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रामु उस नाले के साइड बने रोड के तरफ रिक्शा मोड़ दिया. वह रोड पूरा खली था मगर पुराण और थोड़ा टुटा फूटा था क्यूंकि शायद इस्तेमाल नहीं होता था. उस रोड के एक तरफ जिधर नाला था उधर नाले के किनारे लाइन से पेड़ लगे हुए थे और दूसरी तरफ पुराने छोटे मोठे फैक्ट्रीज थी जो बांध पड़े थे. तो देखा जाये तो अनीता को रामु के साथ रिक्शा पर जाते कोई नहीं देख सकता था. पेड़ होने से छाओं भी था और धुप से भी वह बच रही थी मगर रोड ख़राब होने से रिक्शा जर्क कर रहा था.
रिक्शा के जर्क होने से अनीता की दोनों बड़ी चूँचियाँ जो बिना ब्रा के पतले कपडे के ब्लाउज में थी वह खुल कर हिल रही थी. अनीता की पल्लू बायीं ब्लाउज के एक चौथाई हिस्से के ऊपर hi थी. बायीं चूंकि का बाकी का हिस्सा का ब्लाउज और दये चूंकि के ऊपर का पूरा ब्लाउज पर कुछ नहीं था जिसके कारण से उसकी दोनों बड़ी चूँचियों का हिलना साफ़ साफ़ पता चल रहा था.
अनीता की नज़र चलते हुए सामने रिक्शा के आईने में पड़ी तो वह देखि की उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ कैसे रिक्शा जर्क होने के कारण हिल रही थी, कैसे ऊपर नीचे और दये बाये हो रही थी. अनीता साथ hi यह देखि की पतले कपडे के ब्लाउज में उसकी दोनों चूँचियों के निप्पल का छाप उसकी ब्लाउज पर साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. कोई भी देखकर समझ सकता था की अनीता ब्रा नहीं पहनी है.
अनीता यह देखकर आईने से नज़र हटाने वाली hi थी की आईने में उसे रामु का चेहरा दिखा जो आईने में उसकी चूँचियों को hi देख रहा था. अनीता की दिल यह देख कर धड़क गयी.
अगले पल रिक्शा थोड़ा और जर्क हुआ तो अनीता हलकी चीखती हुयी boli,"ouch आअह्ह्ह रामु जी"
रामु अनीता की चीख सुनकर आईने में उसको देखकर bola,"memsaheb आप ठीक है तो कहीं..."
रामु इतना बोलै hi था की उसका नज़र अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियों पर पड़ा जो ब्लाउज में कैद हुयी हिल रही थी. रामु ध्यान दिया तो देखा की अनीता की निप्पल उसकी ब्लाउज से सटी हुयी अपनी आकार दिखा रही थी तो वह अपना बात पूरा बोले बिना hi रूककर अनीता की चूंकि देखने लगा.
वहीँ अनीता भी रामु का बात सुनकर आईने में देखि तो उसे ध्यान आया की रामु उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता फिर से एक नज़र अपनी चूँचियों पर डाली तो देखि की उसकी चूँचियों थोड़ा थोड़ा हिल रही है और निप्पल का इम्प्रैशन ब्लाउज के कपडे पर दिख रही है. अनीता समझ गयी की रामु वही देख रहा है और यह समझते hi उसकी धड़कन तेज़ हो गयी.
वह धड़कते दिल और तेज़ सांस से रामु को आईने में देखि तो रामु को ध्यान आया की अनीता उसे hi देख रही है तो वह जब नज़र उठाया तो अनीता से उसकी नज़र मिली तो वह घबराकर सामने देखते हुए bola,"maaf कीजियेगा मेमसाहेब. यह रोड बहोत ख़राब है तो आपको परेशानी हो रही है, मगर इस रोड में छाओं है और थोड़ी शान्ति भी है. हम कोशिश कर रहा हूँ की अच्छे से रिक्शा चलौं ताकि ज़्यादा हिल दोल न हो. अगर आपको परेशानी हो रही है तो हम दूसरे रास्ते से चल सकत हैं"
अनीता यह सुनकर boli,"Nahin रामु जी कोई बात नहीं. मैंने hi तो आपको बोलै इधर से चलने के लिए".
रामु यह सुनकर वापस आईने में अनीता को देखा तो वह अपनी बात जारी रखती हुयी आगे boli,"Yeh रोड hi सही है, ठंडा भी है और शान्ति भी है".
रामु यह सुनकर अपना नज़र नीचे करके फिर से अनीता की चूँचियों को देखने लगा वहीँ अनीता रामु को अपनी चूँचियों पर नज़र ले जाते हुए देखकर भी अपनी बात आगे boli,"Rahi बात ख़राब रोड की तो आप कोशिश कर रहे हैं अच्छे से रिक्शा चलने की और रिक्शा की सीट भी अच्छी है. मुझे कोई परेशानी नहीं है, बस थोड़ा आराम से चलाइये"
रामु यह सुनकर अनीता को वापस देखा तो अनीता मुस्कुरा दी. रामु अनीता को मुस्कुराते देख हल्का मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब आराम से चलते हैं. पहली बार आप हमरे रिक्क्षा पर बैठी हैं ससुरा आपको तकलीफ होगा तो हुंका अच्छा नहीं लगेगा"
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर आईने में रामु को देखि तो वह मुस्कुराने के बाद नज़र नीचे करके अनीता की चूँचियों को देखने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Aese रामु जी आप बुरा न माने तो एक बात पूछूं?"
रामु यह सुनकर थोड़ा घबराकर अनीता को देखा तो उसके चेहरे पर नार्मल भाव देखकर थोड़ा रिलैक्स होकर bola,"Are मेमसाहेब हुंका आपका बात कहे बुरा लगेगा. पूछिए का पूछना चाहती हैं आप?"
अनीता मुस्कुरा कर puchhi,"Aap तो हरिया जी के साथ दूकान में काम करते हैं, तो फिर यह रिक्शा?"
रामु यह सुनकर bola,"Kabhi कभी मौक़ा मिलता है तो चला लेट हैं. थोड़ा कमाई हो जाट है ऊपर से ज़रूरत पड़ने पर कहीं आने जाने में काम भी आ जावत है, जैसे आज"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी रामु को देखकर boli,"Ohh. चलिए इसी बहाने मुझे भी घर जाने के लिए कुछ मिल गया"
रामु मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब. अगर रिक्क्षा नहीं होता तो हम कउनो इंतज़ाम कर देते. आपको हम परेशानी कैसे होने देते"
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर रामु को देखि तो वह मुस्कुराते हुए hi अनीता की चूँचियों को एक नज़र फिर से देखकर वापस सामने सड़क पर देखकर रिक्शा चलने लगा.
अनीता देखि की कैसे रामु पहले उसकी चूँचियों को देखकर फिर सड़क पर देखने लगा तो वह एक नज़र खुद भी अपनी हिलती हुयी चूँचियों को देखि की कैसे सड़क पर जेर्किंग होने से उसकी चूँचियाँ हिल रही है की तभी वह देखि की रामु जल्दी से एक नज़र फिर उसकी चूँचियों पर डालकर puchha,"Abhi ठीक है तो मेमसाहेब? आपको परेशानी तो नहीं हो रहा है?"
रामु यह बोलकर वापस सड़क पर देखने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Haan रामु जी ठीक है. आप बहोत संभलकर रिक्शा चला रहे हैं".
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह भी मुस्कुरा दी और फिर रामु नज़र नीचे करके उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा.
अनीता देखि की रामु कैसे उसकी हिलती हुयी चूँचियों को बार बार देख रहा था मगर वह बुरा नहीं मानी. वह अपनी गांड पर रामु का लुंड एक बार महसूस कर चुकी थी तो वह जानती थी की रामु भी एक भरपूर मर्द है और एक मर्द होने के नाते उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देखेगा hi. यह तो प्रकृति का नियम है.
अनीता रामु को एक नज़र देखि और फिर अपनी कान के पास के बालों में हाथ फेरकर उसे कान के पीछे करके आस पास देखने लगी.
