तो दूर की बात है उल्टा मुस्कुरा रही थी.

अनीता को मुस्कुराते देख रामु को कॉन्फिडेंस मिला तो वह आगे bola,"Aur मेमसाहेब ु झूला झूलते वक़्त आपको कइसन लगा".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hehehe रामु जी आप तो देख hi रहे थे मुझे कितनी हसी आ रही थी उस रोड पर हेहेहे."

अनीता जब हंसने लगी तो उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ छोटे ब्लाउज कप्स में हल्का हिलने लगी.

रामु अनीता को हँसते हुए देख हल्का मुस्कुराकर bola,"Humaar मतबल है की ु झूले वाला रोड पर आपकी लगातार हिल रही थी उससे आपको कउनो परेशानी तो नहीं हुआ"

रामु यह बोलकर एक नज़र फिर से अनीता की हिलती चूँचियों को देखने लगा वहीँ अनीता की दिल धड़क गयी यह बात सुनकर. अनीता यह बात का उम्मीद नहीं कर रही थी इसलिए यह सुनकर उसकी दिल धड़क रही थी मगर जैसी वह बेशरम थी वह धड़कते दिल से hi हसना बांध करके मुस्कुराकर boli,"Nahin रामु जी मुझे कोई परेशानी नहीं हुयी. अब रोड वैसा था तो हिलेंगी hi. बदन का क्या है, वह तो हसने से भी हिलने लगती है हेहेहे"

अनीता यह बोलकर बेशर्मी से हसने लगी तो फिर से उसकी चूँचियाँ हिलने लगी तो रामु मुस्कुराते हुए उसकी चूँचियों को देखने लगा. उसका लुंड अनीता की बेशर्मी और हिलती हुयी चूँचियों को देखकर धोती में फिर से हलचल मचने लगा मगर अगले पल उसका लुंड पूरा तन तना गया जब वह अनीता की बात suna,"Dekh रहे हैं न हसने से भी कैसे हिल रही है हहहहए"

रामु का लुंड यह सुनकर तन तना गया तो वह नज़र उठा कर अनीता की चेहरे पर देखा तो वह बेशर्मी से खिलखिला रही थी. रामु अपने लगभग 50 साल की ज़िन्दगी में अनीता जैसी औरत कभी नहीं देखा था. नहीं खूबसूरती के मामले में और न hi बेशर्मी के मामले में. वह फिल्मो में हेरोइनेस को या ऐसे रील्स में मॉडल्स को देखकर उनको बेशर्म तो समझता था मगर हकीकत में कोई हीरोइन और मॉडल जैसी खूबसूरत औरत से उसका सामना होगा जो इतनी खुलकर बेशर्म होगी यह कभी सोचा नहीं था. अनीता को देखकर उसके अंदर का मर्द जागने लगा था और कॉन्फिडेंस भी आने लगा था.

वह अनीता की चेहरे पर देखकर मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहेब देख रहे हैं की कैसे आपकी हिल रही हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"To फिर हिलने से कैसी परेशानी रामु जी"

रामु यह सुनकर हल्का मुस्कुराया तो अनीता एक ऐडा से puchhi,"Aapko क्या अच्छा नहीं लग रहा था मेरी हिल रही थी तोह?"

रामु अनीता से यह सवाल का उम्मीद नहीं कर रहा था. उसका लुंड बौखला कर धोती में हिलने लगा और धड़कन भी तेज़ होने लगा. वह धड़कते दिल से bola,"Are नहीं मेमसाहेब जब आपको कउनो परेशानी नहीं है तो हमरा का. हुंका आपको झूला झूलकर हस्ते हुए देख अच्छा लगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई था रामु एक नज़र उसकी चूँचियों को देखा और फिर नज़र ऊपर करके अनीता को देखा तो वह मुस्कुरा दी. अनीता को मुस्कुराते देख रामु bola,"Hum चालत हैं मेमसाहेब. वह आप कपडा बदल लीजिये."

वह फिर ऐ उसकी ब्लाउज कप्स को देखकर bola,"Pura भीग गवा है. ज़्यादा देर भीगा कपडा पेहेन्ने से आपका तबीयत ख़राब हो जायेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी. मैं अभी नाहा कर चेंज कर लुंगी"

रामु यह सुनकर उसकी चूँचियों से नज़र हटाकर मुस्कुराकर bola,"Theek है मेमसाहेब. आप अपना ख्याल रखियेगा"

अनीता मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी. आप भी अपना ख्याल रखियेगा और कभी किसी चीज़ की ज़रूरत होगी तो बेझिजक बोलियेगा"

रामु यह सुनकर मुस्कुराया और रिक्शा के तरफ जाने लगा. उसका दिल धड़क रहा था और लुंड पूरा बौखला गया था. वह अपने आप को सँभालते हुए रिक्शा तक पहुंचा वहीँ अनीता दरवाज़े पर कड़ी हुयी उसे देखती रही.

रामु रिक्शा पर चढ़ने के लिए पड़ले पर एक पेअर रखकर एक नज़र अनीता को देखा तोह वह मुस्कुरा रही थी. इतनी खूबसूरत और सेक्सी औरत को अपने जैसे मज़दूर से इतना खुलकर बिना शर्म का बात करते हुए देख और अनुभव करके रामु के अंदर का मर्दानगी जाग तो गया था मगर साथ hi वह अनीता की अच्छे की वह उसके जैसे मज़दूर से अच्छे से बात करती है और इज़्ज़त से पेश आती है. हरिया के साथ और यहाँ तक की रामु की बेटी जो अनीता की नौकर थी उसके साथ भी उसका अच्छा और इज़्ज़त से भरा वर्ताव के कारण रामु के दिल में अनीता के लिए इज़्ज़त भी थी.

अनीता को मुस्कुराते देख रामु मुस्कुराया और फिर अगले पल वैसे hi पड़ले पर एक पेअर रखे उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता उसे अपनी चूँचियों पर देखता देखने लगी मगर वह हमेशा की तरह जब कुछ सेकण्ड्स में अपना नज़र नहीं हटाया तो अनीता की दिल धड़क गयी.

वह धड़कते दिल से puchhi,"Ramu जी कोई बात है क्या? आप कुछ कहना चाहते हैं क्या?"

रामु का ध्यान अनीता की बात सुनकर उसकी चूँचियों से हटा तो वह अनीता को देखकर "न" में सर हिलाया तो अनीता हल्का मुस्कुरा दी.

अनीता को मुस्कुराते देख रामु रिक्शा पर चढ़ने लगा की तभी फिर से उसकी चूँचियों पर उसका नज़र गया. अनीता फिर से रामु को देखने लगी की उसका नज़र उसकी चूँचियों पर चला गया. रामु नज़र ऊपर करके अनीता को देखा तो अनीता बिना कुछ बोले आँखों के इशारा से puchhi,"Kya बात है?"

रामु अगले पल रिक्शा से उतरा और तेज़ी से अनीता की तरफ बढ़ा. अनीता की दिल उसके अपने तरफ आते देख धड़कने लगी और इससे पहले की वह कुछ समझती या बोल पाती रामु उसके पास आकर दये हाथ से उसकी कमर पकड़ कर नीचे झुककर उसकी दायी चूंकि ब्लाउज कप के ऊपर से मुंह में लेकर चूसने लगा.

रामु के ऐसा करते hi अनीता की बदन में बिजली जैसी महसूस हुयी और दिल और जोर से धड़कने लगा. अनीता भले hi बेशर्म थी और रामु को खुलेआम अपनी चूँचियों पर देखते हुए देख ऐतराज़ तो दूर की बात है उल्टा मुस्कुरा रही थी, मगर वह यह उम्मीद नहीं कर रही थी की रामु ऐसे आज उसकी चूंकि में मुंह लगाकर पीने का कोशिश करेगा. अनीता को सिचुएशन समझने में कुछ सेकण्ड्स लग गयी तब तक रामु उसकी दायी चूंकि पर ब्लाउज के ऊपर से hi भूखे भेड़िये के तरह टूट पड़ा था.

अनीता कुछ सेकण्ड्स बाद रामु का बाल पकड़ कर खुद से अलग करने का कोशिश करती हुयी boli,"Ramu जी यह क्या कर रहे हैं आप. खुद को सम्भालिये प्लीज" मगर रामु कहाँ सुनने वाला था. लगभग 50 साल के उम्र में अनीता की ख़ूबसूरती, उसका सेक्सी अंदाज़ और सबसे ऊपर उसकी बेशर्मी देखकर उसके अंदर का मर्दानगी का एहसास फिर से जागने लगा था तो जो औरत के कारण उसके अंदर का मर्दानगी जागने लगा था उसे वह इतनी आसानी से कैसे छोड़ता.

रामु जब अलग नहीं हुआ तो अनीता परेशानी के भाव से आस पास देखि मगर सुननसँ जगह था तो कोई नहीं था. अनीता को राहत मिली की वहां कोई नहीं था मगर फिर भी वह दुबारा कोशिश करने लगी रामु को खुद से अलग करने के लिए. वह भले hi बेशर्म औरत थी और उसके अंदर रान्दीपना कूट कूट कर भरा हुआ था मगर वह कोई रंडी नहीं थी की इतनी आसानी से अपने आप को समर्पित कर दे किसी मर्द को.

अनीता कोशिश करती हुयी रामु का सर के बाल से हाथ हटाकर उसके कंधे पर रखकर उसे खुद से अलग करने की कोशिश करने लगी मगर एक तोह वह नाज़ुक सर औरत थी ऊपर से वह अपना पूरा जोर नहीं लगा रही थी. कहीं न कहीं उसकी बेशर्मी, उसके अंदर का रान्दीपना उसे पूरा जोर लगाने से रोक रही थी.

रामु उसकी कमर से हाथ नीचे लेजाकर उसकी गांड पकड़ कर चूंकि चूसने लगा वहीँ अनीता कोशिश करती हुयी बोलती rahi,"Ramu जी अब हो गया, प्लीज खुद को सम्भालिये. चंदा आपका इंतज़ार कर रही होगी"

रामु यह सुनकर अनीता की चूंकि से अलग हुआ तो अनीता तेज़ सांस लेती हुयी उसे देखने लगी. उसकी चेहरे पर ज़रा सा भी गुस्सा या शर्म नहीं थी. रामु एक नज़र उसे देखकर bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब" और तुरंत घूमकर वहां से रिक्शा के तरफ गया और बैठकर अनीता के तरफ देखे बिना बाहर चला गया. अनीता तेज़ सांस लेती हुयी उसे जाता देखती रही और जब वह थोड़ा दूर चला गया तो वह घर में जा कर दरवाज़ा बांध करके नहाने चली गयी और बाथटब में बैठकर पिछली रात और आज जो हुआ उसके बारे में सोचने लगी.

अनीता को पिछली रात की पूरी घटना याद आने लगी. वह रामु के साथ जब हरिया के घर पहुंची तो वह कोई अश्लील भोजपुरी गाना सुन्न रहा था. मोबाइल पर उसका वीडियो चल रहा था.

रामु अनीता के साथ घर में घुसा तो वह सोच में पद गया की अनीता जैसी पढ़ी लिखी अमीर औरत जो एक तरह से उनकी मालकिन hi हुयी वह यहाँ आयी है और हरिया मोबाइल पर अश्लील भोजपुरी गाना सुन्न रहा है जिसे खुद अब अनीता भी सुन्न पा रही थी.

अनीता की भी दिल धड़क गयी वह गाना सुनकर. हालांकि उसे भोजपुरी नहीं आती थी मगर थी तो एक जवान और आत्मनिर्भर औरत. इतनी तो समझ थी की गाने का क्या मतलब था. लेकिन अनीता अब हरिया को अच्छे से जानती थी. उसे ज़रा भी बुरा नहीं लगा हरिया को वह गाना सुनते हुए देख और अपनी बेशर्मी का साबुत देती हुयी चुप चाप गांड मटकती हुयी हरिया के बिस्तर के पास पहुंची तो हरिया का नज़र उस पर पड़ा.

अनीता को देखते hi हरिया का मैं खुश हो गया और वह मुस्कुरा कर bola,"Are मेमसाहेब आप और ु भी इस वक़त?"

हरिया यह बोलकर एक नज़र रामु को भी देखा. अनीता हरिया का बात सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Haan हरिया जी. क्यों नहीं आ सकती क्या?"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are नहीं मेमसाहेब कहे नहीं आ सकती आप. हमरे ग़रीबख़ाने में तो आपका हर वक़त स्वागत है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo हरिया जी फिर से वही अमीरी ग़रीबी की बातें"

हरिया यह सुनकर दांत दिखते हुए मुस्कुराया तो अनीता puchhi,"Kaise हैं आप?"

हरिया मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब हम ठीक हैं. पहले से बेहतर है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई की तभी हरिया रामु को देखकर bola,"Are ससुरा खड़े खड़े का देखत है. ु कुर्सी लाकर मेमसाहेब को बैठने के लिए दे. मेमसाहेब कड़ी है"

रामु यह सुनकर "हाँ" बोलकर पीछे रखे एक कुर्सी को अनीता के पास ले आया तो अनीता मुस्कुराकर रामु को देखकर "थैंक यू" बोली तो रामु मुस्कुरा दिया. हरिया के तरह उसे भी अनीता की मुंह से अंग्रेजी सुनकर अच्छा लगता था.

अनीता फिर कुर्सी को थोड़ा आगे करके बिस्तर के पास हरिया के ऊपरी बदन वाले हिस्से के पास रखकर उस पर बैठ गयी. इससे अनीता को हरिया के चेहरे पर देखकर बात करने में आसानी होती.

अनीता बैठी तो हरिया एक नज़र उसकी जिस्म पर डाला. वह देखकर समझ गया की अनीता ख़ास तरीके से सज धज कर आयी है. वह अनीता को देखने के बाद उसकी चेहरे पर देखा तो वह मुस्कुरा दी तो हरिया puchha,"Memsaheb ी वक़त आयी हैं आप? कउनो ख़ास वजह?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are नहीं हरिया जी मैं कोई ख़ास वजह नहीं है. मैं रेस्टोरेंट से खाना खा कर घर जा रही थी तो रामु जी दिख गए. वह मुझे घर छोड़ने के लिए बोले. मैं नहीं चाहती थी की मेरी वजह से इनको कहीं जाने में देरी हो तो बोले की कहीं काम पर नहीं जाना है इन्हे. यह आपके यहाँ hi आने वाले थे और मुझे घर छोड़कर आ जायेंगे. तो मैं सोची की क्यों न मैं भी साथ आ जॉन और आपका हाल चाल पूछ लू. थोड़ी देर बैठ कर आपका हाल चाल पूछ कर चली जाउंगी"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराया और फिर puchha,"Aur साहेब? हमार मतबल है की ु आपका इंतज़ार कर रहे होंगे घर पर"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Hariya जी वह साथ रहते तो मैं तो उनके साथ hi घर चली जाती. दरअसल उनको कल सुबह सुबह साइट पर कुछ काम था तो आज शाम में hi जाने का प्लान किये और हम दोनों रेस्टोरेंट में खाना खाया. फिर वह मुझे घर छोड़ने का बोले तो मैं hi मन कर दी की उनको लेट हो जायेगा. तो वह रेस्टोरेंट से hi साइट पर चले गए और मैं घर जाने के लिए ऑटो पकड़ने जाने hi वाली थी की"

फिर वह रामु को देखकर मुस्कुराकर boli,"Ramu जी दिख गए और मैं यहाँ आ गयी"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Achha"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Kaisa तबियत है हरिया जी आपका? पेअर में मूवमेंट, मेरा मतलब है की पेअर हिल दोल पा रहे हैं तो"

हरिया यह सुनकर अपने पेअर के तरफ देखकर bola,"Haan मेमसाहेब थोड़ा हिल दोल पा रहे हैं. समझिये की आधे से ज़्यादा ठीक हो hi गए हैं हम"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उसके पेअर को देखि और फिर उसके चेहरे पर देखकर boli,"Achha है. जल्द से जल्द ठीक हो जाइये"

इस बीच रामु एक तरफ रखे कुर्सी को लाने गया.

हरिया अनीता की सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह एक नज़र नीचे लेजाकर उसकी चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब जल्दी ठीक होना चाहते हैं हम लेकिन ऊके लिए हुंका दूध चाहिए"

अनीता की दिल धड़क गयी और सांस तेज़ हो गयी यह सुनकर लेकिन वह अपनी बेशर्मी का साबुत देती हुयी एक नज़र रामु को देखि जो कुर्सी उठाने में लगा हुआ था और फिर हरिया को देखकर boli,"Theek है हरिया जी जब मौक़ा मिलेगा तो पि लीजियेगा".

हरिया यह सुनकर हल्का मुस्कुराया तो अनीता भी मुस्कुरा दी. हरिया अनीता की चूँचियों को देखकर धीरे से puchha,"Lekin हमार पीने के लिए दूध कहाँ है?"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से एक ऐडा से अपनी आँखों से दोनों चूँचियों के तरफ इशारा करके boli,"Aapke सामने hi तो है"

इस बीच रामु कुर्सी लाकर अनीता के बगल में थोड़े फैसले पर कुर्सी रखते हुए puchha,"Are ससुरा हरिया पहले खाना खाकर दवाई खा ले फिर दूध पीना"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा तो अनीता भी उसे मुस्कुराकर देखकर boli,"Sunn लिया आपने? पहले खाना, फिर दवाई उसके बाद दूध".

हरिया यह सुनकर हसने लगा तो अनीता भी खिलखिलाने lagi,"Hehehe". रामु भी साथ में हसने लगा. खिलखिलाने से अनीता की चूँचियाँ हिल रही थी तो रामु का नज़र उस पर चला गया. यहाँ तक की हरिया भी उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता आँखों के कोने से दोनों को देखि की कैसे दोनों उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देख रहे थे मगर कुछ नहीं बोली.

तीनो वहां बैठकर थोड़ी देर गुप्षुप किये फिर अनीता उठती हुयी boli,"Achha अब देर हो रही है. मुझे चलना चाहिए"

रामु भी उठते हुए bola,"Haan मेमसाहेब चलिए हम छोर डेट हूँ आपको"

रामु उठकर बाहर जाने लगा तो हरिया भूखा हवस भरे नज़र से अनीता की चूँचियों को देखा तो वह कामुक अंदाज़ में धीरे से boli,"Phir कभी पि लीजियेगा हरिया जी"

हरिया अपना हाथ बढाकर अनीता की कमर पर रखकर उसे सहलाते हुए puchha,"Ka मेमसाहेब? का पिएंगे हम"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से अपनी आँखों से चूँचियों के तरफ इशारा करती हुयी boli,"Yeh दूध हरिया जी"

हरिया यह सुनकर उसकी चूँचियों को देखा तो अनीता boli,"Abhi मुझे जाना होगा. ऐसे इस वक़्त यहाँ रहना ठीक नहीं है. आप समझ रहे हैं न?"

हरिया यह सुनकर "हाँ" में सर हिलाया की तभी रामु वापस आते हुए bola,"Are मेमसाहेब बाहर तो बारिश हो रहा है"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखा. वहीँ अनीता भी रामु के तरफ देखकर उसकी बात सुनकर वापस हरिया के तरफ देखि तो उसे अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. हरिया अगले पल अनीता की चेहरे पर देखते हुए bola,"Jab तक बारिश रुक नहीं जाता आप यहाँ रुक जाइये मेमसाहेब"

अनीता कुछ बोलती इससे पहले रामु भी उसके पास आकर bola,"Haan मेमसाहेब बारिश थोड़ा तेज़ है. इसमें हम जा नहीं सकते"

अनीता यह सुनकर हल्का मुस्कुरा कर "हाँ" में सर हिलती हुयी boli,"Theek है"

रामु इस बीच bola,"Tab तक हमलोगां खाना खा लेट हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan आपलोग खाना खा लीजिये. अब पता नहीं यह बारिश कब छूटेगी. फिर रामु जी को मुझे घर भी छोड़ना होगा. तोह बेहतर है की आप लोग खा ले"

रामु उठकर प्लेट वगैरह लाने लगा तो हरिया bola,"Ramu तीन प्लेट लाना. मेमसाहेब भी हैं"

अनीता यह सुनकर boli,"Are मैं तोह खाकर hi आयी हूँ. आप लोग खाइये"

अगले पल रामु का आवाज़ सुनाई diya,"Are हरिया मेमसाहेब हम ग़रीब लोगन के घर थोड़े खायेगी"

अनीता यह सुनकर थोड़ी नाराज़गी दिखती हुयी boli,"Ramu जी अब यह क्या बात हो गयी. आप तो देखे hi की मैं रेस्टोरेंट के पास आप से मिली. अब मैं खा चुकी हूँ तो दुबारा कैसे खून. आप लोगो ने फिर से अमीरी ग़रीबी की बात की तो मैं अभी चली जाउंगी, बारिश में hi"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are नहीं मेमसाहेब नहीं बोलेंगे"

रामु भी दो प्लेट लाते हुए हरिया के बिस्तर पर एक दस्तरख्वान बिछा कर उस पर दो प्लेट रख कर bola,"Maaf कर दीजियेगा मेमसाहेब हमार मतबल ु नहीं था"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई था हरिया bola,"Lekin का आप थोड़ा सा भी नहीं खाएंगी? सिर्फ हमार साथ देने के लिए?"

अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Nahin हरिया जी मेरा पेट पूरा भरा हुआ है अब और नहीं खा सकती"

यह सुनकर हरिया अनीता की पेट के तरफ देखने लगा. अनीता उसके नज़र को अपनी पेट के तरफ देखि और फिर तिरछी नज़र से रामु को देखि तो वह भी अनीता की पेट पर देख रहा था. अनीता की गोरी चिकनी और सपाट पेट के बीच गहरी नाभि में चमकती हुयी लम्बी बेल्ली बटन रिंग जिसके अंत में दिल का अकार बना हुआ था यह देखते hi दोनों का लुंड में हलचल होने लगा.