रामु फिर से आईने में देखा तो पाया की अनीता आस पास देख रही थी. अगले पल रामु अपना नज़र नीचे करके आईने में अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखा तो अनीता की भी नज़र आईने में अपनी चूँचियों पर गयी जो हिलकर ऊपर नीचे हो रही थी. वह एक नज़र रामु के तरफ देखि जिसका ध्यान कभी सड़क पर तो कभी उसकी हिलती हुयी चूँचियों के तरफ जा रहा था और फिर बिना कुछ रिएक्शन के वापस आस पास देखने लगी. वहीँ अनीता की चूँचियों को हिलते और ऐसे अनीता की निप्पल का इम्प्रैशन उसकी ब्लाउज पर देखकर रामु का लुंड धोती में खड़ा होने लगा था.
कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता puchhi,"Ramu जी" और इतना बोलती हुयी वह वापस आईने में देखि तो अभी भी उसकी चूँचियों हिल रही थी जिसे रामु देख रहा था. वह यह देखकर अपनी बातें आगे boli,"yeh सभी फैक्ट्रीज बहोत सालों से बांध पड़ा लग रहा है"
अनीता देखि की रामु का नज़र उसकी हिलती चूँचियों पर था और वह बात सुनकर जवाब देने के लिए मुंह खोला तो उसे आईने में देखते हुए देख अपना नज़र रोड के तरफ करते हुए bola,"Haan मेमसाहेब".
अनीता यह सुनकर उससे puchhi,"Koi शुरू करना नहीं चाहता है क्या? इसके शुरू करने से कितना रोज़गार मिलता यहाँ के लोगो को"
रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब ी फैक्ट्री सब झमेला वाला हो गवा है, ु केस मुक़दमा चल रहा है, राजनीती, गुंडा हर एक चीज़ का मसला है"
और बोलकर वह एक नज़र आईने में अनीता की चूँचियों को देखने लगा की तभी अनीता उसे देखती हुयी boli,"Achha" तो अनीता की बात सुनकर वह नज़र ऊपर करके देखा तो समझ गया की अनीता उसे अपनी चूँचियाँ देखते हुए देख ली मगर वह रियेक्ट करता इससे पहले एक गड्ढा आया और रामु का नज़र सामने न होने से गड्ढे से रिक्शा गुज़रा तो जोर से जर्क हुआ और अनीता की चूँचियाँ जोर से हिलने लगी.
रामु तुरंत आईने में देखकर अनीता से माफ़ी maanga,"Maaf कीजियेगा मेम..." की तभी ऊपर नीचे होती अनीता की बड़ी चूँचियाँ पर उसका नज़र पड़ा और वह उतना hi बोले मुंह खोलकर अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए 2-3 सेकण्ड्स बाद अपना बात पूरा किया,".. साहेब"
अनीता रामु को ऐसे मुंह खोलकर उसे आईने में देखते हुए देख चेहरे पर बिना कोई रिएक्शन लायी शांत मिज़ाज़ से boli,"Koi बात नहीं रामु जी"
रामु यह सुनकर नज़र उसकी चूँचियों से ऊपर करके उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता boli,"Ab रोड hi ऐसा है तो क्या किया जा सकता है"
रामु यह सुनकर थोड़ा घबरा कर bola,"Haan मेमसाहेब. सच में आप बहोत अच्छी है. हालात समझ रही हैं की ी रोड hi ऐसा है"
रामु यह बोलकर एक नज़र अनीता की ऊपर नीचे हिलती चूँचियों को देखा. वहीँ अनीता उसका बात सुनकर मुस्कुरा boli,"Haan रामु जी हालत तो समझनी hi चाहिए. हर चीज़ इंसान के बस में थोड़े होता है. अब सड़क में गड्ढे हैं तो आप क्या कर सकते हैं. बस जब गड्ढे आये तो थोड़ा ध्यान से रिक्शा चलाइये"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Theek है मेमसाहेब" और रोड पर ध्यान देकर चलने लगा. रामु अब कोशिश करने लगा की बड़े गड्ढो से बचा कर रिक्शा चलाये और अचानक कोई जर्क न हो, मगर रोड ख़राब होने से थोड़ा बहोत जेर्किंग हो hi रहा था जिससे अनीता की चूँचियाँ हर कुछ सेकण्ड्स बाद हिलने लग रही थी.
अनीता जैसी इतनी खूबसूरत, सेक्सी और जवान औरत की बड़ी बड़ी चूँचियाँ खासकर बिना ब्रा के जब हिले तो कोई भी मर्द देखने से कैसे रोक सकता था. रामु के साथ भी ऐसा hi हो रहा था. वह न चाहते हुए भी जब जब रिक्शा जर्क हो रहा था आईने में अनीता की चूँचियाँ देखने लगता था. अनीता भी यह बात समझ चुकी थी तो वह भी जब जब रिक्शा जर्क हो रहा था अपनी आँखों के कोने से आईने में देखती की रामु उसकी चूँचियाँ देख रहा है या नहीं.
एक जगह ऐसे hi जर्क होने पर अनीता देखि की रामु का ध्यान आईने में उसकी चूँचियों पर नहीं है तो वह रामु के चेहरे पर देखि जो सामने देख रहा था. उसी वक़्त रामु सामने देखते हुए bola,"Memsaheb रिक्शा को थोड़ा जोर से पकड़ लीजिये"
अनीता यह सुनकर सामने देखि तो पूरा रोड का चौड़ाई hi गड्ढा था और उससे बचने का कोई उपाय नहीं था. रिक्शा को उससे होते हुए hi जाना पड़ता. अनीता को अच्छा लगा की रामु ध्यान से रिक्शा चला रहा है और गड्ढे में जाने से पहले उसे बोल भी दिया की वह जोर से रिक्शा पकड़ ले.
अनीता जोर से रिक्शा पकड़ ली उसके कुछ सेकण्ड्स बाद रिक्शा उस गड्ढे में उतरा तो फिर से अनीता की चूँचियाँ हिलने लगी. अनीता आईने में देखि तो रामु नहीं देख रहा था. उसका ध्यान सड़क पर था. अगले कुछ सेकण्ड्स तक रिक्शा उस गड्ढे से चला और फिर ऊपर के तरफ उठकर सड़क के नार्मल लेवल पर अब गया.
नार्मल लेवल पर आने के बाद रामु अनीता से puchha,"Ab ठीक है तो मेमसाहेब?"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी"
रामु यह सुनकर मुस्कुराया और न चाहते हुए भी उसका नज़र आईने में अनीता की हिलती चूँचियों पर चला गया तो अनीता boli,"Ab ठीक है. आप ध्यान दे रहे हैं अब"
रामु यह सुनकर नज़र अनीता की चूँचियों से ऊपर उसके चेहरे पर किया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Aese hi ध्यान से चलाइये"
रामु का लुंड यह सुनकर धोती में hi तन तना गया. अनीता की बात का टाइमिंग ऐसा था की लग रहा हो वह रामु को अपनी चूँचियों को ध्यान से देखने के लिए बोल रही है. सच्चाई क्या था यह तो अनीता hi जानती थी मगर बात यह था की रामु पूरा गड्ढे को सड़क पर देखते हुए hi पार किया था तो वह गड्ढे के वक़्त सड़क पर hi ध्यान दिए था.
खैर जो भी हो रामु का कॉन्फिडेंस अनीता को मुस्कुराता देख थोड़ा बढ़ गया था और वह भी अनीता को देखकर मुस्कुरा दिया और नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र आगे सड़क पर देखि तो कोई गड्ढा नहीं था तो वह बिना कुछ बोले आस पास देखने लगी.
अब सड़क के नार्मल लेवल पर आने के बाद रिक्शा पहले जैसे चलने लगी और छोटे मोठे गड्ढे से गुज़रते वक़्त रिक्शा में थोड़ा जर्क हो रहा था, मगर इतना नहीं की अनीता को बहोत परेशानी हो, हाँ उसकी चूँचियाँ ज़रूर हिल रही थी और हिलती भी क्यों नहीं. उसकी चूँचियाँ बड़ी बड़ी थी और बिना ब्रा के थी तो थोड़ा सा भी रिक्शा जर्क होने पर तो हिलना hi था. अनीता को इससे कोई परेशानी नहीं थी. वह भी पहले के जैसे जब जब गड्ढा आता तो आईने में देखती तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए पाती. अनीता भी आईने में एक दो बार अपनी चूँचियों को देखि की गड्ढे आने पर कैसे हिल रही हैं और निप्पल का छाप तो साफ़ साफ़ पता चल रहा है मगर उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आयी.