अनीता रामु को देख hi रही थी की हरिया bola,"Haan मेमसाहेब आपको तो, ु का कहत है, हाँ फिगर, फिगर बनाकर रखना है तो"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखों बड़ी करके मुस्कुराती हुयी boli,"Offo हरिया जी" तो हरिया हंस diya,"Hahaha". हरिया को हँसते देख रामु भी मुस्कुराने लगा तो अनीता एक नज़र रामु को देखकर मुस्कुराई और फिर हरिया को देखि तो अनीता बेशर्मी से boli,"Fit रहना भी तो ज़रूरी है. अब आप दोनों को देखिये. कैसे म्हणत मज़दूरी करके इतना फिट हैं आप दोनों"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहेब ी तो है. और दिन भर मज़दूरी करने के बाद रात में भी म्हणत कर सकत हैं हम"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी यह तो है"

रामु मुस्कुराते हुए एक पोली बैग निकला जिसमे बाहर का खाना था. दरअसल अनीता जहाँ रेस्टोरेंट में खायी उधर फुटपाथ पर भी दो चार छोटे मोठे रेस्टोरेंट थे जहाँ नॉन वेग खाना मिलता था. रामु वहीँ से खाना लेकर वहां उस गली में पेशाब कर रहा था की अनीता उसे देखि. हरिया और रामु non-veg खाना और शराब पीने का प्लान किये थे आज की रात.

रामु बिरयानी और कहा लेकर आया था. वह दोनों खाने के लिए बैठे तो अनीता boli,"aap दोनों खाइये मैं थोड़ा खिड़की के पास कड़ी होकर ठंडी हवाएं खा लेती हूँ"

हरिया यह सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब. हवा खाने से आपकी फिगर पर कुछो असर नहीं पड़ेगा हेहेहे"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके उसे देखकर boli,"Offo हरिया जी" और फिर वह भी हसने लगी. हसने से उसकी चूँचियाँ फिर से हिलने लगी तो हरिया और रामु का नज़र वहां चला गया. अनीता उन्हें अपनी चूँचियों पर देखते हुए देखि और फिर अपनी हसी कण्ट्रोल करके मुस्कुराती हुयी boli,"Aap दोनों खाइये" और फिर कुर्सी से उठकर खिड़की के पास पहुंची. दोनों रामु और हरिया अनीता की मटकती गांड और लगभग पूरी नंगी पीठ देखने लगे क्यूंकि अनीता की पीठ पर सिर्फ तीन डोरियन hi थी.

अनीता खिड़की के पास जाकर बाहर देखि तो बहोत तेज़ बारिश हो रही थी और हलकी ठंडी हवाएं भी बह रही थी. रामु और हरिया खाना खाने लगे. हरिया जब अनीता की फिगर की तारीफ किया तो रामु को एक पल के लिए लगा की वह कुछ ज़्यादा तो नहीं बोल दिया. वह जानता था की हरिया थोड़ा बड़बोला है और बातें बनाने में एक्सपर्ट है मगर अनीता को ऐसे बोलेगा यह नहीं सोचा था. मगर अनीता को ऐसे बुरा मानने के बजाये हँसते देख उसे राहत मिला. रामु भी सोचा की अनीता पढ़ी लिखी और बड़ी शहर की है जो इतनी बदन दिखाऊ कपडे पहनती है तो इतनी सी बात का तो बुरा नहीं मानेगी. उसके नज़र में शहर की बड़े घर की पढ़ी लिखी औरतों के लिए यह सब कोई मायने नहीं रखता था इसलिए अनीता को बुरा नहीं लगा. ऊपर से वह जानता था की अनीता में ज़रा भी घमंड नहीं है और दिल की अच्छी है तो इसलिए वह हंस के बातें कर रही है और बड़े शहर की मॉडर्न औरत होने के कारण फिगर वाली बात का बुरा नहीं मानी.

दोनों को खाने में 15 मिनट के आस पास लगा. अनीता चुप चाप खिड़की के पास कड़ी थी. इस बीच राज का भी फ़ोन आ गया की वह घर पहुंची या नहीं तो अनीता बोली की वह घर पहुँच चुकी है. राज भी बोलै की वह अच्छे से साइट के तरफ जा रहा है. दोनों पति पत्नी 5 मिनट बात किये फिर फ़ोन रख दिए. तब तक हरिया और रामु खाना खा चुके थे.

अनीता फ़ोन रखने के बाद हरिया के तरफ देखि तो वह bola,"Memsaheb आइये बैठिये न"

अनीता मुस्कुराकर उसके बिस्तर के पास गयी और कुर्सी पर बैठी की तभी हवा और तेज़ होने लगा और बिजली भी कड़कने लगी.

अभी रात के लगभग 10 बजने वाले थे. हरिया अपना दवाई खा लिया हुए थोड़ा देर आराम किया. हरिया और रामु थोड़ा दूकान का बात किये की काम कैसा चल रहा है. संडे को तो दूकान बांध रहता है मगर आज एक स्पेशल डिलीवरी था तो रामु को वह डिलीवरी गोडाउन से hi देना पड़ा. हरिया उसी के बारे में पूछ रहा था. अनीता चुप चाप बैठी उनका बात सुन्न रही थी.

बारिश धीरे धीरे तेज़ होने लगी थी और साथ में हवा भी तेज़ बहने लगा था. हरिया यह देखकर bola,"Ee ससुरा तो रुकने का नाम hi नहीं ले रहा है. मेमसाहेब आपको कउनो तकलीफ नहीं है तो आप इहाँ रुक सकती हैं. हम जानत है की ी छोटा सा घर है और आरामदायक नहीं है मगर.."

अनीता उसे बीच में hi टोकती हुयी boli,"Thank यू हरिया जी. आपने इतना कह दिया यह बहोत है. भले hi घर छोटा है आपका, मगर मुझे रुकने के लिए बोलकर आपने दिखा दिया की दिल कितना बड़ा है आपका की ज़रूरत पड़ने पर आप मुझे यहाँ रहने के लिए जगह भी दे रहे हैं. लेकिन अभी वक़्त है. बारिश रुकेगी तो मैं चली जाउंगी अगर रामु जी को इतनी रात में मुझे घर पहुँचाने में कोई परेशानी नहीं है तो"

रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब हुंका का परेशानी होगा. हम छोड़ देंगे आपको"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई तो हरिया bola,"Achha मेमसाहेब आपको बुरा न लगे तो जब तक बारिश नहीं रुकता हम दोनों थोड़ा पत्ता खेल ले"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan हरिया जी खेलिए. आपका घर है तो मुझे बुरा क्यों लगेगा"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Nahin मेमसाहेब हुंका लगा की आप सोचेंगी की ससुरा आप इहाँ बैठी हैं और हम दोनों पत्ता खेल रहे हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are तो इसमें ग़लत क्या है? आप दोनों को पत्ते खेलना अच्छा लगता है तो खेलिए. मेरा तो एहि मानना है की इंसान को जो चीज़ें अच्छी लगे उसे खुलकर करना चाहिए. ज़िन्दगी का मज़ा तो उसी में है"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Haan मेमसाहेब ठीक बोले आप. ससुरा जो अच्छा लगे उसे करना hi चाहिए. सच में मेमसाहेब ऊपर वाले ने आपको जनता खबसूरत बनाया है उतना hi अच्छा और बड़ा दिल भी दिया है. आप हर चीज़ कितना अच्छे से समझती हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर हरिया को देखि और फिर एक नज़र रामु को देखकर boli,"Ab आप दोनों बस मेरी तारीफ hi करेंगे की आप दोनों को जो खेलने का मैं है वह खेलेंगे भी"

हरिया यह सुनकर है diya,"Hahaha हाँ मेमसाहेब खेलेंगे" तो अनीता भी खिलखिलाने lagi,"Hehehe" और उसकी चूँचियाँ फिर से हिलने लगी.

दोनों का नज़र उसकी हिलती हुयी चूँचियों पर चला गया तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी दोनों को अपनी चूँचियों को देखते हुए देखि.

फिर वह दोनों पत्ते खेलने लगे. अनीता वहीँ कुर्सी पर बैठी दोनों को देखने लगी. अगले एक घंटे तक दोनों पत्ते खेलते रहे. पत्ते खेलते हुए दोनों बात चित भी करते और एक दूसरे को बताते की कैसे दूसरा हार जायेगा. साथ में हरिया जोके भी करता तो अनीता खिलखिलाकर हस्ती और दोनों का ध्यान उसकी हिलती हुयी चूँचियों पर चला जाता. अनीता बेशर्मी से मुस्कुराकर दोनों के नज़रो को अपनी चूँचियों पर देखती मगर कुछ बोलती नहीं.

ऐसे hi करते हुए 11 बज गया मगर बारिश रुकने के बजाये और तेज़ हो रही थी और बिजली कड़क रही थी. अनीता थोड़ी परेशान हो गयी तो हरिया bola,"Are मेमसाहेब हम दोनों को होते हुए आप कहे परेशान हो रही है. इहाँ रुक जाइये. वह दूसरा चौकी पर हम एक साफ़ बिस्तर कर दूंगा आप सो जायेगा और हम और रामु इहाँ ी चौकी पर सो जाऊंगा. हम जानत हूँ की आप जिस तरह का गद्दा पर सोती हैं उतना आराम नहीं मिलेगा आपको मगर... "

अनीता फिर से उसका बात रोकती हुयी बीच में boli,"Hariya जी वह बात नहीं है. एक रात की बात है तू उतना एडजस्ट तो मैं कर लुंगी मगर आपको और रामु जी को परेशानी हो जाएगी"

हरिया यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब हम दोनों का का परेशानी होगा. हम मज़दूर लोगन तो कहीं भी सो जाट है. हुंका कउनो परेशानी नहीं है"

अनीता यह सुनकर एक नज़र हरिया को देखि की तभी जोर का बिजली कड़का तो अनीता खिड़की से बाहर देखि. बिजली चमकने से बाहर बारिश की बंधे दिखती दिया जो की देखकर समझ आ रहा था की बारिश वाक़ई तेज़ है.

अगले पल रामु bola,"Haan मेमसाहेब यहीं रुक जाइये. इतना तेज़ बारिश है की हुंका नहीं लगता की रुकेगा"

अनीता यह सुनकर रामु को देखि और फिर "हाँ" में सर हिलती हुयी boli,"Haan मुझे भी यही लग रहा है"

रामु उठते हुए bola,"Hum बिस्तर कर डेट हैं मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी यह पत्ते तो पहले खेल लीजिये"

रामु सुनकर bola,"memsaheb बिस्तर करके खेलेंगे"

अनीता सुनकर boli,"Mujhe अभी नींद नहीं आ रही है. आप दोनों आराम से खेलिए. जब खेल लीजियेगा तो बिस्तर कर दीजियेगा. मैं देख रही हूँ की आप दोनों खूब एन्जॉय कर रहे हैं तो मैं नहीं चाहती की आप दोनों का यह खेल बीच में रुके. और मुझे भी देखकर अच्छा लग रहा है"

हरिया यह सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब. जब बिस्तर करना हो तो बता दीजियेगा"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Theek है"

रामु यह सुनकर हरिया से bola,"Ab हुंका रिक्क्षा नहीं चलना है तो थोड़ा..."

रामु इतना बोलकर रुक गया तो हरिया और अनीता दोनों उसको देखे. हरिया यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Woh मेमसाहेब रामु थोड़ा पीना चाहता है. ु ससुरे को रात में पिए बिना नींद नहीं आता है"

अनीता यह सुनकर रामु को देखि और एक ऐडा से boli,"To पीजिये न रामु जी"

रामु यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Woh मेमसाहेब आपको कउनो परेशानी तो नहीं होगा?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Ramu जी अब आपको रिक्शा तो चलना है नहीं तो इसमें मुझे क्या परेशानी होगी. शहर में भी तो लोग शौक़ से पीते हैं. आप तो दिन भर की मज़दूरी करने के बाद थकान मिटने के लिए पीना चाहते हैं ताकि आपको अच्छे से नींद आ सके तो इसमें बुरा मानने की क्या बात है. अगर आपको पीना अच्छा लगता है तो पीजिये. अभी तो मैंने कहा की ज़िन्दगी को खुल कर जीना चाहिए और जो अच्छा लगे वह खुल कर करना चाहिए"

रामु यह सुनकर हल्का मुस्कुराकर अनीता को देखा तो हरिया bola,"Abe मेमसाहेब बहोत पढ़ी लिखी और खुले विचार की हैं. मेमसाहेब के सामने हमलोगां पिएंगे तो इनको बुरा नहीं लगेगा. जा लेकर आ और बीड़ी भी ले आना"

रामु उठकर देशी शराब का एक बोतल और छोटा सा टेबल लाकर हरिया के बीएड के पास अपने और अनीता के कुर्सी के बीच लाकर रखा की तभी बिजली चली गयी. हरिया यह देखकर bola,"Le ससुरा ी बिजली भी चला गया"

बिजली कड़कने से खिड़कियों से हलकी रौशनी आ रही थी. हलकी रौशनी में अनीता की गोरी बदन चमक रही थी. रामु एक लैंटर्न लेकर जला दिया जिससे हलकी रौशनी हो गयी.

फिर वह कुर्सी पर बैठकर दो गिलास में शराब डालकर एक गिलास में स्ट्रॉ डालकर हरिया को दिया और दोनों पत्ते खेलते हुए शराब पीने लगे. अनीता बस चुप चल मुस्कुराती हुयी दोनों को देख रही थी. थोड़ी देर में फिर से बात चीत और हरिया का जोके शुरू हो गया और उस झोपडी में अनीता की हसी बार बार गूंजने लगी. जब वह हस्ती उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ हिलने लगती जिसे रामु और हरिया खुद हस्ते हुए देखते और अनीता बेशर्मी से उन्हें अपनी चूँचियों को देखते हुए देख मुस्कुरा देती.

थोड़ी देर में दोनों बीड़ी भी पीने लगे. पत्ते खेलते, शराब और बीड़ी पीते हुए, और हसी मज़ाक करते हुए 12 बज गया. अनीता पूरी खुल कर खिलखिला रही थी उनके बातों पर.

12:15 में एक और राउंड ख़तम हुआ और अनीता को थोड़ी नींद और थकावट महसूस हुयी तो वह boli,"Ramu जी बिस्तर कर दीजिये, मुझे नींद आ रही है"

वह दोनों को भी नींद आने लगा था. रामु उठकर शराब यह सब हटाया और दूसरे चौकी पर अनीता के लिए बिस्तर कर दिया. तीनो थके हुए थे तो जल्द hi सो गए. रात के 1:30 बजे के करीब अनीता को अपनी बदन पर पानी का छींटा महसूस हुयी तो वह उसकी नींद टूटी. नींद टूटने पर पहले वह बिजली कड़कने का आवाज़ सुन्न खिड़की के तरफ देखि तो खिड़की का दरवाज़ा खुल बांध हो रहा था क्यूंकि हवा बहोत तेज़ चल रही थी. अगले पल अनीता को अपनी नाभि पर पानी का बंध महसूस हुआ तो वह अपनी पेट पर देखि जो भीग चुकी थी. अपनी गोरी पेट को भीगा हुआ देख वह महसूस की की उसकी नाभि में पानी जमा हुआ है की तभी एक बंध फिर से ठीक उसकी नाभि पर गिरा और उसे एक कामुक एहसास हुआ. उसकी पेट अंदर के तरफ धंस गयी. अनीता एक नज़र अपनी पेट पर देखि और फिर ऊपर छत पर देखि जहाँ से पानी टपक रहा है. खिड़की से तेज़ हवा के कारण छींटा भी आ रहा था.

अनीता उठी और हरिया के बिस्तर के पास जाकर बोली," हरिया जी, हरिया जी"

हरिया नींद में hi हिलते हुए अपना दया हाथ लुंगी के ऊपर से लेजाकर लुंड खुजाया. अनीता की नज़र उसके लुंगी के ऊपर गयी तो वह बड़ा सा उभर देखि. उसका लुंड का उभर देखते hi दिल धड़क गयी. वह अपने आपको संभालती हुयी फिर से boli,"Hariya जी. हरिया जी उठिये"

हरिया यह सुनकर अपना लुंड खुजलाते हुए आँख खोला तो अनीता दिखती दी. अनीता को अपने पास देख एक पल वह सोचने लगा की तभी फिर से बिजली लड़का तो अनीता boli,"Hariya जी मेरे बिस्तर पर पानी गिर रही है"

हरिया यह सुनकर अनीता की बिस्तर के ऊपर छत के तरफ देखा तो पानी टपकते हुए देखा. वह संग संग रामु को धक्का देते हुए जगाया मगर वह हिला नहीं. हरिया उसके कंधे को जोर से हिलाया तोह वह नींद में badbadaya,"Uhhmm कौन है बे ससुरा" और अपना हाथ धोती के ऊपर से लुंड के ऊपर रखकर खुजाया. अनीता की नज़र उसके धोती पर गयी तो उसका लुंड का उभर देखकर उसकी दिल धड़क गयी. उसे संग संग याद आया की कैसे वह पिछली रात रामु को पेशाब करते हुए देखि थी और उसका लुंड हरिया के जैसा hi मोटा और लम्बा था. अनीता अपनी सांस काबू करने का कोशिश करने लगी की तभी हरिया उसको जोर से हिलाया तो वह हड़बड़ा कर उठा.

हरिया को वह देखकर bola,"are अब का हुआ ससुरा जो हुंका उठा रहा है"

रामु यह बोलकर वहां अनीता को खड़ा देखा तो सोच में पद गया की अनीता ऐसे रात में वहां क्यों कड़ी है. उसका नज़र उसकी चूंकि पर चला गया की तभी हरिया bola,"Are मेमसाहेब का बिस्तर पर पानी गिर रहा है. ु चौकी को और इधर कर दे"

रामु यह सुना तो उसका नज़र तभी अनीता की भीगी हुयी पेट पर गया. इतनी गोरी चिकनी पेट को भीगा हुआ देख, खासकर जब हलकी रौशनी में उसकी नाभि में लटकी बेल्ली बटन रिंग चमक रही थी, उसका लुंड धोती में हिल गया. हरिया का भी लुंड यह देखकर बेचैन हो चूका था.

अनीता देखि की दोनों हरिया और रामु का ध्यान उसकी पेट पर है और दोनों का आँख थोड़ा लाल हो चूका था. अनीता जान रही थी की दोनों सोने से पहले शराब पिए थे इसलिए वैसा हुआ है. वह दोनों के आँखों में अपनी जिस्म के लिए हवस साफ़ साफ़ देख सकती थी मगर वह बुरा नहीं मानी.

वह जानती थी की दोनों शराब पिए हुए हैं और ऐसे रात में उसकी जैसी जवान और खूबसूरत औरत को ऐसे अपने पास देखेंगे तो उनके अंदर उसके जिस्म के लिए हवस तो होगा hi. आखिर दोनों असली मर्द हैं और एक मर्द होने के नाते उसके जैसी जवान और खूबसूरत औरत का जिस्म देखकर अगर उनके अंदर हवस तो जागना hi है.

अनीता एहि सोचकर उनके हवस भरे नज़र का बुरा माने रामु को देखती हुयी boli,"Ramu जी बिस्तर भीग रही है"

रामु यह सुनकर हड़बड़ाते हुए उठा और चौकी को अपने और हरिया के चौकी से एक फ़ीट की दुरी पर लाकर रख दिया और अनीता से bola,"Memsaheb आइये सो जाइये"

अनीता येऊ सुनकर "हाँ" में सर हिलायी और उस बिस्तर पर चढ़कर छत के तरफ देखती हुयी लेट गयी. वहीँ रामु और हरिया उसकी उभरी हुयी चूँचियों को ऊपर नीचे होते और उसकी गोरी चिकनी सपाट पेट को भीगा हुआ देखने लगे.

अनीता चुप चाप ऊपर देखती हुयी कुछ सेकण्ड्स तक वैसे hi लेती रही फिर दये तरफ गर्दन घुमाकर देखि तो हरिया को अपनी जिस्म देखते हुए पायी. अनीता यह देखकर बेशर्मी से मुस्कुराई और फिर अगले पल अपने और हरिया के बीच वाले बिस्तर के तकिया के पीछे रामु को खड़े अपनी जिस्म को देखते हुए पायी तो उसे भी देखकर अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Meri वजह से आप दोनों का नींद ख़राब हो गया. रामु जी आप सो जाइये न"

अनीता यह बोली hi थी की तभी उसकी नाभि पर एक बंध पानी गिरी और उसकी पेट अंदर के तरफ धंस गयी. अनीता अपनी नाभि पर पानी महसूस करने के साथ साथ रामु का नज़र अपनी नाभि के तरफ जाते देखि तो वह भी अपनी नज़र नाभि के तरफ ले गयी. फिर वह अगले पल छत के तरफ देखि की तभी ऊपर से एक बंध गिरते देख तेज़ी से अपनी नज़र अपनी नाभि पर ले गयी और तभी वह पानी की बंध वहां गिरा तो उसकी पेट अंदर के तरफ धंस गयी.

अनीता को न जाने क्यों एक कामुक एहसास हुआ और अगले पल वह हरिया के तरफ देखि जो उसकी पेट hi देख रहा था. फिर वह रामु के तरफ देखि तो उसे भी अपनी पेट देखते हुए पायी. अनीता रामु को देख hi रही थी की तभी उसकी नाभि में एक बंध पानी और गिर गयी और अनीता की पेट फिर से धंस गयी और देखि की रामु यह देखकर अपने ज़बान को होंठों पर फिराया.

रामु अनीता की नंगी पेट को देखते हुए अपने होंठों पर ज़बान फिरा hi रहा था की उसे एहसास हुआ की अनीता उसे देख रही है. वह अनीता को देखा तो वह उसे कामुक नज़र से देखि मगर कुछ नहीं बोली की तभी उसकी नाभि में फिर से एक बंध गिरा. यह एहसास होते hi अनीता रामु को देखती हुयी अपनी निचली होंठ को दांतों के बीच दबाई तो रामु का लुंड धोती में तन तना गया और साथ hi उसका नज़र अनीता की नाभि पर फिर चला गया. अनीता आँखों के कोने से देखि की रामु जे धोती में कुछ हिल रहा है. यह एहसास होते hi अनीता की दिल धड़क गयी और वह हरिया को देखि जी उसकी नाभि देखते हुए अपना लुंड लुंगी के ऊपर से हल्का सेहला रहा था.

हरिया को ऐसे खुलेआम रामु के सामने लुंड सहलाते देख अनीता की दिल धड़क गयी और उसे थोड़ी राहत मिली यह सोच कर की रामु का ध्यान उसकी जिस्म पर है तो वह हरिया को ऐसे लुंड सहलाते हुए नहीं देख रहा है. अनीता हरिया के लुंड को देखकर उसकी चेहरे पर देखि तो हरिया मुस्कुरा दिया. अनीता भी हरिया को मुस्कुराते देख अपनी बेशर्मी का साबुत देती हुयी मुस्कुरा दी.

अनीता मुस्कुरा hi रही थी की तभी उसकी नाभि पर एक बंध और गिरी तो हरिया मुस्कुराते हुए उसकी नाभि देखने लगा. अनीता भी बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी उसे देखकर रामु को देखि जो उसकी नाभि hi देख रहा था. उसे जब एहसास हुआ की अनीता उसे देख रही है तो वह उसके तरफ देखकर हल्का मुस्कुरा दिया.

अनीता रामु को मुस्कुराते देख मुस्कुराकर boli,"Lag रहा है आज हम तीनो hi नहीं सो पाएंगे. इतनी बारिश हो रही है"

अनीता यह बोली hi थी की तभी हवा और ज़ोर से बहने लगा और उसकी बिस्तर पर छत से वह पानी की बूंदों के साथ साथ थोड़े छींटे भी पड़ने लगे.

हरिया यह देखकर bola,"Memsaheb आप इधर आ जाइये"

हरिया अनीता को अपने पास बिस्तर पर बुला रहा था. फिर वह रामु को देखकर bola,"memsaheb इधर आ जाएगी तो वह चौकी इससे सत्ता दे और तुम उधर सो जा"

अनीता यह सुन्न रही थी की तभी हवा और तेज़ होने लगी थी हरिया उसे अपने पास बिस्तर पर बुलाते हुए bola,"Memsaheb आप इधर आ जाइये. उधर भीग जाइएगा"

अनीता यह सुनकर तुरंत उठी और हरिया के बिस्तर पर उसके बगल में जा कर सो गयी. इस बीच रामु वह चौकी हरिया के चौकी से सत्ता दिया और खुद उस पर सो गया. अनीता परेशानी से रामु को देख रही थी की तभी हरिया bola,"Memsaheb माफ़ कीजियेगा हम ग़रीब लोगन का घर में आपको आराम नहीं मिल रहा है. आप भी सोच रही होंगी की कइसन घर है की पानी टपक रहा है"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखि और हल्का मुस्कुराकर boli,"Hariya जी कैसी बात कर रहे हैं आप. मुझे परेशानी आप लोग कहाँ होने दे रहे हैं. उल्टा मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी हो रही है. मैं नहीं होती तो आप दोनों आराम से इधर सो रहे होते"

फिर वह रामु को देखकर boli,"Meri वजह से रामु जी उधर भीग रहे हैं"

रामु यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Are नहीं मेमसाहेब कउनो बात नहीं है. हम लोगन का तो ी हमेशा का बात है".

हरिया यह सुनकर bola,"Hum ठीक हो जायेंगे तो छत को बनवा लेंगे"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराई की तभी फिर से ज़ोर का हवा बहने लगा तो रामु के तरफ पानी का छींटा आने लगा. अनीता यह देखकर हरिया के तरफ थोड़ा खिसक कर रामु को देखकर boli,"Ramu जी आप और इधर आ जाइये नहीं तो भीग जाइएगा"

रामु यह सुनकर अनीता को देखा और फिर उसकी उभरी हुयी चूंकि और फिर उसकी नंगी भीगी हुयी पेट को देख hi रहा था की हवा फिर से ज़ोर से बहने लगा तो उसे छींटे और छत से पानी अपने बदन पर महसूस हुआ. अनीता यह देखकर boli,"Ramu जी आप उधर भीग जाइएगा, इधर आ जाइये".

अनीता यह बोली तो रामु उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता आँखों से उसे अपने पास आने का इशारा की. अनीता जैसी बेहद खूबसूरत, सेक्सी, पढ़ी लिखी और अमीर औरत को ऐसे अपने पास सोने के लिए बुलाते देख रामु का लुंड तन तना गया. ऐसा लग रहा था जैसे अनीता उसे अपने साथ हमबिस्तर होने के लिए बुला रही हो. लेकिन वह समझ रहा था की अनीता का इरादा वह नहीं था बल्कि उसे भीगने से बचने के लिए बुला रही थी. कहीं न कहीं यह सोचकर रामु के मैं में अनीता के लिए एक मर्द के तौर पर हवस तो बढ़ रहा था उसकी जवानी को और ऐसे अपने पास बुलाते देखकर मगर जिस कारण से वह बुला रही थी वह सोचकर उसके मैं में अनीता के लिए इज़्ज़त भी बढ़ गयी थी की वो अमीर होने के बावजूद भी उसके और हरिया का कितना ख्याल रखती है. वह इतनी पढ़ी लिखी और समझदार औरत है की उसे भीगने से बचाने के लिए बेझिझक अपने साथ सोने के लिए बुला रही है. आखिर कितनी औरत होगी जो इतना खुले विचार की होगी, शायद हो कोई औरत अनीता जैसी हो.

रामु एहि सोचते हुए खिसक कर अनीता के करीब चला गया मगर दोनों के बीच फिर भी एक फ़ीट क फैसला था. अब एक चौकी पर हरिया और अनीता साथ सोये थे और दूसरे चौकी के अंदरूनी हिस्से में रामु हुए उसके और अनीता के बीच एक फ़ीट का फैसला था. अनीता और हरिया के बीच एक फ़ीट से काम का फैसला था. रामु के चौकी का बाहरी वाला आधा से ज़्यादा हिस्सा खली था और उस पर पानी टपक रहा था.

अनीता रामु को अपने पास देखकर मुस्कुरा दी की तभी देखि की हल्का फुल्का छींटा उसके बदन पर पद hi रहा है. अनीता यह देखकर boli,"Ramu जी आप तो अभी भी भीग रहे हैं"

रामु यह सुनकर bola,"Are कुछो नहीं मेमसाहेब. अटना चलेगा. एक काम करता हूँ थोड़ा सा पि लेता हूँ तो नींद आ जायेगा ऐसे में hi"

रामु यह बोलकर पास hi टेबल पर से शराब का बोतल उठाया और गटागट थोड़ा सा पीकर अनीता को देखा और फिर उसकी उभरी हुयी चूंकि और भीगी पेट को देखकर चादर को अपने बदन और सर के ऊपर करके सोने लगा. अनीता उसे देखि और फिर छत पर देखकर आँख बांध करने की कोशिश करने लगी मगर उसे नींद नहीं आ रही थी.

वह आँख खोलकर देखि तो हरिया को अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. हरिया को ऐसे अपनी चूँचियों को देखते हुए देख अनीता की दिल धड़क गयी. उसे हरिया के आँखों में हवस और प्यास साफ़ साफ़ समझ आ रही थी.

हरिया को अनीता देख hi रही थी की वह अपनी चिकनी पेट पर एक खुरदुरा मज़दूर का हाथ महसूस की और समझ गयी की वह हरिया का हाथ है.

अनीता यह महसूस करती हुयी हरिया को देख रही थी की तभी वह उसकी कमर पकड़ कर अपने और करीब खींचने का कोशिश करते हुए bola,"Memsaheb हमरे और पास आइये न"

अनीता यह सुनकर धीरे से boli,"Hariya जी रामु जी यहीं सो रहे हैं. आप भी सो जाइये"

हरिया यह सुनकर अनीता की कमर सहलाते हुए bola,"Are मेमसाहेब ु ससुरा गहरा नींद में सोने के लिए hi तो अभी गटागट शराब पिया है. ससुरा अब सुबह से पहले नहीं उठेगा. सुन्न नहीं रही हैं की कैसे खर्राटा ले रहा है"

अनीता यह सुनकर गर्दन घुमाकर एक नज़र रामु के तरफ देखि तो वह दूसरा तरफ करवट लेकर अनीता के तरफ पीठ किये हुए चादर बदन और सर पर रखकर खर्राटे लेते हुए सो रहा था.

अनीता उसे देख hi रही थी की हरिया उसकी कमर पकड़ कर अपने पास खींचने का कोशिश किया तो अनीता थोड़ा खिसक कर उससे चिपक गयी तो वह उसकी कमर से नीचे हाथ खिसका कर गांड पकड़ कर उसे दबाते हुए अपने तरफ करने का कोशिश किया तो अनीता उसके तरफ करवट ली तो अगले पल हरिया सर उठाकर उसकी दायी चूंकि को ब्लाउज के ऊपर से मुंह में लेकर चूसने लगा.

अनीता की दिल धड़क गयी मगर वह हरिया को हटाने का कोशिश नहीं की बल्कि उसके सर के बाल पर प्यार से हाथ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Hariya जी रामु जी कहीं जाग गए तो?"

हरिया यह सुनकर अनीता को देखकर bola,"Are मेमसाहेब ु घोडा बेचकर सो रहा है. नहीं जागेगा"

हरिया यह बोलकर वापस अनीता की चूंकि को ब्लाउज के ऊपर से चूसने लगा तो अनीता उसके सर के बाल में ऊँगली फेरती हुयी धीरे से boli,"Aur आप? आपको नींद नहीं आ रही है क्या?"

हरिया यह सुनकर अनीता की दायी चूंकि को मुंह से बाहर निकलकर उसकी बायीं चूंकि को मुठी में भरकर उसे दबाते हुए अनीता के होंठों के करीब अपना चेहरा करते हुए उसकी आँखों में देखकर bola,"Are मेमसाहेब जब आपके जइसन जवान औरत हमरे साथ बिस्तर पर है तो कैसे नींद आएगा? ु तो रामु है और हमरा पेअर में चोट लगा हुआ है नहीं तो हम सिर्फ आपका दूध नहीं पीते बल्कि अभी आपकी रगड़ कर चुदाई करते"

अनीता हरिया के मुंह से शराब की गंध महसूस कर पा रही थी और साथ hi उसके आँखों में अपनी जिस्म के लिए हवस देख पा रही थी. उसे यक़ीन था की भले hi रामु बगल में सोया था मगर हरिया का पेअर ठीक होता तो वह उसे छोड़ने का कोशिश ज़रूर करता. यह सोचते hi की हरिया रामु के बगल में hi उसे छोड़ ता अनीता की छूट में बेचैनी होने लगी.

वह यह सोचते हुए हरिया का बात सुनी और कामुक अंदाज़ में उसके सर के बाल में उँगलियाँ फेरती हुयी boli,"Uhmm हरिया जी" तो हरिया अपना बात पूरा करके जब अनीता यह बोल hi रही थी तो हरिया उसकी बायीं चूंकि को मसलते हुए हवस भरे अंदाज़ में bola,"Hum आपका दूध के लिए प्यासे हैं मेमसाहेब. हुंका अपना दूध पिलाइये. अपना चूंकि पिलाइये" और बोलते hi दायी चूंकि ब्लाउज के ऊपर से मुंह में लेकर हवस भरे अंदाज़ में चूसने लगा.

अनीता चुप चाप उसके सर के बाल में ऊँगली फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Pi लीजिये हरिया जी" और उसके सर को पकड़ कर अपनी चूंकि उसके मुंह के अंदर ठूसने लगी.

हरिया कुछ सेकण्ड्स उसकी ब्लाउज के ऊपर से चूंकि चूसा और फिर अपना हाथ उसकी ब्लाउज के दायी कप के नीचे रखकर उसे ऊपर करने का कोशिश करने लगा मगर थोड़ा मुश्किल हो रहा था.

हरिया उसे उठाने का कोशिश करते हुए bola,"Humse ी जवानी मत छुपाइये मेमसाहेब. हुंका ब्लाउज खोलकर दूध पिलाइये"

अनीता यह सुनकर तेज़ सांस लेती हुयी boli,"Hariya जी आप जैसे मर्द से क्या hi छुपाना. जैसे पीना है पि लीजिये"

हरिया तेज़ सांस लेते हुए उसकी पीठ पर हाथ लेजाकर उसकी नीचे की डोरी खोलते हुए puchha,"Ka मेमसाहेब का पिए हम, शराब?"

अनीता यह सुनकर रणदीपाने वाली अंदाज़ में अपनी चूँचियों के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी तेज़ सांस में boli,"Inhe हरिया जी"

हरिया यह सुनकर pucchha,"Aapki चूंकि और दूध मेमसाहेब?"

अनीता तेज़ सांस लेती हुयी boli,"Haan हरिया जी, पि लीजिये इन्हे"

हरिया यह सुनकर उसकी ब्लाउज के नीचे की डोरी खोला तो अनीता अपनी ब्लाउज की दायी कप पकड़ कर ऊपर करके अपनी चूंकि को नंगी करके बेशर्मी से रणदीपाने वाली अंदाज़ में उसकी तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Aaiye हरिया जी अपना प्यास बुझा लीजिये"

हरिया यह सुनकर उसकी नंगी चूंकि मुंह में लेकर हवस से चूसने और काटने लगा. थोड़ी देर उसकी चूंकि चूसने के बाद वह ऊपर उसकी क्लीवेज चूमने लगा और फिर गर्दन चूमते हुए अनीता की होंठों तक पहुँच काट उसकी आँखों में देखा. अनीता तेज़ सांस से हरिया को देखि और अगले पल दोनों का होंठ मिल गया. दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और ज़बान चूसने लगे.

हरिया और अनीता की सांस तेज़ होने लगा. हरिया अनीता की चूंकि और गांड मसलने लगा वहीँ अनीता अपनी हाथ हरिया के लुंगी के ऊपर से रखकर उसके लुंड के उभर को पकड़ कर हिलने लगी तो हरिया उसकी हाथ पकड़ कर अपने लुंगी के गाँठ पर रख दिया. अनीता जैसी बेशर्म औरत के लिए इतना hi काफी था. वह हरिया का लुंगी का गांठ खोलकर उसके अंदर हाथ घुसकर उसके लुंड को पकड़ कर हिलने लगी.

दोना थोड़ा देर होंठों को चूमे उसके बाद हरिया अनीता की आँखों में देखते हुए bola,"Humaar लौड़ा चूसिये मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर हरिया को देखकर boli,"Nahin हरिया जी रामु पास में है. यह करना सही नहीं होगा"

हरिया यह सुनकर bola,"Theek है मेमसाहेब तो हमार लौड़ा का मालिश कीजिये"

हरिया यह बोलकर अपना लुंगी पकड़ कर नीचे खिसका कर अपना लुंड पूरा नंगा कर दिया. अनीता यह समझकर उसके लुंड के तरफ देखि तो वह आधा से ज़्यादा खड़ा हुआ था मगर इतने में hi बहोत बड़ा और मोटा लग रहा था. अनीता उसे देखने के बाद हरिया उसकी आँखों में देखकर bola,"Dekhiye मेमसाहेब कैसे बौखलाने लगा है. आपके होंठो से प्यार चाहता है"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Phir कभी हरिया जी. अभी आपके हथियार का मालिश कर देती हूँ"

हरिया यह सुनकर मुस्कुराकर उसे देखते हुए bola,"Hathiyaar नहीं मेमसाहेब. लौड़ा बोलिये लौड़ा जिससे हम आपको रगड़ कर छोड़ेंगे"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराई और खिसक कर हरिया के दये तरफ खिड़की के पास रखे सन्डे का तेल के तरफ हाथ बढ़ने के लिए अपनी ऊपरी जिस्म उठाई तो उसकी दायी चूंकि हरिया के मुंह के ऊपर लटकने लगी जैसे गे का दूध का थांन लटक रही हो. हरिया यह देखकर bola,"Uff मेमसाहेब का मस्त चूंकि है आपकी" और वह सर थोड़ा उठाकर उसकी चूंकि मुंह में लेकर चूसने लगा. अनीता बेशर्मी से मुस्कुराई और फिर चुप चाप सन्डे का तेल लेकर वापस हरिया के बगल में लेट कर उसके लुंड पर तेल गिराकर मालिश करने लगी. वहीँ हरिया उसकी चूंकि चूसने लगा.

थोड़ा देर चूंकि चूसने के बाद अनीता की गर्दन और फिर होंठ चूमने लगा. वहीँ अनीता उसके लुंड का मालिश करती रही. थोड़े देर के बाद वह अनीता की चूंकि वापस मुंह में लेकर चूसने लगा और वैसे hi चूसते हुए सो गया. अनीता भी हरिया के लुंड का मालिश करती हुई सो गयी. अगली सुबह जब वह उठी तो रामु नींद में hi उसकी बायीं चूंकि ब्लाउज के ऊपर से पकडे हुए उसकी गांड से सत्ता हुआ अपना बड़ा और मोटा लुंड उसकी गांड की दरार में साड़ी के ऊपर से hi घुसाने का कोशिश कर रहा था.
 
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लगभग 3 हफ्ते बाद

अनीता बस स्टैंड पर एक कोने में कड़ी हुयी थी और अंकित टिकट के लिए लाइन में लगा हुआ था. लाइन थोड़ी लम्बी थी. अनीता जानती थी की अंकित को लगभग 15 मिनट्स लग जायेंगे टिकट लाने में तो वह अपनी मोबाइल ब्राउज करने लगी.

कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता को अपने करीब किसी का होने का एहसास हुआ और अगले hi पल उसकी कानो में आवाज़ padi,"Kaisan हो मेमसाहब?"

अनीता यह सुनकर उस आवाज़ के तरफ देखि तो उसका दिल एक पल के लिए धड़क गया. वह उधर देखती हुयी एक पल के लिए सोची फिर हलकी मुस्कराहट के साथ boli,"Ji आप?"

यह आवाज़ उसी आदमी का था जो पिछली बार अनीता को बस में मिला था.

अगले पल वह आदमी bola,"Haan हम. कउनो और का इंतज़ार कर रही हो क्या?"

अनीता यह सुनकर न में सर हिलाकर boli,"Nahin मैं किसका इंतज़ार करुँगी. वह आपको देखकर थोड़ा चौंक गयी की क्या co-incidence है, मेरा मतलब है की क्या इत्तेफ़ाक़ है की बस स्टैंड पर आप फिर से मिल गए".

वह आदमी यह सुनकर "हम्म" बोलै और अनीता को ऊपर से नीचे तक देखने लगा. अनीता एक नूडल स्ट्राप वाली गहरे गले की कमीज पहनी हुयी थी जिसमे उसकी क्लीवेज की आधी गहराई और एक तिहाई चूँचियाँ दिख रही थी. अनीता सफर के लिए ऐसी कुर्ती पहनी थी ताकि उसे आराम मिल सके. उसे शर्म तो थी नहीं तो उसे फ़र्क़ नहीं पद रहा था की उस कुर्ती में उसकी एक तिहाई चूँचियाँ और आधी क्लीवेज की गहराई साफ़ साफ़ दिख रही हैं. उसके लिए वह कुर्ती कम्फर्टेबले थी सफर के लिए तो वह पेहेन ली थी.

अनीता चुप चाप बिना शर्म के कड़ी रही और उसे फ़र्क़ नहीं पड़ा की वह आदमी उसकी जिस्म को ऐसे देख रहा है. वह एक नज़र अंकित के तरफ डाली जो लाइन में खड़ा हुआ अपना मोबाइल ब्राउज कर रहा था.

वह आदमी अनीता को ऊपर से नीचे देखने के बाद bola,"Ise इत्तेफ़ाक़ नहीं मेमसाहब, ऊपर वाला का मर्ज़ी बोलो".

अनीता यह सुनकर उसे देखकर अपनी मांग को सिकुड़ कर आश्चर्य से puchhi,"Upar वाले की मर्ज़ी? इसमें ऊपर वाले की क्या मर्ज़ी हो सकती है?"

वह आदमी फिर से अनीता को ऊपर से नीचे तक देखने लगा. अनीता की दिल उसके नज़र को अपनी जवान और खूबसूरत जिसक पर रेंगते हुए देख धड़क रही थी. शर्म तो उसे ज़रा भी नहीं आ रही थी उसे अपनी जिस्म को ऐसे देखने से मगर थोड़ी दिल ज़रूर धड़क रही थी और वह धड़कते दिल से आस पास देखि तो उसे राहत मिली की लोग अपने काम में लगे थे. जिनको बस में चढ़ना था वह चढ़ रहे थे, जो टिकट के लिए लाइन में लगे थे उनका ध्यान मोबाइल नहीं तो लाइन पर था और बाकी लोग अपना जहाँ जाना था वहां जाने में था.

अनीता को ऐसे एक तरफ कोने में काम रौशनी वाले जगह में खड़ा होने का अपना फैसला सही लगा. दरअसल वह बस स्टैंड में आते वक़्त उस आदमी को देख चुकी थी एक तरफ खड़े होकर किसी से बात करते हुए और न जाने क्यों उसे लग रहा था की वह भी उसे किसी न किसी वक़्त देखकर उसके पास आ जायेगा इसलिए वह एक कोने में काम रौशनी वाली जगह पर कड़ी हो गयी ताकि कोई तमाशा न बने.