आगे चलकर एक दो जगह थोड़ा बड़ा गड्ढा था और आराम से चलने के बाद भी थोड़ा जर्क हुआ तो अनीता हलकी cheekhi,"ouch आआअह्ह्ह" और उसकी चूँचियाँ हिलने लगी तो रामु bola,"maaf कीजियेगा मेमसाहेब.."
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी अब बार बार माफ़ी मांग कर मुझे शर्मिंदा मत कीजिये. आप अच्छे से रिक्शा चला रहे हैं. रोड hi ऐसा है तो क्या कर सकते हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर आईने में अनीता को देखा तो रिक्शा हल्का हल्का जर्क होने से उसकी चूँचियाँ लगातार हिल रही थी.
अनीता अपनी चूँचियों को हिलता महसूस करती हुयी आगे बोलना जारी rakhi,"Aur ऐसे भी आपने तो मुझसे बोलै hi था की रोड ख़राब है. यह तो मेरा फैसला था की इधर से hi आप ले चले. बस मैं बड़े गड्ढे के बारे में बोल रही थी की उस वक़्त थोड़ा ध्यान देकर चलाये जो आप कर hi रहे हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को आईने में देखने के बाद एक नज़र सामने देखा तो रिक्शा एक छोटे गड्ढे से गुज़रा. रामु रिक्शा ठीक से चलाया मगर फिर भी हल्का जर्क हो hi गया तो अनीता फिर ी हल्का cheekhi,"ouch आह्हः" मगर इस बार उसे हसी आ गयी और वह खिलखिलाने lagi,"Hehehe ओह माय गॉड यह रास्ता सच में हेहेहे".
अनीता खिलखिला रही थी और साथ hi उसकी चूँचियाँ फिर हिलने लगी. अनीता को खिलखिलाते देख रामु भी मुस्कुराने लगा और अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा. अनीता आईने में देखि की रामु उसकी चूँचियों को hi देख रहा है मगर वह बिना बुरा माने बस खिलखिला रही थी.
इसके बाद आगे चलकर कोई गड्ढा नहीं था मगर सड़क बनाने के लिए जो एग्रीगेट इस्तेमाल होता है वह अब टूट चूका था और रोड पर चिकनाहट नहीं थी. पूरा रोड पर बस वह टूटे हुए एग्रीगेट hi भरे हुए थे जिससे रोड रफ़ हो चूका था. इस पर रिक्शा चलने के कारण अब लगातार हिलने लगी थी हालाँकि बहोत जोर से नहीं हिल रही थी की अनीता को बहोत परेशानी हो मगर इतना तो था hi की उसकी चूँचियाँ लगातार हिलने लगी.
अनीता पहले से hi खिलखिला रही थी और अब लगातार रिक्क्षा के जर्क होने से वह अपनी चूँचियों को लगातार ऊपर नीचे होते महसूस करके खिलखिलाती हुयी आगे boli,"Aahhh रामु जी हेहेहे मैंने ज़िन्दगी में कभी ऐसा रास्ता नहीं देखा हेहेहे ओह माय गॉड सीरियसली"
रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसे आईने में देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप बड़े शहर से आयी हैं. यहां तो रास्ता एक दम चिकना रहता होगा" और वह बोलकर मुस्कुराते हुए वापस अनीता की चूँचियों को हिलता देखने लगा.
अनीता देखि की रामु फिर से उसकी चूँचियों को देखने लगा था. वह उसका बात सुनकर खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe हाँ रामु जी मगर वहां भी बरसात में कहीं कहीं थोड़े गड्ढे हो जाते हैं मगर यह रास्ता तो यूनिक hi है".
अनीता अपनी बात आईने में रामु को देखती हुयी बोल रही थी मगर रामु का ध्यान उसकी चूँचियों पर थी. अगले पल रिक्शा थोड़ा तेज़ जर्क हुआ तो अनीता हलकी cheekhi,"aaahhh रामु जी हेहेहे" और उसकी दोनों चूँचियाँ भी वैसे hi तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी. अनीता की चीख सुनकर रामु उसकी चूँचियों से नज़र ऊपर किया तो अनीता को खिलखिलाते देखा. रामु को यक़ीन था की अनीता उसे अपनी चूँचियों को हिलता देखते हुए देख चुकी थी मगर वह कुछ बोली नहीं बस है रही थी.
अनीता को ऐसे हस्ता देख रामु को अच्छा लगा और साथ hi कॉन्फिडेंस भी बढ़ा तो वह मुस्कुराते हुए अनीता की चेहरे पर देखने के बाद उसकी हिलती हुयी चूँचियों को वापस देखकर bola,"Memsaheb कउनो परेशानी तो नहीं है. रोड ससुरा ऐसा hi है"
अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe नहीं रामु जी. मुझे तो अब लगने लगा है जैसे मैं झूला झूल रही हूँ. देखिये कैसे पूरी बदन हिल रही है मेरी हेहेहे जैसे मैं सच में झूल रही हूँ"
रामु यह सुनकर एक नज़र सड़क पर डालने के बाद वापस अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए bola,"Hahaha मेमसाहेब हाँ सच में पूरा हिल रही है मेमसाहेब. सच में लग रहा है की आप झूला झूल रही हैं"
रामु का बात सुनकर अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe ओह माय गॉड रामु जी" तो रामु मुस्कुराते हुए अनीता की आँखों में देखा तो अनीता हस्ती rahi,"Hehehe" तो रामु वापस उसकी चूँचियों के तरफ देखकर मुस्कुराने लगा तो अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe रामु जी और कितना झूला झुलाएंगे आप मुझे"
रामु यह सुनकर अनीता की आँखों में देखा तो फिर से समझ गया की अनीता उसे अपनी चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए देख चुकी थी.
रामु अनीता को देखकर मुस्कुरा कर bola,"Jab तक आप झूलना चाहेंगी"
फिर एक नज़र वह अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"hum झुलाएंगे मेमसाहेब".
रामु यह बोलकर वापस अनीता की चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Hehehe रामु जी और कितना झुलु मैं. देख तो रहे हैं आप कैसे जबसे इस रोड पर रिक्शा आया है तबसे तो हिल hi रही हूँ"
रामु का लुंड अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखकर तन तना कर धोती में खड़ा हो चूका था और जेर्किंग के कारण वह भी उसके धोती में हिल रहा था. अनीता की बात सुनकर उसका लुंड और बौखका गया और हिलने लगा. वह अपना धड़कन काबू में करते हुए अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब देख रहे हैं की कितना हिल रहा है"
रामु यह बोलकर अनीता की आँखों में देखा तो वह मुस्कुराकर boli,"Aap को नहीं लगता रामु जी की इतना झूलने के बाद थोड़ा आराम भी मिलना चाहिए"
रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब आराम तब मिलना hi चाहिए. बहोत देर से हिल रहा है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा दी और boli,"Aur कितनी देर है घर पहुँचने में?"
रामु यह सुनकर bola,"Bas दो तीन मिनट और मेमसाहेब"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और फिर आस पास देखने लगी. कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता एक नज़र आईने में देखि तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. रामु को भनक लगा तो वह आँख ऊपर करके अनीता को देखा तो वह मुस्कुराती हुयी अपनी कान के पास के बाल को कान के पीछे करके बिना कुछ बोले आस पास देखने लगी. वहीँ रामु सड़क पर एक नज़र डालने के बाद बेझिझक अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र फिर से आईने में देखि तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते पायी. अनीता एक नज़र अपनी चूँचियों को देखि जो ऊपर नीचे होकर हिल रही थी और ब्लाउज के पतले कपडे में उसकी निप्पल्स की छाप साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. बल्कि लगातार ब्लाउज के कपडे से उसकी निप्पल घिसने से कड़ी हो चुकी थी और ब्लाउज के कपडे पर पहले से ज़्यादा उसकी छाप दिख रही थी.
अनीता अपनी चूँचियों और निप्पल के छाप को देखकर एक गहरी सांस ली और आस पास देखने लगी. उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आयी की कैसे उसकी चूँचियाँ लगातार हिल रही है, उसकी निप्पल्स का छाप उसकी ब्लाउज में साफ़ साफ़ समझ आ रही थी और कैसे एक ग़ैर मर्द जो न सिर्फ एक गंवार मज़दूर था, बल्कि उससे लगभग 20 साल बड़ा है वह लगातार उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देख रहा था.