अनीता आस पास देख hi रही थी की वह उस आदमी का आवाज़ सुनकर उसके तरफ dekhi,"Upar वाला चाहत है की तुमका सफर में कउनो परेशानी और बोरियत नहीं हो ीके लिए हुंका भेज दिया"

अनीता उसका बात सुनते हुए उसके चेहरे पर देख रही थी और वह अपना बात हल्का मुस्कुराकर बोलै और फिर से अनीता की जिस्म को देखने लगा, खासकर उसकी क्लीवेज को जो उस गहरे गले की कमीज में आधी दिख रही थी.

अनीता धड़कते दिल से उसका बात सुनकर उससे pucchi,"Matlab आप भी आज सफर कर रहे है क्या?"

वह आदमी अनीता को देखकर "हाँ" में सर हिला दिया और अनीता को ऊपर से नीचे तक देखने के बाद puchha,"Tum कहाँ जा रही हो?"

अनीता यह सुनकर धड़कते दिल से बोल दी की वह कहाँ जा रही है. उसे पता नहीं क्यों वह कहाँ जा रही है उसे बताने में झिझक महसूस नहीं हुयी, बल्कि झिझक तो दूर की बात है वह उसके आँखों में देखती हुयी बोली.

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Waah अब तो हुंका पूरा यक़ीन हो गवा की सब ऊपर वाला का मर्ज़ी से hi होवत है".

उसका बात सुनकर अनीता हल्का मुस्कुराती हुयी puchhi,"Matlab आप भी.."

इससे पहले अनीता पूरा बात बोलती वह आदमी उसकी सलवार के ऊपर से गांड पर हाथ रखकर उसे सहलाते हुए मुस्कुराता हुआ bola,"Haan उन्हें जा रहा हूँ" और यह बोलकर वह अनीता की आँखों में देखते हुए उसकी गांड पर हाथ फेर दिया.

अपनी गांड पर उस आदमी का हाथ महसूस करके अनीता की दिल फिर से धड़कने लगी मगर वह शांत रही और कुछ रियेक्ट किये बिना उस आदमी के आँखों में देखती हुयी एक ऐडा से puchhi,"Wahin जा रहे हैं आप या अभी प्लान बनाया है वहां जाने का?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराने लगा. अनीता चुप चाप कड़ी बेशर्मी से उसके आँखों में देख रही थी और उसका हाथ अपनी गांड से हटाने का न hi कोशिश की और न hi कोई ऐतराज़ जताई. वह आदमी अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए एक नज़र उसकी क्लीवेज में देखकर वापस अनीता की आँखों में देखकर उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए bola,"Are उहे जा रहत है हम भी"

फिर वह अनीता को ऊपर से नीचे देखने लगा और देखकर उसकी गांड को हल्का दबाते हुए उसकी आँखों में देखकर bola,"Aese तुमका देखकर तो साला हम कहीं और जा रहे होते तो पिलान बदल कर तोहरे साथ hi चलते".

वह आदमी यह बोलकर उसकी क्लीवेज देखने लगा. अनीता की दिल फिर से धड़कने लगी उसका बात सुनकर और उसे अपनी क्लीवेज देखते हुए देखकर मगर वह कुछ नहीं बोली और एक नज़र टिकट के लाइन के तरफ देखि तो वह आदमी उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए वापस उसकी चेहरे पर देखकर puchha,"Akele जा रही हो?"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर "न" में सर हिलायी तो वह आदमी puchha,"Kaun जा रहा है तोहार साथ? तोहार पति?"

अनीता यह सुनकर 'न' में सर हिलाकर अपनी आँखों से टिकट के लाइन में खड़े अंकित के तरफ इशारा की तो वह आदमी उसको देखकर अनीता की गांड सहलाते हुए हल्का हस्ते हुए bola,"Haha ी ससुरा गांडू बचुआ".

अनीता यह सुनकर उस आदमी के तरफ थोड़ा नाराज़गी से देखती हुयी boli,"Aap फिर शुरू हो गए. बेचारे को देखा नहीं की मज़ाक बनाना और गाली देना शुरू कर दिया".

वह आदमी यह सुनकर अनीता की आँखों में देखकर उसकी गांड दबाते हुए bola,"Are तो का करे. ससुरा को देखकर hi गाली निकलता है. कबाब में हड्डी ससुरा को समझ नहीं आवत है की बच्चा लोगन को बड़ा लोगन के बीच में नहीं आना चाहिए".

अनीता यह सुनकर उसके आँख में देखती हुयी थोड़ी नाराज़गी से boli,"Are एक तो आप उसे बच्चा कह रहे हैं फिर यह भी उम्मीद कर रहे हैं की वह समझदारी दिखाए. वह बच्चा है लेकिन आप तो बड़े हैं, एक मर्द हैं. आपको तो समझना चाहिए की आप उसे जितना बुली करेंगे वह उतना hi चिढ़ेगा और बातें बढ़ेंगी."

वह आदमी अनीता की बात सुनते हुए उसकी गांड सहलाते हुए उसे गौर से देखने लगा. उसके जैसी इतनी खूबसूरत, जवान और सेक्सी औरत को ऐसे बेशर्मी से उसे अपनी गांड सहलाते हुए महसूस करके इतनी शांत तरीके से उसे समझते देख उसके अंदर एक अलग hi मज़ा आने लगा.

वह अनीता की बात सुनकर bola,"Achha ठीक है लेकिन ी ससुरा बुली का होवत है? हम तो लुल्ली जानत हूँ मगर ी बुली का होवत है?"

अनीता यह सुनकर उसे परेशानी के भाव से देखि क्यूंकि उसे लुल्ली का मतलब नहीं पता था लेकिन वह यह पूछना ज़रूरी नहीं समझी. उसे पता था की वह कोई अजीब शब्द hi होगा, शायद कोई गन्दा शब्द और वो पूछेगी तो वह बातें बनाने लगेगा.

लेकिन वह उसे बुली का मतलब बताना ज़रूरी समझी ताकि वह अंकित को तंग न करे और सफर बिना झमेला का बीते. अनीता परेशानी के भाव से उस आदमी को देखकर boli,"Bully मतलब उसे परेशां करना, उसे डरना और तंग करना"

अनीता देखि की वह आदमी उसकी बात ध्यान से सुन्न रहा है और कहीं न कहीं उसे लगा की वह उसे समझने में सफल हो रही है तो वह एक ऐडा से आगे boli,"Aapko क्या अच्छा लगता है एक मर्द होकर एक बच्चे को तंग करना?"

वह आदमी यह सुनकर अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Nahin. हुंका तोहरे जइसन जवान और खबसूरत औरत का साथ अच्छा लगता है और ु ससुरा बीच में आवत है ी हुंका अच्छा नहीं लागत है"

अनीता उस आदमी के तरफ देखती हुयी उसका बात सुनी मगर फिर बिना कुछ बोले अंकित के तरफ देखने लगी जो मोबाइल में लगा हुआ था.

वह आदमी अपना बात बोलकर अनीता की क्लीवेज देखते हुए उसकी गांड सहलाने लगा. अनीता यह महसूस करती हुयी बिना शर्म के उसके तरफ देखकर boli,"Aapne टिकट ले लिया है क्या?"

वह आदमी यह सुनकर "न" में सर हिलाते हुए अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Kaa बात है. तुमका हमार टिकट का फ़िक़र हो रहा है. तुमका भी हमरा साथ सफर करने का मैं हो रहा है का?"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखकर 'न' में सर हिलती हुयी boli,"Waisi कोई बात नहीं है. मैं तो बस आप यहाँ खड़े होकर बात किये जा रहे हैं तो मुझे लगा की टिकट ले लिए होंगे. लाइन बहोत लम्बी हो गयी है. आप चाहे तो अंकित को बोलकर अपना टिकट भी ले लीजिये. आपको लाइन में लग्न नहीं होगा".

वह आदमी अगले पल bola,"Sasura ु ऐसे लाइन में खड़ा रहेगा तो हो गवा. तुम देखो हम कैसे टिकट लेता हूँ".

अनीता यह सुनकर उसको देखि और अगले पल वह आदमी टिकट काउंटर के तरफ चल दिया. अनीता उसको hi देखने लगी.

कुछ सेकण्ड्स बाद वह आदमी काउंटर के पास पहुंचा और जाकर काउंटर पर कुछ बोलै तो अगले पल आगे खड़ा आदमी उसको जवाब में कुछ बोलै जिसके जवाब में वह आदमी अपने होंठ पर ऊँगली रखते हुए वह आगे खड़ा आदमी को चुप रहने का इशारा किया. यह देखते hi वह आदमी चुप हो गया. अनीता देखि की वह आदमी अब अपने पंत से वॉलेट निकल रहा था.

अनीता मैं hi मैं boli,"Bas एहि चीज़ इनको आता है. गुंडागर्दी करना और लोगो को डरा कर अपना काम निकलना. लेकिन जो भी हो काम तो कर लेते है. किसी को इसे कुछ बोलने की हिम्मत भी नहीं हो रही है".

अनीता उस आदमी को hi देख रही थी. अगले पल वह आदमी टिकट लेकर अनीता के तरफ आने लगा. अनीता उसे hi देख रही थी. वह आकर उसके सामने टिकट लहराता हुआ bola,"Dekho टिकट मिल गवा वह भी पसंद का सीट."

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Bahot बहोत बधाई हो. लोगों को दरकार लाइन तोड़ कर टिकट लेकर ख़ुशी मिल रही है आपको है न".

वह आदमी मुस्कुराकर अनीता की गांड पर वापस हाथ रखते हुए उस पर हाथ फेरते हुए bola,"Ab ससुरा ु लोग डरपोक, नामर्द है तो हम का करू. हिम्मत होता गांडू लोगन में तो हुंका रोकता ससुरा लोग."

अनीता उसका बात सुनकर मैं hi मैं boli,"Sahi बोल रहे हैं यह. अब दुसरो में इनके दबंगई का मुक़ाबला करने का हिम्मत नहीं है तो इनकी क्या ग़लती. सब लोग तो अपना काम आसान करना चाहते hi हैं. इन्होने भी अपनी दबंगई दिखा कर बिना म्हणत के टिकट ले लिया तो क्या ग़लत किया. टिकट के लिए इतने लोग खड़े थे एक में भी हिम्मत नहीं था रोकने का और यह हैं की इतने लोगो के नीचे अपना दबंगई दिखाकर टिकट ले लिए. सही में इसे hi तो मर्दानगी कहते हैं. देखा जाये तो सही मायने में यहाँ असली मर्द एहि एकेले हैं".

वह आदमी अनीता को देखकर bola,"Kaa सोचत हो?"

अनीता यह सुनकर 'न' में सर हिलती हुयी boli,"Nahin कुछ नहीं"

अगले पल वह आदमी अनीता को दो और टिकट दिखते हुए उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए bola,"Are सोचो मत. हम तुम्हारा भी टिकट ले लिया हूँ".

अनीता यह देखकर हल्का मुस्कुराती हुयी boli,"Are इसकी क्या ज़रूरत थी. अंकित तो टिकट लेने वाला hi है"

वह आदमी मुस्कुराते हुए अनीता की गांड सहलाते हुए bola,"Are हम अपने लिए टिकट ले hi रहे थे तो तोहार टिकट कैसे छोर देते. जब हम बोलै हूँ की ऊपर वाला हुंका ी सफर में तोहार ख्याल रखने के लिए भेजा है तो तोहार ख्याल रखना पड़ेगा न. ु ससुरा बहोत खड़ा हो गवा. उसको बुला लो"

अनीता यह सुनकर उसे देखकर puchhi,"Magar यह सही नहीं है न. आप ऐसे लाइन तोड़कर..."

वह आदमी अनीता के पूरा बोलने से पहले बीच में hi बोल pada,"Are सही ग़लत का का बात है इसमें. साला उनलोगां में दम नहीं है हुंका कुछ बोलने का तो हम का करे. हम कुछो ग़लत नहीं किये, अपना टिकट लिए तो तोहार लिए भी ले लिए. हम जब हूँ तो तुमको परेशानी कैसे होने दे सकत हूँ".

अनीता यह सुनकर उसे देखकर boli,"Haan ठीक hi बोल रहे हैं आप. अब उनलोगो में हिम्मत नहीं है तो आप क्या करेंगे"

वह आदमी अनीता की गांड सहलाते हुए उसकी क्लीवेज देखते हुए bola,"Are उनलोगां में कउनो चीज़ का हिम्मत नहीं है. तोहार मदद करने का भी नहीं जैसे हम कर रहा हूँ"

अनीता यह सुनकर boli"main अंकित को बुला लेती हूँ लाइन ी" और फिर अपनी मोबाइल से अंकित को कॉल करके उसे बुला ली. अंकित उससे पूछा की टिकट कैसे मिला तो अनीता boli,"Bas मिल गयी. तुम आओ तो".

वह आदमी अनीता की बात सुनते हुए उसकी गांड सेहला रहा था. अनीता फ़ोन रखकर उस आदमी को देखकर मुस्कुराती हुयी boli,"Thank यू सो मच. सच में अंकित को अभी काम से काम 15 मिनट और खड़े होना पड़ता टिकट के लिए. आपने तो काम hi आसान कर दिया".

वह आदमी अनीता की क्लीवेज देखकर उसकी आँखों में देखते हुए उसकी गांड दबाकर bola,"Eehe तो फ़र्क़ होता है ससुरा एक छोकरा में और हमरे जइसन मरद में. हम जानत हूँ कहाँ का करना है".

अनीता यह सुनकर उसके आँखों में देखती हुयी एक ऐडा से boli,"Haan सही कह रहे हैं आप. आप जैसे मर्द को ज़िन्दगी का इतना तज़ुर्बा है, कहाँ क्या करना है आपको पता है"

अनीता यह बोल hi रही थी तो वह आदमी उसे ऊपर से नीचे देखकर उसकी गांड दबाते हुए bola,"ab हम साथ चल रहा हूँ तो इस सफर में तोहार ख्याल रखने का जिम्मेदारी हमार है."

अनीता यह सुनकर उस आदमी के आँखों में देख hi रही थी की उसे अंकित के आने का एहसास हुए तो वह बिना कुचब बोले सामने के तरफ देखि.

अंकित कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता के पास आया और एक्ससिटेड होकर puchha,"Bhabhi आपको टिकट कैसे मिला बताइये न".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी उस आदमी के तरफ देखकर boli,"Inki वजह से".

अंकित जो एक्ससिटेमेंट में उस आदमी को अभी तक नहीं देखा था वह उसके तरफ देखा और उस आदमी को देखते hi चौंक गया और उसके चेहरे से मुस्कराहट ग़ायब हो गयी.

अनीता यह बात नोटिस की की अंकित उसे देखकर खुश नहीं था. अंकित उस आदमी को देखकर कुछ सेकण्ड्स बाद धीरे से bola,"uncle आप?"

वह आदमी अंकित का गाल पकड़ कर हिलाते हुए bola,"Haan हम. कइसन हो तुम चिकना?"

अंकित परेशानी से उसे देखते हुए bola,"aahh अंकल मेरी गाल".

अनीता यह देखकर उस आदमी के तरफ नाराज़गी से देखकर boli,"Offo फिर से आप शुरू हो गए?"

वह आदमी अनीता के तरफ देखा तो वह उसके आँखों में देखकर थोड़ा ऐडा से boli,"Humein चलना चाहिए. गर्मी में बाहर खड़े रहने से अच्छा है बस में बैठा जाये".

यह सुनकर वह आदमी अंकित का गाल छोर अनीता को देखते हुए उसकी गाने सहलाकर bola,"Haan चलो. तुम्हारे बदन का गर्मी बस में हम निकल दूंगा".

अनीता उस आदमी को देखती हुयी यह बात सुनी तो उसका दिल धड़कने लगा मगर वह कुछ नहीं बोली और वह अंकित का बात सुनकर उसके तरफ देखि.

अंकित अपना गाल सेहला रहा था और bola,"Ticket किधर है भाभी".

अनीता यह सुनकर उस आदमी के तरफ देखि और बोलने hi जा रही थी की वह आदमी एक टिकट अंकित को देते हुए bola,"Yeh ले".

अंकित टिकट लेते हुए bola,"Aur भाभी का टिकट?"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are तुम अपना फ़िक़र करो. जब तोहार टिकट लिया हूँ हम तो"

फिर वह अनीता की आँखों में देखते हुए उसकी गांड दबाते हुए bola"tohaar भाभी का टिकट कैसे छोर देते".

अनीता उस आदमी के आँखों में देखकर उसका बात सुनकर वापस अंकित को देखकर उससे boli,"Ankit तुम सूटकेस बस में डालो मैं इनसे अपनी टिकट लेकर और इन्हे टिकट के पैसे देकर आती हूँ".

अंकित यह सुनकर सर "हाँ" में हिलाते हुए bola,"Theek है भाभी", यह बोलकर वह अनीता के पास पड़ा हुआ उसका ट्राली लेकर जाने लगा तो वह आदमी bola,"Ee हमरा छोटा बैग है, जा रहा है तो ीका भी लेते जा".

अंकित यह सुनकर bola,"Apna बैग आप तो खुद भी ले जा सकते हैं"

यह सुनकर वह आदमी bola,"Are ससुरा....."

इससे पहले की वह आदमी आगे बोलता अनीता यह सुनकर अंकित से boli,"Ankit ग़लत बात. इन्होने हमारे लिए टिकट लेकर कितना टाइम बचाया है. यह नहीं होते तो तुम अभी भी लाइन में hi लगे रहते. बदले में इतना तो कर hi सकते ho.Chhota बैग hi तो है और वह भी ट्राली है तो तुमको उठाना भी नहीं पड़ेगा".

वह आदमी यह सुनकर अनीता की गांड दबाते हुए मुस्कुराकर bola,"Haan हमार बैग तो छोटा है"

फिर वह अनीता की आँखों में देखकत उसकी गांड को पकड़ कर हिलाते हुए bola,"Usse बड़ा चीज़ तो अभी हमरा हाथ में है".

अनीता का दिल यह सुनकर धड़कने लगा और वह एक पल के लिए अंकित के तरफ देखकर वापस वह आदमी तरफ देखि तो वह गांड दबाकर मुस्कुरा दिया.

अनीता और उस आदमी की आंखें कुछ सेकण्ड्स के लिए hi मिली थी की तभी अंकित bola,"Uncle आपके हाथ में टिकट है. यह बैग से छोटा है".

अनीता की दिल तेज़ी से धड़क गयी जब वह अंकित के मुंह से suni,"Uncle आपके हाथ में" मगर अंकित का आगे का बात सुनकर उसे राहत महसूस हुयी.

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are ससुरा टिकट भी बहोत बड़ा चीज़ है. अगर यकीन नहीं है तो यह टिकट फ़ेंक दे और बस में ऐसे hi चढ़ कर दिखा".

अनीता को न जाने क्यों उस आदमी के बात पर थोड़ी हसी आने लगी मगर वह हसी रोककर हल्का मुस्कुरा दी. अनीता को मुस्कुराते देख वह आदमी अनीता की आँखों में देखकर उसकी गांड दबाकर bola,"Tum अभी बचुआ हो. तोहार समझ नहीं आएगा की हमरे हाथ में कितना बड़ा चीज़ है"

अनीता की दिल उस आदमी का बात सुनकर धड़क hi रही थी की तभी अंकित यह सुनकर हस्ते हुए bola,"Haha अंकल उसे इम्पोर्टेन्ट बोलते हैं, बड़ा नहीं".

अंकित का बात सुनकर अनीता की दिल धड़कना जारी था. अगले पल उसकी दिल और धड़क गयी जब वह आदमी उसकी गांड दबाते हुए उससे puchha,"Ee ससुरा इम्पोर्टेड का होता है?"

अंकित को एक मौक़ा मिला था उस आदमी पर हसने का. वह यह मौक़ा नहीं छोरना चाहता था और उसे दिखाना चाहता था की भले hi वह उससे शारीरिक रूप से बड़ा है, मगर है तो जाहिल hi और अंकित पढ़ा लिखा है.

उस आदमी को अनीता से इम्पोर्टेन्ट का मतलब पूछते देख वह मुस्कुराकर bola,"Are अंकल आपको इम्पोर्टेन्ट का मतलब..."

अंकित की यह ख़ुशी थोड़ी देर के लिए hi थी क्यूंकि अनीता उसके तरफ देखकर उसे बीच में hi टोकती हुयी boli,"Ankit अब तुम फिर बहस में लग गए. तुम भी काम नहीं हो".

अंकित यह सुनकर तुरंत bola,"I'm सॉरी भाभी. मैं अभी जाता हूँ" यह बोलकर वह जाने लगा.

अनीता उसे कुछ सेकण्ड्स तक जाते हुए देखती रही फिर वह आदमी अनीता की गांड को हिलाकर puchaa,"Aese इम्पोर्टेड का मतबल का है?"

अनीता उसे देखकर boli,"Uska मतलब महत्वपूर्ण होता है, ज़रूरी"

वह आदमी यह सुनकर अनीता की गांड पकड़ कर हिलाते हुए bola,"Are तो बड़ा के साथ साथ ी महत्वपूर्ण और ज़रूरी भी तो है. हम तो ठीक hi बोल रहे थे की हमार हाथ में...."

अनीता उसे देखकर बीच में टोकती हुयी boli,"Aap मेरी टिकट दे दीजिये और बताइये मुझे आपको कितने पैसे देने हैं टिकट का".

वह आदमी एक टिकट अनीता को देते हुए bola,"Yeh लो तोहार टिकट. एक दम मस्त जगह सीट मिला है".

अनीता उसके हाथ से टिकट लेकर उसे देखि और दो टिकट का हिसाब जोड़कर boli,"Main आपके पैसे दे देती हूँ".

वह आदमी अनीता से bola,"Are हम दोनों के बीच में ी ससुरा पैसा कहे को लावत हो तुम. अब तो पूरा सफर हम दोनों के बीच लेना देना होगा hi".

अनीता उसका बात सुनने के बाद अपनी बैग से पैसे निकलकर उसको देती हुयी boli,"Ab सफर की बात सफर के वक़्त होगी. फिलहाल आप यह पैसे लीजिये".

वह आदमी यह सुनकर उसकी गांड दबाते हुए उसकी आँखों में देखकर bola,"Are मेमसाहब ले लेंगे जब लेना होगा तोह. हम तो तोहार लेना चाहता hi हूँ"

अनीता यह सुनकर जवाब में उस आदमी के आँखों में देखती हुयी एक ऐडा से boli,"To ले लीजिये न. मैं दे तो रही हूँ".

अनीता यह बोलकर उसे पैसे देने लगी तो वह आदमी उसकी गांड सहलाते हुए उसकी आँखों में देखकर मुस्कुराकर bola,"Are मेमसाहेब हम बोले न की हुंका पैसा नहीं चाहिए"

अनीता यह सुनकर उसके आँखों में देखती हुयी एक ऐडा से boli,"Are अभी तो आप बोल रहे थे की आपको लेना है और जब मैं दे रही हूँ तो आप ले नहीं रहे हैं. अब लेना नहीं है तो रहने दीजिये. मैं बस में जा रही हूँ".

वह आदमी हल्का मुस्कुराते हुए अनीता की गांड दबाते हुए bola,"Lena तो हुंका है, लेकिन पैसा नहीं, कुच्छो और लूंगा तोहार"

अनीता की दिल धड़क रही थी. वह एक ऐडा से उस आदमी को देख कर boli,"Ab जो भी लेना है बस में लीजियेगा. नहीं तो हमारी बस छूट जाएगी"

वह आदमी मुस्कुराते हुए उसकी गाड़ को दबाते हुए bola,"Are जो भी का? हम तोहार लेना चाहता हूँ"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी का प्रदर्शन करती हुयी उस आदमी के आँखों में देखती हुयी boli,"Theek है मेरी ले लीजियेगा लेकिन बस के अंदर लीजिये. या यूँ यही खड़े खड़े मेरी लेना चाहते हैं आप?"

यह सुनकर वह आदमी मुस्कुरा दिया तो अनीता भी मुस्कुराती हुयी एक ऐडा से boli,"Aap बस खड़े खड़े मुस्कुराते रहिये और मेरी लेने की सोचते रहिये. मुझे तो टिकट मिल gayi,main जा रही हूँ".

अनीता यह बोलकर जाने के लिए आगे बढ़ी तो वह आदमी मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहब तुम आगे आगे चलो हम पीछे से आऊंगा"

अनीता तब तक कुछ कदम आगे बढ़ चुकी थी और उस आदमी का बात सुनकर पीछे घूम कर उसे देखि तो वह उसकी गांड पर नज़र डालकर bola,"khaas नज़ारा देखते हुए".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Theek है, लेकिन ऐसा क्या ख़ास नज़ारा है यहाँ. मुझे तो कुछ ख़ास यहाँ दिख नहीं रहा".

वह आदमी अनीता की गांड से नज़र ऊपर उसकी चेहरे पर करके उसकी आँखों में देखते हुए bola,"Are मेमसाहब है बहोत ख़ास नज़ारा. वह भी दो बड़ा बड़ा, हिलता हुआ".

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी मगर वह बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Theek है मैं चलती हूँ. आप अपना ख़ास नज़ारा देखते हुए आइये".

यह बोलकर अनीता अपनी गांड मटकती हुयी बस के तरफ चलने लगी. उसकी गांड नार्मल से ज़्यादा मटक रही थी. अनीता चुप चाप अपनी गांड मटकती हुयी बस में चढ़ गयी. वह आदमी देखा की अनीता की कुर्ती का सिर्फ गाला hi गहरी नहीं थी बल्कि पीछे से भी आधी से ज़्यादा पीठ नंगी थी क्यूंकि वह कुर्ती बैकलेस थी और क्रिस्क्रॉस करके पतली डोरियन बंधी हुयी थी जिसका काम उसकी कुर्ती को उसकी जिस्म से बंधे रखना था न की उसकी पीठ को ढांकना. अनीता की दूध जैसी गोरी जिस्म का ऊपरी हिस्सा उस बदन दिखाऊ कुर्ती में चमक रही थी जो किसी भी मर्द का लुंड को बेचैन कर सकती थी.

अनीता बस में चढ़कर देखि तो आगे में कुछ सीट्स के बाद उसे अंकित दिखाई दिया जो उसे देखकर हाथ हिलने लगा.

अनीता अंकित के तरफ देखि तो उसके पास चली गयी. अंकित के बगल का सीट खली था. अंकित अनीता को सीट दिखते हुए bola,"baithiye भाभी. यह सीट शायद आपका hi है".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Nahin अंकित यह सीट मेरी नहीं है. मेरी सीट पीछे है. तुम बैठो मैं अपने सीट पर जाती हूँ".

अंकित यह सुनकर गुस्से से bola,"Bhabhi यह ज़रूर उस गुंडे ने जान बूझकर.... "

अनीता इतना hi सुनने के बाद "सष्ठ" करके धीरे से मगर थोड़ी सख्ती से boli,"Ankit तुम फिर शुरू हो गए. वह आता hi होगा. अगर उसने तुम्हे उसे गुंडा कहते हुए सुन्न लिया तो? "

यह सोचते hi अंकित को भी ध्यान आया की सच में अगर वह आदमी यह सुन्न ले तो कहीं उसे पीट न दे. अंकित को अपनी ग़लती का एहसास हुआ.

अनीता अगले पल boli,"Tum नेगटिवेस पर ध्यान मत दो. यह सोचो की उसकी वजह से हमें जल्दी टिकट मिल गयी. सो प्लीज बेवजह की बातों पर ध्यान देकर सफर को ख़राब मत करो. जस्ट एन्जॉय थे जर्नी."

अंकित अपना सर हिलाते हुए bola,"Haan भाभी. ी ऍम सॉरी."

अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Koi बात नहीं"

अनीता इतना बोली hi थी की उसे अपनी गांड पर एक हाथ महसूस हुयी और अगले पल आवाज़ suni,"Ka हुआ ी ससुरा बचुआ का बोल रहा है?"

अनीता यह सुनकर उस आदमी को देखकर boli,"Kuchh नहीं बस ऐसे hi"

अंकित उस आदमी को थोड़ा गुस्से से देख रहा था. उसको ऐसे देखते हुए देख वह आदमी bola,"Are कहे गुस्सा करात हो तुम?"

अनीता यह सुनते hi उस आदमी से boli,"Are आप इसे छोड़िये और सीट पर चलिए. यहाँ गेट के पास खड़े रहना ठीक नहीं है"

और फिर वह अंकित के तरफ देखि और उसे अपनी आँखें दिखाई जैसे उसे दांत रही हो की क्यों बेवजह का वह वैसे बेहवे कर रहा है और बात बढ़ा रहा है.

वह आदमी यह सुनकर उसकी गांड सहलाते हुए उसे हल्का थप थापा कर bola,"Are तो तुम चलोगी तभी तो हम भी चलूँगा, ख़ास नज़ारा देखते हुए"

अनीता उसका बात सुनकर बेशर्मी से उसकी आँखों में देखि और यह सुनकर अंकित को देखकर हल्का मुस्कुराकर boli,"Just एन्जॉय थे जर्नी. मैं अपनी सीट पर जाती हूँ".

अंकित यह सुनकर सर हिलाकर अपने कान में ईरफ़ोन लगा लिया और मोबाइल पर कोई गेम शुरू कर दिया.

वह आदमी अनीता जी गांड पर थपथपा कर उसे दबाते हुए bola,"Chalo हम दोनों का सीट पर"

अनीता यह सुनकर बिना कुछ बोले अपनी गांड मटकती हुयी सबसे पीछे की सीट के पास चली गयी. वह अपनी गांड नार्मल से ज़्यादा hi मटका रही थी.

अनीता वहां पहुँच कर बैठने के लिए सामने के तरफ घूमी hi थी की वह आदमी को मुस्कुराते हुए वहां अंकित के सीट के पीछे वाले सीट के पास खड़े देखि. अनीता घूमते hi देख चुकी थी की उसका नज़र उसकी गांड पर hi था जो उसके सामने घूमने से हट गया और वह अनीता को देखकर मुस्कुराने लगा.

अनीता भी उसे देखकर मुस्कुराई और सीट पर बैठ गयी. अगले पल वह आदमी भी सीट तक आ गया और अनीता के साथ सत् कर बैठ गया.

वह ऐसे सत् कर बैठा था की उसका दये हाथ का कोहनी अनीता की कमीज के ऊपर से उसकी बायीं चूंकि से सत्ता हुआ था, बल्कि सत्ता क्या उसकी नयी चूंकि के ऊपर hi था और अनीता अपनी बायीं चूंकि पर उस आदमी का कोहनी के साथ साथ उसके बाजु का प्रेशर महसूस कर पा रही थी.

अपनी पूरी बायीं चूंकि पर उस आदमी का मज़बूत बाजु महसूस करके ऐतराज़ करना तो दूर की बात है बल्कि उसके बैठने पर अनीता उसके आँखों में देखकर बेशर्मी से puchhi,"Dekh लिया आपने अपना ख़ास नज़ारा?".

वह आदमी मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहब देख लिए हम".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी अपनी बायीं गाल के पास से बाल को कान के पीछे करती हुयी एक ऐडा से boli,"Ummeed है की जिस ख़ास नज़ारा को आप देखने के लिए रुक गए थे वह देखकर आपको अच्छा लगा".

वह आदमी मुस्कुराते हुए bola,"Bahot अच्छा लगा मेमसाहब. कसम से मज़ा आ गवा. का मस्त नज़ारा था, दो बड़ा बड़ा तरबूज जैसा हिलता हुआ".

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी अपनी बेशर्मी का साबुत देती हुयी boli,"Chaliye आपका सफर तो अच्छे से शुरू हुआ. आपको अपने पसंद का नज़ारा देखने को मिल गया सफर के शुरुआत में hi".

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराता हुआ उसकी आँखों में देखते हुए bola,"Haan मेमसाहेब, अब बाकी का सफर भी अच्छे वे गुज़रेगा हम दोनों का".

अनीता उसका बात सुनकर बाहर खिड़की के तरफ देखने लगी और देखती हुयी अपनी बाल जो सामने लटकी हुयी थी उसे पीछे कर दी तो उसे खिड़की के शीशे में देखकर ध्यान आया की वह बाल उसकी क्लीवेज और दायी चूंकि पर थी जिसे हटाने ऐ उसकी क्लीवेज और दायी चूंकि का उभर साफ़ साफ़ दिखने लगा. अनीता यह जॉब बुझ कर नहीं की थी. वह जब बाल पीछे की तो उस वक़्त ध्यान नहीं था की उसकी बाल कहाँ लटक रही थी, बस वह उसे पीछा करना चाहती थी तो कर दी. खैर जब उसे एहसास हुआ तो भी उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा. उसके जैसी बेशर्म औरत को इससे कोई फ़र्क़ पड़ना भी नहीं था तो वह चुप चाप खिड़की के शीशे से बाहर देख रही थी.

वह बाहर से ध्यान हटाकर ध्यान से शीशे पर देखि तो वह आदमी को अपनी चूंकि और क्लीवेज को देखते हुए पायी. अनीता की दिल यह देखकर धड़क तो गयी मगर वह नार्मल रही और कुछ नहीं बोली.

कुछ सेकण्ड्स बाद वह आदमी अनीता की क्लीवेज और चूंकि देखते हुए bola,"Aage का भी नज़ारा बड़ा मस्त है"

अनीता यह सुनकर उसके तरफ देखि तो उसे अपनी क्लीवेज को खुलकर घूरते हुए देखि. वह आदमी को जब एहसास हुआ तो वह अनीता की आँखों में देखकर मुस्कुरा दिया तो अनीता भी मुस्कुराकर boli,"Agar आपको नज़ारा देखना hi है तो यहाँ मेरे सीट पर बैठ जाइये. बाहर का नज़ारा अच्छे से दिखेगा यहाँ से"

वह आदमी यह सुनकर हल्का मुस्कुराते हुए bola,"Are नहीं तुम्ही यहां बैठो और बाहर का नज़ारा देखो. ु कहत है न की लेडीज फास्ट. तुमको यहां बैठ कर अच्छा लगेगा तुम बैठो. हुंका जो नज़ारा देखना है ु हम इहाँ से hi देख सकत हूँ"

यह बोलकर वह आदमी अपना नज़र अनीता की क्लीवेज पर ले गया. अनीता की दिल धड़क रही थी उसे ऐसे खुलेआम उसकी जिस्म को गंदे नज़र से देखते हुए देखकर मगर उसे बुरा नहीं लग रहा था. बल्कि वह उस आदमी के हिम्मत, दबंगई और मर्दानगी से प्रभावित थी. अनीता को मैं hi मैं थोड़ी हसी भी आ गयी उसके अंग्रेजी पर जब वह 'लेडीज फर्स्ट' को 'लेडीज फास्ट' बोलै. सही से अंग्रेजी नहीं आने पर भी वह जिस हिसाब से बिना शर्मिंदा या झिझक के वह वैसे बोलै अनीता को उसमे उसका कॉन्फिडेंस दिखा. उसे हरिया का याद आ गया की हरिया भी अनपढ़ मज़दूर होने के बावजूद शुरू से hi उसके साथ कितना कॉन्फिडेंस से पेश आता रहा है और यह आदमी भी वैसा hi है.

अनीता उस आदमी का बात सुनकर और उसको अपनी क्लीवेज देखते देख बेशर्मी से मुस्कुरा कर boli,"Bahot ख्याल रहता है आपको औरतों की है न?"

वह आदमी यह सुनकर अनीता की क्लीवेज से प्न नज़र ऊपर करके उसकी मुस्कुराती हुयी चेहरे पर देखकर मुस्कुरा कर bola,"Are कहे ख्याल नहीं रहेगा. असली मरद को औरत का ख्याल रखना hi चाहिए और खासकर तोहरी जैसी औरत का तो इस्पेसल ख्याल रखना चाहिए"

वह आदमी इतना बोलकर फिर से अनीता की जिसक को गंदे नज़र से देखने लगा. अनीता को उसका अंदाज़ हरिया जैसा लग रहा था मगर साथ hi एक अलग तरीक़ा लग रहा था जिससे उसे एक नया अनुभव महसूस हो रहा था. हालांकि वह इस मर्द से पहले मिल चुकी थी बस से सफर के दौरान hi और वह उसे छेड़ भी चूका था मगर वह पहली बार था और अनीता के लिए वह अनजान था और सब कुछ अचानक से हुआ था.

मगर आज की बात कुछ और थी. आज अनीता के लिए वह अनजान नहीं था और पिछली बार के बाद अनीता इतना तो समझ चुकी थी की वह भले hi जैसा हो मगर उसके लिए कोई परेशानी खड़ा नहीं करेगा तो उसे उसके साथ बैठना और बातें करने में पिछली बार से ज़्यादा कम्फर्टेबले महसूस हो रहा था. अनीता को उसके खुलके छेड़ने से कोई आपत्ति नहीं थी बल्कि वह तो उसकी हिम्मत और मर्दानगी से प्रभावित थी की हरिया के तरह यह भी कोई दिखावा नहीं कर रहा है और उसके मैं में जो है वह कर रहा है.

उसका खुल कर बातें करना भी उसे अच्छा लग रहा था तो अनीता बात को आगे बढाती हुयी उसे अपनी क्लीवेज पर देखते हुए देख एक ऐडा से puchhi,"Meri जैसी औरत मतलब?"

वह आदमी अनीता की क्लीवेज से नज़र हटाकर bola,"Are मतबल तोहार जैसी सेहरी गोरी मेम. ससुरा तुमलोगां पढ़ी लिखी होने से सब कुछो तो अपने से कर सकत हो मगर फिर भी हमरा जइसन मरद का ज़रूरत होता है तुमलोगां का जो तोहार ख़ास ख्याल रखे"

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखते हुए bola,"Khaaskar तोहरी गरम जवानी का"

अनीता की दिल धड़क रही थी उसका बात सुनकर और उसकी बदन और छूट में धीरे धीरे बेचैनी बढ़ने लगी थी. इससे पहले की वह उस आदमी के बात पर कुछ रियेक्ट करती या बोलती कुछ पैसेंजर्स उसे बस में चढ़ते हुए दिखे तो वह बात को आगे बढ़ाना ज़रूरी नहीं समझी और चुप चाप दये तरफ सर घुमाकर खिड़की के आईने से बाहर देखने लगी.

अनीता खिड़की के शीशे में देखि की वह आदमी भी उसकी क्लीवेज से नज़र हटाकर एक नज़र सामने पैसेंजर्स पर ले गया. अनीता भी एक नज़र सामने पैसेंजर्स के तरफ लेजाकर देखि की वह लोग आगे के सीट्स पर बैठने लगे तो वह वापस खिड़की के तरफ देखि तो जैसा उम्मीद कर रही थी वह आदमी वापस उसकी क्लीवेज और चूंकि देखने लगा था. अनीता चुप चाप बाहर देखने लगी.

वह आदमी का कोहनी और बाजु अनीता अभी भी अपनी बायीं चूंकि पर महसूस कर सकती थी मगर कुछ बोली नहीं.

कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता वह आदमी का आवाज़ अपनी कान में सुनकर उसके तरफ dekhi,"Aese मेमसाहेब बाहर का नज़ारा कइसन है?"

अनीता यह सुनकर उसे देखती हुयी boli,"Kuchh ख़ास नहीं. यहाँ देखने लायक कुछ है hi नहीं. बस चलेगी तो रास्ते में कुछ देखने लायक हो"

वह आदमी यह सुनकर सर हिलाया और अनीता की क्लीवेज देखते हुए bola,"Humka तो मस्त नज़ारा अभी से दिख रहा है"

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ हो गयी और वह अपनी आँखें बड़ी करके उस आदमी को देखकर तेज़ी से आस पास देखने के बाद उस आदमी के तरफ वापस देखि तो वह मुस्कुरा दिया.

अनीता मुस्कुराई तो नहीं मगर बेशर्मी से उसके आँखों में एक ऐडा से देखि और अपनी सर हिलाकर वापस खिड़की के शीशे से बाहर देखने लगी. वह ध्यान दी की वह आदमी फिर से उसकी क्लीवेज देखने लगा.

अनीता देखि की बाल का एक पतला सा लत्त उसके आगे के तरफ आ चुकी थी तो वह उसे पीछे के तरफ कर दी. बाल को पीछे करते वक़्त उसे ध्यान आया की वह उसकी दायी चूंकि के ऊपर थी.

अनीता अगले पल उस आदमी का बात सुनकर उसके तरफ घूमकर उसे dekhi,"Achha किया जो ससुरा ू बाल को हटा दिया. तोहार खूबसूरती और हमार ख़ास नज़ारा को छुपा रहा था".

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से मुस्कुराकर धीरे से boli,"Aap भी न. नज़ारा देखना है तो बाहर का देखिये, जैसे मैं देख रही हूँ".

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are मेमसाहब बाहर का hi तो नज़ारा देख रहा हूँ" फिर वह अनीता की क्लीवेज के ऊपर चेहरा लेजाकर अंदर झांकते हुए bola,"Ander का तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा है".

अनीता यह सुनकर और उस आदमी को ऐसे अपनी क्लीवेज के अंदर झांकते देखकर उसका चेहरा अपनी क्लीवेज के तरफ से हटती हुयी आँखें बड़ी करके धीरे से boli,"Offo आप भी न. आराम से बैठिये".

वह आदमी अनीता को देखा तो वह अपनी आँखों को तिरछा करके बस के दरवाज़े के तरफ इशारा की तो वह आदमी उधर देखा की पैसेंजर्स चढ़ रहे थे.

वह आदमी वापस अनीता के तरफ देखा तो वह धीरे से थोड़ी नाराज़गी दिखती हुयी मगर बेशर्मी से boli,"Pata नहीं कहाँ नज़र रहता है आपका. अब पैसेंजर्स बढ़ रहे हैं आराम से बैठिये"

वह आदमी धीरे से bola,"Are कहाँ नज़र का. तोहार दूध पर नज़र है हमरा"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़कने लगी और वह जल्दी से सामने के तरफ देखि तो राहत मिला की जितने पैसेंजर्स चढ़े थे अब तक सब सीट्स पर बैठे अपने अपने मोबाइल में लगे हुए थे.

अनीता यह देखने के बाद वापस उस आदमी को देखकर धीरे से boli,"Kya कर रहे हैं आप? ऐसे कोई बोलता है क्या?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are तुम्ही तो पूछी की हमार नज़र कहाँ है. अब जहाँ था ु हम बता दिए की तोहार दूध पर है"

अनीता की बदन में आग लगने लगी थी उस आदमी के बात से मगर वह खुद को कण्ट्रोल करती हुयी धीरे से boli,"Are तो ऐसे बोलियेगा आप?"

वह आदमी मुस्कुराकर bola,"Toh का सच भी नहीं बोलूं हम."

अनीता की सांस तेज़ होने से उसकी बड़ी चूँचियाँ ऊपर नीचे हो रही थी. अनीता एक ऐडा से boli,"Ab बातें मत बनाइये. बड़े आये सच बोलने वाले"

अगले पल अनीता जो बोली उससे उस आदमी का लुंड पंत में तन तना गया. अनीता अपनी आवाज़ में कामुकता लाकर एक ऐडा से puchhi,"Itna hi सच बोलते हैं तो बताइये आप कौन सा नज़ारा देखने के लिए बाहर रुक गए थे. मुझे तो बाहर कुछ ख़ास नज़ारा दिख नहीं रहा है?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Are तो तुमका पूछना चाहिए था न. जो नज़ारा देखने के लिए हम रुके थे ु है तोहार मटकती हुयी गांड".