दो तीन मिनट बाद रिक्शा अनीता के दरवाज़े के पास पहुँच गयी. रामु जिस रास्ते से उसे लाया था वह अनीता की घर के बाये तरफ के सड़क था जिसके कारण उसे ऑटो स्टैंड के तरफ से नहीं आना पड़ा था जो की उसके घर से सामने सीधा रास्ता था. वह रास्ता हरिया के घर से लेकर उसके घर तक पूरा सुननसँ था और रोड ख़राब था. वह इसलिए की उस रास्ते पर पुराण बांध पद चुके फैक्ट्रीज थे जिसके बांध होने के कारण रोड का मेंटेनेंस नहीं हो रहा था. हरिया के घर से कुछ दुरी तक एक तरफ नाला दूसरे तरफ फैक्ट्रीज थे मगर थोड़ी दुरी के बाद, मतलब अनीता की घर से लगभग एक किलोमीटर पहले वह नाला दूसरे तरफ घूम जा रहा था और अनीता की घर से लेकर वहां तक एक तरफ खली ज़मीन थी जो की राज के कंपनी का था और दूसरे तरफ एक पुराण फैक्ट्री और फिर एक बड़ा सा पार्क था जो की बांध था और ज़्यादातर पियक्कड़ और जुआरी लोग कभी कभी रात में इकठ्ठा होते थे.
पूरा रास्ता में दोनों तरफ पेड़ था जिसके कारण वह छाओं में hi आयी और सुननसँ होने के कारण कोई दिखा भी नहीं. घर के पास जब रिक्शा रुका तो रामु रिक्शा से उतारते हुए bola,"Ek मिनट हम आपके उतरने में मदद करते हैं"
अनीता यह सुनकर उसे देखकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी नहीं तो फिर से मैं कहीं गिरने न लागु"
रामु उतारकर रिक्शा के पास आया और दये हाथ से सीट को पकड़ कर उठने लगी फिर वह उतरने लगी तो उसकी हाथ अपने आप रामु के बाये कंधे पर चली गयी और रामु का दया हाथ उसकी बायीं कमर पर जिसे पकड़ कर वह अनीता को संभाला. अनीता जैसी अमीर, खूबसूरत और पढ़ी लिखी औरत जो किसी हीरोइन और मॉडल से काम नहीं थी उसकी कमर पर हाथ रखकर रामु का दिल धड़क गया और लुंड में बेचैनी होने लगा मगर वह अनीता की कमर पर हाथ उसको छेड़ने के इरादे से नहीं बल्कि सच में मदद करने के लिए किया था.
खैर उसका इरादा भले hi अनीता को छेड़ने का नहीं था मगर था तो वह मर्द hi तो अनीता जैसी औरत की नंगी कमर पर हाथ रखने से उसे कैसे अच्छा नहीं लगता. उसे अनीता की कमर पर हाथ रखकर अच्छा लग रहा था. इतना चिकना, मुलायम और गोरी कमर था की उसे लग रहा था की फूल पर हाथ रखा हुआ है.
अनीता उसके कंधे पर हाथ रखकर उतर कर मुस्कुरा कर boli,"Thank यू रामु जी मुझे घर तक छोड़ने के लिए"
रामु यह सुनकर अनीता की कमर पर हाथ रखे हुए hi bola,"Are मेमसाहेब हुंका कहे शर्मिंदा कर रही हैं आप. आप हम ग़रीब लोगन का इतना ख्याल रखती हैं. हरिया के ग़रीब झोपड़े में उसे देखने आयी. उसका इलाज के लिए पैसे दी. इतना कौन करता है. सच में आप बहोत अच्छी है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Ramu जी फिर से अमीर ग़रीब की बातें करने लगे आप"
रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब. अब जो हमलोगां है ु तो है"
अनीता मुस्कुराकर boli,"Mere लिए नहीं है. आप सब बस इंसान हैं मेरे लिए."
रामु यह सुनकर bola,"Memsaheb एक बात बोले आप बुरा नहीं मानियेगा तो?"
अनीता यह सुनकर एक ऐडा से boli,"Kya रामु जी? बोलिये जो भी बोलना है"
रामु यह सुनकर अनीता की कमर को देखते हुए bola,"Aap जतना खबसूरत हैं उतना hi दिल की अच्छी भी हैं. और जैसे हरिया कहत हैं आपका दिल भी बहोत बड़ा है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo रामु जी"
और फिर वह एक ऐडा से boli,"Aap और हरिया जी भी तो मेरी कितनी मदद करते रहते हैं. उस दिन आप नहीं होते तो क्या मेरा पानी का प्रॉब्लम इतनी जल्दी सोल्वे होता? यहाँ मैं जानती hi किसे हूँ. यह तो आप और हरिया जी हैं जो मेरा इतना ख्याल रखते हैं और कोई भी प्रॉब्लम होता है तो मदद करने आ जाते हैं"
रामु यह सुनकर अनीता की कमर पर हाथ रखे hi bola,"Memsaheb कउनो परेशानी होगा तो बोलियेगा. आप बहोत अच्छी हैं. आपका मदद करके हुंका अच्छा लगेगा"
अनीता यह सुनकर एक ऐडा से boli,"Haan रामु जी ज़रूर बोलूंगी. आप और हरिया जी hi तो है जिन्हे मैं जानती हूँ. कोई भी परेशानी होगी तो ज़रूर बताउंगी"
रामु आगे bola,"aese आपको रिक्शा पर ज़्यादा परेशानी तो नहीं हुयी?"
अनीता मुस्कुराकर boli,"Shuru में तो परेशानी हुयी क्यूंकि इतना बड़े बड़े गड्ढे थे मगर बाद में तो मुझे हसी hi आ रही थी क्यूंकि लग रहा था की मैं झूला झूल रही हूँ हहहहए"
अनीता को खिलखिलाते देख रामु भी हस्ते हुए bola,"Hahaha मेमसाहेब ससुरा रास्ता hi वैसा है"
यह बोलकर रामु का ध्यान फिर से अनीता की चूँचियों पर चला गया तो अनीता खिलखिलाती हुयी रामु को अपनी चूंकि देखते हुए देखकर boli,"Hehehe सच में मैंने ऐसा रास्ता आज तक नहीं देखा हेहेहे"
रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसे देखा तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Meri तोह पूरी बदन hi हिल रही थी. आप देख रहे थे न रामु जी कितनी हिल रही थी"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब हम देख रहे थे की कितनी हिल रही थी"
फिर वह अनीता की आँखों में देखकर bola,"Hum कोशिश कर रहे थे की रिक्शा अच्छा से चलाये और काम हिले लेकिन फिर भी ससुरा रोड hi ख़राब था"
अनीता मुस्कुराकर जवाब di,"Haan रामु जी अब रोड ख़राब था तो आप क्या कर सकते थे. वैसे रोड पर सफर करने से तो हिलना hi था. फिर भी आप अच्छे से रिक्शा चला रहे थे ताकि काम से काम हिले मेरी बदन"
रामु यह सुननकट मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Achha अब मैं चलती हूँ. अगर आप अंदर आकर कुछ पीना चाहते हैं, पानी या जूस तो पी सकते हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराया की तभी हरिया का फ़ोन आने लगा. रामु यह देखकर bola,"Woh मेमसाहेब ससुरा हरिया इंतज़ार कर रहा होगा. आप तो देखि hi की वह दारु पीना चाहता है और अब फ़ोन भी करात है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan ठीक है. मैं चलती हूँ"
रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता घूमकर गांड मटकती हुयी दरवाज़े के तरफ जाने लगी. रामु अनीता की मटकती गांड और अधनंगी पीठ देखने लगा जिससे उसका लुंड तन तना गया. अनीता गेट खोलकर अंदर चली गयी और रामु रिक्शा लेकर हरिया के घर चला गया.
रामु उस नाले के साइड बने रोड के तरफ रिक्शा मोड़ दिया. वह रोड पूरा खली था मगर पुराण और थोड़ा टुटा फूटा था क्यूंकि शायद इस्तेमाल नहीं होता था. उस रोड के एक तरफ जिधर नाला था उधर नाले के किनारे लाइन से पेड़ लगे हुए थे और दूसरी तरफ पुराने छोटे मोठे फैक्ट्रीज थी जो बांध पड़े थे. तो देखा जाये तो अनीता को रामु के साथ रिक्शा पर जाते कोई नहीं देख सकता था. पेड़ होने से छाओं भी था और धुप से भी वह बच रही थी मगर रोड ख़राब होने से रिक्शा जर्क कर रहा था.