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ हो गयी और बदन और छूट में एक अजीब सा हलचल हुआ. अनीता यह सुनकर जल्दी से सामने के तरफ देखि तो वह आदमी आगे bola,"Bada मस्त बड़ा बड़ा गांड है तोहार जो चलते वक़्त का मस्त तरीके से हिलत है"

अनीता अगले पल उसे देखकर धीरे से boli,"Ssshhhh" और आँखों से गेट के तरफ इशारा की तो वह आदमी गेट के तरफ पैसेंजर्स को देखा. वह पैसेंजर्स को देखने के बाद अनीता को वापस देखा तो वह एक ऐडा से उसे देखकर खिड़की के तरफ देखने लगी.

वह आदमी वापस अनीता की क्लीवेज देखने लगा जिसे अनीता शीशे में देखि.

अगले पल वह आदमी अनीता की कान में bola,"Jitna अच्छा नज़ारा तोहार पीछे का है उतना hi अच्छा नज़ारा आगे का है. दोनों गांड और दूध तोहार बड़ा बड़ा है"

अनीता यह सुनकर उस आदमी के तरफ देखकर धीरे से boli,"Offi कैसी बातें करते रहते हैं आप"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are तुम hi तो सच बोलने के लिए बोली तो हम बोल रहा हूँ. तुम खुद बताओ तोहार गांड और चूंकि बड़ा बड़ा नहीं है का?"

अनीता की सांस तेज़ हो रही थी यह सब सुनकर. वह तेज़ी से एक नज़र सामने देखकर वापस उस आदमी के तरफ देखकर बेशर्मी से boli,"Theek है आपने बोल लिया एक बार, अब बस कीजिये"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता कुछ नहीं बोली और उसकी आँखों में देख रही थी की तभी वह आदमी फिर से अनीता की चूँचियो को देखा मगर इस बार अपने होंठो पर ज़बान फेरते हुए bola,"Sasura दूध पीने का मैं होवत है हमार".

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क रही थी मगर वह अपनी बेशर्मी का साबुत देती हुयी boli,"To पि लीजिये न"

वह आदमी यह सुनकर अनीता की आँखों में देखा तो वह बेशर्मी से मुस्कुराकर खिड़की के तरफ इशारा करती हुयी boli,"Udhar एक दूकान है. जाकर खरीदकर पि लीजिये".

यह सुनकर वह आदमी मुस्कुरा दिया और अनीता की चूँचियों को कमीज के ऊपर से देखते हुए bola,"Humaar को तो ताज़ा बिना मिलावट का दूध पसंद है. ताज़ा ताज़ा दूध का थांन से निकला हुआ".

यह सुनकर अनीता की दिल की धड़कन तेज़ होने लगी और उसकी चूँचियाँ ऊपर नीचे होने लगी. बिना दुपट्टे का टाइट कुर्ती में जिसका गाला गहरा था और क्लीवेज की आधी गहराई और उसकी बड़ी चूँचियाँ भी एक तिहाई नंगी दिख रही थी वैसी कुर्ती में अनीता की बड़ी चूँचियाँ जब ऊपर नीचे हो रही थी तो साफ़ साफ़ पता चल रहा था. वह आदमी अनीता की बड़ी चूँचियों को ऊपर नीचे होता साफ़ साफ़ देख रहा था. वहीँ अनीता को याद आ रहा था की पिछली बार भी वह आदमी उसकी चूँचियों को देखकर एहि बात बोलै था. अनीता की बदन और छूट में बेचैनी हो रही थी उस आदमी का बात सुनकर.

वह तेज़ सांस लेती हुयी उस आदमी के आँखों में देखकर एक ऐडा से boli,"Yahan कहाँ मिलेगा आपको ताज़ा ताज़ा दूध"

फिर वह खिड़की के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Jaiye दूकान में पूछ लीजिये की ताज़ा दूध मिलेगा या नहीं"

अनीता की दिल अगले पल धड़क गयी जब वह अपनी बायीं चूंकि उस आदमी के मुट्ठी में महसूस की और वह आदमी उसकी चूंकि दबाते हुए bola,"Are इहाँ मिलेगा हमको ताज़ा ताज़ा दूध, तोहार बड़ा बड़ा दो दूध के थांन से"

अनीता तेज़ी से सामने के तरफ देखि और राहत महसूस की की किसी का ध्यान उधर नहीं है. वह तेज़ सांस लेती हुयी boli,"Kya कर रहे हैं आप? छोड़िये"

वह आदमी उसकी बायीं चूंकि अपने बाये हाथ से कुर्ती के ऊपर से मसलते हुए bola,"Tum hi तो बोली की दूध का ी दुकान है. तो दूध निकाल रहा हूँ"

अनीता बेशर्मी से उसे देखती हुयी खिड़की के शीशे के तरफ इशारा करती हुयी boli,"Maine उधर बोलै था वह दूकान"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are उधर का hi दूध का दूकान से दूध निकाल रहा हूँ हम. तुम hi देखो"

वह आदमी शीशे के तरफ इशारा किया तो अनीता शीशे में देखि और उसकी दिल धड़क गयी जब वह शीशे में अपनी चूंकि को देखि जिसे वह आदमी मुट्ठी में भरकर मसल रहा था. उस आदमी ने बहोत hi चालाकी से उसकी बात मैंने के बहाने उसकी चूंकि मसलने लगा था. मगर अनीता भी काम नहीं थी. उसके जैसी बेशर्म औरत चुप कैसे रह सकती थी. वह अपनी बेशर्मी दिखती हुयी अपनी आँखें बड़ी करके उस आदमी के तरफ देखकर धीरे से boli,"Main वह बाहर जो दूकान है उसकी बात कर रही थी मगर आप तोह बस बातें बनाते रहते हैं. छोड़िये मुझे"

वह आदमी मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह सामने देखकर अपनी हाथ से उस आदमी का हाथ अपनी चूंकि से हटती हुयी उसे देखकर गेट के तरफ आँखों से इशारा की. वह आदमी अनीता को देखने के बाद गेट के तरफ देखा तो पैसेंजर्स चढ़ रहे थे.

वह आदमी वापस अनीता के तरफ देखा तो वह भी उसके तरफ एक ऐडा से देखकर वापस खिड़की के तरफ देखने लगी. वह आदमी अनीता की क्लीवेज देखा और फिर उसकी बायीं चूंकि पर अपना दया कोहनी और बाजु रख दिया. अनीता इस पर कुछ रियेक्ट नहीं की.
 
ी हैवे मेड माइनर एडिट्स तो डेस्क्रिबे व्हाट अनीता वास् वेअरिंग. फोर्टनेटेली, ी वास् अबले तो गेट ा सिमिलर इमेज ऑफ़ थे डिस्क्रिप्शन ऑफ़ थे कुर्ती तहत शी वास् वेअरिंग. प्लीज नोट तहत थे इमेज इस मोरे रिलेटेड तो व्हाट काइंड ऑफ़ कुर्ती अनीता वास् वेअरिंग एंड हाउ मच रेवेलिंग तहत कुर्ती वास् एंड नॉट ऑफ़ अनीता इटसेल्फ. थैंक्स.

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अपडेट 111

अनीता और वह आदमी दोनों अगले कुछ मिनट तक चुप रहे. वह आदमी अनीता की बायीं चूंकि को अपने कोहनी और बाजु से महसूस कर रहा था वहीँ अनीता भी उसका मजबूत बांह अपनी बायीं चूंकि पर महसूस कर रही थी मगर न कोई ऐतराज़ कर रही थी.

थोड़े देर में बस चलने लगी. अनीता और उस आदमी के आगे वाले सीट तक पैसेंजर्स थे मगर शामे रौ में दूसरे साइड का सीट खली था.

अनीता बस चलने पर एक पल के लिए सामने के तरफ देखि और फिर अपने और उस आदमी के सीट के बाए तरफ के सीट को देखकर धीरे से boli,"Lagta है वह सीट खली hi रहने वाली है. कोई आया नहीं".

वह आदमी सीट के तरफ देखकर वापस अनीता के तरफ देखकर bola,"Haan. ऊपर वाला नहीं चाहत है की तुमका कौनो परेशानी हो इसलिए वह सीट खली रखा है"

अनीता यह सुनकर उस आदमी के तरफ देखकर मुस्कुराती हुयी boli,"Ab यह क्या बात हुयी".

वह आदमी यह सुनकर दांत दिखाकर मुस्कुराकर bola,"Humaar मतबल है की ऊपर वाला बगल वाला सीट इसलिए खली रखवाया है ताकि"

फिर वह अनीता की गहरी क्लीवेज के तरफ आँखों से इशारा करके bola,"jab हम तोहार दूध निकलू तो कउनो देखे िका चिंता तुम का न करना पड़े"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके उस आदमी को देखती हुयी बेशर्मी से धीरे से boli,"kaisi बात कर रहे हैं आप. धीरे बोलिये" और फिर वह अपनी आँखों से अपने सामने वाले सीट के तरफ इशारा की.

वह आदमी यह सुनकर धीरे से bola,"Are ु लोगन तो अपना मोबाइल में लगा है और कान में ईरफ़ोन ठूसा हुआ है. कुछो नहीं होगा. हम ी पीछे का सीट तो इसलिए hi लिया हूँ की हुंका कउनो परेशानी न हो"

वह आदमी यह बोलकर उसकी बायीं चूंकि को अपने बाये मुठी में भरकर धीरे से दबाया तो अनीता उसके तरफ देखकर बेशर्मी से धीरे से boli,"Kya कर रहे हैं आप?"

वह आदमी उसकी चूंकि दबाते हुए bola,"Are तोहार दूध दबा रहा हूँ. देख तो रही हो"

अनीता उसे थोड़ी नाराज़गी से देखती हुयी बेशर्मी से boli,"Haan देख रही हूँ और सामने वाले भी देख सकते हैं"

फिर अनीता उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूंकि से हटाने का कोशिश करती हुयी आँखों से सामने वाले सीट के तरफ इशारा की. वह आदमी उसकी चूंकि को पकडे हुए hi सामने के सीट के तरफ देखा जहाँ पैसेंजर्स अपने मोबाइल में बिजी थे.

वह आदमी यह देखकर अनीता के तरफ देखा तो अनीता नाराज़गी से उसे देखती हुयी बेशर्मी से अपनी आँखों से बायीं चूंकि के तरफ इशारा की. वह आदमी उसकी बायीं चूंकि को देखा जो उसके मुट्ठी में था तो अनीता अपनी पतली नाज़ुक हाथ जो उस आदमी के कलाई पर रखकर उसके हाथ को हटाने का कोशिश कर रही थी उसे उस आदमी के कलाई पर फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में धीरे से boli,"Please छोड़िये. सामने से कोई देख लेगा"

वह आदमी अनीता की नाज़ुक पतली हाथ को देखा जो वह प्यार से उसके कलाई पर फेर रही थी. वह उसे देखकर अनीता की आँखों में देखते हुए धीरे से bola,"Abhi छोड़ डेट हूँ. तोहार दूध तोहार दोनों बड़ा बड़ा चूंकि से हम बाद में निकलूंगा और पियूँगा भी"

वह यह बोलकर अनीता की चूंकि को छोड़कर उसे वापस देखा तो अनीता उसे कामुक अंदाज़ में एक नज़र देखकर वापस बाहर देखने लगी. कुछ देर वह ऐसे hi बाहर देखते रही और शीशे में उस आदमी को उसकी चूँचियों को घूरते और उस पर उस आदमी के दये हाथ का कोहनी और बाजु सत्ता हुआ देखती रही.

बस 2-3 मिनट में थोड़ा आगे बढ़ा और हाईवे पर पहुंचा तो बस के अंदर थोड़ा अँधेरा हो गया. बस में अँधेरा होने पर अनीता बस में एक नज़र दौड़ाई की तभी अपनी बायीं चूंकि पर फिर से हाथ महसूस की. वह महसूस करके उस आदमी के तरफ जैसे hi देखि वह आदमी मुट्ठी बांध करके अनीता की चूंकि को दबाने लगा.

अनीता उसे देखि तो वह आदमी उसकी चूंकि दबाते हुए हल्का मुस्कुरा दिया तो अनीता बेशर्मी से उसके आँखों में देखती हुयी धीरे से boli,"Aap फिर से शुरू हो गए?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता उसके आँखों में देखती हुयी अपनी बायीं हाथ को उसके कलाई पर रखकर उसपर अपनी हाथ फेरती हुयी कामुक आवाज़ में धीरे से boli,"Please हटाइये न"

वह आदमी जवाब में bola,"Are अब तो अँधेरा हो गवा. कउनो नहीं देखेगा की तोहार दूध का थांन हमार हाथ में है"

अनीता उसके कलाई पर अपनी हाथ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Andhera है तो क्या हुआ. थोड़ा बहोत दिखाई तो दे रहा है"

वह आदमी यह सुनकर अनीता की चूंकि को देखा और फिर उसकी चूंकि से अपना बया हाथ हटा कर अपना दया हाथ को अपने और अनीता के नीचे घुसते हुए धीरे से bola,"Thoda सा आगे खिसको"

अनीता उसे एक ऐडा से देखती हुयी थोड़ा नखरे दिखती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Ab क्या हो गया?"

वह आदमी अनीता की कमर पकड़ कर उसे आगे करने का कोशिश करते हुए bola,"Are खिसकी तो बताते हैं की का हुआ"

अनीता यह सुनकर एक ऐडा और नखरे से उसे देखि और फिर थोड़ी सी आगे खिसक गयी तो वह आदमी अपना दया हाथ उसकी पीछे से लेजाकर उसकी दायी आर्मपिट्स के नीचे से घुसकर उसकी दायी चूंकि को मुट्ठी में भर लिया तो अनीता अपनी आँखें बड़ी करके उसे देखि तो वह आदमी हल्का मुस्कुराकर धीरे से bola,"Ab ऐसे ठीक हैं. कउनो देखेगा तो हम हाथ पीछे कर लूंगा"

अनीता एक ऐडा से जवाब di,"Aap भी न बस अपनी मनमानी करते रहते हैं"

वह आदमी उसकी चूंकि दबाते हुए bola,"Are मनमानी नहीं कर रहा हूँ, तोहार जवानी का ख्याल रख रहा हूँ"

अनीता नखरे से उसे देखती हुयी boli,"Haan वह तो दिख hi रहा है कैसे ख्याल रख रहे हैं आप".

अगले पल अनीता उसके दये हाथ का कलाई जिससे वह अनीता की दायी चूंकि दबा रहा था उस पर अपनी नाज़ुक सी दायी हाथ रखकर उस पर फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Itna मज़बूत हाथ है आपका और इतनी जोर से दबा रहे हैं आप. यह कोई ख्याल रखना हुआ?"

वह आदमी यह सुनकर हल्का मुस्कुराकर अनीता की चूंकि को देखकर puchha,"Kahan दबा रहा हूँ हम?"

वह आदमी यह बोलकर वापस अनीता को देखा तो वह उस आदमी के कलाई पर अपनी नाज़ुक हाथ फेरती हुयी कामुक आवाज़ में नखरेवाली नाराज़गी से boli,"Wahin जहाँ आपका मज़बूत हाथ है और जहाँ अभी आप देख रहे थे"

वह आदमी अनीता की चूंकि को एक बार और मसल कर वहां से हाथ हटाकर bola,"Are कहाँ है हमार हाथ? हम कहाँ कुछो दबा रहा हूँ"

अनीता उसके कलाई पर अपनी हाथ फेरती हुयी नखरे वाली अंदाज़ में कामुक आवाज़ से boli,"Aapne तो हाथ हटा लिया. अब हटा चुके हैं तो रहने दीजिये"

यह सुनकर वह आदमी हल्का मुस्कुरा कर वापस अनीता की चूंकि को देखकर उसे पकड़ कर दबा दिया तो अनीता अपनी आँखें बड़ी करके नखरे वाली अंदाज़ में कामुक आवाज़ से boli,"Phir शुरू हो गए आप?"

वह आदमी यह सुनकर उसकी चूंकि से हाथ हटते हुए bola,"Are का शुरू किये हम? तुम तो कुछो बोल नहीं रही हो तो हुंका कैसे पता चलेगा"

अनीता नखरेवाली नाराज़गी दिखती हुयी धीरे से कामुक आवाज़ में boli,"Are बोल तो रही हूँ की आप जोर से दबा रहे हैं"

अनीता फिर उसके कलाई पर वैसे hi अपनी हाथ फेरती हुयी कामुक आवाज़ में boli,"Ek तो इतना मज़बूत हाथ है आपका, ऊपर से इतनी जोर से दबा रहे हैं आप और फिर बोलते हैं की मेरा ख्याल रख रहे हैं. ऐसे कोई ख्याल रखता है क्या?"

वह आदमी यह सुनकर हल्का मुस्कुराकर उसकी चूंकि को देखा और फिर अनीता की आँखों में देखकर bola,"Are तुम बताओगी की हम कहाँ दबा रहे हैं तभी तो हुंका पता चलेगा की तुम कहाँ दबाने की बात कर रही हो"

अगले पल अनीता जो की उससे उस आदमी का पंत में लुंड हिलने लगा. उस आदमी का बात सुनकर अनीता वैसे hi नखरेवाली नाराज़गी दिखती हुयी उसके कलाई पकड़ कर उसका हाथ अपनी दायी चूंकि पर रखती हुयी कामुक आवाज़ में boli,"Yahan और कहाँ?"

अनीता फिर उसके कलाई पर अपनी हाथ फेरती हुयी कामुक आवाज़ में आगे boli,"Itni मज़बूत हाथ से आप इतनी जोर से दबा रहे हैं यहाँ और फिर अनजान बनकर मुझसे ऐसे पूछ रहे हैं जैसे आपको पता hi नहीं"

वह आदमी यह सुनकर उसकी चूंकि देखने लगा तो अनीता उसके कलाई पर अपनी हाथ फेरती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Koi इतनी ज़ोर से दबाता है क्या?"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखते हुए bola,"Are ी दूध को जोर से hi दबाया जाता है तभी तो तोहार दूध और साथ में जवानी का गर्मी निकलेगा. हम बोले थे न बस स्टैंड पर की बस के अंदर तोहार गर्मी निकालेंगे. उहे तो कर रहे हैं, तोहार गरम जवानी का गर्मी निकल रहे हैं"

अनीता बेशर्मी से उस आदमी के आँखों में देखती हुयी उसका बात सुनी और फिर देखि की वह आदमी उसकी चूँचियों को हवस भरे नज़र से देखते हुए bola,"Uff का जवानी है तोहार. एक दम गरम, मस्त जवानी है तोहार"

अनीता की चेहरे पर यह सुनकर एक गर्व का भाव आ गया. उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आ रही थी की एक ग़ैर मर्द उसकी जिस्म को हवस भरे नज़र से देख रहा था, वह भी ऐसा मर्द जो लगभग 50 साल को होगा और उससे लगभग 20-22 साल बड़ा है. इतना hi नहीं बल्कि वह आदमी एक जाहिल और देहाती दबंग था जिसे सही से बात करने भी नहीं आता था और सिर्फ दबंगई दिखता था.

मगर अनीता को उसका एहि अंदाज़ अच्छा लग रहा था. उसका बेझिझक, निडर और दबंग अंदाज़ अनीता को अच्छा लगा खासकर जब वह इतने लोगो के बीच बिना लाइन के hi टिकट ले आया. अनीता की नज़र में वह एक असली दुमदार मर्द था और एक असली दुमदार मर्द उसके जैसी जवान और खूबसूरत औरत को ऐसे नज़र से तो देखेगा hi, यह तो कुदरत ने hi ऐसा बनाया है की मर्द और औरत एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो ऐसे में एक असली मर्द होने के नाते वह आदमी उसके प्रति आकर्षित था. ऐसे में अगर वह उसकी जवानी की तारीफ कर रहा है और उसकी जिस्म को ऐसे देख रहा है तो उसमे ग़लत hi क्या है, यह तो नेचुरल चीज़ है.

उस आदमी के मुंह से अपनी जवानी की तारीफ सुनकर उसे अपनी चूँचियों को हवस भरे नज़र से देखते हुए देख अनीता अपनी बेशर्मी, बेहयाई और कहीं न कहीं अपनी बदचलनी और रणदीपाने का साबुत देती हुयी उसके कलाई पर हाथ फेरती हुयी कामुक आवाज़ में धीरे से boli,"Lag रहा है आखिर आपको एहसास हो गया की आप कितनी जोर से दबा रहे थे इस लिए अब बस देख रहे हैं और दबा नहीं रहे हैं"

वह आदमी अनीता की चूंकि से नज़र हटाकर उसकी आँखों में देखकर उसकी चूंकि को वापस दबाते हुए धीरे से bola,"Are का नहीं दबा रहे हैं?"

अनीता यह सुनकर उसे देखकर अपनी आँखें बड़ी करके उसे देखती हुयी बेशर्मी से boli,"Phir से अनजान बनने लगे आप?"

वह आदमी उसकी चूंकि से हाथ हटते हुए puchha,"Are बताओ न. का हो जायेगा अगर बता डौगी तो"

अनीता उस आदमी के आँखों में देखती हुयी उसके कलाई को पकड़ कर उसका हाथ अपनी दायी चूंकि पर रखते हुए कामुक अंदाज़ में boli,"Yeh"

वह आदमी उसकी दायी चूंकि को मुठी में भरकर हल्का दबाते हुए puchha,"Tohaar दूध का थांन?"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके नखरेवाली अंदाज़ में उसे देखि तो वह आदमी उसे मुस्कुराकर देखते हुए धीरे से bola,"Are अब दूध के थांन को उहे बोलेंगे".