रिक्शा के जर्क होने से अनीता की दोनों बड़ी चूँचियाँ जो बिना ब्रा के पतले कपडे के ब्लाउज में थी वह खुल कर हिल रही थी. अनीता की पल्लू बायीं ब्लाउज के एक चौथाई हिस्से के ऊपर hi थी. बायीं चूंकि का बाकी का हिस्सा का ब्लाउज और दये चूंकि के ऊपर का पूरा ब्लाउज पर कुछ नहीं था जिसके कारण से उसकी दोनों बड़ी चूँचियों का हिलना साफ़ साफ़ पता चल रहा था.
अनीता की नज़र चलते हुए सामने रिक्शा के आईने में पड़ी तो वह देखि की उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ कैसे रिक्शा जर्क होने के कारण हिल रही थी, कैसे ऊपर नीचे और दये बाये हो रही थी. अनीता साथ hi यह देखि की पतले कपडे के ब्लाउज में उसकी दोनों चूँचियों के निप्पल का छाप उसकी ब्लाउज पर साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. कोई भी देखकर समझ सकता था की अनीता ब्रा नहीं पहनी है.
अनीता यह देखकर आईने से नज़र हटाने वाली hi थी की आईने में उसे रामु का चेहरा दिखा जो आईने में उसकी चूँचियों को hi देख रहा था. अनीता की दिल यह देख कर धड़क गयी.
अगले पल रिक्शा थोड़ा और जर्क हुआ तो अनीता हलकी चीखती हुयी boli,"ouch आअह्ह्ह रामु जी"
रामु अनीता की चीख सुनकर आईने में उसको देखकर bola,"memsaheb आप ठीक है तो कहीं..."
रामु इतना बोलै hi था की उसका नज़र अनीता की बड़ी बड़ी चूँचियों पर पड़ा जो ब्लाउज में कैद हुयी हिल रही थी. रामु ध्यान दिया तो देखा की अनीता की निप्पल उसकी ब्लाउज से सटी हुयी अपनी आकार दिखा रही थी तो वह अपना बात पूरा बोले बिना hi रूककर अनीता की चूंकि देखने लगा.
वहीँ अनीता भी रामु का बात सुनकर आईने में देखि तो उसे ध्यान आया की रामु उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता फिर से एक नज़र अपनी चूँचियों पर डाली तो देखि की उसकी चूँचियों थोड़ा थोड़ा हिल रही है और निप्पल का इम्प्रैशन ब्लाउज के कपडे पर दिख रही है. अनीता समझ गयी की रामु वही देख रहा है और यह समझते hi उसकी धड़कन तेज़ हो गयी.
वह धड़कते दिल और तेज़ सांस से रामु को आईने में देखि तो रामु को ध्यान आया की अनीता उसे hi देख रही है तो वह जब नज़र उठाया तो अनीता से उसकी नज़र मिली तो वह घबराकर सामने देखते हुए bola,"maaf कीजियेगा मेमसाहेब. यह रोड बहोत ख़राब है तो आपको परेशानी हो रही है, मगर इस रोड में छाओं है और थोड़ी शान्ति भी है. हम कोशिश कर रहा हूँ की अच्छे से रिक्शा चलौं ताकि ज़्यादा हिल दोल न हो. अगर आपको परेशानी हो रही है तो हम दूसरे रास्ते से चल सकत हैं"
अनीता यह सुनकर boli,"Nahin रामु जी कोई बात नहीं. मैंने hi तो आपको बोलै इधर से चलने के लिए".
रामु यह सुनकर वापस आईने में अनीता को देखा तो वह अपनी बात जारी रखती हुयी आगे boli,"Yeh रोड hi सही है, ठंडा भी है और शान्ति भी है".
रामु यह सुनकर अपना नज़र नीचे करके फिर से अनीता की चूँचियों को देखने लगा वहीँ अनीता रामु को अपनी चूँचियों पर नज़र ले जाते हुए देखकर भी अपनी बात आगे boli,"Rahi बात ख़राब रोड की तो आप कोशिश कर रहे हैं अच्छे से रिक्शा चलने की और रिक्शा की सीट भी अच्छी है. मुझे कोई परेशानी नहीं है, बस थोड़ा आराम से चलाइये"
रामु यह सुनकर अनीता को वापस देखा तो अनीता मुस्कुरा दी. रामु अनीता को मुस्कुराते देख हल्का मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब आराम से चलते हैं. पहली बार आप हमरे रिक्क्षा पर बैठी हैं ससुरा आपको तकलीफ होगा तो हुंका अच्छा नहीं लगेगा"
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर आईने में रामु को देखि तो वह मुस्कुराने के बाद नज़र नीचे करके अनीता की चूँचियों को देखने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Aese रामु जी आप बुरा न माने तो एक बात पूछूं?"
रामु यह सुनकर थोड़ा घबराकर अनीता को देखा तो उसके चेहरे पर नार्मल भाव देखकर थोड़ा रिलैक्स होकर bola,"Are मेमसाहेब हुंका आपका बात कहे बुरा लगेगा. पूछिए का पूछना चाहती हैं आप?"
अनीता मुस्कुरा कर puchhi,"Aap तो हरिया जी के साथ दूकान में काम करते हैं, तो फिर यह रिक्शा?"
रामु यह सुनकर bola,"Kabhi कभी मौक़ा मिलता है तो चला लेट हैं. थोड़ा कमाई हो जाट है ऊपर से ज़रूरत पड़ने पर कहीं आने जाने में काम भी आ जावत है, जैसे आज"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी रामु को देखकर boli,"Ohh. चलिए इसी बहाने मुझे भी घर जाने के लिए कुछ मिल गया"
रामु मुस्कुरा कर bola,"Haan मेमसाहेब. अगर रिक्क्षा नहीं होता तो हम कउनो इंतज़ाम कर देते. आपको हम परेशानी कैसे होने देते"
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा कर रामु को देखि तो वह मुस्कुराते हुए hi अनीता की चूँचियों को एक नज़र फिर से देखकर वापस सामने सड़क पर देखकर रिक्शा चलने लगा.
अनीता देखि की कैसे रामु पहले उसकी चूँचियों को देखकर फिर सड़क पर देखने लगा तो वह एक नज़र खुद भी अपनी हिलती हुयी चूँचियों को देखि की कैसे सड़क पर जेर्किंग होने से उसकी चूँचियाँ हिल रही है की तभी वह देखि की रामु जल्दी से एक नज़र फिर उसकी चूँचियों पर डालकर puchha,"Abhi ठीक है तो मेमसाहेब? आपको परेशानी तो नहीं हो रहा है?"
रामु यह बोलकर वापस सड़क पर देखने लगा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Haan रामु जी ठीक है. आप बहोत संभलकर रिक्शा चला रहे हैं".
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को देखा तो वह भी मुस्कुरा दी और फिर रामु नज़र नीचे करके उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा.
अनीता देखि की रामु कैसे उसकी हिलती हुयी चूँचियों को बार बार देख रहा था मगर वह बुरा नहीं मानी. वह अपनी गांड पर रामु का लुंड एक बार महसूस कर चुकी थी तो वह जानती थी की रामु भी एक भरपूर मर्द है और एक मर्द होने के नाते उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देखेगा hi. यह तो प्रकृति का नियम है.
अनीता रामु को एक नज़र देखि और फिर अपनी कान के पास के बालों में हाथ फेरकर उसे कान के पीछे करके आस पास देखने लगी.
रामु फिर से आईने में देखा तो पाया की अनीता आस पास देख रही थी. अगले पल रामु अपना नज़र नीचे करके आईने में अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखा तो अनीता की भी नज़र आईने में अपनी चूँचियों पर गयी जो हिलकर ऊपर नीचे हो रही थी. वह एक नज़र रामु के तरफ देखि जिसका ध्यान कभी सड़क पर तो कभी उसकी हिलती हुयी चूँचियों के तरफ जा रहा था और फिर बिना कुछ रिएक्शन के वापस आस पास देखने लगी. वहीँ अनीता की चूँचियों को हिलते और ऐसे अनीता की निप्पल का इम्प्रैशन उसकी ब्लाउज पर देखकर रामु का लुंड धोती में खड़ा होने लगा था.
कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता puchhi,"Ramu जी" और इतना बोलती हुयी वह वापस आईने में देखि तो अभी भी उसकी चूँचियों हिल रही थी जिसे रामु देख रहा था. वह यह देखकर अपनी बातें आगे boli,"yeh सभी फैक्ट्रीज बहोत सालों से बांध पड़ा लग रहा है"
अनीता देखि की रामु का नज़र उसकी हिलती चूँचियों पर था और वह बात सुनकर जवाब देने के लिए मुंह खोला तो उसे आईने में देखते हुए देख अपना नज़र रोड के तरफ करते हुए bola,"Haan मेमसाहेब".
अनीता यह सुनकर उससे puchhi,"Koi शुरू करना नहीं चाहता है क्या? इसके शुरू करने से कितना रोज़गार मिलता यहाँ के लोगो को"
रामु यह सुनकर bola,"Are मेमसाहेब ी फैक्ट्री सब झमेला वाला हो गवा है, ु केस मुक़दमा चल रहा है, राजनीती, गुंडा हर एक चीज़ का मसला है"
और बोलकर वह एक नज़र आईने में अनीता की चूँचियों को देखने लगा की तभी अनीता उसे देखती हुयी boli,"Achha" तो अनीता की बात सुनकर वह नज़र ऊपर करके देखा तो समझ गया की अनीता उसे अपनी चूँचियाँ देखते हुए देख ली मगर वह रियेक्ट करता इससे पहले एक गड्ढा आया और रामु का नज़र सामने न होने से गड्ढे से रिक्शा गुज़रा तो जोर से जर्क हुआ और अनीता की चूँचियाँ जोर से हिलने लगी.
रामु तुरंत आईने में देखकर अनीता से माफ़ी maanga,"Maaf कीजियेगा मेम..." की तभी ऊपर नीचे होती अनीता की बड़ी चूँचियाँ पर उसका नज़र पड़ा और वह उतना hi बोले मुंह खोलकर अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए 2-3 सेकण्ड्स बाद अपना बात पूरा किया,".. साहेब"
अनीता रामु को ऐसे मुंह खोलकर उसे आईने में देखते हुए देख चेहरे पर बिना कोई रिएक्शन लायी शांत मिज़ाज़ से boli,"Koi बात नहीं रामु जी"
रामु यह सुनकर नज़र उसकी चूँचियों से ऊपर करके उसकी चेहरे पर देखा तो अनीता boli,"Ab रोड hi ऐसा है तो क्या किया जा सकता है"
रामु यह सुनकर थोड़ा घबरा कर bola,"Haan मेमसाहेब. सच में आप बहोत अच्छी है. हालात समझ रही हैं की ी रोड hi ऐसा है"
रामु यह बोलकर एक नज़र अनीता की ऊपर नीचे हिलती चूँचियों को देखा. वहीँ अनीता उसका बात सुनकर मुस्कुरा boli,"Haan रामु जी हालत तो समझनी hi चाहिए. हर चीज़ इंसान के बस में थोड़े होता है. अब सड़क में गड्ढे हैं तो आप क्या कर सकते हैं. बस जब गड्ढे आये तो थोड़ा ध्यान से रिक्शा चलाइये"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर bola,"Theek है मेमसाहेब" और रोड पर ध्यान देकर चलने लगा. रामु अब कोशिश करने लगा की बड़े गड्ढो से बचा कर रिक्शा चलाये और अचानक कोई जर्क न हो, मगर रोड ख़राब होने से थोड़ा बहोत जेर्किंग हो hi रहा था जिससे अनीता की चूँचियाँ हर कुछ सेकण्ड्स बाद हिलने लग रही थी.
अनीता जैसी इतनी खूबसूरत, सेक्सी और जवान औरत की बड़ी बड़ी चूँचियाँ खासकर बिना ब्रा के जब हिले तो कोई भी मर्द देखने से कैसे रोक सकता था. रामु के साथ भी ऐसा hi हो रहा था. वह न चाहते हुए भी जब जब रिक्शा जर्क हो रहा था आईने में अनीता की चूँचियाँ देखने लगता था. अनीता भी यह बात समझ चुकी थी तो वह भी जब जब रिक्शा जर्क हो रहा था अपनी आँखों के कोने से आईने में देखती की रामु उसकी चूँचियाँ देख रहा है या नहीं.
एक जगह ऐसे hi जर्क होने पर अनीता देखि की रामु का ध्यान आईने में उसकी चूँचियों पर नहीं है तो वह रामु के चेहरे पर देखि जो सामने देख रहा था. उसी वक़्त रामु सामने देखते हुए bola,"Memsaheb रिक्शा को थोड़ा जोर से पकड़ लीजिये"
अनीता यह सुनकर सामने देखि तो पूरा रोड का चौड़ाई hi गड्ढा था और उससे बचने का कोई उपाय नहीं था. रिक्शा को उससे होते हुए hi जाना पड़ता. अनीता को अच्छा लगा की रामु ध्यान से रिक्शा चला रहा है और गड्ढे में जाने से पहले उसे बोल भी दिया की वह जोर से रिक्शा पकड़ ले.
अनीता जोर से रिक्शा पकड़ ली उसके कुछ सेकण्ड्स बाद रिक्शा उस गड्ढे में उतरा तो फिर से अनीता की चूँचियाँ हिलने लगी. अनीता आईने में देखि तो रामु नहीं देख रहा था. उसका ध्यान सड़क पर था. अगले कुछ सेकण्ड्स तक रिक्शा उस गड्ढे से चला और फिर ऊपर के तरफ उठकर सड़क के नार्मल लेवल पर अब गया.
नार्मल लेवल पर आने के बाद रामु अनीता से puchha,"Ab ठीक है तो मेमसाहेब?"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी"
रामु यह सुनकर मुस्कुराया और न चाहते हुए भी उसका नज़र आईने में अनीता की हिलती चूँचियों पर चला गया तो अनीता boli,"Ab ठीक है. आप ध्यान दे रहे हैं अब"
रामु यह सुनकर नज़र अनीता की चूँचियों से ऊपर उसके चेहरे पर किया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Aese hi ध्यान से चलाइये"
रामु का लुंड यह सुनकर धोती में hi तन तना गया. अनीता की बात का टाइमिंग ऐसा था की लग रहा हो वह रामु को अपनी चूँचियों को ध्यान से देखने के लिए बोल रही है. सच्चाई क्या था यह तो अनीता hi जानती थी मगर बात यह था की रामु पूरा गड्ढे को सड़क पर देखते हुए hi पार किया था तो वह गड्ढे के वक़्त सड़क पर hi ध्यान दिए था.
खैर जो भी हो रामु का कॉन्फिडेंस अनीता को मुस्कुराता देख थोड़ा बढ़ गया था और वह भी अनीता को देखकर मुस्कुरा दिया और नज़र नीचे करके उसकी चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र आगे सड़क पर देखि तो कोई गड्ढा नहीं था तो वह बिना कुछ बोले आस पास देखने लगी.
अब सड़क के नार्मल लेवल पर आने के बाद रिक्शा पहले जैसे चलने लगी और छोटे मोठे गड्ढे से गुज़रते वक़्त रिक्शा में थोड़ा जर्क हो रहा था, मगर इतना नहीं की अनीता को बहोत परेशानी हो, हाँ उसकी चूँचियाँ ज़रूर हिल रही थी और हिलती भी क्यों नहीं. उसकी चूँचियाँ बड़ी बड़ी थी और बिना ब्रा के थी तो थोड़ा सा भी रिक्शा जर्क होने पर तो हिलना hi था. अनीता को इससे कोई परेशानी नहीं थी. वह भी पहले के जैसे जब जब गड्ढा आता तो आईने में देखती तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए पाती. अनीता भी आईने में एक दो बार अपनी चूँचियों को देखि की गड्ढे आने पर कैसे हिल रही हैं और निप्पल का छाप तो साफ़ साफ़ पता चल रहा है मगर उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आयी.
आगे चलकर एक दो जगह थोड़ा बड़ा गड्ढा था और आराम से चलने के बाद भी थोड़ा जर्क हुआ तो अनीता हलकी cheekhi,"ouch आआअह्ह्ह" और उसकी चूँचियाँ हिलने लगी तो रामु bola,"maaf कीजियेगा मेमसाहेब.."
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Are रामु जी अब बार बार माफ़ी मांग कर मुझे शर्मिंदा मत कीजिये. आप अच्छे से रिक्शा चला रहे हैं. रोड hi ऐसा है तो क्या कर सकते हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर आईने में अनीता को देखा तो रिक्शा हल्का हल्का जर्क होने से उसकी चूँचियाँ लगातार हिल रही थी.