अनीता यह सुनकर नखरेवाली ऐडा से उसे देखती हुयी बिना कुछ बोले अपनी सर हिलायी और वापस खिड़की के तरफ देखने लगी. वह आदमी मुस्कुराकर अनीता को देखा और उसकी चूंकि को धीरे धीरे मसलने लगा. अनीता शीशे में देखि की वह आदमी कैसे उसकी चूँचियों को देखते हुए उसे आराम से दबा रहा था.

आगे चलकर वह आदमी अनीता की चूंकि दबाते हुए कान में धीरे से bola,"Kaisan लग रहा है बाहर का नज़ारा"

अनीता यह सुनकर खिड़की के तरफ देखती हुयी hi boli,"Kuchh ख़ास तो नहीं है, बस पेड़ hi दिख रहे हैं"

वह आदमी यह सुनकर उसकी चूंकि मसलते हुए कान में धीरे से bola,"Are बाहर नहीं, तोहार देखने के लिए असली चीज़ तो अंदर है"

अनीता यह सुनकर गर्दन घुमा कर उस आदमी के आँखों में देखकर सवालिया नज़र से puchhi,"Matlab?"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Matbal तोहार देखने का असली चीज़ इहाँ है"

यह बोलते हुए वह आदमी अपने पंत के तरफ आँखों से इशारा किया तो अनीता उधर देखि. उधर देखते hi अनीता की दिल धड़क गयी. वह आदमी का लुंड उसकी चूंकि दबाने से थोड़ा बड़ा हो गया था और उसके जांघ से सत्ता हुआ था. उसके लुंड का उभर उस आदमी के पंत के ऊपर से टांगों के बीच से लेकर जांघ तक साफ़ नज़र आ रहा था.

अनीता तेज़ सांस लेती हुयी उसके लुंड को उभर को देख hi रही थी तो वह आदमी उसके कान में धीरे से bola,"Hai न तोहार देखने के लिए असली चीज़. ऐसे सिर्फ देखो मत, इसे छूकर देखो"

अनीता यह सुनकर एक नज़र सामने वाले सीट के तरड़ देखि तो दोनों लोग कान में ईरफ़ोन लगाए आँख बांध किये हुए थे. अनीता को यह देखकर राहत महसूस हुयी लेकिन तभी वह अपनी नाज़ुक सी बाए हाथ पर उस आदमी का बताया हाथ महसूस की जो उसे पकड़ कर अपने टांगों के बीच पंत के ऊपर से लुंड के उभर पर रखकर bola,"Chhukar देखो मेमसाहेब"

अनीता यह सुनकर अपनी हाथ जल्दी से खिंच ली और आस पास देखि. वह आदमी यह देखकर उसकी चूंकि दबाकर धीरे से bola,"Are कउनो नहीं है. आराम से छुओ जैसे हम तोहार दूध दबा रहे हैं"

अनीता यह सुनकर उसे देखती हुयी "न" में सर हिलाकर आँखों से सामने इशारा की तो वह आदमी देखा की एक पैसेंजर अपने मोबाइल में देखते हुए कुछ कर रहा था.

अनीता चुप चाप वापस बाहर देखने लगी. कुछ मिनट बाद एक पहाड़ आया तो अनीता उसे देखकर मुस्कुराने लगी. उस पर कुछ घर थे तो रौशनी आ रही थी. अनीता यह देखकर उस आदमी से धीरे से puchhi,"Yeh कौन सी जगह है?"

वह आदमी यह सुनकर उसके तरफ देखकर बाहर देखते हुए उसकी चूंकि दबाकर उसकी जान में जगह का नाम बता दिया. अनीता मुस्कुराकर boli,"Achha"

वह आदमी अनीता को देखकर puchha,"Tohaar ी नज़ारा अच्छा लग रहा है?"

अनीता यह सुनकर बाहर देखती हुयी boli,"Haan ठीक ठाक है. काम से काम कुछ इंटरेस्टिंग देखने को तो मिला नहीं तो इतनी देर से तो बस पेड़ hi दिख रहे थे"

वह आदमी यह सुनकर उससे धीरे से bola,"Are तोहार देखने और छूने के लिए हमरे पास हमार लौड़ा है तो जिसका तुम पिछली बार मालिश की थी"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी और वह तुरंत उस आदमी के तरफ उसके आँखों में देखकर boli,"Kaisi बातें करने लगते हैं आप अचानक से"

अनीता यह बोलकर सामने वाले सीट पर देखि तो जो पैसेंजर आँखों खोलकर मोबाइल में कुछ कर रहा था वह वापस आँख बांध कर चूका था. शायद वह कोई गाना सेलेक्ट करने के लिए आँख खोला था.

अनीता उसके तरफ देखि तो वह आदमी धीरे से bola,"Are ु आराम से अपना गाना सुनत है"

अनीता यह सुनकर उस आदमी के आँखों में देखि की तभी थोड़ा आगे उसे एक बड़ा सा झील दिखने लगी. अनीता उसे देखती हुयी मुस्कुराकर धीरे से boli,"Wow".

वह आदमी यह सुनकर उसकी चूंकि दबाते हुए puchha,"Achha लग रहा है का तुमको?"

अनीता यह सुनकर उस आदमी के आँखों में देखि और अगले पल उसके जांघ पर अपनी बायीं हाथ रखकर उसे सहलाती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Haan"

वह आदमी अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Abhi तो थोड़ा दूर है, नज़दीक से और अच्छा लगेगा"

अनीता यह सुनकर उसके जांघ पर अपनी हाथ फेरती हुयी थोड़ा ऊपर लेजाकर उसके जांघ के ऊपरी हिस्से पर सोये उसके लुंड पर पंत के ऊपर से हाथ रखकर उसके आँखों में देखती हुयी कामुक अंदाज़ में pucchi,"Ab ठीक है तो?"

वह आदमी यह सुनकर हल्का मुस्कुराकर bola,"Haan एक दम सही है. अब कइसन लग रहा है तुमका?"

अनीता यह सुनकर boli,"Haan अच्छा लग रहा है. देखिये नज़दीक से झील कितनी अच्छी लग रही है"

अनीता यह बोलकर बाहर देखने लगी और देखती हुयी उस आदमी के लुंड को पंत के ऊपर से सहलाती हुयी एक नज़र उसके आँखों में देखकर कामुक आवाज़ में puchhi,"Aapko कैसा लग रहा है?"

वह आदमी मुस्कुराते हुए bola,"Humka भी अच्छा लग रहा है"

अनीता यह सुनकर उसके लुंड को पंत के ऊपर से सहलाती हुयी मुस्कुराकर boli,"Aapko तो अच्छा लग hi रहा होगा. आप तो बस स्टैंड से hi ख़ास नज़ारा देखते हुए आ रहे हैं"

वह आदमी मुस्कुराकर bola,"Are तो तुमको हम कहाँ रोके थे ख़ास नज़ारा देखने से. बोलो तो अभी खोल कर दिखा देते हैं"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर उसके लुंड को पंत के ऊपर से सहलाती हुयी boli,"Koi ज़रूरत नहीं है"

और फिर अगले पल उसके लुंड के उभर को पकड़ कर boli,"Baahar से ख़ास नज़ारा दिख रहा है मुझे"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Achha ु ख़ास नज़ारा का है ी तो बोलो?"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Bataya तो आपको" और फिर वह उसके लुंड को फिर से पकड़ कर सहलाती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Yeh है"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Are दिखा कर बताओ न जैसे हम बता रहे हैं"

फिर वह अनीता की दायी चूंकि को वैसे hi दये हाथ से पकड़ कर अपने बाये हाथ को उसकी बातो चूंकि पर रखकर दोनों चूँचियों को एक साथ पकड़ कर हिलाते हुए उसके तरफ आँखों से इशारा करके bola,"Jaise हमार लिए ख़ास नज़ारा ी तोहार दोनों दूध का थांन है"

अनीता यह देखकर जल्दी से आस पास देखकर अपनी आँखें बड़ी करके उस आदमी को देखकर धीरे से boli,"Offo आप भी न".

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुरा दिया तो अनीता बेशर्मी से मुस्कुराती हुयी boli,"Ab दिखा दिया न आपने"

फिर वह अपनी बायीं चूंकि के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Ab छोड़िये भी"

वह आदमी यह सुनकर उसकी बायीं चूंकि छोड़कर bola,"Ab तुम बताओ तोहार ख़ास नज़र किधर है"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में उसे देखकर उसके लुंड को पंत के ऊपर से पकड़ कर उसे हिलती हुयी आँखों से उधर इशारा करती हुयी रणदीपाने वाली आवाज़ में boli,"Mera ख़ास नज़ारा इधर है"

वह आदमी मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह bola,"Humaar लौड़ा जिसका तुम पिछली बार मालिश की थी"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर आँखें बड़ी करके आश्चर्य से उसे देखकर अपनी सर हिलाकर धीरे से boli,"Offo अब चुप hi रहिये आप. पूरा सफर बस बोलते hi रहना है क्या आपको?"

अनीता यह सुनकर चुप चाप बाहर देखने लगी और उसके लुंड को पंत के ऊपर से hi पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी तो वह आदमी धीरे से puchha,"Tohaar बैग में तेल है की नहीं?"

अनीता उसके आँखों में देखकर सर "हाँ" में हिला दी तो वह आदमी अपने बाये हाथ से पंत का ज़िप खोलते हुए bola,"Toh हमरे लौड़ा का मालिश कर दो न"

वह आदमी यह बोलकर ज़िप खोलकर उसके अंदर हाथ घुसकर अपने लुंड को थोड़ा बाहर निकला hi था की अनीता उसके लुंड के तरफ देखकर उस आदमी से धीरे से boli,"Kya कर रहे हैं आप. सभी लोग अभी जागे हुए हैं. बांध कीजिये इसे"

वह आदमी यह सुनकर अपना हाथ वहां से हटा दिया तो अनीता बेशर्मक से उसके लुंड के तरफ आँखों से इशारा करती हुयी boli,"Are इसे अंदर डालिये"

वह आदमी अनीता की चूंकि दबाते हुए bola,"Are अभी तो बोल रही थी तुम की सब जगा हुआ है तो तुम हमार लौड़ा का मालिश नहीं कर सकती और अब तोहार अंदर डालने के लिए बोल रही हो. पजामा खोलो अंदर दाल डेट हैं"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी. वह धड़कते दिल से मगर बेशर्मी से उस आदमी के आँखों में देखती हुयी boli,"Mera मतलब वह नहीं था"

और अगले पल अनीता बिना शर्म के उस आदमी का लुंड के थोड़े हिस्से जो ज़िप से बाहर था उसे पकड़ कर अंदर करती हुयी उसका ज़िप बांध करके उसके लुंड को पंत के ऊपर से पकड़ कर ऊपर नीचे करती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Mera मतलब यह था"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Achha ठीक है, जब सब सो जायेगा तब हम तोहार लेंगे"

अनीता यह सुनकर उसके आँखों में देखकर कामुक अंदाज़ में boli,"Haan ले लीजियेगा आप मेरी. मैं तो खुद चाहती हूँ की आपको मैं दू और आप मेरी ले"

यह सुनकर उस आदमी का लुंड पंत में बेचैन होकर हिला तो अनीता मुस्कुराकर उसके लुंड को पंत के ऊपर से देखकर वापस उस आदमी के आँखों में देखकर मुस्कुराकर boli,"Ticket के पैसे"

अनीता यह बोलकर अपनी दांत दिखाकर मुस्कुराने लगी तो वह आदमी उसकी चूंकि दबाते हुए bola,"Are तोहार पैसे नहीं. हम तोहार लेना चाहते हैं"

अनीता मुस्कुराकर बेशर्मी से boli,"Haan पता है की आप मेरी लेना चाहते हैं तो मैं तो देने के लिए तैयार हूँ. वह पैसे तो मेरे hi हैं, आपको क्या लगता हैं मेरे पास अपने पैसे नहीं है आपको देने के लिए?"

अनीता फिर कामुक अंदाज़ में boli,"To जब भी आपका मेरी लेने का दिल करेगा, मैं देने के लिए तैयार हूँ. आराम से आप मेरी ले लीजियेगा, पैसे"

अनीता यह बोलकर फिर से दांत दिखती हुयी मुस्कुराने लगी. अनीता का रान्दीपना देखकर उस आदमी का लुंड पंत में बौखलाने लगा था जिसे अनीता अपनी हाथ में महसूस कर पा रही थी.

वह आदमी अनीता की बेशर्मी, बेहयाई उसकी बदचलनी और रान्दीपना देखकर खुश था और उसका खून अनीता के रणदीपाने से खौलने लगा था जिसे अनीता खुद उसके लुंड के जरिये महसूस कर पा रही थी और वह खुद भी वह महसूस करके गर्व महसूस कर रही थी की उस आदमी जैसा मर्द उसके साथ सफर कर रहा है.

अनीता फिर मुस्कुराती हुयी boli,"Lekin जब आपको मेरी लेना होगा तो लीजियेगा. तब तक के लिए चुप चाप सफर करते हैं नहीं तो लोग हमारी बात सुन्न लेंगे की आप मेरी लेना चाहते हैं".

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Aur ी भी सुन्न लेंगे की तुम हुंका देना चाहती हो"

अनीता यह सुनकर बेशर्मी से उसके तरफ देखकर मुस्कुराकर boli,"Haan बिलकुल"

वह आदमी यह सुनकर bola,"To सुन्न लेने दो. हम सबके सामने तोहार लेंगे"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके आश्चर्य से उसे देखती हुयी boli,"Offo आप भी न"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Achha ठीक है अभी सफर करते हैं आराम से"

फिर वह अनीता की चूँचियों को देखकर दायी चूंकि दबाते हुए bola,"Nazara देखते हुए"

अनीता यह सुनकर फिर से बेशर्मी से मुस्कुराकर उसके लुंड को पकड़ कर हिलती हुयी boli,"Aap नज़ारा देखिये. मैं तो बस महसूस करुँगी"

वह आदमी यह सुनकर उससे puchha,"Kaa?"

अनीता मुस्कुराती हुयी कामुक अंदाज़ में उसके लुंड को पंत के ऊपर से पकड़ कर हिलती हुयी आँखों से इशारा करके boli,"Mera नज़ारा"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुरा दिया तोह अनीता भी मुस्कुराकर उसे देखि और अपनी पीछे की बाल आगे करके उस आदमी के दये हाथ के ऊपर गिरा दी ताकि कोई देखे भी तो समझ नहीं आये की वह आदमी उसकी दायी चूंकि मुट्ठी में पकडे मसल रहा है.

वह आदमी यह देखकर अनीता को देखा तो वह कामुक अंदाज़ में उसे देखि. वह आदमी अगले पल अपने बाये हाथ से अनीता की बायीं हाथ पकड़ कर उसे अपने पंत के दये पॉकेट में घुसाने लगा तो अनीता समझ गयी और वह उसके दये पॉकेट में हाथ घुसा कर उसके पंत के पॉकेट और अंडरवियर के नीचे सोये हुए लुंड को मुठी में पकड़ कर हिलती हुयी कामुक नज़र से उसे देखि और फिर बाहर देखने लगी.
 
Hello डिअर रीडर्स. दो लेट में क्नोव योर थॉट्स अबाउट Anita's बिहेवियर सो फार इन थिस बस जर्नी. व्हाट अरे योर थॉट्स अबाउट हेर बिहेवियर एंड व्हाट काइंड ऑफ़ ा वुमन यू कंसीडर हेर तो बे. Don't होल्ड योरसेल्फ बैक, जस्ट एक्सप्रेस योर ओपिनियन अबाउट हेर फ्रीली. थिस विल हेल्प में तो अंडरस्टैंड हाउ मच ाकुरतेली ी हैवे बीन अबले तो पोर्ट्रे हेर तो थे रीडर्स इन कपरिसों तो हाउ ी वांटेड तो पोर्ट्रे हेर. थैंक्स.
 
अपडेट 112

दो घंटे के बस के सफर के बाद लगभग 10 बजे बस एक ढाबा पर रुकी. वह आदमी अभी भी अनीता की दायी चूंकि मुट्ठी में भरे हुए था और अनीता भी अभी भी उसके दये पंत के पॉकेट में हाथ डालकर उसके लुंड को सेहला और हिला रही थी.

बस रुकने पर वह आदमी bola,"Sabko उतरने दो फिर हमलोगां उतरेंगे"

अनीता यह सुनकर "हाँ" में सर हिलायी तो अगले पल उसे अंकित खड़ा होकर उनके तरफ देखता दिखा. अनीता उसे उतरने का इशारा कर दी तो वह सर "हाँ" में हिलाकर उतर गया.

जब सभी पैसेंजर्स उतर गए तो वह आदमी अनीता को bola,"Ledij फास्ट"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी एक ऐडा से boli,"Haan पता है लेडीज का कितना ख्याल है आपको"

अनीता यह बोलकर सीट से उठी तो वह आदमी उसकी गांड पर हाथ रखकर bola,"Are तोहार ख्याल तो रख रहा हूँ न हम"

अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan वह कैसे रख रहे हैं वह तो देख hi रही हूँ मैं. अब बातें बनाना बांध कीजिये और चलिए"

अनीता यह बोलकर उसके सामने से जाने लगी तो उम्मीद के मुताबिक वह आदमी उसकी कमर पकड़ कर उसकी गांड से चेहरा सत्ता दिया. अनीता कुछ नहीं बोली और अपनी बेशर्मी दिखती हुयी अपनी गांड को दया बया करके उसके चेहरे पर रगड़ कर निकलने लगी तो वह आदमी उसकी कमर छोड़कर अपने चेहरे को आगे करके उसकी गांड पर रगड़ते हुए bola,"Are जाओ तो हम कहाँ रोक रहा हूँ तुमका"

अनिते यह सुनकर निकलने का कोशिश की मगर अपनी गांड पर वह आदमी का चेहरे के दबाओ के कारण निकल नहीं पायी. अनीता यह महसूस करके मुस्कुराई और अपनी गांड को दया बया करके दो तीन बार उसके चेहरे पर रगड़ी और फिर अपनी गांड को पीछे ठेलकर उसका चेहरा धकेल कर मुस्कुराती हुयी बाहर निकल गयी और गांड मटकती हुयी जाने लगी. वह दरवाज़े के पहले घूम कर देखि तो वह आदमी उसकी गांड देख रहा था.

अनीता के रुकने पर वह आदमी उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी उसे आने के लिए आँखों से इशारा की और उसे कामुक नज़र से देखकर boli,"Main वाशरूम जा रही हूँ. आपको कुछ खाना पीना है तो खा लीजिये"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are हम तोहार ु मटकती गांड को खा जाऊंगा"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके उसे देखि और फिर मुस्कुराकर ऐसा काम की जिससे उस आदमी का खून खौलने लगा. वह अपनी गांड थोड़ा दया बया हिलाकर उसे उतरने का इशारा करके गेट के तरफ बढ़ी तो वह आदमी bola,"Ka मस्त गांड है तोहार"

अनीता बिना कुछ बोले अपनी चेहरे पर गर्व का भाव लिए गांड मटकती हुयी उतर गयी. वह उतर कर पहले अंकित के पास जाकर उसे बोली की वह आर्डर देकर जो खाना है खा ले वह पैसे दे देगी. वह उससे पूछा तो वह बोली की उसे भूख नहीं है.

अगले पल अनीता अपनी गांड पर हाथ महसूस करके अपने बगल में देखि तो वह आदमी खड़ा था. अनीता को अब इतना यक़ीन था की वह आदमी किसी के देखते हुए में उसकी गांड पर हाथ नहीं रखेगा तो वह घबराई नहीं.

वह आदमी उसकी गांड पर हाथ रखते हुए अंकित से bola,"Are तोहरी भाभी को खाना का नहीं, कउनो और चीज़ का भूख है अभी जो हमरे पास है"

अनीता की सांस यह सुनकर तेज़ हो गयी और दिल धड़कने लगी. वह उस आदमी को देखते हुए hi उसका बात सुन्न रही थी. वह आदमी अपना बात बोलकर अगले पल अनीता की तरफ नज़र करके उसकी आँखों में देखते हुए puchha,"Kaa हम सच कहत हूँ न?"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क रही थी. वह जान रही थी की वह कुछ जवाब देगी तो वह आदमी बेवजह का अंकित के सामने hi बातें बनाने लगेगा तो वह बिना कुछ बोले वापस अंकित के तरफ देखि तो उसे सवालिया नज़र से देखते पायी.

अनीता उसका सवालिया नज़र देखकर boli,"Ankit तुम खाना खाओ मैं थोड़ा वाशरूम से आती हूँ"

अंकित यह बोलकर उस आदमी के तरफ देखकर boli,"Aap को भी कुछ खाना है तो खा लीजिये. मैं आप दोनों के पैसे आकर दे दूंगी. आप टिकट किये तो खाना मेरी तरफ से ट्रीट है आपके लिए"

वह आदमी यह सुनकर अनीता की गांड सहलाते हुए bola,"Are हुंका भूख नहीं प्यास लगा है ु भी दूध का"

वह आदमी यह बोलकर नज़र एक पल के लिए अनीता की चूंकि पर डालकर वापस अनीता की आँखों में देखकर मुस्कुरा दिया. अनीता की दिल उसका नज़र अपनी चूंकि पर देखकर फिर से धड़कने लगी और उसकी धड़कन अगले पल तेज़ हो गयी जब वह अंकित का आवाज़ suni,"hahaha अरे अंकल आप इतने बड़े होकर अभी भी दूध पीते हैं"

अनीता यह सुनकर अपनी आँखें बड़ी करके अंकित को देखि जैसे उसे दांत रही हो और बहस करने से मन कर रही हो. अगले पल अनीता अपनी गांड पर उस आदमी का हाथ फिरते हुए महसूस करके उसका हसी सुनकर उसके तरफ dekhi,"Hahaha अरे बचुआ तुमका पता नहीं है की बड़ा लोग के लिए ख़ास दूध होवत है, एक दम ताज़ा ताज़ा"

वह आदमी यह बोलकर अनीता के तरफ देखकर एक नज़र उसकी चूंकि पर डालकर bola,"Ka मेमसाहेब हम सही कहत हैं तो?"