अनीता अपनी चूँचियों को हिलता महसूस करती हुयी आगे बोलना जारी rakhi,"Aur ऐसे भी आपने तो मुझसे बोलै hi था की रोड ख़राब है. यह तो मेरा फैसला था की इधर से hi आप ले चले. बस मैं बड़े गड्ढे के बारे में बोल रही थी की उस वक़्त थोड़ा ध्यान देकर चलाये जो आप कर hi रहे हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता को आईने में देखने के बाद एक नज़र सामने देखा तो रिक्शा एक छोटे गड्ढे से गुज़रा. रामु रिक्शा ठीक से चलाया मगर फिर भी हल्का जर्क हो hi गया तो अनीता फिर ी हल्का cheekhi,"ouch आह्हः" मगर इस बार उसे हसी आ गयी और वह खिलखिलाने lagi,"Hehehe ओह माय गॉड यह रास्ता सच में हेहेहे".
अनीता खिलखिला रही थी और साथ hi उसकी चूँचियाँ फिर हिलने लगी. अनीता को खिलखिलाते देख रामु भी मुस्कुराने लगा और अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखने लगा. अनीता आईने में देखि की रामु उसकी चूँचियों को hi देख रहा है मगर वह बिना बुरा माने बस खिलखिला रही थी.
इसके बाद आगे चलकर कोई गड्ढा नहीं था मगर सड़क बनाने के लिए जो एग्रीगेट इस्तेमाल होता है वह अब टूट चूका था और रोड पर चिकनाहट नहीं थी. पूरा रोड पर बस वह टूटे हुए एग्रीगेट hi भरे हुए थे जिससे रोड रफ़ हो चूका था. इस पर रिक्शा चलने के कारण अब लगातार हिलने लगी थी हालाँकि बहोत जोर से नहीं हिल रही थी की अनीता को बहोत परेशानी हो मगर इतना तो था hi की उसकी चूँचियाँ लगातार हिलने लगी.
अनीता पहले से hi खिलखिला रही थी और अब लगातार रिक्क्षा के जर्क होने से वह अपनी चूँचियों को लगातार ऊपर नीचे होते महसूस करके खिलखिलाती हुयी आगे boli,"Aahhh रामु जी हेहेहे मैंने ज़िन्दगी में कभी ऐसा रास्ता नहीं देखा हेहेहे ओह माय गॉड सीरियसली"
रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसे आईने में देखकर bola,"Are मेमसाहेब आप बड़े शहर से आयी हैं. यहां तो रास्ता एक दम चिकना रहता होगा" और वह बोलकर मुस्कुराते हुए वापस अनीता की चूँचियों को हिलता देखने लगा.
अनीता देखि की रामु फिर से उसकी चूँचियों को देखने लगा था. वह उसका बात सुनकर खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe हाँ रामु जी मगर वहां भी बरसात में कहीं कहीं थोड़े गड्ढे हो जाते हैं मगर यह रास्ता तो यूनिक hi है".
अनीता अपनी बात आईने में रामु को देखती हुयी बोल रही थी मगर रामु का ध्यान उसकी चूँचियों पर थी. अगले पल रिक्शा थोड़ा तेज़ जर्क हुआ तो अनीता हलकी cheekhi,"aaahhh रामु जी हेहेहे" और उसकी दोनों चूँचियाँ भी वैसे hi तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी. अनीता की चीख सुनकर रामु उसकी चूँचियों से नज़र ऊपर किया तो अनीता को खिलखिलाते देखा. रामु को यक़ीन था की अनीता उसे अपनी चूँचियों को हिलता देखते हुए देख चुकी थी मगर वह कुछ बोली नहीं बस है रही थी.
अनीता को ऐसे हस्ता देख रामु को अच्छा लगा और साथ hi कॉन्फिडेंस भी बढ़ा तो वह मुस्कुराते हुए अनीता की चेहरे पर देखने के बाद उसकी हिलती हुयी चूँचियों को वापस देखकर bola,"Memsaheb कउनो परेशानी तो नहीं है. रोड ससुरा ऐसा hi है"
अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe नहीं रामु जी. मुझे तो अब लगने लगा है जैसे मैं झूला झूल रही हूँ. देखिये कैसे पूरी बदन हिल रही है मेरी हेहेहे जैसे मैं सच में झूल रही हूँ"
रामु यह सुनकर एक नज़र सड़क पर डालने के बाद वापस अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए bola,"Hahaha मेमसाहेब हाँ सच में पूरा हिल रही है मेमसाहेब. सच में लग रहा है की आप झूला झूल रही हैं"
रामु का बात सुनकर अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe ओह माय गॉड रामु जी" तो रामु मुस्कुराते हुए अनीता की आँखों में देखा तो अनीता हस्ती rahi,"Hehehe" तो रामु वापस उसकी चूँचियों के तरफ देखकर मुस्कुराने लगा तो अनीता खिलखिलाती हुयी boli,"Hehehe रामु जी और कितना झूला झुलाएंगे आप मुझे"
रामु यह सुनकर अनीता की आँखों में देखा तो फिर से समझ गया की अनीता उसे अपनी चूँचियों को हिलते हुए देखते हुए देख चुकी थी.
रामु अनीता को देखकर मुस्कुरा कर bola,"Jab तक आप झूलना चाहेंगी"
फिर एक नज़र वह अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"hum झुलाएंगे मेमसाहेब".
रामु यह बोलकर वापस अनीता की चेहरे पर देखा तो अनीता मुस्कुराती हुयी boli,"Hehehe रामु जी और कितना झुलु मैं. देख तो रहे हैं आप कैसे जबसे इस रोड पर रिक्शा आया है तबसे तो हिल hi रही हूँ"
रामु का लुंड अनीता की चूँचियों को हिलते हुए देखकर तन तना कर धोती में खड़ा हो चूका था और जेर्किंग के कारण वह भी उसके धोती में हिल रहा था. अनीता की बात सुनकर उसका लुंड और बौखका गया और हिलने लगा. वह अपना धड़कन काबू में करते हुए अनीता की हिलती हुयी चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब देख रहे हैं की कितना हिल रहा है"
रामु यह बोलकर अनीता की आँखों में देखा तो वह मुस्कुराकर boli,"Aap को नहीं लगता रामु जी की इतना झूलने के बाद थोड़ा आराम भी मिलना चाहिए"
रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Haan मेमसाहेब आराम तब मिलना hi चाहिए. बहोत देर से हिल रहा है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुरा दी और boli,"Aur कितनी देर है घर पहुँचने में?"
रामु यह सुनकर bola,"Bas दो तीन मिनट और मेमसाहेब"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराई और फिर आस पास देखने लगी. कुछ सेकण्ड्स बाद अनीता एक नज़र आईने में देखि तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते हुए पायी. रामु को भनक लगा तो वह आँख ऊपर करके अनीता को देखा तो वह मुस्कुराती हुयी अपनी कान के पास के बाल को कान के पीछे करके बिना कुछ बोले आस पास देखने लगी. वहीँ रामु सड़क पर एक नज़र डालने के बाद बेझिझक अनीता की चूँचियों को देखने लगा. अनीता एक नज़र फिर से आईने में देखि तो रामु को अपनी चूँचियों को देखते पायी. अनीता एक नज़र अपनी चूँचियों को देखि जो ऊपर नीचे होकर हिल रही थी और ब्लाउज के पतले कपडे में उसकी निप्पल्स की छाप साफ़ साफ़ समझ आ रही थी. बल्कि लगातार ब्लाउज के कपडे से उसकी निप्पल घिसने से कड़ी हो चुकी थी और ब्लाउज के कपडे पर पहले से ज़्यादा उसकी छाप दिख रही थी.
अनीता अपनी चूँचियों और निप्पल के छाप को देखकर एक गहरी सांस ली और आस पास देखने लगी. उसे ज़रा सा भी शर्म नहीं आयी की कैसे उसकी चूँचियाँ लगातार हिल रही है, उसकी निप्पल्स का छाप उसकी ब्लाउज में साफ़ साफ़ समझ आ रही थी और कैसे एक ग़ैर मर्द जो न सिर्फ एक गंवार मज़दूर था, बल्कि उससे लगभग 20 साल बड़ा है वह लगातार उसकी हिलती हुयी चूँचियों को देख रहा था.