अनीता इसका जवाब नहीं दी और उस आदमी को देखकर boli,"Mujhe वाशरूम जाना है आपको जो चाहिए वह आर्डर कर दीजिये"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Humka दो बड़ा बड़ा दूध चाहिए"

अनीता यह सुनकर तेज़ सांस लेती हुयी उस आदमी को देखि मगर बिना कुछ बोले अपनी गांड मटकती हुयी वाशरूम के तरफ चल दी. वह आदमी जाते वक़्त बैकलेस कुर्ती में अनीता की आधी नंगी दूध जैसी गोरी पीठ देखने लगा जो उस बिना चाँद के अँधेरे रात में भी चमक रही थी. फिर वह एक नज़र नीचे उसकी मटकती हुयी गांड पर ले गया. अंकित वेटर के तरफ देखकर उसके आने का इंतज़ार करने लगा.

अनीता देखि की वाशरूम में कोई लाइन नहीं थी तो उसे राहत मिली मगर जब वह अंदर गयी तो अपनी नाक सिकुड़ कर एक नज़र देखि और फिर तुरंत वापस बाहर निकल आयी. वह वाशरूम बहोत hi गन्दा था. अनीता का जैसे मूड ख़राब हो गया वह बाहर आकर अपनी हैंड बैग से एक छोटा सा बोतल निकल कर कुल्ली की और फिर ढाबे के रिसेप्शन के तरफ बढ़ गयी.

वह रिसेप्शन पर जाकर boli,"Excuse में"

रिसेप्शन पर एक 20-21 साल के आस पास का लड़का था. वह अनीता को देखा तो उसका दिल धड़क गया. इतनी खूबसूरत औरत वह अपने ढाबे पर पहली बार देखा था, ऊपर से अनीता ऐसा कपडा पहनी थी जिसमे उसकी एक तिहाई चूंकि दिख रही थी.

वह धड़कते दिल से अपना थूक घोंट कर घबरा कर bola,"Ji जी मैडम"

अनीता उसे एक नज़र देखती हुयी boli,"Aap लोग वाशरूम साफ़ क्यों नहीं करते हैं? कितना गन्दा है. कोई उसे कैसे करेगा?"

वह लड़का अनीता की बात सुनते हुए उसकी बदन से आ रही खुशबु, उसकी खूबसूरती, जवानी और एक तिहाई नंगी चूँचियों को देखकर थोड़ा घबरा रहा था. उसका दिल जोर से धड़क रहा था और वह धड़कते दिल से अनीता को बात सुनकर घबराते हुए bola,"Maaf कीजियेगा मैडम"

अनीता यह सुनकर नाराज़गी से boli,"Ab माफ़ी मांगने से क्या होगा? आप लोग क्या वाशरूम कभी चेक नहीं करते हैं क्या? ढाबा का मतलब यह तो नहीं की सिर्फ खाने पर hi ध्यान देंगे बाकी चीज़ जैसे तैसे रहेगा"

वह लड़का अनीता की ख़ूबसूरती, जवानी और पर्सनालिटी के सामने घबराने लगा था. उसे समझ नहीं आ रहा था की वह क्या बोले तो वह नज़र झुका लिया.

अनीता उसके बात करने के अंदाज़ और नज़र झुकाते देख समझ गयी की उससे बातें करके कोई फायदा नहीं. वह अगले पल puchhi,"Iss ढाबे का कोई मैनेजर है या नहीं?"

वह लड़का यह सुनकर bola,"Ji मैडम. मैं बुला देता हूँ"

अनीता जवाब में boli,"Theek है"

वह लड़का जाकर मैनेजर को बुलाया. अनीता देखकर अंदाजा लगाई की वह लगभग 30 साल का होगा और उसका तोंद निकला हुआ था.

वह आकर थोड़ा टेढ़ा से bola,"Kya हुआ मैडम?"

अनीता उसके चेहरे और मुंह का गंध से समझ गयी की वह पिया हुआ है. अनीता उसे देखती हुयी boli,"Aap लोग वाशरूम साफ़ क्यों नहीं करते? कितना गन्दा है"

वह आदमी जवाब में bola,"Are मैडम अब लोग hi वैसा है तो हम क्या कर सकते है? इस्तेमाल करने के बाद साफ़ करना चाहिए न"

अनीता जवाब में boli,"Haan ठीक है लेकिन आप लोग का भी तो रिस्पांसिबिलिटी बनता है रेगुलर चेक करके साफ़ करने का. वह तो देख कर लग रहा है कितने दिनों से साफ़ नहीं हुआ है"

वह आदमी जवाब में bola,"Are मैडम हर हफ्ता साफ़ होता है. हफ्ता बीतेगा तो फिर से साफ़ होगा"

अनीता थोड़ी इर्रिटेट होकर boli,"Are ये क्या बाय हुयी. हफ्ते में आप एक बार कैसे साफ़ कर सकते हैं. यह तो रोज़ होना चाहिए"

वह आदमी जवाब में bola,"Aesa है मेमसाहेब की इहाँ हफ्ता में hi साफ़ होता है. आपको पसंद नहीं तो कहीं और जाइये. कोई और ढाबे पर जाकर इस्तेमाल कीजिये"

अनीता यह सुनकर और इर्रिटेट हो गयी तो वह परेशानी का भाव से boli,"Are यह क्या बात हुयी? आप ऐसे कैसे इग्नोर कर सकते हैं. आप को.."

अनीता पूरा बोलती उससे पहले वह आदमी bola,"Are मैडम कहे सोने का टाइम हमरा दिमाग़ का दही कर रही हो"

अनीता यह सुनकर ताने मारने के अंदाज़ में boli,"Woh तो पहले से hi दही है, दिमाग़ होता तो ऐसे बात नहीं करते आप"

वह मैनेजर यह सुनकर bola,"Jaise तुम्हारे पास बहोत दिमाग़ है. ससुरा औरत लोग का दिमाग़ होता कहाँ है"

अनीता जो आम तौर पर गुस्सा नहीं होती थी और बहोत hi शांत मिज़ाज़ की थी वह यह सुनकर गुस्से से उसे देखकर boli,"What थे हेलल! यू मिसायनिस्ट, हाउ डरे यू से..."

वह पूरा बोलती इससे पहले वह मैनेजर bola,"Zyada अंग्रेजी मत झाड़ो अब"

फिर वह रिसेप्शन पर खड़े लड़के को देखकर bola,"Are यह कैसी मुंह फट औरत है, चुप hi नहीं होती. तुम hi बात करो इससे. मैं सोने जा रहा हूँ"

अनीता जवाब में कुछ बोलती इससे पहले वह अपने साथ सफर करने वाले उस आदमी का आवाज़ suni,"Ee का हो रहत है?"

अनीता उस आदमी का आवाज़ सुनकर अपने बगल में उसे खड़ा होते हुए पायी.

वह मैनेजर यह सुनकर bola,"Are कुछ नहीं. मुंह फट औरत है ज़बान लड़ाई जा रही है"

अनीता जवाब देने के लिए मुंह खोली थी की तभी वह आदमी bola,"Aur तुम ससुरा ज़बान लड़ाई रहे हो? ससुरा कइसन मरद हो की एक औरत को अकेली देखकर उससे बहस करात हो"

अनीता को उस आदमी का आकर यूँ मैनेजर को बातें सुनना अच्छा लगा. अगले पल वह अपनी गांड पर उस आदमी का हाथ महसूस करके उसके तरफ देखि तो वह मैनेजर को देखते हुए bola,"Tum का का लगत है की ी मेमसाहेब अकेली है तो कुछो भी बोलोगे?"

फिर वह अनीता की गांड सहलाते हुए आगे bola,"Ee मेमसाहेब अकेली नहीं है, हमरा जइसन मरद है ीके साथ" और यह बोलकर वह अनीता को देखते हुए उसकी गांड सहलाना जारी रखा.

अनीता यह सुनकर उस आदमी के तरफ देखि. अनीता को न जाने क्यों अच्छा लगा उस आदमी का यूँ उसकी गांड पर हाथ रखकर प्यार से सहलाते हुए कहना की उसके जैसा मर्द अनीता के साथलिये, जैसे उसकी गांड पर हाथ रखकर अपनापन जाताना छह रहा हो.

वह आदमी मैनेजर को देखकर अनीता की गांड सहलाते हुए आगे bola,"Aur हुंका पता है की तोहरा जइसन नामर्द जिसको ी पता नहीं है की औरत के साथ कैसे पेश आया जाता है उसको तमीज कैसे सिखाया जाता है"

अनीता की चेहरे पर अब थोड़ा गर्व का भाव आ गया था उस आदमी का यह बात कहने पर. वह तो एक कॉंफिडेंट औरत थी hi और कॉन्फिडेंस से उस मैनेजर से अपनी बात कह रही थी मगर उस आदमी को यूँ उसका साथ देते देख उसका कॉन्फिडेंस बढ़ गया था और साथ में गर्व भी हो रहा था उस आदमी को उस मैनेजर जैसे बद्तमीज़, छोटे सोच का आदमी जो औरतों की इज़्ज़त नहीं करता है उसे तमीज सीखने के लिए उसे नामर्द बोल रहा है.

अनीता भी सोच रही थी की एक वह मैनेजर है जो ढंग से बात भी नहीं कर रहा था और एक यह आदमी है जो उसे जब से मिला है उसकी मदद कर रहा है चाहे टिकट लेने में हो या अभी उसका साथ देना. एक मर्द को औरत के साथ कैसे पेश आना चाहिए यह तो मैनेजर को समझ hi नहीं है तो वह आदमी तो ठीक hi कह रहा है की वह नामर्द है. मर्द तो उस आदमी जैसे होना चाहिए जो औरत की परेशानी समझे और उसकी मदद करे. अनीता को ऐसे समय में उस आदमी का उसकी गांड पर हाथ रखने पर कोई ऐतराज़ नहीं था, बल्कि उसे अच्छा लगा की वह आदमी उसकी गांड पर हाथ रखकर बात कर रहा हो, जैसे अनीता को वह आदमी एक सच्चे मर्द और एक नामर्द में फ़र्क़ समझा रहा हो. जैसे वह आदमी अनीता को बता रहा हो की उसके जैसा मर्द उसकी इस सफर में हर तरह से ख्याल रखेगा जैसे एक मर्द को करना चाहिए, चाहे उसकी जवानी का ख्याल या कोई परेशानी होने पर उसका हल निकलना हो.

वह मैनेजर यह सुनकर गुस्से में bola,"Abe कौन है तू जो मुझे नामर्द बोल रहा है?"

यह सुनते hi वह आदमी उस मैनेजर को एक थप्पड़ जड़ दिया और वह नीचे गिर गया. यह देखते hi अनीता थोड़ी परेशान हो गयी. वह कोई झमेला नहीं चाहती थी इसलिए मामला बिगड़ते देख थोड़ी परेशान हो गयी.

मैनेजर के नीचे गिरते hi वह आदमी bola,"Sasura अभी हम बतात हूँ की हम कौन हूँ..."

यह बोलकर वह आदमी मैनेजर के तरफ आगे बढ़ने वाला होता है की अनीता उस आदमी का हाथ पकड़ कर boli,"Please छोड़ दीजिये, बेवजह का बात बढाकर कोई फायदा नहीं"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are ससुरा को तमीज दिखाना ज़रूरी है" और यह बोलकर फिर वह आगे बढ़ने वाला होता है की अनीता फिर से उसे रोकती हुयी कामुक अंदाज़ में boli,"Please छोड़ दीजिये"

यह सुनकर वह आदमी अनीता के तरफ देखा तो अनीता कामुक अंदाज़ में आगे boli,"Aap जैसे मर्द को इसके जैसे आदमी पर वक़्त बर्बाद नहीं करना चाहिए. कहाँ आप और कहाँ यह. यह क्या जाने औरत से कैसे पेश आना चाहिए. इस पर हाथ छोड़ना आपके मर्दानगी पर शोभा नहीं देता है"

वह आदमी यह सुनकर अपना हाथ अनीता की गांड पर रखकर सहलाते हुए bola,"Haan सही कहत हो. ी ससुरा पर हाथ उठाकर का मिलेगा. ससुरा नामर्द कहाँ का"

फिर वह अनीता की गांड को मसलते हुए bola,"Humre जइसन मरद का हाथ सही जगह पर होना चाहिए, जैसे ी" और यह बोलकर वह अनीता की गांड पर थप थापा दिया.

अनीता बेशर्मी से उस आदमी को देख रही थी. इतने में वह स्टाफ bola,"Memsaheb पीछे एक स्टाफ टॉयलेट है. वह थोड़ा साफ़ होगा. आप वहां चले जाइये"

अनीता यह सुनकर उस स्टाफ के तरफ देखि तो वह अपना नज़र झुका लिया. इतने में वह आदमी अनीता की गांड मसलते हुए bola,"Kauno ज़रूरत नहीं है अब ीका. हम खुद इंतज़ाम कर लूंगा मैडम का मूतने का"

अनीता की दिल यह सुनकर धड़क गयी की कैसे वह आदमी मैनेजर और स्टाफ के सामने hi उसके पेशाब करने की बात कर रहा है. वह स्टाफ यह सुनकर उस आदमी को देखने लगा. अनीता उस स्टाफ को देखि और फिर उस आदमी के तरफ बड़ी आँखें करके नाराज़गी से देखि तो वह आदमी अनीता को देखने के बाद उस स्टाफ को दांत ते हुए bola,"Sasura का देखत हो. तुम का भी थप्पड़ चाहिए का?"

अनीता देखि की वह स्टाफ चुप चाप सर नीचे कर लिया. अनीता सोचने लगी की यह आदमी कैसे ऐसी बात करने के बाद स्टाफ को दांत दिया जैसे कुछ हुआ hi नहीं हो.

अगले पल वह आदमी puchha,"Hum का बोले कुछो सुनाई दिया? अगर सुनाई दिया तो हम कान के नीचे एक थप्पड़ लगा कर ठीक कर डेट हूँ"

स्टाफ और मैनेजर चुप चाप रहे. उनको ऐसे चुप चाप देख अनीता अपनी सर हल्का सा हिलायी और सोची की कैसे डरपोक लोग हैं. ऐसे लोगो के सामने वह आदमी वैसे बोल hi दिया तो क्या hi हो गया. ऐसे बात करना तो उसका अंदाज़ hi है और काम से काम उसमे खुलकर बोलने की हिम्मत तो है.

अनीता उस स्टाफ को देख hi रही थी की वह आदमी उसकी गांड थपथपाते हुए bola,"Chalo तोहार मूतने का इंतज़ाम करता हूँ हम"

अनीता यह सुनकर बिना शर्म के उस आदमी को देखि और चलने लगी. वह आदमी कॅश काउंटर के बगल से सीधा पीछे निकलने वाला एक दरवाज़ा के तरफ बढ़ गया. वह अनीता की गांड पर हाथ रखे चल रहा था. अनीता को इससे कोई ऐतराज़ नहीं था. मैनेजर और वह स्टाफ दोनों अनीता की गांड पर उस आदमी का हाथ देखे और उसके ऊपर अनीता की लगभग पूरी नंगी गोरी पीठ देखकर दोनों का दिल धड़क गया. इतनी खूबसूरत और जवान औरत को ऐसे उस आदमी जैसे लगभग 50 साल के देहाती के साथ देखकर दोनों सोच में पद गए.

दरवाज़े से निकलते हुए वह आदमी अनीता की गांड सहलाते हुए उससे bola,"Sasura लोगन का मुंह से आवाज़ निकलना बांध हो गवा हमरा आने के बाद. ससुरा लोगन सोच रहा था की तुम अकेली हो. उनका पता नहीं था की तोहरे साथ हमरे जइसन असली मरद है"

यह बात मैनेजर और स्टाफ सुन्न लिए और अगले पल वह दोनों अनीता की बात sune,"Haan. मेरे साथ बहस करके अपनी मर्दानगी दिखा रहे थे और जब आप जैसे असली मर्द से पाला पड़ा तो चुप हो गए"

वह आदमी अनीता की गांड सहलाते हुए bola,"Tum रोक दी नहीं तो ससुरा लोगन का गांड तोड़ देते हम"

अनीता यह सुनकर कामुक अंदाज़ में boli,"Kyunki मैं नहीं चाहती थी की आप जैसे मर्द अपना वक़्त उन जैसे लोगो पर जाय करे और हमारा वक़्त बर्बाद हो"

वह आदमी यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की गांड सहलाते हुए bola,"Haan सही बोली. हुंका भी अपना हाथ उनलोगां पर उठाकर का मिलता. हमरा हाथ तो इहाँ होना चाहिए"

यह बोलकर वह आदमी अनीता की गांड को मसलते हुए हल्का सा थप्पड़ मार दिया तो अनीता कामुक अंदाज़ में "आउच" की तो वह आदमी मुस्कुरा दिया. अनीता उस आदमी को देखि और फिर अपनी गांड की मटक बढ़ा दी.

यह सब वह स्टाफ और मैनेजर देख रहे थे. अनीता और वह आदमी दरवाज़े से बाहर निकल चुके थे और बाहर hi जाने पर वह आदमी अनीता की गांड पर थप्पड़ मारा था मगर दरवाज़े से सीधा सामने होने के कारण मैनेजर और स्टाफ दोनों देख पाए. आगे चलकर वह आदमी दया घूमकर अनीता को ढाबे के पीछे ले गया.

लगभग आधे घंटे बाद अंकित देखा की अनीता उसके पास आकर बैठ गयी. अंकित अभी भी खा रहा था. वह यह नहीं पूछा की वह आधे घंटे कहाँ थी. वह पूछ कर अनीता को नाराज़ नहीं करना चाहता था.

अंकित देखा की वह आदमी अपने हाथ में बियर पकडे उनके खटिया के पास आकर bola,"Ka रे बचुआ, खाना कइसन है?"

अंकित यह सुनकर bola,"Haan अंकल खाना ठीक है. आप खा सकते हैं"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Are हम बोले न की हम दूध पियूँगा"

वह आदमी यह बोलकर अनीता को देखा तो वह अंकित से boli,"Tum खाओ मैं बस में जा रही हूँ"

अनीता फिर उस आदमी को देखकर boli,"Aapko और कुछ चाहिए क्या?"

वह आदमी यह सुनकर bola,"Nahin, बस हो गवा हमार ी बियर के बाद दूध पीना है हुंका"

अनीता यह सुनकर पैसे निकल कर अंकित को देती हुयी boli,"Ankit इनका बियर का भी पैसा साथ में दे देना. मैं बस में जा रही हूँ"

अंकित यह सुनकर सर हिलाकर puchha,"Bhabhi आप कुछ भी नहीं खाएंगी"

अनीता कुछ बोलती इससे पहले वह आदमी bola,"Are तोहार भाभी को अभी मलाई चाहिए. वह मलाई खायेगी"

अनीता एक नज़र उस आदमी के तरफ देखि तो वह आदमी अनीता को देखकर bola,"Hum बस में जा रहा हूँ"

वह आदमी जाने लगा तो अंकित धीरे से अनीता से bola,"Kaisa अजीब आदमी है यह. क्या बोल रहा था"

अनीता यह सुनकर boli,"Uski बातें छोडो और खाने पर ध्यान do.Main भी बस में जा रही हूँ. तुम आराम से खाना खाओ. अभी भी थोड़ी देर बस रुकेगी. कुछ और खाना हो तो माँगा लेना"

अनीता यह बोलकर उठकर बस में चली गयी.

लगभग 10 मिनट बाद अंकित बस में चढ़ा तोह देखा वह आदमी बैठे हुए अपने गॉड के तरफ देख रहा था. अनीता उसके बगल में नहीं दिख रही थी तो अंकित सीट के तरफ जाते हुए bola,"Uncle भाभी कहाँ गयी"

यह सुनकर वह आदमी bola,"Are तुम इधर कहे आ रहे हो. जाओ अपने सीट पर"

अंकित जवाब में bola,"Par भाभी..."

अंकिता इतना hi बोलै था की वह देखा अनीता अपनी सर नीचे से उठती हुयी होंठ को हल्का पोंछती हुयी boli,"Are मैं एहि हूँ और कहाँ जाउंगी. वह एक सामान नीचे गिर गया था तो खोज रही हूँ. तुम अपने सीट पर जाओ"

अंकित यह सुनकर bola,"Bhabhi मैं खोज देता हूँ"

अंकित यह बोलकर उसके सीट के तरफ जाने लगा तो अनीता boli,"Nahin कोई ज़रूरत नहीं है. तुम जाकर आराम करो अपने सीट पर"

वह आदमी अगले पल सख्ती से bola,"Are ससुरा कइसन लड़का हो तुम. बड़ा लोगन का बात समझ नहीं आता है का. जाओ अपने सीट पर"

अंकित यह सुनकर अनीता के तरफ एक नज़र देखा तो वह आँखों से उसे उसके सीट के तरफ इशारा की. अंकित ध्यान दिया की अनीता की गोरा चेहरा हल्का पिंक हो गया था, खासकर उसकी नाक. अंकित अनीता को देखकर चुप चाप सर हिलाया और जाने लगा.

वह सीट पर बैठने से पहले पीछे देखा तो वह आदमी अनीता को आँखों से नीचे के तरफ इशारा कर रहा था. अनीता यह देखकर नीचे झुक गयी और वह आदमी अपने गॉड के तरफ फिर से देखने लगा. अंकित चुप चाप अपने सीट पर बैठ गया.

लगभग 5 मिनट बाद अंकित पीछे देखा तो वह आदमी आराम से अपना सीट इंक्लिनेड करके लेता हुआ अपने गॉड के तरफ देख रहा था मगर अनीता अभी भी नहीं दिख रही थी.
 
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