दो तीन मिनट बाद रिक्शा अनीता के दरवाज़े के पास पहुँच गयी. रामु जिस रास्ते से उसे लाया था वह अनीता की घर के बाये तरफ के सड़क था जिसके कारण उसे ऑटो स्टैंड के तरफ से नहीं आना पड़ा था जो की उसके घर से सामने सीधा रास्ता था. वह रास्ता हरिया के घर से लेकर उसके घर तक पूरा सुननसँ था और रोड ख़राब था. वह इसलिए की उस रास्ते पर पुराण बांध पद चुके फैक्ट्रीज थे जिसके बांध होने के कारण रोड का मेंटेनेंस नहीं हो रहा था. हरिया के घर से कुछ दुरी तक एक तरफ नाला दूसरे तरफ फैक्ट्रीज थे मगर थोड़ी दुरी के बाद, मतलब अनीता की घर से लगभग एक किलोमीटर पहले वह नाला दूसरे तरफ घूम जा रहा था और अनीता की घर से लेकर वहां तक एक तरफ खली ज़मीन थी जो की राज के कंपनी का था और दूसरे तरफ एक पुराण फैक्ट्री और फिर एक बड़ा सा पार्क था जो की बांध था और ज़्यादातर पियक्कड़ और जुआरी लोग कभी कभी रात में इकठ्ठा होते थे.
पूरा रास्ता में दोनों तरफ पेड़ था जिसके कारण वह छाओं में hi आयी और सुननसँ होने के कारण कोई दिखा भी नहीं. घर के पास जब रिक्शा रुका तो रामु रिक्शा से उतारते हुए bola,"Ek मिनट हम आपके उतरने में मदद करते हैं"
अनीता यह सुनकर उसे देखकर मुस्कुराकर boli,"Haan रामु जी नहीं तो फिर से मैं कहीं गिरने न लागु"
रामु उतारकर रिक्शा के पास आया और दये हाथ से सीट को पकड़ कर उठने लगी फिर वह उतरने लगी तो उसकी हाथ अपने आप रामु के बाये कंधे पर चली गयी और रामु का दया हाथ उसकी बायीं कमर पर जिसे पकड़ कर वह अनीता को संभाला. अनीता जैसी अमीर, खूबसूरत और पढ़ी लिखी औरत जो किसी हीरोइन और मॉडल से काम नहीं थी उसकी कमर पर हाथ रखकर रामु का दिल धड़क गया और लुंड में बेचैनी होने लगा मगर वह अनीता की कमर पर हाथ उसको छेड़ने के इरादे से नहीं बल्कि सच में मदद करने के लिए किया था.
खैर उसका इरादा भले hi अनीता को छेड़ने का नहीं था मगर था तो वह मर्द hi तो अनीता जैसी औरत की नंगी कमर पर हाथ रखने से उसे कैसे अच्छा नहीं लगता. उसे अनीता की कमर पर हाथ रखकर अच्छा लग रहा था. इतना चिकना, मुलायम और गोरी कमर था की उसे लग रहा था की फूल पर हाथ रखा हुआ है.
अनीता उसके कंधे पर हाथ रखकर उतर कर मुस्कुरा कर boli,"Thank यू रामु जी मुझे घर तक छोड़ने के लिए"
रामु यह सुनकर अनीता की कमर पर हाथ रखे हुए hi bola,"Are मेमसाहेब हुंका कहे शर्मिंदा कर रही हैं आप. आप हम ग़रीब लोगन का इतना ख्याल रखती हैं. हरिया के ग़रीब झोपड़े में उसे देखने आयी. उसका इलाज के लिए पैसे दी. इतना कौन करता है. सच में आप बहोत अच्छी है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Ramu जी फिर से अमीर ग़रीब की बातें करने लगे आप"
रामु यह सुनकर मुस्कुराते हुए bola,"Maaf कीजियेगा मेमसाहेब. अब जो हमलोगां है ु तो है"
अनीता मुस्कुराकर boli,"Mere लिए नहीं है. आप सब बस इंसान हैं मेरे लिए."
रामु यह सुनकर bola,"Memsaheb एक बात बोले आप बुरा नहीं मानियेगा तो?"
अनीता यह सुनकर एक ऐडा से boli,"Kya रामु जी? बोलिये जो भी बोलना है"
रामु यह सुनकर अनीता की कमर को देखते हुए bola,"Aap जतना खबसूरत हैं उतना hi दिल की अच्छी भी हैं. और जैसे हरिया कहत हैं आपका दिल भी बहोत बड़ा है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराती हुयी boli,"Offo रामु जी"
और फिर वह एक ऐडा से boli,"Aap और हरिया जी भी तो मेरी कितनी मदद करते रहते हैं. उस दिन आप नहीं होते तो क्या मेरा पानी का प्रॉब्लम इतनी जल्दी सोल्वे होता? यहाँ मैं जानती hi किसे हूँ. यह तो आप और हरिया जी हैं जो मेरा इतना ख्याल रखते हैं और कोई भी प्रॉब्लम होता है तो मदद करने आ जाते हैं"
रामु यह सुनकर अनीता की कमर पर हाथ रखे hi bola,"Memsaheb कउनो परेशानी होगा तो बोलियेगा. आप बहोत अच्छी हैं. आपका मदद करके हुंका अच्छा लगेगा"
अनीता यह सुनकर एक ऐडा से boli,"Haan रामु जी ज़रूर बोलूंगी. आप और हरिया जी hi तो है जिन्हे मैं जानती हूँ. कोई भी परेशानी होगी तो ज़रूर बताउंगी"
रामु आगे bola,"aese आपको रिक्शा पर ज़्यादा परेशानी तो नहीं हुयी?"
अनीता मुस्कुराकर boli,"Shuru में तो परेशानी हुयी क्यूंकि इतना बड़े बड़े गड्ढे थे मगर बाद में तो मुझे हसी hi आ रही थी क्यूंकि लग रहा था की मैं झूला झूल रही हूँ हहहहए"
अनीता को खिलखिलाते देख रामु भी हस्ते हुए bola,"Hahaha मेमसाहेब ससुरा रास्ता hi वैसा है"
यह बोलकर रामु का ध्यान फिर से अनीता की चूँचियों पर चला गया तो अनीता खिलखिलाती हुयी रामु को अपनी चूंकि देखते हुए देखकर boli,"Hehehe सच में मैंने ऐसा रास्ता आज तक नहीं देखा हेहेहे"
रामु अनीता की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उसे देखा तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Meri तोह पूरी बदन hi हिल रही थी. आप देख रहे थे न रामु जी कितनी हिल रही थी"
रामु यह सुनकर मुस्कुराकर अनीता की चूँचियों को देखकर bola,"Haan मेमसाहेब हम देख रहे थे की कितनी हिल रही थी"
फिर वह अनीता की आँखों में देखकर bola,"Hum कोशिश कर रहे थे की रिक्शा अच्छा से चलाये और काम हिले लेकिन फिर भी ससुरा रोड hi ख़राब था"
अनीता मुस्कुराकर जवाब di,"Haan रामु जी अब रोड ख़राब था तो आप क्या कर सकते थे. वैसे रोड पर सफर करने से तो हिलना hi था. फिर भी आप अच्छे से रिक्शा चला रहे थे ताकि काम से काम हिले मेरी बदन"
रामु यह सुननकट मुस्कुराया तो अनीता मुस्कुराकर boli,"Achha अब मैं चलती हूँ. अगर आप अंदर आकर कुछ पीना चाहते हैं, पानी या जूस तो पी सकते हैं"
रामु यह सुनकर मुस्कुराया की तभी हरिया का फ़ोन आने लगा. रामु यह देखकर bola,"Woh मेमसाहेब ससुरा हरिया इंतज़ार कर रहा होगा. आप तो देखि hi की वह दारु पीना चाहता है और अब फ़ोन भी करात है"
अनीता यह सुनकर मुस्कुराकर boli,"Haan ठीक है. मैं चलती हूँ"
रामु यह सुनकर मुस्कुराया तो अनीता घूमकर गांड मटकती हुयी दरवाज़े के तरफ जाने लगी. रामु अनीता की मटकती गांड और अधनंगी पीठ देखने लगा जिससे उसका लुंड तन तना गया. अनीता गेट खोलकर अंदर चली गयी और रामु रिक्शा लेकर हरिया के घर चला गया.